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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: माँ, कह एक कहानी
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1 – 13 16 40 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 31 pages
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: माँ, कह एक कहानी
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 1 माँ, कह एक कहानी के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह क वता मै थलीशरण गुप्त (1886–
1964) क काव्य-कृ त यशोधरा से ली गई है और माँ यशोधरा तथा पुत्र राहुल के बीच संवाद शैली म रची गई है। पृष्ठ 1 से 13 तक क हर ग त व ध —
मेरी समझ से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, अनुमान और कल्पना से, संवाद, शब्द से जुड़े शब्द, पं क्त से पं क्त, क वता
क रचना, रूप बदलकर, क वता म वराम चह्न, आपक बात, नणय कर, सुनी कहानी, आज क पहेली और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक
हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 1 – 13
खं ड प्रश्न
16 40
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 4
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
नीचे दए गए प्रश्न का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक
उत्तर भी हो सकते ह। (1) माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय क कहानी क्य सुनाती है? • राजाओं क कहा नय
से उसका मनोरंजन करने के लए। • उसम सही और गलत क समझ वक सत करने के लए। • उसे प रवार क
वरासत और पूवज के बारे म बताने के लए। • उसे प्रकृ त और जानवर के बारे म जानकारी दे ने के लए।
सबसे सही उत्तर है — उसम सही और गलत क समझ वक सत करने के लए। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
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वकल्प सही / ग़लत कारण
राजाओं क कहा नय से ग़लत बेटा ज़रूर पूछता है — “राजा था या रानी?” — पर माँ जो कहानी सुनाती है वह
मनोरंजन राजा-रानी क नह , एक घायल हंस और उसे बचाने वाले क है।
सही और गलत क समझ सही ★ माँ कहानी अधूरी छोड़कर कहती है — “राहुल, तू नणय कर इसका– न्याय पक्ष लेता है
वक सत करने के लए कसका?” वह बेटे से नणय करवाती है, यानी उसे स्वयं सही-ग़लत परखना सखाती
है।
प रवार क वरासत और यह भी माना कहानी बेटे के अपने पता क है — “तात भ्रमण करते थे तेरे”। इससे राहुल को यह भी
पूवज के बारे म बताने के जा सकता है पता चलता है क उसके पता कैसे व्य क्त थे। पर क वता का मुख्य उ े श्य नणय
लए करवाना ही है।
प्रकृ त और जानवर क ग़लत उपवन, फूल, ओस और हंस का वणन केवल कहानी क पृष्ठभू म है, उ े श्य नह ।
जानकारी दे ने के लए
क्य : प्रश्न म कहा गया है क एक से अ धक उत्तर हो सकते ह। इस लए दूसरा वकल्प मुख्य उत्तर है और तीसरा
वकल्प भी लया जा सकता है — बशत आप उसका कारण बता सक।
प्र.2 (2) क वता म घायल पक्षी क कहानी का उपयोग कस लए कया गया है? • नद ष पक्षी के प्र त आखेटक क
क्रूरता दखाने के लए। • पता क वीरता और साहस पर ध्यान दलाने के लए। • करुणा और हसा के बीच के
संघष को दखाने के लए। • मत्रता और नष्ठा के महत्व को उजागर करने के लए।
सबसे सही उत्तर है — करुणा और हसा के बीच के संघष को दखाने के लए। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / ग़लत कारण
नद ष पक्षी के प्र त यह भी लया जा “ गरा, बद्ध होकर खर-शर से” और “जो था खगभक्षी” — इनसे आखेटक क नदयता
आखेटक क क्रूरता सकता है तो दखती ही है। पर यह पूरी कहानी का केवल एक पक्ष है।
पता क वीरता और ग़लत सद्धाथ ने युद्ध नह कया, उन्ह ने पक्षी को उठाया और उसक रक्षा क । यह वीरता नह ,
साहस करुणा है।
करुणा और हसा के सही ★ पूरी कहानी दो पक्ष क टक्कर है — एक बचाने वाला, दूसरा मारने वाला। क वता स्वयं
बीच का संघष कहती है — “हुआ ववाद सदय- नदय म, उभय आग्रही थे स्व वषय म।”
मत्रता और नष्ठा का ग़लत कहानी म मत्रता का कोई प्रसंग नह है।
महत्व
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प्र.3 (3) क वता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते ब े को क्या समझ म आने लगता है? • न्याय सदै व करुणा के साथ होना
चा हए। • नणय लेते समय सदै व नडर रहना चा हए। • आखेटक का सदै व वरोध करना चा हए। • जानवर क
हर त म रक्षा करनी चा हए।
सबसे सही उत्तर है — न्याय सदै व करुणा के साथ होना चा हए। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
बालक का अपना िनणय —
“कोई िनरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भ क्षक को वारे,
याय दया का दानी!”
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वकल्प सही / ग़लत कारण
न्याय सदै व करुणा के सही ★ बालक क अं तम पं क्त ही यह कहती है — “न्याय दया का दानी!” अथात् स ा
साथ होना चा हए न्याय दया दे ने वाला होता है, वह रक्षक का पक्ष लेता है।
नणय लेते समय सदै व यह भी लया जा माँ ने कहा था — “कह दे नभय, जय हो जसका।” और बालक ने बना डरे अपना
नडर रहना चा हए सकता है मत कह दया। पर यह क वता का सहायक भाव है, मुख्य नह ।
आखेटक का सदै व वरोध ग़लत बालक व्य क्त का नह , अन्याय का वरोध करता है। ‘सदै व’ जैसी बात क वता नह
करना चा हए कहती।
जानवर क हर तम ग़लत प्रश्न पक्षी का नह , न्याय के सद्धांत का है — नरपराध को बचाना बड़ा है या मारने
रक्षा करनी चा हए वाले का दावा।
प्र.4 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुन?
यह चचा का प्रश्न है। चचा म हर उत्तर के साथ क वता क एक पं क्त प्रमाण के रूप म र खए — यही सबसे मज़बूत कारण होता
है।
अ चचा म क्या होना चा हए:
आपने जो वकल्प चुना, उसका अथ अपने शब्द म;
क वता क वह पं क्त जो उसे सद्ध करती है;
बाक वकल्प क्य छोड़े — एक-एक वाक्य म कारण;
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी
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य द कसी साथी ने दूसरा उत्तर चुना है तो उसे सुनकर यह दे खना क क्या वह भी सही ठहर सकता है।
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नमूना उत्तर: मने पहले प्रश्न म ‘सही और गलत क समझ वक सत करने के लए’ चुना, क्य क माँ कहानी पूरी नह
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करती, ब ल्क कहती है — “राहुल, तू नणय कर इसका”। मेरी सहेली ने ‘प रवार क वरासत बताने के लए’ चुना
l उसका कारण भी ठ क था — कहानी राहुल के अपने पता क है, “तात भ्रमण करते थे तेरे”। इस लए हमने तय
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और
क दोन उत्तर लखे जा सकते ह, पर पहला अ धक मज़बूत है, क्य क क वता का अंत ही नणय पर आकर
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रुकता है।
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मलकर कर मलान — पृष्ठ 5
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पाठ से
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पाठ से
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मलान
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gl इस पाठ म आपने माँ और पुत्र के बीच क बातचीत को एक क वता के रूप म पढ़ा है। इस क वता म माँ अपने पुत्र
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को उसके पता क एक कहानी सुना रही ह। क्या आप जानते ह क ये माँ, पुत्र और पता कौन ह? अपने समूह म
cटoाm2. माँ 3. तात ( पता); ये शब्द कनके लए आए ह — 1. a
शक्षक क सहायता ले सकते ह। पात्र — 1..बे agl
इन पर चचा क जए और उन्ह पहचानकर सुमे लत क जए। इसके लए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने
यशोधरा, एक राजकुमारी, सद्धाथlक a em 2. सद्धाथ, एक राजकुमार जो बाद म गौतम बुद्ध के नाम से प्र सद्ध
sपत्नी
aे gपुत्र राहुल
हुए 3. सद्धाथ और यशोधरा क
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पात्र .co
m सही मलान g l as
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पहचान का प्रमाण
agl 1. बेटा 3. िस द्धाथ और यशोधरा के पुत्र राहुल माँ स्वयं उसे नाम से पुकारती है — “राहुल, तू नणय कर इसका–”
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2. माँ 1. यशोधरा, एक राजकु मारी, िस द्धाथ की
o m यह अंश गुप्त जी क काव्य-कृ त यशोधरा से लया गया है; कहानी सुनाने
c वाली माँ यशोधरा ही ह। g l a
पत्नी
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3. तात
( पता) बुद्ध कहलाए agl
2. िस द्धाथ, एक राजकु मार जो बाद में गौतम “सुन, उपवन म बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे” — उपवन म घायल हंस
को बचाने वाले ये ही ह।
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m और उनके पुत्र का नाम
पृष्ठभू म: सद्धाथ क पलवस्तु के राजा शुद्धोदन के पुत्र थे। उनका ववाह यशोधरा सेeहुआ
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o था। बाद म सद्धाथ ने गृह-त्याग कया और ान प्राप्त करके गौतमaबुgद्धlकहलाए। घायल हंस वाली यह कथा
cराहुल
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as em उनके बचपन क प्र सद्ध कथा है — इसी म पहली बार उनक करुणा दखाई दे ती है।
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ध्यान द जए: क वता म इन तीन म से केवल राहुल का नाम आया है। ‘माँ’ और ‘तात’ के नाम हम क वता के
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बाहर क जानकारी से पहचानने पड़ते ह — इसी लए पुस्तक ने शब्दकोश, इंटरनेट या शक्षक क सहायता लेने को
कहा है।
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 5
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और ल खए— (क) “कोई नरपराध को
मारे, / तो क्य अन्य उसे न उबारे? / रक्षक पर भक्षक को वारे, / न्याय दया का दानी!”
