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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 8: जल क व वध अव ाओं क
या ा
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
137 – 155 25 71 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 62 pages
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: जल क व वध अव ाओं क
यात्रा
कक्षा 6 व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय 8 जल क व वध अव ाओं क यात्रा के सभी प्रश्न के वस्तृत एनसीईआरट समाधान। इसम
क्रयाकलाप 8.1 से 8.11 तक के सभी प्रश्न, आइए, चत्र बनाएँ तथा करने के लए कुछ और बॉक्स, पृष्ठ 137 से 152 तक के सभी पाठ्य प्रश्न,
आइए, और अ धक सीख के दस प्रश्न एवं और भी सीख स म्म लत ह। पघलना, उबलना, वाष्पीकरण, संघनन, शीतलन प्रभाव और जल चक्र को
नामां कत चत्र स हत समझाया गया है और प्रत्येक ताप अपने मात्रक °C के साथ दया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 6) 137 – 155
खं ड प्रश्न
25 71
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 137
अध्याय का आरंभ — शकंजी क बफ दे खकर आवी और थरव का वचार
प्र.1 आवी के वचार थरव से अलग ह। आप क्या सोचते ह? वे ऐसा क्य सोचते ह?
आवी सही है। बफ और जल भन्न- भन्न पदाथ नह ह — ये एक ही पदाथ क दो अव ाएँ ह।
थरव का तक था क बफ ठोस लगती है और हाथ म पकड़ी जा सकती है जब क जल नह । यह अंतर सत्य है, परंतु यह अव ा का
अंतर है, पदाथ का नह ।
थरव ने क्या दे खा वास्तव म यह क्या दशाता है
बफ कठोर है और अपना आकार बनाए रखती है ठोस अवस्था में कण िनिश्चत स्थानों पर बँधे रहते है ं
जल को हाथ म नह पकड़ा जा सकता द व अवस्था में कण एक-दू स रे पर िफसल सकते है,ं इसिलए जल बह जाता है
क्या पदाथ एक ही है? हाँ — कु छ जोड़ ा या हटाया नही ं गया, के वल ऊष्मा का अंतर है
हम यह न त रूप से क्य कह सकते ह: यह प रवतन दोन दशाओं म होता है। जल को जर म र खए, बफ
बन जाती है; बफ को बाहर नका लए, वही जल वापस मल जाता है। य द बफ कोई और पदाथ होती तो पघलने पर
वही जल वापस न मलता। शकंजी म पड़ी बफ भी पघलकर उसी म मल जाती है।
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स्वयं जाँच: एक बंद बोतल म 100 g जल लेकर तौ लए। उसे जमाकर पुन: तौ लए। पाठ्यांक वही रहता है — वह
बफ वही जल है।
प्र.2 क्या आपको लगता है क थरव सही है? आप इसक जाँच कैसे कर सकते ह?
नह , थरव सही नह है। वह सोचता है क जर म रखने पर जल म कुछ मल जाता है और इसी लए बफ बनती है। वास्तव म
कुछ नह मलता — जल केवल ऊष्मा खोता है और जम जाता है।
जाँच कैसे कर — घर पर कया जा सकने वाला सरल परीक्षण:
1. एक छोट बोतल म पीने का जल भ रए। उसका स्तर च ह्नत क जए और रसोई के तराजू पर उसका द्रव्यमान अं कत क जए।
2. ढक्कन कसकर बंद करके बोतल को कुछ घंट के लए जर म र खए, जब तक जल बफ न बन जाए।
3. बाहर नकालकर पुन: तौ लए — द्रव्यमान वही रहता है। बंद बोतल म कुछ भी बाहर से नह गया।
4. बोतल को मेज पर र खए। बफ पुन: जल म पघल जाती है, और वह जल पहले जैसा ही स्वच्छ व स्वादहीन होता है।
यह परीक्षण प्रश्न का नपटारा क्य कर दे ता है: य द जर म कुछ मला होता तो (क) द्रव्यमान बढ़ जाता, और
(ख) पघलने पर मला जल कसी न कसी रूप म भन्न होता — धुँधला, नमक न या अ धक मात्रा म। ऐसा कुछ नह
होता। केवल ताप बदला था: जल 0 °C तक ठं डा हुआ और जम गया।
क्या आप जानते ह? जल एक व चत्र पदाथ है — जमने पर यह थोड़ा फैलता है। इसी लए पूरी भरी बोतल कभी-
कभी जर म फूल जाती है या चटक जाती है। जल क मात्रा उतनी ही रहती है, केवल उसका आयतन बढ़ जाता है।
क्रयाकलाप 8.1— आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 138
कप म बफ का एक टु कड़ा रखकर दे खना
क्रयाकलाप
प्र.1 कप म बफ का एक टु कड़ा डाल, इसे मेज पर रख और इसका अवलोकन कर। इन अवलोकन से आप क्या
नष्कष नकालते ह?
अवलोकन: बफ का टु कड़ा धीरे-धीरे छोटा होता जाता है, उसके नुक ले कनारे गोल हो जाते ह और कुछ समय बाद कप म केवल
जल बचता है। कोई नया पदाथ नह बनता और कुछ शेष नह रहता।
नष्कष:
गरम कमरे म रखने पर बफ स्वयं जल म प रव तत हो जाती है। इस प रवतन को पघलना कहते ह।
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यह इस लए होता है क्य क बफ कमरे क वायु और कप से ऊष्मा लेती है। बफ 0 °C पर पघलती है और कमरा उससे कह
अ धक गरम होता है।
चूँ क बफ पूरी तरह जल म ही बदल जाती है और कुछ और नह बनता, अत: बफ और जल एक ही पदाथ के रूप ह।
ऐसा क्य होता है: बफ म कण न श्चत स्थान पर बँधे रहते ह और केवल कंपन कर सकते ह। कमरे क ऊष्मा से
उनका कंपन बढ़ता है, अंतत: वे अपने स्थान से मुक्त होकर एक-दूसरे पर फसलने लगते ह — बफ जल बन जाती
है।
प्रयास कर: एक टु कड़ा मेज पर रखे कप म और वैसा ही दूसरा टु कड़ा अलमारी के भीतर रखे कप म डा लए। मेज
वाला पहले पघलता है क्य क उसे ऊष्मा तेजी से मलती है। इस जाँच म एक बार म केवल एक ही स्थ त बद लए।
प्र.2 क्या इसका यह अथ है क बफ व जल एक ही पदाथ ह?
हाँ। पाठ्यपुस्तक के शब्द म — बफ व जल एक ही पदाथ के दो रूप ह। इन रूप को अवस्थाएँ भी कहा जाता है।
दोन अवस्थाओं का व्यवहार बहुत भन्न है, और पुस्तक इनम से दो अंतर वशेष रूप से बताती है:
व्यवहार जल (द्रव) बफ (ठोस)
क्या यह बहता है? हाँ, जल बहता है नही ं, बफ नही ं बहती
क्या यह छलकता है? हाँ, जल छलकता है नही ं, बफ नही ं छलकती
क्या इसे हाथ म पकड़ सकते ह? नही ं हाँ
क्या यह अपना आकार बनाए रखता है? नही ं, पात्र का आकार ले ले ता है हाँ
पदाथ एक होने पर भी व्यवहार भन्न क्य : भन्नता कण क व्यव ा और उनक स्वतंत्रता म है, पदाथ म
नह । बँधे हुए कण कठोर ठोस बनाते ह; ढ ले, फसलते कण बहने वाला द्रव बनाते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 138
8.1 जल के वलुप्त होने क क्रया क जाँच
प्र.1 क्या आपने कभी ग म से जल को वलुप्त होते दे खा है? यह कहाँ जाता होगा? अपने मत्र से चचा क जए।
हाँ। सुबह जो ग े जल से भरे रहते ह, वे शाम तक छोटे हो जाते ह या पूरी तरह सूख जाते ह।
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जल ग े से दो रास्त से जाता है:
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यह भू म म रस जाता है। म , बालू और गारे के कण के बीच सूक्ष्म रक्त स्थान होते ह जनम जल नीचे
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. ष्पत हो जाता है। ग े क सतह का जल धीरे-धीरे जलवाष्प म बदलकर वायु मgमल
a l जाता है और अदृश्य हो
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दोन हो रहे ह, यह कैसे जान: ढ ली म पर बना ग ा बहुत जल्द गायब होता है — वहाँ रसाव अ धक है। पर
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सीमट के फश या पत्थर क शला पर बना ग ा भी सूख जाता है, और वहाँ जल कह रस नह सकता, अत: वह
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m है, दोन रास्ते साथ-साथ काम करते ह।
अवश्य वा ष्पत हुआ होगा। खेल के मैदान म, जहाँeम
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चचा के लए सुझाव: मत्र से पू छए क धूप वाला ग ा पहले सूखता है या पेड़ क छाया वाला। य द केवल रसाव
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ही कारण होता तो छाया से कोई अंतर नह पड़ना चा हए था। अंतर पड़ता है — यही वाष्पीकरण का प्रमाण है।
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a glप्र.2 आपने जल को और कहाँ वलुप्त होते दे खा है? क्या आप कोई संभा वत कारण सोच सकते ह क ऐसा क्य होता
है?
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a प्तl होता दखता है:
जल दै नक जीवन के अनेक अवसर पर वलुg
तार पर टँ गे गीले कपड़े सूख जाते ह।
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प छा लगा फश कुछ ही मनट म सूख जाता है।
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पंखे के नीचे बैठने पर शरीर का पसीना सूख जाता है।
धुल.े cहुए
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se गरम तवे पर छड़का जल तुरंत गायब हो जाता है।
बतन और रसोई क गीली सतह अपने आप सूख जाते ह।
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agl नहाने के बाद बाल सूख जाते ह; जेब म रखा गीला रूमाल सूख जाता है।
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m जाता है। a
रात भर खुले रखे गलास का जल सुबह कुछ कम हो जाता है।
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नमक क क्या रय म समुद्र का जल सूखकर नमक
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संभा वत कारण: इनम से कसी agभीl स्थ त म जल नष्ट नह होता। वह जलवाष्प नामक गैस म बदलकर वायु म
मल जाता है। जलवाष्प अदृश्य होती है, इसी लए ऐसा लगता है मानो जल वलुप्त हो गया। इस प्रक्रम को
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वाष्पीकरण कहते ह।
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.cक्या आप जानते ह? इनम से कसी उदाहरण म जल को 100 °C तक गरम
a gनह कया जाता। वाष्पीकरण के लए
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उबालना आवश्यक नह — यह कमरे के सामान्य तापमान पर, दन-रात, चुपचाप चलता रहता है।
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प्र.3 आपने दे खा होगा क बतन धोने के कुछ समय बाद बतन क सतह पर बचा हुआ जल सूख जाता है। क्या आपके
ारा पहले सोचा गया कारण इस त म भी जल के वलुप्त होने क व्याख्या करता है?
केवल आं शक रूप से। ग े के लए बताए गए दो कारण म से यहाँ केवल एक ही लागू हो सकता है।
कारण खेल के मैदान का ग ा स्ट ल के बतन पर बचा जल
सतह म रसना संभव — िम ी के कणों के बीच िरक्त स्थान होते है ं संभव नही ं — स्टील िचकना है, उसमें ऐसे िर क्त स्थान नही ं होते
वायु म वाष्पीकरण संभव संभव — और वास्तव में यही होता है
अत: " म ने सोख लया" वाला कारण स्ट ल क प्लेट या कटोरी पर लागू नह होता। वहाँ जल अवश्य ही वाष्पीकरण ारा जा
रहा है।
यह उदाहरण इतना उपयोगी क्य है: यहाँ दो संभा वत कारण म से एक को सतह क प्रकृ त ने ही समाप्त कर
दया। जहाँ केवल एक कारण काम कर सकता हो, वहाँ जाँच करना दो मले-जुले कारण को अलग करने क सुंदर
व ध है — वै ा नक ठ क यही करते ह।
प्र.4 आवी सोच रही थी क बतन क सतह से जल रस गया होगा। थरव सोचता है क बतन क सतह से जल नह
रसता है। एक क्रयाकलाप क रूपरेखा बनाएँ और जाँच क कसका कथन सही है।
क्रयाकलाप ऐसा होना चा हए जो रसाव हो रहा हो तो उसे दखा सके। अत: जल के वलुप्त होने के दौरान हम सतह के दूसरी
ओर भी दे खते रहना होगा।
रूपरेखा:
1. एक साफ, सूखी स्ट ल क प्लेट ली जए और उसक नचली सतह प छकर पूरी तरह सुखा ली जए।
2. ऊपरी सतह के बीच म एक चम्मच जल र खए।
3. प्लेट को दो सूखी छड़ पर या दो गलास के कनार पर टकाइए ता क नचली सतह दखती रहे। नीचे सूखे कागज क एक
शीट र खए।
4. प्रत्येक 10 मनट पर नचली सतह और कागज दे खए। ऊपर कतना जल बचा है, वह भी अं कत क जए।
5. जब तक ऊपर का जल पूरी तरह वलुप्त न हो जाए, तब तक यह क्रम चलाइए।
प रणाम कैसे पढ़:
य द नचली सतह पर बूँद दख या नीचे रखा कागज गीला हो जाए → जल रस रहा है (आवी का वचार)।
य द ऊपर का जल गायब हो जाए और नचली सतह तथा कागज पूरी तरह सूखे रह → जल नह रस रहा ( थरव का वचार),
और वह अवश्य वायु म गया होगा।
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वास्तव म क्या होता है: कागज सूखा ही रहता है, अत: थरव सही है। यही आपक पुस्तक का क्रयाकलाप 8.2
है।
सुझाव: नष्पक्ष जाँच के लए वैसी ही दूसरी प्लेट पर उतना ही जल रखकर उसे उलट कटोरी से ढक द जए। ढक
हुई प्लेट से बहुत कम जल वलुप्त होता है — इससे सद्ध होता है क जल वायु म जा रहा है, स्ट ल से होकर नह ।
क्रयाकलाप 8.2— आइए, जाँच कर — पृष्ठ 138 और 139
स्ट ल क प्लेट पर एक चम्मच जल ( चत्र 8.1)
क्रयाकलाप
प्र.1 आप क्या नष्कष नकालते ह? क्या यह क्रयाकलाप इस नष्कष पर पहुँचने के लए पयाप्त है क स्ट ल क प्लेट
से जल नह रसता है?
नष्कष: स्ट ल क प्लेट पर रखा जल धीरे-धीरे छोटा होता जाता है और अंतत: पूरी तरह वलुप्त हो जाता है, जब क इस पूरे समय
प्लेट का नचला भाग पूरी तरह सूखा रहता है। अत: जल स्ट ल से होकर नह गया।
क्या यह क्रयाकलाप पयाप्त है? इस वशेष प्रश्न के लए हाँ — और यह एक अच्छ जाँच है क्य क:
स्ट ल म छद्र नह होते। य द कुछ रसकर पार जाता तो वह दूसरी ओर दखता, और हम नय मत अंतराल पर वही दे खते रहे।
नीचे कुछ भी सोखने वाला नह रखा गया था, इस लए रसाव छप नह सकता था।
पर नष्कष सावधानी से नका लए: यह क्रयाकलाप सद्ध करता है क स्ट ल से जल नह रसता। यह अकेले
यह सद्ध नह करता क वलुप्त होने का कारण वाष्पीकरण ही है — यह केवल दूसरी संभावना को हटाता है। पूण
नश्चय के लए इसे ढक हुई प्लेट के साथ भी दोहराना चा हए, जहाँ वाष्प बाहर न जा सके। तब बहुत कम जल
वलुप्त होता है, और यही वाष्पीकरण को कारण सद्ध करता है।
सुझाव: उतना ही जल एक सूखी म क तश्तरी पर भी र खए। वहाँ नचली सतह नम हो जाती है, क्य क म
सरंध्र होती है। दोन क तुलना से सतह क भू मका बल्कुल स्पष्ट हो जाती है।
प्र.2 य द स्ट ल क प्लेट से जल नह रसता है तो फर जल कहाँ गया?
वह वायु म चला गया — जल क गैसीय अवस्था म बदलकर, जसे जलवाष्प कहते ह।
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द व जल + कमरे की ऊ ष्मा → जलवाष्प (अदृ श्य गैस)
इस पिरवतन को वाष्पीकरण कहते है।
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जलवाष्प के वषय म तीन बात याद र खए:
यह अदृश्य होती है — इसी लए जल वलुप्त हुआ प्रतीत होता है।
यह जल क तीसरी अव ा है, बफ (ठोस) और जल (द्रव) के साथ।
यह हमारे चार ओर क वायु म सदै व वद्यमान रहती है, बंद कमरे म भी।
सामान्य तापमान पर भी जल क्य चला जाता है: जल के कण सदै व ग तमान रहते ह, कुछ तेज तो कुछ धीमे।
सतह पर उप स्थत सबसे तेज कण वायु म नकल भागते ह। यह क्रम हर ताप पर नरंतर चलता है — इसे जल के
100 °C तक पहुँचने क प्रतीक्षा नह करनी पड़ती।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 139
8.1 जल के वलुप्त होने क क्रया क जाँच — वाष्पीकरण
क्या आप जानते ह?
प्र.1 जब हम डोसा बनाते ह तब हम गरम तवे पर जल छड़कते ह और जल वलुप्त हो जाता है। यह कहाँ जाता है?
जल भाप म बदलकर वायु म चला जाता है। पुस्तक के शब्द म — गरम तवे पर जो जल छड़का जाता है, वह भाप म बदल जाता
है। भाप वास्तव म जलवाष्प है, जसका कुछ भाग जल क बूँद म प रव तत हो जाता है।
चरणबद्ध रूप से:
1. तवा बहुत गरम होता है — 100 °C से कह अ धक।
2. बूँद छू ते ही बहुत अ धक ऊष्मा लेकर तुरंत वाष्प म बदल जाती ह, छन्न क ध्व न के साथ।
3. तवे के ठ क ऊपर वाष्प ठं डी वायु से मलती है और उसका कुछ भाग पुन: छोट -छोट बूँद म बदल जाता है। यही वह सफेद
बादल है जो ऊपर उठता दखता है।
4. और ऊपर जाकर ये बूँद फर वा ष्पत हो जाती ह और वाष्प रसोई क वायु म मल जाती है।
क्या आप जानते ह? वास्तव म, जलवाष्प अदृश्य होती है ले कन भाप म छोट -छोट बूँद क उप स्थ त इसे
दृश्यमान बनाती है। अत: जो सफेद धुँआ-सा दखता है वह वाष्प है ही नह — वह बहुत सूक्ष्म जल-बूँद क धुंध है,
अथात् आँख के सामने होता संघनन।
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रसोइया ऐसा क्य करता है: जल छड़ककर पता चलता है क तवा पयाप्त गरम है या नह — य द बूँद फसलकर
तुरंत गायब ह तो तवा तैयार है। साथ ही वाष्प कुछ ऊष्मा भी ले जाती है जससे तवा थोड़ा ठं डा होकर घोल को
चपकने नह दे ता और डोसा समान रूप से फैलता है।
प्र.2 वाष्पीकरण क प्र क्रया कमरे के सामान्य तापमान पर भी नरंतर होती रहती है। क्या आप वाष्पीकरण के अन्य
उदाहरण सोच सकते ह?
