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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 2: तीन बु मान
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
14 – 28 13 40 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 32 pages
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कक्षा 7 हद अध्याय 2 तीन बु द्धमान AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 2: तीन बु द्धमान
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 2 तीन बु द्धमान के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह एक लोककथा है, जसम एक नधन पता के
तीन बेटे अपनी पैनी दृ ष्ट और तीव्र बु द्ध के बल पर चोरी के झूठे आरोप से बच नकलते ह। पृष्ठ 14 से 28 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से,
पं क्तय पर चचा, मलकर कर मलान, सोच- वचार के लए, अनुमान और कल्पना से, शब्द से जुड़े शब्द, लोककथा को सुनाना, कारक, सूचनापत्र,
आपक बात, ध्यान से दे खना-सुनना-अनुभव करना, आज क पहेली और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 14 – 28
खं ड प्रश्न
13 40
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 20 और 21
पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) लोककथा के आधार पर नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए। ★
कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो सकते ह। (1) लोककथा म पता ने अपने बेट से ‘धन संचय करने’ को
कहा। उनक इस बात का क्या अथ हो सकता है? • खेती-बारी करना और धन इक ा करना • पैनी दृ ष्ट और तीव्र
बु द्ध का वकास करना • ऊँट का व्यापार करना • गाँव छोड़कर कसी नगर म जाकर बसना
सट क उत्तर है — पैनी दृ ष्ट और तीव्र बु द्ध का वकास करना। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
खेती-बारी करना और धन ग़लत पता ने साफ़ कहा — “हमारे पास न तो रुपया-पैसा है और न ही सोना-चाँद ।” वे रुपया
इक ा करना जोड़ने क नह , दूसरे प्रकार के धन क बात कर रहे थे।
पैनी दृ ष्ट और तीव्र बु द्ध का सही ★ पता के अपने शब्द ह — “रुपये-पैसे के ान पर तुम्हारे पास पैनी दृ ष्ट होगी और सोने-
वकास करना चाँद के ान पर तीव्र बु द्ध होगी।”
ऊँट का व्यापार करना ग़लत ऊँट कथा म बहुत बाद म आता है और वह भी दूसरे व्य क्त का है। पता क सलाह से
इसका कोई संबंध नह ।
गाँव छोड़कर कसी नगर म ग़लत नगर जाने का नणय बेट ने पता क मृत्यु के बाद स्वयं लया — “आओ, घूम फरकर
जाकर बसना जगत दे ख।” यह पता क सलाह नह थी।
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क्य : पता जानता था क वह बेट को संप त्त नह दे सकता। इस लए उसने वह पूँजी दे नी चाही जो कभी चोरी नह
होती और ख़च करने पर घटती नह — ध्यान से दे खने क आदत और सोचने क श क्त। पूरी कथा इसी बात को
सद्ध करती है।
प्र.2 (2) तीन भाइय ने अपने ान और बु द्ध का उपयोग करके ऊँट के बारे म बहुत-कुछ बता दया। इससे क्या
नष्कष नकाला जा सकता है? • बु द्ध का प्रयोग करके ऊँट के बारे म सब-कुछ बताया जा सकता है। • समस्या
को सुलझाने के लए ध्यान से नरीक्षण करना महत्वपूण है। • कसी व्य क्त का ान, बु द्ध और धन ही सबसे बड़ी
ताकत है। • ऊँट के बारे म जानने के लए दूसर पर भरोसा करना चा हए।
सट क उत्तर है — समस्या को सुलझाने के लए ध्यान से नरीक्षण करना महत्वपूण है। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
बु द्ध का प्रयोग करके ऊँट के बारे म ग़लत अकेली बु द्ध काफ़ नह थी। भाइय ने पहले दे खा — पैर के चह्न, चरी हुई घास,
सब-कुछ बताया जा सकता है। जूत के नशान — तब सोचा। बना दे खे बु द्ध के पास सोचने के लए कुछ नह
होता।
समस्या को सुलझाने के लए ध्यान सही ★ भाइय ने स्वयं कहा — “बचपन से ही हम ऐसी आदत पड़ गई है क हम कुछ भी
से नरीक्षण करना महत्वपूण है। अपनी दृ ष्ट से नह चूकने दे ते।” नरीक्षण ही उनके हर अनुमान क जड़ है।
कसी व्य क्त का ान, बु द्ध और धन ग़लत कथा तो यह कहती है क भाइय के पास धन था ही नह — “धन-संप त्त … क
ही सबसे बड़ी ताकत है। दृ ष्ट से तो तुम धनवान नह हो।” ‘धन’ जोड़ते ही यह वाक्य पाठ के वरुद्ध हो जाता
है।
ऊँट के बारे म जानने के लए दूसर पर ग़लत भाइय ने कसी से कुछ पूछा ही नह । उन्ह ने ऊँट दे खा तक नह था — सब कुछ
भरोसा करना चा हए। स्वयं अपने अवलोकन से जाना।
ध्यान द जए: नरीक्षण (दे खना) और अनुमान (सोचना) दो अलग-अलग चरण ह। भाइय ने चह्न दे खे — यह
नरीक्षण; फर उनसे यह नकाला क ऊँट बड़ा था — यह अनुमान।
प्र.3 (3) राजा ने भाइय क बु द्धमत्ता पर व ास क्य कया? • भाइय ने अपनी बात को तक के साथ समझाया। •
राजा को ऊँट के स्वामी क बात पर संदेह था। • राजा ने स्वयं ऊँट और पेट क जाँच कर ली थी। • भाइय ने
राजा को अपनी बात म उलझा लया था।
सट क उत्तर है — भाइय ने अपनी बात को तक के साथ समझाया। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
भाइय ने अपनी बात सही ★ राजा के हर प्रश्न पर भाइय ने प्रमाण दया — “धूल पर उसके पैर के चह्न से”, “सड़क के दाय
को तक के साथ ओर क घास तो ऊँट ने चरी थी, मगर बाय ओर क घास ज्य क त्य थी”, “मुझे उसके अंदर
समझाया। कसी छोट -सी गोल वस्तु के लुढ़कने क ध्व न सुनाई द ।” तक सुनकर ही राजा का संदेह मटा।
राजा को ऊँट के स्वामी ग़लत आरंभ म राजा ने स्वामी क ही बात मानी थी — “अवश्य उन्ह ने उसे चुराया होगा। जाओ, उन चोर
क बात पर संदेह था। को यहाँ लाओ।”
राजा ने स्वयं ऊँट और आधा पेट क जाँच राजा ने अवश्य क — उसने पेट खुलवाकर क ा अनार नकालकर सबको
पेट क जाँच कर ली सही दखाया। पर ऊँट तो राजा ने दे खा ही नह ; ऊँट अंत तक खोया ही रहा। इस लए यह वकल्प पूरी
थी। तरह सही नह है।
भाइय ने राजा को ग़लत भाइय ने कोई चालाक नह क । उन्ह ने खुलकर, सरल भाषा म कारण बताए और पेट वाली
अपनी बात म उलझा परीक्षा म उनक बात प्रमा णत भी हो गई।
लया था।
क्य : राजा बु द्धमान था — उसने केवल आरोप पर भरोसा नह कया, परीक्षा ली। परीक्षा म भाइय क बात सच
नकली और उन्ह ने अपने तक भी बता दए। इसी दोहरे प्रमाण से राजा को व ास हुआ।
प्र.4 (4) लोककथा के पात्र और घटनाओं के आधार पर, राजा के नणय के पीछे कौन-सा मूल्य छपा है? • दोषी को
कड़ा से कड़ा दं ड दे ना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है। • अ तरह जाँच कए बना कसी को दोषी नह
ठहराना चा हए। • राजा क प्रत्येक बात और नणय को सदा सही माना जाना चा हए। • ऊँट क चोरी के नणय
के लए सेवक क बु द्ध का उपयोग करना चा हए।
सट क उत्तर है — अ तरह जाँच कए बना कसी को दोषी नह ठहराना चा हए। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
दोषी को कड़ा से कड़ा दं ड दे ना हर ग़लत राजा ने कसी को दं ड दया ही नह । कथा दं ड क नह , स ाई परखने क है।
समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
अ तरह जाँच कए बना कसी सही ★ राजा ने पहले संदेह कया, पर तुरंत सज़ा नह सुनाई — उसने पेट मँगवाकर
को दोषी नह ठहराना चा हए। परीक्षा ली और तब कहा — “इन लोग ने यह स्पष्ट कर दया है क ये चोर नह
ह।”
राजा क प्रत्येक बात और नणय को ग़लत राजा का पहला नणय (“अवश्य उन्ह ने उसे चुराया होगा”) ग़लत ही था। कथा
सदा सही माना जाना चा हए। यही दखाती है क राजा को भी अपना मत बदलना पड़ा।
ऊँट क चोरी के नणय के लए सेवक ग़लत सेवक केवल पेट लाए और खोली। नणय राजा ने स्वयं, भाइय के तक सुनकर
क बु द्ध का उपयोग करना चा हए। लया।
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कक्षा 7 हद अध्याय 2 तीन बु द्धमान
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जोड़ने योग्य बात: इसी से एक दूसरा मूल्य भी नकलता है — न्याय का आधार प्रमाण है, आरोप नह । ऊँट के
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स्वामी के पास केवल शक था, प्रमाण नह ।
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प्र.5 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने भन्न- भन्न उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए क
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आपने ये उत्तर ही क्य चुने।
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यह चचा का काम है। इसका उ े श्य ‘सही उत्तर’ ढूँ ढ़ना नह , ब ल्क यह बताना है क आपने वही उत्तर क्य चुना — यानी अपने
चुनाव के पीछे का प्रमाण पाठ म से दखाना।
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चचा कैसे क जए:
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1. बारी-बारीcसे
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हर साथी अपना चुना हुआ वकल्प पढ़े ।
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a e वह पाठ क एक पं क्त बताए जससे उसका उत्तर सद्ध होता है।
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a 3. य द दो सा थय के उत्तर अलग ह तो दे खए — कसका प्रमाण पाठ के अ धक नकट है?
