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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 10: सजीव— वशेषताओं का
अन्वेषण
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
177 – 199 21 78 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 74 pages
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: सजीव— वशेषताओं का
अन्वेषण
कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत NCERT समाधान। इसम
क्रयाकलाप 10.1 से 10.6 तक क सभी ता लकाएँ भरी हुई ह, पृष्ठ 178 से 195 तक के सभी पाठ्य प्रश्न हल ह, तथा पृष्ठ 197 से 199 तक के
आइए, और अ धक सीख, और भी सीख और आइए, रचना कर के सभी प्रश्न स म लत ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 6) 177 – 199
खं ड प्रश्न
21 78
माध्यम
हन्द
क्रयाकलाप 10.1: आइए, अं कत कर — पृष्ठ 178
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
हमारे आस-पास क सजीव और नज व वस्तुए ँ
क्रयाकलाप
प्र.1 इन्ह ता लका 10.1 म सूचीबद्ध कर और आप अपनी समझ के आधार पर इन्ह सजीव या नज व के रूप म
पहचान और स्तंभ II म भर।
(I) (II) (III) (IV) (V)
नाम मेरा अनुमान (सजीव या कारण या सही सही उत्तर का कारण या
नज व) टप्पणी उत्तर टप्पणी
प सल नज व
पुस्तक
कबूतर सजीव
कार
पौधे
अन्य
ता लका 10.1, पृष्ठ 178 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
अपनी कक्षा म चार ओर दे खए और जो कुछ दखाई दे उसे सूचीबद्ध क जए। फर प्रत्येक को सही समूह म र खए। पुस्तक म द
गई पाँच वस्तुओं के साथ दो और वस्तुएँ जोड़कर ता लका इस प्रकार भरी जाएगी—
(I) नाम (II) मेरा अनुमान (सजीव या नज व)
प सल िनज व
पुस्तक िनज व
कबूतर सजीव
कार िनज व
पौधे (कोने म रखा मनी प्लांट) सजीव
अन्य— द वार पर छपकली सजीव
अन्य— चॉक / डस्टर िनज व
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स्तंभ II को “मेरा अनुमान” क्य कहा गया है: यहाँ आपसे अपेक्षा है क आप कक्षा म चचा होने से पहले अपनी
समझ के अनुसार वस्तुओं को बाँट। आगे पृष्ठ 181 पर आप लौटकर स्तंभ IV और V म सही उत्तर भरगे। य द
आपका पहला अनुमान गलत नकले तो यह भूल नह , ब ल्क क्रयाकलाप का ही एक भाग है।
संकेत: जन वस्तुओं पर संदेह हो उन्ह अवश्य ल खए— जैसे बीज, लकड़ी का ल ा, पंख या अंडा। कक्षा क
चचा इन्ह वस्तुओं से रोचक बनती है।
प्र.2 इन्ह सजीव या नज व म वभा जत करने के कारण का आधार स्तंभ III म भर।
कारण म कसी वशेषता का नाम आना चा हए— केवल “यह जी वत लगती है” कहना पयाप्त नह है।
(I) (II) मेरा (III) कारण या टप्पणी
नाम अनुमान
प सल नज व न वृिद्ध करती है, न भोजन ले ती है, न श्वसन करती है और न ही दू स री पेंिसल उत्पन्न कर सकती है।
उपयोग से के वल छोटी होती जाती है।
पुस्तक नज व अपना फटा पष्ृ ठ स्वयं नही ं जोड़ती; छू ने पर कोई अनुिक्रया नही ं करती।
कबूतर सजीव स्वयं उड़ता है, दाना खाता है, चूजे से बड़ा होता है, श्वसन करता है, अंडे दे ता है और ताली बजाने पर उड़
जाता है।
कार नज व गित तो करती है, पर तभी जब चालक उसे चलाए। न वृिद्ध करती है, न भोजन ले ती है और न ही उससे
कोई छोटी कार जन्म ले ती है।
पौधे सजीव ऊँचाई बढ़ ती है, जल एवं वायु की आवश्यकता होती है, पित्तयाँ िखड़की की ओर मुड़ जाती है ं और बीज
उत्पन्न होते है।
ं
छपकली सजीव पकाश जलते ही भाग जाती है, कीट खाती है, वृिद्ध करती है और अंडे दे ती है।
चॉक नज व पयोग से िघसती जाती है, जो वृिद्ध के ठीक िवपरीत है; अन्य कोई लक्षण भी नही ं िदखाती।
याद रखने योग्य नयम: कोई वस्तु तभी सजीव है जब उसम जीवन क सभी वशेषताएँ एक साथ पाई जाएँ।
केवल एक लक्षण— जैसे कार क ग त— कभी पयाप्त नह होता।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 178
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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10.1 वह क्या है जो सजीव को नज व से पृथक करता है?
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ता लका 10.1 को दे ख। आपके वचार से एक प सल नज व और एक कबूतर सजीव क्य है?
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(I) (II) (III) (IV) (V)
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नाम मेरा अनुमान (सजीव या कारण या सही सही उत्तर का कारण या
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नज व) उत्तर टप्पणी
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agl 10.1, पृष्ठ 178 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
ता लका
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c तर म जीवन क प्रत्येक वशेषता पाई जाती है और प सल म एक भी नह
क्य क.कबू a g। दोन क तुलना क जए—
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स्वयं ग त करना — चल ता है, उ ड़ता है, गद न घुम ाता है नह — तभी हलती है जब उठाई जाए
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भोजन क आवश्यकता हाँ— द ाना बीज जल नह
वृ द्ध — चूजे से पूण कब ूतर बनता है नह — केवल छोट होती जाती है
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श्वसन नह
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हाँ— बीट नह
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agl उ पन के प्र त अनु क्रया — ताल ी बजते ही उ ड़ जाता है नह
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जनन हाँ— अंडे दे ता है नह — प सल से छोट प सल कभी नह बनती
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मृत्यु नह — वह केवल टू ट सकती है या समाप्त हो सकती है
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संपूण समूह ही क्य दे ख: छ लने पर प सल का रूप बदलता है और मेज से लुढ़कने पर वह ग त भी करती है—
कतु ये प रवतन प सल के भीतर से नह आते। सजीव म ये सारे काय शरीर स्वयं करता है।
प्र.2 आपके अनुसार सजीव प्रा णय और नज व वस्तुओं म क्या अंतर होता है?
अंतर को जोड़े बनाकर ल खए। अध्याय इन्ह अंतर पर आधा रत है।
सजीव नज व
स्वयं गित करते है ं (या कम से कम शरीर के िकसी भाग में गित दश ते है)ं तभी ग त करते ह जब कोई बाहरी बल या व्य क्त उन्ह चलाए
ऊज , वृिद्ध और मरम्मत के िलए भोजन की आवश्यकता होती है भोजन क कोई आवश्यकता नह
भीतर से वृिद्ध करते है ं और यह वृिद्ध स्थायी होती है वृ द्ध नह करते; केवल बाहर से कुछ जुड़ सकता है
श्वसन करते है—
ं वायु ले क र भोजन से ऊज मुक्त करते है ं श्वसन नह करते
अपिशष्ट पदाथ ं का उत्सजन करते है ं शरीर से कोई अप शष्ट नह नकलता
स्पश, पकाश, ताप, ध्विन जैसे उ ीपनों के पित अनुिक्रया करते है ं स्वयं कोई अनु क्रया नह करते
जनन करते है ं और अपनी तरह के नवजात उत्पन्न करते है ं अपने जैसी दूसरी वस्तु उत्पन्न नह कर सकते
एक िनिश्चत जीवन-काल होता है और अंततः मर जाते है ं मरते नह ; केवल घसते, टू टते या समाप्त होते ह
क्या आप जानते ह? अध्याय के आरंभ म घ घे का खोल इसी प्रश्न का सुंदर उदाहरण है। खोल हलता नह , फर भी
वह एक सजीव घ घे के शरीर का अंग है— अथात नणय पूरे जीव को दे खकर करना चा हए, उसके कसी स्थर
भाग को दे खकर नह ।
प्र.3 पहचाने गए सजीव म क्या समानताएँ ह?
अपनी सूची के सजीव को दे खए— कबूतर, पौधा, छपकली, आपके सहपाठ । इन सबम ये समानताएँ मलगी—
सभी कसी न कसी प्रकार क ग त दशाते ह— पूरे शरीर क या कसी भाग क ;
सभी को जी वत रहने के लए भोजन, जल और वायु चा हए;
सभी वृ द्ध करते ह और शशु से वयस्क बनते ह;
सभी श्वसन करते ह;
सभी शरीर से अप शष्ट का उत्सजन करते ह;
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सभी अपने प रवेश के प रवतन के प्र त अनु क्रया करते ह;
सभी जनन करते ह जससे उनक जा त चलती रहती है;
सभी एक न त अव ध के बाद मर जाते ह।
यह सूची इतनी उपयोगी क्य है: कबूतर और मनी प्लांट दे खने म बल्कुल भन्न ह और दोन आपसे भी भन्न ह।
फर भी तीन म ये आठ लक्षण मलते ह। इसी लए इन्ह सजीव क वशेषताएँ कहा जाता है— ये आकार, आमाप
और आवास के सारे भेद के पार जाकर लागू होती ह।
प्र.4 आपने पहचाना होगा क ग त एक ऐसी समानता है जो सभी सजीव म होती है। आपने कार को सड़क पर चलते
हुए दे खा होगा। तो क्या इसका अथ यह है क कार सजीव होती है? ऐसे काय को सूचीबद्ध क जए जो आप तो
कर सकते ह ले कन एक कार नह कर सकती।
नह , कार सजीव नह है। वह ग त अवश्य करती है, कतु केवल ग त से कोई वस्तु सजीव नह हो जाती— और चालक के बना
कार स्वयं चल भी नह सकती।
जो काय म कर सकता/सकती ँ क्या कार यह कर सकती है?
रोट खाकर उसे भोजन के रूप म उपयोग करना — पेटोल ई ंधन है, भोजन नही;ं कार उ सका पाचन नही ं कर सकती
नही ं
प्र तवष लंबा होना — छोटी कार कभी बड़ी कार नही ं बनती
नही ं
श्वास लेना और छोड़ना नही ं
पसीना आना या मूत्र त्यागना — उ सका ध ुआँ ई ंधन के जल ने से िनकल ता है, शरीर का अपिशष्ट नही ं है
नही ं
गरम प्याले से हाथ हटा लेना — उ से कु छ अन ुभव ही नही ं होता
नही ं
छोटा भाई या बहन होना — कारे ं कारखाने में बनती है,ं जन्म नही ं ले ती ं
नही ं
घुटने का घाव स्वयं भर लेना — िपचका भाग िमस्त्री ही ठीक करता है
नही ं
जब चाहूँ स्वयं चल पड़ना — हर बार चाल क चािहए
नही ं
नष्कष: ग त एक संकेत तो है, कतु कमजोर कसौट है। नद , पंखा और पतंग— तीन ग त करते ह और तीन
नज व ह। नणय से पहले सभी वशेषताओं क जाँच क जए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 179
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10.1— ग त, वृ द्ध एवं पोषण
प्र.1 ऐसी कौन-सी वशेषताएँ ह जो आपको एक कार से अलग करने म सहायता करती ह? उदाहरण के लए, कार के
आमाप (आकार) म अपने आप वृ द्ध नह होती है। क्या इसका तात्पय है क वह नज व है? अब, कार को नज व
के रूप म वग कृत करने के लए आपने कन वशेषताओं का उपयोग कया?
मुझे कार से अलग करने वाली वशेषताएँ ह— वृ द्ध, पोषण, श्वसन, उत्सजन, उ पन के प्र त अनु क्रया, जनन और मृत्यु।
“कार वृ द्ध नह करती— तो क्या वह नज व है?” केवल इसी एक बात से नह । अनेक सजीव म भी वृ द्ध रुक जाती है— पूरी
बढ़ चुक नीम अथवा एक वयस्क व्य क्त के आमाप म अब कोई वशेष प रवतन नह होता। अतः “वृ द्ध नह होती” अकेले कुछ
सद्ध नह करता।
कार को नज व कहने के लए मने वास्तव म इन वशेषताओं का उपयोग कया—
वह कसी छोट कार से बड़ी नह हुई— कारखाने से ही अपने अं तम आमाप म नकली।
वह भोजन नह लेती; पे ोल या डीजल ईंधन है, ऐसा भोजन नह जससे शरीर बने।
वह श्वसन नह करती— भीतर भोजन से ऊजा मुक्त करने के लए वायु का उपयोग नह होता।
वह शरीर का अप शष्ट उत्स जत नह करती।
वह ताप, प्रकाश या स्पश के प्र त स्वयं अनु क्रया नह करती।
वह जनन नह कर सकती।
वह मरती नह — उसे केवल कबाड़ म डाल दया जाता है।
प्रश्न इस प्रकार क्य पूछा गया है: पुस्तक आपको सावधान रहना सखा रही है। एक वशेषता का अभाव “ नज व”
कहने के लए पयाप्त है, कतु यह न त क जए क वह वशेषता सचमुच अनुप स्थत है, केवल रुक हुई नह ।
वयस्क म वृ द्ध रुक है; कार म वह कभी थी ही नह ।
प्र.2 ऐसी कौन-सी सामान्य वशेषताएँ ह जो सजीव को नज व वस्तुओं से पृथक करती ह?
अध्याय म आठ वशेषताएँ द गई ह। इन्ह एक क्रम म याद क जए— यही पूरे अध्याय का आधार है।
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गित → पोषण → वृिद्ध → श्वसन → उत्सजन → उ ीपन के पित अनुि या → जनन → मृत्यु
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वशेषता कैसे दखाएँ जंतु म पौधे म
गत स्थान बदलते दे िखए, या िकसी भाग को तार से उ ड़ ती गौरै या पातः िखल ता कमल ; डंडे पर िल पटती ल ौकी
िहलते दे िखए की ल ता
पोषण दे िखए वह भोजन के रूप में क्या ग हण करता पत्ते खाती बकरी हरी पित्तयों में भोजन बनना ; डोसेर ा का कीट
है पकड़ ना
वृ द्ध कु छ सप्ताह बाद उसी जीव को मािपए िपल्ले का प ा छोटा पड़ गील ी रुई पर चने का नवोिद् भद पितिद न मािपए
जाना
श्वसन श्वासे ं िगिनए, या पेट की गित दे िखए गाय के पेट का ऊपर नीचे - पित्तयों क -
े रंध ों से वाय ु का आना जाना
होना
उत्सजन शरीर से िनकलने वाला अपिशष्ट दे िखए कमीज पर पसीने के धब्बे ; पातः घास और ग ुल ाब की पित्तयों पर पानी की
मूत्र बदे
ूँ ं
अनु क्रया हल्का उ ीपन दे क र दे िखए काँटे से पैर त ुरंत हट जाना छूने पर छु ई-मुई की पित्तयों का बंद होना
जनन अपनी तरह के नवजात ढू ँिढ़ ए मुग के साथ चूजे बीजों से भरी फ ल ी
मृत्यु ये सभी िक्रयाएँ सदा के िलए रुक जाती है ं िखड़ की पर पड़ ा मरा हुआ फ ल बनने के बाद पील ा पड़ कर सूखता फ ल ी
कीट का पौधा
प्र.3 क्या हम सजीव और नज व के बीच अंतर करने के लए ग त को एक वशेषता मान सकते ह? अपने आस-पास
क पाँच ऐसी वस्तुओं क सूची बनाइए जो अपने आप ग तमान हो सकती ह। क्या आपके अनुसार सूचीबद्ध क
गई पाँच वस्तुए ँ केवल इस लए सजीव ह क्य क वे स्वयं ग तमान हो सकती ह?
हाँ, ग त एक वशेषता तो है— कतु उसे अकेले कसौट नह बनाया जा सकता।
अपने आप ग तमान होने वाली पाँच वस्तुए—
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1. सड़क पार करता कुत्ता
2. रसोई क अलमारी पर पं क्त म चलती च ट
3. पंखा ( स्वच चालू करने पर)
4. नद अथवा नाली म बहता वषा का जल
5. घड़ी क सेकंड वाली सुई (या चाबी वाली खलौना गाड़ी)
क्या पाँच सजीव ह? नह — केवल दो।
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वस्तु सजीव? कारण
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खाता है, वृिद्ध करता है, श्वसन करता है, िपल्ले जनता है
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सजीव
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सजीव भोजन ढोती है, अंडे से बड़ी होती है, स्पश पर तुर ंत अनुिक्रया करती है
पंखा िव तु िमलने पर ही घूम ता है; न वृिद्ध करता है, न जनन
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नद िनज व भूिम की ढाल के कारण बहती है
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कमानीgया से ल से चलती है
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वास्त वक अंतर: सजीव अपने शरीर के भीतर उत्पन्न बल से ग त करता है और उसक ऊजा भोजन से आती है।
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पंखे, नद और घड़ी— तीन को बाहर से धक्का चा हए— व ुत, गुरुत्व या कमानी।
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अब जंतुओं क भाँ त पौधे तो स्वयं एक ान से दूसरे ान पर नह जा पाते तो क्या आप उन्ह सजीव मानते ह?
