aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे

AglaSem पर कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 12 पृथ्वी से परे (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Science Chapter 12 Beyond Earth (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे - Page 1 of 37

About NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे

NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे is available here for free download. Published by NCERT for Class 6, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (37 pages). Candidates preparing for Class 6 can use NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे?

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे have?

NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे contains 37 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 6 study material?

You can find more Class 6 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 6 Science Chapter 12 पृथ्वी से परे – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (37 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 12: पृथ्वी से परे

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

225 – 246 12 36 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 36 pages

Page 2

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: पृथ्वी से परे
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत NCERT समाधान। इसम क्रयाकलाप 12.1 से 12.4 तक,
पृष्ठ 226 से 241 तक के सभी पाठ्य प्रश्न, तथा पृष्ठ 243 से 246 तक के आइए, और अ धक सीख और और भी सीख के सभी प्रश्न हल कए गए
ह— साथ म सप्त ष और ओरायन के नामां कत तारा- चत्र, ग्रह का सही क्रम और ऐसे रेखा चत्र जन्ह आप अपनी कॉपी म उतार सकते ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 6) 225 – 246

खं ड प्रश्न

12 36

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 226
अध्याय का आरंभ— नुब्रा, ल ाख म यांग्डोल और दोरजे

प्र.1 क्या आपने रा त्र-आकाश म तार को दे खकर उन्ह उसी प्रकार काल्प नक रेखाओं ारा जोड़ने क को शश क है
जैसे हम बदुओं और रेखाओं को जोड़कर चत्र बनाते ह?

हाँ— और संसार भर म तारा-मंडल इसी प्रकार बने ह। कसी साफ, अँधेरी रात म तारे काले कागज़ पर बखरे चमक ले बदुओं
जैसे दखाई दे ते ह। य द कुछ चमक ले बदुओं को काल्प नक रेखाओं से जोड़ दया जाए तो एक आकृ त उभर आती है।

उत्तरी आकाश के सात चमक ले तारे मलकर एक बड़ी करछ जैसी आकृ त बनाते ह। भारत म इसे सप्त ष कहते ह; अंग्रेज़ी म
बग डपर।
शीत ऋतु के आकाश म एक छोट सरल रेखा म समान दूरी पर स्थत तीन तारे शकारी ओरायन क पेट बनाते ह।
तार का एक छोटा-सा धुँधला समूह अंगूर के गु े जैसा दखता है— यही कृ त्तका (प्लायो डज) है।

हमारा मन ऐसा क्य करता है: मनुष्य का म स्तष्क पैटन पहचानने म बहुत कुशल है। बखरे हुए बदुओं म भी वह
कोई जानी-पहचानी आकृ त ढूँ ढ़ ही लेता है। ये रेखाएँ आकाश म वास्तव म ह ही नह , और एक पैटन के तारे हमसे
बल्कुल अलग-अलग दू रय पर हो सकते ह— वे केवल एक ही दशा म होने के कारण पास-पास दखाई दे ते ह।

यह क जए: अगली अमावस्या के आस-पास कसी बड़े के साथ छत पर जाइए, उत्तर दशा म दे खए और सप्त ष
क करछ जैसी आकृ त ढूँ ढ़ए। उसे प सल से अपनी कॉपी म उतार ली जए— यही आपका पहला तारा-मान चत्र
होगा।

क्रयाकलाप 12.1: आइए, बदुओं को जोड़कर पैटन बनाएँ — पृष्ठ 226

Page 1 of 36

Page 3

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

12.1 तारे और तारा-मंडल— चत्र 12.2 रा त्र-आकाश का एक भाग

क्रयाकलाप

Page 2 of 36

Page 4

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.1 चत्र 12.2 म रा त्र-आकाश के एक भाग म चमक ले तार को दशाया गया है। इसका ध्यानपूवक अवलोकन
क जए और इसम तार के एक समूह ारा बने पैटन क कल्पना क जए। तार को रेखाओं ारा जो ड़ए और
पैटन बनाइए। आपके ारा बनाए गए पैटन से मलते-जुलते जस जंतु या वस्तु का वचार आपके मन म आता है
उसका नाम अपने पैटन के पास ल खए। उपरोक्त चरण को दोहराइए और कुछ अन्य पैटन बनाइए। अब अपने
पैटन से संबं धत कोई रोचक कहानी सो चए।

चत्र 12.2, पृष्ठ 226 — रा त्र-आकाश का एक भाग। प्रत्येक बदु एक तारा है; बदु जतना बड़ा, तारा उतना ही
चमक ला।

कैसे क जए: प सल ली जए, चत्र 12.2 के प्रत्येक चमक ले तारे पर हल्का-सा बदु लगाइए (धुँधले तार को छोड़ द जए) और

Page 3 of 36

Page 5

as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

m
.co
फर उनम से चार से आठ बदुओं को सरल रेखाओं ारा जो ड़ए। सभी तार को जोड़ने का प्रयास न क जए— अ ा पैटन कुछ ही
तार से बनता है।
se m
o m g l a
m .c रेखाओं से जो ड़ए— वग, त्रभुज, हुक अथवा ंखला।
1. पहले सबसे चमक ले तारे चु नए। आकाश म भी वही सबसे पहले दखाई दे ते ह।
a
l a se
2. उन्ह सीधी, सरल
3. g
a स्वयं से पू छए— यह आकृ त मुझे कसक याद दलाती है? वही नाम उसके पास लख द जए।
4. अब उसी चत्र के कसी अन्य तारा-समूह पर यही प्र क्रया दोहराइए।

co m
m .
नमूना उत्तर: एक वद्याथ ने उसी चत्र से चार पैटन बनाए और हर एक के साथ एक कहानी जोड़ी—
ag
l a se
आपके ारा बनाई आपका
ag कहानी
आकृ त दया नाम

co m
e m.
आयत बनाते चार तारे , एक कोने दादी-माँ की तीन चोर चुपके से वह चारपाई ख च ले जा रहे ह जस पर दाद सो रही ह। दाद कभी

m l as
.co g
से िनकलते तीन और तारे चारपाई जागती ही नह , इस लए चोर को हर रात उसे लेकर आकाश का चक्कर लगाना पड़ता

a
sem
है।

a
aglपाँच तारों की लंबी वक्र शंखृ ला मोर की पूँछ वषा म नाचते-नाचते मोर ने पूँछ इतनी फैलाई क पंख आकाश म ही अटक गए।

m a s
.co agl
छोटी पूँछ वाला ित्रभुज पतंग मकर संक्रां त पर एक बालक क पतंग क डोर टू ट गई और वह इतनी ऊँची उड़ी क

eमंmडी को अनाज ले जाती कसान क गाड़ी— बीच के तीन तारे उसका जुआ ह।
फर कभी नीचे नह आई।

a s
एक पंिक्त में तीन तारे , ऊपर दो
और नीचे दो
बैल गाड़ी
a gl

c o m
इसका कोई एक सही उत्तर क्य नह है: ये रेखाएँ काल्प नक ह। आकाश म तार को कm .
s e ु छ भी नह जोड़ता। जस-
m दे खा, उसने अलग रेखाएँ ख च और अलग कहानी सुनाई— औरglवेaसब इस क्रयाकलाप के सही
जस नेoआकाश
. c a
s m ह।
eउत्तर
a
agl
se m
com a
क्या आप जानते ह? ठ क यही सात तारे भारत म सप्त ष ह, यूरोप म बड़ा भालू, ब्रटे न म हल और क कण-तट के

. a g l
m
मछु आर के लए नाव।

ase
agl
आपने जो पैटन बनाया है उसक तुलना अपने मत्र
co m
ारा बनाए गए पैटन से क जए। क्या ये पैटन एक जैसे ह या
.
प्र.2

seनह है?
भन्न ह? अपनी कहानी दूसर को सुनाइए और उनक कहानी आप सु नए। क्या आपके और आपके सा थय के
m
o m l a
.c ag
पैटन, नाम और कहानी अलग-अलग ह? अगर ऐसा है तो क्या यह रोचक बात

a s em
agl उत्तर
.c
पैटन प्रायः भन्न ही होते ह— और यही इस क्रयाकलाप का मुख्य उ े श्य है।
s e m
. com
दो मत्र उन्ह बदुओं म से अलग-अलग तारे चुन सकते ह।
a gla
a s emम जोड़ने पर आकृ त बदल जाती है।
aतोlभी नाम इस बात पर नभर करता है क उस वद्याथ के आस-पास कौन-सी वस्तुएँ ह—
य द तारे वही ह , तब भी उन्ह अलग क्रम
और य द आकृ त भी वही हो, g
चारपाई, पतंग, नाव, बैलगाड़ी या बल्ला।

com
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 36

Page 6

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: पैटन आकाश नह , हमारी कल्पना बनाती है। इस लए वह उसी व्य क्त के जीवन से आकार लेता
है जो कल्पना कर रहा है। मछु आरे को नाव दखती है, कसान को हल या गाड़ी, शकारी को शकारी। इसी लए एक
ही सात तार के संसार भर म दजन नाम ह।

स्वयं जाँ चए: पाँच सा थय से उनके चत्र दखाने को क हए, पर नाम न बताने द जए। क्या आप हर आकृ त
पहचान पाते ह? य द नह , तो यही सद्ध करता है क ये पैटन कतने नजी होते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 227 एवं 229
12.1 तारे और तारा-मंडल— पैटन का उपयोग और उनक पहचान

प्र.1 क्या हम केवल मनोरंजन के लए तार के पैटन क पहचान करते ह या फर इनका कोई उपयोग भी है?

दोन — कतु उपयोग पहले आया। तार के पैटन मनोरंजन बनने से बहुत पहले एक गंभीर, व्यावहा रक साधन थे।

दशा ात करना। चुंबक य दक्सूचक के आ वष्कार से पहले, और जी.पी.एस. से तो बहुत पहले, ना वक और यात्री तार से
रास्ता खोजते थे। सप्त ष से ुव तारा मलता है, जो उत्तर दशा म लगभग अचल रहता है। नुब्रा से गुज़रने वाले कारवाँ यही
व ध प्रयोग करते थे। आज भी आपात स्थ त म यह वैक ल्पक व ध के रूप म काम आती है।
तार क पहचान। हज़ार तारे एक जैसे दखते ह। समूह बना दे ने पर कसी एक तारे क ओर संकेत करके यह बताया जा
सकता है क वह कौन-सा है— "ओरायन के नीचे-दाईं ओर वाला चमक ला तारा"।
ऋतु-पंचांग। भन्न- भन्न तारा-मंडल भन्न ऋतुओं म उ दत होते ह, इस लए उनके दखने से बुवाई, कटाई और त्योहार का समय
तय होता था।
कहानी और संस्कृ त। हर पैटन के साथ एक कहानी जुड़ी थी, और कहानी से बच्च को पैटन याद रह जाता था।

ुव तारा दशा क्य बताता है: यह लगभग ठ क पृथ्वी के उत्तरी ुव के ऊपर, पृथ्वी के अक्ष क सीध म है। पृथ्वी
घूमती है तो सभी तारे आकाश म घूमते प्रतीत होते ह, पर ुव तारा लगभग अचल रहता है। उसक ओर मुँह क जए
— आप उत्तर क ओर मुँह कए ह।

क्या आप जानते ह? बीसव शताब्द के पूवाद्ध म अंतररा ीय खगोलीय संघ (आई.ए.यू.) ने तारा-मंडल क
प रसीमाएँ तय क और 88 तारा-मंडल सूचीबद्ध कए, इस प्रकार संपूण आकाश को 88 क्षेत्र म बाँट दया।
इसी लए आज तारा-मंडल का अथ आकाश का एक क्षेत्र है, केवल तार का पैटन नह ।

प्र.2 हम रा त्र-आकाश म इनम से कुछ तारा-मंडल क पहचान कैसे कर सकते ह?

