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NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 3 संख्याओं का संसार

AglaSem पर कक्षा 9 गणित अध्याय 3 संख्याओं का संसार (गणित मंजरी) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Maths Chapter 3 the World of Numbers (Ganita Manjari), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 3 संख्याओं का संसार - Page 1 of 53

About NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 3 संख्याओं का संसार

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NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 3 संख्याओं का संसार – Text

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Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 3: संख्याओं का संसार

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत मंजरी

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

41 – 67 19 57 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 52 pages

Page 2

कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

क ा 9 · ग णत · ग णत मं ज री

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: संख्याओं का संसार
यह अध्याय इशांगो अ के खाँच से लेकर अखंड वास्त वक संख्या रेखा तक क पूरी यात्रा कराता है — ब्रह्मगुप्त का शून्य और ऋणात्मक संख्याएँ,
प रमेय संख्याओं क सघनता, √2 के अप रमेय होने क उपप त्त, तथा वह दशमलव पहचान जो प रमेय को अप रमेय से अलग करती है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ग णत मंजरी (क ा 9) 41 – 67

खं ड प्रश्न

19 57

माध्यम
हन्द

प्रश्नावली 3.1 — पृष्ठ 43
3.1 ग णत का उदय — गनती करने क मानवीय आवश्यकता

प्र.1 बंदरगाह नगर लोथल म एक व्यापारी ताम्र श लकाओं को लेने के लए मसाल क थै लय का व नमय करता है।
वह मसाले क प्रत्येक 2 थै लय से 15 ताम्र श लकाएँ लेता है। य द वह बाजार म मसाल क 12 थै लयाँ लेकर
जाता है तो वह उनके बदले कतनी ताम्र श लकाएँ बाजार से लेकर आएगा?

वह 90 ताम्र श लकाएँ लेकर आएगा।

12 थै िलयाँ = 2 थै िलयों के 6 समूह

2 थै िलयों के पत्येक समूह से → 15 िशिलकाएँ

कु ल िशिलकाएँ = 6 × 15 = 90

वही उत्तर इकाई दर से —

1 थै ली → 15 ÷ 2 = 7.5 िशिलकाएँ

12 थै िलयाँ → 12 × 7.5 = 90 िशिलकाए ँ

ऐसा क्य होता है: यह व नमय 15 : 2 के र अनुपात म है। अनुपात के दोन पद को एक ही संख्या से गुणा
करने पर अनुपात नह बदलता, और 12 = 6 × 2 है, अत: श लकाएँ 6 × 15 ही ह गी। ध्यान द जए क इकाई दर
7.5 पूण संख्या नह है, फर भी उत्तर पूण संख्या है — क्य क 12, 2 का गुणज है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 इशांगो अ स्थ के एक स्तंभ पर संख्याओं का अनुक्रम — 11, 13, 17, 19 दे खए। इन संख्याओं म क्या समानता
है? इस प्र तरूप म उपयुक्त आगामी तीन संख्याओं को सूचीबद्ध क जए।

13 19

11 17

चत्र 3.1, पृष्ठ 42 — इशांगो अ स्थ पर बने मलान-रेखा समूह का पुनः बनाया गया रेखा चत्र।

ये चार अभाज्य संख्याएँ ह — वस्तुत: 10 और 20 के मध्य क सभी अभाज्य संख्याएँ यही ह।

11 = 1 × 11 मात्र

13 = 1 × 13 मात्र

17 = 1 × 17 मात्र

19 = 1 × 19 मात्र

19 के आगे प्रत्येक संख्या क जाँच क जए क उसका 1 और स्वयं के अ त रक्त कोई गुणनखंड है या नह —

संख्या गुणनखंड अभाज्य?

20, 21, 22 2·10, 3·7, 2·11 नह

23 1 और 23 के अ त रक्त कोई नह हाँ

24 … 28 सभी भाज्य नह

29 1 और 29 के अ त रक्त कोई नह हाँ

30 2·15 नह

31 1 और 31 के अ त रक्त कोई नह हाँ

अत: आगामी तीन संख्याएँ 23, 29 और 31 ह।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? यह जाँचने के लए क n अभाज्य है या नह , केवल √n तक क अभाज्य संख्याओं से
वभाजन करना पयाप्त है। 31 के लए √31 < 6 है, अत: 2, 3 और 5 से जाँच कर लेना पयाप्त है।

प्र.3 हम ात है क प्राकृत संख्याएँ योग के अंतगत संवृत होती ह ( कन्ह दो प्राकृत संख्याओं का योग सदै व एक
प्राकृत संख्या होती है)। क्या ये संख्याएँ घटाव के अंतगत संवृत होती ह? अपने उत्तर को सद्ध करने हेतु कुछ
उदाहरण द जए।

नह — प्राकृत संख्याएँ घटाव के अंतगत संवृत नह ह।

3 − 5 = −2, और −2 पाकृ त संख्या नही ं है

7 − 7 = 0, और 0 भी पाकृ त संख्या नही ं है

ऐसा क्य होता है: संवृतता का अथ है क सं क्रया आपको कभी समुच्चय से बाहर न ले जाए। योग कभी बाहर नह
ले जाता, क्य क a + b सदै व a से बड़ा या बराबर होता है और {1, 2, 3, …} म ही रहता है। घटाव ले जाता है —
जब भी b ≥ a हो, a − b बाहर चला जाता है। संवृतता के दावे को असत्य सद्ध करने के लए एक ही प्र त-उदाहरण
पयाप्त है; सौ सफल उदाहरण भी उसे सद्ध नह करते।

यही अभाव ग णत को आगे ले गया। घटाव को सदै व संभव बनाने के लए ब्रह्मगुप्त ने शून्य और ऋणात्मक संख्याएँ जोड़ — और
यह बड़ा समुच्चय, अथात पूणाक (Z), घटाव के अंतगत संवृत है।

प्र.4* प्राचीन भारत के नवासी गणना करने के लए अपनी अंगु लय क सं धय का उपयोग करते थे, जो वतमान म
भी प्रचलन म है। प्रत्येक अंगुली म तीन सं धयाँ होती ह और अंगूठे का उपयोग उन्ह गनने के लए कया जाता
है। एक हाथ पर आप कतनी गनती कर सकते ह? यह प्राचीन आधार-12 गणन पद्ध तय से कैसे संबं धत है?

एक हाथ पर 12 तक गनती क जा सकती है।

िगनने के िलए उपयोग की जाने वाली अंगिु लयाँ = 4 (अंगूठा संके तक है)

पत्येक अंगल
ु ी में संिधयाँ = 3

कु ल संिधयाँ = 4 × 3 = 12

अंगूठा एक-एक करके प्रत्येक सं ध को स्पश करता है — क न ष्ठका क तीन, अना मका क तीन, मध्यमा क तीन और तजनी क
तीन — और एक पूरा हाथ एक दजन बन जाता है।

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
ऐसा क्य होता है: गणन का आधार वस्तुत: उस स्वाभा वक समूह का आकार है जसे पूरा करके हम पुन: आरंभ

m a s emदजन गनने पर
co (एक ग्रोस) प्राप्त होता है — इसी कारण दजन, ग्रोस, 12 इंच का एकaफgु टl और 12 माह का एक
करते ह। यहाँ हाथ 12 पर पूरा भर जाता है, अत: 12 ही आधार बन जाता है। दूसरे हाथ पर पूरे हुए
12 × 12 = .144

a s em
ag l
वष आज भी प्रच लत ह।

co m
ag
सुझाव: 12 के गुणनखंड 1, 2, 3, 4, 6, 12 ह जब क 10 के केवल 1, 2, 5, 10। दजन का आधा, तहाई और

m .
as e
चौथाई — तीन पूण संख्याएँ ह। ापा रय को आधार 12 इसी ावहा रक कारण से प्रय था।

a g l

co m
m.
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 46

m as e
.co l
3.3.1 पूणाक का अंकग णत

a g
a s emएक ऋणात्मक संख्या को दूसरी ऋणात्मक संख्या से गुणा करने पर धनात्मक संख्या क्य प्राप्त होती है? इस पर
agl प्र.1
क्रया व ध और ऋण के संदभ म वचार क जए। य द एक ऋणात्मक संख्या ऋणभार को दशाती है तो इसे

m a s
.co agl
ऋणात्मक संख्या से गुणा करना ऋण के नरस्तीकरण को अ भव्यक्त करता है। (संकेत — य द कोई आपके चार

m
ऋणभार, जनम से प्रत्येक ₹3 मूल्य (अथात −3) का है, को आपसे ले लेता है तो प्रभावी रूप से आप ₹12 से

l a se
धनी हो जाते ह। इस प्रकार, (−3) × (−4) = + 12 होता है।)

a g
m

. co
m
क्य क ऋणभार का नरस्तीकरण आपको धनी बनाता है — और दूसरा ऋण चह्न यही 'हटाने' का काय करता है।

m as e
.co a g l
a s em ₹3 का एक ऋणभार → −3

agl ऐसे 4 ऋणभार हटा लेन ा → (−3) × (−4)

se m
com l a
आपकी िस्थित ₹12 सुधर जाती है → +12
. a g
e m
g l as उस अंकग णत से बाध्य भी है जसे हम पहले से मानते ह। बंटन नयम क माँग
a
पुस्तक का यह चत्रण सहज है, परंतु यह नयम
दे खए —

co m
m .
e
(−3) × [4 + (−4)] = (−3) × 0 = 0
m l as
m .co
अत: (−3) × 4 + (−3) × (−4) = 0
a g
l a se
ag हम जानते है ं (−3) × 4 = −12

.c
अत: −12 + (−3) × (−4) = 0
s e m
m a
इसिलए (−3) × (−4) = +12
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: जैसे ही हम यह आग्रह करते ह क a × 0 = 0 और p(q + r) = pq + pr ऋणात्मक संख्याओं
पर भी लागू रह, वैसे ही (−3) × (−4) का मान हमारी इच्छा का वषय नह रह जाता। कोई भी अन्य उत्तर बंटन
नयम को तोड़ दे गा। इस लए 'ऋण गुणा ऋण बराबर धन' कोई सु वधाजनक प रपाट नह , अ पतु एकमात्र ऐसा
मान है जो संपूण पद्ध त को संगत रखता है।

स्वयं जाँ चए: यही तक (−1) × (−1) पर लगाइए। (−1)(1 + (−1)) = 0 से −1 + (−1)(−1) = 0 मलता है, अत:
(−1)(−1) = 1।

प्रश्नावली 3.2 — पृष्ठ 46
3.3 पूणाक — तज का वस्तार

प्र.1 मध्याह्न के समय उच्च तुंगता वाले ल ाख के मरुस्थल म तापमान 4°C अं कत कया गया है। मध्यरा त्र के समय
इसके तापमान म 15°C क कमी हो जाती है। मध्यरा त्र का तापमान क्या है?

मध्यरा त्र का तापमान −11°C है।

मध्यराित्र = मध्याह्न का तापमान − कमी

= 4 − 15

= −11°C

संख्या रेखा पर 4 से आरंभ क जए और 15 इकाई बाईं ओर च लए। 4 पग बाद आप 0 पार कर जाते ह और 11 पग और
ऋणात्मक पक्ष म चले जाते ह।

15 की कमी
−11 4

−15 −12 −9 −6 −3 0 3 6 9

4°C से 15°C क कमी शून्य के 11 इकाई बाईं ओर पहुँचा दे ती है।

सुझाव: 'कमी' का अथ सदै व घटाना होता है। 4 म 15 क कमी 4 − 15 लखी जाती है, 15 − 4 कभी नह ।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 एक मसाला-व्यापारी ₹850 का ऋण लेता है। अगले दन उसे ₹1200 का लाभ (धन) प्राप्त होता है। आने वाले
सप्ताह म उसे ₹450 क हा न होती है। इस अनुक्रम को पूणाक का उपयोग करते हुए समीकरण के रूप म
ल खए और उसके अं तम लाभ-हा न क गणना क जए।

ऋणभार को ऋणात्मक और धन-संप त्त को धनात्मक पूणाक लखने पर —

(−850) + 1200 + (−450)

= 350 + (−450)

= −100

उसक अं तम त −₹100 है, अथात उस पर ₹100 का ऋणभार शेष है।

ऐसा क्य होता है: ब्रह्मगुप्त के नयम तीन लेन-दे न को एक ही संख्या रेखा पर ले आते ह। ₹850 का ऋण और
₹1200 का लाभ आं शक रूप से एक-दूसरे को काट दे ते ह — लाभ म से 850 ऋण चुकाने म लगते ह और 350
शेष रहते ह। बाद क ₹450 क हा न इन 350 से अ धक है, अत: वह ापारी को शून्य के पार 100 तक धकेल दे ती
है।

स्वयं जाँ चए: क्रम से कोई अंतर नह पड़ता। 1200 + (−850) + (−450) = 1200 − 1300 = −100, वही उत्तर,
क्य क पूणाक का योग क्रम व नमेय और साहचय है।

प्र.3 ब्रह्मगुप्त के नयम का उपयोग करते हुए नम्न ल खत क गणना क जए — (i) (−12) × 5 (ii) (−8) × (−7)
(iii) 0 − (−14) (iv) (−20) ÷ 4

भाग ब्रह्मगुप्त का नयम हल उत्तर

(i) (−12) × 5 ऋण × धन = ऋण 12 × 5 = 60, चह्न ऋणात्मक −60

(ii) (−8) × (−7) ऋण × ऋण = धन 8 × 7 = 56, चह्न धनात्मक 56

(iii) 0 − (−14) ऋण हटाना धन है 0 + 14 14

(iv) (−20) ÷ 4 ऋणभार 4 बराबर भाग म 20 ÷ 4 = 5, चह्न ऋणात्मक −5

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक त म उत्तर का प रमाण सामान्य पूण-संख्या अंकग णत से आता है, केवल चह्न ऋण-
धन नयम से आता है। भाग (iv) वभाजन है और वह भी वही चह्न- नयम मानता है, क्य क (−5) × 4 = −20 है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

