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NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 1 पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

AglaSem पर कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति (समाज का अध्ययन) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Social Science Chapter 1 Locating Places on the Earth (Exploring Society: India and Beyond), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 1 पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति - Page 1 of 41

About NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 1 पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

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NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 1 पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 1: पृथ्वी पर ान क त

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

1 – 25 13 42 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 40 pages

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: पृथ्वी पर ान क त
कक्षा 6 सामा जक व ान क पाठ्यपुस्तक समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे के अध्याय 1 पृथ्वी पर ान क त के सभी प्रश्न के
वस्तृत उत्तर। इसम प रचय सामा जक व ान क्य ? (पृष्ठ 1–6) तथा अध्याय (पृष्ठ 7–25) के आइए पता लगाएँ बॉक्स, महत्वपूण प्रश्न, पाठ्य प्रश्न,
आगे बढ़ने से पहले… और प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ के सभी आठ प्रश्न — वग पहेली के पूरे हल स हत — स म्म लत ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6) 1 – 25

खं ड प्रश्न

13 42

माध्यम

हन्द

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 2 (प रचय)
प रचय — सामा जक व ान क्य ?

आइए पता लगाएँ

प्र.1 ऊपर दए गए चत्र को दे खए। आपने क्या दे खा?

ऊपर दए गए चत्र म क्या-क्या है :
सबसे पीछे एक चट्टानी पहाड़ी, जसक चोट नंगी और भूरी है तथा नीचे क ढलान हरे वृक्ष से
ढक ह; उसके बगल म एक दूसरी, नीची पहाड़ी।
पहा ड़य के सामने शांत जल क चौड़ी चादर — एक झील, जसम पहा ड़य और वृक्ष का
प्र त बब दखाई दे ता है।
नकट के कनारे पर वृक्ष और झा ड़याँ; दूर के कनारे के पार पहाड़ी क तलहट म छोटे -छोटे हरे
खेत।
दा हनी ओर कनारे पर एक छोटा घर — पत्थर क खुरदरी द वार, लाल खपरैल क छत, छत के
एक भाग पर फैली चादर और पास ही एक छोट -सी ध्वजा।
सामने क ओर एक पतली पक्क सड़क, जसके दोन ओर सूखी घास है।
ऊपर हल्का, बादल से भरा आकाश।

प्रस्तावना के पृष्ठ 2 का छाया चत्र — यहाँ उसका वणन दया गया है; चत्र स्वयं पाठ्यपुस्तक म दे खए।

चत्र म एक ग्रामीण भू-दृश्य है। इसे दो भाग म बाँटकर दे खए — जो प्रकृ त ने बनाया और जो मनुष्य ने बनाया।

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

प्रकृ त ारा न मत मनुष्य ारा न मत

दो चोिटयों वाली च ानी पहाड़ी, िजस पर हरे वन है ं आगे की ओर मुड़ती हुई एक पक्की सड़क

पहाड़ी की तलहटी में फै ली एक झील झील के िकनारे खपरै ल की ढलवाँ छत वाला एक छोटा घर

वृक्ष, घास और झािड़याँ; बादलों से भरा आकाश (वष ऋतु या उसके तुर ंत घर के पास एक के सिरया ध्वज तथा साफ िकए गए छोटे खेत
बाद का समय) जैसे टुक ड़े

यह भी दे खए क चत्र म क्या नह है — न दुकान, न यातायात, न ऊँची इमारत, न भीड़। केवल एक-दो घर दखाई दे ते ह। अथात
यहाँ बहुत कम लोग रहते ह और वे वन तथा जल के नकट रहते ह।

यह चत्र पुस्तक के आरंभ म क्य है: सामा जक व ान वह का अध्ययन करता है जहाँ प्रकृ त और मनुष्य मलते
ह। पहाड़ी और झील भूगोल से, घर और ध्वज संस्कृ त से तथा सड़क शासन एवं अथव्यवस्था से जुड़े ह। एक ही चत्र
म पुस्तक के पाँच वषय उप स्थत ह।

प्र.2 झील म जल कहाँ से आ रहा है?

लगभग सारा जल वषा से आता है — वशेषकर जून से सतंबर तक चलने वाले द क्षण-प म मानसून से।

वषा का जल पीछे क वन-आच्छा दत पहाड़ी ढलान पर गरता है।
जल सदै व ऊँचे स्थान से नीचे क ओर बहता है, इस लए यह छोट -छोट धाराओं के रूप म ढलान से नीचे उतरता है।
पहाड़ी क तलहट म भू म नीची है, अतः जल वहाँ एकत्र होकर झील बनाता है। जस क्षेत्र का जल इसम आता है, उसे
जलग्रहण क्षेत्र कहते ह।
कुछ जल भू मगत ोत से भी रसकर आता है, इसी लए ऐसी झील वषा समाप्त होते ही नह सूखत ।

वन क्य आवश्यक है: ढलान के वृक्ष और घास म को थामे रखते ह। य द वे न ह तो वषा का जल म बहाकर
झील म भर दे गा और झील उथली हो जाएगी। वन, पहाड़ी और झील एक ही तंत्र के अंग ह।

क्या आप जानते ह? भारत क ऐसी अनेक झील प्राकृ तक नह ह। ग्रामवा सय ने छोट घा टय को बाँधकर
मानसून का जल सं चत कया — कनाटक क केरे, त मलनाडु क एरी तथा राजस्थान और बुंदेलखंड के तालाब एवं
बावड़ी। इनम से कुछ हजार वष से भी पुराने ह और आज भी उपयोग म ह।

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 सड़क का नमाण कसने एवं क्य कया?

कसने: ऐसी सड़क कोई एक प रवार नह बनाता, इसे सरकार बनवाती है — प्रायः ग्राम पंचायत, जला प रषद, राज्य का लोक
नमाण वभाग (पी.डब्ल्यू.डी.) अथवा कद्र क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (सन् 2000 म आरंभ), जसका उ े श्य प्रत्येक गाँव
को बारहमासी सड़क से जोड़ना है। मनरेगा जैसी योजनाओं म स्थानीय लोग भी इस काय म लगते ह।
क्य : सड़क गाँव क जीवन-रेखा है। इससे वहाँ के लोग —

अपना अनाज, दूध या मछली बाजार तक ले जा सकते ह और नमक, तेल, कपड़ा वापस ला सकते ह;
बच्च को वद्यालय भेज सकते ह तथा च कत्सालय या प्राथ मक स्वास्थ्य कद्र शीघ्र पहुँच सकते ह;
पंचायत कायालय, बक और राशन क दुकान तक जा सकते ह;
और झील तथा पहाड़ी तक आने वाले यात्री एवं पयटक भी इसी सड़क से आते ह।

सामा जक व ान क दृ ष्ट: सड़क बताती है क यह एकांत-सा दखने वाला स्थान शेष दे श से जुड़ा हुआ है। कसी
ने इसक योजना बनाई, कर के धन से इसका नमाण हुआ और कसी ने यह नणय लया क सड़क यह बननी
चा हए। ऐसे ही नणय शासन और लोकतंत्र वषय का अध्ययन-क्षेत्र ह।

प्र.4 इन छोटे -छोटे घर म रहने वाले लोग क्या-क्या ग त व धयाँ करते ह गे? उनका क्या इ तहास रहा होगा? उनका
क्या भ वष्य है?

एक चत्र से न त रूप से कुछ नह कहा जा सकता, परंतु प्रमाण के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है — सामा जक
वै ा नक इसी प्रकार आरंभ करते ह।

प्रश्न चत्र से मलने वाला संकेत

ग त व धयाँ साफ िकए गए खेतों में कृ िष, झील में मछली पकड़ना, गाय-बकरी पालना, वन से जलावन, महआ
ु , तेदं ू पत्ता या शहद एकत्र करना,
तथा आने वाले याित्रयों को चाय बेचना या मागदशन करना। पिरवार का कोई सदस्य िनकट के कस्बे में भी काम कर सकता है।

इ तहास यह पिरवार संभवतः अनेक पीिढ़ यों से इसी पहाड़ी के पास रह रहा है। उनके पूवज यहाँ इसिलए बसे होंग े क्योंिक झील से वष-भर
जल िमलता था। उनके अपने गीत, त्योहार, ग ाम-दे वता (ध्वज संभवतः िकसी छोटे स्थान का है) और पहाड़ी से जुड़ी कथाएँ
होंग ी।

भ वष्य नई सड़ क िबजली, मोबाइल नेटवक , िव ालय की बस और अिधक पयटक ला सकती है। बच्चे आगे पढ़ कर नए पकार के काय
कर सकते है।ं परंत ु यिद वन कटे या झील पदू िषत हुई, तो जीवन किठन भी हो सकता है।

नमूना उत्तर: “यह प रवार संभवतः छोटे खेत म खेती करता है और झील म मछली पकड़ता है। इनके पूवज जल क
उपलब्धता के कारण यहाँ बसे ह गे। भ वष्य म सड़क से वद्यालय और रोजगार नकट आ सकते ह, कतु उन्ह उस
झील और वन क रक्षा भी करनी होगी जन पर वे नभर ह।”

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त
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ध्यान द जए: एक छोटे -से घर ने हम अथशास्त्र (उनका काय), इ तहास (उनका अतीत) और भूगोल (वे यह क्य
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रहते ह) तक पहुँचा दया। व भन्न क्षेत्र को इस प्रकार साथ लाने को ही आगे बहु वषयकता कहा गया है
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ag अब, मुखपृष्ठ पर दए गए चत्र को दे खए, आपके मन म क्या-क्या सवाल आते ह? उनको ल खए।
प्र.5

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सामने वाले पृष्ठ के चत्र म क्या-क्या है :
काँच और इस्पात क ऊँची कायालय-इमारत क एक पं क्त, नीली-हरी आभा वाली, अनेक

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मं ज़ल क ; इनम से एक इमारत झुक हुई फाँक जैसी आकृ त क है।

seनीले माग-संकेतक। m.
इमारत पर ऊँचाई पर लगे कंप नय के नाम-पट्ट।

mसामने क सड़क पर ऊँचे मुड़े खंभ पर लगी स् ट लाइट तथा सफ़ेद तीर a
.c o सड़क और इमारत के बीच लगाए गए नए वृक्ष a
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कgकतार।
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चत्र के नचले कनारे पर सड़क पर खड़ी एक कार।
ऊपर चमक ला, लगभग सफ़ेद आकाश।

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प्रस्तावना के पृष्ठ 3 का छाया चत्र — यहाँ उसका वणन दया गया है; चत्र स्वयं पाठ्यपुस्तक म दे खए।

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सामने वाले पृष्ठ का चत्र बल्कुल वपरीत दृश्य दखाता है — एक आधु नक नगर का ावसा यक क्षेत्र: काँच और इस्पात क
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ऊँची इमारत, चौड़ी वभा जत सड़क, स् ट लाइट, कार और सड़क के बीच लगाए गए पौधे। लखने योग्य अच्छे प्रश्न —

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gl इन इमारत म कौन-सा काय होता है? इन्ह कसने और कसके धन से बनवाया?
यह कौन-सा नगर है और यहाँ पहले क्या था — खेत, गाँव या बंजर भू म?

