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NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 2 सजीव जगत में विविधता

AglaSem पर कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 2 सजीव जगत में विविधता (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Science Chapter 2 Diversity in the Living World (Curiosity), Hindi Medium.
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NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 2 सजीव जगत में विविधता – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 2: सजीव जगत म व वधता

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

9 – 34 20 61 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 58 pages

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 2: सजीव जगत म व वधता
कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत एनसीईआरट समाधान। आइए, और अ धक
सीख के दस प्रश्न, क्रयाकलाप 2.1 से 2.10 तक के सभी काय, और भी सीख क प रयोजनाएँ तथा पृष्ठ 9 से 34 तक के सभी पाठ्य प्रश्न — हर
उत्तर म अवलोकन, उसका कारण और भारतीय जीवन से एक उदाहरण।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 6) 9 – 34

खं ड प्रश्न

20 61

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 10
डॉ. रघु और मनीराम चाचा के साथ प्रकृ त क सैर

प्र.1 क्या आपने कभी अपने आस-पास वद्यमान व भन्न प्रकार के पौध और जंतुओं का अवलोकन कया है? अपने
अवलोकन को अपने मत्र और शक्षक के साथ साझा क जए और उन पर चचा क जए।

हाँ। घर से वद्यालय तक क छोट -सी यात्रा म भी अनेक प्रकार के जीव मलते ह — बस ध्यान से दे खने क आवश्यकता है।
आप क्या दे खगे:

पौधे — सड़क कनारे कोमल हरी घास, गमले म तुलसी, लाल फूल वाली गुड़हल क झाड़ी, नुक्कड़ पर ऊँचा नीम या पीपल,
द वार पर चढ़ता मनी प्लांट और भू म पर फैलती क क बेल।
जंतु — तार पर बैठे कौए और मैना, झाड़ी म गौरैया, तने पर दौड़ती गलहरी, पं क्त म चलती च टयाँ, फूल-फूल पर मँडराती
तत लयाँ, द वार पर छपकली, तालाब के पास भस और वषा के बाद टराते मढक।
ध्व नयाँ भी अलग ह — अध्याय का सबसे महत्वपूण अवलोकन यही है क प्रत्येक पक्षी क अपनी एक अलग चहचहाहट होती
है। कोयल क कूक, कौए क काँव-काँव और गौरैया क चहचहाहट बना पक्षी को दे खे ही पहचानी जा सकती है।

यह क्य महत्वपूण है: इन सभी भन्नताओं को मलाकर व वधता कहते ह। कसी क्षेत्र म पाए जाने वाले पौध और
जंतुओं क व वधता उस क्षेत्र क जैव व वधता है। कोई दो प्रकार के जीव आकृ त, आकार, रंग, भोजन, घर या
ध्व न म बलकुल एक जैसे नह होते — और इसी व वधता को व्यव स्थत करना अध्याय 2 का उ े श्य है।

सैर के लए सुझाव: डॉ. रघु का नयम याद रख — बना छे ड़छाड़ कए अवलोकन कर। फूल-पत्ती न तोड़ और
कसी जंतु को न डराएँ। नोटबुक, पेन और पानी क बोतल साथ रख और जो दे ख वह लख ल; स्मृ त धुँधली पड़
जाती है, लखा हुआ नह ।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

क्रयाकलाप 2.1— आइए, खोज और अं कत कर — पृष्ठ 10–12
अनुभाग 2.1 हमारे आस-पास के पौध और जंतुओं म व वधता

क्रयाकलाप

प्र.1 व भन्न पौध म तने, प त्तय , फूल और कसी भी अन्य रोचक जानकारी के बारे म कए गए अवलोकन को
ता लका 2.1 म दए गए रक्त स्थान म अं कत कर।

क्रम स्थानीय तना प त्तयाँ (प त्तय क आकृ त फूल कोई अन्य
सं. नाम या अ भ वन्यास) अवलोकन एवं
वशेषताएँ

1. सामान्य कोमल तने के भन्न बदुओं से हरी प त्तयाँ
घास और एकांतरी रूप से एक पत्ता
पतला नकलता है।

2. तुलसी कठोर प त्तयाँ जोड़ी म एक दूसरे के गुलाबी–
और सम्मुख व्यव स्थत होती ह। बगनी
पतला

3. गुड़हल कठोर

4. नीम कठोर चकनी सतह वाली
और मोटा प त्तयाँ

5. अन्य

ता लका 2.1, पृष्ठ 11— हमारे आस-पास उप स्थत व भन्न पौध का अवलोकन। रक्त खाने आपको भरने ह।

अपनी प्रकृ त क सैर के अवलोकन को इस पूण ता लका 2.1 से मलाकर दे खए।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

क्रम पौधे का तना प त्तयाँ (आकृ त / फूल कोई अन्य
सं. स्थानीय नाम अ भ वन्यास) अवलोकन

1. सामान्य घास कोमल और तने के िभन्न िबंद ुओ ं से एकांतरी रूप बहुत छोटे, हरे -से , हरी पित्त याँ; िशराएँ
पतला से एक लंबा पतला पत्ता सहज िदखाई नही ं दे ते समांतर

2. तुलसी कठोर और पित्तयाँ जोड़ी में एक-दू स रे के गल
ु ाबी–बैगं नी पत्त ी मसलने पर तीव
पतला सम्मुख; िकनारे दाँतेद ार सुग ंध

3. गुड़हल कठोर, चौड़ी, नुक ीली, एक स्थान पर एक बड़े, लाल, लंबे मध्य शाखाएँ भूिम के िनकट से
पतला, भूर ा पत्ती; जाल जैस ी िशराएँ वृंत सिहत — यह झाड़ी है

4. नीम कठोर और एक वृंत पर जोड़ों में अनेक छोटी छोटे, सफ़े द, ग च्ु छों में िचकनी सतह वाली
मोटा पिणकाएँ पित्त याँ; स्वाद कड़वा

5. मनी प्लांट दुबल और हृदयाकार, पत्येक िबंद ु पर एक पाय: िदखाई नही ं दे ते सहारे की सहायता से
हरा पत्ती दीवार पर चढ़ ता है

भरते समय क्या दे ख: तीन बात अ धकांश खाने भर दे ती ह — तना कोमल है या कठोर, पतला है या मोटा?,
प त्तयाँ कैसे लगी ह — एक बदु पर एक (एकांतरी) या आमने-सामने दो (सम्मुख)? और फूल का रंग,
आकार तथा गंध कैसी है? आगे इन्ह वशेषताओं से पौध के समूह बनगे।

क जए: केवल गरी हुई प त्तयाँ और फूल एकत्र कर उन्ह अख़बार के बीच कसी भारी पुस्तक म दबा द जए। एक
सप्ताह म आपके अपने मोहल्ले के पौध क स्क्रैप बुक तैयार हो जाएगी।

प्र.2 आपने जन पौध का अवलोकन कया है, उनम क्या समानताएँ और क्या व भन्नताएँ पाईं?

समानताएँ: दे खे गए हर पौधे म वही मूल भाग थे — जड़, तना, प त्तयाँ और अ धकांश म फूल। सभी एक ही स्थान पर स्थर थे,
सभी के कसी न कसी भाग म हरा रंग था और सभी अपना भोजन स्वयं बनाते ह।
व भन्नताएँ — पुस्तक स्वयं तीन मुख्य भन्नताएँ बताती है।

तना — लंबा या छोटा, कठोर या कोमल, मोटा या पतला, भूरा या हरा। घास के कोमल हरे तने क तुलना नीम के कठोर मोटे
भूरे तने से क जए।
प त्तयाँ — भन्न आकृ तयाँ, आकार और रंग, तथा तने पर भन्न अ भ वन्यास: घास म एक बदु पर एक पत्ती, तुलसी म
सम्मुख जोड़ी, नीम म एक वृंत पर अनेक प णकाएँ।
फूल — रंग, आकार और सुगंध म भन्नता: तुलसी म गुलाबी–बगनी, गुड़हल म बड़े लाल, नीम म सफ़ेद गुच्छे।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता
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भन्नताएँ क्य महत्वपूण ह: जो भन्नता अनेक पौध म बार-बार दखाई दे , उसे समूह बनाने का आधार बनाया

m a s emया समांतर
gl स्थत सूची कुछ
जा सकता है। "कठोर तना या कोमल तना" वृक्ष-झाड़ी को शाक से अलग करता है; "जा लकारूपी
o बीजपत्री को एकबीजपत्री से अलग करेगा। इसी प्रकार एक लंबaी अव्यव
शराएँ" आगे.cचलकर
s mह म बदल जाती है।
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उपयोगी

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प्र.3 अब, सैर के समय दे खे गए अथवा अपने पूव अनुभव के आधार पर जंतुओं क एक सूची बनाइए। उनके रहने के

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स्थान, उनके भोजन और ग त के प्रकार को ता लका 2.2 म दए गए रक्त स्थान म अं कत क जए।

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जंतुओं के नाम उनके रहने का भोजन ग त के
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se वशेषताएँ
अन्य कोई अवलोकन

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(स्थानीय नाम) स्थान प्रकार एवं

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चट मट्ट एवं बल प त्तयाँ, बीज छह पाद होते ह

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sअवलोकन।
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ता लका 2.2, पृ ष्ठ 12— हमारे आस-पास वद्यमान जं त ओं
ु क व भन्न वशे ष ताओं का रक्त खाने आपको

l a se भरने ह।

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यहाँ ता लका 2.2 सामान्य भारतीय जंतुओं के साथ पूण क गई है। अपनी प्र व ष्टयाँ इससे मलाइए।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

जंतु का रहने का स्थान भोजन ग त के प्रकार अन्य कोई अवलोकन
नाम

कौआ वृक्ष कीट, अनाज, बचा हुआ उड़ना और चलना चोंच में टहनी िलए हुए
भोजन

चट िमट्टी एवं िबलों में पित्तयाँ, बीज और कीट चलना / रे ंग ना छह पाद ; पंिक्त में चलती है

गाय गोशाला, घास का मैद ान घास, पित्तयाँ चलना और जुग ाली करती है; खुर और सी ंग
दौड़ना

गलहरी वृक्ष, दीवार का छे द मेवे, फल, बीज दौड़ना, चढ़ ना, पीठ पर तीन धािरयाँ; झबरी पूँछ
कू दना

मछली तालाब, नदी जलीय पौधे , छोटे कीट तैर ना धारारे िखत शरीर और पख

मढक तालाब का िकनारा — जल तथा कीट फु दकना और नम त्वचा; वष के बाद ज़ोर से
थल दोनों तैर ना टर ता है

स्वयं जाँ चए: ऐसा एक जंतु अवश्य जो ड़ए जो कक्षा म कसी और ने न लखा हो — घर क छपकली, वषा के
बाद का घ घा, बुलबुल, नेवला या व्याध-पतंग ( ैगनफ्लाई)। वही एक प्र व ष्ट स्थानीय जैव व वधता क सूची म
आपका अपना योगदान है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

प्र.4 ता लका 2.2 म आपने जन जंतुओं का अवलोकन करके अं कत कया है, उनम क्या समानताएँ और क्या
भन्नताएँ ह?

जंतुओं के नाम उनके रहने का भोजन ग त के अन्य कोई अवलोकन
(स्थानीय नाम) स्थान प्रकार एवं वशेषताएँ

कौआ वृक्ष कट उड़ना और च च म टहनी लए हुए
चलना

चट मट्ट एवं बल प त्तयाँ, बीज छह पाद होते ह
म रहती ह और क ट

गाय घास, प त्तयाँ

अन्य

ता लका 2.2, पृष्ठ 12— हमारे आस-पास वद्यमान जंतुओं क व भन्न वशेषताओं का अवलोकन। रक्त खाने आपको
भरने ह।

समानताएँ: ये सभी भोजन करते ह, श्वसन करते ह, स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते ह, वृ द्ध करते ह, आस-पास होने वाले
प रवतन पर प्र त क्रया करते ह और संतान उत्पन्न करते ह। स्वयं चलना- फरना ही इनका पौध से सबसे बड़ा अंतर है।
भन्नताएँ — पुस्तक इन्ह तीन शीषक म रखती है:

आधार कस प्रकार भन्न उदाहरण

रहने का स्थान भूिम पर, वृक्षों पर, जल में, या जल तथा थल दोनों में गाय भूिम पर , कौआ वृक्ष पर , मछली जल में, मेंढक दोनों में

भोजन के वल पौधे , के वल जंत,ु या दोनों गाय घास खाती है; मेंढक कीट खाता है; कौआ दोनों

गत चलना, दौड़ना, उड़ना, रे ंग ना, तैर ना, फु दकना कौआ उड़ता है, ची ंटी रे ंग ती है, मछली तैर ती है, मेंढक फु दकता है

ऐसा क्य होता है: जंतु क ग त उसके रहने के स्थान से मेल खाती है। मछली को जल म आगे बढ़ने के लए
धारारे खत शरीर और पख चा हए; गाय को कठोर भू म पर चलने के लए टाँग और खुर; कौए को शाखाओं तक
पहुँचने के लए पंख। शरीर प रवेश के अनुसार बना होता है — आगे चलकर अध्याय इसी को अनुकूलन कहेगा।

क्रयाकलाप 2.2— आइए, महत्व समझ — पृष्ठ 13

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

अनुभाग 2.1 — एक कक्षा कतनी व वधता जानती है?

क्रयाकलाप

प्र.1 चत्र म बनाए गए व भन्न पौध और जंतुओं के बारे म आपके क्या वचार ह?

िव ािथयो ं ारा श्
यामपट्ट पर बनाए गए पौधे और जंत ु

क्रयाकलाप 2.2, पृष्ठ 13— श्यामपट्ट पर वद्या थय ारा बनाए गए पौध और जंतुओं का चत्र (पुनर चत रेखा चत्र)।

जब सभी वद्याथ श्यामपट्ट पर चत्र बना लेते ह, तब तीन बात स्पष्ट दखती ह।

दो चत्र प्राय: एक जैसे नह होते। 40 वद्या थय क कक्षा म भी श्यामपट्ट आम, नीम, तुलसी, गुलाब, सूरजमुखी, केला, गाय,
कुत्ता, तोता, मोर, ततली, हाथी, मछली, बल्ली से भर जाता है — एक ही छोटे से क्षेत्र से इतनी व वधता।
कुछ नाम बार-बार आते ह। आम, गुलाब, गाय, तोता और ततली अनेक वद्याथ बनाते ह, क्य क ये सामान्य ह और सरलता
से दख जाते ह।
हर चत्र भन्न वशेषताएँ दखाता है। कसी पौधे का तना मोटा है, कसी का पतला; कसी जंतु के चार पाद ह, कसी के दो,
कसी के एक भी नह ; कसी के पंख ह तो कसी के पख।

चत्र इतने भन्न क्य ह: प्रत्येक वद्याथ ने वही पौधा या जंतु चुना जसे उसने ध्यान से दे खा और जो उसे सबसे
अच्छा लगा। सबका घर, गली और अनुभव भन्न है, इस लए पूरी कक्षा मलकर उतनी जैव व वधता अं कत कर लेती
है जतनी अकेला कोई नह कर सकता।

क्या आप जानते ह? चत्र बनाने से पहले 30 सेकड आँख बंद करना कोई खेल नह है — यह आपको पुस्तक के
चत्र से नह , ब ल्क अपने स्वयं के अवलोकन क स्मृ त से पौधा या जंतु याद करने पर बाध्य करता है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 कक्षा के सभी वद्या थय ारा श्यामपट्ट पर भन्न- भन्न प्रकार के पौध और जंतुओं के कतने चत्र बनाए गए ह?

श्यामपट्ट पर गनकर अपनी कक्षा क वास्त वक संख्या ल खए। लगभग 40 वद्या थय क कक्षा म सामान्यत: यह प रणाम आता
है:

कक्षा में िव ाथ = 40

बनाए गए िचत्र = 40 पौधे + 40 जंत ु = 80 िच त्र

दोहराव हटाने के बाद → लगभग 20–25 िभ न्न पौधे और 20–25 िभ न्न जंत ु

भन्न प्रकार क संख्या चत्र से कम क्य है: अनेक वद्याथ वही लोक प्रय आम का पेड़ या वही गाय बनाते ह।
दोहराव को केवल एक बार गना जाता है, क्य क हम चत्र नह , प्रकार गन रहे ह। वै ा नक भी वन म इसी प्रकार
जा तयाँ गनते ह — एक ही बाघ दो बार दख जाए तो भी वह एक ही बाघ है।

सुझाव: श्यामपट्ट पर "पौधे" और "जंतु" के दो स्तंभ बनाइए और हर दोहराव पर नाम के आगे एक नशान लगाइए।
इससे भन्न प्रकार क संख्या और सबसे सामान्य प्रकार, दोन एक साथ मल जाएँगे।

प्र.3 क्या आप सोचते ह क श्यामपट्ट पर च त्रत कए गए पौध और जंतुओं के अ त रक्त भी व भन्न प्रकार के अनेक
पौधे और जंतु हो सकते ह?

हाँ — और भी बहुत अ धक। श्यामपट्ट पर केवल वही है जो एक क्षेत्र क एक कक्षा को याद आया।

आपके अपने नगर म भी ऐसे अनेक जीव ह जनका चत्र कसी ने नह बनाया — बोगन व लया, अशोक, बाँस, जलकुंभी,
कचुए, मक ड़याँ, घ घे, मधुम क्खयाँ, चमगादड़, उल्लू।
थोड़ा दूर जाइए और सूची पूरी तरह बदल जाती है — राजस्थान के मरुस्थल म नागफनी, हमालय म दे वदार, सुंदरबन म
मग्रोव, अंडमान और नकोबार के आस-पास मूँगा और रंगीन मछ लयाँ।
अनेक जीव इतने छोटे ह क दखाई ही नह दे ते, और बहुत से केवल रात म स क्रय रहते ह।

ऐसा क्य है: कसी क्षेत्र के पौध और जंतुओं क व वधता उसक जैव व वधता है, और इस दृ ष्ट से भारत वश्व के
सबसे समृद्ध दे श म है। एक कक्षा जतना गना सकती है, वह इस बात से सी मत है क वे कहाँ रहते ह और उन्ह ने
क्या दे खा है — इससे नह क वास्तव म कतना जीवन है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता
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क जए: पत्र या वी डयो कॉल के माध्यम से यही क्रयाकलाप कसी अन्य राज्य क कक्षा से कराइए और दोन
श्यामपट्ट क तुलना क जए। दोन सू चय म समान नाम क संख्या दे खकर आप च क जाएँगे —em
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वह बहुत कम
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होगी।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 14
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अनुभाग 2.2 पौध और जंतुओं के समूह कैसे बनाएँ?
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पेड़ कुछ प क्षय और जंतुओं को भोजन और आश्रय प्रदान करते ह, जंतु फल खाने के बाद बीज फैलाने म
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सहायता करते ह इत्या द। क्या आप ऐसे कुछ अन्य उदाहरण सोच सकते ह?