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हाँ, पौधे न श्चत रूप से सजीव ह। वे चलते- फरते नह , कतु अनेक प्रकार क ग तयाँ प्रद शत करते ह और जीवन क शेष सभी
वशेषताएँ भी दखाते ह।
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पौध म दे खी जा सकने वाली ग तयाँ—
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क .टभक्षी पौधे। ड्रोसेरा क प त्तयाँ तश्तरी के आकार क होती ह जनम असमान लंa
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फूल का खलना और बंद होना। कमल और सूरजमुखी प्रातः खलते ह; रात क रानी अँधेरे के बाद खलती है।
se m बाई वाले बाल जैसे अनेक तंतु होते ह
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जनके छोर पर चप चपा पदाथ होता है। जब कोई क ट तश्तरी क सतह को स्पश करता है, बाल अंदर क ओर मुड़ जाते ह
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और अपने चप चपे छोर से क ट को जकड़ लेते ह। क टभक्षी पौधे अपने पोषण के लए क ट पर नभर होते ह।
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सोती हुई प त्तयाँ। छु ई-मुई छू ने पर बंद हो जाती.हैc;oआँवला और इमली क प त्तयाँ सूयास्त के बाद पास आ जाती ह।
आरोही लताएँ अपने समीप रखी कसी वस्तु के चार ओर लपट जाती ह— जैसे लौक , करेला और मनी प्लांट।
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वृ द्ध क ग त। प्ररोह प्रकाश क ओर मुaड़sताeहै, जड़ नीचे क ओर बढ़ती है (यह आप क्रयाकलाप 10.3 म सद्ध करगे)।
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पौधे एक ही ान पर क्य रहते ह: पौधा अपना भोजन सूय के प्रकाश, वायु और जल से स्वयं बनाता है और ये
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तीन उसे वह मल जाते ह जहाँ वह खड़ा है। जंतु को भोजन खोजने जाना पड़ता है, इस लए उसे चलना आवश्यक
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है। एक स्थान पर टके रहना नज व होने का नह , जीने क एक भन्न शैली का प्रमाण है।
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प्र.5 अन्य क टभक्षी पौध म ग त के प्रक्रम का अवलोकन करने का प्रयास क जए।
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क टभक्षी पौधे ऐसी म म उगतेaहgजसम नाइ ोजन कम होती है, इस लए वे अपने पोषण का एक भाग क ट से प्राप्त करते ह।
प्रत्येक पौधे का जाल अलग ढं ग से काम करता है।
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पौधा जाल कैसा दखता है जो ग त आप दे ख सकते ह
ोसेरा (सन ू) तश्तरी के आकार की पत्ती, िजस पर असमान लंबाई तंत ु अंद र की ओर मुड़ ते है ं और िचपिचपे छोर से
के बाल जैसे तंत,ु छोर पर िचपिचपे कीट को जकड़ ले ते है ं
नेप थस (घटपण , मेघालय घड़े जैस ी पत्ती िजस पर ऊपर एक ढक्कन होता है ढक्कन मुँह पर बंद हो जाता है ; कीट िचकनी
म) भीतरी द ीवार से िफ सल जाता है
यू कुले रया (ब्लैडरवट, जल के भीतर छोटी थैिलयाँ िजन पर एक कपाट होता है कपाट क्षण भर में ख ुल कर छोटे जीव को भीतर
तालाब म) खीच
ं ले ता है
वीनस फ्लाई ै प (गमले म पत्ती के दो कब्जेद ार भाग िजन पर कड़े रोम होते है ं रोमों को द ो बार छूने पर द ोनों भाग प ुस्तक की
उगाया जाता है) भाँित बंद हो जाते है ं
स्वयं दे खए: य द व ालय के बगीचे म घटपण या ड्रोसेरा हो तो पत्ती को मा चस क तीली से हल्के-से छू कर कुछ
मनट दे खए। पौधे को बार-बार न छे ड़ए— व्यथ बंद होने से पौधे क ऊजा नष्ट होती है।
प्र.6 आप अपनी तुलना अपने बचपन क तस्वीर से कर। क्या आप वह पोशाक पहन सकते ह जो आप चार वष पहले
पहनते थे?
िशश ु छोटा ब चा च् बड़ा ब चा च्
शशु म वृ द्ध — पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 179 पर इस प्रश्न के साथ दए चत्र का पुनः चत्रण (redrawn sketch)।
नह । वह पोशाक अब बहुत छोट और तंग पड़ेगी।
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इसका कारण वृ द्ध है। चार वष म मेरे हाथ-पैर लंबे हुए, कंधे चौड़े हुए और पूरा शरीर भारी हुआ। यह बढ़ोतरी बाहर से नह आई
— मेरे शरीर ने भोजन से मले पदाथ से स्वयं नए भाग बनाए।
क्या बदला तब (7 वष) अब (11 वष)
लंबाई लगभग 120 सेमी ल गभग 143 से मी
जूते का नाप छोटा -
द ो तीन नाप बड़ ा
दाँत दूध के दाँत अिधकांश स्थायी द ाँतों से बद ल गए
वृ द्ध जीवन का लक्षण क्य है: शरीर शून्य से नए भाग नह बना सकता। भोजन से ही क ा पदाथ और ऊजा
दोन मलते ह। चार वष से आलमारी म टँ गी कमीज आज भी ठ क उतनी ही है— उसके पास स्वयं को बढ़ाने का
कोई साधन नह ।
यह क जए: दरवाजे क चौखट पर प सल से अपनी लंबाई और उसके आगे त थ अं कत क जए। छह माह बाद
फर क जए। दोन नशान के बीच का अंतर वही वृ द्ध है जसे आपने स्वयं मापा।
प्र.7 पौधे और अन्य सजीव भी वृ द्ध करते ह। क्या हम यह मान सकते ह क वृ द्ध सजीव क एक वशेषता है?
हाँ। वृ द्ध सजीव क एक वशेषता है— प्रत्येक सजीव अपने जीवन क कसी न कसी अवस्था म वृ द्ध करता है।
गीली रुई पर रखा चने का बीज तीन दन म नवो द और तीन सप्ताह म कई प त्तय वाला पौधा बन जाता है।
आँगन म लगा आम का पौधा घर से भी ऊँचा वृक्ष बन जाता है।
बछड़ा गाय बनता है; टै डपोल मढक बनता है।
कतु सावधान— “बड़ा हो जाना” सदै व वृ द्ध नह होती। बालू का ट ला, बफ क लटकन और तश्तरी म तू तया
(कॉपर सल्फेट) का क्रस्टल— ये सब बड़े होते ह। पर इनम पदाथ बाहर से जुड़ता है। सजीव म नया पदाथ भोजन
के रूप म लया जाता है, शरीर के भीतर बदला जाता है और शरीर का ही अंग बनता है। इसी लए सजीव क वृ द्ध
स्थायी होती है और एक न त क्रम म चलती है, जब क बालू का ट ला एक ही दन म उड़ भी सकता है।
परीक्षा के लए संकेत: य द प्रश्न कहे “क बढ़ता है, अतः क सजीव है”, तो पहले वृ द्ध का प्रकार जाँ चए। भीतर से
वृ द्ध → सजीव। बाहर से जुड़ाव → नज व।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 180
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10.1— पोषण, श्वसन एवं उत्सजन
प्र.1 सजीव को अपनी वृ द्ध और वकास के लए भोजन (पोषण) क आवश्यकता होती है। ऐसे पाँच सजीव को
सूचीबद्ध क जए जन्ह वृ द्ध के लए भोजन क आवश्यकता होती है।
प्रत्येक सजीव को भोजन चा हए। भारतीय घर के आस-पास के पाँच उदाहरण—
सजीव भोजन के रूप म क्या लेता है
मनुष्य (स्वयं म) चावल, रोटी, दाल, सब्ज़ी, दू ध
गाय / भस घास, चारा, खली, भूस ा
गौरैया दाना, छोटे कीट
चट चीनी, रोटी के टुक ड़े, मरे हुए कीट
आम का पेड़ (कोई भी हरा पौधा) हरी पित्तयों में सूय के पकाश, जल और वायु से स्वयं भोजन बनाता है; िम ी से खिनज ले ता है
वृ द्ध के लए भोजन क्य चा हए: भोजन तीन काम करता है— काय करने के लए ऊजा दे ता है, शरीर के नए
भाग बनाने के लए पदाथ दे ता है और क्ष त क मरम्मत के लए सामग्री दे ता है। भोजन रुका तो वृ द्ध भी रुक जाती
है।
प्र.2 अब, ऐसी प्र क्रया के वषय म सो चए जसके बना हम जी वत नह रह सकते। सामान्य रूप से चलने के बाद,
दौड़ने के बाद और थोड़ा नृत्य करने के बाद आपके ारा प्र त मनट ली जाने वाली श्वास क संख्या ग नए।
आँकड़ को अं कत क जए। क्या आप प्रत्येक त के बाद श्वास क संख्या म कोई अंतर दे खते ह?
वह प्र क्रया है श्वसन। घड़ी लेकर ग नए— एक बार श्वास लेना और छोड़ना मलाकर एक श्वास है।
त श्वास प्र त मनट (कक्षा 6 के सामान्य व ाथ म) मुझे कैसा लगा
चुपचाप बैठे हुए (आरंभ से पहले) ल गभग 18–22 सामान्य
सामान्य रूप से चलने के बाद ल गभग 22–26 थोड़ा तेज़
थोड़ा नृत्य करने के बाद ल गभग 26–32 गरमी लगी, श्वास गहरी हुई
दौड़ने के बाद ल गभग 35–45 हाँफना, हृदय तेज़ धड़कना
हाँ, स्पष्ट अंतर दखाई दे ता है। जतना क ठन काय, उतनी अ धक श्वास प्र त मनट— और प्रत्येक श्वास भी गहरी होती है।
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ऐसा क्य होता है: पे शयाँ भोजन और वायु के उपयोग से ऊजा प्राप्त करती ह। दौड़ने म बैठने क तुलना म कह
अ धक ऊजा खच होती है, इस लए शरीर को अ धक वायु, और वह भी तेज़ी से चा हए। यही कारण है क दौड़ के
बाद हाँफ आती है और व ाम करते ही श्वास धीमी हो जाती है।
स्वयं जाँ चए: तीन मत्र के आँकड़े लेकर औसत नका लए। संख्याएँ व्य क्त-व्य क्त म भन्न ह गी, कतु क्रम—
व ाम < चलना < नृत्य < दौड़— सबम एक जैसा मलेगा।
प्र.3 क्या आपने कुत्ते, बल्ली, गाय और भस जैसे अन्य जंतुओं क श्वसन प्र क्रया पर ध्यान दया है? जब वे व ाम
कर रहे ह , उनके पेट क ग त को ध्यान से दे खए।
हाँ। व ाम करते हुए जंतु म श्वास लेना दूर से भी सरलता से दखाई दे ता है।
छाया म बैठ गाय या भस को दे खए— उसका पेट नय मत रूप से ऊपर-नीचे होता है, लगभग 15 से 25 बार प्र त मनट।
सोए हुए कुत्ते क छाती और पेट म वही धीमी ग त दखती है। धूप म दौड़ने के बाद वह जीभ नकालकर हाँफता है और बहुत
तेज़ श्वास लेता है।
द वार पर ऊँघती बल्ली इतनी हल्क श्वास लेती है क ध्यान से दे खना पड़ता है।
जल म मछली मुँह और क्लोम-ढक्कन खोलती-बंद करती है— यही जल म घुली वायु लेने का उसका ढं ग है।
पेट क्य हलता है: श्वास भीतर ख चने पर वक्ष-गुहा बड़ी होती है और नीचे के अंग नीचे दबते ह, जससे पेट बाहर
उभरता है। श्वास छोड़ने पर सब पहले जैसा हो जाता है। यह ग त सीधा प्रमाण है क जंतु श्वसन कर रहा है— अथात
वह जी वत है।
यह क जए: पीठ के बल लेटकर पेट पर एक हल्क पुस्तक र खए और उसे ऊपर-नीचे होते दे खए। एक मनट म
ग नए— आपने स्वयं को छु ए बना अपनी श्वास-दर माप ली।
प्र.4 श्वसन प्र क्रया म जब हम श्वास अंदर क ओर ख चते ह, वायु बाहर से हमारे शरीर म आती है। जब हम श्वास बाहर
नकालते ह तो वायु हमारे शरीर से बाहर क ओर जाती है। श्वास लेना श्वसन प्र क्रया का एक भाग है। क्या पौधे
भी श्वसन करते ह?
हाँ— सभी सजीव श्वसन करते ह और पौधे भी इसके अपवाद नह ह।
पौधा यह कैसे करता है: पौधे क प त्तय क सतह पर छोटे -छोटे छद्र होते ह जन्ह रंध्र कहते ह। ये छद्र पौधे के शरीर म वायु
अंदर लेने और बाहर करने म सहायता करते ह। जड़ म के कण के बीच क वायु लेती ह और काष्ठीय तन म भी अपने सूक्ष्म
छद्र होते ह।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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हम पौधा
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कस माग से
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नाक और मुँह
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पत्ती की सतह के रंध (और जड़ों की सतह)
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कोई दखने वाली ग त?
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छाती और पेट ऊपर-नीचे होते है ं कोई नही ं— आदान-पदान मौन और बहुत धीमा होता है
क्या रात म रुक जाता है? नही ं नही ं— पौधा िदन-रात श्वसन करता है
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यह क जए— जैसा पुस्तक सुझाती है: अपने व ालय क व रष्ठ कक्षाओं के व ा थय से अनुरोध क जए क वे
ag(रीओ, मनी प्लांट या लली) क नचली सतह क पतली झल्ली
सूक्ष्मदश से रंध्र दखाएँ। कसी ताज़ी पत्ती
उतारकर स्लाइड पर जल क एक बूँद के साथ र खए। आपको मुँह जैसे सूक्ष्म छद्र दखगे, प्रत्येक दो घुमावदार
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को शकाओं के बीच।
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एक m .c भ्रम दूर क जए: पौधा सूय के प्रकाश म भोजन बनाता है और श्वसनaवह g हर समय करता है। ये दो
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सामान्य
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अलग-अलग प्रक्रम ह। तेज़ धूप म भोजन बनना बहुत तेज़ होता है, इसी लए प्रायः वही ध्यान म आता है।
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क्या आपने ीष्मकाल के दौरान कमीज पर काँख के आस-पास पड़ने वाले सफेद धब्ब को दे खा है?
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प्र.5
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हाँ— और ये धब्बे उत्सजन का प्रमाण ह।
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गरमी म.c
ये धब्बे पसीने के कारण पड़ते ह। शरीर से अप शष्ट पदाथ के रूप म नकलने वाले पसीने म जल और लवण होते ह। ग्रीष्म क
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जल उड़ जाता है और लवण कपड़े पर सफेद घेरे के रूप म रह जाता है।
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शरीर से अपिशष्ट उत्पाद का िन ष्क ासन = उत्सजन
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जंतुओं म उत्सजन के एक उत्पाद के रूप म मूत्र भी न मत होता है।
श्वास के साथ नकलने वाली अप शष्ट वायु भी बाहर कर द जाती है।
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शरीर को अप शष्ट बाहर क्य करना पड़ता है: सजीव शरीर के भीतर लगातार चलने वाली क्रयाओं से ऐसे पदाथ
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बनते रहते ह जो अब कसी काम के नह , और कुछ तो जमा होने पर हा नकारक भी होते
e m ह। उत्सजन उन्ह बाहर कर
. a glकaु छ घ टत ही नह हो रहा।
cदे तoाmहै। प सल या कुस म ऐसा कोई अप शष्ट नह बनता, क्य क उनके भीतर
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क्या आप जानते ह? पसीना शरीर को ठं डा भी करता है। जल के वा ष्पत होते समय वह त्वचा से ऊष्मा ले लेता है
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— ठ क उसी कारण से जससे मटका जल को ठं डा रखता है।
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प्र.6 क्या आप जानते ह क पौधे भी उत्सजन करते ह?
