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NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 4 पानी रे पानी

AglaSem पर कक्षा 7 हिंदी पाठ 4 पानी रे पानी (मल्हार) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 4 (Malhar).
NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 4 पानी रे पानी - Page 1 of 37

About NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 4 पानी रे पानी

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Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 4 पानी रे पानी – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 4: पानी रे पानी

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

41 – 56 19 41 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 36 pages

Page 2

कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · हद · मल्हार

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: पानी रे पानी
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 4 पानी रे पानी के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह अनुपम मश्र (1948–2016) का लखा एक
नबंध है, जो जल-चक्र, वषा जल संग्रहण, तालाब और भूजल भंडार क बात ब क भाषा म करता है। पृष्ठ 41 से 56 तक क हर ग त व ध —
मेरी समझ से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, शीषक, शब्द क बात, समानाथ शब्द, उपसग, आपक बात, सृजन, पानी
रे पानी, सबका पानी, दै नक काय म पानी, जन-सु वधा के रूप म जल, बन पानी सब सून, यह भी जान, आज क पहेली, खोजबीन के लए और
साझी समझ — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

मल्हार (कक्षा 7) 41 – 56

खं ड प्रश्न

19 41

माध्यम

हन्द

मेरी समझ से — पृष्ठ 45
पाठ से

पाठ से

प्र.1 ★
(क) नम्न ल खत प्रश्न का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक
उत्तर भी हो सकते ह। (1) हमारा भूजल भंडार नम्न ल खत म से कससे समृद्ध होता है? • नल सूख जाने से। •
पानी बरसने से। • तालाब और झील से। • बाढ़ आने से।

इस प्रश्न के दो उत्तर सही ह — पानी बरसने से। और तालाब और झील से। इन दोन के सामने तारा (★) बनाइए।

वकल्प सही / कारण
ग़लत

नल सूख जाने ग़लत नल का सूखना भूजल घटने का प रणाम है, कारण नह । पाठ कहता है — “गम के दन म हमारे नल
से सूख जाते ह।”

पानी बरसने सही ★ “म क बनी इस वशाल गुल्लक म प्रकृ त वषा के मौसम म खूब पानी बरसाती है।” वषा ही धरती क
से गुल्लक म जमा होने वाली मूल पूँजी है।

तालाब और सही ★ “इनम जमा पानी जमीन के नीचे छपे जल के भंडार म धीरे-धीरे रसकर, छनकर जा मलता है। इससे
झील से हमारा भूजल भंडार समृद्ध होता जाता है।” तालाब-झील वषा के पानी को रोककर उसे जमीन म उतारते
ह।

बाढ़ आने से ग़लत बाढ़ का पानी तेजी से बहकर नकल जाता है, जमीन म उतरने का समय ही नह मलता। पाठ म बाढ़ को
समस्या बताया गया है — “सब कुछ बह जाता है।”

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

ध्यान द: वषा और तालाब दोन एक ही श्रृंखला क क ड़याँ ह — वषा पानी दे ती है, तालाब उसे थामकर जमीन म
उतारते ह। इसी लए दोन उत्तर सही माने जाएँगे।

प्र.2 (2) नम्न ल खत म से कौन-सी बात जल-चक्र से संबं धत है? • वषा जल का संग्रह करना। • समुद्र से उठ भाप
का बादल बनकर बरसना। • न दय का समुद्र म जाकर मलना। • बरसात म चार ओर पानी ही पानी दखाई
दे ना।

इस प्रश्न के भी दो उत्तर सही ह — समुद्र से उठ भाप का बादल बनकर बरसना। और न दय का समुद्र म जाकर मलना। इन
दोन के सामने तारा (★) बनाइए।

जल-चक्र की किड़ याँ (पाठ के अनुसार) —

समुद का पानी भाप बनकर उठता है

→ भाप ठं डी होकर बादल बनती है

→ बादल बरसते है ं

→ पानी नदी बनकर बहता है

→ नदी िफर उसी समुद में िमल जाती है

→ जल-च क्र पूरा हो जाता है।

वकल्प सही / कारण
ग़लत

वषा जल का संग्रह करना ग़लत यह प्रकृ त का चक्र नह , मनुष्य का कया हुआ काम है। इसे पाठ म ‘वषा जल
संग्रहण’ कहा गया है, जल-चक्र नह ।

समुद्र से उठ भाप का बादल सही ★ यही जल-चक्र क पहली कड़ी है — “समुद्र से उठ भाप बादल बनकर पानी म
बनकर बरसना बदलती है।”

न दय का समुद्र म जाकर सही ★ यही चक्र क अं तम कड़ी है — “यही नद अपने चार तरफ का पानी लेकर उसी
मलना समुद्र म मलती दखती है।”

बरसात म चार ओर पानी ही पानी ग़लत यह बाढ़ या जल-भराव का दृश्य है — चक्र का चरण नह , ब ल्क पानी को न सँभाल
दखाई दे ना पाने का नतीजा।

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 (3) “इस बड़ी गलती क सजा अब हम सबको मल रही है।” यहाँ कस गलती क ओर संकेत कया गया है? •
जल-चक्र क अवधारणा को न समझना। • आवश्यकता से अ धक पानी का उपयोग करना। • तालाब को कचरे
से पाटकर समाप्त करना। • भूजल भंडारण के वषय म वचार न करना।

सबसे सही उत्तर है — तालाब को कचरे से पाटकर समाप्त करना। इसके सामने तारा (★) बनाइए। इसके साथ भूजल भंडारण
के वषय म वचार न करना भी लया जा सकता है, क्य क पाठ म दोन बात एक ही वाक्य म जुड़ी हुई ह।

पाठ की मूल पंिक्तयाँ —
“…जब हम लोग इस िछपे खजाने का महत्व भूल गए और जमीन के लालच में हमने

अपने तालाबों को कचरे से पाटकर, भरकर समतल बना िदया।”

“इस बड़ ी गलती की सजा अब हम सबको िमल रही है।”

वकल्प सही / ग़लत कारण

जल-चक्र क अवधारणा को न ग़लत जल-चक्र तो हम भूगोल क कताब म पढ़ ही चुके ह। लेखक क शकायत
समझना समझ क नह , करनी क है।

आवश्यकता से अ धक पानी का ग़लत यह भी एक बुराई है, पर “इस बड़ी गलती” शब्द ठ क ऊपर लखे वाक्य —
उपयोग करना तालाब पाटने — क ओर संकेत करता है।

तालाब को कचरे से पाटकर सही ★ तालाब पाटकर उन पर “कह मकान, कह बाजार, स्टे डयम और सनेमा आ द
समाप्त करना खड़े हो गए।” यही वह गलती है।

भूजल भंडारण के वषय म वचार यह भी लया जा तालाब पाटने का कारण ही यह था क “हम लोग इस छपे खजाने का महत्व
न करना सकता है भूल गए।”

सजा क्या है? पाठ स्वयं बताता है — “गम के दन म हमारे नल सूख जाते ह और बरसात के दन म हमारी
ब स्तयाँ डू बने लगती ह।” तालाब न रहे तो वषा का पानी न जमीन म उतरता है, न कह रुकता है — इस लए एक ही
साल म सूखा भी और बाढ़ भी।

प्र.4 (ख) अब अपने मत्र के साथ संवाद क जए और कारण बताइए क आपने ये उत्तर ही क्य चुन?

यह चचा का प्रश्न है — इसम उत्तर से ज्यादा कारण महत्वपूण है। संवाद करते समय हर बार यह कहने का अभ्यास क जए — “मने
यह वकल्प इस लए चुना, क्य क पाठ म लखा है…” यानी अपने उत्तर को पाठ क कसी पं क्त से जो ड़ए।
नमूना संवाद:

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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m.
प्रश्न मेरा उत्तर मने यह क्य चुना

m l a se
.co —gयह पं क्त सीधे यही कहती है।
पानी बरसने से ; तालाब और
रसकर, छनकर जा मलता है।” a
(1) भूजल भंडार कससे समृद्ध “इनम जमा पानी जमीन के नीचे छपे जल के भंडार म धीरे-धीरे

s em झीलों से
होता है?

a
a(2)glकौन-सी बात जल-चक्र से भाप का बादल बनकर बरसना; ये दोन प्रकृ त के चक्र क क ड़याँ ह। वषा जल संग्रहण तो हम
संबं धत है? निदयों का समुद में िमलना मनुष्य का काम है।

m
तालाबों को कचरे से पाटकर .co यह वाक्य ठ क उसी अनुच्छेद के बाद आया है जसम तालाब पाटने ag
sem क बात है।
(3) “इस बड़ी गलती…” कस

a
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गलती क ओर संकेत? समा त करना
प्

सुझाव: जब कोई साथी आपसे अलग उत्तर चुने, तो पहले उसका कारण सु नए। कई बार दोन उत्तर सही नकलते ह
co m
— इस प्रश्न म भी लखा है क “कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो सकते ह।”
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m .co a g
l a se
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aमलकर कर मलान — पृष्ठ 46
m a s
.co agl
पाठ से

पाठ से मलान
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a
पाठ म से कुछ शब्द समूह या संदभ चुनकर स्तंभ 1 म दए गए ह और उनके अथ स्तंभ 2 म दए गए ह। अपने
प्र.1
समूह म इन पर चचा क जए और रेखा ख चकर सही मलान क जए। स्तंभ 1 — 1. वषा जल संग्रहण 2. जल
co m
m .
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संकट 3. जल-चक्र 4. भूजल। स्तंभ 2 — 1. जमीन के नीचे छपा जल भंडार। 2. वषा के जल को प्राकृ तक

o m l a
.cउठ भाप का बादल बनकर पानी म बदलना और वषा के ारा पुनः समुद्रaमgमल जाना।
अथवा कृ त्रम रूप से (मानवीय प्रयास से) धरती म संग्रह करना। 3. जल क अत्य धक कमी होना। 4. समुद्र से

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a
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com g l a
.
सही मलान इस प्रकार है —

m a
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agl
स्तंभ 1 मलान स्तंभ 2 पाठ का आधार

वषा के जल को प्राकृ तक अथवा कृ त्रम रूप से “जल जहाँ गरे वह एकत्र क जए।” — तालाब, झील
m
1. वष जल →2

. co
संग हण (मानवीय प्रयास से) धरती म संग्रह करना। और छत के ऊपर क टं क , तीन इसी के तरीके ह।

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.संcकoट agम तो अकाल जैसी हालत बन जाती है।”
2. जल →3 जल क अत्य धक कमी होना। “नल म अब पूरे समय पानी नह आता… दे श के कई

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हस्स

gl a
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.
3. जल-चक्र →4 समुद्र से उठ भाप का बादल बनकर पानी म “जल क यात्रा एक तरफ से शुरू होकर समुद्र म वा पस

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बदलना और वषा के ारा पुनः समुद्र म मल मल जाती है। जल-चक्र पूरा हो जाता है।”

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जाना।

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4. भूजल जमीन के नीचे छपा जल भंडार। “पानी का यह खजाना हम दखता नह , ले कन इसी
g
→1

a खजाने से… पूरे साल भर तक पानी नकाल सकते ह।”

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m .
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a g l Page 4 of 36