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हाँ। कसी क्षेत्र क जैव व वधता का प्रत्येक सदस्य दूसरे सदस्य पर नभर रहता है। हमारे आस-पास से कुछ और उदाहरण:
a मधुम क्खयाँ और तत लयाँ मकरंद लेते समय एक फूल का पराग दूसरे फूल तक पहुँचाती ह, जससे आम, सरस और क म

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फल बनते ह। इनके बना उपज बहुत घट जाती है।

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कचुए मट्ट म बल बनाकर उसम वायु और जल पहुँचाते ह तथा सूखी प त्तय को खाद म बदल दे ते ह, जससे पौधे अच्छ वृ द्ध

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करते ह। इसी लए इन्ह कसान का मत्र कहा जाता है।
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पशु घास खाते ह और उनका गोबर मट्ट को पोषक तत्व लौटाता है, जससे नई घास उगती है।

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मढक और पक्षी उन क ट को खाते ह जो धान क फ़सल नष्ट कर दे ते; साँप उन चूह को खाते ह जो सं चत अनाज खाते ह।

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गरी हुई प त्तयाँ सड़कर कवक , क ड़ और जीवाणुओं का भोजन बनती ह, जो पोषक तत्व मुक्त करते ह और वृक्ष उन्ह जड़

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से पुन: ग्रहण कर लेते ह।
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बरगद

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agl मुख्य वचार: इन उदाहरण से पता चलता है क पौधे और जंतु एक-दूसरे पर नभर रहते ह। एक सदस्य हट जाए तो

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शेष को हा न होती है — मधुम क्खयाँ न रह तो आम कम फलेगा; वृक्ष कट जाएँ तो प क्षय का भोजन और आश्रय

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दोन चले जाएँगे।

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आप अपनी नोटबुक और पुस्तक को समूह म कैसे व्यव स्थत करगे? क्या उन्ह समूह म व्यव स्थत करने से
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आपको अपने बस्ते को अच्छे ढं ग से व्यव स्थत करने म सहायता मलेगी?
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agl हाँ — समूह बनाने से बस्ता कह अ धक सु वधाजनक हो जाता है। म इस प्रकार व्यव स्थत करूँगा/करूँगी:
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वषय के अनुसार — व ान क पुस्तक के साथ व ान क नोटबुक, ग णत के साथ ग णत। फर एक दन का गृहकाय करने
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के लए केवल एक बंडल नकालना पड़ेगा।
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a s emबड़े खाने म, उनके पीछे सभी नोटबुक, ऊपर रफ़ र जस्टर।
समय-सारणी के अनुसार —gकlे वल आज के कालांश क पुस्तक, कालांश के क्रम म।
प्रकार के अनुसार — सभी पाठ्यपुस्तक

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आकार के अनुसार — मोट पुस्तक पीछे क ओर ता क बस्ता फूले नह , पतली आगे।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

समूह बनाने से सहायता क्य मलती है: अव्यव स्थत बस्ते म एक पुस्तक ढूँ ढ़ने के लए सब कुछ टटोलना पड़ता
है। समूह बन जाने पर खोज केवल एक छोटे समूह तक समट जाती है। व ान म भी यही कारण है — समूह बनाने
से पौध और जंतुओं को उनक समानताओं और भन्नताओं के आधार पर समझना और अध्ययन करना सरल हो
जाता है।

क्या आप जानते ह? यह वचार भारत म हर जगह दखता है — कराने क दुकान म सारी दाल एक ओर और
साबुन एक ओर, दवा क दुकान म दवाएँ प्रकार के अनुसार, पुस्तकालय म पुस्तक वषय के अनुसार। समूह बनाने के
महत्व के वषय म आप अध्याय हमारे आस-पास क सामग्री म और अ धक जानगे।

क्रयाकलाप 2.3— आइए, समूह बनाएँ — पृष्ठ 14–15
अनुभाग 2.2 — अपना आधार स्वयं चुनना

क्रयाकलाप

प्र.1 एक समान वशेषताओं के आधार पर उनके समूह बनाइए। आपके ारा बनाए गए पौध और जंतुओं के समूह के
आधार को कक्षा के अन्य समूह के साथ साझा कर और उन पर चचा कर।

सभी काड एकत्र करने के बाद एक समय म एक ही वशेषता चु नए और उसी के आधार पर सारे काड छाँ टए। छह वद्या थय के
एक समूह ने ऐसा कया:

चुना गया आधार समूह 1 समूह 2

पौधे — फूल क उप स्थ त गल
ु ाब, सूर जमुखी, ग ड
ु ़ हल, सरसों फन, मॉस, चीड़, घास (फू ल िदखाई नही ं दे ते)

पौधे — कठोर या कोमल तना आम, नीम, ग ल
ु ाब (कठोर) टमाटर, धिनया, पालक (कोमल)

जंतु — खान-पान का स्वभाव गाय, बकरी, िहरण, िट ा (पादपभक्षी) शेर , मेंढक, िकलिकला (जंतभु क्षी)

जंतु — रहने का स्थान मछली, डॉिल्फन, व्हेल (जल) ऊँट, कु त्ता, हाथी (थल)

साझा करते समय क्या कह: स्पष्ट बताइए क आपने कौन-सी एक वशेषता चुनी, और दखाइए क आपके समूह का हर काड उस
पर खरा उतरता है। य द एक काड भी फट न बैठे तो आधार पयाप्त स्पष्ट नह है और उसे फर से लखना होगा।

एक समय म एक ही वशेषता क्य : य द दो वशेषताएँ एक साथ ल — जैसे "ऊँचा और फूल वाला" — तो बना
फूल वाले ऊँचे पौधे के लए कोई समूह ही नह बचेगा। अच्छा आधार हर काड को ठ क एक समूह म रखता है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 आप यह दे खकर आश्चयच कत ह गे क व भन्न समूह ारा उपयोग कए गए आधार भन्न हो सकते ह। आपको
क्या लगता है इसके पीछे के कारण क्या ह?

आधार इस लए भन्न होते ह क्य क कसी पौधे या जंतु म अनेक वशेषताएँ होती ह और हर समूह क दृ ष्ट पहले कसी एक
पर पड़ी।

अलग-अलग वशेषताएँ पहले दख । कसी समूह ने पौध क ऊँचाई दे खी; कसी ने फूल क उप स्थ त या अनुप स्थ त;
कसी ने कठोर या कोमल तना ( चत्र 2.2)।
काड अलग-अलग थे। जस समूह क प त्रकाओं म जलीय जंतु अ धक थे, उसने स्वाभा वक रूप से "रहने का स्थान" चुना।
रु च और अनुभव भन्न ह। कृषक प रवार का वद्याथ पहले "फ़सल है या नह " सोचता है; पालतू पशु रखने वाला "पालतू या
जंगली" सोचता है।
इनम से कोई भी ग़लत नह है। कोई एक "सही" आधार नह होता — बस कुछ आधार आपके प्रश्न के लए अ धक उपयोगी
होते ह।

यह सीख क्य महत्वपूण है: समूह हम अपनी सु वधा के लए बनाते ह। वै ा नक भी वही आधार चुनते ह जो
उनके प्रश्न का उत्तर दे — च कत्सक इस आधार पर क कौन-सा जंतु रोग फैलाता है, कसान इस आधार पर क
कौन फ़सल को हा न पहुँचाता है, जीव व ानी शरीर क संरचना के आधार पर। अध्याय ने पौध के लए ऊँचाई व
तना और जंतुओं के लए ग त को चुना है।

प्र.3 समूह बनाने का क्या महत्व है?

समूह बनाने से पौध और जंतुओं को उनक समानताओं और भन्नताओं के आधार पर समझना और अध्ययन करना सरल
हो जाता है। वस्तार से दे ख तो चार लाभ ह:

वशाल संख्या कुछ मु भर समूह म समट जाती है। हज़ार पौधे अलग-अलग याद रखने के बजाय तीन समूह — शाक,
झाड़ी, वृक्ष — याद र खए और यह क कौन-सा पौधा कहाँ आता है।
पूवानुमान संभव हो जाता है। य द पता है क पौधा एकबीजपत्री है, तो बना खोदे कहा जा सकता है क उसक जड़ झकड़ा ह
और प त्तय क शराएँ समांतर।
ढूँ ढ़ना और तुलना करना सरल हो जाता है। मलते-जुलते जीव एक साथ रहते ह, इस लए समूह के बीच का अंतर तुरंत उभर
आता है।
दै नक काय म सहायता मलती है। कसान पूरे समूह क फ़सल के लए एक ही उपचार तय करता है; वन अ धकारी पूरे
आवास-समूह के लए एक योजना बनाता है।

रोज़मरा का प्रमाण: 5,000 दवाओं वाली एक दुकान सो चए। प्रकार के अनुसार रखी ह तो पत्ता कुछ सेकंड म
मल जाता है; एक ढे र म डाल द जाएँ तो वही खोज एक घंटा ले सकती है। दवाएँ नह बदल — केवल व्यवस्था
बदली।

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क्या आप जानते ह? दै नक जीवन म समूह बनाने के महत्व के वषय म आप अध्याय हमारे आस-पास क सामग्री
म और अ धक जानगे।

क्रयाकलाप 2.4— आइए, समूह बनाएँ — पृष्ठ 15–16
अनुभाग 2.2.1 पौध के समूह कैसे बनाएँ?

क्रयाकलाप

प्र.1 व भन्न पौध क ऊँचाई को ध्यानपूवक दे खए। तने का रंग भूरा है या हरा? क्या आप सरलता से तने को मोड़
सकते ह अथवा यह कठोर है? यह भी दे ख क पौध क शाखाएँ कहाँ से नकलती ह। अपने अवलोकन को
ता लका 2.3 म दए गए रक्त स्थान म भर।

क्रम पौधे ऊँचाई तना: तना: तना: शाखाएँ शाखाएँ पादप
सं. का (छोटा / हरा / कठोर / मोटा / भू म के तने म समूह
नाम मध्यम / भूरा कोमल पतला नकट ऊँचाई का
ऊँचा) पर नाम

1 आम ऊँचा भूरा कठोर मोटा हाँ वृक्ष

2 गुलाब मध्यम भूरा कठोर पतला हाँ झाड़ी

3 टमाटर छोटा हरा कोमल पतला हाँ शाक

ता लका 2.3, पृष्ठ 16— ऊँचाई और तने क प्रकृ त के आधार पर पौध के समूह। रक्त पं क्तयाँ आपको भरनी ह।

यहाँ ता लका 2.3 ऐसे पौध के साथ पूण क गई है जो लगभग हर वद्यालय के उद्यान म मल जाते ह।

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क्रम पौधे का ऊँचाई तने कठोर / मोटा / शाखाएँ भू म शाखाएँ तने म पादप
सं. नाम का कोमल पतला के नकट ऊँचाई पर समूह
रंग

1. आम ऊँचा भूर ा कठोर मोटा — हाँ वृक्ष

2. गुलाब मध्यम भूर ा कठोर पतला हाँ — झाड़ी

3. टमाटर छोटा हरा कोमल पतला हाँ — शाक

4. नीम ऊँचा भूर ा कठोर मोटा — हाँ वृक्ष

5. गुड़हल मध्यम भूर ा कठोर पतला हाँ — झाड़ी

6. ध नया छोटा हरा कोमल पतला हाँ — शाक

सावधानी: तने को केवल धीरे से मो ड़ए, बस इतना क पता चल जाए क वह वापस सीधा हो जाता है या नह ।
ध्यान रख क तना टू टे नह — आपके जाने के बाद भी पौधे को बढ़ना है।

ता लका कैसे पढ़: ध्यान द जए क स्तंभ साथ-साथ चलते ह। जहाँ "ऊँचा + भूरा + कठोर + मोटा + शाखाएँ ऊपर
से" है, वहाँ अं तम स्तंभ म उत्तर वृक्ष है। जहाँ "छोटा + हरा + कोमल" है, वहाँ शाक। इसी कारण ये वशेषताएँ
समूह बनाने का अच्छा आधार ह।

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आपको शाक, झा ड़य और वृक्ष के बीच क्या अंतर दखाई दए? ता लका 2.3 म द गई जानकारी के आधार पर
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प्र.2

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हम पौध के समूह शाक, झाड़ी और वृक्ष के रूप म कैसे बना सकते ह?

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a क्रम पौधे ऊँचाई तना: तना: तना: शाखाएँ शाखाएँ पादप

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सं. का (छोटा / हरा / कठोर / मोटा / भू म के तने म समूह

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नाम मध्यम / भूरा कोमल पतला नकट ऊँचाई का
ऊँचा)
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1 आम ऊँचा agभूl रा कठोर मोटा हाँ वृक्ष

co m झाड़ी
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2 गुलाब मध्यम भूरा कठोर पतला हाँ

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. c o टमाटर छोटा हरा कोमल पतला हाँ
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a ता लका 2.3, पृष्ठ 16— ऊँचाई और तने क प्रकृ त के आधार पर पौध के समूह। रक्त पं क्तयाँ आपको भरनी ह।

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तीन समूह ऊँचाई, तने क प्रकृ त और शाखाओं के नकलने के स्थान म भन्न होते ह।

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वशेषता शाक झाड़ी वृक्ष

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.co ag ऊँचा — आपसे बहतु अिधक
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ऊँचाई छोटा — पाय: घुटने या कमर से नीचे मध्यम — लगभग आपके बराबर

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a gl तने का रंग हरा भूर ा भूर ा

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तने क प्रकृ त कोमल, सरलता से मुड़ता है कठोर और काष्ठीय, परंत ु पतला कठोर, काष्ठीय और मोटा

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शाखाएँ भूिम के िनकट से अनेक तने भूिम के िनकट से शािखत भूिम से दू र , तने की कु छ ऊँचाई से

उदाहरण agl
टमाटर , धिनया, पालक गल
ु ाब, ग ड
ु ़ हल , मेहदँ ी आम , नीम , बरगद

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कसी भी पौधे का समूह बनाने के लए क्रम से तीन प्रश्न पू छए:
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c g से नकलते ह? → यह झाड़ी है।
2.. य द तना भूरा और कठोर है, तो क्या वह पतला है और अनेक तने भू म के नकट
1. क्या तना हरा और कोमल है? → यह शाक है।

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3. य द तना मोटा है और शाखाएँ ऊपर से आरंभ होती ह? → यह वृक्ष है।

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तना ऊँचाई क्य तय करता है: कोमल हरा तना अ धक भार नह उठा सकता, इस लए शाक छोटा रह जाता है।
काष्ठीय तना कठोर और मज़बूत होता है, इस लए वह प त्तय और शाखाओं का बड़ा शीष भू म से बहुत ऊपर थाम
सकता है — जहाँ अ धक सूय प्रकाश मलता है। दुबल तने वाले दो और प्रकार इस समस्या को दूसरे ढं ग से हल
करते ह: आरोही लता (मनी प्लांट, अंगूर) कसी और का सहारा लेती है और वसप लता (क , तरबूज़) भू म पर
फैल जाती है।

क्रयाकलाप 2.5— आइए, तुलना कर — पृष्ठ 17
अनुभाग 2.2.1 — प त्तय म शरा- वन्यास

क्रयाकलाप

प्र.1 प्रकृ त क सैर के समय आपके ारा एक त्रत कए गए व भन्न पौध क प त्तय को दे ख। क्या आपको इन
प त्तय क आकृ त और संरचना म भन्नता दखती है?

हाँ — बहुत अ धक भन्नता। हर पत्ती को प्रकाश के सामने रखकर दे खए, अंतर स्पष्ट हो जाएगा।

कसम भन्नता आप क्या दे खते ह

आकृ त घास में लंबी और पतली; ग ड
ु ़ हल में चौड़ी और नुक ीली; मनी प्लांट में हृदयाकार; चीड़ में सूई जैस ी

आकार तुल सी की नन्ही पत्ती और एक मीटर लंबी के ले की पत्ती

कनारा आम में िचकना; तुल सी और ग ल
ु ाब में दाँतेद ार

सतह नीम में िचकनी और चमकदार; कु छ में खुर दरी या रोमयुक्त

भाग क संख्या आम में एक ही फलक; नीम और इमली में एक वृंत पर अनेक पिणकाएँ

शराएँ पत्त ी में चलती पतली रे खाएँ — ग ड
ु ़ हल में जाल जैस ी, के ले और घास में समानांतर

अं तम पं क्त सबसे महत्वपूण क्य है: आकृ त और आकार तो एक ही पौधे क दो प त्तय म भी बदल जाते ह —
पुरानी पत्ती नई से बड़ी होती है। परंतु कसी पौधे म शराओं का पैटन कभी नह बदलता। जो लक्षण स्थर रहता
है, वही समूह बनाने का वश्वसनीय आधार बनता है — इसी लए अध्याय अब शरा- वन्यास लेता है।

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प्र.2 आपको चत्र 2.4 (क) और चत्र 2.4 (ख) म दखाई गई प त्तय क शराओं म क्या अंतर दखाई दे ते ह?

