Page 1
2025
GOA BOARD
MODEL
PAPERS
Syllabus
Scheme of Question Paper
Prepare yourself for upcoming Goa
Board Exams
Page 2
प्रथम सत्र परीक्षा 2024 - 25 (गोवा बोर्ड पैटर्ड)
ववषय: ह द
िं ी (ववषय कोर् 4424)
कक्षा : ग्यार व िं
नर्र्ाडररत समय : 3 घिंटे अधर्कतम अिंक : 80
कुल प्रश्र् सिंख्या : 41 कुल पष्ृ ठ सिंख्या : 07
…………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………
सामान्य नर्दे श:
• सभ प्रश्र् अनर्वायड ै ।
• प्रश्र् क्रमािंक स्पष्ट रूप से ललखिए।
• दाय िं ओर दशाडई ु ई सिंख्या प्रश्र् के अिंक दशाडत ैं ।
• प्रश्र्-पत्रत्रका त र् ििंर्ों में ववभाजित ै - क, ि, ग। जिसमें कूल प्रश्र् 41 ैं ।
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------
( ििंर् – क कुल अिंक 15 )
नर्म्र्ललखित अपहठत गदयािंश को ध्यार्पूवडक पढ़कर पूछे गए प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए।
( लगभग 10 - 20 शब्दों में)
जजिंदगी मुसीबत में पलकर दनु िया पर कब्जा करती है । अकबर िे 13 साल की उम्र में अपिे पपता
के दश्ु मि को परास्त कर ददया था, जजसका एकमात्र कारण यह था कक अकबर का जन्म रे गगस्ताि
में हुआ था और वह भी उस समय जब उसके पपता के पास एक कस्तूरी को छोड़कर और कोई दौलत
िहीिं थी । महाभारत में दे श के प्रायः अगिकािंश वीर कौरवों के पक्ष में थे मगर किर भी जीत पािंडवों
की हुई , क्योंकक उन्होंिे मुसीबत झेली थी , विवास के जोखिम को पार ककया था । पविंस्टि चगचिल
िे कहा है कक जजिंदगी की सबसे बड़ी ससित दहम्मत है । आदमी के सारे गुण उसके दहम्मती होिे से
पैदा होते हैं । जजिंदगी की दो ही सूरतें हैं । एक तो आदमी बड़े से बड़े मकसद के सलए कोसशश करें ,
जगमगाती हुई जीत पर पिंजा डालिे के सलए हाथ बढाए और अगर असिलताएिं कदम - कदम पर
जोश की रोशिी के साथ जाल बुि रही हो , तब भी वह पािंव पीछे ि हटाए - दस
ू री सूरत यह है कक
उि गरीब आत्माओिं का हमजोली बि जाए जो ि तो बहुत अगिक सुि पाती है और ि बहुत अगिक
दि
ु पािे का सिंयोग रिती है, क्योंकक वे आत्माएिं ऐसी गोिूसल में बसती है जहािं िा तो जीत हँसती
है और िा कभी हार के रोिे की आवाज सुिाई दे ती है । कौि कहता है की पूरी जजिंदगी को दाव पर
लगा दे िे में कोई आििंद िहीिं है , अगर रास्ता आगे ही निकल रहा हो तो किर असली मजा तो पािंव
बढािे , बढते जािे में ही है साहस की जजिंदगी सबसे बड़ी जजिंदगी होती है । ऐसी जजिंदगी की सबसे
बड़ी पहचाि यह है कक वह बबल्कुल निडर , बबल्कुल बेिौि होती हैं। साहसी मिुष्य की पहली
Page 3
पहचाि यह है कक वह इस बात की गचिंता िहीिं करता है कक तमाशा दे ििे वाले लोग उसके बारे में
क्या सोच रहे हैं।
1. अकबर अपिे पपता के दश्ु मि को कैसे हरा पाया ? 1
2. पािंडवों की जीत का कारण क्या था ? 1
3. लेिक िे जजिंदगी की पहली सूरत के बारे में क्या कहा है ? 1
4. आत्माएिं कहािं बसती है ? 1
5. जोश शब्द का पवशेषण रूप सलखिए । 1
6. इस गदयािंश के सलए उगचत शीषिक दीजजए । 1
7. जजिंदगी का असली मजा ककसमें है ? 2
8. साहसी मिुष्य की पहली पहचाि क्या है ? 2
नर्म्र्ललखित अपहठत पदयािंश को ध्यार्पूवडक पढ़कर अिंत में पूछे गए प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए।
यह कैसा वक्त है !