पहले एक पहचान- चह्न वाला पैटन सी खए, फर उसी से दूसर तक पहुँ चए। हर आकाश-दशक इसी प्रकार आरंभ करता है।

Page 5 of 36

Page 7

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

1. जाने से पहले आकृ त याद कर ली जए। चत्र 12.3 और चत्र 12.4 का ध्यान से अध्ययन क जए, या उनके प्रटआउट साथ
ले जाइए।
2. कब और कहाँ दे खना है, यह जा नए। हर तारा-मंडल हर स्थान से हर रात नह दखता। सप्त ष ग्रीष्म ऋतु म रात 9 बजे के
आस-पास उत्तर दशा म सबसे अ ा दखता है; ओरायन भारत म दसंबर से अप्रैल तक सूयास्त के बाद।
3. सबसे सरल से आरंभ क जए। ओरायन क पेट के तीन समान दूरी वाले तारे और सप्त ष क करछ अचूक पहचान ह।
4. एक से दूसरे तक पहुँ चए। सप्त ष → ुव तारा (संकेतक तार क दूरी का 5 गुना)। ओरायन क पेट → रेखा को पूव क ओर
बढ़ाइए → लुब्धक, रा त्र-आकाश का सबसे चमक ला तारा।
5. मोबाइल पर स्काइ मैप या स्टे लै रयम जैसे आकाश-मान चत्रण ऐप से पु ष्ट कर ली जए।

सुझाव: कृ त्रम प्रकाश, ऊँचे भवन और वृक्ष से दूर कोई खुला, अँधेरा स्थान चु नए और लगभग आधा घंटा प्रतीक्षा
क जए ता क आपक आँख अँधेरे के अनुसार समं जत हो जाएँ। तब कह अ धक तारे दखाई दे ने लगते ह। रात म
कसी वयस्क के बना खुले और अँधेरे स्थान पर कभी न जाएँ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 230
12.2 रा त्र-आकाश का अवलोकन— अवलोकन क योजना

प्र.1 हम जस स्थान पर ह क्या वहाँ से अपनी पसंद के कसी तारा-मंडल अथवा तारे को ढूँ ढ़ने का प्रयास कर सकते
ह?

नह — हर तारा हर रात हर स्थान से नह दे खा जा सकता। तीन बात यह तय करती ह क कोई तारा या तारा-मंडल आपको
दखेगा या नह ।

नधारक प्रभाव अध्याय से उदाहरण

पृथ्वी पर आपका आकाश का एक भाग सदा आपके िक्षितज के नीचे रहता है धु व तारा पथ्ृ वी के दिक्षणी गोलाध से नही ं दे खा जा
स्थान सकता

वष क कौन-सी पथ्ृ वी सूय की पिरक्रमा करती है, इसिलए राित्र-आकाश में ओरायन भारत में िदसंबर से अपैल तक, स प्तिष ग ीष्म
रात अलग-अलग तारा-मंडल आते रहते है ं की संध् याओं में

स्थानीय ु ँ, धूल , ऊँचे भवन और वृक्ष
बादल, चाँद नी, पकाश पदू षण, ध आ बड़े नगर से कु छ ही तारे ; नुबा में, जहाँ पकाश पदू षण
प र स्थ तयाँ तारों को ढक दे ते है ं न के बराबर है, हज़ारों तारे

तो करना क्या चा हए? कसी आकाश-मान चत्रण ऐप या ऑनलाइन संसाधन से पता क जए क आपके अपने नगर से आपका
चुना हुआ पड कब और आकाश के कस भाग म दखाई दे गा, फर कोई साफ, चंद्रमा- वहीन रात चु नए।

द क्षणी गोलाध से ुव तारा क्य नह दखता: वह पृथ्वी के उत्तरी ुव के ऊपर है। द क्षणी गोलाध म खड़े व्य क्त
के लए स्वयं पृथ्वी का उभार उस दशा को रोक दे ता है, इस लए वह तारा क्ष तज से ऊपर आता ही नह ।

Page 6 of 36

Page 8

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

क्रयाकलाप 12.2: आइए, स्थ त का पता लगाने का प्रयास कर — पृष्ठ 232
12.2 रा त्र-आकाश का अवलोकन— सप्त ष और ुव तारा

क्रयाकलाप

प्र.1 सप्त ष को दे खने के लए ग्रीष्म-ऋतु के दौरान, रा त्र के लगभग 9 बजे आकाश का अवलोकन कर। इसके लए
आकाश के उत्तरी भाग म दे ख और सप्त ष को पहचान।

प्रेक्षण: ग्रीष्म ऋतु क कसी साफ रात को लगभग 9 बजे उत्तर क ओर मुँह करके दे खए। आकाश म ऊपर क ओर सात
अपेक्षाकृत चमक ले तारे करछ के आकार म दखाई दगे— चार तारे कप बनाते ह और तीन तारे थोड़ा मुड़ा हुआ हत्था।

यही बग डपर है, जसे भारत म सप्त ष (सात ऋ ष) कहा जाता है।
यह असा मेजर तारा-मंडल के अंदर स्थत है।
हत्थे के बीच वाले तारे के ठ क पास एक धुँधला साथी तारा है— य द आप उसे बना यंत्र के अलग दे ख पाएँ तो आपक दृ ष्ट
और आपका आकाश, दोन उत्तम ह।

सुझाव: ऐसी रात चु नए जब आकाश म चंद्रमा न हो। चाँदनी धुँधले तार को ढक दे ती है, और अगले चरण म
आपको धुँधले तारे ही चा हए।

प्र.2 सप्त ष पहचान म आ जाए तो ुव तारे क स्थ त जानने का प्रयास क जए। बग डपर के कप के अं तम दो तार
को दे खए और इन्ह जोड़ने वाली एक सरल रेखा क कल्पना क जए। इस काल्प नक रेखा को उत्तर क ओर
आगे बढ़ाइए। इन तार के बीच क दूरी के लगभग पाँच गुनी दूरी पर इस काल्प नक रेखा पर एक तारा दखेगा जो
बहुत चमक ला नह है। यही ुव तारा है।

व ध— "संकेतक तार " क यु क्त:

1. सप्त ष के कप के बाहरी सरे के दो तारे पहचा नए (वह कनारा जो हत्थे से दूर है)। ये संकेतक तारे ह।
2. आँख से इन दोन के बीच क दूरी ना पए। अब इनसे होकर जाती एक सरल रेखा क कल्पना क जए जो कप से दूर, उत्तर क
ओर जा रही हो।
3. उस रेखा पर लगभग पाँच गुनी दूरी तक आगे ब ढ़ए।
4. वहाँ एक अकेला, बहुत चमक ला नह तारा मलेगा, जसके आस-पास कोई तारा नह है। यही ुव तारा (पोल स्टार) है।
5. पु ष्ट: ुव तारा ल टल डपर (असा माइनर तारा-मंडल) के हत्थे का अं तम तारा है।

Page 7 of 36

Page 9

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

धु व तारा (पोल स्टार)
दोनों संकेतक तारे इस दू र ी का लगभग 5 गुन ा — सदैव उत्तर िदशा मे ं

िलिटल िडपर

सप्तिष (िबग िडपर)

सप्त ष से ुव तारे तक पहुँचने क व ध। कप के खुले सरे के दो तारे रास्ता दखाते ह; उनके बीच क दूरी का लगभग पाँच गुना आगे
जाइए। ये रेखाएँ काल्प नक ह और आकाश म दखाई नह दे त ।

ुव तारा क्य नह हलता: पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है और ुव तारा लगभग ठ क उसी अक्ष क सीध म, उत्तरी
ुव के ऊपर स्थत है। अक्ष पर स्थत बदु पृथ्वी के घूमने से इधर-उधर नह होता, इस लए यह एक तारा अपनी जगह
बना रहता है और शेष सभी तारे उसके चार ओर घूमते प्रतीत होते ह।

स्वयं जाँ चए: अपने साथ एक चुंबक य दक्सूचक ले जाइए। ुव तारा मल जाने पर दक्सूचक दे खए— तारा और
सुई, दोन उत्तर दशा बताएँगे।

क्रयाकलाप 12.3: आइए, पहचानने का प्रयास क जए — पृष्ठ 232

Page 8 of 36

Page 10

as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

12.2 रा त्र-आकाश का अवलोकन— ओरायन और लुब्धक
co m
em.
m as
क्रयाकलाप

.co a g l
a s emम ओरायन को ज्यादा अच्छ तरह दसंबर से अप्रैल महीन म सूयास्त के बाद दे खा जा सकता है। अत: इसे
gl
भारत
a
प्र.1
इसी दौरान दे खए। ओरायन के लगभग बीच म एक छोट सरल रेखा म तीन चमकदार तारे स्थत ह ( जनक

m
कल्पना शकारी क बेल्ट के रूप म क जाती है)। सबसे पहले इन तीन तार को पहचा नए क्य क ओरायन तारा-
मंडल क पहचान क यही सबसे सरल व ध है।
. co ag
e m
g l as
a
प्रेक्षण: दसंबर से अप्रैल के बीच, सूयास्त के एक-दो घंटे बाद पूव और फर द क्षण के आकाश म दे खए। आपको एक छोट , सीधी

co m
m.
पं क्त म लगभग समान दूरी पर तीन चमक ले तारे दखगे— आकाश म और कोई ऐसा दृश्य नह है। यही ओरायन क पेट

m a se
(बेल्ट) है।
o
पेट मल जानेcपर पूरा शकारी अपने-आप बन जाता है—
. a g l
e m
l aपेsट के ऊपर दो चमक ले तारे शकारी के कंधे ह। इनम ला लमा लए तारा बीटलजूज है, जसे भारतीय खगोलशास्त्र म आद्रा
ag कहते ह।
m a s
.co agl
पेट के नीचे दो चमक ले तारे उसके पैर ह। इनम अत्यंत चमक ला नीला- ेत तारा राइजल है।

se m
ओरायन को प्रायः एक बैल (वृष/टॉरस) से युद्ध करते हुए दखाया जाता है, और उसका कुत्ता (कै नस मेजर) पीछे चलता है।

g l a
a

co m
m .
m
बीटलजूज (आद )
as e
.co a g l
sem
बेलािटक्स

a
agl
ओरायन

se m
com g l a
m . a
ase
पेटी (3 तारे)

agl

co m
पेट ी की रे खा पूव की ओर बढ़ ाइए
m .
ase
com l
ल ुब्धक
. a g
m
राित्र-आकाश का सबसे चमकीला तारा
e
राइजल

a s
सैफ

agl c
m .
e
शकारी ओरायन— दो कंधे, पं क्त म तीन पेट -तारे और दो पैर। पेट क रेखा आगे बढ़ाने पर लुब्धक तारा मलता है। ये रेखाएँ काल्प नक

m a s
co agl
ह।

m .
as e
a g l

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 9 of 36

Page 11

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? पेट के ये तीन तारे इतने समान दूरी पर और इतनी सीधी पं क्त म ह क भारत के अनेक गाँव
म इन्ह तीन तारा या तीन बहन कहा जाता है। पूरे शीत-आकाश म यही सबसे सरल आरंभ- बदु है।

प्र.2 एक बार आपने ओरायन को पहचान लया तो इसके पास स्थत अत्यंत चमकदार तारे लुब्धक को पहचानना
आसान हो जाएगा। ओरायन के बीच के तीन तार से गुज़रती हुई सरल रेखा क कल्पना क जए और इस रेखा के
अनु दश पूव क ओर दे खए। वह पर आपको लुब्धक तारा दखाई दे गा।