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यहाँ काम करने वाले हजार लोग कहाँ रहते ह और प्र त दन कैसे आते-जाते ह?
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नगर का जल और बजली कहाँ से आते ह तथा इसका कूड़ा-कचरा कहाँ जाता है?
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यहाँ झील या वन क्य नह दखता? इतने कंक्र ट पर गरने वाले वषा-जल का क्या होता है?

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सड़क, ब त्तयाँ और ना लयाँ कौन ठ क रखता है और इसका व्यय कौन उठाता है?
क्या यहाँ का जीवन पहले चत्र वाले गाँव से बेहतर है — कस दृ ष्ट से बेहतर और कस दृ ष्ट से नह ?

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mरहते ह, दूसरे म पूणतः
दोन चत्र क तुलना क्य : दोन एक ही दन के भारत ह। एक म लोग प्रकृ त के साथ
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. cमनुoष्mय- न मत प रवेश म। यही तुलना बताती है क समाज एक जैसा नह , aअनेglकaरूप वाला है — और इसी लए
a s em सामा जक व ान को इ तहास, भूगोल, अथशास्त्र तथा राजनी त व ान, सबक आवश्यकता होती है।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

प्र.6 इन दो चत्र से संबं धत प्रश्न के उत्तर को जानने के लए आप कस प्रकार प्रयास करगे?

उन्ह साधन से, जनका उपयोग एक सामा जक वै ा नक करता है। इसे एक छोट प रयोजना क तरह नयो जत क जए —

वध इससे क्या पता चलेगा

ध्यानपूवक अवलोकन (क्षेत्र-भ्रमण) कौन-सी फसल होती है, िकतने घर है,ं सड़क पर िकतना आवागमन है,
झील िकतनी स्वच्छ है

लोग से बातचीत — बुजुग , कसान , दुकानदार , पंचायत स चव बस्ती का इितहास, सड़क कब और क्यों बनी, जीवन में क्या पिरवतन
से साक्षात्कार आए

मान चत्र और चत्र — पुराने छाया चत्र तथा उपग्रह चत्र स हत स्थान कहाँ है और 20 या 50 वष पहले कै सा िदखता था

ल खत सामग्री — पुस्तक, समाचार-पत्र, जला गजे टयर, जनसंख्या, वष , साक्षरता, पी.एम.जी.एस.वाई. जैस ी योजनाएँ
जनगणना रपोट, सरकारी वेबसाइट

ोत क तुलना दो व्यिक्त या दो पुस्तकें एक ही बात कहती है ं या नही ं — और यिद नही,ं
तो िकस पर िवश्वास करे ं

सुझाव: आरंभ करने से पहले अपने प्रश्न लख ली जए, प्रत्येक व्य क्त क बात एक कॉपी म नोट क जए और यह
भी ल खए क यह बात कसने और कब बताई। सामा जक वै ा नक का उत्तर उतना ही अच्छा होता है, जतना
अच्छा उसका ोत।

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 7
अध्याय का आरंभ

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 मान चत्र क्या है और हम इसका उपयोग कैसे करते ह? इसके मुख्य घटक क्या ह?

मान चत्र कसी क्षेत्र का वह प्रतीकात्मक चत्रण या रेखांकन है जसम सतह को ऊपर से दे खा जाता है। यह एक लघु क्षेत्र (गाँव,
कस्बा), एक वृहद क्षेत्र (जनपद या राज्य) अथवा भारत या संपूण वश्व का हो सकता है। मान चत्र क पुस्तक या संग्रह एटलस
(मान चत्रावली) कहलाता है।
उपयोग: कसी स्थान क स्थ त जानने, एक स्थान से दूसरे स्थान तक का माग खोजने, दो स्थान के बीच क दूरी का अनुमान लगाने
तथा कसी क्षेत्र म फैली सूचनाओं (पवत कहाँ ह, न दयाँ कहाँ बहती ह, कहाँ कतनी वषा होती है) को दे खने म।
मान चत्र के प्रकार —

भौ तक मान चत्र — पवत, नद , महासागर जैसी प्राकृ तक आकृ तयाँ।

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

राजनै तक मान चत्र — दे श या राज्य, उनक सीमाएँ, नगर और राजधा नयाँ।
थमै टक मान चत्र — कसी एक व शष्ट प्रकार क सूचना, जैसे समय क्षेत्र या वषा का मान चत्र।

तीन मुख्य घटक —

1. दू री — स्के ल ारा (जै से 1 से.मी. = 500 मी.)

2. िदशा — चत िु दश उ., पू., द., प. (तथा उ.पू., द.पू., द.प., उ.प.)

3. पतीक िच ह्न — सड़ क, रेलवे लाइन, मंिदर, कु आँ, वन आिद के िलए िनिश्चत िचह्न

तीन क्य आवश्यक ह: स्केल न हो तो पता नह चलेगा क बाजार 200 मीटर दूर है या 2 कलोमीटर; दशा न हो
तो यह नह पता चलेगा क कधर मुड़ना है; और प्रतीक चह्न न ह तो कागज पर प्रत्येक भवन और नाले को च त्रत
करने का स्थान ही नह बचेगा।

प्र.2 नदशांक क्या ह? पृथ्वी पर कसी ान को अं कत करने के लए अक्षांश और दे शांतर का उपयोग कैसे कया जा
सकता है?

नदशांक वे दो मान ह जो मलकर कसी एक स्थ त को ठ क-ठ क नधा रत कर दे ते ह। अध्याय दो उदाहरण दे ता है — बाजार म
“प्रवेश ार से 5व पं क्त क 7व दुकान” तथा शतरंज के पटल का वग ‘घ’4। अकेला कोई एक मान पयाप्त नह है; दोन साथ
मलकर ही एक ही स्थान बताते ह।
पृथ्वी पर भी यही प्रणाली ग्लोब पर बने ग्रड के रूप म प्रयुक्त होती है —

अक्षांश दे शांतर

कससे दूरी मापता भूम ध्य रे खा से , उत्तर या दिक्षण की ओर पमुख याम्योत्तर से , पूव या पिश्चम की ओर
है

रेखा का आकार भूम ध्य रे खा के समानांतर पूर ा वृत्त ; धु वों की ओर छोटा होता जाता धु व से धु व तक अधवृत्त ; सभी की लंबाई
है समान

दशा पूव–पिश्चम उत्तर–दिक्षण

प रसर भूम ध् य रे खा पर 0° से 90° उ . और 90° द . तक िगिनच पर 0° से 180° पू. और 180° प. तक

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

उत्तर धु व 90° उ.

अक्षाश
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दे शात
ं र भूमध्य रेखा 0°

दिक्षण धु व 90° द.

ग्लोब पर ग्रड — लाल रेखा भूमध्य रेखा, नीले वृत्त अक्षांश के समानांतर ( ुव क ओर छोटे होते हुए) तथा गहरे नीले अधवृत्त दे शांतर के
याम्योत्तर।

दोन मान साथ दे ते ही स्थान न त हो जाता है —

िदल्ली = 29° उ. अक्षांश, 77° पू. दे शांत र (पूण िं कत मान)

भारत का िवस्तार लगभग 8° उ. से 37° उ. तथा 68° पू. से 97° पू.

यह सदै व क्य काम करता है: प्रत्येक अक्षांश वृत्त प्रत्येक याम्योत्तर को ठ क एक ही बदु पर काटता है, अतः दए
गए मान क जोड़ी पूरी पृथ्वी पर केवल एक ही स्थान बताती है। जहाज के कप्तान, वमान-चालक और आपके फोन
का जी.पी.एस. इसी प्रणाली का उपयोग करते ह।

प्र.3 दे शांतर से ानीय समय और मानक समय कैसे संबं धत ह?

पृथ्वी अपनी धुरी पर प म से पूव क ओर घूमती है और 24 घंटे म 360° का एक चक्कर पूरा करती है। अतः —

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

360° ÷ 24 घंटे = 1 घंटे में 15°

15° ÷ 60 िमनट → 1° में 4 िमनट

ानीय समय वह समय है जो आपके अपने दे शांतर पर सूय से नधा रत होता है — जब सूय आपक याम्योत्तर पर सबसे ऊँचा
होता है, तब आपके लए दोपहर के 12 बजे होते ह। इसी लए भन्न याम्योत्तर के स्थानीय समय भन्न होते ह — ग्र नच (0°) पर 12
बजे ह तो 15° पू. पर 1 बजे और 15° प. पर 11 बजे।
मानक समय वह एक समय है जसे पूरा दे श अपनाता है और जो उस दे श से गुजरने वाली कसी एक याम्योत्तर पर आधा रत होता
है। य द भारत का प्रत्येक नगर अपना स्थानीय समय रखता, तो रेलगा ड़याँ, वद्यालय और दूरदशन — सब अव्यव स्थत हो जाते।

भारत की मानक याम्योत्तर = 82°30′ पू. (यह उत्तर पदे श में िमज पुर के िनकट से गुजरती है)

82°30′ ÷ 15° पित घंट ा = 5 घंटे 30 िमनट

अतः आई.एस.टी. = जी.एम.टी. + 5:30

एक वाक्य म संबंध: दे शांतर स्थानीय समय को ठ क-ठ क नधा रत करता है और फर दे श कसी एक दे शांतर को
चुनकर सबके लए मानक समय तय कर लेता है। इसी कारण अरुणाचल प्रदे श म सूय गुजरात से लगभग दो घंटे
पहले उगता है, फर भी दोन राज्य क घ ड़याँ एक ही समय दखाती ह।

क्या आप जानते ह? कुछ दे श एक समय क्षेत्र के लए बहुत बड़े ह — संयुक्त राज्य अमे रका म 6 और रूस म 11
समय क्षेत्र ह। रूस को पूव से प म पार करते समय घड़ी 10 बार पुनः मलानी पड़ती है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 8

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त
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आइए, एक खेल खेलते ह — लघु नगर का मान चत्र ( चत्र 1.1)
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कल्पना क जए क आप रेलवे स्टे शन पर एक रेलगाड़ी से अभी-अभी उतरे ह और मान चत्र पर अं कत बक म
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जाना चाहते ह। आप कस माग से जाएँगे?

