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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: अन्वेषण — माध्य मक व ान
के संसार म प्रवेश
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1–7 11 13 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 16 pages
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कक्षा 9 व ान अध्याय 1 अन्वेषण — माध्य मक व ान के संसार म प्रवेश AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: अन्वेषण — माध्य मक व ान के
संसार म प्रवेश
अन्वेषण का यह प्रारं भक अध्याय कसी एक वषय पर नह , अ पतु इस बात पर है क व ान काय कस प्रकार करता है। इसम बताया गया है क
व ान सरलीकृत मॉडल क्य बनाता है, सट क शब्द , सहमत प्रतीक व मानक (SI) इकाइय तथा भाषा के रूप म ग णत पर बल क्य दे ता है,
नयम, सद्धांत और आधारभूत सद्धांत का वास्त वक अथ क्या है, पूवानुमान तथा अनुमान का उपयोग कैसे होता है, और भौ तक , रसायन, जीव
व ान व पृथ्वी व ान के बीच क वभाजन रेखाएँ हमारे ारा बनाई गई ह, प्रकृ त ारा नह ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
अन्वेषण (कक्षा 9) 1–7
खं ड प्रश्न
11 13
माध्यम
हन्द
उदाहरण 1.1 — पृष्ठ 2
व ान मॉडल का उपयोग क्य करता है
उदाहरण
प्र.1 केट का एक शॉट। कल्पना क जए क एक केट क गद को छक्का लगाने के लए बल्ले से मारा जाता है।
य द आप इसका एक सरल मॉडल तैयार करना चाहते है तो आप इनम कौन-से ववरण स म लत करगे? और
कन ववरण को अनावश्यक मानकर छोड़ दगे?
सवप्रथम वह प्रश्न न त क जए जसका उत्तर मॉडल को दे ना है — “क्या गद सतह पर टकराए बना सीमारेखा को पार कर
जाएगी?” मॉडल म क्या रखना है और क्या छोड़ना है, यह इसी एक प्रश्न से तय होता है।
मॉडल म र खए क्य आवश्यक है छोड़ द जए
गेंद का द व्यमान बल्ले क चोट से गद कतनी तेज़ होगी, यह इसी से तय होता है बल्ले का बांड
पहार के तुर ंत बाद की चाल (u) परास u² के अनुपात म बढ़ती है गेंद का रंग
पहार की िदशा (कोण) चाल ऊँचाई और दूरी म कस अनुपात म बँटेगी मैद ान पर घास की मात्र ा
पहार के समय बल्ले की ऊँचाई प्रभाव छोटा है, पर परास म कुछ जुड़ जाता है सीम पर धागों की िसलाई
सीमारे खा की दू र ी उत्तर क तुलना इसी संख्या से करनी है गेंद का घूणन
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इतनी-सी रा शय के साथ गद को केवल गुरुत्व के अधीन ग तमान एक बदु मान लेना पयाप्त है। य द u = 30 m s⁻¹ और कोण
45° हो तो —
परास R = u² sin 2θ / g
R = (30 m s⁻¹)² × sin 90° / (9.8 m s⁻²)
R = 900 m² s⁻² ÷ 9.8 m s⁻²
R = लगभग 92 m — 70 m की सीमारेखा से कही ं आगे
ऐसा क्य होता है: मॉडल क परख इस बात से नह होती क उसम वास्त वक संसार कतना समाया है, अ पतु
इससे होती है क वह पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे ता है या नह । गद का रंग चाल, कोण और दूरी को जोड़ने वाले कसी
भी समीकरण म आ ही नह सकता, इस लए उसे रखने से प रश्रम बढ़े गा, सट कता नह । वायु प्र तरोध, घूणन और
सीम का प्रभाव वास्त वक अवश्य है — ये एक बड़े शॉट क दूरी दस मीटर या उससे अ धक घटा सकते ह — परंतु u
और θ के प्रभाव के सामने ये न्यून ह, अतः पहले मॉडल म इन्ह छोड़ दया जाता है। जैसे-जैसे मॉडल अ धक ज टल
बनाया जाता है, अ धक सट कता हेतु ये ववरण जोड़ लए जाते ह।
स्वयं जाँ चए: इसी सूत्र म u = 25 m s⁻¹ र खए। R = 625/9.8 ≈ 64 m — अब गद 70 m क सीमारेखा के
भीतर ही गरेगी। बल्ले क चाल म केवल 5 m s⁻¹ क कमी छक्के को कैच म बदल दे ती है — यही कारण है क
मॉडल u को रखता है और बल्ले का ांड छोड़ दे ता है।
याकलाप 1.1 — आइए, मॉडल बनाएँ — पृष्ठ 2
अपना मॉडल स्वयं बनाइए
याकलाप
प्र.1 मान ली जए आप अपने व ालय से घर तक साइ कल चलाकर जाते ह। आपको व ालय से घर तक पहुँचने म
लगने वाले समय पर एक मॉडल तैयार करना है। आप अपने मॉडल म कन ववरण को स म लत करगे और
कन ववरण को अनदे खा करगे? सुझाव द जए क कुछ ववरण को अनदे खा करना वास्तव म क्य उपयोगी हो
सकता है।
मॉडल को केवल एक संख्या नकालनी है — समय t। अतः हर वह रा श र खए जो t को एक-दो मनट से अ धक बदलती है, शेष
छोड़ द जए।
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स म लत क जए समय पर प्रभाव अनदे खा क जए
िव ालय से घर की दू र ी t इसके समानुपाती बढ़ता है साइिकल का रंग व बनावट
आपकी औसत चाल t इसके व्युत्क्रमानुपाती है आपने क्या पहन रखा है
रुकावटों की संख्या व अविध (िसग्नल, फाटक) कुछ मनट सीधे जुड़ जाते ह सड़क का हर ग ा अलग -अलग
सड़क की ढाल, तेज़ सामने की हवा औसत चाल 10–20% तक बदल दे ती है मन में बजते गीत
3 km क दूरी, 12 km h⁻¹ क औसत चाल तथा लगभग 90 s वाले दो सग्नल मानकर बनाया गया मॉडल —
चलने का समय = दू री ÷ औसत चाल
= 3 km ÷ 12 km h⁻¹ = 0.25 h = 15 िमनट
रुकने का समय = 2 × 90 s = 180 s = 3 िमनट
कु ल समय t = 15 िमनट + 3 िमनट = 18 िमनट
ववरण अनदे खा करना क्य उपयोगी है: तीन कारण, और तीन महत्त्वपूण ह।
जो बचा है, उसे वास्तव म मापा जा सकता है। दूरी और औसत चाल ओडोमीटर तथा घड़ी से ात क जा
सकती ह। सड़क के हर मीटर पर हवा कतनी थी, यह नह । जस मॉडल के लए अमाप्य आँकड़े चा हए, वह
कोई उत्तर दे ता ही नह ।
छोड़े गए ववरण का प्रभाव दै नक उतार-चढ़ाव से भी छोटा है। आपका अपना समय ही प्र त दन दो-तीन
मनट बदलता रहता है। जो ववरण उत्तर को दस सेकंड बदलता है, वह इसी उतार-चढ़ाव म दब जाएगा।