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

संक्षेप में — 1 → 2, 2 → 3, 3 → 4, 4 → 1

पहचान का आसान तरीका: ‘संग्रहण’ शब्द म जमा करना छपा है, ‘संकट’ म कमी, ‘चक्र’ म घूमकर वापस आना
और ‘भू’ म जमीन। शब्द के भीतर ही उसका अथ बैठा रहता है।

पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 46
पाठ से

पाठ से

प्र.1 इस पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और अपने सहपा ठय से चचा क जए। •
“पानी आता भी है तो बेवक्त।”

आशय: पानी बलकुल नह आता, ऐसा नह है — पर जब आता है तब वह समय ठ क नह होता। कभी दे र रात, कभी बहुत सबेरे।
इस लए घर के लोग को मीठ न द छोड़कर बाल टयाँ, बतन और घड़े भरने पड़ते ह।

चचा कस दशा म ले जाएँ: इस एक वाक्य म पानी क कमी से भी बड़ी बात कही गई है — पानी क अ न श्चतता।
जो चीज तय समय पर न मले, उसका इंतजाम करने म पूरा दन उलझ जाता है। ब क पढ़ाई, बड़ का काम,
सबका समय इसी म चला जाता है। पाठ आगे कहता है क इसी ख चतान से “तू-तू, म-म” शुरू हो जाती है।

शब्द पर ध्यान द जए: ‘बेवक्त’ म बे- उपसग है, जसका अथ है ‘ बना’ या ‘नह ’ — बेवक्त = बना वक्त का,
गलत समय पर। ऐसे ही — बेकाम, बेचैन, बेईमान।

प्र.2 • “दे श के कई हस्स म तो अकाल जैसे हालात बन जाते ह।”

आशय: पानी क कमी केवल एक-दो नल तक सी मत नह रहती। जब वषा न हो और भूजल भी न बचे, तो दे श के बड़े-बड़े भाग
सूखे क चपेट म आ जाते ह — खेत सूख जाते ह, कुएँ-तालाब खाली हो जाते ह, पशुओं के लए चारा-पानी नह बचता।

अकाल = अ + काल
काल का अथ — समय, मृत्यु

अकाल का अथ — कु समय, सूखा

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

चचा कस दशा म ले जाएँ: लेखक ने आगे यही बात दूसरे सरे से भी कही है — “अकाल और बाढ़ एक ही सक्के
के दो पहलू ह।” यानी अकाल आसमान क गलती नह , हमारी अपनी गलती का नतीजा भी है। जस साल वषा हुई
थी उस साल का पानी हमने रोका ही नह , तो अगले साल के लए बचता कहाँ से?

प्र.3 • “कुछ दन के लए सब कुछ थम जाता है।”

आशय: यह पं क्त बाढ़ के बारे म है। जब घर , स्कूल , सड़क और रेल क पट रय पर पानी भर जाता है, तो जीवन क सारी ग त
रुक जाती है — स्कूल बंद, दुकान बंद, गा ड़याँ बंद, काम बंद। पाठ इसके ठ क बाद कहता है — “सब कुछ बह जाता है।”

‘थमना’ और ‘बहना’ का जोड़ा: लेखक ने जान-बूझकर दो उलटे शब्द पास-पास रखे ह। जीवन थम जाता है, पर
पानी बह जाता है। जो पानी हम साल भर चा हए था, वह चंद दन म नुकसान करके नकल जाता है — यही बाढ़
क सबसे बड़ी वडंबना है।

चचा के लए: अपने इलाके क कसी बाढ़ या जल-भराव क घटना याद क जए — कतने दन स्कूल बंद रहा?
पानी उतरने के बाद सबसे बड़ी परेशानी क्या थी?

प्र.4 • “अकाल और बाढ़ एक ही सक्के के दो पहलू ह।”

आशय: सक्के के दो पहलू अलग दखते ह, पर होते एक ही सक्के के ह। इसी तरह अकाल (पानी का बेहद कम हो जाना) और
बाढ़ (पानी का बेहद ज्यादा हो जाना) ऊपर से उलट लगती दो समस्याएँ ह, पर दोन क जड़ एक ही है — हमने वषा के पानी को
सँभालना छोड़ दया।

तालाब पाट िदए

→ वष का पानी न रुका, न जमीन में उतरा

→ बरसात में सब तरफ बहकर बाढ़

→ भूजल भरा ही नही ं, गम में नल सूखे — अकाल

एक ही गलती, दो सजाएँ।

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

भाषा क सुंदरता: यह एक मुहावरेदार वाक्य है, जसम अमूत बात (जल-प्रबंधन) को एक ठोस, रोज दखने वाली
चीज ( सक्का) से समझाया गया है। पाठ का पूरा तक इसी एक वाक्य म समट आया है — इसी लए लेखक ने आगे
लखा, “य द हम इन दोन को ठ क से समझ सक और सँभाल ल तो इन कई समस्याओं से छु टकारा मल सकता
है।”

सोच- वचार के लए — पृष्ठ 46
पाठ से

पाठ से

प्र.1 लेख को एक बार पुन: प ढ़ए और नम्न ल खत के वषय म पता लगाकर ल खए। (क) पाठ म धरती को एक
बहुत बड़ी गुल्लक क्य कहा गया है?

धरती को गुल्लक इस लए कहा गया है क्य क दोन का काम एक जैसा है — थोड़ा-थोड़ा जमा करना और जरूरत पड़ने पर
काम आना।

गुल्लक धरती

म क बनी होती है। “म क बनी इस वशाल गुल्लक…”

उसम एक-एक रुपया, सक्के और नोट जमा होते उसम वषा का पानी बूँद-बूँद करके जमा होता जाता है।
जाते ह।

जमा करने का रास्ता ऊपर बनी दरार है। जमा करने का रास्ता तालाब और झील ह — “वे धरती क गुल्लक म पानी भरने का
काम करते ह।”

जमा पैसा दखता नह , पर रहता है। “पानी का यह खजाना हमें िदखता नही”ं — यानी भूजल भंडार।

जरूरत पड़ने पर बचत काम आती है। बरसात बीत जाने के बाद पूरे साल घर, खेत और पाठशाला के लए पानी उसी से
मलता है।

यह कौन-सा अलंकार है: धरती पर गुल्लक का आरोप कया गया है, यानी धरती को सीधे गुल्लक कह दया गया है
— यह रूपक है। य द कहा जाता “धरती गुल्लक के समान है”, तो उपमा होती।

चेतावनी भी इसी रूपक म है: गुल्लक तभी काम आती है जब उसम डालते रह। हम डालना भूल गए और ऊपर से
उसे पाट भी दया — इसी लए वह खाली पड़ी है।

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 (ख) जल-चक्र क प्र क्रया कैसे पूरी होती है?

जल-चक्र इस प्रकार पूरा होता है —

1. सूरज की गम से समुद का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है।

2. ऊपर जाकर यह भाप ठं डी होकर बादल बन जाती है।

3. हवा बादलों को धरती की ओर ले आती है।

4. बादल बरसते है ं — बरसात की बूदँ े ं धरती पर िगरती है।
ं

5. यही पानी बहकर नदी बनता है और नदी के िकनारे बसे गाँव-शहर उसका उपयोग करते है।
ं

6. नदी अपने चारों तरफ का पानी लेक र िफर उसी समुद में जा िमलती है।

→ यात्रा वही ं लौट आई जहाँ से चली थी — जल-च क्र पूरा हो जाता है।

सूरज बादल

वष

भाप ऊपर उठती है
गाँव
पहाड़

नदी

सम दु

जल-चक्र — सूरज क गम से समुद्र का पानी भाप बनता है, भाप बादल बनकर बरसती है, वषा का पानी नद बनकर बहता है और नद
फर समुद्र म मल जाती है।

चक्र क्य कहते ह: क्य क इसका न कोई पहला सरा है, न आ खरी। पानी नष्ट नह होता, बस अपना रूप बदलता
रहता है — पानी से भाप, भाप से बादल, बादल से फर पानी।

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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m.
(ग) य द सारी न दयाँ, झील और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
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प्र.3

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l न दयाँ, झील और तालाब सूख जाएँ तो जीवन क पूरी व्यवस्था लड़खड़ा जाएगी। इसका असर एक साथ कई तरफ पड़ेगा
य दgसारी
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—

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भूजल भरना बंद हो जाएगा। तालाब और झील ही वषा के पानी को रोककर उसे जमीन म उतारते ह। ये न रह तो धरती क
ag
गुल्लक खाली रह जाएगी और कुएँ, हडपंप तथा नल eसूm
a s ख जाएँगे।

a l है क शहर म तो पानी बकने लगा है — पानी और महँगा हो जाएगा और
पीने का पानी संकट म पड़ जाएगा। पाठ मgलखा
गरीब सबसे पहले पसेगा।

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खेती चौपट हो जाएगी। सचाई का पानी न मलने से फसल सूख जाएगी, अनाज घटे गा और अकाल जैसी हालत बन जाएगी।

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as
पशु-पक्षी और पेड़-पौधे मरने लगगे। जलचर जीव तो पहले ही दन खत्म हो जाएँगे; जंगल सूखगे तो वषा और भी घटे गी।
m l
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लोग गाँव छोड़ने लगगे। पानी क तलाश म पलायन बढ़े गा और पानी को लेकर “तू-तू, म-म” जैसे झगड़े बड़े ववाद म बदल

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जाएँगे।

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असल म यह हो चुका है: पाठ यही तो बता रहा है क तालाब पाटने के बाद “गम के दन म हमारे नल सूख जाते

m a s
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ह।” यानी यह कोई दूर क कल्पना नह , कई इलाक क आज क स ाई है।

a s em
glसबसे पहले वह चीज छनती है जो सबसे जरूरी है — पीने का पानी।
याद रखने वाली बात: पानी सूखने aपर
इसी लए कहा गया है — “ बन पानी सब सून।”

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. (घ) पाठ म पानी को रुपय से भी कई गुना मूल्यवान क्य बताया गया है?a g l
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प्र.4

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पाठ क पं क्त है — “तब रुपय से भी कई गुना क मती इस वषा को हम इस बड़ी गुल्लक म जमा कर लेना चा हए।” पानी को
m
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रुपय से क मती इन कारण से कहा गया है —

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पानी के बना जीवन नह है, रुपये के बना है। रुपया न हो तो काम क ठन होगा, पर पानी न हो तो मनुष्य, पशु, फसल —
कोई नह बचेगा।

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.
रुपये से पानी हमेशा नह खरीदा जा सकता। पाठ बताता है क शहर म पानी बकने लगा है, फर भी “भयानक कष्ट” बना

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हुआ है। जब ोत ही सूख जाए तो जेब म पैसा होते हुए भी पानी नह मलता।

.co a g l
m बनाई न जा सके, वह सबसे क मती होती है।
पानी बनाया नह जा सकता। रुपया कमाया जा सकता है, पर वषा प्रकृ त दे ती है — वह हमारे बस म नह । जो चीज दोबारा

l a se
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यह पूँजी मुफ्त म मलती है और मुफ्त म बह जाती है। गुल्लक म डालने के लए रुपया कमाना पड़ता है, पर वषा का पानी

m .
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आसमान से बना माँगे आता है — उसे न सँभालना दोहरी नासमझी है।
m a
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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

रु पया → कमाया जा सकता है, िफर से जमा िकया जा सकता है
पानी → न बनाया जा सकता है, न उसका कोई िवकल्प है
इसीिलए वष की एक -एक बूदँ रु पये से कई गुन ा कीमती है।

