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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 9: दै नक जीवन म पृथक्करण
व धयाँ
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
157 – 175 15 49 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 39 pages
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
क ा 6 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: दै नक जीवन म पृथक्करण
व धयाँ
कक्षा 6 व ान (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ के सभी प्रश्न के वस्तृत एनसीईआरट समाधान —
क्रयाकलाप 9.1 से 9.6, सभी “?” वाले सोचने के बॉक्स, “करने के लए कुछ और”, बु द्धमान मछली खेल, आइए, और अ धक सीख के दस
प्रश्न तथा और भी सीख के सभी काय — प्रत्येक व ध, उसम प्रयुक्त गुण (आकार, भार, घनत्व या घुलनशीलता) और भारतीय दै नक जीवन के
उदाहरण के साथ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (क ा 6) 157 – 175
खं ड प्रश्न
15 49
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 157–158
अध्याय का आरंभ — मल्ली और वल्ली क ‘भारत क यात्रा’
प्र.1 क्या आप भी अपने प्रयजन के संपक म रहते ह?
हाँ। मल्ली और वल्ली का प रवार भारत भर म फैले अपने मत्र और रश्तेदार के संपक म रहता है, और हमम से अ धकांश लोग भी
ऐसा ही करते ह।
फोन और वी डयो कॉल से — र ववार को गाँव म नानी जी को फोन, वी डयो कॉल ता क दादा-दाद दे ख सक क आप कतने
बड़े हो गए।
मलने जाकर — गरमी क छु य म नाना-नानी के घर, द वाली, प गल, बहू या ईद पर घर जाना।
पत्र और संदेश से — पोस्टकाड, नववष का शुभकामना-पत्र, फोन पर संदेश।
मौसम क छोट सौगात से — आम, गुड़, घर का अचार या लड्डू, जो कसी के जाने पर भेज दए जाते ह।
पुस्तक यहाँ से क्य शुरू करती है: पूरा अध्याय एक यात्रा है। संपक बना रहने के कारण ही ब े ह रयाणा,
गुजरात, पुडुचेरी, मध्यप्रदे श और मेघालय जा पाते ह — और हर स्थान पर उन्ह पृथक्करण क एक नई व ध दै नक
जीवन म प्रयोग होती दखती है। व ान केवल प्रयोगशाला म नह , नानी जी के आँगन म भी है।
यह करके दे ख: अपनी कॉपी म भारत का मान चत्र बनाएँ और मल्ली-वल्ली के पाँच पड़ाव अं कत कर —
ह रयाणा, अहमदाबाद (गुजरात), पुडुचेरी, भोपाल (मध्यप्रदे श) और शलांग (मेघालय)। प्रत्येक के आगे वहाँ सीखी
गई पृथक्करण व ध लख।
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प्र.2 अपने ेत्र के लोकगीत खोज और अपने मत्र के साथ गाकर आनंद ल।
खेत म कसान पूल को पीटते हुए गाते ह — यह समय क बबाद नह है। काय-गीत सबको एक ही लय म रखता है, और लय म
कया गया काम तेज़ भी होता है और कम थकाता भी है।
यह क्रयाकलाप कैसे कर:
1. घर के कसी बड़े से — दाद जी, खेत म काम करने वाले, राज मस्त्री से — कोई काय-गीत पूछ।
2. उसके बोल कॉपी म लख और उनका अथ पता कर।
3. धुन सीख, फर कक्षा म समूह बनाकर ताली क थाप पर गाएँ।
फसल से जुड़े कुछ लोकगीत:
ेत्र लोक- वधा कब गाया जाता है
पंजाब और ह रयाणा बोिलयाँ, भंग ड़ा और िगद्धा के गीत गेहू ँ की कटाई, बैस ाखी पर
असम िबहू गीत धान की बुवाई और कटाई पर
महाराष्ट्र ओवी — चक्की पर गाए जाने वाले गीत भोर में अनाज पीसते समय
बहार और पूव उ.प्र. रोपनी और कटनी के गीत, सोहर धान की रोपाई और कटाई पर
त मलनाडु ना ु परु पाडलगल अनाज कू टते और थेिशंग करते समय
क्या आप जानते ह? इस अध्याय के आरंभ म दया कबीर का दोहा स्वयं ओसाई पर लखी लोक-वाणी है — सूप
सार को रख लेता है और थोथा उड़ा दे ता है, वैसे ही सज्जन गुण रखते और दोष त्यागते ह।
क्रयाकलाप 9.1: आइए, खोज — पृष्ठ 159
भुनी मूँगफली को रगड़ना और फूँक मारना
क्रयाकलाप
प्र.1 मु भर भुनी हुई मूँगफली के दाने ल और उन्ह अपनी हथे लय के बीच रगड़। क्या होता है?
मूँगफली के दान से पतले, कागज़ जैसे लाल-भूरे छलके उतर जाते ह। रगड़ने के बाद हथेली म दो चीज़ एक साथ पड़ी रहती ह:
मूँगफली के दाने — चकने, हल्के रंग के और अपेक्षाकृत भारी।
उतरे हुए छलके — पतले, कागज़ जैसे, लगभग भारहीन।
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ऐसा क्य होता है: भूनने से छलका सूख जाता है, सकुड़ता है और दाने पर उसक पकड़ ढ ली पड़ जाती है।
रगड़ने से वह अं तम पकड़ भी टू ट जाती है। बड़े पैमाने पर े शग भी यही करती है — पीटने से वह छू ट जाता है जो
केवल हल्के से जुड़ा है।
स्वयं जाँच: क ी मूँगफली को इसी तरह रगड़कर दे ख। छलका आसानी से नह उतरेगा, क्य क वह अभी नम है
और दाने से चपका हुआ है।
प्र.2 क्या मूँगफली के दान से छलके पृथक करना संभव है?
हाँ, और बहुत आसानी से — क्य क अब दोन अवयव केवल आपस म मले पड़े ह और एक-दूसरे से बहुत भन्न ह।
पृथक करने का तरीका कस गुण का उपयोग कतना उपयुक्त?
हस्त चयन आकार, रंग और आकृ ित का अंतर काम तो करे गा, पर बहत
ु धीमा — सै क ड़ों छोटे िछलके होते है ं
फूँक मारना / ओसाई भार का अंतर सव त्त म — एक ही फूँ क में सारे िछलके उड़ जाते है ं
छानना आकार का अंतर कमज़ोर — िछलका दाने िजतना चौड़ा हो सकता है
याद रखने योग्य बात: कसी मश्रण को प्राय: एक से अ धक व धय से पृथक कया जा सकता है। सव त्तम वही
व ध है जो उस गुण का उपयोग करे जसम दोन अवयव का अंतर सबसे अ धक हो। यहाँ वह गुण भार है, आकार
नह ।
प्र.3 अब इसम फूँक मार। आप क्या दे खते ह?
कागज़ जैसे छलके उड़ जाते ह और कुछ दूरी पर जाकर गरते ह। मूँगफली के दाने हथेली म ही रह जाते ह, वे मु श्कल से
हलते ह।
हल्का िछलका + बहती वायु → दू र तक उड़ जाता है
भारी दाना + बहती वायु → वही ं का वही ं रहता है
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ऐसा क्य होता है: वायु दोन को धकेलती है। परंतु छलके का भार बहुत कम और सतह चौड़ी होती है, इस लए
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वायु का धक्का उसे आसानी से उठाकर ले जाता है। दाना अपने आकार के अनुपात म कई गुना भारी
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धक्का उसे हलाने
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aसुgझl ाव: यह क्रयाकलाप फश पर अखबार बछाकर कर और धीरे-धीरे, समान ग त से फूँक मार। एक झटके क तेज़
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फूँक दान को भी बखेर दे गी — इसी लए कसान अचानक के झ के क जगह लगातार बहती पवन से काम लेता है।
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हटाए गए मूँगफली के छलके और मूँगफली के दान म से कौन-सा भाग उड़ जाता है?
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comगए छलके उड़ जाते ह। दाने नह उड़ते। g l as
मूँगफली के.हटाए a
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क्य : छलके मश्रण का हल्का अवयव ह। फूँक मारने से मश्रण सदै व दो भाग म बँटता है — भारी भाग पास ही
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गरता है और हल्का भाग दूर उड़ जाता है। यही एक अवलोकन ओसाई ( वनोइंग) का पूरा सद्धांत है, जसे अध्याय
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के अगले ही अनुच्छेद म कसान ेश कए गेहूँ पर लगाते
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क्या आप जानते ह? यही तरीका रसोई म भी काम आता है। भुने चने को रगड़ने के बाद खुली खड़क के पास
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थाली म उछालते ह — छलके उड़ जाते ह और चना रह जाता है।
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las प्रश्न — पृष्ठ 159
agभूसी से अनाज पृथक करना — सूप और पवन
पाठ्य
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aमs सोच सकते ह?
चने क दाल म मुरमुर क थोड़ी मात्रा मल गई है। क्या आप हस्त चयन के अलावा कसी अन्य व ध से इस
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प्र.1
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मश्रण को पृथक करने के वषय
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हाँ — यहाँ ओसाई (फूँक मारकर पृथक करना) सव त्तम व ध है।
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दोन अवयव क तुलना क जए:
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अवयव कैसा है
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मुरमुरे भीतर से हवा भरे , आकार के अनुपात में बहुत हल्के , ज़रा-सी हवा में उड़ जाते है ं
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चने क दाल कठोर, ठोस और तुल ना में भारी
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िमश्रण को सूप या चपटी थाली में ले।
ं
पंखे के सामने या हवा में धीरे-धीरे उछाले।
ं
मुरमुरे उड़ कर एक ओर िगर जाते है;ं चने की दाल सूप में वापस आ जाती है।
यहाँ हस्त चयन उपयुक्त क्य नह : हस्त चयन तभी सु वधाजनक है जब अनुपयोगी अवयव कम मात्रा म हो और
उसके टु कड़े उठाने योग्य बड़े ह । मुरमुरे बहुत सारे, हल्के होते ह और दबाने पर टू ट जाते ह — पूरी शाम लग जाएगी।
एक और संभव व ध: छानना — ऐसी चालनी ल जसके छद्र से चने क दाल नकल जाए पर बड़े मुरमुरे रुक
जाएँ। फर भी ओसाई अ धक तेज़ है।
प्र.2 आपके वचार म कसान इतनी सारी भूसी से अनाज कैसे अलग करते ह?
वे यह काम पवन से कराते ह — इस व ध को ओसाई ( वनोइंग) कहते ह।
1. ेश कए गए ढे र (अनाज और भूसी एक साथ) को सूप म भरा जाता है, जो बाँस से बना उथला पात्र होता है।
2. कसान ऊँचे चबूतरे पर खड़ा होता है ता क गरती सामग्री को बहती वायु म अ धक दूरी तय करनी पड़े।
3. वह सामग्री को वायु क दशा म बार-बार ऊपर उछालता है।
4. भारी दाने लगभग सीधे नीचे गरकर एक ढे री बना लेते ह। हल्क भूसी बगल म उड़ जाती है और दूर जाकर बैठती है।
ऊँचा चबूतरा क्य आवश्यक है: सामग्री जतनी दे र हवा म रहेगी, पवन को भूसी को बगल म धकेलने का उतना ही
अ धक समय मलेगा। कम ऊँचाई से गराने पर दोन लगभग एक साथ गरगे और पृथक्करण अच्छा नह होगा।
क्या आप जानते ह? आधु नक ेशर मशीन े शग और ओसाई दोन एक साथ करती है — वह पूल को पीटती है
और गरते दान के बीच से तेज़ हवा का झ का नकालती है।
प्र.3 चत्र 9.4 से आप क्या नष्कष नकालते ह? क्या गे ँ के दाने और भूसी, दोन अवयव एक ही स्थान पर गरते ह?
गे ँ के दाने और भूसी म से कौन-सा अवयव उड़कर दूर चला जाता है? क्या पवन दो अवयव को पृथक कर
सकती है?