सरल मॉडल का परीक्षण और सुधार संभव है। एक सप्ताह अपना समय ना पए। य द वास्त वक समय सदै व
22 मनट आता है, 18 नह , तो एक ही बात गलत है — प्रायः मानी गई चाल — और उसे सुधारा जा सकता है।
बीस रा शय वाले मॉडल म यह पता ही न चलता क दोष कसका है।
यह क जए: अवकाश के दन, जब यातायात न हो, उसी माग पर जाइए। य द समय घटकर लगभग 15 मनट रह
जाए तो मॉडल का ‘रुकावट’ वाला पद सत्या पत हो गया। यही तो है — मॉडल का प्रेक्षण से परीक्षण, ठ क वैसे ही
जैसे वै ा नक करते ह।
ज ासा-सूत्र — पृष्ठ 3
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व ान क साझा भाषा — प्रतीक और मात्रक
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ज ासा-सू त्र
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a s em के वेग को ‘c’ से क्य नरू पत कया जाता है?
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प्रकाश
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प्र.1
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क्य क c लै टन शब्द सेले रटास (celeritas) से आया है, m .
a s e जसका अथ है ग त — यह कसी अंग्रेज़ी शब्द का पहला अक्षर नह है।
a l तय से आते ह। ये सु वधा के लए हर लेखक ारा बनाए गए सं क्षप्त रूप
वै ा नक प्रतीक प्रायः इ तहास और अंतरा ीयgसहम
नह होते।
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इसी लए कई प्रतीक भाषा से मेल नह खाते — धारा के लए I ( च intensité de courant से), आवेश के लए q, लोहे केm
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लए Fe (लै टन ferrum)।
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वतमान म प्रकाश क ग त एक न त भौ तक स्थरांक है। इसका मान ठ क 299792458 m/s प रभा षत कया गया है —
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मापा हुआ नह , प रभा षत।
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ऐसा क्य है: कसी प्रतीक का अथ केरल के व ाथ , जापान के शोधकता और ाज़ील म छपी पुस्तक — सबके
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लए एक ही होना चा हए। य द हर कोई अपनी भाषा म संक्षेप बनाता तो समीकरण सीमाओं के पार पढ़े ही नह जा
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सकते। और एक बार प्रतीक पर अंतरा ीय सहमmत बन जाए तो उसे बदलने पर पहले से लखी हर पुस्तक और
se सक चयन आज भी चलता है।
शोध-पत्र अथहीन हो जाएँगे — इस लए lऐaतहा
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क्या आप जानते ह? चूँ क c अब एक प रभा षत संख्या है, इस लए मीटर c पर नभर करता है, न क c मीटर पर
m a s emअब कोई प्रयोग c को
— एक मीटर वह दूरी है जो प्रकाश नवात म 1/299792458 सेकंड म तय करता है। अतः
और cसट
. l है।
o क नह माप सकता; ऐसा कोई भी सुधार केवल मीटर को अ धक सट aकgबनाता
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कलोग्राम का उपयोग सभी मापन काय म क्य कया जाता है?
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प्र.2
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ता क एक कलोग्राम का तात्पय प्रत्येक दुकान, प्रत्येक प्रयोगशाला और प्रत्येक दे श म ठ क एक ही मात्रा हो।
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मापन स्थानीय वस्तुओं या व्य क्तगत वचार पर नह , अंतरा ीय मानक पर आधा रत होते ह।
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मानक इकाइय से वै ा नक प रणाम क तुलना संभव होती है — जस अ भ क्रया म 5 g पदाथ चा हए, वह दल्ली और
.cबoलन दोन म वही 5 g है। a g
m इससे दै नक जीवन व व्यापार म नष्पक्षता भी सु न त होती है। एक कलोग्राम चावल या सब्ज़ी खरीदते समय आप हर वक्रेता
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से समान मात्रा क अपेक्षा करते ह।
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ऐसा क्य है: मापन वास्तव म एक तुलना है — आप पूछ रहे होते ह क “यह मानक इसम कतनी बार समाता है?”
य द दो व्य क्त भन्न मानक ल तो दोन के पूरी सावधानी से लए गए मान भी आपस म तुलनीय नह रहगे। SI पद्ध त
का उ े श्य यही है क प्रत्येक रा श का एक ही मानक तय हो, जससे संख्या सूचना दे , भ्रम नह । इसी अध्याय वाले
वमान का ईंधन इसी कारण समाप्त हुआ था — कमचारी दल ने घनत्व पाउं ड प्र त लीटर म नकाला और उसे
कलोग्राम प्र त लीटर मान लया, जससे आवश्यक 22,300 कलोग्राम ईंधन म से वमान लगभग 15,000 लीटर
कम लेकर उड़ा।
क्या आप जानते ह? वष 2019 तक कलोग्राम क प रभाषा पे रस के पास रखे एक धातु बेलन से होती थी —
ठ क वैसी ही ‘स्थानीय वस्तु’ जससे यह बॉक्स सावधान करता है — और उसका द्रव्यमान धीरे-धीरे घट रहा था।
अब कलोग्राम प्रकृ त के एक न त स्थरांक से प रभा षत है, अतः कसी दे श को मानक सँभालकर रखने क
आवश्यकता नह ।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 4
नयम, सद्धांत, आधारभूत सद्धांत और पूवानुमान
सो चए और बताइए
प्र.1 उस पूवानुमान के वषय म वचार क जए जो वतमान म आपने या आपके प रवार के कसी सदस्य ने कया हो
(जैसे — केट मैच के प रणाम का पूवानुमान)। क्या यह पूवानुमान प्रमाण और तक पर आधा रत था या मात्र
अनुमान पर? वचार क जए क वै ा नक सोच कस प्रकार से ऐसे पूवानुमान म सुधार ला सकती है?