पुस्तक तीन उदाहरण दे ती है — गीले कपड़े, प छा लगे फश और शरीर के पसीने का सूखना। भारतीय घर से कुछ और
उदाहरण:
कहाँ दखता है क्या वा ष्पत हो रहा है
तार पर टँ गे कपड़े, खूँट पर लटका गीला तौ लया कपड़े से जल
प छा लगा फश, धुला हुआ बरामदा फश से जल
पंखे के नीचे सूखता पसीना त्वचा से जल
रैक पर रखे धुले स्ट ल के बतन धातु पर लगा जल
छत पर सूखते पापड़, ब ड़याँ, आम क फाँक और लाल मच खाद्य पदाथ के भीतर का जल
खुली बाल्ट या प क्षय के जल-पात्र का घटता स्तर खुल ी सतह से जल
स्नान के बाद सूखते बाल बालों से जल
गुजरात और त मलनाडु क नमक-क्या रयाँ समुद का जल — नमक पीछे रह जाता है
सप्ताह भर म मटके का घटता जल िछद ों से िरसकर वािष्पत होता जल
सबम समान बात: प्रत्येक स्थ त म द्रव क सतह वायु के संपक म खुली है और ताप सामान्य है। न कोई आग, न
100 °C — केवल सतह से सबसे तेज कण का नरंतर, मौन पलायन।
प्र.3 अब आप क्या सोचते ह — ग से जल के वलुप्त होने का क्या कारण है? क्या यह: (क) भू म म जल के रसाव
के कारण है (ख) जल के वाष्पीकरण के कारण है या (ग) इन दोन के कारण है?
(ग) इन दोन के कारण है।
खेल के मैदान क सतह म क है, अत: जल के लए दोन रास्ते खुले ह:
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रसाव: जल म के कण के बीच के रक्त स्थान म उतरकर नीचे जाकर भू-जल बन जाता है।
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वाष्पीकरण: ग े क खुली सतह का जल वाष्प बनकर वायु म मल जाता है। सूय ारा भू म गरम होने से यह तेज हो जाता है।
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केवल एक कारण क्य नह चुन सकते: क्रयाकलाप 8.2 ने दखाया क जल ऐसी सतह से भी वा ष्पत होता है
l वह रस नह सकता, अत: मैदान म भी वाष्पीकरण अवश्य हो रहा है। साथ ही सूखी म म जल को उतरते
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aसबने दे खा है, अत: रसाव भी हो रहा है। जब दोन कारण संभव ह तो ईमानदार उत्तर यही है क दोन काम कर रहे
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ह — और उनका अनुपात स्थान के अनुसार बदलता है। सीमट के फश पर केवल वाष्पीकरण संभव है; ढ ली बालू
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पर अ धकांश काम रसाव करता है।
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स्वयं जाँच: वषा के बाद म वाले एक ग े और सीमट वाले एक ग े के कनारे चॉक से च ह्नत क जए और सूखने
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का समय अं कत क जए। म वाला प्राय: पहले सूखता है, क्य क उसके पास एक के स्थान पर दो नकास ह।
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a s emजैसे ही आप अपने हाथ पर हड सै नटाइजर मलते ह, वह वलुप्त हो जाता है। इसका क्या होता है?
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a s emवाष्प म बदलकर वायु म मल जाता है। न वह त्वचा म सोख लया जाता है
सै नटाइजर वा ष्पत हो जाता है — वह द्रव अवस्था से
और न ही "खत्म" होता है।
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वह इतनी तेजी से क्य गायब होता है, इसके दो कारण ह:
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सै नटाइजर मुख्यत: ऐल्कोहल ( स्प रट) होता है, और ऐल्कोहल उसी ताप पर जल से कह अ धक तेजी से वा ष्पत होता है।
m त्त क्षेत्र सदैव तीव्र वाष्पीकरण देता है ( क्रयाकलाप 8.7)। as e
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मलने से वह दोन हथे लय और उँ ग लय पर बहुत पतली परत म फैल जाता है, अत: अनावृत्त क्षेत्र बहुत बढ़ जाता है — और
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agl हाथ ठं डे क्य लगते ह: वाष्प म बदलने के लए द्रव को ऊष्मा चा हए, और वह ऊष्मा वह आपक त्वचा से लेता
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है। हथेली ऊष्मा खोकर ठं डी लगती है। यही वह शीतलन प्रभाव है जो मटके का जल ठं डा रखता है और पसीने से
हम ठं डक दे ता है — खंड 8.6 म आप इसे फरco
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मलगे
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प्रयास कर: एक हाथ क पीठ पर agसैl नटाइजर क एक बूँद और दूसरे पर जल क एक बूँद र खए। दोन पर धीरे से
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फूँक मा रए। सै नटाइजर पहले जाता है और अ धक ठं डा लगता है। भन्न द्रव क वाष्पन दर भन्न होती है।
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a s em चत्र बनाएँ — पृष्ठ 139
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
गरम तवे पर छड़के गए जल का क्या होता है
आइए, चत्र बनाएँ
प्र.1 जल का क्या होता है, इसके वषय म एक वस्तृत रेखा चत्र नामांकन और शीषक के साथ बनाएँ।
आपके रेखा चत्र म तीन बात अवश्य होनी चा हए: जल क बूँद स हत गरम तवा, उनसे उठती वाष्प, और वाष्प का कुछ भाग पुन:
छोट बूँद म बदलने से बनी दखाई दे ने वाली सफेद भाप। प्रत्येक का नामांकन क जए और नीचे शीषक ल खए।
गरम तवे पर िछड़ के गए जल का क्या होता है
भाप — वाष्प + छोटी बूदँ े ं (िदखाई दे ने वाला सफेद बादल)
उठती जलवाष्प
जल की बूदँ े ं (द व) (अदृ श्य)
गरम तवा (100 °C से कही ं अिधक)
गरम तवे पर छड़का जल ऊष्मा लेकर अदृश्य जलवाष्प म बदल जाता है, और उस वाष्प का कुछ भाग तुरंत ठं डा होकर छोट -छोट बूँद म
बदल जाता है — यही दखाई दे ने वाली सफेद भाप है।
आपके नामांकन म ये होने चा हए:
गरम तवा — जो ऊष्मा दे ता है।
जल क बूँद — द्रव अवस्था।
जलवाष्प — गैसीय अवस्था, अदृश्य।
भाप — वाष्प के साथ छोट बूँद, इसी लए दखाई दे ने वाली।
नमूना शीषक: "गरम तवे पर छड़का जल तवे से ऊष्मा लेकर अदृश्य जलवाष्प म बदल जाता है (वाष्पीकरण),
और इस वाष्प का एक भाग वायु म ठं डा होकर पुन: छोट बूँद म बदल जाता है, जसे हम सफेद भाप के रूप म
दे खते ह।"
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
क्रयाकलाप 8.3— आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 140
8.2 एक और रहस्य — काँच के गलास म ठं डा जल व बफ के टु कड़े
क्रयाकलाप
प्र.1 एक काँच के गलास म ठं डा जल लेकर उसम बफ के कुछ टु कड़े डाल, इसे पाँच मनट तक बना हलाए-डु लाए
रख और अवलोकन कर। अपने अवलोकन और मन म उठने वाले प्रश्न को ता लका 8.1 म अं कत कर।
मेरे अवलोकन मेरे प्रश्न
ता लका 8.1, पृष्ठ 140 — अवलोकन और प्रश्न को अं कत कर (पुस्तक के अनुसार रक्त)।
ता लका 8.1 इस प्रकार भरी जा सकती है। आप अपने अवलोकन इसी ढं ग से ल खए — एक स्तंभ म जो दखे, दूसरे म जो प्रश्न
उठे ।
मेरे अवलोकन मेरे प्रश्न
िगलास की बाहरी सतह पर चारों ओर जल की छोटी-छोटी बूदँ े ं िदखाई दे ती जल तो मने केवल गलास के भीतर डाला था, तो ये बूँद कहाँ से
है।
ं आईं?
छोटी बूदँ े ं धीरे -धीरे िमलकर बड़ी बूदँ े ं बन जाती है ं और नीचे की ओर बहने छोट बूँद आपस म क्य मल जाती ह?
लगती है।
ं
बाहरी सतह छू ने पर ठं डी और गीली लगती है। क्या गलास से रसाव हो रहा है? या ठं डक ही जल उत्पन्न कर
रही है?
िगलास के नीचे मेज पर जल का घे र ा बन जाता है। क्या भीतर का जल-स्तर उतना नीचे चला जाएगा?
बफ के टुक ड़े छोटे होते जाते है ं और अंतत: िपघल जाते है।
ं क्या बफ के पघलने का बाहर क बूँद से कोई संबंध है?
धातु के पात्र से भी यही होता है, पर सामान्य ताप के जल वाले िगलास से तो क्या बूँद बनने के लए ठं डी सतह आवश्यक है?
नही ं।
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पुस्तक प्रश्न भी लखवाती क्य है: व ान म एक अच्छा प्रश्न उतना ही मूल्यवान है जतना एक अच्छा अवलोकन।
ऊपर क अं तम पं क्त वही प्रश्न है जो अंतत: रहस्य सुलझा दे ता है — वह ठं डे और सामान्य ताप वाले गलास क
तुलना करके सीधे असली कारण क ओर संकेत करता है।
प्र.2 काँच के गलास क बाहरी सतह पर जल क बूँद क उप त को समझाते हुए उसके संभा वत कारण बताएँ।
अपने मत्र से चचा कर और इसके संभा वत कारण को चत्र 8.3 म लख।
हो सकता है िक काँच के
िगलास से बफ िनकलकर
िपघल गई हो।
चत्र 8.3, पृष्ठ 140 — पुन न मत रेखा चत्र: तीन रक्त बुलबुल म अपने संभा वत कारण लख।
हर वह कारण ल खए जो संभव लगे, चाहे बाद म वह गलत नकले। चत्र 8.3 और चत्र 8.4 के चार ब े यही करते ह।
संभा वत कारण इसक जाँच कैसे कर नणय
गलास से बफ नकलकर बाहर पघल गई होगी। िकनारे को ध्यान से दे िखए; बफ के टुक ड़े पूरे समय भीतर गलत
ही रहते है।
ं
काँच क द वार से जल रस गया होगा। जल के स्तर को माक र से िचि त कर 30 िमनट बाद गलत — स्तर नीचे
दे िखए। नही ं जाता
बफ डालते समय जल छलक गया होगा। धीरे से डािलए, िगलास पोंछकर सुखाइए, िफर दे िखए। गलत — बूदँ े ं िफर भी
बनती है ं
गलास धोने के बाद पहले से ही गीला था। आरंभ करने से पहले उसे पूर ी तरह पोंछ लीिजए। गलत — बूदँ े ं िफर भी
बनती है ं
वायु म वद्यमान जलवाष्प ठं डे काँच से मलकर पास में सामान्य ताप के जल वाला दू स रा िगलास रिखए। सही
जल बन जाती है। उस पर बूदँ े ं नही ं बनती ं।
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अं तम कारण ही क्य सही है: केवल यही एक कारण सभी अवलोकन क एक साथ व्याख्या करता है — बूँद
केवल ठं डी सतह पर क्य बनती ह, काँच के साथ-साथ धातु पर भी क्य बनती ह, भीतर का स्तर क्य नह घटता,
और शुष्क दन क अपेक्षा आद्र दन म अ धक बूँद क्य बनती ह।
सुझाव: चत्र 8.3 म कारण ऐसे वाक्य म ल खए जनक जाँच क जा सके। " गलास म जादू है" क जाँच नह हो
सकती; "काँच से जल रस गया" क हो सकती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 141 और 142
8.2 एक और रहस्य — चचा क श्रृंखला और संघनन
प्र.1 आवी और थरव ने भी कई संभा वत कारण पर चचा क । आप इन संभा वत कारण के वषय म क्या सोचते ह
जनका उल्लेख चत्र 8.4 म कया गया है?
मुझे लगता है िक काँच
के िगलास से कु छ जल नही,ं यह िरस नही ं
िरस गया होगा। सकता। काँच के िगलास में
जल का स्तर कम नही ं हुआ है।
यह कम हआ ु होगा परंत ु एक लंबी और संकीण बोतल में
इतना भी नही ं हुआ होगा
जल के स्तर में हुआ मामूली
िक दे ख ा जा सके।
पिरवतन भी सहजता से िदख जाता है।
सामान् य तापमान पर हम िकसी
और िगलास में जल ले सकते है ं और
पता लगा सकते है ं िक कही ं जल का
िरसाव तो नही ं हो रहा है।
चत्र 8.4, पृष्ठ 141 — पुन न मत रेखा चत्र: आवी और थरव के बीच संभा वत कारण पर चचा क ंखला।
चत्र 8.4 इस बात का सुंदर उदाहरण है क वै ा नक तक वास्तव म कैसे चलता है — हर कथन का उत्तर जाँच से दया जाता है,
ऊँची आवाज से नह ।
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चरण क्या कहा गया क्या यह अच्छा कदम है?
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"मुझे लगता है िक काँच के िगलास से कु छ जल िरस गया होगा।"
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उ चत आरं भक अनुमान — इसक जाँच क जा सकती
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है।
a2gl "नही ं, यह िरस नही ं सकता। काँच के िगलास में जल का स्तर कम अच्छा — यह अनुम ान के िवरुद्ध साक्ष्य पस्तुत करता है।
नही ं हआ
ु है। "
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3 "यह कम हआ
ु होगा परंत ु इतना भी नही ं हआ
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ु होगा िक दे खा जा सके ।" ईमानदार और महत्वपूण — यह वचार क नह , मापन ag
g l as क कमजोरी क ओर संकेत करता है।
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"एक लंबी और संक ीण बोतल में जल के स्तर में हुआ मामूल ी पिरवतन उ त्कृ ष्ट — यह िविध को सुध ारता है तािक छोटा पिरवतन
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भी सहजता से िदख जाता है। " भी िदख सके ।
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comहै ं िक कही ं जल का िरसाव तो नही ं हो रहा है।" agl भी िरसता।
5 "सामान्य तापमान पर हम िकसी और िगलास में जल ले क र पता लगा सव त्त म — यह एक िनयंत्रण है। यिद काँच िरसता, तो
m .सकते गरम जल वाला िगलास
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मेरा वचार: प्रत्येक चरण तकसंगत है और कोई भी व्य क्तगत आक्षेप नह है। ब े मतदान से उत्तर तय नह करते;
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वे बार-बार पूछते ह क "हम पता कैसे लगाएँ?" इसी लए यह ृंखला एक सु नयो जत प्रयोग पर समाप्त होती है।
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चरण 5 सबसे महत्वपूण है, क्य क सामान्य ताप वाला गलास बाहर से सूखा ही रहता है — इससे सद्ध होता है क
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काँच रसता नह और असली कारण ठं डक है।
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सुझाव: ध्यान द जए क "गलत" वचार भी उपयोगी रहा। रसाव को हटा दे ने से ही संघनन एकमात्र शेष व्याख्या
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बचा।
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ag सोच क ऐसी जल क बूँद आपने और कहाँ दे खी ह? आपने पौध पर ओस क बूँद दे खी ह गी। हम सुबह के
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प्र.2
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समय ओस क बूँद अ धक क्य दखाई दे ती ह?
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ऐसी बूँद और कहाँ दखती ह:
रे जरेटर से नकाली गई ठं डे जल क बोतल पर।
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गरमी म ठं डे पेय क बोतल या लस्सी के स्ट ल के गलास क बाहरी सतह पर।
omपानी से नहाने के बाद स्नानघर के दपण और टाइल पर। g l as
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जाड़े क सुबह खड़क के शीश और कार के शीशे क भीतरी सतह पर।
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ठं ड से भीतर आते ही चश्मे पर, या मास्क लगाकर साँस छोड़ने पर।
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पकते हुए बतन के ढक्कन क भीतरी सतह पर।
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गरम चाय के कप के ऊपर रखे ठं डे स्ट ल के चम्मच पर धुंध के रूप म।
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सुबह ओस अ धक क्य दखती है:
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agवस्तुएँ खुले आकाश क ओर ऊष्मा खोती रहती ह और आस-पास क वायु से भी ठं डी हो
1. रात भर प त्तयाँ, घास और अन्य
जाती ह।
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2. उनके पास क वायु म जलवाष्प वद्यमान रहती है।
3. जब यह आद्र वायु ठं डी पत्ती को छू ती है तो वाष्प संघ नत होकर छोट बूँद बना दे ती है — यही ओस है।
4. सबसे ठं डा समय सूय दय से ठ क पहले होता है, इस लए ओस तभी सवा धक होती है। सूय चढ़ने पर सब कुछ गरम हो जाता
है, बूँद वा ष्पत हो जाती ह और दोपहर तक घास सूखी मलती है।
यह गलास वाली कहानी ही क्य है: दोन स्थ तय म आद्र वायु अपने से ठं डी सतह से मलती है। गलास को
बफ ठं डा करती है; पत्ती रात भर ऊष्मा खोकर ठं डी होती है। वाष्प के पास गैस बने रहने का कोई उपाय नह बचता,
अत: वह द्रव बन जाती है।
क्या आप जानते ह? ओस स्वच्छ, शांत और ठं डी रात म सबसे अ धक बनती है। बादल वाली रात म बादल
ऊष्मा को वापस भेज दे ते ह, प त्तयाँ पयाप्त ठं डी नह हो पात और सुबह ओस कम मलती है।
प्र.3 जब हम आधे भरे बतन म जल उबालकर उसे स्ट ल क प्लेट से ढक दे ते ह तो जल क कुछ बूँद प्लेट क भीतरी
सतह पर जमा हो जाती ह। ये जल क बूँद कहाँ से आती ह? इस बारे म आप क्या सोचते ह?
ये बूँद उबलते जल से उठती जलवाष्प से बनती ह। ये छ टे नह ह, और बाहर से कोई जल नह आया है।
100 °C पर उबलता जल → जलवाष्प ऊपर उठती है
वाष्प ठं डी स्टील की प्लेट से िमलती है
वाष्प ऊष्मा खोती है → द व बनती है → प्लेट की भीतरी सतह पर बूदँ े ं
इसके प्रमाण:
बूँद प्लेट क भीतरी ( नचली) सतह पर होती ह — उसी ओर जो वाष्प क ओर है, ऊपर क ओर नह ।
ढकने से पहले प्लेट को पूरी तरह प छ दे ने पर भी ये बनती ह।
ठं डी प्लेट पर बूँद अ धक और तेजी से बनती ह; आँच पर गरम क गई प्लेट पर लगभग नह बनत ।
बतन का जल धीरे-धीरे कम होता जाता है — वही खोया हुआ जल आप प्लेट पर एकत्र कर रहे ह।
प्लेट का ठं डा होना क्य आवश्यक है: संघनन के लए वाष्प का ऊष्मा खोना आवश्यक है। सामान्य ताप क प्लेट
100 °C से बहुत नीचे होती है, अत: उसे छू ते ही वाष्प ठं डी होकर पुन: जल बन जाती है। य द प्लेट भाप जतनी ही
गरम होती तो बूँद बनत ही नह ।
दै नक उपयोग: इडली का पात्र, भापा व्यंजन और राइस कुकर इसी सद्धांत पर काम करते ह — और आसवन
( ड स्टलेशन) से खारे या मैले जल से स्वच्छ जल भी इसी प्रकार प्राप्त कया जाता है।
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प्र.4 जब वायु म वद्यमान जलवाष्प ठं डी सतह के संपक म आती है तो जल क बूँद बनती ह। क्या क्रयाकलाप 8.3 म
काँच के गलास क बाहरी सतह पर दखाई दे ने वाला जल भी संघनन के कारण हो सकता है?
