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Senior School Certificate Examination - 2020
HMJ/1
Marking Scheme – ECONOMICS
SUBJECT CODE: 030 PAPER CODE –58/3/2
General Instructions: -
1. You are aware that evaluation is the most important process in the actual and correct
assessment of the candidates. A small mistake in evaluation may lead to serious
problems which may affect the future of the candidates, education system and teaching
profession. To avoid mistakes, it is requested that before starting evaluation, you must
read and understand the spot evaluation guidelines carefully.Evaluation is a 10-12
days mission for all of us. Hence, it is necessary that you put in your best efforts
in this process.
2. Evaluation is to be done as per instructions provided in the Marking Scheme. It should
not be done according to one’s own interpretation or any other consideration. Marking
Scheme should be strictly adhered to and religiously followed. However, while
evaluating, answers which are based on latest information or knowledge and/or
are innovative, they may be assessed for their correctness otherwise and marks
be awarded to them.
3. The Head-Examiner must go through the first five answer books evaluated by each
evaluator on the first day, to ensure that evaluation has been carried out as per the
instructions given in the Marking Scheme. The remaining answer books meant for
evaluation shall be given only after ensuring that there is no significant variation in the
marking of individual evaluators.
4. Evaluators will mark( √ ) wherever answer is correct. For wrong answer ‘X”be marked.
Evaluators will not put right kind of mark while evaluating which gives an impression that
answer is correct and no marks are awarded. This is most common mistake which
evaluators are committing.
5. If a question has parts, please award marks on the right-hand side for each part. Marks
awarded for different parts of the question should then be totaled up and written in the
left-hand margin and encircled. This may be followed strictly.
6. If a question does not have any parts, marks must be awarded in the left-hand margin
and encircled. This may also be followed strictly.
7. If a student has attempted an extra question, answer of the question deserving more
marks should be retained and the other answer scored out.
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8. No marks to be deducted for the cumulative effect of an error. It should be penalized
only once.
9. A full scale of marks 0-80 has to be used. Please do not hesitate to award full marks if
the answer deserves it.
10. Every examiner has to necessarily do evaluation work for full working hours i.e. 8 hours
every day and evaluate 20 answer books per day in main subjects and 25 answer
books per day in other subjects (Details are given in Spot Guidelines).
11. Ensure that you do not make the following common types of errors committed by the
Examiner in the past:-
● Leaving answer or part thereof unassessed in an answer book.
● Giving more marks for an answer than assigned to it.
● Wrong totaling of marks awarded on a reply.
● Wrong transfer of marks from the inside pages of the answer book to the title page.
● Wrong question wise totaling on the title page.
Wrong totaling of marks of the two columns on the title page.
● Wrong grand total.
● Marks in words and figures not tallying.
● Wrong transfer of marks from the answer book to online award list.
● Answers marked as correct, but marks not awarded. (Ensure that the right tick mark is
correctly and clearly indicated. It should merely be a line. Same is with the X for
incorrect answer.)
● Half or a part of answer marked correct and the rest as wrong, but no marks awarded.
12. While evaluating the answer books if the answer is found to be totally incorrect, it should
be marked as cross (X) and awarded zero (0)Marks.
13. Any unassessed portion, non-carrying over of marks to the title page, or totaling error
detected by the candidate shall damage the prestige of all the personnel engaged in the
evaluation work as also of the Board. Hence, in order to uphold the prestige of all
concerned, it is again reiterated that the instructions be followed meticulously and
judiciously.
14. The Examiners should acquaint themselves with the guidelines given in the Guidelines
for spot Evaluation before starting the actual evaluation.
15. Every Examiner shall also ensure that all the answers are evaluated, marks carried over
to the title page, correctly totalled and written in figures and words.
The Board permits candidates to obtain photocopy of the Answer Book on request in an
RTI application and also separately as a part of the re-evaluation process on payment
of the processing charges.
