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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 14: हमारे आस-पास क आ थक
ग त व धयाँ
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
195 – 208 10 15 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 25 pages
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 14: हमारे आस-पास क आ थक
ग त व धयाँ
कक्षा 6 सामा जक व ान के अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ (पुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) के
संपूण एन.सी.ई.आर.ट . समाधान। पुस्तक के इस अं तम अध्याय का प्रत्येक प्रश्न हल कया गया है — महत्वपूण प्रश्न, दोन आइए वचार कर बॉक्स,
तीन आइए पता लगाएँ बॉक्स (पृष्ठ 205 के चत्र 14.1 के सभी चत्र का पूरा वग करण स हत), पृष्ठ 204 का अमूल के उत्पाद वाला पाठ्य प्रश्न,
ध्यान रख बॉक्स का सहकारी संगठन वाला प्रश्न, आगे बढ़ने से पहले... तथा प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ के तीन प्रश्न — साथ म तीन
क्षेत्रक का चत्र, अमूल क दुग्ध ंखला का ‘खेत से थाली तक’ प्रवाह चत्र और भारत क वास्त वक फसल , कारखान , खदान तथा सेवाओं क
क्षेत्रकवार ता लकाएँ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6) 195 – 208
खं ड प्रश्न
10 15
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 195
अध्याय का आरंभ
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 आ थक ग त व धय को कस प्रकार वग कृत कया जाता है?
उत्तर
आ थक ग त व धय को तीन आ थक क्षेत्रक म वग कृत कया जाता है — प्राथ मक क्षेत्रक, तीयक क्षेत्रक और तृतीयक
क्षेत्रक। पृष्ठ 196 इसका आधार बताता है — “कुछ आ थक ग त व धय म समान वशेषताएँ होती ह और इनके आधार पर इन्ह एक
व्यापक समूह म वग कृत कया जा सकता है, जन्ह आ थक क्षेत्रक कहते ह। प्राथ मक, तीयक और तृतीयक तीन प्रकार के मुख्य
आ थक क्षेत्रक ह।”
पाथिमक — कच्चा माल सीधे पकृ ित से िलया जाता है
ि तीयक — उसी कच्चे माल को रूपांत िरत करके नई वस्त ु बनाई जाती है
त ृत ीयक — इन दोनों को सहारा दे ने वाली सेवाएँ दी जाती है ं
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
तीन आिथक क्षेत्रक
पाथिमक क्षे त्र क ि तीयक क्षे त्र क तृतीयक क्षे त्र क
सीधे पकृित से रूप बदलकर नई वस्तु दोनों के िलए सेवाए ँ
• पंजाब में गेहू ँ की खेती • आटा िमल, चीनी िमल • रेल, टक, बस — पिरवहन
• झिरया में कोयला खनन • कोयंबटूर की सूती िमल • बै ंक, डाकघर, यू.पी.आई.
• कोिच्च के पास मछली पकड़ ना • िभलाई का इस्पात संयंत्र • मंड ी, दुकान, गोदाम
• आणंद में दुग्ध पश ु पालन • मानेसर में कार िनम ण • िचिकत्सक, नस, िशक्षक
• कुक्कुट पालन फाम से अंडे • सड़ क और पुल का िनम ण • मोबाइल और इंटरनेट
• वािनकी — बाँस, साल, तेंद ू • जल-आपूित, िवद्यतु उत्पादन • बेगल
ं ुरु का सॉफ्टवेयर
तृतीयक सेवाएँ दोनों िदशाओं में चलती है ं
टक, बै ंक, व्यापारी और फोन हर क्षेत्रक के बीच वस्तु, धन और सूच ना पहु ँचाते है ं
पहचान की एक ही कसौटी — पकृित से िलया, िलए हुए को बदला, या दोनों की सेवा की?
िवदभ के खेत की कपास → सूरत की िमल का कपड़ ा → आपके कस्बे की दुकान की कमीज
भारतीय अथव्यवस्था के तीन क्षेत्रक, प्रत्येक म वास्त वक उदाहरण के साथ। तृतीयक क्षेत्रक नीचे इस लए दखाया गया है क्य क उसक
सेवाएँ तीन को छू ती ह।
वग करण क आवश्यकता क्य पड़ी। पृष्ठ 196 बताता है क पहले के समय म लोग मुख्यत: “कृ ष, पशुपालन, औजार का
नमाण, म के बतन बनाना और कपड़े बुनना” जैसी ग त व धय म लगे थे। आज लोग कंप्यूटर, मोबाइल फोन और ोन बनाते ह;
बक, वद्यालय और होटल म काय करते ह; वाहन चलाते ह; फन चर बनाते ह; मशीन से कपड़े सलते ह; सॉफ्टवेयर बनाते ह और
रे जरेटर तथा वॉ शग मशीन क मरम्मत करते ह। इतनी व वधता म “इन सभी ग त व धय के वग करण से हम यह समझने म
सहायता मलती है क ये कैसे काय करती ह और इनके मध्य क्या संबंध है।”
सुझाव: तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहते ह, क्य क इसम वस्तु नह , सेवा तैयार होती है। य द उत्पाद को
उठाकर घर नह ले जाया जा सकता, तो वह प्राय: तृतीयक ही होता है।
प्र.2 व भन्न आ थक ग त व धय को क्षेत्रक (सेक्टर ) म समूहबद्ध करने का क्या आधार है?
उत्तर
आधार यह है क प्रत्येक ग त व ध प्रकृ त के क े माल के साथ क्या करती है। केवल एक प्रश्न — सामग्री कहाँ से आई और
यह ग त व ध उसका क्या करती है? — हर ग त व ध को उसका सही क्षेत्रक दे दे ता है।
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क्षेत्रक ग त व ध क्या करती है पुस्तक क प रभाषा भारतीय उदाहरण, चरण दर
चरण
पाथिमक कच्चा माल सीधे पकृ ित से ले ती है। “िजन आिथक गितिविधयों में लोग पत्यक्ष िवदभ का िकसान अपने खेत से कपास
कु छ बनाया नही ं जाता — उगाया, रूप से वस्तुओ ं के उत्पादन के िलए पकृ ित चुनता है
पकड़ा, खोदा या पाला जाता है पर िनभर रहते है”ं (पष्ृ ठ 196)
ि तीयक उसी कच्चे माल का रूप बदलकर नई “िजनमें लोग पाथिमक क्षेत्र क पर आधािरत कोयंबटू र की िमल कपास से सूत
और अिधक उपयोगी वस्तु बनाती है वस्तुओ ं को रूपांतिरत करके अन्य वस्तु का कातती है, कपड़ा बुनती है और ितरुप्पूर
उत्पादन करते है”ं (पष्ृ ठ 199) की इकाई टी-शट िसलती है
ृ ीयक
तत कोई वस्तु नही ं बनाती। यह वह से वा वे गितिविधयाँ “जो पाथिमक और ि तीयक टक टी-शट ढोता है, बैक
ं इकाई को
दे ती है िजसके िबना शेष दोनों क्षेत्र क गितिविधयों में सिम्मिलत लोगों को सहायता ऋण दे ता है, दुक ानदार कमीज आपको
चल ही नही ं सकते पदान करती है”ं (पष्ृ ठ 200) बेचता है
परीक्षा म काम आने वाली तीन कसौ टयाँ।
1. क्या प्रकृ त सीधे आपू तकता है? य द काय म , जल, वन, खदान या पशु से जुड़ा है तो वह प्राथ मक है — धान क रोपाई,
केरल म रबड़ का दोहन, बैलाडीला म लौह अयस्क का खनन, राजस्थान म भेड़ पालन।
2. क्या साम ी का रूप बदला? ग ा प्राथ मक है, कतु कोल्हापुर क मल म उससे बनी चीनी तीयक है। लौह अयस्क
प्राथ मक है, भलाई का इस्पात तीयक। पुस्तक नमाण तथा पानी, बजली और गैस क आपू त को भी यह रखती है।
3. क्या उत्पाद वस्तु नह , सेवा है? तब वह तृतीयक है — प रवहन, व्यापार, ब कग, संचार, स्वास्थ्य, शक्षण, मरम्मत, भंडारण,
बीमा, सॉफ्टवेयर।
एक ही वस्तु तीन क्षेत्रक म क्य दखती है: क्य क क्षेत्रक कोई वस्तु नह , काय का चरण है। जब कसान गाय से
दूध नकालता है तो वह प्राथ मक है, जब डेयरी उसी दूध से घी बनाती है तो तीयक, और जब ट्रक घी को दुकान
तक ले जाता है तो तृतीयक। यह दे खए क व्य क्त क्या कर रहा है, यह नह क वस्तु क्या है।
प्र.3 यह तीन क्षेत्रक (सेक्टर) आपस म कस प्रकार संबं धत ह?