शीषक — पृष्ठ 47
पाठ से

पाठ से ले ख न

प्र.1 (क) इस पाठ का शीषक ‘पानी रे पानी’ दया गया है। पाठ का यह नाम क्य दया गया होगा? अपने सहपा ठय
के साथ चचा करके ल खए। अपने उत्तर का कारण भी ल खए।

‘पानी रे पानी’ शीषक इस लए दया गया होगा क्य क यह नाम पूरे पाठ का भाव एक साँस म कह दे ता है। इसके तीन कारण साफ
दखते ह —

1. ‘रे’ संबोधन है। लेखक पानी को दूर क कोई वस्तु नह मानता, उसे सीधे पुकारता है — जैसे कसी अपने से बात कर रहा हो।
इससे पाठ म आत्मीयता और थोड़ी शकायत, दोन आ जाती ह।
2. ‘पानी…पानी’ क पुनरु क्त दोन हालात दखाती है। कभी पानी बलकुल नह — “नल खोलो तो पानी के बदले सूँ-सूँ क
आवाज”; और कभी पानी ही पानी — “बरसात म चार ओर पानी ही पानी दखाई दे ना।” शीषक अकाल और बाढ़, दोन को
एक साथ पकड़ लेता है।
3. यह लोकभाषा क लय है। गीत म ऐसा संबोधन बार-बार आता है, इस लए ब क जबान पर यह नाम तुरंत चढ़ जाता है।
पाठ भी सरल, बातचीत जैसी भाषा म लखा गया है — शीषक उसी शैली से मेल खाता है।

कारण एक वाक्य म: शीषक वषय भी बताता है (पानी), भाव भी ( चता और पुकार) और पाठ क शैली भी
(सहज, बातचीत जैसी) — इसी लए यही नाम सबसे उपयुक्त है।

प्र.2 (ख) आप इस पाठ को क्या नाम दे ना चाहगे? इसका कारण ल खए।

यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है। अच्छा शीषक वही है जो छोटा हो, पाठ क मुख्य बात कहे और याद रह जाए। नीचे कुछ
नाम और उनके कारण दए गए ह — इनम से चु नए या इन्ह क तरह अपना नाम ग ढ़ए।

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संभा वत शीषक कारण

धरती की ग ल्ु लक पाठ का सबसे सुंदर और कद्र य रूपक यही है — वषा को गुल्लक म जमा करने क बात।

एक ही िसक्के के दो अकाल और बाढ़ क एकता ही लेखक का मुख्य तक है।
पहलू

पानी का चक्कर पाठ स्वयं कहता है — “पानी का कुछ अजीब-सा चक्कर सामने आने लगा है” और अंत म — “हम पानी के
चक्कर म फँसते चले जाएँगे।”

बूदँ -बूदँ की बचत वषा जल संग्रहण का संदेश सीधे शीषक म आ जाता है।

नमूना उत्तर: म इस पाठ को ‘धरती क गुल्लक’ नाम दे ना चा ँगा। कारण यह है क पूरा पाठ इसी एक तुलना पर टका है — जैसे
हम गुल्लक म पैसे जमा करते ह, वैसे ही धरती वषा का पानी जमा करती है और साल भर हम लौटाती है। यह नाम ब को तुरंत
समझ म आ जाता है और साथ ही यह भी याद दला दे ता है क गुल्लक तोड़ दगे तो बचत भी खत्म हो जाएगी — जैसे तालाब पाट
दे ने से भूजल खत्म हो गया।

शब्द क बात — बात पर बल दे ना — पृष्ठ 47
पाठ से

पाठ से शब्द क बात

प्र.1 बात पर बल दे ना — • “हमारी यह धरती भी इसी तरह क एक गुल्लक है।” • “हमारी यह धरती इसी तरह क
एक गुल्लक है।” (क) इन दोन वाक्य को ध्यान से प ढ़ए। दूसरे वाक्य म कौन-सा शब्द हटा दया गया है? उस
शब्द को हटा दे ने से वाक्य के अथ म क्या अंतर आया है, पहचान कर ल खए।

दूसरे वाक्य म ‘भी’ शब्द हटा दया गया है।

वाक्य क्या कहता है

“हमारी यह धरती भी इसी तरह की धरती को पहले कही गई गु लक से जोड़ ता है — ऊपर िजस िम ी की गु लक की बात हुई, धरती भी ठीक
ल् ल्

एक ग ल्ु लक है। ” वैस ी ही एक गु लक है। तुल ना और अपनापन, दोनों बने रहते है।ं
ल्

“हमारी यह धरती इसी तरह की यह केवल एक सूचना बनकर रह जाता है। पछली बात से जुड़ाव टू ट जाता है और बल (जोर) खत्म हो
एक ग ल्ु लक है। ” जाता है।

‘भी’ का काम: ‘भी’ एक नपात है। यह अपने आप म कोई अथ नह रखता, पर जस शब्द के बाद लगता है उस
पर बल डाल दे ता है और उसे पहले कही गई बात से जोड़ दे ता है। यहाँ यह कहता है — “गुल्लक सफ म क वही
छोट नह , हमारी धरती भी एक गुल्लक है।”

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खुद पर खए: “म भी चलूँगा” और “म चलूँगा” — पहले वाक्य म कोई और भी जा रहा है, दूसरे म सफ म। एक
छोटा-सा ‘भी’ पूरा अथ बदल दे ता है।

प्र.2 (ख) पाठ म ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए ह जो अपनी उप त से वाक्य म वशेष प्रभाव उत्पन्न करते ह। पाठ
को फर से प ढ़ए और इस तरह के शब्द वाले वाक्य को चुनकर ल खए।

ऐसे शब्द को नपात कहते ह — भी, ही, तो, जरूर, ब ल्क, केवल, मात्र। पाठ म से चुने हुए वाक्य नीचे दए गए ह (बल दे ने वाला
शब्द मोटे अक्षर म) —

पाठ का वाक्य बल दे ने वाला वह क्या जोड़ता है
शब्द

“पर इस बारे म पढ़ा जरूर है।” ज र रू सोचा भले न हो, पढ़ने क बात पक्क है — नश्चय
का बल।

“पानी आता भी है तो बेवक्त।” भी, तो आने क बात मान भी ल, तब भी शकायत बाक रह
जाती है।

“इससे कई घर का पानी खचकर एक ही घर म आ जाता ही सी मत करता है — और कह नह , बस उसी एक
है।” घर म।

“यह कमी गाँव-शहर म ही नह ब ल्क हमारे प्रदे श क ही, बि क ल् दायरा बढ़ाता है — बात यह तक सी मत नह है।
राजधा नय म… भी…”

“शहर म तो अब कई चीज क तरह पानी भी बकने लगा तो, भी अचरज और चता, दोन का बल।
है।”

“लो, सब तरफ पानी ही बहने लगता है।” ही अ त दखाता है — और कुछ नह , बस पानी।

“यह तो हुई जल-चक्र क कताबी बात।” तो अलगाव दखाता है — कताब क बात अलग,
असल हालात अलग।

“ चत्र म कुछ तीर भी बने रहते ह।” भी पहले गनाई गई चीज म एक और जोड़ता है।

“यह तो हुई गरमी के मौसम क बात।” तो आगे बरसात क उलट तस्वीर आने का संकेत दे ता
है।

पहचानने का तरीका: वाक्य म से वह शब्द हटाकर प ढ़ए। य द वाक्य का अथ तो वही रहे पर जोर खत्म हो जाए,
तो वही नपात है।

समानाथ शब्द — पृष्ठ 47

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पाठ से

पाठ से शब्द क बात

प्र.1 नीचे दए गए वाक्य म रेखां कत शब्द के ान पर समान अथ दे ने वाले उपयुक्त शब्द ल खए। इस काय के लए
आप बादल म से शब्द चुन सकते ह। (बादल म दए शब्द — सूय, मेघ, भास्कर, पवन, वा रद, वायु, दवाकर,
जलद, वाष्प, समीर, दनकर, नीरद) (क) सूरज क करण पड़ते ही फूल खल उठे ।

सूरज के समानाथ शब्द बादल म तीन ह — सूय, भास्कर, दवाकर और दनकर। कोई भी एक रखकर वाक्य इस तरह बनेगा —

सूय की िकरणे ं पड़ ते ही फूल िखल उठे ।
भास्कर की िकरणे ं पड़ ते ही फूल िखल उठे ।
िदवाकर की िकरणे ं पड़ ते ही फूल िखल उठे ।
िदनकर की िकरणे ं पड़ ते ही फूल िखल उठे ।

शब्द का अथ खो लए: भास्कर = भास (प्रकाश) करने वाला। दवाकर = दन करने वाला। दनकर = दन का
जन्मदाता। तीन नाम म सूरज का कोई-न-कोई काम छपा है।

प्र.2 (ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर जाता है।

भाप का समानाथ शब्द है — वाष्प।

समुद का पानी वाष्प बनकर ऊपर जाता है।

जोड़कर याद र खए: ‘भाप’ बोलचाल का शब्द है और ‘वाष्प’ तत्सम (संस्कृत से आया) शब्द। वज्ञान क कताब
म भी आपको ‘वाष्पीकरण’ शब्द मलेगा — यानी पानी का भाप बनना, जो जल-चक्र क पहली कड़ी है।

प्र.3 (ग) अचानक बादल गरजने लगे।

बादल के समानाथ शब्द बादल म चार ह — मेघ, वा रद, जलद, नीरद। कोई भी एक चु नए —

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अचानक मेघ गरजने लगे।
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अचानक जलद गरजने लगे।
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अचानक वािरद गरजने लगे।
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aअचानक नीरद गरजने लगे।

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ag दे ता है”, यानी बादल।
बनावट दे खए: जल + द = जलद (जल दे ने वाला), वा र + द = वा रद (वा र = जल), नीर + द = नीरद (नीर =
जल)। तीन का अथ एक ही है — “जो जल

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प्र.4 (घ) जल-चक्र म हवा क भी बहुत बड़ी भू मका है।

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हवा के समानाथ शब्द बादल म तीन ह — पवन, वायु, समीर।

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जल-चक्र में पवन की भी बहुत बड़ ी भूिमका है।se
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जल-चक्र में वायु की भी बहुत बड़ ी भूिमका है।

जल-चक्र में समीर की भी बहत
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ु बड़ ी भूिमका है।
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a s em मूल शब्द बादल म से समानाथ

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सूर ज सूय, भा कर, िदवाकर, िदनकर
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भाप वा प
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ष्

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aमेघs, वािरद, जलद, नीरद
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बादल

हवा पवन, वायु, समीर

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omनह और कोई दो जगह नह जाता। l
ध्यान द जए: बादल म दए बारह शब्द ठ क इन्ह चार समूह म बँट जाते ह — 4 + 1 + 4 + 3 = 12। कोई शब्द
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उपसग — पृष्ठ 48
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पाठ से