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4. अंत म ल खए क चचा के बाद आपका मत बदला या नह , और क्य ।
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प्रश्न हमारे समूह का उत्तर
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(1) ‘धन संचय’ का ष्
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पैनी दृ ि ट और तीवaबुि का िवकास
द्ध “रुपये-पैसे के ान पर तुम्हारे पास पैनी दृ ष्ट होगी…”
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“हम कुछ भी अपनी दृ ष्ट से नह चूकने m . c
यान से िनरी ण करना मह वपूण है
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(2) नष्कष दे ते।”
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(3) राजा का व ास भाइयों ने तक के साथ समझाया ने चरी थी, मगर बाय ओर क घास ज्य क
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त्य थी।”
(4) छपा मूल्य जाँच िकए िबना िकसी को दोषी न राजा का पेट वाली परीक्षा लेना।
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ठहराना m co g l a
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चचा का लाभ: जब आप कारण बताते ह तो उत्तर याद रखने क ज़रूरत नह पड़ती — वह समझ म बदल जाता
है। और य द कसी साथी का प्रमाण आपसे अ ा है तो अपना मत बदल लेना कमज़ोरी नह , समझदारी है — ठ क
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वैसे ही जैसे कथा म राजा ने अपना मत बदला।
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agl क्तय पर चचा — पृष्ठ 21
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पाठ से
पाठ से भाव-ग्रहण
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और ल खए— (क) “रुपये-पैसे के ान
पर तुम्हारे पास पैनी दृ ष्ट होगी और सोने-चाँद के ान पर तीव्र बु द्ध होगी। ऐसा धन सं चत कर लेने पर तुम्ह
कभी कसी प्रकार क कमी न रहेगी और तुम दूसर क तुलना म उन्नीस नह रहोगे।”
सरल अथ: पता कहता है — म तुम्ह रुपया-पैसा और सोना-चाँद नह दे सकता, पर उनक जगह म तुम्ह दे खने क तेज़ नज़र
और तेज़ समझ दे रहा ँ। य द तुमने यह धन जोड़ लया तो जीवन म तुम्ह कसी चीज़ क कमी नह रहेगी और तुम कसी से कम
नह ठहरोगे।
पं क्त का अंश भाव
“रुपये-पैसे के ान पर … पैनी दृ ष्ट” बाहरी संपि की जगह भीतरी संपि
त्त त्त — अवलोकन-शिक्त।
“सोने-चाँद के ान पर … तीव्र बु द्ध” गहनों की जगह सोचने-समझने की शि त, जो कभी चोरी नही ं होती।
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“उन्नीस नह रहोगे” मुहावरा — िकसी से कम या कमज़ ोर नही ं पड़ ोगे।
पूरी कथा इसी पं क्त क व्याख्या है: तीन भाई भूखे-थके, बना पैसे के थे — फर भी उनक पैनी दृ ष्ट ने उन्ह
चोरी के आरोप से बचाया और अंत म राजा के दरबार म ान दलाया। यानी यह ‘धन’ सचमुच काम आया।
मुहावरा जा नए: ‘उन्नीस होना’ — त नक कम होना। जैसे — ग णत म वह कसी से उन्नीस नह है।
प्र.2 (ख) “हर वस्तु और त को पूणत: समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृ ष्ट से न बच पाए।”
सरल अथ: जो कुछ भी तुम्हारे सामने हो — कोई वस्तु हो या कोई प र त — उसे आधा-अधूरा मत दे खो। उसे पूरी तरह समझने
क को शश करो। छोट -से-छोट बात भी तुम्हारी नज़र से छू टनी नह चा हए।
यह पता क द हुई आदत क शक्षा है। ध्यान द जए क वह “दे ख लो” नह कहता, कहता है “समझने और जानने का प्रयास
करो” — यानी दे खना एक अभ्यास है, जो रोज़ करने से बनता है।
कथा से प्रमाण: जब पेट लाई जा रही थी तब भाइय ने केवल पेट नह दे खी — उन्ह ने यह भी दे खा क “पेट
कहाँ से और कैसे लाई गई थी और कस ढं ग से रखी गई थी।” यही ‘कुछ भी दृ ष्ट से न बचने दे ना’ है। इसी से उन्ह ने
जान लया क पेट हल्क है, अंदर कोई गोल वस्तु है और वह उ ान क ओर से आई है।
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आप कैसे अपनाएँ: रोज़ एक मनट के लए अपने कमरे या कक्षा को ध्यान से दे खए, फर आँख बंद करके पाँच
बात बताइए जो आपने दे ख । एक सप्ताह म ही फ़क़ दखने लगेगा।
प्र.3 (ग) “हमने अपने प रवेश को पैनी दृ ष्ट से दे खने और बु द्ध से सोचने के प्रयास म बहुत समय लगाया है।”
सरल अथ: भाई राजा से कहते ह — हमारी यह क्षमता जादू नह है। हमने वष तक अभ्यास कया है — अपने आस-पास
(प रवेश) क हर चीज़ को ध्यान से दे खने का और फर उस पर सोचने का। इसी लंबे अभ्यास का फल है क हम ऊँट को बना दे खे
उसके बारे म बता सके।
पं क्त म छपे तीन शब्द उनका महत्व
प रवेश जो कु छ हमारे चारों ओर है — धूल , घास , रे त, विन, पेड़। भाइयों के सारे सुराग़ इसी पिरवेश से िमले ।
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पैनी दृ ष्ट के वल दे खना नही,ं बारीक़ ी से दे खना — जैसे यह दे खना िक घास सड़ क के िकस ओर चरी गई है।
बहुत समय लगाया है यह गुण ज मजात नही,ं अिजत है। कोई भी अ यास से इसे पा सकता है।
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यह पं क्त क्य महत्वपूण है: राजा को लग रहा था क ऐसा जानना असंभव है — “ कसी को भी दे खे बना ही
उसके वषय म क्या इतना कुछ जानना संभव हो सकता है?” इस पं क्त ने उसका उत्तर दे दया — संभव है, य द
आपने दे खना और सोचना सीख लया हो। इसी उत्तर के बाद राजा ने परीक्षा लेने का नश्चय कया।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 22
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पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 इस लोककथा म से चुनकर कुछ वाक्य नीचे स्तंभ 1 म दए गए ह। उनके भाव या अथ से मलते-जुलते वाक्य
स्तंभ 2 म दए गए ह। स्तंभ 1 के वाक्य को स्तंभ 2 के उपयुक्त वाक्य से सुमे लत क जए— स्तंभ 1: 1. कुछ
समय पश्चात् पता चल बसे। 2. हम कह भी क्य न ह , भूखे नह मरगे। 3. घुड़सवार ने तीन भाइय को शंका क
दृ ष्ट से दे खा। 4. बचपन से ही हम ऐसी आदत पड़ गई है क हम कुछ भी अपनी दृ ष्ट से नह चूकने दे ते। 5. लोग
के आश्चय का कोई ठकाना न था। स्तंभ 2: 1. घोड़े पर सवार व्य क्त ने तीन भाइय को अ व ास से दे खा। 2.
थोड़े समय के बाद पता का दे हांत हो गया। 3. लोग इतने अचं भत थे क उनका आश्चय व्यक्त करना क ठन था।
4. बचपन से ही हम आदत हो गई है क हम हर छोट -बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य दे ते ह। 5. हम चाहे जहाँ भी ह ,
हम खाने के लए कुछ न कुछ मल ही जाएगा।
स्तंभ 1 (पाठ का वाक्य) स्तंभ 2 ( मलता-जुलता वाक्य) मलान का आधार
1. कुछ समय पश्चात् पता चल बसे। 2. थोड़ े समय के बाद िपता का दे हांत चल बसना = दे हांत हो जाना, मृत्यु हो जाना। दोन
हो गया। वाक्य एक ही बात कहते ह, एक मुहावरे म और दूसरा
सीधे शब्द म।
2. हम कह भी क्य न ह , भूखे नह 5. हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के भाइय का आत्म व ास — मेहनत करने वाले को कह
मरगे। िलए कु छ न कु छ िमल ही जाएगा। भी रोट मल जाती है (“हम चरवाह या खेत म श्र मक
का काम कर लगे”)।
3. घुड़सवार ने तीन भाइय को शंका 1. घोड़ े पर सवार व्यिक्त ने तीनों घुड़सवार = घोड़े पर सवार व्य क्त; शंका क दृ ष्ट =
क दृ ष्ट से दे खा। भाइयों को अिव वास से दे खा।
श् अ व ास क नज़र। दोन म शब्द बदले ह, भाव वही है।
4. बचपन से ही हम ऐसी आदत पड़ 4. बचपन से ही हमें आदत हो गई है िक दृ ष्ट से न चूकने दे ना = हर वस्तु पर ध्यान दे ना। यही
गई है क हम कुछ भी अपनी दृ ष्ट से हम हर छोटी-बड़ ी व तु पर यान
स् ध् भाइय क मूल वशेषता है।
नह चूकने दे ते। अव य दे ते है।ं
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5. लोग के आश्चय का कोई ठकाना 3. लोग इतने अचंिभत थे िक उनका ठकाना न होना = सीमा न रहना, बहुत अ धक होना।
न था। आ चय य त करना किठन था।
श् व् क् यह भी एक मुहावरा है।
संक्षेप म मलान: 1 → 2, 2 → 5, 3 → 1, 4 → 4, 5 → 3.
यह अभ्यास क्या सखाता है: एक ही बात दो तरह से कही जा सकती है — मुहावरेदार भाषा म (चल बसे,
ठकाना न था) और सीधी भाषा म (दे हांत हो गया, बहुत अचं भत थे)। लोककथा म मुहावरे आते ह क्य क वह
बोलकर सुनाई जाती थी और मुहावरे बात को छोटा तथा असरदार बना दे ते ह।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 22
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पाठ से
पाठ से
प्र.1 लोककथा को एक बार फर ध्यान से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) तीन भाइय ने बना ऊँट को दे खे
उसके वषय म कैसे बता दया था?
तीन भाइय ने ऊँट को नह , ऊँट के छोड़े हुए चह्न को दे खा था और उन चह्न से अनुमान लगाया था। हर भाई ने एक अलग
सुराग़ पकड़ा।
भाई उसने क्या कहा कस प्रमाण से
सबसे “थोड़ी ही दे र पहले यहाँ से एक बहुत धूल पर पड़ े बड़ े-बड़ े पैरों के िचह्न — “धूल पर उसके पैरों के िचह्न ों से मुझे पता चला
बड़ा बड़ा ऊँट गया है।” िक कोई बहतु बड़ ा ऊँ ट वहाँ से गया है।”
मझला “संभवत: वह ऊँट एक आँख से नह सड़ क के के वल दायी ं ओर की घास चरी हुई थी, बायी ं ओर की यों की यों — यानी
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दे ख पाता हो।” उसे बायी ं ओर की घास िदखी ही नही ं।
सबसे “ऊँट पर एक म हला और एक ब ा एक थान पर ऊँ ट के घुटने टेक कर बैठने के िचह्न , पास ही रे त पर मिहला के जूतों के
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छोटा सवार थे।” िनशान और साथ में छोटे-छोटे पैरों के िनशान।
ऊँट खो गया है — यह भी बड़े भाई ने अनुमान से जाना: “जब मने अपने पास से जानेवाले घुड़सवार को अपने चार ओर नज़र
दौड़ाते दे खा तो उसी समय मेरी समझ म यह बात आ गई क वह क्या खोज रहा है।”
तरीक़ा एक ही है: चह्न दे खना → चह्न का कारण सोचना → नष्कष नकालना। भाइय के पास कोई जादुई श क्त
नह थी, बस बचपन से बनी पैनी दृ ष्ट और तक करने क आदत थी।
प्र.2 (ख) आपके अनुसार इस लोककथा म सबसे अ धक महत्व कस बात को दया गया है— ता कक सोच,
अवलोकन या सत्यवा दता? लोककथा के आधार पर समझाइए।
मेरे वचार से इस लोककथा म सबसे अ धक महत्व अवलोकन को दया गया है — और ता कक सोच उसक सगी साथी है।
सत्यवा दता तीसरे ान पर है।
कारण: कथा क शुरुआत ही अवलोकन क सीख से होती है — पता कहता है, “कुछ भी तुम्हारी दृ ष्ट से न बच पाए।” और भाइय
क हर सफलता का पहला क़दम दे खना ही है — पैर के चह्न दे खना, घास दे खना, जूत के नशान दे खना, पेट लाते हुए दे खना,
खड़क से बाहर अनार के पेड़ दे खना। य द उन्ह ने दे खा न होता तो सोचने के लए कुछ होता ही नह ।
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गुण कथा म उसक भू मका महत्व
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अवलोकन हर सुराग़ का ोत — चह्न, घास, ध्व न, पेट का हल्कापन। सबसे
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ता कक अवलोकन िजतनी ही
aसोच दे खता।” आव यक श्
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सत्यवा दता भाई आरोप लगने पर भी झूठ नह बोलते, शां त से सच कहते ह — और अंत म सच ही मह वपूण, पर सहायक
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जीतता है।
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दूसरा मत भी बन सकता है: कोई कह सकता है क सबसे अ धक महत्व ता कक सोच का है, क्य क चह्न तो
घुड़सवार ने भी दे खे ह गे, पर उनसे नष्कष केवल भाई नकाल सके। यह उत्तर भी ठ क है — बस अपना कारण
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पाठ म से दे ना चा हए। दोन मत म एक बात समान है: अवलोकन और तक साथ-साथ चलते ह।
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a प्र.3 (ग) लोककथा म राजा ने पहले भाइय पर संदेह कया ले कन बाद म उन्ह नद ष माना। राजा क सोच क्य बदल
गई?
