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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 6: ग रधर क वराय क कुंड लया
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
73 – 82 13 31 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 31 pages
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: ग रधर क वराय क कुंड लया
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 6 ग रधर क वराय क कुंड लया के सभी प्रश्न के पूरे हल। इस पाठ म अठारहव सद के
क व ग रधर क वराय क दो प्र सद्ध कुंड लयाँ द गई ह — “ बना बचारे जो करै सो पाछे प छताय” और “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध
लेइ”। पृष्ठ 73 से 82 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, पं क्तय पर चचा, मलकर कर मलान, सोच- वचार के लए, अनुमान और कल्पना से,
शब्द से जुड़े शब्द, क वता क रचना, काल से जुड़े शब्द, आपक बात, हँसी, सोच-समझकर, आज क पहेली और खोजबीन के लए — शीषक-दर-
शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 73 – 82
खं ड प्रश्न
13 31
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 74 और 75
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) पाठ के आधार पर नीचे दए गए प्रश्न का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न
के एक से अ धक उत्तर भी हो सकते ह। (1) “ बना बचारे” काम करने के क्या प रणाम होते ह? • दूसर से
प्रशंसा मलती है। • मन म शां त बनी रहती है। • अपना काम बगड़ जाता है। • खान-पान सम्मान मलता है।
सही उत्तर है — अपना काम बगड़ जाता है। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
कं ु डिलया की पंिक्त —
“िबना िबच ारे जो करै सो पाछे पिछताय।
काम िबगारे आ पनो जग में होत हँसाय॥ ”
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
दूसर से प्रशंसा मलती है। ग़लत क व कहता है क ऐसा व्य क्त “जग म होत हँसाय” — प्रशंसा नह , हँसी मलती है।
मन म शां त बनी रहती है। ग़लत पं क्त ठ क उलटा कहती है — “ चत्त म चैन न पावै”।
अपना काम बगड़ जाता सही ★ “काम बगारे आपनो” — यही बात सीधे-सीधे कुंड लया म कही गई है।
है।
खान-पान सम्मान मलता है। ग़लत “खान पान सन्मान राग रंग मन ह न भावै” — मलने पर भी वह उसे अ ा नह
लगता।
क्य : पहली कुंड लया बना सोचे कए काम के तीन प रणाम गनाती है — पछतावा, अपना काम बगड़ना और
दु नया म हँसी। दए गए चार वकल्प म से इनम से केवल एक ही आया है, इस लए यहाँ एक ही उत्तर सही है।
प्र.2 (2) “ चत्त म चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है? • प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख •
बना सोचे-समझे कए गए काय क असफलता • खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव • दु नया ारा क
जाने वाली नदा और उपहास
यहाँ एक से अ धक उत्तर सही ह। तारा (★) इन दो पर बनाइए —
बना सोचे-समझे कए गए काय क असफलता — यही मूल कारण है।
दु नया ारा क जाने वाली नदा और उपहास — यही तत्काल कारण है, क्य क पं क्त है “जग म होत हँसाय चत्त म चैन न
पावै”।
वकल्प सही / ग़लत कारण
प्रयास करने पर भी टाला न जा आं शक रूप से “दुःख कछु टरत न टारे” कुंड लया म है, पर वह बेचैनी का प रणाम है, कारण
सकने वाला दुख सही नह । इसे मुख्य कारण मानना ठ क नह ।
बना सोचे-समझे कए गए काय सही ★ पूरी कुंड लया इसी एक जड़ से शुरू होती है — “ बना बचारे जो करै”। काम
क असफलता बगड़ा, तभी बेचैनी आई।
खान-पान, सम्मान और राग-रंग का ग़लत क व ने अभाव क बात कही ही नह । उसने कहा क ये सब होते हुए भी “मन ह
अभाव न भावै” — मन को भाते नह ।
दु नया ारा क जाने वाली नदा सही ★ “जग म होत हँसाय” के तुरंत बाद ही “ चत्त म चैन न पावै” आया है — दोन
और उपहास एक ही पं क्त म जुड़े ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए: प्रश्न म ही लखा है क कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर हो सकते ह। इस लए दो तारे बनाना ग़लत
नह है — बस हर तारे का कारण आप बता सक।
प्र.3 (3) “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध लेइ” पं क्त ारा कौन-सी सलाह द गई है? • भ वष्य क सफलता के
