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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 8: काजीरंगा रा ीीय उ ान क
या ा
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
85 – 98 8 43 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 44 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह गद्य है और इसक वधा पत्र
है — चाचा अरूप ने ब को काजीरंगा से पत्र लखा है। पाठ के अंत म पृष्ठ 87 पर रचनाकार का नाम छपा है — अरूप कुमार दत्ता, और उसके
नीचे लखा है “(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)”। पत्र म असम के काजीरंगा रा ीय उद्यान क सैर है — ब्रह्मपुत्र नद का तट, हाथी पर बैठकर क
गई सुबह क यात्रा, हरण और जंगली भस के झुंड, एक स ग वाला गडा, बील (झील) के पक्षी और जंगली हा थय का झुंड। पृष्ठ 85 से 98 तक छपे
हर अभ्यास — बातचीत के लए, पाठ से, सो चए और ल खए, भाषा क बात, पाठ से आगे, यह भी जान तथा पुस्तकालय एवं अन्य ोत — का पूरा
हल यहाँ दया गया है। पाठ के बाद पृष्ठ 97 और 98 पर बना क्रमांक क एक और रचना छपी है — घूमो-दे खो (लोकतक झील — म णपुर तथा हरे-
भरे पहाड़ क नगरी — कूग)। उसे भी यहाँ पूरा हल कया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 85 – 98
खं ड प्रश्न
8 43
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 88
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
पाठ के साथ छपे पशु-प क्षय के चत्र दे खकर कक्षा म बातचीत करने के प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 नीचे दए गए चत्र को ध्यान से दे खए। इसम कौन-से पशु-पक्षी दखाए गए ह?
पहली पं क्त — (1) हरे पानी म खड़ा एक सफ़ेद और काले पंख वाला जल-पक्षी, जसक
लंबी गुलाबी च च के नीचे थैली जैसी बनावट है। (2) जंगल के रास्ते पर चलता हुआ एक बहुत
बड़ा स्लेट जानवर, जसके कान बड़े-बड़े ह और एक लंबी सूँड है। (3) घास पर खड़ा एक
भारी-भरकम जानवर, जसक खाल मोट और परतदार दखती है और नाक के ऊपर एक
स ग है।
दूसरी पं क्त — (4) रेतीले रास्ते पर चलता हुआ एक बड़ा सुनहरा-पीला जानवर, जसके पूरे
शरीर पर काले गोल धब्बे ह। (5) पेड़ के तने से चपका हुआ एक पक्षी, जसके सर पर नारंगी
पंख क खुली हुई कलगी है और पंख तथा पूँछ पर काली-सफ़ेद धा रयाँ ह। (6) काई लगी
च ान पर बैठा हुआ एक स्लेट रोयदार जानवर, जसके कान नुक ले और थूथन लंबी है।
तीसरी पं क्त — (7) जंगल के रास्ते पर चलता हुआ एक पतला भूरा जानवर, जसके शरीर पर
सफ़ेद च त्तयाँ ह और सर पर शाखाओं जैसे स ग ह। (8) हरी काई पर बैठा हुआ एक बड़ा
नारंगी जानवर, जसके पूरे शरीर पर काली धा रयाँ ह।
पृष्ठ 88 पर दए गए आठ छाया चत्र — यहाँ केवल उनका वणन दया गया है; छाया चत्र अपनी पाठ्यपुस्तक म दे खए।
पृष्ठ 88 पर आठ चत्र छपे ह — इनम छह पशु ह और दो पक्षी। नाम इस तरह ह —
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क्रम चत्र म कौन है पहचान कैसे हुई पशु या
पक्षी
1 पे लकन (एक जल पक्षी) सफ़े द -काला बड़ ा पक्षी, पानी में तैरता हुआ। इसकी लंबी चोंच के नीचे थैल ी-सी बनी पक्षी
होती है, िजसमें यह मछली भर ले ता है।
2 हाथी भारी शरीर, लंबी सूँड और बड़ े पंखे जैसे कान। पशु
3 एक स ग वाला गडा नाक पर एक ही सी ंग और शरीर पर मोटी तह, जैसे कवच पहन रखा हो। यही पशु
(इं डयन राइनो) काजीरंगा की पहचान है।
4 तदुआ पीली खाल पर काले गोल धब्बे और भारी-मज़ बूत शरीर। पशु
5 हुदहुद िसर पर पंखों का नारंगी मुकु ट, िजसके िसरे काले है;ं पंखों पर काली-सफ़े द धािरयाँ पक्षी
और पतली लंबी चोंच।
6 भे ड़या कु त्ते जैस ा पर उससे बड़ ा, भूरे-सले टी बाल , नुक ीले खड़ े कान। पशु
7 चीतल ( चत्तीदार हरण) भूरे शरीर पर सफ़े द िचित्तयाँ और िसर पर शाखा जैसे सी ंग। पशु
8 बाघ (रॉयल बंगाल टाइगर) नारंगी शरीर पर काली धािरयाँ। पाठ में इसी का नाम आया है। पशु
इन चत्र का पाठ से क्या नाता है: इनम से चार जीव पत्र म भी आए ह — हाथी, एक स ग वाला गडा, हरण
और रॉयल बंगाल टाइगर। पत्र म पे लकन का नाम भी है — “पे लकन (एक जल पक्षी), सारस, बगुला और
कलहोन इत्या द।” तदुआ, हुदहुद और भे ड़या का नाम पत्र म नह आया; ये चत्र यह दखाने के लए ह क हमारे
जंगल म और भी कतने प्रकार के जीव रहते ह।
दे खने का तरीका: कसी जीव को पहचानना हो तो तीन चीज़ दे खए — (1) स ग है या नह , (2) खाल पर धब्बे ह,
धा रयाँ ह या साद है, (3) पैर-च च-कान का आकार। इन्ह तीन बात से चीतल और साँभर, तदुआ और बाघ अलग-
अलग पहचान म आ जाते ह।
प्र.2 आपने इन पशु-प क्षय को कहाँ-कहाँ दे खा है?
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। जो जीव आपने सचमुच दे खा हो, उसी के आगे जगह
ल खए। जो न दे खा हो, उसके आगे साफ़ ल खए — “यह मने नह दे खा।” तभी उत्तर स ा होगा।
नमूना उत्तर:
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा
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पशु-पक्षी मने इसे कहाँ दे खा
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मैंने असली पेिलकन नही ं दे खा। िचिड़ याघर की एक तसवीर और पाठ पुस्तक के िचlत्रaमेsं ही दे खा है।
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पेिलकन
हाथी as
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हाँ। मंिदर के मेले में और िचिड़ याघर में दे खा है। एक बार सड़ क से जाते हुए हाथी को भी दे खा।
एक सी ंग वाला गैंडा सामने से नही ं दे खा। इसे मैंने िचिड़ याघर के िचत्र-पट्ट पर और इसी पाठ के िचत्र में दे खा है।
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िचिड़ याघर में दे खा है। जंगल में नही ं दे.ख ag
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तेदं ुआ
हाँ। खेत के पास और gस्कूla
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a ल के मैद ान में। यह ज़ मीन पर चोंच गाड़ कर कीड़ े ढू ँढ़ता रहता है।
भेिड़या नही ं दे खा। इसके बारे में के वल कहािनयों में पढ़ ा है।
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हाँ, िचिड़ याघर के बड़ े बाड़ े में झुंड के साथ दे खा।
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चीतल (िचत्तीदार िहरण)
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बाघ िचिड़ याघर में दे खा है। पाठ में िलखा है िक जंगल में इसे दे खना किठन है, क्योंिक यह रात में ही िनकलता है।
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ऐसे ल खए: दो कॉलम बनाइए — बाईं ओर जीव का नाम, दाईं ओर जगह का नाम। जगह ठ क-ठ क ल खए,
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जैसे “नानी के गाँव के तालाब पर” या “कानपुर के च ड़याघर म”। इससे उत्तर सजीव लगता है।
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प्र.3 इस पाठ म पशुओं के स्वभाव के बारे म क्या-क्या बताया गया है?
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a s em का अथ है — कसी का सहज ढं ग, यानी वह आमतौर पर कैसा व्यवहार करता है। पत्र म लगभग हर पशु के स्वभाव क
gl एक बात कही गई है। सब एक जगह देख ली जए —
स्वभाव
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पशु पाठ क पं क्त इससे उसका कौन-सा स्वभाव पता चलता
है
िहरण और “ हरण और जंगली भस के कई झुंड आराम से घास चर रहे ये शाकाहारी है ं और झुंड में रहते है।ं साथ रहने से
जंग ली भैस
ं े थे।” सबको सुरक्षा िमलती है।
िहरण और भैस
ं े “ हरण और भस ने हम संदेह क दृ से दे खा और अलग हट ये सतक और डरपोक है।ं अनजान को दे खते ही दू र
गए।” हट जाते है।ं
गैंडा “पर गडे वह जमे रहे।” गैंडा िनडर है। वह अपनी जगह से िहलता ही नही ं।
उसकी मोटी खाल उसे भरोसा दे ती है।
गैंडा (कथा में) “पर गडा नदश का पालन न कर सका।” वह अपनी मज़ से चलता है, िकसी के कहे पर नही ं।
मादा गैंडा “ शशु साथ म हो तो मादा राइनो (गडा) हसक हो जाती है। माँ का रक्षा-भाव। बच्चे पर आँच आती दे ख वह लड़ ने
हाथी के पास आने पर वह हमला कर सकती है।” को तैयार हो जाती है।
जंग ली हाथी “जब तक पूरे झुंड ने रास्ता पार नह कर लया, तब तक एक हाथी झुंड का रखवाला है। सबसे बड़ ा हाथी पहरा
वशाल हाथी खड़ा नगरानी करता रहा।” दे ता है और सबसे बाद में हटता है।
ऊदिबलाव “बील के पानी म कुछ ऊद बलाव भी उछल-कूद कर रहे थे।” ये िखलंद ड़ े है।ं पानी में खेल ते रहना इनका स्वभाव
है।
रॉयल बंग ाल “मांसाहारी रॉयल बंगाल टाइगर … उन्ह दे खना क ठन है क्य क बाघ मासं ाहारी है और रात में िनकलने वाला। िदन में
टाइगर वे रात म ही नकलते ह।” िछपा रहता है।
सब पशु िमलकर “काजीरंगा म अलग-अलग प्रजा त के पशु शां त और भाईचारे जंगल में जीव आपस में िमल -जुल कर रहते है।ं यही
से संग-संग रहते ह।” पत्र की सबसे बड़ ी बात है।
एक बात ध्यान दे ने क : पाठ म मादा गडे को ‘ हसक’ कहा गया है, पर उसका कारण भी साफ़ लखा है — ब ा
साथ होना। यानी वह बना बात हमला नह करती, अपने शशु क रक्षा करती है। कसी जीव को बुरा कहने से पहले
उसका कारण दे खना चा हए।
पत्र का संदेश: लेखक लखते ह — “क्य नह मानव भी इनक तरह ही शां तपूवक मल-जुलकर रहता! हम अपने
वन्य-सा थय से बहुत कुछ सीख सकते ह।”
प्र.4 आप कहाँ-कहाँ क यात्रा पर जाना चाहगे और क्य ?
