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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 4: इ तहास क समय-रेखा एवं
उसके ोोत
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
59 – 74 15 29 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 39 pages
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सामा जक वज्ञान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: इ तहास क समय-रेखा एवं उसके
ोत
कक्षा 6 सामा जक वज्ञान के अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत (पाठ्यपुस्तक समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) के
सभी प्रश्न के वस्तृत एन.सी.ई.आर.ट . समाधान। अध्याय का प्रत्येक प्रश्न हल कया गया है — महत्वपूण प्रश्न, तीन आइए वचार कर बॉक्स (पृष्ठ
60, 67 एवं 72), छह आइए पता लगाएँ बॉक्स (पृष्ठ 63, 65, 65, 68–69, 70 एवं 71), पृष्ठ 62, 65 एवं 66 के पाठ्य प्रश्न, आगे बढ़ने से
पहले... तथा प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ के पाँच प्रश्न — सा.सं.पू. एवं सा.सं. क प्रत्येक गणना चरण-दर-चरण दखाई गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6) 59 – 74
खं ड प्रश्न
15 29
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 59
अध्याय का आरंभ
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 हम ऐ तहा सक काल क गणना कस प्रकार करते ह?
ऐ तहा सक काल क गणना हम त थपत्र (कैलडर), युग एवं समय-रेखा क सहायता से करते ह। प्रत्येक समाज एवं संस्कृ त के
पास समय गनने क अपनी प्रणा लयाँ रही ह; आज वश्व मुख्यत: एक साझा प्रणाली का उपयोग करता है ता क सभी लोग एक ही
घटना को एक ही बदु पर रख सक।
चरण 1 — एक आरंभ- बदु (युग) चु नए। युग समय का एक न त कालखंड है। कसी व्य क्त वशेष का जन्म अथवा कसी
शासक के शासन का आरंभ प्राय: एक नए युग का आरंभ माना जाता रहा है। आज वश्व-भर म प्रयुक्त ग्रेगो रयन कैलडर ईसा
मसीह के जन्म वष को आरंभ मानता है। इसके साथ-साथ हदू, मु स्लम, यहूद , चीनी आ द त थपत्र भी त्योहार एवं मांग लक काय
क त थय के लए प्रयोग होते ह।
चरण 2 — उससे आगे और पीछे ग नए।
आरंभ -िबंद ु के बाद के वष → पहले ए.डी. → अब सा.सं. (सामान्य संवत, अंगेज़ी में CE)
आरंभ -िबंद ु से पूव के वष → पहले बी.सी. → अब सा.सं.पू. (सामान्य संवत पूव, अंगेज़ी में BCE)
भारत की स्वतं त्रता = 1947 ई. = ई. सन् 1947 = 1947 सा.सं.
बुद्ध का जन्म ≈ 560 सा.सं.पू.
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चरण 3 — याद र खए क 'शून्य वष' नह होता। 1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद 1 सा.सं. आता है। अत: कसी सा.सं.पू. एवं सा.सं.
त थ के बीच के वष = सा.सं.पू. + सा.सं. – 1।
चरण 4 — सही माप चु नए।
इकाई अव ध गणना का नयम अध्याय से उदाहरण
वष 1 वष त थपत्र क मूल इकाई 1947 सा.सं.
दशक 10 वष दस वष का कोई भी कालखंड 1990 का दशक
शताब्द 100 वष सा.सं. क गणना 1 सा.सं. से; सा.सं.पू. क गणना 1 21वी ं शताब्दी सा.सं. = 2001–2100
सा.सं.पू. से पीछे क ओर तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. = 300–201
सा.सं.पू.
सहस्त्राब्द 1,000 वही नयम, हज़ार म तीसरी सहस्त्राब्दी सा.सं. = 2001–3000
वष पहली सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. = 1000
सा.सं.पू.–1 सा.सं.पू.
चरण 5 — समय-रेखा बनाइए। समय-रेखा कसी अव ध क त थय एवं घटनाओं का अनुक्रम दखाती है, इस लए त थयाँ पढ़े
बना ही घटनाओं का क्रम दख जाता है। नीचे अध्याय का अपना चत्र 4.3 (पृष्ठ 62–63) मापानुसार पुन: बनाया गया है —
लगभग 250 सा.सं.पू.
अशोक
लगभग 8000 सा.सं.पू. लगभग 4500 सा.सं.पू.
12,000 सा.सं.पू. पथम स्थायी िनवास व तांबे के पथम 560 सा.सं.पू.
अंितम िहम युग का अंत कृिष का आरंभ धातुकम का आरंभ बुद्ध का जन्म
10,000 सा.सं.पू. 8000 सा.सं.पू. 6000 सा.सं.पू. 4000 सा.सं.पू. 2000 सा.सं.पू. 1 सा.सं. 2000 सा.सं.
लगभग 6000 सा.सं.पू. लगभग 2500 सा.सं.पू. 2000 सा.सं.
भारतीय उपमहा ीप में िम ी के िसंध ु-सरस्वती हम इस काल खंड में है ं
बतन बनाने की तकनीक सभ्यता
लगभग 4700 सा.सं.पू. 1 सा.सं.
मेसोपोटािमया में ईसा का जन्म
संसार का पथम नगर
अध्याय क समय-रेखा ( चत्र 4.3, पृष्ठ 62–63) सही माप म — 780 पक्सल = 14,000 वष। लाल रेखा के बाईं ओर सा.सं.पू. त थयाँ ह
और दाईं ओर सा.सं.; लाल रेखा वही जोड़ है जहाँ 1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद 1 सा.सं. आता है — बीच म कोई शून्य वष नह ।
ध्यान द: पुस्तक के चत्र 4.3 म एक बदुकृत भाग है, जो छोड़े गए कालखंड को दशाता है। य द पूरे 3,00,000 वष
उसी माप म बनाए जाते, तो समय-रेखा लगभग 3 मीटर लंबी हो जाती!
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प्र.2 इ तहास को समझने के लए व भन्न ोत हमारी कस प्रकार सहायता कर सकते ह?
प्रत्येक वस्तु अथवा संरचना एक कहानी बताती है और चत्र-खंड पहेली ( जग्सॉ) के एक हस्से क तरह होती है। अकेला एक टु कड़ा
बहुत कम बताता है; अनेक टु कड़े मलकर अतीत का चत्र बनाते ह। इ तहास का ोत वह स्थान, व्य क्त, लेख अथवा वस्तु है
जससे हम अतीत क कसी घटना अथवा कालखंड क जानकारी एकत्र करते ह।
पृष्ठ 67 का चत्र इन्ह चार वग म बाँटता है —
ोत का इसम क्या-क्या (पृष्ठ 67) यह क्या बताता है भारतीय उदाहरण
वग
पुराता त्वक शलालेख — पांडु ल प, त थयाँ, शासक के नाम एवं अशोक के शलालेख एवं स्तंभलेख (तीसरी
ोत ताम्रपत्र, सक्के उपा धयाँ, राजाज्ञाएँ, व्यापार, शताब्द सा.सं.पू.); समुद्रगुप्त का प्रयागराज
संरचना — स्मारक, ट ला तकनीक, भोजन, शल्प, स्तंभलेख; रुद्रदामन का जूनागढ़ शलालेख;
उत्खनन — मानव, पशु तथा नगर- नयोजन, शवाधान क गुप्तकालीन स्वण सक्के; साँची स्तूप; हड़प्पा,
पौध के अवशेष; उपकरण एवं प्रथाएँ राखीगढ़ एवं धौलावीरा के ट ले
ह थयार; मू तयाँ एवं आभूषण;
मृदभांड एवं खलौने; नवास
स्थान एवं शवाधान
सा ह त्यक भारतीय सा हत्य — वेद एवं वचार, वश्वास, व ध, चार वेद; रामायण एवं महाभारत; त मल संगम
ोत इ तहास, क वता एवं नाटक, वज्ञान, दै नक जीवन, और सा हत्य; का लदास के नाटक; कल्हण क
ऐ तहा सक लेख, कहा नय का यह क बाहर के लोग ने राजतरं गणी; आयभट य एवं चरक सं हता;
संग्रह, वैज्ञा नक एवं तकनीक भारत को कैसे दे खा पंचतंत्र एवं जातक कथाएँ; मेगस्थनीज़, फ़ा ान,
लेख े नसांग, अल- बरूनी एवं इब्न बतूता के ववरण
वदे शी ववरण — यात्रा वृत्तांत,
ऐ तहा सक वृत्तांत
मौ खक लोक सा हत्य; वंशावली प रवार एवं समुदाय क गाँव क कवदं तयाँ एवं लोकगाथाएँ; तीथस्थान
ोत स्मृ त, स्थानीय कवदं तयाँ, पर पंड ारा रखी गई वंशाव लयाँ
लोकगीत एवं कहावत जो
कभी लखी नह गईं
कलात्मक चत्रकला, मू तकला, प का वस्त्र, आभूषण, वाद्ययंत्र, भीमबेटका के शैल- चत्र; अजंता क चत्रकारी;
ोत (पैनल) नौकाएँ, ह थयार, दे वता एवं साँची क प काएँ; चोल कांस्य मू तयाँ
लोग क प्रय कथाएँ
अध्याय दो और प्रकार के ोत जोड़ता है —
वैज्ञा नक अध्ययन — पछले लगभग 50 वष म प्राचीन जलवायु का अध्ययन, उत्खनन क गई सामग्री का रासाय नक
अध्ययन तथा प्राचीन मानव क आनुवां शक ने ऐसे नए दृ ष्टकोण दए ह जो सामान्य ोत के पूरक ह।
आधु नक इ तहास ( पछली दो-तीन शता ब्दयाँ) के लए समाचार-पत्र, और पछले कुछ दशक के लए इलेक् ॉ नक
मी डया — ट .वी., इंटरनेट आ द।
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इ तहासकार अनेक
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ोत पर ज़ोर क्य दे ते ह: कभी-कभी ोत एक-दूसरे क पु ष्ट करते ह — पहेली के टु कड़े
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मेल खाते ह। कभी वे एक-दूसरे के वपरीत सूचनाएँ दे ते ह — टु कड़े मेल नह खाते — और तब इeतहासकार
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करना पड़ता .हैcoक कस ोत पर अ धक वश्वास कया जाए। इसी सावधानी से कसी कालखं
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gl ड के इ तहास का
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emहोता है। और यह ईमानदार काम है: इ तहास म पहेली के कुछ हस्से सदा के लए गायब रह सकते ह।
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पुन नमाण
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क्या आप जानते ह? इन ोत को बोलने योग्य बनाने वाले केवल इ तहासकार नह ह। पुरातत्व वज्ञानी उत्खनन
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करते ह, पुरालेखशास्त्री प्राचीन अ भलेख पढ़ते ह, मानव वज्ञानी समाज एवं संस्कृ तय का अध्ययन करते ह,
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तथा सा हत्य व भाषा के वशेषज्ञ पुराने ग्रंथ पढ़ते ह — सभी उसी पहेली म योगदान दे ते ह।
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आ दमानव कस प्रकार रहते थे?
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प्र.3
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a मानव (होमो से पयंस) लगभग 3,00,000 (तीन लाख) वष से पृथ्वी पर ह। इसम से लगभग पूरा समय वे आखेटक एवं खाद्य
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संग्राहक रहे; कृ ष केवल पछले दस हज़ार वष म आरंभ हुई। अध्याय यह कहानी दो चरण म बताता है।
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चरण 1 — कृ ष से पहले
वे टो लय अथवा समूह म रहते थे, ताgक a s
l प्रकृ त क अनेक चुनौ तय म एक-दूसरे क सहायता कर सक।
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वे आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे — वे आखेट करते और खाने योग्य पौधे व फल एकत्र करते थे, तथा भोजन एवं आश्रय क
नरंतर खोज म रहते थे।
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वे अ ायी श वर , शैलाश्रय अथवा गुफाओं म रहते थे।
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वे जन भाषाओं म संवाद करते थे वे अब लुप्त हो चुक ह, और उन्ह ने अ ग्न का उपयोग कया।
a s em वे उपकरण बनाते गए — पत्थर क उन्नत कुल्हा ड़याँ एवं ब्लेड्स, नुक ले तीर आ द।
ag l वे चत्र बनाते थे। संपूण वश्व क सैकड़ गुफाओं म शैल- चत्र मलते ह — कुछ साधारण आकृ तय एवं प्रतीक के, कुछ
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अ धक वस्तृत दृश्य जनम पशु एवं मानव ह।
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वे आभूषण बनाते थे — पत्थर एवं मनक क माला, पशुओं के दाँत के पडट — और कभी-कभी दूसरे समूह से इनका
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asलेकर, और संभवत: मरणोपरांत जीवन को लेकर भी।
आदान-प्रदान करते थे।
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उनके वश्वास थे — प्राकृ तक तत्व को
चरण 2 — अं तम हम युग के बाद
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अंितम िहम युग: लगभग 1,00,000 (एक लाख) वष पूव → से लगभग 12,000 वषem
m a s पूव तक
. co जलवायु गरम हुई, िहम िपघला, निदयाँ भरी ं और समुदों में समािहत aहुईgं l
as em िफर
agl जीने योग्य पिरिस्थितयों में सुधार → लोग एक स्थान पर बसने लगे
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वश्व के कई हस्स म लोग ने अनाज उगाना तथा गाय, बकरी आ द जानवर का घरेलूकरण आरंभ कया।
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भोजन क अ धक उपलब्धता से समूहeआकार
s m व संख्या म बढ़े और प्राय: न दय के कनारे बसे — केवल जल के लए नह ,
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ब ल्क इस लए भी क वहाँ क gमृlदा अ धक उपजाऊ होती है, जससे अन्न उगाना सरल हो जाता है।
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समाज ज टल होता गया। सरदार अथवा मु खया लोग के कल्याण के लए उत्तरदायी थे और सभी सामू हक रूप से
सामुदा यक कल्याण के लए काय करते थे। नजी स्वा मत्व का भाव नह था: भू म पर सामुदा यक रूप से कृ ष होती थी।
पल्ली बड़े गाँव म बदल गईं जो भोजन, वस्त्र एवं उपकरण का आदान-प्रदान करती थ ; उनम संप्रेषण एवं आवागमन का तंत्र
वक सत हुआ और कुछ गाँव छोटे कस्ब म बदल गए।
नई तकनीक आईं — मृदभांड, तथा धातु का उपयोग (पहले तांबा, फर लोहा) जससे टकाऊ उपकरण, दै नक उपयोग क
वस्तुएँ एवं आभूषण बनाना सरल हुआ।
यह आरं भक प्रग त कभी सुर क्षत नह थी: अध्याय एक चेतावनी के साथ यह कहानी समाप्त करता है। मानव
सभ्यता को अनेक चुनौ तय का सामना करना पड़ा और कुछ क ठन क्षण म वह कुछ पूववत प्रजा तय क भाँ त
लुप्त भी हो सकती थी। हम उन आ दमानव को कभी नह जान पाएँगे जनके साहस और दृढ़ता के कारण आज
हमारा अ स्तत्व संभव है।
आइए वचार कर — पृष्ठ 60
हम अतीत का अध्ययन कस प्रकार करते ह?
