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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 13: काय का महत्व
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
183 – 194 10 19 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 28 pages
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सामा जक वज्ञान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 13: काय का महत्व
कक्षा 6 सामा जक वज्ञान के अध्याय 13 काय का महत्व (पुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) के संपूण एन.सी.ई.आर.ट .
समाधान। अध्याय का प्रत्येक प्रश्न हल कया गया है — महत्वपूण प्रश्न, तीन आइए पता लगाएँ बॉक्स (पृष्ठ 185 और पृष्ठ 191 क दोन ता लकाएँ
पूरी भरी हुई), तीन आइए वचार कर बॉक्स, पृष्ठ 190 पर राजेश के ₹400 वाला पाठ्य प्रश्न, आगे बढ़ने से पहले... तथा प्रश्न, ग त व धयाँ और
प रयोजनाएँ के चार प्रश्न — साथ म मूल्य संवधन का चत्र और ‘काय का प्रकार → उदाहरण → भुगतान मलता है या नह → कसे लाभ’ क पूरी
ता लका, जो बताती है क घर और समुदाय के अवैत नक काय का महत्व वेतन वाले काय से कसी भी प्रकार कम नह है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6) 183 – 194
खं ड प्रश्न
10 19
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 183
अध्याय का आरंभ
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 लोग व भन्न प्रकार क कन- कन ग त व धय म स म्म लत होते ह?
लोग प्र त दन सैकड़ काम करते ह, कतु अध्याय उन सबको केवल दो समूह म बाँट दे ता है — आ थक ग त व धयाँ और गैर-
आ थक ग त व धयाँ। पृष्ठ 185 स्पष्ट कहता है — “उपरोक्त व भन्न प्रकार क ग त व धय को दो समूह या श्रे णय म वभा जत
कया गया है — आ थक ग त व धयाँ और गैर-आ थक ग त व धयाँ।”
आिथक गितिविध = वह काय िजसमें “अथ (दव्य, मुदा) सिम्मिलत होता है अथवा जो वस्त ु के नकद मूल्य से
संबंिधत होता है”
गैर-आिथक गितिविध = वह काय िजसमें “आय अथवा संपित्त अिजत नही ं होती, बिल्क िजसे कृतज्ञता, स्ने ह,
सेवा और आदर जै सी अनुभ ूितयों के साथ िकया जाता है”
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
लोगों की गितिविधयों के दो पकार
लोगों के सभी काय
क्या धन या वस्तु का नकद मूल्य सिम्मिलत है?
हाँ — आिथक गितिविध नही ं — गैर-आिथक गितिविध
धन या वस्तु के नकद मूल्य के बदले कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर के भाव से
• बाजार में स्कूल बैग बेचता व्यापारी • पिरवार के िलए भोजन बनाना
• अपनी उपज बेचता िकसान • बच्चों को िव ालय के काय में सहायता
• शुल्क लेकर बहस करती वकील • ब ुजुग ं की सेवा करते युवा
• सामान ले जाता टक चालक • िमलकर घर का नवीनीकरण
• कार कारखाने के श्रिमक • बच्चों को िन:शुल्क भूगोल पढ़ ाना
• वायु सेना में गीता मौसी • सेवा और गुरु ारे का लंगर
• कुस बेचते बढ़ ई राजेश • स्वच्छ भारत अिभयान, वन महोत्सव
दोन शाखाओं को अलग करने वाला केवल एक प्रश्न है — क्या धन या वस्तु का नकद मूल्य स म्म लत है? शेष सब — प रश्रम, उपयो गता,
सम्मान — दोन ओर समान है।
अब यही बात ता लका म दे खए — काय कस प्रकार होता है और उससे कसे लाभ मलता है, इस आधार पर। सभी उदाहरण
इसी अध्याय से ह।
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काय का अध्याय से उदाहरण भुगतान मलता है या कसे लाभ
प्रकार नह
वेतन वाला गीता मौसी — भारतीय वायु से ना में िवमान चालक; िमल ता है — िनयत भुग तान, काय करने वाले का
काय रोहन — सॉफ्टवेयर इंजीिनयर; काव्या के चाचा — सामान्यतया पितमाह पिरवार, और से वा पाने
बुल डोजर चलाने वाले तकनीिशयन; काव्या की चाची — वाले सब — दे श, कं पनी,
गाँव के डाकघर में कायरत गाँव
मजदू र ी वाला सािहल — टैक्टर से खेत जोतने वाला श्रिमक िमल ता है — दै िनक मजदू र ी, सािहल का पिरवार, और
काय कु छ नकद और कु छ आमों के वह िकसान िजसका खेत
रूप में (वस्तु के रूप में भुग तान) जुतता है
शुल्क वाला के स पर बहस करती वकील; िचिकत्सक; काव्या की िमल ता है — पत्येक से वा या पक्षकार, रोगी, िव ाथ —
काय चाची की शाम की ऑनलाइन कक्षाएँ पत्येक सप्ताह का शुल्क और स्वयं वह व्यावसाियक
व्यिक्त
वस्तु बनाना बढ़ ई राजेश; अनु के माता-िपता की वेशभूषा और िसले िमल ता है — लाभ, अथ त् िवक्रेता का पिरवार, और
और बेचना हुए वस्त्रों की दुक ान; स्कू ल बैग बेचने वाला व्यापारी; सामग ी का व्यय िनकालने के हर वह ग ाहक िजसे
उपज बेचने वाला िकसान बाद बची धनरािश आवश्यक वस्तु िमलती है
घरे ल ू काय पिरवार के िलए भोजन बनाना; बच्चों को िव ालय के नही ं िमल ता — गैर -आिथक पूर ा पिरवार। यह काय
और दे खभाल काय में सहायता; बुजगु ं की से वा; कबीर के दादा जी का रुक जाए तो कोई भी काम
घर के काम िनपटाना; काव्या की चाची का “अपना पर नही ं जा सकता
घरे ल ू काम” िनपटाना
समुद ाय के पड़ोस के बच्चों को िन:शुल्क भूग ोल पढ़ ाना; अनु की माँ नही ं िमल ता — गैर -आिथक पड़ोस, समुद ाय और
िलए स्वैिच्छक का िसलाई िसखाने वाला स्वैिच्छक समूह; रोहन की अंतत: पूर ा रा
से वा ं कक्षाएँ; सेवा और लंग र ; स्वच्छ भारत अिभयान;
सप्ताहात
वन महोत्सव
एक ही काय दोन स्तंभ म क्य आ सकता है: काव्या क चाची एक ही काय — पढ़ाना — दो बार करती ह। जब
वे ऑनलाइन कक्षा लेकर साप्ता हक शुल्क लेती ह, यह आ थक है। जब कबीर के दादा जी न:शुल्क भूगोल पढ़ाते
ह, यह गैर-आ थक है। भुगतान बदलता है, पढ़ाना नह । इसी लए सदै व भुगतान के वषय म पू छए, यह कभी मत
पू छए क काय कतना “महत्वपूण” दखता है।
प्र.2 हमारे दै नक जीवन म इनका क्या योगदान है?
ये दोन प्रकार क ग त व धयाँ मलकर वह सब बनाती ह जसका उपयोग आप करते ह और जस पर आप नभर ह।
वद्यालय जाने से पहले क एक साधारण सुबह ली जए और ग नए क पहली घंट बजने तक आप कतने लोग के काय का उपयोग
कर चुके ह।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व
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व ालय जाने से पहले यह कसके काय से संभव हुआ आ थक या गैर-आ थक
आपने क्या कया
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छत और दरवाजे वाले घर में उठे
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राजिमस्त्री, राजेश जैसे बढ़ ई, िबजली िमस्त्री, नल िमस्त्री आिथक
aपानीglिपया, बत्ती जलाई जलकल के कमचारी, लाइनमैन, अिभयंता आिथक
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नाश्ता िकया अनाज उगाने वाला िकसान, ढोने वाला टक चालक, बेचने वाला दोनों — दुक ान तक आिथक ,
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दुक ानदार — और घर में िजसने रसोई में गैर -आिथक
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gl जैसी दुकान — और घर में िजसने धोकर
स्वच्छ यूिनफॉम पहनी
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दज , अनु के माता-िपता
पेस की
दोनों
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सुर िक्षत िव ालय पहच
ुँ े बस या ऑटो चालक, काव्या के चाचा जैसे सड़क बनाने वाले आिथक
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तकनीिशयन, यातायात पुिलस
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स्वच्छ कक्षा में बैठकर पढ़ ा वेतन पाने वाले िशक्षक, सफाई कमचारी — और स्वच्छता दोनों
a g अिभयानों में स्वयं समुद ाय
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आ थक ग त व धय का योगदान। ये समाज के लए वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करती ह और काय करने वाल को जी वका दे ती ह।
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साथ ही ये हर चरण पर मूल्य संवधन करती ह — पृष्ठ 189–190 क यही बात है। ₹600 क लकड़ी राजेश के काय से ₹1000 क
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agl केवल दो घंटे” कर देगा — अथात् उसे बनाने वाले तकनी शयन वष तक हर यात्री
कुस बन जाती है; कसान का गे ँ आटा, फर रोट बनता है और हर चरण पर उसका मूल्य बढ़ता जाता है। काव्या का नया राजमाग
नकट के नगर तक क यात्रा “पाँच घंटे से घटकर
को लाभ पहुँचाते रहगे।
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गैर-आ थक ग त व धय का योगदान। पृष्ठ 193 इसे संक्षेप म कहता है — ये “सामा जक कल्याण एवं नजी कल्याण म योगदान
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दे ती ह और जीवन क समग्र गुणवत्ता को बढ़ाती ह।” वस्तार से —
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m .cरवार चलाती ह। पका भोजन, स्वच्छ वस्त्र, गृहकाय म सहायता, रोगी और वृद्धagक देखभाल — यही वह अदृश्य काय है
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जसके कारण घर का कोई सदस्य बाहर जाकर कमा पाता है।
ये समुदाय को जोड़ती ह। लंगर हर आगंतुक को न:शुल्क भोजन कराता है; वन महोत्सव का वृक्षारोपण वहाँ पेड़ लगाता है
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जसक छाया म कल पूरा मोहल्ला बैठेगा।
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.c हर गली को कोई नगर नगम अकेले स्वच्छ नह रख सकता — स्वच्छ ag
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ये वे काम करती ह जो कोई वेतन नह करा सकता।
e नाग रक स्वयं यह काय करते ह।
भारत अ भयान इस लए सफल है क्य कsसाधारण
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agइन काय से “हम संतु ष्ट और कृतज्ञता क अनुभू त होती है।”
ये करने वाले को भी कुछ दे ती ह।
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अध्याय का नाम “काय का महत्व” है, “धन का महत्व” नह — क्य : क्य क मूल्य और धन एक ही आकार के
m क न:शुल्क कक्षा, गली
नह ह। धन केवल उसे नापता है जसका लेन-दे न हुआ। माँ का पकाया भोजन, दादाeजी
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o करता पड़ोसी — इनम से कुछ भी कसी बहीखाते म नह आता, फरagभीl जस गाँव म ये न ह वह उस गाँव से
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कह द रद्र होगा जहाँ ये सब होते ह। धन कुछ काय को गनता है। मूल्य सभी काय का होता है।
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सुझाव: य द प्रश्न “योगदान” पूछे तो दोन पक्ष अवश्य द जए — आ थक ग त व धय से मलने वाली वस्तुएँ और
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आय, तथा गैर-आ थक ग त व धय से मलने वाला कल्याण, स्नेह और सामुदा यक श क्त। केवल पहला पक्ष लखने
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वाला उत्तर इस अध्याय का मूल भाव ही छोड़ दे ता है।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 185
अनु और कबीर क कहानी — ता लका भरना
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अनु और कबीर क कहानी म भन्न- भन्न पात्र कौन-कौन से काय कर रहे थे? नीचे द गई ता लका म ल खए —
(कहानी के पात्र / वे कौन-कौन से काय करते ह?)
