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Senior School Certificate Examination - 2020
Marking Scheme – ECONOMICS
HMJ/1
SUBJECT CODE : 030 (PAPER CODE –58/1/1)
General Instructions: -
1. You are aware that evaluation is the most important process in the actual and correct
assessment of the candidates. A small mistake in evaluation may lead to serious
problems which may affect the future of the candidates, education system and teaching
profession. To avoid mistakes, it is requested that before starting evaluation, you must
read and understand the spot evaluation guidelines carefully.Evaluation is a 10-12
days mission for all of us. Hence, it is necessary that you put in your best efforts
in this process.
2. Evaluation is to be done as per instructions provided in the Marking Scheme. It should
not be done according to one’s own interpretation or any other consideration. Marking
Scheme should be strictly adhered to and religiously followed. However, while
evaluating, answers which are based on latest information or knowledge and/or
are innovative, they may be assessed for their correctness otherwise and marks
be awarded to them.
3. The Head-Examiner must go through the first five answer books evaluated by each
evaluator on the first day, to ensure that evaluation has been carried out as per the
instructions given in the Marking Scheme. The remaining answer books meant for
evaluation shall be given only after ensuring that there is no significant variation in the
marking of individual evaluators.
4. Evaluators will mark( √ ) wherever answer is correct. For wrong answer ‘X”be marked.
Evaluators will not put right kind of mark while evaluating which gives an impression that
answer is correct and no marks are awarded. This is most common mistake which
evaluators are committing.
5. If a question has parts, please award marks on the right-hand side for each part. Marks
awarded for different parts of the question should then be totaled up and written in the
left-hand margin and encircled. This may be followed strictly.
6. If a question does not have any parts, marks must be awarded in the left-hand margin
and encircled. This may also be followed strictly.
7. If a student has attempted an extra question, answer of the question deserving more
marks should be retained and the other answer scored out.
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8. No marks to be deducted for the cumulative effect of an error. It should be penalized
only once.
9. A full scale of marks 0-80 has to be used. Please do not hesitate to award full marks if
the answer deserves it.
10. Every examiner has to necessarily do evaluation work for full working hours i.e. 8 hours
every day and evaluate 20 answer books per day in main subjects and 25 answer
books per day in other subjects (Details are given in Spot Guidelines).
11. Ensure that you do not make the following common types of errors committed by the
Examiner in the past:-
● Leaving answer or part thereof unassessed in an answer book.
● Giving more marks for an answer than assigned to it.
● Wrong totaling of marks awarded on a reply.
● Wrong transfer of marks from the inside pages of the answer book to the title page.
● Wrong question wise totaling on the title page.
Wrong totaling of marks of the two columns on the title page.
● Wrong grand total.
● Marks in words and figures not tallying.
● Wrong transfer of marks from the answer book to online award list.
● Answers marked as correct, but marks not awarded. (Ensure that the right tick mark is
correctly and clearly indicated. It should merely be a line. Same is with the X for
incorrect answer.)
● Half or a part of answer marked correct and the rest as wrong, but no marks awarded.
12. While evaluating the answer books if the answer is found to be totally incorrect, it should
be marked as cross (X) and awarded zero (0)Marks.
13. Any unassessed portion, non-carrying over of marks to the title page, or totaling error
detected by the candidate shall damage the prestige of all the personnel engaged in the
evaluation work as also of the Board. Hence, in order to uphold the prestige of all
concerned, it is again reiterated that the instructions be followed meticulously and
judiciously.
14. The Examiners should acquaint themselves with the guidelines given in the Guidelines
for spot Evaluation before starting the actual evaluation.
15. Every Examiner shall also ensure that all the answers are evaluated, marks carried over
to the title page, correctly totalled and written in figures and words.
The Board permits candidates to obtain photocopy of the Answer Book on request in an
RTI application and also separately as a part of the re-evaluation process on payment
of the processing charges.