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है। अ े उत्तर म तीन बात होनी चा हए — (1) जगह का नाम, (2) वह कस राज्य म है, और
(3) आप वहाँ क्य जाना चाहते ह।
नमूना उत्तर: म इन जगह क यात्रा पर जाना चा ँगा —
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जगह राज्य म वहाँ क्य जाना चा ँगा
काजीरंग ा रा ीय उद्यान असम क्योंिक यही ं एक सी ंग वाला गैंडा दे खने को िमलता है। पाठ में िलखा है िक दुिनया के आधे से
अिधक भारतीय गैंडे यही ं रहते है।ं
िजम कॉबट रा ीय उद्यान उत्तराखंड यह भारत का सबसे पुराना और पथम रा ीय उ द्यान है। यहाँ बाघ , हाथी, िहरण और पक्षी सब
िमलते है।ं
लोकतक झील म णपुर इसी पुस्तक के ‘घूमो-दे खो’ में पढ़ ा िक यह तैरती हईु झील है और उसके फु मदी नाम के टुक ड़ ों
पर मछु आरे झोंपड़ ी बनाकर रहते है।ं यह मुझे बहुत अनोखा लगा।
कू ग (कोडाग )ु कनाटक वहाँ हरे -भरे पहाड़ और चाय-कॉफी के बागान है।ं मंडलपट्टी पहाड़ ी से बादलों को पास से दे खा जा
सकता है।
सुंद रबन रा ीय उद्यान प म यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर रहता है, िजसका नाम इसी पाठ में आया है।
बंगाल
अपने िज़ले की नदी और अपना दू र जाने से पहले अपने आसपास की चीज़ ें दे खनी चािहए। यह यात्रा स स्ती भी है और अपनी जगह
पुर ाना िकला राज्य की जानकारी भी बढ़ ती है।
यात्रा से पहले तीन काम: (1) उस जगह के बारे म पहले पढ़ ली जए — क्या दे खने योग्य है। (2) घर के बड़ के
साथ ही जाइए। (3) साथ म एक छोट कॉपी र खए और रोज़ जो दे खा उसे लख ली जए। इसी तरह क डायरी से
आगे चलकर चाचा अरूप जैसा पत्र लखा जा सकता है।
पाठ से — पृष्ठ 89
नम्न ल खत प्रश्न के सही उत्तर पर तारे का चत्र (✱) बनाइए। यहाँ एक से अ धक उत्तर भी सही हो सकते ह।
पाठ से बहु वकल्पी
प्र.1 चाचा अरूप को यात्रा के समय कसने संदेह क दृ से दे खा? (क) गड ने (ख) हरण ने (ग) भस ने (घ)
हा थय ने
इस प्रश्न म तारे का चह्न (✱) दो वकल्प पर बनेगा — (ख) हरण ने और (ग) भस ने। पृष्ठ 89 पर ऊपर ही लखा है — “यहाँ
एक से अ धक उत्तर भी सही हो सकते ह।”
पाठ की पंिक्त —
“िहरणों औ र भै ंसों ने हमें संदे ह की दृ िष्ट से दे खा और अलग हट गए।
पर गैडं े वही ं जमे रहे।”
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संदेह यानी शक। दृ यानी नज़र। ‘संदेह क दृ से दे खना’ का अथ है — शक भरी नज़र से दे खना, यानी यह भरोसा न होना क
सामने वाला ठ क है।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) गड ग़लत यह वकल्प उलटा है। पाठ म सीधे लखा है — “पर गडे वह जमे रहे।” जमे रहना यानी अपनी जगह से
ने हलना ही नह । गडे न डरे, न हटे , न शक कया।
(ख) सही ✱ पं क्त म सबसे पहला नाम हरण का ही है। वे दे खते ही अलग हट गए, क्य क हरण स्वभाव से बहुत सतक
हरण ने होता है।
(ग) भस सही ✱ उसी पं क्त म ‘भस ’ भी है — “ हरण और भस ने”। इस लए यह भी पूरा-पूरा सही है। यही वह जगह है जहाँ
ने एक से अ धक उत्तर सही ह।
(घ) ग़लत हाथी तो उस समय उनक सवारी थे — “हम हा थय पर चढ़कर उद्यान दे खने गए।” जस पर वे बैठे थे, वही
हा थय ने उन्ह शक से कैसे दे खता? पत्र म हा थय के संदेह क कोई बात नह है। बाद म जो जंगली हाथी मले, उनका
एक वशाल हाथी तो नगरानी करता रहा — यह पहरा है, शक नह ।
हरण-भसे हटे और गडे क्य नह : हरण और भसे शकार होने वाले पशु ह, इस लए खतरे का ज़रा-सा शक होते
ही वे दूर हट जाते ह — यही उनक सुरक्षा है। गडे क खाल मोट तह वाली होती है, “जैसे वह कवच पहने हो”, और
वह भारी-भरकम होता है। इस लए वह जल्द नह घबराता।
ऐसे प्रश्न म सावधानी: जब नदश म लखा हो क एक से अ धक उत्तर सही हो सकते ह, तो पहला सही वकल्प
मलते ही रुक मत जाइए। बाक वकल्प को भी पाठ क पं क्त से मलाकर दे खए।
प्र.2 काजीरंगा म रॉयल बंगाल टाइगर भी ह पर उन्ह दे खना क ठन है, क्य क — (क) वे कभी दखाई नह दे ते। (ख) वे
बड़े हसक होते ह। (ग) वे रात म ही नकलते ह। (घ) वे कभी बाहर नह नकलते।
तारे का चह्न (✱) केवल एक वकल्प पर बनेगा — (ग) वे रात म ही नकलते ह।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“काजीरंगा में मांसाहारी रॉयल बंगाल टाइगर भी है ं पर हमें िदखे नही ं।
गाइड ने बताया िक उन्हे ं दे खना किठन है क्योंिक वे रात में ही िनकलते है ं।”
प्रश्न ने ‘क्य क’ पूछा है, यानी कारण। और कारण पाठ म शब्द-दर-शब्द लखा हुआ है, इस लए यहाँ अनुमान लगाने क ज़रूरत ही
नह ।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) वे कभी दखाई ग़लत पाठ कहता है “पर हम दखे नह ” — यानी उस दन, उन लोग को नह दखे। ‘कभी नह दखते’
नह दे ते। कहना बहुत ज़्यादा हो जाएगा। ‘क ठन है’ और ‘असंभव है’ — दोन एक बात नह ह।
(ख) वे बड़े हसक ग़लत यह वकल्प धोखा दे सकता है, क्य क बाघ को पाठ म मांसाहारी कहा ही गया है। पर न दखने का
होते ह। कारण उसका हसक होना नह है। गाइड ने कारण साफ़-साफ़ दूसरा बताया — रात म नकलना।
(ग) वे रात म ही सही ✱ यही गाइड का बताया हुआ कारण है। लोग दन म उद्यान दे खने जाते ह और बाघ रात म नकलता है
नकलते ह। — इस लए भट नह हो पाती।
(घ) वे कभी बाहर ग़लत यह पं क्त का उलटा है। पाठ कहता है क वे नकलते ह — बस रात म नकलते ह। ‘कभी बाहर नह
नह नकलते। नकलते’ लखना पाठ के वरुद्ध होगा।
‘कारण’ वाले प्रश्न कैसे हल कर: पहले पाठ म ‘क्य क’, ‘इस लए’, ‘इस कारण’ जैसा शब्द ढूँ ढ़ए। उसी के आगे-
पीछे कारण छपा होता है। यहाँ तो पाठ म ‘क्य क’ शब्द अपने आप म मौजूद है।
जानने क बात: जो जीव रात म नकलते ह, उन्ह नशाचर कहते ह — नशा यानी रात। उल्लू और चमगादड़ भी
नशाचर ह। (यह शब्द पाठ म नह है, पर याद रखने म काम आता है।)
प्र.3 एक वशाल हाथी तब तक नगरानी करता रहा जब तक — (क) लेखक और उसके मत्र नकल नह गए। (ख)
जीप वह खड़ी रही। (ग) पूरे झुंड ने रास्ता पार नह कर लया। (घ) वहाँ से बाघ चला नह गया।
तारे का चह्न (✱) केवल एक वकल्प पर बनेगा — (ग) पूरे झुंड ने रास्ता पार नह कर लया।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“सामने जंगली हािथयों का एक झुंड िदखा। … झुंड में पाँच -छह बच् चे थे ।
जब तक पूरे झ ड
ुं ने रा स्ता पार नही ं कर िलया, तब तक एक िवशाल हाथी खड़ ा िनगरानी करता रहा।”
नगरानी यानी पहरा दे ना, दे खभाल करना। वशाल यानी बहुत बड़ा।
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा
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वकल्प सही / कारण
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(क) लेखक और.उसक
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मत्र नकल ब पर। पाठ म ‘जब तक’ के आगे झुंड क बात लखी है, लेखक क नह ।
(ख) जीप वह खड़ी रही। ग़लत जीप का ज़क्र इस वाक्य म है ही नह । जीप म तो वे बैठे थे — “इस बार हम जीप म गए।”
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पर हाथी के खड़े रहने का कारण जीप नह थी।
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ag ज़म्मेदारी थी।
(ग) पूरे झुंड ने रास्ता पार यही पाठ के शब्द ह। पहले सारे हाथी और ब े रास्ता पार कर, तभी वह बड़ा हाथी हटा। यह
नह कर लया। उसक
(घ) वहाँ से बाघ चला नह ग़लत
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उस समय वहाँ बाघ था ही नह । पाठ साफ़ कहता है — “रॉयल बंगाल टाइगर भी ह पर हम
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गया। दखे नह ।” जो दखा ही नह , उसके जाने का इंतज़ार कैसा?
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m क्या सखाता है: जंगली हा थय के झुंड म सबसे बड़ा और ताकतवर हाथी सबसे पीछे रुककर पहरा दे ता
यहeदृश्य
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a gl है। पहले छोटे और कमज़ोर पार होते ह, बड़ा सबसे बाद म हटता है। सड़क पार करते समय जब कोई बड़ा भाई या
शक्षक छोटे ब को पहले भेजकर खुद पीछे खड़ा रहता है, तो वह ठ क यही काम कर रहा होता है।
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सो चए और ल खए — पृष्ठ 89 और g
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नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए —
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सो चए और ल खए ले ख न
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प्र.1 यह पाठ एक पत्र है। यह पत्र कसने, कसे और क्य लखा है?
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यह पत्र चाचा अरूप ने अपने घर के ब
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को लखा है। कारण यह क वे काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा पर गए थे और वहाँ जो
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कुछ दे खा-सुना, वह ब तक पहुँचाना चाहते
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प्रश्न का उत्तर पाठ से प्रमाण
हस्सा
िकसने चाचा अरूप ने पत्र के अंत म लखा है — “तुम्हारे चाचा /
िलखा? अरूप”
िकसे घर के बच्चों को पत्र क पहली पं क्त — “ प्रय ब ो,”
िलखा?
कहाँ से काजीरंगा रा ीय उ द्यान से “यह पत्र म तुम्ह काजीरंगा रा ीय उद्यान से
िलखा? लख रहा ँ।”
क्यों अपनी यात्रा का अनुभव बच्चों को बताने के िलए — िक उ द्यान कहाँ है, वहाँ पूरा पत्र यही बताता है। अंत म वे अपने मन क
िलखा? कौन-कौन से पशु-पक्षी है,ं एक सी ंग वाला गैंडा कै सा होता है, उसकी संख्या बात भी कहते ह — “हम अपने वन्य-सा थय
क्यों घटी, और जंगल के जीव आपस में कै से िमल -जुल कर रहते है।ं से बहुत कुछ सीख सकते ह। है न!”
यह पत्र है, यह कैसे पहचान: पत्र क तीन पहचान इसम साफ़ ह — (1) शुरू म संबोधन, यानी जसे लखा जा रहा
है उसका नाम — “ प्रय ब ो,” (2) बीच म अपनी बात, जो सीधे ‘तुम’ कहकर कही गई है, और (3) अंत म लखने
वाले का नाम — “तुम्हारे चाचा, अरूप”। इन्ह तीन चीज़ से पता चल जाता है क यह कहानी नह , च है।
ध्यान द जए: पत्र के भीतर लखने वाले का नाम ‘अरूप’ है, और पाठ के अंत म, पृष्ठ 87 पर रचनाकार का नाम
छपा है — अरूप कुमार दत्ता, तथा नीचे “(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)”।
प्र.1 (ख) मादा गडा कब और क्य हसक हो जाती है?
मादा गडा तब हसक हो जाती है जब उसका शशु यानी ब ा उसके साथ हो। कारण यह है क वह अपने ब े क रक्षा करना
चाहती है।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“हमारा हाथी आगे बढ़ ा तो एक मादा राइनो (गैड
ं ा) अपने बच् चे के साथ िदखाई दी।
महावत हमें पास नही ं ले गए। उन्होंने कहा िक िशश ु साथ में हो तो माद ा राइनो (गै ंडा) िहंसक हो जाती है।
हाथी के पास आने पर वह हमला कर सकती है।”
दो शब्द समझ ली जए —
शशु = ब ा।
हसक = जो मारने-काटने पर उतर आए।
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वह ऐसा क्य करती है: गडे का ब ा छोटा और कमज़ोर होता है। वह न तेज़ भाग सकता है, न अपनी रक्षा कर
सकता है। इस लए माँ को ही उसक ढाल बनना पड़ता है। पास आती हुई कसी भी बड़ी चीज़ को — यहाँ तक क
हाथी को भी — वह खतरा मान लेती है और पहले ही हमला कर दे ती है। यह क्रोध नह , माँ का डर और प्यार है।
इसी लए महावत पास नह ले गए: महावत यानी हाथी चलाने वाला। वह जंगल को अ तरह जानता है। उसने
दूरी बनाए रखी — यही समझदारी है। जंगल म कसी भी पशु के ब े के पास नह जाना चा हए, चाहे वह कतना ही
प्यारा क्य न लगे।
प्र.1 (ग) भारतीय गड क संख्या क्य घट रही है?
भारतीय गड क संख्या इस लए घट , क्य क लोग ने उनके स ग पाने के लए बहुत बड़ी संख्या म उनका शकार कया।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“पर लोगों ने राइनो के सी ंग पाने के िलए उनका िशकार िकया।
लोग यह मानते थे िक सी ंग में औषिध-संबंधी गुण है।
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बाद में वै ािनकों ने िसद्ध िकया िक सी ंग में ऐसा कु छ नही ं है।
इंिडयन राइनो (भारतीय गैडं ों) का िशकार इतनी अिधक संख्या में हआ
ु है िक अब उनकी संख्या कम हो गई
है।”
बात को क्रम से सम झए —
1. चरण 1: लोग ने मान लया क गडे के स ग म औष ध यानी दवा जैसे गुण ह।
2. चरण 2: इसी व ास पर स ग पाने के लए गड का शकार होने लगा।
3. चरण 3: शकार इतना अ धक हुआ क गड क गनती तेज़ी से गर गई।
4. चरण 4: बाद म वै ा नक ने सद्ध कर दया क स ग म ऐसा कोई गुण है ही नह । पर तब तक बहुत नुकसान हो चुका था।
यह कतना बड़ा नुकसान है, यह ऐसे सम झए: पाठ बताता है क सैकड़ वष पहले ये गडे “प म म पेशावर से
लेकर पूव म असम तक” पाए जाते थे — यानी बहुत बड़े इलाके म। और आज? “इनम आधे से अ धक काजीरंगा म
रहते ह।” इतना बड़ा घर समटकर एक उद्यान जतना रह गया। इसी लए पूरे संसार से पशु-प्रेमी इन्ह दे खने काजीरंगा
आते ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
सीखने क बात: एक ग़लत व ास कतना नुकसान कर सकता है, यह इसका उदाहरण है। लोग बना जाँचे मान
बैठे क स ग म दवा है, और उसी के कारण एक पूरी प्रजा त खतरे म पड़ गई। कसी बात को मानने से पहले यह
पूछना चा हए — इसका प्रमाण क्या है?