आइए वचार कर
प्र.1 आपक अपने अतीत क सबसे पुरानी स्मृ त कौन-सी है? क्या आपको याद है क उस समय आपक आयु क्या
थी? संभवत: पाँच या छह वष पूव तक क यह सभी स्मृ तयाँ आपके अतीत का हस्सा ह।
यह व्य क्तगत प्रश्न है, अत: उत्तर आपका अपना होगा। महत्वपूण यह है क आप उस स्मृ त तक कैसे पहुँचते ह — इ तहासकार भी
बहुत पुराने अतीत के साथ ठ क यही करता है।
अपनी सबसे पुरानी स्मृ त ईमानदारी से खोजने का तरीका —
पूरी कहानी नह , कोई एक स्पष्ट चत्र सो चए — कोई गंध, कोई कमरा, कोई चेहरा, कोई गरना, कोई त्योहार।
उसक त थ कसी बाहरी सूत्र से तय क जए: तब आप कस घर म रहते थे, कौन-से वद्यालय म थे, स्मृ त म और कौन है, कोई
छोटा भाई-बहन तब जन्मा था या नह ।
कसी ोत से मलान क जए — माता- पता से पू छए या कोई छाया चत्र दे खए। कभी-कभी पता चलता है क जसे आप
'याद' मानते ह वह वास्तव म सुनी हुई कहानी या बार-बार दे खा गया चत्र है।
नमूना उत्तर: “मेरी सबसे पुरानी स्मृ त है क म अपने चचेरे भाई के नामकरण म कुस पर चढ़कर ल डु ओं क थाली
तक पहुँच रहा था। मुझे पीला परदा और दाद क हँसी याद है। मुझे लगता था म बहुत छोटा था; माँ से पूछा तो पता
चला म साढ़े तीन वष का था — वह कायक्रम 2016 म हुआ था। इस प्रकार मेरा अपना स्मरणीय अतीत लगभग
छह वष पीछे तक जाता है।”
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पुस्तक यह से क्य आरंभ करती है: आपक सबसे पुरानी स्मृ त आपका व्य क्तगत 'इ तहास का ोत' है, और
वह ठ क ऐ तहा सक ोत क तरह व्यवहार करती है। वह अधूरी है (परदा याद है, त थ नह ), वह गलत भी हो
सकती है, और वह तभी वश्वसनीय बनती है जब आप उसे कसी अन्य साक्ष्य — छाया चत्र, बड़ के कथन — से
मलाकर दे ख। यही इ तहास क पूरी पद्ध त है, जसे पाँच हज़ार नह , पाँच वष के अतीत पर आज़माया जा रहा है।
प्र.2 आपको क्या लगता है, अतीत को समझने से हम वतमान वश्व को समझने म कैसे सहायता मलेगी?
क्य क वतमान क कोई भी चीज़ वतमान म आरंभ नह होती। अध्याय के आरंभ म ई.एच. कार क पं क्त है क इ तहास “अतीत
एवं वतमान के मध्य एक अनवरत संवाद है… हम अतीत के आलोक म ही वतमान समाज को पूणत: समझ सकते ह।”
अतीत वतमान को चार ठोस तरीक से समझाता है —
वह बताता है क चीज़ आईं कहाँ से। आपक थाली का गेहूँ और चावल, रसोई का बतन, औज़ार का तांबा और लोहा — इन
सबक कहानी इसी अध्याय से आरंभ होती है, जब लोग ने पहली बार कृ ष, मृदभांड और धातुकम आरंभ कया।
वह बताता है क नगर वह क्य ह जहाँ ह। आरं भक समुदाय जल एवं उपजाऊ मृदा के लए न दय के कनारे बसे। यही
कारण है क भारत के अनेक प्राचीनतम और बड़े नगर आज भी न दय के तट पर ह।
वह हमारी परंपराओं और भाषाओं को समझाता है। त्योहार, त थपत्र, खान-पान, नगर के नाम और हमारे शब्द — सब पर
पछली शता ब्दय के चह्न ह।
वह भ वष्य को तौलने म सहायक है। अध्याय कहता है क आरं भक मानवता “लुप्त भी हो सकती थी”। समाज ने सूखे, बाढ़
और जलवायु प रवतन का सामना कैसे कया, यह जानना आज के जलवायु संकट के लए उपयोगी है।
यह केवल वद्याथ नह , नाग रक के लए भी क्य आवश्यक है: लोग वतमान के ववाद म अतीत के दाव का
सहारा लेते ह — कौन कहाँ रहता था, कसने क्या बनवाया, कसके साथ अन्याय हुआ। जस व्य क्त ने यह पूछना
सीख लया है क “इसका ोत क्या है और क्या उसक जाँच हो सकती है?”, उसे भ्र मत करना बहुत क ठन है।
इ तहास केवल त थय क सूची नह , सावधान चतन का प्र शक्षण है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 62
इ तहास म समय क गणना कस प्रकार क जाती है?
प्र.1 उदाहरण के लए 560 सा.सं.पू. गौतम बुद्ध ( जनके बारे म हम अध्याय 7 म जानगे) के जन्म क अनुमा नत त थ
है। क्या आप गणना कर सकते ह क उनका जन्म आज से कतने वष पूव हुआ था?
हाँ — परंतु तभी, जब आपको वह समस्या याद रहे जसे अगला बॉक्स (पृष्ठ 63) समझाता है: कोई 'शून्य वष' नह होता। इस लए
दोन संख्याएँ जोड़कर योग म से 1 घटाना पड़ता है।
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िकतने वष पूव = (सा.सं.पू. वष) + (वतमान सा.सं. वष) – 1
पुस्तक के वष 2024 सा.सं. के अनुसार:
= 560 + 2024 – 1
= 2584 – 1
= 2,583 वष पूव
रेखा पर चलकर उत्तर क जाँच क जए —
560 सा.सं.पू. से 1 सा.सं.पू. तक = 560 – 1 = 559 वष
1 सा.सं.पू. से 1 सा.सं. तक = 1 वष (बीच में कोई शून्य वष नही ं)
1 सा.सं. से 2024 सा.सं. तक = 2024 – 1 = 2023 वष
कु ल = 559 + 1 + 2023 = 2,583 ✓
यह भी क जए: वही गणना कसी और 'आज' के लए। 2026 सा.सं. म बुद्ध का जन्म 560 + 2026 – 1 =
2,585 वष पूव हुआ था। उत्तर प्रत्येक वष ठ क एक बढ़ता है — यह जाँचने का अ ा तरीका है क कह चूक तो
नह हुई।
1 क्य घटाते ह? य द आप केवल 560 + 2024 कर तो जोड़ के बीच का बदलाव-वष दो बार गना जाता है —
एक बार '1 सा.सं.पू.' के रूप म और एक बार '1 सा.सं.' के रूप म। 1 घटाने से यह दोहरी गनती हट जाती है। इसे
भूल जाना ही सा.सं.पू.–सा.सं. ग णत क सबसे आम भूल है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 63
इ तहास म समय क गणना — 'शून्य वष' नह होता
आइए पता लगाएँ
प्र.1 इस प्रकार क गणना सरल होती है परंतु इसम एक समस्या रहती है। ग्रेगो रयन त थपत्र म कोई भी वष 'शून्य' के
रूप म च ह्नत नह कया गया है। वष 1 सा.सं., 1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद आता है। 2 सा.सं.पू. से लेकर 2 सा.सं.
तक एक समय-रेखा बनाइए। आप दे खगे क 'शून्य वष' क अनुप त के कारण इन दो त थय के मध्य केवल
3 वष ही ह गे।
यह रही वह समय-रेखा, जस पर प्रत्येक वष अं कत है। इसम चार वष-नाम ह परंतु उनके बीच केवल तीन अंतराल — और
प्रत्येक अंतराल एक वष का है।
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1 वष 1 वष 1 वष
2 सा.सं.पू. 1 सा.सं.पू. 1 सा.सं. 2 सा.सं.
यहाँ शून्य वष नही ं है
1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद 1 सा.सं. आता है
2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. तक का प्रत्येक वष। चार वष के नाम ह, परंतु बीतते ह केवल तीन वष — क्य क त थपत्र 1 सा.सं.पू. से सीधे 1
सा.सं. पर छलाँग लगाता है।
नािमत वष: 2 सा.सं.पू., 1 सा.सं.पू., 1 सा.सं., 2 सा.सं. → 4 नाम
नामों के बीच अंत राल: 3
2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. तक बीते वष = 3 वष
शून्य वष क्य नह है: यह प्रणाली छठ शताब्द सा.सं. म यूरोप म बनी, उस समय से बहुत पहले जब वहाँ गनती म
शून्य का सामान्य उपयोग होने लगा। गनती 'एक' से आरंभ क गई — आगे भी और पीछे भी। वडंबना यह है क
संख्या के रूप म शून्य भारत म पहले ही वक सत हो चुका था — परंतु वह अभी उन लोग तक नह पहुँचा था
जन्ह ने यह त थपत्र बनाया।
प्र.2 कसी भी सा.सं.पू. तथा सा.सं. क त थय के बीच के वष क गणना करते समय हम सदै व दोन को जोड़कर
उनके योग म से 1 को घटा दे ना चा हए। ऊपर द गई त म 2+2–1=3
यही पूरे अध्याय का नयम है। इसे एक बार लख ली जए और हर बार उपयोग क जए —
सा.सं.पू. ितिथ और सा.सं. ितिथ के बीच का अंत र = सा.सं.पू. + सा.सं. – 1
ऊपर के उदाहरण पर जाँच : 2 + 2 – 1 = 3 ✓
परंतु सावधान — यह नयम तभी लागू होता है जब दोन त थयाँ रेखा के अलग-अलग ओर ह । तीन स्थ तयाँ दे खए —
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दोन त थयाँ … नयम हल कया गया उदाहरण
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एक सा.सं.पू., एक सा.सं. जोिड़ए , िफर 1 घटाइए
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560 सा.सं.पू. → 2024 सा.सं. = 560 + 2024 – 1 = 2,583 वष
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दोन सा.सं.
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घटाइए 1828 सा.सं. → 1947 सा.सं. = 1947 – 1828 = 119 वष
दोन सा.सं.पू. घटाइए (बड़ी संख्या पहले की ितिथ है) 560 सा.सं.पू. → 320 सा.सं.पू. = 560 – 320 = 240 वष
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स्वयं जाँ चए: 1 सा.सं.पू. से 1 सा.सं. तक नयम दे ता है 1 + 1 – 1 = 1 वष, जो सही है — उनके बीच एक वष
जोgगलत होता।
बीतता है। '– 1' के बना उत्तर 2 आता, a
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पुन.:cलौट, मान ली जए हम आज 2024 सा.सं. म ह, तो महात्मा बुद्ध का जन्मa560+2024–1=2583 वष पूव
प्र.3 अपने सहपा ठय के साथ कुछ ऐसे उदाहरण का अभ्यास क जए। उदाहरणाथ, य द हम महात्मा बुद्ध के प्रश्न पर
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हुआ था।
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कक्षा म अभ्यास के लए यह प्रश्न-समूह ली जए, प्रत्येक पूर.ीcगणना के साथ। दाईं ओर का स्तंभ ढककर स्वयं हल क जए, फर agl
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मलान क जए।
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प्रश्न गणना उत्तर
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560 सा.सं.पू. (बुद्ध का जन्म) से 2024 सा.सं. तक कतने वष?
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560 + 2024 – 1 2,583
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वष
l a se560 सा.सं.पू. से 2026 सा.सं. तक कतने वष?
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560 + 2026 – 1 2,585
वष
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2500 सा.सं.पू. ( सधु-सरस्वती नगर) से 2024 सा.सं. तक? 2500 + 2024 – 1 4,523
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वष
250 सा.सं.पू. (अशोक) से 2024 सा.सं. तक? agl 250 + 2024 – 1 2,273
वष
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560 सा.सं.पू. (बुद्ध) से 250 सा.सं.पू. (अशोक) तक? दोन सा.सं.पू. 560 – 250 310 वष
m 2026 – 1947 gl
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1947 सा.सं. से 2026 सा.सं. तक? दोन सा.सं. 79 वष
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agl 323 सा.सं.पू. से 323 सा.सं. तक? 323 + 323 – 1 645 वष
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2024 सा.सं. म कोई सक्का 2,000 वष पुराना बताया जाता है। वह 2024 – 2000 = 24, अथ त् ितिथ 1 सा.सं. के 24
कस वष बना?
m . बाद पड़ती है सा.सं.
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा म यह क जए: काग़ज़ क दो प याँ बनाइए — एक सा.सं.पू. वष क , एक सा.सं. वष क — और उन्ह
इस प्रकार जो ड़ए क '1 सा.सं.पू.' सीधे '1 सा.सं.' को छु ए, बीच म कोई स्थान न रहे। अब एक नशान सरकाते हुए
ज़ोर से ग नए। एक बार यह दे ख लेने पर क शून्य वष के लए जगह ही नह है, आप '– 1' कभी नह भूलगे।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 65
ध्यान रख — शताब्द , सहस्त्राब्द एवं पंचांग
ध्यान रख
प्र.1 पृष्ठ 62 एवं 63 ( चत्र 4.3) म द गई समय-रेखा म क्या आप आठव सहस्त्राब्द सा.सं.पू. को च ह्नत कर सकते
ह?
िवश्व मे ं शैल
िचत्रकारी के पथम
साक्ष्य
िहम यग
ु
3,00,000 40,000 14,000
सा.सं.पू. सा.सं.पू. सा.सं.पू.
अंितम िहम युग ब ुद्ध का जन्म
का अंत तांबे के पथम
धातुकम का आरंभ
पथम स्थायी िनवास अशोक
व कृिष का आरंभ
12,000 10,000 8000 6000 4000 2000 2000
सा.सं.पू. सा.सं.पू. सा.सं.पू. सा.सं.पू. सा.सं.पू. सा.सं.पू. सा.सं.
हम इस काल
खंड में है ं
भारतीय उपमहा ीप िसंध ु-सरस्वती
मे ं िम ी के बतन सभ्यता
बनाने की तकनीक
ईसा का जन्म
मेसोपोटािमया मे ं
संसार का पथम नगर
चत्र 4.3, पृष्ठ 62–63 — 3,00,000 सा.सं.पू. से कुछ मुख्य घटनाओं क समय-रेखा। ऊपरी प बीच-बीच से टू ट है,
जो दशाती है क बहुत लंबे कालखंड छोड़ दए गए ह; नचली प एकसमान है — प्रत्येक छोटे चह्न पर 1,000 वष।
हाँ — वह ठ क 8000 सा.सं.पू. के नशान पर पड़ती है, जो समय-रेखा पर पहले से ही अं कत है।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत AglaSem · NCERT Solutions
गणना इस प्रकार क जए। सा.सं.पू. क सहस्त्रा ब्दयाँ 1 सा.सं.पू. से आरंभ करके पीछे क ओर, 1,000 वष के खंड म गनी
जाती ह —
सहस्त्राब्द सा.सं.पू. इसम स म्म लत वष
पहली सहस्त्राब्द सा.सं.पू. 1000 सा.सं.पू. – 1 सा.सं.पू.