हाँ। पुस्तक ऐसे दृश्य क ओर संकेत करती है जो आपने प्रायः कसी सद या वषा क सुबह दे खा होगा।
पौधे प त्तय क सतह पर अ त रक्त जल और ख नज को सूक्ष्म बूँद के रूप म उत्स जत करते ह— उदाहरण के लए घास
और गुलाब। सूय दय के तुरंत बाद लॉन दे खए: घास क हर पत्ती के सरे और कनार पर जल क नन्ही बूँद सजी मलगी।
पौधे अप शष्ट कैसे नकालते ह कहाँ दखाई दे ता है
पत्ती के िसरे और िकनारों पर घुले खिनजों सिहत अितिरक्त जल की बूदँ े ं पातःकाल घास , ग ुल ाब और अरबी की पित्तयाँ
रंध ों से अपिशष्ट गैस ों का िनकलना िद खाई नही ं दे ता
अपिशष्ट का पुर ानी पित्तयों और छाल में जमा होकर िगर जाना पतझड़ में िगरी पित्तयाँ; यूके िल प्टस और अज ुन की उ तरती छाल
तने से गोंद और राल का िरसना बब ूल या नीम के तने पर गोंद ; चीड़ पर राल
स्वयं जाँ चए: इन बूँद को ओस समझने क भूल न क जए। ओस हर ठं डी सतह पर जमती है— पत्थर और स्कूटर
क सीट पर भी। उत्सजन क बूँद पत्ती के सरे और कनार पर पं क्तबद्ध होती ह, जहाँ शराएँ समाप्त होती ह—
और ये तब भी बनती ह जब वायु ठं डी न हो।
अध्याय का नष्कष: सभी सजीव उत्सजन करते ह। जंतु पसीने और मूत्र ारा, पौधे बूँद , गरती प त्तय , ग द
और राल ारा— कतु करते सभी ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 180 और 181
10.1— उ पन, अनु क्रया, जनन एवं मृत्यु
प्र.1 य द बना जूते पहने घूमते हुए अप्रत्या शत रूप से आपका पैर काँटे जैसी कसी नुक ली वस्तु पर पड़ जाए या
आप गलती से चाय का गरम प्याला छू ल, तो आपक प्र त क्रया क्या होगी? आप भी तीन उ पन और उनके
प्र त आपके शरीर म होने वाली अनु क्रयाओं को सूचीबद्ध क जए।
म तुरंत पैर (या हाथ) ख च लूँगा/लूँगी— सोचने से भी पहले — और प्रायः चीख भी प ग
ँ ा/प ग
ँ ी।
कोई भी वस्त ु या कोई घटना जो सजीवों को अनुिक्रया करने के िलए पेिरत करती है, उ ीपन कहलाती है।
शरीर जो करता है, वह अनुि या है। क्र
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उ पन शरीर क तत्काल अनु क्रया
काँटे पर पैर पड़ना पैर त ुरंत उ ठ जाता है; मुँह से आवाज़ िनकल ती है
चाय का गरम प्याला छू लेना द द ठीक से महसूस होने से पहले ही हाथ पीछे हट जाता है
आँख पर तेज़ धूप पड़ना आँखें बंद हो जाती है ं और प ुतिल याँ िसकु ड़ जाती है ं
नाक म काली मच या धूल जाना छीक
ं आ जाती है
भूख म भोजन क गंध आना मुँह में पानी आ जाता है
पीछे अचानक तेज़ आवाज़ /
मैं पल टता पल टती हू ँ और हृद य तेज़ धड़ कने ल गता है
अनु क्रया इतनी तेज़ क्य होती है: संकट वाले उ पन म शरीर आपके नणय क प्रतीक्षा नह करता। संदेश त्वचा
से मेरुर ु तक जाता है और वह से हटने का आदे श लौट आता है— सब कुछ क्षण के छोटे -से भाग म। इसी लए
“आह” कहने से पहले ही हाथ प्याले से दूर हो चुका होता है।
प्र.2 क्या पौधे भी उ पन के प्र त अनु क्रया करते ह? अपने आस-पास कुछ अन्य ऐसे पौध का पता लगाइए जनक
प त्तयाँ सूयास्त के बाद बंद हो जाती ह।
जी हाँ, पौधे भी उ पन के प्र त अनु क्रया करते ह। पुस्तक दो स्पष्ट उदाहरण दे ती है—
छु ई-मुई (ल ालु, टच मी नॉट, ममोसा)— छू ते ही प त्तयाँ बंद हो जाती ह और कुछ मनट बाद फर खुल जाती ह।
सोती हुई प त्तयाँ— कुछ पौध क एक-दूसरे के सामने वाली प त्तयाँ सूयास्त के बाद आपस म पास आ जाती ह। यह आँवले
के पेड़ म दे खा जा सकता है।
आस-पास के अन्य ऐसे पौधे जनक प त्तयाँ सूयास्त के बाद बंद होती ह—
पौधा कहाँ मलेगा
इमली सड़क के िकनारे , िव ालय का मैद ान
वषा वृक्ष (गुलाबी सरस) उ ान और माग— साँझ होते ही पूर ी छतरी झुक जाती है
गुलमोहर सड़कों के िकनारे ; नन्ही पिणकाएँ जोड़ों में बंद होती है ं
अगस्त (हड़गा) और सुबबूल खेत की मेड़ और बाड़
मूँगफली, सेम और चने के पौधे रसोई-बगीचा और खेत
तप तया / ख -बूट लॉन और नम कोने
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स्वयं जाँ चए: खड़क से दखने वाली आँवले या इमली क एक टहनी चु नए। उसी दन 5 बजे और फर 7 बजे
उसका चत्र बनाइए। दूसरे चत्र म प णकाएँ जोड़ म सट हुई दखगी।
प्र.3 आँवला और छु ई-मुई क प त्तयाँ इस प्रकार क अनु क्रया क्य करती ह? उनके इस प्रकार के व्यवहार के लए
कौन-सा उ पन उत्तरदायी है?
दोन पौधे अलग-अलग उ पन के प्र त अनु क्रया करते ह।
पौधा उ पन अनु क्रया पौधे को क्या लाभ
छु ई-मुई स्पश — और झटका, गरम एक-दो क्षण में पिणकाएँ बंद चरने वाले पशु को हरी पित्तयों के स्थान पर
वस्त ु या तेज़ हवा भी होकर पूर ी पत्ती झुक जाती है मुर झाई-सी टहनी िदखती है और वह आगे बढ़
जाता है; पत्ती पर बैठे कीट झड़ जाते है ं
आँवला (तथा अंध कार — सूय स्त पर आमने-सामने की पिणकाएँ पास रात में जल की हािन कम होती है, कोमल पिणकाएँ
इमली, वषा पकाश का घटना , साथ ही आ जाती है ं और पत्ती रात भर ठं ड, ओस और हवा से बचती है,ं और मुड़ी पत्ती पर
वृक्ष) तापमान का िगरना बंद रहती है कीटों को कम जगह िमलती है
यह ग त बनती कैसे है: प्रत्येक प णका के आधार पर को शकाओं का एक छोटा फूला हुआ ग ा होता है। उ पन
मलते ही इस ग े क एक ओर क को शकाओं से जल बाहर नकल जाता है। वह ओर ढ ली पड़ जाती है, दूसरी
ओर कड़ी बनी रहती है और प णका खचकर बंद हो जाती है। जल लौटते ही पत्ती फर खुल जाती है— इसी लए
छु ई-मुई कुछ मनट बाद और आँवला सूय दय पर पुनः खुल जाता है।
क्या आप जानते ह? पौध क इस अनु क्रया को यंत्र ारा सद्ध करने वाले भारतीय वै ा नक जगद श चंद्र बोस
से आपका प रचय इसी अध्याय के पृष्ठ 187 पर होता है।
प्र.4 क्या आपने बल्ली, कुत्ते या अन्य जंतुओं के ब को दे खा है? पाँच अलग-अलग जंतुओं के ब को सूचीबद्ध
क जए। क्या आपने कसी नज व वस्तु जैसे प सल, कुस या बल्ब के ब को दे खा है?
हाँ, जंतुओं के ब े दे खे ह— और नह , नज व वस्तुओं के ब े कभी नह होते।
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जंतु उसका ब ा
बल्ली िबल्ल ी का बच्चा
कुत्ता िपल्ल ा
गाय बछड़ ा
मुग चूजा
बकरी मेम ना
मढक टैड पोल
ततली इल्ल ी (ल ाव )
नज व वस्तुए:ँ प सल से कभी छोट प सल नह बनी, कुस से कभी स्टू ल नह बना और बल्ब से कभी छोटा बल्ब नह नकला। नई
प सल, कुस और बल्ब सब कारखाने म मनुष्य ारा बनाए जाते ह— वे कसी पुरानी वस्तु से जन्म नह लेते।
सभी सजीव जनन करते है।
ं जनन अपनी तरह के नवजातों को जन्म दे ने की पिक्रया है।
प्र.5 जनन क्य अ नवाय है?
यह जीवन क नरंतरता के लए अ नवाय है। यही पुस्तक का उत्तर है, और इसे थोड़ा खोलकर सम झए।
प्रत्येक जीव का एक न श्चत जीवन-काल होता है और अंततः वह मर जाता है— वयस्क मच्छर 10 से 15 दन, फली का पौधा
कुछ महीने, मनुष्य कई दशक।
य द नए जीव उत्पन्न न ह तो हर प्रकार का सजीव एक ही जीवन-काल म पृथ्वी से लुप्त हो जाएगा।
जनन मरने वाले जीव का स्थान भर दे ता है, जससे जा त पीढ़ -दर-पीढ़ चलती रहती है— इस वष के पौधे के बीज अगले
वष के पौधे बनते ह।
ध्यान द जए क जनन क्या नह करता: वह व्य क्त को जी वत नह रखता। फल बनने के बाद माता-पौधा फर
भी पीला पड़कर सूख जाता है। बचती है जा त। इसी लए अध्याय के सारांश म लखा है क जनन क प्र क्रया जीव
क नरंतरता को सु न त करती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 181
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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10.1— सब कुछ जोड़कर दे खए
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अब, जब क आप यह जान गए ह क सजीव क पहचान कैसे क जाए, क्रयाकलाप 10.1 को पूरा करने के लए
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प्र.1
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ता लका 10.1 के शेष दो स्तंभ (IV और V) को भ रए।
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(I) (II)
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(III)
om (IV) (V)
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mकारण या
e टप्पणी
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नाम मेरा अनुमान (सजीव या सही सही उत्तर का कारण या
नज व)
a g l उत्तर टप्पणी
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प सल नज व
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पुस्तक
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m .coकबूतर a g
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सजीव
agl कार
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पौधे
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अन्य
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ता लका 10.1, पृष्ठ 178 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
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उत्तर .c
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se आठ वशेषताओं को एक जाँच-सूची क तरह प्रयोग क जए। पूरी भरी हुई ता लका 10.1 इस प्रकार होगी—
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(I) नाम (II) मेरा अनुमान (III) कारण या (IV) (V) सही उत्तर का कारण या टप्पणी
टप्पणी सही
प सल नज व स्वयं न िहलती है, न िनज व आठों िवशेषताओं में से एक भी नही ं— न पोषण, न वृिद्ध,
बढ़ ती है न श्वसन, न उत्सजन, न अनुिक्रया, न जनन
पुस्तक नज व जहाँ रखी है वही ं िनज व कागज वृक्ष से बना है, िकं तु कागज अब न वृिद्ध करता
पड़ी रहती है है, न श्वसन और न अनुिक्रया
कबूतर सजीव छे ड़ने पर उड़ जाता सजीव गित करता है, दाना खाता है, चूजे से बड़ा होता है,
है श्वसन-उत्सजन करता है, अनुिक्रया करता है, अंडे
दे ता है और मरता है
कार नज व चलती तो है, पर िनज व के वल गित जीवन नही ं है। उसे ईंध न चािहए, भोजन
चालक के साथ नही ं; न वृिद्ध, न जनन
पौधे सजीव ऊँचाई बढ़ ती है सजीव वृिद्ध करते है,ं स्वयं भोजन बनाते है,ं रंध ों से श्वसन करते
है,ं बूदँ े ं उत्सिजत करते है,ं पकाश की ओर मुड़ते है,ं बीज
बनाते है ं और मरते है ं
छपकली सजीव दीवार पर दौड़ती है सजीव कीट पकड़ती है, वृिद्ध करती है, श्वसन करती है,
पकाश-ध्विन पर तुर ंत अनुिक्रया करती है, अंडे दे ती है
बीज (क ठन नज व (प्रायः पहला चुपचाप पड़ा रहता सजीव उसके भीतर एक नन्हा जीिवत भूण है। जल और वायु
उदाहरण) अनुमान यही होता है) है, कु छ नही ं करता िमलते ही वह अंकु िरत होकर पूर ा पौधा बन जाता है
स्तंभ II और IV भन्न क्य हो सकते ह: यही अंतर इस क्रयाकलाप का उ े श्य है। पहला अनुमान इस पर
आधा रत होता है क वस्तु दखती कैसी है; सही उत्तर इस पर क वह जीवन क वशेषताओं क कसौट पर खरी
उतरती है या नह । बीज प्रायः स्तंभ II और स्तंभ IV के बीच पक्ष बदल दे ता है।
प्र.2 आप एक बीज को सजीव या नज व कस ेणी म रखगे? क्य ?