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अपेक्षिक उत्तर
क्र. सं . अंक
खण्ड क समक्षि अर्थशास्त्र)
1 प्रश्न: किसी अर्थव्यवस्र्ा में अवस्फीकि अंिराल मााँ ग में ______(अकिििा/अल्पिा) दर्ाथ िा है । (सही उत्तर द्वारा ररक्त स्र्ान िी
पूकिथ िीकजए)
1
उत्तर अल्पिा
2 प्रश्न: कनम्नकलखिि में से िौन-सा एि गै र-िर राजस्व प्राखि नही ं है ? (सही कविल्प िा चयन िीकजए)
(A) वस्तु और से वा िर (B) बाहरी अनुदान (C) लाभां र् व लाभ (D) कवकनवे र्
1
उत्तर: (A) वस्तु और से वा िर
3 प्रश्न: यकद किसी अर्थव्यवस्र्ा िी घरे लू मुद्रा कवकनमय दर में वृ खि होिी है , िो उस अर्थव्यवस्र्ा िे कनयाथ ि िे मूल्य में ______ होने
िी सं भावना है । (सही उत्तर द्वारा ररक्त स्र्ान िी पूकिथ िीकजए)
1
उत्तर: कगरावट/ िमी
4 प्रश्न: उल्लेि िीकजए कि, कनम्नकलखिि िर्न सत्य है या असत्य:
“सरिारी बजट एि वाकषथि कववरण है जो कपछले कवत्तीय वषथ िे कलए सरिार िी वास्तकवि प्राखियों िर्ा वास्तकवि भु गिानों िो
दर्ाथ िा है ।"
उत्तर: असत्य 1
5
प्रश्न: मुद्रा आपूकिथ िे घटिों िे नाम कलखिए ।
उत्तर: मुद्रा पूकिथ िे दो घटि हैं - (i) जनिा िे पास िरें सी। (ii) व्यवसाकयि बैं िों िे पास मां ग जमाए।
½+½
6 प्रश्न: उल्लेि िीकजए कि, कनम्नकलखिि िर्न सत्य है या असत्य :
“भु गिान सं िुलन (BOP) में आकििाररि आरकिि लेनदे नों िो समंजन मदों िे रूप में कलया जािा है ।”
1
उत्तर: सत्य
7
प्रश्न: अनैखिि बे रोज़गारी िा अर्थ कलखिए ।
उत्तर: अनैखिि बे रोज़गारी एि ऐसी खस्र्कि िो दर्ाथ िा है कजसमें ऐसे सभी लोग जो विथ मान मजदू री दरों पर िाम िरने िे 1
इिु ि हैं िर्ा योग्य हैं , िो रोज़गार प्राि नही होिा है । (अन्य क्षकसी प्रामाक्षिक पररभाषा के क्षिए भी अंक क्षिए जाए)
अर्वा
प्रश्न: औसि बचि प्रवृ कत्त (APS) _____िर्ा _____ िा अनुपाि होिा है । (सही उत्तर द्वारा ररक्त स्र्ानों िी पूकिथ िीकजए)
उत्तर: िुल बचि िर्ा िुल आय।
½+½
8 प्रश्न: भु गिान सं िुलन िािे िे स्वायत्त मदों िो पररभाकषि िीकजए ।
उत्तर: स्वायत्त मदों से अकभप्राय भु गिान सं िुलन िािे िे ऐसे लेन-दे न से है जो लाभ िे उद्दे श्य से किये जािे हैं । 1
9 प्रश्न: प्रार्कमि घाटा र्ून्य हो सििा है , यकद _____ । (सही कविल्प द्वारा ररक्त स्र्ान िी पूकिथ िीकजए)
(A) राजिोषीय घाटा = ब्याज भु गिान (B) राजिोषीय घाटा < ब्याज भु गिान
(C) राजिोषीय घाटा > ब्याज भु गिान (D) राजस्व घाटा < राजिोषीय घाटा
उत्तर: (A) राजिोषीय घाटा = ब्याज भु गिान 1
10 प्रश्न: वै िाकनि िरलिा अनुपाि िे अंिगथ ि वाकणखिि बैं िों िो िरल पररसम्पकत्तयों िे रूप में _____ िा एि अंर् रिना
आवश्यि होिा है । (सही कविल्प िा चयन
िीकजए)
(A) िुल जमा (B) आवकिि जमा (C) िुल मााँ ग व आवकिि जमा (D) चालू जमा
उत्तर: (A) िुल जमा या(C) िुल मााँ ग व आवकिि जमा (िोनों उत्तर सही हैं , अतःिोनों में से क्षकसी भी उत्तर पर 1
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अंक क्षिए जायें )
11 प्रश्न: ‘चालू िािा घाटे ' िर्ा 'व्यापार घाटे ' में अंिर स्पष्ट िीकजए ।
उत्तर: चािू खाता घाटे िा अर्थ दृश्य मदों, अदृश्य मदों िर्ा एि पिीय हस्तां िरण िे कनयाथ ि से होने वाली कवदे र्ी कवकनमय
प्राखियों पर ,दृश्य मदों, अदृश्य मदों िर्ा एि पिीय हस्तां िरण िे कलए किए गए आयाि िे िारण कवदे र्ी कवकनमय भु गिानो िी 1½
अकिििा से हैं । जबकि;
व्यापार घाटे िा अर्थ है दृश्य मदों िे कनयाथ ि से होने वाली कवदे र्ी कवकनमय प्राखियों पर दृश्य मदों िे आयाि िे कलए किए गए
1½
कवदे र्ी कवकनमय भु गिानो िी अकिििा से हैं ।
अर्वा
प्रश्न: “लेिां िन अर्थ में, भु गिान सं िुलन (BOP) सदै व सं िुकलि रहिा है ।” मान्य ििों द्वारा कदए गए िर्न िा समर्थन अर्वा
िंडन िीकजए ।
उत्तर: कदए गए िर्न िा समर्थन किया जािा है । भु गिान सं िुलन िािा कद्वप्रकवकष्ट बहीिािा प्रणाली पर आिाररि है । स्वायत्त
लेन दे न िे िारण उत्पन्न िोई भी घाटा/अकिरे ि मौकद्रि प्राकििारी द्वारा समायोजन सौदों में िदनुसार अकिरे ि/ घाटे द्वारा ठीि
किये जािे हैं । 3