भावाथ: ये पं क्तयाँ बालक राहुल का नणय ह। वह कहता है — य द कोई कसी नरपराध (बेकसूर) प्राणी को मारता है, तो दूसरा
व्य क्त उसे बचाए क्य नह ? न्याय तो भक्षक (मारने वाले) को छोड़कर रक्षक (बचाने वाले) का पक्ष लेगा, क्य क स ा न्याय दया
करने वाला होता है।
पं क्त सरल अथ
कोई िनरपराध को मारे , य द कोई बेकसूर प्राणी पर वार करे
तो क्यों अन्य उसे न उबारे ? तो दूसरा व्य क्त उसे बचाए क्य न? (उबारना = बचाना)
रक्षक पर भक्षक को वारे , न्याय रक्षक के आगे भक्षक को न्योछावर कर दे , यानी रक्षक को बड़ा माने
न्याय दया का दानी! न्याय वही है जो दया दे ता है — िनद यता का साथ नही ं दे ता
क्य महत्वपूण है: पूरी क वता एक प्रश्न पर आकर रुकती है — जीवन बचाने वाले का हक बड़ा या मारने वाले का?
बालक इन्ह चार पं क्तय म उत्तर दे दे ता है, और वह भी बना डरे। यही क वता का कद्र य वचार है।
भाषा: ‘रक्षक’ और ‘भक्षक’ — तुक भी मलती है और अथ भी आमने-सामने है। ऐसे वपरीत अथ वाले शब्द को
साथ रखने से बात और तीखी हो जाती है।
प्र.2 (ख) “हुआ ववाद सदय- नदय म, / उभय आग्रही थे स्व वषय म, / गई बात तब न्यायालय म, / सुनी सभी ने
जानी।”
भावाथ: घायल हंस को लेकर दयालु सद्धाथ और नदयी आखेटक म झगड़ा हो गया। उभय यानी दोन अपनी-अपनी बात पर अड़े
हुए थे — एक कहता था “पक्षी मेरा है, मने मारा है”, दूसरा कहता था “पक्षी मेरा है, मने बचाया है”। जब बात कसी तरह न सुलझी
तो मामला न्यायालय पहुँचा और सबने इस ववाद के बारे म सुना-जाना।
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शब्द अथ
सदय दया करने वाला — यहाँ सद्धाथ
िनदय दया न करने वाला — यहाँ आखेटक
उभय दोन
आग ही हठ पर अड़ा हुआ, अपनी बात न छोड़ने वाला
स्विवषय अपना पक्ष, अपनी बात
बड़ी बात: झगड़ा हाथापाई म नह बदला — बात न्यायालय म गई। क वता यही सखाती है क ववाद का हल
ताकत से नह , न्याय क प्र क्रया से नकाला जाता है।
काव्य-स दय: ‘सदय- नदय’ वपरीताथक युग्म है और ‘ वषय म–न्यायालय म’ म सुंदर तुक है। एक ही पं क्त म दो
वरोधी स्वभाव रखकर क व ने पूरे ववाद का चत्र ख च दया है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 5 और 6
पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता को एक बार फर से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) आपके वचार से इस क वता म कौन-सी
पं क्त सबसे महत्वपूण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूण क्य मानते ह?
मेरे वचार से सबसे महत्वपूण पं क्त है — “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!”
कारण:
पूरी क वता एक ही प्रश्न क ओर बढ़ती है — पक्षी पर हक कसका है? इसी पं क्त म उसका उत्तर मलता है।
यह पं क्त एक छोटे बालक के मुँह से नकली है, फर भी इसम न्याय का बड़ा सद्धांत है — न्याय वही स ा है जसम दया हो।
माँ ने कहानी सुनाने का जो उ े श्य रखा था, वह इसी पं क्त पर पूरा होता है। इसी लए माँ अंत म कहती है — “तूने गुनी
कहानी।”
दूसरा अ ा उत्तर: य द आप “राहुल, तू नणय कर इसका– न्याय पक्ष लेता है कसका?” को चुन तो भी वह
सही है — क्य क यह कहानी सुनाने वाली माँ सुनने वाले बेटे को सोचने वाला बना दे ती है। उत्तर चाहे कोई हो,
कारण अवश्य ल खए — यही इस प्रश्न क माँग है।
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प्र.2 (ख) आखेटक और ब े के पता के बीच तक- वतक क्य हुआ था?
तक- वतक घायल हंस पर अ धकार को लेकर हुआ था।
ं े तीर मारा, पक्षी मेरा लक्ष्य था, इसिलए वह मेरा है।”
आखेट क का तक — “मैन
(किवता में — “इतने में आखेट क आया, लक्ष्य-िसिद्ध का मानी।”)
िसद्धाथ का तक — “मैन
ं े उसे उठाया, उसकी पीड़ा दू र की, उसे नया जीवन िदया, इसिलए वह मेरा है।”
(किवता में — “ते रे तात िकं त ु थे रक्षी।”)
पिरणाम — “गई बात तब न्यायालय में।”
आखेटक खगभक्षी था — प क्षय को मारकर खाने वाला। उसने घायल पक्षी माँगा, पर सद्धाथ ने दे ने से मना कर दया। दोन
अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे — “उभय आग्रही थे स्व वषय म” — इस लए ववाद बढ़ता चला गया।
असली टकराव: यह केवल एक पक्षी का झगड़ा नह था। यह मारने के अ धकार और बचाने के अ धकार का
टकराव था — यानी हसा और करुणा का।
प्र.3 (ग) माँ ने पुत्र से “राहुल, तू नणय कर इसका” क्य कहा?
माँ चाहती थी क बेटा तैयार उत्तर याद न करे, ब ल्क स्वयं सोचकर नणय करे।
सोचने क आदत डालने के लए — य द माँ स्वयं कह दे ती क पक्षी कसे मलना चा हए, तो राहुल केवल सुनने वाला रह
जाता। प्रश्न पूछकर उसने उसे सोचने वाला बना दया।
सही-ग़लत परखना सखाने के लए — कहानी म दोन पक्ष अपनी-अपनी जगह तक दे रहे ह। ऐसे म नणय करना ही
असली परीक्षा है।
नडर होकर अपनी बात कहना सखाने के लए — माँ ने साथ ही कहा, “कह दे नभय, जय हो जसका।” यानी कसी का
डर या लहाज़ कए बना जो ठ क लगे, वही कहो।
कहानी म बेटे को शा मल करने के लए — कहानी अब उसक अपनी हो जाती है, और उसका उत्तर ही क वता का अंत
बनता है।
ध्यान द जए: माँ ने बेटे का उत्तर सुनकर उसे ग़लत या सही नह ठहराया, बस कहा — “तूने गुनी कहानी।” यानी
तूने कहानी को समझ लया। यह एक अ श क्षका का ढं ग है।
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प्र.4 (घ) य द कहानी म आप उपवन म होते तो घायल हंस क सहायता के लए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे
कया जा सकता था?
यह आपक अपनी सोच का प्रश्न है। उत्तर म दो बात अलग-अलग ल खए — (1) सहायता के लए क्या करते और (2) न्याय
कैसे होता।
अ े उत्तर म क्या होना चा हए:
पक्षी को तुरंत सँभालने के व्यावहा रक कदम (उठाना, तीर नकालने म जल्दबाज़ी न करना, बड़ या पशु- च कत्सक को बुलाना,
पानी दे ना, शांत जगह पर रखना);
न्याय का आधार — पक्षी कसका? आपका तक क्या है;
ठ क हो जाने के बाद पक्षी का क्या हो — यह भी बताइए।
नमूना उत्तर: य द म उस उपवन म होता तो सबसे पहले हंस को दोन हाथ से बहुत धीरे उठाकर छाया म रखता,
ता क वह और घबराए नह । म तीर स्वयं ख चकर नह नकालता, क्य क इससे घाव और बढ़ सकता है — म
दौड़कर कसी बड़े व्य क्त या पशु- च कत्सक को बुलाता और तब तक उसके पंख को हलने न दे ता। उसे थोड़ा पानी
दे ता और घाव को साफ़ कपड़े से ढक दे ता।
न्याय के बारे म मेरा वचार वही है जो राहुल का था — पक्षी उसी को मलना चा हए जसने उसक जान बचाई,
क्य क मारने वाले ने उससे उसका जीवन छ नना चाहा था और बचाने वाले ने उसे जीवन लौटाया। ठ क हो जाने पर
सबसे अ ा न्याय यह होता क हंस को आकाश म उड़ा दया जाता — क्य क वास्तव म वह न आखेटक का था, न
सद्धाथ का, वह अपना स्वयं का था।
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प्र.5 (ङ) क वता म माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे म क्या-क्या पता चलता है? (संकेत — क वता पढ़कर
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आपके मन म माँ-बेटे के बारे म जो चत्र बनता है, जो भाव आते ह या जो बात पता चलती ह, उन्ह भी लख सकते
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कसके बारे क्या पता चलता है क वता से प्रमाण
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माँ (यशोधरा) बहुत स्नेह करने वाली और धैयवान ह बेटे क हठ पर चढ़ती नह , प्यार से कहती ह — “तू है
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हठ मानधन मेरे”
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अ कहानी कहने वाली ह — दृश्य आँख के सामने
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“वण वण के फूल खले थे, झलमल कर हम- बदु झले
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खड़ा कर दे ती ह थे”
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प त के गुण पर गव करती ह “तेरे तात कतु थे रक्षी”
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बेटा (राहुल) बहुत ज ासु और हठ है
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a glक अं तम पं क्त दोहरा देता
ध्यान से सुनता है — हर पद “लहराता था पानी? हाँ, हाँ, यही कहानी।”
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संवेदनशील है, पक्षी का दुख उसे छू जाता है
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“हुई पक्ष क हानी? करुणा-भरी कहानी!”
