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NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 3 स्थलरूप एवं जीवन

AglaSem पर कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन (समाज का अध्ययन) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Social Science Chapter 3 Landforms and Life (Exploring Society: India and Beyond), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 3 स्थलरूप एवं जीवन - Page 1 of 32

About NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 3 स्थलरूप एवं जीवन

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NCERT Solutions Class 6 Social Science Chapter 3 स्थलरूप एवं जीवन – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 3: स्थलरूप एवं जीवन

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

41 – 58 10 23 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 31 pages

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: स्थलरूप एवं जीवन
कक्षा 6 सामा जक वज्ञान क पाठ्यपुस्तक समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे के अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन के सभी प्रश्न के वस्तृत
उत्तर। इसम महत्वपूण प्रश्न, पाँच आइए पता लगाएँ बॉक्स (पृष्ठ 42, 49, 53, 54 एवं 55–56), पृष्ठ 43 का आइए वचार कर बॉक्स, पृष्ठ 46 पर
का लदास के ोक से जुड़े पाठ्य प्रश्न, आगे बढ़ने से पहले... तथा प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ के पाँच प्रश्न — सही/गलत एवं जोड़े
बनाइए के पूरे हल स हत — स म्म लत ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6) 41 – 58

खं ड प्रश्न

10 23

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 41
अध्याय का आरंभ

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 स्थलरूप के प्रमुख प्रकार कौन-से ह और जीवन तथा संस्कृ त के लए इनका क्या महत्व है?

स्थलरूप पृथ्वी क सतह का एक भौ तक स्वरूप है। अध्याय म इन्ह तीन प्रमुख प्रकार — पवत, पठार और मैदान म बाँटा गया है
( चत्र 3.1)। वशेषज्ञ कुछ और स्थलरूप भी बताते ह, जैसे मरुस्थल।

सँकरा िशखर

चपटा शीष

समुद तल
पवत पठार मैदान
चौड़ ा आधार, खड़ ी ढलान चपटी सतह, सीधी ढलान समतल, 300 मी. से कम

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

एक ही समुद्र-तल रेखा पर तीन स्थलरूप का पाश्व दृश्य। यह चत्र पैमाने पर आधा रत नह है — वास्त वक पवत शखर मैदान से कह
अ धक ऊँचा होता है।

स्थलरूप पहचान भारतीय उदाहरण वहाँ का जीवन

पवत आस-पास से बहुत ऊँचा; चौड़ ा िहमालय, अरावली ंख ृ ला, ऊबड़-खाबड़ भूभाग, इसिलए कृ िष के वल घािटयों
आधार , खड़ ी ढलान, सँक रा पिश्चमी घाट (अनाईमुडी, और वेिदका (सीढ़ ीदार ) खेतों में; पशुपालन,
िशखर ; पाय: िहम से ढँक ा 2695 मी.) पयटन, तीथयात्रा; चीड़, फर, स्पूस और दे वदार
के पवतीय वन

पठार आस-पास की भूिम से उठा द क्कन का पठार , छोटा खनन — पठार 'खिनजों का भंडार-गृह' कहलाते
हुआ , ऊपर से पाय: चपटा, कु छ नागपुर का पठार , चेर ापूंजी है;ं च ानी िम ी के कारण कृिष कम, िकं तु लावा
पाश्व सीधी ढलान वाले (मेघ ालय) का पठार पठारों में उपजाऊ काली िम ी; जल पपात
मैदान िवस्ततृ , सपाट या हल्का गंगा का मैद ान, िसंध ु और निदयों की तलछट से अत्यंत उपजाऊ िम ी; कृ िष
तरंिगत; ऊँची पहािड़याँ या गहरी बह्मपुत्र के मैद ान और मत्स्य पालन; सड़क और नौका से सुग म
घािटयाँ नही ं; पाय: 300 मीटर से आवागमन; सव िधक जनसंख्या यही ं
कम ऊँचा

मरुस्थल ( वशेषज्ञ व्यापक शुष्क िवस्तार, बहुत कम उत्तर-पिश्चम का थार किठन पिरिस्थितयाँ, िफर भी सम ृद्ध सांस्कृ ितक
ारा बताया गया वषण, िवलक्षण वनस्पित और मरुस्थल परंपरा — लोक गीत और िकं वदंितयाँ
चौथा प्रकार) पािण जगत

जीवन के लए महत्व:

जलवायु तय करते ह। एक ही दे श म हमालय क चोट पर स्थायी हम है और थार म तपती रेत।
जल तय करते ह। पवत क पघलती हम न दय को जल दे ती है और वही न दयाँ तलछट लाकर उपजाऊ मैदान बनाती ह।
व्यवसाय तय करते ह — पवत म पशुपालन और पयटन, पठार म खनन, मैदान म कृ ष और मत्स्य पालन।
बसावट तय करते ह। मानव ने हर स्थलरूप म स्वयं को ढाला है, कतु संख्या बहुत असमान है — अकेले गंगा के मैदान म
लगभग 40 करोड़ लोग रहते ह।

संस्कृ त के लए महत्व:

अध्याय के आरंभ म दया अथववेद का भू म सूक्त "अनेक प्रकार क ऊँचाइय , ढलान तथा वशाल समतल भू म" वाली पृथ्वी
क स्तु त करता है।
का लदास का कुमारसंभव हमालय को "पवत का राजा" कहकर आरंभ होता है, जो प श्चमी से पूव समुद्र तक फैला है।
पवत क पूजा होती है — तब्बती एवरेस्ट को 'चोमोलुंगमा' (जगत जननी) और नेपाली 'सागरमाथा' (आकाश क दे वी)
कहते ह; कैलाश पवत को हदू, बौद्ध, जैन और बॉन अनुयायी प वत्र मानते ह।
न दय के ोत और संगम प वत्र माने जाते ह; वहाँ अनेक त्योहार, समारोह और धा मक कृत्य होते ह।
त मल संगम काव्य क पाँच टनै पाँच दृश्यभू मय को अलग-अलग भाव और व्यवसाय से जोड़ती ह — कु रजी (पवत), मुल्लै
(वन और घास के मैदान), मरूदम (उपजाऊ मैदान), नेयदल (तट) और पालै (शुष्क प्रदे श)।

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 प्रत्येक स्थलरूप के साथ संबं धत जीवन क क्या चुनौ तयाँ एवं अवसर ह?

कोई भी स्थलरूप केवल उदार या केवल कठोर नह होता। हर स्थलरूप एक ही समय पर समस्या भी दे ता है और उपहार भी, और
मनुष्य अपनी सूझ-बूझ से उसका उत्तर दे ता है।

स्थलरूप चुनौ तयाँ अवसर

पवत ऊबड़-खाबड़ भूभाग और खड़ी ढलाने,ं इसिलए कृ िष योग्य स्वच्छ हवा और मनोरम दृ श्य, इसिलए पयटन आय का बड़ ा
समतल भूिम बहुत कम; भूस्खलन, िहम स्खलन, आकिस्मक बाढ़ साधन; स्कीइंग, हाइिकं ग, पवतारोहण और पैरा ग्लाइिडंग;
और बादल फटना; भारी िहमपात और ठं डा मौसम; रास्ते िदनों सिदयों पुरानी तीथयात्राएँ; वन उपज; पशुपालन; िहम से
तक बंद ; पयटकों के अिनयंित्र त आगमन से नाजुक पय वरण पर पोिषत निदयाँ जो नीचे पूरे दे श को जल दे ती है ं
दबाव

पठार पाय: च ानी िम ी, मैद ानों की तुल ना में कम उपजाऊ और कृ िष खिनज — 'खिनजों का भंडार-गृह'; छोटा नागपुर के पठार
के िलए कम अनुकू ल; उठी और कठोर सतह के कारण जल की में लौह, कोयला और मैगनीज, पूव अफ ीका के पठार में
कमी; खनन से भूिम और वन की क्षित सोना और हीरा; लावा पठारों में समृद्ध काली िम ी; जल
पपात जो पयटन और िव तु उ त्पादन के अवसर दे ते है ं
मैदान बढ़ ती जनसंख्या और पदू षण; निदयों के उफनने से बाढ़ ; पंप से निदयों की तलछट से बनी सबसे उपजाऊ िम ी — चावल ,
अत्यिधक िसंचाई के कारण भूिमगत जल स्तर में िगरावट — कृ िष गेहू,ँ मक्का, जौ, मोटे अनाज, कपास, जूट और सन; नदी में
के भिवष्य के िलए वास्तिवक चुनौती मत्स्य पालन; हल्की ढलान, इसिलए नौका-संचालन और
सड़ क िनम ण सुगम; आरंिभक सभ्यताओं का जन्मस्थल
मरुस्थल बहुत कम वषण, अत्यिधक गम या अत्यिधक ठं ड, जल की कमी िवलक्षण वनस्पित और पािण जगत; ऊँट जैसे सहनशील
और कम वनस्पित ृ संस्कृ ित; आज
पशु; लोक गीतों और िकं वदंितयों की सम द्ध
सौर ऊज और मरु पयटन भी

एक अनुकूलन ध्यान से दे खए — वे दका (सीढ़ दार) कृ ष। पवतीय ढलान इतनी खड़ी होती है क हल नह चल सकता,
इस लए लोग ढलान को काटकर समतल सी ढ़याँ बना लेते ह ( चत्र 3.5) —

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन
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मूल खड़ी ढलान
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सीिढ़ याँ वष -जल और िम ी को रोक लेती है।
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वे दका कृ ष। बदुदार रेखा नंगी ढलान है; हरी सी ढ़याँ उसी ढलान को काटकर बनाई गई ह।

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सी ढ़याँ काम कैसे करती ह: नंगी ढलान पर वषा का जल सीधे नीचे भागता है और ऊपरी उपजाऊ म बहा ले
जाता है — यही अपरदन है। समतल सीढ़ पर जल को बहने क जगह ही नह मलती, इस लए वह भीतर रस
जाता है और म
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टक रहती है। आकृ त के एक छोटे -से प रवतन से बेकार ढलान धान का खेत बन जाती है।
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m .c रख: बछद्र पाल 1984 म एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय म हलाagबन (उसी वष पद्म ी, 2019 म
ध्यान

aseपद्मभूषण)। अरू णमा सन्हा ने 22 वष क आयु म दुघटना म एक पैर गँवाने के बाद, बछद्र पाल के प्र शक्षण से
agl 2013 म एवरेस्ट पर चढ़ाई क और फर अंटाक टका के वसन ग र ंग स हत सभी महा प क सबसे ऊँची
चो टयाँ जीत (2015 म पद्म ी)। पवत चुनौती दे ते ह — और मनुष्य उत्तर दे ता है।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 42 a