प्रश्न: कनम्नकलखिि आाँ िडों से (a) राजस्व घाटे व (b) राजिोषीय घाटे िी गणना िीकजये :
12
कववरण राकर् ( ₹ िरोड में)
(i) िर राजस्व 1,200
(ii) राजस्व व्यय 3,700
(iii) 2,000
गैर-िर राजस्व
(iv) 145
ऋणों िी वसूली
(v) 500
पूाँजीगि व्यय
(vi) 120
कवकनवेर्
(vii) 1,070
ब्याज भुगिान
उत्तर: - (a) राजस्व घाटा = [ (ii) – {(i) + (iii)} ]
= 3700-(1200+2000)
= ₹500 िरोड
½
(b) राजिोषीय घाटे = [ {(ii)+(v)}-{(iii)+(i)+(iv)+(vi)} ] ½
=[ (3700+500) – (2000+1200+145+120) ] ½
= [ 4200-3465 ] =₹ 735 िरोड ½
½
½
13 प्रश्न: “भारिीय ररज़वथ बैं ि ने अर्थव्यवस्र्ा में कगरिी हुई मााँ ग िो बढावा दे ने िे कलए हाल ही में बैं ि दर में िमी िी है ।” िेन्द्रीय
बैं ि द्वारा उठाए गए िदमों िे औकचत्य िो कवस्तार से समझाइए।
उत्तर: बैं ि दर, ब्याज िी वह दर है कजस पर िेंद्रीय बैं ि, व्यवसाकयि बैं िों िो उनिी दीघथिालीन आवश्यििाओं िो पूरा
िरने िे कलए ऋण दे िा है । बैं ि दर में िमी, व्यवसाकयि बैं िों िो उनिी ब्याज दरों में िमी िे कलए प्रेररि िरिा है । यह सामान्य
जनिा िो अकिि उिार लेने िे कलए उत्साकहि िरिा है । जो उनिी प्रयोि आय िो बढािा है । यह अर्थव्यवस्र्ा में समग्र मां ग िो 4
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िो बढावा दे िा है । (पूरा एक सार् मू ल्ां कन क्षकया जाए)
14
प्रश्न: कदए गए कचत्र में, “KT" अंिराल क्या प्रदकर्थि िरिा है ? इस पररखस्र्कि िे समािान िे कलए किन्ीं दो राजिोषीय उपायों
िा उल्लेि व चचाथ िीकजए ।
1
उत्तर "KT" स्फीकिि अंिराल िो प्रदकर्थि िरिा है ।
स्फीकि अंिराल िो कनयं त्रण िरने िे कलए दो राजिोषीय उपाय है -
i. करों में वृद्धि - स्फीकिि अंिराल पर कनयं त्रण िरने िे कलए सरिार िरों में वृ खि िरिी है । यह जनिा िी क्रय र्खक्त िो िम 1½
िरिी है , कजसिे िारण अर्थव्यवस्र्ा में समग्र मां ग िम हो सििी है जो इसे समग्र पूकिथ िे बराबर लािी है ।
ii. सरकारी व्यय में कमी - स्फीकिि अंिराल पर कनयं त्रण िरने िे कलए सरिार अपने गै रकविासात्मि िचों में िमी िरिी है ।
यह जनिा िी क्रय र्खक्त में िमी लािी है । कजसिे िारण अर्थव्यवस्र्ा में समग्र मां ग िी िमी होिी है , जो इसे समग्र पूकिथ िे 1½
बराबर लािी है ।
दृक्षिबाक्षित छात्ों के क्षिए:
प्रश्न अवस्फीकि अंिराल िा क्या अर्थ है ? अवस्फीकि अंिराल िी पररखस्र्कि िे समािान िे कलए किन्ीं दो राजिोषीय उपायों िा
उल्लेि व चचाथ िीकजए ।
उत्तर अवस्फीकिि अंिराल उस अंिराल िो दर्ाथ िा है कजसमें पूणथ रोजगार िे स्तर पर समग्र मां ग, समग्र पूकिथ से िम होिी है
।ऐसी खस्र्कि िो कनयं कत्रि िरने िे कलए आवश्यि दो राजिोषीय उपाय कनम्न है -
1
i. करों में कमी - अवस्फीकिि अंिराल पर कनयं त्रण िरने िे कलए सरिार िरो में िमी िरिी है । यह जनिा िी क्रय र्खक्त में
वृ खि िरिा है कजसिे िारण अर्थव्यवस्र्ा में समग्र मां ग बढिी है जो इसे समग्र पूकिथ िे बराबर िरने में सहायि है ।
ii. सरकारी खचथ में वृद्धि - अवस्फीकिि अंिराल पर कनयं त्रण िरने िे कलए सरिार अपने िचथ में वृ खि िरिी है । यह जनिा िी 1½
क्रय र्खक्त में वृ खि िरिा है कजसिे िारण अर्थव्यवस्र्ा में समग्र मां ग बढिी है जो इसे समग्र पूकिथ िे बराबर िरने में सहायि है ।
1½
15 प्रश्न: कनम्नकलखिि आाँ िडों से बाज़ार िीमि पर सिल मूल्य वृ खि (GVAMP ) िी गणना िीकजए :
कववरण राकर् (₹ लाि में)
(i) मूल्यह्रास 20
(ii) घरे लू कबक्री 200
(iii) स्टॉि में पररविथ न (-) 10
(iv) कनयाथ ि 10
(v) एिल उपयोग उत्पादि वस्तु एाँ 120
(vi) कनवल अप्रत्यि िर 20
2
उत्तर- GVA MP = [(ii)+(iii)+(iv)]-(v)
= [200+(-)10+10]-120 1
=200-120 ½
= ₹ 80 लाख ½
ऄथवा
प्रश्न: ककसी वषष में एक ऄथषव्यवस्था में मौकिक सकल राष्ट्रीय ईत्पाद (GNP) का मूल्य ₹ 2,500 करोड़ था । ईसी वषष के दौरान, देश के
सकल राष्ट्रीय ईत्पाद (GNP) का मूल्य ककसी अधार वषष की कीमत पर ₹ 3,000 करोड़ था । प्रततशत के रूप में वषष के सकल राष्ट्रीय
ईत्पाद (GNP) ऄवस्फीततक के मूल्य की गणना कीतजए । क्या अधार वषष और ईतल्लतखत वषष के बीच कीमत स्तर में वृति हुइ है ?