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नगर पंचायत

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बाजार

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चत्र 1.1 (पृष्ठ 8) — एक काल्प नक लघु नगर का मान चत्र।

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agl उत्तर
पहले चत्र 1.1 म दोन स्थान ढूँ ढ़ए। रेलवे स्टे शन मान चत्र के सुदूर प म म है और बक पूव क ओर, नगर पंचायत भवन के ठ क
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पूव म है।
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सबसे छोटा माग —

1. रेलवे स्टे शन से बाहर नकलकर सामने क सड़क पर पूव क ओर मु ड़ए।

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2. बाईं ओर झील और दाईं ओर च कत्सालय को छोड़ते हुए आगे ब ढ़ए।

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3. यही सड़क आवासीय भवन के नीचे से होती हुई नगर पंचायत तक पहुँचती है।

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4. उसी सड़क पर कुछ आगे पूव क ओर बक है।

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se m मान चत्र ने कैसे सहायता क : आपने बना सोचे मान चत्र के दो घटक का उपयोग कर लया — दशा (ऊपर दाईं
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ओर के तीर से पता चला क पूव कधर है) और दूरी (आपने दे ख लया क यह माग द क्षण वाले माग से छोटा है)।

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तीसरे घटक प्रतीक चह्न से आप प्रत्येक भवन को एक दृ ष्ट म पहचान सके।

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 क्या कोई अन्य संभा वत माग भी ह?

हाँ। लघु नगर क सड़क एक चक्र बनाती ह, इस लए बक तक एक से अ धक माग जाते ह।

द क्षणी माग: स्टे शन से द क्षण-पूव जाने वाली सड़क पक ड़ए — व ालय और बाजार के पास से होते हुए पूव म संग्रहालय
तक जाइए और फर उत्तर क ओर मुड़कर बक पहुँ चए।
उत्तरी माग: झील के उत्तर से जाने वाली सड़क से आवासीय भवन और सावज नक उ ान क ओर ब ढ़ए, फर द क्षण क
ओर मुड़कर बक पहुँ चए।

तीन माग एक ही स्थान पर पहुँचते ह। अंतर केवल लंबाई का और इस बात का है क रास्ते म क्या-क्या पड़ता है — द क्षणी माग
लंबा है, पर बाजार से होकर जाता है।

यह क जए: प्रत्येक माग पर एक धागा र खए, फर उसे सीधा करके रूलर से मा पए। मान चत्र के स्केल से आप
बता सकगे क बाजार वाला माग कतने मीटर लंबा है। मान चत्र वाले मोबाइल ऐप भी ‘सबसे छोटा’ और ‘सबसे
तेज’ माग इसी प्रकार बताते ह।

प्र.3 क्या आप इसी मान चत्र म सावज नक उ ान, व ालय और संग्रहालय का भी पता लगा सकते ह?

आवासीय भवन पिश् चम पूव

दिक्षण

झील

नगर पंच ायत
रेल वे स्टे शन सावजिनक उ ान

िचिक त्सालय
बै ंक

िव ालय संग हालय

बाजार

चत्र 1.1 (पृष्ठ 8) — एक काल्प नक लघु नगर का मान चत्र।

हाँ — दशा-तीर क सहायता से तीन सरलता से मल जाते ह।

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

ान मान चत्र म कहाँ पड़ोस म क्या

सावज नक उ ान सुदू र उ त्त र -पूव (ऊपर दाएँ कोने में), बाड़ से िघरा हरा भाग आवासीय भवनों के पूव में, बैक
ं के उत्तर में

व ालय दिक्षण-पिश्चम (नीचे बाईं ओर), वृक्षों से िघरा पीला भवन रे ल वे स्टेशन के दिक्षण में, बाजार के पिश्चम में

संग्रहालय दिक्षण-पूव (नीचे दाईं ओर ), स्तंभों वाला सफे द भवन ं के दिक्षण में, बाजार के पूव में
बैक

प्रतीक चह्न इसे शीघ्र क्य बना दे ते ह: आपको प्रत्येक नाम पढ़ना नह पड़ा — बाड़ और क्या रयाँ ‘उद्यान’ बताती
ह, स्तंभ ‘संग्रहालय’ और छाते व ठे ले ‘बाजार’। अच्छा मान चत्र वह व्य क्त भी पढ़ सकता है जो उसक भाषा नह
जानता।

प्र.4 य द आप बक से बाजार तक जाना चाहते ह, तो आप कस माग को चुनगे?

बाजार बक के द क्षण-प म म, मान चत्र के नचले मध्य भाग म है।

1. बक से द क्षण क ओर जाने वाली सड़क पक ड़ए (यह संग्रहालय क ओर से नीचे उतरती है)।
2. चौराहे पर प म क ओर मु ड़ए — यह चौड़ी सड़क मान चत्र के नचले भाग म चलती है।
3. लाल और नीले छात वाली दुकान क पं क्त ही बाजार है, जो च कत्सालय के ठ क द क्षण म है।

दूसरा माग: बक से प म क ओर च कत्सालय तक जाइए और उसके तुरंत बाद द क्षण क ओर मुड़ने वाली सड़क से बाजार
पहुँ चए।

पूरे खेल का सार: मान चत्र क सहायता से आप उस नगर क यात्रा क योजना बना सकते ह जहाँ आप कभी गए
ही नह , और एक कदम चले बना दो माग क तुलना कर सकते ह। पुस्तक के शब्द म — मान चत्र स्थान का पता
लगाने के लए एक मागदशक क तरह है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 9

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

पृष्ठ 8 पर दए गए चत्र 1.1 म

आइए पता लगाएँ

प्र.1 पृष्ठ 8 पर दए गए चत्र 1.1 म — च कत्सालय को अं कत क जए।

आवासीय भवन पिश्च म पूव

दिक्ष ण

झील

नगर पंच ायत
रेल वे स् टेश न साव जिनक उ ान

िचिकत्सालय
बैंक

िव ालय संगहालय

बाजार

चत्र 1.1 (पृष्ठ 8) — एक काल्प नक लघु नगर का मान चत्र।

च कत्सालय मान चत्र के ठ क मध्य म स्थत गुलाबी भवन है। इसे दो चह्न से तुरंत पहचाना जा सकता है —

उसके सामने के मेहराब पर लखा नाम, तथा
द वार पर बना लाल क्रॉस, जो लगभग पूरे वश्व म च कत्सा-सेवा का चह्न है।

पड़ोस से स्थ त और स्पष्ट हो जाती है — यह झील के द क्षण, व ालय के पूव, नगर पंचायत के प म तथा बाजार के उत्तर
म है। अपनी पुस्तक म इसके चार ओर एक गोला बनाइए या लाल क्रॉस से अं कत क जए।

सुझाव: मान चत्र पर कुछ भी अं कत कर तो उसे संकेत-सूची (लेजड) म भी जो ड़ए। जस चह्न का अथ कोई और
न समझ सके, वह कसी काम का नह ।

प्र.2 नीले रंग से दखाए गए क्षेत्र क्या दशा रहे ह?

नीले क्षेत्र जलरा श दशाते ह। इस मान चत्र म ये ह —

झील — उत्तर-प म म लहरदार रेखाओं वाला बड़ा नीला भाग, और
उत्तर से आकर उसम मलने वाली नद /धारा।

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नीला ही क्य : वश्व-भर के मान चत्रकार एक ही रंग-संकेत का पालन करते ह ता क मान चत्र एक दृ ष्ट म समझ आ
जाए — जल के लए नीला, वन, मैदान और उद्यान के लए हरा, पहा ड़य और ऊँची भू म के लए भूरा या पीला,
सड़क , रेलमाग और भवन के लए काला या लाल। इसी लए आप उस दे श का एटलस भी पढ़ सकते ह जसक
भाषा आप नह जानते।

स्वयं दे खए: अपने एटलस म भारत का कोई भौ तक मान चत्र खो लए — अरब सागर, बंगाल क खाड़ी और सभी
न दयाँ नीली ह गी, थार मरुस्थल पीला-भूरा और गंगा का मैदान हरा।

प्र.3 व ालय, नगर पंचायत या सावज नक उ ान म से रेलवे स्टे शन से कौन-सा ान सबसे अ धक दूरी पर है?

सावज नक उ ान सबसे अ धक दूरी पर है।
मान चत्र को प म से पूव क ओर दे खए। रेलवे स्टे शन सुदूर प म कनारे पर है। अब तुलना क जए —

ान स्टे शन से कस ओर दूरी

वद्यालय ठीक दिक्षण-पूव में, बहुत िनकट सबसे िनकट

नगर पंचायत पूव की ओर, िचिकत्सालय से कु छ आगे बीच में

सावज नक उ ान सुदू र उ त्त र -पूव में, मानिचत्र के िवपरीत कोने पर सबसे दू र

स्वयं जाँ चए: रूलर रखकर स्टे शन से तीन स्थान तक क सीधी दूरी मा पए। य द मान चत्र का स्केल 1 से.मी. =
500 मी. होता, तो आप प्रत्येक माप को वास्त वक मीटर म बदल सकते थे।

प्र.4 कक्षा के एक क्रयाकलाप के रूप म तीन या चार व ा थय के अलग-अलग समूह बनाइए। प्रत्येक समूह से अपने
व ालय तथा उस तक जाने वाले कुछ माग और पड़ोस के भवन का मान चत्र बनाने को क हए। अंत म सभी
मान चत्र क तुलना क जए और उन पर चचा क जए।

इसे अ तरह करने के पाँच चरण —

1. पहले घूमकर दे खए। वद्यालय का ार, मुख्य भवन, खेल-मैदान तथा वद्यालय के चार ओर क्या-क्या है, यह नोट क जए।
2. दशा न त क जए। उत्तर पहचा नए (सूय लगभग पूव म उगता है; क ास या मोबाइल का क ास अ धक सट क है)। कुछ
भी बनाने से पहले कागज के कोने पर ‘उ.’ वाला तीर बनाइए।
3. स्केल चु नए। कदम से ना पए — य द ार से मुख्य भवन तक 50 कदम (लगभग 35 मी.) ह, तो 1 से.मी. = 10 मी. र खए।
स्केल को मान चत्र पर ल खए।

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4. ऊपर से दे खी गई आकृ त बनाइए, सामने से दखने वाला चत्र नह । छत आयत बनगी, सड़क दो समानांतर रेखाएँ और वृक्ष
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छोटे गोले।
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5. संकेत-सूची जो ड़ए जसम प्रत्येक चह्न और रंग का अथ लखा हो।

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aमैgदlान बहुत बड़ा बना दया क्य क वे वह खेलते ह; दूसरे समूह ने दशा-तीर बनाया ही नह , इस लए उसका मान चत्र
चचा के लए नमूना उत्तर: “पाँच मान चत्र एक ही वद्यालय के थे, फर भी एक जैसे नह थे। एक समूह ने खेल-

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दूसर से मलाया नह जा सका। जन दो मान चत्र म स्केल था, उनक तुलना सरलता से हो गई।”

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इससे दो बात नकलती ह — मान चत्र एक चुनाव है (मान चत्रकार तय करता है क क्या दखाना है), और दशा
तथा स्केल के बना मान चत्र दूसर के काम का नह रहता।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 10
स्केल — खेल-मै.दcानo
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eलगाएँ
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आइए पता

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प्र.1 कसी व ालय के खेल-मैदान का एक साधारण मान चत्र बनाइए। मान ली जए क यह 40 मीटर लंबा और 30
मीटर चौड़ा आयताकार क्षेत्र है। इसे अपनेm
a s e रूलर क सहायता से 1 सट मीटर = 10 मीटर के स्केल पर सट क ढँ ग

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से ख चए।

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दए गए स्केल से प्रत्येक वास्त वक माप को कागज के सट मीटर म बद लए।
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s mे ल : मानिचत्र का 1 से.मी. = धरातल के 10 मी.
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a लंबाई 40 मी. → 40 ÷ 10 = 4 से.मी.
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चौड़ ाई 30 मी. → 30 ÷ 10 = 3 से.मी.
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अतः रूलर से 4 से.मी. × 3 से.मी. का आयत बनाइए।

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4 से.मी. = 40 मी.

