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NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 5 मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे

AglaSem पर कक्षा 9 गणित अध्याय 5 मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे (गणित मंजरी) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Maths Chapter 5 I M Up and Down and Round and Round (Ganita Manjari), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 5 मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे - Page 1 of 70

About NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 5 मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे

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NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 5 मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 5: म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत मंजरी

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

92 – 117 17 64 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 69 pages

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · ग णत · ग णत मं ज री

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे
अध्याय 5 वृत्त को केवल एक वचार पर खड़ा करता है — वृत्त का प्रत्येक बदु उसके कद्र से समान दूरी पर होता है — और इसी से बारह प्रमेय
नकाल लेता है। जीवाएँ, उनके ारा अंत रत कोण, कद्र से उनक दूरी, चाप और चक्र य चतुभुज — ये सब इसी एक प रभाषा और आपके पहले से
जाने-पहचाने सवागसमता प्र तबंध से प्राप्त होते ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ग णत मंजरी (कक्षा 9) 92 – 117

खं ड प्रश्न

17 64

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 92–93
अध्याय का आरंभ

प्र.1 क्या आप चत्र 5.1 म आकृ तय के उद्भव क पहचान कर सकते ह?

जल पर िगरती वष की बूँदें पौधे के तने की अनुपस्थ काट सूयमुखी

चत्र 5.1, पृष्ठ 92 — पुस्तक के तीन छाया चत्र का पुनर खत रेखा चत्र।

चत्र 5.1 के तीन चत्र प्रकृ त से लए गए ह और तीन म आकृ त वृत्त ही है।

बाईं ओर: शांत जल पर गरती वषा क बूँद। प्रत्येक बूँद से बनी तरंग सभी दशाओं म समान चाल से फैलती है, अत: तरंग का
प्रत्येक बदु उस बदु से समान दूरी पर रहता है जहाँ बूँद गरी थी — यही वृत्त है।
बीच म: पेड़ के तने (पौधे के तने) क अनुप्रस्थ काट। वृ द्ध के छल्ले लगभग वृत्ताकार होते ह क्य क तना चार ओर लगभग
समान रूप से मोटा होता जाता है।
दाईं ओर: सूयमुखी का पुष्पक्रम। सभी छोटे पुष्प एक ही कद्र के चार ओर सजे रहते ह और बाहरी सीमा वृत्त बनाती है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: जब भी कोई वस्तु कसी एक बदु से सभी दशाओं म समान रूप से बढ़ती या फैलती है, तो
उसक सीमा वे सभी बदु बनाते ह जो उस बदु से न त दूरी पर ह। वृत्त क प रभाषा भी ठ क यही है। गुडाहांडी के
गुफा चत्रकार ने वृत्त इस लए बनाए क्य क प्रकृ त उन्ह यह आकृ त बार-बार दखा रही थी।

यह भी क जए: चत्र 5.2 म चंद्रमा और सूय भी वृत्ताकार दखाई दे ते ह — ये गोले ह और दूर से दे खने पर गोले क
सीमारेखा वृत्त ही होती है।

प्र.2 ग त व ध — प्रकृ त म वद्यमान कुछ वस्तुओं क सूची बनाइए, जो वृत्ताकार दखाई दे ती ह।

जो भी वस्तु कसी कद्र से सभी दशाओं म समान रूप से फैलती है, वह वृत्ताकार दखाई दे गी। हमारे आस-पास से कुछ उदाहरण —

तालाब म पत्थर गरने से बनी तरंग।
पू णमा का चंद्रमा तथा पूण सूयग्रहण के समय सूय।
कटे हुए ल े पर बने वा षक छल्ले; बाँस या गन्ने के तने क अनुप्रस्थ काट।
सूयमुखी का फूल; कमल के बीजकोश का ऊपरी चपटा भाग।
फल क काट — संतरा, न बू, टमाटर।
पत्ती पर ठहरी वषा क बूँद; ऊपर से दे खा गया साबुन का बुलबुला।
आँख क पुतली और प रता रका; पक्षी के घ सले क सीमारेखा।

स्वयं जाँ चए: प्रत्येक वस्तु के लए पू छए — "क्या अंदर कोई ऐसा एक बदु है जससे सीमा का हर बदु समान दूरी
पर हो?" य द उत्तर हाँ है तो आकृ त वास्तव म वृत्त है; य द नह (आम, अंडा) तो वह अंडाकार है, वृत्त नह ।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 93
अनुभाग 5.1 प रभाषाएँ से पूव

सो चए और वचार क जए

प्र.1 जमुना के पास कागज का एक वृत्ताकार टु कड़ा है। वह इसके कद्र का पता लगाने का प्रयास कर रही है। अमीना
उसे एक सुझाव दे ती है। वह उन नदश का पालन करती है और उसके प रणाम से रोमां चत होती है। क्या आप
अनुमान लगा सकते ह क अमीना ने उसे क्या सुझाव दया होगा?

अमीना ने न त ही यह सुझाव दया होगा — कागज को दो बार मो ड़ए; दोन मोड़ के चह्न जस बदु पर काटते ह, वही कद्र है।
व ध और प्रत्येक चरण का कारण इस प्रकार है —

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

1. वृत्ताकार कागज को इस प्रकार मो ड़ए क उसका कनारा ठ क अपने ऊपर आ जाए। खो लए। यह मोड़ का चह्न वृत्त क
परावतन सम म त क रेखा है, अत: यह एक ास है — और प्रत्येक ास कद्र से होकर जाता है।
2. अब कसी दूसरी दशा म इसी प्रकार मो ड़ए क कनारा फर अपने ऊपर आ जाए। यह दूसरा चह्न भी एक ास है।
3. दो भन्न ास दोन कद्र से होकर जाते ह और दो भन्न रेखाएँ केवल एक ही बदु पर मलती ह। अत: इनका प्र त े द बदु ही
कद्र है।

मोड़ 2

मोड़ 1
केंद

कनारे को अपने ऊपर लाने वाले दो मोड़ दो ास दे ते ह; ये कद्र पर काटते ह।

ऐसा क्य होता है: मोड़ना वास्तव म परावतन है। जो मोड़ वृत्त के कनारे को अपने ऊपर लाता है, वह वृत्त को स्वयं
पर प्र त ब बत करता है। ऐसा परावतन कद्र को अपने स्थान पर ही रखता है, अत: मोड़ का चह्न कद्र से होकर
जाएगा — अथात वह ास है।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 94

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

5.2 वृत्त क सम म त
co m
e m.
m as
सो चए और वचार क जए

.co a g l
a s emवग म घूणन सम म त कौन कौन-सी ह? इसम परावतन सम म त क कतनी रेखाएँ ह? एक सम पंचभुज
gl
एक
a
प्र.1
और एक समषट् भुज म घूणन सम म त और परावतन सम म त क कतनी रेखाएँ होती ह?

co m
e m . ag
g l as
n भुजाओं वाले कसी भी सम बहुभुज म घूणन सम म त क को ट n होती है और परावतन सम म त क ठ क n रेखाएँ होती ह।
a
वग (n = 4): 90°, 180°, 270°, 360° के घूणन — कोिट 4; समिमित की 4 रेखाएँ (2 िवकण, 2 सम्मुख
co m
se m.
m a
भुजाओं के मध्यिबंद ुओ ं से होकर)।
o l
g की 5 रेखाएँ (पत्येक
.cज (n = 5): 72°, 144°, 216°, 288°, 360° के घूणन — कोिट 5; समिमित
a
m
ase
सम पंच भु

agl शीष से सम्मुख भुजा के मध्यिबंदु तक)।
s
समषट् भुज (n = 6): 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360° के घूणन — कोिट 6; समिमित की 6 रेखाएँ (3
m a
m .co agl
se
बड़ े िवकण, 3 सम्मुख भुजाओं के मध्यिबंद ुओ ं से होकर)।

g l a
a
ऐसा क्य होता है: सम n-भुज के शीष एक वृत्त पर 360°/n के अंतराल पर स्थत होते ह। 360°/n से घुमाने पर

co m
.
प्रत्येक शीष अगले शीष के स्थान पर आ जाता है, अत: आकृ त अप रव तत रहती है। ऐसा n बार करने पर हम
e m
as
आरं भक स्थ त पर लौट आते ह — इसी लए ठ क n घूणन ही संभव ह।
m l
m .co a g
a s eक्या
a gl आप जानते ह? n बढ़ने पर बहुभुज वृत्त जैसा दखने लगता है और उसक सम म तयाँ बढ़ती जाती ह। वृत्त

m
इसक चरम स्थ त है — इसम प्रत्येक कोण घूणन सम म त है और परावतन सम म त क अनंत रेखाएँ ह, प्रत्येक

a se
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ास के लए एक।
. a g
m
ase
agl
प्र.2 5 इकाई त्रज्या वाले वृत्त म सबसे लंबी जीवा क लंबाई कतनी है? क्या इस वृत्त म कोई सबसे छोट जीवा है?

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coलंmबी जीवा ास होती है। l

. a g
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सबसे

a
agl c
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e
सबसे लंबी जीवा = 2 × ित्रज्या = 2 × 5 = 10 इकाई

om a s
क्या सबसे छोट जीवा है? नह । न्यूनतम लंm
e
. c agl
a s
बाई वाली कोई जीवा नह है।

agl

co m
m .
m ase
.co


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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: कद्र से d दूरी पर स्थत जीवा क लंबाई 2√(25 − d²) होती है, जहाँ d का मान 0 ≤ d < 5 म
कुछ भी हो सकता है। जैसे-जैसे d 5 के नकट पहुँचता है, जीवा छोट होती जाती है — 2√(25 − 24) = 2, फर
2√(25 − 24.99) = 0.2, और इसी प्रकार — कतु वह कभी शून्य नह होती, क्य क d = 5 पर रेखा वृत्त को
केवल एक बदु पर छू ती है और तब वह जीवा रह ही नह जाती। अत: जीवा जतनी चाह उतनी छोट बनाई जा
सकती है, पर सबसे छोट कोई नह है।

संकेत: "सबसे लंबी" इस लए है क्य क d = 0 संभव है; "सबसे छोट " इस लए नह है क्य क d = 5 संभव नह
है।

प्र.3 कसी दए गए बदु से समदूरस्थ बदुओं का बदुपथ वृत्त कहलाता है। दए गए कन्ह दो बदुओं से समदूरस्थ
बदुओं के बदुपथ के वषय म हम क्या कह सकते ह? (संकेत— हम जानते ह क कन्ह दो दए गए बदुओं A
और B से समदूरस्थ कोई भी बदु, AB के लंब सम भाजक पर स्थत होता है। क्या इस कारण से रेखाखंड का
लंब सम भाजक ही यह बदुपथ हो जाएगा? इसके लए हम यह सद्ध करना होगा क लंब सम भाजक पर
स्थत सभी बदु, A व B से समदूरस्थ ह।)

दो दए गए बदुओं A और B से समदूरस्थ बदुओं का बदुपथ AB का लंब सम भाजक है।
कसी भी बदुपथ के दावे म दो बात सद्ध करनी पड़ती ह, एक नह —

1. बदुपथ का प्रत्येक बदु उस रेखा पर है। मान ली जए P ऐसा है क PA = PB, और M रेखाखंड AB का मध्य बदु है।
ΔPMA और ΔPMB म — PA = PB, AM = BM, PM उभय नष्ठ। SSS ारा ΔPMA ≅ ΔPMB, अत: ∠PMA =
∠PMB। ये रेखीय युग्म ह, अत: दोन 90° के ह गे। इस प्रकार PM ⊥ AB है और मध्य बदु से होकर जाता है — अथात P
लंब सम भाजक पर स्थत है।
2. उस रेखा का प्रत्येक बदु बदुपथ म है। मान ली जए Q लंब सम भाजक पर कोई बदु है, जो AB को मध्य बदु M पर
मलता है। ΔQMA और ΔQMB म — QM उभय नष्ठ, ∠QMA = ∠QMB = 90°, AM = BM। SAS ारा ΔQMA ≅
ΔQMB, अत: QA = QB।

P, A और B से समदू रस्थ है ⇔ P, AB के लंब समि भाजक पर िस्थत है

अत: िबंद ुपथ ठीक AB का लंब समि भाजक है।

दोन भाग क्य आवश्यक ह: केवल भाग 1 से बदुपथ रेखा का कोई अंश भी हो सकता था; केवल भाग 2 से रेखा
के बाहर भी बदु हो सकते थे। दोन मलकर ही बदुपथ को ठ क-ठ क नधा रत करते ह। अध्याय इसी प रणाम का
तुरंत उपयोग करता है — A और B से होकर जाने वाले सभी वृत्त के कद्र ठ क इसी रेखा के बदु ह।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 95

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

5.3 कतने वृत्त?

सो चए और वचार क जए

प्र.1 कसी समतल पर स्थत दो बदुओं से कतने वृत्त होकर जाते ह?

अनंत वृत्त।

ऐसा क्य होता है: A और B से होकर जाने वाले वृत्त का कद्र O ऐसा होना चा हए क OA = OB हो, अथात O,
AB के लंब सम भाजक पर हो। इसके वपरीत, उस लंब सम भाजक का प्रत्येक बदु O एक वृत्त दे ता है —
त्रज्या OA ली जए, और चूँ क OB = OA है, वृत्त B से भी होकर जाएगा। लंब सम भाजक पर अनंत बदु ह, अत:
ऐसे अनंत वृत्त ह — रेखा के प्रत्येक बदु के लए एक।

AB का लंब समि भाजक

A B

AB के लंब सम भाजक का प्रत्येक बदु A और B से होकर जाने वाले कसी वृत्त का कद्र है।

प्र.2 क्या A और B से होकर जाते हुए सभी संभा वत त्रज्याओं वाले वृत्त वद्यमान होते ह? A और B से होकर जाते
हुए सबसे छोटे वृत्त क त्रज्या क्या है? A और B से होकर जाते हुए सबसे बड़े वृत्त क त्रज्या क्या है?