हाँ। वह ठ क यही है। इस प्रक्रम को संघनन कहते ह — जलवाष्प के द्रव अवस्था म प रवतन क प्र क्रया संघनन कहलाती है।
गलास इसके लए आदश त क्य है:
1. बफ भीतर के जल को लगभग 0 °C पर रखती है, अत: गलास क द वार बहुत ठं डी हो जाती है।
2. कमरे क वायु म सदै व जलवाष्प रहती है — यही उसक आद्रता है।
3. ठं डे काँच को छू ने वाली वायु ठं डी हो जाती है। ठं डी वायु उतनी वाष्प नह रोक पाती जतनी गरम वायु।
4. अ त रक्त वाष्प काँच पर छोट -छोट बूँद क परत के रूप म संघ नत हो जाती है, जो मलकर बड़ी बूँद बनाकर नीचे बहती ह।
अध्याय इसे असं दग्ध रूप से कैसे सद्ध करता है: दो जाँच क जाती ह। (क) क्रयाकलाप 8.4 म पूरे सेट को
ड जटल तराजू पर तौला जाता है और पाठ्यांक बढ़ जाता है — अथात् जल वायु से जुड़ा है, भीतर से गया नह ।
(ख) भीतर के जल का स्तर स्थाई माकर से च ह्नत कया जाता है और वह नीचे नह जाता, अत: कुछ भी रसा
नह । दोन मलकर प्रश्न का नपटारा कर दे ते ह।
क्या आप जानते ह? संघनन वाष्पीकरण का उलटा है। वाष्पीकरण को ऊष्मा चा हए; संघनन ऊष्मा दे ता है।
इसी लए प्रेशर कुकर क भाप उसी 100 °C के उबलते जल से कह अ धक बुरी तरह जला सकती है।
क्रयाकलाप 8.4— आइए, मापन कर — पृष्ठ 142 और 143
संघनन के प्रयोग म ड जटल तराजू ारा द्रव्यमान मापन (ता लका 8.2)
क्रयाकलाप
प्र.1 पूवानुमान लगाएँ क ड जटल तराजू पर रखे ठं डे जल के द्रव्यमान पर क्या प्रभाव पड़ा होगा। क्या यह बढ़े गा,
घटे गा या समान रहेगा?
पूवानुमान: पाठ्यांक बढ़े गा।
सो चए क तीन म से प्रत्येक उत्तर का क्या अथ होगा:
य द पाठ्यांक… …तो इसका अथ होगा
घटता है जल िगलास से िरसकर टपक रहा है, या वाष्प बनकर िनकल रहा है
समान रहता है बाहर का जल भीतर से ही आया — न कु छ िमला, न कु छ गया
बढ़ ता है जल बाहर से जुड़ा है — वायु से
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चूँ क गलास स्ट ल क प्लेट से ढका है, भीतर से कोई वाष्प बाहर नह जा सकती; और संघनन नरंतर वायु का जल ठं डी बाहरी
द वार पर जमा करता रहता है, अत: पलड़े पर कुल द्रव्यमान बढ़ता जाता है — पहले धीरे और फर लगातार, जब तक गलास
ठं डा रहता है।
पहले पूवानुमान लखना क्य आवश्यक है: पाठ्यांक बदलने से पहले अपनी अपेक्षा लख दे ना ही इस
क्रयाकलाप को वास्त वक जाँच बनाता है। य द द्रव्यमान घटता तो रसाव वाला वचार बचा रह जाता। वह घटा नह
— अत: संघनन पर आधा रत पूवानुमान सही नकला।
प्र.2 प्रत्येक पाँच मनट पर तराजू के पाठ्यांक का अवलोकन कर उसे 30 मनट तक ता लका 8.2 म अं कत कर। क्या
आपके नष्कष आपके पूवानुमान से मेल खाते ह? अपने प्रेक्षण क व्याख्या कर।
समय ( मनट म) जल का द्रव्यमान
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5
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ता लका 8.2, पृष्ठ 142 — संघनन के प्रयोग म ड जटल तराजू ारा द्रव्यमान मापन (पुस्तक के अनुसार रक्त)।
हाँ, नष्कष पूवानुमान से मेल खाते ह — द्रव्यमान बढ़ता है। प्र तदश पाठ्यांक इस प्रकार हो सकते ह (आपके मान गलास के
आकार और दन क आद्रता के अनुसार भन्न ह गे):
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समय ( मनट म) पूरे सेट का द्रव्यमान आरंभ से वृ द्ध
0 254.0 g —
5 254.3 g 0.3 g
10 254.7 g 0.7 g
15 255.0 g 1.0 g
20 255.4 g 1.4 g
25 255.7 g 1.7 g
30 256.0 g 2.0 g
प्रेक्षण क व्याख्या:
गलास और प्लेट ठं डे ह। वायु क जलवाष्प इस ठं डी सतह से मलकर बाहर क ओर बूँद म संघ नत हो जाती है।
वह जल पहले वायु म था और अब तराजू के पलड़े पर है — इस लए पाठ्यांक बढ़ता है।
वृ द्ध लगभग एक-सी रहती है — हर पाँच मनट म लगभग 0.3 से 0.4 g — क्य क सतह ठं डी रहने तक संघनन चलता रहता
है।
बफ पघल जाने और गलास के कमरे के ताप तक आ जाने पर वृ द्ध धीमी होकर रुक जाती है।
मान इतने छोटे क्य ह: केवल बूँद क पतली परत बनती है, अत: प रवतन एक ग्राम के अंश जतना होता है —
इसी लए ड जटल तराजू का उपयोग कया जाता है। साधारण तुला कुछ भी न दखाती और आप गलती से यह
समझ लेते क कुछ हुआ ही नह ।
सुझाव: दो पाठ्यांक के बीच गलास उठाइए नह और उस पर साँस मत छो ड़ए। दोन से मापन बगड़ जाएगा।
बना कुछ छु ए केवल डस्प्ले प ढ़ए।
प्र.3 ड जटल तराजू पर ली गई री डग अब बढ़ गई है। क्या हम यह नष्कष नकाल सकते ह क जल का रसाव
गलास क सतह से नह हो रहा है? क्या हम यह भी नष्कष नकाल सकते ह क गलास क बाह्य सतह पर
एक त्रत जल केवल संघनन के कारण है?
पहले प्रश्न पर — न त रूप से नह । दूसरे प्रश्न पर — नह । पुस्तक स्वयं कहती है, नह , हम क्रयाकलाप 8.4 से ऐसा नष्कष
नह नकाल सकते।
यहाँ एक प्रयोग पयाप्त क्य नह है:
तराजू पूरे सेट का सामू हक द्रव्यमान दखाता है — गलास, जल, बफ, प्लेट और बाहर क बूँद, सब मलाकर। य द काँच से
थोड़ा जल रस भी जाता, तो वह भी उसी पलड़े पर रहता और कुल द्रव्यमान उससे नह बदलता।
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अत: द्रव्यमान क वृ द्ध यह सद्ध करती है क वायु से जल जुड़ा है, पर यह सद्ध नह कर सकती क साथ-साथ रसाव नह
हो रहा। दोन एक साथ भी हो सकते ह।
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प्रयोग क्या सद्ध करता है: यह न श्चत रूप से सद्ध करता है क तंत्र के बाहर से जल जुड़ा है — अथात् संघनन
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gl हो रहा है। यह एक ठोस प रणाम है। खुला यह रहता है क रसाव भी हो रहा है या नह । एक अच्छा वै ा नक
aइतना
अवश्य
ही बताता है, इससे अ धक नह ।
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सुझाव: यह बहुत उपयोगी आदत है — हर प्रयोग eकm
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है और कस बात को खुला छोड़ता है?" आँgकlड़ से अ धक दावा करना व ान क सबसे आम भूल है।
े बाद पू छए, "मेरा प रणाम कस बात को असंभव सद्ध करता
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.cआप क्रयाकलाप 8.4 म क्या बदलाव करगे? आप क्या अवलोकन करतेaहgऔर इससे क्या नष्कष
प्र.4 आप यह दखाने के लए और क्या कर सकते ह क काँच के गलास से जल नह रस रहा है? उत्तर खोजने के
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se नकालते ह?
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comपर इस बार काँच के गलास पर जल के स्तर को एक agl
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emनह , उस चह्न को दे खए।
पुस्तक म दया गया संशोधन: क्रयाकलाप 8.4 को दोहराइए, ाई
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माकर या पारदश टे प से च ह्नत क जए। फरaतराजू
आप क्या अवलोकन करते ह: agl
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भीतर जल का स्तर नीचे नह जाता — वह ठ क चह्न पर बना रहता है (ब ल्क बफ पघलने से थोड़ा बढ़ ही जाता है)।
इस बीच गलास क बाहरी सतह पर अ धक से अ धक जल एक त्रत होता जाता है।
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m .cकाँच से जल नह रस रहा। बाहर का अ त रक्त जल वायु से आ रहा है और संaघgनन के कारण वहाँ एक त्रत हो रहा है।
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नष्कष:
aglas माकर से नपटारा कैसे होता है: पछला प्रयोग सब कुछ एक साथ तौलता था और इस लए "वायु से मला" तथा
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"भीतर से गया" को अलग नह कर पाता था। चह्न केवल भीतर के जल को दे खता है। य द रसाव होता तो स्तर
अवश्य गरता। वह गरता नह — अत: रसाव cसमाप्त।
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aglचौड़े गलास के स्थान पर लंबी, संकरी बोतल ली जए, ता क बहुत थोड़ा जल
दो और जाँच जोड़ सकते ह: (1)
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घटने पर भी स्तर म बड़ा अंतर दखे; (2) पास म सामान्य ताप के जल वाला वैसा ही गलास र खए — वह बाहर
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से पूरी तरह सूखा रहता है, जससे सद्ध होता है क बूँद ठं डी सतह के कारण बनती ह, काँच के कारण नह ।
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करने के लए कुछ और — पृष्ठ 142
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अपने क्षेत्र के आद्रता आँकड़े
करने के लए कु छ और
प्र.1 वायु म जलवाष्प क मात्रा को आद्रता भी कहा जाता है। आपके क्षेत्र के दै नक आद्रता आँकड़ को समाचार-पत्र
और अन्य ोत म बताया जाता है। एक वष के आँकड़े संक लत कर और य द कोई पैटन है तो उसका अध्ययन
कर।
यह कैसे कर:
1. एक कॉपी म तीन स्तंभ बनाइए — दनांक, अ धकतम आद्रता (%), न्यूनतम आद्रता (%)। कई समाचार-पत्र दोन छापते
ह; कुछ केवल एक मान दे ते ह।
2. प्र त दन एक ही समय पर, एक ही ोत से मान अं कत क जए — समाचार-पत्र का मौसम स्तंभ, भारत मौसम व ान वभाग
क वेबसाइट, या वद्यालय का मौसम कद्र।
3. हर महीने के अंत म मा सक औसत नका लए और उसे आलेख पर बदु के रूप म अं कत क जए: नीचे महीने, ऊपर आद्रता।
बदुओं को मलाइए।
4. उसी पत्रक पर अपने क्षेत्र के मानसून के महीने च ह्नत क जए।
भारत के अ धकांश भाग म जो पैटन मलेगा:
ऋतु सामान्य आद्रता क्या दखाई दे ता है
तीव्र ग्रीष्म (अप्रैल–मई, आंत रक कम, पाय: 20–40 % कपड़ े बहुत जल्दी सूखते है;ं मटका जल खूब ठं डा रखता
भाग) है
मानसून (जून– सतंबर) अिधक, पाय: 80–95 % कपड़ ों में सीलन आती है और वे पूर ा िदन ले ते है ं
शीत ( दसंबर–जनवरी) मध्यम; भोर में अिधक, दोपहर तक सुबह घनी ओस और कोहरा
कम
दै नक मान इतना क्य बदलता है: आद्रता प्राय: सूय दय से ठ क पहले सवा धक और दोपहर म सबसे कम
होती है। वायु म वाष्प क मात्रा लगभग वही रहती है, पर गरम दोपहर क वायु कह अ धक वाष्प रोक सकती है,
अत: वह भरने से और दूर रहती है — और वाष्पीकरण तेज हो जाता है।
सुझाव: चेन्नई, मुंबई और को जैसे तट य नगर वष भर आद्र रहते ह, जब क जयपुर, नागपुर और दल्ली म शुष्क
ग्रीष्म और आद्र मानसून के बीच बड़ा अंतर रहता है। अपना आलेख कसी दूसरे नगर के मत्र के आलेख से मलाइए।
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8.3 जल क व भन्न अव ाएँ क्या ह? (ता लका 8.3)
क्रयाकलाप
प्र.1 एक पात्र म बफ का एक टु कड़ा डाल और इसे दूसरे आकार के पात्र म ानांत रत कर। आप बफ के टु कड़े के
आकार म क्या प रवतन दे खते ह?
कोई प रवतन नह । बफ का टु कड़ा अपना ही आकार बनाए रखता है — आप उसे कसी भी पात्र म र खए, वह घनाकार ही रहता
है।
गोल कटोरी म र खए — वह घन ही रहता है।
लंबे गलास म डा लए — वह घन ही रहता है।
चपट प्लेट पर र खए — वह घन ही रहता है।
केवल इतना होता है क वह धीरे-धीरे छोटा होता जाता है और उसके कोने गोल हो जाते ह, पर वह पघलना है, पात्र का प्रभाव
नह ।
ठोस अपना आकार क्य बनाए रखता है: बफ म कण एक न श्चत, नय मत व्यवस्था म कसकर बँधे रहते ह। वे
कंपन कर सकते ह पर अपने स्थान से हट नह सकते, इस लए पूरा टु कड़ा अपना रूप नह बदल सकता। यही ठोस
अव ा का मूल गुण है।
स्वयं जाँच: यही प्रयोग एक कंचे, चॉक के टु कड़े और रबड़ के साथ क जए। इनम से कोई भी पात्र का आकार नह
लेता — सभी ठोस ऐसा ही व्यवहार करते ह।
प्र.2 जल को एक पात्र से भन्न आकार के दूसरे पात्र म डाल। अवलोकन कर क बफ क तुलना म जल का व्यवहार
कैसा है। क्या आपने ध्यान दया क जल एक पात्र से दूसरे पात्र म कैसे प्रवा हत हो जाता है? इसके आकार का
क्या होता है?
जल का व्यवहार बफ से ठ क उलटा है।
वह एक पात्र से दूसरे म सहजता और नरंतरता से प्रवा हत होता है — उसे उँ डेला जा सकता है और उँ डेलते समय वह धार का
आकार ले लेता है।
वह नए पात्र का आकार पूरी तरह ले लेता है। गोल कटोरे म गोल, चौकोर डब्बे म चौकोर, लंबे गलास म लंबा स्तंभ।
हर पात्र म उसक ऊपरी सतह समतल रहती है।
उसक मात्रा नह बदलती। कटोरे से गलास म डाला गया 200 mL जल गलास म भी 200 mL ही रहता है। आकार बदला;
आयतन र रहा।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
द्रव ऐसा क्य करता है: जल म कण अब भी पास-पास ह — इसी लए आयतन नह बदलता — पर वे न श्चत
स्थान पर बँधे नह होते। वे एक-दूसरे पर फसल सकते ह। अत: जल स्वयं को कसी भी पात्र म समायो जत कर
लेता है और बह भी सकता है।
सुझाव: ध्यान से याद र खए — द्रव का आयतन न त होता है पर आकार न त नह । ठोस के दोन न श्चत
होते ह। यह जोड़ी ठ क से याद रहने पर अवस्थाओं के अ धकांश प्रश्न हल हो जाते ह।
प्र.3 एक साफ सतह पर जल डाल और दे ख क यह कैसे फैलता है। अपने अवलोकन को ता लका 8.3 म अं कत कर।
गुण बफ जल जलवाष्प
(ठोस अव ा) (द्रव अव ा) (गैसीय अव ा)
आकार
बहने क क्षमता
प्रसारण (फैलने) क क्षमता
ता लका 8.3, पृष्ठ 144 — जल क व भन्न अव ाओं क तुलना कर (पुस्तक के अनुसार रक्त)।
अवलोकन: जल ढे र बनकर नह रहता। वह सतह पर फैलकर पतली, चपट परत बना लेता है और तब तक फैलता रहता है जब
तक कोई कनारा या नाली उसे न रोके।
यह भी ध्यान द जए क मात्रा नह बदलती — वही जल पतली परत म अ धक क्षेत्र घेर लेता है। जल आयतन र रखते हुए
फैलता है।
ता लका 8.3 इस प्रकार भरी जाएगी:
गुण बफ (ठोस अव ा) जल (द्रव अव ा) जलवाष्प (गैसीय अव ा)
आकार िनिश्चत — हर पात्र में अपना ही िनिश्चत नही ं — पात्र का आकार कोई आकार नही ं — पूरे पात्र को
आकार ले ले ता है भर दे ती है
बहने क क्षमता नही ं बहती सहजता से बहता है हर िदशा में स्वतंत्र रूप से बहती है
प्रसारण (फैलने) क नही ं फै लती सतह पर फै लता है, आयतन वही सम स्त उपल ब्ध स्थान में फै ल जाती
क्षमता रहता है है
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बफ क्य नह फैलती पर जल फैलता है: फैलने के लए कण का एक-दूसरे के पास से खसकना आवश्यक है।
बफ म वे ऐसा नह कर सकते; जल म कर सकते ह।
प्र.4 जब जल अपने जलवाष्पीय रूप म प रव तत हो जाता है तो यह जलवाष्प कैसे प्रसा रत होती है? इसक तुलना
जल के प्रसारण व्यवहार से कर।
जलवाष्प अपने लए उपलब्ध समस्त ान म फैल जाती है — हर दशा म, ऊपर क ओर भी — जब तक वह पूरे कमरे या पूरे
पात्र म समान रूप से मल न जाए।
तुलना का बदु जल (द्रव) जलवाष्प (गैस)
फैलने क दशा के वल सतह पर बगल की ओर; यह चढ़ नही ं सकता हर िदशा में, ऊपर की ओर भी
कतनी दूर फैलता है िकनारे तक; पात्र में नीचे ही रहता है जब तक पूर ा पात्र या कमरा न भर जाए
आयतन िस्थर — 200 mL, 200 mL ही रहता है िनिश्चत नही ं — िजतना स्थान िमले , उतना घे र ले ती है
ऊपरी सतह समतल सतह होती है कोई सतह नही ं होती
क्या दखाई दे ती है? हाँ नही ं — अदृ श्य
गैस इतनी पूणता से क्य फैलती है: जलवाष्प म कण बहुत दूर-दूर होते ह और सब दशाओं म बहुत तेज ग त
करते ह। उन्ह बाँधकर रखने वाला लगभग कुछ नह होता, अत: वे तब तक चलते रहते ह जब तक सवत्र समान रूप
से न फैल जाएँ। इसी लए गैस का न आकार न श्चत होता है और न आयतन।
दै नक प्रमाण: गीला फश केवल वह गीला रहता है जहाँ जल है, पर तवे पर सकती रोट क गंध एक मनट म पूरे
घर तक पहुँच जाती है। गैस फैलती ह; द्रव नह ।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 144 और 145
8.3 जल क व भन्न अव ाएँ क्या ह?
