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NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय

AglaSem पर कक्षा 9 गणित अध्याय 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय (गणित मंजरी) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Maths Chapter 7 the Mathematics of Maybe Introduction to Probability (Ganita Manjari), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय - Page 1 of 45

About NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय

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NCERT Solutions Class 9 Maths Chapter 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 7: संभावनाओं का ग णत —
प्रा यकता का प रचय

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत मंजरी

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

155 – 173 12 35 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 44 pages

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · ग णत · ग णत मं ज री

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: संभावनाओं का ग णत —
प्रा यकता का प रचय
अध्याय 7 प्र त दन प्रयोग होने वाले शब्द — असंभव, संभव, न त — को 0 और 1 के बीच क एक संख्या म बदलता है। इस संख्या को वस्तु नष्ठ
रूप से ात करने क दो व धयाँ साथ-साथ वक सत क गई ह — प्रायो गक प्रा यकता, जो वास्तव म संग्र हत आँकड़ से पढ़ जाती है, और
सैद्धां तक प्रा यकता, जो समप्रा यक प रणाम क सूची पर तक करके नकाली जाती है। अध्याय क शेष सभी अवधारणाएँ — प्र तदश सम ष्ट,
घटना, वृक्ष आरेख — इसी सूची को सही बनाने के लए ह, क्य क गनती का सूत्र उतना ही अ ा है जतनी अ वह सूची है जसे वह गनता है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ग णत मंजरी (कक्षा 9) 155 – 173

खं ड प्रश्न

12 35

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 155
अनुभाग 7.1 प्रा यकता क्या है?

प्र.1 क्या हम इन प रणाम को 100 प्र तशत न तता के साथ बता सकते ह?

नह । तीन उदाहरण — आज वषा, कल का हॉक प रणाम और मा सक लक ॉ — यादृ क घटनाएँ ह। हम सभी संभा वत
प रणाम क सूची ात है, परंतु उनम से कौन-सा घ टत होगा, यह ात नह है।

ऐसा क्य होता है: सूची जानना और उसम से एक वशेष प्र व ष्ट जानना एक बात नह है। लक ॉ म हम न त
रूप से कह सकते ह क ठ क एक पच नकलेगी और वह बक्से क ही प चय म से होगी। जो हम कतना भी
सोचकर नह बता सकते, वह यह है क पच कसक होगी। "क्या हो सकता है" और "क्या होगा" के बीच का यही
अंतर संभावना कहलाता है।

हाँ, अपने वश्वास का स्तर हम अवश्य बता सकते ह। पुस्तक इसके दो तरीके दे ती है —

शब्द म — असंभव, कम संभव, समप्रा यक, अ धक संभव, न त;
0 से 1 तक के पैमाने पर एक संख्या के रूप म, जसे शेष अध्याय वक सत करता है।

ध्यान द जए क एक ही आकाश दे खकर दो मत्र अलग-अलग उत्तर दे सकते ह — "धूप तेज है, वषा नह होगी" अथवा "बहुत गम
है, वषा हो सकती है"। दोन एक ही प्रमाण को अलग ढं ग से पढ़ रहे ह। यह व्य क्त नष्ठ प्रा यकता है, और अनुभाग 7.2 इसी के
ान पर ऐसी व ध रखता है जसे कोई भी जाँच सके।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

स्वयं जाँ चए: प्रत्येक घटना यादृ क नह होती। "आगामी सोमवार र ववार के प ात आएगा" — यह 100
प्र तशत न तता से कहा जा सकता है, क्य क यह सप्ताह क प रभाषा से नकलता है, संभावना से नह ।
न तता संभव है — बस यादृ क घटनाओं के लए नह ।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 156
अनुभाग 7.1.1 यादृ कता क्या है?

सो चए और वचार क जए

प्र.1 ऐसी अ न तता कभी-कभी उपयोगी हो सकती है! उदाहरण के लए, एक क्रकेट प्र तयो गता म खला ड़य का
कौन-सा दल पहले बल्लेबाजी करेगा, यह नणय करने के लए सक्का उछाला जाना एक न्यायसंगत व ध है।
क्या आप व्याख्या कर सकते ह क ऐसा क्य है?

क्य क सक्का दोन कप्तान को ठ क समान अवसर दे ता है और कसी को भी प रणाम पर प्रभाव डालने का कोई साधन नह दे ता।

िसक्का िनष्पक्ष है ⇒ P(िचत) = P(पट) = 1/2

कप्तान A के टॉस जीतने की पाियकता = 1/2

कप्तान B के टॉस जीतने की पाियकता = 1/2

ऐसा क्य होता है: कोई व ध न्यायसंगत तभी है जब वह समान भी हो और अ नयंत्रणीय भी। सक्का दोन शत पूरी
करता है। वह सम मतीय है, अतः उसके एक ओर अ धक बार गरने का कोई भौ तक कारण नह है — पुस्तक इसी
गुण को नष्पक्ष होना कहती है। और यादृ क उछाल का अथ है क सक्का बना कसी हस्तक्षेप के स्वतंत्रतापूवक
गरता है, अतः कौशल, श क्त, व रष्ठता या घरेलू मैदान का लाभ प रणाम को नह बदल सकता। कौन 'कॉल' करेगा,
इससे भी अंतर नह पड़ता — ' चत' कहने और 'पट' कहने, दोन क प्रा यकता 1/2 ही है।

यहाँ अ न तता ही सबसे बड़ा गुण है। य द प रणाम का पूवानुमान लगाया या उसे तय कया जा सकता, तो प्रबल पक्ष उसे तय कर
लेता। चूँ क कोई ऐसा नह कर सकता, इस लए दोन दल प रणाम को घ टत होने से पहले ही स्वीकार कर लेते ह।

क्या आप जानते ह? यही तक क्रकेट के बाहर भी काम आता है — चुनाव म बराबरी टू टने पर पच नकालना,
परीक्षा-कक्ष म यादृ क ान आवंटन, या वद्यालय-सभा के लए बक्से से एक पच नकालना। हर तम
न्यायसंगतता इसी से आती है क प्रत्येक प्र तभागी क प्रा यकता समान है, कसी क चतुराई से नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 157

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

अनुभाग 7.1.1 यादृ कता क्या है?

प्र.1 क्या आपने कभी सोचा है क ऐसा क्या है जो वषा जैसी घटना को यादृ क बनाता है?

वषा इस लए यादृ क है क्य क वह अनेक परस्पर जुड़े कारक पर नभर करती है — तापमान, आ ता, वायु प्रणाली और दबाव
— और इन कारक के प्र त इतनी संवेदनशील है क कोई भी मापन इतना पूण या सट क नह हो सकता क प्रश्न पहले से तय कर
दे ।

ऐसा क्य होता है: यहाँ "यादृ क" का अथ " बना कारण" नह है। वषा क प्रत्येक बूँद का भौ तक कारण होता
है। अथ यह है क कारण इतने अ धक और इतने सूक्ष्म संतुलन म ह क आज क वायु म एक अत्यंत छोटा अंतर —
जसे हम कभी माप ही नह सकते — कल का उत्तर बदल दे ता है। अतः उपकरण कतने भी अ े ह , वषा का ठ क
समय और ान पूण न तता से नह बताया जा सकता।

यही कारण है क "कल वषा होगी" वाक्य को पहले से 0 या 1 मान नह दया जा सकता। परंतु यह नरथक भी नह है — पछले
अ भलेख से हम गन सकते ह क आज जैसी प र तय के बाद कतनी बार वषा हुई, और वह सापे क्षक आवृ त्त प्रा यकता का
एक वास्त वक, जाँचने योग्य आकलन है।

संकेत: वषा क तुलना सक्के से क जए। सक्के के केवल दो प रणाम ह और उसम स्पष्ट सम म त है, अतः बना
कसी आँकड़े के P = 1/2 नकाला जा सकता है। वषा म ऐसी कोई सम म त नह है, इस लए उसक प्रा यकता
अ भलेख से मापी जानी चा हए, चत्र से तक करके नह । दोन यादृ क ह; सैद्धां तक व ध केवल एक पर लागू
होती है।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 157
अनुभाग 7.1.1 यादृ कता क्या है?

सो चए और वचार क जए

प्र.1 आप ₹1 का सक्का उछा लए और अपने मत्र से इसके प रणाम का अनुमान लगाने को क हए। क्या आप दे खते
ह क आपका मत्र चत या पट का अनुमान लगा सकता है परंतु न त रूप से प रणाम ात नह कर सकता है?
यही यादृ कता है! सभी संभा वत प रणाम ात होते ह परंतु प्रत्येक व शष्ट या व्य क्तगत प्रयास अप्रत्या शत
होता है।

हाँ — और ध्यान दे ने योग्य बात यह है क ान ठ क कहाँ जाकर रुक जाता है।

सक्का हाथ से छू टने से पहले ही आपके मत्र को पूरी प्र तदश सम ष्ट S = {H, T} ात है।
उसे यह भी ात है क प्रत्येक प रणाम क प्रा यकता 1/2 है।
परंतु इस वशेष उछाल म दोन म से कौन-सा प रणाम आएगा, यह वह नह जान सकता।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय
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ऐसा क्य होता है: प्रा यकता प्रयोग के वषय म कथन है, कसी एक परीक्षण के वषय म नह । P( चत) = 1/2

m a s emदोहराई जाए
co बार चत आएगा। एक अकेले परीक्षण म "आधा" जैसा कुछ होता ही aनहgl— या तो चत आएगा
कहने से इस उछाल का आधा पूवानुमान नह हो जाता; इसका अथ है क य द यह उछाल अनेक बार
.
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तो लगभग आधी

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या पट।

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एक उछाल पर अनुमान सही होने की पाियकता = 1/2
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20 उछालों में सही अनुमानों की अपेिक्षत संख्या ≈ 20 × 1/2 = 10
a
m
अथात आपका मत्र कतनी भी चतुराई से अनुमान लगाए, लगभग आधी बार ही सही होगा — और यही सबसे स्पष्ट प्रमाण है क
co
m.
सक्का वास्तव म यादृ क है। य द कोई अनुमान- नयम द घाव ध म आधे से अ धक बार सही होता, तो सक्का नष्पक्ष नह होता।

o m l a se
c ₹1 का सक्का 20 बार उछा लए और मत्र से हर बार पहले ही अनुमaानgकहलवाइए। सही अनुमान
यह क .जए:
m
aगseनए। अब अनुमान का नयम बद लए — सदा " चत", या एकांतर क्रम म चत, पट, चत, पट। सभी नयम का
agl प रणाम 20 म से 10 के आस-पास ही रहेगा। सक्के को मात नह द जा सकती।
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m .co agl
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प्रश्नावली 7.1 — पृष्ठ 159
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

अनुभाग 7.1.2 प्रा यकता का पैमाना

प्र.1 नम्न ल खत घटनाओं को एक पैमाने पर 0 (असंभव) से लेकर 1 ( न त) तक क्रमबद्ध क जए। प्रत्येक घटना
को असंभव, कम संभव, समप्रा यक, अ धक संभव और न त म वग कृत क जए। कारण बताइए क आपने
प्रत्येक घटना को इस वग म क्य रखा है। (i) आगामी सोमवार र ववार के प ात आएगा। (ii) मुंबई म जुलाई
महीने म बफबारी होगी। (iii) आज आपक कक्षा से एक हाथी गुजरेगा। (iv) कल आप अपने वद्यालय म कम-
से-कम एक मत्र का अ भवादन करगे।

घटना वग पैमाने कारण
पर
ान

(i) आगामी सोमवार न त P=1 यह यादृ क घटना है ही नह । दन का क्रम कैलडर से न त है, अतः
रिववार के पश्चात कोई दूसरा संभा वत प रणाम है ही नह ।
आएगा

(ii) मुंबई में जुल ाई में असंभव P=0 बफबारी के लए वायु का तापमान 0 °C या उससे कम होना चा हए। मुंबई
बफ बारी होगी तट य और उष्णक टबंधीय है; जुलाई वहाँ मानसून का महीना है और
तापमान लगभग 25–30 °C रहता है। अनुकूल प रणाम है ही नह ।

(iii) आज आपकी असंभव (या 0 के P≈0 कक्षा के दरवाजे हाथी के आकार के नह होते और नगर म हाथी खुले नह
कक्षा से एक हाथी इतना नकट क घूमते। हाँ, वन के कनारे बसे उस वद्यालय के लए, जहाँ पास से हा थय
गज
ु रे ग ा अंतर न पड़े) का ग लयारा गुजरता है, यह 'असंभव' नह ब ल्क 'अत्यंत कम संभव'
होगा।

(iv) कल आप कम- अ धक संभव P, 1 के आपके अनेक मत्र ह और आप प्र त दन उनका अ भवादन करते ह, अतः
से -कम एक िमत्र का िनकट इसका होना न होने क तुलना म कह अ धक संभव है। परंतु यह न त
अिभवादन करे ंग े नह है — कल अवकाश हो सकता है या आप अनुप त हो सकते ह।