उत्तर
ये एक ही ंखला क क ड़याँ ह — प्राथ मक क्षेत्रक क ा माल दे ता है, तीयक उसे रूपांत रत करता है और तृतीयक
उसे ढोता, वत्त दे ता तथा बेचता है — और तीन म से कोई भी शेष दो के बना नह चल सकता। पृष्ठ 201 कहता है क तीन
क्षेत्रक “प्राकृ तक क े माल को अं तम उत्पाद म प रव तत करने म महत्वपूण भू मका नभाते ह।”
गुजरात के आणंद जले के एक गाँव से आपक थाली तक दूध का सफर दे खए।
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खेत से थाली तक — अमूल की दुग्ध शृंखला
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1. िकसान गाय का दूध दुहता है 2. गाँव का दुग्ध संगह केंद
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3. शीितत टै ंकर आणंद तक
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सुबह और शाम, अपने घर पर तौल और वसा की जाँच दूध के फटने से पहले
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पाथिमक तृतीयक तृतीयक
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6. खुदरा भंडार और दुकानें 5. लॉरी, रेल , वायुय ान , जहाज 4. दुग्ध पसंस्करण कारखाना
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पालर, िकराना दुकान कस्बों, नगरों और गाँवों तक — पाश्चुरीकरण, मक्खन, घी,
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और शीत अलमािरयाँ और अन्य देशों को िनय त पनीर, दूध का पाउडर
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तृतीयक तृतीयक ि तीयक
7. आपकी थाली मे ं दूध
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अंितम उपभोक्ता
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आपका िदया हुआ धन शृंखला में पीछे लौटता है — माह के अंत में िकसान तक पहु ँचता है
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l a se एक भी कड़ ी टू टी तो पूरी शृंखला रुक जाती है
a g गाय न हो तो दूध नही ं; कारखाना न हो तो दूध खराब; टक और दुकान न हों तो घी आणंद से बाहर ही नही ं जाएगा।
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अध्याय क अमूल ंखला, क्षेत्रकवार। हरा प्राथ मक, नारंगी तीयक और नीला तृतीयक है — दे खए कतने चरण सेवाओं के ह।
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पुस्तक स्वयं इस ंखला का सार दे ती है (पृष्ठ 204)। गाय को दुहना “प्राथ मक क्षेत्रक क आ थक ग त व ध” है “क्य क दुग्ध
उत्पादन एक प्राकृ तक ोत (गाय या मवेशी) से प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त कया जाता है।” कारखान म दूध को “एक रूप (तरल) से
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अन्य खाद्य रूप , जैसे – दूध का पाउडर, घी, पनीर, मक्खन” म बदलना तीयक ग त व ध है। और “यहाँ प रवहन, वपणन और
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खुदरा (फुटकर) वक्रेता तृतीयक ग त व ध म स म्म लत ह।”
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g । डेयरी को कसान का दूध
cे वल पं क्त नह , परस्पर नभरता क्य है: तीर केवल एक दशा म नह aचलते
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aseचा हए, कतु कसान को भी डेयरी चा हए — वरना उसका दूध फट जाएगा और उसका कोई मूल्य नह रहेगा। ट्रक
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को ढोने के लए माल चा हए और माल को पहुँचने के लए ट्रक। हर क्षेत्रक एक साथ दूसरे का ग्राहक भी है और
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आपू तकता भी। पृष्ठ 206 इसे ठ क इन्ह शब्द म कहता है — “इस प्र क्रया क कोई भी ग त व ध संभव नह होती,
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अगर यह तीन क्षेत्रक एक साथ काय नह करते
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आइए वचार कर — पृष्ठ 198
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आपने दे खी हुई प्राथ मक ग त व धयाँ और उनम प्रयुक्त प्राकृ तक संसाधन
आइए वचार कर
प्र.1 क्या आप ऐसी प्राथ मक ग त व धय के बारे म सोच सकते ह, जन्ह आपने पहले दे खा है? इन ग त व धय म
कौन-से प्राकृ तक संसाधन का प्रयोग हुआ है? इनम से दो के नाम बताइए और अपने अनुभव को सहपा ठय के
साथ साझा क जए।
उत्तर
यह “अपने आस-पास दे खए” वाला प्रश्न है, इस लए सबसे अ ा उत्तर वही होगा जो आपने सचमुच दे खा हो — रेल क
खड़क से, गाँव क यात्रा म, समुद्र तट पर या वद्यालय के रास्ते म। पहले ग त व ध ल खए, फर पू छए क वह प्रकृ त के कस
भाग से लेती है। हर प्राथ मक ग त व ध के पीछे कोई न कोई प्राकृ तक संसाधन होता है।
नमूना उत्तर:
मने दे खी हुई कहाँ प्रयुक्त प्राकृ तक संसाधन काय करने वाला क्या करता है
प्राथ मक
गतवध
1. धान की रोपाई अपनी दादी के गाँव िम ी और जल (नहर या नलकू प), तथा गीले खेत की जुताई करता है, हाथ से पौध की
जाते समय सड़क धूप; बीज भी धरती से ही िमलता है कतारे ं लगाता है, पानी भरता है, िनराई करता है
िकनारे के खेतों में और लगभग चार माह बाद कटाई करता है
2. छोटी नाव से तट के बंद रगाह पर, समुद और उसमें रहने वाली मछिलयाँ भोर से पहले नाव ले क र जाता है, जाल डालता
मछली पकड़ना तड़के सुबह — एक जैव संस ाधन, जो अत्यिधक और खी ंचता है, मछिलयाँ बफ की टोकिरयों में
दोहन न हो तो स्वयं भर जाता है छाँटता है और तट पर बेच दे ता है
अन्य प्राथ मक ग त व धयाँ जो आपने दे खी ह गी। पुस्तक के पृष्ठ 198 के चत्र स्वयं ीनहाउस कृ ष, खनन, मत्स्य पालन
(मा त्स्यक ), वा नक तथा पशु पालन दखाते ह। इनके अ त रक्त —
पहाड़ी ढलान पर बकरी या भेड़ चराना — संसाधन ह घास, भू म और स्वयं पशु।
कुक्कुट पालन फाम म अंडे एकत्र करना — संसाधन ह पशु-पक्षी; उनका दाना खेत के अनाज से आता है।
कस्बे के कनारे पत्थर क खदान — संसाधन है धरती के भीतर का पत्थर और ख नज।
केरल म रबड़ का दोहन या छत्तीसगढ़ और ओ डशा के वन से तदू पत्ता तथा शहद एकत्र करना — संसाधन है वन।
राज ान म सरस के खेत के पास मधुमक्खी पालन — संसाधन ह फूल, मधुम क्खयाँ और भू म।
स्वयं जाँ चए: य द आप प्रकृ त का वह ठ क-ठ क भाग बता सक जससे काय करने वाला लेता है — यह म , यह
नद , यह खदान, यह पशुधन — तो ग त व ध प्राथ मक है। य द वह कसी दूसरे के बनाए हुए माल पर काम कर रहा
है, तो नह ।
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यह क्य महत्वपूण है: भारत म आज भी लगभग आधे कायशील लोग प्राथ मक क्षेत्रक से, वशेषकर कृ ष से,
अपनी आजी वका चलाते ह। तीयक और तृतीयक क्षेत्रक जो कुछ करते ह, उसका आरंभ इन्ह लोग ारा प्रकृ त
से लए गए माल से होता है — इसी लए म , जल, वन और मत्स्य भंडार क दे खभाल केवल “पयावरण” का वषय
नह , आ थक आवश्यकता है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 200
तीयक क्षेत्रक क दो और आ थक ग त व धयाँ
आइए पता लगाएँ
प्र.1 हमने तीयक क्षेत्रक क ग त व धय के कुछ उदाहरण दे खे ह, क्या आप तीयक क्षेत्रक म दो अन्य आ थक
ग त व धय के नाम बता सकते ह?