प्र.1 ठोस, द्रव और गैसीय अव ा म जल के गुण म क्या-क्या अंतर ह?
तीन अवस्थाएँ आकार, बहाव, प्रसारण और आयतन म भन्न ह — और ये सभी अंतर इस बात से नकलते ह क सूक्ष्म कण
कस प्रकार व्यव स्थत ह।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा
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अव.cथा
जलवा प — गैसीयm
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बफ — ठोस अवस्था जल — दव अवस्था
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आकार: िनिश्चत, अपना ag आकार: पात्र जैसा आकार: कोई नही ं
बहना: नही ं बहना: हाँ बहना: हाँ
फै लना: हाँ, आयतन िस्थर
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फै लना: नही ं पूरा स्थान भर देत ी है
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.cतो ह पर एक-दूसरे पर फसल सकते ह। जलवाष्प म वे बहुत दूर-दूर होते ह और स्वतंत्रaरूपg से ग त करते हुए समस्त उपलब्ध
एक ही पदाथ क तीन अवस्थाएँ। बफ म कण न श्चत, नय मत व्यवस्था म रहते ह और केवल अपने स्थान पर कंपन करते ह। जल म वे
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पास-पास
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स्थान भर दे ते ह।
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अध्याय के शब्द म अंतर:
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s e m बनाए रखती है। न बहती है, न फैलती है।
a है। इसका कोई न त आकार नह होता, यह पात्र का आकार ले लेता है,
बफ (ठोस): कसी भी पात्र म रखी जाए, अपना आकार
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जल (द्रव): बहता है और अपना आकार बदलता
पर इसका आयतन र रहता है। यह आयतन स्थर रखते हुए फैलता भी है।
जलवाष्प (गैस): समस्त उपलब्ध
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ान म फैल जाने का गुण दखाती है। गैस न श्चत आकार धारण नह करती। जलवाष्प
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सामान्य ताप पर भी वद्यमान रहती है, यद्य प यह अदृश्य है, और हमारे आस-पास क वायु म उप स्थत रहती है।
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a s em कण- चत्र सब कुछ क्य समझा दे ता है: जब कण बँधे ह तो आकार न श्चत होता है (ठोस); जब कण एक-दूसरे
agl को छू ते ह — चाहे बँधे ह या फसलते ह — तो आयतन न श्चत होता है (ठोस और द्रव); जब कण दूर-दूर और
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स्वतंत्र ह तो दोन म से कुछ भी न श्चत नह होता (गैस)।
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प्र.2 agl
अपने आस-पास दे ख और ठोस पदाथ के कुछ उदाहरण खोज। द्रव पदाथ के अन्य उदाहरण क्या ह जनके
वषय म आप सोच सकते ह? पाँच अन्य उदाहरण के बारे म सोच। गैस के अन्य उदाहरण क्या ह जनके बारे म
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आप सोच सकते ह?
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emपुस्तक आरंभ करा देती है — ठोस: पत्थर, लकड़ी, बतन; द्रव: दूध, तेल; गैस: ऑक्सीजन, काबन डाइऑक्साइड। आस-पास
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agl से कुछ और उदाहरण:
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ठोस द्रव गैस
पत्थर, ईंट, लकड़ी दू ध ऑक्सीजन
काँच, स्टील, ताँबे का तार सरसों या नािरयल का तेल काबन डाइऑक्साइड
चॉक, पेंिसल, पुस्तक शहद नाइटोजन
बफ , चीनी, नमक िम ी का तेल और पेटोल जलवाष्प
प्लािस्टक का स्के ल, रबड़, कपड़ा िसरका, नी ंबू का रस, चाय एलपीजी (रसोई गैस )
मोमबत्त ी का मोम , शीतकाल में घी स्याही, सै िनटाइजर , छाछ गुब्बारे की हीिलयम ; स्वयं वायु
पुस्तक के अनुसार पाँच अन्य द्रव: शहद, म का तेल, न बू का रस, स्याही और छाछ।
एक ध्यान रखने योग्य बात: एक ही पदाथ एक से अ धक अवस्थाओं म मल सकता है। अध्याय म मोम, तेल और
घी का उल्लेख इसी लए है — घी और ना रयल का तेल गरमी म द्रव और जाड़े म ठोस होते ह, और मोम मोमबत्ती म
ठोस पर लौ के पास द्रव होता है। अवस्था ताप पर नभर करती है, पदाथ के नाम पर नह ।
सुझाव: गैस लखते समय याद र खए क अ धकांश गैस अदृश्य होती ह। "धुआँ" या "भाप" को गैस मत ल खए
— धुएँ म ठोस कण होते ह और भाप म द्रव बूँद।
प्र.3 क्या आपने कभी ध्यान दया है क आप रसोईघर म प्रवेश कए बना भी खाना पकने क गंध को अनुभव कर
सकते ह? यह गंध हम तक कैसे पहुँचती है?
हाँ। गंध हम तक इस लए पहुँचती है क्य क वह वायु के माध्यम से, गैस के रूप म यात्रा करती है।
1. भोजन को गरम करने पर उसम उप स्थत गंध दे ने वाले पदाथ के अत्यंत सूक्ष्म कण सतह से नकलकर गैस बन जाते ह —
ठ क वैसे ही जैसे जल जलवाष्प बनता है।
2. ये गैस-कण बहुत तेजी से और सब दशाओं म ग त करते ह।
3. चूँ क गैस समस्त उपलब्ध ान म फैल जाती है, ये कण रसोई से नकलकर ग लयारे और हर कमरे तक पहुँच जाते ह।
4. वे हमारी नाक तक पहुँचते ह और भोजन दे खने से बहुत पहले ही हम तड़के क गंध मल जाती है।
यह उदाहरण यह क्य रखा गया है: यह गैस के उसी गुण का सीधा प्रमाण है जो अभी पढ़ा गया। पुस्तक के शब्द
म — स्वा दष्ट खाना पकने क सुगंध वायु के माध्यम से फैलती है और हमारी नाक तक पहुँचती है, भले ही हम
रसोईघर म न ह । ठोस और द्रव ऐसा नह कर सकते; मेज पर रखी गरम दाल वह रहती है, पर उसक गंध सबको
मल जाती है।
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स्वयं जाँच: कमरे के एक कोने म इत्र क शीशी खो लए या कुछ करी पत्ते मस लए और दूसरे कोने म चुपचाप खड़े
र हए। आधे मनट म गंध पहुँच जाती है — और गरम दन म यह और जल्द पहुँचती है, क्य क अ धक ताप पर कण
अ धक तेज ग त करते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 145
8.4 हम जल क अव ाओं को कैसे प रव तत कर सकते ह?
और भी जान!
प्र.1 आप जल क अव ा कैसे प रव तत कर सकते ह? आप बफ को तुरंत उसक द्रव अव ा अथात् जल म कैसे
प रव तत कर सकते ह?
जल क अवस्था ऊष्मा दे कर या ऊष्मा हटाकर बदली जाती है — और कुछ नह चा हए।
बफ + ऊ ष्मा → जल + ऊ ष्मा → जलवाष्प
जलवाष्प − ऊ ष्मा → जल − ऊ ष्मा → बफ
बफ को तुरंत जल म बदलने के लए ऊष्मा तेजी से द जए। व्यावहा रक उपाय:
बफ को जर से नकालकर गरम कमरे म या धूप म र खए।
उसे हथेली म पक ड़ए, या उस पर गुनगुना जल डा लए।
उसे प्ला स्टक के स्थान पर धातु (स्ट ल) के पात्र म र खए — धातु ऊष्मा तेजी से पहुँचाती है।
बफ को छोटे टु कड़ म तो ड़ए या कुचल द जए। छोटे टु कड़ क सतह गरम वायु के संपक म कह अ धक होती है, अत: वे
बड़े टु कड़े से बहुत जल्द पघलते ह।
बफ को जल म हलाइए — बहता जल बफ क सतह तक नरंतर नई ऊष्मा लाता रहता है।
ऊष्मा ही नणायक क्य है: बफ 0 °C पर पघलती है। उसे पघलाने के लए पहले उस ताप तक लाना होगा और
फर पघलने के दौरान लगातार ऊष्मा दे नी होगी। ऊपर के सभी उपाय वास्तव म बफ तक ऊष्मा तेजी से पहुँचाने
के ही तरीके ह।
क्या आप जानते ह? बफ के पघलने के दौरान ऊष्मा जाती रहने पर भी उसका ताप 0 °C पर ही टका रहता है।
सारी ऊष्मा कण को उनके न श्चत स्थान से मुक्त करने म लग जाती है। बफ का अं तम कण पघलने के बाद ही
जल गरम होना आरंभ करता है।
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प्र.2 य द हम जल को बफ म प रव तत करना है तो क्या करना होगा?
हम जल से ऊष्मा हटानी होगी — अथात् उसे 0 °C तक ठं डा करना होगा और ठं डा करते रहना होगा।
पुस्तक के शब्द म: जल को ठं डे वातावरण जैसे क हमीकरण यंत्र (
जर) म रखकर ऐसा कया जा सकता है। जल जम जाता है
और बफ म प रव तत हो जाता है। बफ बाहर नकालने पर पघल जाती है और जल म प रव तत हो जाती है।
प रवतन प्रक्रम का नाम क्या करना होगा ताप
ठोस → द्रव िपघलना ऊष्मा दे ना बफ 0 °C पर पघलती है
द्रव → ठोस िहमीकरण ऊष्मा हटाना जल 0 °C पर जमता है
द्रव → गैस वाष्पीकरण (और उबलना) ऊष्मा दे ना वाष्पीकरण हर ताप पर; उबलना 100 °C पर
गैस → द्रव संघ नन ऊष्मा हटाना जब भी वाष्प ठं डी सतह से मले
जर कैसे काम करता है: जर "ठं डक बनाता" नह है। वह भीतर के स्थान से ऊष्मा ख चकर बाहर फकता है
— इसी लए रे जरेटर का पछला भाग गरम लगता है। भीतर का जल ऊष्मा खोता है, उसके कण धीमे पड़कर
न श्चत स्थान पर बँध जाते ह, और वह बफ बन जाता है।
और भी जान! वायुमंडलीय जल ज नत्र (Atmospheric Water Generator) मशीन इसका उलटा
वचार प्रयोग करती ह। वे आद्र वायु को ठं डा करके उसक जलवाष्प को संघ नत करती ह और उस जल को पीने
योग्य बनाती ह। यह वही प्रक्रम है जो बफ के ठं डे जल वाले गलास के बाहर बूँद बनाता है — बस बड़े पैमाने पर।
प्र.3 क्या आप जल के अ त रक्त अन्य उदाहरण सोच सकते ह जो ठोस से द्रव म प रव तत हो जाते ह? हम मोमबत्ती
के मोम को द्रव अव ा म कैसे बदल सकते ह? हम द्रव मोम को ठोस म कैसे बदल सकते ह? आपने अन्य कौन-से
द्रव पदाथ दे खे ह जो ठोस म प रव तत हो जाते ह?
हाँ — मोमबत्ती, जो मोम से बनती है, पुस्तक ारा दया गया उदाहरण है। दै नक जीवन के अनेक पदाथ ऐसा ही व्यवहार करते
ह।
मोमबत्ती के मोम को द्रव म बदलना: मोमबत्ती जलाइए, या मोम का एक टु कड़ा चम्मच म लेकर आँच पर र खए। मोम ऊष्मा लेकर
पघल जाता है और बत्ती के चार ओर पारदश द्रव मोम का छोटा-सा तालाब बन जाता है।
द्रव मोम को पुन: ठोस बनाना: उसे ठं डा क जए। लौ बुझाइए और पघला मोम एक मनट म जम जाता है; ठं डे चम्मच म डालने
पर और भी जल्द । पुस्तक के शब्द म — हम द्रव मोम को ठोस म बदलने के लए उसे ठं डा करना होगा।
अन्य द्रव जन्ह आपने ठोस म बदलते दे खा होगा:
ना रयल का तेल — शीतकाल म सफेद और ठोस हो जाता है, गरमी म फर साफ द्रव। पुस्तक इसी के वषय म पूछती है।
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घी और मक्खन — जाड़े म जमे हुए, मई म बहते हुए।
ठं डी रसोई म वनस्प त घी।
पघला गुड़ या चीनी क चाशनी, जो जमकर चक्क या लॉलीपॉप बन जाती है।
पघली चॉकलेट, जो ज म फर जम जाती है।
घंटा ढालने वाले ारा साँचे म डाली पघली धातु, जो जमकर ठोस घंटा बन जाती है।
और नस्संदेह जल स्वयं, जो जमकर बफ बनता है।
सामान्य नयम: ठोस के द्रव अवस्था म प रव तत होने के प्रक्रम को पघलना कहते ह; द्रव के ठोस अवस्था म
प रव तत होने के प्रक्रम को हमीकरण कहते ह। प्रत्येक पदाथ का अपना गलनांक होता है — ना रयल का तेल
लगभग 24 °C पर जम जाता है, इस लए एक ठं डी रात ही पयाप्त है, जब क जल को 0 °C और लोहे को 1500 °C
से भी अ धक चा हए।
क्रयाकलाप 8.6— आइए, चत्र पूरा कर — पृष्ठ 145 और 146
चत्र 8.5 जल क व भन्न अव ाओं का रूपांतरण
क्रयाकलाप
प्र.1 बॉक्स म दए गए शब्द का प्रयोग करके जल क व भन्न अव ाओं एवं उनके रूपान्तरण को दशाने के लए चत्र
8.5 को क, ख, ग और 1, 2, 3, 4 के ान म भर। आपक सहायता के लए दो शब्द पहले से भरे गए ह। (द्रव,
जमना, वा ष्पत होना, गैस, संघ नत होना)
(दव, जमना, वािष्पत होना, गैस, संघिनत होना)
1 िपघलना 2
क ठोस ख ग
3 4
चत्र 8.5, पृष्ठ 145 — जल क व भन्न अव ाओं का रूपांतरण। पुस्तक क भाँ त दो शब्द पहले से भरे ह।
पूरा कया गया चत्र:
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बफ 0 °C पर िपघलती है वाष्पीकरण (उबलना 100 °C पर)
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1. िपघलना 2. वािष्पत होना
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ख. दव ग. गैस
a (बफ ) (जल) (जलवाष्प)
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3. जमना 4. संघिनत होना
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जल 0 °C पर जमता है संघनन — ठंडा होने पर
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चत्र 8.5 पूरा कया हुआ। हरे तीर (दाईं ओर) सभी प रवतन म ऊष्मा दे नी पड़ती है; नीले तीर (बाईं ओर) सभी प रवतन म ऊष्मा हटानी
पड़ती है।
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रक्त ान उत्तर इसका अथ
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se ठोस (पहले से भरा — बफ ) ठोस अवस्था म जल
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दव द्रव अवस्था म जल
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गैस
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ग जलवाष्प, गैसीय अवस्था
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िपघलना (पहले से भरा) ठोस → द्रव, गरम करने पर, 0 °C पर
m
2 वािष्पत होना द्रव → गैस, गरम करने पर
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3 जमना द्रव → ठोस, ठं डा करने पर, 0 °C पर
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aकरने पर
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संघ िनत होना गैस → द्रव, ठं डा
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बना अनुमान लगाए शब्द कैसे रख: बॉक्स 1 म पघलना पहले से भरा है और वह क (ठोस) से ख क ओर जाने
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वाले तीर पर है, अत: ख अवश्य द्रव होगा। तब अवस्था वाला शेष शब्द गैस ही बचता है, जो ग है। तीर 2 द्रव से
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s होना है।
गैस क ओर है, अत: वह वा ष्पत होना है; तीर 3 द्रव से ठोस क ओर लौटता है, अत: वह जमना है; तीर 4 गैस से
द्रव क ओर लौटता है, अत: वह संघlaनत
a g
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सुझाव: जोड़े याद र खए — पघलना और जमना उलटे ह (जल के लए दोन 0 °C पर), तथा वाष्पीकरण और
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संघनन उलटे ह। हर जोड़े म एक ऊष्मा लेता है और दूसरा ऊष्मा दे ता है।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 146
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8.5 जल को तीव्र या धीमी ग त से कैसे वा ष्पत कया जा सकता है?
प्र.1 अपने आस-पास अवलोकन कर। वे कौन-सी प र तयाँ ह जो प्रभा वत करती ह क जल कतनी तीव्रता से
वा ष्पत होगा? ठं डे दन क तुलना म गरम दन म आप वाष्पीकरण म क्या अंतर दे खते ह? (पंखा, कपड़े सूखना,
पसीना आना, तीव्र हवाओं वाला दन, गरम दन, बरसात का दन)
चार प र तयाँ तय करती ह क जल कतनी तेजी से वा ष्पत होगा। पुस्तक ारा सुझाए गए शब्द म इनम से हर एक दखती है:
पर त वाष्पीकरण तब तीव्र होता है आस-पास क्या दखता है
जब…
ताप अिधक गरमी हो गरम िदन में कपड़ े दोपहर तक सूख जाते है;ं जाड़ े में वही कपड़ े शाम तक नम
रहते है ं
वायु क ग त वायु तेज चले पंखा पोंछा लगे फश को जल्दी सुखा दे ता है; तीव हवाओं वाले िदन कपड़ े
सबसे जल्दी सूखते है ं
अनावृत्त (खुला) जल अिधक ेत्र में फै ला हो तार पर पूर ा फै लाया गया कपड़ ा िसमटे हुए कपड़ े से कही ं जल्दी सूखता है
क्षेत्र
आद्रता वायु शुष्क हो बरसात के िदन वायु पहले से वाष्प से भरी होती है, अत: कपड़ े और फश बहुत
धीरे सूखते है ं
गरम दन बनाम ठं डा दन: गरम दन म जल के कण के पास पहले से अ धक ऊजा होती है, अत: प्र त सेकंड कह अ धक कण
सतह से नकल भागते ह। ग ा एक घंटे म सूख जाता है, पसीना त्वचा से तुरंत उड़कर हम ठं डक दे ता है, और खुली बाल्ट का जल
स्पष्ट रूप से घट जाता है। ठं डे दन म यह सब होता तो है, पर कह धीरे — वाष्पीकरण कभी रुकता नह , केवल मंद पड़ता है।
चार प र तयाँ एक ही दशा म क्य काम करती ह: वाष्पीकरण सतह से सबसे तेज कण का नकलना है।
ऊष्मा उन्ह अ धक ग त दे ती है; बड़ा क्षेत्र अ धक कण को नकलने का ार दे ता है; बहती वायु नकली हुई वाष्प को
हटाकर ार खुला रखती है; और शुष्क वायु के पास उन्ह ग्रहण करने क अ धक जगह होती है।
सुझाव: इस वषय पर प्रयोग बनाते समय चार म से केवल एक बद लए और शेष तीन समान र खए। क्रयाकलाप
8.7 और 8.8 ठ क यही करते ह।
क्रयाकलाप 8.7— आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 146 और 147
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बोतल के ढक्कन और प्लेट म जल (ता लका 8.4 और 8.5)
क्रयाकलाप
प्र.1 हमने कौन-सी प र तयाँ समान रख ? हमने इस अन्वेषण म क्या प रवतन कए? हमने क्या मापा?