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नडर है और स्वयं सोचकर नणय ले सकता है “कोई नरपराध को मारे, तो क्य अन्य उसे न उबारे?”
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ag दोन के रश्ते के बारे म: माँ-बेटे के बीच बहुत अपनापन है। बेटा माँ से मज़ाक भी कर लेता है — “तू मेरी नानी क
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बेट !” — और माँ भी हँसकर कहती है, “समझ लया क्या तूने मुझको अपनी नानी?” ऐसी सहज बातचीत वह
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होती है जहाँ डर नह , प्रेम होता है।
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अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 6
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पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए— (क) माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत म कहानी को स्वयं पूरा
नह कया, ब ल्क उसी से नणय करने के लए कहा। य द आप कसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को
आगे कैसे बढ़ाते?
कहानी को आगे बढ़ाने के लए सबसे अ ा तरीका यही है क न्यायालय का दृश्य दखाया जाए — दोन पक्ष अपनी बात रख और
फर नणय सुनाया जाए।
अ े उत्तर म क्या होना चा हए:
दोन पक्ष के तक — आखेटक का और रक्षक का;
न्यायाधीश का प्रश्न या कसौट , जससे नणय नकले;
नणय और उसका कारण;
अंत म हंस का क्या हुआ।
नमूना उत्तर: न्यायालय म भीड़ जुट गई। आखेटक ने कहा — “यह पक्षी मेरा है, मेरा तीर इसे लगा है, यह मेरा
शकार है।” राजकुमार सद्धाथ बोले — “यह पक्षी मेरा है, क्य क इसे जीवन मने दया है।” न्यायाधीश ने सोचकर
कहा — “जो वस्तु दो लोग माँग रहे ह , उसका फ़ैसला उससे पूछकर करना चा हए जसक वह वस्तु है।” उन्ह ने हंस
को बीच म रख दया। आखेटक ने अपना धनुष उठाया तो हंस काँपकर पीछे सरक गया, और जब सद्धाथ ने हाथ
बढ़ाया तो वह लड़खड़ाता हुआ उनक गोद म जा बैठा। न्यायाधीश ने कहा — “ नणय हो गया। जीवन लेने वाले से
बड़ा अ धकार जीवन दे ने वाले का है।” कुछ दन बाद जब हंस के पंख ठ क हो गए, सद्धाथ ने उसे स्वयं आकाश म
उड़ा दया — क्य क स ी रक्षा कसी को अपना बनाकर रखना नह , उसे स्वतंत्र कर दे ना है।
प्र.2 (ख) मान ली जए क कहानी म हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए क जब
उसने हंस को तीर से घायल कया तो उसम और हंस म क्या-क्या बातचीत हुई होगी? उन्ह ने एक-दूसरे को क्या-
क्या तक दए ह गे?
यह कल्पना का प्रश्न है। इसे संवाद के रूप म ल खए — नाम, फर दो बदु (:), फर बात। दोन को तक द जए, केवल एक को
बुरा मत बनाइए — तभी संवाद रोचक बनेगा।
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नमूना उत्तर:
हंस: मने तुम्हारा क्या बगाड़ा था? म तो बस आकाश म उड़ रहा था और गा रहा था।
आखेटक: तुमने कुछ नह बगाड़ा। पर म आखेटक ँ, शकार करना मेरा काम है। तुम मेरे नशाने पर आ गए, इसम
मेरा क्या दोष?
हंस: नशाना लगाना तुम्हारा कौशल है, यह मानता ँ। पर कौशल दखाने के लए कसी क जान लेना क्य ? तुम पेड़
पर, पत्थर पर, कसी लक्ष्य पर नशाना लगा सकते थे।
आखेटक: पेड़ से पेट नह भरता। म भी कसी का बेटा ँ, मेरे घर भी लोग भूखे बैठे ह।
हंस: और मेरे घ सले म? वहाँ भी मेरे ब े मेरी राह दे ख रहे ह। तुम्हारी भूख स ी है तो मेरा जीवन झूठा कैसे हुआ?
आखेटक: तुम आकाश के प्राणी हो, तुम्ह क्या पता क धरती पर जीना कतना क ठन है।
हंस: क ठनाई कसी को नदयी बनने का अ धकार नह दे ती। जसने मुझे उठाया, उसने भी तो चुना क उसे क्या
करना है। तुमने मारना चुना, उसने बचाना चुना — अंतर हमारे बीच नह , तुम दोन के चुनाव म है।
ध्यान र खए: संवाद लखते समय दोन क भाषा अलग र खए — घायल हंस क बात म पीड़ा और वनती हो,
आखेटक क बात म हठ और सफ़ाई। इसी से पात्र जी वत लगते ह।
प्र.3 (ग) मान ली जए क माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र ह। आप कौन-सा पात्र बनना चाहगे?
और क्य ? • तीर चलाने वाला • पक्षी • पक्षी को बचाने वाला व्य क्त • न्यायाधीश • कोई अन्य पात्र जो आप
कहानी म जोड़ना चाह
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है — कोई भी पात्र चु नए, पर कारण अवश्य द जए और बताइए क उस पात्र के रूप म आप
क्या करते।
पात्र य द आप यह बन तो क्या लख सकते ह
पक्षी को बचाने वाला करुणा सबसे बड़ा गुण है; घायल क सेवा करना और उसके लए लड़ना दोन साहस का काम है।
व्य क्त
न्यायाधीश दोन पक्ष को सुनकर बना पक्षपात नणय दे ना; न्याय का सद्धांत बनाना — जीवन दे ने वाले का अ धकार
बड़ा।
पक्षी पीड़ा और स्वतंत्रता क बात कह सकते ह — “म कसी का सामान नह , म अपना ँ।”
तीर चलाने वाला य द यह चुन तो ल खए क आप कहानी के अंत म बदल जाते और शकार छोड़ दे ते।
कोई अन्य पात्र जैसे — उपवन का माली, न्यायालय म बैठा कोई बालक, या हंस का साथी पक्षी।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: म पक्षी को बचाने वाला व्य क्त बनना चा ँगा। इसका कारण यह है क उस पूरी कहानी म सबसे
क ठन काम उसी ने कया — उसने केवल दया नह दखाई, ब ल्क दया के लए खड़ा भी हुआ। घायल पक्षी को उठा
लेना आसान है, पर एक ह थयारबंद आखेटक के सामने “नह दूँ गा” कह दे ना और बात न्यायालय तक ले जाना —
यह साहस है। म भी चा ँगा क जब कसी कमज़ोर के साथ अन्याय हो रहा हो तो म चुपचाप दे खता न र ँ। और य द
मुझे एक और पात्र जोड़ने को कहा जाए तो म उपवन के माली को जोड़ता, जो न्यायालय म गवाह बनकर बताता क
उसने अपनी आँख से क्या-क्या दे खा।
संवाद — पृष्ठ 6 और 7
पाठ से
पाठ से गतवध
प्र.1 इस क वता म एक माँ और उसके पुत्र का संवाद दया गया है ले कन कौन-सा कथन कसने कहा है, यह नह
बताया गया है। आप क वता म दए गए संवाद को पहचा नए क कौन-सा कथन कसने कहा है और उसे दए
गए उ चत ान पर ल खए। उदाहरण के लए, माँ और पुत्र का एक-एक कथन दया गया है। (पुत्र ारा कहे गए
कथन — 1. “माँ, कह एक कहानी।” / माँ ारा कहे गए कथन — 1. “बेटा, समझ लया क्या तूने मुझको अपनी
नानी?”)
पहचानने का सरल सूत्र यह है — कहानी सुनाने वाले पद माँ के ह, और अं तम पं क्त को दोहराकर पूछे गए प्रश्न बेटे के ह।
बेटा हर बार माँ क आ ख़री पं क्त लौटाकर पूछता है और साथ म एक टप्पणी जोड़ दे ता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
क्रम पुत्र (राहुल) ारा कहे गए कथन माँ (यशोधरा) ारा कहे गए कथन
1. “माँ, कह एक कहानी।” ( दया हुआ) “बेटा, समझ लया क्या तूने मुझको अपनी नानी?” ( दया
हुआ)
2. “कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेर ी नानी की बेटी! कह माँ, कह, ले टी ही “तू है हठी मानधन मेरे , सुन, उपवन में बड़ े सबेरे , तात भमण
ले टी, राजा था या रानी? राजा था या रानी? माँ, कह एक कहानी।” करते थे तेरे, जहाँ, सुरिभ मनमानी।”
3. “जहाँ सुर िभ मनमानी? हाँ, माँ, यही कहानी। ” “वण वण के फू ल िखले थे, झलमल कर िहम -िबंद ु िझले थे,
हलके झोंके िहले -िमले थे, लहराता था पानी।”
4. “लहराता था पानी? हाँ, हाँ, यही कहानी। ” “गाते थे खग कल कल स्वर से , सहसा एक हंस ऊपर से ,
िगरा, िबद्ध होकर खर-शर से , हुई पक्ष की हानी!”
5. “हईु पक्ष की हानी? क रुणा-भरी कहानी!” “चौंक उ न्होंने उसे उठाया, नया जन्म -सा उसने पाया।
इतने में आखेटक आया, ल क्ष्य-िसिद्ध का मानी।”
6. “ल क्ष्य-िसिद्ध का मानी? कोमल -किठन कहानी। ” “माँग ा उसने आहत पक्षी, तेरे तात िकं तु थे र क्षी। तब
उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने की ठानी।”
7. “हठ करने की ठानी? अब बढ़ चली कहानी। ” “हआ
ु िववाद सदय-िनद य में, उभय आगही थे स्विवषय में,
गई बात तब न्यायालय में, सुनी सभी ने जानी।”
8. “सुनी सभी ने जानी? व्यापक हुई कहानी। ” “राहुल , तू िनणय कर इसका– न्याय पक्ष ले ता है िकसका?