(क ) गुड़हल की पत्त ी — (ख) के ले की पत्त ी — (ग ) घास की पत्त ी —
जािलकारूपी िशरा-िवन्यास समातं र िशरा-िवन्यास समातं र िशरा-िवन्यास
चत्र 2.4, पृष्ठ 17— व भन्न प्रकार के शरा- वन्यास को प्रद शत करने वाली प त्तयाँ। पुस्तक के चत्र का पुनर चत
रेखा चत्र।

पत्ती म चलती पतली रेखाओं को शराएँ कहते ह और उनके ारा बने पैटन को शरा- वन्यास। दोन चत्र दो पैटन दखाते ह।

(क) गुड़हल — जािलकारूपी िशरा-िवन्यास (ख) केला — समातं र िशरा-िवन्यास

शराओं के दो पैटन। (क) म पाश्व शराएँ बार-बार शा खत होकर जाल बनाती ह; (ख) म शराएँ एक सरे से दूसरे सरे तक साथ-साथ
चलती ह और कह नह मलत ।

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चत्र 2.4 (क) — गुड़हल क पत्ती चत्र 2.4 (ख) — केले क पत्ती

पैटन मोटी मध्य िशरा के दोनों ओर िशराओं का जाल जैस ा पैटन िशराएँ समानांतर चलती है ं

नाम जािलकारूपी िशरा-िवन्यास समांतर िशरा-िवन्यास

क्या शराएँ मलती ह? हाँ — बार-बार शािखत होकर िफर जुड़ती है ं नही ं — साथ-साथ चलती रहती है ं

अन्य उदाहरण आम, नीम, तुल सी, सरसों, चना घास [िचत्र 2.4 (ग)], गेहू,ँ मक्का, गन्ना

स्वयं जाँ चए: गुड़हल क एक पत्ती और घास क एक पत्ती धूप के सामने रखकर दे खए। गुड़हल का जाल और
घास क सीधी रेखाएँ बना कसी लस के दख जाती ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 17 और 18
अनुभाग 2.2.1 — पौध के समूह बनाने क अन्य वशेषताएँ

प्र.1 ऐसी कौन-सी अन्य वशेषताएँ हो सकती ह जनके आधार पर आप पौध के व भन्न समूह बना सकते ह?

ऊँचाई और तने क प्रकृ त के अ त रक्त पौध के समूह अनेक वशेषताओं पर बन सकते ह:

प त्तय का शरा- वन्यास — जा लकारूपी या समांतर (इसी प्रश्न के तुरंत बाद यही लया गया है)।
जड़ का प्रकार — मूसला जड़ या झकड़ा जड़।
बीज म बीजपत्र क संख्या — बीजपत्री या एकबीजपत्री।
फूल क उप स्थ त या अनुप स्थ त — गुलाब म फूल आते ह, फन म कभी नह ।
पत्ती क आकृ त और अ भ वन्यास — चौड़ी या पतली; एक बदु पर एक पत्ती या सम्मुख जोड़ी।
उगने का स्थान — जल म (कमल, जलकुंभी), थल पर (नीम), मरुस्थल म (नागफनी), पवत पर (दे वदार)।
जीवन काल — कुछ महीने (गेहूँ, सरस ), कुछ वष (केला), या बहुत लंबा (बरगद)।
हमारे लए उपयोग — खाद्य फ़सल, औषधीय पौधे (तुलसी, घृतकुमारी), इमारती लकड़ी, सजावट पौधे।

सबसे अच्छा आधार कौन-सा है? वही जसे जाँचना सरल हो और जो आयु या ऋतु के साथ न बदले। ऊँचाई
पौधे के बढ़ने के साथ बदलती है और फूल केवल एक ऋतु म आते ह, परंतु पत्ती का शरा- वन्यास और जड़ का
प्रकार जीवन भर एक जैसा रहता है — इसी लए अध्याय अपना मुख्य वग करण इन्ह पर खड़ा करता है।

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प्र.2 क्या आपको लगता है क प त्तय म पाए जाने वाले शरा- वन्यास के आधार पर पौध के समूह बनाए जा सकते
ह?

हाँ। शरा- वन्यास सव त्तम आधार म से एक है, क्य क पैटन केवल दो ह और हर पत्ती स्पष्ट रूप से इनम से कसी एक म आ जाती
है।

जािलकारूपी िशरा-िवन्यास वाले पौधे → गुड़हल, आम, नीम, तलु सी, सरसों, चना, गुलाब
समांतर िशरा-िवन्यास वाले पौधे → केला, घास, गेहूँ, मक्का, गन्ना, बाँस, लेमन घास
दो स्पष्ट समूह, न कोई छूटता है औ र न कोई द ोनों में आ ता है

यह आधार इतना उपयोगी क्य है:

अवलोकन सरल है — एक पत्ती और थोड़ी-सी धूप पयाप्त है; कुछ खोदना या काटना नह पड़ता।
यह पौधे क आयु या ऋतु के साथ नह बदलता।
यह अन्य लक्षण का पूवानुमान दे ता है। जैसा अगले क्रयाकलाप म दखेगा, जा लकारूपी शरा- वन्यास वाले
पौधे म प्राय: मूसला जड़ और दो बीजपत्र होते ह तथा समांतर वाले म झकड़ा जड़ और एक बीजपत्र। एक
पत्ती दे खकर पौधे क तीन बात पता चल जाती ह।

प्र.3 आइए, अब पौध क जड़ के बारे म जानने का प्रयास (अन्वेषण) करते ह। क्या सभी पौध म जड़ होती ह? क्या
ये जड़ एक जैसी होती ह?

आपके आस-पास दखने वाले लगभग सभी पौध म जड़ होती ह — परंतु सभी जड़ एक जैसी नह होत ।
क्या सभी पौध म जड़ होती ह? उद्यान, खेत या पाक म मलने वाले हर पौधे म — घास, टमाटर, गुलाब, आम — जड़ होती ह। वे
पौधे को मट्ट म दृढ़ता से थामती ह तथा जल और ख नज ग्रहण करती ह। (मॉस और तैरते शैवाल जैसे कुछ सरल पौध म वास्त वक
जड़ नह होत , जनके वषय म आप उच्च कक्षाओं म पढ़गे।)
क्या जड़ एक जैसी होती ह? नह । दो पौधे सावधानी से खोदकर दे खए, दो स्पष्ट रूप से भन्न व्यवस्थाएँ मलगी:

सरस के पौधे म एक मुख्य मोट जड़ सीधी नीचे जाती है और उससे छोट पाश्व जड़ नकलती ह।
घास के पौधे म कोई मुख्य जड़ होती ही नह — तने के आधार से समान माप क पतली जड़ का गुच्छा नकलता है।

खोदने से पहले सुझाव: पहले मट्ट को गीला करके खुरपी से ढ ला क जए। जड़ पतली होती ह और सरलता से
टू ट जाती ह, और टू ट जड़ ग़लत चत्र दखाएँगी। अवलोकन से पहले जड़ को पानी से धोइए और बाद म शाक को
दोबारा लगा द जए।

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क्रयाकलाप 2.6— आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 18
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अनुभाग 2.2.1 — जड़ के प्रकार
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क्रयाकलाप

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आपके ारा एक त्रत कए गए पौध क जड़ म क्या समानताएँ और क्या भन्नताएँ ह?
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समानताएँ: धोई गई हर जड़ भू मगत थी, हरी नह थी, शा खत थी, पौधे को मट्ट म दृढ़ता से थामे थी, और उसके सरे के पास

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महीन मूल-रोम थे जो जल और ख नज सोखते ह।

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भन्नताएँ: ये ठ क दो व्यवस्थाओं म आती ह।

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मूसला जड़तंत्र झकड़ा (रेशेदार)

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aglमुख्य जड़ एक मोटी मुख्य जड़ सीधी नीचे कोई मुख्य जड़ नही ं

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अन्य जड़ मुख्य जड़ से िनकलती छोटी पाश्व जड़ें तने के आधार से समान माप की पतली जड़ों का ग च्ु छा

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गहराई िमट्टी में गहराई तक जाती है सतह के पास फै लती है

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उसी पौधे का शरा- वन्यास जािलकारूपी समांतर

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उदाहरण सरसों, ग ड
ु ़ हल , मूल ी, गाजर , चना
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घास , गेहू,ँ म क्का, ले म न घास , प्याज़
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a s em दो आकृ तयाँ क्य ह: गहरी मूसला जड़ सतह से बहुत नीचे का जल तक पहुँच सकती है, इसी लए सरस और चना

agl सूखे खेत म भी टक जाते ह। चौड़ा, उथला झकड़ा जड़तंत्र मट्ट क ऊपरी परत को कसकर पकड़ता है, इसी लए
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घास नद के कनारे या खेल के मैदान क मट्ट को बहने से रोकती है।

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प्र.2 चत्र 2.5 (क) और चत्र 2.5 (ख) म प्रद शत पौध क जड़ म आप क्या भन्नताएँ दे खते ह?

मुख्य जड़ (मूसला जड़ )

पाश्व जड़ े ं

समान माप की अनेक पतली जड़ ें
(क) सरसों के पौधे में (ख ) सामान्य घास के पौधे में
मूस ला जड़ तंत्र झकड़ ा (रेशेदार) जड़ तंत्र

चत्र 2.5, पृष्ठ 18— जड़ के प्रकार। पुस्तक के चत्र का पुनर चत रेखा चत्र।

चत्र 2.5 (क) सरस का पौधा है और चत्र 2.5 (ख) सामान्य घास का पौधा। दोन चत्र यह दखाते ह:

मुख्य जड़
समान माप की
(मूसला जड़ )
अनेक पतली
पाश्व जड़ े ं जड़ े ं

(क) मूसला जड़ — सरसों (ख) झकड़ा जड़ — घास

बदुदार रेखा भू म क सतह है। सरस म एक मुख्य जड़ गहराई म जाती है और उससे पाश्व जड़ नकलती ह; घास म तने के आधार से
समान मोटाई क जड़ का गुच्छा नकलता है।

चत्र 2.5 (क) — सरस : जड़ म एक मुख्य जड़ होती है जससे छोट -छोट पाश्व जड़ नकलती ह। ऐसी जड़ को मूसला जड़
कहते ह। मूसला जड़ वाले एक अन्य पौधे का उदाहरण गुड़हल है, जसे आपने क्रयाकलाप 2.1 म दे खा था।

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चत्र 2.5 (ख) — घास: जड़ तने के आधार से नकलती समान माप क पतली जड़ के गुच्छ के रूप म दखाई दे ती ह।
ऐसी जड़ को झकड़ा जड़ अथवा रेशेदार जड़ कहते ह।

क्या आप जानते ह? थाली म रखी मूली, गाजर या शलजम वास्तव म मूसला जड़ ही है — वह इस लए फूली हुई है
क्य क पौधे ने उसम भोजन सं चत कया है।

प्र.3 क्या आपके संग्रह म कोई अन्य घास स म्म लत है? य द हाँ, तो इसक जड़ कस प्रकार क ह?

हाँ — और उन सभी म झकड़ा (रेशेदार) जड़ ही होती ह।
आपने संभवत: दूब घास, लेमन घास, या गे ँ, मक्का अथवा धान के छोटे पौधे खोदे ह गे — ये भी घास ही ह। कसी क भी मट्ट
धोकर दे खए, वही चत्र मलेगा: कोई एक मुख्य जड़ नह , केवल तने के आधार से नकलती लगभग समान मोटाई क पतली जड़
का घना गुच्छा।

हर घास म यही क्य होता है: सभी घास एकबीजपत्री ह — उनके बीज म एक ही बीजपत्र होता है। एकबीजपत्री
पौध क प त्तय म सदै व समांतर शरा- वन्यास और जड़ म झकड़ा जड़तंत्र होता है। इस लए जैसे ही आप कसी
पौधे को घास पहचान लेते ह, ये दोन बात बना जाँचे बताई जा सकती ह।

स्वयं जाँ चए: खेल के मैदान के कनारे से दूब घास का छोटा गुच्छा उखाड़कर मट्ट झाड़ने का प्रयास क जए। मट्ट
चपक रह जाती है — रेशेदार जड़ क चटाई उसे बाँधे रखती है। इसी लए नहर के कनार और मैदान म घास
लगाई जाती है, ता क वषा म मट्ट न बहे।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 19
अनुभाग 2.2.1 — शरा- वन्यास और जड़ का संबंध

प्र.1 क्या कसी पौधे क पत्ती म शरा- वन्यास के प्रकार और उसक जड़ के प्रकार के बीच कोई संबंध होता है? हम
कैसे इसका पता लगा सकते ह?

हाँ, स्पष्ट संबंध है — और पता लगाने का ढं ग यह है क अनेक पौध के आँकड़े एकत्र करके उनम पैटन खोजा जाए।
व ध (यही क्रयाकलाप 2.7 है):

1. पाँच या अ धक भन्न पौधे ली जए — जतने अ धक उतना अच्छा, ता क पैटन संयोग न रह जाए।
2. प्रत्येक पौधे क दो बात अं कत क जए: प त्तय का शरा- वन्यास (जा लकारूपी या समांतर) और जड़ का प्रकार (मूसला या
झकड़ा)।
3. दोन को एक ही ता लका म आमने-सामने ल खए, ता क जोड़ी एक दृ ष्ट म दखे।
4. ता लका दे खकर पू छए: क्या एक प्रकार का शरा- वन्यास सदै व एक ही प्रकार क जड़ के साथ आता है?

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सदाबहार → जािलकारूपी िशरा-िवन्यास + मूसला जड़

लेमन घास → समांत र िशरा-िवन्यास + झकड़ ा जड़

चना → जािलकारूपी + मूसला | गेहूँ → समांत र + झकड़ ा
जोिड़याँ द ोहराती है ं — इसिलए संबंध वास्तिवक है।

अनेक पौधे जाँचना क्य आवश्यक है: दो पौध का मेल संयोग हो सकता है। जब दस म से दस वही जोड़ी
दखाएँ, तब उसे सामान्य नयम कहा जा सकता है। यही तो अध्याय 1 क वै ा नक व ध है — अवलोकन, अनुमान,
परीक्षण, व ेषण।

क्रयाकलाप 2.7— आइए, संबध
ं ढूँ ढ़ और व ष
े ण कर — पृष्ठ 19
अनुभाग 2.2.1 — ता लका 2.4, शरा- वन्यास और जड़ साथ-साथ

क्रयाकलाप

प्र.1 उन्ह लगाने से पहले उनक जड़ और प त्तय के शरा- वन्यास का अवलोकन कर। अपने अवलोकन को ता लका
2.4 म अं कत कर।

क्रम पौधे का प त्तय के शरा- वन्यास का प्रकार जड़ के प्रकार (झकड़ा या
सं. नाम (जा लकारूपी या समांतर) मूसला)

1. लेमन घास समांतर झकड़ा (रेशेदार)

2.

3.

4.

5.

सा रणी 2.4, पृष्ठ 19— प त्तय के शरा- वन्यास और जड़ के प्रकार। केवल पहली पं क्त भरी हुई द गई है।

वद्यालय क नसरी से पौध लाइए, जड़ क मट्ट धीरे से धोइए और ता लका 2.4 इस प्रकार भ रए।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

क्रम पौधे का नाम प त्तय के शरा- वन्यास का प्रकार (जा लकारूपी या जड़ के प्रकार (झकड़ा या
सं. समांतर) मूसला)

1. लेमन घास समांतर झकड़ा (रे शेद ार )

2. गदा जािलकारूपी मूस ला

3. सदाबहार जािलकारूपी मूस ला

4. तुलसी जािलकारूपी मूस ला

5. मक्का का समांतर झकड़ा (रे शेद ार )
पौधा

ध्यान र खए: जड़ का अवलोकन लगाने से पहले क जए, उन्ह नम र खए और तुरंत बाद पौध वद्यालय के उद्यान
म लगा द जए। क्रयाकलाप का अंत पाँच जी वत पौध के साथ होना चा हए, पाँच मरे हुए पौध के साथ नह ।

अं तम दो स्तंभ साथ प ढ़ए: जहाँ तीसरे स्तंभ म "समांतर" है, वहाँ चौथे म "झकड़ा"; जहाँ "जा लकारूपी" है,
वहाँ "मूसला"। ता लका म एक भी अपवाद नह — यही दोहराव खोज है।

प्र.2 क्या आपको इन पौध क प त्तय के शरा- वन्यास और जड़ के प्रकार के मध्य कोई संबंध दखाई दे ता है? क्या
जा लकारूपी शरा- वन्यास वाले अन्य पौध म भी मूसला जड़ होती ह? क्या अन्य पौधे, जनम समांतर शरा-
वन्यास होता है, उनम भी झकड़ा जड़ होती ह?