ता लका इस प्रकार भरी जाएगी। तीसरा स्तंभ पृष्ठ 187 के अगले ‘आइए पता लगाएँ’ बॉक्स के लए छोड़ा गया है — वहाँ आप
उस पर नाम लखगे।
कहानी के वे कौन-कौन से काय करते ह?
पात्र
गीता मौसी भारतीय वाय ु से ना में पायल ट (िवमान चाल क ) का काय करती है ं — वे दे श की से वा करती है ं और इसके िलए उन्हे ं वेतन
िमलता है
कबीर के दादा सीमा सुर क्ष ा बल ं अब वे (i) आस-पास के बच्चों को िन:शल्ु क भ ूगोल पढ़ ाते है,ं (ii) स ब्जी उ
से से वािनवृत्त हुए है। ान में काम
जी करते है,ं और (iii) घर के अन्य काम करते है ं
अनु के िपता वेशभ ूषा और िसले हुए व स्त्र ों की द ुक ान चलाते है;ं वे सुबह जल्दी दुक ान चले जाते है ं
(अप्पा)
अनु की माँ (i) बच्चों के िव ालय जाने के बाद द ुक ान में सहयोग करती है,ं और (ii) एक स्वैिच्छक समूह के साथ काय करती है ं जहाँ
मिहलाओं को िसल ाई िसखाई जाती है
रोहन (अनु के (i) कं प्यूटर एप्लीके शन बनाने वाली कं पनी में सॉफ्टवेयर इंजीिनयर है,ं और (ii) सप्ताह के अंत में पास के महािव ालय के
बड़े भाई) युवा िवकास कायक्रम में सिम्मिलत लोगों को स्वेच्छा से कं प्यूटर कौशल िसखाते है ं
अनु और कबीर िव ाल य जाते है ं और पढ़ ते है,ं तथा पाक में खेल ते है ं — और यहाँ वे आस-पास के लोगों के काय ं को दे ख और समझ भी रहे
है ं
स्वयं जाँ चए: छपी हुई ता लका म सात रक्त पं क्तयाँ ह और इस उत्तर म छह पात्र आए ह। बची हुई पं क्त के लए
उस टै क्सी चालक को ली जए जो कहानी क पहली ही पं क्त म गीता मौसी को घर छोड़ता है — कराया लेकर
सवारी पहुँचाना भी एक काय है, और यह याद दलाता है क कहानी म बोलने वाले पात्र से कह अ धक लोग
कायरत ह।
यह ता लका धीरे-धीरे भरने योग्य क्य है: ध्यान द जए क इस छोट -सी कहानी म कतने लोग एक से अ धक
प्रकार के काय करते ह। माँ दुकान म भी काम करती ह और न:शुल्क सलाई भी सखाती ह। रोहन सॉफ्टवेयर भी
बनाते ह और स्वेच्छा से पढ़ाते भी ह। दादा जी पूरा जीवन दे श को दे चुके ह और आज भी घर तथा पड़ोस म प्र त दन
काय करते ह। इस कहानी म कोई भी केवल एक काम नह करता, और कोई भी उपयोगी होना बंद नह करता।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 187
उन्ह काय का आ थक या गैर-आ थक वग करण
आइए पता लगाएँ
प्र.1 पृष्ठ 185 पर द गई ता लका म क्या आपने तीसरा रक्त स्तंभ दे खा? इस स्तंभ म ‘आ थक या गैर-आ थक
ग त व ध’ को अं कत क जए। अब इन्ह ग त व ध के प्रकार के अनुसार भी वग कृत क जए।
हाँ — तीसरा स्तंभ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया था। उस पर ‘आ थक या गैर-आ थक ग त व ध’ ल खए और उसे इस
प्रकार भ रए। हर पं क्त पर केवल एक प्रश्न पू छए — क्या यहाँ धन या वस्तु का नकद मूल्य स म्म लत है?
कहानी के पात्र वे कौन-कौन से काय करते ह? आ थक या गैर-आ थक ग त व ध
गीता मौसी भारतीय वायु से ना में िवमान चालक का काय आिथक — उन्हे ं वेतन िमलता है (पष्ृ ठ 187)
कबीर के दादा जी पड़ोस के बच्चों को िन:शुल्क भूग ोल पढ़ ाना -
गैर आिथक — “िन:शुल्क”, अथ त् कोई भुग तान नही ं
घर के सब्जी उ ान में काम करना -
गैर आिथक — सिब्जयाँ घर के िलए है,ं बेचने के िलए नही ं
घर के अन्य काम करना -
गैर आिथक — घरे ल ू काय, पिरवार के पित स्नेह से िकया गया
अनु के िपता वेशभूषा और िसले हुए वस्त्रों की दुक ान चलाना आिथक — वस्तुए ँ धन के बदले िबकती है ं और पिरवार की आय इसी
(अप्पा) से चलती है
अनु की माँ दुक ान में सहयोग करना आिथक — यह उसी व्यवसाय का भाग है िजससे पिरवार की आय
होती है
स्वैिच्छक समूह में िसलाई िसखाना -
गैर आिथक — “स्वैिच्छक”, अथ त् इसके िलए उन्हे ं कु छ नही ं िमलता
रोहन सॉफ्टवेयर इंजीिनयर के रूप में काय आिथक — “उसे भी इस काय के िलए वेतन िमलता है” (पष्ृ ठ 187)
युवा िवकास कायक्रम में सप्ताहात
ं की कं प्यूटर -
गैर आिथक — पष्ृ ठ 187 स्वयं कहता है, “जो एक गैर -आिथक
कक्षाएँ गितिविध है”
अनु और कबीर िव ालय जाना, पढ़ ना, खेल ना -
गैर आिथक — वे न कु छ दे ते है,ं न कमाते है;ं पढ़ ाई भिवष्य के िलए
िनवेश है
टैक्सी चालक गीता मौसी को घर तक पहच
ु ँ ाना आिथक — सवारी के बदले िकराया िमलता है
सावधान — इस अभ्यास क असली परीक्षा: कहानी के तीन पात्र दोन ओर आते ह। माँ दुकान म आ थक और
सलाई समूह म गैर-आ थक काय करती ह। रोहन सप्ताह के दन म आ थक और सप्ताहांत म गैर-आ थक। दादा
जी का बागवानी करना गैर-आ थक है — कतु य द वे वही स ब्जयाँ बाजार म बेचने लग तो वही खुदाई आ थक हो
जाएगी। वग करण ग त व ध का क जए, व्य क्त का नह ।
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व ालय वाली पं क्त भ्रम क्य पैदा करती है: वद्यालय म पढ़ाने वाले शक्षक क ग त व ध आ थक है, क्य क
वद्यालय उन्ह वेतन दे ता है। कतु आप, जो कक्षा म बैठकर सीख रहे ह, आ थक ग त व ध नह कर रहे — आज
आप न कसी को कुछ दे ते ह, न कमाते ह। फर भी पढ़ाई आपके सबसे मूल्यवान काय म से एक है — यही प्रमाण
है क “गैर-आ थक” शब्द “आ थक” से छोटा नह है।
आइए वचार कर — पृष्ठ 187
न:शुल्क पढ़ाना, और अपने प रवार का गैर-आ थक काय
आइए वचार कर
प्र.1 कबीर के दादाजी आस-पास के ब को स्वै च्छक रूप से न:शुल्क पढ़ाते ह। यह आ थक ग त व ध है या गैर-
आ थक? यह ग त व ध आपके अध्यापक ारा व ालय म पढ़ाए जाने से कस प्रकार भन्न है? अपने सहपा ठय
के साथ चचा क जए।
यह गैर-आ थक ग त व ध है। दादा जी कुछ भी नह लेते — पृष्ठ 184 के शब्द ह, “आस-पास के ब को न:शुल्क भूगोल पढ़ाने
म...”। यहाँ न धन आता है, न वस्तु का नकद मूल्य; अत: पृष्ठ 186 क प रभाषा के अनुसार यह गैर-आ थक है। वे यह काय ठ क
उन्ह भावनाओं से करते ह जनका उल्लेख पुस्तक करती है — स्नेह, सेवा और पड़ोस के ब के प्र त आदर।
व ालय के अध्यापक वही काय आ थक ग त व ध के रूप म करते ह, क्य क वद्यालय उन्ह नयुक्त करता है और वेतन दे ता
है (पृष्ठ 187 — “एक नयोक्ता ारा कमचारी को नय मत रूप से प्र तमाह कया जाने वाला नयत भुगतान”)। पढ़ाना उनका
व्यवसाय है; इसी से उनका प रवार चलता है।
कबीर के दादा जी आपके व ालय के अध्यापक
भुग तान कु छ नही ं — िन:शुल्क िव ालय से पितमाह वेतन
गितिविध का पकार -
गैर आिथक आिथक
क्यों करते है ं स्नेह, से वा-भाव और पड़ोस को कु छ यह उनका पिशिक्षत व्यवसाय है — और अिधकांश िशक्षकों को पढ़ ाना
लौटाने की इच्छा से िपय भी है
क्या पढ़ ाया जाए , कौन वे स्वयं — उस िदन बच्चों को िजसकी पाठ क्रम, समय-सारणी और िव ालय का कै ले ंडर
तय करे आवश्यकता हो
उ त्त रदाियत्व वे िकसी िदन पढ़ ाएँ या न पढ़ ाएँ; कोई उपिस्थत रहना, पाठ क्रम पूर ा करना, परीक्षा ले ना और जाँचना,
बाध्य नही ं कर सकता िव ालय तथा अिभभावकों को उत्तर दे ना
पिशक्षण और योग्यता अपना ज्ञान और लंबा जीवन-अनुभव औपचािरक िशक्षण योग्यता और िनयिमत पिशक्षण
पढ़ ाने का मूल्य िबल कु ल समान। भूग ोल सीखने वाला बच्चा दोनों से समान रूप से सीखता है
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यह तुलना क्य महत्वपूण है: दोन म अंतर केवल भुगतान का है — उपयो गता का नह , प रश्रम का नह ,
कौशल का नह , और सम्मान का तो बलकुल नह । भुगतान मलने से काय अ धक मूल्यवान नह हो जाता, और
भुगतान न मलने से कम मूल्यवान नह हो जाता। यही एक वाक्य पूरे अध्याय का हृदय है।
कक्षा-चचा के लए: समूह से एक तीखा प्रश्न पू छए — “क्या दादा जी को भुगतान मलना चा हए?” कुछ कहगे
हाँ, उनका समय मूल्यवान है। कुछ कहगे क भुगतान आ जाने से उस कक्षा का सहज, आत्मीय स्वरूप ही बदल
जाएगा। दोन उत्तर ठ क ह, और दोन को सुनना ही चचा का उ े श्य है। सबसे सशक्त पक्ष यह है क न:शुल्क दे ने
का उनका नणय स्वयं मूल्यवान है — यही सेवा है, जसक चचा पृष्ठ 191 पर होती है।
प्र.2 आप और आपके प रवार के लए कौन-सी गैर-आ थक ग त व धयाँ महत्वपूण ह? ये क्य बहुमूल्य ह?
