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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 11: हमारे ये कलामं दर
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
129 – 142 14 41 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 39 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 11: हमारे ये कलामं दर
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 11 हमारे ये कलामं दर के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह पाठ एक यात्रा-वणन है — यानी ऐसी
रचना जसम कोई अपनी यात्रा म दे खी हुई बात क्रम से बताता है। पुस्तक म इस पाठ के साथ कसी रचनाकार का नाम नह छपा है; न पृष्ठ 129 पर, न
पाठ के अंत म पृष्ठ 132 पर। पाठ म नशा नाम क एक लड़क अपनी मौसी के साथ महाराष्ट्र क अजंता और एलोरा क गुफाएँ दे खने जाती है। वहाँ
वह दो हजार वष पुराने चत्र, पहाड़ काटकर बनाई गई गुफाएँ और एक ही चट्टान से तराशा हुआ कैलाश मं दर दे खती है। पृष्ठ 129 से 142 तक छपे
हर अभ्यास का पूरा हल यहाँ है — बातचीत के लए, पाठ से, सो चए और ल खए, अनुमान एवं कल्पना, भाषा क बात, चत्र का वणन,
मान चत्र, आइए माप, रंग का संसार, पुस्तकालय से, धन्यवाद काड, हमारी धरोहर, आपक अ भव्य क्त तथा अं तम पृष्ठ क आपक
चत्रकारी। ‘पाठ से’ क बहु वकल्पी अभ्यास म नदश छपा है — “ दए गए प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के आगे सूरज का चत्र (☼) बनाइए —”,
और अभ्यास के नीचे लखा है “अब अपने समूह म चचा करके पता लगाइए क कस- कसने कौन-कौन से उत्तर चुने और क्य ।” इस लए यहाँ
हर वकल्प क जाँच अलग-अलग क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 129 – 142
खं ड प्रश्न
14 41
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 132
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म मलकर बात करने के चार प्रश्न — अपनी छु ट्टयाँ, घर के आस-पास बने चत्र, घर म चत्रकारी करने वाले लोग, और
‘वाह!’ कब नकलता है
बातचीत के लए
प्र.1 आपक छु ट्टयाँ कब-कब होती ह? आप छु ट्टय म कहाँ-कहाँ जाते ह?
यह आपके अपने जीवन का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। कक्षा म बताते समय दो बात ज़रूर क हए — छु ट्ट कब
होती है, और आप कहाँ जाते ह।
वद्यालय म छु ट्टयाँ प्रायः इन समय पर होती ह —
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छु ट्ट कब होती है प्रायः कतने दन
दशहरे की छु ट्ट ी िसतंबर –अक्त ूबर में लगभग एक सप्ताह
दीपावली की छु ट्ट ी अ क्त ूबर –नवंबर में कुछ दन
जाड़े की छु ट्ट ी िद संबर –जनवरी में लगभग दो सप्ताह
गरमी की छु ट्ट ी मई –जून में सबसे लंबी छु ट्ट
रिववार और त्योहार प्
हर स ताह , तथा होल ी, ईद , ि समस आिद पर एक या दो दन
नमूना उत्तर: मेरी छु ट्टयाँ साल म तीन बार होती ह — दशहरे म, जाड़े म और गरमी म। सबसे लंबी छु ट्ट गरमी क
होती है। गरमी क छु ट्टय म म अपने नाना-नानी के गाँव जाता हूँ। वहाँ म तालाब के कनारे घूमता हूँ और आम के
बगीचे म खेलता हूँ। पछले दशहरे म हम सब मलकर पास के कले को दे खने गए थे। द पावली क छु ट्ट म म घर पर
ही रहकर द ये सजाता हूँ।
पाठ से जो ड़ए: पाठ म भी नशा दशहरे क छु ट्टय म ही अजंता और एलोरा गई थी। छु ट्ट का असली मज़ा तभी है
जब हम कुछ नया दे ख या सीख — जैसे नशा ने दो हजार साल पुराने चत्र दे खे।
प्र.2 अजंता और एलोरा क गुफाओं के भीतर द वार पर अत्यंत सुंदर चत्र बने थे। आपके घर और घर के आस-पास
कौन-कौन से चत्र बने या लगे ह?
अपने घर म और घर के आस-पास ध्यान से दे खए। चत्र दो तरह के मलगे — कुछ द वार पर बने हुए, और कुछ लगाए हुए (यानी
बनाकर टाँगे हुए)।
कहाँ कैसे चत्र प्रायः मलते ह
घर की बैठक की दीवार पर पिरवार की तसवीरे ं , दे वी-दे वताओं के िचत्र , कै ले ंडर के िचत्र
घर के मुख्य ार पर रंग ोल ी , स्विस्तक , श ुभ-ल ाभ, आम के प ों का तोरण
रसोई या आँग न की दीवार पर फ -
ू ल बेल की बनी हुई िच त्र कारी, हाथ की छाप
िव ालय की दीवार पर वण माल ा , िगनती, महापरु
ु षों के िचत्र , नक्शे
गली, बस-अ े और दुक ानों पर द ुक ानों के रंग ीन बोड , द ीवारों पर बने संदे श-िचत्र
मंिदर, मिस्जद, ग रु
ु ारे में -
द ीवारों और छत पर बनी बेल ब ूटे और कथाओं की िच त्र कारी
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नमूना उत्तर: मेरे घर क बैठक म दादा जी क एक बड़ी तसवीर लगी है और उसके पास एक कैलडर है जस पर
पहाड़ का चत्र छपा है। रसोई क द वार पर मेरी माँ ने हरे रंग से बेल-बूटे बनाए ह। द वाली पर हम दरवाज़े के आगे
रंगोली बनाते ह। मेरे वद्यालय क बाहरी द वार पर भारत का न ा बना है। पास क दुकान के बोड पर एक बड़ी-सी
चाय क प्याली बनी है।
सोचने क बात: अजंता के चत्र द वार पर बने थे और दो हजार साल टके रहे। हमारे घर क रंगोली एक दन म मट
जाती है। दोन ही कला ह — फ़क़ बस इतना है क एक पत्थर पर बनी और एक ज़मीन पर।
प्र.3 आपके घर म कौन-कौन और कहाँ-कहाँ चत्रकारी करते ह? (जैसे – कागज पर, धरती पर, द वार पर, मट्ट क
वस्तुओं पर, कपड़ पर आ द।)
घर म चत्रकारी सफ़ चत्रकार ही नह करते। हम सब कुछ-न-कुछ बनाते ह। पहले सो चए कौन बनाता है, फर कस चीज़ पर।
कौन कहाँ बनाते ह क्या बनाते ह
माँ धरती पर , ार के आगे रंगोली, चौक, अल्पना
दादी द ीवार पर और िम ट्ट ी के घड़े पर बेल-बूटे, फूल, हाथ क छाप
बड़ी बहन कपड़ ों पर दुपट्टे और रूमाल पर कढ़ाई तथा रंग
मैं और मेर ा छोटा भाई कागज पर और िच त्र कल ा की कापी में पेड़, घर, च ड़या, अपने वद्यालय का चत्र
िपता जी द ीवार पर , त्योहार के समय रंग-रोगन और सादे बेल-बूटे
नमूना उत्तर: मेरे घर म सबसे अ धक चत्रकारी मेरी माँ करती ह। वे द पावली और तीज-त्योहार पर ार के आगे
धरती पर रंगोली बनाती ह। मेरी दाद मट्ट के घड़े और द य पर सफ़ेद और लाल रंग से फूल बनाती ह। मेरी बहन
कपड़े पर कढ़ाई करती है। म कागज पर प सल और रंग से चत्र बनाता हूँ। पछली बार मने अपनी कापी म पहाड़
और उगता हुआ सूरज बनाया था।
ध्यान द जए: अजंता के कलाकार ने भी पत्थर क द वार को ही अपना कागज बनाया था। कला के लए महँगी
चीज़ क ज़रूरत नह होती — जो सामने है, उसी पर बनाया जा सकता है।
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गुफाओं के चत्र दे खते ही नशा के मुँह से ‘वाह!’ क्य नकला? आपके मुँह से कब-कब ‘वाह!’ नकलता है?
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नशा glके मुँह से ‘वाह!’ इस लए नकला क्य क गुफा क द वार के चत्र उसक सोच से भी कह अ धक सुंदर और सजीव
थे। जो चीज़ अचानक बहुत अ लगे, उसे दे खकर मुँह से अपने-आप ‘वाह!’ नकल जाता है।
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पाठ क पं क्त दे खए —
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“गुफाओं के अंद र दीवारों पर अत्यंत सुंदaरgिच त्र बने है।
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आिद के िच त्र अत्यंत सजीव थे ।…
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उन्हे ं दे खते ही िनशा के मुँह से िनकला, “वाह!””
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‘वाह!’ नकलने के तीन कारण पाठ म साफ़ दखते ह —
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a 1. चत्र बहुत सुंदर थे — “अत्यंत सुंदर चत्र बने ह।”
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2. चत्र सजीव थे — सजीव यानी जीते-जागते से। आगे लखा है — “ऐसे सजीव चत्र थे क लगता था अभी बोल पड़गे।”
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3. चत्र म इतनी बारीक थी — हाथ क मुद्रा, आँख के भाव, अंग क लोच और मुख क झु रयाँ तक बनी थ ।
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नमूना उत्तर (दूसरा भाग): मेरे मुँह से ‘वाह!’ तब नकलता है जब बरसात के बाद आकाश म इंद्रधनुष दखता है।
जब मेरी माँ मेरी पसंद का हलवा बनाती ह, तब भी ‘वाह!’ नकल जाता है। द पावली क रात पूरे मुहल्ले म जलते
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द ये दे खकर और क्रकेट म कसी का लंबा छक्का दे खकर भी म ‘वाह!’ कह उठता हूँ।
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a s em ‘वाह!’ कैसा शब्द है: यह एक वस्मया दबोधक शब्द है — यानी अचानक मन म उठे भाव को बताने वाला शब्द।
ag l इसे बोलने के लए सोचना नह पड़ता, यह अपने-आप नकल जाता है। इसी लए इसके बाद वस्मया दबोधक चह्न
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(!) लगाया जाता है।
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पाठ से — पृष्ठ 133 agl
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बहु वकल्पी प्रश्न — नदश है “ दए गए प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के आगे सूरज का चत्र (☼) बनाइए —”, और अभ्यास के नीचे लखा है “अब
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अपने समूह म चचा करके पता लगाइए क कस- कसने कौन-कौन से उत्तर चुने और क्य ।” यहाँ हर वकल्प क जाँच अलग-अलग क गई है।
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पाठ से बहु वकल्पी
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agl नशा, अजंता और एलोरा जाने के लए क्य उत्सा हत थी? (क) वह पहली बार हवाई यात्रा करने वाली थी। (ख)
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प्र.1
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उसने इन गुफाओं के बारे म पुस्तक म पढ़ा था। (ग) उसे मौसी जी से एक नया खलौना मलने वाला था। (घ)
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उसने अजंता और एलोरा के बारे म मत्र से सुना था।
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सही वकल्प — (ख) उसने इन गुफाओं के बारे म पुस्तक म पढ़ा था। इसी के आगे सूरज का चत्र (☼) बनाइए।
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पाठ क पहली ही पं क्तयाँ यह उत्तर दे दे ती ह —
“िनशा ने पुस्तकों में अजंत ा, एलोरा के बारे में पढ़ ा था।
तभी से उसके मन में उत्सुक ता थी िक ये गुफाएँ दे खने में कै सी होंगी।”
अब एक-एक वकल्प जाँ चए —
वकल्प सही या कारण
गलत
(क) वह पहली बार हवाई यात्रा गल त ✘ नशा हवाई जहाज़ से गई ही नह । पाठ कहता है — “रेलगाड़ी म आरक्षण छत्रप त
करने वाली थी। संभाजीनगर तक था”, और आगे “वे बस से अजंता क ओर चल द ।” यानी यात्रा रेल और
बस से हुई।
(ख) उसने इन ग फ
ु ाओं के बारे सही ✔ यही पाठ म शब्द-दर-शब्द लखा है। पढ़ने से उसके मन म ज ासा जगी — “ये गुफाएँ
में पुस्तकों में पढ़ ा था। दे खने म कैसी ह गी।” पढ़ हुई चीज़ को अपनी आँख से दे खने का उत्साह ही उसे वहाँ ले
गया।
(ग) उसे मौसी जी से एक नया गल त ✘ पूरे पाठ म खलौने क कोई बात नह है। मौसी ने वादा कया था तो केवल इतना —
िखलौना िमलने वाला था। “छु ट्टय म उसे अजंता और एलोरा दखाने का”।
(घ) उसने अजंता और एलोरा गल त ✘ यह वकल्प दे खने म ठ क लगता है, पर पाठ म ‘ मत्र से सुना’ नह , ‘पुस्तक म पढ़ा’
के बारे में िमत्रों से सुना था। लखा है। ऐसे ही मलते-जुलते वकल्प ध्यान से पढ़ने पड़ते ह।
ध्यान द जए: यहाँ वकल्प (ख) और (घ) दोन कहते ह क नशा को इन गुफाओं के बारे म पहले से पता था। अंतर
सफ़ कैसे पता चला इसम है। ऐसे प्रश्न म पाठ क उसी पं क्त पर उँ गली र खए और शब्द मलाइए।
प्र.2 नशा को अजंता और एलोरा दे खकर कैसा लगा? (क) उसे नराशा हुई। (ख) उसे आश्चय हुआ। (ग) उसे दुख
हुआ। (घ) वह उदास हो गई।
सही वकल्प — (ख) उसे आश्चय हुआ। इसी के आगे सूरज का चत्र (☼) बनाइए।
पाठ म ‘आश्चय’ शब्द तीन-तीन बार आया है —
“िनशा ने आ श्चयचिकत होकर कहा, ‘दो हजार वष! पर आज भी इनके रंग ज्यों के त्यों कै से है?ं ’”
“िनशा को सबसे अिधक आ श्चय यह दे खकर हुआ िक ये गुफाएँ पहाड़ ों को ही काटकर बनाई गई थी ं।”
“िनशा उन्हे ं दे ख-दे खकर चिकत हो रही थी।”
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वकल्प सही या कारण
गलत
(क) उसे गल त ✘ नराशा तब होती है जब कोई चीज़ उम्मीद से कम नकले। यहाँ उलटा हुआ — चत्र उसक सोच से भी
िनराशा हुई। सुंदर नकले, इसी लए मुँह से “वाह!” नकला।
(ख) उसे सही ✔ पाठ स्वयं उसे “आश्चयच कत” और “च कत” कहता है। आश्चय यानी अचरज — कोई बात इतनी बड़ी या
आश्चय हुआ । अनोखी लगे क वश्वास ही न हो। दो हजार साल पुराने रंग और पहाड़ काटकर बनी गुफाएँ दे खकर यही
हुआ।
(ग) उसे दुख गल त ✘ पाठ म दुख क एक भी पं क्त नह है। अंत म तो वह गव से कहती है — “यह गव क बात है क हजार
हुआ । वष पहले भी हमारे दे श म कला का इतना वकास हो चुका था।”
(घ) वह उदास गल त ✘ उदासी का कोई कारण ही नह था। लौटने के बाद भी “ नशा का मन अभी भी उन बेजोड़ कलाकृ तय क
हो गई। ओर लगा था” — यह उदासी नह , मुग्ध हो जाना है।
शब्द सी खए: आश्चयच कत = आश्चय + च कत, यानी अचरज से भरकर हैरान रह जाना। जब कोई बात इतनी
अनोखी हो क तुरंत सवाल पूछने का मन करे — जैसे नशा ने पूछा, “दो हजार वष!”
