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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: फूल और काँटा
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
29 – 40 15 35 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 32 pages
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: फूल और काँटा
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 3 फूल और काँटा के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह क वता अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’
(1865–1947) क रचना है, जसम एक ही पौधे पर पलने वाले फूल और काँटे के अलग-अलग स्वभाव के सहारे यह बताया गया है क व्य क्त क
पहचान उसके कुल से नह , उसके कम से होती है। पृष्ठ 29 से 40 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, पं क्तय पर चचा, मलकर कर मलान,
सोच- वचार के लए, अनुमान और कल्पना से, शब्द से जुड़े शब्द, बड़प्पन, क वता क रचना, क वता का स दय, वशेषण, आपक बात, सृजन, वाद-
ववाद, आज क पहेली और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 29 – 40
खं ड प्रश्न
15 35
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 30 और 31
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) क वता के आधार पर नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ
प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो सकते ह। (1) क वता म काँटे के बारे म कौन-सा वाक्य सत्य है? • काँटा अपने
आस-पास क सुगंध को नष्ट करता है। • काँटा तत लय और भ र को आक षत करता है। • काँटा उँग लय को
छे दता है और वस्त्र फाड़ दे ता है। • काँटा पौधे को हा न पहुँचाता है।
सही उत्तर है — काँटा उँग लय को छे दता है और वस्त्र फाड़ दे ता है। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / क वता से कारण
ग़लत
काँटा अपने आस-पास क सुगंध ग़लत क वता म कह नह कहा गया क काँटा सुगंध नष्ट करता है। सुगंध क बात केवल फूल
को नष्ट करता है। के संदभ म आई है — “ नज सुगंध औ नराले रंग से”।
काँटा तत लय और भ र को ग़लत ततली और भ रे को गोद म लेना और रस पलाना फूल का काम है। काँटा तो उनके
आक षत करता है। “पर कतर” दे ता है और भ रे का “श्याम तन” बेध दे ता है।
काँटा उँग लय को छे दता है और सही ★ “छे द कर काँटा कसी क उँ ग लयाँ, फाड़ दे ता है कसी का वर बसन।” — यह वाक्य
वस्त्र फाड़ दे ता है। सीधे क वता क पं क्त से नकलता है।
काँटा पौधे को हा न पहुँचाता है। ग़लत काँटा दूसर को चुभता है, अपने पौधे को नह । क वता कहती है क पौधा तो दोन को
समान रूप से पालता है — “एक ही पौधा उन्ह है पालता।”
क्य : इस प्रश्न म “सत्य वाक्य” वही है जसका प्रमाण क वता क कसी पं क्त म मल जाए। बाक तीन वाक्य
हमारे अपने अनुमान ह, क वता के कथन नह ।
प्र.2 (2) क वता म फूल और काँटे म समानताओं और व भन्नताओं का उल्लेख कया गया है। नम्न ल खत म से
कौन-सा वाक्य इन्ह सही रूप म व्यक्त करता है? • फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का। • फूल और
काँटे के बारे म लोग के वचार समान होते ह। • फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते ह, ले कन उनके स्वभाव
भन्न होते ह। • फूल और काँटे को समान दे खभाल मलती है फर भी उनके रंग-ढं ग अलग होते ह।
सबसे सट क उत्तर है — फूल और काँटे को समान दे खभाल मलती है फर भी उनके रंग-ढं ग अलग होते ह। इसके साथ फूल
और काँटे एक ही पौधे पर उगते ह, ले कन उनके स्वभाव भन्न होते ह भी सही है। दोन के सामने तारा (★) बनाया जा सकता
है।
वकल्प सही / ग़लत कारण
फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा अधूरा यह वाक्य केवल अंतर बताता है, समानता नह । प्रश्न दोन — समानता
कठोरता का। और व भन्नता — एक साथ माँग रहा है।
फूल और काँटे के बारे म लोग के वचार ग़लत क वता इसका उलटा कहती है — “है खटकता एक सब क आँख म,
समान होते ह। दूसरा है सोहता सुर शीश पर।” लोग के वचार दोन के बारे म बलकुल
अलग ह।
फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते सही ★ “ह जनम लेते जगह म एक ही, एक ही पौधा उन्ह है पालता।” —
ह, ले कन उनके स्वभाव भन्न होते ह। समानता; “ढं ग उनके एक से होते नह ।” — व भन्नता।
फूल और काँटे को समान दे खभाल सही ★ यह वकल्प चाँदनी, मेह और हवा वाली तीन समानताओं को “समान
मलती है फर भी उनके रंग-ढं ग अलग (सव िधक दे खभाल” म समेट लेता है और साथ ही “रंग-ढं ग अलग” कहकर
होते ह। सटीक ) व भन्नता भी बता दे ता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द: प्रश्न स्वयं कहता है क कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर हो सकते ह। इस लए यहाँ दो वकल्प चुनना ग़लत
नह है — बस आपको कारण बताना आना चा हए।
प्र.3 (3) क वता के आधार पर कौन-सा नष्कष उपयुक्त है? • व्य क्त का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है। •
व्य क्त के काय के कारण ही लोग उसका सम्मान करते ह। • कुल क प्र तष्ठा हमेशा व्य क्त के गुण से बड़ी होती
है। • य द व्य क्त अ े काय करता है तो उसके कुल को प्र स द्ध मलती है।
सही उत्तर है — व्य क्त के काय के कारण ही लोग उसका सम्मान करते ह। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / ग़लत कारण
व्य क्त का कुल ही उसके सम्मान ग़लत क वता का अं तम प्रश्न ही इस सोच को नकारता है — “ कस तरह कुल क
का आधार होता है। बड़ाई काम दे , जो कसी म हो बड़प्पन क कसर।”
व्य क्त के काय के कारण ही सही ★ फूल और काँटे का कुल एक ही है, पर सम्मान अलग-अलग मला — क्य क
लोग उसका सम्मान करते ह। कम अलग थे। फूल दे वता के सर चढ़ा, काँटा आँख म खटका।
कुल क प्र तष्ठा हमेशा व्य क्त के ग़लत यह क वता के संदेश के ठ क वपरीत है। यहाँ गुण कुल से बड़े सद्ध होते ह।
गुण से बड़ी होती है।
य द व्य क्त अच्छे काय करता है तो आं शक रूप से यह बात सच तो है, पर क वता इस पर बल नह दे ती। क वता का बल व्य क्त
उसके कुल को प्र स द्ध मलती है। माना जा सकता है के सम्मान पर है, कुल क प्र स द्ध पर नह । य द आप इसे चुन तो यही कारण
बताना होगा।
प्र.4 (4) क वता के अनुसार नम्न ल खत म से कौन-सा कथन ‘बड़प्पन’ के लए सवा धक उपयुक्त है? • धन-दौलत
और ताकत से व्य क्त के बड़प्पन का पता चलता है। • कुल के बड़प्पन क प्रशंसा व्य क्त क क मय को ढक दे ती
है। • बड़प्पन व्य क्त के गुण , स्वभाव और कम से पहचाना जाता है। • कुल का नाम व्य क्त म बड़प्पन क
पहचान का मुख्य आधार है।
सही उत्तर है — बड़प्पन व्य क्त के गुण , स्वभाव और कम से पहचाना जाता है। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा
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वकल्प सही / कारण
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comसे व्य क्त के
ग़लत
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क वता म धन या ताकत क चचा है ही नह ।aफूल के पास न धन है न बल —
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धन-दौलत और ताकत
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ग़लत
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बड़प्पन का पता चलता है। फर भी वह सबका प्रय है।
कुल के बड़प्पन क प्रशंसा व्य क्त क ग़लत क व पूछता है क ऐसी बड़ाई “ कस तरह काम दे ” — यानी कुल क प्रशंसा
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क मय को ढक दे ती है। क मय को ढक नह पाती।
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seपूरी क वता कम बनाम कुल क तुलना है। फूल का बड़प्पन उसके देने के
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सही ★
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ag स्वभाव म है — ततली को गोद, भ रे को रस, कली को खलावट।
बड़प्पन व्य क्त के गुण , स्वभाव और
कम से पहचाना जाता है।
कुल का नाम व्य क्त म बड़प्पन क ग़लत
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य द यह सच होता तो एक ही पौधे के फूल और काँटे का सम्मान भी एक-सा
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पहचान का मुख्य आधार है। होता, जब क क वता कहती है क नह होता।
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a s रखने क बात: ‘बड़प्पन’ = बड़ा + पन, अथात् बड़ा होने का भाव। भाव व्यवहार म दखता है, नाम-पट्ट पर
a gl नह ।
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l ही क्य चुन?