कक ककसी को कड़ी बात कहो
तो भी वह बुरा िहीिं मािता !
जैसे घण
ृ ा और प्यार के जो नियम हैं
उन्हें कोई िहीिं जािता ।
िूब खिले हुए िूल को दे िकर
अचािक िुश हो जािा ,
बड़े स्िेही सुहृदय की हार पर ,
मि भर लािा ,
झुिंझलािा ;
असभव्यजक्त के इि सीिे - सादे रूपों को भी
सब भूल गए
कोई िहीिं पहचािता ।
Page 4
9. आज का वक्त कैसा है ? 1
10. आज का मिुष्य ककि नियमों को िहीिं जािता ? 1
11. मिुष्य कब िुश हो जाता है ? 1
12. कपवता के आिार पर असभव्यजक्त के कोई दो सीिे - सादे रूप सलखिए ? 1
13. हार इस शब्द का पवरुदिाथी रूप सलखिए । 1
ििंर् - ि ( कुल अिंक 40 )
नर्म्र्ललखित पहठत कावयािंश के आर्ार पर पूछे गए प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए । (लगभग 10 से 20
शब्दों में)
(प्राच र् और आर्ुनर्क कववता से)
हम तो एक एक करर जािंिािं।
दोइ कहैं नतिहीिं कौ दो जग िादहिंि पहचाि ।।
एकै पवि एक ही पािी एकै जोनत समािंिािं ।
एकै िाक गढे सब भािंडै एकै कोहरा सािािं ।।
जैसे बाढी काष्ट ही काटै अगगनि ि काटै कोई ।
सब घटी अिंतरर तू ही व्यापक िरै सरूपै सोई ।।
14. सिंत कबीर दास ककस काल के कपव थे ? 1
15. कबीर की दृजष्ट में कौि एक है ? 1
16. ईश्वर व्यापक रूप िरे कहाँ बसा है ? 1
17. कबीर दास िे आत्मा और परमात्मा को एक रूप मािा है , प्रस्तुत पद के आिार पर स्पष्ट
कीजजए । 2
अथवा
निभिय , दृढ, गिंभीर भाव से गरज रहा सागर है ।
Page 5
लहरों पर लहरों का आिा सुिंदर , अनत सुिंदर है ।
कहो यहािं से बढकर सुि क्या पा सकता है प्राणी ?
अिुभव करो हृदय से , अिुराग - भरी कल्याणी ।।
14. कपव िे प्रस्तुत पिंजक्तयों में ककसके सौंदयि का वणिि ककया है ? 1
15. निभिय होकर कौि गरज रहा है ? 1
16. कपव को सबसे सुिंदर क्या लगता है ? 1
17. कपव िे सुि को हृदय से अिुभव करिे के सलए क्यों कहा ? 2
18. नर्म्र्ललखित कावयािंश का भाव सौंदयड स्पष्ट करते ु ए लशल्प सिंबिंर् कोई दो ववशेषताएिं ललखिए
। (लगभग 50 शब्दो में) (आर्ुनर्क कववता से) 4
वह स्वािीि ककसाि रहा ,
असभयाि भरा आिंिों में इसका
छोड़ उसे मिंझिार आज
सिंसार कगार सदृश बह खिसका !
अथवा
मैं मजे में हूिं सही है ,
घर िहीिं हूिं बस यही है ,
ककिं तु यह बस बड़ा बस है ,
इसी बस से सब पवरस है ,
नर्म्र्ललखित प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए । (लगभग 40 शब्दों में) 3×2= 6
19. सिंत कबीरदास िे नियम और िमि का पालि करिे वाले लोगों की ककि कसमयों की ओर सिंकेत
ककया है ?
Page 6
अथवा
19. मायके आई बहि के सलए कपव िे घर को पररताप का घर क्यों कहा है ?
20. पगथक का मि कहाँ पवचरिा चाहता है ?
अथवा
20. कपव िे चिंपा की ककि पवशेषताओिं का उल्लेि ककया है ?
