Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: नह होना बीमार
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
57 – 72 21 68 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 45 pages
Page 2
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: नह होना बीमार
नह होना बीमार स्वयं प्रकाश क एक हास्य-व्यंग्य भरी कहानी है, जसम एक ब ा अस्पताल म बीमार सुधाकर काका के ठाठ दे खकर खुद बीमार
पड़ने का बहाना बना लेता है — और फर पूरा दन अकेले, भूखे और ऊबकर काटता है। कहानी ब े क ही जबानी (प्रथम पुरुष म) कही गई है और
चत्रात्मक भाषा के कारण हर दृश्य आँख के सामने बन जाता है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 57 – 72
खं ड प्रश्न
21 68
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 62
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
नीचे दए गए प्रश्न का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर
भी हो सकते ह। — (1) ब े के व ालय न जाने का मुख्य कारण क्या था? • उसका व ालय जाने का मन नह
था। • उसका साबूदाने क खीर खाने का मन था। • उसने गृहकाय नह कया था। • उसे बुखार हो गया था।
इस प्रश्न के दो उत्तर पर तारा बनेगा —
★ उसका व ालय जाने का मन नह था।
★ उसने गृहकाय नह कया था।
कहानी म ब ा स्वयं कहता है — “कुछ रोज बाद एक दन मेरा स्कूल जाने का मन नह कया। मने होमवक भी नह कया था।
स्कूल जाता तो जरूर सजा मलती।” यही दोन बात मलकर उसे बहाना बनाने पर मजबूर करती ह।
बाक वकल्प क्य नह : साबूदाने क खीर खाने का मन उसे जरूर था, पर वह स्कूल न जाने का मुख्य कारण नह ,
ब ल्क बीमार पड़ने के आकषण का एक हस्सा था। और बुखार तो उसे हुआ ही नह — नानाजी ने माथा छू कर साफ
कहा, “बुखार तो नह है।”
Page 1 of 45
Page 3
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (2) कहानी के अंत म ब े ने कहा, “इसके बाद स्कूल से छु मारने के लए मने बीमारी का बहाना कभी नह
बनाया।” ब े ने यह नणय लया क्य क— • घर म रहने के बजाय व ालय जाना अ धक रोचक है। • बीमारी
का बहाना बनाने से साबूदाने क खीर नह मलती। • झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है। •
इस बहाने के कारण उसे दनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
सबसे सही उत्तर पर तारा —
★ इस बहाने के कारण उसे दनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
★ घर म रहने के बजाय व ालय जाना अ धक रोचक है। (यह भी लया जा सकता है)
ब े ने खुद सोचा था — “इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठ क रहता। सजा मलती तो मल जाती। कतना मजा आता जब रसेस
म ठे ले पर जाकर नमक मच लगे अमरूद खाते कटर-कटर।” यानी बहाने का नतीजा ऊब, भूख और अकेलापन नकला, जब क
स्कूल का दन कह ज्यादा रोचक होता।
क्य नह : खीर न मलना उसक नराशा का एक कारण जरूर है, पर पूरा नणय बदलने क वजह नह । झूठ खुलने
का डर कहानी म कह व्यक्त नह हुआ — उसका झूठ अंत तक खुला ही नह , फर भी वह पछताया।
प्र.3 (3) “लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी” इस बात से ब े के बारे म क्या पता चलता है? • उसे बस्तर पर लेटे रहने के
कारण ऊब हो गई थी। • उसे अपनी बीमारी क कोई चता नह रह गई थी। • वह बस्तर पर आराम करने का
आनंद ले रहा था। • बीमारी के कारण उसक पीठ म दद हो रहा था।
सही उत्तर पर तारा —
★ उसे बस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।
इसी वाक्य से पहले लेखक लखता है — “चाहे जतनी ऊब हो, लेटे ही रहना था।” और इसके तुरंत बाद — “उठकर बैठ गया।
ले कन बाहर कुछ आहट होते ही फर से लेट गया।” यानी पीठ का दुखना बीमारी का लक्षण नह , लगातार बेमन लेटे रहने का नतीजा
था।
क्य नह : ब ा बीमार था ही नह , इस लए “बीमारी के कारण पीठ म दद” गलत है। और आनंद वह ले ही नह पा
रहा था — वह बार-बार बाहर क चहल-पहल दे खने को छटपटा रहा था।
प्र.4 (4) “क्या ठाठ ह बीमार के भी!” ब े के मन म यह बात आई क्य क— • बीमार व्य क्त को बहुत आराम करने
को मलता है। • बीमार व्य क्त को अच्छे खाने का आनंद मलता है। • बीमार व्य क्त को व ालय नह जाना
पड़ता है। • बीमार व्य क्त अस्पताल म शां त से लेटा रहता है।
इस प्रश्न के भी एक से अ धक उत्तर बनते ह —
Page 2 of 45
Page 4
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
★ बीमार व्य क्त को बहुत आराम करने को मलता है।
★ बीमार व्य क्त को अच्छे खाने का आनंद मलता है।
★ बीमार व्य क्त अस्पताल म शां त से लेटा रहता है।
ब े ने ठ क इसी क्रम म सोचा था — “ठाठ से साफ-सुथरे बस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने क खीर खाते रहो!” उसके पहले वह
अस्पताल का माहौल दे ख चुका था — चमकता फश, हरे पेड़, “न ै फक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी…। बाक एकदम
शां त।”
ध्यान द: “ वद्यालय नह जाना पड़ता” वाली बात ब े के मन म बाद म आती है, अस्पताल म नह । इस लए इस
पं क्त के लए वह सबसे कमजोर वकल्प है — पर य द आप इसे भी चुन तो कारण बताकर चुन सकते ह।
प्र.5 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुन?
यह समूह-चचा का प्रश्न है। इसका “एक” उत्तर नह होता — यहाँ महत्व इस बात का है क आप अपने चुनाव का कारण पाठ से दे
सक।
चचा कैसे कर:
1. हर साथी बारी-बारी बताए क उसने कौन-सा वकल्प चुना।
2. फर वह कहानी क वह पं क्त पढ़कर सुनाए जससे उसका उत्तर सद्ध होता हो।
3. जहाँ दो अलग उत्तर ह, वहाँ दे खए क दोन के पास पाठ का प्रमाण है या केवल एक के पास।
4. अंत म समूह मलकर तय करे क कौन-से उत्तर पर तारा बनेगा।
नमूना उत्तर: “मने पहले प्रश्न म दो तारे बनाए, क्य क कहानी म दोन बात साथ-साथ लखी ह — मन न होना और
गृहकाय न करना। मेरे मत्र ने केवल ‘गृहकाय नह कया था’ चुना, क्य क उसे लगा क सजा का डर ही असली
कारण है। चचा के बाद हम दोन इस पर सहमत हुए क दोन कारण मलकर बहाना बनवाते ह।”
यह प्रश्न क्य दया गया: सा हत्य म एक ही पं क्त के एक से अ धक अथ नकल सकते ह। मत्र के तक सुनकर हम
पता चलता है क हमने पाठ का कौन-सा हस्सा छोड़ दया था।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 63
Page 3 of 45
Page 5
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
co m
e m.
m as
पाठ से समू ह काय
.co a g l
a s emम से चुनकर कुछ शब्द नीचे दए गए ह। अपने समूह म इन पर चचा क जए और इन्ह इनके सही अथ से
gl
पाठ
a
प्र.1
मलाइए। इसके लए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने प रजन और शक्षक क सहायता ले सकते ह। शब्द —
om2. एक प्रकार का जाड़े का ओढ़ना जसका कपड़ा दोहरा
1. साबूदाना 2. वाड 3. नस 4. रजाई 5. थमामीटर 6. काढ़ा 7. ाइक्लीनर 8. ताजमहल 9. अरहर। अथ — 1.
. c ag
कसी व शष्ट काय के लए घेरकर बनाया हुआ ान।
a s
होता है और जसम रुई भरी होती है। 3. शरीरem
का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र। 4. कई तरह
a
क जड़ी-बू टय और औष धय को उबालकर gl उनके रस से बना पेय होता है। इसे सद -जुकाम, खाँसी-बुखार और
पाचन से जुड़ी समस्याओं म लाभदायक माना जाता है। 5. रेशमी, ऊनी, मलमल जैसे नाजुक कपड़ को पानी,
साबुन और डटजट के बना मशीन से साफ करने वाला व्य क्त। 6. उत्तर प्रदे श के आगरा शहर म
m
सद म न मत एक वश्व-प्र सद्ध स्मारक जो सफेद संगमरमर से बना है। 7. एक दाल जसे तु.अcरoभी कहते ह। 8.
त 17व
सागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, सागूदाना, यह पहले आटे के रूप म होता है और फरse
m
m a
gl करे।
cाoलया जाता है। 9. वह व्य क्त जो रो गय , घायल या वृद्ध आ द क दे खaभाल
कूटकर दान के रूप म
.
em
सुख
la s
agउत्तर
m a s
.co agl
सही मलान इस प्रकार है —
se m
शब्द अथ अथ
g l a
क्रमांक a
co m
.
1. साबूद ाना 8 सागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, सागूदाना — पहले आटे के रूप म, फर कूटकर दान के रूप म सुखा
e m
as
लया जाता है।
2. वाड.co
m g l
a
sem
1 कसी व शष्ट काय के लए घेरकर बनाया हुआ ान।
a 3. नस
agl 9 वह व्य क्त जो रो गय , घायल या वृद्ध आ द क दे खभाल करे।
se m
com l a
4. रजाई 2 जाड़े का ओढ़ना जसका कपड़ा दोहरा होता है और जसम रुई भरी होती है।
. a g
m
ase
agl
5. थम मीटर 3 शरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र।
6. काढ़ ा 4 जड़ी-बू टय और औष धय को उबालकर उनके रस से बना पेय।
co m
.
नाजुक कपड़ को पानी, साबुन और डटजट के बना मशीन से साफ करने वाला व्य क्त।
m
7. 5
om a se
डाइक्लीनर
.8.cताजमहल त 17व सद का वश्व-प्र सद्ध सफेद संa
l
g का स्मारक।
m
ase
6 आगरा म गमरमर
agl c
.
9. अरहर 7 एक दाल जसे तुअर भी कहते ह।
s e m
m a
e m . co
पहचानने क तरक ब: पहले वे जोड़े मलाइए जो एकदम स्पष्ट ह — थमामीटर→यंत्र, अरहर→दाल, agl
g l as
ताजमहल→स्मारक। बचे हुए शब्द म से चुनना फर आसान हो जाता है। इसी को नष्कासन व ध कहते ह।
a
com
m .
m as e
.co
a g l Page 4 of 45
Page 6
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
कहानी से जो ड़ए: ये नौ शब्द अनायास नह चुने गए — सात शब्द कहानी क क ड़याँ ह। वाड और नस अस्पताल
के दृश्य से, साबूदाना और अरहर खाने के दृश्य से, रजाई-थमामीटर-काढ़ा बहाने वाले दन से, तथा ाइक्लीनर और
ताजमहल ब े क कल्पना से आए ह।
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 63
पाठ से
पाठ से
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और ल खए— (क) “मने सोचा बीमार
पड़ने के लए आज का दन बलकुल ठ क रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते ह।”
भाव: ब ा बीमारी को कोई मजबूरी नह , ब ल्क एक ऐसा काम मान रहा है जसे वह जब चाहे “कर” सकता है — जैसे कोई खेल
चुनता हो। “चलो बीमार पड़ जाते ह” कहने का ढं ग वैसा ही है जैसे कोई कहे “चलो पतंग उड़ाते ह।”
क्य उसे “आज का दन बलकुल ठ क” लगा: उस दन उसका स्कूल जाने का मन नह था, गृहकाय भी नह कया था और सजा
मलना तय था। यानी बहाने का लाभ उस दन सबसे ज्यादा था।
भाषा का कमाल: यहाँ लेखक ने हास्य पैदा कया है — बीमारी अपने आप आती है, कोई उसे तय करके नह ले
सकता। इस उल्ट बात को सहज बोलचाल के ढं ग म कहकर लेखक ब े के भोलेपन पर हँसी ले आता है। यही आगे
क पूरी कहानी क न व भी है।
सीख: ब ा यह नह सोच पाया क बीमारी के साथ जो “ठाठ” वह दे ख रहा था, उसके साथ तकलीफ भी आती है।
कल्पना म हम केवल अच्छ बात दखती ह, क मत नह दखती।
प्र.2 (ख) “दे खो! उन्ह ने एक बार भी आकर नह पूछा क तू क्या खाएगा? पूछते तो म साबूदाने क खीर ही तो
माँगता। कोई ताजमहल तो नह माँग लेता। ले कन नह ! भूखे रहो!! इससे सारे वकार नकल जाएँगे। वकार
नकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर म तुम खुद शकार हो जाओ।”
भाव: यह ब े का भूख, झुँझलाहट और अकेलेपन से भरा मन-ही-मन का शकवा है। उसे लग रहा है क घर वाल ने उसक भूख
क परवाह ही नह क । उसक माँग बहुत छोट थी — सफ साबूदाने क खीर — पर वह भी नह मली।
पं क्त-दर-पं क्त अथ:
“कोई ताजमहल तो नह माँग लेता” — यानी मने कोई असंभव या बहुत बड़ी चीज नह माँगी थी। यहाँ ताजमहल
अ तशयो क्त के रूप म आया है, जो बात को मजेदार बना दे ता है।
Page 5 of 45
Page 7
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
“ वकार नकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर म तुम खुद शकार हो जाओ।” — यह नानाजी के उस उपदे श पर व्यंग्य है क
“त बयत ढ ली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना।” ब ा कहना चाहता है क वकार नकालते- नकालते कह रोगी ही न
नकल जाए।
शब्द का खेल: ‘ वकार’ और ‘ शकार’ — तुक मलते दो शब्द को आमने-सामने रखकर लेखक ने कहन को
चुट ला बना दया है। यही स्वयं प्रकाश क भाषा क वशेषता है — साधारण शकायत भी हँसा दे ती है।
ध्यान द: पाठक जानता है क ब ा बीमार है ही नह । इस लए उसका यह शकवा हम दया से ज्यादा हँसी दे ता है —
उसने यह मुसीबत खुद बुलाई है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 64
पाठ से
पाठ से
प्र.1 पाठ को एक बार फर ध्यान से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) अस्पताल म ब े को कौन-कौन सी
चीज अच्छ लग और क्य ?
अस्पताल ब े के लए बलकुल नया अनुभव था — “अस्पताल जाने का यह मेरा पहला अवसर था।” वहाँ उसे ये चीज अच्छ लग
—
जो अच्छा लगा कहानी क पं क्त क्य अच्छा लगा
सफाई और व्यवस्था “एक जैसे पलंग लाइन से लगे हुए थे… सफेद द वार, ऊँची हर चीज करीने से लगी थी — घर क भीड़-
छत… फश एकदम चमकता हुआ।” भाड़ से बलकुल अलग।
िखड़िकयों के बाहर हरे पेड़ “बड़ी-बड़ी खड़ कय के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।” दृश्य सुंदर और ताजा लगा।
शोर, धूल और मच्छर- “न ै फक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी…।” उसक गली इन्ह सबसे भरी रहती थी।
मक्खी का न होना
शांित और धीमी ग नु ग नु “ सफ लोग के धीरे-धीरे बातचीत करने क धीमी-धीमी ऐसी शां त उसने पहले कह महसूस नह
गुनगुन। बाक एकदम शां त।” क थी।
बीमार की से वा और “नानीजी ने चम्मच से धीरे-धीरे काका को साबूदाने क खीर बीमार होना उसे लाड़ पाने और स्वा दष्ट
साबूद ाने की खीर खलाई।” खाना पाने जैसा लगा।
असली कारण: ब े को अस्पताल इस लए अच्छा लगा क्य क उसने वहाँ केवल ऊपरी दृश्य दे खा — बीमारी क
तकलीफ नह दे खी। इसी अधूरे दे खने से उसके मन म यह भ्रम बना क “क्या ठाठ ह बीमार के भी।”
Page 6 of 45
Page 8
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) कहानी के अंत म ब े को महसूस हुआ क उसे स्कूल जाना चा हए था। क्या आपको लगता है क उसका
नणय सही था? क्य ?