दूसरी सहस्त्राब्द सा.सं.पू. 2000 सा.सं.पू. – 1001 सा.सं.पू.
तीसरी सहस्त्राब्द सा.सं.पू. 3000 सा.सं.पू. – 2001 सा.सं.पू.
… …
आठव सहस्त्राब्द सा.सं.पू. 8000 सा.सं.पू. – 7001 सा.सं.पू.
nवी ं सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. = (n × 1000) सा.सं.पू. से ((n – 1) × 1000 + 1) सा.सं.पू. तक
n = 8 के िलए: 8 × 1000 = 8000 सा.सं.पू. से (7 × 1000 + 1) = 7001 सा.सं.पू. तक
इसका आरंभ — इनमें सबसे पहला वष — है 8000 सा.सं.पू.
8000 सा.सं.पू. — आठवी ं सहस्त्राब् दी सा.सं.पू. का आरंभ
1 सा.सं.पू. | 1 सा.सं.
10वी ं 9वी ं 8वी ं 7वी ं 6ठी 5वी ं 4थी 3री 2री 1ली 1ली 2री
सहस्त्रािब्दयाँ सा.सं.पू. — 1 सा.सं.पू. से पीछे की ओर सहस्त्रािब्दयाँ सा.सं.
8000 सा.सं.पू. → 7001 सा.सं.पू.
सहस्त्रा ब्दयाँ 1,000-1,000 वष के खंड के रूप म। नारंगी घेरे वाला खंड आठव सहस्त्राब्द सा.सं.पू. है; उसका आरंभ 8000 सा.सं.पू.
क रेखा है, जो चत्र 4.3 पर पहले से अं कत है।
चत्र 4.3 पर प सल कहाँ रख: पृष्ठ 63 पर प पर 12,000 सा.सं.पू., 10,000 सा.सं.पू., 8000 सा.सं.पू., 6000 सा.सं.पू.,
4000 सा.सं.पू., 2000 सा.सं.पू. एवं 2000 सा.सं. अं कत ह। 8000 सा.सं.पू. के नशान पर सीधी रेखा ख चकर ल खए
“आठव सहस्त्राब्द सा.सं.पू. का आरंभ”। पुस्तक क समय-रेखा पर यह वह के आस-पास है जहाँ भारतीय उपमहा प म म
के बतन बनाने क तकनीक तथा प्रथम ायी नवास व कृ ष का आरंभ दशाए गए ह।
ध्यान द: सा.सं.पू. म 'आरंभ' का अथ है बड़ी संख्या वाला वष, क्य क सा.सं.पू. वष पीछे क ओर गने जाते ह।
आठव सहस्त्राब्द सा.सं.पू. 8000 सा.सं.पू. से आरंभ होकर 7001 सा.सं.पू. पर समाप्त होती है — जो पहली बार
म उलटा लगता है।
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पुस्तक क एक छोट -सी चूक: पृष्ठ 65 पर सहस्त्राब्द वाले बदु म लखा है “1 सा.सं. से लेकर प्रत्येक सहस्त्र वष
के लए सहस्त्राब्द क गणना क जाती है” — अंग्रेज़ी संस्करण म यहाँ भूल से 'शताब्द ' छप गया है। नयम सही है,
केवल शब्द क चूक है।
प्र.2 क्या आप जानते ह क भारत म पारंप रक त थपत्र का नमाण कस प्रकार कया जाता रहा है?
हाँ — अनेक भारतीय त थपत्र चांद्र-सौर ह: वे महीन एवं दन के नधारण के लए सूय एवं चंद्रमा दोन क स्थ त पर नभर करते
ह, न क केवल एक न त दन-संख्या पर जैसा ग्रेगो रयन त थपत्र करता है।
यह सारी जानकारी जस पुस्तक म रहती है, वह है पंचांग।
पंचांग क्या है इसम क्या होता है इसका उपयोग
ता लकाओं क एक पुस्तक जसम प्रत्येक माह सूय एवं चंद्रमा क स्थ तयाँ; सूयग्रहण एवं त्योहार क त थय एवं समय का
के दन के साथ-साथ संबं धत खगोलीय चंद्रग्रहण का सट क आकलन; सूय दय एवं नधारण, मांग लक मुहूत, तथा वष के
आँकड़े सूचीबद्ध होते ह सूयास्त के समय मौसम पूवानुमान
सूय और चंद्रमा दोन क्य : चंद्रमा एक सुंदर मास दे ता है (लगभग साढ़े उनतीस दन), परंतु ऐसे बारह मास सौर वष
से लगभग 11 दन कम पड़ते ह, जससे ऋतुएँ खसक जात । भारतीय त थपत्र इसका समाधान बीच-बीच म एक
अ त रक्त मास (अ धक मास) जोड़कर करते ह। इसी लए द वाली या होली प्रत्येक वष भन्न अंग्रेज़ी तारीख़ को
पड़ती है, परंतु सदा एक ही ऋतु म।
क्या आप जानते ह? आज भी भारत-भर म पंचांग छपते और बड़े स्तर पर प्रयोग होते ह। इनक सट कता अनुमान
नह है — ग्रहण का मनट तक पूवानुमान वास्त वक खगोलशास्त्र माँगता है, इसी लए भारत म ग णत एवं
खगोलशास्त्र (जैसे आयभट य) त थपत्र- नमाण के साथ-साथ वक सत हुए।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 65
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अपनी समय-रेखा बनाइए
आइए पता लगाएँ
प्र.1 1900 सा.सं. से लेकर आज तक क एक समय-रेखा बनाइए। इस पर अपने दादा-दाद , नाना-नानी, माता- पता,
भाई-बहन एवं अपनी जन्म त थय को अं कत क जए। साथ ही 20 व शताब्द सा.सं. के आरंभ वष व अं तम
वष को भी अं कत क जए।
इस समय-रेखा क त थयाँ आपके अपने प रवार क ह गी। नीचे इसे ठ क ढं ग से बनाने का तरीका है, तथा वे दो उत्तर जो सबके
लए एक-से ह।
पहले दोन न त उत्तर —
सा.सं. की शतािब्दयाँ 1 सा.सं. से, 100-100 वष के खंडों में िगनी जाती है:ं
पहली शताब्दी सा.सं. = 1 – 100 • दू सरी = 101 – 200 • … • 20वी ं = 19 × 100 + 1 से 20 × 100
तक
20वी ं शताब्दी सा.सं. 1901 से आरंभ होती है और 2000 पर समाप्त
(इसीिलए 21वी ं शताब्दी सा.सं. 2001 से आरंभ होकर 2100 तक चलती है — ठीक जै सा पुस्तक कहती है।)
समय-रेखा कैसे बनाएँ —
काग़ज़ क एक लंबी प ली जए या पूरा पन्ना आड़ा क जए। बाएँ सरे पर 1900 और दाएँ सरे पर वतमान वष ल खए।
रेखा को बराबर दस-दस वष (दशक) के भाग म बाँ टए: 1900, 1910, 1920 … इससे माप सही रहता है, अथात् काग़ज़
पर बड़ा अंतर समय म भी बड़ा अंतर होगा।
प्रत्येक जन्म-वष पर छोटा नशान लगाकर ऊपर या नीचे उस व्य क्त का नाम ल खए।
1901 एवं 2000 को अलग रंग से अं कत क जए और ल खए “20व शताब्द सा.सं. का आरंभ” तथा “20व शताब्द सा.सं.
का अंत”।
रेखा के नीचे साधारण घटाव से प्रत्येक व्य क्त क आयु या दो पी ढ़य का अंतर नका लए — दोन त थयाँ सा.सं. ह, इस लए
केवल घटाना है।
1950 2010
दादी बहन
1930 1980
परदादा िपता
1901 2000
1900 1920 1940 1960 1980 2000 2020
20वी ं शताब्द ी का आरंभ 20वी ं शताब्द ी का अंत
2013 — मैं
ये केवल नमूना पिवि टयाँ है ं — अपने पिरवार के वष भिरए
1900 सा.सं. से आज तक क पा रवा रक समय-रेखा, दशक के माप पर। दोन लाल रेखाएँ न त उत्तर ह — 20व शताब्द सा.सं.
1901 से आरंभ होकर 2000 पर समाप्त होती है।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत
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20व शताब्द 1900 से आरंभ क्य नह होती: गनती 1 सा.सं. से आरंभ होती है, 0 सा.सं. से नह — वही
'शून्य वष' क अनुप स्थ त। वष 1 से 100 तक पहली शताब्द बनती है, इस लए 1901 से 2000em
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o 19व शताब्द का अं तम वष है और 2000 20व शताब्द का अं aतमglवष था।s तक 20व
शताब्द । वष.c
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1900
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aयह भी क जए: समय-रेखा बन जाने पर अंतर ना पए। य द आपक दाद का जन्म 1950 म हुआ और आपका
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2013 म, तो अंतर 2013 – 1950 = 63 वष है — और आपका पूरा प रवार-वृक्ष एक ही शताब्द म समा जाता है,
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जब क अध्याय का चत्र 4.3 तीन लाख वष दखाता है। यही तुलना इस अभ्यास का असली पाठ है।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 65
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इ तहास के ोत क्या-क्या ह? — वंशावली
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आइए पता लगाएँ
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क्या आप अपने माता एवं पता के प रवार क तीन पी ढ़य क जानकारी एकत्र कर सकते ह? अपने माता- पता,
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प्र.1
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दादा-दाद , नाना-नानी, परदादा-परदाद , परनाना-परनानी क एक वंशावली बनाइए। उनके नाम का पता
लगाइए और यह भी क वह जीवन-यापनm
s e के लए क्या करते थे एवं उनका जन्म कहाँ हुआ था? साथ ही आप उन
ोत का भी उल्लेख क जए जहाँlसेaआपने ये सूचनाएँ प्राप्त क ह।
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यह एक शोध-प रयोजना है, कसी एक न त उत्तर वाला प्रश्न नह । पुस्तक क ता लका म पाँच स्तंभ ह — संबंध, नाम,
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व्यवसाय, जन्म- ान, सूचना के
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ोत — और अं तम स्तंभ ही इसे 'पा रवा रक गपशप' से 'इ तहास' बनाता है।
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चरण 1 — वंशावली बनाइए। स्वयं को सबसे नीचे रखकर ऊपर क ओर ब ढ़ए, दोन पक्ष अलग-अलग रखते हुए —
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परदादा-परदादी परनाना-परनानी परदादा-परदादी परनाना-परनानी
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दादा-दादी नाना-नानी
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िपता म ाता
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तीन पी ढ़य क वंशावली। प्रत्येक बक्सा पृष्ठ 66 क ता लका क एक पं क्त बन जाता है।
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चरण 2 — जानकारी खो जए, और प्रत्येक तथ्य का ोत ल खए। ये आपके इ तहास के ोत ह —
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ोत इससे क्या मलता है कतना वश्वसनीय
बड़ क स्मृ तयाँ — माता- पता, दादा-दाद , बुजग नाम, व्यवसाय, गाँव के नाम, समृद्ध, परंतु सट क नह । त थयाँ खसक
रश्तेदार प रवार के स्थान बदलने क जाती ह; दो लोग अलग-अलग याद कर
कहा नयाँ सकते ह।
दस्तावेज़ — आधार, राशन काड, वद्यालय के सट क नाम, त थयाँ एवं स्थान अत्यंत वश्वसनीय, और ता लका म उद्धत
प्रमाण-पत्र, जन्म एवं ववाह प्रमाण-पत्र, भू म के करने योग्य।
काग़ज़, पशन बही
छाया चत्र — जनके पीछे त थ या अवसर लखा हो चेहरे, वस्त्र, घर, कौन-कौन व्य क्त व स्थान के लए वश्वसनीय; त थ
उप स्थत था प्राय: नह होती।
पत्र, डाय रयाँ, पुराने बही-खाते, नमंत्रण-पत्र ववाह, जन्म, यात्राओं क बहुत अ े , वशेषकर कसी घटना क त थ
त थयाँ, भाव, हस्तलेख तय करने के लए।
वस्तुए ँ — बतन, आभूषण, पा रवा रक व्यवसाय के प रवार का व्यवसाय, उसक संकेत दे ती ह, सट क नह — बड़ के
औज़ार, पुराने सक्के आ थक स्थ त ववरण के साथ ही उपयोगी।
गाँव/समुदाय के अ भलेख — पंचायत र जस्टर, कई पी ढ़य पीछे तक के नाम जी वत स्मृ त से कह अ धक पीछे तक पहुँच
मं दर या गुरु ारे के रकॉड, पंड ारा रखी सकते ह।
वंशाव लयाँ
नमूना पं क्त: संबंध — दादा-दाद । नाम — श्री राम प्रसाद वमा एवं श्रीमती कमला दे वी। व्यवसाय — वे वद्यालय
म शक्षक थे; वे प रवार के दो बीघा खेत सँभालती थ । जन्म-स्थान — ब तयारपुर, बहार। सूचना के ोत —
पताजी का कथन, दादाजी क सेवा-पु स्तका, तथा 1968 का एक छाया चत्र जसके पीछे त थ लखी है।
अं तम स्तंभ सबसे महत्वपूण क्य है: उसके बना वंशावली केवल एक दावा है। उसके साथ कोई भी आपके काम
क जाँच कर सकता है — और यही कहानी और इ तहास का अंतर है। यह भी दे खए क पीछे जाते-जाते क्या होता
है: माता- पता के लए दस्तावेज़ ह, परदादा-परदाद के लए शायद केवल एक नाम और एक गाँव। जतना पीछे
जाइए, ोत उतने ही कम — प्राचीन भारत के साथ इ तहासकार क भी यही समस्या है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 66
इ तहास के ोत क्या-क्या ह?
प्र.1 आपने अपने प रवार के अतीत के संबंध म जानका रयाँ कैसे प्राप्त क ? इन जानका रय को प्राप्त करने के लए
क्या आपने छाया चत्र , डाय रय , पहचान-पत्र आ द का उपयोग कया या आप केवल अपने माता- पता और
संबं धय क स्मृ तय पर नभर थे?