उ.
3 से.मी.
िवकण 5 से.मी. = 50 मी.
= 30 मी.

स्केल 1 से.मी. = 10 मी.

स्केल पर बनाया गया खेल-मैदान — रेखांकन का प्रत्येक 1 से.मी. धरातल के 10 मी. को दशाता है।

आकृ त सही क्य रहती है: दोन भुजाओं को एक ही संख्या से भाग दया गया है, इस लए रेखांकन क आकृ त
वास्त वक मैदान जैसी ही रहती है, केवल छोट हो जाती है। य द केवल लंबाई घटाई जाती और चौड़ाई नह , तो
मान चत्र गलत जानकारी दे ता।

प्र.2 अब इस आयताकार क्षेत्र के वकण को मा पए। आपके ारा क गई माप कतने सट मीटर क है? स्केल क
सहायता से खेल-मैदान के वकण क वास्त वक लंबाई क मीटर म गणना क जए।

4 से.मी. × 3 से.मी. के आयत के एक कोने से सामने वाले कोने तक रूलर र खए।

मानिचत्र पर मापा गया िवकण = 5 से.मी.

1 से.मी. = 10 मी.

वास्तिवक िवकण = 5 × 10 = 50 मीटर

बना रूलर के जाँच। 30 मी., 40 मी. क भुजाएँ और वकण मलकर एक समकोण त्रभुज बनाते ह —

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40² + 30² = 1600 + 900 = 2500

√2500 = 50 मी. ✔

दोन उत्तर समान क्य आए: स्केल पर बना मान चत्र धरातल क सच्ची छोट प्र तकृ त होता है। उस पर मापी गई
कोई भी दूरी — भुजा, वकण या दो वृक्ष के बीच क दूरी — स्केल से गुणा करने पर वास्त वक दूरी दे दे ती है। यही
आप नमदा और गंगा वाले प्रश्न म करगे।

क्या आप जानते ह? 3, 4, 5 सबसे प्र सद्ध समकोण त्रक है। भारत के राज मस्त्री आज भी 12 गाँठ वाली रस्सी
(3 + 4 + 5) से मकान का सही समकोण बनाते ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 10

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लघु नगर के मान चत्र पर दशाएँ

आइए पता लगाएँ

प्र.1 लघु नगर के मान चत्र पर पुनः वचार क जए। नीचे द गई सूची म सही और गलत कथन क पहचान क जए —
1. बाजार, च कत्सालय के उत्तर म है।

आवासीय भवन पिश्चम पूव

दिक्षण

झील

नगर पंचायत
रेल वे स्टे शन सावजिनक उ ान

िचिकत्सालय
बै ंक

िव ालय संगहालय

बाजार

चत्र 1.1 (पृष्ठ 8) — एक काल्प नक लघु नगर का मान चत्र।

गलत।
चत्र 1.1 म च कत्सालय मान चत्र के मध्य म है और बाजार उससे नीचे है। मान चत्र म ऊपर उत्तर और नीचे द क्षण होता है, अतः
—

बाजार, िचिकत्सालय के दिक्षण में है — उत्तर में नही ं।

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उ.-प. उ.-पू.

पिश्चम पूव

द.-प. द.-पू.

दिक्षण
चतु दश (उत्तर, पूव, द क्षण, प म) तथा चार मध्यवत दशाएँ (उत्तर-पूव, द क्षण-पूव, द क्षण-प म, उत्तर-प म)। शीष से घड़ी क दशा
म — उत्तर, पूव, द क्षण, प म।

याद रखने का नयम: जब तक मान चत्र स्वयं कुछ और न बताए, ऊपर क ओर उत्तर होता है। इसी लए प्रत्येक
मान चत्र पर ‘उ.’ अक्षर वाला तीर बनाया जाता है।

प्र.2 2. संग्रहालय, बक के द क्षण-पूव म है।

सही।
बक मान चत्र के पूव भाग म, मध्य से कुछ ऊपर है। संग्रहालय उससे नीचे (द क्षण) और कुछ दाईं ओर (पूव) है। द क्षण + पूव
मलकर मध्यवत दशा द क्षण-पूव बनाते ह।

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ं के दिक्षण-पूव में है ✔
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संगहालय बैक
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m .co a g
l a se
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सुझाव: जब कोई स्थान न ठ क नीचे हो और न ठ क बगल म, तब मध्यवत दशा का प्रयोग क जए। नाम म उत्तर
aया द क्षण पहले बो लए — उत्तर-पूव, द क्षण-प म।

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l a sमeम है।
ag
प्र.3 3. रेलवे स्टे शन, च कत्सालय के उत्तर-प

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सही।
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.c म स्थत च कत्सालय पर खड़े होकर दे खए — रेलवे स्टेशन आपक बाईं ओर
a g(प म) और कुछ ऊपर (उत्तर)
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है। पseम + उत्तर = उत्तर-प म।
मान चत्र के मध्य

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रेलवे स्टे शन, िचिकत्सालय के उत्तर-पिश्चम में है ✔
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और इसका उल्टा भी सही है — िचिकत्सालय,mरेलवे स्टे शन के दिक्षण-पूव में है। agl
l a se
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दशा के लए आरं भक बदु क्य आवश्यक है: अकेले “उत्तर-प म” कहने का कोई अथ नह । स्टे शन
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च कत्सालय के उत्तर-प म म है, पर आवासीय भवन के द क्षण-प म म। सदै व यह बताइए क आप कस स्थान

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से नाप रहे ह।

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4. झील, आवासीय भवन के उत्तर-प म म है।
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प्र.4

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गलत।

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आवासीय भवन मान चत्र के ऊपरी भाग (उत्तर) म बने ह और झील उनसे नीचे तथा बाईं ओर है।

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पिश्चम + दिक्षण = दिक्षण-पिश्चम
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se m अतः झील, आवासीय भवनों के दिक्षण-पिश्चम में है, उत्तर-पिश्चम में नही ं।
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उल्टा दे खने पर बात और स्पष्ट हो जाती है — आवासीय भवन झील के उत्तर-पूव म ह।
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स्वयं जाँ चए: आवासीय भवन के मध्य से झील के मध्य तक मान चत्र पर एक प सल र खए। वह नीचे-बाईं ओर,
अथात द क्षण-प म कोने क ओर संकेत करेगी।

प्र.5 अपने व ालय को प्रारं भक बदु मानते हुए, क्या आप जानते ह क आपका घर लगभग कस दशा म त है?
अपने शक्षक और माता- पता से चचा क जए।

यह प्रश्न आपके अपने नगर या गाँव से जुड़ा है, इस लए उत्तर स्वयं पता क जए। व ध —

1. प्रातःकाल वद्यालय के ार पर खड़े होकर उगते सूय क ओर मुँह क जए — अब आप लगभग पूव क ओर दे ख रहे ह। तब
बाईं ओर उत्तर, दाईं ओर द क्षण और पीछे प म होगा।
2. अब सो चए क घर जाते समय आप मुख्यतः कस दशा म चलते ह।
3. क ास, मोबाइल के क ास ऐप अथवा ऑनलाइन मान चत्र ( जसम ऊपर उत्तर होता है) से इसक पु ष्ट क जए।
4. य द घर ठ क कसी एक चतु दश म न हो, तो मध्यवत दशा बताइए — “लगभग उत्तर-पूव”।

नमूना उत्तर: “मेरा वद्यालय मुख्य सड़क के सामने है। छु के समय लौटते हुए दोपहर का सूय प्रायः मेरे सामने
रहता है, अथात म प म क ओर चलता ँ। मेरा घर वद्यालय से लगभग 1.5 क.मी. प म म, कुछ उत्तर क ओर
है।”

सूय से दशा क्य मलती है: सूय पूव आकाश म उगता है और प मी आकाश म अस्त होता है। इसी एक तथ्य से
हजार वष से भारत के यात्री, ना वक और भवन- नमाता दशा तय करते आए ह — मं दर, म स्जद और गाँव के घर
भी प्रायः इसी आधार पर बनाए जाते ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 11

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प्रतीक चह्न — अपने क्षेत्र का मान चत्र

आइए पता लगाएँ

प्र.1 अपने घर, व ालय और कुछ अन्य महत्वपूण भू- चह्न स हत अपने ान या अपने गाँव का एक मान चत्र
बनाइए। चतु दश को दशाइए और दशाई गई कुछ महत्वपूण आकृ तय को अं कत करने के लए कुछ चह्न का
उपयोग क जए जो चत्र 1.2 म दशाए गए ह।

रेलवे लाइन — बड़ ी लाइन,
छोटी लाइन, रेलवे स्टेशन
RS

सड़ कें — पक्की, कच्ची

सीमा — अंतर ीय, राज्य, िजला

नदी, कुआँ, तालाब, नहर , सेत ु

मंिदर , िगरजाघर , मिस्जद , छत्र ी

डाकघर , डाक एवं टेलीग ाफ
काय लय, पुिलस स्टेशन PO PTO PS

बिस्तयाँ, किबस्तान

वृक्ष , घास

चत्र 1.2 (पृष्ठ 11) — मान चत्र म सामान्यतः उपयोग कए जाने वाले प्रतीक चह्न।

आपका रेखांकन केवल चत्र न रहकर सचमुच मान चत्र बने, इसके लए उसम ये बात होनी चा हए —

‘उ.’ वाला दशा-तीर;
एक शीषक (“रामपुर गाँव का मान चत्र” / “मेरा मोहल्ला”);
मोटा-मोटा स्केल (“1 से.मी. ≈ 100 मी.”);
चत्र 1.2 से लए गए प्रतीक चह्न; तथा
प्रत्येक चह्न का अथ बताने वाली संकेत-सूची।