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क्र.सं .. अपेक्षिक उत्तर अंक
खण्ड क समक्षि अर्थशास्त्र
1 प्रश्न:अर्थव्यवस्र्ा में मुद्रा आपूर्तथ को र्नयं र्ित करने के र्िए, केन्द्रीय बैं क ---------- सकता है । (सही र्वकल्प का चयन कीर्जए)
(A) खुिे बाजार में प्रर्तभू र्तयााँ खरीद (B) खुिे बाजार में प्रर्तभू र्तयााँ बे च
(C) नऺद आरर्ित अनुपात कम कर (D) रे पो दर कम कर
उत्तर : र्दए गए (A),(B),(C) ूऄथवा(D) र्वकल्पों में से प्रत्येक को सही माना जाए तर्ा एक प्रदान र्कये जाएं । 1
2 प्रश्न:ूईल्लेख कीजजए कक जनम्नजलजखत कथन सत्य है या ूऄसत्य: “सरकारी बजट मौकिक नीजत का एक महत्त्वपूणण साधन है।"
ूईत्तर: ूऄसत्य 1
प्रश्न: जवजनवेश सरकार की एक_______ (पूूँजीगत/राजस्व) प्राजि है। (सही जवकल्प का चयन कीजजए)
ूईत्तर : पूूंजीगत 1
3 प्रश्न: प्रभावी माूँग को पररभाजषत करते हैं _______। (ूईजचत पररभाषा द्वारा ररक्त स्थान की पूर्तत कीजजए)
ूईत्तर : रोजगार तथा ूईत्पादन का वह स्तर जहाूं पर समग्र माूंग तथा समग्र पूर्तत बराबर होते हैं। 1
4
प्रश्न: _______ तथा _______मुिा ूअपूर्तत के दो घटक है। (सही ूईत्तर द्वारा ररक्त स्थानों की पूर्तत कीजजए)
½+
ूईत्तर: (i) जनता के पास करें सी (ii) वाजणजययक बैंकों के पास माूंग जमाए
½
प्रश्न:ूईल्लेख कीजजए कक जनम्नजलजखत कथन सत्य है या ूऄसत्य: “ूऄपेजित ूऄप्रचलन को मूल्यह्रास में शाजमल ककया जाता है ।"
5 ूईत्तर : सत्य 1
6 प्रश्न:राजकोषीय घाटे का ूऄनुमान _______ सूत्र से लगाया जा सकता है । (सही सूत्र द्वारा ररक्त स्थान की पूर्तत कीजजए)
उत्तर : कुि व्यय - कुि प्राप्तियां (उधार को छोड़कर) (ूऄन्य ककसी सही सूत्र को भी ूऄूंक कदए जाएूं) 1
7 प्रश्न: कीन्स के ूऄथणशास्त्र जसद्ाूंतों के ूऄनुसार, औसत ूईपभोग प्रवृजत्त का मान _______ कभी नहीं हो सकता है।
(A) शून्य (B) ूआकाूइ (1) (C) एक से ूऄजधक (D) एक से कम
1
ूईत्तर: (A) शून्य
8 प्रश्न:_______जवदेशी मुिा की माूँग के सबसे महत्त्वपूणण स्रोतों में से एक है। (सही ूईत्तर द्वारा ररक्त स्थान की पूर्तत कीजजए)
ूईत्तर: वस्तुओं तथा सेवाओं का ूअयात (ूऄथवा ूऄन्य ककसी सही स्रोत्र को ूऄूंक कदए जाएूं) 1
9 प्रश्न: ूईल्लेख कीजजए कक जनम्नजलजखत कथन सत्य है या ूऄसत्य :
“कीन्स के जसद्ाूंतानुसार एक ूऄथणव्यवस्था में, पूणण रोजगार की जस्थजत कभी मौजूद नहीं हो सकती ।”
1
ूईत्तर: ूऄसत्य
10 प्रश्न: 'व्यापार ूऄजधशेष' को पररभाजषत कीजजए ।
ूईत्तर: व्यापार ूऄजधशेष से तात्पयण वस्तुओं (दृश्य मदों) के जनयाणत से होने वाली जवदेशी जवजनमय की प्राजियों की वस्तुओं (दृश्य मदों)
1
के ूअयात से होने वाली जवदेशी जवजनमय भुगतान पर ूऄजधकता से है।
11 प्रश्न 11. “ूऄूंजतम वस्तुओं के ूऄूंतगणत के वल वे वस्तुएूँ शाजमल होती हैं, जो कक गृहस्थों द्वारा ूईपभोग की जाती हैं।” कदए गए कथन का मान्य कारण
द्वारा समथणन ूऄथवा खूंडन कीजजए।
ूईत्तर: कदए गए कथन का खूंडन ककया जाता है क्योंकक, ूऄूंजतम वस्तुएूं वे वस्तुएूं होती हैं जजनका या तो गृहस्थों द्वारा ूईपभोग ककया जाता है ूऄथवा
3
ूईत्पादकों द्वारा जनवेश ककया जाता है। (कारण न कदया गया हो ूऄथवा कारण गलत हो तो ूऄूंक प्रदान ना ककयें जायें)
प्रश्न “ूअय का वतुणल प्रवाह जसद्ाूंत ूआस पूवणधारणा पर ूअधाररत है कक एक व्यजक्त द्वारा ककया गया व्यय दूसरे की ूअय बनती है ।” कदए गए कथन