प्र.3 अजंता क गुफाओं म बने रंग इतने वष बाद भी क्य फ के नह पड़े थे? (क) वे वशेष प्रकार के कागज पर बनाए
गए थे। (ख) चत्र म प्र त वष फर से नया रंग भरा जाता था। (ग) रंग, फूल जैसी प्राकृ तक साम य से बनाए
गए थे। (घ) वे सभी गुफाएँ बहुत ठं डे स्थान पर स्थत थ ।
सही वकल्प — (ग) रंग, फूल जैसी प्राकृ तक साम य से बनाए गए थे। इसी के आगे सूरज का चत्र (☼) बनाइए।
यह उत्तर मौसी क बात से आता है —
“उस समय रंग बनाने का ढं ग बहुत अनोखा था। कहते है ं िक उस समय
ये रंग प ों, जड़ ी-बूिटयों, फू लों आिद से बनाए जाते थे ।”
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वकल्प सही या कारण
गलत
(क) वे िवशेष पकार के कागज गल त ✘ चत्र कागज पर नह थे। पाठ कहता है — “गुफाओं के अंदर द वार पर अत्यंत सुंदर
पर बनाए गए थे। चत्र बने ह।” कागज तो कुछ ही वष म गल जाता, पत्थर क द वार हज़ार वष टकती है।
(ख) िचत्रों में पित वष िफर से गल त ✘ पाठ म ऐसा कुछ नह लखा। य द हर वष रंग भरा जाता, तो नशा को आश्चय ही क्य
नया रंग भरा जाता था। होता? उसका सवाल ही यही था क पुराने रंग आज तक कैसे बचे ह।
(ग) रंग , फू लों जैस ी पाकृ ितक सही ✔ यही मौसी ने बताया — रंग पत्त , जड़ी-बू टय और फूल से बनते थे। प्राकृ तक यानी
सामिग यों से बनाए गए थे। प्रकृ त से मली हुई चीज़ से बना। ऐसे रंग सैकड़ साल टके रहे और फ के नह पड़े।
(घ) वे सभी ग फ
ु ाएँ बहत
ु ठं डे गल त ✘ पाठ म ठं डे ान क कोई बात नह है। उलटे लखा है क गुफाओं का मुँह पूव क ओर है
स्थान पर िस्थत थी ं। और सवेरे क धूप उन पर पड़ती है।
आगे क जए: पृष्ठ 138–139 क ‘रंग का संसार’ ग त व ध म इन्ह प्राकृ तक रंग को बनाना सखाया गया है —
पालक से हरा, हल्द से पीला, चुकंदर से लाल। वही तरीका जो हज़ार साल पहले काम म आता था।
प्र.4 यात्रा से लौटने के बाद भी नशा को वे कलाकृ तयाँ बार-बार क्य याद आ रही थ ? (क) उसने अपनी पाठ्यपुस्तक
म उनके बारे म पढ़ा था। (ख) मौसी जी ने वादा कया था क वे फर वहाँ जाएँगे। (ग) यात्रा बहुत लंबी थी इस लए
उसे याद आ रही थी। (घ) गुफाओं क सभी कलाकृ तयाँ बहुत आकषक थ ।
सही वकल्प — (घ) गुफाओं क सभी कलाकृ तयाँ बहुत आकषक थ । इसी के आगे सूरज का चत्र (☼) बनाइए।
पाठ क अं तम पं क्त यही कहती है —
“अजंत ा और एलोरा दे खकर िनशा और मौसी जी वापस लौट आए
पर िनशा का मन अभी भी उन बेजोड़ कलाकृ ितयों की ओर लगा था।”
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वकल्प सही या कारण
गलत
(क) उसने अपनी गल त ✘ पढ़ना तो यात्रा से पहले क बात थी, और पाठ म ‘पाठ्यपुस्तक’ नह , केवल ‘पुस्तक ’ लखा
पाठ पुस्तक में उनके बारे में है। पढ़ने से वह जाने के लए उत्सा हत हुई थी; लौटने के बाद याद आने का कारण कुछ और
पढ़ ा था। है।
(ख) मौसी जी ने वादा िकया गल त ✘ मौसी ने वादा कया था तो केवल यह क वे उसे अजंता और एलोरा दखाएँगी। दुबारा ले
था िक वे िफर वहाँ जाएँग े। जाने का कोई वादा पाठ म नह है।
(ग) यात्रा बहुत लंबी थी गल त ✘ लंबी यात्रा से थकान याद रहती है, कलाकृ तयाँ नह । नशा को याद आ रही थ कलाकृ तयाँ
इसिलए उसे याद आ रही — यानी द वार के चत्र और तराशी हुई मू तयाँ।
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ु ाओं की सभी सही ✔ पाठ उन्ह “बेजोड़ कलाकृ तयाँ” कहता है — बेजोड़ यानी जसक जोड़ी न हो। चत्र इतने
कलाकृ ितयाँ बहुत आकषक सजीव थे क “लगता था अभी बोल पड़गे”, और मू तय क “कारीगरी दे खते ही बनती थी”।
थी ं। ऐसी चीज़ मन से उतरती नह ।
चार प्रश्न का सूत्र: हर उत्तर पाठ क कसी एक पं क्त म छपा है — पहला उत्तर पहले अनु े द म, दूसरा और
तीसरा पृष्ठ 130 पर, और चौथा पृष्ठ 132 क अं तम पं क्त म। उत्तर चुनने से पहले वह पं क्त ढूँ ढ़ए, फर वकल्प
मलाइए।
पुस्तक कहती है: इस अभ्यास के नीचे लखा है — “अब अपने समूह म चचा करके पता लगाइए क कस- कसने
कौन-कौन से उत्तर चुने और क्य ।” अपने समूह म हर उत्तर के साथ पाठ क वह पं क्त भी पढ़कर सुनाइए जससे
वह उत्तर मला। इससे सबको पता चलेगा क उत्तर अनुमान से नह , पाठ से नकला है।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 134
नदश — “नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए —”। पाँच प्रश्न — अजंता म नशा ने क्या दे खा, कैलाश मं दर क
सबसे आश्चयजनक बात, छोट -बड़ी गुफाएँ, गुफाओं का मुँह पूव दशा म क्य , और यातायात के साधन
सो चए और ल खए ले ख न
प्र.1 अजंता म नशा ने क्या-क्या दे खा?
अजंता म नशा ने पहाड़ी पर एक पं क्त म बनी उनतीस गुफाएँ, उनक द वार पर बने दो हजार वष पुराने चत्र और पत्थर
तराशकर बनाई गई मू तयाँ दे ख । साथ ही उसने वहाँ का बाहरी दृश्य भी दे खा।
पाठ के अनुसार उसने जो कुछ दे खा, वह क्रम से यह है —
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कहाँ नशा ने क्या दे खा
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ु ाओं के बाहर
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, नद ी में पड़े बड़े-बड़े िशल ाखंड, घाटी में िखले रंग -िबरंग े फू ल
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एक ओर बहती छोटी सी नद ी
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पहाड़ी पर नद ी के दि क्षण में एक पंिक्त में बनी उ नतीस ग ुफ ाएँ, िजनका मुँह पूव िद शा की ओर था और िजन पर सवेरे की धूप पड़
रही थी
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ु ा के ठीक नीचे पानी से भरा एक कुं ड
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गफ
ु ाओं की दीवारों पर
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द्ध का घर छोड़कर तप के िल ए जाना, िभक्ष ुओं को उ पदे श दे ना, साध ु के रूप में िभक्षा माँग ने जाना — इनके
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गौतम ब ु
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अ यंत सजीव िच त्र
इसके अितिरक्त िचत्रों - , पश-ु पिक्षयों और िस्त्र यों के िचत्र
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पेड़ पौधों
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में
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िचत्रों की बारीकी में , आँखों के भाव, अंग ों की ल ोच, मुखों पर सुख-द ुख के भाव तथा झ ुिर याँ
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हाथों की मुद ा
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ु ाओं के भीतर त्
प थरों को तराशकर बनाई गई मूितयाँ ; कु छ ग ुफ ाएँ अत्यंत ल ंबी-चौड़ी और कु छ छोटी
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सबसे बड़ी बात: नशा को सबसे अ धक आश्चय यह दे खकर हुआ क ये गुफाएँ बनाई नह गईं — पहाड़ को ही
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काटकर नकाली गई थ । यानी पहले पहाड़ था,
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लखते समय: उत्तर को दो हस्स म बाँ टए — पहले बाहर का दृश्य (नद , शलाखंड, फूल, कुंड), फर भीतर का
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दृश्य ( चत्र और मू तयाँ)। ऐसा करने से उत्तर व्यव त और पूरा दखता है।
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agl प्र.2 कैलाश मं दर के बारे म आपको कौन-सी बात सबसे अ धक आश्चयजनक लगी?
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सबसे आश्चयजनक बात यह है क पूरा कैलाश मं दर एक ही चट्टान से बना है — उसे जोड़कर नह बनाया गया, ब ल्क एक
ऊँचे पहाड़ को ऊपर क ओर से तराशकर काटा गया है।
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मौसी जी ने यही बताया —
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“िनशा, यह अत्यंत पिसद्ध मंिदर है। पूरा मंिदर एक ऊँ चे पहाड़ को ऊपर की ओर से
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se m तराशकर बनाया गया है। दे खो, एक ही चट्टान से बनी इतनी बड़ ी और सुंदर
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इमारत िकतनी अद् भ तु है!”
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यह बात इतनी अनोखी क्य है, इसे ऐसे सम झए —
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1. साधारण मं दर नीचे से ऊपर बनाया जाता है — पहले न व, फर द वार, फर छत। पत्थर जोड़-जोड़कर रखे जाते ह।
2. कैलाश मं दर ऊपर से नीचे बना — पहले पहाड़ क चोट काट गई, फर नीचे उतरते हुए मं दर नकाला गया।
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3. इसम कोई पत्थर जोड़ा नह गया। जो नह चा हए था, वह हटाया गया — जैसे मट्ट के ढे ले से खलौना बनाते समय हम बाहर
क मट्ट हटाते ह।
4. इसम एक भूल भी सुधारी नह जा सकती। एक बार पत्थर कट गया तो वापस नह जुड़ता। इसी लए कारीगर क कुशलता
आश्चय म डाल दे ती है।
नमूना उत्तर: मुझे कैलाश मं दर क यह बात सबसे अ धक आश्चयजनक लगी क यह पूरा मं दर एक ही चट्टान से
बना है। इसे बनाने के लए कारीगर ने ऊँचे पहाड़ को ऊपर क ओर से तराशना शुरू कया और नीचे तक काटते चले
गए। इतनी बड़ी और सुंदर इमारत बना एक भी पत्थर जोड़े तैयार हो गई। मुझे लगता है इसम बहुत वष क मेहनत
लगी होगी, क्य क एक बार गलती हो जाने पर उसे सुधारा नह जा सकता था।
ध्यान र खए: पाठ म कैलाश मं दर एलोरा म है, अजंता म नह । एलोरा म पहाड़ काटकर लगभग तीस मं दर बनाए
गए ह और उनम कैलाश मं दर सबसे प्र सद्ध है।
प्र.3 मौसी जी ने छोट और बड़ी गुफा के बारे म क्या बताया?
पाठ के अनुसार अजंता क गुफाएँ एक-सी नह थ — कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थ और कुछ छोट थ । इससे भी
बड़ी बात यह बताई गई क छोट हो या बड़ी, हर गुफा पहाड़ को ही काटकर बनाई गई थी और भीतर क मू तयाँ पत्थर
तराशकर बनी थ ।
पाठ क पं क्तयाँ ये ह —
“कु छ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ ी थीं, कु छ छोटी।
िनशा को सबसे अिधक आ श्चय यह दे खकर हुआ िक ये गुफाएँ पहाड़ ों को ही काटकर
बनाई गई थी ं। इन गुफाओं में बनी मूित याँ भी पत्थरों को तराशकर बनाई गई थी ं।”
बात पाठ म क्या कहा गया है
गफ
ु ाओं का आकार त् -
कु छ अ यंत ल ंबी चौड़ ी , कु छ छोटी — यानी सब एक नाप की नही ं थी ं
गफ
ु ाओं की संख्या पहाड़ ी पर एक पंि क्त में उ नतीस ग ुफ ाएँ
गफ
ु ाएँ कै से बनी ं पहाड़ ों को ही काटकर बनाई गई ं
भीतर की मूितयाँ त्
प थरों को तराशकर बनाई गई ं
भीतर के िचत्र त्
द ीवारों पर बने अ यंत सुंद र और सजीव िच त्र , िजनके रंग द ो हजार वष बाद भी फ ीके नही ं पड़े
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
एक बात साफ़ कर ली जए: पुस्तक म छोट -बड़ी गुफाओं वाली यह पं क्त मौसी जी के संवाद के रूप म नह ,
कहानी सुनाने वाले के शब्द म छपी है — “कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थ , कुछ छोट ।” इस लए उत्तर लखते
समय इसी पं क्त को आधार बनाइए। मौसी जी ने गुफाओं के बारे म जो सीधे कहा, वह है — “ नशा, ये गुफाएँ दो
हजार वष पुरानी ह।”
प्र.4 क्या कारण है क अजंता क गुफाओं का मुँह पूव दशा म बनाया गया है?