हाँ। दोन लक्षण सदै व साथ चलते ह, और यह नयम अन्य पौध पर भी लागू होता है।

जािलकारूपी िशरा-िवन्यास → मूसला जड़

समांतर िशरा-िवन्यास → झकड़ा (रेशेद ार) जड़

पुस्तक से प्रमाण:

सदाबहार म मूसला जड़ और जा लकारूपी शरा- वन्यास।
लेमन घास म झकड़ा जड़ और समांतर शरा- वन्यास।
चना — मूसला जड़ और जा लकारूपी शरा- वन्यास का एक और उदाहरण।
गे ँ — झकड़ा जड़ और समांतर शरा- वन्यास।
अपनी ओर से जो ड़ए: आम, नीम, सरस , गदा, तुलसी सभी म जा लकारूपी + मूसला; घास, मक्का, गन्ना, केला, प्याज़ सभी
म समांतर + झकड़ा।

इस लए सामान्य कथन यह है: सामान्यत: जन पौध म जा लकारूपी शरा- वन्यास होता है उनम मूसला जड़ होती ह,
जब क जनम समांतर शरा- वन्यास होता है उनम झकड़ा जड़ होती ह।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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पत्ती जड़ के बारे म क्य बता दे ती है: क्य क दोन एक ही बात से तय होते ह — पौधे का बीज। दो बीजपत्र वाले
बीज ( बीजपत्री) से ऐसा पौधा बनता है जसक प त्तयाँ जा लकारूपी और जड़ मूसला होती है;eएक
s m बीजपत्र वाले
m
co से समांतर शरा- वन्यास और झकड़ा जड़। क्रयाकलाप 2.8 यही सीधे a
glदखाता है।
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बीज (एकबीजपत्री)

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aसुgझl ाव: "सामान्यत:" शब्द पर ध्यान द जए। कुछ पौधे अपवाद होते ह, इस लए अच्छा वै ा नक कथन प्रबल

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प्रवृ त्त के लए "सदै व" के बजाय "सामान्यत:" कहता है।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 20
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अनुभाग 2.2.1 और 2.2.2 — बीज से जंतुओं तक

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प्र.1 m .c कसी पौधे के बीज, जड़ के प्रकार और पत्ती के शरा- वन्यास म परस्पर aसंबgंध है? क्या सभी बीज एक जैसे
se होते ह?
क्या
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omका प्रकार तथा पत्ती का शरा- वन्यास दोन तय करता है। a s
cजड़ agl

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seदो-तीन
नह , सभी बीज एक जैसे नह होते — और हाँ, बीज ही
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बीज दो प्रकार के होते ह। चना और मक्का केlबीज
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दन पानी म भगोकर खो लए:

चना ठ क दो बराबर भाग म वभक्त हो जाता है। प्रत्येक भाग बीजपत्र है, जसम नन्हे पौधे के लए भोजन सं चत रहता है।

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ऐसे पौधे बीजपत्री कहलाते ह।

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मक्का दो भाग म नह बँटता; उसम एक पतला बीजपत्र होता है। ऐसे पौधे एकबीजपत्री कहलाते ह।

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ि बीजप त्र ी बीज (2 बीजपत्र) → जािलकारूपी िशरा-िवन्यास → मूसला जड़ जै से चना, राजमा, सरसों

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त्र (1 बीजपत्र) → समांत र िशरा-िवन्यास → झकड़ ा जड़ जै से मक्का, गेहूँ, धान
se
एकबीजप ी बीज

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एक ही लक्षण तीन बात क्य तय कर दे ता है: पूरा पौधा बीज से ही बनता है। बीजपत्र क संख्या आरंभ म ही
न त हो जाती है और वही योजना आगे जड़ तथा प त्तयाँ बनाती है। इसी लए ये तीन लक्षण साथ-साथ चलते ह
और कभी आपस म नह मलते।

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a s emप्र.2 पौध क भाँ त जंतु भी एक-दूसरे से बहुत भन्न होते ह। क्या कभी आपने सोचा है क हम इतने व वध प्रकार के

agl जंतुओं के समूह कैसे बना सकते ह? आप ऐसी कौन-सी वशेषताओं के बारे म सोच सकते ह जनका उपयोग

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इनका समूह बनाने के लए कया जा सकता है?

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जंतुओं के समूह अनेक प्रकार से बन सकते ह। बस ऐसी वशेषता चुननी है जसका अवलोकन सरल हो और जो हर जंतु म या तो
स्पष्ट रूप से हो या न हो।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

समूह बनाने का आधार समूह 1 समूह 2

ग त का प्रकार (अध्याय म उड़ने वाले — कबूतर, मक्खी, िततली चलने / रे ंग ने / तैर ने वाले — बकरी, ची ंटी, मछली
प्रयुक्त)

ग त के लए प्रयुक्त अंग पैर और पंख — कबूतर, िट ा पख — मछली; िबना पाद — साँप, कें चुआ

आवास थलीय — ऊँट, कु त्ता, शेर जलीय — मछली, व्हेल , डॉिल्फन

खान-पान का स्वभाव पादपभक्षी — गाय, बकरी, िट ा जंतभु क्षी — शेर , मेंढक, िकलिकला

पाद क संख्या दो — पक्षी; चार — गाय, कु त्ता छह — कीट; िबना पाद — साँप, मछली

शरीर का आवरण पंख — पक्षी; बाल — स्तनधारी शल्क — मछली, िछपकली; कठोर कवच —
कछु आ

मेरुदं ड उपिस्थत — गाय, मछली, कबूतर, िछपकली अनुपिस्थत — ची ंटी, ितलचट्टा, कें चुआ

संतान उत्प त्त अंडे दे ने वाले — मुग , मछली, मेंढक, बच्चे दे ने वाले — गाय, बकरी, व्हेल , चमगादड़
िछपकली

कौन-सा आधार चुन: वही एक नयम जो पौध के लए था — वशेषता सरलता से जाँची जा सके और हर जंतु
ठ क एक समूह म आए। "सुंदर या बदसूरत" दोन कसौ टय पर वफल है; "मेरुदं ड है या नह " दोन पर खरा
उतरता है। अध्याय स्वयं ग त और ग त के लए प्रयुक्त अंग को लेता है।

क्रयाकलाप 2.8— आइए, तुलना कर — पृष्ठ 20
अनुभाग 2.2.1 — बीजपत्री और एकबीजपत्री बीज

क्रयाकलाप

प्र.1 चने के बीज का आवरण हटा कर बीज क संरचना को दे ख। अब चने और मक्का के बीज क संरचना का
अवलोकन कर। क्या वे समान ह अथवा भन्न ह?

वे स्पष्ट रूप से भन्न ह। दो-तीन दन भगोने के बाद यह अवलोकन मलता है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

अवलोकन चना — चत्र 2.6 (क) मक्का — चत्र 2.6 (ख)

बीज आवरण िभगोने के बाद सरलता से उतर जाता है कसकर जुड़ा रहता है, उतरता नही ं

वभाजन दो बराबर भागों में साफ़ -साफ़ बँट जाता है बँटता नही ं — एक ही टुक ड़े में रहता है

बीजपत्र क संख्या दो, दोनों मोटे और मांस ल एक , पतला

समूह का नाम ि बीजपत्र ी (डाइकॉट) एकबीजपत्र ी (मोनोकॉट)

इसी प्रकार के अन्य बीज राजमा, मूँग , मटर, मूँग फली, सरसों गेहू,ँ धान, ज्वार, बाजरा

भगोना क्य आवश्यक है: सूखा बीज पत्थर जैसा कठोर होता है और बँटने के बजाय टू ट जाता। भगोने पर बीज
जल सोखकर फूल जाता है, आवरण ढ ला पड़ जाता है और दोन बीजपत्र अपनी प्राकृ तक सं ध से अलग हो जाते
ह। बीच म दे खए — नन्हा ूण, उसक पहली जड़ और प्ररोह भी दखाई दे जाएँगे।

क्या आप जानते ह? भीगे चने के जो दो भाग आपने दे खे, वही चना दाल ह। "दाल" वास्तव म अलग हुए बीजपत्र
ही ह — इसी लए दाल हमारे लए भी ऊजा और पोषण का इतना अच्छा ोत है।

प्र.2 आप पौध म पत्ती के शरा- वन्यास, जड़ के प्रकार और बीज म बीजपत्र क संख्या म परस्पर क्या संबंध दे खते
ह?

ये तीन लक्षण दो न त समुच्चय म साथ-साथ चलते ह।

ि बीजप त्री पौधे एकबीजपत्र ी पौधे

बीज मे ं दो बीजपत्र बीज मे ं एक बीजपत्र

पित्तयाँ — जािलकारूपी िशरा-िवन्यास पित्तयाँ — समातं र िशरा-िवन्यास

जड़ े ं — मूसला जड़ तंत्र जड़ े ं — झकड़ ा जड़ तंत्र

चना, राजमा, सरसों, आम, मक्का, गेहूँ, धान, घास,
गुड़हल, तुलसी, नीम केला, गन्ना, प्याज़

ये तीन लक्षण कभी आपस म नह मलते। इनम से कसी एक का पता होने पर शेष दो बताए जा सकते ह।

पुस्तक के शब्द म: बीजपत्री पौध म जा लकारूपी शरा- वन्यास और मूसला जड़तंत्र होता है, जब क एकबीजपत्री पौध
म समांतर शरा- वन्यास और झकड़ा जड़तंत्र होता है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

यह इतना उपयोगी क्य है: कसी पौधे का बीज, पत्ती और जड़ — तीन एक साथ दे खने को प्राय: नह मलते।
परंतु तीन साथ चलते ह, इस लए एक ही अवलोकन पयाप्त है। केले क गरी हुई पत्ती उठाइए, समांतर शराएँ
दे खए और आपको पहले से पता है क केले म झकड़ा जड़ ह गी और वह एक बीजपत्र वाले बीज से उगा है — बना
एक भी पौधा खोदे ।

क्रयाकलाप 2.9— आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 21–22
अनुभाग 2.2.2 जंतुओं के समूह कैसे बनाएँ?

क्रयाकलाप

प्र.1 चत्र 2.7 को दे खकर यह बताने का प्रयास कर क जंतुओं ारा ग त के लए शरीर के कस अंग का उपयोग कया
जाता है?

उड़ ते पक्षी

ची ंटी केंचुआ कनखजूरा साँप
वक्ष
ृ पर गौरैया

कछु आ िततली
गाय खरगोश

बत्तख
मेंढक

मछली

चत्र 2.7, पृष्ठ 21— जंतुओं म व वधता। पुस्तक म दए गए तालाब और मैदान के दृश्य का पुनर चत रेखा चत्र, जसम
प्रत्येक जंतु का नाम दया गया है।

चत्र 2.7 म एक तालाब और उसके आस-पास का खेत दखाया गया है, जसम कुछ जंतु वृत्त म बड़े करके दखाए गए ह — च ट ,
कचुआ, कनखजूरा, कछु आ, साँप, ततली, मढक और मछली, तथा साथ म गाय, खरगोश, वृक्ष पर बैठे पक्षी और जल के कनारे
बगुले। प्रत्येक कस अंग का उपयोग करता है:

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

चत्र 2.7 का जंतु ग त के लए प्रयुक्त शरीर का अंग ग त का प्रकार

चट छह टाँग ें चलना और रे ंग ना

कचुआ पूर ा शरीर — पेिशयाँ और महीन शूक शरीर को फै लाकर -िसकोड़कर रे ंग ना

कनखजूरा टाँग ों के अनेक जोड़े तेज़ी से रे ंग ना

ततली पंख और टाँग ें उड़ना; फू ल पर चलना

साँप पूर ा शरीर और शल्क (कोई टाँग नही ं) रे ंग ना / सरकना

कछु आ चार छोटी टाँग ें धीरे चलना; तैर ना

मढक िझल्लीयुक्त पंजों वाली मज़बूत िपछली टाँग ें थल पर फु दकना, जल में तैर ना

मछली पख और पूँछ तैर ना

गाय खुर ों वाली चार टाँग ें चलना और दौड़ना

खरगोश चार टाँग ें, िपछली टाँग ें लंबी कू दना और दौड़ना

पक्षी (गौरैया, बगुला) पंख और पैर उड़ना, चलना, पानी में टहलना

ध्यान दे ने योग्य पैटन: अंग प रवेश से मेल खाता है। वायु के लए पंख, जल के लए पख, कठोर भू म के लए टाँग
— और जो जंतु मट्ट या घास म से होकर चलते ह उनम कोई अंग नह , ब ल्क एक लंबा पेशीय शरीर होता है जो हर
सतह पर धक्का दे कर आगे बढ़ता है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता
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इन जंतुओं को ता लका 2.5 म सूचीबद्ध कर। इन जंतुओं म ग त करने के तरीक को दे ख और उनके चलने के
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प्र.2

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लए उपयोग कए जाने वाले शरीर के अंग के नाम बताएँ।

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ची ंटी aकेंचुआ कनखजूरा साँप
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ृ पर गौरैया

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गाय खरगोश

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चत्र 2.7, पृष्ठ 21— जंतुओं म व वधता। पुस्तक म दए गए तालाब और मैदान के दृश्य का पुनर चत रेखा चत्र, जसम

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प्रत्येक जंतु का नाम दया गया है।
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क्रम सं. जंतु का नाम ग त का प्रकार ग त के लए प्रयुक्त शरीर के अंग

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1. चट टाँग

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2. बकरी चलना और कूदना टाँग

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3. कबूतर चलना और उड़ना पैर और पंख

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4. मक्खी चलना और उड़ना पैर और पंख
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5. मछली पख

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6. अन्य

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

ता लका 2.5, पृष्ठ 22— जंतुओं क ग त और ग त के लए प्रयुक्त शरीर के अंग। रक्त खाने आपको भरने ह।

यहाँ ता लका 2.5 पूण है — छपी हुई ता लका के रक्त स्थान भरकर और कुछ अपने जंतु जोड़कर।

क्रम सं. जंतु का नाम ग त का प्रकार ग त के लए प्रयुक्त शरीर के अंग

1. चट चलना और रे ंग ना टाँग ें

2. बकरी चलना और कू दना टाँग ें

3. कबूतर चलना और उड़ना पैर और पंख

4. मक्खी चलना और उड़ना पैर और पंख

5. मछली तैर ना पख

6. साँप रे ंग ना पूर ा शरीर और शल्क

7. मढक फु दकना और तैर ना िझल्लीयुक्त पंजों वाली िपछली टाँग ें

8. कचुआ रे ंग ना शरीर की पेिशयाँ और शूक

सुझाव: छपी हुई ता लका के दो रक्त स्थान च ट (ग त का प्रकार — चलना और रगना) और मछली (ग त का
प्रकार — तैरना) के ह। पं क्त 6, 7 और 8 म वही जंतु भ रए जन्ह आपने स्वयं दे खा हो, नकल कए हुए नह ।

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प्र.3 ता लका 2.5 म द गई जानकारी के आधार आप क्या नष्कष नकाल सकते ह?

क्रम सं. जंतु का नाम ग त का प्रकार ग त के लए प्रयुक्त शरीर के अंग

1. चट टाँग

2. बकरी चलना और कूदना टाँग

3. कबूतर चलना और उड़ना पैर और पंख

4. मक्खी चलना और उड़ना पैर और पंख

5. मछली पख

6. अन्य

7.

8.

ता लका 2.5, पृष्ठ 22— जंतुओं क ग त और ग त के लए प्रयुक्त शरीर के अंग। रक्त खाने आपको भरने ह।

ता लका से सीधे तीन नष्कष नकलते ह।

1. व भन्न जंतुओं म अलग-अलग प्रकार क ग त होती है। जंतु उड़ सकते ह, दौड़ सकते ह, रग सकते ह, चल सकते ह, कूद या
फाँद सकते ह और तैर सकते ह।
2. वे ग त के लए शरीर के भन्न अंग का उपयोग करते ह। पंख, टाँग, पख — और कचुए तथा साँप जैसे कुछ जंतु पूरे शरीर
का, क्य क उनके कोई पाद ही नह होते।
3. एक ही जंतु म एक से अ धक प्रकार क ग त हो सकती है। कबूतर चलता भी है और उड़ता भी; मढक फुदकता भी है और
तैरता भी; मक्खी चलती भी है और उड़ती भी। अत: ग त के आधार पर समूह बनाने पर एक ही जंतु दो समूह म आ सकता है।

तीसरी बात क्य महत्वपूण है: इससे पता चलता है क समूह बनाने का आधार सावधानी से कहना चा हए। "उड़ने
वाले जंतु" और "चलने वाले जंतु" एक-दूसरे म मल जाते ह, क्य क कबूतर दोन करता है। अ धक स्पष्ट आधार
होगा "जो उड़ सकते ह" और "जो उड़ नह सकते" — इससे हर जंतु ठ क एक समूह म आ जाता है।

प्र.4 हम जंतुओं को उनक ग त के आधार पर समूह म कैसे बाँट सकते ह?

ग त के वषय म एक स्पष्ट प्रश्न चु नए और उसी के उत्तर के आधार पर सभी जंतुओं को बाँट द जए।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

आधार बनने वाले समूह उदाहरण

क्या यह उड़ सकता है? उड़ने वाले / न उड़ने वाले कबूतर , म क्खी, िततली, चमगादड़ | गाय, मछली, ची ंटी, साँप

थल पर कैसे चलता है? चलने वाले / फु दकने वाले / रे ंग ने वाले बकरी, गाय | मेंढक , खरगोश, िट ा | साँप, कें चुआ , ची ंटी

क्या यह तैरता है? तैर ने वाले / न तैर ने वाले मछली, व्हेल , बत्त ख, मेंढक | बकरी, कबूतर , ची ंटी

कौन-सा अंग प्रयुक्त होता है? टाँग ें / पंख / पख / िबना पाद बकरी, ची ंटी | कबूतर , म क्खी | मछली | साँप, कें चुआ

पाद क संख्या शून्य / दो / चार / छह / अनेक साँप | कबूतर | बकरी | ची ंटी | कनखजूर ा

जंतुओं के समूह बनाना क्य आवश्यक है: पौध क भाँ त ही जंतुओं के समूह बनाना उनक व वधता को समझने
के लए महत्वपूण है। इससे एक गहरा वचार भी सामने आता है — जंतु क ग त का उसके रहने के स्थान से घ नष्ठ
संबंध है। पख जल के साथ, पंख वायु के साथ, खुर कठोर भू म के साथ। यही संबंध अनुभाग 2.3 म आगे लया गया
है।

क जए: अपने क्षेत्र के दस जंतुओं का पोस्टर बनाइए और प्रत्येक के आगे एक चह्न लगाइए — पंख, टाँग, पख, या
बना पाद के लए लहरदार रेखा। तब पोस्टर स्वयं ही समूह बना दे गा।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 23
अनुभाग 2.3 व भन्न प रवेश म पौधे और जंतु

प्र.1 क्या जंतुओं क ग त उनके प रवेश पर नभर करती है?