बीज सजीव है।
वह पहली दृ ष्ट म नज व क्य लगता है: सूखा बीज न हलता है, न दखाई दे ने वाली वृ द्ध करता है, न कोई अनु क्रया दखाता है
और न कुछ खाता है। वह वष भर डब्बे म पड़ा रहकर भी वैसा ही रहता है। इस स्थ त म बीज प्रसुप्त कहलाता है— उसक जैव
क्रयाएँ अत्यंत धीमी ग त से चलती रहती ह।
वह वास्तव म सजीव क्य है—
बीजावरण के भीतर एक नन्हा भ्रूण होता है— छोट जड़ और छोटे प्ररोह वाला शशु पौधा।
उपयुक्त प र स्थ तयाँ— जल और वायु— मलते ही वह अंकु रत हो जाता है: आवरण मुलायम होकर फटता है, जड़ नीचे और
प्ररोह ऊपर जाता है।
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फर वह वृ द्ध करता है, श्वसन करता है, प्रकाश और गुरुत्व के प्र त अनु क्रया करता है और अंततः फूल, फल तथा नए बीज
बनाता है।
मरा हुआ या भुन ा हुआ बीज उतना ही जल और वायु पाकर भी कभी अंकु िरत नही ं होता → अथ त साधारण बीज
पूरे समय जीिवत था।
स्वयं जाँ चए: रसोई से दस चने और दस भुने चने ली जए। दोन को तीन दन गीली रुई पर र खए। साधारण चने
अंकु रत हो जाएँगे; भुने चने केवल फूलकर सड़ जाएँगे। भूनने से ूण मर चुका था।
क्रयाकलाप 10.2: आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 182
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10.2 बीज के अंकुरण के लए आवश्यक प र तयाँ
क्रयाकलाप
प्र.1 ता लका 10.2 म वायु, सूय के प्रकाश और जल क उपलब्धता को इं गत क जए।
(क) सीधा सूय के प काश (ख ) सीधा सूय के प काश (ग) पूणत : अँधेरे मे ं (घ) सीधा सूय के प काश
मे ं और जलरिहत मे ं और अत्यिधक और नम िम ीयुक्त मे ं और नम
गमला जलयुक्त गमला गमला िम ीयुक्त गमला
चत्र 10.1, पृष्ठ 182 — व भन्न प र तय म रखे चार गमल का पुनः चत्रण (redrawn sketch)।
फली के बीज वाले उपलब्धता बीज का अंकुरण अवलोकन का
गमले संभा वत कारण
वायु सूय का जल पूवानुमान अवलोकन
प्रकाश
क— सीधा सूय के नह
प्रकाश म और
जलर हत
ख— सीधा सूय के
प्रकाश म और
अत्य धक जलयुक्त
ग— पूणत: अँधेरे म
और नम म युक्त
घ— सीधा सूय के
प्रकाश म और नम
म युक्त
ता लका 10.2, पृष्ठ 183 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
प्रत्येक गमले को ध्यान से प ढ़ए और ल खए क बीज तक वास्तव म क्या पहुँच रहा है।
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फली के बीज वाले गमले वायु सूय का प्रकाश जल
क: सीधा सूय के प्रकाश म और जलर हत हाँ हाँ नही ं
ख: सीधा सूय के प्रकाश म और अत्य धक जलयुक्त नही ं हाँ हाँ (अत्यिधक )
ग: पूणतः अँधेरे म और नम म युक्त हाँ नही ं हाँ (उ पय ुक्त मात्रा)
घ: सीधा सूय के प्रकाश म और नम म युक्त हाँ हाँ हाँ (उ पय ुक्त मात्रा)
सबसे अ धक भूल गमला ‘ख' क वायु म होती है। कसी ने वहाँ से वायु हटाई नह । कतु वहाँ म के ऊपर
सदै व जल भरा रहता है, अतः जल ने म के कण के बीच का सारा ान भर दया और वायु को बाहर
नकाल दया। बीज जल के नीचे है और उसे वायु नह मल पा रही। यही एक प रवतन गमला ‘ख' को ‘घ' से अलग
करता है।
संकेत: दे खए चार गमले कैसे बनाए गए ह। ‘घ' म सब कुछ है। ‘क' = घ घटा जल, ‘ग' = घ घटा सूय का प्रकाश,
‘ख' = घ म अत्य धक जल (और इसी लए वायु नह )। एक बार म केवल एक बात बदलना ही इसे नष्पक्ष परीक्षण
बनाता है।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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जब कसी बीज म अंकुर नकलता है तो उसे अंकु रत बीज कहते ह। अनुमान लगाएँ क क्या प्रत्येक गमले म
तय म रखे गए प्रत्येक गमले के वषय म अपने पूवeानु
प्र.2
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10.2 म.cअंoकत क जए। 7–10 दन तक गमल म बीज अंकुरण क
बीज का अंकुरण होगा? व भन्न प र
त का नयgमत
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emअवलोकन को ता लका 10.2 म अं कत क जए। अपने अवलोकन के पक्ष म संभा वत कारण को
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अपने
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फली के बीज वाले उपलब्धता बीज का अंकुरण अवलोकन का
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वायु सूय का जल पूवानुमान अवलोकन
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अत्य धक जलयुक्त
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ता लका 10.2, पृष्ठ 183 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
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7 से 10 दन बाद पूरी भरी हुई ता लका 10.2
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
फली के उपलब्धता बीज का अंकुरण अवलोकन का संभा वत
बीज वाले कारण
गमले वायु सूय का जल पूवानुमान अवलोकन
प्रकाश
क: सीधा सूय हाँ हाँ नह नही ं अंकु रण नही ं हुआ जल के िबना बीजावरण मुल ायम
के प्रकाश म नही ं होता और भूण अपनी
और जलर हत िक्रयाएँ आरंभ नही ं कर पाता।
बीज कठोर और सूखे ही रहे।
ख: सीधा सूय नह हाँ हाँ नही ं अंकु रण नही ं हआ
ु ; भरे हएु जल ने िम ी के कणों के
के प्रकाश म (अत्य धक) बीज फू ल कर बीच का स्थान घे र कर वायु
और अत्य धक मुल ायम पड़ गए , बाहर कर दी। अंकु रण के िलए
जलयुक्त सड़ ने ल गे और द ुग ंध वायु आवश्यक है, अतः बीज मर
आने ल गी गए और सड़ गए।
ग: पूणतः हाँ नह हाँ अिधकाश
ं बीज अंकु िरत हो फली के बीजों को अंकु रण के
अँधेरे म और (उपयुक्त) िव ाथ “नही ं” गए। नवोिद् भद ल ंबे , िलए पकाश की आवश्यकता
नम म युक्त का अनुम ान पतले और हरे के नही ं— जल और वायु पय प्त
लगाते है ं -
बजाय पीले सफे द थे ं पकाश अंकु रण के बाद
है।
नवोिद् भद के हरा और सुदृ ढ़
बनने के िलए चािहए।
घ: सीधा सूय हाँ हाँ हाँ हाँ सव त्तम अंकु रण — तीनों आवश्यकताएँ पूर ी है:ं
के प्रकाश म (उपयुक्त) स्वस्थ हरे नवोिद् भद उपयुक्त मात्रा में जल, िम ी के
और नम िरक्त स्थानों में भरपूर वायु, और
म युक्त आगे की विृ द्ध के िलए सूय का
पकाश।
इस क्रयाकलाप का सबसे बड़ा आश्चय गमला ‘ग' है। अ धकांश व ाथ सोचते ह क अँधेरे म बीज नह फूटगे।
वे फूटते ह। प्रयोग का मूल्य यही है— वह एक गलत धारणा को प्रमाण से सुधार दे ता है। इसी कारण कसान बीज
को म के भीतर, अँधेरे म बोते ह, ऊपर नह ।
यह क जए: गमला ‘ग' के पीले नवो द को दो दन धूप म र खए। वे हरे हो जाएँगे और उनका लंबा-पतलापन घट
जाएगा। अब आपने अंकुरण और वृ द्ध का अंतर अपनी आँख से दे ख लया।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 183 और 184
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10.2— चार गमले क्या सखाते ह
प्र.1 क्या आप सोचते ह क बीज के अंकुरण के लए सूय का प्रकाश अ नवाय है?
नह — फली के बीज के अंकुरण के लए सूय का प्रकाश अ नवाय नह है।
प्रमाण: गमला ‘ग' पूणतः अँधेरे म नम म के साथ रखा गया था और उसके बीज अंकु रत हुए। वहाँ केवल जल और वायु
उपलब्ध थे, और इतना ही पयाप्त सद्ध हुआ।
गमला ग: वायु ✓ जल ✓ सूय का पकाश ✗ → अंकु रण हुआ
पुस्तक सामान्य नयम बताती है: सामान्यतः अ धकांश बीज को अंकुरण के लए प्रकाश क आवश्यकता नह होती। कतु
अंकुरण के पश्चात, नवो द क वृ द्ध के लए सूय के प्रकाश क आवश्यकता होती है— इसी लए गमला ‘ग' के नवो द
पीले और दुबल थे जब क ‘घ' के हरे और मजबूत।
क्या आप जानते ह? दोन दशाओं म अपवाद ह। कॉ लयस और पटू नया जैसे पौध के बीजांकुरण के लए
प्रकाश आवश्यक होता है, इन बीज को म से ढकने पर अंकुरण बा धत होता है। वह कैलडु ला और जी नया के
बीजांकुरण के लए अंधकार चा हए, इन्ह पयाप्त म से ढका जाना चा हए।
प्र.2 क्या प्रत्येक गमले म बीज को वायु, जल और सूय का प्रकाश मल रहा है? क्या कोई ऐसा गमला है जसम बीज
को वायु नह मल रही है, य द ऐसा है तो यह क्य नह मल रही है?
नह , गमला ‘घ' को छोड़कर कसी भी गमले को तीन उपयुक्त मात्रा म नह मले।
गमला क— वायु और प्रकाश ह, कतु जल नह ।
गमला ख— प्रकाश और भरपूर जल है, कतु वायु नह ।
गमला ग— वायु और जल ह, कतु सूय का प्रकाश नह ।
गमला घ— वायु, जल और प्रकाश, तीन उपयुक्त मात्रा म।
जस गमले म वायु नह मल रही, वह गमला ‘ख' है।
वहाँ वायु क्य नह मल रही: साधारण म ठोस नह होती— म के कण के बीच असंख्य छोटे -छोटे रक्त
ान होते ह और इन्ह म वायु भरी रहती है। बीज इसी वायु का उपयोग करता है। गमला ‘ख' म जल सदा म के
ऊपर खड़ा रहता है, अतः वह इन सब रक्त ान म भरकर वायु को बाहर धकेल दे ता है। बीज जलमग्न म
म बना वायु के रह जाता है और अंकु रत होने के बजाय सड़ जाता है।
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यह कक्षा के बाहर कहाँ दखता है: अत्य धक वषा के बाद जस खेत म कई दन जल भरा रहता है, वहाँ के पौधे
पीले पड़कर मर जाते ह। कसान इसी कारण ना लयाँ काटते ह— ता क म म वायु लौट सके।
प्र.3 उन गमल के बीज का क्या हुआ जनम अत्य धक जल डाला गया था?
उनका अंकुरण नह हुआ। वे फूल गए, मुलायम पड़ गए, काले पड़ने लगे, सड़ गए और उनसे दुगध आने लगी।
अत्यिधक जल → िम ी के िरक्त स्थान भर गए → बीज को वायु नही ं → श्वसन नही ं → बीज सड़ गया
दो बात साथ-साथ होती ह—
बीज को ऊजा मुक्त करने के लए आवश्यक वायु नह मलती, अतः ूण मर जाता है।
गरम, गीली म म मरे हुए मुलायम बीज पर फफूँद और जीवाणु शीघ्र आक्रमण करते ह, जससे वह लसदार और दुगधयुक्त हो
जाता है।
स्वयं जाँ चए: दस राजमा एक कटोरी जल म डु बोकर चार दन पूरी तरह जल के भीतर र खए और दस को नम रुई
पर। जल म डू बे बीज से ख गंध आएगी और वे मुलायम पड़ जाएँगे; नम रुई वाले अंकु रत हो जाएँगे। बीज वही,
जल वही— अंतर केवल वायु का।
प्र.4 कौन-से बीज को वायु और जल दोन प्राप्त हो रहे ह? उन गमल को पहचा नए जहाँ आपको बीज का अंकुरण
दखाई दे रहा है।
गमला ‘ग' और गमला ‘घ' के बीज को वायु और जल दोन प्राप्त हो रहे ह।
गमला वायु जल क्या बीज अंकु रत हुए?
क हाँ नह नही ं
ख नह अत्य धक नही ं
ग हाँ हाँ हाँ— िकं त ु नवोिद् भद पीले और पतले
घ हाँ हाँ हाँ— स्वस्थ हरे नवोिद् भद
अंकुरण गमला ‘ग' और ‘घ' म दखाई दे ता है— अथात ठ क उन्ह दो गमल म जहाँ वायु और जल दोन थे। प्रयोग इसी
उत्तर तक पहुँचाने के लए बनाया गया था।
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ऐसे प्रयोग को पढ़ने का ढं ग: जन गमल म एक जैसा प रणाम मला उन्ह साथ र खए और दे खए क उनम समान
क्या है। ‘ग' और ‘घ' दोन म अंकुरण हुआ और दोन म वायु + उपयुक्त जल थे। ‘क' और ‘ख' असफल रहे और
इनम से प्रत्येक म इन दोन म से एक अनुप स्थत था। ‘ग' और ‘घ' म सूय का प्रकाश भन्न है फर भी प रणाम एक
जैसा है— अतः प्रकाश नणायक कारक नह है।
प्र.5 अपने अवलोकन के आधार पर बीज के अंकुरण के लए अनुकूल प र तयाँ बताइए। बीज के अंकुरण के लए
वायु, जल और सूय के प्रकाश म से क्या-क्या अ नवाय है?
अनुकूल प र तयाँ: उपयुक्त मात्रा म जल, पयाप्त वायु और उपयुक्त (गरम) तापमान। सूय का प्रकाश अ नवाय नह है।
अिनवाय → जल (उपयुक्त मात्रा में) + वायु
फली के बीजों के िलए अिनवाय नही ं → सूय का पकाश
पर त अ नवाय? कौन-सा गमला यह सद्ध करता है
जल— उपयुक्त मात्रा हाँ गमला ‘क' में िबल्कु ल नही ं था और वह असफल रहा; ‘ख' में अत्यिधक था और वह भी
म असफल रहा
वायु हाँ गमला ‘ख' में वायु नही ं थी और वह असफल रहा
सूय का प्रकाश (
नही ं फ ल ी के बीजों के गमला ‘ग' में पकाश नही ं था िफर भी अंकु रण हुआ
िल ए )
पुस्तक के शब्द म: फली के बीज के अंकुरण के लए जल और वायु क उपयुक्त मात्रा क आवश्यकता होती है।
संकेत: केवल “जल” नह , “उपयुक्त मात्रा म जल” क हए। बहुत कम (गमला क) और बहुत अ धक (गमला ख)—
दोन ही अंकुरण रोक दे ते ह। यह इस अध्याय के सबसे सुंदर प रणाम म से एक है।
प्र.6 बीज को अंकुरण के लए इन प र तय क आवश्यकता क्य होती है? क्या आप ऐसा सोचते ह क इन
पर तय म से कसी एक या एक से अ धक प र तय का अभाव बीज के अंकुरण को प्रभा वत करेगा?
प्रत्येक प र त एक न श्चत काम करती है, अतः हाँ— एक भी अनुप त हो तो अंकुरण प्रभा वत होता है या रुक जाता
है।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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पर त बीज के लए वह क्या करती है अनुप त होने पर
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.c बीज को वृिद्ध के िलए अिनवाय पिक्रया पूरी करने में सक्षम बनाता है। यह भीतर के ag
जल बीजावरण (बीज के बाह्य आवरण) को मुल ायम करता है िजससे वह फट सके , और , भूण
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आवरण कठोर बना रहता है
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पसुप्त रहता है कु छ नही ं होता
नन्हे भूण को पौधे में िवकिसत होने में सहायता करता है। (गमल ा क )
वायु बीज िम ी के कणों के बीच के स्थान में उपिस्थत वायु का उपयोग श्वसन के िलए ; वह
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बीज श्वसन नही ं कर पाता
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करते है,ं िजससे अंकु रण की ऊज िमलती है। सड़ जाता है (गमल ा ख)
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केeबीच के स्थान के कारण जड़ें आसानी से
वायु रखने के अितिरक्त, िम ी के कणों s
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रक्त ान कठोर , द बी हुई िम ी में जड़ों को
वाली म बढ़ ती है।
ं किठनाई होती है
उपयुक्त बीज के भीतर की जैव िक्रयाएँ के वल मध्यम गरमी में ही चलती है।
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बहुत ठं डा या बहुत गरम अंकु रण
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तापमान धीमा या असंभव
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प्रकाश /
c o agl नवोिद् भद पीले , पतले और द ुबल
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अंधकार नवोिद् भद की वृिद्ध के िलए सूय का पकाश चािहए। (गमल ा ग )
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रह जाते है ं
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यह ठ क संतु लत आहार जैसा है: अध्याय ‘उ चत आहार— स्वस्थ शरीर का आधार' म आपने सीखा क मनुष्य
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को उत्तम स्वास्थ्य और उ चत वृ द्ध के लए संतु लत भोजन चा हए। इसी प्रकार पौध को भी उ चत वृ द्ध और
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agकlदूसरी अनुप स्थत हो।
वकास के लए अनुकूल प र स्थ तयाँ एवं पोषक तत्व चा हए। न व्य क्त और न पौधा केवल एक आवश्यकता क
अ धकता से काम चला सकता है जब
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m पृष्ठ 184 और 185 as e
पाठ्य प्रश्नo—
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10.2— अन्य प र तयाँ, और बीज पर पुन वचार
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आपके वचार से कौन-सी अन्य प र तयाँ बीज के अंकुरण को प्रभा वत करगी?
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जल, वायु और प्रकाश के अ त रक्त भी कई बात तय करती ह क बीज अंकु रत होगा या नह ।
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पर त अंकुरण पर प्रभाव रोजमरा का प्रमाण
तापमान भारत की अिधकांश फसलों के बीज लगभग 20 °C से 35 °C के बीच सव त्तम जून में मूँग एक िद न में अंकु िरत हो
अंकु िरत होते है।
ं बहत
ु ठं डा या बहत
ु गरम होने पर अंकु रण धीमा पड़ता है या जाती है , िद संबर में तीन िद न ले ती है
रुक जाता है।
बीज क गुणवत्ता क्षितग स्त, कीट-खाया, भुना हआ
ु या बहत
ु पुर ाना बीज— उसका भूण मर चुक ा भ ुना चना कभी नही ं फू टता
और आयु होता है और वह कभी अंकु िरत नही ं होगा
बोने क गहराई बहुत गहरा बोने पर परोह सतह तक पहच
ु ँ ने से पहले ही संिचत भोजन समाप्त िकसान छोटे बीज उ थले और बड़ े
कर दे ता है; ऊपर रह जाने पर बीज सूख जाता है बीज कु छ गहरे बोते है ं
म का प्रकार भुर भुर ी दोमट िम ी जल और वायु दोनों रोकती है; कड़ी िचकनी िम ी में जल तो ज ुते खेत में बीज पगडंड ी की अपेक्ष ा
है पर वायु कम; बालू में जल िटकता ही नही ं कही ं अच्छे उ गते है ं
पोषक तत्व अंकु रण के िलए स्वयं आवश्यक नही ं, िकं तु उसके बाद नवोिद् भद की वृिद्ध के -
रसोई बगीचे की क्यारी में डाल ी गई
(खाद) िलए अिनवाय कं पोस्ट
जल एवं म क बहुत खारा जल बीज को जल सोखने ही नही ं दे ता रे ह वाल ी भ ूिम पर कु छ नही ं उ गता
लवणता
यह क जए: इनम से कसी एक के लए नष्पक्ष परीक्षण बनाइए— जैसे गहराई। तीन एक जैसे गमल म 1 सेमी, 3
सेमी और 8 सेमी गहराई पर फली के बीज बोइए और जल, वायु तथा प्रकाश तीन समान र खए। तभी दखने वाला
अंतर केवल गहराई के कारण होगा। (अभ्यास का प्रश्न 9 आपसे यही काम तापमान के लए करवाता है।)
प्र.2 सजीव क कौन-सी वशेषताओं के कारण आपने क्रयाकलाप 10.1 म पौध को सजीव क ेणी म रखा? क्या
क्रयाकलाप 10.2 म पौध म वृ द्ध दखाई दे ती है? क्या सजीव क अन्य कोई वशेषता इन पौध म दखाई दे ती
है?
