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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: जल — जीवन का आधार
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — हमारा अ त संसार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
3 – 20 18 38 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 42 pages
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 1 जल — जीवन का आधार AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हमारे चार ओर क दु नया · हमारा अ त सं सार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: जल — जीवन का आधार
हमारा अ त संसार का अध्याय 1 इकाई 1 हमारे आस-पास का जीवन से आरंभ होता है। आफरीन और ज्यो त खड़क के काँच पर फसलती वषा
क बूँद को दे खती ह और पूछती ह क यह जल कहाँ से आता है और कहाँ चला जाता है। इसी प्रश्न के साथ यह अध्याय हम जल के व भन्न रूप ,
जल-चक्र, भू मगत जल और सतह जल, भारत क न दय तथा मीठे जल म रहने वाले पौध और जंतुओं तक ले जाता है। इसम 10 ग त व धयाँ,
दो चचा क जए बॉक्स, प रवतन का अवलोकन ता लका, जल म जीवन ता लका और अंत म आइए वचार कर के 7 प्रश्न ह। अध्याय के अंत म
अलग से कोई अभ्यास नह है — प्रश्न पूरे अध्याय म फैले हुए ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
हमारा अ त संसार (कक्षा 5) 3 – 20
खं ड प्रश्न
18 38
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 3
खड़क पर आफरीन और ज्यो त
प्र.1 आफरीन पूछती है, “तुम्ह क्या लगता है क ये जल कहाँ से आता है और फर कहाँ चला जाता है?”
वषा बादल से आती है, और बादल उस जल से बनते ह जो महासागर , न दय और झील से ऊपर उठा था। वषा के बाद
यह जल फर से भू म म, न दय म और सागर म लौट जाता है। जल इसी प्रकार नरंतर घूमता रहता है।
एक बूँद के साथ-साथ च लए।
1. सूय सागर, न दय और तालाब के जल को गम करता है।
2. उस जल का कुछ भाग जलवाष्प — गैस के रूप म अदृश्य जल — बनकर वायु म ऊपर उठ जाता है।
3. ऊपर वायु ठं डी होती है। वाष्प ठं डी होकर बहुत नन्ह बूँद बनाती है। ऐसी लाख बूँद मलकर बादल बनाती ह।
4. जब बूँद बड़ी और भारी हो जाती ह तो नीचे गर जाती ह। यही आफरीन क खड़क पर पड़ रही वषा है।
5. वषा का जल ना लय , तालाब और न दय म बहता है। कुछ जल मृदा म रस जाता है। न दयाँ शेष जल को सागर तक पहुँचा
दे ती ह।
6. सूय उसे फर गम करता है और पूरी यात्रा दोबारा आरंभ हो जाती है।
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बादल बनते है ं
सूय
वष होती है
जलवाष्प
ऊपर उठती है
सागर, नदी, तालाब
जल लौटकर आता है
वही जल गोल-गोल घूमता है — सागर से आकाश, आकाश से भू म, भू म से सागर। यही जल-चक्र है।
ऐसा क्य होता है: ताप जल को वाष्प बनाकर ऊपर भेजता है और ठं डक वाष्प को फर बूँद म बदल दे ती है। ताप
सूय से मलता है और ठं डक आकाश से, इस लए जल कभी रुकता नह ।
क्या आप जानते ह? पृथ्वी नया जल नह बनाती। आज आपक खड़क पर गरी बूँद कभी कसी नद म रही होगी,
कभी कसी बादल म, या कभी कसी के गलास म भी।
चचा क जए — पृष्ठ 4
महासागरीय जल
चचा क जए
प्र.1 क्या आपको लगता है क हम महासागर म उप स्थत जल को पी सकते ह?
नह , हम महासागर का जल नह पी सकते। महासागर का जल खारा होता है — उसम बहुत अ धक मात्रा म नमक घुला रहता है।
य द कोई इसे पी ले तो क्या होगा —
1. जल के साथ-साथ नमक भी शरीर म चला जाता है।
2. शरीर को उस अ त रक्त नमक को बाहर नकालना पड़ता है।
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3. इसके लए शरीर पए हुए जल से भी अ धक जल खच कर दे ता है।
4. इस लए प्यास बुझने के स्थान पर और बढ़ जाती है।
ऐसा क्य होता है: हमारे शरीर को मीठे जल क आवश्यकता होती है — ऐसे जल क जसम नमक न हो। सभी
सजीव को यही चा हए। पुस्तक के पृष्ठ 4 को दे खए — य द पृथ्वी का सारा जल 200 मलीलीटर के गलास म हो
तो मीठा जल केवल 5 मलीलीटर अथात् एक चम्मच होगा। शेष सब खारा महासागरीय जल है। इसी लए मीठे जल
को कभी व्यथ नह करना चा हए।
घर पर क जए: एक गलास जल म एक चम्मच नमक घोलकर उसक एक बूँद च खए। समुद्र का जल इससे भी
अ धक खारा होता है।
प्र.2 महासागरीय जल का उपयोग कस हेतु कया जा सकता है?
महासागर का जल पया नह जा सकता, कतु अनेक अन्य काम म बहुत उपयोगी है।
नमक बनाने म। समुद्र जल को उथले सपाट स्थल म फैलाया जाता है, जन्ह लवण-पटल (सॉल्ट पेन) कहते ह। सूय जल को
सुखा दे ता है और नमक शेष रह जाता है। गुजरात के लवण-पटल भारत के सबसे बड़े लवण उत्पादक क्षेत्र म से एक ह।
समुद्र जीवन के घर के रूप म। मछ लयाँ, केकड़े, झ गे, कछु ए और े ल महासागर म रहते ह। मछु आरा प रवार क जी वका
इसी से चलती है।
यातायात और ापार म। बड़े जलयान महासागर पार करके एक दे श से दूसरे दे श तक सामान पहुँचाते ह।
जल-चक्र म। हमारे बादल क अ धकांश वाष्प महासागर से ही उठती है। नमक पीछे रह जाता है, इस लए बरसने वाला जल
मीठा होता है।
काय और मनोरंजन म। समुद्र तट पर पयटक आते ह और कुछ बड़े कारखान तथा वद्युत संयंत्र म ठं डा करने के लए समुद्र
जल का उपयोग होता है।
वषा का जल खारा क्य नह होता: जब समुद्र जल वा ष्पत होता है तो केवल जल वाष्प बनकर ऊपर उठता है।
नमक समुद्र म ही रह जाता है। इसी लए बादल और वषा — दोन मीठे जल के होते ह।
क्या आप जानते ह? मशीन क सहायता से समुद्र जल से नमक हटाकर उसे पीने योग्य बनाया जा सकता है, कतु
इसम बहुत ऊजा और धन लगता है। जो मीठा जल हमारे पास है, उसे बचाना कह आसान है।
ग त व ध 1 — पृष्ठ 5
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जल के ोत
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गतवध
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हम पेय जल (मीठा जल) कहाँ मल सकता है? नीचे दए गए चत्र म से मीठे जल के व भन्न ोत को पहचा नए
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प्र.1
और उनके नाम ल खए। (‘जल के ोत’ के चार ओर आठ चत्र दए गए ह।)
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पृष्ठ 5 पर ‘जल के
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asप्रत्येक चत्र के नीचे द गई पं क्त पर उस ोत का नाम ल खए।
ोत’ शब्द के चार ओर छपे आठ चत्र, यहाँ सरल रेखा चत्र के रूप म पुनः च त्रत (redrawn
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sketches)।
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c o mोत शब्द के चार ओर बने आठ चत्र को पं क्त दर पं क्त, बाएँ से दाएँ दे खए।
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जल के
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चत्र कहाँ है चत्र म क्या दख रहा है नाम जो लखना
है
ऊपर क पं क्त, बाएँ चार ओर घास और सरकंड से घरा छोटा गोल जल- नकाय तालाब
ऊपर क पं क्त, बीच रेतीले तट पर आती हुई ऊँची लहर समुद (महासागर )
म
ऊपर क पं क्त, दाएँ अत्यंत ठं डे जल म तैरते बफ के वशाल टु कड़े िहमनद / िहमटोप
बीच क पं क्त, बाएँ पहाड़ के सामने फैला शांत जल झील
बीच क पं क्त, दाएँ भू म का काटकर दखाया गया दृश्य — ऊपर मृदा, फर जल क परत, फर गोल भूिमगत जल
पत्थर
नीचे क पं क्त, बाएँ हरी भू म पर बल खाती जल-धारा नदी
नीचे क पं क्त, बीच म ईंट का गोल ढाँचा, रस्सी और बाल्ट स हत कु आँ
नीचे क पं क्त, दाएँ काला बादल जससे बूँद गर रही ह वष
एक चत्र शेष से भन्न है। ऊपर बीच वाला चत्र समुद्र का है। समुद्र का जल खारा होता है, इस लए वह मीठे जल का ोत नह है।
शेष सात मीठे जल के ोत ह।
ये मीठे जल के ोत क्य ह: तालाब, झील और नद भू म क सतह पर जल रखते ह। हमनद और हमटोप मीठे
जल को ठोस रूप म, बफ बनाकर रखते ह। वषा बादल से मीठा जल नीचे लाती है। कुआँ भू मगत जल ऊपर लाता
है। और भू मगत जल स्वयं वही वषा का जल है जो मृदा म रसकर नीचे भंडा रत हो गया।
तीन समूह म बाँ टए: भू म के ऊपर का जल — तालाब, झील, नद ; भू म के नीचे का जल — भू मगत जल,
कुआँ; आकाश से आने वाला और जमा हुआ जल — वषा, हमनद।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 5
जल के व भन्न रूप
प्र.1 ज्यो त यह जानने को उत्सुक थी क क्या वायु म भी जल क उप स्थ त होती है? और क्या बफ जल का ही एक
रूप है?
दोन प्रश्न का उत्तर हाँ है। वायु म जल होता है, और बफ जल का ही एक रूप है।
वायु म जल। आपके चार ओर क वायु म सदै व कुछ जल रहता है। वह दखाई नह दे ता, क्य क वह जलवाष्प — गैस के रूप म
जल — के रूप म होता है। इसे सद्ध क जए —
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1. स्ट ल का एक गलास ली जए और उसम बफ के टु कड़े डा लए।
2. दो-तीन मनट प्रतीक्षा क जए।
3. गलास के बाहर नन्ह बूँद दखाई दे ने लगगी।
4. ये बूँद वायु क जलवाष्प ह, जो ठं डे गलास से ठं डी होकर फर से जल बन गईं।
बफ। बफ जल का ठोस रूप है। जब आकाश म ऊपर जलवाष्प बहुत अ धक ठं डी हो जाती है तो वह सीधे मुलायम सफ़ेद हमकण
म बदलकर नीचे गरती है।
जल का रूप कैसा होता है आपने इसे दे खा है
ठोस कठोर, अपनी आकृ त बनाए रखता है बफ का टुक ड़ ा, िहम , ओले
द्रव बहता है, पात्र क आकृ त ले लेता है वष , नदी का जल , पीने का जल
वाष्प (गैस) अदृश्य, वायु म फैल जाता है वायु में घुल ा जल , गरम दाल के ऊपर की भाप
यह फर भी जल ही क्य है: बफ, जल और वाष्प एक ही वस्तु के तीन वेश ह। गम क जए तो वाष्प बन जाती है,
ठं डा क जए तो फर जल, और बहुत ठं डा क जए तो बफ।
ग त व ध 2 — पृष्ठ 6
स्ट ल के गलास म बफ के टु कड़े
गतवध
प्र.1 स्ट ल का एक गलास ली जए। इसम बफ के कुछ टु कड़े डा लए। गलास पर दखाई दे ने वाले जलकण को
दे खए। (क) ये जलकण कहाँ से आए?