लए अतीत क गल तय से सीखने क • अतीत क असफलताओं को भूलकर भ वष्य पर ध्यान दे ने क • अतीत
और भ वष्य दोन घटनाओं को समान रूप से याद रखने क • अतीत और भ वष्य दोन को भूलकर केवल
वतमान म जीने क
सही उत्तर है — अतीत क असफलताओं को भूलकर भ वष्य पर ध्यान दे ने क । इसके सामने तारा (★) बनाइए।
पंिक्त का सीधा अथ —
“बीती” = जो बीत चुक ा → “तािह िबसािर दे ” = उसे भ ुला दे
“आगे” = आने वाला समय → “की स ुिध लेइ” = उसकी स ुध ले
वकल्प सही / कारण
ग़लत
अतीत क गल तय से सीखने क ग़लत यह बात अ ज़रूर है, पर पं क्त म “सीखने” का नह , “ बसा र दे ”
यानी भुलाने का शब्द है।
अतीत क असफलताओं को भूलकर भ वष्य सही ★ पं क्त के दोन आधे भाग बलकुल यही कहते ह — पहला भूलने क ,
पर ध्यान दे ने क दूसरा आगे क सुध लेने क सलाह।
दोन को समान रूप से याद रखने क ग़लत क व दोन को बराबर नह रखता; वह बीते को छोड़ने और आगे को
पकड़ने के लए कहता है।
केवल वतमान म जीने क ग़लत “आगे क सु ध लेइ” म भ वष्य क चता स्पष्ट है, इस लए केवल
वतमान वाली बात नह बनती।
क्य : कुंड लया का अंत भी यही दोहराता है — “आगे को सुख होइ समु झ बीती सो बीती”। यानी “जो बीत गया सो
बीत गया” मान लेने से ही आगे का सुख बनता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया
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(4) “जो ब न आवै सहज म ताही म चत दे इ” पं क्त का क्या अथ है? • हम क ठनाइय और चुनौ तय से बचना
चा हए। • हम आराम क तलाश करने म मन लगाना चा हए। • हम असंभव और क ठन कायem
प्र.4
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चा हए।.c• o gl
पर ध्यान दे ना
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हम सहज जीवन पर ध्यान दे ना चा हए।
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सही उत्तर है — हम सहज जीवन पर ध्यान दे ना चा हए। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
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“जो बिन आवै सहज में” = जो काम सहज रूप से, स्वाभािवक ढं ग से बन रहा हो
“ताही में िच त दे इ” = उसी में मन लगाओ
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वकल्प सही / कारण
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ग़लत
aglकबचनाठनाइय और चुनौ तय से
चा हए
ग़लत क व भागने के लए नह कह रहा। वह कह रहा है क व्यथ क उलझन म मन मत
उलझाओ — यह भागना नह , समझदारी है।
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आराम क तलाश करने म मन ग़लत “सहज” का अथ आलस या आराम नह , स्वाभा वक है।
लगाना चा हए
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असंभव और क ठन काय पर ग़लत
a यह पं क्त के अथ का ठ क उलटा है।
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ध्यान दे ना चा हए
पं क्त म “सहज” शब्द स्वयं आया है और “ चत दे इe”m
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सही ★
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हम सहज जीवन पर ध्यान दे ना = मन लगाओ। दोन मलकर
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चा हए
. यही अथ दे ते ह।
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agl याद र खए: हद म सहज = स्वाभा वक, बना बनावट का, जो सहज ही बन जाए। इसे “आसान” या “आलसी”
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समझ लेना सबसे आम भूल है।
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प्र.5
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(ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
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se mयह चचा क ग त व ध है। इसम उत्तर “सही-ग़लत” नह , कारण महत्वपूण है। चचा इस तरह क जए —
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1. हर साथी अपना चुना हुआ वकल्प बोले और साथ ही कुंड लया क वह पं क्त पढ़े जससे उसे यह वकल्प सही लगा।
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2. जहाँ दो सा थय के उत्तर अलग ह, वहाँ पू छए — “तुम्ह कौन-सा शब्द ऐसा लगा जससे यह अथ नकला?”