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प रचय — अपने आस-पास क दृश्यभू म

आइए पता लगाएँ

प्र.1 कक्षा क ग त व ध के रूप म चार अथवा पाँच व ा थय के समूह बनाइए और व ालय के आस-पास के क्षेत्र
का अवलोकन क जए। आपको कस प्रकार क दृश्यभू म दखाई दे ती है? क्या कुछ कलोमीटर क दूरी पर
दृश्यभू म म कोई प रवतन दखाई दे ता है? क्या लगभग 50 कलोमीटर के भीतर प रदृश्य म बदलाव होगा? अन्य
समूह ारा द गई जानकारी के साथ इनक तुलना क जए।

यह अवलोकन का क्रयाकलाप है, इस लए उत्तर आपके अपने आस-पास का ववरण होना चा हए। इसे अच्छ तरह करने का
तरीका और एक नमूना उत्तर नीचे दया गया है।
क्या-क्या दे ख और लख:

भू म समतल है, ढलान वाली है या पहाड़ी? क्ष तज पर कोई पहाड़ी या कटक दखती है, या चार ओर आकाश-रेखा सीधी
है?
जल कहाँ है? नद , नहर, तालाब, झील या समुद्र — और भू म कस ओर ढलती है?
क्या उग रहा है? धान और गे ँ के खेत मैदान का संकेत ह; झा ड़याँ, च ानी भू म और छोटे पेड़ पठार का; सीढ़ दार खेत और
शंकुधारी वृक्ष पवत का।
म कैसी है? गहरी और मुलायम, या पतली जसम से च ान झाँक रही हो?
मकान और सड़क कैसी ह? घुमावदार चढ़ाई वाली सड़क और ढलवाँ छत पहाड़ी क्षेत्र बताती ह; सीधी सड़क और सपाट छत
मैदान।

नमूना उत्तर (गंगा के मैदान का व ालय): "हमारे व ालय के ार से चार ओर भू म समतल दखाई दे ती है।
धान के खेत, एक नहर और पेड़ क कतार दखती है, पर कह कोई पहाड़ी नह । कुछ कलोमीटर दूर भी दृश्यभू म
वैसी ही है — केवल गाँव बदल जाते ह। 50 कलोमीटर के भीतर भी मैदान ही है, पर नद और उसका रेतीला
कनारा दखने लगता है। समूह 3, जो चत्रकूट गया था, ने बताया क पहा ड़याँ लगभग 120 कलोमीटर द क्षण म
शुरू होती ह।"

नमूना उत्तर (अल्मोड़ा, उत्तराखंड का व ालय): "हमारा व ालय ढलान पर है। नीचे एक घाट है जसम
जलधारा बहती है और सामने क पहाड़ी पर चीड़ के वन ह। कुछ कलोमीटर आगे बढ़ते ही दृश्यभू म तेजी से बदलती
है — नई घाट , नई कटक, हर ढलान पर सीढ़ दार खेत। 50 कलोमीटर के भीतर हम और ऊँचे पवत तक पहुँच
जाते ह, जहाँ शीत ऋतु म चो टय पर हम रहती है।"

समूह क तुलना क्य : एक ही स्थान से अलग-अलग समूह अलग-अलग बात दे खते ह — कसी को खेत दखते ह,
कसी को सड़क क ढलान, कसी को च ान। सबको मलाने पर कक्षा को वह ववरण मलता है जो कोई एक समूह
अकेले नह लख सकता था। भूगोलवेत्ता ठ क इसी प्रकार काम करते ह।

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 इन्ह समूह के साथ भारत के कसी भी ऐसे क्षेत्र क यात्रा के बारे म चचा क जए, जहाँ वे जा चुके ह। उन क्षेत्र म
दखाई दे ने वाली व भन्न प्रकार क दृश्यभू मय क सूची बनाइए। अन्य समूह ारा द गई जानकारी के साथ
इनक तुलना क जए।

ऐसी एक यात्रा चु नए जसे समूह अच्छ तरह जानता हो, फर दृश्यभू मय को उसी क्रम म ल खए जस क्रम म वे दख , हर एक
के साथ एक पहचान- चह्न दे ते हुए। सूची ता लका के रूप म सबसे स्पष्ट लगती है।

यात्रा का चरण क्या दखा स्थलरूप

दल्ली से ह र ार गेहू ँ और ग े के समतल खेत, नहरे ं, सीधी सड़कें मैद ान
ह र ार से ऋ षकेश वनों से ढँक ी नीची पहािड़यों के बीच से िनकलती हुई गंग ा तराई/िशवािलक की पहािड़ याँ
ऋ षकेश से दे वप्रयाग गहरी घाटी के ऊपर घुम ावदार सँक री सड़क; दो निदयों का संग म पवत
दे वप्रयाग से औली सीढ़ ीदार खेत, दे वदार और चीड़ के वन, आगे िहमाच्छािदत चोिटयाँ ऊँ चे पवत

नमूना उत्तर ( बल्कुल भन्न यात्रा): "हम हैदराबाद से वशाखापत्तनम गए। हैदराबाद के आस-पास भू म च ानी
पठार है, जसम वशाल शलाखंड और पतली लाल म है। वारंगल के पास काली म के खुले खेत मले। फर
सड़क पूव घाट क नीची, टू ट -फूट पहा ड़य से होकर चढ़ और अंत म एक सँकरे हरे तट य मैदान पर उतर आई,
जहाँ दाईं ओर समुद्र था।"

यात्रा मान चत्र से बेहतर क्य सखाती है: मान चत्र बताता है क पठार कहाँ समाप्त होकर मैदान शुरू होता है, पर
यात्रा उस प रवतन को महसूस कराती है — चढ़ाई पर कान बंद होते ह, फसल बदलती ह, मकान बदलते ह, यहाँ
तक क भाषा और भोजन भी। अध्याय का अपना उदाहरण (छोटा नागपुर → प्रयागराज → अल्मोड़ा) इसी वचार
पर बना है।

आइए वचार कर — पृष्ठ 43
हम, ओले और वषण

आइए वचार कर

प्र.1 हम क्या है?

हम, जल का ठोस रूप म गरना है — अथात वह वषण जो वायुमंडल से भू म पर तरल बूँद के रूप म नह , ब ल्क नम सफेद
हम-कण के रूप म पहुँचता है।

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

जलवाष्प ऊपर उठकर ठं डी होती है

यिद वायु िहमांक से ऊपर हो → वाष्प बूदँ ों में बदलती है → वष

यिद वायु पय प्त ठं डी (िहमांक से नीचे ) हो → वाष्प सीधे िहम-कणों में बदलती है → िहम
यिद बूदँ े ं तूफानी बादल में बार-बार ऊपर-नीचे होकर परतों में जमें → ओले

वष , िहमपात और ओले — तीनों वषण है ं

जलवाष्प का बादल

वष िहम ओले
वाय ु गम वाय ु पय प्त ठं डी तूफानी बादल
तरल बूदँ े ं नम िहम-कण कठोर िहम-गोिलयाँ

तीनों को िमलाकर वषण कहते है ं
एक ही बादल से वही जल तीन अलग-अलग रूप म गरता है। रूप इस बात से तय होता है क जस वायु म से वह गरता है उसका
तापमान कतना है।

भारत म हम कहाँ दखती है: हमालयी क्षेत्र म — कश्मीर, ल ाख, हमाचल प्रदे श, उत्तराखंड, स क्कम और अरुणाचल
प्रदे श। शेष भारत म अ धकांश वषण, वषा और ओले के रूप म होता है, इस लए संभव है क बहुत-से व ा थय ने कभी हम दे खी
ही न हो।

हम का महत्व पवत से कह आगे तक है: कम ऊँचाई पर हम हर ग्रीष्म म पघलकर उस जल म बदल जाती है
जो न दय को पो षत करता है; बहुत ऊँचाई पर वह कभी नह पघलती और चो टयाँ स्थायी रूप से हम से ढँ क
रहती ह। इस प्रकार मई म पंजाब के खेत म उगा गे ँ कुछ महीने पहले कसी हमालयी ढलान पर गरी हम का जल
पी रहा होता है।

अंतर पहचा नए: हम नम, हल्क होती है और चुपचाप फाह के रूप म गरती है, प्राय: शीत ऋतु म; ओले कठोर,
भारी गो लयाँ ह जो आँधी-तूफान के साथ अचानक गरती ह और फसल को क्ष त पहुँचा सकती ह। दोन जमा हुआ
जल ही ह — पर हम धीरे-धीरे बनती है, ओले प्रचंड रूप से।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 46

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का लदास के 'कुमारसंभव' के दो ोक

प्र.1 'प मी से पूव समुद्र तक' से क्या तात्पय है? चत्र 5.2 म क्या आप इनक और 'पवत के दे वता' क स्थ त को
दखा सकते ह?

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चेन
चे नाब
ाब नदी
झे ल
झे म नदी नद ी
लम नद ी

ब् यास नदी
ब्यास नद ी
य
रावी नदी
रावी नद ी ा ल
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िह
सतलज
सतलु
ज ु नदी
नद ी

सर स्वती नदी
सरस्वती नद ी

यमुन
यमु ना
ा नदी
नद ी
िसंध
िसं ध ुु नदी
नद ी गंग
गं गा
ा नदी
नद ी
बबह्मपु
ह्मपत्र
त्र
ु नदी
नद ी

चंब
चं बल
ल नदी
नद ी

नम द ा नदी
नमदा नद ी

तापती नदी
तापती नद ी महानदी
महानद ी

गोद ावरी नदी
गोदावरी नद ी

कृृ ष्णा
क ष् णा नदी
नद ी

अरब सागर बंगाल की खाड़ ी

कावेर
कावे री
ी नदी
नद ी

िहंद महासागर
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चत्र 5.2, पृष्ठ 76 (अध्याय 5) — भारतीय उपमहा प का भौ तक मान चत्र जसम कुछ न दयाँ प्रद शत ह।
पुनः च त्रत।

का लदास यहाँ भारतीय उपमहा प क पूरी चौड़ाई का वणन कर रहे ह। भूगोल क दृ ष्ट से ोक तीन चीज के नाम लेता है —

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन
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ोक म आज इसे क्या कहाँ है

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कहते ह

प मी समुद्र .c a g l
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ु रात, महारा , गोवा, कन टक और के रल के तट पर;

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यह िहंद महासागर की एक शाखा है