स्वयं जाँ चए: (iii) का अथ है 'शून्य म से 14 का ऋणभार घटाना'। य द आप पर कोई ऋण न हो और कोई आपके
लए ₹14 का ऋण नरस्त कर दे तो आप ₹14 धनी हो जाते ह — अत: उत्तर +14 ही होगा।

प्र.4 वास्त वक जीवन से संबं धत ऋणभार के एक उदाहरण का उपयोग करते हुए वस्तारपूवक बताइए क कसी
ऋणात्मक संख्या को घटाना, एक धनात्मक संख्या का योग करने के समान क्य है (जैसे 10 − (−5) = 15)।

मान ली जए आपके पास ₹10 ह और आपके खाते म ₹5 का ऋणभार भी है, जसे −5 लखा जाता है। य द कोई संबंधी वह
ऋणभार हटा ले — अथात −5 को घटा दे — तो आपक जेब से कुछ नह जाता, फर भी आप ₹5 बेहतर त म आ जाते ह।

10 − (−5)

= 10 + 5

= 15

बीजग णतीय कारण यह है क घटाना अथात योज्य ुत्क्रम जोड़ना, और −5 का योज्य ुत्क्रम +5 है —

a − b = a + (−b)

10 − (−5) = 10 + [−(−5)] = 10 + 5 = 15

ऐसा क्य होता है: −(−5) का मान 5 ही होना चा हए, क्य क −5 और 5 का योग 0 है और कसी संख्या का योज्य
ुत्क्रम केवल एक ही होता है। इस प्रकार दोन ऋण चह्न एक-दूसरे को नरस्त कर दे ते ह। ऋण के चत्रण म —
ऋणभार ऋणात्मक रा श है, और ऋणात्मक रा श का हटना लाभ है।

सुझाव: '−(−5)' को '5 का ऋणभार हटाना' प ढ़ए, न क 'दो ऋण चह्न मलकर धन बन गए'। अथ समझ लेने पर
नयम कभी नह भूलता।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 47
3.4 रक्त स्थान क पू त करना — भन्न और प रमेय संख्याएँ

प्र.1 क्या आप प रमेय संख्या क प रभाषा म न हत q ≠ 0 क आवश्यकता क व्याख्या कर सकते ह?

क्य क शून्य से वभाजन का कोई उत्तर नह होता — और p/q चह्न का अथ है 'वह संख्या जसे q से गुणा करने पर p प्राप्त हो'।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

मान लीिजए p/q = x, अत: x × q = p

यिद q = 0 हो तो x × 0 = p

परंत ु पत्येक x के िलए x × 0 = 0 होता है

अब दो अलग-अलग क ठनाइयाँ उत्पन्न होती ह —

य द p ≠ 0 हो, जैसे 5/0, तो हम x × 0 = 5 चा हए। कोई संख्या ऐसा नह करती, अत: कोई मान अ स्तत्व म ही नह है।
य द p = 0 हो, अथात 0/0, तो x × 0 = 0 प्रत्येक x के लए सत्य है। अत: प्रत्येक संख्या उत्तर बन जाएगी और यह चह्न
कसी एक संख्या को ना मत नह करता।

ऐसा क्य होता है: या तो कोई अभ्यथ नह है या अनंत अभ्यथ ह, और दोन ही तय म p/q संख्या रेखा पर
कसी एक बदु को ना मत करने म असफल रहता है। q = 0 क अनुम त दे ने पर अंकग णत भी टू ट जाएगा — 1 ×
0 = 2 × 0 से '0 को काटकर' हम 1 = 2 सद्ध कर दगे।

सुझाव: यही प्र तबंध वभाजन नयम a/b ÷ c/d = ad/bc म पुन: आता है, जसे अध्याय केवल b ≠ 0, d ≠ 0
और c ≠ 0 के लए बताता है — अ त रक्त c ≠ 0 इस लए है क्य क c अब हर बनने जा रहा है।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 48
3.4 रक्त स्थान क पू त करना — भन्न और प रमेय संख्याएँ

प्र.1 भन्न- भन्न हर वाली दो प रमेय संख्याओं का योग अथवा घटाव करते समय आप उनके हर को समान कैसे
बनाएँगे?

प्रत्येक प रमेय संख्या को उसक समतुल्य संख्या से बदल द जए जसका हर दोन हर का साव गुणज हो — सबसे सु वधाजनक
रूप से उनका लघुत्तम समापवत्य।

a/b और c/d, जहाँ m = ल.स. (b, d)

a/b = (a × m/b)/m और c/d = (c × m/d)/m

तब a/b + c/d = (a·m/b + c·m/d)/m

उदाहरण के लए 7/12 और 5/8 का योग —

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
12 = 2² × 3, 8 = 2³ → ल.स. = 2³ × 3 = 24
m l as
.co
7/12 = 14/24 और 5/8 = 15/24
m a g
l a se
g
योग = (14 + 15)/24 = 29/24
a

. c om
ऐसा क्य होता है: अंश और हर दोन को एक ही शून्येतर संख्या से गुणा करने पर मान नह बदलता, क्य क k ≠ 0
ag
के लए (ka)/(kb) = a/b होता है। एक बार दोनem
a s भन्न समान आकार के भाग को गनने लग, तो केवल गन तयाँ

agl a/b + c/b = (a + c)/b है।
जोड़ी जा सकती ह — यही अध्याय का नयम

co m
m.
सुझाव: गुणनफल b × d भी साव हर के रूप म सदै व काम करता है, परंतु ल.स. संख्याओं को छोटा रखता है और

m as e
.co l
प्राय: अं तम सरलीकरण का श्रम बचा दे ता है।
a g
se m
g l a
a
प रमेय संख्याओं के लए बंटन नयम को सत्या पत क जए।
s
प्र.2

m a
em
.co agl
a s
aे gलएl p(q + r) = pq + pr। ली जए p = 2/3, q = 1/4, r = 5/6।

नयम कहता है क सभी प रमेय p, q, r क

co m
क्ष
m .
as e
बायाँ प

m l
.co
q + r = 1/4 + 5/6 = 3/12 + 10/12 = 13/12
m + r) = 2/3 × 13/12 = 26/36 = 13/18 a g
a s ep(q
a gl
se m
com g l a
क्ष . a
em
द ायाँ प

pq = 2/3 × 1/4 = 2/12 = 1/6 las
a g
pr = 2/3 × 5/6 = 10/18 = 5/9

co m
pq + pr = 1/6 + 5/9 = 3/18 + 10/18 = 13/18
m .
as e
om
दोन.cपक्ष 13/18 ह, अत: इस त्रक के लए नयम सत्य है। a g l
a sem
agl
एक उदाहरण केवल उदाहरण है। यह रही ापक उपप त्त, जसम p = a/b, q = c/d, r = e/d साव हर d के साथ लए गए ह

.c
m
—

m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

p(q + r) = (a/b) × (c + e)/d = a(c + e)/(bd)

= (ac + ae)/(bd) (पूण क
ं ों में बंट न)
= ac/(bd) + ae/(bd)
= (a/b)(c/d) + (a/b)(e/d) = pq + pr

ऐसा क्य होता है: संपूण तक एक ही पं क्त पर टका है — पूणाक के लए a(c + e) = ac + ae। प रमेय
अंकग णत पूणाक अंकग णत से ही बना है, अत: पूणाक जस नयम का पालन करते ह वह प रमेय संख्याओं को
वरासत म मल जाता है।

प्रश्नावली 3.3 — पृष्ठ 49
3.4 रक्त स्थान क पू त करना — भन्न और प रमेय संख्याएँ

प्र.1 सद्ध क जए क नम्न ल खत प रमेय संख्याएँ समतुल्य ह — (i) 2/3 और 4/6 (ii) 5/4 और 10/8 (iii) −3/5
और −6/10 (iv) 9/3 और 3

अध्याय क कसौट है — a/b = c/d ठ क तभी जब ad = bc हो। इसे प्रत्येक युग्म पर लगाइए।

भाग वज्र गुणनफल AD और BC समतुल्य?

(i) 2/3, 4/6 2 × 6 = 12 और 3 × 4 = 12 हाँ

(ii) 5/4, 10/8 5 × 8 = 40 और 4 × 10 = 40 हाँ

(iii) −3/5, −6/10 (−3) × 10 = −30 और 5 × (−6) = −30 हाँ

(iv) 9/3, 3/1 9 × 1 = 9 और 3 × 3 = 9 हाँ

यही चार तथ्य समतुल्य भन्न क दृ ष्ट से —

4/6 = (2 × 2)/(2 × 3) = 2/3

10/8 = (2 × 5)/(2 × 4) = 5/4

−6/10 = (2 × −3)/(2 × 5) = −3/5

9/3 = (3 × 3)/(3 × 1) = 3

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: ad = bc वस्तुत: a/b = c/d का ही वह रूप है जसम हर हटा दए गए ह — दोन पक्ष को
bd से गुणा क जए और भन्न लुप्त हो जाते ह। यही कारण है क इस कसौट म वभाजन क आवश्यकता नह
पड़ती और यह ऋणात्मक भन्न पर भी लागू होती है।

सुझाव: (iv) म पूण संख्या को कसौट लगाने से पहले 3/1 लखा गया है। प्रत्येक पूणाक हर 1 वाली प रमेय संख्या
है।

प्र.2 योगफल ात क जए — (i) 2/5 + 3/10 (ii) 7/12 + 5/8 (iii) −4/7 + 3/14

(i) ल.स. (5, 10) = 10

2/5 + 3/10 = 4/10 + 3/10 = 7/10

7 और 10 सह-अभाज्य है ं → 7/10

(ii) 12 = 2² × 3, 8 = 2³ → ल.स. = 24
7/12 + 5/8 = 14/24 + 15/24 = 29/24 (= 1 5/24)

(iii) ल.स. (7, 14) = 14

−4/7 + 3/14 = −8/14 + 3/14 = −5/14

5 और 14 सह-अभाज्य है ं → −5/14

ऐसा क्य होता है: नयम a/b + c/b = (a + c)/b तभी काम करता है जब भाग समान आकार के ह , अत:
प्रत्येक योग साव हर पर लखने से आरंभ होता है। उसके बाद केवल अंश जुड़ते ह — हर भाग का आकार बताता है
और बदलता नह ।

स्वयं जाँ चए: (iii) का उत्तर ऋणात्मक ही होगा, क्य क 4/7 = 8/14, 3/14 से बड़ा है।

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प्र.3 अंतर ात क जए — (i) 5/6 − 1/4 (ii) 11/8 − 3/4 (iii) −7/9 − (−2/3)

(i) ल.स. (6, 4) = 12

5/6 − 1/4 = 10/12 − 3/12 = 7/12

(ii) ल.स. (8, 4) = 8

11/8 − 3/4 = 11/8 − 6/8 = 5/8

(iii) ऋणात्मक को घटाना अथ त उसका िवपरीत जोड़ ना

−7/9 − (−2/3) = −7/9 + 2/3
= −7/9 + 6/9 = −1/9

ऐसा क्य होता है: भाग (iii) म खंड 3.3 का पूणाक नयम भन्न के भीतर लगाया गया है। चूँ क 2/3 = 6/9, 7/9
से छोटा है, इसे जोड़ने पर योग 0 तक नह पहुँच पाता, अत: उत्तर ऋणात्मक ही रहता है — गणना से पहले यह एक
उपयोगी जाँच है।

प्र.4 गुणनफल ात क जए — (i) 2/3 × 3/10 (ii) 7/11 × 5/8 (iii) −4/7 × 5/14

नयम है a/b × c/d = ac/bd। गुणा करने से पहले साव गुणनखंड काट दे ने पर संख्याएँ छोट रहती ह।

(i) 2/3 × 3/10 = (2 × 3)/(3 × 10)

3 कट गया, 2 कट गया → 1/5

= 1/5

(ii) 7/11 × 5/8 = 35/88

88 = 2³ × 11, 35 = 5 × 7 — कोई साव गुणनखंड नही ं

= 35/88

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(iii) −4/7 × 5/14 = −20/98

अंश और हर को 2 से िवभािजत कीिजए

= −10/49

ऐसा क्य होता है: एक धनात्मक और एक ऋणात्मक प रमेय संख्या का गुणनफल ऋणात्मक होता है — वही
ऋण-धन नयम जो पूणाक पर लागू है, क्य क चह्न अंश के साथ चलता है।