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3. अंत म समूह तय करे क कौन-सा उत्तर पाठ से सबसे सीधे जुड़ा है और कौन-सा अपनी सोच से जोड़ा गया है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: “मने प्रश्न 2 म दो उत्तर पर तारा बनाया। एक — ‘ बना सोचे-समझे कए गए काय क असफलता’,
क्य क कुंड लया यह से शुरू होती है। दूसरा — ‘दु नया ारा क जाने वाली नदा और उपहास’, क्य क ‘जग म
होत हँसाय’ और ‘ चत्त म चैन न पावै’ एक ही पं क्त म साथ-साथ आए ह। मेरे मत्र अ नल ने केवल पहला चुना।
उसका कारण था क नदा तो बाद म होती है, पहले तो काम ही बगड़ता है। दोन बात ठ क ह — बस दे खने का ढं ग
अलग है।”
इससे क्या सीखा: क वता के अथ अकसर एक से अ धक होते ह। जसका कारण पाठ से जुड़ा हो, वह उत्तर मान्य
है — इसी लए प्रश्न म ही लखा गया है क एक से अ धक उत्तर हो सकते ह।
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 75
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और ल खए। (क) “ बना बचारे जो करै
सो पाछे प छताय। काम बगारे आपनो जग म होत हँसाय॥”
अथ — जो व्य क्त बना सोचे-समझे कोई काम कर डालता है, उसे बाद म पछताना पड़ता है। वह अपना बना-बनाया काम भी
बगाड़ लेता है और दु नया म हँसी का पात्र बन जाता है।
शब्द-दर-शब्द —
“िबना िबचारे जो करै” = जो िबना िवचार िकए काम करता है
“सो पाछे पिछताय” = वह बाद में पछताता है
“काम िबगारे आपनो” = अपना ही काम िबगाड़ लेत ा है
“जग में होत हँसाय” = संसार में उसकी हँसी होती है
इन दो पं क्तय म तीन बात एक साथ कही गई ह —
पछतावा — जो काम हो चुका, उसे लौटाया नह जा सकता; बचता है सफ़ अफ़सोस।
अपनी हा न — नुकसान कसी और का नह , “आपनो” यानी अपना ही होता है।
सामा जक हा न — लोग के बीच साख गर जाती है।
वचार: क व ने काम बगड़ने से पहले “प छताय” रखा है — यानी सबसे पहले चोट मन पर लगती है, फर काम
पर, फर समाज म। यह क्रम ही पं क्त को गहरा बनाता है। एक और सुंदरता दे खए — “ बना बचारे” और
“ बगारे”, “प छताय” और “हँसाय” — पूरी पं क्त ‘ब’ और ‘आय’ क ध्व नय से बँधी हुई है।
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आज के जीवन से उदाहरण: बना पढ़े परीक्षा म उत्तर लख दे ना, बना जाँचे कोई संदेश आगे भेज दे ना, गुस्से म
कोई बात कह दे ना — तीन म पहले जल्दबाज़ी होती है, फर पछतावा।
प्र.2 (ख) “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध लेइ। जो ब न आवै सहज म ताही म चत दे इ॥”
अथ — जो बीत गया उसे भुला दो और आने वाले समय क सुध लो। जो काम सहज रूप से बनता चला जाए, अपना पूरा मन उसी
म लगाओ।
“बीती तािह िबसािर दे ” = बीती हुई बात को भुला दे
“आगे की सुिध लेइ” = आ गे की स ुध ले, भिवष्य पर ध्यान दे
“जो बिन आवै सहज में” = जो काम सहज ही बन रहा हो
“ताही में िचत दे इ” = उसी में मन लगा
यह पं क्त दो सलाह एक साथ दे ती है — एक छोड़ने क , एक पकड़ने क । बीती बात पकड़े रहना मन क श क्त व्यथ खच करना
है; वही श क्त य द आगे के काम म लगे तो सफलता मलती है।
वचार: ‘सहज’ शब्द यहाँ बहुत सोच-समझकर रखा गया है। इसका अथ आलस नह , स्वाभा वक है — यानी जो
काम आपक क्षमता, प र त और साधन म बैठता हो। क व यह नह कहता क मेहनत मत करो; वह कहता है
क असंभव के पीछे भागकर मन मत बखेरो।
अपने शब्द म: “जो हो गया सो हो गया — अब आगे क्या करना है, यह सोचो। और जो काम अपने हाथ म है,
उसम पूरा मन लगाओ।”
मलकर कर मलान — पृष्ठ 76
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पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 नीचे स्तंभ 1 म कुछ पं क्तयाँ द गई ह, उनसे संबं धत अथ वाली स्तंभ 2 क पं क्तय से उनका मलान क जए—
स्तंभ 1: 1. जग म होत हँसाय चत्त म चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मन ह न भावै॥ 2. कह ग रधर
क वराय दुख कछु टरत न टारे। टकत है जय मा ह कयो जो बना बचारे॥ 3. ताही म चत दे इ बात जोई ब न
आवै। दुजन हँसै न कोइ चत्त म खता न पावै॥ 4. कह ग रधर क वराय यहै करु मन परतीती। आगे को सुख होइ
समु झ बीती सो बीती॥ स्तंभ 2: 1. जो काय बना वचार कए कया जाता है, वह लंबे समय तक मन म खटकता
रहता है और उसक पीड़ा से छु टकारा पाना मु श्कल होता है। 2. बना वचार के कए गए काय के कारण मन
अशांत रहता है। अ ा खान-पान, सम्मान या जीवन क खु शयाँ भी उस व्य क्त को सुख नह दे पात । 3. अपने
मन को इस बात पर व ास करना सखाओ क भ वष्य क खुशी को समझते हुए अतीत के दुख को भुलाकर
आगे बढ़ना चा हए। 4. ऐसे काय क जए क कसी बुरे व्य क्त को हँसने का मौका न मले और मन म कसी
प्रकार का दोष या अपराधबोध न हो।
सही मलान इस प्रकार है —