व ध: पेट के तीन तार क रेखा को पेट से आगे, पूव क ओर बढ़ाइए और उसी दशा म दे खते जाइए। यह रेखा सीधे एक अत्यंत
चमक ले, हल्के नीलापन लए तारे तक ले जाती है, जो आस-पास के सभी तार से कह अ धक चमकता है। यही लुब्धक
( स रयस) है।

लुब्धक संपूण राित्र-आकाश का सबसे चमकीला तारा है।
यह कै िनस मेजर तारा-मंडल का अंग है— िशकारी का कु त्ता।

अंगेज़ी में इसका नाम िसिरयस है।

यह इतना चमक ला क्य है: दो कारण एक साथ। लुब्धक स्वयं एक गम और चमक ला तारा है, और यह हमारे
नकटतम तार म से भी एक है। आकाश म कसी तारे क चमक सदा दो बात पर नभर करती है— वह कतना
प्रकाश दे ता है और वह कतनी दूर है।

स्वयं जाँ चए: क्ष तज के पास होने पर लुब्धक बहुत तेज़ी से टम टमाता है और लाल, ेत, नीले रंग म झल मलाता
प्रतीत होता है। ऐसा इस लए क यह प्रकाश का एक बदु है और वायुमंडल उसक करण को लगातार मोड़ता रहता
है। उतनी ही ऊँचाई पर कोई ग्रह प्रायः नह टम टमाता— तारे और ग्रह म भेद करने क यह सरल कसौट है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 232, 233 एवं 234
12.3 हमारा सौर प रवार— सूय तथा आकाश के अन्य पड

प्र.1 कौन-सा तारा हमारे सबसे नकट है?

सूय। सूय एक तारा है— पृथ्वी के सबसे नकट का तारा।

Page 10 of 36

Page 12

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

पृथ्वी से सूय की दू री ≈ 15 करोड़ िकलोमीटर = 1 खगोलीय मात्रक (au)

इसके बाद िनकटतम तारा: पोिक्समा सेट
ं ाओरी, लगभग 269000 au दू र
अथ त् सूय से हमारी दू री का लगभग 269000 गुन ा।

इसका महत्त्व: इतना नकट होने के कारण सूय एक वशाल चमकते गोले जैसा दखता है और पृथ्वी को ऊष्मा तथा
प्रकाश से भर दे ता है। प्रो क्समा सटाओरी भी उसी प्रकार का पड है, पर 269000 गुनी दूरी पर होने के कारण वह
बना यंत्र के दखाई ही नह दे ता।

क्या आप जानते ह? खगोलीय मात्रक (au) इसी लए बनाया गया क अंत रक्ष क दू रयाँ कलोमीटर म लखना
क ठन है। "बृहस्प त सूय से लगभग 5 au दूर है" कहना 78 करोड़ कलोमीटर लखने से कह सरल है।

प्र.2 हमारा सूय भी एक तारा है। फर ऐसा कैसे है क सूय हम बड़ा दखाई दे ता है और इसका प्रकाश पूरे आकाश म
फैला रहता है जब क अन्य तारे रा त्र आकाश म चमकदार बदुओं क तरह दखाई पड़ते ह और दन के समय तो
ये दखाई भी नह दे ते?

अंतर दूरी का है, आकार का नह ।

सूय अन्य सभी तार क तुलना म हमसे बहुत अ धक नकट है, इस लए वह एक बड़ी, चमकती हुई चकती जैसा दखता है।
व्यास म यह पृथ्वी से लगभग 100 गुना बड़ा है, फर भी 15 करोड़ कलोमीटर दूर होने के कारण उतना बड़ा नह दखता
जतना वह वास्तव म है।
अन्य सभी तारे अत्य धक दूर ह— नकटतम भी 269000 गुनी दूरी पर। इतनी दूरी पर वशाल तारा भी सकुड़कर प्रकाश का
बदु रह जाता है। इनम से अनेक तारे वास्तव म हमारे सूय से भी बड़े ह।
दन के समय सूय का प्रकाश इतना तीव्र होता है— और वायुमंडल उसे संपूण आकाश म बखेर दे ता है— क अन्य तार का
क्षीण प्रकाश उसम दब जाता है। तारे कह गए नह होते; हम बस उन्ह चमक ली पृष्ठभू म म अलग नह कर पाते।

रोज़ का उदाहरण: अँधेरे कमरे म द ये क लौ स्पष्ट दखती है, पर उसी द ये को स्टे डयम क तेज़ रोशनी के पास ले
जाइए तो वह गायब हो जाता है। द या तब भी जल रहा होता है— बस उसक चमक दब जाती है। तारे द ये ह और
दन का आकाश स्टे डयम क रोशनी।

क्या आप जानते ह? चंद्रमा पर वायुमंडल न के बराबर है, इस लए वहाँ सूय का प्रकाश बखरता नह । चंद्रमा पर
खड़ा अंत रक्ष यात्री सूय के रहते हुए भी तारे दे ख सकता है। इससे सद्ध होता है क तार को हमसे हमारी वायु
छपाती है, स्वयं सूय नह ।

Page 11 of 36

Page 13

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 क्या आकाश म केवल तारे ही वद्यमान ह? या फर अन्य पड भी ह जनक ओर अभी तक हमारा ध्यान गया ही
नह है?

अन्य अनेक पड भी ह। तारे तो केवल सबसे स्पष्ट दखने वाले पड ह। हमारी पृथ्वी, इनम से कुछ अन्य पड और सूय— ये सब
मलकर हमारा सौर प रवार बनाते ह।

पड क्या है उदाहरण

सूय एक तारा— सौर पिरवार का सबसे बड़ा और सबसे भारी िपंड सौर पिरवार की लगभग संपूण ऊज का
ोत

ग्रह िवशाल, लगभग गोलाकार िपंड जो सूय की पिरक्रमा करते है ं बुध से वरुण तक (कु ल आठ)

उपग्रह ग हों की पिरक्रमा करने वाले िपंड पथ्ृ वी का चंद मा; मंग ल के दो चंद मा
(चंद्रमा)

क्षुद्रग्रह ं मंग ल और बहृ स्पित के
छोटे, च ानी, अिनयिमत आकार के िपंड, अिधकाश क्षदु ग ह प ी
बीच

धूमकेतु धूल , गैस , पत्थर और बफ से बने; सूय के िनकट लंबी पूँछ बना ले ते है ं हेल ी धूम के तु

वामन ग्रह सूय की पिरक्रमा तो करते है ं पर ग ह की पूर ी पिरभाषा पर खरे नही ं उतरते प्लूटो

िकसी िपंड का सूय के चारों ओर घूमना पिर क्र मण कहलाता है।
िकसी िपंड का अपने ही अक्ष पर घूमना घूणन कहलाता है।

पृथ्वी: एक पिरक्रमा ≈ 1 वष | एक घूणन ≈ 24 घंटे = एक िदन

सुझाव: इन दोन शब्द को मलाइए मत। प रक्रमण = कसी और के चार ओर घूमना (पृथ्वी सूय के चार ओर)।
घूणन = अपनी ही जगह पर घूमना (पृथ्वी अपने अक्ष पर)। लट्टू घूणन करता है; मेले के झूले म बैठा बच्चा कद्र क
प रक्रमा करता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 236 एवं 237

Page 12 of 36

Page 14

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

12.3 हमारा सौर प रवार— ग्रह क पहचान, दूरदशक और उपग्रह

प्र.1 जैसे हमने तारा-मंडल क पहचान क , क्या उसी तरह कसी ग्रह को भी पहचान सकते ह?

हाँ, ग्रह आकाश म खोजे जा सकते ह— कतु पैटन से नह । ग्रह तार के बीच अपनी स्थ त बदलते रहते ह, इस लए वे कसी
स्थर आकृ त का अंग नह होते। उन्ह चमक, स्थ त और व्यवहार से पहचाना जाता है।

शुक्र सबसे सरल है। सूय और चंद्रमा के बाद यह आकाश का सबसे चमक ला पड है, जो सूय दय से पहले पूव म या सूयास्त
के बाद प म म नीचे दखाई दे ता है— इसी लए इसे भोर का तारा या संध्या का तारा कहा जाता है, यद्य प यह तारा है ही
नह ।
बुध, मंगल, बृहस्प त और श न भी बना कसी उपकरण के दे खे जा सकते ह। मंगल स्पष्ट रूप से ला लमा लए दखता है।
पक्क कसौट : तारे बहुत टम टमाते ह; ग्रह नह । स्थर प्रकाश वाला कोई चमक ला "तारा" प्रायः ग्रह ही होता है।
कसी आकाश-मान चत्रण ऐप से पु ष्ट क जा सकती है क उस रात कौन-सा ग्रह दख रहा है।

ग्रह क्य नह टम टमाते: तारा इतनी दूर है क वह प्रकाश का एक मात्र बदु रह जाता है, और ग तशील वायु उस
पतली करण को इधर-उधर मोड़ती रहती है— इस लए वह झल मलाता है। ग्रह इतना पास है क वह एक नन्ही
चकती बनता है— अनेक बदु साथ-साथ— और उनक झल मलाहट आपस म संतु लत हो जाती है, इस लए
प्रकाश स्थर दखता है।

प्र.2 जो ग्रह बना कसी प्रका शक यंत्र क सहायता के केवल आँख से दखाई नह दे ते ह, उन्ह दे खने के लए हम क्या
कर सकते ह?

नेत्री दूरबीन (बाइनॉक्युलर) या दूरदशक (टे लीस्कोप) का उपयोग क जए। यूरेनस और वरुण केवल आँख से दे खे जाने के
लए बहुत धुँधले ह, और चमक ले ग्रह का भी कोई ववरण बना यंत्र के नह दखता।

दूरदशक हमारी आँख क छोट पुतली क तुलना म कह अ धक प्रकाश एकत्र करता है, इस लए पड अ धक चमकदार
दखते ह, और वह उन्ह बड़ा भी दखाता है। इसी से वे अनेक धुँधले पड भी दख जाते ह जो सीधे दखाई नह दे ते।
नेत्री दूरबीन सस्ती है, हाथ म पकड़ने म सरल है और इतने से ही बृहस्प त के चार बड़े चंद्रमा एक पं क्त म छोटे बदुओं जैसे
दख जाते ह।
यंत्र खरीदना आवश्यक नह । अपने क्षेत्र म होने वाले रा त्र-आकाश दशन कायक्रम म जाइए— अनेक उच्च शक्षा संस्थान,
अव्यावसा यक खगोलीय संगठन, संग्रहालय और कृ त्रम नभमंडल ऐसे कायक्रम वद्या थय के लए आयो जत करते ह।

क्या आप जानते ह? छोटे -से दूरदशक से भी श न के वलय, चंद्रमा के गत और शुक्र क कलाएँ दे खी जा सकती ह
— ये तीन पहली बार दूरदशक से लगभग चार सौ वष पहले ही दे खे गए थे।