पाठ से भाषा क बात

प्र.1 “दे श के कई हस्स म तो अकाल जैसे हालात बन जाते ह।” उपयुक्त वाक्य म रेखां कत शब्द म ‘अ’ ने ‘काल’
शब्द म जुड़कर एक नया अथ दया है। काल का अथ है— समय, मृत्यु। जब क अकाल का अथ है— कुसमय,
सूखा। कुछ शब्दांश कसी शब्द के आरंभ म जुड़कर उसके अथ म प रवतन कर दे ते ह या कोई वशेषता उत्पन्न
कर दे ते ह और इस प्रकार नए शब्द का नमाण करते ह। इस तरह के शब्दांश ‘उपसग’ कहलाते ह। आइए, कुछ
और उपसग क पहचान करते ह— (पुस्तक म दया चत्र — प्र, व, पर, स्व + दे श = प्रदे श, वदे श, परदे श,
स्वदे श)

चत्र म ‘दे श’ शब्द के आगे चार उपसग जोड़े गए ह। हर उपसग अथ को नई दशा म मोड़ दे ता है —

उपसग + मूल शब्द नया शब्द अथ

प दे श पदे श दे श का एक बड़ा भाग, राज्य — “हमारे प्रदे श क राजधा नय म…”

िव दे श िवदे श अपने दे श से बाहर का दे श

पर दे श परदे श पराया दे श या पराया इलाका, घर से दूर क जगह

स्व दे श वदे श
स् अपना दे श

उपसग क पहचान: उपसग शब्द के आरंभ म लगता है और अकेला खड़ा नह हो सकता। ‘ व’, ‘प्र’, ‘स्व’ अपने
आप म कोई शब्द नह ह — पर ‘दे श’ के आगे लगते ही चार अलग-अलग शब्द बन जाते ह। जो शब्दांश अंत म
लगता है उसे प्रत्यय कहते ह (जैसे — पयावरण + वद = पयावरण वद)।

पाठ म से और उदाहरण: अ + काल = अकाल, बे + वक्त = बेवक्त, सु + र क्षत = सुर क्षत, सम + तल =
समतल, प्र + कृ त = प्रकृ त, आ + वश्यकता से जुड़ा ‘आवश्यक’, व + शाल = वशाल।

प्र.2 अब आप भी उपसग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्य म प्रयोग क जए— (पुस्तक म दया चत्र — सु,
अ, व + पात्र, ान)

चत्र म तीन उपसग (सु, अ, व) और दो मूल शब्द (पात्र, ज्ञान) दए गए ह। इनसे बनने वाले चार शब्द और उनके वाक्य —

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उपसग + मूल नया अथ वाक्य म प्रयोग
शब्द शब्द

सु + पात्र सुपा त्र योग्य व्य क्त, जसे दे ना साथक हो दान हमेशा सुपात्र को ही दे ना चा हए।

अ + पात्र अपा त्र अयोग्य, जो उस चीज के लायक न अपात्र के हाथ म अ धकार आ जाए तो नुकसान ही होता
हो है।

अ + ान अ ान जानकारी का अभाव, नासमझी तालाब को पाट दे ना हमारे अज्ञान का ही प रणाम था।

िव + ान िव ान वशेष रूप से जाना हुआ ज्ञान वज्ञान ने वषा जल संग्रहण के कई सरल तरीके सुझाए
ह।

और अभ्यास क जए — इन्ह तीन उपसग से बने कुछ और शब्द —

उपसग अथ क दशा बने हुए शब्द एक वाक्य

सु अच्छा, सुंदर सुगंध, सुजल , सुिवधा, सुरि त क्ष बरसात के बाद म से उठती सुगंध मन मोह लेती है।

अ नह , अभाव अकाल , अशु , असंभव, अनजान
द्ध बना छाने वषा का जल अशुद्ध हो सकता है।

िव वशेष, अलग, उलटा िवशाल , िवदे श, िववाद , िव वास
श् पानी को लेकर पड़ो सय म ववाद न हो, इसका ध्यान र खए।

सावधानी: ‘अ’ उपसग स्वर से शुरू होने वाले शब्द के आगे ‘अन्’ हो जाता है — अन् + उपयोगी = अनुपयोगी,
अन् + आवश्यक = अनावश्यक।

आपक बात — पृष्ठ 48
पाठ से आगे

पाठ से आगे

प्र.1 (क) धरती क गुल्लक म जलरा श क कमी न हो इसके लए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते ह, अपने
सहपा ठय के साथ चचा करके ल खए।

इस प्रश्न म दो तरह के काम आने चा हए — पानी बचाना (गुल्लक से कम नकालना) और पानी जमा करना (गुल्लक म ज्यादा
डालना)। दोन साथ चल तभी बात बनेगी।

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क्या करूँ कैसे इससे क्या होगा

बूदँ -बूदँ बचाना ब्रश करते और हाथ धोते समय नल बंद रखना; शॉवर क जगह एक टपकता नल दन भर म कई लीटर पानी
बालट से नहाना; टपकते नल तुरंत ठ क कराना। बहा दे ता है — यह बचत सबसे आसान है।

पानी दोबारा काम सब्जी-चावल धोया पानी गमल म डालना; कपड़े धोने का बचा एक ही पानी दो काम कर दे ता है।
में ले ना पानी आँगन धोने म लगाना।

वष जल संग हण घर या व ालय क छत के पाइप को भंडारण टं क से जोड़ना — वष का पानी बहकर जाने के बजाय गु लक में
ल्

“जल जहाँ गरे वह एकत्र क जए।” जमा हो जाएगा।

तालाब-कु ओं की तालाब म कचरा न डालना, न डालने दे ना; सफाई के श्रमदान म तालाब भरा रहेगा तो पानी रसकर भूजल
रखवाली भाग लेना; पुराने कुओं-बाव ड़य क सफाई म सहयोग करना। बढ़ाता रहेगा।

पेड़ लगाना घर, व ालय और सड़क के कनारे पौधे लगाना और उनक पेड़ क जड़ वषा के पानी को रोककर जमीन म
दे खभाल करना। उतारती ह और म बहने नह दे त ।

मोटर का लालच नल के पाइप म मोटर लगाकर दूसर का पानी न ख चना। पाठ कहता है — “यह तो अपने आस-पास का
छोड़ना हक छ नने जैसा काम है।”

दू स रों को बताना कक्षा म पोस्टर, नारे और छोट प रचचा; घर म माता- पता से बात। अकेले क बचत छोट होती है, मोहल्ले भर क
बचत बड़ी।

याद रखने वाला सूत्र: गुल्लक भरने के दो ही तरीके ह — कम खच करो और ज्यादा डालो। पानी के साथ भी ठ क
यही नयम चलता है।

प्र.2 (ख) इस पाठ म एक छोटे से खंड म जल-चक्र क प्र क्रया को प्रस्तुत कया गया है। उस खंड क पहचान कर और
जल-चक्र को चत्र के माध्यम से प्रस्तुत कर।

जल-चक्र वाला खंड पाठ का सबसे पहला अनु े द है (पृष्ठ 41)। उसक पं क्तयाँ ये ह —

“सूरज, समुद , बादल, हवा, धरती, िफर बरसात की बूदँ े ं और लो िफर बहती हुई एक नदी और उसके िकनारे बसा

त म्ु हारा, हमारा घर, गाँव या शहर। िचत्र के दू सरे भाग में यही नदी अपने चारों तरफ का पानी लेक र उसी समुद में

िमलती िदखती है। … समुद से उठी भाप बादल बनकर पानी में बदलती है और िफर इन तीरों के सहारे जल की

यात्रा एक तरफ से शुरू होकर समुद में वािपस िमल जाती है। जल-च क्र पूरा हो जाता है।”

चत्र कैसे बनाएँ — कागज के बीच म एक चौड़ी प म समुद्र बनाइए, बाएँ ऊपर सूरज, ऊपर बीच म बादल, बाईं ओर पहाड़ और
उससे नकलती नद , नद के कनारे घर-गाँव। फर तीर लगाइए — यही चत्र क जान ह —

1. समुद्र से ऊपर क ओर तीर — ल खए वाष्पीकरण (भाप बनना)
2. भाप से बादल क ओर तीर — ल खए संघनन (बादल बनना)

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3. बादल से धरती क ओर नीचे जाते तीर — ल खए वषा
4. पहाड़ से नद होकर समुद्र तक तीर — ल खए बहाव
5. नद से जमीन के नीचे जाता एक तीर — ल खए रसाव → भूजल भंडार

सूरज बादल

वष

वाष्पीकरण

पहाड़ गाँव

नदी

समुद
िरसाव → भूजल भंडार

जल-चक्र का नमूना चत्र — सूरज, समुद्र, बादल, वषा, नद और गाँव; तीर बताते ह क पानी कस दशा म यात्रा कर रहा है।

अ े चत्र म क्या होना चा हए: (1) हर भाग पर नाम लखा हो, (2) तीर क दशा गोल घेरा पूरा करती हो, (3)
कह यह भी दखे क पानी जमीन के नीचे उतरता है — क्य क पाठ का असली संदेश यही भूजल भंडार है।

प्र.3 (ग) अपने ारा बनाए गए जल-चक्र के चत्र का ववरण प्रस्तुत क जए।

ववरण दे ते समय चत्र के हर भाग को क्रम से बताइए — कहाँ से शुरू, कहाँ होते हुए, कहाँ खत्म। नीचे एक नमूना ववरण दया
गया है, इसे अपने चत्र के अनुसार बदल ली जए।
नमूना उत्तर: मेरे चत्र के दाईं ओर नीला समुद्र है और बाईं ओर ऊपर सूरज। सूरज क गम से समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठ
रहा है — यह मने ऊपर क ओर जाते घुमावदार तीर से दखाया है और उस पर ‘वाष्पीकरण’ लखा है। ऊपर जाकर यह भाप ठं डी
होती है और बादल का रूप ले लेती है, जो मने आसमान के बीच म स्लेट रंग से बनाया है। हवा इन बादल को पहाड़ क ओर ले
जाती है। वहाँ बादल बरसते ह — नीली सीधी रेखाओं से मने वषा दखाई है। वषा का पानी पहाड़ से नीचे उतरकर नद बन जाता है।
नद के कनारे मने एक छोटा-सा गाँव बनाया है, क्य क लोग हमेशा नद के कनारे ही बसते ह। नद अंत म उसी समुद्र म जा मलती
है, जहाँ से पानी क यात्रा शुरू हुई थी — इस तरह चक्र पूरा हो जाता है। एक बगनी तीर मने नद से नीचे जमीन क ओर भी बनाया
है और लखा है ‘ रसाव → भूजल भंडार’, क्य क पाठ के अनुसार तालाब और न दय का पानी रसकर ही धरती क गुल्लक भरता
है और वही पानी हम साल भर मलता है।

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ववरण म यह जरूर क हए: जल-चक्र म पानी क मात्रा घटती-बढ़ती नह , केवल उसका रूप और जगह बदलती

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है। इसी लए पानी को हम बना नह सकते — सफ सँभाल सकते ह।

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सृजन — पृष्ठ 49

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पाठ से आगे

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पाठ से आगे ले ख न
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प्र.1 (क) कल्पना क जए क कसी दन आपके घर म पानी नह आया। आपको व ालय जाना है। आपके घर के

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समीप ही एक सावज नक नल है। आप बालट आ द लेकर वहाँ पहुँचते ह और ठ क उसी समय आपके पड़ोसी

