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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 10: आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1:
शासन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
149 – 162 10 25 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 34 pages
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1:
शासन
कक्षा 6 सामा जक व ान के अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन (पुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) के
संपूण एन.सी.ई.आर.ट . समाधान। अध्याय का प्रत्येक प्रश्न हल कया गया है — महत्वपूण प्रश्न, आइए पता लगाएँ के पाँच बॉक्स, पृष्ठ 150 और
159 के पाठ्य प्रश्न, आगे बढ़ने से पहले... तथा प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ के चार प्रश्न — नयम बनने क प्र क्रया तथा साइबर अपराध
के मामले म तीन अंग क भू मका के प्रवाह- चत्र स हत। चत्र 10.1 के दोन चत्र, चत्र 10.2 के दस चत्र, चत्र 10.3 का ‘श क्तय का पृथक्करण’
चक्र, चत्र 10.4 का परा मड और चत्र 10.5 क पूरी सारणी मु द्रत पुस्तक से दे खकर उत्तर लखे गए ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6) 149 – 162
खं ड प्रश्न
10 25
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 149
अध्याय का आरंभ
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 ‘शासन’ का अथ क्या है?
शासन का अथ है — नयम के सहारे पूरे समाज को चलाने का काम। पृष्ठ 150 पर अध्याय इसक प रभाषा एक ही वाक्य म
दे ता है —
“िनणयों को लेने की पिक्रया, िनयमों के िविभन्न समूहों से सामािजक जीवन को व्यविस्थत करना
और उनका पालन सुिनिश्चत करना ही शासन कहलाता है।”
अथात शासन के तीन भाग ह और तीन होने चा हए —
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
शासन का भाग अथ रोज़मरा का उदाहरण
1. िनणय ले ना िकसी समस्या या आवश्यकता पर यह तय करना यह तय करना िक गाँव में नई जल-पाइपलाइन डाली जाए
िक क्या िकया जाए
2. िनयमों से जीवन को िनयम बनाना, तािक सबको पता हो िक क्या करना यातायात के िनयम, िवद्यालय के िनयम, परीक्षा के िनयम,
व्यविस्थत करना है और साझा चीज़ें ठीक से बँटें िनयोक्ता और कमचािरयों के बीच तय िनयम
3. पाल न सुिनिश्चत यह दे खना िक िनयमों का वास्तव में पालन हो रहा चौराहे पर खड़ा यातायात पुिलसकम ; साइबर अपराधी को
करना है, और न होने पर कारवाई करना दंड दे ता न्यायालय
अध्याय तीन शब्द को सावधानी से अलग-अलग रखता है, जन्ह वद्याथ अक्सर मला दे ते ह।
शब्द पुस्तक क अपनी प रभाषा यह क्या है
शासन िनणय ले ने, िनयमों से समाज को व्यविस्थत करने और उनका पालन सुिनिश्चत करने की क्र
एक पि या — एक काय
पिक्रया
सरकार “उन व्यिक्तयों के समूह या तंत्र … जो िनयम बनाते और इन िनयमों का अनुपालन सुिनिश्चत एक समूह या तंत्र — लोग और
करते है”ं संस्थाएँ
कान ून “कु छ अिधक महत्वपूण िनयमों को कानून कहा जाता है” स्वयं िनयम
शासन — िनणय िकस पकार िनयम बनकर जीवन तक पहँचु ता है
समाज में कोई समस्या िवधाियका कायपािलका
पितिनिध चच और मंत्रीगण और अिभकरण
या आवश्यकता
बहस कर कानून बनाते है ं कानून को लागू करते है ं
यह पूरा चक्र ही शासन है
नागिरक यायपािलका
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अपनी बात रखते है ं और तय करती है िक कानून टू टा
िनयम बदलने को कह सकते है ं या नही ं, और वह उिचत है या नही ं
शासन एक पूरा चक्र है — आवश्यकता, प्र त न धय ारा बनाया गया नयम, उसका पालन, ववाद का नपटारा और नाग रक क माँग पर
बदलाव।
समाज को यह प्र क्रया चा हए ही क्य : अध्याय का तक बहुत सीधा है — “जब बहुत से लोग एक साथ रहते ह,
तब असहम त और अव्यवस्था क स्थ त उत्पन्न हो सकती है। ऐसे म, समाज म व्यवस्था और स ाव बनाए रखने के
लए नयम अ नवाय हो जाते ह।” आप पहले से ही कई नयम के बीच रहते ह — घर, वद्यालय, परीक्षा कक्ष,
सड़क, कायस्थल। शासन इसी प र चत बात का दे श जतना बड़ा रूप है।
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परीक्षा के लए संकेत: एक पं क्त म उत्तर दे ना हो, तो पहले पुस्तक क प रभाषा ज्य -क -त्य ल खए और फर
अंतर जो ड़ए — शासन प्र क्रया है; सरकार वह तंत्र है जो इसे पूरा करता है।
प्र.2 हम सरकार क आवश्यकता क्य होती है?
क्य क नयम अपने आप न बनते ह, न लागू होते ह और न अपनी रक्षा करते ह — यह काम कसी को करना पड़ता है।
सरकार “उन व्य क्तय के समूह या तंत्र” का नाम है “जो नयम बनाते और इन नयम का अनुपालन सु न त करते ह”। इसके
बना नयम केवल कागज़ पर रह जाते ह।
अध्याय चार कारण दे ता है, उसी क्रम म जसम वह उन्ह सामने लाता है।
सरकार क्य चा हए अध्याय इसे कैसे दखाता है
1. बहुत से ल ोगों के बीच व्यवस्था “जब बहुत से लोग एक साथ रहते है,ं तब असहमित और अव्यवस्था की िस्थित उत्पन्न हो सकती है। ”
बनाए रखने के िल ए पष्ृ ठ 151 पर िचत्र 10.1 के दोनों िचत्र दे िखए — एक ही जैस ी सड़क, िनयमों के साथ और िनयमों के
िबना
2. िनयम बनाने और बद ल ने के िल ए िवधाियका नए कानून बनाती है और “कभी-कभी पुर ाने कानूनों में संशोधन तथा वतमान कानून को
िनरस्त भी करती है” — जैसे साइबर अपराध के िवरुद्ध बनाए गए नए कानून, जबिक यह अपराध एक
पीढ़ ी पहले था ही नही ं
3. यह सुिनिश्चत करने के िल ए िक कायपािलका कानून लागू करती है; अिभकरण कानून-व्यवस्था बनाए रखते है ं — उदाहरण में साइबर
िनयमों का पाल न हो पुिलस — और न्यायालय तय करते है ं िक िकसी ने कानून तोड़ा है या नही ं
4. उ न से वाओं को चल ाने के िल ए जो पष्ृ ठ 152 पर िचत्र 10.2 के दस िचत्र — सड़क, रे ल , रक्षा, जन-स्वास्थ्य, आपदा बचाव और
कोई अके ल ा पिरवार नही ं चल ा सकता अि नशमन, यातायात िनयंत्र ण, न्यायालय, िवद्यालय, डाक और बैक
ं
एक पाँचवाँ कारण अध्याय चुपचाप जोड़ता है, जो कम महत्वपूण नह — सरकार लोग को कसी गलत नयम को वैध तरीके से
बदलवाने का रास्ता दे ती है। “कानून और नयम म नाग रक भी अपनी बात रख सकते ह।” सरकार न हो, तो कहने के लए कोई
नह और बदलने के लए कुछ नह ।
‘अपरा धय को दं ड दे ने के लए’ कहना पयाप्त क्य नह : सरकार का अ धकांश काम दं ड से जुड़ा है ही नह ।
सड़क बनाना, अस्पताल चलाना, च पहुँचाना, मुद्रा छापना, वद्यालय म पढ़ाना और भूकंप के बाद लोग को
बचाना — ये सब चत्र 10.2 म ह। दं ड तो केवल एक अंग, न्यायपा लका, का अं तम कदम है और वह भी तभी जब
कानून वास्तव म तोड़ा गया हो।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन
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‘लोकतंत्र’ का अथ क्या है? यह क्य महत्वपूण है?
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aglत्र का अथ है ‘लोग का शासन’। पृष्ठ 159 पर पुस्तक शब्द क उत्प त्त बताती है —
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गीक डेमोस = ‘लोग’ + गीक
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क्रे टोस = ‘शासन’ या.‘शिक्त’
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अत: डेमोक्रे सी (लोकतं त्र) = ‘लोगों का शासन
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परंतु पुस्तक तुरंत ईमानदार प्रश्न भी पूछती है — “क्या सभी लोग एक साथ शासन कर सकते ह? स्पष्ट है क यह संभव नह है।”
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इस लए लोकतंत्र दो रूप म चलता है —
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a िनण य कौन पत्येक व्यिक्त स्वयं जनता ारा चुने गए पितिनिध
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ले ता है
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ु तक का कक्षा हाथ उठाकर िपकिनक के िलए ‘क’ या ‘ख’ स्थान चुनती पधानाचाय के पास भेजा गया कक्षा-पितिनिध; और राज्य
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है; “स्थान िनिश्चत करने में पत्येक िवद्याथ की राय ली गई” तथा रा ीय स्तर पर चुने गए िवधायक व सास
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उ द ाहरण
कब चल ता है
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जब समूह इतना छोटा हो िक सब एकत्र होकर हर पश्न पर मत दे जब समूह एक राज्य या दे श िजतना बड़ा हो
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सकें
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छोटी संस्थाओं और बैठकों में “िकसी भी आध ुिनक ल ोकतंत्र की तरह भारत में ‘जन
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भारत
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’ आधािरत ल ोकतंत्र है”
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पितिनिध
agl लोकतंत्र क्य महत्वपूण है — अध्याय से नकले पाँच कारण:
जन्ह नयम मानना है, उनक नयम बनाने म भी बात चलती है। “कानून और नयम म नाग रक भी अपनी बात रख
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सकते ह।”
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मतभेद बल से नह , बातचीत से सुलझते ह। सदस्य सभाओं म “कानून पर चचा करते ह… मतभेद क स्थ त म एक-दूसरे
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से संवाद और तक- वतक ारा समस्या का हल करने का प्रयास करते ह।”
इसम सब शा मल ह। 2024 म लगभग 97 करोड़ मतदाताओं के साथ भारत वश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और “18 वष
से ऊपर क आयु के सभी भारतीय नाग रक को चुनाव म मतदान करने का अ धकार है”।
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नयम शां तपूवक बदले जा सकते ह। कोई कानून अनु चत सद्ध हो, तो वही सभा उसम संशोधन कर सकती है या उसे
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नरस्त कर सकती है — बदलाव के लए कानून तोड़ना नह पड़ता।
a s em नाग रक क भागीदारी को प्रोत्सा हत और सु न त कया जाता है”, ता क “नाग रक स्वयं को प्रभा वत करने वाले नणय पर
यह सामान्य नाग रक तक पहुँचता है। आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र “उस तंत्र क ओर इशारा करता है, जसम सामान्य
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अपनी बात रख सकते ह”।
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अध्याय के आरंभ म रगोबटा मेन्चु तुम क्य : उनक पं क्तयाँ पाँच वचार को एक ंखला म जोड़ती ह — “न्याय
के बना शां त नह ; समानता के बना न्याय नह ; वकास के बना समानता नह ; संस्कृ त और लोग क पहचान और
सम्मान के बना लोकतंत्र नह ।” अथात लोकतंत्र केवल वोट गनना नह है; इसका अथ यह भी है क हर भाषा, क्षेत्र
और संस्कृ त के लोग को सम्मान मले। अपार व वधता वाले भारत के लए यह कसौट वशेष रूप से महत्वपूण है।
ध्यान रख: लोकतंत्र संस्थाओं और प्र क्रयाओं क बात है — चुनाव, सभाएँ, चचा, न्यायालय। उत्तर म यह ल खए
क व्यवस्था कैसे काम करती है; कसी दल या नेता क प्रशंसा या आलोचना नह ।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 150
प रचय — नयम क्य ह और उन्ह कौन बनाता है
प्र.1 य द कोई व्य क्त नयम का पालन नह करता है, तो क्या होगा?