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प्र.5 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग या एक से अ धक उत्तर चुने ह । अपने मत्र के
साथ चचा क जए क आपने ये
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यह समूह-चचा क ग त व ध है। चचा म हर साथी को केवल यह नह बताना है क उसने क्या चुना, ब ल्क यह भी क क वता क
कस पं.cक्त a
se m के आधार पर चुना।
g l aचचा को अ ा बनाने का तरीका —
a 1. हर साथी अपना चुना हुआ वकल्प पढ़े और साथ म क वता क वह पं क्त भी पढ़े जो उसका प्रमाण है।
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2. जहाँ दो सा थय के उत्तर अलग ह, वहाँ यह दे खए क वे अलग ह या दोन सही ह। जैसे प्रश्न (2) म तीसरा और चौथा — दोन
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a“येs उत्तर सबने चुने”, “इन पर मतभेद रहा”, “इनका कारण क वता म नह मला”।
वकल्प सही ह।
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3. अंत म समूह एक साझा सूची बनाए —l
नमूना उत्तर: “मने प्रश्न (2) म चौथा वकल्प चुना, क्य क क वता क पहली आठ पं क्तयाँ केवल यही बताती ह क चाँद, मेह और
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हवा दोन को बराबर मलते ह — यही ‘समान दे खभाल’ है। और नौव पं क्त से आगे उनके अलग-अलग ‘ढं ग’ बताए गए ह। मेरे
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मत्र आ दत्य ने तीसरा वकल्प चुना। हम दोन सही ह, क्य क दोन वाक्य एक ही बात को अलग शब्द म कहते ह।”
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m यह ग त व ध क्य है: बहु वकल्पी प्रश्न म असली सीख उत्तर चुनने म नह , कारण बताने म है। जब आप कारण
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ag बोलकर बताते ह, तो आपको स्वयं पता चल जाता है क आपका उत्तर पाठ पर टका है या केवल अनुमान पर।
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 31
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पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और ल खए— (क) “मेह उन पर है बरसता
एक सा, एक सी उन पर हवाय ह बही। पर सदा ही यह दखाता है हम, ढं ग उनके एक से होते नह ।”
अथ — वषा दोन पर एक जैसी बरसती है और हवा भी दोन पर एक जैसी बहती है। फर भी यह बात हम हमेशा दखाई दे ती रहती
है क फूल और काँटे का ढं ग, यानी स्वभाव और व्यवहार, कभी एक जैसा नह होता।
पं क्त क्या कह रही है
“मेह उन पर है बरसता एक सा” प्रकृ त भेदभाव नह करती — बादल यह नह दे खता क नीचे फूल है या काँटा।
“एक सी उन पर हवाय ह बही” हवा, धूप, पानी — सब अवसर दोन को बराबर मले।
“पर सदा ही यह दखाता है हम” ‘सदा’ शब्द बताता है क यह कोई एक दन क बात नह , हर बार का अनुभव है।
“ढं ग उनके एक से होते नही ं” एक जैस ा पालन-पोषण पाकर भी दोनों का चिरत्र अलग िनकला।
गहरी बात: यह केवल पौधे क बात नह है। एक ही घर, एक ही वद्यालय, एक ही शक्षक — फर भी दो ब का
स्वभाव अलग हो सकता है। क व कहना चाहता है क प र त सबको समान मल सकती है, पर च रत्र हर कोई
अपना स्वयं गढ़ता है। इसी लए कसी के अच्छे या बुरे होने क ज़म्मेदारी उसके कुल पर नह , उस पर स्वयं है।
भाषा क बात: ‘मेह’ = वषा, ‘हवाय’ = हवाएँ (क व ने लय के लए पुराना रूप रखा है), ‘ढं ग’ = तौर-तरीक़ा,
स्वभाव।
प्र.2 (ख) “ कस तरह कुल क बड़ाई काम दे , जो कसी म हो बड़प्पन क कसर।”
अथ — य द कसी व्य क्त म स्वयं बड़प्पन क कमी है, तो उसके कुल यानी ख़ानदान क बड़ाई उसके कस काम आएगी? क व यह
बात प्रश्न के रूप म रखता है, पर उत्तर स्पष्ट है — कसी काम क नह ।
कुल क बड़ाई = वंश, प रवार या ख़ानदान का ऊँचा नाम।
बड़प्पन क कसर = व्य क्त के अपने गुण , स्वभाव और आचरण म कमी।
क वता से प्रमाण — फूल और काँटा दोन का ‘कुल’ एक ही है — वही पौधा, वही जड़, वही मट्ट । फर भी फूल दे वता के सर पर
सजता है और काँटा सबक आँख म खटकता है। इससे सद्ध होता है क सम्मान कुल से नह , कम से मलता है।
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क्य यह पं क्त क वता का सार है: पूरी क वता म क व केवल वणन करता रहा — कौन क्या करता है। अं तम दो
पं क्तय म वह उस वणन से नकला हुआ नष्कष हमारे सामने रखता है, और वह भी उपदे श दे कर नह , प्रश्न
पूछकर। प्रश्न पढ़ने वाले को स्वयं सोचने पर मजबूर करता है — यही इस पं क्त क श क्त है।
अपने शब्द म: “नाम बड़ा होने से आदमी बड़ा नह होता; आदमी बड़ा हो तो नाम अपने आप बड़ा हो जाता है।”
मलकर कर मलान — पृष्ठ 32
पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 इस क वता म ‘फूल’ और ‘काँटा’ के उदाहरण ारा लोग के स्वभाव के अंतर और समानताओं क ओर संकेत
कया गया है। दूसरे शब्द म, ‘फूल’ और ‘काँटा’ प्रतीक के रूप म प्रयोग कए गए ह। अपने सा थय के साथ
मलकर चचा क जए क फूल और काँटा कस- कस के प्रतीक हो सकते ह। इन्ह उपयुक्त प्रतीक से जो ड़ए—
(बाईं ओर — दया, स्वाथ, अ ाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, आनंद; दाईं ओर — परोपकार, प्रेम, बुराई, दुख,
कठोरता, प्रसन्नता, पीड़ा)
पुस्तक म बीच म दो चत्र ह — फूल और काँटा। दोन ओर दए गए चौदह शब्द को इनसे रेखा ख चकर जोड़ना है। जो भाव सुख,
सुंदरता और दे ने से जुड़े ह वे फूल से जुड़गे; जो चोट, कमी और लेने से जुड़े ह वे काँटे से।
फूल के प्रतीक क वता से आधार काँटे के प्रतीक क वता से आधार
दया ततली को गोद म लेना स्वाथ केवल अपने लए, कसी को कुछ नह दे ता
अच्छाई “है सदा दे ता कली का जी खला” बुराई “छे द कर काँटा कसी क उँ ग लयाँ”
सुख भ रे को अनूठा रस पलाना दुख “फाड़ दे ता है कसी का वर बसन”
सुंद रता “ नराले रंग”, “सोहता सुर शीश पर” कठोरता चुभने वाला, नुक ला स्वभाव
कोमलता पंखु ड़य क कोमलता, कोमल व्यवहार पीड़ ा “भ र का है बेध दे ता श्याम तन”
आनंद सुगंध से चार ओर आनंद — —
परोपकार अपना रस दूसर को दे ना — —
पेम “प्यार-डू बी तत लय ” का स्वागत — —
पस ता न्न “कली का जी खला” दे ना — —
संक्षेप म —
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
फूल → दया, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, आनंद, परोपकार, प्रेम, प्रसन्नता (कुल 9 शब्द)
काँटा → स्वाथ, बुराई, दुख, कठोरता, पीड़ा (कुल 5 शब्द)
प्रतीक क्या होता है: जब कोई वस्तु अपने अलावा कसी भाव या वचार का संकेत दे ने लगे, तो वह प्रतीक कहलाती
है। यहाँ फूल केवल फूल नह रह जाता — वह दे ने वाले, सुख बाँटने वाले स्वभाव का प्रतीक बन जाता है; और काँटा
चोट पहुँचाने वाले स्वभाव का। इसी कारण क वता पौध क न रहकर मनुष्य क हो जाती है।
चचा के लए: काँटे को हमेशा बुरा मानना ज़रूरी नह । वही काँटा पौधे क रक्षा भी करता है। इस लए कोई साथी
‘रक्षा’ या ‘संघष’ को भी काँटे से जोड़े तो उसका कारण सु नए — पाठ के अंत म दया गया वाद- ववाद इसी बात
पर है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 32
पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता को एक बार पुन: ध्यान से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) क वता म ऐसी कौन-कौन सी
समानताओं का उल्लेख कया गया है जो सभी पौध पर समान रूप से लागू होती ह?
क वता क पहली आठ पं क्तय म चार समानताएँ गनाई गई ह, और ये चार हर पौधे पर एक जैसी लागू होती ह —
क्रम समानता क वता क पं क्त
1 जन्म एक ही ान पर होता है “है ं जनम ले ते जगह में एक ही”
2 पालन-पोषण एक ही पौधा करता है “एक ही पौधा उन्हे ं है पालता”
3 चाँद क चाँदनी सब पर एक-सी पड़ती है “रात में उन पर चमकता चाँद भी, एक ही सी चाँद नी है डालता”
4 वषा और हवा सब पर एक-सी बरसती-बहती है “मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवाये ं है ं बही”
यानी जन्म ान, पालने वाला, चाँदनी, वषा और हवा — ये सब प्रकृ त क दे न ह और प्रकृ त इन्ह बाँटते समय कसी म भेद नह
करती।
क व ने ये समानताएँ पहले क्य गनाईं: य द पहले यह सद्ध न कया जाए क दोन को सब कुछ बराबर मला, तो
बाद म यह कहना बेकार हो जाता क अंतर उनके अपने ढं ग का है। पहले समानता, फर अंतर — यही इस क वता
क तक-रचना है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव म मुख्य रूप से कौन-सा अंतर दखाई दया?
मुख्य अंतर यह है क काँटा दूसर को कष्ट दे ता है और फूल दूसर को सुख दे ता है। एक का स्वभाव छ नने और चुभने का है,
दूसरे का दे ने और खलाने का।
कसके साथ काँटा क्या करता है फूल क्या करता है
मनुष्य उँ ग लयाँ छे दता है, अच्छे वस्त्र फाड़ दे ता है सुगंध और रंग से मन पस करता है
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ततली पंख कतर दे ता है गोद में ले ले ता है
भ रा काला शरीर बेध दे ता है अपना अनूठा रस िपलाता है
कली — उसका जी िखला दे ता है
लोग क दृ ष्ट म सबक आँख म खटकता है दे वता के िसर पर शोभा पाता है
ध्यान दे ने क बात: क व ने दोन के लए वही तीन पात्र चुने — ततली, भ रा और दे खने वाले लोग। एक ही त
म दो अलग व्यवहार दखाने से अंतर बहुत तीखा उभर आता है। यही अच्छ क वता क कला है।
प्र.3 (ग) क वता म मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचा नए, सम झए और अपने शब्द म ल खए।
मुख्य बात — मनुष्य क पहचान और सम्मान उसके कुल से नह , उसके गुण और कम से होता है।
अपने शब्द म — क व ह रऔध जी एक पौधे का उदाहरण लेते ह जस पर फूल भी है और काँटा भी। दोन का जन्म एक जगह
हुआ, दोन को एक ही पौधे ने पाला, दोन पर एक-सी चाँदनी पड़ी और एक-सा पानी बरसा। फर भी काँटा चुभता है और फूल
महकता है। इसका कारण उनक जड़ नह , उनका स्वभाव है। इसी लए अंत म क व पूछता है क जब कसी व्य क्त म स्वयं बड़प्पन
ही न हो, तो उसके ख़ानदान का बड़ा नाम उसके कस काम आएगा। स ा बड़प्पन दूसर के काम आने म है, ऊँचे कुल म जन्म लेने
भर म नह ।
कु ल एक ही → चाँद नी, मेह, हवा एक-से
पर ढं ग अलग → काँट ा चुभ ा, फूल महका
इसिलए → सम्मान कु ल का नही,ं कम का फल है
एक पं क्त म: “जन्म से कोई बड़ा नह होता, कम से बड़ा बनता है।”
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा
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(घ) “ कस तरह कुल क बड़ाई काम दे , जो कसी म हो बड़प्पन क कसर।” उदाहरण दे कर समझाइए।
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a पं lक्त का अथ है — जस व्य क्त म स्वयं बड़प्पन क कमी हो, उसके ख़ानदान का बड़ा नाम उसके कसी काम नह आता।
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उदाहरण 1 — क वता के भीतर से: काँटे का कुल तो वही है जो फूल का। उसी पौधे पर, उसी जड़ से वह भी नकला है। पर
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उसका स्वभाव चुभने का है, इस लए लोग उसे तोड़कर फक दे ते ह। पौधे का बड़ा नाम काँटे को सम्मान नह दला सका।
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उदाहरण 2 — हमारे आसपास से: मान ली जए कसी गाँ
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व के प्र सद्ध वैद्य जी के दो पोते ह। एक पोता लोग क सेवा करता है,
बीमार को दवा पहुँचाता है — गाँव उसे उसके अपनेlनाम से जानता है। दूसरा पोता कसी क मदद नह करता, झगड़ता रहता है —
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लोग उसके सामने चुप रहते ह पर पीछे कहते ह, “दादा कतने भले थे!” यहाँ दादा क प्र तष्ठा दूसरे पोते के काम नह आई।
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उदाहरण 3 — इ तहास से: मह ष वाल्मी क और महाक व का लदास कसी बड़े कुल क प्र स द्ध लेकर नह जन्मे थे, पर अपने
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कम से अमर हो गए। दूसरी ओर बड़े राजवंश के अनेक उत्तरा धकारी अपने बुरे आचरण के कारण इ तहास म नदा के पात्र बने।
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क्य काम नह आती कुल क बड़ाई: कुल का नाम एक उधार लया हुआ सम्मान है — वह दूसर के कम से बना
a gl है। जस दन आपका अपना आचरण उसके वरुद्ध जाता है, उसी दन वह उधार लौटाना पड़ता है। इसी लए क व ने
‘कसर’ शब्द चुना — कमी क भरपाई बाहर से नह हो सकती, वह भीतर से ही भरनी पड़ती है।
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प्र.5 आँgख म, दूसरा है सोहता सुर शीश पर।” लोग कैसे स्वभाव के व्य क्तय क प्रशंसा
(ङ) “है खटकता एक सब क a
करते ह और कैसे स्वभाव वाले व्य क्तय से दूर रहना पसंद करते ह?