ईत्तर: कदया गया है - मौकिक (GNP) = ₹ 2,500 करोड़ और वास्ततवक GNP = ₹3000 करोड़,
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मौकिक सकल राष्ट्रीय ईत्पादवास्ततवक
(GNP) ऄवस्फीततक = x100
सकल राष्ट्रीय ईत्पाद
2500
= x 100 2
3000
= 83.33 %
नही, ईतल्लतखत वषष में अधार वषष की तुलना में कीमत स्तर में 16.67% की कमी हुइ है। ½
½
1
16
प्रश्न: नीचे कदए गए अँकड़़ों पर अधाररत तनम्नतलतखत प्रश्ऩों के ईत्तर दीतजए :
(i) तनवेश का तनयोतजत स्तर = ₹ 200 करोड़
(ii) C = 100 + 0-8Y
(a) अय के संतुलन स्तर का तनधाषरण कीतजए।
(b) अय के संतुलन स्तर पर बचत व ईपभोग व्यय की गणना कीतजए ।
ईत्तर: (a) Y= C + I
Y= (100+ 0. 8Y) +200 ½
= 300+0.8 Y ½
Y-0.8 Y= 300 ½
0.2 Y =300 ½
Y= 300/0.2 ½
अय का संतुलन स्तर = ₹1500 करोड़ ½
(b) C = C + 0.8
= 100+ 0.8(1500) ( कदया है Y = 150)
= 100 + 1200
½
ईपभोग= ₹1300 करोड़
½
बचत = अय (Y)- ईपभोग (C)
½
= 1500 - 1300
½
= ₹ 200 करोड़ ½
½
17 प्रश्न 17. राष्ट्रीय अय के अकलन में अने वाली, दोहरी गणना की समस्या को पररभातषत कीतजए । दोहरी गणना की समस्या के तनवारण
के दो दृतिकोण़ों की चचाष कीतजए ।
2
ईत्तर वस्तुओं के मूल्य की एक से ऄतधक बार गणना के कारण राष्ट्रीय अय के अकलन में दोहरी गणना की समस्या ईत्पन्न होती है। यह
ऄथषव्यवस्था में ईत्पाकदत वस्तुओं और सेवाओं के ऄतधमूल्यन से सम्बंतधत है।
दोहरी गणना की समस्या के तनवारण के दो दृतिकोण तनम्नतलतखत हैं: 2
(i) ऄंततम ईत्पाद तवतध - आस तवतध के ऄनुसार राष्ट्रीय अय का अकलन करते समय के वल ऄंततम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य
को शातमल करना चातहए। 2
(ii) मूल्य वृति तवतध - आस तवतध के ऄनुसार प्रत्येक ईत्पादक आकाइ द्वारा की गइ के वल मूल्य वृति के योग को सतम्मतलत
करना चातहए। आसका ऄथष है कक मध्यवती ईपभोग के मूल्य शातमल नही ककया जाना चातहए।
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ऄथवा
प्रश्न: तनम्नतलतखत को पररभातषत कीतजए :
(a) पूँजीगत वस्तुएँ (b) सकल घरे लू ईत्पाद (c) प्रवाह चर (d) संपतत्त तथा ईद्यमशीलता से प्राप्त अय
ईत्तर: (a) पूँजीगत वस्तुएँ वे ऄंततम वस्तुएं हैं जो दूसरी वस्तुओं और सेवाओं के ईत्पाद में सहयोग करती है। ईदाहरण मशीनरी 1½
b) सकल घरे लू ईत्पाद, ककसी देश की घरे लू सीमा के ऄंदर एक वषष की ऄवतध में ईत्पाकदत सभी ऄंततम वस्तुओं और सेवाओं के कु ल
1½
बाजार मूल्य का योग है।
1½
c) प्रवाह चर वह चर है तजन्हें समय की एक ऄवतध में मापा जाता है। ईदाहरण राष्ट्रीय अय।
d) संपतत्त तथा ईद्यमशीलता से अय वह अय हैं जो भौततक / अर्थथक / बौतिक संपतत्त के स्वातमत्व से ईत्पन्न होती है तथा वस्तुओं और 1½
सेवाओं के ईत्पादन के योगदान में ईद्यमी को पाररतोतषक स्वरूप लाभ,रायल्टी, ककराया, ब्याज अकद के रूप में प्राप्त होती है।
खण्ड ख (भारतीय ऄथषव्यवस्था का तवकास)
18 प्रश्न: ककसी व्यति के तलए ऄतधकतम भूतम-धारण (ऄतधपत्य) की सीमा का तनधाषरण_______कहलाता है। (सही ईत्तर द्वारा ररि स्थान
की पूर्थत कीतजए)
1
ईत्तर: भूतम की ऄतधकतम सीमा तनधाषरण।
19 प्रश्न: स्वतंत्र भारत में पहला औद्योतगक नीतत प्रस्ताव वषष ------------ में लागू ककया गया था । (सही तवकल्प का चयन कीतजए)