हाँ, उसका नणय बलकुल सही था। झूठा बहाना बनाकर स्कूल से बचने क को शश ने उसे फायदा नह , नुकसान ही दया।
दनभर क ऊब — “चाहे जतनी ऊब हो, लेटे ही रहना था।”
भूख — उसे कड़वी पु ड़या और काढ़े जैसी चाय मली, खाना नह । “उस पूरे दन मुझे भूखे पेट ही रहना पड़ा।”
अकेलापन — “अब घर म म अकेला रह गया।” मुन्नू भी उसे दे खने नह आया।
काम फर भी बाक — “और आज दया गया होमवक! कससे कॉपी माँगोगे?” — जस गृहकाय से भागा था, वह और बढ़
गया।
स्कूल जाता तो अ धक-से-अ धक एक दन क सजा मलती — “सजा मलती तो मल जाती” — पर उसे दोस्त, पढ़ाई, रसेस और
ठे ले के नमक- मच वाले अमरूद मलते।
असली सीख: बहाना समस्या को टालता है, हल नह करता। जस काम से हम भागते ह, वह अगले दन और बड़ा
होकर सामने खड़ा हो जाता है।
प्र.3 (ग) जब ब ा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन म कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
(संकेत— मन म उत्पन्न होने वाले वकार या वचार को भाव कहते ह, उदाहरण के लए — क्रोध, दुख, भय,
करुणा, प्रेम आ द।)
पूरे दन उसके मन म भाव लगातार बदलते रहे — यही कहानी को रोचक बनाता है।
Page 7 of 45
Page 9
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
भाव कहानी का प्रमाण
उत्सुक ता / कौतूहल “मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई क… अपनी गली क चहल-पहल दे खूँ।”
ऊब (उकताहट) “यह तो अच्छ खासी बो रयत हो गई। पूरा दन कोई कैसे लेटा रहे?”
भूख से उपजी बेचैनी “गरमागरम खस्ता कचौड़ी… मावे क बफ … और सबसे ऊपर साबूदाने क खीर!”
अके लापन और उपेक्षा का दुख “मुन्नू एक बार भी मुझे दे खने नह आया।”
िशकायत / झुँझलाहट “उन्ह ने एक बार भी आकर नह पूछा क तू क्या खाएगा?”
ईष्य (जलन) “ले कन मुन्नू आम चूस रहा था। आम! इस मौसम म!… भुक्कड़ कह का।”
ोध और कु ढ़ न “म जलन, गुस्से और कुढ़न म पाँव पटकता वापस बस्तर म आ गया।”
पछतावा “अक्लमन्द! और बनो बीमार।” तथा अंत म — “बीमारी का बहाना कभी नह बनाया।”
रुलाई / रुआँस ापन “म रुआँसा हो गया।”
क्रम पर ध्यान द जए: उत्साह → ऊब → भूख → जलन → पछतावा। यह भाव क यात्रा ही बताती है क ब े
क सोच दनभर म कैसे बदल गई।
प्र.4 (घ) कहानी म ब े ने सोचा था क “ठाठ से साफ-सुथरे बस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने क खीर खाते रहो।”
आपको क्या लगता है, असल म बीमार हो जाने और इस ब े क सोच म कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर
ह गे? (संकेत — आप अपने अनुभव के आधार पर इस प्रश्न पर वचार कर सकते ह क कहानी वाले ब ेक
कल्पना वास्त वकता से कतनी अलग है।)
ब े क कल्पना और स ी बीमारी म कुछ बात मलती ह, पर बड़ा हस्सा अलग है।
समानताएँ
दोन म बस्तर पर लेटे रहना पड़ता है और स्कूल नह जाना पड़ता।
दोन म घर वाले ध्यान रखते ह, दवा दे ते ह और हालचाल पूछते ह।
दोन म हल्का, सादा भोजन (जैसे साबूदाने क खीर, खचड़ी) दया जाता है।
अंतर
Page 8 of 45
Page 10
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
ब े क सोच असली बीमारी
m as e
आराम और मजा
.co
दद , कमजोरी और बेचैनी
a g l
se m
g l a
a
स्वाद ले क र खीर खाना भूख ही नही ं लगती; मुँह का स्वाद िबगड़ जाता है
मीठी दवाएँ कड़वी पुिड़या, काढ़ ा, इंजेक्शन, जाँचें
co m
m . ag
se
जब चाहे उठ जाना उठने-बैठने तक की ताकत न होना
l a
िदनभर की छु ी
aपढ़g ाई िपछड़ जाना और बाद में दुगनु ी मेहनत
घर वालों का लाड़ घर वालों की िचंता, खच और परे शानी
co m
e m.
m l as
ब
तबeवेm
.co
े क कल्पना क्य अधूरी थी: उसने अस्पताल म सुधाकर काका को केवल कुछ मनट के लए दे खा था —
a g
a s
gl इंतजार उसने नह दे खा। अधूरा दे खना ही गलत नष्कष का कारण बनता है।
लेटे हुए, खीर खाते हुए दख रहे थे। उनक रात क तकलीफ, दवाओं का कड़वापन या ठ क होने का लंबा
a
m a s
m.co agl
l a se
g
(ङ) नानीजी और नानाजी ने ब े को बीमारी क दवा द और उसे आराम करने को कहा। ब े को खाना नह
a
प्र.5
दया गया। क्या आपको लगता है क उन्ह ने सही कया? आपको ऐसा क्य लगता है?
co m
m .
o m l a se
c g
इस प्रश्न के दोन पक्ष कहे जा सकते ह। नीचे दोन दए ह और अंत म सबसे संतु लत उत्तर।
उन्ह. ने सही कया —
हाँ, m a
l a se
ag ब े ने खुद कहा था क उसे सरदद, पेटदद और बुखार है। पेट खराब होने पर हल्का उपवास पुराना घरेलू उपाय है — “त बयत
ढ ली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना।”
se m
com g l a
. a
नानाजी ने पहले जाँच क — माथा छु आ, पेट दे खा, नब्ज दे खी। यानी बना दे खे कुछ नह कया।
m
ase
उन्ह ने दवा द और “शाम को दे खगे” कहकर नगरानी भी तय क ।
नह , इसम कमी थी — agl
m
ब े को पूरे दन बलकुल भूखा रखना ठ क नह । बीमार ब े को भी थोड़ा तरल — दूध, दाल का पानी, नीबू-नमक का घोल
. co
m
— दे ना चा हए।
m उसका मन बहलाने कोई पास नह बैठा; अकेलापन भी एक तकलीफ है। glas e
o
थमामीटर न मलने पर भी डॉक्टर को दखाया जा सकता था।
. c a
se m दनभर
g l a
a c
संतु लत उत्तर: नानाजी-नानीजी क नीयत पूरी तरह सही थी — उन्ह ने जाँचा, दवा द , आराम कराया और दोबारा
m .
m a s e
agl
दे खने क बात कही। पर तरीका आज के हसाब से पूरा नह था: बुखार न मलने पर भी पूरा दन भूखा रखना जरूरी
. co
e m
नह था। मजे क बात यह है क ब ा बीमार था ही नह — इस लए यही “कठोर” इलाज उसके लए सबसे बड़ी
सजा और सबसे अच्छ सीख बन गया।
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 45
Page 11
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द: कोई भी बीमारी लंबी खचे, तेज बुखार हो या ब ा कुछ खा-पी न पा रहा हो, तो घरेलू उपाय पर रुकना
नह चा हए — डॉक्टर को दखाना चा हए।
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 64–65
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 (क) कहानी के अंत म ब ा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का नणय कर लेता तो कहानी म
आगे क्या होता? (संकेत — उसका दन कैसे बदल जाता? उसक सोच और अनुभव कैसे होते?)
यह कल्पना का प्रश्न है — आपको कहानी को आगे बढ़ाकर लखना है। अच्छे उत्तर म तीन बात होनी चा हए: (1) सच बोलने का
क्षण, (2) घर वाल क प्र त क्रया, (3) ब े के मन म आया बदलाव।
नमूना उत्तर:
शाम को जब नानाजी फर पु ड़या लेकर आए, तो मुझसे रहा नह गया। मने रजाई हटाई और धीरे से कहा —
“नानाजी, मुझे बुखार नह है। मने होमवक नह कया था, इस लए झूठ बोल दया।” नानाजी कुछ दे र चुप रहे। फर
हँस पड़े — “म सुबह ही समझ गया था, इसी लए तो पु ड़या म सफ म ी थी!” नानीजी रसोई से खीर क कटोरी ले
आईं और बोल — “भूखे तो तुम्ह सजा के लए नह , सच बुलवाने के लए रखा था।”
उस शाम मने खीर भी खाई, आँगन म खेला भी, और मुन्नू से कॉपी लेकर होमवक भी पूरा कया। सोते समय मुझे
लगा क सुबह का पूरा दन बचाया जा सकता था — केवल एक सच बोलकर।
दन कैसे बदल जाता: उसे दनभर भूखा और अकेला नह रहना पड़ता, गृहकाय समय पर पूरा हो जाता, मुन्नू के
आम पर जलन नह होती, और सबसे बड़ी बात — मन पर झूठ का बोझ नह रहता। कहानी का अंत पछतावे से
नह , राहत से होता।
ध्यान र खए: कहानी बढ़ाते समय पात्र का स्वभाव वही र खए जो पाठ म है — नानाजी व्यावहा रक और थोड़े
सख्त, नानीजी स्नेही और खलाने- पलाने वाली।
Page 10 of 45
Page 12
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) कहानी म ब े क नानीजी के ान पर आप ह। आप सारे नाटक को समझ गए ह ले कन चाहते ह क
ब ा सारी बात आपको स्वयं बता दे । अब आप क्या करगे? (संकेत — इस सवाल म आपको नानीजी क जगह
लेकर सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जससे ब ा आपको स्वयं सारी बात बता दे ।)
यहाँ आपको डाँटने क नह , बुलवाने क योजना बनानी है। अच्छे उत्तर म यह दखना चा हए क आप ब े को श मदा कए बना
सच तक पहुँचा रहे ह।
योजना के चरण:
1. बीमारी को “गंभीरता” से लेना — बलकुल शांत रहकर कहूँगी, “इतना तेज बुखार है तो डॉक्टर साहब को बुलाना पड़ेगा, वे
सुई भी लगा सकते ह।”
2. बीमारी का “पूरा इलाज” शुरू करना — कड़वा काढ़ा, बलकुल फ क खचड़ी, दनभर पूरा आराम, और खेलना-कूदना,
ट वी, मोबाइल सब बंद।
3. लालच पास से गुजारना — रसोई से गरम पकौड़ क खुशबू आने दे ना और कहना, “बीमार को तला हुआ नह दया जाता।”
4. अपनी कहानी सुनाना — पास बैठकर कहूँगी, “मने भी बचपन म एक बार पेटदद का बहाना बनाया था… फर क्या हुआ,
सुनोगे?” अपनी गलती बताने से ब े का डर टू टता है।
5. रास्ता खुला रखना — अंत म कहूँगी, “अगर आज त बयत ठ क लगने लगे तो बता दे ना, फर तुम्ह खीर भी मलेगी और आँगन
म खेलने भी जाना।”
यह योजना क्य काम करेगी: ब ा बीमारी इस लए चुनता है क्य क उसे उसम फायदा दखता है। जैसे ही बीमारी
म केवल कड़वाहट, ऊब और पाबंद बचती है और सच बोलने म राहत दखती है, वह स्वयं सच बोल दे ता है — और
वह सीख डाँट से मली सीख से कह ज्यादा टकती है।
प्र.3 (ग) कहानी म ब े के ान पर आप ह और घर म अकेले ह। अब आप ऊबने से बचने के लए क्या-क्या करगे?
यह आपका अपना उत्तर होगा। अच्छे उत्तर म कुछ काम मन बहलाने के, कुछ सीखने के और कुछ घर के काम आने वाले होने
चा हए।
कस तरह का काम क्या-क्या कर सकते ह
पढ़ ने-िलखने के कहानी क कताब पढ़ना, अपनी डायरी लखना, कोई नई क वता याद करना, अपनी एक छोट कहानी लखना।
रचनात्मक चत्र बनाना, रंग भरना, कागज से नाव-हवाई जहाज बनाना, पुरानी चीज से कोई खलौना बनाना।
घर के छोटे काम अपनी अलमारी और कताब ठ क करना, पौध म पानी दे ना, अपना बस्ता जमाना।
मनोरंजन गाने सुनना, पहे लयाँ बूझना, वग-पहेली भरना, अकेले खेली जाने वाली खेल (जैसे लूडो-सुडोकू) खेलना।
बातचीत दादा-दाद या कसी मत्र को फोन करना, अगले दन का काम याद करके सूची बनाना।
Page 11 of 45
Page 13
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: “म सबसे पहले अपनी अलमारी ठ क करता, क्य क वह हफ्त से बखरी है। फर पंचतंत्र क
कहा नयाँ पढ़ता और उनम से एक कहानी का चत्र बनाता। दोपहर म गमल म पानी दे ता और शाम को अपनी दाद
को फोन करके दनभर क बात बताता।”
ध्यान दे ने क बात: कहानी का ब ा इस लए ऊबा क्य क उसने कुछ कया ही नह — वह केवल दूसर क
आवाज का अनुमान लगाता रहा। अकेलापन तब बोझ बनता है जब हाथ खाली ह ।
प्र.4 (घ) कहानी के अंत म ब े को लगा क उसे स्कूल जाना चा हए था। कल्पना क जए, अगर वह स्कूल जाता तो
उसका दन कैसा होता? अगले दन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या कया होगा?
अगर वह उसी दन स्कूल जाता: गृहकाय न करने पर शायद उसे डाँट या छोट -सी सजा मलती — जैसे खड़े रहना या कक्षा के
बाद काम पूरा कराना। पर उसके बाद दन सामान्य रूप से चलता: दोस्त के साथ हँसी-मजाक, नई पढ़ाई, खेल का पी रयड और
रसेस म ठे ले पर “नमक मच लगे अमरूद खाते कटर-कटर”। वह खुद ही सोचता है — “सजा मलती तो मल जाती।” यानी सजा
का डर, सजा से बड़ा था।
अगले दन स्कूल जाकर उसने क्या-क्या कया होगा:
सबसे पहले कसी मत्र से कॉपी लेकर छू टा हुआ काम पूरा कया होगा — उसक सबसे बड़ी चता यही थी: “ कससे कॉपी
माँगोगे?”