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राजा क सोच इस लए बदली क्य क उसने आरोप के आगे जाकर प्रमाण जुटाया — और प्रमाण भाइय के पक्ष म नकला।
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1. पहले संदेह क्य : ऊँट के स्वामी क बात सुनकर राजा को लगा क जो व्य क्त बना बताए ऊँट का पूरा हु लया बता दे , वही चोर
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हो सकता है — “अवश्य उन्ह ने उसे चुराया होगा।”
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2. परीक्षा: भाइय ने कहा क बना दे खे भी जाना जा सकता है। राजा ने तुरंत मंत्री से कहकर एक बंद पेट मँगवाई और पूछा क
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a 3. प्रमाण: भाइय ने बताया — कोई छोट गोल वस्तु, अनार, और वह भी क ा। पेट खुली तो सचमुच क ा अनार नकला।
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comका सबूत समझ रहा था (भाइय का बना दे खे सब जान लेना),
असली कारण: ऊँट का स्वामी जस बात को .चोरी g l a
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राजा ने उसी बात को परखा और पाया
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सीख: मन बदलना कमज़ोरी नह है। नया प्रमाण मलने पर अपना मत बदल लेना ही m .
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कक्षा 7 हद अध्याय 2 तीन बु द्धमान AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (घ) ऊँट के स्वामी ने भाइय पर तुरंत संदेह क्य कया? आपके वचार से उसे क्या करना चा हए था जससे उसे
अपना ऊँट मल जाता?
संदेह का कारण: वह घबराया हुआ था — उसक पत्नी, बेटा और ऊँट, तीन खो गए थे। ऐसे म उसे रास्ते म तीन अजनबी मले जो
उसके ऊँट के बारे म वे बात बता रहे थे जो केवल ऊँट दे खने वाला ही जान सकता है — क ऊँट बहुत बड़ा था, एक आँख से नह
दे खता था और उस पर एक म हला ब े के साथ सवार थी। उसने सोचा, “इतना सब इन्ह कैसे मालूम, य द इन्ह ने ऊँट दे खा नह ?”
उसने ख़ुद कहा भी — “मुझे पूरा व ास है क उन्ह ने मेरा ऊँट चुराया है।”
उसे क्या करना चा हए था:
भाइय क बात पूरी सुननी चा हए थी। उन्ह ने तो कारण बताने क को शश क थी — “हम अपनी आँख और बु द्ध से काम
लेना जानते ह।”
भाइय ने रास्ता भी बता दया था — “शीघ्रता से उस दशा म अपना घोड़ा दौड़ाओ। वहाँ तुम्ह तुम्हारा ऊँट मल जाएगा।” उसे
तलवार नकालने के बजाय उसी दशा म जाना चा हए था।
अकेले न जाना हो तो भाइय को साथ लेकर चलता — जनक दृ ष्ट इतनी पैनी थी, वे रास्ते म और सुराग़ भी पकड़ सकते थे।
शक होने पर भी पहले जाँच, फर आरोप — यही क्रम सही है।
उसक असली भूल: उसने डर और जल्दबाज़ी म सोचा। जन बात को उसने चोरी का प्रमाण मान लया, वे असल
म मदद थ । इसी जल्दबाज़ी म उसका समय भी गया और ऊँट भी अंत तक नह मला — कथा म कह नह कहा
गया क उसे ऊँट वापस मला।
प्र.5 (ङ) पता ने बेट को “दूसरे प्रकार का धन” सं चत करने क सलाह क्य द ? इससे पता के बारे म क्या-क्या पता
चलता है?
सलाह का कारण: पता नधन था — उसके पास न रुपया-पैसा था, न सोना-चाँद । वह जानता था क वह बेट को संप त्त नह दे
सकता। इस लए उसने वह पूँजी दे नी चाही जो बना पैसे के भी जोड़ी जा सकती है और जीवन भर काम आती है — पैनी दृ ष्ट और
तीव्र बु द्ध।
इससे पता के बारे म क्या पता चलता है:
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पता का गुण प्रमाण
वह स्वयं समझदार था धन और बुि में से उसने बुि को बड़ ा माना — यह गहरी समझ का काम है।
द्ध द्ध
वह दूरदश था उसने अपनी मृ यु के बाद की िचंता की — “ऐसा धन संिचत कर ले ने पर तु हे ं कभी िकसी पकार की
त् म्
कमी न रहेगी।”
वह अ ा शक्षक था वह “पाय: कहता” था — यानी एक बार नही,ं बार-बार समझाता था। इसी दोहराव से बेटों की आदत
बनी।
उसे अपनी नधनता क ल ा उसने सच बताया — “हमारे पास न तो पया-पैस ा है और न ही सोना-चाँद ी।” पर हीनता नही ं
रु
नह थी िदखाई।
वह आत्मसम्मान सखाता था “तुम दू स रों की तुल ना में उ न्नीस नही ं रहोगे” — यानी ग़ र ीबी में भी िसर ऊँ चा रखो।
सलाह सही सद्ध हुई: तीन भाइय के पास अंत तक धन नह आया, पर उनक बु द्ध ने उन्ह कारागार से बचाकर
राजा के दरबार तक पहुँचा दया। पता क सीख कथा म प्रमा णत होकर लौटती है।
प्र.6 (च) राजा ने भाइय क परीक्षा लेने के लए पेट का उपयोग कया। इस परीक्षा से राजा के व्य क्तत्व और नणय
शैली के बारे म क्या-क्या नष्कष नकाला जा सकता है?
राजा क वशेषता परीक्षा से मला प्रमाण
ज ासु वह के वल दंड दे क र मामला बंद कर सकता था, पर उसने पूछा — “िकसी को भी दे खे िबना ही उसके िवषय में या क्
इतना कु छ जानना संभव हो सकता है?”
प्रमाण पर चलने वाला भाइयों के दावे को उसने माना भी नही,ं ठुक राया भी नही ं — जाँच ली। यही वै ािनक ढं ग है।
चतुर परीक्षक परी ा ऐसी बनाई िक नक़ ल असंभव हो — पेटी बंद थी, व तु कोई नही ं जानता था, और मं ी के कान में चुपके से
क्ष स् त्र
कहा गया।
न्याय प्रय सच जानते ही उसने अपना पहला िनणय पलट िदया — “तुम लोग िबलकु ल िनद ष हो और जहाँ भी जाना चाहो जा
सकते हो।”
गुण का आदर करने उसने अ छे भोजन से आवभगत की, पशंस ा की — “तु हारे पास बुि का बहतु बड़ ा कोष है” — और तीनों को दरबार
च् म् द्ध
वाला में रख िलया।
नणय शैली एक पं क्त म: सुनो → परखो → तब नणय दो, और आवश्यकता पड़े तो अपना नणय बदल भी दो।
एक कमज़ोरी भी दखती है: आरंभ म राजा ने बना जाँच के भाइय को “चोरो” कहकर धमकाया था। यानी उससे
भी जल्दबाज़ी हुई — पर उसने उसे सुधार लया। यही उसे साधारण से अलग बनाता है।
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प्र.7 (छ) आप इस लोककथा के भाइय क कस वशेषता को अपनाना चाहगे और क्य ?
यह आपके अपने वचार का प्रश्न है। भाइय म कई वशेषताएँ ह — उनम से कसी एक को चुनकर कारण स हत ल खए।
वशेषता कथा म कहाँ दखती है अपनाने से लाभ
पैनी दृ ष्ट (बारीक़ से पैर के चह्न, चरी हुई घास, जूत के नशान छोटी-छोटी बाते ं पकड़ में आती है,ं ग़ ल ितयाँ
दे खना) कम होती है ं
तक से सोचना “घास एक ही ओर क चरी है, अत: वह एक आँख से नह िबना घबराए सम या हल करना आ जाता है
स्
दे खता”
संकट म धैय तलवार दखाने पर भी शांत रहना, राजा के सामने शालीनता डर के समय भी िदमाग़ काम करता रहता है
से उत्तर दे ना
सच पर डटे रहना “हम चोर नह ह, हमने इसका ऊँट कभी नह दे खा” अंत में स चाई ही बचाती है
च्
मलकर काम करना तीन ने अलग-अलग सुराग़ जोड़कर पूरी तस्वीर बनाई समूह में काम बड़ ा और बेहतर होता है
नमूना उत्तर: म भाइय क पैनी दृ ष्ट को अपनाना चा ँगा। मुझे यह इस लए अ लगी क्य क इसके लए न पैसा
चा हए, न कोई वशेष साधन — केवल ध्यान चा हए। भाइय ने ऊँट दे खा तक नह था, फर भी धूल पर बने चह्न से
उन्ह ने उसका पूरा हाल बता दया। य द म भी अपने आस-पास क चीज़ को ध्यान से दे खूँ तो कक्षा म शक्षक क
बात, प्रश्नपत्र के नदश और घर के छोटे -छोटे काम — सब म मुझसे कम भूल होगी। और जैसा भाइय ने कहा, यह
आदत अभ्यास से बनती है, इस लए म इसे आज से शुरू कर सकता ँ।
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 23
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए— (क) य द राजा ने बना जाँच के भाइय को दोषी ठहरा दया होता तो इस
लोककथा का क्या प रणाम होता?