A) 1948 (B) 1950 (C ) 1954 (D)1956
ईत्तर: (A) 1948 1
20 प्रश्न: के न्िीय प्रदूषण तनयंत्रण बोडष (CPCB) ने _____श्रेतणय़ों के बड़े तथा मध्यम ईद्योग़ों की पहचान प्रदूतषत करने वाले ईद्योग़ों के
रूप में की है। (सही तवकल्प का चयन कीतजए)
(A) 15 (B) 17 (C) 19 (D)13
ईत्तर: (B) 17 1
21 प्रश्न: 8 नवंबर, 2016 को पुरानी महात्मा गाँधी श्रेणी के ____और___करें सी नोट़ों को कानूनी रूप में ऄवैध घोतषत कर कदया गया था।
(A) ₹50 और ₹100 (B) ₹500 और ₹1000 (C) ₹500 और ₹2000 (D) ₹500 और ₹200
ईत्तर: (B) ₹500 and ₹1000 1
22 प्रश्न: 'पशुधन' का ऄथष तलतखए ।
ईत्तर: वे पशु तजन्हें श्रम और सामग्री ईत्पादन के तलए पालतू (कृ तष संबंधी पररवेश में) बनाकर पाला
1
जाता है,पशुधन कहलाता है। जैसे मवेशी, बकररयाँ अकद। (ऄन्य दूसरे ईतचत ऄथष को भी ऄंककत ककया जाय)
23 प्रश्न: 'मानव पूँजी तनमाषण' को पररभातषत कीतजए ।
ईत्तर: मानव पूंजी तनमाषण एक समय-ऄवतध में देश में कु शल और सक्षम लोग़ों को बढाने की प्रकिया है। (ऄन्य कोइ ईतचत पररभाषा)
1
ऄथवा
कॉलम II में कदए गए संबंतधत वषों के साथ तमलान करके कॉलम I में कदए गए तवकल्प़ों के सही ऄनुिम की पहचान कीतजए:
कॉलम I कॉलम II
a. जन धन योजना (i) 2005
b. प्रभावी ईपभोग माँग और न्यूनतम अवश्यकता ऄनुमानन कायष बल (ii) 1962
c. महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारं टी ऄतधतनयम (iii) 1979
d. तनधषनता के तलए योजना अयोग द्वारा गरित ऄध्ययन दल (iv) 2014
तनम्नतलतखत में से सही तवकल्प का चयन कीतजए :
(A) a-(iv), b-(i), c-(ii), d-(iii) (B) a-(iv), b-(ii), c-(i), d-(iii) 1
(C) a-(iv), b-(iii), c-(i), d-(ii) (D) a-(iv), b-(ii), c-(iii), d-(i)
ईत्तर: (C) a-(iv), b-(iii), c-(i),d-(ii)
24 प्रश्न: „कम्यून' का ऄथष तलतखए ।
ईत्तर: चीन में महान सवषहारा सांस्कृ ततक िांतत के ऄंतगषत सामूतहक खेती की वह व्यवस्था तजसमें लोगो से संयुि रूप से खेती करवाइ
1
गइ, कम्यून कहलाता है।
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25 प्रश्न: “गूगल ने भारत में 4000 स्नातक तवद्यार्थथय़ों को नौकरी पर रखा है ।”
कदया गया कथन औपचाररक क्षेत्रक/ऄनौपचाररक क्षेत्रक रोज़गार से संबंध रखता है । (सही प्रकार के रोज़गार का चयन कीतजए)
1
ईत्तर: औपचाररक क्षेत्रक
26 प्रश्न: वस्तु और सेवा कर (GST) के लागू होने के पश्चात् हटाए गए कऱों में से एक_______कर है। (सही ईत्तर द्वारा ररि स्थान की पूर्थत कीतजए)
ईत्तर: वैट (वैल्यू एडेड टैक्स ) ( कोइ ऄन्य ईतचत ईदाहरण) 1
27 प्रश्न: कालानुितमक िम में तनम्नतलतखत घटनाओं को व्यवतस्थत कीतजए तथा सही तवकल्प का चयन कीतजए :
(i) चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना (ii) पाककस्तान का तनमाषण
(iii) भारत की प्रथम पंचवषीय योजना (iv) चीन की प्रथम पंचवषीय योजना
1
तवकल्प: (A) (i), (iv), (ii), (iii) (B) (iii), (ii), (i), (iv) (C) (ii), (i), (iii), (iv) (D) (iv), (iii), (ii), (i)
ईत्तर: (C) (ii),(i),(iii),(iv)
28 प्रश्न: “अर्थथक संवृति में तीव्र वृति ऄवश्य ही पूणषतः तनधषन वगष के व्यतिय़ों तक धीरे -धीरे पहुँच जाती है ।” कदए गए कथन का मान्य तकों
सतहत समथषन ऄथवा खंडन कीतजए ।
ईत्तर: कथन का खंडन ककया जाता है क्य़ोंकक -
1
