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NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा

AglaSem पर कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Science Chapter 11 Nature’s Treasures (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा - Page 1 of 56

About NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा

NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा is available here for free download. Published by NCERT for Class 6, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (56 pages). Candidates preparing for Class 6 can use NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 11 प्रकृति की अमूल्य संपदा – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 11: प्रकृ त क अमूल्य संपदा

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

201 – 224 24 56 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 55 pages

Page 2

कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 11: प्रकृ त क अमूल्य संपदा
कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत NCERT समाधान। इसम क्रयाकलाप 11.1
से 11.6 तक क सभी ता लकाएँ भरी हुई ह, पृष्ठ 201 से 219 तक के सभी पाठ्य प्रश्न हल ह, तथा पृष्ठ 221 से 224 तक के आइए, और अ धक
सीख और और भी सीख के सभी प्रश्न स म्म लत ह— साथ म भारत के कोयला क्षेत्र , पवनचक्क फाम , वन और पारंप रक जल संचयन व धय के
वास्त वक उदाहरण।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 6) 201 – 224

खं ड प्रश्न

24 56

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 201
अध्याय का आरंभ— प मी घाट म अ ी का गाँव

प्र.1 क्या आप प्रकृ त क ऐसी कुछ और संपदाओं के वषय म सोच सकते ह?

अ ी ने चार संपदाएँ पहले ही बता द ह— शुद्ध वायु, उपजाऊ मृदा, पयाप्त धूप और वृक्ष जो जंतुओं तथा प क्षय को भोजन
एवं आश्रय दे ते ह। इनके अ त रक्त और भी अनेक संपदाएँ ह— और इनम से एक भी हमारी बनाई हुई नह है।

प्रकृ त क संपदा यह संपदा क्य है

जल झरने, निदयाँ, तालाब, वष और भू-जल— पीने, खाना बनाने, नहाने और फसले ं उगाने के िलए

वन लकड़ी, फल, शहद, गोंद , औषिधयाँ, तथा पिक्षयों, कीटों और वन्य जंतओ
ु ं का घर

मृदा जड़ों को थामती है, जल एवं पोषक तत्व संिचत रखती है और हमारा संपूण भोजन उगाती है

पवन अनाज ओसाने, नाव चलाने, पवनचक्की घुम ाने और िवद्य तु उत्पादन में

च ान और ख नज घर एवं सड़क के िलए पत्थर; खिनजों से लोहा, ताँबा, ऐलुिमिनयम और सोना

पौधे और जंतु भोजन, दू ध , कपास , ऊन, शहद , लकड़ ी और औषिधयाँ

जीवाश्म ईंधन पथ्ृ वी के भीतर गहराई में दबे कोयला, पेटोिलयम और पाकृ ितक गैस

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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

इन्ह ‘संपदा’ क्य कहा गया: संपदा वह मूल्यवान वस्तु है जो हम बना कमाए मली है, कतु जसक रक्षा करना
हमारा दा यत्व है। वायु, मृदा या नद कसी कारखाने म नह बनत । धन के वपरीत, ये य द बगड़ जाएँ या समाप्त हो
जाएँ तो कोई दुकान हम दूसरी नह दे सकती।

यह क जए: अपने घर के बाहर पाँच मनट खड़े होकर ऐसी दस वस्तुएँ ल खए जन्ह कसी मनुष्य ने नह बनाया—
धूप, बयार, प क्षय क चहचहाहट, नीम का पेड़, बादल, मृदा, च टयाँ… यही आपक अपनी ‘प्रकृ त क संपदा’ क
सूची है।

क्रयाकलाप 11.1: आइए, अनुभव कर — पृष्ठ 202
11.1 वायु— श्वास रोककर दे खना

क्रयाकलाप

प्र.1 एक गहरी श्वास ली जए और उसे धीरे-धीरे छो ड़ए। फर एक और अ धक गहरी श्वास ली जए। जतना संभव हो
सके, श्वास को रोक कर र खए और फर धीरे-धीरे छो ड़ए। आप कतनी दे र तक श्वास रोक सकते ह?

कक्षा 6 के अ धकांश व ाथ लगभग 25 से 45 सेकंड तक श्वास रोक पाते ह। अभ्यास करने वाला तैराक एक मनट या उससे
अ धक तक रोक सकता है, जब क दौड़ने के तुरंत बाद यह समय घटकर केवल 10–15 सेकंड रह जाता है।
इसे ठ क प्रकार से कैसे कर:

शांत होकर बै ठए। कसी मत्र से घड़ी ारा या धीरे-धीरे गनकर समय नोट करवाइए।
गहरी श्वास ली जए, रो कए, और असहज लगते ही धीरे-धीरे छोड़ द जए।
इसे तीन बार दोहराइए और तीन बार का समय ल खए।

प्रयास रोका गया समय (नमूना प्रेक्षण)

पहला प्रयास 28 से कं ड

दूसरा प्रयास 35 से कं ड

तीसरा प्रयास (दौड़ने के बाद) 14 से कं ड

समय इतना कम क्य : जस वायु को हम भीतर लेते ह उसम ऑक्सीजन होती है। हमारे शरीर को अपने काय करने
के लए ऑक्सीजन क नरंतर आवश्यकता होती है। श्वास रोकने पर शरीर को नई ऑक्सीजन नह मलती, अतः
कुछ ही क्षण म शरीर हम पुनः श्वास लेने के लए ववश कर दे ता है।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

सावधानी (पुस्तक से): अपनी श्वास को इतनी दे र तक मत रो कए क आपको असहज लगने लगे। जल म यह
प्रयोग कभी मत क जए।

प्र.2 जब आप श्वास रोक कर रखते ह तो आपको कैसा लगता है?

आरंभ म कुछ नह लगता, कतु शीघ्र ही श्वास लेने क तीव्र और असहज इच्छा उत्पन्न होती है।

छाती म भारीपन या कसाव अनुभव होता है।
हृदय क धड़कन तेज हो जाती है।
गले म जलन होती है और हाँफने का मन करता है।
अ धक दे र रोकने पर चक्कर आते ह और चेहरा लाल हो जाता है।
श्वास छोड़ते ही और ताजी वायु भीतर लेते ही बहुत राहत मलती है।

ऐसा क्य होता है: शरीर ऑक्सीजन का संचय नह कर सकता। श्वास रोकने पर शरीर को अपने काय के लए
पयाप्त ऑक्सीजन नह मलती और उपयोग हो चुक काबन डाइऑक्साइड रक्त म एकत्र होती जाती है। शरीर इसे
भाँप लेता है और हम श्वास लेने पर ववश कर दे ता है। इसी लए हम भोजन या जल के बना कुछ दन जी वत रह
सकते ह, कतु ऑक्सीजन के बना कुछ क्षण भी नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 203
11.1 वायु— चत्र 11.1 वायु का संघटन

प्र.1 पृथ्वी के चार ओर उप स्थत वायु व भन्न गैस का मश्रण है। क्या आप वायु म उप स्थत कुछ गैस के नाम बता
सकते ह?

वायु कोई एक गैस नह , ब ल्क गैस का मश्रण है। चत्र 11.1 म इसे 100 वग ारा दशाया गया है, जहाँ प्रत्येक वग 1 प्र तशत का
प्रतीक है।

100 वग ं में से — 78 नाइट ोजन + 21 ऑ क्सीजन + 1 आगन , काबन डाइऑ क्साइड तथा अन्य गैसे ं = 100

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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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l a se नाइटोजन — 78%
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e m . ऑक्सीजन — 21% ag
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आगन, काबन डाइऑक्साइड
तथा अन्य गैसें .— 1%
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agl प त्येक छोटा वग = वायु का 1 प ितशत

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चत्र 11.1 को 100 वग के रूप म दे खए— 78 वग नाइट्रोजन, 21 वग ऑक्सीजन तथा 1 वग आगन, काबन डाइऑक्साइड एवं अन्य

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नाइट्रोजन— वायु का सबसे बड़ा भाग, लगभग 78%।

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ऑक्सीजन— लगभग 21%; यही वह गैस है जो जी वत रहने के लए आवश्यक है।

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आगन, काबन डाइऑक्साइड तथा अन्य गैस— सब मलाकर केवल लगभग 1%।

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वायु म जलवाष्प और सूक्ष्म धूलकण भी रहते ह, जनक मात्रा बदलती रहती है।

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a gl 1% भी महत्वपूण क्य है: काबन डाइऑक्साइड वायु का बहुत छोटा भाग है, फर भी पौधे इसी से भोजन

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बनाते ह और जीवाश्म ईंधन जलने पर यही गैस नकलती है। मात्रा कम होने का अथ महत्व कम होना नह है।

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और भी जान! ‘प्र तशत’ प्रत्येक 100 म से अंश क संख्या है। इसे % संकेत ारा दशाया जाता है। अतः 21%

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ऑक्सीजन का अथ है— वायु के प्रत्येक 100 भाग म 21 भाग ऑक्सीजन।

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m 11.2: आइए, फरक बनाएँ और सजाएँ — पृष्ठ 204 ase
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क्रयाकलाप
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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

11.1 वायु— कागज क फरक बनाना

क्रयाकलाप

प्र.1 अब आप अपने हाथ म फरक को पकड़कर दौ ड़ए। आप इसे फूँक मार कर भी चला सकते ह। आप क्या दे खते
ह? क्या फरक घूमती है?

हाँ— जब भी वायु फरक के पंख से टकराती है, फरक घूमने लगती है।

आप क्या करते ह आप क्या दे खते ह

शांत वायु म फरक को स्थर पकड़ना वह नही ं घूम ती

उस पर फूँक मारना वह घूम ती है; तेज फूँ क मारने पर और तेज घूम ती है

उसे पकड़कर दौड़ना वह स्वयं तेजी से घूम ने लगती है

उसे आगे-पीछे हलाना पत्येक बार िहलाने पर वह घूम ती है

तेज हवा वाले दन स्थर खड़े रहना िबना कु छ िकए ही वह लगातार घूम ती रहती है

यह घूमती क्य है: फरक के पंख मोड़कर बनाए जाते ह, इस लए प्रत्येक पंख तरछा होता है। तरछे पंख से
टकराकर वायु उसे एक ओर धकेलती है। चार पंख एक ही दशा म धकेले जाते ह, अतः पूरी फरक पन पर घूमने
लगती है। दौड़ने पर आप स्थर वायु म आगे बढ़ते ह— यह वैसा ही है जैसे वायु आपके पास से गुजर रही हो।

सुझाव: 15 cm × 15 cm का कड़ा कतु पतला कागज ली जए और ऑल पन को डंडी म बहुत कसकर मत
ठो कए। पन कसी होगी तो कतनी भी फूँक मा रए, फरक नह घूमेगी।

प्र.2 फरक को कौन घुमा रहा है?

पवन अथात् चलती हुई वायु ही फरक को घुमाती है।
वायु दखाई नह दे ती, कतु उसका प्रभाव दखाई दे ता है— पेड़ पर प त्तय क सरसराहट, रस्सी पर लटके कपड़ का हलना, पंखा
चलाने पर खुली पुस्तक के पन्न क फड़फड़ाहट। इसी प्रकार चलती वायु फरक के तरछे पंख को धकेलकर उसे घुमा दे ती है।

चलती हुई वायु = पवन
मंद पवन = बयार • बहुत ते ज पवन = आँधी

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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

मुख्य बात: पवनचक्क भी ठ क फरक क तरह ही काय करती है, केवल आकार म बहुत बड़ी होती है— पवन
उसके पंख को घुमाती है। पवनचक्क का उपयोग आटे क चक्क चलाने, कुँए से पानी ऊपर ख चने और वद्युत-
उत्पादन के लए कया जाता है। पवनचक्क फाम वह क्षेत्र है जसम अनेक पवनच क्कयाँ एक साथ लगी होती ह
और पवन-ऊजा से वद्युत बनाती ह।

और भी जान! — पृष्ठ 204
11.1 वायु— भारत के पवनचक्क फाम

और भी जान!

प्र.1 त मलनाडु का मुप्पंडल पवनचक्क फाम, राजस्थान के जैसलमेर का पवनचक्क पाक और महाराष्ट्र का ब्रह्मवेल
पवनचक्क फाम हमारे दे श के कुछ प्रमुख पवनचक्क फाम ह। अपने दे श म पाए जाने वाले अन्य पवनचक्क
फाम के वषय म जानकारी प्राप्त क जए।

भारत वश्व के सबसे बड़े पवन-ऊजा उत्पादक दे श म से एक है। पवनचक्क फाम वह बनाए जाते ह जहाँ पवन तेज और लगातार
चलती है— समुद्र तट पर, प श्चमी घाट के दर म और खुले मरुस्थल म।

पवनचक्क फाम राज्य वहाँ पवन तेज क्य है

मुप्पंडल (कन्याकुमारी के तिमलनाडु समुद्र पवन प श्चमी घाट के अरलवायमोझी दर से होकर तेजी से बहती है— ए शया के सबसे
पास) बड़े पवन फाम म से एक

कयत्तार और तिमलनाडु तरुनेलवेली–तूतीको रन का वही तेज पवन वाला क्षेत्र
अरलवायमोझी

जैसलमेर पवन पाक राजस्थान थार मरुस्थल का खुला, समतल वस्तार जहाँ पवन को कोई रोक नह

ब्रह्मवेल और धुले–साकरी महारा सतपुड़ा एवं स ा द्र क ऊँची पवत-श्रे णयाँ

वनकुसवडे (कोयना के महारा प श्चमी घाट का पवन-प्रवण शखर
पास)

चत्रदुग और गदग कन टक उत्तरी कनाटक का खुला पठार

कच्छ और जामनगर तट गज
ु रात सौराष्ट्र–कच्छ के पूरे तट पर तेज समुद्र पवन

अनंतपुर और राम ग र आंध रायलसीमा का शुष्क, खुला पठार
पदे श

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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

पवन-ऊजा क्य लाभदायक है: पवन एक नवीकरणीय संसाधन है। पवनचक्क एक बार लग जाने के बाद न
कोयला चा हए, न डीजल, और न ही कोई धुँआ नकलता है। ऊपर बताए गये पाँच राज्य— त मलनाडु , गुजरात,
कनाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान— मलकर भारत क अ धकांश पवन- वद्युत बनाते ह।

पता लगाइए: घर पर पू छए या मान चत्र म दे खए क आपके राज्य म कोई पवनचक्क फाम है या नह । य द नह है
तो सो चए क्य — क्या आपका क्षेत्र पहाड़ क ओट म है, या समुद्र से बहुत दूर है?

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 205
11.2 जल— जल के उपयोग और ोत

प्र.1 य द आपको पीने के लए जल न मले, वशेषतः जब आपको प्यास लगी हो तब आपको कैसा महसूस होगा?

बहुत बेचैनी और व्याकुलता अनुभव होगी— और यह अनुभू त तेजी से बढ़ती जाती है।

मुँह और गला सूख जाता है, बोलना तक क ठन हो जाता है।
कमजोरी, थकान और चड़ चड़ाहट होती है, कसी काम म मन नह लगता।
बहुत दे र तक जल न मले तो सरदद और चक्कर आने लगते ह।
जब तक एक गलास जल न मल जाए, और कुछ सूझता ही नह ।

ऐसा क्य होता है: हमारे शरीर का आधे से अ धक भाग जल है। पसीने, श्वास और मूत्र के रूप म यह लगातार बाहर
नकलता रहता है, इस लए इसक पू त करनी ही पड़ती है। प्यास शरीर का अपना संकेत है क जल कम हो रहा है।
यही कारण है क जल को अमूल्य कहा गया है— मनुष्य भोजन के बना कई दन जी सकता है, कतु जल के बना
कुछ ही दन।

सो चए: गर मय म भारत के अनेक नगर -कस्ब म दुकान और मं दर के बाहर राहगीर तथा प क्षय के लए प्याऊ
या मटका रखा जाता है। यह पुरानी परंपरा इसी अनुभू त के कारण बनी है।

प्र.2 क्या आप अपने दै नक जीवन म जल के कुछ अन्य उपयोग के वषय म सोच सकते ह? अपने वचार नीचे दये
गये रक्त स्थान म ल खए।

पहले बुलबुले म लखा है— “हम पीने के लए जल क आवश्यकता होती है।” रक्त बुलबुल म ये उपयोग लखे जा सकते ह।

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कहाँ उपयोग उदाहरण

घर म खाना बनाना, बतन धोना, कपड़े धोना, नहाना, फश साफ करना, शौचालय में, पौधों को पानी दे ना

खेत म फसलों की िसंचाई, खेत की तैयारी, पशुओ ं को पानी िपलाना

उ ोग म कागज, कपड़ा, सीमेंट, चीनी और इस्पात बनाने में; मशीनों को ठं डा करने में

सबके लए बाँध ों से िवद्य तु उ त्पादन, आग बुझाना, नौका ारा पिरवहन, मछली पालन

एक बात ध्यान द जए: पीने के अ त रक्त लगभग हर उपयोग कम जल म, या पहले से एक बार उपयोग कए गये
जल से भी पूरा कया जा सकता है। जल क बचत क संभावना यह छपी है।

प्र.3 हम जल कहाँ-कहाँ से प्राप्त होता है? जल के व भन्न ोत क एक सूची बनाइए।

पृथ्वी क सतह का लगभग दो- तहाई भाग जल से घरा है, फर भी अ धकांश जल सीधे उपयोग योग्य नह है।

जल का प्रकार ोत क्या हम उपयोग कर सकते ह?