पूव समुद्र बंगाल की खाड़ ी पूव (दाईं ओर) — पिश्चम बंग ाल, ओिडशा, आंध पदे श और तिमलनाडु के तट पर; यह भी िहंद

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महासागर की शाखा है
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aनेgपाल, िसिक्कम और भूटान होते हुए अरुणाचल पदे श तक
'पवत के दे वता' ृ ला — जम्मू-कश्मीर और ल ाख से िहमाचल पदे श, उत्तराखंड,
पूरे उत्तर में फै ली िवशाल ंख
( हमालय)

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चत्र 5.2 (अध्याय 5 म दया भारतीय उपमहा प का भौ तक मान चत्र) पर इन्ह कैसे दखाएँ:

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1. मान चत्र के सबसे ऊपर आर-पार फैली भूरी प
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खो जए — यही हमालय है, 'पवत का दे वता'।
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2. इस प .कcे साथ प म क ओर च लए, जहाँ यह समुद्र के नकट आती है: उस ओर का aजलg अरब सागर है।
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se पूव क ओर च लए, जहाँ ब्रह्मपुत्र द क्षण क ओर मुड़ती है: उस ओर का जल बंगाल क खाड़ी है।
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ag4. अब एक समुद्र से दूसरे समुद्र तक अपनी उँगली पवत के साथ-साथ फे रए — यही "प श्चमी से लेकर पूव समुद्र तक फैला
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हुआ" का अथ है।

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aglृंखला लगभग 2400 कलोमीटर लंबी सीधी, अखंड रेखा है जो एक समुद्र
क व उसे मापदं ड क्य कहते ह: ोक कहता है क हमालय "पृथ्वी को नापने का मापदं ड" है। मान चत्र के ऊपरी
भाग पर पैमाना रखकर दे खए — यह
से दूसरे समुद्र को छू ती है। उपग्रह-र हत युग के क व के लए यही पूरी भू म का स्वाभा वक मापदं ड था।

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.cये हद महासागर क ही दो भुजाएँ ह और सभी महासागर आपस म जुड़aे हुएg ह।
दोन एक ही महासागर ह: अरब सागर और बंगाल क खाड़ी अलग-अलग महासागर नह ह। जैसा अध्याय 2 म
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पढ़ा,

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प्र.2
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गंगा का उल्लेख क्य कया गया है? (संकेत – इसके अनेक कारण हो सकते ह।)
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संकेत महत्वपूण है — इसका कोई एक ही उत्तर नह है। का लदास एक साथ कई कारण से गंगा का उल्लेख करते ह, और अच्छा

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उत्तर वही है जो एक से अ धक कारण दे ।

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.cक महानता कहने का सबसे छोटा रास्ता है — वह केवल खड़ा नह है, वह भारतagको उसक सबसे बड़ी नद देता है।
क्य क गंगा का जन्म हमालय म ही होता है। यह नद उत्तराखंड के गंगोत्री हमनद से नकलती है। गंगा का नाम लेना पवत

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क्य क वह पवत क शीतलता लोग तक पहुँचाती है। ोक म वायु "गंगा के झरन क फुहार " के साथ नीचे आती है,

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दे वदार के वृक्ष को हलाती है और मृग क खोज म घूमते पवतवा सय क थकान मटाती है। नद मानो पवत क साँस है जो

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मनुष्य तक पहुँचती है।

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क्य क गंगा भारत क सवा धक प वत्र नद है। उसके तट पर, ोत पर और संगम स्थल पर असंख्य त्योहार और धा मक

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कृत्य होते ह। उसका नाम लेने से पवत भी प वत्र हो जाता है।
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क्य क उसके अवतरण क कथा है। पुराण के अनुसार गंगा आकाश से इतने वेग से उतरी क शव ने उसे हमालय पर
अपनी जटाओं म धारण कया और फर धीरे-धीरे मुक्त कया। ोक का 'झरन क फुहार' वाला दृश्य उसी कथा क ओर
संकेत करता है।
पा रवा रक संबंध के कारण। इसी परंपरा म गंगा और पावती दोन हमवान ( हमालय) क पु त्रयाँ ह। कुमारसंभव पावती और
शव के ववाह क कथा है — इस लए आरंभ म ही गंगा का नाम लेकर क व उस प रवार का प रचय दे दे ते ह जसक कथा वे
कहने जा रहे ह।

दोन ोक मलकर क्या दखाते ह: का लदास के लए हमालय केवल दृश्य नह है। वह एक जीवंत उप स्थ त है
— पृथ्वी को नापने वाला दे वता, एक पता, एक प वत्र नद का ोत और अपने ऊपर बसे लोग को छाया, वायु और
जल दे ने वाला। अध्याय का 'स्थलरूप और संस्कृ त' वाला बदु यही है।

इसी अध्याय से कुछ भूगोल: हमालय से नकलने वाली न दय म गंगा वशालतम है, लगभग 2500 कलोमीटर
लंबी। यमुना और घाघरा जैसी सहायक न दयाँ भी हमालय से नकलती ह, जब क सोन गंगा के मैदान के द क्षण म
पड़ने वाली वध्य ृंखला से नकलती है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 49

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पवतीय जीवन क चुनौ तयाँ ( चत्र 3.6, पृष्ठ 50)

आइए पता लगाएँ

प्र.1 चत्र के माध्यम से ( चत्र 3.6, पृष्ठ 50) पवत पर रहने वाले लोग के सामने आने वाली चुनौ तय को दशाया गया
है। कक्षा म समूह बनाकर चचा क जए और प्रत्येक पर एक अनु े द ल खए। यह भी वचार क जए क जब
पवत पर इतनी सारी चुनौ तयाँ ह, फर भी लोग वहाँ क्य रहते ह?

आकिस्मक बाढ़ भूस्खलन पय टकों का अिनयंित्रत आना-जाना िहमस्खलन (एवलांश)

भारी िहमपात बादल फटना ठंडा मौसम

चत्र 3.6, पृष्ठ 50 — सात चत्र, नामां कत रेखा चत्र के रूप म पुनः च त्रत।

चत्र 3.6 म सात नामां कत चत्र दए गए ह। नीचे उसी क्रम म प्रत्येक पर एक अनुच्छेद है, और उसके बाद प्रश्न के दूसरे भाग का
उत्तर।

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चत्र 3.6 क उस पर एक अनु ेद
चुनौती

आक स्मक बाढ़ आकिस्मक बाढ़ िकसी स्थान िवशेष में अचानक आने वाली बाढ़ है, जो बहुध ा बादल फटने से होती है। पवतों में ढलाने ं
खड़ी होती है ं और िम ी की परत पतली, इसिलए वष का जल भीतर नही ं िरसता — वह ढलान पर दौड़ता है और कु छ ही
िमनटों में एक छोटी जलधारा गरजते हुए मटमैले पवाह में बदल जाती है। चेतावनी का समय लगभग नही ं िमलता। पुल ,
पगडंिडयाँ, खड़े वाहन और नदी िकनारे के घर बह जाते है ं और गाँव कट जाते है,ं क्योंिक सड़क ही समाप्त हो जाती है।

भूस्खलन भूस्खलन का अथ है पवतीय भूखंड के एक बड़े भाग या च ान का अकस्मात टू टकर िगरना। भारी वष से िम ी भीग कर
भारी और िफसलनदार हो जाती है, शेष काम ग रु
ु त्व कर दे ता है। सड़क काटना, िवस्फोट और अिनयोिजत िनम ण ढलानों
को और कमजोर बनाते है।
ं एक ही भूस्खलन राजमाग के लंबे िहस्से को दबा सकता है, नदी को रोक सकता है और पूर ी
घािटयों को िदनों तक अलग-थलग कर सकता है — पुस्तक का िचत्र यही िदखाता है, बीच से टू टी हुई सड़क।

पयटक का यह पाकृ ितक नही ं, मानव-िनिमत चुनौती है। पयटन आय लाता है, िकं तु जब एक साथ बहुत अिधक वाहन और पयटक
अ नयं त्रत रूप से पहुच
ँ जाते है ं तो सँक री पहाड़ी सड़कों पर घंटों जाम लग जाता है, जल और िबजली की कमी हो जाती है, ढलानों पर
आ जाना प्लािस्टक कचरे के ढे र लग जाते है ं जहाँ कोई गाड़ी पहुच
ँ ही नही ं सकती, और िजस शांित के िलए लोग आए थे वही नष्ट हो
जाती है। पवतीय पय वरण नाजुक है और स्वागत तथा संर क्षण के बीच सही संतल
ु न बनाना पाय: किठन हो जाता है।

हमस्खलन िहमस्खलन का अथ है पवत से अकस्मात िहम, बफ या च ानों का टू टकर िगरना, और ऐसा पाय: तब होता है जब िहम
(एवलांश) िपघलना आरंभ होती है। पूर ी ढलान की िहम एक साथ िखसक कर वाहन से भी तेज गित से नीचे आ सकती है और रास्ते
में जो भी हो उसे दबा दे ती है। पवतारोही, ऊँचाई पर तैनात सै िनक, सड़क-मजदू र और खड़ी िहम-ढलानों के नीचे बसे गाँव
— सभी संक ट में रहते है,ं और बचाव किठन होता है क्योंिक िगरी हईु िहम लगभग कं ीट िजतनी कठोर जम जाती है।

भारी हमपात भारी िहमपात एक ही रात में सड़कों, छतों और खेतों को ढँक सकता है। दर बंद हो जाते है,ं बसे ं रुक जाती है,ं िव ालय
बंद हो जाते है ं और गाँव हफ्तों तक कट सकते है।
ं जल की पाइपें जम कर फट जाती है,ं भार से िबजली की तारे ं टू ट जाती
है,ं और भोजन, ईंध न तथा दवाएँ पहले से जमा करनी पड़ती है।
ं इसीिलए पहाड़ी घरों की छते ं ढलवाँ बनाई जाती है ं —
तािक िहम जमा होकर छत को तोड़ने के बजाय िफसल जाए।

बादल फटना बादल फटना अचानक होने वाली पचंड वष है, िजसमें बहुत कम समय में बहुत छोटे क्षेत्र पर भारी मात्रा में जल िगरता है।
पवत नम वायु को तेजी से ऊपर उठने को िववश करते है,ं इसीिलए बादल फटना यहाँ अिधक होता है। िगरता हुआ जल न
इतनी तेजी से भूिम में िरस सकता है, न बह सकता है, इसिलए बादल फटने के बाद पाय: इसी िचत्र की दो और आपदाएँ
— आकिस्मक बाढ़ और भूस्खलन — एक के बाद एक आती है।
ं

ठं डा मौसम ऊँचाई बढ़ ने के साथ तापमान िगरता है, इसिलए पवतीय शीत ऋतु लंबी और कठोर होती है। गम कपड़े, ईंध न की लकड़ी
और अच्छी तरह ढँके घर सुिवधा नही ं, आवश्यकता है।
ं फसल वष के के वल कु छ ही महीनों में उगती है, इसिलए भोजन
सुर िक्षत रखकर जमा करना पड़ता है। ठं ड साधारण कामों को भी किठन बना दे ती है — िनम ण रुक जाता है, नल जम
जाते है,ं और बुजगु ं तथा िशशुओ ं की िवशेष दे खभाल करनी पड़ती है।

तो इतनी चुनौ तय के बाद भी लोग पवत पर क्य रहते ह?

