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NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 1 विज्ञान का अनूठा संसार

AglaSem पर कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 1 विज्ञान का अनूठा संसार (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Science Chapter 1 The Wonderful World of Science (Curiosity), Hindi Medium.
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NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 1 विज्ञान का अनूठा संसार – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 1: व ान का अनूठा संसार

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

1–8 9 23 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 19 pages

Page 2

कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: व ान का अनूठा संसार
कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत NCERT समाधान। अध्याय के तीन
क्रयाकलाप 1.1, 1.2 और 1.3 “आइए, सोच और लख” तथा पृष्ठ 1 से 8 तक के सभी पाठ्य प्रश्न के उत्तर — प्रेक्षण, कारण और भारतीय
दै नक जीवन के उदाहरण स हत।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 6) 1–8

खं ड प्रश्न

9 23

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 1
अध्याय का आरंभ — व ान क्या है?

प्र.1 व ालय के प्रारं भक स्तर म पढ़ते हुए क्या आप अपने आस-पास के प रवेश के वषय म पता लगाकर और
खोजकर आनं दत हुए?

हाँ। प्रारं भक स्तर (कक्षा 3, 4 और 5) म हमने जो कुछ सीखा, उसम अ धकांश खोजना और करना था, रटना नह ।

हमने अवलोकन कया — प त्तय के आकार, कतार म चलती च टयाँ, रात-प्र तरात बदलता चंद्रमा।
हमने एकत्र और वग कृत कया — बीज, कंकड़, पंख, पशु-प क्षय के चत्र।
हमने हाथ से करके दे खा — गीली रुई पर चने उगाए, कागज़ क पवनचक्क बनाई, बाल्ट के पानी म वस्तुएँ तैराईं और
डु बोईं।
हमने लोग से बात क — दादा-दाद से उनके बचपन के खेल और भोजन के बारे म पूछा, बाज़ार और डाकघर दे खने गए।

पुस्तक यह प्रश्न क्य पूछती है: अध्याय आपको यह अनुभव कराना चाहता है क आप पहले से ही व ान करते आ
रहे ह। मध्य स्तर म वही ज ासा आगे बढ़ती है, बस अब उसे एक नाम — व ान — और एक क्रमबद्ध व ध मल
जाती है।

यह करके दे खए: कक्षा 5 म स्वयं खोजी गई तीन ऐसी बात ल खए जन्ह ने आपको च कत कया था। यह सूची
सँभालकर र खए — कक्षा 6 के अंत तक आप उनम से अ धकांश क व्याख्या कर सकगे।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 व ान क्या है?

पाठ्यपुस्तक के अपने शब्द म —

िव ान दे खने , सोचने , समझने और काय करने का एक सशक्त माध्यम है जो िवश्व के रहस्यों की परते ं खोलता

है।

अथात् व ान तथ्य से भरी कोई मोट पुस्तक नह , ब ल्क काय करने क एक पद्ध त है। इस प रभाषा के तीन भाग दे खए —

सोचना — प्रश्न पूछना, अनुमान लगाना, तक करना क उत्तर क्या हो सकता है।
दे खना (अवलोकन) — आस-पास क वस्तुओं को ध्यान से दे खना और नोट करना क वास्तव म क्या होता है।
करना — प्रयोग करके दे खना, अपने अनुमान का परीक्षण करना।

पुस्तक व ान क तुलना दो चीज़ से करती है —

एक रोमांचक साह सक काय — जहाँ हम प्रश्न पूछते ह, खोजते ह और समझने का प्रयास करते ह क यह सब होता कैसे है।
एक व्यापक और अंतहीन जग्सॉ पहेली — हर नई खोज इसम एक और टु कड़ा जोड़ दे ती है। कभी-कभी पता चलता है क
कोई टु कड़ा गलत स्थान पर लगा है और उसे हटाना पड़ता है। इसी लए नई खोज वश्व के बारे म हमारी समझ बदलती रहती ह।

यह पहेली कभी समाप्त क्य नह होती: ान का हर नया भाग नए प्रश्न क ओर ले जाता है। जल उबलता है, यह
जान लेने पर हम रुकते नह — फर पूछते ह क कस तापमान पर उबलता है और पहाड़ पर जल्द क्य उबल जाता
है। इस लए खोज क कोई सीमा नह है।

क्या आप जानते ह? वै ा नक का सबसे बड़ा उपकरण सूक्ष्मदश या दूरदश नह , ‘ ज ासा’ है। इसी लए इस
पाठ्यपुस्तक का नाम ज ासा रखा गया है।

प्र.3 क्या आपने कभी रात के आकाश म चमकते तार को ध्यान से दे खा और ये सोचा क ये तारे चमकते क्य ह?

हाँ — और यह प्रश्न इस बात का सुंदर उदाहरण है क व ान साधारण अवलोकन से आरंभ होता है।
क्या दखाई दे ता है: स्वच्छ, अँधेरी रात म, रोशनी से दूर, हज़ार छोटे -छोटे प्रकाश- बदु दखते ह। ये टम टमाते ह और कुछ दूसर
से अ धक चमक ले लगते ह। चंद्रमा टम टमाता नह ।
ऐसा क्य होता है:

तारा अपना प्रकाश स्वयं उत्पन्न करता है। तारे के भीतर पदाथ इतना सघन और गरम होता है क वहाँ अपार ऊष्मा और
प्रकाश नकलता है। हमारा सूय भी एक तारा है — सबसे नकट वाला। इसी लए वह आग के वशाल गोले जैसा और शेष तारे
बदु जैसे दखते ह।
तारे छोटे केवल इस लए दखते ह क वे अकल्पनीय रूप से दूर ह।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

वे टम टमाते इस लए दखते ह क उनका प्रकाश पृथ्वी के चार ओर क हलती-डु लती वायु क परत से होकर आता है, जो
प्रकाश को थोड़ा इधर-उधर मोड़ दे ती ह। चंद्रमा और ग्रह बहुत पास ह और बदु के बजाय छोट चकती जैसे दखते ह, इस लए
उनका टम टमाना नह दखता।

दै नक जीवन म उपयोग: क ास और GPS से बहुत पहले भारतीय ना वक और यात्री दशा जानने के लए ुव
तारे का उपयोग करते थे। कसान आज भी सूय और तार क स्थ त दे खकर बुवाई का समय तथा मकर संक्रां त
जैसे त्योहार क त थ तय करते ह।

स्वयं जाँ चए: बना चंद्रमा वाली रात म पहले अपनी गली से और फर ब त्तयाँ बुझाकर छत या खुले खेत से आकाश
दे खए। अँधेरी जगह म कह अ धक तारे दखगे। हमारी अपनी ब त्तय का प्रकाश ही उन्ह छपा दे ता है — इसे
प्रकाश प्रदूषण कहते ह।

प्र.4 कसी फूल को खलते दे ख आप व स्मत हुए ह क उसे कैसे पता चलता है क कब खलना है?