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भी पानी लेने पहुँच जाते ह। आप दोन ही अपनी-अपनी बालट पहले भरना चाहते ह। ऐसी प र त म आपस
g (स्लोगन) तैयार क जए।
c प्रकार का ववाद (तू-तू म-म) न हो, यह ध्यान म रखते हुए पाँच संदेशaवाक्य
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अच्छा स्लोगन छोटा होता है, उसम लय होती है और वह लड़ाई क जगह मल-बाँटकर चलने क बात कहता है। पाँच नमूना

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स्लोगन —

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1. “पहले आप, पहले आप — पानी बँटे, न बढ़े ताप।”
2. “लाइन म लगकर भरो पानी, यही है समझदारी क नशानी।”
3. “झगड़ा नह , बारी-बारी — पानी है सबक जरूरत सारी।”
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4. “बालट भर, फर पीछे हट — पड़ोसी भी है अपना ही घर।”

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5. “पानी पर सबका हक बराबर, न कोई छोटा, न कोई बड़ा तर।”

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a gl ये पं क्तयाँ काम क्य करती ह: हर स्लोगन म दो चीज ह — एक नयम (लाइन म लगो, बारी से भरो) और एक
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भाव (पड़ोसी अपना है, हक बराबर है)। केवल डाँट या मनाही वाला वाक्य (“शोर मत करो”) स्लोगन नह बनता।

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बनाने का तरीका: पहले वह बात सो चए जो आप कहना चाहते ह, फर उसे 6–8 शब्द म ल खए, फर अंत के दो
शब्द म तुक मलाइए। पाठ का ही एक वाक्य आपक मदद करेगा — “यह तो अपने आस-पास का हक छ नने जैसा
काम है।”

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m .c (ख) “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फर बरसात क बूँद और फरagबहती हुई एक नद और उसके कनारे
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प्र.2

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बसा तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर।” इस वाक्य को पढ़कर आपके सामने कोई एक चत्र उभर आया होगा,
उस चत्र को बनाकर उसम रंग भ रए।
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यह चत्रकला क ग त व ध है — इसे अपनी कॉपी म स्वयं बनाइए। नीचे बताया गया है क चत्र म क्या-क्या आना चा हए और
कौन-सा रंग कहाँ भरना चा हए।

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वाक्य का शब्द चत्र म कहाँ रंग

सूर ज ऊपर एक कोने म, करण के साथ नारंगी और पीला

समुद एक ओर चौड़ी लहरदार प गहरा नीला

बादल आसमान म, कुछ भरे-भरे बादल ले टी और सफे द
स्

हवा बादल के पास घुमावदार रेखाएँ, झुके हुए पेड़ ह की नीली रे खाएँ
ल्

धरती नीचे का भाग — खेत, पहाड़, मैदान हरा और भूरा

बरसात की बूदँ े ं बादल से नीचे गरती तरछ रेखाएँ नीला

बहती नदी पहाड़ से नकलकर समुद्र तक जाती टे ढ़ -मेढ़ धारा नीला-हरा

घर, गाँव या शहर नद के कनारे — झोपड़ी, मकान, स्कूल, एक-दो ऊँची इमारत लाल छत, पीली दीवारे ं

सुझाव: पहले प सल से हलका खाका बनाइए, फर रंग भ रए। नद को समुद्र तक जरूर पहुँचाइए — क्य क वाक्य
म यही यात्रा छपी है। चाह तो पाठ क तरह छोटे -छोटे तीर भी बना द जए, जससे चत्र दे खते ही जल-चक्र समझ
म आ जाए।

पानी रे पानी ( चत्र पर बातचीत) — पृष्ठ 50
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 नीचे हम सबक दनचया से जुड़ी कुछ ग त व धय के चत्र ह। उन चत्र पर बातचीत क जए जो धरती पर पानी
के संकट को कम करने म सहायक ह और उन चत्र पर भी बात कर जो पानी क गुल्लक को जल्द ही खाली कर
रहे ह।

पुस्तक के पृष्ठ 50 पर नौ चत्र ह। उन्ह दो खान म बाँ टए — गुल्लक भरने वाले और गुल्लक खाली करने वाले।

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चत्र कस खाने क्य
म

बालटी में बैठकर मग से संक ट कम बालट और मग से नहाने म शॉवर क तुलना म बहुत कम पानी लगता है — जतना चा हए,
नहाता बच्चा करता है उतना ही।

झारी (वाटिरंग कै न) से संक ट कम झारी से पानी सीधे जड़ तक जाता है, पाइप क तरह इधर-उधर बहता नह ।
पौधों को पानी दे ती करता है
लड़की

िफल्टर की टोंटी से ध्यान से य द ट ट खुली छोड़कर बतन भर चुका है और पानी बह रहा है, तो यह बबाद है। पर य द
बतन में िगरता पानी दे खए फल्टर से नकलने वाले बचे पानी को बतन म इक ा करके दूसरे काम म लया जा रहा है, तो
यह अच्छ आदत है। चचा म दोन पक्ष र खए।

मजदू र ों ारा तालाब/ संक ट कम यही तो धरती क गुल्लक बनाना है — तालाब वषा का पानी रोककर उसे भूजल म उतारता है।
जलाशय की खुद ाई करता है

खुले बहते नल के सामने गु लक
ल् ब्रश करते समय नल खुला रहने से हर दन कई लीटर साफ पानी बेकार बह जाता है।
बश करता बच्चा खाली करता
है

मोटर लगे नल से गु लक
ल् पाठ क ही बात — “नल के पाइप म मोटर लगवा लेते ह… यह तो अपने आस-पास का हक
भरकर बहती हुई बड़ी खाली करता छ नने जैसा काम है।” ऊपर से बतन भरकर बह भी रहा है।
टंक ी है

पौधा लगाकर उसे पानी संक ट कम पेड़ क जड़ वषा का पानी जमीन म उतारती ह और म को बहने से रोकती ह।
दे ते दो बच्चे करता है

पाइप से स्कू टर धोती गु लक
ल् पाइप से गाड़ी धोने म सैकड़ लीटर पानी बह जाता है; एक बालट और कपड़े से यही काम हो
लड़की खाली करता जाता है।
है

खाली कक्षा, पंखे और गु लक
ल् यह सीधे पानी क नह , पर संसाधन क बबाद क तस्वीर है। बजली बनाने म भी पानी
ब ी चालू खाली करता लगता है — बाँध और ताप- बजलीघर म। बना जरूरत चलते पंखे-बत्ती भी अंत म पानी ही
है खच कराते ह।

बातचीत का सूत्र: हर चत्र पर तीन प्रश्न पू छए — (1) यहाँ पानी कहाँ से आ रहा है? (2) कतना पानी सचमुच
काम आ रहा है और कतना बह रहा है? (3) यही काम कम पानी म कैसे हो सकता है?

नष्कष जो कक्षा म लखा जाना चा हए: पानी बचाने वाले काम बड़े नह ह — बालट , झारी, बंद नल, एक
पौधा। पानी बबाद करने वाले काम भी बड़े नह ह — खुला नल, पाइप, मोटर। फक आदत का है, साधन का नह ।

सबका पानी — पृष्ठ 50

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे प रयोजना

प्र.1 ‘सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पयाप्त पानी कैसे मले’ इस वषय पर एक प रचचा का आयोजन कर।
प रचचा के मुख्य बदुओं को आधार बनाते हुए रपोट तैयार कर।

यह कक्षा क ग त व ध है। इसे तीन चरण म क जए — तैयारी → प रचचा → रपोट।
1. तैयारी: कक्षा को चार समूह म बाँ टए — घर, व ालय, गाँव/मोहल्ला और प्रशासन। हर समूह अपने हस्से पर दो-तीन बदु
सोचकर लाए।
2. प रचचा म ये बदु जरूर आने चा हए:

बँटवारा: पानी सबका है, इस लए बारी और मात्रा तय हो — मोटर लगाकर कोई एक घर सबका पानी न ख च ले।
समय: नल का समय तय और सबको पता हो, ता क कसी को रात- बरात न उठना पड़े।
भंडारण: हर घर म और व ालय म साफ ढका हुआ भंडारण हो; टं कय क नय मत सफाई हो।
वषा जल संग्रहण: छत का पानी टं क या सोख्ता ग े म जाए — “जल जहाँ गरे वह एकत्र क जए।”
जल ोत क रखवाली: तालाब, कुएँ, बावड़ी और नद म कचरा न जाए।
रसाव रोकना: टू टे पाइप और टपकते नल तुरंत ठ क ह — जो पानी बीच रास्ते बह जाता है, वह कसी के काम नह आता।
बराबरी: यह भी दे खा जाए क बस्ती के अं तम छोर तक, सबसे कमजोर प रवार तक पानी पहुँच रहा है या नह ।

3. रपोट का ढाँचा (नमूना):

शीषक क्या लख

िवषय सभी को आवश्यकता के अनुसार पयाप्त पानी कैसे मले

ितिथ, स्थान, सहभागी दनांक, कक्षा 7 का कक्ष, कुल 38 व ाथ , संचालन — कक्षा-अध्यक्ष

उठाए गए मुख्य िबंद ु ऊपर दए बदुओं म से जो कक्षा म सचमुच उठे

मतभेद के िबंद ु जैसे — पानी का शुल्क लया जाए या नह ; मोटर पर पूरी रोक हो या समय तय हो

सवसम्मत सुझाव तीन-चार ऐसे सुझाव जन पर सब सहमत हुए

हम क्या करे ंग े कक्षा का अपना संकल्प — जैसे “ व ालय के सारे टपकते नल क सूची बनाकर प्रधानाचाय को दगे”

प रचचा का नयम: एक बार म एक व्य क्त बोले, हर समूह को बराबर समय मले और अंत म सुझाव लखे जाएँ
— नह तो अच्छ बात बोलकर हवा म उड़ जाती ह।

दै नक काय म पानी — पृष्ठ 51

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे प रयोजना

प्र.1 (क) क्या आपने कभी यह जानने का प्रयास कया है क आपके घर म एक दन म औसतन कतना पानी खच
होता है? अपने घर म पानी के उपयोग से जुड़ी एक ता लका बनाइए। इस ता लका के आधार पर पता लगाइए —
• घर के काय म एक दन म लगभग कतना पानी खच होता है? (बालट , घड़े या कसी अन्य बतन को मापक
बना सकते ह) • आपके माँ और पता या घर के अन्य सदस्य पानी बचाने के लए क्या-क्या उपाय करते ह?