(iv)
(ii), (iii) (i)

0 1/2 1
असंभव कम संभव समपाियक अिधक संभव िनिश्चत

चार घटनाएँ चत्र 7.1 वाले प्रा यकता पैमाने पर।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: यह पैमाना वही काय कर रहा है जो लंबाई के लए संख्यारेखा करती है। प्रत्येक घटना को 0 और
1 के बीच कह -न-कह आना ही है, और वह जतनी दाईं ओर होगी, हमारा वश्वास उतना ही अ धक होगा। ान
प्रमाण से तय होता है, राय से नह — (i) प रभाषा से, (ii) जलवायु के अ भलेख से, (iii) कक्षा क भौ तक बनावट
से, और (iv) आपके अपने प्र त दन के अनुभव से।

संकेत: 'असंभव' शब्द उन्ह घटनाओं के लए र खए जनका कोई अनुकूल प रणाम है ही नह — जहाँ P ठ क 0
है। जो घटनाएँ केवल दुलभ ह, जैसे वन के कनारे वाले वद्यालय म (iii), उनके लए 'अत्यंत कम संभव' क हए।
बहुत छोट प्रा यकता भी शून्य नह होती, और गणना आरंभ करते ही यह अंतर महत्त्वपूण हो जाता है।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 163
अनुभाग 7.2.3 प्रा यकता के माध्यम से सां ख्यक य आँकड़ का व ेषण

सो चए और वचार क जए

प्र.1 य द म 8 बार नरंतर पासा फकने पर सदै व 4 पाता ँ तो अगली बार 4 आने क प्रा यकता अभी भी केवल ≈
0.16 है (माना पासा नष्पक्ष है)। प्रा यकता आपको यह नह बताती क आगे क्या होगा, अ पतु द घाव ध म क्या
होगा, इसका अनुमान लगाती है।

यह कथन सही है — और इसे ठ क-ठ क लखना चा हए। नष्पक्ष पासे के लए अगला फक एक नया प्रयोग है जसक प्र तदश
सम ष्ट S = {1, 2, 3, 4, 5, 6} है, अतः

P(अगली बार 4 आना) = 1/6 = 0.1666… ≈ 0.167

(पुस्तक इसे ≈ 0.16 तक सिन्नकिटत करती है)

ऐसा क्य होता है: पासा अपने पछले आठ फक का कोई अ भलेख नह रखता। प्रत्येक फक एक स्वतंत्र घटना है,
अतः प्र तदश सम ष्ट और अनुकूल प रणाम क संख्या वही ह जो पहले फक के समय थ । ऐसी कोई क्रया व ध है
ही नह जससे पछला प रणाम घन के आकार को बदल सके।

यहाँ दो भन्न प्रश्न को मला दे ने क भूल होती है —

फकने से पहले: P(लगातार नौ बार 4) = (1/6)9 ≈ 0.0000001 — वास्तव म अत्यंत छोट संख्या।
आठ बार 4 आ जाने के बाद: वे आठ अब तथ्य ह, संभावनाएँ नह । केवल नौवाँ फक अ न त है और उसके लए P = 1/6
है।

दुलभ बात नौ क पूरी ंखला है, उसका अं तम फक नह । यह मान लेना क अब 4 आना 'कम संभव' हो गया है — अथवा उल्टा,
क पासा 'गरम' चल रहा है — पृष्ठ 164 वाला द्यूतकार का भ्रम है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

स्वयं जाँ चए: यहाँ एक उ चत शंका अवश्य छपी है, पर वह दूसरी है। लगातार आठ बार 4 आना नष्पक्ष पासे के
पक्ष म इतना कमजोर प्रमाण है क आप मान्यता पर ही संदेह करके यह जाँच सकते ह क पासा भा रत तो नह है।
यह प्रश्न पासे के वषय म है, नौव फक के वषय म नह । जब तक पासा नष्पक्ष है, उत्तर 1/6 ही रहेगा।

प्रश्नावली 7.2 — पृष्ठ 165–166
अनुभाग 7.2 प्रा यकता का वस्तु नष्ठ मापन

प्र.1 एक शक्षक व भन्न रंग क मठाइय के एक बड़े थैले को आपस म मलाती है और उसम से यादृ क रूप से
30 मठाइय के एक प्र तदश का चयन करती है। वह प्रत्येक रंग क मठाइय क गनती करती है, जनक संख्या
इस प्रकार है— 10 लाल मठाइयाँ | 8 हरी मठाइयाँ | 7 पीली मठाइयाँ | 5 नीली मठाइयाँ (i) प्र तदश से
यादृ क रूप से हरी मठाई नकालने क प्रा यकता क गणना क जए। (ii) य द बड़े थैले म कुल 600 मठाइयाँ
ह तो प्र तदश के प रणाम के आधार पर आकलन क जए क कतनी मठाइय के पीले रंग के होने क संभावना
है?

पहले प्र तदश क जाँच क जए — 10 + 8 + 7 + 5 = 30 मठाइयाँ ✓
(i) प्र तदश क प्रत्येक मठाई के नकलने क संभावना समान है, अतः हरी मठाइय को कुल के सापेक्ष ग नए।

P(हरी) = 8/30

= 4/15 ≈ 0.267 अथवा 26.7%

(ii) प्र तदश से पीली मठाइय का अनुपात ली जए और उसे पूरे थैले पर लगाइए।

P(पीली) = 7/30

600 में अपेिक्षत पीली िमठाइयाँ = 600 × 7/30

= 20 × 7

= 140 पीली िमठाइयाँ

ऐसा क्य होता है: यह सां ख्यक य प्रा यकता है — आकलन आँकड़ से आया है, सम म त से नह । रंग के अनुसार
मठाइयाँ समप्रा यक नह ह (थैले म हर रंग क समान संख्या हो, इसका कोई कारण नह ), अतः "चार रंग ह"
कहकर P(पीली) = 1/4 नह लखा जा सकता। समप्रा यक तो प्र तदश क 30 मठाइय म से एक का चयन है, और
यही 7/30 भन्न को वैध बनाता है। इसके बाद 600 तक बढ़ाने म यह मान लया गया है क प्र तदश पूरे थैले का
प्र त न धत्व करता है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: 140 एक आकलन है, गनती नह । 30 मठाइय का दूसरा प्र तदश 6 या 9 पीली मठाइयाँ दे सकता है और
आकलन 120 या 180 हो जाएगा। बड़ा प्र तदश इसे अ धक सट क बनाएगा — अध्याय बड़े और प्र त न धक
प्र तदश क सलाह इसी लए दे ता है।

प्र.2 एक वद्यालय म सवक्षण कराया गया, जहाँ 40 वद्या थय के एक यादृ क प्र तदश से उनका प्रय क्लब पूछा
गया। प्र त क्रयाएँ इस प्रकार ह— 14 वद्याथ — व ान क्लब | 11 वद्याथ — कला क्लब | 9 वद्याथ —
खेल क्लब | 6 वद्याथ — वाद- ववाद क्लब। मान ली जए क पूरे वद्यालय म 800 वद्याथ ह। (i) प्र तदश से
यादृ क चय नत वद्याथ क प्राथ मकता कला क्लब के होने क प्रा यकता क्या है? (ii) प्र तदश के प रणाम
का उपयोग करके आकलन क जए क पूरे वद्यालय म कतने वद्याथ खेल क्लब को प्राथ मकता दगे।

प्र तदश क जाँच — 14 + 11 + 9 + 6 = 40 वद्याथ ✓
(i)

P(कला क्लब) = 11/40

= 0.275 अथवा 27.5%

(ii) प्र तदश म खेल क्लब का अंश 40 म से 9 है। यही अंश 800 वद्या थय पर लगाइए।

P(खेल क्लब) = 9/40 = 0.225

िव ालय में अनुमािनत संख्या = 800 × 9/40

= 20 × 9

= 180 िव ाथ

क्लब प्र तदश म संख्या सापे क्षक आवृ त्त 800 म आकलन

िव ान 14 14/40 = 0.35 280

कला 11 11/40 = 0.275 220

खेल 9 9/40 = 0.225 180

वाद-िववाद 6 6/40 = 0.15 120

कु ल 40 1.00 800

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय
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ऐसा क्य होता है: चार सापे क्षक आवृ त्तय का योग 1 है, ठ क वैसे ही जैसे पूरी प्र तदश सम ष्ट क प्रा यकताओं
का योग होना चा हए। यह एक उपयोगी जाँच है — य द आपक भन्न का योग 1 न आए तो कोईeप्रmत क्रया छू ट गई
है या दो बार .c
as योग पुनः 800
omगई है। प्रत्येक को 800 से गुणा करने पर वद्यालय चार भाग म बँटताaहैglजनका
है। se
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गनी

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संकेत: आकलन उतना ही अ ा है जतना प्र तदश। य द वे 40 वद्याथ एक ही कक्षा से या केवल वद्यालय के

m .
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गायन-दल से चुने गए ह तो 'यादृ क प्र तदश' का दावा टू ट जाता है और 180 का अथ बहुत कम रह जाता है। पूरे
वद्यालय म से चुनने पर ही यह गुणा ईमानदार है।
a g l

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एक सक्के को 20 बार उछा लए और प्रत्येक बार प रणाम को अं कत क जए ( चत अथवा
a s em पट)। (i) आपने
glप्राप्त करने क प्रायो गक
co बार चत प्राप्त कया? (ii) आपने कतनी बार पट प्राप्त कया? (iii) aचत
प्र.3

.
emप्रा यकता क गणना क जए। (iv) य द आप सक्के को एक और बार उछालते ह तब चत प्राप्त करने क
कतनी

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agl प्रा यकता क्या है?
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a प्रश्नl का उ े श्य है।
यह प्रश्न वास्तव म करके ही हल होगा — उत्तर आपके अपने आँकड़े ह। व ध दखाने के लए नीचे एक नमूना प रणाम दया है;
आपक गनती भन्न होगी, और यही इस g

m
.co
उछाल 1–5 6–10 11–15 16–20

se m च चप चप
पिरणाम
com
चप च चप प चप च च चपप चप
g l a
m . a
ase
agl (iii)
(i) चत = 11 बार (ii) पट = 9 बार (11 + 9 = 20 ✓)

se m
com g l a
m . a
ase
पायोिगक P(िचत) = िचत आने की संख्या / कु ल उछाले ं

= 11/20
agl
m
= 0.55 अथवा 55%

. co
em
m l as
.co g
(iv) यह भाग आपके आँकड़ से हल नह होता। 21व उछाल नष्पक्ष सक्के का एक नया, स्वतंत्र परीक्षण है।

m a
l a se
ag P(अगली उछाल में िचत) = 1/2 = 0.5
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m as e
.co


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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: (iii) और (iv) दो अलग प्रश्न ह और इन्ह मला दे ना यहाँ क सबसे बड़ी भूल है। (iii) प्रायो गक
प्रा यकता है — यह घट चुके 20 परीक्षण का सारांश है, अतः 0.55 आपके आँकड़ का तथ्य है। (iv) सैद्धां तक
प्रा यकता है — यह अभी न हुए परीक्षण के वषय म है, और नष्पक्ष सक्के को यह स्मरण नह रहता क चत 11–
9 से आगे था। (iv) का उत्तर 11/20 दे ना उल्टे रूप म द्यूतकार का भ्रम होगा।

यह क जए: पूरी कक्षा के प रणाम जोड़ ली जए। य द 30 वद्याथ 20-20 बार उछाल तो 600 उछाल हो जाएँगी।
संयुक्त अनुपात अ धकांश व्य क्तगत प रणाम क तुलना म 0.5 के कह अ धक नकट होगा — बृहत् संख्याओं का
नयम, एक ही कालांश म दखता हुआ।

प्र.4 कागज से न मत एक प्याले को हवा म 100 बार उछा लए। प्रत्येक बार उछालने के प ात एक कागज पर यह
लखते जाइए क प्याला अपने नचले तल पर गरता है, उल्टा होकर ऊपरी भाग पर गरता है अथवा अपने पा
पर गरता है ( चत्र 7.5 दे खए)।

तल उल्टा होकर पाश्व
ऊपरी भाग पर

चत्र 7.5, पृष्ठ 165 — काग़ज़ से न मत प्याले के गरने क तयाँ (बाएँ से दाएँ) — तल, उल्टा होकर ऊपरी भाग
और पा ।

प्रायो गक प्रा यकता का उपयोग करके प रणाम क प्रा यकता क गणना क जए।

यहाँ प्र तदश सम ष्ट S = {तल, ऊपरी भाग, पा } है और n(S) = 3 — परंतु प्रत्येक के लए 1/3 नह लखा जा सकता। कागज
का प्याला सम मतीय नह है, अतः ये तीन प रणाम समप्रा यक नह ह। इनक प्रा यकताएँ ात करने का एकमात्र ईमानदार तरीका
उछालकर गनना है।
100 उछाल का एक व शष्ट प रणाम, और उससे बनी प्रा यकताएँ —