नर्म्र्ललखित पहठत गदयािंश के आर्ार पर पूछे गए प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए। (लगभग 10 से 20
शब्दों में)
उिके पपता एक अिुभवी पुरुष थे समझािे लगे , बेटा घर की दद
ु िशा दे ि रहे हो ॠण के बोझ से दबे
हुए हैं । लड़ककयािं हैं , वह घास िूस की तरह बढती चली जाती है , मैं कगारे पर का वक्ष
ृ हो रहा हूिं
ि मालूम कब गीर पडू। अब तुम ही घर के मासलक मुख्तार हो , िौकरी में ओहदे की ओर ध्याि
मत दे िा , यह तो पीर का मजार है । निगाह चढावे और चादर पर रििी चादहए। ऐसा काम ढूिंढिा
जहािं कुछ ऊपरी आए हो । माससक वेति तो पूणिमासी का चािंद है , जो एक ददि ददिाई दे ता है और
घटते- घटते लुप्त हो जाता है । ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जजससे सदै व प्यास बुझती है । वेति
मिुष्य दे ता है , इससे वद
ृ गि िहीिं होती , ऊपरी आमदिी ईश्वर दे ता है , इसी से बरकत होती है ,
तुम स्वयिं पवदवाि हो तुम्हें क्या समझाऊिं कक इस पवषय में पववेक की बड़ी आवश्यकता है ।
21. विंशीिर का पररवार ककस बोझ से दबा था ? 1
22. ओहदे को पीर का मजार क्यों कहा है ? 1
23. माससक वेति तो पूणिमासी का चािंद है इस वक्तव्य का क्या अथि है । 1
24. कगारे पर का वक्ष
ृ होिा इस मुहावरे का अथि सलिकर वाक्य में प्रयोग कीजजए । 2
नर्म्र्ललखित दो प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए। (लगभग 80 शब्दों में) 5×2=10
25. ककि दो दृश्य में दशिि यह पहचाि िहीिं पाते कक उिकी शूदटिंग में कोई तरकीब अपिाई गई है?
अथवा
25.कजिि को इस्तीिा क्यों दे िा पड़ा ?
26 .समयािं िसीरुददीि को िािबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है ?
Page 7
अथवा
26. ििराम को मोहि के ककस व्यवहार पर आश्चयि होता है और क्यों ?
नर्म्र्ललखित पहठत गदयािंश (ववतार्) के आर्ार पर पूछे गए प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए। (लगभग 10 से
20 शब्दों में)
सिंगीत के क्षेत्र में लता का स्थाि अव्वल दजे के िािदािी गायक के समाि ही माििा पड़ेगा । क्या
लता 3 घिंटे की महकिल जमा सकती है ऐसी सोच व्यक्त करिे वालों से मुझे भी एक प्रश्ि पूछिा है
। क्या कोई पहली श्रेणी का गायक 3 समिट की अवगि में गचत्रपट का कोई गािा उसकी इतिी
कुशलता और रसोत्कटता से गा सकेगा । िहीिं , यही उसके प्रश्ि का उत्तर उन्हें दे िा पड़ेगा ।
िािदािी गवैयों ऐसा भी दावा है कक गचत्रपट सिंगीत के कारण लोगों की असभरुगच बबगड़ गई है ।
गचत्रपट सिंगीत में लोगों के काि बबगाड़ ददए ऐसा आरोप लगाया जाता है । पर मैं समझता हूिं कक
गचत्रपट सिंगीत िे लोगों के काि िराब िहीिं ककए हैं उल्टे सुिार ददए हैं । यह पवचार पहले भी व्यक्त
ककए हैं और उिकी पुिरुजक्त िहीिं करूिंगा । सच बात तो यह है कक हमारे शास्त्रीय गायक बड़ी आत्म