कसी भी पूवानुमान को एक ही कसौट पर पर खए — क्या कोई दूसरा व्य क्त उन्ह आँकड़ से इसक जाँच कर सकता है? य द हाँ,
तो वह प्रमाण पर आधा रत है; य द वह केवल मन क बात है, तो मात्र अनुमान है।
नमूना उत्तर: एक दवसीय मैच से पहले मेरे चाचा ने कहा, “भारत जीतेगा, इस मैदान पर तो सदै व जीतता ही है।” यह कुछ हद तक
प्रमाण था, पर अ धकतर अनुमान। इसम एक वास्त वक पैटन (घरेलू मैदान का रकॉड) तो था, परंतु पच क स्थ त, खला ड़य क
चोट और कौन-सी ट म बाद म बल्लेबाज़ी कर रही है — इन सबक उपेक्षा थी।
वै ा नक सोच इस पूवानुमान को चार चरण म सुधारती है —
1. इसे ऐसे क हए क यह गलत सद्ध हो सके। “भारत जीतेगा” परीक्षण योग्य है। “भारत अ ा खेलेगा” नह , क्य क यह कब
असफल हुआ, इस पर कोई सहम त नह बन सकती।
2. महत्त्वपूण रा शयाँ पहचा नए। उस मैदान का जीत- रकॉड, पहली पारी का औसत स्कोर, सूयास्त के बाद ओस, आरं भक
गदबाज़ का औसत।
3. स्मृ त नह , पछले आँकड़े ली जए। य द उस मैदान के पछले 20 मैच म से 13 बार बाद म बल्लेबाज़ी करने वाली ट म जीती
है, तो यह मापा हुआ 65% है — “सदै व जीतता है” से कह बेहतर आधार।
4. प रणाम जाँ चए और सुधार क जए। य द पूवानुमान बार-बार असफल होता है तो उसके पीछे क धारणा गलत है; उसे
बदलना चा हए, उसका बचाव नह करना चा हए।
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ऐसा क्य है: कोई पूवानुमान इस लए वै ा नक नह होता क वह सही नकला, अ पतु इस लए क वह मापन योग्य
रा शय से बना है और गलत सद्ध कया जा सकता है। संयोग से सही नकला अनुमान कुछ नह सखाता, क्य क
यह पता ही नह चलता क तक का कौन-सा भाग काम आया। इसके वपरीत, असफल हुआ तकयुक्त पूवानुमान
वास्तव म उपयोगी है — वह सीधे उस धारणा क ओर संकेत करता है जसम सुधार चा हए। वै ा नक असफल
पूवानुमान का उपयोग ठ क इसी प्रकार करते ह।
उदाहरण 1.2 — पृष्ठ 4
पूवानुमान को परीक्षण योग्य बनाना
उदाहरण
प्र.1 हम पूवानुमान कस प्रकार लगाएँ? वषा ने अपनी सहेली मेघना को बताया, “आज दोपहर म वषा होगी क्य क
बादल काले दखाई दे रहे ह।” उन प्रश्न के वषय म सो चए जो मेघना ारा वषा से पूछे जा सकते ह जससे इस
पूवानुमान को वै ा नक रूप से परीक्षण योग्य बनाया जा सके।
मेघना को ऐसे प्रश्न पूछने चा हए जो मापन योग्य प्रमाण और पछले पैटन माँग — जनके उत्तर संख्याएँ ह , वचार नह ।
“जब पछली बार वषा हुई थी तो आकाश क स्थ त क्या थी?”
“आज आद्रता का स्तर कतना है? क्या वगत समय म यह 80 प्र तशत थी?”
“आज वायु क ग त और दशा क्या है?”
“क्या तापमान वैसे ही कम हो गया है जैसा हाल क वषा से पूव हुआ था?”
“ पछले एक माह म कतनी बार काले बादल दखे और तीन घंटे के भीतर वषा भी हुई?”
साथ ही मेघना को कथन को ही अ धक स्पष्ट कराना चा हए, जससे बाद म उसक जाँच हो सके —
अस्पष्ट: “आज दोपहर में वष होगी।”
परीक्षण योग्य: “ आज यहाँ दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे के बीच मापन यो य वष होगी।”
ग्
ऐसा क्य है: जन प्रश्न का उत्तर केवल हाँ या ना म होता है (“क्या बादल काले ह?”) वे बहुत उपयोगी नह होते,
क्य क उनका उत्तर तो वषा के कथन म पहले से ही है और वह अ े पूवानुमान को संयोग से अलग नह कर पाता।
काले बादल एक वास्त वक संकेत अवश्य ह — इनका अथ है मोटे , जल से भरे बादल — परंतु ये अकेले पयाप्त
नह ; काले बादल प्रायः बना बरसे नकल भी जाते ह। परीक्षण योग्य पूवानुमान के लए एक मापन योग्य रा श
(आद्रता, तापमान क प्रवृ त्त, वायु), एक ान व समय-सीमा, और तुलना के लए पछला रकॉड — तीन
चा हए। तभी मेघना बाद म ईमानदारी से कह सकेगी क पूवानुमान सही नकला या नह ।
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संकेत: यही तीन बात — मापन योग्य रा श, न त समय-सीमा और जाँच के लए रकॉड — कसी भी रोज़मरा के
दावे (“यह बस सदै व दे र से आती है”, “यह साबुन अ धक चलता है”) को वास्तव म परखने योग्य बना दे ती ह।
आइए, और आगे बढ़ — पृष्ठ 5
पूवानुमान क सीमाएँ
आइए, और आगे बढ़
प्र.1 मौसम संबंधी पूवानुमान कभी-कभी त्रु टपूण क्य हो जाते ह?