हाँ — बहुत अ धक। जंतु कस प्रकार चलता है और कस अंग का उपयोग करता है, दोन उसके प रवेश से मेल खाते ह।

जंतु प रवेश शरीर का अंग गत

मछली जल धारारे िखत शरीर और पख [िचत्र 2.8 (क)] तैर ती है

बकरी थल पर घास वाले क्षेत्र खुर ों वाली चार टाँग ें [िचत्र 2.8 (ख)] चलती, दौड़ती, कू दती है

पक्षी वायु और वृक्ष पंख और हल्की अिस्थयाँ उड़ता है

कचुआ िमट्टी के भीतर शूक युक्त कोमल शरीर, कोई पाद नही ं िबल बनाता और रे ंग ता है

ऊँट रे तीला मरुस्थल चौड़े खुर ों वाले लंबे पैर रे त में िबना धँसे चलता है

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: जल हर चलती वस्तु को पीछे धकेलता है, इस लए तैरने वाले को चकना धारारे खत आकार
और चपटे पख चा हए। वायु सहारा नह दे ती, इस लए उड़ने वाले को पंख और हल्का शरीर चा हए। ढ ली रेत पैर के
नीचे धँस जाती है, इस लए मरुस्थली जंतु को चौड़े खुर चा हए जो भार फैला द। कठोर भू म पकड़ दे ती है, इस लए
वहाँ टाँग और खुर पयाप्त ह। शरीर प रवेश के अनुरूप होता है — और ऐसी वशेषताएँ अनुकूलन कहलाती ह।

स्वयं दे खए: मछली का शरीर दोन सर पर पतला और बीच म चौड़ा होता है — ठ क नाव के अगले भाग क
तरह। नाव बनाने वाल ने प्रकृ त क नकल क ; यही आकार दोन को कम प्रयास म जल चीरने दे ता है।

क्रयाकलाप 2.10— आइए, तुलना और व ष
े ण कर — पृष्ठ 23–24
अनुभाग 2.3 — ता लका 2.6, भन्न क्षेत्र का जीवन

क्रयाकलाप

प्र.1 अब उन पौध और जंतुओं के नाम क सूची बनाइए जन्ह आप या आपके सहपा ठय ने ता लका म दए गए
स्थान पर दे खा है अथवा जनके बारे म आप जानते ह।

क्रम सं. मरुस्थल म पवतीय क्षेत्र म महासागर म जंगल म अन्य

1 ऊँट दे वदार का वृक्ष मछली शेर

2 अन्य

3

ता लका 2.6, पृष्ठ 24— व भन्न प रवेश म पाए जाने वाले जंतु और पौधे। रक्त खाने आपको भरने ह।

यहाँ ता लका 2.6 भारत के भन्न- भन्न क्षेत्र के पौध और जंतुओं से भरी गई है।

क्रम मरुस्थल म पवतीय क्षेत्र महासागर म जंगल म अन्य क्षेत्र (तालाब /
सं. म घास का मैदान)

1. ऊँट दे वदार का वृक्ष मछली शेर मेंढक

2. नागफनी याक व्हेल साल और कमल और जलकं ु भी
सागौन के वृक्ष

3. खेजड़ी, मरुस्थली बुर ांस , िहम डॉिल्फन, मूँग ा, समुद ी हाथी, बाघ, बत्त ख, घोंघ ा, िट ा, पालतू
लोमड़ी, िचंक ारा तेदं ुआ , चीड़ शैवाल, समुद ी कछु आ िहरण, बाँस पशु

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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सुझाव: अं तम स्तंभ म अपने क्षेत्र जो ड़ए — नद (महासीर मछली, घ ड़याल), सुंदरबन के मग्रोव (मग्रोव वृक्ष,

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बंगाल बाघ), समुद्र तट (ना रयल, केकड़ा), या आपके वद्यालय का उद्यान।

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प्र.2 व भन्न क्षेत्र म पाए जाने वाले जंतुओं और पौध के संबंध म आपके क्या अवलोकन ह? अपने अवलोकन पर

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सहपा ठय के साथ चचा कर।

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मुख्य अवलोकन यह है क एक प्रकार के क्षेत्र म पाए जाने वाले पौधे और जंतु दूसरे प्रकार के क्षेत्र म पाए जाने वाल से
भन्न होते ह। ऊँट कभी महासागर म नह मलेगा और व्हेल कभी मरुस्थल म नह ।
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ध्यान से दे खने पर तीन बात उभरती ह:
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m .c अपना समुच्चय है। नागफनी और ऊँट मरुस्थल के; देवदार और याक पवतaकgे ; मछली, व्हेल और मूँगा महासागर
हर क्षेत्र का

l aकsे ;eशेर, बाघ और ऊँचे वृक्ष जंगल के।
a g एक क्षेत्र के जीव म उस क्षेत्र के अनुकूल वशेषताएँ होती ह। मरुस्थली पौध के तने मोटे और मांसल; पवतीय वृक्ष
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शंक्वाकार और झुक शाखाओं वाले; महासागर के जंतु धारारे खत।

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एक ही प्रकार का पौधा भन्न क्षेत्र म भन्न दख सकता है। नील ग र क तेज़ हवाओं म बुरांस छोटे और छोट प त्तय वाले,

s e m ठं डे मरुस्थल के ऊँट म दो।
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स क्कम म लंबे; गरम मरुस्थल के ऊँट म एक कूबड़,

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कसी क्षेत्र क जैव व वधता भन्न क्य होती है: क्य क उसक प र स्थ तयाँ भन्न होती ह — जल क मात्रा,

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गरमी और ठं ड, हवा, हमपात, मट्ट का प्रकार। वहाँ केवल वही पौधे और जंतु मलते ह जो उन प र स्थ तय को m
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सहन कर सक और जी वत रह सक। इस लए भन्न प र स्थ तय म भन्न जैव व वधता पाई जाती है।
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a पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 24–26
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अनुभाग 2.3 — मरुस्थल और पवत के अनुकूलन
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अलग-अलग क्षेत्र म पाए जानेla
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ऐसा क्य है? एक क्षेत्र क aजैव व वधता अन्य क्षेत्र क जैव व वधता से अलग क्य होती है?
प्र.1 वाले ये दोन प्रकार के पौधे एक-दूसरे से भन्न होते ह। आइए, पता लगाते ह क

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क्य क दोन क्षेत्र क प र स्थ तयाँ पूणत: भन्न ह, और वहाँ केवल वही पौधे रह पाते ह जो उन वशेष प र स्थ तय म

s e mजी वत रह सक।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

राजस्थान का मरुस्थल — नागफनी ( चत्र हमाचल का हमालयी क्षेत्र — दे वदार ( चत्र
2.9) 2.10)

प र स्थ तयाँ बहुत कम जल; िदन में अत्यिधक गरम, रात में अत्यिधक ठं ड, बार-बार िहमपात
अत्यिधक ठं डा

पौधा कैसा दखता मोटे और मांस ल तने शंक्वाकार आकृ ित, लचीली और झुक ी हुई शाखाएँ
है

कैसे सहायता ं ल तना जल संग ृिहत करता है और गरम
मास आकृ ित के कारण बफ आसानी से िफसल जाती है,
करता है पिरिस्थितयों को सहने में सहायक है इसिलए शाखाएँ भार से टू टती नही ं

एक पं क्त म तक: थार म लगाया गया दे वदार सूख जाएगा क्य क उसके पास जल सं चत करने का उपाय नह ;
हमालय क ढलान पर नागफनी जमा दे ने वाली बफ के भार से नष्ट हो जाएगी। दोन एक ही प्रकार क प र स्थ तय
के लए बने ह। भन्न प र स्थ तय के कारण ही व भन्न स्थान क जैव व वधता एक-दूसरे से बहुत अलग होती है।

क्या आप जानते ह? नागफनी क प त्तयाँ काँट म बदल जाती ह। चौड़ी प त्तयाँ गरम शुष्क हवा म बहुत जल उड़ा
दे त — और काँटे सं चत जल को प्यासे जंतुओं से भी बचाते ह।

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प्र.2 राजस्थान के गरम मरुस्थल के ऊँट ( चत्र 2.11) और ल ाख के ठं डे मरुस्थल के ऊँट ( चत्र 2.12) दे खए। इन
दोन जंतुओं म आपको क्या अंतर दखाई दे ते ह? इन अंतर के कारण ऊँट को क्या लाभ होते ह?

खुर खुर

िचत्र 2.11— राजस्थान के गरम मरुस्थल िचत्र 2.12— ल ाख के ठंडे मरुस्थल
में रहने वाला ऊँ ट में रहने वाला ऊँ ट
• एक कू बड़ • दो कू बड़
• लंबे पैर, चौड़ े खुर • छोटे पैर; लंबे बाल

चत्र 2.11 और चत्र 2.12, पृष्ठ 25— पुस्तक म दए गए दोन छाया चत्र के पुनर चत रेखा चत्र; खुर पुस्तक के अनुसार
नामां कत ह।

दोन ऊँट ह, परंतु उनके शरीर दो बलकुल भन्न मरुस्थल के लए बने ह।

वशेषता गरम मरुस्थल का ठं डे मरुस्थल का लाभ
ऊँट (राजस्थान) ऊँट (ल ाख)

पैर लंबे पैर , अिधक ऊँचाई तुल नात्मक रूप से छोटे लंबे पैर शरीर को तपती रे त से दू र रखते है;ं छोटे पैर पहाड़ी
पैर और कम ऊँचाई म रुस्थलीय क्षेत्र ों में आसानी से चलने में स क्षम बनाते है ं

खुर चौड़े खुर छोटे, अिधक कठोर खुर चौड़े खुर भार फै ला दे ते है,ं िजससे ऊँट रे त में िबना धँसे चलता है

कूबड़ एक कू बड़ दो कू बड़ कू बड़ में भोजन संिचत रहता है; ठं डे म रुस्थल के ऊँट के दोनों
कू बड़ सिद यों के अंत में छोटे हो जाते है ं क्योंिक संिचत भोजन पयोग
हो जाता है

बाल छोटे बाल िसर से गदन के िनचले लंबे बाल गरमी रोक ले ते है ं और ल ाख के बफ ले मौसम में जीिवत
भाग तक लंबे बाल रहने में सहायक होते है ं

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फर भी दोन ऊँट ही क्य ह: मरुस्थल — गरम हो या ठं डा — वह स्थान है जहाँ जल और भोजन दोन बहुत कम
ह। इस लए दोन जंतुओं क मूल बनावट एक ही रहती है: भोजन सं चत करने के लए कूबड़ और बना जल के कई
दन नकाल दे ने वाला शरीर। भन्न केवल चलने क सतह और तापमान ह — राजस्थान म रेत और गरमी, ल ाख
म पथरीली ढलान और बफ — और इन्ह दो बात के अनुसार पैर, खुर और बाल बदले ह।

प्र.3 मरुस्थल म ऊँट को जी वत रहने म कौन-सी अन्य वशेषताएँ सहायक हो सकती ह?

अध्याय म राजस्थान क काशी तीन और वशेषताएँ बताती है, तथा कुछ आप स्वयं जोड़ सकते ह।

वे कम मात्रा म मूत्र वसजन करते ह।
उनका गोबर सूखा होता है — उसके साथ बहुत कम जल जाता है।
उन्ह पसीना नह आता।

कम मूत्र + सूखा गोबर + पसीना नही ं

= शरीर से बहुत कम जल बाहर जाता है

= ऊँ ट िबना जल िपए भी कई िद नों तक जीिवत रह सकता है

अन्य सहायक वशेषताएँ जनका आप अवलोकन कर सकते ह या पता लगा सकते ह:

लंबी पलक और बंद हो सकने वाले नथुने उड़ती रेत को आँख और नाक से दूर रखते ह।
घुटन और छाती पर मोट चमड़ी क ग याँ उसे तपती रेत पर बैठने दे ती ह।
वह खेजड़ी और बबूल जैसे काँटेदार मरुस्थलीय पौधे भी खा लेता है, जन्ह बहुत कम जंतु चबा सकते ह।
जल मलने पर वह एक ही बार म बहुत अ धक जल पी सकता है।

मरुस्थल म जल बचाना ही सारी समस्या क्य है: पौधे और जंतु श्वसन, पसीने और मल-मूत्र के साथ लगातार जल
खोते रहते ह। जहाँ उसे भरने के लए जल लगभग है ही नह , वहाँ जी वत रहना पूरी तरह कम खोने पर नभर है।
ऊपर लखा ऊँट का हर अनुकूलन एक ही काम करता है — जल बचाना। इसी लए ऊँट को मरुस्थल का जहाज़ कहा
जाता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 27–28

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अनुभाग 2.3 — आवास और उनक रक्षा

प्र.1 आप कन- कन भन्न व धय के माध्यम से पौध और जंतुओं के आवास के आधार पर उनके समूह बना सकते
ह?

आवास वह स्थान है जहाँ पौधे और जंतु रहते ह। सबसे सरल वग करण वही है जो पुस्तक दे ती है — जो थल पर रहते ह और जो
जल म रहते ह।

समूह अथ आवास के उदाहरण वहाँ मलने वाले पौधे और जंतु

थलीय थल पर रहने वाले वन, मरुस्थल, घास के मैद ान, पवतीय ऊँट, शेर , दे वदार , नागफनी, नीम ,
क्षेत्र बकरी

जलीय जल में रहने वाले तालाब, झील, निदयाँ, महासागर मछली, व्हेल , डॉिल्फन, कमल ,
जलकं ु भी

उभयचर जल के साथ-साथ थल पर भी रहने वाले तालाब के िकनारे , दलदली भूिम मेंढक , भेक
जंत ु

थलीय और जलीय आवास को और आगे बाँटा जा सकता है:

थलीय → मरुस्थल (ऊँट, नागफनी), वन (बाघ, साल), घास का मैदान ( हरण, घास), पवत (याक, दे वदार, बुरांस)।
जलीय → मीठा जल (तालाब, झील, नद — रोहू, कमल, मढक) और खारा जल (महासागर — व्हेल, मूँगा, समुद्र शैवाल)।

आवास इतना अच्छा आधार क्य है: आवास ही जीव को भोजन, जल, वायु, आश्रय और जी वत रहने क
अन्य आवश्यकताएँ दे ता है। इस लए एक ही आवास के जीव म प्राय: एक जैसे अनुकूलन भी होते ह — हर
महासागरीय जंतु धारारे खत है, हर मरुस्थली पौधा जल बचाता है। अत: आवास के आधार पर समूह बनाना केवल
पते के आधार पर नह , जीवन-शैली के आधार पर समूह बनाना है।

प्र.2 य द कसी पौधे या जंतु का आवास क्ष तग्रस्त हो जाए तो क्या होगा? य द बकरी को खाने के लए घास न मले तो
क्या होगा? क्या मछली बना जल के जी वत रह सकती है?

आवास क्ष तग्रस्त होने पर वहाँ के पौधे और जंतु अपने घर, भोजन और अन्य संसाधन से वं चत हो जाते ह — और इससे
जैव व वधता क हा न होती है।
बकरी: घास बकरी का भोजन है। घास न मलने पर वह भूखी रहेगी, दुबल हो जाएगी, दूध दे ना बंद कर दे गी, और या तो चरागाह क
खोज म दूर जाना पड़ेगा या वह जी वत नह रह पाएगी। सूखे के वष म चरवाह के साथ यही होता है — पूरे रेवड़ को चारे क खोज
म सैकड़ कलोमीटर हाँकना पड़ता है।
मछली: नह — मछली बना जल के जी वत नह रह सकती। जल केवल उसका घर नह है; मछली जल म घुली ऑक्सीजन
क्लोम ( गल) से लेती है और उसके पख केवल जल पर ही धक्का दे सकते ह। जल से बाहर क्लोम सूख जाते ह और वह साँस ही
नह ले पाती। मई म गाँव का तालाब सूखने पर यही दृश्य दखता है।

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हा न फैलती क्य है: जीव एक-दूसरे पर नभर ह। वन कट जाए तो हरण का भोजन और आश्रय जाता है, बाघ से
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m a s emक्ष तग्रस्त
gl है।
हरण जाता है, प क्षय से घ सले के वृक्ष जाते ह, और फल वाले वृक्ष से बीज फैलाने वाले पक्षी। एक
oला गरा दे ता है — इसी लए आवास क क्ष त से जैव व वधता क हा नaहोती
आवास पूरी .cंख

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क्या आप जानते ह? भारत ने इसी पर काय कया है। बंगाल बाघ क घटती संख्या के संरक्षण के लए 1973 म

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बाघ प रयोजना, 2022 म चीता पुनवास प रयोजना, और गोडावण (ग्रेट इं डयन बस्टड) के आवास को गुजरात,

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राजस्थान तथा महाराष्ट्र म संर क्षत क्षेत्र घो षत कया गया है।

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प्र.3 अपने माता- पता, दादा-दाद और पड़ो सय से उन पौध , प क्षय , क ट अथवा ऐसे अन्य जंतुओं के बारे म जान

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जन्ह वे बचपन म प्राय: दे खते थे ले कन अब वे कम दखाई दे ते ह।
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a यह सवक्षण आपको वास्तव म करना है — तीन-चार बुजग से पू छए और उनके अपने शब्द म ल खए। व ध और एक नमूना उत्तर
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नीचे है।

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व ध: हर व्य क्त से पू छए (i) आपके बचपन म कौन-से पौधे, पक्षी और क ट सामान्य थे, (ii) उनम से अब कौन कम दखते ह,
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और (iii) आपके अनुसार क्या बदला। यह भी ल खए क वे कस स्थान क बात कर रहे ह, क्य क उत्तर उसी पर नभर ह। फर

ag आए।
कक्षा म वे नाम मलाइए जो एक से अ धक बार

. c om
नमूना उत्तर: मेरी दाद बताती ह क जब वे मेरी आयु क थ तब लगभग हर घर क छत म गौरैया घ सले बनाती थी
और खेत के ऊपर गद्ध मँडराते थे। वषा ऋतु म झा ड़य म जुगनू चमकते थे और पहलीem
omक तालाब रात भर गूँजता रहता था। आज वे बहुत कम गौरैया दे खती aह,gगद्ध
टरातेcथे
s
la तो एक भी नह , और जुगनू
वषा के बाद इतने मढक

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aseभी न के बराबर। वे कहती ह क घ सले के छे द वाले पुराने कच्चे-खपरैल घर चले गए, तालाब पाटकर मकान बन
agl गए, और खेत म पहले से कह अ धक क टनाशक छड़का जाता है।