यह व्य क्तगत प्रश्न है, अत: उत्तर आपके अपने घर से आना चा हए। व ध सरल है — अपने प रवार के एक पूरे दन को याद
क जए और हर वह काम ल खए जसके लए कसी को कुछ नह मला। फर हर काम के आगे ल खए क य द वह न हो तो
क्या बगड़ेगा।
अच्छे उत्तर म क्या होना चा हए
अपने ही घर और मोहल्ले क कम-से-कम पाँच-छह वास्त वक ग त व धयाँ — कोई सामान्य सूची नह ।
हर ग त व ध कस सदस्य ारा क जाती है और लगभग कतना समय लेती है।
हर एक के लए स्पष्ट कारण क वह बहुमूल्य क्य है — उससे मलने वाला कल्याण, सुरक्षा, शक्षा, स्वास्थ्य या प्रसन्नता।
एक ईमानदार वाक्य उस काय के बारे म जो आपके घर म प्राय: अनदे खा रह जाता है, और उसे न्यायपूण ढं ग से बाँटने का एक
सुझाव।
नमूना उत्तर:
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मेरे प रवार क गैर- कौन करता है यह बहुमूल्य क्य है
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िदन भर का भोजन बनाना और
िटिफनaलगाना
माँ, और रिववार को िपताजी हम सब स्वस्थ रहते है ं और कोई भूखा िव ालय या काम पर नही ं
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जाता। बाहर का भोजन कही ं महँग ा और कम पौिष्टक होता
छोटी बहन को ग ृहकाय में मैं वह सीखती है, िव ालय से डरती नही,ं और पिरवार का ट ूशन का
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सहायता व्यय भी बचता है
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दादी को समय पर दवा दे ना िपताजी और बुआ , बारी-बारी उनका स्वास्थ् य िस्थर रहता है और वे अके लापन नही ं अनुभव करती ं
और उनके पास बैठना — यह से वा कोई दवा नही ं दे सकती
घर की सफाई और कपड़े धोना बँटा हआ
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हम रोग से बचते है,ं और बारी बँटी होने से एक ही व्यिक्त थकता नही ं
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साप्तािहक बारी तय है रहता
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घर के आगे और गली में लगे दादा जी
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छाया, स्वच्छ हवा और एक ऐसी गली िजसमें चलना सबको अच्छा
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पौधों को पानी दे ना लगता है
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a त्योहार से पहले गली और मंिदर गली के सभी पिरवार िमलकर पूरे मोहल्ले को लाभ िमलता है, और साथ काम करने से पड़ोसी िम त्र
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पिरसर की सफाई बन जाते है ं
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रिववार सुबह गली के दो बच्चों मेरे बड़े चचेरे भाई पढ़ ाई में िपछड़ रहे दो बच्चे अब पढ़ ने लगे है ं — एक व्यिक्त के एक
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को िन:शुल्क पढ़ ाना िन:शुल्क घंटे ने उनका पूर ा वष बदल िदया
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ये बहुमूल्य क्य ह — परीक्षा म लखने योग्य एक अनुच्छेद: इनम से कोई भी ग त व ध एक रुपया भी नह कमाती, फर भी
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इनके बना हमारा प रवार एक दन भी नह चल सकता। ये हम भोजन, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुरक्षा दे ती ह; सीखने म सहायता
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करती ह; बुजुग क दे खभाल करती ह; और हमारे मोहल्ले को ऐसा स्थान बनाती ह जहाँ लोग एक-दूसरे के काम आते ह। ये स्नेह,
c और आदर से क जाती ह — ठ क वही भाव जो पृष्ठ 186 गनाता है। इनका
सेवा, क.ृ तज्ञता
a gमूल्य कसी बल पर नह छपता, कतु
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seका हर सदस्य उसे अनुभव करता है।
g l aघर
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घर पर यह क जए: एक सप्ताह तक एक छोट ता लका बनाइए जसम घर का हर अवैत नक काम और उसे करने
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वाले का नाम लखा हो। दो बात प्राय: च काती ह।om
c पहली, इन सबका कुल समय कतना बड़ा है — अक्सर एक पूरे g l a
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a s emअसमान रूप से बँटा है। घर के सभी सदस्य म — लड़ कय और
glइस काय को न्यायपूण ढं ग से बाँटना ही इस काय का वास्त वक सम्मान है,
काय दवस से भी अ धक। दूसरी, यह कतने
लड़क , म हलाओं और पुरुष मa—
केवल प्रशंसा करना नह ।
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आइए वचार कर — पृष्ठ 189
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
व ालय के माग क आ थक ग त व धयाँ और उनका भुगतान
आइए वचार कर
प्र.1 क्या आप अपने घर से व ालय जाने के माग म लोग ारा क जाने वाली व भन्न प्रकार क आ थक ग त व धय
का स्मरण कर सकते ह? आपके वचार से इन लोग को कस प्रकार भुगतान कया जाता है?
अपनी यात्रा को धीरे-धीरे, मोड़-दर-मोड़ याद क जए — वद्यालय के ार तक पहुँचने से पहले ही आपको दजन भर आ थक
ग त व धयाँ मल जाएँगी। फर हर एक के आगे ल खए क उस व्य क्त को कस रूप म भुगतान मलता है। पुस्तक चार रूप बताती
है — वेतन, मजदूरी, शुल्क और वस्तु के रूप म भुगतान; इनम अपना व्यवसाय चलाने वाल के लए लाभ जोड़ ली जए।
नमूना उत्तर:
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
कसे दे खा आ थक ग त व ध भुगतान का रूप
क्र
दू ध िव े ता सुबह-सुबह घर-घर दू ध पहच
ु ँ ाना पत्येक थैल ी पर ल ाभ; डेयरी में िनयुक्त िवतरक को वेतन
समाचार -पत्र डालने वाला हर ार पर अखबार डालना हर घर से िलया जाने वाला मािसक भ ुगतान — कु छ उसका, कु छ एजेंस ी
का
क्र
स ब्जी िव े ता ठे ले या दुक ान से सब्जी बेचना ल ाभ — मंडी के भाव और िबक्री के भाव का अंतर
चाय की दुक ान का स्वामी चाय और नाश्ता बनाकर बेचना ल ाभ ; िगलास धोने वाले सहायक को दै िनक मजदू री
ऑटो और बस चालक सवािरयों को काम, िव ालय पत्येक सवारी से िकराया; नगर बस के चालक को मािसक वेतन
और बाजार पहच
ु ँ ाना
दज छोटी दुक ान में कपड़े िसलना पत्येक वस्त्र की िसल ाई का शल्ु क , जो उसके कौशल का मूल्य है
और ठीक करना
मोची नुक्कड़ पर जूते िसलना और हर मरम्मत का शल्ु क , वही ं नकद
पॉिलश करना
िनम ण श्रिमक मकान बनाना या सड़क की दै िनक मजदू री ; अिभयंता और मशीन चलाने वाले तकनीिशयन को मािसक
मरम्मत वेतन
सफाई कम चारी सड़क बुहारना और कू ड़ा उठाना नगरपािलका या ठे के दार से वेतन अथवा मजदू री
क्र
दवा िव े ता और क्लीिनक दवा बेचना; रोिगयों को दे खना दवाओं पर ल ाभ; िचिकत्सक को परामश शल्ु क
के िचिक त्सक
बैक
ं और डाकघर के जमा, मनीऑडर और पत्रों का मािसक वेतन — ठीक काव्या की चाची की तरह
कम चारी काय
सड़क िकनारे खेत में काम जुताई, िनराई, कटाई दै िनक मजदू री , कभी कु छ नकद और कु छ अनाज या फल के रूप में —
करता श्रिमक वस् तु के रू , सािहल के आमों की तरह
प में भ ुगतान
मेरे िशक्षक और िव ालय पढ़ ाना; ार की सुर क्षा िव ालय से मािसक वेतन
का र क्षक
एक ही काम का भुगतान अलग-अलग क्य : यह इस पर नभर करता है क काय कस व्यव ा म हो रहा है, न
क इस पर क काय क्या है। प रवहन कंपनी म नयुक्त चालक को वेतन मलता है; अपना ऑटो चलाने वाले को
कराया। कारखाने का दज मजदूरी पाता है; अपनी दुकान वाला दज प्र त वस्त्र शुल्क। अत: उत्तर लखते समय
व्यवस्था बताइए — “कंपनी म नयुक्त…”, “अपनी दुकान…”, “ दहाड़ी पर…” — भुगतान का सही नाम स्वयं आ
जाएगा।
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क्या आपने दे खा? उसी माग पर आपने गैर-आ थक ग त व धयाँ भी अवश्य दे खी ह गी — अपने ार के आगे झाड़ू
लगाती पड़ोसन, ब े को सड़क पार कराता कोई बुजुग, प क्षय के लए पानी रखते स्वयंसेवक। ऊपर क सूची म वे
इस लए नह ह क उनका कोई भुगतान नह होता — कतु उनके बना वह माग नश्चय ही बुरा होता।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 190
मूल्य संवधन — बढ़ई राजेश
प्र.1 कुस बनाने के लए लकड़ी क लागत ₹600 है, तो शेष रा श ₹400 (₹1000–₹600) कसके लए है?