शक्षक को “त बयत ठ क नह थी” बताया होगा और मन-ही-मन असहज हुआ होगा, क्य क वह जानता था क यह सच नह
है।
दोस्त से पूछा होगा क कल क्या-क्या पढ़ाया गया और क्या छू ट गया।
रसेस म ठे ले पर जाकर अमरूद खाए ह गे — जसक कल दनभर कल्पना करता रहा।
और सबसे जरूरी — उसने तय कया होगा क आगे से काम समय पर करेगा, ता क बहाना बनाने क नौबत ही न आए।
कहानी क सीख यही है: जस दन से वह भागा, वह दन गया नह — वह अगले दन दुगुने काम के साथ लौट
आया।
प्र.5 (ङ) कहानी म नानाजी और नानीजी ने ब े क बीमारी ठ क करने के लए उसे दवाई द और खाने के लए कुछ
नह दया। अगर आप नानीजी या नानाजी क जगह होते तो क्या-क्या करते?
यह आपक अपनी राय का प्रश्न है। उत्तर म यह दखना चा हए क आप ब े क दे खभाल भी कर रहे ह और उसे सीख भी दे रहे
ह।
म क्या-क्या करता/करती —
1. पहले ठ क से जाँच करता: माथा छू ता, थमामीटर लगाता; न मलने पर पड़ोस से माँग लेता या दन म डॉक्टर को दखा दे ता।
2. बलकुल भूखा न रखता: हल्का खाना जरूर दे ता — दूध, दाल का पानी, खचड़ी या फल। भूख बीमारी का इलाज नह है।
Page 12 of 45
Page 14
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
3. पास बैठकर बात करता: अकेले पड़े रहने से मन और गरता है। कोई कहानी सुनाता या साथ बैठकर कताब पढ़ता।
4. सच बोलने का रास्ता खुला रखता: डाँटने के बजाय कहता — “अगर आज मन नह था तो बता दे ते, हम कोई हल नकाल
लेते।” डर हटने पर ब े सच बोलते ह।
5. काम का हल नकालता: गृहकाय म उसक मदद कर दे ता, ता क उसे भागना ही न पड़े।
6. नयम भी बनाता: शाम को यह तय कर लेता क रोज का काम रोज होगा — फर बहाने क जरूरत ही नह पड़ेगी।
नमूना उत्तर: “अगर म नानीजी होती तो पहले उसका माथा छू कर दे खती। बुखार न मलने पर भी उसे डाँटती नह ।
उसे गरम दूध और एक कटोरी खचड़ी दे ती और पास बैठकर पूछती क स्कूल म कोई परेशानी तो नह । मुझे लगता है
क तब वह खुद ही होमवक वाली बात बता दे ता।”
कहानी क रचना — पृष्ठ 65–66
पाठ से
पाठ से समू ह काय
प्र.1 “अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। बड़ी-बड़ी खड़ कय के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे। न
ै फक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी...। सफ लोग के धीरे-धीरे बातचीत करने क धीमी-धीमी गुनगुन।
बाक एकदम शां त।” इन पं क्तय पर ध्यान द जए। इन पं क्तय म ऐसा लग रहा है मानो हमारी आँख के
सामने अस्पताल का चत्र-सा बन गया हो। लेखन म इसे ‘ चत्रात्मक भाषा’ कहते ह। … (क) इस पाठ को एक बार
फर से प ढ़ए और अपने समूह म मलकर इस पाठ क अन्य वशेषताओं क सूची बनाइए। अपने समूह क सूची
को कक्षा म सबके साथ साझा क जए।
इस कहानी म लेखक ने कई तरीके अपनाए ह जनसे यह सरस और रोचक बन गई है। आपक समूह-सूची म ये वशेषताएँ आ
सकती ह —
1. प्रथम पुरुष म कहन — कहानी ब ा स्वयं “म” कहकर सुनाता है, इस लए हम उसके मन के भीतर तक पहुँच जाते ह।
2. चत्रात्मक भाषा — अस्पताल, दाल के बघार और गली के दृश्य आँख के सामने बन जाते ह।
3. हास्य और व्यंग्य — “चलो बीमार पड़ जाते ह”, “कोई ताजमहल तो नह माँग लेता”, “सारे वकार नकल गए”।
4. ब े क कल्पना — वह लेटे-लेटे घर और गली क ग त व धय का अनुमान लगाता रहता है।
5. स्वयं से बातचीत (आत्म-संवाद) — “अक्लमन्द! और बनो बीमार।”
6. छोटे -छोटे सजीव संवाद — “क्या हो गया?” … “म आज बीमार हूँ।”
7. ध्व न और गंध का वणन — बतन क खटर-पटर, चबाने क आवाज, ह ग-जीरे के बघार क खुशबू।
8. अनुकरणात्मक और युग्म शब्द — कटर-कटर, खटर-पटर, धीरे-धीरे, हरे-हरे, बड़ी-बड़ी, चहल-पहल, गुड़प।
9. रोजमरा क बोलचाल क भाषा — ठाठ, झख मारना, भुक्कड़, दबे पाँव, गुड़प हो जाना।
10. भारतीय घर का सजीव चत्र — नानाजी-नानीजी, मामा, मौसी, मुन्नू, पड़ोस के सुधाकर काका, गली क दुकान।
11. सोच का बदलना — कहानी शुरू होती है “काश! म बीमार प ”ँ से और खत्म होती है “बहाना कभी नह बनाया” पर।
12. बना उपदे श दए सीख — लेखक कह भी “झूठ मत बोलो” नह कहता; सीख घटनाओं से अपने आप नकलती है।
Page 13 of 45
Page 15
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
समूह म कैसे काम कर: पाठ को चार हस्स म बाँट ली जए — अस्पताल, बहाने क सुबह, दोपहर क भूख, और
m a s emमलाकर एक
gl
अंत। हर जोड़ी एक हस्सा पढ़कर उसक दो-तीन वशेषताएँ पं क्त स हत लखे। अंत म सब सू चयाँ
. o जए।
cली a
em
बड़ी सूची बना
a s
agl
comकया जाना / ब े ारा सोचने के तरीके म बदलाव ag
(ख) कहानी म से नम्न ल खत के लए उदाहरण खोजकर ल खए— वशेष बदु: ब े ारा पछली बात को
.
प्र.2
s em
याद कया जाना / हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग
a
agl
आना / कहानी म कसी का कसी बात से अनजान होना / ब े ारा स्वयं से बात कया जाना
co m
e m.
as
पाठ्यपुस्तक क ता लका इस प्रकार भरी जाएगी —
. com a g l
s em
वशेष बदु
a
कहानी म से उदाहरण
gl
a बच्चे ारा िपछली बातों “क्या ठाठ ह बीमार के भी। मने सोचा… ठाठ से साफ-सुथरे बस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने क खीर खाते
s
को याद िकया जाना रहो!” — बहाने वाले दन वह अस्पताल का पूरा दृश्य याद करता है। इसी तरह वह याद करता है क रसेस म ठे ले
m a
.co agl
पर अमरूद खाने म कतना मजा आता है।
a s em
aglमुन्नू के लए कहा गया “भुक्कड़ कह का” भी हँसा देता है।
हास्य यानी हँस ी-मजाक “कोई ताजमहल तो नह माँग लेता।” तथा अंत क पं क्त — “उस पूरे दन मुझे भूखे पेट ही रहना पड़ा। सारे
का उपयोग िकया जाना वकार नकल गए।”
बच्चे ारा सोचने के शुरू म — “काश! सुधाकर काका क जगह म होता! म कब बीमार प ग
co m
ँ ा!” और अंत म — “इसके बाद स्कूल से
m .
e
तरीके में बदलाव आना छु ट्ट मारने के लए मने बीमारी का बहाना कभी नह बनाया।”
m l as
.co
m बात से अनजान a g
नानाजी-नानीजी अंत तक नह जान पाते क ब ा बीमार है ही नह । नानाजी माथा-पेट-नब्ज दे खकर कहते ह —
eिकसी
कहानी में िकसी का
a s
gl होना
“बुखार तो नह है”, फर भी उसे सचमुच का रोगी मानकर पु ड़या खलाते रहते ह।
a
se m
com l a
बच्चे ारा स्वयं से बाते ं “क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आ खर कब तक कोई पड़ा रह सकता है?” और “अक्लमन्द! और बनो बीमार।”
. a g
m
िकया जाना
ase
agl
ता लका भरने क तरक ब: हर बदु के लए कहानी म से पूरा वाक्य उद्धरण चह्न म ल खए और साथ म एक
m
पं क्त म बताइए क वह उस बदु से कैसे मेल खाता है। केवल पृष्ठ संख्या लखना उत्तर नह माना जाएगा।
. co
e m
m l as
.co a g
a s em और समाधान — पृष्ठ 66
gl
समस्या
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 14 of 45
Page 16
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 कहानी को एक बार पुन: पढ़कर पता लगाइए— (क) ब े के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या
समाधान नकाला?
समस्या: उस दन ब े का स्कूल जाने का मन नह था और उसने गृहकाय भी नह कया था। स्कूल जाता तो सजा मलना तय था
— “स्कूल जाता तो जरूर सजा मलती।”
उसका नकाला हुआ समाधान: उसने बीमार पड़ने का बहाना बनाया —
रजाई से नकला ही नह और कहा, “म आज बीमार हूँ।”
तीन शकायत एक साथ गना द — “मेरे सर म दद हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।”
खुद को स ा सा बत करने के लए चाल भी चली — “थमामीटर लगाकर दे खए” (उसे पता था क घर म कोई दे खने वाला
नह है)।
नानाजी के आने पर कराहकर बोला — “बुखार आ गया।”
क्या यह समाधान चला? बलकुल नह । इसका नतीजा हुआ — कड़वी पु ड़या, काढ़े जैसी चाय, दनभर क ऊब, अकेलापन और
भूख। और गृहकाय फर भी बचा रहा, ब ल्क बढ़ गया।
असली समाधान क्या होता: सच बोलकर मदद माँगना — “काम नह हुआ है, थोड़ी मदद क जए।” समस्या का
हल समस्या से भागने म नह , उसका सामना करने म है। कहानी के अंत म ब ा खुद यही समझता है।
प्र.2 (ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्ह ने उस समस्या का क्या समाधान नकाला?
समस्या: घर का ब ा कह रहा था क उसे सरदद, पेटदद और बुखार है। उन्ह तय करना था क वह सचमुच बीमार है या नह , और
य द है तो क्या कया जाए। मु श्कल यह थी क जाँचने का साधन ही नह मला — “बहुत ढूँ ढ़ा गया पर थमामीटर मला ही नह ।
शायद कोई माँगकर ले गया था।”
उनका नकाला हुआ समाधान:
1. पहले खुद जाँचा — नानाजी ने “रजाई हटाकर मेरा माथा छु आ। पेट दे खा और नब्ज दे खने लगे।” और साफ कहा, “बुखार तो
नह है।”
2. घरेलू दवा द — “ले, पु ड़या खा ले।” साथ म काढ़े जैसी चाय पलाई।
3. खाना बंद कर दया — “आज इसे कुछ खाने को मत दे ना।” उनका मानना था — “त बयत ढ ली हो तो सबसे अच्छा उपाय है
भूखे रहना। इससे सारे वकार नकल जाएँगे।”
4. आराम और नगरानी — “आराम करने दो। शाम को दे खगे।”
5. दन म नानाजी दोबारा आकर हाल पूछते ह — “अब कैसा है सरदद?” और एक पु ड़या और खला जाते ह।
Page 15 of 45
Page 17
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
नतीजा: उनका इलाज सचमुच क बीमारी पर तो असर करता या नह , यह कहानी नह बताती — पर झूठ बीमारी
का इलाज उसने पूरा कर दया। ब ा दनभर म इतना ऊब और भूख झेलता है क दोबारा कभी बहाना नह बनाता।
मजा कया ढं ग से लेखक लखता है — “सारे वकार नकल गए।”
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 66
पाठ से
पाठ से शब्द भं डार
प्र.1 नीचे दए गए ान म ‘बीमार’ से जुड़े शब्द पाठ म से चुनकर ल खए— (पुस्तक म बीच के गोले म ‘बीमार’
लखा है और उससे जुड़े सात गोल म से एक म ‘काढ़ा’ पहले से दया गया है।)
पुस्तक म बीच म बीमार लखा है और उससे सात गोले जुड़े ह — उनम से एक म काढ़ा पहले से भरा है। बाक छह गोल म पाठ से
चुने हुए ये शब्द ल खए —
गोले म ल खए पाठ क पं क्त जहाँ से लया
काढ़ ा “काढ़े जैसी चाय पीनी पड़ी।” (पहले से दया हुआ)
अस्पताल “वे अस्पताल म भत थे।”
नस “तभी सफेद कपड़ म एक नस आई।”
दवा / पुिड़या “और काका को दवा खलाई।” / “ले, पु ड़या खा ले।”
थम मीटर “थमामीटर लगाकर दे खए।”
बुखार “मुझे बुखार भी है।”
नब्ज “पेट दे खा और नब्ज दे खने लगे।”
और भी शब्द जो पाठ म मलगे (य द गोले ज्यादा ह या अलग से सूची बनानी हो): वाड, पलंग, भत , सरदद, दद, आराम,
वकार, रजाई, खीर, चादर-कंबल।
यह अभ्यास क्य : एक शब्द से जुड़े शब्द का ऐसा जाल बनाने को शब्द-मान चत्र कहते ह। इससे वषय-आधा रत
शब्द भंडार तेजी से बढ़ता है — जैसे ‘ वद्यालय’ से घंट , कक्षा, बस्ता, शक्षक, पुस्तकालय जुड़गे।
खोजबीन — पृष्ठ 67
Page 16 of 45
Page 18
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 कहानी म से वे वाक्य ढूँ ढ़कर ल खए जनसे पता चलता है क— (क) कहानी म सद के मौसम क घटनाएँ बताई
गई ह।
ये वाक्य सद का मौसम बताते ह —
“सब पर एक जैसी सफेद चादर और लाल कंबल।”
“म रजाई से नकला ही नह ।”
“म रजाई म पड़ा-पड़ा घर म चल रही ग त व धय का अनुमान लगाता रहा।”
“न चाहते हुए भी मुझे कड़वी पु ड़या खानी पड़ी और काढ़े जैसी चाय पीनी पड़ी।”
“जब रहा नह गया तो म रजाई फककर खड़ा हो गया।”
“ले कन मुन्नू आम चूस रहा था। आम! इस मौसम म! जरूर बंबई वाले चाचाजी ने भेजे ह गे।”
सबसे पक्का सबूत कौन-सा: रजाई और कंबल तो सीधे सद बताते ही ह, पर सबसे चतुर संकेत आम वाला है —
ब ा खुद च कता है “आम! इस मौसम म!” यानी यह आम का मौसम नह है। आम गर मय का फल है, इस लए
यह सद का समय ही होगा। इसी कारण आम बाहर से मँगवाने पड़े।
प्र.2 (ख) ब े को बहाना बनाने के प रणाम का आभास हो गया।
ये वाक्य बताते ह क उसे अपनी करनी का नतीजा समझ आ गया —
“क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आ खर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठ क रहता। सजा
मलती तो मल जाती।”
“हे भगवान! यह तो अच्छ खासी बो रयत हो गई। पूरा दन कोई कैसे लेटा रहे?”