ये जलकण गलास के चार ओर क वायु से आए ह। वायु म जलवाष्प रहती है जो हम दखाई नह दे ती। ठं डा गलास उस वाष्प
को ठं डा कर दे ता है और वह गलास के बाहर नन्ह बूँद म बदल जाती है।
चरण दर चरण क जए और दे खए।
1. स्ट ल का सूखा गलास ली जए। प छकर दे ख ली जए — बाहर से बलकुल सूखा है।
2. उसम बफ के चार-पाँच टु कड़े डा लए।
3. दो मनट प्रतीक्षा क जए। उसे छु इए मत।
4. अब गलास के बाहर दे खए। वह नन्ह बूँद से भर गया है। छू ने पर उँ गली गीली हो जाती है।
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अंदर बफ के टु कड़ े
वायु की
जलवाष्प बूँदे ं यहाँ बनती है ं —
िगलास के बाहर
िगलास मे ं कोई छे द नही ं है । जल बाहर से आया है , अंदर से नही ं।
अदृश्य जलवाष्प ठं डे गलास से टकराकर ठं डी होती है और दखाई दे ने वाली बूँद बन जाती है।
ऐसा क्य होता है: गरम वायु अपने साथ जलवाष्प रख सकती है, ठं डी वायु उतनी नह रख पाती। जब कमरे क
गरम वायु अत्यंत ठं डे स्ट ल से टकराती है तो वह तुरंत ठं डी हो जाती है और उसक जलवाष्प फर से द्रव जल बन
जाती है। वाष्प के जल म बदलने क इस क्रया को संघनन कहते ह।
स्वयं जाँ चए: पास म एक और गलास र खए जसम सामान्य ताप का जल हो। वह बाहर से सूखा ही रहेगा। केवल
ठं डा गलास गीला होता है — अथात् बूँद वायु से आ रही ह, स्ट ल से रसकर नह ।
प्र.2 (ख) बफ के टु कड़ को कुछ समय के लए गलास म ही छोड़ दे ने पर उनका क्या होगा?
बफ के टु कड़े पघल जाएँगे। वे धीरे-धीरे द्रव जल म बदल जाएँगे और कुछ समय बाद गलास म बफ के स्थान पर जल
होगा।
आप क्रम से यह दे खगे —
1. पहले टु कड़ के नुक ले कोने गोल और चकने हो जाते ह।
2. फर टु कड़े छोटे होने लगते ह और नीचे थोड़ा जल इक ा हो जाता है।
3. टु कड़े उसी जल म तैरते रहते ह और घटते जाते ह।
4. अंत म बफ बचती ही नह — केवल ठं डा जल रह जाता है।
बफ (ठोस) + कमरे का ताप → जल (द व)
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ऐसा क्य होता है: कमरा बफ से गरम है। ताप सदै व गरम वस्तु से ठं डी वस्तु क ओर जाता है। इस लए वायु और
गलास का ताप बफ म चला जाता है और बफ पघल जाती है — अथात् ठोस रूप से द्रव रूप म बदल जाती है।
जल वही रहता है, केवल उसका रूप बदलता है।
यह भी क जए: एक टु कड़ा छाया म और एक धूप म प्लेट पर र खए। धूप वाला टु कड़ा बहुत जल्द पघलेगा,
क्य क उसे ताप शीघ्रता से मलता है।
प्र.3 (ग) य द हम जल को गम कर तो उसका क्या होगा?
जल गरम होगा, फर उबलने लगेगा और भाप अथात् जलवाष्प म बदल जाएगा। पात्र म जल धीरे-धीरे कम होता जाएगा।
चूल्हे पर रखे पात्र को दे खए।
1. जल पहले गुनगुना, फर गरम होता है।
2. तली से छोटे -छोटे बुलबुले उठने लगते ह।
3. शीघ्र ही पूरा जल तेज़ी से बुलबुले छोड़ने लगता है। यही उबलना है।
4. पात्र के ऊपर सफ़ेद धुँधली भाप उठती दखाई दे ती है — यह वही जलवाष्प है जो वायु म थोड़ी ठं डी हो गई है।
5. चूल्हा जलता रहे तो पात्र म जल का स्तर घटता जाता है, क्य क जल लगातार वाष्प बनकर उड़ रहा है।
जल (द व) + ताप → जलवाष्प (गैस)
ऐसा क्य होता है: ताप जल को इतनी ऊजा दे दे ता है क वह पात्र छोड़कर गैस के रूप म वायु म उड़ जाए। इसके
लए उबलना आवश्यक नह है — गीले कपड़े धूप म इसी तरह सूखते ह, बस बहुत धीरे-धीरे। उबलना केवल बहुत
तेज़ वाष्पन है।
सावधानी: भाप उबलते जल से भी अ धक गरम होती है और बुरी तरह जला सकती है। उबलते पात्र को दूर से और
कसी बड़े के साथ ही दे खए।
प्र.4 उपयुक्त ग त व ध म आप जल के कौन-से रूप को दे खते ह?
जल के तीन रूप — ठोस, द्रव और वाष्प।
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रूप इस ग त व ध म कहाँ दखा क्या बदला
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ठोस
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ल के गलास म डाले गए बफ के टु कड़े
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जल जमकर कठोर हो गया
se m गलास के अंदर पघला हुआ जल और बाहर बनी बूँद
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द्रव
a बफ िपघली; वाष्प संघ िनत हुई
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वाष्प (गैस) वायु का अदृश्य जल जससे बूँद बन ; उबलते पात्र के ऊपर क भाप जल गरम होकर गैस बनकर उठा
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ठोस ⇄ द व ⇄ वाष्प
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ताप इसे दाईं ओर ले जाता है, ठं डक बाईं ओर लौटा लाती है।
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है.cऔर फर लौट भी सकता है। प्रकृ त यही काम बहुत बड़े पैमाने पर करती a
यह क्य महत्वपूण है: यह छोट -सी ग त व ध पूरे अध्याय का मूल वचार दखा दे ती है। जल अपना रूप बदल
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सकता m और उसे हम जल-चक्र कहते
a glaह।
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प रवतन का अवलोकन — पृष्ठ 6
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‘मेरा अवलोकन’ स्तंभ भ रए a g
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प रवतन का अवलोकन — ग त व ध: बफ का पघलना। अपना अवलोकन ल खए।
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comठं डा जल रह जाता है। पात्र के बाहर भी नन्ह बूँद बन जाती ह। a
मेरा अवलोकन: बफ धीरे-धीरे अपनी आकृ त खोकर द्रव जल म बदल जाती है। टु कड़े छोटे और गोल होते जाते ह, उनके नीचे जल
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इक ा हो जाता है और अंत म बफ बचती ही नह — केवल
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बफ (ठोस) → जल (द व) —aइसे गलन (िपघलना) कहते है ं
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ऐसा क्य होता है: कमरे क वायु बफ से गरम है। ताप गरम वायु से ठं डी बफ म चलाemजाता है। यही ताप बफ को
. o कठोर, स्थर आकृ त से मुक्त कर दे ता है और वह द्रव जल बनकर aबहने
cउसक gl लगती है।
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स्वयं जाँ चए: सारी बफ पघल जाने पर जल का स्तर च ह्नत क जए। उसे फर जमाइए, बफ वापस मल जाएगी।
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कुछ भी नष्ट नह होता — केवल रूप बदलता है।
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प्र.2 प रवतन का अवलोकन — ग त व ध: जल का उबलना। अपना अवलोकन ल खए।
मेरा अवलोकन: पात्र क तली म बुलबुले बनते ह और ऊपर आते ह। जल हलता है और आवाज़ करता है। पात्र के ऊपर सफ़ेद
भाप उठती है। पात्र को आँच पर रखे रहने द तो जल का स्तर धीरे-धीरे घट जाता है।
जल (द व) → जलवाष्प (गैस) — इसे वाष्पन कहते है ं
ऐसा क्य होता है: आँच का ताप जल को इतनी ऊजा दे ता है क वह अदृश्य गैस बनकर वायु म उड़ सके। बुलबुले
जल के भीतर ही बनी वाष्प ह। पात्र से थोड़ा ऊपर यह वाष्प ठं डी वायु से मलकर बहुत नन्ह बूँद बना लेती है —
वही सफ़ेद भाप हम दखाई दे ती है।
कसी बड़े के साथ क जए: भाप से कुछ ऊँचाई पर स्ट ल क सूखी प्लेट कुछ क्षण र खए। उस पर बूँद बन
जाएँगी। वाष्प फर जल बन गई।
प्र.3 प रवतन का अवलोकन — ग त व ध: तीन दन तक जल को सूय के प्रकाश म रखना। अपना अवलोकन
ल खए।
मेरा अवलोकन: गलास म जल का स्तर हर दन थोड़ा-थोड़ा घटता जाता है। तीसरे दन तक गलास का ऊपरी भाग खाली दखाई
दे ने लगता है। न कुछ गरा, न कुछ रसा — जल वायु म चला गया।
इसे व्यव स्थत ढं ग से क जए —
1. एक गलास जल से भ रए और माकर या टे प से जल का स्तर च ह्नत क जए।
2. उसे धूप वाले ऐसे स्थान पर र खए जहाँ कोई हलाए नह ।
3. तीन दन तक प्र त दन उसी समय स्तर पर नशान लगाइए।
दन मुझे क्या दखा नमूना जल-स्तर
पहला दन (आरंभ) गलास नशान तक भरा हुआ 200 िमलीलीटर
दूसरा दन स्तर नशान से थोड़ा नीचे लगभग 185 िमलीलीटर
तीसरा दन स्तर और नीचे लगभग 170 िमलीलीटर
आपके गलास म मात्रा भन्न हो सकती है। गरम, शुष्क और हवादार दन म जल अ धक उड़ता है, ठं डे व बादल वाले दन म कम।
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ऐसा क्य होता है: वाष्प बनने के लए जल का उबलना आवश्यक नह है। सूय का ताप ही पयाप्त है। थोड़ा-थोड़ा
करके ऊपरी सतह का जल वाष्प बनकर वायु म मल जाता है। इस धीमे प रवतन को वाष्पन कहते ह। यही जल-
चक्र का पहला चरण है।
तीन पं क्तय क तुलना क जए: पघलने म थोड़ा ताप लगा। उबलने म बहुत ताप लगा और काम तेज़ी से हुआ।
धूप म ताप हल्का था, इस लए तीन दन लगे। प रवतन एक ही है — केवल ग त अलग है।
ग त व ध 3 — पृष्ठ 7
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बंद थैली म जल-चक्र
गतवध
प्र.1 एक पारदश थैली ली जए। चत्र म दशाई गई आकृ तय के अनुसार इस थैली पर माकर पेन से सूय, बादल, वृक्ष
और तीर के चह्न बनाइए। इस थैली को रंगीन जल से एक- तहाई भर ली जए। थैली को कसकर बंद कर द जससे
कोई रसाव न हो। इसे सूय के प्रकाश म र खए। कुछ घंट के प ात थैली के अंदर होने वाले प रवतन का
अवलोकन क जए।
पृष्ठ 7 पर ग त व ध 3 के साथ दया गया चत्र — बंद थैली, जस पर माकर से सूय, बादल, वृक्ष और तीर के चह्न बने ह
और जसका नचला एक- तहाई भाग रंगीन जल से भरा है।
आप क्या दे खगे: थैली का जल गरम हो जाता है; थैली के ऊपरी खाली भाग के भीतर नन्ह बूँद बन जाती ह; बूँद बड़ी होकर आपस
म जुड़ती ह, द वार पर फसलती ह और रंगीन जल म वापस गर जाती ह। थैली बंद है, इस लए जल बाहर नह जाता — वही जल
बार-बार घूमता रहता है।
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कैसे क जए:
1. एक पारदश ज़प वाली थैली ली जए।
2. माकर से एक ऊपरी कोने म सूय, उसके पास बादल, नीचे एक वृक्ष तथा एक ओर ऊपर जाते और दूसरी ओर नीचे आते तीर
बनाइए।
3. लगभग एक कप जल म नीले रंग या खाद्य रंजक क कुछ बूँद मलाइए। रंग से जल स्पष्ट दखाई दे ता है।
4. थैली को इस रंगीन जल से एक- तहाई भ रए।
5. हवा नकालकर थैली कसकर बंद क जए। एक बार उलटकर दे ख ली जए क रसाव तो नह है।
6. इसे टे प से धूप वाली खड़क पर चपका द जए, जल नीचे क ओर रहे।
7. तीन-चार घंटे बाद लौटकर थैली के ऊपरी आधे भाग को ध्यान से दे खए।