उत्तर
दो स्पष्ट उदाहरण, रूपांतरण स हत।
1. चीनी बनाना — खेत का गन्ना (पाथिमक) → चीनी िमल में पेराई, उबाल और िक्रस्टलीकरण → चीनी
2. सीमेंट बनाना — खदान का चून ा-पत्थर (पाथिमक) → भट्ठे में पकाकर पीसना → सीमेंट
ये तीयक क्य ह। दोन म काय करने वाला उस वस्तु से आरंभ करता है जसे प्राथ मक क्षेत्रक पहले ही प्रकृ त से ले चुका है, और
उसका रूप बदलकर एक नया उत्पाद बनाता है जसे बेचा या उपभोग कया जा सके। ग े को चाय म नह डाला जा सकता, चीनी
को डाला जा सकता है। चूना-पत्थर द वार नह जोड़ सकता, सीमट जोड़ सकता है।
और भी उदाहरण — हर एक कसी प्राथ मक उपज को नया रूप दे ता है —
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तीयक क्षेत्रक क क ा माल (प्राथ मक) तैयार उत्पाद भारत म प्रमुख कद्र
गतवध
चीनी िमल गन्ना चीनी, ग ड
ु ़ , शीरा को ापुर (महारा ), मेर ठ (उत्तर पदे श)
सीमेंट िनम ण चूना-पत्थर सीमेंट िचत्तौड़गढ़ (राजस्थान), कलबुग
(कन टक)
जूट िमल कच्चा जूट बोरे , टाट, जूट की चटाई हुग ली नदी के िकनारे , पिश्चम बंग ाल
चम उ द्य ोग पशुओ ं की खाल जूते, बैग , बेल्ट कानपुर (उत्तर पदे श), चेन्नई
(तिमलनाडु)
कागज िनम ण लकड़ी की लुग दी, बाँस , र ी कागज और गत्ता बल्लारपुर (महारा ), नेपानगर (मध्य
कागज पदे श)
हथकरघा बुनाई रे शम या सूती धागा बनारसी साड़ी, पोचमपल्ली वाराणसी (उत्तर पदे श), पोचमपल्ली
इकत (तेल ंग ाना)
बेक री और खाद्य पसंस्करण गेहू ँ का आटा, फल, दू ध डबलरोटी, िबस्कु ट, मुर ब्बा, लगभग हर कस्बे की छोटी इकाइयाँ
पापड़, अचार
भवन िनम ण पत्थर, बालू, ईंट, सीमेंट, मकान, सड़क, पुल , िवद्यालय सवत्र — पष्ृ ठ 199 इसे ि तीयक क्षेत्र क
इस्पात में रखता है
सावधानी: उत्तर म “चीनी बेचना” या “सीमट ढोना” मत ल खए। ये तृतीयक ह। तीयक उत्तर म कुछ बनाना या
नमाण करना अवश्य होना चा हए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 204
सहकारी संगठन के अनेक प्रकार के उत्पाद
प्र.1 वतमान म इस सहकारी संगठन के पास अनेक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र और कारखाने ह, जो भारत के सभी भाग म
अनेक प्रकार के उत्पाद तैयार करते ह। क्या आप इनम से कुछ का नाम बता सकते ह?
उत्तर
हाँ — कसी भी डेयरी क दुकान म जाइए, वहाँ रखी लगभग हर वस्तु इसी सहकारी संगठन का उत्पाद है। और इन सबका
आरंभ एक ही वस्तु से होता है — कसान के घर गाय या भस से नकाला गया दूध।
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उत्पाद का प्रकार पहचाने-जाने वाले उदाहरण दूध के साथ क्या कया जाता है
तरल दू ध टोंड दू ध , डबल टोंड दू ध , फु ल क्रीम दू ध , स्वािदष्ट पाश्चुर ीकरण करके थैिलयों या िडब्बों में पैक िकया
(फ्ले वड) दू ध जाता है
वसा से बने उ त्पाद मक्खन, घी, क्रीम दू ध से वसा अलग करके मथा जाता है
सूखे उ त्पाद दू ध का पाउडर, िशशु आहार, डेयरी व्हाइटनर पानी सुखा िदया जाता है, िजससे दू ध महीनों चलता
है
पनीर और चीज पसंस्कृ त चीज, चीज स्लाइस, पनीर दू ध फाड़कर ठोस भाग दबाया जाता है
िकि वत उ त्पाद दही, छाछ, लस्सी, श्रीखंड जामन िमलाकर दू ध जमाया जाता है
िमठाइयाँ और जमे हुए आइसक्रीम, चॉकले ट, ग ल
ु ाब जामुन, रसग ल्ु ला, पेड़ा दू ध के ठोस अंश को पकाया, मीठा या जमाया जाता
उ त्पाद है
पहले दो नाम पुस्तक स्वयं दे ती है। जब दूध क मात्रा इतनी बढ़ गई क उसे केवल दूध के रूप म नह बेचा जा सकता था, तब
कसान ने “आणंद म एक दुग्ध प्रसंस्करण कारखाना स्था पत कया तथा मक्खन और दूध का पाउडर बनाना आरंभ कया” (पृष्ठ
203)। शेष सारे उत्पाद उसी पहले कारखाने से आगे बढ़े ।
सहकारी संगठन इतने उत्पाद क्य बनाता है: दूध कुछ ही घंट म खराब हो जाता है, कतु घी महीन और दूध का
पाउडर लगभग एक वष चलता है। हर अ त रक्त उत्पाद उस दूध को बचाने का एक और तरीका है जो अन्यथा नष्ट हो
जाता — और हर प्रसंस्करण चरण मूल्य संवधन करता है, जससे कसान के दूध क कमाई सादे दूध से अ धक हो
जाती है। इसी लए वही एक लीटर दूध भोपाल म मक्खन बन सकता है और कसी अन्य दे श जाने वाले जहाज म दूध
का पाउडर।
क्या आप जानते ह? पछले तीस वष से भारत वश्व म दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसका आरंभ इसी प्रकार
के सहकारी संगठन से हुआ, और आणंद क इसी पद्ध त पर बने दे शव्यापी कायक्रम को ऑपरेशन फ्लड या श्वेत
क्रां त कहा जाता है।
ध्यान रख — पृष्ठ 205
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वह सहकारी संगठन जसने समुदाय को समृद्ध कया
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अमू ल के समान कनाटक से नं दनी, दल्ली – रा ीय राजधानी क्षेत्र से मदर डेयरी, त मलनाडु से आ वन, आंध्र
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प्रदे श से वजया, नागालड से केवी, बहार से सुधा, पंजाब से वरका आ द नाम से अन्य अनेक सहकारी दुग्ध
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संगठन ह। क्या आप अपने आस-पास के कसी एक सहकारी संगठन का नाम बता सकते ह जसने कसान ,
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अशक्त लोग और म हलाओं को एक त्रत करके उनके जीवन को समृद्ध कया हो?
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उत्तर
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य द संभव हो तो अपने ही जले के कसी सहकारी संगठन का नाम ल खए — घर पर पू छए या जो दूध, शहद अथवा
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हथकरघा कपड़ा आपका प रवार खरीदता है उसके लेबल को दे खए। अ े उत्तर म तीन बात होनी चा हए — संगठन का नाम,
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उसके सदस्य कौन ह, और उनके जीवन म क्या बदला।
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g का भाग है। इसक शुरुआत
नमूना उत्तर: cमेरे जले म लज्जत पापड़ का एक कद्र है, जो श्री म हला गृह उद्योग लज्जत पापड़
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seम मुंबई म सात म हलाओं और ₹80 क उधार ली गई रा श से हुई थी। आज हजार म हला सदस्य अपने घर और मोहल्ले के
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agकद्र म पापड़ बेलती ह। हर सदस्य स्वामी भी है और कमाई म हस्सेदार भी, इस लए जो म हला कारखाने क नौकरी के लए घर से
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बाहर नह जा सकती, वह भी अपनी आय अ जत करती है। मेरे कस्बे क कई सदस्य ने इसी आय से अपने ब क वद्यालय क
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फ स भरी है।
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भारत के कुछ प्र सद्ध सहकारी संगठन, जनका नाम
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सहकारी संगठन कहाँ सदस्य कौन क्या बदला
अमूल आणंद , ग ज
ु रात दुग्ध उत्पादक िकसान, िजनमें बहुत िबचौिलयों की पकड़ समाप्त हुई; अब िकसान
बड़ी संख्या मिहलाओं की है स्वयं उन कारखानों के स्वामी है ं जो उनका दू ध
संस ािधत करते है ं
नंिदनी (के .एम .एफ .) कन टक गाँवों के दुग्ध उत्पादक लाखों ग ामीण पिरवारों तक दू ध का पितिदन
भुग तान
सुध ा िबहार िबहार के दुग्ध संघ ों के िकसान बहुत छोटी जोतों वाले िजलों में दू ध का पक्का
बाजार
आिवन तिमलनाडु गाँव की दुग्ध सहकारी सिमितयाँ पशुओ ं के पास ही, पैद ल दू र ी पर दुग्ध संग ह कें द