प्र.5 भागफल ात क जए — (i) 2/3 ÷ 3/10 (ii) 7/11 ÷ 5/8 (iii) −4/7 ÷ 5/14

c/d से वभाजन का अथ है उसके ुत्क्रम d/c से गुणा करना, जसके लए c ≠ 0 आवश्यक है।

(i) 2/3 ÷ 3/10 = 2/3 × 10/3 = 20/9

(ii) 7/11 ÷ 5/8 = 7/11 × 8/5 = 56/55

(iii) −4/7 ÷ 5/14 = −4/7 × 14/5
= −56/35, दोनों को 7 से िवभािजत कीिजए

= −8/5

ऐसा क्य होता है: c/d का ुत्क्रम वह संख्या है जससे गुणा करने पर 1 प्राप्त हो, क्य क (c/d) × (d/c) =
cd/dc = 1। अत: c/d से वभाजन और d/c से गुणन का प रणाम एक ही होगा। ध्यान द जए क (i) और (ii) म
भागफल पहली संख्या से बड़ा है — 1 से छोट भन्न से वभाजन संख्या को बड़ा कर दे ता है।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
सद्ध क जए क (1/2 + 3/4) × 8/3 = 1/2 × 8/3 + 3/4 × 8/3
e
प्र.6

m l as
m.co a g
a se

a g l
क्ष
m
बायाँ प

. co ag
m
1/2 + 3/4 = 2/4 + 3/4 = 5/4

as e
(5/4) × (8/3) = 40/12 = 10/3
a g l

co m
m.
क्ष
as e
द ायाँ प

m l
.co
1/2 × 8/3 = 8/6 = 4/3
a g
a s e×m8/3 = 24/12 = 2 = 6/3
gl
3/4
a 4/3 + 6/3 = 10/3

m a s
m .co agl
se
दोन पक्ष 10/3 ह, अत: कथन सद्ध हुआ।

g l a
a
ऐसा क्य होता है: यह p = 1/2, q = 3/4, r = 8/3 के साथ बंटन नयम (p + q)r = pr + qr ही है। यह इन

m
.co
वशेष भन्न का संयोग नह — यह नयम प रमेय संख्याओं के प्रत्येक त्रक पर लागू होता है, और 8/3 के ान पर
कोई भी प रमेय संख्या रखने पर भी समता बनी रहेगी।
se m
com g l a
m . a
ase
agl प्र.7 बंटन गुणधम का उपयोग करते हुए नम्न ल खत का सरलीकरण क जए — 7/9 (6/7 − 3/4)

se m
com g l a
m . a
ase

agl
7/9 को कोष्ठक म बाँट द जए —

co m
.
7/9 × 6/7 − 7/9 × 3/4

e m
m l as
.=co2/3 − 7/12
= 42/63 − 21/36
a g
se m
g l a
a = 8/12 − 7/12
c
m .
= 1/12
m a s e
e m . co agl
g l as
पहले कोष्ठक हल करने पर भी वही उत्तर आना चा हए — यह एक उपयोगी जाँच है —
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 14 of 52

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6/7 − 3/4 = 24/28 − 21/28 = 3/28

7/9 × 3/28 = 21/252 = 1/12

ऐसा क्य होता है: अध्याय म बंटन नयम योग के लए p(q + r) = pq + pr लखा गया है; यह घटाव पर भी लागू
होता है क्य क q − r का अथ q + (−r) है। यहाँ पहला माग हल्का है, क्य क 7/9 × 6/7 म 7 तुरंत कट जाता है।

प्र.8 प रमेय संख्या x को इस प्रकार ात क जए क 5/6 (x + 3/5) = 5/6 x + 1/2

बंटन नयम से बाएँ पक्ष का वस्तार क जए —

5/6 (x + 3/5) = 5/6 · x + 5/6 · 3/5

5/6 × 3/5 = 15/30 = 1/2

अत: बायाँ पक्ष 5x/6 + 1/2 है

5x/6 + 1/2 = 5x/6 + 1/2

दोनों पक्षों से 5x/6 घटाइए → 1/2 = 1/2

समीकरण एक सत्य कथन म बदल जाता है और उसम x शेष ही नह रहता। अत: यह एक सवस मका है — प्रत्येक प रमेय संख्या
x इसे संतुष्ट करती है।

ऐसा क्य होता है: यह समीकरण p = 5/6, q = x, r = 3/5 के लए लखा गया बंटन नयम ही है, जसम
गुणनफल 5/6 × 3/5 को पहले ही 1/2 कर दया गया है। जो नयम सभी प रमेय संख्याओं के लए सत्य है, वह x
के कसी एक मान को नह चुन सकता। य द दायाँ पक्ष 5x/6 + 1/3 होता तो हम 1/2 = 1/3 मलता, जो असत्य
है, और तब कोई भी x हल न होता।

स्वयं जाँ चए: x = 2 ली जए। बायाँ पक्ष — 5/6 (2 + 3/5) = 5/6 × 13/5 = 13/6। दायाँ पक्ष — 5/6 × 2 +
1/2 = 5/3 + 1/2 = 10/6 + 3/6 = 13/6। दोन समान, जैसा कसी भी x के लए होना चा हए।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 51

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3.4.1 संख्या रेखा पर प रमेय संख्याओं का नरूपण

प्र.1 8/5 और − 7/4 को संख्या रेखा पर नरू पत करने का प्रयत्न क जए।

अध्याय के नयम का अनुसरण क जए — p/q को अं कत करने के लए इकाई अंतराल को q समान भाग म बाँ टए और 0 से p
भाग च लए; संख्या धनात्मक हो तो दाईं ओर, ऋणात्मक हो तो बाईं ओर।

8/5 = 1 3/5, अत: यह 1 और 2 के मध्य है

1 से 2 के अंत राल को 5 समान भागों में बाँिटए

1 से दाईं ओर 3 भाग चिलए

−7/4 = −1 3/4, अत: यह −2 और −1 के मध्य है
−1 से −2 के अंत राल को 4 समान भागों में बाँिटए

−1 से बाईं ओर 3 भाग चिलए

−7/4 8/5

−2 −1 0 1 2
चौथाई पाँचवाँ

−7/4, −1 से तीन चौथाई-पग बाईं ओर; 8/5, 1 से तीन पाँचव-पग दाईं ओर।

ऐसा क्य होता है: दोन संख्याओं को अलग-अलग मापनी चा हए। पाँचव और चौथाई भाग के चह्न एक-दूसरे से
नह मलते, अत: प्रत्येक संख्या अपने ही इकाई अंतराल म त क जाती है। य द दोन को एक ही चह्न-समुच्चय
पर लाना हो तो बीसव भाग ली जए — 8/5 = 32/20 और −7/4 = −35/20।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 52

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3.4.2 प रमेय संख्याओं क सघनता

प्र.1 यह स्पष्ट करने का प्रयास क जए क दो प रमेय संख्याओं a और b का माध्य, जो (a + b)/2 है, सदै व a और b
के मध्य स्थत एक प रमेय संख्या ही क्य होती है?

दो बात सद्ध करनी ह — माध्य प रमेय है, और वह a तथा b के मध्य स्थत है।
1. यह प रमेय है। प रमेय संख्याएँ योग के अंतगत संवृत ह और 0 से वभाजन को छोड़कर वभाजन के अंतगत भी।

a = p/q और b = r/s, जहाँ q, s ≠ 0

a + b = (ps + qr)/(qs)
(a + b)/2 = (ps + qr)/(2qs)

अंश ps + qr और हर 2qs दोन पूणाक ह तथा 2qs ≠ 0 है। अत: (a + b)/2 प रमेय संख्या के रूप म है।
2. यह मध्य म स्थत है। मान ली जए a < b। तब

(a + b)/2 − a = (a + b − 2a)/2 = (b − a)/2 > 0

b − (a + b)/2 = (2b − a − b)/2 = (b − a)/2 > 0

दोन अंतराल धनात्मक ह और वस्तुत: बराबर भी — अत: a < (a + b)/2 < b, और माध्य ठ क बीच म त है।

ऐसा क्य होता है: यही एक तथ्य प रमेय संख्याओं को सघन बनाता है। a और b का माध्य पुन: a के साथ माध्य
कया जा सकता है, और यह क्रम कभी समाप्त नह होता — अत: कन्ह दो प रमेय संख्याओं के मध्य, चाहे वे
कतनी ही नकट ह , अनंत प रमेय संख्याएँ वद्यमान ह। अध्याय 1 और 3/2 के मध्य 5/4 पाता है; 1 और 5/4 के
मध्य आपको 9/8 मलेगा, फर 17/16, और यह क्रम अनंत तक चलेगा।

सुझाव: इस तक के लए a ≠ b आवश्यक है। य द a = b हो तो 'माध्य' स्वयं a ही होगा और उनके मध्य कुछ भी
नह होगा।

प्रश्नावली 3.4 — पृष्ठ 52

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3.4.2 प रमेय संख्याओं क सघनता

प्र.1 एक ही संख्या रेखा पर 2/3, − 5/4 और 1 1/2 को नरू पत क जए।

प्रत्येक संख्या को उसके अपने इकाई अंतराल को हर ारा बताए गए भाग म बाँटकर अं कत कया जाता है।

संख्या कनके मध्य रचना

2/3 0 और 1 0–1 को 3 भाग म बाँटकर दाईं ओर 2 भाग

−5/4 = −1 1/4 −2 और −1 −1 से −2 को 4 भाग म बाँटकर −1 से बाईं ओर 1 भाग

1 1/2 = 3/2 1 और 2 1 और 2 के ठ क मध्य

−5/4 2/3 1½

−2 −1 0 1 2
चौथाई ितहाई आधा

तीन प रमेय संख्याएँ −2 से 2 तक क एक ही संख्या रेखा पर अं कत।

सुझाव: य द तीन को एक ही मापनी पर लाना हो तो बारहव भाग ली जए — 2/3 = 8/12, −5/4 = −15/12
और 3/2 = 18/12, क्य क 12 = ल.स. (3, 4, 2)।

प्र.2 अ नवाय रूप से − 1/2 और 1/4 के मध्य वद्यमान तीन भन्न प रमेय संख्याएँ ात क जए।

दोन सीमाओं को ऐसे साव हर पर ल खए क उनके बीच पयाप्त पूणाक अंश आ सक।

ल.स. (2, 4) = 4, अत: −1/2 = −2/4 और 1/4 = 1/4

इनके ठीक मध्य के वल 0/4 आता है — एक संख्या, तीन नही ं

अत: हर बड़ ा कीिजए — आठवें भाग लीिजए

−1/2 = −4/8 और 1/4 = 2/8

अब −4 और 2 के मध्य के पूणाक ह −3, −2, −1, 0, 1 — पाँच वकल्प। इनम से कोई तीन ली जए —

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
−3/8, −1/8, 1/8
m l as
.co
जाँच — −4/8 < −3/8 < −1/8 < 1/8 < 2/8 ✓
m a g
l a se
g
aऐसा क्य होता है: साव हर d के साथ दोन सीमाओं के मध्य क संख्याएँ ठ क वही k/d ह जनके अंश k दोन

co m
अंश के मध्य पड़ते ह। अत: वकल्प क संख्या पूरी तरह इस बात पर नभर है क अंश कतनी दूर ह — और हर

e m .
को 2 से गुणा करने पर सीमाएँ हले बना यह दूरी दोगुनी हो जाती है। ag
g l as
a
स्वयं जाँ चए: बार-बार माध्य लेने से भी उत्तर मलेगा। (−1/2 + 1/4)/2 = −1/8; फर −1/8 का दोन सीमाओं

co m
m.
से माध्य लेने पर −5/16 और 1/16 मलते ह।

m as e
.co a g l
a s emव्यंजक (−1/4) + (5/12) का सरलीकरण क जए।
a gl प्र.3

m a s
.co agl

se m
g l a
ल.स. (4, 12) = 12
a
m
−1/4 = −3/12

. co
−3/12 + 5/12 = 2/12
e m
m l as
.co a g
e=m1/6
अंश और हर को 2 से िवभािजत कीिजए

a s
agl
se m
com g l a
.
ऐसा क्य होता है: 5/12, 1/4 = 3/12 से बड़ा है, अत: योग 0 के धनात्मक पक्ष म आता है। 2/12 को 1/6
m a
ase
agl
करना उ चत है क्य क 2/12 और 1/6 समतुल्य प रमेय संख्याएँ ह, और अध्याय के अनुसार प रमेय संख्या को
उसके सह-अभाज्य रूप म ना मत करना चा हए।

co m
m .
mक आवश्यकता होती है तो दज कुल कतने कुत बना सकता है? glas e
c o
एक दज के पास 15 3/4 मीटर प रष्कृत रेशमी कपड़ा है। य द एक कुता बनाने के लए 2 1/4 मीटर रेशमी कपड़े
. a
प्र.4

se m
g l a
a c
m .
m a s e
co agl
दोन मश्र संख्याओं को वषम भन्न म बदलकर वभाजन क जए।

m .
ase
a g l

co m
m .
m ase
.co


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15 3/4 = (15 × 4 + 3)/4 = 63/4

2 1/4 = (2 × 4 + 1)/4 = 9/4

63/4 ÷ 9/4 = 63/4 × 4/9 = 63/9 = 7

दज ठ क 7 कुत बना सकता है और कपड़ा कुछ भी शेष नह बचेगा।

ऐसा क्य होता है: दोन लंबाइयाँ चौथाई-मीटर क पूण संख्याएँ ह — 63 चौथाई और 9 चौथाई। उनका वभाजन
केवल 63 ÷ 9 है, और चूँ क 9, 63 को पूणत: वभा जत करता है, कुछ शेष नह रहता। साव हर ने ही सारा काय
कर दया।

स्वयं जाँ चए: 7 × 2 1/4 = 7 × 9/4 = 63/4 = 15 3/4 मीटर ✓

प्र.5 3.1415 और 3.1416 के मध्य तीन प रमेय संख्याएँ ात क जए।

एक और दशमलव ान जोड़ द जए। चौथे ान क संख्याओं 3.1415 और 3.1416 के मध्य पाँचव ान क नौ संख्याओं के
लए ान है।

3.1415 = 31415/10000 = 314150/100000

3.1416 = 31416/10000 = 314160/100000

314150 और 314160 के मध्य का कोई भी अंश काम करेगा, जैसे —

3.14152 = 314152/100000 = 39269/12500

3.14155 = 314155/100000 = 62831/20000

3.14158 = 314158/100000 = 157079/50000

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक सांत दशमलव एक प रमेय संख्या है, और एक और दशमलव ान जोड़ने पर हर 10
गुना हो जाता है तथा दोन अंश भी 10 गुने। अंश के बीच क दूरी 1 से बढ़कर 10 हो जाती है और नौ नई प रमेय
संख्याएँ बन जाती ह — यह क्रम अनंत तक दोहराया जा सकता है। यही प रमेय संख्याओं क सघनता है, दशमलव
के वेश म।

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क्या आप जानते ह? π = 3.14159265… इसी अंतराल म त है, परंतु π इस व ध से सूचीबद्ध प रमेय
संख्याओं म नह है — इसका दशमलव न कभी समाप्त होता है, न आवत होता है।

प्र.6* क्या आप कन्ह दो प रमेय संख्याओं के मध्य एक प रमेय संख्या ात करने क कसी अन्य व ध सोच सकते
ह?