यह ₹400 राजेश के काय का मौ क मूल्य है — “यह राजेश के कौशल, समय और प्रयास का मौ द्रक मूल्य है जो उन्ह उस कुस
को बनाने म लगा था।” उन्ह यह ₹400 कह से मले नह ; उन्ह ने साधारण लकड़ी को ऐसी कुस म बदलकर इसे उत्पन्न कया जस
पर कोई बैठना चाहे। पुस्तक इसी को मूल्य संवधन कहती है।
कु स का िवक्रय मूल्य = ₹1000
खरीदी गई लकड़ ी की लागत = ₹600
राजेश ारा जोड़ ा गया मूल्य = ₹1000 − ₹600 = ₹400
मूल्य संवधन — ₹600 की लकड़ ी ₹1000 की कु स कैसे बनी
बाजार से लकड़ ी राजेश का काय बनी हुई कु स
₹600 उनका कौशल, समय,
पयास और उपकरण
₹1000
इतना उन्होंने चुकाया इतना गाहक चुकाता है
जोड़ ा गया मूल्य = ₹400
₹1000 − ₹600 = ₹400। यह अंतर कसी से छ ना गया लाभ नह है — यह उस काय का मूल्य है जसने लकड़ी के ढे र को कुस बना
दया।
ग्राहक यह ₹400 प्रसन्नता से क्य दे ता है: ₹600 क बखरी लकड़ी पर कोई बैठना नह चाहता। ग्राहक के लए
कुस का मूल्य लकड़ी से कह अ धक है, और यह पूरी वृ द्ध राजेश के हाथ से आई है। पृष्ठ 189 का यही आशय है
क आ थक ग त व धय से “ कसी वस्तु के अन्य रूप म रूपांतरण क प्र क्रया के प्रत्येक चरण पर उसके मूल्य म भी
वृ द्ध होती है।” यही आपके चार ओर होता है — कपास से धागा, धागे से कपड़ा, कपड़े से अनु के माता- पता क
दुकान क कमीज, और हर जोड़ी हाथ कुछ मूल्य जोड़ती जाती है।
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सावधान: यह ₹400 जोड़ा गया मूल्य है, राजेश का शुद्ध लाभ नह । इसी म से उन्ह “ वशेष प्रकार के उपकरण ”
और अन्य सामग्री का व्यय भी नकालना है — क ल, ग द, पॉ लश, ग — तथा आरी और कायशाला क टू ट-फूट
भी। इन सबके बाद जो बचे, वही उनक वास्त वक कमाई है। अत: “राजेश को ₹400 का लाभ हुआ” मत ल खए;
ल खए क “राजेश ने ₹400 का मूल्य संवधन कया, जसम सामग्री का व्यय तथा उनके कौशल, समय और प्रयास
का मूल्य दोन स म्म लत ह”।
स्वयं जाँ चए: य द उस कुस पर राजेश के उपकरण, क ल और पॉ लश का व्यय ₹150 हो, तो उनके कौशल, समय
और प्रयास के लए कतना बचा? ₹400 − ₹150 = ₹250। और य द वे सप्ताह म ऐसी 4 कु सयाँ बनाते ह, तो उस
सप्ताह का मूल्य संवधन = 4 × ₹400 = ₹1600।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 191
कौन-सी ग त व धयाँ मौ क मूल्य का सृजन करती ह?
आइए पता लगाएँ
प्र.1 आपके वचार से जो ग त व धयाँ या व्यवसाय मौ क मूल्य का सृजन करते ह, उनके सामने सही (✓) का नशान
लगाइए। क्या आप अं तम दो रक्त पं क्तय म दो ग त व धयाँ और उनके मूल्य सृजन से संबं धत धनरा श के दो
उदाहरण जोड़ सकते ह? (1. बेकर 2. दज 3. कसान ारा अपने ै क्टर क मरम्मत 4. च कत्सक 5. प रवार के
लए भोजन बनाने वाले अ भभावक 6. वैज्ञा नक 7. बीमार दादा-दाद एवं नाना-नानी क दे खभाल करने वाला
व्य क्त 8. ____ 9. ____)
नशान केवल वह लगाइए जहाँ कोई धन या वस्तु का नकद मूल्य चुकाता है। पूरी भरी हुई ता लका इस प्रकार है, जसम पं क्त
8 और 9 भी भरी गई ह।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व
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क्र.सं. ग त व ध/व्यवसाय मौ क मूल्य मूल्य सृजन संबंधी धनरा श के उदाहरण
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का सृजन?
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1 बेक र ✓ ₹200 का आटा, चीनी और खमीर खरीदकर उससे बनी बेड और के क ₹500
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में बेचता है — पकाने से ₹300 का मूल्य जुड़ा
2 दज ✓ ग ाहक के लाए कपड़े से कु त िसलने के ₹300 ले ता है — यह ₹300 उसके
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कौशल का मूल्य है, ठीक राजेश के ₹400 की तरह
✗ (िनशान ase m
ं) g
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3 िकसान ारा अपने टैक्टर वे अपना ही टैक्टर ठीक करते है,ं अत: िकसी को कोई भुग तान नही ं होता।
की मर म्मत नही a इसकी जुड़वाँ िस्थित दे िखए — वही टैक्टर मैके िनक शल्ु क ले कर ठीक करे तो
✓ होगा
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✓ ₹400 परामश शल्ु क ले ते है,ं अथवा अस्पताल से मािसक वेतन पाते है ं
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4 िचिक त्सक
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m वाले अिभभावक
पिरवार के िलए भोजन बनाने ✗ (िनशान
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इसके िलए कोई भुग तान नही ं होता — यह स्नेह और से वा से िकया जाता है।
l a se नही ं) पिरवार के िलए इसका मूल्य अपार है, िकं तु वह मौिद क मूल्य नही ं है। वही
a g खाना बनाने वाला रसोइया होटल में मजदू री पर बनाए तो ✓ होगा
✓
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6 वैज्ञ ािनक पयोगशाला, िवश्विव ालय या इसरो/सी.एस.आई.आर. जैसे संस्थान से वेतन
.coपाते है,ं और उनके अनुसंधान से करोड़ों के उत्पाद बन सकते है ं
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7 बीमार दादा-दादी एवं नाना- las
aनहीg ं)
✗ (िनशान यह पािरवािरक से वा है, स्नेह और कृ तज्ञता से की गई। वही दे खभाल पिशिक्षत
नानी की दे खभाल करने नस वेतन ले क र करे तो ✓ होगा — काय वही है, के वल भुग तान का अंतर है
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वाला व्यिक्त
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कु म्हार (जोड़ ा गया) ✓
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8 लगभग मुफ्त की िम ी खोदकर, गढ़ कर और पकाकर साप्तािहक बाजार में
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₹150 पित मटका बेचता है
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बस चालक (जोड़ ा गया) ✓ पितिदन सै क ड़ों सवािरयों को काम, िव ालय और बाजार सुर िक्षत पहच
ु ँ ाने के
a िलए मािसक वेतन पाता है
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पं क्त 8 और 9 के लए अन्य अच्छे वकल्प: नाई (बाल काटने का शुल्क) · मछु आरा ( दन क मछली बेचता है) · बुनकर
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as· ब्यूट शयन, बजली मस्त्री, नल मस्त्री, ऐप बनाने वाला।
(हथकरघा साड़ी बेचता है) · राज मस्त्री ( नमाण स्थल पर दै नक मजदूरी) · मोबाइल मरम्मत क दुकान (हर मरम्मत का शुल्क) ·
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कू रयर पहुँचाने वाला (प्र त डलीवरी भुगतान)
पं क्त 3, 5 और 7 पर नशान क्य नह — और यह अपमान क्य नह है: प्रश्न केवल मौ क मूल्य पूछ रहा है,
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और धन तभी आता है जब दो लोग के बीच लेन-दे न हो। कसान क मरम्मत, अ भभावक का भोजन बनाना और
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.cबारे म क्या कहती है — ठ क अगले ही खंड क पहली पं क्त है, “गैर-आ aथकg ग त व धय म धनरा श स म्म लत
बीमार बुजुग क सेवा — तीन प रवार के भीतर, प रवार के लए कए जाते ह। दे खए क पुस्तक स्वयं इसी काय के
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नह होती है, फर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन म महत्व रखते ह।” इस स्तंभ म नशान न लगना उस काय
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को कम अंक दे ना नह है। इसका केवल इतना अथ है क यह स्तंभ रुपये नाप रहा है, और रुपये सब कुछ नह नाप
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सकते।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
एक कदम आगे सो चए: जो प रवार रसोइया, नस और मैके नक रखता है, वह प्र तमाह ठ क उसी काय के लए
वास्त वक धन चुकाता है जसका वणन पं क्त 3, 5 और 7 करती ह। अथात् इस काय का मौ द्रक मूल्य सदै व था —
बस उसका बल कभी नह बना। संसार भर के और भारत के भी अथशास्त्री दशक से कहते रहे ह क अवैत नक
घरेलू और दे खभाल के काय को नापा और गना जाना चा हए, क्य क छोड़ दे ने से वह अदृश्य हो जाता है। भारत
स हत अ धकांश दे श म इस अवैत नक काय का बड़ा भाग म हलाएँ करती ह; इसे पहचानना और घर के सभी
सदस्य म न्यायपूण ढं ग से बाँटना इस अध्याय को व्यवहार म उतारने का सबसे सीधा उपाय है।
आइए वचार कर — पृष्ठ 193
सामुदा यक सहभा गता, त्योहार और सामुदा यक कायक्रम
आइए वचार कर
प्र.1 भारत के अनेक समुदाय म सामुदा यक सहभा गता क समान परंपराएँ ह। क्या आप अपने क्षेत्र क कुछ ऐसी
परंपराओं के बारे म बता सकते ह?