स्तंभ 1 (पं क्त) मलान स्तंभ 2 (अथ) पहचान का सूत्र
1. जग में होत हँस ाय िचत्त में चैन →2 बना वचार के कए गए काय के कारण मन दोन म खान-पान, सम्मान और
न पावै। खान पान सन्मान राग अशांत रहता है। अ ा खान-पान, सम्मान या राग-रंग तथा मन क अशां त क
रंग मनिहं न भावै॥ जीवन क खु शयाँ भी उस व्य क्त को सुख नह बात है।
दे पात ।
2. कह िगिरधर किवराय दुख →1 जो काय बना वचार कए कया जाता है, वह “खटकत है जय मा ह” = मन म
कछु टरत न टारे । खटकत है लंबे समय तक मन म खटकता रहता है और खटकता रहना; “टरत न टारे” =
िजय मािहं िकयो जो िबना उसक पीड़ा से छु टकारा पाना मु श्कल होता है। छु टकारा मु श्कल।
िबचारे ॥
3. ताही में िचत दे इ बात जोई →4 ऐसे काय क जए क कसी बुरे व्य क्त को हँसने “दुजन हँसै न कोइ” = बुरा व्य क्त
बिन आवै। दुजन हँसै न कोइ का मौका न मले और मन म कसी प्रकार का हँस न सके; “खता न पावै” = कोई
िचत्त में खता न पावै॥ दोष या अपराधबोध न हो। दोष न मले।
4. कह िगिरधर किवराय यहै →3 अपने मन को इस बात पर व ास करना “मन परतीती” = मन म व ास;
करु मन परतीती। आगे को सखाओ क भ वष्य क खुशी को समझते हुए “आगे को सुख” = भ वष्य क
सुख होइ समुिझ बीती सो बीती॥ अतीत के दुख को भुलाकर आगे बढ़ना चा हए। खुशी; “बीती सो बीती” = अतीत को
भुलाना।
संक्षेप में — 1 → 2, 2 → 1, 3 → 4, 4 → 3
मलान कैसे कर (तरीका): हर पं क्त म से एक ‘कुंजी-शब्द’ छाँट ली जए — जैसे खान-पान, खटकत, दुजन,
परतीती। फर स्तंभ 2 म वही भाव खो जए। इससे मलान बना अटके हो जाता है।
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सोच- वचार के लए — पृष्ठ 76
पाठ से
पाठ से
प्र.1 पाठ को एक बार पुन: प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए। (क) “ बना बचारे जो करै सो पाछे प छताय।” क वता
म बना वचार कए काय करने के क्या नुकसान बताए गए ह?
क वता म पाँच नुकसान गनाए गए ह। ये सब पहली कुंड लया म एक के बाद एक आते ह —
क्रम नुकसान क वता क पं क्त
1 पछतावा — बाद म अफ़सोस करना पड़ता है। “सो पाछे प छताय”
2 अपना काम बगड़ जाना — हा न कसी और क नह , अपनी ही होती “काम बगारे आपनो”
है।
3 संसार म हँसी — लोग मज़ाक उड़ाते ह, साख गरती है। “जग म होत हँसाय”
4 मन क बेचैनी — चत्त को चैन नह मलता; खान-पान, सम्मान, राग-रंग “ चत्त म चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग
कुछ भी अ ा नह लगता। मन ह न भावै॥”
5 न टलने वाला दुख — वह पीड़ा टालने पर भी नह टलती, मन म काँटे-सी “दुःख कछु टरत न टारे। खटकत है जय मा ह कयो
खटकती रहती है। जो बना बचारे॥”
ध्यान दे ने क बात: क व ने नुकसान को एक सीढ़ क तरह रखा है — पहले काम बगड़ता है, फर समाज हँसता
है, फर मन अशांत होता है, और अंत म वह अशां त ायी दुख बन जाती है। इसी क्रम के कारण छोट -सी कुंड लया
इतनी असरदार लगती है।
प्र.2 (ख) “ बना बचारे जो करै सो पाछे प छताय।” कुंड लया म जो बात सकड़ साल पहले कही गई थ , क्या वे
आपके लए भी उपयोगी ह? कैसे? उदाहरण दे कर समझाइए।
हाँ, ये बात आज भी उतनी ही उपयोगी ह — ब ल्क पहले से भी अ धक। कारण यह है क आज नणय लेने क ग त बहुत बढ़ गई
है। एक ‘टै प’ म पैसा भेजा जा सकता है, एक क्लक म संदेश हज़ार लोग तक पहुँच सकता है। जहाँ काम इतनी तेज़ी से होता है,
वहाँ “ बना बचारे” करने का ख़तरा और बड़ा हो जाता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया
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आज क त बना बचारे कया तो … सोचकर कया तो …
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पैस ा चला गया, पछतावा बचा
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मोबाइल पर आया संदेश — “₹5000 नंबर जाँचा, बड़ को बताया, ठगी से बच
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भे जए, लॉटरी लगी
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aसोशल िबना जाँचे आगे भेज दी — बाद में झूठी पहले स ाई जाँची, फर भेजा या नह
िनकली, शिमदं गी हईु भेजा
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गुस्से म मत्र को कही गई बात दोस्ती टू ट गई, मन दस तक गनकर बोले — बात भी कह द ,
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रश्ता भी बचा
परीक्षा म प्रश्न पढ़े बना उत्तर लखना पूरा उ त्तर ग़ ल त, अंक कट गए प्रश्न दो बार पढ़ा, सही उत्तर लखा
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l हुआ। साइ कल
नमूना उत्तर: “ पछले महीने मने बना सोचे अपनी साइ कल एक अनजान लड़के को दे द क्य
o म लौटा दे गा। वह शाम तक नह आया। घर म डाँट पड़ी और मुझे बहुत
वह पाँच.cमनट
