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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: हमारा जीवंत दे श
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — हमारा अ त संसार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
75 – 93 16 29 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 37 pages
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 5 हमारा जीवंत दे श AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हमारे चार ओर क दु नया · हमारा अद्भत सं सार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: हमारा जीवंत दे श
हमारा अ त संसार का अध्याय 5 इकाई 3 अद्भत भारत से आरंभ होता है। अध्याय क शुरुआत वद्यालय म गणतंत्र दवस क सुबह से होती है —
ध्वजारोहण, ड्रम क आवाज़ और राष्ट्रगान। इसके बाद यह अध्याय रोज़ क चीज़ म भारत को खोजता है — मुद्रा नोट, राष्ट्रीय प्रतीक, बाघ और मोर,
हमारी अनेक भाषाएँ, सर पर पहने जाने वाले प रधान, हमारे ढोल, संगीत और नृत्य, और वह एकजुटता क भावना जो सबको जोड़े रखती है।
अध्याय म 7 ग त व धयाँ, चार ल खए खंड, एक चचा क जए, एक पता लगाइए, एक चत्र बनाइए और अंत म आइए वचार कर के 7 प्रश्न ह।
अंत म कोई अलग अभ्यास नह है — प्रश्न पूरे अध्याय म फैले हुए ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
हमारा अद्भत संसार (कक्षा 5) 75 – 93
खं ड प्रश्न
16 29
माध्यम
हन्द
ल खए — पृष्ठ 76–78
वद्यालय म एक वशेष दवस
ल खए
प्र.1 गणतंत्र दवस के अवसर पर आपके वद्यालय म कौन-से वशेष कायक्रम एवं ग त व धय का आयोजन कया
जाता है?
गणतंत्र दवस पर हमारे वद्यालय म ध्वज समारोह होता है, सब मलकर राष्ट्रगान गाते ह, और फर सांस्कृ तक कायक्रम
होता है। भारत के अ धकतर वद्यालय म यही क्रम रहता है।
सुबह का कायक्रम इस प्रकार चलता है।
1. सब वद्याथ समय से पहले वद्यालय पहुँचते ह और ध्वज-स्तंभ के चार ओर पं क्तय म खड़े होते ह।
2. समेटा हुआ ध्वज पहले से ही स्तंभ के शीष पर बँधा रहता है। आस-पास का मैदान फूल से सजाया जाता है।
3. प्रधानाध्यापक डोरी ख चते ह और तरंगा फहर उठता है। समेटे हुए ध्वज म रखी फूल क पंखु ड़याँ नीचे गरती ह।
4. सब सावधान खड़े होकर मलकर राष्ट्रगान गाते ह।
5. प्रधानाध्यापक सं वधान और हमारे कतव्य पर छोटा-सा भाषण दे ते ह।
6. फर सांस्कृ तक कायक्रम होता है — दे शभ क्त गीत, समूह नृत्य, माच पास्ट, छोटा नाटक, क वता।
7. कुछ वद्यालय म चत्रकला या नबंध प्र तयो गता भी होती है और पुरस्कार दए जाते ह।
8. अंत म मठाई या लड्डू बाँटे जाते ह।
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कायक्रम क्या होता है ऐसा क्य करते ह
ध्वज समारोह ड्रम और ता लय के साथ तरंगा फहराया जाता है दे श के पित स म्मान िदखाने के िलए
राष्ट्रगान सब स्थर खड़े होकर एक साथ गाते ह पूर ा िव ालय एक स्वर में जुड़ जाता है
भाषण शक्षक सं वधान के वषय म बताते ह तािक हम इस िदन का अथ समझें
सांस्कृ तक कायक्रम व भन्न राज्य के गीत, नृत्य और नाटक इससे भारत की िविवधता िदखती है
पुरस्कार और मठाई वजेताओं को बुलाया जाता है, मठाई बाँट जाती है साझा उ त्सव
अपने वद्यालय के वषय म ल खए: कसने ध्वज फहराया, आपक कक्षा ने क्या प्रस्तुत कया, और आपको
सबसे अच्छा क्या लगा। दो-तीन वाक्य पयाप्त ह।
प्र.2 इस दन हम मलकर राष्ट्रगान गाते ह। क्या आप राष्ट्रगान म उ ल्ल खत कुछ न दय और पवत- ृंखलाओं के नाम
बता सकते ह? नीचे द गई ता लका म उनके नाम ल खए —
न दयाँ पवत- ंखलाएँ
पृष्ठ 77 पर छपी ता लका, पुस्तक क भाँ त रक्त।
राष्ट्रगान क दूसरी पं क्त धीरे-धीरे गाइए और ध्यान से सु नए — पंजाब सधु गुजरात मराठा, द्रा वड़ उत्कल बंग, वध्य हमाचल
यमुना गंगा… नाम वह छपे ह।
न दयाँ पवत- ृंखलाएँ
िसंध ु िवंध् य
यमुना िहमाचल (िहमालय)
गंग ा —
निदयाँ — िसंध,ु यम ुना, गंगा
पवत- ृंखलाएँ — िवंध्य, िहमाच ल (िहमालय)
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इसी के आगे आता है — उच्छल जल ध तरंग। जल ध का अथ है समुद्र और तरंग का अथ है लहर। तो राष्ट्रगान म समुद्र का भी नाम
है — पर समुद्र नद नह है।
राष्ट्रगान म ये नाम क्य ह: जन गण मन के रच यता रव द्रनाथ ठाकुर चाहते थे क एक छोटा-सा गीत पूरे दे श को
समेट ले। इस लए उन्ह ने हर दशा के क्षेत्र का नाम लया — उत्तर-प श्चम म पंजाब और सध, प श्चम म गुजरात
और मराठा, द क्षण म द्रा वड़, पूव म उत्कल (ओ डशा) और बंग (बंगाल) — और फर वे पवत और न दयाँ जो
सबक साझी ह।
क्या आप जानते ह? जन गण मन पहली बार 27 दसंबर 1911 को गाया गया था। इसे 24 जनवरी 1950 को
राष्ट्रगान के रूप म स्वीकार कया गया — पहले गणतंत्र दवस से ठ क दो दन पहले। इसे गाने म लगभग 52 सेकंड
लगते ह।
प्र.3 गणतंत्र दवस पर आप कौन-सी ग त व ध म भाग लेना पसंद करगे?
वह चु नए जो आप सचमुच अच्छा कर सकते ह, और एक ऐसी चीज़ भी जसे आप आज़माना चाहते ह। कोई भी उत्तर
अच्छा है, बस कारण बताइए।
य द आपको पसंद तो भाग ली जए तैयारी म क्या करना होगा
है…
गाना दे शभ क्त गीत के समूह म शब्द याद कीिजए और समूह के साथ ताल िमलाकर अभ्यास
कीिजए
नृत्य कसी राज्य का लोक नृत्य पद (steps) सीिखए और सरल वेशभूषा जुटाइए
माच करना माच पास्ट म पंिक्त सीधी रखने और कदम िमलाने का अभ्यास कीिजए
बोलना छोटा भाषण या क वता आठ-दस पंिक्तयाँ िलिखए और धीरे तथा ऊँचे स्वर में बोलने का
अभ्यास कीिजए
चत्र बनाना और चीज़ चाट, फूल क सजावट या राज्य क झाँक एक स प्ताह पहले ग त्त ा, रंग और अविशष्ट सामग ी जुटाइए
बनाना का मॉडल
अ भनय कसी स्वतंत्रता सेनानी पर छोटा नाटक अपने संवाद याद कीिजए और दशकों की ओर दे खकर बोिलए
नमूना उत्तर: म समूह गान म भाग लेना चाहूँगा। मुझे सारे जहाँ से अच्छा पूरा याद है और म दूसर के साथ ताल मला सकता हूँ। म
सुबह ध्वज-स्तंभ को गदे के फूल से सजाने म भी सहायता करना चाहूँगा, क्य क म जल्द वद्यालय पहुँच सकता हूँ।
एक छोट बात: हर काम महत्वपूण है। डोरी पकड़ना, कु सयाँ लगाना और पं क्तयाँ सीधी रखना — ये काम भी
उतने ही ज़रूरी ह।
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क्या आपने कभी टे ली वजन पर दल्ली म होने वाली गणतंत्र दवस परेड को दे खा है? आपको इस परेड म सबसे
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प्र.4
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अच्छा क्या लगा?
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हाँ। यह परेड नई दल्ली के कतव्य पथ पर होती है और हर 26 जनवरी को टे ली वजन पर सीधी दखाई जाती है। इसम क्रम
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से यह सब दखता है।
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1. राष्ट्रप त आते ह और राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। राष्ट्रगान बजता है और 21 तोप क सलामी द जाती है।
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2. वीरता पुरस्कार दए जाते ह। राष्ट्रीय समर स्मारक पर दे श के लए ब लदान दे ने वाले सै नक को पुष्पचक्र अ पत कए जाते ह।
3. सबसे पहले माच करती टु क ड़याँ आती ह — थलसेना, जलसेना, वायुसेना, अधसै नक बल और पु लस, सब अपनी-अपनी
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वद म, बड क धुन पर।
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4. फर टक, मसाइल वाहन और सीमा सुरक्षा बल क ऊँट टु कड़ी आती है।
cबomे अनेक राज्य के लोक नृत्य प्रस्तुत करते ह। g l as
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5. फर आती ह राज्य क झाँ कयाँ — सजी हुई गा ड़याँ। हर झाँक कसी एक राज्य या वभाग का जीवन दखाती है।
em कल सवार संतुलन का प्रदशन करते ह। a
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6. वद्यालयी
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ag8. अंत म लड़ाकू वमान आकाश म फ्लाई-पास्ट करते ह और केस रया, श्वेत तथा हरा धुआँ छोड़ते ह।
7. मोटरसाइ
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नमूना उत्तर: मुझे राज्य क झाँ कयाँ सबसे अच्छ लग । हर झाँक एक छोट चलती- फरती कहानी जैसी थी — कसी पर नौका
दौड़ थी, कसी पर बड़ा हथकरघा, कसी पर मं दर। दसmमनट म मुझे पूरे दे श के टु कड़े गुज़रते दखाई दए। अंत का फ्लाई-पास्ट भी
a e े बाद आई।
sउनक
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अच्छा लगा, जब वमान इतने नीचे उड़े क आवाज़
यह परेड क्य महत्वपूण है: एक ही सड़क पर, लगभग दो घंटे म, दे श अपने सै नक, अपने कसान, अपने कलाकार
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और अपने वद्याथ एक साथ खड़े कर दे ता है। यह कहने का ढं ग है क ये सब एक ही भारत के ह।
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m आप जानते ह? गणतंत्र दवस के समारोह 29 जनवरी को बी टग र ट के साथ समाप्त होते ह, जब संध्या
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a gl के समय सामू हक बड बजते ह और रायसीना पहाड़ी क रोशनी जल उठती है।
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ग त व ध 1 — पृष्ठ 78
अपने राज्य क झाँक
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गतवध
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g क जए। इसका एक पोस्टर अथवा
m .c अपने राज्य क झाँक के व भन्न वषय क एक सूची बनाइए और चचा
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मॉडल बनाइए।
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झाँक वह सजी हुई गाड़ी है जो एक ही चत्र म कसी राज्य का जीवन और संस्कृ त दखा दे ती है। पृष्ठ 78 का चत्र दे खए
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ने गत्ते के डब्बे से झाँक बनाई है, जस पर पहाड़, झरना, छोट मू तयाँ और खलौना पशु रखे ह।
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चरण 1 — वषय तय क जए। केवल एक वचार ली जए, वरना झाँक भरी-भरी लगेगी। जैसे — हमारा फ़सल पव, हमारी नद ,
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हमारा हथकरघा, हमारा प्र सद्ध स्मारक।
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चरण 2 — रखी जाने वाली वस्तुओं क सूची बनाइए। इन छह शीषक का उपयोग क जए। अं तम स्तंभ अपने राज्य के अनुसार
भ रए।
क्या दखाना है उदाहरण — राज ान उदाहरण — केरल मेरा राज्य
भू-दृश्य या स्मारक रेत के ट ले और कले क द वार बैकवाटर और ना रयल के पेड़ _______
पारंप रक वेशभूषा घाघरा-चोली और ओढ़नी; पुरुष का रंगीन साफा सुनहरे कनारे वाली कसावु साड़ी; मुंडु _______
नृत्य या संगीत घूमर नृत्य; नगाड़ा मो हनीअट्टम; चडा _______
पव तीज, गणगौर ओणम, नौका दौड़ के साथ _______
शल्प या काय ब्लॉक छपाई, नीली मट्ट के बतन ना रयल जटा का काम, हाउसबोट _______
भोजन दाल-बाट -चूरमा केले के पत्ते पर परोसी सद्या _______
चरण 3 — मॉडल बनाइए।
1. जूते का डब्बा या गत्ते का काटन ली जए। उसे लटाकर र खए — यही गाड़ी का फ़श है।
2. मोटे गत्ते से चार प हए का टए और उन्ह पन या ग द से लगाइए।
3. एक गत्ते पर पृष्ठभू म बनाइए और पीछे खड़ी क जए — पहाड़, नद , मं दर।
4. मू तयाँ मट्ट , मा चस क ती लय , कपड़े के टु कड़ और बोतल के ढक्कन से बनाइए। छोट र खए।
5. सबसे ऊँची चीज़ पीछे और सबसे छोट आगे र खए, ता क कुछ छपे नह ।
6. कनारे पर बड़े अक्षर म अपने राज्य का नाम ल खए — अपनी भाषा म और अं ेज़ी म।
चरण 4 — एक पं क्त म क हए। हर अच्छ झाँक का एक वाक्य होता है। जैसे — ओ डशा — सूय मं दर और कोणाक चक्र क
भू म।
झाँ कयाँ क्य बनाई जाती ह: झाँक भाषण से तेज़ होती है। जतनी दे र म झाँक सामने से नकलती है, उतने म
दे खने वाला उस राज्य क वेशभूषा, नृत्य, काम और पव — सब एक साथ दे ख लेता है और एक चत्र क तरह याद
रख लेता है।
अव शष्ट साम ी का उपयोग क जए: पुराने काटन, पपीयर-माशे के लए अख़बार, प हय के लए बोतल के
ढक्कन, बाड़ के लए आइसक्र म क डं डयाँ, कपड़ के लए कतरन। कुछ भी नया ख़रीदने क आवश्यकता नह ।
ल खए — पृष्ठ 79
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वद्यालय के राष्ट्रीय पव
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प्र.1 आपके वद्यालय म गणतंत्र दवस के अवसर पर कन कायक्रम का आयोजन कया जाता है?