भारत के लगभग हर भाग म लोग के मलकर, बना कसी भुगतान के काम करने क परंपरा है। अपने दादा-दाद और
पड़ो सय से पू छए — आपके अपने क्षेत्र म भी तीन-चार ऐसी परंपराएँ अवश्य मलगी। पहचानने म सहायता के लए दे श भर के
कुछ वास्त वक उदाहरण —
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परंपरा कहाँ लोग मलकर क्या करते ह
श्रमदान पूरे भारत में गाँववासी एक िदन का श्रम िन:शुल्क दे क र तालाब की गाद िनकालते है,ं बंध ा ठीक
करते है,ं सड़क समतल करते है ं या िव ालय की दीवार बनाते है ं
हलमा भील समुद ाय, झाबुआ और हजारों लोग एक ही िदन पहाड़ी पर एकत्र होकर वष जल रोकने के िलए खंितयाँ
पेटलावद क्षेत्र , मध्य पदे श और ग े खोदते है ं — यह पुर ानी परंपरा आज सूखे से लड़ने का साधन बन गई है
कार से वा सवत्र ग रु
ु ारों में, िवशेषकर श्र ालु सरोवर और पिरसर की सफाई करते है,ं लंग र बनाते और परोसते है,ं तथा
पंजाब में जूठे बतन स्वयं माँजते है ं
गणेशोत्सव मंडल महारा , गोवा पूर ी गली िमलकर चंद ा जुटाती है, पंडाल बनाती है, दस िदन के कायक्रम चलाती है
और िवसजन का पबंध करती है
छठ से पहले घाटों िबहार, झारखंड, पूव उत्तर पिरवार िमलकर नदी-तट साफ और समतल करते है ं तथा घाट सजाते है ं — के वल
की सफाई पदे श अपने िलए नही ं, सबके िलए
पूक्कलम और के रल पड़ोसी िमलकर ओणम के िलए फू लों की रंग ोली और सामुद ाियक भोज तैयार करते
ओणस ा है ं
रथ खी ंचना तिमलनाडु, ओिडशा (रथ यात्रा) सै क ड़ों हाथ िमलकर रथ खी ंचते है ं — ऐसा काय जो कोई एक पिरवार कभी नही ं
कर सकता
सामुद ाियक म त्स्य मेघ ालय, मिणपुर , असम पूर ा गाँव िनयत िदन एक साथ तालाब या धारा में मछली पकड़ता है और पकड़ बाँट
आखेट ले ता है
सामुद ाियक अनाज अनेक जनजातीय क्षेत्र , ओिडशा फसल के बाद हर पिरवार कु छ अनाज दे ता है तािक बुरे वष में कोई घर भूखा न रहे
कोठार और छत्तीसगढ़ सिहत
िमलकर घर बनाना दे श भर के गाँवों में, िवशेषकर पड़ोसी िन:शुल्क श्रम दे क र छत डलवाते है;ं पिरवार के वल भोजन कराता है
पूव त्तर में
अपने क्षेत्र के लए नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले म द पावली से पहले गली के सभी प रवार मलकर गली क सफाई करते ह और
चारद वारी पर सफेद करते ह। वषा ऋतु म कॉलोनी के युवा ना लयाँ साफ करते ह जससे पानी न भरे। हर वष हमारी नवासी
कल्याण स म त रक्तदान श वर और वृक्षारोपण कायक्रम कराती है, और पछली ग मय म सबने मलकर प क्षय और आवारा
पशुओं के लए पानी का पात्र तथा छायादार स्थान बनवाया। इनम से कसी के लए कसी को भुगतान नह मलता।”
ये परंपराएँ जी वत क्य ह: कुछ काम एक प रवार के लए बहुत बड़े होते ह और कसी सरकारी कायालय के लए
बहुत छोटे या बहुत बखरे हुए। एक गली क सफाई, एक तालाब क गाद, एक त्योहार का प्रबंध — ये ठ क इसी
बीच क जगह म आते ह। सामुदा यक सहभा गता इसी जगह को भरती है, और साथ ही एक और काम करती है —
जो लोग एक बार कंधे से कंधा मलाकर काम कर चुके ह , वे दुबारा एक-दूसरे क सहायता कह सरलता से करते ह।
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प्र.2 हम भारत म कई त्योहार मनाते ह। इन त्योहार के अवसर पर लोग मलकर अनेक ग त व धयाँ करते ह। वे मल-
जुलकर ान क सजावट करते ह और व्यंजन को बनाते ह। क्या ये गैर-आ थक ग त व धयाँ ह? आपके वचार
से इनम क्या जीवन-मूल्य समा हत ह।
हाँ — त्योहार पर लोग स्वयं जो काय करते ह, वह गैर-आ थक है। पंडाल सजाने, आँगन बुहारने, रंगोली बनाने, प्रसाद पकाने
और भोजन परोसने वाले पड़ो सय को कोई भुगतान नह मलता। वे यह सब ठ क उन्ह भाव से करते ह जो पृष्ठ 186 गनाता है —
कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर।
एक ही त्योहार म… उदाहरण आ थक या गैर-
आ थक
जो काय लोग स्वयं, िन:शुल्क पंडाल सजाना, रंग ोली बनाना, सामुद ाियक भोज पकाना और परोसना, भजन-मंडली गैर -आिथक
करते है ं में गाना, बाद में सफाई करना
िजन काय ं के िलए लोग फू ल, िमठाई, दीये और नए वस्त्र खरीदना; टेंट, ध्विन-यंत्र या बैड
ं बुल ाना; मूितकार, आिथक
भुग तान करते है ं पुर ोिहत, छायाकार, िबजली िमस्त्री को दे ना
अवैत नक पक्ष म कौन-से जीवन-मूल्य समा हत ह। पाँच कारण, इनम से कोई तीन लख सकते ह —
सामुदा यक भावना। जो लोग सामान्यत: केवल नमस्ते करते ह, वे सप्ताह भर कंधे से कंधा मलाकर काम करते ह। पड़ोसी
मत्र बन जाते ह, और यह त्योहार बीत जाने के बाद भी काम आता है।
संस्कृ त का हस्तांतरण। ब े गीत, रंगोली के प्रारूप, व्यंजन और री तयाँ बड़ के साथ करके सीखते ह — जो कसी पुस्तक
या कक्षा से नह आ सकता।
समानता और समावेश। सामुदा यक भोज म धनी और नधन साथ बैठकर खाते ह। पुस्तक का अपना उदाहरण लंगर है, जहाँ
“सभी श्रद्धालुओं को न:शुल्क भोजन कराया जाता है।”
संगठन और उत्तरदा यत्व। चंदा जुटाना, काम बाँटना, हसाब रखना, भीड़ सँभालना और बाद म सफाई करना — यह मलकर
काम करने का वास्त वक प्र शक्षण है।
आनंद और अपनेपन का भाव। ये छोट बात नह ह। पृष्ठ 193 कहता है क गैर-आ थक ग त व धयाँ “सामा जक कल्याण एवं
नजी कल्याण म योगदान दे ती ह और जीवन क समग्र गुणवत्ता को बढ़ाती ह” — त्योहार ठ क यही करता है।
क्या आपने दे खा? त्योहार अपने चार ओर बहुत-सी आ थक ग त व ध भी उत्पन्न करता है — फूल वाले, मठाई
क दुकान, दज , कुम्हार, मू तकार, बस और ऑटो चालक के लए। अत: त्योहार इस बात का सुंदर उदाहरण है क
दोन प्रकार क ग त व धयाँ साथ-साथ चलती ह और एक-दूसरे क सहायता करती ह — वास्त वक जीवन म प्राय:
ऐसा ही होता है।
समय कम हो तो एक पं क्त का उत्तर: लोग का अपना त्योहारी काय गैर-आ थक है क्य क उसका कोई भुगतान
नह होता, कतु वह मूल्यवान है क्य क वह समुदाय को जोड़ता है, संस्कृ त आगे बढ़ाता है, सबको साथ लेता है और
आनंद दे ता है — इनम से कुछ भी धन से नह खरीदा जा सकता।
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प्र.3 क्या आप उन सामुदा यक कायक्रम क पहचान कर सकते ह जन्ह आपके व ालय या आस-पास आयो जत
कया गया हो? इन कायक्रम म आपने क्या दे खा?
हर व ालय ऐसे कायक्रम उससे कह अ धक कराता है जतना व ाथ सोचते ह। बीते वद्यालय-वष और अपने मोहल्ले को
याद क जए और उन्ह सूचीबद्ध क जए; फर ल खए क आपने वास्तव म क्या दे खा — वह नह जो आपको लगता है क लखना
चा हए।
व ालय और मोहल्ले के सामान्य कायक्रम
कायक्रम क्या कया जाता है क्या प्राप्त होता है
स्वच्छता अिभयान िव ालय पांग ण, गली, पाक या बस-स्टॉप की सफाई; गीले स्वच्छ और स्वस्थ स्थान — और दुबारा गंद ा न
और सूखे कचरे के िलए अलग-अलग िडब्बे रखना करने की आदत
वन महोत्सव / वृक्षारोपण िव ालय और कॉलोनी में पौधे लगाना, और किठन भाग छाया, स्वच्छ हवा, और आरंभ िकए काम को
— पहली पूर ी गम उन्हे ं पानी दे ना िनभाने की सीख
स्वास्थ् य एवं नेत्र जाँच िशिवर , िचिकत्सक और स्वयंसे वक िव ािथयों तथा िनवािसयों की रोग समय से पकड़ में आते है;ं अनेक िव ािथयों
र क्तदान िशिवर िन:शुल्क जाँच करते है ं को पहली बार चश्मा िमलता है
साक्षरता या ट ूशन अिभयान बड़ी कक्षाओं के िव ाथ छोटों को पढ़ ाते है,ं या मोहल्ले के वास्तिवक िशक्षा, और पढ़ ाने वाला िव ाथ स्वयं
वयस्कों को पढ़ ना और हस्ताक्षर करना िसखाते है ं और अिधक सीखता है
कं बल , पुस्तक या भोजन सिदयों में गम वस्त्र, या सत्र के आरंभ में पुस्तकें और उपयोगी वस्तु व्यथ नही ं जाती, और जो बच्चे
संग ह ले खन-सामग ी एकत्र कर बाँटना पुस्तकें नही ं खरीद सकते उन्हे ं िमल जाती है ं
जल संर क्षण, वष जल टपकते नल ठीक करना, टंक ी साफ करना, सोख्ता ग ा कम पानी व्यथ जाता है, और िव ालय के जल-
संचयन बनाना िबल में स्पष्ट कमी िदखती है
सड़क सुर क्षा और यातायात स्थानीय पुिलस के साथ रै ल ी, पोस्टर, नुक्कड़ नाटक हेल मेट पहना जाने लगता है, ज़ेबरा क्रॉिसंग का
जाग रूकता पयोग होता है
योग िदवस , िफट इंिडया, अिभभावक, कमचारी और पड़ोसी सिहत सब भाग ले ते है ं स्वास्थ्य, और एक ऐसा िव ालय जो अपने
मोहल्ले का खेल िदवस मोहल्ले का अंग लगता है
नमूना उत्तर — मने क्या दे खा: “हमारे वद्यालय म 2 अक्तूबर के सप्ताह म स्वच्छता अ भयान चला। कक्षा 6 से 8 के वद्या थय ,
हमारे शक्षक , वद्यालय के कमचा रय और लगभग बीस अ भभावक ने वद्यालय प्रांगण, बाहर क गली और बस-स्टॉप क सफाई
क , और हमने दो डब्बे हरे तथा नीले रंग से रंगे। चार बात ने मुझे च काया। पहली, दो घंटे के काम म कतना कचरा नकला —
जस गली से हम प्र त दन बना ध्यान दए गुजरते ह, उससे उन्नीस बोरे। दूसरी, जैसे ही हम छोटे -छोटे समूह म बँटकर एक-एक
काम लेने लगे, काम कतनी तेजी से हुआ — जब क पहले सब मलकर सब कुछ कर रहे थे। तीसरी, हमारे प्रधानाचाय और सफाई
कमचारी एक ही झाड़ू लेकर साथ-साथ काम कर रहे थे और कसी को यह अटपटा नह लगा — इससे मुझे श्रम क ग रमा के बारे म
कसी भी पाठ से अ धक समझ आया। चौथी, सुबह हम दे खने वाले दुकानदार ने शाम तक अपनी दुकान के आगे स्वयं झाड़ू लगा
ली थी, बना कहे। एक महीने बाद भी वह गली पहले से स्वच्छ थी, यद्य प उस दन जतनी नह — इस लए हमने तय कया क यह
हर दूसरे महीने दोहराएँगे।”
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व
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यह उत्तर लखने का सुझाव: परीक्षक अवलोकन दे खना चाहते ह, प्रशंसा नह । कम-से-कम एक संख्या द जए
mअगली बार
( कतने लोग, कतने घंटे, कतने पौधे), एक बात जो योजना के अनुसार नह हुई, और एक बातeजो
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co। इससे साधारण अनुच्छेद एक वास्त वक ववरण बन जाता है। agl a
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आप अलग करगे
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agवl ालय के कायक्रम उस दन से आगे क्य महत्वपूण ह: पुस्तक कहती है क स्वच्छ भारत अ भयान “सभी
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भारतीय नाग रक ारा सामू हक प्रयास पर आधा रत है” और “इन सामू हक प्रयास से घर, आस-पास के क्षेत्र,
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समाज और राष्ट्र स्वच्छ रहता है।” वद्यालय का अ भयान वही स्थान है जहाँ एक नाग रक पहली बार ऐसा नाग रक
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बनने का अभ्यास करता है। इस वष आप जन पौध को पानी दे ते ह, दस वष बाद उन्ह क छाया म कोई बैठेगा।
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आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 193
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अध्याय तीन बदुओं
आगेla
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बढ़ने से पहले . ..