ये तीन प्रश्न हर नष्पक्ष जाँच क रीढ़ ह।
प्रश्न क्रयाकलाप 8.7 के लए उत्तर
हमने क्या समान जल की मात्र ा (ढक्कन और प्ले ट दोनों में समान), पयुक्त द व (दोनों में जल, या दोनों में सै िनटाइजर), स्थान — दोनों
रखा? एक-दू स रे के िनकट, अत: समान ताप, समान वायु-गित और समान आद ता, तथा आरंभ का समय।
हमने क्या के वल एक बात — जल का अनावृत्त (खुल ा) ेत्र। बोतल के ढक्कन में यह कम है और प्ले ट में अिधक।
प रव तत कया?
हमने क्या मापा? पत्येक िस्थित में जल के पूर ी तरह वािष्पत होने में लगने वाला समय।
दोन को साथ-साथ क्य रखना आवश्यक है: य द एक को धूप वाली खड़क पर और दूसरे को अलमारी म रखा
जाता तो एक साथ दो बात बदल जात — क्षेत्र और ताप — और हम कभी न बता पाते क अंतर कसके कारण
हुआ। ठ क एक प र स्थ त बदलना ही जाँच को नष्पक्ष बनाता है।
सुझाव: दोन के लए जल उसी चम्मच या उसी मापक ढक्कन से ना पए। जब आप समय का अंतर माप रहे ह तो
"लगभग बराबर" पयाप्त नह होता।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 प्रत्येक त म जल के पूरी तरह से वा ष्पत होने म लगने वाले समय को ता लका 8.4 म अं कत कर। इस
अन्वेषण से आप क्या नष्कष नकाल सकते ह?
जल का अनावृत्त (खुला) क्षेत्र पूण वाष्पीकरण म लगने वाला समय
कम (बोतल का ढक्कन)
अ धक (प्लेट)
ता लका 8.4, पृष्ठ 146 — अन्वेषण के प रणाम (पुस्तक के अनुसार रक्त)।
गरम दन म एक चम्मच जल के लए प्र तदश पाठ्यांक के साथ ता लका 8.4 (आपके मान भन्न ह गे):
जल का अनावृत्त (खुला) क्षेत्र पूण वाष्पीकरण म लगने वाला समय
कम (बोतल का ढक्कन) लगभग 3 घंटे
अ धक (प्लेट) लगभग 35 िमनट
नष्कष: प्लेट का जल बोतल के ढक्कन के उतने ही जल से कह तेजी से वा ष्पत होता है। पुस्तक के शब्द म — य द आप
प्लेट म जल फैलाते ह तो वह वायु के संपक म अ धक आता है। इस लए इसका वाष्पीकरण तीव्र होता है।
अिधक अनावृत्त े → सतह पर अिधक जल-कण → तीव वा पीकरण
त्र ष्
क्षेत्र इतना महत्वपूण क्य है: कण केवल जल क सतह से नकल सकते ह, भीतर से नह । ढक्कन म जल का
छोटा-सा गोला वायु के सामने होता है; प्लेट म वही जल चौड़ी पतली परत बन जाता है जसका क्षेत्रफल कई गुना है।
अ धक सतह अथात् अ धक नकास-माग, अत: उतना ही जल बहुत कम समय म चला जाता है।
हम इसे रोज कहाँ काम म लाते ह: कपड़े मोड़कर नह , फैलाकर सुखाते ह; अनाज, पापड़ और मच छत पर
पतली परत म फैलाते ह; चाय ठं डी करने के लए तश्तरी म उँ डेलते ह; और नमक बनाने वाले समुद्र-जल को गहरे
टक के स्थान पर चौड़ी उथली क्या रय म फैलाते ह।
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प्र.3 य द उपयुक्त क्रयाकलाप म जल के ान पर दूध लया जाए तो क्या होगा?
वही प्रवृ त्त दखाई दे गी — प्लेट का दूध बोतल के ढक्कन के दूध से बहुत पहले सूख जाएगा — पर कुछ रोचक अंतर भी ह गे।
दूध मुख्यत: जल ही है, अत: उसम का जल ठ क उसी प्रकार वा ष्पत होता है और अनावृत्त क्षेत्र ही ग त तय करता है।
दूध को शुद्ध जल से कुछ अ धक समय लगेगा, क्य क उसम उप स्थत वसा, प्रोट न और शकरा सतह पर एक परत बना दे ते ह
जो जल-कण के नकलने को धीमा कर दे ती है।
दूध पूरी तरह गायब नह होगा। सारा जल चले जाने पर पीछे सूखी सफेद-पीली ठोस परत बच जाएगी — वसा, प्रोट न, दुग्ध-
शकरा और ख नज।
बहुत दे र छोड़ने पर वह परत ख गंध दे ने लगेगी, क्य क दूध खराब हो जाता है।
इससे क्या सीखने को मलता है: दूध म से केवल जल वा ष्पत होता है। उसम घुले और मले ठोस पीछे रह जाते
ह। यही सद्धांत घंट दूध औटाने पर खोया (मावा) दे ता है और नमक-क्या रय म समुद्र-जल सूखने पर नमक दे ता
है।
सुझाव: य द आप वास्तव म यह कर तो बहुत थोड़ी मात्रा ली जए और बची हुई परत फक द जए — उसे च खए
नह ।
प्र.4 क्रयाकलाप 8.7 से मलता-जुलता एक अन्य क्रयाकलाप बनाइए जससे यह जाना जा सके क जल के वाष्पन
क तीव्रता को प्रभा वत करने वाली अन्य प र तयाँ कौन-सी ह। आप क्या प रवतन करगे और क्या समान
रखगे? ता लका 8.5 म आँकड़े अं कत कर।
त जो समान रखी गई— ______________________
त जो प रव तत हुई पूण वाष्पीकरण म लगने वाला समय
................................
ता लका 8.5, पृष्ठ 147 — अन्वेषण के आँकड़े अं कत करना जहाँ एक त प रव तत होती है और अन्य त
समान रहती है (पुस्तक के अनुसार रक्त)।
एक प र स्थ त चु नए, केवल उसे बद लए और शेष सब समान र खए। तीन अच्छे प्रारूप:
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as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
प्रारूप प रव तत प र त समान रखी गई प र तयाँ क्या मलता है
as e
com
.उसी a g l
क. वायु एक तश्तरी चलते पंखे के नीचे, दू स री वही तश्त रयाँ, उतना ही जल, वही कमरे पंखे के नीचे वाली तश्तरी बहुत पहले
m
ase
क गत कमरे की शात
ं वायु में का ताप, वही आद्रता, साथ-साथ आरंभ सूखती है
aख.glताप एक तश्तरी धूप वाली िखड़की पर, वही तश्त रयाँ, उतना ही जल, वही शांत गरम स्थान वाली तश्तरी बहुत पहले
दू स री उसी कमरे की छाया में वायु सूखती है
co m
ग. आद्रता एक तश्तरी खुले कमरे में, वैस ी ही
e m .
वही तश्त रयाँ, उतना ही जल, वही स्थान, ढकी तश्तरी लगभग सूखती ही नही ं ag
दू स री उलटे काँच के मतबान से ढकी
g l asवही ताप — मतबान की वायु शीघ वाष्प से भर
हुई
a जाती है
co m
m.
प्रारूप "क" के लए भरी गई ता लका 8.5:
m as e
.co
त जो समान रखी गई — जल क मात्रा, तश्तरी का आकार, कमरे का ताप, आद्रता
a g l
a s eतmजो प रव तत हुई
a gl
पूण वाष्पीकरण म लगने वाला समय
s
शांत वायु (पंखा बंद) लगभग 2 घंटे 30 िमनट
m a
m .coलगभग 45 िमनट agl
se
ग तशील वायु (पंखा पूरी ग त पर)
g l a
a
बहती वायु वाष्पीकरण को तेज क्य करती है: जल के ठ क ऊपर क वायु क परत शीघ्र ही वाष्प से भर जाती है
co m
.
और फर आगे नकलने को रोक दे ती है। पंखा या हवा उस भरी हुई परत को नरंतर हटाकर ताजी, शुष्क वायु लाती
em
as
रहती है, अत: वाष्पीकरण पूरी ग त से चलता रहता है।
m l
.co
m जाँच: प्रारूप "ग" सबसे च काने वाला है और उसके लए केवल एक काँच का मतबान चा हए। यह सबसे a g
a s eस्वयं
a gl स्पष्ट रूप से दखाता है क अंतत: वाष्पीकरण को आद्रता ही रोकती है।
se m
com g l a
m . a
l ण कर — पृष्ठ 148 और 149
क्रयाकलाप 8.8— आइए, अन्वेgष ase
a
सूय के प्रकाश एवं छाया म दो ढक्कन का जल ( चत्र 8.6)
co m
क्रयाकलाप क्या आप जानते ह?
m .
o m l a se
m .c एक ढक्कन को सूय के प्रकाश म और दूसरे को छाया म रख, प्रत्येक a15g मनट के प ात दोन का अवलोकन कर
a s e
agl
प्र.1
तथा प्रत्येक त म जल के पूरी तरह वा ष्पत होने म लगने वाला समय अं कत कर। क्रयाकलाप 8.8 और अन्य
.c
m
समान अनुभव से आप क्या नष्कष नकालते ह?
m a s e
e m . co agl
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स्वच्छ ग्रीष्म दवस म दो समान ढक्कन म बराबर जल के लए प्र तदश पाठ्यांक:
co m
m .
m as e
.co
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ढक्कन कहाँ रखा है पूण वाष्पीकरण म लगने वाला समय
सूय के प्रकाश म लगभग 1 घंटा 15 िमनट
छाया म लगभग 4 घंटे
पुस्तक के शब्द म नष्कष:
छाया वाले ान म रखे ढक्कन क तुलना म सूय के प्रकाश म रखे हुए ढक्कन से जल तीव्रता से वा ष्पत हो जाता है।
प्राय: तेज धूप वाले दन म कपड़े जल्द सूख जाते ह।
हवा क ग त बढ़ने से जल तीव्रता से वा ष्पत होता है — तेज हवा वाले दन कपड़े जल्द सूखते ह।
बरसात के दन जल धीरे-धीरे वा ष्पत होता है, क्य क वायु म आद्रता पहले से अ धक होती है।
सूय का प्रकाश इतना बड़ा अंतर क्य लाता है: धूप जल और ढक्कन दोन को गरम करती है। अ धक गरम जल
अथात् अ धक तेज चलते कण, और प्र त सेकंड कह अ धक कण सतह से नकल भागते ह। ध्यान द जए क दोन
ढक्कन एक जैसे थे, उनम जल भी बराबर था और दोन को 15-15 मनट के समान अंतराल पर दे खा गया — अत:
केवल ताप ही भन्न था।
सुझाव: केवल "धूप ने सुखा दया" मत ल खए। बताइए क कौन-सी प र स्थ त बदली — जल का ताप — और
शेष सब समान रखा गया। यही अवलोकन को नष्कष बनाता है।
प्र.2 प्राय: तेज धूप वाले दन म कपड़े जल्द सूख जाते ह। क्या तेज हवा वाले दन कपड़े जल्द सूखते ह या धीमी ग त
से?
जल्द सूखते ह। तेज हवा वाले दन कपड़े अ धक तेजी से सूखते ह — प्राय: शांत गरम दन से भी तेज।
अिधक वायु की गित → कपड़ े के ऊपर की आद परत हट जाती है → तीव वाष्पीकरण
हवा इतनी सहायक क्य है:
1. जल वा ष्पत होते ही गीले कपड़े से सट हुई अत्यंत आद्र वायु क पतली परत बन जाती है।
2. य द वह परत वह टक रहे तो शीघ्र ही वाष्प से भर जाती है और वाष्पीकरण लगभग रुक जाता है।
3. हवा इस भरी हुई परत को उड़ा ले जाती है और उसके स्थान पर ताजी, शुष्क वायु लाती है।
4. अत: कपड़े क सतह के सामने सदा शुष्क वायु रहती है और जल पूरी ग त से नकलता रहता है।
धूप से महत्वपूण अंतर पर ध्यान द जए: हवा ऊष्मा नह दे ती — बहती हवा प्राय: शांत वायु से ठं डी ही होती है।
वह वाष्प हटाकर सुखाना तेज करती है, जल को गरम करके नह । यह बहुत सामान्य ां त है, और अभ्यास का प्रश्न
5 इसी पर आधा रत है।
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दै नक प्रमाण: इसी लए धुले कपड़े बंद स्नानघर के स्थान पर खुली, हवादार जगह म टाँगे जाते ह, और उसी दन
वही कपड़े द वार से घरी बालकनी क तुलना म छत पर जल्द सूखते ह।
प्र.3 य द आप बरसात के दन अपने कपड़े सुखाना चाहते ह तो आप इन्ह शीघ्रता से कैसे सुखा सकते ह?
बरसात के दन वायु पहले से बहुत आद्र होती है, अत: हम शेष तीन प र स्थ तय — क्षेत्र, वायु क ग त और ताप — पर काम
करना होगा।
क्या कर यह कस प र त का उपयोग करता है
पहले कपड़ को अच्छ तरह नचो ड़ए या मशीन म घुमाइए सुखाने से पहले ही अिधकांश जल िनकल जाता है
हर कपड़े को चौड़े तार या स्टड पर पूरा फैलाइए, कभी समटा या मोड़ा हुआ नह अनावृत्त ेत्र बढ़ ता है
कपड़ के बीच अंतर रखकर टाँ गए दोनों ओर वायु पहच
ु ँ पाती है
पंखा चलाइए, या दो खुली खड़ कय के बीच के झ के म टाँ गए वायु की गित बढ़ ती है और आद परत हट जाती है
गरम कमरे म सुखाइए, या गरम इस्तरी फे रए, या हेयर ायर अथवा मशीन के ायर का ताप बढ़ ता है
उपयोग क जए
छोटे बंद स्नानघर म मत सुखाइए वहाँ बंद वायु वाष्प से भर जाती है और सूखना रुक
जाता है
यहाँ आद्रता ही खलनायक क्य है: य द वायु म जल क मात्रा पहले से ही अ धक है (अ धक आद्रता) तो जल
मंदग त से वा ष्पत होता है। वायु के पास और वाष्प लेने क जगह ही कम बची होती है। मौसम हम नह बदल सकते,
पर एक पंखा और भली-भाँ त फैलाया गया कपड़ा काम कर दे ते ह।
क्या आप जानते ह? बरसात के दन म वायु म जलवाष्प क मात्रा अ धक होती है इस लए बरसात के दन अ धक
आद्र होते ह। इसी लए बरसात का दन चप चपा लगता है — पसीना वा ष्पत नह हो पाता, अत: शरीर सरलता से
ठं डा नह हो पाता।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 149
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8.6 शीतलन प्रभाव
प्र.1 आवी पूछती है क “ म के मटके म जल इतना ठं डा क्य है? मने जल को स्टे नलेस स्ट ल के बतन म कभी ठं डा
होते नह पाया।” आपके वचार म इसका क्या कारण है?
इसका कारण है वाष्पीकरण और उससे उत्पन्न शीतलन प्रभाव।
1. म का मटका पक हुई म का बना होता है, जसम अत्यंत सूक्ष्म छद्र होते ह।
2. जल इन छद्र से धीरे-धीरे रसकर बाहरी सतह पर नमी क पतली परत के रूप म आ जाता है — इसी लए मटका सदा थोड़ा
गीला-सा लगता है।
3. यह जल क परत वायु म वा ष्पत हो जाती है।
4. वा ष्पत होने के लए जल को ऊष्मा चा हए, और वह ऊष्मा वह मटके से तथा भीतर के जल से लेता है।
5. ऊष्मा खोकर भीतर का जल ठं डा हो जाता है — और यह क्रम दन भर चलता रहता है।
स्टे नलेस स्ट ल का बतन ऐसा क्य नह करता: स्ट ल म छद्र नह होते। कोई जल बाहरी सतह तक पहुँच ही नह सकता, अत:
वा ष्पत होने के लए कुछ नह होता और कोई ऊष्मा नह हटती। भीतर का जल कमरे के ताप पर ही बना रहता है।
जल िछद ों से िरसकर बाहर आता है → वािष्पत होता है → मटके और भीतर के जल से ऊष्मा लेत ा है → जल
ठं डा हो जाता है
मटका शुष्क गरमी म सबसे अच्छा काम क्य करता है: वाष्पीकरण तब सबसे तेज होता है जब वायु गरम, शुष्क
और ग तशील हो। राजस्थान या वदभ क ग्रीष्म ऋतु ठ क ऐसी ही होती है, इसी लए वहाँ मटका जल को कमरे से
कई डग्री ठं डा रख पाता है। आद्र मानसून म वही मटका बहुत कम ठं डक दे ता है, क्य क वाष्पीकरण मंद पड़ जाता
है।
सुझाव: मटके को छायादार, हवादार स्थान पर र खए और उस पर गीला कपड़ा लपे टए। दोन से बाहरी वाष्पीकरण
बढ़ता है और भीतर का जल और अ धक ठं डा होता है। मटके को प्ला स्टक म कभी मत लपे टए — इससे
वाष्पीकरण रुक जाता है और पूरा उ े श्य ही समाप्त हो जाता है।
प्र.2 शीतलन प्रभाव के अन्य उदाहरण क्या ह?
जहाँ भी जल वा ष्पत होता है, वहाँ ठं डक आती है। अध्याय स्वयं ग्रीष्मकाल म फश और छत पर जल छड़कने का उदाहरण दे ता है।
कुछ और:
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उदाहरण क्या वा ष्पत होता है और क्या ठं डा होता है
पसीना आना पसीना त्वचा से वािष्पत होकर शरीर से ऊष्मा ले जाता है — शरीर इसी से अपना ताप िनयंित्रत
करता है
पंखे के नीचे बैठना बहती वायु पसीने को तेजी से वािष्पत कराती है, अत: पंखा ठं डक न दे ते हुए भी हमें ठं डा लगता है
मटका और सुराही िम ी से िरसकर आया जल वािष्पत होकर भीतर के जल को ठं डा करता है
फश या छत पर जल का छड़काव जल वािष्पत होकर फश और उसके ऊपर की वायु को ठं डा करता है
ार पर गीले खस या जूट के पद पद का जल वािष्पत होते ही उससे होकर आती वायु ठं डी हो जाती है
डेजट कूलर वायु गीली पि यों से खी ंची जाती है; जल वािष्पत होता है और वायु ठं डी होकर बाहर आती है
त्वचा पर सै नटाइजर या स्प रट ऐल्कोहल बहुत तेजी से वािष्पत होता है और हथेल ी ठं डी लगती है
ज्वर म माथे पर गीली प प ी से वािष्पत होता जल िसर से ऊष्मा ले जाता है
कुत्ते का हाँफना; भस का तालाब म जीभ या गीली त्वचा से वािष्पत होता जल पशु को ठं डक दे ता है
बैठना
इन सबके पीछे एक ही नयम: वाष्पीकरण एक शीतलन प्रक्रम है। कोई द्रव बना ऊष्मा लए वाष्प नह बन
सकता, और वह ऊष्मा वह उसी से लेता है जसके संपक म है — त्वचा, म , फश या वायु।
प्र.3 जब आप अपने हाथ पर सै नटाइजर लगाते ह तब आपको कैसा महसूस होता है?