पहले एक बात ध्यान द जए। यह प्रश्न ‘क्या आप जानते ह?’ बॉक्स के ठ क बाद आता है, जसम 15 अगस्त 1947 क स्वतंत्रता
क बात है। अं ेज़ी संस्करण म यही प्रश्न स्वतंत्रता दवस के बारे म पूछा गया है। इस लए यहाँ दोन दन का उत्तर दया जा रहा है
— आप अपनी पुस्तक म छपे दन का उत्तर ल खए।
स्वतंत्रता दवस (15 अगस्त) पर वद्यालय म:
1. सब वद पहनकर पं क्तय म मैदान म एकत्र होते ह।
2. मुख्य अ त थ या प्रधानाध्यापक ध्वज चढ़ाते ह — अथात् ध्वज नीचे से ख चकर ऊपर ले जाया जाता है। (गणतंत्र दवस पर
ध्वज पहले से ऊपर बँधा होता है और केवल फहराया जाता है। दोन दन म यही अंतर है।)
3. सब मलकर राष्ट्रगान गाते ह।
4. छोटे भाषण म स्वतंत्रता सेना नय को याद कया जाता है — महात्मा गांधी, भगत सह, रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस और वे
अनेक जनके नाम हम नह जानते।
5. वद्याथ दे शभ क्त गीत, क वता, भाषण और स्वतंत्रता सं ाम पर नाटक प्रस्तुत करते ह।
6. कह माच पास्ट, चत्रकला प्र तयो गता या वृक्षारोपण भी होता है।
7. मठाई बाँट जाती है और पूरा वद्यालय जय हद का उ ोष करता है।
गणतंत्र दवस (26 जनवरी) पर वद्यालय म: ध्वज फहराया जाता है, राष्ट्रगान गाया जाता है, सं वधान पर भाषण होता है,
सांस्कृ तक कायक्रम और माच पास्ट होते ह, और मठाई बाँट जाती है।
स्वतंत्रता दवस — 15 अगस्त गणतंत्र दवस — 26 जनवरी
क्या याद करते ह 1947 में भारत अंग ेज़ों के शासन से स्वतंत्र हुआ 1950 में हमारा संिवधान लागू हुआ
ध्वज चढ़ ाया जाता है (hoist) — नीचे से ऊपर फहराया जाता है (unfurl) — ऊपर बँध ा ध् वज खोला जाता है
मुख्य राष्ट्रीय समारोह लाल िक़ ला, िद ल्ली कतव्य पथ, िद ल्ली
हम इन दन को क्य मनाते ह: स्वतंत्रता उपहार म नह मली थी। अनेक लोग ने अपने जीवन के वष, और कुछ ने
अपना जीवन ही दे दया, ता क भारत अपने नणय स्वयं ले सके। ये दन उन्ह के प्र त हमारा धन्यवाद ह।
ग त व ध 2 — पृष्ठ 79
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हमारे वद्यालय के नयम
गतवध
प्र.1 उन पाँच नयम को ल खए जनका आपके वद्यालय म अनुपालन कया जाता है। य द आपको एक नया नयम
बनाना हो तो आप क्या नयम बनाएँगे?
नयम दं ड नह होता। नयम वह सहम त है जो सबको सुर क्षत रखती है और सबको उ चत अवसर दे ती है। यहाँ पाँच नयम दए ह
जनका अ धकतर वद्यालय म पालन होता है, कारण स हत।
क्र. नयम यह नयम क्य है
1 समय पर, स्वच्छ वद म वद्यालय आइए। क क्षा एक साथ आरंभ होती है और िकसी की शुरुआत नही ं छू टती।
2 सी ढ़य और ग लयारे म पं क्त म च लए। भीड़ में कोई ध क्का खाकर चोिटल नही ं होता।
3 कूड़ा केवल कूड़ेदान म डा लए और कक्षा स्वच्छ र खए। व छ िव ालय सबको स्वस्थ रखता है।
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4 बोलने से पहले हाथ उठाइए; दूसरे के बोलते समय सु नए। सबको बारी िमलती है और सबकी बात सुनी जाती है।
5 वद्यालय क या कसी साथी क वस्तु को हा न मत पहुँचाइए। िव ालय हम सबका है, इसिलए दे खभाल भी हम सबकी है।
म एक नया नयम यह बनाऊँगा:
नमूना उत्तर: मेरा नयम होगा — हर कक्षा बारी-बारी से बोतल भरने और पौध को पानी दे ने का काय सँभालेगी, और कोई भी नल
खुला नह छोड़ेगा। हर कक्षा का एक मॉनीटर मध्यांतर म सभी नल दे खेगा और रसाव उसी दन बताएगा।
मने यही क्य चुना। वद्यालय म हर दन पानी बना कसी के ध्यान दए बबाद होता है। जस नयम म बारी और नाम जुड़ा हो, वह
चलता है — क्य क तब वह कसी का काम बन जाता है, केवल अच्छा वचार नह रहता।
इस ग त व ध का बड़ा वचार: दे श एक बहुत बड़े वद्यालय जैसा है। भारत को भी सहम त से बने नयम क
आवश्यकता थी ता क सब सुर क्षत रह और सबके साथ न्याय हो। उन्ह नयम का संकलन हमारा सं वधान है, और
हमने 26 जनवरी 1950 से उसका पालन आरंभ कया।
अच्छा नयम कैसा होता है: छोटा हो, सबके लए एक जैसा हो, यह बताए क क्या करना है (केवल यह नह क
क्या नह करना), और कोई उसे जाँच सके।
ग त व ध 3 — पृष्ठ 80
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मुद्रा नोट पर भारत को ढूँ ढ़ना
गतवध
प्र.1 कोई भी भारतीय मुद्रा नोट ली जए और उसका ध्यानपूवक अवलोकन क जए। इसके प ात नम्न ल खत
ता लका को भ रए —
आपको क्या अवलोकन करना है आपने क्या अवलोकन कया
नोट का मूल्य
नोट का रंग
भाषाओं क संख्या
नोट पर लखी भाषाएँ और उनका क्रम
स्मारक का नाम
नोट पर दे खे गए प्रतीक
पशुओं के चत्र
नोट पर लखा हुआ कोई संदेश
अन्य कुछ
ग त व ध 3 क ता लका, पृष्ठ 80 — पुस्तक क भाँ त रक्त। ता लका के ऊपर पुस्तक म एक नमूना नोट के दोन ओर
के चत्र भी छपे ह।
पृष्ठ 80 पर जो नोट दखाया गया है वह दस रुपये का नोट है। उसी के अनुसार ता लका भरी गई है। य द आप कोई दूसरा नोट लगे
तो केवल मूल्य, रंग और स्मारक बदलगे — बाक सब वैसा ही रहेगा।
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क्या दे खना है क्या मला (₹10 का नोट)
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नोट का मूल्य
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₹10 — दस रुपये। अंक ों में और शब्दों में, िहंद ी तथा अंग ेज़ी दोनों में िलखा है।
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नोट का रंग
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चॉकले टी भूर ा
भाषाओं क संख्या कु ल 17 — सामने िहंद ी और अंग ेज़ी, तथा पीछे की भाषा-पट्ट ी में 15 और भाषाएँ
co m क्रम में — असिमया, बां ला, गजु राती, कन्नड़, क मीरी,
नोट पर लखी भाषाएँ
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सामने: पहले िहंद ी, िफर अंग ेज़ी। पीछे की पट्ट ी में इस ag
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कोंक णी, मलयालम, मराठी, नेपाली, ओिड़या, पंजाबी, संस्कृ त, तिमल, तेल ुग ,ु उदू ।
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और उनका क्रम
स्मारक का नाम
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ओिडशा का कोणाक सूय मंिदर — उसका बड़ा पत्थर का पिहया िदखाई दे ता है
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नोट पर दे खे गए प्रतीक
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रु पये का पतीक ₹; रा ीय पतीक (गोल मंच पर तीन शेर ); स्वच्छ भारत अिभयान का गोल ऐनक; भारतीय िरज़व बैक
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की मुहर; गवनर के हस्ताक्षर
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पशुओं के चत्र रा ीय पतीक के शेर । शेर ों के नीचे गोल मंच पर एक घोड़ा और एक बैल भी बना है। पीछे कोणाक की नक्काशी में
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भी पशु है।
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वचन-पंिक्त — मैं धारक को दस रुपये अदा करने का वचन देता हू ँ — िजस पर िरज़व बैक
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नोट पर लखा हुआ कोई ं के गवनर के हस्ताक्षर है।
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संदेश ऐनक के पास स्वच्छ भारत की पंिक्त है — एक कदम स्वच्छता की ओर ।
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a हुई छपाई तािक दृ ि टबािधत यि त नोट को छू कर पहचान सकें
अन्य कुछ महात्मा गाध
ं ी का िचत्र ; पकाश में दे खने पर िदखने वाला दू स रा छोटा गाध
ं ी-िचत्र (जलिचह्न ); छपाई का वष; नोट की
क्रम सं या; उभरी
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अपना नोट कैसे दे ख, चरण दर चरण:
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2. तीन.cशेर ढूँ ढ़ए। यही राष्ट्रीय प्रतीक है।
1. नोट को मेज़ पर सामने क ओर से र खए। मूल्य अंक म और शब्द म प ढ़ए।
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a 3. नोट पल टए। स्मारक का चत्र और छोट -छोट ल पय वाली पट्ट दे खए।
agl 4. पट्ट क भाषाएँ ग नए। सामने क हद और अं ेज़ी जोड़ना मत भू लए।
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6. अँगूठे से सामने क ओर सहलाइए। उभरे हुए भाग.cदृo बा धत व्य क्तय के लए ह।
5. अब नोट को खड़क या द ये क ओर पकड़कर आर-पार दे खए। दूसरा गांधी- चत्र और नोट क संख्या दखाई दे गी।
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एक छोटे नोट पर इतनी भाषाएँ agक्यl : नोट हर जगह घूमता है। दल्ली म छपा नोट अगले महीने केरल म चल
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सकता है। मूल्य को सत्रह भाषाओं म छापना यह कहने का ढं ग है क यह नोट — और यह दे श — सबका बराबर है।
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क्या आप जानते ह? मनी ऐप (MANI App) भारतीय रज़व बक ने बनाया है। दृ बा धत व्य क्त फ़ोन का कैमरा
m नोट क ओर करता है और ऐप बोलकर मूल्य बता दे ता है तथा फ़ोन म स्पंदन होता है। a g
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ग त व ध 4 — पृष्ठ 82
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अपने वद्यालय के लए प्रतीक क रचना
गतवध
प्र.1 अपने वद्यालय के लए एक प्रतीक क रचना क जए। इसे वशेष बनाने के लए एक ऐसे संदेश के वषय म
वचार क जए जो आप प्रतीक , शब्द , आकार और रंग के प्रयोग ारा दे ना चाहते ह।
प्रतीक वह छोटा चत्र है जो बना शब्द के बड़ी बात कह दे ता है। पहले पृष्ठ 82 का राष्ट्रीय प्रतीक दे खए — गोल मंच पर तीन
शेर और नीचे अशोक चक्र। वहाँ कुछ भी बना कारण नह है। शेर श क्त, साहस और आत्म वश्वास दशाते ह।
चरण 1 — अपना संदेश तय क जए। केवल एक वाक्य। जैसे — हमारा वद्यालय हर ब े को बढ़ने म सहायता करता है।