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m .c आवास क क्ष त के उदाहरण ह। कंक्र ट के भवन म घ सले के ag
sकाe प्रजनन स्थल छ न लेता है; क टनाशक उन क ट को मार दे ते ह जन पर
ये प रवतन क्य होते ह: उनके बताए तीन कारण

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ag चला जाए तो जंतु टक नह पाता — भले ही कसी ने उसे हा न पहुँचाने का
छे द नह होते; पाटा हुआ तालाब मढक
गौरैया और जुगनू नभर ह। आवास

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इरादा न कया हो।

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l a se आप अपने क्षेत्र के प वत्र उपवन के वषय म पता लगाइए।

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प वत्र उपवन वे अबा धत वन क्षेत्र ह जनका संरक्षण स्थानीय समुदाय करता है। इनका आकार बहुत छोटे से लेकर बहुत बड़े
e ह। ये कई प्रकार के औषधीय पौध समेत व वध प्रकार के पौध और जंतुओं का घर
तक हो सकता है और ये पूरे भारत म पाएsजाते
a
ह। यहाँ कसी को भी कसी जीव-जं
agतlु को हा न पहुँचाने, पेड़ काटने या क्षेत्र को क्ष त पहुँचाने क अनुम त नह है — इस लए प वत्र
उपवन सामुदा यक रूप से संर क्षत जैव संपदा ह।

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अपने क्षेत्र के उपवन का पता कैसे लगाएँ: गाँव या मोहल्ले के बुजग से उसका स्थानीय नाम पू छए (हर राज्य म नाम अलग है),
शक्षक के साथ वहाँ जाइए, भीतर के वृक्ष, पक्षी और औषधीय पौधे अं कत क जए, और पू छए क उसक दे खभाल कौन करता है
तथा वहाँ के नयम क्या ह।

राज्य प वत्र उपवन का स्थानीय नाम

केरल कावु / सप कावु

मेघालय लॉ िकं तांग / लॉ िलंग दोह (जैसे मॉफ़ लांग )

महाराष्ट्र दे वराई

राजस्थान ओरण / कें कड़ी

कनाटक दे वरकाडु / दे वरकान

हमाचल प्रदे श एवं उत्तराखंड दे वभूिम / दे व वन

प वत्र उपवन इतने सफल क्य ह: इनक रक्षा कसी बाड़ या पहरेदार से नह , ब ल्क समुदाय क अपनी आस्था
और सहम त से होती है। जब नयम सब मानते ह तो कोई तोड़ता नह । इसी लए अनेक प वत्र उपवन म आज भी वे
पुराने वृक्ष और दुलभ औषधीय पौधे बचे ह जो चार ओर के जंगल से लुप्त हो चुके ह — यह जीवंत प्रमाण है क
साधारण लोग जैव व वधता क रक्षा कर सकते ह, ठ क वैसे ही जैसे साइलट वैली बचाओ आंदोलन म कया।

आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 30–32
अध्याय के अंत के प्रश्न

आइए, और अ धक सीख

प्र.1 यहाँ दो प्रकार के बीज दए गए ह। आप इनके पौध क जड़ और प त्तय के शरा- वन्यास म क्या अंतर पाते ह?
(क) गे ँ (ख) राजमा

ये दोन बीज पौध के दो बड़े समूह के ह, इस लए उनक जड़ और प त्तयाँ भी भन्न होती ह।

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(क) गे ँ (ख) राजमा

बीज म बीजपत्र क एक (दाना दो भागों में नही ं बँटता) दो (भीगा बीज दो भागों में बँट जाता है)
संख्या

समूह एकबीजपत्र ी ि बीजपत्र ी

जड़ का प्रकार झकड़ा (रे शेद ार ) जड़ — तने के आधार से समान माप मूस ला जड़ — एक मोटी मुख्य जड़ िजससे छोटी पाश्व
की पतली जड़ों का ग च्ु छा जड़ें िनकलती है ं

पत्ती का शरा- समांतर िशरा-िवन्यास — िशराएँ साथ-साथ चलती है ं जािलकारूपी िशरा-िवन्यास — मोटी म ध् य िशरा के दोनों
वन्यास ओर िशराओं का जाल

जड़ क गहराई सतह के पास फै लकर ऊपरी िमट्टी थामती है ं गहराई में जाकर नीचे का जल ले ती है

बीज ही शेष सब कुछ क्य तय करता है: बीजपत्र क संख्या बीज बनते ही न त हो जाती है और वही योजना
आगे जड़ और प त्तयाँ बनाती है। इस लए एक बीजपत्र वाले बीज से सदै व समांतर शरा- वन्यास और झकड़ा जड़
बनती ह, तथा दो बीजपत्र वाले बीज से जा लकारूपी शरा- वन्यास और मूसला जड़।

स्वयं जाँ चए: कुछ गेहूँ के दाने और कुछ राजमा रात भर भगोइए। राजमा उँ ग लय म दो भाग म बँट जाता है, गेहूँ
नह । फर दोन को एक सप्ताह गीली रुई पर उगाइए और जड़ दे खए — गेहूँ के नीचे समान धाग का गुच्छा, राजमा
के नीचे एक मज़बूत मुख्य जड़।

प्र.2 नीचे कुछ जंतुओं के नाम दए गए ह, उनके आवास के आधार पर समूह बनाएँ। च ां कत खंड ‘क’ म जलीय
जंतुओं और च ां कत खंड ‘ख’ म थलीय जंतुओं के नाम ल खए। खंड ‘ग’ म दोन आवास म रहने वाले
जंतुओं के नाम ल खए। घोड़ा, डॉ ल्फन, मढक, भेड़, मगरमच्छ, गलहरी, व्हेल, कचुआ, कबूतर, कछु आ

दोन वृत्त एक-दूसरे को काटते ह, इस लए जो जंतु जल और थल दोन का उपयोग करते ह वे बीच के खंड ‘ग’ म आएँगे।

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क — जलीय ग — दोनों ख — थलीय

घोड़ ा
मेढं क
भे ड़
डॉिल्फन मगरमच्छ
िगलहरी
व्हेल कछु आ
केंचुआ
कबूतर

खंड ‘क’ म केवल जल म रहने वाले, ‘ख’ म केवल थल पर रहने वाले और ‘ग’ म दोन का उपयोग करने वाले जंतु।

खंड जंतु कारण

क — जलीय डॉिल्फन, व्हेल ये पूर ा जीवन जल में िबताते है ं और थल पर चल ही नही ं सकते

ख — थलीय घोड़ा, भेड़, िगलहरी, कें चुआ , कबूतर ये थल पर रहते है ं — भूिम पर, िमट्टी के भीतर, या वृक्षों पर

ग — दोन मेंढक , मगरम च्छ, कछु आ ये जल में तैर ते भी है ं और बाहर आकर थल पर चलते-िफरते भी है ं

व्हेल और डॉ ल्फन ‘ग’ म क्य नह : वे साँस लेने के लए सतह पर आते अवश्य ह, परंतु जल छोड़ते कभी नह ।
मढक, मगरमच्छ और कछु आ वास्तव म थल पर चलते ह — मढक कनारे पर क ट पकड़ता है, मगरमच्छ कनारे पर
धूप सकता है और कछु आ भू म पर चलता है। साँस लेने के लए ऊपर आना थल पर रहना नह है।

क्या आप जानते ह? मढक जैसे जंतु जो जल के साथ-साथ थल पर भी रह सकते ह, उभयचर कहलाते ह।

प्र.3 मनु क माँ क एक शाक वा टका ( कचन गाडन) है। एक दन वह मट्ट से मूली उखाड़ रही थ । उन्ह ने मनु को
बताया क मूली एक प्रकार क जड़ है। एक मूली को सावधानीपूवक दे ख और लख क वह कस प्रकार क जड़
है। मूली के पौधे क प त्तय म आपको कस प्रकार का शरा- वन्यास दखाई दे गा?

मूली एक मूसला जड़ है — फूली हुई मुख्य जड़ — और मूली के पौधे क प त्तय म जा लकारूपी शरा- वन्यास दखाई
दे गा।
मूली को दे खने पर क्या दखता है:

एक मोट मुख्य जड़ है, सफ़ेद और लंबी, नीचे क ओर पतली होती हुई। यही भाग हम खाते ह।

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उसक पूरी लंबाई पर पतली पा जड़ नकलती ह — सतह पर उनके नशान या बाल जैसी जड़ दखती ह।
तने के आधार पर समान माप क पतली जड़ का कोई गुच्छा नह है, इस लए यह झकड़ा जड़तंत्र न त रूप से नह है।
ऊपर क प त्तय म मोट मध्य शरा के दोन ओर छोट शराओं का जाल है।

एक मुख्य जड़ + छोटी पाश्व जड़ े ं → मूसला जड़

मूसला जड़ → पौधा ि बीजपत्री → पित्तयों में जािलकारूपी िशरा-िवन्यास

मूली इतनी मोट क्य होती है: मूली का पौधा आगे फूल और बीज बनाने के लए अ त रक्त भोजन अपनी मूसला
जड़ म सं चत करता है। हम उसे उससे पहले ही नकाल लेते ह — इसी लए जड़ मोट , रसीली और भोजन से भरी
होती है। गाजर, शलजम, चुकंदर और शकरकंद म भी इसी प्रकार भोजन सं चत रहता है।

स्वयं जाँ चए: अगली बार जब मूली पत्त स हत घर आए, तो एक पत्ती प्रकाश के सामने र खए। शराओं का जाल
स्पष्ट दखता है — और इतने भर से पता चल जाता है क पौधा बीजपत्री है और उसक जड़ मूसला है, बना कुछ
खोदे ।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता
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नीचे दए गए चत्र म पवतीय बकरी और मैदान म पाई जाने वाली बकरी को दे ख। उनके बीच समानताएँ और
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प्र.4

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अंतर बताएँ। साथ ही यह भी बताएँ क इन अंतर के क्या कारण ह?

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(ख) मैदानों मे ं पाई जानेm .
(क) पवतीय बकरी
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m • छोटे,a
. co a•gलंबlी, पतली टाँगें
• घने, लंबे बाल िचकने बाल
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• छोटी, मज़ बूत टाँगें

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• बड़ े मुड़े हुए सींग • छोटे सींग

om a s
पाठ्यपुस्तक के मु द्रत पृष्ठ पर केवल ये दोm
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(क) पवतीय बकरी और (ख) मैदान म पाई जाने वाली बकरी, प्रश्न 4, पृष्ठ 32— पुनर चत रेखा चत्र। ध्यान द:

अध्यायla
s e शीषक छपे ह, चत्र स्वयं पुस्तक के पृष्ठ से लुप्त ह; इस लए यह रेखा चत्र

ag
म बताई गई वशेषताओं के आधार पर बनाया गया है।

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em : दोन के चार पाद और खं डत खुर, दो स ग, छोट पूँछ, शरीर पर बाल, दो कान और एक जैसा मुख होता है। दोन
दोन बक रयाँ ह, इस लए अ धकांश शरीर एक जैसा है; अंतर ठ क वह है जहाँ दोन आवास क माँग भन्न है।

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समानताएँ
a शाकाहारी ह जो घास और प त्तयाँ चरती ह, दोन जुगाली करती ह तथा दोन बच्च को जन्म दे कर दूध पलाती ह।

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वशेषता पवतीय बकरी मैदान क बकरी अंतर का कारण

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aछोटेs , पतले बाल
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बाल / घने, लंबे, ऊनी बाल पवत बहुत ठं डे है;ं घना आवरण गरम वायु रोककर शरीर को गरम रखता
रोम है। गरम मैद ानों में पतला आवरण ऊष्म ा िनकल जाने दे ता है।

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शरीर भारी और गठा हुआ पतला और हल्का गठा हुआ शरीर ठं ड में कम ऊष्म ा खोता है

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.co भूिमgपर चलने-दौड़ने के िलए उपयुक्त है ं
लंबी टाँग ें समतल a
टाँग छोटी, मोटी और मज़बूत लंबी और पतली छोटी मज़बूत टाँग ें खड़ी पथरीली ढलानों पर संतल
ु न और पकड़ दे ती है;ं

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खुर दरी ग ी खेल के जूते के तले जैस ी पकड़ दे ती है और चट्ट ान पर
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खुर कठोर िकनारे , भीतर अपेक्षाकृ त िचकने
कोमल खुर दरी ग ी साधारण खुर िफसलने नही ं दे ती
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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

इन सबका कारण: ये सब अनुकूलन ह — वे व शष्ट वशेषताएँ जो जंतु को अपने क्षेत्र म जी वत रहने योग्य बनाती
ह। पवतीय बकरी का क्षेत्र ठं डा, ढालू और पथरीला है, इस लए उसका शरीर गरमी और पकड़ के लए बना है। मैदानी
बकरी का क्षेत्र गरम और समतल है, इस लए उसका शरीर ठं डक और तेज़ चाल के लए बना है। ठ क यही बात पृष्ठ
25–26 पर गरम और ठं डे मरुस्थल के ऊँट के साथ हुई थी।

क्या आप जानते ह? ल ाख क पवतीय बक रय के भीतरी कोमल ऊन को हर वसंत म नकालकर पश्मीना बुना
जाता है — वश्व के सबसे गरम और महीन ऊन म से एक। बकरी ने उसे सद से बचने के लए उगाया था; हम उसे
उधार लेते ह।

प्र.5 पाठ म चचा क गई वशेषताओं के अ त रक्त कसी अन्य वशेषता के आधार पर नम्न ल खत जंतुओं के दो
समूह बनाएँ— गाय, तलचट्टा (कॉकरोच), कबूतर, चमगादड़, व्हेल, कछु आ, मछली, ट ा, छपकली।

अध्याय आवास, ग त, भोजन और रंग पहले ही ले चुका है, इस लए कोई और वशेषता चुननी होगी। सबसे स्पष्ट यह है।
चुना गया आधार: मेरुदं ड क उप स्थ त या अनुप स्थ त।

समूह 1 — मेरुदं ड वाले जंतु समूह 2 — मेरुदं ड र हत जंतु

गाय, कबूतर , चमगादड़, कछु आ , व्हेल , मछली, िछपकली ितलचट्ट ा, िट ा

दो अन्य सही उत्तर, भन्न आधार पर:

आधार समूह 1 समूह 2

संतान उत्प त्त बच्चों को जन्म दे ने वाले — गाय, अंडे दे ने वाले — ितलचट्टा, कबूतर, कछु आ , मछली, िट ा, िछपकली
चमगादड़, व्हेल

पाद क संख्या छह पाद — ितलचट्टा, िट ा चार पाद — गाय, चमगादड़, कछु आ , िछपकली; दो पाद — कबूतर; िबना
पाद — व्हेल , मछली

शरीर का बाल — गाय, चमगादड़, व्हेल ; पंख — शल्क — मछली, िछपकली; कठोर कवच — कछु आ ; कठोर बाह्य आवरण
आवरण कबूतर — ितलचट्टा, िट ा

समूहन सही कब है: दो कसौ टयाँ। पहली, आधार एक स्पष्ट वशेषता हो जसे जाँचा जा सके। दूसरी, सूची का
हर जंतु ठ क एक ही समूह म आए — न कोई छू टे , न कोई दोन म। मेरुदं ड वाला वग करण और अंडे दे ने वाला
वग करण दोन इन कसौ टय पर खरे ह, इस लए दोन सही ह। "हमारे लए उपयोगी या अनुपयोगी" आधार वफल
होगा, क्य क वह व्य क्त-व्य क्त पर बदल जाता है।

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प्र.6 जनसंख्या के बढ़ने और मनुष्य ारा अ धक सु वधाजनक जीवन क चाह म व भन्न आवश्यकताओं क पू त के
लए वन क कटाई क जा रही है। यह हमारे आस-पास के प रवेश को कैसे प्रभा वत कर सकता है? आपके
वचार से हम इस चुनौती का नदान कैसे कर सकते ह?

वन क कटाई हज़ार पौध और जंतुओं के आवास को नष्ट करती है, और इसक हा न हम तक भी पहुँचती है।
प रवेश पर प्रभाव:

आवास और जैव व वधता क हा न। जंतुओं का घर, भोजन और आश्रय छन जाता है। भारत म बंगाल बाघ, चीता और
गोडावण क संख्या इसी कारण घट ।
मट्ट का कटाव और भूस्खलन। जड़ मट्ट थामती ह। वृक्ष हटते ही वषा ऊपरी मट्ट बहा ले जाती है और पहाड़ी ढलान
खसकने लगती ह।
कम वषा और अ धक गरमी। वृक्ष जलवाष्प और छाया दे ते ह। वन कटने पर क्षेत्र गरम और शुष्क हो जाता है।
बाढ़ और सूखते कुएँ। वन क मट्ट स्पंज क तरह वषा सोख लेती है; नंगी भू म से पानी तुरंत बह जाता है, इस लए वषा म
न दयाँ उफनती ह और गरमी म भूजल घट जाता है।
काबन डाइऑक्साइड और प्रदूषण म वृ द्ध। वृक्ष काबन डाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन दे ते ह। वृक्ष कम होने का अथ है
दू षत वायु और गरम होती जलवायु।
जंतुओं का गाँव म आना। वन म भोजन न मलने पर हाथी और तदुए खेत और ब स्तय म आ जाते ह, जो दोन के लए
ख़तरनाक है।
औष धय और आजी वका क हा न। अनेक औषधीय पौधे केवल वन म उगते ह और वनवासी समुदाय उन्ह पर नभर ह।

इस चुनौती का नदान:

1. काटने से अ धक लगाइए। वन महोत्सव जैसे वृक्षारोपण अ भयान तथा वद्यालय और सड़क कनारे क हर खाली जगह पर
पौधे।
2. कम प्रयोग और पुन: उपयोग। काग़ज़ के दोन ओर ल खए, पुनच क्रत काग़ज़ और कपड़े के थैले काम म लाइए, लकड़ी और
काग़ज़ क वस्तुएँ व्यथ न कर।
3. वकल्प अपनाइए। जलावन क लकड़ी के स्थान पर एल.पी.जी. या सौर चूल्हा; वन क इमारती लकड़ी के स्थान पर बाँस और
कृ ष अप शष्ट।
4. जो बचा है उसक रक्षा क जए। राष्ट्रीय उद्यान , अभयारण्य और बाघ प रयोजना जैसी योजनाओं का समथन क जए तथा
सामुदा यक वन और प वत्र उपवन को बचाइए।
5. कृ ष-वा नक । खेत म फ़सल के साथ वृक्ष लगाइए, ता क लकड़ी और फल खेत से मल, वन से नह ।
6. जागरूकता फैलाइए। साइलट वैली बचाओ और चपको आंदोलन इस लए सफल हुए क्य क साधारण लोग ने पोस्टर, पत्र,
से मनार और या चकाओं के माध्यम से अपनी बात रखी।

केवल वृक्षारोपण पयाप्त क्य नह है: नया लगाया पौधा वन नह होता। वन एक पूरा आवास है — उल्लुओं के
लए खोखले वाले पुराने वृक्ष, झा ड़याँ, गरे हुए तने, क ट और स दय म बनी मट्ट । जो एक दन क कटाई नष्ट कर
दे ती है, उसे फर से बनने म दशक लगते ह। इसी लए बचे हुए वन क रक्षा नया वन लगाने से कह अ धक
मूल्यवान है।

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प्र.7 फ्लोचाट का व ेषण कर। इसम ‘क’ और ‘ख’ के कौन-कौन-से उदाहरण हो सकते ह?