हथेली स्पष्ट रूप से ठं डी लगती है, और ठं डक तब सबसे अ धक होती है जब सै नटाइजर गायब हो रहा होता है। हाथ पर फूँक मारने
से वह और भी ठं डी लगती है।
कारण:
सै नटाइजर मुख्यत: ऐल्कोहल होता है, जो सामान्य ताप पर बहुत तेजी से वा ष्पत होता है।
मलने से वह पतली परत म फैल जाता है, अत: अनावृत्त क्षेत्र बड़ा होता है और वाष्पीकरण बहुत तीव्र होता है।
वा ष्पत होता द्रव आवश्यक ऊष्मा आपक त्वचा से लेता है, अत: त्वचा ऊष्मा खोकर ठं डी लगती है।
फूँक मारने से वायु क ग त जुड़ जाती है, जससे वाष्पीकरण और तेज हो जाता है — इसी लए ठं डक और बढ़ जाती है।
आवी का नष्कष: अब म समझ सकती ँ क पंखे के नीचे बैठने से हम ठं डक क्य अनुभव होती है। पंखे क हवा
पसीने को वा ष्पत करती है और हम ठं डा अनुभव करने म मदद करती है। हथेली पर सै नटाइजर और शरीर पर
पसीना ठ क एक ही ढं ग से काम करते ह — पंखा ठं डी हवा नह फकता, वह केवल द्रव को वा ष्पत होने म सहायता
करता है।
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as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
प्रयास कर — यह "और भी सीख" का पहला काय भी है: एक हाथ गीला क जए और दूसरा सूखा छो ड़ए,
. com
m a s emहोते जल से
gl
फर दोन पर फूँक मा रए। केवल गीला हाथ ठं डा लगता है, जससे सद्ध होता है क ठं डक वा ष्पत
आती है, वायु.cकo
em
े ठं डे होने से नह ।
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agl
क्रयाकलाप 8.9— आइए, एक मॉडल बनाएँ — पृष्ठm149 और 150
. c o ag
गमल से बना (पॉट-इन-पॉट) कूलर ( चत्र 8.7) और सुराही ( चत्रm
a s e 8.8)
क्रयाकलाप agl
co m
e m.
अवलोकन कर चचा कर क कस प्रकार से गमल के अंदर शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है।
as
प्र.1
m l
.co a g
a s em
l का कूलर बड़े पैमाने पर काम करता हुआ मटका ही है। याद क जए क यह कैसे बनता है: एक बड़ा म का गमला, उसक
agगमल
तली म रेत क एक परत, बीच म रखा छोटा गमला, बीच के रक्त स्थान म और रेत, रेत म डाला गया जल, और ऊपर ढक्कन
m a s
.co agl
या जूट क गीली बोरी।
se m
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शीतलन कैसे होता है — चरणबद्ध रूप से:
l
ag है।
1. गीली रेत बाहरी गमले को सदा नम रखती
2. जल बाहरी गमले के छद्र से रसकर उसक बाहरी सतह तक पहुँचता है।
3. वहाँ वह आस-पास क वायु म वा ष्पत हो जाता है।
. com
m a s emवस्तुओं से ली जाती है।
o गमले का भीतरी भाग कमरे से कई डग्री ठं डा हो जाता है, और ऊपर रखीaजूgटlक गीली बोरी मुँह के लए यही काम
4. वाष्पीकरण को ऊष्मा चा हए, और वह ऊष्मा बाहरी गमले, रेत, भीतरी गमले तथा भीतर रखी
. cछोटे
em
5. अत:
l a s करती है।
ag 6. नय मत रूप से जल डालते रहने से रेत नम रहती है और यह प्रक्रम कभी रुकता नह । इसम कह भी वद्युत का उपयोग नह
होता।
se m
com g l a
m . a
ase
गीली रेत → जल बाहरी सतह तक िरसता है → वािष्पत होता है → भीतर से ऊष्मा लेत ा है → साग-भाजी और
फल ठं डे व ताजे रहते है ं agl
co m
m .
o m l a se
रेत क्य डाली जाती है: रेत एक भंडार का काम करती है। वह बहुत सारा जल रोककर बाहरी गमले को लगातार
.cदे ती रहती है, जससे वाष्पीकरण कुछ मनट म रुकने के बजाय घंट चलताagहै। साथ ही वह दोन गमल को अलग
m रखती है, जससे ठं डा भीतरी गमला सीधे गरम वायु के संपक म नह आता।
l a se
ag
.c
s e m
m a
co agl
क्या आप जानते ह? इस रचना को वश्व भर म जीर पॉट (zeer pot) कहा जाता है। बना बजली वाले गाँव म
m .
as e
यह टमाटर और पत्तेदार साग-भाजी को कई दन ताजा रख सकता है, और गरम, दूरस्थ क्षेत्र म दवाइयाँ रखने के
लए भी इसका उपयोग हुआ है।
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com
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m ase
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प्र.2 कूलर म कुछ स ब्जयाँ एवं फल रखकर एक सप्ताह तक प्र त दन अवलोकन क जए। इसम साग और फल को
कतने दन तक ताजा रखा जा सकता है? वह कौन-सी तयाँ ह गी जो इन दन क संख्या को प्रभा वत कर
सकती ह?
आप लगभग क्या पाएँगे: सामान्य भारतीय ग्रीष्म म अच्छ तरह बनाया गया पॉट-इन-पॉट कूलर अ धकांश साग-भाजी को खुली
रसोई क अलमारी से कह अ धक समय तक ताजा रखता है।
रखी गई वस्तु खुली अलमारी म पॉट-इन-पॉट कूलर म
टमाटर, बगन, शमला मच 2–3 िदन लगभग 8–12 िदन
पालक, ध नया और अन्य पत्तेदार साग एक िदन से भी कम लगभग 3–5 िदन
गाजर, फ लयाँ, भडी 2–4 िदन लगभग 7–10 िदन
अमरूद, केला, अंगूर 2–3 िदन लगभग 5–8 िदन
दन क संख्या को प्रभा वत करने वाली तयाँ:
वायु कतनी शुष्क है। गरम, शुष्क वायु म वाष्पीकरण तीव्र होता है और शीतलन सव त्तम। आद्र मानसून म कूलर बहुत कम
काम करता है।
वायु क ग त। छायादार, हवादार स्थान पर रखा कूलर बंद कोने क तुलना म कह अ धक ठं डा रहता है।
धूप। सीधी धूप गमले को उतनी तेजी से गरम कर दे ती है जतनी तेजी से वाष्पीकरण उसे ठं डा नह कर पाता — कूलर सदा
छाया म र खए।
आप कतनी नय मतता से जल डालते ह। रेत सूखते ही शीतलन तुरंत रुक जाता है।
गमल क गुणवत्ता। बना पॉ लश क , अच्छ तरह पक म सरंध्र होती है और अच्छा काम करती है; पॉ लश कया या रँगा
गमला बंद छद्र के कारण लगभग कुछ नह करता।
ढकने क व ध। सूखे ढक्कन से गीली जूट क बोरी बेहतर है, क्य क उससे भी वाष्पीकरण होता है।
क्या और कतना रखा है। केवल ताजी, सूखी और बना कट -फट उपज ही रखनी चा हए, और गमला इतना ठसाठस न भरा
जाए क वायु न चल सके।
सुझाव: वैसी ही साग-भाजी का एक समूह कूलर के बाहर नयंत्रण के रूप म र खए और प्र त दन तुलना क जए।
तुलना के बना यह दावा नह कया जा सकता क कूलर से कोई अंतर पड़ा।
प्र.3 बेहतर शीतलन के लए हम रेत के ान पर और क्या उपयोग कर सकते ह?
बीच म भरी सामग्री का केवल एक काम है — अ धक से अ धक जल रोककर बाहरी गमले को गीला रखना। अत: जो भी वस्तु
जल अच्छ तरह सोखे और गमले से सट रहे, वह चलेगी, और कुछ सामग्री रेत से बेहतर काम करती ह।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
सामग्री कतनी अच्छ
खस (वे टवर) क जड़ उ त्कृ ष्ट — बहुत जल रोकती है,ं वायु आर -पार जाने दे ती है ं और सुगंध भी दे ती है।
ं परंपरागत कू लरों में
यही पयुक्त होती है ं
गीला जूट या टाट, परत म भरा बहुत अच्छा — समान भार की रे त से कही ं अिधक जल सोखता है
कॉयर (ना रयल क जटा) या बहुत अच्छा — अपने भार से कई गुना जल रोक ले ता है
कोको-पीट
बुरादा या सूखी पुआल अच्छा, और गाँवों में सहज उपलब्ध
कोयले के टु कड़े अच्छा — सरंध होते है,ं जल रोकते है ं और गंध भी दू र रखते है ं
रेत (सामान्य वकल्प) काम करती है, सस्ती और सुल भ है, पर ऊपर की सामग ी से कम जल रोकती है
चकनी म या रुई खराब — िचकनी िम ी ठोस जम जाती है और वायु रोक दे ती है; रुई गीली पड़ी रहकर सड़ जाती है
अच्छ सामग्री क दो कसौ टयाँ: उसे पयाप्त जल रोकना चा हए (ता क आपू त दे र तक चले) और वह इतनी
ढ ली होनी चा हए क उसम से वायु नकल सके (ता क जल वास्तव म वा ष्पत हो सके)। रेत पहली कसौट पर
केवल औसत है, इसी लए खस क जड़ और कॉयर उससे बेहतर काम करते ह।
प्रयास कर: दो छोटे कूलर बनाइए — एक रेत का, एक गीले जूट का — और 5 घंटे बाद प्रयोगशाला तापमापी से
दोन के भीतर का ताप मा पए। दोन पाठ्यांक °C म ल खए — इससे आपका मॉडल एक वास्त वक प्रयोग बन
जाएगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 150
8.7 बादल हम वषा कैसे दे ते ह?
क्या आप जानते ह?
प्र.1 वा ष्पत जल को पृथ्वी क सतह पर पुन: लाने के प्रक्रम म संघनन एक महत्वपूण भू मका नभाता है। यह कैसे
होता है?
यह पाँच चरण म होता है — और यह सब आकाश के पैमाने पर वाष्पीकरण के बाद संघनन ही है।
1. जल ऊपर जाता है। महासागर , न दय , झील , गीली म , पौध और गीले कपड़ से जल वा ष्पत होकर अदृश्य जलवाष्प के
रूप म वायु के साथ ऊपर उठता है।
2. ऊपर उठती वायु ठं डी होती जाती है। पुस्तक कहती है — जैसे-जैसे वायु धरती क सतह से ऊपर उठती है तो यह ठं डी होती
जाती है।
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3. संघनन। एक न श्चत ऊँचाई पर वायु इतनी ठं डी हो जाती है क उसम उप स्थत वाष्प छोट -छोट जलक णकाओं म बदल
जाती है। ये क णकाएँ आमतौर पर धूल के कण के आस-पास बनती ह।
4. बादल। ये छोट जलक णकाएँ इतनी हल्क होती ह क वायु म तैरती रहती ह, और असंख्य क णकाएँ मलकर बादल के रूप
म दखाई दे ती ह।
5. वषा। बहुत-सी क णकाएँ मलकर बड़ी बूँद बनाती ह। कुछ बूँद इतनी भारी हो जाती ह क वायु उन्ह रोक नह पाती और वे
गरने लगती ह — इन गरती बूँद को ही हम वषा कहते ह। वशेष प र स्थ तय म ये ओले या हम के रूप म भी गरती ह।
वाष्पीकरण → ऊपर उठती, ठं डी होती वायु → धूल के कणों पर संघनन → तै रती किणकाएँ = बादल →
किणकाएँ िमलती है ं → भारी होकर वष , ओले या िहम
धूल के कण क्य आवश्यक ह: बल्कुल स्वच्छ वायु म वाष्प के लए बूँद बनाना क ठन होता है। धूल, नमक या धुएँ
का एक कण उसे जमने के लए सतह दे दे ता है। क्रयाकलाप 8.10 इसे सुंदर ढं ग से सद्ध करता है — बोतल तब
तक साफ रहती है जब तक जले हुए समाचार-पत्र का धुआँ न डाला जाए, और तभी धुँधलापन दखता है।
क्या आप जानते ह? जलवाष्प युक्त वायु वायुमंडल म ऊपर क्य जाती है? हल्क गैस से भरे गुब्बारे वायु म ऊपर
जाते ह। इसी प्रकार, जलवाष्प वायु से हल्क होती है जसके कारण यह ऊपर उठती है। गरम, आद्र वायु अपने आस-
पास क ठं डी शुष्क वायु से हल्क होती है, अत: वह ऊपर तैर जाती है — और वायुमंडल पृथ्वी के आस-पास हवा
क पतली परत है।
प्र.2 जलवाष्प युक्त वायु वायुमंडल (पृथ्वी के आस-पास हवा क पतली परत) म ऊपर क्य जाती है?
क्य क जलवाष्प वायु से हल्क होती है, अत: आद्र वायु ऊपर उठती है — ठ क वैसे ही जैसे हल्क गैस से भरा गुब्बारा ऊपर
जाता है।
दो बात उसे ऊपर धकेलती ह:
आद्र वायु शुष्क वायु से हल्क होती है। पुस्तक इसक तुलना गैस के गुब्बार से करती है: जैसा क हम जानते ह, हल्क गैस
से भरे गुब्बारे वायु म ऊपर जाते ह। इसी प्रकार, जलवाष्प वायु से हल्क होती है जसके कारण यह ऊपर उठती है।
गरम वायु ठं डी वायु से हल्क होती है। तपती भू म या गरम समुद्र के ऊपर क वायु गरम होकर फैलती है, हल्क हो जाती है
और अपनी वाष्प स हत ऊपर तैर जाती है। नीचे उसका स्थान लेने के लए ठं डी, भारी वायु आ जाती है।
वषा के लए यह क्य महत्वपूण है: जब तक आद्र वायु ऊपर न जाए, वह इतनी ठं डी नह हो पाती क उसक वाष्प
संघ नत हो सके। ऊपर उठना ही ठं डक दे ता है। इसी लए पहाड़ पर, जो चलती वायु को ऊपर चढ़ने के लए ववश
करते ह, इतनी वषा होती है — प श्चमी घाट और मेघालय क खासी पहा ड़याँ इसके भारतीय उदाहरण ह।
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स्वयं जाँच: जलते द ये या गरम चूल्हे के ऊपर (सुर क्षत दूरी से) पतले कागज क एक प पक ड़ए। वह ऊपर क
ओर फड़फड़ाती है, जो गरम वायु क ऊपर उठती धारा दखाती है। यही धारा जलवाष्प को बादल क ऊँचाई तक ले
जाती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 151
जल क यात्रा पर आवी क क वता
प्र.1 आवी वषा का आनंद लेती है और एक क वता रचती है। आप भी इस क वता को पूरा कर अपनी कक्षा म प्रस्तुत
कर सकते ह। (जल क बूँद असमान म फर … अब सोचो, समझो और करो वचार / कस पथ पर चले जल इस
बार)
दोन रक्त पं क्तय म वही लय और तुक रहनी चा हए, और उनम जल क यात्रा का एक और चरण जुड़ना चा हए। नीचे पूरी क हुई
क वता द गई है, जसे आप अपने ढं ग से बदल सकते ह।
जल की बूदँ े ं असमान में िफरे ं
सोचे ं धरती से कै से िमले?ं
वाष्प बन वायु में घूमें
बादल बन आसमान में झूमें
पर बने बफ या बािरश की धार
जल कै से िनणय ले इस बार
कही ं िगरे तो िहम कहलाए
कही ं वष की धार बन जाए
कहीं नदी बन खेत िसंच ाए
कहीं सागर में जा समाए
अब सोचो, समझो और करो िवचार
िकस पथ पर चले जल इस बार
इनके ान पर ये पं क्तयाँ भी उतनी ही अच्छ रहगी:
"कह ओस बन पत्ती पर छाए / कह भू-जल बन गहरे समाए"
"कह मटके को शीतल कर जाए / कह गमले के पौधे ह रयाए"
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
"कह कुएँ म चुपके उतर जाए / कह बादल बन फर लौट आए"
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अच्छ पू त क पहचान: यह क वता जल चक्र के वषय म प्रश्न और संभावनाओं क ंखला है, तथ्य क सूची
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नह । हर जोड़ी पं क्त जल क यात्रा का एक पड़ाव बताती है — हम, वषा, वाष्पीकरण, संघनन, नद का सागर म
l — और तुक के साथ समाप्त होती है। ज ासा का स्वर बनाए र खए, क्य क पूरा अध्याय उत्तर खोजने से
gमलना
aपहले प्रश्न पूछने पर ही आधा रत है।
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a s emप ढ़ए, हर एक जल चक्र का एक चरण ले और अपनी पं क्त के
gl वषा, नद — ऊपर उठाकर दखाए। तब कक्षा जल चक्र सुनेगी भी
प्रस्तु त के लए सुझाव: चार मत्र के साथ मलकर
समय उस चरण का सरल चत्र — सागर,aबादल,
और दे खेगी भी।
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m 8.10— आइए, सामू हक क्रयाकलाप म भागीदार बन — पृष्ठ 151 a g
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क्रयाकलाप
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प्ला स्टक क बोतल म बादल बनाना
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क्रयाकलाप
m.co agl
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1 लीटर क एक अनुपयोगी खाली बोतल म लगभग 1 कप जल डाल, ढक्कन कसकर बंद कर द, 2–3 मनट तक
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प्र.1
लगातार बोतल को जल्द -जल्द दबाएँ और छोड़, फर बोतल म जल के ऊपर के ान का अवलोकन कर। आप
क्या अवलोकन करगे?
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लगभग.c g छोड़ते ही क्षण भर के लए बहुत
कुछ नह होता। जल के ऊपर का स्थान साफ ही रहता है, या अ धक से अ धकaबोतल
m
se -सी धुंध दखती है जो तुरंत मट जाती है।
g l aहल्क
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भीतर क्या हो रहा है:
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दबाने से भीतर क वायु का दाब बढ़ता है; अचानक छोड़ने पर दाब घटता है और भीतर क वायु कुछ ठं डी हो जाती है।
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s नह होता। साफ बोतल क वायु म धूल के कण बहुत कम होते ह।
बोतल क वायु म नीचे के जल से आई जलवाष्प न श्चत रूप से होती है।
g l aआधार
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परंतु वाष्प के संघ नत होने के लए कोई
अत: कोई टकाऊ बादल नह बनता।
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यह पहला, "असफल" चरण ही सबसे महत्वपूण क्य है: यह नयंत्रण है। इसके बना, जब क्रयाकलाप के
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दूसरे भाग म बादल दखेगा तो आप नह बता पाएँगे क उसका कारण क्या था — दबाना, जल, या धुआँ। बना धुएँ
a s em के पहले करने से स्पष्ट हो जाता है क केवल ठं डक पयाप्त नह है।
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सावधान: कसकर बंद होने वाले ढक्कन क खाली, अनुपयोगी बोतल ली जए और इतनी जोर से मत दबाइए क
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ढक्कन उछल जाए।
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प्र.2 समाचार-पत्र का एक छोटा टु कड़ा जलाकर जल म मलाएँ और इस प्र क्रया को दोहराएँ। अब आप क्या
अवलोकन करगे और ऐसा क्य होता है?