क्य क मौसम अनेक साथ-साथ बदलती रा शय पर नभर करता है, और आज क प र स्थ तय का अत्यंत सूक्ष्म अंतर भी कुछ दन
म पूरी तरह भन्न मौसम बन जाता है।
वायुमंडल क स्थ त ताप, दाब, आद्रता और वायु से तय होती है — हर स्थान पर और हर ऊँचाई पर।
पूवानुमान इन मापन को एक मॉडल म डालकर कया जाता है। परंतु मापन कद्र और उपग्रह कई कलोमीटर क दूरी पर ह,
अतः उनके बीच क स्थ त अनुमान से भरनी पड़ती है।
इस आरं भक चत्र क छोट -सी त्रु ट छोट नह रहती। वह दुगुनी होती है, फर दुगुनी — और कुछ दन म स्वयं मौसम जतनी
बड़ी हो जाती है।
आज एक स्थान पर त्रुिट ≈ 0.1 °C
लगभग पत्येक 1–2 िदन में दुगन
ु ी
8 िदन बाद ≈ 0.1 °C × 2⁵ ≈ 3 °C — पूरे मौसम-पिरवतन िजतनी बड़ ी
ऐसा क्य होता है: वायुमंडल केवल ज टल नह , संवेदनशील है। वायु-प्रवाह के समीकरण स्वयं पर लौटते ह —
थोड़ा गम भाग कुछ तेज़ी से ऊपर उठता है, जससे और वायु खचती है, जससे बादल खसकता है, जससे सूय
अगली जगह ज़मीन गम करता है। यही कारण है क पूवानुमान कुछ घंट , यहाँ तक क कुछ दन के लए तो
वश्वसनीय रहते ह, कतु आगे क अव ध के लए उनक वश्वसनीयता घटती जाती है। ध्यान द जए क कारण यह
नह है क भौ तक गलत है या मॉडल खराब बना है — सीमा इस बात से आती है क आरं भक स्थ त कभी पूणतः
मापी ही नह जा सकती।
क्या आप जानते ह? इसी कारण मौसम व ानी एक ही मॉडल को थोड़ी-थोड़ी भन्न आरं भक स्थ तय से कई बार
चलाते ह। य द 50 म से 45 बार वषा आती है तो वे कहते ह “वषा क 90% संभावना”। इन प रणाम का फैलाव ही
इस बात का ईमानदार माप है क पूवानुमान पर कतनी दूर तक भरोसा कया जा सकता है।
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ज ासा-सूत्र — पृष्ठ 5
वै ा नक प्रश्न से दावे क जाँच
ज ासा-सू त्र
प्र.1 सोशल मी डया पर तीव्र ग त से फैलने वाले (वायरल) दाव क जाँच — क्या ग्रहण के समय भोजन करना
हा नकारक है?
नह । यह दावा उसी क्षण टू ट जाता है जब आप पूछते ह क ग्रहण भोजन म आ खर कौन-सा भौ तक प रवतन करता है।
बॉक्स म सुझाए गए सरल वै ा नक प्रश्न एक-एक करके पू छए —
प्रश्न प्रमाण से मला उत्तर
भौितक रूप से ग हण है क्या? के वल छायाओं का खेल — चंद मा सूय और पथ्ृ वी के एक भाग के बीच आ जाता है
क्या ताप में कोई महत्त्वपूण पिरवतन आता है? कु छ िमनटों के िलए ताप कु छ °C घटता है, िफर लौट आता है — सूय स्त से भी कम पिरवतन
क्या छाया में रखा भोजन खराब हो जाता है? नही ं। पेड़ की छाया में रखने से भोजन खराब नही ं होता
क्या कोई नया िविकरण उत्पन्न होता है? कोई नही ं। धरती पर सूय का पकाश कम पहच
ु ँ ता है, अिधक नही ं
ऐसा क्य है: भोजन खराब होने का एक ही कारण है — सूक्ष्मजीव क वृ द्ध, जसे ऊष्मा, नमी और समय बढ़ाते
ह। ग्रहण इनम से कसी को नह बदलता; ताप म जो थोड़ी कमी आती है वह उल्टे सूक्ष्मजीव को कुछ धीमा ही
करती है। अतः ऐसा कोई भौ तक, रासाय नक या जै वक प्रमाण नह है जससे ग्रहण भोजन को हा नकारक बना
सके। यह दावा प्रमाण से नह , इस कारण टका हुआ है क ग्रहण एक वरल और नाटक य घटना है और लोग
स्वाभा वक रूप से उसे अपने आस-पास क हर बात से जोड़ लेते ह।
संकेत: कसी भी वायरल दावे पर यही तीन प्रश्न लगाइए — (1) दावा ठ क-ठ क क्या है, मापन योग्य शब्द म? (2)
इसे उत्पन्न करने वाली क्रया व ध क्या हो सकती है? (3) कौन-से आँकड़े इसे दखाएँगे? जो दावा तीन पर असफल
हो, वह ‘अप्रमा णत’ नह , नराधार है।
आइए, और आगे बढ़ — पृष्ठ 6
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वै ा नक कौशल के रूप म अनुमान
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आइए, और आगे बढ़
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a s emचार सदस्यीय प रवार के लए एक माह म कतना चावल पयाप्त होगा?