नह — सभी त्रज्याएँ संभव नह ह। केवल AB क आधी लंबाई या उससे बड़ी त्रज्याएँ ही मलती ह।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

मान लीिजए AB = c है और कें द O, AB के मध्यिबंद ु M से h दू री पर है।

तब OA² = OM² + MA², अथ त r² = h² + (c/2)²

अत: r = √(h² + c²/4) ≥ c/2 पत्येक h ≥ 0 के िलए।

सबसे छोट त्रज्या = c/2 = ½ AB, जो h = 0 पर प्राप्त होती है, अथात जब कद्र AB का मध्य बदु हो। उस वृत्त म AB एक
ास है।
सबसे बड़ी त्रज्या कोई नह है। h बढ़ाने पर r भी बढ़ता जाता है, अत: त्रज्या जतनी चाह उतनी बड़ी ली जा सकती है पर कोई
अ धकतम मान नह है।

ऐसा क्य होता है: AB ऐसे प्रत्येक वृत्त क जीवा है और कोई जीवा ास से बड़ी नह हो सकती। अत: सदै व 2r ≥
AB, अथात r ≥ ½AB। ½AB से छोट त्रज्याएँ असंभव ह और ½AB से बड़ी प्रत्येक त्रज्या वास्तव म प्राप्त होती
है।

प्र.3 जैसे-जैसे आप रेखाखंड AB से लंब सम भाजक के अनु दश दूर होते जाते ह तो A और B से होकर जाते हुए
वृत्त क त्रज्याएँ बढ़ती ह या घटती ह?

त्रज्याएँ बढ़ती ह।

r = √(h² + (AB/2)²) जहाँ h = कें द की AB के मध्यिबंद ु से दू री

h ↑ ⇒ h² ↑ ⇒ h² + (AB/2)² ↑ ⇒ r ↑

ऐसा क्य होता है: A वृत्त पर ही रहता है, अत: त्रज्या दूरी OA है। O को AB से लंब सम भाजक के अनु दश दूर
ले जाने पर वह A से भी दूर होता जाता है — समकोण त्रभुज OMA म खड़ी भुजा लंबी होती जाती है जब क
क्षै तज भुजा MA का मान ½AB स्थर रहता है, अत: कण OA बढ़ता है।

प्र.4 जैसे-जैसे आप लंब सम भाजक के अनु दश जाते ह तो क्या उस बदु से न मत A और B से होकर जाता हुआ
वृत्त अ धक वक्र य या कम वक्र य प्रतीत होता है?

कम वक्र य — A और B के बीच का चाप अ धक से अ धक चपटा दखाई दे ता है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: वक्रता त्रज्या से नधा रत होती है — छोटा वृत्त तीव्रता से मुड़ता है, बड़ा वृत्त धीरे-धीरे। प्रश्न 3 से
त्रज्या बढ़ती जाती है, अत: A और B के पास चाप चपटा होता जाता है। सीमा म, जब कद्र अनंत क ओर चला
जाता है, A और B से होकर जाता चाप सीधी रेखा AB म बदल जाता है।

क्या आप जानते ह? इसी लए क्ष तज सीधा दखाई दे ता है। आप लगभग 6400 कलोमीटर त्रज्या वाले वृत्त पर
खड़े ह, अत: कुछ मीटर क दूरी म वक्रता इतनी कम होती है क दखाई ही नह दे ती।

प्र.5 एक समतल पर आपको दो बदु A और B दए गए ह। आप उसी समतल पर ऐसे कतने वग बना सकते ह
जनक सीमारेखा पर A और B स्थत ह ? उसी समतल पर आप ऐसे कतने वग बना सकते ह जनके कोने के
बदु A और B ह ?

(क) A और B सीमारेखा पर कह भी: अनंत वग।
रेखाखंड AB ख चए। कसी भी आकार का वग ली जए — उसे खसकाकर और घुमाकर ऐसा कया जा सकता है क उसक
सीमारेखा A और B दोन से होकर जाए। आकार पर भी कोई प्र तबंध नह है, अत: ऐसे अनंत वग ह।
(ख) A और B वग के कोने (शीष) ह : ठ क 3 वग।

िस्थित 1 — AB एक भुजा हो: वग AB के दोनों ओर बनाया जा सकता है → 2 वग

िस्थित 2 — AB एक िवकण हो: शेष दो शीष िनि चत हो जाते है,ं AB के दोनों ओर एक-एक → 1 वग

कु ल = 2 + 1 = 3 वग

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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A Bl a se A B
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a g AB भुजा: 2 वग AB िवकण: 1 वग
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A और B शीष ह तो केवल तीन वग बनते ह — दो म AB भुजा है और एक म वकण।
agl
l a se
a g
इतना अंतर क्य : "सीमारेखा पर" कहने से आकार और झुकाव दोन स्वतंत्र रह जाते ह, अत: उत्तर का पूरा
प रवार बनता है। "कोने पर" कहते ही एक पूरी भुजा या पूरा वकण न त हो जाता है, और भुजा (तथा कस ओर
co m
m .
as e
बनाना है) या वकण जान लेने पर वग पूरी तरह नधा रत हो जाता है।
m l
m .co a g
l a se
g
a पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 96
se m
5.3 कतने वृत्त?
com g l a
m . a
e
asही रेखा पर स्थत ह या संरेखीय ह ? क्या आप स्पष्ट कर सकते ह क क्य इस
प्र.1
g l
a कोई वृत्त नह जाता?
क्या होगा, य द A, B और C एक
स्थ त म A, B और C से होकर

co m
m .
as e

m l
.co a g
तीन संरेखीय बदुओं से होकर कोई भी वृत्त नह जाता।

a s emदया गया है: A, B, C एक ही रेखा पर स्थत तीन भन्न बदु ह। सद्ध करना है: कोई बदु O ऐसा नह है जसके लए OA = OB
agl = OC हो।
.c
s e m
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e m . co agl
g l as
a

co m
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m ase
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

मान लीिजए ऐसा वृत्त है िजसका कें द O है।

OA = OB ⇒ O, AB के लंब समि भाजक पर िस्थत है

OB = OC ⇒ O, BC के लंब समि भाजक पर िस्थत है
िकं त ु AB और BC एक ही रेखा ℓ पर है।
ं

अत: दोनों लंब समि भाजक ℓ पर लंब है ं ⇒ वे परस्पर समांत र है।
ं

ये िभन्न िबंद ुओ ं से होकर जाते है ं (AB और BC के मध्यिबंद ु िभन्न है)ं , अत: ये दो िभ न्न समात
ं र रेखाएँ है ं — जो

कभी नही ं िमलती ं।

अत: ऐसा कोई िबंद ु O है ही नही ं। तीन संरेखीय िबंद ुओ ं से होकर कोई वृत्त नही ं जाता।

ऐसा क्य होता है: प्रमेय 1 इस लए काम करती है क्य क वास्त वक त्रभुज के दो लंब सम भाजक समांतर नह
होते, अत: वे ठ क एक बदु पर काटते ह। संरेखीयता ठ क इसी चरण को नष्ट कर दे ती है — दोन सम भाजक
समांतर हो जाते ह, प्र त े द बदु लुप्त हो जाता है और उसके साथ कद्र भी।

स्वयं जाँ चए: इसी बात को उलटकर पढ़ तो यह कहती है क कोई सरल रेखा वृत्त को अ धक से अ धक 2 बदुओं
पर ही काट सकती है — तीन पर कभी नह ।

प्रश्नावली 5.1 — पृष्ठ 98
5.3 कतने वृत्त?

प्र.1 ΔABC क रचना क जए, जसम AB = 5 सट मीटर, ∠A = 70° और ∠B = 60° है। ΔABC के प रवृत्त क
रचना क जए। क्या इस वृत्त का कद्र त्रभुज के अंदर या बाहर स्थत है?

कद्र त्रभुज के अंदर स्थत है।
रचना —

1. AB = 5 सट मीटर ख चए।
2. A पर AB से 70° का और B पर BA से 60° का कोण बनाती करण ख चए। ये C पर मलती ह।
3. AB और BC के लंब सम भाजक बनाइए। ये O पर मलते ह।
4. कद्र O और त्रज्या OA लेकर वृत्त बनाइए। यह B और C से भी होकर जाएगा।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

∠C = 180° − 70° − 60° = 50°

कोण 70°, 60°, 50° है ं — तीनों न्यून कोण, अत: ΔABC एक न्यून कोण ित्रभुज है।

न्यून कोण ित्रभुज के िलए पिरकें द ित्रभुज के अंद र िस्थत होता है।

स्वयं जाँ चए: OA, OB, OC मा पए — तीन लगभग 3.3 सट मीटर आने चा हए। (ठ क-ठ क, R = AB / (2
sin C) = 5 / (2 sin 50°) ≈ 3.26 सट मीटर।)

ऐसा क्य होता है: प रकद्र O से भुजा AB पर बना कोण ∠AOB = 2∠C होता है। O त्रभुज के अंदर तभी रहता
है जब ये तीन कद्र य कोण 2∠A, 2∠B, 2∠C 180° से कम ह — अथात त्रभुज का प्रत्येक कोण 90° से कम
हो।

प्र.2 ΔABC क रचना क जए, जसम AB = 5 सट मीटर, ∠A = 100°, AC = 4 सट मीटर है। ΔABC के प रवृत्त क
रचना क जए। इस वृत्त का कद्र त्रभुज के अंदर या बाहर स्थत है?

कद्र त्रभुज के बाहर स्थत है — BC के उस ओर जहाँ A नह है।
रचना: AB = 5 सट मीटर ख चए; A पर AB से 100° का कोण बनाती करण ख चकर उस पर AC = 4 सट मीटर का टए; BC
मलाइए। अब AB और AC के लंब सम भाजक बनाइए; वे त्रभुज के बाहर O पर मलते ह। कद्र O और त्रज्या OA लेकर वृत्त
बनाइए।

∠A = 100° > 90° ⇒ ΔABC एक अिधक कोण ित्रभुज है।

अिधक कोण ित्रभुज के िलए पिरकें द ित्रभुज के बाहर िस्थत होता है,
अिधक कोण के सम्मुख भुजा के उस पार — यहाँ BC के पार।

स्वयं जाँ चए: BC ≈ 6.9 सट मीटर और OA = OB = OC ≈ 3.5 सट मीटर।
(BC² = 5² + 4² − 2·5·4·cos 100° ≈ 47.9, अत: BC ≈ 6.92 सट मीटर; R = BC / (2 sin 100°) ≈ 3.52
सट मीटर।)

ऐसा क्य होता है: BC पर बना कद्र य कोण 2∠A = 200° है, जो एक प्र तवत कोण है। अत: A, BC के लघु चाप
पर स्थत है और कद्र BC के दूसरी ओर, त्रभुज से बाहर चला जाता है।

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प्र.3 ΔABC क रचना क जए, जसम AB = 6 सट मीटर, BC = 7 सट मीटर, CA = 7 सट मीटर है। ΔABC के
प रवृत्त क रचना क जए। मान ली जए, प रकद्र O है तो OA, OB और OC को मा पए।

OA = OB = OC ≈ 3.9 सट मीटर। तीन समान होने ही चा हए — ये एक ही वृत्त क त्रज्याएँ ह।
रचना: AB = 6 सट मीटर ख चए; कद्र A और त्रज्या 7 सट मीटर तथा कद्र B और त्रज्या 7 सट मीटर से चाप ख चकर C प्राप्त
क जए। AB और BC के लंब सम भाजक बनाइए; वे O पर मलते ह। कद्र O और त्रज्या OA लेकर वृत्त बनाइए।

ित्रभुज समि बाहु है (CA = CB = 7 सेट
ं ीमीटर), अत: यह AB के लंब समि भाजक के सापेक्ष समिमत है।

C से AB पर ऊँ चाई = √(7² − 3²) = √40 ≈ 6.32 सेट
ं ीमीटर

क्षेत्रफल = ½ × 6 × 6.32 ≈ 18.97 वग सेट
ं ीमीटर

R = (abc) / (4 × क्षेत्रफल) = (6 × 7 × 7) / (4 × 18.97) = 294 / 75.9 ≈ 3.87 सेट
ं ीमीटर

संकेत: यहाँ कोण लगभग 64.6°, 64.6° और 50.8° ह — तीन न्यूनकोण — अत: O त्रभुज के अंदर AB के
लंब सम भाजक पर, AB से लगभग 2.45 सट मीटर ऊपर स्थत है।

OA = OB = OC क्य : "प रकद्र" का अथ ही यही है। O, AB के लंब सम भाजक पर है (अत: OA = OB)
और BC के लंब सम भाजक पर भी (अत: OB = OC)। दोन बात मलकर तीन को समान कर दे ती ह — और
इसी लए एक ही वृत्त तीन शीष से होकर जा सकता है।

प्र.4 दो बदुओं A और B से होकर जाते हुए वृत्त क न्यूनतम संभा वत त्रज्या क्या है?