नह , दोन एक ही स्थान पर नह गरते। भूसी उड़कर दूर चली जाती है; दाने कसान के पैर के पास ही गरते ह। हाँ, पवन दोन
अवयव को पृथक कर सकती है — चत्र यही दशाता है।
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वायु की िदशा
सूप (बाँस का पात्र)
ऊँचा चबूतरा
अनाज (भारी) पास ही िगरता है भूसी (हल्की) दूर उड़ जाती है
ओसाई — एक ही पवन दोन अवयव पर लगती है, पर वह केवल हल्क भूसी को हटा पाती है। भारी दाने लगभग सीधे गरकर अलग ढे री
बना लेते ह।
दोन अलग-अलग स्थान पर क्य गरते ह: पवन सूप से गरने वाली हर चीज़ को एक ही बगल का धक्का दे ती है।
भूसी का हल्का टु कड़ा उस धक्के से आसानी से खसक जाता है और दूर जाकर गरता है। भारी दाना उसे लगभग
अनुभव ही नह करता और सीधा नीचे आ जाता है। इस लए दो ढे रयाँ बनती ह — चबूतरे के पास अनाज, दूर भूसी।
सुझाव: इसी लए बंद कमरे म ओसाई नह होती। जहाँ वायु बह ही नह रही, वहाँ बगल का धक्का लगता ही नह
और दोन अवयव एक ही स्थान पर गरते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 160
बंद कमरे म ओसाई, और आटे का चालन
प्र.1 वल्ली बंद कमरे म चावल से भूसी अलग नह कर पा रही है। आप उसक सहायता कैसे कर सकते ह?
ओसाई के लए बहती वायु चा हए। बंद कमरे म वायु बहती ही नह , इस लए कुछ उड़ता नह । वल्ली को इनम से कोई उपाय
बताइए:
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पंखा चलाइए — टे बल फैन या धीमी ग त पर छत का पंखा — और मश्रण को उसके सामने धीरे-धीरे गराइए। भूसी बगल म
उड़ जाएगी।
स्वयं फूँक मा रए, ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 9.1 म मूँगफली के छलक पर, थोड़ा-थोड़ा मश्रण थाली म लेकर।
खड़क या दरवाज़ा खोल द जए और हवा के झ के म खड़े होइए, या आँगन म चली जाइए जहाँ हवा बह रही हो।
छान ली जए, य द भूसी के टु कड़े चावल के दान से काफ बड़े ह — यह भार के स्थान पर आकार का उपयोग करता है और
इसम वायु क आवश्यकता ही नह ।
पंखा क्य काम करता है: ओसाई के लए वास्तव म पवन नह , ब ल्क गरते मश्रण के पास से गुजरती वायु
चा हए। पंखा ठ क यही करता है। हल्क भूसी बगल म धकेल द जाती है और भारी चावल सूप म गर जाता है।
स्वयं जाँच: थाली म थोड़ा पोहा और कुछ चावल के दाने लेकर टे बल फैन के सामने र खए। दे खए पोहा कतनी
अ धक दूर जाता है। वही हवा, भन्न भार — इसी लए गरने का स्थान भी भन्न।
प्र.2 ध्यान से चालनी का अवलोकन कर। क्या चालनी के सभी छद्र एक ही आकार के ह? य द चालनी म छद्र पदाथ
से बड़े ह तो क्या छानना प्र क्रया काम करेगी? चालनी से गुजरने वाले कण और चालनी पर शेष रहने वाले कण
के आकार म क्या अंतर होता है?
तीन प्रश्न के उत्तर क्रम से:
1. क्या सभी छद्र एक ही आकार के ह? — हाँ। एक चालनी के सभी छद्र एक ही आकार के और समान दूरी पर होते ह। इसी
से चालनी “आकार क सही परीक्षा” बन पाती है — कोई कण या तो हर छद्र से नकल जाएगा या कसी से नह ।
2. य द छद्र पदाथ से बड़े ह तो? — नह , तब छानना काम नह करेगा। य द दोन अवयव छद्र से छोटे ह तो सब कुछ नीचे
गर जाएगा और कुछ भी पृथक नह होगा। छद्र का आकार दोन अवयव के आकार के बीच होना चा हए।
3. नकलने वाले और रुकने वाले कण म अंतर? — हाँ, और यही पूरी बात है। जो नीचे आता है वह छद्र से छोटा है; जो
ऊपर रह जाता है वह छद्र से बड़ा है।
आटे के बारीक कण < िछद का आकार → नीचे िनकल जाते है ं (यही आटा हम उपयोग करते है)ं
चोकर और छोटे कं कड़ > िछद का आकार → चालनी पर रह जाते है ं
सही चालनी चुनना क्य ज़रूरी है: चालनी यह नह पूछती क कोई वस्तु कस चीज़ क बनी है, केवल यह दे खती
है क वह कतनी बड़ी है। इस लए पूरा काम ऐसी चालनी चुनने का है जसके छद्र उस अवयव से बड़े ह जसे आप
नीचे चाहते ह और उस अवयव से छोटे ह जसे रोकना है। चाय क चालनी से आटा नह छनता और आटे क चालनी
से चाय नह ।
ध्यान द: छानना केवल ठोस–ठोस मश्रण के लए है, जसके कण के आकार भन्न ह । यह न तो एक ही आकार के
दो ठोस अलग कर सकता है और न ही कसी घुले हुए ठोस को।
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प्र.3 क्या आपने कभी नमाण स्थल पर रेत से कंकड़ और पत्थर अलग करने के लए चालनी का उपयोग होते दे खा
है?
हाँ। कसी भी नमाण स्थल पर द वार से टक हुई एक बड़ी तरछ जालीदार चालनी दखाई दे ती है। मज़दूर उस पर फावड़े से रेत
फकता है।
क्या होता है क्य
बारीक रेत जाली से नकलकर पीछे ढे र बना लेती है रे त के कण जाली के िछद ों से छोटे है ं
कंकड़, पत्थर और ढे ले जाली पर फसलकर सामने इक े हो जाते ह वे िछद ों से बड़े है,ं इसिलए िनकल नही ं पाते
राज मस्त्री ऐसा क्य करते ह: प्लास्टर और मसाला चकना होना चा हए। एक भी कंकड़ द वार पर उभार या ग ा
छोड़ दे ता है। छनी हुई साफ़ रेत प्लास्टर म जाती है; कंकड़ फके नह जाते — वे कंक्र ट म काम आते ह, जहाँ बड़े
टु कड़े ही चा हए।
चार ओर दे खए: यही वचार आटे क चालनी, सब्ज़ी धोने क छद्रदार टोकरी, चाय क चालनी और गरम तेल से
पकौड़े नकालने के झारे म भी काम करता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 161
साबरमती आश्रम, और साधारण नमक कहाँ से आता है
करने के लए कु छ और
प्र.1 साबरमती आश्रम कस लए प्र सद्ध है? दांडी यात्रा का एक पोस्टर बनाएँ और चचा कर क इस यात्रा का
आयोजन क्य कया गया था।
अहमदाबाद म साबरमती नद के कनारे स्थत साबरमती आश्रम महात्मा गांधी का 1917 से 1930 तक का नवास था। यह
उस स्थान के रूप म प्र सद्ध है जहाँ से उन्ह ने स्वतंत्रता संग्राम का बड़ा भाग संचा लत कया और जहाँ से दांडी यात्रा आरंभ हुई।
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तथ्य ववरण
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आरंभ
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12 माच 1930, साबरमती आ श्रम से
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समापन
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ु रात के समुद तट पर िस्थत दांडी में
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पैदल दूरी लगभग 385 िकमी, 24 िदनों में
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आरंभ म गाध
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ं ी जी और 78 सहयोगी; माग में हज़ारों लोग जुड़ते गए ag
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दांडी म क्या कया
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तट से पाकृ ितक नमक की एक डली उठाकर नमक कानून तोड़ा
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यह यात्रा क्य आयो जत क गई: टश सरकार ने भारतीय के लए स्वयं नमक बनाना या इक ा करना अवैध कर दया था और
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खरीदे जाने वाले नमक पर कर लगा दया था। नमक हर घर क — अमीर और गरीब दोन क — आवश्यकता है, इस लए यह कर
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.c के वरुद्ध प्रतीक बन गई। नमक कानून तोड़ना अ हसक स वनय अव ा aथा,g और इसी ने स्वतंत्रता आंदोलन को
सबसे अ धक गरीब पर भारी पड़ता था। गांधी जी ने जान-बूझकर नमक चुना — इससे एक साधारण, रोज़मरा क आवश्यकता
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सlaाsजन-आंदोलन बनाया।
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m दखे; नीचे समुद्र और नमक के खेत; और शब्द — a s
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नमूना उत्तर — पोस्टर म क्या बनाएँ: आगे लाठ लए चलते गांधी जी और उनके पीछे या त्रय क लंबी कतार;
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e।mएक कोने म नमक क ढे री बनाकर लख “नमक भारत क जनता
गुजरात का मान चत्र जस पर साबरमती → दांडी का
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“नमक सत्याग्रह, 12 माच – 6 अप्रैल 1930”
का है।”
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इस अध्याय से संबंध: दांडी म गांधी जी ने जो नमक उठाया, वह प्रकृ त ने इसी अध्याय कmएक व ध से बनाया था
— समुoद्रmजल का वाष्पीकरण। l a se
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नमक कहाँ से प्राप्त होता है?
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समुद्र-जल से — और खारी झील तथा सधा नमक क खान से भी।
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समुद्र जल एक मश्रण है: उसम कई लवण और अन्य पदाथ जल म घुले रहते ह। नमक इस प्रकार पृथक कया जाता है:
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द ी जल को तट के पास चौड़ े, उथले ग ों में भरा जाता है। a
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ag धूप और वायु से जल वािष्पत होता है।
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कु छ िदनों में जल समाप्त हो जाता है और ग े में लवणों का ठोस िमश्र ण बचता है।
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इसका आगे शोधन कर साधारण नमक पाप्त िकया जाता है।
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ग े उथले और चौड़े क्य होते ह: वाष्पीकरण सतह से होता है। चौड़ा और उथला ग ा बड़ी सतह और जल क
पतली परत दे ता है, इस लए सूय उसे शीघ्र गरम कर दे ता है और वह महीन के बजाय दन म सूख जाता है।
क्या आप जानते ह? भारत वश्व के सबसे बड़े नमक उत्पादक म है। गुजरात के खारागोड़ा और कच्छ के छोटे
रण, त मलनाडु के तूतीको रन और मुंबई के तट से बहुत बड़ी मात्रा म नमक मलता है। इसे बनाने वाले मज़दूर
अग रया कहलाते ह।
प्र.3 भारत म उन जलाशय के वषय म पता लगाएँ जनम साधारण नमक पाया जाता है। इसका एक ोत राजस्थान
म सांभर झील है।
समुद्र के अ त रक्त भारत क कई भीतरी झील खारी ह। इनम जल आता तो है, पर बाहर नकलने के लए कोई नद नह होती —
इस लए जल केवल वाष्प बनकर जा सकता है और साथ लाया लवण वह जमा होता रहता है।
जलाशय राज्य वशेष
सांभर झील राजस्थान भारत की सबसे बड़ी भीतरी खारी झील ; सिदयों से यहाँ नमक बनता है
पचपदरा और डीडवाना झील राजस्थान थार ेत्र की पुर ानी नमक उत्पादक झीले ं
लोनार झील महाराष्ट्र उल्कािपंड के िगरने से बनी खारी े टर झील
पग ग त्सो और त्सो मोरीरी ल ाख अिधक ऊँचाई पर िस्थत खारे जल की झीले ं
चल्का झील ओ डशा बंग ाल की खाड़ी से जुड़ी खारे -मीठे जल की झील
कच्छ का रण गुजरात िवशाल नमकीन दलदल , जो सूखकर सफे द नमक का म रुस्थल बन जाता है
झील खारी क्य हो जाती है: च ान और म पर बहता वषा-जल थोड़े-थोड़े लवण घोलकर झील म ले आता है।
झील से जल वाष्प बनकर उड़ जाता है, पर लवण वाष्प नह बन सकता — इस लए हर सूखे मौसम के बाद झील
थोड़ी और खारी हो जाती है।
यह करके दे ख: भारत के रेखा-मान चत्र पर ये स्थान अं कत क जए। आप दे खगे क इनम से अ धकतर शुष्क क्षेत्र
म ह, जहाँ वाष्पीकरण तेज़ और वषा कम होती है।
क्रयाकलाप 9.2: आइए, अवलोकन कर और रचनात्मक बन — पृष्ठ 161–162
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काले कागज़ पर नमक के वलयन क बूँद
क्रयाकलाप
प्र.1 क्या आपको कागज पर कुछ धब्बे दखाई दे ते ह? आपको क्या लगता है क कागज पर क्या बचा है? कागज
छू कर आप नमक क उप स्थ त महसूस कर सकते ह। पानी कहाँ लुप्त हो गया?
