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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 8: अगले पद का पूवानुमान —
अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत मंजरी
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
174 – 196 20 62 हन्द
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
क ा 9 · ग णत · ग णत मं ज री
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: अगले पद का पूवानुमान —
अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण
अध्याय 8 दो बात को अलग-अलग करता है, जो दे खने म एक-सी लगती ह — प्र तरूप को पहचानना और उस नयम को सद्ध करना। अनुक्रम पद
क एक क्र मक सूची है; उसका नयम व्यापक सूत्र (tn को पद-संख्या n के रूप म लखना) या पुनरावत सूत्र (tn को पछले पद के रूप म लखना)
हो सकता है। फर दो वशेष अनुक्रम पर ध्यान दया जाता है — समानांतर ेढ़ , जो बार-बार जोड़ने से बनती है, और गुणोत्तर ेढ़ , जो बार-बार
गुणा करने से बनती है — और योग 1 + 2 + … + n का सूत्र केवल बताया नह , नग मत कया जाता है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ग णत मंजरी (क ा 9) 174 – 196
खं ड प्रश्न
20 62
माध्यम
हन्द
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 174
अनुभाग 8.1 अनुक्रम से प रचय
सो चए और वचार क जए
प्र.1 इस प्रश्न से ठ क पहले दए गए अनुक्रम इस प्रकार ह—
1, 2, 3, 4, 5, 6, … (प्राकृत संख्याएँ)
1, 3, 5, 7, 9, 11, … ( वषम संख्याएँ)
1, 3, 6, 10, 15, 21, … ( त्रभुजाकार संख्याएँ)
1, 4, 9, 16, 25, 36, … (वग संख्याएँ)
क्या आप ऊपर दए गए अनुक्रम म प्रत्येक अनुक्रम म प्र तरूप क व्याख्या कर सकते ह? क्या आप इन अनुक्रम
म अ म कुछ संख्याओं का पूवानुमान लगा सकते ह?
चार अनुक्रम क व्याख्या इस बात से होती है क एक पद से अगले पद तक क्या होता है, और केवल यही बात आगे के सभी पद
नधा रत कर दे ती है।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
अनुक्रम अंतर का प्र तरूप अगले तीन पद Nव पद का सूत्र
1, 2, 3, 4, 5, 6, … प्रत्येक बार 1 जुड़ता है 7, 8, 9 tn = n
1, 3, 5, 7, 9, 11, … प्रत्येक बार 2 जुड़ता है 13, 15, 17 tn = 2n – 1
1, 3, 6, 10, 15, 21, … अंतर 2, 3, 4, 5, 6 ह — ये स्वयं 1-1 बढ़ते ह 28, 36, 45 tn = n(n + 1)/2
1, 4, 9, 16, 25, 36, … अंतर 3, 5, 7, 9, 11 ह — वषम संख्याएँ 49, 64, 81 t n = n2
अं तम दो पं क्तय क जाँच क जए: 21 + 7 = 28, 28 + 8 = 36, 36 + 9 = 45; तथा 36 + 13 = 49, 49 + 15 = 64, 64 +
17 = 81। अंतर स्वयं एक अनुक्रम बनाते ह, और इसी से पूवानुमान संभव होता है।
ऐसा क्य होता है: त्रभुजाकार संख्याएँ 1, 2, 3, 4, … के क्र मक योग ह, अत: (n – 1)व और nव पद के बीच का
अंतर ठ क n होता है। वग संख्याएँ 1, 3, 5, 7, … के क्र मक योग ह, अत: वहाँ अंतर nव वषम संख्या 2n – 1 है।
दोन तय म आप अनुमान नह लगा रहे — आप उस संरचना को पढ़ रहे ह, जो अनुक्रम म पहले से वद्यमान है।
स्वयं जाँ चए: 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 = 28 तथा 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 = 49। क्र मक योग क
ये दोन सू चयाँ वास्तव म त्रभुजाकार और वग संख्याएँ ही दे ती ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 174–175
अनुभाग 8.1 अनुक्रम से प रचय
प्र.1 क्या आप अन्य प र मत अनुक्रम पर वचार कर सकते ह, जन्ह आप अपने दै नक जीवन म दे खते ह?
हाँ — प र मत अनुक्रम वह क्र मक सूची है, जो कह समाप्त हो जाती है, और दै नक जीवन ऐसे अनुक्रम से भरा है।
ट -20 पारी के ओवर: 1, 2, 3, …, 20।
प्रचलन म भारतीय नोट: 10, 20, 50, 100, 200, 500।
कसी वद्याथ के छह वषय के अंक, अंकपत्र के क्रम म लखे हुए।
वष 2026 के बारह महीन म दन क संख्या: 31, 28, 31, 30, 31, 30, 31, 31, 30, 31, 30, 31।
सी ढ़य क एक उड़ान क सी ढ़याँ नीचे से ऊपर तक क्रम म, या रेलवे स्टे शन के प्लेटफ़ॉम नंबर।
ऐसा क्य होता है: कसी सूची को अनुक्रम बनने के लए दो शत पूरी करनी होती ह — वस्तुएँ न त क्रम म ह ,
और प्रत्येक वस्तु क एक त संख्या हो। दुकान म बखरी हुई क मत अनुक्रम नह ह; वही क मत सस्ते से महँगे
के क्रम म लखी जाएँ तो अनुक्रम बन जाती ह। अनुक्रम प र मत तभी है जब तय क यह सूची समाप्त हो जाए,
जैसे 20व ओवर पर या 12व महीने पर।
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संकेत: तीन बदु … ही प र मत और अप र मत अनुक्रम को अलग करते ह। 6, 12, 24, 48, 96 म पाँच पद ह और
यह समाप्त हो जाता है; 6, 12, 24, 48, 96, … कभी समाप्त नह होता।
प्र.2 क्या आप इस अनुक्रम के आगामी दो पद के लए प्र तरूप क रचना कर सकते ह?
1 3 6 10 15
चत्र 8.1 — प्रथम पाँच त्रभुजाकार संख्याएँ, प्रत्येक बदुओं क त्रभुजाकार व्यव ा के रूप म।
चत्र 8.1 म प्रथम पाँच त्रभुजाकार संख्याएँ 1, 3, 6, 10, 15 बदुओं क त्रभुजाकार व्यव ा ारा दशाई गई ह। आगामी दो पद
21 और 28 ह, जो प्रत्येक बार एक नई पं क्त जोड़ने से बनते ह।
t₆ = 21 t₇ = 28
छठ और सातव त्रभुजाकार व्यव ा। छठ म 1, 2, 3, 4, 5, 6 बदुओं क पं क्तयाँ ह; सातव म नीचे 7 बदुओं क एक पं क्त और जुड़
जाती है।
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t6 = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 = 21
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t7 = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 = 28
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ऐसा क्य होता है: एक त्रभुजाकार व्यव ा से अगली व्यव ा तक जाने के लए पूरा पुराना त्रभुज ज्य का त्य
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रखा जाता है और उसके नीचे एक नई पं क्त रख द जाती है। इस नई पं क्त म ऊपर वाली पं क्त से एक बदु अ धक
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होता है, अत: संख्या 15 + 6 = 21 और फर 21 +m
s e 7 = 28 हो जाती है। यही कारण है क प्रत्येक त्रभुजाकार
संख्या अपनी पद-संख्या तक क सभी प्राकृतla
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संख्याओं का योगफल होती है।
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प्र.3 वषम संख्याओं और वग संख्याओं के मध्य इस रोचक संबंध को चत्र 8.2 म आरेख ारा प्रद शत कया गया है।
क्या आप इस संबंध क व्याख्या कर सकते ह?
चत्र 8.2 — बदुओं का एक वगाकार वन्यास, जो एकांतर रंग क L-आकार प य म वभा जत है।
चत्र 8.2 म बदुओं क वगाकार व्यव ा को L-आकार क प य म बाँटा गया है, प्रत्येक प अलग रंग क है। पहली प म 1 बदु
है, दूसरी म 3, तीसरी म 5, और इसी प्रकार आगे — अत: वग बनाना और वषम संख्याओं को जोड़ना एक ही बात है।
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6 × 6 व्यव ा को 1, 3, 5, 7, 9 और 11 बदुओं क L-आकार प य म बाँटा गया है। धूसर रेखाएँ बताती ह क एक वग कहाँ समाप्त
होता है और अगला कहाँ प्रारंभ होता है।
1 = 12
1 + 3 = 4 = 22
1 + 3 + 5 = 9 = 32
1 + 3 + 5 + 7 = 16 = 42
1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 = 36 = 62
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ऐसा क्य होता है: n × n वग को (n + 1) × (n + 1) वग बनाने के लए n बदुओं का एक नया स्तंभ, n बदुओं
क एक नई पं क्त और एक कोने का बदु जोड़ना पड़ता है — अथात n + n + 1 = 2n + 1 बदु, जो सदै व वषम
संख्या है। अत: वग संख्याओं म एक कदम आगे बढ़ने पर ठ क एक और वषम संख्या जुड़ती है, और प्रथम n वषम
संख्याओं का योग n2 ही होना चा हए। यह चत्र तथ्य का केवल उदाहरण नह है; यह स्वयं उपप त्त है।
यह क जए: प्रथम 10 वषम संख्याओं का योग बना जोड़े बताइए। उत्तर 102 = 100 है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 176
अनुभाग 8.1 अनुक्रम से प रचय
प्र.1 प्रश्न — अनुक्रम 1, 4, 7, 10, 13, ... पर वचार क जए। क्या आप आगामी चार पद का पूवानुमान लगा सकते
ह? क्या आप इस अनुक्रम म दए गए पद तक आने वाले सभी पद का योग करने पर प्राप्त अनुक्रम के पहले 10
पद बता सकते ह? (संकेत — प्रथम पद 1 है। दूसरा पद 1 + 4 = 5 है, तीसरा पद 1 + 4 + 7 = 12 है और आगे
भी इसी प्रकार पद प्राप्त कए जा सकते ह।)
क्रमागत पद के बीच अंतर अचर 3 है, अत: आगामी चार पद 16, 19, 22, 25 ह।
1, 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25, 28, …
nवाँ पद: tn = 1 + (n – 1) × 3 = 3n – 2
अब क्र मक योग बनाइए। प्रथम दस पद 1, 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25, 28 लेकर एक-एक करके जो ड़ए:
N 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
1, 4, 7, … का पद 1 4 7 10 13 16 19 22 25 28
क्र मक योग Sn 1 5 12 22 35 51 70 92 117 145
अत: अभीष्ट अनुक्रम 1, 5, 12, 22, 35, 51, 70, 92, 117, 145 है।
ऐसा क्य होता है: नए अनुक्रम के अंतर 4, 7, 10, 13, … ह — अथात मूल अनुक्रम ही, दूसरे पद से आगे। क्र मक
योग यही करता है: Sn–1 से Sn तक क छलाँग ठ क वही पद है, जसे आपने अभी जोड़ा। चूँ क ये अंतर स्वयं अचर
3 से बढ़ते ह, योग का अनुक्रम और भी तेज़ी से बढ़ता है, और वह समानांतर ेढ़ नह है, यद्य प जस अनुक्रम से
वह बना है वह समानांतर ेढ़ है।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? 1, 5, 12, 22, 35, 51, … पंचभुजाकार संख्याएँ कहलाती ह। इनका nवाँ पद n(3n –
1)/2 है — n = 4 के लए जाँ चए: 4 × 11 ÷ 2 = 22।
प्र.2 प्रश्न — क्या आप त्रभुजाकार संख्याओं के अनुक्रम हेतु t5, t6, t7 और t8 लख सकते ह?
त्रभुजाकार संख्याएँ 1, 3, 6, 10, 15, 21, 28, 36, … ह, अत:
t5 = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 = 15
t6 = 15 + 6 = 21
t7 = 21 + 7 = 28
t8 = 28 + 8 = 36
यही मान व्यापक सूत्र tn = n(n + 1)/2 से भी सीधे मल जाते ह:
t5 = (5 × 6)/2 = 15 t6 = (6 × 7)/2 = 21
t7 = (7 × 8)/2 = 28 t8 = (8 × 9)/2 = 36
ऐसा क्य होता है: tn म नीचे लखी संख्या त है, मान नह । t7 = 28 लखने का अथ है क सातव
त्रभुजाकार संख्या 28 है — इससे संख्या 7 के वषय म कुछ नह कहा जा रहा। त और मान को अलग-अलग
रखने से ही आगे चलकर tn = 300 जैसे समीकरण हल करके त ात क जा सकती है।
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 176
अनुभाग 8.1 अनुक्रम से प रचय
सो चए और वचार क जए
प्र.1 क्या आप अन्य प्रकार के अनुक्रम के वषय म वचार कर सकते ह? पाँच व भन्न प्रकार के अनुक्रम क सूची
बनाइए और अपने मत्र के साथ अनुक्रम के गुण पर चचा क जए।
अनुक्रम इस बात म भन्न होते ह क उनके पद कस प्रकार क संख्याएँ ह और एक पद से अगला पद कैसे बनता है। पाँच स्पष्ट रूप
से भन्न प्रकार:
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प्रकार उदाहरण गुण
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इकाई भन्न का घटता अनुक्रम 1, 1/2, 1/3, 1/4,
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प्रत्येक पद धनात्मक है, प्रत्येक पछले से छोटा है, और पद 0 के नकट जाते ह
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… कतु 0 तक पहुँचते नह
gl पूणाक का अनुक्रम
aऋणात्मक –1, –2, –3, –4, पद बना सीमा के घटते ह; n फर भी प्राकृत संख्या है, भले tn ऋणात्मक हो
…
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एकांतर अनुक्रम 1, –1, 1, –1, … न बढ़ता है न घटता; केवल दो मान बार-बार दोहराते ह
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बार-बार दोगुना होने वाला
अनुक्रम
ag प्रत्येक पद पछले पद का नयत गुणज है, अत: यह बहुत तीव्रता से बढ़ता है
3, 6, 12, 24, 48,
…
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बना कसी सरल नयम वाला अभाज्य संख्याएँ: पूणत: प रभा षत, फर भी अगला पद बताने वाला कोई सूत्र
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2, 3, 5, 7, 11, 13,
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अनुक्रम … नह
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agl शत लगाती है, न सूत्र के अ स्तत्व क । अत: अनुक्रम बढ़ सकता है, घट सकता है, दोलन कर सकता है, दोहरा सकता
ऐसा क्य होता है: अनुक्रम क प रभाषा केवल एक बात माँगती है — क्र मक सूची। वह न तो पद के बढ़ने क
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है या बखरा हुआ हो सकता है; और संकेतक tn हर त म चलता है, क्य क n केवल त बताता है जब क tn
कोई भी वास्त वक संख्या हो सकती है।
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यह क जए: 22/7 के दशमलव अंक का अनुक्रम ल खए, या कसी पारी म भारतीय टे स्ट स्कोर का अनुक्रम
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बनाइए। दोन वास्त वक अनुक्रम ह; कसी का सूत्र नह है।
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a l चए और वचार क जए — पृष्ठ 177
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अनुभाग 8.2 अनुक्रम के लए व्यापक सूत्र
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कसी अनुक्रम के nव पद हेतु व्यापक सूत्र होना क्य उपयोगी है?