प्र.1 (घ) भगवान कृष्ण ने हाथी के स्थान पर गडे को रणक्षेत्र म भेजने का वचार क्य छोड़ दया?
क्य क गडा नदश का पालन नह कर सका। यानी उसे जो सखाया गया, उस पर वह चला ही नह । इस लए भगवान कृष्ण ने
कवच स हत ही उसे वापस वन म भेज दया।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“भगवान कृ ष्ण ने एक बार सोचा िक हाथी के बदले गैड
ं े को रणक्षेत्र में भे जा जाए।
उन्होंने उसे कवच पहनाकर अभ्यास कराया।
पर गैडं ा िनद शों का पालन न कर सका ।
बस भगवान कृ ष्ण ने कवच सिहत ही उसे वापस वन में भे ज िदया।”
तीन शब्द समझ ली जए —
रणक्षेत्र = युद्ध का मैदान।
कवच = लोहे का वह पहनावा जो युद्ध म शरीर को बचाता है।
नदश = बताई गई बात, आदे श।
युद्ध म केवल ताकत काफ़ नह होती: गडा ताकतवर था और उसक खाल भी मोट थी — फर भी काम न
आया। कारण यह क युद्ध म पशु को हर आदे श पर मुड़ना, रुकना और बढ़ना पड़ता है। जो कहा माने ही नह , वह
अपने ही लोग के लए खतरा बन जाता है। हाथी यह सब सीख लेता है, गडा नह सीख सका।
यह कथा पाठ म क्य आई: यह महावत क सुनाई हुई एक रु चकर कथा है। लेखक ने पहले लखा — “इं डयन
राइनो (भारतीय गडे) के शरीर पर मोट तह होती है, जैसे वह कवच पहने हो।” उसी बात पर महावत ने यह कथा
सुनाई, जो बताती है क गडे का ‘कवच’ आया कहाँ से। यह मन बहलाने वाली लोक-कथा है, इ तहास नह ।
प्र.1 (ङ) प्रथम दन क यात्रा के बाद लेखक का मन क्य नह भरा?
क्य क पहले दन क यात्रा बहुत जल्द समाप्त हो गई। जतना दे खा उससे कह अ धक दे खना बाक था, इस लए मन नह भरा।
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पाठ की पंिक्तयाँ —
“हमारी यात्रा शीघ समाप्त हो गई। मेरा मन अभी भरा नही ं था।
अगले िदन सुबह का नाश्ता करके हम िफर िनकल पड़ े। इस बार हम जीप में गए।
साथ में वन संरक्षक भी था।”
शीघ्र यानी जल्द । मन न भरना यानी जी न भरना — अभी और दे खने का मन बना रहना।
मन न भरने के कारण पाठ से ये बनते ह —
1. उद्यान बहुत बड़ा था और उसम सैकड़ पशु थे — एक सुबह म सब कहाँ दख पाते।
2. पहली बार एक स ग वाला गडा सामने दे खा। ऐसी चीज़ एक बार दे खकर मन नह भरता।
3. मादा गडे के पास महावत ले ही नह गए, क्य क साथ म उसका शशु था।
4. अभी बील (झील), उसके पक्षी और जंगली हा थय का झुंड दे खना बाक था — ये सब अगले दन ही दखे।
और इसी का फल क्या मला: दूसरे दन वे जीप म, वन संरक्षक के साथ गए। उसी दन उन्ह बील पर सैकड़ पक्षी,
पानी म ऊद बलाव और लौटते समय जंगली हा थय का पूरा झुंड दखा। लेखक ने खुद लखा — “लौटते समय तो
हमारे भाग्य ही खुल गए।” यानी मन न भरना अ ा ही रहा — दोबारा जाने से ही वह सब दे खने को मला।
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा
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दए गए चत्र को ध्यान से दे खए।
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यहाँ पक्षी से संबं धत एक प्रश्न दया गया है। अब आप भी अपनी लेखन-पु स्तका म इस पक्षी से संबं धत तीन
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और प्रश्न का नमाण क जए — उदाहरण — यह चत्र कस पक्षी का है?
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s e mपृष्ठ 90 पर एक रंग- बरंगा तोते जैसा पक्षी पेड़ क डाल पर बैठा है। उसके पंख म लाल, पीला और नीला रंग है और च च मोट
agla तथा मुड़ी हुई है। इसे मकाऊ कहते ह — यह तोते के प रवार का ही पक्षी है।
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पुस्तक ने एक प्रश्न उदाहरण के लए दे दया है — “यह चत्र कस पक्षी का है?” अब आपको तीन और प्रश्न बनाने ह।
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नमूना उत्तर — मेरे तीन प्रश्न:
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1. इस पक्षी के पंख म कौन-कौन से रंग दखाई दे रहे ह?
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3. यह पक्षी कस चीज़ पर बैठा है और उसके आसपास क्या-क्या दख रहा है?
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चाह तो इनम से भी चुन सकते ह —
प्रश्न यह प्रश्न कस बात उत्तर (जो चत्र से मलता है)
पर है
इस पक्षी के पंखों में कौन-कौन रंग लाल , पीला, नीला और थोड़ ा हरा।
से रंग है?ं
इसकी चोंच कै सी है? बनावट मोटी, मज़ बूत और नीचे की ओर मुड़ी हुई — ऐसी चोंच से कड़ े बीज और फल
आसानी से तोड़ े जाते है।ं
यह िकस पर बैठा है? जगह एक पेड़ की डाल पर। आसपास लंबी हरी पित्तयाँ है।ं
इसकी पूँछ कै सी है? बनावट लंबी और नुक ीली, िजसमें भी रंग भरे है।ं
यह पक्षी क्या खाता होगा? भोजन फल , बीज और मेवे। तोते वाली मुड़ी चोंच इसी काम की होती है।
क्या यह पक्षी हमारे आसपास अपना अनुभव यह पक्षी हमारे यहाँ खुले में नही ं िदखता; हरा तोता ज़ रूर िदखता है।
िदखता है?
अ ा प्रश्न कैसे बनता है: चत्र को चार आँख से दे खए — रंग, आकार, जगह और काम। हर एक पर एक प्रश्न
बन जाता है। और प्रश्न ऐसा बनाइए जसका उत्तर चत्र दे खकर दया जा सके — जैसे “इसक च च कैसी है?”
अ ा प्रश्न है, पर “इसक उम्र कतनी है?” का उत्तर चत्र से नह मलेगा।
ध्यान रहे: प्रश्न के अंत म प्रश्नवाचक चह्न (?) ज़रूर लगाइए, और प्रश्न म कौन, क्या, कैसा, कहाँ, क्य , कतने
जैसे शब्द र खए। इन्ह शब्द से वाक्य प्रश्न बनता है।
भाषा क बात — पृष्ठ 90, 91 और 92
कोष्ठक म से उ चत शब्द चुनकर रक्त स्थान भरना, समूहवाचक शब्द (झुंड, गु ा, जोड़ी …) तथा अनेक शब्द के लए एक शब्द
भाषा क बात ाकरण
प्र.1 (क) कोष्ठक म से उ चत शब्द का चयन कर रक्त स्थान क पू त क जए — (क) आज ............ ही हम हा थय
पर चढ़कर उद्यान दे खने गए। (भोर, सुबह)
सही शब्द है — सुबह।
पूरा वाक्य —
“आज स ुबह ही हम हािथयों पर चढ़ कर उद्य ान दे खने गए।”
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यही वाक्य पाठ म पृष्ठ 85 पर ज्य -का-त्य छपा है, इस लए इसम कोई संदेह नह रहता।
‘भोर’ यहाँ क्य नह बैठता: ‘भोर’ का अथ है — सूरज नकलने से ठ क पहले का समय। पर हद म हम कहते ह
“भोर म” या “भोर होते ही”, अकेला ‘भोर’ इस वाक्य म अटपटा लगता है। ‘सुबह’ शब्द ऐसे ही चल जाता है —
“आज सुबह ही”। इस लए वाक्य म ‘सुबह’ ही ठ क बैठता है।
पास क एक और पं क्त: इसी अनु े द म आगे लखा है — “इसके लए हम बहुत सवेरे उठना पड़ा — तब सूरज
भी नह नकला था।” यानी उठे तो वे भोर म ही थे, पर उद्यान क सैर ‘सुबह’ हुई।
प्र.1 (ख) (ख) हमने एक स ग वाला गडा ............ बार दे खा। (पहले, पहली)
सही शब्द है — पहली।
पूरा वाक्य —
“हमने एक सी ंग वाला गैड
ं ा पहली बार दे खा।”
‘पहली’ क्य , ‘पहले’ क्य नह : क्य क आगे शब्द है बार, और ‘बार’ स्त्री लग है। स्त्री लग शब्द के साथ वशेषण
भी स्त्री लग रूप म आता है। इस लए — पहली बार, दूसरी बार, तीसरी बार। ‘पहले’ पु ल्लंग रूप है, जैसे — पहले
दन, पहले महीने।
सही ग़लत कारण
पहली बार पहले बार ‘बार’ स्त्री लग है
पहला िदन पहली दन ‘ दन’ पु ल्लंग है
दू स री क क्षा दूसरे कक्षा ‘कक्षा’ स्त्री लग है
तीसरा पाठ तीसरी पाठ ‘पाठ’ पु ल्लंग है
प्र.1 (ग) (ग) हमारी यात्रा कुछ ............ ही समाप्त हो गई। (धीरे, जल्द )
सही शब्द है — जल्द ।
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पूरा वाक्य —
“हमारी यात्रा कु छ जल्द ी ही समाप्त हो गई।”
पाठ म यही बात इस तरह लखी है — “हमारी यात्रा शीघ्र समाप्त हो गई। मेरा मन अभी भरा नह था।” शीघ्र का अथ ही जल्द है।
‘धीरे’ यहाँ क्य नह बैठता: ‘धीरे’ का अथ है — मंद ग त से। पर यहाँ बात ग त क नह , समय क है — यात्रा
कतनी दे र चली। यात्रा जल्द खत्म हो गई, तभी तो मन नह भरा और अगले दन वे फर नकल पड़े। ‘धीरे समाप्त
हो गई’ कहने से अथ ही नह बनता।
प्र.1 (घ) (घ) ाइवर हम एक बील यानी झील क ............ ले गया। (और, ओर)
सही शब्द है — ओर।
पूरा वाक्य —
“डाइवर हमें एक बील यानी झील की ओ र ले गया।”
इन दो शब्द को हमेशा के लए अलग-अलग पहचान ली जए —
शब्द अथ वाक्य
ओर दशा, तरफ़ नाव झील की ओर बढ़ रही थी।
और तथा; दो चीज़ को जोड़ने वाला शब्द बील पर सारस और बगुल ा बैठे थे।
पहचानने का आसान तरीका: वाक्य म उस शब्द क जगह ‘तरफ़’ रखकर दे खए। अगर बात बन जाए तो ओर
ल खए — “झील क तरफ़ ले गया” — बात बनती है, इस लए ‘ओर’ सही है। और अगर ‘तथा’ रखकर बात बने
तो और ल खए।
बील क्या है: पाठ ने खुद बता दया — “एक बील यानी झील”। असम म झील को ‘बील’ कहते ह। लेखक ने पहले
वहाँ का शब्द दया, फर उसका अथ — यह अ े लेखन का ढं ग है।
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प्र.1 (ङ) (ङ) मागदशक (गाइड) ने बताया ............ उन्ह दे खना क ठन है। ( क, क )
सही शब्द है — क।
पूरा वाक्य —
“मागदशक (गाइड) ने बताया िक उन्हे ं दे खना किठन है।”
पाठ म भी यही वाक्य है — “गाइड ने बताया क उन्ह दे खना क ठन है क्य क वे रात म ही नकलते ह।”
शब्द काम वाक्य
िक दो वाक्य को जोड़ता है — प्रायः ‘कहा’, ‘बताया’, ‘सुना’, ‘लगा’ के बाद महावत ने कहा िक मादा गैंडा िहंस क हो जाती है।
की संबंध बताता है — कसका, कसक यह गैंडे की खाल है।
पहचानने का आसान तरीका: ‘क ’ से पहले हमेशा कोई नाम या वस्तु होती है और वह बताता है क चीज़ कसक
है — जैसे “झील क ओर”, “मेरी क हुई मेहनत”। पर ‘ क’ के आगे पूरा नया वाक्य शुरू हो जाता है — “बताया
क उन्ह दे खना क ठन है।” यही सबसे पक्क पहचान है।
एक शब्द और: यहाँ ‘गाइड’ के साथ हद शब्द मागदशक दया गया है — माग यानी रास्ता, दशक यानी दखाने
वाला। यानी रास्ता दखाने वाला।
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प्र.2 (क) “सामने जंगली हा थय का एक झुंड दखा।” यहाँ ‘झुंड’ शब्द का प्रयोग हा थय के समूह के लए कया गया
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o आ द। (क) नीचे दए गए चत्र का सही नाम के साथ मलान क जए g—l
है। भन्न- भन्न समूह के लए ऐसे ही कुछ अन्य शब्द का प्रयोग कया जाता है, जैसे – अं गूर का गु ा, जूत
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पृष्ठ 91 पर दया गया मलान अभ्यास। एक मलान पुस्तक म पहले से कर दया गया है।
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पृष्ठ 91 पर बाईं ओर सात चत्र ह और दाईं ओर सात नाम। हा थय वाले चत्र का मलान पुस्तक ने पहले ही ‘झुंड’ से जोड़कर
दखा दया है। पूरा सही मलान यह रहा —
क्रम चत्र म क्या है सही समूहवाचक पूरा रूप
शब्द
1 छल्ले म लगी बहुत-सी चा बयाँ गुच्छा चा बय का गु ा
2 साथ-साथ खड़े कई हाथी झुंड हा थय का झुंड (यह मलान पुस्तक म पहले से बना हुआ
है)
3 मेज़ पर पढ़ते हुए वद्याथ क क्षा वद्या थय क कक्षा
4 डाल पर लटका मधुम क्खय का छत्ता मधुम क्खय का छत्ता
घर
5 एक साथ खड़े बहुत-से लोग भीड़ लोग क भीड़
6 एक के ऊपर एक रखी लक ड़याँ गट्ठर लक ड़य का गट्ठर
7 चरती हुई भेड़ और मेमना रे वड़ भेड़ का रेवड़