लगभग न त रूप से आपने दोन प्रकार का मश्रण उपयोग कया होगा — एक ओर ल खत एवं भौ तक वस्तुए,ँ दूसरी ओर बोली
गई स्मृ त। यही मश्रण इस प्रश्न का पूरा उ े श्य है।
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आपने क्या उपयोग कया यह इ तहास के कस वग से मेल खाता है (पृष्ठ 67)
आधार काड, राशन काड, प्रमाण-पत्र, भू म के काग़ज़, पत्र, डाय रयाँ सािहित्यक /िलिखत ोत — जैसे िशलाले ख, ताम पत्र एवं पांडुिलिप
पुराने छाया चत्र, कसी पूवज का चत्र कलात्मक ोत — जैसे िचत्र कला एवं मूितकला
बतन, आभूषण, औज़ार, पुराने सक्के, पुराना घर पुर ाताित्वक ोत — जैसे िस क्के , आभूषण, उपकरण एवं संर चनाएँ
माता- पता, दादा-दाद एवं पड़ो सय ने जो बताया मौिखक ोत — जैसे लोक सािहत्य एवं वंशावली
नमूना उत्तर: “अ धकांश जानकारी दाद के बताने से मली। उन्ह ने चार परदादा-परनाना के नाम और उनका गाँव
बताया। परंतु उन्ह वष ठ क-ठ क याद नह थे, इस लए मने दादाजी क पशन बही से उनक जन्म त थ दे खी और
एक पुराने छाया चत्र के पीछे '1971' लखा मला। जहाँ दोन म अंतर था, मने ता लका म दोन लख दए और साथ
म यह भी क कौन-सी सूचना कस ोत से आई है।”
यह असहम त असफलता नह है: अध्याय कहता है क कभी ोत एक-दूसरे क पु ष्ट करते ह और कभी एक-
दूसरे के वपरीत सूचनाएँ दे ते ह, और तब इ तहासकार को तय करना पड़ता है क कस ोत पर अ धक वश्वास
कया जाए। दस्तावेज़ पर लखी त थ प्राय: याद क गई त थ से बेहतर होती है — परंतु छाया चत्र पर भी ग़लत
लेबल लग सकता है। वरोध को छपाने के बजाय दज करना ही अ े इ तहासकार का काम है।
आइए वचार कर — पृष्ठ 67
इ तहास के ोत क्या-क्या ह?
आइए वचार कर
प्र.1 क्या आपने कभी अपने घर अथवा आस-पास पुराने सक्क , पुस्तक , वस्त्र , आभूषण अथवा बतन को दे खा
है? इन वस्तुओं अथवा पुराने घर एवं भवन से हम कस प्रकार क सूचनाएँ एकत्र कर सकते ह?
हाँ — भारत के लगभग हर घर म ऐसी कुछ वस्तुएँ मल जाती ह, और उनम से प्रत्येक प रवार के इ तहास क चत्र-खंड पहेली का
एक हस्सा है। सावधान आँख उनसे क्या पढ़ सकती है, दे खए —
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वस्तु यह क्या बता सकती है
पुराने सक्के जारी करने वाला शासक या सरकार, वष, उन पर लखी भाषा एवं ल प, प्रयुक्त धातु, तथा प रवार कहाँ तक आया-गया
या व्यापार करता था। सक्का प्राय: सबसे आसानी से त थ बताने वाली वस्तु होती है।
पुरानी पुस्तक, प रवार कन भाषाओं एवं ल पय म पढ़ता था, वे क्या पढ़ते या मानते थे, उस समय के भाव एवं मज़दूरी, तथा घटनाओं
पत्र एवं काग़ज़ क सट क त थयाँ।
पुराने वस्त्र जलवायु, स्थानीय बुनाई एवं रंगाई, कपड़ा हाथ का बुना था या मल का, प रवार का व्यवसाय एवं संपन्नता, तथा त्योहार
व ववाह के पहनावे।
आभूषण उस समय उपलब्ध धातुएँ एवं रत्न, स्थानीय श ल्पय का कौशल, क्षेत्रीय एवं सामुदा यक डज़ाइन, तथा प रवार क
समृ द्ध।
बतन क्या और कैसे पकता था, ईंधन क्या था, धातु पीतल थी, कांसा, तांबा, लोहा या म , तथा एक साथ भोजन करने वाले
प रवार का आकार।
पुराने घर एवं नमाण-सामग्री ( म , पत्थर, ईंट, चूना, सीमट), कस जलवायु के लए बने, प रवार का आकार एवं कमर का बँटवारा,
भवन कुएँ एवं आँगन, तथा पूरे मोहल्ले क संपन्नता एवं शल्प-परंपरा — कोई मं दर, म स्जद, गरजाघर, बावड़ी या क़ला एक
समुदाय क कहानी बताता है, केवल एक प रवार क नह ।
साधारण वस्तु ल खत अ भलेख से बेहतर साक्ष्य क्य हो सकती है: कोई वृत्तांत कसी दृ ष्टकोण वाले व्य क्त ने
लखा होता है, प्राय: राजाओं के वषय म। खाना पकाने का बतन कसी को प्रभा वत करने के लए नह बना था।
उसका आकार, उस पर जमी का लख और उसम चपके दाने चुपचाप बताते ह क आम लोग वास्तव म क्या खाते थे
— इसी लए पुरातत्व वज्ञानी टू टे मृदभांड को लेकर इतने उत्सा हत रहते ह।
यह क जए: अपने घर क कोई एक पुरानी वस्तु चु नए। ल खए — (1) वह कस चीज़ क बनी है, (2) आपके
अनुमान से कतनी पुरानी है और क्य , (3) उसका उपयोग कौन और कस लए करता था, तथा (4) आपको यह कैसे
पता — स्मृ त से, वस्तु पर बने कसी चह्न से, या कसी दस्तावेज़ से। आपने अभी-अभी एक सं क्षप्त ोत- व ेषण
लख डाला, ठ क जैसे इ तहासकार करते ह।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 68–69
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तीन वस्तुओं को ोत के रूप म पढ़ना
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अगले पृष्ठ पर इ तहास के ोत से संबं धत कुछ चत्र दए गए ह। ये वस्तुए ँ कौन-कौन सी ह एवं आपके अनुसार
क्या दशाती ह? चत्र के सम्मुख दए गए ान म वस्तु से संबं धत प्राप्त जानकारी को ल खए।
पृष्ठ 69 पर क्या छपा है: पुराने, फटे कनार वाले चमपत्र (parchment) पर रखी तीन वस्तुओं के छाया चत्र,
और प्रत्येक के सामने लखने के लए ख ची गई पं क्तयाँ।
ऊपर बाएँ — एक स्वण-मुद्रा (सोने का सक्का)। एक आकृ त पालथी मारकर नीची चौक पर बैठ
है, सर के पीछे बड़ा प्रभामंडल है, गोद म एक लंबा तंतु-वाद्य रखा है जसे दा हने हाथ से बजाया जा
रहा है। कनारे- कनारे कसी प्राचीन भारतीय ल प के अक्षर क पं क्त चलती है।
दाईं ओर — एक उत्क ण पाषाण-फलक जसका ऊपरी भाग मेहराबदार है, दोन ओर एक-एक
स्तंभ है और जो दो मं ज़ल म बँटा है। ऊपरी भाग म अलंकृत आकृ तयाँ (कुछ के दो से अ धक
हाथ) एक छत्र के नीचे बैठ कद्र य आकृ त के चार ओर खड़ी और बैठ ह। नचले भाग म कुछ
आकृ तयाँ एक लंबी नाव जैसी वस्तु के आस-पास काम करती दखती ह।
नीचे बाएँ — एक चमकदार पॉ लश कया हुआ पाषाण शीष (capital)। पीठ से पीठ जोड़े हुए सह
( जनम से तीन दखाई दे ते ह) एक गोल चौक पर खड़े ह; चौक पर एक आर वाला चक्र और एक
पशु उकेरा है, और यह चौक उलटे कमल के घंटाकार आधार पर टक है।
पाठ्यपुस्तक का पृष्ठ 69 — तीन वस्तुओं का वणन यहाँ दया गया है; छाया चत्र के लए पुस्तक दे खए।
पृष्ठ 69 पर तीन वस्तुए ँ द गई ह, तीन ोत के अलग-अलग वग से। पहले उन्ह ध्यान से दे खए, फर नीचे के ववरण से मलान
क जए।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत
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पृष्ठ 69 क क्या दखाई दे ता है इ तहासकार इससे क्या पढ़ता है
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वस्तु
ऊपर बाएँ — .c सर के पीछे प्रभामंडल लए एक राजा,
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ag थे — अथात् राज्य संपन्न था।
a s em जो पालथी मारकर आसन पर बैठा वीणा स्वण उपलब्ध था और सक्के ढाले जा सकते
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aसक्का
एक स्वण शासक ने स्वयं को योद्धा नह , संगीतकार के रूप म दखाया — अथात्
बजा रहा है। कनारे- कनारे कसी प्राचीन दरबार म कलाओं का सम्मान था। लेख से शासक का नाम एवं उपा धयाँ
पुराता त्वक ल प (ब्रा ी) म लेख। मलती ह — यह गुप्त शासक समुद्रगुप्त का प्र सद्ध 'वीणावादक' प्रकार
. comका भी पता चलता है। ag
ोत ( सक्के/ का स्वण सक्का है (चौथी शताब्द सा.सं.)। सक्क से ल प, भाषा एवं
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शलालेख) व्यापार
दाईं ओर — a g
ऊपर मेहराबदार एक ऊँची पाषाण-
l छत्र एवं सहासन राजसत्ता या दे वत्व के चह्न ह; ऐसी प काएँ प्राय:
पत्थर क प का, दोन ओर उत्क ण स्तंभ, और दो कसी महाकाव्य या धा मक कथा का दृश्य दखाती ह। यह मं दर-स्थापत्य,
उत्क ण मं ज़ल म बँट । ऊपर: छत्र के नीचे
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शल्पी के औज़ार एवं कौशल, तथा उस समय के वस्त्र, आभूषण, केश-
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प का सहासन पर बैठ एक मुकुटधारी वन्यास, वाद्ययंत्र और नौकाओं का साक्ष्य है — ऐसे ववरण जन्ह कोई
कलात्मक ोत
com अनेक आकृ तय वाला व्यस्त दृश्य
आकृ त, चार ओर प रचारक। नीचे: ल खत ग्रंथ दज नह करता।
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(मू तकला एवं
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प का) जसम एक नौका जैसी रचना दखती है।
ag नीचे बाएँ — एक गोल चौक पर पीठ-से-पीठ जोड़कर यह सारनाथ का अशोक का सह-शीष है, वाराणसी के पास, तीसरी
mएक सुसंग ठत एवं सशक्त राज्य दशाता है जो वशाल पत्थर काट, a s
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सह-शीष खड़े चार सह। चौक पर एक चक्र एवं शताब्द सा.सं.पू. म तराशा गया — अशोक के कसी स्तंभ का ऊपरी भाग।
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(लायन पशु उत्क ण ह; उसके नीचे उलटे कमल
कै पटल) के आकार का आधार। पत्थर अत्यंत
l a se तराश, चमका और ढो सकता था; चक्र एवं पशु वह संदेश ले जाते ह जो
पुराता त्वक
ोत (स्मारक
चमकाया हुआ है।
a g सम्राट फैलाना चाहता था। भारत ने इसे 26 जनवरी 1950 को राज्य- चह्न
के रूप म अपनाया, और इसका चक्र रा ीय ध्वज के मध्य का अशोक चक्र
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एवं संरचना) है — 2,200 वष पुराना एक ोत, जो आज भी प्र त दन उपयोग म है।
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तीन वस्तुओं म एक बात समान है, उसे दे खए —
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तीन.c टकाऊ ह — स्वण एवं पत्थर। यह एक चेतावनी है: कपड़े, लकड़ी, ताड़पत्र याag
s e m म क वस्तुएँ नष्ट हो जाती ह, इस लए
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जो बचा है वह अतीत का नष्पक्ष नमूना नह है।
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तीन शासक या मं दर से जुड़ी ह। आम लोग के जीवन का पुन नमाण साधारण वस्तुओं से करना पड़ता है — मृदभांड के
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टु कड़े, औज़ार, अनाज, घर के फ़श।
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प्रत्येक अलग प्रकार के प्रश्न का उत्तर दे ती है: सक्का नाम एवं त थ दे ता है, प का जीवन-शैली, और सह-शीष राज्य क
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श क्त एवं पहुँच।
अपने बॉक्स कैसे भर: प्रत्येक चत्र के लए चार बात ल खए — (1) वह कस चीज़ क बनी है, (2) उस पर क्या
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दखाया गया है, (3) उसे संभवत: कसने और कसके लए बनाया, और (4) एक ऐसा प्रश्न जसका उत्तर वह नह
m a s em था।
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दे ती। अं तम बदु ही सबसे ईमानदार है: सक्का यह नह बताएगा क कसान क्या खाता
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 70
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत AglaSem · NCERT Solutions
मानव इ तहास का प्रारंभ
आइए पता लगाएँ
प्र.1 ऊपर दए गए चत्र म शैलाश्रय म आरं भक मानव से संबं धत कुछ ग त व धय को दे खए। आप इनम से कस-
कस ग त व ध को पहचान सकते ह? प्रत्येक का सं क्षप्त ववरण द जए।
दृश्य: जल-रंग म बनी एक चौड़ी शैल-छाजन (rock overhang)। उसके नीचे हर आयु के लगभग
पंद्रह लोग ह; दाईं ओर खुले म हरी पहाड़ी दखाई दे ती है।
पीछे क ढलवाँ शैल- भ त्त पर: काले रंग से बनी आकृ तयाँ — कूबड़ वाले पशुओं क पं क्तयाँ,
उनक ओर धनुष ताने एक धनुधर, और उठे हुए हाथ वाली पतली मानव-आकृ तय का समूह।
उसी भ त्त के नीचे: नारंगी वस्त्र लपेटे एक पुरुष एक हाथ ऊपर च ान तक फैलाए खड़ा है; उसके
पास एक बालक भी हाथ म कुछ लए भ त्त क ओर हाथ बढ़ाए खड़ा है।
बाईं ओर: तेज़ आग जल रही है। उसके पीछे एक वृद्ध पुरुष लंबी लकड़ी लए खड़ा है, एक अन्य
व्य क्त सूखी घास का गट्ठर थामे है, और दो स्त्रयाँ आग के पास बैठ ह जनम से एक क गोद म
शशु है।
सामने, शैलाश्रय क ज़मीन पर: तीन लोग पत्थर पर झुके ह और एक पत्थर से दूसरे पत्थर पर चोट
कर रहे ह; सबसे बाईं ओर शरीर पर रंग के चह्न बनाए एक पुरुष बैठा है।
दाईं ओर: एक पुरुष और एक स्त्री एक बड़े पाषाण-पात्र पर झुके ह जसम गोल पत्थर पड़े ह और वे
उसम दबाकर कुछ कर रहे ह; उनके पास दो ब े छोटे -छोटे टु कड़े हाथ म लए बैठे ह; सबसे दाईं
ओर एक पुरुष खड़ा होकर दोन हाथ म पकड़ी कसी वस्तु पर काम कर रहा है।
पृष्ठ 70 के ऊपर दया गया चत्र — शैलाश्रय का एक आधु नक कलाकार ारा बनाया चत्र; यहाँ केवल उसका वणन है,
चत्र के लए पाठ्यपुस्तक दे खए।
पृष्ठ 70 का चत्र एक ऊपर नकली हुई च ान के नीचे काम करते पूरे समुदाय को दखाता है। इसम ये ग त व धयाँ पहचानी जा
सकती ह —
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चत्र म दख रही ववरण
गतवध
च ान पर एक व्य क्त हाथ उठाए शला- भ त्त पर चत्र बना रहा है। उसके ऊपर द वार पर पहले से काली आकृ तयाँ ह —
चत्रकारी पशुओं क एक पं क्त, एक आखेटक, तथा नाचती-सी मानव आकृ तयाँ। ये वही शैल- चत्र ह जनका उल्लेख अध्याय
म है और जो संपूण वश्व क सैकड़ गुफाओं म मलते ह।
रंग तैयार करना दो लोग एक बड़े पत्थर के पात्र पर झुककर ढे ल को पीस रहे ह। रंग रंगीन म एवं ख नज को बारीक पीसकर
मलाकर बनाना पड़ता था — अथात् द वार क चत्रकारी इस शांत प रश्रम पर टक थी।
आग के चार ओर एक समूह जलती हुई आग के चार ओर बैठा है, उनम से एक आग क ओर हाथ बढ़ा रहा है। अ ग्न ने ऊष्मा, अँधेरे म