हाँ — बूँद सूखने के बाद काले कागज़ पर ठ क उन्ह स्थान पर हल्के सफेद धब्बे दखाई दे ते ह। वहाँ जो बचा है वह नमक है।
उँ गली फेरने पर वह थोड़ा खुरदरा-सा लगता है।
पानी कहाँ गया: वह लुप्त नह हुआ। वह वा ष्पत हो गया — धीरे-धीरे जलवाष्प म बदलकर कमरे क वायु म मल गया।
कागज़ पर नमक का िवलयन
→ जल जलवाष्प बनकर वायु में चला जाता है (वाष्पीकरण)
→ नमक सफेद धब्बे के रूप में पीछे रह जाता है
केवल जल ही क्य जाता है: जल साधारण ताप पर भी आसानी से वाष्प बन जाता है। नमक नह बनता — वह
ठोस ही रहता है। इस लए मश्रण के सूखने पर द्रव चला जाता है और घुला ठोस रह जाता है। समुद्र के नमक-
खेत म ठ क यही होता है, बस वहाँ “कागज़” एक वशाल उथला ग ा है और “सुखाने” का काम सूय करता है।
यह करके दे ख: अपनी नमक-कलाकृ त बनाइए। मोटे काले कागज़ पर नमक के वलयन से कोई आकृ त बनाकर
धूप म सुखाइए। सूखने पर रेखाएँ सफेद उभर आएँगी — नमक ने आपका चत्र बना दया।
प्र.2 क्या आपने कभी ग मय के समय अपने पहने हुए गहरे रंग के कपड़ पर सफेद धब्बे दे ख ह? ये धब्बे कैसे बनते
ह?
हाँ — गहरे रंग क कमीज़ पर बगल म, कॉलर पर और पीठ पर दखने वाले वे सफेद घेरे हमारे अपने पसीने के नमक से बनते ह।
पसीना = जल + उसमें घुला साधारण नमक और अन्य पदाथ
गम में कपड़ े से जल वािष्पत हो जाता है
नमक वािष्पत नही ं हो सकता, इसिलए कपड़ े में ही रह जाता है → सफेद धब्बा
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ग मय म और गहरे कपड़ पर ही क्य दखते ह: गम म पसीना कह अ धक आता है, इस लए नमक अ धक
जमा होता है। और गहरे रंग पर सफेद नमक सहज ही दख जाता है — सफेद कमीज़ पर वही धब्बा लगभग अदृश्य
रहता है।
क्या आप जानते ह? इसी लए गम म चुटक भर नमक डालकर न बू-पानी या ओ.आर.एस. पीने को कहा जाता है।
पसीने से शरीर से जल और नमक दोन नकलते ह, और दोन क पू त आवश्यक है।
क्रयाकलाप 9.3: आइए, जाँच कर — पृष्ठ 162–163
चीनी म क डश म नमक के वलयन को गरम करना
क्रयाकलाप
प्र.1 आप क्या दे खते ह? चीनी म क डश म क्या शेष है? क्या आपको नमक पुन: प्राप्त हुआ?
गरम करने पर वलयन पहले उबलने लगता है। डश से भाप उठती है और द्रव का स्तर घटता जाता है। जब सारा जल उबलकर उड़
जाता है, तो चीनी म क डश म सूखे सफेद नमक क परत चपक रह जाती है।
हाँ, नमक पुन: प्राप्त हो जाता है — डश ठं डी होने पर आप उसे उँ ग लय से छू कर महसूस कर सकते ह।
नमक का िवलयन गरम िकया
→ जल वाष्प बनकर उड़ गया
→ चीनी िम ी की िडश में सफेद ठोस नमक शेष
यहाँ नस्यंदन क्य काम नह करता: वलयन म नमक इतने सूक्ष्म रूप म बँट जाता है क वह जल के साथ छोटे -
से-छोटे छद्र से भी नकल जाता है — न वह दखता है, न छाना जा सकता है। कसी घुले हुए ठोस को पृथक करने
का एक ही उपाय है — द्रव को वाष्प बनाकर उड़ा दे ना, अथात् वाष्पीकरण।
सावधान: गरम चीनी म क डश पर कभी झुक नह और गरम करने के तुरंत बाद उसे छु एँ नह । यह क्रयाकलाप
शक्षक ारा प्रद शत कराएँ और डश ठं डी होने पर ही नमक छु एँ।
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प्र.2 क्या कोई ऐसी व ध है जससे म नमक और जल दोन प्राप्त कर सकता ँ? चत्र का अवलोकन कर। क्या यह
प्रश्न का उत्तर दे ता है? क्या आप इसम न हत प्र क्रया का नाम बता सकते ह?
हाँ। क्रयाकलाप 9.3 म नमक तो बच गया, पर जल वायु म उड़ गया। दोन पाने के लए वाष्प को पकड़कर ठं डा करना होगा,
जससे वह पुन: द्रव बन जाए।
चत्र यही दखाता है — केतली से उठती भाप ऊपर रखी ठं डी प्लेट से टकराती है और प्लेट से स्वच्छ जल क बूँद गलास म टपकती
ह।
नमक के िवलयन को गरम करे ं → जल वाष्प बनता है ……… वाष्पीकरण
वाष्प को ठं डी सतह पर ठं डा करे ं → वाष्प द व बनती है ……… संघनन
पिरणाम: िगलास में शुद्ध जल + पात्र में शेष नमक
प्र क्रया का नाम: दोन चरण मलकर वाष्पीकरण के बाद संघनन कहलाते ह। प्रयोगशाला म उपकरण स हत करने पर इसे
आसवन ( ड स्टलेशन) कहते ह।
बूँद शुद्ध जल क्य होती ह: केवल जल वाष्प बनता है। नमक गरम पात्र म ही रह जाता है। इस लए ठं डी प्लेट पर
जो संघ नत होता है, वह बना नमक का जल है — आसुत जल इसी प्रकार बनाया जाता है।
स्वयं जाँच: उबलते पानी क भाप के थोड़ा ऊपर कुछ क्षण के लए ठं डी स्ट ल क प्लेट पक ड़ए। उसक नचली
सतह पर जल क बूँद बन जाएँगी। यही संघनन है — वाष्पीकरण का उल्टा — और वषा भी इसी प्रकार बनती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 163–164
दादा जी चाय बनाते ह — अवसादन, नस्तारण और नस्यंदन
प्र.1 चाय बनाने के बाद आप चाय क प त्तय को कैसे पृथक करते ह?
दो तरीके ह, और अध्याय दोन दखाता है।
1. चालनी से — नस्यंदन। चाय को चाय क चालनी से छान ली जए। सारी प त्तयाँ जाली म रुक जाती ह और स्वच्छ चाय कप म
आ जाती है।
2. बना चालनी के — अवसादन के बाद नस्तारण। बतन को कुछ दे र स्थर छोड़ द जए ता क प त्तयाँ तली म बैठ जाएँ, फर
बतन को धीरे से तरछा कर चाय कप म उड़ेल द जए, अवसाद के कनारे तक पहुँचने से पहले रुक जाइए।
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अवसादन स्तारण
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ऊपर स्वच्छ दव
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तली मे ं बैठी पित्तयाँ
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अवसाद नीचे रह जाता है
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स्वच्छ चाय
emअघुलनशील कण तली मे ं बैठ जाते है।ं a
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भारी ऊपर का स्वच्छ दव धीरे से उड़ ेल िदया जाता है।
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अवसादन और नस्तारण एक ही काम के दो चरण ह — पहले भारी प त्तय को तली म बैठने द जए, फर स्वच्छ चाय को उनसे अलग
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उड़ेल ली जए।
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कौन-सी व ध बेहतर: नस्यंदन, क्य क यह हर पत्ती हटा दे ता है। नस्तारण तेज़ है और उसम कोई उपकरण नह
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चा हए, पर कुछ बारीक प त्तयाँ द्रव के साथ आ ही जाती ह — इसी लए दादा जी के मुँह म फर भी कुछ प त्तयाँ आ
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जाती ह।
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a s eसुmझाव: नस्तारण तभी काम करता है जब ठोस द्रव से भारी और उसम अघुलनशील हो, ता क वह तली म बैठ सके।
a gl चाय म घुली चीनी का नस्तारण कभी नह कया जा सकता।
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प्र.2 ‘हमारे आस-पास क सामग्री’ अध्याय म आपने पढ़ा क तेल जल म म श्रत नह होता है और कुछ समय तक
बना हलाए रखने पर एक अलग परत बना लेता है। तेल और जल को पृथक करने के लए आप कस व ध का
उपयोग करगे?
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com(डीकटेशन)। l
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नस्तारण
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agl 1. मश्रण को तब तक स्थर छोड़ द जए जब तक दो स्पष्ट परत न बन जाएँ — ऊपर तेल, नीचे जल।
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2. पात्र को धीरे-धीरे तरछा करके ऊपर क तेल क परत दूसरे पात्र म उड़ेल द जए; अथवा नीचे ट ट वाले पात्र (पृथक्कारी क प)
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से पहले नीचे का जल नकाल ली जए।
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यह क्य काम करता है: तेल और जल अ मश्रणीय ह — वे आपस म घुलते नह । और तेल जल से हल्का (कम
घनत्व वाला) है, इस लए वह सदै व ऊपर तैरता है। दोन परत के बीच स्पष्ट सीमा होने के कारण ऊपर क परत को
नीचे वाली से अलग उड़ेला जा सकता है।
नस्यंदन क्य नह ? नस्यंदक कसी ठोस को द्रव से अलग करता है। तेल द्रव है — वह जल के साथ ही फल्टर-पत्र
से नकल जाएगा। इसी कारण दूध क मलाई भी ऊपर से उतार ली जाती है, क्य क वह हल्क होती है।
प्र.3 बालन मल्ली से पूछता है क क्या वह मटमैले जल के नस्यंदन के लए चाय क चालनी का उपयोग कर सकता है।
आओ, क्य न हम स्वयं करके इसका पता लगाएँ।
ठ क से नह । चाय क चालनी केवल बड़े टु कड़े — पत्ते, तनके, कंकड़ — रोक पाती है। नीचे आया जल फर भी भूरा और
मटमैला ही रहता है।
प्रयुक्त नस्यंदक छद्र का आकार मटमैले जल पर प रणाम
चाय क चालनी काफी बड़े िछद बड़े टुक ड़े हट जाते है;ं जल िफर भी मटमैल ा
मलमल का कपड़ा (कुछ परत) धागों के बीच छोटे रंध काफी स्वच्छ, पर हल्की ध ँधु लाहट बची रहती है
फल्टर-पत्र अत्यंत सूक्ष्म िछद िम ी अवशेष के रूप में रुक जाती है; स्वच्छ िनस्यंद िमलता है
क्य : कोई नस्यंदक केवल उन्ह कण को रोकता है जो उसके छद्र से बड़े ह । म के कण अत्यंत सूक्ष्म होते ह,
इस लए वे चाय क चालनी के बड़े छद्र से सीधे नकल जाते ह। उन्ह रोकने के लए छद्र कण से भी बारीक होने
चा हए।
महत्वपूण: फल्टर-पत्र से छना तालाब का जल भी पीने योग्य नह होता। वह केवल दखने वाली अशु द्धयाँ हटाता
है, रोगाणु नह । जल को बाद म उबालना भी आवश्यक है — अभ्यास के प्रश्न 10 म लीला यही करती है।
प्र.4 हम कपड़े का टु कड़ा क्य उपयोग करना चा हए?
क्य क बुना हुआ कपड़ा स्वयं एक बना-बनाया नस्यंदक है। कपड़े के टु कड़े क बुनाई म धाग के बीच बहुत छोटे छद्र या रंध्र होते
ह, और यही रंध्र छानने का काम करते ह।
ये रंध्र चाय क चालनी के छद्र से कह अ धक बारीक होते ह, इस लए कह अ धक म रुक जाती है।
कपड़ा सस्ता है, हर घर म मलता है और धोकर बार-बार उपयोग कया जा सकता है।
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मोड़ने पर कई परत बन जाती ह, जससे रास्ता और सँकरा हो जाता है और अ धक कण फँसते ह।
एक प्राचीन भारतीय पद्ध त: लोग स दय से पीने का जल कपड़े से छानते आए ह — अध्याय स्वयं यह कहता है।
आज भी अनेक गाँव म मटके के मुँह पर बँधा सूती या मलमल का कपड़ा जल छानता है।
क्या आप जानते ह? यही वचार मलमल के ट -बैग, दही के लए प्रयुक्त छन्नी और को वड-19 म पहने गए कपड़े
के मास्क म भी काम करता है — ये सब धाग के बीच के रंध्र के कारण ही काम करते ह।
प्र.5 स्वच्छ जल पाने के लए मुझे कपड़े क कतनी परत का उपयोग करना होगा?