समय आप क्या दे खगे
1 घंटे बाद थैली गरम लगती है। ऊपरी भाग हल्का धुँधला दखता है।
2–3 घंटे बाद ऊपरी भाग के भीतर अनेक नन्ह पारदश बूँद जमी दखती ह।
4 घंटे बाद कुछ बूँद जुड़कर बड़ी हो जाती ह, फसलकर नीचे रंगीन जल म गर जाती ह।
रंगीन जल का स्तर आरंभ जैस ा ही रहता है — बंद थैल ी से कु छ भी बाहर नही ं गया।
ऐसा क्य होता है: सूय का प्रकाश रंगीन जल को गम करता है। उसका कुछ भाग वा ष्पत होकर जलवाष्प बनता है
और थैली के खाली भाग म ऊपर उठ जाता है। ऊपर क पॉलीथीन जल से ठं डी है, इस लए वाष्प उससे टकराकर
संघ नत हो जाती है और नन्ह बूँद बन जाती ह। भारी होने पर बूँद नीचे लुढ़क आती ह। यही वाष्पन, संघनन और
वषा है — आपक हथेली पर।
एक बात पर ध्यान द जए: पॉलीथीन पर बनी बूँद रंगहीन ह, नीली नह । रंग जल म ही रह गया। इसी प्रकार
महासागर का नमक पीछे रह जाता है और बरसने वाला जल मीठा होता है।
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 1 जल — जीवन का आधार
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emबन गए ह।)
प्र.2 ‘मेरा अवलोकन — म च कत ँ — इसका कारण है…’ ता लका को पूरा क जए। (पहली पं क्त द गई है: जल
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गम हो गया है / जल कैसे गम हो गया? / सूय का प्रकाश; दूसरी पं क्त: थैली के अंदर जलकण
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a gl मेरा अवलोकन म च कत ँ इसका कारण है…
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जल गम हो गया है। जल कैसे गम हो गया? सूय का प्रकाश
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थैली के अंदर जलकण बन गए ह।
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s e m हुई है, शेष रक्त ह।
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पृष्ठ 7 पर ग त व ध 3 के साथ छपी ता लका, ठ क वैसी ही जैसी पुस्तक म है — पहली पं क्त भरी
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a उत्तर
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पूरी क गई ता लका यह रही। पहली पं क्त पुस्तक ने द है; शेष थैली म वास्तव म जो होता है, उसी से भरी गई ह।
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मेरा अवलोकन
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म च कत ँ
a se इसका कारण है…
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जल गम हो गया है। जल कैसे गम हो गया? सूय का पकाश
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थैली के अंदर जलकण बन गए ह। जल तो मैंने नीचे डाला था, वह
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गरम जल जलवाष्प बनकर ऊपर उठ गया। ऊपर की पॉलीथीन
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थैल ी के ऊपर कै से पहच
ु ँ गया? ठं डी है, इसिलए वाष्प ठं डी होकर बूदँ ों में बदल गई। इसे संघ नन
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कहते है। ं
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agl दँ े ं बड़ ी होकर दीवार से िफसलती है ं
और जल में वापस िगर जाती है।
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बूदँ े ं ऊपर िटकी क्यों नही ं
रहती?ं
छोटी बूदँ े ं जुड़कर बड़ ी और भारी हो जाती है ं और भारी बूदँ े ं नीचे
िफसल जाती है। ं आकाश में यही होता है और उसे हम वष कहते
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है।
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रंगीन जल का स्तर लगभग वैस ा ही जल गया कहाँ और लौटा कहाँ थैल ी बंद है। जल ने के वल रूप बदला — द व से वाष्प और िफर
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रहता है। से ? वाष्प से द व। थैल ी से कु छ भी बाहर नही ं गया।
पॉलीथीन पर बनी बूदँ े ं नीली नही,ं रंग जल के साथ ऊपर क्यों वाष्प के वल जल बनता है। रंग पीछे रह गया, ठीक वैसे ही जैसे
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रंगहीन है।
ं नही ं गया? समुद ी जल के वािष्पत होने पर नमक पीछे रह जाता है।
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.cबड़ा वचार: यह थैली पृथ्वी का छोटा-सा नमूना है। रंगीन जल सागर है, धूaपgवाली खड़क सूय है, ऊपर बनी धुंध
m और बूँद बादल ह और नीचे लुढ़कती बूँद वषा ह। थैली बंद है, इस लए स्पष्ट दखता है क जल कभी समाप्त नह
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ag होता — वह केवल यात्रा करता है और रूप बदलता है।
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ग त व ध 4 — पृष्ठ 9
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भू मगत जल
गतवध
प्र.1 एक पारदश गलास ली जए। इसे मृदा से आधा भर ली जए। अब इस मृदा म एक चम्मच से धीरे-धीरे जल
डा लए। ध्यानपूवक दे खए क क्या होता है।
आप क्या दे खगे: जल ऊपर नह ठहरता। वह मृदा म समा जाता है, मृदा ऊपर से नीचे क ओर गहरी और गीली होती जाती है, और
कुछ दे र बाद गलास क तली म जल इक ा हो जाता है। य द जल डालते रह तो मृदा और नह सोख पाती और जल सतह पर खड़ा
होने लगता है।
कैसे क जए:
1. पारदश गलास या कट हुई प्ला स्टक क बोतल ली जए, जससे कनारे से भीतर दखाई दे ।
2. उसे सूखी बगीचे क मृदा से आधा भ रए। मृदा को दबाइए मत।
3. एक चम्मच जल लेकर मृदा के बीच बीच धीरे-धीरे डा लए।
4. सतह भी दे खए और गलास के कनारे से भीतर क मृदा भी दे खए।
5. एक और चम्मच डा लए, रु कए, फर एक और — कुल छह से आठ चम्मच।
चरण अवलोकन
पहला चम्मच जल ऊपर से लगभग तुरंत गायब हो जाता है। छोटा-सा गहरा गीला धब्बा बनता है।
अगले कुछ चम्मच गहरी गीली रेखा मृदा म धीरे-धीरे नीचे खसकती है। नन्हे बुलबुले ऊपर आते ह।
कई चम्मच के बाद गीली मृदा के नीचे, गलास क तली म स्वच्छ जल इक ा होने लगता है।
डालते रहने पर म ृद ा भर जाती है। अब जल सतह पर खड़ ा रहता है और भीतर नही ं जाता — यह भारी वष के बाद जल -भराव जैस ा है।
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1. धीरे -धीरे जल डािलए
2. वह मदृ ा मे ं िरसता है
3. तली मे ं इक ा होता है
वष मे ं खेत के नीचे भी यही होता है — यही संिचत जल भूिमगत जल है ।
मृदा से भरा गलास हमारे पैर के नीचे क भू म का छोटा नमूना है।
ऐसा क्य होता है: मृदा दखने म ठोस लगती है, कतु वह असंख्य छोटे कण से बनी है और उनके बीच नन्हे रक्त
स्थान होते ह जनम वायु भरी रहती है। जल डालने पर वह वायु को बाहर धकेल दे ता है — इसी लए बुलबुले उठते ह
— और स्वयं उन रक्त स्थान म बैठ जाता है। अपने भार के कारण जल एक रक्त स्थान से दूसरे म उतरता जाता है,
जब तक कोई ऐसी परत न मले जससे वह आगे न जा सके। वह वह एकत्र हो जाता है।
यही भू मगत जल है। इसी प्रकार भू म के नीचे गहराई म भंडा रत होने वाला जल भू मगत जल कहलाता है। कुएँ,
बोरवेल, ूबवेल और हडपंप इसी जल को ऊपर लाने के लए बनाए जाते ह।
ग त व ध 5 — पृष्ठ 9
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भू मगत जल का पुनभरण
गतवध
प्र.1 उस चत्र पर सही का चह्न अं कत क जए जो भू मगत जल का पुनभरण करेगा। — कंक्र ट क सड़क ☐ ह रत
बगीचा ☐ पक्का क्षेत्र ☐
कं ीट की सड़ क हिरत बगीचा पक्का क्षेत्र
पृष्ठ 9 पर ग त व ध 5 के साथ छपे तीन चत्र, यहाँ सरल रेखा चत्र के रूप म पुनः च त्रत, तथा प्रत्येक के नीचे सही का
चह्न लगाने का खाना।
बीच वाले चत्र — ह रत बगीचा — पर सही का चह्न लगाइए।
चत्र सतह कैसी है वषा जल कहाँ जाता है सही का
चह्न?
कंक्र ट क कठोर, चकनी, सीमट और तारकोल से सड़क से बहकर सीधे ना लय म ✗
सड़क बंद
ह रत बगीचा घास से ढक मुलायम मृदा, एक बड़ा वृक्ष घास और मृदा से रसकर भू मगत जल तक ✓
पक्का क्षेत्र भू म पर सटाकर बछाए गए पत्थर के स्लैब से बहकर; केवल जोड़ से थोड़ा-सा रसता ✗
स्लैब है
बगीचा ही क्य : वषा जल भू मगत जल तभी बन सकता है जब वह भू म के भीतर जा सके। घास और मृदा म नन्हे
रक्त स्थान होते ह और जड़ नीचे तक छोट -छोट राह बना दे ती ह, इस लए वषा भीतर रस जाती है। कंक्र ट और
पत्थर के स्लैब म ऐसा कोई रक्त स्थान नह होता, इस लए जल उन पर से फसलकर बह जाता है। यही कारण है क
अ धक पक्क सतह वाले शहर का भू मगत जल घट जाता है — वषा होती है, पर वह भू म तक पहुँचती ही नह ।
पुनभरण म क्या सहायक है: कुछ भू म खुली और अनाव रत रखना, शोषक गत (सोक पट) बनाना, तालाब और
मानव न मत झील बनाए रखना तथा अ धक वृक्षारोपण। राजस्थान के जोहड़ — वषा जल एकत्र करने वाले मट्ट
के छोटे बाँध — सैकड़ वष से यही काम करते आ रहे ह।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 10
सतह जल
प्र.1 क्या आपने कभी सोचा है क न दयाँ कैसे बहती ह?
नद ढाल पर नीचे क ओर बहती है। वह प्राय: ऊँचे पहाड़ से आरंभ होती है — पघलती बफ, हमनद या कसी ोत से — और
फर नीची से नीची भू म क ओर बहती हुई अंत म सागर तक पहुँच जाती है।
यह यात्रा चरण दर चरण ऐसी होती है —
1. पहाड़ पर ऊँचाई पर वषा होती है या बफ पघलती है।
2. जल ढाल पर टक नह सकता, इस लए नीचे क ओर बहने लगता है।
3. अनेक छोट धाराएँ मलकर एक जल-धारा बनाती ह।
4. अनेक जल-धाराएँ मलकर नद बनाती ह।
5. नद भू म के नचले भाग का अनुसरण करती है — पहाड़ी पर चढ़ने के स्थान पर उसके चार ओर घूम जाती है।
6. जहाँ भू म समतल और नीची है, वहाँ जल फैल जाता है और धीमा हो जाता है। जहाँ बड़ा ग ा होता है, वहाँ जल एकत्र होकर
झील बना लेता है।
7. अपनी यात्रा के अंत म वह सागर म जा गरती है।
नीचे क ओर ही क्य : जल म भार होता है और भार सदै व नीचे क ओर ख चता है। इस लए जल स्वयं कभी ऊपर
क ओर नह बह सकता। यही एक सरल नयम संसार क हर नद का माग तय कर दे ता है।
जल भू म को भी आकार दे ता है: बहते समय नद अपने साथ रेत, मट्ट और छोटे पत्थर बहा ले जाती है। सैकड़
वष म यह चट्टान को घसकर घा टयाँ बना दे ती है और समतल मैदान म मट्ट बछा दे ती है। इस प्रकार भू म नद
को और नद धीरे-धीरे भू म को आकार दे ती है।
ग त व ध 6 — पृष्ठ 10–11
मुड़े हुए समाचार-पत्र पर सरस के दाने
गतवध
प्र.1 सरस के दान के संबंध म आपने क्या अवलोकन कया?