बैठना प्रकाश, पशुओं से सुरक्षा और पका भोजन दया — अध्याय स्पष्ट कहता है क आ दमानव ने अ ग्न का उपयोग
कया।
पत्थर के उपकरण कई लोग शैलाश्रय के फ़श पर घुटन के बल बैठकर एक पत्थर से दूसरे पत्थर पर प्रहार कर रहे ह। यह उपकरण-
बनाना नमाण है: पत्थर क उन्नत कुल्हा ड़याँ एवं ब्लेड्स, नुक ले तीर तथा खुरचनी, जो पत्थर के टु कड़े छ लकर बनाए
जाते थे।
उपकरण क धार दाईं ओर खड़ा एक व्य क्त दोन हाथ से कसी ब्लेड पर काम कर रहा है — पहले से मोटे रूप म बने औज़ार क धार
बनाना घस या छ ल रहा है।
ब का दे खना दो ब े अलग बैठे छोटे टु कड़े हाथ म लए वही कर रहे ह जो बड़े कर रहे ह। चत्र म कोई पुस्तक से नह पढ़ा रहा;
एवं नकल करना कौशल दे खकर और नकल करके हस्तांत रत होते थे।
समूह म रहना सबसे महत्वपूण 'ग त व ध': सभी एक ही आश्रय म एक साथ ह और प्रत्येक अलग काम कर रहा है। अध्याय कहता है
क आ दमानव प्रकृ त क चुनौ तय म एक-दूसरे क सहायता के लए टो लय अथवा समूह म रहते थे।
शैलाश्रय ही क्य , घर क्य नह : ये लोग आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे, भोजन क खोज म नरंतर चलते रहते थे।
प्राकृ तक रूप से नकली च ान वषा एवं धूप से मुफ़्त आश्रय दे ती थी — न नमाण, न ढोना। घर अध्याय म बाद म
आते ह, तभी जब कृ ष लोग को एक स्थान से बाँध दे ती है।
क्या आप जानते ह? ऐसे शैल- चत्र का वश्व-प्र सद्ध संग्रह भारत म मध्य प्रदे श के भीमबेटका शैलाश्रय म है —
सैकड़ आश्रय म पशुओं, आखेटक , नतक एवं वादक के चत्र। यह यूनेस्को वश्व धरोहर स्थल है, और चत्रकार ने
ठ क ऐसा ही दृश्य कल्पना म रखा होगा।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 71
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पहली उपज
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अगले पृष्ठ पर दए गए चत्र का अवलोकन क जए। यह कुछ सहस्त्राब्द पूव के कृषक समुदाय क ग त व धय
को प्रद शत करता है। उन ग त व धय को सूचीबद्ध क जए जनक आप पहचान कर सकते ह।
पृष्ठभू म: एक चौड़ी नद ; जल के कनारे खड़े मवेशी; उसके आगे नीची हरी पहा ड़याँ और वृक्ष;
आकाश म प क्षय क पं क्त।
बायाँ आधा भाग — खेत: धूप म खड़ी पक हुई ऊँची फ़सल। एक पुरुष कटे डंठल का बड़ा गट्ठर
सर के ऊपर उठाए है; एक स्त्री फ़सल पर झुककर उसे काट रही है; एक बालक उक ँ बैठकर कटे
डंठल बटोर रहा है; कुछ दूर एक और व्य क्त सर पर गट्ठर रखे चल रहा है।
मध्य म: दाढ़ वाला एक पुरुष कंधे पर लंबी बट वाला औज़ार रखे सामने क ओर आ रहा है, औज़ार
से कपड़े क एक गठरी बँधी है। उसके साथ-साथ एक कुत्ता चल रहा है।
दाईं ओर — गाँव: म क द वार और फूस क छत वाली चार झोप ड़याँ। एक पुरुष एक झोपड़ी
के कोने पर औज़ार से काम कर रहा है; झोप ड़य के सामने ज़मीन पर दो छोटे ब े खेल रहे ह।
दाईं ओर सामने: लकड़ी क आग पर रखा म का बड़ा गोल बतन; उसके पास एक स्त्री घुटन के
बल बैठकर एक उथले पात्र पर झुक है, और उसके पास ज़मीन पर एक कटोरा तथा लाल-पीली
स ब्ज़याँ रखी ह।
सबसे आगे: घास चरती सफ़ेद भेड़ का झुंड; नीचे दाईं ओर काँटेदार झाड़ी।
पृष्ठ 72 के ऊपर दया गया चत्र — आरं भक कृषक ग्राम का आधु नक कलाकार ारा बनाया चत्र; यहाँ केवल उसका
वणन है, चत्र के लए पाठ्यपुस्तक दे खए।
पृष्ठ 72 का चत्र नद के कनारे बसा एक स्थायी कृषक गाँव दखाता है। मुख्य ग त व धयाँ ये ह —
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गतवध चत्र म क्या दख रहा है यह क्या बताती है
फ़सल काटना खड़ी ऊँची फ़सल पर झुके लोग हाथ के समुदाय अनाज उगाता है — हम युग के बाद आया वही बड़ा
औज़ार से कटाई कर रहे ह प रवतन जसका अध्याय वणन करता है
उपज ढोना दो लोग सर पर कट फ़सल के बड़े गट्ठर फ़सल भंडारण के लए लाई जा रही है — अब लोग के पास बचाकर
लए चल रहे ह रखने योग्य अ त रक्त अन्न है
औज़ार ले जाना एक व्य क्त कंधे पर लंबे हत्थे वाला कृ ष को बने-बनाए औज़ार चा हए; अध्याय म आगे ये धातु के हो
औज़ार और उससे बँधी गठरी लए गाँव जाते ह — पहले तांबा, फर लोहा
क ओर जा रहा है
झोपड़ी बनाना या एक व्य क्त हाथ ऊपर उठाए फूस क लोग बस चुके ह; अस्थायी श वर एवं शैलाश्रय क जगह स्थायी घर
मरम्मत करना छत वाले म के घर क द वार पर काम आ गए
कर रहा है
भोजन पकाना खुले चूल्हे पर एक बड़ा गोल पात्र, नीचे मृदभांड — अध्याय म गनाई गई नई तकनीक म से एक — भोजन
आग जल रही है पकाने एवं भंडारण के लए
अनाज पीसना एवं एक म हला चपट सल पर घुटन के खाने से पहले अनाज को संसा धत करना पड़ता है; आरं भक कृषक
भोजन तैयार करना बल पीस रही है; पास म स ब्ज़य क स्थल पर सलब े सबसे आम प्रा प्तय म से ह
टोकरी एवं एक कटोरा
भेड़-बकरी चराना अग्रभू म म चरता झुंड; पीछे नद के पशुओं का घरेलूकरण — अध्याय गाय एवं बकरी का नाम लेता है
पास मवेशी — दूध, मांस, ऊन एवं श्रम के लए
कुत्ता पालना औज़ार लए व्य क्त के साथ एक कुत्ता कुत्ता मनुष्य के साथ रहने वाला पहला पशु था; यहाँ वह झुंड एवं गाँव
चल रहा है क रखवाली करता है
ब का खेलना घर के पास छोटे ब े, खेत से दूर बसा हुआ, सुर क्षत गाँव-जीवन — पछले चत्र क नरंतर चलती
टोली से बल्कुल भन्न
नद के कनारे पृष्ठभू म म नद , हरे कनारे एवं वृक्ष अध्याय का अपना कारण: लोग न दय के पास केवल जल के लए
बसना नह बसे, ब ल्क इस लए भी क वहाँ मृदा अ धक उपजाऊ होती है,
जससे अन्न उगाना सरल हो जाता है
दोन चत्र क तुलना क जए। शैलाश्रय के दृश्य (पृष्ठ 70) म सब कुछ अस्थायी है: न द वार, न खेत, न सं चत
भोजन। इस दृश्य म घर ह, बाड़ ह, खेत ह, बतन ह, पशु-झुंड ह और खेलते ब े ह। यही एक प रवतन — भोजन के
पीछे चलने से भोजन उगाने तक — समुदाय को आकार एवं संख्या म बढ़ने, मु खया, आदान-प्रदान एवं शल्प
वक सत करने और अंतत: पहले नगर बसाने म सक्षम बना गया।
आइए वचार कर — पृष्ठ 72
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पहली उपज — स्त्री-पुरुष क भू मकाएँ
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आइए वचार कर
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a s emप्रद शत शैल- चत्र एवं उपयुक्त चत्र, दोन म ही पुरुष एवं म हलाओं को कुछ न त भू मकाओं म दशाया
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पहले
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गया है। यद्य प ये स्वाभा वक प्रतीत होते ह, परंतु आवश्यक नह क ये सही ही ह और ये सभी प र तय पर
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लागू नह होते। उदाहरण के लए, हो सकता है क शैल- चत्र म म हलाओं ने गुफा म चत्रकारी करने के लए रंग
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को तैयार कया हो अथवा स्वयं चत्रकारी क हो। दोन ही चत्र म हो सकता है क पुरुष ने भोजन क कोई वस्तु
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बनाई हो अथवा शशुओं क दे खभाल म मददem
क हो।
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पहले दया गया चत्र — शैलाश्रय (पृष्ठ 70)। नारंगी वस्त्र लपेटे एक पुरुष शैल- भ त्त पर चत्र बना
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रहा है, उसके पास एक बालक है। बाईं ओर एक वृद्ध पुरुष धधकती आग सँभाल रहा है और उसके
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पास दो स्त्रयाँ बैठ ह, जनम एक क गोद म शशु है। सामने पुरुष ज़मीन पर
a s emघुटन के बल बैठकर
. gl पाषाण-पात्र म दबाकर कुछ
co पत्थर से पत्थर पर चोट कर रहे ह। दाईं ओर एक पुरुष और एक स्त्रीaबड़े
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कूट रहे ह, और एक पुरुष खड़ा होकर दोन हाथ म पकड़ी वस्तु को अं तम रूप दे रहा है।
उपयुक्त चत्र — कृषक ग्राम (पृष्ठ 72)। खेत म एक पुरुष कटे डंठल का गट्ठर सर के ऊपर उठाए है,
जब क एक स्त्री झुककर फ़सल काट रही है और एक बालक डंठल बटोर रहा है। दाढ़ वाला एक
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. cहैo।mचूल्हे के पास एक स्त्री घुटन के बल बैठ है, आग पर बतन agl
पुरुष कंधे पर औज़ार रखे और साथ म कुत्ता लए खेत से लौट रहा है। झोप ड़य के पास एक पुरुष
s eपरmस ब्ज़याँ रखी ह; झोप ड़य के सामने दो छोटे ब े खेल रहे ह।
द वार पर औज़ार से काम कर रहा
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रखा है और पास ज़मीन
प्रश्न जन दो चत्र क बात कर रहा है — पृष्ठ 70 एवं 72; कलाकार ारा बनाए इन चत्र का वणन यहाँ दया गया है,
चत्र के लए पाठ्यपुस्तक दे खए।
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gl पुस्तक अपने ही पन्न के चत्र के वषय म सावधान कर रही है — यह असामान्य है और इसे गंभीरता से लेना चा हए। ये चत्र
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आधु नक अनुमान ह, साक्ष्य नह ।
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दोन चत्र क्या दखाते ह: पुरुष आखेट करते, उपकरण बनाते, च ान पर चत्र बनाते, उपज ढोते और घर बनाते; म हलाएँ अनाज
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पीसत , भोजन पकात और ब क दे खभाल करत । साक्ष्य वास्तव म क्या अनुम त दे ता है: इससे कह अ धक।
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चत्र जो संकेत दे ता है वह सही क्य नह भी हो सकता
शैल- चत्र केवल पुरुष ने कसी चत्र म यह नह लखा होता क ब्रश कसने पकड़ा था। वश्व क कई च त्रत गुफाओं म द वार पर बने
बनाए हाथ के छाप को नापा गया है और उनम से अनेक म हलाओं एवं ब के हाथ के आकार के ह। रंग तैयार
करने का आधा काम भी म हलाओं ने कया होगा।
भोजन एवं ब क जस टोली म सबको खाना है, वहाँ जो श वर म हो वही पकाता है। पुरुष ने भी अवश्य पकाया होगा, ब को
दे खभाल केवल म हलाएँ सँभाला होगा और शशुओं को गोद म ढोया होगा।
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आखेट केवल पुरुष, संग्रह पौधे, फल, कंद, शहद, अंडे एवं छोटे जीव इकट्ठा करना भोजन का बड़ा हस्सा दे ता था और सब करते थे। ज्ञात
केवल म हलाएँ आखेटक-संग्राहक समुदाय म म हलाएँ छोटे शकार एवं मछली पकड़ती ह।
उपकरण एवं घर केवल उपकरण बनाना एवं घर बनाना सीखे हुए कौशल ह; चत्र म ब े पहले से बड़ क नकल कर रहे ह। यह मानने
पुरुष बनाते थे का कोई कारण नह क यह सीखना केवल लड़क तक सी मत था।
चत्रकार ऐसा चत्र क्य बना दे ता है: पाषाण युग का कोई छाया चत्र नह है। चत्रकार को रक्त स्थान कसी न
कसी से भरना ही पड़ता है, और सबसे सहज वही होता है जो पैटन वह आज अपने आस-पास दे खता है। इस प्रकार
एक आधु नक धारणा 12,000 वष पुराने दृश्य पर पुत जाती है — और फर उसे ही प्रमाण मान लया जाता है।
प्र.2 ऐसी भू मकाओं एवं प र तय पर वचार करते हुए कक्षा म चचा क जए। इस बात का ध्यान र खए क हमारे
पास उस समय क केवल सी मत सूचनाएँ ही उपलब्ध ह।
चचा को साथक बनाने का तरीका। कक्षा को दो भाग म बाँ टए और प्रत्येक को एक काम द जए —
पक्ष अ — “हम वास्तव म क्या जानते ह?” केवल वही सूचीबद्ध क जए जो भौ तक साक्ष्य दखा सकता है: उपकरण, शैल-
चत्र, सलब े , पशुओं क ह याँ, शवाधान। ध्यान द जए क इनम से कतने कम पर यह लखा है क इनका उपयोग कसने
कया।
पक्ष ब — “हमने क्या मान लया है?” दोन चत्र म हर उस भू मका क सूची बनाइए जो स पी गई है, सद्ध नह क गई।
फर सू चयाँ बद लए और तक क जए। उपयोगी प्रश्न कभी “क्या म हलाएँ आखेट करती थ ?” नह होता, ब ल्क “ कस साक्ष्य
से यह बात तय हो सकेगी?” होता है।
तीन नष्कष जन तक पहुँचना चा हए —
1. साक्ष्य का अभाव, अभाव का साक्ष्य नह है। हमारे पास प्रमाण नह है क भीमबेटका म म हलाओं ने चत्र बनाए; यह प्रमाण
भी नह है क उन्ह ने नह बनाए।
2. जो बचता है वही दखता है। पत्थर बचता है, कपड़ा एवं लकड़ी नह — इस लए पत्थर का काम ज़रूरत से अ धक महत्वपूण
दखता है, और जो बुनता, पकाता या शशु पालता था उसका लगभग कोई चह्न नह बचता।
3. भू मकाएँ संभवत: लचीली थ । भूख, ठं ड और ख़तरे से जूझती छोट टोली म काम का कठोर बँटवारा एक वला सता है।
जसे जो आवश्यक था, वह करता था — इसी लए पुस्तक कहती है क ये भू मकाएँ “सभी प र स्थ तय पर लागू नह होत ”।
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अपनी कॉपी के लए नमूना नष्कष: “हमारी कक्षा इस बात पर सहमत हुई क चत्र एक उ चत अनुमान ह, प्रमाण
नह । हम वश्वास से कह सकते ह क लोग समूह म रहते थे, अ ग्न का उपयोग करते थे, उपकरण बनाते थे और
चत्रकारी करते थे, क्य क ये चीज़ बच जाती ह। हम यह वश्वास से नह कह सकते क कौन कौन-सा काम करता
था, क्य क साक्ष्य यह दज नह करता। इस लए ऐसे चत्र को चत्रकार का सुझाव मानना चा हए और मन खुला
रखना चा हए।”
यह केवल समानता का नह , इ तहास का पाठ क्य है: यहाँ जो आदत सखाई जा रही है — साक्ष्य जो दखाता
है उसे चत्रकार क धारणा से अलग करना — वही आदत आगे क पूरी पुस्तक के हर ोत के लए चा हए, चाहे वह
अपनी प्रशंसा करता कसी राजा का शलालेख हो या कसी वदे शी यात्री का वह ववरण जसने वह नगर मु श्कल से
दे खा था।
आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 73
अध्याय चार बदुओं म
आगे बढ़ने से पहले . ..