न्यूनतम संभा वत त्रज्या ½ AB है — दोन बदुओं क दूरी क आधी।

AB ऐसे पत्येक वृत्त की जीवा है।

कोई जीवा व्यास से बड़ ी नही ं हो सकती, अत: AB ≤ 2r, अथ त r ≥ AB/2।

r = AB/2 वास्तव में पाप्त भी होता है: AB का मध्यिबंद ु M कें द लीिजए।

तब MA = MB = AB/2 है और कें द M, ित्रज्या AB/2 वाला वृत्त दोनों से होकर जाता है।

न्यून तम ित्रज्या = AB/2, और उस वृत्त में AB एक व्यास है।

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ऐसा क्य होता है: कद्र को AB के लंब सम भाजक पर ही होना है और A से उसक दूरी √(h² + (AB/2)²) है,
जहाँ h मध्य बदु से हटने क दूरी है। यह h = 0 पर न्यूनतम है। मध्य बदु से हटते ही त्रज्या बढ़ने लगती है।

सो चए, रचना क जए और नष्कष नका लए — पृष्ठ 98
5.3 कतने वृत्त?

सो चए, रचना क जए और नष्कष नका लए

प्र.1 A, B और C तीन संरेखीय बदु ह। क्या आप ऐसे एक बदु P का पता लगा सकते ह जसके लए PA = PB = PC
हो? आप AB और BC के लंब सम भाजक के वषय म क्या कह सकते ह? रचना क जए और जाँ चए। क्या
आप प्रद शत कर सकते ह क तीन संरेखीय बदुओं A, B और C के लए AB और BC के लंब सम भाजक
समांतर ह? क्या संरेखीय बदुओं से होकर जाता हुआ वृत्त संभव है? क्या आप एक ऐसी रेखा ख च सकते ह, जो
दए गए वृत्त को तीन भन्न बदुओं पर प्र त े द करती है?

क्रमश: उत्तर — ऐसा कोई P नह है; दोन लंब सम भाजक समांतर ह; तीन संरेखीय बदुओं से कोई वृत्त नह जाता; और
कोई रेखा वृत्त को तीन बदुओं पर नह काट सकती। चार वस्तुत: एक ही तथ्य के चार रूप ह।
लंब सम भाजक समांतर ह। मान ली जए A, B, C रेखा ℓ पर ह, AB का मध्य बदु M और BC का मध्य बदु N है। AB का लंब
सम भाजक M से होकर ℓ पर लंब रेखा है; BC का लंब सम भाजक N से होकर ℓ पर लंब रेखा है। एक ही रेखा पर लंब दो
रेखाएँ समांतर होती ह। चूँ क M ≠ N है ( बदु भन्न ह), ये दो भन्न समांतर रेखाएँ ह और कभी नह मलत ।

PA = PB वाला P ⇒ P, AB के लंब समि भाजक पर

PB = PC वाला P ⇒ P, BC के लंब समि भाजक पर

ये दोनों रेखाएँ िभन्न व समांत र है ं ⇒ कोई उभयिन ष्ठ िबंद ु नही ं ⇒ ऐसा कोई P नही ं

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
m AB का लं.स. BC का लं.स. l as
m .co a g
l a se
a g

co m
e m . ag
g l as
a
A B Ccom
.
em
m l as
m .co a g
l a se
a g
s
दोन सम भाजक एक ही रेखा पर लंब ह, अत: समांतर ह और कभी नह मलते — प रकद्र बनता ही नह ।

om a
. c
mहए जो तीन से समदूरस्थ हो — अथात वही बदु P, जसका अ स्तत्व
संरेखीय बदुओं से वृत्त नह : वृत्त के लए ऐसा कद्रeचा agl
a s
अभी असंभव सद्ध हुआ।
agl
रेखा वृत्त को तीन बदुओं पर नह काटती: य द कोई रेखा वृत्त को तीन बदुओं पर काटती तो वे तीन बदु संरेखीय भी होते और

co m
.
संवृत्तीय भी — जो ऊपर क बात से असंभव है। कोई रेखा वृत्त को 0, 1 या अ धक से अ धक 2 बदुओं पर ही काटती है।

e m
m l as
.co a g
ऐसा क्य होता है: दो बदुओं से तीन बदुओं तक जाने पर ही वृत्त अ तीय बनता है — कतु तभी जब तीसरा बदु

a s eरेmखा से हटकर हो। संरेखीयता ठ क वह अपक षत स्थ त है जहाँ तीसरा प्र तबंध कुछ नया नह जोड़ता और पूरी
agl रचना ढह जाती है।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
प्र.2 दए गए ΔABC के प रवृत्त क रचना क जाती है। क्या ΔABC के सवागसम अन्य त्रभुज हो सकते ह, जनका
प रवृत्त ΔABC का प रवृत्त हो?

co m
m .
m as e
.co g l
हाँ — अनंत त्रभुज।

m a
l a se
ag ऐसा क्य होता है: वृत्त म कद्र के सापेक्ष पूण घूणन सम म त होती है। ΔABC को प रकद्र O के चार ओर कसी भी
कोण θ से घुमाइए। O से दू रयाँ नह बदलत , अत: तीन प्र त बब शीष A′, B′, C′ उसी वृत्त पर रहते ह और प्रत्येक
.c
s e m
m a
भुजा क लंबाई भी अप रव तत रहती है — अत: ΔA′B′C′ ≅ ΔABC और उसका प रवृत्त वही है। θ अनंत मान ले

m . co agl
se
सकता है, अत: ऐसे अनंत त्रभुज ह।

l a
g कसी भी ास के सापेक्ष पराव तत क जए। वृत्त स्वयं पर आ जाता है और त्रभुज उसी वृत्त
एक दूसरा प रवार भी है: ΔABCaको
म अंत न हत एक सवागसम (दपण-प्र त बब) त्रभुज म बदल जाता है।

co m
m .
m ase
.co


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O

अंत न हत त्रभुज को O के चार ओर घुमाने पर उसी वृत्त म सवागसम त्रभुज मलता है।

संकेत: प्रमेय 1 क अ तीयता उलट दशा म है। तीन बदु न त क जए तो वृत्त अ तीय है। वृत्त न त क जए
तो उसम अनंत सवागसम त्रभुज अंत न हत कए जा सकते ह।

प्रश्नावली 5.2 — पृष्ठ 100
5.4 जीवा और जीवा ारा अंत रत कोण

प्र.1 प्रद शत क जए क कसी जीवा ारा वृत्त के कद्र के साथ बनने वाला त्रभुज, एक सम बाहु त्रभुज होता है।

दया गया है: कद्र O वाला वृत्त और उसक एक जीवा AB। OA और OB मलाइए। सद्ध करना है: ΔOAB सम बाहु है।

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OA = वृत्त की ित्रज्या

OB = वृत्त की ित्रज्या

∴ OA = OB
िजस ित्रभुज की दो भुजाएँ समान हों वह समि बाहु होता है, अत: ΔOAB समि बाहु है, िजसका आधार AB है।

इस अध्याय म बार-बार काम आने वाला प रणाम: आधार के कोण समान होते ह, अथात ∠OAB = ∠OBA।

O
r r

A B

ΔOAB क दो भुजाएँ त्रज्याएँ ह, अत: वे समान ह — त्रभुज सम बाहु है।

यह कथन क्य महत्त्वपूण है: इस अध्याय म जीवाओं से संबं धत प्रत्येक उपप त्त जीवा के सर को कद्र से मलाने
से आरंभ होती है। ऐसा करते ही दो समान भुजाएँ मुफ़्त म मल जाती ह और सम बाहु त्रभुज आधार के समान
कोण दे दे ता है। प्रमेय 2, 3, 4 और 9 इसी पर टक ह।

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प्र.2 प्रद शत क जए क य द ऐसे दो सम बाहु त्रभुज (प्रश्न 1 के त्रभुज) के आधार क लंबाई समान हो तो वे
सवागसम त्रभुज होते ह।

दया गया है: कद्र C वाले एक ही वृत्त क जीवाएँ AB और DE, जनम AB = DE है। सद्ध करना है: ΔCAB ≅ ΔCDE।

CA = CB = r (ित्रज्याएँ)

CD = CE = r (ित्रज्याएँ)

⇒ CA = CD और CB = CE

AB = DE (िदया गया है — दोनों आधार समान है)ं

SSS सव गं समता पितबंध ारा ΔCAB ≅ ΔCDE
इससे तुरंत क्या मलता है: सवागसम त्रभुज के संगत भाग समान होते ह, अत:

∠ACB = ∠DCE — समान जीवाएँ कें द पर समान कोण अंत िरत करती है ं (पमेय 2)

और C से खी ंची गई ऊँ चाइयाँ समान है ं — समान जीवाएँ कें द से समदू रस्थ है ं (पमेय 6)

संकेत: य द इसके स्थान पर दोन त्रभुज के C पर बने शीष कोण समान दए ह तो SAS लगाइए (दो त्रज्याएँ और
उनके बीच का कोण) और AB = DE प्राप्त होगा — यही प्रमेय 3 अथात वलोम है।

प्रश्नावली 5.3 — पृष्ठ 101

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5.5 जीवाओं के मध्य बदु और लंब सम भाजक

प्र.1 क्या आप स्पष्ट कर सकते ह क प्रमेय 4 का वलोम सत्य क्य है— कसी वृत्त के कद्र से जीवा पर ख चा गया लंब
उस जीवा को क्य सम भा जत करता है? (संकेत— चत्र 5.12 का उपयोग क जए। आपको बताया गया है क
∠CMA = ∠CMB = 90° है। आपको प्रद शत करना है क AM = BM है।)

A

M

B

C

चत्र 5.12, पृष्ठ 101 — कद्र C वाला वृत्त तथा जीवा AB; M, AB पर स्थत है और C को A, M तथा B से मलाया
गया है।

दया गया है: कद्र C वाला वृत्त, जीवा AB, और CM ⊥ AB जहाँ M, AB पर स्थत है। सद्ध करना है: AM = BM।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
ΔCMA और ΔCMB में —
m l as
.co
∠CMA = ∠CMB = 90° (िदया गया है — CM, AB पर लंब है)
m a g
l a se
CA = CB = r (ित्रज्याएँ — ये कण है)ं
g
aCM = CM (उभयिनष्ठ भुजा)

co m
. ag
RHS सव गं समता पितबंध ारा ΔCMA ≅ ΔCMB
em
l
∴ AM = BM (संगत भुजाएँ) — CM जीवा AB को समि भािजत करता है
g as
a
m
बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय से वैक ल्पक व ध —
co
em.
m l as
.co a g
AM² = CA² − CM² और BM² = CB² − CM²

a s em
l
CA = CB = r है और CM दोनों में वही है
a g ⇒ AM² = BM² ⇒ AM = BM (लंबाइयाँ धनात्मक होती है)ं

m a s
em
.co agl
a s
RHS ही क्य , SSS क्य नह : यहाँ हम समकोण और दोन कण दए गए ह और तीसरी भुजाओं का युग्म अभी
agतlहै। प्रमेय 4 म इसके ठ क वपरीत मध्य बदु दया था और समकोण सद्ध
ात नह है — यही तो RHS क स्थ
करना था; वहाँ SAS उपयुक्त था।

co m
m .
o m l a se
m .cएक वृत्त के अंतगत सम बाहु त्रभुज ABC अंत न हत है, जसम AB = aACg है। प्रद शत क जए क A से BC पर
e
las डाला गया लंब वृत्त के कद्र से होकर जाता है।
प्र.2

ag
se m
com g l a
m . a
ase
दया गया है: कद्र O वाले वृत्त म अंत न हत ΔABC, जसम AB = AC है। मान ली जए AD, A से BC पर लंब है। सद्ध करना है:

agl
O, AD पर स्थत है।
चरण 1 — A से डाला गया लंब BC का लंब सम भाजक है। ΔABD और ΔACD म — AB = AC ( दया गया), AD
उभय नष्ठ, ∠ADB = ∠ADC = 90°। RHS ारा ΔABD ≅ ΔACD, अत: BD = DC। इस प्रकार AD, BC पर लंब है और
co m
उसके मध्य बदु D से होकर जाता है — अथात यह BC का लंब सम भाजक ही है।
m .
o m l a se
g होता है। अत: O उसी रेखा पर है।
C .सेcसमदूरस्थ है। B और C से समदूरस्थ प्रत्येक बदु BC के लंब सम भाजक परaस्थत
चरण 2 — जीवा का लंब सम भाजक कद्र से होकर जाता है। BC एक जीवा है और OB = OC ( त्रज्याएँ), अत: O, B और

se m
a
agl c
m .
e
BC का लंब समि भाजक = रेखा AD (चरण 1)
m a s
O, BC के लंब समि भाजक पर िस्थत है (चरण 2)
e m . co agl
g l as
∴ O, AD पर िस्थत है — A से डाला गया लंब कें द से होकर जाता है
a

com
m .
m ase
.co


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A

O

B D C

AD, BC को समकोण पर सम भा जत करता है, अत: वह जीवा BC का लंब सम भाजक है और कद्र O से होकर जाएगा।

संकेत: सम बाहु त्रभुज म शीष से ख ची गई ऊँचाई, मा ध्यका, कोण सम भाजक और आधार का लंब
सम भाजक — सब एक ही रेखा होते ह, और यहाँ वह रेखा प रवृत्त का ास भी है।

प्र.3 कसी वृत्त क 6 सट मीटर और 8 सट मीटर लंबाई क दो समांतर जीवाएँ वृत्त के कद्र के वपरीत स्थत ह। य द
वृत्त क त्रज्या 5 सट मीटर हो तो जीवाओं के मध्य बदुओं के मध्य दूरी ात क जए।

दूरी = 7 सट मीटर।
कद्र O से प्रत्येक जीवा पर लंब डा लए। प्रमेय 5 के अनुसार प्रत्येक लंब अपनी जीवा को सम भा जत करता है, अत: उसका पाद
उस जीवा का मध्य बदु है।