हर समूह का अपना शब्द क्य : हद म समूह के लए एक ही शब्द नह चलता। जो चीज़ डोरी या डंठल से बँधी ह ,
उनके लए गु ा या गट्ठर; जो जीव साथ-साथ चलते ह , उनके लए झुंड या रेवड़; जो लोग बेतरतीब जमा ह ,
उनके लए भीड़; और जो ब े पढ़ने के लए बैठे ह , उनके लए कक्षा। सही शब्द चुनने से वाक्य सुंदर लगता है।
याद रखने क बात: ‘रेवड़’ खास तौर पर भेड़-बक रय के लए बोला जाता है, और ‘झुंड’ बड़े पशुओं तथा प क्षय
के लए — जैसे पाठ म “ हरण और जंगली भस के कई झुंड”, “प क्षय के झुंड”, “जंगली हा थय का एक झुंड”।
प्र.2 (ख) (ख) अब मलान कए गए समूह वाले शब्द का वाक्य म प्रयोग क जए। जैसे – मेले म लोग क बहुत भीड़
थी।
सात समूहवाचक शब्द के वाक्य नीचे दए ह। समूहवाचक शब्द मोटे अक्षर म है।
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शब्द वाक्य
ग च्ु छा माँ ने अलमारी खोलने के िलए चािबयों का गुच्छा मुझे थमा िदया।
झुंड शाम होते ही पिक्षयों का एक झुंड पेड़ पर लौट आया।
कक्षा हमारी क क्षा ने िमलकर िवद्यालय के आँगन में पौधे लगाए।
छत्ता आम की डाल पर मधुमिक्खयों का बड़ ा छत्ता लटका है, इसिलए हम उधर नही ं जाते।
भीड़ मेले में लोगों की बहुत भीड़ थी। (यह वाक्य पुस्तक ने उदाहरण के रूप में िदया है।)
गट्ठर दादी िसर पर लकिड़ यों का गट्ठर रखकर खेत से लौटी ं।
रे वड़ चरवाहा भेड़ों का रे वड़ ले क र पहाड़ ी की ओर चल पड़ ा।
कुछ और समूहवाचक शब्द, जो रोज़ काम आते ह —
समूह शब्द वाक्य
अंग ूर गु ा बाज़ ार से अंगूरों का एक गुच्छा लाइए।
जूते जोड़ी मुझे नए जूतों की एक जोड़ ी िमली है।
गाय-भैस
ं गल्ला / झुंड गायों का झुंड तालाब की ओर जा रहा है।
कागज़ ढे र मेज़ पर कागज़ ों का ढे र लगा था।
फू ल गुलदस्ता अितिथ को फू लों का गुल द स्ता भेटं िकया गया।
तारे समूह आकाश में तारों का एक सुंद र समूह िदखाई दे ता है।
वाक्य बनाते समय: पहले सो चए क वह चीज़ कसक है — “चा बय का”, “भेड़ का”, “मधुम क्खय का”।
फर उसके आगे समूह वाला शब्द र खए। इससे वाक्य अपने आप सही बन जाता है।
प्र.3 (क) अब नीचे दए गए वाक्य म रेखां कत वाक्यांश के स्थान पर ता लका म से एक शब्द चुनकर वाक्य को पुनः
ल खए — (क) काजीरंगा का स दय दे खने योग्य है। (ता लका — साप्ता हक, मृदुभाषी, अग्रज, प्रशंसनीय,
दशनीय)
सही शब्द है — दशनीय।
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पहले —
काजीरंगा का सौंद य दे खने योग्य है।
अब —
काजीरंगा का सौंद य द श नीय है।
दशनीय = जो दे खने योग्य हो। यह ‘दशन’ शब्द से बना है, और दशन का अथ है — दे खना।
यह काम क्य सीखते ह: पुस्तक ने पृष्ठ 92 पर खुद समझाया है — ‘घोड़ा घास खाता है’ और ‘घोड़ा शाकाहारी है’
— दोन म एक ही बात है। ‘घास खाने वाला’ इन तीन शब्द क जगह एक शब्द ‘शाकाहारी’ रख दया गया, और
अथ म कोई अंतर नह आया। इसी तरह ‘दे खने योग्य’ क जगह ‘दशनीय’ रख दे ने से वाक्य छोटा और सुंदर हो
जाता है।
अपना वाक्य बनाइए: हमारे शहर का कला भी बहुत दशनीय है।
प्र.3 (ख) (ख) र श्म का काय प्रशंसा के योग्य है।
सही शब्द है — प्रशंसनीय।
पहले —
रिश्म का काय पशंसा के योग्य है।
अब —
रिश्म का काय पशंसनीय है।
प्रशंसनीय = जो प्रशंसा के योग्य हो, यानी जसक तारीफ़ क जानी चा हए। यह ‘प्रशंसा’ शब्द से बना है।
ध्यान द जए: ‘दशनीय’ और ‘प्रशंसनीय’ — दोन के अंत म -नीय लगा है। हद म ‘-नीय’ जोड़ने से प्रायः वही
अथ बनता है — “जो ऐसा कए जाने योग्य हो”। जैसे — पठनीय (पढ़ने योग्य), आदरणीय (आदर के योग्य),
स्मरणीय (याद रखने योग्य)।
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अपना वाक्य बनाइए: सफ़ाई करने वाल का काम सचमुच प्रशंसनीय है।
प्र.3 (ग) (ग) गौरव को उसके सहपाठ मधुर बोलने वाला लड़का मानते ह।
सही शब्द है — मृदुभाषी।
पहले —
गौरव को उसके सहपाठी मधुर बोलने वाला लड़ का मानते है।
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अब —
गौरव को उसके सहपाठी म ृद ुभ ाषी मानते है।
ं
मृदुभाषी = मीठा बोलने वाला। यह दो शब्द से बना है — मृदु (कोमल, मीठा) + भाषी (बोलने वाला)।
सहपाठ = साथ पढ़ने वाला। सह यानी साथ, पाठ यानी पढ़ने वाला।
वाक्य म ‘लड़का’ का क्या हुआ: ‘मृदुभाषी’ शब्द अपने आप म ‘ऐसा व्य क्त’ का अथ रखता है, इस लए ‘लड़का’
लखना ज़रूरी नह रह जाता। चाह तो “गौरव को उसके सहपाठ मृदुभाषी लड़का मानते ह” भी लख सकते ह —
दोन ठ क ह। पर छोटा वाक्य अ धक सुंदर लगता है।
अपना वाक्य बनाइए: हमारे वद्यालय के चौक दार बहुत मृदुभाषी ह, इस लए ब े उनसे बात करने म झझकते
नह ।
प्र.3 (घ) (घ) वद्यालय म सप्ताह म एक बार श्रमदान कया जाता है।
सही शब्द है — साप्ता हक।
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िवद्यालय में सप्ताह में एक बार श्रमदान िकया जाता है।
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िवद्य ालय में प् मदान िकया जाता है।
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g बार। यह ‘सप्ताह’ शब्द से बना है।
साप्ता हक = जो हर सप्ताह हो, यानी सप्ताह मaएक
श्रमदान = अपना श्रम यानी मेहनत बना पैसे लए दे ना — जैसे मलकर आँगन साफ़ करना, क्यारी बनाना।
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कतनी बार एक शब्द वाक्य
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हर िदन दै िनक हम दै नक प्राथना म भाग लेते ह।
aglहर सप्ताह साप्तािहक हमारे गाँव म साप्ता हक बाज़ार लगता है।
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हर महीने मािसक मा सक परीक्षा हर महीने के अंत म होती है।
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वािषक
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हर साल
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(ङ) मेरा बड़ा भाई सै नक है।
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सही शब्द है — अग्रज।
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पहले —
मेरा बड़ ा भाई सैिनक है।
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अग ज सैिनक है।
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अग्रज = बड़ा भाई। यह दो हस्स से बना है — अग्र (आगे) + ज (जन्मा हुआ)। यानी जो पहले जन्मा, वह अग्रज।
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इसी से जुड़ा एक और शब्द: जो बाद म जन्मा, उसे अनुज कहते ह — यानी छोटा भाई। ‘अनु’ का अथ है —
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पीछे । इस लए अग्रज = बड़ा भाई और अनुज = छोटा भाई।
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अब पाँच उत्तर एक साथ दे ख ली जए —
वाक्य रेखां कत वाक्यांश एक शब्द
(क) काजीरंग ा का सौंद य दे खने योग्य है। दे खने योग्य दशनीय
(ख) रिश्म का काय पशंस ा के योग्य है। प्रशंसा के योग्य पशंस नीय
(ग) गौरव को उसके सहपाठी मध रु बोलने वाला लड़का मानते है।
ं मधुर बोलने वाला मृद ुभाषी
(घ) िवद्यालय में सप्ताह में एक बार श्रमदान िकया जाता है। सप्ताह म एक बार साप्तािहक
(ङ) मेर ा बड़ा भाई सै िनक है। बड़ा भाई अगज
जाँच का तरीका: ता लका के पाँच शब्द एक-एक बार ही काम आते ह। इस लए उत्तर लख लेने के बाद गन
ली जए — कोई शब्द बचा तो नह , कोई दो बार तो नह लखा गया।
पाठ से आगे — पृष्ठ 92, 93 और 94
पत्र म आए प्रा णय के अपने-अपने नाम, तथा भारत के मान चत्र म दखाए गए प्रमुख रा ीय उद्यान पर आधा रत प्रश्न
पाठ से आगे मान चत्र
प्र.1 इस पत्र म बहुत-से प्रा णय के नाम आए ह। आप उन प्रा णय को कस नाम से पुकारते ह? अपने अ भभावक
क सहायता से कुछ पशु-प क्षय के नाम यहाँ ल खए —
पृष्ठ 92 पर आठ खाने बने ह। हर खाने म एक प्राणी का वह नाम लखना है, जससे आप उसे पुकारते ह।
पहले पत्र म से प्रा णय के नाम छाँट ली जए। पत्र म ये नाम आए ह — हरण, जंगली भसा, गडा (एक स ग वाला/इं डयन
राइनो), हाथी, जंगली सूअर, ऊद बलाव, रॉयल बंगाल टाइगर, पे लकन, सारस, बगुला, कलहोन, तथा चार तरह के हरण
— भ कने वाला हरण, बौना सूअर हरण, दलदली हरण और साँभर हरण।
नमूना उत्तर — आठ खाने भरे हुए:
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
खाना पत्र म जो नाम आया है हम इसे जस नाम से पुकारते ह
खाना 1 गडा (इं डयन राइनो) गैंडा — हमारे यहाँ इसी नाम से पुक ारा जाता है। पत्र में इसे ‘एक सी ंग वाला गैंडा’ भी कहा गया है।
खाना 2 हाथी हाथी — घर में बड़ े इसे प्यार से ‘गजराज’ भी कह दे ते है।ं मादा को ‘हिथनी’ कहते है।ं
खाना 3 हरण िहरन — बोलचाल में हम ‘िहरन’ ही बोलते है।ं िकताबों में ‘मृग’ भी आता है।
खाना 4 जंगली भसा भैसं ा — खेतों वाले भैसं े को हम ‘भैसं ा’ और मादा को ‘भैसं ’ कहते है।ं
खाना 5 रॉयल बंगाल टाइगर बाघ — बोलचाल में बहुत लोग इसे ‘शेर’ भी कह दे ते है,ं यद्यिप बाघ और शेर अलग-अलग पशु है।ं
खाना 6 जंगली सूअर सूअर — हमारे यहाँ ‘जंगली सूअर’ कहकर ही बुल ाया जाता है।
खाना 7 बगुला बगुल ा — खेत में पानी भर जाने पर ये सफ़े द पक्षी आ जाते है।ं कु छ लोग ‘बगला’ भी बोलते है।ं
खाना 8 सारस सारस — लंबी टाँगों और लंबी गरदन वाला बड़ ा पक्षी। हमारे यहाँ इसे इसी नाम से जानते है।ं
ये नाम भी काम आ सकते ह —
पत्र का शब्द हद म इसे और कस नाम से कहते ह
पेिलकन हवासील
ऊदिबलाव ऊद , ऊदिबलाव — पानी में रहने वाला िबलाव जैस ा जीव
साँभर िहरण साँभर — सबसे बड़ ा भारतीय िहरण
दलदली िहरण बारहिसंगा — इसी का नाम मानिचत्र में कान्हा रा ीय उ द्यान के साथ भी आया है
ध्यान रहे: एक ही जीव का नाम हर इलाके म अलग हो सकता है — गाँव म कुछ और, शहर म कुछ और। इस लए
प्रश्न म साफ़ लखा है — “अपने अ भभावक क सहायता से”। घर के बड़ से पू छए क आपके क्षेत्र म इन्ह क्या
कहते ह, और वही नाम खाने म ल खए। अपनी बोली का शब्द लखना इस प्रश्न म सबसे अ ा उत्तर है।
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प्र.2 (क) नीचे भारत के मान चत्र म कुछ प्रमुख रा ीय उद्यान दशाए गए ह। इसम द गई सूचनाओं को समझते हुए दए
गए प्रश्न के उत्तर ल खए —
िहमाचल प देश उ त्त राखंड
ग ेट िहमालयन रा ीय उद्य ान िजम कॉबट रा ीय उद्य ान
(जैव िविवधता के िलए पिसद्ध ) भारत का सबसे पुराना और
पथम रा ीय उद्य ान
(बाघों, हािथयों, िहरणों और
पिक्षयों के िलए पिसद्ध )
राज स्थान
रणथंभौर रा ीय उद्य ान उ त्त र पदेश
(बाघों के िलए पिसद्ध ) दुधवा रा ीय उद्य ान
(दुल भ और लुप्तपाय
पजाितयों का घर)
ध्
म य प देश
कान्हा रा ीय उद्य ान असम
(बारहिसंग ा के िलए पिसद्ध ) काजीरंग ा रा ीय उद्य ान
(एक सी ंग वाले गैंडे के
िलए पिसद्ध )
श्
पि चम बंगाल
सुंद रबन रा ीय उद्य ान
(रॉयल बंग ाल टाइगर
के िलए पिसद्ध )
के रल ओिडशा
पेिरयार रा ीय उद्य ान िसमिलपाल रा ीय उद्य ान
(हािथयों के िलए पिसद्ध ) (बाघ अभयारण्य)
पृष्ठ 93 पर दया गया भारत का मान चत्र, जसम कुछ प्रमुख रा ीय उद्यान दशाए गए ह।
(क) हा थय के लए प्र सद्ध रा ीय उद्यान कौन-से राज्य म स्थत है?