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m .c अथ — एक (काँटा) सबक आँख म चुभता है और दूसरा (फूल) देवताओं कaे gसर पर चढ़कर शोभा पाता है। यही बात
seष्य पर भी लागू होती है।
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लोग जनक प्रशंसा करते ह — ‘फूल’ जैसे लोग लोग जनसे दूर रहना चाहते ह — ‘काँटे’ जैसे लोग
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जो मीठा बोलते है ं और दू स रों की बात धै य से सुनते है ं m. a
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जो कड़वा बोलते ह और बात-बात पर ताना मारते ह
जो िबना कहे मदद कर दे ते है ं agl जो सहायता माँगने पर भी टाल जाते ह
जो दू स रों की सफलता पर पस होते है ं
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न्न जो दूसर क सफलता से जलते ह
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जो ग़ ल ती मान ले ते है ं और क्षमा माँग ले ते है ं
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जो अपनी ग़लती दूसर पर डाल दे ते ह
em जो छोटे-बड़ े सबसे समान व्यवहार करते है ं a
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जो घमंड करते ह और दूसर को नीचा दखाते ह
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संक्षेप म — लोग वनम्र, उदार, सहनशील और परोपकारी स्वभाव के व्य क्तय क प्रशंसा करते ह और अहंकारी, स्वाथ ,
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कठोर तथा ईष्यालु स्वभाव वाले व्य क्तय से दूरी बना लेते ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
‘खटकना’ शब्द क्य सट क है: जो चीज़ आँख म खटकती है, उसे हम हटा दे ना चाहते ह — यह हमारी सोची-
समझी योजना नह , स्वाभा वक प्र त क्रया है। क व कहना चाहता है क बुरे व्यवहार से बनी दूरी अपने आप बन
जाती है, कोई घोषणा करके नह बनाता।
सो चए: क्या कोई ‘काँटा’ बदलकर ‘फूल’ बन सकता है? स्वभाव जन्म से तय नह होता — अभ्यास से बदलता है।
यही इस क वता क सबसे आशा भरी बात है।
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 32 और 33
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए — (क) कल्पना क जए क चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर
बरसते ह। बाक पौधे इन सबके बना कैसे दखगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
य द प्रकृ त भेदभाव करने लगे तो केवल एक पौधा हरा-भरा रहेगा और शेष सारे पौधे मुरझा जाएँगे।
बाक पौधे कैसे दखगे —
पत्ते पीले पड़कर सूखने और झड़ने लगगे; टह नयाँ भूरी और भंगुर हो जाएँगी।
न कोई कली फूटे गी, न फूल खलगे, न फल लगगे।
जड़ सूखी मट्ट म सकुड़ जाएँगी और पौधे झुककर गर पड़गे।
उनके जीवन पर प्रभाव —
कसके बना क्या होगा
मेघ (वषा) के बना जल न िमलने से पौधा भोजन नही ं बना पाएगा और सूख जाएगा।
हवा के बना साँस ले ने और भोजन बनाने की ि या रुक जाएगी; परागण न होने से बीज नही ं बनेगं े।
क्र
चाँदनी और चाँद के बना रात-िदन का च िबगड़ जाएगा; फू लों का िखलना-मुरझाना अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
क्र
इसका असर केवल पौध तक नह रुकेगा। तत लयाँ और भ रे भूखे रह जाएँगे, प क्षय के घ सले उजड़ जाएँगे, और अंत म मनुष्य
को भी अनाज, फल और छाया नह मलेगी।
इससे क वता का क्या संबंध है: क वता क न व ही यह है क प्रकृ त सबको बराबर दे ती है। यह कल्पना उलट
दशा से वही बात सद्ध करती है — य द दे ना बराबर न हो, तो फर कसी के अच्छे -बुरे होने का दोष उसका अपना
नह रह जाएगा, प र त का हो जाएगा।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (एक वाक्य म): “सूरज, पानी और हवा कसी एक क जागीर नह ह; ये सबके ह — तभी तो हर पौधे
को अपने ढं ग से बढ़ने का पूरा अवसर मलता है।”
प्र.2 (ख) य द सभी पौधे एक जैसे होते तो दु नया कैसी लगती?
य द सभी पौधे एक जैसे होते तो दु नया दे खने म नीरस और उबाऊ लगती, और जीवन के लए बहुत क ठन भी हो जाती।
सुंदरता समाप्त हो जाती — न गुलाब का लाल रंग, न गदे का पीला, न चंपा क महक। हर ओर एक ही आकार, एक ही रंग।
भोजन क व वधता चली जाती — गे ँ, चावल, आम, नीबू, हल्द , तुलसी — सब एक ही चीज़ म बदल जाते। स्वाद और
पोषण दोन घट जाते।
औष धयाँ न मलत — नीम, गलोय, अश्वगंधा जैसे अलग-अलग गुण वाले पौधे न होते तो अनेक रोग का इलाज ही न होता।
पयावरण असुर क्षत हो जाता — कोई एक रोग या क ड़ा फैलता तो सारे पौधे एक साथ नष्ट हो जाते, क्य क सबक कमज़ोरी
एक ही होती।
जीव-जंतु भी घट जाते — हर ततली, भ रे और पक्षी का भोजन और घर अलग-अलग पौध से जुड़ा है।
असली बात: जसे हम ‘अंतर’ कहकर कभी-कभी बुरा मान लेते ह, वही अंतर संसार को सुंदर और सुर क्षत बनाता
है। यही बात मनुष्य पर भी लागू होती है — सब एक जैसा सोचने लग तो न कोई नया वचार आए, न कोई नई खोज
हो।
प्र.3 (ग) य द काँटे न होते और हर पौधा केवल फूल से भरा होता तो क्या होता?
पहली नज़र म यह बात सुंदर लगती है, पर सोचने पर पता चलता है क इसम कई हा नयाँ भी ह।
अ ा क्या होता क ठनाई क्या होती
हर ओर रंग और सुगंध होती; फूल तोड़ते समय कसी पौधों की रक्षा समाप्त हो जाती — बकरी, ऊँ ट और अन्य पशु सारे पौधे चर जाते।
क उँ गली न छदती।
बगीच और खेत म काम करना आसान हो जाता। रे िगस्तान के नागफनी जैसे पौधे जीिवत ही न रह पाते, क्योंिक उनके काँटे ही पानी
बचाने और धूप से बचने का साधन है।ं
ब े बेखटके पौध के बीच खेल सकते। बेर, बबूल , करौंद ा और नीबू जैसे उपयोगी पेड़ िबना सुरक्षा के जल्दी नष्ट हो जाते।
इसके अलावा, य द केवल फूल ही फूल होते तो हम फूल क क़ मत भी न पता चलती। काँटा है, इसी लए फूल क कोमलता वशेष
लगती है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
दूसरा पक्ष भी सु नए: क वता काँटे को चुभने वाला बताती है, पर वनस्प त- व ान बताता है क काँटा असल म
पौधे का रक्षा-कवच है। इस लए इस प्रश्न का कोई एक ‘सही’ उत्तर नह है — जो उत्तर कारण के साथ दया जाए,
वही अच्छा उत्तर है।
प्र.4 (घ) कल्पना क जए क एक ततली काँटे से मत्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?
ऐसे संवाद म दो बात होनी चा हए — ततली का डर और काँटे क सफ़ाई, और अंत म कोई ऐसी बात जस पर दोन सहमत हो
जाएँ।
नमूना उत्तर —
कौन क्या कहता है
ततली काँटे भैया, नमस्ते! म रोज़ इस पौधे पर आती ँ, पर आपसे कभी बात नह क ।
काँटा बात कौन करता है मुझसे? सब कहते ह — काँटा है, दूर रहो।
ततली सच क ँ तो मुझे भी डर लगता है। सुना है आप तत लय के पंख कतर दे ते ह।
काँटा म कसी को ढूँ ढ़कर नह चुभता, बहन। म तो एक जगह खड़ा रहता ँ। जो पास से टकराता है, उसे चोट लग जाती है। मेरा काम इस
पौधे को बक रय से बचाना है।
ततली अरे! यह तो मने कभी सोचा ही नह । यानी जस फूल का रस म पीती ँ, वह आपके कारण ही बचा हुआ है?