तब यह कथा बु द्ध क कथा न रहकर अन्याय क कथा बन जाती। संभा वत प रणाम —
तीन नद ष भाई चोरी के झूठे आरोप म दं ड पाते — कारागार, कोड़े या दे श- नकाला।
ऊँट फर भी न मलता, क्य क वह तो दूसरी दशा म था। घुड़सवार क पत्नी और ब े क खोज भी वह रुक जाती — भाइय
ने जो दशा बताई थी, वही एकमात्र सुराग़ थी।
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राजा क बु द्धमत्ता कभी प्रकट न होती; क े अनार वाली परीक्षा होती ही नह और पाठक को भाइय के तक कभी सुनने को
न मलते।
प्रजा म यह संदेश जाता क इस राज्य म शक ही सज़ा है — लोग सच बोलने से भी डरने लगते।
कथा क सीख उलट जाती — “अपनी बु द्ध दखाओगे तो फँसोगे।” जब क असली कथा कहती है क बु द्ध और स ाई अंत म
बचा लेती है।
इसी लए जाँच ज़रूरी है: इस कल्पना से समझ आता है क न्याय म एक क़दम रुककर परखना कतना क़ मती है।
राजा ने वह एक क़दम लया — इसी लए तीन नद ष बच गए।
प्र.2 (ख) य द भाइय ने अनार के बारे म सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत कस प्रकार होता? अपने
वचार व्यक्त कर।
पेट वाली परीक्षा ही भाइय का एकमात्र प्रमाण थी। य द अनुमान ग़लत नकलता तो —
राजा को लगता क भाइय ने अपनी बु द्ध क बात केवल बचने के लए गढ़ ली थी, और उसका पहला संदेह पक्का हो जाता —
“तो सचमुच इन्ह ने ऊँट दे खा ही था!”
तीन को चोर मानकर दं ड मलता; नद ष होते हुए भी वे अपनी बात सद्ध न कर पाते।
घुड़सवार भी संतुष्ट न होता — उसे ऊँट, पत्नी और बेटा फर भी न मलते।
कथा का संदेश दूसरा बनता — शायद यह क “केवल अनुमान पर मत टको, प्रमाण जुटाओ”, या यह क “जल्दबाज़ी म क
गई गवाही ख़तरनाक होती है।”
एक और मोड़ सो चए: हो सकता है भाई तब राजा से कहते — “हम दूसरा अवसर द जए” — और नई परीक्षा म
सही उतरते। तब कथा और लंबी होती और सीख यह जुड़ जाती क एक बार चूकने पर हार नह माननी चा हए।
कल्पना म ऐसा अंत भी लखा जा सकता है — बस वह कथा के पात्र के स्वभाव से मेल खाना चा हए।
ध्यान द जए: भाइय का अनुमान तुक्का नह था। हल्क पेट + लुढ़कने क ध्व न + उ ान क दशा + मौसम —
चार सुराग़ जोड़कर उत्तर नकला था। जतने अ धक प्रमाण, अनुमान उतना ही सुर क्षत।
प्र.3 (ग) लोककथा म य द तीन भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्ह कौन-कौन सी क ठनाइय का सामना करना पड़
सकता था?
कल्पना क जए क राजा भाइय से कहता — “तुम्ह जाकर ऊँट खोजो।” तब आने वाली क ठनाइयाँ —
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क ठनाई क्य आती
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शरीर क थकान
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वे पहले ही चालीस िदन चल चुके थे, भूखे थे और पैरों में छाले पड़ े थे।
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भोजन-पानी क कमी “उनके पास िजतना खाने-पीने का सामान था, अब तक समाप्त हो गया था। ”
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चह्न का मट जाना हवा, धूल या िकसी और के गुज़रने से रे त पर बने िनशान िमट सकते थे — िफर सुराग़ ही न बचता।
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.coघािटयाँ और िदशा का ान न होना। ag
sem
अनजान रास्ता वे उस दे श में नए थे — पहाड़ , वीरान
वीरान रा तों पर िहंgसlकaपशु तथा गरमी-आँधी का ख़तरा।
जंगली जानवर और मौसम स्
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उन पर चोरी का आरोप लगा था; रा ते में िमलने वाले लोग उनकी सहायता करने से िहचकते।
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लोग का अ व ास
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ऊँ ट का हुआ नही ं था; वह चलता रहा होगा, इसिलए दू री लगातार बढ़ ती।
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ऊँट का आगे बढ़ जाना
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aवेsकैसे पार पाते: वही तरीक़ा जो उन्ह ने पहले अपनाया — बारी-बारी से अलग-अलग सुराग़ दे खना, आपस म
agl बाँटकर काम करना और थकने पर “आराम करने के लए रुके और पुन: आगे चल दए” वाली आदत।
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l तो भाइय क परीक्षा लेने के लए कस प्रकार के सवाल या ग त व धयाँ
ान पर आपgहोते
प्र.4 (घ) य द राजा के
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करते? अपनी कल्पना साझा कर।
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eहोतm —
अ परीक्षा वही है जसम नक़ल या तुक्का काम न आए और जसका उत्तर केवल ध्यान से दे खने-सुनने से नकले। मेरी परीक्षाएँ
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ये
a 1. बंद मु क परीक्षा: मु म कोई वस्तु छपाकर पूछता — “भारी है या हल्क , कठोर है या मुलायम?” वे हाथ क मु ा और
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mपानी उँड़ेलना, काग़ज़ फाड़ना, चूड़ी खनकाना — और पूछता क क्या हो glase
ध्व न से अनुमान लगाते।
2. ध्व न से पहचान: पद के पीछे कोई काम करवाताc—
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l aगनs पर कसी से चलवाकर पूछता — “यह व्य क्त भारी था या हल्का, दौड़ रहा था या
रहा है।
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3. पद चह्न क परीक्षा: महल के गीलेgआँ
चल रहा था, अकेला था या बोझ लए हुए?” यह ठ क उनके ऊँट वाले कौशल क परीक्षा होती।
. c om
4. गंध क परीक्षा: आँख पर पट्ट बाँधकर रसोई क तीन चीज़ सुँघाता — ह ग, इलायची, गुड़ — और नाम पूछता।
5. बदली हुई वस्तु: दरबार म दस मनट बैठाकर बाहर भेजता, फर तीन चीज़ बदलकर पूछताm
s e
omक पहेली: कोई ऐसी पहेली देता जसम संकेत से उत्तर नकालना पड़े —aजैgसlaे इसी पाठ क ‘रंगीन डब्बे’ वाली पहेली।
— “अब क्या-क्या बदला है?”
6.cतक
.
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इन सबम एक बात समान है: उत्तर कसी पुस्तक म नह मलेगा। हर परीक्षा म ान य से जानकारी लेनी पड़ेगी
और फर बु द्ध से जोड़ना पड़ेगा — यही राजा क पेट वाली परीक्षा का भी सद्धांत था।
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शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 23 a
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पाठ से
पाठ से शब्द-भं डार
प्र.1 नीचे दए गए रक्त ान म ‘बु द्ध’ से जुड़े शब्द अपने समूह म चचा करके ल खए— (शब्द-जाल के बीच म
‘बु द्ध’ लखा है और उससे जुड़े खान म से एक म ‘म स्तष्क’ पहले से भरा हुआ है।)
पुस्तक के शब्द-जाल म बीच का खाना बु द्ध है और एक खाना म स्तष्क पहले से भरा है। बाक़ खान म ऐसे शब्द भरने ह जो
‘बु द्ध’ से जुड़ते ह — कुछ पयायवाची, कुछ बु द्ध के गुण, कुछ बु द्ध के अंग।
वग शब्द अथ / प्रयोग
पयायवाची मि त क , िदमाग़ , मेधा, प ा, मित
स् ष् सोचने क श क्त के अलग-अलग नाम। जैसे — उसक मेधा कक्षा म सबसे तेज़
है।
बु द्ध के गुण िववेक , समझ, सूझबूझ, चतुराई, ववेक = सही-ग़लत परखने क श क्त। जैसे — ववेक से काम लो।
कु शागता
बु द्ध क सोच, तक , अनुमान, अवलोकन, पाठ के भाइय ने यही पाँच काम कए — दे खा, सोचा, तक लगाया, अनुमान
क्रयाएँ िनणय कया, नष्कष नकाला।
बु द्ध से बने बुि मान, बुि म ा, बुि जीवी,
द्ध द्ध त्त द्ध पाठ का शीषक ही ‘तीन बु द्धमान’ है।
शब्द पितभा, ान
ख़ाली खान के लए छह सुझाए गए शब्द: ववेक, ान, समझ, तक, सूझबूझ, प्र ा। (आपके समूह के शब्द इनसे अलग हो
सकते ह — बस उनका संबंध ‘बु द्ध’ से जुड़ना चा हए।)
चचा के लए: ‘बु द्ध’ और ‘ ान’ एक नह ह। ान का अथ है — जानकारी होना; बु द्ध का अथ है — उस
जानकारी का सही उपयोग करना। पाठ के भाइय के पास पुस्तक का ान नह था, पर बु द्ध थी।
लोककथा को सुनाना — पृष्ठ 24
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पाठ से
पाठ से गतवध
प्र.1 लोककथा के ल खत रूप म आने से पहले कहा नय का प्रचलन मौ खक रूप म ही पीढ़ -दर-पीढ़ चलता था। …
अब आप अपने समूह के साथ मलकर इस लोककथा को रोचक ढं ग से सुनाइए। लोककथा को प्रभावशाली और
रोचक रूप म सुनाने के लए नीचे कुछ सुझाव दए गए ह जो लोककथा को और भी आकषक बना सकते ह—
(कथा सुनाना: स्वर म उतार-चढ़ाव, भावनाओं क अ भव्य क्त, पात्र के लए अलग-अलग स्वर, हाथ और शरीर
का उपयोग, हास्य का प्रयोग, ववरणात्मक भाषा का उपयोग, रोचक मोड़, संवाद को स्पष्ट और प्रासं गक
बनाना।)
यह सुनाने का अभ्यास है — इसे कक्षा म करना है। नीचे कथा को चार दृश्य म बाँटकर एक तैयार योजना द गई है, जसम पुस्तक
के आठ सुझाव लगाए गए ह।
दृश्य क्या सुनाना है कौन-सा सुझाव कैसे लगाएँ
1. पता क सीख नधन पता का बेट से कहना — वर धीमा और गंभीर। िपता के संवाद में नेह झलके । ‘पैनी दृ ि ट’ कहते समय
स् स् ष्
“दूसरे प्रकार का धन सं चत अपनी आँखों की ओर उँ गली से संके त कीिजए।
करो।”
2. यात्रा और तीन चालीस दन क यात्रा, फर तीन तीनों भाइयों के िलए तीन अलग वर — बड़ ा भारी वर में, मझला सामा य,
स् स् न्
अनुमान भाइय के तीन वाक्य। छोटा ह का ऊँ चा। यही ं रोचक मोड़ पर िकए — “अब सोिचए , िबना ऊँ ट दे खे
ल् रु
यह कै से संभव है?”