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जीवा AB = 6 सेट
ं ीमीटर ⇒ आधी जीवा = 3 सेट
ं ीमीटर

d₁² = r² − 3² = 5² − 3² = 25 − 9 = 16 ⇒ d₁ = 4 सेट
ं ीमीटर

जीवा PQ = 8 सेट
ं ीमीटर ⇒ आधी जीवा = 4 सेट
ं ीमीटर

d₂² = r² − 4² = 5² − 4² = 25 − 16 = 9 ⇒ d₂ = 3 सेट
ं ीमीटर

जीवाएँ O के िवपरीत ओर है ं और दोनों लंब O से होकर जाती एक ही रेखा पर है।
ं

मध्यिबंद ुओ ं के मध्य दू री = d₁ + d₂ = 4 + 3 = 7 सेट
ं ीमीटर

6 सेमी

4

O

3

8 सेमी

कद्र के वपरीत ओर होने पर दोन दू रयाँ जुड़ती ह। ध्यान द जए, लंबी जीवा (8 सेमी) ही अ धक समीप (3 सेमी) है।

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संकेत: " वपरीत ओर" ⇒ दू रयाँ जो ड़ए; "एक ही ओर" ⇒ दू रयाँ घटाइए। इन प्रश्न म सबसे आम भूल यही
उलट-फेर है।

जाँच: प्रमेय 8 कहती है क लंबी जीवा कद्र के अ धक समीप होगी। यहाँ 8 सट मीटर वाली जीवा 3 सट मीटर पर है
और 6 सट मीटर वाली 4 सट मीटर पर — ठ क वैसा ही।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 102
5.6 जीवाओं क वृत्त के कद्र से दूरी

प्र.1 ग त व ध — एक वृत्ताकार कागज ली जए। कनारे क ओर से कागज को अंदर क ओर मो ड़ए। अब इस मोड़
को खोल द जए। कागज पर बना मोड़ अब एक जीवा के समान है ( चत्र 5.13 (ख) दे खए)। अब कागज को पुन:
इस प्रकार मो ड़ए क जीवा के अंत्य बदु आपस म मल। अब इस मोड़ को खोल द जए ( चत्र 5.13 (ग) दे खए)।
इन भाग क दू रयाँ मा पए। दोन मोड़ के चह्न के मध्य कोण मा पए। वृत्त के कद्र से जीवा के मध्य बदु के मध्य
क दूरी मा पए।

िच त्र 5.13 ( )
क िच त्र 5.13 ( )
ख िच त्र 5.13 ( )
ग

चत्र 5.13 (क), (ख), (ग), पृष्ठ 102 — वृत्ताकार कागज़ के छाया चत्र का पुनर खत रेखा चत्र — बना मोड़ा कागज़,
पहला मोड़ खोलने के बाद, तथा दूसरा मोड़ खोलने के बाद।

इस मोड़ने क क्रया से तीन बात नकलती ह और तीन इसी अध्याय क प्रमेय ह, केवल कागज के रूप म।

जीवा के दोन भाग समान ह। दूसरा मोड़ जीवा के अंत्य बदुओं को आपस म मला दे ता है, अत: वह चह्न जीवा का लंब
सम भाजक है — वह जीवा को उसके मध्य बदु पर ठ क आधा-आधा काटता है।
दोन मोड़ के चह्न के बीच का कोण 90° है। दूसरे चह्न पर मोड़ने से जीवा अपने ही ऊपर आ जाती है; यह तभी संभव है
जब वह चह्न जीवा से समकोण बनाए।
दूसरा चह्न कद्र से होकर जाता है, और कद्र से जीवा के मध्य बदु तक क दूरी ही कद्र से जीवा क दूरी है। दूसरा मोड़
वृत्त के कनारे को अपने ऊपर लाता है, अत: वह चह्न एक ास है और कद्र से होकर जाता है। " बदु से रेखा क दूरी" का अथ
सदै व लंबवत दूरी होता है, और यहाँ वह लंब ठ क कद्र से मध्य बदु तक का रेखाखंड है।

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पहला िचह्न = जीवा AB दू सरा िचह्न = AB का लंब समि भाजक

दू सरा िचह्न कें द O से होकर जाता है और AB को M पर िमलता है

AM = MB, ∠OMA = ∠OMB = 90°, और OM = O से जीवा की दू री

कागज को यह कैसे पता चलता है: मोड़ना परावतन है। दूसरा मोड़ वह परावतन है जो A और B को आपस म
बदल दे ता है और वृत्त को स्वयं पर लाता है। जो परावतन वृत्त को स्वयं पर लाता है वह कद्र को अपने स्थान पर ही
रखता है, अत: चह्न O से होकर जाएगा; और जो परावतन A व B को बदलता है वह AB का लंब सम भाजक ही
होगा। ये दोन कथन मलकर प्रमेय 4 और 5 ह।

प्र.2 अब पहली जीवा के समान लंबाई क अन्य जीवा बनाइए। आप यह कैसे करगे? आप स्वयं ही यह पता लगाइए।
कद्र से नई जीवा के मध्य बदु को मलाइए और इसक लंबाई मा पए। क्या यह कद्र से पहली जीवा क दूरी के
समान ही है?

समान लंबाई क दूसरी जीवा कैसे बनाएँ: परकार को पहली जीवा AB क लंबाई के बराबर खो लए। परकार क नोक वृत्त पर
कसी भी बदु P पर रखकर वृत्त को Q पर का टए। तब PQ = AB होगी। (अथवा: अनुरेखण पत्रक पर वृत्त और जीवा अनुरे खत
क जए और पत्रक को कद्र के चार ओर घुमाइए — अनुरे खत जीवा उसी लंबाई क नई जीवा पर आ जाएगी।)
हाँ — दूरी समान ही है। समान जीवाएँ कद्र से समदूरस्थ होती ह।

मान लीिजए M और N क्रमश: AB और PQ के मध्यिबंद ु है।
ं

ΔOMA और ΔONP में — OA = OP = r, AM = ½AB = ½PQ = PN, ∠OMA = ∠ONP = 90°

RHS सव गं समता ारा ΔOMA ≅ ΔONP ⇒ OM = ON

घूणन से यह स्पष्ट क्य हो जाता है: वृत्त म O के सापेक्ष पूण घूणन सम म त है। AB को O के चार ओर घुमाने पर
उतनी ही लंबाई क जीवा मलती है और O से ख चा गया लंब भी उसी के साथ घूम जाता है — अत: उसक लंबाई
बदल ही नह सकती। ऊपर द गई सवागसमता वाली उपप त्त यही बात कहती है, केवल अवलोकन के स्थान पर तक
के रूप म। यह अंतर महत्त्वपूण है — उदाहरण संकेत दे ते ह, उपप त्त नणय करती है। यही प रणाम प्रमेय 6 है।

प्रश्नावली 5.4 — पृष्ठ 104

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

5.6 जीवाओं क वृत्त के कद्र से दूरी
co m
e m.
m l as
.co a g
बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके प्रद शत क जए क क्य प्रमेय 6 अवश्य ही सत्य होनी चा हए।
m
प्र.1

l a se
a
उत्तरg
m
प्रमेय 6: कसी वृत्त क समान लंबाई क जीवाएँ वृत्त के कद्र से समदूरस्थ होती ह।

. co ag
e m
दया गया है: कद्र C और त्रज्या r वाला वृत्त; जीवाएँ AB और FG, जनम AB = FG है; E और H क्रमश: C से AB और FG पर
ख चे गए लंब के पाद ह। सद्ध करना है: CE = CH।
g l as
a
पमेय 5 के अनुसार कें द से खी ंचा गया लंब जीवा को समि भािजत करता है, अत:
co m
em.
as
AE = ½ AB और FH = ½ FG
m गया) ⇒ AE = FH
co(िदया g l
. a
em
AB = FG
a s
a gl
s
ΔCEA, E पर समकोण है, अत: बौधायन-पाइथागोरस पमेय से —
m a
m .co agl
se
CE² = CA² − AE² = r² − AE²

g l a
a
इसी पकार CH² = CF² − FH² = r² − FH²

co m
चूँिक AE = FH है, दोनों दाएँ पक्ष समान है ं —
m .
m as e
.co
CE² = CH² ⇒ CE = CH (लंबाइयाँ धनात्मक है)ं
a g l
se m
g l a
a यह उपप त्त क्य उपयोगी है: पाठ म द गई उपप त्त SSS या RHS का उपयोग करती है; यह उपप त्त पूरी प्रमेय
se m
m
को एक ही समीकरण म बदल दे ती है। सूत्र के रूप म यह कहती है — d = √(r² − (ℓ/2)²): दूरी केवल जीवा क
लंबाई ℓ पर नभर है, और कसी बात पर नह .।cℓoसमान होने पर d समान होना ही है — और इसी को उलटकर g l a
emजाती ह। a
पढ़ने से प्रमेय 7 तथा प्रमेय 8 भी तुरंतasमल
agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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प्र.2 चत्र 5.15 पर वचार क जए। य द CE, AB पर लंब है, CH, GH पर लंब है और CE = CH है तो प्रद शत क जए
क AB = GF है।

B E A

G

C

H

F

चत्र 5.15, पृष्ठ 104 — कद्र C वाला वृत्त; AB और GF जीवाएँ ह तथा C से AB पर E तक और GF पर H तक
रेखाखंड ख चे गए ह।

( चत्र 5.15 म C कद्र है; AB और GF जीवाएँ ह, E, AB पर और H, GF पर स्थत है। प्र तबंध यह है क CH, जीवा GF पर लंब
है — जैसा चत्र म समकोण चह्न से दशाया गया है।)
दया गया है: CE ⊥ AB, CH ⊥ GF, CE = CH। सद्ध करना है: AB = GF।

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ΔCEA और ΔCHF में —

∠CEA = ∠CHF = 90° (िदया गया)

CA = CF = r (ित्रज्याएँ — ये कण है)ं
CE = CH (िदया गया)

RHS सव गं समता पितबंध ारा ΔCEA ≅ ΔCHF

⇒ AE = FH (संगत भुजाएँ)

पमेय 5 के अनुसार E और H क्रमश: AB और GF के मध्यिबंद ु है,ं अत:

AB = 2 AE और GF = 2 FH

∴ AB = 2 AE = 2 FH = GF

मध्य बदु वाला चरण क्य आवश्यक है: सवागसमता से केवल आधी जीवाएँ समान मलती ह। प्रमेय 5 — कद्र से
ख चा गया लंब जीवा को सम भा जत करता है — ही AE = FH को AB = GF म बदलती है। यह प्रश्न वस्तुत:
प्रमेय 7 अथात प्रमेय 6 का वलोम सद्ध करता है।

ध्यान द जए: मु द्रत प्रश्न म "CH, GH पर लंब है" लखा है। चूँ क H जीवा GF पर ही स्थत है, अ भप्राय जीवा
GF से है; चत्र 5.15 म समकोण H पर जीवा GF के साथ ही अं कत है।

प्र.3 बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग करते हुए प्रश्न 2 को हल क जए।

दया गया है: CE ⊥ AB, CH ⊥ GF, CE = CH, जहाँ C कद्र और त्रज्या r है। सद्ध करना है: AB = GF।

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ΔCEA, E पर समकोण है: AE² = CA² − CE² = r² − CE²

ΔCHF, H पर समकोण है: FH² = CF² − CH² = r² − CH²

िदया है CE = CH, अत: CE² = CH², इसिलए

AE² = FH² ⇒ AE = FH

पमेय 5 के अनुसार E और H जीवाओं को समि भािजत करते है:ं

AB = 2 AE और GF = 2 FH

∴ AB = GF

संकेत: अनुभाग 5.6 और 5.6.1 का पूरा सार एक ही सवस मका म है — (आधी जीवा)² + d² = r²। r को स्थर
र खए। तब d जीवा को तय करता है और जीवा d को। समान जीवाएँ ⇒ समान d (प्रमेय 6); समान d ⇒ समान
जीवाएँ (प्रमेय 7); बड़ी जीवा ⇒ छोटा d (प्रमेय 8)।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 104
5.6.1 दो असमान जीवाओं म से कौन-सी वृत्त के कद्र से अ धक दूरी पर है?

प्र.1 ग त व ध — एक वृत्त बनाइए। व भन्न लंबाइय क जीवाएँ बनाइए। वृत्त के कद्र से प्रत्येक जीवा पर लंब डा लए।
जीवाओं क लंबाई और कद्र से इनक दूरी को एक ता लका (ता लका 1) म ल खए। आपने क्या अवलोकन
कया?

अवलोकन: जीवा जतनी लंबी होती है, कद्र से उसक दूरी उतनी ही कम होती है।
नीचे 5 सट मीटर त्रज्या वाले वृत्त के लए भरी हुई ता लका द गई है (अपने वृत्त के लए भी ऐसा ही क जए और मलाइए)।

जीवा क लंबाई (सेमी) 10 9 8 6 4 2

कद्र से दूरी (सेमी) 0 2.18 3 4 4.58 4.90

पत्येक मान उसी समकोण ित्रभुज से आता है —

d = √(r² − (आधी जीवा)²) = √(25 − (आधी जीवा)²)

जै से जीवा 8 ⇒ d = √(25 − 16) = 3; जीवा 6 ⇒ d = √(25 − 9) = 4

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ऐसा क्य होता है: r स्थर है, अत: d² + (आधी जीवा)² एक अचर रा श है (यहाँ 25)। दोन वग म से एक बढ़े गा
तो दूसरा घटे गा ही। अत: लंबी जीवा का अथ है छोट दूरी — यही प्रमेय 8 है।

दोन चरम स्थ तयाँ दे खए: सबसे लंबी जीवा ास है, 10 सट मीटर, दूरी 0 — वह कद्र से होकर जाती है। जीवा
को बाहर क ओर धके लए तो वह एक बदु म समट जाती है और दूरी पूरी त्रज्या 5 सट मीटर के नकट पहुँच जाती
है।

प्रश्नावली 5.5 — पृष्ठ 105–106
5.6.1 दो असमान जीवाओं म से कौन-सी वृत्त के कद्र से अ धक दूरी पर है?