कह दे िनभय, जय हो िजसका। सुन लूँ तेरी बानी।”
9. “माँ, मेर ी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी। कोई िनरपराध को मारे , तो “न्याय दया का दानी? तूने गुनी कहानी। ”
क्यों अन्य उसे न उबारे ? र क्षक पर भक्षक को वारे , न्याय दया का
दानी!”
पहचानने के संकेत:
जन पं क्तय म “तेरे तात”, “मानधन मेरे”, “बेटा”, “राहुल” आया है — वे माँ क ह।
जनम “माँ” कहकर पुकारा गया है या प्रश्नवाचक चह्न (?) के साथ पछली पं क्त दोहराई गई है — वे बेटे क
ह।
ध्यान द जए, कहानी का अं तम नणय बेटा दे ता है और उस पर मुहर माँ लगाती है — “तूने गुनी कहानी।”
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 7
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी
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पाठ से
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पाठ से शब्द क बात
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a s emदए गए रक्त
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नीचे ान म प्रकृ त से जुड़े शब्द क वता म से चुनकर ल खए— (शब्द-जाल के बीच म ‘प्रकृ त’
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लखा है और एक खाना ‘उपवन’ से भरा हुआ है; शेष सात खाने खाली ह।)
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शब्द-जाल के बीच म प्रकृ त लखा है और एक खाना पहले से भरा है — उपवन। बाक सात खान म क वता से चुने हुए ये शब्द
ल खए — a
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शब्द क वता क पं क्त प्रकृ त से संबंध
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उपवन (
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) “सुन, उपवन म बड़े सबेरे”
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बगीचा, पेड़-पौध क जगह
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िदया हुआ
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सु “जहाँ, सुर भ मनमानी।” फूल क सुगंध
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“वण वण के फूल खले थे” वनस्प त
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“झलमल कर हम- बदु झले थे”.co ओस क बूँद agl
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झोंके a केl हले- मले थे”
“हलके झg हवा
पानी “लहराता था पानी।” जल, सरोवर
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“गाते थे खग कल कल स्वर से” पक्षी
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a s e स “सहसा एक हंस ऊपर से” जलपक्षी
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और भी शब्द: य द खाने बढ़ाने ह तो सबेरे (समय), वण (रंग) और पक्षी भी प्रकृ त से जुड़े शब्द ह, जो इसी
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क वता म आए ह।
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ऐसे शब्द-जाल बनाने का लाभ: एक कद्र य शब्द के चार ओर उससे जुड़े शब्द रखने से शब्द-भंडार समूह म याद
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रहता है। आप ‘वषा’, ‘ वद्यालय’ या ‘बाज़ार’ पर भी ऐसा ही जाल बना सकते ह।
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क्त से पं क्त — पृष्ठ 8
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 म कुछ पं क्तयाँ द गई ह। मलती-जुलती पं क्तय को रेखा ख चकर मलाइए— स्तंभ
1: 1. कहती है मुझसे यह चेट 2. तू है हठ मानधन मेरे 3. झलमल कर हम- बदु झले थे 4. गरा, बद्ध होकर
खर-शर से 5. हुआ ववाद सदय- नदय म 6. कह दे नभय, जय हो जसका। 7. तूने गुनी कहानी। 8. उभय
आग्रही थे स्व वषय म 9. तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने क ठानी। 10. रक्षक पर भक्षक को वारे न्याय
दया का दानी! — स्तंभ 2: 1. दोन ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। 2. तू बना डरे कह दे क जीत कसक
होनी चा हए। 3. दयालु और नदयी व्य क्त म झगड़ा हुआ। 4. न्याय म दया स म्म लत होती है, न्याय मारने वाले
के ान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। 5. हम-कण/ओस क बूँद झल मला रही थ । 6. तूने कहानी को समझ
लया है। 7. यह से वका मुझसे यह कहती है। 8. तेज धार वाले तीर से घायल होकर गर गया। 9. हे मेरे पुत्र, तू
बहुत हठ करता है। 10. तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का नश्चय कर लया।
स्तंभ 1 (क वता क पं क्त) स्तंभ 2 ( मलता-जुलता अथ) कुंजी-शब्द
1. कहती है मुझसे यह चेट 7. यह से िवका मुझसे यह कहती है। चेट = से वका, दासी
2. तू है हठ मानधन मेरे 9. हे मेरे पुत्र , तू बहुत हठ करता है। हठ = ज़ ; मानधन = प्यारा
पुत्र
3. झलमल कर हम- बदु झले थे 5. िहम -कण/ओस की बूदँ े ं िझलिमला रही थी ं। हम- बदु = ओस क बूँद
4. गरा, बद्ध होकर खर-शर से 8. तेज धार वाले तीर से घायल होकर िगर गया। बद्ध = बधा; खर-शर = तीखा
बाण
5. हुआ ववाद सदय- नदय म 3. दयालु और िनद यी व्यिक्त में झगड़ ा हुआ । सदय = दयालु; नदय = नदयी
6. कह दे नभय, जय हो जसका। 2. तू िबना डरे कह दे िक जीत िकसकी होनी चािहए। नभय = बना डरे
7. तूने गुनी कहानी। 6. तूने कहानी को समझ िलया है। गुनना = समझना, वचारना
8. उभय आग्रही थे स्व वषय म 1. दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़ े हएु थे। उभय = दोन ; आग्रही = अड़ा
हुआ
9. तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ 10. तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का िनश्चय कर खगभक्षी = पक्षी खाने वाला
करने क ठानी। िलया।
10. रक्षक पर भक्षक को वारे न्याय 4. न्याय में दया सिम्मिलत होती है, न्याय मारने वाले के स्थान पर रक्षक = बचाने वाला; भक्षक =
दया का दानी! बचाने वाले का पक्ष ले ता है। मारने वाला
सरल क्रम म उत्तर: 1→7, 2→9, 3→5, 4→8, 5→3, 6→2, 7→6, 8→1, 9→10, 10→4।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
मलान का तरीका: पहले हर पं क्त का एक क ठन शब्द छाँ टए (चेट , हठ , हम- बदु, बद्ध…) और फर स्तंभ 2
म उसी अथ वाला शब्द खो जए। इससे मलान बना अटके हो जाता है।
क वता क रचना — पृष्ठ 8 और 9
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 (क) इस क वता को एक बार पुन: प ढ़ए और अपने समूह म मलकर इस क वता क वशेषताओं क सूची
बनाइए। अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके साथ साझा क जए।
समूह क सूची म ये वशेषताएँ आनी चा हए —
1. संवाद शैली — पूरी क वता माँ और बेटे क बातचीत के रूप म चलती है। कह भी क व स्वयं बीच म नह बोलता।
2. आवृ त्त (दोहराव) — “राजा था या रानी? राजा था या रानी?” जैसी पं क्तयाँ दो बार आती ह; “माँ, कह एक कहानी” बार-बार
लौटती है।
3. तुक — हर पद म अं तम शब्द क ध्व न मलती है — कहानी, नानी, रानी, बानी, हानी, ठानी, जानी, दानी।
4. अनुप्रास — एक ही वण से शुरू होने वाले शब्द पास-पास — “क◌ोमल-क ठन कहानी”, “ह◌ुई पक्ष क ह◌ानी”।
5. पुनरुक्त शब्द — “वण वण के फूल”, “कल कल स्वर”, “हाँ, हाँ, यही कहानी”।
6. वपरीताथक युग्म — सदय- नदय, कोमल-क ठन, रक्षक-भक्षक।
7. प्रकृ त- चत्रण — उपवन, वण-वण के फूल, हम- बदु, हलके झ के, लहराता पानी।
8. प्रश्न-उत्तर क लड़ी — बेटा प्रश्न पूछता है, माँ उत्तर दे ती है; इससे कहानी आगे बढ़ती जाती है।
9. छोट -छोट पं क्तयाँ और गेय लय — क वता गाई जा सकती है, इस लए ब को शीघ्र याद हो जाती है।
10. कहानी के भीतर कहानी — क वता स्वयं एक कहानी है, और उसके भीतर माँ एक दूसरी कहानी सुनाती है।
11. तत्सम शब्द का प्रयोग — बद्ध, उभय, आग्रही, नरपराध, आखेटक।
12. अंत खुला हुआ — नणय क व नह दे ता, बालक दे ता है।
चचा के लए: हर वशेषता के आगे क वता क एक पं क्त उदाहरण के रूप म ल खए। बना उदाहरण क सूची
अधूरी मानी जाएगी।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) नीचे इस क वता क कुछ वशेषताएँ और वे पं क्तयाँ द गई ह जनम ये वशेषताएँ दखाई दे ती ह।
वशेषताओं का सही पं क्तय से मलान क जए। आप क वता क पं क्तय म एक से अ धक वशेषताएँ भी ढूँ ढ़
सकते ह। क वता क वशेषताएँ: 1. संवाद दए गए ह। 2. पं क्त के अं तम शब्द क ध्व न आपस म मलती-