काँटा हाँ, पर श्रेय हमेशा फूल को मलता है। मुझे इसका दुख नह — बस कोई समझ ले तो अच्छा लगता है।
ततली तो आज से हम मत्र। म आपसे थोड़ा दूर बैठा करूँगी, पर बात रोज़ करूँगी।
काँटा यही स ी मत्रता है — पास आकर चोट खाने से अच्छा है, दूर रहकर एक-दूसरे को समझना।
लखते समय ध्यान रख: संवाद म हर पात्र क भाषा उसके स्वभाव जैसी हो — ततली क बात हल्क और चंचल,
काँटे क बात सं क्षप्त और गंभीर। संवाद के आगे नाम और डैश (—) लगाना न भूल।
प्र.5 (ङ) कल्पना क जए क आपको कसी काँटे, फूल या दोन के गुण के साथ जीवन जीने का अवसर मलता है।
आप कसके गुण को अपनाना चाहगे? कारण स हत बताइए।
यह आपक अपनी राय का प्रश्न है, इस लए तीन म से कोई भी उत्तर सही है — शत यह है क कारण स्पष्ट हो। अच्छे उत्तर म तीन
बात होनी चा हए: (1) आपका चुनाव, (2) उस चुनाव के दो-तीन ठोस कारण, (3) एक उदाहरण।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (दोन के गुण चुनते हुए) — म दोन के गुण अपनाना चा ँगा/चा ँगी। फूल से म यह सीखना चाहता ँ क दूसर के
काम आना, मीठा बोलना और बना जताए दे ना कतना सुंदर होता है — जैसे फूल ततली को गोद दे ता है और भ रे को रस पलाता
है। पर केवल कोमल होना पयाप्त नह है। काँटे से म यह सीखना चाहता ँ क जब कोई ग़लत बात हो, तब डटकर खड़े रहना और
अपनी तथा अपने सा थय क रक्षा करना भी ज़रूरी है। जैसे कक्षा म य द कोई छोटे ब े को चढ़ा रहा हो, तो चुप रहना कोमलता
नह , कमज़ोरी है। इस लए म फूल-सा स्वभाव और काँटे-सा साहस — दोन साथ रखना चा ँगा।
य द आप चुन तो ये कारण दे सकते ह
केवल फूल सबको सुख दे ना, सम्मान पाना, दूसर के जीवन म सुगंध भरना; “सोहता सुर शीश पर”।
केवल काँटा अपनी और दूसर क रक्षा करना, क ठन प र त म टके रहना, सूखे म भी जी वत रहना।
दोन व्यवहार म कोमलता और सद्धांत म दृढ़ता — जीवन के लए दोन चा हए।
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 33
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 नीचे दए गए रक्त ान म ‘बड़प्पन’ से जुड़े शब्द अपने समूह म चचा करके ल खए— (बीच म ‘बड़प्पन’
लखा है और उससे सात ख़ाने जुड़े ह, जनम से एक म ‘संतोष’ पहले से भरा हुआ है।)
पुस्तक म सात ख़ाने ह और एक ख़ाने म संतोष पहले से भरा है। शेष छह ख़ान म ‘बड़प्पन’ के साथ चलने वाले भाव भरने ह।
ख़ाना शब्द यह बड़प्पन से क्य जुड़ा है
1 िवनमता जो सचमुच बड़ा होता है, वह झुकना जानता है — फूल भी भारी होकर झुक जाता है।
2 संतोष (पहले से भरा हुआ) जो अपने पास जो है उसी म प्रसन्न रहता है, वह लालच से बड़ा हो जाता है।
3 उदारता बना गने और बना जताए दे ना बड़प्पन क सबसे साफ़ पहचान है।
4 क्षमा बदला लेने क श क्त होते हुए भी माफ़ कर दे ना ही बड़ाई है।
5 सहनशीलता बड़ा व्य क्त छोट बात पर बगड़ता नह , सह लेता है।
6 परोपकार दूसर के काम आना — जैसे फूल ततली और भ रे के काम आता है।
7 त्याग अपना सुख छोड़कर दूसर को दे ना बड़प्पन क सबसे ऊँची सीढ़ है।
अन्य शब्द जो लखे जा सकते ह — दया, करुणा, स ावना, समपण, आदर, नष्ठा, धैय, सरलता, सादगी, नःस्वाथता।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा
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चचा का सुझाव: समूह म हर साथी एक शब्द बोले और साथ म यह भी बताए क उसने कस व्य क्त म वह गुण
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दे खा है। इससे शब्द केवल याद नह होता, समझ म उतर जाता है।
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बड़प्पन — पृष्ठ 33
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पाठ से
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पाठ से शब्द क बात
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प्र.1 ‘बड़प्पन’ शब्द ‘बड़ा’ और ‘पन’ से मलकर बना है। इसका अथ होता है — बड़ाई, ेष्ठ या बड़ा होने का भाव,
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महत्व, गौरव। इसका उपयोग मुख्य रूप से व्य क्तत्व, गुण और च रत्र क ऊँचाई या महानता बताने के लए कया
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जाता है, जैसे — उनक सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत लया। • नीचे कुछ शब्द दए गए ह जो कसी
m .cको व्यक्त करते ह। इनम से जो शब्द ‘बड़प्पन’ के भाव व्यक्त करते ह, उनagपर एक गोला बनाइए, जो
se बड़प्पन का भाव व्यक्त नह करते ह, उनके नीचे रेखा ख चए। (सहनशीलता, दया, अहंकार, व ास, घमंड,
भाव
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agl ईष्या, े ष, प्र तशोध, क्रूरता, उदारता, वनम्रता, त्याग, संतोष, समपण, आदर, सम्मान, नष्ठा, परोपकार,
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स ावना, स्वाथ, अपमान, अ व ास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन)
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gl सहनशीलता, दया, वश्वास, उदारता, वनम्रता, त्याग, संतोष, समपण, आदर,
गोला बनाइए (बड़प्पन का भाव) — 13aशब्द:
सम्मान, नष्ठा, परोपकार, स ावना।
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नीचे रेखा ख चए (बड़प्पन का भाव नह ) — 13 शब्द: अहंकार, घमंड, ईष्या, े ष, प्र तशोध, क्रूरता, स्वाथ, अपमान, अ वश्वास,
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झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
शब्द गोला / रेखा अथ और कारण
सहनशीलता गोला सह लेने क श क्त — बड़ा व्य क्त छोट बात पर बगड़ता नह ।
दया गोला दूसर का दुख दे खकर पघल जाना।
अहंकार रेखा स्वयं को सबसे बड़ा समझना — यह बड़प्पन का उलटा है।
वश्वास गोला दूसर पर भरोसा करना; भरोसा वही करता है जसका मन बड़ा हो।
घमंड रेखा अहंकार का ही दूसरा रूप।
ईष्या रेखा दूसरे क उन्न त से जलन।
ेष रेखा मन म बैर पाल लेना।
प्र तशोध रेखा बदला लेने क भावना; बड़प्पन क्षमा म है, बदले म नह ।
क्रूरता रेखा नदयता — जैसे काँटे का चुभना।
उदारता गोला खुले मन से दे ना।
वनम्रता गोला झुककर बात करना; बड़ा होकर भी छोटा बने रहना।
त्याग गोला अपना छोड़कर दूसरे को दे ना।
संतोष गोला जो है उसी म सुखी रहना।
समपण गोला पूरे मन से कसी काम या व्य क्त को स प दे ना।
आदर गोला दूसर को मान दे ना।
सम्मान गोला प्र तष्ठा दे ना और पाना।
नष्ठा गोला अपने कतव्य पर टके रहना।
परोपकार गोला दूसर का भला करना — क वता का ‘फूल’ यही है।
स ावना गोला सबके प्र त अच्छ भावना रखना।
स्वाथ रेखा केवल अपना हत दे खना।
अपमान रेखा दूसरे को नीचा दखाना।
अ वश्वास रेखा बना कारण शक करना।
झूठ रेखा सच छपाना — च रत्र क सबसे बड़ी कसर।
अधीरता रेखा धैय न रखना।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
शब्द गोला / रेखा अथ और कारण
लालच रेखा और-और पाने क भूख।
झगड़ालूपन रेखा बात-बात पर झगड़ना।
पहचानने का सरल नयम: जो भाव दूसर को कुछ दे ता है (दया, त्याग, आदर, परोपकार) वह बड़प्पन है; जो भाव
दूसर से कुछ छ नता है या उन्ह छोटा दखाता है (अहंकार, ईष्या, लालच, अपमान) वह बड़प्पन नह है।
शब्द-रचना दे खए: बड़ा + पन = बड़प्पन। इसी तरह — अपना + पन = अपनापन, लड़का + पन = लड़कपन,
पागल + पन = पागलपन, ब ा + पन = बचपन। ‘पन’ प्रत्यय सं ा बनाकर ‘होने का भाव’ बताता है।
क वता क रचना — पृष्ठ 34
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 “फूल लेकर तत लय को गोद म, भ र को अपना अनूठा रस पला। नज सुगंध औ नराले रंग से, है सदा दे ता
कली का जी खला।” इस पं क्त म रेखां कत शब्द पर ध्यान द जए। क्या आपने इस शब्द को पहले कह पढ़ा है?
यह शब्द है— ‘और’। क वता म ‘र’ वण नह लखा गया है। कई बार बोलते हुए हम शब्द क अं तम ध्व न
उच्च रत नह करते ह। क व भी क वता क लय के अनुसार ऐसा प्रयोग करते ह। इस क वता म ऐसी अनेक
वशेषताएँ छपी ह, जैसे— ‘प्यार म डू बी तत लय ’ के ान पर ‘प्यार-डू बी तत लय ’ का प्रयोग कया गया है।
हर दूसरी पं क्त का अं तम शब्द मलती-जुलती ध्व न वाला यानी ‘तुकांत’ है आ द। (क) अपने समूह के साथ
मलकर इन वशेषताओं क सूची बनाइए। अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके साथ साझा क जए।
पुस्तक ने तीन उदाहरण स्वयं दे दए ह — ‘और’ के ान पर ‘औ’, ‘प्यार म डू बी’ के ान पर ‘प्यार-डू बी’, और तुकांत। इसी
तरह क और वशेषताएँ ढूँ ढ़कर सूची बनानी है। एक अच्छ सूची इस प्रकार बन सकती है —
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
क्रम वशेषता क वता से उदाहरण
1 शब्द क अं तम ध्व न छोड़ दे ना — लय साधने के लए ‘और’ → औ (“िनज सुग ंध ों औ िनराले रंग से ”)
2 शब्द को जोड़कर छोटा कर दे ना (समास जैसा प्रयोग) ‘प्यार में डू बी’ → प्यार-डू बी िततिलयों
3 तुकांत — हर दूसरी पं क्त का अं तम शब्द मलती-जुलती ध्व न पालता–डालता, बही–नही ं, बसन–तन, िपला–िखला, शीश पर–
का कसर
4 अनुप्रास — एक ही वण से शुरू होने वाले शब्द पास-पास “स ◌ोहता सुर शीश पर”, “क ि◌स तरह कु ल क ◌ी”
5 मानवीकरण — पौधे, फूल और काँटे मनुष्य क तरह काम फू ल “गोद में” ले ता है, “रस िपला” दे ता है, पौधा “पालता” है
करते ह
6 वपरीत अथ वाले चत्र का जोड़ा खटकता ↔ सोहता; छे द ना-फाड़ना ↔ गोद ले ना-रस िपलाना
7 मुहावरे का प्रयोग “आँख में खटकना”, “जी िखलाना”
8 प्रश्न के रूप म बात कहना (प्रश्न-शैली) “िकस तरह कु ल की बड़ाई काम दे ”
9 पुराने/काव्य-रूप वाले शब्द मेह, बसन, सुर , हवाये,ं जनम, भौंर
10 प्रतीक — फूल और काँटा दो स्वभाव के प्रतीक पूर ी किवता
साझा करते समय: हर वशेषता के आगे क वता क पं क्त ज़रूर प ढ़ए। बना उदाहरण के कही गई वशेषता आधी
बात रह जाती है।
प्र.2 (ख) नीचे इस क वता क कुछ वशेषताएँ और वे पं क्तयाँ द गई ह जनम ये वशेषताएँ झलकती ह। वशेषताओं
का सही पं क्तय से मलान क जए। आप क वता क पं क्तय म एक से अ धक वशेषताएँ भी ढूँ ढ़ सकते ह।
क वता क वशेषताएँ — 1. एक ही वण से शुरू होने वाले दो शब्द एक ही पं क्त म साथ-साथ आए ह। 2. मुहावरे
का प्रयोग कया गया है। 3. प्रश्न पूछा गया है। 4. प्राकृ तक वस्तुओं, जैसे— पेड़-पौध म मानवीय काय और
भावनाओं का वणन कया गया है। 5. एक-दूसरे के वपरीत अथ वाले शब्द का प्रयोग कया गया है। क वता क
पं क्तयाँ — 1. कस तरह कुल क बड़ाई काम दे 2. भ र को अपना अनूठा रस पला 3. फाड़ दे ता है कसी का वर
बसन 4. है खटकता एक सब क आँख म, दूसरा है सोहता सुर शीश पर 5. है सदा दे ता कली का जी खला 6.