3. घुड़सवार और तलवार नकालना, चोर कहकर वर तेज़ और नाटकीय। हाथ से तलवार घुमाने का अिभनय। राजा के िलए
स्
राजा का दरबार धमकाना, पेट मँगवाना। रोबदार भारी वर। पेटी वाला ण सबसे रह यमय — यहाँ वर धीमा करके
स् क्ष स् स्
ठहर जाइए।
4. क ा अनार पेट खुलना, भाइय का तक आ चय का भाव चेहरे पर लाइए — आँखें बड़ ी कीिजए। अंत में वर में पस न्नता
श् स्
और सम्मान बताना, राजा का प्रसन्न होना। और ह की मुस कान। िखड़ की की ओर संके त करते हुए किहए — “दे िखए , सब
ल्
अनार क चे है!ं ”च्
सुनाने से पहले तीन तैयारी:
1. कथा को याद मत क जए — केवल क्रम याद र खए: सीख → यात्रा → तीन अनुमान → आरोप → परीक्षा → तक →
सम्मान।
2. तीन-चार संवाद ज्य के त्य याद र खए, जैसे — “हमने तुम्हारे ऊँट का मुँह तक नह दे खा।”
3. एक बार घर पर, दपण के सामने या साथी को सुनाकर अभ्यास क जए।
ऐसा क्य करते थे: लोककथाएँ पहले लखी नह जाती थ । कहने वाला य द रोचक ढं ग से सुनाता तो सुनने वाल
को कथा याद रह जाती और वे आगे सुनाते। इसी तरह ये कथाएँ पीढ़ -दर-पीढ़ बच — यही कारण है क लोककथा
म छोटे -छोटे संवाद, दोहराव और नाटक य मोड़ अ धक होते ह।
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कारक — पृष्ठ 24 और 25
पाठ से
पाठ से भाषा क बात
प्र.1 नीचे दए गए वाक्य म कारक लखकर इन्ह पूरा क जए — ( दए गए कारक: ने, को, पर, से, के ारा, का, म, के
लए, क , के, हे, हो, अरे) 1. “हमने तो तुम्हारे ऊँट ______ दे खा तक नह ”, भाइय ______ परेशान होते हुए कहा।
पूरा वाक्य: “हमने तो तुम्हारे ऊँट को दे खा तक नह ”, भाइय ने परेशान होते हुए कहा।
रक्त ान कारक कारण
तुम्हारे ऊँट ___ को ‘ऊँट’ यहाँ कम है — दे खने क क्रया जस पर पड़ रही है। कम कारक का चह्न ‘को’ है।
दे खा
भाइय ___ कहा ने ‘भाइय ’ कता है और क्रया ‘कहा’ भूतकाल क सकमक क्रया है। ऐसे वाक्य म कता के साथ ‘ने’
लगता है।
पहचान का नुस्ख़ा: ‘ने’ लगाना है या नह — यह जाँचने के लए दे खए क क्रया भूतकाल म है और सकमक
(कम वाली) है या नह । ‘भाइय ने कहा’ — सही। पर ‘भाइय ने आए’ नह होता, वहाँ ‘भाई आए’ ही ठ क है।
प्र.2 2. “म अपने रेवड़ ______ पहाड़ ______ लये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे -से बेटे ______
साथ एक बड़े-से ऊँट ______ मेरे पीछे -पीछे आ रही थी।”
पूरा वाक्य: “म अपने रेवड़ को पहाड़ पर लये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे -से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट
पर मेरे पीछे -पीछे आ रही थी।”
रक्त ान कारक कारण
रेवड़ ___ लये जा रहा था को रेवड़ (भेड़-बक रय का झुंड) कम है — ले जाने क क्रया उसी पर है।
पहाड़ ___ पर यह अ धकरण है — ान बताता है क कहाँ ले जा रहा था।
बेटे ___ साथ के ‘के साथ’ एक पूरा परसग है, जो संग त (साथ होना) दखाता है।
ऊँट ___ पर फर अ धकरण — पत्नी ऊँट के ऊपर सवार थी।
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ध्यान द जए: ‘पर’ दो बार आया है, पर दोन बार ान ही बता रहा है — एक बार पहाड़ का, दूसरी बार ऊँट का।
यही कारक क ख़ूबी है — एक ही परसग अलग-अलग वाक्य म वही संबंध जोड़ता है।
प्र.3 3. राजा ______ उसी समय अपने मंत्री ______ बुलाया और उसके कान ______ कुछ फुसफुसाया।
पूरा वाक्य: राजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान म कुछ फुसफुसाया।
रक्त ान कारक कारण
राजा ___ बुलाया ने कता + भूतकाल क सकमक क्रया ‘बुलाया’।
मंत्री ___ बुलाया को कम — बुलाने क क्रया मंत्री पर पड़ रही है।
कान ___ फुसफुसाया में अ धकरण — ान बताता है क फुसफुसाहट कहाँ हुई।
एक वाक्य, तीन कारक: इसी छोटे -से वाक्य म कता (ने), कम (को) और अ धकरण (म) — तीन दख जाते ह।
यही कारण है क पुस्तक ने इसे अभ्यास के लए चुना।
प्र.4 4. यह सुनकर राजा ______ पेट ______ पास लाने ______ आदे श दया। सेवक ______ तुरंत आदे श पूरा कया।
राजा ______ सेवक ______ पेट खोलने ______ लए कहा।
पूरा वाक्य: यह सुनकर राजा ने पेट को पास लाने का आदे श दया। सेवक ने तुरंत आदे श पूरा कया। राजा ने सेवक को पेट
खोलने के लए कहा।
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रक्त ान कारक कारण
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राजा ___ आदे श दया
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ने कता + भूतकाल क सकमक क्रया।
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पेट ___ पास लाने को कम — लाने क क्रया पेट पर।
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लाने ___ आदे श का संबंध कारक — ‘लाने का आदे श’ यानी कस बात का आदे श।
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सेवक ___ पूरा कया ने
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कता + भूतकाल क सकमक क्रया ‘ कया’। ag
l a sनयम
राजा ___ कहा ने
ag वही — कता के साथ ‘ने’।
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सेवक ___ कहा संप्रदान/कम — कहना जनसे है, वे सेवक ह।
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के
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खोलने ___ लए ‘के लए’ पूरा परसग है — संप्रदान कारक, प्रयोजन बताता है ।
e m . ag
s रखने क बात: कारक (परसग) सं ा या सवनाम के बाद आकर उसका क्रया से या दूसरे शब्द से संबंध
aयाद
agl जोड़ता है। इसी लए पुस्तक ने दखाया क “भाइय जवाब दया” अटपटा लगता है, पर “भाइय ने जवाब दया”
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सही है — ‘ने’ ही ‘भाइय ’ और ‘जवाब दया’ को जोड़ रहा है।
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a gl ये संबोधन कारक के चह्न ह — जैसे “हे राम!”, “अरे भाई!”। इन
सूची म दए ‘हे, हो, अरे’ का क्या हुआ?
चार वाक्य म कसी को पुकारा नह गया, इस लए ये कह नह लगे। पाठ म संबोधन का उदाहरण है — “मेरे बेटो!”
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और “चोरो, तुरंत बताओ!”
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laचsनापत्र — पृष्ठ 25
agपाठ से
सू
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पाठ से ले ख न
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प्र.1 agl
कल्पना क जए क आप इस लोककथा के वह घुड़सवार ह जसका ऊँट खो गया है। आप अपने ऊँट को खोजने
के लए एक सूचना कागज पर लखकर पूरे शहर म जगह-जगह चपकाना चाहते ह। अपनी कल्पना और
co m
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लोककथा म द गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र ल खए।
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emसूचनापत्र म क्या-क्या होना चा हए:
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.c
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1. ऊपर मोटे अक्षर म शीषक — सूचना / ऊँट खोया है।
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2. क्या खोया — ऊँट, और उसक पहचान (पाठ से ली गई): बहुत बड़ा है, एक आँख से नह दे ख पाता।
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3. कब और कहाँ से खोया — कौन-सा रास्ता, कौन-सा दन।
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4. साथ म कौन था — एक म हला और एक छोटा ब ा।
5. मलने पर क्या कर — कससे, कहाँ संपक कर; चाह तो पुरस्कार क बात।
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6. नीचे — सूचना दे ने वाले का नाम, पता और त थ।
नमूना उत्तर:
सूचना
— ऊँट खो गया है —
मेरा एक ऊँट पछले मंगलवार, नगर के प श्चमी माग से, पहाड़ क ओर जाते समय रास्ता भटक गया है।
ऊँट क पहचान:
• क़द म बहुत बड़ा और हृष्ट-पुष्ट।
• एक आँख से नह दे ख पाता, इस लए चलते समय एक ही ओर क घास चरता है।
• पीठ पर रंगीन झूल और गले म घंट बँधी है।
साथ म: ऊँट पर मेरी पत्नी और छोटा पुत्र सवार थे। वे भी उसी के साथ रास्ता भटक गए ह।
जस कसी भाई-बहन को यह ऊँट अथवा ये दोन कह दखाई द, वे कृपया तुरंत नगर के मुख्य ार के पास बने चरवाह के पड़ाव म
सूचना द। सूचना दे ने वाले को उ चत पुरस्कार दया जाएगा।
आपक थोड़ी-सी सहायता एक प रवार को फर से मला दे गी।
नवेदक — रहीम, चरवाहा
पड़ाव — प श्चमी ार, नगर
त थ — 12 आषाढ़
ध्यान रखने योग्य बात: सूचनापत्र छोटा, स्पष्ट और बदुवार होना चा हए, क्य क उसे चलते-चलते पढ़ा जाता है।
कहानी क तरह लंबा मत ल खए। जो पहचान- चह्न सबसे वशेष हो (यहाँ — एक आँख से न दे ख पाना), उसे मोटे
अक्षर म ल खए, क्य क उसी से ऊँट तुरंत पहचाना जाएगा।
आपक बात — पृष्ठ 26
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 लोककथा म तीन भाइय क पैनी दृ ष्ट क बात कही गई है। क्या आपने कभी अपनी पैनी दृ ष्ट का प्रयोग कसी
समस्या को हल करने के लए कया है? उस समस्या और आपके ारा दए गए हल के वषय म ल खए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर लखते समय तीन बात अवश्य आनी चा हए — समस्या क्या थी, आपने क्या दे खा
और उस दे खने से हल कैसे नकला।
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नमूना उत्तर: हमारे घर म एक दन सुबह से ही पानी क टं क ख़ाली मलने लगी, जब क मोटर रोज़ क तरह चल
रही थी। सब कहने लगे क मोटर ख़राब हो गई है। मने ध्यान से दे खा तो पाया क आँगन क द वार के पास क मट्ट
हमेशा गीली रहती है, जब क वहाँ कोई नल नह है। मने पताजी को बताया। खुदाई करने पर पता चला क ज़मीन के
नीचे क पाइप म दरार थी और सारा पानी वह बह रहा था। मोटर बलकुल ठ क थी। य द मने गीली मट्ट पर ध्यान
न दया होता तो हम बेकार म मोटर बदलवा दे ते।
अपना उत्तर लखने के लए ये संकेत मदद करगे:
घर म कोई वस्तु खो जाना और आपका उसे कसी छोटे सुराग़ से ढूँ ढ़ लेना।
साइ कल का बार-बार पंक्चर होना और आपका टायर म फँसा काँच खोज लेना।
कक्षा म कसी साथी का चुपचाप उदास होना और आपका उसका कारण भाँप लेना।
ग णत के प्रश्न म सबक उत्तर ग़लत आना और आपका यह पकड़ लेना क प्रश्न म इकाई ( कलो/ ाम) बदली हुई थी।
प्र.2 लोककथा म बताया गया है क भाइय ने “बचपन से हर वस्तु पर ध्यान दे ने क आदत डाली।” य द आपने ऐसा
कया है तो आपको अपने जीवन म इसके क्या-क्या लाभ मलते ह?