क्य क वह उनका घर है। पी ढ़य से प रवार वह रहते आए ह; उनक भू म, घर, मं दर, त्योहार, भाषा और संबंधी सब वह ह।
लोग अपने घर को केवल उसके खतर से नह तौलते।
शुद्ध वायु और मनोरम दृश्य। अध्याय क अपनी पं क्त कहती है क पवतीय जीवन के कई सकारात्मक पक्ष ह — "शुद्ध वायु,
मनोरम दृश्य आ द"।
पवत से मलने वाली आजी वका। घा टय म वे दका कृ ष, पशुपालन, सेब और अखरोट के बाग, वन उपज, औषधीय पौधे
— और पयटन, जो प्राय: आय का सबसे बड़ा साधन है।
जल और सुरक्षा। पवतीय ोत वष-भर स्वच्छ जल दे ते ह, और जो दुगमता आवागमन क ठन बनाती है वही मैदान क भीड़,
शोर और प्रदूषण को दूर भी रखती है।

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संस्कृ त और आस्था। अनेक समुदाय पवत को प वत्र मानते ह; तीथ माग और दे वस्थल ने स दय से ब स्तय को सहारा दया
है।
कौशल और लचीलापन। लोग स्वयं को ढाल लेते ह — ढलवाँ छत, सीढ़ दार खेत, सं चत भोजन, ऊनी वस्त्र और यह गहरी
जानकारी क कौन-सी ढलान सुर क्षत है। अध्याय इसी शब्द पर समाप्त होता है — लचीलापन।

समूह काय के लए सुझाव: सात चत्र समूह के सदस्य म बाँट ली जए, प्रत्येक एक अनुच्छेद लखे, फर सात को
क्रम से प ढ़ए। आप दे खगे क बादल फटना → आक स्मक बाढ़ → भूस्खलन वास्तव म तीन अलग दुघटनाएँ
नह , एक ही ंखला क क ड़याँ ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 53
स्थलरूप का वश्व मान चत्र ( चत्र 3.8)

आइए पता लगाएँ

प्र.1 चत्र 3.8 म दशाए गए स्थलरूप म रंग के कोड का प्रयोग क जए। उदाहरणाथ – तब्बत का पठार, रॉक
ृंखला, नील नद का मैदान (आपको मान चत्र म दए नाम स्मरण करने क आवश्यकता नह है)।

यूराल
अलास्का मंगोिलयन
जीक

िमिससीपी ितब्बत
र ॉ

एटलस िहमालय
िसंध ु यांग्त्सी
नील
अमेजन
पूव अफीकी
गंगा और बह्मपुत्र
ज़ ी ड
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पैटागोिनयन

पठार निदयों के मैदान पवत ख ृं ला

मानिच त्र पैमाने पर आधािरत नहीं है।

चत्र 3.8, पृष्ठ 53 — वश्व-मान चत्र और उसके रंग का कोड, पुनः च त्रत।

चत्र 3.8 क सूची तीन रंग दे ती है — भूरा = पठार, हरा = न दय का मैदान, नारंगी = पवत ृंखला। हर नाम को उस पैच के रंग
से मलाइए जस पर वह लखा है —

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मान चत्र म नाम रंग पूरा नाम कहाँ है

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अलास्का
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अलास्का ंखृ ला
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उत्तरी अमेिरका का उत्तर-पिश्चमी कोना

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रॉक ज
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नारंग ी पिश्चमी उत्तरी अमेिरका

म ससीपी हरा िमिससीपी नदी का मैद ान मध्य संयक्ु त राज्य अमेिरका

co m उत्तरी दिक्षण अमेिरका
अमेजन नदी का मैद ान
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अमेजन हरा

एंडीज़ नारंग ी एंडीज aंखृ gलाla दिक्षण अमेिरका के पिश्चमी िकनारे पर

पैटागोिनया का पठार
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पैटागो नयन भूर ा दिक्षण अमेिरका का दिक्षणी िसरा

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एटलस ंखृ ला
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एटलस नारंग ी उत्तर-पिश्चमी अफ ीका

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नील हरा नील नदी का मैद ान उत्तर-पूव अफ ीका

aglपूव अ क भूर ा पूव अफ ीका का पठार पूव अफ ीका — सोने और हीरे के खनन के िलए पिसद्ध

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यूराल नारंग ी यूराल ंखृ ला यूर ोप और एिशया के बीच की पचिलत िवभाजक रे खा

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मंगोिलयाlaकाsपठार
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मंगो लयन भूर ा मध्य एिशया, चीन के उत्तर में

तब्बत भूर ा ितब्बत का पठार िवश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार — 'िवश्व की छत'

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िसंध ु नदी का मैद ान
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सधु हरा भारतीय उपमहा ीप का उत्तर-पिश्चम

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गंगा और हरा गंगा और बह्मपुत्र का मैद ान ंग्लादे

a हमालय
agl नारंग ी िहमालय ंखृ ला भारतीय उपमहा ीप के पूरे उत्तर में

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यागं त्सी नदी का मैद ान
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यांगत्सी हरा पूव चीन

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ृंखलाएँ (नारंगी): अलास्का, रॉकी, एंडीज, एटलस, यूराल, िहमालय

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पठार (भूरा): पैट ागोिनयन , पूव अफीकी, मंगोिलयन , ित ब्बत
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निदयों के मैद ान (हरा): िमिससीपी, अमेजन , नील, िसंध,ु गंगा और बह्मपुत्र, यांगत्सी
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ध्यान दे ने योग्य एक पैटन: हर हरा पैच कसी नद के नाम पर है — म ससीपी, अमेजन, नील, सधु, गंगा,
ब्रह्मपुत्र, यांगत्सी। यह संयोग नह है। न दय के मैदान न दय ारा ही बनाए जाते ह — पवत से लाई गई तलछट से;
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इस लए मैदान को स्वाभा वक रूप से नद का नाम मल जाता है।
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एक और पैटन: नारंगी ृंखलाएँ प्राय: हरे मैदान के ठ क बगल म ह — हमालय के साथ गंगा का मैदान, एंडीज के
साथ अमेजन। पवत च ान और गाद दे ते ह; नद उसे ढोती है; मैदान उसका प रणाम है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 54
गंगा के मैदान का उपग्रह चत्र ( चत्र 3.9)

आइए पता लगाएँ

प्र.1 गंगा के मैदान का रंग कौन-सा है?

चत्र 3.9, पृष्ठ 54 — उत्तर भारत का उपग्रह चत्र, रंग के रेखा चत्र के रूप म पुनः च त्रत। इसम कसी भाग का नाम
नह लखा है — रंग को पढ़ना ही काय है।

गंगा का मैदान वह चौड़ी हरी प है जो चत्र के मध्य म, पवत के ठ क नीचे, बाएँ से दाएँ फैली हुई है।

हरा रंग वनस्प त का है — मुख्यत: फसल का। मैदान खेत का एक वशाल वस्तार है, इस लए उपग्रह से यह लगातार हरा
दखाई दे ता है।
ध्यान से दे खए तो हरे म से हल्क चाँद जैसी टे ढ़ -मेढ़ रेखाएँ गुजरती दखगी — ये गंगा और उसक सहायक न दयाँ ह,
अपने चौड़े रेतीले तट के साथ।
दाईं ओर (पूव म) हरा रंग धुँधली धूसर-सफेद चादर म बदल जाता है। यह गंगा के नचले मैदान पर छाया कुहासा और धुँध है
— अध्याय म बताए प्रदूषण क याद दलाता हुआ।

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यहाँ हरा रंग उपजाऊपन क्य बताता है: न दयाँ हमालय से तलछट — रेत, च ान के कण और गाद — बहाकर
लाती ह और मैदान म जमा कर दे ती ह। जमा हुई यह म गहरी, मुलायम और समृद्ध होती है, इस लए लगभग हर
वग कलोमीटर पर खेती हो सकती है। उपग्रह चत्र का रंग वास्तव म नीचे क म क रपोट है।

प्र.2 सफेद रंग कस वस्तु को दशा रहा है?

चत्र 3.9, पृष्ठ 54 — उत्तर भारत का उपग्रह चत्र, रंग के रेखा चत्र के रूप म पुनः च त्रत। इसम कसी भाग का नाम
नह लखा है — रंग को पढ़ना ही काय है।

चत्र के ऊपरी भाग और ऊपर-दाईं ओर फैला सफेद वस्तार हमालय और तब्बत के पठार पर जमी हम और बफ है, जसम कुछ
बादल भी मले हुए ह।

सफेद भाग का हस्सा वह क्या है

हरे मैदान के ऊपर क नुक ली, कटकदार सफेद ृ ला — कटकों के बीच की गहरी छायादार घािटयाँ
स्थायी िहम से ढँक ी ऊँची िहमालय ंख
रेखा तक िदखाई दे ती है ं

उसके आगे ऊपर-दाईं ओर फैली चौड़ी, कोमल िहम से ढँक ा ितब्बत का पठार , तथा उसके ऊपर छाए बादल
सफेद चादर

सफेद म दखते छोटे गहरे नीले धब्बे पठार पर िस्थत ऊँचाई वाली झीले ं

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यह पूरे वष सफेद क्य रहता है: उन ऊँचाइय पर वायु इतनी ठं डी है क हम कभी नह पघलती और पवत स्थायी
रूप से हम से ढँ के रहते ह (पृष्ठ 43)। नीचे क ओर हम हर ग्रीष्म म पघलती है — और वही पघला जल ठ क नीचे
बहने वाले हरे मैदान क न दय को पो षत करता है।

सीमा-रेखा दे खए: सफेद और हरा एक आश्चयजनक रूप से स्पष्ट रेखा पर मलते ह। वही रेखा है जहाँ पवत
समाप्त होते ह और मैदान आरंभ होता है — पृथ्वी क सबसे स्पष्ट प्राकृ तक सीमाओं म से एक, जो अंत रक्ष से भी
दखाई दे ती है।

प्र.3 उपग्रह चत्र के नीचे बाईं ओर भूरे रंग का फैलाव क्या दशा रहा है?