दाने उच्चतम बदु से लुढ़ककर नीचे के भाग क ओर चले गए। वे वह नह ठहरे जहाँ उड़ेले गए थे। वे मुड़े हुए कागज़ के वलन
और ग का अनुसरण करते हुए नचले हस्स म इक े हो गए।
तैयारी कैसे क जए:
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1. पुराने समाचार-पत्र का एक पृष्ठ लेकर उसे मरोड़कर गद बनाइए, फर खोल ली जए। अब उसम अनेक वलन बन गए ह।
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2. उसके ऊपर दूसरा पृष्ठ र खए और थोड़ा दबाइए जससे वलन हल्के ढाल बन जाएँ।
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3. एक कनारा थोड़ा उठाइए जससे कोई एक भाग स्पष्ट रूप से सबसे ऊँचा हो।
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4. उस उच्चतम बदु पर एक प्याले से सरस के दाने धीरे-धीरे उड़े लए।
5. दे lखए दाने कहाँ जाते ह। कागज़ को हलाइए मत।
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मने क्या दे खा अवलोकन
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दान क दशा सदा ऊँचे भाग से िनचले भाग की ओर — कभी ऊपर की ओर नही ं।
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उनका माग सीधा नही ं। वे वलनों की खाँचों और मोड़ ों के साथ-साथ चले ।
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वे कहाँ रुके िनचले ग ों में, जहाँ छोटे-छोटे ढे र बन गए।
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a ऐसा क्य होता है: दान म भार है, इस लए वे जस नचले स्थान तक पहुँच सकते ह वह तक लुढ़कते ह। कौन-सी
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राह खुली है, यह कागज़ क आकृ त तय करती है। जल भी ठ क ऐसा ही करता है, इसी लए यह ग त व ध नद का
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अच्छा नमूना है।
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क्या ये दाने सीधी रेखा म ग त कर रहे ह या ये व भन्न दशाओं म फैल रहे ह?
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eवmभन्न दशाओं म फैल रहे ह। ये एक सीधी रेखा म नह चलते।
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a दान क धारा कई छोट धाराओं म बँट जाती है। कुछ बाईं ओर जाते ह, कुछ दाईं ओर, कुछ बीच से नीचे उतरते ह। हर छोट धारा
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उसी खाँच का अनुसरण करती है जसम वह गरी।
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उच्चतमagिबंद ु
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m अलग-अलग वलन दानों को अलग-अलग la s e
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l a se िदशाओं मे ं भेज दे ते है।
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दाने ग ों मे ं इक े होते है ं
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आरंभ एक ही बदु से, पर माग अनेक — क्य क कागज़ के वलन राह तय करते ह।
वे फैलते क्य ह: मुड़ा हुआ कागज़ एक समान ढाल नह है। उसम अनेक छोट उभरी कटक और अनेक छोट
घा टयाँ ह। दाना उभरी कटक को पार नह कर सकता, इस लए उसे उसी घाट म चलना पड़ता है जसम वह गरा।
न दयाँ भी यही करती ह। इसी लए एक ही पवत पर पास-पास जन्मी न दयाँ दे श के दो अलग-अलग सागर तक पहुँच
सकती ह।
प्र.3 क्या दाने कुछ क्षेत्र म एक त्रत हो रहे ह? क्या ये दाने इस प्रकार एक त्रत हो रहे ह जस प्रकार झील एवं न दय
इत्या द म पानी एक त्रत होता है?
हाँ। दाने कागज़ के नचले ग म एकत्र हो रहे ह — ठ क वैसे ही जैसे जल तालाब और झील म एकत्र होता है।
कागज़ पर प्रकृ त म
लंबी खाँच जसम दाने बहते चले जाते ह नदी या जल -धारा
ग ा जहाँ दाने ढे र बनकर रुक जाते ह तालाब या झील
तीव्र ढाल जहाँ दाने तेज़ी से गरते ह जलपपात या तेज़ पहाड़ ी धारा
उभरी कटक जसे दाने पार नह कर पाते ृ ला
दो निदयों को अलग करने वाली पहाड़ ी या पवत ंख
कागज़ के कनारे से बाहर गरते दाने सागर में िमलती नदी
वे इक े क्य होते ह: ग े के आगे कोई और नीचा स्थान नह होता। एक बार उसम आ जाने पर दाना रुक जाता है।
जल भी यही करता है। य द ग े क तली कठोर हो और जल रसकर नीचे न जा सके, तो जल वह ठहर जाता है और
तालाब या झील बन जाती है।
पुस्तक के अपने शब्द म नयम: जल अपने माग म आने वाली भू-संरचनाओं क आकृ त के अनुसार बहता,
रुकता अथवा मुड़ता है — और जल का प्रवाह भू-आकृ तय को भी प रव तत कर सकता है।
चचा क जए — पृष्ठ 11
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न दयाँ अलग-अलग सागर म क्य जाती ह
चचा क जए
प्र.1 सरस के दान पर क गई ग त व ध 6 के आधार पर चचा क जए क क्य कुछ न दयाँ अरब सागर क ओर बहती
ह जब क कुछ बंगाल क खाड़ी क ओर बहती ह।
क्य क भारत क भू म समतल नह है। कह वह ऊँची है और कह नीची, और हर नद उसी ढाल पर उतरती है जस पर
वह जन्मी है — ठ क वैसे ही जैसे सरस के दाने मुड़े हुए कागज़ के वलन पर उतरे थे।
भारत को एक बहुत बड़ा मुड़ा हुआ कागज़ मा नए।
1. प्राय प के प मी कनारे के साथ-साथ पहा ड़य क एक लंबी ऊँची द वार है, जसे प मी घाट कहते ह।
2. घाट के प म म भू म तीव्रता से नीचे उतरती है और अरब सागर पास ही है।
3. घाट के पूव म भू म बहुत दूर तक हल्के ढाल से नीचे उतरती चली जाती है — ठे ठ बंगाल क खाड़ी तक।
4. इस लए प मी घाट से नकलकर पूव क ओर मुँह करने वाली न दयाँ — गोदावरी, कृष्णा और कावेरी — पूरे दे श को पार
करके बंगाल क खाड़ी म गरती ह।
5. नमदा और ताप्ती भन्न ह। ये पवत ृंखलाओं के बीच बनी लंबी सँकरी घा टय म प म क ओर बहती ह और वे घा टयाँ
प म क ओर ढलती ह, इस लए ये दोन अरब सागर तक पहुँचती ह।
6. उत्तर म गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र हमालय से उतरती ह। नीचे का मैदान द क्षण-पूव क ओर ढलता है, इस लए वे भी बंगाल क
खाड़ी म जाती ह।
पिश्चमी घाट
लंबा, हल्का ढाल
छोटा,
तीव ढाल
अरब बंगाल की
सागर खाड़ी
ऊँची दीवार पिश्चमी तट के पास है , इसिलए अिधकाश
ं निदयों को पूव जाना पड़ता है ।
प्राय पीय भारत का बगल से दृश्य। ढाल ही तय करता है क नद कस सागर तक पहुँचेगी।
कक्षा म चचा के लए नमूना उत्तर: “ग त व ध 6 म सभी दाने एक ही ऊँचे बदु से चले थे, फर भी सब एक ही ओर नह गए। हर
दाना उसी वलन के साथ गया जसम वह गरा। भारत क भू म भी उसी मुड़े कागज़ जैसी है। प मी तट के पास प मी घाट ऊँचा
वलन है। वहाँ से अ धकांश भू म पूव क ओर ढलती है, इस लए अ धकांश न दयाँ पूव जाकर बंगाल क खाड़ी म गरती ह। केवल वे
न दयाँ अरब सागर तक पहुँचती ह जो नमदा और ताप्ती क तरह प म क ओर ढलती घा टय म बहती ह।”
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क्या आप जानते ह? राजस्थान क लूणी नद अरावली ृंखला से नकलती है और कसी सागर तक पहुँचती ही
नह । वह गुजरात म कच्छ के रण क दलदली भू म म समाप्त हो जाती है।
ग त व ध 7 — पृष्ठ 13
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न दय के प्रवाह-पथ को दे खए! — पृष्ठ 12 का भारत का मान चत्र
गतवध
प्र.1 न दय के प्रवाह-पथ को दे खए! मान चत्र म आप दे ख सकते ह क न दयाँ भन्न- भन्न दशाओं म बहती ह। कुछ
न दयाँ बंगाल क खाड़ी म और कुछ अरब सागर म जाकर मलती ह। अवलोकन क जए और ता लका म
ल खए। (द गई न दयाँ — गोदावरी, नमदा, गंगा; आगे क पं क्तयाँ रक्त ह।)
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यमन गंगा
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कृ णा
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अरब सागर बंगाल की खाड़ ी
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*मानिचत्र मापनी के अन स
ु ार नही ं है
पृष्ठ 12 पर दया गया भारत का मान चत्र, यहाँ वास्त वक अक्षांश-दे शांतर पर पुनः च त्रत। इसम पुस्तक के मान चत्र
वाली वही आठ न दयाँ दशाई गई ह। *मान चत्र मापनी के अनुसार नह है।
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नद का नाम बंगाल क खाड़ी क ओर बहती है अरब सागर क ओर बहती है
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gतीन पं क्तयाँ उन न दय के लए
m .पृcष्ठ 13 पर ग त व ध 7 के साथ छपी ता लका — तीन न दय के नाम दए गए ह और
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रक्त ह जन्ह आप स्वयं मान चत्र म खोजगे।
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gl ब्रह्मपुत्र, गंगा, यमुना, नमदा, ताप्ती, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी। हर नद को
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पृष्ठ 12 के मान चत्र म आठ न दयाँ अं कत ह —
उँ गली से तब तक े स क जए जब तक वह सागर तक न पहुँच जाए, फर सही स्तंभ म चह्न लगाइए।
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नद का नाम बंगाल क खाड़ी क ओर बहती है अरब सागर क ओर बहती है
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गोदावरी —
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गंगा —
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ब्रह्मपुत्र ✓ —
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यमुना ✓ (पहले गंaगाgमें िमलती है) —
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ताप्ती —
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कृष्णा —
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बंगाल की खाड़ ी — 6 निदयाँ: गंगा, यमुन ा, बह्मपुत्र, गोदावरी, कृ ष्णा, कावेरी
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अरब सागर — 2 निदयाँ: नमदा, ताप्ती
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इतनी न दयाँ पूव क ओर क्य : ऊँचे प मी घाट प मी तट के पास ह, इस लए उनके पूव क भू म ठे ठ बंगाल
क खाड़ी तक हल्के ढाल से उतरती है। केवल नमदा और ताप्ती ऐसी घा टय म बहती ह जो दूसरी ओर, अथात्
प म क ओर, ढलती ह।
एक शब्द सी खए: जो नद सीधे सागर म जाने के बजाय कसी बड़ी नद म मल जाती है, जैसे यमुना गंगा म, उसे
सहायक नद कहते ह। यह शब्द आपको अध्याय 2 म फर मलेगा।
जल म जीवन — पृष्ठ 14–15
स्थल पर रहने वाले और जल म रहने वाले जंतु
प्र.1 जल म रहने वाले व वध प्रकार के पौध और जंतुओं को दे खना अ त है! ये स्थल पर रहने वाले जीव से कस
प्रकार अलग ह?