फूल लेकर तत लय को गोद म
मलान इस प्रकार होगा (एक पं क्त म एक से अ धक वशेषताएँ भी मल सकती ह) —
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
वशेषता पं क्त कैसे
1. एक ही वण से शुरू होने वाले दो शब्द 4 — “है खटकता एक सब की आँख ‘सोहता–सुर–शीश’ म ‘स/श’ क आवृ त्त; पं क्त 1
साथ-साथ (अनुप्रास) में, दू स रा है सोहता सुर शीश पर” म ‘क’ क आवृ त्त।
और 1 — “िकस तरह कु ल की बड़ ाई
काम दे ”
2. मुहावरे का प्रयोग 4 — “है खटकता एक सब की आँख आँख म खटकना = बुरा लगना; जी खलाना = मन
में” प्रसन्न कर दे ना। दोन मुहावरे ह।
और 5 — “है सदा दे ता कली का जी
िखला”
3. प्रश्न पूछा गया है 1 — “िकस तरह कु ल की बड़ ाई काम यह कथन नह , प्रश्न है — और इसी प्रश्न म क वता
दे ” का संदेश छपा है।
4. पेड़-पौध म मानवीय काय और 6 — “फू ल ले क र िततिलयों को गोद गोद म लेना, पलाना, कसी का जी खलाना — ये
भावनाओं का वणन (मानवीकरण) में” सब मनुष्य के काम ह, जो यहाँ फूल कर रहा है।
और 2 — “भौंर को अपना अनूठा रस
िपला”
और 5 — “है सदा दे ता कली का जी
िखला”
5. एक-दूसरे के वपरीत अथ वाले शब्द 4 — “है खटकता एक सब की आँख खटकना ↔ सोहना — बुरा लगना और भला लगना;
का प्रयोग में, दू स रा है सोहता सुर शीश पर” साथ ही ‘एक ↔ दूसरा’ भी वरोध बनाता है।
बची हुई पं क्त 3 — “फाड़ दे ता है कसी का वर बसन” — काँटे क क्रूरता का चत्र है। इसम भी मानवीकरण है, क्य क फाड़ना
एक मानवीय क्रया है।
पं क्त 4 सबसे भरी हुई क्य है: इस एक ही पं क्त म अनुप्रास, मुहावरा और वलोम — तीन वशेषताएँ एक साथ
ह। इसी लए यह क वता क सबसे अ धक उद्धत क जाने वाली पं क्त है।
क वता का स दय — पृष्ठ 34 और 35
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा
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पाठ से
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पाठ से काव्य-स दय
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a s emआगे क वता क कुछ पं क्तयाँ द गई ह। इनम कुछ शब्द हटा दए गए ह और साथ म मलते-जुलते अथ वाले
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(क)
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प्र.1
शब्द भी दए गए ह। इनम से प्रत्येक शब्द से वह पं क्त पूरी करके दे खए। जो शब्द उस पं क्त म जँच रहे ह, उन
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पर घेरा बनाइए। 1. ह जनम लेते जगह म एक ही, एक ही पौधा उन्ह है पालता। ____ म उन पर चमकता ____ भी,
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(रात, रा त्र, रजनी, नशा) (श श, चंद्रमा, चाँद, राकेश, इंदु) एक ही सी चाँदनी है डालता। 2. ______ उन पर है
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बरसता एक सा, (मेह, बादल, मेघ, जलद) एक
s emसी उन पर ______ ह बही। (वायु, पवन, समीर, मारुत, बयार,
हवाय) पर सदा ही यह दखाता है हम,gढंlग उनके एक से होते नह ।
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क व ने मूल क वता म जो शब्द रखे ह, वे ह — रात, चाँद, मेह और हवाय। इन्ह पर घेरा बनाइए। कारणm
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c m म ठ क बैठते ह और सरल-सहज भी ह। gla
यह है क ये चार शब्द
पं क्त क मात्राo(लय)
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agl रक्त ान जो शब्द क्य
जँचता है
बाक शब्द
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“____ म उन पर रात
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‘रात म’ बोलने म सहज है और लय टू टती नह । ‘रजनी रा त्र, रजनी, नशा — तीन का अथ
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चमकता”
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म’, ‘ नशा म’ भारी और सा ह त्यक लगते ह। ‘रात’ ही है।
“चमकता ____ चाँद a g
अगली ही पं क्त म ‘चाँदनी’ आता है — ‘चाँद’ रखने श श, चंद्रमा, राकेश, इंदु — सब ‘चाँद’
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भी” से चाँद–चाँदनी क सुंदर आवृ त्त बन जाती है। के पयायवाची।
बादल,m
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मेह
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m la‘बादल/वषा’।
“____ उन पर है ‘मेह’ एक अक्षर छोटा है और ‘बरसता’ के साथ मेघ, जलद — तीन का अथ
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बरसता एक सा” जुड़कर लय बनाए रखता है। ‘बादल’ रखने पर पं क्त
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लंबी हो जाती है।
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ag “एक सी उन पर हवाये ं ‘ह बही’ बहुवचन क्रया है, इस लए बहुवचन शब्द वायु, पवन, समीर, मारुत —
____ ह बही” चा हए। ‘हवाय’ और ‘बयार’ दोन बहुवचन ह, पर एकवचन; बयार — बहुवचन, यह भी
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‘हवाय’ सबसे सहज है। चल सकता है।
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यह ग त व ध क्य है: सभी दए गए शब्द का अथ लगभग एक ही है, फर भी क वता म हर शब्द नह चलता।
क व शब्द चुनते समय तीन बात दे खता है — अथ, लय और ध्व न। इसी को ‘शब्द का जँचना’ कहते ह। इसे परखने
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का तरीका सरल है: पं क्त को हर शब्द के साथ ज़ोर से प ढ़ए और सु नए क कहाँ ठोकर लगती है।
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m .cपयायवाची याद र खए: रात = रा त्र, रजनी, नशा, या मनी। चाँद = श श,aचंgद्रमा, राकेश, इंदु, सुधाकर। बादल =
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ag मेह, मेघ, जलद, घन, पयोद। हवा = वायु, पवन, समीर, मारुत, बयार, अ नल।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) अपने समूह म चचा करके पता लगाइए क कौन-सा शब्द रक्त ान म सबसे अ धक सा थय को जँच रहा
है और क्य ?
यह गनती और चचा क ग त व ध है। समूह म हर साथी अपना चुना हुआ शब्द बोले, और एक साथी बोड या कापी पर नशान
लगाकर गनती करे।
तरीका —
1. चार रक्त ान के लए अलग-अलग ता लका बनाइए।
2. हर शब्द के आगे उतने नशान लगाइए जतने सा थय ने उसे चुना।
3. सबसे अ धक नशान वाले शब्द पर घेरा लगाइए और पू छए — “यह क्य जँचा?”
रक्त प्रायः सबसे अ धक चुना जाने वाला सा थय ारा दया जाने वाला कारण
ान शब्द
पहला रात “रोज़ बोलने वाला शब्द है, पढ़ने म अटकता नह ।”
दूसरा चाँद “आगे ‘चाँदनी’ आ रहा है, इस लए ‘चाँद’ सुनने म मीठा लगता है।”
तीसरा मेह “छोटा शब्द है, पं क्त क चाल नह बगड़ती।” कुछ साथी ‘मेघ’ भी
चुनते ह।
चौथा हवाये ं “‘ह बही’ के साथ केवल बहुवचन ही चलेगा।”
नमूना उत्तर: “हमारे समूह म 6 म से 5 सा थय ने ‘चाँद’ चुना। कारण यह बताया गया क ‘चाँद’ के तुरंत बाद ‘चाँदनी’ शब्द आता
है, इस लए दोन मलकर एक सुंदर ध्व न बनाते ह। एक साथी ने ‘श श’ चुना क्य क उसे वह शब्द अ धक काव्यात्मक लगा —
उसका कारण भी ठ क था।”
ध्यान र खए: इस ग त व ध म ‘बहुमत’ ही अं तम सत्य नह है। जसने अलग शब्द चुना है, उसका कारण भी सु नए
— क वता म एक से अ धक शब्द जँच सकते ह।
वशेषण — पृष्ठ 35 और 36
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से भाषा क बात
प्र.1 “भ र का है बेध दे ता श्याम तन।” ‘श्याम तन’ का अथ है— काला शरीर। यहाँ ‘श्याम’ शब्द भँवरे के ‘शरीर’ क
वशेषता बता रहा है, अथात् ‘श्याम’ ‘ वशेषण’ है। ‘तन’ एक सं ा शब्द है जसक वशेषता बताई जा रही है
अथात् ‘तन’ ‘ वशेष्य’ शब्द है। (क) नीचे द गई पं क्तय म वशेषण और वशेष्य शब्द क पहचान करके
ल खए — 1. भ र का है बेध दे ता श्याम तन 2. फाड़ दे ता है कसी का वर बसन 3. भ र को अपना अनूठा रस
पला 4. नज सुगंध औ नराले ढं ग से
वशेषण = जो गुण बताए; वशेष्य = जसका गुण बताया जाए। ता लका इस प्रकार भरी जाएगी —
क्रम पं क्त वशेषण वशेष्य अथ
1 भ र का है बेध दे ता श्याम तन श्याम तन काला शरीर (पुस्तक म उदाहरण के रूप म पहले से भरा है)
2 फाड़ दे ता है कसी का वर बसन वर बसन उत्तम/श्रेष्ठ वस्त्र
3 भ र को अपना अनूठा रस पला अनूठा रस अनोखा, बेजोड़ रस
4 नज सुगंध औ नराले ढं ग से िनज, िनराले सुगंधों, ढं ग अपनी सुगंध और अनोखा ढं ग
चौथी पं क्त म दो जोड़े ह — ‘ नज’ वशेषण है और ‘सुगंध ’ वशेष्य; ‘ नराले’ वशेषण है और ‘ढं ग’ वशेष्य।
पहचानने का तरीका: वाक्य से प्रश्न पू छए — “कैसा?”। उत्तर वशेषण होगा। जैसे — कैसा तन? श्याम तन। कैसा
बसन? वर बसन। कैसा रस? अनूठा रस। जस शब्द के बारे म प्रश्न पूछा गया, वही वशेष्य है (तन, बसन, रस)।
ध्यान द: क वता के मूल पाठ म यह पं क्त “ नज सुगंध औ नराले रंग से” है, जब क इस अभ्यास क ता लका म
इसे “ नराले ढं ग से” छापा गया है। दोन म वशेषण ‘ नराले’ ही रहेगा; वशेष्य पुस्तक के अनुसार ‘ढं ग’ ल खए
(क वता के अनुसार ‘रंग’)।
प्र.2 (ख) नीचे दए गए वशेष्य के लए अपने मन से वशेषण सोचकर ल खए — 1. फूल 2. काँटा 3. मेह 4. चाँद 5.