क्रयाकलाप 10.1 म पौध को सजीव क्य माना: वे वृ द्ध करते ह, उन्ह जल, वायु और पोषक तत्व चा हए, वे रंध्र से श्वसन करते
ह, प त्तय पर बूँद उत्स जत करते ह, स्पश और प्रकाश जैसे उ पन के प्र त अनु क्रया करते ह, बीज ारा जनन करते ह और
अंततः मर जाते ह।
क्या क्रयाकलाप 10.2 म वृ द्ध दखती है? हाँ, बहुत स्पष्ट रूप से।
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दन गमला ‘घ' म क्या दखता है
दन 0 िम ी के भीतर एक सूखा, कठोर फली का बीज
दन 2–3 बीज फू ल गया है; आवरण फट गया है; एक छोटी सफे द जड़ नीचे की ओर बढ़ रही है
दन 4–5 िम ी के ऊपर हुक जैस ा मुड़ा हुआ परोह िदखाई दे ता है
दन 7–10 परोह सीधा हो जाता है, पहली हरी पित्तयाँ खुल ती है,ं जड़ शाखाएँ बनाती है
उसी क्रयाकलाप म दखने वाली अन्य वशेषताएँ—
पोषण— नवो द पहले बीज म सं चत भोजन का उपयोग करता है, फर हरी प त्तयाँ खुलते ही स्वयं भोजन बनाता है।
श्वसन— बीज को वायु चा हए थी; इसी कारण गमला ‘ख' असफल रहा। यह श्वसन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उ पन के प्र त अनु क्रया— बना कसी के बताए जड़ नीचे और प्ररोह ऊपर मुड़ा; गमला ‘ग' के पीले नवो द प्रकाश म
आते ही हरे हो गए।
मृत्यु— गमला ‘ख' के बीज सड़ गए, और प र स्थ तयाँ न मलने पर पौधा मर जाता है।
यह प्रश्न दोबारा क्य पूछा गया: क्रयाकलाप 10.1 म आपने पौधे को सजीव अपनी पूव-धारणा के आधार पर कहा
था। क्रयाकलाप 10.2 के बाद आप वही बात इस लए कह सकते ह क्य क आपने उसे घ टत होते दे खा है। यही
अ भमत और प्रमाण का अंतर है।
प्र.3 आप बीज को सजीव या नज व कस ेणी म रखगे?
सजीव— और अब म इसे केवल कहता नह , सद्ध भी कर सकता/सकती ँ।
जीवन क वशेषता क्या क्रयाकलाप 10.2 म बीज ने दखाई?
वृ द्ध हाँ— वह फू ल ा, जड़ और परोह िनकाले , नवोिद् भद बना
श्वसन हाँ— उ से वाय ु चािहए थी; वाय ुरिहत बीज (गमल ा ख) मर गए
पोषण हाँ— पहले भीतर संिचत भोजन, िफ र स्वयं बनाया भोजन
गत हाँ— जड़ नीचे और परोह ऊपर की ओर गया
अनु क्रया हाँ— जल , ग ुरुत्व और बाद में पकाश के पित अन ुिक्रया की
जनन हाँ— बड़ा होकर यही पौधा नए बीज बनाएगा
मृत्यु हाँ— जल मग्न गमले के बीज मरकर सड़ गए
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सूखे बीज ने हम धोखा क्य दया: प्रसुप्त बीज अपनी जैव क्रयाएँ इतनी धीमी रखता है क बाहर कुछ दखाई ही
नह दे ता। यह उस द ये जैसा है जसक लौ लगभग बुझा द गई हो— लौ छोट है, बुझी नह । जल और वायु मलते
ही वह फर भड़क उठती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 185
10.3 पौध म वृ द्ध एवं ग त
प्र.1 पौधे सूय के प्रकाश के प्र त कस प्रकार अनु क्रया करते ह? क्या सूय का प्रकाश पौध के व भन्न भाग क वृ द्ध
क दशा को प्रभा वत करता है?
पौधे सूय के प्रकाश क ओर बढ़कर अनु क्रया करते ह— और हाँ, प्रकाश वृ द्ध क दशा को प्रभा वत करता है, कतु केवल
प्ररोह क ।
प्ररोह मुड़कर प्रकाश क ओर बढ़ता है। मनी प्लांट को पखवाड़े भर खड़क के पास र खए— उसक सारी प त्तयाँ खड़क
क ओर हो जाएँगी।
जड़ प्रकाश का बल्कुल अनुसरण नह करती। वह नीचे म म ही बढ़ती रहती है जहाँ जल और ख नज ह।
प त्तयाँ इस प्रकार मुड़ जाती ह क उनक चपट सतह प्रकाश के सामने आए और अ धक से अ धक प्रकाश मले।
युवा सूरजमुखी का फूल दन भर पूरब से प म क ओर सूय के साथ घूमता है।
प्ररोह प्रकाश के पीछे और जड़ उदासीन क्य : प्ररोह पर प त्तयाँ लगी ह और प त्तय को भोजन बनाने के लए सूय
का प्रकाश चा हए— अतः प्रकाश क ओर मुड़ना सीधे लाभदायक है। जड़ का काम अलग है: पौधे को जमाना और
जल तथा ख नज लेना। ये दोन नीचे मलते ह, इस लए जड़ प्रकाश के बजाय गुरुत्व का उत्तर दे ती है। क्रयाकलाप
10.3 इसी अंतर को दखाने के लए बनाया गया है।
स्वयं जाँ चए: तुलसी का गमला खड़क पर र खए और हर चौथे दन गमले को आधा घुमा द जए। हर बार प्ररोह के
सरे फर से काँच क ओर मुड़ जाएँगे। उन्ह कोई हला नह रहा— पौधा स्वयं अनु क्रया कर रहा है।
प्र.2 कसी पौधे को उल्टा रखे जाने पर इसक जड़ और प्ररोह क वृ द्ध कस दशा म होगी? आप इन प्रश्न का उत्तर
खोजने के लए एक क्रयाकलाप क योजना कैसे बनाएँगे?
मेरा पूवानुमान: पौधे को उल्टा रखने पर भी जड़ मुड़कर नीचे क ओर और प्ररोह मुड़कर ऊपर क ओर ही वृ द्ध करेगा। पौधा
स्वयं को “सुधार” लेगा।
क्रयाकलाप क योजना— जैसी पुस्तक क्रयाकलाप 10.3 म अपनाती है—
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1. नवो द तैयार क जए। फली या चने के बीज को नम कपड़े पर तब तक अंकु रत क जए जब तक प्रत्येक म छोट जड़ और
छोटा प्ररोह न बन जाए।
2. तीन एक जैसे सेट-अप बनाइए ता क तुलना नष्पक्ष रहे— तीन काँच के बीकर ली जए और उन पर ‘क', ‘ख' और ‘ग' लेबल
लगाइए।
3. प्रत्येक प्लेट पर एक नवो द बाँ धए। काँच क प्लेट पर मोटा ब्लॉ टग पेपर मोटे कोमल सूती धागे से बाँ धए और उसी धागे
से नवो द इस प्रकार बाँ धए क वह क्ष तग्रस्त न हो। गीला ब्लॉ टग पेपर उसे नमी दे ता रहेगा।
4. प्रत्येक म केवल एक बात बद लए— यही योजना का मूल है:
क— नवो द सीधा, सूय का प्रकाश सभी दशाओं से। यह नयंत्रण (कं ोल) है।
ख— नवो द उल्टा (प्ररोह नीचे, जड़ ऊपर), प्रकाश सभी दशाओं से। यह पौधे क अपनी स्थ त का प्रभाव जाँचता है।
ग— नवो द सीधा, कतु गत्ते के बॉक्स के एक छोटे गोल छे द से केवल एक दशा से प्रकाश। यह प्रकाश क दशा का
प्रभाव जाँचता है।
5. पहले पूवानुमान ल खए, फर कई दन अवलोकन क जए और दोन ता लका म अं कत क जए, ता क ईमानदारी से तुलना
हो सके।
तीन सेट-अप क्य , एक क्य नह : केवल बीकर ‘ख' से आप नह जान पाते क मुड़ाव उल्टा रखने के कारण हुआ
या वह नवो द वैसे ही बढ़ता। ‘क' तुलना के लए सामान्य स्थ त है और ‘ग' प्रकाश क दशा के प्रभाव को पौधे
क स्थ त के प्रभाव से अलग कर दे ता है। एक बार म एक कारक बदलना ही कसी क्रयाकलाप को प्रदशन से प्रयोग
बनाता है।
क्रयाकलाप 10.3: आइए, योजना बनाएँ — पृष्ठ 186 और 187
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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10.3— जड़ और प्ररोह क वृ द्ध क दशा
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क्रयाकलाप
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बॉक्स के िपछले भाग मे ं छेद
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बॉक्स के अंदर
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का दृश्य
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(a) (b) (c)
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(क) सभी िदशाओं से आते सूय के पकाश मे ं रखा सीधा पौधा
(ख) सभी िदशाओं से आते सूय के पकाश मे ं रखा उल्टा पौधा
(ग) एक िदशा से आते सूय के पकाश मे ं रखा सीधा पौधा
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.co sketch)। agl
चत्र 10.2, पृष्ठ 186 — व भन्न प र तय म रखे गए पौधे को दशाने वाले सेट-अप का पुनः चत्रण (redrawn
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बीकर या सूय के प्रकाश क पौधे क दशा
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जड़ और प्ररोह क वृ द्ध क दशा
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गलास दशा
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प्ररोह या अवलोकन
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जड़
ag क सभी दशाएँ सीधा ऊपर क प्ररोह
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ओर
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जड़
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ख सभी दशाएँ उल्टा नीचे क प्ररोह
ओर
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ग केवल एक दशा से सीधा ऊपर क प्ररोह
m जड़gl
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ता लका 10.3, पृष्ठ 186 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
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g पूवानुमान बीकर रखने से पहले ल खए और अवलोकन 4 से 7 दन बाद।
भरी हुई ता लका 10.3 इस प्रकारaहोगी।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
बीकर या सूय के प्रकाश पौधे क प्ररोह या पूवानुमान अवलोकन
गलास क दशा दशा जड़
क सभी दशाएँ सीधा, ऊपर प्ररोह ऊपर की ओर सीधा ऊपर की ओर बढ़ ा
क ओर बढ़ े ग ा
जड़ नीचे की ओर बढ़ े ग ी सीधी नीचे की ओर बढ़ ी
ख सभी दशाएँ उल्टा, नीचे प्ररोह शायद नीचे ही मुड़ कर ऊपर की ओर बढ़ ा
क ओर बढ़ ता रहेग ा
जड़ शायद ऊपर ही मुड़ कर नीचे की ओर बढ़ ी
बढ़ ती रहेग ी
ग केवल एक दशा सीधा, ऊपर प्ररोह ऊपर की ओर ऊपर बढ़ ा और छेद की ओर मुड़ गया
से क ओर बढ़ े ग ा जहाँ से पकाश आ रहा था
जड़ नीचे की ओर बढ़ े ग ी नीचे की ओर बढ़ ी , पकाश की ओर
ध्यान नही ं िद या
संकेत: ब्लॉ टग पेपर सदा गीला र खए और यह सु न त क जए क नवो द जल क सतह से ऊपर रहे। जल म
डू बा नवो द सड़ जाएगा— ठ क वही जो क्रयाकलाप 10.2 के गमला ‘ख' म हुआ था।
प्र.2 आपके अवलोकन के अनुसार बीकर ‘क', ‘ख' और ‘ग' म जड़ और प्ररोह क वृ द्ध क दशा क्या है? क्या
आपके अवलोकन आपके पूवानुमान से मेल खाते ह? आप इस क्रयाकलाप से क्या नष्कष नकालते ह?
प रणाम, जैसे पुस्तक उन्ह दज करती है—
1. पौधे को सीधा रखे जाने पर जड़ नीचे क ओर वृ द्ध करती है और प्ररोह क वृ द्ध ऊपर क दशा म होती है। (बीकर ‘क')
2. य द पौधा उल्टा रखा हो तो जड़ मुड़ जाती है और नीचे क ओर वृ द्ध करती है। प्ररोह भी मुड़ जाता है और ऊपर क ओर
वृ द्ध करता है। (बीकर ‘ख')
3. य द पौधे को सूय का प्रकाश केवल एक दशा से मलता है तो प्ररोह प्रकाश क दशा म वृ द्ध करता है, जब क जड़ नीचे क
ओर वृ द्ध करती है। (बीकर ‘ग')
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
क — सीधा ख — उल्टा ग — एक िदशा से पकाश
परोह ऊपर, जड़ नीचे दोनों मुड़कर स्वयं को सुधार लेते है ं परोह पकाश की ओर, जड़ िफर भी नीचे
हरा = परोह • बैगं नी = जड़ • िबंददु ार रेखा = बीज का तल
क्रयाकलाप 10.3 का नष्कष: नवो द चाहे जस दशा म रखा जाए, जड़ अंततः नीचे और प्ररोह ऊपर क ओर ही बढ़ता है।
क्या पूवानुमान मेल खाते ह? बीकर ‘क' के लए प्रायः खाते ह। बीकर ‘ख' के लए अ धकांश व ा थय का पूवानुमान गलत
नकलता है— वे सोचते ह क उल्टा पौधा उसी उल्ट दशा म बढ़ता रहेगा। ऐसा नह होता। यहाँ गलत सद्ध होना ही इस
क्रयाकलाप का सबसे मूल्यवान भाग है।
िन ष्कष: पौधों के परोह ऊपर की ओर बढ़ ते है ं और सूय के पकाश की ओर गित पदिशत करते है,ं जबिक पौधों
की जड़ े ं नीचे की ओर बढ़ ती है।
ं
पौधा ऐसा क्य करता है: प्ररोह को अपनी प त्तयाँ प्रकाश और वायु तक पहुँचानी ह ता क भोजन बन सके, इस लए
वह पृथ्वी के खचाव से दूर और प्रकाश क ओर बढ़ता है। जड़ को जल, ख नज और मजबूत पकड़ चा हए जो नीचे
मलते ह, इस लए वह पृथ्वी के खचाव क ओर बढ़ती है और प्रकाश क परवाह नह करती। यही कारण है क खेत
म लापरवाही से गरा बीज भी सही दशा म ही उगता है।
वै ा नक से प रचय: जगद श चंद्र बोस (1858–1937) एक भारतीय वै ा नक थे जन्ह ने प्रकाश, ताप, व ुत
और गुरुत्वाकषण जैसे उ पन के प्र त पौध क अनु क्रयाओं को अं कत करने के लए क्रेस्को ाफ नामक मशीन
बनाई। इस मशीन से उन्ह ने मापा क पौधे कतनी तेजी से बढ़ते ह, और यह भी दशाया क पौधे उ पन को महसूस
कर सकते ह और उनके प्र त अनु क्रया करते ह।
क्रयाकलाप 10.4: आइए, खोज कर — पृष्ठ 188
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
10.4 पौधे का जीवन-चक्र
क्रयाकलाप
प्र.1 कसी प रवतन के होने म कतना समय लगा? आपके ारा दे खे गए व भन्न प रवतन ता लका 10.4 म चत्रां कत
क जए।
दनांक अवलोकन चत्र
बीज बोए गए
ता लका 10.4, पृष्ठ 188 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
एक फली का बीज लगाइए, नय मत जल द जए और तीन माह तक अवलोकन क जए। जब भी कुछ नया दखे, त थ ल खए।
भारतीय मौसम म फली के पौधे के सामान्य समय के साथ भरी हुई ता लका 10.4 इस प्रकार होगी—
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
दनांक ( क्रयाकलाप का अवलोकन चत्र जो बनाना है
दन)
दन 1 बीज बोए गए िम ी के भीतर फ ल ी का
बीज
दन 3–4 बीज फू ल गया, बीजावरण फट गया और छोटी सफे द जड़ नीचे की ओर छोटी जड़ सिहत बीज
िनकली
दन 5–7 िम ी के ऊपर मुड़ा हआ
ु परोह िनकला और सीधा हो गया; दो मोटी हक
ु जैस ा परोह , िफ र द ो
बीजपत्रीय पित्तयाँ खुल ी ं पित्तयाँ
दन 10–15 वास्तिवक हरी पित्तयाँ िनकली ं; तना लंबा हआ
ु ; जड़ में शाखाएँ बनी ं 4–6 पित्तयों वाल ा नन्हा
पौधा
दन 25–40 पौधा घना हआ
ु , पतान या पाश्व शाखाएँ िनकली ं पूर ा पत्ते द ार पौधा
दन 40–55 पहले फू ल िदखाई िदए फू ल ों सिहत पौधा
दन 55–70 पंखिु ड़याँ सूखकर िगरी ं; पीछे एक नन्ही हरी फली रह गई जो फू लने लगी सूखे फू ल के साथ नन्ही
फली
दन 70–90 फिलयाँ पूरे आकार की हो गईं और उनमें बीज बने; वे सूखकर भूर ी होने ख ुल ी हुई फ ल ी , भीतर बीज
लगी ं
दन 90 के बाद जल दे ते रहने पर भी पौधा पीला पड़कर सूख गया— उसका जीवन पूर ा हो सूखा , पील ा पौधा
गया
संकेत: त थयाँ स ी र खए। आपका पौधा ग्रीष्म म एक सप्ताह पहले और शीत म दे र से भी चल सकता है— यह
भूल नह , एक स ा अवलोकन है जसे अवश्य ल खए।
प्र.2 कतने दन के बाद पहला फूल दखाई दया?