का वणणन कीजजए।
ूईत्तर:दो िेत्रक ूऄथणव्यवस्था में ग्रहस्थ िेत्र और णमण का ूऄजस्तत्व ही ूऄथणव्यवस्था को चलाता है । ग्रहस्थ िेत्र णमण को कारक सेवाएूँ प्रदान करता
है तथा पररणामस्वरूप कारक ूअय प्राि करता है जबकक णमण वस्तुओं और सेवाओं का ूईत्पादन करती है तथा ूआन्हे गृहस्थ िेत्र को बेचती है और
3
समान ूअय सृजजत करती है जजतनी की ग्रहस्थ िेत्र ने ूऄर्तजत की थी। ूऄतूः ूअय का वतुणल प्रवाह ूआस जसद्हाूंत को जसद् करता है कक ककसी एक का
व्यय दूसरे कक ूअय होता है। (एक साथ मूल्याूंककत ककया जाए) (जचत्र की ूअवश्यकता नहीं हैं) (ूऄन्य ककसी मान्य व्याख्या को भी ूऄूंक प्रदान ककयें जायें)
12 प्रश्न: जनम्नजलजखत कथन का मान्य कारण द्वारा औजचत्य जसद् कीजजए:“प्रत्याजशत कु ल माूँग सदैव प्रत्याजशत कु ल पूर्तत के बराबर होती है”
ूईत्तर: कदया गया कथन ूऄसत्य है क्योंकक प्रत्याजशत समग्र माूंग तथा प्रत्याजशत समग्र पूर्तत के वल ूऄथणव्यवस्था में सूंतुलन की जस्तजथ में ही बराबर होती
हैं। ूऄल्पकालीन रोजगार सूंतुलन स्तर पर जब प्रत्याजशत समग्र माूंग, प्रत्याजशत समग्र पूर्तत से कम होती है तो ूआससे माल सूची में वृजद् हो सकती है।
3
ूऄतूः ूईत्पादक रोजगार को कम करें गे जजससे ूईत्पादन तथा ूअय में कमी ूअएगी और यह प्रकिया तब तक जारी रहेगी जब तक प्रत्याजशत समग्र माूंग
प्रत्याजशत समग्र पूर्तत के बराबर न हो जाए।तथा ूआसके जवपरीत भी।
(एक साथ मूल्याूंककत ककया जाए) (जचत्र की ूअवश्यकता नहीं हैं) (ूऄन्य ककसी मान्य व्याख्या को भी ूऄूंक प्रदान ककयें जायें)
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13 प्रश्न:एक काल्पजनक सूंख्यात्मक ूईदाहरण का प्रयोग करते हुए, वाजणजययक बैंक द्वारा साख जनमाणण की प्रकिया की व्याख्या कीजजए।
ूईत्तर: साख गुणक ूईस मुिा की राजश को मापता है जो बैंक ूऄपने पास प्रारूं जभक जमा की प्रत्येक मौकिक ूआकाूइ से जमाओं के रूप में
सृजजत करने में समथण होते हैं। साख जनमाणण का वैधाजनक ररज़वण ूऄनुपात (LRR) से जवलोम सूंबूंध होता है। 1
वाजणजययक बैंकों द्वारा साख जनमाणण दो बातों पर जनभणर करता है :
1. ूअरूं जभक जमा की राजश ½
2. वैधाजनक ररज़वण ूऄनुपात (LRR) ½
माना की: ूअरूं जभक जमा ₹ 1000 है और LRR 10% है।
तब बैंक ूऄपने पास जमा का 10% (₹100) ररजवण के रूप में रखेंगे तथा शेष राजश (₹ 900) ूईधार दे देंगे। ूईधार लेने वाले ूआस राजश को
भुगतान के रूप में व्यय करें गे।
यह माना जाता है कक ₹ 900 की पूरी राजश नूइ जमाओं के रूप में बैंककग व्यवस्था में वापस ूअ जाती है। ूऄब बैंक पुनूः ूआस राजश ( ₹ 2
900) का 10% (₹90) ूऄपने पास ररजवण रखेंगे तथा शेष राजश (₹810) को ूईधार दे देंगे। यह प्रकिया तब तक जारी रहेगी जब तक कु ल
ररजवण ूअरूं जभक जमा के बराबर नहीं हो जाते।
1
कु ल साख जनमाणण = ूअरूं जभक जमा × ( )
LRR
1
= 1000x( )
10%
= ₹ 10,000
₹1000 की ूअरूं जभक जमा कु ल मुिा पूर्तत को ₹10,000 में बढा देती है। ( ताजलका के रूप में व्याख्या को भी ूऄूंक कदये जाए)
प्रश्न: “के न्िीय बैंक सरकार के बैंकर का कायण करता है ।” कदए गए कथन का जवस्तार से वणणन कीजजए।
ूईत्तर: कें िीय बैंक सरकार के बैंकर के रूप में कायण करता है। यह सरकार के खातों को बनाए रखता है ूईनकी प्राजिओं को स्वीकार