सिंतुष्ट वपृ त्त के हैं। सिंगीत के क्षेत्र में उन्होंिे अपिी हुकुमशाही स्थापपत कर रिी है । शास्त्र शुदिता
के कमिकािंड को उन्होंिे आवश्यकता से अगिक महत्व दे रिा है । मगर गचत्रपट सिंगीत दवारा लोगों
को असभजात सिंगीत से जाि पहचाि होिे लगी हैं उिकी गचककत्सक और चौकस वपृ त्त और बढती जा
रही है । केवल शास्त्र शुदि और िीरस गािा उन्हें िहीिं चादहए । उन्हें तो सुरीला और भावपूणि गािा
चादहए , और यह क्ािंनत गचत्रपट सिंगीत ही लाया है । गचत्रपट सिंगीत समाज के सिंगीत पवषयक
असभरुगच से प्रभावशाली मोड लाया है , गचत्रपट सिंगीत की लचीली िार उसका एक और सामर्थयि है ।
27.सिंगीत के क्षेत्र में लता जी का क्या स्थाि था ? 1
28. पहली श्रेणी के गायक के बारे में लेिक िे क्या सवाल पूछा ? 1
29. गचत्रपट सिंगीत पर क्या आरोप लगाया जाता है ? 1
30. गदयािंश में उजल्लखित प्रससदि गानयका का पूरा िाम सलखिए । 1
31. लेिक के गचत्रपट सिंगीत के सिंबिंि में क्या पवचार है ? 2
32. शास्त्रीय एविं गचत्रपट दोिों तरह के सिंगीतों के महत्व का आिार क्या होिा चादहए ? 2
33. प्रस्तुत गदयािंश के पाठ तथा लेिक का िाम सलखिए। 2
ििंर् - ग (कुल अिंक 25 )
Page 8
नर्म्र्ललखित ‘ िर्सिंचार माध्यम और लेिर् ” पर आर्ाररत प्रश्र्ों के उत्तर ललखिए।(लगभग 10-
20 शब्दों में)
34. सिंचार की पररभाषा सलखिए । 1
35. जिसिंचार का क्या तत्व है । 1
36. जिसिंचार की पवशेषता सलखिए । 1
37. जिसिंचार के कोई चार प्रकार सलखिए । 1
38. जिसिंचार का प्रमुि कायि क्या है 1
39. ‘ बढ़त म िंगाई और सामान्य आदम ” इस ववषय पर लसया और सररता इर् दो औरतों के ब च
ु ए सिंवाद को लगभग 15 से 20 वाक्य में ललखिए । 5
40.नर्खिल/ नर्ककता र्ायक, बािारपेठ- त्रबचोललम गोवा से, मुख्य अलभयिंता सावडिनर्क बािंर्काम 5
ववभाग त्रबचोललम गोवा को गािंव के रास्ते की दद
ु डशा की लशकायत करते ु ए पत्र ललिता / ललित ै
41.नर्म्र्ललखित ककस एक ववषय पर लगभग 200 - 250 शब्दों में नर्बिंर् ललखिए। 10
➢ मेरा भारत महाि
➢ रुपए की आत्मकथा
➢ मेरा पप्रय िेल
➢ पािी बचाओ
Page 9
व्दितीय सत्र परीक्षा 2024-25 (गोवा बोर्ड पैटर्ड )
(ववषय कोर्: 4424)
निर्धा रित समय: 3 घंटे ववषय : व िं िी अविकतम अिंक : 80
कुल प्रश्न सिंख्या : 41 कक्षा : ग्यार वी कुल पृष्ठ सिंख्या : 08
सामान्य वर्िे श-
• सभी प्रश्न अवर्वायड ैं |
• प्रश्न क्रमािं क स्पष्ट रूप से वलव्िए |
• प्रश्न पवत्रका तीर् िण्ोिं में ववभावित ै - क, ि, ग ।
• िायीिं ओर िशाड यी हुई सिंख्या प्रश्न के अिंक िशाड ती ैं ।
खण्ड -क ( कुल अंक 15 )
निम्ननलखखत अपनित गद्यंश को ध्ययिपूर्वक पढकर पूछे गए प्रश्ों के उत्तर लगभग
10- 20 शब्ों में नलखखएः -
सिंवाि में िोर्ोिं पक्ष बोलें य आवश्यक र् ीिं। प्रायः एक व्यव्ि की सिंवाि में मौर् भागीिारी
अविक लाभकर ोती ै । य व्िवत सिंवाि ीर्ता से वभन्न ै। मर् से ारे िु िी व्यव्ि के