चत्र 3.9, पृष्ठ 54 — उत्तर भारत का उपग्रह चत्र, रंग के रेखा चत्र के रूप म पुनः च त्रत। इसम कसी भाग का नाम
नह लखा है — रंग को पढ़ना ही काय है।

नीचे बाईं ओर का भूरा और बालू जैसा वस्तार बहुत कम वनस्प त वाली शुष्क भू म है — राजस्थान का थार मरुस्थल और उसके
द क्षण-पूव म फैले नंगे, च ानी ऊँचे प्रदे श।

अंत रक्ष से भूरा रंग का अथ है नंगी म , बालू या च ान का दखना, क्य क उसे ढँ कने वाले पौधे बहुत कम ह।
भारत के इस उत्तर-प श्चमी भाग म बहुत कम वषा होती है, इस लए यहाँ वह लगातार फसल-आवरण संभव नह जो गंगा के
मैदान को हरा बनाता है।
और नीचे भूरा रंग धब्बेदार तथा ला लमा लए हो जाता है — वह मध्य भारत का सूखा, पथरीला प्रदे श है, जहाँ पतली म सीधे
च ान पर टक है।

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चत्र 3.9 म रंग क्या दशाता है क्य

हरा गंगा का मैद ान निदयों की तलछट से बनी गहरी उपजाऊ िम ी और पय प्त जल — लगातार फसले ं

सफेद िहमालय और ितब्बत का पठार बहुत अिधक ऊँचाई पर िहम और बफ , साथ में बादल

भूरा / बालू जैसा उ त्तर-पिश्चम की शुष्क भूिम बहुत कम वषण, इसिलए पौधों के स्थान पर नंग ी बालू और च ान

एक ही चत्र म पूरा पाठ: तीन स्थलरूप और तीन जलवायु एक ही े म म साथ-साथ ह — हम से सफेद पवत, हरा
उपजाऊ मैदान और भूरा शुष्क वस्तार। ये रंग सजावट नह ह; हर रंग बता रहा है क उस भू म तक कतना जल
पहुँचता है और वह कस प्रकार के जीवन को सँभाल सकती है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 55–56
न दयाँ, प वत्र स्थल और पयटन स्थल

आइए पता लगाएँ

प्र.1 क्या आप अपने प्रदे श क नद के ोत अथवा संगम के कुछ उदाहरण दे सकते ह जन्ह कसी समुदाय ारा
प वत्र स्थल माना जाता है?

हाँ — भारत के लगभग हर भाग म ऐसे स्थल ह। संगम दो या दो से अ धक न दय के मलने का स्थान है और ोत वह स्थान जहाँ
नद जन्म लेती है; दोन को व्यापक रूप से प वत्र माना जाता है।

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प्रदे श प वत्र ोत या संगम क्या है

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उत्तराखंड
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(गंग ोत्र ी िहमनद ) भागीरथी-गंग ा का ोत; पमुख तीथ
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उत्तराखंड अलकनंद ा और भागीरथी का संग म — इसके बाद नदी 'गंग ा' कहलाती है। ऊपर चार और पयाग
है ं — िवष्णपु याग, नंद पयाग, कणपयाग और रुद पयाग

पयागराज (ित्रवेणी संगम)
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गंग ा और यमुना का संग म ; यहाँ माघ मेल ा और कुं भ मेल ा लगता है
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प्रदे श

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नमदाgऔर सोन का ोत
मध्य
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अमरकं टक a

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महाराष्ट्र त्र्यंबके श्वर , नािसक के ोत
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गोदावरी का

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पास
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se m तलकावेरी, कोडगु
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कनाटक कावेर ी का

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a कनाटक ितरुमकू डलु नरसीपुर (टी. कावेर ी और किपला का संग म ; यहाँ कुं भ मेल ा लगता है
नरसीपुर)
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गंग ा और गंm
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सोनपुर / हाजीपुर डक का संग म ; पिसद्ध सोनपुर मेल ा

la ज के तट पर िसख परंपरा से जुड़े स्थल
बहार

पंजाब कीरतपुर / आनंद पुर क्षेत्र agसतलु

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नमूना उत्तर: "हमारे जले म बेतवा, हमीरपुर के पास यमुना से मलती है। लोग का तक पू णमा पर वहाँ स्नान करते
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ह, त्योहार के बाद मू तय का वसजन करते ह, और हर वष तट पर एक छोटा मेला लगता है।"

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a ोत और संगम ही क्य : ोत वह स्थान है जहाँ जल पृथ्वी से प्रकट होता है — एक आरंभ, और आरंभ प वत्र
लगते ह। संगम वह स्थान है जहाँ दो अलग धाराएँ एक हो जाती ह — एक मलन, जो एकता का प्रतीक है। केवल
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comको दे वस्थल और त्योहार से च ह्नत कया है। g l a
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भारत म ही नह , वश्व-भर के समुदाय ने ऐसे स्थान
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प्र.2 अपने पास क नद पर जाइए और वहाँ होने वाली सभी आ थक या सांस्कृ तक ग त व धय का अवलोकन

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क जए। उन्ह लखकर अपने सहपा ठय के साथ उन पर चचा क जए।

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यह क्षेत्र-भ्रमण है, इस लए उत्तर वही होगा जो आप दे खगे। कसी बड़े के साथ जाइए, जल के कनारे से दूर र हए, और एक कॉपी ले

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जाइए जसम दो स्तंभ बने ह — आ थक और सांस्कृ तक।

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आ थक ग त व धयाँ जो दे खनी ह सांस्कृ तक ग त व धयाँ जो दे खनी ह

जाल या बंस ी से मछली पकड़ना; लोगों या सामान को ले जाती नौकाएँ; तट पर मंिदर, मिस्जद, ग रु
ु ारा या कोई दे वस्थल; स्नान के िलए बने
नदी-तल से रे त िनकालना; धोिबयों का काम; खेतों के िलए जल पंप घाट; पात:कालीन पूजा और संध् या आरती; जल में दीप या फू ल
करना; पशुओ ं को पानी िपलाना; पंिपंग स्टेशन या जलकल; पुल या घाट; पवािहत करना; त्योहार के बाद मूित िवसजन; अंितम संस्कार; मेल ा;
तट पर छोटी दुक ाने ं और चाय की ग मु िटयाँ; जल-चक्की या छोटा बाँध नदी से जुड़े लोकगीत और कथाएँ; सै र -सपाटे का स्थान

अ रपोट म क्या-क्या हो:

1. नद का नाम, आप कहाँ खड़े थे, तथा दनांक और समय।
2. उस हस्से का एक छोटा रेखा चत्र — तट, जल, पुल, घाट, खेत।
3. ग त व धय क सूची, साथ म लगभग कतने लोग वह कर रहे थे।
4. जनसे बात क उनके दो-तीन वाक्य — कोई ना वक, मछु आ रन, दुकानदार।
5. नद के स्वास्थ्य के बारे म आपक टप्पणी — जल स्वच्छ है या गंदा, तट पर कचरा है क्या, नद -तल खोदा जा रहा है क्या?

नमूना उत्तर: "हम प्रात: 7 बजे गोमती के तट पर गए। चार व्य क्त नाव से मछली पकड़ रहे थे और दो जाल क
मरम्मत कर रहे थे। पुल के पास ै क्टर पर रेत लाद जा रही थी। घाट पर लगभग बीस लोग स्नान कर रहे थे और एक
पुजारी छोट पूजा करा रहे थे; जल म गदे क मालाएँ और द ये बह रहे थे। सी ढ़य के ऊपर एक चाय क दुकान और
एक फूल क दुकान थी। घास-फूस म बहुत सारा प्ला स्टक कचरा फँसा था, जसे हमारे पूरे समूह ने एक समस्या के
रूप म लखा।"

यह क्रयाकलाप क्या सखाता है: एक ही नद एक साथ कायस्थल भी है और पूजा-स्थल भी। अध्याय का यही
बदु है — " वश्व म बहने वाली न दयाँ बहुत से सांस्कृ तक मूल्य का वहन करती ह" और "मैदान म नद म नौका-
संचालन सुगम होता है, जससे बहुत-सी आ थक ग त व धय को सहायता मलती है"। आप एक ही तट पर दोन
वाक्य को घ टत होते दे ख रहे ह।

प्र.3 भारत के कुछ लोक प्रय पयटन स्थल के नाम बताइए। साथ ही पहचा नए क वे पयटन स्थल कस प्रकार के
स्थलरूप से संबं धत ह।

पयटन स्थल को स्थलरूप के अनुसार छाँ टए। नीचे तैयार सूची है, जसम आप अपने पसंद दा स्थल जोड़ सकते ह —

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

स्थलरूप पयटन स्थल आकषण

पवत िशमला और मनाली (िहमाचल पदे श), मसूरी, नैनीताल और औली (उ त्तराखंड), ीनगर, ठं डी जलवायु, पाकृ ितक
गुल मग और ले ह (जम्मू-कश्मीर, ल ाख), दािजिलंग और गंगटोक (पिश्चम बंगाल , दृ श्य, िहम, टेिकं ग और
िसिक्कम), तवांग (अरुणाचल पदे श), ऊटी और कोडै कनाल (नीलिगिर और पलनी स्कीइंग , चाय बागान, मठ
पहािड़ याँ), मु ार (के रल , पिश्चमी घाट), माउं ट आबू (अरावली, राजस्थान)
पठार हंपी और बादामी (कन टक, द क्कन का पठार), अजंता और एलोरा की गुफ ाएँ (महारा , शैल कृ त ग फ
ु ाएँ और मंिदर,
द क्कन का पठार), पंचगनी और महाबले श्वर (पठार का िकनारा), राँची और नेतरहाट तथा जल पपात, पठार के
हंडु रू जल पपात (छोटा नागपुर का पठार), चेरापूंजी (सोहरा) और नहकालीकाई जल पपात िकनारे के दृ श्य-स्थल
(मेघ ालय का पठार ), जोग जल पपात (शरावती नदी, पिश्चमी घाट)

मैदान वाराणसी, पयागराज, अयोध्या, मथुरा-वृंद ावन और आगरा (गंगा-यमुना का मैद ान), बोधगया घाट और मंिदर,
और नालंद ा (िबहार), अमृतसर (पंजाब का मैद ान), काजीरंगा (बह्मपुत्र का मैद ान) ऐितहािसक स्मारक, नदी-
मेले , बाढ़ के मैद ान का
वन्य जीवन