केरल म। मान चत्र म केरल के साथ लखा है — पे रयार रा ीय उद्यान (हा थय के लए प्र सद्ध)।
मानिचत्र की सूच ना —
के रल → पेिरयार रा ीय उद्य ान ( हािथ यों के िलए पिस द्ध )
एक बात ध्यान से दे खए: मान चत्र म हा थय का नाम एक और जगह भी आया है — उत्तराखंड के जम कॉबट
रा ीय उद्यान के साथ, जो “बाघ , हा थय , हरण और प क्षय के लए प्र सद्ध” बताया गया है। पर वहाँ हाथी चार
नाम म से एक ह। जस उद्यान क पहचान केवल हा थय से बताई गई है, वह पे रयार है। इस लए इस प्रश्न का
उत्तर केरल ही है।
पूरा वाक्य ऐसे ल खए: हा थय के लए प्र सद्ध पे रयार रा ीय उद्यान केरल राज्य म त है।
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प्र.2 (ख) (ख) सुंदरबन रा ीय उद्यान कस राज्य म स्थत है और यह कस लए प्र सद्ध है?
सुंदरबन रा ीय उद्यान प म बंगाल म त है और यह रॉयल बंगाल टाइगर के लए प्र सद्ध है।
मानिचत्र की सूच ना —
पिश्चम बंगाल → सुंद रबन रा ीय उद्य ान ( रॉयल बंग ाल टाइगर के िलए पिसद्ध )
प्रश्न म दो बात पूछ गई ह, इस लए उत्तर म भी दोन आनी चा हए — राज्य और कसके लए प्र सद्ध।
पाठ से जो ड़ए: ‘रॉयल बंगाल टाइगर’ का नाम इसी पत्र म भी आया है — “काजीरंगा म मांसाहारी रॉयल बंगाल
टाइगर भी ह पर हम दखे नह ।” यानी यह बाघ सुंदरबन के अलावा काजीरंगा म भी मलता है।
पूरा वाक्य ऐसे ल खए: सुंदरबन रा ीय उद्यान प म बंगाल म त है और यह रॉयल बंगाल टाइगर के लए
प्र सद्ध है।
प्र.2 (ग) (ग) भारत का सबसे पुराना और प्रथम रा ीय उद्यान कौन-सा है और यह कस राज्य म स्थत है?
भारत का सबसे पुराना और प्रथम रा ीय उद्यान जम कॉबट रा ीय उद्यान है। यह उत्तराखंड म त है।
मानिचत्र की सूच ना —
उत्तराखंड → िजम कॉबट रा ीय उद्य ान भारत का सबसे प ुराना औ र पथ म रा ीय उ द्य ान
(बाघों, हािथयों, िहरणों और पिक्षयों के िलए पिसद्ध )
प्रथम का अथ है — पहला। यानी भारत म रा ीय उद्यान बनाने क शुरुआत इसी से हुई।
पूरा वाक्य ऐसे ल खए: भारत का सबसे पुराना और प्रथम रा ीय उद्यान जम कॉबट रा ीय उद्यान है, जो
उत्तराखंड राज्य म त है। यह बाघ , हा थय , हरण और प क्षय के लए प्र सद्ध है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
(घ) स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ का उ चत मलान क जए — स्तंभ ‘क’: i. पे रयार रा ीय उद्यान, ii. एक स ग
em
प्र.2 (घ)
m a s
gl गा रा ीय उद्यान, v.
वाले गडे के लए प्र सद्ध, iii. दुधवा रा ीय उद्यान, iv. ओ डशा, v. कान्हा रा ीय उद्यान। स्तंभ ‘ख’: i. दुलभ
. cलुoप्तप्राय प्रजा तय का घर, ii. केरल, iii. सम लपाल रा ीय उद्यान, iv. aकाजीरं
sem
और
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मध्यप्रदे श।
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m
पूरा सही मलान नीचे दया है। हर जोड़ी का आधार मान चत्र म छपी सूचना ही है।
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स्तंभ ‘क’ मलान l
स्तंभg‘ख’
a आधार (मान चत्र क सूचना)
i. पेिरयार रा ीय उद्यान → ii. के रल
co m
केरल → पे रयार रा ीय उद्यान (हा थय के लए प्र सद्ध)
e m.
m काजीरंगा रा ीय उ द्यान
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ii. एक सी ंग वाले गैंडे के असम → काजीरंगा रा ीय उद्यान (एक स ग वाले गडे के
g
→ iv.
em
िलए पिसद्ध लए प्र सद्ध)
a
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agliii. दुधवा रा ीय उद्यान → i. दुल भ और लुप्तपाय पजाितयों
का घर
उत्तर प्रदे श → दुधवा रा ीय उद्यान (दुलभ और लुप्तप्राय
प्रजा तय का घर)
िसमिलपाल रा ीयoउm a s
.c agl
द्य ान ओ डशा → सम लपाल रा ीय उद्यान (बाघ अभयारण्य)
em
iv. ओिडशा → iii.
asदे श
मlध्यप
ag
v. कान्हा रा ीय उद्यान → v. मध्यप्रदे श → कान्हा रा ीय उद्यान (बारह सगा के लए
प्र सद्ध)
co m
m .
as e
मलान करने का तरीका: ध्यान द जए क यहाँ जो ड़याँ एक ही तरह क नह ह। कह उद्यान का नाम राज्य से
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जुड़ता है (पे रयार → केरल, कान्हा → मध्यप्रदे श), कह राज्य उद्यान से जुड़ता है (ओ डशा → सम लपाल), और
s e m पहचान उद्यान से जुड़ती है (एक स ग वाला गडा → काजीरंगा, दुलभ प्रजा तय का घर → दुधवा)। इस लए
la पहले वे जो ड़याँ मलाइए जो आपको पक्क मालूम ह, फर बचे हुए मलते जाएँगे।
कह
ag
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अभ्यास के लए मान चत्र क पूरी सूची एक जगह दे ख ली जए —
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राज्य रा ीय उद्यान कसके लए प्र सद्ध
िहमाचल पदे श ग्रेट हमालयन रा ीय उद्यान जैव िविवधता के िलए
उत्तराखंड जम कॉबट रा ीय उद्यान भारत का सबसे पुराना और पथम रा ीय उ द्यान; बाघों, हािथयों, िहरणों और पिक्षयों के िलए
राजस्थान रणथंभौर रा ीय उद्यान बाघों के िलए
उत्तर पदे श दुधवा रा ीय उद्यान दुल भ और लुप्तपाय पजाितयों का घर
मध्यपदे श कान्हा रा ीय उद्यान बारहिसंगा के िलए
असम काजीरंगा रा ीय उद्यान एक सी ंग वाले गैंडे के िलए
पिश्चम बंग ाल सुंदरबन रा ीय उद्यान रॉयल बंगाल टाइगर के िलए
ओिडशा सम लपाल रा ीय उद्यान बाघ अभयारण्य
के रल पे रयार रा ीय उद्यान हािथयों के िलए
जोड़ने क बात: मान चत्र म असम के साथ जो लखा है — “काजीरंगा रा ीय उद्यान (एक स ग वाले गडे के लए
प्र सद्ध)” — वही बात पत्र म भी है: “उनम कुछ एक स ग वाले गडे भी थे। इसी पशु के कारण काजीरंगा पूरे संसार
म प्र सद्ध हो गया है।” पाठ और मान चत्र एक ही बात कह रहे ह।
यह भी जान — पृष्ठ 94
रा ीय उद्यान एक ऐसा क्षेत्र है जसे सरकार ारा प्राकृ तक पयावरण के संरक्षण के लए सुर क्षत रखा जाता है। यहाँ उप स्थत पेड़-पौधे, पशु-
पक्षी अपनी प्राकृ तक अवस्था म संर क्षत रहते ह। भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार वतमान म भारत म 106 रा ीय उद्यान ह।
यह भी जान जानकारी
प्र.1 ‘यह भी जान’ के अनुसार रा ीय उद्यान कसे कहते ह? भारत म इस समय कतने रा ीय उद्यान ह?
रा ीय उद्यान वह क्षेत्र है जसे सरकार प्राकृ तक पयावरण के संरक्षण के लए सुर क्षत रखती है। वहाँ के पेड़-पौधे और पशु-पक्षी
अपनी प्राकृ तक अवस्था म सुर क्षत रहते ह। भारतीय वन्यजीव सं ान के अनुसार इस समय भारत म 106 रा ीय उद्यान ह।
पृष्ठ 94 पर छपी पंिक्तयाँ —
“रा ीय उद्य ान एक ऐसा क्षेत्र है िजसे सरकार ारा पाकृ ितक पय वरण के संरक्षण के िलए सुरिक्षत रखा जाता है।
यहाँ उपिस्थत पेड़-पौधे, पशु-पक्षी अपनी पाकृ ितक अवस्था में संरिक्षत रहते है।
ं
भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार वत मान में भारत में 106 रा ीय उद्य ान है।
ं ”
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
तीन शब्द समझ ली जए —
संरक्षण = बचाकर रखना, रक्षा करना।
प्राकृ तक अवस्था = जैसा प्रकृ त ने बनाया, वैसा ही रूप — बना पजरे, बना बदलाव।
वतमान म = इस समय।
च ड़याघर और रा ीय उद्यान म अंतर: च ड़याघर म पशु-पक्षी बाड़े या पजरे म रखे जाते ह और उन्ह खाना दया
जाता है। रा ीय उद्यान म वे अपने असली जंगल म, खुले रहते ह — अपना भोजन खुद ढूँ ढ़ते ह, अपने झुंड म रहते
ह। इसी लए काजीरंगा म लोग हाथी पर या जीप म बैठकर उन्ह दे खने जाते ह, जीव पजरे म नह होते।
पत्र से जो ड़ए: यही कारण है क पाठ म महावत उन्ह मादा गडे के पास नह ले गए और गाइड ने बताया क बाघ
रात म नकलते ह। खुले जंगल म हम मेहमान ह, मा लक नह — इस लए वहाँ के नयम मानने पड़ते ह।
प्र.2 रा ीय उद्यान बनाने क ज़रूरत क्य पड़ी? इस पाठ से एक उदाहरण दे कर समझाइए।
रा ीय उद्यान इस लए बनाने पड़े, क्य क शकार और जंगल कटने से बहुत-से जीव क संख्या तेज़ी से घट रही थी। सुर क्षत
क्षेत्र बना दे ने पर वहाँ शकार रुक जाता है और जीव फर से बढ़ने लगते ह।
पाठ का उदाहरण — एक स ग वाला गडा:
1. पहले: “सैकड़ वष पहले इं डयन राइनो (भारतीय गडे) प म म पेशावर से लेकर पूव म असम तक पाए जाते थे।” यानी उनका
घर बहुत बड़ा था।
2. फर क्या हुआ: “लोग ने राइनो के स ग पाने के लए उनका शकार कया।” “ शकार इतनी अ धक संख्या म हुआ है क अब
उनक संख्या कम हो गई है।”
3. अब: “इनम आधे से अ धक काजीरंगा म रहते ह। इसी लए पूरे संसार से पशु-प्रेमी इसे दे खने काजीरंगा आते ह।”
इससे क्या सद्ध होता है: जो जीव पेशावर से असम तक फैला हुआ था, वह समटकर एक उद्यान म रह गया। अगर
काजीरंगा जैसा सुर क्षत क्षेत्र न होता, तो शायद वह भी न बचता। इसी लए रा ीय उद्यान ज़रूरी ह — वे जीव को
जगह भी दे ते ह और सुरक्षा भी।
पुस्तक से बाहर क जानकारी (साफ़ च ह्नत): काजीरंगा रा ीय उद्यान को यूनेस्को ने वश्व धरोहर स्थल घो षत
कया है, यानी इसे पूरी दु नया के लए सँभालकर रखने योग्य माना गया है। यह बात पाठ्यपुस्तक म नह छपी है
— इसे केवल अपनी जानकारी के लए याद र खए, उत्तर म लखना हो तो साथ म यह भी लख द जए क यह
पुस्तक के बाहर क जानकारी है।
पुस्तकालय एवं अन्य ोत — पृष्ठ 95 और 96
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कसी एक पक्षी अभयारण्य के बारे म पढ़कर कक्षा म प्रस्तु त दे ना, तथा बादल म बने चत्र को बदु मलाकर पूरा करना
पु स्तकालय एवं अन्य ोत गतवध
प्र.1 (क) वद्यालय के पुस्तकालय म जाकर भारत के कसी एक पक्षी अभयारण्य के बारे म प ढ़ए। … आप अपनी
प्रस्तु त म नम्न ल खत जानकारी स म्म लत कर सकते ह — (क) पक्षी अभयारण्य क्या है?