Page 13 of 36

Page 15

as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
हम जानते ह क ग्रह सूय क प रक्रमा करते ह। क्या कुछ ऐसे पड भी ह जो ग्रह क प रक्रमा करते ह?
e
प्र.3

m l as
.co a g
a s em
a glउन्ह उपग्रह कहते ह। ग्रह क प रक्रमा करने वाले पड को सामान्यतः उपग्रह कहा जाता है और वे उन ग्रह से आकार म
हाँ—
छोटे होते ह। ग्रह के प्राकृ तक उपग्रह को चंद्रमा कहा जाता है।

co m चंद्रमाओं क संख्या
ग्रह
e m . ag
g l as
पृथ्वी
a 1 — चंद मा

मंगल 2
co m
em.
m l as
.co
बृहस्प त, श न, यूरेनस, वरुण पत्येक के अनेक

a g
se m
g l a
हमारा चंद्रमा— एक दृ म:
a पृथ्वी क एक प रक्रमा म लगभग 27 दन लेता है।

m a s
.co agl
पृथ्वी से लगभग 3,84,000 कलोमीटर दूर— अंत रक्ष म हमारा नकटतम पड़ोसी।

se m
व्यास म पृथ्वी का लगभग एक चौथाई।

g l a
वहाँ वायुमंडल न के बराबर है, जल नह है, जीवन नह है।
a
इसक सतह पर वृत्ताकार, कटोरेनुमा गत (क्रेटर) ह, जो अ धकांशतः अंत रक्ष से आई चट्टान और क्षुद्रग्रह के टकराने से बने ह।

m
वायु, जल और जीवन न होने के कारण इन्ह मटाने वाला कुछ नह है, इस लए ये बहुत लंबे समय तक बने रहते ह।

. co
se m
o m l a
भारत और चंद्रमा (पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 238–239 से)। भारत ने चंद्रमा के लए तीन चंद्रयान अ भयान भेजे ह—
c सन् 2008 म, चंद्रयान-2 सन् 2019 म और चंद्रयान-3 जुलाई 2023
चंद्र.यान-1 g म। चंद्रयान-3 का लडर वक्रम,
m a
a seजो रोवर प्र ान को साथ ले गया था, 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा क सतह पर सफलतापूवक उतरा। इसके साथ
agl ही भारत चंद्रमा के कम खोजे गए द क्षण ुव के नकट उपकरण उतारने वाला वश्व का पहला दे श बन गया।

se m
mद्रमा से मट्ट और पत्थर के नमूने लाना है। a
इस सफलता के उपलक्ष्य म भारत सरकार ने 23 अगस्त को रा ीय अंत रक्ष दवस घो षत कया। चौथे अ भयान
चंद्रयान-4 क योजना बन चुक है, जसका लक्ष्cयoचं
. a g l
m
seअ भयान— मंगलयान (मास ऑ बटर मशन, 2013) और आ दत्य-L1
l a
इस अध्याय म नह : इसरो के अन्य प्र सद्ध
(भारत क पहली सौर वेधशाला,ag सतंबर 2023)— इस अध्याय म नह दए गए ह, इस लए इन्ह उत्तर म तभी
ल खए जब प्रश्न इसरो के बारे म सामान्य रूप से पूछा गया हो।

co m
m .
o m l a se
g कहा जा सकता है। चंद्रमा वशेष
.cकरता हो, उसका उपग्रह कहा जा सकता है। इस अथ म पृथ्वी को सूय काaउपग्रह
"उपग्रह" शब्द "चंद्रमा" से व्यापक क्य है: सामान्यतः कोई भी पड जो अपने से बहुत बड़े पड क प रक्रमा

s e m
a
agl
रूप से कसी ग्रह का प्राकृ तक उपग्रह है— मनुष्य ारा छोड़े गए कृ त्रम उपग्रह से भन्न।
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m as e
.co


a g l Page 14 of 36

Page 16

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

पाठ्यपुस्तक से आगे— चंद्रमा का आकार क्य बदलता दखता है। यह अध्याय चंद्रमा क कलाओं क चचा
नह करता, पर आपने उन्ह अवश्य दे खा होगा। चंद्रमा का आधा भाग सदा सूय के प्रकाश से चमकता रहता है। जैसे-
जैसे चंद्रमा पृथ्वी क प रक्रमा करता है, हम वह प्रका शत आधा भाग अलग-अलग कोण से दखता है, इस लए हर
रात उसका अलग-अलग अंश हमारी ओर होता है। पूरा चक्र लगभग साढ़े 29 दन का होता है। ये कलाएँ पृथ्वी क
छाया से नह बनत — पृथ्वी क छाया चंद्रमा पर कभी-कभार ही पड़ती है और वह चंद्रग्रहण होता है, बल्कुल
अलग घटना।

अमावस्या शुक्ल पक्ष की कला शुक्ल पक्ष अष्टमी शुक्ल पक्ष का
(नया चंदमा) (बालचंद) (अध चंद) िगब्बस

पूिणमा कृष्ण पक्ष का कृष्ण पक्ष अष्टमी कृष्ण पक्ष की कला
(पूण चंदमा) िगब्बस (अध चंद)

चंद्रमा क आठ कलाएँ, क्रम म। नारंगी भाग वह प्रका शत अधाश है जो हम पृथ्वी से दखाई दे ता है। भारत म मास का बढ़ता हुआ
पक्ष शुक्ल पक्ष और घटता हुआ पक्ष कृष्ण पक्ष कहलाता है।

क्रयाकलाप 12.4: आइए, पहचानने का प्रयास क जए — पृष्ठ 236
12.3 हमारा सौर प रवार— शुक्र ग्रह को खोजना

क्रयाकलाप

प्र.1 कसी ऐप क सहायता से आप शुक्र ग्रह को भोर अथवा संध्या के समय दे ख सकते ह। अगर आप भोर के समय
इसे दे ख रहे ह तो सूय दय से पहले पूव दशा म दे खए। जब आप संध्या के समय म इसे दे ख रहे ह तो सूयास्त के
प ात् प म दशा म दे खए।

प्रेक्षण: शुक्र एक अकेला, अत्यंत चमक ला, स्थर ेत "तारा" जैसा दखता है, जो आकाश म काफ नीचे, वह होता है जहाँ सूय
उगने वाला है या अभी-अभी डू बा है।

Page 15 of 36

Page 17

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

कब दे ख कहाँ दे ख शुक्र का नाम

भोर म, सूय दय से ठ क पहले पूव िदशा में नीचे भोर का तारा

संध्या म, सूयास्त के ठ क बाद पिश्चम िदशा में नीचे संध् या का तारा

यह शुक्र ही है, तारा नह — कैसे न त कर:

यह कसी भी तारे से कह अ धक चमक ला है— सूय और चंद्रमा के बाद आकाश का सबसे चमक ला पड।
इसका प्रकाश स्थर रहता है, यह अ धक टम टमाता नह ।
उस समय आकाश गोधू ल के कारण अभी उजाला ही होता है और वहाँ कोई तारा दखाई नह दे ता।
ऐप से पु ष्ट कर ली जए— वह पड का नाम बता दे गा।

शुक्र केवल भोर या संध्या म ही क्य दखता है: शुक्र पृथ्वी क कक्षा के भीतर रहकर सूय क प रक्रमा करता है,
इस लए पृथ्वी से दे खने पर वह आकाश म सूय से कभी बहुत दूर नह जाता। वह या तो सूय से थोड़ा आगे रहता है
(संध्या) या थोड़ा पीछे (भोर), और आधी रात को सर के ऊपर कभी नह होता।

क्या आप जानते ह? सूय से बुध क तुलना म अ धक दूर होने पर भी शुक्र बुध से अ धक गरम है— इसका घना
वायुमंडल ऊष्मा को बाहर नकलने ही नह दे ता।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 239 एवं 241
12.4 मंदा कनी आकाश गंगा तथा 12.5 ब्रह्माण्ड

प्र.1 अंत रक्ष म सौर प रवार के आगे क्या है?

सौर प रवार से आगे अन्य तारे ह— और हमारा पूरा सौर प रवार एक मंदा कनी का छोटा-सा भाग मात्र है।

चंद्रमा- वहीन रात म, नगर क रोशनी से दूर कसी अँधेरे स्थान से दे खने पर आकाश म उत्तर से द क्षण तक फैली प्रकाश क एक
धुँधली पट्ट दखाई दे ती है। यही मंदा कनी आकाश गंगा ( मल्क वे गैलेक्सी) है।
मंदा कनी एक वशाल तंत्र है जसम करोड़ से लेकर अरब तक तारे होते ह।
हमारा सौर प रवार मंदा कनी आकाश गंगा का ही अंग है, और सूय उसके असंख्य तार म से एक है।
सूय के बाद नकटतम तारा प्रो क्समा सटाओरी लगभग 269000 au दूर है— और वह भी इसी आकाश गंगा का अंग है।

आकाश गंगा प जैसी क्य दखती है: हमारी मंदा कनी का आकार लगभग एक चपट चकती जैसा है और हम
उसी चकती के भीतर ह। चकती के तल क दशा म दे खने पर असंख्य दूरस्थ तारे एक के पीछे एक दखते ह और
उनक स म्म लत आभा एक दू धया पट्ट बना दे ती है। चकती से बाहर क दशा म दे खने पर बहुत कम तारे मलते ह।

Page 16 of 36

Page 18

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 मंदा कनी आकाश गंगा के परे क्या है?

और भी अनेक मंदा क नयाँ। आकाश गंगा से परे बाह्य अंत रक्ष म असंख्य अन्य मंदा क नयाँ ह, और हर एक म करोड़ से अरब
तारे ह।

गह → िकसी तारे की पिरक्रमा करते है ं

करोड़ ों-अरबों तारे िमलकर → एक मंद ािकनी बनाते है ं

असंख्य मंद ािकिनयाँ िमलकर → ब ाण्ड बनाती है ं

वै ा नक इन दूरस्थ मंदा क नय का अध्ययन इस लए करते ह ता क यह समझ सक क तारे कैसे बनते ह, मंदा क नयाँ कैसे बनती ह
और ब्र ाण्ड कैसे काम करता है।

क्या आप जानते ह? ल ाख के हान्ले म सरस्वती पवत पर स्थत भारतीय खगोलीय वेधशाला संसार क सबसे
ऊँची वेधशालाओं म से एक है। भारतीय वै ा नक ऐसे ही दूरस्थ पड का अध्ययन वहाँ से करते ह।

प्र.3 क्या ब्रह्माण्ड म अन्यत्र कह जीवन है?