गुफाओं का मुँह पूव दशा म इस लए बनाया गया ता क सवेरे उगते सूरज क करण सीधे गुफाओं पर और उनके भीतर
पड़। सूरज पूव से नकलता है, इस लए पूव क ओर मुँह होने पर सुबह क धूप भीतर तक पहुँचती है।
पाठ यह बात इन शब्द म कहता है —
“इन गुफाओं का मुँह पूव िदशा की ओर होने के कारण
पातःकाल के सूय की िकरणे ं इन पर पड़ रही थीं।”
इससे क्या लाभ हुआ होगा, यह चरण म सम झए —
1. चरण 1 — गुफा पहाड़ के भीतर होती है, इस लए वह अपने-आप अँधेरी होती है।
2. चरण 2 — उस समय बजली नह थी। रोशनी का एक ही पक्का साधन था — सूरज क धूप।
3. चरण 3 — मुँह पूव क ओर रखने से सवेरे क सीधी धूप गुफा के भीतर घुसती है।
4. चरण 4 — इस उजाले म कारीगर द वार पर चत्र बना सकते थे और भक्षु भीतर बैठकर पढ़- लख सकते थे।
5. चरण 5 — आज भी सवेरे-सवेरे जाने वाले या त्रय को गुफाओं के चत्र इसी प्राकृ तक उजाले म साफ़ दखते ह।
सोचने क बात: पाठ केवल इतना बताता है क मुँह पूव क ओर है, इस लए सुबह क करण उन पर पड़ती ह।
भीतर उजाला मलने वाली बात हम उसी पं क्त से समझ सकते ह — यह हमारा तक है, पुस्तक का छपा हुआ वाक्य
नह । उत्तर लखते समय पहले पाठ क पं क्त ल खए, फर अपना कारण।
दशा याद र खए: सूरज पूव म उगता है और प श्चम म डू बता है। इसी लए सुबह क धूप चा हए हो तो ार पूव क
ओर रखा जाता है। पृष्ठ 137 के मान चत्र म भी दशा बताने के लए ‘उत्तर’ का चह्न बना है।
प्र.5 अजंता और एलोरा तक पहुँचने के लए यातायात के कौन-कौन से साधन का प्रयोग कर सकते ह?
पाठ के अनुसार नशा और उसक मौसी ने दो साधन काम म लए — पहले रेलगाड़ी और फर बस। इनके अलावा आज कई
और साधन से भी वहाँ पहुँचा जा सकता है।
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पहले पाठ म जो छपा है, वह दे खए —
चरण साधन पाठ क पं क्त
घर से छत्रपित संभाजीनगर तक रे ल गाड़ ी “रेलगाड़ी म आरक्षण छत्रप त संभाजीनगर तक था।”
संभाजीनगर से अजंता (लगभग 100 िक.मी.) बस “दूसरे दन बड़े सवेरे ही उठकर वे बस से अजंता क ओर चल द ।”
संभाजीनगर से एलोरा (लगभग 40 िक.मी.) बस “वे दूसरे दन बस म बैठकर एलोरा क गुफाएँ दे खने गईं।”
गफ
ु ाओं के पवेश- ार से ग फ
ु ाओं तक शटल से वा पृष्ठ 137 के मान चत्र म ‘शटल सेवा’ और उसके पास ‘आप यहाँ ह’ लखा है।
इनके अलावा और कौन-से साधन काम आ सकते ह —
हवाई जहाज़ — दूर के शहर से पहले छत्रप त संभाजीनगर तक हवाई जहाज़ से आया जा सकता है, फर आगे सड़क से।
कार या टै क्सी — अपने वाहन या कराए क गाड़ी से भी जाया जा सकता है।
ऑटो या जीप — पास के कस्बे से गुफाओं तक।
पैदल — गुफाएँ एक पं क्त म बनी ह, इस लए एक गुफा से दूसरी गुफा तक पैदल ही जाना होता है, और कह -कह सी ढ़याँ भी
चढ़नी पड़ती ह।
नमूना उत्तर: अजंता और एलोरा तक पहुँचने के लए हम रेलगाड़ी, बस, कार, टै क्सी और हवाई जहाज़ का प्रयोग
कर सकते ह। पाठ म नशा और उसक मौसी छत्रप त संभाजीनगर तक रेलगाड़ी से गईं और वहाँ से अजंता तथा
एलोरा बस से गईं। दूर रहने वाले यात्री पहले हवाई जहाज़ से संभाजीनगर आ सकते ह और फर बस या टै क्सी ले
सकते ह। प्रवेश- ार से गुफाओं तक जाने के लए शटल सेवा भी चलती है और आगे थोड़ी दूर पैदल चलना पड़ता है।
ध्यान द जए: रेलगाड़ी और बस पाठ म छपे हुए साधन ह, और शटल सेवा पृष्ठ 137 के मान चत्र म। हवाई जहाज़,
कार और ऑटो हमारी अपनी जानकारी से जोड़े गए ह — उत्तर लखते समय इन दोन को अलग-अलग र खए।
अनुमान एवं कल्पना — पृष्ठ 134
कल्पना पर आधा रत दो प्रश्न — य द अजंता क द वार के चत्र बोल सकते तो क्या कहा नयाँ सुनाते, और हजार वष पहले के संसार म जाकर
आप गुफा म कौन-सा नया चत्र बनाते
अनु मान एवं कल्पना कल्पना
प्र.1 य द अजंता क द वार के चत्र बोल सकते तो वे हम क्या कहा नयाँ सुनाते?
यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए एक ही सही उत्तर नह है। पर अ ा उत्तर वही होगा जो पाठ म दखाए गए चत्र से जुड़ा हो। पाठ
बताता है क द वार पर कन- कन चीज़ के चत्र ह — वही चत्र बोलते तो अपनी-अपनी कहानी सुनाते।
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द वार का चत्र (पाठ से) वह क्या कहानी सुनाता
गौतम बुद्ध का घर छोड़कर तप के िलए एक राजकु मार की कहानी , िजसने महल का सुख छोड़कर स च्चाई खोजने के िल ए जंग ल की राह
जाना पकड़ ी।
िभक्षओ
ु ं को उपदे श दे ना - च्
उ स िद न की कहानी जब बहुत से ल ोग च ुपचाप बैठ कर एक अ छी बात सुन रहे थे — द या, सच और
शािं त की बात।
साध ु के रूप में िभक्षा माँग ने जाना -
गाँव गाँव घूम ने की कहानी — िकस घर ने भोजन िद या, िकसने द रवाज़ा नही ं खोल ा, और भ ूख में भी
मन शांत कै से रहा।
पेड़-पौधों के िचत्र उ स समय के जंग ल की कहानी — कौन-से पेड़ थे, िकन प ों और फू ल ों से रंग बनाए जाते थे।
पशु-पिक्षयों के िचत्र हाथी , िहरन और िचिड़यों की कहानी, जो ग ुफ ा के पास की घाटी में घूम ते थे।
िस्त्रयों के िचत्र उस ज़ माने क -
े रहन सहन की कहानी — कै से कपड़े पहने जाते थे, कै से गहने बनते थे, त्योहार कै से
मनाए जाते थे।
मुखों पर सुख-दुख के भाव और झुिरयाँ उ न ल ोगों की कहानी जो सचमुच िजए — िकसी की ख ुशी, िकसी का द ुख, और ब ुढ़ापे तक का
सफ़ र।
नमूना उत्तर: य द अजंता क द वार के चत्र बोल सकते तो सबसे पहले वे अपने बनाने वाल क कहानी सुनाते। वे
बताते क दो हजार वष पहले कुछ कारीगर पहाड़ काटकर यहाँ आए थे। उनके पास बजली नह थी, इस लए वे सवेरे
क धूप म काम करते थे। वे पत्त , जड़ी-बू टय और फूल को पीसकर रंग बनाते थे। फर बुद्ध वाला चत्र बोलता —
“मने दे खा है क एक राजकुमार सब कुछ छोड़कर तप के लए नकल पड़ा था।” पेड़-पौध के चत्र बताते क उस
समय यहाँ कैसा घना जंगल था। पशु-प क्षय के चत्र अपनी घाट क बात सुनाते। और अंत म सब मलकर कहते —
“हम छू ना मत, हमारे रंग दो हजार साल से टके ह, इन्ह ऐसे ही रहने दो।”
अ े उत्तर म क्या होना चा हए: (1) कम-से-कम दो-तीन ऐसे चत्र का नाम जो पाठ म सचमुच बताए गए ह। (2)
चत्र क अपनी आवाज़ म एक-दो वाक्य, यानी संवाद। (3) अंत म एक भाव — जैसे उन्ह सँभालकर रखने क बात।
प्र.2 मान ली जए क आप हजार वष पहले के संसार म चले गए ह और आपको अजंता क गुफाओं म एक नया चत्र
बनाने का अवसर मला है। आप क्या बनाएँगे और क्य ?
इस उत्तर के दो हस्से होने चा हए — आप क्या बनाएँगे, और क्य बनाएँगे। ‘क्य ’ वाला हस्सा ही उत्तर को अ ा बनाता है।
उत्तर तैयार करने के चरण —
1. चरण 1 — एक ऐसा दृश्य चु नए जो आपको सचमुच प्रय हो — अपना गाँव, अपना वद्यालय, अपना त्योहार या अपने आस-
पास के पशु-पक्षी।
2. चरण 2 — सो चए क हजार साल बाद जो व्य क्त यह चत्र दे खेगा, उसे इससे क्या पता चलेगा।
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3. चरण 3 — तय क जए क रंग कन प्राकृ तक चीज़ से बनाएँगे — पालक से हरा, हल्द से पीला, चुकंदर से लाल (पृष्ठ 138–
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139)।
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4. चरण 4 — दो-तीन वाक्य म अपना कारण ल खए।
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agचत्रl म म बड़े बरगद का पेड़ बनाता, उसके नीचे चू ड़य और खलौन क दुकान बनाता, और एक ओर झूला बनाता
नमूना उत्तर: य द मुझे अजंता क गुफा म एक नया चत्र बनाने का अवसर मलता तो म अपने गाँव का मेला बनाता।
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जस पर ब े बैठे ह । एक कोने म म मट्ट के बरतन बनाते कुम्हार को दखाता। रंग म वैसे ही बनाता जैसे उस समय
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बनते थे — पालक से हरा, हल्द से पीला और चुकंदर से लाल। म यह चत्र इस लए बनाता क्य क हजार वष बाद
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जो व्य क्त इसे दे खेगा, उसे पता चलेगा क हमारे समय के लोग मल-जुलकर खुशी मनाते थे, क्या पहनते थे और
कौन-कौन से काम करते थे। जैसे अजंता के चत्र से हम दो हजार वष पुराने जीवन का पता चलता है, वैसे ही मेरा
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चत्र भी आगे आने वाल को हमारा जीवन दखाता।
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यह उत्तर अ ा क्य है: इसम चत्र का ब्योरा है (क्या-क्या दखेगा), रंग बनाने का तरीका
m है जो पाठ से जुड़ता है। अजंता के चत्र भी तो यही करते ह — वे हम दो हजार साल पुराना जीवन
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gl दखाते ह।
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भाषा क बात — पृष्ठ 134, 135 औरla136
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पाँच अभ्यास — शब्द का उनके मलते-जुलते अथ से मलान, दो शब्द के मेल से बने शब्द, ‘ज्य का त्य ’ जैसे वाक्यांश से वाक्य, ‘लगता था
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अभी बोल पड़गे’ जैसे वाक्यांश से वाक्य, तथा वशेषण शब्द क वग पहेली
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भाषा क बात व्याकरण
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a s em पाठ म से कुछ शब्द नीचे दए गए ह। इन्ह उनके मलते-जुलते अथ के साथ रेखाएँ ख चकर मलाइए — शब्द:
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प्र.1