लवणीय (नमक न) जल महासागर एवं समुद ं घरे ल ू, कृ िष तथा औद्य ोिगक उपयोग के योग्य नही ं
नही—

हम के रूप म मृदु जल बफ की चादरे ं, ऊँचे पवतों की िहम और िहमनद म ृद ु जल है, िकं तु पाप्त करना किठन

भू-जल कु एँ, नलकू प और हैड
ं पंप से िनकाला गया जल म ृद ु जल है, िकं तु सुगमता से उपल ब्ध नही ं

सतही मृदु जल निदयाँ, झरने, झीले ं, तालाब, बाविड़याँ, सोते हाँ— सहजता से उपल ब्ध , िकं तु मात्रा बहुत थोड़ ी

वषा छतों और खुल ी भूिम से एकित्रत वष जल हाँ— यही मूल ोत है जो शेष सभी को भरता है

पृथ्वी का कु ल जल → अिधकांश लवणीय समुद ी जल

थोड़ ा भाग मृद ु जल → उसका भी अिधकांश िहम और भू-जल में बंद

तालाबों, निदयों, झीलों और कुँ ओं में के वल बहुत थोड़ ा भाग सहजता से उपलब्ध

इसी लए जल अमूल्य है: इतना जल, फर भी पीने योग्य इतना कम! हमारा दे श गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी,
कृष्णा, कावेरी, नमदा और महानद जैसी न दय से समृद्ध है, फर भी अनेक भाग म जल क कमी रहती है। यही
कारण है क अ ीब को हर बूँद सँभालकर उपयोग करना सखाती ह।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 206
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11.2 जल— क्या जल व्यथ हो रहा है?
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aप्र.1gl क्या आपने दै नक काय म जल को व्यथ होते हुए दे खा है?
क्या आप अनुभव करते ह क हमारे दै नक जीवन क ग त व धय म जल का उपयोग सही प्रकार से हो रहा है?

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नह — अ धकांश घर और व ालय म जल का उपयोग ठ क प्रकार से नह होता। एक बार ध्यान दे ना आरंभ कर तो
अपव्यय हर ओर दखाई दे ने लगता है।

दाँत साफ करते, हाथ म साबुन लगाते या दाढ़ बनाते समय नल खुला छोड़ दे ना।
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s e mदेता है।
omभूल जाने से टंक का बहना। gla
नल और पाइप का रसाव— एक सेकंड म एक बूँद टपकने वाला नल दन भर म कई बाल्ट जल बहा
मोटर बंदcकरना
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a s eू टर,mकार या आँगन को चलते पाइप से धोना।
gl दोपहर म बगीचे को पानी देना, जब अ धकांश जल वा ष्पत हो जाता है।
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केवल दो-तीन बतन के लए भी नल या मशीन चला दे ना।
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हम ध्यान क्य नह जाता: नल घुमाते ही जल आ जाता है, इस लए वह अनंत लगता है। कतु उस नल के पीछे

a तlनह है। भारत के कई भाग म लोग को पीने का पानी लाने के लए बहुत
कोई नद , झील या नलकूप है, जो अनंg
दूर तक चलना पड़ता है— सभी के पास जल क समान उपलब्धता नह है।

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comप्र त दन इतना जल व्यथ कर दे ता है। l
स्वयं जाँ चए: सुबह टपकते नल के नीचे एक मग र खए और शाम को दे खए क कतना जल भर गया। एक छोटा-
सा .रसाव a g
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क्रयाकलाप 11.3: आइए, पता लगाएँ — पृoष्ठm206
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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

11.2 जल— ता लका 11.1 दै नक ग त व धय म जल क व्यथता

क्रयाकलाप

प्र.1 ता लका 11.1 म स्तंभ II एवं स्तंभ III को भर— 1. हाथ धोना 2. कपड़े धोना 3. बतन धोना 4. नहाना 5. खाना
पकाना 6. बागवानी 7. दाँत साफ करना

ता लका 11.1 — दै नक ग त व धय म जल क व्यथता

स्तंभ I स्तंभ II स्तंभ III

गतवध जल कस प्रकार व्यथ हो रहा है? जल व्यथ होने से रोकने के लए सुझाए गये उपाय

1. हाथ धोना

2. कपड़े धोना

3. बतन धोना

4. नहाना

5. खाना पकाना

6. बागवानी

7. दाँत साफ करना

ता लका 11.1 जैसी पृष्ठ 206 पर छपी है — स्तंभ II और स्तंभ III रक्त ह, इन्ह आपको भरना है।

पूरी भरी हुई ता लका 11.1 यह रही। अपने घर म जो वास्तव म होता है, उसे दे खकर अपनी प्र त भ रए।

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कक्षा 6 व ान अध्याय 11 प्रकृ त क अमूल्य संपदा AglaSem · NCERT Solutions

गतवध जल कस प्रकार व्यथ हो रहा है? जल व्यथ होने से रोकने के लए सुझाए गये उपाय

1. हाथ धोना साबुन लगाते समय नल खुल ा रहता है साबुन लगाते समय नल बंद कर दे ं; के वल धोते समय खोले ं; नल
आधा ही खोले ं

2. कपड़े धोना मशीन आधी भरकर चलाना; बार-बार खंग ालना; मशीन पूर ी भरकर चलाएँ; कपड़ े पहले िभगोएँ तािक कम रगड़ ना
साबुन वाला जल बहा दे ना पड़ ;े खंगालने वाले जल से आँगन या फश धोएँ

3. बतन धोना नल लगातार खुल ा रहता है; एक-एक बतन अलग पहले जूठन खुर चें, सभी बतनों पर एक साथ साबुन लगाएँ, िफर
धोना टब में भरे जल से धोएँ

4. नहाना शॉवर के नीचे दे र तक नहाने से बहुत जल बहता है; बाल्टी और मग से नहाएँ; शॉवर का समय कम करे ं; कम पवाह
साबुन लगाते समय भी जल िगरता रहता है वाला शॉवर लगवाएँ

5. खाना चलते नल के नीचे साग-भाजी धोना; चावल-दाल का कटोरे में भरकर सिब्जयाँ धोएँ; बचा हआु जल पौधों में डाले ं या
पकाना बचा जल फें क दे ना आटा गूँध ने में ले ं; आवश्यकता िजतना ही जल ले ं

6. बागवानी पाइप खुल ा छोड़ना; तेज धूप में दोपहर को पानी दे ना सुबह या शाम झारी से पानी दे ं; पौधों के आस -पास सूखी पित्त याँ
िजससे अिधकांश वािष्पत हो जाए िबछाएँ; टपक (िडप) िविध अपनाएँ

7. दाँत साफ पूरे दो िमनट नल खुल ा रहता है एक िगलास जल से काम चलाएँ; बश करते समय नल बंद रखें
करना

सुझाव: कहानी म अ ी क व ध सबसे सरल नयम है— पौध को इस प्रकार पानी द जए क प्रत्येक बूँद का
उपयोग हो और एक भी बूँद व्यथ न जाए।

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प्र.2 इस ता लका से प्राप्त हुई जानकारी से आप क्या नष्कष नकाल सकते ह? जल के अपव्यय को रोकने के लए
आप और आपका प रवार क्या कर सकता है?

ता लका 11.1 — दै नक ग त व धय म जल क व्यथता

स्तंभ I स्तंभ II स्तंभ III

गतवध जल कस प्रकार व्यथ हो रहा है? जल व्यथ होने से रोकने के लए सुझाए गये उपाय

1. हाथ धोना

2. कपड़े धोना

3. बतन धोना

4. नहाना

5. खाना पकाना

6. बागवानी

7. दाँत साफ करना

ता लका 11.1 जैसी पृष्ठ 206 पर छपी है — स्तंभ II और स्तंभ III रक्त ह, इन्ह आपको भरना है।

नष्कष: जल कसी एक बड़े काय म व्यथ नह होता— वह दन भर म थोड़ा-थोड़ा, बार-बार, ब्रश करने, नहाने और धोने जैसे
साधारण काम म बहता रहता है। इसका लगभग पूरा अपव्यय आदत के छोटे -छोटे बदलाव से रोका जा सकता है, जन पर कोई
खच नह आता।
प रवार क्या कर सकता है:

उपयोग म न होने पर नल बंद रख और प्रत्येक रसाव तुरंत ठ क करवाएँ।
शॉवर के स्थान पर बाल्ट और मग से नहाएँ।
जल का पुनः चक्रण कर— सब्जी धोने और कपड़े खंगालने का जल पौध , फश और आँगन के लए उपयोग कर।
जल संचयन कर— छत का वषा जल टं क म एकत्र कर या ग े के ारा भू म म उतार।
टं क म फ्लोट वाल्व लगवाएँ ता क वह कभी न बहे।
घर म प्र त सप्ताह एक व्य क्त को “जल प्रहरी” बनाएँ जो नल क जाँच करे और रसाव बताए।

यह जुड़कर बड़ा हो जाता है: य द एक प रवार प्र त दन केवल 50 लीटर बचाए, तो 100 प रवार क कॉलोनी
प्र त दन 5,000 लीटर बचाएगी— पूरा एक टकर। जल बचाने से उसे पंप करने म लगने वाली बजली भी बचती है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 207

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11.2 जल— प्रदूषण, संरक्षण एवं जल संचयन

प्र.1 जल को प्रदू षत करने वाली मानवीय ग त व धय को पहचा नए। कक्षा म अपने मत्र के साथ चचा क जए क
आप जल प्रदूषण को कम करने के लए क्या उपाय कर सकते ह।

पुस्तक म दो बात बताई गई ह— जल ोत म कचरा फकना और घर तथा उद्योग का अप शष्ट उनम डालना। शेष ग त व धयाँ ये
ह।

मानवीय ग त व ध यह जल को कैसे प्रदू षत करती है

बना शोधन कए मल-जल और ना लय का पानी न दय म गंद गी और रोगाण ु िमल जाते है;ं जल से दुग ध
ं आने लगती है और मछिलयाँ
छोड़ना मर जाती है ं

कारखान का अप शष्ट— रंग, अम्ल, तेल, रसायन ऐसे हािनकारक पदाथ िमल जाते है ं जो स्वयं समाप्त नही ं होते

खेत म अ धक उवरक और क टनाशक डालना वष उन्हे ं बहाकर तालाबों और निदयों में ले जाती है

तालाब-नद म कपड़े, पशु और वाहन धोना साबुन, अपमाजक और िचकनाई जल में िमल जाते है ं

न दय म प्ला स्टक थै लयाँ, रैपर, मू तयाँ और पूजा-साम ी प्लािस्टक वष ं तक तैर ता रहता है और पवाह रोकता है
डालना

जल ोत के पास खुले म शौच रोगाण ु जल में िमलकर बीमािरयाँ फै लाते है ं

नाव और जहाज से तेल का रसाव तेल की पतली परत फै लकर जलीय पौधों और मछिलयों को मार दे ती है

हम क्या कर सकते ह (कक्षा म चचा कर चु नए):

तालाब, नहर या नद म रैपर, बोतल या बचा भोजन कभी न फक— उन्ह कूड़ेदान तक ले जाएँ।
अपमाजक कम मात्रा म उपयोग कर और कपड़े नद - कनारे के बजाय घर पर धोएँ।
मू तयाँ और पूजा के फूल नद के स्थान पर अलग बने कुंड म वस जत कर।
वद्यालय और मोहल्ले क ना लयाँ साफ और खुली रख।
स्वच्छता सप्ताह म पोस्टर और नुक्कड़ नाटक कर; नद या झील क सफाई अ भयान म भाग ल।

यह इतना महत्वपूण क्य है: प्रदू षत जल कसी भी सजीव के उपभोग के लए उपयुक्त नह होता— न हमारे
लए, न पशुओं के लए, न उसम रहने वाली मछ लय के लए। और मृदु जल के ोत तो पहले से ही सी मत ह।

प्र.2 आप जल संरक्षण क कौन-कौन सी व भन्न व धयाँ सोच सकते ह?

जल संरक्षण का अथ है— जल का ववेकपूण उपयोग और जतना संभव हो उतना जल वापस लौटाना। इसक तीन श्रे णयाँ
ह:

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वध क्या कर

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कम उपयोग कर आवश्यकता न होने पर नल बंद रखें; बाल्टी से नहाएँ; िरसाव ठीक कराएँ; कटोरे में सब्जी धोएँ

a s em चलाएँ

aपुgनःlउपयोग खंग ालने का जल और आर.ओ. से िनकला जल पौधों, फश और शौचालय में उपयोग करे ं
(पुनःचक्रण)

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जल लौटाएँ (संचयन)
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छत से वष जल संचयन; िरचाज ग े और सोख्ता ग े ; चेक डै म , तालाब और बाविड़याँ; कु छ भूिम िबना पक्की छोड़ें ag
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तािक वष भूिम में समा सके
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खेती म कम व्यय
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खेत भरने के बजाय टपक (िडप) और फ व्वारा िसंचाई; सूखी पित्त यों की पलवार

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जल स्वच्छ रख पदू षण रोकना भी संर क्षण है— स्वच्छ जल ही उपयोग योग्य बना रहता है

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यहeआवश्यक
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क्य है: मृदु जल के ोत सी मत होने के कारण भारत के अनेक भाग म जल क कमी है। कुछ

a gl स्थान पर लोग को पीने का पानी लाने के लए बहुत दूर चलना पड़ता है। सभी के पास जल क समान उपलब्धता
नह है— इस लए जल का ववेकपूण उपयोग केवल समझदारी नह , न्याय भी है।
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प्र.3 gl पद्ध तय को अपने आस-पास खोज। इसके बारे म और अ धक जानने के
आप जल संचयन क इन पारंपaरक
लए अपने शक्षक और अ भभावक से बातचीत कर।

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m .c पंप आने से बहुत पहले भारत के हर क्षेत्र ने वषा जल पकड़ने और सं चत करनेagक अपनी व ध वक सत कर ली थी।
se लगाइए क इनम से कौन-सी आपके क्षेत्र क है।
पाइप और

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पारंप रक व ध क्षेत्र यह कैसे काय करती है

बावड़ी / बावली राजस्थान सीढ़ दार गहरा कुआँ; वषा जल के साथ आस-पास क झील -तालाब से रसने वाला
जल भी सं चत करता है— जैसे तूरजी का झालरा, जोधपुर

वाव गज
ु रात सीढ़ दार बावड़ी— पाटन क रानी क वाव तथा अडालज क वाव

जोहड़, टाँका, राजस्थान मट्ट का छोटा बाँध; आँगन के नीचे भू मगत टाँका; खेत म बहते जल को रोकने वाला
खड़ीन, कुंड मेड़-बंधा

आहर–पइन िबहार (मगध) पइन नामक ना लयाँ नद और वषा का जल आहर नामक जलाशय तक पहुँचाती ह

एरी / केरे, तिमलनाडु, कन टक गाँव के तालाब और मं दर-कुंड क ंखला, जो एक के बाद एक भरते जाते ह
कल्याणी

फड़ और बंधारा महारा नाले पर बना पत्थर का बंधारा जल को नहर ारा खेत तक ले जाता है

कुहल / कूल, िहमाचल पदे श, जम्मू, हमनद के नाले से नकाली गई छोट नहर; ोत पर बना सीढ़ दार पत्थर का कुंड
नौला, गूल उत्तराखंड

बाँस टपक सचाई, मेघ ालय, नागालै ंड चीरे हुए बाँस क न लय से झरने का जल; पहाड़ी सीढ़ दार खेत म वषा का संचयन
जाबो

सुरंगम, जग, के रल , ल ाख, क च्छ लेटराइट पहाड़ी म खोद गई सुरंग; हमनद के पघले जल का टाँका; रेतीले ग े म उथला
वरदा (गुजरात) कुआँ

यह काय कैसे कर: दादा-दाद या कसी बुजुग पड़ोसी से पू छए क गाँव या मोहल्ले म तालाब, जोहड़, बावड़ी, केरे या मं दर-कुंड
था या नह ; उसक दे खभाल कौन करता था; और क्या आज भी उसम जल रहता है। फर उसका सरल रेखा चत्र बनाकर पाँच
पं क्तयाँ ल खए।

क्या आप जानते ह? बावड़ी म केवल वषा का जल ही नह , आस-पास क झील , तालाब और न दय से रसकर
आने वाला जल भी सं चत होता है। इसके लए खाइय क भीतरी द वार पत्थर के टु कड़ से इस प्रकार बनाई जाती
ह क उनम से जल रस सके।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 208
11.3 सूय से ऊजा— वश्व जल दवस तथा सूय के उपयोग

प्र.1 प्रत्येक वष 22 माच को वश्व जल दवस मनाया जाता है। इसका महत्त्व पता लगाइए।

प्रत्येक वष 22 माच को वश्व जल दवस मनाया जाता है, ता क पूरे संसार को यह स्मरण रहे क मृदु जल सी मत है और उसका
मूल्य समझना, उसे सबम बराबर बाँटना तथा स्वच्छ रखना आवश्यक है।

इसका आरंभ संयुक्त राष्ट्र ारा कया गया और यह 1993 से मनाया जा रहा है।

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प्रत्येक वष एक वषय (थीम) रखा जाता है— जैसे भू-जल, हमनद अथवा जल और शां त— जससे एक समस्या पर सबका
ध्यान जाए।
इसका मुख्य लक्ष्य है क पृथ्वी के प्रत्येक व्य क्त को स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता उपलब्ध हो।
वद्यालय, पंचायत और नगर इस दन रैली, तालाब -कुँओं क सफाई, पोस्टर एवं नारा प्र तयो गता तथा टपकते नल ठ क कराने
के संकल्प के साथ इसे मनाते ह।