प्र.1 वृत्त क जीवा क लंबाई ात क जए, जसक त्रज्या 7 सट मीटर है और कद्र से लंबवत दूरी 6 सट मीटर है।

जीवा = 2√13 सट मीटर ≈ 7.2 सट मीटर।

मान लीिजए AB जीवा है, O कें द है और M, O से खी ंचे गए लंब का पाद है।

पमेय 5 के अनुसार M, AB का मध्यिबंद ु है और ΔOMA, M पर समकोण है।

AM² = OA² − OM² = 7² − 6² = 49 − 36 = 13

AM = √13 सेट
ं ीमीटर

AB = 2 × AM = 2√13 सेट
ं ीमीटर ≈ 7.21 सेट
ं ीमीटर

स्वयं जाँ चए: उत्तर ास 14 सट मीटर से कम होना चा हए — और है भी। साथ ही 7 सट मीटर त्रज्या के लए 6
सट मीटर काफ़ बड़ी दूरी है, अत: छोट -सी जीवा मलना अपे क्षत ही था।

प्र.2 स्पष्ट क जए क दया गया कथन सत्य क्य है— य द कद्र से जीवा क लंबवत दूरी d है और त्रज्या r है तो जीवा
क लंबाई 2√(r² − d²) होगी।

दया गया है: कद्र O और त्रज्या r वाला वृत्त; जीवा AB, जसक O से लंबवत दूरी d है। सद्ध करना है: AB = 2√(r² − d²)।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
मान लीिजए M, O से AB पर खी ंचे गए लंब का पाद है, अत: OM = d और ∠OMA = 90°।

पमेय 5 (कें द cसेoखी
. las
mंचा गया लंब जीवा को समि भािजत करता है) से AM = MB = ½gAB।
a
m
gl ase
aसमकोण ित्रभुज OMA में बौधायन-पाइथागोरस पमेय से —

co m
. ag
OA² = OM² + AM²
e m
r² = d² + AM²
g l as
AM² = r² − d² a

co m
m.
AM = √(r² − d²)

m as e
.co a g l
se m
AB = 2 AM = 2√(r² − d²)
g l a
a
m a s
m .co agl
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a g

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a O
r se m
com g l a
m . d a
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agl
A √(r² − d²) M mB
m .co
a se
.com a g l
m
ase
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
as
त्रज्या, दूरी और आधी जीवा वाला यही एक समकोण त्रभुज पूरे अध्याय क गणनाएँ चलाता है।

a g l

co m
m .
m ase
.co


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सूत्र को प ढ़ए: d = 0 र खए तो AB = 2r मलता है — ास, सबसे लंबी जीवा। d को r क ओर बढ़ाइए तो
जीवा घटकर शून्य क ओर जाती है। और चूँ क d बढ़ने पर r² − d² घटता है, अ धक दूरी का अथ सदै व छोट जीवा
— यही प्रमेय 8 एक पं क्त म है।

प्र.3 कसी वृत्त म, य द कसी जीवा AB क कद्र से दूरी अन्य जीवा CD क कद्र से दूरी क दोगुनी है तो क्या हम
नष्कष नकाल सकते ह क CD = 2AB है? कारण स हत उत्तर द जए।

नह , ऐसा नष्कष नह नकाला जा सकता। CD = 2AB सामान्यत: असत्य है; यह केवल एक वशेष स्थ त म ही सत्य होता है।

मान लीिजए CD की कें द से दू री d है, अत: AB की दू री 2d है।

AB = 2√(r² − 4d²) और CD = 2√(r² − d²)

r = 10 सेट
ं ीमीटर और d = 3 सेट
ं ीमीटर लीिजए —

CD = 2√(100 − 9) = 2√91 ≈ 19.08 सेट
ं ीमीटर
AB = 2√(100 − 36) = 2√64 = 16 सेट
ं ीमीटर
CD / AB ≈ 1.19, 2 नही।
ं

तो CD = 2AB कब होगा?

2√(r² − d²) = 2 × 2√(r² − 4d²)

r² − d² = 4(r² − 4d²)

r² − d² = 4r² − 16d²

15d² = 3r² ⇒ r² = 5d², अथ त r = d√5

जाँच — d = 2, r = 2√5: CD = 2√(20 − 4) = 8, AB = 2√(20 − 16) = 4 ✓

यह अनुमान क्य गलत है: दूरी और जीवा क लंबाई परस्पर समानुपाती नह ह। ये d² + (आधी जीवा)² = r² ारा
जुड़ी ह, जो एक वग संबंध है, अत: एक रा श को दोगुना करने से दूसरी न आधी होती है, न दोगुनी। प्रमेय 8 से हम
केवल इतना कह सकते ह क AB कद्र से अ धक दूर है, अत: AB छोट जीवा है और CD > AB। CD, AB का
1.1 गुना है या ठ क 2 गुना — यह r पर नभर करता है।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 107
5.7 वृत्त के चाप ारा अंत रत कोण

प्र.1 प्रश्न — एक वृत्त बनाया गया है जसका कद्र O है तथा A, B, C और D वृत्त पर स्थत बदु ह ( चत्र 5.19 दे खए)।
चाप AKB तथा चाप CLD ारा कद्र O पर अंत रत कोण मा पए। य द कद्र पर अंत रत कोण 180° से कम है तो
यह एक लघु चाप है। य द कद्र पर अंत रत कोण 180° से अ धक है तो यह एक द घ चाप है। बताइए क क्या चाप
AKB और CLD लघु चाप ह या द घ चाप ह।

C

B

L

K O

A

D

चत्र 5.19, पृष्ठ 107 — कद्र O वाला वृत्त; A, B, C, D, K तथा L वृत्त पर स्थत ह। छायां कत भाग O पर बने कोण ह।

चत्र 5.19 म चाँदे से दोन कोण मापने पर —

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चाप O पर अंत रत कोण 180° से कम / अ धक प्रकार

चाप AKB लगभग 100° 180° से कम लघु चाप

चाप CLD लगभग 205° (पितवत ) 180° से अ धक द घ चाप

चत्र को सही ढं ग से कैसे पढ़। चाप ारा अंत रत कोण वह कोण है जो त्रज्या चाप के एक सरे से दूसरे सरे तक उसी चाप के
अनु दश घूमने पर बनाती है।

चाप AKB के लए OA से OB तक OK से होकर जाना है। K, A और B के बीच छोटे माग पर है, अत: साधारण (अप्र तवत )
कोण AOB बनता है — लगभग 100°।
चाप CLD के लए OC से OD तक OL से होकर जाना है। L लंबे माग पर स्थत है, अत: प्र तवत कोण COD बनता है —
लगभग 205°। सीधा कोण COD लगभग 155° है, कतु वह C से D तक जाने वाले दूसरे चाप का कोण है, जस पर L नह
है।

चाप CLD का कोण + C से D तक के दू सरे चाप का कोण = 360°

205° + 155° = 360° ✓

बीच का अक्षर क्य आवश्यक है: "चाप CD" कहना अस्पष्ट है — C और D को जोड़ने वाले दो चाप होते ह।
CLD लखने से बीच का बदु L नाम म आ जाता है और यह न त हो जाता है क दोन म से कौन-सा चाप है।
पुस्तक चाप के लए तीन अक्षर इसी लए लखती है।

प्र.2 ग त व ध — एक वृत्त बनाइए, जसम एक जीवा AB हो। एक चाप AKB चु नए, जो जीवा AB के अंत्य बदुओं A
व B एवं वृत्त पर बदुओं A व B के मध्य कसी बदु K से मलकर बनी हो। चाप AKB ारा कद्र पर अंत रत कोण
को मा पए। वृत्त पर स्थत कोई तीन बदु P, Q, R ली जए, जो चाप AKB के बाहर स्थत ह । चाप AKB ारा
बदुओं P, Q, R पर अंत रत कोण मा पए। आपने क्या ध्यान दया?

दो बात सामने आती ह और दोन मलकर प्रमेय 9 ह।

तीन कोण ∠APB, ∠AQB और ∠ARB परस्पर समान मलते ह — वृत्त पर (चाप AKB के बाहर) बदु कह भी ली जए,
कोई अंतर नह पड़ता।
इनम से प्रत्येक कोण, चाप AKB ारा कद्र पर अंत रत कोण का ठ क आधा है।

एक नमून ा माप (स्वयं बनाकर जाँिचए) —

कें द पर कोण, ∠AOB = 110°

∠APB = ∠AQB = ∠ARB = 55° = ½ × 110°

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ऐसा क्य होना ही है: P को कद्र O से मलाइए और PO को आगे बढ़ाकर वृत्त पर मलाइए। इससे ∠APB दो
भाग म बँट जाता है और प्रत्येक भाग ऐसे सम बाहु त्रभुज म है जसक दो समान भुजाएँ त्रज्याएँ ह। बाह्य कोण
प्रमेय प्रत्येक भाग को कद्र पर दोगुना कर दे ती है। दोन भाग को जोड़ने पर ∠AOB = 2∠APB मलता है — और
इस तक म कह भी यह नह आया क P कहाँ है, केवल यह क वह चाप के बाहर वृत्त पर है। इसी लए P क हर
स्थ त एक ही उत्तर दे ती है।

यह भी क जए: अब वृत्त के अंदर एक बदु F और बाहर एक बदु G लेकर ∠AFB और ∠AGB मा पए। आपको
∠AGB < ∠APB < ∠AFB मलेगा। कोण क यह अप रवतनीयता केवल वृत्त पर स्थत बदुओं क वशेषता है —
चत्र 5.25 दे खए।

प्रश्नावली 5.6 — पृष्ठ 110–111
5.7.1 वृत्त के चाप ारा वृत्त के उस बदु पर अंत रत कोण जो चाप के बाहर है

प्र.1 कसी वृत्त म जसका कद्र O है, कद्र य कोण AOB क माप 60° है। य द वृत्त क त्रज्या 12 सट मीटर है तो जीवा
AB क लंबाई क्या है?

AB = 12 सट मीटर — जीवा त्रज्या के बराबर है।

ΔOAB में: OA = OB = 12 सेट
ं ीमीटर (ित्रज्याएँ) ⇒ ित्रभुज समि बाहु है

∠OAB = ∠OBA (समि बाहु ित्रभुज के आधार के कोण)

∠OAB + ∠OBA + 60° = 180°

2 ∠OAB = 120° ⇒ ∠OAB = ∠OBA = 60°

तीनों कोण 60° के है,ं अत: ΔOAB समबाहु है

∴ AB = OA = OB = 12 सेट
ं ीमीटर

जीवा के सूत्र से जाँच: O से AB क दूरी d = 12 cos 30° = 6√3 है, अत: AB = 2√(144 − 108) = 2√36 =
12 सट मीटर ✓

याद रखने योग्य: 60° का कद्र य कोण सदै व त्रज्या के बराबर जीवा दे ता है। इसी लए वृत्त के अंतगत बने
समषट् भुज क भुजा त्रज्या के बराबर होती है — 60° के छह भाग मलकर 360° बना दे ते ह।

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
मान ली जए, एक वृत्त का कद्र O है और वृत्त पर स्थत दो बदु A और B ह। (i) क्या AB के एक ही ओर वृत्त पर
emहै क य द ∠AXB
प्र.2

m a s
स्थत दो बदु X, Y इस प्रकार हो सकते ह क ∠AXB, ∠AYB से भन्न हो? (ii) क्या यह सत्य
= ∠AYB . a gl हो और X व Y वृत्त पर
coहो तो बदु X व Y वृत्त पर एक ही ओर स्थत ह? (iii) य द ∠AXB = ∠AYB
a s emनह ह तो क्या A, B और X से होकर जाने वाला वृत्त बदु Y से होकर जाएगा?
l
स्थत
ag
m

. co ag
m
(i) नह । य द X और Y दोन वृत्त पर ह और जीवा AB के एक ही ओर ह तो वे एक ही चाप पर ह गे, अत: सदै व ∠AXB =

ase
l
∠AYB।

a g
m
X और Y दोनों एक ही चाप AB के बाहर है,ं अत: पमेय 9 से
co
em.
as
∠AXB = ½ (उस चाप ारा O पर अंत िरत कोण) = ∠AYB