हाँ — फूल सचमुच न त समय पर खलते और बंद होते ह, और यह संयोग नह है।
क्या दखाई दे ता है: कमल और सूरजमुखी सुबह क धूप म खलते ह और साँझ तक बंद हो जाते ह। रात क रानी और ब्रह्म कमल
इसके उलट अँधेरा होने पर खलते ह। इमली और वषा-वृक्ष क प त्तयाँ रात म मुड़ जाती ह।
ऐसा क्य होता है: पौधे के पास न आँख ह न म स्तष्क, फर भी वह अपने प रवेश को अनुभव कर सकता है।

पंखु ड़याँ प्रकाश और अंधकार के प्र त तथा दन-रात के तापमान के घटने-बढ़ने के प्र त अनु क्रया करती ह। पंखुड़ी के एक
ओर क को शकाएँ दूसरी ओर क तुलना म थोड़ा तेज़ी से जल भरकर फूलती ह, जससे पंखुड़ी बाहर क ओर मुड़ जाती है और
फूल खल जाता है।
पौध म लगभग 24 घंटे क एक भीतरी “जै वक घड़ी” भी होती है, इसी लए वे धूप आने से थोड़ा पहले ही खलने लगते ह।
यह समय पौधे के काम का है। दन म खलने वाले फूल तब खुलते ह जब मधुम क्खयाँ और तत लयाँ स क्रय होती ह; रात म
खलने वाले फूल तब खुलते ह जब पतंगे और चमगादड़ घूमते ह — और वे प्रायः सफ़ेद तथा तेज़ सुगंध वाले होते ह ता क अँधेरे
म पहचाने जा सक।

बड़ी बात: फूल “सोच” नह रहा है। वह प रवेश म हुए प रवतन के प्र त अनु क्रया कर रहा है — और प रवेश के
प्र त अनु क्रया करना सजीव का एक प्रमुख लक्षण है। यह आप पौध तथा सजीव वाले अध्याय म पढ़गे।

यह करके दे खए: व ालय के बगीचे म गुड़हल क एक कली को दो दन तक दे खए। प्र त दन उसके खलने का
और पंखु ड़याँ मुरझाने का समय ल खए। क्या दोन दन समय एक-सा रहा?

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 2 और 3

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार
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इस पुस्तक क सहायता से हम क्या खोजगे?
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इस पुस्तक क सहायता से हम क्या खोजगे?
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प्र.1

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अध्याय स्वयं यात्रा का मान चत्र दे दे ता है। हम अपने ही घर — पृथ्वी — से आरंभ करगे और धीरे-धीरे तार तक पहुँचगे।

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वषय
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कस प्रकार के प्रश्न पूछे जाएँगे
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पथ्ृ वी ही एकमात्र ऐसा ग ह क्यों है िजस पर जीवन है? इसके पय वरण की रक्षा कै से करे ं?

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पयावरण

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m a s emपर पौधे -जंत ु कैसे जीिवत
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जीवन क

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बीज से पौधा कै से बनता है? इल्ली िततली कै से बन जाती है? मरुस्थल, जंग ल और समुद -तट
व वधता
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भोजन भारत में इतने पकार के पकवान है ं — वे िकससे बनते है?ं िकसी भोजन में क्या-क्या है, यह कै से पता करे ं?

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जल बािरश क्यों और कै से होती है? जल ठं डा करने पर बफ और गरम करने पर भाप क्यों बन जाता है?

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गरम और ठं डा कोई वस्तु िकतनी गरम है, यह कै से मापें — एक िगलास जल या ज्वर में तपता हमारा शरीर?
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आस-पास के aglरबर, कपड़ा और चुंबक िकससे बने है?ं एक पदाथ को दू सरे से कैसे पथृ क करे ं?
कागज़, धातु, प्लािस्टक,
पदाथ

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ग त और प्रकाश वस्तुए ँ कै से गित करती है?ं पत्ती की संर चना कै सी होती है? मूँग फली के िछलके कै से अलग करते है?ं

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पृथ्वी.से
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सूय, चंद मा और आकाश में चमकने वाले लाखों तारे ।
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इस पृष्ठ क सबसे बड़ी बात: जैसे-जैसे हम अ धक खोज करते ह, हम समझ आने लगता है क ये सभी वचार

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एक-दूसरे से जुड़े हुए ह। बा रश जल का भी वषय है और ऊष्मा का भी; भोजन पौध का भी है और पदाथ का

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भी। व ान आठ अलग-अलग सू चयाँ नह , एक ही वषय है।

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प्र.2 इन पौध और जंतुओं का वकास कस प्रकार होता है?

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प्रत्येक सजीव भोजन लेकर, उससे शरीर के नए भाग बनाकर और थोड़ा-थोड़ा जुड़ते हुए वृ द्ध करता है। परंतु पौधे और जंतु
यह काम अलग-अलग ढं ग से करते ह।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

पौधे जंतु

भोजन कहाँ से अपनी हरी पित्तयों में सूय के पकाश, िम ी के जल और वायु से भोजन नही ं बना सकते; पौधे या दू स रे जंत ु खाते है।
ं
स्वयं भोजन बनाते है।
ं

और क्या जल, वायु, सूय का पकाश, िम ी के खिनज, उपयुक्त ताप भोजन, जल, वायु, ताप, आश्रय
चा हए

वृ द्ध कैसे जड़ ें गहरी जाती है,ं तना ऊँ चा और मोटा होता है, नई पित्तयाँ, शरीर लंबा, ऊँ चा और भारी होता है; कु छ जंतओ
ु ं का
दखती है फू ल और फल आते है ं रूप ही बदल जाता है

कब रुकती है अनेक पौधे जीवन भर बढ़ ते रहते है ं अिधकांश जंत ु वयस्क होने पर बढ़ ना बंद कर दे ते है ं

क्या अवलोकन कर सकते ह: पुस्तक के दोन चत्र यही दखाते ह।

बीज जल सोखता है, फूलकर फटता है, नीचे जड़ और ऊपर प्ररोह भेजता है और नन्हा पौधा बन जाता है।
इल्ली (कैटर पलर) खूब प त्तयाँ खाती है, बढ़ती है, फर एक खोल म वश्राम करती है और अंत म सुंदर ततली बनकर
नकलती है। रूप के इस पूण प रवतन को कायांतरण कहते ह।

वृ द्ध के लए भोजन क्य आवश्यक है: शरीर शून्य से नए भाग नह बना सकता। भोजन नए भाग का क ा माल
भी दे ता है और उन्ह बनाने क ऊजा भी — ठ क वैसे ही जैसे द वार उठाने के लए राज मस्त्री को ईंट भी चा हए और
श क्त भी।

यह करके दे खए: पाँच चने रातभर भगोकर एक कटोरी म गीली रुई पर र खए और खड़क के पास रख द जए।
एक सप्ताह तक प्र त दन सुबह स्केल से प्ररोह क लंबाई नापकर एक छोटा आलेख बनाइए। आपने वृ द्ध को अपनी
आँख से दे ख लया।

प्र.3 दे शभर म व भन्न प्रकार के स्वा दष्ट पकवान और उनको बनाने क व शष्ट व धयाँ ह। वे सब कससे बनते ह? हम
इसे कैसे पता करगे?