फली के पौधे म पहला फूल सामान्यतः बोने के लगभग 40 से 55 दन बाद दखाई दे ता है— अथात लगभग छह से आठ
सप्ताह। अपने पौधे के दन ठ क-ठ क ल खए।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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पौधा बोने से पहले फूल तक के दन
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सेम / राजमा
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40–55 िद न
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ल गभग 30–35 िद न
सूरजमुखी 55–65 िद न
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गदा 45–60 िद न
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ल गभग
सरस
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ल गभग g l
40–50 िद न
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फूल आने म इतना समय क्य : फूल खलाने से पहले पौधे को पयाप्त शरीर बनाना पड़ता है— अच्छ जड़ और
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इतनी प त्तयाँ क भरपूर भोजन बन सके। फूल बनाने और फर बीज भरने म बहुत भोजन खच होता है। इसी लए
पौधा कई.cसप्ताह क पत्तेदार वृ द्ध के बाद ही फूलता है, आरंभ के कुछ दन म कभी
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प्र.3 फूल के कुछ भाग के सूखने के बाद, क्या आपको आगे कोई अन्य वृ द्ध दखाई द ? फूल के शेष भाग कस प्रकार
क संरचना म वक सत हुए? क्या आपने m
a s e फूल से वक सत कसी बीजयुक्त फली या फल को दे खा?
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हाँ— फूल के सूखने के बाद भी वृ द्ध चलती रहती है। कसी एक फूल को ध्यान से दे खए और उसे तो ड़ए मत।
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2. फूल.cकoे आधार पर का छोटा हरा भाग वह बना रहता है और फूलने लगता है। l as
1. पहले रंगीन पंखु ड़याँ मुरझाकर गर जाती ह। लगता है फूल समाप्त हो गया।
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agl 4. फली के भीतर बीज बनते और बड़े होते जाते ह।
3. यही भाग फल— फली के पौधे म एक फली क े रूप म वक सत होता है ।
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5. अंत म फली सूखकर भूरी हो जाती है और उसे चीरने पर नए बीज दखाई दे ते ह।
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शेs
फूल → पंखिु ड़ याँ सूखकर िगरी ं →la
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ष भाग फूला → फल (फली) → भीतर बीज
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हाँ, बीजयुक्त फली फूल से ही वक सत होती है। यही इस क्रयाकलाप का सबसे महत्वपूण अवलोकन है: जन बीज से आपने
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आरंभ कया और जो बीज अंत म मले, वे एक ही प्रकार के ह— बस एक पीढ़ आगे।
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m .cस्वयं जाँ चए: पौधे के सबसे पहले फूल क डंडी पर एक धागा ढ ला-सा बाँaधgद जए। दो सप्ताह बाद दे खए—
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ag आपका धागा अब एक नन्ही फली के नीचे बँधा मलेगा। यह स्पष्ट प्रमाण है क फली उसी फूल से बनी।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 बीजयुक्त फल के बनने के बाद पौधे का क्या हुआ?
पौधा धीरे-धीरे बढ़ना बंद कर दे ता है, पीला पड़ता है, सूख जाता है और मर जाता है— भले ही आप जल दे ते रह।
प त्तय का हरा रंग जाता रहता है, वे पीली, फर भूरी और कागज जैसी हो जाती ह।
नई प त्तयाँ और फूल आना बंद हो जाता है।
तना सूखा और भुरभुरा हो जाता है; हलाने पर फ लयाँ खड़खड़ाती ह।
अंततः जीवन क सभी ग त व धयाँ समाप्त हो जाती ह और पौधे को मृत मान लया जाता है।
फल बनने के बाद पौधा क्य मर जाता है: फली का पौधा केवल एक ऋतु जीता है। वह जो भी भोजन बनाता है
उसका लगभग सारा हस्सा बीज भरने म लगा दे ता है। वह काम पूरा होते ही उसका काय समाप्त— अगली पीढ़
फ लय के भीतर तैयार है। आम या नीम इससे बहुत भन्न ह, जो दशक तक हर वष फूलते और फलते रहते ह।
पौधा तब मृत कहलाता है जब वह बढ़ ना बंद कर दे त ा है और सभी आवश्यक पिरिस्थितयों की उपलब्धता के बाद
भी उसमें जीवन की गितिविधयाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।
ं
प्र.5 फल के बनने के बाद आपने क्या-क्या प रवतन दे खे? क्या आपके ारा इसम नरंतर पानी डाले जाने के बाद भी
पौधा पीला हो कर सूख गया? अपने फली के पौधे से प्राप्त बीज को उगाइए और दे खए क बीज कस प्रकार
फली के पौध क नई पीढ़ को आगे बढ़ाता है।
हाँ— नय मत जल दे ने पर भी पौधा पीला पड़कर सूख गया। जीवन-चक्र पूरा हो जाने के बाद केवल जल पौधे को जी वत नह
रख सकता।
अब अपनी ही फ लय के बीज बोइए। लगभग एक सप्ताह म वे अंकु रत हो जाएँगे और पूरी कहानी फर से आरंभ हो जाएगी।
यही वृत्त पूरा करता है और जीवन-चक्र का अथ समझाता है।
बीज → नन्हा पौधा → पिरपक्व पौधा → फूल → बीजयुक्त फल (फली) → पौधों की नई पीढ़ ी
पुस्तक के शब्द म: बीज से पौधा और फर बीज क अगली पीढ़ तक क संपूण प्र क्रया को पौधे का जीवन-चक्र कहा
जाता है। चत्र 10.4 क पाँच अवस्थाएँ ह—
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अव ा क्या दखाई दे ता है
अव ा1 बीज
अव ा2 बीज का अंकु रण
अव ा3 पित्तयों का पकटन
अव ा4 फू ल ों का पकटन
अव ा5 फ ल ों का पकटन — बीज सिहत फ ल ी, और उ सके बाद पौधे की म ृत्य ु
मूल वचार: पौधा मर जाता है, कतु उसक जा त नह । बीज जीवन को आगे ले जाते ह। यही बात आपने तब भी
दे खी थी जब पूछा गया था क जनन क्य अ नवाय है— वह जीवन क नरंतरता के लए आवश्यक है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 190
10.5 जंतुओं का जीवन-चक्र — 10.5.1 मच्छर का जीवन-चक्र
प्र.1 क्या आपने कभी ध्यान दया क समय के साथ जंतु कैसे बड़े होते ह? व भन्न जंतुओं के ब के रेखा- चत्र
बनाइए और उनके नाम ल खए।
हाँ। कुछ ब े अपने माता- पता क छोट प्र तकृ त जैसे दखते ह; कुछ बल्कुल भन्न दखते ह। रेखा- चत्र बनाइए और दोन नाम
ल खए।
जंतु ब ा क्या ब ा वयस्क जैसा दखता है?
गाय बछड़ ा हाँ— लंबी टाँग ों वाली छोटी गाय
मुग चूजा हाँ— रोएँद ार छोटा पक्षी
बल्ली िबल्ल ी का बच्चा हाँ
बकरी मेम ना हाँ
मढक टैड पोल नही—
ं पूँछ वाला तैर ाक, पैर िबल्कु ल नही ं
ततली इल्ल ी (ल ाव ) ं रे ंग ने वाला, पत्ते खाने वाला कृ िम जैस ा जीव
नही—
मच्छर ल ाव नही—
ं जल में रहता है और उड़ नही ं सकता
रेशम क ट ल ाव (रे शम का कीड़ा) नही ं
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
यह अंतर क्य महत्वपूण है: जहाँ ब ा वयस्क जैसा दखता है, वहाँ वृ द्ध केवल आमाप का बढ़ना है। जहाँ वह
बल्कुल भन्न दखता है— मच्छर, ततली, मढक— वहाँ जंतु क बाह्य आकृ त, शरीर के आकार और संरचना म
महत्वपूण प रवतन होते ह और कभी-कभी उसका आवास भी जल से थल म बदल जाता है। इन्ह जीवन-चक्र का
वस्तार से अध्ययन यह अध्याय करता है।
यह क जए: कॉपी म दो स्तंभ बनाइए— “ब ा” और “वयस्क”। मुग के साथ चूजा और मढक के साथ टै डपोल
बनाइए। दोन स्तंभ एक ही दृ ष्ट म पूरी कहानी कह दगे।
प्र.2 हम सलाह द जाती है क अपने आस-पास कह भी जल इक ा न होने द। ऐसा क्य है? क्या र जल का
मच्छर के अंडे दे ने के साथ कोई संबंध है?
हाँ— सीधा संबंध है। मच्छर के प्रजनन के लए र जल चा हए, अतः घर के पास र जल का अथ है घर म मच्छर।
वयस्क मादा मच्छर सीधे जल पर या जल के समीप अंडे दे ती है।
लावा और प्यूपा जल म रहते ह— वे कह और वक सत हो ही नह सकते।
उन्ह र जल चा हए। बहती नद या तेज़ नाली म अंडे और लावा बह जाते ह, इसी लए स्थर जल ही खतरनाक है।
मादा मच्छर खून चूसने वाले क ट ह जनसे मले रया, डगू और चकनगु नया जैसी अनेक बीमा रय का संचरण हो सकता
है।
र जल के सामान्य ान— सुरक्षा परीक्षण (सेफ्ट ऑ डट) म इन्ह अवश्य दे खए: कूलर के अंदर, गमले और उनक तश्त रयाँ,
कोई भी खुला पात्र, पुराने टायर, फके हुए डब्बे और ना रयल के खोल, बना ढका टं क , तथा वषा के बाद रुक ना लयाँ और छत।
इस सलाह के पीछे का तक: वयस्क मच्छर के पीछे भागने क अपेक्षा जीवन-चक्र को आरंभ म ही तोड़ना कह
सरल है। जल हटाइए और उसके साथ अंडे, लावा तथा प्यूपा भी चले जाएँगे— कोई वयस्क बनेगा ही नह ।
घर म यह क जए: सप्ताह म एक बार कूलर क तश्तरी, गमल क प्लेट और कोई भी रखी बाल्ट खाली करके
सुखा द जए। एक सप्ताह पयाप्त छोटा अंतराल है— मच्छर को अंडे से वयस्क बनने म लगभग 7 से 10 दन लगते
ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 190 और 191
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
10.5.1— लावा, प्यूपा और रोकथाम
प्र.1 आपको दो अलग-अलग प्रकार के कृ म जैसे जीव ( चत्र 10.5) मल सकते ह। ये लावा और प्यूपा ह, जो मच्छर
के वकास के दौरान उनके जीवन क दो व शष्ट अव ाएँ ह। लावा और प्यूपा के आकार म आपने क्या-क्या
अंतर दे खे?
यूपा
प् लाव
चत्र 10.5, पृष्ठ 190 — र जल नकाय म मच्छर के लावा और प्यूपा का पुनः चत्रण (redrawn sketch); दोन
को आव धत करके दखाया गया है।
दोन जल म तड़पते-से दखते ह, कतु हड लस से दे खने पर वे स्पष्ट रूप से भन्न ह।
लक्षण लावा प्यूपा
समग्र आकार लंबा, पतला और कृ िम जैस ा, स्पष्ट खंडों में छोटा और अल्प-िवराम (कॉमा) जैस ा— आगे बड़ा गोल भाग, पीछे छोटी
बँटा मुड़ी पूँछ
सर एक िसरे पर छोटा स्पष्ट िसर िसर और वक्ष िमलकर एक बड़ा गोल भाग बनाते है ं
शरीर क सतह शरीर पर बाल जैसे तंत ु या शूक िचकना, शूक रिहत
जल म कैसे लटकता सतह से िसर नीचे करके लटकता है िसर ऊपर करके कॉमा की तरह मुड़ा तैर ता है
है
चाल इधर-उधर तेजी से बल खाता है छे ड़ने पर कलाबाजी खाकर भागता है; अन्यथा पायः िस्थर
क्या भोजन लेता है? हाँ, भोजन ले क र वृिद्ध करता है नही ं— यह िव ाम की अवस्था है िजसमें शरीर नए िसरे से बनता है
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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सुरक्षा पहले: उन्ह पात्र म ही हड लस से दे खए, नंगे हाथ जल म न डा लए और अपने शक्षक को सूचना द जए।
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इसके बाद जल सूखी भू म पर उड़ेल द जए।
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प्र.2 जल नकाय म दे खे गए मच्छर के लावा और प्यूपा बार-बार जल क सतह पर आते ह। इसका क्या कारण हो
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सकता है?
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वे श्वास लेने के लए ऊपर आते ह।
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मच्छर के लावा और प्यूपा जल म रहते ह और उन्ह श्वास लेने के लए वायु क आवश्यकता होती है। वे मछली क भाँ त जल
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म घुली वायु नह ले सकते, इस लए उन्ह श्वास लेने के लए जल क सतह पर आना पड़ता है। दोन के पास एक छोट श्वास-नली
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होती है जसे वे जल क सतह से जरा-सा ऊपर नकालते ह और फर नीचे चले जाते ह।
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agl जल में रहना + वायु की आवश्यकता → बार-बार सतह पर आना अिनवाय
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m के जीवन का कमजोर बदु है। जो भी वस्तु जल क सतह को agl
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यह एक तथ्य इतना उपयोगी क्य है: यही मच्छर
g a प्यूपा को समाप्त कर दे गी, और बाहर कसी को हा न नह पहुँचेगी।
वायु से काट दे , वह उस पात्र के हर लावाlऔर
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अगला प्रश्न ठ क यही उपाय बताता है।
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om के जीवन-चक्र को कस प्रकार भंग कया जा सकता है?
प्र.3 .cमच्छर a g l
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ag उत्तर
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कसी भी एक अवस्था पर प्रहार क जए और वयस्क मच्छर बनेगा ही नह । सबसे सरल नशाना वे अवस्थाएँ ह जो जल म रहती ह।
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जस अव ा क्या कर यह क्य काम करता है
पर प्रहार
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अंडा कही ं भी जल इक ा न होने दे ं; कू लर, गमले , तश्तिरयाँ, टायर और टंिकयाँ माद ा को अंड े दे ने के िल ए स्थान ही
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सप्ताह में एक बार खाली करे ं; जल-भंडारण ढककर रखें
comऔर प्यूपा
नही ं िमल ता
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िजस िस्थर जल को खाली न िकया जा सके उस पर िम ी के तेल की पतली परत उ न्हे ं वाय ु से काट दे ती है और वे
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परत िछड़कें मर जाते है ं
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लावा तालाबों और टंिकयों में ग प्पी या गैंबिू सया मछली डाले ं
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मछिल याँ ल ाव खा जाती है ं
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वयस्क
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मच्छरदानी, िखड़िकयों पर जाली, पूर ी बाँह के कपड़े, िवकषक; आस-पास की कम काटेंग े , अतः रोग कम फै ले ंग े और
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सफाई
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अंड े भी कम िद ए जाएँग े
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? इसी कारण नगरपा लका के कमचारी वषा से पहले ना लय म धुआँ करते ह और तालाब पर
तेल छड़कते ह, और व ालय म सप्ताह म एक “शुष्क दवस” रखा जाता है जसम हर पात्र खाली कया जाता है।
प्र.4 मने अपनी माताजी को र जल पर म का तेल छड़कते हुए दे खा है। वो ऐसा क्य करती ह?
उस जल म पल रहे मच्छर के लावा और प्यूपा को मारने के लए। पुस्तक इसका कारण एक ही वाक्य म स्पष्ट कर दे ती है।
िम ी का ते ल जल की सतह पर एक पतली परत बनाता है।
यह परत जल को वायु से पृथ क कर दे त ी है और लाव एवं प्यूपा श्वास ारा वायु गहण नही ं कर पाते है।
ं
पिरणामतः वे मर जाते है।
ं
म का तेल इस प्रकार क्य फैलता है: म का तेल जल से हल्का है और उसम घुलता नह , इस लए थोड़ी-सी मात्रा भी फैलकर
पूरी सतह ढक लेती है। लावा हमेशा क तरह अपनी श्वास-नली ऊपर नकालता है, वहाँ वायु के स्थान पर तेल मलता है और वह
श्वास नह ले पाता।
एक आवश्यक सावधानी: म का तेल केवल उसी जल पर डालना चा हए जसे कोई पएगा या उपयोग नह
करेगा— रुक नाली, बेकार ग ा, जलभराव वाला कोना। पीने के पानी क टं क या पशुओं के तालाब पर कभी नह ।
घर के पात्र के लए सबसे सुर क्षत उपाय है उन्ह खाली करके सुखा दे ना।
क्रयाकलाप 10.5: आइए, व ष
े ण कर — पृष्ठ 191 और 192
10.5.1— कौन-सी अव ा पहले आती है?