फ्लोचाट को क्रम से प ढ़ए। "पौधा" → "क्या इसम प त्तयाँ ह?" → हाँ → "क्या इसम जा लकारूपी शरा- वन्यास है?" अब माग
दो भाग म बँटता है:

जािलकारूपी िशरा-िवन्यास → हाँ → क = जािलकारूपी िशरा-िवन्यास वाले पौधे (ि बीजपत्री)

जािलकारूपी िशरा-िवन्यास → नही ं → ख = पित्तयों वाले िकं त ु समांत र िशरा-िवन्यास वाले पौधे (एकबीजपत्री)

क ख

क्या दशाता है वे पौधे िजनकी पित्तयों में जािलकारूपी िशरा-िवन्यास है वे पौधे िजनमें जािलकारूपी नही ं, समांतर िशरा-िवन्यास
है

उदाहरण गड
ु ़ हल , आम , नीम , तुल सी, सरसों, चना, ग ल
ु ाब, बरगद , के ला, घास , गेहू,ँ म क्का, धान, ग न्ना, बाँस , ले म न घास ,
पीपल , गेंद ा, सदाबहार प्याज़, नािरयल

इनके बारे म मूस ला जड़; बीज में दो बीजपत्र (ि बीजपत्री) झकड़ा जड़; बीज में एक बीजपत्र (एकबीजपत्री)
और

चाट "क्या इसम प त्तयाँ ह?" से क्य आरंभ होता है: शरा- वन्यास का प्रश्न तभी साथक है जब पौधे म प त्तयाँ
ह । नागफनी, जसक प त्तयाँ काँट म बदल चुक ह, पहले ही प्रश्न पर "नह " कहकर चाट से बाहर हो जाएगा।
फ्लोचाट तभी काम करता है जब प्रश्न सही क्रम म पूछे जाएँ।

क जए: चाट को स्वयं आगे बढ़ाइए। ‘क’ के नीचे जो ड़ए "क्या तना कोमल और हरा है?" — हाँ से तुलसी और
टमाटर (शाक), नह से आम और नीम (वृक्ष तथा झाड़ी)। ऐसे फ्लोचाट को कुंजी कहते ह और जीव व ानी अनजान
पौध क पहचान इसी व ध से करते ह।

प्र.8 राज अपने मत्र संजय से तक करता है, “गुड़हल का पौधा एक झाड़ी है।” संजय इसके स्पष्टीकरण के लए कौन
से प्रश्न पूछ सकता है?

संजय को ऐसे प्रश्न पूछने चा हए जो झाड़ी क तीन प रभाषक वशेषताओं क जाँच कर — ऊँचाई, तने क प्रकृ त और शाखाएँ
कहाँ से नकलती ह।

1. पौधा कतना ऊँचा है? हमसे छोटा है, हमारे बराबर है, या हमसे बहुत ऊँचा? (झाड़ी मध्यम ऊँचाई क होती है।)
2. तने का रंग क्या है — हरा या भूरा? (झाड़ी का तना भूरा होता है।)
3. तना कठोर है या कोमल? क्या वह सरलता से मुड़ जाता है या काष्ठीय और कड़ा है? (झाड़ी का तना कठोर काष्ठीय होता है।)

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4. तना वृक्ष के तने जैसा मोटा है या पतला? (झाड़ी का तना कठोर परंतु पतला होता है।)
5. शाखाएँ कहाँ से नकलती ह — भू म के नकट से या तने के ऊपरी भाग से? (झाड़ी म वे भू म के नकट से नकलती ह।)
6. एक ही मुख्य तना है या आधार के पास से अनेक तने नकलते ह? (झाड़ी म अनेक होते ह।)
7. क्या तने को खड़ा रहने के लए कसी सहारे क आवश्यकता है? (य द हाँ, तो वह झाड़ी नह , आरोही लता होगी।)

गुड़हल → मध्यम ऊँ चाई ✔ भूरा तना ✔ कठोर िकं त ु पतला ✔ शाखाएँ भूिम के िनकट ✔

अत : राज सही है — ग ुड़हल का पौधा झाड़ी है।

तक करने से पूछना बेहतर क्य है: संजय के प्रश्न मत को अवलोकन म बदल दे ते ह। "मुझे झाड़ी लगती है" बनाम
"मुझे वृक्ष लगता है" के स्थान पर दोन मत्र एक ही पौधे को दे खकर एक ही चार वशेषताएँ जाँचते ह — और फर
ववाद बचता ही नह । यह अध्याय 1 क वै ा नक व ध का मत्र क बहस म उपयोग है।

सुझाव: गुड़हल क तुलना गुलाब (यह भी झाड़ी), टमाटर (शाक) और आम (वृक्ष) से क जए। सं दग्ध पौधे को हर
समूह के ात उदाहरण के पास रखकर दे खना ऐसे प्रश्न सुलझाने का सबसे तेज़ उपाय है।

प्र.9 ता लका म कुछ आँकड़े दए गए ह। आँकड़ के समूह के आधार पर इन पौध के उदाहरण का पता लगाइए। समूह
‘क’ — बीजपत्री बीज, मूसला जड़; समूह ‘ख’ — एकबीजपत्री बीज, झकड़ा जड़। (I) समूह ‘क’ के पौध म
और क्या समानताएँ ह? (II) समूह ‘ख’ के पौध म और क्या समानताएँ ह?

ता लका का "उदाहरण" स्तंभ भरने पर:

समूह बीज का जड़ का उदाहरण
प्रकार प्रकार

क ि बीजपत्री मूस ला जड़ चना, राजमा, सरसों, मटर , मूँग फली, आम , नीम , ग ड
ु ़ हल , ग ल
ु ाब, गेंद ा, टमाटर ,
सदाबहार

ख एकबीजपत्री झकड़ा जड़ गेहू,ँ म क्का, धान, घास , ग न्ना, बाँस , के ला, प्याज़, ले म न घास , नािरयल

(I) समूह ‘क’ के पौध क अन्य समानताएँ:

उनके बीज दो बीजपत्र म बँट जाते ह।
उनक प त्तय म जा लकारूपी शरा- वन्यास होता है।
उनक मुख्य जड़ मट्ट म गहराई तक जाती है और उससे पाश्व जड़ नकलती ह।
उनक प त्तयाँ प्राय: चौड़ी और वृंत स हत होती ह।

(II) समूह ‘ख’ के पौध क अन्य समानताएँ:

उनके बीज म एक ही बीजपत्र होता है।
उनक प त्तय म समांतर शरा- वन्यास होता है।

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उनक जड़ तने के आधार से नकलती समान माप क पतली जड़ का गुच्छा होती ह, जो सतह के पास फैलती ह।
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उनक प त्तयाँ प्राय: लंबी और पतली होती ह और आधार तने को लपेटता है।
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दोन सू चयाँ कभी आपस म क्य नह मलत : ये सभी लक्षण बीज बनते समय एक साथ तय हो जाते ह।
gl लए एक ही अवलोकन पयाप्त है — कसी पौधे के नीचे झकड़ा जड़ का गुच्छा दे खकर बना दे खे ही कहा जा
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सकता है क उसक प त्तय म समांतर शराएँ ह गी और उसके बीज म एक बीजपत्र था।

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क्या आप जानते ह? भारत म उगने वाला लगभग हर अनाज — गेहूँ, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा — समूह ‘ख’ का
agमूँग, उड़द, राजमा — समूह ‘क’ का। इसी लए दाल-चावल क थाली म
है और लगभग हर दलहन — चना, अरहर,
सचमुच एक एकबीजपत्री और एक बीजपत्री साथ-साथ होते ह।

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gप क्षय क तुलना म आपको
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प्र.10 mनीचे दए गए चत्र म बत्तख के नामां कत भाग को दे ख। बत्तख के पंज म अन्य
l a se क्या भन्नता दखाई दे ती है? बत्तख अपने इस भाग का उपयोग करके कौन-सी ग त व ध करने म सक्षम होगी?
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अलग-अलग, नखरयुक्त उँगिलयाँ
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(क) बत्तख (ख) कबूत र

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प्रश्न 10, पृष्ठ 32— बत्तख और कबूतर के पुनर चत रेखा चत्र; बत्तख के झल्लीयुक्त पंजे पुस्तक के अनुसार नामां कत
ह।

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बत्तख के पंजे झल्लीयुक्त होते ह; कबूतर के नह ।

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उँगिलयाँ िझल्ली
से जुड़ी है ं

(क) बत्तख — िझल्लीयुक्त पंजे (ख) कबूत र — अलग-अलग नखयुक्त उँ गिलयाँ

बत्तख म त्वचा क झल्ली उँ ग लय को जोड़कर एक चौड़ा चप्पू बना दे ती है; कबूतर म हर उँ गली अलग है और नख पर समाप्त होती है।

बत्तख कबूतर और अन्य पक्षी

उँग लयाँ त्वचा की िझल्ली से आपस में जुड़ी हुई अलग-अलग, पत्येक के िसरे पर नख

पंजे क आकृ त चौड़ी और चपटी, चप्पू या पंखे जैस ी पतली और पकड़ने योग्य

कस काम के लए उपयुक्त जल को पीछे धके लने के िलए डाली या तार पकड़ने के िलए

बत्तख कौन-सी ग त व ध कर सकेगी: जल म तैरना (और पानी म पैर मारकर आगे बढ़ना)। झल्लीयुक्त पंजा चप्पू क तरह
काम करता है — पीछे क ओर मारने पर वह फैल जाता है और बहुत सारा जल पीछे धकेलता है, जससे बत्तख आगे बढ़ती है; आगे
लाते समय झल्ली समट जाती है, इस लए बाधा बहुत कम होती है। यही चौड़ा पंजा बत्तख को क चड़ और गीली रेत पर बना
धँसे चलने म भी सहायता करता है।

कबूतर को इनक आवश्यकता क्य नह : कबूतर डा लय , तार और मुँडेर पर बैठता है। उसे ऐसी पतली उँ ग लयाँ
चा हए जो नख स हत लपटकर पकड़ बना सक। झल्लीयुक्त पंजा तार पकड़ ही नह पाता, और नखयुक्त पंजा
तैरने म लगभग बेकार होता। दोन पंजे अपने-अपने आवास के अनुकूलन ह।

क्या आप जानते ह? तैराक रबर के लपर ठ क इसी कारण पहनते ह — बड़ा तल अ धक जल पीछे धकेलता है
और अ धक ग त दे ता है। यह वचार सबसे पहले बत्तख़ को आया था।

और भी सीख — पृष्ठ 33

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प रयोजनाएँ और आगे क खोज

और भी सीख

प्र.1 एक भारतीय वै ा नक/वन्य जीव व ानी के बारे म पढ़ जो भारत क जैव व वधता के संरक्षण क दशा म काम
कर रहे ह। इस पर एक सं क्षप्त रपोट बनाएँ।

एक वै ा नक चु नए, दो-तीन वश्वसनीय ोत प ढ़ए और लगभग आधा पृष्ठ ल खए। अच्छ रपोट म पाँच भाग होने चा हए: वे
कौन ह, उन्ह ने क्या अध्ययन कया, मुख्य काय क्या रहा, जैव व वधता के लए वह क्य महत्वपूण था, और आपने उनसे
क्या सीखा।
जनके बारे म लख सकते ह: जानक अम्माल और सा लम अली (दोन आपके अध्याय म), उल्लास कारंत (बाघ गणना), कृ त
कारंत (मानव–वन्यजीव संघष), रमन सुकुमार (हाथी), बट्टू सहगल (संरक्षण लेखन), पू णमा दे वी बमन (असम का हर गला
सारस)।

नमूना रपोट: जानक अम्माल (1897–1984) केरल क एक भारतीय वनस्प तशास्त्री थ जन्ह ने अपना जीवन
पौध और पयावरण को सम पत कया। उन्ह ने गन्ने और प मी घाट के पौध पर काय कया और भारतीय
वनस्प त सवक्षण क प्रमुख के रूप म पूरे दे श क पादप व वधता का प्रलेखन करने के लए कायक्रम आरंभ कए।
जीवन के उत्तराध म वे साइलट वैली बचाओ आंदोलन से जुड़ और केरल के पालक्काड़ ज़ले के आद्र सदाबहार
वन को बाँध म डू बने से बचाने म सहायक हुईं। उनक सबसे बड़ी सीख यह है क सावधानीपूवक अ भलेख रखना
स्वयं म संरक्षण का काय है — जसे कसी ने गना ही नह , उसक रक्षा नह क जा सकती।

अच्छ रपोट क्या होती है: प्रशंसा नह , व शष्ट काय ल खए। "उन्ह पक्षी बहुत प्रय थे" से कुछ पता नह चलता;
"उन्ह ने भारतीय प क्षय क सूची बनाई, उनके यात्रा माग और आवास प्रले खत कए, तथा केवलादे व राष्ट्रीय उद्यान
और रंगना थ टु पक्षी अभयारण्य को संर क्षत करवाया" से पाठक को ठ क-ठ क पता चलता है क सा लम अली के
कारण क्या बदला।

प्र.2 भारत म जैव व वधता के प्र त दव्या मुदप्पा, उषा लाचुंगपा, गज़ाला शाहबु न, नं दनी वेलोह, वद्या अ ेया,
उमा रामाकृष्णन और दव्या कनाड के योगदान के बारे म पता क जए। इनम से कन्ह तीन के ारा कए गए
काय का एक प्र तवेदन ( रपोट) तैयार कर।

कोई तीन नाम चु नए, पता क जए क प्रत्येक कहाँ और कस जीव या आवास पर काय करती ह, और हर एक पर एक छोटा
अनुच्छेद ल खए। अपनी पढ़ाई के बाद इस रूपरेखा को आगे बढ़ाइए।

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वै ा नक मुख्य कायक्षेत्र जैव व वधता के लए महत्व

दव्या मुदप्पा पिश्चमी घाट की आनामलै पहािड़यों में िदखाया िक स्थानीय पजाितयाँ लगाकर क्षितग स्त वन पुन: बनाया जा सकता
वष वन के टुक ड़ों का पुनस्थ पन है, और टुक ड़ों को जोड़कर धनेश तथा क स्तूर ी िबलाव आ -जा सकें

उषा लाचुंगपा िसिक्कम के वन्य जीव और उच्च दुल भ िहमालयी पिक्षयों, पौधों और चरागाहों का पले खन तथा स्थानीय समुद ायों
िहमालयी आवास के साथ िमलकर उनका संर क्षण

गज़ाला पक्षी, वन और वन में रहने वाले लोग अध् ययन करती है ं िक वनों का उपयोग और पबंध न पक्षी िविवधता को कै से
शाहबु न पभािवत करता है, और संर क्षण को वनवािसयों के अिधकारों से जोड़ती है ं

नं दनी वेलोह पूव िहमालय, िवशेषकर अरुणाचल पदे श इस पर काय िक उ ान कम और स्थानीय लोग िमलकर संर क्षण को वास्तव
के संर िक्षत क्षेत्र में कै से सफल बनाते है ं

वद्या अ ेया मानव बिस्तयों के पास रहने वाले तेदं ुए िदखाया िक तेदं ुए मनुष्यों के साथ एक ही भूदृ श्य में रह सकते है,ं िजससे भारत
में मानव–वन्यजीव संघ ष से िनपटने का तरीका बदला

उमा बाघ और अन्य भारतीय वन्य जीवों की मल और बालों से पाप्त डी.एन.ए . ारा गणना करती है ं और दे खती है ं िक छोटी
रामाकृष्णन आनुवंिशकी आबािदयाँ एक -दू स रे से कट तो नही ं रही ं

दव्या कनाड भारत के तटों की समुद ी जीव-स ृिष्ट, मछु आ रा समुद ायों के साथ िमलकर िटकाऊ म त्स्यन पर काय, तािक समुद ी
मत्स्यन और शाक जैव िविवधता और आजीिवका दोनों बचें

सुझाव: हर वै ा नक क अपनी संस्था या प रयोजना क वेबसाइट तथा वश्वसनीय समाचार लेख काम म ली जए।
रपोट म अपने शब्द म एक वाक्य अवश्य ल खए क उनका काय क्य महत्वपूण है — शक्षक उसी वाक्य को
सबसे ध्यान से पढ़गे।

प्र.3 अपने वद्यालय म पौध और वृक्ष को उनके स्थानीय नाम से च त कर। इसके लए अपने शक्षक अथवा माली
क सहायता ल। अपनी नोटबुक म इन पेड़-पौध क सूची बनाएँ।