चरण 2 — आकार चु नए। वृत्त एकजुटता दशाता है। ढाल सुरक्षा। खुली पुस्तक सीखना।
चरण 3 — दो-तीन प्रतीक चु नए, और हर एक का अथ जा नए।
प्रतीक यह क्या कहता है
खुली पुस्तक सीखना — िव ालय का मुख्य काय
द पक या उगता सूय ान, और हर िदन एक नई शुरुआत
गहरी जड़ वाला वृक्ष धीरे -धीरे बढ़ ना और मज़बूती से खड़े रहना
जुड़े हुए दो हाथ एक-दू स रे की सहायता; हर बच्चा अपना है
स्थानीय पक्षी, वृक्ष या नद यह िव ालय इसी जगह का है
चरण 4 — रंग चु नए और हर रंग का कारण बताइए। हरा वृ द्ध के लए, नीला शां त और जल के लए, पीला सूय और उल्लास
के लए। केवल तीन रंग र खए; अ धक रंग शोर जैसे लगते ह।
चरण 5 — छोटा ध्येय-वाक्य जो ड़ए। तीन-चार शब्द, अपनी भाषा म या अं ेज़ी म, आकार के नीचे एक फ ते पर लखे हुए।
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िव ालय-पतीक का एक नमूना
सीखे ं · सँभाले ं · बढ़ े ं
एकजुटता के लए वृत्त, सीखने के लए खुली पुस्तक, नई शुरुआत के लए सूय, और नीचे फ ते पर ध्येय-वाक्य।
नमूना उत्तर — मेरा प्रतीक। एक हरा वृत्त। उसके भीतर खुली पुस्तक, उसके पीछे उगता छोटा सूय, और नीचे नीले रंग क जल-
रेखा। फ ते पर ध्येय-वाक्य है — सीख · सँभाल · बढ़। वृत्त बताता है क हम सब एक वद्यालय के ह। पुस्तक सीखने क । सूय हर
सुबह क नई शुरुआत का। जल-रेखा हमारे वद्यालय के पास बहने वाली नहर क है, जससे कोई भी तुरंत पहचान ले क यह कौन-
सा वद्यालय है।
अपनी रचना जाँ चए: क्या इसे वद्यालय के ार पर एक ही रंग से बनाया जा सकता है? क्या बहुत छोटा बनाने पर,
बैज पर, यह पढ़ा जा सकेगा? अच्छा प्रतीक दोन कसौ टय पर खरा उतरता है।
ल खए — पृष्ठ 83
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पहे लयाँ — राष्ट्रीय प्रतीक पहचा नए
ल खए
प्र.1 नारंगी रंग, काली धा रयाँ, / जंगल म मेरी खूब सवा रयाँ। / तेज दहाड़ से म सबको डराऊँ, / बूझो तो म क्या
कहलाऊँ? — भारतीय राष्ट्रीय पशु
उत्तर: बाघ — रॉयल बंगाल टाइगर। यही भारत का राष्ट्रीय पशु है।
पहेली क पं क्त उसम छपा संकेत
नारंगी रंग, काली धा रयाँ बाघ की नारंग ी खाल पर काली धािरयाँ
जंगल म मेरी खूब सवा रयाँ बाघ घने जंग लों और मैंग ोव वनों में रहता है
तेज दहाड़ से म सबको डराऊँ बाघ भारतीय वन का सबसे बड़ा िशकारी है
बूझो तो म क्या कहलाऊँ यह हमारे दे श की शिक्त का पतीक है
बाघ को क्य चुना गया: बाघ भारत के लगभग हर प्रकार के वन म मलता है — हमालय क तराई, सूखे सागौन के
वन, गरम प श्चमी घाट और खारे सुंदरबन। उसे राष्ट्रीय पशु बनाना उसक रक्षा का वचन भी था। प्रोजेक्ट टाइगर
1973 म आरंभ हुआ और आज भारत म पचास से अ धक बाघ अभयारण्य ह।
कोई दो एक जैसे नह : हर बाघ क धा रय का नमूना अलग होता है, जैसे हर व्य क्त क अँगु लय के नशान। वन
अ धकारी इन्ह धा रय क तस्वीर से एक बाघ को दूसरे से पहचानते ह।
प्र.2 सुबह क रोशनी म बरसात संग नाचूँ, / हरे-नीले पंख से सबका मन लुभाऊँ। / सर पर सुंदर मुकुट लए खड़ा म
नराला, / जब पंख अपने लहराऊँ तो लगे दृश्य मतवाला। — भारतीय राष्ट्रीय पक्षी
उत्तर: मोर। यही भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
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पहेली क पं क्त उसम छपा संकेत
सुबह क रोशनी म बरसात संग नाचूँ वष के बादल आते ही मोर पंख फै लाकर नाचता है
हरे-नीले पंख से सबका मन लुभाऊँ गहरी नीली गद न और नीले -हरे पंख
सर पर सुंदर मुकुट िसर पर पंखों की छोटी कलगी
जब पंख अपने लहराऊँ आँख जैसे िनशानों वाला बड़ा फै ला हआ
ु पंख
मोर को क्य चुना गया: यह पूरे भारत म मलता है — गाँव , खेत और वन म। यह हमारी पुरानी कहा नय , मं दर
क नक्काशी और लोक चत्र म दखता है, और लोग ने सदा इसे अपने पास रहने दया है। हमारे वन्यजीव कानून म
इसे वशेष संरक्षण भी प्राप्त है।
लंबे पंख केवल नर के होते ह। नीले-हरे बड़े पंख वाला पक्षी नर है — मोर। मादा को मोरनी कहते ह; वह भूरे रंग
क और छोट पूँछ वाली होती है। नाच उसी को दखाने के लए होता है।
चचा क जए — पृष्ठ 83
राष्ट्रीय फल
चचा क जए
प्र.1 य द हम अपने दे श के लए एक राष्ट्रीय फल का चयन करना हो तो आप क्या सुझाव दगे? और क्य ?
आम। यह पहले से ही भारत का राष्ट्रीय फल माना जाता है, और चार स्पष्ट कारण से यह सही चुनाव है।
1. यह भारत म लगभग हर जगह होता है। उत्तर प्रदे श और बहार से लेकर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदे श और त मलनाडु तक — आम के
पेड़ लगभग हर राज्य म मलते ह।
2. इसक सैकड़ कस्म ह — जैसे दे श क व वधता। अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, बंगनपल्ली, हमसागर, केसर, तोतापुरी। एक
ही फल, अनेक रूप — भारत भी ठ क ऐसा ही है।
3. यह बहुत पुराने समय से हमारे साथ है। आम हमारी पुरानी क वताओं और कथाओं म आता है, और ववाह तथा पव पर ार
पर आम के पत्त का तोरण बाँधा जाता है।
4. इसका हर भाग काम आता है। क े आम से अचार, चटनी और आम पन्ना बनता है। पका आम खाया जाता है या आमरस
बनता है। लकड़ी, पत्ते और छाया — सब उपयोगी ह।
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य द कोई पक्ष म तक वपक्ष म तक
सुझाए…
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.co पूरे वष मलता है, सस्ता है, और पौधे का हर भाग काम आता a g l
केला
a s em यह के वल गरम और नम क्षेत्र ों में ही अच्छा होता
ag l है है
कटहल बहुत बड़ा और पौ क; यह केरल का राज्य फल है यह मुख्यतः दिक्षण और पूव त्त र में होता है
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ना रयल सौ तरह से उपयोगी यह अिधकतर समुद तटों पर ही होता है
सेब सबको प्रय
a g l यह के वल ठं डे पहाड़ों में होता है
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कसी भी सुझाव को कैसे परख: तीन प्रश्न पू छए। क्या यह भारत के अ धकतर भाग म होता है? क्या पूरे दे श के
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लोग इसे जानते और उपयोग करते ह? क्या यह हमारी कथाओं, गीत और पव म आता है? जसका उत्तर तीन म
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हाँ हो, वही मज़बूत चुनाव है — और वह आम है।
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चचा के लए: हर ब ा एक फल का नाम और एक कारण बताए। फर मतदान क जए। ध्यान द जए क रोचक
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भाग मतदान नह , कारण ह।
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पता लगाइए — पृष्ठ 83
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अपने राज्य के प्रतीक
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पता लगाइए
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a प्र.1 राज्य के भी प्रतीक चह्न होते ह। अपने शक्षक क सहायता से अपने राज्य के नम्न ल खत प्रतीक बताइए।
राज्य पशु ______ राज्य पुष्प ______ राज्य पक्षी ______ राज्य वृक्ष ______
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भारत के हर राज्य और कद्रशा सत प्रदे श ने अपना राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष और पुष्प चुना है — प्रायः वही जो उस जगह के
लए वशेष हो। अपने शक्षक से पू छए, या राज्य सरकार क वेबसाइट अथवा वद्यालय के एटलस म दे खए।
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कैसे भर:
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. omरक्त स्थान म नाम भ रए।
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1. पृष्ठ के ऊपर अपने राज्य का नाम ल खए।
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3. हर नाम के आगे एक पं क्त ल खए — आपके वचार से इसे क्य चुना गया होगा?
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4. इनम से कसी एक का छोटा चत्र बनाइए।
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नमूना उत्तर — ओ डशा के कसी ब े के लए:
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प्रतीक ओ डशा यह उपयुक्त क्य है
राज्य पशु सांभर िहरण यह ओ डशा के वन म रहता है
राज्य पुष्प अशोक का पुष्प वसंत म खलने वाले नारंगी-लाल गुच्छे
राज्य पक्षी नीलकं ठ (इंिडयन रोलर) तार और खेत म दखने वाला चमक ला नीला पक्षी
राज्य वृक्ष अशोक वृक्ष राज्य म सामान्य, और हमारी पुरानी कथाओं म भी
कुछ और उदाहरण, ता क वचार स्पष्ट हो जाए:
राज्य पशु पक्षी वृक्ष पुष्प
राजस्थान िचंक ारा गोडावण (ग ेट इंिडयन बस्टड) खेजड़ी रोिहड़ा
केरल भारतीय हाथी बड़ा धनेश (ग ेट हॉनिबल) नािरयल न्न
किनक्को ा (अमलतास)
असम एक सी ंग वाला गैंडा वेत पंख वाली वन बत्त ख
श् होलोंग फॉक्सटेल ऑिक ड
महाराष्ट्र शेखरू (िवशाल िगलहरी) हिरयल आम जारुल
राज्य प्रतीक क्य चुने जाते ह: राज्य प्रतीक प्रायः वह जीव या पौधा होता है जो वहाँ सामान्य है, या वहाँ दुलभ और
संकट म है। उसका नाम रखना यह कहना है — यह हमारा है, इस लए हम इसक रक्षा करगे। राजस्थान ने गोडावण
को राज्य पक्षी बनाया, तो बचे हुए थोड़े से गोडावण बचाने का वशेष काय आरंभ हुआ।
सुझाव: य द आपके राज्य का प्रतीक कोई पक्षी या वृक्ष है, तो घर लौटते समय उसे ढूँ ढ़ए। अ धकतर राज्य प्रतीक
ऐसी चीज़ ह जो सचमुच दख जाती ह।
चत्र बनाइए — पृष्ठ 84
अपने वद्यालय का प्रतीक
चत्र बनाइए
प्र.1 अपने वद्यालय के पास कसी वृक्ष, पक्षी, पशु, पुष्प या कसी वस्तु को दे खए और इनम से कसी एक का अपने
वद्यालय के प्रतीक के रूप म चयन क जए। इसका चत्र बनाकर एक पं क्त ल खए क यह आपके वद्यालय का
प्रतीक क्य हो सकता है?