मरुस्थल जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और साम के रे त के टीले ; कच्छ का रण (गुजरात) िकले , ऊँट सफारी, लोक
संग ीत और नत्ृ य, रण
उत्सव

तट और प गोवा, कोवलम और वकला (के रल ), पुरी (ओिडशा), रामेश्वरम और कन्याकु मारी समुद तट, समुद िकनारे
(एक और (तिमलनाडु), अंडमान एवं िनकोबार तथा ल क्ष ीप के मंिदर, पवाल िभित्तयाँ
स्थलरूप) और जल- ीड़ाएँ

वाक्य रूप म नमूना उत्तर: " शमला और मनाली पवत म ह; हंपी और अजंता क गुफाएँ दक्कन के पठार पर;
वाराणसी और आगरा गंगा-यमुना के मैदान म; जैसलमेर थार मरुस्थल म; और गोवा तट य मैदान पर।"

पैटन क्या बताता है: आकषण स्थलरूप ही तय करता है। पवत ठं डी हवा और हम दे ते ह, पठार जल प्रपात और
शैलकृत गुफाएँ (क्य क वहाँ काटने योग्य कठोर च ान है और गरने के लए ऊँचा कनारा), मैदान नद -घाट और बड़े
नगर, मरुस्थल ट ले और कले। पयटन भी उन्ह तरीक म से एक है जनसे स्थलरूप मानव जीवन को आकार दे ते ह
— और, जैसा चत्र 3.6 चेतावनी दे ता है, अ नयं त्रत पयटन उसी स्थान को हा न भी पहुँचा सकता है जसे दे खने
लोग आते ह।

आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 57

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय तीन बदुओं म

आगे बढ़ने से पहले . ..

प्र.1 स्थलरूप तीन प्रकार के होते ह — पवत, पठार और मैदान। उनक भौ तक वशेषताएँ और पयावरण बहुत अलग-
अलग प्रकार के होते ह।

इस सारांश का वस्तार:

पवत पठार मैदान

आकृ त चौड़ा आधार, खड़ी ढलान, सँक रा उठा हुआ , ऊपर से पाय: चपटा, पाय: िवस्ततृ , सपाट या हल्का तरंिगत;
िशखर एक ओर सीधी ढलान ऊँची पहािड़याँ या गहरी घािटयाँ नही ं

ऊँचाई आस-पास से बहुत अिधक; 8000 कु छ सौ मीटर से कई हजार मीटर तक समुद तल से सामान्यत: 300 मीटर
मीटर से भी ऊपर हो सकती है से अिधक नही ं
म पतली, पथरीली पाय: च ानी और कम उपजाऊ — लावा निदयों की तलछट से बनी गहरी
पठार अपवाद है,ं जहाँ सम ृद्ध काली िम ी और अत्यंत उपजाऊ
है

वनस्प त पवतीय वन — चीड़, फर, स्पूस , िवश्व-भर में बहुत िविवध; पाय: झािड़याँ फसले ं और घास के मैद ान; िविवध
दे वदार; और ऊपर घास, मॉस और और शुष्क वन वनस्पित एवं जीव-जंत ु
लाइके न

भारतीय िहमालय; अरावली ंखृ ला; पिश्चमी द क्कन का पठार; छोटा नागपुर का पठार गंगा का मैद ान
उदाहरण घाट

इस वग करण म अध्याय दो बात और जोड़ता है —

आयु भी आकृ त जतनी ही महत्वपूण है। हमालय जैसे नवीन पवत क चो टयाँ ऊँची और नुक ली ह और वे आज भी बढ़
रहे ह; अरावली जैसे प्राचीन पवत अपरदन से गोल हो चुके ह। पठार भी नवीन या प्राचीन हो सकते ह — दक्कन वश्व के सबसे
पुराने पठार म से एक है।
तीन ही पूरी सूची नह है। पृथ्वी का स्वरूप ज टल है और वशेषज्ञ कुछ और स्थलरूप भी बताते ह — जैसे मरुस्थल, जो थार
और सहारा क तरह गम या गोबी क तरह ठं डा हो सकता है।

प्र.2 ऐ तहा सक समय से लोग ारा कए जाने वाले क्रयाकलाप उस स्थलरूप से संबं धत होते ह जसम वे नवास
करते ह। ये स्थलरूप वश्व क संस्कृ त के अ भन्न भाग ह; वशेष रूप से भारतीय संस्कृ त व वध प्रकार से उन्ह
मनाती रही है।

पहला भाग — स्थलरूप तय करते ह क लोग क्या करते ह:

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स्थलरूप अध्याय के अनुसार मुख्य व्यवसाय

पवत घािटयों में वेिदका कृ िष, पशुपालन, पयटन, पवतारोहण और तीथयात्रा से जुड़ी से वाएँ

पठार खनन — िवश्व की अनेक सबसे बड़ी खाने ं पठारों पर ही है ं

मैदान कृ िष और नदी में मत्स्य पालन; निदयों के सहारे व्यापार और आवागमन

मरुस्थल पशुपालन, मरु माग ं पर व्यापार, तथा लोक गीतों और िकं वदंितयों की सशक्त परंपरा

दूसरा भाग — स्थलरूप हर जगह संस्कृ त का हस्सा ह। वश्व-भर के अनेक पारंप रक समुदाय पवत को प वत्र मानकर उनक
पूजा करते ह। तब्बती एवरेस्ट को 'चोमोलुंगमा' अथात 'जगत जननी' और नेपाली 'सागरमाथा' अथात 'आकाश क दे वी' कहते
ह; तब्बत के कैलाश पवत को हदू, बौद्ध, जैन और बॉन के अनुयायी प वत्र मानते ह।
तीसरा भाग — भारतीय संस्कृ त ने इन्ह कन- कन रूप म मनाया है:

अध्याय के आरंभ म दया अथववेद का भू म सूक्त "अनेक प्रकार क ऊँचाइय , ढलान तथा वशाल समतल भू म" वाली पृथ्वी
का अ भवादन करता है और उसे माता कहता है।
का लदास का कुमारसंभव हमालय क स्तु त से आरंभ होता है — प श्चमी से पूव समुद्र तक फैले पवत के राजा क ।
न दय के ोत और संगम प वत्र माने जाते ह और वहाँ अनेक त्योहार, समारोह तथा धा मक कृत्य होते ह।
प्राचीन त मल संगम काव्य क पाँच टनै हर दृश्यभू म को अपने दे वताओं, भाव और व्यवसाय से जोड़ती ह — कु रजी, मुल्लै,
मरूदम, नेयदल और पालै। यह स्थलरूप का बल्कुल भन्न वग करण है, जो भौ तक आकृ त के बजाय मानवीय अनुभू त पर
आधा रत है।
थार मरुस्थल के समुदाय मरुस्थल से जन्मे लोक गीत और कवदं तय क समृद्ध परंपरा सँजोए हुए ह।

टनै इस अध्याय म क्य द गई ह: यह दखाने के लए क स्थलरूप केवल च ान और म नह है। त मल क वय
ने पवत को अनुराग से और मरुस्थल को अलगाव से जोड़ा — अथात भूगोल के व ालयी वषय बनने से दो हजार
वष पहले ही लोग भू म को मानव जीवन के दपण क तरह पढ़ रहे थे।

प्र.3 प्रत्येक स्थलरूप, व भन्न प्रकार क चुनौ तय के साथ-साथ अवसर को भी प्रस्तुत करता है।

यही वाक्य पूरे अध्याय को एक सूत्र म बाँधता है। एक-एक पं क्त म —

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन
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स्थलरूप चुनौती अवसर

m पयटन, साहिसक खेल , तीथlaयाsत्राe, वेिदका कृिष,
.बाढ़co, बादल फटना, भारी िहमपात और ठं ड; नाजुक पय वरण पशुपालन, तथा निदयोंaकोg पोिषत करने वाली िपघलती
पवत खड़ा, ऊबड़-खाबड़ भूभाग; भूस्खलन, िहमस्खलन, आकिस्मक

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g l a िहम
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पठार च ानी िम ी, कम उपजाऊ और कृ िष के िलए कम अनुकू ल 'खिनजों का भंडार -ग ृह', जल पपात, और लावा पठारों की

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समृद्ध काली िम ी
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बढ़ ती जनसंख्या, पदू षण, तथा अत्यिधक िसंचsाईeसे भूिमगत
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मैदान सबसे उपजाऊ िम ी, सुगम नौका-संचालन और
जलस्तर में िगरावट आवागमन, तथा बड़ ी बिस्तयों के िलए स्थान

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िवल क्षण वनस्पित एवं पािण जगत, तथा समृद्ध सांस्कृितक
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मरुस्थल बहुत कम वषण और जीवन की किठन पिरिस्थितयाँ
परंपराएँ
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अध्याय यह क्य समाप्त होता है: क्य क एक ही तथ्य को दो तरह से पढ़ा जा सकता है। खड़ी ढलान हल को

agl रोकती है — और पयटक को ख चती है। तलछट से भरी न दयाँ बाढ़ लाती ह — और वही म बछाती ह जो 40
करोड़ लोग का पेट भरती है। मानव ने जस प्रकार सभी स्थलाकृ तय को अपना घर बनाया है, वह पुस्तक के अपने
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शब्द म "हमारे अनुकूलन और लचीलेपन का साक्षी है"।

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प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ — पृष्ठ 58
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अध्याय के अंत के प्रश्न

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a s em कौन-सी वशेषताएँ आप अपने आस-पास दे खते ह?
आपका कस्बा या गाँव या नगर कस प्रकार के स्थलरूप पर स्थत है? इस अध्याय म बताई गई वशेषताओं म से
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प्र.1

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उत्तर आपके अपने स्थान का ववरण होना चा हए। इसे दो चरण म क जए।

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चरण 1 — स्थलरूप पहचा नए। अध्याय क अपनी कसौ टयाँ लगाइए —

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य द आप दे खते ह … तो आप ह …

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चारों ओर समतल भूिम, कही ं पहाड़ी नही ं, गहरी मुल ायम िम ी, धान या गेहू ँ के खेत, नहरे ं, धीमी चौड़ी नदी मैद ान में
m .ऊँची पर ऊपर से चपटी भूिम, सतह के पास च ान, पतली लाल या काली िम ी, कही ं िकनारे परa तीखी ढलान, पास में
as e पठार पर
agl खदाने ं या खाने ं