ध्यान दे ने क आदत के लाभ रोज़मरा के जीवन म साफ़ दखते ह —
कहाँ लाभ
पढ़ाई म प न यान से पढ़ ने पर उ र ग़ ल त नही ं होता; िश क की कही बात एक ही बार में याद रह जाती है।
श् ध् त्त क्ष
घर म चीज़ ें कहाँ रखी है ं यह याद रहता है, इसिलए ढू ँढ़ने में समय नही ं जाता।
सुरक्षा म सड़ क पार करते समय, गैस की गंध पर, िबजली के खुले तार पर यान जाता है — दुघ टना टल जाती है।
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रश्त म माँ की थकान या िम की उदासी िबना कहे समझ आ जाती है, और हम समय पर सहायता कर पाते है।ं
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स्वभाव म ज दबाज़ ी घटती है, धै य बढ़ ता है; िनणय अनुमान से नही,ं पमाण से िलए जाते है।ं
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नमूना उत्तर: मने अपनी कक्षा-पु स्तका और बस्ते पर ध्यान दे ने क आदत डाली है। रोज़ रात को समय-सारणी
दे खकर बस्ता लगाता ँ। इससे मेरी कोई पुस्तक छू टती नह और गृहकाय कभी अधूरा नह रहता। इसी आदत के
कारण एक बार मने दे खा क परीक्षा क त थ सूचनापट्ट पर बदल द गई है, जब क मेरे कई साथी पुरानी त थ ही
मान रहे थे — मेरे बताने पर सबने समय रहते तैयारी कर ली।
पाठ से जो ड़ए: भाइय क यह श क्त जन्मजात नह थी। उन्ह ने कहा — “हमने … बहुत समय लगाया है।” यानी
यह आदत रोज़ के अभ्यास से बनती है, और तभी लाभ भी रोज़ मलता है।
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प्र.3 लोककथा म भाइय को यात्रा करते समय अनेक क ठनाइयाँ आईं, जैसे— भूख, थकान और पैर म छाले। आप
अपने दै नक जीवन म कन- कन क ठनाइय का सामना करते ह? ल खए।
यह अपने जीवन के बारे म लखने का प्रश्न है। ईमानदारी से ल खए — क ठनाई बताइए, और साथ म यह भी क आप उससे कैसे
नपटते ह।
क ठनाई उससे नपटने का उपाय
व ालय दूर होना, पैदल या भीड़ भरी बस म जाना ज दी उठना, सािथयों के साथ समूह में जाना
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समय कम पड़ना — पढ़ाई, घर के काम और खेल एक साथ एक छोटी समय-सारणी बनाना और सबसे किठन काम पहले करना
बजली चले जाना, पढ़ने म बाधा िदन के उजाले में पढ़ ाई का बड़ ा भाग िनपटा ले ना
कोई वषय क ठन लगना िश क या साथी से पूछने में संक ोच न करना
क्ष
वषा या कड़ी धूप म आना-जाना ब ते में छाता रखना, पानी की बोतल साथ रखना
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नमूना उत्तर: मुझे रोज़ तीन कलोमीटर पैदल चलकर व ालय आना पड़ता है। गर मय म धूप और वषा म क चड़
बहुत परेशान करते ह और कई बार जूते भीग जाते ह। पर मने अपने मुहल्ले के चार सा थय के साथ मलकर एक
समूह बना लया है — हम साथ नकलते ह, बात करते हुए रास्ता कट जाता है और कोई पीछे छू ट जाए तो सब रुक
जाते ह। कथा के भाइय क तरह मने भी समझ लया है क थकान से रुकना नह है — “वे आराम करने के लए
रुके और पुन: आगे चल दए।”
प्र.4 भाइय ने बना दे खे ही ऊँट के बारे म सही-सही बात बताईं। क्या आपको लगता है क अनुभव और समझ से दे खे
बना भी सही नणय लया जा सकता है? क्या आपने भी कभी ऐसा कया है?
हाँ, लया जा सकता है — पर एक शत पर। नणय ‘ बना दे खे’ ज़रूर हो सकता है, पर ‘ बना प्रमाण के’ नह । भाइय ने ऊँट नह
दे खा था, ले कन उन्ह ने चह्न, घास और नशान दे खे ज़रूर थे। यानी उनका अनुमान प्रमाण पर टका था, कल्पना पर नह ।
सही अनुमान ख़तरनाक अनुमान
दे खे हुए चह्न पर आधा रत — “घास एक ओर क चरी है, अत: वह एक आँख से िबना िकसी पमाण के — “ये तीन अजनबी है,ं अत: चोर
नह दे खता।” होंगे।”
ग़लत नकलने पर बदला जा सकता है यि त उस पर अड़ जाता है, जैसे ऊँ ट का वामी अड़
व् क् स्
गया
प रणाम — नद ष बच गए पिरणाम — िनद ष लगभग दंड पा गए
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नमूना उत्तर: एक बार मेरी छोट बहन खेलते-खेलते चुप हो गई और खाना छोड़ दया। मने उसका माथा छु ए बना
ही समझ लया क उसे बुख़ार है, क्य क उसक आँख भारी थ , वह बार-बार लेटने जा रही थी और उसने अपनी
सबसे प्रय गु ड़या भी नह उठाई। मने माँ को बता दया। थमामीटर लगाने पर सचमुच बुख़ार नकला। मने ‘दे खा’
बुख़ार नह था, पर तीन छोट बात दे खी थ — और तीन एक ही ओर संकेत कर रही थ ।
सावधानी: जब बात कसी व्य क्त के च रत्र क हो — जैसे कोई चोर है या नह — तब केवल अनुमान से नणय
कभी नह लेना चा हए। कथा म यही भूल ऊँट के स्वामी ने क थी।
प्र.5 जब ऊँट के स्वामी ने भाइय पर शंका क तो भाइय ने बना गुस्सा कए शां त से उत्तर दया। क्या आपको लगता
है क कभी कसी को संदेह होने पर हम भी शांत रहकर उत्तर दे ना चा हए? क्या आपने कभी ऐसी त का
सामना कया है? ऐसे म आपने क्या कया?
हाँ, शांत रहकर उत्तर दे ना ही सही है — और कथा इसका कारण भी दखाती है।
ग़स्सा करने से आरोप लगाने वाले को लगता है क आप कुछ छपा रहे ह। शांत उत्तर से आपक बात सुनी जाती है।
ग़स्से म तक भूल जाते ह। भाई शांत रहे, इसी लए वे राजा के सामने अपने सारे कारण क्रम से रख सके — पैर के चह्न, घास,
जूत के नशान।
बात बढ़ने से झगड़ा हो जाता। तलवार नकले होने पर भी भाइय ने केवल इतना कहा — “हम चोर नह ह, हमने इसका ऊँट
कभी नह दे खा।”
अंत म शां त ही जीती — राजा ने उन्ह नद ष माना और दरबार म ान दया।
नमूना उत्तर: एक बार कक्षा म मेरे बगल वाले साथी क क़लम खो गई और उसने सबके सामने कह दया क मने ले
ली है। पहले तो मुझे बहुत ग़स्सा आया, पर मने चल्लाने के बजाय शां त से कहा — “मेरा बस्ता तुम स्वयं दे ख लो।”
बस्ता दे खने पर क़लम नह मली। फर मने उससे पूछा क उसने आ ख़री बार क़लम कहाँ रखी थी। ढूँ ढ़ने पर क़लम
उसक अपनी पुस्तक के पन्न के बीच मल गई। उसने मुझसे क्षमा माँगी। य द म उस दन झगड़ पड़ता तो स ाई
शायद कभी सामने न आती।
पर एक बात जो ड़ए: शांत रहने का अथ चुप रह जाना नह है। भाई चुप नह रहे — उन्ह ने अपनी बात स्पष्ट कही,
कारण बताए और परीक्षा दे ने को तैयार हुए। शां त + स्पष्टता, यही सही मश्रण है।
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emहै जो आपके लए
प्र.6 राजा ने भाइय क बु द्धमानी दे खकर बहुत आश्चय व्यक्त कया। क्या आपको कभी कसी क सोच, समझ या
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o और च काने वाला हो? gl
कसी वशेष कौशल को दे खकर आश्चय हुआ है? क्या आपने कभी कसी से कुछ ऐसा सीखा
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बलकुल
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यह अपने अनुभव का प्रश्न है। सो चए — आपके आस-पास ऐसा कौन है जो कोई काम असाधारण ढं ग से करता है? बहुत बार ऐसे
लोग हमारे बलकुल पास होते ह और हम उन पर ध्यान नह दे ते।
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कुम्हार, जो चाक पर बना नापे एक जैसे घड़े बना दे ता है।
बुनकर या दज , जो कपड़े को दे खकर ही नाप बता दे ता है।
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कसान, जो बादल और हवा दे खकर वषा का अनुमान लगा लेता है।
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मोटर मरम्मत करने वाला, जो केवल आवाज़ सुनकर बता दे ता है क ख़राबी कहाँ है।
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दाद , जो बना घड़ी दे खे परछाईं से समय बता दे ती ह।
eनmा उत्तर: हमारे मुहल्ले म एक साइ कल ठ क करने वाले चाचा ह। एक दन मेरी साइ कल से अजीब-सी खट- a
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खट आ रही थी। मने साइ कल उनके पास खड़ी ही क थी क उन्ह ने बना खोले कहा — “ पछले प हये क एक
om रहती है। उस दन मने सीखा क सुनना भी दे खने a s
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तीली ढ ली है।” मुझे बहुत आश्चय हुआ। पूछने पर उन्ह ने बताया क ढ ली तीली क आवाज़ प हये के घूमने क ग त
के साथ बदलती है, जब क चेन क आवाज़ लगातार.cएक-सी
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जैeसे कथा के बड़े भाई ने पेट के अंदर गोल वस्तु के लुढ़कने क ध्व न
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जतना ही बड़ा प्रमाण है — ठ क वैसे ही
सुनी थी।
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.coलोककथा म पता ने अपने बेट को यह सलाह द क वे समझ और ान जमा कर। क्या आपको कभी कसी बड़े
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m व्य क्त से ऐसी कोई सलाह मली है जो आपके जीवन म उपयोगी रही हो? क्या आप भी अपने अनुभव से कसी
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इस प्रश्न के दो भाग ह — पहले वह सलाह ल खए जो आपको मली और वह कब काम आई; फर वह सलाह ल खए जो आप
कसी छोटे को दगे।
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कसने द सलाह वह कैसे काम आई
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परी ा से पहले घबराहट नही ंs
a e , योंिक पाठ पहले ही तैयार रहते है।ं
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दादाजी “जो काम आज करना है, आज ही कर लो।” होती
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किठन िवषय पीछे नही ं छू टता।
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“जो न आए, उसे पूछ लो; पूछने म शम नह ।”
आधे से अिधक ग़ ल ितयाँ अपने आप कम हो गईं।
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शक्षक “प्रश्न दो बार पढ़ो, उत्तर एक बार लखो।”
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नमूना उत्तर: मेरी दाद हमेशा कहती ह — “सुनो सबक , करो मन क , पर सोच-समझकर।” पहले मुझे यह बात
केवल कहावत लगती थी। एक बार मेरे कुछ साथी मुझे स्कूल छोड़कर मेला दे खने चलने को कह रहे थे। मने दाद क
बात याद क , दो पल रुककर सोचा और मना कर दया। उस दन कक्षा म ग णत का महत्वपूण पाठ पढ़ाया गया, जो
आगे परीक्षा म आया। अब म अपने छोटे भाई को यही सलाह दे ता ँ — “कोई भी काम करने से पहले एक मनट
रुककर सोच लो क इसका प रणाम क्या होगा।” कथा के पता क सलाह भी ऐसी ही थी — तुरंत काम आने
वाली नह , पर जीवन भर काम आने वाली।
प्र.8 भाइय ने अपने ऊपर लगे आरोप के होते हुए भी सदा स ाई का साथ दया। क्या आपको लगता है क सदा सच
बोलना महत्वपूण है, भले ही त क ठन क्य न हो? क्या आपको कसी समय ऐसा लगा है क आपक स ाई
ने आपको समस्याओं से बाहर नकाला हो?