वलए िू सरा पक्ष अच्छे विा के रूप में र् ीिं अच्छे श्रोता के रूप में अविक लाभकर ोता
ै । बोलर्े वाले के ावभाव और उसका सलीका, उसकी प्रकृवत और सािं स्कृवतक-
सामाविक पृष्ठभूवम को पल भर में बता िे ते ैं । सिंवाि से सिंबिंि बे तर भी ोते ैं और
अवशष्ट सिंवाि सिंबिंि वबगाड़र्े का कारण भी बर्ता ै । पर सिंवाि की सबसे बड़ी शतड ै
एक-िू सरे की बातें पूरे मर्ोयोग से, सिं पूणड िैयड से सुर्ी िाएँ । श्रोता उन्हें कार् से सुर्ें और
मर् से अर्ुभव करें तभी उर्का लाभ ै , तभी समस्याएँ सुलझर्े की सिंभावर्ा बढ़ती ै
और कम-से-कम य समझ में आता ै वक अगले के मर् के भीतर ै क्या? सच तो य
ै वक सुर्र्ा एक कौशल्य ै विसमें म प्रायः अकुशल ोते ैं । िू सरे की बात काटर्े के
वलए, उसे समािार् सुझार्े के वलए म उतावले ोते ैं और य उतावलापर् सिंवाि की
आत्मा तक में पहुँ चर्े र् ीिं िे ता। ध्यार् और िैयड से सुर्र्ा पववत्र आध्याव्त्मक कायड ै और
सिंवाि की सफलता का मूल मिंत्र ै । लोग तो पेड़-पौिोिं से, र्िी-पवडतोिं से, पशु-पवक्षयोिं तक
से सिंवाि करते ैं। इसवलए सिंवाि की अर्िंत सिंभावर्ाओिं को समझा िार्ा चाव ए।
1) सिंवाि में कौर्सी बात आवश्यक र् ीिं ै ? (1)
2) कौर्सी व्िवत सिंवाि ीर्ता से वभन्न ै ? (1)
3) सिंवाि की सबसे बड़ी शतड ै ? (1)
4) िु िी व्यव्ि से सिंवाि में िू सरा पक्ष कब अविक लाभकर ोता ै ? क्योिं? (1)
5) समस्याएँ सुलझर्े की सिंभावर्ा कब बढ़ती ै ? (1)
-1-
Page 10
6) सिंवाि की सफलता का मूल मिंत्र क्या ै ? (1)
7) म सिंवाि की आत्मा तक प्रायः क्योिं र् ीिंपहुँ च पाते? (2)
8) लोग वकर् वकर् से सिंवाि करते ै ? (2)
निम्ननलखखत अपनित कयव्यंश को ध्ययिपूर्वक पढकर पूछे गए प्रश्ों के उत्तर
नलखखएः -
कैसा वि ै !
वक वकसी को कड़ी बात क ो
तो भी व बुरा र् ीिं मार्ता !
िैसे घृणा और प्यार के िो वर्यम ैं
उन्हें कोई र् ीिं िार्ता।
िूब व्िले हुए फूल को िे िकर
अचार्क िुश ो िार्ा,
बड़े स्ने ी सुहृि की ार पर,
मर् भर लार्ा,
झिंुझलार्ा;
अवभव्यव्ि के इर् सीिे-सािे रूपोिं को भी
सब भूल गए
कोई र् ीिं प चार्ता।
9) आि के यिंत्र –युग में मर्ुष्य कौर् -से वर्यम र् ीिं िार्ता ै ? (1)
10) कववयत्री के अर्ुसार मर्ुष्य को कब िुश ोर्ा चाव ए? (1)
11) कववयत्री के अर्ुसार मर्ुष्य को कब िु िी ोर्ा चाव ए? (1)
12) अवभव्यव्ि के वकर् सीिे -सािे रूपोिं के उिा रण कववता में प्रस्तुत ै ? (1)
13) मर्ुष्य का िीवर् वकस बात से कविर् बर् गया ै ? (1)
-2-
Page 11
खण्ड – ख (कुल अंक 40)
निम्ननलखखत पनित काव्ांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नं के उत्तर नलखखएः -
(सूचिा प्राचीि और आधुनिक कनिता से)
मेिे तो नििर्ि िोपधल दू सिो ि कोई ॥
जध के नसि मोि-मुकुट मेिो पनत सोई।
छधं ऩि दयी कुल की कधनि कहध करिहै कोई?