जल के लए पूरा एक दन क्य : पृथ्वी के जल का बहुत थोड़ा भाग ही ऐसा मृदु जल है जो सरलता से मल जाता
है, और वही प्रत्येक मनुष्य, जंतु तथा पौधे को बाँटना पड़ता है। वष म एक न श्चत दन होने से सरकार अपना काम
बताती ह और साधारण लोग अपनी आदत पर वचार करते ह।

यह क जए: 22 माच को अपने वद्यालय के नल ग नए, दे खए कतने टपक रहे ह, और वह सूची शक्षक को
द जए। यही वास्त वक वश्व जल दवस है, केवल पोस्टर बनाना नह ।

प्र.2 हम व भन्न काय के लए सूय क ऊष्मा (गरमी) और प्रकाश का उपयोग करते ह। वे कौन सी ग त व धयाँ ह
जनके लए हम ऊष्मा और प्रकाश क आवश्यकता होती है? भू म कुछ चत्र बनाती है। क्या आप कुछ अन्य
उदाहरण के साथ उसक सहायता कर सकते ह? चत्र बनाइए और दए गये स्थान पर उनके नाम ल खए।

पौधों ारा कपड़ े सूखना
भोजन बनाना

पृष्ठ 208 पर छपे चत्र-स्थान — भू म के बनाए दो चत्र और भरने के लए तीन रक्त बक्से।

भू म दो चत्र पहले ही बना चुक है— पौध ारा भोजन बनाना और कपड़े सूखना। इनके आगे ये चत्र बनाए जा सकते ह और
नीचे इनका ववरण लखा जा सकता है।

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जो चत्र बनाएँ नीचे जो ववरण लख

चटाई पर सूखती मच / आम क सूय की गरमी इन्हे ं सुखा दे ती है तािक ताजी उपलब्ध न होने पर इनका उपयोग िकया जा सके — ठीक
फाँक वही जो अज्जी कर रही है ं

छत पर सूखते पापड़ और ब ड़याँ धूप में सुखाने से जल िनकल जाता है और ये खराब नही ं होते

ख लहान म फैलाया अनाज िकसान धान और गेहू ँ को भंडारण से पहले धूप में सुखाते है ं

छत पर लगे सौर पैनल ये सौर-ऊज एकित्रत कर िवद्य तु उत्पन्न करते है ं

सोलर कुकर िबना िकसी ईंध न के सीधे सूय की ऊष्मा से भोजन पकता है

सौर जल ऊष्मक नहाने का जल सूय से गम होता है

समुद्र कनारे नमक के खेत समुद ी जल धूप में वािष्पत होकर नमक छोड़ जाता है— जैसे गुजरात और तिमलनाडु में

जाड़े क धूप म रखे कपड़े और धूप नमी सुखा दे ती है तथा फफूँ दी और कीटाणुओं से बचाती है
पुस्तक

सुबह क धूप म खेलता ब ा धूप से शरीर िवटािमन डी बनाता है, जो हि यों को मजबूत करता है

जल चक्र— समुद्र, बादल, वषा सूय की ऊष्मा जल का वाष्पीकरण करती है और हमें वष िमलती है

सबम एक ही बात समान है: इनम से हर काम म सूय वह काय कर दे ता है जसके लए अन्यथा ईंधन, बजली या
धन लगता। इसी लए सूय को पृथ्वी पर ऊजा का मुख्य ोत कहा जाता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 209
11.3— गाय, घास और सूय

सो चए और उत्तर द जए

प्र.1 (घास चरती गाय के वषय म वातालाप) आपके अनुसार, कसका कथन सही है और क्य ?

अं तम ब े का कथन सही है— वह जो कहता है: “गाय घास खा रही है। घास को बढ़ने के लए सूय के प्रकाश क आवश्यकता
होती है। अतः ऊजा का मुख्य ोत सूय है। इस प्रकार गाय को सूय से ऊजा प्राप्त होती है।”
अब तीन कथन को दे खए:

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कथन सही? कारण

“गाय घास खा रही है और उससे ऊजा आंिशक रूप यहाँ तक ठीक है िक गाय को ऊज घास से ही िमलती है। िकं तु यह कथन
प्राप्त कर रही है।” से सही घास पर रुक जाता है और यह नही ं पूछता िक घास को ऊज कहाँ से िमली।

“गाय धूप म खड़ी है, परंतु इसका अथ यह एक बात में यह ठीक कहता है िक कोई जंत ु के वल धूप में खड़े रहकर ऊज नही ं ले सकता
नह क इसे सूय से ऊजा मल रही है।” सही — जंत ु सूय के पकाश से भोजन नही ं बना सकते। िकं तु यह िनष्कष गलत है
िक सूय गाय को कोई ऊज नही ं दे ता।

“गाय घास खाती है; घास को बढ़ने के लए पूणतः सही यह ऊज को उसके आरंिभक ोत तक पीछे ले जाकर दे खता है।
सूय का प्रकाश चा हए; अतः ऊजा का
मुख्य ोत सूय है।”

सूय → सूय का पकाश घास को भोजन बनाने में सहायता करता है → गाय घास खाती है → गाय को ऊज
िमलती है

अतः सूय ही ऊज का मुख्य ोत है, यद्यिप वह पत्यक्ष रूप से नही ं िमलती।

दूसरा ब ा कहाँ चूक गया: धूप म खड़ी गाय केवल गम होती है— वह सूय के प्रकाश को भोजन म नह बदल
सकती। यह काय केवल हरे पौधे कर सकते ह। अतः सूय क ऊजा गाय तक घास के माध्यम से पहुँचती है, उसक
त्वचा से नह । यही बात हम पर भी लागू होती है— हमारी रोट , दाल, दूध और अंडा सब पौध ारा सं चत सूय-ऊजा
ही ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 210
11.3— य द सूय दखाई न दे तो?

सो चए और उत्तर द जए

प्र.1 क्या होगा य द सूय कुछ दन तक दखाई न दे ? 1. हम दन के समय भी कृ त्रम प्रकाश पर नभर रहना पड़
सकता है। 2. ......... 3. .........

बदु 1 पुस्तक म पहले से भरा है। बदु 2 और 3 म ये बात लखी जा सकती ह— और भी कई।

1. हम दन के समय भी कृ त्रम प्रकाश पर नभर रहना पड़ सकता है। ( दया हुआ)
2. कपड़े, अनाज, पापड़ और मच नह सूखगी; गीले कपड़ से दुगध आएगी और फफूँद लग जाएगी।
3. सौर पैनल, सोलर कुकर और सौर जल ऊष्मक काम करना बंद कर दगे, अतः वद्युत कम मलेगी और मुफ्त गम जल नह
मलेगा।
4. ठं ड बढ़ जाएगी— भू म, वायु और जल को गरमी सूय से ही मलती है।
5. पौधे ठ क से भोजन नह बना पाएँगे, प त्तयाँ पीली पड़ जाएँगी और फसल कमजोर हो जाएँगी।
6. पौध पर नभर जंतुओं को भोजन क कमी होगी, और अंततः हम भी।

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7. समुद्र और न दय से वाष्पीकरण कम होगा, जससे आगे चलकर बादल और वषा भी कम ह गे।
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8. अनेक फूल नह खलगे, पक्षी अपने समय को लेकर भ्र मत ह गे और लोग सुस्ती अनुभव करगे।
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एक ही तारे पर इतना कुछ क्य नभर है: सूय पृथ्वी के प्रत्येक सजीव को ऊष्मा और प्रकाश दोन दे ता है। पौधे
gयl से ऊजा लेकर भोजन बनाते ह, जंतु पौध को खाते ह और हम दोन से भोजन प्राप्त करते ह। पृथ्वी पर यह पूरा
aसूचक्र सूय के कारण ही संभव है— इसी लए सूय के बना पृथ्वी पर जीवन क कल्पना नह क जा सकती।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 211 a
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11.4 वन— वन से हम क्या मलता है

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आप अपने मत्र से चचा कर और कम से कम पाँच ऐसे उत्पाद क एक सूची बनाएँ जन्ह हम वन से प्राप्त करते
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पाँच से कह अ धक— नीचे द गई सूची म से चु नए।

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इमारती लकड़ी (साल, सागौन, दे वदार) फन चर, दरवाजे, िखड़िकयाँ, नाव, कृ िष-उपकरण

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जलाने क लकड़ी और कोयला (चारकोल) खाना पकाने और गरमी के िलए

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g की तीिलयाँ
टोकरी, चटाई, सीढ़ ी, झोपड़ी, मचान,aअगरबत्ती
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a फल, मेवे और बीज
agl आँवला (नेिलकाई), जामुन, महुआ , इमली, िचरौंजी

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औषधीय पौधे
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नीम, तुल सी, अश्वगंध ा, सपगंध ा, िगलोय
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m . भोजन और मोमबत्ती— सुंदरबन तथा नीलिगिर में एकत्र िकया जाता है a
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शहद और मोम

ग द, राल और लाख बबूल का गोंद , चीड़ की राल, चूिड़यों और पॉिलश के िलए लाख

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तदू पत्ता और साल-बीज अनेक वनवासी पिरवारों की आजीिवका का साधन
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कागज एवं प्लाईवुड का क ा माल
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वृक्षारोपण से पाप्त लुगदी-लकड़ ी l
a s em चारा और हरी पत्ती क खाद
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गाय-बकिरयों का चारा; खेतों में िमलाई जाने वाली पित्त याँ
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वे उत्पाद जो थैले म नह बाँधे जा सकते: वन हम स्वच्छ वायु, छाया और ठं डक, वषा भी दे ते ह और अपनी

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जड़ से मृदा को थामे रखते ह ता क वह बहे नह । वन प क्षय , क ट और वन्य जंतुओं का प्राकृ तक आवास ह। ये

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नःशुल्क सेवाएँ ऊपर क पूरी ता लका से भी अ धक मूल्यवान ह।

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अ ी का नयम ध्यान र खए: उनके गाँव म पेड़ से फल नह तोड़े जाते— केवल गरे हुए फल उठाए जाते ह,
ता क पेड़ के फल जंतुओं और प क्षय के लए बचे रह। यही एक परंपरा पूरे वन का पेट भरती रहती है।

प्र.2 एक बड़े वन क्षेत्र को काटने के क्या प रणाम होते ह? एक प्रस्तु त बनाइए या अ भनय (रोल प्ले) क जए या एक
कहानी या क वता ल खए जो दशाती हो क य द हम अपने जंगल म पेड़ को नरंतर काटते रहगे तो क्या हो
सकता है।

आपक प्रस्तु त, नाटक, कहानी या क वता म ये बात अवश्य आनी चा हए: प रणाम एक के बाद एक आते ह, जैसे गरती हुई
डो मनो क पं क्त।

पहले क्या होता है फर क्या होता है

जड़ मृदा को थामे नह रहत वष उपजाऊ ऊपरी म ृद ा बहा ले जाती है; भूिम बंजर हो जाती है; निदयाँ और बाँध गाद से भर
जाते है ं

भू म पर प त्तयाँ नह गरत सड़ी पित्तयाँ न िमलने से म ृद ा के पोषक तत्व घट जाते है ं

वषा जल सोखने वाले पेड़ नह रहते जल तेजी से बह जाता है— वष में बाढ़ और गरमी में सूखे कु एँ

जंतुओं का घर उजड़ जाता है पक्षी, कीट और वन्य जंत ु भोजन एवं आश्रय खो दे ते है;ं हाथी और तेदं ुए गाँवों में आ जाते है ं

छाया और पेड़ कम हो जाते ह क्षेत्र अिधक गम और शुष्क हो जाता है

काबन डाइऑक्साइड सोखने वाले पेड़ घट जाते वायु में काबन डाइऑक्साइड बढ़ ती है; वायु अिधक पदू िषत होती है
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वन-उपज समाप्त हो जाती है शहद , तेदं ू पत्त ा और औषधीय पौधों पर जीने वाले पिरवारों की आजीिवका िछन जाती है

नया वन उगाने म कई वष लगते ह यह क्षित हमारे जीवनकाल में पूर ी नही ं होती

नमूना कहानी क रूपरेखा (अपने शब्द म ल खए):

“दे वगढ़ का आ खरी पेड़”— दे वगढ़ गाँव एक हरी पहाड़ी क तलहट म बसा है। हर वष लकड़ी के लए कुछ और
पेड़ काटे जाते ह। ब को तब भी आँवला और महुआ मल जाता है। दस वष बाद पहाड़ी नंगी हो जाती है। वषा
आती है और जड़ न होने से मट्ट बहकर खेत को ढँ क दे ती है। गर मय म कुआँ सूख जाता है और मोर आना बंद कर
दे ते ह। बूढ़ अ ीब को चपको आंदोलन क कथा सुनाती ह— कैसे 1970 के दशक के आरंभ म उत्तराखंड
म स्थानीय म हलाओं ने पेड़ को घेरकर उनसे लपटकर उन्ह कटने से बचाया था। ब े दे वगढ़ म वन महोत्सव आरंभ
करते ह, पहाड़ी पर पौधे लगाते ह और हर पौधे को एक नाम तथा एक रखवाला दे ते ह। वष बाद मोर लौट आते ह।

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कहानी भाषण से अच्छ क्य है: वन का नाश धीरे-धीरे होता है, इस लए वष-दर-वष कसी का ध्यान नह जाता।
कहानी बीस वष को पाँच मनट म समेटकर दशक को वह प रवतन दखा दे ती है।

क्रयाकलाप 11.4: आइए, जाँच कर — पृष्ठ 212 और 213
11.5 मृदा, च ान और ख नज— ता लका 11.2 मृदा के नमूने

क्रयाकलाप

प्र.1 अपने घर और व ालय के आस-पास के व भन्न क्षेत्र से मृदा के नमूने एक त्रत कर। अनुमान लगाइए क व भन्न
मृदाओं म क्या-क्या हो सकता है। मृदा के प्रत्येक नमूने का ध्यानपूवक अवलोकन कर और उसका रंग लख।
प्रत्येक नमूने को स्पश कर उसक बनावट को महसूस कर। नग्न आँख से तथा आवधक लेन्स से अवलोकन कर
ता लका 11.2 म अपने अवलोकन अं कत कर।

ता लका 11.2 — मृदा के नमूने

स्थान जहाँ से नमूना मृदा के बारे म नग्न आँख से मृदा का आवधक लस से मृदा
एक त्रत कया गया अनुमान अवलोकन (रंग एवं संरचना) का अवलोकन

जुताई के बाद खेत से िम ी

ता लका 11.2 जैसी पृष्ठ 213 पर छपी है — एक स्थान दया हुआ है, शेष रक्त है।

चार-पाँच नमूने अलग-अलग कागज क पु ड़य म एकत्र क जए और प्रत्येक पर स्थान का नाम ल खए। भरी हुई ता लका 11.2 इस
प्रकार दखेगी।

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स्थान जहाँ से नमूना मृदा के बारे म नग्न आँख से अवलोकन (रंग आवधक लेन्स से अवलोकन
एक त्रत कया गया अनुमान एवं संरचना)

जुताई के बाद खेत से मुल ायम, गहरे रंग गहरी भूर ी, ढीली और भुर भुर ी; कु छ िभ -िभ आकार के महीन कण, सूखी
न्न न्न

म की और नम नम; िम ी की सोंध ी गंध जड़ ों और पित्त यों के टुक ड़ े, कु छ नन्हे ं कीट

व ालय के खेल के कठोर और धूल हल्की भूर ी, कठोर, कसकर दबी हुई, अिधकतर रे त के कण और छोटे कं कड़ ;
मैदान क मृदा भरी नमी बहुत कम वनस्पित का अंश लगभग नही ं

बड़े पेड़ के नीचे क मृदा पित्तयों से भरी हईु बहत
ु गहरे रंग की, मुल ायम और स्पंज अधसड़ ी पित्त याँ, जड़ ों के महीन रोम ,
जैस ी; ठं डी और नम ची ंिटयाँ, एक छोटा कें चुआ

नद या तालाब के िचपिचपी धूस र, िचकनी, गीली होने पर बहतु महीन कण, बड़ े कण बहतु कम , छोटे
कनारे क मृदा िचपिचपी; लंबी बत्ती बनाई जा सकती है शंख के टुक ड़ े

रेत के ढे र या सूखे नाले ढीली और खुर दरी हल्की पीली-धूस र , खुर दरी और अलग-अलग चमकीले कण, लगभग सभी
क रेत िकरिकरी, उँ गिलयों से िफसल जाती है एक ही आकार के

सावधानी (पुस्तक से): व भन्न स्थान क मृदा को छू ने के उपरांत अपने हाथ को अच्छ तरह से धोना याद र खए।
जस मृदा म कचरा होता है उसम ऐसे क टाणु हो सकते ह जो हमारे लए हा नकारक ह।

प्र.2 नमून के बारे म लगाये गये अनुमान और नकट से कए गये अवलोकन म क्या अंतर है?

हाँ, अंतर है— और यही इस क्रयाकलाप का उ े श्य है। अनुमान स्मृ त से लगाया जाता है; अवलोकन दे खकर कया जाता है।

हम प्रायः अनुमान लगाते ह वास्तव म हम मलता है

“मृदा तो केवल मट्ट है” इसमें रे त, िचकनी िम ी, कं कड़ , जड़ ें, सूखी पित्त याँ, कीट और कृ िम होते है ं

“सारी मृदा भूरी होती है” नमूने गहरे भूरे , लाल , धूस र , काले या हल्के पीले रंग के िमलते है ं

“मृदा म कुछ जी वत नह होता” ची ंिटयाँ, कें चुए तथा आँखों से न िदखने वाले अनेक सूक्ष्म जीव उसमें रहते है ं

“सभी मृदाएँ छू ने म एक जैसी लगती ह” कोई िकरिकरी, कोई रे शमी, कोई िचपिचपी लगती है

पहले अनुमान लगाना फर भी उपयोगी क्य है: व ान म जाँच से पहले अनुमान लगाया ही जाता है— अनुमान
बताता है क क्या दे खना है, और आश्चय बताता है क हमने कुछ नया सीखा।

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प्र.3 क्या आपको व भन्न स्थान से लए गये मृदा के नमून म कोई अंतर दखाई दया?