चत्र 1.2 के उपयोगी चह्न: पक्क सड़क के लए दो समानांतर रेखाएँ, कच्ची सड़क के लए टू ट हुई रेखाएँ, रेलवे लाइन के लए
धारीदार रेखा और स्टे शन के लए RS, नद के लए लहरदार नीली प , कुएँ के लए छोटा गोला, तालाब के लए नीला भाग, मं दर
के लए ध्वज-युक्त चह्न तथा डाकघर, डाक एवं तार कायालय और पु लस स्टे शन के लए PO, PTO, PS।

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नदी उ.
मंिदर कु आँ

पक्की सड़क

िव ालय घर

PO

कच्ची सड़क

एक नमूना रेखा-मान चत्र। आपका मान चत्र अलग होगा, पर उसम ये चार बात अवश्य होनी चा हए — शीषक, दशा-तीर, प्रतीक चह्न और
संकेत-सूची।

नमूना उत्तर (मान चत्र के नीचे लखने के लए): “मेरे मोहल्ले का मान चत्र, स्केल लगभग 1 से.मी. = 100 मी.।
मेरा घर मुख्य सड़क के पूव ओर है; वद्यालय लगभग 400 मीटर प म म, सड़क के द क्षण क ओर है। मं दर
सड़क के उत्तर म तथा गाँव का कुआँ उत्तर-पूव म है। डाकघर (PO) मुख्य सड़क और कच्ची सड़क के चौराहे के पास
है।”

न त चह्न क्य : सन् 1767 म स्था पत भारतीय सवक्षण वभाग दे श का सबसे पुराना वै ा नक वभाग है और
वही भारत के मान चत्र के चह्न नधा रत करता है। सब एक ही चह्न प्रयोग करते ह, इस लए सै नक, कसान और
वद्याथ — सब एक ही मान चत्र को एक ही अथ म पढ़ पाते ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 13

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नदशांक को समझना — शतरंज का पटल

आइए पता लगाएँ

प्र.1 य द आपको काले पक्ष क ओर से खेलना हो और उसी व ध से प्रत्युत्तर दे ना हो, तो इन्ह नयम का उपयोग
करते हुए अपनी चाल ल खए।

सफेद पक्ष ने रानी के सामने वाला प्यादा ‘घ’2 से ‘घ’4 तक बढ़ाया है। काले पक्ष क “वैसी ही चाल” का अथ है उसका दपण-
प्र त बब — काली रानी के सामने वाले प्यादे को दो घर आगे बढ़ाना —

काला पक्ष चलेगा ‘घ’7 से ‘घ’5

क ख ग घ ङ च छ ज
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त
a g l AglaSem · NCERT Solutions

कसी वग के दो नदशांक होते ह — स्तंभ का अक्षर और पं क्त क संख्या। सफेद प्यादा ‘घ’2 से ‘घ’4 (लाल) आया है; काला पक्ष ‘घ’7 से
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se m.
‘घ’5 (नीला) चलकर उत्तर दे ता है।

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‘घ’7 ही क्य m .c पक्ष के मोहरे 7 और 8 पं क्तय पर होते ह, ठ क सफेद क 1 और 2 पं क्तयaकgे सामने। काली रानी ‘घ’8 पर
se प्यादा ‘घ’7 पर है। पहली चाल म प्यादा दो घर बढ़ सकता है, इस लए वह ‘घ’5 पर पहुँचकर सफेद के ‘घ’4 वाले
: काले
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agके सामने आ जाता है।
है, अतः उसका
प्यादे

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सामा जक व ान से संबंध: अक्षर स्तंभ बताता है और अंक पं क्त। अकेला कोई एक पयाप्त नह ; दोन मलकर ag
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64 म से एक ही वग बताते ह। अक्षांश और दे शांतर पृथ्वी के लए यही काय करते ह — और दोन प्रणा लयाँ एक ही
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उ े श्य से बन , ता क कोई स्थ त ऐसी लखी जा सके क दूसरा व्य क्त उसे फर से खोज ले।

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.
m शताब्द सा.सं. म
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क्या आप जानते ह? शतरंज का वकास प्राचीन भारतीय खेल चतुरंग से हुआ, जो लगभग छठ
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भारत म खेoलm
. c a glaघोड़े, हाथी (रुख) और
ा जाता था। इसके चार अंग — हाथी, घोड़े, रथ और पैदल — आज के ऊँट,

a s emबने।
प्यादे

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आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 16
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ग्लोब या मान चत्रावली से नदशांक पढ़ना

आइए पता लगाएँ

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य द आपक कक्षा म ग्लोब या मान चत्रावली म स्पष्ट रूप से अक्षांश और दे शांतर अं
l को लखने का प्रयास क जए।
कत ह, तो (1) मुंबई (2)
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प्र.1
cकोलकाता (3) सगापुर और (4) पे रस के अक्षांश और दे शांतर के लगभग g
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मान

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com a
पहले स्थान ढूँ ढ़ए, फर उसके ऊपर से जाने वाला नकटतम अक्षांश और उससे होकर जाने वाला नकटतम दे शांतर प ढ़ए।

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पूणा कत मान लगभग इस प्रकार आएँगे —

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ान अक्षांश
agl दे शांतर इससे क्या पता चलता है

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मुंबई (महाराष्ट्र) 19° उ . 73° पू. भूम ध्य रे खा के उत्तर, उष्ण किटबंध में — वष-भर गरम और आद

.
mयहाँ सूय लगभग एक घंटा पहले
लगभग कक रे खा पर और मुंबई से 15° पूवe—
a s
com agl
कोलकाता (प म 23° उ . 88° पू.

m . बंगाल) उगता है

e
as सगापुर
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1° उ . 104° पू. लगभग भूम ध्य रे खा पर — शीत ऋतु नही ं, वष-भर वष

.c
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mिदवस a
पे रस ( ांस) 49° उ . 2° पू. भूम ध्य रे खा से बहुत दू र और पमुख याम्योत्तर के िनकट — कड़ी सद , लंबे ग ीष्म-

e m . co agl
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

ता लका क्या बताती है: अक्षांश जलवायु बताता है — 1° उ. पर सगापुर वष-भर उष्ण है, 49° उ. पर पे रस
शीतोष्ण। दे शांतर समय बताता है — सगापुर (104° पू.) का स्थानीय समय पे रस (2° पू.) से लगभग 6 घंटे 45
मनट आगे है।

सुझाव: आपके और आपके मत्र के एटलस म एक-दो डग्री का अंतर आ सकता है; यह ठ क है, क्य क पुस्तक भी
कहती है क ये डग्री “आनुमा नक रूप से पूण है, कतु सट क नह ”। ध्यान यह र खए क अक्षांश के साथ उ./द.
और दे शांतर के साथ पू./प. अवश्य लखा जाए — केवल “19, 73” का कोई अथ नह ।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 20
समय क्षेत्र — पोरबंदर और तनसु कया

आइए पता लगाएँ

प्र.1 एक दन ढलती दोपहर म दो मत्र, एक पोरबंदर (गुजरात) म और दूसरा तनसु कया (असम) म बैठे हुए फोन पर
बातचीत कर रहे ह। तनसु कया वाला मत्र कहता है क असम म सूयास्त हो गया है और अब अंधेरा है, जब क
पोरबंदर वाला मत्र च कत होकर कहता है — “ले कन यहाँ तो अभी भी दन का प्रकाश है!” बताइए क ऐसा
क्य है?

क्य क दोन मत्र के दे शांतर म बड़ा अंतर है और पृथ्वी प म से पूव क ओर घूमती है।

तनसु कया भारत के सुदूर पूव म (लगभग 95° पू.) और पोरबंदर सुदूर प म म (लगभग 70° पू.) है।
पृथ्वी पूव क ओर घूमती है, इस लए पूव स्थान सूय के प्रकाश म पहले आते ह और पहले ही बाहर नकल जाते ह। अतः असम
म सूय गुजरात से पहले उगता भी है और पहले अस्त भी होता है।
जब तनसु कया म सूयास्त हो चुका होता है, तब पोरबंदर को अपने सूयास्त तक पहुँचने म लगभग 25° और घूमना शेष रहता है
— अथात लगभग पौने दो घंटे का दन-प्रकाश बाक ।

पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है → 1 घंटे में 15°

स्थान िजतना पूव में होगा, वहाँ सूय दय और सूय स्त उतने ही पहले होंगे।

मत्र को भ्रम क्य हुआ: दोन क घ ड़याँ एक ही समय दखा रही थ , क्य क पूरे भारत म एक ही भारतीय
मानक समय चलता है। उनक घ ड़याँ समान थ , कतु उनके ानीय समय — अथात उनके अपने सूय के अनुसार
समय — समान नह थे। स्थानीय समय और मानक समय का यही अंतर है।

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क्या आप जानते ह? यह एक वास्त वक समस्या है। तनसु कया म जून म सूय प्रातः 4:30 बजे से भी पहले उग
आता है और दसंबर म सायं 4:15 बजे के तुरंत बाद अस्त हो जाता है, जससे असम म चाय-बागान और कायालय
का बहुत-सा दन-प्रकाश बेकार चला जाता है। इसी कारण असम प्रायः आई.एस.ट . से एक घंटा आगे ‘चाय-बागान
समय’ क माँग करता रहा है।

प्र.2 और कक्षा क एक ग त व ध के रूप म इन दो शहर के बीच ानीय समय के अंतर क गणना क जए (संकेत –
पोरबंदर और तनसु कया के बीच दे शांतर म 30° के अंतर पर वचार क जए और इसके बाद आप उ चत मान
प्राप्त कर सकते ह)।

पृथ्वी के घूमने क दर का उपयोग क जए।

24 घंटे में 360° → 360 ÷ 24 = पित घंट ा 15°

दे शात
ं र का अंत र = 30°
स्थानीय समय का अंत र = 30 ÷ 15 = 2 घंटे

अथात जब पोरबंदर म स्थानीय समय सायं 6 बजे होगा, तब तनसु कया म 8 बजे ह गे — इसी लए वहाँ अंधेरा है और गुजरात म
उजाला।
सट क मान ( जसक ओर संकेत इशारा करता है): पोरबंदर लगभग 69.6° पू. और तनसु कया लगभग 95.4° पू. पर है।

अंत र = 95.4° − 69.6° = 25.8°

1° में 4 िमनट → 25.8 × 4 = 103.2 िमनट

= लगभग 1 घंट ा 43 िमनट

दोन उत्तर भन्न क्य ह: संकेत म दया गया 30° केवल गणना सरल बनाने के लए लया गया पूणाक है।
वास्त वक अंतर कुछ कम है, इस लए वास्त वक समयांतर भी दो घंटे से थोड़ा कम है। दोन गणनाओं का नयम एक
ही है — 1° दे शांतर = 4 मनट समय।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 20

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ानीय समय और मानक समय

आइए पता लगाएँ

प्र.1 गुजरात और असम म बैठे दो मत्र पुनः चचा करते ह। इस उदाहरण का उपयोग ानीय समय और मानक समय
के अंतर को स्पष्ट करने के लए क जए।