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क्य क इससे कसी भी पद तक सीधे पहुँचा जा सकता है, उससे पहले के सभी पद ात कए बना।
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un = 2n – 1 से:
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u300 = 2 × 300 – 1 = 599 — एक ही कदम में, 299 कदमों में नही ं
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उल्टे प्रश्न का उत्तर भी इसी से सु वधापूवक मलता है। "क्या 137 इस अनुक्रम म है, और कहाँ है?" पूछने पर बस समीकरण हल
क जए:
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2n – 1 = 137
2n = 138
n = 69 — अत: 137, 69वी ं िवषम संख्या है
ऐसा क्य होता है: व्यापक सूत्र त का फलन है। चूँ क सूत्र म n अकेला आता है, n का मान रखना एक ही
गणना है, और उसी सूत्र को n म समीकरण मानकर उल्टा भी पढ़ा जा सकता है। पुनरावत सूत्र यह नह कर सकता:
300व पद तक पहुँचने के लए उसे पहले 299वाँ पद चा हए, उसके लए 298वाँ, और इसी प्रकार प्रारंभ तक।
संकेत: tn = k हल करने पर प्राप्त n को सदै व दे खए। केवल प्राकृत संख्या ही मान्य है — भन्न या ऋणात्मक मान
का अथ है क k अनुक्रम का पद ही नह है।
प्र.2 क्या आप वग संख्याओं के अनुक्रम के nव पद को प्रद शत करने वाला सूत्र ात कर सकते ह?
अनुक्रम 1, 4, 9, 16, 25, 36, … है और सूत्र है
tn = n2
पुस्तक म दए पद पर जाँ चए: t1 = 12 = 1, t2 = 22 = 4, t3 = 9, t4 = 16, t5 = 25, t6 = 36। छह मेल खाते ह।
ऐसा क्य होता है: अध्याय पहले ही दखा चुका है क प्रत्येक वग संख्या उस त तक क वषम संख्याओं का
योग है — 1 + 3 + 5 + … + (2n – 1)। चत्र 8.2 बताता है क यह योग n2 क्य है: L-आकार क प याँ मलकर
n × n व्यव ा बना दे ती ह। अत: tn = n2 केवल प्रथम छह पद पर बैठने वाला सूत्र नह है; इसके पीछे कारण है,
और वही कारण इसे प्रत्येक n के लए सु न त करता है।
स्वयं जाँ चए: 20व वग संख्या 400 होनी चा हए, और 1 + 3 + 5 + … + 39 (बीस वषम संख्याएँ) वास्तव म
400 है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 177–178
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अनुभाग 8.2 अनुक्रम के लए व्यापक सूत्र
प्र.1 प्रश्न — सूत्र un = 2n – 1 का उपयोग करते हुए, वषम संख्या अनुक्रम के 53व, 108व तथा 1170व पद को ात
क जए?
त संख्या सीधे सूत्र म र खए।
u53 = 2 × 53 – 1 = 106 – 1 = 105
u108 = 2 × 108 – 1 = 216 – 1 = 215
u1170 = 2 × 1170 – 1 = 2340 – 1 = 2339
ऐसा क्य होता है: वषम संख्याएँ सम संख्याओं से एक कम होती ह। nव सम संख्या 2n है, अत: nव वषम
संख्या 2n – 1 है। यहाँ कह भी पछले पद को जानने क आवश्यकता नह पड़ी — व्यापक सूत्र का यही लाभ है,
और इसी कारण 1170वाँ पद नकालना 53व पद जतना ही सरल है।
स्वयं जाँ चए: 105, 215 और 2339 तीन वषम ह, और प्रत्येक अपनी त के दुगुने से एक कम है।
प्र.2 प्रारं भक दस अभाज्य संख्याओं का अनुक्रम — 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29 है। क्या आप इस अनुक्रम
म कोई प्र तरूप दे खते ह? क्या आप कसी सूत्र पर वचार कर सकते ह, जससे अगली कुछ अभाज्य संख्याओं
का पूवानुमान लगाया जा सके?
कुछ वशेषताएँ अवश्य दखती ह, कतु अगला पद बताने वाला कोई सूत्र नह है। अंतर दे खए:
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29
अंत र: 1, 2, 2, 4, 2, 4, 2, 4, 6
अंतर कसी अचर मान पर नह ठहरते (अत: यह समानांतर ेढ़ नह है), और अनुपात 3/2, 5/3, 7/5, … भी अचर नह ह (अत:
गुणोत्तर ेढ़ भी नह है)। आगामी अभाज्य संख्याएँ — 31, 37, 41, 43, 47 — वभाज्यता क जाँच से ात करनी पड़ती ह,
कसी सूत्र से नह ।
जो बात न त रूप से कही जा सकती ह:
2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है; इसके बाद क सभी अभाज्य संख्याएँ वषम ह।
2 और 3 को छोड़कर प्रत्येक अभाज्य संख्या 6 के कसी गुणज से 1 अ धक या 1 कम होती है।
अभाज्य संख्याएँ कभी समाप्त नह होत — वे अप र मत ह।
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ऐसा क्य होता है: अभाज्य संख्या क प रभाषा बताती है क वह क्या नह है — उसका 1 और स्वयं के अ त रक्त
कोई भाजक नह है। यह शत उससे छोट सभी संख्याओं के वषय म है, न क पछले पद से आगे बढ़ने क कोई
व ध। अत: प रभाषा एक अभाज्य से अगली अभाज्य तक पहुँचने का कोई रास्ता नह दे ती, और यही कारण है क
अभाज्य संख्याओं का कोई व्यापक या पुनरावत सूत्र ात नह है। पुस्तक भी इसी को ऐसे अनुक्रम का उदाहरण
बताती है, जसके नयम म कोई नय मतता नह है।
क्या आप जानते ह? अभाज्य संख्याओं के बीच के अंतर कतने भी बड़े हो सकते ह — 100! के आगे कह ऐसी
99 क्रमागत संख्याएँ मलती ह, जनम एक भी अभाज्य नह है।
प्र.3 प्रश्न — व्यंजक tn = 3n – 7 पर वचार क जए। (i) इस अनुक्रम का पहला, दूसरा, तीसरा, 12वाँ, 18वाँ और
50वाँ पद ात क जए। (ii) अनुक्रम का कौन-सा पद 332 है? (iii) क्या 557 इस अनुक्रम का कोई पद है? क्य
या क्य नह ?
(i) प्रत्येक त को tn = 3n – 7 म र खए।
t1 = 3 – 7 = –4 t2 = 6 – 7 = –1 t3 = 9 – 7 = 2
t12 = 36 – 7 = 29 t18 = 54 – 7 = 47 t50 = 150 – 7 = 143
(ii) tn = 332 हल क जए।
3n – 7 = 332
3n = 339
n = 113
अत: 332 इस अनुक्रम का 113वाँ पद है।
(iii) उसी प्रकार tn = 557 हल क जए।
3n – 7 = 557
3n = 564
n = 564 ÷ 3 = 188
188 प्राकृत संख्या है, अत: हाँ — 557 इस अनुक्रम का पद है, 188वाँ पद। जाँच: 3 × 188 – 7 = 564 – 7 = 557।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: इस अनुक्रम का प्रत्येक पद 3 के कसी गुणज से 7 कम है, अत: कोई संख्या k तभी पद होगी
जब k + 7, 3 से वभाज्य हो — अथात जब k को 3 से भाग दे ने पर शेषफल 2 आए। 332 और 557 दोन यह
जाँच पास करते ह (332 = 3 × 110 + 2 तथा 557 = 3 × 185 + 2), अत: दोन पद ह। 558 जैसी संख्या,
जसका शेषफल 0 है, कतना भी आगे बढ़ने पर कभी नह आएगी।
संकेत: "क्य या क्य नह " वाला प्रश्न वास्तव म जाँच माँगता है, केवल नणय नह । यहाँ जाँच यह है: क्या
समीकरण 3n – 7 = k से n प्राकृत संख्या मलती है?
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 179
अनुभाग 8.3 अनुक्रम के लए पुनरावत सूत्र
प्र.1 [ वरहांक- फबोनाची अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, …] क्या आप इस अनुक्रम के आगामी दो पद लख
सकते ह?
पुनरावत सूत्र Vn = Vn–1 + Vn–2 का उपयोग क जए, अथात प्रत्येक बार अं तम दो पद को जो ड़ए।
V8 = 34, V7 = 21
V9 = V8 + V7 = 34 + 21 = 55
V10 = V9 + V8 = 55 + 34 = 89
अनुक्रम इस प्रकार आगे बढ़ता है — 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, 144, …
ऐसा क्य होता है: यह सूत्र दो कदम पीछे जाता है, एक नह , अत: इसे दो प्रारं भक मान चा हए — यहाँ V1 = 1
और V2 = 2। इसी कारण सूत्र केवल n ≥ 3 के लए लखा गया है: n = 1 या n = 2 पर जोड़ने के लए दो पूव पद
ह ही नह । पुनरावत सूत्र तभी पूण होता है, जब उसके साथ प्रारं भक पद भी दए जाएँ।
क्या आप जानते ह? आचाय वरहांक ने सातव शताब्द म वृत्तजा तसमुच्चय म यह अनुक्रम प्राकृत छं द म लघु और
गुरु अक्षर क व्यव ाएँ गनते हुए लखा था। गोपाल और हेमचंद्र ने बारहव शताब्द म इसका अध्ययन कया —
फबोनाची से लगभग पचास वष पहले।
प्रश्नावली 8.1 — पृष्ठ 179–180
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as e
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 8.3 अनुक्रम के लए पुनरावत सूत्र
co m
e m.
m l as
.co a g
उस अनुक्रम के प्रथम पाँच पद को ात क जए, जसका nवाँ पद नम्न ल खत प्रकार से दया गया है— (i) tn
m
प्र.1
l a se
= 3n – 4 (ii) tn = 2 – 5n (iii) tn = n² – 2n + 3 जहाँ n ≥ 1 हो।
a g
co m
. ag
प्रत्येक सूत्र म n = 1, 2, 3, 4, 5 र खए।
e m
l as
(i) tn = 3n – 4
a g
m
t1 = 3 – 4 = –1 t2 = 6 – 4 = 2 t3 = 9 – 4 = 5 t4 = 12 – 4 = 8 t5 = 15 – 4 = 11
co
em.
as
पथम पाँच पद: –1, 2, 5, 8, 11
m l
m .co a g
l a se
(ii) tn = 2 – 5n
a g
m a s
.co agl
t1 = 2 – 5 = –3 t2 = 2 – 10 = –8 t3 = 2 – 15 = –13 t4 = –18 t5 = –23
se m
a
पथम पाँच पद: –3, –8, –13, –18, –23
a g l
(iii) tn = n2 – 2n + 3
co m
m .
m as e
.co
t1 = 1 – 2 + 3 = 2 t 2 = 4 – 4 + 3 = 3 t 3 = 9 – 6 + 3 = 6
a g l
a s etm
a g l 4 = 16 – 8 + 3 = 11 t5 = 25 – 10 + 3 = 18
m
पथम पाँच पद: 2, 3, 6, 11, 18
a se
.com a g l
m
ase
agl
ऐसा क्य होता है: पहले दो सूत्र n म रै खक ह, अत: उनके पद प्रत्येक कदम पर समान मात्रा से बदलते ह — (i) म
+3 से और (ii) म –5 से। दोन समानांतर े ढ़याँ ह, एक बढ़ती और एक घटती। तीसरा सूत्र घात है, अत: उसके
अंतर 1, 3, 5, 7 ह — जो स्वयं बढ़ रहे ह — और वह समानांतर ेढ़ नह है। सूत्र का रूप दे खकर ही अनुक्रम का
co m
स्वभाव पहचाना जा सकता है, एक भी पद नकाले बना।
m .
m as e
.co a g l
e m
as
स्वयं जाँ चए: (iii) म n2 – 2n + 3 = (n – 1)2 + 2 है, अत: पद वग संख्याओं 0, 1, 4, 9, 16 से 2 अ धक ह
agl — फर वही 2, 3, 6, 11, 18 प्राप्त होते ह।
c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
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प्र.2 अनुक्रम tn = 5n – 3 हो, जब क n ≥ 1 के 10व एवं 15व पद को ात क जए।
t10 = 5 × 10 – 3 = 50 – 3 = 47
t15 = 5 × 15 – 3 = 75 – 3 = 72
ऐसा क्य होता है: tn = 5n – 3 एक समानांतर ेढ़ है, जसका प्रथम पद t1 = 2 और साव अंतर 5 है। अत:
15वाँ पद 10व पद से पाँच कदम आगे होना चा हए: 47 + 5 × 5 = 72, जो सीधे प्र त ापन से भी यही आया।
एक ही मान तक दो स्वतंत्र रास्त से पहुँचना अ जाँच है।
प्र.3 नधा रत क जए क क्या 97 और 172 अनुक्रम tn = 5n – 3 के पद ह, जब क n ≥ 1 है।
tn = 97 और tn = 172 हल क जए और दे खए क n प्राकृत संख्या आती है या नह ।
5n – 3 = 97 → 5n = 100 → n = 20
5n – 3 = 172 → 5n = 175 → n = 35
n के दोन मान प्राकृत संख्याएँ ह, अत: 97, 20वाँ पद है और 172, 35वाँ पद है — दोन ही इस अनुक्रम के पद ह।
ऐसा क्य होता है: इस अनुक्रम का प्रत्येक पद 5 के कसी गुणज से 3 कम है, अत: उसका इकाई अंक 2 या 7
होता है। 97 और 172 के इकाई अंक 7 और 2 ह, और 3 जोड़ने पर 100 तथा 175 मलते ह, जो 5 से वभाज्य ह।
य द 98 क जाँच करते तो 5n = 101 और n = 20.2 आता — यह कोई त नह है, अत: 98 पद नह होता।
संकेत: "क्या k एक पद है?" सदै व यही प्रश्न है: क्या समीकरण tn = k का हल प्राकृत संख्या है?
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प्र.4 अनुक्रम tn = 5n – 3 जहाँ n ≥ 1 है, म कौन-सा पद 607 है?