वरका पंजाब पंजाब के दुग्ध संघ ों के उत्पादक गेहू ँ और धान की खेती के साथ दू स री आमदनी
के वी नागालै ंड पहाड़ी क्षेत्र ों के दुग्ध उत्पादक कम संग िठत उद्योग वाले क्षेत्र में नकद आय
िल ज्जत पापड़ मुंबई से आरंभ, मिहला सदस्य, जो स्वयं स्वामी भी है ं घर से िकया जा सकने वाला काम और अपनी
अब दे शभर में अलग आय
से वा (SEWA) की अहमदाबाद, मिहला फे रीवाले , बुनकर, कचरा बचत, बैक
ं ऋण और उिचत मूल्य, जो पहले उन्हे ं
सहकारी सिमितयाँ गज
ु रात बीनने वाली और घर से काम करने कभी नही ं िमले
वाली मिहलाएँ
इफको (IFFCO) दे शभर में िकसानों की सहकारी सिमितयाँ उवरक िकसानों के अपने ही संग ठन ारा बनाया
और बाँटा जाता है
सहकारी संगठन उपे क्षत समूह क सहायता क्य कर पाता है: अकेली कसान के पास दस लीटर दूध हो तो
उसक कोई मोल-भाव क श क्त नह — दूध खराब होने से पहले जो दाम मले, वही लेना पड़ता है। कतु दस हजार
ऐसे कसान मलकर एक शीतलन संयंत्र, एक प्रयोगशाला, टकर का बेड़ा और एक ांड के स्वामी बन जाते ह।
सहका रता उन्ह दान नह दे ती, आकार दे ती है। आणंद के कसान को सरदार वल्लभ भाई पटे ल ने यही परामश दया
था।
आइए वचार कर — पृष्ठ 206
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
चत्र 14.1 म दखाई गई प्र क्रया के चरण
आइए वचार कर
प्र.1 पृष्ठ 205 पर चत्र 14.1 म प्र क्रया के व भन्न चरण को दे खए और अपने सहपा ठय के साथ चचा क जए।
1 2 3
आरी से पेड़ काटता कटे लट्ठों को उठाकर क्रे न से लट्ठे टक पर
एक श्रिमक ढेर लगाती मशीन लादे जा रहे हैं
5 4
िमल मे ं मशीन से िनकलती लट्ठों से लदा टक
कागज की चादर राजमाग पर
6 7 8
फ़ोकिलफ़् ट कागज का गट्ठर छपाई मशीन से िनकलती पुस्तक की दुकान पर
मुदणालय मे ं रंगीन छपी चादर िकताबें खरीदता पिरवार
ले जाता हआु
िच त्र 14.1
चत्र 14.1, पृष्ठ 205 — पाठ्यपुस्तक बनने क आठ चरण वाली प्र क्रया का प्रवाह- चत्र, तीर तथा प्रत्येक चत्र के नीचे
छपी रक्त पं क्त स हत पुनः बनाया गया। यहाँ प्रत्येक खंड का चत्र शब्द म व णत है; मूल चत्रांकन के लए
पाठ्यपुस्तक दे खए।
उत्तर
चत्र 14.1 आपक अपनी पाठ्यपुस्तक को पीछे क ओर चलकर उस पेड़ तक ले जाता है जससे वह बनी है। आठ चत्र
को क्रम से दे खए और पूरा सफर सामने आ जाएगा — “कैसे लुगद (पेड़ के काष्ठीय रेशे) को कागज और उसके बाद इस कागज पर
मुद्रण कर इसे पाठ्यपुस्तक म प रव तत करते ह” (पृष्ठ 205)।
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चरण चत्र म क्या है क्या हो रहा है
1 आरा-मशीन से पेड़ काटता हुआ श्रिमक वन से लकड़ी ली जाती है — कागज का कच्चा माल
2 कटे हुए ल ट्ठों को उठाकर ढे र लगाती मशीन लट्ठे एकत्र करके संग ह स्थल पर जमा िकए जाते है ं
3 े न ारा खड़े टक पर ल ट्ठे लादना
क्र लकड़ी को वन से बाहर ले जाने के िलए लादा जाता है
4 राजमाग पर ल ट्ठे ले जाता लंबा टक लट्ठे कागज िमल तक, कभी-कभी सै क ड़ों िकलोमीटर, ढोए जाते है ं
5 िवशाल मशीन से िनकलती सफे द कागज की चादर िमल में लकड़ी से लुग दी और लुग दी से कागज बनता है
6 फोक िल फ्ट से मुद णालय में कागज के ग ट्ठर ले जाना कागज के रीम पेस तक पहच
ु ँ ाए और जमा िकए जाते है ं
7 रंग ीन पन्न े छापती मुद ण मशीन पुस्तक के पष्ृ ठ छपते है,ं मोड़े और िसलकर आवरण चढ़ ाया जाता है
8 दुक ान के काउं टर पर पुस्तक खरीदता पिरवार तैयार पाठ पुस्तक िबककर िवद्याथ तक पहच
ु ँ ती है
सहपा ठय के साथ चचा के लए बदु:
हाथ ग नए। एक लकड़हारा, मशीन चालक, ट्रक चालक, मल के श्र मक, फोक लफ्ट चालक, मुद्रक, जल्दसाज और
दुकानदार — कम से कम आठ अलग-अलग लोग ने आपके बस्ते क पुस्तक पर काम कया, और उनम से कोई आपसे कभी
मला भी नह ।
दे खए क साम ी कतनी बार केवल चलती है। आठ म से चार चत्र प रवहन या ढु लाई के ह। उनम कुछ बनता नह , फर
भी उनके बना कुछ पहुँचता भी नह ।
दे खए मूल्य कहाँ बढ़ता है। ल े का मूल्य थोड़ा है, कागज का अ धक, और छपी- सली पाठ्यपुस्तक का उससे भी बहुत
अ धक। हर चरण का काय मूल्य जोड़ता है।
पेड़ नवीकरणीय संसाधन है — पर तभी, जब फर से लगाए जाएँ। उसी पृष्ठ का “ध्यान रख” बॉक्स कारण भी बताता है
— एक टन कागज के पुनचक्रण से 17 पेड़ और 2.5 घन मीटर लड फल स्थान बचता है, तथा नए कागज क तुलना म 70
प्र तशत कम ऊजा और पानी लगता है।
सो चए क कहाँ रुकावट आ सकती है। मल म हड़ताल, राजमाग पर भूस्खलन या प्रेस म बजली क कटौती — इनम से
एक भी हो जाए तो पुस्तक समय पर नह छपेगी।
पुस्तक इस चत्र से जो नष्कष नकालती है (पृष्ठ 206): “पेड़ से लुगद नकालने से लेकर अंतत: पाठ्यपुस्तक
तैयार करने तक क इस प्र क्रया क कोई भी ग त व ध संभव नह होती, अगर यह तीन क्षेत्रक एक साथ काय नह
करते।”
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 206
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चत्र 14.1 के काय का क्षेत्रक म वग करण
आइए पता लगाएँ
प्र.1 पृष्ठ 205 पर दए गए चत्र 14.1 म दशाए गए काय को क्षेत्रक म वग कृत क जए — 1. प्राथ मक क्षेत्रक 2.
तीयक क्षेत्रक 3. तृतीयक क्षेत्रक
1 2 3
आरी से पेड़ काटता कटे लट्ठों को उठाकर क्रे न से लट्ठे टक पर
एक श्रिमक ढेर लगाती मशीन लादे जा रहे हैं
5 4
िमल मे ं मशीन से िनकलती लट्ठों से लदा टक
कागज की चादर राजमाग पर
6 7 8
फ़ोकिलफ़् ट कागज का गट्ठर छपाई मशीन से िनकलती पुस्तक की दुकान पर
मुदणालय मे ं रंगीन छपी चादर िकताबें खरीदता पिरवार
ले जाता हुआ
िच त्र 14.1
चत्र 14.1, पृष्ठ 205 — पाठ्यपुस्तक बनने क आठ चरण वाली प्र क्रया का प्रवाह- चत्र, तीर तथा प्रत्येक चत्र के नीचे
छपी रक्त पं क्त स हत पुनः बनाया गया। यहाँ प्रत्येक खंड का चत्र शब्द म व णत है; मूल चत्रांकन के लए
पाठ्यपुस्तक दे खए।
उत्तर
तीर के क्रम म चत्र 14.1 के हर चत्र का वग करण नीचे दया गया है। यही नाम अपनी पुस्तक म प्रत्येक चत्र के नीचे बनी
रेखा पर ल खए।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ
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चत्र क्या दखाया गया है क्षेत्रक क्य
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1
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आरा-मशीन से पेड़ काटना पाथिमक
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लकड़ी सीधे पकृ ित से ली जा रही है — यह वािनकी है
se m क्षत्रे क
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a2 मशीन से ल ट्ठे एक त्र करके ढे र लगाना पाथिमक यह वन-उपज के िनष्कषण का ही भाग है; लकड़ी का रूप अभी बदला
क्षत्रे क नही ं
m
ततृ ीयक .co लादना और चढ़ ाना एक से वा है — लकड़ी के वल िहलाई जा रही है, ag
क्षत्रे sकem
3 ल ट्ठों को टक पर लादना
gla
बनाई नही ं जा रही
4 टक ारा ल ट्ठों को िमल तक ले जाना
a ततृ ीयक पिरवहन, िजसे पष्ृ ठ 200 ततृ ीयक गितिविध बताता है
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क्षेत्रक
लकड़ी का रूप बदलता है — लट्ठे से लुeगm
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ि तीयक
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5 िमल में लुग दी से कागज बनाना दी, लुग दी से कागज
m . क्षत्रे क
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agl
6 फोक िल फ्ट से कागज के ग ट्ठर पेस तक ततृ ीयक भंडारण, लदान और पहच
ु ँ ाना — एक ढुल ाई से वा
पहुच
ँ ाना क्षत्रे क
ि तीयक om a s
क.