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पवत या पहाड़ ी क्षेत्र
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खड़ी ढलाने,ं घुम ावदार सड़कें , तेज जलधाराओं वाली घािटयाँ, सीढ़ ीदार खेत, चीड़ या दे वदार के वन, कड़ी सद

m . में
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बालू, बहुत कम वष , काँटेद ार झािड़याँ, ऊ ट मरुस्थल में

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चरण 2 — अध्याय क जन वशेषताओं क ओर आप वास्तव म उँगली उठा सकते ह, उन्ह ल खए, जैसे — तुंगता, शखर,
ढलान, घाट , वे दका कृ ष, पवतीय वन, नद , बाढ़ का मैदान, तलछट, संगम, समुद्र तल, पठार का कनारा, जल प्रपात, खनन, वषा
या हम के रूप म वषण।

नमूना उत्तर (गंगा के मैदान का कस्बा): "हमारा कस्बा ब लया गंगा के मैदान म है। भू म हर ओर समतल है और
म गहरी तथा मुलायम — ठ क वैसी ही जैसी अध्याय के अनुसार तलछट से बनती है। गंगा कस्बे के पास चौड़ी
धारा और रेतीले कनार के साथ बहती है और हर वष कुछ खेत म बाढ़ आकर ताजी गाद छोड़ जाती है। लगभग
सभी लोग खेती करते ह — धान, गे ँ और सरस — और कुछ प रवार नद म मछली पकड़ते ह। सौ कलोमीटर तक
कोई पहाड़ी नह है और मने कभी हम नह दे खी, केवल वषा और कभी-कभी ओले।"

नमूना उत्तर (छोटा नागपुर के पठार का नगर): "राँची छोटा नागपुर के पठार पर, समुद्र तल से लगभग 650 मीटर
ऊँचाई पर है। भू म ऊँची है पर ऊपर से अ धकतर समतल, लाल म म से च ान झाँकती है और खेत म बड़े
शलाखंड पड़े ह। थोड़ी दूर जाने पर पठार एक तीखे कनारे पर समाप्त हो जाता है, जहाँ से सुवण रेखा हुंडरू जल
प्रपात के रूप म गरती है। हमारे राज्य म कोयले और लौह का खनन आम है — ठ क वैसे ही जैसे अध्याय कहता है
क पठार ख नज के भंडार-गृह ह।"

प्र.2 आइए, छोटा नागपुर से प्रयागराज और अल्मोड़ा क हमारी आरं भक यात्रा पर चल। इस माग म आने वाले तीन
स्थलरूप के बारे म बताइए।

यह यात्रा क्रमश: तीन स्थलरूप से होकर गुजरती है — पहले पठार, फर मैदान, फर पवत।

2000 मी.
अल्मोड़ ा
1500 मी.

1000 मी.
छोटा नागपुर
500 मी.
पयागराज
0 मी.
पठार ~600 मी. मैदान ~100 मी. पवत ~1600 मी.

यात्रा का ऊँचाई- चत्र। भू म पठार से उतरकर मैदान म आती है और फर तेजी से हमालय क ओर चढ़ जाती है।

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स्थान स्थलरूप क्या दखाई दे गा

छोटा नागपुर, पठार ऊँची पर ऊपर से चपटी भूिम, सतह के पास च ान और पतली लाल िम ी। झािड़याँ और साल के वन, खेतों
झारखंड में िशलाखंड। इस पठार में लौह, कोयला और मैग नीज के पचुर भंडार है,ं इसिलए खाने ं और खदाने ं आम है।
ं
सुवण रे खा जैस ी निदयाँ इसके िकनारे से जल पपात के रूप में िगरती है ं — हुंडरू जल पपात ऐसा ही एक है।

प्रयागराज, मैद ान पूर ी तरह समतल भूिम, समुद तल से के वल लगभग सौ मीटर ऊँची, िजसमें निदयों ारा जमा की गई तलछट
उत्तर प्रदे श से बनी गहरी उपजाऊ िम ी है। धान, गेहू ँ और दालों के खेत िक्षितज तक फै ले है;ं गाँव और कस्बे पास-पास
है,ं क्योंिक मैद ान घनी आबादी वाला है। यही ं गंग ा और यमुना िमलती है ं — एक पिसद्ध संग म ।

अल्मोड़ा, पवत सड़क पहले तराई की पहािड़यों से चढ़ ती है और िफर गहरी घािटयों के ऊपर कटकों पर घूम ती है। ढलानों
उत्तराखंड को कृ िष के िलए सीिढ़ यों में काटा गया है, पहािड़यों पर चीड़ और दे वदार के वन है,ं और स्वच्छ िदन में उत्तर
की ओर िहमाच्छािदत ऊँचा िहमालय िदखाई दे ता है। वायु ठं डी और िवरल है तथा बिस्तयाँ छोटी और िबखरी
हुई है।
ं

प रवतन इतना तीखा क्य है: पठार पुरानी, कठोर च ान है जो घसने से बची रही। बीच का मैदान च ान है ही नह
— वह न दय ारा लाई गई ढ ली तलछट है, इसी लए समतल और उपजाऊ है। पवत नवीन च ान ह जन्ह आज
भी ऊपर धकेला जा रहा है। एक ही सड़क यात्रा म आप पृथ्वी के इ तहास के तीन बल्कुल अलग अध्याय पार कर
जाते ह।

प्र.3 भारत के कुछ प्र सद्ध तीथ स्थल क सूची बनाइए। यह भी ल खए क वे कौन-से स्थलरूप के अंतगत आते ह।

भारत के तीथ स्थल हर स्थलरूप पर फैले ह। नीचे द सूची को आप छोटा कर सकते ह या उसम अपने स्थान जोड़ सकते ह —

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स्थलरूप तीथ स्थल कहाँ

पवत के दारनाथ और बद ीनाथ गढ़ वाल िहमालय, उत्तराखंड (चार धाम यात्रा)

पवत अमरनाथ गुफ ा; वैष्णो दे वी कश्मीर िहमालय; ित्रकू ट पहािड़याँ, जम्मू

पवत हेमकुं ड सािहब; तवांग मठ उत्तराखंड; अरुणाचल पदे श

पवत सबरीमाला; ितरुपित (ितरुमला) पिश्चमी घाट, के रल; पूव घाट की शेषाचलम पहािड़याँ, आंध पदे श

पठार / िशखरजी (पारसनाथ पहाड़ ी) छोटा नागपुर का पठार, झारखंड — जैन धम का सव िधक पिवत्र स्थल
पहा ड़याँ

पठार / पालीताणा (शत्रंजु य) और िगरनार; िदलवाड़ ा गज ृ ला में माउं ट आबू, राजस्थान
ु रात की पहािड़याँ; अरावली ंख
पहा ड़याँ के मंिदर
पठार िशरडी; पंढरपुर; एलोरा और अजंता की दक्कन का पठार, महारा
गुफ ाएँ
मैदान वाराणसी (काशी); पयागराज; हिर ार गंग ा का मैद ान — हिर ार ठीक वही ं है जहाँ गंग ा पवतों को छोड़कर मैद ान
में पवेश करती है

मैदान अयोध्या; मथुरा और वृंद ावन; बोधगया और गंग ा-यमुना का मैद ान, उत्तर पदे श और िबहार
सारनाथ
मैदान अमृतसर (हरमंिदर सािहब); अजमेर शरीफ पंजाब का मैद ान; राजस्थान में अरावली के िकनारे

तट य मैदान पुरी; रामेश्वरम; सोमनाथ; वेल नक ी ओिडशा का तट; तिमलनाडु; ग ज
ु रात का तट

मरुस्थल रामदे वरा; करणी माता मंिदर, दे शनोक थार मरुस्थल, राजस्थान

ध्यान दे ने योग्य पैटन: बहुत से तीथ स्थल या तो कसी शखर पर ह या कसी नद पर — और प्राय: वह जहाँ
एक स्थलरूप दूसरे से मलता है। ह र ार वहाँ है जहाँ पवत समाप्त होकर मैदान शुरू होता है; प्रयागराज वहाँ जहाँ
दो न दयाँ मलती ह; केदारनाथ वृक्ष-रेखा से भी ऊपर। सीमाएँ और आरंभ मनुष्य को सदा प वत्र लगते रहे ह।

सुझाव: अपने राज्य के दो-तीन स्थान इस सूची म जो ड़ए और प्रत्येक के आगे उसका स्थलरूप ल खए। प्रश्न वास्तव
म यही चाहता है।

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प्र.4 सही या गलत बताइए — • हमालय गोल शखर वाली नवीन पवत ृंखला है। • पठार प्राय: एक ओर से उठे हुए
होते ह। • पवत और पहा ड़याँ एक ही प्रकार के स्थलरूप ह। • भारत म पवत, पठार और न दय म एक ही प्रकार
के वनस्प त और प्राणी जगत पाए जाते है। • गंगा, यमुना क सहायक नद है। • मरुस्थल का वनस्प त जगत और
प्राणी जगत वलक्षण होता है। • हम के पघलने से न दय म जल आता है। • मैदान म न दय ारा एकत्र कए
गए तलछट भू म को उपजाऊ बनाते ह। • सभी मरुस्थल गम होते ह।

क्र. कथन उत्तर क्य

1 हमालय गोल शखर वाली नवीन गलत नवीन — हाँ; गोल िशखर — नही ं। िहमालय जैसे नवीन पवतों की चोिटयाँ ऊँची
पवत ृंखला है। और नुक ीली होती है।ं गोल शीष अरावली जैस ी बहुत पुर ानी, अपरिदत ंख
ृ लाओं
के होते है।
ं

2 पठार प्राय: एक ओर से उठे हुए होते सही पठार आस-पास की भूिम से उठा होता है और उसकी सतह पाय: चपटी होती है,
ह। तथा "इसके कु छ पाश्व सीधी ढलान वाले होते है"ं ।

3 पवत और पहा ड़याँ एक ही प्रकार के सही दोनों ऊँचे स्थान है ं और एक ही व्यापक ेणी में आते है।
ं पहाड़ी बस कम ऊँची
स्थलरूप ह। होती है, उसकी चढ़ ाई कम खड़ी और शीष गोल होता है; दोनों के बीच कोई
िनिश्चत ऊँचाई-रे खा नही ं है।

4 भारत म पवत, पठार और न दय म गलत हर स्थलरूप की जलवायु अलग है, इसिलए जीवन भी अलग — पवतों में दे वदार,
एक ही प्रकार के वनस्प त और प्राणी मॉस और लाइके न के साथ याक और िहम तेदं ुआ ; पठारों पर शुष्क झािड़याँ;
जगत पाए जाते ह। मैद ानों में फसले ं, घास और नदी की मछिलयाँ।