जुलती है। 3. कुछ शब्द दो बार और साथ-साथ आए ह। 4. कुछ वपरीताथक शब्द साथ-साथ आए ह। 5. प्रकृ त
का वणन कया गया है। 6. एक ही वण से शुरू होने वाले एक से अ धक शब्द एक ही पं क्त म आए ह। 7. प्रश्न-
उत्तर दए गए ह। 8. शब्द क वतनी बदलकर उपयोग कया गया है। — क वता क पं क्तयाँ: 1. हुआ ववाद
सदय- नदय म 2. हुई पक्ष क हानी। 3. बेटा, समझ लया क्या तूने मुझको अपनी नानी? कहती है मुझसे यह चेट ,
तू मेरी नानी क बेट ! 4. तू है हठ मानधन मेरे, सुन, उपवन म बड़े सबेरे 5. कोमल-क ठन कहानी। 6. वण वण के
फूल खले थे, झलमल कर हम- बदु झले थे, हलके झ के हले- मले थे, लहराता था पानी।
क वता क वशेषता पं क्त कहाँ दखती है
1. संवाद दए गए ह। 3 माँ पूछती है और बेटा उत्तर दे ता है — दोन क बात आमने-
सामने है।
2. पं क्त के अं तम शब्द क ध्व न आपस म मलती-जुलती है 2, 3, हानी–कहानी; तूने–नानी–चेट –बेट ; खले थे– झले थे– मले थे।
(तुक)। 6
3. कुछ शब्द दो बार और साथ-साथ आए ह (पुनरु क्त)। 6 “वण वण के फूल खले थे”
4. कुछ वपरीताथक शब्द साथ-साथ आए ह। 1, 5 सदय × नदय; कोमल × क ठन
5. प्रकृ त का वणन कया गया है। 6 फूल, हम- बदु, हवा के झ के, लहराता पानी (पं क्त 4 म
‘उपवन’ और ‘सबेरे’ भी)।
6. एक ही वण से शुरू होने वाले एक से अ धक शब्द एक ही 2, 5 “ह◌ुई पक्ष क ह◌ानी”; “क◌ोमल-क ठन कहानी”
पं क्त म (अनुप्रास)।
7. प्रश्न-उत्तर दए गए ह। 3 “समझ लया क्या तूने मुझको अपनी नानी?” — और उत्तर म
बेटे क बात।
8. शब्द क वतनी बदलकर उपयोग कया गया है। 4 ‘सवेरे’ के ान पर ‘सबेरे’ — तुक (मेरे–सबेरे–तेरे) मलाने के
लए।
ध्यान द जए: प्रश्न स्वयं कहता है क एक पं क्त म एक से अ धक वशेषताएँ हो सकती ह। जैसे पं क्त 6 म तुक भी
है, पुनरु क्त भी और प्रकृ त-वणन भी; पं क्त 3 म संवाद भी है, प्रश्न-उत्तर भी और तुक भी। इस लए आपक उत्तर-
पु स्तका म एक पं क्त के सामने दो-तीन रेखाएँ खच सकती ह — यह ग़लत नह है।
अनुप्रास क्या है? जब एक ही वण एक पं क्त म बार-बार लौटे तो उसे अनुप्रास अलंकार कहते ह। जैसे —
“कोमल-क ठन कहानी” म ‘क’ तीन बार आया है, इससे पं क्त म संगीत-सा बन जाता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
रूप बदलकर — पृष्ठ 9
पाठ से
पाठ से ले ख न
प्र.1 “सुन, उपवन म बड़े सबेरे, / तात भ्रमण करते थे तेरे,” — क वता क इन पं क्तय को नम्न प्रकार से बदलकर
लखा जा सकता है— “सुनो! आपके पता एक उपवन म बहुत सवेरे भ्रमण कया करते थे... ” अब आप भी पाठ
के कसी एक पद को एक अनु े द के रूप म ल खए।
इस काम को गद्य-रूपांतरण कहते ह — क वता क बात को साधारण बोलचाल के वाक्य म लख दे ना।
तरीका:
पद को दो-तीन बार पढ़कर उसका दृश्य मन म बना ली जए;
क ठन शब्द के अथ पहले लख ली जए ( बद्ध = घायल, खर-शर = तेज़ तीर, आहत = घायल);
तुक और लय क चता छोड़ द जए — अब पूरे वाक्य बनाइए;
क्रम वही र खए जो क वता म है, ता क कहानी न बदले।
नमूना उत्तर 1 — पद: “गाते थे खग कल कल स्वर से…”
सुबह का समय था और उपवन म पक्षी मीठ आवाज़ म चहचहा रहे थे। तभी अचानक ऊपर आकाश से एक हंस
नीचे आ गरा। कसी ने उस पर तेज़ धार वाला तीर चला दया था और वह उसी से बध गया था। बेचारे पक्षी का पंख
बुरी तरह घायल हो गया था।
नमूना उत्तर 2 — पद: “हुआ ववाद सदय- नदय म…”
इसके बाद दयालु राजकुमार और उस नदयी शकारी के बीच झगड़ा हो गया। दोन अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे
— शकारी कहता था क पक्षी उसका है क्य क उसने उसे मारा है, और राजकुमार कहते थे क पक्षी उनका है
क्य क उन्ह ने उसे बचाया है। आ ख़र यह मामला न्यायालय तक जा पहुँचा और वहाँ सबने इसे सुना और जाना।
क्या ध्यान रख: गद्य म बदलते समय क वता का भाव नह बदलना चा हए। आप अपने वाक्य बना सकते ह, पर
घटना, क्रम और पात्र क भावना वही रहनी चा हए।
क वता म वराम चह्न — पृष्ठ 10
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी
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पाठ से
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पाठ से भाषा क बात
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a s emनीचे क वता का एक अंश बना वराम चह्न के दया गया है। इसम उपयुक्त
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(क) ान पर वराम चह्न लगाइए
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प्र.1
— राहुल तू नणय कर इसका– / न्याय पक्ष लेता है कसका / कह दे नभय जय हो जसका / सुन लूँ तेरी बानी /
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माँ मेरी क्या बानी / म सुन रहा कहानी / कोई नरपराध को मारे / तो क्य अन्य उसे न उबारे / रक्षक पर भक्षक
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को वारे / न्याय दया का दानी / न्याय दया का दानी / तूने गुनी कहानी
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वराम चह्न लगाने पर अंश इस प्रकार होगा —
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“राहुल, तू िनणय कर इसका–
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न्याय पक्ष लेत ा है िकसका?
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सुन लू ँ ते री बानी।”
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मै ं सुन रहा कहानी।
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कोई िनरपराध को मारे,
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न्याय दया का दानी!”
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“न्याय दया का दानी?
तूने गुन ी कहानी।”
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
चह्न नाम यहाँ क्य लगाया
“” उद्धरण चह्न यह बताने के लए क कौन-सा भाग माँ ने कहा और कौन-सा राहुल ने। पहला और तीसरा भाग माँ का,
बीच का भाग बेटे का है।
, अल्प वराम पुकारने के बाद (राहुल, / माँ,) और पं क्त के भीतर थोड़ा ठहरने के लए ( नभय, / मारे, / वारे,)।
। पूण वराम जहाँ बात पूरी हो जाती है — “जय हो जसका।”, “सुन लूँ तेरी बानी।”, “म सुन रहा कहानी।”, “तूने गुनी
कहानी।”
? प्रश्नवाचक चह्न जहाँ प्रश्न पूछा गया है — “ कसका?”, “क्या बानी?”, “न उबारे?”, “न्याय दया का दानी?”
! वस्मया दबोधक “न्याय दया का दानी!” — बालक यह बात आवेश और व ास के साथ कहता है, इस लए यहाँ प्रश्न नह ,
चह्न वस्मय है।
– नदशक/योजक “तू नणय कर इसका–” — बात आगे बढ़ रही है, वाक्य यह समाप्त नह होता।
रेखा
सबसे रोचक बात: एक ही वाक्य “न्याय दया का दानी” दो बार आया है, पर उसके चह्न अलग ह। बेटा उसे ! के
साथ कहता है — यह उसका नणय है। माँ उसे ? के साथ दोहराती है — मानो पूछ रही हो, “सचमुच ऐसा ही है?”
चह्न बदलते ही वाक्य का भाव बदल जाता है।
प्र.2 (ख) अब वराम चह्न का ध्यान रखते हुए क वता को अपने समूह म सुनाइए।
यह सस्वर वाचन (क वता-पाठ) क ग त व ध है। नीचे दए ढं ग से अभ्यास क जए —
चह्न पढ़ते समय क्या कर
, (अल्प िवराम) ज़रा-सा रु कए — एक साँस जतना।
। (पूण िवराम) पूरा ठह रए और आवाज़ नीचे लाइए।
? (पश्नवाचक) अं तम शब्द पर आवाज़ ऊपर उठाइए — “रानी?”
! (िवस्मयािदबोधक) ज़ोर दे कर, भाव भरकर बो लए — “न्याय दया का दानी!”
“ ” (उद्धरण) यह वक्ता बदलता है — माँ क पं क्तयाँ एक साथी पढ़े , बेटे क दूसरा।
अ े वाचन के सुझाव:
समूह म दो भू मकाएँ बाँट ली जए — एक माँ, एक राहुल। इससे संवाद-शैली स्वयं उभर आएगी।
बेटे क पं क्तय म ज ासा और हठ का स्वर र खए; माँ क पं क्तय म स्नेह और ठहराव।
“राजा था या रानी? राजा था या रानी?” — दूसरी बार थोड़ा और ज़ोर दे कर बो लए, क्य क यह हठ है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
हंस के गरने वाले पद म आवाज़ धीमी और गंभीर क जए — “हुई पक्ष क हानी!”
ध्यान रख: क वता तेज़ नह , लय म पढ़ जाती है। हर पं क्त के अंत म तुक (कहानी, नानी, रानी, बानी) को थोड़ा
ठहरकर सुनाइए — तभी ोताओं को क वता का संगीत सुनाई दे गा।
आपक बात — पृष्ठ 11
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) “सुन, उपवन म बड़े सबेरे, / तात भ्रमण करते थे तेरे,” — आप या आपके प रजन भ्रमण के लए कहाँ-कहाँ
जाते ह? और क्य ?