अभी हम नह जानते— और यही ईमानदार वै ा नक उत्तर है। अब तक वै ा नक को पृथ्वी के अ त रक्त कह भी जीवन का
कोई प्रमाण नह मला है, कतु खोज पूरी तरह जारी है।

यह खोज मुख्यतः बाह्य ग्रह पर क द्रत है— वे ग्रह जो हमारी ही मंदा कनी के अन्य तार क प रक्रमा करते हुए खोजे गए ह।
वै ा नक ऐसे ग्रह ढूँ ढ़ते ह जो अपने तारे से उ चत दूरी पर ह , जहाँ जल द्रव रूप म रह सके, और फर उनसे आने वाले प्रकाश म
उन गैस के चह्न खोजते ह जो जीवधारी बना सकते ह।
हमारे अपने सौर प रवार म भी मंगल तथा बृहस्प त और श न के कुछ बफ ले चंद्रमाओं पर खोज चल रही है।

"हम नह जानते" एक अच्छा उत्तर क्य है: व ान म यह कह दे ना क प्रमाण अभी नह मला है, अनुमान लगा
लेने से कह बेहतर है। वै ा नक प्रश्न को खुला रखता है, परीक्षण करता रहता है और उत्तर तभी बदलता है जब
प्रेक्षण ऐसा करने को कह। यही वह ज ासा क भावना है जससे यह पुस्तक अध्याय 1 म आरंभ हुई थी।

आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 243 – 245

Page 17 of 36

Page 19

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय का अभ्यास

प्र.1 नम्न ल खत का मलान क जए— स्तंभ I: (i) पृथ्वी का उपग्रह, (ii) लाल ग्रह, (iii) तारा-मंडल, (iv) एक ग्रह
जसे सामान्यत: सांध्य तारा कहा जाता है। स्तंभ II: (क) ओरायन, (ख) शुक्र, (ग) मंगल, (घ) चंद्रमा।

स्तंभ I मलान स्तंभ कारण
II

(i) पृथ्वी का उपग्रह (घ) चंद मा चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृ तक उपग्रह है; यह लगभग 27 दन म
पृथ्वी क एक प रक्रमा करता है।

(ii) लाल ग्रह (ग) मंग ल मंगल लाल दखाई दे ता है क्य क उसक सतह क मृदा का रंग लाल
है।

(iii) तारा-मंडल (क) ओरायन ओरायन एक तारा-मंडल है, जसक कल्पना तीन तार क पेट वाले
शकारी के रूप म क जाती है।

(iv) एक ग्रह जसे सामान्यत: सांध्य (ख) शुक्र शुक्र सूयास्त के बाद प म म चमकता दखता है— पर यह ग्रह है,
तारा कहा जाता है तारा नह ।

(i) → (घ) (ii) → (ग) (iii) → (क ) (iv) → (ख)

सुझाव: जब यही शुक्र सूय दय से पहले पूव म दखता है तो इसे भोर का तारा कहते ह। ग्रह वही है, केवल समय
अलग है।

प्र.2 (क) नम्न ल खत पहे लय को हल क जए— मेरे नाम का पहला अक्षर मंत्रणा म है यंत्रणा म नह , मेरे नाम का
दूसरा अक्षर गगन और सागर दोन म है, मेरे नाम का तीसरा अक्षर जल म है, जग म नह , म सूय क प रक्रमा
करने वाला एक ग्रह ँ। (ख) इस प्रकार क दो पहे लयाँ आप स्वयं बनाइए।

(क) पहेली का हल— अक्षर दर अक्षर:

संकेत हल अक्षर

मंत्र णा में है, यंत्र णा में नही ं मंत्रणा = म + त्र + णा · यंत्रणा = य + त्र + णा → अंतर का अक्षर म

गगन और सागर दोनों में है गगन = ग + ग + न · सागर = सा + ग + र → उभय नष्ठ अक्षर ग

जल में है, जग में नही ं जल = ज + ल · जग = ज + ग → अंतर का अक्षर ल

Page 18 of 36

Page 20

as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
म + ग + ल = मंगल
m गह, सूय से चौथा गह। as e
उत्तर: मंगल—coलाल
. a g l
m
ase
agl
(ख) मेरी बनाई दो पहे लयाँ। इन्ह भी इसी व ध से हल क जए।

co m
. ag
पहेली 1
मेरे नाम का पहला अक्षर श क्त म है, भ क्त म नहe,m
मेरे नाम का दूसरा अक्षर कबूतर और मकानgदोनl asम है,
a
मेरे नाम का तीसरा अक्षर रथ म है, पथ म नह ,

co m
m.
सूय और चंद्रमा के बाद म आकाश का सबसे चमक ला पड हूँ।
उत्तर: शुक्र (श + क + र)
m as e
.co a g l
a s eलmी 2
a gl
पहे
मेरे नाम का पहला अक्षर बल म है, फल म नह ,

m a s
agl
मेरे नाम का दूसरा अक्षर धन और बंधन दोन म है,
म सूय के सबसे नकट का ग्रह हूँ।
m .co
l a se
g
उत्तर: बुध (ब + ध)
a
अपनी पहेली कैसे बनाएँ: पहले उत्तर ल खए, फर उसके हर अक्षर के लए दो छोटे शब्द ढूँ ढ़ए— एक जसम वह
co m
m .
as e
अक्षर हो और एक जसम न हो, पर बाक सब मलता-जुलता हो (जल / जग)। जस अक्षर को रखना है, उसके लए
m l
.co a g
ऐसे दो शब्द ली जए जनम केवल वही अक्षर उभय नष्ठ हो (गगन / सागर)।

se m
g l a
a
se m
com a
नम्न ल खत म से कौन सौर प रवार का सदस्य नह है? (क) लुब्धक (ख) क्षुद्रग्रह (ग) धूमकेतु (घ) प्लूटो
l
प्र.3

. a g
m
ase
agl

उत्तर: (क) लुब्धक
co m
m .
m as e
.co a g l
कारण: लुब्धक ( स रयस) एक तारा है— रा त्र-आकाश का सबसे चमक ला तारा— जो कै नस मेजर तारा-मंडल का अंग है। यह

s e mसौर प रवार से बहुत बाहर है और सूय क प रक्रमा नह करता।
agla
.c
(ख) क्षुद्रग्रह— सदस्य ह। छोटे चट्टानी पड, जनम से अ धकांश मंगल और बृहस्प त के बीच क्षुद्रग्रह पट्ट म ह।

s e m
m a
(ग) धूमकेतु— सदस्य ह। बफ और चट्टान के पड; अनेक धूमकेतु सूय क प रक्रमा करते ह और नयत समय पर लौटते ह।

m . co agl
(घ) प्लूटो— सदस्य है। यह वरुण से आगे रहकर सूय क प रक्रमा करता है; 2006 से इसे वामन ग्रह कहा जाता है, पर यह

ase
l
सौर प रवार का ही अंग है।

a g

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 19 of 36

Page 21

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

सुझाव: सौर प रवार क सदस्यता क कसौट सरल है— क्या वह हमारे सूय क प रक्रमा करता है? लुब्धक नह
करता; वह स्वयं एक सूय है।

प्र.4 नम्न ल खत म से कौन सूय का ग्रह नह है? (क) बृहस्प त (ख) वरुण (ग) प्लूटो (घ) श न

उत्तर: (ग) प्लूटो

कारण: प्लूटो सूय क प रक्रमा तो करता है और वरुण से भी दूर स्थत है, कतु इसे ग्रह नह गना जाता। यह पृथ्वी के चंद्रमा से भी
छोटा है। जब इसके जैसे और अनेक छोटे पड खोजे गए तो अंतररा ीय खगोलीय संघ (आई.ए.यू.) ने 2006 म ग्रह कहलाने क
शत को पुनप रभा षत कया। उस प रभाषा के अनुसार प्लूटो और उसके जैसे छोटे पड अब वामन ग्रह कहलाते ह।
बृहस्प त, वरुण और श न— ये तीन सूय के आठ ग्रह म से ह।

क्या आप जानते ह? प्लूटो 1930 म खोजा गया था और 76 वष तक उसे नौवाँ ग्रह कहा जाता रहा। नए प्रमाण
मलने पर व ान ने अपना मत बदल दया— व ान को ऐसा ही होना चा हए।

प्र.5 ुव तारा और लुब्धक म से कौन अ धक चमकदार तारा है?

लुब्धक अिधक चमकदार तारा है।

लुब्धक ( स रयस), जो कै नस मेजर तारा-मंडल म है, संपूण रा त्र-आकाश का सबसे चमक ला तारा है। ओरायन क पेट
क रेखा पूव क ओर बढ़ाते ही यह अचूक रूप से मल जाता है।
ुव तारा (पोल स्टार) बहुत चमक ला नह है। पाठ्यपुस्तक स्वयं कहती है क इसे पहचानने के लए ऐसी रात चु नए जसम न
चंद्रमा हो न बादल— ठ क इसी लए क यह धुँधला है।

फर भी ुव तारा अ धक उपयोगी क्य है: आकाश म कसी तारे का महत्त्व उसक चमक से तय नह होता। ुव
तारा इस लए महत्त्वपूण है क वही एक तारा पूरी रात और पूरे वष उत्तर दशा म लगभग अचल रहता है, इस लए
उससे दशा ात क जा सकती है। लुब्धक चाहे कतना ही चमक ला हो, वह अन्य तार क तरह आकाश म चलता
रहता है।

Page 20 of 36

Page 22

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.6 सौर प रवार का कसी चत्रकार ारा बनाया गया चत्र 12.12 म दशाया गया है। क्या इसम ग्रह का क्रम ठ क है?
य द ठ क नह है तो चत्र के नीचे दए गए बॉक्स म उनका सही क्रम ल खए।

चत्र 12.12, पृष्ठ 244 — सौर प रवार का कसी चत्रकार ारा बनाया गया चत्र; प्रत्येक ग्रह के नीचे एक रक्त बॉक्स
है। पुनर चत।

नह , चत्र 12.12 म ग्रह का क्रम ठ क नह है। दो जोड़ी ग्रह आपस म बदल गए ह।
सूय से बाहर क ओर चत्र म क्रम इस प्रकार बनाया गया है— बुध, पृथ्वी, शुक्र, मंगल, बृहस्प त, यूरेनस, श न, वरुण। अब इसक
तुलना सही क्रम से क जए—

बॉक्स चत्र 12.12 म बना ग्रह सही ग्रह

1 बुध बुध ठक

2 पथ्ृ वी (नीला, बादलों सिहत) शुक्र बदला हुआ

3 शुक्र (नारंग ी-भूर ा) पथ्ृ वी बदला हुआ

4 मंग ल मंग ल ठक

5 बहृ स्पित बहृ स्पित ठक

6 यूरे नस (हल्का नीला, पतला खड़ा वलय) शिन बदला हुआ

7 शिन (पीला, चौड़े वलय) यूरे नस बदला हुआ

8 वरुण वरुण ठक

अतः बॉक्स म सूय से बाहर क ओर यह क्रम लखा जाना चा हए—

Page 21 of 36

Page 23

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

बुध → शुक्र → पृथ्वी → मंगल → बहृ स्पित → शिन → यूरेनस → वरुण

सूय से बढ़ ती हुई दूरी

5 6 7 8
1 2 3 4

बध
ु प ृथ्वी यूरेन स
बृह स्पित
शुक्र मंगल वरुण
सूय शिन
क्षुद ग ह प ी

सूय से बाहर क ओर आठ ग्रह का सही क्रम। चत्र म आकार और दू रयाँ कसी स्केल के अनुसार नह ह।

सुझाव— क्रम याद रखने का वाक्य: बुध शुक्र पृथ्वी मंगल बृहस्प त श न यूरेनस वरुण → "बुशु पृमं बृश यूव"—
इसे एक साँस म दोहराइए, क्रम पक्का हो जाएगा।

चत्र म गलती स्वयं कैसे पकड़: पृथ्वी नीली-सफेद होती है (जल और बादल); शुक्र सादा पीला-भूरा; श न के चौड़े
और स्पष्ट वलय लगभग सपाट पड़े होते ह; यूरेनस छोटा, हल्का नीला-हरा गोला है जसका पतला वलय लगभग
खड़ा दखता है। चत्र 12.12 म नीली-सफेद गद दूसरे स्थान पर और चौड़े वलय वाला पीला वशाल ग्रह सातव स्थान
पर है— दोन अपने स्थान से एक-एक कदम खसके हुए ह।

Page 22 of 36

Page 24

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.7 रा त्र-आकाश का एक भाग चत्र 12.13 म दशाया गया है। बग डपर एवं ल टल डपर के तार को सरल रेखाओं
ारा जो ड़ए। ुव तारे को पहचा नए और चत्र म इसका नाम ल खए।

चत्र 12.13, पृष्ठ 244 — तार स हत रा त्र-आकाश का एक भाग।

अपनी पुस्तक के चत्र पर कैसे काम कर:

1. चत्र 12.13 के ऊपरी-बाएँ भाग म सात सबसे चमक ले बदु ढूँ ढ़ए। इनम से चार थोड़ा तरछा आयत (कप) बनाते ह और
तीन एक कोने से हल्के मोड़ के साथ आगे नकलते ह (हत्था)। इन्ह जोड़ द जए— यही बग डपर (सप्त ष) है।
2. कप के बाहरी कनारे के दो तारे ली जए— वह कनारा जो हत्थे से दूर है। इनसे होकर एक हल्क सरल रेखा ख चए, जो कप
से दूर जा रही हो।