5n – 3 = 607
5n = 610
n = 122
अत: 607 इस अनुक्रम का 122वाँ पद है। जाँच: 5 × 122 – 3 = 610 – 3 = 607।
ऐसा क्य होता है: n के लए हल करना सूत्र को उल्टा चलाना है। सूत्र 5n – 3 त लेकर मान दे ता है; समीकरण
मान लेकर त दे ता है। इसी दो-तरफा उपयोग के कारण व्यापक सूत्र पद क सूची से कह अ धक श क्तशाली है।
प्र.5 एक अनुक्रम t1 = –5, tn+1 = tn + 3 पुनरावत सूत्र ारा दशाया जाता है, जब n ≥ 1 हो। अनुक्रम के प्रथम
पाँच पद ात क जए। क्या इस अनुक्रम का एक पद 52 है? य द हाँ, तो यह अनुक्रम का कौन-सा पद है?
t1 = –5 से प्रारंभ क जए और प्रत्येक बार 3 जो ड़ए।
t2 = –5 + 3 = –2
t3 = –2 + 3 = 1
t4 = 1 + 3 = 4
t5 = 4 + 3 = 7
पथम पाँच पद: –5, –2, 1, 4, 7
पद अचर 3 से बढ़ते ह, अत: यह समानांतर ेढ़ है, जसम a = –5 और d = 3 है। पहले व्यापक सूत्र बनाइए, फर हल क जए:
tn = –5 + (n – 1) × 3 = 3n – 8
3n – 8 = 52
3n = 60
n = 20
हाँ — 52 इस अनुक्रम का पद है, 20वाँ पद। जाँच: 3 × 20 – 8 = 52।
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ऐसा क्य होता है: केवल पुनरावत सूत्र से 52 तक पहुँचने के लए उन्नीस पद नकालने पड़ते। पहले उसे व्यापक
सूत्र tn = 3n – 8 म बदलना ही उ चत माग है — और दोन रूप एक ही अनुक्रम बताते ह, क्य क t1 = 3 – 8 = –
5 है और n के प्रत्येक कदम पर 3 जुड़ता है।
संकेत: यहाँ सूत्र tn+1 = tn + 3 लखा है, tn = tn–1 + 3 नह । दोन एक ही बात कहते ह — कसी भी पद के
बाद वाला पद उससे 3 अ धक है — केवल संकेतांक बदला है।
प्र.6 मान ली जए, T1 = 1, T2 = 2, T3 = 4 और Tn = Tn–1 + Tn–2 + Tn–3 हो, जब क n ≥ 4 है। T4, T5, T6,
T7, और T8 ात क जए।
प्रत्येक पद अपने से पहले के तीन पद का योग है।
T 4 = T3 + T2 + T1 = 4 + 2 + 1 = 7
T5 = T4 + T3 + T2 = 7 + 4 + 2 = 13
T6 = T5 + T4 + T3 = 13 + 7 + 4 = 24
T7 = T6 + T5 + T4 = 24 + 13 + 7 = 44
T8 = T7 + T6 + T5 = 44 + 24 + 13 = 81
अनुक्रम है — 1, 2, 4, 7, 13, 24, 44, 81, …
ऐसा क्य होता है: चूँ क सूत्र तीन कदम पीछे दे खता है, इसे तीन प्रारं भक पद चा हए और वह n = 4 से ही प्रारंभ
हो सकता है। ध्यान द जए क वरहांक सूत्र का यही वस्तार है: दो पद पीछे जाने पर 1, 2, 3, 5, 8, … मलता है;
तीन पद पीछे जाने पर 1, 2, 4, 7, 13, …। कसी पुनरावत सूत्र को जतने कदम पीछे जाना है, उतने ही प्रारं भक
पद चा हए।
क्या आप जानते ह? पछले तीन पद को जोड़कर बनने वाला अनुक्रम ाइबोनाची अनुक्रम कहलाता है, दो-पद
वाले नयम क तुलना म।
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 180
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अनुभाग 8.4 समानांतर े ढ़याँ
सो चए और वचार क जए
प्र.1 क्या आप अनुक्रम के 5व और 6व चरण म वग क संख्या का पूवानुमान लगा सकते ह? क्या आप चरण 10, 11
और 12 म वग क संख्या का पूवानुमान लगा सकते ह? क्या आप चरण 20 म वग क संख्या का पूवानुमान लगा
सकते ह? क्या आप कसी भी चरण म वग क संख्या का पूवानुमान लगा सकते ह?
चरण 1 चरण 2 चरण 3 चरण 4
चत्र 8.3 — वग के एक बढ़ते हुए प्र तरूप के चरण 1 से 4।
हाँ — और एक बार नयम सद्ध हो जाने पर ये सभी उत्तर केवल प्र त ापन से मल जाते ह। प्रत्येक चरण म 4 वग जुड़ते ह, X क
प्रत्येक भुजा पर एक, अत: संख्याएँ 1, 5, 9, 13, 17, 21, … ह।
चरण 4 → 13 वग चरण 5 → 17 वग
चरण 4 से चरण 5 तक जाने पर चार वकण भुजाएँ एक-एक वग लंबी हो जाती ह: 13 + 4 = 17।
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co m
em.
चरण 1: 1
m l as
.co
चरण n: 1 + (n – 1) × 4 = 4n – 3
m a g
l a se
g
aचरण 5 6 10 11 12 20 N
co m 41
. ag
वग क संख्या
m
17 21 37 45 77 4n – 3
as e
a g l
चरण 10: 4 × 10 – 3 = 37 चरण 11: 41 चरण 12: 45
co m
m.
चरण 20: 4 × 20 – 3 = 77
m as e
.co a g l
a s em
ऐसा क्य होता है: केवल "4 जो ड़ए" पहचान लेने से आप एक-एक चरण ही आगे बढ़ सकते ह। सूत्र तब बनता है
a gl जब आप दे खते ह क 4 कतनी बार जोड़ा गया है: चरण n तक बीच के एक वग के साथ (n – 1) बार 4-4 वग जुड़
चुके ह, अत: संख्या 1 + (n – 1) × 4 है। इसे हल करने पर 4n – 3 मलता है। यही कदम — चत्र म दखे प्र तरूप
m a s
.co agl
से चत्र के वषय म तक तक — अनुमान को ऐसे नयम म बदलता है, जस पर चरण 200 पर भी भरोसा कया जा
सकता है।
se m
g l a
a
स्वयं जाँ चए: चरण 1 पर उत्तर 1 आना चा हए। 4n – 3 म n = 1 रखने पर 4 – 3 = 1 मलता है। जो सूत्र n = 1
co m
.
पर वफल हो, वह ग़लत सूत्र है।
e m
m l as
.co a g
a s em
a l चए और वचार क जए — पृष्ठ 181
gसो
अनुभाग 8.4 समानांतर े ढ़याँ
se m
com g l a
सो चए और वचार क जए
m . a
ase
प्र.1 agl
इस अध्याय म अब तक हमने जन अनुक्रम पर चचा क है, उन पर वचार क जए। उनम से कौन-सी समानांतर
m
े ढ़याँ ह और कौन-सी नह ह? क्या आप अपने कथन को सद्ध कर सकते ह?
. co
se m
o m l a
तg
जाँ.चc एक ही है और यां त्रक है: प्रत्येक पद को अगले पद म से घटाइए। य द सभी अंa
e m
s है; एक भी अपवाद उसे अस्वीकार कर देता है।
र एक ही संख्या ह तो अनुक्रम समानांतर ेढ़
a
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
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अनुक्रम अंतर AP? कारण
1, 2, 3, 4, 5, … 1, 1, 1, … हाँ a = 1, d = 1
1, 3, 5, 7, 9, … 2, 2, 2, … हाँ a = 1, d = 2
1, 4, 7, 10, 13, … 3, 3, 3, … हाँ a = 1, d = 3
1, 5, 9, 13, 17, … 4, 4, 4, … हाँ a = 1, d = 4 ( चत्र 8.3)
11, 7, 3, –1, –5, … –4, –4, –4, … हाँ a = 11, d = –4; साव अंतर ऋणात्मक भी हो सकता है
–7, –3, 1, 5, 9, … 4, 4, 4, … हाँ a = –7, d = 4; पद ऋणात्मक भी हो सकते ह
1, 3, 6, 10, 15, … (ित्रभुजाकार) 2, 3, 4, 5 नही ं अंतर स्वयं बदलते ह
1, 4, 9, 16, 25, … (वग) 3, 5, 7, 9 नही ं अंतर वषम संख्याएँ ह, अचर नह
1, 1/2, 1/3, 1/4, … –1/2, –1/6, –1/12 नही ं अंतर घटते जाते ह
2, 3, 5, 7, 11, 13, … (अभाज्य) 1, 2, 2, 4, 2 नही ं कोई नय मतता नह
1, 2, 3, 5, 8, 13, … (िवरहांक ) 1, 1, 2, 3, 5 नही ं अंतर स्वयं वही अनुक्रम ह
1, 5, 13, 29, … (un = 2un–1 + 3) 4, 8, 16 नही ं अंतर प्रत्येक बार दोगुने होते ह
ऐसा क्य होता है: "बढ़ता हुआ" और "समानांतर ेढ़ " एक बात नह ह। त्रभुजाकार और वग संख्याएँ लगातार
बढ़ती ह, फर भी कोई भी समानांतर ेढ़ नह है, क्य क समानांतर ेढ़ होना अंतर के वषय म कथन है, पद के
वषय म नह । समतुल्य रूप से, tn = an + b (n म रै खक) प्रकार का व्यापक सूत्र सदै व समानांतर ेढ़ दे ता है,
और जस सूत्र म n2 हो या n घातांक म हो, वह कभी नह दे ता।
संकेत: केवल एक युग्म क जाँच से कुछ सद्ध नह होता। 1, 3, 6 का पहला अंतर 2 है, फर भी यह समानांतर
ेढ़ नह है — प्रत्येक अंतर क जाँच आवश्यक है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 182–183
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अनुभाग 8.4.1 समानांतर ेढ़ का दृश्यांकन
प्र.1 प्रश्न — सत्या पत क जए क नीचे दए गए अनुक्रम समानांतर े ढ़याँ ह और उनके nव पद ल खए। इन
अनुक्रम से प्राप्त क्र मक युग्म को आलेख पत्रक पर प्रद शत करने पर आप क्या अवलोकन करते ह? (i) 2, 5,
8, 11, … (ii) –5, –1, 3, 7, …
(i) 2, 5, 8, 11, … — अंतर 5 – 2 = 3, 8 – 5 = 3, 11 – 8 = 3। अचर ह, अत: यह समानांतर ेढ़ है जसम a = 2, d = 3।
tn = 2 + (n – 1) × 3 = 2 + 3n – 3 = 3n – 1
जाँच : t1 = 2, t2 = 5, t3 = 8, t4 = 11
(ii) –5, –1, 3, 7, … — अंतर –1 – (–5) = 4, 3 – (–1) = 4, 7 – 3 = 4। अचर ह, अत: यह समानांतर ेढ़ है जसम a = –
5, d = 4।
tn = –5 + (n – 1) × 4 = –5 + 4n – 4 = 4n – 9
जाँच : t1 = –5, t2 = –1, t3 = 3, t4 = 7
आलेख से अवलोकन: क्र मक युग्म (1, 2), (2, 5), (3, 8), (4, 11) — और इसी प्रकार (1, –5), (2, –1), (3, 3), (4, 7) —
आलेख पत्रक पर ठ क एक सरल रेखा पर त होते ह, जैसा चत्र 8.4 म दखाया गया है।
AP 2, 5, 8, 11, 14 GP 3, 6, 12, 24, 48
बाएँ: समानांतर ेढ़ — दाईं ओर समान कदम पर ऊपर समान उठान, अत: बदु एक रेखा पर। दाएँ: तुलना के लए गुणोत्तर ेढ़ — वही
बदु ऊपर क ओर मुड़ जाते ह।
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ऐसा क्य होता है: दाईं ओर एक कदम चलने पर y हर बार ठ क d से बढ़ता है, और जस आलेख म प्रत्येक इकाई
चाल पर उठान समान हो वह सरल रेखा ही होता है। अध्याय 2 क भाषा म tn = a + (n – 1)d, n म रै खक
व्यंजक है और उसका आलेख d प्रवणता वाली रेखा है। अत: "समानांतर ेढ़ " और "एक रेखा पर त बदु" एक
ही तथ्य के दो वणन ह।
प्र.2 प्रश्न — सूत्र tn = a + (n – 1) × d का उपयोग करते हुए नीचे द गई समानांतर े ढ़य के nव पद ात क जए।
(i) 1/2, 5/2, 9/2, 13/2, … (ii) 1.5, 3.5, 5.5, 7.5, …
(i) यहाँ a = 1/2 और d = 5/2 – 1/2 = 4/2 = 2 (तथा 9/2 – 5/2 = 2, 13/2 – 9/2 = 2)।
tn = 1/2 + (n – 1) × 2
= 1/2 + 2n – 2
= 2n – 3/2, अथवा tn = (4n – 3)/2
जाँच : t1 = 1/2, t2 = 5/2, t3 = 9/2, t4 = 13/2
(ii) यहाँ a = 1.5 और d = 3.5 – 1.5 = 2।
tn = 1.5 + (n – 1) × 2
= 1.5 + 2n – 2
= 2n – 0.5
जाँच : t1 = 1.5, t2 = 3.5, t3 = 5.5, t4 = 7.5
ऐसा क्य होता है: दोन े ढ़य का साव अंतर एक ही है, d = 2, और वे केवल प्रथम पद म भन्न ह — 0.5 और
1.5 — अथात दूसरी ेढ़ पहली से 1 ऊपर खसक हुई है। सूत्र tn = a + (n – 1)d क यही वशेषता है: भन्न,
दशमलव और ऋणात्मक संख्याएँ इसम ज्य क त्य चलती ह, क्य क इसके नगमन म कह यह नह माना गया था
क पद पूण संख्याएँ ह। केवल कदम का माप महत्त्व रखता है, पद कस प्रकार क संख्याएँ ह यह नह ।
संकेत: अंत म उत्तर को n के एक ही व्यंजक म सरल कर ली जए। (4n – 3)/2 म मान रखना, 1/2 + (n – 1) ×
2 म रखने से सरल है।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 प्रश्न — पूव के प्रश्न म समानांतर े ढ़य के लए पुनरावत सूत्र ात क जए।
समानांतर ेढ़ के पुनरावत सूत्र म दो बात चा हए: प्रथम पद, और नदश "d जो ड़ए"।
समानांतर ेढ़ A D पुनरावत सूत्र
2, 5, 8, 11, … 2 3 t1 = 2, tn = tn–1 + 3, n ≥ 2
–5, –1, 3, 7, … –5 4 t1 = –5, tn = tn–1 + 4, n ≥ 2
1/2, 5/2, 9/2, 13/2, … 1/2 2 t1 = 1/2, tn = tn–1 + 2, n ≥ 2
1.5, 3.5, 5.5, 7.5, … 1.5 2 t1 = 1.5, tn = tn–1 + 2, n ≥ 2
ऐसा क्य होता है: सामान्य समानांतर ेढ़ का व्यापक सूत्र tn = a + (n – 1)d है और पुनरावत सूत्र t1 = a, tn
= tn–1 + d। दोन मेल खाते ह, क्य क a + (n – 1)d म से a + (n – 2)d घटाने पर ठ क d बचता है। अं तम दो
पं क्तयाँ दे खए: पुनरावत कदम एक ही है, प्रारं भक पद भन्न ह — इसी लए प्रारं भक पद कभी छोड़ा नह जा
सकता। उसके बना वही सूत्र अन गनत भन्न अनुक्रम का वणन करता है।
संकेत: n ≥ 2 क शत महत्त्वपूण है। n = 1 पर सूत्र tn = tn–1 + d नरथक है, क्य क t0 जैसा कोई पद है ही
नह ।
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 184
अनुभाग 8.5 आरं भक n प्राकृत संख्याओं का योग
सो चए और वचार क जए
प्र.1 क्या इसी व ध ारा 1 + 2 + 3 + ... + 100 का योगफल ात कया जा सकता है?