वे कससे बनते ह: दो भारतीय व्यंजन चाहे कतने ही अलग दख, वे कुछ ही पोषक तत्व से मलकर बने होते ह।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

घटक हमारे लए क्या करता है भारतीय भोजन जनम अ धक है

काब हाइ ेट ऊजा दे ता है चावल , चपाती, आलू, गुड़

प्रोट न शरीर बनाता और उसक मरम्मत करता है दाल , राजमा, पनीर, अंडा, मछली

वसा अ धक ऊजा दे ती और सं चत करती है घी, सरसों का तेल , मूँगफली, मक्खन

वटा मन और ख नज रोग से बचाते ह; ह ी और रक्त बनाते ह आँवला, अमरूद , पालक , दू ध, के ला

रूक्षांश और जल पाचन ठ क रखते ह सलाद , साबुत अनाज, फल , पीने का जल

कैसे पता करगे — अनुमान से नह , परीक्षण से। आगे इसी पुस्तक म आप ये सरल परीक्षण करगे —

मंड (स्टाच) का परीक्षण — पके चावल या आलू के टु कड़े पर आयोडीन वलयन क एक बूँद डा लए। मंड होने पर रंग नीला-
काला हो जाता है।
वसा का परीक्षण — भोजन को कागज़ पर रगड़कर सुखाइए। य द तैलीय धब्बा बने जससे प्रकाश आर-पार दखे, तो वसा
उप स्थत है। मूँगफली और सेब के टु कड़े से करके तुलना क जए।
प्रोट न का परीक्षण — भोजन के लेप पर कॉपर सल्फेट वलयन और कॉ स्टक सोडा वलयन क कुछ बूँद डालने पर प्रोट न
होने पर बगनी रंग आता है।

भारतीय रसोई म इसका महत्व: केवल चावल क थाली ऊजा तो दे गी पर शरीर बनाने वाला पदाथ पयाप्त नह
दे गी। इसी लए पारंप रक थाली म चावल या रोट के साथ दाल (प्रोट न), सब्ज़ी ( वटा मन और ख नज), दही
(प्रोट न और कै ल्शयम) और थोड़ा घी (वसा) होता है। हमारी दाद -नानी ने संतु लत आहार इन परीक्षण के
आ वष्कार से बहुत पहले खोज लया था — परीक्षण केवल यह बताते ह क वह क्य सही है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 4
जल, ऊष्मा और आस-पास के पदाथ

प्र.1 क्या आपने कभी सोचा है क बा रश क्य और कैसे होती है?

हाँ। वषा जल चक्र का दखाई दे ने वाला भाग है, जो समुद्र, आकाश और धरती के बीच नरंतर चलता रहता है।
यह कैसे होता है — चरण-दर-चरण:

1. वाष्पन। सूय महासागर , न दय , तालाब और गीले कपड़ तक के जल को गरम करता है। जल धीरे-धीरे एक अदृश्य गैस —
जलवाष्प — म बदलकर गरम वायु के साथ ऊपर उठता है।
2. ऊपर जाकर ठं डा होना। ऊपर क वायु अ धक ठं डी होती है।
3. संघनन। वाष्प ठं डा होकर धूल के कण के चार ओर अ त सूक्ष्म बूँद म बदल जाता है। ऐसी करोड़ बूँद मलकर जो दखती
ह, वही बादल है।
4. वषण। बूँद आपस म मलती जाती ह और इतनी भारी हो जाती ह क वायु उन्ह रोक नह पाती — तब वे वषा बनकर गरती ह।
बहुत ठं ड होने पर ओले या हम गरते ह।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

5. वषा का जल न दय से होकर फर समुद्र म पहुँचता है और चक्र दोबारा आरंभ हो जाता है।

भारत म वषा एक न त ऋतु म क्य होती है: गरमी म स्थल अरब सागर और बंगाल क खाड़ी क तुलना म
कह तेज़ी से गरम होता है। स्थल क गरम वायु ऊपर उठती है और उसका स्थान लेने समुद्र से नम वायु दौड़ी आती
है। यही मानसूनी पवन ह। प मी घाट और हमालय से टकराकर ये ऊपर उठती ह, ठं डी होती ह और जमकर
बरसती ह — इसी लए जून के आस-पास पहली वषा केरल म होती है और चेरापूँजी (मेघालय) पृथ्वी के सबसे
अ धक वषा वाले स्थान म है।

स्वयं जाँ चए: उमस भरे दन म ठं डे जल से भरा स्ट ल का गलास कुछ दे र हाथ म र खए। गलास के बाहर पानी क
बूँद दखने लगगी। भीतर से कुछ रसा नह — वायु म पहले से मौजूद वाष्प ठं डी सतह पर संघ नत हो गई। बादल भी
ठ क इसी प्रकार बनता है।

प्र.2 क्या आपने ध्यान दया क जल ठं डा करने पर बफ बन जाता है और गरम करने पर उबलने लगता है?

हाँ। तीन रूप म पदाथ वही जल है; केवल उसक अव ा बदलती है।

अव ा हम क्या कहते ह कससे बदलती है दै नक जीवन म

ठोस बफ 0 °C तक ठं डा करना — िहमीकरण फ ीज़ र की बफ , ओले

द्रव जल बफ को 0 °C से ऊपर गरम करना — गलन पीने के जल का िगलास

गैस भाप / जलवाष्प 100 °C तक गरम करना — क्वथन पेशर कु कर की सीटी

ऐसा क्य होता है: जल अत्यंत सूक्ष्म कण से बना है जो सदा ग तशील रहते ह।

ठं डा करने पर कण धीमे पड़ जाते ह, पास-पास आकर न त स्थान पर जम जाते ह और केवल वह कंपन कर
पाते ह। जल कठोर हो जाता है — बफ।
गरम करने पर कण तेज़ और तेज़ चलने लगते ह और अंततः एक-दूसरे का बंधन तोड़कर वायु म बखर जाते ह
— भाप।

अथात् गरम या ठं डा करने से नया पदाथ नह बनता; केवल यह बदलता है क कण कतनी स्वतंत्रता से चल सकते
ह। इसी लए पघली हुई बफ से वही जल वापस मल जाता है।

क्या आप जानते ह? कुकर या केतली से नकलता सफ़ेद बादल भाप नह है। असली भाप अदृश्य होती है। जो
दखता है वह थोड़ी ठं डी होकर फर से बनी सूक्ष्म जल-बूँद ह — संघनन आपक आँख के सामने!