हाँ— प्रत्येक नमूना रंग, बनावट और उसम उप स्थत पदाथ म भन्न है।

रंग— खेत क मृदा गहरी भूरी, वन क मृदा लगभग काली, नद - कनारे क धूसर, तथा महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और त मलनाडु के
कई भाग क मृदा गहरी लाल।
बनावट— बलुई मृदा कर करी और ढ ली, चकनी मृदा चप चपी और मुलायम, दोमट मृदा भुरभुरी।
नमी— गरी प त्तय के नीचे वन क मृदा नम रहती है; मैदान क मृदा सूखी।
सजीव— बगीचे और वन क मृदा म कचुए एवं क ट बहुतायत से; सड़क कनारे या खेल के मैदान क मृदा म लगभग नह ।

ये भन्न क्य होते ह: व भन्न स्थान से एक त्रत मृदा के नमूने अलग-अलग रंग के हो सकते ह क्य क उनम
व भन्न पदाथ उप स्थत होते ह। मृदा अपने नीचे क चट्टान से बनती है, अतः भन्न चट्टान से भन्न मृदा बनती है।
पौधे और जंतु भी वघटन और क्षय के कारण मृदा का भाग बन जाते ह, इस लए जहाँ वनस्प त अ धक है वहाँ मृदा
अ धक गहरी और उपजाऊ होती है।

क्या आप जानते ह? मृदा व भन्न प्रकार क होती है— कुछ वशेष पौध को उगाने के लए अच्छ होती है तो कुछ
भवन हेतु ईंट बनाने के लए। वन म अनेक प्रकार क मृदाएँ होती ह, इसी लए मृदा को वह अमूल्य संपदा कहा गया
है जो जैव- व वधता को आश्रय दे ती है।

प्र.4 क्या नग्न आँख से और आवधक लेन्स से कए गये अवलोकन म आपको अंतर दखाई दया?

हाँ— आवधक लेन्स नग्न आँख क तुलना म कह अ धक दखाता है।

नग्न आँख से आवधक लेन्स से

मृदा एक ही भूरे चूण जैसी दखती है अनेक आकार और रंग के अलग-अलग कण िदखाई दे ने लगते है ं

केवल बड़े कंकड़ और प त्तयाँ दखती ह सूखी जड़ , टू टी पत्त ी और बीज के िछलके के महीन टुक ड़ े िदखते है ं

कोई जीव दखाई नह दे ता माइट, ची ंिटयों के अंडे तथा अन्य अत्यंत छोटे जीव िदखाई दे ते है ं

बनावट केवल स्पश से आँक जा सकती है कण गोल है,ं नुक ीले है ं या चपटे— यह आँखों से दे खा जा सकता है

लेन्स क्य महत्वपूण है: मृदा म ऐसे अनेक छोटे जीव हो सकते ह जन्ह हम नग्न आँख से दे ख ही नह सकते।
आवधक लेन्स वै ा नक के अ धक ध्यान से दे खने का साधन है— मृदा नह बदली, केवल हमारी दे खने क क्षमता
बढ़ ।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 213
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11.5— मृदा का नमाण कैसे होता है
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aप्र.1gl
क्या आपने कभी सोचा है क मृदा कैसे बनती है?

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मृदा का नमाण लंबे समय म (कई हजार वष म) सूयe,m
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जल और सजीव ारा च ान के वघटन (टू टने- बखरने) से होता
है।

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च ान सूय की ऊष्मा, वष और बहता जल,

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पवन तथा पौधों की जड़ े ं च ान को

g l a धीरे-धीरे तोड़ ती रहती है ं
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च ान के छोटे टु कड़े—
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.coिगरी पित्तयाँ तथा मतृ पौधे और agl
रे त, गाद और िचकनी िम ी

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जंत ु सड़ कर इनमे ं िमल जाते है ं और
पोषक तत्व जोड़ देते है ं
मदृ ा
वायु • जल • सजीव
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इस पूरी पिक्रया में हजारों वष लगते है ं

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मृदा कैसे बनती है: सूय, जल और सजीव चट्टान को तोड़ते ह, और टू टे कण सड़ी हुई वनस्प त तथा जंतु-अवशेष से मलकर मृदा बनाते ह।

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agl च ान को तोड़ने वाले कारक:
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सूय— चट्टान दन म गम होकर फैलती है और रात म ठं डी होकर सकुड़ती है; बार-बार ऐसा होने से उसम दरार पड़ जाती ह।
जल— वषा का जल दरार म भर जाता है; बहती.cनद का जल चट्टान के टु कड़ को आपस म रगड़कर गोल कंकड़ और रेत बना ag

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l करती ह; शैवाल-लाइकेन चट्टान क सतह को धीरे-धीरे क्षय करते ह; कचुए और क ट
agचौड़ा
दे ता है।
सजीव— जड़ दरार म घुसकर उन्ह
सब कुछ मलाते-पलटते रहते ह।

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l से मृदा को थामने वाले वन इतने
मृदा को अनवीकरणीय क्य माना जाता है: कुछ सट मीटर मृदा बनने म सैकड़ से हजार वष लगते ह, कतु नंगी
o से एक तेज वषा उसे एक ही दोपहर म बहा ले जा सकती है। इसी लए
.cपहाड़ी agजड़
se m महत्वपूण ह।
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प्रकृ त म पुनचक्रण (कहानी से): पेड़ से गरने वाली प त्तयाँ सड़ जाती ह और मृदा को पोषक तत्व से समृद्ध

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करती ह, और उसी मृदा से नए पौधे उगते ह— यही अ ी ने वन क सैर के समय बताया था।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 214
11.5— च ान और उनम उप स्थत ख नज

प्र.1 च ान कससे बनी होती ह?

च ान ख नज से बनी होती ह। चट्टान कोई एक पदाथ नह है— वह एक या अ धक ख नज का प्राकृ तक मश्रण है।

च ान भारत म कहाँ मलती है कस काम आती है

ेनाइट कन टक, तेल ंग ाना, राजस्थान, तिमलनाडु फश, रसोई क स्लैब, मं दर के स्तंभ, स्मारक

बलुआ धौलपुर और जोधपुर (राजस्थान) भवन नमाण— लाल कला और फतेहपुर सीकरी लाल बलुआ पत्थर से
पत्थर बने ह

संगमरमर मकराना (राजस्थान) मू तयाँ, फश, मेज के ऊपरी भाग— ताजमहल मकराना के संगमरमर से
बना है

स्लेट काग
ं ड़ा (िहमाचल पदे श), माक पुर (आंध छत बनाने म ( चत्र 11.6), लखने क पट्ट , फश
पदे श)

लेटराइट के रल , तटीय कन टक , गोवा, कोंक ण, ब्लॉक काटकर ईंट क तरह उपयोग ( चत्र 11.7)
ओिडशा

ख नज से हम क्या मलता है:

ऐलु म नयम, सोना, ताँबा और लोहा जैसी महत्वपूण धातुएँ ख नज से प्राप्त क जाती ह।
ख नज का उपयोग वायुयान, कार, आभूषण, प्रसाधन तथा व ुत और इलेक्ट्रॉ नक उपकरण के नमाण म होता है।
एक साधारण मोबाइल फोन म भी लगभग एक दजन ख नज होते ह— सोना, चाँद , ताँबा, कोबाल्ट आ द।

इनका दा यत्वपूण उपयोग क्य आवश्यक है: चट्टान के बनने म हजार से लाख वष लगते ह, और ख नज केवल
कुछ न श्चत स्थान पर सी मत मात्रा म मलते ह। एक बार नकालकर उपयोग कर लेने पर उनका नया भंडार नह
बनता— इसी लए चट्टान और ख नज अनवीकरणीय ह।

क्या आप जानते ह? मानव हजार वष से चट्टान से औजार बनाता आया है— पत्थर क हस्त कुल्हा ड़याँ ( चत्र
11.8 क) और तीर शीष ( चत्र 11.8 ख) मध्य प्रदे श के भीमबेटका जैसे प्रागै तहा सक स्थल से मले ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 215

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11.5 / 11.6— ख नज का प रवहन तथा भन्न- भन्न ईंधन

प्र.1 क्या आप जानते ह क च ान और ख नज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे पहुँचाया जाता है?

हाँ— अ धकतर ट्रक , मालगा ड़य और जहाज ारा, और इनम से लगभग सभी जीवाश्म ईंधन से चलते ह।

प रवहन का क्या ढोता है उपयोग म आने वाला
साधन ईंधन

ट्रक और डंपर खदान से सड़क तक पत्थर, रे त, संग मरमर के खंड डीजल

मालगा ड़याँ लंबी दू र ी तक कोयला और लौह अयस्क— झिरया से इस्पात कारखानों तक, डीजल अथवा िवद्य तु
बैल ाडीला से िवशाखापत्तनम तक

जहाज और बजरे पारादीप, िवशाखापत्तनम और मामुगाओ जैसे बंद रगाहों से लौह अयस्क और कोयला डीजल / फनस ऑयल

कन्वेयर बेल्ट और खदान से पास के कारखाने तक अयस्क िवद्य तु
रोपवे

पाइपलाइन पेटोिलयम और पाकृ ितक गैस , तथा जल में िमलाया गया अयस्क (स्लरी) िवद्य तु पंप

पुस्तक यह प्रश्न यह क्य पूछती है: यही अगले अनुभाग तक पहुँचने का पुल है। प रवहन के लए हम जन वाहन
का उपयोग करते ह उनम से अ धकांश जीवाश्म ईंधन से चलते ह— अथात् एक ट्रक भर पत्थर के पीछे भी कुछ
कोयला या पेट्रो लयम खच होता है। यहाँ एक नह , दो प्राकृ तक संसाधन उपयोग हो रहे ह।

प्र.2 सूया, व भन्न प्रकार के वाहन अलग-अलग ईंधन स्टे शन पर क्य जाते ह?

क्य क अलग-अलग वाहन अलग-अलग प्रकार के ईंधन का उपयोग करते ह, और प्रत्येक ईंधन स्टे शन पर केवल वही ईंधन
उपलब्ध होते ह जनक व्यवस्था वहाँ क गई है।

वाहन सामान्य ईंधन कहाँ से प्राप्त

स्कूटर, मोटरसाइ कल, अ धकांश कार पेटोल पेटोिलयम से पाप्त

ट्रक, बस, ट्रै क्टर डीजल पेटोिलयम से पाप्त

अनेक ऑटो, नगर बस और टै क्सयाँ सी.एन.जी. (संपीिड़ त पाकृ ितक गैस ) पाकृ ितक गैस — पेटोल या डीजल से अिधक स्वच्छ ईंध न

वद्युत स्कूटर, ई- र ा, वद्युत कार िवद्य तु चािजंग स्टेशन पर आवेिशत; ध ँआ
ु िबल्कु ल नही ं छोड़ते

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एक ईंधन दूसरे क जगह क्य नह ले सकता: इंजन कसी एक ईंधन के लए बनाया जाता है। पेट्रोल चगारी से
सरलता से जलता है, डीजल अ धक दबाव पड़ने पर जलता है, और सी.एन.जी. गैस के रूप म मजबूत स लडर म
दाब पर रखी जाती है। गलत ईंधन डालने से इंजन खराब हो जाता है— इसी लए पंप और उनक नोजल तक अलग
रखी जाती ह।

क्या आप जानते ह? पेट्रोल, डीजल तथा म का तेल तीन पेट्रो लयम से प्राप्त होते ह। पेट्रो लयम, प्राकृ तक
गैस और कोयले को मलाकर जीवाश्म ईंधन कहा जाता है।

क्रयाकलाप 11.5: आइए, सवक्षण कर — पृष्ठ 216
11.6 जीवाश्म ईंधन— ता लका 11.3 वाहन का प्रकार और उपयोग म आने वाले ईंधन

क्रयाकलाप

प्र.1 अपने आस-पड़ोस म वाहन का सवक्षण कर। वाहन कतने प्रकार के होते ह? उनम कस प्रकार के ईंधन क
आवश्यकता होती है? आपके ारा एक त्रत क गई जानकारी ता लका 11.3 म अं कत कर।

ता लका 11.3 — वाहन का प्रकार और उपयोग म आने वाले ईंधन

वाहन का प्रकार उपयोग म आने वाले ईंधन

ता लका 11.3 जैसी पृष्ठ 216 पर छपी है — दोन स्तंभ आपके सवक्षण के लए रक्त ह।

सड़क के कनारे सुर क्षत स्थान पर या अपनी कॉलोनी म पंद्रह मनट खड़े होकर हर दखने वाला वाहन नोट क जए। भरी हुई
ता लका 11.3 इस प्रकार दखेगी।

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वाहन का प्रकार उपयोग म आने वाले ईंधन

स्कूटर / मोटरसाइ कल पेटोल

कार (छोट , पा रवा रक) पेटोल या डीजल ; कु छ सी.एन.जी. से

ऑटो- र ा सी.एन.जी. या पेटोल

वद्यालय बस / नगर बस डीजल या सी.एन.जी.

ट्रक / टपो / ट्रै क्टर डीजल

ई- र ा / वद्युत स्कूटर िवद्य तु (बैटरी)

साइ कल, बैलगाड़ी, ठे ला कोई ईंध न नही—
ं पेशीय शिक्त

रेलगाड़ी (जहाँ दखे) िवद्य तु , अथवा िबना िवद्य तु ीकरण वाली पटरी पर डीजल

सुझाव: अपनी ओर से एक तीसरा स्तंभ जो ड़ए— “ कतने गने?” तब आप यह भी बता सकगे क आपके क्षेत्र म
सबसे अ धक वाहन कौन-सा ईंधन उपयोग करते ह, केवल यह नह क कौन-कौन से ईंधन ह।

प्र.2 सामान्यतः कस प्रकार के ईंधन का उपयोग अ धक होता है?

वाहन के लए पेट्रोल और डीजल दो सबसे अ धक उपयोग कए जाने वाले ईंधन ह। भारत के अ धकांश सवक्षण म पेट्रोल
पहले स्थान पर आता है, क्य क दोप हया वाहन क संख्या सबसे अ धक है।

पेट ोल, डीजल और िम ी का ते ल ← पेट ोिलयम से पाप्त

पेट ोिलयम + पाकृ ितक गैस + कोयला = जीवाश्म ईंधन

पेट्रोल— स्कूटर, मोटरसाइ कल, अ धकांश कार।
डीजल— बस, ट्रक, ट्रै क्टर, जेनरेटर।
सी.एन.जी.— ऑटो, टै क्सी और नगर बस; यह पेट्रोल या डीजल क तुलना म अ धक स्वच्छ ईंधन है।
व ुत— बढ़ती संख्या म ई- र ा, स्कूटर और कार, जो बल्कुल धुँआ नह छोड़त ।

यह सवक्षण क्य महत्वपूण है: सूची के लगभग सभी वाहन कोई न कोई जीवाश्म ईंधन जलाते ह। जीवाश्म ईंधन
सी मत मात्रा म ह और उन्ह बनने म लाख वष लगते ह— अतः यह सूची जतनी लंबी होगी, भंडार उतनी ही शीघ्र
समाप्त होगा और वायु उतनी ही अ धक प्रदू षत होगी।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 216
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11.6— भारत के कोयला एवं अन्य ईंधन-संसाधन
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aप्र.1gl प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य का पता लगाइए और उन्ह भारत के मान चत्र पर च त क जए।
कोयले का उपयोग मुख्य रूप से व ुत उत्पादन के लए कया जाता है। यह भारत के कई भाग म पाया जाता है।

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कोयला मुख्यतः पूव और मध्य भारत क एक चौड़ी पट्ट म मलता है। भारत का रेखा-मान चत्र ली जए, इन राज्य को रं गए और
प्रत्येक के आगे कोयला क्षेत्र का नाम ल खए।

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राज्य प्रमुख कोयला क्षेत्र वशेष बात

छत्तीसगढ़ co
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ं सेlएक
दे श के सबसे बड़ े उ त्पादकों मेg
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कोरबा, रायगढ़ , िचरिमरी

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aglओ डशा तालचेर , इब घाटी िवशाल भंडार ; अनेक िवद्य तु संयंत्रों को कोयला दे ता है

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com agl
झारखंड झिरया, बोकारो, उत्तरी कणपुर ा, िगिरडीह झिरया का कोककारी कोयला इस्पात कारखानों के िलए सव त्त म

m .
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मध्य प्रदे श िसंगरौली को भारत की “ऊज राजधानी” कहा जाता है

agl
िसंग रौली, सोहागपुर , पेंच–कन्हान

तेलंगाना िसंग रे नी (रामाग ंड
ु म, कोठाग ड
ु ेम ) दिक्षण भारत का मुख्य कोयला ोत

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प म बंगाल रानीगंज भारत का सबसे पुर ाना कोयला क्षेत्र— खनन 1774 में आरंभ हुआ

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पिश्चमी भारत के िवद्य तु संयंत्रों को कोयला दे ता है
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महाराष्ट्र चंद पुर , वध घाटी

a s eतmमलनाडु
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नैवेल ी िल ग्नाइट (भूर ा कोयला), काला कोयला नही ं
a असम एवं मेघालय मकु म , जयंितया पहािड़ याँ पूव त्त र के छोटे िकं तु पुर ाने कोयला क्षेत्र
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इसी मान चत्र पर अन्य ईंधन-संसाधन भी अं कत क जए:

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पेट्रो लयम— मुंबई हाई (महाराष्ट्र के अपतट य क्षेत्र), अंकलेश्वर एवं कलोल (गुजरात), डगबोई एवं नहरक टया (असम),
बाड़मेर (राजस्थान)।

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प्राकृ तक गैस— कृष्णा–गोदावरी बे सन (आंध्र प्रदे श), त्रपुरा, गुजरात और असम।

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कोयला पूव भारत म ही क्य : ये कोयला परत उन पौध से बन जो लाख वष पूव दामोदर, महानद , सोन और

se m गोदावरी क प्राचीन घा टय म दब गये थे। इसी लए भारत के बड़े इस्पात कारखाने— बोकारो, राउरकेला, भलाई,
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a दुगापुर, जमशेदपुर— कोयले और लौह अयस्क के नकट ही बनाए गये।
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मान चत्र के लए सुझाव: कोयले के लए एक रंग, पेट्रो लयम के लए दूसरा और प्राकृ तक गैस के लए तीसरा रंग
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ली जए तथा कोने म एक छोट सूची (संकेत- चह्न) बनाइए। नीचे “मापनी के अनुसार नह ” लखना न भूल।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 217
11.6— जीवाश्म ईंधन का संरक्षण

प्र.1 आइए, हम जीवाश्म ईंधन के संरक्षण म अपना कुछ योगदान द— नकट स्थान तक पैदल या साइ कल से जाएँ।
सावज नक वाहन का उपयोग कर। कुछ अन्य व धयाँ सुझाएँ।

पुस्तक म दो उपाय दए गये ह। कुछ और उपाय, इस आधार पर क बचत कहाँ होती है:

कहाँ क्या कर

सड़क पर एक ही वाहन साझा करे ं या िवद्यालय बस से जाएँ; लाल बत्ती पर इंजन बंद करे ं; टायरों में हवा सही रखें; वाहन की समय पर
सिवस कराएँ; एक समान गित से चलाएँ

वाहन का चुनाव सी.एन.जी. या िवद्य तु वाहन चुन;े ं लंबी यात्रा के िलए अलग-अलग कारों के स्थान पर रे ल या मेटो ले ं

घर म पेशर कु कर का उपयोग करे ं; दाल-चावल पहले िभगोएँ; बतन ढककर पकाएँ; धूप वाले िदनों में सोलर कु कर एवं सौर जल
ऊष्मक चलाएँ; सारी तैयारी के बाद ही गैस जलाएँ

व ुत बचाएँ हमारी अिधकांश िवद्य तु कोयले से बनती है— अतः पंखे-बल्ब बंद करना और एल.ई.डी. बल्ब लगाना भी कोयले की बचत है

अन्य ोत सौर पैनल , पवन-ऊज , गोबर से बनी बायोगैस , जल -िवद्य तु
अपनाएँ

कम खरीद, कम हर वस्तु को बनाने और लाने में ईंध न लगा है; मर म्मत और पुनः उपयोग से वही ईंध न बचता है
फक

यह क्य आवश्यक है: जीवाश्म ईंधन सी मत मात्रा म उपलब्ध ह, अतः य द हम इसी प्रकार उपयोग करते रहे तो ये
शीघ्र समाप्त हो जाएँगे। और जलाए जाने पर इनसे धुँआ और काबन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है जो वायु को
प्रदू षत करती है। इस लए ईंधन बचाना एक साथ दो लाभ दे ता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 218
11.8 हमारे उपयोगी संसाधन— नगर लौटने पर

प्र.1 क्या आप वायु प्रदूषण कम करने के लए उपलब्ध वकल्प क सूची बना सकते ह?

नगर म पहुँचते ही भू म और सूया को अंतर अनुभव हो गया— बहुत कम पेड़ और वाहन के धुएँ क गंध। इस पर क्या कया जा
सकता है, दे खए।

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वकल्प यह वायु प्रदूषण कैसे घटाता है

व ुत वाहन ये िकसी भी पकार का ध ँआ
ु नही ं छोड़ते— जैस ा कहानी में अम्मा बताती है ं

सी.एन.जी. बस, ऑटो और कार सी.एन.जी. पेटोल या डीजल से अिधक स्वच्छ ईंध न है

सावज नक वाहन, साइ कल और पैदल चलना एक बस चालीस कारों िजतने ध एु ँ की जगह ले ले ती है

सौर एवं पवन व ुत कोयला नही ं जलता, अतः िबजलीघर का ध ँआ
ु भी नही ं

घर म एल.पी.जी., प्राकृ तक गैस या सोलर कुकर कोयले , लकड़ी और उपलों की तुल ना में बहुत कम ध ँआ
ु

अ धक पेड़ लगाना पेड़ काबन डाइऑक्साइड सोखते है,ं धूल रोकते है ं और वायु को ठं डा रखते है ं

कचरा और पराली जलाना बंद करना जलाने के स्थान पर कचरे से खाद बनाइए

नमाण स्थल को ढकना और पानी छड़कना धूल हवा में उड़ ने से रुक जाती है

कारखान म फल्टर और ऊँची चम नयाँ ध ँआ
ु और राख खुल ी वायु में पहच
ु ँ ने से पहले ही रोक िलए जाते है ं

गाँव क वायु अच्छ क्य लगी: गाँव म पेड़ अ धक और वाहन कम ह, इस लए वहाँ क हवा ताजी और ठं डी होती
है। नगर म इसका उल्टा है— और यह दुभाग्य नह , हमारे चुनाव का प रणाम है; दूसरे चुनाव इसे फर बदल भी
सकते ह।

क्रयाकलाप 11.6: आइए, उपयोग कए गये प्राकृ तक संसाधन क एक सूची बनाएँ — पृष्ठ 219

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11.8— ता लका 11.4 उपयोग कए जाने वाले प्राकृ तक संसाधन

क्रयाकलाप

प्र.1 अपने दै नक जीवन म आपके ारा क जाने वाली ग त व धय क एक सूची बनाएँ और उन प्राकृ तक संसाधन
को लख जनका उस ग त व ध के संचालन म प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग कया गया। ता लका 11.4 म
कुछ ग त व धयाँ पहले से ही भरी हुई ह। उनका अनुसरण करके आप रक्त पं क्तयाँ भर सकते ह।

ता लका 11.4 — उपयोग कए जाने वाले प्राकृ तक संसाधन

गतवध प्राकृ तक संसाधन

कपड़े धोना पानी

िम ी के िखलौने बनाना

जलाने की लकड़ी एकित्र त करना

पतंग बनाना

जलपान करना

ता लका 11.4 जैसी पृष्ठ 219 पर छपी है — पहली पं क्त उदाहरण के रूप म भरी हुई है।

भरी हुई ता लका 11.4। ध्यान द जए क लगभग हर पं क्त म एक से अ धक संसाधन आ जाते ह।

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गतवध प्राकृ तक संसाधन

कपड़े धोना पानी (िदया हुआ)

म के खलौने बनाना म ृद ा (िचकनी िम ी), जल , सुखाने के िलए सूय की ऊज

जलाने क लकड़ी एक त्रत वन (पेड़ों की लकड़ ी)
करना

पतंग बनाना वन (लकड़ ी से बना कागज), बाँस , उड़ ाने के िलए वायु

जलपान करना अनाज उगाने के िलए म ृद ा, जल और धूप; भोजन के िलए पौधे और जंत;ु पकाने के िलए पाकृ ितक गैस या
लकड़ ी

एक गलास जल पीना नदी, कु एँ या वष का जल

बस से व ालय जाना जीवाश्म ईंध न— डीजल या सी.एन.जी.; ढाँचे की धातु के िलए खिनज

पढ़ना और लखना वन (कागज), खिनज (पेंिसल का गेफ ाइट), पेटोिलयम (प्लािस्टक की कलम )

पंखा या बल्ब जलाना िवद्य तु बनाने के िलए कोयला, जल या पवन; तारों के िलए खिनज

श्वास लेना और बाहर खेलना वायु तथा सूय का पकाश

घर बनाना च ाने,ं रे त, ईंट के िलए म ृद ा, जल , लकड़ ी, खिनजों से पाप्त लोहा

यह सूची क्या सद्ध करती है: प्राकृ तक संसाधन के बना हम दन भर म कुछ भी नह कर सकते। इसी लए
अध्याय के अंत म कहा गया है क हम अपने प्राकृ तक संसाधन का संरक्षण करना चा हए और उनका अपव्यय न
करते हुए दा यत्वपूवक उपयोग करना चा हए, ता क पयावरण को हा न पहुँचाए बना हम अपनी आवश्यकताएँ भी
पूरी कर और भ वष्य के लए भी बचा सक।

मत्र से तुलना क जए: आपक और मत्र क सूची एक जैसी नह होगी— कोई “रंगोली बनाना” (मृदा, ख नज से
बने रंग) लखेगा तो कोई “ क्रकेट खेलना” (बल्ले के लए लकड़ी, गद के लए रबर)। हर नई ग त व ध एक नया
संसाधन जोड़ दे ती है।

आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 221 – 223

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अध्याय का अभ्यास
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चत्र 11.9 म प्राकृ तक संसाधन से संबं धत वस्तुओं को दशाया गया है। उन्ह उनके अव्यव स्थत नाम से
em एक अन्य ता लका बनाइए और इन संसाधन के नाम ल खए। इन संसाधन को नवीकरणीय और
प्र.1

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मलाइए।

a gl अनवीकरणीय संसाधन के रूप म वग कृत क जए। (अव्यव स्थत नाम— नटाट्च, नव, नवप, लज)

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चत्र 11.9 — प्राकृ तक संसाधन

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वस्तु अव्यव स्थत नाम

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(पुस्तक के इस पुनमुद्रण म यह चत्र छपा ही नह है) नटाट् च

(पुm
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स्तक के इस पुनमुद्रण म यह चत्र छपा ही नह है)

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as पुस्तक क पी.डी.एफ. म रक्त ह।
चत्र 11.9 जैसा पृष्ठ 221 पर छपा है। इस पुनमुद्रण म केवल चौथी पं क्त का चत्र छपा है; पहली तीन पं क्तय के चत्र

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चरण 1— अव्यव स्थत नाम को सही क जए।
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अव्यव स्थत नाम सही नाम

नटाट् च च ान

नव वन

नवप पवन

लज जल

चरण 2— प्रत्येक चत्र को उसके नाम से मलाइए। चत्र 11.9 क अं तम पं क्त म च ान का चत्र है, अतः वह नटाट् च से
मलता है। शेष तीन चत्र को— एक साथ उगे पेड़, वायु से हलती/घूमती कोई वस्तु, तथा बहता या सं चत जल— नव, नवप और
लज से मलाइए।
चरण 3— नई ता लका, वग करण स हत।

संसाधन नवीकरणीय / कारण
अनवीकरणीय

च ान अनवीकरणीय बनने में हजारों से लाखों वष लगते है;ं एक बार िनकाल ले ने पर हमारे जीवनकाल में उसकी
पूित नही ं होती

वन नवीकरणीय बीजों से नए पेड़ उगते है ं और पकृ ित वन को पुनः स्थािपत कर दे ती है— बशत उसे पय प्त
समय िमले

पवन नवीकरणीय वायु िनरंतर चलती रहती है; पवनचक्की में उपयोग करने से वह समाप्त नही ं होती

जल नवीकरणीय पकृ ित जल चक्र— वाष्पीकरण, बादल और वष — ारा इसका नवीकरण करती रहती है

सावधान: ‘नवीकरणीय’ का अथ ‘असी मत’ नह है। वन तभी नवीकरणीय है जब उसे इतनी धीमी ग त से काटा
जाए क वह पुनः उग सके, और जल तभी, जब हम उसे प्रदू षत न कर और वषा से पुनःपू त क तुलना म अ धक
भू-जल न ख च।

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प्र.2 बताइए क नम्न ल खत कथन सत्य ह या असत्य? य द असत्य है, तो उन्ह सही कर के पुनः ल खए— (क)
प्रकृ त म मानव क आवश्यकताओं क पू त के लए पयाप्त संसाधन ह। (ख) मशीन प्रकृ त म पाया जाने वाला
एक संसाधन है। (ग) प्राकृ तक गैस एक अनवीकरणीय संसाधन है। (घ) वायु एक नवीकरणीय संसाधन है।

कथन सत्य / सही कथन / कारण
असत्य

(क) प्रकृ त म मानव क स त्य जीिवत रहने के िलए आवश्यक सब कु छ पकृ ित दे ती है— वायु, जल, धूप, म ृद ा, भोजन, वन,
आवश्यकताओं क पू त के लए ं ीजी के शब्दों में— “पथ्ृ वी पत्येक मनुष्य की आवश्यकता की पूित
खिनज और ईंध न। गाध
पयाप्त संसाधन ह। के िलए पय प्त संस ाधन उपलब्ध कराती है, ले िकन पत्येक मनुष्य के लालच को पूर ा करने
के िलए नही ं।”

(ख) मशीन प्रकृ त म पाया जाने अस त्य सही कथन: मशीन एक मानव-िनिम त संस ाधन है। इसे मनुष्य खिनज और जीवाश्म ईंध न
वाला एक संसाधन है। जैसे पाकृ ितक संस ाधनों का उपयोग करके बनाता है।

(ग) प्राकृ तक गैस एक स त्य यह एक जीवाश्म ईंध न है। इसे बनने में लाखों वष लगे, यह सीिमत मात्रा में है और उिचत
अनवीकरणीय संसाधन है। समयाविध में इसकी पुनःपूित नही ं होती।

(घ) वायु एक नवीकरणीय स त्य पकृ ित इसका िनरंतर नवीकरण करती है— पौधे ऑक्सीजन छोड़ते है,ं तथा पवन एवं जल
संसाधन है। चक्र इसे िमलाते और स्वच्छ करते रहते है।
ं

यहाँ क्या परखा जा रहा है: प्रकृ त से मली वस्तु (प्राकृ तक संसाधन) और उससे बनाई गई वस्तु (मानव- न मत
संसाधन) का अंतर, तथा यह अंतर क प्रकृ त कन संसाधन को शीघ्र लौटा दे ती है और कन्ह नह ।

प्र.3 सबसे उपयुक्त वकल्प का उपयोग करके रक्त स्थान भर। 3.1 ईंधन जो सामान्यतः स्कूटर या बाइक जैसे
दोप हया वाहन म उपयोग कया जाता है...... (क) म का तेल (ख) पेट्रोल (ग) डीजल (घ) सी.एन.जी. 3.2
नवीकरणीय संसाधन का एक उदाहरण है...... (क) कोयला (ख) जल (ग) प्राकृ तक गैस (घ) पेट्रोल

3.1 दोप हया वाहन म सामान्यतः उपयोग कया जाने वाला ईंधन है— (ख) पेट्रोल।

(क) म का तेल— लालटे न और स्टोव म जलता है, दोप हया इंजन म नह ।
(ग) डीजल— ट्रक, बस और ट्रै क्टर म, जनका इंजन भन्न प्रकार का होता है।
(घ) सी.एन.जी.— कुछ ऑटो, टै क्सी और बस म उपयोग होती है, दोप हया वाहन का सामान्य ईंधन नह है।

3.2 नवीकरणीय संसाधन का एक उदाहरण है— (ख) जल।

(क) कोयला, (ग) प्राकृ तक गैस और (घ) पेट्रोल (पेट्रो लयम से प्राप्त) तीन जीवाश्म ईंधन ह— अनवीकरणीय।
जल का नवीकरण प्रकृ त जल चक्र ारा करती रहती है, अतः यह नवीकरणीय है।

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सुझाव: ऐसे प्रश्न म पहले पू छए— “क्या यह जीवाश्म ईंधन या ख नज है?” य द हाँ, तो वह अनवीकरणीय है।
वायु, जल, वन, सौर-ऊजा और पवन प्रायः नवीकरणीय उत्तर होते ह।

प्र.4 नम्न ल खत को नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन के रूप म वग कृत कर— कोयला, प्राकृ तक गैस, वन
और ख नज।

संसाधन प्रकार कारण

कोयला अनवीकरणीय दबे हुए पादप-अवशेषों से लाखों वष ं में बना जीवाश्म ईंध न; सीिमत मात्रा में और एक बार उपयोग के बाद
समाप्त

प्राकृ तक अनवीकरणीय यह भी जीवाश्म ईंध न है, जो पेटोिलयम के साथ पथ्ृ वी के भीतर लाखों वष ं में बना
गैस

वन नवीकरणीय बीजों से नए पेड़ उगते है,ं अतः पकृ ित वन को पुनस्थ िपत कर दे ती है— िकं तु तभी जब उसे पय प्त समय
िमले

ख नज अनवीकरणीय च ानों के भीतर अत्यंत लंबे समय में बने; भंडार सीिमत है ं और उनकी पुनःपूित नही ं होती

नवीकरणीय: वन

अनवीकरणीय: कोयला, पाकृ ितक गैस, खिनज

प्र.5 हम यह क्य कहते ह क पेट्रो लयम एक अनवीकरणीय संसाधन है?