पुस्तक अगली ही पं क्त म स्वयं उत्तर दे ती है: “इसका सीधा-सा उत्तर है क समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने म सक्षम नह हो
पाएगा।”
उसी अनु े द म गनाए गए नयम को एक-एक कर हटाकर दे खए — उत्तर एकदम ठोस हो जाता है।
नयम य द कोई पालन न करे
घर के िनयम खाने का कोई समय नही ं, कोई चीज़ अपनी जगह नही ं, कोई बताकर नही ं जाता — रोज़ छोटे-छोटे झगड़े
और िकसी की सुर क्षा नही ं
िवद्य ाल य के िनयम (िवद्य ािथयों कक्षाएँ समय पर शुरू नही ं होंग ी, िकसी को पता नही ं होगा िक िकस कक्ष में जाना है, और शोर में कोई
और िशक्ष कों द ोनों के िल ए ) िशक्षक पढ़ ा नही ं पाएगा। पढ़ ाई रुक जाएगी
परीक्ष ा के िनयम अंक ों का कोई अथ नही ं रहेग ा, क्योंिक ईमानदार और बेईमान पिरश्रम में अंतर नही ं िकया जा सके गा
यातायात के िनयम ठीक वही दृ श्य जो पष्ृ ठ 151 पर िचत्र 10.1 के नीचे वाले िचत्र में है — हर िदशा में मुड़े वाहन, कारों के बीच
फँ से साइिकल-सवार और पैद ल चलने वाले , और कोई आगे नही ं बढ़ पा रहा। और दुघ टनाएँ
काम के िनयम (कम चारी और न िकसी को वेतन िमलने का भरोसा, न िकसी िनयोक्ता को काम पूर ा होने का
िनयोक्ता द ोनों के िल ए )
‘समाज व्यव ा बनाए नह रख पाएगा’ कहना क्य सही है: नयम असल म इस बात का वचन है क दूसरे लोग
क्या करगे। यातायात इस लए चलता है क्य क आप भरोसा कर सकते ह क सामने वाला लाल बत्ती पर रुकेगा;
दुकान इस लए चलती है क्य क आप भरोसा कर सकते ह क दुकानदार शेष पैसे लौटाएगा। यह भरोसा टू ट जाए तो
सब कुछ थम जाता है — इस लए नह क लोग बुरे हो गए, ब ल्क इस लए क कोई कसी बात क योजना ही नह
बना सकता।
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ध्यान द जए: अध्याय बार-बार बताता है क नयम दोन पक्ष पर लागू होते ह — “ नयोक्ता को भी उन सभी
नयम का पालन करना पड़ता है जो उन्ह ने अपने अधीन काम करने वाले लोग के लए बनाए ह”, और वद्यालय म
“कुछ वद्या थय के लए, तो कुछ शक्षक के लए”। जो नयम केवल एक पक्ष पर लागू हो, वह नयम नह , आदे श
है।
प्र.2 नयम को कसने बनाया और क्य बनाया? उन्ह कस प्रकार से बनाया गया?
अलग-अलग नयम अलग-अलग लोग बनाते ह, पर कारण हमेशा एक ही होता है — जहाँ बहुत से लोग एक जगह साझा
करते ह, वहाँ व्यव ा और स ाव बनाए रखना। यही वे प्रश्न ह “ जनके बारे म हम इस अध्याय म पढ़गे”, और अध्याय तीन
चरण म इनका उत्तर दे ता है।
कसके कौन बनाता है कैसे बनते ह
नयम
घर पिरवार के बड़े, पाय: िमलकर चच से — और “घर पर आप अपने माता-िपता के साथ िकसी िवशेष िनयम के बारे
में चच कर सकते है”ं
िवद्य ाल य िवद्यालय या िवश्विवद्यालय पबंध न, िवद्याथ संघ “िवद्यालय या िवश्विवद्यालय पबंध न से िनयमों में बदलाव के िलए कह
िशक्षकों के साथ सकते है”ं
कायस्थल िनयोक्ता — पर िनयम िनयोक्ता पर भी िनयोक्ता और कमचािरयों के बीच सहमित से
लागू
समाज या दे श िवधाियका — “जनता के पितिनिधयों ं संवाद और तक -िवतक ारा
सदस्य सभाओं में “कानूनों पर चच करते है…
की सभा ” समस्या का हल करने का पयास करते है”ं
क्य बनाए जाते ह: क्य क “जब बहुत से लोग एक साथ रहते ह, तब असहम त और अव्यवस्था क स्थ त उत्पन्न हो सकती है…
व्यवस्था और स ाव बनाए रखने के लए नयम अ नवाय हो जाते ह।” इनम से अ धक महत्वपूण नयम को कानून कहा जाता है।
और ये दोबारा बनाए भी जा सकते ह। पृष्ठ 150–151 का यह वाक्य याद रखने योग्य है — “इसका यह तात्पय कदा प नह है क
जो नयम और कानून एक बार बन गए, वे सदा के लए बन गए… कानून और नयम म नाग रक भी अपनी बात रख सकते
ह।” वधा यका कसी कानून म संशोधन कर सकती है या उसे नरस्त कर सकती है — ठ क वैसे ही जैसे ड जटल लेन-दे न से नए
प्रकार का अपराध जन्मा, तो साइबर अपराध के वरुद्ध नए कानून लखने पड़े।
संकेत: इस प्रश्न का उत्तर तीन शब्द से शुरू क जए — प्र त न ध, चचा, बदलाव। समाज के नयम जनता के
प्र त न ध बनाते ह, चचा और तक- वतक से बनाते ह, और लोग के कहने पर उन्ह बदला जा सकता है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 150
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प रचय — चत्र 10.1 के दो चत्र
आइए पता लगाएँ
प्र.1 पृष्ठ 151 पर चत्र 10.1 म दए गए दो चत्र के बारे म बताइए। आप उनम क्या अंतर पाते ह?
चत्र 10.1, पृष्ठ 151 — एक के नीचे एक छपे दोन सड़क-दृश्य का पुनः बनाया गया रेखा चत्र।
दोन चत्र म एक ही जैसी व्यस्त सड़क, वैसे ही लोग और वैसे ही वाहन ह। अंतर केवल इतना है क पहले चत्र म सब
यातायात के नयम का पालन कर रहे ह और दूसरे म कोई नह ।
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कस पर ऊपर का चत्र — नयम का पालन नीचे का चत्र — नयम क अनदे खी
ध्यान द
सड़ क साफ़ चौराहा, बनी हुई ले न और चार सफ़े द ज़ेबा क्रॉिसंग वाहनों के नीचे सड़क की पिट्टयाँ िदखती ं ही नही ं; ले न कहाँ है,
पता नही ं चलता
वाहन एक कार, एक स्कू टर और एक बड़ी गाड़ी — सब अपनी- कार, वैन, ऑटो, साइिकल और बस हर कोण पर फँ सी हुई,
अपनी ले न में, एक ही िदशा में, बीच में जगह छोड़कर अलग-अलग िदशाओं में मुँह िकए, एक-दू स रे से सटी हुई
संके त और यातायात की बित्तयाँ काम कर रही है ं और उनका पालन हो कोई संके त िदखाई ही नही ं दे ता, और िदखता भी तो कोई
िच ह्न रहा है; कोने पर ‘यहाँ न रुकें ’ का िचह्न लगा है मानने वाला नही ं
पैद ल चल ने लोग चौड़े फु टपाथ पर चल रहे है ं या ज़ेबा क्रॉिसंग से लोग सड़क के बीचोबीच चल रहे है,ं चलती गािड़यों के बीच से
वाले सड़क पार कर रहे है ं िनकल रहे है,ं कु छ बच्चों को साथ िलए हुए
साइिकल - एक साइिकल-सवार अपनी ले न के िकनारे सुर िक्षत चल साइिकले ं कारों के बीच िबलकु ल दबी हईु है,ं िहलने तक की
सवार रही है जगह नही ं
समग पभाव जगह, व्यवस्था, शांित — यातायात चल रहा है भीड़, भम, खतरा — कु छ भी आगे नही ं बढ़ रहा
इस जोड़ी का उ े श्य: ये दो चत्र कसी अ और कसी बुरी जगह के नह ह। ये एक ही तरह क जगह ह —
एक बार नयम के पालन के साथ, एक बार बना। दूसरे चत्र म केवल अव्यवस्था जोड़ी गई है, और उसी से सब धीमे
भी हो गए और असुर क्षत भी।
प्र.2 नयम पर हमारी चचा से आप इसे कैसे जोड़कर दे खते ह?
चत्र 10.1 अध्याय के तक को दो चत्र म कह दे ता है। ठ क ऊपर का अनु े द पूछता है, “य द कोई व्य क्त नयम का पालन
नह करता है, तो क्या होगा?” और उत्तर दे ता है, “समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने म सक्षम नह हो पाएगा।” नीचे वाला चत्र
वही उत्तर है, चत्र-रूप म।
चचा म क्या कहा गया चत्र क्या दखाता है
“जब बहुत से लोग एक साथ रहते है,ं तब असहमित और एक छोटे चौराहे पर इतने ल ोग और वाहन — नीचे वाले िचत्र की अव्यवस्था
अव्यवस्था की िस्थित उत्पन्न हो सकती है”
“व्यवस्था और सद् भाव बनाए रखने के िलए िनयम अिनवाय हो ऊपर वाल ा िचत्र — ले न, बित्त याँ, क्र ॉिसंग — और सब जल्द ी अपने गंतव्य तक
जाते है”ं
“सड़क पर वाहन-चालकों से भी यातायात के िनयमों का -
वही एक िनयम समूह िजस पर द ोनों िचत्र िटके है ं
पालन करने की अपेक्षा की जाती है”
शासन का अथ यह भी है िक “उनका पालन सुिनिश्चत यातायात की बत्त ी , ‘यहाँ न रुकें ’ का िचह्न — और पष्ृ ठ 152 पर िचत्र 10.2 में
करना” वह यातायात प ुिल सकम , िजसका पूर ा काम यही है
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तीन बात लख लेने योग्य ह —
नयम उन्ह के काम आते ह जो उन्ह मानते ह। ऊपर वाले चत्र म कसी को कसी और के लाभ के लएm
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em का पालन कोई नह कराता, वह नयम नह रह जाता। ज़े ा क्रॉ सग दोन चत्र म है; नीचे वाले म वह
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l के नीचे ढँ क गई है। इसी लए शासन का तीसरा भाग है — पालन सु न त करना।
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अव्यव ा क सबसे बड़ी क मत सबसे कमज़ोर चुकाते ह। दे खए नीचे वाले चत्र म सबसे अ धक खतरे म कौन है —
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पैदल चलने वाले, साइ कल-सवार और बच्चे।
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आपके व ालय म कौन-कौन से नयम है? उन्ह कसने बनाया?