“अक्लमन्द! और बनो बीमार। और आज दया गया होमवक! कससे कॉपी माँगोगे? म रुआँसा हो गया।”
“उस पूरे दन मुझे भूखे पेट ही रहना पड़ा। सारे वकार नकल गए।”
“इसके बाद स्कूल से छु मारने के लए मने बीमारी का बहाना कभी नह बनाया।”
ध्यान द जए: “अक्लमन्द! और बनो बीमार।” वाक्य म वह खुद को ही ताना मार रहा है। इसी को आत्म-व्यंग्य
कहते ह — और यही पछतावे का सबसे साफ प्रमाण है।
Page 17 of 45
Page 19
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 (ग) ब े को खाना-पीना बहुत प्रय है।
पूरी कहानी म खाने का जक्र बार-बार आता है। ये वाक्य उसका खाने-पीने का शौक दखाते ह —
“ठाठ से साफ-सुथरे बस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने क खीर खाते रहो!”
“गरमागरम खस्ता कचौड़ी… मावे क बफ … बेसन क चक्क … गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने क खीर!”
“खुशबू तो दाल-चावल क आ रही है। अरहर क दाल म ह ग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा ध नया और आधा
चम्मच दे सी घी।”
“ कतना मजा आता जब रसेस म ठे ले पर जाकर नमक मच लगे अमरूद खाते कटर-कटर।”
“जब रहा नह गया तो म रजाई फककर खड़ा हो गया। दबे पाँव दरवाजे तक गया और चुपके से झाँककर दे खा।”
“पूछते तो म साबूदाने क खीर ही तो माँगता।”
भाषा क खूबी: लेखक केवल “उसे खाना पसंद था” नह लखता — वह व्यंजन के नाम, उनक खुशबू और
आवाज (“कटर-कटर”) तक लख दे ता है। इसी से पढ़ते-पढ़ते हमारे मुँह म भी पानी आ जाता है।
प्र.4 (घ) ब े को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
यह बात कहानी म सीधे नह कही गई, पर इन वाक्य से साफ झलकती है —
“इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठ क रहता। सजा मलती तो मल जाती। कतना मजा आता जब रसेस म ठे ले पर जाकर
नमक मच लगे अमरूद खाते कटर-कटर।”
“कुछ दे र इधर-उधर क , स्कूल क , दोस्त क बात सोचता रहा…”
“और आज दया गया होमवक! कससे कॉपी माँगोगे? म रुआँसा हो गया।”
“इसके बाद स्कूल से छु ट्ट मारने के लए मने बीमारी का बहाना कभी नह बनाया।”
कैसे पता चलता है: जो ब ा घर म अकेला पड़ा हो और दनभर स्कूल और दोस्त क ही बात सोचे, उसे स्कूल
नापसंद नह हो सकता। उसे नापसंद केवल एक बात थी — बना गृहकाय के जाकर सजा पाना। ऊब का दन झेलने
के बाद उसे स्कूल क क मत समझ आ गई।
शीषक — पृष्ठ 67
Page 18 of 45
Page 20
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
co m
e m.
m as
पाठ से
.co a g l
a s emआपने जो कहानी पढ़ है, इसका नाम ‘नह होना बीमार’ है। अपने समूह म चचा करके ल खए क इस
gl
(क)
a
प्र.1
कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नह । अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
co m
e m . ag
हाँ, यह नाम पूरी तरह उपयुक्त है। कारण —
g l as
a
1. कहानी का नचोड़ इसी म है — कहानी का अं तम वाक्य ही है, “इसके बाद स्कूल से छु ट्ट मारने के लए मने बीमारी का
बहाना कभी नह बनाया।” यानी अंत म ब ा तय करता है — अब बीमार नह होना।
co m
se m.
2. दो अथ एक साथ — ‘नह होना बीमार’ का एक अथ है बीमार होने का नाटक न करना, दूसरा अथ है ब ा सचमुच बीमार था
o m l a
g पड़े — “म कब बीमार
.c ज ासा जगाता है — कहानी क शुरुआत म तो ब ा चाहता है क वहaबीमार
ही नह । दोन अथ कहानी म सच ह।
m
eँ ा!” शीषक इसके ठ क उलटा है, इस लए पाठक जानना चाहता है क उसका मन कैसे बदला।
पs ग
3. उलटा शीषक
g l a
a 4. शब्द-क्रम का प्रभाव — ‘बीमार नह होना’ क जगह ‘नह होना बीमार’ लखने से पं क्त ब े क अपनी बोली जैसी और
m a s
agl
जोरदार लगती है।
m .co
l a se
g
दूसरा पक्ष भी कह सकते ह: कोई साथी कह सकता है क कहानी असल म बहाने और उसके नतीजे क है,
a
इस लए शीषक म ‘बहाना’ शब्द होता तो और सीधा होता। यह भी एक ठ क तक है — बस कारण दे ना जरूरी है।
co m
m .
m as e
.co a g l
(ख) य द आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम दे ना हो तो क्या नाम दगे? आपने यह नाम क्य सोचा, यह भी
em
प्र.2
a s
बताइए।
l
ag उत्तर
se m
com g l a
. a
नाम ऐसा चु नए जो कहानी क मुख्य बात या उसक सबसे यादगार चीज पकड़ता हो। कुछ सुझाव और उनके कारण —
m
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
sem
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 19 of 45
Page 21
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
संभा वत शीषक क्य उपयुक्त है
साबूद ाने की खीर यही वह चीज है जसने ब े के मन म बीमार पड़ने क इच्छा जगाई और यही अंत तक उसे तरसाती रही। पूरी
कहानी इसी के इद- गद घूमती है।
बहाने का नतीजा कहानी क सीख सीधे-सीधे इसी म आ जाती है।
क्या ठाठ है ं बीमारों के कहानी क सबसे मजेदार पं क्त, जससे पूरी घटना शुरू होती है। यह पढ़ते ही उत्सुकता जगती है।
भी!
सारे िवकार िनकल कहानी क अं तम व्यंग्य-भरी पं क्त; इसम हास्य भी है और सीख भी।
गए
एक िदन की छु ी ब े ने जो चाहा था वह मला भी, पर बलकुल उलटे रूप म — यह वरोधाभास शीषक को रोचक बनाता है।
भूखे पेट का िदन उस दन क सबसे बड़ी तकलीफ यही थी, जसने ब े क सोच बदल द ।
नमूना उत्तर: “म इस कहानी का नाम ‘साबूदाने क खीर’ रखूँगा/रखूँगी। कारण यह है क पूरी कहानी उसी खीर से
शुरू होती है — अस्पताल म काका को खीर मलते दे खकर ही ब े के मन म बीमार पड़ने का वचार आता है —
और दनभर वह उसी खीर को याद करता रहता है। जो चीज कहानी को शुरू से अंत तक जोड़े रखे, वही सबसे
अच्छा शीषक बनती है।”
अच्छा शीषक कैसा होता है: छोटा हो, कहानी क मुख्य बात या मुख्य पात्र से जुड़ा हो, पूरी कहानी बता न दे पर
पढ़ने क उत्सुकता जगा दे ।
अ भनय — पृष्ठ 67
पाठ से — कहानी म से चुनकर कुछ संवाद नीचे दए गए ह। आपको इन्ह अ भनय के साथ बोलकर दखाना है। प्रत्येक समूह से बारी-बारी से
छात्र/छात्राएँ कक्षा म सामने आएँगे और एक संवाद अ भनय के साथ बोलकर दखाएँगे—
पाठ से अ भनय
प्र.1 “बुखार आ गया।” मने कराहते हुए कहा।
कौन बोल रहा है: बहाना बनाने वाला ब ा, रजाई म लेटे-लेटे, जब नानाजी पूछते ह “क्या हो गया?”
अ भनय कैसे कर —
आवाज: बहुत धीमी और लड़खड़ाती हुई; ‘आ गया’ को ख चकर बो लए — “बुऽखाऽर… आ गया।”
कराहना: बोलने से पहले हल्क -सी “उँ ह…” क आवाज नका लए, यही ‘कराहते हुए’ का अथ है।
मु ा: लेटे हुए, माथे पर हाथ, आँख आधी बंद, शरीर ढ ला।
Page 20 of 45
Page 22
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
चेहरा: भ ह सकुड़ी हुई, पर एक क्षण के लए आँख खोलकर दे खए क सुनने वाले ने वश्वास कया या नह — इसी झलक से
दशक को हँसी आएगी।
टप: यहाँ असली मजा “झूठे दद” म है — दद दखाना जरा-सा ज्यादा हो जाए तो हास्य अपने आप बन जाता है।
प्र.2 “आपको पता नह चल रहा। थमामीटर लगाकर दे खए।” मने कहा।
प्रसंग: नानाजी माथा और नब्ज दे खकर कह चुके ह, “बुखार तो नह है।” अब ब े को अपनी बात बचानी है।
अ भनय कैसे कर —
आवाज: पहली पं क्त म हल्क -सी शकायत और जद — “आपको पता नह चल रहा।” दूसरी म सलाह दे ने जैसा भरोसा —
“थमामीटर लगाकर दे खए।”
ग त: जरा जल्द बो लए — जो झूठ पकड़ा जाने वाला हो, उसे बचाने क जल्द होती है।
मु ा: कोहनी के सहारे थोड़ा उठकर बै ठए, हाथ से थमामीटर लगाने का इशारा क जए, फर तुरंत वापस लेट जाइए।
चेहरा: गंभीर और आश्वस्त — मानो आप ही सबसे बड़े जानकार ह ।
यह संवाद खास क्य है: ब े को मालूम है क घर म कोई है ही नह — “थमामीटर लगा भी लया तो दे खेगा
कौन?” यानी यह उसक सोची-समझी चाल है। अ भनय म यह चतुराई झलकनी चा हए।
प्र.3 “मेरे सर म दद हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।”
प्रसंग: सुबह नानीजी के “क्या हो गया?” पूछने पर ब े का उत्तर — एक साथ तीन बीमा रयाँ।
अ भनय कैसे कर —
तीन इशारे, तीन ठहराव: “ सर म दद” कहते हुए माथा पक ड़ए → रु कए; “पेट भी दुख रहा है” कहते हुए पेट पर हाथ र खए
→ रु कए; “बुखार भी है” कहते हुए दोन हाथ रजाई म समेट ली जए।
चढ़ता स्वर: हर शकायत पछली से थोड़ी और दुखी सुनाई दे — जैसे सूची लंबी करते जा रहे ह ।
‘भी’ पर जोर: “पेट भी”, “बुखार भी” — यही दो शब्द बताते ह क वह बहाने को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
टप: एक साथ इतनी बीमा रयाँ गनाना ही इस संवाद का हास्य है। इसे बना हँसे, पूरी गंभीरता से बोलगे तो कक्षा म
सबसे ज्यादा हँसी आएगी।
Page 21 of 45
Page 23
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 नानाजी आए। बोले, “अब कैसा है सरदद?”
कौन बोल रहा है: नानाजी — दोपहर म दोबारा हाल पूछने आते ह।
अ भनय कैसे कर —
प्रवेश: धीमे, र कदम से मंच पर आइए; बड़े-बुजुग क चाल दखाइए — जल्दबाजी बलकुल नह ।
आवाज: भारी, शांत और थोड़ी रुखी-सी अपनत्व भरी। स्वर म न घबराहट हो, न ज्यादा दुलार।
मु ा: बस्तर के पास झुककर, एक हाथ पीठ पर रखकर, ब े के माथे क ओर दे खते हुए पू छए।
ठहराव: “अब कैसा है…” कहकर जरा रु कए, फर “ सरदद?” — इस ठहराव से लगेगा क वे ब े का चेहरा पढ़ रहे ह।
ध्यान र खए: नानाजी को शक हो चुका है (“बुखार तो नह है”), फर भी वे दे खभाल कर रहे ह। इस लए आवाज म
डाँट नह , हल्क -सी जाँच का भाव होना चा हए।
प्र.5 फर नानाजी बोले, “आज इसे कुछ खाने को मत दे ना। आराम करने दो। शाम को दे खगे।”
प्रसंग: नानाजी नानीजी से कह रहे ह — यह वही आदे श है जससे ब े का पूरा दन भूखा बीतता है।
अ भनय कैसे कर —
दशा: ब े क ओर नह , बगल म खड़ी नानीजी क ओर दे खकर बो लए — बात उन्ह से हो रही है।
आवाज: दृढ़ और नणय जैसी; तीन वाक्य छोटे -छोटे और साफ, जैसे कोई नयम बता रहा हो।
मु ा: पहला वाक्य कहते हुए हाथ से हल्का-सा मना करने का इशारा; “शाम को दे खगे” कहते हुए मुड़कर जाने ल गए।
दूसरा पात्र: जो ब ा बना है, वह इसी समय रजाई के भीतर से घबराई हुई आँख से दे खे — दशक तभी समझगे क यह
आदे श उसके लए सजा है।
समूह के लए सुझाव: इन पाँच संवाद को क्रम से जोड़कर एक छोटा दृश्य भी खेला जा सकता है — तीन पात्र
चा हए: ब ा, नानाजी और नानीजी। एक कुस या चादर से बस्तर बना ली जए, बस इतना ही मंच काफ है।
चेहर पर मुस्कान, मुह
ँ म पानी — पृष्ठ 67
Page 22 of 45
Page 24
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) इस कहानी म अनेक रोचक घटनाएँ ह जन्ह पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी म कन बात
को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्ह रेखां कत क जए। (इन्ह रेखां कत करने के लए आप
कसी अन्य रंग का उपयोग कर सकते ह।)
यह अपनी पसंद का काम है — अपनी पुस्तक म इन जैसी पं क्तय के नीचे रंगीन प सल से लक र ख चए। मुस्कान लाने वाली
प्रमुख पं क्तयाँ ये ह —
“क्या ठाठ ह बीमार के भी। … काश! सुधाकर काका क जगह म होता! म कब बीमार प ग
ँ ा!”
“मने सोचा बीमार पड़ने के लए आज का दन बलकुल ठ क रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते ह।”
“आपको पता नह चल रहा। थमामीटर लगाकर दे खए।” — और आगे, “थमामीटर लगा भी लया तो दे खेगा कौन?”
“म पता नह कब न द म गुड़प हो गया।”
“कोई ताजमहल तो नह माँग लेता।”
“पूरी गुठली मुँह म ठूं से। जैसे आम कभी दे खे न ह । भुक्कड़ कह का।”
“अक्लमन्द! और बनो बीमार।”
“उस पूरे दन मुझे भूखे पेट ही रहना पड़ा। सारे वकार नकल गए।”
हँसी कहाँ से आती है: ज्यादातर जगह हास्य उलट बात से बनता है — बीमारी को कोई सौभाग्य समझना, भूख को
इलाज मानना, या खुद को ही “अक्लमन्द” कहना। लेखक कह मजाक बनाने क को शश नह करता; त ही
मजा कया है।
प्र.2 (ख) इस कहानी म कन वाक्य को पढ़कर आपके मुँह म पानी आ गया था? उन्ह रेखां कत क जए।
खाने-पीने के वणन वाली ये पं क्तयाँ रेखां कत क जए —
“नानीजी ने चम्मच से धीरे-धीरे काका को साबूदाने क खीर खलाई। काका ने बहुत स्वाद लेकर खीर खाई।”
“गरमागरम खस्ता कचौड़ी… मावे क बफ … बेसन क चक्क … गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने क खीर!”
“अरहर क दाल म ह ग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा ध नया और आधा चम्मच दे सी घी। फर उसम उन्ह ने
नीबू नचोड़ा होगा।”
“हाँ, दाल-चावल, तली हुई हरी मच ।”
“ कतना मजा आता जब रसेस म ठे ले पर जाकर नमक मच लगे अमरूद खाते कटर-कटर।”
“ले कन मुन्नू आम चूस रहा था। आम! इस मौसम म!”