. cत्रoताmशेष नही ं रहती — कोण बदल ही नही ं सकता। a g l
em
कोई स्वतं
a s
gl
a (ii) नह , यह सदै व सत्य नह है। कोण के समान होने से X और Y का AB के एक ही ओर होना आवश्यक नह है।
a s
. com एक चक्रीय चतभु जु है, अत: agl
s em
यिद X दीघ चाप पर हो और Y लघु चाप पर, तो
a
AXBY

agl
∠AXB + ∠AYB = 180° (पमेय 11)

m
ये दोनों समान तभी होंगे जब पत्येक 90° हो, अथ त जब AB एक व्यास हो।

. co
e m
m l as
m .co
पत् युद ाहरण: मान लीिजए AB एक व्यास है। X को AB के ऊपर और Y को नीचे लीिजए।
a g
a s e∠AXB
gl
= ∠AYB = 90° (अधवृत्त का कोण), िफर भी X और Y िवपरीत ओर है।
ं
a
se m
अत: सही कथन यह है — य द ∠AXB = ∠AYB हो और AB
com
ास न हो तो X और Y एक ही ओर ह गे; य द AB ास हो तो यह
g l a
m . a
e
आवश्यक नह ।

g l
(iii) हाँ, बशत X और Y रेखा AB के एक aहीs ओर स्थत ह । यही तो प्रमेय 10 है।
a
A, B, X असंरेखीय है ं ⇒ इनसे होकर एक वृत्त जाता है (पमेय 1)
co m
m .
m as e
l
∠AXB = ∠AYB है और X, Y, AB के एक ही ओर है ं

m .⇒coपमेय 10 से A, B, X, Y संवृ ीय है ं a g
ase
त्त

agl ⇒ A, B, X से होकर जाने वाला वृत्त Y से भी होकर जाएगा
c
m .
m a s e
em . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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"एक ही ओर" वाली शत क्य नह हटाई जा सकती: Y को रेखा AB के सापेक्ष पराव तत करके Y′ ली जए। तब
∠AY′B = ∠AYB होगा, कतु Y′ प्राय: A और B से होकर जाने वाले कसी अन्य वृत्त पर होगा। प्रमेय 10 क
उपप त्त "Y अंदर" और "Y बाहर" — दोन स्थ तय को बाह्य कोण प्रमेय से काटती है, और उस तक के लए Y का
X वाली ही ओर होना आवश्यक है।

प्र.3 चत्र 5.26 म x ात क जए।

D

100°

A C

x

B

चत्र 5.26, पृष्ठ 111 — A, D, C तथा B एक ही वृत्त पर स्थत ह; D पर अं कत कोण 100° है और B पर अं कत कोण
x है।

x = 80°।

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चत्र 5.26 म चार बदु A, D, C, B एक वृत्त पर स्थत ह, अत: ADCB एक चक्र य चतुभुज है। 100° का कोण D पर और x का
कोण B पर अं कत है, और D तथा B सम्मुख शीष ह।

पमेय 11 के अनुसार चक्रीय चत भु ज
ु के सम्मुख कोणों का योगफल 180° होता है —

∠ADC + ∠ABC = 180°

100° + x = 180°

x = 180° − 100° = 80°

D

100°

A C

x

B
ADCB चक्र य है, अत: सम्मुख शीष D और B पर बने कोण का योग 180° होगा।

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सम्मुख कोण का योग 180° क्य : ∠ADC चाप ABC पर खड़ा है और ∠ABC चाप ADC पर। ये दोन चाप
मलकर पूरा वृत्त बनाते ह, अत: दोन कद्र य कोण का योग 360° है। प्रत्येक अंत रत कोण अपने कद्र य कोण का
आधा है, अत: दोन का योग ½ × 360° = 180° होगा।

स्वयं जाँ चए: दूसरे युग्म का योग भी 180° होना चा हए। अत: यहाँ ∠DAB + ∠DCB = 180° भी होगा, चाहे
उनके अलग-अलग मान कुछ भी ह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 113
5.8 बदुओं क संवृत्तीयता

प्र.1 प्रश्न — एक चक्र य चतुभुज के कोण क माप ∠A = 80°, ∠B = 110°, ∠C = 100° तथा ∠D = 70° है। क्या
ऐसे चतुभुज क रचना क जा सकती है? स्पष्ट क जए क क्य या क्य नह ।

हाँ, ऐसे चतुभुज क रचना क जा सकती है। दोन जाँच पूरी होती ह।

जाँच 1 — चत भ ु के कोणों का योग:
ु ज

80° + 110° + 100° + 70° = 360° ✓

जाँच 2 — च क्र ीय चत भ ु के सम्मुख कोण:
ु ज

∠A + ∠C = 80° + 100° = 180° ✓

∠B + ∠D = 110° + 70° = 180° ✓

सम्मुख कोण के दोन युग्म का योग 180° है, अत: प्रमेय 12 के अनुसार चार शीष अवश्य ही एक वृत्त पर स्थत ह गे। ऐसा चक्र य
चतुभुज वद्यमान है।

नणायक जाँच दूसरी ही क्य है: प्रत्येक चतुभुज के कोण का योग 360° होता ही है, चक्र य हो या न हो — अत:
केवल जाँच 1 से वृत्त के वषय म कुछ सद्ध नह होता। असली काम प्रमेय 12 करती है — सम्मुख कोण संपूरक ⇒
संवृत्तीय। यह भी ध्यान द जए क एक बार ∠A + ∠C = 180° हो जाने पर ∠B + ∠D = 360° − 180° =
180° स्वत: मल जाता है; दोन प्र तबंध स्वतंत्र नह ह।

यह भी क जए: ∠C को 95° कर द जए और योग 360° बनाए रखने के लए ∠D = 75° ली जए। अब ∠A +
∠C = 175° ≠ 180° है, अत: इन कोण वाला चतुभुज तो बनेगा — कतु उसके चार शीष से होकर कोई वृत्त
नह जा सकता।

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अं तम प्रश्नावली — पृष्ठ 114–116
संपूण अध्याय

प्र.1 कसी वृत्त म, कद्र से 5 सट मीटर दूरी पर एक जीवा है। य द वृत्त क त्रज्या 13 सट मीटर है तो जीवा क लंबाई
क्या है?

जीवा = 24 सट मीटर।

(आधी जीवा)² = r² − d² = 13² − 5² = 169 − 25 = 144

आधी जीवा = 12 सेट
ं ीमीटर

जीवा = 2 × 12 = 24 सेट
ं ीमीटर

संकेत: (5, 12, 13) एक बौधायन त्रक है, अत: वगमूल नकालने क आवश्यकता ही नह पड़ती। (3,4,5),
(5,12,13), (8,15,17) और (7,24,25) याद र खए — इस प्रश्नावली के प्रश्न इन्ह से बने ह।

प्र.2 एक वृत्त का चाप कद्र पर 70° कोण अंत रत करता है। इस चाप ारा वृत्त के कसी बदु पर अंत रत कोण क माप
क्या है?

35°, वृत्त के उस कसी भी बदु पर जो उस चाप के बाहर स्थत है।

पमेय 9 से: कें द पर कोण = 2 × चाप के बाहर वृत्त के िबंद ु पर बना कोण
70° = 2 × िबंद ु पर कोण

िबंद ु पर कोण = 70° ÷ 2 = 35°

उत्तर बदु पर नभर क्य नह करता: आधा करने वाले तक म केवल इतना ही उपयोग होता है क बदु वृत्त पर है
और चाप के बाहर है — कहाँ है, यह कभी नह । अत: ऐसा प्रत्येक बदु 35° ही दे ता है; इसी लए एक ही वृत्तखंड के
सभी कोण समान होते ह।

सावधान: दूसरी ओर का बदु — अथात 70° वाले चाप पर ही स्थत बदु — जीवा को 180° − 35° = 145° के
कोण पर दे खेगा, 35° पर नह । प्रमेय चाप के बाहर स्थत बदुओं के वषय म है।

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
कसी वृत्त का ास 26 सट मीटर है। वृत्त म 24 सट मीटर लंबी जीवा बनाई गई है। वृत्त के कद्र से जीवा क दूरी
e
प्र.3

m l as
.co
ात क जए।

a g
se m
g l a
a

दूरी = 5 सट मीटर।

com
m . ag
se
ित्रज्या r = 26 ÷ 2 = 13 सेट
ं ीमीटर
l a
ं ीमीटरa(पgमेय 5: कें द से खी ंचा गया लंब जीवा को समि भािजत करता है)
आधी जीवा = 24 ÷ 2 = 12 सेट

co m
em.
as
d² = r² − (आधी जीवा)² = 13² − 12² = 169 − 144 = 25
m
cं oीमीटर
d = 5 से.ट g l
em a
a s
a gl
संकेत: यह प्रश्न 1 को उलटकर पूछा गया है — वही वृत्त, वही जीवा, केवल अ ात रा श समीकरण के दूसरे पक्ष म
m a s
.co agl
चली गई है।

se m
g l a
a
m
प्र.4 कसी वृत्त क त्रज्या 15 सट मीटर है। वृत्त म एक जीवा बनाई गई है। वृत्त के कद्र से जीवा क दूरी 9 सट मीटर है।
जीवा क लंबाई क्या है?
. co
e m
उत्तर .co
m g l as
em= 24 सट मीटर। a
a s
agl
जीवा

se m
जीवा = 2√(r² − d²)
com g l a
m . a
ase
= 2√(15² − 9²)

= 2√(225 − 81) agl
= 2√144 = 2 × 12 = 24 सेट
ं ीमीटर
co m
m .
o m l a se
agमीटर, ास 30 सट मीटर से कम है
.cस्वयं जाँ चए: (9, 12, 15) वस्तुत: (3, 4, 5) का तीन गुना है। और 24 सट
m — जैसा प्रत्येक जीवा के लए होना ही चा हए।
l a se
ag
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m a
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g l as
a

co m
m .
m ase
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प्र.5 सद्ध क जए क कसी जीवा का लंब सम भाजक वृत्त के कद्र से होकर जाता है।

दया गया है: कद्र O वाला वृत्त और उसक जीवा AB। सद्ध करना है: AB का लंब सम भाजक O से होकर जाता है।

OA = OB = r (दोनों ित्रज्याएँ है)ं

अत: O, A और B से समदू रस्थ है।

A और B से समदू रस्थ पत्येक िबंद ु AB के लंब समि भाजक पर िस्थत होता है।

∴ O, AB के लंब समि भाजक पर िस्थत है।

बदुपथ वाला चरण वस्तार से। मान ली जए M, AB का मध्य बदु है और OM मलाइए। ΔOMA और ΔOMB म — OA =
OB ( त्रज्याएँ), AM = BM (M मध्य बदु है), OM उभय नष्ठ। SSS ारा ΔOMA ≅ ΔOMB, अत: ∠OMA = ∠OMB। ये
रेखीय युग्म ह, अत: ∠OMA + ∠OMB = 180°, जससे ∠OMA = ∠OMB = 90°। इस प्रकार OM, AB पर लंब है और उसे
सम भा जत करता है — अथात OM ही लंब सम भाजक है और वह O से होकर जाता है।

यह छोटा-सा प रणाम इतना महत्त्वपूण क्य है: प रकद्र क रचना इसी पर टक है। तीन बदु दए ह तो प्रत्येक
भुजा का लंब सम भाजक कद्र को अपने म समेटे रहता है, अत: दो सम भाजक ही कद्र को न त कर दे ते ह।
दए गए वृत्त का कद्र खोजने क ावहा रक व ध भी यही है — कोई भी दो जीवाएँ ख चए, उनके लंब
सम भाजक बनाइए, वे कद्र पर काटगे।

प्र.6 कसी वृत्त का ास AB है। वृत्त क प र ध पर कोई बदु C स्थत है। ∠ACB क माप क्या है? अपने तक क
ाख्या क जए।

∠ACB = 90° — अधवृत्त का कोण समकोण होता है।

मान लीिजए O कें द है, अत: A, O, B संरेखीय है ं और AB व्यास है।

A से B तक वह चाप लीिजए िजस पर C नही ं है। वह चाप O पर ऋजु कोण अंत िरत करता है —

∠AOB = 180°

C वृत्त पर उस चाप के बाहर िस्थत है, अत: पमेय 9 से

∠ACB = ½ ∠AOB = ½ × 180° = 90°

सम बाहु त्रभुज से दूसरी उपप त्त। OC मलाइए। तब OA = OC = OB = r, अत: ΔOAC और ΔOBC दोन सम बाहु ह।

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मान लीिजए ∠OAC = ∠OCA = p और ∠OBC = ∠OCB = q

ΔABC के कोणों का योग: p + q + ∠ACB = 180°, और ∠ACB = p + q

अत: 2(p + q) = 180° ⇒ p + q = 90° ⇒ ∠ACB = 90°

क्या आप जानते ह? इसका वलोम भी सत्य है और बहुत काम आता है: य द A और B से होकर जाने वाले वृत्त पर
कसी बदु C के लए ∠ACB = 90° हो तो AB अवश्य ही ास होगा। नीचे प्रश्न 15 इसी से हल होता है।

प्र.7 ABCD एक चक्र य चतुभुज है जो एक वृत्त के अंतगत बनाया गया है। य द ∠A क माप 75° है तो ∠C क माप
कतनी होगी? य द ∠B क माप 110° है तो ∠D क माप कतनी होगी?