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mगई धारणा के अंतगत क प रवार क संपूण ऊजा केवल चावल से ही
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लगभग 70–80 kg क ा चावल — इस जानबूझकर मानी
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आती है।
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एक वयस्क को पितिदन ≈ 2000 – 2500 kcal, मान लीिजए 2250 kcal
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चार सदस्यों का पिरवार ≈ 4 × 2250 kcal ≈ 9000 kcal पितिदन
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s e g पका हुआ चावल लगभग 130 kcal ऊज दे त ा है
a glaपितिदन पका चावल = 9000 kcal ÷ (130 kcal / 100 g)
= 9000 ÷ 1.3 g ≈ 6900 g ≈ 6.9 kg पितिदन
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एक माह में = 6.9 kg × 30 ≈ 208 kg पका हm
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a l गुना हो जाता है
पकने पर चावल का द व्यमान लगभग g2.7
अतः कच्चा चावल ≈ 208 ÷ 2.7 = लगभग 77 kg
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अब वही क जए जो बॉक्स वास्तव म कहता है — जाँ चए क उत्तर का कोई सही अथ बनता है या नह —
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एक माह के लए 100 g तो स्पष्टतः बहुत कम है (यह तो एक छोटा भोजन भर है)।
agl कुछ टन बहुत अ धक है (एक टन चावल एक छोटे कमरे को भर देगा)।
77 kg बाज़ार म मलने वाली 50 kg क लगभग डेढ़ बोरी है — इतना चावल एक प रवार रख भी सकता है और एक माह म
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समाप्त भी कर सकता है। अनुमान उ चत है।
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s क खरीद से लगभग दुगुना आता है, और यह त्रु ट नह — यह हमारी
ऐसा क्य होता है: उत्तर वास्त वकlपaरवार
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धारणा स्वयं दखा रही है। वास्त वक भोजन म दाल, तेल, सब्ज़ी और दूध भी होते ह; अकेले तेल म लगभग 900
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kcal प्र त 100 g होती है। जब 9000 kcal म से केवल एक भाग चावल से आना है, तो चावल घटकर लगभग
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35–40 kg प्र त माह रह जाता है, जो वास्त वक खपत के काफ़ नकट है। अनुमान का मूल्य यही है — वह सट क
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.cउसेo स्पष्ट करके सुधारने योग्य बना दे ता है। g
होने के लए नह होता, पर वह बता दे ता है क उत्तर कलोग्राम क दहाई म है, और जस धारणा से वह नकला है
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स्वयं जाँ चए: चावल के पैकेट पर छपा कैलोरी-मान और अपने घर के सदस्य क संख्या लेकर ऊपर क पं क्तयाँ
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दोहराइए। य द आपका उत्तर 30 kg से 100 kg प्र त माह के बीच कह आता है तो आपका तक सही है — सट क
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संख्या कभी उ े श्य थी ही नह ।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 1 अन्वेषण — माध्य मक व ान के संसार म प्रवेश AglaSem · NCERT Solutions
उदाहरण 1.3 — पृष्ठ 6
दो स्वतंत्र माग से अनुमान
उदाहरण
प्र.1 अनुमान लगाइए क एक दन म आप कतने लीटर वायु ास म लेते ह। इसका अनुमान यहाँ से प्रारंभ क जए क
एक मनट म आप कतनी बार ास लेते ह और एक ास म वायु का कतना आयतन प्रयुक्त होता है। आपका
उ े श्य सट क उत्तर प्राप्त करना नह है अ पतु एक उ चत अनुमान लगाना है।
लगभग 10,000 लीटर, अथात प्र त दन लगभग 10 m³ वायु।
माग 1 — श्वासों की संख्या × एक श्वास का आयतन
िव ाम की िस्थित में श्वास दर ≈ 12 – 15 बार पित िमनट
एक िदन में िमनट = 60 × 24 = 1440 िमनट
पितिदन श्वास = 12 × 1440 से 15 × 1440 = 17280 से 21600
≈ 18 – 22 हजार, अथ त लगभग 20 हजार वास पितिदन
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एक श्वास का आयतन: लगभग 2 लीटर के गुब्बारे को भरने में 4 – 5 श्वास लगती है ं
अतः एक श्वास ≈ 2 L ÷ 4 = 0.5 लीटर
पितिदन वायु = 20000 × 0.5 L = 10,000 लीटर
माग 2 — गुब्बारे से स्वतं त्र जाँच
एक गुब्बारा फु लाने में लगभग 20 s → पित िमनट 3 गुब्बारे
(3 गुब्बारे / िमनट) × (2 लीटर / गुब्बारा) × (1440 िमनट / पितिदन)
= 3 × 2 × 1440 L = 8640 लीटर पितिदन
दोन माग से 10,000 L और 8640 L मलते ह — अंतर लगभग 14%। अनुमान के लए यह उत्तम सहम त है, अतः “लगभग दस
हजार लीटर” वाला उत्तर वश्वसनीय है।
जाँच क्य आवश्यक है: अकेला अनुमान बना कसी चेतावनी के बहुत गलत हो सकता है, क्य क एक असावधान
गुणक 10 पूरा उत्तर बदल दे ता है। भन्न धारणाओं पर बने दो माग प्रायः एक ही दशा म गलत नह होते, इस लए
उनका मेल वास्त वक प्रमाण है। यह भी ध्यान द जए क दोन माग पूणतः स्वतंत्र नह ह — दोन म 2 लीटर वाला