हाँ — यह व ध सूची क लंबाई पर नभर नह करती। योग को सीधा ल खए, नीचे उल्टा ल खए, और स्तंभवार जो ड़ए।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
S = 1 + 2 + 3 + … + 98 + 99 + 100
m l as
.co
S = 100 + 99 + 98 + … + 3 + 2 + 1
m a g
l a se
g
2S = 101 + 101 + 101 + … + 101 (101 का 100 बार योग)
a2S = 100 × 101 = 10100
com
. ag
S = 5050
se m
l a
g पर भी मलता है: (100 × 101)/2 = 5050।
यही उत्तर सूत्र Sn = n(n + 1)/2 म n = 100aरखने
. com
ऐसा क्य होता है: दोन पं क्तय को जोड़ने क यु क्त इस लए चलती है, क्य क दाईं ओर बढ़ते हुए पहली पं क्त 1
से बढ़ती है और दूसरी 1 से घटती है, अत: प्रत्येक स्तंभ का योग एक ही रहता है। वह योग सदैeवm(प्रथम पद + अं तम
m
पद) = 1.c+o100 = 101 है, और स्तंभ उतने ही ह जतने पद। यही कारण है क यह युgक्त l asकसी भी n के लए
e m a
s
gla
चलती है — और यही वह तक है जो सू त्र बनाता है , के वल उसक जाँ च नह करता।
a
m a s
coयहाँ agl
क्या आप जानते ह? आयभट यम म आयभट के नयम का दूसरा भाग ठ क यही है: प्रथम और अं तम पद का
m .
as e
औसत ली जए, फर पद क संख्या से गुणा क जए। वह है (1 + 100)/2 × 100 = 50.5 × 100 = 5050।
a g l
co m
.
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 185
e m
omक जए l as
अनुभाग 8.5 आरं भक n प्राकृत संख्याओं का योग
. cवचार a g
a s em
सो चए और
agl
प्र.1 क्या आप ऊपर दए गए सूत्र का उपयोग S20, S50 या S1000 ात करने के लए कर सकते ह?
se m
com g l a
m . a
ase
agl
हाँ। Sn = n(n + 1)/2 म मान र खए।
co m
m .
e
S20 = (20 × 21)/2 = 420/2 = 210
m l as
m .co
S50 = (50 × 51)/2 = 2550/2 = 1275
a g
l a se
ag S1000 = (1000 × 1001)/2 = 1001000/2 = 500500
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 24 of 60
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
2 × (1+2+3+4+5+6) = 7 × 6 = 42
सूत्र के पीछे का चत्र ( चत्र 8.5)। लाल वृत्त 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 = 21 गनते ह; हरे वृत्त उतने ही; दोन मलकर 7 × 6 का आयत भर
दे ते ह।
ऐसा क्य होता है: 1, 2, 3, …, n क सीढ़ क दो प्र तयाँ आपस म मलकर (n + 1) चौड़ा और n ऊँचा आयत
बना दे ती ह। उस आयत म n(n + 1) वृत्त ह और वह ठ क योग का दुगुना है, अत: Sn = n(n + 1)/2। चूँ क तक
इस बात पर है क दोन सी ढ़याँ कैसे बैठती ह, वह n = 20 और n = 1000 के लए भी उतना ही सही है जतना
उस n = 6 के लए, जसे आप बना सकते ह।
स्वयं जाँ चए: n और n + 1 म से एक सदै व सम होता है, अत: n(n + 1)/2 सदै व पूण संख्या है — जैसा वृत्त क
गनती को होना ही चा हए।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 आइए, त्रभुजाकार संख्याओं 1, 3, 6, 10, 15, ... के अनुक्रम tn पर पुन: वचार करते ह, जसे चत्र 8.1 म
दशाया गया है। ध्यान द जए क इस अनुक्रम का nवाँ पद, प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग है। इस प्रकार tn =
n(n + 1)/2 है। क्या आप इस सूत्र का उपयोग 10व , 17व और 80व त्रभुजाकार संख्याएँ प्राप्त करने म कर
सकते ह?
1 3 6 10 15
चत्र 8.1 — प्रथम पाँच त्रभुजाकार संख्याएँ, प्रत्येक बदुओं क त्रभुजाकार व्यव ा के रूप म।
t10 = (10 × 11)/2 = 110/2 = 55
t17 = (17 × 18)/2 = 306/2 = 153
t80 = (80 × 81)/2 = 6480/2 = 3240
पहले उत्तर क सीधी जाँच: 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8 + 9 + 10 = 55।
ऐसा क्य होता है: इस अनुभाग के दोन वचार वास्तव म एक ही वचार ह। n पं क्तय वाली त्रभुजाकार व्यव ा
म सबसे ऊपर 1 बदु, अगली पं क्त म 2, और इसी प्रकार नीचे n तक होते ह — अत: उसके बदु गनना प्रथम n
प्राकृत संख्याओं को जोड़ना ही है। एक बार यह योग n(n + 1)/2 ात हो जाने पर प्रत्येक त्रभुजाकार संख्या बना
एक भी बदु बनाए मल जाती है। 80व व्यव ा बनाने म 3240 बदु लगते; सूत्र म केवल एक गुणा और एक भाग।
यह क जए: दो क्रमागत त्रभुजाकार संख्याएँ जो ड़ए, जैसे 55 + 66। उत्तर 121 = 112 आता है। दो त्रभुज सदै व
मलकर एक वग बनाते ह।
प्रश्नावली 8.2 — पृष्ठ 185–186
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 8.5 आरं भक n प्राकृत संख्याओं का योग
प्र.1 समानांतर ेढ़ 3, 8, 13, 18, ... के 10व और 26व पद ात क जए।
प्रथम पद a = 3; साव अंतर d = 8 – 3 = 5 (तथा 13 – 8 = 5, 18 – 13 = 5)।
tn = a + (n – 1)d = 3 + (n – 1) × 5 = 5n – 2
t10 = 5 × 10 – 2 = 48
t26 = 5 × 26 – 2 = 128
ऐसा क्य होता है: 26वाँ पद 10व पद से 16 कदम आगे है, अत: वह उससे 16 × 5 = 80 अ धक होना चा हए।
और 48 + 80 = 128 — दोन उत्तर परस्पर संगत ह, जो एक ही सूत्र म दो बार मान रखने से अ धक मज़बूत जाँच
है।
प्र.2 समानांतर ेढ़ 21, 18, 15, ... का कौन-सा पद – 81 है? साथ ही क्या 0 इस समानांतर ेढ़ का एक पद है?
अपने उत्तर के लए कारण द जए।
यहाँ a = 21 और d = 18 – 21 = –3 है, अत: ेढ़ घटती है।
tn = 21 + (n – 1)(–3) = 21 – 3n + 3 = 24 – 3n
24 – 3n = –81
3n = 105
n = 35
अत: –81, 35वाँ पद है। जाँच: 24 – 3 × 35 = 24 – 105 = –81।
क्या 0 एक पद है? 24 – 3n = 0 हल क जए।
3n = 24
n=8
हाँ — 0 इस ेढ़ का पद है, 8वाँ पद, क्य क n = 8 प्राकृत संख्या है। पद लखकर दे खए: 21, 18, 15, 12, 9, 6, 3, 0, –3,
…
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: इस ेढ़ का प्रत्येक पद 3 का गुणज है (21 गुणज है, और 3 घटाने पर यह गुण बना रहता है)।
0 भी 3 का गुणज है और प्रथम पद से नीचे है, अत: घटती हुई ेढ़ को उस पर पहुँचना ही है — और समीकरण
ठ क-ठ क बता दे ता है क कहाँ। 10 जैसी संख्या 3 का गुणज नह है, अत: 24 – 3n = 10 से n = 14/3 आता,
जो कोई त नह है, और 10 कभी नह आ सकता।
संकेत: साव अंतर का ऋणात्मक होना सामान्य बात है। उल्टा घटाकर d को धनात्मक बनाने का प्रयास मत क जए।
प्र.3 समानांतर ेढ़ 11, 8, 5, 2, ... का nवाँ पद ात क जए। इस ेढ़ के लए पुनरावत सूत्र ल खए।
a = 11 और d = 8 – 11 = –3 (तथा 5 – 8 = –3, 2 – 5 = –3)।
tn = 11 + (n – 1)(–3)
= 11 – 3n + 3
= 14 – 3n
जाँच : t1 = 11, t2 = 8, t3 = 5, t4 = 2
पुनरावत सूत्र:
t1 = 11, tn = tn–1 – 3 जहाँ n ≥ 2
ऐसा क्य होता है: दोन सूत्र अलग-अलग प्रश्न के उत्तर दे ते ह। "40वाँ पद क्या है?" व्यापक सूत्र का काम है —
14 – 120 = –106, एक ही पं क्त म। "आगे क्या आएगा?" पुनरावत सूत्र का काम है — 3 घटाइए। दोन म
सामंजस्य होना चा हए, और है भी: 14 – 3n म से 14 – 3(n – 1) घटाने पर –3 मलता है, जो ठ क वही कदम है
जो पुनरावत सूत्र उठाता है।
प्र.4 एक समानांतर ेढ़ म 50 पद ह। य द ेढ़ का तीसरा पद 12 और अं तम पद 106 है तो इसका 29वाँ पद ात
क जए। (संकेत — य द ‘a’ प्रथम पद हो तथा ‘d’ साव अंतर हो, तब हम दो समीकरण a + 2d = 12 और a +
49d = 106 प्राप्त होता है। रै खक समीकरण के इस युग्म को ‘a’ तथा ‘d’ के लए हल क जए।)
दोन तथ्य को tn = a + (n – 1)d क सहायता से ल खए। अं तम पद 50वाँ है, अत: n = 50 से a + 49d मलता है।
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as e
a g l
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co m
e m.
a + 2d = 12 (1)
m l as
.co
a + 49d = 106 (2)
a g
a s em
agमlसे (1) घटाइए — इससे a नरस्त हो जाता है:
(2)
co m
47d = 94
e m . ag
g l as
a
d=2
(1) से: a + 4 = 12, अत: a = 8
co m
em.
m l as
अब 29वाँ पद:
.co a g
a s e=ma + 28d = 8 + 28 × 2 = 8 + 56 = 64
agl 29
t
m a s
m .co
ऐसा क्य होता है: कोई भी समानांतर ेढ़ केवल दो संख्याओं, a और d, से पूरी तरह नधा रत हो जाती है। अत:
agl
l a se
उसके वषय म कोई भी दो तथ्य a और d म दो रै खक समीकरण दे दे ते ह — और दो चर वाले रै खक समीकरण
a g
का युग्म हल करना अध्याय 2 म सीखा जा चुका है। यहाँ घटाना इस लए सु वधाजनक है, क्य क दोन समीकरण म
a का गुणांक 1 है।
co m
m .
m as e
.co g l
स्वयं जाँ चए: a = 8 और d = 2 से ेढ़ 8, 10, 12, 14, … बनती है। इसका तीसरा पद 12 है और 50वाँ पद 8
a
a s em + 98 = 106 है।
agl
se m
m सभी 2-अंक य संख्याओं का योगफल क्या है?
coइन g l a
. a
em
प्र.5 कतनी 2-अंक य संख्याएँ 3 से वभाज्य ह?
a s
उत्तर agl
m
3 से वभाज्य 2-अंक य संख्याएँ 12 से 99 तक ह और वे d = 3 वाली समानांतर ेढ़ बनाती ह।
. co
em
m l as
.co
12, 15, 18, …, 99
m t = 12 + (n – 1) × 3 = 3n + 9 a g
l a se
ag
n
.c
e m
3n + 9 = 99
m a s
. co agl
3n = 90
e m
n = 30
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 60
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अत: ऐसी 30 संख्याएँ ह। योग के लए अनुभाग 8.5 क तरह सर के युग्म बनाइए:
S = 12 + 15 + … + 96 + 99
S = 99 + 96 + … + 15 + 12
2S = 111 + 111 + … + 111 (111 का 30 बार योग)
2S = 30 × 111 = 3330
S = 1665
ऐसा क्य होता है: अनुभाग 8.5 क उलट-कर-जोड़ने वाली यु क्त वास्तव म केवल 1, 2, 3, … के लए नह थी —
वह कसी भी समानांतर ेढ़ पर चलती है, क्य क जब एक पं क्त d से बढ़ती है तो दूसरी d से घटती है, अत:
प्रत्येक स्तंभ का योग (प्रथम पद + अं तम पद) रहता है। यहाँ वह योग 12 + 99 = 111 है और स्तंभ 30 ह। शब्द
म: योग = (पद क संख्या) × (प्रथम और अं तम पद का औसत) = 30 × 55.5 = 1665।
स्वयं जाँ चए: दूसरा रास्ता — ये संख्याएँ 3 × 4, 3 × 5, …, 3 × 33 ह, अत: योग = 3 × (4 + 5 + … + 33) =
3 × (S33 – S3) = 3 × (561 – 6) = 3 × 555 = 1665।
प्र.6 हरीश ने कोई काय (नौकरी) ₹5,00,000 वा षक आय से प्रारंभ क और प्र तवष ₹20,000 वेतन-वृ द्ध के रूप म
प्राप्त कए। कतने वष के बाद उसक आमदनी ₹7,00,000 हुई होगी?
उसक वा षक आय समानांतर ेढ़ बनाती है, जसम a = ₹5,00,000 और d = ₹20,000 है।
tn = 500000 + (n – 1) × 20000
500000 + (n – 1) × 20000 = 700000
(n – 1) × 20000 = 200000
n – 1 = 10
n = 11
उसक आय नौकरी के 11व वष म ₹7,00,000 होती है, अथात 10 वष के बाद।
ऐसा क्य होता है: पहले वष म कोई वेतन-वृ द्ध नह मलती, अत: वृ द्धय क संख्या सदै व वष-संख्या से एक कम
रहती है। (n – 1) = 10 को "10 बार वेतन-वृ द्ध हो चुक है" पढ़ना ही इस प्रश्न का सार है; "11 वष" उत्तर दे ने पर
प्रारं भक वष भी चुपचाप वृ द्ध वाले वष म गन लया जाता।
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स्वयं जाँ चए: ₹5,00,000 + 10 × ₹20,000 = ₹5,00,000 + ₹2,00,000 = ₹7,00,000।
प्र.7 एक ब ा कंच को पं क्तय म इस प्रकार व्यव त करता है क पहली पं क्त म 1 कंचा है, दूसरी पं क्त म 2 कंचे
ह, तीसरी पं क्त म 3 कंचे ह तथा इसी प्रकार से 25व पं क्त तक कंचे रखे गए ह। ब ा इनम कुल कतने कंच
का उपयोग करता है?
कुल संख्या 1 + 2 + 3 + … + 25 है — प्रथम 25 प्राकृत संख्याओं का योग।
S25 = n(n + 1)/2, जहाँ n = 25
= (25 × 26)/2
= 650/2
= 325 कं चे
ऐसा क्य होता है: यह व्यव ा चत्र 8.1 क त्रभुजाकार व्यव ा ही है, जसम 25 पं क्तयाँ ह, अत: कुल संख्या
25व त्रभुजाकार संख्या है। युग्म बनाकर भी वही उत्तर मलता है: 1 + 25 = 26, 2 + 24 = 26, …, 12 + 14 =
26 — अथात 26 वाले 12 युग्म, और बीच म बची 13 कंच वाली पं क्त। अत: 12 × 26 + 13 = 312 + 13 =
325।
संकेत: अं तम पं क्त म 25 कंचे ह, 325 नह । प्रश्न कुल संख्या पूछ रहा है, अत: यह योग है, कोई पद नह ।
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 186
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अनुभाग 8.6 गुणोत्तर े ढ़याँ
सो चए और वचार क जए
प्र.1 क्या आप प्र तरूप के चरण 5 और 6 म वग क संख्या का पूवानुमान लगा सकते ह? क्या आप चरण 10, 11
और 12 म वग क संख्या का पूवानुमान लगा सकते ह? क्या आप चरण 20 म वग क संख्या का पूवानुमान लगा
सकते ह? ऊपर दया गया प्र तरूप चत्र 8.3 के बढ़ते प्र तरूप से कस प्रकार भन्न है?