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7 पाठ पुस्तक के पन्न े छापना कोरे कागज से छपी और िसली हईु पुस्तक का िनम ण होता है
क्षत्रे m
l a se
8 दुक ान पर पुस्तक खरीदना ag ततृ ीयक खुद रा व्यापार — अंितम उपभोक्ता को थोड़ी मात्रा में िबक्री
क्षेत्रक
co m
m .
m as e
.co
पाथिमक — िचत्र 1, 2
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a s eिmतीयक — िचत्र 5, 7
agl
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त ृत ीयक — िचत्र 3, 4, 6, 8
a se
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से sपाठ पु तक तक — िच 14.1 का े कवार वग करण
पेडl़ a
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स् त्र क्षत्र
1. पेड़ काटना 2. लट्ठे जमा 3. टक पर 4. िमल तक 5. कागज
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वन मे ं करना लादना ढुलाई बनाना
.
प ाथिमक प ाथिमक तृत ीयक तृत ीयक ि तीयक
e m
m l as
.co a g
a s em 6. पेस तक 7. पुस्तक 8. दुकान पर आपके बस्ते
agl पहुँचाना
तृत ीयक
छापना
ि तीयक
िबक्री
तृत ीयक
की प ुस्तक
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दो चरण पाथिमक, दो ि तीयक और चार तृतीयक — और शृंखला तभी चलती है जब आठों हों।
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चत्र 14.1 के आठ चत्र क्रम म, क्षेत्रक के अनुसार रंग म।
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य द आपके शक्षक चत्र 3 को प्राथ मक मान: वह भी उ चत है — वन-स्थल पर लादने को लकड़ी क कटाई का
अं तम चरण माना जा सकता है। कतु तक कभी नह बदलना चा हए — प्रकृ त से लेना प्राथ मक, रूप बदलना
तीयक, ढोना या बेचना तृतीयक। य द आप अपने वग करण का कारण लख दे ते ह तो उत्तर पूरा है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 207
अपने आस-पास क आ थक ग त व धयाँ
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अपने आस-पास क आ थक ग त व धय क एक सूची बनाइए और प्राथ मक, तीयक या तृतीयक ग त व धय
के रूप म उन्ह वग कृत क जए। इसके उपरांत तीर लगाकर दशाइए क वे एक-दूसरे से कस प्रकार संबं धत और
परस्पर आ त ह; य द इनम से कसी एक ग त व ध का अंत हो जाता है, तो क्या होगा?
उत्तर
इसे करने का सही तरीका। कॉपी लेकर अपने घर के पास क एक सड़क पर च लए और हर वह स्थान ल खए जहाँ कोई धन
कमाता है — खेत, कायशाला, दुकान, च कत्सालय, बस अ ा। फर हर एक के आगे प्रा., . या तृ. ल खए। अंत म तीर लगाइए
— तीर उस ग त व ध से चलेगा जो दे ती है, उस ग त व ध तक जो लेती है।
नमूना उत्तर (महाराष्ट्र का एक छोटा कस्बा — इनके स्थान पर अपने आस-पास के नाम ल खए):
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
मेरे आस-पास क आ थक क्षेत्रक कससे लेती है कसे दे ती है
गतवध
ग न्न े और ज्वार के खेत पाथिमक बीज-खाद की दुक ान; िकराए का टैक्टर; चीनी िमल; आटा चक्की; सब्जी मंडी
नहर का पानी
ं ों का बाड़ा और दुग्ध संग ह कें द
भैस पाथिमक खेतों का चारा; पशु िचिकत्सालय डेयरी संयंत्र ; घर-पिरवार; चाय की दुक ान
क स्बे के िकनारे की चीनी िमल ि तीयक खेतों का गन्ना; िबजली; श्रिमक थोक व्यापारी; िमठाई की दुक ाने;ं बेक री
आटा चक्की ि तीयक िकसानों का गेहू ँ और ज्वार हर घर; बेक री
दज की दुक ान ि तीयक कपड़ा व्यापारी से कपड़ा; िसलाई मशीन पिरवार, िवद्याथ , हमारे िवद्यालय की
गणवेश का ऑडर
नया मकान बनाते राजिम स्त्र ी ि तीयक हाडवेयर की दुक ान से सीमेंट, बालू, ईंट, वह पिरवार जो उस मकान में रहेग ा
सिरया
टेंपो और टैक्टर -टॉली पिरवहन ततृ ीयक पेटोल पंप से डीजल; मरम्मत की दुक ान िकसान, िमल, बाजार की हर दुक ान
साप्तािहक बाजार और िकराना ततृ ीयक खेतों, िमलों और थोक व्यापािरयों से माल कस्बे का हर पिरवार
दुक ाने ं
बैक
ं शाखा और डाकघर ततृ ीयक पिरवारों और व्यापािरयों की जमा रािश िकसानों और दुक ानदारों को ऋण; धन का
हस्तांतरण
पाथिमक स्वास्थ् य कें द और ततृ ीयक वेतन, दवाइयाँ, पुस्तकें , िबजली हर दू स री गितिविध के िलए स्वस्थ और
िवद्य ालय िशिक्षत कायकत
मोबाइल मर म् मत और साइबर कै फे ततृ ीयक शहर से पुज; इंटरनेट संयोजन भाव दे खने वाले िकसान, िवद्याथ ,
दुक ानदार
तीर, शब्द म। खेत → चीनी मल → व्यापारी → दुकान → प रवार। खेत → आटा चक्क → बेकरी → दुकान। भस का बाड़ा
→ दुग्ध कद्र → डेयरी → दुकान। और इन सबके आर-पार — प रवहन → सब तक, बक → सब तक, वद्यालय और स्वास्थ्य कद्र
→ हर ग त व ध के कायकताओं तक।
ये एक-दूसरे पर कस प्रकार आ त ह?
तीयक क्षेत्रक को क े माल के लए प्राथ मक क्षेत्रक चा हए। खेत म ग ा नह , तो मल म चीनी नह ।
प्राथ मक क्षेत्रक को बाजार और औजार के लए तीयक क्षेत्रक चा हए। मल न हो तो ग ा सड़ जाएगा; हाडवेयर क
दुकान और ट्रै क्टर कारखाने न ह तो हल, पंप और पाइप कहाँ से आएँ।
दोन को कसी तक पहुँचने के लए तृतीयक क्षेत्रक चा हए। टपो ग ा ढोता है, बक जून म ऋण दे ता है और माच म
वसूलता है, मोबाइल मंडी का भाव बताता है।
तृतीयक क्षेत्रक को ढोने, वत्त दे ने और बेचने के लए शेष दोन चा हए। खाली अलमा रय वाली दुकान, दुकान नह होती।
य द कोई एक ग त व ध समाप्त हो जाए तो क्या होगा?
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ AglaSem · NCERT Solutions
य द यह रुक …सबसे पहले यह होगा …और फर
जाए…
खेती चीनी िमल और आटा चक्की के पास संस ािधत करने को िमल के श्रिमकों की मजदू र ी जाएगी, दुक ानों के ग ाहक
कु छ नही ं बचेग ा और वे बंद हो जाएँग ी घटेंग े, अनाज दू र से महँग ा मँग ाना पड़ेग ा
चीनी िमल िकसान गन्ना बेच नही ं पाएँग े, और गन्ना रखा भी नही ं जा फसल बब द, खेती की आय ठप, ढुल ाई करने वालों का
सकता काम बंद
पिरवहन गन्ना िमल तक नही ं पहच
ु ँ ेग ा और चीनी िमल से बाहर नही ं खेत और कारखाना दोनों रुक जाएँग े, जबिक दोनों में से
जाएगी कोई िवफल नही ं हुआ
बैक
ं बीज, खाद या नई िसलाई मशीन के िलए ऋण नही ं िमले ग ा बुवाई घटेग ी, दज अपना काम नही ं बढ़ ा पाएगा, और
साहूक ार कही ं अिधक ब्याज ले ंग े
िवद्य ालय और बीमारी का उपचार नही ं होगा और बच्चों की पढ़ ाई छू ट हर दू स री गितिविध धीरे -धीरे कमजोर होगी, क्योंिक उन्हे ं
स्वास्थ् य कें द जाएगी चलाते तो लोग ही है ं
उत्तर के अंत म लखने योग्य सीख: मोहल्ले क ग त व धयाँ केवल एक सूची नह , एक जाल ह। एक धागा कटते
ही उसका भार शेष सब पर आ पड़ता है। क्षेत्रक क परस्पर नभरता का अध्याय म यही अथ है।
आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 207
अध्याय दो बदुओं म
आगे बढ़ने से पहले . ..