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गरने क त गनती (100 म से) सापे क्षक आवृ त्त प्रायो गक प्रा यकता

िनचला तल (सीधा) 22 22/100 0.22

ऊपरी भाग (उल्टा) 18 18/100 0.18

पाश्व 60 60/100 0.60

कु ल 100 100/100 1.00

पायोिगक P(पाश्व) = 60/100 = 0.60

पायोिगक P(तल) = 22/100 = 0.22
पायोिगक P(ऊपरी भाग) = 18/100 = 0.18

जाँच — 0.60 + 0.22 + 0.18 = 1 ✓

ऐसा क्य होता है: यह प्रयोग अध्याय म ठ क इसी लए है क प रणाम क संख्या से भाग दे ने क आदत टू टे। गनती
का सूत्र P = n(A)/n(S) केवल तभी वैध है जब प्रत्येक प रणाम समप्रा यक हो, और प्याला ऐसा मानने का कोई
कारण नह दे ता — उसक गोल द वार का क्षेत्रफल कसी भी कनारे से कह अ धक है, इस लए 'पाश्व' सबसे
अ धक आता है। जहाँ सम म त से तक नह कया जा सकता, वहाँ प्रमाण ही एकमात्र माग है — यही सैद्धां तक और
प्रायो गक प्रा यकता का पूरा भेद है।

स्वयं जाँ चए: प रणाम को 20-20 के समूह म ल खए और 'पाश्व' का चलता हुआ अनुपात आले खत क जए।
आरंभ म वह उछलेगा और उछाल के बढ़ने के साथ र होता जाएगा। अब भन्न आकार का प्याला — अ धक
चौड़ा और कम ऊँचा — ली जए; तीन प्रा यकताएँ बदल जाएँगी। इससे सद्ध होता है क ये उस वशेष प्याले के गुण
ह, संख्या 3 के नह ।

प्र.5 एक नष्पक्ष षट् फलक य पासे को फकने पर एक सम संख्या को प्राप्त करने क प्रा यकता क्या है?

S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, अतः n(S) = 6

E = 'सम संख्या' = {2, 4, 6}, अतः n(E) = 3

P(E) = n(E)/n(S) = 3/6

= 1/2 = 0.5 अथवा 50%

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ऐसा क्य होता है: पासा नष्पक्ष है, अतः छह फलक समप्रा यक ह और गनती का सूत्र बना कसी अ त रक्त
वचार के लागू होता है। छह म से तीन फलक पर सम संख्याएँ ह, अथात ठ क आधे प रणाम अनुकूल ह। इसी तक
से P( वषम) = 3/6 = 1/2, और P(सम) + P( वषम) = 1 — जैसा होना ही चा हए, क्य क प्रत्येक फक इन्ह दो म
से एक है।

संकेत: उत्तर 1/2 केवल इस लए है क्य क इस पासे पर सम और वषम संख्याएँ बराबर ह। य द पासे पर 1, 1, 2,
3, 4, 5 अं कत ह तो फलक क प्र तदश सम ष्ट म अब भी छह समप्रा यक तत्त्व ह गे, परंतु सम संख्या केवल दो
फलक पर होगी, अतः P(सम) = 2/6 = 1/3. सदै व फलक ग नए, उन पर लखी संख्याएँ नह ।

प्र.6 मान ली जए, आप एक षट् फलक य पासे को 12 बार फकते ह और तीन बार अंक ‘3’ प्राप्त करते ह। (i) पासे पर
‘3’ आने क प्रायो गक प्रा यकता क्या है? (ii) पासे पर ‘3’ आने क सैद्धां तक प्रा यकता क्या है? (iii) इन
प्रा यकताओं म भन्नता क्य हो सकती है? य द आप पासे को 60, 600 या 6000 बार फक तो क्या प्राप्त होने क
अपेक्षा करगे?

(i) आँकड़ से —

पायोिगक P(3) = 3 आने की संख्या / कु ल फेंक

= 3/12

= 1/4 = 0.25 अथवा 25%

(ii) नष्पक्ष पासे क सम म त से —

S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, n(S) = 6; अनुकू ल = {3}, n = 1

सै ांितक P(3) = 1/6 = 0.1666… ≈ 0.167 अथवा 16.7%

(iii) भन्नता इस लए है क 12 फक बहुत छोट ंखला है। 12 फक म 3 आने क अपे क्षत संख्या 12 × 1/6 = 2 है, और 2 के
ान पर 3 आ जाना एक साधारण उतार-चढ़ाव है — केवल एक अ त रक्त 3 भन्न को 0.167 से 0.25 तक पहुँचा दे ता है, क्य क
हर इतना छोटा है।

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फक क अपे क्षत 3 (N × एक अ त रक्त 3 से P म क्या अपेक्षा कर
संख्या 1/6) प रवतन

12 2 0.083 बड़े उतार-चढ़ाव; 0.25 या 0.08 असामान्य
नह

60 10 0.017 प्रायः लगभग 0.10 से 0.23 के बीच

600 100 0.0017 प्रायः 0.15–0.19 के नकट

6000 1000 0.00017 0.167 के बहुत नकट

ऐसा क्य होता है: प्रायो गक प्रा यकता एक ऐसी भन्न है जसका हर परीक्षण क संख्या है। हर जतना बढ़ता है,
कोई एक अप्रत्या शत प रणाम भन्न को उतना ही कम हलाता है, अतः मान र होता जाता है। यही बृहत्
संख्याओं का नयम है — परीक्षण बढ़ने पर प्रायो गक प्रा यकता 1/6 क ओर बढ़ती है। ध्यान द जए क यह क्या
नह कहता — यह कभी नह कहता क गन तयाँ बराबर हो जाएँगी, केवल यह क अनुपात र होता जाएगा।

संकेत: य द 6000 फक के बाद भी लगभग 0.25 ही मले तो उ चत नष्कष यह नह होगा क " नयम वफल हो
गया", अ पतु यह क "यह पासा नष्पक्ष नह है"। कसी मान्यता क जाँच के लए प्रायो गक प्रा यकता का उपयोग
इसी प्रकार होता है।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 167
अनुभाग 7.3.1 प्र तदश सम ष्ट (सपल ेस)

सो चए और वचार क जए

प्र.1 उपरोक्त उदाहरण 1 म जब हमने प्र तदश सम ष्ट {वषा होगी, वषा नह होगी} का उपयोग कया था तो हमने वषा
होगी या नह होगी, केवल इसी वषय पर वचार कया था। यद्य प य द हम वषा क व भन्न मात्राओं, जैसे—
फुहार, हल्क वषा अथवा भारी वषा को स म्म लत करना चाहते ह तो हम अपने प्र तदश सम ष्ट को {वषा नह ,
बूँदा-बाँद , हल्क वषा, भारी वषा} म वस्ता रत करने क आवश्यकता होगी, जससे यह प्रश्न के लए आवश्यक
ववरण के स्तर के अनुरूप मेल खाता हो। यह सु न त करना आवश्यक है क प्र तदश सम ष्ट, प्रस्तुत व शष्ट
प्रश्न के अध्ययन के लए पयाप्त रूप से वस्तृत हो।

मूल बात यह है क प्र तदश सम ष्ट मौसम से तय नह होती — वह आपके प्रश्न से चुनी जाती है। नीचे द गई दोन सू चयाँ कल के
लए सही प्र तदश सम ष्टयाँ ह; वे भन्न प्रश्न का उत्तर दे ती ह।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co mN(S)
m.
अध्ययन का प्रश्न उपयुक्त प्र तदश सम ष्ट

m as e
.co
क्या मुझे छाता ले जाना चािहए? S = {वषा होगी, वषा नह होगी}
a g l 2

se m
g l a S = {वषा नह , बूँदा-बाँद , हल्क वषा, भारी वषा}
a
क्या िव ालय का मैद ान मैच के योग्य रहेग ा? 4

m
आप जो भी सूची ल, उसे अनुभाग 7.3.1 के दोन नयम का पालन करना ही होगा —

. co ag
e m
कुछ छू टे नह — प्रत्येक संभा वत प रणाम सूची म हो, अन्यथा कसी परीक्षण के लए कोई प रणाम बचेगा ही नह ।

g l as
कुछ दो बार न हो — तत्त्व एक-दूसरे म न घुस, अन्यथा एक ही परीक्षण दो प रणाम म गना जाएगा।
a
m
ऐसा क्य होता है: वस्तृत सूची, 'वषा होगी' नामक एक प रणाम को बूँदा-बाँद , हल्क वषा और भारी वषा म
co
m.
वभा जत करके बनी है। वभाजन से सूची पूण भी रहती है और परस्पर अनन्य भी, अतः वह अब भी वैध प्र तदश

o m l a se
सम ष्ट है — परंतु ध्यान द जए क इससे क्या नह होता। इससे चार प रणाम समप्रा यक नह हो जाते। केवल n(S)
= 4 दे ख.कर c P(भारी वषा) = 1/4 लखना गलत होगा; ये प्रा यकताएँ वषा के अ भलेaखg से ही आएँगी, ठ क वैसे ही
m
जैsसeे पृष्ठ 157 पर।
g l a
a
om a s
. c agl
संकेत: "पयाप्त रूप से वस्तृत" दोन ओर काटता है। बहुत मोट सूची म वह घटना कही ही नह जा सकेगी जसम
आपक रु च है — {वषा होगी, वषा नह होगी}m
s e म 'भारी वषा' कहने का कोई साधन नह है। बहुत सूक्ष्म सूची (वषा
े aआकलन के लए पयाप्त आँकड़े कभी एकत्र नह ह गे। ववरण का स्तर,
agl
मलीमीटर तक) म कसी भी प्रा यकता क
नणय के अनुरूप र खए।

co m
m .
as e
om— पृष्ठ 167–168
प्रश्नावली.c7.3 a g l
a s em
agl
अनु भाग 7.3 प्रा यकता के तत्त्व — प्र तदश सम ष्ट और घटनाएँ

se m
com
जब एक षट् फलक य पासा फका जाता है तो प्र तदश सम ष्ट म संभा वत प रणाम क कुल संख्या कतनी होगी?
g l a
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प्र.1

m
ase
agl

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S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}
m .
m as e
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n(S) = 6
a g l
se m
g l a
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.
ऐसा क्य होता है: पासे के छह फलक ह और ठ क एक फलक ऊपर आता है, अतः छह संभा वत प रणाम ह,

s e m
m a
इससे अ धक नह । यह सूची प्र तदश सम ष्ट क दोन शत पूरी करती है — प्रत्येक प रणाम है और कोई दो बार नह

m . co
है — और चूँ क पासा नष्पक्ष है, छह समप्रा यक ह, प्रत्येक क प्रा यकता 1/6.
e agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


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संकेत: n(S) प रणाम गनता है, उनके वषय म पूछे गए कसी प्रश्न के उत्तर नह । "सम या वषम" इन्ह छह
प रणाम को दो घटनाओं म समू हत करने का एक ढं ग है; इससे प्र तदश सम ष्ट दो तत्त्व क नह हो जाती।

प्र.2 नम्न ल खत प्रयोग के लए प्र तदश सम ष्ट S ल खए— (i) एक साथ एक पासा फकना और एक सक्का
उछालना। (ii) −5 और +5 के मध्य एक पूणाक का यादृ क चयन करना। (iii) एक बक्से म 5 हरी और 7 लाल
गद ह। एक गद यादृ क रूप से नकाली गई।

(i) पासा और सक्का एक साथ। पासे के 6 फलक म से प्रत्येक, सक्के के 2 प रणाम म से प्रत्येक के साथ जुड़ सकता है।

S = {(1, H), (2, H), (3, H), (4, H), (5, H), (6, H),

(1, T), (2, T), (3, T), (4, T), (5, T), (6, T)}

n(S) = 6 × 2 = 12

ये बारह समप्रा यक ह, प्रत्येक क प्रा यकता 1/12.
(ii) −5 और +5 के मध्य एक पूणाक। 'मध्य' का कठोर अथ लेने पर दोन सरे स म लत नह होते —

S = {−4, −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3, 4}

n(S) = 9

य द सर को भी स म लत मानना हो तो S = {−5, −4, …, 4, 5} और n(S) = 11 होगा। आप कौन-सा अथ ले रहे ह, यह लखना
भी उत्तर का भाग है।
(iii) 5 हरी और 7 लाल गद म से एक। दो सही प्र तदश सम ष्टयाँ बनती ह, और वे एक-दूसरे का ान नह ले सकत —

प्र तदश सम ष्ट N(S) समप्रा यक? कस काम क

S = {हरी, लाल} 2 नह — P(हरी) = 5/12, P(लाल) = 7/12 क्या हो सकता है, यह बताने के लए