a शलाखंड, गुफा, कुंड, भक्षु। अथ: कंदरा, गुहा / संन्यासी, याचक / चट्टान, पत्थर / तालाब, जलाशय। (पुस्तक म
‘ शलाखंड’ से ‘चट्टान, पत्थर’ तक क रेखा उदाहरण के रूप म पहले से खची है।)
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पूरा मलान नीचे दया है। पुस्तक म पहली रेखा — शलाखंड → चट्टान, पत्थर — उदाहरण के रूप म पहले से खची है। बाक
तीन रेखाएँ आपको ख चनी ह।
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शब्द अथ क्य — पाठ क पं क्त
िशलाखंड च ट्ट ान, पत्थर “नद म बड़े-बड़े शलाखंड पड़े थे।” शला यानी बड़ी चट्टान और खंड यानी टु कड़ा — मलकर बना
(उदाहरण) ‘चट्टान का टु कड़ा’।
गफ
ु ा कं द रा , ग ुहा “एक पहाड़ी पर एक पं क्त म उनतीस गुफाएँ थ ।” गुफा यानी पहाड़ के भीतर बना खोखला ान।
‘कंदरा’ और ‘गुहा’ भी इसी के दूसरे नाम ह।
कुं ड ताल ाब , “गुफा के ठ क नीचे एक कुंड बना था जसम पानी भरा हुआ था।” कुंड यानी पानी भरा ग ा।
जल ाशय ‘जलाशय’ = जल + आशय, यानी जल रहने क जगह।
िभक्ष ु न्
सं यासी , “ भक्षुओं को उपदे श दे ना, साधु के रूप म भक्षा माँगने जाना।” भक्षु यानी वह साधु जो माँगकर
याचक भोजन पाता है। ‘याचक’ का अथ भी माँगने वाला है।
पयायवाची शब्द: ये सब पयायवाची ह — यानी एक ही अथ वाले अलग-अलग शब्द। ‘गुफा’ के लए कंदरा और
गुहा, ‘कुंड’ के लए तालाब और जलाशय। भाषा म पयायवाची जानने से लखते समय एक ही शब्द बार-बार नह
दोहराना पड़ता।
प्र.2 “ नशा और मौसी ने स्टे शन पर ही वश्रामगृह म रात बताई।” यहाँ ‘ वश्रामगृह’ शब्द दो शब्द से मलकर बना है
— ‘ वश्राम’ और ‘गृह’। वश्राम का अथ है — आराम। गृह का अथ है — घर। अतः वश्रामगृह का अथ हुआ —
आराम करने का घर या स्थान। पाठ म से ऐसे ही दो शब्द के मेल से बने अन्य शब्द को खोजकर उनके अथ
लेखन-पु स्तका म ल खए।
पाठ और उसके अभ्यास म ऐसे कई शब्द ह जो दो शब्द को जोड़कर बने ह। नीचे पूरी सूची अथ के साथ द गई है।
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शब्द दो शब्द अथ कहाँ मला
िवश्रामग ृह िवश्राम + ग ृह आराम करने का घर या ान पृष्ठ 129
(उदाहरण)
कलामंिदर कल ा + मंिद र कला का मं दर, यानी वह ान जहाँ कला मं दर क तरह पाठ का शीषक, पृष्ठ
सँभालकर रखी हो 129
रे ल गाड़ी रे ल + गाड़ी पटरी पर चलने वाली गाड़ी पृष्ठ 129
िशलाखंड िशल ा + खंड चट्टान का बड़ा टु कड़ा पृष्ठ 129
पातःकाल पातः + काल सवेरे का समय पृष्ठ 129
आश्चयचिकत आ चय श् + अचरज से हैरान रह जाना पृष्ठ 130
चिकत
कलाकृ ित कल ा + कृ ित कला से बनाई गई रचना या चीज़ पृष्ठ 132
पाठ पुस्तक पाठ + पस्ु तक पढ़ने-पढ़ाने क पुस्तक पृष्ठ 133
मानिचत्र मान + िचत्र नाप के अनुसार बनाया गया चत्र, यानी न ा पृष्ठ 137
जलपपात जल + पपात ऊपर से गरता हुआ पानी, यानी झरना पृष्ठ 137 का मान चत्र
श्यामपट्ट श्याम + पट्ट काले रंग का पट्ट या तख्ता, जस पर कक्षा म लखा जाता है पृष्ठ 138
धन्यवाद न् + वाद
ध य ‘आप धन्य ह’ ऐसा कहना, यानी आभार प्रकट करना पृष्ठ 140
पहचानने का तरीका: शब्द को बीच से तोड़कर दे खए। य द टू टे हुए दोन टु कड़ का अपना-अपना अथ नकलता
है, तो शब्द दो शब्द के मेल से बना है। जैसे ‘रेलगाड़ी’ को तो ड़ए — ‘रेल’ का अथ है और ‘गाड़ी’ का भी। पर
‘गुफा’ को तोड़ने से ‘गु’ और ‘फा’ का कोई अथ नह नकलता — इस लए वह जुड़ा हुआ शब्द नह है।
एक और तरह के जोड़े: पाठ म पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, सुख-दुख, जड़ी-बूट , रंग- बरंगे, लंबी-चौड़ी जैसे शब्द भी
ह। इनम दो शब्द बीच म छोट रेखा (हाइफ़न) लगाकर जोड़े जाते ह और दोन का अपना अथ बना रहता है। इन्ह भी
अपनी लेखन-पु स्तका म अलग सूची बनाकर ल खए।
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प्र.3 नशा ने आश्चयच कत होकर कहा — “दो हजार वष! पर आज भी इनके रंग ज्य के त्य कैसे ह?” ‘ज्य का त्य ’
का अथ है — कोई प रवतन न होना। इसी प्रकार के कुछ शब्द नीचे दए गए ह। इनका प्रयोग करते हुए अपनी
लेखन-पु स्तका म वाक्य ल खए — ज्य का त्य , जैसे का तैसा, बलकुल वैसा ही, वैसा का वैसा, जैसे थे वैसे ही,
वास्त वक रूप म।
ये सभी वाक्यांश एक ही बात कहते ह — कोई बदलाव नह हुआ। नीचे छह के अथ और वाक्य दए गए ह।
वाक्यांश अथ वाक्य
ज्यों का त्यों जैस ा था िबल कु ल वैस ा ही , कोई दो हजार वष बाद भी अजंता के चत्र का रंग ज्य का त्य बना हुआ है।
पिरवतन नही ं
जैसे का तैस ा ठीक उ सी हाल त में म छु ट्ट से लौटा तो मेरा कमरा जैसे का तैसा पड़ा था।
िबलकु ल वैस ा र ी भर भी अंतर नही ं मेरे भाई ने बलकुल वैसा ही चत्र बनाया जैसा पुस्तक म छपा था।
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वैस ा का वैस ा िजस रूप में था, उ सी रूप में बरसात बीत गई पर पुल वैसा का वैसा मज़बूत खड़ा है।
जैसे थे वैसे ही पहले जैस ी ही ि स्थित में (बहुवचन के मेले से लौटकर दे खा तो सारे खलौने जैसे थे वैसे ही रखे मले।
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वास्तिवक रूप असल ी रूप में, स च्चे रूप में कैलाश मं दर को चत्र म नह , वास्त वक रूप म दे खने पर उसक वशालता
में समझ आती है।
ध्यान द जए: ‘ज्य का त्य ’, ‘जैसे का तैसा’ और ‘वैसा का वैसा’ — तीन म ढाँचा एक जैसा है : एक शब्द + का
+ उससे मलता-जुलता शब्द। हद म ऐसे जोड़े बहुत ह, जैसे ‘जहाँ का तहाँ’, ‘जब का तब’। इनका प्रयोग करने
से भाषा म रस आ जाता है।
अपने लए और वाक्य: इन्ह वाक्यांश से घर क चीज़ के बारे म वाक्य बनाइए — जैसे “दाद क सलाई मशीन
तीस साल से ज्य क त्य चल रही है।” अपने आस-पास से उदाहरण लेने पर वाक्य अपने-आप सही बनते ह।
प्र.4 “ऐसे सजीव चत्र थे क लगता था अभी बोल पड़गे।” “इन मू तय क कारीगरी दे खते ही बनती थी।” रेखां कत
अंश को ध्यान म रखते हुए अब नीचे दए गए वाक्यांश से वाक्य बनाइए — दं ग रह जाना, ऐसा जैसे सपना हो,
प्रशंसा के योग्य होना, आँख न हटा पाना, दल को छू जाना, कल्पना से परे होना, मन मोह लेना, दृश्य भूल न
पाना, दृ थम जाना।
ये नौ वाक्यांश कसी चीज़ क सुंदरता या अचरज को बताने के लए काम आते ह — ठ क वैसे ही जैसे पाठ म “लगता था अभी
बोल पड़गे” और “दे खते ही बनती थी”। नीचे नौ के नौ वाक्यांश के अथ और वाक्य दए गए ह।
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वाक्यांश अथ वाक्य
दंग रह जाना हैर ान रह जाना कैलाश मं दर एक ही चट्टान से बना है, यह सुनकर नशा दं ग रह गई।
ऐसा जैसे सपना हो इतना सुंद र िक सच ल गे ही नही ं पहाड़ काटकर बनी उन गुफाओं को दे खकर लगा, ऐसा जैसे सपना हो।
पशंस ा के योग्य तारीफ़ िकए जाने ल ायक होना दो हजार वष पुराने इन चत्र को बनाने वाले कारीगर का काम प्रशंसा के
होना योग्य है।
आँखें न हटा पाना नज़ र हटाने का मन ही न करना अजंता के चत्र से नशा आँख न हटा पाई।
िदल को छू जाना मन क च्
े भीतर तक अ छा ल गना मू तय के चेहर पर बने सुख-दुख के भाव दल को छू गए।
कल्पना से परे इतना बड़ ा या अनोखा िक सोचा भी न जा पूरा मं दर एक ही पहाड़ को ऊपर से तराशकर बना है — यह बात कल्पना
होना सके से परे है।
मन मोह ले ना मन को अपनी ओर खीच
ं ले ना घाट म खले रंग- बरंगे फूल ने नशा का मन मोह लया।
दृ श्य भूल न पाना दे खा हुआ दृ श्य याद से न जाना घर लौटकर भी नशा एलोरा का वह दृश्य भूल न पाई।
दृ ि ट थम जाना नज़ र एक ही जगह िटक जाना गुफा क द वार पर बने बुद्ध के चत्र पर मेरी दृ थम गई।
ऐसे वाक्यांश क्य काम आते ह: य द हम बार-बार “बहुत सुंदर था” लख तो लेख फ का लगता है। ये वाक्यांश
उसी बात को नए-नए ढं ग से कहते ह — कोई कहता है ‘आँख न हटा पाना’, कोई ‘मन मोह लेना’। पाठ ने भी यही
कया — “लगता था अभी बोल पड़गे।”
सुझाव: इन नौ वाक्य म से कोई तीन चुनकर उनसे अपनी कसी यात्रा का छोटा-सा वणन ल खए। वाक्यांश जब
अपने अनुभव पर लगते ह, तभी वे सचमुच याद रहते ह।
प्र.5 नीचे एक वग पहेली द गई है। इस वग पहेली म कुछ वशेषण शब्द छपे हुए ह। शब्द को खो जए और उन शब्द
का वाक्य म प्रयोग क जए —
यह छह पं क्तय और छह स्तंभ क वग पहेली है। इसम कुल ग्यारह वशेषण छपे ह — कुछ आड़े (बाएँ से दाएँ) और कुछ खड़े
(ऊपर से नीचे)। पुस्तक म पहला शब्द बेजोड़ उदाहरण के रूप म लाल घेरे से घेरा हुआ है।
पूरी भरी हुई वग पहेली नीचे है। रंगीन खाने वे ह जो कसी छपे शब्द का हस्सा ह —
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स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 स्तंभ 4 स्तंभ 5 स्तंभ 6
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अब दे खए कौन-सा शब्द कहाँ छपा है और उसका वाक्य क्या बनेगा —
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छपा शब्द कहाँ है अथ वाक्य म प्रयोग
अद् भत
ु पंि क्त 1, स्तंभ 1 से 4 जो दे खकर अचरज हो एक ही चट्टान से बना कैलाश मं दर सचमुच अ त है।
(आड़ा)
बेजोड़ स्तंभ 1, पंिक्त 2 से 4 जसक जोड़ी या बराबरी न हो अजंता क कलाकृ तयाँ बेजोड़ ह।
(उदाहरण) (खड़ा)
सुंद र पंि क्त 2, स्तंभ 2 से 4 दे खने म अ ा लगने वाला गुफाओं क द वार पर बहुत सुंदर चत्र बने ह।
(आड़ा)
किठन पंि क्त 3, स्तंभ 2 से 4 मु श्कल, जो आसानी से न हो पहाड़ काटकर मं दर बनाना बहुत क ठन काम रहा
(आड़ा) होगा।
सजीव पंि क्त 4, स्तंभ 2 से 4 जीता-जागता सा, जसम जान चत्र इतने सजीव थे क लगता था अभी बोल पड़गे।