हाँ — माध्य केवल एक व ध है। यहाँ तीन और व धयाँ ह, प्रत्येक अपनी उपप त्त के साथ।

साव हर, बड़ा हर। a = p/m और b = r/m इस प्रकार ल खए क r − p ≥ 2 हो (आवश्यकता हो तो m बड़ा क जए)। तब
(p + 1)/m उनके ठ क मध्य म त होगी।
भा रत माध्य। 0 < t < 1 वाली कसी भी प रमेय संख्या t के लए ta + (1 − t)b, a और b के मध्य त होती है। t = 1/2
लेने पर साधारण माध्य मलता है; t = 1/3 लेने पर एक- तहाई दूरी का बदु।
दो भन्न का मध्यक (मी डएंट)। धनात्मक a = p/q और b = r/s के लए, य द p/q < r/s हो तो भन्न (p + r)/(q + s)
सदै व उनके मध्य त होती है।

तीसरी व ध, जो सबसे कम स्पष्ट है, उसक उपप त्त —

p/q < r/s का अथ है ps < qr
(p + r)/(q + s) − p/q = (q(p + r) − p(q + s))/(q(q + s))

= (qr − ps)/(q(q + s)) > 0

इसी पकार r/s − (p + r)/(q + s) = (qr − ps)/(s(q + s)) > 0

अत: p/q < (p + r)/(q + s) < r/s।

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक व ध म उत्तर a, b और पूणाक से केवल +, −, × और शून्येतर संख्या से ÷ ारा बनाया
गया है। चूँ क प रमेय संख्याएँ इन चार सं क्रयाओं के अंतगत संवृत ह, प रणाम प रमेय होना ही है; अस मकाएँ फर
उसे अंतराल के भीतर बाँध दे ती ह। 1/2 और 2/3 पर मध्यक लगाइए — (1 + 2)/(2 + 3) = 3/5, और वास्तव म
1/2 < 3/5 < 2/3।

सुझाव: मध्यक भन्न का योग नह है। (p + r)/(q + s) एक प्र सद्ध रचना है और इसी कारण फैरे अनुक्रम क
भन्न इतने सुंदर क्रम म सजती ह।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 53

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3.5 अप रमेय संख्याएँ

प्र.1 क्या √2 को एक प रमेय संख्या p/q के रूप म लखा जा सकता है?

नह । ऐसा कोई पूणाक युग्म p, q (q ≠ 0) नह है जसके लए √2 = p/q हो।
खंड 3.5.1 क औपचा रक उपप त्त से पहले, एक झलक क उत्तर 'नह ' ही क्य होना चा हए —

यिद √2 = p/q हो तो 2q² = p²
दोनों पक्षों में गुणनखंड 2 िगिनए

p² में 2 की संख्या सम होती है (p का पत्येक 2 दो बार आता है)

q² में भी 2 की संख्या सम होती है

अत: 2q² में 2 की संख्या िवषम होगी

सम िगनती कभी िवषम िगनती के बराबर नही ं हो सकती

ऐसा क्य होता है: वग करने पर अभाज्य गुणनखंडन का प्रत्येक घातांक दोगुना हो जाता है, अत: पूण वग म प्रत्येक
अभाज्य सम बार ही आता है। एक अ त रक्त 2 से गुणा करने पर यह सम- वषम संतुलन टू ट जाता है। चूँ क 2 पूण
वग नह है, उसका वगमूल पूणाक का अनुपात नह हो सकता। अत: √2 अप रमेय है — इ तहास क पहली संख्या
जसे अप रमेय सद्ध कया गया।

क्या आप जानते ह? अध्याय √2 तक ज्या म त से पहुँचता है — इकाई वग का वकण d, 1² + 1² = d² को संतुष्ट
करता है, अत: d² = 2। एक अत्यंत साधारण लंबाई ऐसी संख्या नकलती है जसे कोई भन्न नाम नह दे सकती।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 55
3.5.1 √2 क अप रमेयता क उपप त्त

प्र.1 वरोधाभास ारा उपप त्त का उपयोग करते हुए √3 क अप रमेयता सद्ध करने का प्रयत्न क जए। क्या यह व ध
√5, √7 या √10 के लए भी सहायक सद्ध होगी।

कथन — √3 अप रमेय है। खंड 3.5.1 के आठ चरण का अनुसरण क जए, केवल 'सम' के ान पर '3 से वभाज्य' र खए।

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च रण 1. मान लीिजए √3 = p/q सरलतम रूप में, q ≠ 0, p और q सह-अभाज्य

च रण 2. वग कीिजए — 3 = p²/q²

च रण 3. 3q² = p²

च रण 4. अत: 3, p² को िवभािजत करता है। चूँिक 3 अभाज्य है, 3, p को भी िवभािजत करेगा

मान लीिजए p = 3k

च रण 5. 3q² = (3k)² = 9k²

च रण 6. 3 से िवभािजत कीिजए — q² = 3k²

च रण 7. अत: 3, q² को िवभािजत करता है, इसिलए 3, q को भी िवभािजत करेगा

च रण 8. p और q दोनों में साव गुणनखंड 3 है — जो 'सह-अभाज्य' की मान्यता का खंडन है

त्रु ट केवल प्रारं भक कल्पना म हो सकती है, अत: √3 अप रमेय है।
क्या यह व ध √5, √7, √10 पर भी चलेगी? हाँ, तीन पर।

संख्या मुख्य चरण नष्कष

√5 5 अभाज्य — 5 | p² ⇒ 5 | p अपिरमेय

√7 7 अभाज्य — 7 | p² ⇒ 7 | p अपिरमेय

√10 10 अभाज्य नह , पर 2 | p² ⇒ 2 | p चलता है अपिरमेय

√10 के लए केवल अभाज्य 2 के साथ तक चलाइए — 10q² = p² से p सम, p = 2k, अत: 10q² = 4k², अथात 5q² = 2k²,
अत: q² सम और q सम — वरोधाभास।

ऐसा क्य होता है: पूरी उपप त्त का इंजन यह चरण है — 'n, p² को वभा जत करता है तो n, p को भी वभा जत
करता है', और यह चरण ठ क तभी वैध है जब n अभाज्य (अथवा ापक रूप से वग-मुक्त) हो। n = 4 पर यह
वफल है — 4, 6² = 36 को वभा जत करता है परंतु 6 को नह — और इसी लए √4 = 2 अप रमेय नह है। अत:
यह व ध प्रत्येक ऐसे धनात्मक पूणाक n के लए √n को अप रमेय सद्ध करती है जो पूण वग न हो, और n के पूण
वग होने पर ईमानदारी से रुक जाती है।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 55

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ase
कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

3.5.2 √n लंबाई क संरचना व ध
co m
e m.
m l as
.co a g
हमने पूव म दे खा है क एक ऐसी रेखा कैसे प्राप्त क जाए, जसक लंबाई एक प रमेय संख्या हो। ऐसी रेखाएँ
m
प्र.1

l a se
कैसे प्राप्त कर सकते ह जनक लंबाई अप रमेय हो?

a g

वभाजन के
. c om
ान पर बौधायन–पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके। एक इकाई को q बराबर भाग म बाँटने से केवल प रमेय
ag
लंबाइयाँ p/q ही बनती ह; समकोण त्रभुज वगमूल वाली eलंm
a s बाइयाँ बनाता है।

agl
1 और 1 भुजाओं वाला समकोण ित्रभुज

co m
em.
कण² = 1² + 1² = 2
m l as
.co
कण = √2 — एक अपिरमेय लंबाई
a g
a s em
a l 3.11 क रचना उस लंबाई को संख्या रेखा पर ले आती है —
gचत्र
चरण 1. संख्या रेखा पर OA = 1 इकाई ली जए और A पर लंब ख चए।
m a s
m.co
चरण 2. उस लंब पर AB = 1 इकाई लेकर बदु B अं कत क जए और OB मलाइए। तब OB = √2 है। agl
l a se
g
चरण 3. O को कद्र और OB को त्रज्या लेकर चाप ख चए, जो संख्या रेखा को P पर काटता है। तब OP = √2, अत: P ही
√2 है। a

co m
m .
m as e
.co a g l
se m B
g l a
a
√2
se m
1
com g l a
m . a
ase
agl
O 1 A P

0 1 2 3
co m
m .
m ase
.co a g l
OA = AB = 1, अत: OB = √2; परकार से OB को नीचे घुमाकर P पर √2 अं कत होता है।

se m
g l a
a c
ऐसा क्य होता है: परकार कसी लंबाई को बना बदले ानांत रत करता है। प्रमेय दो प रमेय लंबाइय से एक
m .
m a s e
co agl
अप रमेय लंबाई गढ़ दे ता है और परकार उसे अक्ष तक पहुँचा दे ता है। इसी प्रकार संख्या रेखा उन बदुओं पर भी

m .
e
भरती है जहाँ कोई भन्न नह पहुँच सकती।

g l as
a

co m
m .
m as e
.co


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सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 56
3.5.2 √n लंबाई क संरचना व ध

प्र.1 इस व ध को मापनी और परकार के उपयोग से √3 और √5 लंबाई के रेखाखंड क रचना करने के लए वस्ता रत
क जए। इस व ध को कसी भी √n रूप क लंबाई के रेखाखंड क रचना करने के लए व्यापक कृत क जए,
जहाँ n एक धनात्मक पूणाक है।

√3 क लंबाई। P पर बने √2 से आरंभ क जए।

P पर लंब खी ंचकर PC = 1 अंिकत कीिजए

OC² = OP² + PC² = (√2)² + 1² = 2 + 1 = 3

अत: OC = √3

परकार से OC को संख्या रेखा पर घुमा दीिजए

√5 क लंबाई। दो बार और दोहराइए, अथवा 1 और 2 भुजाओं से सीधा रास्ता ली जए —

√3 से एक इकाई लंब — 3 + 1 = 4, अत: √4 = 2

2 से एक इकाई लंब — 4 + 1 = 5, अत: √5

सीधा रास्ता — भुजाएँ 2 और 1 से 2² + 1² = 5

व्यापक नयम। √n बना लेने पर उसके सरे पर 1 लंबाई का लंब ख चए। नया कण —

(नया)² = (√n)² + 1² = n + 1
नई लंबाई = √(n + 1)

अत: OA = 1 = √1 से आरंभ करके यह रचना एक-एक चरण चढ़ती है — √1 → √2 → √3 → √4 → … → √n, कसी भी
धनात्मक पूणाक n के लए ठ क n − 1 चरण म। इसे अनंत तक दोहराने पर चत्र 3.14 का वगमूल स पल बनता है।

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक चरण लंबाई म नह , अ पतु लंबाई के वग म ठ क 1 जोड़ता है। इसी लए स पल का बाहरी
कनारा धीरे-धीरे और धीमा बढ़ता है — √n और √(n + 1) का अंतर n बढ़ने पर घटता जाता है, क्य क √(n+1)
− √n = 1/(√(n+1) + √n)।

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स्वयं जाँ चए: इस रचना म चाँदे क कभी आवश्यकता नह पड़ती। मापनी और परकार पयाप्त ह, क्य क कसी
बदु पर लंब केवल परकार से ख चा जा सकता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 57
3.6.1 प रमेय दशमलव — सांत और आवत

प्र.1 क्या आप यह बता सकते ह क कन प रमेय संख्याओं के लए वभाजन प र मत दशमलव स्थान तक समाप्त या
सांत हो जाएगा?

ठ क उन्ह p/q के लए जनका हर, सरलतम रूप म, केवल 2 और 5 के अभाज्य गुणनखंड से बना हो।

q = 2^m × 5^n → दशमलव सांत होगा

q में कोई अन्य अभाज्य गुणनखंड → दशमलव आवत होगा

प रमेय संख्या हर का गुणनखंडन दशमलव

3/8 2³ 0.375, सांत

3/20 2² × 5 0.15, सांत

13/250 2 × 5³ 0.052, सात
ं

4/15 3×5 0.2666…, आवत

5/11 11 0.4545…, आवत

ऐसा क्य होता है: k ान पर समाप्त होने वाला दशमलव वस्तुत: वह भन्न है जसका हर 10^k = 2^k × 5^k
है। अत: p/q तभी सांत होगा जब उसे 10 क कसी घात वाले हर के साथ लखा जा सके — और q के भीतर
पहले से बैठे 3, 7, 11 जैसे अभाज्य गुणनखंड को कोई गुणन हटा नह सकता। इसके वपरीत, य द q = 2^m
5^n हो तो अंश और हर को 2 अथवा 5 क छू ट हुई घात से गुणा करने पर हर 10^max(m, n) बन जाता है।

सुझाव: पहले सरलतम रूप म लाइए। 6/15 म 3 दखता है, परंतु 6/15 = 2/5 = 0.4, जो सांत है।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 57

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3.6.1 प रमेय दशमलव — सांत और आवत

प्र.1 10/3 और 11/12 के दशमलव प्रसार ात करने का प्रयत्न क जए। दशमलव बदु के प ात आने वाले अंक क
पुनरावृ त्त के वषय म आप क्या अवलोकन करते ह?