चरण 1
चरण 2
चरण 3
चरण 4
चत्र 8.6 — वग के एक बढ़ते हुए प्र तरूप के चरण 1 से 4।
चरण 1 चरण 2 चरण 3 चरण 4
चत्र 8.3 — वग के एक बढ़ते हुए प्र तरूप के चरण 1 से 4।
चत्र 8.6 का प्रत्येक चरण 3 वग चौड़ा आयत है, जसक ऊँचाई दोगुनी होती जाती है: 1, 2, 4, 8 पं क्तयाँ। अत: संख्याएँ नयत
मात्रा से बढ़ने के बजाय दोगुनी होती ह।
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3, 6, 12, 24, 48, 96, …
t1 = 3, t2 = 3 × 2, t3 = 3 × 22, t4 = 3 × 23
tn = 3 × 2n–1
चरण 5 6 10 11 12 20 N
वग क संख्या 48 96 1536 3072 6144 15,72,864 3 × 2n–1
चरण 10: 3 × 29 = 3 × 512 = 1536
चरण 20: 3 × 219 = 3 × 524288 = 15,72,864
चत्र 8.3 से भन्नता:
चत्र 8.3 चत्र 8.6
एक चरण से अगले चरण तक 4 जो ड़ए 2 से गुणा क जए
अनुक्रम 1, 5, 9, 13, 17, … 3, 6, 12, 24, 48, …
वणन करने वाला अचर साव अंतर d = 4 साव अनुपात r = 2
nवाँ पद 4n – 3 3 × 2n–1
प्रकार समानांतर ेढ़ी ु ोत्त र ेढ़ी
गण
चरण 20 पर 77 15,72,864
ऐसा क्य होता है: बार-बार जोड़ने पर n सूत्र म साधारण गुणक के रूप म आता है, अत: पद n के अनुपात म बढ़ते
ह। बार-बार गुणा करने पर n घातांक म चला जाता है, और घातांक चक्रवृ द्ध क तरह काम करता है — प्रत्येक बार
दोगुना करना उस पूरी रा श पर लगता है, जो अब तक इक हुई है। यही कारण है क चरण 4 पर मलते-जुलते
दखने वाले दो प्र तरूप (13 और 24) चरण 20 पर बहुत दूर हो जाते ह (77 और पंद्रह लाख से अ धक)।
स्वयं जाँ चए: 3 × 2n–1 से n = 1 पर 3 आना चा हए। और 20 = 1 है, अत: वही आता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 187
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as e
a g l
कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 8.6 गुणोत्तर े ढ़याँ
co m
e m.
m l as
.co a g
प्रश्न — जाँ चए क क्या नीचे दए गए अनुक्रम गुणोत्तर े ढ़याँ ह और उनके nव पद ात क जए। (i) 2, 10,
m
प्र.1
l a se
50, 250, … (ii) 4, 8/3, 16/9, 32/27, … (iii) 3, –3/2, 3/4, –3/8, …
a g
co m
. ag
गुणोत्तर ेढ़ क जाँच क्रमागत पद के अनुपात पर होती है, अंतर पर नह । प्रत्येक क्रमागत युग्म से वही r मलना चा हए।
e m
l as
(i) 2, 10, 50, 250, …
a g
m
10 ÷ 2 = 5, 50 ÷ 10 = 5, 250 ÷ 50 = 5
co
em.
as
अनुपात अचर है, अत: यह गुणोत्तर ेढ़ी है िजसमें a = 2, r = 5
m
tn = 2 ×.c5on–1 (t1 = 2, t2 = 10, t3 = 50, t4 = 250) g l
em a
a s
gl
a (ii) 4, 8/3, 16/9, 32/27, …
m a s
m .co agl
se
(8/3) ÷ 4 = 8/12 = 2/3
l a
g 2/3
(16/9) ÷ (8/3) = (16/9) × (3/8)a=
m
(32/27) ÷ (16/9) = (32/27) × (9/16) = 2/3
. co
e m
as
अनुपात अचर है, अत: यह गुणोत्तर ेढ़ी है िजसमें a = 4, r = 2/3
m
tn =.c4o× (2/3)n–1 g l
a
a sem
agl (iii) 3, –3/2, 3/4, –3/8, …
se m
com g l a
m . a
ase
(–3/2) ÷ 3 = –1/2
(3/4) ÷ (–3/2) = (3/4) × (–2/3) = –1/2 agl
co m
(–3/8) ÷ (3/4) = (–3/8) × (4/3) = –1/2
m .
अनुपात अचर है, अत: यह गुणोत्तर ेढ़ी है िजसमें a = 3, r = –1/2
m as e
.tcno= 3 × (–1/2)n–1 a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 60
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: साव अनुपात 1 से बड़ा, 0 और 1 के बीच, या ऋणात्मक हो सकता है, और प्रत्येक त
अनुक्रम पर दखाई दे ती है। (i) म r = 5 से पद तेज़ी से दूर भागते ह। (ii) म 0 < r < 1 है, अत: पद धनात्मक रहते
हुए 0 क ओर घटते ह। (iii) म r ऋणात्मक है, अत: प्रत्येक कदम पर चह्न बदल जाता है, क्य क (–1/2)n–1
वषम n के लए धनात्मक और सम n के लए ऋणात्मक है — पद का माप घटता है और चह्न एकांतर रूप से
बदलता है।
स्वयं जाँ चए: (iii) म n = 4 र खए: 3 × (–1/2)3 = 3 × (–1/8) = –3/8।
प्र.2 प्रश्न — क्या आप सूत्र tn = 3 × 10ⁿ⁻¹ के लए पुनरावत सूत्र का पता लगा सकते ह, जससे गुणोत्तर ेढ़ 3,
30, 300, 3000, ... बनती है?
प्रत्येक पद पछले पद का दस गुना है, अत:
t1 = 3, tn = 10 × tn–1 जहाँ n ≥ 2
चलाकर दे खए: t2 = 10 × 3 = 30, t3 = 10 × 30 = 300, t4 = 10 × 300 = 3000।
ऐसा क्य होता है: दोन सूत्र का मेल केवल दे खा नह , सद्ध कया जा सकता है। व्यापक सूत्र के n वाले मान को
(n – 1) वाले मान से भाग द जए:
tn ÷ tn–1 = (3 × 10n–1) ÷ (3 × 10n–2) = 10n–1–(n–2) = 10।
अत: प्रत्येक n ≥ 2 के लए tn = 10 tn–1 है, और चूँ क t1 = 3 × 100 = 3 है, दोन सूत्र एक ही ान से प्रारंभ भी
होते ह। यही गणना tn = arn–1 पर करने से व्यापक तथ्य tn = r · tn–1 मलता है।
संकेत: गुणोत्तर ेढ़ म साव अनुपात गुणक है, अत: पुनरावत कदम "× r" होता है, "+ r" कभी नह ।
सो चए और वचार क जए — पृष्ठ 189
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 8.6.1 ै क्टल्स के साथ आनंद
सो चए और वचार क जए
प्र.1 सएर पस्क त्रभुज का अवलोकन क जए और नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर दे ने का प्रयास क जए। (क) चत्र
8.7 म चरण 0 से चरण 3 तक कतने काले त्रभुज ह? (ख) क्या आप चरण 4 और चरण 5 म काले त्रभुज क
संख्या का पूवानुमान लगा सकते ह? (ग) क्या आप nव चरण म काले त्रभुज क संख्या के लए सूत्र ात कर
सकते ह? (घ) मान ली जए चरण 0 म त्रभुज का ेत्रफल (जो काला ेत्र है) 1 वग इकाई है। चरण 1, 2 और 3
म काले ेत्र का ेत्रफल क्या है? चरण 4 और 5 म काले ेत्र का ेत्रफल क्या होगा? nव चरण म काले ेत्र के
ेत्रफल के लए एक सूत्र ात क जए। चरण क संख्या n के बढ़ने के साथ इस ेत्रफल म क्या अंतर आता है?
चरण 0 चरण 1 चरण 2 चरण 3
चत्र 8.7 — सएर पस्क त्रभुज के चरण 0 से 3।
(क) चत्र 8.7 म काले त्रभुज ग नए:
चरण 0: 1 चरण 1: 3 चरण 2: 9 चरण 3: 27
(ख) प्रत्येक काला त्रभुज अगले चरण म तीन छोटे काले त्रभुज से व ा पत हो जाता है, अत: संख्या 3 गुनी हो जाती है।
चरण 4: 27 × 3 = 81 चरण 5: 81 × 3 = 243
(ग) संख्याएँ 1, 3, 9, 27, 81, 243, … एक गुणोत्तर ेढ़ ह, जसका प्रथम पद 1 और साव अनुपात 3 है, और ये 3 क वे घात ह
जनका घातांक चरण-संख्या के बराबर है:
1 = 30, 3 = 31, 9 = 32, 27 = 33, 81 = 34, 243 = 35
चरण n में काले ित्रभुजों की संख्या = 3n
पुन रावत रूप में: t0 = 1, tn = 3 × tn–1
(घ) प्रत्येक चरण म त्रभुज 4 बराबर भाग म बाँटा जाता है और बीच वाला भाग हटा दया जाता है, अत: काले क्षेत्र का ठ क 3/4
भाग शेष रहता है।
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चरण 1: 1 × 3/4 = 3/4 = 0.75
चरण 2: (3/4) × (3/4) = 9/16 = 0.5625
चरण 3: (3/4)3 = 27/64 ≈ 0.4219
चरण 4: (3/4)4 = 81/256 ≈ 0.3164
चरण 5: (3/4)5 = 243/1024 ≈ 0.2373
चरण n में ेत्रफल = (3/4)n वग इकाई
पुन रावत रूप में: s0 = 1, sn = (3/4) × sn–1
n के बढ़ने पर क्षेत्रफल बार-बार 3/4 से गुणा होता जाता है, और 3/4, 1 से छोटा है, अत: काला ेत्रफल लगातार घटता है और
0 के अ धक से अ धक नकट आता जाता है, यद्य प वह कभी 0 नह होता।
ऐसा क्य होता है: एक ही आकृ त से दो गुणोत्तर े ढ़याँ नकलती ह, जो वपरीत दशाओं म खचती ह। त्रभुज
गनने पर 3 से गुणा होता है (r > 1, अत: संख्या फूल जाती है); क्षेत्रफल मापने पर 3/4 से गुणा होता है (0 < r <
1, अत: क्षेत्रफल समट जाता है)। इसम कोई वरोध नह है: प्रत्येक चरण म टु कड़े तीन गुने हो जाते ह, कतु प्रत्येक
टु कड़े का क्षेत्रफल अपने मूल टु कड़े का चौथाई ही रह जाता है, और 3 × 1/4 = 3/4 < 1 है। यही एक संख्या 3/4
बताती है क टु कड़ क संख्या और कुल क्षेत्रफल उल्ट दशाओं म क्य जाते ह।
क्या आप जानते ह? यहाँ गनती चरण 0 से प्रारंभ होती है, अत: घातांक ठ क चरण-संख्या के बराबर है — 3n
और (3/4)n, "n – 1" के बना। सूत्र लखने से पहले सदै व दे खए क पहला चरण कस संख्या से गना जा रहा है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 189
अनुभाग 8.6.1 ै क्टल्स के साथ आनंद
प्र.1 चरण संख्या बढ़ने के साथ काले त्रभुज क संख्या अत्यंत तीव्रता से बढ़ती है। क्या आप व्याख्या कर सकते ह क
ऐसा क्य है?
क्य क वृ द्ध गुणा से हो रही है, जोड़ से नह । प्रत्येक काला त्रभुज अगले चरण म तीन बन जाता है, अत: पूरी संख्या हर बार तगुनी
हो जाती है।
tn = 3 × tn–1 से tn = 3n
चरण 5: 243 चरण 10: 59,049 चरण 15: 1,43,48,907
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अब इसक तुलना चत्र 8.3 क समानांतर ेढ़ से क जए, जहाँ प्रत्येक चरण म नयत 4 जुड़ते ह:
चरण N 5 10 15
AP: 4n – 3 17 37 57
GP: 3n 243 59,049 1,43,48,907
ऐसा क्य होता है: जब कोई रा श जोड़ से बढ़ती है, तो प्रत्येक कदम उतनी ही नयत मात्रा दे ता है, चाहे रा श
कतनी भी बड़ी हो चुक हो। जब वह गुणा से बढ़ती है, तो प्रत्येक कदम पहले से उप त रा श के समानुपाती मात्रा
दे ता है — रा श जतनी बड़ी, अगली छलाँग उतनी बड़ी। 3n म त n घातांक म है, और n म 1 क वृ द्ध पूरे उत्तर
को 3 से गुणा कर दे ती है। यही चक्रवृ द्ध संख्या को भगा ले जाती है।
क्या आप जानते ह? इसी कारण नयत दर पर चक्रवृ द्ध ब्याज पयाप्त समय बीतने पर नयत रा श वाले साधारण
ब्याज से आगे नकल जाता है।
प्र.2 क्या आप व्याख्या कर सकते ह क क्य चरण n म काला ेत्र (3/4)ⁿ होगा?