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a s emदन मल तो गई, पर उस रात मुझे भी न द नह आई — ठ क वैसे ही जैसे क व ने कहा है, ‘खटकत है जय
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अगले
a मा ह’। अब म कोई भी चीज़ दे ने से पहले घर म पूछता ँ।”
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s जाती ह।
नष्कष: कुंड लया क भाषा पुरानी है, पर उसका सू है — पहले सोचो, फर करो। यही कारण है क ग रधर
क ये पं क्तयाँ आज भी कहावत क तरहlaबोली
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m a s emशब्दकोश से दे खकर
(ग) “खान पान सन्मान राग रंग मन ह न भावै॥” इस पं क्त म रेखां कत शब्द के अथ
coल खए। प्रत्येक के लए एक-एक उदाहरण भी द जए। gl
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पं क्त म रेखां कत शब्द ह — सन्मान, मन ह और भावै। शब्दकोश के अनुसार इनके अथ और उदाहरण —
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रेखां कत आज का शब्दकोश के अनुसार अथ उदाहरण (अपना वाक्य)
शब्द रूप
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सन्मान आदर, इज़्ज़त, प्र तष्ठा; कसी के गुण या पद के गणतंत्र दवस पर हमारी प्रधानाध्या पका को शक्षा
कारण दया गया मान
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के क्षेत्र म उनके काम के लए सम्मान मला।
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मनिहं मन को / मन ‘मन’ + ‘ ह’ (को) — अथात मन को।
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दाद क सुनाई कहानी मेरे मन को बहुत भाती है।
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भाता है / ‘भाना’ क्रया का रूप — रुचना, पसंद आना, बा रश म गरम पकौड़े सबको भाते ह।
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अच्छा लगता अ ा लगना
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पूरी पंिक्त का अथ —
“खान पान सन्मान राग रंग मनिहं न भावै”
= अच् छा खाना-पीना, आ द र-सम्मान औ र गीत -संगीत — कु छ भी उसके मन को अच् छा नही ं लगता।
ध्यान र खए: ‘भावै’ का अथ ‘भाव’ (क मत या मनोदशा) नह है। यहाँ यह भाना क्रया से बना है। इसी से आज का
मुहावरा बना — “यह बात मुझे नह भाई।”
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 77
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए— (क) आपने पढ़ा है क “ बना बचारे जो करै सो पाछे प छताय...।”
कल्पना क जए क आपके एक मत्र ने बना सोचे-समझे एक बड़ा नणय लया है। वह नणय क्या था और
उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे म एक रोचक कहानी अपने सा थय के साथ मलकर बनाइए और कक्षा म
प्रस्तुत क जए।
यह समूह-ग त व ध है। कहानी बनाते समय ये चार सी ढ़याँ ध्यान म र खए — इससे कहानी अपने आप रोचक बन जाती है।
1. जल्दबाज़ी का क्षण — मत्र ने बना सोचे क्या तय कया? (एक वाक्य म)
2. तुरंत का असर — शुरू म तो सब ठ क लगा। यह पाठक क उत्सुकता बनती है।
3. पछतावे का मोड़ — फर वह चूक सामने आई जो उसने नह सोची थी।
4. सीख — अंत म मत्र ने क्या समझा? कुंड लया क एक पं क्त यहाँ जोड़ द जए।
नमूना कहानी: “पाँच सौ रुपये का पौधा — मेरे मत्र रोहन को पौध का बहुत शौक है। एक दन मेले म एक
आदमी बोला — ‘यह वदे शी पौधा है, महीने भर म फल दे दे गा, केवल पाँच सौ रुपये।’ रोहन ने सोचा भी नह । उसने
अपनी पूरी जमा-पूँजी — वह पैसा जो वह साइ कल क घंट के लए बचा रहा था — तुरंत दे द । घर आकर उसने
गमला सबसे अ जगह रखा, रोज़ पानी दया, तीन दन तक दोस्त को बुला-बुलाकर दखाया। दसव दन पौधे क
प त्तयाँ झड़ने लग । पंद्रहव दन माली चाचा ने दे खकर कहा — ‘बेटा, यह तो साधारण झाड़ी है, इसक जड़ ही
काटकर लगाई गई थी। दो रुपये क चीज़ है।’ रोहन कुछ बोल नह पाया। उस रात उसे न द नह आई — जैसा क व
ने कहा है, ‘खटकत है जय मा ह कयो जो बना बचारे’। अगले दन उसने अपनी कॉपी के पहले प े पर लखा —
‘कोई भी चीज़ खरीदने से पहले एक रात सोचूँगा।’ आज भी वह प ा वैसे ही लगा है।”
प्रस्तु त का सुझाव: कहानी को तीन भू मकाओं म बाँट ली जए — मत्र, वक्रेता और सुनाने वाला (सूत्रधार)। मंच
पर संवाद बो लए और अंत म कुंड लया क पं क्त सब मलकर एक साथ बो लए। इससे प्रस्तु त यादगार बन जाएगी।
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) कल्पना क जए क “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध लेइ...।” क वता नम्न ल खत के लए लखी गई
है — • आप • आपका कोई सहपाठ • आपका कोई प रजन • आपके कोई शक्षक • कोई पक्षी • कोई पशु —
इनक कौन-कौन सी समस्याएँ ह गी? यह क वता उन्ह कैसे प्रे रत करेगी?