(i) तेजी से बढती हुइ जनसंख्या के कारण प्रतत व्यति अय में वृति बहुत कम हुइ।
(ii) हररत िांतत ने क्षेत्रीय तवषमताओं को बढाया और बड़े तथा छोटे ककसाऩों के बीच खाइ गहरी की। 1
(iii) अर्थथक सुधाऱों के ऄतधकांश लाभ़ों को धनी वगष द्वारा हतथया तलया गया। 1
(ऄन्य ककसी मान्य कारण/तकष /व्याख्या को भी ऄंककत ककया जाये)
29 प्रश्न: “ऄनौपचाररक क्षेत्र के बजाय औपचाररक क्षेत्र में रोज़गार का सृजन करना अवश्यक है ।” मान्य तकों द्वारा कदए गए कथन का
समथषन या खंडन कीतजए ।
ईत्तर: कदया गया कथन सत्य है और तनम्न तकों के अधार पर आसका समथषन ककया जाता है -
1½
(i) रोजगार का औपचाररक क्षेत्र, ऄनौपचाररक क्षेत्र की तुलना में ऄतधक ऄच्छी कायष सुरक्षा प्रदान करता हैं।
(ii) औपचाररक क्षेत्र में रोजगार के ऄंतगषत लोग ऄतधक ऄच्छे सामातजक सुरक्षा लाभ प्राप्त करने के ऄतधकारी होते हैं।
(ऄन्य ककसी मान्य कारण/तकष /व्याख्या को भी ऄंककत ककया जाये) 1½
ऄथवा
प्रश्न: भारतीय तवद्युत् क्षेत्रक की ककन्हीं दो चुनौततय़ों का ईल्लेख व चचाष कीतजए ।
ईत्तर: भारतीय तवद्युत क्षेत्रक में दो चुनोततयाँ हैं - 1½
(i) भारत की तवद्युत ईत्पादन क्षमता ऄपयाषप्त है और ईसका भी पूणष ईपयोग नही हो पाता। भारत में शति सयंत्ऱों की कायाषत्मक क्षमता
तजसे पलांट लोड फै क्टर (PLF) के रूप में दशाषया जाता है, बहुत कम है।
1½
(ii) राज्य तवद्युत बोडष संचरण और तवतरण की हातन, तबजली की दोषपूणष कीमतें और ऄन्य ऄकु शलताओ से त्रस्त हैं।
(ककसी ऄन्य ईतचत बबदु के तलए भी ऄंक प्रदान ककये जायें)
30 प्रश्न: “भारत, चीन व पाककस्तान ने तवतभन्न पररणाम़ों के साथ, सात दशक़ों से ऄतधक की तवकास पथ की यात्रा की है।” मान्य तकों के
साथ कदए गए कथन को समझाआए ।
ईत्तर: (i) 1970 के ऄंत तक तीऩों देश़ों तनम्न तवकास के लगभग समान स्तर को बनाए हुए थे।
(ii) तपछले तीन दशक़ों में तीऩों देश़ों ने तवकास के तवतभन्न स्तर प्राप्त ककए हैं।
1
★ भारत ने आन वषों में सामान्य प्रदशषन ककया है। यहां ऄतधकांश लोग ऄभी भी कृ तष पर तनभषर हैं। अधारभूत संरचना की
1
कमी है और एक चौथाइ से ऄतधक जनसंख्या गरीबी रे खा से नीचे जीवनयापन कर रही है।
★ पाककस्तान ने राजनीततक ऄतस्थरता, तवप्रेतषत धन और तवदेशी सहायता पर ऄत्यतधक तनभषरता और कृ तष में ऄतस्थर
1
प्रदशषन के कारण तनम्न प्रदशषन ककया है।
★ चीन ने ऄथषव्यवस्था के तवकास की दर को बढाने के साथ-साथ गरीबी के ईन्मूलन पर दबाव बनाने के तलए बाजार
1
व्यवस्था का प्रयोग ककया। तजसमे वह काफी हद तक सफल रहा। (पूरा एक साथ मूल्यांकन ककया जाए)
(कोइ ऄन्य ईतचत तकष को भी ऄंककत ककया जाय)
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31 प्रश्न: भारतीय ऄथषव्यवस्था के योजना ईद्देश्य के रूप में 'अधुतनकता' के चयन के औतचत्य की संक्षेप में चचाष कीतजए।
ईत्तर: अधुतनकता का ईद्देश्य नवीन तकनीकी के रास्ते को ऄपनाकर वस्तुओं और सेवाओं के ईत्पादन में वृति करना है। नइ तकनीकी
द्वारा लोग़ों के जीवन स्तर को उपर ईिाने तथा सामातजक दृतिकोण में पररवतषन हेतु स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय ऄथषव्यवस्था के
योजना के ईद्देश्य के रूप अधुतनकीकरण को चुना गया था।
4
(पूरा एक साथ मूल्यांकन ककया जाए) (कोइ ऄन्य ईतचत तकष को भी ऄंककत ककया जाय)