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

भारत म उपयोग: मटका गरमी म जल ठं डा रखता है क्य क उसके सूक्ष्म छद्र से रसकर जल वा ष्पत होता है और
ऊष्मा साथ ले जाता है। गरमी क शाम को छत पर पानी छड़कने से छत ठं डी होने का कारण भी यही है।

प्र.3 हम गरम और ठं डे को कैसे समझते ह?

स्पश से हम केवल तुलना कर सकते ह — कोई वस्तु कतनी गरम है, यह जानने के लए मापना पड़ता है।
क्या दे खने को मलता है: हमारी स्पश-संवेदना वश्वसनीय नह है। यह सरल परीक्षण क जए —

बायाँ हाथ → ठं डे जल के कटोरे में | दायाँ हाथ → ग ुनग ुने जल के कटोरे में

एक िमनट बाद दोनों हाथ एक ही सामान्य जल के कटोरे में डािलए।

वही जल उसी क्षण बाएँ हाथ को गरम और दाएँ हाथ को ठं डा लगेगा। अथात् त्वचा केवल यह बताती है क वस्तु हमारे हाथ से
अ धक गरम है या कम।

मापन क्य आवश्यक है: “गरम” और “ठं डा” सापेक्ष शब्द ह, इस लए व ान ताप नामक संख्या का प्रयोग करता
है, जसे ड ी से ल्सयस (°C) म तापमापी (थमामीटर) से मापा जाता है। थमामीटर का पाठ्यांक इस बात पर
नभर नह करता क उसे कौन पकड़े है।

डॉक्टरी तापमापी शरीर का ताप मापता है। सामान्य मानव शरीर का ताप लगभग 37 °C (98.6 °F) होता है। इससे अ धक
होने पर ज्वर माना जाता है।
प्रयोगशाला तापमापी जल, तेल या वायु का ताप कह अ धक वस्तृत परास म मापता है।
समुद्र तल पर जल 0 °C पर जमता है और 100 °C पर उबलता है।

कहाँ काम आता है: डॉक्टर माथा छू कर नह , थमामीटर का पाठ्यांक दे खकर दवा तय करता है। हलवाई दही जमाने
के लए दूध को सही ताप पर रखता है। मौसम वभाग अ धकतम ताप लगभग 45 °C पार करने पर लू क चेतावनी
दे ता है और तब व ालय का समय बदल दया जाता है।

प्र.4 और फर, हमारे आस-पास अनेक प्रकार क वस्तुए ँ ह— जस कागज पर हम लखते ह, धातु क चाबी, प्ला स्टक
का पैमाना, हमारे बॉक्स म मटाने वाला रबर, बॉक्स को बंद रखने वाला चुंबक, हमारे पहनने के कपड़े, दूध पीने
का प्याला और बहुत-सी अन्य वस्तुए।ँ ये सब कससे बनी होती ह? क्या ये व भन्न पदाथ से बनी ह? हम व भन्न
पदाथ को एक-दूसरे से कैसे पृथक करते ह?

हाँ — प्रत्येक वस्तु उसी पदाथ से बनी है जो उसके काम के लए उपयुक्त हो, और कोई एक वस्तु दो-तीन पदाथ से भी बन
सकती है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार
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वस्तु पदाथ वह गुण जो उसे उपयुक्त बनाता है

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कागज़
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हल्का, मुलायम, स्याही सोख लेता है
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चाबी
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धातु (पीतल, इस्पात)

पैमाना प्लािस्टक हल्का, सीधा रहने वाला, सस्ता, जंग नह लगती

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seलोहे को आक षत करता है, इस लए ढक्कन चपक जाता है
रबर रबर मुलायम और लचीला, प सल के नशान मटा दे ता है

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बॉक्स का चुंबक चुंबकीय पदाथ
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कपड़े कपास, ऊन, रे शम, संिश्लष्ट रे शा सूती कपड़ा गरमी म हवा आने-जाने दे ता है; ऊन वायु रोककर गरम रखती है

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प्याला काँच, चीनी िम ी, स्टील या िम ी द्रव रोकता है, दूध म घुलता नह

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agl हस्त चयन — जब टुकड़े बड़े, थोड़े और स्पष्ट भन्न ह , जैसे चावल म से कंकड़ बीनना।
पदाथ को पृथक कैसे करते ह: हम ऐसा एक गुण ढूँ ढ़ते ह जो केवल एक पदाथ म हो, और उसी का उपयोग करते ह।

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नष्पावन (ओसाना) — कसान मश्रण को हवा म गराता है; हल्का भूसा उड़ जाता है और भारी अनाज सीधे नीचे गरता है।

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चालन — आटा चलनी के छद्र से नकल जाता है, चोकर ऊपर रह जाता है।.co
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चुंबक य पृथक्करण — चुंबक रेत या छ लन म से लोहे क पन ख च लेता है।
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नस्यंदन — छन्नी म चाय क पत्ती रह जाती है और चाय छनकर नकल जाती है।

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अवसादन और नस्तारण — गँदला जल कुछ दे र रखा रहने द, म नीचे बैठ जाती है और ऊपर का स्वच्छ जल उँ डेल लया
जाता है।
वाष्पन — समुद्र का जल उथले खेत म भरते ह; धूप म जल वा ष्पत हो जाता है और नमक शेeषm
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co के तट पर नमक इसी प्रकार बनता है। gl
रह जाता है। गुजरात और

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त मलनाडु

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agl सभी व धय के पीछे एक ही नयम: पृथक्करण सदै व कसी गुण के अंतर का उपयोग करता है — चालन म
आकार, नष्पावन म भार, चुंबक य पृथक्करण म चुंबक से आकषण, वाष्पन म घुलनशीलता और क्वथन। य द दो
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पदाथ के सभी गुण समान ह तो उन्ह अलग नह oकया
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 5
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स्वयं उत्तर ढूँ ढ़ना — लखना बंद कर दे ने वाली कलम
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हम स्वयं अपने प्रश्न के उत्तर ढूँ ढ़ने का प्रयास कैसे कर सकते है?