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m .c ल खए जनका आप वास्तव म पालन करते ह, न क सूचना-पट्ट पर लगी वहaसूgची जो कभी पढ़ ही नह । फर हर
eे सामने ल खए क उसे कसने बनाया — क्य क प्रश्न का दूसरा भाग यही है। आप पाएँगे क देश क तरह वद्यालय म भी
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agनयम बनाने वाले एक से अ धक ह।
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मेरे व ालय का नयम — कसने बनाया क्य है
नमूना उत्तर
पात: 8:00 बजे पाथना सभा; 8:10 पधानाचाय और िवद्य ाल य पबंध न पूरे िदन की समय-सारणी एक साझा आरंभ पर िटकी है
पर ार बंद
गणवेश, पहचान-पत्र और साफ़ जूते िवद्य ाल य पबंध न सब एक जैसे िदखें, तािक कपड़ों से िकसी को न आँक ा जाए;
और बाहरी व्यिक्त पहचाना जा सके
कक्षा में मोबाइल फ़ ोन नही ं पबंध न , िशक्षा िवभाग के िनद शों के ध्यान बना रहे और परीक्षा में िनष्पक्षता रहे
अन ुसार
ग ृहकाय उसी िदन जमा; संशोधन - -
क क्ष ा िशक्ष क या िवषय िशक्ष क पढ़ ाई िनयिमत हो, तभी काम करती है
अवश्य
पुस्तकालय में मौन; पुस्तक सात िदन पस्
ु तकाल याध् यक्ष , पबंध न के साथ साझा संस ाधन — वही तक जो हर साझा वस्तु पर लागू होता है
में वापस
पानी और कैं टीन पर पंिक्त में लगना पहले परंपरा , िफ र िवद्य ाल य ने बारी बाँटने का सबसे न्यायपूण तरीका पंिक्त ही है
िनयम बनाया
कक्षा का मॉनीटर कॉिपयाँ इक ी -
क क्ष ा िशक्ष क , और मॉनीटर का यही पितिनिध त्व का पहला अनुभव है — वही उदाहरण जो पष्ृ ठ
करता और अनुपिस्थित बताता है चयन क क्ष ा करती है 159 पर आता है
कही ं कू ड़ा नही ं; कचरा दो अलग इको क्ल ब और पबंध न ने िवद्यािथयों ने बनाया, इसिलए िवद्याथ ही िनभाते है ं
िडब्बों में िमल कर
खेल का मैद ान कालांश के अनुस ार -
खेल िशक्ष क और क क्ष ा पितिनिध मैद ान एक, कक्षाएँ अनेक — बाँटने के िलए िनयम चािहए ही
कक्षाओं में बँटा
परीक्षा के िनयम — न बात, न िवद्य ाल य से ऊपर — बोड या अध्याय भी कहता है: “बड़ी कक्षाओं में परीक्षा दे रहे िवद्यािथयों
अनुिचत साधन -
परीक्ष ा संस्था को भी कु छ अिनवाय िनयमों का पालन अवश्य करना पड़ता है”
प्रश्न का दूसरा भाग असल म क्या सखा रहा है। अपनी सूची को ‘ कसने बनाया’ के अनुसार छाँ टए — चत्र 10.4 के तीन स्तर
का छोटा रूप सामने आ जाएगा:
कक्षा-स्तर — कक्षा- शक्षक और स्वयं कक्षा (मॉनीटर, बैठने का क्रम, सफ़ाई क बारी)।
व ालय-स्तर — प्रधानाचाय और प्रबंधन (समय, गणवेश, अनुशासन)।
व ालय से ऊपर — बोड या शक्षा वभाग (परीक्षा के नयम, पाठ्यक्रम, सुरक्षा नयम)।
यह करके दे खए: कोई एक ऐसा नयम चु नए जसे आपके वचार से बदलना चा हए और अध्याय क ही सलाह पर
च लए — “ वद्याथ संघ, वद्यालय या वश्व वद्यालय प्रबंधन से नयम म बदलाव के लए कह सकते ह”। कारण
और वकल्प स हत प्राथना-पत्र ल खए और अपने कक्षा-प्र त न ध को द जए। कक्षा म आधारभूत लोकतंत्र यही है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 153
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
चत्र 10.2 के दस चत्र — सरकार क्या-क्या करती है
आइए पता लगाएँ
प्र.1 क्या आप पृष्ठ 152 पर चत्र 10.2 म दए गए दस चत्र म दशाए लोक सेवाओं के प्रकार अथवा अन्य कायकलाप
क पहचान कर सकते ह?
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन
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चत्र 10.2, पृष्ठ 152 — दस चत्र के पुनः बनाए गए रेखा चत्र, पुस्तक के क्रम म (बाएँ से दाएँ, पं क्त-दर-पं क्त)
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क्रमां कत।
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हाँ — पृष्ठ 152 के दस चत्र, ऊपर बाएँ से पं क्त-दर-पं क्त:
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क्रम चत्र म क्या है लोक सेवा का प्रकार
1 रोलर और पेवर मशीने ं नई सड़क िबछाती हुई ं
a g सड़ क और सावजिनक िनम ण (अवसंर चना)
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2 िवद्य तु ीकृ त पटरी पर दौड़ती आध िु नक रे ल गाड़ी — सावजिनक पिरवहन
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रे ल
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3 वद और हिथयारों के साथ कतार में चलते सै िनक, सीमा चौकी पर
emिचिकत्सक रोगी की जाँच कर रही है,ं पास में पिरवार खड़ा है
र क्ष ा और सीमा सुर क्ष ा
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जन स्वास्थ् य — अस्पताल और स्वास्थ् य कें द
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5 नारंग ी वद और हेल मेट पहने बचावकम जलती-ढही इमारत से एक व्यिक्त को
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अि नशमन और आपद ा राहत
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िनकालते हुए
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यातायात पुिलसकम हाथ उठाकर संके त पर वाहनों को रोकते हएु — कान ून, व्यवस्था और यातायात
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प ुिल स
िनयंत्र ण
7 भारत के सव च्च न्यायालय का भवन
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— न्यायपािल का
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न्याय
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8 श्यामपट्ट के पास िशिक्षका और भरी हुई कक्षा — िवद्य ाल य
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िशक्ष ा
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l a se9 लाल डाकपेटी और साइिकल के पास िच ी िलए डािकया
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डाक से वा और संचार
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10 बैक
ं के काउं टरों पर ग ाहक और कमचारी
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बै ंिकं ग और िवत्त
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स्वयं मलाकर दे खए: इस सूची को पृष्ठ 157 क चत्र 10.5 से मलाइए। रक्षा, संचार, मुद्रा और अंतराज्यीय
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वा णज्य कद्र सरकार के अंतगत ह; पु लस व कानून-व्यवस्था, जन-स्वास्थ्य, कृ ष और सचाई राज्य सरकार के
अंतगत; और शक्षा दोन म आती है।
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आपके वचार से इन कायकलाप म सरकार क क्या भू मका होती है ?
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हर एक म सरकार तीन म से कम-से-कम एक काम करती है — नयम बनाती है, सेवा का खच उठाकर उसे स्वयं चलाती
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है, या चलाने वाल का नयमन और नगरानी करती है।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
कायकलाप सरकार क भू मका मुख्यत: कौन-सा स्तर
सड़ क िनम ण सड़क की योजना, भूिम अिधग हण, धन, मानक तय करना, ठे क ा दे ना और रा ीय राजमाग — कें द ; राज्य राजमाग
िनगरानी, और बाद में रखरखाव — राज्य; गली-मोहल्ले — स्थानीय
िनकाय
रे ल पूर ा तंत्र चलाना, माग, िकराया और समय-सारणी तय करना, और सुर क्षा कें द
का दाियत्व
र क्ष ा सशस्त्र से नाएँ रखना और सीमाओं की रक्षा। भारत के रा पित तीनों कें द — कें द की सूची में ‘रक्षा’ पहला
सशस्त्र से नाओं के सव च्च कमांडर है ं (िचत्र 10.5) िवषय है
-
जन स्वास्थ् य अस्पताल, पाथिमक स्वास्थ्य कें द और टीकाकरण कायक्रम चलाना; राज्य (‘जन-स्वास्थ्य’ राज्य सूची में),
िचिकत्सकों-नस ं का पिशक्षण व वेतन; दवाओं का िनयमन साथ में कें द के कायक्रम
अि नशमन और पिशिक्षत दल और उपकरण तैयार रखना और आपदा आते ही भेजना — तीनों स्तर िमलकर
आपद ा बचाव जैसे अध्याय के बाढ़ वाले उदाहरण में राज्य बचाव दल भेजता है और कें द
राहत सामग ी तथा से ना
यातायात प ुिल स यातायात िनयमों का पालन कराना, संके त िनयंित्रत करना, उल्लंघ न पर राज्य (‘पुिलस, कानून व्यवस्था’), नगर
जुम ना — कायपािलका का ‘पालन सुिनिश्चत करना’ वाला काम पुिलस के माध्यम से
न्यायाल य न्याय की पूर ी पणाली — अिखल भारत के िलए सव च्च न्यायालय, हर न्यायपािलका, दोनों स्तरों पर
राज्य में उच्च न्यायालय और उनके नीचे के न्यायालय
िवद्य ाल य सरकारी िवद्यालय चलाना, िशक्षकों की िनयुिक्त और वेतन, पाठ क्रम तय िशक्षा कें द और राज्य दोनों की सूची में है
करना, िनजी िवद्यालयों को मान्यता और िनरीक्षण; मध्याह्न भोजन और
छात्रविृ त्तयाँ
डाक दे श के हर कोने तक िच ी और पासल पहच
ु ँ ाना — उन जगहों तक भी कें द — ‘संचार’
जहाँ कोई िनजी कं पनी नही ं जाती; बचत योजनाएँ चलाना
बै ंिकं ग मुद ा जारी करना, बैक
ं ों के िलए िनयम बनाना और उनकी िनगरानी, कें द — ‘मुद ा’
सावजिनक क्षेत्र के बैक
ं चलाना और जमाकत ओं का धन सुर िक्षत रखना
ये काम अकेले नजी व्य क्त क्य नह कर सकते: इनम से हर सेवा सबके लए है और सब तक पहुँचनी चा हए
— उन गाँव तक भी और उन लोग तक भी जो भुगतान नह कर सकते। सड़क एक-एक घर के लए अलग नह बन
सकती; सीमा क रक्षा कोई एक प रवार नह कर सकता; और न्यायालय ववाद के कसी एक पक्ष का नह हो
सकता। यही वे काम ह जनके लए सरकार चा हए।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 क्या आप अपने दै नक जीवन के ऐसे अन्य पहलुओं पर भी वचार कर सकते ह जहाँ सरकार महत्वपूण भू मका
नभाती है?
हाँ — साधारण दन का बड़ा हस्सा कसी न कसी ऐसी चीज़ से होकर गुज़रता है जसे सरकार ने बनाया, चलाया या
जसका नयमन कया है। अपने ही दन पर च लए और सूची बनाइए।
दन का क्षण वहाँ सरकार कहाँ है
आप नल खोलते है ं नगरपािल का या पंचायत की जल ापूित , िकसे िकतना पानी िमले गा इसके िनयम , और पानी की जाँच
आप बत्ती जलाते है ं राज्य िवद्य त
ु बोड या िवतरण कं पनी , िबजल ी की द र और संचरण ल ाइने ं
कचरा उठ जाता है स्थानीय िनकाय — झाड़ू, संग हण, लै ंडिफ ल या खाद -स्थल , और कचरा अल ग करने के िनयम
आप नाश्ता करते है ं पैके ट पर खाद्य सुर क्ष ा मानक , अनेक पिरवारों के िल ए राशन की द ुक ान, और अनाज उ गाने वाले िकसान के
िल ए न्यूनतम समथन मूल्य
आप बस या ऑटो से िवद्यालय परिमट और माग , िकराया-सूची, चाल क का ल ाइसे ंस , वाहन का िफ़ टनेस और पदू षण पमाण-पत्र
जाते है ं
िवद्यालय का मध्याह्न भोजन सरकारी काय क्र ,
म िजसमें पित बच्चा मात्र ा और मेन ू तय है
आपकी पाठ पुस्तक . . .