क्य क प्रत्येक चरण म प्रत्येक काले त्रभुज पर एक ही क्रया क जाती है, और वह सदै व चार बराबर भाग म से ठ क तीन रखती है।
रचना का एक चरण:
पत्येक काले ित्रभुज को 4 बराबर छोटे ित्रभुजों में बाँिटए
बीच वाला हटाइए, 3 रिखए
चरण के बाद काला ेत्रफल = (3/4) × चरण से पहले का काला ेत्रफल
चरण 0 से, जहाँ क्षेत्रफल 1 है, इसे बार-बार लगाइए:
s1 = (3/4) × 1 = 3/4
s2 = (3/4) × (3/4) = (3/4)2
s3 = (3/4) × (3/4)2 = (3/4)3
…
sn = (3/4) × sn–1 = (3/4)n
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as e
a g l
कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: त्रभुज क भुजाओं के मध्य बदुओं को मलाने पर वह चार बराबर क्षेत्रफल वाले त्रभुज म बँट
m a s emहो। इसी कारण
coचरण के सभी 3n काले त्रभुज पर एक साथ लगकर भी केवल एक गुणaकgl3/4 से व्यक्त हो जाती
जाता है, अत: एक हटाने से ठ क एक चौथाई क्षेत्रफल हटता है — त्रभुज कतना भी बड़ा या छोटा
.
em
यह क्रया कसी
है।l1as
g व्यापक सूत्र ह, और यह तक दखाता है क वे मेल क्य खाते ह।
aऔर
से प्रारंभ करके ठ क n बार 3/4 से गुणा करना ही (3/4)n का अथ है। यह एक ही गुणोत्तर ेढ़ के पुनरावत
o m
e m . c ag
a s
स्वयं जाँ चए: चरण n पर 3n काले त्रभुज ह, प्रत्ये क का क्षेत्रफल (1/4)n। कुल क्षेत्रफल = 3n × (1/4)n =
(3/4)n — दूसरे रास्ते से वही उत्तर। agl
co m
em.
mपृष्ठ 193–194
प्रश्नावली 8.3 o—
c g l as
m . a
s e
gla
अनुभाग 8.6 गुणोत्तर े ढ़याँ (* अं कत प्रश्न क ठन वग के ह)
a
s
उस गुणोत्तर ेढ़ का 12वाँ पद ात क जए, जसका साव अनुपात 2 है और 8वाँ पद 192 है।
m a
प्र.1
m .co agl
l a se
g
a
12वाँ पद 8व पद से चार कदम आगे है, और प्रत्येक कदम r = 2 से गुणा करता है।
co m
m .
t12 = t8 × 24 = 192 × 16 = 3072
m as e
.co a g l
a s eे m
a g l लं ब रास्ते से भी वही उत्तर आता है। t8 = ar7 से:
se m
a × 27 = 192
com g l a
m . a
ase
agl
128a = 192
a = 1.5
t12 = 1.5 × 211 = 1.5 × 2048 = 3072
co m
m .
m as e
.co a g l
e m
as
ऐसा क्य होता है: गुणोत्तर ेढ़ म tm ÷ tn = rm–n होता है — प्रथम पद नरस्त हो जाता है। अत: एक ही ेढ़
agl के दो पद को जोड़ने वाले प्रश्न म a क आवश्यकता ही नह पड़ती, इसी लए छोटा रास्ता चलता है और उसक
c
m .
s e
गणना भी सुर क्षत रहती है।
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 60
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प्र.2 गुणोत्तर ेढ़ 5, 25, 125, ... का 10वाँ पद तथा nवाँ पद ात क जए।
a = 5 और r = 25 ÷ 5 = 5 (तथा 125 ÷ 25 = 5)।
tn = arn–1 = 5 × 5n–1 = 5n
t10 = 510 = 97,65,625
पुस्तक के पद पर सूत्र क जाँच: t1 = 51 = 5, t2 = 52 = 25, t3 = 53 = 125।
ऐसा क्य होता है: यहाँ संयोगवश प्रथम पद और साव अनुपात दोन 5 ह, अत: घातांक नयम am × ak = am+k
से 5 × 5n–1 समटकर एक ही घात 5n बन जाता है। यह इसी ेढ़ क वशेषता है, कोई व्यापक नयम नह — 3,
6, 12, … का nवाँ पद 3 × 2n–1 ही रहता है और उसे और छोटा नह कया जा सकता।
स्वयं जाँ चए: 510 = (55)2 = 31252 = 97,65,625।
*प्र.3 एक अनुक्रम का पुनरावत सूत्र t1 = 2, tn+1 = 3tn – 2, जब क n ≥ 1 है। इस अनुक्रम का कौन-सा पद 730
है?
पद बनाते जाइए जब तक 730 न आ जाए।
t1 = 2
t2 = 3 × 2 – 2 = 4
t3 = 3 × 4 – 2 = 10
t4 = 3 × 10 – 2 = 28
t5 = 3 × 28 – 2 = 82
t6 = 3 × 82 – 2 = 244
t7 = 3 × 244 – 2 = 730
अत: 730 इस अनुक्रम का 7वाँ पद है।
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बना सूची बनाए भी यह दे खा जा सकता है। प्रत्येक पद म से 1 घटाइए: 1, 3, 9, 27, 81, 243, 729 — 3 क घात क गुणोत्तर
ेढ़ ।
यिद un = tn – 1 हो, तो
un+1 = tn+1 – 1 = (3tn – 2) – 1 = 3(tn – 1) = 3un
जहाँ u1 = 1, अत: un = 3n–1
इसिलए tn = 3n–1 + 1
3n–1 + 1 = 730 → 3n–1 = 729 = 36 → n – 1 = 6 → n = 7
ऐसा क्य होता है: सूत्र tn+1 = 3tn – 2 अपने रूप म गुणोत्तर ेढ़ नह है, क्य क उसम "– 2" है। कतु प्रत्येक
पद को 1 नीचे खसकाने पर वह अचर हट जाता है और शुद्ध तगुना करना बचता है — सूत्र का र बदु x = 3x
– 2, अथात x = 1 है, और उसी बदु से मापने पर अनुक्रम गुणोत्तर ेढ़ बन जाता है। इस पहचान से सूची बनाने
वाला प्रश्न एक पं क्त के समीकरण म बदल जाता है, और य द प्रश्न 30व पद के वषय म होता तो यही एकमात्र
व्यावहा रक व ध होती।
प्र.4 गुणोत्तर ेढ़ 2, 6, 18, ... का कौन-सा पद 4374 है? इस ेढ़ के nव पद के लए मानक सूत्र और पुनरावत सूत्र
भी ल खए।
a = 2 और r = 6 ÷ 2 = 3 (तथा 18 ÷ 6 = 3)।
यापक सू : tn = 2 × 3n–1
व् त्र
पुनरावत सू : t1 = 2, tn = 3 × tn–1, जहाँ n ≥ 2
त्र
अब tn = 4374 हल क जए:
2 × 3n–1 = 4374
3n–1 = 2187
37 = 2187, अत: n – 1 = 7
n=8
अत: 4374 इस ेढ़ का 8वाँ पद है। जाँच: 2 × 37 = 2 × 2187 = 4374।
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ऐसा क्य होता है: गुणोत्तर ेढ़ म अ ात त घातांक म बैठ होती है, अत: अं तम कदम भाग नह , घात का
मलान है: 2187 को 37 पहचानना पड़ता है। 3 क घात नीचे से बनाइए — 3, 9, 27, 81, 243, 729, 2187 —
और गन ली जए। य द 4374, 3 क कसी घात का दुगुना न होता, तो वह इस ेढ़ का पद ही नह होता।
प्र.5 एक गद को 80 मीटर क ऊँचाई से गराया जाता है। भू म से टकराने के बाद गद अपनी प्रारं भक ऊँचाई के 60
प्र तशत तक भू म के ऊपर जाती है। इसी प्रकार से गद क उछाल जारी रहती है अथात प्रत्येक बार गद भू म से
टकराकर अपनी पछली ऊँचाई के 60 प्र तशत तक ऊपर जाती है। (i) 5 उछाल के बाद गद कतनी ऊँचाई तक
जाती है? (ii) गद ारा भू म से छठ बार टकराने तक तय क गई कुल लंबवत दूरी कतनी है?
अ धकतम ऊँचाइयाँ r = 60% = 0.6 वाली गुणोत्तर ेढ़ बनाती ह, जो 80 मी. क गरावट से प्रारंभ होती है।
पहली उछाल के बाद: 80 × 0.6 = 48 मी.
दू सरी उछाल के बाद: 48 × 0.6 = 28.8 मी.
तीसरी उछाल के बाद: 28.8 × 0.6 = 17.28 मी.
चौथी उछाल के बाद: 17.28 × 0.6 = 10.368 मी.
पाँच वी ं उछाल के बाद: 10.368 × 0.6 = 6.2208 मी.
(i) 5 उछाल के बाद गद 6.2208 मी. (लगभग 6.22 मी.) ऊँचाई तक जाती है। सीधे: 80 × (0.6)5 = 80 × 0.07776 =
6.2208 मी.।
(ii) यात्राओं को ध्यान से ग नए। गद पहले 80 मी. गरती है, फर प्रत्येक उछाल म उतनी ही ऊपर जाकर उतनी ही नीचे आती है,
और भू म से छठ बार टकराना पाँचव उछाल के बाद वाली गरावट पर होता है।
चरण दूरी
पहली गरावट 80 मी.
उछाल 1 के बाद ऊपर और नीचे 2 × 48 = 96 मी.
उछाल 2 के बाद 2 × 28.8 = 57.6 मी.
उछाल 3 के बाद 2 × 17.28 = 34.56 मी.
उछाल 4 के बाद 2 × 10.368 = 20.736 मी.
उछाल 5 के बाद (छठ बार टकराने तक) 2 × 6.2208 = 12.4416 मी.
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कु ल = 80 + 2 × (48 + 28.8 + 17.28 + 10.368 + 6.2208)
= 80 + 2 × 110.6688
= 80 + 221.3376
= 301.3376 मी. (लगभग 301.34 मी.)
ऐसा क्य होता है: ऊँचाइयाँ गुणोत्तर ेढ़ बनाती ह, कतु तय क गई दूरी उसका कोई एक पद नह है — वह एक
योग है, और पहली गरावट के बाद प्रत्येक चढ़ाई के साथ उतनी ही लंबी गरावट भी जुड़ी है। इसी लए पाँच
अ धकतम ऊँचाइयाँ दुगुनी क जाती ह जब क प्रारं भक 80 मी. केवल एक बार गनी जाती है। यहाँ सामान्य भूल
गनती क होती है: छठ टक्कर केवल 5 उछाल के बाद आती है।
संकेत: 60 प्र तशत का अथ r = 0.6 है, अत: गद प्रत्येक बार अपनी ऊँचाई का 40 प्र तशत खो दे ती है। 5 उछाल
के बाद प्रारं भक ऊँचाई का केवल (0.6)5 ≈ 7.8 प्र तशत ही बचता है।
प्र.6 अनुक्रम 2, 2√2, 4, ... का कौन-सा पद 128 है?
पहले अनुपात लेकर जाँ चए क यह गुणोत्तर ेढ़ है।
2√2 ÷ 2 = √2
4 ÷ 2√2 = 2/√2 = √2
अनुपात अचर है, अत: a = 2 और r = √2
अब √2 = 21/2 का उपयोग करके प्रत्येक पद को 2 क घात के रूप म ल खए:
tn = 2 × (√2)n–1 = 21 × 2(n–1)/2 = 2(n+1)/2
128 = 27
अत: (n + 1)/2 = 7
n + 1 = 14
n = 13
128 इस अनुक्रम का 13वाँ पद है। जाँच: t13 = 2 × (√2)12 = 2 × 26 = 2 × 64 = 128।
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as e
a g l
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ऐसा क्य होता है: अनुक्रम है 2, 2√2, 4, 4√2, 8, 8√2, 16, … — पूण संख्याएँ केवल प्रत्येक दूसरे कदम पर
. co1/2m
se m
o m l a
दुगुनी होती ह, क्य क √2 से दो बार गुणा करना 2 से एक बार गुणा करने के बराबर है। करणी को घात 2
के रूप
m .cक ठन दखने वाला अनुक्रम 2 क सीधी घात बन जाता है, और फर घातांaकg का मलान एक ही
sमeकाम पूरा कर दे ता है।
म लख दे ने से
l a
ag
पं क्त
co m
ag
तय पर आते ह — t1 = 2, t3 = 4, t5 = 8, t7 = 16, t9 = 32,
.
स्वयं जाँ चए: पूण संख्या वाले पद वषम
e m
as
t11 = 64, t13 = 128।
a g l
co m
प्र.7
se
चत्र 8.12 म सएर पस्क वग कारपेट के चरण 0 से चरण 3 तक प्रद शत ह। इस ै क्टल का चरण 0 कागज का
m.
o m l a
g ह। तत्प ात मध्य म
.cसम्मुख भुजाओं के त्र वभाजक बदुओं को मलाने पर नौ छोटे वग प्राप्तaहोते
एक वगाकार पत्रक है। चरण 1 क रचना करने के लए वग क प्रत्येक भुजा को तीन समान भाग म बाँटा गया है
se m
और त वग
a
agl
को हटा दया जाता है और 8 छोटे वग के मध्य एक वगाकार र क्त शेष रह जाती है। यही प्र क्रया आठ छोटे
छायां कत वग पर दोहराई जाती है, जससे चरण 2 प्राप्त होता है और आगे भी यही प्र क्रया जारी रहती है। चत्र
m
8.12 को दे खए और नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर दे ने का प्रयास क जए। (i) चरण 0 से 3 तक कतने लाल वग
a s
.co
ह? (ii) क्या आप चरण 4 से 5 म लाल वग क संख्या का पूवानुमान लगा सकते ह? (iii) क्या आप nव चरण म
em agl
a s
gl (iv) मान ली जए चरण 0 म वग का ेत्रफल 1 वग इकाई है। चरण 1, 2
लाल वग क संख्या के लए सूत्र ात कर सकते ह? कसी भी चरण म लाल वग क संख्या के लए एक व्यापक
a
सूत्र और पुनरावत सूत्र भी ल खए।
और 3 म लाल ेत्र का ेत्रफल क्या है? चरण 4 और 5 म लाल ेत्र का ेत्रफल कतना होगा? nव चरण म लाल
ेत्र के ेत्रफल के लए व्यापक सूत्र और पुनरावत सूत्र भी ात क जए। चरण संख्या n बढ़ने के साथ इस
co m
m .
as e
ेत्रफल म क्या अंतर आता है?
m l
m .co a g
l a se
ag
se m
com g l a
m . a
ase
चरण 0
agl चरण 1 चरण 2 चरण 3
co m
.