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प्र.1 इस अध्याय म हमने आ थक और गैर-आ थक ग त व धय के बारे म सीखा।
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उत्तर a
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पूरा अध्याय एक ही वभाजक रेखा पर टका है, और उसे एक साँस म कह पाना आना चा हए।
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आिथकomगितिविध — इसमें अथ सिम्मिलत होता है, अथवा यह वस्त ु के नकद मूlल्aय sकeे बदले की जाती है m
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aseगै र आिथ क गितिविध
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- — इसमे ं आय या सं प ित्त अिजत नही ं होती; यह कृ त ज्ञता , स्ने ह, सेवा और आदर के भाव
से की जाती है
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
आ थक ग त व ध गैर-आ थक ग त व ध
धन सिम्मिलत? हाँ — धन या वस्तु के नकद मूल्य का ले न-दे न होता नही ं
है
उ े श्य अथ पाजन तथा वस्तुओ ं और से वाओं का उत्पादन सहायता, स्नेह, कु छ लौटाना, से वा
अध् याय के बाजार में स्कू ल बैग बेचना; उपज बेचता िकसान; पिरवार के िलए भोजन बनाना; बच्चों को ग ृहकाय में सहायता;
उदाहरण शुल्क ले ती वकील; सामान ले जाता टक चालक; बुजगु ं की से वा करते युवा; िमलकर घर का नवीनीकरण; िन:शुल्क
कार कारखाने के श्रिमक; वायु से ना में गीता मौसी; भूग ोल की कक्षाएँ; िसलाई समूह; से वा और लंग र; स्वच्छ भारत
कु स बेचते राजेश अिभयान; वन महोत्सव
भुग तान का रूप वेतन, मजदू र ी, शुल्क, वस्तु के रूप में भुग तान अथवा कोई भुग तान नही ं — पितफल है संतिु ष्ट, कृ तज्ञता तथा सुदृ ढ़
लाभ पिरवार और समुद ाय
दे श की आय में हाँ पाय: नही ं — इसीिलए यह काय इतनी सरलता से अनदे खा रह
िगना जाता है? जाता है
दोहराने के लए एक पं क्त: अंतर भुगतान का है, व्य क्त का नह और काय के महत्व का तो बलकुल नह । एक
ही व्य क्त एक दन म दोन कर सकता है, और एक ही काय एक व्य क्त के लए आ थक तथा दूसरे के लए गैर-
आ थक हो सकता है।
प्र.2 हमने आ थक ग त व धय से उत्पन्न मूल्य संवधन के बारे म भी सीखा।
मूल्य संवधन का अथ है कसी वस्तु को दूसरे रूप म बदलने के हर चरण पर उसके मूल्य म होने वाली वृ । पृष्ठ 189 —
आ थक ग त व धय से “ कसी वस्तु के अन्य रूप म रूपांतरण क प्र क्रया के प्रत्येक चरण पर उसके मूल्य म भी वृ द्ध होती है। इसे
मूल्य संवधन कहते ह।”
िकसी चरण पर जुड़ा मूल्य = जो िनकला उसका मूल्य − जो लगा उसकी लागत
राजेश: ₹1000 − ₹600 = ₹400
यह केवल बढ़ई तक सी मत नह है। खेत से लेकर अनु के माता- पता क दुकान तक एक कमीज का सफर दे खए और हर जोड़ी
हाथ पर मूल्य बढ़ता दे खए —
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चरण कौन काम करता है वस्तु क्या बनती है मूल्य कससे जुड़ा
1 िकसान कपास उगाई और चुनी जुताई, बुवाई, िसंचाई, कटाई
गई
2 ओटाई और कताई िमल का कपास से धागा सफाई, ध नु ाई और कताई
श्रिमक
3 बुनकर / पावरलूम श्रिमक धागे से कपड़ा बुनाई, रँग ाई, छपाई
4 दज कपड़े से कमीज कटाई, िसलाई, िफिनिशंग
5 टक चालक कमीज नगर तक पहच
ुँ ी पिरवहन — गोदाम में रखी कमीज का मूल्य दुक ान में रखी कमीज
से कम है
6 दुक ानदार (अनु के माता-िपता) कमीज ग ाहक तक सही नाप रखना, सजाना, सलाह दे ना, बेचना
पहुच
ँ ी
यह वचार महत्वपूण क्य है: यह ठ क-ठ क बताता है क अथव्यवस्था म धन कहाँ से आता है — काय से, कह
और से नह । अं तम मूल्य का हर रुपया इस ंखला के कसी न कसी चरण पर कसी के कौशल, समय और प्रयास
का मूल्य है। यह भी समझ म आता है क केवल क ा माल बेचने वाला दे श उससे कह कम कमाता है जो उसे
संसा धत भी करता है — क्य क मूल्य काम करने से जुड़ता है, केवल रखने से नह ।
प्र.3 हमने समझा क गैर-आ थक ग त व धयाँ कस प्रकार सामा जक कल्याण एवं नजी कल्याण म योगदान दे ती ह
और जीवन क समग्र गुणवत्ता को बढ़ाती ह।
तीन बात को अलग-अलग ली जए — अध्याय हर एक का उदाहरण दे ता है।
कसम अथ अध्याय का उदाहरण
योगदान
सामािजक अपने पिरवार से बाहर के लोगों का िहत लंगर , जहाँ “सभी श्र ालुओ ं को िन:शुल्क भोजन कराया जाता है”; स्वच्छ भारत
क ल्याण — पड़ोस, समुद ाय, रा अिभयान, िजसके “सामूिहक पयासों से घर, आस-पास के क्षेत्र , समाज और रा
ृ ारोपण अिभयान
स्वच्छ रहता है”; वन महोत्सव के वक्ष
िनजी क ल्याण जो काय करने वाले को और उसके इन काय ं से “हमें संतिु ष्ट और कृ तज्ञता की अनुभिू त होती है”; अिभभावकों का
िनकट के लोगों को िमलता है भोजन बनाना और ग हृ काय में सहायता; बुजगु ं की से वा करते युवा
जीवन की वह सब जो िकसी स्थान को रहने योग्य स्वच्छ गिलयाँ और पाक , वृक्ष और छाया, ऐसे त्योहार िजनमें सिम्मिलत होना
समग ग ण
ु वत्त ा बनाता है और िजसे कोई अके ले वेतन अच्छा लगे, ऐसे पड़ोसी िजन पर भरोसा हो
से नही ं खरीद सकता
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समाज को दोन प्रकार क ग त व धयाँ क्य चा हए। आ थक ग त व धयाँ दे श को वस्तुए,ँ सेवाएँ और आय दे ती ह। गैर-आ थक
ग त व धयाँ वह दे ती ह जो आ थक ग त व धयाँ खरीद नह सकत — स्नेह, व ास, ऐसी स्वच्छता जो सफाईकम के जाने के बाद
भी बनी रहे, और ऐसे नाग रक जो कोई काम केवल इस लए कर द क उसे कया जाना चा हए। जस स्थान पर पहली वस्तु बहुत हो
और दूसरी बलकुल न हो, वह धनी तो होगा कतु रहने योग्य नह । यह अध्याय आपसे दोन को दे खने और दोन का सम्मान करने
को कहता है।
अध्याय का समापन- वचार, पृष्ठ 183 पर ववेकानंद के शब्द म: “जब आप कोई काम कर रहे ह , उससे बाहर
कुछ न सोच। उसे पूजा क तरह कर, सबसे बड़ी पूजा क तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे सम पत कर
द।” वे कसी बड़े काम क बात नह कर रहे। वे कह रहे ह क काय का मूल्य इस बात म है क वह कैसे कया गया,
इसम नह क उसका कतना भुगतान मला — और इसी लए वमान चालक, बुलडोजर तकनी शयन, खेत का
श्र मक, दुकानदार, सब्जी उद्यान म लगे दादा जी और रसोई म लगे अ भभावक — सब एक ही अध्याय म साथ खड़े
ह।
प्रश्न, ग त व धयाँ और प रयोजनाएँ — पृष्ठ 193
अध्याय के अंत का अभ्यास
प्र.1 आ थक ग त व धयाँ कस प्रकार गैर-आ थक ग त व धय से भन्न होती ह?