एन सी ई आर टी . . ारा तैयार और िशक्ष ा िवभाग ारा िनध िरत ; पाय: िन:शल्ु क
आपका टीकाकरण काड रा ीय टीकाकरण काय क्र ,
म स्वास्थ् य के ं द ों के माध् यम से
जन्म पमाण-पत्र, आधार, पंजीकरण और पहचान — हर एक सरकारी अिभले ख
पासपोट
जेब का पैस ा भारतीय िरज़ व बै ंक ारा जारी मुद ा ; नोट एक वचन है िजसके पीछे सरकार खड़ी है
फ़ ोन कॉल या इंटरनेट सरकार ारा आवंिटत स्पेक्टम और तय िनयम ; और साइबर अपराध के िवरुद्ध वही नए कान ून िजनकी चच
अध् याय करता है
पाक , स्टेिडयम, पुस्तकालय, स्थानीय िनकाय या राज्य ारा िनिम त और अन ुरिक्ष त
संग हालय
चक्रवात से पहले की चेतावनी मौसम िवभाग , और उ स पर कार वाई करने वाल ा आपद ा पबंध न पािधकरण
यह करके दे खए: पूरे एक दन एक छोट कॉपी र खए और जब भी सरकार ारा द या नय मत क गई कसी
चीज़ का उपयोग कर, एक नशान लगाइए। अ धकांश वद्याथ दोपहर तक बीस नशान पार कर जाते ह। यही गनती
‘हम सरकार क आवश्यकता क्य है?’ का सबसे अ ा उत्तर है।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 154
सरकार के तीन अंग — साइबर अपराध का उदाहरण
आइए पता लगाएँ
प्र.1 ऊपर दए गए साइबर अपरा धय के मामले म सरकार के तीन अंग कस प्रकार काय करते ह, वणन क जए। वे
हस्तक्षेप कैसे करते ह?
तीन अंग अलग-अलग समय पर आते ह, और कोई भी अकेला यह काम पूरा नह कर सकता। अध्याय का उदाहरण यह है
क ड जटल लेन-दे न ने एक नए प्रकार क चोरी संभव बना द , जसम अपराधी “अपने स्थान पर बैठे-बैठे” लोग का धन चुरा लेते
ह।
अंग कब हस्तक्षेप इस मामले म ठ क-ठ क क्या करता है
करता है
िवधाियका सबसे पहले — पुर ाने कानून उस चोरी के िलए बने थे जो िदखाई दे ती है। इसिलए िवधाियका साइबर अपराध के
(कान ून बनाती िकसी िगरफ़् तारी से िवरुद्ध नए कानून बनाती है — अध्याय के शब्दों में, “ऐसी आपरािधक गितिविधयों… को रोकने के
है) भी पहले िलए अनेक सरकारों ने नए कानून बनाए है”ं । वह अपराध की पिरभाषा और दंड तय करती है और
नए तरीके सामने आने पर कानून में संशोधन भी करती है
कायपािल का उसके बाद — जब सरकार साइबर पुिलस बनाती और उसका खच उठाती है — इस अिभकरण का नाम अध्याय स्वयं
(कान ून ल ागू अपराध वास्तव में ले ता है। वह िशकायत ले ती है, िडिजटल सुर ाग खोजती है, खाते रुकवाती है, साक्ष्य जुटाती है और
करती है ) हो जाता है अिभयुक्तों को िगर फ़् तार कर न्यायालय के समक्ष पस्तुत करती है। मंत्र ी और िवभाग नीित, पिशक्षण
तथा साइबर सुर क्षा के िनयम तय करते है ं
न्यायपािल का अंत में — जब न्यायालय दोनों पक्षों को सुनकर तय करता है “िक क्या िकसी ने कानून तोड़ा है और यिद तोड़ा है, तो
(िनणय करती अिभयुक्त न्यायालय उस पर क्या कारवाई की जाए”। पिरणाम भी अध्याय बताता है — ऐसे अपरािधयों “को िगरफ्तार भी
है) के सामने आता है िकया गया है एवं न्यायालय ारा उन्हे ं दोषी ठहराया गया है। सामान्यत: उन्हे ं आिथक दंड के साथ-
साथ जेल की सजा भी दी जाती है। ” न्यायालय यह भी परख सकता है िक नया कानून सभी के िहत में
है या नही ं
साइबर अपराध का मामला, अंग-दर-अंग (पृ ठ 153–154)
ष्
नए पकार का अपराध िवधाियका कायपािलका
बैठे-बैठे ऑनलाइन साइबर अपराध के िवरुद्ध साइबर पुिलस खोज,
धन की चोरी नए कानून बनाती है जाँच और िगरफ़् तारी
लोगों की सुरक्षा न् यायपािलका
बचत सुरिक्षत, और न्यायालय सुनवाई कर दोषी
दूसरों के िलए चेतावनी ठहराता, ज ुम ना और जेल
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एक ही मामला, तीन अंग, क्रम से — पहले कानून बनता है, फर लागू होता है, फर न्यायालय उसे लागू करता है; तभी लोग को वास्त वक
सुरक्षा मलती है।
तीन क्य चा हए: कसी एक को हटा द जए, मामला वह बखर जाएगा। वधा यका न हो तो कानून ही नह ,
और जो अपराध ही नह है उसके लए पु लस कसी को पकड़ नह सकती। कायपा लका न हो तो कानून कताब म
धरा रह जाएगा, क्य क जाँच और गरफ़्तारी कोई करेगा ही नह । न्यायपा लका न हो तो अपराध तय करने का काम
पु लस स्वयं करने लगेगी और नद ष व्य क्त के पास जाने के लए कोई जगह नह बचेगी। इसी लए चत्र 10.3 तीन
को एक ही वृत्त के अलग-अलग भाग के रूप म दखाता है, बीच म तीर के साथ — पृथक, फर भी साथ-साथ।
क्या आप जानते ह? अध्याय बताता है क ‘मनी ऑडर’ और ‘ डमांड ाफ्ट’ जैसे शब्द आपने शायद सुने भी न ह
— तीस वष पहले पैसा भेजने का अथ था फ़ॉम, पं क्त और कई दन क प्रतीक्षा। नई तकनीक नई सु वधा लाई,
फर नया अपराध, और फर नया कानून। यही क्रम बताता है क वधा यका को “पुराने कानून म संशोधन तथा
वतमान कानून को नरस्त” करने क श क्त क्य चा हए।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 155
श क्तय का पृथक्करण — कक्षा क ग त व ध
आइए पता लगाएँ
प्र.1 कक्षा क एक ग त व ध के रूप म क्या आप कसी ऐसी त क कल्पना कर सकते ह जहाँ शासन के तीन
अंग क श क्तयाँ कसी एक ही समूह के नयंत्रण म आ जाएँ, ऐसे म कस प्रकार क अव्यव ा उत्पन्न होगी?
क्या आप वास्त वक जीवन म सुनी हुई कसी ऐसी प र त का वणन कर सकते ह?
य द एक ही समूह नयम बनाए, उन्ह लागू करे और ववाद का नणय भी करे, तो गलती होने पर उसे सुधारने वाला कोई
नह बचेगा। अध्याय पृथक्करण का उ े श्य स्पष्ट बताता है — “इसका उ े श्य पूरी प्रणाली को नयं त्रत करना एवं संतुलन बनाए
रखना है, अथात सरकार का प्रत्येक अंग दूसरे अंग के काय क नगरानी कर सकता है तथा य द कोई अंग अपनी अपे क्षत भू मका
से परे जाकर काय कर रहा है, तो उसे नयं त्रत कर पुन: संतुलन स्था पत कर सकता है।”
कक्षा क ग त व ध कैसे क जए। कक्षा को तीन समूह म बाँ टए — वधा यका, कायपा लका, न्यायपा लका — और उन्ह एक
छोटा-सा ववाद द जए (जैसे, मध्यावकाश म खेल का मैदान कसे मलेगा)। इसे दो बार खे लए: पहले तीन समूह अलग-अलग,
फर तीन भू मकाएँ एक ही समूह को दे कर। फर ल खए क क्या बदला।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन
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क्या बगड़े गा क्य
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sरोक
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जो समूह िनयम भी िलखे और उसी पर िनणय भी दे , उसे अपने पक्ष में िनयम िलखने से कोई
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िनयम बनाने वाल ों के
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अन ुकू ल िनयम
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िनष्पक्ष सुनवाई नही ं जो आप पर आरोप लगा रहा है, वही यह भी तय करे ग ा िक आप दोषी है ं या नही ं। िनद ष होना भी काम नही ं आएगा
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िशकायत कही ं नही ं कायपािलका गलत करे तो अध्याय के अनुस ार न्यायपािलका “जाँच करती है िक क्या कायपािलका ारा िलया गया
पहु ँचेग ी
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कोई िनणय ठीक है या नही ं”। यह हट जाए तो िशकायत का कोई पता ही नही ं बचता
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गल ितयाँ कभी नही ं
सुध रे ंग ी रहेग ा
agन “भली-भाँित परखा गया है और सभी के िहत में है या नही ं”, इसिलए बुरा कानून सदा बना
कोई नही ं दे खेग ा िक कानू
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वही समूह आज िनयम बनाकर कल िकसी िवशेष मामले के िलए बदल सकता है। तब कोई िकसी बात की योजना
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िनयम कभी भी बद ल
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नही ं बना सकता
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जाएँग े
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ल ोग भाग ले ना छोड़ दे ंग े यिद आपके वोट और आपकी बात से कु छ न बदले , तो भागीदारी समाप्त हो जाती है — और उसके साथ आधारभूत
लोकतंत्र भी
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वास्त वक जीवन क ऐसी प र तयाँ — इन्ह प र स्थ त के रूप म ल खए, कसी व्य क्त या दल पर नणय के रूप म नह :
व ालय या मोहल्ले म। कल्पना क जए क एकm . c
s e ही व्य क्त मैदान का समय तय करे, नयम तोड़ने वाल को पकड़े और दं ड
a श वद्या थय ने इसका छोटा रूप देखा है, और वह हमेशा अन्यायपूण लगता है
भी सुनाए, और आगे कह अपील न हो। अlधकां
— तब भी जब वह व्य क्त सही हो। a g
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भारत म औप नवे शक शासन के समय। भारतीय के लए कानून एक ऐसे प्रशासन ने बनाए जसे भारतीय ने चुना नह था,
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उन्ह के अ धका रय ने उन्ह लागू कया और चुनौती भी उसी सत्ता ारा बनाए न्यायालय म दे नी पड़ती थी। ‘अपने कानून हम
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.c सावधानी से पृथक रखा।
स्वयं बनाएँगे’ — यह स्वतंत्रता आंदोलन क कद्र य माँग म थी, और इसी कारण हमारे सं वधान- नमाताओं ने तीन अंग को
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se जहाँ श क्तय का पृथक्करण नह होता। इ तहास बताता है क जहाँ भी तीन श क्तयाँ एक ही समूह के पास रही ह, वहाँ
इतनी