करता है तथा ूईन्हे ूऊण प्रदान करता है। कें िीय बैंक सरकार की ओर से खुले बाजार में सरकारी प्रजतभूजतयों का िय तथा जविय 4
करता है यह सरकार को नीजतगत मामलों में सलाह भी देता है। (पूरे ूईत्तर को एक साथ ूऄूंककत ककया जाएूं)
14 प्रश्न:“व्यापार सुगमता सूचकाूंक में भारत बडी छलाूँग लगा रहा है, ूआसके फलस्वरूप कूइ बहुराष्ट्रीय कम्पजनयाूँ (MNC) ूऄपने
ूईत्पादन ूअधार को भारत में स्थानाूंतररत कर रही हैं।” ूईपयुणक्त कथन के ूअलोक में, जवदेशी मुिा के प्रवाह और भारतीय ूऄथणव्यवस्था
पर ूआसके सूंभाजवत प्रभाव पर रटप्पणी कीजजए ।
ूईत्तर:व्यापार सुगमता सूचकाूंक में भारत बडी छलाूंग लगा रहा है, जजसके फलस्वरूप बहुत से बहुराष्ट्रीय कूं पजनयाूं (MNCs) ूऄपने
ूईत्पादन ूअधार को भारत में स्थानाूंतररत कर रही हैं। जजससे भारतीय ूऄथणव्यवस्था में जवदेशी जवजनमय का ूऄूंतप्रवाह(Inflow) बढ
रहा है। ूआसके कारण भारत में बहुराष्ट्रीय कूं पजनयों द्वारा प्रत्यि जवदेशी जनवेश मे वृजद् हो रही है । जजससे जवदेशी जवजनमय पूर्तत बढ
जाएगी ूआसके कारण जवदेशी जवजनमय की दर में कमी ूअएगी। पररणाम स्वरूप भारतीय रुपए (₹) में मूल्य वृजद् हो जाएगी। प्रत्यि
जवदेशी जनवेश से ूईत्पादन में वृजद् होगी तथा ूआसके फलस्वरूप भारतीय ूऄथणव्यवस्था में रोजगार ूऄवसरों का सृजन होगा।
4
(पूरा ूईत्तर एक साथ ूऄूंककत ककया जाए) (ूऄन्य ककसी मान्य व्याख्या को भी ूऄूंक प्रदान ककयें जायें)
15 प्रश्न: (a) राजस्व व्यय' को पररभाजषत कीजजए ।
ूईत्तर (a) राजस्व व्यय - राजस्व व्यय सरकार का वह व्यय है जजससे न तो सरकार की पररसूंपजत्तयों का जनमाणण होता है तथा न ही
1
सरकार की देयताओं में कमी ूअती है।
प्रश्न: (b) प्रत्यि कर तथा ूऄप्रत्यि कर के बीच ूऄन्तर स्पष्ट कीजजए ।
ूईत्तर(b): प्रत्यि कर - वह कर जजसकी देयता तथा भार समान सूंस्था/ व्यजक्त पर पडता है। ूऄतूः ूआसका भार ककसी ूऄन्य सूंस्था/ व्यजक्त 1½
पर नहीं डाला जा सकता है।जैसे ूअयकर, जबकक;
ूऄप्रत्यि कर - वह कर जजसकी देयता तथा भार जवजभन्न सूंस्थाओं/ व्यजक्तयों पर पडता है। ूऄतूः ूआसका भार ूऄन्य सूंस्था/ व्यजक्त पर
डाला जा सकता है जैसे जीएसटी(GST) 1½
16 प्रश्न: (a) जनम्नजलजखत ूअूँकडों से 'स्टॉक में पररवतणन के मूल्य की गणना कीजजए :
ि.सूं. मदें राजश(₹ करोड में)
i. जबिी 400
ii साधन लागत पर जनवल मूल्य वृजद् (NVAFC) 200
iii ूऄनुदान 10
iv स्टॉक में पररवतणन ?
v मूल्यह्रास 40
vi मध्यवती ूईपभोग 100
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ूईत्तर: स्टॉक में पररवतणन = (ii) +(vi)+(v)-(iii)-(i) 2
= 200+100+40-10-400 1½
½
= (-)₹70 करोड
प्रश्न: (b) वास्तजवक सकल घरे लू ूईत्पाद को पररभाजषत कीजजए ।
ूईत्तर: वास्तजवक घरे लू ूईत्पाद - एक ूऄथणव्यवस्था में एक वषण में ूईत्पाकदत ककए गए वस्तुओं तथा सेवाओं के कु ल मौकिक मूल्य को जब
कदए गए ूअधार वषण की कीमतों पर जनधाणररत ककया जाता है। 2
प्रश्न: (a) सूंपजत्त और ूईद्यमशीलता से ूअय' के तीन घटकों पर सूंिेप में चचाण कीजजए ।
ूईत्तर: सूंपजत्त और ूईद्यमशीलता (पररचालन ूऄजधशेष) से ूअय के घटक जनम्न है - 1
(i) ककराया/रॉयल्टी 1
(ii) ब्याज 1
(iii) लाभ
प्रश्न: (b) 'बाह्यताएूँ क्या होती हैं ? ूईपयुक्त ूईदाहरणों सजहत ूआसके प्रकार जलजखए ।