32 प्रश्न: “कृ तष क्षेत्र अर्थथक सुधार प्रकिया से प्रततकू ल रूप से प्रभातवत हुअ है ।” कदए गए कथन का वणषन कीतजए।
ईत्तर: कृ तष क्षेत्रक अर्थथक सुधाऱों की प्रकिया से बुरी तरह प्रभातवत हुअ है क्य़ोंकक-
1
(i) अर्थथक सुधाऱों की प्रकिया के समय कृ तष क्षेत्रक में तवशेषकर तसचाइ, शति जैसी अधारभूत संरचना में सावषजतनक तनवेश में कमी
अयी।
(ii) ईवषरक़ों की सतब्सडी कम करने के कारण ईत्पाद की लागत बढ गइ तजसके कारण छोटे और सीमांत ककसाऩों पर बुरा प्रभाव पड़ा। 1
(iii) ईदारीकरण और अयात शुल्क़ों में कमी के कारण ऄंतरराष्ट्रीय प्रततयोतगता में वृति। 1
(iv) तनयाषत कें कित नीतत के कारण कृ तष में खाद्य फसलो से नगद फसलो की ओर बदलाव हुअ तजसने खाद्य फसलो की कीमत़ों में वृति 1
की। (ऄन्य ककसी मान्य कारण/तकष /व्याख्या को भी ऄंककत ककया जाये)
ऄथवा
प्रश्न: भारत को प्रायः तवश्व का „बाह्यप्रापण गंतव्य' कहा जाता है । भारत को कदए गए आस नाम के मुख्य कारण़ों की चचाष कीतजए ।
ईत्तर: भारत को तवश्व का "बाह्य प्रापण गंतव्य" कहने के मुख्य कारण हैं -
(1) कु शल मानव शति की ईपलब्धता - भारत में कु शल मानव शति की बहुतायत है जो बहुराष्ट्रीय कं पतनय़ों के तवश्वास को बढाता है।
2+2
(2) ऄनुकूल सरकारी नीततयां - भारतीय सरकार बहुराष्ट्रीय कं पतनय़ों को तवतभन्न प्रकार के लाभप्रद प्रस्ताव जैसे करो मे छू ट, करो की
तनम्न दर अकद, देती है तजससे बहुराष्ट्रीय कं पतनयां भारत की ओर अकर्थषत होती है। (या ऄन्य कोइ ईपयुि कारण सतहत व्याख्या)
33 प्रश्न:(a) “ग्रामीण भारत के तलए ईज्ज्वला योजना प्रमुख पररवतषक रही है ।” ऐसे ककन्हीं तीन पारं पररक ईंधऩों का ईल्लेख कीतजए, तजनके
प्रयोग को कम करने की कदशा में एल.पी.जी. तसलेंडर तवतरण योजना (ईज्ज्वला योजना) कायष कर रही है ।
ईत्तर: (a) उजाष के पारं पररक स्रोत वायु प्रदूषण के कारण बनते हैं आसतलए सरकार ने ग्रामीण भारत के तलए मुफ्त एलपीजी गैस
तसलेंडर ( स्वच्छ ईंधन) तवतरण योजना द्वारा ईज्ज्वला योजना की शुरुअत की है जो ग्रामीण गृहस्थ़ों के तलए प्रमुख पररवतषक रही है।
तीन पारं पररक ईंधन तजनका प्रयोग ईज्जवला योजना के कारण कम हुअ है:
(i) कृ तष ऄवशेष और सूखा गोबर । 1
(ii) जलाने की लकड़ी । 1
1
(iii) कोयला । (ऄन्य कोइ ईतचत ईदाहरण)
प्रश्न: (b) "स्वयं को िीक करने के तलए भारतीय स्वास््य प्रणाली को सावषजतनक व्यय की एक शतिशाली खुराक की अवश्यकता है ।”
मान्य तकों द्वारा कदए गए कथन का औतचत्य तसि कीतजए।
3
ईत्तर: (b) आस कथन का समथषन ककया जाता है क्योकक स्वतंत्रता से ही भारत में स्वास््य प्रणाली में सुधार की गतत ऄतार्ककक रूप से
धीमी रही है। दूसरे कारण़ों के साथ साथ स्वास््य प्रणाली ऄपेक्षाकृ त कम सावषजतनक व्यय की तशकार रही है। कु छ बड़े तवकासशील देश़ों
की तुलना में हमारा स्वास््य पर जीडीपी के प्रततशत के रूप में, ख़चष बहुत कम रहा है। यह 2014-15 में कु ल सकल घरे लू ईत्पाद का
लगभग 4.7% है। आसतलए वास्तव में “भारतीय स्वास््य प्रणाली को स्वयं को िीक करने के तलए सावषजतनक व्यय की खुराक में वृति करने
की अवश्यकता है। (पूरा एक साथ मूल्यांकन ककया जाए) (ऄन्य ककसी मान्य कारण/तकष /व्याख्या को भी ऄंककत ककया जाये)
ऄथवा
प्रश्न: (a) तनयतमत वेतनभोगी कमषचाररय़ों में मतहलाएँ कम क्य़ों हैं ?