अब बादल बन जाता है। पुस्तक के शब्द म — इस स्थ त म आप बोतल म जल के ऊपर कुछ धुँधलापन (बादल) दे खगे। दबाइए
तो धुँधलापन मट जाता है; छो ड़ए तो फर आ जाता है, बार-बार।
ऐसा क्य होता है:
1. जलते समाचार-पत्र से बोतल म बहुत छोटे , अदृश्य धूल और धुए ँ के कण नकल आते ह।
2. बोतल छोड़ते ही भीतर क वायु फैलती है और ठं डी हो जाती है।
3. अब ठं डी वायु क जलवाष्प के पास जमने के लए आधार है, अत: वह इन सूक्ष्म कण के चार ओर संघ नत होकर असंख्य
नन्ही बूँद बना दे ती है।
4. वे तैरती बूँद ही बादल ह — इसी लए धुँधलापन दखता है।
5. फर दबाने पर भीतर क वायु गरम व संपी डत होती है, बूँद वा ष्पत हो जाती ह और बोतल साफ हो जाती है।
ठं डक + जलवाष्प + धूल के कण → छोटी-छोटी बूदँ े ं → बादल
यह क्रयाकलाप क्या दशाता है: यह बादल के नमाण म धूल के कण क भू मका दखाता है। आकाश म यही
काम खेत और मरुस्थल से उड़ी धूल, समुद्र फुहार का नमक, धुआँ और परागकण करते ह। इसी लए वास्त वक
वायु, जो कभी पूणत: स्वच्छ नह होती, इतनी सहजता से बादल बना लेती है।
सावधान: कागज जलाते हुए सावधानी बर तए, यह काय शक्षक क दे खरेख म क जए, और जला हुआ टु कड़ा
तुरंत जल म डा लए ता क आग बुझ जाए।
क्रयाकलाप 8.11— आइए, इस प्र क्रया को समझ — पृष्ठ 151 और 152
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चत्र 8.9 जल क अव ाओं एवं ग त म प रवतन — जल चक्र
क्रयाकलाप आइए, चतन कर
प्र.1 बॉक्स म दए गए शब्द और चत्र म दशाए गए तीर के चह्न का उपयोग करके चत्र 8.9 तीरां कत कर यह दशाएँ
क जल कहाँ संग्र हत है, जल कैसे अपनी अव ा बदलता है और यह कहाँ ग त करता है। (बादल, झील, समुद्र/
महासागर, नद , भू-जल, वाष्पीकरण, संघनन, वषा, हम)
बादल, झील, समुद/महासागर, नदी, भू-जल, वाष्पीकरण, संघनन, वष , िहम
चत्र 8.9, पृष्ठ 152 — पुन न मत रेखा चत्र: जल क अव ाओं एवं ग त म प रवतन। तीर के चह्न पुस्तक के अनुसार
ह; ऊपर दए शब्द आपको लगाने ह।
नीचे चत्र दया गया है जसम सभी नौ शब्द सही स्थान पर रखे गए ह।
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संघनन
बादल
िहम
वष
वाष्पीकरण
नदी झील
समुद/महासागर
भू-जल
जल चक्र। महासागर, न दय , झील और गीली धरती से जल वा ष्पत होता है; ऊपर उठती वायु ठं डी होती है और वाष्प धूल के कण के
आस-पास संघ नत होकर बादल बनाती है; क णकाएँ मलकर वषा, ओले या हम के रूप म गरती ह; जल झील और न दय म एकत्र होता
है, भू-जल के रूप म भू म म उतरता है और अंतत: महासागर म लौट जाता है।
बॉक्स का शब्द चत्र म कहाँ लगेगा यह क्या दशाता है
समुद्र/महासागर बाईं ओर का िवशाल जलरािश जल का संगह — पथ्ृ वी का अिधकांश जल
वाष्पीकरण महासागर और गीली धरती से ऊपर जाते तीरों पर अवस्था पिरवतन: द व → गैस
संघनन ऊपर बनते हुए बादल के पास अवस्था पिरवतन: गैस → द व
बादल तैर ती जलकिणकाओं के समूह आकाश में जल का संगह
वषा गहरे बादल से नीचे जाते तीरों और बूदँ ों पर जल का पथ्ृ वी की ओर लौटना
हम पवत की सफे द चोटी पर ठोस अवस्था में संगिहत जल
नद पहाड़ों से महासागर तक जाती टेढ़ी-मेढ़ी नीली रे खा धरती पर जल की गित
झील धरती पर ठहरा हुआ जलाशय सतह पर जल का संगह
भू-जल भूिम की सतह के नीचे की प ी, िजसमें नीचे जाते तीर है ं भूिम के भीतर संगिहत जल
अध्याय का सार: जल महासागर और पृथ्वी क सतह से जलवाष्प के रूप म वा ष्पत होकर वायु म जाता है और वषा, ओल तथा
हम के रूप म पुन: लौटता है और अंतत: बहकर महासागर म चला जाता है। जल के इस प्रकार चक्रण को जल चक्र कहते ह।
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इसे चक्र क्य कहते ह: इसका न आरंभ है न अंत, और नया जल कभी बनता नह । वही जल घूमता रहता है —
आज आपके गलास का जल कभी हमालय के हमनद म, कभी बंगाल क खाड़ी म और कभी कसी आम के पेड़
के भीतर रहा होगा। इसी लए जल को व्यथ करना या प्रदू षत करना इतना गंभीर है: हम और जल बना नह सकते।
प्र.2 मने क्या अच्छा कया? क्या म जल चक्र के सभी भाग को नामां कत करने म सक्षम था/थी? जल चक्र के कौन-
से भाग मुझे स्पष्ट नह थे?
यह आत्म- चतन का बॉक्स है, अत: उत्तर आपका अपना होना चा हए। इसे ईमानदारी से तीन छोटे भाग म ल खए — इसके अंक
नह मलते, यह आपको दखाता है क क्या दोहराना है।
नमूना उत्तर: मने क्या अच्छा कया: मने महासागर, बादल, वषा, नद और पवत पर हम बना सहायता के
नामां कत कए, और सभी तीर क दशा भी सही रखी — वाष्पीकरण के लए ऊपर और वषा के लए नीचे। क्या म
सभी भाग नामां कत कर सका/सक : हाँ, नौ के नौ, पर भू-जल पर मुझे दो बार सोचना पड़ा। क्या स्पष्ट नह था:
मने पहले "संघनन" वषा के पास लख दया था, बनते हुए बादल के पास नह । अब म समझता/समझती ँ क
संघनन वह क्षण है जब वाष्प बूँद म बदलती है और बादल बनाती है, जब क वषा उसके बाद तब होती है जब बूँद
मलकर गरने योग्य भारी हो जाती ह।
अपने चत्र म ये बात अवश्य जाँ चए:
क्या वाष्पीकरण का तीर ऊपर क ओर और वषा के तीर नीचे क ओर ह?
क्या संघनन वहाँ अं कत है जहाँ बादल बनता है, न क जहाँ वषा गरती है?
क्या भू-जल भू म क सतह के नीचे दखाया गया है?
क्या नद जाकर महासागर म मलती है, जससे चक्र पूरा होता है?
क्या आपने दखाया है क वाष्पीकरण केवल समुद्र से नह , धरती, झील और न दय से भी होता है?
चतन व ान का अंग क्य है: यह ठ क-ठ क जान लेना क कौन-सा चरण गलत हुआ, अंक जानने से अ धक
उपयोगी है। पूरा अध्याय इसी आदत पर चला है — अवलोकन, प्रश्न, संभा वत कारण, प्रयोग, और फर पीछे मुड़कर
दे खना क क्या सही नकला।
आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 154 और 155
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय के अभ्यास प्रश्न
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आइए, और अ धक सीख
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a s emल खत म से कौन संघनन का उत्तम वणन करता है? (क) जल का वाष्प के रूप म प रवतन। (ख) जल का
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नम्न
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प्र.1
द्रव से गैसीय अव ा म प रवतन का प्रक्रम। (ग) जल क छोट बूँद से बादल का बनना। (घ) जलवाष्प का
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उसक द्रव अव ा म प रवतन।
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मgप रवतन।
उत्तर: (घ) जलवाष्प का उसक द्रव अव ा a
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यही अध्याय क अपनी प रभाषा है — जलवाष्प के द्रव अवस्था म प रवतन क प्र क्रया संघनन कहलाती है।
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वकल्प यह सही क्य है या गलत क्य है
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गलत — यह वाष्पीकरण है, उलटा पक्रम
agl(ख) जल का द्रव से गैसीय अवस्था म
(क) जल का वाष्प के रूप म प रवतन
गलत — यह भी वाष्पीकरण ही है, के वल दू स रे शब्दों में
प रवतन
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mघनन का पिरणाम है, संघनन नही ं। संघनन ही पहले वे बूदँ े ं बनाता है; बादल तो उन agl
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बूदँ ों काaिदखने वाला रूप है
(ग) जल क छोट बूँद से बादल का गलत — यह सं
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बनना
(घ ) जलवाष्प का उसकी द व अवस्था में सही — गैस → द व, जो तब होता है जब वाष्प िकसी ठं डी सतह से िमलती है
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पिरवतन
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m .c काटने का सूत्र: प रवतन क दशा प ढ़ए। संघनन म प रवतन गैस →agद्रव होना चा हए। वकल्प (क) और
se(ख) दोन द्रव → गैस क ओर ह, अत: तुरंत कट जाते ह। (ग) और (घ) म से वह चु नए जो प्रक्रम बताता है, उसका
वकल्प
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agl प रणाम नह ।
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प्र.2 नीचे क द गयी प्र क्रयाओं म से कस प्र क्रया म वाष्पीकरण अ त महत्वपूण है— (क) रंग भरना: (i) क्रेयॉन से
(ii) पानी के रंग से (iii) ऐक्रे लक रंग से (iv) प सल रंग से; (ख) कागज पर लखना: (i) प सल से (ii) स्याही
वाले पेन से (iii) बॉल पॉइंट पेन से
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s e m(क) रंग भरना — उत्तर है (ii) पानी के रंग से।
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रंग भरने का क्या वाष्पीकरण स म्म लत है?
माध्यम
(i) क्रेयॉन से नही ं — क्रेयॉन ठोस मोम है िजसे कागज पर रगड़ा जाता है। कु छ सूखना ही नही ं है
(ii) पानी के रंग ों से हाँ, अित महत्वपूण — रंगद व्य जल में िमला होता है। िचत्र तभी पूर ा होता है जब जल वािष्पत होकर रंग को कागज पर
छोड़ जाता है
(iii) ऐक्रे लक रंग से जल का वाष्पीकरण होता तो है, पर रंग ऐक्रेिलक के जमने से भी बैठता है। पानी के रंग अिधक स्पष्ट उत्तर है ं
(iv) प सल रंग से नही ं — ठोस रंग ीन सीसा, कु छ भी गीला नही ं
(ख) कागज पर लखना — उत्तर है (ii) स्याही वाले पेन से।
लखने का क्या वाष्पीकरण स म्म लत है?
साधन
(i) प सल से नही ं — ठोस ग ैफ ाइट तुर ंत िनशान छोड़ दे ता है, सूखने को कु छ नही ं
(ii) स्याही वाले हाँ, अित महत्वपूण — फाउं टेन पेन की स्याही पतला, जल -आधािरत द व है। जब तक स्याही का जल वािष्पत न हो जाए ,
पेन से िलखावट फै लती रहती है — इसीिलए पहले सोख्ता कागज रखा जाता था
(iii) बॉल पॉइंट बहत
ु कम — बॉल पेन की स्याही गाढ़ ी, तैल ीय लुग दी होती है जो लगभग तुर ंत सूख जाती है और वाष्पीकरण पर बहत
ु कम
पेन से िनभर है
लगाने का नयम: पू छए क पदाथ कागज पर ऐसे द्रव के रूप म रखा जा रहा है जसे सूखना है या नह । य द हाँ,
तो वाष्पीकरण अ नवाय है; य द पदाथ पहले से ठोस है, तो वाष्पीकरण क कोई भू मका नह ।
स्वयं जाँच: एक पं क्त फाउं टेन पेन से और एक बॉल पेन से ल खए, और पाँच सेकंड बाद दोन को छू कर दे खए।
फाउं टेन पेन वाली पं क्त फैल जाती है; बॉल पेन वाली नह ।
प्र.3 आजकल हम अनेक ान पर हरे रंग क प्ला स्टक क घास दखाई दे ती है। प्राकृ तक घास के आस-पास का
ान प्ला स्टक क घास के आस-पास के ान क तुलना म अ धक ठं डा लगता है। क्या आप पता लगा सकते ह
क ऐसा क्य है?
क्य क प्राकृ तक घास जल से भरी होती है और वाष्पीकरण ारा नरंतर जल खोती रहती है, जब क प्ला स्टक क घास म
जल होता ही नह ।
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प्राकृ तक घास प्ला स्टक क घास
जल क हाँ — पित्तयों में, नीचे की िम ी में और उस पर पड़ी ओस िबल्कु ल नही ं; नीचे पाय: बंद चटाई होती है
उप त में
वाष्पीकरण िनरंतर — पित्त यों और नम िम ी से जल िनकलता रहता कु छ नही ं
है
ऊष्मा पर प्रभाव वाष्पीकरण पित्तयों और वायु से ऊष्मा ले ले ता है, दोनों ठं डे अवशोिषत सारी ऊष्मा वही ं रहकर वायु को दे दी जाती है
रहते है ं
धूप म व्यवहार काफी ठं डी रहती है; दोपहर में भी नंग े पाँव चला जा बहुत गरम हो जाती है — प्लािस्टक धूप सोखकर शीघ तप
सकता है जाता है
एक पं क्त म व ान: वाष्पीकरण एक शीतलन प्रक्रम है। घास से नकलने वाला हर ग्राम जल अपने साथ ऊष्मा
ले जाता है, अत: प्राकृ तक लॉन एक वशाल, मौन, बना बजली के चलने वाले कूलर जैसा काम करता है। प्ला स्टक
क घास के पास वा ष्पत होने को कुछ नह , अत: वह केवल धूप सोखकर गरम होती है और अपने ऊपर क वायु को
भी गरम कर दे ती है।
स्वयं जाँच: धूप वाली दोपहर म प्रयोगशाला तापमापी को पहले असली लॉन के ठ क ऊपर और फर प्ला स्टक क
चटाई के ऊपर दो-दो मनट र खए। दोन पाठ्यांक °C म ल खए — अंतर प्राय: 10 °C से भी अ धक होता है।
प्र.4 जल के अ त रक्त अन्य द्रव पदाथ के उदाहरण द जए जो वा ष्पत होते ह।
अनेक द्रव वा ष्पत होते ह, और उनम से कई जल से कह तेजी से।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
द्रव कहाँ मलता है कतनी तेजी से वा ष्पत होता है
स्प रट / ऐल्कोहल हड सै नटाइजर, इंजेक्शन से पहले क बहुत तेज — त्वचा तुर ंत ठं डी लगती है
रुई
ऐसीटोन नेल-पॉ लश रमूवर बहुत तेज, तीव गंध के साथ
पे ोल पे ोल पंप पर बहुत तेज — कई मीटर दू र से गंध आ जाती है
म का तेल और डीजल लालटे न, स्टोव, वाहन तेज
इत्र, डयोडरट, अत्तर त्वचा पर लगाया जाने वाला तेज — इसीिलए हमें उसकी गंध िमलती है
तारपीन और थनर तैल रंग के साथ तेज
दूध, छाछ, चाय रसोई म धीमा — इनका के वल जल वािष्पत होता है, ठोस पीछे रह
जाते है ं
सरका, न बू का रस खाना पकाने म धीमा
ना रयल का तेल, सरस का हर घर म बहुत धीमा, पर महीनों में वे भी वािष्पत होते है ं
तेल
भन्न द्रव क वाष्पन दर भन्न क्य है: कुछ द्रव के कण जल क तुलना म कह कम मजबूती से बँधे होते ह, अत:
उसी ताप पर वे अ धक सरलता से नकल भागते ह। ऐसे द्रव को वाष्पशील कहते ह — स्प रट, ऐसीटोन और
पे ोल इसके दै नक उदाहरण ह। इसी लए इनक बोतल सदा कसकर बंद और आग से दूर रखनी चा हए।
प्र.5 पंखे हवा को इधर-उधर घुमाते ह जससे ठं डक महसूस होती है। गीले कपड़ को सुखाने के लए पंख का उपयोग
व चत्र लग सकता है क्य क पंखे क हवा वस्तुओं को ठं डा करती है, गरम नह । सामान्यत: जब जल वा ष्पत
होता है तो उसे ऊष्मा क आवश्यकता होती है, ठं डी वायु क नह । आपका इस वषय म क्या सोचना है?
यहाँ कोई वरोधाभास है ही नह । उलझन तब मट जाती है जब हम समझ ल क पंखा वाष्पीकरण के लए ऊष्मा नह दे ता, और
उसे दे ने क आवश्यकता भी नह ।
दोन बात को अलग-अलग दे खए:
1. ऊष्मा कहाँ से आती है? पंखे से नह । वाष्पीकरण के लए आवश्यक ऊष्मा गीले कपड़े और आस-पास क वायु से ली
जाती है, जो पहले से ही कमरे के ताप पर ह — मान ली जए 30 °C या उससे अ धक। यह पयाप्त से भी अ धक है; वाष्पीकरण
को 100 °C पर उबलने क आवश्यकता नह होती।
2. पंखा वास्तव म करता क्या है? जल वा ष्पत होते ही कपड़े से सट अत्यंत आद्र वायु क परत जम जाती है और आगे के
वाष्पीकरण को रोक दे ती है। पंखा इस भरी हुई परत को नरंतर हटाकर ताजी, शुष्क वायु सतह तक लाता है। अत:
वाष्पीकरण रुकने के बजाय पूरी ग त से चलता रहता है।
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3. तो पंखा हम ठं डा क्य लगता है? ठ क इसी कारण। वह शरीर के पसीने को तेजी से वा ष्पत कराता है, और वा ष्पत होता
पसीना हमारी त्वचा से ऊष्मा ले जाता है। पंखे क हवा ठं डी होती ही नह — पंखे के सामने रखा तापमापी कमरे का ही ताप
दखाता है।
पंखा → आद वायु की परत हटती है → तीव वाष्पीकरण
कपड़ े से तीव वाष्पीकरण → कपड़ े जल्दी सूखते है ं
त्वचा से तीव वाष्पीकरण → शरीर से ऊष्मा जाती है → हमें ठं डक लगती है
दोन के पीछे एक ही वचार: पंखा केवल वाष्पीकरण तेज करता है, और कुछ नह । वह "सुखाना" दखे या
"ठं डक", यह केवल इस पर नभर है क जल कस वस्तु से वा ष्पत हो रहा है — कमीज से या आपक त्वचा से।
स्वयं जाँच: एक गीला रूमाल पंखे के सामने और वैसा ही दूसरा उसी कमरे के शांत कोने म टाँ गए। पंखे वाला पहले
सूखता है, यद्य प उस पर पड़ने वाली हवा अ धक गरम नह है।
प्र.6 प्राय: जब ना लय से क चड़ नकाला जाता है तो नाली के समीप म उसका ढे र बनाकर तीन से चार दन के लए
छोड़ दया जाता है। इसके प ात इसे उद्यान या खेत म ले जाया जाता है जहाँ इसका उपयोग खाद के रूप म कर
सकते ह। यह व ध क चड़ को दूसरे ान पर ले जाने क लागत कम करती है और इसके साथ ही काम करने
वाले व्य क्तय क सुरक्षा बढ़ाती है। इस पर वचार कर और बताएँ क ऐसा क्य है?