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वै ा नक व ध का पालन करके — यह एक छोट और ईमानदार प्र क्रया है जसे कसी भी छोट -बड़ी समस्या पर लगाया जा
सकता है।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

अवलोकन → पश्न → अन ुमान → परीक्षण → िवश्लेषण

1. ध्यान से अवलोकन क जए। कारण तय कए बना नोट क जए क हो क्या रहा है।
2. स्पष्ट प्रश्न बनाइए। “ऐसा क्य होता है?” या “यह कैसे होता है?” अस्पष्ट प्रश्न का उत्तर भी अस्पष्ट ही मलेगा।
3. अनुमान लगाइए जो इसक व्याख्या कर सके — और ध्यान र खए क वह अनुमान जाँचा जा सकता हो।
4. अनुमान का परीक्षण प्रयोग, मापन या अ धक अवलोकन से क जए।
5. प रणाम का व ेषण क जए। अनुमान सही नकला तो उत्तर मल गया। गलत नकला तो यह असफलता नह है — नया
अनुमान लगाइए और फर परीक्षण क जए।

यह केवल मान लेने से बेहतर क्य है: दावा तो कोई भी कर सकता है। जो अनुमान परीक्षण म खरा उतरा हो वह
प्रमाण पर आधा रत होता है, और कोई दूसरा व्य क्त वही परीक्षण दोहराकर वही प रणाम पा सकता है। इसी
कारण वै ा नक उत्तर वश्वसनीय होता है।

संकेत: जब घर पर परीक्षण संभव न हो तो वै ा नक के अन्य साधन अपनाइए — वश्वसनीय पुस्तक प ढ़ए, ध्यान से
खो जए, शक्षक से पू छए और सबसे बढ़कर मत्र से चचा क जए। अध्याय याद दलाता है क व ान अकेले कम
ही होता है।

प्र.2 मान ली जए क आपक कलम लखना बंद कर दे ती है तब आप क्या करगे?

म कलम फक नह दूँ गा — म यह पता लगाऊँगा क वह क्य रुक , ठ क वैसे ही जैसे पुस्तक म बताया गया है।

चरण कलम के साथ म क्या करता ँ

अवलोकन कलम कागज़ पर चलती तो है पर कोई रे खा नही ं बनती।

प्रश्न “मेर ी कलम ने िलखना क्यों बंद कर िदया?”

अनुमान “संभवतः स्याही समाप्त हो गई है। ”

परीक्षण कलम खोलकर िरिफल की स्याही दे खना।

व ेषण यिद िरिफल खाली है तो अनुमान सही था — स्याही समाप्त हो चुक ी थी।

यह व ान क्य है: ध्यान द जए, मने कह भी यह मान नह लया क स्याही समाप्त है। मने उसे अनुमान बनाया
और फर जाँचा। अनुमान और जाँच — यही वै ा नक व ध का हृदय है, और आप वष से बना नाम जाने यही
करते आ रहे ह।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 परंतु मान ली जए क आप दे खते ह क स्याही समाप्त नह हुई है। तब आप क्या करगे?

तब पहला अनुमान गलत है — और व ान म यह बल्कुल सामान्य बात है। म नया अनुमान लगाऊँगा और उसका भी परीक्षण
करूँगा।

नया अनुमान 1 — नोक पर स्याही सूख गई है। परीक्षण: नोक को थोड़े गुनगुने जल म डु बोइए या खुरदरे कागज़ पर ज़ोर से
घ सए। य द लखने लगे तो अनुमान सही था।
नया अनुमान 2 — नोक क गोली अटक गई है या उस पर मैल जमा है। परीक्षण: नोक साफ़ करके कागज़ पर घुमाइए।
अब चल जाए तो यही कारण था।
नया अनुमान 3 — र फल म वायु का बुलबुला आ गया है। परीक्षण: र फल को नीचे क ओर झट कए ता क स्याही बुलबुले
से आगे आ जाए।
नया अनुमान 4 — र फल म दरार है या नोक मुड़ी हुई है। परीक्षण: वही र फल दूसरी कलम म लगाइए। फर भी न चले तो
दोष र फल का है; चल जाए तो दोष कलम के ढाँचे का था।

गलत अनुमान भी उपयोगी क्य है: असफल होने वाला प्रत्येक परीक्षण एक संभा वत कारण घटा दे ता है और
आपको असली कारण के और पास ले आता है। वै ा नक भी ठ क यही करते ह। अध्याय कहता ही है क पहेली का
कोई टु कड़ा कभी-कभी हटाना पड़ता है — गलत सद्ध होना व ान के आगे बढ़ने का तरीका है, रुकने का कारण
नह ।

संकेत: परीक्षण करते समय एक बार म केवल एक चीज़ बद लए। य द आपने नोक भी साफ़ क और र फल भी
बदल द और कलम चल पड़ी, तो कभी पता नह चलेगा क कारण इनम से कौन-सा था।

क्रयाकलाप 1.1: आइए, सोच और लख — पृष्ठ 5
आपने स्वयं हल क गई कोई समस्या

क्रयाकलाप

प्र.1 एक ऐसी ही अन्य समस्या के बारे म लख जसे आपने हल करने का प्रयास कया हो।

यह आपका अपना अनुभव है, इस लए अपने जीवन क कसी वास्त वक समस्या पर ल खए। अच्छे उत्तर म तीन बात होनी चा हए
— क्या गड़बड़ हुई, आपने कारण क्या समझा, और आपने जाँचा कैसे।
घर या व ालय क कोई समस्या चु नए, जैसे —

साइ कल चलाना अचानक भारी लगने लगा।
ट .वी. का रमोट काम करना बंद हो गया।
ूबलाइट टम टमाई पर जली नह ।
खड़क पर रखा पौधा पानी दे ने पर भी सूख गया।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

रसोई के नल से पानी क केवल पतली धार आने लगी।

नमूना उत्तर: एक सुबह मेरी साइ कल चलाना बहुत भारी लगने लगा, जब क टू टा-फूटा कुछ नह दख रहा था।
मने पहले अनुमान लगाया क चेन सूख गई है, इस लए उसे दे खा — वह तेल लगी और आसानी से चल रही थी,
अतः यह अनुमान गलत नकला। फर मने अनुमान लगाया क पछले टायर म हवा कम है। मने अंगूठे से दोन
टायर दबाकर दे खे — अगला कड़ा था पर पछला आसानी से दब गया। व ालय के पास क दुकान से हवा भरवाते
ही साइ कल फर सरलता से चलने लगी। मेरा दूसरा अनुमान सही था।

यह उत्तर अ ा क्य है: इसम एक स्पष्ट समस्या है, अनुमान जाँच से पहले बताए गए ह, पहला अनुमान गलत
नकलने क बात स्वीकारी गई है, और अंत म वह प्रमाण दया गया है जससे बात तय हुई — केवल “मने ठ क कर
दया” नह ।

प्र.2 आपने कन चरण का पालन कया?