Page 23 of 36

Page 25

as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

3. इन दोन तार के बीच क दूरी ना पए और उसी रेखा पर लगभग पाँच गुनी दूरी आगे जाइए। वहाँ एक अकेला, अपेक्षाकृत
co m
धुँधला तारा मलेगा— उस पर ुव तारा ल खए।
e m.
om g l as
ल टल डपर.cहै। ध्यान द जए क ुव तारा इसी के हत्थे के सरे पर है। a
4. उसी तारे से आरंभ करके तीन तार का छोटा मुड़ा हुआ हत्था और फर चार तार का छोटा कप जो ड़ए। यह छोट करछ

a s em
agl पूरा कया हुआ चत्र ऐसा दखना चा हए—
आपका

com
m . ag
l a seदू री का लगभग 5 गुना
ag
संकेतक तारे इस
धु व तारा

co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g
s
िलिटल िडपर
m a
m .co agl
l a se
a g

co m
m .
m as e
.co a g l
m
ase
िबग िडपर (सप्तिष)

agl चत्र 12.13 का पूरा कया हुआ उत्तर— बग डपर, ल टल डपर और ल टल डपर के हत्थे के सरे पर ुव तारा।

se m
com g l a
m . a
ase
सुझाव: प सल और स्केल का उपयोग क जए और हल्का दबाव द जए, ता क मटाकर दोबारा प्रयास कया जा

agl
सके। पैटन म केवल चमक ले बदु आते ह; बीच म बखरे धुँधले बदुओं को छोड़ द जए।

co m
m .
m ase
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 24 of 36

Page 26

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.8 रा त्र-आकाश का एक भाग चत्र 12.14 म दशाया गया है। इसम ओरायन तारा-मंडल के तार को सरल रेखाओं
ारा जो ड़ए। तारे लुब्धक का नाम अं कत क जए। इसके लए आप चत्र 12.3 क सहायता ले सकते ह।

चत्र 12.14, पृष्ठ 245 — रा त्र-आकाश का एक भाग।

लु धक
ब्

कै िनस
ओरायन वषृ
मेजर

चत्र 12.3, पृष्ठ 228 — कुछ तारा-मंडल और तारे; इस प्रश्न म सहायता हेतु अध्याय से दए गए ह। लाल रेखाएँ आकाश
म नह होत ; ये केवल पहचान क सु वधा के लए बनाई गई ह।

अपनी पुस्तक के चत्र पर कैसे काम कर:

1. चत्र 12.14 के लगभग बीच म तीन अपेक्षाकृत चमक ले बदु ढूँ ढ़ए जो एक छोट , सीधी पं क्त म समान दूरी पर बहुत पास-
पास ह। यही ओरायन क पेट है— सबसे पहले इसी को पहचा नए।

Page 25 of 36

Page 27

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

2. पेट के ऊपर दो चमक ले तारे च ह्नत क जए, जो शकारी के कंधे बनाते ह (इनम से अ धक चमक ला और ला लमा लए तारा
बीटलजूज है)।
3. पेट के नीचे दो चमक ले तारे च ह्नत क जए, जो पैर बनाते ह (अत्यंत चमक ला तारा राइजल है)।
4. दोन ओर कंधा → पेट का सरा → पैर जो ड़ए, और ऊपर दोन कंध को आपस म जोड़ द जए। अब ओरायन क लंबी,
कमर से पतली आकृ त बन जाएगी।
5. अब पेट के तीन तार क रेखा को पूव क ओर आगे बढ़ाइए ( चत्र म पेट से नीचे क ओर)। उस रेखा पर मलने वाला पहला
अत्यंत चमक ला तारा लुब्धक है। उसका नाम अं कत क जए।

आपका पूरा कया हुआ चत्र ऐसा दखना चा हए—

बीटलजूज

ओरायन

पेटी (3 तारे)

पेट ी की रे खा आगे बढ़ ाइए
ल ुब्धक
राइजल

चत्र 12.14 का पूरा कया हुआ उत्तर— ओरायन जुड़ा हुआ, और पेट क रेखा बढ़ाकर खोजा गया लुब्धक तारा।

पेट ही कुंजी क्य है: लगभग समान चमक वाले तीन तारे, लगभग समान दूरी पर, लगभग पूण सरल रेखा म—
ऐसा दृश्य पूरे आकाश म और कह नह है। पेट मल जाने पर ओरायन का हर दूसरा तारा उसी के सापेक्ष न त हो
जाता है— और लुब्धक भी।

प्र.9 पृथ्वी से आप उषाकाल म तार को लुप्त होते तथा संध्याकाल म प्रकट होते दे ख सकते ह। दन के समय आप तार
को नह दे ख पाते ह। ऐसा क्य होता है? व्याख्या क जए।

तारे दन भर चमकते रहते ह। वे केवल सूय के प्रकाश म दब जाते ह।

सूय के उदय होते ही उसका प्रकाश हमारे ऊपर क वायु पर पड़ता है और वायुमंडल क गैस तथा धूल-कण ारा चार ओर
बखेर दया जाता है। यही बखरा हुआ प्रकाश दन के संपूण आकाश को चमक ला और नीला बना दे ता है।

Page 26 of 36

Page 28

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

कसी भी अन्य तारे से हम तक पहुँचने वाला प्रकाश अत्यंत क्षीण होता है, क्य क हर तारा असाधारण रूप से दूर है।
अत्यंत चमक ली पृष्ठभू म पर क्षीण प्रकाश अलग नह दखता। इस लए दन के चमकते आकाश म तारे अदृश्य हो जाते ह—
अनुप स्थत नह होते।
संध्याकाल म सूय क्ष तज के नीचे चला जाता है, बखरा हुआ प्रकाश घटता जाता है, आकाश क पृष्ठभू म गहराती जाती है
और एक-एक करके चमक ले तारे दखने लगते ह। उषाकाल म इसका उल्टा होता है और वे लुप्त हो जाते ह।

रोज़ का उदाहरण: अँधेरे कमरे म मोबाइल क टॉच च धया दे ती है। उसी टॉच को दोपहर क तेज़ धूप म जलाइए—
पता ही नह चलता क वह जल रही है। टॉच नह बदली— पृष्ठभू म बदल गई।

क्या आप जानते ह? चंद्रमा पर वायुमंडल न के बराबर है, इस लए वहाँ सूय के प्रकाश को बखेरने वाला कुछ नह
है। वहाँ का आकाश दन म भी काला रहता है और अंत रक्ष यात्री तेज़ धूप म खड़ा होकर भी तारे दे ख सकता है।
इससे सद्ध होता है क तार को हमसे हमारी वायु छपाती है, स्वयं सूय नह ।

प्र.10 रात म जब आकाश साफ हो तो बग डपर (सप्त ष) के अवलोकन का प्रयास 2–3 घंटे के समय अंतराल पर 3–
4 बार क जए। प्रत्येक बार ुव तारे क स्थ त दे खने का प्रयास भी क जए। क्या सप्त ष ग त करते हुए प्रतीत
होता है? प्रत्येक प्रेक्षण का समय बताते हुए एक क ा रेखा चत्र बनाइए।

प्रेक्षण: हाँ, सप्त ष ग त करता हुआ प्रतीत होता है— कतु ुव तारा नह ।

रात भर संपूण सप्त ष ुव तारे के चार ओर एक वृत्त म घूमता प्रतीत होता है, और उत्तर क ओर मुँह करने पर यह घूमना
वामावत (एंट -क्लॉकवाइज़) दखता है।
पैटन का आकार कभी नह बदलता; केवल उसका झुकाव बदलता है। कसी समय वह सीधा खड़ा दखता है तो कुछ घंट बाद
लगभग लेटा हुआ।
प्रत्येक तारे क ुव तारे से दूरी भी वही बनी रहती है— पूरा पैटन बस उसी एक बदु के चार ओर घूम जाता है।
ुव तारा पूरी रात एक ही स्थान पर, उत्तर दशा म, क्ष तज से उतनी ही ऊँचाई पर बना रहता है।

आकाश लगभग 24 घंटे में 360° घूमता है

→ लगभग 15° पित घंट ा

→ 2 से 3 घंटे के अंत राल में लगभग 30° से 45°

क ा रेखा चत्र (3 घंटे के अंतर पर तीन प्रेक्षण):

Page 27 of 36

Page 29

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

धु व तारा— अचल रहता है

रात 9 बजे

रात 12 बजे
पात: 3 बजे

पूरा पैटन धुव तारे के चारों ओर वामावत घूमता पतीत होता है

वही सप्त ष रात 9 बजे, 12 बजे और प्रात: 3 बजे। आकृ त वही है; केवल अचल ुव तारे के चार ओर उसक स्थ त हर तीन घंटे म
लगभग 45° घूम गई है।

ऐसा क्य होता है: तारे वास्तव म हमारे आकाश म चल नह रहे— पृथ्वी अपने अक्ष पर घूम रही है, लगभग 24
घंटे म एक बार। घूमती पृथ्वी पर खड़े होकर हम संपूण आकाश उल्ट दशा म घूमता प्रतीत होता है। ुव तारा पृथ्वी
के अक्ष क सीध म है, इस लए वही एक बदु है जो घूमता नह दखता और शेष सभी तारे उसी के चार ओर चक्कर
लगाते प्रतीत होते ह।

स्वयं जाँ चए: हर प्रेक्षण म कॉपी को एक ही दशा म पक ड़ए और सप्त ष के साथ क्ष तज तथा ुव तारा भी
बनाइए। हर चत्र के पास समय ल खए। तीन चत्र के बाद यह घूमना स्पष्ट दखने लगेगा।

प्र.11 रा त्र-आकाश के बारे म चतन क जए और इसके संबंध म कोई क वता अथवा कहानी ल खए।

यह आपक अपनी सृजनात्मक रचना है, इस लए इसका कोई एक सही उत्तर नह है। अ रचना म वही बात आनी चा हए जो
आपने इस अध्याय म सीखी ह— सप्त ष, ुव तारा, ओरायन क पेट , लुब्धक, आकाश गंगा, धूमकेतु, चंद्रमा के गत— न क
केवल " टम टमाते हीरे" जैसे गोल-मोल शब्द।
अच्छे उत्तर म क्या होना चा हए:

रा त्र-आकाश के एक-दो वास्त वक पड, सही नाम के साथ।
उनके बारे म कोई स ी बात ( ुव तारा उत्तर म अचल रहता है; लुब्धक सबसे चमक ला तारा है; धूमकेतु सूय के पास आकर
पूँछ बना लेता है)।