S = {ह1, …, ह5, ला1, …, ला7} 12 हाँ — प्रत्येक 1/12 प्रा यकता क गणना के लए

ऐसा क्य होता है: यह इस अनुभाग का सबसे महत्त्वपूण वचार है। {हरी, लाल} पूणतया वैध प्र तदश सम ष्ट है —
वह पूण है और उसम कोई पुनरावृ त्त नह — परंतु उसके दोन तत्त्व समप्रा यक नह ह, क्य क लाल गद हरी से
अ धक ह। अतः उस पर गनती का सूत्र नह लगाया जा सकता — P(हरी) 5/12 है, 1/2 नह । गद को ह1…ह5,
ला1…ला7 नाम दे ने पर 12 ऐसे प रणाम बनते ह जो वास्तव म समप्रा यक ह, क्य क नकासी यादृ क है और हर
गद के नकलने क संभावना समान है। तभी n(A)/n(S) सही उत्तर 5/12 दे ता है।

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संकेत: n(S) से भाग दे ने से पहले हर बार स्वयं से पू छए — "क्या म इन सब पर बराबर दाँव लगाऊँगा?" य द उत्तर
'नह ' है तो सूची को तब तक सूक्ष्म क जए जब तक उत्तर 'हाँ' न हो जाए।

प्र.3 एक ामीण मेले म 3 लोक प्रय नाश्ते उपलब्ध ह— समोसा, पकौड़ा और भाजी। पेय पदाथ म ामीण व्य क्त
चाय या लस्सी का चयन कर सकते ह। (i) नाश्ते और पेय के सभी संभव संयोजन जो एक व्य क्त मेले म चय नत
कर सकता है, के प्र तदश सम ष्ट सूचीबद्ध क जए। (ii) ‘समोसे को नाश्ते के रूप म चय नत करने’ क घटना को
सूचीबद्ध क जए।

(i) प्रत्येक नाश्ते को प्रत्येक पेय के साथ जो ड़ए —

S = {(समोसा, चाय), (समोसा, लस्सी),

(पकौड़ ा, चाय), (पकौड़ ा, लस्सी),

(भाजी, चाय), (भाजी, लस्सी)}

n(S) = 3 × 2 = 6

चाय लस्सी

समोसा (समोसा, चाय) (समोसा, ल स्सी)

पकौड़ा (पकौड़ा, चाय) (पकौड़ा, लस्सी)

भाजी (भाजी, चाय) (भाजी, लस्सी)

(ii) घटना उन प रणाम का समुच्चय है जनम नाश्ता समोसा है — अथात ऊपर रेखां कत पहली पं क्त —

E = {(समोसा, चाय), (समोसा, लस्सी)}

n(E) = 2

य द व्य क्त नाश्ता और पेय पूणतया यादृ क रूप से चुने तो P(E) = 2/6 = 1/3.

ऐसा क्य होता है: सारणी दखाती है क 3 × 2 = 6 क्य होता है और 3 + 2 = 5 क्य नह । दोन चयन साथ-साथ
होते ह, अतः प्रत्येक नाश्ते के साथ हर पेय जुड़ना ही चा हए; प्र तदश सम ष्ट का एक तत्त्व सारणी का एक खाना है,
कोई पूरी पं क्त या स्तंभ नह । 'समोसा' वाली घटना पूरी एक पं क्त है — यह स्मरण दलाती है क घटना प्र तदश
सम ष्ट का उपसमुच्चय है और उसम एक से अ धक प रणाम हो सकते ह, यहाँ दो।

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संकेत: यही 3 × 2 सारणी उस वृक्ष आरेख क प्र तदश सम ष्ट भी है जसम पहले चरण क 3 और दूसरे चरण क 2
शाखाएँ ह — अगले अनुभाग का चत्र 7.6 ठ क यही चत्र है, बस बगल से ख चा हुआ।

सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 169
अनुभाग 7.4 वृक्ष आरेख

सो चए और वचार क जए

प्र.1 क्या आप एक बार चत और एक बार पट आने क प्रा यकता ात कर सकते ह?

हाँ। चत्र 7.6 के वृक्ष आरेख से प ढ़ए, जसके चार पथ समप्रा यक ह।

S = {HH, HT, TH, TT}, n(S) = 4

E = 'एक िचत और एक पट' = {HT, TH}, n(E) = 2

P(E) = 2/4 = 1/2 = 0.5 अथवा 50%

िचत (H) 1/2 HH 1/4

पट (T) 1/2
िचत (H) 1/2
HT 1/4

पट (T) 1/2
िचत (H) 1/2 TH 1/4

पट (T) 1/2
TT 1/4

चार समप्रा यक पथ। HT और TH दो अलग-अलग पथ ह—इसी लए एक चत और एक पट आने क प्रा यकता, दो चत आने क
प्रा यकता से दुगुनी है।

ऐसा क्य होता है: HT और TH वृक्ष के दो अलग-अलग पथ ह — पहले चत फर पट, और पहले पट फर चत।
इनका वणन एक-सा है परंतु ये पृथक प रणाम ह, अतः घटना म चार म से दो प त्तयाँ आती ह, एक नह । यही कारण
है क P(एक-एक) = 1/2 है जब क P(HH) = 1/4 — एक चत और एक पट आना, दो चत आने से दुगुना
संभा वत है।

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सामान्य गलत उत्तर 1/3 है, जो "दो चत, एक-एक, दो पट" वाली सूची से आता है। वह सूची वैध प्र तदश सम ष्ट है — न कुछ छू टा
है, न कुछ दोहराया गया — परंतु उसके तीन तत्त्व समप्रा यक नह ह (1/4, 1/2, 1/4), अतः 3 से भाग दे ना वैध नह है। वृक्ष
आरेख दोन क्रम को अलग रखकर इसी भूल से बचाता है।

स्वयं जाँ चए: प त्तयाँ गनने के ान पर पथ पर गुणा क जए। P(HT) = 1/2 × 1/2 = 1/4 और P(TH) = 1/2
× 1/2 = 1/4; दोन पथ मलकर घटना बनाते ह, अतः जो ड़ए — 1/4 + 1/4 = 1/2. पथ पर गुणा, पथ म
जोड़ — यही नयम शेष अध्याय म काम आएगा।

प्रश्नावली 7.4 — पृष्ठ 169
अनुभाग 7.4 वृक्ष आरेख

प्र.1 A और B फल क दो टोक रयाँ ह। टोकरी A म एक सेब और दो संतरे ह। टोकरी B म एक केला और एक आम
है। आप यादृ क रूप से प्रत्येक टोकरी से एक फल नकालते ह— (i) फल के सभी संभा वत युग्म को दशाता
हुआ एक वृक्ष आरेख ख चए। (ii) प्र तदश सम ष्ट को सूचीबद्ध क जए। (iii) एक सेब और एक केला नकालने
क प्रा यकता क्या होगी?

(i) टोकरी A म 3 फल ह, अतः पहले चरण म तीन शाखाएँ ह गी; दोन संतर को अलग-अलग नाम द जए जससे तीन समप्रा यक
रह। टोकरी B म 2 फल ह, अतः प्रत्येक शाखा आगे दो भाग म बँटेगी।

केला 1/2 (सेब, केला) 1/6
आम 1/2
(सेब, आम) 1/6
सेब 1/3

केला 1/2 (संतरा 1, केला) 1/6
संतरा 1 1/3
आम 1/2
(संतरा 1, आम) 1/6
संतरा 2 1/3

केला 1/2 (संतरा 2, केला) 1/6
आम 1/2
(संतरा 2, आम) 1/6

टोकरी A म 3 फल और टोकरी B म 2 फल ह, अतः वृक्ष आरेख 3 × 2 = 6 समप्रा यक युग्म पर समाप्त होता है।

(ii) छह प त्तय को पढ़ने पर —

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
S = {(सेब, के ला), (सेब, आम),
m l as
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(संत रा 1, के ला), (संत रा 1, आम),
m a g
(संsतeरा 2, के ला), (संत रा 2, आम)}
a
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an(S) = 3 × 2 = 6, पत्येक की पाियकता 1/6

co m
e m . ag
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(iii) ठ क एक पत्ती अनुकूल है —

a g l
P(सेब और के ला) = 1/6 ≈ 0.167

co m
m.
अथवा उसी पथ पर गुणा करके — 1/3 × 1/2 = 1/6 ✓

m as e
.co a g l
a s emक्य होता है: दोन संतर को अलग रखना आवश्यक है। य द आप प्र तदश सम ष्ट प्रकार के अनुसार लख —
gl {(सेब, केला), (सेब, आम), (संतरा, केला), (संतरा, आम)} — तो चार प रणाम मलगे और भाग दे ने पर गलत उत्तर
ऐसा
a
s
1/4 आएगा। ये चार समप्रा यक नह ह — टोकरी A से संतरा नकलने क प्रा यकता 2/3 है जब क सेब नकलने
m a
.co agl
क केवल 1/3, क्य क संतरे दो ह और सेब एक। 'संतरा 1' और 'संतरा 2' लखते ही समप्रा यकता लौट आती है

se m
a
और तभी प त्तयाँ गनना वैध होता है।

a g l

m
स्वयं जाँ चए: छह प त्तय क प्रा यकताएँ जो ड़ए — 6 × 1/6 = 1. अब प्रकार के अनुसार समू हत क जए —

. co
m
(सेब, ·) का योग 2/6 = 1/3 और (संतरा, ·) का योग 4/6 = 2/3, जो टोकरी के 1 सेब और 2 संतर से ठ क मेल

m as e
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खाता है। वृक्ष और टोकरी दोन एक ही बात कह रहे ह।
a g
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g l a
a
मान ली जए, आपके पास एक बक्सा है जसम 3 लाल पेन, 4 काले पेन और 2 हरे पेन ह। आपने बक्से म बना
se m
com a
प्र.2

. a
दे खे एक पेन नकाला और वापस उसी म रख दया। अब आपका मत्र भी इसी काय को दोहराता है। (i) पेन के
g l
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as कर अनुमान लगा सकते ह क आप और आपके मत्र ारा एक ही रंग के
रंग के संभा वत प रणाम क्या ह? क्या आप संभा वत प रणाम को दशाता हुआ एक वृक्ष आरेख ख च सकते ह?
(ii) क्या आप वृक्ष आरेख का lउपयोग
a g
पेन नकालने क प्रा यकता क्या होगी?

co m
m .
e

c o m g l as
. क शाखाओं क प्रा यकताएँ समान ह — लाल 3/9, काला 4/9, हरा 2/9. a
बक्से म 3 + 4 + 2 = 9 पेन ह। चूँ क पेन वापस रख दया जाता है, आपके मत्र क बारी म बक्सा वैसा ही रहता है, अतः दोन

s e m
चरण
a
agl (i) प्रत्येक चरण म तीन रंग, अतः 3 × 3 = 9 क्र मत रंग-युग्म —
c
m .
m a s e
. co agl
S = {(ला, ला), (ला, का), (ला, ह), (का, ला), (का, का), (का, ह), (ह, ला), (ह, का), (ह, ह)}
e m
g l as
a

co m
m .
m ase
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a g l Page 19 of 44

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

(ला, ला) 9/81
लाल 3/9
काला 4/9
(ला, का) 12/81
हरा 2/9

(ला, ह) 6/81
लाल 3/9

(का, ला) 12/81
लाल 3/9
काला 4/9 काला 4/9
(का, का) 16/81
हरा 2/9

(का, ह) 8/81
हरा 2/9

(ह, ला) 6/81
लाल 3/9
काला 4/9
(ह, का) 8/81
हरा 2/9

(ह, ह) 4/81

प्र त ापन के साथ दो बार नकालना। नौ पथ क प्रा यकताओं का योग 81/81 = 1 है; समान रंग वाले तीन पथ मलकर 29/81 दे ते ह।

ये नौ युग्म समप्रा यक नह ह, अतः इनक प्रा यकताएँ प्रत्येक पथ पर गुणा करके नकालनी ह गी, प्रत्येक को 1/9 लखकर नह ।
(ii) 'एक ही रंग' तीन पथ से बनती है — (ला, ला), (का, का) और (ह, ह)। प्रत्येक पथ पर गुणा क जए, फर जो ड़ए —

P(ला, ला) = 3/9 × 3/9 = 9/81

P(का, का) = 4/9 × 4/9 = 16/81
P(ह, ह) = 2/9 × 2/9 = 4/81

P(एक ही रंग) = (9 + 16 + 4)/81

= 29/81 ≈ 0.358 अथवा लगभग 36%

रंग P(आप) P( मत्र) P(दोन )

लाल 3/9 3/9 9/81

काला 4/9 4/9 16/81

हरा 2/9 2/9 4/81

एक ही रंग — — 29/81

िभन्न रंग — — 52/81

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ऐसा क्य होता है: एक ही पथ क शाखाएँ एक के बाद एक घ टत होती ह, अतः उनक प्रा यकताएँ गुणा होती ह;
अलग-अलग पथ वकल्प ह, अतः उनक प्रा यकताएँ जोड़ी जाती ह। प्र त ापन के कारण ही दूसरे चरण क भन्न
पहले चरण जैसी ह — मत्र उसी बक्से से नकालता है जससे आपने नकाला था। य द आप पेन अपने पास रख
लेते तो दूसरे चरण का हर 8 होता और काला- फर-काला 4/9 × 3/8 होता।

स्वयं जाँ चए: नौ पथ क प्रा यकताओं का योग 81/81 = 1 है, और 29/81 + 52/81 = 1, अतः भन्न रंग आना
अ धक संभा वत है। अकेले सबसे संभा वत मलान काला है (16/81), केवल इस लए क काले पेन सबसे अ धक
ह।

अं तम प्रश्नावली — पृष्ठ 169–173
अध्याय 7 पुनरावलोकन (* अं कत प्रश्न क ठन वग के ह)

प्र.1 रक्त ान क पू त क जए— (i) असंभव घटना क प्रा यकता _____ है। (ii) एक यादृ क प्रयोग के सभी
संभव प रणाम के समुच्चय को _____ कहा जाता है। (iii) एक न त ही घ टत होने वाली घटना क प्रा यकता
_____ है। (iv) नष्पक्ष सक्का उछालने पर चत आने क प्रा यकता _____ है।

भाग उत्तर कारण

(i) असंभव घटना की पाियकता 0 कोई भी प रणाम अनुकूल नह है, अतः P = 0/n(S) = 0.