अपने चरण क्रम से ल खए और फर उन्ह वै ा नक व ध के पाँच चरण से मलाइए। ऊपर वाले साइ कल के उदाहरण के लए —

वै ा नक व ध का मने वास्तव म क्या कया
चरण

1. अवलोकन साइिकल चलाने में सामान्य से कही ं अिधक ज़ोर लगना पड़ा; कु छ टू टा हुआ नही ं िदखा।

2. प्रश्न मेर ी साइिकल अचानक भारी क्यों हो गई?

3. अनुमान पहला अनुम ान — चेन सूख गई है। दू स रा अनुम ान — िपछले टायर की हवा िनकल गई है।

4. परीक्षण चेन दे खी और िहलाकर जाँची (वह ठीक थी)। दोनों टायरों को अंग ूठे से दबाकर तुल ना की।

5. व ेषण िपछला टायर आसानी से दब गया → उसमें हवा कम थी। हवा भरवाते ही साइिकल ठीक चलने लगी। दू स रा
अनुमान सही िस द्ध हुआ।

इस क्रयाकलाप का उ े श्य: आप पहले से ही वै ा नक व ध का प्रयोग कर रहे थे, बस उसका नाम नह जानते थे।
चरण को इस क्रम म लखने से व ध दखाई दे ने लगती है, जससे अगली बार आप उसे जान-बूझकर कसी क ठन
समस्या पर लगा सकगे।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 5, 6 और 7

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

वै ा नक व ध के चरण

प्र.1 वे कौन-से चरण ह जनका हम अनुपालन कर सकते ह?

पुस्तक पाँच चरण इसी क्रम म बताती है —

1. अवलोकन कु छ रोचक या न समझ आने वाली बात देखना।

2. पश्न उसके बारे में स्पष्ट “क्यों?” या “कैसे?” बनाना।

3. अनुमान उस पश्न के संभािवत उत्तर का अन ुमान लगाना।

4. परीक्षण पयोगों या अिधक अवलोकनों से अन ुमान जाँचना।

5. िवश्लेषण देखना िक पश्न का उत्तर वास्तव में िमला या नही ं।

ज ासा के पृष्ठ 6 पर द गई वै ा नक व ध के पाँच चरण। य द चरण 5 म अनुमान गलत नकले तो हम चरण 3 पर लौटकर नया अनुमान
लगाते ह।

पुस्तक के अपने शब्द म —

1. सबसे पहले, जो हम रु चकर लगता है या जसे हम समझ नह पाते, हम उसका अवलोकन करते ह।
2. यह हम अचं भत करता है और शायद हम उसके बारे म एक प्रश्न सोचते ह।
3. इसके बाद हम उस प्रश्न के संभा वत उत्तर का अनुमान लगाते ह।
4. इस अनुमान का हम प्रयोग और अ धक अवलोकन ारा सत्यापन करते ह।
5. इसके बाद हम प रणाम का व ेषण करके दे खते ह क क्या वास्तव म हमारे प्रश्न का उत्तर प्राप्त हुआ।

क्रम क्य महत्वपूण है: अनुमान परीक्षण से पहले आना चा हए, और परीक्षण ऐसा हो जो अनुमान को गलत भी
सद्ध कर सके। य द आप उत्तर पहले तय कर ल और फर केवल उसी के पक्ष क बात ढूँ ढ़, तो वह व ान नह है।
चरण 5 से चरण 3 पर लौटने वाला यह चक्र ही व ध को ईमानदार बनाए रखता है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार
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क्या आप जानते ह? व ान केवल तथ्य और आँकड़ को याद करना नह है, और केवल प्रयोग करना भी नह है।

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पुस्तक स्पष्ट कहती है क यह उत्तर ढूँ ढ़ने क चरण-दर-चरण प्र क्रया का पालन करना है।

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प्र.2 क्या आपने अनुभव कया है क हमारे दै नक जीवन म ऐसी अनेक प र तयाँ आती ह जहाँ हम जाने-अनजाने

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वै ा नक व ध का प्रयोग करते ह?

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हाँ। पाँच चरण जान लेने के बाद ये हम हर जगह दखने लगते ह। अध्याय स्वयं तीन उदाहरण दे ता है, और घर पर ऐसे दजन
उदाहरण मलगे।
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व्य क्त अवलोकन प्रश्न अनुमान परीक्षण

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g l aरसोइया दाल कुकर से बाहर बाहर क्यों िनकली? कु कर में बहत
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साइ कल मरम्मत टायर क हवा नकल हवा कहाँ से बाहर ट ूब में छे द है ट ूब में हवा भरकर पानी में डुबोना
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करने वाला गई है िनकली? और बुल बुले दे खना
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व ुत कम
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उसी cसॉके ट में दू स री के बल
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आप मोबाइल चाज नह हो दोष चाजर, के बल या के बल भीतर से टू टी

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लगाकर दे खना

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रहा सॉके ट में है? है

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as अध्याय का बड़ा संदेश: “वै ा नक वे लोग होते ह जो वै ा नक व ध का प्रयोग करते ह… परंतु जो भी व्य क्त
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वै ा नक व ध का पालन करता है वह एक वै ा नक क तरह काय करता है।” वै ा नक क पहचान सफ़ेद

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कोट या प्रयोगशाला नह , सोचने का ढं ग है। जब हम प्रश्न पूछते और उत्तर ढूँ ढ़ते ह तो एक तरह से हम सभी
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वै ा नक जैसा काय करते ह।

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फर व ान पढ़ना क्य आवश्यक है: हम सब इस व ध का थोड़ा-बहुत प्रयोग छोट समस्याओं पर करते ह।
व ान पढ़ने से यह क्षमता बढ़ती है और हम इसे बड़ी समस्याओं पर लगा पाते ह — जैसे प्रदू षत नद को स्वच्छ
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करना, अ धक अन्न उगाना या कसी रोग का उपचार खोजना।
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क्रयाकलाप 1.2: आइए, सोच और लख — पृष्ठ 6
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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

दै नक जीवन म वै ा नक व ध

क्रयाकलाप

प्र.1 आप दै नक जीवन क ऐसी एक प र त का वणन कर जहाँ कोई व्य क्त वै ा नक व ध का अनुसरण करता
है।

अपनी दे खी हुई कोई वास्त वक घटना चु नए और उसे पाँच चरण म ल खए। उत्तर म यह दखना चा हए क उस व्य क्त ने पहले
अनुमान लगाया और फर जाँचा।

नमूना उत्तर: पछले महीने हमारा पंखा तेज़ आवाज़ करने लगा। पताजी ने पहले अनुमान लगाया क कोई
पंखुड़ी ढ ली हो गई है। उन्ह ने पंखा बंद करके, स्टू ल पर चढ़कर हर पंखुड़ी हलाकर दे खी — तीन कसी हुई थ ,
अतः यह अनुमान गलत नकला। फर उन्ह ने अनुमान लगाया क पंखे पर धूल और चकनाई जम गई है जससे
संतुलन बगड़ रहा है। उन्ह ने गीले कपड़े से पंखु ड़याँ साफ़ क और जोड़ पर तेल क कुछ बूँद डाल । पंखा चलाने
पर आवाज़ पूरी तरह बंद हो गई। उनका दूसरा अनुमान सही सद्ध हुआ।

आप इनम से कसी प र स्थ त पर भी लख सकते ह —

दूध उफनकर गर गया — आँच बहुत तेज़ थी या बरतन बहुत छोटा?
स दय म दही नह जमा — जामन डालते समय दूध बहुत ठं डा तो नह था?
मोबाइल क बैटरी जल्द उतरने लगी — दोष बैटरी म था या पीछे चलते कसी ऐप म?
कोने म रखा पौधा पीला पड़ गया — धूप कम मली या पानी अ धक दे दया?
पानी क मोटर चालू नह हुई — दोष स्वच, तार या मोटर म था?