(आड़ा) लगे
िवशाल पंि क्त 5, स्तंभ 2 से 4 बहुत बड़ा कारीगर ने वशाल शलाओं को तराशकर मू तयाँ
(आड़ा) बनाईं।
रंग िबरंग ा पंि क्त 6, स्तंभ 2 से 6 कई रंग वाला घाट म रंग बरंगे फूल खले हुए थे।
(आड़ा)
मनोरम स्तंभ 5, पंिक्त 1 से 4 मन को भाने वाला, सुंदर अजंता पहुँचकर नशा ने जो दृश्य दे खा, वह बड़ा
(खड़ा) मनोरम था।
छोटी स्तंभ 6, पंिक्त 1 से 2 आकार म कम गुफाओं के पास एक छोट -सी नद बह रही थी।
(खड़ा)
पिस द्ध स्तंभ 6, पंिक्त 3 से 5 जसे बहुत लोग जानते ह , एलोरा का कैलाश मं दर अत्यंत प्र सद्ध है।
(खड़ा) मशहूर
बड़ी स्तंभ 1, पंिक्त 5 से 6 आकार म अ धक नद म बड़ी-बड़ी चट्टान पड़ी थ ।
(खड़ा)
ये सब वशेषण क्य ह: वशेषण वह शब्द है जो कसी सं ा क वशेषता बताए। ‘सुंदर चत्र’ म ‘सुंदर’ बता रहा है
क चत्र कैसा है। ऊपर के ग्यारह शब्द यही काम करते ह — अ त मं दर, वशाल शला, सजीव चत्र, प्र सद्ध
मं दर, रंग बरंगे फूल।
दो बात और: (1) पं क्त 5 का ‘च’ खाना कसी शब्द का हस्सा नह है — वह केवल भरने के लए रखा गया है।
पहे लय म ऐसे खाने जान-बूझकर रखे जाते ह ता क शब्द तुरंत न दख जाएँ। (2) इनम से क ठन को छोड़कर बाक
सभी शब्द कसी-न- कसी रूप म इसी पाठ म आए ह। खोजते समय पहले पाठ के वशेषण याद कर ली जए —
पहेली फर आसान हो जाती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
चत्र का वणन — पृष्ठ 136
नदश — “आपने पाठ म अजंता के चत्र का सुंदर वणन पढ़ा। नीचे अजंता का एक प्र सद्ध चत्र दया गया है। इसका वणन अपने शब्द म
लेखन-पु स्तका म क जए —”
चत्र का वणन ले ख न
प्र.1 आपने पाठ म अजंता के चत्र का सुंदर वणन पढ़ा। नीचे अजंता का एक प्र सद्ध चत्र दया गया है। इसका वणन
अपने शब्द म लेखन-पु स्तका म क जए —
वणन करते समय जल्दबाज़ी मत क जए। पहले चत्र को ध्यान से दे खए, फर ऊपर से नीचे और बीच से कनारे क ओर बढ़ते
हुए ल खए।
पुस्तक के पृष्ठ 136 पर छपे चत्र म यह सब दखाई दे ता है —
चत्र का भाग क्या दखाई दे ता है
मुख्य आकृ ित -
बीच में एक बड़ ी आकृ ित है जो कमर तक िद खती है। उ सका ऊपरी शरीर ख ुल ा है और वह हल की सी एक ओर झ ुकी हुई
है।
िसर पर ऊँ चा , न ुकील ा और र त्नों से जड़ा हुआ मुकु ट। मुकु ट के नीचे घुँघ राले बाल िद खते है ं।
चेहरा आँखें आधी झ ुकी हुई है ं और नीचे की ओर दे ख रही है ं। भौ ंहे ं ल ंबी और पतल ी है ं। मुख पर शांित और कोमल ता का भाव है
— न ह ँसी, न द ुख।
गहने गले में मोितयों की माल ा , िजसके बीच एक नील ा-सा नग है। कं धे से नीचे तक एक पतल ी माल ा ल टक रही है। बाँह में
बाजूबंद और कल ाई में कड़ े है ं।
हाथ द ायाँ हाथ छाती के पास मुड़ ा हुआ है और उँ गिल याँ कोमल ता से मुड़ ी है ं।
आस-पास की मुख्य आकृ ित के चारों ओर कई छोटी आकृ ितयाँ है ं — बाई ं ओर गहरे रंग की एक आकृ ित, द ाई ं ओर एक चेहरा, और
आकृ ितयाँ ऊपर की ओर कु छ ल ोग तथा एक पश ु जैस ी आकृ ित।
पीछे का दृ श्य ऊपर बाई ं ओर पेड़ ों और चौड़ े प - स्सा िद खता है।
ों जैस ी आकृ ितयाँ है ं। पीछे ल ाल भ ूरे रंग का एक चौकोर िह
रंग -
पील ा सुनहरा रंग सबसे अिधक है। उ सके साथ गे रुआ , ल ाल -भ ूरा, गहरा नील ा और हरापन िद खता है।
दीवार की दशा िच त्र जगह-जगह से िघसा हुआ है और कही-ं कही ं द ीवार की पपड़ी उ तर गई है — िफ र भी रंग अभी तक साफ़ िद खते है ं।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: यह चत्र अजंता क एक गुफा क द वार पर बना है। चत्र के बीच म एक बड़ी आकृ त है जो कमर तक
दखाई दे ती है। उसके सर पर ऊँचा और नुक ला मुकुट है जस पर रत्न जड़े ह। उसका चेहरा गोल और कोमल है।
आँख आधी झुक हुई ह और नीचे क ओर दे ख रही ह, मानो वह कसी गहरी सोच म हो। उसके गले म मो तय क
माला है और बाँह म बाजूबंद है। दायाँ हाथ छाती के पास मुड़ा हुआ है। मुख्य आकृ त के चार ओर कई छोट -छोट
आकृ तयाँ बनी ह — कुछ लोग, एक पशु और ऊपर क ओर पेड़ के चौड़े पत्ते। चत्र म पीला, गेरुआ, लाल-भूरा और
गहरा नीला रंग दखता है। द वार कह -कह से घस गई है, फर भी रंग इतने साफ़ ह क आकृ त के गहने तक गने
जा सकते ह। इस चत्र को दे खकर वही बात याद आती है जो पाठ म लखी है — “ऐसे सजीव चत्र थे क लगता था
अभी बोल पड़गे।”
वणन लखने क व ध: चरण 1 — चत्र म सबसे बड़ी चीज़ पहचा नए और पहले उसी के बारे म ल खए। चरण
2 — उसके भाग बताइए: सर, चेहरा, आँख, हाथ, गहने। चरण 3 — फर आस-पास क चीज़ बताइए। चरण 4
— रंग क बात क जए। चरण 5 — अंत म एक वाक्य अपने मन का ल खए — दे खकर आपको कैसा लगा।
पुस्तक के बाहर क जानकारी: पुस्तक ने इस चत्र का कोई नाम नह छापा; वहाँ केवल इतना लखा है क यह
“अजंता का एक प्र सद्ध चत्र” है। इस लए वणन उसी म सी मत र खए जो चत्र म दखता है। कला क पुस्तक म
यह चत्र पद्मपा ण के नाम से जाना जाता है और अजंता क गुफा संख्या 1 म है — पर यह जानकारी आपक
पाठ्यपुस्तक म नह छपी है, इस लए उत्तर म इसे अलग से और साफ़ लखकर ही जो ड़ए।
मान चत्र — पृष्ठ 137
नदश — “आपने पाठ म अजंता का वणन पढ़ा। नीचे अजंता का एक मान चत्र दया गया है। इस वणन और मान चत्र क सहायता से नीचे दए
गए प्रश्न के उत्तर खो जए —”। पाँच प्रश्न — नद का नाम, गुफाओं क संख्या, दशा का संकेत, ‘आप यहाँ ह’ का आशय और कुंड का नाम
मान चत्र खो जए
प्र.1 नद का क्या नाम है?
नद का नाम वाघोरा नद है।
मान चत्र म नद नीले रंग म बनी है और वह एक बड़ा घुमाव लेती हुई गुफाओं के सामने से बहती है। नद के ऊपर सफ़ेद डब्बे म
लखा है — वाघोरा नद ।
पाठ से मलाइए: पाठ म इस नद का नाम नह दया गया, केवल इतना लखा है — “एक ओर छोट -सी नद बह
रही थी। नद म बड़े-बड़े शलाखंड पड़े थे। नद के द क्षण म एक पहाड़ी पर एक पं क्त म उनतीस गुफाएँ थ ।” नाम
हम मान चत्र से मला। यही मान चत्र का काम है — वह वे बात बताता है जो लखे हुए वणन म छू ट जाती ह।
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प्र.2 कुल कतनी गुफाएँ दखाई गई ह?
मान चत्र म गुफाओं को 1 से 30 तक क्रमांक दए गए ह, यानी कुल तीस गुफाएँ दखाई गई ह।
मान चत्र को ध्यान से दे खए —
1. गुफाएँ नद के दूसरी ओर पहाड़ी के कनारे- कनारे एक पं क्त म बनी ह।
2. हर गुफा के भीतर एक अंक लखा है — 1, 2, 3 … और आगे बढ़ते-बढ़ते 28, 29, 30 तक।
3. हर गुफा के पास सफ़ेद डब्बे म ‘गुफा’ भी लखा है।
एक बात ध्यान दे ने क : पाठ म लखा है — “एक पहाड़ी पर एक पं क्त म उनतीस गुफाएँ थ ।” पर मान चत्र म
क्रमांक तीस तक जाते ह। दोन बात अपनी-अपनी जगह पर प ढ़ए — जो प्रश्न मान चत्र से पूछा गया है उसका उत्तर
मान चत्र से द जए (तीस), और जो पाठ से पूछा जाए उसका उत्तर पाठ से (उनतीस)। उत्तर लखते समय यह अंतर
भी बता द जए, तो उत्तर और अ ा हो जाएगा।
गनने का तरीका: सबसे बाईं गुफा पर लखा अंक दे खए — वह 1 है। फर पं क्त के साथ-साथ दाईं ओर बढ़ते
जाइए और सबसे बड़ा अंक ढूँ ढ़ए — वह 30 है। लगातार क्रमांक ह तो गनना नह पड़ता, सबसे बड़ा अंक ही कुल
संख्या बता दे ता है।
प्र.3 चार दशाओं म से कौन-सी दशा का संकेत दया गया है?
मान चत्र म उत्तर दशा का संकेत दया गया है।
मान चत्र के नीचे दाईं ओर एक तारे जैसा चह्न बना है और उसके नीचे लखा है — उत्तर। यही दशा-सूचक चह्न है।
एक दशा से चार दशाएँ: मान चत्र म केवल एक दशा लखने का रवाज है, क्य क एक पता चल जाए तो बाक
अपने-आप नकल आती ह। उत्तर क ओर मुँह करके खड़े होइए — तब पीछे द क्षण, दाएँ पूव और बाएँ प श्चम
होगा।
पाठ से जो ड़ए: पाठ कहता है — “नद के द क्षण म एक पहाड़ी पर… गुफाएँ थ ” और “इन गुफाओं का मुँह पूव
दशा क ओर” है। मान चत्र पर उत्तर का चह्न दे खकर आप ये दोन बात अपनी आँख से मलाकर दे ख सकते ह।
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“आप यहाँ ह” से क्या आशय है?
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“आपglयहाँ ह” का आशय यह है क मान चत्र दे खने वाला इस समय ठ क उसी जगह खड़ा है। यानी वह चह्न आपक अपनी
जगह बताता है।
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पृष्ठ 137 के मान चत्र म यह चह्न नीचे बाईं ओर बना है — ‘शटल सेवा’ लखे ान के पास। इसका अथ यह हुआ क यात्री पहले
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वह पहुँचता है, और वहाँ से गुफाओं तक जाता है।
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ऐसा चह्न क्य बनाया जाता है, यह चरण म सम झए —
1. चरण 1 — कोई नई जगह पर पहुँचता है और उसे कुछ पता नह होता क वह कहाँ खड़ा है।
2. चरण 2 — बोड पर लगा मान चत्र उसे बताता है — “आप यहाँ ह”।
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3. चरण 3 — अब वह अपनी जगह जान गया, इस लए वह नाप सकता है क उसे कस ओर और कतनी
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4. चरण 4 —
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agl और कहाँ दखता है: ऐसा चह्न रेलवे स्टेशन, बस अ े, च ड़याघर, अस्पताल और बड़े बाज़ार के मान चत्र पर भी
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लगा होता है। बना इस चह्न के मान चत्र आधा-अधूरा रहता है — रास्ता तभी समझ आता है जब हम अपनी जगह
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पता हो।
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प्र.5 कुंड का क्या नाम है?