यह घर पर करने का काम है। तरीका यह है — एक बालट को मापक मान ली जए (एक साधारण बालट लगभग 15 लीटर क
होती है) और एक पूरे दन गनते र हए क कस काम म कतनी बालट लग । नीचे नमूना ता लका द गई है; आप अपने घर के
असली आँकड़े भ रए।

काम कतनी बार लगभग बालट लगभग लीटर

नहाना (5 सदस्य) 5 10 150

कपड़े धोना 1 4 60

बतन धोना 3 3 45

खाना पकाना और पीना — 1 15

शौचालय — 6 90

घर-आँग न की सफाई 1 2 30

पौधों और पशुओ ं के िलए — 2 30

कुल (एक दन) — 28 420 लीटर

एक बालटी = 15 लीटर

कु ल बालटी = 28

28 × 15 = 420 लीटर पितिदन

पित व्यिक्त = 420 ÷ 5 = 84 लीटर पितिदन

एक महीने में = 420 × 30 = 12,600 लीटर

घर के लोग पानी बचाने के लए जो उपाय करते ह (नमूना उत्तर):

नल क ट ट म टपकन दखते ही उसे तुरंत ठ क करवाना।
बालट और मग से नहाना, शॉवर या फुहारे का प्रयोग न करना।
सब्जी और चावल धोया हुआ पानी गमल म डालना।

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी
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बतन पहले प छकर फर कम पानी म धोना; कपड़े इक े करके एक बार म धोना।
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आँगन धोने के बजाय झाड़ू लगाना।
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पीने का पानी उतना ही गलास म लेना जतना पीना हो — बचा हुआ फकना नह , पौधे म डालना।

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gl गनती जरूरी क्य है: जब तक संख्या सामने न आए, बचत का अंदाजा नह होता। य द इस घर म रोज सफ
aयह
दो बालट बचा ली जाएँ, तो महीने भर म 900 लीटर पानी बच जाएगा।

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प्र.2 ag सार पानी उपलब्ध हो जाता है? य द हाँ, तो कैसे? य द नह , तो क्य ?
(ख) क्या आपको अपनी आवश्यकतानु

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.cआती है।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर म तीन बात आनी चा हए — पानी कहाँ से मलता है, कतना और कब मलता है, और

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क्या क ठनाई

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नमू ना उत्तर (हाँ): हमारे घर म पानी नगरपा लका के नल से आता है। वह सुबह छह से आठ और शाम को पाँच से छह बजे तक
आता है। इसी बीच हम टं क और घड़े भर लेते ह, इस लए दन भर क जरूरत पूरी हो जाती है। पीने के लए हम इसी पानी को

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coऔर agl
छानकर और उबालकर काम म लेते ह। ग मय म कभी-कभी दबाव कम हो जाता है, तब पड़ोस के हडपंप से पानी लाना पड़ता है।

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s, जससे आगे के घर तक पानी पहुँचता ही नह — पाठ म इसी को “अपने
नमूना उत्तर (नह ): हमारे मोहल्ले म पानी हर दन नह आता जब आता है तब बहुत कम दबाव से आता है। इसका कारण यह
है क गली के कई घर ने पाइप म मोटर लगवा लीaहै
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आस-पास का हक छ नने जैसा काम” कहाaगया है। ग मय म भूजल स्तर नीचे चला जाने से हडपंप भी सूँ-सूँ करने लगता है। तब

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हम दूर के सावज नक नल या टकर पर नभर रहना पड़ता है और लाइन म लगकर घंट समय गँवाना पड़ता है।

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e ा पर बात क जए —
om रसाव, कम भूजल, टूटे पाइप, दूर का ोत।
लखते समय ध्यान र खए: कारण बताते समय दोष कसी व्य क्त पर न डालकर व्यव
जैस.े cमोटर, g l as
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(ग) आपके घर म दै नक आवश्यकताओं क पू त के लए पानी का संचयन कैसे और कन पात्र म कया जाता
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प्र.3

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है?

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संचयन यानी पानी को जमा करके रखना। घर म यह दो तरह से होता है — ऊपर क टं क म (सारे घर के लए) और बतन म

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(रोज के काम के लए)।
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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

पात्र कस काम के ध्यान रखने क बात
लए

छत की प्लािस्टक/सीमेंट की पूरे घर क आपू त ढक्कन बंद रहे; साल म दो बार सफाई हो।
टंक ी

िम ी का घड़ा या सुर ाही पीने का ठं डा पानी रोज बद लए और कपड़े से ढककर र खए।

स्टील/पीतल का ढका हुआ रसोई और पीने का पानी लेने के लए अलग डोई र खए, हाथ न डा लए।
बतन या मटका पानी

बालिटयाँ और डम नहाना, कपड़े, ढककर र खए, वरना मच्छर पनपते ह।
सफाई

िफल्टर या घड़े का छन्ना पीने का शुद्ध पानी मोमबत्ती/कडल समय पर बद लए।

छत से जुड़ी वष जल टंक ी वषा का पानी जमा पाठ के अनुसार इसम छत क म के कण मल जाते ह, इस लए उपयोग से
करना पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।

नमूना उत्तर: हमारे घर म नल का पानी सबसे पहले छत पर रखी टं क म जाता है। वहाँ से नल ारा वह रसोई और स्नानघर तक
आता है। रसोई म पीने का पानी हम म के घड़े और स्ट ल के ढके बतन म रखते ह। नहाने और कपड़े धोने के लए दो बाल टयाँ
और एक ड्रम पहले से भरकर रख लए जाते ह, ता क नल बंद हो जाने पर भी काम रुके नह । बरसात म हम आँगन म रखे बड़े ड्रम
म छत से गरता पानी भी जमा कर लेते ह और उसे पौध तथा सफाई म काम म लेते ह।

जन-सु वधा के रूप म जल — पृष्ठ 51
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 नीचे दए गए चत्र को ध्यान से दे खए— इन चत्र के आधार पर जल आपू त क त के बारे म अपने सा थय
से चचा क जए और उसका ववरण ल खए।

पृष्ठ 51 पर पाँच चत्र ह। पाँच म एक ही बात दखती है — पानी घर तक नह आ रहा, लोग को पानी तक जाना पड़ रहा है।

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

चत्र क्या दखता है यह क्या बताता है

1. सावजिनक नल पर भीड़ बस्ती के बहुत-से स्त्री-पुरुष और ब े घड़े- पूरे मोहल्ले के लए एक ही ोत — इसी लए लंबा इंतजार
बाल टयाँ लए एक ही नल के आसपास और आपसी ख चतान।
खड़े ह।

2. ‘पानी का टैंक र’ टकर से पाइप लगाकर लोग अपने बतन जहाँ पाइपलाइन नह है या ोत सूख चुके ह, वहाँ पानी गाड़ी
भर रहे ह। से लाना पड़ता है — यह अस्थायी और महँगा उपाय है।

3. तालाब/नदी से पानी लोग तालाब म उतरकर घड़े भर रहे ह, यही खुला जल ोत गाँव का सहारा है, पर यह पानी बना
भरते लोग कुछ सर पर रखकर लौट रहे ह। छाने-उबाले पीने योग्य नह होता।

4. सूखी, दरारों भरी जमीन स्त्री सर पर घड़ा और पुरुष काँवर म दो अकाल क तस्वीर — पानी बहुत दूर से लाना पड़ता है। इसम
पर पानी ढोते स्त्री-पुरुष बतन लए फट हुई जमीन पर चल रहे ह। सबसे ज्यादा समय और श्रम स्त्रय तथा ब का लगता है।

5. ‘जल रे ल ’ टकर के डब्बे जोड़कर चलती एक संकट इतना बड़ा हो जाता है क पूरे शहर के लए रेलगाड़ी से
रेलगाड़ी। पानी भेजना पड़ता है — यह हालात क गंभीरता का सबसे
बड़ा प्रमाण है।

नमूना ववरण: इन चत्र से पता चलता है क हमारे दे श म जल आपू त क स्थ त एक जैसी नह है। कह नल से पानी आता है,
कह एक ही सावज नक नल पर पूरी बस्ती नभर है, कह तालाब ही एकमात्र सहारा है और कह टकर या जल रेल से पानी पहुँचाना
पड़ता है। जहाँ भी स्थानीय ोत — तालाब, कुएँ और भूजल — सूख गए ह, वहाँ लोग का बहुत सारा समय केवल पानी जुटाने म
चला जाता है। इसका सबसे अ धक बोझ स्त्रय और ब पर पड़ता है, जससे ब क पढ़ाई तक छू ट जाती है। टकर और जल
रेल संकट के समय राहत तो दे ते ह, पर यह स्थायी हल नह है। स्थायी हल वही है जो पाठ बताता है — वषा के पानी को वह रोकना,
तालाब क रखवाली करना और भूजल भंडार को फर से भरना।

चचा म यह प्रश्न भी उठाइए: टकर सबसे पहले कसके घर पहुँचता है और सबसे बाद म कसके? पानी क कमी
सबको एक जैसा नह सताती — जनके पास साधन कम ह, उन्ह ज्यादा सताती है।

बन पानी सब सून — पृष्ठ 52
पाठ से आगे

पाठ से आगे प रयोजना

प्र.1 (क) पाठ म भूजल स्तर के कम होने के कुछ कारण बताए गए ह, जैसे— तालाब म कचरा फककर भरना आ द।
भूजल स्तर कम होने के और क्या-क्या कारण हो सकते ह? पता लगाइए और कक्षा म प्रस्तुत क जए। (इसके
लए आप अपने सहपा ठय , शक्षक और घर के सदस्य क सहायता भी ले सकते ह।)

भूजल स्तर तभी गरता है जब नकाला ज्यादा जाए और भरा कम। दोन तरफ के कारण नीचे दए ह —

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

वग कारण कैसे असर डालता है

भरना घट गया तालाब, झील, बावड़ी और कुओं का पाटा पाठ का बताया मुख्य कारण — जो पानी रसकर जमीन म जाता था,
जाना उसका रास्ता ही बंद हो गया।

भरना घट गया सड़क , आँगन और ग लय का पूरी तरह वषा का पानी जमीन म उतरने के बजाय ना लय से बहकर नकल जाता
पक्का (कंक्र ट) हो जाना है।

भरना घट गया पेड़ और जंगल क कटाई जड़ पानी को रोकती और धीरे-धीरे नीचे उतारती ह; पेड़ न रह तो पानी
बहकर चला जाता है और म भी कटती है।

भरना घट गया नद -नाल का सकुड़ना और उन पर पानी के फैलने और ठहरने क जगह ही नह बचती।
अ तक्रमण

िनकालना बढ़ घर-घर बोरवेल और सबम सबल पंप पहले हाथ से जतना ख चा जाता था, अब मोटर उससे कई गुना ख च
गया लेती है।

िनकालना बढ़ ज्यादा पानी माँगने वाली फसल और खुली बहुत-सा पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है; टपक ( ड्रप) सचाई से यह
गया नाली से सचाई बचता है।

िनकालना बढ़ बढ़ती आबाद , कारखाने और नमाण काय पाठ भी कहता है — “कायालय म, कारखान और खेत म पानी का कुछ
गया अजीब-सा चक्कर सामने आने लगा है।”

बब दी टू टे पाइप, टपकते नल और खुले छोड़े गए नकाला हुआ पानी काम आए बना ही बह जाता है।
नल

गण
ु व ा कचरे और गंदे पानी का जमीन म रसना भूजल क मात्रा भले रहे, वह पीने लायक नह रह जाता — यानी
उपयोगी पानी और घट जाता है।

प्रस्तु त कैसे कर: कक्षा म एक चाट बनाइए जसके बीच म एक कुआँ हो — बाईं ओर “जो भरता था, वह रुक
गया” और दाईं ओर “जो नकलता है, वह बढ़ गया”। हर तरफ तीन-चार कारण ल खए। बात एक नजर म समझ
आ जाएगी।

प्र.2 (ख) भूजल स्तर क कमी से हम आजकल कन क ठनाइय का सामना करना पड़ता है?