पक्षी अभयारण्य वह सुर क्षत क्षेत्र है जो खास तौर पर प क्षय के लए बनाया जाता है, ता क वे वहाँ बना डर के रह सक, घ सले
बना सक और अंडे दे सक।
अभयारण्य शब्द को टु कड़ म दे खए — अभय यानी बना डर के, अरण्य यानी जंगल। यानी वह जंगल जहाँ जीव नडर होकर रह
सक।
बात पक्षी अभयारण्य म क्या होता है
जगह पायः झील , तालाब, दलदल या नदी का िकनारा — क्योंिक जल पिक्षयों को पानी चािहए।
भोजन पानी में मछली, कीड़ े और जलीय पौधे — जो पिक्षयों का पाकृ ितक भोजन है।
सुर क्षा वहाँ िशकार करना और घोंस ले उजाड़ ना कानून से मना है।
आने-जाने वाले पक्षी सिद यों में दू र दे शों से पवासी यानी उड़ कर आने वाले पक्षी भी यहाँ ठहरते है।ं
लोग लोग वहाँ दे खने जा सकते है,ं पर चुपचाप — शोर करना और कू ड़ ा फे ं कना मना होता है।
रा ीय उद्यान से अंतर: पृष्ठ 94 के ‘यह भी जान’ के अनुसार रा ीय उद्यान पूरे प्राकृ तक पयावरण — पेड़-पौधे
और सभी पशु-पक्षी — क रक्षा के लए होता है। पक्षी अभयारण्य का ध्यान खास तौर पर प क्षय और उनके रहने
क जगह पर होता है। दोन का काम एक ही है — जीव को बचाना।
प्र.1 (ख) (ख) इनक स्थापना करने क आवश्यकता क्य पड़ी?
क्य क प क्षय के रहने क जगह तेज़ी से खत्म हो रही थ और उनक संख्या घट रही थी। उन्ह बचाने के लए ऐसे सुर क्षत क्षेत्र
बनाने पड़े।
मुख्य कारण —
1. तालाब और दलदल सूखते गए। जल पक्षी वह भोजन पाते ह और वह घ सले बनाते ह। पानी खत्म तो पक्षी भी खत्म।
2. पेड़ काटे गए। जन पेड़ पर घ सले बनते थे, वे ही न रहे।
3. शकार होता रहा। पंख , अंड और माँस के लए पक्षी मारे जाते रहे।
4. गंदगी और ज़हर। पानी म कूड़ा और खेत क दवाइयाँ मल जाने से प क्षय का भोजन ज़हरीला हो गया।
5. शोर और भीड़। जहाँ लगातार शोर होता है, वहाँ पक्षी अंडे नह दे ते।
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इसी पाठ से मलती-जुलती बात: गडे के साथ भी ठ क यही हुआ था। पत्र कहता है क शकार इतना हुआ क
उनक संख्या घट गई और अब आधे से अ धक गडे काजीरंगा म ही बचे ह। यानी जब तक कोई जगह सुर क्षत न कर
द जाए, गनती घटती ही जाती है। प क्षय के लए वही काम पक्षी अभयारण्य करते ह।
हम क्या कर सकते ह: गर मय म छत या आँगन म म के बरतन म पानी र खए, घ सले को हाथ मत लगाइए,
और पतंग का तेज़ माँझा मत ली जए — उससे बहुत पक्षी घायल होते ह।
प्र.1 (ग) (ग) वतमान म भारत म कुल कतने रा ीय पक्षी अभयारण्य ह?
इस प्रश्न का उत्तर पाठ्यपुस्तक म नह छपा है। पुस्तक ने पृष्ठ 95 पर खुद कहा है — “इस जानकारी को ढूँ ढ़ने तथा लखने के लए
आप पुस्तकालय, अ भभावक या कसी अन्य ोत क सहायता भी ले सकते ह।” यानी यह संख्या आपको खोजकर लखनी है।
यह खोज कैसे क जए —
1. चरण 1: वद्यालय के पुस्तकालय म भारत के मान चत्र वाली या वन्यजीव वाली कोई पुस्तक ली जए।
2. चरण 2: उसम ‘पक्षी अभयारण्य’ या ‘Bird Sanctuary’ क सूची दे खए।
3. चरण 3: संख्या के साथ यह भी लख ली जए क वह कस पुस्तक से और कस वष क है।
4. चरण 4: शक्षक को दखाकर पक्का कर ली जए।
संख्या के साथ वष क्य लखना ज़रूरी है: ऐसी गन तयाँ बदलती रहती ह — नए अभयारण्य बनते ह और कुछ
क सीमा बदल जाती है। इसी लए पुस्तक ने भी रा ीय उद्यान क संख्या के साथ लखा — “भारतीय वन्यजीव
संस्थान के अनुसार वतमान म भारत म 106 रा ीय उद्यान ह।” कसका आँकड़ा है और कब का है — यह बताना
अ े उत्तर क पहचान है।
पुस्तक क द हुई जो संख्या पक्क है: रा ीय उद्यान — 106 (भारतीय वन्यजीव सं ान के अनुसार, पृष्ठ 94)।
पक्षी अभयारण्य क संख्या पुस्तक म कह नह द गई, इस लए उसे अपने आप मत लख द जए — खोजकर,
ोत का नाम लखकर ल खए।
प्र.1 (घ) (घ) भारत के पाँच प्र सद्ध रा ीय पक्षी अभयारण्य कौन-से ह?
यह जानकारी भी पाठ म नह छपी है — इसे पुस्तकालय या बड़ क सहायता से खोजना है। नीचे नमूना उत्तर दया गया है, जसे
आप अपनी प्रस्तु त म रख सकते ह। यह पुस्तक से बाहर क जानकारी है — इसे लखते समय अपने शक्षक से एक बार जाँच
अवश्य करा ली जए।
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as e
कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा
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क्रम पक्षी अभयारण्य राज्य क्य प्र सद्ध है
सिद यों में यहाँ दू र दे शों से बहुत-से lपa
e
s पक्षी आते है।ं
. com ag
1 केवलादे व रा ीय उद्यान (भरतपुर पक्षी राज ान वासी
m
ase
अभयारण्य)
a2gl सुल्तानपुर पक्षी अभयारण्य ह रयाणा झील के िकनारे बसा छोटा-सा क्षेत्र, जहाँ जल पिक्षयों के झुंड
िदखते है।ं
co m कावेरी नदी के बीच के छोटे-छोटे टापुओं पर पक्षी घोंसले बनाते
3 रंगन त टु पक्षी अभयारण्य
em .
कनाटक ag
g l as है।ं
4 वेदा ंगल पक्षी अभयारण्य
a त मलनाडु भारत के सबसे पुराने पक्षी अभयारण्यों में िगना जाता है।
omबहुत-से जल पक्षी
बड़ ी उथली झील , जहाँ राजहंस (फ्ले िमंगो.) cऔर
sem
5 नाल सरोवर पक्षी अभयारण्य गुजरात
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आते है।ं
m . co agl
l a se
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प्रस्तु त म कावेरी वाली बात जोड़ सकते ह: रंगन त टु जस कावेरी नद पर है, उसी नद का उद्गम ान कूग है
— और कूग क बात इसी पुस्तक म, पृष्ठ 98 पर ‘घूमो-दे खो’ म छपी है। दो पाठ को इस तरह जोड़ दे ने से प्रस्तु त
m a s
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बहुत अ लगती है।
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agl ली जए। (2) ऊपर अभयारण्य का नाम और राज्य ल खए। (3) बीच म
प्रस्तु त कैसे बनाइए: (1) एक बड़ा चाट
प क्षय के चत्र चपकाइए या बनाइए। (4) नीचे तीन-चार वाक्य ल खए — कहाँ है, कौन-से पक्षी ह, वहाँ जाने का
co m
.
सबसे अ ा समय कौन-सा है। (5) बोलते समय चाट क ओर उँ गली से इशारा करते च लए।
e m
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.co a g
a s em(ङ)
agl प्र.1 (ङ) इनम कौन-से पशु-पक्षी पाए जाते ह?
se m
com g l a
. a
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पक्षी अभयारण्य म मुख्य रूप से जल पक्षी मलते ह, और उनके साथ पानी के आसपास रहने वाले कुछ दूसरे जीव भी।
a gl
वग कौन-कौन पहचान
पेिलकन, सारस , बगुल ा, कलहोन
. c om
emबगुला और कलहोन इत्या द।”
पत्र में आए हुए पक्षी ये चार नाम इसी पाठ म ह — “बील पर सैकड़ प क्षय के झुंड थे —
om a s
gl
पे लकन (एक जल पक्षी), सारस,
. c ये पानी के कनारे a
e m और भी जल पक्षी
las
जलकाग, बत्तख, राजहंस (फ्ले िमंगो), या पानी म तैरते हुए मलते ह और मछली, क ड़े
ag
िकलिकला (िकं गिफ़ शर), चम्मचबाज़ तथा जलीय पौधे खाते ह।
.c
ऊदिबलाव, कछु ए , मेंढक , मछिलयाँ,
s e m
om a
पानी के आसपास पत्र म ऊद बलाव का नाम है — “बील के पानी म कुछ ऊद बलाव भी
.c agl
के दू स रे जीव अजगर उछल-कूद कर रहे थे।”
m
se ), नीलगाय, िसयार
चीतल (िचत्तीदारaिहरण
agl
आसपास के पशु ये अभयारण्य के आसपास क झा ड़य और घास के मैदान म दख
जाते ह।
co m
m .
m as e
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा AglaSem · NCERT Solutions
पुस्तक से बाहर क बात (साफ़ च ह्नत): ऊपर क ता लका म जो नाम पत्र म नह आए — जैसे राजहंस,
जलकाग, कल कला, नीलगाय — वे सामान्य जानकारी ह। अपनी प्रस्तु त म इन्ह तभी ल खए जब आपने
पुस्तकालय क कसी पुस्तक म उस अभयारण्य के साथ इनका नाम पढ़ा हो। बना पढ़े नाम लख दे ना ठ क नह ।
एक बात जो सबसे अ लगेगी: प्रस्तु त के अंत म यह ज़रूर क हए क इन जीव को दे खने जाएँ तो चुप रह,
बहुत पास न जाएँ और कूड़ा न फैलाएँ। इसी पाठ म भी महावत ने मादा गडे के पास जाने से रोका था — यही जंगल
का पहला नयम है।
प्र.2 नीचे दए गए बादल म मछली और बंदर का चत्र बनाया गया है। अब आप भी दए गए बदुओं को मलाकर चत्र
पूरा क जए और उसम रंग भ रए —
पृष्ठ 95 पर दो तसवीर ह। दोन म बादल ह और उन्ह बादल क आकृ त पर पतली रेखाएँ ख चकर एक म मछली और दूसरे म
बंदर का मुँह बना दया गया है।
पृष्ठ 96 पर दो चौकोर बक्से बने ह। उनम बादल क आकृ तयाँ बदुओं वाली रेखा से बनी ह और कुछ हस्से पहले से गहरे बने हुए
ह—
बक्सा बादल म कौन-सा पहले से क्या बना हुआ है आपको क्या करना है
जीव छपा है
बायाँ भालू दोन कान, दोन आँख और नाक-मुँह सर, कंधे, दोन हाथ और गोल पेट क बदु-रेखा पर
बक्सा गहरी रेखा से बने ह प सल फेरकर पूरा क जए, फर रंग भ रए
दायाँ िबल्ली दोन नुक ले कान, दोन बड़ी आँख, गोल चेहरा, गरदन और नीचे-बगल क रोएँदार बदु-
बक्सा नाक और मूँछ गहरी रेखा से बनी ह रेखा पूरी क जए, फर रंग भ रए
करने का तरीका — चरण दर चरण:
1. चरण 1: पहले पूरा बक्सा ध्यान से दे खए और पहचा नए क उसम कौन-सा जीव छपा है।
2. चरण 2: प सल हल्के हाथ से पक ड़ए और बदुओं के ऊपर-ऊपर रेखा ख चते जाइए। एक ही जगह से शुरू करके एक ही
दशा म च लए, बीच म मत कू दए।
3. चरण 3: जहाँ रेखा टे ढ़ -मेढ़ है (जैसे बल्ली के रोएँ), वहाँ जल्द मत क जए — छोटे -छोटे टु कड़ म ख चए।
4. चरण 4: पूरी रेखा बन जाने पर एक बार पीछे हटकर दे खए क आकार बना या नह । कोई हस्सा छू ट गया हो तो जोड़ ली जए।
5. चरण 5: अब रंग भ रए। भालू म भूरा और बल्ली म सलेट या नारंगी अ ा लगेगा। बचे हुए हस्से म हलका नीला भ रए —
वही आकाश है।
6. चरण 6: अंत म नीचे अपने चत्र का नाम लख द जए — जैसे “बादल का भालू”।
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यह ग त व ध क्य द गई है: बादल हर बार नया आकार बनाते ह। कभी वे हाथी जैसे लगते ह, कभी नाव जैसे। यह
अभ्यास हम ध्यान से दे खना सखाता है — क साधारण चीज़ म भी आकार छपे होते ह, बस दे खने वाली आँख
चा हए। यही आँख चाचा अरूप के पास भी थी, तभी तो उन्ह ने बील, पक्षी और हा थय के झुंड का इतना सुंदर
वणन लखा।
आगे क जए: कसी शाम छत पर लेटकर बादल दे खए और जो आकार दख उन्ह कॉपी म उतार ली जए। दो-चार
दन म आपक अपनी ‘बादल- चत्र ’ क एक छोट पु स्तका बन जाएगी।
घूमो-दे खो — पृष्ठ 97 और 98
पाठ के बाद छपी बना क्रमांक क रचना — दो सुंदर स्थान का प रचय: ‘लोकतक झील — म णपुर’ तथा ‘हरे-भरे पहाड़ क नगरी — कूग
(कनाटक)’। इस रचना के साथ पुस्तक म कोई प्रश्न नह छपा है; नीचे इसी क समझ जाँची गई है।
अनु पू र क रचना घू मो-दे खो
प्र.1 ‘घूमो-दे खो’ म कन दो स्थान का प रचय दया गया है? वे कस- कस राज्य म ह?