प्र.1 हमने अपने अतीत के बारे म और अ धक जानने के कुछ तरीक का पता लगाया। समय-रेखा क अवधारणा हम
भन्न- भन्न समय पर ऐ तहा सक घटनाओं के अनुक्रम को समझने म सहायता करती है।
समय-रेखा क्या है: एक सु वधाजनक उपकरण जो कसी वशेष अव ध क त थय एवं घटनाओं का अनुक्रम दखाता है। अध्याय
का चत्र 4.3 मानव सभ्यता के आरंभ से वतमान तक चलता है और उस पर कुछ प्रमुख घटनाएँ च ह्नत ह।
तीन काम जो समय-रेखा करती है और त थय क सूची नह कर सकती —
वह एक नज़र म क्रम दखाती है। त थयाँ पढ़े बना भी दख जाता है क बुद्ध का जन्म ईसा मसीह के जन्म से पहले हुआ।
वह दूरी दखाती है। दो नशान के बीच का अंतर समय का वास्त वक अंतर होता है, इस लए दख जाता है क भारत का पूरा
ल खत इ तहास एक बहुत लंबी रेखा के दाएँ सरे का छोटा-सा टु कड़ा है।
वह यह भी दखाती है क क्या छोड़ा गया है। चत्र 4.3 का बदुकृत भाग छोड़े गए कालखंड को दशाता है — और पुस्तक
कारण भी बताती है: ईमानदारी से माप म बनाई जाती तो समय-रेखा लगभग 3 मीटर लंबी हो जाती।
3,00,000 वष उसी माप में िजसमें छपा हुआ भाग है
→ लगभग 3 मीटर लंबी काग़ ज़ की प ी
→ उस पर बुद्ध के जन्म से अब तक के 2,583 वष 3 सेट
ं ीमीटर से भी कम होंगे
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत AglaSem · NCERT Solutions
छोड़ा गया भाग महत्वपूण क्य है: समय-रेखा स्वयं भी एक प्रकार का ोत है, और हर ोत क तरह वह चुनाव
करती है। जो उसे बनाता है वही तय करता है क क्या रखा जाए, क्या छोड़ा जाए और कौन-सा माप लया जाए —
और ये चुनाव पाठक को दखने वाली कहानी बदल दे ते ह।
प्र.2 समय क गणना क व भन्न व धयाँ ह— वष, दशक, शताब्द , सहस्त्राब्द ।
चार इकाइयाँ, प्रत्येक के गणना- नयम के साथ। नयम ही वह भाग है जहाँ लोग चूकते ह, इस लए सीमाएँ याद रखने योग्य ह।
इकाई अव ध सा.सं. क ओर सा.सं.पू. क ओर
वष 1 1 सा.सं., 2 सा.सं., 3 सा.सं. … … 3 सा.सं.पू., 2 सा.सं.पू., 1 सा.सं.पू.
दशक 10 वष दस वष ं का कोई भी खंड दस वष ं का कोई भी खंड
शताब्द 100 वष 1 सा.सं. से गणना: 1 सा.सं.पू. से पीछे :
पहली = 1–100 सा.सं. पहली = 100–1 सा.सं.पू.
21वी ं = 2001–2100 सा.सं. तीसरी = 300–201 सा.सं.पू.
सहस्त्राब्द 1,000 वष पहली = 1–1000 सा.सं. पहली = 1000–1 सा.सं.पू.
तीसरी = 2001–3000 सा.सं. आठवी ं = 8000–7001 सा.सं.पू.
इन सब पर एक ही िनयम शासन करता है: कोई शून्य वष नही ं होता
इसिलए िगनती 1 से आरंभ होती है — आगे भी और पीछे भी
और सा.सं.पू. एवं सा.सं. ितिथयों का अंत र = सा.सं.पू. + सा.सं. – 1
ध्यान रख: कसी शताब्द क संख्या उसके सा.सं. वष के पहले दो अंक से सदा एक अ धक होती है — 2001–
2100 इक्क सव शताब्द है, 1901–2000 बीसव । अपवाद है प्रत्येक शताब्द का अं तम वष (2000, 1900), जो
पछली शताब्द म आता है। यह एक बात ठ क कर ली जए तो शताब्द वाला हर प्रश्न ठ क हो जाएगा।
भारत म एक से अ धक त थपत्र क्य : सरकारी कामकाज के लए वश्व-भर म ग्रेगो रयन त थपत्र चलता है,
जब क त्योहार एवं मांग लक काय के लए हदू, मु स्लम, यहूद , चीनी आ द त थपत्र साथ-साथ प्रयोग होते ह। सूय
एवं चंद्रमा क स्थ त पर आधा रत पंचांग आज भी पूरे दे श म छपता एवं प्रयोग होता है।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 इ तहास के व भन्न ोत ह। ये ऐ तहा सक घटनाओं को समझने व उनका पुन नमाण करने म सहायक होते ह।
चार वग, एक-एक पं क्त म, और नीचे पूरे अभ्यास का मम।
वग इसम क्या-क्या यह कसम सबसे अ ा
पुराता त्वक िशलाले ख (पांडुिलिप, तामपत्र, िसक्के ); संर चना (स्मारक, टीला); उत्खनन (मानव-पशु- त थयाँ, शासक, तकनीक,
पौधों के अवशेष, उपकरण एवं हिथयार, मूितयाँ एवं आभूषण, म ृद भांड एवं िखलौने, िनवास भोजन, शल्प, दै नक जीवन
स्थान एवं शवाधान)
सा ह त्यक भारतीय सािहत्य — वेद एवं इितहास, किवता एवं नाटक, ऐितहािसक ले ख, कहािनयों का वचार, वश्वास, व ध, वज्ञान,
ृ ांत, ऐितहािसक वत्त
संग ह, वै ािनक एवं तकनीकी ले ख; िवदे शी िववरण — यात्रा वत्त ृ ांत तथा बाहरी दृ ष्ट
मौ खक लोक सािहत्य, वंशावली वह सामुदा यक स्मृ त जो
कभी लखी नह गई
कलात्मक िचत्रकला, मूितकला, पि का (पैनल) वस्त्र, आभूषण, संगीत,
नौकाएँ, दे वता एवं कथाएँ
अध्याय ारा जोड़े गए नए ोत: प्राचीन जलवायु का अध्ययन, उत्ख नत सामग्री का रासाय नक अध्ययन एवं प्राचीन मानव क
आनुवां शक ; तथा आधु नक इ तहास के लए समाचार-पत्र एवं इलेक् ॉ नक मी डया।
यह काम कौन करता है: इ तहासकार, और उनके साथ पुरातत्व वज्ञानी, पुरालेखशास्त्री (जो प्राचीन अ भलेख पढ़ते ह), मानव
वज्ञानी, तथा सा हत्य व भाषा के वशेषज्ञ।
इस वाक्य क दोन क्रयाएँ अलग काम कर रही ह। पुन नमाण का अथ है टु कड़ को फर से जोड़ना — क्या
हुआ, कब हुआ, कहाँ हुआ। व्याख्या का अथ है यह बताना क उसका अथ क्या था। दो ईमानदार इ तहासकार हर
तथ्य पर सहमत होकर भी अलग-अलग व्याख्या कर सकते ह; और दोन को बताना पड़ता है क उन्ह ने कौन-से
ोत उपयोग कए, ता क दूसरे जाँच सक।
प्र.4 हमने आरं भक मानव जीवन को संक्षेप म समझा और यह भी जाना क मानव-समाज कैसे समय के साथ ज टल
होता गया।
अध्याय का अं तम वचार यह है क ज टलता बढ़ — वह आरंभ से नह थी। पूरा क्रम यह रहा —
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
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चरण लोग कैसे रहते थे नया क्या था
m टोिलयों में, अस्थायी िशिवरों, शैलाश्रयों एवं गफु ाओं l a se
.co में; भोजन एवं आश्रय की खोज में िनरंतर गितशील चत्र; मनक एवं दाँत के a gषण; दूसरे समूह से आदान-
1. आखेटक- अ ग्न; पत्थर क कुल्हा ड़याँ, ब्लेड्स एवं नुक ले तीर; शैल-
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संग्राहक
m आभू
g l a प्रदान; प्रकृ त एवं मरणोपरांत जीवन को लेकर वश्वास
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2. अं तम हम युग जलवायु गरम हईु , िहम िपघला, निदयाँ भरी ं; जीने लोग एक ान पर बसने लगे
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के बाद योग्य पिरिस्थितयों में सुध ार
(1,00,000 →
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लगभग 12,000 वष
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पूव)
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3. प्रथम कृषक निदयों के िकनारे बसे — जल के िलए और
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अनाज उगाना; गाय, बकरी आ द का घरेलूकरण; समूह का
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इसिलए भी िक म ृद ा अिधक उपजाऊ है आकार व संख्या म बढ़ना
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4. आरं भक ग्राम- सरदार/मुिखया लोगों के कल्याण के िलए
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नेतृत्व एवं सामू हक काय
l a se
समाज उत्तरदायी; भूिम पर सामुद ाियक कृ िष; िनजी
ag स्वािम त्व का भाव नही ं
5. गाँव एवं छोटे
mं
मृदभांड; धातु — पहले तांबा, फर लोहा — टकाऊ
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agl
पल्ली बड़े गाँवों में बदली ं जो भोजन, वस्त्र एवं
उपकरणों का आदान-पदान करती थी ं; o
कस्बे
. c उपकरण, दै नक वस्तुएँ एवं आभूषण
m बन गए
उनमे
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संपेषण का तंत्र बना; कु छ छोटे कस्बे
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अध्याय 6 म दे खगे क इन चरण ने कस प्रकार 'सभ्यता' के उदय क भू म तैयार क ।
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अध्याय जस वाक्य पर समाप्त होता है: इस आरं भक प्रग त को “अनेक चुनौ तय का सामना करना पड़ा था।
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इस दौरान कुछ क ठन क्षण भी आए, जब कुछ पूववत प्रजा तय क भाँ त मानव सभ्यता भी लुप्त हो सकती थी।”
a s em आज हमारा अ स्तत्व अ नवाय नह था — वह उन लोग के साहस और दृढ़ता पर टका है जनके नाम हम कभी नह
agl जान पाएँगे।
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emपृष्ठ 74
प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँs—
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अध्याय के अंत के प्रश्न agl
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m .
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एक प रयोजना के रूप म अपने आस-पास उपलब्ध इ तहास के ोत का उपयोग करते हुए अपने प रवार (य द
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प्र.1
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.co क जए। g
आप गाँव म रहते ह, तो गाँव) का इ तहास ल खए। प रयोजना के लए अपने शक्षक से मागदशन हेतु नवेदन
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l a se
ag
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m a s e
co agl
यह एक प रयोजना है, इस लए वषय-वस्तु आपक अपनी होगी। नीचे काय-पद्ध त और एक नमूना आरंभ दया गया है जसे आप
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अपने अनुसार ढाल सकते ह।
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चरण 1 — प्रश्न तय क जए। “मेरे प रवार का इ तहास” बहुत बड़ा वषय है। कोई उत्तर दे ने योग्य प्रश्न चु नए: चार पीढ़ पहले मेरा
प रवार कहाँ रहता था और वहाँ से क्य चला? या गाँव के लए: मेरा गाँव कतना पुराना है और पछले सौ वष म उसम क्या बदला?
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m .