रात
हर वशेष्य के लए दो-दो वशेषण नीचे दए जा रहे ह। आप अपने मन से इनसे अलग भी लख सकते ह — शत यह है क शब्द उस
वस्तु का गुण, रंग, आकार या दशा बताए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
वशेष्य वशेषण वाक्य म प्रयोग
1. फूल सुगंिधत, कोमल बगीचे का सुगं धत फूल दूर से ही पहचान म आ गया।
2. काँटा नुक ीला, कठोर बबूल का नुक ला काँटा चप्पल म धँस गया।
3. मेह मूस लाधार, ठं डा दोपहर म मूसलाधार मेह बरसा और ग लयाँ भर गईं।
4. चाँद उजला, गोल शरद पू णमा का उजला चाँद आँगन म दूध-सा फैल गया।
5. रात अँधेरी, शांत अमावस क अँधेरी रात म जुगनू तार -से चमक रहे थे।
और वकल्प — फूल: खला, ताज़ा, लाल, मुरझाया। काँटा: तीखा, लंबा, छोटा, चुभने वाला। मेह: झमाझम, हल्का, पहला,
बेमौसम। चाँद: पूरा, आधा, चाँद -सा, धुँधला। रात: लंबी, चाँदनी, सद, सुहानी।
जाँच का नयम: लखा हुआ शब्द वशेषण है या नह — यह जानने के लए उसके आगे वशेष्य लगाकर पू छए
“कैसा/कैसी?” य द उत्तर बन जाए तो वह वशेषण है। जैसे — “कैसी रात? अँधेरी रात।” ✔
आपक बात — पृष्ठ 36 और 37
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) य द आपको फूल और काँटे म से कसी एक को चुनना हो तो आप कसे चुनगे और क्य ?
यह आपक अपनी राय का प्रश्न है। दोन उत्तर सही माने जाएँगे, बशत कारण ठोस हो और क वता से जुड़ा हो।
नमूना उत्तर 1 — फूल चुनते हुए: म फूल को चुनूँगा/चुनूँगी। फूल का जीवन दूसर को दे ने म बीतता है — वह ततली को गोद दे ता
है, भ रे को अपना रस पलाता है और अपनी सुगंध से आसपास के मन खला दे ता है। इसी कारण वह दे वता के सर तक पहुँच जाता
है। म भी चाहता ँ क लोग मुझसे मलकर हल्का महसूस कर, भारी नह । फूल कुछ ही दन रहता है, पर जतने दन रहता है, कसी
को दुख नह दे ता — यही उसका सबसे बड़ा गुण है।
नमूना उत्तर 2 — काँटा चुनते हुए: म काँटा चुनूँगा/चुनूँगी। काँटा कसी को ढूँ ढ़कर नह चुभता; वह चुपचाप अपने पौधे क
पहरेदारी करता है। उसी क वजह से पशु पौधे को चर नह पाते और फूल सुर क्षत खल पाता है। काँटा तेज़ धूप और सूखे म भी
टका रहता है, जब क फूल जल्द मुरझा जाता है। म भी ऐसा बनना चाहता ँ जो दखावे म न हो, पर मु श्कल समय म अपन के
आगे खड़ा हो जाए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
य द फूल चुन — तक य द काँटा चुन — तक
दू स रों को सुख और सुगंध दे ना दू स रों की रक्षा करना
सबका िपय बनना, स म्मान पाना किठन पिरिस्थित में िटके रहना
कोमलता और उदारता दृ ढ़ता और आत्मिनभरता
अ े उत्तर क पहचान: उत्तर म केवल “मुझे फूल अच्छा लगता है” लखना पयाप्त नह । क वता क कोई पं क्त
और अपने जीवन का कोई उदाहरण — ये दोन जोड़ दे ने से उत्तर पूरा हो जाता है।
प्र.2 (ख) क वता म बताया गया है क फूल अपनी सुगंध और व्यवहार से चार ओर प्रसन्नता और आनंद फैला दे ता है।
आप अपने मत्र या प रवार के जीवन म प्रसन्नता और आनंद लाने के लए क्या-क्या करते ह और क्या-क्या कर
सकते ह?
इस उत्तर के दो भाग बनाइए — जो म अभी करता/करती ँ और जो म आगे कर सकता/सकती ँ। छोटे -छोटे काम ल खए,
बड़े-बड़े वादे नह ।
अभी जो करता/करती ँ आगे जो कर सकता/सकती ँ
माँ के साथ रसोई और घर के काम में हाथ बँटाता हू।ँ सप्ताह म एक दन पूरा खाना परोसने और बतन समेटने क ज़म्मेदारी ले
लूँ।
दादा-दादी को अख़बार और कहानी पढ़ कर सुनाता हू।ँ उनक सुनी हुई पुरानी कहा नयाँ एक कापी म लखकर प रवार क
‘कहानी-पोथी’ बना दूँ ।
जो िमत्र क क्षा में पीछे रह जाता है, उसे अपनी कापी िदखा दे ता हू।ँ रोज़ आधा घंटा उसके साथ बैठकर प ँ , ता क उसे नक़ल नह , समझ
मले।
जन्मिदन पर िमत्रों को शुभकामना दे ता हू।ँ ख़रीदे हुए उपहार क जगह अपने हाथ का बनाया काड या चत्र दूँ ।
छोटी बहन/भाई के साथ खेल ता हू ँ और झगड़ ा होने पर पहले माफ़ ी उसे रोज़ एक नई कहानी सुनाऊँ या एक नया खेल सखाऊँ।
माँग ले ता हू।ँ
नमूना उत्तर: “म मानता ँ क प्रसन्नता बड़ी चीज़ से नह आती। जब म थक हुई माँ के हाथ से थाली ले लेता ँ या दाद क दवा
समय पर याद दला दे ता ँ, तो उनके चेहरे पर जो हल्क -सी मुस्कान आती है, वही मेरे लए फूल क सुगंध जैसी है। आगे म यह
करना चाहता ँ क हर र ववार प रवार के साथ बैठकर एक खेल खेलूँ, ता क सब एक साथ हँस सक।”
टप: ‘मीठा बोलना’, ‘सुनना’ और ‘समय दे ना’ — ये तीन काम बना पैसे के कसी के जीवन म आनंद भर दे ते ह।
उत्तर म इन्ह ज़रूर शा मल क जए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा
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. com
emक्रोधी; स्वाद, जैसे
प्र.3 (ग) ‘फूल’ और ‘काँटे’ एक-दूसरे से बलकुल भन्न ह फर भी साथ-साथ पाए जाते ह। अपने आस-पास से ऐसे
m a s
co रंग, जैसे— काला-सफेद; अनुभव, जैसे— सुख-दुख आ द) agl
अन्य उदाहरण द जए। (संकेत— वस्तुए,ँ जैसे— नमक और चीनी; स्वभाव, जैसे— शांत और
— ख .ा-मीठा;
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उत्तरgl
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पुस्तक के संकेत के अनुसार वग बनाकर उदाहरण द जए। ऐसे जोड़े चु नए जो वपरीत ह , फर भी साथ-साथ मलते ह ।
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वग उदाहरण
g l as ये साथ-साथ कैसे
वस्तुएँ
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नमक और चीनी; सुई और धागा; ताला और चाबी दोन एक ही रसोई या एक ही डब्बे म रहते ह; एक के बना दूसरे
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का काम अधूरा है।
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om)
ख ा-मीठा (आम की चटनी), तीखा-मीठा (गोलगप्पे का
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स्वाद एक ही थाली म दोन मलते ह; मलकर ही स्वाद पूरा होता है।
. cपानी
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lरंaगs
a g काला-सफ़े द (शतरंज की िबसात, बुल बुल के पंख) एक ही वस्तु पर दोन रंग साथ दखते ह।
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िदन-रात; धूप-छाँव; गम -सद ; नदी का शातं और तेज़
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प्रकृ त एक के बाद दूसरा आता है; एक ही चक्र के दो हस्से ह।
.c agl
बहाव
m e और
शांत और ोधी भाई-बहन; एक ही कlक्षaा मेsं शरारती
ag
स्वभाव क्र एक ही घर, एक ही कक्षा — फर भी स्वभाव अलग, ठ क फूल
गंभीर िव ाथ और काँटे क तरह।
सुख-दुख; जीत-हार; िमलना-िबछड़ ना
co m
.