हर व्य क्त या प्राणी क बीती हुई पीड़ा अलग होती है, पर कुंड लया का संदेश सबके लए एक ही है — बीता हुआ छोड़ो, आगे क
सुध लो। नीचे छह के लए एक-एक संभा वत समस्या और प्रेरणा द गई है।
कसके संभा वत समस्या (जो बीत चुक ) क वता कैसे प्रे रत करेगी
लए
आप पछली परीक्षा म अंक कम आए; उसी क चता “बीती सो बीती” — बीता पिरणाम अब बदले ग ा नही ं। आज का एक घंटा
म नई पढ़ाई नह हो रही। पढ़ ना ही अगली परीक्षा बदल सकता है।
सहपाठी खेल म हार गया और अब ट म म उतरने से डरता “आगे की सुिध ले इ” — हार खेल का िहस्सा है। अगले अभ्यास पर
है। ध् यान दे , तो खेल िफर बनेग ा।
पिरजन दादाजी पुराने दन को याद करके उदास रहते ह। “आगे को सुख होइ” — पुर ानी यादे ं सहेिजए , पर आज के पोते-पोितयों
के साथ का सुख भी लीिजए।
िशक्षक कोई पाठ अ तरह नह करा पाए, इसका “जो बिन आवै सहज में ताही में िचत दे इ” — इस बार तरीका बदिलए ,
मलाल है। अगली क क्षा नया अवसर है।
कोई पक्षी आँधी म घ सला गर गया, तनके बखर गए। पक्षी िबखरे घोंस ले पर बैठा नही ं रहता — वह नया ितनका उठाता है।
किवता ठीक यही कहती है।
कोई पशु बछड़ा गरकर घायल हुआ, अब खड़ा होने से िगरना बीत गया; चलना बाकी है। एक -एक कदम आगे बढ़ ाना ही “आगे
डरता है। की सुिध” है।
क्य यह क वता सबके लए है: ग रधर ने कसी एक व्य क्त का नाम नह लया। उन्ह ने केवल त बताई —
“बीती”। इसी लए यह पं क्त व ाथ , बुजग, शक्षक और पक्षी — सब पर बराबर लागू हो जाती है। यही अ
नी त-क वता क पहचान है।
प्र.3 (ग) कल्पना क जए क आप एक ऐसे व्य क्त से मले ह, जो हमेशा बीती बात म खोया रहता है। आप उसे
समझाने के लए क्या-क्या कहगे?
ऐसे व्य क्त को उपदे श दे ने से नह , साथ दे ने से बदलाव आता है। बात इस क्रम से क जए —
1. पहले सु नए — “आपके साथ जो हुआ, वह सचमुच क ठन था।” बना सुने द गई सलाह कोई नह मानता।
2. फर सीमा दखाइए — “बीती बात को याद करने से वह लौटे गी नह , पर आज का समय ज़रूर चला जाएगा।”
3. फर आगे का काम द जए — कोई छोटा-सा काम, जो आज ही हो सके।
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
4. अंत म क वता सुनाइए — “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध लेइ।”
नमूना उत्तर (संवाद रूप म):
म — चाचाजी, आप रोज़ उसी पुराने नुकसान क बात करते ह। मन बहुत दुखता होगा।
वे — हाँ बेटा, वह गलती न होती तो आज सब अलग होता।
म — ठ क कहते ह। पर एक बात सो चए — वह दन अब लौट नह सकता, और आज का दन हमारे हाथ म है।
बीती बात याद करके हम उसे बदल नह रहे, बस आज को भी वैसा ही बना रहे ह।
वे — तो करूँ क्या?