(b) भारत में कायषबल के क्षेत्रीय तवतरण में हाल की प्रवृतत्तय़ों का तवश्लेषण कीतजए :
रोज़गार पितत की प्रवृतत्तयाँ (क्षेत्रक), 1993 - 2012 (प्रततशत में)
क्षेत्रक 1993-94 1999-2000 2011-2012
प्राथतमक 64 60.4 48.9
तद्वतीयक 16 15.8 24.3
सेवा 20 23.8 26.8
ईत्तर: (a) (i) तनयतमत वेतन भोगी कमषचाररय़ों में मतहलाओं की संख्या कम होती है क्य़ोंकक आस तरह के कायष के तलए बौतिक कौशल 1½
तथा ईच्च स्तर की शैतक्षक योग्यता की अवश्यकता होती है
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(ii) सामातजक बंधऩों के कारण मतहलाओं में गततशीलता की में कमी होती है।
1½
(b) कदए गए अंकड़े दशाषते हैं कक कदए गए समयकाल के दौरान प्राथतमक क्षेत्र में कायषबल का ऄनुपात तेजी से घटा है जबकक तद्वतीयक
तथा सेवायें दोनो क्षेत्ऱों में रोजगार की सहभातगता बढी है। 1993 - 94 से 2011 - 12 के बीच तद्वतीयक क्षेत्रक में तहस्सेदारी लगभग 9% 3
तथा सेवा क्षेत्र में आसी समय-काल के तलए लगभग 7% बढी है।
(पूरा एक साथ मूल्यांकन ककया जाए) (या ऄन्य कोइ ईपयुि व्याख्या)
34 प्रश्न: (a) “मानव पूँजी तनमाषण नवोत्थान, अतवष्कार तथा तकनीकी सुधाऱों को जन्म देता है।" क्या अप कदए गए कथन से सहमत हैं ?
मान्य तकों सतहत ऄपने ईत्तर का समथषन कीतजए।
(b) भारत में ग्रामीण तवकास की प्रकिया में ग्रामीण बैंककग व्यवस्था की भूतमका का अलोचनात्मक मूल्यांकन कीतजए ।
ईत्तर: (a) हां आस कथन से सहमत हैं। मानव पूंजी तनमाषण के वल मानव संसाधनो की ईत्पादकता को ही नही बढाता है बतल्क नवोत्थान 3
तथा नइ तकनीकी को ऄपनाने की योग्यता को भी प्रेररत करता हैं। तशक्षा में तनवेश नइ तकनीकी को ऄपनाने की योग्यता,वैज्ञातनक प्रगतत
के ऄवसर तथा नवोत्थान में सहायता करता है। क्य़ोंकक तशतक्षत कायषबल सामान्यतया नइ तकनीकी तथा नवोत्थान को तेजी से सीखता
तथा ऄपनाता है। (ऄन्य ककसी मान्य कारण/तकष /व्याख्या को भी ऄंककत ककया जाये) (पूरा एक साथ मूल्यांकन ककया जाए)
(b) बैंककग व्यवस्था के तेजी से तवस्तार ने ग्रमीण कृ तष तथा गैर कृ तष ईत्पादन, अय तथा रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
आसके बावजूद ग्रामीण बैंककग तनम्न समस्याओं का सामना कर रहा है- 1½
★देश मे ग्रामीण साख की मात्रा ऄभी भी आसकी मांग की तुलना में ऄपयाषप्त है तथा साख के संस्थागत स्रोत्र देश के सभी ग्रामीण
1½
ककसाऩों तक पहुँचने में ऄसफल रहे हैं।
★ जरूरतमंद़ों ( छोटे और सीमांत ककसान) की साख अवश्यकताओं पर कम ध्यान कदया गया है। कृ तष साख में कजष न चुका पाने की
समस्या लगातार बनी हुइ है। (ऄन्य ककसी मान्य कारण/तकष /व्याख्या को भी ऄंककत ककया जाये)
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