अनुभव एक ही जीवन म दोन आते ह; दुख के बाद सुख अ धक मीठा
लगता है।
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पेड़- .co गुल ाब में फू ल और काँटा; नीबू और बेर में फल और काँटा l a
m ag यही तो क वता का मूल चत्र है।
aseपौधे
एक ही टहनी पर दोन —
agl
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cकomकोमलता वशेष न लगे।
यहाँ सीखने क बात: वपरीत चीज़ का साथ रहना कोई गड़बड़ी नह , प्रकृ त का नयम है। य द छाँव न हो तो धूप
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क क़ मत न पता चले; य द काँटा न हो तो फूल
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agl
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प्र.4 (घ) “छे द कर काँटा कसी क उँग लयाँ, फाड़ दे ता है कसी का वर बसन।” आप अपने आस-पास क कसी
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समस्या का वणन क जए जसे आप ‘काँटे’ के समान महसूस करते ह। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।
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a s emउत्तर
agl इस उत्तर म तीन बात होनी चा हए — समस्या क्या है, वह ‘काँटे’ जैसी क्य लगती है, और उसका व्यावहा रक समाधान।
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s e m
om a
नमूना उत्तर: हमारे मुहल्ले के नुक्कड़ पर कूड़े का ढे र लगा रहता है। लोग घर का कचरा वह फक दे ते ह। बा रश म उससे बदबू
. c agl
उठती है, मच्छर पनपते ह और गाय-कुत्ते पन्नी खाकर बीमार हो जाते ह। यह मुझे ठ क ‘काँटे’ जैसा लगता है — वह वह पड़ा रहता
है, कसी को बुलाता नह , पर जो पास से गुeज़m
a s रता है उसी को चुभ जाता है।
समाधान —
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1. मुहल्ले के ब क एक ‘सफ़ाई टोली’ बने जो महीने म एक बार वहाँ श्रमदान करे।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
2. नगर पा लका को आवेदन दे कर वहाँ दो कूड़ेदान — गीला और सूखा — रखवाए जाएँ।
3. द वार पर ब के बनाए चत्र और नारे लगाए जाएँ; जस द वार पर सुंदर चत्र होता है, वहाँ लोग कचरा नह फकते।
4. हर घर से एक व्य क्त यह ज़म्मेदारी ले क कचरा गाड़ी आने पर ही कचरा दया जाएगा।
और कौन-सी समस्याएँ ‘काँटे’ जैसी ह सुझाया जा सकने वाला समाधान
सड़क पर खुला पड़ा नाला या ग ा गाम पंचायत/नगर िनगम को िशकायत; तब तक ग े के पास संके त-प ी
लगाना।
वद्यालय जाते समय रास्ते म झुंड बनाकर चढ़ाने वाले बड़े अके ले न जाकर समूह में जाना; िशक्षक और अिभभावक को तुरंत बताना।
लड़के
पानी के नल का दन भर टपकते रहना टोंटी बदलवाना; ‘पानी बचाओ’ का बोड लगाना।
कक्षा म कसी साथी को उसके रंग, कद या भाषा पर चढ़ाना तुरंत टोकना, चुप न रहना; क क्षा में ‘स म्मान का िनयम’ बनाकर दीवार पर
लगाना।
लखते समय: समस्या ऐसी चु नए जो सचमुच आपके आसपास हो और जसका समाधान आप स्वयं कुछ हद तक
कर सक। बहुत बड़ी समस्या चुनने पर समाधान केवल भाषण बनकर रह जाता है।
सृजन — पृष्ठ 37
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) इस क वता के बारे म एक चत्र बनाइए। आप चत्र म जहाँ चाह, अपने मनोनीत रंग भर सकते ह। आप बना
रंग या केवल उपलब्ध रंग क सहायता से भी चत्र बना सकते ह। चत्र बलकुल मौ लक लगे इसक चता करने
क भी आवश्यकता नह है। आप अपनी कल्पना को जैसे मन करे, वैसे साकार कर सकते ह।
यह चत्रकला क ग त व ध है — इसे अपनी कापी के दए गए ख़ाने म स्वयं बनाइए। नीचे बताया गया है क चत्र म क्या-क्या आना
चा हए ता क वह क वता का चत्र लगे, केवल एक फूल का नह ।
चत्र म ये पाँच बात आनी चा हए —
1. एक ही पौधा, जसक एक टहनी पर फूल खला हो और उसी टहनी पर काँटे भी दख — यही क वता का मूल दृश्य है।
2. ऊपर चाँद और चाँदनी, तथा एक ओर बादल से गरती बूँद और हवा क लहर — ये तीन दोन पर समान रूप से पड़ती
दखाइए।
3. फूल क ओर ततली और भ रा, जन्ह फूल मानो बुला रहा हो।
4. काँटे क ओर एक फटा हुआ आँचल या दुप ा अथवा चुभी हुई उँ गली का संकेत।
5. ऊपर या नीचे क वता क कोई एक पं क्त सुंदर अक्षर म लख द जए, जैसे — “ढं ग उनके एक से होते नह ।”
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
भाग सुझाया गया रंग
फूल लाल / गुल ाबी, बीच में पीला पराग
प त्तयाँ और तना दो तरह का हरा — गहरा और हल्का
काँटे भूरा या गहरा हरा, नुक ीली रे खाओं से
रात का आकाश गहरा नीला, चाँद के चारों ओर सफ़े द आभा
ततली नारंगी-काली, भौंरा काला
सुझाव: चत्र को दो भाग म बाँट द जए — बायाँ आधा भाग फूल का संसार (चमक ले रंग) और दायाँ आधा भाग
काँटे का संसार (फ के रंग)। इससे क वता का ‘अंतर’ चत्र म अपने आप दखने लगेगा। य द रंग न ह तो प सल क
छायांकन (shading) से भी यही असर लाया जा सकता है।
प्र.2 (ख) मान ली जए क फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनक बातचीत या संवाद अपनी कल्पना से
ल खए। संवाद का वषय नम्न ल खत हो सकता है— • उनके गुण और वशेषताओं पर चचा। • यह समझाना
क उनका जीवन म क्या योगदान है। उदाहरण — • फूल — म दूसर के जीवन म सुगंध और सुख फैलाने आया
ँ। • काँटा — और म संघष क याद दलाने और सुरक्षा दे ने के लए ँ।
नमूना उत्तर — फूल और काँटे का संवाद
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
पात्र संवाद
फूल काँटे भाई, सुबह से सब मुझे ही दे ख रहे ह। कोई तुम्हारी ओर आँख उठाकर भी नह दे खता।
काँटा दे ख भी क्य ? तुम्हारे पास रंग है, सुगंध है। मेरे पास केवल नोक है।
फूल पर म सोचता ँ — हम दोन तो एक ही पौधे के ह। एक ही जड़ हम पानी दे ती है, एक ही चाँदनी हम पर पड़ती है। फर हमारा ढं ग
इतना अलग क्य है?
काँटा क्य क हमारा काम अलग है, भाई। तुम्हारा काम दे ना है — ततली को गोद, भ रे को रस, कली को हौसला। मेरा काम पहरा दे ना है।
रात म जब बकरी मुँह बढ़ाती है, तो सामने म होता ँ, तुम नह ।
फूल यह तो मने कभी सोचा ही नह । यानी म जो खल पाता ँ, वह तुम्हारे पहरे के कारण?
काँटा और म जो टका रह पाता ँ, वह तुम्हारे कारण। तुम्हारी सुगंध से भ रा आता है, भ रे से बीज बनता है, बीज से नया पौधा। म अकेला
कुछ नह ।
फूल तो फर लोग तुम्ह बुरा क्य कहते ह?
काँटा क्य क लोग वही दे खते ह जो उन्ह चुभता है। पर मुझे शकायत नह । सम्मान माँगने से नह , काम करने से मलता है — दे र से ही
सही।
फूल सच कहा। क व ने भी तो यही पूछा है — कुल क बड़ाई कस काम क , जब अपने म बड़प्पन न हो। हम दोन का कुल एक है,
बड़प्पन अपना-अपना है।
काँटा ठ क। तुम महकते रहो, म पहरा दे ता र ँगा। पौधा तभी पूरा है जब हम दोन ह।
संवाद लखने क व ध: (1) हर पं क्त के आगे पात्र का नाम और डैश (—) लगाइए। (2) पात्र क भाषा उसके
स्वभाव जैसी र खए — फूल क बात कोमल, काँटे क बात रूखी पर स ी। (3) संवाद केवल बहस न रहे — अंत
म कोई साझा नष्कष नकलना चा हए। (4) आठ से बारह पं क्तयाँ पयाप्त ह।
वाद- ववाद — पृष्ठ 38
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 व भन्न समूह बनाकर कक्षा म एक वाद- ववाद ग त व ध का आयोजन क जए। इसके लए वषय है— ‘जीवन म
फूल और काँटे, दोन क आवश्यकता होती है’। (कक्षा म वाद- ववाद का आयोजन करने के लए पुस्तक म दस
सुझाव दए गए ह — समूह बनाना, नणायक मंडल, 15 मनट क तैयारी, तीन-चार मनट का समय, क्रम, अंक
का नधारण, वजेता का नणय, ता लयाँ और अनुभव पर अनु े द-लेखन।)
यह कक्षा म करने क ग त व ध है। पुस्तक ने आयोजन के दस चरण दे दए ह। नीचे दोन पक्ष के लए तैयार तक दए जा रहे ह,
जन्ह आप अपने समूह क तैयारी म काम म ला सकते ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
‘फूल’ के पक्ष म तक ‘काँटे’ के पक्ष म तक
फू ल सुख, सुगंध और सुंद रता दे ता है — “है सदा दे ता कली काँटा पौधे की रक्षा करता है; उसी के कारण फू ल सुरिक्षत िखलता है।
का जी िखला”।
फू ल दू स रों को अपनाता है — िततली को गोद , भौंरे को काँटा किठनाई सहना िसखाता है; सूखे और धूप में भी िटका रहता है।
रस।
फू ल के िबना परागण नही,ं बीज नही,ं नया पौधा नही ं। नागफनी जैसे रे िगस्तानी पौधों में काँटा ही पित्तयों का काम करता है और पानी
बचाता है।
समाज में मीठा बोलने वाले , सहयोग करने वाले लोग ही समाज में िनयम, अनुशासन और ‘ना’ कहने वाले लोग भी ज़ रूरी है,ं वरना ग़ ल त
जोड़ ते है।ं बात नही ं रुकती।
फू ल स म्मान पाता है — “सोहता सुर शीश पर”। जीवन में किठनाइयाँ ही व्यिक्त को मज़ बूत बनाती है;ं िबना काँटों के िमली
सफलता की क़ ीमत नही ं होती।
नष्कष जो नणायक मंडल रख सकता है — वषय स्वयं कहता है क ‘दोन क आवश्यकता होती है’। इस लए सबसे अच्छा
वही समूह माना जाएगा जो अपने पक्ष के तक रखते हुए दूसरे पक्ष का महत्व भी स्वीकार करे — जैसे “फूल बड़ा है, पर काँटे के पहरे
के बना वह खल ही नह पाता।”
नणायक मंडल कन बात पर अंक दे क्या दे खे
तक क गहराई तक के साथ उदाहरण या क वता क पं क्त द गई या नह
भाषा कौशल शब्द चयन, स्पष्ट उ ारण, शष्ट भाषा
प्रस्तु त शैली आत्म वश्वास, समय का पालन, सबक भागीदारी
श्रवण- शष्टाचार दूसरे समूह क बात बना टोके सुनी गई या नह
अंत म (सुझाव 10): ग त व ध के बाद अपने अनुभव पर एक अनुच्छेद ल खए — “मुझे कौन-सा तक सबसे
अच्छा लगा और क्य ”, “बोलते समय मुझे क्या क ठनाई हुई”, “अगली बार म क्या अलग करूँगा/करूँगी”।
आज क पहेली — पृष्ठ 39
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
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पाठ से आगे पहे ली
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a s emकुछ ऐसे पेड़-पौध के चत्र दए गए ह जनम फूल और काँटे साथ-साथ पाए जाते ह। चत्र को सही नाम के
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नीचे
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प्र.1
साथ रेखा ख चकर जो ड़ए — 1. बबूल (फूल— पीले या सफेद छोटे गु े दार। काँटे— लंबे और नुक ले। वशेषता
om
— इसका उपयोग ईंधन, चारा और औष धय म कया जाता है।) 2. गुलाब (फूल— व भन्न रंग म, वशेष रूप से
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लाल, सफेद, और गुलाबी। काँटे— तने पर छोटे और तीखे। वशेषता— सजावट पौधा और इत्र बनाने के लए
a s e,mनारंगी या गुलाबी। काँटे— पूरी सतह पर छोटे या लंबे। वशेषता—
प्र सद्ध।) 3. नागफनी (फूल— रंग- बरंगे, पीले
a gl पौधे के रूप म भी उगाया जाता है।) 4. बेर (फूल— छोटे और हल्के
सूखे क्षेत्र म पाया जाता है और सजावट
पीले। काँटे— शाखाओं पर छोटे -छोटे । वशेषता— इसके फल खाद्य और औषधीय होते ह।) 5. कर दा (फूल—
छोटे , सफेद और सुगं धत। काँटे— शाखाओं पर छोटे -छोटे और तीखे। वशेषता— फूल सजावट और मधुर सुगंध
co m
eटे— शाखाओं पर छोटे m.