म — आज एक छोटा काम क जए — बस एक। बगीचे के दो पौधे लगा द जए, या मुझे ग णत का वह तरीका
सखा द जए जो आप जानते ह। कल एक और काम। हमारे क व ग रधर ने यही कहा है — “बीती ता ह बसा र दे
आगे क सु ध लेइ।” और आगे वे यह भी कहते ह — “आगे को सुख होइ समु झ बीती सो बीती।” यानी सुख तभी
आएगा जब हम मान लगे क जो बीत गया, सो बीत गया।
ध्यान र खए: ‘भूल जाओ’ कहने का अथ यह नह क उनका दुख छोटा है। क व का आशय है — दुख को पकड़े
मत रहो। दुख को स्वीकार करना और उसम उलझे रहना, दो अलग बात ह।
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 77
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 नीचे दए गए रक्त ान म ‘ चत्त’ या ‘मन’ से जुड़े शब्द कुंड लय म से चुनकर ल खए— (पुस्तक म ‘मन
( चत्त)’ से जुड़े सात खान म से एक म ‘चैन’ पहले से भरा हुआ है।)
पुस्तक म एक खाना पहले से भरा है — चैन। बाक छह खान म कुंड लय से चुनकर ये शब्द ल खए —
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
खाने म ल खए कुंड लया क पं क्त ‘मन’ से जुड़ाव
चैन (पहले से भरा) “ चत्त म चैन न पावै” मन क शां त
िचत्त “ चत्त म चैन न पावै”, “ चत्त म खता न पावै” मन का दूसरा नाम
मनिहं “राग रंग मन ह न भावै” मन को
िजय “खटकत है जय मा ह” जी, हृदय — मन का पयाय
िचत “ताही म चत दे इ” ध्यान, मन लगाना
खता “ चत्त म खता न पावै” मन म रहने वाला दोष / अपराधबोध
परतीती “यहै करु मन परतीती” मन का व ास
और भी वकल्प: य द आप चाह तो इनके ान पर खटकत (मन म चुभना), भावै (मन को अ ा लगना), सु ध
(मन का ध्यान) या समु झ (मन का समझना) भी लख सकते ह — ये सब भी कुंड लय से ही लए गए ह और मन
से जुड़े ह।
दे खए तो: केवल बारह पं क्तय क दो कुंड लय म ‘मन’ के लए इतने शब्द आए ह — चत्त, चत, जय, मन,
मन ह। इसी से पता चलता है क इन कुंड लय का असली वषय बाहर का काम नह , भीतर का मन है।
क वता क रचना — पृष्ठ 78
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 (क) अब आप पाठ म द गई दोन कुंड लय को ध्यान से दे खए और अपने-अपने समूह म मलकर इनक
वशेषताओं क सूची बनाइए। अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके साथ साझा क जए। (ता लका — जो
वशेषताएँ दोन कुंड लय म ह / जो वशेषताएँ कसी एक कुंड लया म ह)
दोन कुंड लय को साथ रखकर प ढ़ए। सूची इस प्रकार बनेगी —
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया
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जो वशेषताएँ दोन कुंड लय म ह जो वशेषताएँ कसी एक कुंड लया म ह
omकुंड लया छं द है। l a se
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पं क्त म कई वस्तुओं क a
दोन म छह-छह पं क्तयाँ ह — पहले दो पं क्तय का दोहा, फर चार पहली म — “खान पान सन्मान राग रंग” क तरह एक ही
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पं क्तय का रोला। ची आई है।
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aदोनglका पहला शब्द ही अं तम शब्द भी है — “ बना बचारे … बना दूसरी म — वपरीत अथ वाले काल-शब्द साथ आए ह —
बचारे”, “बीती … बीती”। कुंडली क तरह गोल घूमकर वह आ जाना। “बीती” (अतीत) और “आगे” (भ वष्य)।
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em .
दोन म दोहे क दूसरी पं क्त का अंश तीसरी पं क्त के आरंभ म दोहराया पहली म — बना सोचे कए काम के दुष्प रणाम गनाए ag
गया है — “जग म होत हँसाय”, “ताही म चत दे इ”।
g l as गए ह (पछतावा, हँसी, बेचैनी, न टलने वाला दुख)।
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दोन क पाँचव पं क्त म “कह ग रधर क वराय” आता है — यानी क व दूसरी म — सीधा समाधान और आ ा-रूप दए गए ह —
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अपना नाम स्वयं जोड़ता है (छाप)। “ बसा र दे ”, “सु ध लेइ”, “ चत दे इ”, “करु”।
.