10/3 दीघ िवभाजन से

10 ÷ 3 = 3, शेषफल 1

10 ÷ 3 = 3, शेषफल 1 (पुन : वही)

10/3 = 3.3333… = 3.3

11/12 दीघ िवभाजन से

110 ÷ 12 = 9, शेषफल 2

20 ÷ 12 = 1, शेषफल 8

80 ÷ 12 = 6, शेषफल 8

80 ÷ 12 = 6, शेषफल 8 (पुन रावृि )

11/12 = 0.91666… = 0.916

अवलोकन। दोन असांत और आवत ह, परंतु पुनरावृ त्त भन्न- भन्न ान से आरंभ होती है —

10/3 म आवत खंड दशमलव बदु के तुरंत बाद आरंभ होता है — यह शुद्ध आवत दशमलव है। इसके हर 3 म 2 या 5 का
कोई गुणनखंड नह है।
11/12 म पहले दो अंक 9 और 1 आते ह और तब 6 क पुनरावृ त्त होती है — यह सामान्य आवत दशमलव है। इसके हर 12
= 2² × 3 म 3 के साथ 2 क घात भी मली हुई है।

ऐसा क्य होता है: 12 का 2² भाग 10 क घात म समा सकता है (उसी से अनावत अंक बनते ह), परंतु शेष 3
कभी नह हटता, अत: कोई शेषफल दोहराता ही है और पुच्छ अनंत तक चक्र म घूमता रहता है। जब हर म 2 या 5
बलकुल न ह , जैसे 3 म, तो बनाने के लए कोई अनावत अंक ही नह होता और चक्र तुरंत आरंभ हो जाता है।

स्वयं जाँ चए: अनावत अंक क संख्या हर म 2 और 5 क घात म से बड़ी होती है। 12 = 2² × 5⁰ के लए यह 2
है — ठ क वही दो अंक 9 और 1।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 58

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3.6.1 प रमेय दशमलव — सांत और आवत

प्र.1 p/q का दशमलव प्रसार न त रूप से सांत होगा, जब q का अभाज्य गुणनखंड केवल 2, केवल 5 अथवा 2
और 5 दोन हो। क्या आप व्याख्या कर सकते ह क ऐसा क्य है?

' न त रूप से' का अथ है क दोन दशाओं म सद्ध करना होगा। यहाँ p/q सरलतम रूप म है।
य द q = 2^m × 5^n हो तो दशमलव सांत होगा। मान ली जए k, m और n म से बड़ा है। जो घात छू ट रही है उससे अंश और
हर को गुणा क जए —

2^m 5^n × 2^(k−m) 5^(k−n) = 2^k 5^k = 10^k

अत: p/q = (p × 2^(k−m) 5^(k−n))/10^k

10^k से वभा जत पूण संख्या ठ क k ान पर समाप्त हो जाती है। अध्याय का अपना उदाहरण 3/20 है, जहाँ 20 = 2² × 5
और k = 2 —

3/20 = (3 × 5)/(2² × 5 × 5) = 15/100 = 0.15

य द दशमलव सांत हो तो q म केवल 2 और 5 ही ह गे। k ान पर समाप्त होने वाला दशमलव —

p/q = N/10^k िकसी पूण क
ं N के िलए
अत: p × 10^k = N × q

अथ त q, p × 10^k को िवभािजत करता है

परंत ु p और q सह-अभाज्य है,ं अत: q, 10^k = 2^k 5^k को िवभािजत करेगा

2^k 5^k का कोई भी भाजक 2 और 5 के अ त रक्त कोई अभाज्य नह रख सकता। अत: q का रूप वही है जो कहा गया है।

ऐसा क्य होता है: हमारे अंक आधार 10 म लखे जाते ह और 10 = 2 × 5 है। कोई हर 10 क घात म तभी समा
सकता है जब वह दस क अपनी ही अभाज्य ईंट से बना हो। कोई अन्य अभाज्य — 3, 7, 11, 13 — प्रत्येक गुणन
को झेल जाता है, वभाजन म शेषफल कभी 0 नह होता, और चूँ क संभा वत शेषफल सी मत ह, कोई एक शेषफल
अवश्य लौटता है और अंक चक्र म बँध जाते ह।

क्या आप जानते ह? आधार 3 म 1/3 सांत होता (वहाँ वह 0.1 है) जब क 1/2 आवत होता। सांत होना संख्या
का अकेला गुण नह , अ पतु संख्या और आधार का साझा गुण है।

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
प्रश्नावली 3.5 — पृष्ठ 61
m as e
.co
3.6.3 अप रमेय दशमलव — अव्यव स्थत एवं अनंत
a g l
a s em
aप्र.1gl और कौन-सी आवत दशमलव है — 7/20, 4/15 और 13/250, तत्प ात स्पष्ट रूप से द घ वभाजन करते हुए
द घ वभाजन कए बना नम्न ल खत प रमेय संख्याओं म से यह नधा रत क जए क कौन-सी सांत दशमलव है

co m
अपने उत्तर क जाँच क जए और इन प रमेय संख्याओं को दशमलव म भी व्यक्त क जए।

e m . ag
g l as
a

हर से अनुमान। तीन भन्न पहले से सरलतम रूप म ह, अत: हर का गुणनखंडन क जए और 2, 5 के अ त रक्त कोई अभाज्य
ढूँ ढ़ए।
co m
m.
e अनुमान
m l as
.co g
संख्या हर अन्य अभाज्य?

m a
l a se
g
7/20 20 = 2² × 5 कोई नह सांत

a 4/15 15 = 3 × 5 3 आवत

m a s
250 = 2 × 5³
m .co कोई नह agl
se
13/250 सात
ं

g l a
अब द घ वभाजन।
a

co m
7/20 — 70 ÷ 20 = 3, शेषफल 10
m .
m as e
.co
100 ÷ 20 = 5, शेषफल 0 — िवभाजन समाप्त
a g l
s m = 0.35 (2 स्थान, जै सा 2² × 5 से max(2, 1) = 2 अपेिक्षत था)
e7/20
gl a
a
se m
com g l a
4/15 — 40 ÷ 15 = 2, शेषफल 10
m . a
100 ÷ 15 = 6, शेषफल 10
gl ase
a
100 ÷ 15 = 6, शेषफल 10 — शेषफल 10 लौट आया

co m
.
4/15 = 0.2666… = 0.26
e m
m l as
.co
m 13/250 — 130 ÷ 250 = 0, शेषफल 130 a g
l a se
ag 1300 ÷ 250 = 5, शेषफल 50
.c
s e m
m a
. co agl
500 ÷ 250 = 2, शेषफल 0 — िवभाजन समाप्त

e m
l as
13/250 = 0.052 (3 स्थान, जै सा 2 × 5³ से max(1, 3) = 3 अपेिक्षत था)
a g
m
तीन अनुमान सत्य नकले।

. co
e m
m l as
.co a g
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ऐसा क्य होता है: दोन सांत तय म वभाजन क आवश्यकता ही नह । 7/20 = 35/100 (5 से गुणा) और
13/250 = 52/1000 (4 से गुणा)। 4/15 म गुणनखंड 3 को 10 क कसी घात म नह बदला जा सकता, अत:
कोई शेषफल दोहराना ही है — और वह पहले ही चरण म दोहरा जाता है।

प्र.2 1/13 के लए द घ वभाजन क जए। अंक के आवत खंड को पहचा नए। य द आप 2/13 क गणना करते ह
तो क्या यह चक्र य गुण को प्रद शत करता है? अब आप 3/13, 4/13 इत्या द क गणना क जए। आपने क्या
ध्यान कया?

1/13 का द ीघ िवभाजन

10 ÷ 13 = 0, शे. 10 → 100 ÷ 13 = 7, शे. 9
90 ÷ 13 = 6, शे. 12 → 120 ÷ 13 = 9, शे. 3

30 ÷ 13 = 2, शे. 4 → 40 ÷ 13 = 3, शे. 1

शेषफल 1 लौट आया → अब अंक दोहराएँगे

1/13 = 0.076923

आवत खंड 076923 है, जसक लंबाई 6 है। अब शेष तेरहव भाग —

भन्न आवत खंड भन्न आवत खंड

1/13 076923 2/13 153846

3/13 230769 4/13 307692

5/13 384615 6/13 461538

7/13 538461 8/13 615384

9/13 692307 10/13 769230

11/13 846153 12/13 923076

अवलोकन। बारह खंड बारह भन्न- भन्न अंक-समुच्चय नह ह — वे दो प रवार म बँट जाते ह, और प्रत्येक प रवार एक ही खंड का
चक्र य घुमाव है —

प रवार क (076923 के घुमाव) — 1/13, 3/13, 4/13, 9/13, 10/13, 12/13
प रवार ख (153846 के घुमाव) — 2/13, 5/13, 6/13, 7/13, 8/13, 11/13

अत: 2/13, 1/13 के खंड का घुमाव नह दे ता — वह एक दूसरा चक्र आरंभ करता है। 1/7 से यही अंतर है।

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ऐसा क्य होता है: 1/n के आवत खंड क लंबाई उतनी ही होती है जतने शेषफल द घ वभाजन म प्रकट होते ह।
1/7 म सभी छह संभव शून्येतर शेषफल 1…6 आते ह, अत: 1 से 6 तक से गुणा करने पर वही चक्र कसी दूसरे
ान से आरंभ हो जाता है — 142857 सच्ची चक्र य संख्या है। 1/13 म बारह म से केवल छह शेषफल {1, 3, 4,
9, 10, 12} आते ह, अत: बारह भन्न छह-छह के दो चक्र म बँट जाती ह। 1/n का खंड पूणत: चक्र य ठ क तब
होता है जब उसक लंबाई n − 1 हो।

स्वयं जाँ चए: 076923 × 3 = 230769 और 076923 × 9 = 692307 — दोन घुमाव ह। परंतु 076923 × 2
= 153846, जो घुमाव नह है।

प्र.3 नम्न ल खत संख्याओं को प रमेय या अप रमेय के रूप म वग कृत क जए — (i) √81 (ii) √12 (iii) 0.33333
… (iv) 0.123451234512345 … (v) 1.01001000100001… (इस प्र तरूप पर ध्यान द जए — क्या इसम
एकल खंड क पुनरावृ त्त हो रही है?) (vi) 23.560185612239874790120 । प रमेय संख्याओं क स्थ त म
उनके स्पष्ट भन्न रूप को ात क जए।

संख्या कारण प्रकार भन्न रूप

(i) √81 81 = 9² पूण वग है पिरमेय 9 = 9/1

(ii) √12 12 = 2² × 3 पूण वग नह अपिरमेय —

(iii) 0.33333… शुद्ध आवत , खंड 3 पिरमेय 1/3

(iv) 0.123451234512345… शुद्ध आवत , खंड 12345 पिरमेय 4115/33333

(v) 1.01001000100001… कोई न त खंड नह दोहराता अपिरमेय —

(vi) 23.560185612239874790120 सांत दशमलव पिरमेय नीचे दे खए

प रमेय संख्याओं का हल।

(i) √81 = 9, क्योंिक 9 × 9 = 81 → 9/1

(iii) x = 0.3; 10x = 3.3

9x = 3 → x = 3/9 = 1/3

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(iv) x = 0.12345; 5 अंक दोहराते है,ं अत: 10⁵ से गुणा

100000x = 12345.12345

99999x = 12345 → x = 12345/99999
99999 = 3² × 41 × 271 और 12345 = 3 × 5 × 823, साव गुणनखंड 3

x = 4115/33333

(vi) दशमलव िबंद ु के बाद 21 अंक है,ं अत:

= 23560185612239874790120/10²¹

अंश और हर को 40 से िवभािजत कीिजए

= 589004640305996869753/25000000000000000000

ऐसा क्य होता है: (ii) खंड 3.5.1 के सम- वषम तक से अप रमेय है — √12 = 2√3 और √3 अप रमेय है, अत:
√12 पूणाक का अनुपात नह हो सकता। (v) सबसे रोचक है — अंक म प्र तरूप तो है, परंतु शून्य के अंतराल 1,
2, 3, 4, … बढ़ते जाते ह और कभी कसी न त लंबाई के खंड म र नह होते। प रमेय संख्या म र लंबाई
का खंड दोहराना अ नवाय है, अत: (v) अप रमेय है। दखाई दे ने वाला प्र तरूप और आवत खंड एक ही बात नह
ह।

सुझाव: (vi) बस समाप्त हो जाती है — इसम 21 दशमलव ान ह और आगे '…' नह है। जो भी दशमलव
समाप्त होता है वह 10 क घात पर एक भन्न है, अत: प रमेय है, चाहे उसके अंक कतने ही ज टल दख।

प्र.4 संख्या 0.9 (अथात 0.99999) एक प रमेय संख्या है। बीजग णत (मान ली जए x = 0.9 है, 10 से गुणा क जए
और घटाइए) का उपयोग करते हुए व्याख्या क जए क 0.9 ठ क 1 के समान क्य है?