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agl एक ही ढरा दोहराया गया — असहम त क आवाज़ दबती है, चुनाव अथहीन हो जाते ह और सामान्य व्य क्त के पास गलत
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नणय को पलटवाने का कोई रास्ता नह रहता।
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संतुलन का वचार, एक पं क्त म: श क्तय का पृथक्करण कसी व्य क्त पर अ वश्वास नह है। यह ऐसी रचना है
जो मानकर चलती है क गलती कोई भी कर सकता है, इस लए उसे पकड़ने वाला भी व्यवस्था म रखा जाए।
इसी लए चत्र 10.3 म तीन भाग के बीच तीर दोन दशाओं म ह।
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त के बारे म है, कसी दल या नेता के बारे मaनह
ag कौन सुधार सकता है। अध्याय यही
.cप्र क्रयाओं का क्या होता है — नयम कौन बनाता है, लागू कौन करता है, गलती
नष्पक्ष र हए: प्रश्न कसी प र
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सखा रहा है।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 156 se m . co agl
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सरकार के तीन स्तर — चत्र 10.5 क सारणी पढ़ना
आइए पता लगाएँ
प्र.1 चत्र 10.5 म द गई सारणी को दे खए। उन काय और दा यत्व पर प्रकाश डा लए जो आपके जीवन को सबसे
अ धक प्रभा वत करते ह।
अ खल भारत / राष्ट्रीय स्तर राज्य स्तर
न्यायपा लका भारत का सव च्च न्यायालय उच्च न्यायालय
वधा यका दो सदन — लोकसभा और राज्यसभा — राज्य का एक वधानमंडल अथवा वधान
जो राष्ट्रीय स्तर पर कानून का नमाण सभा (ध्यान रहे क अ धकांश राज्य म एक
करते ह ही सदन होता है; कुछ राज्य म दो होते ह)
कायपा लका संघ सरकार — भारत के राष्ट्रप त राज्य सरकार — राज्यपाल (औपचा रक
(औपचा रक प्रमुख और तीन सशस्त्र प्रधान) ारा संचा लत; मुख्यमंत्री
सेनाओं के सव च्च कमांडर) ारा कायपा लका के प्रमुख
संचा लत; प्रधानमंत्री कायपा लका के
प्रमुख
कायपा लका के काय रक्षा · वदे शी मामले · परमाणु ऊजा · पु लस, कानून व्यव ा · राज्य स्तर पर कद्र
और दा यत्व (यह संचार · मुद्रा · अंतराज्यीय वा णज्य · सरकार ारा बनाए गए कानून को अपनाना
वस्तृत सूची नह है) शक्षा · राष्ट्रीय नी तय का प्र तपादन और उनका कायान्वयन · जन-स्वास्थ्य ·
शक्षा · कृ ष · सचाई · ानीय सरकार
चत्र 10.5, पृष्ठ 157।
पहले पृष्ठ 157 क चत्र 10.5 क पूरी सारणी, ता क आप उस पर नशान लगा सक। पुस्तक क अपनी चेतावनी याद र खए —
“यह वस्तृत सूची नह है”।
अंग अ खल भारत / राष्ट्रीय स्तर राज्य स्तर
न्यायपािल का भारत का सव च्च न्यायालय उच्च न्यायालय
िवधाियका दो सदन — लोकसभा और राज्य सभा — जो रा ीय राज्य का एक िवधानमंडल अथवा िवधान सभा (अिधकांशत:
स्तर पर कानूनों का िनम ण करते है ं राज्यों में िवधान सभा होती है, जबिक कु छ राज्यों में िवधान
सभा के साथ-साथ एक िवधान पिरषद भी होती है)
कायपािल का संघ सरकार — भारत के रा पित (औपचािरक पमुख राज्य सरकार — राज्यपाल (औपचािरक पधान) ारा
और तीनों सशस्त्र से नाओं के सव च्च कमाड
ं र) ारा संचािलत; मुख्यमंत्र ी कायपािलका के पमुख
संचािलत; पधानमंत्र ी कायपािलका के पमुख
कायपािल का के रक्षा · िवदे शी मामले · परमाण ु ऊज · संचार · मुद ा · पुिलस, कानून व्यवस्था · राज्य स्तर पर कें द सरकार ारा
काय और द ाियत्व अंतर ज्यीय वािणज्य · िशक्षा · रा ीय नीितयों का बनाए गए कानूनों को अपनाना और उनका काय न्वयन · जन-
पितपादन स्वास्थ्य · िशक्षा · कृ िष · िसंचाई · स्थानीय सरकार
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
अब नशान लगाइए। वे प्र व ष्टयाँ चु नए जो आपके दन को छू ती ह और एक पं क्त म ल खए क कैसे। एक नमूना:
जस पर म प्रकाश स्तर मेरे जीवन पर प्रभाव — नमूना उत्तर
डालूँगा
िशक्ष ा कें द और राज्य मेर ा िवद्यालय, मेरे िशक्षक, मेर ी पाठ पुस्तक, मध्याह्न भोजन, बोड परीक्षा। यही एक पिविष्ट
दोनों मुझे सबसे अिधक पभािवत करती है
-
जन स्वास्थ् य राज्य वह स्वास्थ्य कें द जहाँ मेर ा टीकाकरण हुआ , और वह अस्पताल जहाँ मेर ा पिरवार जाता है
प ुिल स , कान ून व्यवस्था राज्य िवद्यालय के बाहर चौराहे पर खड़ी यातायात पुिलस; सुर िक्षत घर लौट पाना
कृ िष और िसंचाई राज्य वह नहर और वे बीज िजन पर हमारे खेत िटके है ं — और बाकी सबके िलए सब्ज़ी का भाव
स्थानीय सरकार राज्य का िवषय पानी, सड़क की बत्ती, नाली, पाक — घर से 200 मीटर के भीतर की हर चीज़
संचार कें द फ़ ोन और इंटरनेट, और डाकघर
मुद ा कें द हर नोट और िसक्का, और दुक ान पर माँ का यू.पी.आई. भुग तान
र क्ष ा कें द यह रोज़ िदखती नही ं, पर इसी के कारण दे श इतना सुर िक्षत है िक ऊपर की सारी बाते ं चल
पाती है ं
नशान लगाते समय एक बात दे खए: शक्षा दोन स्तंभ म है। यह छपाई क भूल नह — कुछ वषय पर दोन
स्तर मलकर काम करते ह। इसी लए आपका वद्यालय एक ही समय म राज्य वभाग के नयम भी मानता है और
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम भी।
प्र.2 दो अथवा तीन वयस्क लोग से सरकार के साथ उनके काय संबं धत संपक अथवा अनुभव के बारे म पू छए —
यह संपक कन स्तर पर और कन उ े श्य से हुए?
व ध। अलग-अलग काम करने वाले वयस्क चु नए — जैसे एक कसान, एक दुकानदार और एक वेतनभोगी कमचारी; या एक
गृ हणी, एक ऑटो चालक और एक शक्षक। केवल तीन प्रश्न पू छए और उत्तर सारणी म ल खए। कसी क आय या नजी बात मत
पू छए।
1. पछले एक वष म आपको कस काम से कसी सरकारी कायालय जाना पड़ा?
2. वह स्थानीय कायालय था, राज्य का या कद्र का?
3. वह असल म कौन-सा अंग था — कोई नयम बनाने वाला, लागू करने वाला या न्यायालय?
नमूना उत्तर (आपके उत्तर अलग ह गे — यही इस अभ्यास का उ े श्य है):
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व्य क्त संपक का उ े श्य स्तर अंग
िकसान भू-अिभले ख में सुध ार; नहर के पानी की बारी; स्थानीय और राज्य कायपािलका
अनुद ान पर बीज; क्रय कें द पर अनाज बेचना
द ुक ानद ार नगरपािलका से दुक ान का लाइसे ंस स्थानीय और कें द कायपािलका
नवीनीकरण; ऑनलाइन जी.एस.टी. िववरणी
वेतनभोगी आयकर िववरणी; पासपोट बनवाना; भिवष्य कें द कायपािलका
कम चारी िनिध का दावा
ग ृिहणी राशन काड, गैस कनेक्शन, बच्चे का िवद्यालय स्थानीय और राज्य कायपािलका
में पवेश और छात्रविृ त्त फ़ ॉम, टीकाकरण का
समय
ऑटो चाल क डाइिवंग लाइसे ंस , वाहन का िफ़ टनेस और राज्य — आर.टी.ओ. और कायपािलका; चालान पर िववाद हो तो
परिमट, पदू षण पमाण-पत्र, यातायात चालान यातायात पुिलस के माध्यम से न्यायालय
कोई भी मतदाता पहचान-पत्र, और पंचायत/ तीनों स्तर िवधाियका का चयन — यही एक
मतद ाता नगरपािलका, िवधान सभा तथा लोकसभा संपक है िजसमें िनणय नागिरक करता
चुनावों में मतदान है
कक्षा को प्राय: क्या पता चलता है: रोज़ का लगभग सारा संपक कायपा लका से होता है — वे कायालय और
अ धकारी जो कानून को लागू करते ह। वधा यका से संपक मुख्यत: मतदान के दन होता है और न्यायपा लका से
तभी जब कोई ववाद हो। यह अ खोज है, क्य क इससे पता चलता है क मतदान का वह एक दन इतना
महत्वपूण क्य है — उसी दन नाग रक उन लोग को चुनते ह जो वे नयम बनाते ह, जन्ह ये सारे कायालय बाद म
लागू करते ह।
शष्टता से क जए: कुछ भी लखने से पहले अनुम त ली जए और कॉपी म नाम मत ल खए — केवल ‘ कसान’,
‘दुकानदार’ आ द। अंत म धन्यवाद अवश्य क हए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 159
लोकतंत्र — प्र त न ध क्य चा हए
प्र.1 परंतु क्या सभी लोग एक साथ शासन कर सकते ह?
नह । अध्याय तुरंत उत्तर दे ता है — “स्पष्ट है क यह संभव नह है।”
संख्या पर वचार क जए। 2024 म भारत म लगभग 97 करोड़ मतदाता थे। य द हर एक को इक ा होकर, हर तक सुनकर, हर
प्रश्न पर मत दे ना पड़े तो कोई नणय कभी नह हो पाएगा — इतने लोग के लए कोई सभागार नह है, और एक ही बहस वष
चलेगी।
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इस लए लोकतंत्र वही एक व्यावहा रक काम करता है: जनता अपनी ओर से काम करने के लए कुछ लोग को चुन लेती है।
सभी लोग एकत्र होकर िनणय नही ं ले सकते → इसिलए वे पितिनिध चुन ते है ं
पितिनिध सभा में िमलते है ं → चच , तक -िवतक और िनणय
यही पितिनिध लोकतं त्र कहलाता है
समूह का आकार नणय कैसे हो सकता है
40 िवद्यािथयों की कक्षा िपकिनक का स्थान चुनती है सब मतद ान करते है ं — पत्यक्ष ल ोकतंत्र (पष्ृ ठ 160 का हाथ उ ठाकर मतद ान)
गाँव की ग ाम सभा सभी वयस्क ग ामवासी आकर बोल सकते है ं — अब भी काफ़ ी हद तक पत्यक्ष
कई करोड़ लोगों का राज्य िवधान सभा में च ुने हुए िवधायक
140 करोड़ लोगों का दे श ल ोकसभा और राज्य सभा में च ुने हुए सांस द
फर भी यह ‘लोग का शासन’ क्य है: क्य क प्र त न ध उस स्थान के मा लक नह होते — जनता उन्ह वह स्थान
स पती है। वे चुनाव से चुने जाते ह, मतदाताओं को उत्तर दे ना पड़ता है, और अगले चुनाव म बदले जा सकते ह।
चुनाव के बीच नाग रक अपनी बात उन धरातलीय संस्थाओं के माध्यम से रखते ह जन्ह आप आगे के दो अध्याय म
पढ़गे। अत: शासन लोग का ही है; वे बस अपने चुने हुए व्य क्तय के माध्यम से करते ह।
प्र.2 इस त म क्या पूरी कक्षा प्रधानाचाय के पास जाएगी?