∠C = 105° और ∠D = 70°।

पमेय 11 से चक्रीय चत भु ज
ु के सम्मुख कोण संपूरक होते है।
ं

∠A + ∠C = 180° ⇒ 75° + ∠C = 180° ⇒ ∠C = 105°

∠B + ∠D = 180° ⇒ 110° + ∠D = 180° ⇒ ∠D = 70°

स्वयं जाँ चए: 75° + 110° + 105° + 70° = 360° ✓ — चतुभुज के कोण का योग ठ क आता है, जैसा आना
चा हए।

प्र.8 चतुभुज PQRS एक वृत्त के अंतगत बनाया गया है। य द ∠P = (2x + 10)° और ∠R = (3x − 20)° है तो x का
मान और ∠P व ∠R क माप ात क जए।

x = 38, ∠P = 86° और ∠R = 94°।

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चत भ ु PQRS में P और R सम्मुख शीष है,ं अत:
ु ज

∠P + ∠R = 180°

(2x + 10) + (3x − 20) = 180
5x − 10 = 180

5x = 190

x = 38

∠P = 2(38) + 10 = 76 + 10 = 86°

∠R = 3(38) − 20 = 114 − 20 = 94°

स्वयं जाँ चए: 86° + 94° = 180° ✓, और दोन कोण धनात्मक तथा 180° से कम ह, अत: चतुभुज वास्त वक
है।

प्र.9 16 सट मीटर लंबी जीवा क वृत्त के कद्र से दूरी 6 सट मीटर है। वृत्त क त्रज्या ात क जए।

त्रज्या = 10 सट मीटर।

आधी जीवा = 16 ÷ 2 = 8 सेट
ं ीमीटर
r² = d² + (आधी जीवा)² = 6² + 8² = 36 + 64 = 100

r = 10 सेट
ं ीमीटर

संकेत: (6, 8, 10), (3, 4, 5) का दोगुना है। प्रश्न 1, 3, 4 और 9 म एक ही संबंध r² = d² + (आधी जीवा)² है,
बस हर बार अ ात रा श बदल जाती है।

प्र.10 एक चक्र य चतुभुज क भुजाएँ 5, 5, 12 और 12 इकाई ह। चतुभुज का क्षेत्रफल ात क जए।

क्षेत्रफल = 60 वग इकाई।

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मान ली जए चतुभुज ABCD है जसम AB = BC = 5 और CD = DA = 12 है — दोन समान युग्म आस-पास ह, अत: यह एक
पतंग (काइट) है। वकण BD मलाइए।

पतं ग BD के सापेक्ष समिमत है, अत: ∠A = ∠C।

ABCD चक्रीय है, अत: ∠A + ∠C = 180° (पमेय 11)

⇒ 2∠A = 180° ⇒ ∠A = ∠C = 90°

अत: ΔABD, A पर और ΔCBD, C पर समकोण है।
ं

BD² = AB² + AD² = 5² + 12² = 25 + 144 = 169 ⇒ BD = 13

क्षेत्रफल = ΔABD का क्षेत्रफल + ΔCBD का क्षेत्रफल

= ½ × 5 × 12 + ½ × 5 × 12

= 30 + 30 = 60 वग इकाई

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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m 13 l as
m .co 12 a g
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m .co agl
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agl पतंग चक्र य है, अत: A और C पर बने दोन समान कोण 90° के ही ह गे — और BD ास बन जाता है।

se m
o m l a
.c
12m= 60 वग इकाई ही आएगा।
य द भुजाएँ 5, 12, 5, 12 के क्रम म ह : सम्मुख भुजाएँ
आयत होता है (प्रश्न 14), अत: क्षेत्रफल = 5 × e
समान ह, अत: चतुभुज समांतर चतुभुज है; और चक्र य समांतर चतुभुज
ag
g l as
a
दोन क्रम म 60 क्य : दोन ही स्थ तय म आकृ त 5 और 12 भुजाओं तथा 13 कण वाले दो समकोण त्रभुज म

co m
.
बँट जाती है। वस्तुत: दोन म BD = 13 एक ास है, अत: प र त्रज्या भी दोन म 6.5 इकाई है।

e m
m l as
.co a g
a s em
agl प्र.11 एक चक्र य चतुभुज पर वचार क जए। चतुभुज के प रवृत्त क रचना कए बना हम कस प्रकार ात कर

.c
m
सकते ह क प रवृत्त का कद्र चतुभुज के अंदर या बाहर स्थत होगा? इसे ात करने क सबसे उपयुक्त व ध

m a s e
co agl
क्या है?

m .
ase
a g l
सबसे उपयुक्त व ध: एक वकण ख चए और उससे बने दोन त्रभुज को दे खए।

co m
m .
m as e
.co


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कोई एक वकण, मान ली जए AC, चक्र य चतुभुज ABCD को ΔABC और ΔACD म बाँट दे ता है। दोन त्रभुज उसी वृत्त के
अंतगत ह, अत: चतुभुज का प रकद्र इन दोन त्रभुज का भी प रकद्र है। और त्रभुज का प रकद्र कहाँ रहता है, यह हम जानते ही ह
—

त्रभुज ABC या ACD प रकद्र कहाँ ABCD के लए नष्कष

इनमें से एक न्यूनकोण ित्रभुज है उसी ि भुज के अंद र
त्र चतुभुज के अंदर

इनमें से एक समकोण ित्रभुज है उसके कण के म यिबंद ु पर
ध् वकण AC पर (AC ास है)

दोनों अिधक कोण ित्रभुज है ं दोनों के बाहर चतुभुज के बाहर

भुजाओं क सहायता से समतुल्य जाँच। चतुभुज क प्रत्येक भुजा एक चाप काटती है। कद्र अंदर तभी होगा जब कोई भी भुजा
अधवृत्त से बड़ा चाप न काटे । चूँ क अंत रत कोण चाप का आधा होता है, यह जाँच चाँदे से क जा सकती है —

पत्येक भुजा ारा सम्मुख शीष ं में से िकसी एक पर बना कोण दे िखए —

∠ACB (भुजा AB पर), ∠BDC (भुजा BC पर), ∠CAD (भुजा CD पर), ∠DBA (भुजा DA पर)

चारों 90° से कम ⇒ कें द अंद र
इनमें से एक ठीक 90° ⇒ कें द उसी भुजा पर (वह भुजा व्यास है)

इनमें से एक 90° से अिधक ⇒ कें द बाहर

एक कोण 90° से बड़ा होते ही कद्र बाहर क्य चला जाता है: य द ∠ACB > 90° है तो C को न रखने वाला
चाप AB अधवृत्त से बड़ा है, अत: C और D दोन जीवा AB के एक ही ओर, अधवृत्त से छोटे चाप पर समट जाते
ह। कद्र AB के दूसरी ओर रह जाता है — चतुभुज के बाहर। यह वही क्रया व ध है जो अ धक कोण त्रभुज के
प रकद्र को बाहर धकेल दे ती है।

संकेत: आयत म कद्र वकण के प्र त े द बदु पर होता है (प्रश्न 15); और य द चतुभुज बहुत चपटा हो, चार शीष
एक ही छोटे चाप पर समटे ह , तो कद्र काफ़ बाहर पड़ता है।

प्र.12 जब वृत्त क दो जीवाएँ एक-दूसरे को प्र त े द करती ह तो प्रत्येक जीवा दो रेखाखंड म वभक्त हो जाती है।
प्रद शत क जए क य द दोन जीवाओं क लंबाई समान हो, तो पहली जीवा के रेखाखंड दूसरी जीवा के संगत
रेखाखंड के समान ह गे।

दया गया है: कद्र O वाले वृत्त क जीवाएँ AB और CD, जनम AB = CD है और जो वृत्त के अंदर बदु P पर प्र त े द करती ह।
सद्ध करना है: AB के दोन भाग CD के भाग के समान ह।

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चरण 1 — समान जीवाएँ कद्र से समदूरस्थ ह। मान ली जए M और N क्रमश: AB और CD के मध्य बदु ह। प्रमेय 6 से OM =
ON, तथा OM ⊥ AB और ON ⊥ CD।
चरण 2 — P दोन मध्य बदुओं से समदूरस्थ है।

ΔOMP और ΔONP में —

∠OMP = ∠ONP = 90°

OP = OP (उभयिनष्ठ कण)

OM = ON (चरण 1)

RHS सव गं समता ारा ΔOMP ≅ ΔONP ⇒ PM = PN

चरण 3 — अब भाग को जो ड़ए। M और N मध्य बदु ह, अत: AM = MB = ½AB और CN = ND = ½CD; और AB =
CD से AM = CN।

AP = AM − PM और CP = CN − PN (मान लीिजए P, A और M के बीच है)

AM = CN तथा PM = PN ⇒ AP = CP

PB = MB + PM और PD = ND + PN ⇒ PB = PD

अत: {AP, PB} और {CP, PD} एक ही लंबाइयों का युग् म है ं —

एक जीवा का पत् येक रेखाखंड दू सरी जीवा के संगत रेखाखंड के समान है।

मध्य बदु ही कुंजी क्य ह: दोन जीवाएँ वृत्त म भन्न- भन्न स्थान पर ह, अत: उनके बीच सीधी सवागसमता नह
बनती। दोन म उभय नष्ठ केवल कद्र है। O से होकर चलना — समान जीवाएँ ⇒ समान दूरी ⇒ P दोन मध्य बदुओं
से समान दूरी पर — ही दोन जीवाओं को आपस म जोड़ता है।

संकेत: P मध्य बदु के कस ओर पड़ता है, इसके अनुसार AP का युग्म CP से बनेगा या PD से। याद रखने योग्य
कथन यही है क भाग का समुच्चय एक ही है: {AP, PB} = {CP, PD}।

प्र.13 एक वृत्त क रचना क जए, जसम 6 सट मीटर लंबी जीवा वृत्त के कद्र से 3 सट मीटर दूरी पर स्थत हो। (संकेत
— क्या यह कसी त्रभुज का प रवृत्त है?)

वृत्त न त हो जाता है: उसक त्रज्या 3√2 ≈ 4.24 सट मीटर ही होगी।

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r² = d² + (आधी जीवा)² = 3² + 3² = 9 + 9 = 18

r = √18 = 3√2 ≈ 4.24 सेट
ं ीमीटर

सीधी रचना —

1. जीवा AB = 6 सट मीटर ख चए।
2. AB का लंब सम भाजक बनाइए; मान ली जए वह AB को M पर काटता है।
3. उसी सम भाजक पर O ऐसा अं कत क जए क OM = 3 सट मीटर हो।
4. कद्र O और त्रज्या OA (≈ 4.2 सट मीटर) लेकर वृत्त बनाइए। तब AB इस वृत्त क 6 सट मीटर लंबी जीवा है, जो O से 3
सट मीटर दूरी पर है।

संकेत का उत्तर। हाँ — यह एक त्रभुज का प रवृत्त है, और वह त्रभुज बहुत पहचाना हुआ है।

समकोण ित्रभुज OMA में: OM = MA = 3 सेट
ं ीमीटर, अत: ∠MOA = 45°

∠AOB = 2 × 45° = 90°

अत: ΔAOB एक समि बाहु समकोण ित्रभुज है िजसकी भुजाएँ 3√2 और कण AB = 6 है।

कें द ीय कोण 90° है, अत: दीघ चाप के िकसी भी िबंद ु C पर

∠ACB = ½ × 90° = 45°

अत: समतुल्य रचना यह है: AB = 6 सट मीटर और ∠ACB = 45° वाला ΔABC बनाइए और उसका प रवृत्त ख चए। उस
वृत्त म जीवा AB = 6 सट मीटर स्वत: कद्र से 3 सट मीटर दूरी पर होगी।

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O
3√2
3

A 6 सेमM
ी B

आधी जीवा 3 और दूरी 3 होने से ΔOMA 45° वाला समकोण त्रभुज बनता है, अत: ∠AOB = 90° और r = 3√2।

प्र.14 दशाइए क आयत ही एकमात्र ऐसा समांतर चतुभुज है जसे वृत्त के अंतगत बनाया जा सकता है।

दया गया है: वृत्त के अंतगत बना समांतर चतुभुज ABCD। सद्ध करना है: ABCD एक आयत है।

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
em.
ABCD समात
ं र चत भ
ु ज
ु है ⇒ सम्मुख कोण समान है:ं
m l as
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∠A = ∠C और ∠B = ∠D
m a g
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g
aABCD चक्रीय है ⇒ सम्मुख कोण संपूरक है ं (पमेय 11):

co m
. ag
∠A + ∠C = 180°
e m
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∠C = ∠A रखने पर: a
2∠A = 180° ⇒ ∠A = 90°, अत: ∠C = 90° भी
co m
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m l as
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इसी पकार 2∠B = 180° ⇒ ∠B = ∠D = 90°
a g
a s em
a gl चारों कोण समकोण है ं ⇒ ABCD एक आयत है।
m a s
m .co
वलोम भी सत्य है, अत: कुछ छू टता नह : प्रत्येक आयत चक्र य है ही। उसके वकण समान होते ह और परस्पर सम भा जत होते
agl
l a se
ह, अत: उनका उभय नष्ठ मध्य बदु चार शीष से समान दूरी पर रहता है — वही बदु A, B, C, D से होकर जाने वाले वृत्त का कद्र
है।
ag

. c om
शेष समांतर चतुभुज क्य बाहर हो जाते ह: समचतुभुज या साधारण समांतर चतुभुज म एक युग्म न्यूनकोण और

s e mक ठ क 90° हो, अत:
gla बन जाता है। वग इसी क
c mतगत आते ही समांतर चतुभुज का झुकाव समाप्त हो जाता है और वहaआयत
एक युग्म अ धक कोण होता है। दो समान कोण का योग 180° तभी हो सकता है जब प्रत्ये
वृत्त केoअं
.
a s em
agl
वशेष स्थ त है — वह भी आयत ही है।

se m
cे oअंmतगत है तो उसके वकण का प्र त े दन बदु वृत्त के कद्र पर ही
दशाइए क य द एक आयत कसी वृत्त .क g l a
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s
प्र.15

a
agl
स्थत होगा।

co m

दया गया है: वृत्त के अंतगत बना आयत ABCD। सद्ध करना है: वकण कद्र पर मलते ह।
m .
m as e
.co
उपप त्त 1 — प्रत्येक वकण ास है।
a g l
se m
g l a
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m .
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g l as
a

com
m .
m ase
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

∠ABC = 90° (आयत का कोण)

B वृत्त पर है और ∠ABC, जीवा AC ारा अंत िरत कोण है।

अंत िरत कोण 90° तभी होता है जब वह व्यास पर खड़ ा हो (पमेय 9 के उपपमेय का िवलोम)।
∴ AC एक व्यास है। इसी पकार ∠BAD = 90° ⇒ BD भी एक व्यास है।

दो व्यास दोनों कें द से होकर जाते है ं और दो िभन्न रेखाएँ के वल एक िबंद ु पर िमलती है।
ं

∴ उनका पितच्छे द िबंद ु ही कें द O है।

उपप त्त 2 — आयत के गुण से। आयत के वकण समान होते ह और परस्पर सम भा जत होते ह। मान ली जए वे P पर मलते
ह। तब

PA = PC = ½ AC और PB = PD = ½ BD, जहाँ AC = BD
⇒ PA = PB = PC = PD

अत: P चारों शीष ं से समदू रस्थ है — P ही उनसे होकर जाने वाले वृत्त का कें द है, अथ त P = O।

संकेत: इससे वृत्ताकार चकती का कद्र शीघ्र ात करने क व ध मलती है — उसम एक आयत अंत न हत क जए
और वकण ख चए, वे कद्र पर काटगे। प्रश्न 10 भी इसी से स्पष्ट होता है: वहाँ वकण 13 एक ास था, अत:
प र त्रज्या 6.5 थी।

प्र.16 कसी वृत्त म एक न त लंबाई क सभी जीवाओं पर वचार क जए। इन सभी जीवाओं के मध्य बदुओं को
मलाने पर कौन-सी आकृ त बनती है?