प्र.1 इस अध्याय म हमने आ थक ग त व धय के तीन क्षेत्रक के बारे म सीखा है।
उत्तर
तीन क्षेत्रक साथ-साथ, पुस्तक के अपने शब्द म। य द आप यह ता लका स्मरण से भर सक, तो अध्याय आपका हो गया।
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प्राथ मक क्षेत्रक तीयक क्षेत्रक तृतीयक क्षेत्रक
क्या करता है लोग “पत्यक्ष रूप से वस्तुओ ं के लोग “पाथिमक क्षेत्र क पर आधािरत वे गितिविधयाँ “जो पाथिमक और
उत्पादन के िलए पकृ ित पर वस्तुओ ं को रूपात
ं िरत करके अन्य वस्तु ि तीयक गितिविधयों में सिम्मिलत लोगों
िनभर रहते है”ं का उत्पादन करते है”ं को सहायता पदान करती है”ं
हािशये की “पकृ ित से सीधे कच्चे माल का “पाथिमक क्षेत्र क से पाप्त कच्ची “पाथिमक तथा ि तीयक क्षेत्र कों के
पिरभाषा िनष्कषण … जैसे – कृ िष, मत्स्य सामिग यों के पसंस्करण ारा इसे िबक्री संपूर क … से वाओं का पावधान … जैसे
पालन, वािनकी आिद” या उपभोग हेत ु उत्पादों में पिरवितत – पिरवहन, बैिं कं ग, व्यवसाय पबंध न
करना” आिद”
उ त्पाद कच्चा माल — अनाज, दू ध , िनिमत वस्तुए ँ, भवन, सड़कें , तथा पानी, से वाएँ — िजन्हे ं उठाकर ले जाया नही ं जा
मछली, लकड़ी, कोयला, िबजली और गैस जैस ी उपयोगी से वाएँ सकता
अयस्क
पुस्तक के कृ िष, खनन, मछली पकड़ना, िनम ण, िविनम ण, जल-आपूित, सौर स्वास्थ्य दे खभाल, व्यापार और उपयोगी
िचत्र (पष्ृ ठ कु क्कु ट पालन, वािनकी ऊज , िवद्य तु उत्पादन सामग ी, संचार, बैिं कं ग, पिरवहन
197)
अन्य नाम — औद्योिगक क्षेत्र क से वा क्षेत्रक (पष्ृ ठ 201)
एक भारतीय असम में चाय की पत्ती तोड़ना जोरहाट के कारखाने में पत्ती से चाय चाय की पैिकं ग, रे ल से िदल्ली भेजना
उदाहरण तैयार करना और दुक ान में बेचना
याद रखने क एक पं क्त: प्राथ मक क्षेत्रक उपजाता है, तीयक क्षेत्रक संसा धत करता है, तृतीयक क्षेत्रक सेवा
दे ता है।
प्र.2 व भन्न उदाहरण और चत्र से तीन प्रकार क आ थक ग त व धय या क्षेत्रक — प्राथ मक, तीयक और
तृतीयक क भन्नता और उनक परस्पर नभरता को समझने म सहायता मली है।
उत्तर
अध्याय परस्पर नभरता को दो वस्तृत उदाहरण से सद्ध करता है।
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कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 14 हमारे आस-पास क आ थक ग त व धयाँ
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उदाहरण प्राथ मक तीयक तृतीयक
omिकसान गाय-भैसं पालते और l a se
सहकारी संग ठन .c दुहते है ं — “दुग्ध उत्पादन एक लॉिरयों,a
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अमूल दुग्ध कारखानों में दू ध “एक रूप “अमूल अपने उत्पादों को … टकों व
se,m पाकृितक ोत (गाय या मवेशी) से
(तरल) से अन्य खाद्य रूपों, जैसे रे ल , वायुयान एवं पिरवहन” से
आणंlदaिजला
aगुgजरात (प ृ ठ
– दू ध का पाउडर, घी, पनीर, भेजता है और खुद रा भंडार स्थािपत करता है
ष् पत्यक्ष रूप से पाप्त” होता है मक्खन” में बदला जाता है — “पिरवहन, िवपणन और खुद रा …
202–204) ततृ ीयक गितिविध” है ं
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m . ag
seऔर उस पर मुदण करके
आपकी अपनी वन में पेड़ काटे जाते है ं और लट्ठे िमल में लुग दी से कागज बनता है लादना, टक से ढुल ाई, भंडारण और वह
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ag पुस्तक तैयार होती है
पाठ पुस्तक एकत्र होते है ं दुक ान जहाँ पुस्तक अंतत: िबकती है
िच 14.1, प ृ ठ
त्र ष्
205
. comतीयक चरण ही
se
दोन उदाहरण म समानता क्या है। दोन म ंखला प्रकृ त से आरंभ होकर घर तक पहुँचती है; दोन म केवल
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g द के गोदाम म पड़ा रहेगा और
.c दूध देगी जो फट जाएगा, कारखाना दूध के अभाव म खाली खड़ा रहेगा, या घीaआणं
सामग्री का रूप बदलता है; और दोन म तृतीयक चरण बार-बार बीच म आता है। कसी एक क्षेत्रक को हटा द जए और ंखला रुक
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e नह पहुँचेगा।
sकभी
जाएगी — गाय
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असम
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अमूल क कहानी केवल अथशास्त्र का उदाहरण क्य नह है: यह यह भी दखाती है क इस ंखला का स्वामी
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कौन है। 1946 से पहले कसान के पास केवल प्राथ मक चरण था और शेष का लाभ बचौ लए ले जाते थे।
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सहकारी संगठन बनते ही उन्ह कसान ने “दूध के संग्रह, प्रसंस्करण और वतरण” क पूरी प्र क्रया स्वयं संभाल
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ली। तीन क्षेत्रक म कुछ नह बदला — बदले तो वे लोग जनके पास कमाई रुक । इसी लए उनक आमदनी क्रमश:
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बढ़ और यह कहानी सुनाने योग्य है।
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la के अंत का अभ्यास
प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ — पृष्ठ 207
agअध्याय
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cकomसे कस प्रकार भन्न है? दो उदाहरण द जए।
प्राथ मक क्षेत्रक क्या है? यह तीयक क्षे.त्र g l a
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उत्तर agl
प्राथ मक क्षेत्रक उन आ थक ग त व धय का समूह है जनम लोग वस्तुओं के उत्पादन के लए सीधे प्रकृ त पर नभर रहते
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ह। पृष्ठ 196 इसे “उन ग त व धय का समूह, जसम प्रकृ त से सीधे क े माल का नष्कषण शा मल होता है, जैसे – कृ ष, मत्स्य
om
cह।” g l as
पालन, वा नक आ द” बताता है, और पाठ जोड़ता है क इनम “लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन के लए प्रकृ त पर नभर
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रहते
a
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पाथिमक = पकृ ित से जै सा है वैसा ही लेन ा
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ि तीयक = उसका रूप बदलकर नया उत्पाद बनाना
e m . co agl
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दोन म अंतर: a
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अंतर का आधार प्राथ मक क्षेत्रक तीयक क्षेत्रक
1. सामग ी का ोत स्वयं पकृ ित — िम ी, जल, वन, खदान, पाथिमक क्षेत्र क की उपज
पशुध न
2. सामग ी के साथ उसे उगाया, पकड़ा, पाला या िनकाला जाता रूप बदलता है — पसंस्करण, िविनम ण या जोड़कर नया उत्पाद
क्या होता है है। रूप नही ं बदलता बनता है
3. उ त्पाद का स्वरूप कच्चा माल — गेहू,ँ दू ध , मछली, कपास, तैयार या अध-तैयार वस्तुए ँ — आटा, घी, कपड़ा, फन चर, इस्पात;
लकड़ी, लौह अयस्क भवन, सड़क और उपयोगी से वाएँ भी