कोई एक न त संख्या नह है — यह इस पर नभर करता है क जल कतना मटमैला है और कपड़ा कतना बारीक। व्यवहार म
साफ़ सूती या मलमल के कपड़े क तीन-चार परत एक परत से कह बेहतर जल दे ती ह।
1 परत → कु छ िम ी िनकल जाती है, जल अब भी भूरा-सा
2–3 परते ं → स्पष्ट रूप से अिधक स्वच्छ
4 परते ं → और भी स्वच्छ, पर जल अब बहुत धीरे टपकता है
अ धक परत क्य सहायक ह: हर परत के अपने रंध्र होते ह, और एक परत के रंध्र दूसरी परत के रंध्र के ठ क ऊपर
नह आते। इस लए जो कण पहली परत से नकल जाता है, वह दूसरी या तीसरी परत म रुक जाता है। अथात्
अ धक परत = अ धक बारीक छनाई।
एक सीमा भी है: एक सीमा के बाद अ त रक्त परत जल को केवल धीमा कर दे ती ह, अ धक स्वच्छ नह करत ।
य द जल फर भी साफ़ न हो तो और कपड़ा मत जो ड़ए — पहले म को बैठने द जए (अवसादन) और फर
छा नए, या फल्टर-पत्र जैसा बारीक नस्यंदक ली जए।
क्रयाकलाप 9.4: आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 165
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फल्टर-पत्र से मटमैले जल का नस्यंदन
क्रयाकलाप
प्र.1 चत्र 9.10 म दखाए अनुसार आप स्वयं फल्टर-पत्र को मोड़कर उसका एक शंकु (कोन) बनाने का प्रयास कर।
मोड़ने के चार चरण, ठ क चत्र 9.10 के अनुसार:
1. गोल फल्टर-पत्र को समतल र खए।
2. एक तह (फोल्ड) — उसे ठ क बीच से मो ड़ए। अब अधवृत्त बन गया।
3. दो तह (फोल्ड) — अधवृत्त को फर आधा मो ड़ए। अब चौथाई वृत्त बन गया।
4. शंकु (कोन) — चौथाई को इस प्रकार खो लए क एक ओर तीन परत और दूसरी ओर एक परत रहे। यह शंकु बन जाता है,
जो क प के भीतर ठ क बैठता है।
चपट चकती नह , शंकु ही क्य : शंकु क प के आकार से मेल खाता है, इस लए कागज़ चार ओर काँच से चपक
जाता है और कनारे पर कोई खाली जगह नह बचती। य द खाली जगह रह जाए तो मटमैला जल फल्टर-पत्र के
भीतर से जाने के बजाय उसके बगल से बह जाएगा और कुछ भी नह छनेगा।
सुझाव: जल डालने से पहले मुड़े हुए शंकु को थोड़े स्वच्छ जल से गीला कर ली जए। गीला कागज़ क प से चपक
जाता है और उड़ेलते समय अपनी जगह पर टका रहता है।
प्र.2 आपने क्या अवलोकन कया? क्या म के कण फल्टर-पत्र से छन कर जाते ह?
नह , म के कण छनकर नह जाते। वे फल्टर-पत्र पर ही रुक जाते ह। क प से टपककर शंक्वाकार फ्लास्क म जो जल आता है
वह स्वच्छ होता है।
िफल्टर-पत्र पर → िम ी …………… यही अवशेष है
शंक्वाकार फ्लास्क में → स्वच्छ जल … यही िन स्यंद है
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स्टै ंड
िफल्टर-पत्र
मटमैला जल
अवशेष (िम ी)
पत्र पर रह जाती है
कीप (फनल)
शंक्वाकार फ्लास्क
िनस्यंद
(एकित्रत स्वच्छ जल)
नस्यंदन — फल्टर-पत्र अत्यंत सूक्ष्म छद्र वाली चालनी क तरह काम करता है। जल नकल जाता है; म के बड़े कण नह नकल पाते
और अवशेष के रूप म पत्र पर रह जाते ह।
यह क्य काम करता है: फल्टर-पत्र म अत्यंत सूक्ष्म छद्र होते ह। छद्र से छोट हर चीज़ नकल जाती है; बड़ी हर
चीज़ रुक जाती है। म के कण आँख से न दखने पर भी इन छद्र से कह बड़े होते ह — इस लए वे फँस जाते ह
और जल नकल जाता है।
क्या आप जानते ह? फल्टर-पत्र के अ त रक्त कपास, चारकोल और रेत भी नस्यंदक के रूप म काम आते ह।
कौन-सा चुन, यह हटाए जाने वाले कण के आकार पर नभर करता है। चारकोल दुगध और रंग भी हटा दे ता है।
क्रयाकलाप 9.5: आइए, योजना बनाएँ और नमाण कर — पृष्ठ 166
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ
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कम लागत का जल- नस्यंदक बनाना
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क्रयाकलाप
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a s emअपनी दाद जी के साथ प्रकृ त क सैर पर जाती है और एक तालाब से थोड़ा जल एक पात्र म एक त्रत
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करती है। उसे जल म कुछ अवां छत पदाथ दखाई दे ते ह। कम लागत क साम ग्रय का उपयोग करके जल के
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नस्यंदन के लए एक कायकारी मॉडल क योजना बनाएँ और इसका नमाण कर।
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agनस्यंदक। यह डज़ाइन कक्षा म बनाई जा सकती है; परीक्षण के बाद अपने
नमूना उत्तर — बोतल से बना तीन-परत वाला
अवलोकन स्वयं ल खए।
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आवश्यक सामग्री: 2 लीटर क खाली प्ला स्टक बोतल, साफ़ सूती कपड़ा या पुरानी रुई, धुली मोट रेत, धुली बारीक रेत, छोटे
कंकड़ या रोड़ी, चूल्हे के बुझे कोयले का चूण (चारकोल), रबर बड और जल एक त्रत करने के लए एक eगलास।
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कैसे बनाएँ:.co a gl
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1. बोतल क तली काट द जए और उसे उल्टा कर द जए, ता क ढक्कन वाला सरा गलास क ओर रहे। ढक्कन हटा द जए।
2. मुँह पर सूती कपड़ा रबर बड से बाँध द जए। यही सबसे बारीक परत है और यह सबसे नीचे रहती है।
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4. पहले दो-तीन बार स्वच्छ जल डालकर परत को धो ली.cजए। agl
3. अब नीचे से ऊपर क ओर भ रए: रुई → चारकोल चूण → बारीक रेत → मोट रेत → सबसे ऊपर कंकड़।
a s emदे खए गलास म क्या एक त्रत होता है।
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5. अब तालाब का जल ऊपर से धीरे-धीरे डा लए और
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परत (ऊपर से नीचे) क्या हटाती है क्य
सबसे बड़े रक्त स्थान m
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a s e — केवल बड़ी चीज़ रोकते ह
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कंकड़ / रोड़ी पत्ते , ितनके , कीड़े
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मोट रे त-कं कड़ और बड़े मैले कण छोटे रक्त
agl बारीक रेत बारीक िम ी, िजससे जल स्वच्छ िदखे कण के बीच अत्यंत छोटे रक्त स्थान
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चारकोल रंग और दुग ध
ं चारकोल इन्ह अपनी सतह पर रोक लेता है
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बचा-खुचा सब कुsछ; परतों को भी रोके रखता है
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सूती कपड़ा सबसे बारीक रंध्र
मोट परत ऊपर और बारीक नीचे क्य : बड़े टु कड़े पहले ही रुक जाते ह, इस लए नीचे क बारीक रेत तुरंत जाम
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नह होती। नगरपा लका का जल-शोधन संयंत्र भी नद के जल के साथ ठ क यही करता है — पहले जाली, फर
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बैठने के टक, फर रेत क तह।
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महत्वपूण: इस नस्यंदक से नकला जल स्वच्छ दखता है पर पीने योग्य नह होता। नस्यंदन केवल उतना ही
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हटाता है जतना फँसने लायक बड़ा हो; रोगाणु उससे कह छोटे होते ह। बाद म जल अवश्य उबाल।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 167–168 a
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
नद -प्रदूषण, ढाबे पर मथना और बढ़ई का चुंबक
प्र.1 आइए! नद और महासागर म प्रदूषण के मु े पर जागरूकता बढ़ाने के लए एक क वता क रचना कर। यहाँ कुछ
पं क्तयाँ लखी गई ह, इनम कुछ और पं क्तयाँ जोड़—
आपक क वता म क्या होना चा हए: प्रदूषण क्या है (प्ला स्टक क थै लयाँ, बोतल, रैपर, न लयाँ), कसे हा न पहुँचती है
(कोइलास जैसी मछ लयाँ, पक्षी और हम स्वयं), वह आता कहाँ से है (हमारे ही घर और ग लय से) और हम क्या कर सकते ह (एक
बार उपयोग वाला प्ला स्टक न ल, जल म कचरा न फक, दखे तो उठाएँ)।
नमूना उत्तर — पुस्तक क क वता म जोड़ी जा सकने वाली पं क्तयाँ:
बोतल का ढक्कन, टू ट नली,
दुकान से आई रैपर क पन्नी,
नाली ले गई, नद ले गई,
और समुद्र क तली म जा बैठ ।
कोइलास अब कह नह सकती,
जाल म मछली भी, कचरा भी,
थैली, बोतल, प्ला स्टक डोरी,
मछु आरे क नाव भर आई।
थैला कपड़े का साथ ले जाएँ,
प्ला स्टक दुकान पर ही ठु कराएँ,
जो एक टु कड़ा हम न फक,
उतनी पीड़ा नद बचाए।
इस अध्याय से संबंध: ओटु क्कम का मछली पकड़ने का जाल जल से मछली को पृथक करता है — यह एक प्रकार
का प्राकृ तक नस्यंदन है। पर जाल के साथ थै लयाँ, बोतल और रैपर भी ऊपर आ जाते ह, क्य क प्ला स्टक न
घुलता है और न सड़ता है। प्रकृ त के पास ऐसी कोई पृथक्करण व ध नह जो नद से प्ला स्टक नकाल सके। एक
ही उपाय है — उसे नद म डाल ही नह ।
प्र.2 आपके घर म कटोरे म रखा हुआ दूध फट गया है। अपने माता- पता के साथ चचा कर क आप इसे कस प्रकार
उपयोग कर सकते ह? इस प्र क्रया म आप पृथक्करण क कस व ध का प्रयोग करगे।
फटा दूध बेकार नह है। भारतीय रसोई म वह तुरंत काम म ले लया जाता है।
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कस काम म क्या कया जाता है पृथक्करण व ध
पनीर या छे ना दू ध फट जाता है; ठोस छे ना मलमल के कपड़े में डालकर पानी िनस्यंद न (कपड़े से )
(व्हे) िनकाल िदया जाता है
मक्खन और छाछ दही जमाकर मथनी से मथने पर मक्खन ऊपर तैर आता है मथना
कढ़ , ढोकला, इडली का घोल, ख े ख े पन के िलए सीधे उपयोग ृ क्करण की
पथ
दूध का पराँठा आवश्यकता नही ं
व्हे — आटा गूँधने या पौध म डालने पनीर बनाने के बाद बचा द व रख िलया जाता है िनस्यंद न से पहले ही
के लए अलग
यहाँ मुख्य व ध नस्यंदन है। फटा दूध एक ठोस भाग (छे ना) और एक द्रव भाग (व्हे) म बँट जाता है। मलमल के
कपड़े से छानने पर ठोस रुक जाता है — छे ना अवशेष है और व्हे नस्यंद। य द इसके बजाय दही जमाकर मथ तो
हल्का मक्खन अलग होकर तैर आता है, जो मथना है।
सुझाव: कपड़े को धीरे से नचो ड़ए, आधे घंटे लटकाइए और छे ने को कसी वज़न के नीचे दबाइए। ताज़ा पनीर
तैयार — और आपने रसोई म ही नस्यंदन और नस्तारण दोन कर लए।
प्र.3 क्या आप रसोईघर के कसी एक उपकरण का नाम बता सकते ह जो बजली से चलता है और छाछ तैयार करने
के लए उपयोग म लाया जाता है?