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर म ान और कारण दोन ल खए।
अ े उत्तर म क्या होना चा हए:
जगह का नाम (पाक, नद का कनारा, खेत, छत, वद्यालय का मैदान, मं दर या गुरु ारे का रास्ता);
कब जाते ह — सबेरे, शाम, र ववार को;
कसके साथ जाते ह;
क्य जाते ह — स्वास्थ्य, ताज़ी हवा, बातचीत, पक्षी दे खना, मन का हल्का होना।
नमूना उत्तर: मेरे दादाजी हर सबेरे मुहल्ले के पाक म टहलने जाते ह और छु वाले दन मुझे भी साथ ले जाते ह।
हम सूरज नकलने से पहले पहुँच जाते ह, जब घास पर ओस क बूँद चमक रही होती ह — ठ क वैसे ही जैसे क वता
म “झलमल कर हम- बदु झले थे”। वहाँ हम पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर तोत और गलह रय को दे खते ह।
दादाजी कहते ह क सबेरे क हवा दवा से भी अ होती है। ग मय क छु य म हम गाँव जाते ह, जहाँ नहर के
कनारे- कनारे बहुत दूर तक चलते ह। मुझे भ्रमण इस लए अ ा लगता है क्य क उस समय घर क भाग-दौड़ नह
होती और दादाजी से खूब बात हो जाती ह।
प्र.2 (ख) इस पाठ म एक माँ अपने पुत्र को कहानी सुना रही है। आप कस- कस से कहानी सुनते ह या थे? आप
कसको और कौन-सी कहानी सुनाते ह?
इसम दो बात अलग-अलग बताइए — (1) आप कससे सुनते ह और (2) आप कसे सुनाते ह।
अ े उत्तर म क्या होना चा हए:
सुनाने वाल के नाम/ रश्ते — दाद , नानी, माँ, पता, बड़ी बहन, शक्षक, पड़ोसी;
कस प्रकार क कहा नयाँ — लोककथाएँ, पंचतंत्र, अकबर-बीरबल, भूत-प्रेत क , अपने प रवार क स ी कहा नयाँ;
आप कसे सुनाते ह — छोटे भाई-बहन, मत्र, कक्षा;
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
कोई एक कहानी का नाम और उसम आपको जो अ ा लगता है।
नमूना उत्तर: सबसे अ धक कहा नयाँ मने अपनी दाद से सुनी ह। रात को खाना खाने के बाद वे चारपाई पर बैठकर
पंचतंत्र क कहा नयाँ सुनाती ह — “एकता म बल”, “चतुर खरगोश और शेर” जैसी। मेरी माँ हम अपने बचपन क
स ी कहा नयाँ सुनाती ह क वे कैसे नद पार करके स्कूल जाती थ । वद्यालय म हमारे हद शक्षक कभी-कभी
बीरबल क कहा नयाँ सुनाते ह।
म अपनी छोट बहन को सोते समय कहानी सुनाता ँ। उसे “प्यासा कौआ” और “खरगोश और कछु आ” सबसे प्रय
ह, पर सबसे अ धक बार मने उसे यही कहानी सुनाई है — घायल हंस और उसे बचाने वाले राजकुमार क । अंत म म
भी माँ क तरह रुककर उससे पूछता ँ — “अब तू बता, हंस कसका?”
प्र.3 (ग) माँ ने कहानी सुनाने के बीच म एक प्रश्न पूछ लया था। क्या कहानी सुनाने के बीच म प्रश्न पूछना सही है?
क्य ?
हाँ, प्रश्न पूछना सही है — बशत वह कहानी क धारा तोड़े नह , ब ल्क उसे आगे बढ़ाए।
प्रश्न पूछने से लाभ कब सावधानी चा हए
सुनने वाला जागता और सोचता रहता है — वह केवल ोता नह , य द हर दो पं क्त पर प्रश्न पूछा जाए तो कहानी का प्रवाह और रस
भागीदार बन जाता है। टू ट जाता है।
पता चल जाता है क सुनने वाला कहानी समझ रहा है या नह । ऐसा प्रश्न न हो जससे आगे क कहानी पहले ही खुल जाए।
सुनने वाले क अपनी राय बनती है — जैसे राहुल का नणय। प्रश्न परीक्षा जैसा न लगे, वरना डर पैदा होता है।
कहानी याद रह जाती है, क्य क उसम सुनने वाले का अपना उत्तर जुड़ सबसे अ ा समय — जब कहानी कसी मोड़ पर आकर रुके।
जाता है।
क वता से प्रमाण: माँ ने प्रश्न ठ क उस जगह पूछा जहाँ कहानी अपने सबसे बड़े मोड़ पर थी — मामला न्यायालय
पहुँच चुका था। उसने पूछा — “न्याय पक्ष लेता है कसका?” य द वह स्वयं उत्तर दे दे ती तो राहुल केवल सुनता रह
जाता; प्रश्न के कारण वह सोचने वाला बन गया और क वता का अंत उसी के शब्द म हुआ।
प्र.4 (घ) क वता म बालक अपनी माँ से बार-बार ‘वही’ कहानी सुनने क हठ करता है। क्या आपका भी कभी कोई
कहानी बार-बार सुनने का मन करता है? अगर हाँ, तो वह कौन-सी कहानी है और क्य ?
यह आपके अपने मन क बात है। उत्तर म कहानी का नाम, कौन सुनाता है और बार-बार क्य अ लगती है — तीन
ल खए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
कारण ऐसे हो सकते ह:
उस कहानी का कोई पात्र बहुत प्रय है;
सुनाने वाले क आवाज़ और अंदाज़ अ ा लगता है;
हर बार कोई नई बात समझ म आती है;
कहानी सुनते समय अपनापन और सुरक्षा का भाव मलता है;
अंत जानते हुए भी उसे सुनने म मज़ा आता है — जैसे कोई प्रय गीत बार-बार सुनना।
नमूना उत्तर: हाँ, मुझे भी एक कहानी बार-बार सुनने का मन करता है — दाद वाली “ च ड़या और उसके तीन
ब ” क कहानी। मुझे उसका अंत पहले से याद है, फर भी हर बार वही जगह आते ही मेरा दल धड़कने लगता है
जहाँ च ड़या अपने ब को बचाने के लए बहे लये से भड़ जाती है। मुझे यह कहानी इस लए भी अ लगती है
क्य क दाद हर बार उसम एक छोट -सी नई बात जोड़ दे ती ह — कभी बहे लये का नाम, कभी ब क बातचीत।
और सच क ँ तो मुझे कहानी से ज़्यादा वह समय अ ा लगता है जब दाद मुझे पास बठाकर सुनाती ह — ठ क
वैसे ही जैसे राहुल को अपनी माँ के पास लेटे-लेटे कहानी सुनना अ ा लगता था।
नणय कर — पृष्ठ 11
पाठ से आगे
पाठ से आगे मू ल्य- शक्षा
प्र.1 “राहुल, तू नणय कर इसका–” नीचे कुछ तयाँ द गई ह। बताइए क इन तय म आप क्या करगे? 1.
खेलते समय आप दे खते ह क एक मत्र ने भूल से एक नयम तोड़ा है।
म खेल रोककर शां त से उसे बता दूँ गा क यह नयम इस तरह होता है — क्य क उसने जान-बूझकर नह , भूल से तोड़ा है।
पहले यह दे खूँगा क सचमुच नयम टू टा है या मुझे भ्रम हुआ;
सबके सामने चल्लाकर या ताना दे कर नह , ब ल्क पास जाकर क ँगा — “यार, यह चाल नयम के वरुद्ध है, फर से कर लो”;
य द ववाद हो तो दोन ट म के साथ मलकर नयम एक बार दोहरा लगे;
खेल फर से उसी जगह से शुरू करगे।
क्य : भूल और बेईमानी दो अलग बात ह। भूल पर दं ड नह , सुधार चा हए। और नयम क याद दलाना दोस्ती
तोड़ना नह , खेल को बचाना है।
प्र.2 2. एक सहपाठ को कक्षा म दूसर ारा चढ़ाया जा रहा है।
म चुप नह र ँगा। जो चढ़ाते समय चुपचाप दे खता रहता है, वह भी अनजाने म चढ़ाने वाल का साथ दे दे ता है।
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चढ़ाने वाल से दृढ़ता से क ँगा — “बस करो, इसे बुरा लग रहा है।”
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उस सहपाठ के पास जाकर बैठँू गा, उससे बात करूँगा और उसे अपने समूह म शा मल करूँगा;
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य द बात न रुके तो शक्षक को बताऊँगा — यह चुगली नह , सहायता है;
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बाद म उस साथी से अकेले म पूछूँगा क वह ठ क है या नह ।
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aक वता से जो ड़ए: बालक राहुल कहता है — “कोई नरपराध को मारे, तो क्य अन्य उसे न उबारे?” चढ़ाया जा
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रहा सहपाठ भी नरपराध है, और उसे ‘उबारना’ हमारा काम है।
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3. एक समूह प रयोजना के बीच एक सहपाठ अपने भाग का काय नह कर रहा है।
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प्र.3
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m .पूछूँगा, फर हल नकालूँगा — शकायत सबसे आ ख़री कदम होगा। a
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पहले कारण
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1. अकेले म पूछूँगा — “कोई परेशानी है क्या? समझ नह आ रहा या समय नह मल पा रहा?”