4. कायस्थल खेत, वन, खदान, नदी, समुद , पशु-फाम िमल, कारखाना, कायशाला, उत्पादन इकाई, िनम ण स्थल
5. िनभरता पकृ ित पर — वष , िम ी, ऋतु तथा मछली कच्चे माल के िलए पाथिमक क्षेत्र क पर, तथा मशीनों और ऊज पर
या खिनज के भंडार पर
6. मूल्य उपज का मूल्य अपने आप में अपेक्षाकृ त कम मूल्य जुड़ता है — उत्पाद कच्चे माल की लागत से अिधक में िबकता
होता है है
दो उदाहरण, जोड़े म, ता क अंतर स्पष्ट दखे:
1. वदभ या गुजरात क काली म म कपास उगाना प्राथ मक ग त व ध है — कसान पौधे से रेशा लेता है। कोयंबटू र क मल
म उसी कपास से सूत कातना और कपड़ा बुनना तीयक ग त व ध है — कपास अब कुछ और बन चुक है।
2. छत्तीसगढ़ के बैलाडीला म लौह अयस्क का खनन प्राथ मक ग त व ध है — अयस्क धरती से नकाला जाता है। भलाई संयंत्र
म उसी अयस्क से इस्पात और फर इस्पात से कार बनाना तीयक ग त व ध है।
दो और जोड़े, य द पुस्तक के ही उदाहरण चा हए ह — अनाज उगाना (प्राथ मक) → मल म उससे आटा बनाना
( तीयक); जंगल से लकड़ी एकत्र करना (प्राथ मक) → उससे फन चर और कागज बनाना ( तीयक)।
प्र.2 तीयक क्षेत्रक कस प्रकार से तृतीयक क्षेत्रक पर नभर है? उदाहरण ारा समझाइए।
उत्तर
कारखाना वस्तु बना तो सकता है, कतु उसे ढो नह सकता, उसका भुगतान नह कर सकता, बेच नह सकता और यह भी
नह जान सकता क क्या बनाना है। यह सब तृतीयक क्षेत्रक करता है — इसी लए भारत का कोई कारखाना उसके बना
नह चलता।
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तृतीयक सेवा कारखाने के लए क्या करती है उदाहरण
1. पिरवहन कच्चा माल भीतर लाती है और तैयार माल बाहर पहच
ु ँ ाती है िभलाई इस्पात संयंत्र कु छ ही िदनों में रुक जाएगा यिद रे ल
बैल ाडीला से लौह अयस्क और झिरया से कोयला न लाए
2. व्यापार और कारखाने का बनाया माल बेचती है; ग ाहक न हो तो उत्पादन मानेस र में बनी कारे ं हजारों डीलरों और शोरूम से िबकती
खुद रा व्यथ है है;ं अमूल का मक्खन खुद रा भंडारों से आप तक पहच
ु ँ ता है
3. बैिं कं ग और संयंत्र लगाने और कच्चा माल खरीदने के िलए ऋण दे ती ितरुप्पूर की बुनाई इकाई कमीजों का भुगतान िमलने से
बीमा है; आग, चोरी और दुघ टना से माल का बीमा करती है महीनों पहले बैक
ं से ऋण ले क र धागा खरीदती है
4. भंडारण और िबकने तक माल रखती है — पष्ृ ठ 201 गोदाम को “िवशाल नािसक और राजमाग ं के शीतगृह कारखाने और दुक ान के
शीतग हृ इमारते ं िजसमें उत्पादों को बेचने … से पहले रखा जाता है” बीच पसंस्कृ त खाद्य तथा दुग्ध उत्पाद रखते है ं
बताता है
5. संचार और ऑडर, िडजाइन और भुग तान पहच
ु ँ ाती है; मशीने ं और वस्त्र िनय तक िवदे शी क्रेता को ई-मेल से िडजाइन भेजता है;
सॉफ्टवेयर ले खा-जोखा चलाती है बेगं लुरु और हैद राबाद का सॉफ्टवेयर हर खेप पर नजर
रखता है
6. िशक्षा और इंजीिनयर, तकनीिशयन और श्रिमक तैयार करती है और आई.टी.आई. और अिभयांित्रकी महािवद्यालय हैद राबाद तथा
स्वास्थ् य उन्हे ं काम-लायक स्वस्थ रखती है ब ी की हर औषिध इकाई को िफटर और मशीिनस्ट दे ते है ं
7. मर म्मत और मशीने ं चलती रखती है; बंद मशीन कु छ नही ं बनाती मैके िनक और “िबजली िमस्त्री (इले िक्टिशयन), जो िबजली
रखरखाव की िनयिमत आपूित सुिनिश्चत करते है”ं — पष्ृ ठ 200
एक उदाहरण पूरा — कोल्हापुर क चीनी मल।
टै क्टर-टॉली और बैलगाड़ ी खेत ों से गन्ना लाती है ं — पिरवहन
ं िमल को ऋण दे त ा है तािक चीनी िबकने से पहले िकसानों को भुगतान हो सके — बैिं कं ग
बैक
टक और रेल के िडब्बे चीनी ले जाते है ं थोक बाजारों तक — पिरवहन
थोक व्यापारी और िकराना दुक ान उसे घरों तक बेच ते है ं — व्यापार और खुद रा
फोन और कं प्यूट र ऑडर पहुँच ाते और भुगतान दज करते है ं — संच ार
यह नभरता दोन ओर क्य है: तृतीयक क्षेत्रक को भी तीयक क्षेत्रक उतना ही चा हए। खाली ट्रक कुछ नह
कमाता; बना माल क दुकान बंद हो जाती है; जस बक के पास ऋण लेने वाला कारखाना ही न हो, उसका कोई
ग्राहक नह । हर एक दूसरे का ग्राहक है। यही पारस्प रक आवश्यकता अध्याय क “परस्पर नभरता” है।
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प्र.3 प्राथ मक, तीयक और तृतीयक क्षेत्रक के बीच परस्पर नभरता का एक उदाहरण द जए। इसको प्रवाह चत्र
(फ्लो चाट) का प्रयोग करते हुए समझाइए।
उत्तर
उदाहरण: वदभ के खेत क कपास से आपक पहनी हुई कमीज तक का सफर। यह तीन क्षेत्रक से होकर गुजरता है और हर
क्षेत्रक अपना काम अगले को स प दे ता है।
कपास के खेत से कमीज तक — तीनों क्षेत्रक
1. िकसान कपास उगाता और चुनता है
िवदभ, महारा की काली िम ी
पाथिमक क्षेत्रक
2. व्यापारी और टक उसे िमल तक ले जाते है ं
मंड ी, तौल-काँटा, लॉरी, बै ंक से भुगतान
बै ंक, फोन और टक हर चरण की सेवा करते है ं
आपका िदया धन लौटकर िकसान तक पहु ँचता है
तृतीयक क्षेत्रक
3. िम ल सूत कातती, कपड़ ा बनती
ु , कम ीज िसलती है
कोयंबटूर और ितरुप्प ूर, तिमलनाडु
ि तीयक क्षेत्रक
4. गोदाम , पिरवहन, दुकान और िव ापन
रेल का िडब्बा, गोदाम, शोरूम, ऑनलाइन ऑडर
तृतीयक क्षेत्रक
5. आप कमीज खरीदकर पहनते है ं
अंितम उपभोक्ता
कपास से कमीज तक क ंखला। वस्तुएँ नीचे क ओर चलती ह, धन ऊपर क ओर लौटता है, और तृतीयक सेवाएँ हर चरण को छू ती ह।
इस ंखला म हर क्षेत्रक दूसरे पर कैसे नभर है:
मल कसान पर नभर है — खेत म कपास नह तो मल म सूत नह ।
कसान मल पर नभर है — खरीदार न हो तो कपास घर म पड़ी रहेगी और उसे कुछ नह मलेगा।
दोन प रवहन, बक और ापारी पर नभर ह — कपास ढोनी, तौलनी, उसका भुगतान और बीमा कराना पड़ता है, और
कमीज को दुकान तक पहुँचना पड़ता है तभी कोई उसे खरीद सकता है।
ढु लाई करने वाला और दुकानदार पहले दोन पर नभर ह — खाली ट्रक और खाली दुकान, दोन कुछ नह कमाते।
तीन को लोग के लए तृतीयक क्षेत्रक चा हए — वद्यालय, आई.ट .आई. और च कत्सालय ही वे कसान, फटर, चालक
और वक्रेता तैयार करते ह जनसे यह ंखला चलती है।
चाह तो पुस्तक का ही उदाहरण ल खए। अमूल क ंखला बल्कुल इसी तरह चलती है — कसान गाय दुहता
है (प्राथ मक) → टकर दूध आणंद तक ले जाता है (तृतीयक) → कारखाना मक्खन, घी और दूध का पाउडर
बनाता है ( तीयक) → लॉरी, रेल, जहाज और खुदरा भंडार (तृतीयक) → आपक रसोई। अथवा चत्र 14.1
क ंखला — पेड़ काटना (प्राथ मक) → मल तक ढु लाई (तृतीयक) → कागज बनाना और मुद्रण ( तीयक)
→ दुकान पर बक्र (तृतीयक)।
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प्रवाह चत्र वास्तव म क्या दखा रहा है: हर चरण पर जुड़ता हुआ मूल्य। क ी कपास कुछ रुपये प्र त कलो क
होती है; सूत बनने पर उसका मूल्य बढ़ता है, कपड़ा बनने पर और अ धक, और दुकान म रखी सली हुई कमीज का
मूल्य कपास से कई गुना हो जाता है। इस मूल्य का एक हस्सा हर क्षेत्रक अपने काय से जोड़ता है — इसी लए कसी
भी दे श को तीन क्षेत्रक चा हए, और इसी लए कसी एक के कमजोर पड़ने से पूरी ंखला के सभी लोग गरीब होते