भूजल घटने क मार रोज के जीवन पर कई तरफ से पड़ती है —

नल और हडपंप सूख जाते ह। पाठ के शब्द म — “नल खोलो तो उससे पानी के बदले सूँ-सूँ क आवाज आने लगती है।”
पानी बेवक्त और बहुत कम समय के लए आता है, जससे मीठ न द छोड़कर बतन भरने पड़ते ह।
पानी पर खच बढ़ जाता है। बोरवेल और गहरा करना पड़ता है, मोटर लगवानी पड़ती है और शहर म तो “पानी भी बकने
लगा है।”
खेती चौपट होती है। सचाई का पानी न मलने से फसल सूखती है और कसान कज म डू बता है।
पानी को लेकर झगड़े बढ़ते ह — पाठ म इसे “तू-तू, म-म” और “झगड़े-टं टे” कहा गया है।

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

समय और पढ़ाई का नुकसान। दूर से पानी ढोने म जो घंटे लगते ह, वे ब — खासकर लड़ कय — क पढ़ाई से कटते ह।
बीमा रयाँ बढ़ती ह। कम और गंदा पानी मलने पर सफाई घट जाती है, जससे पेट क बीमा रयाँ फैलती ह। कुछ जगह पर
गहरे भूजल म फ्लोराइड या खारापन भी मलने लगता है।
गाँव छोड़ना पड़ता है। लगातार पानी न मलने पर प रवार शहर क ओर पलायन करने लगते ह।

जड़ क बात: ये सब अलग-अलग क ठनाइयाँ नह ह — सबक जड़ एक ही है। जब धरती क गुल्लक खाली हो
जाए, तो हर जरूरत के लए हाथ फैलाना पड़ता है।

प्र.3 (ग) आपके व ालय, गाँव या शहर के ानीय प्रशासन ारा भूजल स्तर बढ़ाने के लए क्या-क्या प्रयास कए
जा रहे ह, पता लगाकर ल खए।

यह पता लगाने का काम है। जानकारी इन जगह से मल सकती है — ग्राम पंचायत या नगरपा लका का कायालय, व ालय के
प्रधानाचाय, जल वभाग का कमचारी, स्थानीय समाचार पत्र और घर के बड़े।
पूछने के लए प्रश्न: क्या यहाँ वषा जल संग्रहण अ नवाय है? कतने सरकारी भवन म यह लगा है? पुराने तालाब -बाव ड़य क
सफाई कब हुई? नए भवन को न ा पास कराते समय क्या शत रहती है?
आमतौर पर कए जाने वाले प्रयास (अपने इलाके के अनुसार जाँ चए):

सरकारी भवन , व ालय और नए मकान म छत के ऊपर वषा जल संग्रहण अ नवाय करना।
पुराने तालाब , कुओं और बाव ड़य क सफाई और गहरीकरण, और उनके कनारे अ तक्रमण हटाना।
नाल पर छोटे चेक डैम और खेत म मेड़बंद , ता क पानी वह ठहरे।
सोख्ता ग े ( रचाज पट) बनवाना, जनसे वषा का पानी सीधे जमीन म उतरे।
सड़क के कनारे और सावज नक जगह पर वृक्षारोपण।
जल जागरूकता अ भयान — रैली, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर और व ालय म जल- मत्र दल।
बना अनुम त के बोरवेल पर रोक और पानी क चोरी/बबाद पर जुमाना।

नमूना उत्तर: हमारे व ालय क छत पर पछले वष वषा जल संग्रहण क टं क लगाई गई है, जसका पानी बगीचे म काम आता है।
नगरपा लका ने मोहल्ले के पुराने तालाब क सफाई कराई और उसके कनारे पेड़ लगवाए ह। इसके अलावा नए मकान का न ा
पास कराते समय अब सोख्ता ग ा बनवाना अ नवाय कर दया गया है। पछले जल सप्ताह म हमारी कक्षा ने भी पोस्टर बनाकर रैली
म भाग लया था।

प्रस्तु त के लए: जो पता चले उसे तीन खान म ल खए — क्या हो रहा है, कतना असर दखा, और क्या और
होना चा हए। तीसरा खाना ही आपक अपनी राय है।

यह भी जान — वषा-जल संग्रहण — पृष्ठ 52

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे
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पाठ से आगे प रयोजना

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a s emघर या व ालय के आस-पास, मुहल्ले या गाँव म पता लगाइए क वषा जल संग्रहण क कोई व ध अपनाई
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अपने
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जा रही है या नह ? य द हाँ, तो कौन-सी व ध है? उसके वषय म ल खए। य द नह , तो अपने शक्षक या

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प रजन क सहायता से इस वषय म समाचार पत्र के संपादक को एक पत्र ल खए।

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agकहाँ जाकर खत्म होते ह? आँगन म कोई सोख्ता ग ा है? मोहल्ले म कोई

पहले दे खए और पू छए — छत से उतरते पाइप
तालाब, बावड़ी या चेक डैम है?

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ताm
य द हाँ — व ध का ववरण कुछ इस तरह ल खए (नमूना): हमारे व ालय म ‘छत के ऊपर वषा-जल संग्रहण’ क व ध
अपनाई गई है। भवन क छत पर गरने वाला वषा जल पाइप से होकर पीछे बनी भंडारण टं क म पहुँचe
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o पत्ते और कचरा रोक लेती है। पहली बा रश का पानी छोड़ दया जाता है, क्यagकlउसम छत क म और धूल
है। पाइप के मुँह पर एक
जाली लगी है cजो
.
emहै — पाठ म भी लखा है क “इसका उपयोग करने से पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।” इस पानी से बगीचे
मलीsरहती
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agकl सचाई और शौचालय क सफाई होती है, और टंक भर जाने पर बचा पानी पास के सोख्ता ग े म जाकर भूजल बढ़ाता है।
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य द नह — संपादक के नाम पत्र का नमूना:
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सेवा म,
संपादक महोदय,
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दै नक समाचार पत्र,

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(नगर का नाम)

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वषय — मुहल्ले म वषा जल संग्रहण क व्यव ा कराने हेतु। m
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aseम आपके लोक प्रय समाचार पत्र के माध्यम से नगर प्रशासन और मुहल्लेवा सय का ध्यान एक गंभीर समस्या क ओर दलाना चाहता/चाहती ँ।
महोदय,

agl हमारे मुहल्ले म गम आते ही नल सूखने लगते ह और हडपंप से पानी के बदले सफ हवा नकलती है। दूसरी ओर बरसात के दन म छत और
ग लय का सारा पानी ना लय से बहकर व्यथ चला जाता है, और कई बार ग लय म भर भी जाता है।
se m
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c ग े तक पहुँचा दया जाए, तो यही पानी जमीन म उतरकर हमारा भूजल भंडार ag
य द भवन क छत का पानी पाइप ारा भंडारण टं क या.सोख्ता
l a
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se संग्रहण’ कहते ह और यह खच म कम तथा लाभ म बहुत अ धक है।
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बढ़ा सकता है। इस व ध को ‘छत के ऊपर वषा-जल

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अत: आपसे नवेदन है क इस वषय को अपने पत्र म स्थान दे कर प्रशासन का ध्यान इस ओर आक षत कर, जससे हमारे मुहल्ले म भी वषा
जल संग्रहण क व्यवस्था हो सके।
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धन्यवाद।

em भवद य/भवद या, a
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agl (अपना नाम)

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कक्षा 7, ( व ालय का नाम)

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(पता)
दनांक — …………
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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

वषा जल संग्रहण का मूल मंत्र: “जल जहाँ गरे वह एकत्र क जए।” पानी को जतनी दूर बहने दया जाएगा,
उतना ही वह हाथ से नकलता जाएगा।

आज क पहेली — पृष्ठ 52
पाठ से आगे

पाठ से आगे पहे ली

प्र.1 जल के प्राकृ तक ोत ह— वषा, नद , झील और तालाब। दए गए वग म जल और इन प्राकृ तक ोत के
समानाथ शब्द ढूँ ढ़ए और ल खए।

वग म शब्द बाएँ से दाएँ और ऊपर से नीचे — दोन दशाओं म छपे ह। नीचे रंगीन खान म वे अक्षर दखाए गए ह जो कसी न
कसी शब्द का हस्सा ह।

क मे क ग ब पा ज र

ल ह व नी न र ला ज

अं बु स र ब स श नी

म न रो िर ल िल य य

य भ व थ ता ल श त

ज वा र म ग र पा िट

बा िर श त प वा िह नी

व र त रं िग णी ट ग

वग म छपे शब्द —

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

शब्द कसका समानाथ कहाँ मला

अंब ु जल तीसरी पं क्त म बाएँ से दाएँ (अं + बु)

नीर जल चौथे खाने म ऊपर से नीचे (नी + र)

सिलल जल छठे खाने म ऊपर से नीचे (स + ल + ल)

वािर जल दूसरे खाने म ऊपर से नीचे (वा + र)

बािरश वष सातव पं क्त म बाएँ से दाएँ (बा + र + श)

मेह वष दूसरे खाने म सबसे ऊपर, नीचे क ओर (मे + ह)

तिटनी नदी आठव खाने म ऊपर से नीचे (त + ट + नी)

तरंिगणी नदी आठव पं क्त म बाएँ से दाएँ (त + रं + ग + णी)

पवािहनी नदी सातव पं क्त म बाएँ से दाएँ (प्र + वा + ह + नी)

सिरता नदी तरछा — ‘स’ से शुरू होकर नीचे-दाएँ क ओर (स + र + ता)

सर झील / तालाब तीसरी पं क्त म बाएँ से दाएँ (स + र)

सरोवर झील / तालाब तीसरे खाने म ऊपर से नीचे (स + रो + व + र)

ताल तालाब पाँचव पं क्त म बाएँ से दाएँ (ता + ल)

जलाशय तालाब सातव खाने म ऊपर से नीचे (ज + ला + श + य)

अथ भी जान ली जए: अंबु, नीर, स लल, वा र — चार का अथ जल है। त टनी = जसके तट ह , तरं गणी =
जसम तरंग उठ, प्रवा हनी = जो बहती रहे, स रता = जो सरकती चले — चार नद के नाम ह और चार म नद का
कोई गुण छपा है। सर और सरोवर झील के लए, ताल और जलाशय तालाब के लए।

ढूँ ढ़ने का तरीका: पहले वे खाने दे खए जनम ‘जल’, ‘नी’, ‘वा’, ‘स’ जैसे अक्षर ह — पानी के अ धकतर
पयायवाची इन्ह से शुरू होते ह। फर उस अक्षर से दाईं ओर और नीचे क ओर पढ़कर दे खए।

खोजबीन के लए — पृष्ठ 53

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे प रयोजना

प्र.1 पानी से संबं धत गीत या क वताओं का संकलन क जए और इनम से कुछ को अपनी कक्षा म प्रस्तुत क जए।
इसके लए आप अपने प रजन एवं शक्षक अथवा पुस्तकालय या इंटरनेट क सहायता भी ले सकते ह।

यह संकलन का काम है। इसे इस तरह क जए —

1. तीन ोत से इक ा क जए — (क) घर के बड़े: दाद -नानी से बरसात के लोकगीत, मल्हार और कजरी जैसे वषा-गीत
पू छए; (ख) पुस्तकालय: हद क क वता-पुस्तक और प त्रकाएँ; (ग) शक्षक और इंटरनेट।
2. एक कॉपी म ‘जल-संकलन’ बनाइए — हर पृष्ठ पर रचना, नीचे रचनाकार का नाम और ोत, और एक-दो पं क्त म यह क
वह रचना आपको क्य अच्छ लगी।
3. प्रस्तु त — दो-तीन रचनाएँ चुनकर कक्षा म सस्वर पाठ या समूह-गान क जए। य द लोकगीत हो तो ताली या ढोलक क लय के
साथ और भी अच्छा लगेगा।