हर उदाहरण म क्या दे खना है: व्य क्त ने अपने पहले वचार को अं तम नह माना। उसने एक संभा वत कारण
बताया, उसे जाँचने का उपाय कया और अपना मत बदलने के लए तैयार रहा। गलत सद्ध होने क यही तैयारी
वै ा नक व ध क असली पहचान है।

क्रयाकलाप 1.3: आइए, वचार कर और लख — पृष्ठ 7
“क्य ?” पूछना

क्रयाकलाप

प्र.1 य द आपको कसी वस्तु या घटना के बारे म प्रश्न पूछना है क यह क्य होती है तो उसके बारे म आप क्या पूछगे?

ऐसी बात चु नए जो आपने स्वयं अपनी आँख से दे खी हो — अपने प रवेश का “क्य ” पुस्तक से नकल कए गए “क्य ” से सदा
अच्छा होता है।
कुछ अच्छे प्रश्न जो आप पूछ सकते ह —

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

दन म आकाश नीला और सूयास्त के समय लाल क्य दखता है?
कटा हुआ सेब कुछ दे र म भूरा क्य हो जाता है, जब क न बू का टु कड़ा नह होता?
सूरजमुखी सूय क ओर मुँह क्य घुमाता है?
म का मटका बना बजली के जल ठं डा कैसे रखता है?
च टयाँ सदा एक ही कतार म क्य चलती ह?
पंखा चलने पर गीला फ़श जल्द क्य सूख जाता है?
महीने भर म चंद्रमा का आकार बदलता हुआ क्य दखता है?
गरम तेल म पूरी फूल क्य जाती है?

नमूना उत्तर: म पूछूँगा — “थाली म रखा कटा हुआ सेब भूरा क्य हो जाता है?” जब भी माँ सेब काटती ह मने
यह दे खा है, और भूरा रंग केवल कट सतह पर आता है, छलके पर नह ।

अ ा वै ा नक प्रश्न कैसा होता है: वह कसी ऐसी बात पर हो जसका आप अवलोकन कर सक, वह न त
हो (“संसार ऐसा क्य है?” जैसा अस्पष्ट नह ), और उसका कम से कम कुछ भाग आप स्वयं जाँच सक। “कटा सेब
भूरा क्य होता है?” तीन कसौ टय पर खरा उतरता है।

प्र.2 आप अपने प्रश्न का उत्तर कस प्रकार खोजगे यह लखने का प्रयास क जए।

अपनी योजना वै ा नक व ध के पाँच चरण म ल खए। सेब वाले प्रश्न को आगे बढ़ाते हुए —

चरण म क्या करूँगा

1. खुले में रखा से ब का कटा सफ़े द भाग धीरे -धीरे भूर ा हो जाता है; िछलके से ढका भाग सफ़े द ही रहता है।
अवलोकन

2. प्रश्न से ब की कटी सतह भूर ी क्यों हो जाती है?

3. अनुमान वायु में उपिस्थत कोई चीज़ — संभवतः वायु ही — कटी सतह पर ि या करके उसका रंग बदल दे ती है। यिद वायु न लगे तो
से ब सफ़े द बना रहना चािहए।

4. परीक्षण एक से ब के चार बराबर टुक ड़े कीिजए। टुक ड़ा A प्ले ट में खुल ा रिखए। टुक ड़ा B िक्लंग िफ़ ल्म में कसकर लपेिटए। टुक ड़ा C
नी ंबू के रस में डुबोइए। टुक ड़ा D पानी की कटोरी में रिखए। 10, 30 और 60 िमनट बाद चारों को दे खकर िलिखए।

5. टुक ड़ ा A सबसे पहले भूरा होता है। B और D, िजन्हे ं वायु कम या िबल्कु ल नही ं लगी, कही ं अिधक हल्के रहते है।ं नी ंबू के रस
व ेषण वाला C सबसे सफ़े द रहता है। अतः भूरापन सचमुच वायु के संपक से आता है और नी ंबू का रस उसे धीमा कर दे ता है।

चार टु कड़े क्य आवश्यक ह: टु कड़ा A नयंत्रण है — वह सामान्य स्थ त जससे बाक सबक तुलना क जाती
है। उसके बना यह पता ही नह चलता क क्लंग फ़ल्म से कोई अंतर पड़ा भी या नह । एक बार म एक ही चीज़
बदलना और एक नयंत्रण रखना — इसी तरह उ चत परीक्षण बनाया जाता है।

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संकेत: य द आपके प्रश्न क जाँच घर पर संभव न हो — जैसे “आकाश नीला क्य है?” — तो दूसरे ईमानदार रास्ते
अपनाइए: उसे दन के अलग-अलग समय पर दे खए, वश्वसनीय पुस्तक म प ढ़ए, व ान शक्षक से पू छए और
मत्र से चचा क जए। अध्याय याद दलाता है क दु नया भर के वै ा नक बड़े-बड़े समूह म मलकर काय करते ह,
अतः सहायता माँगना व ध का ही भाग है, कोई शॉटकट नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 8
व ान क यात्रा का आनंद ली जए

प्र.1 बु द्धमान होने के लए आपको प्रश्न पूछने वाला बनना आवश्यक है।

यह अध्याय का समापन- वचार है। अंग्रेज़ी संस्करण म यह शब्द का सुंदर खेल है — “wise” (बु द्धमान) और “whys” (क्य
पूछने वाला) लगभग एक जैसे सुनाई दे ते ह।
इसका अथ: बु द्धमानी बने-बनाए उत्तर इक े करने से नह आती। वह “क्य ?” पूछने क आदत से आती है — और फर
ईमानदारी से उसका उत्तर खोजने से।