(ii) सभी संभव पिरणामों का समुच्चय पितदश समिष्ट (S) प रभाषा से; उसका आकार प्र तदश आकार n(S) है।

(iii) िनिश्चत घटना की पाियकता 1 प्रत्येक प रणाम अनुकूल है, अतः P = n(S)/n(S) = 1.

(iv) िनष्पक्ष िसक्के पर िचत 1/2 (0.5 अथवा 50%) S = {H, T}, दोन समप्रा यक, एक अनुकूल।

ऐसा क्य होता है: (i) और (iii) प्रा यकता पैमाने के दोन सरे ह और यही बताते ह क कोई प्रा यकता इस पैमाने
से बाहर क्य नह जा सकती। अनुकूल प रणाम क संख्या n(A) कभी 0 से कम और n(S) से अ धक नह हो
सकती, अतः भन्न n(A)/n(S) सदै व 0 और 1 के बीच बँधी रहती है — सारांश म लखा 0 ≤ P(E) ≤ 1 यही कहता
है।

संकेत: P(E) = 0 और P(E) = 1 ठ क-ठ क वपरीत ह — य द E असंभव है तो 'E नह ' न त है, और P(E
नह ) = 1 − P(E) = 1 − 0 = 1.

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प्र.2 50 वद्या थय के एक सवक्षण म 15 वद्या थय ने कहा क उन्ह फुटबॉल पसंद है। फुटबॉल पसंद करने वाले
वद्या थय क संख्या 15 है और _______ (आवृ त्त/सापे क्षक आवृ त्त) _____ है ( भन्न अथवा दशमलव म पू त
क जए)।

रक्त ान म क्रमशः सापे क्षक आवृ त्त और 15/50 = 3/10 = 0.3 आएगा।

'फु टबॉल पसंद है' की आवृित्त = 15 (एक िगनती)

सापेिक्षक आवृित्त = 15/50 = 3/10 = 0.3 अथवा 30% (कु ल का एक अंश)

ऐसा क्य होता है: यह वाक्य दोन शब्द को जान-बूझकर साथ रखता है। आवृ त्त " कतने?" का उत्तर दे ती है और
एक पूण संख्या है, जो अ धक लोग से पूछने पर बढ़ती जाती है। सापे क्षक आवृ त्त " कतना अंश?" का उत्तर दे ती है
— वह कुल से भाग दे ती है, अतः सदै व 0 और 1 के बीच रहती है और भन्न आकार के सवक्षण क तुलना संभव
बनाती है। प्रा यकता का आकलन सापे क्षक आवृ त्त से होता है, आवृ त्त से नह — P(यादृ क चय नत वद्याथ
को फुटबॉल पसंद है) ≈ 0.3.

संकेत: 200 वद्या थय के दूसरे सवक्षण म आवृ त्त 62 हो सकती है — कह बड़ी संख्या — फर भी सापे क्षक
आवृ त्त 62/200 = 0.31 अथात लगभग वही। यही रता वह कारण है जसके लए प्रा यकता को अनुपात के
रूप म प रभा षत कया जाता है।

प्र.3 नम्न ल खत म कस प्रयोग के समप्रा यक प रणाम ह? व्याख्या क जए। (i) एक चालक कार को चालू करने का
प्रयास कर रहा है। कार चालू होती है या नह होती है। (ii) नष्पक्ष सक्का एक बार उछालना। (iii) नष्पक्ष
षट् फलक य पासा फकना। (iv) एक थैली से यादृ क रूप से एक कंचा नकालना, जसम 3 लाल कंचे और 7
नीले कंचे ह । (v) एक बच्चे का जन्म हुआ है। यह एक लड़का है या लड़क है।

केवल (ii) और (iii) के प रणाम समप्रा यक ह। (v) को वद्यालयी प्रश्न म समप्रा यक माना जाता है, पर वह ठ क-ठ क समप्रा यक
नह है।

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प्रयोग समप्रा यक? व्याख्या

(i) कार चालू होना / न नही ं प रणाम बैटरी, ईंधन और कार क आयु पर नभर है — ये भौ तक तथ्य ह, सम म त नह ।
होना सुव्यव त कार न चलने क तुलना म कह अ धक बार चालू होती है।

(ii) िनष्पक्ष िसक्का हाँ सक्का सम मतीय और नष्पक्ष है, अतः कसी एक फलक के पक्ष म कोई कारण नह —
एक बार उछालना P( चत) = P(पट) = 1/2.

(iii) िनष्पक्ष हाँ छह फलक आकार और भार म एक-से ह, अतः प्रत्येक क प्रा यकता 1/6.
षट् फ लकीय पासा
फें कना

(iv) 3 लाल और 7 नही ं (रंग के P(लाल) = 3/10 और P(नीला) = 7/10. दस कंचे समप्रा यक ह, प्रत्येक 1/10; दो रंग
नीले कं चों में से एक अनुसार) समप्रा यक नह ह।

(v) बच्चा लड़का है या लगभग, पर ठीक- वश्व भर के जन्म-अ भलेख बताते ह क लड़क क संख्या कुछ अ धक होती है — प्र त
लड़की ठीक नही ं 100 जन्म म लगभग 51 लड़के। वद्यालयी प्रश्न म इसे 1/2 मान लेना एक अ ा
स न्नकटन है, सम म त से नकला तथ्य नह ।

ऐसा क्य होता है: दो प रणाम का केवल दो होना उन्ह समप्रा यक नह बना दे ता — (i), (iv) और (v) इसी भूल
क जाँच कर रहे ह। समप्रा यकता कह -न-कह से आनी चा हए — या तो भौ तक सम म त से, जैसे सक्के और
पासे म, या आँकड़ से। (iv) म सम म त वास्तव म है, पर वह कंच क है, रंग क नह — इसी लए प्र तदश सम ष्ट
को {कं1, …, कं10} लखते ही गनती का सूत्र फर काम करने लगता है।

संकेत: जब भी कोई प्रश्न ठ क दो प रणाम दे , 1/2 लखने क जल्द मत क जए। पहले पू छए क इन्ह समान कौन
बनाता है। (i) म कुछ भी नह बनाता।

प्र.4 द गई सूचनाओं के आधार पर प्र तदश सम ष्ट ल खए और प्रा यकता ात क जए। (i) एक ही समय पर दो
सक्क को उछाला जाता है। कम-से-कम एक चत आने क प्रा यकता क्या है? (ii) 10 सवसम पत्ते 1 से 10 तक
संख्यां कत करके एक बक्से म रखे गए ह। एक पत्ता यादृ क रूप से नकाला जाता है। एक सम संख्या वाले
पत्ते के आने क प्रा यकता क्या है? (iii) एक पासा एक बार फका जाता है। 4 से बड़ी संख्या आने क प्रा यकता
क्या है? (iv) एक थैले म 3 लाल गद, 2 नीली गद और 1 हरी गद ह। एक गद यादृ क रूप से नकाली जाती है।
इसक क्या प्रा यकता है क वह गद लाल नह होगी? (v) तीन सक्क को एक साथ उछाला जाता है। ठ क दो
चत आने क प्रा यकता क्या है?

(i) दो सक्के, कम-से-कम एक चत।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
S = {HH, HT, TH, TT}, n(S) = 4
m l as
.co
E = {HH, HT, TH}, n(E) = 3
m a g
l a se
g
P(कम-से-कम एक िचत) = 3/4 = 0.75
a
m
अथवा पूरक से — असफल होने का एकमात्र ढं ग TT है, अतः P = 1 − 1/4 = 3/4.

. co ag
(ii) 1 से 10 तक के पत्त म से एक, सम संख्या।
e m
g l as
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10}, n(S) = 10
a

co m
m.
E = {2, 4, 6, 8, 10}, n(E) = 5

m as e
.co
P(सम) = 5/10 = 1/2 = 0.5
a g l
a s em
a l पासा, 4 से बड़ी संख्या।
g(iii)
m a s
.co agl
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, n(S) = 6

se m
E = {5, 6}, n(E) = 2
g l a
P(4 से बड़ ी) = 2/6 = 1/3 ≈ 0.333 a

co m
m .
(iv) 3 लाल, 2 नीली, 1 हरी — लाल नह । गद को नाम द जए जससे छह समप्रा यक हो जाएँ —
m as e
.co a g l
a s eSm= {ला1, ला2, ला3, नी1, नी2, ह}, n(S) = 6
agl
m
E = 'लाल नही ं' = {नी1, नी2, ह}, n(E) = 3

a se
P(लाल नही ं) = 3/6 = 1/2 = 0.5
. com a g l
m
ase
agl
पूरक से जाँच — P(लाल) = 3/6 = 1/2, अतः P(लाल नह ) = 1 − 1/2 = 1/2 ✓
(v) तीन सक्के, ठ क दो चत। प्रत्येक सक्का सूची को दुगुना करता है, अतः n(S) = 2 × 2 × 2 = 8.

co m
m .
m as e
.co
S = {HHH, HHT, HTH, HTT, THH, THT, TTH, TTT}, n(S) = 8
a g l
se m E = 'ठीक दो िचत' = {HHT, HTH, THH}, n(E) = 3
g l a
a c
P(ठीक दो िचत) = 3/8 = 0.375
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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ऐसा क्य होता है: हर भाग म व ध एक ही है — पहले ऐसी सूची बनाइए जसके तत्त्व समप्रा यक ह , फर ग नए।
सावधानी सूची बनाने म लगती है। (iv) म रंग समप्रा यक नह ह, अतः पहले गद को नाम दया गया; (v) म 'ठ क
दो चत' को उन तीन क्रम म बाँटना पड़ा जनम वह घट सकती है, क्य क HHT, HTH और THH प्रयोग के तीन
अलग प रणाम ह, भले ही शब्द म एक-से लगते ह ।

संकेत: (i) का 'कम-से-कम एक' और (iv) का 'लाल नह ' — दोन पूरक नयम P(E नह ) = 1 − P(E) से सरल
हो जाते ह। तीन सक्क के साथ 'कम-से-कम एक चत' = 1 − P(TTT) = 1 − 1/8 = 7/8 — सात प रणाम
लखने के ान पर एक पं क्त।

प्र.5 एक थैली म 3 टॉ फयाँ ह— स् ॉबेरी, न बू और पुद ना। एक टॉफ यादृ क रूप से नकाली जाती है। स् ॉबेरी
टॉफ नकालने क प्रा यकता क्या है?