Page 28 of 36

Page 30

as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

कोई भाव— वस्मय, ज ासा, या कोई प्रश्न जसका उत्तर आप जानना चाहते ह।
co m
em.
m l as
.co a g
नमूना उत्तर— क वता

se m
वह द पक जो कभी नह हलता
g l a
aसात ऋ ष लेकर चलते ह उ जयारी करछ ,

co m
ag
धीरे-धीरे घूमे रात क ऊँची छत पर।

m .
as e
वे झुकते ह, मुड़ते ह, चलते ही जाते ह,

a
पर उत्तर म एक छोटा द पक टँ गा रह जाता है।
g l

co m
न वह सबसे चमक ला है, न सबसे सुंदर,

e m.
फर भी ना वक ने सबसे अ धक उसी पर भरोसा कया।

coहैmजो कभी भटकता नह ।
ओरायन चलता रहे, लुब्धक जलता रहे—
g l as
m . a
ase
ुव अके ला

agl और उसी द पक के नीचे, ल ाख क ठं डी रात म,
m a s
.co agl
आकाश गंगा प्रकाश से छलक पड़ती है—
तार क वह नद जो कसी बाल्ट म नह समाती,
se m
g l a
और म एक सुनहरे ग्रह पर बैठा नन्हा-सा कण हूँ।
a

c o m
.
नमूना उत्तर— कहानी (संक्षेप म)

s e mलेट गई। दोरजे भी दादा
यांग्डोल को न द नह आ रही थी। उसने अपना ग चा लपेटा, छत पर चढ़ और ठं डे पत्थर पर
जी काoपुm
. c राना पीतल का दक्सूचक लेकर ऊपर आ गया।
a gla
mख," उसने कहा, "करछ खसक गई है।" नौ बजे सप्त ष पहाड़ी के ऊपर सीधा खड़ा था; अब आधी रात के बाद
ase
"दे

agl वह तरछा लेटा हुआ था।
"वह नह खसक ," यांग्डोल बोली। "हम खसके ह। पृथ्वी हमारे नीचे घूम गई।" उसने उँ गली से दोन संकेतक तारे
se m
com g l a
.
जोड़े, पाँच गुनी दूरी गनी और एक धुँधले, अकेले तारे पर रुक गई। दोरजे ने दक्सूचक खोला। सुई और तारा दोन

e m a
asदूसरे पहाड़ तक फैली थी। यांग्डोल ने सोचा— उस प्रकाश क पट्ट म कह
एक ही बात कह रहे थे— उत्तर।
उनके ऊपर आकाश गंगा एक पहाड़lसे
a g
कोई तारा होगा, उसका कोई ग्रह होगा, और शायद उस ग्रह पर भी कोई छत पर लेटा हम ही दे ख रहा होगा। यही
सोचते-सोचते वह सो गई।
co m
m .
m as e
.co a g l
m से नकलता चंद्रमा, कोई टूटता तारा, बजली जाने पर छत से दखा आकाश। सच्चा प्रेक्षण गढ़ हुई पं क्त से सदा
अपनी रचना के लए सुझाव: आरंभ कसी ऐसी बात से क जए जो आपने सचमुच दे खी हो— नीम के पेड़ के पीछे

l a se
ag
.c
बेहतर आरंभ दे ता है।

s e m
m a
e m . co agl
s
और भी सीख — पृष्ठ 245 एवंla246
ag

com
m .
m ase
.co


a g l Page 29 of 36

Page 31

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प रयोजनाएँ एवं आगे क खोज

प रयोजना काय

प्र.1 अपनी स्थानीय भाषा म ग्रह के नाम जानने का प्रयास क जए। आपके क्षेत्र म तारा-मंडल के तार से जुड़ी
कहा नय का पता लगाइए। इन कहा नय को चत्र के माध्यम से प्रस्तुत क जए।

यह प रयोजना कैसे कर: अपने दादा-दाद , कसी पुजारी, कसान या मछु आरे से पू छए— पुराने नाम और कहा नयाँ उन्ह प्रायः
कसी पुस्तक से बेहतर याद रहती ह। नाम, भाषा और कहानी अपनी कॉपी म ल खए, फर उसका चत्र बनाइए।
नमूना उत्तर— आँख से दखने वाले ग्रह के नाम (पाठ्यपुस्तक स्वयं पृष्ठ 235 पर संस्कृत-मूलक नाम दे ती है):

अंग्रेज़ी संस्कृत / हद त मल तेलुगु मलयालम

Mercury बुध पुथन बुधुडु बुधन

Venus शुक्र वे ल्ल शुक्रुडु शुक्रन

Earth पथ्ृ वी भू म भू म भू म

Mars मंग ल सेव्वाइ कुजुडु / अंगारकुडु चोव्वा

Jupiter बहृ स्पित / ग रु
ु गुरु गुरुवु व्याषम

Saturn शिन सन शन शन

नमूना उत्तर— अध्याय क और भारत क कुछ कहा नयाँ:

मध्य भारत क जनजा तयाँ: सप्त ष के जो चार तारे लगभग आयत बनाते ह वे दाद -माँ क चारपाई ह, और शेष तीन तारे
उसे चुराते हुए तीन चोर ह।
क कण-तट के मछु आरे: वही चार तारे एक नाव ह और अं तम तीन तारे उस नाव क ग्रीवा ह।
पूरे भारत म: ये सात तारे सप्त ष ह और ुव तारा वह ुव है जसक दृढ़ता ने उसे आकाश म स्थायी स्थान दलाया।
धूमकेतु को संस्कृत म धूमकेतु, और भारत क व भन्न जनजा तयाँ पुच् ा तारो (पूँछ वाला तारा) अथवा झ ा तारो (झंडे
जैसा तारा) कहती ह।

चत्र के माध्यम से कैसे प्रस्तुत कर: काला चाट पेपर ली जए। सही पैटन म छोटे चाँद या सफेद तारा- स्टकर
चपकाइए। उनके ऊपर पतली सफेद चॉक या जेल पेन से क ल्पत आकृ त बनाइए— चारपाई, नाव, ऋ ष। हर चत्र
के नीचे दो-तीन पं क्तय म कहानी ल खए। पोस्टर को शीषक द जए और कक्षा म लगाइए।

Page 30 of 36

Page 32

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 कसी नकटवत कृ त्रम नभमंडल (प्लेनेटे रयम) म जाइए। य द आपके आस-पास कोई प्लेनेटे रयम या व ान
संग्रहालय है तो आप उसम वशेषकर उस समय जाइए जब वे कोई रा त्र-आकाश दशन कायक्रम आयो जत कर
रहे ह । तब आपको दूरदशक के माध्यम से चंद्रमा, ग्रह और तार को दे खने का अवसर प्राप्त होगा। य द आप दन
के समय प्लेनेटे रयम म जाते ह तो वहाँ आप उनके आकाशीय पड के चत्र और आकाश संबंधी प्रदशन दे ख
पाएँगे।

यात्रा क योजना कैसे बनाएँ:

1. अपने नकटतम कृ त्रम नभमंडल या व ान संग्रहालय का पता क जए और उसके शो का समय तथा यह दे खए क वहाँ
रा त्र-आकाश दशन कायक्रम होते ह या नह । संग्रहालय, प्लेनेटे रयम, उच्च शक्षा संस्थान और अव्यावसा यक खगोलीय
संगठन— सभी ऐसे कायक्रम करते ह।
2. अपने शक्षक, माता- पता अथवा कसी वयस्क के साथ जाइए। कॉपी और प सल साथ र खए।
3. जाने से पहले तीन प्रश्न लखकर ले जाइए— जैसे "दूरदशक कतना बड़ा है?", "आज रात कौन-सा ग्रह दखेगा?", "श न का
वलय चपटा क्य है?"

आप वास्तव म क्या दे ख पाएँगे:

पड छोटे दूरदशक से क्या दखता है

चंद्रमा गत, पवत और पकािशत तथा अंध कारमय भाग के बीच की तीखी रे खा

बृहस्प त धािरयों वाली छोटी चकती और उसके पास एक पंिक्त में चार नन्हे चंद मा

शन वलय— यही दृ श्य अिधकांश दशकों को जीवन भर याद रहता है

शुक्र चमकीली कला, छोटे चंद मा जैस ी

तारा-गुच्छ कृ ित्तका (प्लायोिडज) अलग-अलग दजनों नीले तारों में बँट जाती है

सुझाव: दन क यात्रा म गुंबद के नीचे होने वाला आकाश-प्रदशन मत छो ड़ए। वह पूरी रात के घूमने को कुछ ही
मनट म दखा दे ता है, इस लए आप सप्त ष को ुव तारे के चार ओर घूमते हुए वह दे ख सकते ह— वही बात जो
प्रश्न 10 आपसे कई घंट तक दे खने को कहता है।

प्र.3 पता लगाइए क क्या बढ़ता हुआ प्रकाश-प्रदूषण मानव, वन्यजीवन एवं पयावरण के लए समस्याएँ उत्पन्न कर रहा
है। ऐसे कसी काय का वणन क जए, जो आप अपने व्य क्तगत स्तर पर प्रकाश प्रदूषण को नयं त्रत करने के
लए करगे।

हाँ— प्रकाश प्रदूषण वास्त वक हा न पहुँचा रहा है, और वश्व स्तर पर तेज़ी से बढ़ रहा है। रात म आकाश क ओर फका गया
अत्य धक कृ त्रम प्रकाश तीन वग को प्रभा वत करता है।

Page 31 of 36

Page 33

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

प्रभा वत उत्पन्न समस्या

मानव रात में तेज़ पकाश नी ंद और शरीर की िदन-रात की लय िबगाड़ता है; गलत िदशा में लगे लै ंप की चौंध वाहन चालकों को
परे शान करती है; ज़मीन के स्थान पर आकाश को रोशन करने में ऊज और धन दोनों व्यथ होते है।
ं

वन्यजीवन कीट रात भर लै ंप के चारों ओर मँडराकर मर जाते है,ं और कीट घटने से पिक्षयों का भोजन तथा परागण दोनों घटते है।
ं पवासी
पक्षी रोशन इमारतों से भिमत हो जाते है।
ं हमारे तटों पर अभी-अभी िनकले कछु ए के बच्चे समुद के बजाय होटलों की रोशनी की
ओर चल पड़ते है।
ं चमगादड़, उल्लू और अन्य िनशाचर पाणी अपने िशकार-क्षेत्र खो दे ते है।
ं

पयावरण एवं नगर के अिधकांश बच्चों के िलए राित्र-आकाश खो चुक ा है। खगोलिवद ध ँध
ु ले िपंडों का अध्ययन नही ं कर पाते— इसीिलए
व ान अँधे रे आकाश वाले संर िक्षत क्षेत्र बनाए जा रहे है,ं जैसे िदसंबर 2022 में घोिषत ल ाख का हान्ले डाक स्काई िरजव।

नमूना उत्तर— व्य क्तगत स्तर पर म क्या करूँगा:

जब आवश्यकता न हो तो घर के बाहर का बल्ब और छत क बत्ती बुझा दूँ गा, और प रवार से भी ऐसा करने को कहूँगा।
पताजी से कहकर गेट के लप पर एक साधारण छ ा या टोपी लगवाऊँगा, ता क प्रकाश नीचे रास्ते पर पड़े, आकाश म और
पड़ोसी क खड़क म न जाए।
बाहर च धयाने वाले सफेद बल्ब के स्थान पर कम श क्त का, हल्के पीले रंग का बल्ब लगवाऊँगा।
रात म पद बंद रखूँगा ता क भीतर का प्रकाश बाहर न फैले।
वद्यालय के सूचना-पट्ट के लए एक पोस्टर बनाऊँगा— "रोशनी ज़मीन पर डा लए, आकाश पर नह "— और कक्षा को
समझाऊँगा क प्रकाश प्रदूषण से हम क्या खो रहे ह।

यह छोटा-सा काय क्य महत्त्वपूण है: अ धकांश प्रदूषण के वपरीत, प्रकाश प्रदूषण उसी क्षण समाप्त हो जाता है
जब कारण हटा दया जाए। गलत दशा म लगा लप बुझाइए और उसी रात उसके ऊपर का आकाश फर साफ हो
जाता है। बहुत कम पयावरणीय समस्याएँ इतनी जल्द ठ क हो सकती ह।