ये दोन मत्र एक ही क्षण म दोन प्रकार के समय दखा दे ते ह।

ानीय समय मानक समय

कससे तय उसी याम्योत्तर पर सूय की िस्थित से — जब सूय सबसे पूरे दे श के िलए चुनी गई एक ही याम्योत्तर से
होता है ऊँचा हो, तब वहाँ 12 बजे

हमारे ितनसुिकया (95° पू.) में सूय स्त हो चुक ा है जबिक दोनों िमत्रों की घड़ी और फोन एक ही समय िदखा रहे है,ं
उदाहरण म पोरबंद र (70° पू.) में िदन है — दोनों के स्थानीय समय में क्योंिक दोनों आई.एस.टी. का पालन करते है ं
लगभग 1 घंटा 43 िमनट का अंतर

भारत म पत्येक याम्योत्तर का अलग — अथ त हजारों के वल एक — आई.एस .टी. = जी.एम .टी. + 5:30, जो
कतने 82°30′ पू. पर आधािरत है और यह याम्योत्त र उ त्त र पदे श में
िमज पुर के िनकट से गुजरती है

आवश्यकता यह दै िनक जीवन को सूय से जोड़ता है इससे रे ल , िवमान, िव ालय, काय लय और समाचार —
क्य सब एक ही समय-सारणी पर चल पाते है ं

एक वाक्य म: स्थानीय समय वह है जो आपके स्थान पर सूय बताता है; मानक समय वह है जसे पूरा दे श अपनी घ ड़य पर रखने
के लए स्वीकार करता है।

दे श को एक समय क्य चुनना पड़ता है: य द प्रत्येक नगर अपना स्थानीय समय रखता, तो अहमदाबाद से प्रातः
10 बजे चलने वाली रेलगाड़ी गुवाहाट कब पहुँचेगी — यह कोई समय-सारणी बता ही नह पाती। इस लए भारत ने
82°30′ पू. याम्योत्तर चुन ली और कच्छ से क बथू तक सभी घ ड़याँ उसी का पालन करती ह।

क्या आप जानते ह? सन् 1906 से पहले भारत म कई स्थानीय समय चलते थे, जनम बंबई समय और कलकत्ता
समय भी थे और उनम लगभग 40 मनट का अंतर था। बंबई समय तो 1955 तक उस नगर म चलता रहा।

आगे बढ़ने से पहले… — पृष्ठ 22–23

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अध्याय चार बदुओं म

आगे बढ़ने से पहले …

प्र.1 मान चत्र पृथ्वी के क्षेत्र, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, को दशाने के लए एक अत्य धक उपयोगी साधन है। मान चत्र
के मुख्य घटक दूरी, दशा और प्रतीक चह्न ह।

इस सार का वस्तार —

मान चत्र पूरे महा प को एक पृष्ठ पर समेट सकता है और एक छोटे गाँव को पूरे पृष्ठ पर फैला सकता है। बदलता केवल स्केल
है, वचार नह ।
दूरी स्केल से आती है — लघु नगर के मान चत्र म 1 से.मी. = 500 मी., तो चत्र 5.2 म 2.5 से.मी. = 500 क.मी.।
दशा ‘उ.’ वाले तीर और क ास के आठ बदुओं से आती है — उ., उ.पू., पू., द.पू., द., द.प., प., उ.प.।
प्रतीक चह्न बहुत कम स्थान म बहुत अ धक सूचना भर दे ते ह; भारत म इन्ह भारतीय सवक्षण वभाग नधा रत करता है।

महत्व: तीन म से कोई एक भी हटा द जए और मान चत्र काम करना बंद कर दे गा। स्केल नह तो दूरी का अनुमान
नह ; दशा नह तो यात्रा म उपयोग नह ; प्रतीक चह्न नह तो कुछ दखाने का स्थान ही नह ।

प्र.2 पृथ्वी के प्रत्येक ान क एक त है जसको अक्षांश और दे शांतर के एक ग्रड — पूव से प म क ओर
जाने वाली (भूमध्य रेखा के समानांतर) और उत्तर से द क्षण क ओर जाने वाली (एक ुव से दूसरे ुव तक)
काल्प नक रेखाओं क सहायता से सही-सही प रभा षत कया जा सकता है।

ग्रड को खोलकर दे खए —

अक्षांश के समानांतर दे शांतर के याम्योत्तर

रेखा क दशा पूव–पिश्चम उत्तर–दिक्षण

आकार पूरे वृत्त ; धु वों की ओर छोटे होते जाते है ं अधवृत्त , सभी की लंबाई समान, दोनों धु वों पर िमलते है ं

शून्य रेखा भूम ध् य रे खा, 0° िग िनच की पमुख याम्योत्त र , 0°

अ धकतम मान 90° उ . और 90° द . (दोनों धु व) 180° पू. = 180° प. (एक ही रे खा)

इन्ह काल्प नक रेखाएँ इस लए कहा जाता है क धरातल पर कह कुछ खचा हुआ नह है — ये केवल मान चत्र और ग्लोब पर
बनाई जाती ह। फर भी इनसे मलने वाली स्थ त बल्कुल न त होती है — दल्ली 29° उ., 77° पू.।

एक बात अवश्य याद र खए: पहले अक्षांश, फर दे शांतर, और अक्षर कभी न भू लए — 19° उ., 73° पू. मुंबई है,
कतु 19° द., 73° प. प्रशांत महासागर का सूना जल है।

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दे शांतर से समय नधा रत कया जाता है और समय क्षेत्र को भी प रभा षत कया जाता है।
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प्र.3

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a l घंटे म 360° घूमती है, इस लए —
पृथ्वीg24

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360° ÷ 24 घंटे = पित घंट ा 15° • 1° = 4 िमनट
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प्रत्येक याम्योत्तर का अपना g है — पूव क ओर प्रत्येक 15° पर एक घंटा आगे।
ानीय समयaहोता
दे श इन्ह समय क्षेत्र म बाँट लेते ह (लगभग 15° चौड़ी प याँ) और प्रत्येक क्षेत्र म एक मानक समय रखते ह।

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वश्व मान चत्र ( चत्र 1.8) म समय क्षेत्र क रेखाएँ सीधी नह ह — वे अंतराष्ट्रीय सीमाओं का पालन करती ह ता क कोई दे श

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दो समय म न बँट जाए।
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भारत म एक ही मानक समय है — आई.एस.ट . = जी.एम.ट . + 5:30। बड़े दे श म ऐसा संभव नह ; अमे रका म 6 और

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रूस म 11 समय क्षेत्र ह।

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क्या आप जानते ह? कुछ दे श का अंतर आधे या पौन घंटे का भी है — भारत +5:30, म्यांमार +6:30, नेपाल
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+5:45। इसी लए चत्र 1.9 के ग्लोब पर भारत पर +5.5 लखा है।

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अंतरा ीय त थ रेखा मुख्य याम्योत्तर के वपरीत लगभग 180° के दे शांतर पर अव त है। अंतरा ीय त थ रेखा
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प्र.4
को पार करने पर त थ म एक दन का प रवतन होता है।
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उत्तर .c a g
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seतराष्ट्रीय त थ रेखा प्रशांत महासागर के बीच बीच, ग्र नच से ठ क वपरीत ओर से गुजरती है। यह +12 और −12 समय क्षेत्र
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एक-दूसरे को छू ते ह, इस लए त थ को एक दन बदलना पड़ता है।

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पूव की ओर पार करने पर → एक िदन घटाएँ (सोमवार से रिववार)

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पिश्चम की ओर पार करने पर → एक िदन जोड़ े ं (रिववार से सोमवार)

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mसमय दो भन्न त थयाँ न चल।
“लगभग” 180° क्य : यह रेखा जान-बूझकर टे ढ़ -मेढ़ बनाई गई है — रूस के चुकोटका, अमे रका के अल्यू शयन
प तथा
क रबाती, फजी और समोआ के प-समूह के चार ओर घूमकर — ता क कसी दे श म एकeही
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a sem ऐसी रेखा आवश्यक क्य है: य द आप पूव क ओर वश्व का चक्कर लगाएँ और प्रत्येक 15° पर एक घंटा जोड़ते
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जाएँ, तो लौटने तक आप पूरे 24 घंटे जोड़ चुके ह गे। यह अ त रक्त दन कह न कह लौटाना पड़ेगा — वही स्थान

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अंतराष्ट्रीय त थ रेखा है।

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प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ — पृष्ठ 23–25

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अध्याय के अंत के प्रश्न

प्र.1 इस पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 10 और अध्याय 5 म चत्र 5.2 के संदभ म, 2.5 से.मी. = 500 क.मी. का पैमाना लेते
हुए, नमदा नद के मुहाने से गंगा नद के मुहाने तक क वास्त वक दूरी क गणना क जए (संकेत – मान चत्र पर
अपनी माप को एक सरल संख्या म पूणा कत क जए)।

गंगा

नमदा

नमदा का मुहाना गंगा का मुहाना

अरब सागर बंगाल की खाड़ ी

0 500 1,000 िक.मी.

इस प्रश्न के लए भारत का मान चत्र — नमदा और गंगा तथा दोन न दय के मुहाने। यह वास्त वक अक्षांश-दे शांतर पर
बनाया गया है; पुस्तक का अपना मान चत्र अध्याय 5 का चत्र 5.2 है।

चरण 1 — भारत के मान चत्र पर दोन मुहाने ढूँ ढ़ए। नमदा प म क ओर बहकर गुजरात म खंभात क खाड़ी के पास अरब
सागर म मलती है। गंगा पूव क ओर बहकर प म बंगाल म सुंदरबन के डेल्टा से होकर बंगाल क खाड़ी म मलती है।
चरण 2 — दोन के बीच सीधी रेखा मा पए। रूलर से यह लगभग 8 से.मी. आती है (यही वह “सरल संख्या” है जसक ओर
संकेत इशारा करता है)।
चरण 3 — पैमाने का उपयोग क जए।

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मानिचत्र के 2.5 से.मी. = धरातल के 500 िक.मी.

अतः 1 से.मी. = 500 ÷ 2.5 = 200 िक .मी.

मापी गई दू री = 8 से.मी.

वास्तिवक दू री = 8 × 200 = 1,600 िक.मी.

अथात दोन न दय के मुहाने सीधी रेखा म लगभग 1,600 कलोमीटर दूर ह — लगभग उतना ही, जतनी अहमदाबाद से
कोलकाता क हवाई दूरी।

मुहाना: वह स्थान जहाँ नद समुद्र म मलती है (पृष्ठ 23 पर पुस्तक क हा शया- टप्पणी)। नमदा का मुहाना क प
जैसा है, जब क गंगा वश्व का सबसे बड़ा डेल्टा बनाती है, जो भारत और बांग्लादे श म फैला है।

आपका उत्तर थोड़ा भन्न क्य हो सकता है: तट पर आप कौन-से बदु चुनते ह और माप को कैसे पूणा कत करते
ह, इससे उत्तर म 100 क.मी. तक का अंतर आ सकता है। यह स्वाभा वक है — पैमाना अच्छा अनुमान दे ता है,
सवक्षण जैसा सट क मान नह । सही होनी चा हए व ध — पहले मा पए, फर 1 से.मी. के मान से गुणा क जए।

प्र.2 जब लंदन म दोपहर 12 बजे का समय होता है, तो उसी समय भारत म सायं के 5:30 बजते ह, क्य ?