संति निि बैनि- बैनि लोकलधज खोयी
अंसुवि जल सींनि-सींनि प्रेम-बेनल बोयी
अब त बेनल फैली ियी, आणंद-फल होयी
14) मीिध नकसे अपिध सवास्व मधिती है ? (1)
15) मीिध कृष्ण को नकि िधमों से पुकधिती है ? (1)
16) मीिध कृष्ण - प्रेम के नवषय में क्यध बतधती है ? (1)
17) मीिध िे अपिी लोक लधज नकसप्रकि खोयी है ? (2)
अथवा
भीतर की आग
िर्ुष की र्ोरी
तीर का र्ुकीलापर्
कुल्हाड़ी की िार
ििंगल की तािा वा
र्वियोिं की वर्मडलता
प ाड़ोिं का मौर्
गीतोिं की िुर्
वमट्टी का सोिंिापर्
फसलोिं की ल ल ा ट
14) उपयुडि कववता की कववयत्री का र्ाम वलव्िए। (1)
15) 'भीतर की आग' से क्या तात्पयड ै ? (1)
16) कववयत्री वकर् वचिोिं को बचार्े का आवा र् करती ै ? (1)
17) आविवावसयोिं की विर्चयाड से सिंबवित कौर्सी वचिे उपयोग में आती ैं ? (2)
-3-
Page 12
18) निम्ननलखखत कयव्यंश कय भयर् - सौन्दर्व स्पष्ट करते हुए नशल्प संबंधी कोई दो
नर्शेषतय नलखखए।( लगभग 50 शब्ों में) (4)
(सूचिय आधुनिक कनर्तय से)
कपट के शोर में
स ी ोते हुए भी िब िार्ा - बुरा तो ै
वकसी िुगर्ू की लौ में पढ़र्ा - बुरा तो ै
मुवियािं भीिंचकर बस वि वर्काल लेर्ा – बुरा तो ै
सबसे ख़तरर्ाक र् ीिं ोता
अथवा
अपर्े चे रे पर
सिंथाल परगर्ा की माटी का रिं ग
भाषा में झारििंर्ीपर्
ििं र्ी ोती विर्चयाड में
िीवर् की गमाड ट
मर् का रापर्
भोलापर् विल का
निम्ननलखखत प्रश्ों के उत्तर नलखखए । ( लगभग 40 शब्ों में) (3x2=6)
19) वर्म्नवलव्ित काव्य पिंव्ियोिं का आशय स्पष्ट कीविएः -
े मो ! पाश अपर्े ढील
लोभ, मत ललचा
े मि ! मत कर मि ोश
ईष्याड , िला मत
ओ चराचर ! मत चूक अवसर
अथवा
19) दू र् की मथनियधाँ ब़िे प्रेम से नवलधयी
दनर् मनथ घृत कधऩि नलयों, डधरि दयी छोयी
भित दे खख िधजी हुयी, जित दे खख िोयी
दधनस मीिधं लधल नििर्ि ! तधिो अब मोही
-4-
Page 13
20) सबसे ितरर्ाक शब्द के बार- बार िो राए िार्े से कववता में क्या असर पैिा हुआ
ै?
अथवा
20) शायर की सरत क्या ै ?
निम्ननलखखत पनित गद्यंश के आधयर पर पूछे गए प्रश्ों के उत्तर नलखखएः -
( लगभग 10-20 शब्ों में)
स्पीवत व माचल प्रिे श के लाहुल-स्पीवत विले की त सील ै । लाहुल-स्पीवत का य योग
भी आकव्िक ी ै । इर्में बहुत योगायोग र् ीिं ै । ऊँचे िरों और कविर् रास्तोिं के कारण
इवत ास में भी कम र ा ै । अलिंघ्य भूगोल य ाँ इवत ास का एक बड़ा कारक ै । अब
िबवक सिंचार में कुछ सुिार हुआ ै तब भी लाहुल-स्पीवत का योग प्रायः 'वायरलेस सेट'
के ज़ररए ै िो केलिंग और कािा के बीच िड़कता र ता ै । वफर भी केलिंग के बािशा
को भय लगा र ता ै वक क ीिं कािा का सूबेिार उसकी अवज्ञा तो र् ीिं कर र ा ै ? क ीिं
बगावत तो र् ीिं करर्े वाला ै ? लेवकर् वसवाय वायरले स सेट पर सिंिेश भेिर्े के व कर
भी क्या सकता ै ? वसिंत में भी १७० मील िार्ा - आर्ा कविर् ै । शीत में प्रायः असिंभव
ै।
21) स्पीवत क ाँ व्ित ैं ? (1)
22) लाहुल-स्पीवत का योग वकस प्रकार का ै ? (1)
23) कौर्सा भूगोल स्पीवत में इवत ास का एक बड़ा कारक ै ? (1)
24) स्पीवत का र्ाम इवत ास में कम क्योिं ैं ? (1)
निम्ननलखखत प्रश्ों के उत्तर नलखखए । ( लगभग 80 शब्ों में) (5x2=10)
25) ‘रिर्ी’ पटकथा पढ़कर आपको क्या सिंिेश वमलता ै ?