ह।
अध्याय — एक नज़र म
अध्याय का मूल वचार — दे श क सभी आ थक ग त व धय को तीन क्षेत्रक म बाँटा जा सकता है: प्राथ मक,
तीयक और तृतीयक। अध्याय कौ टल्य के अथशास्त्र से आरंभ होता है — “आ थक ग त व ध से ही समृ द्ध आती है,
इसका अभाव भौ तक तनाव दे ता है।” पृष्ठ 196 वग करण का आधार बताता है — “कुछ आ थक ग त व धय म समान
वशेषताएँ होती ह और इनके आधार पर इन्ह एक व्यापक समूह म वग कृत कया जा सकता है, जन्ह आ थक क्षेत्रक कहते
ह।”
प्राथ मक क्षेत्रक — प्रकृ त से सीधे लया गया काय। “ जन आ थक ग त व धय म लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन
के लए प्रकृ त पर नभर रहते ह, उन्ह प्राथ मक ग त व धयाँ … कहते ह” (पृष्ठ 196)। हा शये क प रभाषा जोड़ती है — इसम
“प्रकृ त से सीधे क े माल का नष्कषण शा मल होता है”। पंजाब म गे ँ उगाना, छत्तीसगढ़ के वन से लकड़ी लाना, झ रया म
कोयला नकालना, को के पास मछली पकड़ना, कुक्कुट पालन फाम से अंडे लेना — सब प्राथ मक ह।
तीयक क्षेत्रक — प्राथ मक क्षेत्रक क उपज को रूपांत रत करने वाला काय। पृष्ठ 199 — “ऐसी आ थक ग त व धयाँ
जनम लोग प्राथ मक क्षेत्रक पर आधा रत वस्तुओं को रूपांत रत करके अन्य वस्तु का उत्पादन करते ह।” इसम कारखान का
व नमाण, भवन और सड़क का नमाण तथा पानी, बजली और गैस जैसी आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करना स म्म लत है।
अनाज से आटा, मूँगफली से तेल, चाय क पत्ती से चाय, लकड़ी से फन चर और कागज, कपास से कपड़ा और लौह अयस्क से
इस्पात।
तृतीयक क्षेत्रक — वे सेवाएँ जो शेष दोन क्षेत्रक को चलाती ह। पृष्ठ 201 — “वे सभी आ थक ग त व धयाँ, जो
प्राथ मक और तीयक ग त व धय म स म्म लत लोग को सहायता प्रदान करती ह, उन्ह तृतीयक ग त व धयाँ … कहते ह।”
खेत से कारखाने तक अनाज ले जाने वाला ट्रक चालक, सब्जी वक्रेता, च कत्सक, नस, शक्षक, अ धवक्ता, वमान चालक,
तकनी शयन, मैके नक, बजली मस्त्री, बक, मोबाइल और इंटरनेट, सॉफ्टवेयर, होटल, गोदाम और दुकान। इस क्षेत्रक को
सेवा क्षेत्रक भी कहते ह।
अमूल क कहानी तीन क्षेत्रक को एक ही ंखला म दखाती है। 1940 के आरंभ म गुजरात के आणंद जले के कसान
चल चलाती गरमी म साइ कल से दूध बेचने जाते थे और बचौ लय पर नभर थे, जो “बहुत कम क मत पर अ धक मात्रा म
दूध” खरीदते थे। सरदार वल्लभ भाई पटे ल के परामश पर उन्ह ने सहकारी संगठन बनाया; अमूल क स्थापना 1946 म
त्रभुवन दास पटे ल तथा डॉ. वग ज कु रयन के नेतृत्व म हुई। गाय का दूध दुहना प्राथ मक है, आणंद के कारखाने म मक्खन
और दूध का पाउडर बनाना तीयक, तथा ट्रक, खुदरा भंडार और नयात तृतीयक ह।
पृष्ठ 205 का चत्र 14.1 यही बात आपक अपनी पाठ्यपुस्तक से समझाता है। पेड़ काटा जाता है और ल े एकत्र होते ह
(प्राथ मक), ल े मल तक ढोए जाते ह (तृतीयक), लुगद से कागज बनता है और कागज पर मुद्रण होकर पुस्तक बनती है
( तीयक), और फोक लफ्ट, ट्रक तथा पुस्तक क दुकान इसे आप तक पहुँचाते ह (तृतीयक)। पृष्ठ 206 का नष्कष — “इस
प्र क्रया क कोई भी ग त व ध संभव नह होती, अगर यह तीन क्षेत्रक एक साथ काय नह करते।”
असली सीख परस्पर नभरता है। कोई भी क्षेत्रक अकेले नह चल सकता। मल न हो तो कपास खेत म पड़ी रह जाएगी;
कसान न हो तो मल म कपास नह आएगी; और ट्रक, बक तथा दुकान न ह तो दोन बेकार ह। इसी लए अध्याय के अंत म
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आपसे कहा गया है क अपने आस-पास क ग त व धय के बीच तीर लगाइए और सो चए क य द इनम से एक भी रुक जाए
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तो क्या होगा।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय याद रखने योग्य
म कहाँ
मौ द्रक मूल्य “िकसी वस्तु का मूल्य िजसे मुद ा के मूल्य के रूप में मापा जा सकता है” पृष्ठ 195, जन ग त व धय म इसका अजन
हा शया होता है, वही आ थक ग त व धयाँ ह
— अध्याय 13 से जुड़ाव
आ थक क्षेत्रक “व्यापक समूह, िजनमें ऐसी िविभन्न गितिविधयाँ सिम्मिलत होती है ं िजनसे पृष्ठ 196, तीन — प्राथ मक, तीयक और
एक रा की आिथक सम िृ में सहायता िमलती है” हा शया तृतीयक
प्राथ मक “उन गितिविधयों का समूह, िजसमें पकृ ित से सीधे कच्चे माल का पृष्ठ 196 सीधे प्रकृ त पर नभर — कृ ष,
क्षेत्रक िनष्कषण शािमल होता है, जैसे – कृ िष, मत्स्य पालन, वािनकी आिद” खनन, मछली पकड़ना, पशु पालन,
वा नक
तीयक “उन गितिविधयों का समूह, िजनमें पाथिमक क्षेत्र क से पाप्त कच्ची पृष्ठ 199, इसम नमाण तथा पानी, बजली और
क्षेत्रक सामिग यों के पसंस्करण ारा इसे िबक्री या उपभोग हेत ु उत्पादों में हा शया गैस क आपू त भी स म्म लत है
पिरवितत करना सिम्मिलत है”
तृतीयक क्षेत्रक “उन गितिविधयों का समूह, िजसमें पाथिमक तथा ि तीयक क्षेत्र कों के पृष्ठ 200, इसे सेवा क्षेत्रक भी कहते ह (पृष्ठ
संपूर क के रूप में इन्हे ं सहायता पदान करने वाली से वाओं का पावधान है, हा शया 201) — काय दखता नह , पर
जैसे – पिरवहन, बैिं कं ग, व्यवसाय पबंध न आिद” उसके बना कुछ नह चलता
सहकारी “व्यिक्तयों का एक समूह जब स्वेच्छा से एक साथ आकर औपचािरक पृष्ठ 203, अमूल, 1946 — कारखाने के स्वामी
संगठन तरीके से अपनी आिथक तथा सामािजक आवश्यकताओं को पूर ा करता हा शया कसान स्वयं ह
है। समूह के सभी सदस्य सहकारी संग ठन के स्वामी होते है”ं
बचौ लए “व्यिक्त, जो उत्पादकों से सामान खरीदते है ं और उपभोक्ताओं को बेचते पृष्ठ 202, सहका रता से पहले कसान इनके
है।
ं िबचौिलए इस से वा के िलए शुल्क ले ते है”ं हा शया कारण “ठगा या उत्पी ड़त” अनुभव
करते थे
पा रीकरण “ऐसी पिक्रया िजसमें दू ध को एक िनिश्चत तापमान तक गम िकया जाता पृष्ठ 203, यह तीयक क्षेत्रक क ग त व ध है
है, तािक इसके हािनकारक बैक्टीिरया को नष्ट करके इसे संर िक्षत िकया हा शया — दूध स्वयं बदल जाता है
जा सके ”
कारखाना “भवन या भवनों का समूह, जहाँ वस्तुओ ं का िनम ण िकया जाता है, या पृष्ठ 203, अमूल के पहले कारखाने म मक्खन
िविभन्न घटकों को एक साथ िमलाकर अंितम उत्पाद तैयार िकया जाता हा शया और दूध का पाउडर बना
है”
गोदाम “िवशाल इमारते ं िजसमें उत्पादों को बेचने, उपयोग करने या दुक ानों में पृष्ठ 201, भंडारण एक सेवा है — तृतीयक
(वेयरहाउस) िकराए पर दे ने से पहले रखा जाता है” हा शया गतवध
खुदरा “माल की िबक्री को थोड़ी मात्रा में अंितम उपभोगकत ओं तक पहच
ु ँ ाना पृष्ठ 204, ंखला के अंत क दुकान —
और िजसका उ े श्य माल का पुनिवक्रय नही ं है” हा शया तृतीयक
नयात “वस्तुए ँ और से वाएँ, जो िकसी एक दे श में उत्पािदत होती है ं और इन्हे ं पृष्ठ 204, अमूल “ वश्व के अनेक दे श म अपने
िकसी अन्य दे श के क्रेताओं या उपभोक्ताओं को बेचा जाता है” हा शया उत्पाद का नयात” करता है
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