मक्सर-ग्राइंडर ( मक्सी), अथवा वशेष रूप से बनी बजली क मथनी (इले क् क चनर)। हड ब्लडर भी यही काम करता है।
जार में दही → ब्लेड ते ज़ी से उसे मथते है ं
→ वसा के कण जुड़ते जाते है ं और हल्के होने के कारण ऊपर तै र आते है ं (मक्खन)
→ नीचे बचा द व छाछ है
मथने से मक्खन क्य अलग होता है: दही म वसा असंख्य सूक्ष्म कण के रूप म पूरे द्रव म फैली रहती है। मथने से
ये कण आपस म टकराकर इतने बड़े ल दे बना लेते ह क दखने लग। वसा जलीय भाग से हल्क होती है, इस लए
ये ल दे ऊपर तैर आते ह और उतार लए जाते ह।
क्या आप जानते ह? रस्सी लपेटकर चलाई जाने वाली परंपरागत मथनी (या रई) बना बजली के ठ क यही काम
करती है — और ढाबे क प टग वाली बड़ी मथनी उसी का गाँव-संस्करण है।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 बढ़ई ने पृथक्करण क कस व ध का उपयोग कया? ‘चुंबक को जान’ अध्याय का स्मरण कर।
उसने चुंबक य पृथक्करण का उपयोग कया — बुरादे पर चुंबक घुमाया और सारी लोहे क क ल उछलकर उससे चपक गईं।
अवयव चुंबक के पास व्यवहार कहलाता है
लोहे क क ल पबल आकषण, चुंबक से िचपक जाती है ं चुंबकीय पदाथ
लकड़ी का बुरादा िबल्कु ल आकिषत नही ं होता, पीछे रह जाता है अचुंबकीय पदाथ
यहाँ यह हस्त चयन से बेहतर क्य है: बढ़ई क ल हाथ से चुनने लगा था। पर बुरादे म दबी क ल दखती नह और
चुभती ह। चुंबक एक ही बार घुमाने म हर क ल ढूँ ढ़ लेता है, उन्ह भी जो दखाई नह दे रह — क्य क वह उस गुण
(चुंबक य गुण म भन्नता) का उपयोग करता है जसे आँख नह पहचान सकती।
क्या आप जानते ह? पुनचक्रणकता क्रेन म लगे वशाल व ुत चुंबक से म श्रत कचरे के ढे र से लोहे क कतरन
ख च लेते ह। फर इन्ह गलाकर पुन: उपयोग म लाया जाता है।
क्रयाकलाप 9.6: आइए, खेल खेल — पृष्ठ 169–170
दो टोक रयाँ — हम पदाथ को पृथक क्य करते ह?
क्रयाकलाप
प्र.1 नम्न ल खत वाक्यांश को कागज क छोट प चय पर लख — 1. दाल से छोटे कंकड़ पृथक करना। 2. दही
मथकर मक्खन प्राप्त करना। 3. पके हुए द लये या पोहे से हरी मच नकालना। 4. तरबूज से बीज नकालना। 5.
नमाण सामग्री के म श्रत ढे र से लकड़ी के बुरादे और लोहे क क ल को पृथक करना। 6. माला बनाने के लए
व भन्न फूल के ढे र म से गदे के फूल चुनना। 7. रेत से कंकड़ पृथक करना। 8. चावल के आटे म से ना रयल के
टु कड़े पृथक करना। 9. जल से तेल पृथक करना। 10. नमक के वलयन से नमक पृथक करना। अब दो टोक रयाँ
ल, इनम से प्रत्येक उन दो प्रयोजन म से एक को प्रद शत करती है, जनके लए हम पदाथ का पृथक्करण करते
ह। दो दल बनाएँ और दे ख क कौन-सा दल अ धकतम सही प्र व ष्टयाँ प्रस्तुत कर पाता है।
दोन टोक रय के नाम ह:
टोकरी क — “ कसी एक अनुपयोगी अवयव को हटाना।”
टोकरी ख — “दो भन्न परंतु उपयोगी अवयव को पृथक करना।”
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क्र. वाक्यांश टोकरी प्रयुक्त व ध
1 ृ क करना
दालों से छोटे कं कड़ पथ क — कं कड़ अनुपयोगी और हािनकारक है ं हस्त चयन
2 दही मथकर मक्खन पाप्त करना ख — म क्खन और छाछ, दोनों उपयोगी है ं मथना
3 दिलये या पोहे से हरी िमच िनकालना क — िमच अनचाही होने से हटाई जाती है हस्त चयन
4 तरबूज से बीज िनकालना क — बीज फल के साथ नही ं खाए जाते हस्त चयन
5 ृ क
िनम ण सामग ी से बुर ादा और लोहे की कीले ं पथ ख — कीले ं पुन: पयोग होती है ं और बुर ादा भी काम चुंबक य
करना आता है पृथक्करण
6 फू लों के ढे र में से गेंदे के फू ल चुनना ख — दोनों पकार के फू ल उपयोगी है ं हस्त चयन
7 ृ क करना
रे त से कं कड़ पथ ख — रे त प्लास्टर के िलए , कं कड़ कं ीट के िलए छानना
8 ृ क करना
चावल के आटे में से नािरयल के टुक ड़े पथ ख — दोनों पकाने में काम आते है ं छानना
9 ृ क करना
जल से तेल पथ ख — तेल पुन: िमल जाता है और जल भी काम आता नस्तारण
है
10 ृ क करना
नमक के िवलयन से नमक पथ ख — नमक चािहए ; जल भी पुन: पाप्त िकया जा वाष्पीकरण
सकता है
यहाँ कस समझ क परख हो रही है: हम पदाथ को यूँ ही नह पृथक करते। इसके ठ क दो कारण ह — या तो
कसी हा नकारक या अनुपयोगी वस्तु को बाहर करना, या दो उपयोगी वस्तुएँ अलग-अलग प्राप्त करना। प्रयोजन
पहचान लेने पर व ध चुनना सरल हो जाता है।
ध्यान द: कुछ प चय पर तक दोन ओर दया जा सकता है — जैसे तरबूज के बीज सुखाकर मगज के रूप म खाए
जाते ह, तब पच 4 टोकरी ख म जाएगी। य द आपका दल कारण बता सके तो उत्तर स्वीकाय है। केवल “कौन-सी”
नह , “क्य ” भी बताइए।
एक खेल खे लए — बु द्धमान मछली — पृष्ठ 171–172
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ
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टक 1: व धयाँ · टक 2: प्रत्येक व ध क्या करती है
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एक खे ल खे लए
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a s emारा पहले एक लाल मछली नकाल जो कसी पृथक्करण व ध का प्र त न धत्व करती है, फर उससे
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छड़ी
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प्र.1
संबं धत नीली पच नकाल। (टक 1: नस्यंदन, नस्तारण, संघनन, हस्त चयन, मथना, वाष्पीकरण, ओसाई,
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अवसादन, छानना, े शग, चुंबक य पृथक्करण। टक 2: चुंबक य गुण म भन्नता; ठोस के कण के आकार म
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अंतर; भारी कण का तली पर बैठना; जल और तेल का मश्रण; दही से मक्खन नकालना; समुद्र जल से नमक
पृथक करना; पूल को पीटकर अनाज के दानem
a s को पृथक करना; जलवाष्प का उसक द्रव अवस्था म प रव तत
l अवशेष रहना; बड़े कण को हस्त चयन; मश्रण के हल्के अवयव को
होना; अघुलनशील कण का नस्यंदनgहोकर
फूँक मारकर पृथक करना।)
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टक 1 और टक 2 का पूरा मलान इस प्रकार है।
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a glटक 1 — लाल मछली ( व ध) टक 2 — नीली पच
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नस्यंदन अघुल नशील कणों का िनस्यंद न होकर अवशेष रहना
se m जल और तेल का िम ण
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नस्तारण
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संघनन a जलवाष्प का उसकी द व अवस्था में पिरवितत होना
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हस्त चयन बड़े कणों को हस्त चयन
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मथना दही से म क्खन िनकालना
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eवाष्पीकरण
gl a ृ क करना
समुद जल से नमक पथ
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ओसाई ृ क करना
िम श्रण के हल्के अवयव को फूँ क मारकर पथ
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अवसादन भारी कणों का तली पर बैठना
छानना
agl ठोस के कणों के आकार में अंतर
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े शग ृ क करना
पूल ों को पीटकर अनाज के दानों को पथ
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चुंबक य पृथक्करण चुंबकीय गण
ु ों में िभ ता
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as सही जोड़ी कैसे पहचान: हर व ध के लए पू छए — “यह कस गुण का उपयोग करती है?” छानना और हस्त
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चयन, दोन ठोस पर काम करते ह, पर छानना चालनी से नापे गए आकार का उपयोग करता है और हस्त चयन
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उँग लय से उठाने योग्य आकार का। अवसादन और नस्तारण एक ही काम के दो भाग ह — पहले बैठना, फर
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उड़ेलना। वाष्पीकरण जल को वाष्प बनाकर भेजता है; संघनन उसे द्रव बनाकर वापस लाता है।
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खेल के लए सुझाव: छड़ी कसी डंडी से बनाइए, सरे पर धागा और छोटा चुंबक बाँ धए और कागज़ क मछ लय
पर लोहे क क्लप लगाइए। ध्यान द जए क यह खेल स्वयं चुंबक य पृथक्करण से चलता है!
आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 172–174
अभ्यास के प्रश्न 1 से 10
प्र.1 पृथक्करण व ध के रूप म हस्त चयन का क्या प्रयोजन है? (क) नस्यंदन (ख) छँ टाई (ग) वाष्पन (घ) नस्तारण
उत्तर: (ख) छँ टाई
क्य : हस्त चयन का अथ है मश्रण म से उँ ग लय ारा टु कड़े चुनना, वह भी आकार, रंग और आकृ त के आधार
पर। छँ टाई का अथ भी यही है — दे खकर वस्तुओं को अलग-अलग करना। चावल से कंकड़ या राजमा से छोले
नकालना हाथ से क गई छँ टाई ही है।
अन्य वकल्प क्य गलत ह:
(क) नस्यंदन छद्र वाले नस्यंदक से द्रव म से अघुलनशील ठोस अलग करता है — इसम हाथ का काम नह ।
(ग) वाष्पन द्रव को वाष्प बनाकर घुला ठोस प्राप्त करता है।
(घ) नस्तारण ठोस के बैठ जाने के बाद द्रव को उड़ेल दे ना है।
याद रख: हस्त चयन तभी सु वधाजनक है जब अनुपयोगी अवयव कम मात्रा म हो और उसके टु कड़े उठाने योग्य
बड़े ह ।
प्र.2 नम्न ल खत म से कन पदाथ का पृथक्करण मथना व ध से कया जाता है? (क) तेल का पानी से (ख) रेत का
पानी से (ग) मक्खन का दही से (घ) ऑक्सीजन का वायु से
उत्तर: (ग) मक्खन का दही से
क्य : मथने से द्रव इतनी तेज़ी से हलता है क वसा के सूक्ष्म कण जुड़कर बड़े ल दे बना लेते ह। वसा जलीय भाग से
हल्क (कम घनत्व वाली) होने के कारण ऊपर तैर आती है और उतार ली जाती है — दूध या दही से मलाई और
मक्खन इसी प्रकार अलग होते ह।
अन्य वकल्प क्य गलत ह:
(क) तेल का पानी से — दोन स्वयं अलग परत बना लेते ह; यहाँ नस्तारण होता है, मथना नह ।
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(ख) रेत का पानी से — रेत अघुलनशील ठोस है; अवसादन- नस्तारण या नस्यंदन प्रयोग होता है।
(घ) ऑक्सीजन का वायु से — वायु गैस का मश्रण है; गैस को मथकर अलग नह कया जा सकता।
प्र.3 नस्यंदन के लए नम्न ल खत म से कौन-सा कारक प्राय: अ नवाय होता है? (क) उपकरण का आकार (ख) वायु
क उप स्थ त (ग) छद्र का आकार (घ) मश्रण का तापमान
उत्तर: (ग) छद्र का आकार
कण िछद से बड़ ा → अवशेष के रूप में रुक जाता है
कण िछद से छोटा → द व के साथ िनकलकर िन स्यंद में चला जाता है
क्य : नस्यंदक बस छद्र से भरी एक रुकावट है। वह कुछ पृथक कर पाएगा या नह , यह पूरी तरह इस बात पर
नभर है क उसके छद्र का आकार कण के आकार क तुलना म कैसा है। इसी लए चाय क चालनी मटमैला जल
स्वच्छ नह कर पाती पर फल्टर-पत्र कर दे ता है — अध्याय यह चालनी, कपड़े और फल्टर-पत्र के उदाहरण से
दखाता है।
अन्य वकल्प क्य गलत ह: उपकरण का आकार केवल यह तय करता है क एक बार म कतना छाना जा सकता है; वायु क
यहाँ कोई भू मका नह ; और गरम द्रव थोड़ा तेज़ बहता अवश्य है, पर तापमान यह तय नह करता क कण रुकगे या नह ।
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प्र.4 कारण स हत बताएँ क नम्न ल खत कथन म सत्य और असत्य कौन-कौन से ह? असत्य कथन को सही करके
लख। (क) नमक के वलयन को सूय के प्रकाश म अथवा धूप म रखकर नमक को इससे पृथक कया जा सकता
है। (ख) जब एक अवयव कम मात्रा म हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता है। (ग) मुरमुरे और चावल के दान के
मश्रण को े शग ारा पृथक कर सकते ह। (घ) सरस के तेल और न बू पानी के मश्रण को नस्तारण ारा
पृथक कर सकते ह। (ङ) छानने क व ध का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने म होता है।
कथन सत्य / कारण
असत्य
(क) नमक के वलयन को धूप म रखकर स त्य सूय की ऊष्मा से जल वािष्पत हो जाता है और नमक शेष रह जाता है।
नमक पृथक कया जा सकता है। नमक के खेतों में समुद ी जल से नमक इसी पकार बनता है।
(ख) जब एक अवयव कम मात्रा म हो तभी स त्य मात्रा अिधक होने पर एक-एक टुक ड़ा चुनने में बहुत समय लगेग ा — भूस ी
हस्त चयन का उपयोग होता है। के बारे में वल्ली को यही िचंता होती है।
(ग) मुरमुरे और चावल के दान का मश्रण अस त्य थेिशंग के वल पूल ों से दाने छु ड़ाती है। मुर मुरे और चावल तो पहले से ही
े शग से पृथक हो सकता है। अलग-अलग दाने है।
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(घ) सरस के तेल और न बू पानी का मश्रण स त्य तेल जल में नही ं िमलता और हल्का होता है, इसिलए ऊपर स्पष्ट परत बना
नस्तारण से पृथक हो सकता है। ले ता है िजसे उड़ेल ा जा सकता है।
(ङ) छानने क व ध से चावल का आटा और अस त्य छानना के वल ठोस –ठोस िमश्रण पर काम करता है। यहाँ एक अवयव द व
पानी पृथक होते ह। है।
असत्य कथन का सही रूप:
(ग) मुरमुरे और चावल के दान के मश्रण को ओसाई (हल्के मुरमुरे उड़ जाते ह) अथवा छानने से पृथक कर सकते ह, क्य क
दोन म भार और आकार का अंतर है।
(ङ) चावल के आटे और पानी को पृथक करने म नस्यंदन क व ध का उपयोग होता है, क्य क चावल का आटा पानी म
अघुलनशील है और नस्यंदक पर रुक जाता है।
सुझाव: व ध चुनने से पहले दो प्रश्न पू छए — क्या दोन अवयव ठोस ह? और क्या इनम से कोई घुल जाता है?