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चरण 2 — लखना आरंभ करने से पहले ोत क सूची बनाइए।
प्रकार प रवार के इ तहास के लए गाँव के इ तहास के लए
मौ खक प रवार के सबसे बुजग सदस्य से साक्षात्कार बुजग, पुजारी, नाई, वद्यालय के शक्षक, गाँव क स्थापना से जुड़े
लोकगीत एवं कवदं तयाँ
ल खत प्रमाण-पत्र, पहचान-पत्र, भू म के काग़ज़, पत्र, पंचायत के अ भलेख, भू-राजस्व रकॉड, वद्यालय एवं मं दर के
डाय रयाँ, वद्यालय र जस्टर रकॉड, जनगणना, पुराने समाचार-पत्र
भौ तक पुराने बतन, आभूषण, औज़ार, सक्के, पुराना घर पुराने कुएँ, बाव ड़याँ, मं दर, म स्जद, क़ला या ार, मील के पत्थर,
स्मारक- शलाएँ, ट ले
दृश्य छाया चत्र, चत्र पुराने छाया चत्र, सवक्षण मान चत्र, चत्रकारी
चरण 3 — साक्षात्कार ठ क ढं ग से ली जए। समय तय क जए। कॉपी और (अनुम त लेकर) रकॉडर साथ र खए। हाँ/नह वाले
नह , खुले प्रश्न पू छए (“जब आप दस वष के थे तब गाँव कैसा दखता था?”)। साक्षात्कार क त थ और व्य क्त का नाम अवश्य
ल खए — वही आपका ोत-संदभ है।
चरण 4 — मलान क जए। जहाँ दो ोत भन्न बात कह, वहाँ चुपचाप एक चुन लेने के बजाय दोन ल खए।
चरण 5 — रपोट ल खए — (1) सं क्षप्त भू मका क आप क्या जानना चाहते थे, (2) कहानी कालक्रम म, साथ म समय-रेखा,
(3) भौ तक ोत के छाया चत्र या रेखा चत्र, (4) उपयोग कए गए सभी ोत क सूची, तथा (5) एक ईमानदार अनु े द क आप
क्या नह जान पाए।
नमूना आरंभ: “मेरे प रवार के सबसे पुराने स्मरणीय पूवज श्री भोला राम ह, जनका जन्म मेरी परदाद के अनुसार
'बड़े अकाल के समय' हुआ था। गाँव के भू-राजस्व अ भलेख म 1897 म भोला राम नाम के व्य क्त के पास भू म
दज है। य द दोन एक ही व्य क्त ह, तो हमारा प रवार कम से कम पाँच पी ढ़य से इसी गाँव म है। ोत: श्रीमती
सीता दे वी से साक्षात्कार (12 जुलाई 2026); गाँव का भू-अ भलेख, 1897; 1954 का एक छाया चत्र।”
शक्षक का मागदशन क्य माँगा गया है: ऐसी प रयोजना दूसर क स्मृ तय को छू ती है और कभी-कभी दुखद
स्मृ तय को भी। शक्षक आपको प्रश्न आदरपूवक रखने, रकॉड करने से पहले अनुम त लेने, तथा यह तय करने म
सहायता कर सकते ह क कक्षा म पढ़ जाने वाली रपोट म क्या रखा जाए।
प्र.2 क्या हम इ तहासकार क तुलना जासूस से कर सकते ह? अपने उत्तर के समथन म कारण द जए।
हाँ — यह तुलना अ है, और अध्याय स्वयं इसके नकट पहुँचता है जब वह प्रत्येक ोत को “ चत्र-खंड पहेली का एक
हस्सा” कहता है। परंतु यह तुलना दो महत्वपूण स्थान पर टू टती भी है, और पूरा उत्तर दोन बात कहता है।
दोन म समानता कहाँ है —
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जासूस … इ तहासकार …
एक प्रश्न से आरंभ करता है — यह कसने कया? एक प्रश्न से आरंभ करता है — यहाँ क्या हुआ और क्य ?
साक्ष्य जुटाता है: उँ ग लय के नशान, वस्तुए,ँ दस्तावेज़, ोत जुटाता है: शलालेख, सक्के, स्मारक, ग्रंथ, लोक सा हत्य
गवाह
एक साक्ष्य से अ धक साक्ष्य को वरीयता दे ता है अ धक से अ धक ोत से जानकारी संक लत करता है
दे खता है क गवाह आपस म मेल खाते ह या नह , और दे खता है क ोत एक-दूसरे क पु ष्ट करते ह या वरोध, और तय करता है क
कौन ग़लत या झूठा हो सकता है कस पर अ धक वश्वास कया जाए
वज्ञान का उपयोग करता है — फ़ॉर सक, रसायन, वज्ञान का उपयोग करता है — प्राचीन जलवायु, रासाय नक अध्ययन,
डी.एन.ए. आनुवां शक
अधूरे चह्न से घटनाओं का क्रम पुन न मत करता है अध्ययन कए जा रहे कालखंड के इ तहास का पुन नमाण करता है, यह जानते
हुए क कुछ टु कड़े गायब ह
तुलना कहाँ टू टती है —
जासूस जी वत गवाह से पूछ सकता है, इ तहासकार नह । कसी शलालेख को समझाने के लए कसी को वापस नह
बुलाया जा सकता। जो ोत ह, बस वही सदा रहगे।
जासूस प्राय: एक अं तम उत्तर तक पहुँचता है, इ तहासकार प्राय: नह । इ तहास म मामला शायद ही कभी बंद होता है।
नए उत्खनन, नए पाठ और नई वैज्ञा नक व धयाँ कसी भी प्रश्न को फर खोल सकती ह — और अध्याय ईमानदारी से कहता है
क “पहेली के कुछ हस्से गायब रह सकते ह”।
जासूस अपराधी खोजता है, इ तहासकार व्याख्या। उ े श्य कसी को दोषी ठहराना नह , यह समझना है क लोग कैसे जीते
थे और चीज़ क्य बदल ।
एक पंिक्त में तक संगत उत्तर:
हाँ, क्योंिक दोनों अधूरे साक्ष्य से तक संगत पुन िन म ण तक पहुँच ते है ं और हर ोत का िमलान करते है ं —
परंत ु इितहासकार का 'मुक़ दमा' कभी अंितम रूप से बंद नही ं होता, और पूछने के िलए कोई शेष नही ं बचता।
प्र.3 त थय के साथ कुछ अभ्यास — (i) समय-रेखा पर नम्न ल खत त थय को कालक्रमानुसार लगाइए — 323
सा.सं., 323 सा.सं.पू., 100 सा.सं., 100 सा.सं.पू., 1900 सा.सं.पू., 1090 सा.सं., 2024 सा.सं.। (ii) य द स ाट
चंद्रगुप्त का जन्म 320 सा.सं.पू. म हुआ तो बताइए उनका संबंध कस शताब्द से था? उनका जन्म बुद्ध के जन्म
से कतने वष प ात हुआ? (iii) झाँसी क रानी का जन्म 1828 सा.सं. म हुआ। उनका संबंध कस शताब्द से
है? उनका जन्म भारत क स्वतंत्रता से कतने वष पूव हुआ? (iv) '12,000 वष पूव' को त थ के रूप म बद लए।
(i) सात त थयाँ कालक्रमानुसार। ध्यान र खए क सा.सं.पू. म बड़ी संख्या पहले क त थ है, और सा.सं.पू. सदा सा.सं. से पहले
आता है।
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1900 सा.सं.पू. → 323 सा.सं.पू. → 100 सा.सं.पू. → 100 सा.सं. → 323 सा.सं. → 1090 सा.सं. → 2024
सा.सं.
1 सा.सं.पू. | 1 सा.सं.
1900 सा.सं.पू. 100 सा.सं.पू. 323 सा.सं. 2024 सा.सं.
323 सा.सं.पू. 100 सा.सं. 1090 सा.सं.
← सा.सं.पू. सा.सं. →
1 2 3 4 5 6 7
सात त थयाँ एक ही मापानुसार रेखा पर (बाएँ 1900 सा.सं.पू., दाएँ 2024 सा.सं.)। बीच क चार त थयाँ पास-पास ह क्य क 323
सा.सं.पू. और 323 सा.सं. के बीच केवल 645 वष ह, जब क 1900 सा.सं.पू. से 323 सा.सं.पू. तक 1,577 वष ह।
इस प्रश्न क चाल: 323 सा.सं.पू. और 323 सा.सं. दे खने म एक ही संख्या ह, परंतु एक बदलाव- बदु से तीन
शताब्द से अ धक पहले है और दूसरा तीन शताब्द से अ धक बाद — दोन म 323 + 323 – 1 = 645 वष का
अंतर है। यही चाल 100 सा.सं.पू. और 100 सा.सं. म भी है, जनम 100 + 100 – 1 = 199 वष का अंतर है।
(ii) स ाट चंद्रगुप्त, जन्म 320 सा.सं.पू.
शताब्दी: सा.सं.पू. की शतािब्दयाँ 1 सा.सं.पू. से पीछे की ओर िगनी जाती है।
ं
पहली शताब्दी = 100–1 सा.सं.पू. • दू सरी = 200–101 • तीसरी = 300–201 • चौथी = 400–301
सा.सं.पू.
320, 400 और 301 के बीच है → उनका संबंध चौथी शताब्दी सा.सं.पू. से था
बुद्ध के जन्म (560 सा.सं.पू.) से िकतने वष पश्चात : दोनों ितिथयाँ सा.सं.पू. है,ं इसिलए के वल घटाइए।
= 560 – 320
= 240 वष पश्चात
दोन संस्करण के वषय म: इस पुस्तक के अंग्रेज़ी संस्करण म यह त थ 320 सा.सं. (320 CE) छपी है,
सा.सं.पू. नह । ऐ तहा सक रूप से दोन संभव ह — चंद्रगुप्त मौय ने लगभग 321 सा.सं.पू. म मौय साम्राज्य क
न व रखी, जब क चंद्रगुप्त प्रथम ने लगभग 320 सा.सं. म गुप्त शासन आरंभ कया। य द आपके शक्षक सा.सं.
वाला पाठ ल, तो उत्तर ह गे: चौथी शताब्द सा.सं. (301–400 सा.सं.), तथा 560 + 320 – 1 = 879 वष बुद्ध के
जन्म के प ात (एक त थ सा.सं.पू. और एक सा.सं., इस लए जोड़कर 1 घटाइए)।
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(iii) झाँसी क रानी, जन्म 1828 सा.सं.
शताब्दी: 19वी ं शताब्दी सा.सं. = 1801 – 1900
1828 इसी में आता है → उनका संबंध 19वी ं शताब्दी सा.सं. से है
भारत की स्वतं त्रता (1947 सा.सं.) से िकतने वष पूव: दोनों ितिथयाँ सा.सं. है,ं इसिलए के वल घटाइए।
= 1947 – 1828
= 119 वष पूव
क्या आप जानते ह? झाँसी क रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 1828 म हुआ और 1858 म वे लड़ती हुई वीरग त को
प्राप्त हुईं। 1857 म जब वद्रोह आरंभ हुआ, वे 29 वष क थ — 1857 – 1828 = 29।
(iv) '12,000 वष पूव' को त थ म बदलना।
मान लीिजए ितिथ Y सा.सं.पू. है। अध्याय के िनयम से:
Y + (वतमान वष) – 1 = 12,000
पुस्तक के अपने वतमान वष 2024 सा.सं. के अनुसार:
Y = 12,000 – 2024 + 1 = 12,000 – 2023 = 9977 सा.सं.पू.
2026 सा.सं. लेने पर:
Y = 12,000 – 2026 + 1 = 9975 सा.सं.पू.
चूँिक '12,000 वष पूव' स्वयं एक मोटा आँक ड़ ा है, उिचत उत्तर है लगभग 10,000 सा.सं.पू.
जाँच: 9977 सा.सं.पू. से 1 सा.सं.पू. तक 9,976 वष; 1 सा.सं.पू. से 2024 सा.सं. तक 2,024 वष; 9,976 + 2,024 = 12,000
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पुस्तक क एक छोट असंग त, जसे दे ख लेना अ
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ा है: पृष्ठ 71 पर लखा है क हम युग लगभग 12,000
m a s emयुग का अंत”
co.पू. पर अं कत है — जो 12,000 + 2024 – 1 ≈ 14,000 वष पूव होताagहैl। दोन म लगभग दो
वष पूव तक रहा, अथात् लगभग 10,000 सा.सं.पू. तक। परंतु पृष्ठ 63 के चत्र 4.3 म “अं तम हम
.
emका अंतर है। वैज्ञा नक जो सीमा बताते ह उसम दोन आ जाते ह, इस लए मोटे आँकड़े के रूप म कोई
12,000 सा.सं
हज़ारsवष
a
gl नह — परंतु यह अ याद दलाता है क त थ 'वष पूव' म लखी है या 'सा.सं.पू.' म, यह अवश्य दे खए।
aग़लत
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दोन एक बात नह ह।
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प्र.4
a
कसी नकटतम संग्रहालय के भ्रमण क योजना बनाइए। संग्रहालय क प्रदश नय के वषय म पहले से कुछ
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जानकारी जुटा ली जए। इस भ्रमण के दौरान टप्प णयाँ तैयार क जए। भ्रमण के प ात एक सं क्षप्त रपोट
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ल खए और उसम भ्रमण से जुड़ी स्मृ तय एवं रोचक बात या घटनाओं को रेखां कत क जए।
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m .co a g
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a आभूषण संर क्षत रहते ह जो हम अपना इ तहास समझने म सहायता करते ह। यह क्रयाकलाप उसी बात को एक दन के काम म
अध्याय रा ीय संग्रहालय, नई दल्ली के छाया चत्र से आरंभ होता है और कहता है क ऐसे संग्रहालय म मू तयाँ, सक्के एवं
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बदल दे ता है। इसे तीन भाग म क जए।
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भाग 1 — भ्रमण से पहले (पूव-जानकारी)
a
gग्रlहालय ह। अ धकांश राज्य क राजधानी म राज्य संग्रहालय है; अनेक ज़ल म
पता क जए क आपके पास कौन-से सं
a
भारतीय पुरातत्व सवक्षण का स्थल-संग्रहालय, वश्व वद्यालय संग्रहालय, रेल या वस्त्र संग्रहालय, अथवा कोई स्मारक-भवन है।
संग्रहालय क द घाओं क सूची दे खए और ध्यान से दे खने के लए दो चु नए। सब कुछ दे ख लेने क को शश सबसे आम भूल
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है।
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खुलने के दन, समय, टकट, छाया चत्र लेने क अनुम त तथा वद्यालय-समूह के लए पूव-अनुम त क जाँच क जए।
a s em तीन प्रश्न पहले से ल खए — जैसे: “यहाँ सबसे प्राचीन वस्तु कौन-सी है और उसक आयु कैसे जानी गई?”
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ag भाग 2 — भ्रमण के दौरान ( टप्प णयाँ)
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कॉपी म स्तंभ क्या लख
नाम a e m
एवंsद घा — लेबल से हूबहू उता रए
वस्तु
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सामग्री पत्थर, मृण्मू त, कांस्य, स्वण, ताड़पत्र, वस्त्र …
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त थ एवं स्थान जैसा लेबल पर दया हो, जैसे “सारनाथ, तीसरी शताब्द सा.सं.पू.”