S = {स्टॉबेरी, नी ंबू, पुद ीना}, n(S) = 3

E = {स्टॉबेरी}, n(E) = 1

P(स्टॉबेरी) = 1/3 ≈ 0.333 अथवा लगभग 33.3%

ऐसा क्य होता है: यहाँ — इसी प्रश्नावली के रंगीन गद वाले प्रश्न के वपरीत — प्रत्येक प्रकार क ठ क एक टॉफ
है, अतः तीन प रणाम वास्तव म समप्रा यक ह और 1/3 ईमानदार उत्तर है। 'यादृ क रूप से' शब्द ही इसक
गारंट है — कोई टॉफ दूसरी से अ धक सुलभ नह है।

संकेत: थैली बदलकर 3 स् ॉबेरी, 1 न बू और 1 पुद ना कर द जए तो उत्तर 3/5 हो जाएगा, 1/3 नह — यद्य प
स्वाद अब भी तीन ही ह। टॉ फयाँ ग नए, नाम नह ।

प्र.6 एक बच्चे के पास 2 कमीज (एक लाल और एक नीला) और 3 प्रकार क पतलून (ज स, खाक और शॉट् स) ह।
एक कमीज और एक पतलून मलकर बनने वाली पोषाक के सभी संभव संयोजन को सूचीबद्ध क जए। अपने
उत्तर को सारणी रूप म प्रस्तुत क जए।

प्रत्येक कमीज हर पतलून के साथ पहनी जा सकती है, अतः 2 × 3 = 6 पोषाक बनगी।

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कमीज \ पतलून जस खाक शॉट् स

लाल लाल + जी ंस लाल + खाकी लाल + शॉट् स

नीली नीली + जी ंस नीली + खाकी नीली + शॉट् स

S = {(लाल, जी ंस), (लाल, खाकी), (लाल, शॉट् स),

(नीली, जी ंस), (नीली, खाकी), (नीली, शॉट् स)}

n(S) = 2 × 3 = 6

ऐसा क्य होता है: दोन चयन साथ-साथ होते ह, एक के बदले दूसरा नह , अतः संख्याएँ गुणा होती ह। सारणी क
प्रत्येक पं क्त एक कमीज को तीन पतलून के साथ जोड़ती है; तीन-तीन खान क दो पं क्तयाँ छह खाने दे ती ह।
यही गुणा प्रश्नावली 7.3 म पासे- सक्के के 6 प रणाम और चत्र 7.6 म दो उछाल के 4 प रणाम दे ता है।

संकेत: य द बच्चा यादृ क रूप से कपड़े पहने तो प्रत्येक खाने क प्रा यकता 1/6 होगी, अतः P(शॉट् स पहनना)
= 2/6 = 1/3 — अथात शॉट् स वाला पूरा स्तंभ। सारणी एक आयत म फैली हुई प्र तदश सम ष्ट ही है।

प्र.7 एक टायर कंपनी 1000 मामल म प्र त ापन ( रप्लेसमट) से पूव दू रय को अ भले खत करती है— दूरी
( कमी): 4000 से कम — 20 मामले; 4001 से 9000 — 210 मामले; 9001 से 14000 — 325 मामले; 14000
से अ धक — 445 मामले। यादृ क चय नत टायर क आयु क प्रा यकता ात क जए, जब दूरी— (i) 4000
कलोमीटर से कम हो। (ii) 4000 से 14000 कलोमीटर के मध्य हो। (iii) 14000 कलोमीटर से अ धक हो।

कुल मामले — 20 + 210 + 325 + 445 = 1000 ✓ अतः प्रत्येक प्रा यकता = (उस वग के मामले) ÷ 1000.

दूरी ( कमी) 4000 से कम 4001 से 9000 9001 से 14000 14000 से अ धक

मामलों की संख्या 20 210 325 445

पाियकता 0.02 0.21 0.325 0.445

(i)

P(4000 िकमी से कम) = 20/1000 = 1/50 = 0.02 अथवा 2%

(ii) '4000 से 14000 के मध्य' म बीच के दोन वग आते ह —

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अनुकू ल मामले = 210 + 325 = 535

P = 535/1000 = 107/200 = 0.535 अथवा 53.5%

(iii)

P(14000 िकमी से अिधक) = 445/1000 = 89/200 = 0.445 अथवा 44.5%

जाँच — 0.02 + 0.535 + 0.445 = 1 ✓ अथात तीन उत्तर मलकर हजार मामल को ठ क एक-एक बार समेट लेते ह।

ऐसा क्य होता है: ये प्रायो गक प्रा यकताएँ ह जो वास्त वक अ भलेख से पढ़ गई ह, सैद्धां तक नह । चार दूरी-
वग म कोई सम म त नह है — टायर का 14000 कमी से अ धक चलना, 4000 कमी से पहले खराब होने क
तुलना म कह अ धक संभा वत है — अतः संख्याएँ आँकड़ से ही आनी चा हए। 1000 से भाग दे ने का आधार यह
है क हजार म से एक मामला यादृ क रूप से चुना जाता है, अतः प्रत्येक अ भ ल खत मामला समप्रा यक है।

संकेत: मु त वग '4000 से कम' और '4001 से 9000' ह, अतः ठ क 4000 कमी चलने वाला टायर कसी वग
म नह आता। सारणी दू रय को पूण कलोमीटर म लेती है और भाग (ii) बीच के दोन वग के वषय म पूछता है —
इसी से 535 आता है। अपनी सार णय म वग ऐसे बनाइए क कोई अंतराल न छू टे ।

प्र.8 ‘PEACE’ शब्द के अक्षर को पत्त पर लखा गया है। लीला बना दे खे एक पत्ता नकालती है— (i) इसके P, E या
C होने क प्रा यकता क्या है? (ii) इसके E न होने क प्रा यकता क्या है?

PEACE म 5 अक्षर ह, अतः 5 पत्ते ह — P, E, A, C, E. प्रत्येक पत्ता समप्रा यक है, अतः n(S) = 5. ध्यान द जए क E दो पत्त
पर है।

अक्षर P E A C

पत्तों की संख्या 1 2 1 1

पाियकता 1/5 2/5 1/5 1/5

(i) अनुकूल पत्ते — P (1 पत्ता), E (2 पत्ते) और C (1 पत्ता)।

n(E) = 1 + 2 + 1 = 4

P(P, E या C) = 4/5 = 0.8 अथवा 80%

(ii) जो पत्ते E नह ह, वे P, A और C ह।

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n(E नही ं) = 5 − 2 = 3

P(E नही ं) = 3/5 = 0.6 अथवा 60%

जाँच — P(E) + P(E नही ं) = 2/5 + 3/5 = 1 ✓

ऐसा क्य होता है: दोहराया गया E ही इस शब्द को चुनने का कारण है। भन्न अक्षर 4 ह परंतु पत्ते 5 ह, और
यादृ क रूप से पत्ते ही नकाले जाते ह, इस लए समप्रा यक भी वे ही ह। (i) का उत्तर 3/4 दे ना — चार भन्न
अक्षर म से तीन — इस तथ्य क उपेक्षा करता है क दूसरा E भी एक वास्त वक पत्ता है जसे लीला नकाल सकती
है।

संकेत: भाग (ii) पूरक नयम से शीघ्र हल होता है — P(E नह ) = 1 − P(E) = 1 − 2/5 = 3/5. यह भी दे खए
क (i) और (ii) संबं धत तो ह, पर 'P, E या C' और 'E नह ' परस्पर पूरक नह ह, अतः एक से दूसरा नह नकाला
जा सकता।

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as e
कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
*संयोग के एक खेल म एक तीर घूमता है (आकृ त 7.7 दे खए), जो रुकने के प ात 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 और 8 म
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प्र.9

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से कसी एक संख्या को इं गत करता है और ये सभी प रणाम समप्रा यक ह।

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चत्र 7.7, पृष्ठ 171 — घूमने वाला चक्र, जो 1 से 8 तक अं कत आठ बराबर त्रज्यखंड म बँटा है।

co m
.
इसक क्या प्रा यकता है क यह तीर इं गत करेगा— (i) 8? (ii) एक वषम संख्या? (iii) 2 से बड़ी संख्या? (iv)

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9 से छोट संख्या? (v) 3 का एक गुणज?

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चत्र 7.7 का चक्र 1 से 8 तक अं कत 8 बराबर त्रज्यखंड म बँटा है और प्रश्न बताता है क ये समप्रा यक ह। अतः S = {1, 2, 3, 4,
5, 6, 7, 8} के साथ n(S) = 8, और प्रत्येक उत्तर = ( कतने त्रज्यखंड अनुकूल ह) ÷ 8.
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

भाग अनुकूल त्रज्यखंड संख्या प्रा यकता

(i) 8 {8} 1 1/8 = 0.125

(ii) िवषम संख्या {1, 3, 5, 7} 4 4/8 = 1/2 = 0.5

(iii) 2 से बड़ी संख्या {3, 4, 5, 6, 7, 8} 6 6/8 = 3/4 = 0.75

(iv) 9 से छोटी संख्या {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8} 8 8/8 = 1

(v) 3 का ग ण
ु ज {3, 6} 2 2/8 = 1/4 = 0.25

(i) P(8) = 1/8

(ii) P(िवषम) = 4/8 = 1/2

(iii) P(> 2) = 6/8 = 3/4

(iv) P(< 9) = 8/8 = 1

(v) P(3 का गुणज) = 2/8 = 1/4

ऐसा क्य होता है: त्रज्यखंड बराबर आकार के ह और यही वह भौ तक कारण है जससे आठ प रणाम समप्रा यक
ह — तीर के रुकने के लए हर त्रज्यखंड म उतनी ही जगह है। भाग (iv) वशेष रूप से रोचक है — चक्र क हर
संख्या 9 से छोट है, अतः घटना पूरी प्र तदश सम ष्ट है और P = 1, अथात न त घटना। भाग (iii) म अस मका को
कठोरता से प ढ़ए — '2 से बड़ी' म 2 स म लत नह है, अतः 6 त्रज्यखंड ह, 7 नह ।

संकेत: (v) म 9 भी 3 का गुणज है परंतु इस चक्र पर है ही नह , और 1 तथा 2, 3 के गुणज नह ह — केवल 3 और
6 अनुकूल ह। गनने से पहले ववरण को प्र तदश सम ष्ट से मलाइए।

प्र.10 *एक टोकरी म 4 लाल और 5 नीले रंग क गद ह। एक गद नकाली जाती है और अलग रख द जाती है, इसके
प ात दूसरी गद नकाली जाती है। संभा वत प रणाम और प्रा यकता को दशाने के लए एक वृक्ष आरेख
ख चए। वृक्ष आरेख का उपयोग करके नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर द जए— (i) एक लाल और उसके प ात
एक नीले रंग क गद को नकालने क प्रा यकता क्या है? (ii) 2 नीली गद नकालने क प्रा यकता क्या है?

टोकरी म आरंभ म 4 + 5 = 9 गद ह। पहली गद अलग रख द जाती है, अतः दूसरी नकासी के लए केवल 8 गद बचती ह — और
कौन-सा रंग कम हुआ, यह पहली नकासी पर नभर है। वृक्ष का दूसरा चरण यही दज करता है।

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लाल 3/8 लाल, िफर लाल = 12/72 = 1/6

नीली 5/8
लाल 4/9
लाल, िफर नीली = 20/72 = 5/18

नीली 5/9
लाल 4/8 नीली, िफर लाल = 20/72 = 5/18

नीली 4/8
नीली, िफर नीली = 20/72 = 5/18

बना प्र त ापन के नकालना—दूसरे चरण के हर म 8 है, क्य क एक गद पहले ही अलग रखी जा चुक है।

(i) पहले लाल, फर नीली। उसी पथ पर गुणा क जए —

P(पहले लाल) = 4/9

P(िफर नीली) = 5/8 (5 नीली शेष, कु ल 8 गेंदे ं)

P(लाल िफर नीली) = 4/9 × 5/8 = 20/72

= 5/18 ≈ 0.278

(ii) दोन नीली।

P(पहले नीली) = 5/9

P(िफर नीली) = 4/8 (8 में से के वल 4 नीली शेष)

P(दोनों नीली) = 5/9 × 4/8 = 20/72

= 5/18 ≈ 0.278

पथ गणना प्रा यकता

लाल, लाल 4/9 × 3/8 = 12/72 1/6

लाल, नीली 4/9 × 5/8 = 20/72 5/18

नीली, लाल 5/9 × 4/8 = 20/72 5/18

नीली, नीली 5/9 × 4/8 = 20/72 5/18

कु ल (12 + 20 + 20 + 20)/72 = 72/72 1

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ऐसा क्य होता है: दोन नका सयाँ स्वतंत्र नह ह। एक गद हटाने से कुल संख्या भी बदलती है और उस रंग क
संख्या भी, अतः दूसरे चरण क सभी भन्न का हर 8 है और अंश इस पर नभर है क आप कस शाखा से आए।
इसक तुलना प्रश्नावली 7.4 के प्र. 2 से क जए, जहाँ पेन वापस रख दया गया था और दोन चरण का हर 9 था —
प्र त ापन ही तय करता है क -चरणीय वृक्ष स्वयं को दोहराएगा या नह ।

स्वयं जाँ चए: चार प त्तय क प्रा यकताओं का योग 1 है, जो वृक्ष के पूण होने क मानक जाँच है। ध्यान द जए क
'लाल फर नीली' और 'नीली फर लाल' दोन 5/18 आते ह, यद्य प शाखाओं क भन्न अलग ह — 4/9 × 5/8
और 5/9 × 4/8 एक ही गुणनफल के दो रूप ह।