‘घूमो-दे खो’ म दो ान का प रचय है —
क्रम स्थान राज्य पुस्तक म छपा शीषक पृष्ठ
1 लोकतक झील म णपुर “लोकतक झील — म णपुर” 97
2 कू ग (कोडागु) कनाटक “हरे-भरे पहाड़ क नगरी — कूग (कनाटक)” 98
यह रचना यह क्य छपी है: पाठ 8 एक यात्रा का पत्र है — असम के काजीरंगा क यात्रा। ‘घूमो-दे खो’ उसी बात
को आगे बढ़ाता है और भारत के दो और सुंदर ान दखाता है — एक पूव त्तर म (म णपुर) और एक द क्षण म
(कनाटक)। यानी पाठ जस रास्ते पर चला था, यह रचना उसी रास्ते को और आगे ले जाती है।
ध्यान द जए: ‘घूमो-दे खो’ पाठ 8 के भीतर नह है, इसका अपना कोई क्रमांक भी नह है। यह पाठ के बाद अलग
से छपी हुई रचना है, इस लए इसके साथ कोई अभ्यास-प्रश्न नह दया गया।
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प्र.2 लोकतक झील को भारत क एकमात्र तैरती हुई झील क्य कहा गया है? ‘फुमद ’ क्या है?
लोकतक झील म घनी जलीय घास के बड़े-बड़े हस्से पानी पर तैरते रहते ह। दूर से दे खने पर लगता है क झील का एक हस्सा
तैर रहा है — इसी लए इसे भारत क ऐसी एकमात्र ताजा पानी क झील कहा गया है जो तैरती हुई दखाई दे ती है।
इन्ह तैरते हुए घास के हस्स को ‘फुमद ’ कहते ह।
रचना की पंिक्तयाँ —
“मिणपुर राज्य की लोकतक झील भारत की ऐसी एकमात्र ताजा पानी की झील है जो तै रती हईु िदखाई दे त ी है।
इस सुंद र झील में घनी जलीय घास के बड़ े-बड़ े िहस्से तै रते रहते है ं िजन्हे ं ‘ फुमद ी ’ कहते है।
ं ”
फुमद के बारे म रचना जो-जो बताती है —
बात रचना म क्या लखा है
फु मदी क्या है घनी जलीय घास के बड़ े-बड़ े िहस्से , जो झील पर तैरते रहते है ं
उस पर कौन रहता है मछु आरे उन पर अपनी झोंपड़ ी बनाकर रहते है ं
सबसे बड़ा फु मदी 40 वग िकलोमीटर क्षेत्र फल का ीप
उस पर क्या है भारत तथा िवश्व का एकमात्र तैरता हुआ नेशनल पाक — िजसे ‘के ईबुल लामजाओ’ कहते है ं
फु मदी में क्या पाया जाता है भारतीय वै ािनकों के अनुस ार बहु-एंजाइम उ त्पादक जीवाणु, और पौधों की वृिद्ध के िलए उपयोगी रसायन
वहाँ कौन-सा पशु िदखता है मिणपुर का राज्य पशु — ‘संगई िहरण’
घास पानी पर तैरती कैसे है: फुमद केवल घास नह है। उसम घास, जड़, प त्तयाँ और म — सब आपस म
गुँथकर एक मोट परत बन जाती है। यह परत हलक होती है, इस लए डू बती नह । इतनी मज़बूत होती है क उस पर
मछु आरे झ पड़ी बनाकर रह लेते ह, और उस पर एक पूरा नेशनल पाक तक बसा है।
दो नए शब्द: ताजा पानी = वह पानी जो खारा न हो, यानी पीने लायक। प = चार ओर पानी से घरी ज़मीन।
प्र.3 कूग कन- कन बात के लए प्र सद्ध है? रचना के आधार पर ल खए।
कूग — जसे कोडागु भी कहते ह — कनाटक का एक प्रशास नक ज़ला है। यह अपनी प्राकृ तक सुंदरता के लए प्र सद्ध है।
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कूग कसके लए प्र सद्ध रचना म क्या लखा है
है
पाकृ ितक सुंद रता “एक बहुत सुंद र पयटन स्थल है जो अपनी पाकृ ितक सुंद रता के िलए पिस द्ध है। ”
हरे -भरे पहाड़ और जंग ल “यहाँ के हरे -भरे पहाड़ , घने जंग लों, मसालों और चाय-कॉफी के बागानों से भरे पड़ े है।
ं ”
शांत वातावरण “कू ग अपने शांत वातावरण तथा सुंद रता के िलए पयटकों के मनपसंद स्थलों में से एक है। ”
सुहावना मौसम “यहाँ का मौसम अिधकतर सौम्य ही रहता है। गरमी के मौसम में भी यहाँ का तापमान अिधक नही ं रहता। ”
मंडलपट्टी पहाड़ी “मंडलपट्ट ी पहाड़ ी की ऊँ चाई से आप आकाश में घूम ते बादलों को समीप से दे खने का आनंद उठा सकते
है।ं ”
कावेर ी नदी का उद् ग म “कू ग कावेर ी नदी का उद् ग म स्थान भी है। ”
अभयारण्य और वन्य जीव “बह्मिगिर तथा पुष्पिगिर अभयार ण् य अनेक दुल भ पशु-पिक्षयों के घर है।
ं ”
कूग क तीन तालुक (क्षेत्र) — म दकेरी, सोमवारपेट और वराजपेट।
वहाँ के पशु-पक्षी, जो रचना म गनाए गए ह —
पशु पक्षी
एिशयाई हाथी, िचत्तीदार िहरण, साभं र िहरण, गौर (भारतीय बाइसन) गे होनिबल , नीलिगिर फ्लाईकै चर, प ा कबूतर
दो शब्द सम झए: सौम्य यानी न बहुत गरम, न बहुत ठं डा — सुहावना। उद्गम स्थान यानी वह जगह जहाँ से नद
नकलती है। कावेरी द क्षण भारत क बड़ी नद है और उसका जन्म यह , कूग म होता है।
जोड़कर दे खए: पाठ म लखा है क काजीरंगा ब्रह्मपुत्र नद के तट पर है, और यहाँ कूग कावेरी नद का उद्गम है।
यानी नद और जंगल का साथ हर जगह है — जहाँ पानी है, वह जीवन है।
प्र.4 काजीरंगा रा ीय उद्यान, केईबुल लामजाओ और कूग — इन तीन म कौन-सी बात एक जैसी है?
तीन म एक ही बात साझा है — तीन जगह प्रकृ त और वन्य जीव को सँभालकर रखा गया है, और तीन क अपनी एक
अनोखी पहचान है।
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बात काजीरंगा (असम) केईबुल लामजाओ कूग (कनाटक)
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(म णपुर)
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कहाँ है
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aअनोखी l एक सी ंग वाला गैंडा — इसी के भारत तथा िवश्व का एकमात्र तैरता कावेरी नदी का उद् गम स्थान; मंडलपट्टी
पहचान कारण पूरे संस ार में पिस द्ध हुआ नेशनल पाक से बादल पास िदखते है ं
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o राज्य पशु — संगई
मिणपु.रcका
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seिहरण
कौन-सा खास एक सी ंग वाला गैंडा, बाघ , हाथी, चार एिशयाई हाथी, िचत्तीदार िहरण, सांभर,
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जीव तरह के िहरण गौर
पानी का साथ नदी और बील (झील ) पूरी झील ही उसका घर है नदी यही ं से जन्म ले ती है
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पहाड़ , बागान और.cशाoंत वातावरण के िलए
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पशु-पेमी गैंडा दे खने आते है ं तैरती झील और फु मदी दे खने
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लोग वहाँ क्यों
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जाते है ं
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agl क्षेत्र सुर क्षत कर दया गया। लोकतक म लखा है — “यहाँ अनेक जलीय पौधे और जानवर बना संरक्षण के फल-
सबसे बड़ी साझी बात: तीन जगह इंसान ने प्रकृ त को बदला नह , बचाया है। काजीरंगा म गडे इसी लए बचे क
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comवन्य-सा थय से बहुत कुछ सीख सकते ह।” agl
फूल रहे ह”, यानी वहाँ प्रकृ त खुद अपना काम कर रही है। और कूग म ब्रह्म ग र तथा पुष्प ग र अभयारण्य दुलभ
जीव के घर ह। पत्र का संदेश भी यही था — “हम.अपने
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जोड़ने वाली एक और बात: तीन जगह हरण मलते ह — काजीरंगा म चार तरह के हरण, लोकतक म संगई
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हरण और कूग म चत्तीदार तथा सांभर हरण। यानी भारत के तीन कोन म एक ही प रवार के जीव, अपने-अपने
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ढं ग से रह रहे ह।
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‘घूमो-दे खो’ पढ़कर नीचे द गई ता लका के सभी खाने भ रए — स्थान / राज्य / कस बात के लए प्र सद्ध / एक
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प्र.5
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वशेष जानकारी / वहाँ का खास जीव।
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ता लका के सभी खाने रचना क पं क्तय से भरे गए ह। एक भी खाना खाली नह छोड़ा गया।
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स्थान राज्य कस बात के लए एक वशेष जानकारी वहाँ का खास जीव
प्र सद्ध
लोकतक मिणपुर भारत की एकमात्र ऐसी इसमें ‘फु मदी’ नाम के तैरते घास - ीप है;ं संगई िहरण — मिणपुर का
झील ताजा पानी की झील , जो सबसे बड़ ा फु मदी 40 वग िकलोमीटर का है राज्य पशु
तैरती हुई िदखाई दे ती है और उसी पर िवश्व का एकमात्र तैरता हुआ
नेशनल पाक ‘के ईबुल लामजाओ’ है। फु मदी
पर मछु आरे झोंपड़ ी बनाकर रहते है।ं
कू ग कन टक पाकृ ितक सुंद रता — यह कन टक का एक पशासिनक िज़ ला है और एिशयाई हाथी, िचत्तीदार िहरण,
(कोडागु) हरे -भरे पहाड़ , घने तीन तालुक ों से िमलकर बना है — मिदके री, साभं र िहरण, गौर (भारतीय
जंगल , मसालों तथा सोमवारपेट और िवराजपेट। यह कावेरी नदी बाइसन); पिक्षयों में गे होनिबल ,
चाय-कॉफी के बागान का उद् गम स्थान भी है, और मंडलपट्टी पहाड़ ी नीलिगिर फ्लाईकै चर और प ा
और शातं वातावरण से बादल पास से दे खे जा सकते है।ं कबूतर
काजीरंगा असम एक सी ंग वाले गैंडे के यह बह्मपुत्र नदी के तट पर िस्थत है। दुिनया एक सी ंग वाला गैंडा (इंिडयन
रा ीय िलए — “इसी पशु के के आधे से अिधक भारतीय गैंडे यही ं रहते है,ं राइनो), रॉयल बंगाल टाइगर,
उद्यान कारण काजीरंगा पूरे इसिलए पूरे संस ार से पशु-पेमी यहाँ आते है।ं जंगली हाथी, जंगली भैसं ा और
(पाठ से, संस ार में पिस द्ध हो गया चार तरह के िहरण
तुलना के है।”
िलए)
अपने लए एक काम: इसी ता लका म एक पं क्त और जो ड़ए — अपने राज्य क कसी सुंदर जगह क । उसम भी
यही पाँच बात भ रए। इससे आपको पता चलेगा क आपके पास भी दखाने लायक बहुत कुछ है।
ता लका बनाने का फ़ायदा: पढ़ हुई बात जब खान म बँट जाती है, तो याद रखना आसान हो जाता है। परीक्षा म
भी ऐसे ही प्रश्न आते ह — “कौन-सा उद्यान कस राज्य म है”, “कौन कसके लए प्र सद्ध है”। एक बार ता लका
बना ली जए, फर सब एक नज़र म दख जाएगा।
अध्याय — एक नज़र म
काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा क वता नह , गद्य है। और यह साधारण गद्य भी नह — यह एक पत्र है। पत्र यानी च ।
इसक शुरुआत “ प्रय ब ो,” से होती है और अंत “तुम्हारे चाचा — अरूप” से। पाठ के अंत म, पृष्ठ 87 पर रचनाकार का