क्य क इसे बनने म लाख वष लगते ह, यह सी मत मात्रा म पाया जाता है, और उ चत समयाव ध के भीतर इसक
पुनःपू त नह होती— एक बार उपयोग करने के बाद यह समाप्त हो जाता है।

यह कैसे बना: पेट्रो लयम पृथ्वी के भीतर गहराई म दब गये सूक्ष्मजीव और पौध के अवशेष से धीरे-धीरे बना।
कतना समय लगा: लाख वष— कुछ वष या शता ब्दयाँ नह ।
कतना उपलब्ध है: यह केवल कुछ स्थान पर सी मत मात्रा म मलता है— भारत म मुंबई हाई, गुजरात, असम और राजस्थान
के बाड़मेर म।
उपयोग के बाद क्या बचता है: पेट्रोल या डीजल जलकर धुँआ और गैस म बदल जाता है। ऐसा कुछ शेष नह रहता जो फर
से पेट्रो लयम बन सके।

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लाखों वष ं में बना → कु छ सौ वष ं में समाप्त
उिचत समय में पुन ःपूित नही ं = अनवीकरणीय

वन से तुलना क जए: काटे गये पेड़ क जगह बीस-तीस वष म नया पेड़ आ जाता है— यह मनुष्य के जीवनकाल
के भीतर है, इस लए वन नवीकरणीय है। पेट्रोल क टं क फर से भरने के लए कोई दस लाख वष प्रतीक्षा नह कर
सकता, इस लए पेट्रो लयम नह ।

प्र.6 वन को पुनः उगाना क ठन है। इस कथन क पु ष्ट क जए।

वन केवल पेड़ क भीड़ नह है— वह पौध , जंतुओं, मृदा और सूक्ष्मजीव का ऐसा समुदाय है जो बहुत लंबे समय म बनता
है। पेड़ लगाए जा सकते ह; वन को उगना पड़ता है।

पेड़ म दशक लगते ह। साल, सागौन या दे वदार को पूरा बड़ा होने म 30 से 60 वष लगते ह। एक नया वन उगाने या लुप्त हुए
वन को पुनस्था पत करने म कई वष लग जाते ह।
सबसे पहले मृदा चली जाती है। पेड़ हटते ही जड़ मृदा को नह थामत और वषा उपजाऊ ऊपरी मृदा बहा ले जाती है। फर
नए पौध को उगने के लए दुबल मृदा ही मलती है।
झा ड़याँ और मस भी नष्ट हो जाते ह। सड़ी प त्तय क जो परत मृदा को समृद्ध करती है, उसे फर से बनने म वष लगते ह।
जंतु चले जाते ह। परागण करने वाले और बीज बखेरने वाले पक्षी, चमगादड़, मधुम क्खयाँ और क ट पलायन कर जाते ह,
जससे प्राकृ तक रूप से वन का पुनः उगना धीमा पड़ जाता है। अ ी के गाँव म गरे हुए फल ही उठाए जाते ह— ठ क
इसी लए, क जंतुओं और प क्षय के मल से नकले बीज नए पेड़ उगाते रह।
पुनर पण म कुछ ही प्रजा तयाँ लगती ह। प्राकृ तक वन म सैकड़ प्रकार के पौधे होते ह, जब क रो पत वन म प्रायः एक-दो;
अतः जीव क व वधता लौटती नह ।
खरपतवार खाली भू म पर छा जाते ह और नए पौध को दबा दे ते ह।

सही नष्कष: चूँ क पुनः उगना इतना धीमा है, इस लए हम वन का संरक्षण और दा यत्वपूण उपयोग करना
चा हए ता क उन्ह दोबारा उगने के लए पयाप्त समय मल सके— वद्यमान वन को बचाना नया वन बनाने से
कह सरल है।

क्या आप जानते ह? चपको आंदोलन के पीछे यही वचार था। इसक शुरुआत 1970 के दशक म उत्तराखंड
(तत्कालीन उत्तर प्रदे श) म हुई। स्थानीय म हलाओं ने पेड़ को घेरकर और उनसे लपटकर उन्ह कटने से बचाया—
क्य क वे जानती थ क यह वन उनके जीवनकाल म वापस नह आएगा।

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पाँच दै नक ग त व धय क सूची बनाइए जहाँ आप प्राकृ तक संसाधन का प्रयोग करते ह। उनका उपयोग कम
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प्र.7

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करने क व धयाँ सुझाएँ।

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दै नक ग त व ध उपयोग होने वाले उपयोग कम करने के उपाय
प्राकृ तक संसाधन
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seबश करते समय एक मग जल ले ं; शॉवर के स्थान पर बाल्टी से नहाएँ; टपकते नल
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ag की सूचना दे ं
1. दाँत साफ करना जल
और नहाना

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2. व ालय जाना जीवाश्म ईंध न— पेटोल, पास हो तो पैद ल या साइिकल से जाएँ; िवद्य ालय बस ले ं; पड़ ोिसयों के साथ वाहन

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डीजल या सी.एन.जी. साझा करे ं

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3. भोजन .बनाना
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eखाना
पाकृ ितक गैस या लकड़ी, ag िजतना खाया जाए; भोजन कभी व्यथ
ढककर पेशर कु कर में पकाएँ; उतना ही बनाएँ

l a s न करे ं, क्योंिक व्यथ भोजन उसे उगाने में लगे सभी संस ाधनों को व्यथ कर दे ता है
ag 4. बल्ब, पंखा और
और जल, म दृ ा, धूप

कोयला (अिधकाश
ं िवद्य तु कमरे से िनकलते समय बंद करे ं; एल .ई.डी. बल्ब लगाएँ; िदन में िखड़ की खोलकर

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ट .वी. चलाना कोयले से बनती है) पाकृ ितक पकाश ले ं; जहाँ संभव हो सौर ऊज अपनाएँ

a s emपष्ृ ठ के दोनों ओर िलखें; पुरानी कॉिपयाँ पूरी करे ं; रीिफल वाली कलम रखें; पुरानी
agl
5. कॉपी- कताब म वन (कागज), खिनज,
लखना पेटोिलयम (प्लािस्टक) पुस्तकें छोटी क क्षाओं को दे ं और र ी का पुनच ण कराएँ
क्र

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हर सुझाव के पीछे एक ही नयम है: कम उपयोग कर, पुनः उपयोग कर, पुनचक्रण कर। ‘कम उपयोग’ पहले
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आता है, क्य क जो संसाधन उपयोग ही नह हुआ, वह पूरी तरह बच गया।

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प्र.8 चार ग त व धय क सूची बनाइए जो वायु क उप स्थ त म संभव ह।

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चार (और उससे भी अ धक):

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1. श्वसन— हम और लगभग सभी सजीव वायु से ऑक्सीजन लेते ह; इसके बना कुछ क्षण भी जी वत नह रहा जा सकता।

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2. ईंधन का जलना— गैस चूल्हा, चूल्हा और प्रत्येक वाहन का इंजन ईंधन जलाकर ऊष्मा दे ने के लए वायु क ऑक्सीजन का

o mउपयोग करते ह।
l a se
gमलनाडु के मुप्पंडल और राजस्थान के
3..cपवन से व ुत उत्पादन— चलती वायु पवनचक्क के पंख को घुमाती है, जैसaे त
m
se जैसलमेर पवन पाक म; यही पवन फरक भी घुमाती है।
a
agl c
.
4. गीले कपड़ और अनाज का सूखना— चलती वायु जलवाष्प को उड़ा ले जाती है, इस लए हवा वाले दन कपड़े शीघ्र सूखते

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ह।

अन्य सही उत्तर:
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पतंग उड़ाना, तथा प क्षय और वायुयान का उड़ना।
पवन से नाव चलाना, और अनाज ओसाकर भूसा अलग करना।

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बोलना और सुनना— ध्व न वायु से होकर चलती है।
पवन ारा परागण तथा बीज का बखराव।

ऐसी ग त व धयाँ कैसे पहचान: स्वयं से पू छए— “य द वायु बल्कुल न हो तो क्या यह काम फर भी होगा?” य द
उत्तर ‘नह ’ है, तो वह काय वायु ही कर रही है।

प्र.9 आप अपने घर के आस-पास को ह रत आवरण से समृद्ध बनाने के लए कस प्रकार योगदान दगे? ऐसे काय क
सूची बनाएँ।

म ये काय कर सकता/सकती ँ (उस क्रम म जो कक्षा 6 का व ाथ वास्तव म कर सकता है):

1. पौधे लगाना— घर, वद्यालय और मोहल्ले क सड़क के कनारे; और सजावट के स्थान पर स्थानीय पेड़ चुनना— नीम, पीपल,
बरगद, गुलमोहर, आँवला, जामुन, आम और सहजन।
2. केवल लगाना नह , सँभालना भी— प्रत्येक पौधे को पानी दे ना, चार ओर ट्र -गाड लगाना और जड़ के पास सूखी प त्तयाँ
बछाना। जो पौधा सूख गया, वह ह रत आवरण नह है।
3. एक पेड़ गोद लेना— कक्षा का प्रत्येक वद्याथ पूरे वष एक पेड़ क जम्मेदारी ले और उसक वृ द्ध का रकॉड रखे।
4. रसोई-ब गया बनाना— बालकनी या छत पर गमल म तुलसी, करी पत्ता, पुद ना, मच और टमाटर।
5. खाद बनाना— रसोई और बगीचे के कचरे से कंपोस्ट बनाकर उवरक के स्थान पर उसका उपयोग करना।
6. वन महोत्सव मनाना— जुलाई म दे श भर म मनाया जाने वाला यह सप्ताह भर का वन-उत्सव वद्यालय म शक्षक के साथ
आयो जत करना।
7. जो पहले से है उसक रक्षा करना— टह नयाँ न तोड़ना, तन पर नाम न खोदना, बना अनुम त पेड़ काटने वाले क सूचना
दे ना, मोहल्ले के पुराने पेड़ बचाना।
8. जागरूकता फैलाना— पोस्टर, द वार प त्रका, नुक्कड़ नाटक, और जन्म दन पर प्ला स्टक उपहार के स्थान पर पौधे भट
करना।
9. व ालय के इकोक्लब से जुड़ना और यह सरल सवक्षण रखना क आपक गली म कतने पेड़ ह, ता क वृ द्ध मापी जा सके।

ह रत आवरण क्य आवश्यक है: पेड़ छाया और ऑक्सीजन दे ते ह, काबन डाइऑक्साइड सोखते ह, जड़ से मृदा
थामते ह, वषा लाने म सहायक होते ह और प क्षय तथा क ट का घर ह। ह रत आवरण बढ़ाना ही वन महोत्सव का
उ े श्य है।

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प्र.10 दए गये चत्र म हम दे खते ह क भोजन बनाया जा रहा है। नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर द जए— (क) भोजन
बनाने के लए कस प्रकार क ऊजा का उपयोग हो रहा है? (ख) भोजन बनाने के लए इस प्रकार क ऊजा के
उपयोग का एक लाभ और एक हा न ल खए।

इस प्रश्न के साथ पृष्ठ 222 पर छपा चत्र — पुनः च त्रत रेखा चत्र।

चत्र म एक गाँव क झोपड़ी के बाहर आकाश क ओर मुँह कए एक बड़ी चमक ली तश्तरी है और उसके सामने एक बतन रखा है—
यह सोलर कुकर (तश्तरी वाला सौर कुकर) है।
(क) यहाँ सौर-ऊजा अथात् सूय क ऊष्मा और प्रकाश का उपयोग हो रहा है। तश्तरी सूय क करण को एकत्र करके बतन पर
क द्रत कर दे ती है, जससे बतन इतना गम हो जाता है क भोजन पक जाए। इसम कोई ईंधन नह जलता।
(ख) एक लाभ और एक हा न

लाभ हा न

यह िनःशुल्क और स्वच्छ है— लकड़ ी, कोयला या एल .पी.जी. की यह के वल तेज धूप में काम करता है— बादल वाले िदन, वष में या
आवश्यकता नही,ं अतः न ध ँआ
ु , न वायु पदू षण, और एक अनवीकरणीय ईंध न सूय स्त के बाद खाना नही ं बन सकता, और गैस चू े की तुल ना में
की बचत भी धीमा है

अन्य लाभ: ईंधन का खच नह , आग या गैस रसाव का भय नह , भोजन जलता नह और उसके पोषक तत्व बचे रहते ह।
अन्य हा नयाँ: कुकर महँगा है, खुली जगह चा हए, हर घंटे उसे सूय क ओर घुमाना पड़ता है, और इसम तलना या रोट सकना
क ठन है।

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यह क्य महत्वपूण है: सौर-ऊजा नवीकरणीय है— सूय इसे नरंतर दे ता रहता है। सोलर कुकर म पका हर भोजन
उतनी एल.पी.जी. या लकड़ी बचाता है। इस प्रकार यह एक उपकरण अध्याय के तीन वचार को जोड़ दे ता है— सूय
से ऊजा, जीवाश्म ईंधन का संरक्षण और वायु प्रदूषण म कमी।

प्र.11 बड़े पैमाने पर पेड़ को काटने से मृदा क गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। आपके अनुसार ऐसा क्य होता है?

क्य क मृदा को यथास्थान थामकर रखने और उपजाऊ बनाए रखने का काम पेड़ ही करते ह। उन्ह हटा द जए तो मृदा चार
अलग-अलग प्रकार से क्ष तग्रस्त होती है।

1. मृदा बह जाती है (अपरदन)। पौध क जड़ मृदा को जकड़कर रखती ह और उसे बहने से रोकती ह। जड़ न रहने पर वषा का
जल उपजाऊ ऊपरी मृदा को न दय म बहा ले जाता है और पवन सूखी सतह उड़ा ले जाती है।
2. मृदा के पोषक तत्व समाप्त हो जाते ह। पेड़ से गरने वाली प त्तयाँ सड़कर मृदा को पोषक तत्व से समृद्ध करती ह, जनका
उपयोग नए पौधे करते ह। पेड़ नह तो प त्तयाँ नह , प त्तयाँ नह तो मृदा प्र तवष और नधन होती जाती है।
3. मृदा सूखकर कठोर हो जाती है। पेड़ क छाया हटते ही सूय सीधे भू म पर पड़ता है; नमी वा ष्पत हो जाती है और मृदा
पककर कठोर हो जाती है तथा उसम दरार पड़ जाती ह।
4. मृदा के भीतर का जीवन समाप्त हो जाता है। कचुए— जो मृदा को उलटने-पलटने और ढ ला करने वाले प्राकृ तक कारक ह
— तथा क ट और सूक्ष्मजीव नमी और सड़ी प त्तय पर नभर ह। उनके बना मृदा का पलटना और मलना रुक जाता है।

पेड़ नही ं → जड़ े ं नही ं → ऊपरी उपजाऊ मृद ा बह जाती है

पित्तयाँ नही ं िगरती ं → मू स नही ं बनता → पोषक तत्व घटते है ं

छाया नही ं → मृद ा सूखकर कठोर → बंजर भूिम

इसक भरपाई शीघ्र क्य नह होती: मृदा का नमाण चट्टान के वघटन से हजार वष म होता है। जो मृदा एक
वषा-ऋतु म बह जाती है, वह कसी के जीवनकाल म वापस नह बनती— इसी लए मृदा को अनवीकरणीय
संसाधन म गना जाता है।

प्र.12 दो मानवीय ग त व धयाँ बताइए जनसे वायु प्रदू षत होती है। एक काय सुझाएँ जो वायु प्रदूषण कम करने म
सहायक हो।

वायु को प्रदू षत करने वाली दो मानवीय ग त व धयाँ:

1. वाहन म जीवाश्म ईंधन जलाना। इंजन म पेट्रोल और डीजल जलने पर धुँआ और काबन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है।
प रवहन के लए जीवाश्म ईंधन पर अत्य धक नभरता के कारण बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण हुआ है— यही गंध भू म और सूया
को नगर पहुँचते ही मलती है।

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2. कारखान तथा बजलीघर म ईंधन जलाना और कचरा जलाना। वद्युत उत्पादन के लए जलाया गया कोयला तथा ईंट-
भ , चम नय , कूड़े और पराली के धुएँ से वायु म का लख, राख और हा नकारक गैस भर जाती ह। कोयले, लकड़ी और उपल
पर खाना बनाने से घर के भीतर क वायु भी प्रदू षत होती है।

अन्य कारण: नमाण, खनन और उत्खनन क धूल; रासाय नक धुआँ और क टनाशक का छड़काव; प्ला स्टक कचरे का जलाया
जाना।
वायु प्रदूषण कम करने का एक काय:

पत्येक व्यिक्त के िलए अलग वाहन के स्थान पर सावजिनक वाहन का उपयोग करे,ं अथवा पास की दू री पैद ल

या साइिकल से तय करे।
ं

एक बस उतने ही लोग को ले जाती है जतने चालीस स्कूटर, अतः प्र त व्य क्त धुँआ बहुत कम होता है। अन्य अच्छे काय:
सी.एन.जी. या व ुत वाहन अपनाना, घर म कोयले-उपल के स्थान पर एल.पी.जी. या सोलर कुकर का उपयोग, लाल बत्ती पर
इंजन बंद करना, और अ धक पेड़ लगाना जो काबन डाइऑक्साइड सोखते और धूल रोकते ह।

स्वच्छ वायु इतनी आवश्यक क्य है: प्रदू षत वायु म साँस सभी लेते ह— ब े, बुजुग और पशु भी। प्रदू षत
तालाब से तो दूर हटा जा सकता है, प्रदू षत वायु से नह ।

प्र.13 एक प रवार सौर पैनल बजली उत्पादन के लए, गैस स्टोव खाना बनाने के लए और पवनचक्क कुएँ से पानी
ख चने के लए उपयोग करता है। क्या होगा य द एक सप्ताह तक सूय का प्रकाश न हो।

तीन साधन को अलग-अलग दे खए।

साधन उस सप्ताह क्या क्य
होगा

सौर पैनल लगभग पूर ी तरह काम सौर पैनल सूय की ऊज एकित्रत करके िवद्य तु बनाते है।
ं सूय का पकाश ही न हो तो एकत्र करने
करना बंद कर दे ंगे को कु छ नही ं— बल्ब, पंखा और टी.वी. नही ं चले ंग े, और बैटरी में संिचत िवद्य तु एक-दो िदन में
समाप्त हो जाएगी।