प्र.11 *मने षट् फलक य पासे के एक युग्म को फका। एक ऐसी घटना ल खए, जसक प्रा यकता 0 हो और एक ऐसा
प रणाम ल खए, जसक प्रा यकता 1 हो।

दो पासे फकने पर n(S) = 6 × 6 = 36 समप्रा यक प रणाम बनते ह और संभा वत योग 2 से 12 तक होते ह।
प्रा यकता 0 वाली घटना — कोई भी ऐसी बात जो घट ही नह सकती —

E = 'दोनों पासों का योग 1 है'

a, b ≥ 1 वाला कोई युग् म (a, b) 1 नही ं दे त ा, अतः n(E) = 0

P(E) = 0/36 = 0

अन्य सही उत्तर — 'योग 13 है', ' कसी पासे पर 7 आता है', 'दोन पास पर समान संख्या हो और योग वषम हो'।
प्रा यकता 1 वाली घटना — कोई भी ऐसी बात जो घटनी ही है —

F = 'योग 2 और 12 के बीच है (दोनों सि मिलत)'

छत्तीसों पिरणाम इसे संत ष्ु ट करते है,ं अतः n(F) = 36

P(F) = 36/36 = 1

अन्य सही उत्तर — 'प्रत्येक पासा 1 से 6 तक क कोई पूण संख्या दखाता है', 'योग कम-से-कम 2 है'।

ऐसा क्य होता है: P = 0 और P = 1 पैमाने के दोन सरे ह और वे घटनाओं का वणन करते ह, भाग्य का नह ।
असंभव घटना का अनुकूल समुच्चय रक्त होता है; न त घटना का अनुकूल समुच्चय पूरी प्र तदश सम ष्ट होती है।
दो पास क हर वास्त वक बात इन्ह के बीच है — सबसे अ धक आने वाला योग 7 भी केवल 6/36 = 1/6
प्रा यकता रखता है।

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संकेत: प्रश्न म "एक ऐसा प रणाम जसक प्रा यकता 1 हो" लखा है, परंतु कठोर अथ म इस प्रयोग के कसी भी
एकल प रणाम क प्रा यकता 1 नह हो सकती — 36 म से प्रत्येक युग्म क प्रा यकता 1/36 है। प्रा यकता 1 केवल
न त घटना क होती है, जैसा ऊपर लखा है। इसे 'ऐसा फल जो होना ही है' के अथ म प ढ़ए।

प्र.12 *नीचे द गई सूचना के आधार पर प्र तदश सम ष्ट ल खए और प्रा यकता क गणना क जए— (i) दो पासे फके
गए। इसक क्या प्रा यकता है क प्राप्त अंक का योग 5 से बड़ी अभाज्य संख्या हो? (ii) एक थैले म 4 लाल, 3
हरे और 2 नीले रंग क गद ह। दो गद को बना प्र त ापन के नकाला जाता है। इसक क्या प्रा यकता है क
दोन गद के रंग भन्न ह? (iii) तीन सक्क को उछाला जाता है। इसक क्या प्रा यकता है क पहला सक्का
चत प्रद शत करता हो और कुल मलाकर दो चत प्राप्त ह ? (iv) 1, 2, 3 और 4 संख्याओं को बना पुनरावृ त्त
के उपयोग करके एक 4-अंक य संख्या बनाई गई है। इसक क्या प्रा यकता है क यह संख्या सम है? (v) एक
वद्याथ 3 प्रश्न क एक बहु- वकल्पीय परीक्षा म स म्म लत होता है, जहाँ प्रत्येक प्रश्न के 4 वकल्प (A, B, C,
D) ह और उनम से केवल एक वकल्प सही है। इसक क्या प्रा यकता है क वद्याथ अनुमान लगाकर 2 सही
उत्तर प्राप्त करे?

(i) दो पासे, योग 5 से बड़ी अभाज्य संख्या। प्र तदश सम ष्ट सभी क्र मत युग्म क है, n(S) = 6 × 6 = 36. संभा वत योग 2 से
12 ह; उनम अभाज्य 2, 3, 5, 7, 11 ह और 5 से बड़े 7 और 11 ह।

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co m
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दूसरा पासा
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m .co a g
l a se 1 2 3 4 5 6
a g
1 2 3 4 m 5 6 7
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2 3 4 a g 5 6 7 8

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पहला पासा

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3 4 5 6 7 8
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a g 4 5 6 7 8 9 10
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5 6 7 sem 8
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9 10 11
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6 7 8 9 10 11 12 om
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m a
e m . co agl
g l as 36 समप्रा यक योग। 6 गुलाबी खाने योग 7 के ह और 2 हरे खाने योग 11 के—कुल मलाकर 36 म से 8.

a
se m
योग 7 — (1,6), (2,5), (3,4), (4,3), (5,2), o m → 6 पिरणाम
c(6,1) g l a
. a
a s em
gl
योग 11 — (5,6), (6,5) → 2 पिरणाम

n(E) = 6 + 2 = 8
a

co m
.
P = 8/36 = 2/9 ≈ 0.222

se m
o m l a
m .c4 लाल, 3 हरी, 2 नीली म से दो गद — भन्न रंग। कुल 9 गद; बना प्र त aापनg दो नकालने पर
se
(ii)

a
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m a s e
e m . co agl
g l as
a

com
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n(S) = 9C2 = (9 × 8)/2 = 36 समपाियक युग् म

समान रंग — लाल 4C2 = 6, हरी 3C2 = 3, नीली 2C2 = 1

n(समान) = 6 + 3 + 1 = 10, अतः P(समान) = 10/36 = 5/18

P(िभन्न) = 1 − 5/18 = 13/18 ≈ 0.722

C के संकेत के बना सीधे ग नए — 4×3 (लाल-हरी) + 4×2 (लाल-नीली) + 3×2 (हरी-नीली) = 12 + 8 + 6 = 26 भन्न-रंग
युग्म, और 26/36 = 13/18 ✓
(iii) तीन सक्के — पहला चत और कुल मलाकर ठ क दो चत।

S = {HHH, HHT, HTH, HTT, THH, THT, TTH, TTT}, n(S) = 8

पहला H और ठीक दो िचत — HHT, HTH → n(E) = 2

P = 2/8 = 1/4 = 0.25

ध्यान द जए क THH म ठ क दो चत तो ह, पर पहली शत पूरी नह होती, अतः वह नह गना जाता।
(iv) 1, 2, 3, 4 से बना पुनरावृ त्त बनी 4-अंक य संख्याएँ — सम।

n(S) = 4! = 4 × 3 × 2 × 1 = 24 संख्याएँ

सम होने के िलए इकाई का अंक 2 या 4 होना चािहए → 2 िवकल्प

शेष तीन अंक 3! = 6 पकार से सजाए जा सकते है ं

n(E) = 2 × 6 = 12

P(सम) = 12/24 = 1/2 = 0.5

(v) 3 बहु- वकल्पीय प्रश्न, अनुमान से ठ क 2 सही। प्रत्येक प्रश्न के 4 वकल्प ह, अतः

n(S) = 4 × 4 × 4 = 64 समपाियक उत्तर-पत्रक

तीन में से कौन-से 2 पश्न सही है ं — 3 पकार से

पत्येक सही पश्न — 1 पकार; गलत पश्न — 3 गलत िवकल्प

n(E) = 3 × 1 × 1 × 3 = 9

P(ठीक 2 सही) = 9/64 ≈ 0.141 अथवा लगभग 14%

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ऐसा क्य होता है: हर भाग म वही अनुशासन है — पहले समप्रा यक प रणाम क सूची बनाइए, फर ग नए। (i)
म युग्म क्र मत होने चा हए, क्य क (1,6) और (6,1) दो अलग फक ह; य द 2 से 12 तक के 11 योग को ही
प्र तदश सम ष्ट मान ल तो गलत उत्तर 2/11 आएगा। (ii) म युग्म अक्र मत ह, क्य क दोन गद साथ नकलती ह;
पूरक इस लए लया गया क समान रंग क गनती छोट है। (iv) म शत इकाई के अंक पर है, अतः पहले वही तय
कया गया और शेष स्वतंत्र रूप से सजाए गए। (v) म गलत उत्तर का ान भी मायने रखता है, इसी लए 3 का
गुणक आता है।

संकेत: (iv) के उत्तर 1/2 का एक सुंदर कारण है। चार अंक म दो सम और दो वषम ह, और 24 व्यव ाओं म
प्रत्येक अंक के इकाई ान पर आने क संभावना समान है — अतः ठ क आधी संख्याओं के अंत म सम अंक होगा।

प्र.13 *एक बक्से म 4 गद ह जन पर 1 से 4 तक अंक लखे ह। नम्न ल खत प्रयोग के लए वृक्ष आरेख का उपयोग
करते हुए एक प्र तदश सम ष्ट ल खए— (i) एक गद नकाली जाती है और उस पर ल खत अंक को एक कागज
पर लख लया जाता है। तत्प ात गद को वापस बक्से म रख दया जाता है और एक दूसरी गद नकाली जाती है
और उस पर ल खत अंक को लख लया जाता है। (ii) एक गद नकाली जाती है और लख ली जाती है। पहली
गद के बना प्र त ापन के परीक्षक दूसरी गद नकालता है और उसे लख लेता है। (iii) इन दोन प्र तदश
सम ष्टय के आकार क्या ह?

(i) प्र त ापन के साथ। गद वापस चली जाती है, अतः दूसरी नकासी म भी चार अंक उपलब्ध ह — 4 शाखाएँ, और प्रत्येक से
आगे 4 शाखाएँ।

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(1, 1)
1
2 (1, 2)
3
4 (1, 3)

(1, 4)

1 (2, 1)
1
2 (2, 2)
3
4 (2, 3)
2

(2, 4)

3 (3, 1)
1
2 (3, 2)
3
4 (3, 3)
4

(3, 4)

(4, 1)
1
2 (4, 2)
3
4 (4, 3)

(4, 4)

प्र त ापन के साथ—पहली संख्या के बाद चार म से कोई भी संख्या आ सकती है, अतः n(S) = 4 × 4 = 16.

S1 = {(1,1), (1,2), (1,3), (1,4), (2,1), (2,2), (2,3), (2,4),

(3,1), (3,2), (3,3), (3,4), (4,1), (4,2), (4,3), (4,4)}

(ii) बना प्र त ापन के। पहली गद बाहर ही रहती है, अतः पहला अंक दोबारा नह आ सकता — चार शाखाएँ आगे केवल 3-3
भाग म बँटती ह।

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(1, 2)
2
3
(1, 3)
4

(1, 4)

1 (2, 1)
1
3
(2, 3)
4
2
(2, 4)

3 (3, 1)
1
2
(3, 2)
4
4
(3, 4)

(4, 1)
1
2
(4, 2)
3

(4, 3)

बना प्र त ापन के—पहली संख्या दोहराई नह जा सकती, अतः प्रत्येक शाखा केवल 3 भाग म बँटती है और n(S) = 4 × 3 = 12.

S2 = {(1,2), (1,3), (1,4), (2,1), (2,3), (2,4),

(3,1), (3,2), (3,4), (4,1), (4,2), (4,3)}

(iii) आकार।

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
em.
n(S1) = 4 × 4 = 16
m l as
m .co
n(S2) = 4 × 3 = 12
a g
l a se
a g
अंत र = 4, अथ त ठीक वे चार पुन रावृित्तयाँ (1,1), (2,2), (3,3), (4,4)

co m
ऐसा क्य होता है: प्र त
m .
ापन ही तय करता है क वृक्ष का दूसरा चरण कतना चौड़ा होगा। गद वापस रखने पर
ag
l a se
बक्सा अप रव तत रहता है, अतः दूसरी नकासी म भी वही 4 वकल्प ह — और (क, क) प्रकार के युग्म संभव ह।
agजाता है, अतः दूसरी नकासी म 3 वकल्प बचते ह और कोई युग्म अंक
गद बाहर रखने पर एक वकल्प समाप्त हो
दोहरा नह सकता। छू टे हुए चार प रणाम ठ क वही चार पुनरावृ त्तयाँ ह, इसी लए 16 − 12 = 4.

co m
se m.
c o m l a
g, क्रम क चता कए बना, तो
संकेत: दोन सू चय म क्रम महत्त्वपूण है — (1,2) का अथ पहले 1 फर 2 है, जब क (2,1) उल्टा है, और दोन

m .अलग-अलग a
aSseघटकर 12 ÷ 2 = 6 अक्र मत युग्म क रह जाती।
वृक्ष क प त्तयाँ ह। य द प्रश्न केवल यह पूछता क कौन-से दो अंक नकले

agl
2

m a s
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.co agl
a s
agl सम ष्ट के तत्त्व को सूचीबद्ध क जए।
प्र.14 *एक सक्का उछालने और 1 से 6 तक संख्यां कत ताश के 6 पत्त के समूह से एक पत्ता नकालने का प्रयोग
एक साथ करने के लए एक प्र तदश