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2. य द काम क ठन लग रहा है तो उसका भाग छोटा-छोटा बाँट दूँ गा या कसी और के साथ जोड़ दूँ गा;
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3. समूह म काम क एक सूची और तारीख़ बना लगे, ता क सबको अपना हस्सा साफ़ दखे;
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4. फर भी वह न करे तो पूरी बात शक्षक को बताऊँगा
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ध्यान र खए: उसका काम चुपचाप स्वयं कर दे ना सबसे आसान लगता है, पर इससे न प रयोजना का उ े श्य पूरा
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होता है और न वह सीख पाता है।
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a s em 4. आपके दो मत्र के बीच एक छोट -सी बात पर तक- वतक हो रहा है।
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म बीच-बचाव करूँगा, पर कसी एक का पक्ष लेकर नह ।
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दोन को अलग-अलग पूरी बात कहने दूँ गा — बना बीच म टोके;
फर दोन क बात दोहराकर पूछूँगा — “तुम्हारा मतलब यही है न?” अक्सर आधा झगड़ा ग़लतफ़हमी का होता है;
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याद दलाऊँगा क बात कतनी छोट है और दोस्ती कतनी बड़ी;
ज़रूरत हो तो कोई बीच का रास्ता सुझाऊँगा और दोन को एक काम म साथ लगा दूँ गा। em
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क वता से जो ड़ए: “उभय आग्रही थे स्व वषय म” — दोन अपनी-अपनी बात पर अड़ जाएँ तो झगड़ा बढ़ता ही है।
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कहानी म हल तब नकला जब मामला कसी तीसरे नष्पक्ष के सामने रखा गया।
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प्र.5 5. एक सहपाठ को कुछ ऐसा करने के लए अनु चत रूप से दं डत कया जा रहा है जसे उसने नह कया।
यह सीधे-सीधे अन्याय है, इस लए म नडर होकर सच बताऊँगा — जैसे माँ ने कहा था, “कह दे नभय, जय हो जसका।”
वनम्रता से शक्षक से क ँगा — “क्षमा क जए, मने दे खा था, यह काम इसने नह कया।”
जो सचमुच हुआ था, वह पूरा और सच-सच बताऊँगा — बना कसी को बचाए और बना कसी को फँसाए;
य द और साथी गवाह ह तो उन्ह भी बोलने के लए क ँगा;
बाद म उस सहपाठ के पास जाकर उसका मन हल्का करूँगा।
क्य ज़रूरी है: नरपराध को दं ड मलना दोहरा नुकसान है — बेकसूर को पीड़ा मलती है और असली दोषी बच
जाता है। सच कहने म थोड़ी हम्मत लगती है, पर यही राहुल वाला काम है।
प्र.6 6. एक सहपाठ प्र तयो गता म हार जाने पर उदास है।
म उसके पास जाकर बैठँू गा। इस समय उसे उपदे श नह , साथ चा हए।
“कोई बात नह ” कहकर उसक बात टालूँगा नह — पहले उसे बोलने दूँ गा;
उसने जो अ ा कया, वह वशेष रूप से बताऊँगा — “तुम्हारा तीसरा उत्तर तो सबसे अ ा था”;
याद दलाऊँगा क इस बार भाग लेना ही बड़ी बात थी, और अगली बार का अभ्यास हम साथ करगे;
थोड़ी दे र बाद उसे खेल या कसी और काम म साथ ले लूँगा, ता क मन बदले।
क्या न कर: “मने तो पहले ही कहा था”, “तुमने मेहनत ही नह क ” — ऐसे वाक्य हारे हुए मन को और तोड़ते ह।
प्र.7 7. कक्षा म चचा के बीच एक सहपाठ संकोच कर रहा है और बोलने का अवसर नह पा रहा है।
म उसे अवसर दलाऊँगा — क्य क चचा तभी अ होती है जब सब बोल।
अपनी बात छोट रखकर क ँगा — “मुझे लगता है इस पर रोहन कुछ कहना चाह रहा है”;
उसने पहले जो अ ा वचार बताया हो, उसका नाम लेकर उल्लेख करूँगा, इससे उसका आत्म व ास बढ़े गा;
य द वह संकोच म हो तो पहले छोटे समूह म उसक बात सुनूँगा, फर पूरी कक्षा के सामने कहने को क ँगा;
वह बोले तो बीच म न टोकूँ और ध्यान से सुनूँ।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
क्य : बहुत बार सबसे अ ा वचार उसी के पास होता है जो सबसे कम बोलता है। उसे अवसर दे ना भी एक तरह
का न्याय है।
प्र.8 8. सहपाठ कसी वषय म संघष कर रहा है और आपसे सहायता माँगता है।
म सहायता अवश्य करूँगा, पर इस तरह क वह स्वयं करना सीख जाए — केवल उत्तर लखवा दे ना सहायता नह है।
1. पहले पूछूँगा क क ठनाई ठ क कहाँ है — पूरा अध्याय या कोई एक बदु;
2. उस बदु को सरल भाषा और उदाहरण से समझाऊँगा;
3. फर एक प्रश्न उसे स्वयं करने दूँ गा और केवल जाँचूँगा;
4. अपने पास जो नोट् स या तरीका है, वह साझा करूँगा;
5. य द वषय मुझे भी क ठन लगे तो हम दोन मलकर शक्षक से पूछगे।
याद र खए: सहायता माँगना कमज़ोरी नह है। जो मत्र आपसे पूछता है, वह आप पर भरोसा करता है — उसका
मज़ाक कभी न बनाइए।
सुनी कहानी — पृष्ठ 12
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 हमारे दे श और वश्व म अनेक कहा नयाँ लोग एक-दूसरे को सैकड़ -हजार साल से सुनते-सुनाते रहे ह। इन
कहा नय को लोककथाएँ कहते ह। अपने घर या आस-पास सुनी-सुनाई जाने वाली कसी लोककथा को लखकर
कक्षा म सुनाइए। आपने जस भाषा म लोककथा सुनी है या जस भाषा म आप लोककथा लखना चाह, लख
सकते ह। कक्षा के सभी समूह ारा एक त्रत लोककथाओं को जोड़कर एक पु स्तका बनाइए और कक्षा के
पुस्तकालय म उसे स म्म लत क जए।
यह प रयोजना काय है। इसे तीन चरण म क जए — सुनना → लखना → पु स्तका बनाना।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
चरण क्या करना है
1. खोज दाद -नानी, माता- पता, पड़ोस के बुजग या गाँव के कसी व रष्ठ व्य क्त से एक लोककथा सु नए। सुनते समय टो कए नह ; बाद
म क ठन नाम और ान पूछकर लख ली जए।
2. लेखन कथा को अपनी भाषा म ल खए — हद म या अपनी बोली/मातृभाषा म (भोजपुरी, अवधी, मराठ , त मल… जो भी हो)। ऊपर
ल खए — कथा का नाम, कससे सुनी, और वह कस क्षेत्र क है।
3. साझा कक्षा म सुनाइए। सुनाते समय आवाज़ बद लए, रु कए और बीच म एक प्रश्न पू छए — जैसे क वता म माँ ने पूछा था।
4. सब कथाओं को एक क्रम म लगाइए, अनुक्रम णका बनाइए, चत्र जो ड़ए, आवरण पर पु स्तका का नाम ल खए (जैसे — हमारी
पु स्तका कहा नयाँ) और उसे कक्षा-पुस्तकालय म र खए।
लोककथा क पहचान: इसका कोई एक लेखक नह होता; यह पीढ़ -दर-पीढ़ मुँह-जबानी चलती है; इसम अक्सर बोलने वाले
जानवर, राजा-रानी, चतुर कसान या कोई सीख होती है; और हर सुनाने वाला उसम अपना थोड़ा रंग भर दे ता है।
नमूना उत्तर (संक्षेप म): “सोने का घड़ा” — मेरी नानी ने यह कथा सुनाई थी। एक गरीब कसान को खेत जोतते
समय सोने से भरा घड़ा मला। उसने वह घड़ा उस व्य क्त के पास पहुँचा दया जससे उसने खेत ख़रीदा था, यह
कहकर क “मने खेत ख़रीदा था, घड़ा नह ।” उस व्य क्त ने कहा — “मने खेत बेचा था, उसम जो कुछ था वह भी
बेच दया।” दोन राजा के पास पहुँचे। राजा ने पूछा — क्या इन दोन के ब का ववाह हो सकता है? दोन मान
गए और राजा ने घड़ा उन नवदं पती को दे दया। नानी अंत म हमेशा पूछती थ — “बताओ, इसम सबसे बड़ा धनी
कौन था?”
पाठ से जोड़: ‘माँ, कह एक कहानी’ भी वैसे ही सुनाई-सुनी परंपरा का हस्सा है — माँ अपने बेटे को उसके पता
क कथा सुना रही है। लोककथाएँ इसी तरह एक पीढ़ से दूसरी पीढ़ तक पहुँचती ह।
आज क पहेली — पृष्ठ 12
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 नीचे कुछ पहे लयाँ द गई ह। इनके उत्तर आपको क वता म से मल जाएँगे। पहे लयाँ बू झए— पहेली 1: नानी क
बेट है कौन? / मामा क बहना है कौन? / भाया है पता क कौन? / भाभी है चाचा क कौन?
उत्तर है — माँ।
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पहेली क पं क्त रश्ता खोलकर दे खए
नानी की बेटी है कौन? नानी माँ क माँ होती है — इस लए नानी क बेट हुई माँ।
मामा की बहना है कौन? मामा माँ का भाई होता है — इस लए उसक बहन हुई माँ।
भाय है िपता की कौन? ‘भाया’ का अथ है पत्नी — पता क पत्नी हुई माँ।
भाभी है चाचा की कौन? चाचा पता का छोटा भाई होता है — उसक भाभी हुई माँ।
क वता से जोड़: क वता के आरंभ म बालक ठ क इसी तरह का रश्त वाला मज़ाक करता है — “कहती है मुझसे
यह चेट , तू मेरी नानी क बेट !” और माँ हँसकर कहती है — “समझ लया क्या तूने मुझको अपनी नानी?”