इनके उत्तर अ धकांश गलत व धयाँ तुरंत हटा दे ते ह।
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प्र.5 स्तंभ I म दए गए प्रत्येक मश्रण का स्तंभ II म द गई उपयुक्त पृथक्करण व ध से मलान कर। स्तंभ I: (क)
बेसन और काले चने का मश्रण (ख) चॉक पाउडर और पानी का मश्रण (ग) भु े और आलू का मश्रण (घ) लोहे
के चूरे और बुरादे का मश्रण (ङ) तेल और पानी का मश्रण। स्तंभ II: (i) हस्त चयन (ii) चुंबक य पृथक्करण
(iii) नस्तारण (iv) छानना (v) नस्यंदन
स्तंभ I स्तंभ II कस गुण का उपयोग
(क) बेसन और काले चने का मश्रण (iv) छानना बेस न के कण बहुत बारीक, चना बड़ा — कणों के आकार में अंतर
(ख) चॉक पाउडर और पानी का मश्रण (v) िनस्यंद न चॉक पानी में अघुल नशील है और िनस्यंद क के िछद ों से बड़ा है
(ग) भु े और आलू का मश्रण (i) हस्त चयन दोनों बड़े है ं और आकार , रंग , आकृ ित से आसानी से पहचाने जाते है ं
(घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मश्रण ृ क्करण
(ii) चुंबकीय पथ लोहा चुंबक से आकिषत होता है, बुर ादा नही ं — चुंबकीय गुण में िभन्नता
(ङ) तेल और पानी का मश्रण (iii) िनस्तारण दोनों िमलते नही ं; तेल हल्का है और अलग परत बनाकर तैर ता है
(क ) → (iv) · (ख) → (v) · (ग) → (i) · (घ) → (ii) · (ङ) → (iii)
चॉक पाउडर के लए नस्तारण क्य नह , नस्यंदन ही क्य : छोड़ दे ने पर चॉक बैठ तो जाता है, इस लए
अ धकांश पानी नस्ता रत कया जा सकता है। पर बहुत बारीक चॉक नलं बत रहकर पानी को धुँधला रखता है।
नस्यंदन उसे पूरी तरह हटा दे ता है — नस्तारण कभी नह ।
प्र.6 कस प र स्थ त म आप ठोस और द्रव के मश्रण को पृथक करने म नस्यंदन के स्थान पर नस्तारण व ध का
उपयोग करगे?
नस्तारण तब चुना जाता है जब ठोस स्वयं तली म बैठ जाता हो और पूण पृथक्करण आवश्यक न हो।
जब ठोस भारी और अघुलनशील हो और तुरंत बैठ जाए — तालाब के जल क म , बतन म चाय क प त्तयाँ, बाल्ट म रेत।
जब द्रव क मात्रा बहुत अ धक हो — पूरा ड्रम मटमैला जल फल्टर-पत्र से छानने म घंट लगगे; बैठाकर उड़ेलने म मनट।
जब कोई नस्यंदक उपलब्ध न हो — दादा जी के पास चालनी नह है, इस लए वे प त्तयाँ बैठने दे ते ह और चाय धीरे से उड़ेलते
ह।
जब नस्यंदक जाम हो जाने का डर हो — बहुत गाढ़ म फल्टर-पत्र को तुरंत बंद कर दे गी, इस लए पहले म बैठाकर
नस्तारण कया जाता है और उसके बाद ही नस्यंदन।
जब दोन अवयव ऐसे द्रव ह जो आपस म न मलते ह — तेल और जल, या दूध पर तैरती मलाई। नस्यंदक दो द्रव को
पृथक कर ही नह सकता।
जब केवल धोना हो — चावल या दाल धोते समय मैल और भूसी तैर या बैठ जाती है और पानी उड़ेल दया जाता है।
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एक स्पष्ट सीमा: नस्तारण तेज़ है और नःशुल्क, पर कभी पूण नह होता। बारीक कण द्रव म रह ही जाते ह। जब
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द्रव सचमुच स्वच्छ चा हए — पीने का जल, प्रयोगशाला का रसायन — तब नस्यंदन करना ही होगा।
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gl म: दोन साथ-साथ उपयोग होते ह — अवसादन → नस्तारण → नस्यंदन। प्रश्न 10 म लीला यही
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व्यवहार
है, और जल-शोधन संयंत्र भी वशाल पैमाने पर यही करता है।
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प्र.7 ना सका म बाल क उप स्थ त को a
आपg कस पृथक्करण प्र क्रया से जोड़कर दे खते ह?
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हाँ — ना सका के बाल ठ क नस्यंदक क तरह काम करते ह, इस लए यह प्र क्रया नस्यंदन है।
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a gl साँस से भीतर जाती वायु = स्वच्छ वायु + धूल, परागकण, धुए ँ के कण, नन्हे कीट
नाक के बाल बारीक अंत राल वाले िन स्यंद क का काम करते है ं
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→ बड़ े कण बालों पर फँस जाते है ं (अवशेष)
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→ स्वच्छ वायु फेफड़ ों तक पहुँच ती हैg(िनस्यं
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seते ह। नाक आती हुई वायु
शरीर को इसक आवश्यकता क्य है: फेफड़े अत्यंत कोमल होते ह। वहाँ पहुँचने वाली धूल उन्ह क्ष त पहुँचाती।
m ेष्मा क सहायता से, अ धकांश धूल प्रवेश- ार पर ही रोकaले
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c और नम भी कर दे ती है।
नाक के बाल, चप चपी
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नाक के बाल उखा ड़ए मत। वे आपके लए काम कर रहे ह। इसी लए मुँह से नह , नाक से साँस लेने को कहा जाता
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है — मुँह म ऐसा कोई नस्यंदक नह है, इस लए मुँह खोलकर दौड़ने पर धूल गले तक जल्द पहुँच जाती है।
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को वड-19 (कोरोना वायरस महामारी) के समय, हम सभी ने मास्क पहने थे। सामान्यतया वे कस सामग्री से बने
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होते ह? आपके मुँह और नथुन (नाक) को ढँ कने म मास्क क क्या भू मका है?
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वे कस सामग्री से बने होते ह:
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मास्क का प्रकार सामग्री
घर का बना कपड़े का मास्क कसकर बुने सूती या मलमल के कपड़े की दो-तीन परते ं
स जकल (तीन-परत) मास्क िबना बुने पॉलीपोिपलीन कपड़े की तीन परते ं
N95 रे स्परेटर अत्यंत बारीक कृ ित्र म रे शों की कई परते ं
मास्क क भू मका — यह दोन दशाओं म नस्यंदक का काम करता है:
बाहर जाते समय: संक्र मत व्य क्त के खाँसने, छ कने, बोलने या साँस छोड़ने पर वषाणु युक्त सूक्ष्म बूँद नकलती ह। मास्क
इन बूँद को रोक लेता है ता क वे दूसर तक न पहुँच।
भीतर आते समय: मास्क बाहर क वायु म मौजूद बूँद , धूल और रोगाणुओं को पहनने वाले क नाक और मुँह तक पहुँचने से
रोकता है।
यह हम बना धुले हाथ से नाक-मुँह छू ने से भी रोकता है।
अ धक परत बेहतर क्य ह: एक परत के रंध्र दूसरी परत के रंध्र के ठ क ऊपर नह होते, इस लए जो बूँद पहली
परत से नकल जाए वह दूसरी या तीसरी म रुक जाती है — ठ क उसी कारण से जससे कपड़े क कई परत मटमैला
जल एक परत से बेहतर छानती ह (पृष्ठ 164 पर मल्ली यही सीखता है)।
क्या आप जानते ह? मास्क हमारा बनाया हुआ ना सका-रोम है। दोन नस्यंदक ह: दोन इस तथ्य का उपयोग करते
ह क हा नकारक कण सामग्री के अंतराल से बड़े होते ह।
प्र.9 आपको आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे का मश्रण दया गया है। इस मश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने
के लए चरणबद्ध प्र क्रया क रूपरेखा तैयार क जए।
तीन अवयव तीन बात म भन्न ह — आकार, तैरना और घुलना। हर चरण म एक गुण का उपयोग क जए।
चरण क्या कर वध क्या मलेगा
1 आलू हाथ से चुन लीिजए — वे बाकी सब से बहुत बड़े है।
ं हस्त चयन आलू पृथक
2 बचे नमक + बुर ादे में पय प्त जल डालकर िहलाइए। नमक घुल जाता है; जल में घोलना नमक का वलयन, ऊपर
बुर ादा ऊपर तैर ने लगता है। तैरता बुरादा
3 तैर ता बुर ादा ऊपर से उतार लीिजए, अथवा िमश्रण को िफल्टर-पत्र से छान िनस्तारण / बुरादा पृथक (धूप म सुखा
लीिजए। िनस्यंद न ली जए)
4 स्वच्छ नमक-िवलयन को गरम कीिजए या धूप में रिखए जब तक सारा जल वाष्पीकरण नमक सफेद ठोस के रूप म
न उड़ जाए। शेष
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आलू + नमक + बुरादा
—[हस्त चयन]→ आलू + (नमक + बुरादा)
—[जल डालकर छानना]→ बुरादा + नमक का िवलयन
—[वाष्पीकरण]→ नमक
यही क्रम क्य : सबसे बड़े और सरल अवयव को हमेशा पहले हटाइए, और जल उसके बाद ही डा लए। य द आरंभ
म ही जल डाल दे ते तो आलू गीले हो जाते और बुरादा उन पर चपक जाता। नमक अंत म इस लए नकाला जाता है
क्य क वाष्पीकरण के लए स्वच्छ वलयन चा हए।
याद रख: दो से अ धक अवयव वाले मश्रण के लए प्राय: कई व धय का संयोजन आवश्यक होता है — अध्याय
के अंत म पुस्तक यही संकेत दे ती है।
प्र.10 अग्र ल खत ‘बु द्धमान लीला’ शीषक कहानी पढ़। इसम यत्र-तत्र आए दो वैक ल्पक शब्द म से सबसे उ चत
वकल्प पर सही (✓) का नशान लगाएँ। अपनी पसंद से अनुच्छेद का कोई अन्य उपयुक्त शीषक द। — लीला
अपने पता के साथ खेत म काम कर रही थी। तब उसे ध्यान आया क वे पीने का पानी घर पर ही भूल आए ह।
इससे पहले क उसके पता को प्यास/भूख लगे, वह पास के तालाब से पानी/अनाज लेने गई। डब्बे म पानी लेने
के बाद उसने ध्यान दया क पानी मटमैला है और पीने के लए योग्य/अयोग्य है। पानी शुद्ध करने के लए, उसने
पानी को कुछ समय के लए रख दया और उसके बाद मटमैले पानी को कागज/मलमल के कपड़े से नस्यं दत
कया/मथा। तब लीला ने पानी को दस मनट तक ढके बतन म ठं डा कया/उबाला। ठं डे/उबले पानी को उसने
दोबारा से नस्यं दत कया/मथा और उसने पानी पीने योग्य/अयोग्य बनाया।
पूरा कया गया अनुच्छेद (सही वकल्प मोटे अक्षर म):
लीला अपने पता के साथ खेत म काम कर रही थी। तब उसे ध्यान आया क वे पीने का पानी घर पर ही भूल आए ह। इससे पहले