5 गंगा, यमुना क सहायक नद है। गलत बात उलटी है। यमुना गंग ा की सहायक नदी है, जो पयागराज में गंग ा से िमलती
है। सहायक नदी वह है जो िकसी बड़ी नदी में जाकर िमलती है।

6 मरुस्थल का वनस्प त जगत और प्राणी सही अध्याय स्वयं कहता है — मरुस्थल बहुत कम वषण वाले शुष्क िवस्तार है ं और
जगत वलक्षण होता है। "उनके वनस्पित जगत और पािण जगत िवलक्षण ही होते है"ं ।

7 हम के पघलने से न दय म जल सही कम तुंग ता पर िहम हर ग ीष्म में िपघलती है और "जल में बदलने के बाद निदयों में
आता है। पहच
ु ँ ती है"। इसीिलए िहमालयी निदयाँ मानसून से पहले भी बहती रहती है।
ं

8 मैदान म न दय ारा एकत्र कए गए सही निदयाँ पवतों में रे त, च ानों के कण और गाद एकत्र करती है,ं उन्हे ं मैद ान तक
तलछट भू म को उपजाऊ बनाते ह। बहाकर लाती है ं और जमा कर दे ती है,ं िजससे "िम ी उपजाऊ" बन जाती है।

9 सभी मरुस्थल गम होते ह। गलत कु छ गम है ं — सहारा, थार। कु छ ठं डे है ं — एिशया का गोबी; कु छ िवशेषज्ञ
ं मरुस्थल की पहचान शुष्क ता है, गम
अंटाक िटका को भी मरुस्थल मानते है।
नही ं।

सही: 2, 3, 6, 7, 8

गलत: 1, 4, 5, 9

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कथन 1 और 9 का जाल: दोन आधे सही ह, और आधा सही वाक्य गलत ही होता है। हमालय के लए 'नवीन'
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सही है, पर 'गोल शखर' नह । 'कुछ मरुस्थल गम ह' सही है, पर 'सभी' नह । नणय से पहले हरem
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शब्द प ढ़ए।
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agl शब्द के जोड़े बनाइए — एवरेस्ट ग र ंग, रा टं ग, ऊँट, पठार, गंगा का मैदान, जलमाग, क लमंजारो ग र ंग,
प्र.5

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यमुना — के साथ — अ का, वश्व क छत, धान के खेत, मरुस्थल, नद , गंगा, सहायक नद , पवतारोहण।

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स्तंभ अ जोड़ा क्य

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पवतारोहण
a s em अरूिणमा िसन्हा ने
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एवरेस्ट ग र ंग

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िवश्व का सबसे ऊँचा पवत िशखर, 8848 मीटर। बछे ंद ी पाल ने 1984 में और

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2013 में इस पर चढ़ ाई की।

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रा टं ग नदी रािफ्टंग तेज बहती निदयों में िकया जाने वाला साहिसक खेल है, जैसे ऋिषके श में गंग ा में।

मरुस्थल
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ऊँट
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ऊँट वह पशु है जो गम, शुष्क मरुस्थलीय जीवन के िलए सबसे अिधक अनुकू िलत है — जैसे थार में।

comऊँचाई 4500 मीटर है, इसीिलए उसे 'िवश्व की छत' कहा जाता है।
ितब्बत के पठार की.औसत agl
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िवश्व की
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पठार

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छत
गंगा का मैदान धान के खेत उपजाऊ गंग ा के मैद ान में चावल, गेहू,ँ मक्का, जौ और मोटे अनाज उगाए जाते है।
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गंगा
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जलमाग मैद ान में हल्की ढलान होने से नौका-संचालन सुग म है; आज भी गंग ा में नौकाओं से लोग और सामान

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आते-जाते है ं (िचत्र 3.10)।

eकmलमंजारो a
a s अफ ीका
gl ग र ंग
ृ क पवत है, जो िकसी ंख
पूव अफ ीका का िकिलमंजारो एक पथ ृ ला से संबंिधत नही ं है।

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सहायक se m
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यमुना यमुना गंग ा की सहायक नदी है — वह िहमालय से िनकलकर पयागराज में गंग ा से िमलती है।
नदी
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एवरेस्ट िगिरशृंग → पवतारोहण
ag• lरािफ्टं ग → नद ी • ऊँ ट → मरुस्थ ल • पठार → िवश्व की छत

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गंगा का मैद ान → धान के खेत • जलमाग → गंगा • िकिलमंजारो िगिरशृंग → अफीका • यमुन ा →
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सहायक नद ी

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जोड़े बनाने का सुर क्षत तरीका: पहले वे जोड़े बनाइए जनके बारे म आप न श्चत ह — क लमंजारो–अ का

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और ऊँट–मरुस्थल — और उन्ह दोन स्तंभ से काट द जए। तब संदेह वाले वकल्प अपने आप कम हो जाते ह।

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यहाँ असली जाल केवल नद और गंगा है — 'रा टं ग' के लए कोई भी तेज नद चा हए, जब क 'जलमाग' के लए
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वही नद चा हए जसका नाम अध्याय नौका-प रवहन के लए लेता है।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय — एक नज़र म
स्थलरूप पृथ्वी क सतह का एक भौ तक स्वरूप है। स्थलरूप लाख वष म आकार लेते ह और इन्ह व्यापक रूप से तीन
े णय म बाँटा जाता है — पवत, पठार और मैदान ( चत्र 3.1)। हर स्थलरूप क अपनी जलवायु, अपने पेड़-पौधे, जीव-
जंतु और अपनी जीवन-शैली होती है।
पवत आस-पास क भू म से बहुत ऊँचे होते ह — चौड़ा आधार, खड़ी ढलान और सँकरा शखर। हमालय जैसे नवीन
पवत क चो टयाँ ऊँची और नुक ली ह तथा इनक ऊँचाई आज भी बढ़ रही है; अरावली जैसे प्राचीन पवत अपरदन से गोल
हो चुके ह। कम ऊँचाई वाले, गोल शीष वाले ऊँचे स्थान पहाड़ी कहलाते ह।
पठार आस-पास क भू म से उठा होता है और इसक सतह प्राय: चपट होती है, कुछ पाश्व सीधी ढलान वाले होते ह। पठार
को 'ख नज का भंडार-गृह' कहा जाता है — छोटा नागपुर के पठार म लौह, कोयला और मैगनीज ह — तथा यहाँ जोग,
हुंडरू और नहकालीकाई (340 मीटर) जैसे भव्य जल प्रपात मलते ह।
मैदान का धरातल वस्तृत, सपाट या हल्का तरं गत होता है और इनक ऊँचाई सामान्यत: समुद्र तल से 300 मीटर से अ धक
नह होती। न दयाँ तलछट जमा करके मैदान बनाती ह, जससे म अत्यंत उपजाऊ हो जाती है। इसी लए आरं भक सभ्यताएँ
मैदान म वक सत हुईं और गंगा के मैदान म लगभग 40 करोड़ लोग रहते ह।
प्रत्येक स्थलरूप चुनौ तयाँ और अवसर साथ-साथ दे ता है। पवत शुद्ध वायु, पयटन और तीथयात्रा दे ते ह, कतु भूस्खलन,
हमस्खलन, आक स्मक बाढ़ और ठं ड भी; पठार ख नज दे ते ह, कतु म प्राय: च ानी और कम उपजाऊ होती है; मैदान
समृद्ध फसल और सुगम आवागमन दे ते ह, कतु यहाँ जनसंख्या, प्रदूषण और भू मगत जलस्तर क गरावट क चुनौती है।
स्थलरूप संस्कृ त से गहराई से जुड़े ह — अथववेद का भू म सूक्त, का लदास का कुमारसंभव, एवरेस्ट को 'चोमोलुंगमा' के
रूप म तथा कैलाश पवत को प वत्र मानना, और त मल संगम काव्य क पाँच टनै। वशेषज्ञ और स्थलरूप भी बताते ह, जैसे
मरुस्थल — थार और सहारा जैसे गम, या गोबी जैसे ठं डे।

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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म उदाहरण
कहाँ

स्थलरूप पथ्ृ वी की सतह का एक भौितक स्वरूप पृष्ठ 42, चत्र 3.1 पवत, पठार और मैदान

तुंगता (एल्ट ूड) समुद तल से िकसी वस्तु की ऊँचाई हा शया, पृष्ठ 42 एवरेस्ट ग र ंग क तुंगता 8848
मीटर

पवत आस-पास की भूिम से बहुत ऊँचा स्थलरूप — चौड़ा आधार, पृष्ठ 42 कंचनजुंगा, नेपाल और स क्कम
खड़ी ढलान, सँक रा िशखर के बीच

पहाड़ी पवत से कम ऊँचा स्थान, िजसकी चढ़ ाई कम खड़ी और शीष पृष्ठ 43 अरावली ृंखला क गोल पहा ड़याँ
गोल हो

पवत ृंखला आपस में जुड़े पवतों की एक कतार या समूह पृष्ठ 45 हमालय, आल्प्स, एंडीज

वषण वायुम ंडल से भूिम पर िकसी भी रूप में जल का िगरना हा शया, पृष्ठ 43 वषा, हमपात और ओले

पवतीय वन पवतीय क्षेत्र में उगने वाले वनों का एक पकार पृष्ठ 46 चीड़ (पाइन), फर, ूस, दे वदार

वे दका (सीढ़ दार) ढलान को काटकर सीढ़ ीनुम ा स्थान पर की जाने वाली कृ िष पृष्ठ 48–49, चत्र उत्तराखंड और पूव त्तर भारत के
कृ ष 3.5 सीढ़ दार खेत

पठार आस-पास की भूिम से उठा हुआ स्थलरूप, िजसकी सतह पाय: पृष्ठ 51 दक्कन का पठार; तब्बत का पठार
चपटी होती है

मैदान िवस्ततृ सपाट या हल्का तरंिगत धरातल, ऊँचाई सामान्यत: 300 पृष्ठ 53 गंगा का मैदान
मीटर से कम

तलछट नदी ारा बहाकर लाए और जमा िकए गए रे त, च ानों के कण पृष्ठ 53 गंगा के मैदान को उपजाऊ बनाने
और गाद वाली गाद

संगम स्थल दो या दो से अिधक निदयों के िमलने का स्थान हा शया, पृष्ठ 55 प्रयागराज म गंगा और यमुना का
संगम

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages32
Languagehindi
Updated19 Sep 2026