हाँ, सच बोलना ही सबसे सुर क्षत रास्ता है — और कथा इसे प्रमा णत करती है।
भाइय पर तलवार तनी थी, राजा ने “चोरो” कहकर धमकाया, फर भी उन्ह ने एक ही बात कही — “हमने इसका ऊँट कभी
नह दे खा।” उनका उत्तर आरंभ से अंत तक एक-सा रहा।
झूठ बोलने वाले को हर बार नई कहानी गढ़नी पड़ती है और कह -न-कह वह पकड़ी जाती है। सच बोलने वाले को कुछ याद
नह रखना पड़ता।
सच के साथ प्रमाण जुड़ जाए तो वह और मज़बूत हो जाता है — पेट खुली और भाइय क बात अपने आप सद्ध हो गई।
अंत म सच ने केवल बचाया ही नह , सम्मान भी दलाया — राजा ने उन्ह अपने दरबार म रख लया।
नमूना उत्तर: एक बार खेलते समय मेरी गद से घर क खड़क का काँच टू ट गया। कोई दे ख नह रहा था और म
चुपचाप नकल सकता था। पर मने माँ को स्वयं जाकर बता दया। माँ ने डाँटा तो सही, पर बात वह समाप्त हो गई।
बाद म पताजी ने कहा क य द म छपाता तो सज़ा दुगुनी मलती — एक काँच तोड़ने क , दूसरी झूठ बोलने क ।
उस दन मुझे समझ आया क सच बोलने से मुसीबत छोट हो जाती है, बड़ी नह ।
ध्यान द जए: कथा म सच अकेला काम नह आया — सच के साथ धैय और प्रमाण भी थे। य द भाई सच बोलकर
चुप बैठ जाते और अपने कारण न बताते तो शायद उनक बात मानी ही न जाती।
ध्यान से दे खना-सुनना-अनुभव करना — पृष्ठ 26 और 27
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पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) ‘हाँ’ या ‘नह ’ प्रश्न-उत्तर खेल — चरण— 1. एक व ाथ कक्षा से बाहर जाकर दखाई दे ने वाली कसी एक
वस्तु या ान का नाम चुनेगा। कक्षा के भीतर से भी कोई नाम चुना जा सकता है। 2. व ाथ वापस कक्षा म
आएगा और उस नाम को एक कागज पर लख लेगा। ले कन ध्यान रहे, वह कागज पर लखे नाम को कसी को न
दखाए। 3. अन्य व ाथ बारी-बारी से उस वस्तु का नाम पता करने के लए प्रश्न पूछगे। 4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर
केवल ‘हाँ’ या ‘नह ’ म दया जाएगा। उदाहरण के लए— • क्या इस वस्तु का उपयोग कक्षा म होता है? • क्या यह
खाने-पीने क चीज है? • क्या यह लकड़ी से बनी है? • क्या यह बजली से चलती है? 5. सभी व ाथ अ धकतम
20 प्रश्न ही पूछ सकते ह। … 8. ग त व ध के अंत म सभी मलकर इस खेल से जुड़े अपने अनुभव के बारे म चचा
कर।
यह कक्षा म खेला जाने वाला खेल है। जीतने क कुंजी यह है क 20 प्रश्न बहुत कम ह, इस लए ऐसे प्रश्न पू छए जो हर बार
संभावनाओं को आधा कर द। एक-एक वस्तु का नाम लेकर पूछना (“क्या यह डस्टर है?”) सबसे ख़राब रणनी त है।
प्रश्न का सही क्रम — चौड़े से सँकरे क ओर:
1. ान: क्या वह वस्तु कक्षा के भीतर है?
2. जी वत/ नज व: क्या वह सजीव है?
3. आकार: क्या वह आपके बस्ते म आ सकती है?
4. पदाथ: क्या वह लकड़ी क बनी है? / क्या वह धातु क है?
5. उपयोग: क्या उसका उपयोग पढ़ने- लखने म होता है?
6. बजली: क्या वह बजली से चलती है?
7. रंग/ त: क्या वह द वार पर लगी है?
8. अब बचे हुए दो-तीन नाम म से सीधे पू छए — “क्या यह घड़ी है?”
क्रम प्रश्न उत्तर क्या बचा
1 क्या वह कक्षा के भीतर है? हाँ बाहर की सब चीज़ ें हट गईं
2 क्या वह सजीव है? नह के वल िनज व व तुए ँ
स्
3 क्या वह बस्ते म आ सकती है? नह बड़ ी व तुए ँ — मेज़, कु स , बोड, पंखा, घड़ ी…
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4 क्या वह बजली से चलती है? हाँ पंखा, ब ब, घड़ ी
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5 क्या वह छत पर लगी है? नह घड़ ी (दीवार पर)
6 क्या यह घड़ी है? हाँ — जीत! के वल 6 प नों में
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इसका पाठ से क्या संबंध है: यही तो तीन भाइय ने कया था। उन्ह ने एक-एक करके संभावनाएँ घटाईं — बड़े
पैर के चह्न यानी बड़ा ऊँट; एक ओर क चरी घास यानी एक आँख से न दे खना; घुटन के नशान और जूत के
नशान यानी सवार उतरे थे। हर अवलोकन ने उत्तर को थोड़ा और सँकरा कया।
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चचा के लए (चरण 8): खेल के बाद पू छए — कौन-सा प्रश्न सबसे अ धक काम आया? कस प्रश्न से कुछ भी पता
नह चला और क्य ? (सामान्यत: वे प्रश्न बेकार जाते ह जनका उत्तर पहले ही मालूम था।)
प्र.2 (ख) ग त व ध— ‘स्पश, गंध और स्वाद से पहचानना’ — 1. एक थैले या डब्बे म (सावधानीपूवक एवं सुर क्षत)
व भन्न वस्तुए ँ (जैसे— फल, फूल, मसाले, खलौने, कपड़े, कताब, गुड़ आ द) रख। 2. व ा थय को आँख पर
प बाँधकर केवल स्पश, गंध या स्वाद का उपयोग करके वस्तु क पहचान करनी होगी और उसका नाम बताना
होगा। … 7. अंत म सभी वस्तुओं को कक्षा म दखाएँ और उनके बारे म चचा कर क कस वस्तु को पहचानना
आसान या क ठन लगा।
यह ग त व ध सखाती है क ान केवल आँख से नह आता। ान याँ पाँच ह — आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। यहाँ आँख
बंद है, इस लए बाक़ चार को काम करना पड़ता है।
वस्तु कस इं य से पहचानी पहचान का संकेत
इलायची / ल ग नाक (गंध) तेज़ सुगंध — छू ने से पहले ही पहचान में आ जाती है
गुड़ जीभ (स्वाद), त्वचा ( चप चपाहट) मीठा, थोड़ ा िचपिचपा और दानेद ार
न बू त्वचा + नाक खुरदुरा िछलका और ख ी ताज़ ा गंध
कपड़ा त्वचा (स्पश) मुल ायम, लचीला, मोड़ ा जा सकता है
कताब त्वचा + कान स ़ त िकनारे और पन्ने पलटने की खड़ खड़ ाहट
खलौना त्वचा लाि टक की िचकनाहट, ह का वज़ न, िवशेष आकार
प् स् ल्
फूल नाक + त्वचा सुगंध और पंखिु ड़ यों की कोमलता
सावधा नयाँ: डब्बे म कोई नुक ली, गरम, टू टने वाली या गंद वस्तु न रख। स्वाद केवल उसी वस्तु का ल जो साफ़ और खाने योग्य
हो, और हर व ाथ के लए अलग टु कड़ा हो।
चचा के नष्कष (चरण 7): सामान्यत: गंध वाली वस्तुए ँ सबसे आसान लगती ह और एक-से आकार वाली
चकनी वस्तुए ँ सबसे क ठन (जैसे साबुन और रबड़, या दो तरह के कपड़े)। जस वस्तु के दो संकेत मल जाएँ —
जैसे न बू का खुरदुरापन और गंध — वह सबसे जल्द पहचानी जाती है।
पाठ से जो ड़ए: बड़े भाई ने पेट को छु आ तक नह था — उसने केवल सुना क भीतर कोई गोल वस्तु लुढ़क रही
है, और दे खा क सेवक पेट को कतनी आसानी से उठा लाए। इन्ह दो संकेत से उसने कह दया क पेट हल्क है
और उसम कोई छोट गोल वस्तु है। यही इस ग त व ध का पाठ है — हर इं य एक प्रमाण दे ती है।
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आज क पहेली — पृष्ठ 28
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 1. कौन है यह प्राणी? 1. इसक लंबी पूँछ होती है जो पेड़ क शाखाओं के चार ओर लपट रहती है। 2. इसका
मुख्य आहार क ट और छोटे जीव होते ह जन्ह यह चुपके से पकड़ता है। 3. यह प्राणी अपने प रवेश म घुल- मल
जाता है और अपनी रंगत को बदल सकता है। 4. इसके पास तेज आँख होती ह जो चार दशाओं म दे ख सकती
ह।
उत्तर है — गर गट (अं ेज़ी म chameleon)।
संकेत गर गट पर कैसे लागू होता है
1. लंबी पूँछ जो शाखाओं से लपट िगरिगट की पूँछ पकड़ ने वाली होती है; वह उसे टहनी पर कुं डली की तरह लपेटकर वयं को िटकाए
स्
रहती है रखता है।
2. क ट और छोटे जीव चुपके से वह घंटों िन चल बैठा रहता है और िबजली की गित से अपनी लंबी िचपिचपी जीभ बाहर फे ं ककर कीट
श्
पकड़ता है पकड़ ले ता है।
3. प रवेश म घुल- मल जाता है, रंग यही िगरिगट की सबसे पिस पहचान है — इसी से िहंद ी में मुहावरा बना, “िगरिगट की तरह रंग
द्ध
बदलता है बदलना”।
4. तेज़ आँख जो चार दशाओं म दे ख इसकी दोनों आँखें अलग-अलग घूम सकती है ं — एक आगे दे ख सकती है और दू स री उसी समय
पीछे ।
अन्य उत्तर क्य नह : बंदर क पूँछ भी लपटती है, पर वह रंग नह बदलता और मुख्यत: फल खाता है। छपकली
रंग बदलती नह और उसक आँख अलग-अलग नह घूमत । जब चार संकेत एक साथ मलाते ह तो केवल गर गट
बचता है — यही तो तीन भाइय वाली व ध है!