ऐसी चीज़ चु नए जो वद्यालय के ार पर खड़ा कोई भी व्य क्त सचमुच दे ख सके। इसी से प्रतीक आपका बनता है, कसी
और का नह ।
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कैसे कर, चरण दर चरण:
1. वद्यालय के ार पर खड़े होइए। धीरे-धीरे चार ओर दे खए — ऊपर पेड़ क ओर, नीचे ज़मीन पर, द वार के साथ।
2. तीन चीज़ लख ली जए जो आपको दख — जैसे बड़ा नीम का पेड़, एक कुआँ, द वार पर बैठ दो गौरैया।
3. उनम से वह चु नए जो सबसे पुरानी है और जसे सब जानते ह।
4. उसे पृष्ठ के बीच म बड़ा और सरल बनाइए। हर पत्ता बनाने क चे ा मत क जए।
5. नीचे एक पं क्त ल खए — यह हमारे वद्यालय का प्रतीक हो सकता है क्य क…
आपने क्या दे खा आप कौन-सी पं क्त लख सकते ह
आँगन का पुराना नीम इसने चालीस वष ं से इस िव ालय के हर बच्चे को छाया दी है, और यह हमें धीरे -धीरे बढ़ ना तथा मज़बूत
रहना िसखाता है।
ग लयारे के ऊपर घ सला बनाती ये छोटी है,ं फु त ली है ं और यही ं अपना घर बनाती है ं — ठीक हमारी तरह।
गौरैया
वद्यालय क घंट इसकी आवाज़ हम सबको एक साथ बुल ाती है, चाहे हम कोई भी हों।
पास के तालाब का कमल यह कीचड़ से िनकलकर भी साफ़ िखलता है, इसिलए यह कहता है िक हार मत मानो।
ार का हडपंप इससे सब पानी पीते है,ं इसिलए यह साझा करने का पतीक है।
नमूना उत्तर: मने वद्यालय के ार के पास वाले नीम के पेड़ को चुना। मेरे चत्र म उसका मोटा तना और गोल हरा शखर है, और
नीचे छाया म दो ब े बैठे ह। मेरी पं क्त है — नीम का पेड़ हमारे वद्यालय का प्रतीक है क्य क यह यहाँ आने वाले हर व्य क्त को
छाया और स्वच्छ हवा दे ता है, और बदले म कुछ नह माँगता।
प्रतीक सजावट नह होता। समाप्त करने से पहले अपनी पं क्त ऊँचे स्वर म प ढ़ए। य द वह आपके वद्यालय के
बारे म कोई स ी बात कहती है, तो प्रतीक सही है।
ग त व ध 5 — पृष्ठ 84–85
हमारी जीवंत संस्कृ त — भाषाएँ
गतवध
प्र.1 आपक कक्षा म वद्या थय ारा बोली जाने वाली भाषाओं का पता लगाइए और उनका नाम ल खए।
कक्षा म एक छोटा सवक्षण क जए। आपको सोच से अ धक भाषाएँ मलगी।
कैसे कर:
1. श्यामपट्ट पर दो स्तंभ बनाइए — घर म बोली जाने वाली भाषा और कतने ब े।
2. हर ब ा बताए क वह घर पर प रवार से कौन-सी भाषा बोलता है।
3. उस भाषा के सामने एक नशान लगाइए। य द भाषा नई है तो नई पं क्त जो ड़ए।
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4. दूसरा प्रश्न भी पू छए — आप और कौन-सी भाषा थोड़ी-बहुत समझ लेते ह? उन्ह भी जो ड़ए।
5. अंत म पं क्तयाँ ग नए। वही संख्या एक कक्षा क भाषाओं क संख्या है।
नमूना उत्तर — 32 ब क एक कक्षा:
घर म बोली जाने वाली भाषा ब क संख्या
हद 14
भोजपुरी 6
बांग्ला 4
मराठ 3
उदू 2
ओ ड़या 2
नेपाली 1
कु ल 32 बच्चे, 7 भाषाएँ
आपक कक्षा क सूची अलग होगी। जो सचमुच मले वही ल खए, यह सूची नह ।
यह सवक्षण क्या दखाता है: भारत म एक हज़ार से अ धक भाषाएँ बोली जाती ह, और 22 भाषाएँ हमारे सं वधान
म दज ह। यहाँ अनेक ब े हर दन दो-तीन भाषाएँ सुनते हुए बड़े होते ह — एक घर क , एक गली क , एक
वद्यालय क । यह सामान्य बात है और यही हमारी श क्त है।
यह भी क जए: हर ब ा अपनी घर क भाषा म नमस्ते या धन्यवाद एक पच पर लखे। सारी प चयाँ एक चाट पर
लगाइए। वह चाट आपक कक्षा का चत्र है।
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प्र.2 कोई व शष्ट शब्द चु नए (उदाहरणाथ आम) और जा नए क भन्न- भन्न भाषाओं म इसे क्या कहते ह। ता लका
भ रए —
भाषा इसे कैसे बोला जाता है
त मल माम्पलम्
तेलुगु
मराठ
बंगाली
पृष्ठ 85 क ता लका। एक उदाहरण पहले से भरा हुआ है।
पुस्तक ने पहली पं क्त भर द है — त मल म आम को माम्पलम् कहते ह। पूरी ता लका इस प्रकार भरी जाएगी।
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भाषा इसे कैसे बोला जाता है
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तेलुगु
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अस मया आम
संस्कृत आम म्
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अं ेज़ी मैंग ो (mango)
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m बात ध्यान द जए: शब्द फर से प ढ़ए — आम, आम्ब, आंबा, अंब, आम्रम्, माम्पलम्, मांङ्ङा, मा वन। a g
a s eएक
a gl लगभग सबम वही छोट -सी ध्व न आम या मा छपी है। एक ही भू म पर पली-बढ़ भाषाएँ प्रायः एक ही वस्तु के
लए वही पुराना मूल शब्द रखती ह। अं ेज़ी का mango शब्द भी त मल-मलयालम के मांगाय से बना है।
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a,sवद्यालय, चावल। कक्षा म पू छए, घर पर पू छए, दुकानदार से पू छए। शब्द
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दूसरा शब्द भी आज़माइए: पानी, माँ
ल खए और साथ म यह भी कaकसने बताया। यही असली खोज-काय है।
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om — पृष्ठ 87
पाठ्यcप्रश्न
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सवत्र व वधता — सर के प रधान
प्र.1 आप सर पर पहनने वाले कतने प रधान के नाम जानते ह?
1 2 3 4
5 6 7
पृष्ठ 87 पर दए गए सात सर-प रधान, यहाँ फर से बनाए गए ह।
पृष्ठ 87 के सात चेहर को पं क्त दर पं क्त, बाएँ से दाएँ दे खए। हर एक ने क्या पहना है, यह रहा।
चत्र कहाँ है चत्र म क्या दखता है नाम
ऊपर क श्वेत कुत म एक बुजग, सर पर बड़ी चमक ली गुलाबी पगड़ी लपट हुई गल
ु ाबी पगड़ी (साफा) — राजस्थान
पं क्त, पहला और हिरयाणा के बुज़गु पहनते है ं
ऊपर क गहरे लाल साफे म एक पुरुष, जस पर सुनहरी पट्ट और सामने एक नग लगा है लाल साफा / पगड़ी — राजस्थान
पं क्त, दूसरा
ऊपर क एक युवती, जसके सर पर मुकुट जैसा बुना प रधान है — त्रकोण नमूने क पूव त्त र भारत का उ त्सवी बुना हुआ
पं क्त, तीसरा पट्ट , ऊपर चाँद के फूल, और दोन ओर लाल मो तय क लंबी ल ड़याँ िशरोवस्त्र
ऊपर क कंधे पर उत्तरीय डाले एक पुरुष, सर पर सली हुई, ऊपर से चपट गुलाबी- िसली हुई ज़री की पगड़ी — कन टक
पं क्त, चौथा सुनहरी ज़री क पगड़ी और महारा का पेटा / फे टा
नीचे क एक लड़क , हरे-नीले कठोर हैलमेट म, ठु ी के नीचे पट्ट बँधी हुई साइिकल हैल मेट
पं क्त, पहला
नीचे क एक पुरुष, छोट गोल टोपी म, जसके सामने रंगीन बुनी पट्ट लगी है िहमाचली टोपी — िहमाचल पदे श
पं क्त, दूसरा
नीचे क दाढ़ वाला एक पुरुष, करीने से बँधी नीली पगड़ी म द स्तार / पगड़ी — िसख पुरुष धारण
पं क्त, तीसरा करते है ं
सूची म ये नाम और जोड़ सकते ह: गांधी टोपी, नेहरू टोपी, असम क बाँस-पत्ते से बनी जापी, कश्मीरी काराकुली, ल ाख क
पेराक, नगालड का पंख वाला शरोवस्त्र, मैसूर पेटा, सेना क बेरेट, नमाणकम का हैलमेट, मोटरसाइ कल हैलमेट, धूप क हैट।
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सर का प रधान इतना कुछ क्य कहता है: इससे तीन बात पता चलती ह। व्य क्त कहाँ का है — हमाचली
टोपी और राजस्थानी साफा बाँधने का ढं ग अलग है। उसक आ ा क्या है — अनेक सख पुरुष पगड़ी को अपने
धम का अंग मानकर धारण करते ह। वह क्या काय करता है — हैलमेट का अथ है नमाण स्थल, सड़क या खदान
पर काम करने वाला व्य क्त। वही कपड़ा, अलग ढं ग से बँधकर, अलग कहानी बन जाता है।
पृष्ठ 87 का सुरक्षा नयम: दोप हया वाहन पर हैलमेट अ नवाय है। हैलमेट भी सर का प रधान ही है — पर वह
सुंदरता के लए नह , सर क सुरक्षा के लए पहना जाता है।
ग त व ध 6 — पृष्ठ 87
सर का प रधान बनाइए
गतवध
प्र.1 छोटे -छोटे समूह बनाइए और कसी एक दुप े अथवा स्काफ को सर पर पहनने वाला प रधान बनाने म एक-दूसरे
क सहायता क जए।
तीन-तीन के समूह बनाइए। एक पहनने वाला, एक बाँधने वाला, एक खुला सरा पकड़ने वाला। लंबा दुपट्टा, स्टोल या बड़ा
स्काफ काम आएगा। न कुछ काटना है न सलना, इस लए कपड़ा ख़राब नह होगा।
सरल साफा-शैली क पगड़ी:
1. दुपट्टे को लंबाई म दो-तीन बार मो ड़ए, जससे एक हथेली चौड़ी लंबी पट्ट बन जाए।
2. पट्ट का मध्य भाग पहनने वाले के माथे पर, भ ह से ठ क ऊपर र खए।
3. दोन सरे कान के ऊपर से पीछे ले जाइए, सर के पीछे आड़े क जए और फर सामने लाइए।
4. अब उन्ह सर पर बार-बार लपे टए, हर लपेट पछली लपेट से थोड़ी ऊपर, ता क सुंदर शंकु बन जाए।
5. अं तम सरा पीछे क कसी तह म मज़बूती से ख स द जए। कुछ भी लटकना नह चा हए।
6. ऊपर से एक छोटा कोना नकालकर पंखे जैसा फैला द जए — जैसे राजस्थानी साफे क कलगी।
सरल टोपी-शैली: स्काफ को त्रकोण म मो ड़ए, लंबा कनारा माथे पर र खए, दोन कोने पीछे ले जाकर चपट गाँठ लगाइए, और
लटकता कोना गाँठ के नीचे ख स द जए।
य द बार-बार खसक जाए क्या ठ क कर
पगड़ी ढ ली हो जाती है तहे ं अिधक चौड़ी थी ं। पट्ट ी पतली बनाइए और हर लपेट को कसकर खी ंिचए।
बहुत ऊँची बैठती है और डगमगाती है माथे से , नीचे से आरंभ कीिजए और पहली लपेट सपाट रिखए।
सरा टकता ही नह उसे एक नही ं, दो तहों के नीचे खोंिसए। पीछे एक छोटी से ़ टी िपन लगाई जा सकती है।
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करने से क्या सीखा: पगड़ी केवल एक लंबा कपड़ा है — न सलाई, न बटन। उसका पूरा आकार लपेटने के ढं ग से
बनता है। इसी लए वही कपड़ा राजस्थान, पंजाब, कनाटक और महाराष्ट्र म अलग-अलग ढं ग से बँधता है, और वहाँ
के लोग एक नज़र म एक-दूसरे क बँधाई पहचान लेते ह।
सावधानी और शष्टाचार: कसी के सर पर कुछ बाँधने से पहले अनुम त ली जए। कुछ लोग सर का प रधान
अपनी आस्था के कारण पहनते ह — वह वेशभूषा नह होता। सादे स्काफ से, सीखने क भावना से, एक-दूसरे पर
अभ्यास क जए।
प्र.2 अव शष्ट साम ी का उपयोग करके सर पर पहनने वाले प रधान या टोपी बनाइए।
कोई नई साम ी चा हए ही नह । पुराना अख़बार, गत्ते का काटन, उपहार लपेटने का काग़ज़, बोतल के ढक्कन, ऊन के टु कड़े,
पुरानी चू ड़याँ, सूखे पत्ते, ज़मीन पर पड़ा पंख — सब काम आएगा।
अख़बार क टोपी — छह चरण:
1. अख़बार का पूरा पन्ना खोलकर आधा मो ड़ए, तह ऊपर क ओर र खए।