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कुंड का नाम सप्तकुंड है।
ag मान चत्र म ऊपर दाईं ओर, ‘जल प्रपात’ लखे ान के पास, तरछे अक्षर म लखा है — सप्तकुंड। जल प्रपात यानी ऊपर से
गरता हुआ पानी, जसे हम झरना भी कहते ह।
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नाम का अथ: सप्त का अथ है सात और कुंड का अथ है पानी भरा ग ा। यानी ‘सप्तकुंड’ का अथ हुआ — सात
कुंड वाला
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ान। झरने का पानी गरते- गरते चट्टान म कई ग े बना दे ता है, और उन्ह ग म पानी भर जाता है।
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पाठ से मलाइए: पाठ म लखा है — “गुफा के ठ क नीचे एक कुंड बना था जसम पानी भरा हुआ था।” पाठ ने
omप्रपात और शटल सेवा भी लखा है — इन्ह भी प ढ़ए, तो पूरा l a se
नाम नह बताया; नाम मान चत्र से मला। इसी तरह मान चत्र पर संर क्षत वन, ऊपरी दृश्य बदु, नम्न दृश्य बदु,
.cजल g म आ जाएगा।
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आइए माप — पृष्ठ 138
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नदश — “लंबाई मापने के फ ते क सहायता से अपने समूह के साथ मलकर कक्षा म इन्ह मा पए और ल खए —”। पाँच चीज़ मापनी ह —
कक्षा क लंबाई, कक्षा क चौड़ाई, दरवाजे क चौड़ाई, खड़क क चौड़ाई और श्यामपट्ट क लंबाई-चौड़ाई
आइए माप गतवध
प्र.1 कक्षा क लंबाई —
यह मापने का काम है, इस लए उत्तर आपक अपनी कक्षा से नकलेगा। हर कक्षा का नाप अलग होता है।
मापने क व ध —
1. चरण 1 — कक्षा क सबसे लंबी द वार चु नए। लंबाई हमेशा लंबी ओर क नापी जाती है।
2. चरण 2 — फ ते का शून्य (0) वाला सरा एक कोने म र खए। यहाँ एक साथी क मदद ली जए ता क सरा हले नह ।
3. चरण 3 — फ ते को द वार के साथ-साथ सीधा फैलाइए। फ ता ढ ला या टे ढ़ा न रहे।
4. चरण 4 — दूसरे कोने पर फ ते का जो अंक आए, वही लंबाई है।
5. चरण 5 — नाप को मीटर और सट मीटर दोन म ल खए, जैसे — 8 मीटर 40 सट मीटर।
नमूना उत्तर: कक्षा क लंबाई — 8 मीटर 40 सट मीटर (यह केवल एक उदाहरण है; अपनी कक्षा नापकर अपना
नाप ल खए)।
याद र खए: 1 मीटर = 100 सट मीटर। य द फ ता 840 सट मीटर बताए, तो उसे 8 मीटर 40 सट मीटर लखा
जाएगा।
प्र.2 कक्षा क चौड़ाई —
चौड़ाई लंबाई के आर-पार नापी जाती है — यानी लंबी द वार से समकोण बनाते हुए, छोट ओर।
1. चरण 1 — जस द वार के साथ आपने लंबाई नापी थी, उससे सट हुई छोट द वार चु नए।
2. चरण 2 — फ ते का शून्य वाला सरा एक कोने म र खए।
3. चरण 3 — फ ते को सीधा आर-पार ख चए। बीच म मेज़ या बच हो तो पहले हटा ली जए।
4. चरण 4 — दूसरी द वार पर जो अंक आए, वही चौड़ाई है।
नमूना उत्तर: कक्षा क चौड़ाई — 6 मीटर 20 सट मीटर (यह उदाहरण है; अपना नाप स्वयं ल खए)।
जाँच क जए: चौड़ाई प्रायः लंबाई से कम होती है। य द आपक चौड़ाई लंबाई से अ धक नकले, तो शायद आपने
दोन दशाएँ बदल द ह — फर से ना पए।
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प्र.3 दरवाजे क चौड़ाई —
दरवाजे क चौड़ाई यानी उसक एक बाजू से दूसरी बाजू तक क दूरी।
1. चरण 1 — दरवाजा पूरा खोल द जए, ता क चौखट के दोन कनारे साफ़ दख।
2. चरण 2 — फ ते का सरा चौखट के भीतरी बाएँ कनारे पर र खए।
3. चरण 3 — फ ते को सीधा दाएँ कनारे तक ले जाइए। फ ता झुका हुआ न हो, नह तो नाप बढ़ा हुआ आएगा।
4. चरण 4 — दाएँ कनारे पर जो अंक आए, वही चौड़ाई है।
नमूना उत्तर: दरवाजे क चौड़ाई — 90 सट मीटर (यह उदाहरण है; अपने दरवाजे को नापकर ल खए)।
छोट चीज़ के लए: एक मीटर से कम नाप को केवल सट मीटर म लखना अ धक आसान रहता है — जैसे 90
स.मी., न क 0 मीटर 90 सट मीटर।
प्र.4 खड़क क चौड़ाई —
खड़क भी दरवाजे क तरह ही नापी जाती है, बस वह ऊँचाई पर होती है।
1. चरण 1 — खड़क खोल ली जए। य द वह ऊँचाई पर है, तो शक्षक या कसी बड़े क मदद ली जए। कुस पर अकेले मत
च ढ़ए।
2. चरण 2 — फ ते का सरा खड़क के बाएँ कनारे पर र खए और साथी से पकड़वा द जए।
3. चरण 3 — फ ता सीधा ख चकर दाएँ कनारे तक ले जाइए।
4. चरण 4 — अंक प ढ़ए और लख ली जए। य द कक्षा म कई खड़ कयाँ ह, तो एक-दो और नापकर दे खए — प्रायः सब एक
ही नाप क नकलती ह।
नमूना उत्तर: खड़क क चौड़ाई — 1 मीटर 20 सट मीटर (यह उदाहरण है; अपनी खड़क का नाप स्वयं
ल खए)।
प्र.5 श्यामपट्ट क लंबाई-चौड़ाई —
यहाँ दो नाप लेने ह — लंबाई और चौड़ाई, इस लए उत्तर म दोन ल खए।
1. चरण 1 — श्यामपट्ट क लंबाई ना पए — यानी बाएँ कनारे से दाएँ कनारे तक क आड़ी दूरी।
2. चरण 2 — अब चौड़ाई ना पए — यानी ऊपर के कनारे से नीचे के कनारे तक क खड़ी दूरी।
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3. चरण 3 — दोन नाप इस तरह ल खए — लंबाई × चौड़ाई।
4. चरण 4 — चाह तो दोन को गुणा करके क्षेत्रफल भी नकाल ली जए।
नमूना उत्तर: श्यामपट्ट क लंबाई-चौड़ाई — 2 मीटर × 1 मीटर (यह उदाहरण है; अपनी कक्षा के श्यामपट्ट का नाप
स्वयं ल खए)।
पाठ से जो ड़ए: इस ग त व ध का पाठ से गहरा नाता है। अजंता क कुछ गुफाएँ “अत्यंत लंबी-चौड़ी थ , कुछ
छोट ।” जब आप अपनी कक्षा नाप लगे, तब आप यह सोच पाएँगे क उससे भी बड़ी गुफा पहाड़ काटकर बनाना
कतना क ठन काम रहा होगा।
समूह म काम कैसे बाँट: एक साथी फ ते का सरा पकड़े, दूसरा फ ता ख चे, तीसरा अंक पढ़े और चौथा लेखन-
पु स्तका म लखे। हर नाप को दो बार ली जए — य द दोन बार एक ही अंक आए, तो नाप सही है।
रंग का संसार — पृष्ठ 138 और 139
नदश — “आपने पाठ म पढ़ा क रंग को प्राकृ तक वस्तुओं का उपयोग करके भी बनाया जा सकता है। आगे रंग बनाने क कुछ व धयाँ द गई
ह। अपने अ भभावक क सहायता से इनका प्रयोग करके आप भी प्राकृ तक रंग बनाइए —”। पाँच रंग — हरा, पीला, लाल, नीला और भूरा
रं ग का सं सार गतवध
प्र.1 हरा रंग — साम ी : पालक, मेहँद , पुद ना या हरा ध नया, पानी। व ध : पालक के पत्त को पानी म उबा लए
और फर पीस ली जए। इस मश्रण को छानकर गाढ़ा हरा रंग तैयार कया जा सकता है। पुद ना, ध नया व पालक
क प त्तय को धूप म सुखाकर और उसका पाउडर बनाकर आप हरे रंग को तैयार कर सकते ह।
हरा रंग दो तरीक़ से बन सकता है — गीला रंग (पीसकर) और सूखा रंग (पाउडर बनाकर)। दोन क व ध नीचे चरण म द गई
है।
क्या गीला हरा रंग सूखा हरा पाउडर
चा हए
सामग ी पाल क के प े , पानी प ुद ीना , धिनया या पाल क की पि याँ
चरण 1 पाल क के प च्
ों को अ छी तरह धो ल ीिजए। पि यों को धोकर उ नका पानी सुखा ल ीिजए।
चरण 2 प ों को पानी में उ बािल ए। यह काम बड़ ों से कराइए। पि यों को धूप में तब तक सुखाइए जब तक वे कड़ क न हो जाएँ।
चरण 3 उ बले प ों को पीस ल ीिजए। सूखी पि यों को हाथ से मसल कर या िसल पर पीसकर बारीक
पाउ डर बनाइए।
चरण 4 िम श्रण को कपड़े या छल नी से छान ल ीिजए — गाढ़ा हरा पाउ डर को सूखी िडिबया में रिखए। ज़ रूरत पड़ने पर थोड़े पानी में
रंग तैयार। घोल ल ीिजए।
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पाठ से नाता: मौसी ने बताया था — “उस समय ये रंग पत्त , जड़ी-बू टय , फूल आ द से बनाए जाते थे।” यह व ध
ठ क वैसी ही है। पालक का हरापन उसके पत्ते म ही होता है; उबालने और पीसने से वह पानी म उतर आता है।
सावधानी: उबालने का काम अकेले मत क जए — माता- पता या शक्षक के साथ ही क जए। गरम बरतन को
कपड़े से पक ड़ए।
प्र.2 पीला रंग — साम ी : हल्द पाउडर, पानी। व ध : एक चम्मच हल्द पाउडर म थोड़ा पानी मलाइए और इसे
अ तरह से घो लए। हल्द का रंग गहरा पीला होता है और इसे आप चत्रकारी के लए आसानी से उपयोग कर
सकते ह।
यह सबसे आसान रंग है। रसोई क हल्द से ही बन जाता है।
1. चरण 1 — एक कटोरी म एक चम्मच हल्द पाउडर डा लए।
2. चरण 2 — उसम थोड़ा-सा पानी डा लए। एक साथ बहुत पानी मत डा लए।
3. चरण 3 — चम्मच से अ तरह घो लए, जब तक गुठ लयाँ न रह जाएँ।
4. चरण 4 — गहरा पीला रंग तैयार है। इससे कागज पर सीधे चत्र बनाइए।
य द रंग… तो क्या क जए
बहुत गाढ़ ा है और बश पर नही ं फै लता बद
ूँ बद-
ूँ करके थोड़ ा और पानी िमल ाइए।
बहुत पतला है और कागज पर हलका िदखता है ल्
थोड़ ी और ह द ी िमल ाकर िफ र घोिल ए।
ग ठु िलयों वाला है म्
च मच से और घोिल ए या छल नी से छान ल ीिजए।
ध्यान र खए: हल्द का दाग़ कपड़े पर पड़ जाए तो जल्द नह जाता। इस लए पुराना कपड़ा पहनकर या मेज़ पर
अख़बार बछाकर काम क जए। काम के बाद हाथ साबुन से धो ली जए।
प्र.3 लाल रंग — साम ी : चुकंदर, पानी। व ध : चुकंदर को छोटे टु कड़ म काटकर पानी म उबा लए। इसके बाद इसे
ठं डा होने द जए और फर पीसकर छान ली जए। इससे गहरा लाल रंग मल जाएगा। आप इसे पानी के साथ
पतला करके पट के रूप म भी प्रयोग कर सकते ह।
चुकंदर का रस स्वयं ही गहरा लाल होता है, इस लए उससे बहुत अ ा लाल रंग बनता है।
1. चरण 1 — चुकंदर को धोकर छोटे -छोटे टु कड़ म कटवाइए। चाकू बड़ से चलवाइए।
2. चरण 2 — टु कड़ को पानी म उबा लए। पानी लाल होने लगेगा।
3. चरण 3 — बरतन को उतारकर ठं डा होने द जए। गरम मश्रण को हाथ मत लगाइए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर
a g l AglaSem · NCERT Solutions
4. चरण 4 — ठं डा होने पर टु कड़ को पीस ली जए।
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5. चरण 5 — कपड़े या छलनी से छान ली जए। गहरा लाल रंग तैयार है।
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6. चरण 6 — हलका गुलाबी-सा रंग चा हए हो तो इसम थोड़ा पानी मलाकर पतला कर ली जए। इसी को पट क तरह काम म
लाइए।
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aछानना क्य ज़रूरी है: पीसने के बाद मश्रण म चुकंदर के रेशे रह जाते ह। रेशे ब्रश म अटक जाते ह और चत्र पर
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धब्बे बना दे ते ह। छानने से केवल साफ़ रंग बचता है।
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ag जा सकते ह — बना पानी मलाए गहरा लाल, और पानी मलाकर
गाढ़ा और पतला: एक ही रंग से दो रंग बनाए
हलका गुलाबी। इसी तरह अजंता के कारीगर भी एक ही रंग के गहरे-हलके रूप बनाते ह गे।
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g को पानी म मला ली जए।
प्र.4 m .c रंग — साम ी : नील (कपड़ म लगाने वाला)। व ध : नीले रंग के लए नील
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यह सबसे छोट व ध है — केवल दो चरण।
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1. चरण 1 — एक कटोरी साफ़ पानी ली जए।
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2. चरण 2 — उसम ज़रा-सा नील मलाइए और घोल ली जए। नीला रंग तैयार है।
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नील क्या है: नील वह चीज़ है जो घर म सफ़ेद कपड़े धोते समय पानी म डाली जाती है, ता क कपड़े और उजले
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दख। इसका रंग बहुत गहरा नीला होता है, इस लए बहुत थोड़ा-सा ही काफ़ रहता है।
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agl सावधानी: नील बहुत तेज़ रंग दे ता है। पहले चुटक भर डालकर दे खए। य द रंग हलका लगे तो और मलाइए —
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पर एक बार अ धक डल गया तो वापस नह नकाला जा सकता। नील हाथ और कपड़ पर लग जाए तो जल्द नह
छू टता, इस लए ध्यान से काम क जए।
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भूरा रंग — साम ी : कॉफ पाउडर या चाय क प त्तयाँ, पानी। व ध : थोड़ा-सा कॉफ पाउडर या चाय क प त्तय
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को पानी म उबाल ली जए। इसे ठं डा करके प्रयोग क जए। इससे भूरा रंग तैयार होगा।
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emभूरा रंग रसोई क दो साधारण चीज़ से बन जाता है — कॉफ या चाय क पत्ती।
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1. चरण 1 — थोड़ा-सा कॉफ पाउडर या चाय क प त्तयाँ ली जए।
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2. चरण 2 — उन्ह पानी म उबाल ली जए। पानी भूरा होने लगेगा। यह काम बड़ क दे ख-रेख म क जए।
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3. चरण 3 — बरतन उतारकर ठं डा होने द जए।