“जैसे गु झया सफ होली- दवाली और पंजीरी सफ पू णमा के दन ही बनाई जाती है।”
Page 23 of 45
Page 25
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ध्यान द जए क लेखक क्या करता है: वह केवल व्यंजन का नाम नह लखता — साथ म उसक खुशबू (ह ग-
m वाले के मुँह
जीरे का बघार), रूप (बारीक कटा हरा ध नया) और आवाज (कटर-कटर) भी लखता है। इसी सेeपढ़ने
s
m
co है। यह भी ‘ चत्रात्मक भाषा’ का ही एक रूप है। gl a
. a
em
म पानी आ जाता
a s
agl
लेखन के अनोखे तरीके — पृष्ठ 68
. c om ag
a s em को कैसे लखा गया है—
पाठ से — नीचे कुछ वाक्य दए गए ह। कहानी म ढूँ ढ़ए क इन बात
पाठ से भाषा क बात agl
co m
e m.
1. ऐसा लगा मानो हम दे खकर सुधाकर काका खुश हो गए।
as
प्र.1
m l
.co a g
a s em
l म यह बात इस तरह लखी गई है —
a gकहानी
s
“हम दे खकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।”
m a
em
.co agl
a s
aglजैसा हो गया — और उसका अथ जरा भी नह बदला। यह शब्द यह भी
अंतर कहाँ है: ‘ऐसा लगा मानो’ जैसे लंबे वाक्यांश क जगह लेखक ने केवल एक छोटा-सा शब्द ‘जैसे’ रख दया।
इससे वाक्य छोटा, सहज और बोलचाल
बताता है क ब ा पूरी तरह न श्चत नह था; काका बहुत बीमार थे, फर भी उनके चेहरे पर हल्क खुशी दखी।
co m
m .
m as e
c o
. 2. खड़ कयाँ बहुत बड़ी थ और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हल रहे थे। a g l
e m
las
प्र.2
ag उत्तर
se m
com g l a
. a
कहानी म यह बात इस तरह लखी गई है —
m
ase
agl
“बड़ी-बड़ी खड़ कय के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।”
तीन बदलाव दे खए:
co m
m .
‘बहुत बड़ी’ → ‘बड़ी-बड़ी’ और ‘हरे’ → ‘हरे-हरे’ — शब्द को दोहराने से आकार और रंग दोन बढ़ जाते ह।
o m
ऐसे दोहरे शब्द को पुनरुक्त शब्द कहते ह।
l a se
g म खुशी भी है। पेड़ को इंसान क
.c ‘ हल रहे थे’ → ‘झूम रहे थे’ — ‘ हलना’ केवल ग त बताता है, ‘झूमaना’
se m
g l a
a
तरह झूमते दखाना मानवीकरण कहलाता है।
.c
m
लंबा वाक्य टू टकर एक छोट , बहती हुई पं क्त बन गया।
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 45
Page 26
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 3. वहाँ केवल लोग के फुसफुसाने क आवाज आ रही थ ।
कहानी म यह बात इस तरह लखी गई है —
“ सफ लोग के धीरे-धीरे बातचीत करने क धीमी-धीमी गुनगुन।”
खूबी: ‘आवाज’ जैसा सादा शब्द हटाकर लेखक ने ‘गुनगुन’ रखा — यह शब्द अपनी ध्व न से ही वैसी आवाज सुना
दे ता है, जैसा वह बताना चाहता है। ऐसे शब्द को अनुकरणात्मक (ध्वन्यात्मक) शब्द कहते ह, जैसे — खटर-पटर,
सरसराहट, कटर-कटर। साथ म ‘धीरे-धीरे’ और ‘धीमी-धीमी’ क जोड़ी से वहाँ क शां त और गहरी हो जाती है।
और भी ध्यान द जए: यहाँ पूरा वाक्य क्रया के बना है — ‘थ ’ या ‘आ रही थ ’ कह नह । ऐसे अधूरे-से वाक्य
पढ़ने म चत्र क तरह ठहर जाते ह।
प्र.4 4. फुसफुसाने क आवाज के सवा वहाँ कोई आवाज नह थी।
कहानी म यह बात इस तरह लखी गई है —
“बाक एकदम शां त।”
खूबी: पूरे तेरह शब्द क बात लेखक ने केवल तीन शब्द म कह द । इससे पहले वह लख चुका है — “न ै फक
का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी…।” इस लए अब लंबी बात दोहराने क जरूरत नह रही। छोटा वाक्य पढ़ते ही
मन म वैसा ही ठहराव आ जाता है, जैसा अस्पताल म था — यानी वाक्य क लंबाई भी अथ पैदा करती है।
प्र.5 5. बीमार लोग के बहुत मजे होते ह।
कहानी म यह बात इस तरह लखी गई है —
“क्या ठाठ ह बीमार के भी।”
Page 25 of 45
Page 27
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
खूबी: तीन चीज बदल —
‘मजे’ → ‘ठाठ’ — ‘ठाठ’ म केवल मजा नह , शान और ऐश्वय भी है; बीमार के लए ऐसा शब्द च काता है।
सीधा वाक्य → वस्मय-वाक्य — ‘क्या…!’ से लगने लगता है क ब ा उसी क्षण मन-ही-मन बोल रहा है।
‘भी’ शब्द — यही असली मजा है। ‘भी’ का अथ है: “और तो और, बीमार तक के ठाठ ह!” इसी एक अक्षर से
पूरी पं क्त म व्यंग्य आ जाता है।
प्र.6 6. म झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ।
कहानी म यह बात इस तरह लखी गई है —
“चलो बीमार पड़ जाते ह।”
खूबी: लेखक ने ‘झूठमूठ’ शब्द लखा ही नह — फर भी झूठ पूरी तरह समझ आ जाता है। ‘चलो’ शब्द ऐसा है जो
कसी मनचाहे काम के लए बोला जाता है — “चलो खेलते ह”, “चलो घूम आते ह”। इसी शब्द के कारण बीमारी
एक चुना हुआ काम लगने लगती है, और यह से हास्य पैदा होता है।
नचोड़: इन छह उदाहरण से एक ही बात सीखने को मलती है — कम शब्द म, सही शब्द चुनकर लखना ही
लेखन को सुंदर बनाता है। लंबा लखना आसान है; छोटा और सट क लखना क ठन।
वराम चह्न — पृष्ठ 68–69
पाठ से
पाठ से भाषा क बात
प्र.1 “दे ख!” नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छु आ। पेट दे खा और नब्ज दे खने लगे। इस बीच नानीजी भी आ गईं।
“क्या हुआ?”, नानीजी ने पूछा। — पछले पृष्ठ पर दए गए वाक्य को ध्यान से दे खए। इन वाक्य म आपको
कुछ शब्द से पहले या बाद म कुछ चह्न दखाई दे रहे ह। इन्ह वराम चह्न कहते ह। अपने समूह के साथ मलकर
नीचे दए गए वराम चह्न को कहानी म ढूँ ढ़ए। ध्यानपूवक दे खकर सम झए क इनका प्रयोग वाक्य म कहाँ-कहाँ
कया जाता है। आपने जो पता कया, उसे नीचे ल खए— पूण वराम ( । ), अल्प वराम ( , ), प्रश्नवाचक चह्न (
? ), वस्मया दबोधक चह्न ( ! ), उद्धरण चह्न ( “ ” )
पाठ्यपुस्तक क ता लका इस प्रकार भरी जाएगी —
Page 26 of 45
Page 28
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
वराम चह्न कहाँ प्रयोग कया जाता है कहानी से उदाहरण
पूण िवराम ( । ) वाक्य पूरा होने पर, उसके अंत म। यह बताता है क बात “नानीजी चली गईं। ” / “दोनों चले गए।”
यहाँ समाप्त हुई और यहाँ रुकना है।
अल्प िवराम ( , ) वाक्य के भीतर थोड़ी दे र रुकने के लए; एक-सी चीज “मैं जलन, ग स्ु से और कु ढ़ न में पाँव पटकता…” / “क्या
क सूची अलग करने के लए; संबोधन या उद्धरण के हआ
ु ?”, नानीजी ने पूछा। / “हाँ, दाल-चावल, तली हईु
बाद। हरी िमच ।”
पश्नवाचक िचह्न ( ? प्रश्न पूछने वाले वाक्य के अंत म। “क्या हो गया?” / “आिखर कब तक कोई पड़ा रह
) सकता है?” / “िकससे कॉपी माँग ोगे?”
िवस्मयािदबोधक हष, आश्चय, दुख, क्रोध या कसी तेज भाव को दखाने “काश! सुध ाकर काका की जगह मैं होता!” / “आम!
िचह्न ( ! ) वाले शब्द या वाक्य के बाद। इस मौसम में!” / “हे भगवान!” / “क्या मुस ीबत है!”
उद्धरण िचह्न ( “ ” ) कसी के कहे हुए शब्द को ज्य -का-त्य लखने पर, “मैं आज बीमार हू।
ँ ” / “बुखार तो नही ं है। ” नानाजी
यानी संवाद के आगे-पीछे ; कसी शीषक या वशेष शब्द बोले । / ‘िचत्र ात्मक भाषा’
को अलग दखाने पर।
वराम चह्न इतने जरूरी क्य : बोलते समय हम आवाज ऊँची-नीची करके, रुककर या हैरान होकर अथ बता दे ते
ह। लखते समय यही काम वराम चह्न करते ह। जरा फक दे खए —
“बुखार आ गया।” = सूचना | “बुखार आ गया?” = शक भरा सवाल | “बुखार आ गया!” = घबराहट या
आश्चय। शब्द वही, चह्न बदलते ही अथ बदल गया।
ध्यान द: पूछने वाला वाक्य हो तो अंत म पूण वराम नह , प्रश्नवाचक चह्न ही लगता है — दोन साथ नह लगाए
जाते। इसी तरह संवाद के भीतर का पूण वराम उद्धरण चह्न के अंदर आता है — “म आज बीमार हूँ।”
कैसी होगी गली — पृष्ठ 69
पाठ से
पाठ से चत्र बनाइए
प्र.1 “मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई क इसी समय बाहर नकलकर दन क रोशनी म अपनी गली क चहल-पहल दे खूँ” —
आपने कहानी म ब े के घर के साथ वाली गली के बारे म बहुत-सी बात पढ़ ह। उन बात और अपनी कल्पना के
आधार पर उस गली का एक चत्र बनाइए।
यह चत्र बनाने का काम है। चत्र आपको अपनी कॉपी म बनाना है, पर उसम कहानी क बात जरूर आनी चा हए — तभी वह
“इसी गली” का चत्र कहलाएगा।
कहानी गली के बारे म क्या-क्या बताती है:
Page 27 of 45
Page 29
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
कहानी क पं क्त चत्र म क्या बनाइए
“चंदू भाई डाइक्लीनर क्या कर रहे है?ं ” एक डाइक्लीनर की दुक ान — बाहर टँग े कोट-सािड़याँ,
इस्तरी की मेज।
“तेजराम की दुक ान पर िकतने ग ाहक बैठे है?ं ” एक छोटी दुक ान िजसके बाहर बेच
ं पर बैठे कु छ ग ाहक।
“महेश घी से ंटर ने मलाई का भगोना आँच पर चढ़ ाया या नही ं” घी-दू ध की दुक ान, चू े पर चढ़ ा बड़ा भगोना, उठती हुई
भाप।
“टेल ीफोन के तारों पर िकतनी िचिड़या बैठी है?ं ” खंभों के बीच झूल ते तार और उन पर कतार में बैठी
िचिड़याँ।
ु , न धूल , न मच्छर-मक्खी…” (अस्पताल के बारे में — यानी
“न टैिफक का शोरग ल आते-जाते िर क्शा, साइिकल और स्कू टर; उड़ती धूल ;
गली में इसका उलटा) भीड़-भाड़।
“अब छोटे मामा ने साइिकल उठाई।” / “कु सुम मौसी… कॉले ज बस पकड़ने साइिकल पर जाता एक व्यिक्त, बस-स्टॉप की ओर भागती
भागी ं।” एक लड़की।
“सारे बच्चे हल्ला मचाते हुए आँग न में खेल रहे होंग े” गली के िकनारे खेल ते-शोर मचाते बच्चे।
“ठे ले पर जाकर नमक िमच लगे अमरूद खाते” अम रूद वाला ठे ल ा और उसके पास खड़े ग ाहक।
“मैं रजाई से िनकला ही नही ं” (सद का मौसम ) धूप से ंक ते लोग, स्वेटर-शॉल पहने राहगीर, हल्की धूप।
चत्र बनाने का तरीका:
1. बीच म गली क सड़क बनाइए और दोन ओर दुकान व घर।
2. तीन दुकान के नाम-पट्ट ल खए — चंदूभाई ाइक्लीनर, तेजराम क दुकान, महेश घी सटर।
3. ऊपर तार और च ड़याँ, नीचे लोग-वाहन-ठे ला जो ड़ए।
4. एक घर क खड़क म रजाई ओढ़े झाँकता ब ा भी बना द जए — यही कहानी का नायक है!
ध्यान र खए: चत्र सुंदर हो, यह जरूरी नह ; उसम कहानी के संकेत ह , यह जरूरी है। हर चीज पर छोटा-सा नाम
लख दे ने से मूल्यांकन आसान हो जाता है।
आपक बात — पृष्ठ 69–70
Page 28 of 45
Page 30
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
co m
em.
m as
पाठ से आगे
.co a g l
a s emब े ने अस्पताल के वातावरण का वस्तार से सुंदर वणन कया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वणन
gl
(क)
a
प्र.1
क जए।
co m
em . ag
g l as
यहाँ आपको चत्रात्मक भाषा का अभ्यास करना है — यानी ऐसा लखना क पढ़ने वाले क आँख के सामने आपक कक्षा बन
जाए। a
m
अच्छे वणन म ये बात होनी चा हए:
co
e m.
as
जो दखता है — द वार का रंग, खड़ कयाँ, बोड, बच, चाट, अलमारी, बाहर का दृश्य।
m l
.co a g
जो सुनाई दे ता है — पंखे क घरघराहट, चॉक क खटखट, ब क खुसुर-फुसुर, घंट ।
a s em
जो महसूस होता है — खड़क से आती हवा, धूप का टु कड़ा, नई कताब क गंध।
a gl छोट -छोट खास चीज — कोने वाली टूट बच, बोड के ऊपर लगा सु वचार, गमला, द वार-प त्रका।
m a s
c o agl
नमूना उत्तर:
.
m खरी छोर पर है। दरवाजा खोलते ही हल्के नीले रंग क द वार और
s e
हमारी कक्षा ऊपर वाली मं जल पर, बरामदे के आ
a g
सामने चौड़ा हरा बोड दखाई दे ता है, जसlaपर आज क तारीख अब भी लखी है। बोड के ऊपर एक सु वचार टँगा है,
जसे हर सोमवार को बदल दया जाता है। तीन कतार म लकड़ी क बच लगी ह — तीसरी कतार क दूसरी बच मेरी
है, जस पर कसी ने बहुत पहले एक छोटा-सा फूल खोद रखा है।
co m
m .
se
बाईं ओर क बड़ी खड़ कय से गुलमोहर का पेड़ झाँकता है और दोपहर म धूप का एक चौकोर टु कड़ा फश पर
o m l a
.cक वताएँ, चत्र और पछली प्रदशनी क तस्वीर लगी ह। कोने म पानी क aसुgराही और एक गमला रखा है,
आकर बैठ जाता है। पंखे धीमी घरघराहट के साथ घूमते रहते ह। पीछे क द वार पर हमारी द वार-प त्रका है —
m
ase जसम मनी प्लांट धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
उसम
agl
m
जब शक्षक आते ह तो चॉक क खटखट और कॉ पय के पन्ने पलटने क आवाज ही बचती है — बाक एकदम
a se
com l
शां त।
. a g
m
ase
agl
तरक ब: पहले पूरी कक्षा को एक नजर म बताइए, फर एक-एक कोने पर जाइए, और अंत म एक ऐसी बात
ल खए जो सफ आपक कक्षा म हो। ऐसा अंत वणन को यादगार बना दे ता है।
co m
m .
o m l a se
m .c (ख) कहानी म ब े को घर म अकेले दन भर लेटे रहना पड़ा था। क्याagआप कभी कह अकेले रहे ह? उस समय
se
प्र.2
a
agl
आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या कया था?