पूरा लाभ इन तीन-चार दन म क चड़ के जल के वा ष्पत हो जाने से मलता है।
ढु लाई क लागत कैसे घटती है:
ताजा क चड़ मुख्यत: जल होता है — प्राय: उसके भार का तीन-चौथाई।
खुले म ढे र बनाकर छोड़ने पर वह धूप और हवा के संपक म रहता है और उसका बहुत सारा जल वा ष्पत हो जाता है।
ढे र हल्का और आयतन म छोटा हो जाता है।
अत: उतना ही उपयोगी ठोस पदाथ कम फेर म, छोटे वाहन से, कम ईंधन म ले जाया जा सकता है — यह सीधी बचत है।
खेत को जल क आवश्यकता न हो तो जल ढोना केवल व्यथ का खच है।
काम करने वाल क सुरक्षा कैसे बढ़ती है:
सूखा क चड़ फसलनदार, टपकते घोल के बजाय ठोस और भुरभुरा होता है। उसे फावड़े से उठाया जा सकता है और वह
त्वचा, आँख या कपड़ पर नह छपकता।
रास्ते म ठे ले से छलकने या रसने को बहुत कम द्रव बचता है।
धूप म सूखने से बहुत सारे रोगाणु नष्ट हो जाते ह, और गीला, सड़ता पदाथ सूखने पर दुगध बहुत कम हो जाती है।
हल्का भार अथात् कम शारी रक श्रम और दुघटना क कम संभावना।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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एक पं क्त म व ान: सूय और हवा यह सुखाने का काम बना कसी खच के, केवल वाष्पीकरण से कर दे ते ह।
m a s em मच और
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कुछ दन क प्रतीक्षा ईंधन, धन और जो खम तीन क जगह ले लेती है — यही वचार अनाज, पापड़,
उपल को धूप.cमoसुखाने के पीछे भी है।
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सुझाव: ढे र को पीने के जल के ोत से दूर रखना चा हए और वषा से पहले ढक दे ना चा हए — अन्यथा वषा उन्ह
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फर भगो दे गी और सारा सुखाना व्यथ हो जाएगा।
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एक दन के लए अपने घर क ग त व धय का अवलोकन कर। उन ग त व धय क पहचान कर जनम
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प्र.7
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वाष्पीकरण स म्म लत है? वाष्पीकरण के प्रक्रम को समझने से हम अपनी दै नक ग त व धय म कैसे सहायता
मलती है?
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a सामान्य भारतीय घर क वे ग त व धयाँ जनम वाष्पीकरण स म्म लत है:
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समय गतवध क्या वा ष्पत हो रहा है
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सुबह स्नान के बाद गीले बाल और तौ लया सूखना बालों और कपड़े से जल
सुबह फश पर प छा लगाना; फश का सूखना
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फश से जल
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सुबह बतन धोकर रैक पर रखना
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स्टील पर लगा जल
सुबह .co
m धुले कपड़े तार पर टाँगना l a
ag कपड़ों से जल
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a दोपहर
agl खीर या खोया बनाने के लए दूध औटाना दू ध का जल
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दोपहर
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छत पर पापड़, मच, आम क फाँक या अनाज सुखाना खाद्य पदाथ के भीतर का जल
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दोपहर मटके का जल ठं डा रहना; उसका स्तर धीरे-धीरे घटना िम ी के िछद ों से िरसता जल
दन म आँगन या छत पर जल का छड़काव फश से जल
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कभी भी पसीना आने पर पंखे के नीचे बैठना; सै नटाइजर लगाना
m .
त्वचा से पसीना और ऐल्कोहल
m l a seरंग और स्याही का जल
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शाम रँगी या पुती द वार का सूखना; कॉपी पर स्याही का सूखना
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agl वाष्पीकरण समझने से हम क्या सहायता मलती है:
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हम कपड़े बेहतर सुखाते ह — फैलाकर, हवा म, धूप म; कभी बंद स्नानघर म समटाकर नह ।
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हम बना बजली के जल ठं डा रखते ह — मटका, सुराही, या बोतल के चार ओर गीला कपड़ा लपेटकर।
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s e mछड़ककर या खस के गीले पद लगाकर; और हम समझते ह क डेजट कूलर मानसून
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हम कमरा ठं डा करते ह — फश पर जल
म कम क्य चलता है।
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हम भोजन सुर क्षत रखते ह — सुखाकर। सूखी मछली, पापड़, बड़ी और सूखी स ब्जयाँ महीन चलती ह क्य क जल के बना
रोगाणु नह पनप सकते।
हम द्रव को ठ क से रखते ह — पे ोल, स्प रट और इत्र को कसकर बंद रखते ह ता क वे उड़ न जाएँ।
हम आराम और सुरक्षा पाते ह — हम जानते ह क पसीना क्य आता है, गरमी म ढ ले सूती कपड़े क्य अच्छे लगते ह, और
उसी ताप पर आद्र दन शुष्क दन से अ धक कष्टकर क्य लगता है।
बड़ी बात: कसी प्रक्रम को समझ लेने पर हम उसे चाह तो तेज कर सकते ह और चाह तो धीमा। यह केवल
उसका नाम जान लेने से कह अ धक उपयोगी है।
प्र.8 प्रकृ त म जल ठोस अव ा म कस प्रकार वद्यमान है?
प्रकृ त म जल बफ के रूप म ठोस अवस्था म वहाँ मलता है जहाँ ताप 0 °C तक या उससे नीचे चला जाता है।
रूप यह कैसे बनता है भारत म कहाँ मलता है
हम (बफबारी) ऊँचाई पर जलवाष्प सीधे बफ के िक्रस्टल में जमकर िहमालय — क श्मीर , िहमाचल , उ त्त राखंड,
िगरती है िसिक्कम , ल ाख
ओले वष की बूदँ े ं बहत
ु ठं डे बादलों में ऊपर उठकर बफ के मैद ानों में गरज-चमक के साथ, िवशेषकर वसंत में
ढे ल ों में जम जाती है ं
हमनद (ग्ले शयर) सिदयों तक जमती बफ दबकर धीरे बहती बफ की नदी गंगोत्री और िसयािचन िहमनद — गंगा तथा अन्य
बन जाती है निदयों के उद् गम
ुवीय हम-टो पयाँ और बफ की िवशाल स्थायी चादरे ं; टू टे टुक ड़े समुद में तैर ते आक िटक और अंटाक िटका, जहाँ भारत के
हमशैल है ं अनुस ंध ान कें द है ं
तुषार (पाला) जाड़े की अत्यंत ठं डी रातों में जलवाष्प सीधे ठं डी सतहों िदसंबर -जनवरी में उ त्त र भारत की घास और
पर जम जाती है फसलों पर
जमी हुई झील और न दयाँ वायु का ताप लगातार 0 °C से नीचे रहने पर सतह का ल ाख की पैगं ोंग त्सो और जांस्कर नदी, िजस पर
जल जम जाता है चादर टेक होता है
हमाच्छा दत चो टयाँ बहुत अिधक ऊँचाई पर इतनी ठं ड रहती है िक बफ कभी कं चनजंगा, नंद ा दे वी और अन्य ऊँची चोिटयाँ, वष
पूर ी तरह नही ं िपघलती भर
ठोस जल हमारे लए क्य महत्वपूण है: हमालय क बफ और हमनद मीठे जल का प्राकृ तक भंडार ह। वे वसंत
और ग्रीष्म म धीरे-धीरे पघलकर गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और सधु को वषा न होने पर भी बहती रखते ह। इसी लए
हमनद का पघलना इतनी गंभीर चता का वषय है।
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क्या आप जानते ह? बफ जल पर तैरती है क्य क वह उतने ही आयतन के जल से हल्क होती है। यह बहुत
असामान्य है, और अच्छा भी — झील केवल ऊपर से जमती है और नीचे के द्रव जल म मछ लयाँ जी वत रह पाती
ह।
प्र.9 “जल हमारे अ धकार से पहले हमारी जम्मेदारी है” इस कथन पर वचार कर। अपने वचार साझा कर।
यह वचार-प्रधान प्रश्न है, अत: अपने वचार कारण स हत ल खए। नीचे पूरा नमूना उत्तर दया गया है, जसे आप अपने ढं ग से
बदल सकते ह।
नमूना उत्तर: म इस कथन से सहमत ँ। हर व्य क्त को स्वच्छ पेयजल का अ धकार है — पर वह अ धकार तभी
पूरा हो सकता है जब कसी ने पहले जल को स्वच्छ और उपलब्ध रखने क जम्मेदारी उठाई हो। य द सब अ धकार
माँग और कोई कतव्य न नभाए तो कुआँ सूख जाएगा और नद काली पड़ जाएगी, और तब माँगने के लए कोई
अ धकार बचेगा ही नह । अत: जम्मेदारी पहले आनी चा हए, और वह हम सबक है, केवल सरकार क नह ।
इसके पीछे का तक, बदुवार:
अध्याय स्वयं कहता है क पृथ्वी पर उपलब्ध जल का केवल एक छोटा-सा भाग ही पौध , जानवर और मनुष्य के उपयोग
योग्य है। अ धकांश जल महासागर म है और सीधे प्रयोग नह हो सकता।
जनसंख्या के साथ माँग बढ़ती जा रही है, और वश्व के कई भाग म पहले ही जल क कमी है।
जल कह बनाया नह जाता। जल चक्र उसी जल को घुमाता भर है। अत: हम केवल इतना ही नयं त्रत कर सकते ह क उसका
उपयोग कैसे कर और उसे कतना स्वच्छ रख।
एक व्य क्त जो व्यथ करता या प्रदू षत करता है, वह नीचे क ओर बसे कसी दूसरे से छन जाता है — अत: एक का अ धकार
सीधे दूसरे क जम्मेदारी पर टका है।
व्यवहार म जम्मेदारी उठाना कैसा दखता है:
दाँत साफ करते या हाथ धोते समय नल बंद र खए; टपकता नल ठ क कराइए — एक सेकंड म एक बूँद भी दन भर म कई
लीटर बहा दे ती है।
शॉवर के स्थान पर बाल्ट का उपयोग क जए, और सब्जी धोने का जल पौध म डा लए।
तालाब , न दय और ना लय म प्ला स्टक, तेल, रंग या कचरा मत डा लए; जलाशय को प्रदूषण से मुक्त र खए।
घर और वद्यालय म वषा जल संचयन का समथन क जए और कुओं व तालाब को भरने म सहायता क जए।
पौध को सुबह या शाम क ठं डक म स चए, जब वाष्पीकरण से कम जल उड़ता है।
कथन क भाषा इतनी अच्छ क्य है: " जम्मेदारी" को "अ धकार" से पहले रखकर यह हमारी सामान्य सोच को
उलट दे ता है। यह याद दलाता है क सबक साझी संपदा तभी बचती है जब हर व्य क्त उसक रक्षा करे — और
भारत क बाव ड़याँ, जोहड़ और गाँव के तालाब स दय पहले इसी समझ पर बनाए गए थे।
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प्र.10 धूप म खड़े दुप हया वाहन क सीट गरम हो जाती है। आप उसे ठं डा कैसे करगे?
सबसे तेज उपाय है वाष्पीकरण का उपयोग — सीट को गीला क जए और जल को वा ष्पत होने द जए, वह अपने साथ ऊष्मा ले
जाएगा।
क्या कर यह क्य काम करता है कतनी जल्द
सीट पर थोड़ा जल छड़ककर सूखने द जए जल वािष्पत होकर सीट से ऊष्मा ले ले ता है — कु छ ही िमनटों में
शीतलन पभाव
गीले कपड़े से प छए, या गीला कपड़ा उस पर बछा वही कारण, और सीट टपकती हुई भी नही ं रहती कु छ िमनट
द जए
गीली सीट पर हवा क जए, या वाहन को हवादार बहती वायु जल को और तेजी से वािष्पत कराती है सबसे तेज
जगह पर ले जाइए
वाहन को छाया म खड़ा करके प्रतीक्षा क जए सीट धूप सोखना बंद कर दे ती है और धीरे -धीरे धीमा — 10 से 20 िमनट
अपनी ऊष्मा वायु को दे दे ती है
खड़ा करने से पहले ही सीट पर गीला तौ लया या धूप काली सीट तक पहच
ु ँ ती ही नही ं सव त्त म — सीट कभी
अखबार डाल द जए (रोकथाम) गरम होती ही नही ं
सीट इतनी गरम होती ही क्य है: सीट का कवर प्राय: काला होता है, और गहरे रंग क सतह उन पर पड़ने वाली
लगभग सारी धूप सोखकर ऊष्मा म बदल दे ती ह। प्ला स्टक और फोम फर उस ऊष्मा को रोके रखते ह। तेज गरमी
म ऐसी सीट 60 °C से भी ऊपर पहुँच सकती है — इतनी क त्वचा जल जाए।
सुझाव: पूरे वाहन पर ढे र सारा जल मत डा लए। सीट पर हल्का छड़काव पयाप्त है और उससे जल फोम के भीतर
या वद्युत पुज तक नह पहुँचता।
और भी सीख — पृष्ठ 155
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वस्ता रत क्रयाकलाप एवं प रयोजनाएँ
और भी सीख
प्र.1 एक हाथ जल से गीला कर और दूसरा सूखा छोड़ द। दोन हाथ के ऊपर फूँक मार और शीतलन प्रभाव को
महसूस कर। इसके कारण का पता लगाएँ।
आप क्या अनुभव करते ह: फूँक मारते समय गीला हाथ स्पष्ट रूप से ठं डा लगता है; सूखे हाथ पर लगभग कुछ नह लगता,
अ धक से अ धक हल्क हवा। फूँक बंद करते ही अंतर घट जाता है। जल के स्थान पर स्प रट से हाथ गीला क जए तो ठं डक और
भी तीखी लगती है।
कारण:
1. आप जो वायु छोड़ते ह वह लगभग 37 °C पर होती है — यह आपके शरीर का ताप है। वह कमरे से अ धक गरम है, ठं डी
नह । अत: ठं डक वायु से नह आ सकती।
2. गीले हाथ पर बहती वायु त्वचा के ठ क ऊपर क आद्र परत को हटा दे ती है और वाष्पीकरण तेज कर दे ती है।
3. वा ष्पत होते जल को ऊष्मा चा हए, और वह ऊष्मा वह आपक त्वचा से लेता है।
4. आपक त्वचा ऊष्मा खोती है और आपको ठं डक लगती है।
5. सूखे हाथ पर जल है ही नह , अत: वा ष्पत होने को कुछ नह और कोई ऊष्मा नह हटती।
गीले हाथ पर फूँक → तीव वाष्पीकरण → त्वचा से ऊष्मा जाती है → हाथ ठं डा लगता है
सूखे हाथ पर फूँक → वाष्पीकरण नही ं → लगभग कोई ठं डक नहीं
यह छोटा-सा प्रयोग इतना मूल्यवान क्य है: यह उस प्रश्न का नपटारा कर दे ता है जो अ धकांश लोग को
उलझाता है — पंखा ठं डी हवा नह फकता; वह हमारी त्वचा क नमी को वा ष्पत कराता है। सूखा हाथ यहाँ नयंत्रण
है, और नयंत्रण ही बात सद्ध करता है।
यह भी प्रयास कर: एक हाथ गीला करके स्थर र खए, फर उसे हवा म हलाइए। हलता हुआ हाथ अ धक ठं डा
लगता है — इससे सद्ध होता है क वाष्पीकरण को तेज करने वाली बात वायु क ग त है।
प्र.2 जल क व भन्न अव ाओं व जल से संबं धत अवधारणाओं को स म्म लत करते हुए एक खेल का नमाण कर
और खेलते हुए अं तम छोर तक पहुँच। जलचक्र, वाष्पीकरण और संघनन इत्या द से संबं धत प्रश्न वाले चुनौती
काड खेल के कुछ घटक हो सकते ह।
इसे साँप-सीढ़ जैसे बोड के रूप म बनाइए — बनाना सरल है और व ान उसम बल्कुल ठ क बैठता है।
क्या चा हए: चाट पेपर पर 40 खान का बोड, एक पासा, हर खलाड़ी के लए एक गोट , और आधे-आधे पोस्टकाड से बने लगभग
25 चुनौती काड।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 8 जल क व वध अवस्थाओं क यात्रा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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बोड कैसे बनाएँ:
.
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खाना 1 है महासागर और खाना 40 है फर महासागर म — क्य क जल चक्र का कोई स ा अंत नह होता।
o बनाइए: ग ा, गीले कपड़े, वायु, बादल, ओला, पवत क बफ, हमनद, नद
कुछ खान कोcपड़ाव
. a g, lझील, भू-जल, कुआँ, मटका,
नल। em
s
a gजलlaको आकाश तक ले जाने वाले हर प रवतन के लए ऊपर जाता तीर ("सीढ़ ") बनाइए — वाष्पीकरण, तेज धूप वाला
दन, तेज हवा, चौड़ी खुली प्लेट।
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जल को नीचे लाने वाले हर प रवतन के लए नीचे जाता तीर ("साँप") बनाइए — संघनन, वषा, ओले, हम, जमना, बहुत
em
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आद्र दन।
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लगभग आठ खान पर "?" लगाइए। वहाँ पहुँचने पर खलाड़ी को एक चुनौती काड उठाना होगा।
नमूना चुनौती काड (उत्तर पीछे ल खए):
. comपुरस्कार /
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काड उत्तर
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.co a g दं ड
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गैस → द्रव प रवतन का नाम बताइए संघ नन 3 खाने आगे
s
बफ कस ताप पर पघलती है? 0 °C 3 खाने आगे
om a
100 °C.c agl
sem
जल कस ताप पर उबलता है? 3 खाने आगे
a
वाष्पीकरण और उबलने म एक अंतर बताइए
agl वाष्पीकरण हर ताप पर और केवल सतह से होता है; उबलना 100 °C 4 खाने आगे
पर पूरे द व में होता है
co m
m .
e
मटके का जल ठं डा क्य रहता है? जल िछद ों से िरसकर वािष्पत होता है और ऊष्मा ले जाता है 3 खाने आगे
m l as
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बरसात के दन कपड़े दे र से क्य सूखते ह? वायु पहले से ही आद होती है 3 खाने आगे
a s
agl आकाश म जलक णकाएँ कसके चार ओर धूल के कणों के 4 खाने आगे
m
संघ नत होती ह?
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आपने ब्रश करते समय नल खुला छोड़ दया
. com 4 खाने पीछे
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—
ase
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यह खेल केवल मनोरंजन नह , शक्षा भी क्य है: तीर मनमाने नह ह। हर सीढ़ वह प रवतन है जसम ऊष्मा
m
दे नी पड़ती है और हर साँप वह प रवतन है जसम ऊष्मा हटानी पड़ती है। तीन-चार बार खेलने के बाद खला ड़य
. co
m
को यह सोचना ही नह पड़ता — और यही इसका उ े श्य है।
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अपने शक्षक के साथ चचा कर भू मका नवहन क ग त व ध के ारा जल चक्र के व भन्न चरण का अ भनय
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प्र.3
अपनी वद्यालय सभा म कर।
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भू मका-अ भनय तभी अच्छा बनता है जब जल चक्र के हर चरण का अपना पात्र, अपना संवाद और अपनी सरल सामग्री हो।
वद्यालय सभा के पाँच मनट के प्रस्तुतीकरण क रूपरेखा:
co m
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