मान लीिजए x = 0.9 = 0.9999…

एक अंक की पुन रावृि है, अत: 10¹ = 10 से गुणा कीिजए

10x = 9.9999… = 9.9

घटाइए — 10x − x = 9.9999… − 0.9999…

9x = 9

x=1

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अत: 0.9 और 1 एक ही संख्या के दो दशमलव नाम ह।

ऐसा क्य होता है: यह घटाव ठ क-ठ क इसी लए संभव है क्य क 9 क पुच्छ अनंत है; 10x के दशमलव बदु के
बाद का प्रत्येक 9, x के 9 से कट जाता है और ठ क 9 शेष रहता है। य द 9 कह भी रुक जाते — मान ली जए
0.9999 पर — तो घटाव म पुच्छ बच जाती और x, 1 से कुछ कम रह जाता। यह समता कसी प र मत स न्नकटन
का नह , अ पतु पूण अनंत प्रसार का कथन है।

स्वयं जाँ चए: यही तथ्य पहले से ात अंकग णत से भी नकलता है — 1/3 = 0.3, अत: 3 × 1/3 = 3 × 0.3,
अथात 1 = 0.9। अथवा यह दे खए क 1 − 0.9 को ऐसी धनात्मक संख्या होना पड़ेगा जो प्रत्येक 1/10^k से छोट
हो, और ऐसी कोई प रमेय संख्या नह है। अध्याय इसी को 'दशमलव नरूपण क अ तीयता का अभाव' कहता है
— 2.47000… = 2.46999… भी।

प्र.5* हम दे ख चुके ह क 1/7 का आवत खंड एक चक्र य संख्या है। कुछ और संख्याओं (n) को ात करने का
प्रयास क जए, जनके प्र तलोम (1/n) आवत खंड के ऐसे दशमलव उत्पन्न करते ह , जो चक्र य ह।

1/n पूणत: चक्र य खंड तभी दे ता है जब आवत खंड क लंबाई अ धकतम संभव, अथात n − 1, हो। इसके लए n का अभाज्य
होना आवश्यक है।

N खंड क लंबाई आवत खंड चक्र य?

7 6=7−1 142857 हाँ

11 2 09 नह

13 6, 12 नह 076923 नह

17 16 = 17 − 1 0588235294117647 हाँ

19 18 = 19 − 1 052631578947368421 हाँ

23 22 = 23 − 1 0434782608695652173913 हाँ

29 28 = 29 − 1 0344827586206896551724137931 हाँ

अत: n = 7, 17, 19, 23, 29 सभी काम करते ह, और यह सूची 47, 59, 61, 97, … के साथ आगे बढ़ती है।

17 के िलए जाँच — 0588235294117647 × 2 = 1176470588235294

जो वही अंक घुमे हुए है ं — एक चक्र ✓

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ase
कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
ऐसा क्य होता है: 1/n के द घ वभाजन म शेषफल केवल 1, 2, …, n − 1 ही हो सकते ह, अत: खंड कभी n −

m
1 अंक से लंबा नह हो सकता। जब वभाजन 1 पर लौटने से पहले सभी n − 1 शेषफल से होकर
a s emगुजरता है, तब
co वही चक्र कसी अन्य शेषफल से आरंभ करती है — जो कागज पर वहीagअंlक घुमे हुए दखते ह।
प्रत्येक भन्न .k/n
जब कsे वल
a emकुछ शेषफल आते ह, जैसे 13 म, तो भन्न कई अलग चक्र म बँट जाती ह और खंड चक्र य नह रहता।
gl गुण वाली अभाज्य संख्याओं को पूण आवत अभाज्य कहते ह।
aइस

co m
e m .
सुझाव: n का 10 के साथ सह-अभाज्य होना आवश्यक है। 2 या 5 से वभाज्य n के दशमलव म कुछ सांत भाग ag
g l as
a
रहेगा, अत: वह पूरी लंबाई का शुद्ध आवत खंड नह दे सकता।

co m
em.
mत यात्रा as
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 64
. coअनं a g l
em
3.7 नष्कष — एक

a s
agl प्र.1 इस पहेली पर वचार क जए क −1 का वगमूल क्या है? हम जानते ह क 1 × 1 = 1 होता है। हम यह भी जानते

m a s
.co agl
ह क (−1) × (−1) = 1 होता है। ऐसी कोई भी वास्त वक संख्या नह है क जब उसे स्वयं से गुणा कर तो प रणाम

sem
ऋणात्मक संख्या प्राप्त हो। अत: √−1 का संख्या रेखा पर अ स्तत्व नह है।

g l a
उत्तर a

co m
कोई वास्त वक संख्या नह है जसका वग −1 हो। इसका कारण ब्रह्मगुप्त का अपना चह्न- नयम है।

m .
m as e
.co
यिद x > 0 हो तो x × x > 0 (धन × धन = धन)
a g l
s m x < 0 हो तो x × x > 0 (ऋण × ऋण = धन)
eयिद
gl a
a
m
यिद x = 0 हो तो x × x = 0

a se
. com a g l
e m
aभीs कोई हल नह है।
प्रत्येक वास्त वक संख्या इन्ह तीन तय म से एक म आती है, अत: प्रत्येक वास्त वक x के लए x² ≥ 0। चूँ क −1 < 0 है,

g
समीकरण x² = −1 का संख्या रेखा पर कह
a l

co m
ऐसा क्य होता है: संख्या रेखा रक्तताएँ भरकर बनी थी — भन्न ने पूणाक के बीच क रक्तता भरी, अप रमेय

m .
e
संख्याओं ने वह रक्तता भरी जो भन्न छोड़ गई थ । परंतु √(−1) कसी रक्तता म नह बैठा है; उसे चह्न का

c o m g l as
अंकग णत ही बाहर कर दे ता है। अत: कतनी भी भराई से वह नह मलेगा, और ग णत को रेखा छोड़कर एक नया
.
a s em आयाम जोड़ना पड़ा, जसम i² = −1 वाली रा श को i लखा जाता है। a
agl c
m .
क्या आप जानते ह? इस अध्याय का प्र तरूप यहाँ एक बार और दोहराया जाता है। जब भी कोई सं क्रया संभव
a s e
. c om
नह हुई — N म घटाव, Z म वभाजन, Q म वगमूल — तब-तब संख्या पद्ध त का वस्तार हुआ। काल्प नक
agl
m धारा प रपथ तथा क्वांटम यां त्रक क गणना संभव बनाती ह।
संख्याएँ अगला वस्तार ह, और वही eप्रत्यावत
s
a
agl

co m
m .
m as e
.co


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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions

अं तम प्रश्नावली — पृष्ठ 64
संख्याओं का संसार

प्र.1 नम्न ल खत प रमेय संख्याओं को द घ वभाजन क प्र क्रया के माध्यम से सांत दशमलव या अनावत और
आवत दशमलव (जो भी उपयुक्त हो) म रूपांत रत क जए — (i) 3/50 (ii) 2/9

(i) 3/50। 50 = 2 × 5², के वल 2 और 5 → सांत दशमलव अपेिक्षत

30 ÷ 50 = 0, शेषफल 30

300 ÷ 50 = 6, शेषफल 0 — समाप्त

3/50 = 0.06, 2 दशमलव स्थानों वाला सांत दशमलव

(ii) 2/9। 9 = 3², 2 या 5 के अितिरक्त अभाज्य → पुन रावृि अपेिक्षत

20 ÷ 9 = 2, शेषफल 2

20 ÷ 9 = 2, शेषफल 2 (शेषफल त रु ंत लौट आया)

2/9 = 0.2222… = 0.2

ऐसा क्य होता है: 3/50 के लए अपे क्षत दशमलव ान max(1, 2) = 2 ह, और उत्तर वास्तव म दो ान पर
समाप्त हो जाता है। 2/9 म शेषफल केवल 1…8 हो सकता है और वह तुरंत 2 पर लौट आता है, अत: एकमात्र अंक
2 अनंत तक दोहराता रहता है।

स्वयं जाँ चए: 3/50 = 6/100 = 0.06 बना वभाजन के; और शुद्ध आवत नयम से 0.2 = 2/9, क्य क 9x =
2।

प्र.2 सद्ध क जए क √5 एक अप रमेय संख्या है।

वरोधाभास ारा उपप त्त, खंड 3.5.1 के प्र तरूप पर।

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च रण 1. मान लीिजए √5 पिरमेय है।

तब √5 = p/q, जहाँ p, q पूण क
ं है,ं q ≠ 0 और p, q सह-अभाज्य है।
ं

च रण 2. दोनों पक्षों का वग कीिजए — 5 = p²/q²

च रण 3. q² से गुणा कीिजए — 5q² = p²

च रण 4. अत: 5, p² को िवभािजत करता है। चूँिक 5 अभाज्य है, 5 को p भी िवभािजत होना चािहए।

मान लीिजए p = 5k, जहाँ k पूण क
ं है।

च रण 5. पितस्थािपत कीिजए — 5q² = (5k)² = 25k²

च रण 6. 5 से िवभािजत कीिजए — q² = 5k²

च रण 7. अत: 5, q² को िवभािजत करता है, इसिलए 5, q को भी िवभािजत करेगा।

च रण 8. अब 5 दोनों p और q को िवभािजत करता है, अथ त उनका साव गुणनखंड 5 है।

परंत ु चरण 1 में हमने उन्हे ं सह-अभाज्य माना था। िवरोधाभास।

कल्पना के बाद का प्रत्येक चरण बाध्य है, अत: कल्पना ही असत्य होनी चा हए। इस प्रकार √5 को p/q के रूप म नह लखा जा
सकता — यह अप रमेय है।

ऐसा क्य होता है: चरण 4 इस तक का हृदय है और उसके लए 5 का अभाज्य होना आवश्यक है। य द कोई
अभाज्य कसी गुणनफल को वभा जत करता है तो वह कसी एक गुणनखंड को अवश्य वभा जत करेगा; यहाँ
गुणनफल p × p है, अत: वह अभाज्य p को वभा जत करता है। यही उपप त्त √4 पर ढह जाएगी, क्य क 4, 6²
को वभा जत करता है परंतु 6 को नह — और उ चत ही, क्य क √4 = 2 प रमेय है।

सुझाव: चरण 3 एक और शीघ्र तक भी दे ता है। p² म प्रत्येक अभाज्य सम बार आता है; 5q² म अभाज्य 5 वषम
बार आता है। दोन पक्ष कभी बराबर नह हो सकते।

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प्र.3 नम्न ल खत दशमलव संख्याओं को p/q के रूप म रूपांत रत क जए — (i) 12.6 (ii) 0.0120 (iii) 3.052
(iv) 1.235 (v) 0.23 (vi) 2.05 (vii) 2.125 (viii) 3.125 (ix) 2.1625

पहली दो सांत ह; शेष म त 2 और त3क ानांतरण-एवं-घटाव व ध लगेगी।

(i) 12.6 = 126/10 = 63/5

(ii) 0.0120 = 120/10000 = 12/1000 = 3/250

(iii) 3.052 — 1 अनावत अंक , 2 आवत

x = 3.0525252…

10x = 30.52 और 1000x = 3052.52

1000x − 10x = 3052.5252… − 30.5252… = 3022

990x = 3022 → x = 3022/990 = 1511/495

(iv) 1.235 — 1 अनावत अंक , 2 आवत

10x = 12.35, 1000x = 1235.35

990x = 1223 → x = 1223/990

(v) 0.23 — शुद्ध आवत , 2 अंक

100x = 23.23, अत: 99x = 23 → x = 23/99

(vi) 2.05 — 1 अनावत , 1 आवत

10x = 20.5, 100x = 205.5

90x = 185 → x = 185/90 = 37/18

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(vii) 2.125 — 2 अनावत , 1 आवत

100x = 212.5, 1000x = 2125.5

900x = 1913 → x = 1913/900

(viii) 3.125 — (vii) जै सा ही रूप

1000x − 100x = 3125.5… − 312.5… = 2813

900x = 2813 → x = 2813/900

(ix) 2.1625 — शुद्ध आवत , 4 अंक

10000x = 21625.1625

9999x = 21623 → x = 21623/9999

दशमलव भन्न दशमलव भन्न

12.6 63/5 2.05 37/18

0.0120 3/250 2.125 1913/900

3.052 1511/495 3.125 2813/900

1.235 1223/990 2.1625 21623/9999

0.23 23/99

ऐसा क्य होता है: 10^m से गुणा करने पर m अनावत अंक दशमलव बदु के बाईं ओर चले जाते ह; पुन: 10^n
से गुणा करने पर दशमलव ठ क एक पूरे आवत चक्र आगे खसक जाता है। तब दोन संख्याओं क अनंत पुच्छ
बलकुल एक जैसी हो जाती है, अत: घटाव पुच्छ को पूरी तरह मटा दे ता है और पूण संख्या शेष रह जाती है। यही
पूरी यु क्त है, और इसी लए हर सदै व 9 क एक ंखला के बाद 0 क ंखला बनता है — 990 = 99 × 10, 900
= 9 × 100, 9999 = 9999 × 1।