2. ऊपर के दोन कोने भीतर क ओर मोड़कर बीच म मलाइए। अब नीचे एक पट्ट के साथ त्रकोण बन गया।
3. नीचे क पट्ट को सामने क ओर ऊपर मो ड़ए। फर पूरे काग़ज़ को पल टए।
4. इस ओर क पट्ट भी ऊपर मो ड़ए।
5. सारी तह अँगूठे के नाखून से कसकर दबाइए।
6. नीचे से खोलकर सर पर पह नए। यह गांधी-टोपी जैसा आकार है।
गत्ते का मुकुट-शैली शरोवस्त्र — पाँच चरण:
1. गत्ते क एक पट्ट का टए, जो सर के चार ओर आ जाए और चार अँगुल चौड़ी हो।
2. सर पर ना पए, दो अँगुल अ त रक्त छो ड़ए, और सर को जोड़कर गोल छल्ला बना ली जए।
3. छल्ले को उपहार-काग़ज़ से ढ कए या कसी एक चटख रंग से रँ गए।
4. सजाइए — शीश के लए बोतल के ढक्कन के गोल टु कड़े, कनार पर लटकाने के लए ऊन के फुँदने, ऊपर मुड़े हुए काग़ज़ के
नोक।
5. भीतरी कनारे पर मुलायम कपड़े क पट्ट लगाइए ता क माथा न छले।
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अव शष्ट साम ी यह क्या बन सकती है
अख़बार मुड़ी हुई टोपी, या ढाँचे के िलए काग़ ज़ की निलयाँ
गत्ते का काटन मुकु ट की पट्ट ी या हैल मेट का खोल
बोतल के ढक्कन, पुरानी चू ड़याँ शीशे जैस ी चमकीली गोिलयाँ
ऊन, जूट क डोरी फुँ दने और लटकती लिड़याँ
पुराना उपहार-काग़ज़, कपड़े क कतरन चटख आवरण और िकनारी
यहाँ अव शष्ट साम ी ही सही साम ी क्य है: असली शरोवस्त्र सदा उसी साम ी से बनते थे जो उस जगह पहले
से थी — पूव त्तर म बत और पत्ते, पहाड़ म ऊन, मैदान म कपास। जो चीज़ आस-पास पड़ी ह उनसे बनाना उसी
वचार को आगे बढ़ाना है, और कुछ भी कूड़ेदान म नह जाता।
छोट प्रदशनी क जए: हर ब ा अपना बनाया प रधान पहनकर एक वाक्य कहे — यह कससे बना है, और भारत
के कस भाग से वचार लया गया है। बस, ग त व ध पूरी।
ग त व ध 7 — पृष्ठ 89
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 5 हमारा जीवंत दे श
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नृत्य शै लयाँ और उनके राज्य
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गतवध
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a s emशक्षक के दशा नदश के अनुसार भारत के मान चत्र पर उन राज्य को पहचा नए और च ह्नत क जए
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प्र.1
जहाँ से इन नृत्य शै लय का उद्भव हुआ है।
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पृष्ठ 89 पर दए गए नौ नतक-नत कयाँ, यहाँ फर से बनाए गए ह — पोशाक, सर क सजावट और हाथ म पकड़ी वस्तु
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को ध्यान से दे खए।
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m .c हर चत्र को ध्यान से दे खए — वेशभूषा, हाथ म क्या है, मुद्रा क्या है — ag
और फर नृत्य तथा राज्य का नाम ल खए। se
पुस्तक म नौ चत्र ह, पर नाम नह दए गए। इस लए पहले
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 5 हमारा जीवंत दे श AglaSem · NCERT Solutions
चत्र कहाँ है चत्र म क्या दखता है नृत्य राज्य
ऊपर क पं क्त, खुले लंबे बाल वाली युवती, दोन हाथ म डंडे, एक हाथ ऊपर उठा हुआ, डांिडया रास (गरबा के गज
ु रात
पहला लाल-पीले घेरदार घाघरे म साथ)
ऊपर क पं क्त, तीन स्त्रयाँ पं क्त म कदम मलाकर चलत — बुने कनारे वाले लपेटदार पूव त्त र का लोक नत्ृ य असम
दूसरा घाघरे, पीली चादर और सफ़ेद कलगी वाली शरोपट्ट — िबहू
ऊपर क पं क्त, पगड़ी पहने पुरुष और सलवार-कमीज़ म स्त्रयाँ, हाथ ऊपर उठे हुए, एक पैर भाग
ं ड़ा और िग ा पंजाब
तीसरा हवा म
ऊपर क पं क्त, घूमती हुई स्त्री, नीले-पीले घाघरे का घेरा फैला हुआ, सर पर लाल ओढ़नी, उठे घूम र राजस्थान
चौथा हाथ म भारी चू ड़याँ
नीचे क पं क्त, चौड़ी सुनहरी कनारी वाले श्वेत घाघरे म स्त्री, कमर पर सुनहरा चुन्नटदार पंखा, मोिहनीअट्ट म के रल
पहला बाल का जूड़ा एक ओर
नीचे क पं क्त, पुरुष नतक, कमर से ऊपर वस्त्रहीन, हरी कनारी वाली पीली धोती म, एक भरतनाट म तिमलनाडु
दूसरा हाथ सर के ऊपर मुड़ा हुआ
नीचे क पं क्त, चौड़ी लाल-सुनहरी कनारी वाली क्र म रंग क साड़ी और लाल चोली म स्त्री, कु िचपुड़ी आंध
तीसरा घूमने से चुन्नट फैली हुईं पदे श
नीचे क पं क्त, चाँद के जालीदार मुकुट और चाँद क करधनी म स्त्री, पैर पर पीला वस्त्र, ओिडसी ओिडशा
चौथा अँगु लयाँ मुद्रा म
नीचे क पं क्त, कड़े, ढोल जैसे गोल घाघरे म स्त्री, नीचे चटख कढ़ाई क पट्ट , नुक ली टोपी मिणपुर ी (रास लीला) मिणपुर
पाँचवाँ पर पतला श्वेत घूँघट
मान चत्र कैसे च ह्नत कर:
1. भारत का रेखा-मान चत्र ली जए।
2. ऊपर बताए हर राज्य को ढूँ ढ़कर हल्के रंग से भ रए।
3. नृत्य का नाम राज्य के भीतर ल खए, या रेखा ख चकर हा शये म ल खए।
4. हर नृत्य का अपना छोटा चह्न बनाइए — डां डया के लए दो डंडे, भांगड़ा के लए ढोल, घूमर के लए घूमता घाघरा।
5. नीचे संकेत-सूची बनाइए ता क कोई भी मान चत्र पढ़ सके।
नृत्य जगह-जगह अलग क्य होते ह: नृत्य आस-पास के जीवन से जन्म लेता है। भांगड़ा पंजाब के गेहूँ के खेत क
फ़सल-खुशी से नकला। घूमर और डां डया प श्चम क पव-रात के ह। म णपुरी मं दर क उपासना के भीतर पला।
भरतनाट्यम, ओ डसी, कु चपुड़ी और मो हनीअट्टम द क्षण और पूव के मं दर तथा दरबार म स दय म गढ़े गए।
इस लए हर नृत्य अपने कोने का मौसम, काम और आस्था अपने साथ लेकर चलता है।
एक ईमानदार बात: पुस्तक म चत्र के नाम नह छपे ह, इस लए हो सकता है आपके शक्षक एक-दो चत्र का नाम
थोड़ा अलग बताएँ — कई भारतीय नृत्य क वेशभूषा मलती-जुलती होती है। सदा पहले वह ल खए जो चत्र म
दख रहा है, फर नाम। सावधान वद्याथ ऐसे ही काम करता है।
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ल खए — पृष्ठ 89
वाद्ययंत्र
ल खए
प्र.1 आप कन पारंप रक भारतीय वाद्ययंत्र के वषय म जानते ह?
भारतीय वाद्ययंत्र को चार सरल समूह म बाँटा जा सकता है — जन्ह पीटते ह, जनम फूँकते ह, जनम तार होते ह, और
जन्ह बजाकर या टकराकर बजाया जाता है।
समूह वाद्ययंत्र आपने कहाँ सुना होगा
ढोल — जन्ह पीटते ह तबला, ढोलक, ढोल, मृदंग, पखावज, नगाड़ा, खोल, थ वल, पष्ृ ठ 88 के िचत्र में यही ग्यारह ढोल है ं
इडक्का, ढमा, खंजीरा
फूँक वाले बाँसुरी, शहनाई, नादस्वरम्, पुंगी, बीन िववाह में शहनाई; िफ़ ल्मी गीतों में बाँस ुर ी
तार वाले सतार, वीणा, सरोद, संतूर, सारंगी, इकतारा, तानपूरा, दलरुबा िहंद ुस्तानी संग ीत में िसतार; कन टक-
संग ीत में वीणा
टकराकर या हलाकर मंजीरा, घुँघरू, घटम् ( मट्ट का घड़ा), चमटा, करताल भजन में मंजीरा; कथक नतक के पैर ों में
बजने वाले घुँघ रू
पुस्तक म बताई गई दो संगीत परंपराएँ:
कन टक संग ीत (दिक्षण भारत) — मृद ंग, वीणा, नादस्वरम्, घटम्, खंजीरा
िहंद ुस्तानी संग ीत (उत्तर भारत) — िसतार, शहनाई, तबला, सरोद, सारंगी, पखावज
एक ढोल दूसरे जैसा क्य नह होता: ढोल उसी साम ी से बनता है जो उस जगह मलती है — शरीर के लए
लकड़ी, मट्ट या धातु; ऊपर के लए चमड़ा; कसने के लए रस्सी या चमड़े क डोरी। आकार, लकड़ी और कसाव
बदलते ही ध्व न पूरी तरह बदल जाती है। इसी लए त मलनाडु का थ वल, असम का खोल और पंजाब का ढोल —
तीन ढोल होते हुए भी अलग-अलग सुनाई दे ते ह।
अपने क्षेत्र के बारे म ल खए: वही वाद्ययंत्र ल खए जो आपने सचमुच सुने ह — ववाह म, मं दर या म स्जद म,
गाँव के मेले म, वद्यालय के कायक्रम म। ये पुस्तक के प्र सद्ध नाम से अ धक महत्व रखते ह।
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प्र.2 ानीय रूप से उपलब्ध साम ी से एक वाद्ययंत्र बनाने का प्रयास क जए।
हर वाद्ययंत्र तीन म से कसी एक ढं ग से बजता है — कुछ तानकर पीटा जाता है, कुछ तानकर छे ड़ा जाता है, या कसी
नली के भीतर क हवा को हलाया जाता है। तीन बना ली जए, तो सब समझ म आ जाएगा।
1. ढोल (छोटा ढोलक)
1. खाली टन या ऊपर से कट प्ला स्टक क बाल्ट ली जए।
2. मोटे गुब्बारे या पुरानी ट्यूब से मुँह से थोड़ा बड़ा गोल टु कड़ा का टए।
3. उसे मुँह पर कसकर ता नए और मज़बूत डोरी या रबर के छल्ले से बाँध द जए।
4. अँगु लय से थप कए। फर डोरी और कसकर थप कए — ध्व न ऊँची हो जाएगी।
2. तार वाला यंत्र (एक तार का इकतारा)
1. मज़बूत गत्ते का डब्बा या ऊपर से खुला टन ली जए।
2. खुले मुँह पर अलग-अलग मोटाई के दो-तीन रबर बड तान द जए।
3. दोन सर के पास बड के नीचे एक-एक प सल फँसा द जए, ता क वे डब्बे से ऊपर उठ जाएँ।
4. अब उन्ह छे ड़ए। पतला बड ऊँची और मोटा बड नीची ध्व न दे गा।
3. फूँक वाला यंत्र (स् ॉ क शहनाई)
1. पीने वाले स् ॉ का एक सरा चपटा करके पतले V आकार म का टए।
2. वही सरा ह ठ म हल्के से दबाकर ज़ोर से फूँ कए। वह भन भनाएगा।
3. फूँकते-फूँकते स् ॉ को थोड़ा-थोड़ा काटते जाइए। हर बार स्वर ऊँचा होता जाएगा।
आपने जो बनाया ध्व न कससे बनती है स्वर कैसे बदल
टन का ढोल तनी हुई रबर काँपती है अिधक कसने पर ऊँचा, ढीला करने पर नीचा स्वर
रबर बड का इकतारा तना हुआ बड काँपता है पतला या अिधक तना बैड
ं ऊँचा स्वर दे ता है
स् ॉ क शहनाई स् ॉ के भीतर क हवा काँपती है छोटा स्टॉ ऊँचा स्वर दे ता है
बोतल जलतरंग पानी के ऊपर क हवा काँपती है बोतल में अिधक पानी हो तो स्वर नीचा
इन सबके पीछे एक ही नयम: ध्व न तब बनती है जब कोई वस्तु तेज़ी से काँपती है — ढोल का चमड़ा, रबर बड,
नली क हवा। जतनी तेज़ी से काँपेगी, स्वर उतना ऊँचा होगा। छोट , कसी और नाट चीज़ तेज़ी से काँपती ह,
इस लए ऊँचा स्वर दे ती ह। बड़ी, ढ ली और लंबी चीज़ धीरे काँपती ह, इस लए नीचा स्वर दे ती ह।
मलकर बजाइए: ढोल, इकतारा और स् ॉ लेकर तीन ब े एक मंडली बन जाते ह। पहले ढोल पर एक स्थर ताल
र खए, फर बाक उसी ताल पर जुड़। असली मंडली भी ऐसे ही आरंभ करती है।
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आइए वचार कर — पृष्ठ 91–93
अं तम प्रश्न
आइए वचार कर
प्र.1 य द आपको एक और भारतीय भाषा सीखनी हो तो आप कौन-सी भाषा का चयन करगे और क्य ?