ये इस लए अलग ह क इनका शरीर स्थल के लए नह , जल के लए बना है। जल म रहने वाले जंतु को तैरना पड़ता है, जल के
भीतर साँस लेनी पड़ती है और बहते जल म स्वयं को सँभालना पड़ता है। इस लए उसके पास मीनपक्ष, गलफड़े और चकना नुक ला
शरीर होता है। स्थल के जंतु को चलना और वायु म साँस लेनी होती है, इस लए उसके पास पैर और फेफड़े होते ह।
पृष्ठ 14–15 के तालाब के चत्र को दे खए और तुलना क जए।
ग त कैसे करते ह। मछली मीनपक्ष और पूँछ से; मढक जालयुक्त पछले पैर से; बगुला लंबे पतले पैर से उथले जल म
चलकर। स्थल पर हरण या कुत्ता चार पैर से दौड़ता है।
ास कैसे लेते ह। अ धकांश मछ लयाँ जल म घुली वायु गलफड़ से लेती ह। स्थल के जंतु नाक से वायु लेकर फेफड़ तक
पहुँचाते ह।
शरीर क आकृ त। मछली दोन सर पर नुक ली और चकनी होती है, इस लए जल म सरलता से फसलती है। स्थल के जंतु
को ऐसी आकृ त क आवश्यकता नह ।
शरीर का आवरण। मछ लय पर गीले, फसलनदार शल्क होते ह। स्थल के जंतुओं पर सूखी त्वचा, बाल या पंख होते ह।
पौधे भी। जलीय पौध के तने कोमल होते ह जो जल के साथ झुक जाते ह और प त्तयाँ चौड़ी होकर तैरती ह। स्थल के पौध के
तने कठोर होते ह जो हवा के सामने सीधे खड़े रहते ह।
ऐसा क्य : जल कसी भी चलती वस्तु पर वायु से कह अ धक धक्का लगाता है। चकना, नुक ला शरीर और चपटे
मीनपक्ष इसी धक्के से नपटते ह। साथ ही जल के भीतर खुली वायु नह मलती, इस लए वहाँ रहने वाले जंतु को
जल म घुली थोड़ी-सी वायु लेनी पड़ती है — यही काम गलफड़े करते ह।
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 1 जल — जीवन का आधार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अपने सा थय के साथ स्थल पर रहने वाले जंतुओं और जल म रहने वाले जंतुओं क वशेषताओं पर चचा
क जए और आगे द गई ता लका को पूरा क जए। (द गई पं क्त: ‘ये जल म ास नह ले सकते ह।’ / ‘इनम
तैरने के लए मीनपक्ष होते ह।’)
स्थल पर रहने वाले जंतु जल म रहने वाले जंतु
ये जल म ास नह ले सकते ह। इनम तैरने के लए मीनपक्ष (गलफड़े) होते ह।
पृष्ठ 15 पर छपी ता लका, ठ क वैसी ही जैसी पुस्तक म है — एक पं क्त भरी हुई, पाँच पं क्तयाँ रक्त।
पूरी क गई ता लका यह रही। पहली पं क्त पुस्तक ने द है।
स्थल पर रहने वाले जंतु जल म रहने वाले जंतु
ये जल म श्वास नह ले सकते ह। इनम तैरने के लए मीनपक्ष होते ह।
नाक से वायु ले क र फे फड़ ों से श्वास ले ते है।
ं अिधकांश जल के भीतर गलफड़ ों से श्वास ले ते है।
ं
चलने, दौड़ ने या उड़ ने के िलए पैर या पंख होते है।
ं जल को पीछे धके लने के िलए मीनपक्ष और मज़बूत पूँछ होती है।
शरीर पर बाल , पंख या सूखे शल्क होते है।
ं शरीर िचकना और िफसलनदार होता है, पाय: गीले शल्कों वाला।
शरीर की आकृ ित िचकनी हो, यह आवश्यक नही ं। शरीर दोनों िसरों पर नुक ीला होता है िजससे जल में सरलता से िफसल सके ।
अंडे स्थल पर दे ते है ं या बच्चे स्थल पर जन्म ले ते है।
ं अनेक जंत ु जल में ही कोमल अंडे दे ते है।
ं
उदाहरण जो आप जोड़ सकते ह: स्थल पर — गाय, कुत्ता, मुग , हरण, हाथी। जल म — मछली, मीठे पानी का कछु आ, जलीय
सप, जलीय बच्छू ।
शब्द पर ध्यान द जए: मीनपक्ष वे चपटे अंग ह जनसे मछली तैरती है, और गलफड़े वे अंग ह जनसे वह जल म
श्वास लेती है। दोन अलग-अलग काम करते ह।
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कुछ दोन जगह रहते ह। कमल के पत्ते पर बैठा मढक छोट अवस्था म टै डपोल बनकर तालाब म मछली क तरह
श्वास लेता है और बड़ा होकर स्थल पर कूदता है और वायु म श्वास लेता है। भारत क आद्रभू मय म मलने वाली
मत्स्य बल्ली ( फ शग कैट) के पंजे आं शक रूप से जालयुक्त होते ह और वह मछली पकड़ने के लए गोता लगाती
है, पर रहती स्थल पर ही है।
ग त व ध 8 — पृष्ठ 17–18
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तालाब, झील या जल-जीवशाला का भ्रमण
गतवध
प्र.1 अपने शक्षक अथवा माता- पता के साथ कसी स्थानीय जल- नकाय, जैसे— तालाब, झील अथवा जल-
जीवशाला को दे खने जाइए और जल- नकाय के अंदर और आस-पास के जीवन का अवलोकन क जए। 1.
अपने अवलोकन के आधार पर नम्न ल खत ता लका को पूरा क जए। (द गई पं क्तयाँ — मछली: गोल मुख,
ऊपर क ओर, मीनपक्ष; तालाब का बगुला: लंबी एवं नुक ली च च, पतले पैर।)
पक्षी या जंतु मुख या च च पैर, पाद, मीनपक्ष के चत्र
का नाम ारा ग त
मछली गोल मुख, ऊपर मीनपक्ष
क ओर
तालाब का लंबी एवं नुक ली पतले पैर
बगुला चच
पृष्ठ 17 पर ग त व ध 8 के साथ छपी ता लका — पहली दो पं क्तयाँ पुस्तक क अपनी ह, उनके दोन चत्र स हत; तीन
पं क्तयाँ आपके अपने अवलोकन के लए रक्त ह।
भ्रमण को उपयोगी कैसे बनाएँ
1. शक्षक या माता- पता के साथ ही जाइए। जल के कनारे से दूर र हए।
2. कसी पौधे या जंतु को स्पश मत क जए और न ही उन्ह छे ड़ए। केवल दे खए।
3. पहले दो मनट चुपचाप स्थर खड़े र हए — शां त होते ही पक्षी लौट आते ह।
4. हर जीव के बारे म दो बात नोट क जए: उसका मुख या च च कैसी है और वह कस अंग से ग त करता है।
5. कॉपी म उसक आकृ त का एक कच्चा चत्र बनाइए। चत्र सुंदर होना आवश्यक नह , आकृ त स्पष्ट होनी चा हए।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — पृष्ठ 14–15 के तालाब के चत्र और पृष्ठ 16 के सूचना काड म दखाए गए जीव से भरी गई ता लका। पहली दो
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पं क्तयाँ पुस्तक क ह।
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comमुख या च च g l as
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पक्षी या जंतु का पैर, पाद, मीनपक्ष के ारा ग त
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मछली गोल मुख, ऊपर क ओर मीनपक्ष दोन सर पर नुक ला लंबा शरीर,
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मीनपक्ष और पूँछ स हत
m पैर
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तालाब का बगुला लंबी एवं नुक ली च च उथले जल म तीली जैसे पैर पर
खड़ा लंबा पक्षी
मेंढक चौड़ ा मुख, कीट पकड़ ने के िलए चार पैर ; तैर ने और कू दने के िलए लंबे
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गोल शरीर , ऊपर की ओर बड़ ी
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sजैeसा कवच, िजससे िसर और
लंबी िचपिचपी जीभ जालयुक्त िपछले पैर आँख,ें मुड़े हुए िपछले पैर
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मीठे पानी का छोटा भोथरा मुख, दाँतों के स्थान चार छोटे जालयुक्त पाद , जो चप्पू की
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कछु आ पर कठोर जबड़ े तरह काम करते है ं चार पाद बाहर िनकले हों
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a िकलिकला लंबी, सीधी, छु र ी जैस ी चोंच बहत
ु छोटे पैर ; यह उड़ कर गोता सरकं डे पर बैठा छोटा गोल पक्षी,
(िकं गिफ़ शर ) िजससे मछली पकड़ ता है
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लगाता है, जल में चलता नही ं बहुत लंबी चोंच सिहत
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मेढं क कछु आ िकलिकला
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ऐसे कच्चे चत्र पयाप्त ह। आकृ त, मुख और ग त करने वाला अंग दखाइए।
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क्या ध्यान दे ना है: हर मुख उसके भोजन के अनुरूप है और हर ग त करने वाला अंग उसके स्थान के अनुरूप।
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बगुले क लंबी नुक ली च च मछली पकड़ने क चमट है और पतले पैर उसे उथले जल म बना धँसे खड़ा रहने दे ते
s e m ह। कल कला क छु री जैसी च च तेज़ गोते के लए है। कछु ए के जालयुक्त पाद चप्पू ह। मछली का ऊपर क ओर
agla खुलने वाला मुख सतह पर तैरता भोजन लेने म सहायक है।
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य द जल- नकाय तक न जा सक: कसी दुकान या वद्यालय क जल-जीवशाला दे खए, या पुस्तक के पृष्ठ 14–
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15 के तालाब के चत्र को ध्यान से sदेeखए। उसम मढक, मछ लयाँ, कछु आ, जलीय सप, व्याध पतंग, जल पर चलने
वाले क ट, कल कला, बगुल la अन्य जल-पक्षी दखाई दे ते ह।
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प्र.2 2. भ्रमण के समय आपने जन पौध को दे खा है उनके चत्र बनाइए। उनके स्थानीय नाम के साथ उनका
नामांकन क जए। (ता लका: प्रकार — नाम — स्थानीय नाम; पहली पं क्त म ‘ लली’ दया गया है।)
जलीय पौधे इस बात से तीन समूह म बँटते ह क वे अपनी प त्तयाँ और जड़ कहाँ रखते ह। ता लका यह रही। अं तम स्तंभ म
अपने क्षेत्र के नाम ल खए — वे स्थान-स्थान पर बदलते ह।
प्रकार नाम स्थानीय नाम (नमूना)
प्लवन करते पौधे (जल के ऊपर) िलली · जलकुं भी · ले म्ना कु मुिदनी · जलकुं भी ·
जलपण
जल के अंदर रहने वाले पौधे हाइिडला · वैिलसनेिरया (फीता िसवार / जल -िसवार
घास )
ऐसे पौधे जनक जड़ जल संस्तर पर होती ह कतु वे जल के ऊपर कमल · नरकु ल · िसंघ ाड़ ा कमल · पटेर ा / नरकु ल ·
दखाई दे ते ह िसंघ ाड़ ा
हर पौधे का चत्र कैसे बनाएँ:
1. प्लवी पौधा। पहले जल क रेखा ख चए। फर उस रेखा पर गोल चपट प त्तयाँ बनाइए और नीचे बाल जैसी छोट जड़
लटकाइए।
2. जल के अंदर का पौधा। तालाब के संस्तर से उठता एक पतला तना बनाइए जस पर सारी लंबाई म सँकरी प त्तयाँ ह , और पूरा
पौधा जल क रेखा के नीचे रहे।
3. जड़ संस्तर म, पौधा ऊपर। नीचे क चड़ म जड़, जल म से ऊपर जाता लंबा डंठल और जल क रेखा के ऊपर खड़ी पत्ती या
पुष्प बनाइए।
ये तीन समूह क्य बनते ह: हर हरे पौधे को सूय का प्रकाश चा हए। प्लवी पौधा अपनी प त्तयाँ सतह पर रखकर उसे
पा लेता है। कमल जैसा जड़युक्त पौधा लंबा डंठल ऊपर भेजकर पत्ती को जल के ऊपर ले आता है। हाइ ला जैसा
जल के अंदर का पौधा जल म पहुँचने वाले कम प्रकाश से ही काम चला लेता है, इस लए उसक प त्तयाँ पतली और
सँकरी होती ह।
पृष्ठ 16 के सूचना काड से: नरकुल तालाब के कनार पर उगने वाले लंबे, घास जैसे पौधे ह; कमल और कुमु दनी
को जलबद्ध प्लवी कहा गया है — इनके पुष्प जल पर तैरते ह और जड़ तालाब के संस्तर पर रहती ह; जलकुंभी
मुक्त प्लवी है और तालाब पर बहुत तेज़ी से फैल जाती है।
ग त व ध 9 — पृष्ठ 18
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सादे कागज़ और मोम लगे कागज़ पर जल क बूँद
गतवध
प्र.1 1. एक कागज का टु कड़ा ली जए और उस पर जल क एक बूँद डा लए। अवलोकन क जए।
आप क्या दे खगे: बूँद गोल नह रहती। वह तुरंत फैलकर चपटा गीला धब्बा बन जाती है, कागज़ म समा जाती है और वह स्थान
गहरा, मुलायम तथा आर-पार दखने वाला हो जाता है। कागज़ उठाने पर गीला भाग झूल जाता है और रगड़ने पर सरलता से फट
जाता है।
कैसे क जए:
1. सादा, स्वच्छ कागज़ ली जए — पुरानी कॉपी का पन्ना भी चलेगा।
2. उँ गली जल म डु बोकर कागज़ के बीच म एक बूँद गराइए।
3. धीरे-धीरे दस तक ग नए और बूँद को दे खए।
4. अब गीले स्थान को हल्के से छू कर दे खए क कागज़ कैसा लगता है।
ऐसा क्य होता है: कागज़ असंख्य नन्हे रेश को दबाकर बनाया जाता है और उनके बीच नन्हे रक्त स्थान रहते ह।
जल उन्ह रक्त स्थान म घुसकर अगल-बगल और नीचे फैल जाता है। कागज़ जल को सोख लेता है, ठ क जैसे
कपड़ा या स्पंज सोखता है।
प्र.2 2. कागज पर मोम के रंग (क्रेयॉन) से रंग भ रए। अब इस पर जल क बूँद डा लए। क्या आपको कोई प रवतन
दखाई दे ता है?