क्य क भारत क घ ड़याँ ग्र नच से 5 घंटे 30 मनट आगे रखी जाती ह, और यह संख्या सीधे दे शांतर से आती है।

लंद न (िगिनच) पमुख याम्योत्तर, 0° पर है

भारत की मानक याम्योत्तर = 82°30′ पू. (उत्तर पदे श में िमज पुर के िनकट से)

पृथ्वी 1 घंटे में 15° घूमती है

82°30′ ÷ 15° = 5.5 घंटे = 5 घंटे 30 िमनट

12:00 मध्याह्न जी.एम.टी. + 5:30 = सायं 5:30

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0° िगिनच 82°30′ पू. भारत

82.5° पूव = 5 घंटे 30 िमनट जोड़ े गए

12:00 मध्याह्न सायं 5:30
पूव की ओर समय जोिड़ ए • पिश्चम की ओर घटाइए

भारत ग्र नच के पूव म है, इस लए भारतीय घ ड़याँ आगे रहती ह — ठ क 5 घंटे 30 मनट।

आगे क्य , पीछे क्य नह : पृथ्वी प म से पूव क ओर घूमती है, इस लए पूव के स्थान तक सूय पहले पहुँचता है।
भारत लंदन के पूव म है, अतः यहाँ दन पहले आरंभ होता है और घड़ी अ धक समय दखाती है।

प्र.3 हम मान चत्र म प्रतीक चह्न और रंग क आवश्यकता क्य होती है?

प्रतीक चह्न ान क कमी के कारण आवश्यक ह और रंग शीघ्र समझने के लए।

सब कुछ बनाने का ान नह होता। जनपद के मान चत्र पर प्रत्येक घर, मं दर और कुएँ का चत्र नह बनाया जा सकता; एक
छोटा न त चह्न यह काय कर दे ता है।
ये मान चत्र को सवग्राह्य बनाते ह। भारतीय सवक्षण वभाग एक ही समुच्चय नधा रत करता है, इस लए प्रत्येक पाठक के
लए मान चत्र का अथ एक ही रहता है — जो नाम न पढ़ सके, वह भी रेलमाग और नद दे ख लेता है।
ये समय बचाते ह। रंग एक दृ ष्ट म पढ़ लए जाते ह — नीला = जल, हरा = मैदान, वन और उद्यान, पीला/भूरा = पठार और
पहा ड़याँ, सफेद = हम, काला/लाल = सड़क, रेलमाग और ब स्तयाँ।
ये तुलना सरल बनाते ह। थमै टक मान चत्र म एक ही रंग क गहरी-हल्क छायाएँ तुरंत बता दे ती ह क कस राज्य म
सवा धक वषा या साक्षरता है, बना एक भी अंक पढ़े ।

स्वयं पर खए: भारत का कोई भौ तक मान चत्र खो लए। एक शब्द पढ़े बना आपको उत्तर म भूरा हमालय, प म
म पीला-भूरा थार, हरा गंगा का मैदान और तीन ओर नीले समुद्र दखाई दगे। यही रंग और प्रतीक चह्न का काम है।

प्र.4 आपके घर या व ालय क आठ दशाओं म क्या-क्या त है? पता लगाइए।

इसे ठ क से करने क व ध —

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1. अपने घर या वद्यालय के ार पर खड़े होइए। पहले उत्तर न त क जए — प्रातःकाल के सूय से (वह लगभग पूव म उगता है),
क ास से अथवा मोबाइल के क ास से।
2. एक पृष्ठ पर दशा-चक्र बनाइए — ऊपर उ., फर घड़ी क दशा म उ.पू., पू., द.पू., द., द.प., प., उ.प.।
3. प्रत्येक दशा म दे खकर उस ओर का नकटतम महत्वपूण भू- चह्न ल खए।
4. संदेह वाली दशाएँ माता- पता, शक्षक अथवा नगर के मु द्रत मान चत्र से जाँच ली जए।

दशा नमूना उत्तर — मेरे व ालय से

उत्तर गाँव का तालाब और पानी की टंक ी

उत्तर-पूव पाथिमक स्वास्थ्य कें द

पूव मुख्य सड़क और बस स्टॉप

द क्षण-पूव साप्तािहक बाजार का मैद ान

द क्षण गेहू ँ के खेत और नहर

द क्षण-प म ग ाम पंचायत काय लय

प म मेर ा घर और डाकघर

उत्तर-प म मंिदर और आम का बगीचा

अपना उत्तर स्वयं ल खए। ऊपर द गई प्रत्येक प्र व ष्ट के स्थान पर वह ल खए जो सचमुच आपके वद्यालय के
चार ओर है, फर एक रेखा-मान चत्र पर आठ तीर और भू- चह्न अं कत क जए। यही रेखा चत्र पृष्ठ 11 वाले “अपने
क्षेत्र का मान चत्र” क्रयाकलाप म भी काम आएगा।

प्र.5 ानीय समय और मानक समय के बीच क्या अंतर है? समूह म चचा क जए और फर प्रत्येक समूह 100–150
शब्द तक का एक उत्तर लखे। उत्तर क तुलना क जए।

नमूना उत्तर (लगभग 140 शब्द):
स्थानीय समय वह समय है जो कसी स्थान पर सूय क स्थ त से तय होता है। जब सूय कसी याम्योत्तर पर सबसे ऊँचा होता है, तब
उस याम्योत्तर के सभी स्थान पर दोपहर के 12 बजते ह। पृथ्वी एक घंटे म 15° घूमती है, इस लए प्रत्येक याम्योत्तर का अपना
स्थानीय समय होता है और 15° पूव का स्थान एक घंटा आगे रहता है। मानक समय वह एक समय है जसे पूरा दे श अपनाता है और
जो दे श से गुजरने वाली कसी एक याम्योत्तर पर आधा रत होता है। भारत क मानक याम्योत्तर 82°30′ पूव है, जो उत्तर प्रदे श म
मजापुर के नकट से गुजरती है; इस लए भारतीय मानक समय ग्र नच के समय से 5 घंटे 30 मनट आगे है। इसी कारण असम के
तनसु कया म सूय गुजरात के पोरबंदर से लगभग दो घंटे पहले उगता है, फर भी दोन नगर क घ ड़याँ एक ही समय दखाती ह।
स्थानीय समय सूय का अनुसरण करता है और मानक समय उस समझौते का, जो रेल, वद्यालय और कायालय को एक साथ
चलाता है।

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तुलना करते समय दे खए: अच्छे उत्तर म चार बात अवश्य ह गी — (1) स्थानीय समय सूय और याम्योत्तर से तय
m का आँकड़ा,
होता है, (2) मानक समय पूरे दे श के लए चुना गया एक समय है, (3) 15° प्र त घंटा या 1° = 4 eमनट
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o भारतीय उदाहरण। उत्तर क लंबाई नह , इन चार बदुओं क उप स्थ aतgदेlखए।
और (4) एक.cस्पष्ट
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दल्ली और बगलुरु के अक्षांश क्रमशः 29° उ. और 13° उ. ह और उनका दे शांतर लगभग 77° पू. एक ही है। दोन
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नगर के बीच ानीय समय म कतना अंतर होगा?

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कोई अंतर नह होगा — दोन नगर का ानीय समय एक ही रहेगा।
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omकेवल दे शांतर पर िनभर करता है
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emका दे शांतर = 77° पू., बेगं लुरु का दे शांतर = 77° पू. a
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दे शांत र का अंत र = 0°
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स्थानीय समय का अंत र = 0 × 4 िमनट = 0 िमनट
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दोन नगर लगभग एक ही याम्योत्तर पर ह, यद्य प एक दूसरे से लगभग 1,750 क.मी. उत्तर म है। सूय उस याम्योत्तर को एक ही
क्षण पार करता है, इस लए दल्ली और बगलुरु म मध्याह्न एक साथ होता है।

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m a s em। 13° उ. पर बगलुरु म
l म ग्रीष्म के दन लंबे और
तो अक्षांश क्या बदलता है? मध्याह्न का समय नह , ब ल्क दन क लंबाई और जलवायु
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वष-भर

aseशीत के दन छोटे होते ह, मई अत्यंत गरम और जनवरी ठं डी। अक्षांश जलवायु और ऋतु तय करता है, दे शांतर समय।
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सावधानी: दल्ली और बगलुरु म सूय दय घड़ी के एक ही समय पर नह होता, क्य क अक्षांश भन्न होने से ऋतु के
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s इसी को मापता है।
अनुसार सूय के क्ष तज से ऊपर आने का समय बदल जाता है। कतु मध्याह्न — जब सूय सबसे ऊँचा हो — दोन

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जगह एक साथ होता है, और स्थानीय

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प्र.7 नम्न ल खत कथन पर सही या गलत का चह्न लगाइए और इसे एक या दो वाक्य म समझाइए। (क) अक्षांश के
सभी समानांतर क लंबाई समान होती है। (ख) दे शांतर के एक याम्योत्तर क लंबाई भूमध्य रेखा क आधी होती
है। (ग) द क्षण ुव का अक्षांश 90° द. है। (घ) असम म ानीय समय और आई.एस.ट . (भारतीय मानक समय)
एक ही है। (ङ) समय क्षेत्र को पृथक करने वाली रेखाएँ दे शांतर के याम्योत्तर के समान होती ह। (च) भूमध्य रेखा
एक अक्षांश वृत्त भी है।

कथन सही / कारण
गलत

(क) अक्षांश के सभी समानांतर क गलत भूम ध्य रे खा सबसे बड़ा वृत्त है। धु वों की ओर बढ़ ने पर अक्षांश वृत्त छोटे होते जाते है ं
लंबाई समान होती है। और 90° उ. तथा 90° द. पर के वल िबंद ु रह जाते है।
ं

(ख) दे शांतर के एक याम्योत्तर क सही याम्योत्तर एक धु व से दू स रे धु व तक का अध वृत्त है, जबिक भूम ध्य रे खा उतने ही बड़े
लंबाई भूमध्य रेखा क आधी होती है। वृत्त का पूर ा घे र ा है। अतः याम्योत्तर उसकी आधी होती है।

(ग) द क्षण ुव का अक्षांश 90° द. है। सही अक्षांश भूम ध्य रे खा के 0° से िगना जाता है और पत्येक धु व पर अिधकतम 90° हो जाता
है — उत्तर धु व 90° उ., दिक्षण धु व 90° द.।