चत्र 8.12 — सएर पस्क वग कारपेट के चरण 0, 1, 2 और 3।
e m
m l as
.co a g
a s emउत्तर
agl
.c
m
प्रत्येक लाल वग नौ छोटे वग म बँटता है, जनम से 8 रखे जाते ह — अत: संख्या और क्षेत्रफल दोन एक ही क्रया से नयं त्रत होते
m a s e
co agl
ह।
m .
as e
a g l
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 44 of 60
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रचना का एक चरण: 9 बराबर वग, बीच वाला हटाया गया, 8 शेष — अत: संख्या 8 से और क्षेत्रफल 8/9 से गुणा होता है।
(i) चत्र 8.12 म लाल वग ग नए:
चरण 0: 1 चरण 1: 8 चरण 2: 8 × 8 = 64 चरण 3: 64 × 8 = 512
(ii)
चरण 4: 512 × 8 = 4096 चरण 5: 4096 × 8 = 32768
(iii) संख्याएँ 1, 8, 64, 512, … साव अनुपात 8 वाली गुणोत्तर ेढ़ ह, और ये 8 क वे घात ह जनका घातांक चरण-संख्या के
बराबर है।
यापक सू : tn = 8n
व् त्र
पुनरावत सू : t0 = 1, tn = 8 × tn–1, जहाँ n ≥ 1
त्र
(iv) नौ छोटे वग म से प्रत्येक का क्षेत्रफल मूल वग का 1/9 है और उनम से 8 रखे जाते ह, अत: प्रत्येक चरण म लाल क्षेत्रफल 8/9
से गुणा हो जाता है।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
चरण 1: 8/9 ≈ 0.8889
चरण 2: (8/9)2 = 64/81 ≈ 0.7901
चरण 3: (8/9)3 = 512/729 ≈ 0.7023
चरण 4: (8/9)4 = 4096/6561 ≈ 0.6243
चरण 5: (8/9)5 = 32768/59049 ≈ 0.5549
यापक सू : sn = (8/9)n वग इकाई
व् त्र
पुनरावत सू : s0 = 1, sn = (8/9) × sn–1, जहाँ n ≥ 1
त्र
चूँ क 8/9, 1 से छोटा है, क्षेत्रफल प्रत्येक चरण म घटता है और n के बढ़ने पर 0 क ओर जाता है, यद्य प वह वास्तव म कभी 0
नह होता।
ऐसा क्य होता है: यह सएर पस्क त्रभुज वाला ही तक है, केवल संख्याएँ बदली ह। भुजाओं के त्र वभाजन से 3
× 3 = 9 सवागसम वग बनते ह, अत: प्रत्येक का क्षेत्रफल मूल का 1/9 है; उनम से 8 रखने पर क्षेत्रफल का 8 ×
(1/9) = 8/9 भाग बचता है, जब क टु कड़ क संख्या 8 गुनी हो जाती है। चूँ क 8/9, त्रभुज के 3/4 क तुलना म
1 के अ धक नकट है, कारपेट का क्षेत्रफल धीमे घटता है — कतु घटता अवश्य है, और 8n, 3n से कह आगे
नकल जाता है। ै क्टल क यही पहचान है: टु कड़े अ धक से अ धक, क्षेत्रफल कम से कम।
स्वयं जाँ चए: चरण n पर 8n लाल वग ह, प्रत्येक का क्षेत्रफल (1/9)n। उनका योग 8n × (1/9)n = (8/9)n —
दोन सूत्र आपस म मेल खाते ह।
अं तम प्रश्नावली — पृष्ठ 194–195
अध्याय 8 पुनरावलोकन (* अं कत प्रश्न क ठन वग के ह)
प्र.1 उस समानांतर ेढ़ का 31वाँ पद ात क जए, जसका 11वाँ पद 38 है और 16वाँ पद 73 है।
समानांतर ेढ़ के दो पद से a और d म दो समीकरण मलते ह।
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a + 10d = 38 (1)
a + 15d = 73 (2)
(2) – (1): 5d = 35, अत: d = 7
(1) से: a = 38 – 70 = –32
t31 = a + 30d = –32 + 210 = 178
छोटा रास्ता: t31, t16 से 15 कदम आगे है, अत: t31 = 73 + 15 × 7 = 73 + 105 = 178।
ऐसा क्य होता है: समानांतर ेढ़ म mव और nव पद का अंतर (m – n)d होता है और a नरस्त हो जाता है।
यहाँ t16 – t11 = 5d = 35 तुरंत मल जाता है। पूरा हल एक बार करना फर भी उपयोगी है, क्य क उससे पता
चलता है क a = –32 है — यह ेढ़ शून्य से नीचे प्रारंभ होती है और बाद म धनात्मक होती है।
प्र.2 उस समानांतर ेढ़ का नधारण (क रचना) क जए, जसका तीसरा पद 16 है और जसका 7वाँ पद, 5व पद से
12 अ धक है।
"7वाँ पद, 5व पद से 12 अ धक है" का अथ है t7 – t5 = 12, और ये दोन पद दो कदम क दूरी पर ह।
t7 – t5 = (a + 6d) – (a + 4d) = 2d
2d = 12
d=6
t3 = a + 2d = 16 → a + 12 = 16 → a = 4
समानांतर ेढ़ है 4, 10, 16, 22, 28, 34, 40, …
जाँच: तीसरा पद 16 है; t7 = 40 और t5 = 28, तथा 40 – 28 = 12।
ऐसा क्य होता है: "इतना अ धक है" पद का अंतर है, और समानांतर ेढ़ म ऐसा प्रत्येक अंतर d का पूण गुणज
होता है — उसम a आता ही नह । इसी कारण दूसरी शत अकेले d नधा रत कर दे ती है, और पहली शत a नधा रत
करने के लए बच रहती है। " ेढ़ का नधारण क जए" का अथ है a और d बताइए, अथवा इतने पद ल खए क
प्र तरूप स्पष्ट हो जाए।
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*प्र.3 कतनी 3-अंक य संख्याएँ 7 से वभाज्य ह? (संकेत — सभी 7 ारा वभाज्य संख्याएँ एक समानांतर ेढ़
बनाती ह। ऐसी सबसे छोट 3-अंक य संख्या और सबसे बड़ी 3-अंक य संख्या ात क जए।)
पहले दोन सरे ात क जए।
सबसे छोटी: 100 ÷ 7 = 14.28…, अत: 100 या उससे ऊपर 7 का पहला गुणज 7 × 15 = 105
सबसे बड़ ी: 999 ÷ 7 = 142.71…, अत: 999 या उससे नीचे अंितम गुणज 7 × 142 = 994
ये a = 105, d = 7 वाली समानांतर ेढ़ बनाते ह, जसका अं तम पद 994 है।
105 + (n – 1) × 7 = 994
(n – 1) × 7 = 889
n – 1 = 127
n = 128
7 से वभाज्य 128 तीन-अंक य संख्याएँ ह।
ऐसा क्य होता है: ये गुणज 7 × 15, 7 × 16, …, 7 × 142 ह, अत: इन्ह गनना 15 से 142 तक क पूण संख्याएँ
गनना है — अथात 142 – 15 + 1 = 128। यह "+1" खंभे- गनने वाला सुधार है, और वही सुधार tn = a + (n –
1)d म "– 1" के रूप म आता है। दोन रास्त का उत्तर एक ही आना चा हए, और आता भी है।
संकेत: 15 से 142 तक क संख्याएँ 142 – 15 = 127 गनने पर एक सरा छू ट जाता है। छोटे उदाहरण पर
जाँ चए: 3 से 5 तक तीन संख्याएँ ह, दो नह ।
*प्र.4 4 के कतने गुणज 10 और 250 के बीच आते ह? (संकेत — 4 के सभी गुणज एक समानांतर ेढ़ बनाते ह। 10
और 250 के बीच आने वाले 4 के सबसे छोटे गुणज और सबसे बड़े गुणज ात क जए।)
10 और 250 के ठ क बीच आने वाले 4 के गुणज 12 से 248 तक ह।
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as e
a g l
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co m
e m.
सबसे छोटा: 4 × 3 = 12 (क्योंिक 4 × 2 = 8, 10 से कम है)
m l as
.co
सबसे बड़ ा: 4 × 62 = 248 (क्योंिक 4 × 63 = 252, 250 से अिधक है)
m a g
l a se
g
12 + (n – 1) × 4 = 248
a(n – 1) × 4 = 236
com
. ag
n – 1 = 59
e m
n = 60
g l as
a
m
10 और 250 के बीच 4 के 60 गुणज ह।
co
se m.
o m l a
g क ठनाई नह दे ता; य द
ऐसा क्य होता है: पछले प्रश्न क तरह यहाँ गुणज 4 × 3 से 4 × 62 तक ह, अत: संख्या 62 – 3 + 1 = 60 है।
c क 250 स्वयं 4 का गुणज नह है, अत: "के बीच" शब्द उस सरे पर aकोई
ध्यान द .जए
m
se 248 होती तो यह नणय करना पड़ता क उसे स म लत कर या नह ।
g l a
a
सीमा
om a s
उस गुणोत्तर ेढ़ क रचना ( नमाण) कm
e
. c agl
a s
जए, जसके प्रारं भक दो पद का योगफल –4 है और जसका पाँचवा
agl
*प्र.5
पद, तीसरे पद का 4 गुना है।
co m
.
e m
m as
मान ली जए ेढ़ a, ar, ar2, … है। दोन शत ल खए।
.co a g l
a s eam+ ar = –4, अथ त a(1 + r) = –4 (1)
agl
t5 = 4 t3 → ar4 = 4ar2
se m
r2 = 4 (ar2 से भाग दे क र, जो शून्य नही ं है) .co
m g l a
em a
a s
r = 2 अथवा r = –2
agl
co m
.
त r = 2: a(1 + 2) = –4 से 3a = –4, अत: a = –4/3।
em
m l as
m .coेढ़ी: –4/3, –8/3, –16/3, –32/3, … a g
l a se
ag जाँच : –4/3 – 8/3 = –12/3 = –4; t5 = –64/3 और 4 t3 = 4 × (–16/3) = –64/3
.c
s e m
m a
. co agl
त r = –2: a(1 – 2) = –4 से –a = –4, अत: a = 4।
e m
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 49 of 60
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ेढ़ी: 4, –8, 16, –32, 64, …
जाँच : 4 + (–8) = –4; t5 = 64 और 4 t3 = 4 × 16 = 64
दोन उत्तर मान्य ह: –4/3, –8/3, –16/3, … तथा 4, –8, 16, –32, …
ऐसा क्य होता है: शत t5 = 4t3 से r2 = 4 बनता है, और वग कए गए मान के दो वगमूल होते ह। प्रश्न म कह भी
ऋणात्मक साव अनुपात मना नह कया गया, अत: दोन उत्तर दे ने चा हए। ar2 से भाग दे ना यहाँ उ चत है, क्य क
a = 0 होने पर सभी पद 0 हो जाते और योग –4 नह हो सकता था।
*प्र.6 100 को क्रमागत प्राकृत संख्याओं के योग के रूप म लखने के सभी संभव व धयाँ ात क जए।
मान ली जए योग म k पद ह और वह a से प्रारंभ होता है। समानांतर ेढ़ के योग के अनुसार, कुल योग k पद का उनके औसत
(प्रथम + अं तम)/2 से गुणा है:
a + (a + 1) + … + (a + k – 1) = k × [2a + (k – 1)]/2 = 100
अत: k(2a + k – 1) = 200
अब k और (2a + k – 1) दोन 200 के गुणनखंड ह। इनक सम- वषमता सदै व वपरीत होती है: य द k वषम है तो k – 1 सम
है और 2a + k – 1 सम होगा, और इसके वपरीत भी। अत: एक गुणनखंड वषम होना ही चा हए। 200 = 23 × 52 के वषम
गुणनखंड 1, 5 और 25 ह।
K 2A + K – 1 A मान्य?
1 200 100 केवल संख्या 100 — यह योग नह है
5 40 (40 – 4)/2 = 18 हाँ
8 25 (25 – 7)/2 = 9 हाँ
25 8 ऋणात्मक अस्वीकृत
40 5 ऋणात्मक अस्वीकृत
200 1 ऋणात्मक अस्वीकृत
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100 = 18 + 19 + 20 + 21 + 22
100 = 9 + 10 + 11 + 12 + 13 + 14 + 15 + 16
दोन क जाँच: 18 + 22 = 40, और 20 औसत वाले 5 पद 100 दे ते ह; 9 + 16 = 25, और 12.5 औसत वाले 8 पद 100 दे ते ह।
अत: ठ क दो व धयाँ ह (य द केवल संख्या 100 को भी गन तो तीन)।
ऐसा क्य होता है: सम- वषमता वाला तक ही खोज को सी मत करता है। चूँ क k और 2a + k – 1 दोन सम नह
हो सकते, प्रत्येक मान्य k, 200 के कसी वषम गुणनखंड के साथ जुड़ता है — और 200 के केवल तीन वषम
गुणनखंड ह। इसी कारण 64 जैसी 2 क घात को क्रमागत प्राकृत संख्याओं के योग के रूप म लखा ही नह जा
सकता: उसका एकमात्र वषम गुणनखंड 1 है।
स्वयं जाँ चए: 18 + 19 + 20 + 21 + 22 = 100 और 9 + 10 + 11 + 12 + 13 + 14 + 15 + 16 = 100।
जोड़कर दे खए।
*प्र.7 कसी कल्चर (नमूने) म जीवाणुओं क संख्या प्रत्येक घंटे म दुगुनी हो जाती है। य द प्रारंभ म कल्चर (नमूने) म
30 जीवाणु वद्यमान थे, तो दूसरे घंटे के अंत म, चौथे घंटे के अंत म और nव घंटे के अंत म कतने जीवाणु
वद्यमान ह गे?
प्रत्येक घंटे दुगुना होना a = 30 और r = 2 वाली गुणोत्तर ेढ़ है, जसक गनती घंटा 0 से होती है।
पारंभ (घंट ा 0): 30
पहले घंटे के अंत में: 30 × 2 = 60
दू सरे घंटे के अंत में: 30 × 22 = 120
तीसरे घंटे के अंत में: 30 × 23 = 240
चौथे घंटे के अंत में: 30 × 24 = 480
nवें घंटे के अंत में: 30 × 2n
ऐसा क्य होता है: घातांक यह गनता है क कतनी बार दुगुना हुआ है, और n घंट के बाद ठ क n बार दुगुना हुआ
है — अत: घातांक n है, n – 1 नह । tn = arn–1 म n – 1 केवल इस लए आता है क वहाँ प्रथम पद को n = 1
कहा जाता है; यहाँ प्रारं भक संख्या को घंटा 0 कहा गया है। घातांक को उठाए गए वास्त वक कदम से मलाइए, तो
यह कभी ग़लत नह होगा।
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क्या आप जानते ह? इस दर पर एक दन म 224 बार दुगुना होगा — 30 जीवाणु बढ़कर 30 × 1,67,77,216
अथात पचास करोड़ से अ धक हो जाएँगे।
*प्र.8 कसी समानांतर ेढ़ के चौथे और आठव पद का योगफल 24 है और छठे और दसव पद का योगफल 44 है।
समानांतर ेढ़ के पहले तीन पद ात क जए।
प्रत्येक पद को a + (n – 1)d के रूप म लखकर जो ड़ए।
t4 + t8 = (a + 3d) + (a + 7d) = 2a + 10d = 24 → a + 5d = 12 (1)
t6 + t10 = (a + 5d) + (a + 9d) = 2a + 14d = 44 → a + 7d = 22 (2)
(2) – (1): 2d = 10, अत: d = 5
(1) से: a + 25 = 12, अत: a = –13
पहले तीन पद ह –13, –8, –3।
जाँच: t4 = –13 + 15 = 2 और t8 = –13 + 35 = 22, योग 24; t6 = –13 + 25 = 12 और t10 = –13 + 45 = 32, योग 44।
ऐसा क्य होता है: दोन समीकरण को प्रारंभ म ही 2 से भाग दे ना लाभदायक है — 2a + 10d = 24 से a + 5d
= 12 बनता है, जो वास्तव म t6 = 12 ही है। कसी मध्य पद के दोन ओर समान दूरी पर त दो पद का योग
सदै व उस मध्य पद का दुगुना होता है, अत: दोन शत सीधे t6 = 12 और t8 = 22 कहती ह, और d = (22 –
12)/2 = 5 एक ही पं क्त म मल जाता है।
*प्र.9 n का वह न्यूनतम मान ात क जए, जससे प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योगफल 1,000 से अ धक हो।
आवश्यक है Sn = n(n + 1)/2 > 1000, अथात n(n + 1) > 2000।
n = 44: 44 × 45 = 1980, जो 2000 से अिधक नहीं है → S44 = 990
n = 45: 45 × 46 = 2070, जो 2000 से अिधक है → S45 = 1035
अत: न्यूनतम मान n = 45 है, जससे S45 = 1035 > 1000 होता है, जब क S44 = 990 < 1000 है।
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ऐसा क्य होता है: Sn लगभग n2/2 है, अत: n2 को 2000 के आसपास और n को √2000 ≈ 44.7 के
आसपास होना चा हए। यह अनुमान बताता है क कहाँ दे खना है; नणय n = 44 और n = 45 क दो सट क जाँच
से होता है। "न्यूनतम n" वाले प्रश्न म उससे एक कम मान का वफल होना दखाना अ नवाय है — अन्यथा न्यूनतम
होना सद्ध नह हुआ।
*प्र.10 गुणोत्तर ेढ़ 2, 8, 32, ... का कौन-सा पद 131072 है? nव पद के लए व्यापक सूत्र और पुनरावत सूत्र भी
ल खए।
a = 2 और r = 8 ÷ 2 = 4 (तथा 32 ÷ 8 = 4)।
यापक सू : tn = 2 × 4n–1
व् त्र
पुनरावत सू : t1 = 2, tn = 4 × tn–1, जहाँ n ≥ 2
त्र
सब कुछ 2 क घात म बदलकर tn = 131072 हल क जए:
2 × 4n–1 = 131072
4n–1 = 65536
4n–1 = 22(n–1) और 65536 = 216
2(n – 1) = 16
n–1=8
n=9
अत: 131072 इस ेढ़ का 9वाँ पद है। जाँच: 2 × 48 = 2 × 65536 = 131072।
ऐसा क्य होता है: 2 और 4 दोन एक ही आधार क घात ह, अत: समीकरण को 2 के घातांक के मलान तक
घटाया जा सकता है — इस कदम से अनुमान क आवश्यकता ही नह रहती। य द संख्याओं का आधार एक न होता
तो पद एक-एक करके बनाने पड़ते: 2, 8, 32, 128, 512, 2048, 8192, 32768, 131072 — नौवाँ पद।
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as e
a g l
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co m
m.