.c
s e m
m a
co agl
m .
e
यह आपका अपना अनुभव है, इस लए उत्तर सबका अलग होगा। अच्छे उत्तर म तीन बात आनी चा हए — कब और कहाँ अकेले
g l as
थे, कैसा लगा (मन के भाव), और क्या-क्या कया।
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 29 of 45
Page 31
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
अकेलेपन म आने वाले भाव: शुरू म आजाद और मजा — “आज कोई टोकने वाला नह !”; फर ऊब; फर हल्क घबराहट या
हर आहट पर च कना; और अंत म घर वाल के लौटने का इंतजार।
नमूना उत्तर: “ पछली ग मय म एक दन माँ और भाई बाजार चले गए और म दो घंटे घर म अकेला रह गया। पहले
तो मुझे बड़ा मजा आया — मने तेज आवाज म गाने लगाए और मनपसंद कायक्रम दे खा। पर आधे घंटे बाद घर बहुत
बड़ा और सुनसान लगने लगा। दरवाजे क हर आहट पर म च क जाता। फर मने खुद को व्यस्त करने के लए अपनी
अलमारी ठ क क , दो चत्र बनाए और दाद को फोन करके दे र तक बात क । जब घंट बजी और माँ लौट , तो मुझे
इतनी खुशी हुई जतनी शायद ही कभी हुई हो। उस दन मने सीखा क थोड़ा अकेलापन अच्छा है, पर बहुत दे र का
अकेलापन भारी पड़ता है।”
कहानी से तुलना: कहानी का ब ा भी पहले खुश था क घर खाली है — “अब घर म म अकेला रह गया।” पर
उसने खुद को व्यस्त नह कया, बस लेटा रहा। इसी लए उसका अकेलापन ऊब और चड़ चड़ाहट म बदल गया।
प्र.3 (ग) कहानी म आम खाने वाले मुन्नू को दे खकर ब े को ई या हुई थी। क्या आपको कभी कसी से या कसी को
आपसे ई या हुई है? आपने तब क्या कया था ता क यह भावना दूर हो जाए?
ईष्या यानी दूसरे के पास कुछ अच्छा दे खकर मन म जलन होना। यह भाव लगभग सबके मन म कभी न कभी आता है — इसे मान
लेना ही उसे दूर करने का पहला कदम है।
ई या दूर करने के तरीके:
1. अपने मन से सच क हए — “हाँ, मुझे जलन हो रही है।” छपाने से भाव और बढ़ता है।
2. कारण दे खए — ज्यादातर ईष्या के पीछे यह डर होता है क “म पीछे रह गया।”
3. तुलना क जगह सीख — जो अच्छा कर रहा है, उससे पू छए क उसने कैसे कया। प्र त ं को शक्षक बना लेना सबसे
अच्छा उपाय है।
4. अपनी अच्छ बात ग नए — हर व्य क्त कसी न कसी चीज म आगे होता है।
5. बधाई द जए — मन से कही गई एक बधाई ईष्या को आधा कर दे ती है।
6. बाँ टए — साथ खेलने या साथ खाने से जलन दोस्ती म बदल जाती है।
नमूना उत्तर: “हमारी कक्षा म हुई चत्रकला प्र तयो गता म मेरे मत्र को पहला पुरस्कार मला और मुझे कुछ नह । दो
दन तक मुझे उससे बात करने का मन ही नह कया। फर मुझे लगा क गलती उसक नह है। मने उससे जाकर
कहा — ‘तुम्हारा चत्र सचमुच बहुत अच्छा था, मुझे भी छाया दे ना सखा दो।’ उसने मुझे रंग भरने का तरीका
बताया। अगली बार मेरा चत्र भी चुना गया। तब समझ आया क जलने से कुछ नह मलता, सीखने से मलता है।”
कहानी म क्या हुआ: ब ा “जलन, गुस्से और कुढ़न म पाँव पटकता वापस बस्तर म आ गया।” उसने अपनी ईष्या
का कुछ नह कया — इस लए उसका दन और भी बुरा बीता। य द वह जाकर मुन्नू के साथ बैठ जाता, तो शायद
उसे भी आम मल जाता!
Page 30 of 45
Page 32
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (घ) कहानी म नानाजी-नानीजी ब े का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते ह। आपके घर और व ालय म
आपका ध्यान कौन-कौन रखते ह? कैसे?
यह आपका अपना उत्तर होगा। सो चए क आपके दन म कौन-कौन आपके लए कुछ करता है — कई बार हम उन्ह गनते ही नह ।
कौन कैसे ध्यान रखते ह
माता-िपता समय पर भोजन, बीमार होने पर दवा और डॉक्टर, पढ़ाई और फ स का इंतजाम, हर बात पर हौसला।
दादा-दादी / नाना-नानी कहा नयाँ सुनाना, बीमार होने पर घरेलू उपाय, धूप-छाँव और खाने-पीने क चता।
बड़े भाई-बहन गृहकाय म मदद, स्कूल तक साथ जाना, अपनी चीज बाँटना।
िशक्षक न समझ आने पर दोबारा समझाना, अनुप त रहने पर पूछना, गलती सुधारना और सराहना करना।
िव ालय के अन्य कम मध्याह्न भोजन बनाना और परोसना, कक्षा और शौचालय क सफाई, पानी का प्रबंध, गेट पर सुरक्षा।
िमत्र छू टा हुआ काम बताना, कॉपी दे ना, मन खराब होने पर साथ रहना।
नमूना उत्तर: “मेरा सबसे ज्यादा ध्यान मेरी माँ रखती ह — वे सुबह मुझसे पहले उठकर मेरा ट फन तैयार करती ह
और रात को मेरा बस्ता जाँचती ह। वद्यालय म हमारी कक्षा- श क्षका ध्यान रखती ह; एक दन म बुखार म स्कूल
चला गया था तो उन्ह ने तुरंत घर सूचना भजवाई। और भोजन बनाने वाली द द सबका ध्यान रखती ह क कसी क
थाली खाली न रह जाए।”
कहानी से जो ड़ए: नानाजी-नानीजी का तरीका भले सख्त लगे, पर उसम चता ही थी — नानाजी ने खुद जाँच क ,
दवा द और दोपहर म फर आकर पूछा “अब कैसा है सरदद?” बड़ का ध्यान रखना हमेशा दुलार जैसा नह
दखता।
प्र.5 (ङ) आप अपने प रजन और मत्र का ध्यान कैसे रखते ह? क्या-क्या करते ह या क्या-क्या नह करते ह ता क
उन्ह कम-से-कम परेशानी हो?
ध्यान रखना केवल “कुछ करना” नह होता — कई बार कुछ न करना भी ध्यान रखना है।
Page 31 of 45
Page 33
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
क्या-क्या करता/करती हूँ क्या-क्या नह करता/करती
अपना कमरा, बस्ता और बतन खुद समेटता हू।
ँ घर में चीजें िबखेर कर नही ं छोड़ता।
कोई बीमार हो तो पास बैठकर पानी-दवा दे ता हू ँ और शोर नही ं करता। बीमार व्यिक्त के पास तेज आवाज में टीवी या गाने नही ं चलाता।
घर के छोटे काम िबना कहे कर दे ता हू ँ — सब्जी लाना, पौधों में पानी हर छोटी चीज के िलए बड़ों को बार-बार नही ं टोकता।
दे ना।
अपना काम समय पर पूर ा करता हू,ँ तािक िकसी को िचंता न हो। झूठ या बहाना नही ं बनाता — इसी से सबसे ज्यादा परे शानी होती
है।
िमत्र का छू टा काम उसे बताता हू ँ और अपनी कॉपी दे दे ता हू।
ँ िकसी का मजाक नही ं उड़ाता, न ही उसकी बात दू स रों से कहता
हू।
ँ
कही ं जाने से पहले घर पर बता दे ता हू।
ँ िबना बताए दे र तक बाहर नही ं रुकता।
नमूना उत्तर: “जब पछले महीने मेरी छोट बहन को बुखार आया, तो मने दो दन उसका काम अपने जम्मे ले लया
— उसक कताब जमाईं और दोपहर म उसे कहानी सुनाई। म दनभर धीरे बोलता रहा ता क उसक न द न टू टे।
मुझे लगता है क सबसे बड़ा ध्यान यही है क हम कसी के लए मुसीबत न बन।”
कहानी से सीख: ब े के एक झूठ से नानीजी को काढ़ा बनाना पड़ा, नानाजी को दन म दो बार आना पड़ा और
घरभर क दनचया बगड़ी। हमारी छोट -सी लापरवाही दूसर का पूरा दन खा जाती है।
बहाने — पृष्ठ 70
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) कहानी म ब े ने बीमारी का बहाना बनाया ता क उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी कसी कारण से
बहाना बनाया है? य द हाँ, तो उसके बारे म बताइए। उस समय आपके मन म कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे?
आप कैसा अनुभव कर रहे थे?
यह आपका अपना अनुभव है। उत्तर म तीन बात आनी चा हए — क्या बहाना बनाया, क्य बनाया, और उस समय मन म क्या-
क्या चल रहा था।
बहाना बनाते समय आने वाले भाव (क्रम से):
1. डर — पकड़े जाने का।
2. घबराहट — दल का तेज धड़कना, आँख न मला पाना।
3. थोड़ी राहत — जब बात मान ली जाती है।
4. बेचैनी — बार-बार यही सोचना क कह झूठ खुल न जाए।
Page 32 of 45
Page 34
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
5. ग्ला न / पछतावा — जब वही व्य क्त आप पर भरोसा करके आपक दे खभाल करने लगे।
नमूना उत्तर: “एक बार मुझसे ग णत का काम पूरा नह हुआ था। मने शक्षक से कह दया क मेरी कॉपी घर पर रह
गई। कहते समय मेरा गला सूख गया और म उनक आँख म दे ख ही नह पाया। उन्ह ने बना कुछ पूछे कह दया,
‘कोई बात नह , कल दखा दे ना।’ उसी क्षण मुझे राहत भी हुई और शम भी। पूरा दन मेरा मन पढ़ाई म नह लगा —
मुझे लगता रहा क कह वे कॉपी माँग न ल। शाम को घर आकर मने पहले वही काम पूरा कया और अगले दन सच
बता दया। सच बताने के बाद जो हल्कापन लगा, वह मुझे आज भी याद है।”
ध्यान द जए: झूठ एक बार बोलने से खत्म नह होता — उसे बचाने के लए दनभर सतक रहना पड़ता है। कहानी
का ब ा भी दनभर सतक रहा; बाहर आहट होते ही “ फर से लेट गया।” यही थकान बहाने क असली क मत है।
प्र.2 (ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहान क एक सूची बनाइए।
आमतौर पर सुने-सुनाए जाने वाले बहाने कुछ इस तरह के होते ह —
कहाँ आमतौर पर बनाए जाने वाले बहाने
िव ालय “कॉपी घर पर रह गई।” • “मेरी त बयत ठ क नह थी।” • “कल बजली नह थी।” • “मुझे यह काम मला ही नह था।” •
में “बस छू ट गई थी, इस लए दे र हो गई।” • “मेरे छोटे भाई ने कॉपी फाड़ द ।”
घर में “मने तो अभी-अभी पढ़ना शुरू ही कया था।” • “वह काम मने कर दया था, आपने दे खा नह ।” • “यह मने नह तोड़ा।” •
“थोड़ी दे र और, बस पाँच मनट।” • “ सर म दद हो रहा है।”
िमत्रों से “मने तुम्हारा संदेश दे खा ही नह ।” • “म आने ही वाला था, तभी काम आ गया।” • “मुझे तो पता ही नह था।”
एक बात नो टस क जए: लगभग हर बहाना एक ही ढाँचे का होता है — “गलती मेरी नह , हालात क है।” बहाना
असल म जम्मेदारी कसी और पर डालने का तरीका है। और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला बहाना वही है जो इस
कहानी म है — त बयत खराब होना।
प्र.3 (ग) बहाने क्य बनाने पड़ते ह? बहाने न बनाने पड़, इसके लए हम क्या-क्या कर सकते ह?
बहाने क्य बनाने पड़ते ह:
डाँट या सजा का डर — यही सबसे बड़ा कारण है। कहानी का ब ा भी सोचता है — “स्कूल जाता तो जरूर सजा मलती।”
काम समय पर पूरा न होना — टालमटोल (आलस) से काम इक ा हो जाता है।
श मदगी से बचना — यह मानना क ठन लगता है क “मुझसे नह हुआ” या “मुझे समझ नह आया।”
Page 33 of 45
Page 35
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
मन न होना — कोई काम उबाऊ लगे तो उससे बचने का रास्ता ढूँ ढ़ा जाता है।
co m
em.
as
भरोसे क कमी — जब लगे क सच बोलने पर कोई सुनेगा नह ।
m l
m .co
ता क बहाने न बनाने पड़ — क्या कर:
a g
l a se
a g
1. रोज का काम रोज क जए। स्कूल से लौटकर पहले वही काम नपटाइए जो सबसे भारी लगे।
2. छोट -सी योजना बनाइए — गृहकाय क एक सूची लखकर पूरा होने पर नशान लगाइए।
co m
3. न समझ आए तो पू छए — शक्षक, माता- पता या मत्र से। ज्यादातर बहाने ‘समझ न आने’ से शुरू होते ह।
m . ag
se
4. सच बो लए, समय रहते — “काम नह हो पाया, कल तक कर दूँ गा” कहने पर आमतौर पर मौका मल ही जाता है।
l a
g वे सच बोल सक। जहाँ डर कम होता है, वहाँ बहाने अपने आप कम हो जाते ह।
5. अपनी दनचया बाँ धए — पढ़ाई, खेल और सोने का समय तय हो तो काम पछड़ता ही नह ।
6. बड़े क्या कर — ब को इतना भरोसा दaक
co m
m.