हाँ, बड़ा प रवतन दखाई दे ता है। बूँद सतह पर चमकदार गोल मोती क तरह टक रहती है। वह न फैलती है, न भीतर
जाती है। कागज़ को तरछा करने पर बूँद लुढ़ककर गर जाती है और नीचे का कागज़ सूखा ही रहता है।
कैसे क जए:
1. उसी तरह का नया कागज़ ली जए।
2. हथेली जतने भाग पर मोम के रंग (क्रेयॉन) से रंग भ रए। दबाकर और एकसमान रं गए, कोई सफ़ेद जगह न छू टे ।
3. रंगे हुए भाग के बीच म जल क एक बूँद डा लए।
4. दस सेकंड दे खए, फर कागज़ को धीरे-धीरे तरछा क जए।
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क्या जाँचा सादा कागज़ मोम के रंग से रंगा कागज़
बूँद क आकृ त चपट होकर फैल जाती है गोल मोती जैस ी बनी रहती है
क्या भीतर समाती है? हाँ, तुरंत नही ं
बाद म कागज़ गीला है? हाँ, गहरा और मुलायम नही,ं सूखा ही है
कागज़ तरछा करने पर गीला धब्बा वह रहता है बूदँ लुढ़ककर िगर जाती है
ऐसा क्य होता है: क्रेयॉन कागज़ पर मोम क एक पतली परत छोड़ दे ता है। मोम और जल आपस म नह मलते
और मोम म जल के घुसने के लए कोई रक्त स्थान नह होता। इस लए मोम क परत कागज़ को बंद कर दे ती है —
उसे जलरोधी बना दे ती है, अथात् ऐसा क जल आर-पार न जा सके। फैलने क जगह न मलने पर बूँद स्वयं को
सबसे छोट आकृ त, अथात् गोल मोती, म समेट लेती है।
प्र.3 अपने अवलोकन ल खए।
मेरा अवलोकन: सादे कागज़ पर जल क बूँद फैलकर भीतर समा गई और कागज़ गीला तथा कमज़ोर हो गया। मोम के रंग से रंगे
कागज़ पर बूँद गोल बनी रही, बलकुल भीतर नह गई और कागज़ तरछा करने पर लुढ़ककर गर गई। मोम ने कागज़ को जलरोधी
बना दया।
सादा कागज़ → जल भीतर समा जाता है
मोम लगा कागज़ → जल ऊपर ही िटकता है और लुढ़क जाता है
यह पौध के बारे म क्या बताता है: अनेक प त्तय पर प्राकृ तक मोमीय आलेपन होता है, ठ क क्रेयॉन क परत
जैसा। यह आलेपन पत्ती को जलरोधी बना दे ता है और पौधे के अंदर अत्य धक जल को जाने से रोकता है। इससे
पौधा स्वस्थ रहता है और क्ष तग्रस्त होने से बचता है। इसी लए कमल के पत्ते पर वषा क बूँद चमकते मो तय क
तरह टकती ह और लुढ़क जाती ह — पृष्ठ 18 पर पत्ती का चत्र दे खए।
यह वचार और कहाँ काम आता है? बरसाती, छाता, भोजन लपेटने वाला मोम लगा कागज़ और गाड़ी क पॉ लश
— सब इसी तरह जल को बाहर रोकते ह।
ग त व ध 10 — पृष्ठ 19
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कौन कसे खाता है? — एक नद क आहार- ृंखला का खेल
गतवध
प्र.1 कौन कसे खाता है? — एक नद क आहार- ृंखला का खेल। व ा थय को कागज क प चयाँ वत रत
क जए। प्रत्येक व ाथ लखेगा क वह क्या बनना चाहता है (उदाहरण के लए — छोट मछली, बड़ी मछली,
मढक, पक्षी, मनुष्य, मगरमच्छ, ऊद बलाव इत्या द)। व ा थय से क हए क वे वचार कर क वे क्या खाते ह
और उन्ह कौन खाता है। एक रस्सी के ारा उन व ा थय को संबद्ध कर जो भोजन के लए एक-दूसरे पर नभर
ह।
खेल कैसे खेल, चरण दर चरण:
1. हर वद्याथ एक पच लेकर नद का कोई एक सजीव लखे — जलीय पौधा, छोट मछली, बड़ी मछली, मढक, व्याध पतंग,
बगुला, कल कला, जलीय सप, मगरमच्छ, ऊद बलाव, मनुष्य। पच अपनी कमीज़ पर लगा ली जए।
2. सब बड़ा गोल घेरा बनाकर खड़े हो जाइए।
3. हर वद्याथ दो प्रश्न सोचे — म क्या खाता ँ? और मुझे कौन खाता है?
4. एक वद्याथ रस्सी का सरा पकड़कर उसे उस साथी को दे , जसे वह खाता है या जो उसे खाता है। वह साथी रस्सी पकड़कर
आगे बढ़ा दे ।
5. इसी तरह तब तक च लए जब तक सब रस्सी पकड़ न ल। अब घेरे के आर-पार रस्सी का एक जाल बन गया है — यही नद क
आहार- ृंखला है।
6. अब परीक्षा। कसी एक से — मान ली जए सभी छोट मछ लय से — रस्सी छोड़ने को क हए। दे खए कतनी और र स्सयाँ
ढ ली पड़ जाती ह।
खेल म काम आने वाली नमूना आहार- ृंखलाएँ:
जलीय पौधे → छोटी मछली → बड़ ी मछली → बगुला
जलीय पौधे → टै डपोल → मेंढक → जलीय सप → िकलिकला
नन्हे जलीय कीट → व्याध पतं ग → मेंढक → मगरमच्छ
जलीय पौधे → छोटी मछली → बड़ ी मछली → मनुष्य
जलीय पौधे छोटी मछली बड़ी मछली बगुला
हर तीर का अथ है “इसे खाया जाता है ”। ऊज तीरों के साथ आगे बढ़ ती है ।
नद क एक सरल आहार- ृंखला। इसका हर जंतु अपने से पहले वाले पर नभर है।
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 1 जल — जीवन का आधार
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यह खेल क्या सखाता है: नद म कोई भी सजीव अकेले अपना भोजन नह जुटाता। पौधे सूय के प्रकाश से अपना
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भोजन स्वयं बनाते ह। छोटे जंतु पौध को खाते ह। बड़े जंतु छोटे जंतुओं को खाते ह। इस प्रकार सूeयm
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gl सीधी रेखा नह , ब ल्क
क ऊजा पूरी
. coकरती है। चूँ क ृंखलाएँ एक-दूसरे को काटती ह, इस लए यह वास्तव मaएक
em है।
ृंखला म यात्रा
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आहार-जाल
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प्र.2 चचा क जए क य द ृंखला म से एक जंतु लुप्त हो जाए तो क्या होगा (उदाहरण के लए य द सभी मछ लयाँ
लुप्त हो जाएँ तो क्या होगा?)
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य द सारी मछ लयाँ लुप्त हो जाएँ तो पूरी नद का संतुलन बगड़ जाएगा। कुछ जंतु भूखे रह जाएँगे, कुछ क संख्या बहुत बढ़
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जाएगी और मनुष्य का भोजन तथा रोज़गार छन जाएगा।
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ृंखला को दोन ओर से दे खए।
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कस पर असर क्या होगा क्य
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भूखे रहगे; दूसरे जल- नकाय क ओर मछली इनका मुख्य भोजन थी। अब खाने को कु छ बचा ही
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ऊद बलाव, जलीय सप
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चले जाएँगे या इनक संख्या घट जाएगी नही ं।
जलीय क ट, मच्छर के लावा, a g
इनक संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ जाएगी मछिलयाँ इन्हे ं खाती थी ं। मछली न रहने पर इन्हे ं रोकने वाला
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टै डपोल कोई नही ं। अिधक म च्छर अथ त् अिधक बीमारी।
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s e mमछिलयाँ खाती थी ं। मछली
m a जाती है।
जलीय पौधे और शैवाल पूरे तालाब पर फैलकर उसे घ ट सकते ह इ हे ं चरने वाले न हे जीवों को
हटते ही पूर ी कड़ ीlडगमगा
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l a seमछली पकड़ने वाले लोग
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भोजन और जी वका दोन खो दगे मछु आ रा पिरवार सीधे नदी पर िनभर है।
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स्वयं जल अ धक गंदा हो जाएगा मछिलयाँ मरे हुए अंश खाकर जल स्वच्छ रखती है। ं उनके
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िबना जल दुगधं युक्त और अस्वास्थ् यकर हो जाता है।
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l s लुप्त हो जाएँ तो मछली खाने वाले प क्षय और जंतुओं के पास खाने को कुछ नह
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बचेगा, इस लए वे नद छोड़ दगे या मरaजाएँगे। साथ ही जन क ट को मछ लयाँ खाती थ , उनक संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ जाएगी।
चचा के लए नमूना उत्तर: “य द सारी मछ
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मछु आर का रोज़गार चला जाएगा। एक कड़ी टू टते ही पूरी ृंखला टू ट जाती है — इस लए एक जीव क रक्षा करना असल म
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सबक रक्षा करना है।”
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ag और ना लय का गंदा जल बना
.cमछ लयाँ लुप्त क्य होती ह? न दय म कचरा और प्ला स्टक फकना, कारखान
m उपचार के छोड़ दे ना, और आवश्यकता से बहुत अ धक मछ लयाँ पकड़ लेना। नद को स्वच्छ रखना ही उसक
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ag आहार- ृंखला को बचाए रखने का उपाय है।
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आइए वचार कर — पृष्ठ 20gla
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अध्याय के अं तम प्रश्न
आइए वचार कर
प्र.1 नम्न ल खत को सुमे लत क जए— (i) महासागरीय जल (ii) बफ (iii) वाष्प (iv) वषा जल — के साथ — (क)
जल का ठोस रूप (ख) जल का वाष्प रूप (ग) पीने के लए अनुपयुक्त (घ) पेय जल
स्तंभ क उत्तर स्तंभ ख क्य
(i) महासागरीय (ग ) पीने के लए इसम बहुत नमक है, इस लए हम इसे पी नह सकते।
जल अनुपयुक्त
(ii) बफ (क ) जल का ठोस रूप बफ जमा हुआ जल है — कठोर और अपनी आकृ त बनाए रखने वाला।
(iii) वाष्प (ख) जल का वाष्प रूप वाष्प वह जल है जो ताप पाकर गैस बन गया है।
(iv) वषा जल (घ ) पेय जल वाष्प केवल जल क बनती है, नमक पीछे रह जाता है, इस लए वषा का जल
मीठा होता है।
(i) → (ग) (ii) → (क) (iii) → (ख) (iv) → (घ)
जाँचने का सरल तरीका: (ii) और (iii) जल के रूप क बात करते ह — ठोस और वाष्प। (i) और (iv) इस बात
क क हम उस जल का उपयोग कर सकते ह या नह — नह और हाँ।
प्र.2 आपके वचार से पृथ्वी पर पाया जाने वाला अ धकांश जल पीने हेतु अथवा कृ ष हेतु उपयोग म क्य नह लाया
जा सकता है?