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4. चरण 4 — चाय क पत्ती को छानकर हटा द जए और रंग काम म लाइए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
पाँच रंग एक नज़र म कससे बनता है मुख्य क्रया
हरा पाल क , मेह ँद ी, प ुद ीना या हरा धिनया उबालना और पीसना (या सुखाकर पाउडर बनाना)
पीला ल्
ह द ी पाउ डर पानी म घोलना
लाल च ुकं दर काटना, उबालना, पीसना, छानना
नीला नील पानी म मलाना
भूर ा कॉफ ी पाउ डर या चाय की पि याँ उबालना और ठं डा करना
सबसे बड़ी सीख: पाँच रंग रसोई और आँगन क चीज़ से बने — कोई ड बया खरीदनी नह पड़ी। अजंता के
कारीगर ने भी यही कया था, तभी दो हजार वष बाद भी उनके रंग फ के नह पड़े।
आगे क जए: गहरा और हलका भूरा दोन बनाइए — अ धक कॉफ से गहरा, कम कॉफ से हलका। फर इन्ह
पाँच रंग से एक चत्र बनाइए और नीचे ल खए क कौन-सा रंग कस चीज़ से बनाया।
पुस्तकालय से — पृष्ठ 139
नदश — “इस पाठ म आपने अजंता-एलोरा के बारे म पढ़ा और उसके बारे म जाना। अब भारत के अन्य दशनीय स्थान के बारे म अपने
पुस्तकालय म खोजबीन क जए और उनके बारे म प ढ़ए। साथ ही कक्षा म उनके बारे म चचा भी क जए।”
पु स्तकालय से खोजबीन
प्र.1 इस पाठ म आपने अजंता-एलोरा के बारे म पढ़ा और उसके बारे म जाना। अब भारत के अन्य दशनीय स्थान के
बारे म अपने पुस्तकालय म खोजबीन क जए और उनके बारे म प ढ़ए। साथ ही कक्षा म उनके बारे म चचा भी
क जए।
यह पुस्तकालय म करने का काम है। नीचे इसे करने का तरीका और एक पूरा नमूना दया गया है।
खोजबीन कैसे क जए —
1. चरण 1 — पुस्तकालय म जाकर पुस्तकालयाध्यक्ष से क हए क आपको भारत के दशनीय ान क पुस्तक चा हए। ‘दशनीय’
यानी दे खने योग्य।
2. चरण 2 — बाल- वश्वकोश, भारत का भूगोल, यात्रा-पुस्तक और ब क प त्रकाएँ दे खए। पुराने कैलडर और चत्र-पु स्तकाएँ
भी काम आती ह।
3. चरण 3 — कोई एक ान चु नए और उसके बारे म चार बात ल खए — नाम, राज्य, वह कस लए प्र सद्ध है, और वहाँ
कैसे पहुँचा जा सकता है।
4. चरण 4 — य द पुस्तक म चत्र हो तो उसे दे खकर अपनी लेखन-पु स्तका म उतार ली जए।
5. चरण 5 — कक्षा म दो मनट खड़े होकर बताइए। अंत म एक वाक्य यह भी क हए क आपको वह ान क्य अ ा लगा।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
क्या लखना उदाहरण — अजंता आपका चुना हुआ स्थान
है
स्थान का नाम अजंता की ग ुफ ाएँ यहाँ अपने चुने हुए ान का नाम
ल खए
िकस राज्य में महारा राज्य का नाम ल खए
िकसिलए पिसद्ध पहाड़ काटकर बनी उ नतीस ग ुफ ाएँ और द ीवारों पर बने द ो हजार वष प ुराने दो-तीन शब्द म कारण ल खए
िच त्र
कै से पहच
ु ँ ें छ त्र पित संभाजीनगर तक रे ल से , वहाँ से ल गभग सौ िकल ोमीटर बस से रेल, बस या सड़क का रास्ता ल खए
एक खास बात ग ुफ ाओं का मुँह पूव िद शा में है, इसिल ए सवेरे की धूप भीतर तक आती है पुस्तक म मली कोई अनोखी बात
ल खए
नमूना उत्तर (कक्षा म सुनाने के लए): मने पुस्तकालय क एक पुस्तक म कोणाक के सूय मं दर के बारे म पढ़ा।
यह मं दर ओ डशा राज्य म समुद्र के कनारे है। यह इस लए प्र सद्ध है क्य क पूरा मं दर पत्थर के एक वशाल रथ
जैसा बनाया गया है। उसम पत्थर के बड़े-बड़े प हए बने ह और आगे घोड़े गढ़े गए ह। प हय पर इतनी बारीक
कारीगरी है क उनक ती लयाँ तक अलग-अलग दखती ह। वहाँ पहुँचने के लए पहले पुरी या भुवनेश्वर तक रेल से
जाना पड़ता है और फर बस या टै क्सी से कोणाक। मुझे यह ान इस लए अ ा लगा क्य क अजंता-एलोरा क
तरह यहाँ भी पत्थर तराशकर एक बड़ी कलाकृ त बनाई गई है।
ऐसे और स्थान चुन सकते ह: ताजमहल (उत्तर प्रदे श), खजुराहो के मं दर (मध्य प्रदे श), हंपी (कनाटक),
महाबलीपुरम (त मलनाडु ), आमेर का कला (राज ान), साँची का स्तूप (मध्य प्रदे श), ए लफटा क गुफाएँ
(महाराष्ट्र)। इनम से कोई एक चुनकर उसी पर पूरी खोजबीन क जए — एक ान को गहराई से जानना दस ान
के नाम रटने से बेहतर है।
धन्यवाद काड — पृष्ठ 140
नदश — “ नशा को उसक मौसी ने अजंता और एलोरा क गुफाएँ दखाईं। इस कारण नशा ने अपनी मौसी को धन्यवाद काड लखा। अब
आप भी अपने कसी संबंधी को धन्यवाद काड ल खए —”। पुस्तक म काड का ढाँचा छपा है, जसके ऊपर ‘ प्रय/पूज्य’ और नीचे ‘आपका/
आपक ’ लखा है।
धन्यवाद काड पत्र-ले ख न
प्र.1 नशा को उसक मौसी ने अजंता और एलोरा क गुफाएँ दखाईं। इस कारण नशा ने अपनी मौसी को धन्यवाद
काड लखा। अब आप भी अपने कसी संबंधी को धन्यवाद काड ल खए —
धन्यवाद काड बहुत लंबा नह होता। पाँच-छह वाक्य ही काफ़ ह। पुस्तक म जो ढाँचा छपा है, उसी क्रम से ल खए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
काड का भाग क्या लखना है उदाहरण
संबोधन (सबसे ‘िपय’ या ‘पूज्य’ िल खकर उ स व्यिक्त का नाम पूज्य मामा जी,
ऊपर) श्
या िर ता
पहला वाक्य िकस बात क न्
े िल ए ध यवाद दे रहे है ं आपने गरमी क छु ट्टय म मुझे कला दखाया, इसके लए बहुत-
बहुत धन्यवाद।
बीच का िहस्सा -
उ स िद न की एक द ो खास बाते ं मुझे कले क ऊँची द वार और भीतर बना बड़ा कुआँ सबसे अ ा
लगा।
अपना भाव आपको कै सा ल गा और आपने क्या सीखा उस दन के बाद से मुझे पुरानी इमारत के बारे म पढ़ना अ ा
लगने लगा है।
अंितम वाक्य आगे िमल ने या िफ र साथ जाने की बात अगली छु ट्टय म आपके साथ फर कह घूमने चलूँगा।
समापन (सबसे ‘आपका’ या ‘आपकी’ िल खकर अपना नाम आपका, रोहन
नीचे)
नमूना उत्तर:
पूज्य मौसी जी,
सादर प्रणाम।
दशहरे क छु ट्टय म आप मुझे अजंता और एलोरा क गुफाएँ दखाने ले गईं, इसके लए आपको बहुत-बहुत
धन्यवाद।
मने पहले इन गुफाओं के बारे म केवल पुस्तक म पढ़ा था। अपनी आँख से दे खकर तो म दं ग रह गई। द वार पर बने
चत्र इतने सजीव थे क लगता था अभी बोल पड़गे। कैलाश मं दर क यह बात मुझे कभी नह भूलेगी क पूरा मं दर
एक ही चट्टान से तराशकर बनाया गया है।
आपने रास्ते म हर चीज़ इतने प्यार से समझाई क यात्रा और भी अ हो गई। अब म भी सबको बताती हूँ क
हजार वष पहले हमारे दे श म कला का कतना वकास हो चुका था।
अगली छु ट्टय म आपके साथ फर कसी ऐ तहा सक ान पर चलना चाहूँगी।
आपक ,
नशा
धन्यवाद काड म सबसे ज़रूरी क्या है: केवल ‘धन्यवाद’ लख दे ना काफ़ नह । यह बताना ज़रूरी है क कस
बात के लए धन्यवाद है और आपको सबसे अ ा क्या लगा। इसी से पढ़ने वाले को लगता है क आपने सचमुच
मन से लखा है।
हमारी धरोहर — पृष्ठ 140
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पाठ के अंत म छपा हुआ संदेश — ऐ तहा सक स्मारक और कलाकृ तयाँ हमारे दे श क शोभा और गौरव बढ़ाती ह, इस लए उन्ह सँभालकर
रखना हमारा उत्तरदा यत्व है
हमारी धरोहर नाग रक कतव्य
प्र.1 “हमारे दे श म बहुत सुंदर ऐ तहा सक स्मारक एवं कलाकृ तयाँ ह। ये हमारे दे श क शोभा एवं गौरव बढ़ाते ह। यह
हमारा उत्तरदा यत्व है क हम भी इनक सुंदरता को बनाए रख। इन स्मारक को छू ने, इनक द वार को खुरचने
अथवा कुछ भी अंकन करने से इन्ह हा न पहुँचती है। इस लए इन पयटन स्थल का भ्रमण करते समय हम
सावधानी रखनी चा हए।” — इस अंश म क्या कहा गया है? हम अपनी धरोहर क रक्षा कैसे कर सकते ह?
इस अंश म कहा गया है क हमारे दे श के ऐ तहा सक स्मारक और कलाकृ तयाँ हमारा गौरव ह, और उन्ह बचाए रखना हर
नाग रक का उत्तरदा यत्व है। उत्तरदा यत्व यानी ऐसा काम जसे करना हमारा फ़ज़ हो।
अंश म तीन बात साफ़ कही गई ह —
1. ये स्मारक दे श क शोभा और गौरव बढ़ाते ह।
2. इन्ह छू ने से, द वार को खुरचने से और उन पर कुछ भी लखने से इन्ह हा न पहुँचती है।
3. इस लए घूमते समय हम सावधानी रखनी चा हए।
यह मत क जए क्य नह इसके बदले यह क जए
दीवार के िचत्रों को हाथ हाथ की िचकनाई और पसीना रंग को धीरे धीरे खराब - थोड़ा दूर खड़े होकर दे खए
लगाना कर दे ता है
दीवार पर नाम िलखना या एक बार ख ुरची हुई द ीवार िफ र कभी पहले जैस ी नही ं अपनी लेखन-पु स्तका म उस जगह का नाम और
खुर चना होती तारीख़ ल खए
मूितयों पर चढ़ ना या उन्हे ं त्
प ुराना प थर भार से टूट सकता है चार ओर घूमकर ध्यान से दे खए
पकड़ना
वहाँ कू ड़ा फें कना कू ड़ े से स्थान गंद ा होता है और जानवर भी आ जाते है ं कूड़ा अपने थैले म र खए और कूड़ेदान म डा लए
शोर मचाना या दौड़ना दू सरे याि त्र यों को परे शानी होती है और टकराने से धीरे बो लए और चलकर च लए
न ुकसान हो सकता है
वहाँ लगे सूचना-पट्ट न पढ़ ना मना की गई बात अनजाने में हो जाती है पहले पट्ट प ढ़ए, फर आगे ब ढ़ए
‘धरोहर’ का अथ: धरोहर वह चीज़ है जो कसी ने हम सँभालने के लए द हो। अजंता और एलोरा हम अपने पुरख
से मले ह। हम उन्ह वैसा ही आगे क पीढ़ को दे ना है, जैसा हम मला — तभी हमारा काम पूरा माना जाएगा।
सो चए: दो हजार वष तक जो रंग धूप, वषा और समय से नह बगड़े, वे कुछ लोग के हाथ लगाने से बगड़ सकते
ह। इसी लए पुस्तक ने इस बात को पाठ के अंत म अलग से छापा है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर
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आपक अ भव्य क्त — पृष्ठ 141
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क हो तो अपने कसी.cमत्र या प रवार के सदस्य के अनुभव भी लख सकते ह।” — पुस्तक म नीचे लखनेgके लए खाली पं क्तयाँ द गई ह।
नदश — “क्या आपने कभी कोई रेल यात्रा क है? अपनी कसी रेल यात्रा का कोई रोचक अनुभव साझा क जए। य द आपने रेल यात्रा नह
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आपक अ भव्य क्त
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क्या आपने कभी कोई रेल यात्रा क है? अपनी कसी रेल यात्रा का कोई रोचक अनुभव साझा क जए। य द
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s e mया प रवार के सदस्य के अनुभव भी लख सकते ह।
आपने रेल यात्रा नह क हो तो अपने कसी मत्र
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यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए हर ब े का उत्तर अलग होगा। य द आपने रेल यात्रा नह क , तो घर के कसी बड़े से
पूछकर उनक यात्रा ल खए — पुस्तक ने इसक छू ट द है।
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लखने क व ध —
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1. चरण 1 — शुरुआत म बताइए क यात्रा कब, कसके साथ और कहाँ से कहाँ क ।
a 2. चरण 2 — स्टेशन का दृश्य ल खए — भीड़, घोषणा, चाय और खाने वाल क आवाज़।
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3. चरण 3 — गाड़ी के भीतर क एक-दो बात ल खए — खड़क से दखता दृश्य, सहयात्री, पुल पार करना, सुरंग म अँधेरा।
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4. चरण 4 — कोई एक रोचक बात ज़रूर डा लए — यही आपके लेख क जान है।
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5. चरण 5 — अंत म अपना भाव ल खए — यात्रा कैसी लगी।
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नमूना उत्तर: पछली गरमी क छु ट्टय म म अपने माता- पता के साथ रेलगाड़ी से नानी के गाँव गया था। हम शाम
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को स्टे शन पहुँचे। वहाँ बहुत भीड़ थी और चाय बेचने वाल क आवाज़ आ रही थ । गाड़ी आते ही सब चढ़ने लगे।
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मुझे खड़क वाली सीट मली, इस लए म बहुत खुश था।
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g लंबा पुल आया। नीचे नद बह
गाड़ी.cचली तो बाहर खेत, तालाब और छोटे -छोटे गाँव पीछे भागते दखे। बीच मaएक
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aseरही थी और प हय क आवाज़ अचानक बदल गई। सबसे रोचक बात तब हुई जब गाड़ी एक सुरंग म घुसी। एक पल
agl म सब अँधेरा हो गया और डब्बे के सारे ब े एक साथ चल्ला पड़े। जब गाड़ी बाहर नकली तो सब हँसने लगे।
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mच चुके थे। यह मेरी अब तक क सबसे अ a
रात को माँ ने घर से लाई पूरी-सब्ज़ी खलाई। प हय क खटखट सुनते-सुनते मुझे कब न द आ गई, पता ही नह
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चला। सुबह जब आँख खुली तो हम नानी के शहर यात्रा थी।
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पाठ से जो ड़ए: नशा क यात्रा भी रेलगाड़ी से ही शुरू हुई थी — “रेलगाड़ी म आरक्षण छत्रप त संभाजीनगर तक
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था।” रात होने पर वे स्टे शन के वश्रामगृह म रुक थ । आप भी अपनी यात्रा म यह बता सकते ह क आरक्षण था या