ऐसी पहेली स्वयं बनाइए: कसी एक व्य क्त को चु नए और उसके चार अलग-अलग रश्ते ल खए — जैसे “दाद
का बेटा कौन? बुआ का भाई कौन?” उत्तर होगा — पता।
प्र.2 पहेली 2: आसमान म उड़-उड़ जाए, / तरह-तरह के गाने गाए, / पर फैलाकर करता सैर, / दो ह जसके पर और
पैर।
उत्तर है — खग यानी पक्षी (क वता म यह हंस है)।
पहेली का संकेत पक्षी पर कैसे लागू होता है क वता क पं क्त
आसमान में उड़-उड़ जाए पक्षी आकाश म उड़ता है “सहसा एक हंस ऊपर से”
तरह-तरह के गाने गाए चहचहाना, कूकना, कलरव करना “गाते थे खग कल कल स्वर से”
पर फै लाकर करता सै र पंख फैलाकर घूमना “हुई पक्ष क हानी!” (पक्ष = पंख)
दो है ं िजसके पर और पैर पक्षी के दो पंख और दो पैर होते ह —
शब्द- ान: ‘पर’ के दो अथ यहाँ काम कर रहे ह — पंख और ले कन/ऊपर। पहे लय म अक्सर ऐसे ही दो अथ
वाले शब्द ( ेष) से मज़ा बनता है। क वता म पंख के लए ‘पक्ष’ शब्द आया है — इसी से ‘पक्षी’ बना है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी
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पहेली 3: बाग म जो सुगंध फैलाती, / फूल-फूल म बसती गाती, / हवा-हवा म घुल- मल जाए, / कौन है जो यह
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प्र.3
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नाम बताए?
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उत्तर है — सुर भ यानी सुगंध (महक)।
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पहेली का संकेत
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सुगंध पर कैसे लागू होता है
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बागों में जो सुग ंध फै लाती
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उपवन-बगीचे सुगंध से भर जाते ह
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फू ल-फू ल में बसती गाती सुगंध का घर फूल ही है
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वह दखती नह , हवा के साथ बहती है और दूर तक पहुँचती है
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हवा-हवा में घुल -िमल जाए
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कs वता से प्रमाण: माँ उपवन का वणन करते हुए कहती है — “जहाँ, सुर भ मनमानी।” यानी वहाँ सुगंध अपनी
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a gl मनमानी कर रही थी, जहाँ चाहे वहाँ फैल रही थी। यहाँ सुगंध को मनुष्य क तरह ‘मनमानी करते’ दखाया गया है —
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यह मानवीकरण है।
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खोजबीन के लए — पृष्ठ 13
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे प रयोजना
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agl प्र.1 खोजबीन के लए— • माँ, कह एक कहानी • हंस कसका • मै थलीशरण गुप्त ारा एक क वता का पाठ
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(channel=PrasarBharatiArchives)
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यह खोज और सुनने क ग त व ध है। पुस्तक ने तीन चीज़ ढूँ ढ़ने को कही ह। इन्ह अपने शक्षक या बड़ क सहायता से
पुस्तकालय, इंटरनेट या प्रसार भारती के संग्रह म खो जए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
क्या खोजना है कहाँ और कैसे खोजकर क्या लख
माँ, कह एक कहानी यह अंश यशोधरा से लया गया है। पुस्तकालय म मै थलीशरण पाठ्यपुस्तक वाले अंश से आगे क पं क्तयाँ
— पूरी क वता गुप्त क यशोधरा दे खए; कई गायक ने इसे गाया भी है। पढ़कर ल खए क कहानी आगे कहाँ जाती है।
हंस कसका यह इसी घटना पर आधा रत प्र सद्ध कथा है — सद्धाथ और कथा म न्यायालय का नणय क्या हुआ, और
घायल हंस क । बाल-प त्रकाओं, कथा-संग्रह और नाट्य- वह क वता के बालक के नणय से कतना
रूपांतरण म मलती है। मलता है — यह तुलना क जए।
मै थलीशरण गुप्त प्रसार भारती अकाइव्स (channel = सुनकर ल खए — क व कन शब्द पर ठहरते
ारा एक क वता का PrasarBharatiArchives) म क व क अपनी आवाज़ का ह, आवाज़ कहाँ ऊँची-नीची होती है, और
पाठ रकॉड सुर क्षत है। सुनकर क वता का अथ कतना अ धक खुलता
है।
क व के बारे म जो पता चलना चा हए:
मै थलीशरण गुप्त (1886–1964) — जन्म चरगाँव, झाँसी (उत्तर प्रदे श) म।
पंद्रह-सोलह वष क आयु म ही क वता करने लगे थे; पहले ब्रज भाषा म, फर आजीवन खड़ी बोली हद म लखा।
स्वतंत्रता आंदोलन म उनक रचनाओं ने लोग म दे शप्रेम जगाया; वे राष्ट्रक व कहलाए।
प्रमुख काव्य-कृ तयाँ — साकेत, भारत-भारती और यशोधरा।
सुझाव: कक्षा म एक ‘सुनने का दन’ र खए — क वता का रकॉड कया हुआ पाठ सु नए, फर वही पं क्तयाँ आप
स्वयं दो भू मकाओं (माँ और राहुल) म बाँटकर सुनाइए। दोन म क्या अंतर लगा, यह भी ल खए।
अध्याय — एक नज़र म
माँ, कह एक कहानी मै थलीशरण गुप्त क क वता है, जो उनक काव्य-कृ त यशोधरा से ली गई है। इसम बालक राहुल
अपनी माँ यशोधरा से कहानी सुनाने क हठ करता है और माँ उसे उसके पता सद्धाथ (बाद म गौतम बुद्ध) क एक घटना
सुनाती है।
कहानी यह है — एक सबेरे सद्धाथ उपवन म घूम रहे थे। वहाँ फूल खले थे, ओस क बूँद झल मला रही थ और पक्षी गा रहे
थे। तभी एक हंस तीर से बधकर गर पड़ा। सद्धाथ ने उसे उठाकर उसक सेवा क और उसे मानो नया जीवन दे दया।
तभी आखेटक ( शकारी) आ पहुँचा और घायल पक्षी को अपना ‘लक्ष्य’ बताकर माँगने लगा। सद्धाथ ने दे ने से मना कर दया।
दोन म ववाद हुआ — एक सदय (दयालु) था, दूसरा नदय। बात न्यायालय तक जा पहुँची।
क वता का सबसे सुंदर मोड़ यह है क माँ कहानी का अंत स्वयं नह करती। वह कहती है — “राहुल, तू नणय कर इसका”।
बालक उत्तर दे ता है — “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!” यानी न्याय हमेशा बचाने वाले का पक्ष लेता है,
मारने वाले का नह ।
क वता क शैली संवादात्मक है — हर बार माँ एक पद कहती है और बेटा उसक अं तम पं क्त दोहराकर प्रश्न पूछता है। इस
आवृ त्त से क वता म लय, ज ासा और नाटक यता आ जाती है।
काव्य-स दय म अनुप्रास (“कोमल-क ठन कहानी”, “हुई पक्ष क हानी”), पुनरु क्त (“वण वण के फूल”), वपरीताथक
युग्म (सदय- नदय, कोमल-क ठन) और प्रकृ त- चत्रण (उपवन, हम- बदु, झ के, लहराता पानी) दे खने योग्य ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
चेट दासी, से िवका “कहती है मुझसे यह राजकुमारी क चेट उसके लए फूल लेकर
चेट ” आई।
मानधन िजसका धन ‘मान’ है; प्यार से पुक ारने का शब्द — “तू है हठ मानधन मेरे” माँ ने बेटे को गोद म लेकर कहा — “मेरे
मेरे मान-सम्मान वाले पुत्र मानधन, अब सो जा।”
तात िपता (आदर के साथ); पूज्य “तात भ्रमण करते थे तात के बताए माग पर चलना ही सबसे बड़ा
तेरे” सम्मान है।
सुर भ सुग ंध , महक “जहाँ, सुर भ मनमानी।” रातरानी क सुर भ पूरे आँगन म भर गई।
हम- बदु ओस की बूदँ े ं “झलमल कर हम- बदु सुबह घास पर हम- बदु मोती-से चमक रहे
झले थे” थे।
खग पक्षी “गाते थे खग कल कल भोर होते ही खग अपने घ सल से नकल
स्वर से” पड़े।
बद्ध िबंध ा हुआ , तीर से घायल “ गरा, बद्ध होकर खर- बाण से बद्ध हरण झा ड़य म गर पड़ा।
शर से”
खर-शर तेज़ धार वाला तीर (खर = तीखा, शर = बाण) “ गरा, बद्ध होकर खर- खर-शर लगते ही पक्षी नीचे आ गरा।
शर से”
आखेटक िशकारी, आखेट (िशकार) करने वाला “इतने म आखेटक आखेटक जाल लेकर जंगल क ओर बढ़ा।
आया”
आहत घायल, चोट खाया हुआ “माँगा उसने आहत आहत खलाड़ी को तुरंत अस्पताल भेजा
पक्षी” गया।
रक्षी रक्षा करने वाला, रक्षक “तेरे तात कतु थे रक्षी” अ ा राजा अपनी प्रजा का रक्षी होता है।
खगभक्षी पिक्षयों को मारकर खाने वाला “तब उसने, जो था खगभक्षी बाज आकाश म मंडरा रहा था।
खगभक्षी–”
सदय / दया करने वाला / दया न करने वाला — दोनों “हुआ ववाद सदय- नदय सदय व्य क्त दूसर का दुख दे खकर रुक
नदय िवपरीताथक शब्द है ं म” जाता है, नदय नह ।
उभय दोनों “उभय आग्रही थे उभय पक्ष ने अपनी-अपनी बात न्यायालय म
स्व वषय म” रखी।
नरपराध िजसका कोई अपराध न हो, बेक सूर “कोई नरपराध को मारे” नरपराध को दं ड दे ना सबसे बड़ा अन्याय है।
गुनी ग नु ले ना = समझ ले ना, िवचार कर ले ना “तूने गुनी कहानी।” उसने बात को गुनकर ही उत्तर दया।
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