अंतर केवल एक बात का है — धन या वस्तु के नकद मूल्य का लेन-दे न हुआ या नह । शेष सब इसी से नकलता है।
आिथक गितिविधयाँ “वे है ं िजनमें अथ (दव्य, मुदा) सिम्मिलत होता है अथवा िजन्हे ं अथ पाजन के िलए िकया
ं ” (पृष्ठ 185)
जाता है अथवा जो सिम्मिलत पक्षों के िलए वस्त ु के नकद मूल्य से संबंिधत होती है।
गैर-आिथक गितिविधयाँ “वे है ं िजनमें आय अथवा संपित्त अिजत नही ं होती है, बिल्क इन्हे ं कृतज्ञता, स्ने ह, सेवा
और आदर जै सी अनुभ ूितयों के साथ िकया जाता है।” (पृष्ठ 186)
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अंतर का आ थक ग त व धयाँ गैर-आ थक ग त व धयाँ
आधार
1. धन धन या वस्तु के नकद मूल्य का ले न-दे न होता है धन का कोई ले न-दे न नही ं
2. उ े श्य अथ पाजन; दू स रों के िलए वस्तुए ँ और से वाएँ उत्पन्न कृ तज्ञता, स्नेह, से वा, आदर, कु छ लौटाने का भाव
करना
3. आय या करने वाले को आय और संपित्त िमलती है कोई आय नही ं होती
संपित्त
4. भुग तान का वेतन, मजदू र ी, शुल्क, वस्तु के रूप में भुग तान — कोई भुग तान नही ं; पितफल है संतिु ष्ट और कृ तज्ञता
रूप अथवा व्यवसाय में लाभ
5. सामान्यत: ग ाहक, िनयोक्ता, पक्षकार — पाय: पिरवार से बाहर के पिरवार, पड़ोस, समुद ाय, रा
िकसके िलए लोग
6. मूल्य हर चरण पर मूल्य जोड़ती है ं — ₹600 की लकड़ी जीवन में मूल्य जोड़ती है,ं िकं तु ऐसा मूल्य नही ं जो रुपये में आँक ा
संवध न ₹1000 की कु स बनती है जाए
7. उदाहरण स्कू ल बैग बेचता व्यापारी; उपज बेचता िकसान; शुल्क पिरवार के िलए भोजन बनाते अिभभावक; बच्चों को ग ृहकाय में
ले ती वकील; टक चालक; कार कारखाने के श्रिमक; सहायता; बुजगु ं की से वा करते युवा; िमलकर घर का नवीनीकरण;
िवमान चालक गीता मौसी; डाकघर में काव्या की दादा जी की िन:शुल्क कक्षाएँ; िसलाई समूह; से वा और लंग र;
चाची; श्रिमक सािहल स्वच्छ भारत अिभयान; वन महोत्सव
जो अंतर नह है: महत्व का। दोन प्रकार के काय आवश्यक ह और दोन समान सम्मान के अ धकारी ह। एक ही
ग त व ध केवल व्यवस्था बदलने से एक स्तंभ से दूसरे म चली जाती है — घर म भोजन बनाना गैर-आ थक है; वही
भोजन होटल म बनाना आ थक है। य द अंतर काय के महत्व का होता तो यह अदला-बदली संभव ही न होती।
परीक्षा-सुझाव: इस प्रश्न का उत्तर 4–6 आधार वाली ता लका म ल खए और अंत म एक वाक्य अवश्य जो ड़ए
क अंतर भुगतान का है, काय क ग रमा का नह । यही अं तम वाक्य पूरे अंक दलाता है।
प्र.2 लोग कस प्रकार क आ थक ग त व धय म स म्म लत होते ह? उदाहरण स हत समझाइए।
लोग मुख्यत: चार प्रकार से जी वका अ जत करते ह, और यह अध्याय हर प्रकार के लए एक वास्त वक पात्र दे ता है।
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आ थक व्य क्त क्या करता है अध्याय से उदाहरण भुगतान का रूप
ग त व ध का
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प्रकार
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aउपज ले ना
1. पकृ ित से भूिम से भोजन और कच्चा बाजार में उपज बेचता िकसान; टैक्टर से खेत जोतता फसल की िबक्री; दै िनक
माल उत्पन्न करता है श्रिमक सािहल ; आम का बगीचा मजदू री , कु छ नकद और
कु छ वस्त ु के रूप में
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भ ुगतान
l a seकी लकड़ी से कु स बनाते बढ़ ई
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2. वस्तुए ँ बनाना कच्चे माल को उपयोगी बनी ₹600 ; कार बनाने पत्येक वस्तु की िबक्री पर
हुई वस्तु में बदलता है — यही a
राजेश
वाले कारखाने कश्र
े िमक ल ाभ ; कारखाने के श्रिमकों
मूल्य संवधन सबसे स्पष्ट को वेतन या मजदू री
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िदखता है
m जहाँ वे बनती है ं और वहाँ
क्रय-िवक्रय
l a se — माल, दुकान और
( यापार ) .co
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, जहाँ वेशभूषा और िसले हुए वस्त्र िबकते है ं g
3. वस्तुओ ं को वहाँ से लाता है ; अन ु के माता-िपता की
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कू ल बैग बेचने वाल ा यापारी ल ाभ
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व् कमचािरयों का व्यय
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द ुक ान
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पहच
ु ँ ाता है जहाँ उनकी िनकालने के बाद बची
a आवश्यकता है धनरािश
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comयर इंजीिनयर ; बुलडोजर agl
4. से वाएँ दे ना कोई वस्तु नही ं, अपना िवमान चालक गीता मौसी; बहस करती वकील ; टक कमचािरयों को वेतन;
.
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कौशल, दे खभाल, सुर क्षा या ; सॉफ्टवे
चाल क रोहन व्यावसाियक व्यिक्त को
a s व् पत्येक से वा का शल्ु क
agl कम
सुिवधा दे ता है तकनीिशयन ; डाकघर तथा ऑनलाइन
का या के चाचा
कक्षाओं वाली व् ; िचिकत्सक, िशक्षक, बैक
का या की चाची ं
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एक ही प रवार चार म से तीन प्रकार पूरे कर दे ता है। काव्या क चाची गाँव के डाकघर से वेतन पाती ह और ऑनलाइन कक्षाओं
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omघर, तीन प्रकार क आ थक ग त व ध, भुगतान के तीन रूप। l
का साप्ता हक शुल्क लेती ह; काव्या के चाचा नमाण तकनी शयन के रूप म वेतन पाते ह; काव्या के पता राजेश फन चर बनाकर
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बेचते ह।
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agl क्या आप जानते ह? इस अध्याय से आगे अथशास्त्री इन चार समूह को औपचा रक नाम दे ते ह। प्रकृ त से उपज
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omअध्याय म मौजूद है, केवल नाम नह दए गए ह। a
लेना प्राथ मक क्षेत्र है; वस्तुएँ बनाना तीयक क्षेत्र; और व्यापार तथा सेवाएँ मलकर तृतीयक क्षेत्र बनाते ह। ये
शब्द आप ऊपर क कक्षा म पढ़गे — वचार तोcइसी
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aglहै: कसान क कपास तब तक व्यथ है जब तक उसे कातने वाली मल, सलने
चार म से हर एक क्य आवश्यक
वाला दज , ढोने वाला ट्रक और बेचने वाली दुकान न हो। ंखला क कोई एक कड़ी काट द जए, शेष सब रुक
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जाएगा। कोई भी आ थक ग त व ध दूसरी से बड़ी नह है — हर एक इसी लए है क दूसर को उसक आवश्यकता
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है।
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प्र.3 सामुदा यक सेवा ग त व धय म लगे लोग अत्य धक सम्माननीय ह। इस कथन पर टप्पणी क जए।
यह कथन सही है, और अध्याय ठ क-ठ क बताता है क्य । सामुदा यक सेवा म लगे लोग को कुछ भी नह मलता, अत: पृष्ठ
186 क प रभाषा के अनुसार उनका काय गैर-आ थक है। फर भी पृष्ठ 191 इसी खंड का आरंभ उसी वाक्य से करता है जो इस
प्रश्न का उत्तर है — “गैर-आ थक ग त व धय म धनरा श स म्म लत नह होती है, फर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन म महत्व
रखते ह।”
ऐसे लोग अत्य धक सम्माननीय क्य ह — पाँच कारण
वे बदले म कुछ नह चाहते। पृष्ठ 192 कहता है क ये सेवा काय “ न:स्वाथ भाव से समाज म योगदान दे ते ह।” यही सेवा है,
और यह भारतीय जीवन के सबसे पुराने वचार म से एक है। गुरु ारे का लंगर “सभी श्रद्धालुओं को न:शुल्क भोजन” कराता है
— सभी को, बना यह पूछे क कौन है।
वे वह काम करते ह जो धन से नह हो पाता। कसी नगरपा लका के पास इतने कमचारी नह क हर गली स्वच्छ रहे। स्वच्छ
भारत अ भयान इस लए सफल है क साधारण नाग रक स्वयं यह करते ह, और “इन सामू हक प्रयास से घर, आस-पास के
क्षेत्र, समाज और राष्ट्र स्वच्छ रहता है।”
वे उन तक पहुँचते ह जहाँ और कुछ नह पहुँचता। दादा जी क न:शुल्क भूगोल क कक्षा, म हलाओं को सलाई सखाने
वाला स्वै च्छक समूह, युवा वकास कायक्रम म रोहन क सप्ताहांत कक्षाएँ — हर एक कसी को ऐसा कौशल दे ती है जो शायद
उसे और कह से न मलता। आज न:शुल्क दया गया कौशल कल कसी क जी वका बन जाता है।
वे अपने जीवनकाल से आगे सोचते ह। वन महोत्सव “वृक्ष के महत्व और वन संरक्षण के प्र त जागरूकता” के लए समुदाय
को वृक्षारोपण हेतु एकत्र करता है। वन महोत्सव म पेड़ लगाने वाला प्राय: उसक छाया म स्वयं कभी नह बैठता।
वे ऐसा उदाहरण रखते ह जो फैलता है। कचरा अलग करने वाला एक प रवार पूरी गली बदल दे ता है; एक स्वच्छ गली पूरी
कॉलोनी बदल दे ती है। सामुदा यक सेवा इस तरह बढ़ती है जैसे कोई वेतन वाला काम प्राय: नह बढ़ पाता।
गहरी बात: समाज दो अलग-अलग चीज से बँधा रहता है — लेन-दे न, जहाँ म आपको कुछ इस लए दे ता ँ क
आप भुगतान करते ह, और सेवा, जहाँ म आपको कुछ इस लए दे ता ँ क आपको आवश्यकता है। पहली को धन
सँभाल लेता है। दूसरी को केवल ऐसे लोग सँभालते ह। इसी लए अध्याय इन्ह सम्मान दे ने को कहता है — शष्टाचार
के नाते नह , ब ल्क इस लए क इनके बना समाज सचमुच नह चलता।
अपने जीवन से उदाहरण द जए: इस प्रश्न का अच्छा उत्तर कसी एक वास्त वक व्य क्त का नाम लेता है —
न:शुल्क पढ़ाने वाला पड़ोसी, रक्तदान श वर लगवाने वाले चाचा, हर गम म तालाब साफ करने वाला समूह —
और बताता है क वे रुक जाएँ तो क्या नह रहेगा। वह एक ठोस उदाहरण पन्ने भर क प्रशंसा से अ धक मूल्यवान है।
प्र.4 व भन्न आ थक ग त व धय के लए लोग को कस- कस प्रकार से पा रश्र मक दया जाता है? उदाहरण द जए।