क उसके पता को प्यास लगे, वह पास के तालाब से पानी लेने गई। डब्बे म पानी लेने के बाद उसने ध्यान दया क पानी मटमैला है
और पीने के लए अयोग्य है। पानी शुद्ध करने के लए, उसने पानी को कुछ समय के लए रख दया और उसके बाद मटमैले पानी
को मलमल के कपड़े से नस्यं दत कया। तब लीला ने पानी को दस मनट तक ढके बतन म उबाला। उबले पानी को उसने दोबारा
से नस्यं दत कया और उसने पानी पीने योग्य बनाया।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही वकल्प कारण
प्यास / भूख यास
प् समस्या भूल ा हुआ पीने का पानी थी
पानी / अनाज पानी तालाब से पानी िमलता है, अनाज नही ं
योग्य / अयोग्य अयोग्य मटमैल ा पानी पीने के िलए सुर ि त नही ं
कागज / मलमल के कपड़े मलमल के कपड़े साधारण कागज फट जाएगा; मलमल में बारीक रंध होते है ं
नस्यं दत कया / मथा िनस्यंिदत िकया मथने से दही से मक्खन िनकलता है; यहाँ िम ी छाननी है
ठं डा कया / उबाला उबाला दस िमनट उबालने से रोगाण ु मर जाते है ं
ठं डे / उबले उबले यह िपछले चरण के अनुस ार है
नस्यं दत कया / मथा िनस्यंिदत िकया उबालने के बाद बैठी अशुिद्धयाँ हटाने के िलए
योग्य / अयोग्य योग्य अब पानी स्वच्छ और रोगाण-ु मुक्त है
आप ये शीषक दे सकते ह: “लीला ने पानी को सुर क्षत बनाया”, “मटमैले तालाब से स्वच्छ गलास तक”, “बेट क समझदारी”,
अथवा “अवसादन, नस्यंदन और उबालना”।
लीला बु द्धमान क्य कही गई: उसने तीन बात सही क्रम म क — पहले पानी को रखा रहने दया ता क म बैठ
जाए (अवसादन), फर कपड़े से छाना ( नस्यंदन), और अंत म उबाला, क्य क छानने से केवल वही हटता है जो
फँसने लायक बड़ा हो और रोगाणु उससे कह छोटे होते ह।
सुझाव: उबालते समय बतन ढका रखा गया था। इससे पानी बचता है — भाप ढक्कन पर संघ नत होकर वापस गर
जाती है, बाहर नह जाती।
और भी सीख — पृष्ठ 174–175
प रयोजनाएँ, नाटक और वै ा नक क भाँ त सोचना
और भी सीख
प्र.1 माता- पता के साथ मनोरंजन— हम अपनी भारतीय वरासत पर गव है। अपने बड़ क दे ख-रेख म पौध के
व भन्न भाग का उपयोग कर घर पर कुछ हबल उपचार तैयार करने का प्रयास कर, जैसे— तुलसी का काढ़ा।
हबल काढ़ा बनाने म आप कस पृथक्करण व ध का उपयोग करगे?
तुलसी का काढ़ा बनाते समय प्रयुक्त पृथक्करण व धयाँ:
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
काढ़ा बनाने का चरण पृथक्करण व ध
अच्छे तुलसी के पत्ते चुनना और खराब पत्ते, डंठल तथा धूल हटाना हस्त चयन
जड़ी-बू टय , जड़ या प त्तय को भंडारण से पहले छाया म सुखाना वाष्पीकरण (उनमें िवद्य मान जल का)
स ठ या काली मच कूटकर मोटे टु कड़े छान लेना छानना
उबले काढ़े को रखा रहने दे ना ता क भारी कण नीचे बैठ जाएँ अवसादन
ऊपर का स्वच्छ काढ़ा कप म उड़ेलना, अवशेष बतन म छोड़ना िनस्तारण
काढ़े को छन्नी या मलमल के कपड़े से छानना िनस्यंद न
ढक्कन पर संघ नत होकर वापस टपकती भाप संघ नन
नमूना उत्तर — सरल तुलसी काढ़ा ( कसी बड़े के साथ बनाइए): एक गलास पानी उबा लए। उसम 8–10 धुले
तुलसी के पत्ते, 2 कुट काली मच, अदरक का छोटा कुटा टु कड़ा और 2 कुट ल ग डा लए। ढककर तब तक धीमी
आँच पर पकाइए जब तक वह लगभग आधा गलास न रह जाए। चाय क चालनी से छानकर कप म ली जए, थोड़ा
ठं डा होने पर शहद या गुड़ मलाइए और गुनगुना पी जए। यहाँ मुख्य व ध नस्यंदन है।
जड़ी-बू टयाँ तेज़ धूप म नह , छाया म क्य सुखाई जाती ह: जैसा पुस्तक के ‘क्या आप जानते ह?’ बॉक्स म
लखा है, छाया म सुखाने से आ धक्य जल धीरे-धीरे वा ष्पत होता है और औष ध का महत्वपूण भाग सुर क्षत रहता
है। तेज़ धूप प त्तय के कोमल तत्व को नष्ट कर सकती है।
प्र.2 रंगमंचीय नाटक— कल्पना कर क मल्ली आप ह और आपक मत्र वल्ली है। पदाथ के पृथक्करण क व भन्न
व धय पर प्रकाश डालते हुए ‘संपूण भारत क यात्रा’ को प्रस्तुत करने के लए संवाद लख। अपने व ालय क
सभा म नाटक प्रस्तुत कर।
अच्छ पटकथा म क्या होना चा हए: पाँच पड़ाव के पाँच दृश्य, जनम से प्रत्येक व ध का नाम ले, उसे होते हुए दखाए और
बताए क वह कस गुण का उपयोग करती है; कथा को आगे बढ़ाने वाला एक सूत्रधार; और एक छोटा समापन जो बताए क हम
पदाथ पृथक क्य करते ह।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 9 दै नक जीवन म पृथक्करण व धयाँ
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दृश्य स्थान दखाई जाने वाली व धयाँ
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1
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नानी जी का घर, ह रयाणा हस्त चयन, थेिशंग, ओसाई, छानना
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se m साबरमती, अहमदाबाद
2
g l a वाष्पीकरण (समुद ी जल से नमक ); दांडी यात्र ा
a
3 दादा जी का घर, पुडुचेरी अवसादन, िनस्तारण, िनस्यंद न
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e m मथना
4 भोपाल का एक ढाबा
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5 बुआ जी का घर, शलांग
a ृ क्करण
चुंबकीय पथ
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नमूना उत्तर — आरंभ के संवाद, जन्ह आप आगे बढ़ा सकते ह:
o m l a se
सूत्रधार:.cगरमी क छु याँ, और एक प रवार नकल पड़ा भारत क यात्रा पर। पहलाag
m
se नानी जी, सब लोग अनाज म से क्या चुन रहे ह?
पड़ाव — ह रयाणा।
aवल्ली:
agl नानी जी: कंकड़ नकाल रहे ह बेटा, ता क अनाज पकाने योग्य हो जाए। यह हाथ से कया जाता है — इसे हस्त
चयन कहते ह।
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मल्ली: पर भूसी तो कंकड़ से कह ज़्यादा है! क्या वह भी हाथ से चुनगे?
agl
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agहlऔर भूसी उड़ रही है!
मामा जी (हँसकर): नह । उसके लए हम पवन को बुलाते ह। (वे सूप उठाकर अनाज गराते ह।)
वल्ली: दे खए! दाने सीधे नीचे गर रहे
मामा जी: क्य क भूसी हल्क है। यही ओसाई है।
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.
सूत्रधार: एक गुण, एक व ध। अब च लए अहमदाबाद …
se m
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m .cत के लए सुझाव: असली वस्तुएँ प्रयोग क जए — सूप, चालनी, चाय कagचालनी, चुंबक और बुरादे -क ल
ase
प्रस्तु
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का कटोरा। दशक वही मानते ह जो आँख से होते दे खते ह, और व ान कह अ धक समय तक याद रहता है।
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प्र.3 सामू हक क्रयाकलाप— एक सप्ताह के अंतगत आपके ारा अपनाई गई और अपने प रवेश म दे खी गई
a
पृथक्करण क व धय क सूची बनाएँ। इन व धय का उपयोग करने के पीछे का कारण बताएँ और जस व ध
का आपने सबसे अ धक उपयोग कया है अथवा दे खा है, उसे अ भले खत कर। अपने और अपने समूह के
सदस्य के अवलोकन क तुलना कर।
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emइसे ठ क से कैसे कर: सात दन तक एक छोट डायरी र खए। जब भी कसी मश्रण को पृथक होते देख, चार बात ल खए —
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agl कहाँ, क्या पृथक हुआ, कौन-सी व ध, और वह व ध क्य चुनी गई। फर ग नए क कौन-सी व ध कतनी बार आई।
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दन / स्थान क्या पृथक हुआ वध वही व ध क्य
सोम — रसोई दाल से कं कड़ हस्त चयन कंकड़ कम ह, दखते और उठाए जा सकते ह
सोम — रसोई आटे से चोकर छानना चोकर आटे के कण से बड़ा है
मंगल — चाय के समय चाय से पित्तयाँ िनस्यंद न पूरी सफाई चा हए
बुध — चावल धोते समय चावल से मैल और भूस ी िनस्तारण मैल तैरता या बैठता है; पानी उड़ेल दया जाता है
गुरु — वषा के बाद ग े का पानी सूखना वाष्पीकरण धूप और हवा जल उड़ा ले जाते ह
शुक्र — नमाण स्थल रे त से कं कड़ छानना आकार का स्पष्ट अंतर
श न — घर दही से मक्खन मथना मक्खन हल्का है और ऊपर तैरता है
र व — कबाड़ क दुकान कचरे से लोहे के टुक ड़े ृ क्करण
चुंबकीय पथ केवल लोहा आक षत होता है
आप क्या पाएँगे: लगभग हर समूह पाता है क हस्त चयन, छानना और नस्यंदन सबसे अ धक बार आते ह, क्य क
घर के अ धकांश मश्रण ठोस–ठोस या ठोस–द्रव होते ह और उनके अवयव के आकार भन्न होते ह। ऊष्मा माँगने
वाली व धयाँ, जैसे वाष्पीकरण, घर म कम दखती ह।
तुलना और चचा: जस सहपाठ का प रवार खेती करता है वह े शग और ओसाई बताएगा; जो समुद्र-तट के पास
रहता है वह नमक के खेत। प रवेश अलग, फर भी व धय का वही छोटा-सा समूह — यह अच्छा नष्कष है।
प्र.4 अपने समुदाय के दग्गज बन— कूड़ा बीनने वाले का सा ात्कार ल। उसके ारा उसके दै नक जीवन म उपयोग
कए जाने वाली पृथक्करण क व धय का अध्ययन कर। अपने समुदाय के 14 साल से छोट उम्र के ब को
आस-पास के व ालय जाने के लए प्रे रत कर।
सा ात्कार कैसे ल: कसी शक्षक या अ भभावक के साथ जाइए, पहले अनुम त ली जए, आदर से बात क जए, बोलने से अ धक
सु नए और अंत म धन्यवाद क हए। बना पूछे कसी का फोटो कभी न ल।
पूछने योग्य प्रश्न:
आप कस- कस प्रकार का कचरा एक त्रत कर छाँटते ह?
आप कैसे तय करते ह क कोई वस्तु कस ढे र म जाएगी?
क्या आप कोई उपकरण प्रयोग करते ह — चुंबक, चालनी, कुंडा, दस्ताने?
सबसे क ठन सामग्री कौन-सी है और क्य ?