एक गुणोत्तर ेढ़ के प्रथम तीन पद का योगफल 13/12 है और उनका गुणनफल –1 है। ेढ़ का साव
e
*प्र.11
m l as
.co
अनुपात और पद ात क जए।
a g
se m
g l a
a
तीन पद को a/r, a, ar लेने पर गुणनफल सरल हो जाता है।
co m
e m . ag
as
गुणनफल: (a/r) × a × (ar) = a3 = –1
a = –1 a g l
co m
m.
अब योग का उपयोग क जए:
m as e
.co a g l
a s em
–1/r – 1 – r = 13/12
a gl –(1/r + r) = 13/12 + 1 = 25/12
m a s
agl
1/r + r = –25/12
m .co
se
12r से गुणा करने पर: 12 + 12r2 = –25r
g l a
12r2 + 25r + 12 = 0 a
co m
गुणनखंड क जए: 12r2 + 16r + 9r + 12 = 4r(3r + 4) + 3(3r + 4) = (3r + 4)(4r + 3)।
m .
m as e
.co a g l
se m
l a
r = –4/3 अथवा r = –3/4
a g
a = –1 और r = –3/4 लेने पर तीन पद a/r = 4/3, a = –1, ar = 3/4 ह:
se m
com g l a
m . a
4/3, –1, 3/4
gl ase
a
योग = 16/12 – 12/12 + 9/12 = 13/12
co m
.
गुणनफल = (4/3) × (–1) × (3/4) = –1
em
coमूm g l as
m . ल r = –4/3 वही तीन संख्याएँ उल्टे क्रम म दे ता है: 3/4, –1, 4/3।
a
se
दूसरा
a
agl c
.
ऐसा क्य होता है: पद को a/r, a, ar लखने से मध्य पद कद्र म आ जाता है, अत: गुणनफल म r नरस्त हो जाता
s e m
m a
है और एक अ ात तुरंत समाप्त हो जाता है। दोन मूल एक-दूसरे के व्युत्क्रम ह, क्य क गुणोत्तर ेढ़ को उल्टा करने
पर r के
m . co
ान पर 1/r आ जाता है — ये दो भन्न े ढ़याँ नह , एक ही ेढ़ को पढ़ने के दो तरीके ह।
e agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 54 of 60
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संकेत: गुणनफल ऋणात्मक होने से ऋणात्मक पद क संख्या वषम होनी चा हए। r ऋणात्मक होने पर मध्य पद
ही ऋणात्मक है — a = –1 ठ क यही कह रहा है।
*प्र.12 य द कसी गुणोत्तर ेढ़ का चौथा, दसवाँ और सोलहवाँ पद क्रमश: x, y और z है। सद्ध क जए क x, y, z
गुणोत्तर ेढ़ म ह।
मान ली जए गुणोत्तर ेढ़ का प्रथम पद a और साव अनुपात r है।
x = t4 = ar3
y = t10 = ar9
z = t16 = ar15
अब x, y, z के क्रमागत युग्म के अनुपात क तुलना क जए:
y/x = ar9 ÷ ar3 = r6
z/y = ar15 ÷ ar9 = r6
अत: y/x = z/y = r6
क्रमागत पद का अनुपात एक ही अचर है, अत: x, y, z गुणोत्तर ेढ़ म ह, जसका साव अनुपात r6 है। समतुल्य रूप म y2 =
a2r18 = (ar3)(ar15) = xz, जो यही कथन है।
ऐसा क्य होता है: तयाँ 4, 10, 16 स्वयं समान दूरी पर ह — वे साव अंतर 6 वाली समानांतर ेढ़ बनाती ह।
कसी गुणोत्तर ेढ़ म से समान दूरी पर पद चुनने से सदै व गुणोत्तर ेढ़ ही बचती है, क्य क 6 ान आगे बढ़ने पर
हर बार r6 से गुणा होता है। यह समानांतर ेढ़ के प र चत तथ्य का गुणात्मक जोड़ीदार है: समानांतर ेढ़ के समान
दूरी वाले पद भी समानांतर ेढ़ बनाते ह।
संकेत: उपप त्त म "अनुपात समान लगते ह" कहकर रु कए मत। दोन अनुपात प रभाषा से नका लए और
दखाइए क वे एक ही व्यंजक ह — यही उसे उपप त्त बनाता है।
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*प्र.13 एक गुणोत्तर ेढ़ के प्रथम तीन पद का योगफल 26 है और उन पद के वग का योगफल 364 है। गुणोत्तर
ेढ़ के पद को ात क जए।
मान ली जए पद a, ar, ar2 ह।
a(1 + r + r2) = 26 (1)
a2(1 + r2 + r4) = 364 (2)
मुख्य बात सवस मका 1 + r2 + r4 = (1 + r + r2)(1 – r + r2) है। इसे (2) म र खए:
a(1 + r + r2) × a(1 – r + r2) = 364
26 × a(1 – r + r2) = 364
a(1 – r + r2) = 14 (3)
अब (1) म से (3) घटाइए, फर दोन जो ड़ए:
(1) – (3): 2ar = 12 → ar = 6
(1) + (3): 2a(1 + r2) = 40 → a + ar2 = 20
a + ar2 = 20 म a = 6/r र खए:
6/r + 6r = 20
6 + 6r2 = 20r
3r2 – 10r + 3 = 0
(3r – 1)(r – 3) = 0
r = 3 अथवा r = 1/3
r = 3 और ar = 6 से a = 2 मलता है, अत: पद 2, 6, 18 ह। r = 1/3 लेने पर वही पद उल्टे क्रम म 18, 6, 2 मलते ह।
जाँच : 2 + 6 + 18 = 26
4 + 36 + 324 = 364
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ऐसा क्य होता है: साव अनुपात r वाली गुणोत्तर ेढ़ के पद का वग करने पर साव अनुपात r2 वाली गुणोत्तर ेढ़
मलती है, इसी लए दूसरी शत म 1 + r2 + r4 आता है। गुणनखंडन 1 + r2 + r4 = (1 + r + r2)(1 – r + r2) —
अध्याय 4 म मली सवस मकाओं जैसा — समीकरण (2) को समीकरण (1) से भाग दे ने योग्य बना दे ता है और एक
ही कदम म घात चार से घात दो पर ले आता है।
*प्र.14 मान ली जए क P1 = 1, P2 = 2 है और n > 2 के लए Pn = P1 + P2 + ... Pn–1 + 1 है। P1, P2, …, P8
के मान ात क जए। क्या आप Pn के लए एक अ धक सरल पुनरावत सूत्र ात कर सकते ह? क्या आप
एक व्यापक सूत्र बता सकते ह?
प्रत्येक पद अपने से पहले के सभी पद के योग से 1 अ धक है।
P1 = 1, P2 = 2
P3 = 1 + 2 + 1 = 4
P4 = 1 + 2 + 4 + 1 = 8
P5 = 1 + 2 + 4 + 8 + 1 = 16
P6 = 1 + 2 + 4 + 8 + 16 + 1 = 32
P7 = 64 P8 = 128
अत: मान ह 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128।
अ धक सरल पुनरावत सूत्र। n > 3 के लए दो क्रमागत पद क तुलना क जए:
Pn = (P1 + … + Pn–2 + Pn–1) + 1
Pn–1 = (P1 + … + Pn–2) + 1
घटाने पर: Pn – Pn–1 = Pn–1
अत: Pn = 2 Pn–1
यह n = 3 पर भी सही है, क्य क P3 = 4 = 2 × 2 = 2P2। अत: P1 = 1, Pn = 2Pn–1, n ≥ 2 — यह a = 1 और r = 2 वाली
गुणोत्तर ेढ़ है।
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
यापक सू : Pn = 2n–1
व् त्र
जाँच : P1 = 20 = 1, P5 = 24 = 16, P8 = 27 = 128
ऐसा क्य होता है: जैसा सूत्र छपा है, उसम प्रत्येक पछला पद जोड़ना पड़ता है, अत: P20 नकालने म उन्नीस जोड़
लगते। सूत्र के दो क्रमागत कथन को घटाने से वह पूरा लंबा योग एक ही बार म नरस्त हो जाता है और केवल दो
पद का संबंध बचता है। इसके पीछे 2 क घात का एक सुंदर तथ्य है: 1 + 2 + 4 + … + 2k = 2k+1 – 1, अत:
उस योग म 1 जोड़ने पर ठ क अगली घात मल जाती है।
संकेत: "अ धक सरल पुनरावत सूत्र ात क जए" का अथ है सूत्र को एक कदम आगे लखकर उसी म से घटा
द जए। जहाँ भी सूत्र म क्र मक योग हो, यह यु क्त काम करती है।
*प्र.15 मान ली जए W1 = 1, W2 = 2 और n > 2 के लए Wn = W1 + W2 + ... + Wn–2 + 2 है। W1, W2, ...,
W8 के मान ात क जए। क्या आप इस अनुक्रम को पहचानते ह?
ध्यान द जए क यह योग Wn–2 पर रुकता है, Wn–1 पर नह — ठ क पछला पद छू ट जाता है।
W1 = 1, W2 = 2
W3 = W 1 + 2 = 1 + 2 = 3
W4 = W 1 + W 2 + 2 = 1 + 2 + 2 = 5
W5 = 1 + 2 + 3 + 2 = 8
W6 = 1 + 2 + 3 + 5 + 2 = 13
W7 = 1 + 2 + 3 + 5 + 8 + 2 = 21
W8 = 1 + 2 + 3 + 5 + 8 + 13 + 2 = 34
अनुक्रम है 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34 — अथात वरहांक- फबोनाची अनुक्रम।
यह केवल पहचान नह , कारण भी है। सूत्र को n पर ल खए और उसम से n – 1 वाला कथन घटाइए:
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कक्षा 9 ग णत अध्याय 8 अगले पद का पूवानुमान — अनुक्रम और े ढ़य का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
Wn = (W1 + … + Wn–3 + Wn–2) + 2
m l as
m .co
Wn–1 = (W1 + … + Wn–3) + 2
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घटाने पर: Wn – Wn–1 = Wn–2
अथ त Wn = Wn–1 + Wn–2
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W1 = 1 और W2 = 2 के साथ यह ठ क पृष्ठ 179 वाला सूत्र Vn = Vn–1 + Vn–2 है, अत: दोन अनुक्रम एक ही ह।
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ऐसा क्य होता है: योग को एक के ान पर दो पद पीछे रोक दे ने से ही वरहांक नयम उत्पन्न होता है। पछले प्रश्न
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m.
वाली घटाने क यु क्त यहाँ भी सभी पूव पद वाले सूत्र को केवल दो पद वाले सूत्र म बदल दे ती है — और यह
m as e
का अनुम.cानoहोता है; घटाने वाली उपप त्त उसे प्रत्येक n के लए सद्ध कर दे ती है। agl
दखाती है क एक ही अनुक्रम को एक से अ धक प्रकार से प रभा षत कया जा सकता है। आठ पद दे खकर उत्तर
m
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agl क्या आप जानते ह? इसके पीछे सवस मका 1 + 2 + 3 + 5 + … + V
n–2 + 2 = Vn है: वरहांक संख्याओं का
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कसी पद तक का योग, और 2, मलकर दो ान आगे वाला पद बना दे ते ह।
se m
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अध्याय — एक नज़र म
o m l a se
m .cक्रम संख्याओं क एक क्र मक सूची है; सूची क प्रत्येक संख्या एक पद है। संकेaतकg t1, t2, t3, … पद को उसक त
se से जोड़ता है, अत: t = 7 का अथ है "चौथी त पर पद 7 है"। अनुक्रम प र मत (6, 12, 24, 48, 96) या अप र मत (1,
अनु
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agl
4
2, 3, 4, …) हो सकते ह।
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m है: tn = k हल करने पर पता चलता है क k अनुक्रम का पद है या glase
व्यापक सूत्र पद का मान सीधे त संख्या n से नकालता है — tn = 2n – 1 से 1170व वषम संख्या बना पहले 1169
पद लखे प्राप्त हो जाती है। यह उल्ट दशा म भीcचलता
. o a
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नह , और है तो कस
g l asसे प्राप्त करता है, जैसे t = 1, t = t + 3। यह एक से अ धक कदम पीछे भी
त पर। उत्तर तभी मान्य है जब n प्राकृ त सं ख्या हो।
पुनरावत सूत्र कसी पद को पछले a पद 1 n n–1
जा सकता है: वरहांक- फबोनाची अनुक्रम म Vn = Vn–1 + Vn–2 है, जससे 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, … प्राप्त होता
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है। इसे सातव शताब्द म आचाय वरहांक ने वृत्तजा तसमुच्चय म लखा, गोपाल और हेमचंद्र ने इसका अध्ययन कया, और
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m as e
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बहुत बाद म फबोनाची ने।
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m a + (n – 1)d है और पुनरावत रूप t1 = a, tn = tn–1 + d है। चूँ क प्रत्येक कदम म समान मात्रा जुड़ती है, आलेख पत्रक
समानांतर ेढ़ (AP) म क्रमागत पद के बीच साव अंतर d अचर होता है: a, a + d, a + 2d, …, जसका nवाँ पद tn =
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पर बदु (n, tn) एक सरल रेखा पर त होते ह।
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प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग Sn = n(n + 1)/2 है। योग को सीधा और उल्टा लखकर जो ड़ए: प्रत्येक स्तंभ का योग
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n + 1 होता है और स्तंभ n ह, अत: 2S = n(n + 1)। यही तथ्य चत्र 8.5 म वृत्त क 7 × 6 आयताकार व्यव ा के रूप म
दखता है। त्रभुजाकार संख्याएँ 1, 3, e6, 10, 15, … यही योग ह, अत: उनका tn = n(n + 1)/2 है। यह प रणाम आयभट
के आयभट यम, अध्याय 2,a छंg
as
द l19 म मलता है।
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