नाम छपा है — अरूप कुमार दत्ता। उसके नीचे लखा है “(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)”, यानी यह अंश उसी प्रकाशन क
पुस्तक से लया गया है।
पत्र क पहली ही पं क्त बता दे ती है क यह कहाँ से लखा गया — “यह पत्र म तुम्ह काजीरंगा रा ीय उद्यान से लख रहा ँ।”
काजीरंगा उद्यान असम म ब्रह्मपुत्र नद के तट पर स्थत है। तट यानी नद का कनारा। वहाँ व भन्न प्रकार के पशु और
पक्षी ह।
पहले दन क यात्रा हाथी पर चढ़कर हुई। इसके लए बहुत सवेरे उठना पड़ा — तब सूरज भी नह नकला था। उद्यान म
सैकड़ पशु थे। हरण और जंगली भस के कई झुंड आराम से घास चर रहे थे। उनम कुछ एक स ग वाले गडे भी थे। इसी पशु
के कारण काजीरंगा पूरे संसार म प्र सद्ध हुआ है।
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पशुओं का स्वभाव भी पत्र म साफ़ दखता है। हरण और भस ने चाचा अरूप को संदेह क दृ से दे खा और अलग हट गए
— संदेह यानी शक। पर गडे वह जमे रहे, यानी टस से मस नह हुए। लेखक को एक स ग वाला गडा पहली बार दे खने को
मला। यह हाथी के बाद भारत का सबसे बड़ा पशु है। इसे इं डयन राइनो (भारतीय गडा) भी कहते ह और यह केवल भारत
तथा नेपाल के जंगल म पाया जाता है।
गडे के शरीर पर मोट तह होती है, जैसे उसने कवच पहन रखा हो। इसी पर महावत ने एक रु चकर कथा सुनाई — भगवान
कृष्ण ने एक बार सोचा क हाथी के बदले गडे को रणक्षेत्र म भेजा जाए। उन्ह ने उसे कवच पहनाकर अभ्यास कराया, पर गडा
नदश का पालन न कर सका। इस लए भगवान कृष्ण ने कवच स हत ही उसे वापस वन म भेज दया। महावत यानी हाथी
चलाने वाला।
पत्र एक दुख क बात भी कहता है। सैकड़ वष पहले इं डयन राइनो प म म पेशावर से लेकर पूव म असम तक पाए जाते
थे। पर लोग ने स ग पाने के लए उनका शकार कया, क्य क वे मानते थे क स ग म औष ध-संबंधी गुण ह। बाद म
वै ा नक ने सद्ध कर दया क स ग म ऐसा कुछ नह है। तब तक शकार इतना हो चुका था क गड क संख्या कम हो गई।
अब आधे से अ धक गडे काजीरंगा म ही रहते ह — इसी लए पूरे संसार से पशु-प्रेमी इन्ह दे खने काजीरंगा आते ह।
आगे बढ़ने पर एक मादा राइनो अपने ब े के साथ दखी। महावत उन्ह पास नह ले गए। कारण उन्ह ने बताया — शशु
साथ म हो तो मादा गडा हसक हो जाती है और हाथी के पास आने पर हमला कर सकती है। इसी सुबह लेखक ने हरण के
अनेक झुंड दे खे। पाठ के अनुसार काजीरंगा म चार प्रकार के हरण ह — भ कने वाले हरण, बौने सूअर हरण, दलदली
हरण और साँभर हरण। जंगली सूअर भी दखाई दए।
दूसरे दन क यात्रा जीप म हुई और साथ म वन संरक्षक भी था। ाइवर उन्ह एक बील यानी झील क ओर ले गया। बील पर
सैकड़ प क्षय के झुंड थे — पे लकन (एक जल पक्षी), सारस, बगुला और कलहोन। पानी म कुछ ऊद बलाव उछल-कूद कर
रहे थे। लौटते समय जंगली हा थय का एक झुंड दखा, जसम पाँच-छह ब े थे। जब तक पूरे झुंड ने रास्ता पार नह कर
लया, तब तक एक वशाल हाथी खड़ा नगरानी करता रहा। काजीरंगा म मांसाहारी रॉयल बंगाल टाइगर भी ह, पर वे दखे
नह — गाइड ने बताया क वे रात म ही नकलते ह।
पत्र का सबसे सुंदर भाव अंत म है। लेखक लखते ह क काजीरंगा म अलग-अलग प्रजा त के पशु शां त और भाईचारे से
संग-संग रहते ह। उनके मन म बार-बार यह बात उठती रही क क्य नह मानव भी इनक तरह शां तपूवक मल-जुलकर
रहता! “हम अपने वन्य-सा थय से बहुत कुछ सीख सकते ह। है न!” — यही पत्र का संदेश है। पाठ के बाद पृष्ठ 97 और 98
पर बना क्रमांक क रचना घूमो-दे खो छपी है, जो म णपुर क लोकतक झील और कनाटक के कूग से मलवाती है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
रा ीय सरकार ारा पशु-पिक्षयों और पेड़-पौधों की “यह पत्र म तुम्ह काजीरंगा रा ीय उद्यान से हम गरमी क छु म एक रा ीय
उद्यान रक्षा के िलए सुर िक्षत रखा गया क्षेत्र लख रहा ँ।” उद्यान दे खने गए।
तट नदी या झील का िकनारा “काजीरंगा उद्यान असम म ब्रह्मपुत्र नद के शाम को हम नद के तट पर बैठे
तट पर त है।” रहे।
व भन्न अलग-अलग तरह के “यहाँ व भन्न प्रकार के पशु व पक्षी ह।” मेले म व भन्न प्रकार के खलौने
सजे थे।
झुंड पशुओ ं या पिक्षयों का समूह “ हरण और जंगली भस के कई झुंड आसमान म प क्षय का झुंड उड़ता
आराम से घास चर रहे थे।” जा रहा था।
चरना पशुओ ं का घास खाना “कई झुंड आराम से घास चर रहे थे।” गाय खेत क मेड़ पर घास चर रही
है।
संदेह शक; यह भरोसा न होना िक सामने वाला “ हरण और भस ने हम संदेह क दृ से अनजान आदमी को दे खकर कुत्ते
ठीक है दे खा।” ने संदेह क दृ से दे खा।
दृ नज़र, दे खने का ढं ग “हम संदेह क दृ से दे खा और अलग हट माँ ने मुझे प्यार भरी दृ से दे खा।
गए।”
जमे रहना अपनी जगह से िहलना ही नही ं “पर गडे वह जमे रहे।” भीड़ हट गई, पर वह अपनी जगह
जमा रहा।
इं डयन भारतीय गैंडा; एक सी ंग वाला गैंडा “इसको इं डयन राइनो (भारतीय गडा) भी इं डयन राइनो केवल भारत और
राइनो कहते ह।” नेपाल म पाया जाता है।
कवच लोहे का वह पहनावा जो युद्ध में शरीर को “मोट तह होती है, जैसे वह कवच पहने योद्धा कवच पहनकर युद्ध म गया।
बचाता है हो।”
रणक्षेत्र युद्ध का मैद ान “हाथी के बदले गडे को रणक्षेत्र म भेजा रणक्षेत्र म बड़े-बड़े वीर आमने-
जाए।” सामने थे।
अभ्यास बार-बार करके सीखना “उन्ह ने उसे कवच पहनाकर अभ्यास रोज़ अभ्यास करने से लखावट
कराया।” सुधर जाती है।
नदश बताई गई बात; आदे श “पर गडा नदश का पालन न कर सका।” शक्षक के नदश ध्यान से सु नए।
महावत हाथी को चलाने और सँभालने वाला “इस पर हमारे महावत ने एक रु चकर कथा महावत ने हाथी को नद म
सुनाई।” नहलाया।
रु चकर जो सुनने में अच्छा लगे, मन लगे “महावत ने एक रु चकर कथा सुनाई।” दाद क कहा नयाँ बहुत रु चकर
होती ह।
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
शकार पशु-पक्षी को मारना “लोग ने राइनो के स ग पाने के लए उनका शकार करना अब कानून से मना
शकार कया।” है।
औष ध दवा “लोग यह मानते थे क स ग म औष ध- तुलसी को औष ध क तरह भी
संबंधी गुण ह।” काम म लाते ह।
सद्ध करना पमाण दे क र बात सािबत करना “वै ा नक ने सद्ध कया क स ग म ऐसा उसने प्रयोग करके अपनी बात
कुछ नह है।” सद्ध कर द ।
शशु बच्चा “ शशु साथ म हो तो मादा राइनो हसक हो बंद रया अपने शशु को छाती से
जाती है।” चपकाए रहती है।
हसक जो मारने-काटने पर उतर आए “मादा राइनो (गडा) हसक हो जाती है।” घायल पशु कभी-कभी हसक हो
जाता है।
दलदली कीचड़ और पानी वाली ज़मीन का “भ कने वाले हरण, बौने सूअर हरण, दलदली ज़मीन पर पैर धँस जाते
दलदली हरण और साँभर हरण।” ह।
शीघ्र जल्दी “हमारी यात्रा शीघ्र समाप्त हो गई।” वषा होते ही हम शीघ्र घर लौट
आए।
वन संरक्षक जंग ल और उसके जीवों की रक्षा करने वाला “साथ म वन संरक्षक भी था।” वन संरक्षक ने हम जंगल के नयम
अिधकारी बताए।
बील असम में झील को कहते है ं “ ाइवर हम एक बील यानी झील क ओर बील का पानी शांत और साफ़ था।
ले गया।”
पे लकन एक बड़ा जल पक्षी, िजसकी चोंच के नीचे “पे लकन (एक जल पक्षी), सारस, बगुला पे लकन पानी म तैरते हुए मछली
थैल ी-सी होती है और कलहोन इत्या द।” पकड़ता है।
ऊद बलाव पानी के िकनारे रहने वाला एक चतुर जीव, “बील के पानी म कुछ ऊद बलाव भी उछल- ऊद बलाव पानी म मछली के पीछे
जो बहुत अच्छा तैर ता है कूद कर रहे थे।” तैरता है।
भाग्य अचानक बहुत अच्छी बात हो जाना “लौटते समय तो हमारे भाग्य ही खुल गए।” खोई हुई घड़ी मल गई — मानो
खुलना भाग्य ही खुल गया।
नगरानी दे खभाल, पहरा “एक वशाल हाथी खड़ा नगरानी करता बड़े भाई क नगरानी म हम नद
रहा।” तक गए।
मांसाहारी माँस खाने वाला “काजीरंगा म मांसाहारी रॉयल बंगाल टाइगर बाघ और शेर मांसाहारी पशु ह।
भी ह।”
अ त बहुत अनोखा, जैस ा पहले कभी न दे खा हो “कुल मलाकर यह एक अ त अनुभव बफ़ गरते दे खना मेरे लए अ त
रहा।” अनुभव था।
प्रजा त एक ही तरह के जीवों का वग “अलग-अलग प्रजा त के पशु शां त से संग- इस जंगल म तत लय क कई
संग रहते ह।” प्रजा तयाँ ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 8 काजीरंगा रा ीय उद्यान क यात्रा
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
m l a sमुeहल्ले म सब भाईचारे से
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भाईचारा आपस में भाइयों जैस ा पेम “शां त और भाईचारे से संग-संग रहते ह।” हमारे
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l जंगल का, जंगल में रहने वाला “हम अपने वन्य-सा थय से बहुत कुछ सीख वन्य जीव को परेशान नह करना
सकते ह।” चा हए।
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लुप्तप्राय जो समाप्त होने के कगार पर हो, िजसकी
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“दुलभ और लुप्तप्राय प्रजा तय का घर” गद्ध अब लुप्तप्राय पक्षी माना ag
िगनती बहुत घट गई हो
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अभयारण्य वह जंग ल जहाँ पशु-पक्षी िबना डर के रह
a “ सम लपाल रा ीय उद्यान (बाघ हम पास के पक्षी अभयारण्य म
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सकें अभयारण्य)” सारस दे खने गए।
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m पर बैठे मछु आरे दूर से प
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agl जैसे दखते ह।
फुमद लोकतक झील में तैर ते हएु जलीय घास के “घनी जलीय घास के बड़े-बड़े हस्से तैरते फुमद
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े-बड़े िहस्से रहते ह जन्ह ‘फुमद ’ कहते ह।”
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उद्गम वह जगह जहाँ से नदी िनकलती है “कूग कावेरी नद का उद्गम ान भी है।” गंगा का उद्गम ान गंगोत्री है।
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