1
ूईत्तर: बह्यताओं से तात्पयण फमण / व्यजक्त द्वारा समाज में होने वाले लाभ / हाजन से है। जजसके जलए न तो ूईन्हें पुरस्कार कदया
जाता है और न हीं कोूइ दूंड।
(i) धनात्मक बह्यताए - सामाजजक लाभ, ूईदाहरण के जलए बढते हुए शैजिक मानको से समाज में ूअर्तथक ूईत्पादकता में
वृजद् हो सकती है। ½+½
(ii) ूऊणात्मक बह्यताए - सामाजजक हाजन,ूईद्योगों से जनकालने वाले धुएूँ से वायु प्रदूषण । ½+½
17 प्रश्न 17. एक ूऄथणव्यवस्था में, यकद प्रारूं जभक जनवेश में ₹ 100 करोड की वृजद् हुूइ है, यह मानते हुए
कक सीमाूंत ूईपभोग प्रवृजत्त 0.8 है, जनवेश गुणक की कायणपद्जत की चचाण कीजजए ।
ूईत्तर :जनवेश गुणक की कायण पद्जत ूआस तथ्य पर ूअधाररत है कक एक व्यजक्त का व्यय दूसरे व्यजक्त की ूअय है।
कदया गया प्रारूं जभक जनवेश = ₹ 100 करोड और MPC = 0.8
चि जनवेश में पररवतणन ूअय में पररवतणन ूईपभोग में पररवतणन बचत में पररवतणन
(₹ करोड में) (₹ करोड में) (₹ करोड में) (₹ करोड में)
I 100 100 80 20
II - 80 64 16
III - 64 51.2 12.8
- - - -
500 400 100 2
( ताजलका की व्याख्या )
1
K=
1−𝑚𝑝𝑐
1 1
= =5
0.2 1
∆Y= K x ∆ I
= 5 x 100 ½
½
= ₹ 500 करोड (ूऄन्य ूईजचत व्याख्या को भी ूऄूंककत ककया जाय ) 1
खण्ड ख भारतीय ूऄथणव्यवस्था का जवकास
18 प्रश्न: भारत की प्रथम सात पूंचवषीय योजनाओं में भारत सरकार द्वारा______नीजत का ूऄनुगमन घरे लू ूईद्योगों के सूंरिण के जलए
ककया गया था। (सही ूईत्तर द्वारा ररक्त स्थान की पूर्तत कीजजए)
1
ूईत्तर: ूअयात प्रजतस्थापन (ूऄथवा ूऄन्य कोूइ प्रासूंजगक पद)
19 प्रश्न:जैजवक खेती के ककसी एक लाभ का ूईल्लेख कीजजए ।
ूईत्तर: सुरजित व स्वास्थ्यकर भोजन (ूऄथवा ूऄन्य कोूइ लाभ) 1
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20 प्रश्न: बताूआए कक जनम्नजलजखत कथन सत्य है या ूऄसत्य :
“जवगत कु छ दशकों में, भारत में प्राथजमक िेत्र ने सवाणजधक रोज़गार के ूऄवसर ूईत्पन्न ककये हैं।"
1
ूईत्तर : ूऄसत्य
21 प्रश्न: ____ _ जवश्व व्यापार सूंगठन (WTO) की पूवणवती सूंस्था थी । (सही जवकल्प का चयन कीजजए।)
(A) ूऄूंतराणष्ट्रीय पुनर्तनमाणण और जवकास बैंक (IBRD) (B) ूऄूंतराणष्ट्रीय मुिा कोष (IMF)
(C) भारतीय ररज़वण बैंक (RBI) (D) व्यापार और सीमा शुल्क महासूंजध (GATT)
1
ूईत्तर :(D) व्यापार और सीमा शुल्क महासूंजध (GATT)
22 प्रश्न: भारत जनम्नजलजखत में से ककस िेत्रीय/वैजश्वक ूअर्तथक समूह का सदस्य नहीं है ? (सही जवकल्प का चयन कीजजए)
(A) यूरोजपयन सूंघ (B) BRICS (जिक्स) (C) G-20 (D) SAARC (साकण )
1
ूईत्तर : (A) यूरोजपयन सूंघ
प्रश्न पाककस्तान ने वषण ________ में ूऄपने ूअर्तथक सुधारों की शुरुूअत की थी। (सही जवकल्प का चयन कीजजए)
(A) 1974 (B) 1976 (C) 1978 (D) 1988
ूईत्तर :(D) 1988 1
23 प्रश्न: बताूआए कक जनम्नजलजखत कथन सत्य है ूऄथवा ूऄसत्य: “स्वयूं सहायता समूह ूऄजतलघु साख सूंगठन के ूईदाहरण हैं ।”
ूईत्तर : सत्य 1
24 प्रश्न: ‘ग्रेट लीप फॉरवडण' का मुख्य ूईद्देश्य चीन में______ (प्राथजमक/जद्वतीयक/तृतीयक) िेत्र में तेज़ी से वृजद् सुजनजित करना था ।
ूईत्तर: जद्वतीयक 1
25 प्रश्न: 1991 में भारत में ूअर्तथक सुधारों को कायाणजन्वत करने के ककसी एक पररणाम का ूईल्लेख कीजजए।
ूईत्तर : जनवेश में ूऄजधक ूऄन्तवाणह(Inflow) (ूऄथवा ूऄन्य कोूइ प्रासूंजगक पररणाम) 1