क्रयाकलाप
प्र.1 आप कैसे नणय करगे क अंडा अव ा के तुरंत बाद कौन-सी अव ा (लावा या प्यूपा) पहले आती है? कल्पना
क जए क आपको पोखर के जल से भरा एक पात्र दया जाता है जसम लावा और प्यूपा ह। इनक अव ाओं
का सही अनुक्रम पता करने के लए एक क्रयाकलाप क योजना बनाएँ।
दोन प्रकार के जीव को अलग-अलग क जए और दे खए क कौन कसम बदलता है। जो दूसरे म बदलता है, वही पहले
आता है।
अव ध क योजना के अनुसार क्रयाकलाप इस प्रकार होगा—
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
चरण म क्या करूँगा/करूँगी
चरण मेरे पास जल से भरा एक पात्र है िजसमें मच्छर के लाव और प्यूपा है।
ं
1
चरण मैं 4–5 लाव और 4–5 प्यूपा को समान जल वाले अलग-अलग पात्रों में िवभक्त करूँगी। उन पर ल और प ले बल लगाऊँगी।
2
चरण मैं इनका एक अवस्था से अगली अवस्था में पिरवतन दे खने के िलए पितिदन अवलोकन करूँगी।
3
चरण यिद लाव , प्यूपा में पिरवितत होता है, तो इसका तात्पय होगा िक लाव की अवस्था प्यूपा से पूव की है। यिद इसका उल्टा होता है तो
4 प्यूपा की अवस्था लाव के पूव की होगी।
चरण मैं दे खती रहूगँ ी िक मच्छर पहले िकस पात्र में िदखाई दे ता है।
5
आपको वास्तव म क्या मलेगा: पात्र ल म कुछ दन बाद लावा प्यूपा म बदलते दखगे; पात्र प म वयस्क मच्छर पहले नकलगे।
अतः अनुक्रम है—
अंडा → लाव → प्यपू ा → वयस्क मच्छर
चरण 5 का परीक्षण नणय क्य पक्का कर दे ता है: प्यूपा वयस्क अवस्था के अ धक नकट है, इस लए प्यूपा से
मच्छर पहले नकलगे। दो स्वतंत्र प्रमाण— लावा का प्यूपा बनना और प्यूपा से वयस्क का पहले नकलना— एक ही
नष्कष क ओर संकेत करते ह। दो सहमत परीक्षण एक अकेले परीक्षण से कह अ धक सशक्त होते ह।
सुरक्षा: दोन पात्र को महीन कपड़े से ढककर रबर बड लगा द जए। वायु भीतर जाती रहेगी पर नकलने वाला
मच्छर कमरे म नह उड़ पाएगा। क्रयाकलाप समाप्त होने पर जल सूखी भू म पर उड़ेल द जए।
प्र.2 अब, कल्पना क जए क आपको पोखर के जल से भरा एक पात्र दया जाता है जसम लावा और प्यूपा ह। उन्ह
पात्र से अलग कए बना यह न श्चत करने के लए क दोन अव ाओं म से पहले कौन-सी अव ा आएगी,
आप क्रयाकलाप क कस प्रकार योजना बनाएँगे?
अब उत्तर अलग करने से नह , गनती से नकालना होगा।
1. पहले दन ग नए। हड लस से ग नए क पात्र म कतने लावा और कतने प्यूपा ह। दोन संख्याएँ लख ली जए।
2. और कुछ मत बद लए। पात्र को महीन कपड़े से ढककर उसी स्थान पर र खए और कोई जीव न नका लए, न डा लए।
3. प्र त दन उसी समय फर ग नए, एक सप्ताह तक, और साथ म यह भी ल खए क कतने वयस्क मच्छर नकले।
4. प्रवृ त्त प ढ़ए।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
दन लावा प्यूपा नकले वयस्क
1 20 6 0
2 17 8 1
3 13 10 3
4 8 11 6
5 3 9 11
इस ता लका को कैसे पढ़: लावा क संख्या लगातार घट रही है जब क प्यूपा क संख्या पहले बढ़ती है और वयस्क नकलते जाते
ह। स्पष्ट है क लावा प्यूपा म और प्यूपा वयस्क म बदल रहे ह।
लाव ↓ प्यूपा पहले ↑ िफर ↓ वयस्क ↑ → लाव , प्यपू ा से पहले आता है
उसी पात्र म एक और सरल संकेत: य द आप कसी एक जीव को च त कर सक— जैसे एक लावा को ऊपर से
खुली पारदश नली म रखकर उसी पात्र म तैरा द— तो आप उसी एक जीव को बदलते दे ख सकगे। कसी एक जीव
को बदलते दे खना सबसे सशक्त प्रमाण है, क्य क उसका और कोई स्पष्टीकरण संभव नह ।
प्र.3 मच्छर के जीवन-चक्र क व भन्न अव ाओं के दौरान उसक बाह्य आकृ त, शरीर के आकार और संरचना म
महत्वपूण प रवतन होते ह। क्या यह कल्पना करना आसान है क मच्छर एक प्यूपा से नकलता है?
नह — यह कल्पना करना बहुत क ठन है, और इसी लए मच्छर का जीवन-चक्र पढ़ने योग्य है।
अव ा कैसी दखती है कहाँ रहती है भोजन
अव ा I— अंडा एक नन्हा काला िबंद ु, अके ला या समूह में जल पर या उसके समीप भोजन नही ं ले ता
तैर ता
अव ा II— लंबा, खंडयुक्त, शूक ों वाला कृ िम िजसका िसर जल में; वायु के िलए सतह भोजन ले क र वृिद्ध करता है
लावा स्पष्ट है पर आता है
अव ा III— छोटा, कॉमा जैस ा, शूक रिहत जल में; वायु के िलए सतह भोजन नही ं ले ता— यह िव ाम की
प्यूपा पर आता है अवस्था है
अव ा IV— पंखों, छह पैर ों और लंबे स्पशकों वाला पतला वायु और थल पर मादा खून चूस ती है
वयस्क उड़ने वाला कीट
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
पुस्तक स्पष्ट कहती है: अंडे का आकार लावा से बहुत भन्न होता है; लावा प्यूपा से बहुत भन्न दखाई दे ता है; और प्यूपा वयस्क
मच्छर से बहुत भन्न दखाई दे ता है।
प्यूपा से नकला वयस्क मच्छर जल क सतह पर थोड़ा व ाम करता है और फर उड़ जाता है। वयस्क मच्छर 10 से 15
दन तक जी वत रह सकता है। इसके बाद वयस्क मादा मच्छर सीधे जल पर या जल के समीप अंडे दे ती है और यह चक्र चलता
रहता है।
इतना पूण प रवतन मच्छर के लए उपयोगी क्य है: लावा और वयस्क बल्कुल अलग स्थान पर रहते ह और
बल्कुल अलग भोजन लेते ह, इस लए वे कभी आपस म भोजन के लए प्र तस्पधा नह करते। बीच का प्यूपा वह
शांत कायशाला है जसम तैरने वाला शरीर उड़ने वाले शरीर म बदल दया जाता है।
क्रयाकलाप 10.6: आइए, व ष
े ण कर — पृष्ठ 193 और 194
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
10.5.2 मढक का जीवन-चक्र
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क्रयाकलाप
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a s em10.7 म दशाए गए मढक के जीवन-चक्र क सभी अव ाओं क वशेषताओं का अवलोकन क जए। आप
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चत्र
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प्र.1
द गई अव ाओं (क, ख, ग, घ, ङ, च) का अनुक्रम कैसे सु न श्चत करगे? कुछ अव ाएँ अपने आरं भक और
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अं तम आकार म स्पष्ट प रवतन दशाती ह। इन प रवतन को ता लका 10.5 म सूचीबद्ध क जए।
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चत्र 10.7, पृष्ठ 193 — तालाब म मढक क छह अव ाओं (क से च) का पुनः चत्रणm
s e (redrawn sketch)।
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क ख ग घ ङ च
यह ‘ग’ कc om है, कतु इसके दो पैर होते ह। g l a
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a gताl लका 10.5, पृष्ठ 194 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
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g कतना बन चुका है— सबसे पहले वह
.cक्रम कैसे तय कर: अवस्थाओं को इस आधार पर क्रम म र खए क मढक काaशरीर
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se जसम कोई अंग नह , और सबसे अंत म वह जसम सब कुछ है।
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1. जसम केवल अंडे ह, वह सबसे पहले।
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2. जसम अंड के भीतर काली आकृ त बनती दख रही है, वह उसके बाद।
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3. फर पूँछ कतु पैर नह , फर पूँछ के साथ दो पैर, फर पूँछ के साथ चार पैर, और अंत म चार पैर और पूँछ नह ।
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4. ता लका म छपे संकेत का उपयोग क जए: ‘घ' ‘ग' के समान है, कतु इसके दो पैर होते ह। अतः ‘ग' ‘घ' से पहले आएगा।
छपे हुए चत्र 10.7 को पढ़कर भरी हुई ता लका 10.5 इस प्रकार होगी—
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
क ख ग घ ङ च
तालाब के िकनारे एक छोटा मेंढक गोल िसर और यह ‘ग ' के समान जल से बाहर पत्ते कु छ बड़े पारदश
तैर ता अनेक छोटे िजसके चार पैर है ं और लंबी पूँछ वाला है, िकं तु इसके दो पर बैठा हरा- अंडे िजनके भीतर
काले अंडों का जेल ी पूँछ अब भी लगी है। नन्हा काला जीव, पैर होते है।
ं पूँछ िचतकबरा वयस्क काली कॉमा जैस ी
जैस ा समूह— यही यह सतह के पास पैर िबल्कु ल नही ं और पीछे के पैर ों मेंढक । चार आकृ ित िदखाई दे ती
जलाड
ं क है। कोई तैर ता है— मंडूक — आरंिभक वाला टैडपोल। मजबूत पैर , पूँछ है— अंडे के भीतर
अंग अभी नही ं बना। (फ ॉगले ट)। टैडपोल । नही।
ं िवकिसत होता
भूण।
सही अनुक्र म: क → च → ग → घ → ख → ङ
संकेत: दो सबसे सरल सरे ह ‘क' (केवल अंडे, अतः पहला) और ‘ङ' (पूण वयस्क, अतः अं तम)। इन्ह तय कर
ली जए, बीच क चार अवस्थाएँ पैर गनकर अपने-आप क्रम म आ जाएँगी।
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प्र.2 ता लका 10.5 म सूचीबद्ध अवलोकन के आधार पर मढक के जीवन-चक्र का चत्र बनाइए। आपके ारा बनाए
गए चत्र क तुलना चत्र 10.8 से क जए।
क ङ च
ख ग
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चत्र 10.7, पृष्ठ 193 — तालाब म मढक क छह अव ाओं (क से च) का पुनः चत्रण (redrawn sketch)।
क ख ग घ ङ च
यह ‘ग’ के समान है, कतु इसके दो पैर होते ह।
ता लका 10.5, पृष्ठ 194 — पुस्तक के अनुसार, भरने के लए।
इसे वृत्त के रूप म बनाइए, क्य क वयस्क मढक ही वे अंडे दे ता है जनसे चक्र फर आरंभ होता है। चत्र 10.7 क कुछ अवस्थाएँ
एक साथ रखी गई ह— जैसे ‘क' और ‘च' दोन को अवस्था I म रखा गया है।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
अवस्था Iक — जलाडं क (िदन 1)
अंडों का जेल ी जैस ा समूह — क
अवस्था IV — वयस्क मेढं क अवस्था Iख — भूण (िदन 3–4)
पूँछ नही ं, 14 सप्ताह — ङ अंडे के भीतर काली आकृ ित — च
मेंढक का जीवन -च क्र
के वल जल → जल और थल दोनों
अवस्था III — मंडू क अवस्था IIक — पूँछ वाला टै ड पोल
4 पैर + छोटी पूँछ, 12 सप्ताह — ख पैर नही ं, िदन 7–10 — ग
अवस्था IIख — पै रों वाला टै ड पोल
पीछे के पैर , 8–10 सप्ताह — घ
मढक के जीवन-चक्र क चार अवस्थाएँ, प्रत्येक के सामने चत्र 10.7 का अक्षर अं कत है। अवस्थाएँ ‘क' और ‘च' मलाकर अवस्था I
बनती है।
पुस्तक के अनुसार चार अव ाएँ—
1. अंडा अव ा, जो भ्रूण अवस्था म प रव तत होती है;
2. टै डपोल अव ा— पहले पूँछयुक्त तथा पैर वहीन प्रारं भक अवस्था और पीछे के पैर स हत बाद क अवस्था;
3. मंडूक ( ॉगलेट) अव ा;
4. वयस्क मढक अव ा।
समय-अव धयाँ क्या बताती ह: अंडा 3–4 दन म ूण और 7–10 दन म टै डपोल बन जाता है— बहुत तेज़ी से।
कतु टै डपोल से मंडूक तक का प रवतन कई सप्ताह लेता है। वषा से भरे तालाब अ धक दन नह टकते, इस लए
मढक आरं भक अवस्थाएँ जल्द पार करता है और समय तभी लेता है जब टै डपोल स्वयं भोजन जुटाने लगे।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 194 और 195
10.5.2— कक्षा म चचा क जए
प्र.1 मढक के ये अंडे उन अन्य अंड से कस प्रकार भन्न ह, जो आपने पहले कभी दे खे ह?
मढक के अंड क तुलना रसोई म दखने वाले मुग के अंडे से क जए।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
लक्षण मढक के अंडे (जलांडक) मुग का अंडा
आवरण मुल ायम, पारदश जेल ी, कोई कठोर खोल नही ं कठोर, भुर भुर ा कै िल्सयम का
खोल
संख्या सै क ड़ों, एक साथ जुड़े हुए सफे द जेल ी जैसे समूह में— जलांडक एक बार में एक
आमाप और रंग बहुत छोटे, पत्येक पारदश गोले के भीतर काला िबंद ु बड़ा, सफे द या भूर ा
कहाँ दए जाते ह तालाब के िकनारे जल की सतह पर तैर ते हुए , पायः जल में या आस-पास उगने थल पर, घोंस ले में
वाले पौधों से संल ग्न
माता- पता क कोई नही ं— अंडे स्वयं िवकिसत होते है ं मुग उन पर बैठकर उन्हे ं गरम
दे खभाल रखती है
क्या भीतर दखता हाँ— जेल ी के आर-पार िवकिसत होता भूण िदखाई दे ता है नही ं— खोल अपारदश है
है?
मढक के अंड को खोल क आवश्यकता क्य नह : खोल वायु म दए अंडे को सूखने से बचाता है। मढक के अंडे
तो जल म ही ह, अतः वे सूख ही नह सकते। जेली इसके बदले तीन दूसरे काम करती है— अंड को जोड़े रखती है,
समूह को फसलनदार और कई शका रय के लए अरु चकर बनाती है, और जल सोखकर फूल जाने से अंड को
ग दे ती है। फर भी बहुत-से अंडे खा लए जाते ह, इसी लए मढक सैकड़ अंडे दे ती है ता क कुछ तो बच।
प्र.2 कौन-सी अव ा क अव ध सबसे कम होती है?
अंडा अव ा सबसे कम अव ध क होती है। चत्र 10.8 म छपी अव धयाँ दे खए—
अव ा कब आती है लगभग कतनी चलती है
अवस्था Iक— जलांडक दन 1 2–3 िद न (सबसे कम )
अवस्था Iख— ूण दन 3–4 ल गभग 4–6 िद न
अवस्था IIक— पूँछ वाला टै डपोल दन 7–10 ल गभग 7 सप्ताह
अवस्था IIख— पैर वाला टै डपोल 8–10 सप्ताह ल गभग 2–3 सप्ताह
अवस्था III— मंडूक 12 सप्ताह ल गभग 2 सप्ताह
अवस्था IV— वयस्क मढक 14 सप्ताह शेष जीवन
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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िदन 1 → िदन 3–4 = अंडे के रूप में के वल लगभग 3 िदन
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se m ा इतनी जल्द क्य बीत जाती है: अंडा न तैर सकता है, न छप सकता है, न भोजन ले सकता है। वह
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अंडा अव
aपूणतः असहाय है और मछ लयाँ, क ट तथा पक्षी उसे खा जाते ह। जतनी जल्द वह ऐसे टैडपोल म बदल जाए जो
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कम से कम तैरकर भाग सके, उतना ही उसके बचने क संभावना बढ़ती है।
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प्र.3 क्या मढक के जीवन-चक्र क व भन्न अव a ाओं के दौरान उनके आवास म कोई प रवतन होता है?