गुब्बारा प्रयुक्त हुआ है — अतः यह जाँच वास्तव म श्वास-दर वाले चरण को परखती है, और उसक पु ष्ट करती है।
एक ईमानदार चेतावनी भी है: लगातार गुब्बारे फुलाते रहने पर हम कुछ ही मनट म थक जाएँगे, जब क आराम से
श्वास लेने म ऐसा नह होता, क्य क बलपूवक श्वास लेने म पेशीय काय कह अ धक होता है।
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क्या आप जानते ह? 10,000 लीटर = 10 m³, अथात लगभग 2 m × 2 m × 2.5 m का एक बॉक्स — कसी
छोटे स्नानघर के आयतन जतना। इस अनुमान म लया गया 0.5 लीटर प्र त श्वास भी संयोग नह है: वश्राम कर रहे
वयस्क का ज्वारीय आयतन (tidal volume) वास्तव म लगभग 500 mL होता है, अथात गुब्बारे वाला रोज़मरा
का तक ठ क उसी मान पर पहुँचता है जो च कत्सा म मापा गया है।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 6–7
अनुमान, सट कता और व ान क शाखाएँ
सो चए और बताइए
प्र.2 एक ऐसी त का वणन क जए जहाँ अनुमा नत उत्तर ही पयाप्त हो और एक ऐसी त भी जहाँ आपको
बहुत सट क मान क आवश्यकता हो।
नणय का नयम यह है — पू छए क उत्तर कतना बदलने पर आपका नणय बदल जाएगा। उतनी ही छू ट आपक आवश्यक
सट कता है, न अ धक न कम।
जहाँ अनुमा नत उत्तर पयाप्त है — व ालय क पक नक के लए चावल खरीदना।
80 िव ाथ × लगभग 150 g पका चावल पित व्यिक्त ≈ 12 kg
15 kg की बोरी ले लीिजए — 2 kg इधर-उधर होने से कु छ नही ं िबगड़ ता
यहाँ 15% क त्रु ट से थोड़ा-सा चावल अ धक आएगा, और कुछ नह । अनुमान लगाना आलस्य नह है; हर व ाथ क भूख नापना
नरथक प रश्रम होता।
जहाँ बहुत सट क मान चा हए — कसी ब े को द जाने वाली औष ध क मात्रा।
पैरािसटामोल की मात्रा = 15 mg पित kg शरीर द व्यमान
20 kg के बच्चे के िलए: 15 mg kg⁻¹ × 20 kg = ठीक 300 mg
ु ी मात्रा, बार-बार दे ने पर यकृ त को हािन पहुँच ाती है
इससे दुगन
यहाँ 100% क त्रु ट खतरनाक है, अतः ब े का द्रव्यमान और सरप क सांद्रता — दोन ठ क से मापने ह गे।
ऐसा क्य है: सट कता म समय, धन और उपकरण लगते ह, इस लए व ान उसे केवल वहाँ खच करता है जहाँ वह
प रणाम बदलती है। पक नक वाला नणय सहनशील है — अनेक उत्तर एक ही काय तक ले जाते ह, एक बोरी
खरीद लो। औष ध वाला नणय संवेदनशील है — संख्या म छोटा-सा प रवतन प रणाम को उपचार से हा न म बदल
दे ता है। यही अंतर पूरे व ान म चलता है: प्रयोग करने योग्य है या नह , यह तय करने के लए अनुमान पयाप्त है,
परंतु उस प्रयोग से नकलने वाला अं तम मापन उतना ही सट क होना चा हए जतना उपकरण अनुम त दे ।
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और उदाहरण: अनुमान पयाप्त — व ालय भ्रमण के लए कतनी बस, द वार के लए कतना रंग, कोई पुल-
अ भकल्प सही परास म है या नह । सट क मान आवश्यक — सुनार के यहाँ तौला गया सोना, मशीन के पुज़ का
व्यास, अंत रक्ष यान के इंजन के प्रज्वलन का समय।
प्र.3 कसी दै नक उपयोग क वस्तु (संभवतः एक प्रेशर कुकर या मोबाइल फोन) अथवा कोई वास्त वक समस्या
(संभवतः आपके व ालय के पास एक ै फक जाम क त) का चयन क जए। एक रूपरेखा तैयार क जए
जसम सूचीबद्ध हो क भौ तक , रसायन व ान, जीव व ान, पृथ्वी व ान, या ग णत से कस प्रकार के
दृ कोण उपरोक्त समस्या से संबं धत ह। यह भी दशाइए क आपके उदाहरण म व ान क कम-से-कम दो
शाखाएँ परस्पर कस प्रकार जुड़ी हुई ह।
नमूना उत्तर — प्रेशर कुकर। पहले प्रत्येक शाखा के वचार सूचीबद्ध क जए, फर उन्ह जोड़ने वाली ंखला दखाइए।
शाखा इसके वचार
भौितकी बंद भाप का दाब; दाब बढ़ ने पर क्वथनाक
ं बढ़ ना; तली से ऊष्मा का चालन; भार -वाल्व का बल -संतल
ु न
रसायन स्टाच कणों का जल सोखकर फू लना; पत्येक 10 °C वृिद्ध पर अिभि या दर का लगभग दुग नु ा होना; ऐलुिमिनयम व इस्पात का
िव ान चयन
जीव िव ान ऊष्मा से जीवाण ु व उनके बीजाण ु नष्ट होना; नरम स्टाच का सरल पाचन; िवटािमन C िकतना बचता है
पथ्ृ वी िव ान LPG एक जीवाश्म ईंध न है; कम समय पकाने से कम ईंध न और कम CO₂; पहाड़ों पर जल 100 °C से नीचे ही उबल जाता है
गिणत दाब–ताप ग ाफ पढ़ ना; बचे हुए ईंध न व समय की पितशत में गणना
दो शाखाएँ कैसे जुड़ती ह। भौ तक और रसायन एक ही ंखला से जुड़ी ह, जसे नीचे क रूपरेखा दशाती है —
भौितकी — ढक्कन बतन को बंद कर देता भौितकी — अिधक दाब पर जल 100 °C
है, अतः भाप का दाब बढ़ कर लगभग के स्थान पर लगभग 120 °C पर उबलता
2 × 10⁵ Pa (बाहरी दाब का दुगनु ा) हो जाता है। है, अतः भोजन अिधक गम होता है।
जीव िव ान — स्टाच शीघ नरम होता रसायन — पत्येक 10 °C विृ द्ध पर
है तथा इस ताप पर जीवाणु और उनके अिभि या दर लगभग दुगनु ी, अतः
बीजाणु नष्ट हो जाते है।
ं 20 °C विृ द्ध पर लगभग 4 गुनी।
गिणत और पथ्ृ वी िव ान — लगभग 4 गुनी दर का अथ है लगभग एक-चौथाई समय, अतः
लगभग एक-चौथाई LPG और लगभग एक-चौथाई CO₂ उत्सजन।
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एक ही ंखला, चार शाखाएँ — भौ तक का वचार (दाब से क्वथनांक बढ़ता है) रसायन के वचार (ताप से दर बढ़ती है) को आधार दे ता