वह भाषा चु नए जसका उपयोग आप सचमुच कर सकगे, और बताइए क कसके साथ करगे। इसी से यह उत्तर अनुमान न
रहकर अच्छा उत्तर बनता है।
चुनने के तीन समझदार ढं ग:
1. आस-पास बोली जाने वाली भाषा। कक्षा का कोई मत्र, पड़ोसी, दुकानदार — रोज़ अभ्यास मलेगा।
2. अपने ही प रवार क भाषा। अनेक ब े दाद -नानी क भाषा समझ लेते ह पर बोल नह पाते। उसे सीखने से उनक कहा नयाँ
खुल जाती ह।
3. जस भाषा क ध्व न अच्छ लगे। कोई गीत, फ़ल्म या क वता भी पूरा-पूरा अच्छा कारण है।
नमूना उत्तर: म त मल सीखना चाहूँगा। हमारी गली म दो प रवार घर पर त मल बोलते ह, और मेरी सहेली मीना त मल क पुस्तक
पढ़ती है जो म नह पढ़ सकती। त मल संसार क सबसे पुरानी जी वत भाषाओं म से एक है, जसक क वताएँ दो हज़ार वष से भी
पुरानी ह। म रोज़ के वाक्य से आरंभ करूँगी — कैसे हो, तुम्हारा नाम क्या है, धन्यवाद — और मीना ने कहा है क वह मुझे अक्षर
सखा दे गी।
चरण पहले क्या कर
1 रोज़ के दस शब्द सीिखए — पानी, भोजन, आओ, जाओ, ध न्यवाद, िकतने का, हाँ, नही ं, नाम, िम त्र
2 पाँच पूरे वाक्य सीिखए और हर िदन िकसी वास्तिवक व्यिक्त से बोिलए
3 अक्षर पढ़ ना सीिखए — अपने नाम के अक्षरों से आरंभ कीिजए
4 एक गीत सीिखए। गीत से ध् विनयाँ याद रह जाती है ं
दूसरी भारतीय भाषा सीखना क्य अच्छा है: हर भाषा म ऐसी कहा नयाँ, गीत और चुटकुले होते ह जो अनुवाद म
नह आते। कसी क भाषा सीखना उसे यह बताना भी है क वह हमारे लए महत्वपूण है। और जो ब ा पहले से दो
भाषाएँ जानता है, उसे तीसरी सीखना क ठन नह , आसान लगता है।
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 5 हमारा जीवंत दे श
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m ₹100, ₹200,
आपको व भन्न मुद्रा नोट म कौन-से स्मारक दखाई दे ते ह? नीचे द गई ता लका म उनके नाम ल खए। (मूल्य
वग / स्मारक / राज्य का नाम — ₹10 कोणाक का सूय मं दर, ओ डशा दया गया है; ₹20, e₹50,
प्र.2
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co ह।)
₹500 .रक्त
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उत्तरgl
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वतमान ृंखला के हर नोट के पीछे भारत का कोई प्र सद्ध स्मारक छपा है। ता लका इस प्रकार भरी जाएगी।
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मूल्य वग स्मारक
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₹10 कोणाक का सूय मंिदर
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₹20 एलोरा की ग फ
ु ाएँ महारा
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₹50 हम्पी का पत्थर का रथ कन टक
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ag ₹100 पाटन की रानी की वाव (बावड़ी) गज
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₹200 साँची का स्तूप म ध् य पदे श
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₹500 लाल िक़ ला िद ल्ली
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हर एक पर एक नज़र: ag
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कोणाक का सूय मं दर — सूय दे व के वशाल पत्थर के रथ के रूप म बना मं दर, जसम चौबीस नक्काशीदार प हए और सात
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घोड़े ह।
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एलोरा क गुफाएँ — पहाड़ी क चट्टान काटकर बनाए गए मं दर और कक्ष, जन्ह तीन अलग-अलग धम के लोग ने साथ-साथ
a s em बनाया।
agl हम्पी का पत्थर का रथ — वजयनगर के महान नगर के खंडहर म पत्थर तराशकर बनाया गया छोटा रथ।
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रानी क वाव — सात मं ज़ल नीचे जाती हुई बावड़ी, जसक द वार सैकड़ मू तय से भरी ह।
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साँची का स्तूप — ईंट और पत्थर का वशाल गुंबद, जो बुद्ध के अवशेष रखने के लए सम्राट अशोक के समय बनना आरंभ
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s जहाँ से हर स्वतंत्रता दवस पर प्रधानमंत्री देश को संबो धत करते ह।
हुआ।
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लाल क़ला — लाल बलुआ पत्थर का
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चत्र क जगह स्मारक क्य : स्मारक सबका होता है। हर नोट पर एक स्मारक छापना पूरे दे श को उसका अपना
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इ तहास चुपचाप सखाता है — नोट-दर-नोट। और ये नोट भारत भर म फैले ह, ओ डशा से गुजरात तक, मध्य प्रदे श
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से कनाटक तक।
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रंग भी सहायता करते ह: ₹10 चॉकलेट भूरा, ₹20 हरा-पीला, ₹50 चमक ला नीला, ₹100 बगनी-लैवडर, ₹200
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चटख पीला और ₹500 पत्थरी धूसर है। अलग रंग और अलग आकार से नोट पहचानना सरल हो जाता है —
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वशेषकर उस व्य क्त के लए जसे कम दखाई दे ता है।
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प्र.3 नीचे दए गए चत्र म से भारतीय मुद्रा प्रतीक को पहचा नए (संकेत हमारे मुद्रा नोट म है)। क्या आप कसी अन्य
दे श क मुद्रा के प्रतीक को भी पहचान सकते ह?
€ $ ₽ ₹ Y Y £ £
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पृष्ठ 91 पर छपे आठ मुद्रा प्रतीक।
भारत का मुद्रा प्रतीक ₹ है — पं क्त म बाएँ से चौथा। इसे रुपये का चह्न कहते ह।
इसे कैसे पहचान। दे वनागरी का अक्षर र दे खए। अब उसके ऊपर एक रेखा और थोड़ा नीचे एक छोट रेखा जोड़ द जए, जैसे
बराबर के चह्न क दो रेखाएँ। यही ₹ है। यह दे वनागरी के र और रोमन के R को मलाकर बना है, और ऊपर क दो रेखाएँ तरंगे क
दो प ट्टय तथा समानता का भाव दशाती ह।
पं क्त का प्रतीक कस दे श क मुद्रा कैसे पहचान
€ यूर ो — यूर ोप के अनेक दे श गोल C पर दो आड़ी रेखाएँ
$ डॉलर — संयक्ु त राज्य अमेिरका तथा कु छ और दे श S के बीच से जाती एक खड़ी रेखा
₽ रू बल — रूस बड़े P क डंडी पर एक आड़ी रेखा
₹ रु पया — भारत अक्षर र, ऊपर दो रे खाएँ — एक लंबी, एक छोटी
¥ (एक रेखा) युआ न — चीन बड़े Y पर एक आड़ी रेखा
¥ (दो रेखाएँ) येन — जापान वही Y, पर दो आड़ी रेखाओं के साथ
£ पाउं ड स्टिल गं — यूनाइटेड िकं गडम घुमावदार L पर एक आड़ी रेखा
हद संस्करण म सात प्रतीक छपे ह। अं ेज़ी संस्करण म आठ ह — वहाँ पाउं ड का चह्न दो अलग-अलग टाइप म दो बार छपा है।
नोट म संकेत कहाँ है: दस रुपये का नोट लेकर उस पर छपा बड़ा मूल्य दे खए। 10 से पहले ₹ का चह्न लगा है।
प्रश्न इसी संकेत क ओर इशारा कर रहा है।
क्या आप जानते ह? ₹ चह्न बहुत नया है। इसक रचना डी. उदय कुमार ने क थी और भारत ने इसे 2010 म
अपनाया। उससे पहले हम केवल Rs. लखते थे।
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प्र.4 ₹ 10 के नोट म आपको कौन-से पशु दखाई दे रहे ह?