संकलन म ये पं क्तयाँ शा मल क जा सकती ह (नमूना):

रचना / पं क्त रचनाकार या रूप क्य चुनी

“रिहमन पानी रािखए, िबन पानी सब रहीम (दोहा) ‘पानी’ शब्द के तीन अथ एक साथ — जल, चमक और मान-मयादा।
सून।” इसी पाठ के एक शीषक म भी यही पं क्त है।

“िसिमट-िसिमट जल भरिहं तलावा” तुलसीदास पुस्तक म ‘झरोखे से’ वाले पृष्ठ पर यही पं क्त चत्र के साथ छपी है —
(रामच रतमानस) बूँद-बूँद से तालाब भरने क बात।

बरसात के लोकगीत — कजरी, लोक-परंपरा वषा को उत्सव क तरह दे खने वाले गीत; पुस्तक का नाम मल्हार भी
म ार, सावन के झूल ा-गीत वषा-राग पर ही है।

“मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के ” सवश्वरदयाल सक्सेना बादल का मानवीकरण — मेहमान क तरह आते मेघ।

“बादल गरजो!” नराला वषा म श क्त और नई शुरुआत का भाव।

सुझाव: संकलन के अंत म एक पृष्ठ अपनी लखी हुई चार पं क्तय के लए भी र खए। जो शब्द आपने ‘आज क
पहेली’ म सीखे — नीर, वा र, स लल, त टनी — उन्ह अपनी क वता म प्रयोग क जए।

झरोखे से और साझी समझ — पृष्ठ 53 और 54

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे

प्र.1 ‘पानी रे पानी’ और ‘पाल के कनारे रखा इ तहास’ म आपको कौन-कौन सी बात समान लग ? उनके वषय म
अपने सहपा ठय के साथ चचा क जए।

दोन रचनाएँ अनुपम मश्र क ही ह और दोन का वषय एक है — तालाब और पानी को सँभालने क समाज क परंपरा।
समानताएँ इस प्रकार ह —

समान बात ‘पानी रे पानी’ म ‘पाल के कनारे रखा इ तहास’ म

तालाब ही कें द में है तालाब और झील “धरती क गुल्लक म पानी पूरा कस्सा ही चार तालाब का है — बूढ़ा सागर, सरमन सागर,
भरने का काम करते ह।” क राई सागर और कुंडम सागर।

पानी सबसे बड़ी वषा को “रुपय से भी कई गुना क मती” राजा पारस और सोना दोन लौटा दे ता है और कहता है — “जाओ
संपि है कहा गया है। इससे अच्छे -अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।” यानी
सोने से बड़ा काम तालाब है।

काम समाज करता “अपने आस-पास के जल ोत क , तालाब “ जस कसी ने भी तालाब बनाया, वह महाराज या महात्मा ही
है, अके ला आदमी क और न दय आ द क रखवाली अच्छे ढं ग कहलाया” — राजा, रानी, गृहस्थ, साधु सब बनाते रहे।
नही ं से करनी पड़ेगी।”

जो जमा िकया जाए, गुल्लक का रूपक — बरसात म जमा करो, तालाब बनाने वाले चले गए, पर तालाब आज भी ह और आज भी
वही आगे काम आता साल भर नकालो। काम आते ह।
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सरल, िकस्सा बातचीत क भाषा — “लो, सब तरफ पानी कहानी क भाषा — पारस, दराँती, चार भाई और उनक बेट का
सुनाने वाली भाषा ही बहने लगता है।” कस्सा।

आज के िलए “इस बड़ी गलती क सजा अब हम सबको “इ तहास ने सरमन, बुढ़ान, क राई और कूड़न को याद नह रखा,
चेतावनी मल रही है।” ले कन इन लोग ने तालाब बनाए और इ तहास को उनके कनारे
पर रख दया था।”

दोन का साझा संदेश: पानी का इंतजाम कोई नया आ वष्कार नह है — हमारा समाज सैकड़ साल से तालाब
बनाकर यह करता आया है। पहला पाठ बताता है क हम वह समझ भूल गए; दूसरा पाठ याद दलाता है क वह
समझ थी और आज भी हजार तालाब के रूप म हमारे सामने खड़ी है।

चचा के लए एक प्रश्न: ‘पानी रे पानी’ म हमने तालाब पाटकर उन पर बाजार और सनेमा बना दए; ‘पाल के
कनारे रखा इ तहास’ म लोग तालाब बनाकर समाज के प्र त कृतज्ञता जताते थे। इन दोन के बीच क्या बदल गया
— साधन या सोच?

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कक्षा 7 हद अध्याय 4 पानी रे पानी
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अध्याय — एक नज़र म
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m .cएक नबंध है। लेखक अनुपम मश्र प्रखर लेखक, संपादक, छायाकार और जानेa-gमाने पयावरण वद थे। उनक
sचe चत पुस्तक आज भी खरे ह तालाब है; साफ माथे का समाज उनक एक और महत्वपूण पुस्तक है। वे गाँधी शां त
पानी रे पानी
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agप्र तष्ठान क प त्रका गांधी माग के संस्थापक-संपादक भी थे।
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पाठ क शुरुआत भूगोल क कताब वाले जल-चक्र के चत्र से होती है — सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, बरसात क बूँद,

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नद और फर वही नद समुद्र म। समुद्र से उठ भाप बादल बनकर बरसती है और जल क यात्रा घूमकर समुद्र म लौट आती है
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agनल म पानी बेवक्त आता है, लोग पाइप म मोटर लगवाकर पड़ो सय का हक
— जल-चक्र पूरा हो जाता है।
पर कताबी बात से बाहर हालात दूसरे ह —
ख च लेते ह, शहर म पानी बकने लगा है, और दल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बगलोर तक म जल-संकट है।

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लेखक का मूल सूत्र यह है क अकाल और बाढ़ एक ही सक्के के दो पहलू ह — पानी का बेहद कम हो जाना और बेहद
ज्यादा हो जाना। दोन को ठ क से समझ और सँभाल ल तो कई समस्याओं से छु टकारा मल सकता हैm
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laकरते ह, वैसे ही वषा का पानी
omसुंदर रूपक है — धरती एक बहुत बड़ी गुल्लक। जैसे हम गुल्लक म पैसaे gजमा
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em और झील से रसकर भूजल भंडार म जमा होता है और साल भर काम आता है। पर जमीन के लालच म हमने
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gl तालाब पाटकर उन पर मकान, बाजार, स्टे डयम और सनेमा खड़े कर दए — इसी बड़ी गलती क सजा अब गम म सूखे नल
तालाब

a और बरसात म डू बती ब स्तय के रूप म मल रही है।

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बुढ़ान, सरमन और क राई के पारस और चार तालाब .का com agl
पाठ के साथ दो और रचनाएँ जुड़ी ह — झरोखे से म अनुपम मश्र के लेख पाल के कनारे रखा इ तहास का अंश (कूड़न,

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aश्वsरैया वषा देखकर प्रकृ त क श क्त पर सोचने लगता है।
कस्सा) और पढ़ने के लए म आर. के. मू त क लखी वश्वेश्वरैया

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(अनुवाद — सुमन जैन), जसम बालक वश्वे

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग

जल-चक्र पानी का समुद से भाप बनकर उठना, “इन तीर के सहारे जल क यात्रा एक तरफ से जल-चक्र प्रकृ त का सबसे
बादल बनना, बरसना, नदी बनकर बहना शुरू होकर समुद्र म वा पस मल जाती है। जल- बड़ा पुनचक्रण है।
और िफर समुद में लौट आना चक्र पूरा हो जाता है।”

भूजल जमीन के नीचे िछपा हुआ जल भंडार “इससे हमारा भूजल भंडार समृद्ध होता जाता गाँव के हडपंप का पानी
है।” भूजल से ही आता है।

गुल्लक पैसे जमा करने का िम ी का पात्र; पाठ में “हमारी यह धरती भी इसी तरह क खूब बड़ी मने अपनी गुल्लक तोड़कर
धरती के िलए पयुक्त रूपक गुल्लक है।” बहन के लए उपहार खरीदा।

अकाल कु समय, सूखा; अनाज-पानी की भारी कमी “दे श के कई हस्स म तो अकाल जैसी हालत लगातार दो साल वषा न होने
का समय बन जाती है।” से इलाके म अकाल पड़ गया।

बेवक्त गलत समय पर, कु समय “पानी आता भी है तो बेवक्त।” बेवक्त क बा रश ने पूरी
फसल भगो द ।

झगड़े-टं टे छोटी-छोटी बातों पर होने वाले आपसी “रोज-रोज के इन झगड़े-टं ट से बचने के मोहल्ले के झगड़े-टं टे बैठकर
िववाद लए…” बात करने से ही सुलझते ह।

रसना धीरे -धीरे बूदँ -बूदँ करके अंद र जाना या “जमीन के नीचे छपे जल के भंडार म धीरे-धीरे घड़े से पानी रसकर नीचे फश
टपकना रसकर, छनकर जा मलता है।” पर फैल गया।

पाटना ग े या तालाब को िम ी-कचरे से भरकर “अपने तालाब को कचरे से पाटकर, भरकर नाले को पाटकर वहाँ सड़क
बराबर कर दे ना समतल बना दया।” बना द गई।

जल ोत पानी िमलने की जगह — कु आँ, तालाब, “अपने आस-पास के जल ोत क , तालाब क गाँव का पुराना कुआँ आज
झील, नदी, झरना और न दय आ द क रखवाली…” भी सबसे भरोसेमंद जल ोत
है।

वषा जल वष के जल को पाकृ ितक या कृ ित्रम रूप से “जल जहाँ गरे वह एकत्र क जए।” हमारे व ालय क छत पर
संग्रहण धरती में/टंक ी में जमा करना वषा जल संग्रहण क टं क
लगी है।

पहलू िकसी बात का एक पक्ष या रुख “अकाल और बाढ़ एक ही सक्के के दो पहलू हर समस्या के दो पहलू होते
ह।” ह, दोन दे खने चा हए।

समृद्ध भरा-पूर ा, संपन्न “इससे हमारा भूजल भंडार समृद्ध होता जाता पुस्तकालय अच्छ कताब से
है।” समृद्ध होना चा हए।

पयावरण वद पय वरण का जानकार, पय वरण के िलए “…जाने-माने पयावरण वद होने के साथ-साथ पयावरण वद ने पेड़ क
काम करने वाला छायाकार भी थे।” कटाई रोकने का सुझाव
दया।

पाल तालाब की मेड़ या बाँध , तालाब का िकनारा “पाल के कनारे रखा इ तहास” गाँव के लोग शाम को तालाब
क पाल पर बैठते ह।

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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग

पारस वह किल्पत पत्थर िजसके छू ने से लोहा “उनके हाथ म कोई साधारण पत्थर नह है, अच्छ संग त पारस क तरह
सोना बन जाता है पारस है।” होती है।

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages37
Languagehindi
Updated19 Sep 2026