गैस स्टोव सामान्य रूप से चलता यह पाकृ ितक गैस या एल.पी.जी. जलाता है, जो पहले से िसिलंडर या पाइपलाइन में है। इसे सूय
रहेगा के पकाश की आवश्यकता नही ं, अतः खाना बनता रहेग ा।

पवनचक्क जब तक पवन चलती इसे पवन घुम ाती है, सूय का पकाश नही ं; अतः कु एँ से पानी खी ंचा जा सके गा।
रहेगी, काम करती रहेगी

घर के अन्य काम पर भी असर पड़ेगा: कपड़े नह सूखगे, मच और अन्य वस्तुएँ धूप म नह सुखाई जा सकगी, सौर जल ऊष्मक
गम जल नह दे गा, पौधे ठ क से नह बढ़गे, और दन अँधेरे तथा ठं डे रहगे।

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एक गहरी बात, जसे उत्तर म लखना अच्छा रहेगा: पवन स्वयं इस लए बनती है क्य क सूय पृथ्वी के भन्न- भन्न
भाग को असमान रूप से गम करता है। अतः य द सूय बहुत लंबे समय तक छपा रहे तो पवन भीeदुबल
s m पड़ जाएगी
— और तब .तीन
m
co म से दो साधन के पीछे सूय ही नकलेगा, एक के नह । इसी लए सूय को a
gपृlथ्वी पर ऊजा का
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मुख्य seोत कहा जाता है।
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परीक्षा के लए सुझाव: उत्तर साधन-दर-साधन ल खए— स्पष्ट क हए क कौन-सा बंद होगा, कौन-से दो चलते

m .
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रहगे, और प्रत्येक का कारण द जए। प्रश्न यही दे खना चाहता है।

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m.
प्र.14 नम्न ल खत शब्द का उपयोग करके रक्त स्थान क पू त कर— (जीवाश्म ईंधन, वन, वायु, पेट्रो लयम,

m
कोयला, जल और अनवीकरणीय संसाधन)
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a पूरा कया हुआ चाट:
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पाकृितक

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संसाधन

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अनवीकरणीय नवीकरणीय

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संसाधन संसाधन

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जीवाश्म ईंधन वायु जल वन

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प ाकृ ितक
कोयला पेटोिलयम
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गैस

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प्राकृ तक संसाधन का अनवीकरणीय और नवीकरणीय म वग करण। ‘प्राकृ तक गैस’ चाट म पहले से छपी थी; शेष सात रक्त स्थान भरे
गये ह।

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चाट म स्थान उत्तर

“प्राकृ तक संसाधन” के नीचे बायाँ वृत्त अनवीकरणीय संस ाधन

उसके नीचे का बॉक्स जीवाश्म ईंध न

सबसे नीचे बाईं पं क्त का पहला बॉक्स कोयला

सबसे नीचे बाईं पं क्त का तीसरा बॉक्स पेटोिलयम

“नवीकरणीय संसाधन” के नीचे तीन बॉक्स वायु, जल , वन

न त कैसे ह : नीचे क पं क्त के बीच वाले बॉक्स म “प्राकृ तक गैस” पहले से छपी है, और कोयला, पेट्रो लयम
तथा प्राकृ तक गैस— ये ठ क तीन जीवाश्म ईंधन ह। अतः वही पूरी शाखा अनवीकरणीय होगी, और शेष तीन शब्द
— वायु, जल और वन— वही ह जो अध्याय म नवीकरणीय के उदाहरण के रूप म दए गये ह।

प्र.15 उ ोग और आवास क आवश्यकताओं को पूरा करने के लए पेड़ क माँग बढ़ रही है। इस लए लगातार पेड़
काटे जा रहे ह। क्या यह उ चत है? चचा क जए और एक सं क्षप्त रपोट तैयार क जए।

पक्ष: माँग वास्त वक है, कतु उसे पूरा करने के लए बड़े पैमाने पर प्राकृ तक वन को काटना उ चत नह है। यही आवश्यकता ऐसे
उपाय से भी पूरी क जा सकती है जो वन को नष्ट न कर।

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नमूना रपोट— क्या उद्योग और आवास क माँग पूरी करने के लए पेड़ काटना उ चत है?
1. माँग सचमुच है। फन चर, दरवाजे, खड़ कयाँ और मचान के लए लकड़ी चा हए; पुस्तक और पै कग के लए
कागज चा हए; प रवार बढ़ने पर घर के लए भू म चा हए। लाख लोग क आजी वका भी इन्ह उद्योग से चलती
है।
2. बड़े पैमाने पर कटाई से हम क्या खोते ह। बड़े पैमाने पर पेड़ क कटाई जैसी मानवीय ग त व धय के कारण
वन क्षेत्र लगातार घट रहा है। वन नष्ट होने पर— उपजाऊ ऊपरी मृदा बह जाती है, भू म बंजर हो जाती है, कुएँ सूखते
ह जब क बाढ़ बढ़ती है, वन्य जंतु और पक्षी भोजन तथा आश्रय खो दे ते ह, वायु म काबन डाइऑक्साइड बढ़ती और
ऑक्सीजन घटती है, और वनवासी प रवार क आजी वका छन जाती है। एक नया वन उगाने या लुप्त हुए वन को
पुनस्था पत करने म कई वष लग जाते ह— यह क्ष त हमारे जीवनकाल म पूरी नह होती।
3. अतः मेरा नष्कष। योजनाबद्ध ढं ग से कुछ पेड़ काटना और उनसे अ धक पेड़ पुनः लगाना स्वीकाय है। प्राकृ तक
वन को साफ कर दे ना नह — इसम हम एक अपूरणीय वस्तु दे कर वह पा रहे ह जो कसी और उपाय से भी मल
सकती थी।
4. इसके स्थान पर क्या कया जाए।

लकड़ी को फसल क तरह उगाइए— सामा जक वा नक और कृ ष-वा नक : खेत क मेड़ और बंजर भू म
पर यूके लप्टस, पॉपुलर, बाँस और सरू; प्राकृ तक वन काटने के स्थान पर।
बाँस का उपयोग क जए, जो तीन-चार वष म फर तैयार हो जाता है; तथा लकड़ी के बुरादे से बना बोड।
कागज का पुनचक्रण क जए और दोन ओर छपाई क जए; एक टन पुनच क्रत कागज अनेक पेड़ बचाता है।
जहाँ लकड़ी अ नवाय न हो वहाँ ईंट, पत्थर, इस्पात और सीमट से नमाण क जए; पुराने फन चर क मरम्मत
और पुनः उपयोग क जए।
प्रत्येक काटे गये पेड़ के बदले कम से कम पाँच पौधे लगाइए और जब तक वे जम न जाएँ, उनक दे खभाल
क जए।
वन महोत्सव म भाग ली जए, प वत्र उपवन क रक्षा क जए, और 1970 के दशक के उत्तराखंड के चपको
आंदोलन से प्रेरणा ली जए, जहाँ म हलाओं ने पेड़ से लपटकर उन्ह बचाया।

5. एक पं क्त म। हम वन का संरक्षण और दा यत्वपूण उपयोग करना चा हए ता क उन्ह पुनः उगने का पयाप्त समय
मले— आज क आवश्यकता पूरी हो, कतु कल का हस्सा न छने।

कक्षा म यह तक कैसे रख: केवल यह मत क हए क “पेड़ काटना बुरा है”। पहले मा नए क माँग है, फर उसे पूरा
करने का बेहतर उपाय बताइए। इसी से रपोट प्रभावशाली बनती है।

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प्र.16 अपने व ालय म पानी के उपयोग को कम करने के लए एक योजना बनाइए। इस योजना को साकार करने के
लए आप क्या कदम उठाएँगे और इससे पयावरण को कैसे सहायता मलेगी?

नमूना योजना: “हर बूँद बचाएँ”— हमारे व ालय क जल योजना
चरण 1— पता लगाइए क जल कहाँ उपयोग और कहाँ व्यथ होता है (पहला सप्ताह)। प्रत्येक कक्षा से दो
वद्या थय का जल-मंडल बनाइए। एक जाँच-सूची लेकर पूरे वद्यालय म घू मए और हर नल, कूलर, टं क और
शौचालय नोट क जए। ग नए क कतने नल टपकते ह, कतने पूरी तरह बंद नह होते, और टं क बहती है या नह ।
वद्यालय का सरल न ा बनाकर हर जल-स्थान अं कत क जए।
चरण 2— जो खराब है उसे ठ क कराइए (दूसरा सप्ताह)। सूची प्रधानाचाय को द जए। टपकते नल के वाशर
बदलवाइए, टू टे पाइप ठ क कराइए और टं क म फ्लोट वाल्व लगवाइए ता क वह स्वयं बहना बंद कर दे ।
चरण 3— जल उपयोग करने का ढं ग बद लए (तीसरे सप्ताह से)।

हर नल के ऊपर एक छोटा-सा च त्रत बोड— “उपयोग के बाद मुझे बंद क जए।”
वॉश-बे सन पर पुश-टै प लगवाइए या मुख्य वाल्व आधा खो लए ता क जल क धार कम रहे।
हाथ धोने और आर.ओ. से नकले जल के लए एक ड्रम र खए और उससे फश तथा आँगन साफ क जए।
वद्यालय के बगीचे को सुबह-सुबह पाइप के बजाय झारी से स चए और पौध के चार ओर सूखी प त्तयाँ
बछाइए।
प्रत्येक कक्षा घर से जल क बोतल लाए, ता क कूलर पर कम जल नकाला और गराया जाए।

चरण 4— जल लौटाइए (इसी वषा-ऋतु म)। वद्यालय क छत का वषा जल पाइप ारा एक संग्रह टं क और
खेल के मैदान के पास बने रचाज ग े तक ले जाइए। कुछ भू म बना पक्क छो ड़ए ता क वषा भू म म समा सके।
चरण 5— मा पए और बताइए (हर महीने)। प्रत्येक माह मीटर क री डग या टकर क संख्या नोट क जए और
सूचना-पट्ट पर आलेख लगाइए। सबसे अ धक जल बचाने वाली कक्षा को हर माह “नीला तारा” द जए।
चरण 6— आगे फैलाइए। प्राथना-सभा म घोषणा, पोस्टर, 22 माच ( वश्व जल दवस) पर नुक्कड़ नाटक, और घर
के लए पत्र, ता क प रवार भी यही नयम अपनाएँ।

इससे पयावरण को कैसे सहायता मलेगी:

नलकूप या नगरपा लका से कम जल लेने का अथ है कम भू-जल ख चा जाना, जससे भू-जल स्तर धीमी ग त से गरेगा।
वषा जल संचयन से वषा नाली म बहने के बजाय भू म को पुनः भरती है।
जल पंप करने म वद्युत लगती है, जसका अ धकांश भाग कोयले से बनता है— अतः जल बचाने से कोयला भी बचता है
और वायु प्रदूषण घटता है।
न दय और तालाब म कसान , पशुओं तथा मछ लय के लए अ धक जल शेष रहेगा।
वद्याथ यह आदत घर ले जाएँगे, जससे बचत पूरे मोहल्ले म कई गुना हो जाएगी।

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योजना म चरण और आँकड़े क्य आवश्यक ह: “हम जल बचाएँगे” केवल एक इच्छा है। “हमने 11 टपकते नल
ठ क कराए और महीने का एक टकर घटाया” वह योजना है जसे जाँचा जा सकता है— और यही वास्तव म काम
करती है।

और भी सीख — पृष्ठ 224
प रयोजनाएँ एवं आगे क खोज

प रयोजना काय

प्र.1 वषा जल संचयन भारत म एक स दय पुरानी परंपरा है। अपने राज्य या दे श के अन्य भाग म उपयोग क जा रही
कुछ पारंप रक वषा जल संचयन व धय का पता लगाइए।

भारत के हर क्षेत्र ने अपनी वषा, मृदा और ढलान के अनुसार अपनी व ध वक सत क । इस ता लका म अपने राज्य क व ध
खो जए और फर कसी बुजुग से उसके बारे म पू छए।

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वध राज्य / क्षेत्र काय करने का ढं ग

mराजस्थान l a se
.co g चाँद बावड़ी, आभानेरी
जल भी सं चत— तूरजी का झालरा, जोधपुर ( चत्र 11.4aख);
बावड़ी / बावली सीढ़ दार गहरा कुआँ; वषा जल के साथ पास क झील , तालाब और न दय से रसने वाला

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aवावg गज
ु रात सीढ़ दार बावड़ी— पाटन क रानी क वाव ( वश्व धरोहर) और अडालज क वाव

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टाँका और कुंड पिश्चमी राजस्थान आँगन के नीचे भू मगत टाँका, जसम ढलवाँ सतह से वषा जल आता है; पेयजल ठं डा बना

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रहता है

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g पर मट्ट का बाँध; खेत म बहते जल को बुवाई तक रोकने वाला मेड़-बंधा
जोहड़ और
खड़ीन
राजस्थान (अलवर,
जैस लमेर )
aढलान

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वरदा नचली भू म म उथले कुएँ, जहाँ मीठा वषा जल खारे जल के ऊपर तैरता रहता है
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कच्छ, ग ज
ु रात

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आहर–पइन
m .co िबहार (मगध) a g
पइन ना लयाँ जल को तीन ओर से बँधे आहर जलाशय तक पहुँचाती ह

l a se
a g एरी (तालाब) तिमलनाडु गाँव के तालाब क
जाती
ंखला; एक का अ त रक्त जल दूसरे को भरता है, अतः वषा व्यथ नह

m a s
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केरे, कल्याणी, कन टक गाँव के तालाब तथा सीढ़ दार मं दर-कुंड

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पुष्क रणी

फड़ और बंधारा महारा (नािसक, g l
a नाले पर पत्थर का बंधारा जल को नहर ारा खेत के खंड तक पहुँचाता है
धल
ु े)

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हवेली पद्ध त मध्य पदे श पूरे वषा-काल म छोट मेड़ ारा वषा जल खेत म ही रोका जाता है

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(बुंदे ल खंड)

m मुंडा,
eकटास, a
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gl बंधा
ओिडशा, झारखंड ढलान के ऊपरी भाग म मट्ट के तालाब, जनसे नीचे के खेत क सचाई होती है

a
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कुहल / कूल, िहमाचल पदे श, जम्मू,
com
हमनद के नाले से नकली पत्थर क छोट नहर; नौला ोत पर बना सीढ़ दार कुंड है
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ase
नौला, गूल उत्तराखंड

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जग ल ाख दन म पघले हमनद-जल को एकत्र करने वाला टाँका, जसका उपयोग शाम को होता है

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बाँस टपक मेघ ालय चीरे हुए बाँस क न लयाँ झरने का जल बूँद-बूँद करके पान और काली मच के पौध तक

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सचाई पहुँचाती ह

m as e
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जाबो (रूजा) नागालै ंड
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पहाड़ी क चोट पर वषा जल रोककर, पशु-बाड़े से होते हुए सीढ़ दार खेत और मछली-

m
ase
तालाब तक

agl c
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सुरंगम के रल , कासरगोड लेटराइट पहाड़ी म खोद गई सुरंग, जो चट्टान से रसने वाला जल एकत्र करती है

s e m
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. co agl
चेरुवु, कुंटा तेल ंगाना, आंध पदे श गाँव के तालाब और छोटे पोखर, जन्ह मशन काकतीय के अंतगत पुनज वत कया गया

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प रयोजना कैसे प्रस्तुत कर: कोई एक व ध चु नए, उसका नामां कत रेखा चत्र बनाइए, और ल खए क वह कहाँ उपयोग होती है,
कैसे बनती है, उसक दे खभाल कौन करता है, और आज भी काम करती है या नह । य द आपके पास ऐसी कोई संरचना हो तो

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उसका चत्र भी लगाइए।

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आधु नक रूप: छत से वषा जल संचयन ( चत्र 11.4 क) इसी वचार का पाइप वाला रूप है— छत का जल छन्ने से
होकर संग्रह टं क या रचाज ग े म जाता है। भारत के अनेक नगर म अब नए भवन के लए यह अ नवाय है।

प्र.2 वायु प्रदूषण आपके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अपने से बड़े या समुदाय के सदस्य के साथ
बातचीत कर अपने स्थानीय क्षेत्र म वायु प्रदूषण के मुख्य ोत क पहचान कर जाँच कर। आप नष्कष के
आधार पर दो व्यावहा रक उपाय सुझाइए जनका उपयोग कर आपका व ालय या समुदाय वायु प्रदूषण कम कर
सकता है।

भाग क— जाँच कैसे कर

1. एक छोट प्रश्नावली बनाइए (6–8 प्रश्न)— जैसे: क्या पछले बीस वष म यहाँ क हवा बदली है? क्या आपको या घर म कसी
को खाँसी, साँस फूलना, आँख से पानी आना या दमा होता है? क्या यह कसी वशेष मौसम म बढ़ता है? आपके अनुसार
इसका कारण क्या है?
2. 10 से 15 लोग से बात क जए— दादा-दाद , पड़ोसी, मुख्य सड़क का दुकानदार, यातायात पु लसकम , वद्यालय का माली,
और य द संभव हो तो कोई च कत्सक या आशा कायकता।
3. स्वयं अवलोकन क जए— सड़क क ओर वाली खड़क क चौखट पर सफेद कपड़ा फे रए और भीतरी खड़क पर भी;
दोन क धूल क तुलना क जए। यह भी नोट क जए क धुँआ कब सबसे अ धक होता है (सुबह का यातायात, शाम को कचरा
जलाना, कटाई के बाद पराली जलाना)।
4. सब कुछ ता लका म ल खए और ग नए क कतने लोग ने कौन-सी समस्या बताई।