कहानी का प्रमाण: ब े ने बहाना बनाकर एक दन बचाना चाहा था, पर उसे मला — भूख, ऊब, अकेलापन और
m as e
.co l
दुगुना होमवक। यानी बहाना काम को टालता है, मटाता नह ।
a g
se m
g l a
a
अनुमान — पृष्ठ 70
m a s
.co agl
पाठ से आगे
se m
पाठ से आगे
g l a
a
प्र.1 “म रजाई म पड़ा-पड़ा घर म चल रही ग त व धय का अनुमान लगाता रहा।” कहानी म ब
m
अनुमान लगाए ह। क्या आपने कभी कसी अनदे खे व्य क्त/वस्तु/पशु-पक्षी/ ान आ द.cकoे वषय म अनुमान
े ने अनेक प्रकार के
लगाए ह? कसके बारे म? क्या? कब? वस्तार से बताइए। (संकेत — जैसे पेड़ सेsआने
m a em वाली आवाज सुनकर
.coकसी प्राणी का अनुमान लगाना; कह दूर रहने वाले कसी संबंधी/ रश्तेदaारgकlे वषय म सुनकर उसके संबंध म
m अनुमान लगाना।)
l a se
ag
se m
o m l a
m .c है — वह कुछ देख नह रहा, केवल आवाज सुन रहा है और उन्ह से ag
se
पहले दे खए क कहानी का ब ा कैसे अनुमान लगाता
l a
ag
पूरा दृश्य बना लेता है:
उसे क्या सुनाई/महसूस हुआ उसने क्या अनुमान लगाया
co m
m .
se
नल और कदमों की आवाज “अब छोटे मामा नहाकर नकले।”
com की आहट l a
em
.जल्दबाजी ag कॉलेज बस पकड़ने भाग ।”
s
“अब कुसुम मौसी रोज क तरह नाश्ता छोड़कर
gl a
a c
.
इधर-उधर खटकने की आवाज “अब मुन्नू अपना जूता ढूँ ढ़ रहा है।”
s e m
com a
agl
पास के कमरे में खटर-पटर “मुन्नू स्कूल से आ गया है। तो क्या एक बज गया?”
.
m“शायद सब लोग खाना खाने बैठ रहे ह।”
ase
l
बतनों की आवाज और चबाने की ध्विन
a g
ही ंग-जीरे की खुशबू “अरहर क दाल… फर उसम उन्ह ने नीबू नचोड़ा होगा।”
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 45
Page 36
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
अब अपना अनुभव ल खए। अच्छे उत्तर म यह होना चा हए: कसके बारे म अनुमान लगाया, कस संकेत से लगाया, और बाद म
वह सही नकला या गलत।
नमूना उत्तर: “ पछली बरसात म हमारे आँगन के अमरूद के पेड़ से रात को खटखट और पत्त के सरसराने क
आवाज आने लग । मने अनुमान लगाया क कोई बड़ी बल्ली होगी, क्य क आवाज भारी थी और डाल हल रही थी।
सुबह दे खा तो पेड़ पर आधे कुतरे हुए अमरूद पड़े थे और मुझे समझ आया क वह कोई गलहरी-चमगादड़ नह ,
बंदर का झुंड था जो सुबह-सुबह फर आ गया। मेरा अनुमान आधा सही नकला — जानवर तो था, पर वह नह जो
मने सोचा।”
अनुमान कैसे लगता है: हमारे पास कुछ संकेत होते ह — आवाज, गंध, समय, आदत — और बाक हस्सा हमारा
अनुभव भर दे ता है। इसी लए ब ा घड़ी दे खे बना कह पाता है, “तो क्या एक बज गया?” — क्य क मुन्नू रोज उसी
समय लौटता है। अनुमान अंदाजा है, इस लए वह गलत भी हो सकता है।
घर का सामान — पृष्ठ 70
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 “बहुत ढूँ ढ़ा गया पर थमामीटर मला ही नह । शायद कोई माँगकर ले गया था।” कहानी म ब े के घर पर
थमामीटर (तापमापी) खोजने पर वह मल नह पाता। आमतौर पर हमारे घर म कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है
जसे खोजने पर भी वह नह मलती, जसे कोई माँगकर ले जाता है या हम जसे कसी से माँगकर ले आते ह।
अपने घर को ध्यान म रखते हुए ऐसी वस्तुओं क सूची बनाइए — जो खोजने पर भी नह मलती ह / जो कोई
माँगकर ले जाते ह / जो आप कसी से माँगकर लाते ह
पुस्तक क तीन-खान वाली ता लका इस तरह भरी जा सकती है। यह सूची आपके अपने घर क होनी चा हए — नीचे नमूना दया
गया है।
जो खोजने पर भी नह मलती ह जो कोई माँगकर ले जाते ह जो आप कसी से माँगकर लाते ह
नाखून काटने वाला (नेल कटर) कु िस याँ और दरी (शादी-समारोह के िलए) िसलाई मशीन या इस्तरी
सुई-धागा और कैं ची सीढ़ ी बड़े बतन — भगोना, कड़ाही, थािलयाँ
छाता पेचकस, हथौड़ी, प्लास पेचकस या टॉच
पेन और रबड़ कहानी की िकताबे ं कोई स ब्जी या मसाला जो चूक गया हो
चाबी का ग च्ु छा और चश्मा थम मीटर छाता या रे नकोट
मोबाइल का चाजर साइिकल का पंप कु िस याँ या ग े (मेहमान आने पर)
Page 35 of 45
Page 37
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: जो चीज कभी-कभार काम आती ह, उनक कोई तय जगह नह बन पाती — इस लए जरूरत
के समय वे नह मलत । और जो चीज महँगी ह पर साल म दो-चार बार ही चा हए (सीढ़ , बड़े बतन, औजार), उन्ह
हर घर खरीदता नह — पड़ोस से माँग लेना ही समझदारी है।
करके दे खए: घर क ऐसी तीन-चार चीज क एक तय जगह बना द जए और वहाँ छोट -सी पच चपका द जए।
साथ म एक कागज पर लख ली जए क कसने क्या माँगकर लया — फर कभी नानाजी क तरह ढूँ ढ़ते नह रह
जाएँगे!
खान-पान और आप — पृष्ठ 71
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) कहानी म सुधाकर काका को बीमार होने पर साबूदाने क खीर द गई थी। आपके घर म कसी के बीमार होने
पर उसे क्या-क्या खलाया जाता है?
बीमारी म आमतौर पर हल्का, कम मसाले वाला और आसानी से पचने वाला भोजन दया जाता है। भारत के अलग-अलग घर म ये
चीज द जाती ह —
प्रकार क्या-क्या दया जाता है
हल्का भोजन मूँग दाल क खचड़ी, द लया, दाल का पानी, साद रोट और दही, साबूदाने क खीर या खचड़ी।
तरल नीबू-नमक-चीनी का घोल, ना रयल पानी, छाछ, गरम दूध म हल्द , सूप।
घरे ल ू औषिध अदरक-तुलसी का काढ़ा, अजवाइन का पानी, शहद-अदरक, जीरे का पानी।
फल केला, सेब, अनार, मौसमी का रस, पपीता।
क्या नही ं िदया जाता तला-भुना, ज्यादा मच-मसाला, बहुत ठं डी चीज, बाजार का खाना।
नमूना उत्तर: “हमारे घर म कोई बीमार हो तो सबसे पहले मूँग दाल क खचड़ी बनती है, जसम बस थोड़ा-सा नमक
और घी डाला जाता है। दाद अदरक-तुलसी का काढ़ा बनाती ह और दन म दो बार नीबू-नमक का पानी दया जाता
है। पेट खराब होने पर दही-चावल और खाँसी होने पर हल्द वाला दूध जरूर मलता है।”
साबूदाना ही क्य : साबूदाना जल्द पच जाता है, उसम मसाला नह होता और उससे तुरंत ऊजा मलती है। इसी लए
वह बीमारी और व्रत — दोन म खाया जाता है।
Page 36 of 45
Page 38
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) कहानी म ब े को बहुत-सी चीज खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?
यह आपक अपनी पसंद है। उत्तर को रोचक बनाने के लए केवल नाम मत गनाइए — बताइए क कब और क्य मन करता है,
जैसे कहानी का ब ा करता है।
नमूना उत्तर: “बा रश शुरू होते ही मेरा मन गरम पकौड़ और अदरक वाली चाय का हो जाता है। सद क धूप म
मूँगफली और गुड़ खाने म जो मजा है, वह कसी और चीज म नह । स्कूल क छु ट्ट के बाद ठे ले पर मलने वाले
भेलपूरी और गोलगप्पे मुझे सबसे ज्यादा पसंद ह। और अगर घर म हलवा बन जाए, तो म दूसरी कटोरी माँगे बना
नह रहता।”
ध्यान द जए: कहानी म लेखक ने यही कया है — “गरमागरम खस्ता कचौड़ी… मावे क बफ … बेसन क
चक्क … गोलगप्पे।” उसने हर नाम के साथ एक वशेषण जोड़ा है, इसी लए पढ़कर मुँह म पानी आ जाता है। आप
भी अपने वणन म ऐसा ही एक-एक शब्द जो ड़ए।
प्र.3 (ग) कहानी म ब ा सोचता है क साबूदाने क खीर सफ बीमारी या उपवास म क्य मलती है। आपके घर म
ऐसा क्या-क्या है, जो केवल वशेष अवसर या त्योहार पर ही बनता है?
हर घर और हर प्रदे श म कुछ व्यंजन ऐसे होते ह जो कसी खास दन से बँधे हुए ह —
अवसर जो उसी दन बनता है
होली गु झया, दहीबड़े, ठं डाई, पापड़ी
िदवाली चकली, मठरी, लड्डू, शकरपारे, नमकपारे
जन्माष्टमी / पूिणमा पंजीरी, माखन- म ी, खीर
मकर सं ांित / लोहड़ी तल के लड्डू, गजक, खचड़ी, रेवड़ी
ईद सेवइयाँ (शीर खुरमा), बरयानी
पोंग ल / ओणम प गल, पायसम, ओणम सद्या
वत-उपवास साबूदाने क खचड़ी, कुट्टू क पूरी, फलाहार
जन्मिदन / मेहमान आने पर हलवा, खीर, पूरी-सब्जी, केक
और ब े का सवाल कतना सही है? वह पूछता है — “क्या ये चीज जब इच्छा हो तब नह बनाई जा सकत । कोई मना करता
है?” बात म दम है। ऐसा कोई नयम तो नह है, पर तीन कारण ह —
Page 37 of 45
Page 39
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
मौसम — तल-गुड़ सद म गरमी दे ते ह, इस लए वे संक्रां त से जुड़ गए।
मेहनत और खच — गु झया या चकली बनाने म घंट लगते ह; रोज कौन बनाए?
इंतजार का स्वाद — साल म एक बार मलने वाली चीज ज्यादा स्वा दष्ट लगती है। रोज मलने लगे तो वही खास बात खत्म हो
जाए।
नमूना उत्तर: “हमारे घर म गु झया केवल होली पर और तल के लड्डू केवल मकर संक्रां त पर बनते ह। दाद कहती ह
क इन्ह बनाने म पूरा दन लगता है, इस लए साल म एक ही बार बनते ह — और शायद इसी लए इनका स्वाद सबसे
अच्छा लगता है।”
प्र.4 (घ) कहानी म ब ा सोचता है क अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठे ले पर नमक- मच वाले अमरूद खाने को
मलते। आप अपने व ालय म क्या-क्या खाते-पीते ह? व ालय म आपका रु चकर भोजन क्या है?
यह आपका अपना उत्तर होगा। इसम तीन बात आ सकती ह — घर से लाया ट फन, वद्यालय का मध्याह्न भोजन, और छु ट्ट के
समय ठे ले या कट न क चीज।
कहाँ से क्या-क्या
घर के िटिफन में पराठा-अचार, रोट -सब्जी, पूरी-आलू, इडली, पोहा, उपमा, चपाती-गुड़, कभी-कभी हलवा।
मध्याह्न भोजन में दाल-चावल, रोट -सब्जी, खचड़ी, राजमा-चावल, कढ़ , तहरी; कह -कह फल या दूध भी।
छु ी के समय ठे ले पर नमक- मच लगे अमरूद, इमली-बेर, भेलपूरी, चना-चाट, कुल्फ , बफ का गोला।
पीने को पानी क बोतल, वद्यालय क टं क का पानी, छाछ, नीबू-पानी।
नमूना उत्तर: “म घर से आलू का पराठा और अचार लाता हूँ, पर मुझे सबसे ज्यादा मध्याह्न भोजन म मलने वाली
कढ़ -चावल पसंद है — खासकर जब वह गरम हो। छु ट्ट के बाद हम तीन दोस्त गेट के बाहर ठे ले पर नमक- मच लगे
अमरूद जरूर खाते ह। मुझे लगता है क दोस्त के साथ बाँटकर खाया गया खाना अकेले खाए गए कसी भी
पकवान से ज्यादा स्वा दष्ट होता है।”
ध्यान द: ठे ले क चीज खाते समय सफाई का ध्यान जरूर र खए — कटा हुआ फल ढका हुआ हो, हाथ धोकर
खाइए, और खुला पानी न पएँ।
Page 38 of 45
Page 40
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
(ङ) इस कहानी म भोजन से जुड़ी ब े क कई रोचक बात बताई गई ह। आपके बचपन क भोजन से जुड़ी कोई
e
प्र.5
m l as
.co
वशेष याद क्या है, जसे आप अब भी याद करते ह?
a g
se m
g l a
a
यह आपक अपनी स्मृ त है। अच्छा उत्तर वह है जसम केवल व्यंजन का नाम न हो, ब ल्क वह दृश्य, वे लोग और वह भाव भी हो
com
जो उस याद से जुड़े ह।
e m .
लखने का ढाँचा: (1) कब और कहाँ क बात है → (2) कौन-सी चीज और कसने बनाई → (3) उस दन क्या खास हुआ → (4) ag
आज याद करके कैसा लगता है।
g l as
a
m
नमूना उत्तर: “मुझे आज भी वह गर मय क छु ट्ट याद है जब हम गाँव गए थे। नानी ने चूल्हे पर बाजरे क रोट सक
co
m.
और ऊपर से सफेद मक्खन का बड़ा-सा टु कड़ा रख दया। मक्खन पघलकर रोट म समा गया और उसक स धी
o m l a se
खुशबू पूरे आँगन म फैल गई। हम सब जमीन पर बछ दरी पर बैठकर खा रहे थे और नानी बीच-बीच म गरम रोट
m .c म डालती जा रही थ । शहर लौटकर मने माँ से कई बार वैसी रोट बनवाई,agपर वह स्वाद कभी नह आया।
seसमझ आता है क उसम आधा स्वाद चूल्हे का था और आधा नानी के हाथ का।”
सीधे थाली
g l a
अब
a
m a s
. c o agl
भोजन और याद: स्वाद और गंध हमारी स्मृ त से बहुत गहरे जुड़े होते ह — इसी लए कोई खुशबू आते ही पूरा
s e
बचपन याद आ जाता है। कहानी म भी ब ा दालm के बघार क खुशबू से पूरा दृश्य बना लेता है।
a
agl
(च) कहानी म ब
. c om
ा भोजन क सुंगध से रजाई फककर रसोई म झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ
em ह क क्या पक रहा है?
प्र.6
m a s
है क घर म कसी वशेष खाने क सुंगध से आप भी रसोई म जाकर तुरंत दे खना चाहते
m
o कस- कस खाने क सुंगध सबसे अ धक पसंद है?