अध्याय चार रूप बताता है और हर एक क प रभाषा हा शये पर दे ता है; अपना काम स्वयं करने वाल के लए पाँचवाँ रूप
भी है।
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पा रश्र मक पुस्तक क प रभाषा कब मलता है उदाहरण
का रूप
वेतन “एक िनयोक्ता ारा कमचारी को हर माह उतनी ही िवमान चालक गीता मौसी; सॉफ्टवेयर इंजीिनयर
िनयिमत रूप से पितमाह िकया जाने रािश, चाहे उस िदन रोहन ; िनम ण तकनीिशयन काव्या के चाचा; गाँव के
वाला िनयत भुग तान” (पष्ृ ठ 187) का काम कै सा भी रहा डाकघर में काव्या की चाची; िशक्षक, बैक
ं कम , नस
हो
मजदू र ी “एक िविशष्ट समय अविध के िलए िदन या घंटे के िहसाब सािहल , खेत का श्रिमक, िजसे “दै िनक मजदू र ी”
िनयोक्ता ारा श्रिमक को िकया गया से , पाय: उसी अविध िमलती है; िनम ण स्थल के राजिमस्त्री, सहायक और
भुग तान” (पष्ृ ठ 189) के अंत में पल्ले द ार
शुल्क “िकसी व्यावसाियक परामश या पत्येक दी गई से वा पर “अिभयोजन का शुल्क” ले ती वकील ; िचिक त्सक का
से वाओं के िलए एक व्यिक्त या एक बार परामश शुल्क; काव्या की चाची की परीक्षा-तैयारी
संग ठन को िकया गया भुग तान” कक्षाओं का साप्तािहक शुल्क
(पष्ृ ठ 185)
वस्तु के रूप में “िकए गए काय के िलए पाप्त िकया नकद के साथ, या सािहल को शेष भुग तान “आमों के रूप में” िमलता है;
भुग तान गया गैर -मौिद क भुग तान” (पष्ृ ठ नकद के स्थान पर अनाज के रूप में भुग तान पाने वाले खेत-श्रिमक; ऐसी
189) नौकरी िजसमें आवास या भोजन िन:शुल्क िमले
लाभ (स्वरोजगार अध्याय में पिरभािषत नही ं, िकं तु जब भी िबक्री हो; हर बढ़ ई राजेश: ₹1000 − ₹600 की लकड़ी − उपकरण
वालों के िलए) िदखाया गया है — सामग ी और सब सप्ताह अलग-अलग और सामग ी का व्यय; अन ु के माता-िपता की वस्त्र
व्यय िनकालने के बाद जो बचे दुक ान; स्कू ल बैग बेचने वाला व्यापारी; अपनी उपज
बेचने वाला िकसान
भुगतान का रूप कैसे तय होता है: यह इस पर नभर करता है क काय कस व्यव ा म हो रहा है। एक ही
नयोक्ता के साथ नय मत, नरंतर काम के लए वेतन उपयुक्त है — आप अपने समय क उपलब्धता के लए
भुगतान पाते ह। जो काम केवल कुछ दन मले उसके लए मजदूरी — आप उन्ह दन का पाते ह जन दन काम
कया। एक व्य क्त के लए एक बार प्रयुक्त कौशल के लए शुल्क। और वस्तु के रूप म भुगतान वहाँ सु वधाजनक
है जहाँ उपज प्रचुर हो और नकद कम — इसी लए यह खेती म आम है और इसी लए सा हल “समान मूल्य” के आम
लेकर घर जाता है। अपना काम करने वाले को सबसे अंत म, बची हुई रा श से भुगतान मलता है — वही लाभ है।
सावधान — परीक्षा का प्रय भ्रम: वेतन नयत होता है और सामान्यत: मा सक; मजदूरी एक व शष्ट समय अव ध
— जैसे एक दन या एक घंटे — के लए होती है। हर माह क पहली तारीख को ₹12,000 पाने वाला दुकान का
सहायक वेतन पाता है। जस दन आए उसी दन शाम को ₹500 पाने वाला सहायक मजदूरी पाता है। दुकान एक
ही, शब्द दो अलग।
अध्याय — एक नज़र म
अध्याय का मूल वचार — हर ईमानदार काय मूल्यवान है, चाहे उसके लए कोई भुगतान न मले। अध्याय स्वामी
ववेकानंद के इस कथन से आरंभ होता है — “जब आप कोई काम कर रहे ह , उससे बाहर कुछ न सोच। उसे पूजा क तरह
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
कर, सबसे बड़ी पूजा क तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे सम पत कर द।” कोई वमान चलाए, बुलडोजर चलाए,
कपड़े सले, खेत जोते, प रवार के लए भोजन बनाए या पड़ोस के ब को न:शुल्क पढ़ाए — हर काय सम्मान का पात्र है।
सभी ग त व धयाँ दो समूह म बँटती ह — आ थक और गैर-आ थक। पृष्ठ 185 पहली क प रभाषा दे ता है — “आ थक
ग त व धयाँ वे ह जनम अथ (द्रव्य, मुद्रा) स म्म लत होता है अथवा जन्ह अथ पाजन के लए कया जाता है अथवा जो
स म्म लत पक्ष के लए वस्तु के नकद मूल्य से संबं धत होती ह।” पृष्ठ 186 दूसरी क — “गैर-आ थक ग त व धयाँ वे ह
जनम आय अथवा संप त्त अ जत नह होती है, ब ल्क इन्ह कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभू तय के साथ कया
जाता है।” कसौट यह नह क काय कतना क ठन या कतना उपयोगी है — कसौट केवल यह है क धन या वस्तु का नकद
मूल्य हस्तांत रत हुआ या नह ।
एक ही व्य क्त प्राय: एक ही दन म दोन प्रकार के काय करता है। गीता मौसी वायु सेना म वमान चालक ह और उन्ह
वेतन मलता है (आ थक); रोहन सॉफ्टवेयर कंपनी से वेतन पाता है (आ थक) और सप्ताह के अंत म युवा वकास कायक्रम म
न:शुल्क कंप्यूटर सखाता है (गैर-आ थक); काव्या क चाची गाँव के डाकघर म प्र तमाह वेतन पाती ह, शाम क ऑनलाइन
कक्षाओं के लए साप्ता हक शुल्क लेती ह, और सुबह उठकर “अपना घरेलू काम” भी नपटाती ह — जसके लए उन्ह कुछ
भी नह मलता।
लोग को भुगतान चार अलग-अलग रूप म मलता है, और पुस्तक हर एक क प रभाषा हा शये पर दे ती है — वेतन
“एक नयोक्ता ारा कमचारी को नय मत रूप से प्र तमाह कया जाने वाला नयत भुगतान” (पृष्ठ 187); मजदूरी “एक
व शष्ट समय अव ध के लए नयोक्ता ारा श्र मक को कया गया भुगतान” (पृष्ठ 189); शुल्क “ कसी व्यावसा यक परामश
या सेवाओं के लए एक व्य क्त या संगठन को कया गया भुगतान” (पृष्ठ 185); और वस्तु के रूप म भुगतान “ कए गए काय
के लए प्राप्त कया गया गैर-मौ द्रक भुगतान” (पृष्ठ 189) — जैसे सा हल को नकद मजदूरी के साथ मलने वाले आम।
आ थक काय हर चरण पर मूल्य बढ़ाता है — यही मूल्य संवधन है (पृष्ठ 189–190)। बढ़ई राजेश ₹600 क लकड़ी
खरीदते ह और बनी हुई कुस ₹1000 म बेचते ह। शेष ₹400 कोई जादू नह है — “यह राजेश के कौशल, समय और प्रयास
का मौ द्रक मूल्य है जो उन्ह उस कुस को बनाने म लगा था।” सस्ती लकड़ी को उपयोगी कुस म बदलने वाला काय ही वह
मूल्य जोड़ता है।
गैर-आ थक काय का मूल्य धन से कभी नह नापा जा सकता। अध्याय दो सुंदर उदाहरण दे ता है — सेवा, जो “मं दर ,
गुरु ार , म स्जद और गरजाघर ” म दखाई दे ती है और जसका सबसे जाना-पहचाना रूप लंगर या सामुदा यक रसोई है;
और सामुदा यक सहभा गता, जो स्वच्छ भारत अ भयान तथा वन महोत्सव म दखती है, जहाँ वृक्षारोपण अ भयान के
लए “समुदाय के सदस्य को एक साथ लाया जाता है”। ये सब “ न:स्वाथ भाव से समाज म योगदान” दे ते ह।
सबसे अ धक अनदे खा रह जाने वाला काय घर का काय है। प रवार के लए भोजन बनाना, ब को वद्यालय के काय म
सहायता दे ना, बीमार बुजुग क दे खभाल करना, घर के छोटे -बड़े काम नपटाना — पृष्ठ 186 इन सबको गैर-आ थक
ग त व धयाँ बताता है। कसी वेतन-पच म इनका नाम नह आता, कतु इनके बना घर का कोई भी सदस्य काम पर जा ही नह
सकता। इस काय को पहचानना, घर के सभी सदस्य म इसे न्यायपूण ढं ग से बाँटना और इसे करने वाले का सम्मान करना —
यही इस अध्याय क असली सीख है।
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कक्षा 6 सामा जक वज्ञान अध्याय 13 काय का महत्व AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म याद रखने योग्य
कहाँ
आ थक वह गितिविध “िजसमें अथ (द व्य, मुद ा) सिम्मिलत होता है पृष्ठ 185 कसौट लेन-दे न है, प रश्रम नह — वमान
गतवध अथवा जो सिम्मिलत पक्षों के िलए वस्तु के नकद मूल्य से चालक, कसान, ट्रक चालक, कारखाने का
संबंिधत होती है” श्र मक
गैर-आ थक वह गितिविध “िजसमें आय अथवा संपित्त अिजत नही ं होती, पृष्ठ 186 धन नह — कतु “मूल्य नह ” कभी नह
गतवध बिल्क िजसे कृ तज्ञता, स्नेह, से वा और आदर जैस ी
अनुभिू तयों के साथ िकया जाता है”
वस्तु का “िकसी वस्तु का व्यिक्त ारा तय िकया गया मौिद क मूल्य जो पृष्ठ 185, इसी से आम म मला भुगतान भी भुगतान गना
नकद मूल्य िक उस वस्तु से िमलने वाले लाभ पर आधािरत होता है” हा शया जाता है
बाजार “वह स्थान जहाँ व्यिक्त वस्तुओ ं और से वाओं का ले न-दे न पृष्ठ 185, वस्तु के बदले वस्तु भी हो सकती है, “ कतु
करते है”ं हा शया अ धकांशत: बाजार म इनका लेन-दे न धनरा श
के लए कया जाता है”
शुल्क “िकसी व्यावसाियक परामश या से वाओं के िलए एक व्यिक्त पृष्ठ 185, च कत्सक, वक ल — और काव्या क चाची क
या संग ठन को िकया गया भुग तान” हा शया ऑनलाइन कक्षाओं का साप्ता हक शुल्क
वेतन “एक िनयोक्ता ारा कमचारी को िनयिमत रूप से पितमाह पृष्ठ 187, गीता मौसी, रोहन, काव्या के चाचा और चाची —
िकया जाने वाला िनयत भुग तान” हा शया सभी को वेतन मलता है
मजदूरी “एक िविशष्ट समय अविध के िलए िनयोक्ता ारा श्रिमक को पृष्ठ 189, सा हल को दै नक मजदूरी मलती है — वेतन
िकया गया भुग तान” हा शया मा सक, मजदूरी दन या घंटे के हसाब से
वस्तु के रूप “िकए गए काय के िलए पाप्त िकया गया गैर -मौिद क पृष्ठ 189, सा हल को मलने वाले “समान मूल्य” के आम
म भुगतान भुग तान” हा शया — नकद के स्थान पर वस्तु
मूल्य संवधन िकसी वस्तु के “अन्य रूपों में रूपात
ं रण की पिक्रया के पत्येक पृष्ठ 189– ₹1000 − ₹600 = ₹400, अथात् राजेश के
चरण पर” उसके मूल्य में होने वाली वृि 190 कौशल, समय और प्रयास का मौ द्रक मूल्य
सेवा िन:स्वाथ भाव से िकया गया काय, जो “मंिदरों, ग रु
ु ारों, पृष्ठ 191 गुरु ारे का लंगर हर आगंतुक को न:शुल्क
मिस्जदों और िगरजाघरों” में िदखाई दे ता है भोजन कराता है
स्वच्छ भारत अपने आस-पास सफाई रखने के िलए “सभी भारतीय पृष्ठ 192 दखाता है क सामुदा यक सहभा गता वह कर
अ भयान नागिरकों ारा सामूिहक पयासों पर आधािरत” अिभयान सकती है जो कोई अकेला नह कर सकता
वन महोत्सव “वृक्षों के महत्व और वन संर क्षण के पित जागरूकता लाने के पृष्ठ 192– “इस प्रयास से वृक्षारोपण अ भयान के लए
िलए” मनाया जाने वाला उत्सव 193 समुदाय के सदस्य को एक साथ लाया जाता है”
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