क्य क पृथ्वी का अ धकांश जल खारा समुद्र जल है, और खारा जल न पीने के काम आता है, न फसल उगाने के।
पृष्ठ 4 के चत्र को याद क जए।
1. 200 मलीलीटर का गलास पृथ्वी के संपूण जल का प्रतीक है।
2. उसम मीठा जल केवल 5 मलीलीटर है — एक चम्मच।
3. शेष 195 मलीलीटर खारा महासागरीय जल है।
4. और वह एक चम्मच भी पूरा सुलभ नह है। उसका बड़ा भाग हमनद और हमटोप म बफ बनकर बंद है और बहुत सारा भू म
के बहुत नीचे भू मगत जल के रूप म है।
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जल कहाँ है क्या हम इसे पी या इससे खेती कर सकते क्य नह
ह?
महासागर और समुद्र नह बहत ु खारा। शरीर को हािन पहच
ु ँ ाता है और फसल सुखा
दे ता है।
हमनद, हमटोप, हम सीधे नह यह ठोस बफ है और बहुत ठं डे, दू र के स्थानों पर है।
गहरा भू मगत जल कुछ ही भाग यह भूिम के बहुत नीचे है, कु एँ या पंप के िबना नही ं िमलता।
नद , तालाब, झील, हाँ यही हमारा वास्तिवक भंडार है — और यह बहुत ही छोटा भाग
वषा है।
नमक ही समस्या क्य है: खारा जल शरीर को जल दे ने के बजाय उससे जल ख च लेता है। इसे पीने पर प्यास और
बढ़ जाती है। खेत म डालने पर पौधे सूख जाते ह और मृदा खराब हो जाती है। इसी लए जो थोड़ा-सा मीठा जल
हमारे पास है, उसे कभी व्यथ नह करना चा हए।
प्र.3 ऐसा क्य है क जलीय नकाय के आस-पास बड़ी संख्या म सजीव प्रजा तयाँ नवास करती ह?
क्य क जल उन्ह जी वत रहने के लए आवश्यक सब कुछ दे ता है — पीने का जल, भोजन, रहने का स्थान और बच्च को
पालने क सुर क्षत जगह। कोई भी सजीव जल के बना जी वत नह रह सकता, इस लए जीवन वह इक ा होता है जहाँ जल है।
पीने का जल। हर जंतु को जल पीना पड़ता है। पास म तालाब या नद हो तो दूर जाना नह पड़ता।
भोजन। जहाँ जल है वहाँ पौधे अच्छे उगते ह, और जहाँ पौधे ह वहाँ क ट, पक्षी और जंतु खाने आते ह। तालाब स्वयं मछ लय ,
मढक और क ट से भरा रहता है।
घर। मछ लयाँ, कछु ए, जलीय सप और जलीय बच्छू जल के भीतर रहते ह। कनारे के नरकुल और कमल के पत्ते प क्षय को
घ सले क और नन्हे जीव को छपने क जगह दे ते ह।
ठं डी वायु। जल- नकाय के पास क वायु अ धक ठं डी और सुखद रहती है, वशेषकर ग मय म।
मनुष्य के लए। गाँव और नगर न दय के कनारे बसते ह, क्य क लोग को पीने, खेती, पशुओं, धुलाई और नाव से यात्रा —
सबके लए जल चा हए।
इतनी व वधता एक साथ क्य : एक जल- नकाय छोटे -से क्षेत्र म अनेक अलग-अलग रहने के स्थान दे ता है —
खुला जल, क चड़ भरा संस्तर, नरकुल भरा कनारा, जल क सतह और तट। हर स्थान कसी अलग जीव के अनुकूल
है, इस लए बहुत सारे प्रकार के सजीव साथ-साथ रह पाते ह।
भारत के दो उदाहरण: जम्मू-कश्मीर क वुलर झील ए शया क सबसे बड़ी मीठे जल क झील म से एक है और
बाढ़ रोकने म भी सहायक है। म णपुर का केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान वश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय
उद्यान है; इसके तैरते प को फुमद कहते ह और वहाँ दुलभ संगाई हरण रहता है।
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 1 जल — जीवन का आधार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 य द आपके क्षेत्र म दो वष तक वषा नह हो तो क्या होगा?
जल का भीषण संकट खड़ा हो जाएगा — सूखा पड़ जाएगा। कुएँ और तालाब सूख जाएँगे, फसल नष्ट हो जाएँगी और
लोग तथा पशु दोन कष्ट भोगगे।
क्रम से क्या होगा —
1. पहले कुछ महीने। तालाब और छोट धाराएँ सूख जाएँगी। मृदा कठोर होकर फट जाएगी।
2. उसके बाद। भू मगत जल का पुनभरण नह हो रहा, इस लए उसका स्तर गरने लगेगा। हडपंप हवा ख चने लगगे। कुएँ सूख
जाएँगे।
3. खेत म। फसल सूखकर नष्ट हो जाएँगी। कसान को न उपज मलेगी, न आय।
4. भोजन और मूल्य। अनाज और स ब्ज़याँ कम पड़ जाएँगी, इस लए महँगी हो जाएँगी।
5. पशु। गाय-भस को न घास मलेगी, न जल। वन्य जंतु क्षेत्र छोड़ दगे या मर जाएँगे।
6. लोग। प रवार को जल लाने के लए दूर-दूर तक चलना पड़ेगा। टकर से जल मँगाना पड़ेगा। कुछ लोग काम क खोज म गाँव
छोड़ भी सकते ह।
7. स्वास्थ्य। जो थोड़ा जल बचेगा वह प्राय: गंदा होगा, और गंदे जल से बीमा रयाँ फैलती ह।
सब कुछ प्रभा वत क्य होता है: हमारे संपूण मीठे जल क शुरुआत वषा से ही होती है। वषा न दयाँ और तालाब
भरती है और वषा ही रसकर भू मगत जल बनती है। वषा रुक जाए तो ये सब भंडार धीरे-धीरे खाली हो जाते ह,
क्य क हम जल नकालते रहते ह और उसे भरने वाला कुछ नह होता।
ऐसे समय म क्या सहायक है: वषा होते समय जल को टं कय और जोहड़ म सं चत करना, तालाब और झील
को स्वच्छ तथा भरा रखना, कम जल माँगने वाली फसल उगाना और हर टपकते नल तथा पाइप क मरम्मत कराना।
महाराष्ट्र का हवरे बाज़ार गाँव वषा जल संचयन और जल-संभर प्रबंधन से ही अपने जल-संकट से उबरा।
प्र.5 आपके अनुसार शहर क तुलना म वन म वषा जल का क्या होता है?
वन म अ धकांश वषा जल भू म म रस जाता है। शहर म अ धकांश जल पक्क सतह से बहकर ना लय म चला जाता है।
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वषा जल का क्या वन म शहर म
होता है
पहले कहाँ गरता है प त्तय और शाखाओं पर, जो उसक ग त धीमी कर दे ती ह छतों, सड़ कों और पक्के आँगनों पर
क्या वह भू म म जा हाँ — मृदा मुलायम है, सूखी प त्तय से ढक है और जड़ पाय: नही ं — सीमेंट और तारकोल में कोई िर क्त
सकता है? क राह से भरी है स्थान नही ं
जल क ग त धीमी। वह चुपचाप नीचे रसता है। बहत
ु तेज़। वह चादर की तरह बहकर नािलयों में
िगरता है।
भू मगत जल अच्छी तरह पुनभिरत होता है लगभग पुनभिरत नही ं होता
मृदा जड़ उसे थामे रखती ह खुल ी म ृद ा कम है, और जो है वह बहकर चली
जाती है
क्या परेशानी होती है बहुत कम सड़ कों पर जल -भराव, नािलयों का जाम ,
अचानक शहरी बाढ़
वन यह काम बेहतर क्य करता है: वन परत म काम करता है। प त्तयाँ बूँद क चोट रोक लेती ह जससे मृदा पर
तेज़ प्रहार नह पड़ता। भू म पर गरी सूखी प त्तयाँ स्पंज क तरह काम करती ह। जड़ नीचे क ओर हज़ार छोट राह
बना दे ती ह। इस लए जल धीरे-धीरे और लगातार भीतर जाता है और भू म के नीचे सं चत हो जाता है। शहर ने यह
सब हटाकर एक कठोर, बंद परत बछा द है, और बंद परत से जल आर-पार नह जा सकता।
शहर क्या कर सकता है: वृक्ष के चार ओर खुली मृदा छोड़ना, जोड़ वाली पेवर टाइल लगाना, शोषक गत बनाना,
और छत का वषा जल नाली म भेजने के बजाय टं क या पुनभरण ग े तक पहुँचाना।
प्र.6 क्या आप एक ऐसे घर या व ालय क आकृ त बना सकते ह जसम जल का ववेकपूवक संरक्षण हो? इसम
क्या-क्या स म्म लत होगा?