. com
सक्के से 2 प रणाम और पत्त से 6 प रणाम मलते ह, और दोन एक साथ होते ह, अतः सक्के कe
s m क प रणाम को हर पत्ते के
o m gl a
े प्रत्ये
साथ जो cड़ए।
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S = {(H, 1), (H, 2), (H, 3), (H, 4), (H, 5), (H, 6),

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(T, 1), (T, 2), (T, 3), (T, 4), (T, 5), (T, 6)}
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n(S) = 2 × 6 = 12

m
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सक्का \ पत्ता 1 2 3 4 5 6

se m (H, 5)
com l a
H (H, 1) (H, 2) (H, 3) (H, 4) (H, 6)

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a(T, 4)
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as
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(T, 1) (T, 2) (T, 3) (T, 5) (T, 6)

.c
s e m
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ऐसा क्य होता है: सक्के का प रणाम पत्ते को प्रभा वत नह करता और पत्ता सक्के को, अतः कोई संयोजन

. co a gl
m
असंभव नह है और कसी को वरीयता भी नह — बारह प रणाम समप्रा यक ह, प्रत्येक 1/12. यह वही सूची है जो

as e
l
प्रश्नावली 7.3 के प्र. 2(i) म बनी थी, जहाँ छह पत्त के ान पर पासा था — इससे स्पष्ट है क संरचना महत्त्वपूण
है, सामग्री नह । a g

com
m .
m ase
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संकेत: इसी प्र तदश सम ष्ट से संयुक्त प्रश्न भी तुरंत हल हो जाते ह। P( चत और सम पत्ता) = |{(H,2), (H,4),
(H,6)}| / 12 = 3/12 = 1/4, जो 1/2 × 1/2 भी है — अथात -चरणीय पथ पर गुणा।

प्र.15 *तीन सक्क को उछाला जाता है और चत आने क संख्या को अं कत कया जाता है। नम्न ल खत म कौन-
सा समुच्चय इस प्रयोग के लए एक प्र तदश सम ष्ट है? अन्य समुच्चय, प्र तदश सम ष्ट के रूप म योग्य क्य नह
माने जाते ह— (i) {1, 2, 3} (ii) {0, 1, 2} (iii) {0, 1, 2, 3, 4} (iv) {0, 1, 2, 3}

प्र तदश सम ष्ट (iv) {0, 1, 2, 3} है। तीन सक्क म चत क संख्या 0, 1, 2 या 3 हो सकती है — और कुछ नह ।

समुच्चय वैध? दोष क्या है

(i) {1, 2, 3} नही ं 0 छू ट गया है। TTT प्रयोग का वास्त वक प रणाम है और उसके लए कोई तत्त्व बचता ही नह ।

(ii) {0, 1, 2} नही ं 3 छू ट गया है। HHH घट सकता है, अतः सूची अपूण है।

(iii) {0, 1, 2, 3, नही ं इसम 4 है, जो असंभव है — सक्के केवल तीन ह, अतः अ धक-से-अ धक तीन चत आ सकते ह।
4}

(iv) {0, 1, 2, 3} हाँ पूण भी है और पुनरावृ त्त-र हत भी — तीन सक्क क हर उछाल इन्ह चार म से ठ क एक गनती दे ती
है।

ऐसा क्य होता है: प्र तदश सम ष्ट को अनुभाग 7.3.1 के दोन नयम एक साथ पूरे करने होते ह — कुछ छू टे नह
और जो घट ही नह सकता वह हो नह । (i) और (ii) पहला नयम तोड़ते ह, (iii) दूसरा। असंभव प रणाम जोड़ना
नद ष नह है — उसे प्रा यकता 0 मलेगी और आपको 5 से भाग दे ने का लोभ होगा।

संकेत: {0, 1, 2, 3} सही प्र तदश सम ष्ट तो है, परंतु उसके चार तत्त्व समप्रा यक नह ह, अतः P(2 चत) 1/4
नह है। आठ समप्रा यक प रणाम {HHH, HHT, HTH, HTT, THH, THT, TTH, TTT} पर लौटने से P(0) =
1/8, P(1) = 3/8, P(2) = 3/8, P(3) = 1/8 मलता है, जनका योग 1 है। वैध प्र तदश सम ष्ट होना और गनती
के सूत्र के योग्य होना — ये दो अलग बात ह।

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प्र.16 *मान ली जए, आप यादृ क रूप से चत्र 7.8 म दशाए अनुसार आयताकार क्षेत्र म रंग क एक बूँद गराते ह।

3 मी

2 मी

चत्र 7.8, पृष्ठ 173 — आयताकार क्षेत्र, जसके भीतर वृत्त बना है (मापानुसार)।

इसक क्या प्रा यकता होगी क यह बूँद 1 मीटर व्यास वाले वृत्त म गरेगी?

चत्र 7.8 के अनुसार आयत 3 मी. × 2 मी. का है और वृत्त का व्यास 1 मी. है, अतः उसक त्रज्या 0.5 मी. है। यहाँ प रणाम बदु ह,
कोई गनी जा सकने वाली सूची नह — इस लए प्रा यकता क्षेत्रफल से मापी जाती है।

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3 मी.

1 मी.
2 मी.

बूँद 6 मी.² के आयत म कह भी गर सकती है; वह वृत्त म तभी गरेगी जब π/4 मी.² क्षेत्रफल वाले चक्र पर गरे।

आयत का क्षेत्रफल = 3 × 2 = 6 मी.²

वृत्त की ित्रज्या = 1/2 = 0.5 मी.

वृत्त का क्षेत्रफल = πr² = π × (1/2)² = π/4 मी.²

P(बूदँ वृत्त में िगरे) = वृत्त का क्षेत्रफल / आयत का क्षेत्रफल

= (π/4) ÷ 6

= π/24

≈ 3.1416/24 ≈ 0.131 अथवा लगभग 13.1%

π ≈ 22/7 लेने पर (22/7)/24 = 22/168 = 11/84 ≈ 0.131 — तीन दशमलव ान तक वही उत्तर।

ऐसा क्य होता है: यहाँ 'यादृ क रूप से' का अथ है क आयत का प्रत्येक बदु समप्रा यक है और कसी भाग को
वरीयता नह है। इस मान्यता के अंतगत कसी भाग म गरने क संभावना उसके क्षेत्रफल के अनुपात म होती है —
अतः गनती का सूत्र n(A)/n(S) यहाँ क्षेत्रफल(A)/क्षेत्रफल(S) बन जाता है। वृत्त आयत के आठव भाग से भी कम
घेरता है, और उत्तर यही कहता है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: जब तक वृत्त पूरी तरह आयत के भीतर है, उसे कह भी र खए, उत्तर π/24 ही रहेगा — केवल क्षेत्रफल
मायने रखते ह, त नह । यह भी दे खए क वृत्त का व्यास आयत क लंबाई का तहाई है, फर भी वह लगभग
13% ही घेरता है — क्षेत्रफल लंबाई के वग के अनुपात म घटता है।

अध्याय — एक नज़र म
प्रा यकता कसी घटना के घ टत होने क संभावना का मापन है, जसे 0 से 1 तक के पैमाने पर व्यक्त कया जाता है।
कसी घटना E के लए 0 ≤ P(E) ≤ 1. P(E) = 0 का अथ असंभव, P(E) = 1 का अथ न त और P(E) = 1/2 का अथ
समप्रा यक है। इस अंतराल के बाहर क कोई संख्या प्रा यकता नह हो सकती।
यादृ क प्रयोग वह है जसक पुनरावृ त्त क जा सके, जसके सभी संभा वत प रणाम पहले से ात ह , परंतु कसी एक
परीक्षण का प रणाम पहले से ात न हो। सभी संभा वत प रणाम का समुच्चय प्र तदश सम ष्ट S है; उसका प्रत्येक तत्त्व एक
प रणाम है; तत्त्व क संख्या प्र तदश आकार n(S) है। घटना, S का कोई भी उपसमुच्चय है — एक प रणाम, कई प रणाम
अथवा एक भी नह ।
प्रायो गक प्रा यकता = (घटना के घ टत होने क संख्या) ÷ (परीक्षण क कुल संख्या)। यह एक सापे क्षक आवृ त्त है — यह
आपके पास उपलब्ध आँकड़ का वणन करती है, अतः भन्न परीक्षण-समूह से भन्न मान प्राप्त होते ह।
सैद्धां तक प्रा यकता P(A) = (अनुकूल प रणाम क संख्या) ÷ (संभा वत प रणाम क संख्या)। यह भाग केवल तभी वैध
है जब सूची का प्रत्येक प रणाम समप्रा यक हो। य द प रणाम समप्रा यक नह ह तो उन्ह गनने से उत्तर गलत आएगा —
तब प्र तदश सम ष्ट को इस प्रकार पुनः लखना होगा क उसके तत्त्व वास्तव म समप्रा यक हो जाएँ।
बृहत् संख्याओं के नयम के अनुसार, परीक्षण क संख्या जतनी बढ़ती है, प्रायो गक प्रा यकता उतनी ही सैद्धां तक
प्रा यकता के समीप र होती जाती है। यह नयम यह नह कहता क थोड़े परीक्षण म दोन समान ह गे, और न ही यह कहता
है क कसी प रणाम क लंबी ंखला के बाद वपरीत प रणाम का आना 'बाक ' है — यही भूल द्यूतकार का भ्रम कहलाती
है। सक्के और पासे क कोई स्मृ त नह होती; प्रत्येक परीक्षण स्वतंत्र है।
वृक्ष आरेख बहु-चरणीय प्रयोग के प रणाम को सूचीबद्ध करता है — मूल से पत्ती तक का एक पूरा पथ एक प रणाम है। एक
पथ क प्रा यकता के लए उसक शाखाओं को गुणा क जए; घटना बनाने वाले पथ को जो ड़ए। कसी भी वृक्ष के सभी पथ
क प्रा यकताओं का योग 1 होता है।

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कक्षा 9 ग णत अध्याय 7 संभावनाओं का ग णत — प्रा यकता का प रचय
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co m
m.
त्व रत पुनरावृ त्त
m l a se
m .coसंकेत / सूत्र ag भूल
ase
संकल्पना इसका वास्त वक अथ सामान्य

agl
प रणाम S का एक तत्त्व एक परीक्षण का एक पूण फल प रणाम के समूह को एक प रणाम मान
लेना

co m
प्र तदश सम ष्ट S = {प1, प2, …, पn}
em
.
प्रत्येक संभा वत प रणाम, ठ क एक कोई प रणाम छू ट जाना या दो बार लखा
ag
l a s
बार जाना

प्र तदश आकार n(S)
ag S म कतने प रणाम ह प रणाम के ान पर प्रकार को गनना

m
घटना E⊆S S म से चुने गए प रणाम का
हो सकते ह m
.co
यह भूलना क E म 0, 1 या अनेक प रणाम

a se
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समुच्चय

m . ag
ase
प्रायो गक प्रा यकता (घटना घिटत होने की आँकड़ से मापी गई सापे क्षक यह अपेक्षा करना क यह सैद्धां तक मान के

agl
संख्या)/(कु ल परीक्षण) आवृ त्त ठ क बराबर होगी

a s
सैद्धां तक प्रा यकता समप्रा यक प रणाम म अनुकूल प रणाम के समप्रा यक न होने पर भी
m
P(A) = n(A)/n(S)

.co agl
प रणाम का अंश इसका उपयोग

a s em0 असंभव · 1/2 समप्रा यक · 1
gl
प्रा यकता का 1 से बड़ा या ऋणात्मक उत्तर लख दे ना
a
0 ≤ P(E) ≤ 1
पैमाना न त

m
.co
पूरक P(E नही ं) = 1 − P(E) प्रत्येक परीक्षण म या तो E होगी या घटाने के ान पर जोड़ दे ना

em
नह

m a s
-चरणीयcवृo एक पथ क शाखाएँ एक के बाद एक gl जोड़ने के
. a
em
क्ष P(पथ) = उसकी शाखाओं का ान पर गुणा करना और इसके

l a s गण
ु नफल घ टत होती ह वपरीत

ag स्वतंत्रता
se m
पूव पिरणाम से P नही ं बदलती नष्पक्ष पासे क कोई स्मृ त नह होती द्यूतकार का भ्रम — 6 अब 'आना ही

com l a
चा हए'

. पहली नकासी से बक्सा सचमुच ag
e m
as
agl
बना प्र त ापन दू स रे चरण का हर 1 कम हो दूसरे चरण म भी पहले चरण क भन्न
जाता है बदल गया है लगाना

m
बृहत् संख्याओं का पायोिगक → सै ािं तक अ धक परीक्षण, अ धक र इसे अगले परीक्षण का वादा समझ लेना
नयम सापे क्षक आवृ त्त
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m .co a g
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ag
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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages45
Languagehindi
Updated19 Sep 2026