(घ) असम म स्थानीय समय और गलत आई.एस.टी. 82°30′ पू. पर आधािरत है, जबिक असम लगभग 92°–95° पू. पर है।
आई.एस.ट . एक ही है। वहाँ का स्थानीय समय आई.एस.टी. से लगभग 40 िमनट से एक घंटा तक आगे रहता
है, इसीिलए वहाँ सूय इतनी जल्दी उगता है।

(ङ) समय क्षेत्र को पृथक करने वाली गलत वे 15° की याम्योत्तरों का के वल मोटे तौर पर पालन करती है।
ं िचत्र 1.8 में िदखता है
रेखाएँ दे शांतर के याम्योत्तर के समान िक वे अंतर ीय सीमाओं के अनुस ार टेढ़ी हो जाती है ं तािक कोई दे श दो मानक समयों
होती ह। में न बँटे।

(च) भूमध्य रेखा एक अक्षांश वृत्त भी सही यह 0° अक्षांश है — वही रे खा िजससे सभी अन्य अक्षांश नापे जाते है ं और जो सबसे
है। ृ है।
बड़ा अक्षांश वत्त

(क) और (ख) को साथ दे खए: सभी याम्योत्तर बराबर लंबाई क होती ह, पर सभी अक्षांश वृत्त नह । ग्लोब से
यह याद र खए — याम्योत्तर सब ुव पर मलती ह, अतः बराबर ह; अक्षांश एक के ऊपर एक रखे भन्न आकार के
वृत्त ह।

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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थान क स्थ त AglaSem · NCERT Solutions

प्र.8 नीचे द गई वग पहेली को हल क जए। बाएँ से दाएँ — 1. वह समय जसका हम भारत म अनुसरण करते ह। 3.
मान चत्र म एक वृहद क्षेत्र को लघु रूप म दखाना। 5. एक सु वधाजनक गोलाकार वस्तु। 7. ये दोन मलकर
कसी ान का पता लगाने म सहायक होते ह। 9. भूमध्य रेखा से दूरी क एक माप। 11. एक रेखा के लए शब्द-
संक्षेप जसके आर-पार दन और त थ म प रवतन होता है। ऊपर से नीचे — 2. माग को खोजने का सरल
साधन। 4. जो अक्षांश और दे शांतर मलकर बनाते ह। 6. जो वश्व के शीष पर है। 8. वह ान जहाँ से प्रमुख
याम्योत्तर गुजरती है। 10. प्रमुख याम्योत्तर से दूरी क एक माप। 12. सबसे लंबी समानांतर अक्षांश रेखा।

पथ्ृ वी पर स्थानों का पता लगाना

1. 2.

3. 4. 6.

8. 10.

7. 5. 12.

9.

11.

पृष्ठ 24 पर छपी वग पहेली का ढाँचा।

क्रमांक संकेत उत्तर

1 (बाएँ से दाएँ) वह समय िजसका हम भारत में अनुस रण करते है ं भारतीय मानक समय

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क्रमांक संकेत उत्तर

3 (बाएँ से दाएँ) मानिचत्र में एक वृहद क्षेत्र को लघु रूप में िदखाना स्केल
5 (बाएँ से दाएँ) एक सुिवधाजनक गोलाकार वस्तु ग्लोब
7 (बाएँ से दाएँ) ये दोनों िमलकर िकसी स्थान का पता लगाने में सहायक होते है ं िनद शांक

9 (बाएँ से दाएँ) भूम ध्य रे खा से दू र ी की एक माप अक्षाश
ं

11 (बाएँ से दाएँ) एक रे खा के िलए शब्द-संक्षेप िजसके आर-पार िदन और ितिथ में पिरवतन होता है अंतर ीय ितिथ रे खा

2 (ऊपर से नीचे) माग को खोजने का सरल साधन मानिचत्र

4 (ऊपर से नीचे) जो अक्षांश और दे शांतर िमलकर बनाते है ं िगड

6 (ऊपर से नीचे) जो िवश्व के शीष पर है धु व

8 (ऊपर से नीचे) वह स्थान जहाँ से पमुख याम्योत्तर ग ज
ु रती है िगिनच

10 (ऊपर से नीचे) पमुख याम्योत्तर से दू र ी की एक माप दे शांतर

12 (ऊपर से नीचे) सबसे लंबी समानांतर अक्षांश रे खा भूम ध् य रे खा

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1 2

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3 4 6

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8 10

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7 5 12

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9

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रे
11

अं त र ी य ित िथ रे खा

पूरी भरी हुई वग पहेली। प्रत्येक खाने म एक अक्षर (मात्रा स हत) आता है; लाल अंक पुस्तक म दए गए संकेत के क्रमांक ह।

काटती हुई रेखाओं से जाँच: ‘भारतीय मानक समय’ का पाँचवाँ अक्षर मा ही ‘मान चत्र’ का पहला अक्षर है;
‘ नदशांक’ का पहला अक्षर न ‘ ग्र नच’ का दूसरा अक्षर है और उसका तीसरा अक्षर शां ‘दे शांतर’ का दूसरा अक्षर;
‘भूमध्य रेखा’ का अं तम अक्षर खा ‘अंतराष्ट्रीय त थ रेखा’ का भी अं तम अक्षर है।

अध्याय — एक नज़र म
मान चत्र कसी क्षेत्र का ऊपर से दे खा गया रेखांकन या प्रतीकात्मक चत्रण है। यह एक गाँव, जनपद, राज्य, भारत अथवा
संपूण वश्व का हो सकता है। मान चत्र क पुस्तक या संग्रह को एटलस (मान चत्रावली) कहते ह।

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मान चत्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते ह — भौ तक (पवत, नद , महासागर), राजनै तक (दे श, राज्य, सीमाएँ, राजधा नयाँ)
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और थमै टक ( कसी एक व शष्ट प्रकार क सूचना)।
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.c ) और प्रतीक चह्न (भारत के मान चत्र के लए भारतीय सवक्षण वभाग aाराg नधा रत)।
प्रत्येक मान चत्र के तीन घटक होते ह — दूरी (स्केल से, जैसे 1 से.मी. = 500 मी.), दशा (चतु दश उ., पू., द., प. तथा

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वीsलगभग गोलाकार है, इस लए समतल मान चत्र क तुलना म ग्लोब उसे बेहतर दशाता है। ग्लोब पर अक्षांश भूमध्य रेखा
मध्यवत दशाएँ
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ag(0°) से उत्तर या द क्षण क दूरी (90° उ. और 90° द. तक) तथा दे शांतर ग्र नच के प्रमुख याम्योत्तर (0°) से पूव या प म

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क दूरी (180° तक) मापते ह।

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अक्षांश और दे शांतर मलकर कसी स्थान के दो नदशांक बनाते ह — दल्ली लगभग 29° उ., 77° पू. पर है। भारत का

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वस्तार लगभग 8° उ. से 37° उ. तथा 68° पू. से 97° पू. तक है।
पृथ्वी 24 घंटे म 360° घूमती है, अथात 1 a टे म 15° या 1° म 4 मनट। इसी कारण दे शांतर से समय भी नधा रत होता है।
भारतीय मानक समय जी.एम.ट . से 5 घंटे 30 मनट आगे है और लगभग 180° पर स्थत अंतरा ीय त थ रेखा त थ को
एक दन बदल दे ती है।
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ग्र नच से बहुत पहले भारत क अपनी प्रमुख याम्योत्तर थी — उज्ज यनी (उज्जैन) से गुजरने वाली मध्य रेखा, जहाँ लगभग
1500 वषoपूव खगोल वद वराह म हर ने काय कया था।
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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म उदाहरण
कहाँ

मान चत्र ऊपर से दे खे गए िकसी क्षेत्र का रे खांक न पृष्ठ 8–9, चत्र काल्प नक लघु नगर का मान चत्र
1.1

एटलस (मान चत्रावली) मानिचत्रों की पुस्तक या संग ह पृष्ठ 9 आपके वद्यालय का एटलस

स्केल मानिचत्र का एक से ंटीमीटर धरातल पर िकतनी पृष्ठ 9–10 1 से.मी. = 500 मी.; चत्र 5.2 म 2.5 से.मी. =
दू र ी दश ता है 500 क.मी.

चतु दश उत्तर, पूव, दिक्षण, पिश्चम पृष्ठ 10 प्रत्येक मान चत्र पर ‘उ.’ वाला तीर

मध्यवत दशाएँ उत्तर-पूव, दिक्षण-पूव, दिक्षण-पिश्चम, उत्तर- पृष्ठ 10 संग्रहालय बक के द क्षण-पूव म है
पिश्चम

प्रतीक चह्न िकसी आकृ ित को दश ने वाला छोटा िनिश्चत पृष्ठ 11, चत्र सेतु, मं दर, डाकघर के लए नधा रत चह्न
िचह्न 1.2

ग्लोब वह गोला िजस पर मानिचत्र बना होता है पृष्ठ 12 कक्षा का ग्लोब

नदशांक वे दो मान जो िकसी िस्थित को ठीक-ठीक पृष्ठ 12–13 शतरंज का ‘घ’4; दल्ली के लए 29° उ., 77°
िनध िरत करते है ं पू.

भूमध्य रेखा ( वषुवत 0° अक्षांश, दोनों धु वों के मध्य सबसे बड़ा वृत्त पृष्ठ 13, चत्र केन्या, इंडोने शया, इक्वाडोर से होकर
वृत्त) 1.3

अक्षांश भूम ध्य रे खा से दू र ी दश ने वाला पूव-पिश्चम वृत्त पृष्ठ 13–14 कक रेखा लगभग 23½° उ., भारत के आठ
राज्य से होकर

दे शांतर (याम्योत्तर) पमुख याम्योत्तर से दू र ी दश ने वाला धु व से धु व पृष्ठ 14–15 82°30′ पू. — भारत क मानक याम्योत्तर
तक अधवत्तृ

प्रमुख याम्योत्तर 0° दे शांतर, 1884 में िग िनच पर िनध िरत पृष्ठ 15 लंदन का ग्र नच क्षेत्र

मध्य रेखा उज्जियनी से ग ज
ु रने वाली भारत की पाचीन पृष्ठ 16, चत्र उ ैन, कुरुक्षेत्र, रो हतक
पमुख याम्योत्तर 1.5

मानक समय एक याम्योत्तर पर आधािरत पूरे दे श का एक पृष्ठ 20 आई.एस.ट . = जी.एम.ट . + 5:30
समय

अंतराष्ट्रीय त थ रेखा लगभग 180° पर िस्थत वह रे खा जहाँ ितिथ पृष्ठ 21–22 पूव क ओर पार करने पर एक दन घटाते ह
बदलती है

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages41
Languagehindi
Updated19 Sep 2026