नह — “स्पष्ट है क यह व्यावहा रक नह होगा।” यह छोटा-सा उदाहरण अध्याय का वह तरीका है जससे वह ‘प्र त न धत्व’ को
राज्य या दे श के लए प्रयोग करने से पहले समझा दे ता है।
कल्पना क जए क पूरी कक्षा ऐसा करे: चालीस वद्याथ एक छोटे कक्ष म, सब एक साथ बोलते हुए, प्रधानाचाय को एक भी पूरा
वाक्य सुनाई नह दे रहा, और बाहर प्रतीक्षा म चालीस कक्षाओं का काम रुका हुआ। कुछ भी तय नह होगा।
वास्तव म होता क्या है, अध्याय के शब्द म: “बहुत से वद्यालय म पूरी कक्षा मलकर कक्षा के मॉनीटर या कक्षा के प्र त न ध का
चयन करती है; य द कोई मॉनीटर नह भी है, तो भी कसी वशेष काय के लए कसी एक प्र त न ध का चयन कया जा सकता है
और उस प्र त न ध को प्रधानाचाय के पास भेजा जा सकता है।”
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कक्षा म दे श म वही वचार
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पूर ी कक्षा की साझा समस्या — टू टी िखड़की, भमण की
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— सड़क , अस्पताल , िवद्य ाल य
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पूरे िनव चन क्ष ेत्र की साझा सम स्या
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ितिथ
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aकक्षा मॉनीटर या पितिनिध चुनती है जनता िवधायक या सांस द च ुनती है
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पितिनिध कक्षा की बात पधानाचाय के सामने रखता है सद स्य िवधान सभा या संस द में वह िवषय उ ठाता है
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कक्षा पहले तय करती है िक माँग ना क्या है
g l as “संवाद और तक -िवतक ” एक -दू सरे को समझाने का पयास करते
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सद स्य ारा
है ं
जो पितिनिध कभी बोलता ही नही ं, वह दोबारा नही ं चुना जाता — नागिरक का यही िनयंत्र ण है
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च ुनाव िफ र आते है ं
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दो शब्द याद र खए जो इसे लोकतां त्रक बनाते ह: चय नत और उत्तरदायी। कक्षा ारा चुना गया और कक्षा के
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प्र त उत्तरदायी मॉनीटर प्र त न ध है; जो स्वयं ही अगुआ बन बैठे, वह नह ।
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आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 160
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अध्याय चार बदुओं म
आगे बढ़ने से पहले . ..
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सरकार और शासन के बना कोई भी दे श नह चल सकता।
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प्र.1
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क्य क दे श और कुछ नह , एक ही जगह साझा करते बहुत-बहुत लोग ह — और जैसा अध्याय आरंभ म ही कहता है, “जब
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बहुत से लोग एक साथ रहते ह, तब असहम त और अव्यवस्था क स्थ त उत्पन्न हो सकती है। ऐसे म, समाज म व्यवस्था और स ाव
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बनाए रखने के लए नयम अ नवाय हो जाते ह।”
हटा द जए क्या रुक जाएगा agl
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न कोई िनणय होगा, न िनयम बनेगं े, और न कोई दे खेग ा िक पालन हो रहा है या नही ं। िचत्र 10.1 का नीचे वाला दृ श्य, हर जगह
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शासन
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ag के िलए कायपािलका नही ं, और िववाद िनपटाने
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तंत्र कानून बनाने के िलए िवधाियका नही ं, सड़क-रे ल -स्वास्थ्य-रक्षा-पुिलस चलाने
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सरकार
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के िलए न्यायालय नही ं
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और ध्यान रहे, दोन शब्द एक नह ह: शासन काम है; सरकार वह है जो यह काम करती है। दे श को दोन चा हए — संस्थाओं
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का ढाँचा भी और वह प्र क्रया भी जससे वे वास्तव म नणय लेकर उन्ह पूरा करती ह।
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यह बदु सारांश म पहला क्य है: पूरा अध्याय इसी पर खड़ा है। नयम तो पहले से हर जगह ह — घर म, वद्यालय
म, परीक्षा कक्ष म, सड़क पर, काम पर। शासन कोई ऊपर से थोपी गई नई चीज़ नह ; वही प र चत बात दे श के
आकार म है।
प्र.2 आधु नक सरकार के तीन अंग है — वधा यका, कायपा लका और न्यायपा लका — जन्ह एक साथ काय करने
क आवश्यकता होती है।
तीन अलग-अलग काम, तीन अलग-अलग अंग — पर शासन एक ही।
अंग इसका काम, पुस्तक के शब्द म भारत म कौन ( चत्र 10.5)
िवधाियका “नए कानून बनाती है और कभी-कभी पुर ाने कानूनों में संशोधन तथा रा ीय स्तर पर लोकसभा और राज्य सभा; राज्य में
वतमान कानून को िनरस्त भी करती है” — यह काम “जनता के िवधान सभा
पितिनिधयों की सभा” करती है
कायपािल का “कानूनों को लागू करती है” — पमुख, मंत्र ीगण और वे अिभकरण रा पित (औपचािरक पमुख) और पधानमंत्र ी
“िजनका दाियत्व कानून को लागू करवाना होता है” कायपािलका के पमुख; राज्यपाल (औपचािरक पधान)
और मुख्यमंत्र ी कायपािलका के पमुख
न्यायपािल का “न्यायालयों की पणाली है जो इस बात का िनणय करती है िक क्या भारत का सव च्च न्यायालय; राज्य में उच्च न्यायालय
िकसी ने कानून तोड़ा है”, और कभी-कभी कायपािलका के िनणय
तथा कानून के औिचत्य की भी जाँच करती है
‘साथ काम करना’ और ‘पृथक रखना’ — दोन सही ह, और अध्याय दोन एक ही साँस म कहता है: “इन तीन अंग को न त
रूप से पृथक रखा जाता है, जब क ये तीन एक-दूसरे को प्रभा वत करते ह और काय भी एक साथ करते ह।” इस वभाजन को
‘श क्तय का पृथक्करण’ कहते ह और इसका उ े श्य है नयंत्रण एवं संतुलन — प्रत्येक अंग दूसरे क नगरानी कर सकता है और
“य द कोई अंग अपनी अपे क्षत भू मका से परे जाकर काय कर रहा है, तो उसे नयं त्रत कर पुन: संतुलन स्था पत कर सकता है”।
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शिक्तयों का पथृ क्करण — िचत्र 10.3 शब्दों मे ं
िवधाियका न् यायपािलका
हर अंग दू सरे की िनगरानी करता है
शासन
बीच में
कायपािलका
तीन पृथक अंग, उनके बीच चलते तीर और बीच म शासन — पृष्ठ 154 पर पुस्तक ने यही आकृ त बनाई है।
प्र.3 भारत सरकार तीन स्तर पर काय करती है — संघीय अथवा राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर और ानीय स्तर।
अलग-अलग समस्याएँ अलग-अलग आकार क होती ह — और पृष्ठ 155 पर चत्र 10.4 उन्ह परा मड के रूप म दखाता है,
जसक चोट पर कद्र सरकार, बीच म राज्य सरकार और चौड़े आधार पर स्थानीय सरकार है।
स्तर कहाँ काम मुख्य वषय अध्याय का बाढ़ वाला उदाहरण
करता है
स्थानीय नगर अथवा पानी, सड़क की बित्तयाँ, नािलयाँ, कचरा, “यिद वह ज्यादा भीषण नही ं है, तो स्थानीय पािधकारी उस
सरकार ग ाम स्तर पर गली-मोहल्ले की सड़कें , बाज़ार — आगे के िस्थित को संभाल सकते है”ं
दो अध्यायों में िवस्तार से
राज्य राज्य स्तर पुिलस और कानून-व्यवस्था, जन-स्वास्थ्य, “यिद बाढ़ अनेक नगरों और बहुत से गाँवों को पभािवत करती
सरकार पर िशक्षा, कृ िष, िसंचाई, स्थानीय सरकार है, तो राज्य सरकार आगे आती है और… बचाव दल भेजती
है”
कें द रा ीय स्तर रक्षा, िवदे शी मामले , परमाण ु ऊज , संचार, “यिद बाढ़ भयानक रूप ले ले ती है और िवशाल क्षेत्र को
सरकार पर मुद ा, अंतर ज्यीय वािणज्य, िशक्षा, रा ीय पभािवत करती है, तो कें द सरकार मदद के िलए आगे आती है
नीितयों का पितपादन और राहत सामग ी और से ना इत्यािद भेजती है”
अध्याय एक घरेलू तुलना भी दे ता है — बल्ब नह जल रहा। पहले आप बल्ब, स्वच और फ्यूज दे खते ह; फर बजली मस्त्री को
बुलाते ह; और य द दोष घर के बाहर हो, तो बजली वभाग जाते ह। “यहाँ भी समस्या के समाधान के तीन स्तर ह।”
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
परा मड नीचे से सबसे चौड़ा क्य है: स्थानीय स्तर सबसे अ धक लोग और सबसे अ धक रोज़मरा के वषय को
छू ता है। इसी लए अध्याय का शीषक आधारभूत लोकतंत्र है — ‘आधार’ वही चौड़ा तल है, जहाँ सामान्य नाग रक
सबसे सरलता से भाग ले सकता है।
प्र.4 लोकतंत्र इस प्रणाली क पूरी रूपरेखा है। यह राज्य और राष्ट्रीय दोन स्तर पर चय नत प्र त न धय के माध्यम से
काय करती है।
अंग और स्तर तो मशीन ह; लोकतंत्र वह है जो इस मशीन को जनता क बनाता है। लोकतंत्र हटा द जए तो वधा यका,
कायपा लका और न्यायपा लका फर भी रहगी — पर जनता का इस पर कोई वश नह होगा क उनम कौन बैठे, और कसी नयम
को वैध रूप से बदलवाने का कोई रास्ता नह होगा।
मशीन का हस्सा लोकतंत्र उसम क्या जोड़ता है
िवधाियका कानून बनाती उ सके सद स्य च ुने हुए होते है ं — राज्य स्तर पर िवधायक , रा ीय स्तर पर सांस द
है
िनणय तो ले ने ही पड़ते है ं वे “संवाद और तक -िवतक ” से िल ए जाते है,ं एक -दू सरे को समझाकर — आदे श से नही ं
िनयम सब पर लागू होते है ं इसिल ए उ नमें सबकी बात चल ती है : “कान ूनों और िनयमों में नागिरक भी अपनी बात रख सकते है”ं
सरकार तीन स्तरों पर है तीनों पर च ुनाव , और आधार पर आधारभ ूत ल ोकतंत्र , तािक “नागिरक स्वयं को पभािवत करने वाले िनणयों पर
अपनी बात रख सकते है ं ”
गलती कोई भी कर पितिनिधयों को िफ र मतद ाताओं के सामने आना पड़ ता है ; और न्यायाल य परख सकता है िक कान ून “सभी के िहत
सकता है ”
में है या नही ं
आकार भी याद रखने योग्य है: भारत वश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, 2024 म लगभग 97 करोड़ मतदाता, और सद्धांतत: 18
वष से ऊपर का प्रत्येक नाग रक इन चुनाव म भाग ले सकता है।
दोहराने के लए एक पं क्त: तीन अंग — काम का बँटवारा; तीन स्तर — काम कहाँ होता है; लोकतंत्र — यह
सरकार कसक है।
प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ — पृष्ठ 161
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अध्याय के अंत का अभ्यास
प्र.1 स्वयं पर खए — लोकतंत्र का क्या अथ है? प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्र त न ध लोकतंत्र के बीच क्या अंतर है?