है, जससे जै वक और पयावरणीय प रणाम नकलते ह।
ऐसा क्य होता है: कुकर इस लए तेज़ नह पकाता क भाप “दाब म” है — दाब अकेले चावल को नरम नह
करता। वह इस लए तेज़ पकाता है क दाब जल को बना उबलकर उड़े 120 °C तक पहुँचने दे ता है, और स्टाच को
नरम करने वाली रासाय नक अ भ क्रयाएँ ताप बढ़ने पर तेज़ी से बढ़ती ह। इनम से कोई एक कड़ी हटा द जए,
व्याख्या अधूरी रह जाएगी। अध्याय क मूल बात यही है — भौ तक , रसायन और जीव व ान के बीच वभाजन
ान को व्यव स्थत करने के लए हमने बनाए ह, जब क एक साधारण-सी दै नक वस्तु इन सबको एक साथ काट दे ती
है।
यह क जए: यही रूपरेखा मोबाइल फोन के लए बनाइए — भौ तक (रे डयो तरंग, बैटरी वोल्टता, स्पश-पटल क
धा रता), रसायन ( ल थयम-आयन सेल, काँच), जीव व ान (आँख 60 Hz क झल मलाहट को कैसे दे खती है),
पृथ्वी व ान (इसके लए खनन कए गए ख नज, ई-कचरा), ग णत (आँकड़ का संपीडन, त्रु ट-सुधार कूट)। फर
ऊपर क तरह दो शाखाओं को जोड़ने वाली एक ंखला ख चए।
आइए, और आगे बढ़ — पृष्ठ 7
वास्त वक समस्याओं के लए कई शाखाएँ एक साथ
आइए, और आगे बढ़
प्र.1 मास्क वास्तव म कस प्रकार काय करता है?
छानकर नह । मास्क इस लए काय करता है क्य क कण को कसी रेशे से टकराकर चपकने पर ववश कया जाता है, और तीन
भन्न आमाप के कण के लए तीन भन्न क्रया व धयाँ यह काय करती ह।
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1. संघट्ट (जड़ त्व से टकराव)
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भारी बूदँ ें (5 – 100 µm) इतनी भारी होती
se m है ं िक मुड़ती हईु वायु का साथ नही ं दे
g l a पाती ं और सीधे रेशे से टकरा जाती है। ं
a
omआमाप का कण (लगभग 1 µm) वायु
2. अवरोधन (छू कर रुक जाना)
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. cमध्यम
m के साथ मुड़ तो जाता है, पर इतना पास से ag
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िनकलता है िक रेशे को छू कर रुक जाता है।
3. िवसरण (टे ढ़ी-मेढ़ी गित)
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अत्यंत सूक्ष्म कण (0.1 µm से छोटे) वायु
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के अणुओ ं की टक्करों से इधर-उधर भटकते
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हुए कुछ ही परतों में िकसी रेशे पर जा लगते है।
ं
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धूसर वृत्त मास्क के एक-एक रेशे के अनुप्रस्थ काट ह। मास्क ऐसे हज़ार रेश का घना जाल है, अतः जो कण एक परत से बच नकलता है
a g उसे आगे अनेक परत मलती ह।
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अब वे शाखाएँ, ठ क जैसी बॉक्स म सूचीबद्ध ह —
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भौ तक — कणीय ग त व वै ुत् स्थै तक आकषण। बीच क मेल्ट-ब्लोन परत पर स्थायी आवेश होता है, जो उदासीन कण म
भी आवेश प्रे रत करके उन्ह ख च लेताaहैg
।
रसायन — बहुलक रेश के गुणधम। पॉ लप्रो पलीन इस लए चुना जाता है क वह अ ुवीय है, जल को दूर रखता है और महीन
तक स्थर आवेश धारण कए रहता है।
. c om
जीव व ान — वषाणु क आमाप और प्रकृ त। वषाणु लगभग 0.1 µm का होता है, परंतु वहmअकेला नह चलता — वह 1
m
– 100oµm l a se
m .c — वायुप्रवाह और नस्यंदन दक्षता का प्र तरूपण। प्रत्येक परत एक न त अंaशg रोकती है, अतः दक्षताएँ जुड़ती नह ,
क श्वसन-बूँद म सवार रहता है, जन्ह पकड़ना कह सरल है।
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ग णत
गुणा होती ह।
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comजाता है g l a
. a
s0.4em× 0.4 = 0.064
यिद एक परत 60% कण रोके तो 0.4 अंश िनकल
a
ऐसी तीन परतों से िनकलेगा = 0.4l×
ag
कु ल दक्षता = 1 − 0.064 = 93.6%
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m .
o m l a se
.cबड़े। अतः य द मास्क छलनी होता तो वह बल्कुल नरथक होता। वह छलनीagनह , जाल है। संघट्ट बड़े कण को
ऐसा क्य होता है: मास्क के रेश के बीच के अंतराल द सय माइक्रोमीटर चौड़े होते ह — वषाणु से सैकड़ गुना
se m
g l a
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पकड़ता है और वसरण अत्यंत सूक्ष्म कण को, अतः सबसे क ठन कण लगभग 0.3 µm वाले रह जाते ह — इतने
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m
हल्के नह क रेशे से टकरा जाएँ, इतने भारी नह क भटककर उस पर जा लग। इसी आमाप को सवा धक भेद
m a s e
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कण-आमाप कहते ह, और मास्क के मानक इसी पर जानबूझकर परखे जाते ह — जो मास्क अपनी सबसे क ठन
m .
e
आमाप पर खरा उतरे, वह शेष सभी आमाप पर उससे बेहतर ही करेगा।
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a
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m .