26 प्रश्न:कालानुिजमक िम में जनम्नजलजखत घटनाओं को व्यवजस्थत कीजजए तथा कदए गए जवकल्पों में से सही ूईत्तर का चयन कीजजए :
(i) चीनी जनवादी गणरायय की स्थापना (ii) पाककस्तान का जनमाणण
(iii) भारत की प्रथम पूंचवषीय योजना (iv) चीन की प्रथम पूंचवषीय योजना
जवकल्प:
(A) (i), (iv), (ii), (iii) (B) (iii), (ii), (i), (iv) (C) (ii), (i), (iii), (iv) (D) (iv), (iii), (ii), (i)
1
ूईत्तर: (C) (ii), (i), (iii), (iv)
27 प्रश्न: स्वतूंत्र भारत का प्रथम औद्योजगक नीजत प्रस्ताव वषण में घोजषत ककया गया था । (सही जवकल्प द्वारा ररक्त स्थान की पूर्तत कीजजए)
(A) 1947 (B) 1948 (C) 1951 (D) 1956
ूईत्तर :(B) 1948 1
28 प्रश्न: “मानव पूूँजी जनमाणण नवोत्थान, ूअजवष्कार तथा तकनीकी सुधारों को जन्म देता है ।”
क्या ूअप कदए गए कथन से सहमत हैं ? मान्य तकों सजहत ूऄपने ूईत्तर का समथणन कीजजए।
ूईत्तर : हाूं ूआस कथन से सहमत हैं। मानव पूूंजी जनमाणण के वल मानव सूंसाधनो की ूईत्पादकता को ही नही बढाता है बजल्क
नवोत्थान तथा नूइ तकनीकी को ूऄपनाने की योग्यता को भी प्रेररत करता हैं। जशिा में जनवेश नूइ तकनीकी को ूऄपनाने की 3
योग्यता,वैज्ञाजनक प्रगजत के ूऄवसर तथा नवोत्थान में सहायता करता है क्योंकक जशजित कायणबल सामान्यतया नूइ तकनीकी तथा
नवोत्थान को तेजी से सीखता तथा ूऄपनाता है। (ककसी ूऄन्य मान्य तकण को भी ूऄूंककत ककया जाय) (पूरा एक साथ मूल्याूंकन ककया जाए)
प्रश्न भारत में ग्रामीण जवकास की प्रकिया में ग्रामीण बैंककग व्यवस्था की भूजमका का ूअलोचनात्मक मूल्याूंकन कीजजए ।
ूईत्तर : बैंककग व्यवस्था के त्वररत प्रसार का ग्रामीण कृ जष और गैर कृ जष ूईत्पादन, ूअय और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव रहा है
लेककन ूआसके बावजूद भी ग्रामीण बैंको को जनम्न समस्याओं का सामना करना पड रहा है
★ देश में ग्रामीण साख व्यवस्था ूआसकी पूर्तत की ूऄपेिा ूऄपयाणि है तथा औपचाररक साख व्यवस्था बहुसूंख्यक ग्रामीण ककसानों को 1½
ूऄपने ूऄूंतगणत लाने में जवफल रही है
1½
★ ूऊण की ूअवश्यकता वाले छोटे व सीमाूंत ककसानों पर कम ध्यान कदया गया तथा कृ जष ूऊणों की वसूली न होना भी एक
समस्या बनी हुूइ है (ककसी ूऄन्य मान्य तकण को भी ूऄूंककत ककया जाय)
29 प्रश्न 29 वैध कारणों के साथ भारत और चीन के कदए गए ूअूँकडों की तुलना व जवश्लेषण कीजजए :
राष्ट्र जनसूंख्या वृजद् की वार्तषक दर (2015) ललगानुपात (प्रजत हज़ार पुरुष)
भारत 1.2% 929
चीन 0.5% 941
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स्रोत : जवश्व जवकास सूंकेतक, 2015.
ूईत्तर (i) कदए गए ूअूंकडे दशाणते हैं कक चीन ने 1970 के दशक में "एक जशशु नीजत" जैसे कु छ सख्त ूईपायों की सहायता से ूऄपनी 2
जनसूंख्या की वार्तषक वृजद् दर को जनयूंजत्रत ककया है। ये ूईपाय चीन के जलए जनसूंख्या वृजद् को जनयूंजत्रत करने में मददगार जसद् हुए।
भारत की जनसूंख्या की वार्तषक वृजद् दर जो 1.2% है, चीन जजसकी वार्तषक वृजद् दर 0.5% , से लगभग दुगनी है।
(ii) दोनो देशों का सामाजजक ढाूंचा लगभग समान है। लडको को प्राथजमकता देने के कारण दोनों ही देशों का ललगानुपात कम तथा 1
पिपातपूणण है। जहाूं भारत 929 मजहला प्रजत 1000 पुरुष पर खडा है वही चीन भी 941 मजहला प्रजत 1000 पुरुष के साथ बहुत दूर नही