दस रुपये के नोट पर सबसे स्पष्ट पशु ह राष्ट्रीय प्रतीक के शेर, जो नोट के सामने वाले भाग पर छपे ह।
1. शेर। सामने क ओर, मूल्य के पास दाईं ओर राष्ट्रीय प्रतीक है — अशोक का सह-शीष। गोल मंच पर तीन शेर पीठ जोड़े खड़े
ह। (चौथा शेर पीछे छपा रहता है।)
2. घोड़ा और बैल। शेर के नीचे वाले गोल मंच को दे खए। उस पट्ट पर दौड़ता हुआ घोड़ा और एक बैल बने ह, और बीच-बीच म
चक्र। ये बहुत छोटे ह, इस लए नोट को अच्छे प्रकाश म दे खए।
3. पीछे क नक्काशी। नोट के पीछे कोणाक का सूय मं दर है। वह मं दर सूय दे व के रथ के रूप म बना है, जसे घोड़े ख चते ह,
और उसक पत्थर क द वार पर हाथी स हत अनेक पशु तराशे गए ह। बड़े प हए के पास वाली नक्काशीदार द वार ध्यान से
दे खए।
नोट का भाग कहाँ दे ख पशु
सामने दाईं ओर का राष्ट्रीय प्रतीक शेर (तीन िदखाई दे ते है)ं
सामने शेर के नीचे का गोल मंच एक घोड़ा और एक बैल
पीछे कोणाक सूय मं दर क नक्काशी पत्थर की नक्काशी में घोड़े और हाथी
शेर वहाँ क्य ह: राष्ट्रीय प्रतीक हमारे दे श का अपना चह्न है, जो दो हज़ार वष से भी पहले सम्राट अशोक ारा
सारनाथ म स्था पत स्तंभ से लया गया है। यह श क्त, साहस और आत्म वश्वास का प्रतीक है, और यह हर नोट,
सरकारी प्रलेख तथा आपके आधार काड पर छपा रहता है। इसके नीचे लखा है — सत्यमेव जयते, अथात् सत्य क
ही वजय होती है।
स्वयं क जए: कसी बड़े से ₹10 का नोट माँ गए। पहले शेर ढूँ ढ़ए, फर उनके नीचे का मंच। दे खने के बाद नोट
लौटा द जए, और मुद्रा को सदा स्वच्छ, सूखे हाथ से पक ड़ए।
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प्र.5 आपने अपने वद्यालय या अन्य कसी ान पर भारत के कुछ महान व्य क्तय के चत्र अवश्य दे खे ह गे। नीचे
दए गए इन महान पुरुष और म हलाओं के नाम बताइए और उनके योगदान के वषय म कुछ पं क्तयाँ ल खए।
1. मूँछ वाला एक युवक। उसने चौड़े कनारे वाला भूरा फ़ेल्ट हैट और हल्के नीले रंग क कमीज़ पहनी
है।
2. पीले कनारे वाली लाल साड़ी म एक म हला। उसके सर पर लाल कपड़ा बँधा है जसका पीला-
नीला छोर लटक रहा है। गले म मो तय क माला और माथे पर बद है।
3. हरी सै नक वद और हरी टोपी पहने एक व्य क्त। गोल चश्मा, छाती पर पदक क प याँ और चमड़े
का प ा है।
4. पीछे क ओर सँवारे चाँद जैसे सफ़ेद बाल वाला एक मुस्कुराता हुआ वृद्ध व्य क्त, सादे भूरे-सफ़ेद
कुत म।
5. सफ़ेद पगड़ी और गोल चश्मा पहने एक वृद्ध व्य क्त, पीले कुत म।
6. बगल से दखता एक दाढ़ वाला व्य क्त। उसने कलगी लगी सफ़ेद-नीली रत्नज ड़त पगड़ी, मो तय
क मालाएँ और सुनहरे कनार वाला नीला वस्त्र पहना है।
पृष्ठ 92 के छह चत्र — यहाँ उनका वणन दया गया है; चत्र स्वयं पाठ्यपुस्तक म दे खए।
पृष्ठ 92 के छह चत्र को पं क्त दर पं क्त, बाएँ से दाएँ दे खए।
ऊपर क पं क्त
1. भगत सह — भूरे हैट और हल्के कुत वाले युवक। ये पंजाब के क्रां तकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। ये और इनके साथी चाहते थे क
अं ेज़ भारत तुरंत छोड़ द। इन्ह ने इंक़लाब ज़दाबाद का नारा दया। 1931 म, केवल 23 वष क आयु म इन्ह फाँसी दे द गई।
इतनी कम आयु म दखाया गया इनका साहस आज भी लोग को प्रे रत करता है।
2. झाँसी क रानी लक्ष्मीबाई — लाल पगड़ी, मो तय क माला और लाल साड़ी वाली वीरांगना। ये झाँसी क रानी थ । जब
अं ेज़ ने उनका राज्य लेना चाहा तो उन्ह ने स पने से मना कर दया और 1857 के महान वद्रोह म स्वयं अपनी सेना का नेतृत्व
कया। ये लड़ते हुए वीरग त को प्राप्त हुईं और हमारे इ तहास क सबसे साहसी नेताओं म गनी जाती ह।
3. सुभाष चंद्र बोस (नेताजी) — हरी सै नक वद , टोपी और गोल चश्मे वाले व्य क्त। इनका मानना था क स्वतंत्रता के लए
संघष करना ही होगा, और इन्ह ने आज़ाद हद फ़ौज बनाई। इनका आ ान था — तुम मुझे खून दो, म तुम्ह आज़ाद दूँ गा। जय
हद का अ भवादन भी इन्ह का दया हुआ है।
नीचे क पं क्त
4. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम — सफ़ेद बाल वाले मुस्कुराते हुए वयोवृद्ध। ये वै ा नक थे और इन्ह ने भारत के रॉकेट तथा
मसाइल काय का नेतृत्व कया, इसी लए इन्ह भारत का मसाइल मैन कहा जाता है। ये भारत के 11व राष्ट्रप त बने। ये सदा
कहते थे क वे शक्षक के रूप म याद कए जाना चाहते ह, और अपने अं तम वष वद्या थय से बातचीत म बताए।
5. डॉ. सवपल्ली राधाकृष्णन — श्वेत पगड़ी और गोल चश्मे वाले व्य क्त। ये महान शक्षक और दाश नक थे, और बाद म भारत
के प्रथम उपराष्ट्रप त तथा दूसरे राष्ट्रप त बने। जब उनके वद्याथ उनका जन्म दन मनाना चाहते थे तो उन्ह ने कहा क इसे सभी
शक्षक का दन बना द जए। इसी लए भारत म 5 सतंबर को शक्षक दवस मनाया जाता है।
6. छत्रप त शवाजी महाराज — नुक ली दाढ़ , मो तय क मालाओं और कलगीदार पगड़ी वाले शासक। इन्ह ने 17व शताब्द म
मराठा राज्य क स्थापना क । ये कुशल सेनानायक थे, जन्ह ने अपने क्षेत्र क पहा ड़य और कल का चतुराई से उपयोग कया,
समुद्र तट क रक्षा के लए नौसेना बनाई, और साधारण लोग , कसान तथा स्त्रय के साथ न्याय के लए जाने गए।
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नाम कस रूप म जाने जाते ह कस लए याद कर
भगत सह क्रां तकारी स्वतंत्रता सेनानी 23 वष की आयु में साहस; इंक़ लाब िज़ंद ाबाद का नारा
रानी लक्ष्मीबाई झाँसी क रानी 1857 में स्वयं से ना का नेतत्ृ व, कभी समपण नही ं
सुभाष चंद्र बोस नेताजी आज़ाद िहंद फ़ ौज की स्थापना; जय िहंद
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मसाइल मैन; 11व राष्ट्रप त रॉके ट और िमसाइल; आजीवन बच्चों के िशक्षक
डॉ. एस. राधाकृष्णन दाश नक; दूसरे राष्ट्रप त उनके जन्मिदन 5 िसतंबर को िशक्षक िदवस
छत्रप त शवाजी महाराज मराठा राज्य के संस्थापक िकले , नौसे ना और साधारण लोगों के िलए न्याय
इन सबम समान क्या है: ये अलग-अलग शता ब्दय , अलग-अलग क्षेत्र और अलग-अलग आस्थाओं के ह। तीन ने
स्वतंत्रता के लए संघष कया, एक ने राज्य बनाया, दो ने मन गढ़े । फर भी छह ने अपने से पहले दे श को रखा —
इसी लए इनके चत्र हमारे वद्यालय म लगे रहते ह।
प्र.6 सामू हक ग त व ध — अपने क्षेत्र या राज्य के उन व्य क्तय के वषय म अपने से बड़ से पता क जए जन्ह ने
दे श के लए योगदान दया हो और उनसे प्राप्त जानकारी को अपनी कक्षा म साझा क जए।
महान लोग केवल पुस्तक म नह होते। भारत के लगभग हर ज़ले म कोई ऐसा व्य क्त है जसे जानना चा हए, और उन्ह
याद रखने वाले आपके अपने बड़े-बुजग ह।
चरण 1 — समूह बनाइए और काम बाँ टए। चार-पाँच ब े। एक लखेगा, एक चत्र बनाएगा, एक समय दे खेगा, एक समूह क
ओर से बोलेगा।
चरण 2 — तय क जए कससे पूछना है। दादा-दाद , नाना-नानी, कोई बुजग पड़ोसी, सेवा नवृत्त शक्षक, गाँव के मु खया,
पुस्तकालय वाले, गली क सबसे पुरानी दुकान के दुकानदार।
चरण 3 — ये छह प्रश्न पू छए। उत्तर सुनते-सुनते लखते जाइए।
1. हमारे क्षेत्र का कौन-सा व्य क्त है जसक चचा आज भी होती है?
2. वे कब हुए और उन्ह ने क्या कया?
3. उनके कारण क्या बदला?
4. क्या यहाँ उनके नाम पर कुछ है — वद्यालय, सड़क, अस्पताल, प्र तमा?
5. उनके बारे म कोई कहानी याद है?
6. और कससे पूछना चा हए?
चरण 4 — उन लोग को भी खो जए जो छू ट जाते ह। स्वतंत्रता सेनानी तो ह ही। पर ये भी — वह म हला जसने कस्बे का
पहला बा लका वद्यालय आरंभ कया; वह च कत्सक जो नःशुल्क औषधालय चलाते थे; वह कसान जसने लुप्त होता बीज
बचाया; वह व्य क्त जसने तालाब साफ़ कराकर बचाया; कोई खलाड़ी; कोई लोक गायक; कोई शल्पी जसने पुराना शल्प जी वत
रखा।
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चरण 5 — तीन मनट म प्रस्तुत क जए। नाम, स्थान, समय, क्या कया, क्या बदला, और एक कहानी। हो सके तो चत्र, तस्वीर
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या कोई वस्तु भी दखाइए।
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नमूना उत्तर: हमारे समूह ने मेरी दाद से हमारे कस्बे क शां त दे वी के बारे म पूछा। 1974 म उन्ह ने एक पेड़ के नीचे छह लड़ कय
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को पढ़ाना आरंभ कया, क्य क आस-पास लड़ कय के लए कोई वद्यालय नह था। पहले माता- पता भेजना नह चाहते थे,
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इस लए वे स्वयं हर घर गईं। दस वष म वह कक्षा पूरा वद्यालय बन गई। स्टे शन रोड का बा लका वद्यालय आज भी है और उन्ह के
नाम पर है। मेरी दाद उन्ह पहली छह लड़ कय म से एक थ । वे कहती ह क क ठन पढ़ाई नह थी — क ठन था उन लोग के
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सामने से गुज़रना जो हँसते थे।
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ag बार लखने वाले आप बनते ह। यह असली काम है और यह केवल
बड़ से क्य पूछ, केवल पुस्तक से क्य नह : छोटे , स्थानीय इ तहास प्रायः कभी लखे ही नह जाते। जब कोई
बुजग आपको कहानी सुनाते ह, तो उसे पहली
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आपक कक्षा का है।
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साक्षात्कार का शष्टाचार: पहले अनुम त ली जए। बीच म टोके बना सु नए। जसने कहानी सुनाई उसका नाम
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ल खए। अपने नोट उन्ह पढ़कर सुनाइए और पु कर ली जए। अंत म धन्यवाद क हए।
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प रयोजना — सांस्कृ तक मेला। भारत क जीवंत व वधताओं का उत्सव मनाइए जहाँ प्रत्येक राज्य अपनी
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aशgभूlषा, लोक प्रय भोजन, पव, भाषा, नृत्य अथवा संगीत पर प्रस्तु त तैयार करेगा;
मनमोहक कहानी कहता है। कक्षा को समूह म बाँ टए; प्रत्येक समूह के लए एक राज्य नधा रत क जए; प्रत्येक
समूह उस राज्य क पारंप रक वे
पोस्टर और कटआउट बनाइए; कक्षा म मेला लगाइए, हर समूह अपना स्टॉल लगाएगा; मेले के बाद चचा क जए
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— आपने प्रत्येक राज्य म क्या अनूठ वशेषताएँ दे ख ? आपने कौन-सी समानताएँ या साझा मूल्य दे खे?
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सां कृ तक मेला पूरे अध्याय को एक दोपहर म बदल दे ता है। इसे कैसे चलाएँ और कैसे अच्छे ढं ग से समाप्त कर, यह रहा।
a चरण 1 — समूह बनाइए और राज्य बाँ टए। चार-पाँच ब के समूह। हर समूह एक कटोरी से एक राज्य या कद्रशा सत प्रदे श
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comवाला चाट भरे। a
क पच नकाले। उत्तर, द क्षण, पूव, प श्चम और पूव त्तर — सब आ जाएँ, इसका ध्यान र खए।
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चरण 2 — हर समूह अपने राज्य के लए यह छह-खाने
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खाना
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क्या पता करना उदाहरण — असम
पारंप रक वेशभूषा पव के दन म लोग क्या पहनते ह
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िस्त्र यों की मेखला-चादर; पुरुषों की धोती और गमोसा
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लोक प्रय भोजन दो रोज़ के व्यंजन और एक पव का व्यंजन चावल के साथ मछली की तरी; खार; िबहू पर पीठा
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सबसे बड़ा पव और वह कब आता है िबहू, खेती के वष के तीन अवसरों पर
असिमया, बोडो, िमिसंग ; नम स्ते के िलए नम स्कार
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भाषाएँ लोग क्या बोलते ह; नमस्ते कैसे कहते ह
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नृत्य या संगीत एक नृत्य और एक वाद्ययंत्र िबहू नत्ृ य; ढोल और पेपा
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एक वशेष बात राज्य कसके लए प्र सद्ध है काज़ीरंग ा का एक सी ंग वाला गैंडा; असम की चाय
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चरण 3 — स्टॉल बनाइए। राज्य के रेखा-मान चत्र वाला पोस्टर। वेशभूषा के कटआउट। भोजन के चत्र या मट्ट के छोटे मॉडल।
उस राज्य क भाषा के दस शब्द का चाट। कोई ढोल या ताल जो समूह बजाकर दखा सके। चाट को तीन भाग म मो ड़ए ता क वह
मेज़ पर स्वयं खड़ा रहे।
चरण 4 — मेला चलाइए। आधा समूह स्टॉल पर रहकर बताए, आधा दूसरे स्टॉल दे खने जाए। फर अदल-बदल क जए, ता क
सबको दोन बारी मल। हर दे खने वाले को एक पच द जए, जस पर वह हर स्टॉल से एक नई बात लखे।
चरण 5 — अं तम गोल घेरा। दोन प्रश्न के उत्तर द जए।
आपने प्रत्येक राज्य म क्या अनूठ वशेषताएँ दे ख ?