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संकेत: इसी से यह भी स्पष्ट होता है क मास्क का ठ क बैठना क्य आवश्यक है। नाक या गाल के पास से नकलने
वाली वायु कसी रेशे से मलती ही नह , अतः ऊपर नकाली गई 93.6% दक्षता ढह जाती है। नस्यंदन दक्षता पदाथ
का गुण बताती है; ढ ला पहना गया मास्क उस गुण का उपयोग ही नह करता।
अध्याय — एक नज़र म
मॉडल वास्त वक प्रणाली का जानबूझकर बनाया गया सरल रूप है जसम केवल वे रा शयाँ रखी जाती ह जो पूछे गए प्रश्न के
लए महत्त्वपूण ह। वायु प्र तरोध या हृदय क एकल को शकाओं क उपेक्षा करना त्रु ट नह , एक सोचा-समझा चयन है।
व ान दै नक जीवन के शब्द — बल, काय, को शका, अ भ क्रया — का उपयोग सी मत और सहमत अथ म करता है तथा
रा शय को न त प्रतीक (m, v, F, I) से नरू पत करता है, जनम से प्रत्येक का एक नधा रत मात्रक होता है।
ग णत वह भाषा है जो बताती है क रा शयाँ आपस म कस प्रकार संबं धत ह। समीकरण केवल प रकलन का साधन नह ,
अ पतु एक संबंध का सं क्षप्त कथन है।
मानक (SI) इकाइयाँ अंतरा ीय सहम त पर आधा रत ह। इकाइय क गड़बड़ी — कलोग्राम प्र त लीटर के स्थान पर पाउं ड
प्र त लीटर — के कारण एक वमान म 15,000 लीटर ईंधन क कमी हो गई थी।
नयम प्रकृ त के नय मत पैटन का वणन करता है; सद्धांत यह व्याख्या करता है क वह पैटन क्य उत्पन्न होता है और प्रमाण
पर आधा रत होता है; आधारभूत सद्धांत व्यापक वचार है जो अनेक स्थ तय म लागू होता है। व ान म सद्धांत कभी
अनुमान नह होता।
भली प्रकार परखे गए नयम, सद्धांत और मॉडल हम नई प र स्थ तय का पूवानुमान करने म सक्षम बनाते ह। पूवानुमान
असफल होने पर वै ा नक अपनी धारणा, मॉडल या मापन का पुनः परीक्षण करते ह — यही खुलापन व ान क दुबलता नह ,
सबसे बड़ी श क्त है।
अनुमान — यह जाँचने के लए कया गया मोटा आकलन क उत्तर संभव भी है या नह — एक वास्त वक वै ा नक कौशल
है। प्रारं भक चरण म ध्यानपूवक तक, सट क संख्या से अ धक महत्त्वपूण है।
भौ तक , रसायन, जीव व ान और पृथ्वी व ान ान को व्यव स्थत करने के लए हमारे ारा बनाए गए वभाजन ह। जलवायु
प रवतन, औष ध- नमाण या मास्क के काय करने जैसी वास्त वक समस्याओं के लए कई शाखाएँ एक साथ चा हए।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द व ान म अथ अध्याय से उदाहरण महत्त्व
मॉडल सरलीकृ त िनरूपण िजसमें के वल पश्न के ग तशील कार को एक बदु मानना; पृथ्वी को असंभव समस्या को हल करने
िलए आवश्यक बाते ं रखी जाती है ं परत वाला समतल गोला मानना योग्य बनाता है
धारणा (मान्यता) मॉडल बनाते समय जानबूझकर छोड़ा गया गरते पड के लए वायु प्र तरोध क उपेक्षा इसे बताना आवश्यक है,
िववरण जससे मॉडल क सीमा ात
रहे
प्रतीक भौितक रािश के िलए सहमत अक्षर द्रव्यमान, वेग, बल, धारा के लए m, v, F, I वश्वभर म एक ही प्रतीक का
एक ही अथ
मानक (SI) रािश का अंतर ीय स्तर पर सहमत मात्रक द्रव्यमान के लए कलोग्राम (kg); चाल के प रणाम क तुलना संभव;
मात्रक लए m/s इकाई क गड़बड़ी से बचाव
नयम पकृ ित में दे खा गया िनयिमत पैटन, शब्दों या न्यूटन के ग त नयम — बस के अचानक वश्वसनीय रूप से बताता है
गिणत में व्यक्त रुकने पर झटका क क्या होता है
सद्धांत पैटन क्यों उत्पन्न होता है, इसकी पमाण- परमाणु सद्धांत बताता है क अणु कैसे बनते अनुमान नह — यह कठोर
आधािरत व्याख्या ह परीक्षण से गुज़रा है
आधारभूत व्यापक िवचार जो अनेक िस्थितयों को सी ढ़याँ चढ़ते समय ऊजा संरक्षण भौ तक , रसायन व जीव
सद्धांत समझने में सहायक व ान — सभी म लागू
पूवानुमान स्थािपत िव ान से िनकली तक युक्त कक मारी गई फुटबॉल कतनी दूर जाएगी असफल पूवानुमान हम
अपेक्षा, मात्र अनुम ान नही ं धारणाओं तक वापस ले जाता
है
अनुमान यह जाँचने के िलए मोटी गणना िक उत्तर प्र त दन लगभग 10,000 लीटर वायु श्वास म सट क काय से पहले त्रु टयाँ
(आकलन) उिचत है या नही ं लेना पकड़ लेता है
प्रकाश का वेग एक पिरभािषत भौितक िस्थरांक ठ क 299792458 m/s; ‘c’ लै टन शब्द प्रतीक इ तहास और सहम त
(c) सेले रटास से से आते ह
तार का एक पिसद्ध मॉडल — अिधकांश िववरण मेघनाद साहा ने तारे के पदाथ को उष्ण गैस इसी से समझ आया क तारे
सरलीकृत छोिड़ए, उत्तर तय करने वाली थोड़ी-सी माना और केवल ताप, दाब व आयनन पर का रंग उसके ताप से क्य
अध्ययन रािशयाँ रिखए ध्यान दया जुड़ा है
व ान क ान व्यविस्थत करने हेत ु हमारे बनाए भौ तक , रसायन, जीव व ान, पृथ्वी व ान प्रकृ त म ऐसी कोई वभाजन
शाखाएँ िवभाजन रेखा नह है
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