जो केवल रटता है वह तथ्य दोहरा तो सकता है, पर नई प र स्थ त सामने आते ही अटक जाता है।
जो “क्य ” पूछता है वह तथ्य के पीछे का कारण समझता है, इस लए वह उसे ऐसी स्थ त म भी लगा सकता है जो कसी ने
पढ़ाई ही न हो।

अध्याय का अंत इसी बात पर क्य : पूरा अध्याय यही समझाता आया है क व ान काय करने क पद्ध त है,
सूचनाओं का ढे र नह । ज ासा प्र क्रया आरंभ करती है, प्रश्न उसे दशा दे ता है और परीक्षण उसे तय करता है।
“क्य ” हटा द जए तो पूरी व ध ढह जाती है।

यह करके दे खए: एक “क्य -कॉपी” बनाइए। प्र त दन एक ऐसी बात ल खए जसने आपको उलझाया — और
उत्तर मलने पर भरने के लए नीचे जगह छोड़ द जए। कक्षा 6 के अंत तक आप स्वयं दे खकर च कत ह गे क
कतनी जगह आपने स्वयं भर ली ह।

प्र.2 क्या आप व ान क इस रोमांचक यात्रा पर नकलने के लए तैयार ह?

हाँ! और अध्याय यह भी बता दे ता है क इस यात्रा म साथ क्या ले जाना है —

ज ासा — ब्रह्मांड के अ त रहस्य के बारे म सोचना कभी बंद न क जए।
पैनी अवलोकन-दृ ष्ट — अध्याय कहता है क सबसे पहली और सबसे आवश्यक बात है ज ासु होना और आस-पास के
वातावरण का ध्यान से अवलोकन करना।
वै ा नक व ध — अवलोकन, प्रश्न, अनुमान, परीक्षण, व ेषण।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार AglaSem · NCERT Solutions

मत्र — “वै ा नक खोज अकेले कम ही होती ह।” दु नया भर के वै ा नक बड़े समूह म काय करते ह, इस लए स्वयं उत्तर न
मले तो मत्र से नःसंकोच सहायता माँ गए।
धैय — कक्षा 6 म आपको अपने सभी प्रश्न के उत्तर नह मलगे, और यह ठ क ही है। यह यात्रा अगले पाँच वष तक और उससे
भी आगे चलती है।

इस पृष्ठ का चत्र भाव बताता है: बा रश म दौड़ते-भागते प्रसन्न ब े। पुस्तक कहती है क व ान आनंदमय खोज
है — ढोया जाने वाला बोझ नह , आनंद लेने क वस्तु। संसार उन बात से भरा है जो हम नह जानते और जन्ह
खोजना अभी शेष है।

क्या आप जानते ह? आगे का हर अध्याय इसी अध्याय म पूछे गए कसी न कसी प्रश्न का उत्तर है — सजीव,
भोजन, जल, ऊष्मा, पदाथ, ग त, प्रकाश तथा सूय, चंद्रमा और तारे। अध्याय 1 मान चत्र है; शेष पुस्तक यात्रा है।

अध्याय — एक नज़र म
व ान दे खने, सोचने, समझने और काय करने का एक सशक्त माध्यम है जो वश्व के रहस्य क परत खोलता है। यह केवल
तथ्य को रटना नह है।
व ान का इंजन है ज ासा — साधारण चीज़ के बारे म “कैसे?” और “क्य ?” पूछने क आदत। इसी कारण कक्षा 6 क
इस पाठ्यपुस्तक का नाम ज ासा है।
व ान सवत्र है — रेत के एक कण म भी और वशाल पवत म भी, रसोई म भी और खेल के मैदान म भी, महासागर क
गहराई म भी और दूर क मंदा कनी म भी।
वै ा नक व ध के पाँच चरण ह — अवलोकन → प्रश्न → अनुमान → परीक्षण → व ेषण। य द अनुमान परीक्षण म
गलत नकले तो नया अनुमान लगाकर फर से परीक्षण करते ह।
वै ा नक वह हर व्य क्त है जो इस व ध का पालन करता है — दाल कुकर से बाहर क्य नकली, यह सोचने वाला रसोइया;
टायर से हवा कहाँ से नकली, यह ढूँ ढ़ने वाला साइ कल मरम्मत करने वाला; बल्ब और स्वच जाँचने वाला व ुत कम ।
यह पुस्तक पृथ्वी और पयावरण, जीव-जंतु, भोजन, जल, ऊष्मा, पदाथ, ग त, प्रकाश तथा सूय, चंद्रमा और तार क खोज
कराएगी। व ान मलकर कया जाता है, अतः उत्तर न मले तो मत्र से नःसंकोच सहायता माँ गए।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 1 व ान का अनूठा संसार
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त्व रत पुनरावृ त्त
m l a se
m .coअथ अध्याय म ag दै नक जीवन का उदाहरण
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शब्द

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व ान दे खने, सोचने, समझने और काय करने का सशक्त माध्यम जो िवश्व पृष्ठ 1 तारे क्य चमकते ह, यह पता

co m
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के रहस्यों की परते ं खोलता है लगाना

m .
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ज ासा पृष्ठ 1 फूल को कब खलना है, यह कैसे
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जो िदखे उसके बारे में पश्न पूछने की पबल इच्छा; इसी से पुस्तक
का शीषक बना
a पता चलता है

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अवलोकन िबना अनुम ान लगाए ध्यान से दे खना और लक्षण नोट करना चरण 1, पृष्ठ 6 कुकर के चार ओर दाल गरी

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दे खना

m l a s“मेe री कलम ने लखना क्य बंद
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प्रश्न चरण 2, पृष्ठ 6

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कर दया?”

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परीक्षण से पहले सोचा गया संभािवत उत्तर चरण 3, पृष्ठ 6 “शायद स्याही समाप्त हो गई है।”

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(प रकल्पना)

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परीक्षण / प्रयोग अनुम ान की जाँच के िलए कु छ करना या और अवलोकन करना चरण 4, पृष्ठ 6 कलम खोलकर र फल दे खना
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व ेषण पिरणाम दे खकर तय करना agिकlपश्न का उत्तर िमला या नही ं चरण 5, पृष्ठ 6 र फल खाली → अनुमान सही था

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डु.बcोना
वै ा नक व ध अवलोकन → पश्न → अनुम ान → परीक्षण → िवश्ले षण की चरण- पृष्ठ 5 साइ कल वाले का ूब पानी म

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दर-चरण पि या

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वै ा नक
m . co वह व्यिक्त जो वै ािनक िविध से समस्या हल करता है या नई खोज
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पृष्ठ 6 प्रश्न पूछने और जाँचने वाला हर

g l as करता है व्य क्त

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जानने क इच्छा पश्न पूछना कभी बंद न करने की आदत पृष्ठ 5 और 8 “आकाश नीला क्य दखता है?”

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पूछना

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages20
Languagehindi
Updated19 Sep 2026