हाँ। जल- ववेक भवन तीन काम करता है: वह अपने ऊपर गरी वषा को पकड़ता है, प्र त दन कम जल खच करता है, और जहाँ
सुर क्षत हो वहाँ जल का दुबारा उपयोग करता है।
नमूना उत्तर — मेरा जल- ववेक व ालय
1. वषा पक ड़ए
हर छत के कनारे परनाला, जो एक ही पाइप म मले।
ज़मीन पर एक बड़ी ढक हुई टं क , जसके मुँह पर जाली, बजरी और रेत का सरल छन्ना लगा हो।
टं क के पास एक पुनभरण ग ा। टं क भर जाने पर अ त रक्त जल इसी ग े म जाकर नीचे रस जाए और भू मगत जल बन
जाए।
वद्यालय के मैदान म एक छोटा तालाब, जो वषा जल रोके और उसे रसने दे ।
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 1 जल — जीवन का आधार
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2. कम खच क जए
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स्वयं बंद हो जाने वाले पुश-टै प, जससे कोई नल खुला न रह जाए।
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हर कक्षा से एक मॉनीटर सप्ताह म एक बार सभी नल और पाइप जाँचे और उसी दन रसाव क सूचना दे ।
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l क टंक पर जल-स्तर सूचक, जससे वह कभी न छलके।
कम जल वाले या दो-बटन वाले फ्लश।
a gऊपर
बे सन के पास मग रख और धुलाई के लए पाइप के स्थान पर बाल्ट का उपयोग कर।
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3. जल का दुबारा उपयोग
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दन के अंत म बोतल म बचा जल नाली म नह , गमल म डाल।
आर.ओ. मशीन से नकलने वाला जल इक ा करके फ़श धोने और बगीचा स चने म लगाएँ।
रसोई-बगीचे को सुबह-सुबह टपक ( प) पाइप से बूँद-बूँद स च।
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4. भू म खुली र खए
m करने के बजाय घास, मृदा और वृक्ष रख जससे वषा रस सके।
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emके रास्त पर जोड़ वाली पेवर टाइल लगाएँ।
पूरा प रसर
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चलने
a 5. सबको बताइए
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हर नल पर च त्रत सूचना — “मुझे कसकर बंद क जए”।
सूचना-पट्ट पर एक चाट, जसम लखा हो क इसem
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महीने वद्यालय ने कतने लीटर जल बचाया।
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ये उपाय काम क्य करते ह: वषा जल संचयन उस जल को रोक लेता है जो अन्यथा नाली म बह जाता। पुनभरण
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ग ा जल को वह लौटा दे ता है जहाँ से वह आया था। पुश-टै प और रसाव क जाँच उस चुपचाप होने वाली रोज़ क
बरबाद को रोकते ह जो सबसे अ धक होती है। और एक बार और उपयोग करने का अथ हैmक हर लीटर एक के
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स्थान पर दो काम करता है।
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agl चत्र बनाइए: भवन का एक सरल बगल का दृश्य बनाइए। छत दखाइए, छत से पाइप तक तीर, पाइप से टं क तक,
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टं क से पुनभरण ग े तक तीर, और तालाब तथा वृक्ष का नामांकन क जए। चत्र सुंदर होने से अ धक महत्वपूण है
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नामांकन स्पष्ट होना।
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आइए, हम कागज के टु कड़े को मोड़कर एक मछली बनाएँ। (चरण 1 से चरण 6 चत्र म दए गए ह।)
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प्र.7
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emकागज़ का एक वगाकार टुकड़ा ली जए — कोई भी रंग चलेगा। कठोर, समतल मेज़ पर मो ड़ए और हर मोड़ को अँगूठे के नाखून से
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agl अच्छ तरह दबाइए। पृष्ठ 20 के चत्र के अनुसार छह चरण ये ह —
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1. चरण 1 — आधा मो ड़ए। नीचे का कनारा उठाकर ऊपर के कनारे से मलाइए। मोड़ दबाइए और फर खोल द जए। अब
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बीच म एक रेखा बन गई है।
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agवाली लंबी पट्ट बन गया है।
2. चरण 2 — चपट प बनाइए। ऊपर का कनारा बीच क रेखा तक नीचे मो ड़ए और नीचे का कनारा बीच क रेखा तक
ऊपर मो ड़ए। वग अब दो परत
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3. चरण 3 — बीच को खोलकर दबाइए। पट्ट के भीतर उँ गली डालकर बीच का भाग फैलाइए, जससे दोन सरे बाहर क ओर
खुल जाएँ। अब कागज़ धनुष जैसा दखता है — सर पर चौड़ा और बीच म सकुड़ा हुआ।
4. चरण 4 — एक सरे से मीनपक्ष बनाइए। एक सरे का कोना बाहर और ऊपर क ओर मो ड़ए, जससे एक त्रभुज खड़ा हो
जाए। यही त्रभुज मछली क पीठ का मीनपक्ष बनेगा।
5. चरण 5 — पूँछ बनाइए। दूसरे सरे पर दोन कोन को बाहर क ओर मो ड़ए, जससे दो नुक ले सरे बन जाएँ। इन्ह दबाकर
चपटा क जए। अब यह करवट लेट मछली जैसा दखने लगा है।
6. चरण 6 — मछली पूरी क जए। पूरी आकृ त को इस प्रकार घुमाइए क शरीर सीधा खड़ा हो, नुक ला सरा पीछे रहे और
चपटा सरा आगे। एक बार फर दबाकर चपटा क जए। अब आगे क ओर एक आँख और मुस्कुराता मुँह बना द जए। आपक
कागज़ क मछली तैयार है।
तैयार कागज़ की मछली
वगाकार शरीर, ऊपर एक मीनपक्ष, दो नुक ले सर क पूँछ और आपक बनाई हुई आँख।
काम आने वाले सुझाव: आयत नह , वग ली जए — कागज़ का एक कोना आड़ा मोड़कर बची पट्ट काट द जए तो
वग बन जाएगा। अगला मोड़ बनाने से पहले पछला मोड़ नाखून से दबा ली जए। कोई चरण बगड़ जाए तो कागज़
पूरा खोलकर चरण 1 से फर आरंभ क जए; बने हुए मोड़ स्वयं राह दखा दगे।
अध्याय का अंत मछली से क्य : अध्याय खड़क पर गरी एक बूँद से आरंभ हुआ था और जीवन से भरे तालाब
पर समाप्त हुआ। कागज़ क यह मछली उसी तालाब क याद दलाती है — और इस बात क भी क उसक हर
मछली को स्वच्छ मीठा जल चा हए, वही जल जो हम पीते ह।
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अध्याय — एक नज़र म
पृथ्वी का अ धकांश जल खारा है। पृष्ठ 4 का चत्र दे खए। गलास म 200 मलीलीटर जल है और चम्मच म 5 मलीलीटर।
य द पृथ्वी का संपूण जल वह भरा हुआ गलास हो, तो सारा मीठा जल केवल उस एक चम्मच जतना होगा। मीठा जल अथात्
वह जल जसम नमक नह है। हम उसे पी सकते ह, उससे भोजन बना सकते ह और फसल उगा सकते ह। समुद्र का जल खारा
है, इस लए वह इन काम म नह आता।
जल के तीन रूप ह। ठोस — बफ और हम। द्रव — पीने का जल, वषा, नद का जल। वाष्प — वायु म घुली हुई अदृश्य
जलवाष्प और उबलते पात्र के ऊपर उठती भाप। हर बार जल वही रहता है, केवल उसका रूप बदलता है। ताप से जल वाष्प
बनता है, ठं डा होने पर वाष्प फर जल बन जाता है और बहुत अ धक ठं डा होने पर बफ।
जल-चक्र अथात् जल का गोल-गोल घूमना। सूय का ताप महासागर , न दय और झील के जल को गम करता है। वह जल
जलवाष्प बनकर ऊपर उठता है। ऊपर वायु ठं डी होती है, इस लए वाष्प ठं डी होकर नन्ह बूँद बनाती है और इन्ह बूँद से बादल
बनते ह। बूँद भारी होने पर वषा, बफ या ओल के रूप म गर जाती ह। यह जल फर न दय , झील और महासागर म पहुँच
जाता है और यात्रा दोबारा शुरू हो जाती है। जल क इसी सतत चक्र य ग त को जल-चक्र कहते ह।
वषा का कुछ जल भू म के अंदर चला जाता है। मृदा पूरी तरह ठोस नह होती। उसके कण के बीच नन्हे-नन्हे रक्त स्थान
होते ह। वषा का जल इन्ह रक्त स्थान म रसकर मृदा और चट्टान क परत से होता हुआ नीचे चला जाता है। भू म के नीचे
गहराई म भंडा रत इस जल को भू मगत जल कहते ह। कुएँ, बोरवेल, ूबवेल और हडपंप से हम इसी जल को नकालते ह।
खुली भू म भू मगत जल का पुनभरण करती है, पक्क भू म नह । घास, मृदा, खेत या वन पर गरा जल भू म म रस जाता
है। कंक्र ट क सड़क, पक्के आँगन या छत पर गरा जल बहकर ना लय म चला जाता है। इसी लए बहुत अ धक कंक्र ट वाले
शहर का भू मगत जल घटता जाता है। शोषक गत (सोक पट), तालाब, मानव न मत झील और अ धक वृक्षारोपण वषा जल
को भू म म लौटाने म सहायक ह। राजस्थान म मट्ट के छोटे बाँध, जन्ह जोहड़ कहते ह, सैकड़ वष से यही काम करते आ रहे
ह।
न दयाँ, तालाब और झील सतह जल ह। नद प्राय: ऊँचे पहाड़ से अपनी यात्रा आरंभ करती है और नचली भू म क ओर
बहती है। जल सदै व ऊँचाई से नीचाई क ओर जाता है। अपने माग क भू-आकृ तय के अनुसार वह मुड़ता है, रुकता है और
फैलता है। लंबे समय म बहता हुआ जल भू-आकृ तय को भी बदल दे ता है।
भारत क न दयाँ दो सागर म गरती ह। पृष्ठ 12 के मान चत्र म ब्रह्मपुत्र, गंगा, यमुना, नमदा, ताप्ती, गोदावरी, कृष्णा और
कावेरी दखाई गई ह। इनम से गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी पूव क ओर बहकर बंगाल क खाड़ी म
गरती ह। नमदा और ताप्ती प म क ओर बहकर अरब सागर म मलती ह। राजस्थान क लूणी नद वशेष है — वह कसी
सागर तक पहुँचती ही नह , गुजरात म कच्छ के रण क दलदली भू म म समाप्त हो जाती है।
मीठा जल जीवन से भरा है। तालाब म जल के ऊपर तैरने वाले पौधे (जलकुंभी, लली) होते ह, जल के अंदर रहने वाले पौधे
होते ह, और ऐसे पौधे भी होते ह जनक जड़ तालाब के संस्तर म रहती ह कतु प त्तयाँ और पुष्प जल के ऊपर दखाई दे ते ह
(कमल, नरकुल)। इसम मीनपक्ष वाली मछ लयाँ, मढक, कछु ए, जलीय सप, व्याध पतंग, जलीय बच्छू तथा मछली पकड़ने
आने वाले बगुला और कल कला जैसे पक्षी रहते ह। हर एक के शरीर म कोई वशेष अंग होता है जो जल के जीवन के लए
उपयुक्त है।
जल सी मत है और साझा है। जम्मू-कश्मीर क वुलर झील ए शया क सबसे बड़ी मीठे जल क झील म से एक है और बाढ़
रोकने म सहायक है। म णपुर का केइबुल लामजाओ वश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है। महाराष्ट्र का हवरे बाज़ार
गाँव वषा जल संचयन और जल-संभर प्रबंधन से जल-समृद्ध बना। यह सब तभी चलता है जब हम जल का ववेकपूवक
उपयोग कर और वषा जल को भू म म लौटने द।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द इसका अथ अध्याय म कहाँ रोज़मरा का उदाहरण
मीठा जल वह जल िजसमें नमक न हो और िजसे सजीव पी और पृष्ठ 4, गलास और चम्मच हडपंप या नद का जल
(अलवणीय जल) उपयोग कर सकें
खारा जल (लवणीय वह जल िजसमें बहुत सा नमक घुल ा हो चचा क जए, पृष्ठ 4 समुद्र तट का जल
जल)
जलवाष्प गैस के रूप में वायु में तैर ता हुआ अदृ श्य जल जल के व भन्न रूप, पृष्ठ 5 गरम दाल के ऊपर उठती भाप
संघनन जलवाष्प का ठं डा होकर िफर से नन्ही ं बूदँ ों में ग त व ध 2, पृष्ठ 6 ठं डे स्ट ल के गलास पर बनने
बदलना वाली बूँद
वाष्पन द व जल का ताप पाकर जलवाष्प में बदलना ग त व ध 3, पृष्ठ 7 धूप म सूखते गीले कपड़े
जल-चक्र सागर से आकाश, आकाश से भूिम और भूिम से जल-चक्र, पृष्ठ 8 आज क वषा, कल का नद -जल
सागर तक जल की सतत यात्रा
भू मगत जल म ृद ा और च ानों के िरक्त स्थानों में भूिम के नीचे भू मगत जल, पृष्ठ 9 बोरवेल से नकलने वाला जल
भंडािरत जल
पुनभरण वष जल का भूिम में लौटकर भूिमगत जल को भरना ग त व ध 5, पृष्ठ 9 वद्यालय क घास म रसती वषा
शोषक गत वष जल को भूिम में िरसाने के िलए बनाया गया ग ा क्या आप जानते ह?, पृष्ठ 9 आँगन के कोने म बना ग ा
(सोक पट)
जोहड़ राजस्थान का िम ी का छोटा बाँध जो वष जल क्या आप जानते ह?, पृष्ठ 4 वषा म भरता गाँव का जोहड़
एकत्र कर भूिमगत जल का पुनभरण करता है
सतह जल भूिम के ऊपर िदखाई दे ने वाला मीठा जल — नदी, सतह जल, पृष्ठ 10 वषा के बाद भरा गाँव का तालाब
तालाब, झील
मुहाना वह स्थान जहाँ नदी अंत में सागर से िमलती है भारत क न दयाँ — हमारी बंगाल क खाड़ी म मलती गंगा
जीवनरेखा, पृष्ठ 12
जलरोधी िजसमें से जल आर-पार न जा सके पृष्ठ 19, मोमीय आलेपन कमल का पत्ता या बरसाती
वाली पत्ती
आहार- ृंखला िकसी स्थान पर कौन िकसे खाता है, इसकी कड़ी ग त व ध 10, पृष्ठ 19 जलीय पौधा → छोट मछली →
बड़ी मछली → बगुला
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