है।
30
प्रश्न:“भारत को प्रायूः जवश्व का „बाह्य प्रापण गूंतव्य' कहा जाता है ।” भारत को कदए गए ूआस नाम के मुख्य कारणों की चचाण कीजजए ।
ूईत्तर : भारत को जवश्व का "बाह्य प्रापण गूंतव्य" कहने के मुख्य कारण हैं -
(1) कु शल मानव शजक्त की ूईपलब्धता - भारत में कु शल मानव शजक्त की बहुतायत है जो बहुराष्ट्रीय कूं पजनयों के जवश्वास को बढाता है। 2
(2) ूऄनुकूल सरकारी नीजतयाूं - भारतीय सरकार बहुराष्ट्रीय कूं पजनयों को जवजभन्न प्रकार के लाभ प्रद प्रस्ताव जैसे करो मे छू ट, करो की 2
जनम्न दर ूअकद, देती है जजससे बहुराष्ट्रीय कूं पजनयाूं भारत की ओर ूअकर्तषत होती है। (या ूऄन्य कोूइ ूईपयुक्त कारण सजहत व्याख्या)
प्रश्न ूअयात प्रजतस्थापन का ूऄथण जलजखए । स्पष्ट कीजजए कक ूअयात प्रजतस्थापन ककस प्रकार घरे लू ूईद्योगों को सूंरिण प्रदान कर
सकता है ।
ूईत्तर : ूअयात प्रजतस्थापन से तात्पयण ूईस नीजत से है जजसमें ूअयात का प्रजतस्थापन घरे लू ूईत्पादन द्वारा ककया जाता है। भारत का 1
घरे लू ूईद्योग जवकजसत देशों द्वारा ूईत्पाकदत वस्तुओं से प्रजतस्पधाण करने की जस्थजत में नहीं था। ूऄतूः ूअयात प्रजतस्थापन की नीजत ने
ूआनकी रिा दो प्रकार से की:
(i) ूअयाजतत वस्तुओं पर प्रशुल्क लगाकर
1½
(ii) कोटा - कोटे में ूअयाजतत वस्तुओं की मात्रा जनर्ददष्ट की जाती है। पररणाम स्वरूप घरे लू णमें, जवदेशी वस्तुओं की प्रजतस्पधाण से जबना
1½
डरे ूऄजधक जवकास कर पाएूँगी ।
31 प्रश्न: (a) ूऄूंग्रेज़ों द्वारा भारत में ककए गए ककसी एक सकारात्मक योगदान का ूईल्लेख कीजजए ।
ूईत्तर : रे लवे का ूअरूं भ (ूऄथवा ूऄन्य कोूइ सकारात्मक योगदान ) 1
प्रश्न :(b) स्वतूंत्रता के समय भारत के जवदेशी व्यापार के पररमाण और कदशा की जानकारी दीजजए।
(b) औपजनवेजशक सरकार द्वारा ूऄपनाूइ गूइ वस्तु ूईत्पादन ,व्यापार और सीमा शुल्क की प्रजतबूंधकारी नीजतयों का भारत के जवदेशी
व्यापार की कदशा तथा पररणाम पर प्रजतकू ल प्रभाव पडा जैसे : 1
i. भारत के जनयाणत और ूअयात व्यापार पर ूआूं ग्लैंड ने एकाजधकार जमाए रखा।
1
ii. भारत का ूअधे से ूऄजधक व्यापार तो के वल ूआूं ग्लैंड तक सीजमत रहा तथा शेष कु छ व्यापार चीन श्रीलूंका और ूइरान से भी होने कदया
जाता था 1
iii. औपजनवेजशक काल में भारत में जवशाल जनयाणत ूऄजधशेष था। (ूऄन्य ककसी मान्य कारण/तकण /व्याख्या को भी ूऄूंककत ककया जाये)
32 प्रश्न: जनम्नजलजखत में से ककन्हीं दो को पररभाजषत कीजजए :
(a) पयाणवरण की ूऄवशोषी िमता (b) पयाणवरण की धारण िमता (c) गरीबी रे खा (कै लोरी मानों के पदों में)
ूईत्तर: (a) पयाणवरण की ूऄवशोषी िमता - ूआसका ूऄथण पयाणवरण की ूऄपिय को सोखने की योग्यता से है।
(b) पयाणवरण की धारण िमता- ूआसका ूऄथण है कक सूंसाधनों का जनष्कषणण ूआनके पुनजणनन की दर से ूऄजधक नहीं है और ूईत्पन्न
ूऄवशेष पयाणवरण की समावेशन िमता के भीतर हैं।
(C ) जनधणनता रे खा (गरीबी रे खा) - जनधणनता रे खा न्यूनतम कै लोरी ूईपभोग के प्रजत व्यय का जनधाणरण करने की जवजध है ूआसके
ूऄनुसार ग्रामीण व्यजक्त को प्रजतकदन औसतन 2400 कै लोरी तथा शहरी व्यजक्त को प्रजतकदन औसतन 2100 कै लोरी का न्यूनतम 2+2
ूईपभोग जमलना चाजहए। (ककन्ही दो मान्य ूईत्तरों को ूऄूंककत ककया जाये)
33 प्रश्न: (a) जनयजमत वेतनभोगी कमणचाररयों में मजहलाएूँ कम क्यों हैं ?