लोकतंत्र का अथ है ‘लोग का शासन’। यह शब्द ीक भाषा के दो शब्द से बना है — डेमोस, अथात ‘लोग’, और क्रेटोस,
अथात ‘शासन प्रणाली या तंत्र या श क्त’। वश्व के अ धकांश दे श ने “शासन प्रणाली क न व के रूप म लोकतंत्र को अपनाया है”।
दोन प्रकार म अंतर:
तुलना का प्रत्यक्ष लोकतंत्र प्र त न ध लोकतंत्र
बदु
िनण य कौन समूह का पत्येक व्यिक्त स्वयं जनता ारा चुने गए पितिनिध
ले ता है
राय कै से िगनी सब उसी पश्न पर मत दे ते है ं — जैसे ‘क’ या ‘ख’ जनता व्यिक्त चुनने के िलए मत दे ती है; िफर वह व्यिक्त पश्नों पर
जाती है स्थान के िलए हाथ उठाना मत दे ता है
पस्
ु तक का िपकिनक का मतदान — “यह पत्यक्ष लोकतंत्र का पधानाचाय के पास भेजा गया कक्षा-पितिनिध; और राज्य व रा ीय
उ द ाहरण उदाहरण है, जहाँ स्थान िनिश्चत करने में पत्येक स्तर पर िवधायक तथा सांस द
िवद्याथ की राय ली गई”
कहाँ उ पयक्
ु त छोटे समूह जो सब एक साथ बैठ सकें — कक्षा, ग ाम बड़ी जनसंख्या — राज्य या दे श
सभा, छोटी संस्था
जनता कब हर उठने वाले पश्न पर चुनाव के समय; उसके बीच िनणय पितिनिध ले ते है ं
िनण य करती है
भारत छोटी संस्थाओं और बैठकों में “िकसी भी आध ुिनक ल ोकतंत्र की तरह भारत में ‘जन पितिनिध ’
आधािरत ल ोकतंत्र है ” — और 2024 में ल गभग 97 करोड़
मतद ाताओं के साथ िवश्व का सबसे बड़ ा
भारत हर बात के लए प्रत्यक्ष लोकतंत्र क्य नह अपना सकता: इस लए नह क लोग क राय महत्वपूण नह ,
ब ल्क केवल ग णत के कारण। य द 97 करोड़ मतदाताओं म से हर एक कसी एक कानून पर केवल एक मनट भी
बोले, तो बहस 1,800 वष से अ धक चलेगी। प्र त न धत्व वही तरीका है जससे हर व्य क्त क आवाज़ नणय म
बनी भी रहे और नणय इसी सप्ताह हो भी जाए।
भ्रम न हो: ‘प्रत्यक्ष’ का अथ ‘बेहतर’ नह और ‘प्र त न ध’ का अथ ‘कमज़ोर’ नह । दोन लोकतंत्र ही ह — अंतर
समूह के आकार का है, स्वतंत्रता क मात्रा का नह ।
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सरकार के तीन अंग कौन-से ह? उनक क्या अलग-अलग भू मकाएँ ह?
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agl के तीन अंग ह — वधा यका, कायपा लका और न्यायपा लका।
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अंग भू मका भारत म साइबर अपराध के
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उदाहरण म
िवधाियका
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नए कानून बनाती है, कभी-कभी संशोधन लोकसभा और राज्य सभा (रा ीय); िवधान साइबर अपराध के
करती या िनरस्त भी करती है। यह काम सभा (राज्य)। सदन अथ त “ऐसी सभा जहाँ िवरुद्ध नए कानून बनाए
“जनता के पितिनिधयों की सभा” करती है कानूनों पर चच की जाती है अथवा उन्हे ं
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पािरत िकया जाता है”
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m .co कानूनों को लागू करती है — पमुख, मंत्रीगण a g
रा पित (औपचािरक पमुख और तीनों सशस्त्र साइबर पुिलस ने जाँच
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कायपािल का
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और वे अिभकरण “िजनका दाियत्व कानून से नाओं के सव च्च कमांडर) तथा पधानमंत्र ी की और अपरािधयों को
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पधान) तथा मुख्यमंत्र ी कायपािलका के पमुख
िगरफ़् तार िकया
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आगे क्या कारवाई हो, आवश्यक हो तो दंडm
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िनणय करती है िक कानून टू टा या नही ं और भारत का सव च्च न्यायालय; पत्येक राज्य में उन्हे ं दोषी ठहराया; “उन्हे ं
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न्यायपािल का
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; उच्च न्यायालय आिथक दंड के साथ-
कभी-कभी यह भी परखती है िक l
a g कायपािलका
का िनणय ठीक है या कानून सबके िहत में है
साथ जेल की सजा भी
दी जाती है”
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पूरे अंक के लए एक बात और जो ड़ए: तीन को पृथक रखा जाता है — यही श क्तय का पृथक्करण है — यद्य प वे एक-
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o सकता है तथा… उसे नयं त्रत कर पुन: संतुलन स्था पत कर सकता है।” agl a s
दूसरे को प्रभा वत करते और साथ काम करते ह। उ े श्य है नयंत्रण एवं संतुलन: “सरकार का प्रत्येक अंग दूसरे अंग के काय क
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agl याद रखने क तरक ब: बनाना · करना · परखना। वधा यका कानून बनाती है, कायपा लका उसे करती है,
न्यायपा लका उसे परखती है।
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भारत के प रप्रेक्ष्य म हम त्रस्तरीय सरकार क आवश्यकता क्य है?
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emनकट हो और उसे सँभाल भी सके। “अनेक देश म कोई भी सरकार कई स्तर पर काय करती है… प्रत्येक स्तर भन्न वषय पर
क्य क समस्याएँ तीन आकार म आती ह, और हर आकार को उस स्तर पर सँभालना सबसे अ ा है जो उसके सबसे
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agl काय करता है।”
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तीन स्तर — िचत्र 10.4, और हर स्तर का काम
रा ीय स्तर पर रक्षा, मुद ा,
के ं द सरकार िवदेशी मामले
राज् य सरकार
पुिलस, स्वास्थ्य,
कृिष, िसंचाई राज्य स्तर पर
स्थानीय सरकार
पानी, नाली,
बत्ती, गली की सड़ कें नगर अथवा गाम स्तर पर
पृष्ठ 155 का परा मड — ऊपर संकरा, जहाँ वषय कम और राष्ट्रीय ह; नीचे चौड़ा, जहाँ वषय अनेक और स्थानीय ह।
कारण व्याख्या
1. िवषयों का आकार अल ग - रक्षा, मुद ा और िवदे शी मामले पूरे दे श के िवषय है;ं पुिलस, स्वास्थ्य और िसंचाई राज्य के ; और बंद नाली या टू टी
अल ग है स्टीटलाइट एक गली की। एक ही काय लय ये तीनों काम अच्छी तरह नही ं कर सकता
2. स्थानीय सम स्या के िल ए कौन-सी गली में पानी भरता है और कौन-सा हैड
ं पंप खराब है, यह वही ं के लोग जानते है।
ं दो हज़ार िकलोमीटर
स्थानीय जानकारी चािहए दू र बैठकर िलया गया िनणय यह चूक जाएगा
3. गित काय लय पास हो तो छोटी समस्याएँ जल्दी सुल झती है ं — पष्ृ ठ 155 की बल्ब, िबजली िमस्त्री और िबजली
िवभाग वाली तुल ना
4. बड़ी सम स्या के िल ए सीढ़ी एक क्षेत्र की बाढ़ स्थानीय पािधकारी सँभालते है;ं अनेक नगरों-गाँवों तक फै ले तो राज्य बचाव दल भेजता है;
और भयानक रूप ले ले तो कें द राहत सामग ी तथा से ना भेजता है
5. भारत िवशाल और िविवध है अलग-अलग राज्यों की भाषा, फ़ सल, वष और आवश्यकताएँ अलग है।
ं राज्य सरकारे ं रा ीय कानूनों के भीतर
रहते हएु अपनी पिरिस्थितयों के अनुस ार काम कर सकती है ं
6. इससे ल ोकतंत्र ल ोगों तक यह अध्याय की अपनी बात है: आधारभूत लोकतंत्र में “सामान्य नागिरकों की भागीदारी को पोत्सािहत और
पहु ँचता है सुिनिश्चत िकया जाता है”, तािक नागिरक “स्वयं को पभािवत करने वाले िनणयों पर अपनी बात रख सकते है”ं
आगे क्या: स्थानीय स्तर के लए अलग अध्याय ह — पुस्तक कहती है क स्थानीय सरकार का चत्र 10.5 म
उल्लेख नह है “क्य क हम आगे के दो अध्याय म इसे वस्तार से समझगे”।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 प रयोजना — 2019 क को वड महामारी के दौरान लगा लॉकडाउन आपको याद होगा। उस समय उठाए गए
सभी कदम क सूची बनाइए। उस त को संभालने म सरकार के कौन-कौन से स्तर स म लत थे? उसम
सरकार के प्रत्येक अंग क क्या भू मका थी?