नमूना उत्तर: हर स्टॉल पर कुछ ऐसा था जो और कह नह था। केरल म नौका दौड़ और केले के पत्ते पर परोसा भोजन था।
राजस्थान म रे गस्तान, कठपुतली का खेल और चटख साफा था। असम म एक स ग वाला गडा और चाय के बगान थे। नगालड म
हॉन बल महोत्सव और ऐसा बुना शॉल था जसका नमूना ही बता दे ता है क पहनने वाला कौन है। कश्मीर म शकारा और इतना
महीन शॉल था क अँगूठ से नकल जाए। त मलनाडु म मं दर का गोपुरम और सुबह ार पर बनी कोलम थी।
आपने कौन-सी समानताएँ या साझा मूल्य दे खे?
नमूना उत्तर: ऊपर से अलग दखने वाले ये स्टॉल भीतर से आश्चयजनक रूप से एक जैसे थे।
हर राज्य म फ़सल का पव था — बैसाखी, बहू, ओणम, प गल, नुआखाई, लोहड़ी। नाम अलग, पर फ़सल के लए वही
धन्यवाद।
हर राज्य अ त थ का स्वागत भोजन से करता है। व्यंजन बदलता है, स्वागत नह ।
हर राज्य के पास अपना नृत्य और अपना ढोल है, और ववाह तथा पव पर उनका उपयोग होता है।
हर राज्य अपनी न दय , पहाड़ और पेड़ का सम्मान अपने गीत और कथाओं म करता है।
हर राज्य बड़ और शक्षक का आदर करता है, और उसके अ भवादन का अपना ढं ग है।
हर राज्य म हाथ से बना कोई शल्प है, जो माता- पता से ब को मलता आया है।
यह मेला वास्तव म क्या सखाता है: केवल ऊपर से दे खए तो भारत अनेक अलग-अलग दे श जैसा लगता है —
अलग कपड़े, अलग भोजन, अलग ल पयाँ। थोड़ा भीतर दे खए तो हर जगह वही कुछ बात मलती ह — फ़सल के
लए धन्यवाद, अ त थ का स्वागत, बड़ का आदर, संगीत से प्रेम, भू म क दे खभाल। ये साझी बात धागा ह;
भन्नताएँ रंग ह। दोन मलकर एक सशक्त, जीवंत वस्त्र बुनते ह। अध्याय जसे वसुधैव कुटु म्बकम् कहता है, वह
यही है — सारा संसार एक प रवार।
मेले के बाद इसे सँभालकर र खए: सब समूह के छह-खाने वाले चाट एक साथ बाँधकर एक पुस्तक बना ली जए
और कक्षा के पुस्तकालय म र खए। अगले वष उसम और जो ड़ए। कुछ वष म आपके वद्यालय के पास ब का
बनाया भारत का अपना एटलस होगा।
अध्याय — एक नज़र म
गणतंत्र दवस हमारे नयम क पुस्तक का दन है। भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ। पर स्वतंत्र दे श को भी नयम
चा हए, ता क सब सुर क्षत रह और सबके साथ न्याय हो। हमारे नेताओं ने भारत के लए नयम क एक वशेष पुस्तक लखी।
उसे सं वधान कहते ह। हमने 26 जनवरी 1950 को उसका पालन करना आरंभ कया। इसी लए 26 जनवरी हमारा गणतंत्र
दवस है। भारत का सं वधान वश्व के कसी भी दे श का सबसे लंबा ल खत सं वधान है।
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राष्ट्रीय ध्वज हम चार बात बताता है। सबसे ऊपर केस रया रंग श क्त और साहस का प्रतीक है। बीच म श्वेत रंग शां त और
सत्य का प्रतीक है। श्वेत पट्ट के बीच नीला अशोक चक्र कतव्य और धम का प्र त न धत्व करता है। सबसे नीचे हरा रंग वृ द्ध
और समृ द्ध का प्रतीक है। गणतंत्र दवस पर ध्वज फहराया (unfurl) जाता है और स्वतंत्रता दवस पर ऊपर चढ़ाया (hoist)
जाता है, और हम मलकर राष्ट्रगान गाते ह।
एक मुद्रा नोट म पूरा भारत बसा है। दस रुपये का नोट हाथ म ली जए। सामने क ओर महात्मा गांधी ह, राष्ट्रीय प्रतीक है
— गोल मंच पर खड़े तीन शेर — और मूल्य हद तथा अं ेज़ी म लखा है। नोट को प्रकाश क ओर पक ड़ए, तो गांधीजी का
एक दूसरा छोटा चत्र दखाई दे ता है। यही जल चह्न (वॉटरमाक) है। पीछे क ओर ओ डशा का कोणाक का सूय मं दर है,
स्वच्छ भारत अ भयान का गोल ऐनक वाला प्रतीक है, और एक पट्ट म मूल्य 15 और भारतीय भाषाओं म लखा है। कुछ
नोट पर उभरे हुए नशान होते ह ता क दृ बा धत व्य क्त उन्ह छू कर पहचान सक। मनी ऐप भी उन्ह नोट पहचानने म
सहायता करता है।
राष्ट्रीय प्रतीक हम याद दलाते ह क हम कौन ह। हमारा राष्ट्रीय पशु बाघ है, राष्ट्रीय पक्षी मोर, राष्ट्रीय पुष्प कमल, राष्ट्रीय
वृक्ष बरगद और राष्ट्रीय फल आम है। राष्ट्रीय प्रतीक सम्राट अशोक ारा सारनाथ म स्था पत सह-शीष से लया गया है। हर
राज्य के भी अपने प्रतीक होते ह — राज्य पशु, राज्य पक्षी, राज्य वृक्ष और राज्य पुष्प।
भारत म एक हज़ार से अ धक भाषाएँ बोली जाती ह। इनम से 22 भाषाएँ सं वधान म दज ह। एक ही फल के कतने नाम
होते ह — त मल म माम्पलम्, मराठ म आंबा, बंगाली और हद म आम, गुजराती म केरी। हर भाषा के अपने गीत, अपनी
कहा नयाँ और अपना इ तहास ह। भारत वश्व के सबसे अ धक बहुभाषी दे श म से एक है।
व वधता दे श को वैसे ही सशक्त बनाती है जैसे वन को। उपवन म कुछ ही प्रकार के पौधे होते ह और उन्ह नरंतर दे खभाल
चा हए। वन म सैकड़ प्रकार के पेड़-पौधे, पशु, पक्षी और क ट होते ह। वे एक-दूसरे क दे खभाल करते ह और वन स्वयं ही
अ धक समृद्ध और सुंदर होता जाता है। भारत उपवन नह , वन जैसा है।
सर के प रधान से व्य क्त का क्षेत्र पहचाना जा सकता है। राजस्थान म पुरुष रंग- बरंगा साफा या पगड़ी बाँधते ह।
हमाचल प्रदे श म लोग बुनी हुई टोपी पहनते ह। पूव त्तर भारत म अनेक लोग पव के दन म सजा हुआ बुना प रधान पहनते ह।
सर का प रधान बताता है क व्य क्त कहाँ का है, उसक आस्था क्या है, या वह क्या काय करता है। यह सुरक्षा भी दे ता है —
सै नक का हैलमेट, खदान-कम का हैलमेट, और वह सड़क हैलमेट जो दोप हया वाहन पर सबको पहनना अ नवाय है।
ढोल तक राज्य-दर-राज्य बदल जाता है। अध्याय के चत्र-पट म ग्यारह भारतीय ढोल दखाए गए ह — पखावज, ढमा,
खंजीरा, ढोल, मृदंग, ढोलक, थ वल, इडक्का, खोल, नगाड़ा और तबला। हर एक अपने क्षेत्र क लकड़ी, चमड़े और रस्सी से
बनता है, और हर एक क अपनी ध्व न है। इसी प्रकार कनाटक-संगीत म मृदंग और हदुस्तानी संगीत म सतार तथा शहनाई
का उपयोग होता है। व भन्न राज्य ने हम व भन्न नृत्य शै लयाँ भी द ह।
अनेक धागे, एक वस्त्र। भारत म अनेक भाषाएँ, अनेक धम, अनेक प्रकार क वेशभूषा और भोजन ह। हर क्षेत्र एक धागे क
तरह अपनी कहानी कहता है। ये सब धागे मलकर एक सशक्त और जीवंत वस्त्र बुनते ह। हम आगे भी दे ख रहे ह — वै ा नक
रॉकेट छोड़ रहे ह, कसान नई तकनीक अपना रहे ह, एक क्लक से भुगतान हो रहा है, और ब े नृत्य-संगीत के साथ व ान
भी सीख रहे ह। पुराना हटाया नह जा रहा — उसम नए रंग भरे जा रहे ह। इसी के लए हमारा पुराना वाक्य है — वसुधैव
कुटु म्बकम्, अथात् सारा संसार एक प रवार है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द इसका अथ पु स्तक म कहाँ रोज़ का उदाहरण
गणतंत्र दवस 26 जनवरी, िजस िदन से हमने संिवधान का पालन वद्यालय म एक वशेष आपके वद्यालय का ध्वज समारोह
आरंभ िकया दवस, पृष्ठ 75
सं वधान िनयमों की वह िवशेष पुस्तक िजससे दे श चलता है क्या आप जानते ह?, पृष्ठ इसी म लखा है क हर ब े को पढ़ने
79 का अ धकार है
अशोक चक्र ध्वज के बीच बना नीला चक्र; कतव्य और धम का क्या आप जानते ह?, पृष्ठ तरंगे के बीच का चक्र
पतीक 75
झाँक सजी हुई गाड़ी जो िकसी एक राज्य का जीवन और ग त व ध 1, पृष्ठ 78 केरल क झाँक म नौका दौड़
संस्कृ ित िदखाती है
राष्ट्रीय प्रतीक गोल मंच पर तीन शेर , सारनाथ के अशोक स्तंभ से प्रतीक जो बोलते ह, पृष्ठ 82 आधार काड और हर नोट पर छपा
िलया गया हुआ
जल चह्न कागज़ के भीतर िछपा िचत्र, जो पकाश में ही पृष्ठ 81 नोट पर गांधीजी का दूसरा छोटा चत्र
(वॉटरमाक) िदखता है
स्वच्छ भारत स्वच्छता का रा व्यापी अिभयान; इसका पतीक पृष्ठ 81 नोट के पीछे छपा ऐनक
अ भयान गांध ीजी का गोल ऐनक है
मुद्रा प्रतीक धनरािश से पहले लगाया जाने वाला छोटा िचह्न आइए वचार कर 3, पृष्ठ 91 ₹ 50 का अथ है पचास रुपये
व वधता अनेक पकार के लोग, भाषाएँ और जीवन-शैिलयाँ सवत्र व वधता, पृष्ठ 86 एक ही कक्षा म चार भाषाएँ
होना
सर का प रधान िसर पर पहनी जाने वाली कोई भी वस्तु — पगड़ी, पृष्ठ 86 साफा, हमाचली टोपी, साइ कल
टोपी, हैल मेट हैलमेट
साफा / पगड़ी िसर पर लपेटा जाने वाला लंबा कपड़ा, जो अनेक पृष्ठ 86 राजस्थान के बुजग क गुलाबी पगड़ी
ढं ग से बाँध ा जाता है
कला-शैली संग ीत, नत्ृ य, िचत्रकला या िशल्प से अपनी बात पृष्ठ 88 भांगड़ा, ओ डसी, ार पर बनी रंगोली
कहने का ढं ग
मृदंग दिक्षण भारत के कन टक-संग ीत में बजने वाला पृष्ठ 89 कनाटक-संगीत म गायक के साथ
दोमुँहा ढोल बजता है
वसुधैव कुटु म्बकम् पुर ाना भारतीय वाक्य — सारा संस ार एक पिरवार इकाई के वषय म कक्षा म आए नए ब े को अपना बना
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