स्वयं जाँ चए: 1511 ÷ 495 = 3.0525252…, 1223 ÷ 990 = 1.2353535…, 1913 ÷ 900 = 2.12555…
— प्रत्येक वही दशमलव लौटा दे ता है जससे हमने आरंभ कया था।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
नम्न ल खत प रमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर नरू पत क जए — (i) 0.532 (ii) 1.15
e
प्र.4

m l as
.co a g
a s em
(i) g l को क्र मक आवधन से अं कत कया जाता है — प्रत्येक दशमलव ान अंतराल को दस बराबर भाग म बाँटता है।
a0.532

co m
. ag
0.532, 0.5 और 0.6 के मध्य है (पहला अंक 5)
e m
िफर 0.53 और 0.54 के मध्य (दू सरा अंक 3)
g l as
िफर 0.53 से 0.54 के दस भागों में से दू सरा भाग
a

co m
e m.
m l as
m
0
.co a g 1

l a se
a g
m a s
.co agl
0.5 0.6

se m
g l a
a

com
0.53 0.54

m .
m gl ase
0.532

. co a
e m
l as
तीन बार आवधन — 0.5–0.6, फर 0.53–0.54, फर बदु 0.532।

a g
(ii) 1.15 आवत दशमलव है, अत: पहले उसे भन्न म बद लए और तब ठ क-ठ क अं कत क जए।
se m
com g l a
m . a
x = 1.1555…
gl ase
10x = 11.5, 100x = 115.5
a

co m
.
90x = 104 → x = 104/90 = 52/45

se m
o m l a
m .c1.15 = 52/45 = 1 7/45। इसे ठ क-ठ क अं कत करने के लए 1 से 2 के अंaतgराल को 45 बराबर भाग म बाँ टए और 1 से
se 7 भाग च लए। आवधन से देख तो यह 1.15 और 1.16 के मध्य, उस अंतराल के आधे से कुछ आगे त है।
अत:

a
agl c
m .
m
ऐसा क्य होता है: सांत दशमलव को बार-बार दस-गुना आवधन से अं कत कया जाता है, जो वस्तुत: एक-एक
a s e
. co a gl
m
दशमलव ान पढ़ना ही है। आवत दशमलव कभी समाप्त नह होता, अत: केवल आवधन से उसका स न्नकट ान

as e
परकार क सट क क्रया है।agl
ही मलेगा — परंतु उसका p/q रूप ठ क ान दे दे ता है, क्य क इकाई को q बराबर भाग म बाँटना मापनी और

co m
m .
m ase
.co


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प्र.5 3 और 4 के मध्य 6 प रमेय संख्याएँ ात क जए।

दोन सीमाओं को ऐसे हर पर ल खए क उनके बीच छह पूणाक अंश आ सक। छह संख्याएँ चा हए, अत: हर 6 + 1 = 7 ली जए।

3 = 21/7 और 4 = 28/7

21 और 28 के मध्य के पूण क
ं — 22, 23, 24, 25, 26, 27 — ठीक छह

अत: 3 और 4 के मध्य छह प रमेय संख्याएँ —

22/7, 23/7, 24/7, 25/7, 26/7, 27/7

ऐसा क्य होता है: साव हर d के साथ प्रत्येक k/d, जहाँ 3d < k < 4d, 3 और 4 के मध्य त होती है, और ऐसे
k ठ क d − 1 होते ह। d = 7 लेने पर 6 मलते ह — ठ क उतने ही जतने चा हए। d = 10 लेने पर नौ वकल्प
(3.1 से 3.9) मलते और उनम से कोई छह चुने जा सकते।

सुझाव: उत्तर अ तीय नह है। 3.1, 3.2, 3.3, 3.4, 3.5, 3.6 भी उतना ही सही है, और बार-बार माध्य लेने क
व ध भी।

प्र.6 2/5 और 3/5 के मध्य 5 प रमेय संख्याएँ ात क जए।

अंश 2 और 3 क्रमागत है ं — अभी कोई स्थान नही ं

दोनों के अंश और हर को 6 से गुणा कीिजए

2/5 = 12/30 और 3/5 = 18/30

12 और 18 के मध्य के पूण क
ं — 13, 14, 15, 16, 17 — ठीक पाँच

2/5 और 3/5 के मध्य पाँच प रमेय संख्याएँ —

13/30, 14/30 = 7/15, 15/30 = 1/2, 16/30 = 8/15, 17/30

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ऐसा क्य होता है: सीमाएँ हली नह — 12/30 और 18/30 वही संख्याएँ ह जो 2/5 और 3/5 ह — परंतु अंश
के बीच क दूरी 1 से बढ़कर 6 हो गई, और यही पाँच ान बनाती है। इस व ध से n संख्याएँ रखने के लए अंश
क दूरी कम से कम n + 1 होनी चा हए।

स्वयं जाँ चए: 15/30 = 1/2, और वास्तव म 0.4 < 0.5 < 0.6 ✓

प्र.7 1/6 और 2/5 के मध्य 5 प रमेय संख्याएँ ात क जए।

ल.स. (6, 5) = 30

1/6 = 5/30 और 2/5 = 12/30

5 और 12 के मध्य के पूण क
ं — 6, 7, 8, 9, 10, 11 — छह िवकल्प, आवश्यकता से अिधक

इनम से पाँच चु नए —

6/30 = 1/5, 7/30, 8/30 = 4/15, 9/30 = 3/10, 10/30 = 1/3

दशमलव म क्रम क जाँच — 0.16 < 0.2 < 0.23 < 0.26 < 0.3 < 0.3 < 0.4 ✓

ऐसा क्य होता है: यहाँ केवल ल.स. लेने से ही अंश क दूरी 7 हो जाती है, जो पाँच संख्याओं के लए आवश्यक 6
से अ धक है। प्र.6 के वपरीत यहाँ हर को और बड़ा करने क आवश्यकता नह पड़ी। जब भी दूरी कम पड़े, साव हर
को कसी उपयुक्त पूण संख्या से गुणा कर द जए।

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प्र.8 य द x/3 + x/5 = 16/15 है तो प रमेय संख्या x ात क जए।

ल.स. (3, 5) = 15

x/3 + x/5 = 5x/15 + 3x/15 = 8x/15

8x/15 = 16/15

दोनों पक्षों को 15 से गुणा कीिजए — 8x = 16

x=2

ऐसा क्य होता है: दोन पद म अ ात x साझा है, अत: बंटन नयम से उन्ह एकत्र कया जा सकता है — x(1/3 +
1/5) = x × 8/15। चूँ क दोन पक्ष के हर पहले से समान ह, समीकरण केवल अंश क तुलना रह जाता है।

स्वयं जाँ चए: 2/3 + 2/5 = 10/15 + 6/15 = 16/15 ✓

प्र.9 मान ली जए a और b दो ऐसी शून्येतर प रमेय संख्याएँ ह क a + 1/b = 0 है। कोई संख्यात्मक मान न दष्ट कए
बना नधा रत क जए क ab धनात्मक है या ऋणात्मक। अपने उत्तर को सत्या पत क जए।

ab ऋणात्मक है — वस्तुत: ab = −1 ही होगा।

a + 1/b = 0 (b ≠ 0, अत: 1/b पिरभािषत है)

a = −1/b

दोनों पक्षों को b से गुणा कीिजए
ab = −1

चूँ क −1 < 0 है, ऐसे प्रत्येक युग्म a, b के लए गुणनफल ab ऋणात्मक है।

ऐसा क्य होता है: प्र तबंध कहता है क a, b के ुत्क्रम का ऋणात्मक है। कसी संख्या और उसके ुत्क्रम का
चह्न सदै व समान होता है — य द b > 0 हो तो 1/b > 0, और य द b < 0 हो तो 1/b < 0। आगे ऋण चह्न लगाने
पर a और b के चह्न न त रूप से वपरीत हो जाते ह, और धन तथा ऋण का गुणनफल ऋण होता है। कह भी
कसी संख्यात्मक मान क आवश्यकता नह पड़ी।

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स्वयं जाँ चए: b = 4 लेने पर a = −1/4 और ab = −1। b = −2/3 लेने पर a = 3/2 और ab = −1। सदै व −1।

प्र.10 एक प रमेय संख्या का सांत दशमलव प्रसार है व जसका अं तम शून्येतर अंक चौथे दशमलव स्थान पर है।
प्रद शत क जए क ऐसी संख्या को p/10⁴ के रूप म व्यक्त कया जा सकता है, जहाँ p एक पूणाक है जो 10
से अ वभाज्य है। क्या यह आवश्यक है क इस प रमेय संख्या का हर जब अपने सरलतम रूप म लखा जाता है
तो वह 2⁴ या 5⁴ से वभाज्य हो? कारण बताइए।

भाग 1 — p/10⁴ का रूप। चौथे ान पर समाप्त होने वाला दशमलव इस रूप का होता है —

N = d₀.d₁d₂d₃d₄
दशमलव हटाने के िलए 10⁴ से गुणा कीिजए

N × 10⁴ = एक पूण क
ं , िजसे p किहए
अत: N = p/10⁴

यहाँ d₄, अथात चौथा दशमलव अंक, अं तम शून्येतर अंक है, और d₄ ठ क p का इकाई अंक है। चूँ क d₄ ≠ 0, अत: p का अंत 0
से नह होता, इस लए 10, p को वभा जत नह करता। ∎
भाग 2 — हाँ, यह आवश्यक है। N = p/10⁴ = p/(2⁴ · 5⁴) लखकर सरलतम रूप म लाइए।
चूँ क 10 ∤ p है, p एक साथ 2 और 5 दोन से वभाज्य नह हो सकता। अत: इनम से कम से कम एक त अवश्य बनेगी —

2 ∤ p। तब 2 का कोई गुणनखंड नह कटे गा और सरलतम हर म पूरा 2⁴ बना रहेगा — अत: वह 2⁴ से वभाज्य है।
5 ∤ p। तब 5 का कोई गुणनखंड नह कटे गा और सरलतम हर म पूरा 5⁴ बना रहेगा — अत: वह 5⁴ से वभाज्य है।

इस प्रकार सरलतम रूप का हर सदै व 2⁴ अथवा 5⁴ से (कभी-कभी दोन से) वभाज्य होगा।

संख्या P/10⁴ सरलतम रूप हर

0.0005 5/10⁴ 1/2000 2⁴ × 5³ — 2⁴ से वभाज्य

0.0002 2/10⁴ 1/5000 2³ × 5⁴ — 5⁴ से वभाज्य

0.1233 1233/10⁴ 1233/10000 2⁴ × 5⁴ — दोन से वभाज्य

ऐसा क्य होता है: हर म से कोई अभाज्य तभी कट सकता है जब अंश उसे उपलब्ध कराए। चूँ क p म 2 और 5 म
से कम से कम एक बलकुल नह है, उसक चौथी घात अछू ती बची रह जाती है। यह सांत-दशमलव नयम का ही
उल्टा पक्ष है — दशमलव ान क संख्या सरलतम हर म 2 और 5 क घात म से बड़ी होती है, और यहाँ वह बड़ी
घात 4 ही होनी चा हए।

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
वभाजन कए बना यह नधा रत क जए क 18/125 का दशमलव प्रसार सांत है या असांत। य द यह सांत है
e
प्र.11

m l as
.co
तो दशमलव स्थान क संख्या बताइए।

a g
se m
g l a
a

om
125 = 5³, और 18 = 2 × 3²
. c
emपहले से सरलतम रूप में है ag
a s
18 और 125 का साव गुणनखंड 1 है, अत: 18/125

हर में एकमात्र अभाज्य 5 है agl

co m
m.
हर का रूप 2⁰ × 5³ है, अत: दशमलव सांत होगा। ान क संख्या दोन घात म से बड़ी है —

m as e
.co a g l
se m
a
स्थान = max(0, 3) = 3

a g l
s
बना द घ वभाजन के पु ष्ट —
m a
m .co agl
l a se
18/125 = (18 × 2³)/(5³ × 2³) = 144/1000 = 0.144 — 3 स्थान ✓
a g
m
.coक 144 का अंत 0
ऐसा क्य होता है: 5³ को 10 क घात बनाने के लए छू टा हुआ 2³ जोड़ना ही पड़ेगा। इससे हर 10³ पर र हो
ान नह चा हए — और तीन से कम भी नह m
se
जाता है, अत: दशमलव को तीन से अ धक , क्य

co m l a
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से नह होता।
e m
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a
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ह गे? अपने उत्तर क व्याख्या क जए। com l a
प्र.12 अपने सरलतम रूप म एक प रमेय संख्या का हर 2³ × 5 है। इसके दशमलव प्रसार म कतने दशमलव स्थान

. a g
e m
g l as
उत्तर a
m
प्रसार 3 दशमलव स्थान पर समाप्त होगा।

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e m
m l as
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q = 2³ × 5¹, अत: m = 3 और n = 1

se m k = max(m, n) = 3
g l a
a c
अंश और हर को 5^(3−1) = 5² = 25 से गुणा कीिजए
m .
m a s e
. co agl
p/(2³ × 5) = 25p/(2³ × 5³) = 25p/1000
m
seपर समाप्त हो जाती है। उदाहरण के लए 3/40 —
l a
1000 से वभा जत पूण संख्या तीन
ag ान

co m
m .
m as e
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3/40 = (3 × 25)/1000 = 75/1000 = 0.075 — 3 स्थान ✓

ऐसा क्य होता है: हर को 10 क घात बनाने के लए दोन अभाज्य समान घात म आने चा हए, और वह घात दोन
म से कसी से कम नह हो सकती — अत: वह बड़ी घात, max(m, n), ही होगी। इससे अ धक कभी नह , क्य क
10 क अ त रक्त घात केवल शून्य जोड़ती ह। और इससे कम भी कभी नह , क्य क सरलतम रूप म अंश का हर के
साथ कोई साव गुणनखंड नह है, अत: कुछ भी कटकर प्रसार को छोटा नह कर सकता।

स्वयं जाँ चए: 1/40 = 0.025 और 7/40 = 0.175 — इस हर वाली प्रत्येक भन्न ठ क तीन ान लेती है।