अथवा
25) भारत की चचाड र्े रू िी कब और वकससे करते थे?
26) िबा हुआ आिमी एक कवव ै , य बात कैसे पता चली और इसे िार्कारी का
फाइल की यात्रा पर क्या असर पड़ा?
अथवा
26) बिंबई में र कर कला के अध्ययर् के वलए रज़ा र्े क्या-क्या सिंघषड वकए?
Page 14
-5-
निम्ननलखखत पनित गद्यंश नर्तयि के आधयर पर पूछे गए प्रश्ों के उत्तर नलखखएः -
( लगभग 10-20 शब्ों में)
कुिंई की ग राई में चल र े मे र्ती काम पर व ाँ की गरमी का असर पड़े गा। गरमी कम
करर्े के वलए ऊपर िमीर् पर िड़े लोग बीच-बीच में मुिी भर रे त बहुत िोर के साथ
र्ीचे फेंकते ैं । इससे ऊपर की तािी वा र्ीचे वफकाती ै और ग राई में िमा िमघोिंटू
गरम वा ऊपर लौटती ै । इतर्े ऊपर से फेंकी िा र ी रे त के कण र्ीचे काम कर र े
चेलवािंिी के वसर पर लग सकते ैं इसवलए वे अपर्े वसर पर कािं से, पीतल या अन्य वकसी
िातु का एक बतडर् टोप की तर प र्े हुए ैं । र्ीचे थोड़ी िुिाई ो िार्े के बाि चेलवािं िी
के पिंिोिं के आसपास मलबा िमा ो गया ै । ऊपर रस्सी से एक छोटा-सा र्ोल या बाल्टी
उतारी िाती ै । वमट्टी उसमें भर िी िाती ै । पूरी साविार्ी के साथ ऊपर िीिंचते समय
भी बाल्टी में से कुछ रे त, किंकड़-पत्थर र्ीचे वगर सकते ैं । टोप इर्से भी चेलवािं िी का
वसर बचाएगा। चेलवािंिी चेिारो विस कुिंई को बर्ा र े ैं , व भी कोई सािारण ढाँ चा र् ीिं
ै । कुिंई यार्ी बहुत ी छोटा-सा कुआँ । कुआँ पुवलिंग ै , कुिंई स्त्रीवलिंग। य छोटी भी केवल
व्यास में ी ै । ग राई तो इस कुिंई की क ीिं से कम र् ीिं। राििार् में अलग-अलग िार्ोिं
पर एक ववशेष कारण से कुिंईयोिं की ग राई कुछ कम - ज़्यािा ोती ै ।
कुँई एक और अथड में कुएँ से वबलकुल अलग ै । कुआँ भूिल को पार्े के वलए बर्ता ै
पर कुँई भूिल से िीक वैसे र् ीिं िुड़ती िैसे कुआँ िुड़ता ै । कुिंई वषाड के िल को बड़े
वववचत्र ढिं ग समेटती ै -तब भी िब वषाड ी र् ीिं ोती! यार्ी कुिंई में र् तो सत पर ब र्े
वाला पार्ी ै , र् भूिल ै । य तो 'र्ेवत-र्ेवत' िैसा कुछ पेचीिा मामला ै । मरुभूवम में रे त
का ववस्तार और ग राई अथा ै । य ाँ वषाड अविक मात्रा में भी ो तो उसे भूवम में समा
िार्े में िे र र् ीिं लगती। पर क ीिं-क ीिं मरुभूवम में रे त की सत के र्ीचे प्राय: िस-पिंद्र
ाथ से पचास-साि ाथ र्ीचे िवड़या पत्थर की एक पट्टी चलती ै । य पट्टी ि ाँ भी ै ,
काफी लिंबी-चौड़ी ै पर रे त के र्ीचे िबी र र्े के कारण ऊपर से वििती र् ीिं ै ।
27) कुिंई की ग राई में चल र े मे र्ती काम पर वकसका असर पड़े गा? (1)
28) गद्ािं श में ववणडत चेलवािं िी कौर् ैं ? (1)