ूईत्तर: (a) (i) जनयजमत वेतन भोगी कमणचाररयों में मजहलाओं की सूंख्या ूआसजलए कम है क्योंकक ूआस तरह के कायण के जलए बौजद्क
1½
कौशल तथा ूईच्च स्तर की शैजिक योग्यता की ूअवश्यकता होती है
1½
(ii) सामाजजक बूंधनों के कारण मजहलाओं में गजतशीलता की कमी होती है।
प्रश्न: b) भारत में कायण बल के िेत्रीय जवतरण में हाल की प्रवृजत्तयों का जवश्लेषण कीजजए : रोज़गार पद्जत की प्रवृजत्तयाूँ (िेत्रक), 1993 - 2012 (प्रजतशत में)
िेत्रक 1993-94 1999-2000 2011-2012
प्राथजमक 64 60.4 48.9
जद्वतीयक 16 15.8 24.3
सेवा 20 23.8 26.8
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(b) कदए गए ूअूंकडे दशाणते हैं कक कदए गए समयकाल के दौरान प्राथजमक िेत्र में कायणबल का ूऄनुपात तेजी से घटा है जबकक जद्वतीयक
तथा सेवायें दोनो िेत्रों में रोजगार की सहभाजगता बढी है। 1993 - 94 से 2011 - 12 के बीच जद्वतीयक िेत्रक में जहस्सेदारी लगभग 9% 3
तथा सेवा िेत्र में ूआसी समय-काल के जलए लगभग 7% बढी है। (ूऄन्य ककसी मान्य कारण/तकण /व्याख्या को भी ूऄूंककत ककया जाये)
34 प्रश्न:(a) “ग्रामीण भारत के जलए ूईज्ज्वला योजना प्रमुख पररवतणक रही है ।” ऐसे ककन्हीं तीन पारूं पररक ईंधनों का ूईल्लेख कीजजए,
जजनके प्रयोग को कम करने की कदशा में एल.पी.जी. जसलेंडर जवतरण योजना (ूईज्ज्वला योजना) कायण कर रही है ।
ूईत्तर:(a) ूउजाण के पारूं पररक स्रोत वायु प्रदूषण के कारण बनते हैं ूआसजलए सरकार ने ग्रामीण भारत के जलए मुफ्त एलपीजी गैस
जसलेंडर ( स्वच्छ ईंधन) जवतरण योजना द्वारा ूईज्ज्वला योजना की शुरुूअत की है जो ग्रामीण गृहस्थों के जलए प्रमुख पररवतणक रही है।
तीन पारूं पररक ईंधन जजनका प्रयोग ूईज्ज्वला योजना के कारण कम हुूअ है-
(i) कृ जष ूऄवशेष और सूखा गोबर ।
(ii) जलाूउ लकडी । 1x3
(iii) कोयला । (ूऄन्य कोूइ ूईजचत ूईदाहरण) =3
प्रश्न: (b) "स्वयूं को ठीक करने के जलए भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली को सावणजजनक व्यय की एक शजक्तशाली खुराक की ूअवश्यकता है ।”
मान्य तकों द्वारा कदए गए कथन का औजचत्य जसद् कीजजए।
ूईत्तर: (b) ूआस कथन का समथणन ककया जाता है क्योकक स्वतूंत्रता से ही भारत में स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की गजत ूऄतार्दकक रूप से
धीमी रही है। दूसरे कारणों के साथ स्वास्थ्य प्रणाली ूऄपेिाकृ त कम सावणजजनक व्यय की जशकार रही है। कु छ बडे जवकासशील देशों की
तुलना में हमारा स्वास्थ्य पर जीडीपी के प्रजतशत के रूप में, ख़चण बहुत कम रहा है। यह 2014-15 में कु ल सकल घरे लू ूईत्पाद का
लगभग 4.7% है। ूआसजलए वास्तव में “भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली को स्वयूं को ठीक करने के जलए सावणजजनक व्यय की एक शजक्तशाली
3
खुराक में की ूअवश्यकता है। (एक साथ मूल्याूंककत ककया जाए) (ूऄन्य ककसी मान्य कारण/तकण /व्याख्या को भी ूऄूंककत ककया जाये)
प्रश्न: भारतीय स्वतूंत्रता से ूऄब तक कायाणजन्वत ककए गए ग़रीबी ूईन्मूलन कायणिमों के पररणामों की ूअलोचनात्मक समीिा कीजजए ।
ूईत्तर : स्वतूंत्रता के पिात जनधणनता जनवारण के जलए जनधाणररत ककए गए कायणिमों के पररणामस्वरूप जनधणनों की जनरपेि सूंख्या
तथा ूईनके प्रजतशत में कमी ूअूइ है । कु छ राययों में यह ूऄनुपात जनधणनता के राष्ट्रीय औसत से भी कम हो गया है। ूआन कायणिमों के
बावजूद भी देश में ूऄभी भी जनधणनता, भुखमरी, कु पोषण, जनरिरता और बुजनयादी सुजवधाओं का ूऄभाव जनरूं तर बना हुूअ है
जजसके कारण जनम्नजलजखत हैं-
1.पररसूंपजत्तयों के स्वाजमत्व में कोूइ मौजलक पररवतणन ना होना।
2.भूजम और ूऄन्य पररसूंपजत्तयों के जवतरण की जवषमताओं के कारण प्रत्यि जनधणनता जनवारण कायणिमों का लाभ प्राय गैर जनधणन
वगण के लोग ही ूईठा पाए।
3. ूआन कायणिमों के जलए ूअवूंरटत सूंसाधन जनताूंत ही ूऄपयाणि रहे।
4. जनधणनता जनवारण कायणिमों के कियान्वयन के जलए ूईत्तरदायी ूऄजधकाररयों में ूईपयुक्त चेतना का ूऄभाव तथा ूईनका ूऄपयाणि 6
प्रजशिण।
ूऄतूः यह कहा जा सकता है की जनधणनता जनवाणरण कायणिम बहुत ूऄच्छे कदम थे लेककन सही तरह से कियाजन्वत न होने के कारण
प्रत्याजशत पररणाम प्राि न हो सके । (एक साथ मूल्याूंककत ककया जाए) (ूऄन्य ककसी मान्य कारण/तकण /व्याख्याको भी ूऄूंककत ककया जाये)
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