एक और वृत्त, उसी कद्र वाला — त्रज्या √(r² − ℓ²/4) का संकद्र वृत्त, जहाँ r दए गए वृत्त क त्रज्या और ℓ जीवा क न त
लंबाई है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

मान लीिजए O कें द है और AB लंबाई ℓ की कोई जीवा है, िजसका मध्यिबंद ु M है।

पमेय 4 से OM ⊥ AB, अत: OM ही O से जीवा की दू री है।

OM² = OA² − AM² = r² − (ℓ/2)²

OM = √(r² − ℓ²/4), जो ऐसी पत्येक जीवा के िलए एक ही मान है

अत: पत्येक मध्यिबंद ु O से िनि चत दू री पर है ⇒ सभी मध्यिबंद ु O कें द वाले उसी ित्रज्या के वृत्त पर िस्थत है।
ं

और उस वृत्त का प्रत्येक बदु प्राप्त भी होता है। कोई भी बदु M ली जए जसके लए OM = √(r² − ℓ²/4) है। M से होकर
OM पर लंब जीवा ख चए। प्रमेय 5 से वह M पर सम भा जत होती है और उसक लंबाई 2√(r² − OM²) = 2 × (ℓ/2) = ℓ है।
अत: M वास्तव म लंबाई ℓ क कसी जीवा का मध्य बदु है। बदुपथ पूरा संकद्र वृत्त है, उसका कोई अंश मात्र नह ।

O

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 5 म ँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे AglaSem · NCERT Solutions

एक ही लंबाई क सभी जीवाएँ O से समान दूरी पर होती ह, अत: उनके मध्य बदु एक संकद्र वृत्त बनाते ह।

दो वशेष स्थ तयाँ: य द ℓ = 2r हो तो सभी जीवाएँ ास ह और मध्य बदुओं का "वृत्त" समटकर केवल बदु O
रह जाता है। य द ℓ बहुत छोटा हो तो मध्य बदु दए गए वृत्त के ही नकट आ जाते ह।

प्र.17 कद्र O वाले एक वृत्त म जीवाएँ AB और AC सवागसम ह। स्पष्ट क जए क यह कथन सत्य क्य है— “वृत्त का
कद्र ∠BAC के कोण सम भाजक पर स्थत है।”

दया गया है: कद्र O वाला वृत्त; जीवाएँ AB और AC, जनम AB = AC है। सद्ध करना है: AO, ∠BAC को सम भा जत
करता है।

ΔOAB और ΔOAC में —

AB = AC (िदया गया)

OB = OC = r (ित्रज्याएँ)

OA = OA (उभयिनष्ठ)

SSS सव गं समता ारा ΔOAB ≅ ΔOAC

∴ ∠OAB = ∠OAC (संगत कोण)

अथ त िकरण AO, ∠BAC को दो समान भागों में बाँट ती है — AO ही ∠BAC का समि भाजक है, अत: O

उस पर िस्थत है।

दूसरी दृ ष्ट। AB = AC समान जीवाएँ ह, अत: वे O से समदूरस्थ ह (प्रमेय 6)। कसी कोण के अंदर स्थत वह बदु जो दोन
भुजाओं से समदूरस्थ हो, उस कोण के सम भाजक पर होता है। अत: O, ∠BAC के सम भाजक पर स्थत है।

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A

O

B C

A से नकली समान जीवाएँ पूरी आकृ त को रेखा AO के सापेक्ष सम मत बना दे ती ह — अत: AO ही ∠BAC को सम भा जत करता है।

दोन उपप त्तय के पीछे एक ही वचार: AB = AC होने से पूरा चत्र रेखा AO के सापेक्ष सम मत हो जाता है।
AO के सापेक्ष परावतन B और C को आपस म बदल दे ता है और वृत्त को स्वयं पर लाता है, अत: वह कद्र को अपने
स्थान पर रखता है — इसका अथ है क O दपण रेखा पर ही होगा, और वही रेखा ∠BAC को सम भा जत करती
है।

प्र.18 10 सट मीटर और 24 सट मीटर लंबाई क दो समांतर जीवाएँ वृत्त के कद्र के एक ही ओर स्थत ह। दोन
जीवाओं के मध्य क दूरी 7 सट मीटर है। वृत्त क त्रज्या ात क जए।

त्रज्या = 13 सट मीटर।

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
मान लीिजए कें द O से लंबी जीवा (24 सेट
ं ीमीटर) की दू री d है।
m l as
.co
दोनों जीवाएँ एक ही ओर है ं और लंबी जीवा ही अिधक समीप होती है (पमेय 8),
m a g
l a se
g
अत: 10 सेट
ं ीमीटर वाली जीवा की दू री d + 7 होगी।
a

co m
. ag
24 सेट
ं ीमीटर वाली जीवा के िलए: r² = d² + 12² = d² + 144
e m
10 सेट
g l as
ं ीमीटर वाली जीवा के िलए: r² = (d + 7)² + 5² = d² + 14d + 49 + 25
a

co m
m.
दोनों बराबर रखने पर: d² + 144 = d² + 14d + 74

m as e
.co l
144 − 74 = 14d
a g
se m
70 = 14d ⇒ d = 5 सेट
ं ीमीटर
g l a
a
m a s
agl
r² = 5² + 12² = 25 + 144 = 169 ⇒ r = 13 सेट
ं ीमीटर

m .co
l a se
a g

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m .
m as e
.co a g l
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g l as
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m .
m ase
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10 सेमी

7

24 सेमी
5

O

कद्र के एक ही ओर होने पर दोन दू रय का अंतर 7 है, योग नह ।

स्वयं जाँ चए: 10 सट मीटर वाली जीवा क दूरी = 5 + 7 = 12 सट मीटर, और 12² + 5² = 144 + 25 = 169 =
13² ✓। दोन जीवाएँ 13 सट मीटर त्रज्या वाले एक ही वृत्त म बैठ जाती ह।

"एक ही ओर" से समीकरण क्य बदल जाता है: दोन जीवाएँ एक ही ओर ह तो O से ख चे गए दोन लंब एक
ही दशा म जाते ह, अत: उनके बीच का अंतराल दोन दू रय का अंतर होता है। य द वे वपरीत ओर होत (जैसे
प्रश्नावली 5.3 के प्रश्न 3 म) तो अंतराल दोन दू रय का योग होता।

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प्र.19 त्रज्या r के एक वृत्त के अंतगत एक समषट् भुज क रचना क गई है। षट् भुज क भुजाओं क लंबाई ात
क जए और वृत्त के कद्र से प्रत्येक भुजा क दूरी ात क जए।

भुजा = r, और प्रत्येक भुजा क कद्र से दूरी = (√3/2) r।

छह शीष वृत्त को छह समान चापों में बाँट ते है,ं अत: पत्येक भुजा ारा अंत िरत

कें द ीय कोण = 360° ÷ 6 = 60°

ु ा: एक भुजा और कें द से बने ित्रभुज में दोनों ित्रज्याएँ समान है ं और उनके बीच का कोण 60° है।
भज

अत: आधार के कोण (180° − 60°) ÷ 2 = 60° पत्येक — ित्रभुज समबाहु है।
∴ भुजा = r

कें द से दू री: भुजा r लंबाई की एक जीवा है, अत:

d = √(r² − (r/2)²) = √(r² − r²/4) = √(3r²/4) = (√3/2) r ≈ 0.866 r

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r

r
√3r/2

O

षट् भुज छह समबाहु त्रभुज से बनता है; कद्र से भुजा क दूरी उन्ह म से एक क ऊँचाई है।

क्या आप जानते ह? इसी लए परकार को त्रज्या के बराबर खोलकर वृत्त पर छह बार नशान लगाने पर हम
आरं भक बदु पर ही लौट आते ह — समषट् भुज क यही प्राचीन रचना है। षट् भुज क प रमाप 6r है, जो प र ध
2πr ≈ 6.28r से थोड़ी ही कम है।

प्र.20 कसी वृत्त के अंतगत एक चतुभुज MNOP क रचना क गई है। य द MN वृत्त का ास है तो ∠MOP और
∠MNP के वषय म आप क्या कह सकते ह? अपने तक को स्पष्ट क जए।

∠MOP = ∠MNP — ये समान ह, क्य क दोन जीवा MP पर एक ही वृत्तखंड म बने कोण ह।

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शीष वृत्त पर M, N, O, P के क्रम में िस्थत है।
ं

जीवा MP पर िवचार कीिजए। N और O दोनों MP से बने एक ही चाप पर है ं

(वह चाप जो M से P तक पहले N और िफर O से होकर जाता है)।

पमेय 9 से ∠MNP और ∠MOP दोनों उस दूसरे चाप MP ारा कें द पर अंत िरत कोण के आधे है।
ं

∴ ∠MOP = ∠MNP

ास MN से और क्या मलता है। चूँ क MN एक ास है, वह वृत्त के कसी भी अन्य बदु पर समकोण अंत रत करता है —

∠MON = 90° (अधवृत्त का कोण, O पर)

∠MPN = 90° (अधवृत्त का कोण, P पर)

संकेतन को ध्यान से प ढ़ए: ∠MOP शीष O पर OM और OP के बीच का कोण है — अथात भुजा MP ारा
शीष O पर अंत रत कोण; और ∠MNP उसी भुजा MP ारा शीष N पर अंत रत कोण है। एक ही जीवा, उसक
एक ही ओर, अत: कोण भी एक ही। यही "एक ही वृत्तखंड के कोण" वाला गुण है, जो प्रमेय 9 का सबसे अ धक
प्रयुक्त प रणाम है।

प्र.21 मान ली जए, ABCD एक चक्र य चतुभुज है। स्पष्ट क जए क कसी भी शीष पर ब हष्कोण, सम्मुख अंत:कोण
के समान क्य है? (अथात ∠CDE = ∠ABC, जहाँ E, भुजा CD को आगे बढ़ाने पर प्राप्त रेखा पर कोई बदु है)।

कसी भी शीष का ब हष्कोण सम्मुख शीष के अंत:कोण के बराबर होता है। पूरा तक तीन पं क्तय म —

भुजा AD को D से आगे बढ़ ाकर िबंद ु E लीिजए, तािक A, D, E संरेखीय हों और ∠CDE, D पर बिहष्कोण

हो।

∠ADC + ∠CDE = 180° (रेखीय युग् म — सरल रेखा ADE पर बने कोण)

∠ADC + ∠ABC = 180° (पमेय 11 — चक्रीय चत भ
ु ज
ु के सम्मुख कोण)

ु ना करने पर: ∠CDE = ∠ABC ∎
दोनों की त ल

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

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A
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m .co agl
D glase
a
E co m
m .
o m l a se
m .c AD को E तक बढ़ाने पर D का ब हष्कोण ∠CDE, सम्मुख शीष B के अंत:कोणag∠ABC के बराबर होता है।
l a se
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यह प्रत्येक शीष पर क्य लागू होता है: तक म D क कोई वशेषता नह थी। कसी भी भुजा को आगे बढ़ाइए,
se m
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. a
वहाँ ब हष्कोण ली जए — वही दो तथ्य (रेखीय युग्म तथा सम्मुख कोण का संपूरक होना) सम्मुख अंत:कोण के
m
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साथ समानता दे दगे। जैसे BC को C से आगे बढ़ाकर F लेने पर ∠DCF = ∠DAB मलेगा।

agl
m
नामकरण पर ध्यान: ∠CDE के ब हष्कोण होने के लए E को AD को आगे बढ़ाकर D के परे लेना होगा, ता क

. co
m
∠ADC और ∠CDE मलकर ऋजु कोण बनाएँ। (य द E को CD आगे बढ़ाकर लया जाए तो "कोण CDE" स्वयं

m as e
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180° का ऋजु कोण ही हो जाएगा।)
a g
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a c
m .
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प्र.22 “वृत्त क ऐसी कोई जीवा नह है जो उसके ास से बड़ी हो।” आप इस कथन को कैसे सद्ध करगे?
m a
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पहली व ध — जीवा के सूत्र सेa।

co m
m .
m ase
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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages70
Languagehindi
Updated19 Sep 2026