29) ऊपर िमीर् पर िड़े लोग बीच-बीच में मुिी भर रे त बहुत िोर के साथ र्ीचे क्योिं
फेंकते ैं ? (1)
30) अपर्ा वसर बचाए रिर्े के वलए चेलवािं िी क्या-क्या उपाय करते ैं ? (1)
31)चेलवािंिी के व्यव्ित्व से म कौर्-कौर् से मूल्य ग्र ण कर सकते ैं ? (1)
32) कुिंईयोिं की ग राई कुछ कम ज़्यािा क्योिं ोती ै ? (1)
33) िवड़या पत्थर की पट्टी वकस कारण ऊपर से र् ीिं वििती ै ? (1)
Page 15
-6-
खण्ड ग (कुल अंक 25 )
निम्ननलखखत जिसंचयर मयध्यम और लेखि पर आधयररत प्रश्ों के उत्तर नलखखए |
( लगभग 10-20 शब्ों में ) (1x5=5)
34) पत्रकाररता से क्या आशय ै ?
35) समाचार के कौर्-कौर् से तत्त्व ैं ?
36) सिंपािर् के वसद्धातिं कौर् से ैं ?
37) िोिपरक पत्रकाररता से क्या अवभप्राय ै ?
38) ववशेषीकृत पत्रकाररता वकसे क ते ैं ?
39) आदशव उच्च मयध्यनमक नर्द्यलर् मडगयाँर् - गोर्य में आर्ोनजत की गई ‘अखखल
गोर्य दे शभखि गीत गयर्ि प्रनतर्ोनगतय’ पर लगभग 70-80 शब्ों में प्रनतर्ेदि
नलखखए (5)
40) समीर / समीरय ियर्क मकयि क्र. 620, ियर्ेली मडगयाँर् गोर्य से िीचे नदए गए
नर्ज्ञयपि (Advertisement) के आधयर पर आर्ेदि पत्र तैर्यर करतय / करती है।(5)
आवश्यकतध
कारकूर् (क्लकड)
शैक्षवणक योग्यताएँ : बार वीिं उत्तीणड
सिंगणक का ज्ञार् आवश्यक
कोिंकणी, मरािी, व िं िी भाषा का ज्ञार् अवर्वायड
अर्ुभव : कम से कम एक साल
पूरी िार्कारी के साथ आवेिर् करे
सिंपकड: प्राचायड
ववद्ा उच्च माध्यवमक ववद्ालय
Page 16
-7-
41) निम्ननलखखत नकसी एक निषय पर 200-250 शब्नं में निबंध नलखखए: (10)
❖ ऑिलधइि पिधई के फधयदे औि िुकसधि
❖ जल है तो कल है
❖ पुस्तक की आत्मकथध
❖ िोवध एक सधं स्कृनतक पयाटर् स्थल
-8-
Page 17
Sample Papers
CBSE Sample Papers
ICSE / ISC Board Sample Papers
AP Board Sample Papers
Assam Board Sample Papers
Bihar Board Sample Papers
Chhattisgarh Board Sample Papers
Goa Board Sample Papers
Gujarat Board Sample Papers
Haryana Board Sample Papers
HP Board Sample Papers
J&K State Board Sample Papers
Jharkhand Board Sample Papers
Karnataka Board Sample Papers
Kerala Board Sample Papers
Page 18
Sample Papers
MP Board Sample Papers
Maharashtra Board Sample Papers
Manipur Board Sample Papers
Mizoram Board Sample Papers
Orissa Board Sample Papers
Punjab Board Sample Papers
Rajasthan Board Sample Papers
Tamil Nadu Board Sample Papers
Telangana State Board Sample Papers
Tripura Board Sample Papers
UP Board Sample Papers
Uttarakhand Board Sample Papers
West Bengal Board Sample Papers