व ध: शक्षक या माली के साथ वद्यालय का चक्कर लगाइए। हर पौधे का पहले स्थानीय नाम पू छए — माली प्राय: उसे सबसे
अच्छा जानता है — फर सामान्य नाम और य द हो सके तो वै ा नक नाम पता क जए। नाम-पट्ट मौसम-रोधी काड या रंगे हुए
लकड़ी के टु कड़े पर लखकर तने से ढ ला बाँ धए (कभी क ल न ठोक)।
नोटबुक क सूची म क्या हो:

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क्रम स्थानीय सामान्य शाक / झाड़ी वद्यालय म कहाँ कोई वशेष बात
सं. नाम नाम / वृक्ष है

1. आम आम वृक्ष मुख्य ार के पास जािलकारूपी िशरा-िवन्यास; मूस ला जड़;
वसंत में मंजरी

2. गड
ु ़ हल गड
ु ़ हल झाड़ी चारदीवारी की बाड़ बड़े लाल फू ल, पूजा में पयुक्त
के साथ

3. तुल सी तुल सी शाक काय लय के पास औषधीय; पित्तयाँ सम्मुख जोड़ी में
गमले में

4. नीम नीम वृक्ष खेल के मैद ान के कड़वी पित्तयाँ; कीटों से बचाव में पयुक्त
कोने पर

स्थानीय नाम अं कत करना क्य आवश्यक है: स्थानीय नाम अपने साथ वह ान लाता है जो पाठ्यपुस्तक म नह
होता — कौन-सा पौधा खाँसी म काम आता है, कौन वषा से पहले फूलता है, कसम पक्षी घ सला बनाते ह। जब भी
कोई स्थानीय नाम भुला दया जाता है, उसके साथ यह ान भी चला जाता है।

प्र.4 अपने शक्षक क सहायता से क्षेत्र-भ्रमण या प्रकृ त क सैर क योजना बनाएँ। अपने अवलोकन अं कत कर।
क्षेत्र-भ्रमण अथवा प्रकृ त क सैर के दौरान सभी वद्या थय के अवलोकन और टप्प णय को मलाकर कक्षा के
लए जैव व वधता र जस्टर तैयार कर।

योजना कैसे बनाएँ:

1. स्थान और त थ शक्षक के साथ तय क जए — उद्यान, तालाब, वन का कोई भाग या वद्यालय प रसर। प्रात:काल सव त्तम
है; तब पक्षी और क ट सबसे अ धक स क्रय रहते ह।
2. साथ र खए नोटबुक, पेन, पानी क बोतल, हो सके तो आवधक लस, और अनुम त हो तो कैमरा।
3. काय बाँट ली जए। एक समूह वृक्ष, एक झाड़ी और शाक, एक पक्षी, एक क ट और एक शेष सब अं कत करे। न कुछ छू टे गा, न
पाँच बार लखा जाएगा।
4. वह अं कत क जए: नाम (य द पता हो तो स्थानीय), कहाँ दखा, कतने, क्या कर रहा था, और कोई वशेष लक्षण। कुछ
तो ड़ए या छे ड़ए मत — केवल गरी हुई प त्तयाँ और फूल एकत्र क जए।
5. कक्षा म लौटकर सभी समूह क टप्प णयाँ मलाइए, दोहराव हटाइए और अं तम र जस्टर ल खए।

कक्षा का जैव व वधता र जस्टर ऐसा दखना चा हए:

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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता
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क्रम नाम (स्थानीय / पौधा या समूह कहाँ दखा अवलोकन
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सामान्य) जंतु
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1. पीपल पौधा वृक्ष, ि बीजपत्र ी तालाब के हृदयाकार पित्तयाँ; कोयल इसके फल
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पास खा रही थी

2. दू ब घास पौधा शाक , पूरे मैद ान में समांतर िशरा-िवन्यास; झकड़ा जड़ें िमट्टी

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एकबीजपत्र ी बाँधे हुए

a seपक्षmी, थलीय
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3. मैना जंत ु घास के मैद ान चलती भी है और उड़ती भी; आँख के
पर पीछे पीला धब्बा

4. व्याध-पतंग जंत ु कीट तालाब के
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पंखों के दो जोड़े; हवा में ठहरकर तेज़ी

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ऊपर से बढ़ ती है

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a s em केवल सूची क्य नह है: य द यही सैर अगले वष और उसके अगले वष दोहराई जाए, तो र जस्टर
gl प रवतन का अ भलेख बन जाता है। य द गौरैया तीस से घटकर पाँच रह जाएँ या कोई नया पौधा दखे, तो आपके
र जस्टर

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वद्यालय के पास प्रमाण होगा। सा लम अली जैसे वै ा नक ने भारत के प क्षय का प्रलेखन ठ क इसी तरह कया
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— एक-एक सावधान नोटबुक से।

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प्र.5 हमारी जैव व वधता क रक्षा के लए भारत म प्रारंभ क गई बाघ प रयोजना (प्रोजेक्ट टाइगर) और इसी प्रकार
क अन्य प रयोजनाओं के बारे म पता कर। अपनी कक्षा के लए एक प्रस्तु त (प्रेजटे शन) तैयार कर।
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उत्तर .c o m g l a
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l a se आठ स्लाइड क प्रस्तु त बनाइए। एक स्लाइड म एक वचार, चत्र और मान चत्र का उपयोग, और अंत म यह क वद्याथ
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लगभग
स्वयं क्या कर सकते ह।

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om रक्षा
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प रयोजना आरंभ
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बाघ प रयोजना 1973 बंग ाल बाघ की घटती संख्या — कॉबट, कान्हा, रणथंभौर , बाद
ं ीपुर , सुंद रबन जैसे बाघ
आरिक्षत क्षेत्र ों के माध् यम से

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चीता पुनवास प रयोजना 2022 चीते की संख्या की पुन:स्थापना — म ध् य पदे श के कू नो रा ीय उ ान में

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ु रात, राजस्थान और महारा में गोडावण के आवासों को संर िक्षत क्षेत्र घोिषत िकया
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गोडावण के संर क्षत क्षेत्र — गज

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गया

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हाथी प रयोजना 1992 हाथी, उनके गिलयारे और आवास

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मगरमच्छ संरक्षण प रयोजना 1975 घिड़याल , मगर और खारे जल का मगरम च्छ

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जीवमंडल आर क्षत क्षेत्र एवं रामसर पूरे आवास — नीलिगिर , सुंद रबन, नंद ा दे वी; िचल्का और के वलादे व जैस ी आद भूिमयाँ
आद्रभू म
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कक्षा 6 व ान अध्याय 2 सजीव जगत म व वधता AglaSem · NCERT Solutions

सुझाई गई स्लाइड-क्रम: (1) जैव व वधता क्य घट रही है — मानवीय ग त व धय से आवास क क्ष त। (2) बाघ प रयोजना:
1973 ही क्य , और बाघ आर क्षत क्षेत्र क्या है। (3) भारत के बाघ आर क्षत क्षेत्र का मान चत्र। (4) बाघ क संख्या म प रवतन।
(5) चीता पुनवास प रयोजना, 2022। (6) गोडावण। (7) सामुदा यक संरक्षण — प वत्र उपवन और साइलट वैली बचाओ
आंदोलन। (8) हम अपने वद्यालय म क्या कर सकते ह।

इन सभी प रयोजनाओं के पीछे का वचार: एक प्र सद्ध जंतु को बचाने से पूरा आवास बच जाता है। बाघ के लए
आवश्यक वन क रक्षा क जए और उसी के साथ हरण, पक्षी, क ट, वृक्ष और वहाँ से बहती नद — सब स्वत:
सुर क्षत हो जाते ह।

प्र.6 अपनी कक्षा को छह-छह वद्या थय के समूह म बाँट ल। कक्षा म इस पर चचा आरंभ कर क आप अपने आस-
पास क जैव व वधता क रक्षा कैसे कर सकते ह। सभी समूह के सदस्य ारा दए गए सुझाव को स म्म लत
करते हुए एक समूहवार रपोट तैयार कर।

चचा कैसे कराएँ: छह वद्या थय के हर समूह को लगभग पंद्रह मनट द जए। प्रत्येक सदस्य कम से कम एक सुझाव अवश्य दे ;
एक सदस्य सब लखे; एक सदस्य कक्षा के सामने प्रस्तुत करे। फर सभी समूह क सू चयाँ मलाकर एक कक्षा-चाट बनाइए और
उन सुझाव पर नशान लगाइए जन्ह वद्यालय इसी महीने आरंभ कर सकता है।
प्राय: आने वाले और सचमुच उपयोगी सुझाव:

कहाँ हम क्या कर सकते ह

वद्यालय म स्थानीय पजाितयों के वृक्ष लगाना और सी ंचना; गरमी में पिक्षयों के िलए जल-पात्र रखना; छोटी िततली वािटका बनाना; पौधों पर
नाम-पट्टी लगाना; समारोहों में थम कोल और एकल-पयोग प्लािस्टक बंद करना

घर पर ृ क्करण; रसोई के कचरे से खाद; तुल सी या करी पत्ते का एक गमला; वन्य जंतओ
कपड़े के थैले ; कचरे का पथ ु ं के अंग ों से बनी
वस्तुए ँ कभी न ख़रीदना

मोहल्ले म तालाब और नािलयाँ स्वच्छ रखना; झीलों के पास कू ड़ा न फें कना; स्थानीय उपवन या पुर ाने वृक्ष की रक्षा; वृक्ष कटाई और
वनािग्न की सूचना दे ना

जंतुओं के घोंस ले न छे ड़ना, फू ल न तोड़ना; जंग ली पिक्षयों को पालतू न बनाना; िनराि त पशुओ ं के साथ करुणा; छत पर उथला जल-पात्र
प्र त रखना

प्रचार-प्रसार िभित्त पित्रका, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर पितयोिगता, छोटी कक्षाओं के िलए संभाषण, िव ालय में जैव िविवधता िदवस

यहाँ समूह काय ही सही व ध क्य है: छह वद्याथ कक्षा म छह भन्न घर और छह भन्न ग लयाँ लेकर आते ह।
इससे बनी सूची कसी एक वद्याथ क सूची से कह अ धक समृद्ध होती है — और चूँ क सुझाव सबका है, इस लए
उत्तरदा यत्व भी सब अनुभव करते ह।

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प्र.7 अपने प रवार या पड़ोस के वृद्धजन से बातचीत कर व भन्न प्रकार के ऐसे पौध और जंतुओं के वषय म
जानकारी प्राप्त कर जन्ह वे वतमान म दे खते ह, परंतु पहले नह दे खते थे अथवा जनको वे पहले दे खते थे पर
अब नह दे खते ह। इन पौध और जंतुओं के चत्र एक त्रत कर और उन्ह एक स्क्रैपबुक म चपकाएँ।

व ध: तीन-चार वृद्धजन से बात क जए। दो प्रश्न पू छए — "आपके बचपन म कौन-से पौधे और जंतु दखते थे जो अब नह
दखते?" और "आज कौन-से दखते ह जो पहले नह थे?" उनके उत्तर उन्ह के शब्द म ल खए, फर पुरानी प त्रकाओं, समाचार
पत्र या प्रटआउट से चत्र एकत्र कर स्क्रैपबुक म शीषक स हत चपकाइए।

पहले दखते थे, अब कम दखते ह अब दखते ह, पहले नह थे

गौरै या, िगद्ध, जुग नू, मध मु क्खी, मेंढक, िसयार, दे शी गाय की बड़ी संख्या में कबूतर, हर गली में कु त्ते और िबिल्लयाँ, यूके िलप्टस और
नस्ले ं, दे शी आम की िकस्में, स्थानीय मोटे अनाज (कोदो, सुबबूल के बागान, गाजर घास, जलकुं भी, संक र सिब्ज़याँ, िवदे शी सजावटी
कु टकी) फू ल

सूची दोन दशाओं म क्य बदलती है: कुछ जीव इस लए लुप्त होते ह क्य क उनका आवास नष्ट हो गया —
तालाब पाट दए गए, पुराने घर कंक्र ट म बदल गए, खेत म क टनाशक छड़का जाने लगा। दूसरे इस लए बढ़ते या
आते ह क्य क नया प रवेश उन्ह रास आता है — कबूतर कंक्र ट क मुँडेर पर सुख से घ सला बनाते ह और
यूके लप्टस जैसे तेज़ बढ़ने वाले वृक्ष लोग स्वयं लगाते ह। इस लए बदलते आवास का अथ केवल "कम जंतु" नह है;
अथ है भन्न समुच्चय — और प्राय: छोटा तथा कम व वध।

सुझाव: वृद्धजन का नाम, आयु, वे कस गाँव या नगर क बात कर रहे ह और लगभग कौन-से वष क — यह सब
अवश्य ल खए। इनके बना स्मृ त केवल कहानी है; इनके साथ वह आँकड़ा बन जाती है जससे आपका वद्यालय
आगे तुलना कर सकेगा।

अध्याय — एक नज़र म
हमारे चार ओर पौध और जंतुओं क वशाल व वधता है। कसी क्षेत्र म पाई जाने वाली यह व वधता उस क्षेत्र क जैव
व वधता कहलाती है और इसके हर सदस्य क अपनी भू मका होती है।
पौध और जंतुओं के समूह उनक समानताओं और भन्नताओं के आधार पर बनाए जाते ह। समूह बनाने से उनका अध्ययन
सरल हो जाता है — ठ क वैसे ही जैसे पुस्तक व्यव स्थत करने से बस्ता सु वधाजनक हो जाता है।
ऊँचाई और तने के आधार पर पौधे शाक, झाड़ी और वृक्ष होते ह; दुबल तने वाले पौधे आरोही लता और वसप लता
कहलाते ह। टमाटर शाक, गुलाब झाड़ी और आम वृक्ष है।
प त्तय म जा लकारूपी शरा- वन्यास (गुड़हल) या समांतर शरा- वन्यास (केला, घास) होता है। जड़ दो प्रकार क होती ह
— मूसला जड़ (सरस ) और झकड़ा (रेशेदार) जड़ (घास)।
ये लक्षण साथ-साथ चलते ह। बीजपत्री पौध (दो बीजपत्र, जैसे चना) म जा लकारूपी शरा- वन्यास और मूसला जड़ होती
है; एकबीजपत्री पौध (एक बीजपत्र, जैसे मक्का) म समांतर शरा- वन्यास और झकड़ा जड़ होती है।

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जंतुओं के समूह उनक ग त और ग त के लए प्रयुक्त शरीर के अंग — टाँग, पंख, पख — तथा आकृ त, आकार व रंग जैसी
अनेक अन्य वशेषताओं के आधार पर बनाए जाते ह।
जो व शष्ट वशेषताएँ कसी जीव को अपने प रवेश म जी वत रहने योग्य बनाती ह, वे अनुकूलन कहलाती ह; जहाँ वह रहता
है वह उसका आवास है, जो थलीय या जलीय हो सकता है। मढक जैसे जंतु उभयचर कहलाते ह।
आवास क क्ष त से जैव व वधता क हा न होती है। बाघ प रयोजना (1973), चीता पुनवास प रयोजना (2022) और
समुदाय ारा संर क्षत प वत्र उपवन बताते ह क जैव व वधता कैसे बचाई जा सकती है।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय से उदाहरण कहाँ
आया है

जैव व वधता िकसी िवशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जंतओ
ु ं की केरल का साइलट वैली का आद्र पृष्ठ 13
िविवधता सदाबहार वन

समूहन सामान्य िवशेषताओं के आधार पर वस्तुओ ं को समूहों में बस्ते म पुस्तक और नोटबुक को पृष्ठ 14
व्यविस्थत करना व्यव स्थत करना

शाक छोटा पौधा, तना कोमल, हरा और पतला टमाटर, ध नया पृष्ठ 17

झाड़ी मध्यम ऊँचाई; अनेक कठोर, पतले , भूरे तने भूिम के िनकट से गुलाब, गुड़हल पृष्ठ 17
शािखत

वृक्ष ऊँचा पौधा, तना कठोर, मोटा, भूर ा और काष्ठीय; शाखाएँ आम, नीम पृष्ठ 16
ऊपर से

आरोही / वसप लता दुबल तना — आरोही को सहारा चािहए, िवसप भूिम पर मनी प्लांट (आरोही), क ( वसप ) पृष्ठ 17
फै लती है

जा लकारूपी शरा- मोटी मध्य िशरा के दोनों ओर िशराओं का जाल जैस ा पैटन गुड़हल, आम, चना पृष्ठ 17
वन्यास

समांतर शरा- वन्यास पत्ती में समानांतर चलती हुई िशराएँ केला, घास, गेहूँ, मक्का पृष्ठ 17

मूसला जड़ एक मुख्य जड़ िजससे छोटी पाश्व जड़ें िनकलती है ं सरस , मूली, गुड़हल पृष्ठ 18

झकड़ा (रेशेदार) जड़ तने के आधार से िनकलती समान माप की पतली जड़ों का घास, गेहूँ, लेमन घास पृष्ठ 18
ग च्ु छा

बीजपत्र बीज के भीतर का भाग िजसमें भोजन संिचत रहता है — चना ( बीजपत्री), मक्का पृष्ठ 20
ि बीजपत्री में 2, एकबीजपत्री में 1 (एकबीजपत्री)

अनुकूलन वह िविशष्ट िवशेषता जो जीव को अपने क्षेत्र में जीिवत रहने ऊँट का कूबड़, दे वदार क शंक्वाकार पृष्ठ 26
योग्य बनाती है आकृ त

आवास वह स्थान जहाँ पौधे और जंत ु रहते है ं ऊँट के लए मरुस्थल, समुद्र कछु ए के पृष्ठ 26
लए महासागर

थलीय / जलीय थल पर / जल में आवास; दोनों में रहने वाले जंत ु उभयचर वन और मरुस्थल / तालाब और पृष्ठ 27
कहलाते है ं महासागर; मढक

प वत्र उपवन स्थानीय समुद ाय ारा संर िक्षत अबािधत वन क्षेत्र प मी घाट के प वत्र उपवन पृष्ठ 28

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages59
Languagehindi
Updated19 Sep 2026