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अपने शब्द म दो पं क्तय का ववरण
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agl ोत का कौन-सा वग पुराता त्वक / सा ह त्यक / मौ खक / कलात्मक (पृष्ठ 67)
c
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मेरा प्रश्न एक बात जो लेबल ने नह बताई
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कसी एक वस्तु का रेखा चत्र भी बनाइए। चत्र बनाने म आँख छाया चत्र लेने क तुलना म कह अ धक ध्यान से दे खती है।
ag— लगभग एक पृष्ठ, चार छोटे भाग म: कहाँ और कब गए; क्या दे खा (आपक चुनी दो
भाग 3 — भ्रमण के बाद ( रपोट)
m
द घाएँ); क्या अप्रत्या शत, रोचक या आनंददायक लगा; और अब क्या जानना शेष है।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 4 इ तहास क समय-रेखा एवं उसके ोत AglaSem · NCERT Solutions
नमूना अनु े द: “सबसे अप्रत्या शत बात यह थी क हड़प्पा क मुहर कतनी छोट ह — पाठ्यपुस्तक म बड़ी छपी
होने से म उन्ह हथेली जतना समझता था, पर वे डाक- टकट के आकार क ह। सबसे आनंददायक वाद्ययंत्र क द घा
रही, जहाँ हर वाद्य क रकॉ डग बजती थी। मेरा अनुत्त रत प्रश्न यह है क संग्रहालय कैसे तय करता है क कौन-सी
वस्तुएँ प्रद शत ह — मागदशक ने बताया क दसव हस्से से भी कम वस्तुएँ प्रद शत ह।”
संग्रहालय-भ्रमण इस अध्याय का अंग क्य है: जन सक्क , शलालेख , मू तय , उपकरण , मृदभांड और
पांडु ल पय के बारे म आपने पढ़ा है, वे सब एक बस-यात्रा दूर काँच क अलमा रय म रखे ह। लेबल स हत एक
असली वस्तु दे ख लेना 'इ तहास के ोत' क धारणा को पन्ने भर के ववरण से कह अ धक स्पष्ट कर दे ता है।
प्र.5 अपने वद्यालय म कसी पुरातत्व वज्ञानी अथवा इ तहासकार को आमं त्रत क जए और उनसे ानीय इ तहास
एवं उसे जानना क्य महत्वपूण है, इस वषय म व्याख्यान दे ने का आग्रह क जए।
यह इ तहास के साथ-साथ आयोजन का भी काम है। कक्षा इसे इस प्रकार पूरा कर सकती है।
चरण 1 — उपयुक्त व्य क्त खो जए। इसी क्रम म प्रयास क जए —
नकटतम महा वद्यालय या वश्व वद्यालय का इ तहास/पुरातत्व वभाग।
भारतीय पुरातत्व सवक्षण का मंडल कायालय, अथवा पास का कोई संर क्षत स्मारक या स्थल-संग्रहालय।
राज्य पुरातत्व एवं संग्रहालय नदे शालय, या स्थानीय संग्रहालय के अध्यक्ष/क्यूरेटर।
कोई स्थानीय इ तहासकार, लेखक या शक्षक जन्ह ने ज़ले पर लखा हो — नगर पुस्तकालय या ज़ला गजे टयर से उनके
नाम मल जाएँगे।
चरण 2 — व धवत आमंत्रण द जए। कक्षा क ओर से एक सं क्षप्त पत्र, शक्षक के हस्ताक्षर स हत, जसम त थ, समय, कक्षा
का स्तर, वां छत अव ध (30–40 मनट पयाप्त है) और वषय एक पं क्त म हो: “हमारे क्षेत्र का इ तहास और उसे जानना क्य
महत्वपूण है।”
चरण 3 — प्रश्न पहले से तैयार क जए। प्रत्येक वद्याथ एक प्रश्न लाए। कुछ अ े प्रश्न —
प्रश्न यह अ ा प्रश्न क्य है
हमारे ज़ले का सबसे प्राचीन ज्ञात स्थल कौन-सा है और उसका पता कैसे अध्याय के उत्खनन वाले वचार को एक वास्त वक स्थानीय
चला? स्थान से जोड़ता है
हमारे क्षेत्र के लए आप कौन-से ोत उपयोग करते ह — शलालेख, पृष्ठ 67 के चार वग का सीधा उपयोग
सक्के, मौ खक परंपराएँ?
क्या हाल म मली कसी वस्तु ने हमारे क्षेत्र के बारे म पुरानी मान्यता बदली दखाता है क नए साक्ष्य से इ तहास संशो धत होता है
है?
उत्खनन के बाद कसी वस्तु का क्या होता है? संरक्षण, संग्रहालय एवं अ भलेखीकरण क बात सामने लाता है
स्थानीय धरोहर बचाने के लए वद्याथ क्या कर सकते ह? व्याख्यान को काय म बदल दे ता है
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चरण 4 — बाद म। कक्षा क रपोट ल खए, धन्यवाद-पत्र भे जए, और अपने क्षेत्र के अतीत के बारे म जो सीखा उसका एक
प्रदशन-बोड बनाइए।
“उसे जानना क्य महत्वपूण है” प्रश्न का अंग क्य है: स्थानीय इ तहास अतीत का वह हस्सा है जहाँ तक आप
पैदल जा सकते ह। यह जान लेना क नगर के कनारे का ट ला एक अ-उत्ख नत स्थल है, या बस-अ े के पीछे क
बावड़ी चार सौ वष पुरानी है, आपके और आपके पड़ो सय के व्यवहार को बदल दे ता है। जस धरोहर के बारे म कोई
नह जानता, वही सबसे पहले मटा द जाती है।
य द कोई वशेषज्ञ उपलब्ध न हो: यह क्रयाकलाप कसी जानकार बुजग, कसी मं दर या म स्जद के दे खभाल
करने वाले, अथवा कसी सेवा नवृत्त शक्षक के साथ भी उतना ही अ ा चलता है। बातचीत रकॉड क जए, वक्ता
का नाम एवं त थ ल खए — आपने अपना एक मौ खक ोत तैयार कर लया।
अध्याय — एक नज़र म
इ तहास मानव के अतीत का अध्ययन है। इसे उजागर करने म अनेक वशेषज्ञ लगे रहते ह — भू- वज्ञानी (पृथ्वी के
भौ तक स्वरूप), जीवाश्म वज्ञानी (जीवाश्म), मानव वज्ञानी (मानव समाज एवं संस्कृ त) तथा पुरातत्व वज्ञानी (मानव,
पौध एवं पशुओं ारा छोड़े गए अवशेष) — चत्र 4.2। मानव (होमो से पयंस) लगभग 3,00,000 वष से ही पृथ्वी पर ह, जो
पृथ्वी के 4.54 अरब वष के इ तहास का एक अत्यंत छोटा-सा अंश है ( चत्र 4.1)।
समय क गणना युग म होती है। आज वश्व-भर म ग्रेगो रयन कैलडर ( त थपत्र) प्रयुक्त होता है; साथ ही त्योहार एवं
मांग लक काय के लए हदू, मु स्लम, यहूद , चीनी आ द त थपत्र का भी उपयोग होता है। ईसा मसीह के जन्म क पारंप रक
त थ के बाद के वष को पहले ए.डी. कहा जाता था, अब सी.ई. — सामान्य संवत (सा.सं.) कहते ह; उससे पूव के वष को
पहले बी.सी., अब बी.सी.ई. — सामान्य संवत पूव (सा.सं.पू.) कहते ह। भारत 1947 सा.सं. म स्वतंत्र हुआ; बुद्ध का जन्म
लगभग 560 सा.सं.पू. हुआ।
'शून्य वष' नह होता। 1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद 1 सा.सं. आता है। अत: कसी सा.सं.पू. त थ और कसी सा.सं. त थ के
बीच के वष नकालने के लए दोन को जोड़कर योग म से 1 घटाते ह। 2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. तक 2 + 2 – 1 = 3 वष; 560
सा.सं.पू. म जन्मे बुद्ध का जन्म 2024 सा.सं. से 560 + 2024 – 1 = 2,583 वष पूव हुआ।
लंबी अव धय के अपने नाम ह। दशक = 10 वष, शताब्द = 100 वष, सहस्त्राब्द = 1,000 वष। सा.सं. क शता ब्दयाँ 1
सा.सं. से गनी जाती ह — हम 21व शताब्द सा.सं. (2001–2100) एवं तीसरी सहस्त्राब्द सा.सं. (2001–3000) म
ह। सा.सं.पू. क शता ब्दयाँ एवं सहस्त्रा ब्दयाँ 1 सा.सं.पू. से पीछे क ओर गनी जाती ह — तीसरी शताब्द सा.सं.पू. = 300–
201 सा.सं.पू., पहली सहस्त्राब्द सा.सं.पू. = 1000 सा.सं.पू.–1 सा.सं.पू.। भारत का अपना पंचांग सूय एवं चंद्रमा क
स्थ त पर आधा रत त थपत्र है।
इ तहास के ोत चार वग म बँटे ह — पुराता त्वक ( शलालेख, ताम्रपत्र, सक्के, स्मारक, ट ले, उत्खनन से प्राप्त उपकरण,
मृदभांड, शवाधान), सा ह त्यक (वेद एवं इ तहास, क वता एवं नाटक, ऐ तहा सक लेख, वैज्ञा नक लेख, वदे शी यात्रा वृत्तांत
एवं ऐ तहा सक वृत्तांत), मौ खक (लोक सा हत्य, वंशावली) तथा कलात्मक ( चत्रकला, मू तकला, प का)। अब वज्ञान भी
जुड़ गया है — प्राचीन जलवायु का अध्ययन, रासाय नक अध्ययन एवं आनुवां शक ; आधु नक इ तहास के लए समाचार-पत्र
एवं इलेक् ॉ नक मी डया। इ तहासकार ोत को चत्र-खंड पहेली ( जग्सॉ) के टु कड़ क तरह मलाकर दे खते ह — और
कुछ टु कड़े सदै व गायब रह जाते ह।
आ दमानव टो लय म, अस्थायी श वर , शैलाश्रय एवं गुफाओं म रहते थे; वे आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे, अ ग्न का
उपयोग करते थे, पत्थर क कुल्हा ड़याँ, ब्लेड्स एवं नुक ले तीर बनाते थे, सैकड़ गुफाओं म शैल- चत्र बनाते थे और मनक
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तथा पशुओं के दाँत के आभूषण बनाते थे। अं तम हम युग लगभग 1,00,000 वष पूव से 12,000 वष पूव तक रहा। इसके
बाद लोग ने कृ ष एवं पशुओं का घरेलूकरण आरंभ कया, जल एवं उपजाऊ मृदा के कारण न दय के कनारे बसे, सरदार/
मु खया चुने, भू म पर सामू हक कृ ष क , तथा पल्ली से गाँव और फर छोटे कस्ब तक बढ़े — मृदभांड एवं धातु (पहले
तांबा, फर लोहा) के साथ।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म पु स्तक से उदाहरण
कहाँ
इ तहास मानव के अतीत का अध्ययन हा शया, पृष्ठ ई.एच. कार — “अतीत एवं वतमान के मध्य
60 एक अनवरत संवाद”
जीवाश्म ु ं के पदिचह्नों या पौधों के अवशेष िचह्न जो म ृद ा
जीव-जंतओ हा शया, पृष्ठ जीवाश्म वज्ञानी इनका अध्ययन करते ह
अथवा िशलाओं की परतों के बीच संर ि त पाए जाते है ं 61 ( चत्र 4.2.2)
पुरातत्व वज्ञानी वह व्यिक्त जो मानव, पौधों एवं पशुओ ं ारा छोड़े गए पृष्ठ 61, चत्र उपकरण, घड़े, मनके, मू तयाँ, खलौने,
अवशेषों का उत्खनन करके अतीत का अध्ययन करता है 4.2.4 ह याँ, जले हुए अनाज, ईंट
युग समय का एक िनिश्चत कालखंड हा शया, पृष्ठ सामान्य संवत (सा.सं.), जो 1 सा.सं. से
61 आरंभ होता है
ग्रेगो रयन कैलडर िवश्व-भर में पयुक्त ितिथपत्र; 365 िदन िमलकर बारह हा शया, पृष्ठ 1800 एवं 1900 लीप वष नह ; 2000
माह, पत्येक चार वष में एक अिधवष 62 लीप वष है
सा.सं. — सामान्य ईसा मसीह के जन्म की पारंपिरक ितिथ से आगे िगने गए पृष्ठ 62 1947 सा.सं. — भारत क स्वतंत्रता का वष
संवत वष; पहले 'ए.डी.'
सा.सं.पू. — उसी िबंद ु से उलटे (अवरोही) क्रम में िगने गए वष; पहले पृष्ठ 62 560 सा.सं.पू. — गौतम बुद्ध के जन्म क
सामान्य संवत पूव 'बी.सी.' अनुमा नत त थ
समय-रेखा वह उपकरण जो िकसी िवशेष अविध की ितिथयों एवं पृष्ठ 62–64, चत्र 4.3 — 3,00,000 सा.सं.पू. से 2000
घटनाओं का अनुक्रम िदखाता है चत्र 4.3 सा.सं. तक; बदुकृत भाग छोड़ा गया
कालखंड है
शताब्द / िकसी भी 100 वष ं का कालखंड / िकसी भी 1,000 वष ं ध्यान रख, पृष्ठ 21व शताब्द सा.सं. = 2001–2100;
सहस्त्राब्द का कालखंड 64–65 तीसरी सहस्त्राब्द सा.सं. = 2001–3000
पंचांग तािलकाओं की एक पुस्तक िजसमें पत्येक माह के िदनों ध्यान रख, पृष्ठ सूयग्रहण, चंद्रग्रहण, सूय दय-सूयास्त,
के साथ खगोलीय आँक ड़े िदए जाते है ं 65 त्योहार क त थयाँ, मौसम पूवानुमान
इ तहास के ोत कोई स्थान, व्यिक्त, ले ख अथवा वस्तु िजसके माध्यम से हा शया, पृष्ठ शलालेख, सक्के, स्मारक, पांडु ल प, लोक
हम अतीत की िकसी घटना अथवा कालखंड की 65 सा हत्य
जानकारी एकत्र करते है ं
इ तहासकार ऐसा व्यिक्त जो अतीत का अध्ययन करता है एवं उसके हा शया, पृष्ठ अ धक से अ धक ोत जुटाकर तय करता है
िवषय में िलखता है 68 क कस पर अ धक वश्वास कया जाए
आनुवां शक जीव िव ान की वह शाखा जो अध्ययन करती है िक हा शया, पृष्ठ प्राचीन मानव क आनुवां शक के अध्ययन
िवशेषताएँ एक पीढ़ ी से दू स री पीढ़ ी तक कै से पहच
ु ँ ती है ं 68 ने नया दृ ष्टकोण दया
मरणोपरांत जीवन म ृत्यु के बाद जीवन हा शया, पृष्ठ आ दमानव क संभवत: इस वषय म कुछ
71 धारणाएँ थ
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शब्द अथ अध्याय म पु स्तक से उदाहरण
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73 वस्तुओं का आदान-प्रदान करती थ
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