यह प रयोजना कैसे क जए। चार वद्या थय के समूह म काम क जए। साम ी तीन ोत से जुटाइए — (1) प रवारजन और
पड़ो सय से पू छए क उन्ह क्या याद है, (2) वद्यालय या सावज नक पुस्तकालय म 2020–21 के समाचार-पत्र दे खए, और (3)
अपने वद्यालय ने जो कया, वह नोट क जए। लेखन को प्रश्न के अनुसार तीन भाग म र खए — उठाए गए कदम, कौन-से स्तर,
कौन-सा अंग। समय-रेखा वाला भ त्त- चत्र बहुत अ ा रहता है।
भाग 1 — उठाए गए कदम क सूची (नमूना; अपनी खोज से और जो ड़ए):
क्षेत्र महामारी के दौरान उठाए गए कदम
आवागमन पर माच 2020 के अंत से दे शव्यापी लॉकडाउन; आवश्यक से वाओं को छोड़कर दुक ाने,ं काय लय, कारखाने, रे ल , बस और
रोक िवमान बंद ; कं टेनमेंट ज़ोन सील; अनेक िजलों में कफ़् यू जैस ी पाबंिदयाँ
स्वास्थ् य संबंध ी मास्क और शारीिरक दू र ी अिनवाय; जाँच कें द और कोिवड दे खभाल कें द ; अस्पतालों में ऑक्सीजन संयंत्र और अितिरक्त
उ पाय ृ क-वास और संग रोध के िनयम; जनवरी 2021 से दे शव्यापी टीकाकरण अिभयान और कोिवन पोटल
िबस्तर; पथ
भोजन और राशन काडधारकों को िन:शुल्क अनाज; सामुद ाियक रसोई; अनेक पिरवारों के बैक
ं खातों में रािश; अपने घर लौटते श्रिमकों
सहायता रािश के िलए आश्रय और यातायात की व्यवस्था; बाद में िवशेष रे ल गािड़याँ
िशक्ष ा िवद्यालय-महािवद्यालय बंद ; ऑनलाइन कक्षाएँ, दू र दशन और रे िडयो पर पाठ; परीक्षाएँ स्थिगत या उनका स्वरूप बदला;
मध्याह्न भोजन के बदले घर पर राशन या रािश
सूचना पितिदन के आँक ड़े; हेल्पलाइन नंबर; स्वच्छता संबंध ी िव ापन और उद् घ ोषणाएँ; भामक सूचना पर कारवाई
भाग 2 — कौन-से स्तर स म लत थे: तीन , और पूरे अध्याय म यही सबसे अ ा प्रमाण है क तीन स्तर क्य चा हए।
स्तर उसने क्या कया
कें द दे शव्यापी लॉकडाउन की घोषणा और रा ीय िदशािनदश; अंतररा ीय सीमाएँ और उड़ाने;ं टीकों तथा ऑक्सीजन की खरीद और
िवतरण; रा ीय अनाज योजना; और पूरे पयास का िवत्तपोषण
राज्य िदशािनदशों को स्थानीय पिरिस्थितयों के अनुस ार लागू करना — िचत्र 10.5 में “राज्य स्तर पर कें द सरकार ारा बनाए गए कानूनों
को अपनाना और उनका काय न्वयन करना” राज्य का ही काय है; अस्पताल और जाँच (जन-स्वास्थ्य राज्य का िवषय); पुिलस की
तैनाती; िवद्यालय बंद करने और खोलने का िनणय
स्थानीय नगरपािलकाओं और पंचायतों ने कं टेनमेंट ज़ोन िचिह्नत िकए, गिलयों में िछड़काव िकया, घर-घर सवक्षण और जाँच की, ज़रूरतमंद ों
तक भोजन-पानी पहच
ु ँ ाया और स्थानीय उद् घ ोषणाएँ की ं। आँग नवाड़ी और आशा कायकत एक-एक घर तक पहच
ुँ ी ं
भाग 3 — सरकार के प्रत्येक अंग क भू मका:
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अंग महामारी के समय उसक भू मका
िवधाियका संस द और िवधान सभाओं की बैठकें हुई,ं िस्थित पर चच हुई, सरकार से पश्न पूछे गए, और वे िवधे यक तथा बजट पािरत हुए
िजनसे राहत, अस्पताल और टीकों का खच चला; कु छ स्वास्थ्य और आपदा संबंध ी कानूनों में संशोधन भी हएु
कायपािल का िदखाई दे ने वाला अिधकांश काम इसी ने िकया — पधानमंत्र ी, मुख्यमंत्र ी, मंत्र ीगण, स्वास्थ्य िवभाग, िजलािधकारी, पुिलस,
िचिकत्सक, नस, सफ़ ाईकम और नगरपािलका कमचारी। आदे श जारी हएु , अस्पताल चले , सामग ी पहच
ु ँ ी, िनयमों का पालन
कराया गया
न्यायपािल का न्यायालय चलते रहे, अनेक ऑनलाइन। ऑक्सीजन की आपूित, अस्पताल के िबस्तरों, पवासी श्रिमकों की िस्थित और जाँच-
उपचार के मूल्य पर यािचकाएँ सुनी गईं और सरकारों से उत्तर तथा कारवाई माँग ी गई — यह न्यायपािलका ारा यह “जाँच
करने” का उदाहरण है “िक क्या कायपािलका ारा िलया गया कोई िनणय ठीक है या नही ं”
प रयोजना का नष्कष क्या हो: एक ही आपदा म हर स्तर और हर अंग एक साथ लगे — राष्ट्रीय नयम, उसे
अपनाता राज्य, हर गली तक पहुँचाती नगरपा लका, धन स्वीकृत करती सभा, और कुछ गड़बड़ होने पर प्रश्न पूछता
न्यायालय। महामारी अध्याय के दोन प्रमुख चत्र — चत्र 10.3 के तीन अंग और चत्र 10.4 के तीन स्तर — का
सबसे हाल का और सबसे स्पष्ट प्रमाण है।
अ प रयोजना के लए दो सावधा नयाँ। पहली, त थयाँ: को वड-19 क पहचान 2019 म हुई, महामारी
भारत तक 2020 के आरंभ म पहुँची और दे शव्यापी लॉकडाउन माच 2020 म लगा। दूसरी, लेखन को संस्थाओं
और प्र क्रयाओं पर क द्रत र खए — कस स्तर और कस अंग ने क्या कया — कसी दल या नेता क प्रशंसा या
आलोचना पर नह । समूह म मतभेद हो तो दोन मत ल खए और यह भी ल खए क हर मत कस प्रमाण पर टका
है।
अध्याय — एक नज़र म
अध्याय का एक ही वचार — साथ रहने वाले लोग को नयम चा हए, और नयम को बनाने तथा उनका पालन
कराने वाला कोई चा हए। “जब बहुत से लोग एक साथ रहते ह, तब असहम त और अव्यवस्था क स्थ त उत्पन्न हो सकती
है। ऐसे म, समाज म व्यवस्था और स ाव बनाए रखने के लए नयम अ नवाय हो जाते ह।” पुस्तक तीन शब्द स्पष्ट करती है
— शासन प्र क्रया है, सरकार वह समूह या तंत्र है जो यह काम करता है, और कानून “कुछ अ धक महत्वपूण नयम” ह।
नयम सदा के लए नह बनते। जैसे आप घर पर माता- पता से कसी नयम पर चचा कर सकते ह या वद्याथ संघ वद्यालय
प्रबंधन से नयम बदलने को कह सकता है, वैसे ही “समाज को संचा लत करने वाले कानून और नयम म नाग रक भी अपनी
बात रख सकते ह”। यही एक वाक्य पूरे अध्याय का बीज है — इसी कारण आगे चलकर लोकतंत्र क बात आती है।
सरकार तीन अंग से काम करती है। वधा यका नए कानून बनाती है, पुराने म संशोधन करती या उन्ह नरस्त करती है —
यह काम “जनता के प्र त न धय क सभा” करती है; कायपा लका कानून को लागू करती है — राष्ट्र-राज्य के प्रमुख,
मंत्रीगण और कानून लागू करवाने वाले अ भकरण; न्यायपा लका न्यायालय क प्रणाली है जो तय करती है क कानून टू टा या
नह और क्या कारवाई हो, तथा कभी-कभी यह भी परखती है क कायपा लका का नणय ठ क है या कानून सबके हत म है।
तीन को अध्याय एक ही उदाहरण से समझाता है — साइबर अपराध।
तीन अंग को पृथक रखा जाता है — यही ‘श क्तय का पृथक्करण’ है। चत्र 10.3 म तीन एक ही वृत्त के तीन भाग ह,
बीच म शासन लखा है और तीन के बीच तीर चल रहे ह — पृथक, फर भी एक-दूसरे को प्रभा वत करते और साथ काम
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करते हुए। इसका उ े श्य नयंत्रण एवं संतुलन है, अथात “सरकार का प्रत्येक अंग दूसरे अंग के काय क नगरानी कर सकता है
तथा… उसे नयं त्रत कर पुन: संतुलन स्था पत कर सकता है”।
सरकार तीन स्तर पर भी काम करती है। भारत म ये ह ानीय, राज्य और कद्र या संघ — चत्र 10.4 का परा मड।
प्रत्येक स्तर भन्न वषय पर काम करता है — बल्ब, बजली मस्त्री और बजली वभाग वाली तुलना; या वह बाढ़ जसे कभी
जला सँभाल लेता है, कभी राज्य और कभी कद्र। चत्र 10.5 राष्ट्रीय और राज्य स्तर को आमने-सामने रखती है — सव च्च
न्यायालय और उच्च न्यायालय; लोकसभा-राज्य सभा और वधान सभा; राष्ट्रप त और प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री।
लोकतंत्र — ‘लोग का शासन’ — इस पूरी व्यव ा क रूपरेखा है। ीक ‘डेमोस’ (लोग) और ‘क्रेटोस’ (शासन या
श क्त) से बना शब्द। सभी लोग एक साथ शासन नह कर सकते, इस लए भारत “ कसी भी आधु नक लोकतंत्र क तरह”
प्र त न ध आधा रत लोकतंत्र है — जनता राज्य स्तर पर वधायक और राष्ट्रीय स्तर पर सांसद चुनती है, जो “संवाद और
तक- वतक” से नणय तक पहुँचते ह। 2024 म लगभग 97 करोड़ मतदाताओं के साथ भारत वश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है
और 18 वष से ऊपर के सभी नाग रक को मतदान का अ धकार है। प्रत्यक्ष लोकतंत्र — जसम सब स्वयं नणय लेते ह, जैसे
कक्षा का मतदान — छोटे समूह म ही चल पाता है, और आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र का अथ है ऐसा तंत्र जसम
परा मड के आधार पर बैठे सामान्य नाग रक भी अपने से जुड़े नणय म अपनी बात रख सक।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन
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त्व रत पुनरावृ त्त
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m .coअथ agरखने योग्य
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शब्द अध्याय म याद
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कहाँ
शासन “िनणयों को ले ने की पिक्रया, िनयमों के िविभन्न समूहों से पृष्ठ 150, यह एक प्र क्रया है, लोग का समूह नह
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सामािजक जीवन को व्यविस्थत करना और उनका पालन ‘प रचय’
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सुिनिश्चत करना”
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“उन व्यिक्तयों के समूह या तंत्र कोgकहते है ं जो िनयम बनाते
सरकार
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और इन िनयमों का अनुपालन सुिनिश्चत करते है”ं
पृष्ठ 150 शासन काम है; सरकार वह है जो यह
काम करती है
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कानून “कु छ अिधक महत्वपूण िनयमों को कानून कहा जाता है” पृष्ठ 150 हर कानून नयम है; हर नयम कानून नह
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.co वह अंग जो नए कानून बनाता है, संशोधन करता है या िनरस्त a g l
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वधा यका पृष्ठ 153 राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा और राज्य सभा;
a s करता है — “जनता के पितिनिधयों की सभा” राज्य म वधान सभा
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g लका
aकायपा वह अंग जो कानूनों को लागू करता है — पमुख, मंत्र ीगण तथा पृष्ठ 153– साइबर अपराध के उदाहरण म वह
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कानून लागू करवाने वाले अिभकरण 154 अ भकरण है साइबर पु लस
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emकायपािलका के agl
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न्यायपा लका न्यायालयों की पणाली जो तय करती है िक कानून टू टा या पृष्ठ 154 अ खल भारत — भारत का सव च्च
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िनणय और कानून की भीa जाँgच
नही ं और क्या कारवाई हो — कभी-कभी न्यायालय; राज्य स्तर — उच्च न्यायालय
( चत्र 10.5)
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श क्तय का ृ क रखना, यद्यिप वे एक-दू स रे को पभािवत
तीनों अंग ों को पथ पृष्ठ 154, उ े श्य — नयंत्रण एवं संतुलन बनाए
पृथक्करण करते और साथ काम करते है ं चत्र 10.3
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रखना
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तीन स्तर .co
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पृष्ठ 155, g बल्ब, बजली मस्त्री, बजली वभाग —
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स्थानीय, राज्य या पादे िशक और रा ीय — “पत्येक स्तर िभन्न
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िवषयों पर काय करता है” चत्र 10.4 एक समस्या के तीन स्तर
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औपचा रक प्रमुख के वल नाम के पमुख — रा पित और राज्यपाल वास्तिवक पृष्ठ 157, वशेष प र स्थ तय म वशेषा धकार, पर
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कायपािलका पमुख नही ं होते चत्र 10.5 सामान्यत: हस्तक्षेप नह
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लोकतंत्र ग ीक ‘डेम ोस’ (लोग) और ‘क्रेटोस’ (शासन/शिक्त) से — पृष्ठ 159 “संस्कृ त और लोग क पहचान और
शािब्दक अथ ‘लोगों का शासन’ सम्मान के बना लोकतंत्र नह ” —
रगोबटा मेन्चु तुम
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प्र त न ध लोकतंत्र जनता पितिनिधयों को वोट दे क र चुनती है, जो सभा के पृष्ठ 159–
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राज्य स्तर पर वधायक, राष्ट्रीय स्तर पर
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चयिनत सदस्य होते है ं 160 सां स
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प्रत्यक्ष जहाँ पत्येक व्यिक्त की राय सीधे ली जाती है, जैसे िपकिनक पृष्ठ 160 छोटे समूह म ही व्यावहा रक
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के स्थान के िलए कक्षा का मतदान
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आधारभूत/ “वह तंत्र … िजसमें सामान्य नागिरकों की भागीदारी को पृष्ठ 160 यही इस अध्याय और आगे के दो अध्याय
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धरातलीय लोकतंत्र पोत्सािहत और सुिनिश्चत िकया जाता है” — िपरािमड का का शीषक है
आधार
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