छाँटने के बाद हर ढे र का क्या होता है?
इस काम म आपको कन क ठनाइय का सामना करना पड़ता है?
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छाँटा गया कचरा कस आधार पर वध
कागज, प्ला स्टक, काँच, कपड़ा सामग ी का िदखना और छू ने का अनुभव हस्त चयन (छँटाई)
लोहे और इस्पात का कबाड़ चुंबक से आकषण ृ क्करण
चुंबकीय पथ
एल्यु म नयम बनाम लोहे के डब्बे के वल लोहा चुंबक से िचपकता है ृ क्करण
चुंबकीय पथ
प्ला स्टक क बोतल बनाम रेत-कंकड़ प्लािस्टक जल पर तैर ता है, कं कड़ डू ब जाते है ं िनस्तारण / प्लवन
म श्रत कचरे से बारीक धूल कण का आकार छानना
केस स्टडी का नष्कष क्या होना चा हए: कूड़ा बीनने वाले प्र त दन कुशल पृथक्करण करते ह, मुख्यत: हस्त
चयन ारा, और उनका काम पुनचक्रण का पहला चरण है। इससे बहुत बड़ी मात्रा म सामग्री लड फल जाने से बच
जाती है। उन्ह दस्ताने, जूते और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरण तथा सम्मान मलना चा हए।
काय का दूसरा भाग भी उतना ही महत्वपूण है: पता क जए क प रवार का कोई ब ा व ालय से बाहर तो नह
है, माता- पता को नकटतम सरकारी व ालय, मध्याह्न भोजन और नःशुल्क पुस्तक क जानकारी द जए, और
अपने कक्षा- शक्षक को सू चत क जए। 14 वष तक के हर ब े क शक्षा शक्षा का अ धकार अ ध नयम के अंतगत
उसका अ धकार है।
प्र.5 रपोटर बन— (क) आपके समुदाय म उपयोग क जाने वाली व भन्न पृथक्करण क व धय (जैसे खेत म या
नमाण स्थल म) के समाचार क कतरन और लेख को एक त्रत कर (ख) कसी स्थानीय कसान ारा उपयोग
क जाने वाली नवीनतम कृ ष पृथक्करण व धय के वषय म जानने के लए उनका सा ात्कार ल।
(क) कतरन क फाइल बनाना। एक स्क्रैपबुक र खए और उसे चार भाग म बाँ टए — कृ ष, नमाण, जल और कचरा एवं
पुनचक्रण। हर कतरन चपकाकर उसके नीचे ल खए: त थ, उसम न हत पृथक्करण व ध और वह कस गुण का उपयोग करती है।
समाचार का प्रकार उसम दखने वाला पृथक्करण
फसल कटाई क खबर, कंबाइन हावस्टर, मंडी के चत्र थेिशंग और ओसाई
रेत क छनाई, रेडी- मक्स कंक्र ट संयंत्र छानना
जल-शोधन संयंत्र, बाढ़ के बाद फल्टर बाँटना अवसादन, िनस्यंद न
गुजरात या त मलनाडु म नमक उत्पादन वाष्पीकरण
कचरा पृथक्करण अ भयान, क्रेन-चुंबक वाले कबाड़ याड ृ क्करण
हस्त चयन, चुंबकीय पथ
समुद्र म तेल- रसाव क सफाई िनस्तारण / ऊपरी परत उतारना
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(ख) कसान का सा ात्कार — पूछने योग्य प्रश्न:
आपके बचपन म फसल क े शग कैसे होती थी और अब कैसे होती है?
क्या आप ेशर या कंबाइन हावस्टर प्रयोग करते ह? वह अपना है, कराए का है या साझा?
क्या मशीन ओसाई भी करती है? भूसे का क्या कया जाता है?
मंडी भेजने से पहले दान क सफाई और श्रेणीकरण कैसे होता है?
अगली बुवाई के लए बीज कैसे छाँटे जाते ह?
पुराना तरीका और मशीन — कौन तेज़ है और कौन सस्ता?
आप क्या सीखगे: सद्धांत बल्कुल नह बदला — ेशर आज भी फसल को पीटता है और आज भी गरते दान के
बीच हवा फकता है। बदली है तो केवल श क्त — लकड़ी के ल े और पवन क जगह डीज़ल इंजन और पंखा।
कंबाइन हावस्टर एक ही चक्कर म काटता, ेश करता और ओसाई भी कर दे ता है।
प्र.6 वै ा नक क भाँ त सोच— आपको एक मश्रण दया गया है जसम लोहे क क ल, रेत, काली मच, कंकड़, सादा
नमक और जल ह। मश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लए आप कन- कन चरण का पालन करगे?
छह अवयव ह — इस लए एक बार म एक गुण का उपयोग क जए, और सबसे सरल अवयव पहले नका लए। पूरा क्रम इस प्रकार
है।
चरण क्या कर वध प्राप्त अवयव
1 िमश्रण पर चुंबक घुम ाइए। कीले ं उससे िचपक जाएँग ी। चुंबकीय लोहे क क ल
ृ क्करण
पथ
2 कं कड़ और काली िमच हाथ से चुन लीिजए — दोनों बड़े है ं और रंग -आकृ ित से हस्त चयन कंकड़ और काली
आसानी से पहचाने जाते है।
ं मच
3 बचे िमश्रण को िहलाइए। नमक जल में घुल जाता है; रे त नही ं घुल ती और तली में बैठ अवसादन रेत तली म; नमक
जाती है। वलयन म
4 ऊपर का स्वच्छ नमक-िवलयन उड़ेल लीिजए, िफर उसे िफल्टर-पत्र से छान लीिजए िनस्तारण और रेत (अवशेष के रूप
तािक रे त का एक कण भी न बचे। रे त सुखा लीिजए। िनस्यंद न म)
5 िनस्यंद को गरम कीिजए (या धूप में रिखए) तािक जल वाष्प बनकर उड़ जाए। वाष्पीकरण सादा नमक
6 जल भी चािहए तो वाष्प को ठं डी सतह पर ठं डा कीिजए, िजससे वह पुन: द व बन संघ नन (आसवन) जल
जाए।
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िमश्रण
—[चुंबक]→ लोहे की कीले ं
—[हस्त चयन]→ कं कड़ , काली िमच
—[बैठाकर छानना]→ रेत
—[वाष्पीकरण]→ नमक —[वाष्प का संघनन]→ जल
यही क्रम क्य , कोई और क्य नह :
चुंबक पहले, क्य क वह केवल लोहा उठाता है और कुछ नह , तथा नुक ली क ल उँ ग लयाँ डालने से पहले
नकल जाना ही अच्छा है।
हस्त चयन उसके बाद, क्य क कंकड़ और काली मच अब बची हुई सबसे बड़ी वस्तुएँ ह; इन्ह जल्द हटा दे ने
से आगे का काम आसान हो जाता है।
जल का उपयोग औज़ार क तरह इसके बाद ही होता है, क्य क तब केवल एक गुण बचता है — नमक घुलता
है, रेत नह ।
वाष्पीकरण अंत म, क्य क उसके लए ऐसा स्वच्छ वलयन चा हए जसम और कुछ तैर न रहा हो।
चतन के चरण — अपने शब्द म भ रए: “म यह अवलोकन करता/करती हूँ क इस मश्रण म बहुत भन्न आकार
के ठोस ह, एक धातु है और एक ठोस ऐसा है जो जल म लुप्त हो जाता है। म व स्मत हूँ क क्या म जल को ही
पृथक्करण का साधन बना सकता/सकती हूँ।” पुस्तक का संकेत यही मुख्य वचार है: दो से अ धक अवयव वाले
मश्रण के लए पृथक्करण क कई व धय का संयोजन करना पड़ता है।
अध्याय — एक नज़र म
यह अध्याय मल्ली और वल्ली के साथ भारत क यात्रा करता है — ह रयाणा, अहमदाबाद, पुडुचेरी, भोपाल और शलांग —
और हर पड़ाव पर मश्रण (दो या अ धक पदाथ का मेल) को पृथक करने क एक नई व ध सामने आती है।
ठोस–ठोस मश्रण को हस्त चयन (आकार, रंग और आकृ त का अंतर), े शग (पूल को पीटकर दाने अलग करना),
ओसाई/ वनोइंग (भार का अंतर, पवन ारा) और छानना (कण के आकार का अंतर) से पृथक कया जाता है।
ठोस–द्रव मश्रण के लए अवसादन (भारी अघुलनशील कण तली म बैठते ह), नस्तारण (द्रव को धीरे से उड़ेल दे ना) और
नस्यंदन (द्रव सूक्ष्म छद्र से नकल जाता है, ठोस अवशेष के रूप म रह जाता है और एक त्रत द्रव नस्यंद कहलाता है)
प्रयोग होते ह।
घुले हुए ठोस को छानकर नह नकाला जा सकता। उसे वाष्पीकरण से प्राप्त करते ह — जैसे समुद्र कनारे के नमक के खेत
म। वाष्प को ठं डा करने पर वह पुन: द्रव बन जाती है; यह संघनन है, और वाष्पीकरण के बाद संघनन करने से नमक और जल
— दोन वापस मल जाते ह।
अध्याय के अंत म दो और व धयाँ आती ह — मथना, जससे दही से हल्का मक्खन अलग होता है, और चुंबक य
पृथक्करण, जससे ढे र म से लोहा चुंबक ारा ख च लया जाता है।
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हम पदाथ को केवल दो कारण से पृथक करते ह — या तो कसी अनुपयोगी अवयव को हटाने के लए (दाल से कंकड़,
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अनाज से भूसी) या दो भन्न परंतु उपयोगी अवयव को अलग-अलग पाने के लए (मक्खन और छाछ, नमक और जल)।
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agपुl नरावृ त्त
त्व रत
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वध क्या पृथक करती है कस गुण का उपयोग भारतीय दै नक उदाहरण
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e रंग और आकृ त का
sआकार,
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ag अंतर
हस्त चयन ठोस में से ठोस, जब एक अवयव कम चावल या दाल से कंकड़ चुनना; पुलाव से
मात्रा में हो साबुत काली मच नकालना
co m
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े शग कटी फसल के पूल ों से अनाज के दाने ढ ले जुड़े होते ह, पीटने से छू ट कसान का गेहूँ के पूल को ल े पर पीटना;
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दाने जाते ह ेशर मशीन
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.co भारी अनाज से हल्की भूसी aसूपgसे ेश कया गेहूँ वायु क दशा म गराना
ग)em
ओसाई भार का अंतर — पवन हल्के भाग
( वनोइंs
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को उड़ा ले जाती है
छानना िभन्न आकार के कणों वाले दो ठोस कण के आकार और चालनी के आटे से चोकर छानना; नमाण स्थल पर रेत
m a s
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छद्र के आकार का अंतर से कंकड़ छानना
a s emघनत्व का अंतर — भारी कण तली
gl म बैठते ह
अवसादन द व में से भारी अघुल नशील ठोस बतन क तली म चाय क प त्तयाँ बैठना; घड़े
a
(पहला चरण) म म बैठना
m
नस्तारण घनत्व का अंतर; तरछा करने पर बना चालनी के चाय उड़ेलना; चावल-दाल
co
बैठे हुए ठोस से ऊपर का स्वच्छ द व,
या न िमलने वाले दो द व अवसाद नीचे रह जाता है
m .
धोना; जल पर तैरता तेल
m दव में से अघुलनशील ठोस, पूण रूप l a sकe चालनी; मटके पर बँधा मलमल;
.co से ag
नस्यंदन आकार का अंतर — ठोस नस्यंदक चाय
a s em के छद्र से बड़ा होता है क प म रखा फल्टर-पत्र
l
ag वाष्पीकरण िवलयन में से घुल ा हुआ ठोस द्रव वाष्प बन जाता है; घुला ठोस उथले ग म समुद्र जल से नमक; काढ़े के
नह बनता लए जड़ी-बू टयाँ सुखाना
se m
com g l a
m . ठं डा होने पर वाष्प द्रव म बदल a
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as जाती है
संघनन जलवाष्प से पुन: जल उबलती केतली के ऊपर रखी ठं डी प्लेट पर
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जल क बूँद
मथना दही से मक्खन (हल्का) घनत्व का अंतर — वसा के कण मथनी से दही मथना; बजली क मथनी या
जुड़कर ऊपर तैरते ह
co m
मक्सी से छाछ बनाना
m .
a sकeे चुंबक ारा लोहा नकालना
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चुंबक य चुंबक य गुण म भन्नता बुरादे से लोहे क क ल उठाना; कबाड़ से क्रेन
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अचुंबकीय पदाथ ं से चुंबकीय पदाथ
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पृथक्करण
a
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