.cआपको agl
l a se
ag उत्तर
se m
comदेखा।” a
यह लगभग सबके साथ होता है — इसी को लेखक ने बहुत मजेदार ढं ग से लखा है: “जब रहा नह गया तो म रजाई फककर खड़ा
. a g l
वे खुशबुए ँ जो रसोई तक ख च ले जाती ह:sem
हो गया। दबे पाँव दरवाजे तक गया और चुपके से झाँककर
a g la
ह ग-जीरे या लहसुन का दाल म लगा बघार — कहानी म भी यही खुशबू आती है।
co m
तवे पर सकती रोट और उस पर लगा घी।
m .
e
गरम तेल म तली जा रही पूरी, पकौड़े या समोसे।
c o m
भुनते हुए मसाले, तली जा रही हरी मच।
g l as
m . धीमी आँच पर पकती खीर — दूध, इलायची और मेवे क मली-जुली गंध। a
l a se
ag बरसात म मट्ट क स धी गंध के साथ चाय-पकौड़े।
.c
m
भुनती हुई मूँगफली और भुट्टा।
m a s e
e m . co
नमूना उत्तर: “मुझे दाल म लगने वाले ह ग-जीरे के बघार क खुशबू सबसे प्रय है। जैसे ही ‘छन्न’ क आवाज आती agl
g l as
a
है और खुशबू कमरे तक पहुँचती है, म कताब बंद करके रसोई म पहुँच जाता हूँ। इसके अलावा जलेबी क चाशनी
और बरसात म बनने वाले प्याज के पकौड़ क गंध मुझसे रुक नह जाती।”
com
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 45
Page 41
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: स्वाद का बड़ा हस्सा असल म गंध से आता है। इसी लए नाक बंद हो तो खाना फ का लगता है,
और खुशबू आते ही भूख अपने आप जाग जाती है।
आज क पहेली — पृष्ठ 71–72
पाठ से आगे — कहानी म आपने खाने-पीने क अनेक वस्तुओं के बारे म पढ़ा है। अब हम आपके सामने खाने-पीने क वस्तुओं या व्यंजन से
जुड़ी कुछ पहे लयाँ लाए ह। इन्ह बू झए और उत्तर ल खए—
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 1. रोट जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भरा / घी-तेल साथी ह इसके, दही-चटनी से हरा-भरा
उत्तर — आलू का पराठा
संकेत कैसे मले:
“रोट जैसा होता है ये” → आटे से बना और तवे पर सकने वाला।
“पर आलू से भरा-भरा” → भरावन (स्ट फग) म आलू — यही पराठे क पहचान है।
“घी-तेल साथी ह इसके” → रोट सूखी सकती है, पराठा घी या तेल लगाकर।
“दही-चटनी से हरा-भरा” → पराठा दही, अचार और हरी चटनी के साथ खाया जाता है।
जानकारी: पराठा पूरे उत्तर भारत का लोक प्रय नाश्ता है। पंजाब म इसे मक्खन और लस्सी के साथ खाया जाता है।
प्र.2 2. दाल-चावल का मेल है यह तो, भारत भर म तुम इसे पाओ, / द क्षण म ये खूब है बनता, चटनी-सांभर संग-संग
खाओ, / गोल- तकोना इसका आकार, गरम-गरम तुम इसे बनाओ, / कौन-सा व्यंजन होता है यह, बोलो बोलो
नाम बताओ।
उत्तर — डोसा
Page 40 of 45
Page 42
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
संकेत कैसे मले:
“दाल-चावल का मेल” → डोसे का घोल चावल और उड़द दाल को भगोकर, पीसकर और खमीर उठाकर बनता
है।
“द क्षण म ये खूब है बनता” → यह द क्षण भारत का प्र सद्ध व्यंजन है।
“चटनी-सांभर संग-संग खाओ” → डोसा ना रयल क चटनी और सांभर के साथ परोसा जाता है।
“गोल- तकोना इसका आकार” → तवे पर फैलाने से गोल बनता है और मोड़ने पर तकोना।
“गरम-गरम तुम इसे बनाओ” → डोसा तवे से उतरते ही खाया जाता है।
ध्यान द: इडली भी दाल-चावल से बनती है, पर वह भाप म पकती है और केवल गोल होती है — “गोल- तकोना”
और “गरम-गरम बनाओ” वाला संकेत डोसे क ओर ही ले जाता है।
प्र.3 3. नाश्ते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट्र म इसका वास, / मच-मसाले से भरपूर, संग बटाटा भी मशहूर, / चटपट
चटनी लगी कसे? बूझो नाम तो खाएँ इसे!
उत्तर — वड़ा पाव ( जसका मुख्य भाग बटाटा वड़ा है)
संकेत कैसे मले:
“महाराष्ट्र म इसका वास” → यह महाराष्ट्र, खासकर मुंबई का सबसे लोक प्रय नाश्ता है।
“संग बटाटा भी मशहूर” → मराठ म बटाटा का अथ है आलू; उबले आलू के मसालेदार गोले को बेसन म
लपेटकर तला जाता है।
“चटपट चटनी लगी” → लहसुन क सूखी चटनी और हरी चटनी लगाकर पाव के बीच रखा जाता है।
“नाश्ते का यह बड़ा है खास” → यहाँ ‘बड़ा’ शब्द का दोहरा प्रयोग है — बड़ा (महत्वपूण) और वड़ा (व्यंजन)।
पहे लय म ऐसा शब्द-खेल खूब होता है।
प्र.4 4. बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात म बड़ा है बोल। / खाने म नम, पानी भरे, ध नया मच संग सजे।
उत्तर — ढोकला
Page 41 of 45
Page 43
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
संकेत कैसे मले:
“बेसन से बने” → ढोकला बेसन (या चावल-चने क दाल) के घोल से बनता है।
“चौकोर या गोल” → थाली म भाप दे कर जमाया जाता है, फर चौकोर टु कड़ म काटा जाता है।
“गुजरात म बड़ा है बोल” → यह गुजरात का प्र सद्ध व्यंजन है।
“खाने म नम, पानी भरे” → भाप म पकने और ऊपर से मीठा-नमक न पानी छड़कने के कारण यह स्पंज जैसा
नम और रसीला होता है।
“ध नया मच संग सजे” → ऊपर से राई का तड़का, हरा ध नया, ना रयल का बुरादा और हरी मच सजाई जाती
है।
अच्छ बात: ढोकला तला नह जाता, भाप म पकता है — इस लए यह हल्का और सेहतमंद नाश्ता माना जाता है।
प्र.5 5. गोल-गोल पानी से भरके, चटनी स ठ संग इसे खाओ / उत्तर-द क्षण पूरब-प म, गली-मुहल्ल म भी पाओ। /
ख -मीठ , तीखी हाय, खाना तो इसे हर कोई चाहे!
उत्तर — गोलगप्पे (पानी पूरी / पुचका / फुचका / गुपचुप — जगह-जगह अलग नाम)
संकेत कैसे मले:
“गोल-गोल पानी से भरके” → कुरकुरी गोल पूरी म छे द करके मसालेदार पानी भरा जाता है।
“चटनी स ठ संग” → इमली-गुड़ क मीठ स ठ क चटनी इसम डाली जाती है।
“उत्तर-द क्षण पूरब-प श्चम, गली-मुहल्ल म भी पाओ” → पूरे भारत म मलता है, हर जगह ठे ले पर।
“खट्ट -मीठ , तीखी” → पुद ने का तीखा पानी, इमली क खटास और स ठ क मठास — तीन स्वाद एक
साथ।
नाम अनेक: दल्ली म गोलगप्पे, मुंबई म पानी पूरी, कोलकाता म पुचका, ओ डशा म गुपचुप, मध्य प्रदे श म फुल्क
— व्यंजन एक, नाम अनेक। कहानी म भी ब ा “गोलगप्पे” याद करता है।
प्र.6 6. हरे साग संग मुझको पाओ, / मक्खन के संग मुझको खाओ। / आटा मेरा हल्का पीला, / स्वाद मेरा है बड़ा
रंगीला।
उत्तर — मक्के क रोट (सरस के साग के साथ)
Page 42 of 45
Page 44
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
संकेत कैसे मले:
“हरे साग संग मुझको पाओ” → ‘सरस दा साग ते मक्क द रोट ’ — यह जोड़ी पंजाब म सबसे प्र सद्ध है।
“मक्खन के संग मुझको खाओ” → इस पर सफेद घर का मक्खन रखकर खाया जाता है।
“आटा मेरा हल्का पीला” → मक्के (भुट्टे) का आटा पीले रंग का होता है — यही सबसे पक्का संकेत है।
“स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला” → स धा और अलग-सा स्वाद।
मौसम से जो ड़ए: यह स दय का भोजन है, क्य क सरस का साग जाड़े म ही मलता है और मक्के क रोट शरीर
को गरमी दे ती है। कहानी भी सद के मौसम क ही है।
प्र.7 7. आग म पकती हूँ, स धा-सा स्वाद, / साथ म खाओ चूरमा, बन जाए फर बात, / गरम दाल से मुझको प्यार,
राज ान का म उपहार।
उत्तर — बाट (यानी प्र सद्ध दाल-बाट -चूरमा क बाट )
संकेत कैसे मले:
“आग म पकती हूँ” → बाट तवे पर नह बनती; उसे उपले या कोयले क आँच म, या तंदूर म सका जाता है।
“स धा-सा स्वाद” → सीधे आँच म सकने से ही यह स धापन आता है।
“साथ म खाओ चूरमा” → बाट को कूटकर, घी-गुड़ या शक्कर मलाकर चूरमा बनाया जाता है।
“गरम दाल से मुझको प्यार” → पंचमेल दाल के साथ परोसी जाती है।
“राज ान का म उपहार” → यह राज ान का सबसे प्र सद्ध पकवान है।
क्य बनी होगी ऐसी: रे गस्तान म पानी और ईंधन दोन कम थे। बाट बना ज्यादा पानी के बनती है, आँच म सक
जाती है और कई दन खराब नह होती — इस लए यह वहाँ के लए सबसे उपयुक्त भोजन बनी।
प्र.8 8. गोल-गोल और श्वेत रंग का / रस से भरा हुआ हूँ खूब / मीठ दु नया का महाराजा / चाशनी मीठ डू ब-डू ब।
उत्तर — रसगुल्ला
Page 43 of 45
Page 45
as e
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
संकेत कैसे मले:
m as e
.co
“गोल-गोल और श्वेत रंग का” → छे ने के सफेद, गोल गोले।
a g l
a s em
“रस से भरा हुआ हूँ खूब” → नाम म ही ‘रस’ है — रस + गुल्ला = रस से भरा गोला।
a gl “चाशनी मीठ डू ब-डू ब” → यह हमेशा चाशनी म डू बा हुआ ही परोसा जाता है।
“मीठ दु नया का महाराजा” → मठाइय म इसका वशेष ान है।
co m
e m . ag
g l as
a
जानकारी: रसगुल्ला दूध फाड़कर बने छे ने से बनता है और प श्चम बंगाल तथा ओ डशा — दोन क पहचान है।
गुलाब जामुन भी गोल और चाशनी म डू बा होता है, पर वह भूरे रंग का होता है — इस लए “श्वेत रंग का” संकेत
रसगुल्ले क ओर ही जाता है।
co m
e m.
m l as
.co a g
em प्रदे श (गुजरात, महाराष्ट्र, राज ान) और खाने का ढं ग (चटनी के साथ, चाशनी म, दाल के साथ)। तीन
पहेली बूझने क तरक ब: हर पहेली म तीन तरह के संकेत होते ह — साम ी (बेसन, मक्के का आटा, दाल-
a s
gl मलाकर उत्तर अपने आप नकल आता है।
चावल),
a
m a s
m .co agl
l a se
a g
अध्याय — एक नज़र म
co m
m .
se
कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश (1947–2019) ह; यह पाठ कक्षा 7 क हद पाठ्यपुस्तक मल्हार का पाँचवाँ पाठ है और पृष्ठ
o m l a
gकाका को मली साबूदाने क खीर
ब .cा नानीजी के साथ अस्पताल जाता है, वहाँ क सफाई, शां त, हरे पेड़ और सुधाकर
57 से 72 तक फैला है।
m a
a se देखकर सोचता है — “क्या ठाठ ह बीमार के भी।”
agl गृहकाय न करने और स्कूल न जाने के मन के कारण वह अगली बार बीमारी का बहाना बना लेता है — सरदद, पेटदद और
se m
m a
बुखार का झूठ बोलकर रजाई म पड़ा रहता है।
.c o a g l
m
नानाजी उसे कड़वी पु ड़या और काढ़े जैसी चाय पला दे त े ह और खाना बं द करा दे त े ह — “त बयत ढ ली हो तो सबसे अच्छा
उपाय है भूखे रहना।”
l a se
दनभर वह ऊब, भूख, अकेलेपनaऔरg मुन्नू के आम चूसने पर ईष्या से जूझता है; अंत म तय करता है क अब कभी बीमारी का
बहाना नह बनाएगा।
co m
.
कहानी क खू बयाँ — चत्रात्मक भाषा, ब े क कल्पना, हास्य, स्वयं से बात करना और अंत म सोच का बदलना।
e m
m l as
m .co a g
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 44 of 45
Page 46
कक्षा 7 हद अध्याय 5 नह होना बीमार AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ कहानी म कहाँ आया एक वाक्य म प्रयोग
वाड िकसी िविशष्ट काय के िलए घे र कर बनाया हुआ “एक बड़े से वाड म कई एक जैसे पलंग ब का वाड पहली मं जल
स्थान (अस्पताल का बड़ा कमरा) लाइन से लगे हुए थे।” पर है।
नस वह व्यिक्त जो रोिगयों, घायलों या वृद्धों आिद की “तभी सफेद कपड़ म एक नस आई।” नस ने समय पर दवा दे द ।
दे खभाल करे
साबूदाना सागू नामक वृक्ष के तने का गूद ा, िजसे सुखाकर “नानीजी काका के लए साबूदाने क व्रत म माँ साबूदाने क
दानों के रूप में बनाया जाता है खीर बनाकर लाई थ ।” खचड़ी बनाती ह।
रजाई जाड़े का ओढ़ ना िजसका कपड़ा दोहरा होता है और “म रजाई से नकला ही नह ।” ठं ड बढ़ते ही रजाई नकाल
िजसमें रुई भरी होती है ली गई।
थमामीटर शरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का छोटा यंत्र “बहुत ढूँ ढ़ा गया पर थमामीटर मला ही थमामीटर लगाकर बुखार
नह ।” दे ख लो।
काढ़ा जड़ी-बूिटयों और औषिधयों को उबालकर बनाया “काढ़े जैसी चाय पीनी पड़ी।” सद म दाद काढ़ा पलाती
गया पेय ह।
पु ड़या कागज में मोड़कर रखी गई दवा की छोटी मात्रा “ले, पु ड़या खा ले।” वैद्यजी ने तीन पु ड़या द ।
नब्ज कलाई पर महसूस होने वाली नाड़ी की धड़कन “पेट दे खा और नब्ज दे खने लगे।” डॉक्टर ने नब्ज दे खकर
बताया।
वकार शरीर या मन का दोष/खराबी “इससे सारे वकार नकल जाएँगे।” खाने म संयम रखने से वकार
दूर होते ह।
ाइक्लीनर नाजुक कपड़ों को पानी-साबुन के िबना मशीन से “चंदूभाई ाइक्लीनर क्या कर रहे ह?” कोट ाइक्लीनर को दे
साफ करने वाला व्यिक्त आओ।
अरहर एक दाल िजसे तुअर भी कहते है ं “अरहर क दाल म ह ग-जीरे का आज अरहर क दाल बनी है।
बघार…”
चत्रात्मक ऐसा वणन िजससे दृ श्य आँखों के सामने िचत्र-सा अस्पताल के माहौल का वणन चत्रात्मक भाषा रचना को
भाषा बन जाए सरस बनाती है।
Page 45 of 45