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हाँ— और यही मढक क सबसे वलक्षण बात है। वह जीवन पूणतः जल म आरंभ करता है और अंत म जल तथा थल दोन म
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रहने योग्य हो जाता है।
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अव ा आवास उसके अनुकूल शारी रक लक्षण
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अंडा / ूण के वल जल मुल ायम जेल ी का आवरण जो सूख नही ं सकता
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पूँछ वाला टै डपोल के वल जल
a तैर ने के िलए लंबी पूँछ; पैर नही ं
पछले पैर वाला
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पूँछ अब भी है, पीछे के पैर बनने लगे
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के वल जल
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टै डपोल
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मंडूक अिधकतर जल , िकं त ु कु छ समय थल पर भी िबताना चार पैर , पूँछ छोटी होती जाती है
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आरंभ
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वयस्क मढक पूँछ नही ं; कू दने और उतरने के िलए मजबूत िपछले
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जल और थल द ोनों
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पैर
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g l as बदलने के साथ-साथ शरीर भी नए सरे से बनता जाता है। थल पर
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यह प रवतन संभव कैसे होता है: आवास
बेकार पूँछ धीरे-धीरे शरीर म समा जाती है; और पैर, जो पानी म तैरते जीव के लए कसी काम के नह , तभी बनते ह
m
जब उनक आवश्यकता पड़नी है। यही वचार आपने मच्छर म भी दे खा था— शशु और वयस्क अलग-अलग स्थान
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पर रहते ह और उसी के अनुसार बने होते ह।
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a उस अव ा म व शष्ट वशेषताएँ कस प्रकार सहायक होती ह?
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प्रत्येक अवस्था का प्रत्येक लक्षण कसी कारण से है। उन्ह मलाकर दे खए।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
अव ा व शष्ट लक्षण वह कस प्रकार सहायक है
जलांडक एक ही जेल ी में सै क ड़ों अंडे - ,
बहुत से खा िल ए जाते है ं अतः अिधक संख्या कु छ के बचने की
सुिनिश्चतता दे ती है ; जेल ी उ न्हे ं जोड़े रखती और ग ी दे ती है
टै डपोल लंबी पूँछ, पैर नही ं पूँछ उ न्हे ं जल में तैर ने में सहायता करती है— वही एकमात्र स्थान है
(आरं भक) जहाँ वे रह और खा सकते है ं
टै डपोल (बाद पूँछ रहते हएु ही िपछले पैर िनकल आते है ं वह ताल ाब की तल ी पर धक्का दे कर चल ना सीख ले ता है और अभी
क) तैर भी अच्छी तरह सकता है
मंडूक चार पैर , पूँछ घटती हुई; वह अब भी जल में रहता है यह सुर िक्षत बीच की अवस्था है — थल पर चल ने का अभ्यास और
िकं तु कु छ समय थल पर भी िबताने लगता है त ुरंत जल में ल ौटने की सुिवधा
वयस्क मढक पूँछ पूणतः लुप्त; पैर मजबूत हो जाते है ं िजससे ल ंबी छल ाँग से वह थल पर कीट पकड़ ले ता है और िशकारी से एक
कू दकर स्थल पर आने में सहायता िमलती है ही छल ाँग में ताल ाब में ल ौट सकता है
पुस्तक के अनुसार: टै डपोल के पछले पैर वक सत हो जाते ह कतु उनक पूँछ बनी रहती है; धीरे-धीरे वे छोटे मढक जैसे दखने
लगते ह जन्ह मंडूक कहते ह; वे बड़े होते जाते ह और उनक पूँछ पूणतः लुप्त हो जाती है; पूण वक सत वयस्क मढक बनने पर वे
जल और थल दोन म रहने लगते ह।
क्या आप जानते ह? पूँछ य ही फक नह जाती। उसका पदाथ शरीर म वापस सोख लया जाता है और मंडूक के
बदलते समय काम आता है— इसी लए मंडूक कुछ समय बहुत कम खाकर भी काम चला लेता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 195
10.5— जीवन-चक्र क तुलना
प्र.1 आपके वचार से क्या पक्षी भी जीवन-चक्र क व भन्न अव ाओं म महत्वपूण प रवतन प्रद शत करते ह?
प क्षय म प रवतन होते तो ह, कतु मच्छर या मढक जैसे नाटक य नह ।
पक्षी के जीवन क अव ा कैसी दखती है
अंडा कठोर खोल वाला, घोंस ले में िदया गया; भीतर चूजा िवकिसत होता है
चूजा छोटा, दुबल, पायः लगभग पंखहीन, आँखें बंद , उड़ नही ं सकता; माता-िपता िखलाते है ं
कशोर पक्षी पंख आ जाते है,ं उड़ना सीखता है, कभी-कभी अब भी िखलाया जाता है
वयस्क पक्षी पूरे पंख, उड़ता है, स्वयं भोजन जुटाता है और अंडे दे ता है
यह मढक या मच्छर से कस प्रकार भन्न है—
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चूजे का शरीर का ढाँचा माता- पता जैसा ही होता है— च च, दो पंख, दो पैर। वह मुख्यतः बड़ा होता है और उस पर पंख
आते ह।
उसका आवास नह बदलता— घ सला, फर पेड़ और आकाश।
प्यूपा जैसी कोई व ाम अव ा नह होती और टै डपोल क पूँछ क तरह कोई अंग लुप्त नह होता।
तो स ा उत्तर क्या है? हाँ, प रवतन होते ह— नंगा गुलाबी चूजा और उड़ती कोयल बहुत भन्न दखते ह— कतु ये
आमाप और आवरण के प रवतन ह, शरीर के पूरे पुन नमाण के नह । अध्याय का वाक्य “बाह्य आकृ त, शरीर के
आकार और संरचना म महत्वपूण प रवतन” मच्छर और मढक पर कह अ धक ठ क बैठता है।
प्र.2 जंतुओं का जीवन-चक्र पौध के जीवन-चक्र से कस प्रकार भन्न होता है?
दोन जीवन-चक्र ह— दोन छोटे से आरंभ होते ह, वृ द्ध करते ह, अगली पीढ़ बनाते ह और मृत्यु पर समाप्त होते ह। कतु ववरण
भन्न ह।
तुलना का बदु पौधे का जीवन-चक्र जंतु का जीवन-चक्र
आरंभ बीज से अंडे या नवजात से
पहला चरण अंकु रण स्फु टन या जन्म
अवस्थाएँ बीज → नवोिद् भद → पित्तयाँ → फू ल → बीजयुक्त फल अंडा/िशशु → (लाव , प्यूपा या टैडपोल, मंडूक ) →
वयस्क
गत जीवन भर एक ही स्थान पर चलता-िफरता है और आवास भी बदल सकता है
भोजन हरी पित्तयों में स्वयं भोजन बनाता है पौधों या अन्य जंतओ
ु ं पर िनभर
वृ द्ध अनेक पौधे जीवन भर वृिद्ध करते रहते है;ं नई शाखाएँ और जड़ें अिधकांश जंत ु वयस्क होने पर वृिद्ध करना बंद कर
बनती रहती है ं दे ते है ं
अगली पीढ़ फल के भीतर बीजों में अंडों में, या जीिवत जन्मे बच्चों में
कसम
दोन म समान क्या है: अध्याय का समापन संदेश। पौधे और जंतु सजीव जगत का एक भाग ह, वे अपने जीवन-काल म अनेक
प रवतन से गुजरते ह, और इस प्रकार के प रवतन पौध और जंतुओं के जी वत रहने तथा अपनी प्रजा त क नरंतरता
बनाए रखने के लए महत्वपूण होते ह। हम उनका और उनके आवास स्थान का ध्यान रखना चा हए— उनके आवास वक सत
और सुर क्षत करके हम इस समृद्ध सजीव जगत म योगदान दे सकते ह।
आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 197 और 198
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अध्याय का अभ्यास
प्र.1 पौध और जंतुओं के जीवन-चक्र म समानताओं और भन्नताओं को सूचीबद्ध क जए।
समानताएँ
दोन एक छोटे से आरंभ- बदु से शुरू होते ह— पौधे म बीज, जंतु म अंडा या नवजात।
दोन एक न त क्रम म अनेक अव ाओं से गुजरते ह।
दोन वृ द्ध एवं वकास करते ह और इसके लए उन्ह भोजन, जल तथा वायु चा हए।
दोन ऐसी अवस्था तक पहुँचते ह जहाँ वे जनन करके अगली पीढ़ उत्पन्न कर सक।
दोन अंततः मर जाते ह, जब क उनक जा त अगली पीढ़ के रूप म चलती रहती है।
दोन म यह चक्र फर दोहराया जाता है— बीज से नए पौधे, अंड से नए जंतु।
भन्नताएँ
पौधा जंतु
आरं भक बीज अंडा या नवजात िशशु
अवस्था
पहले चरण का अंकु रण स्फु टन या जन्म
नाम
प्रमुख अवस्थाएँ बीज → अंकु रण → पित्तयाँ → फू ल → अंडा → लाव → प्यूपा → वयस्क (मच्छर); अंडा → टैडपोल → मंडूक
बीजयुक्त फल → वयस्क (मेंढक)
स्थान जीवन भर एक ही स्थान पर िस्थर चलता-िफरता है; आवास जल से थल में बदल सकता है
भोजन सूय के पकाश से स्वयं भोजन बनाता है भोजन के िलए पौधों या अन्य जंतओ
ु ं पर िनभर
वृ द्ध पायः जीवन भर चलती रहती है सामान्यतः वयस्क अवस्था में रुक जाती है
अगली पीढ़ कैसे बीज फल के भीतर बनते और िबखरते है ं अंडे िदए जाते है ं या बच्चे जन्म ले ते है ं और पायः उनकी दे खभाल की जाती
है
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 नीचे ता लका म कुछ ववरण (डाटा) दया गया है। ता लका का अध्ययन क जए और दूसरे व तीसरे स्तंभ म द
गई तय के लए उपयुक्त उदाहरण का पता लगाने का प्रयास क जए। य द आपको लगता है क नीचे द गई
कसी भी त के लए उदाहरण संभव नह है, तो स्पष्ट क जए क ऐसा क्य है? (1. वृ द्ध— नह , श्वास—
नह ; 2. वृ द्ध— नह , श्वास— हाँ; 3. वृ द्ध— हाँ, श्वास— नह ; 4. वृ द्ध— हाँ, श्वास— हाँ)
प्रत्येक पं क्त को अलग-अलग ली जए। तीन पं क्तय के उदाहरण मल जाते ह; एक का नह मलता— और क्य नह मलता यही
असली उत्तर है।
क्रम क्या क्या उदाहरण टप्पणी
सं. इसक यह
वृ द्ध श्वास
होती है? लेता
है?
1. नह नह पत्थर , कु स , साइिकल , प्ल ािस्टक की एक सामान्य िनज व वस्तु। दोनों में से कोई भी
बोतल , चॉक का टुक ड़ा पक्रम नही ं होता क्योंिक वहाँ कोई सजीव शरीर है ही
नही ं।
2. नह हाँ पूण वयस्क मन ुष्य , वयस्क गाय, पूर ी बढ़ सजीव। वयस्क होने पर आमाप की वृिद्ध रुक जाती
च ुकी प ुरानी बरगद , वयस्क मच्छर है, िकं तु श्वसन जीवन के हर क्षण चलता रहता है
क्योंिक ऊज की आवश्यकता िनरंतर बनी रहती है।
3. हाँ नह कोई सजीव उ द ाहरण संभव नही ं है। के वल सजीव श्वसन के िबना वृिद्ध नही ं कर सकता,
ऐसी िनज व वस्त ुएँ जो बढ़ ती हई
ु पतीत होती क्योंिक नए भाग बनाने की ऊज और पदाथ श्वसन
— तश्तरी में नमक या त ूितया के िक्रस्टल ,
है ं से ही िमलते है।
ं सूचीबद्ध वस्तुए ँ बड़ी अवश्य होती
ग ुफ ा में ल टकते स्तंभ , बफ की ल टकन, बाल ू है,ं पर के वल बाहर से पदाथ जुड़ने के कारण— यह
का टील ा , ल ुढ़कता बफ का गोल ा सच्ची वृिद्ध नही ं है और यहाँ श्वसन होता ही नही ं।
4. हाँ हाँ बच्चा , िपल्ल ा, फ ल ी का नवोिद् भद , आम का सजीव और अभी बढ़ रहा। दोनों पक्रम साथ-साथ
छोटा पौधा , टैडपोल चल रहे है—
ं यह पत्येक बढ़ ते सजीव की सामान्य
िस्थित है।
पं क्त 3 सबसे रोचक क्य है: यह आपसे वृ द्ध क ठ क-ठ क प रभाषा माँगती है। “वह बड़ी हो जाती है” कहना
पयाप्त नह । सजीव म नया पदाथ भोजन के रूप म लया जाता है, शरीर के भीतर बदला जाता है और शरीर का अंग
बनता है— और इसके लए श्वसन से मली ऊजा चा हए। क्रस्टल म कण केवल बाहर से आकर बैठ जाते ह। आँख
को प रणाम एक-सा दखता है, प्रक्रम बल्कुल भन्न है।
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कक्षा 6 व ान अध्याय 10 सजीव— वशेषताओं का अन्वेषण
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आपने सीखा है क बीज के अंकुरण के लए भन्न- भन्न प र तय क आवश्यकता होती है। अनाज और
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दाल के उपयुक्त भंडारण के लए हम इस ान का उपयोग कस प्रकार कर सकते ह?
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भंडा रत अनाज से ठ क वही चीज दूर र खए जो बीज को अंकुरण के लए चा हए— जल, वायु और गरमी। अनाज और
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दाल बीज ही ह; भंडार म अंकु रत हो जाएँ या उनम फफूँद लगे तो वे नष्ट हो जाते ह।
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अंकुरण के भंडारण म हम क्या करते ह
g l as यह क्य काम करता है
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चा हए
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जल / नमी भंडारण से पहले अनाज को धूप में अच्छी तरह सुखाइए ; सूखे कमरे में
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नमी के िबना बीजावरण कभी मुल ायम नही ं
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.co िडब्बे में सूखी राख या चूने की पोटली रिखए
रिखए; बोिरयाँ फश और दीवार से हटकर लकड़ी के तख्ते पर रिखए;
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होगा और भूण पसुप्त बना रहेग ा
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a g वायु वायुर ोधी िटन, डम, कोठी या सील बंद थैल ों में भिरए; पात्र ऊपर तक
भिरए
वाय ु के िबना बीज श्वसन नही ं कर सकता
अतः अंकु िरत भी नही ं होगा — और भीतर बंद
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कीट भी जीिवत नही ं रहे ंगे
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गरमी भंडार ठं डा, छायादार और हवादार रिखए; चू े के पास या धूप में कभी
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ठं डे अनाज में न अंकु रण होता है , न कीट और
नही ं फफूँ द पनपते है ं
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नमी और हा न सूखी नीम की पित्त याँ, हल्दी या सूखी लाल िमच िमलाइए; भरने से पहले ,
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कीट और नमी दू र रहते है ं अतः बीज पसुप्त
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लाने वाले क ट पात्र साफ कीिजए; कु छ महीनों बाद अनाज िफर धूप िदखाइए
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और साब ुत बना रहता है
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एक.cपं क्त का सद्धांत: जब तक बीज सूखा, ठं डा और वायुर हत है, वह बीज
a gही बना रहेगा। भारत क हर
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aseपारंप रक भंडारण- व ध— म क कोठ , कसकर ढका धातु का ड्रम, अप्रैल म छत पर दाल सुखाना— इन्ह तीन
agl म से कोई एक काम कर रही है।
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स्वयं जाँ चए: दो मु मूँग ली जए। एक कसकर बंद सूखे जार म र खए और दूसरी रसोई के नम कोने म खुली
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कटोरी म। वषा ऋतु म पखवाड़े भर बाद तुलना क जए। खुली मूँग से सीलन क गंध आएगी और वह अंकु रत भी हो
सकती है।
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g यह मढक बनता है तो पूँछ लुप्त हो
.c आपने सीखा है क टैडपोल क एक पूँछ होती है ले कन जब वृ द्ध केaबाद
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जाती है। टै डपोल अव ा म पूँछ होने से क्या लाभ मलता है?
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पूँछ टै डपोल का तैरने का अंग है। टै डपोल पूणतः जल म रहता है और आरं भक अवस्था म उसके पैर होते ही नह , अतः चलने-
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फरने का उसके पास यही एकमात्र साधन है।
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पूँछ टै डपोल को क्या-क्या करने देaती है—
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