प्र.4 पता लगाइए क कस प्रकार के मौसम के कारण भारतीय खगोलभौ तक संस्थान (इं डयन इंस्ट ूट ऑफ
एस् ो फ जक्स) ने हान्ले, ल ाख को वेधशाला स्था पत करने के लए चुना है।

हान्ले क भारतीय खगोलीय वेधशाला दगपा-रत्सा री पवतमाला के सव च्च शखर— जसका नाम अब सरस्वती पवत है— पर
लगभग 4,500 मीटर क ऊँचाई पर बनी है। यह संसार क सबसे ऊँची वेधशालाओं म से एक है। भारतीय खगोलभौ तक संस्थान ने
इसे इस लए चुना क खगोल वद को जो भी प र स्थ तयाँ चा हए, वे लगभग सभी यहाँ एक साथ मलती ह।

Page 32 of 36

Page 34

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

हान्ले क प र स्थ त दूरदशक के लए इसका लाभ

बादल बहुत कम— वष म बड़ी संख्या म साफ अवलोकन के िलए अिधक राते ं िमलती है;ं बादलों वाले स्थान पर महँग ा दू र दशक व्यथ पड़ा
रात रहता है

अत्यंत शुष्क, शीत-मरुस्थलीय वायु— जलवाष्प अवरक्त पकाश सोख ले ती है; शुष्क वायु में उसका कही ं अिधक भाग दू र दशक तक
जलवाष्प न के बराबर पहच
ु ँ ता है

बहुत अ धक ऊँचाई— वायुमंडल का बड़ा कम वायु में से दे खना पड़ता है, इसिलए पितिबंब अिधक स्पष्ट और िस्थर बनते है ं
भाग नीचे रह जाता है

शांत, स्थर वायु— वक्षोभ बहुत कम तारों के पितिबंब िझलिमलाकर ध ँध
ु ले नही ं होते

दूरस्थ और वरल आबाद — प्रकाश प्रदूषण अत्यंत ध ँध
ु ले िपंड भी अिभले िखत िकए जा सकते है;ं इसीिलए िदसंबर 2022 में इस क्षेत्र को
न के बराबर हान्ले डाक स्काई िरजव घोिषत िकया गया

धूल और औद्यो गक धुंध बहुत कम स्वच्छ वायु पकाश कम िबखेर ती है और आकाश की पष्ृ ठभूिम अँधे र ी बनी रहती है

क्या आप जानते ह? हान्ले के दूरदशक म से एक का नाम हमालयी चंद्र टे लीस्कोप है, जो नोबेल पुरस्कार
वजेता वै ा नक सुब्रह्मण्यम् चंद्रशेखर के सम्मान म रखा गया है। यह रजव वष भर आम जनता के लए खुला
रहता है, और स्थानीय नाग रक को छोटे टे लीस्कोप दे कर संस्थान ने उन्ह खगो लक य राजदूत के रूप म प्र श क्षत
कया है— खगोल-पयटन से पूरे क्षेत्र को लाभ पहुँचाने का सुंदर उदाहरण।

Page 33 of 36

Page 35

as e
कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
emमाध्यम ारा
प्र.5 य द आपको कढ़ाई करना पसंद है तो कसी गहरे रंग के कपड़े पर उन तारा-मंडल क कढ़ाई क जए, जो आपने

m a s
o से भी तारा-मंडल को च त्रत कर सकते ह। gl
चत्र 12.15 म दे खे ह। आप अपनी सृजनशीलता का उपयोग करते हुए व वध कला और शल्प
अन्य व.cधय
em a
a s
a gl

co m
e m . ag
g l as
a

co m
e m.
m l as
m .co a g
l a se
a g
m a s
m .co agl
l a se
a g

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl
चत्र 12.15, पृष्ठ 246 — कढ़ाई के घेरे म गहरे रंग के कपड़े पर काढ़े गए तारा-मंडल। पुनर चत रेखा चत्र; मूल छाया चत्र
पाठ्यपुस्तक म दे खए।

co m
m .
m ase
.co a g l
emकढ़ाई से तारा- चत्र कैसे बनाएँ:

a s
agl
.c
m
1. गहरे नीले या काले रंग का कपड़ा लेकर उसे कढ़ाई के घेरे (हूप) म क सए।

m a s e
co agl
2. चत्र 12.3 या चत्र 12.4 से तारा-मंडल को े सग पेपर पर उता रए। हर तारे पर बदु लगाइए और जो तारा अ धक चमक ला

m .
e
है उसका बदु बड़ा र खए।

g l as
a
3. दज़ क महीन चॉक से ये बदु कपड़े पर उतार ली जए।
4. हर तारे को सफेद, चाँद या हल्के पीले धागे से च नॉट या कुछ छोटे सीधे टाँक के गु े के रूप म का ढ़ए। सबसे चमक ले

m
तारे— लुब्धक, या लाल रंग म बीटलजूज— के लए एक मोती या सतारा लगाइए।

. co
em
m l as
.co a g
Page 34 of 36

Page 36

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

5. चाह तो तार को धूसर धागे के बहुत महीन र नग स्टच से जोड़कर क ल्पत आकृ त दखाइए, और नीचे बैक स्टच से उसका
नाम काढ़ द जए।

तारा-मंडल दखाने के अन्य तरीके— इनम से कोई एक चु नए:

सुई- छद्र लालटे न: काले चाट पेपर पर सुई से तार के अनुसार छे द क जए, उसे बेलनाकार मो ड़ए और भीतर टॉच र खए।
अँधेरे कमरे क छत पर पैटन उभर आएगा।
क ल-धागा कला: रंगे हुए लकड़ी के तख्ते पर तार क जगह छोट क ल ठ कए और उनके बीच सफेद धागा ता नए।
रंगोली / द ये: सफेद रंगोली से फश पर सप्त ष बनाइए, या द पावली पर सात तार क जगह नन्हे द ये र खए।
बोतल-ढक्कन मोज़ेक या ग्लो पट: काली शीट पर चाँद के ढक्कन चपकाइए या अँधेरे म चमकने वाला रंग लगाइए।
कक्षा का आकाश- भ त्त चत्र: हर वद्याथ एक-एक वग पर एक तारा-मंडल काढ़े या बनाए, और सारे वग जोड़कर कक्षा क
द वार के लए एक "आकाश-रजाई" तैयार क जए।

सुझाव: तार क आपसी दू रयाँ और आपसी चमक लगभग सही र खए। तारा- चत्र तभी उपयोगी है जब कोई
उसे सचमुच के आकाश के सामने रखकर पैटन पहचान सके।

अध्याय — एक नज़र म
तारे अपने स्वयं के प्रकाश से चमकते ह। तार के जो समूह पैटन बनाते प्रतीत होते ह उन्ह तारा-मंडल कहा जाता था।
आजकल तारा-मंडल का अथ है आकाश का एक न त क्षेत्र — अंतररा ीय खगोलीय संघ (आई.ए.यू.) ने संपूण आकाश को
88 तारा-मंडल म बाँटा है।
ुव तारा (पोल स्टार) उत्तर दशा म लगभग अचल दखाई पड़ता है, इस लए उत्तरी गोलाध म यह उत्तर दशा बता दे ता है।
इसे सप्त ष ( बग डपर) के कप के अं तम दो तार से खोजा जाता है— उनके बीच क दूरी का लगभग पाँच गुना आगे।
सूय एक तारा है— हमारे सबसे नकट का तारा। यह व्यास म पृथ्वी से लगभग 100 गुना बड़ा है और लगभग 15 करोड़
कलोमीटर दूर है (यही दूरी 1 खगोलीय मात्रक, au कहलाती है)। यह पृथ्वी पर ऊजा का प्रमुख ोत है।
ग्रह एक वशाल, लगभग गोलाकार पड है जो सूय क प रक्रमा करता है। सूय से बढ़ती दूरी के क्रम म आठ ग्रह ह— बुध,
शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्प त, श न, यूरेनस, वरुण। भीतरी चार छोटे और चट्टानी ह; बाहरी चार वशाल ह, अ धकांशतः गैस
एवं बफ के बने ह और उनके चार ओर वलय ह। प्लूटो अब वामन ग्रह है (आई.ए.यू., 2006)।
ग्रह क प रक्रमा करने वाले पड उपग्रह कहलाते ह। चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृ तक उपग्रह है— व्यास म पृथ्वी का लगभग एक
चौथाई, 3,84,000 कलोमीटर दूर, एक प रक्रमा म लगभग 27 दन, सतह पर गत (क्रेटर) और वायुमंडल न के बराबर। भारत
के चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के द क्षण ुव के नकट सफल ल डग क — अब यह रा ीय अंत रक्ष दवस है।
सूय + आठ ग्रह + उनके उपग्रह + क्षुद्रग्रह + धूमकेतु मलकर सौर प रवार बनाते ह, जो मंदा कनी आकाश गंगा का एक
छोटा-सा भाग है। उससे परे असंख्य अन्य मंदा क नयाँ ह— ये सब मलकर ब्रह्माण्ड ह।

Page 35 of 36

Page 37

कक्षा 6 व ान अध्याय 12 पृथ्वी से परे AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय से उदाहरण पृष्ठ

तारा गैस ों का अत्यंत गम िवशाल गोला, जो अपने पकाश से सूय, लुब्धक ( स रयस), प्रो क्समा सटाओरी 227,
चमकता है 232

तारा-मंडल आकाश का एक िनिश्चत क्षेत्र , िजसमें पायः तारों का ओरायन, वृष (टॉरस), कै नस मेजर, असा मेजर 227
कोई जाना-पहचाना पैटन होता है

ुव तारा वह तारा जो उत्तर िदशा में लगभग अचल िदखाई दे ता दोन संकेतक तार क दूरी के लगभग 5 गुना पर स्थत 229
है; िलिटल िडपर का अंग

सप्त ष / बग अस मेजर तारा-मंडल में िस्थत सात तारों का पैटन भारतीय लोक-कथाओं म दाद -माँ क चारपाई या नाव 229
डपर

नक्षत्र िकसी तारे या तारा-समूह के िलए भारतीय शब्द आद्रा = बीटलजूज, कृ त्तका = प्लायो डज, रो हणी = 228
अ ेबरान

प्रकाश प्रदूषण राित्र के समय अत्यिधक कृ ित्रम पकाश की उपिस्थित बड़े नगर से केवल कुछ ही तारे दखाई दे ते ह 230

प रक्रमण िकसी िपंड का दू स रे िपंड के चारों ओर घूम ना पृथ्वी सूय के चार ओर— लगभग 1 वष; चंद्रमा पृथ्वी के 234,
चार ओर— लगभग 27 दन 238

घूणन िकसी िपंड का अपने ही अक्ष पर घूम ना पृथ्वी एक घूणन म लगभग 24 घंटे लेती है— यही एक 234
दन है

ग्रह िवशाल, लगभग गोलाकार िपंड जो सूय की पिरक्रमा बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्प त, श न, यूरेनस, वरुण 234–
करता है 235

उपग्रह ग ह की पिरक्रमा करने वाला िपंड चंद्रमा; मंगल के दो चंद्रमा; बृहस्प त के अनेक 237–
238

क्षुद्रग्रह छोटे, च ानी, अिनयिमत आकार के िपंड; अिधकांश क्षुद्रग्रह पट्ट ; आकार 10 मीटर से लगभग 500 239
मंग ल और बहृ स्पित के बीच कलोमीटर तक

धूमकेतु धूल , गैस , पत्थर और बफ का िपंड, जो सूय के िनकट हेली धूमकेतु— हर 76 वष म; संस्कृत म धूमकेतु 239–
लंबी पूँछ बना ले ता है 240

Page 36 of 36

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages37
Languagehindi
Updated19 Sep 2026