प्र.2 2. रंगीन डब्बे — एक मेज पर चार रंगीन डब्बे बराबर-बराबर रखे ह— लाल, हरा, नीला और पीला। बताइए पीले
डब्बे के बराबर म कौन-सा डब्बा है? य द— 1. लाल डब्बा नीले डब्बे के पास है। 2. हरा डब्बा पीले डब्बे के
पास नह है। 3. पीला डब्बा लाल डब्बे के पास नह है। 4. हरा डब्बा लाल डब्बे के पास है।
उत्तर है — पीले डब्बे के बराबर म नीला डब्बा है।
हल कैसे नकला:
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चारों िडब्बे एक पंिक्त में है ं — चार स्थान: 1, 2, 3, 4.
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संके त 2 → हरा, पीले के पास नही।
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संके त 3 → पीला, लाल के पास नही।
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aतो पीले के बग़ ल में न हरा हो सकता है, न लाल।
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बचा के वल एक रंग — नीला।
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अत: पीले का पड़ ोसी नीला ही होगा।
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पूरी पं क्त भी बन जाती है: पीले का इकलौता पड़ोसी नीला है, इस लए पीला कसी सरे पर होगा। संकेत 1 से लाल नीले के पास
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है और संकेत 4 से हरा लाल के पास है। इस तरह क्रम बनता है —
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पीला नीला
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gl – लाल – हरा (उल्टा क्रम भी सही है)
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चार संकेत को एक साथ मानने पर यही एक क्रम बनता है। दाय से बाय पढ़ तो भी सभी शत पूरी होती ह।
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संकेत जाँच (पीला–नीला–लाल–हरा)
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agl 1. लाल, नीले के पास है ✔ नीला और लाल आस-पास है ं
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✔ हरा िसरे पर, पीला दू सरे िसरे पर
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2. हरा, पीले के पास नह है
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3. पीला, लाल के पास नह है ✔ बीच में नीला है
4. हरा, लाल के पास है ✔ लाल और हरा आस-पास है ं
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c‘नहo ’ (संकेत 2 और 3) मलकर ही उत्तर दे दे ते ह — बाक़ दो संकेत तो कaे gवलl पूरी पं क्त बनाने के काम आते ह।
पहेली हल करने का नुस्ख़ा: ‘नह ’ वाले संकेत सबसे श क्तशाली होते ह, क्य क वे संभावनाएँ काट दे ते ह। यहाँ दो
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खोजबीन के लए — पृष्ठ 28
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कक्षा 7 हद अध्याय 2 तीन बु द्धमान AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 नीचे दए गए लक का प्रयोग करके आप बहुत-सी अन्य लोककथाएँ दे ख-सुन सकते ह— • सुनो लोककथा •
दु नया क छत • भूल चूक लेनी दे नी
पुस्तक म इन तीन के साथ क्यू आर कोड दए गए ह। उन्ह अपने शक्षक या अ भभावक क सहायता से स्कैन क जए और
लोककथाएँ सु नए-दे खए। ये तीन साम याँ NCERT के अपने ड जटल मंच (द क्षा / e-पाठशाला) पर उपलब्ध ह।
शीषक क्या मलेगा
सुनो लोककथा भारत के अलग-अलग पदे शों की लोककथाओं का सुनाया हुआ (ऑिडयो) प — यानी वही मौिखक परंपरा िजसकी बात
रू
‘लोककथा को सुनाना’ में की गई है।
दु नया क छत पहाड़ ी े से जुड़ी कथा-सामगी। ‘दुिनया की छत’ नाम ित बत-पामीर के ऊँ चे पठारों के िलए पयोग होता है।
क्ष त्र ब्
भूल चूक लेनी एक रोचक कथा, िजसका शीषक ही एक पचिलत मुहावरा है — अथ त ‘जो भूल हो गई, उसे आपस में मा कर ले ं’।
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दे नी
खोजबीन को अपनी प रयोजना बनाइए:
1. सुनी हुई प्रत्येक लोककथा का नाम, प्रदे श और उसका एक पं क्त का सार कॉपी म ल खए।
2. हर कथा से मलने वाली सीख अलग से ल खए।
3. अपने घर के कसी बुजग से एक लोककथा सु नए और उसे अपने शब्द म लखकर कक्षा म सुनाइए — यही सबसे अ
खोजबीन है, क्य क वह कथा शायद कह लखी ही न हो।
4. कक्षा म सबक कथाओं को जोड़कर एक ‘हमारी लोककथाएँ’ नाम क हस्त ल खत पु स्तका बनाइए।
लोककथा क पहचान: उसका कोई एक लेखक नह होता; वह सुनने-सुनाने से चलती है; उसम सरल पात्र, छोटे
संवाद और अंत म कोई सीख होती है। ‘तीन बु द्धमान’ म भी यही सब है — इसी लए वह लोककथा है।
अध्याय — एक नज़र म
तीन बु द्धमान एक लोककथा है — यानी पीढ़ -दर-पीढ़ मौ खक रूप से चली आई कहानी। पुस्तक म इसके कसी लेखक
का नाम नह दया गया, क्य क लोककथा कसी एक व्य क्त क रचना नह होती।
एक नधन पता अपने तीन बेट से कहता था — हमारे पास रुपया-पैसा और सोना-चाँद नह है, इस लए तुम “दूसरे प्रकार
का धन” सं चत करो, यानी पैनी दृ ष्ट और तीव्र बु द्ध। पता क मृत्यु के बाद तीन भाई जगत दे खने नकल पड़े।
चालीस दन क थकाऊ यात्रा के बाद वे एक बड़े नगर के पास पहुँचे। रास्ते के चह्न दे खकर बड़े भाई ने कहा — यहाँ से एक
बहुत बड़ा ऊँट गया है; मझले ने कहा — वह एक आँख से नह दे ख पाता; छोटे ने कहा — उस पर एक म हला और एक
ब ा सवार थे।
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कक्षा 7 हद अध्याय 2 तीन बु द्धमान AglaSem · NCERT Solutions
यही बात सुनकर ऊँट के स्वामी (घुड़सवार) ने उन्ह चोर समझ लया और राजा के पास ले गया। राजा ने उनक परीक्षा ली —
एक बंद पेट मँगवाई और पूछा क उसम क्या है। भाइय ने बता दया — उसम एक क ा अनार है। पेट खुली तो बात सही
नकली।
भाइय ने अपने-अपने अनुमान का तक भी बताया — धूल पर पैर के चह्न, सड़क के केवल एक ओर चरी हुई घास, रेत पर
म हला के जूत और ब े के छोटे पैर के नशान, पेट का हल्कापन और गोल वस्तु के लुढ़कने क ध्व न, तथा महल के उ ान
म लगे क े अनार।
कथा का संदेश — अवलोकन + तक = बु द्ध। राजा ने कहा — “धन-संप त्त या सांसा रक वस्तुओं क दृ ष्ट से तो तुम धनवान
नह हो ले कन तुम्हारे पास बु द्ध का बहुत बड़ा कोष है”, और तीन को अपने दरबार म रख लया।
भाषा क दृ ष्ट से यह पाठ कारक (परसग) सखाता है — ने, को, से, के लए, का/क /के, म, पर, के ारा, हे/हो/अरे — वे
शब्द जो सं ा-सवनाम का वाक्य के दूसरे शब्द से संबंध जोड़ते ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 2 तीन बु द्धमान AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
पैनी दृ ष्ट बारीक़ ी से दे खने वाली नज़र, तेज़ नज़र “रुपये-पैसे के ान पर तुम्हारे पास पैनी दृ ष्ट शक्षक क पैनी दृ ष्ट से एक
होगी” भी ग़लती नह बचती।
तीव्र / तीक्ष्ण तेज़ समझ, जल्दी सोच ले ने की शिक्त “सोने-चाँद के ान पर तीव्र बु द्ध होगी” रोहन क तीव्र बु द्ध ने पहेली
बु द्ध दो मनट म हल कर द ।
सं चत करना इक ा करना, जमा करना “तुम्ह एक दूसरे प्रकार का धन सं चत करना हम पानी बूँद-बूँद सं चत
चा हए” करना चा हए।
उन्नीस होना िकसी से थोड़ा कम या कमज़ोर पड़ना “तुम दूसर क तुलना म उन्नीस नह रहोगे” मेहनत करोगे तो कसी से
(मुहावरा) उन्नीस नह रहोगे।
चल बसना म ृत्यु हो जाना (मुहावरा) “कुछ समय पश्चात् पता चल बसे” बहुत बूढ़े हो चुके दादाजी
पछले वष चल बसे।
रेवड़ भेड़-बकिरयों का झुंड “म अपने रेवड़ को पहाड़ पर लए जा रहा था” गड़ रया अपना रेवड़ लेकर
पहाड़ी क ओर चला।
चरवाहा पशु चराने वाला “हम चरवाह या खेत म श्र मक का काम कर चरवाहा दन भर गाय के
लगे” साथ रहता है।
घुड़सवार घोड़े पर सवार व्यिक्त “ले कन घुड़सवार उनक एक भी सुनने को तैयार मेले म घुड़सवार का करतब
नह था” सबने दे खा।
आवभगत स्वागत-सत्कार, ख़ाितरदारी “लगा इन भाइय क आवभगत करने” गाँव म मेहमान क ख़ूब
आवभगत होती है।
ान याँ ान कराने वाली पाँच इंिद याँ — आँख, “अपनी ान य और बु द्ध का पूरा उपयोग करते हम अपनी ान य से ही
कान, नाक, जीभ, त्वचा ह” संसार को जानते ह।
कारक / ‘ने, को, से , में, पर…’ जैसे शब्द जो सं ा- “सं ा या सवनाम के साथ प्रयुक्त होने वाले शब्द ‘राम ने पत्र लखा’ म ‘ने’
परसग सवनाम का दू स रे शब्दों से संबंध जोड़ते है ं के ऐसे रूप को कारक या परसग कहते ह” कारक है।
लोककथा लोक में मौिखक रूप से चली आ रही कथा “लोककथा के ल खत रूप म आने से पहले दाद ने रात म एक पुरानी
कहा नय का प्रचलन मौ खक रूप म ही … चलता लोककथा सुनाई।
था”
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