प्र.13* मान ली जए a = 7/12 और b = 5/6 है। a और b दोन को k₁/m और k₂/m के रूप म व्यक्त क जए,
जहाँ k₁, k₂ और m पूणाक ह और k₂ − k₁ > 6 है। समान हर m का उपयोग करते हुए a और b के मध्य
स्थत ठ क पाँच भन्न प रमेय संख्याएँ ल खए, जनके अंश पूणाक ह । स्पष्ट क जए क इस व ध से दो
प रमेय संख्याओं a और b के मध्य स्थत ऐसी n प रमेय संख्याओं को ात करने के लए k₂ − k₁ > n + 1
प्र तबंध क्य आवश्यक है।

चरण 1 — पयाप्त बड़ा साव हर।

a = 7/12, b = 5/6 = 10/12

यहाँ k₂ − k₁ = 10 − 7 = 3, जो 6 से बड़ ा नही ं है

अत: हर बढ़ ाइए — अंश और हर को 3 से गुणा कीिजए

a = 21/36 और b = 30/36

अब m = 36, k₁ = 21, k₂ = 30 और k₂ − k₁ = 9 > 6 ✓

चरण 2 — उनके मध्य पाँच प रमेय संख्याएँ। 21 और 30 के मध्य के पूणाक ह 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29 — आठ
वकल्प। इनम से पाँच चु नए —

22/36 = 11/18, 23/36, 24/36 = 2/3, 25/36, 26/36 = 13/18

जाँच — 21/36 < 22/36 < 23/36 < 24/36 < 25/36 < 26/36 < 30/36 ✓
चरण 3 — यह प्र तबंध क्य आवश्यक है।

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इस िविध से बनने वाली संख्याएँ k/m है,ं जहाँ k₁ < k < k₂

ऐसे पूण क
ं k की संख्या = k₂ − k₁ − 1
n संख्याएँ पाने के िलए चािहए k₂ − k₁ − 1 ≥ n
अथ त k₂ − k₁ ≥ n + 1

पुस्तक का प्र तबंध k₂ − k₁ > n + 1 यही आवश्यकता कुछ अ त रक्त छू ट के साथ है — यह सु न त करता है क k₂ − k₁ − 1 >
n हो, अत: n से अ धक वकल्प उपलब्ध रह और चुनाव क स्वतंत्रता बनी रहे। n = 5 के लए यह k₂ − k₁ > 6 माँगता है, और
हमारा m = 36 उसे 9 दे कर सहज ही पूरा कर दे ता है।

ऐसा क्य होता है: हर के m पर र हो जाने पर a और b के मध्य उपलब्ध प रमेय संख्याएँ 1/m पग वाली एक
जाली पर बँध जाती ह। उस जाली पर और बदु पाने का एकमात्र उपाय सीमाओं के बीच क दूरी बढ़ाना है, और m
को t से गुणा करने पर a, b हले बना दूरी k₂ − k₁ भी t गुनी हो जाती है। अत: दो भन्न प रमेय संख्याओं के मध्य
कतनी भी प रमेय संख्याएँ रखी जा सकती ह — यही प रमेय संख्याओं क सघनता, इस बार ठ क-ठ क गनी हुई।

सुझाव: कड़ाई से दे ख तो k₂ − k₁ = n + 1 भी ठ क n संख्याएँ दे दे ता है, यद्य प तब कोई चुनाव शेष नह रहता।
पुस्तक क कड़ी अस मका न्यूनतम प्र तबंध न होकर एक सुर क्षत पयाप्त प्र तबंध है।

प्र.14* तीन प रमेय संख्याएँ x, y, z इस प्रकार ह क x + y + z = 0 और xy + yz + zx = 0 प्र तबंध संतुष्ट होते ह।
प्रद शत क जए क सभी प रमेय संख्याएँ x, y, z एक साथ आवश्यक रूप से शून्य ही ह गी।

पहले प्र तबंध का वग क जए और उसम दूसरा प्र तबंध र खए।

(x + y + z)² = x² + y² + z² + 2(xy + yz + zx)

x + y + z = 0 और xy + yz + zx = 0 पितस्थािपत कीिजए

0² = x² + y² + z² + 2 × 0

x² + y² + z² = 0

अब x², y², z² प रमेय संख्याओं के वग ह, अत: प्रत्येक ≥ 0 है। तीन ऋणेतर संख्याओं का योग 0 तभी होगा जब तीन म प्रत्येक 0
हो —

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यिद मान लीिजए x² > 0 हो तो x² + y² + z² ≥ x² > 0, जो िवरोधाभास है

अत: x² = 0, y² = 0, z² = 0

इसिलए x = y = z = 0 ∎

ऐसा क्य होता है: सवस मका (x + y + z)² = x² + y² + z² + 2(xy + yz + zx) दोन द हुई शत को वग के
एक योग वाले कथन म बदल दे ती है, और वास्त वक संख्याओं के वग कभी ऋणात्मक नह हो सकते — वही तथ्य
जो √(−1) वाले 'सो चए और वचार क जए' म प्रयुक्त हुआ था। यह कतना आवश्यक है, यह इससे स्पष्ट है क
काल्प नक संख्याओं म यह नष्कष टू ट जाता है — x = 1, y = ω, z = ω² (1 के स मश्र घनमूल) दोन शत संतुष्ट
करते ह, फर भी शून्य नह ह।

स्वयं जाँ चए: हाथ से कोई शून्येतर उदाहरण खोजने का प्रयास क जए। x = 1, y = −1 ली जए; तब पहली शत से
z = 0, परंतु xy + yz + zx = −1 ≠ 0। दूसरी शत सदै व रोक दे ती है।

प्र.15* प्रद शत क जए क प रमेय संख्या (a + b)/2, प रमेय संख्याओं a और b के मध्य स्थत है।

a ≠ b ली जए और ापकता क हा न के बना मान ली जए a < b (अन्यथा नाम बदल द जए)।

a से बड़ा —

(a + b)/2 − a = (a + b − 2a)/2 = (b − a)/2

चूँिक a < b, अत: b − a > 0, इसिलए (b − a)/2 > 0

अत: (a + b)/2 > a

b से छोटा —

b − (a + b)/2 = (2b − a − b)/2 = (b − a)/2

पुन : (b − a)/2 > 0

अत: (a + b)/2 < b

दोन मलाकर, a < (a + b)/2 < b। ∎
यह प रमेय संख्या भी है — a + b प रमेय है क्य क प रमेय संख्याएँ योग के अंतगत संवृत ह, और 2 ≠ 0 से वभाजन उसे प रमेय
ही रखता है।

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ऐसा क्य होता है: ऊपर नकाले गए दोन अंतराल बलकुल समान ह, दोन (b − a)/2। इसी लए माध्य केवल
कह बीच म नह , अ पतु ठ क मध्य बदु पर है — दोन सर से बराबर दूरी पर। ज्या मतीय रूप से यह संख्या रेखा
पर a और b को मलाने वाले खंड का मध्य बदु है।

सुझाव: इस कथन के लए a ≠ b आवश्यक है। य द a = b हो तो (a + b)/2 = a ही होगा और उनके मध्य कोई
संख्या ढूँ ढ़ने को शेष नह रहती।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 3 संख्याओं का संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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चत्र 3.14 ( जसे वगमूल स पल कहा जाता है) म प्रद शत सभी समकोण त्रभुज के कण क लंबाई ात
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प्र.16

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क जए।

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चत्र 3.14, पृष्ठ 66 — वगमूल स पल।

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चत्र 3.14 खंड 3.5.2 के नयम से बना है — प्रत्येक नया समकोण त्रभुज पछले कण को एक भुजा और 1 लंबाई के नए रेखाखंड

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को दूसरी भुजा बनाता है।
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पहला ित्रभुज — भुजाएँ 1 और 1 → h₁² = 1 + 1 = 2 → h₁ = √2

दू सरा ित्रभुज — भुजाएँ √2 और 1 → h₂² = 2 + 1 = 3 → h₂ = √3

तीसरा ित्रभुज — भुजाएँ √3 और 1 → h₃² = 3 + 1 = 4 → h₃ = 2
व्यापक रूप में hₙ = √(n + 1)

चत्र म दस समकोण त्रभुज मु द्रत ह, अत: उनके कण —

त्रभुज भुजाएँ कण² कण

1 1, 1 2 √2 ≈ 1.414

2 √2, 1 3 √3 ≈ 1.732

3 √3, 1 4 √4 = 2

4 2, 1 5 √5 ≈ 2.236

5 √5, 1 6 √6 ≈ 2.449

6 √6, 1 7 √7 ≈ 2.646

7 √7, 1 8 √8 = 2√2 ≈ 2.828

8 √8, 1 9 √9 = 3

9 3, 1 10 √10 ≈ 3.162

10 √10, 1 11 √11 ≈ 3.317

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2
√5 √3

√6
√2
√7
O 1

√8

3

√10
√11

प्रत्येक नीला रेखाखंड 1 लंबाई का है; O से नकलती प्रत्येक धूसर तीली पछले त्रभुज का कण है — √2, √3, 2, √5, … , √11।

अत: दस कण ह — √2, √3, 2, √5, √6, √7, 2√2, 3, √10 और √11।

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक चरण लंबाई के वग म ठ क 1 जोड़ता है, अत: वग क्रमश: 2, 3, 4, 5, … पूण संख्याओं
से होकर गुजरते ह। इनम से कुछ वग पूण ह — 4 और 9 — जो प रमेय लंबाइयाँ 2 और 3 दे ते ह; शेष सभी
अप रमेय लंबाइयाँ दे ते ह। इस प्रकार यह स पल इस तथ्य का चत्र है क संख्या रेखा पर प रमेय और अप रमेय बदु
साथ-साथ बैठे ह, और साथ ही यह दखाता है क केवल मापनी और परकार से प्रत्येक धनात्मक पूणाक n के लए
√n क रचना कैसे क जाए।

क्या आप जानते ह? प्रत्येक चरण पर घूणन arctan(1/√n) होता है, जो n बढ़ने पर घटता जाता है। दस त्रभुज
के बाद स पल लगभग 259° घूम चुका होता है, और एक पूरा चक्कर पूरा करने म सत्रह त्रभुज लगते ह।

अध्याय — एक नज़र म
प्राकृत संख्याओं का जन्म एकैक -संगतता से हुआ; ब्रह्मगुप्त (628 सामान्य संवत) ारा शून्य को संख्या मानने और ऋणभार
(ऋण) तथा धन-संप त्त (धन) के रूप म ऋणात्मक-धनात्मक संख्याएँ दे ने पर पूणाक (Z) प्राप्त हुए।

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प रमेय संख्या वह संख्या है जसे p/q के रूप म लखा जा सके, जहाँ p, q पूणाक ह और q ≠ 0। प रमेय संख्याएँ योग,
घटाव और गुणन के अंतगत संवृत ह तथा 0 से वभाजन को छोड़कर वभाजन के अंतगत भी।
प रमेय संख्याएँ सघन होती ह — कन्ह दो प रमेय संख्याओं a, b का माध्य (a + b)/2 सदै व एक प रमेय संख्या है जो उनके
ठ क मध्य म त होती है, अत: कन्ह दो बदुओं के मध्य अनंत प रमेय संख्याएँ ह।
√2 अप रमेय है। हप्पासस क वरोधाभास ारा उपप त्त म √2 = p/q (सरलतम रूप) मानने पर p और q दोन सम सद्ध
हो जाते ह, जो मान्यता का ही खंडन कर दे ता है।
सरलतम रूप क प रमेय संख्या p/q का दशमलव प्रसार ठ क तभी सांत होता है जब q म 2 और 5 के अ त रक्त कोई
अभाज्य गुणनखंड न हो; अन्यथा कोई शेषफल अवश्य दोहराता है और दशमलव आवत हो जाता है।
प रमेय और अप रमेय संख्याएँ मलकर वास्त वक संख्याएँ (R) बनाती ह। सांत और आवत दशमलव प रमेय होते ह; असांत-
अनावत दशमलव अप रमेय।

त्व रत पुनरावृ त्त

संकल्पना चह्न / रूप नयम या जाँ च अध्याय का उदाहरण

प्राकृत संख्याएँ N = {1, 2, 3, …} योग व गुणन म संवृत, घटाव म नह 3 − 5 प्राकृत संख्या नह है

पूणाक Z = {…, −1, 0, 1, …} धन और ऋण; (−) × (−) = (+) (−3) × (−4) = 12

प रमेय संख्या p/q, p, q पूण क
ं ,q≠0 q ≠ 0; p, q सह-अभाज्य ली जए 12/30 = 2/5

प रमेय संख्याओं क समतुल्यता a/b = c/d ठ क तभी जब ad = bc 2/3 = 4/6, क्य क 2·6 = 3·4

नरपेक्ष मान |x| 0 से दूरी; | a − b | = a और b क दूरी | −4 − 3 | = 7

सघनता (a + b)/2 सदै व प रमेय और a, b के मध्य 1 और 3/2 के मध्य 5/4

सांत दशमलव सरलतम रूप में p/q q = 2^m · 5^n ही हो 3/20 = 15/100 = 0.15

आवत दशमलव सरलतम रूप में p/q q म 2, 5 के अ त रक्त कोई अभाज्य 5/11 = 0.4545…, आवत

दशमलव ान क संख्या q = 2^m · 5^n m और n म से बड़ा 1/40 = 0.025, 3 ान

अप रमेय संख्या p/q के रूप में असंभव दशमलव न समाप्त, न आवत √2, √3, π

वरोधाभास ारा उपप त्त िवपरीत की कल्पना असंभव नष्कष तक पहुँचना √2 = p/q से p, q दोन सम

वास्त वक संख्याएँ R = पिरमेय ∪ अपिरमेय रेखा का प्रत्येक बदु संख्या रेखा म कोई रक्तता नह

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages53
Languagehindi
Updated19 Sep 2026