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नह , और रात कहाँ बीती।
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m अ े लेख के लए तीन सुझाव: (1) जो आँख से दे खा, कान से सुना और नाक से सूँघा — तीन ल खए। (2)
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कम-से-कम एक संवाद डा लए, जैसे “माँ ने कहा — अब खड़क से सर बाहर मत नकालो।” (3) हर नई घटना के
लए नया अनु े द बनाइए।
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आपक चत्रकारी — पृष्ठ 142 a
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर AglaSem · NCERT Solutions
नदश — “ हद क गनती मलाकर चत्र पूरा क जए और उसम अपनी रु च के रंग भ रए—”। पृष्ठ पर इक्क स से चालीस तक हद म लखे
बदु दए गए ह, जन्ह क्रम से मलाना है।
आपक चत्रकारी गतवध
प्र.1 हद क गनती मलाकर चत्र पूरा क जए और उसम अपनी रु च के रंग भ रए—
बदुओं को इक्क स से चालीस तक क्रम से मलाने पर एक डाल पर बैठ हुई च ड़या का चत्र पूरा हो जाता है। पृष्ठ पर
च ड़या का शरीर, पैर, डाल और पत्ते पहले से बने ह; केवल पंख, पूँछ, च च और सर का ऊपरी भाग बदुओं से बनने ह। ऊपर बाईं
ओर सूरज और बादल भी बने हुए ह।
पृष्ठ पर बदुओं के नाम हद शब्द म लखे ह। उन्ह इस क्रम से मलाइए —
क्रम हद म अंक म क्रम हद म अंक म
1 इ क्कीस 21 11 इकतीस 31
2 बाईस 22 12 ब ीस 32
3 तेईस 23 13 तै ंतीस 33
4 चौबीस 24 14 चौ ंतीस 34
5 च्
प चीस 25 15 पै ंतीस 35
6 ब्
छ बीस 26 16 छ ीस 36
7 स ाईस 27 17 सै ंतीस 37
8 अ ाईस 28 18 अड़ तीस 38
9 उ नतीस 29 19 उ नताल ीस 39
10 तीस 30 20 चाल ीस 40
चत्र पूरा करने क व ध —
1. चरण 1 — पहले पूरे पृष्ठ के सारे बदु पढ़ ली जए, ता क पता रहे क कौन कहाँ है।
2. चरण 2 — ‘इक्क स’ से शुरू क जए। वह च ड़या के पैर के पास है।
3. चरण 3 — प सल से हलक रेखा ख चते हुए ‘बाईस’, ‘तेईस’ … इसी क्रम से आगे ब ढ़ए।
4. चरण 4 — ‘तीस’ से ‘ततीस’ तक क रेखाएँ च ड़या का सर और च च बनाती ह, इस लए यहाँ हाथ धीरे चलाइए।
5. चरण 5 — ‘पतीस’ से ‘चालीस’ तक क रेखाएँ लंबी पूँछ बनाती ह।
6. चरण 6 — पूरा हो जाने पर रेखाओं को गहरा क जए और फर अपनी रु च के रंग भ रए।
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रंग भरने का सुझाव: चाह तो वही प्राकृ तक रंग काम म लाइए जो पृष्ठ 138–139 पर बनाना सखाया गया है —
पत्त के लए पालक वाला हरा, च ड़या के लए हल्द वाला पीला, फल के लए चुकंदर वाला लाल और डाल के
लए चाय वाला भूरा। इस तरह पाठ क सीख और चत्रकारी दोन एक साथ हो जाएँगी।
यह गनती क्य ज़रूरी है: हद म इक्क स से चालीस तक क गनती बोलने म मलती-जुलती लगती है — जैसे
‘उनतीस’ (29) और ‘उनतालीस’ (39), या ‘बत्तीस’ (32) और ‘छत्तीस’ (36)। बदु मलाते समय ये अलग-अलग
पहचाननी पड़ती ह, इस लए गनती अपने-आप पक्क हो जाती है। ध्यान रहे — पाठ म अजंता क गुफाओं क
संख्या भी उनतीस ही बताई गई है।
अध्याय — एक नज़र म
हमारे ये कलामं दर एक यात्रा-वणन है। यात्रा-वणन यानी ऐसी रचना जसम कोई अपनी यात्रा क बात सल सले से सुनाता
है। पुस्तक म इस पाठ के साथ रचनाकार का नाम नह छपा है। पाठ का शीषक ‘कलामं दर’ है — कला का मं दर, यानी वह
जगह जहाँ कला पूजा क तरह सँभालकर रखी गई हो।
कहानी क शुरुआत — नशा क मौसी ने छु ट्टय म उसे अजंता और एलोरा दखाने का वादा कया था। नशा ने इन गुफाओं
के बारे म पुस्तक म पढ़ा था, इस लए उसके मन म उत्सुकता (जानने क तेज़ इ ा) थी क ये दे खने म कैसी ह गी।
यात्रा का रास्ता — दशहरे क छु ट्टय म कायक्रम बना। रेलगाड़ी म आरक्षण (सीट पहले से बुक कराना) छत्रप त
संभाजीनगर तक था। संभाजीनगर महाराष्ट्र राज्य का एक नगर है। रात होने पर वे स्टे शन के वश्रामगृह म रुक और दूसरे दन
बड़े सवेरे बस से अजंता चल । संभाजीनगर से अजंता लगभग सौ कलोमीटर दूर है।
अजंता का दृश्य — एक ओर छोट -सी नद बह रही थी, नद म बड़े-बड़े शलाखंड (चट्टान के टु कड़े) पड़े थे। नद के द क्षण
म एक पहाड़ी पर एक पं क्त म उनतीस गुफाएँ थ । इन गुफाओं का मुँह पूव दशा क ओर है, इस लए सवेरे क सूरज क
करण इन पर पड़ रही थ । गुफा के ठ क नीचे एक कुंड बना था जसम पानी भरा था और घाट म रंग- बरंगे फूल खले थे।
गुफाओं के भीतर — द वार पर अत्यंत सुंदर चत्र बने ह। गौतम बुद्ध का घर छोड़कर तप के लए जाना, भक्षुओं को उपदे श
दे ना, साधु के रूप म भक्षा माँगने जाना — ये चत्र बहुत सजीव (जीते-जागते से) थे। पेड़-पौध , पशु-प क्षय और स्त्रय के
चत्र भी थे। दे खते ही नशा के मुँह से नकला — “वाह!”
रंग का रहस्य — सैकड़ साल बीतने पर भी रंग फ के नह पड़े थे। मौसी ने बताया क ये गुफाएँ दो हजार वष पुरानी ह। रंग
बनाने का ढं ग उस समय बहुत अनोखा था — कहते ह क ये रंग पत्त , जड़ी-बू टय और फूल से बनाए जाते थे। चत्र म
हाथ क मुद्रा, आँख के भाव, अंग क लोच और मुख क झु रयाँ तक दखती थ — ऐसे सजीव क लगता था अभी बोल
पड़गे।
सबसे बड़ा आश्चय — कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थ , कुछ छोट । नशा को सबसे अ धक आश्चय यह दे खकर हुआ क ये
गुफाएँ पहाड़ को ही काटकर बनाई गई थ , और भीतर क मू तयाँ भी पत्थर को तराशकर बनाई गई थ । तराशना यानी
छे नी-हथौड़े से पत्थर को काट-छाँटकर रूप दे ना।
एलोरा — संभाजीनगर से एलोरा लगभग चालीस कलोमीटर दूर है। वहाँ पहाड़ को काटकर लगभग तीस मं दर बनाए गए
ह। इनक मू तयाँ केवल बौद्ध धम से ही नह , कुछ हदू और जैन धम से भी संबं धत थ । मौसी ने कैलाश मं दर दखाते हुए
बताया क पूरा मं दर एक ऊँचे पहाड़ को ऊपर क ओर से तराशकर बनाया गया है — एक ही चट्टान से बनी इतनी बड़ी
इमारत!
पाठ का भाव — अंत म नशा कहती है, “यह गव क बात है क हजार वष पहले भी हमारे दे श म कला का इतना वकास हो
चुका था।” लौटने पर भी उसका मन उन बेजोड़ ( जसक जोड़ी न हो) कलाकृ तय म लगा रहा। पाठ के अंत म ‘हमारी
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धरोहर’ म यह भी सखाया गया है क स्मारक को छू ने, द वार को खुरचने या उन पर कुछ लखने से उन्ह हा न पहुँचती है —
इस लए घूमते समय सावधानी रखनी चा हए।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
उत्सुकता जानने या दे खने की तेज़ इच्छा “तभी से उसके मन म उत्सुकता थी क ये गुफाएँ प रणाम सुनने क उत्सुकता से मेरा मन
दे खने म कैसी ह गी।” बैठा जा रहा था।
आरक्षण सीट या स्थान पहले से बुक “रेलगाड़ी म आरक्षण छत्रप त संभाजीनगर तक पता जी ने रेल म हमारा आरक्षण करा
कराना था।” दया।
वश्रामगृह आराम करने का घर या स्थान “ नशा और मौसी ने स्टे शन पर ही वश्रामगृह म यात्री रात भर वश्रामगृह म ठहरे रहे।
रात बताई।”
मनोरम मन को अच्छा लगने वाला, “जो दृश्य नशा ने दे खा, वह बड़ा ही मनोरम था।” पहाड़ से उतरता झरना बहुत मनोरम
सुंद र लगता है।
शलाखंड चट्टान का बड़ा टुक ड़ा “नद म बड़े-बड़े शलाखंड पड़े थे।” बाढ़ का पानी शलाखंड तक बहा ले
गया।
पं क्त कतार, लाइन “एक पहाड़ी पर एक पं क्त म उनतीस गुफाएँ थ ।” ब े पं क्त म खड़े होकर कक्षा म गए।
प्रातःकाल सवेरे का समय “प्रातःकाल के सूय क करण इन पर पड़ रही प्रातःकाल घूमने से मन ताज़ा रहता है।
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कुंड पानी भरा ग ा, छोटा तालाब “गुफा के ठ क नीचे एक कुंड बना था जसम पानी मं दर के पास बने कुंड म साफ़ पानी था।
भरा हुआ था।”
घाट दो पहाड़ों के बीच की नीची “घाट म रंग- बरंगे फूल खले हुए थे।” घाट म हरे-भरे खेत फैले थे।
ज़मीन
तप किठन साधना, कड़ी तपस्या “गौतम बुद्ध का घर छोड़कर तप के लए जाना” ऋ ष वष तक वन म तप करते रहे।
भक्षु िभक्षा माँग कर जीवन चलाने “ भक्षुओं को उपदे श दे ना” भक्षु सवेरे-सवेरे गाँव म आ गए।
वाला साध ु
उपदे श अच्छी बात िसखाने वाली “ भक्षुओं को उपदे श दे ना” गुरु जी के उपदे श हम सदा याद रहते ह।
िशक्षा
भक्षा माँग कर िमला हुआ अन्न या “साधु के रूप म भक्षा माँगने जाना” साधु ने ार पर आकर भक्षा माँगी।
दान
सजीव जीता-जागता सा, िजसमें जान “आ द के चत्र अत्यंत सजीव थे।” चत्र इतना सजीव था क घोड़ा दौड़ता
लगती हो हुआ लगा।
फ के िजनका रंग उतर गया हो “सैकड़ साल बीत जाने पर भी ये रंग फ के नह धूप म सूखकर परदे के रंग फ के पड़
पड़े थे।” गए।
अनोखा िनराला, बहुत अलग ढं ग का “उस समय रंग बनाने का ढं ग बहुत अनोखा था।” दाद क कहानी सुनाने का ढं ग अनोखा
है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 11 हमारे ये कलामं दर
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
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जड़ी-बूट दवा के काम आने वाली “ये रंग पत्त , जड़ी-बू टय , फूल आ द से बनाए गाँव के वैद्य जड़ी-बू टय से दवा बनाते
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वनस्पित जाते थे।” ह।
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टकटकagl िबना पलक झपकाए एकटक “ नशा टकटक लगाए चत्र को दे खती रही।” वह टकटक लगाए आसमान म पतंग
लगाना दे खना दे खता रहा।
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मुद्रा हाथ या शरीर की बनी हईु
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“ चत्र म हाथ क मुद्रा, आँख के भाव” नतक ने हाथ क सुंदर मुद्रा बनाई। ag
िस्थित
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लोच लचीलापन, मुड़ने की क्षमता
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“अंग क लोच, मुख पर सुख-दुख के भाव” बाँस क छड़ी म अ लोच होती है।
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झु रयाँ “मुख पर सुख-दुख के भाव तथा झु रयाँ” दादा जी के माथे पर झु रयाँ पड़ गई ह।
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चेहरे या चमड़ी पर पड़ी
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िसलवटें
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se m जो दे खकर अचरज हो, बहुत
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अ त “सभी कुछ अत्यंत अ त था” चाँद पर पहुँचना मनुष्य का अ त काम
a g िविचत्र है।
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तराशना पत्थर काट-छाँटकर रूप दे ना “मू तयाँ भी पत्थर को तराशकर बनाई गई थ ।” कारीगर ने पत्थर तराशकर हाथी बना
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दया।
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कारीगरी हाथ का हन
ु र, बनाने की “इन मू तय क कारीगरी दे खते ही बनती थी।” इस पीतल के द ये क कारीगरी दे खते ही
कु शलता बनती है।
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शला बड़ी चट्टान “बड़ी-बड़ी वशाल शलाओं को तराशकर” नद कनारे एक चौड़ी शला पड़ी थी।
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e का वशाल दरवाज़ा देखकर हम
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. c ag रुक गए।
वशाल बहत बड़ा “बड़ी-बड़ी वशाल शलाओं को तराशकर”
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agl च कत हैर ान, अचरज में पड़ा हुआ “ नशा उन्ह दे ख-दे खकर च कत हो रही थी।” जादूगर का खेल दे खकर सब च कत रह
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गए।
coमनmअभी भी उन बेजोड़ कलाकृ तय g l a
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emओर लगा था।”
बेजोड़ िजसकी जोड़ी या बराबरी न “ नशा का ताजमहल क सुंदरता बेजोड़ है।
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agl “उन बेजोड़ कलाकृ तय क ओर लगा था”
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कलाकृ त कला से बनाई गई चीज़ मट्ट क यह कलाकृ त मेरी बहन ने
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बनाई है।
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mकला हमारी धरोहर है, इसे साफ़ रखना
e हमारा काम है।
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धरोहर पुर खों से िमली सँभालने योग्य “हमारे दे श म बहुत सुंदर ऐ तहा सक स्मारक एवं
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वस्तु कलाकृ तयाँ ह।”
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