वाले होते ह। इसके फल से अचार, जैम और जेली बनाई जाती ह। यह शुष्क और पहाड़ी क्षेत्र म उगता है।) 6.
े दार। s
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gउपयोग पेय पदाथ, अचार,
.cतीखे काँटे। वशेषता— फल ख े और वटा मन सी से भरपूर होते ह। इनका
नीबू (फूल— छोटे , सफेद और हल्क गुलाबी छाया लए हुए। सुगं धत और गु काँ
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se औष धय और खाना बनाने म कया जाता है।)
और
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.co agl
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पुस्तक म बाईं ओर छह वणन ह और दाईं ओर छह चत्र, पर दोन का क्रम अलग है। चत्र को ऊपर से नीचे गनते हुए मलान इस
प्रकार होगा —
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a
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चत्र (ऊपर से क्रम चत्र म क्या दखता है जुड़ेगा वणन से
म)
. co
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.co g 3. नागफनी
a
पहला चत्र चपटे , मोटे , काँट से भरे हरे पत्ते-जैसे तने; ऊपर पीले फूल
s m चत्र
eदूसरा
gl a 4. बेर
a
अंडाकार दाँतेदार प त्तयाँ, हल्के पीले छोटे फूल और गोल पीले फल
तीसरा चत्र बारीक पंखनुमा ( च ड़य के पंख जैसी) प त्तयाँ, पीले गोल गुच्छेदार फूल और एक 1. बबूल
se m
com g l a
.
फली
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चौथा चत्र
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गुलाबी बड़ा फूल, दाँतेदार प त्तयाँ और तने पर छोटे काँटे 2. गुल ाब
पाँचवाँ चत्र
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सफ़ेद तारे-जैसे फूल और एक पीला अंडाकार फल 6. नीबू
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छठा चत्र सफ़ेद-गुलाबी नुक ली पंखु ड़य वाले फूल और लाल अंडाकार फल
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पहचानने
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नागफनी — प त्तयाँ नह होत ; चपटा तना ही पत्ते जैसा दखता है और पूरी सतह काँट से भरी रहती है।
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बबूल — प त्तयाँ बहुत बारीक और पंखनुमा; फूल पीली गद जैसे; साथ म लंबी फली।
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बेर — गोल पीले-भूरे फल, पत्ती के नीचे क सतह सफ़ेद लए हुए।
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गुलाब — बड़ी, कई परत वाली पंखु ड़याँ; तने पर छोटे तीखे काँटे।
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नीबू — सफ़ेद सुगं धत फूल, चमकदार पत्ती और पीला रसदार फल।
कर दा — छोटे सफ़ेद-गुलाबी फूल और गुच्छ म लाल-गुलाबी फल, जनसे अचार बनता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
यह पहेली क्य द गई है: क वता कहती है क फूल और काँटा एक ही पौधे पर होते ह। ये छह पौधे उसका जीता-
जागता प्रमाण ह — गुलाब, नीबू, बेर, बबूल, कर दा और नागफनी, सबम सुंदरता और चुभन साथ-साथ रहती है।
करने योग्य: इनम से जो पौधे आपके गाँव या मुहल्ले म मलते ह , उन्ह जाकर दे खए और अपनी कापी म ल खए
क उनके काँटे कहाँ लगे ह — तने पर, शाखा पर या पत्ती पर।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 40
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 • रंग- बरंगे फूल से • फूल क घाट म — क वता
यह पढ़ने और खोजने का सुझाव है, प्रश्न नह । पुस्तक चाहती है क आप क वता से आगे बढ़कर फूल पर लखी और साम ी ढूँ ढ़
और पढ़।
सुझाव क्या करना है
रंग- बरंगे अपने आसपास िखलने वाले फू लों की एक सूची बनाइए — गुल ाब, गेंद ा, गुड़हल , चंपा, चमेल ी, सूरजमुखी, कमल , सरसों के
फूल से फू ल। हर फू ल के आगे िलिखए — उसका रंग, िखलने का मौसम और उसका उपयोग। हो सके तो सूखी पंखिु ड़ याँ
िचपकाकर एक ‘फू ल -पुिस्तका’ बनाइए।
फूल क घाट पुस्तकालय या िशक्षक की सहायता से यह किवता खोजकर पिढ़ ए। ‘फू लों की घाटी’ (Valley of Flowers) उ त्तराखंड के
म — क वता चमोली िज़ ले में िस्थत एक िवश्व धरोहर स्थल है, जहाँ वष ऋतु में सै क ड़ ों पकार के जंगली फू ल एक साथ िखलते है।ं किवता
पढ़ कर िलिखए िक किव ने घाटी का िचत्र िकन-िकन रंगों और ध्विनयों से खी ंचा है।
प रयोजना के लए और सुझाव —
अपने वद्यालय या घर के आँगन के कसी एक पौधे को एक महीने तक दे खए और सप्ताह म एक बार ल खए क उसम क्या
बदला — कली आई, फूल खला, मुरझाया, बीज बना।
अपने क्षेत्र के कसी बड़े-बुजग या माली से पू छए क कौन-सा फूल कस मौसम म खलता है और कस काम आता है। सुनी
बात अपनी भाषा म ल खए।
ह रऔध जी क अन्य बाल-क वताएँ — वशेषकर चंद्र- खलौना और खेल-तमाशा संकलन से — प ढ़ए और कक्षा म सुनाइए।
नमूना उत्तर क शुरुआत: “हमारे आँगन म गुड़हल का पौधा है। उसके फूल गहरे लाल होते ह और सुबह खलकर
शाम तक मुरझा जाते ह। दाद उसक पंखु ड़य से बाल के लए तेल बनाती ह…”
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय — एक नज़र म
फूल और काँटा अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’ क क वता है। ‘उठो लाल, अब आँख खोलो’ जैसी प्र सद्ध बाल-क वता के
रच यता ह रऔध जी का जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदे श) म हुआ था। उनक च चत काव्य-कृ त प्रयप्रवास को खड़ी बोली का
पहला महाकाव्य माना जाता है।
क वता का आधार एक सीधी-सी बात है — फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते ह। वही चाँदनी, वही वषा, वही हवा
दोन को मलती है। पालन-पोषण म कोई अंतर नह , फर भी “ढं ग उनके एक से होते नह ”।
काँटे का ढं ग — वह उँ ग लयाँ छे दता है, अच्छे वस्त्र फाड़ दे ता है, तत लय के पंख कतर दे ता है और भ रे के काले शरीर को
बेध दे ता है। उसका काम चोट पहुँचाना है।
फूल का ढं ग — वह तत लय को गोद म लेता है, भ रे को अपना अनूठा रस पलाता है और अपनी सुगंध तथा नराले रंग से
क लय का मन खला दे ता है। उसका काम सुख बाँटना है।
इसी अंतर का प रणाम भी अलग है — “है खटकता एक सब क आँख म, दूसरा है सोहता सुर शीश पर।” काँटा सबक
आँख म चुभता है और फूल दे वताओं के सर पर चढ़ता है।
क वता का कद्र य संदेश अं तम दो पं क्तय म है — “ कस तरह कुल क बड़ाई काम दे , जो कसी म हो बड़प्पन क कसर।”
यानी य द व्य क्त म स्वयं बड़प्पन नह है, तो ऊँचे कुल का नाम उसे बड़ा नह बना सकता।
काव्य-स दय — ‘और’ के ान पर ‘औ’, ‘प्यार म डू बी’ के ान पर ‘प्यार-डू बी’ जैसे लय के लए कए गए प्रयोग, हर
दूसरी पं क्त का तुकांत (पालता–डालता, बही–नह , बसन–तन, पला– खला, शीश पर–कसर), अनुप्रास (सोहता सुर शीश),
मानवीकरण और वपरीताथक शब्द-युग्म इस क वता क वशेषताएँ ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 3 फूल और काँटा AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
मेह वष , बािरश “मेह उन पर है बरसता एक सावन का मेह बरसते ही खेत हरे हो गए।
सा”
वर बसन ेष्ठ वस्त्र, अच्छा कपड़ा (वर = उत्तम, बसन = “फाड़ दे ता है कसी का वर त्योहार पर दाद ने वर बसन पहनकर पूजा क ।
वसन/वस्त्र) बसन”
कतर काट दे ना, कतरना “प्यार-डू बी तत लय का पर काँटे ने ततली का पर कतर दया।
कतर”
बेध बेध ना, छे द कर दे ना “भ र का है बेध दे ता श्याम तीर ने ढाल को बेध दया।
तन”
श्याम काला शरीर (श्याम = काला, तन = शरीर) “भ र का है बेध दे ता श्याम भ रे का श्याम तन फूल पर साफ़ दखाई दे ता है।
तन तन”
अनूठा अनोखा, बेजोड़, िजस जैस ा दू स रा न हो “भ र को अपना अनूठा रस इस चत्रकार क शैली सचमुच अनूठ है।
पला”
नज अपना, स्वयं का “ नज सुगंध औ नराले रंग हर व्य क्त को नज कम पर भरोसा रखना
से” चा हए।
औ ‘और’ का लय के िलए िकया गया छोटा रूप “ नज सुगंध औ नराले रंग क व ने छं द नभाने के लए ‘और’ के ान पर
से” ‘औ’ लखा है।
खटकना बुर ा लगना, आँख में चुभना “है खटकता एक सब क झूठ बोलने वाले क बात सबको खटकती है।
आँख म”
सोहना शोभा पाना, सुंद र लगना “दूसरा है सोहता सुर शीश माँ के हाथ का बनाया द पक ार पर सोहता है।
पर”
सुर दे वता (सुर = दे व) “दूसरा है सोहता सुर शीश मं दर म सुर-शीश पर फूल चढ़ाए गए।
पर”
कुल वंश, ख़ानदान “ कस तरह कुल क बड़ाई कुल बड़ा होने से कोई अपने आप बड़ा नह हो
काम दे ” जाता।
बड़प्पन ‘बड़ा’ + ‘पन’; बड़ाई, ेष्ठता, महानता का भाव “जो कसी म हो बड़प्पन क उनक सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत
कसर” लया।
कसर कमी, अभाव “जो कसी म हो बड़प्पन क मेहनत म उसने कोई कसर नह छोड़ी।
कसर”
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