भाग ख— ऐसी जाँच म प्रायः क्या मलता है

बताई गई स्वास्थ्य समस्या पहचाने गये स्थानीय ोत

खाँस ी, गले में खराश और बार-बार जुक ाम मुख्य सड़ क पर वाहनों का ध ँआ
ु

साँस फू लना और दमा, जाड़ों में अिधक कचरा, सूखी पित्त याँ और प्लािस्टक जलाना

आँखों में जलन और पानी आना िनम ण स्थलों और क च्ची सड़ कों की धूल

िसरदद और थकान डीजल जेनरे टर , ईंट-भ े या पास के कारखाने की िचमनी

ु , वृद्ध मिहलाओं की आँखों में जलन
रसोई में ध ँआ लकड़ ी, कोयले या उपलों पर खाना बनाना

फसल कटाई के बाद खाँस ी बढ़ ना खेतों में पराली जलाना

भाग ग— दो व्यावहा रक उपाय (अपने नष्कष के अनुसार दो चु नए)

1. व ालय म “वाहन-मुक्त दवस” और पैदल-दल। सप्ताह म एक दन दो कलोमीटर के भीतर रहने वाले सभी वद्याथ
पैदल या साइ कल से आएँ; शेष वाहन साझा कर। अ भभावक से क हए क प्रतीक्षा करते समय इंजन बंद रख— गेट पर
“इंजन बंद क जए” का बोड लगाइए।

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2. व ालय और मोहल्ले म “जलाना नह , खाद बनाना” का नयम। दो कूड़ेदान र खए, सूखी प त्तय और रसोई के कचरे को
जलाने के बजाय ग े म खाद बनाइए और वह खाद वद्यालय के बगीचे को द जए। साथ म चारद वारी के कनारे वृक्षारोपण
क जए, क्य क पेड़ धूल रोकते और काबन डाइऑक्साइड सोखते ह।

बातचीत क्य आवश्यक है: पुस्तक के आँकड़े दूर के लगते ह; कतु जब कोई पड़ोसी कहता है “बचपन म यहाँ से
पहा ड़याँ दखाई दे ती थ ”, तब प रवतन वास्त वक लगने लगता है— और यह भी सीखने को मलता है क प्रमाण
केवल मापकर नह , पूछकर भी जुटाए जाते ह।

प्र.3 उन महत्वपूण ख नज और च ान का पता लगाइए जनका उपयोग आपके गाँव/कस्बे या नगर म व भन्न
प्रयोजन के लए कया जाता है। उनके नाम और उपयोग सूचीबद्ध क जए।

यह कैसे कर: कॉपी लेकर अपने क्षेत्र म घू मए। वद्यालय का फश, मं दर क द वार, सड़क के कनारे के पत्थर, सड़क क गट्ट ,
कोई नमाण स्थल और हाडवेयर क दुकान दे खए। राज मस्त्री या दुकानदार से पू छए क प्रत्येक सामग्री क्या है और कहाँ से आती
है।
च ान— क्या दे खना है

च ान कहाँ दखेगी भारत म कहाँ से आती है

ेनाइट रसोई की स्लै ब, फश की पि याँ, मंिदरों के स्तंभ, स्मारक कन टक , तेल ंगाना, तिमलनाडु, राजस्थान

संगमरमर फश, मूितयाँ, मंिदर-काय, मेज का ऊपरी भाग मकराना और िकशनगढ़ (राजस्थान)

बलुआ पत्थर भवनों की दीवारे ं, नक्काशीदार छज्जे, फश धौलपुर और जोधपुर (राजस्थान)

स्लेट छत (िचत्र 11.6), फश, िलखने की प ी कांगड़ ा (िहमाचल पदे श), माक पुर (आंध पदे श)

लेटराइट ब्लॉक काटकर ईंट की तरह उपयोग (िचत्र 11.7) के रल , तटीय कन टक , गोवा, कोंक ण, ओिडशा

चूना पत्थर सीमेंट का कच्चा माल; पुताई के िलए चूना राजस्थान, म ध् य पदे श, आंध पदे श, गुजरात

बेसाल्ट (काली च ान) सड़ क की िग ी, रे ल पटरी की िग ी, भवन-पत्थर द क्कन पठार — महारा , म ध् य पदे श

बजरी और रेत कं ीट, प्लास्टर , गारा
क्र नदी-तल और हर नगर के पास की खदाने ं

ख नज— वे कस रूप म हमारे पास आते ह

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ख नज / धातु उपयोग मुख्यतः कहाँ से

लौह अयस्क → लोहा और िग ल, गेट, भवन की छड़ें, औजार, वाहन, रे ल ओिडशा, छत्त ीसगढ़ (बैल ाडीला), झारखंड, कन टक ,
इस्पात पटरी गोवा

बॉक्साइट → ऐलु म नयम बतन, िखड़की के फे म, पन्नी, वायुयान का ढाँचा, ओिडशा (पंचपटमाली), झारखंड, गुजरात, छत्त ीसगढ़
िवद्य तु तार

ताँबा अयस्क → ताँबा िवद्य तु तार, बतन, मंिदर की घंिटयाँ खेतड़ ी (राजस्थान), िसंहभूम (झारखंड), मलाजखंड
(म ध् य पदे श)

सोना और चाँद आभूषण, तथा मोबाइल फोन के भीतर के सूक्ष्म कोलार और ह ी (कन टक )
संपक

मगनीज मजबूत इस्पात बनाना, शुष्क से ल ओिडशा, बालाघाट (म ध् य पदे श), नागपुर –भंडारा
(महारा )

अभ्रक िवद्य तु रोधन, पसाधन, रंग-रोगन कोडरमा (झारखंड), नेल्लोर (आंध पदे श), राजस्थान

जप्सम प्लास्टर ऑफ पेिरस , फॉल्स सीिलंग , सीमेंट राजस्थान, तिमलनाडु

नमक भोजन बनाना और पिरर क्षण साँभर झील (राजस्थान); गुजरात और तिमलनाडु के
तटीय नमक -क्षेत्र

यह सूची क्या सखाएगी: आपके चार ओर क लगभग हर कठोर वस्तु भारत म कह न कह भू म से नकाली गई
चट्टान या ख नज से आरंभ हुई है— और इनम से हर एक अनवीकरणीय है। इसी लए अध्याय कहता है क चट्टान
और ख नज का संरक्षण कर तथा उनका दा यत्वपूण उपयोग कर।

अपनी ओर से एक स्तंभ जो ड़ए: “क्या इसका पुनः उपयोग या पुनचक्रण हो सकता है?” लोहा, ऐलु म नयम और
ताँबा पघलाकर फर उपयोग कए जा सकते ह— इससे ख नज भी बचता है और उसे खोदने म लगने वाला ईंधन
भी।

प्र.4 आप एक इकोक्लब मॉ नटर ह। अपने शक्षक क सहायता से अपने व ालय म वृक्षारोपण अ भयान का
आयोजन क जए। इस ग त व ध के आयोजन के लए आवश्यक चरण क सूची बनाइए। लगाए गये वृक्ष के
नाम और उनके महत्त्व को सूचीबद्ध करते हुए एक पृष्ठ क रपोट तैयार क जए।

भाग क— अ भयान के आयोजन के चरण

1. अनुम त ली जए और त थ तय क जए। ल खत प्रस्ताव लेकर प्रधानाचाय से म लए। वषा-ऋतु का आरंभ सबसे उपयुक्त
है— जुलाई का वन महोत्सव सप्ताह सव त्तम है, क्य क नए पौध को प्राकृ तक वषा मल जाती है।
2. स्थान का सवक्षण क जए। वद्यालय म घूमकर मोटे न े पर अं कत क जए क पेड़ कहाँ लग सकते ह— चारद वारी के
साथ, खेल के मैदान के पीछे , गेट के पास। पानी क पाइप के ऊपर या बजली के तार के नीचे स्थान न चु नए।

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3. सही पेड़ चु नए। अपने क्षेत्र के अनुकूल स्थानीय प्रजा तयाँ ली जए और फलदार, फूलदार तथा छायादार पेड़ का मश्रण
र खए।
4. पौधे और साम ी जुटाइए। वन वभाग क नसरी, नगरपा लका या स्थानीय नसरी से माँ गए— प्रायः पौधे नःशुल्क मल जाते
ह। फावड़े, झारी, खाद, तथा बाँस या पुरानी जाली के ट्र -गाड एकत्र क जए।
5. टो लयाँ बनाइए। प्रत्येक पौधे पर दो वद्याथ और प्रत्येक समूह के साथ एक शक्षक। काम बाँ टए— खोदना, लगाना, पानी
दे ना, नाम-पट्ट लगाना, छाया चत्र लेना, रपोट लखना।
6. ग े एक दन पहले खो दए— लगभग 45 cm चौड़े और 45 cm गहरे— और उनम कंपोस्ट या गोबर क खाद मलाइए।
7. नधा रत दन रोपण क जए। पॉलीथीन क थैली सावधानी से हटाइए ता क जड़ का पड न टू टे, पौधा सीधा र खए, मट्ट
भरकर दबाइए, तुरंत पानी द जए, और ट्र -गाड तथा नाम-पट्ट लगाइए।
8. दे खभाल क योजना बनाइए— यही सबसे महत्वपूण चरण है। पूरे वष के लए, गरमी क छु ट्टय स हत, पानी दे ने क बारी
तय क जए। जस पौधे को कोई पानी न दे , वह व्यथ गया पौधा है।
9. रकॉड र खए और उत्साह बनाइए। प्रत्येक पौधे का उसक टोली के साथ छाया चत्र ली जए, हर महीने ऊँचाई मा पए, और
“पेड़ गोद लेने” का छोटा प्रमाणपत्र-समारोह क जए।

भाग ख— नमूना एक-पृष्ठीय रपोट

रपोट: वृक्षारोपण अ भयान, वन महोत्सव सप्ताह
त थ: 12 जुलाई स्थान: वद्यालय क चारद वारी एवं पछला बगीचा लगाए गये पौधे: 30 प्र तभागी: कक्षा 6–
8 के 60 वद्याथ , 5 शक्षक, 2 माली

लगाया गया वृक्ष संख्या उसका महत्त्व

नीम 6 औषधीय पित्तयाँ, दातुन के िलए टहिनयाँ, कीटों से बचाव, घनी छाया

पीपल 2 बहत
ु दीघजीवी, पचुर ऑक्सीजन, पिक्षयों का घर; भारत में पूजनीय

बरगद 1 िवशाल छाया, फल पिक्षयों और चमगादड़ों का भोजन; हमारा रा ीय वृक्ष

आँवला 4 िवटािमन सी से भरपूर फल— वही नेिलकाई जो अज्जी का पिरवार इक ा करता है

आम 3 फल, छाया और इमारती लकड़ी

जामुन 3 मनुष्यों और पिक्षयों के िलए फल; जड़ें अिधक जल सोखती है ं और म ृद ा थामती है ं

गुलमोहर 3 तेजी से बढ़ ने वाला, चटकीले फू ल, साइिकल स्टैंड पर अच्छी छाया

सहजन (मुनगा) 4 पित्तयाँ और फिलयाँ अत्यंत पौिष्टक; शीघ बढ़ ता है

करी पत्ता और तुलसी 4 रसोई और औषधीय उपयोग; कक्षाओं के पास गमलों के िलए उपयुक्त

दे खभाल: कक्षा 6-अ सोमवार और गुरुवार को, 6-ब मंगलवार और शुक्रवार को पानी दे गी; अवकाश के दन माली।
प्रत्येक माह क पहली तारीख को हर पौधे क ऊँचाई मापकर इकोक्लब क पं जका म लखी जाएगी।
हमने क्या सीखा: पौधा लगाने म एक सुबह लगती है; उसे जी वत रखने म एक वष। ह रत आवरण बढ़ाना एक
आयोजन नह , एक आदत है।

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स्थानीय पेड़ ही क्य : नीम, पीपल या जामुन यहाँ क मृदा और वषा के अनुकूल पहले से ह, एक बार जम जाने पर

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कम दे खभाल माँगते ह, और स्थानीय प क्षय तथा क ट का पोषण करते ह। बाहर से लाया गया सजावट
. cहैo, कतु जीवन को कह कम सहारा दे ता है। a
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तो लग सकता

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अध्याय — एक नज़र म
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प्रकृ त से प्राप्त होने वाली प्रत्येक वस्तु प्राकृ तक संसाधन है— वायु, जल, सूय से ऊजा, वन, मृदा, चट्टान, ख नज और

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जीवाश्म ईंधन। इनसे मानव ारा बनाई गई वस्तुएँ (बल्ब, फन चर, सौर पैनल, साइ कल) मानव- न मत संसाधन कहलाती

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ह।

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.c हुई वायु पवन कहलाती है, और मुप्पंडल (त मलनाडु ), जैसलमेर (राजस्थान)agतथा ब्रह्मवेल (महाराष्ट्र) जैसे
वायु गैस का मश्रण है— लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन तथा 1% आगन, काबन डाइऑक्साइड एवं अन्य

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गैस। चलती

g l aपवनचक्क फाम इससे वद्युत उत्पन्न करते ह।
a पृथ्वी क सतह का लगभग दो- तहाई भाग जल से घरा है, परंतु अ धकांश जल लवणीय है। तालाब , न दय , झील और

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कुँओं का बहुत थोड़ा मृदु जल ही सहजता से उपलब्ध है— इसी लए वषा जल संचयन (राजस्थान क बावड़ी, गुजरात क
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वाव) भारत क स दय पुरानी परंपरा है।
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a l वास्तव म सं चत सूय-ऊजा है।
सूय पृथ्वी पर ऊजा का मुख्य ोत है। पौधे सूय के प्रकाश से भोजन बनाते ह, जंतु पौध को खाते ह और हम दोन से भोजन
प्राप्त करते ह— अथात् हमारी थाली काgभोजन
मृदा का नमाण सूय, जल और सजीव ारा चट्टान के वघटन से हजार वष म होता है। चट्टान ख नज से बनी होती ह,

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जनसे लोहा, ऐलु म नयम, ताँबा और सोना जैसी धातुएँ प्राप्त होती ह।
नवीकरणीय संसाधन (वायु, जल, वन, सौर-ऊजा, पवन) उ चत समयाव ध म प्रकृ त ारा पुनm
s e ः पू रत हो जाते ह।

. c om संसाधन (कोयला, पेट्रो लयम, प्राकृ तक गैस, ख नज, चट्टान, मृदा)aसीglमतa ह और एक बार उपयोग के बाद
अनवीकरणीय

a semसमाप्त हो जाते ह— “पृथ्वी प्रत्येक मनुष्य क आवश्यकता क पू त कर सकती है, लालच क नह ।”
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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय से उदाहरण पृष्ठ

प्राकृ तक संसाधन पकृ ित से पाप्त वे सभी वस्तुए ँ िजनका हम उपयोग वायु, जल, सौर-ऊजा, वन, मृदा, चट्टान, ख नज, 217
करते है ं जीवाश्म ईंधन

मानव- न मत पाकृ ितक संस ाधनों का उपयोग करके मानव ारा वद्युत बल्ब, फन चर, सौर पैनल, साइ कल 217 –
संसाधन बनाए गये संस ाधन 218

नवीकरणीय वे संस ाधन िजनका उिचत समयाविध में वायु, जल, वन 218
संसाधन नवीनीकरण, पुनःपूित या पुनस्थ पन हो जाता है

अनवीकरणीय सीिमत मात्रा में उपलब्ध वे संस ाधन िजनकी उिचत ख नज, मृदा, चट्टान, कोयला, पेट्रो लयम, प्राकृ तक गैस 218
संसाधन अविध में पूित नही ं होती

वायु पथ्ृ वी के चारों ओर उपिस्थत गैस ों का िमश्रण नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, आगन + काबन 203
डाइऑक्साइड + अन्य 1%

पवन चलती हुई वायु— मंद हो तो बयार, तेज हो तो आँध ी फरक को घुमाती है; पवनचक्क के पंख को घुमाती है 203 –
204

मृदु (अलवणीय) लवण-रिहत जल, जो पीने, कृ िष और उद्योग के न दयाँ, झील, तालाब, कुएँ, बफ क चादर, भू-जल 205 –
जल योग्य होता है 206

वषा जल संचयन वष के जल को बड़ी मात्रा में एकित्रत एवं संग िहत छत से जल संचयन; राजस्थान क बावड़ी, गुजरात क 207
करना वाव

वन िविभन्न पकार के पौधों की सघन वृिद्ध वाला बड़ा क्षेत्र अ ी के गाँव के पास प श्चमी घाट का वन 210

मृदा सूय, जल एवं सजीवों ारा च ानों के िवघटन से खेत क मृदा, वन क मृदा, ईंट बनाने योग्य मृदा 213 –
हजारों वष ं में बनी 214

चट्टान और ख नज च ाने ं खिनजों से बनी होती है;ं खिनजों से धातुए ँ ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर, संगमरमर, स्लेट, लेटराइट; सोना, 214 –
पाप्त की जाती है ं चाँद , ताँबा, कोबाल्ट 215

जीवाश्म ईंधन पथ्ृ वी के भीतर दबे सूक्ष्म जीवों एवं पौधों से लाखों वष ं कोयला, पेट्रो लयम (पेट्रोल, डीजल, मट्ट का तेल), 216
में बने ईंध न प्राकृ तक गैस (सी.एन.जी.), एल.पी.जी.

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages56
Languagehindi
Updated19 Sep 2026