m a s em क बात है (“जग म
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दोन म तुक मलती है — प छताय/हँसाय/भावै/पावै, लेइ/दे इ, परतीती/ पहली म — समाज और लोक-लाज
बीती।
m . होत हँसाय”)।
l a seम अनुप्रास है — “ बना बचारे”, “प◌ाछे प छताय”, “बीती …
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दोन दूसरी म — “मन परतीती” यानी मन म व ास जमाने क
बसा र”। बात है, जो पहली म नह आती।
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दोन क भाषा ब्रज है और शैली नी तपरक — मानो कोई बड़ा हमसे पहली म — “दुःख कछु टरत न टारे” जैसी पीड़ा क गहराई
बातचीत कर रहा हो।
a s em है, जो दूसरी म नह है।
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दोन म बोलने पर बराबर समय लगता है — इसी लय के कारण ये पं क्तयाँ दूसरी म — “जो ब न आवै सहज म” जैसा जीवन-जीने का
कहावत बन गईं। व्यावहा रक सूत्र है।
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g पूरा-पूरा नभाया गया है।
.c (गोल घेरा)। इसी से इसका नाम कुंड लया पड़ा। दोन कुंड लय म यह aनयम
कुंड लया क सबसे बड़ी पहचान: जस शब्द से कुंड लया शुरू होती है, उसी पर वह समाप्त होती है — जैसे
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कुंडली
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(ख) नीचे एक स्तंभ म क वता क पं क्तय क कुछ वशेषताएँ द गई ह और उनसे संबं धत पं क्तयाँ दूसरे स्तंभ
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म द गई ह। क वता क वशेषताओं का सही पं क्तय से मलान क जए— क वता क वशेषताएँ: 1. पं क्त के
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अं तम शब्द क ध्व न आपस म मलती-जुलती है। 2. क व के नाम का उल्लेख कया गया है। 3. एक-दूसरे के
वपरीत वचार एक साथ आए ह। 4. एक ही वण से शुरू होने वाले एक से अ धक शब्द एक ही पं क्त म आए ह।
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क वता क पं क्तयाँ: 1. कह ग रधर क वराय यहै करु मन परतीती॥ 2. ताही म चत दे इ बात जोई ब न आवै।
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दुजन हँसै न कोइ चत्त म खता न पावै॥ 3. बना बचारे जो करै सो पाछे प छताय। 4. बीती ता ह बसा र दे आगे
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क सु ध लेइ। (संकेत— आप क वता क पं क्तय म कुछ और वशेषताएँ भी खोज सकते ह।)
emउत्तर a
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सही मलान इस प्रकार है —
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
क वता क वशेषता मलान पं क्त कैसे पहचान
1. पंिक्त के अंितम शब्द की ध्विन →2 ताही म चत दे इ बात जोई ब न आवै। “आवै” और “पावै” क अं तम ध्व न एक-
आपस में िमलती-जुल ती है। दुजन हँसै न कोइ चत्त म खता न सी है। इसे तुक या अंत्यानुप्रास कहते ह।
पावै॥
2. किव के नाम का उल्ले ख िकया →1 कह ग रधर क वराय यहै करु मन पं क्त म क व का अपना नाम आया है।
गया है। परतीती॥ इसे क व क छाप कहते ह।
3. एक-दू स रे के िवपरीत िवचार एक →4 बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध “बीती” = अतीत, “आगे” = भ वष्य —
साथ आए है।
ं लेइ। दो उलट दशाएँ एक ही पं क्त म।
4. एक ही वण से शुरू होने वाले एक →3 बना बचारे जो करै सो पाछे ‘ ब- ब’ और ‘पा-प’ क आवृ त्त। इसे
से अिधक शब्द एक ही पंिक्त में आए प छताय। अनुप्रास कहते ह।
है।
ं
संक्षेप में — 1 → 2, 2 → 1, 3 → 4, 4 → 3
संकेत के अनुसार कुछ और वशेषताएँ जो आप खोज सकते ह —
पुनरु क्त / आवृ त्त — “जग म होत हँसाय” और “ताही म चत दे इ” दो-दो बार आए ह।
वक्रता या चक्र — कुंड लया जस शब्द से शुरू होती है, उसी पर समाप्त होती है।
संवाद-शैली — “ बसा र दे ”, “सु ध लेइ”, “करु” — क व मानो सामने बैठकर हमसे कह रहा हो।
सू क्त / कहावत जैसा गठन — पं क्त इतनी छोट और पूण है क वह अकेली भी अथ दे दे ती है।
याद रखने क बात: अनुप्रास = एक ही वण क आवृ त्त (पं क्त के भीतर)। तुक/अंत्यानुप्रास = पं क्त के अंत म
मलती-जुलती ध्व न। दोन को आपस म मत मलाइए।
काल से जुड़े शब्द — पृष्ठ 78 और 79
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से भाषा क बात
प्र.1 “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध लेइ।” इस वाक्य म ‘बीती’ शब्द अतीत यानी ‘भूतकाल’ के काय को व्यक्त
कर रहा है और ‘आगे’ शब्द ‘भ वष्य’ के काय को व्यक्त कर रहा है। इसी प्रकार ‘वतमान’ समय म होने वाले
काय को ‘आज’ जैसे शब्द से व्यक्त कया जा सकता है। रोचक बात यह है क अनेक शब्द का प्रयोग बीते हुए
समय, आने वाले समय और वतमान समय को बताने वाले, तीन प्रकार के वाक्य म कया जा सकता है। (क)
नीचे कुछ शब्द दए गए ह। इनका प्रयोग करते हुए तीन प्रकार के ‘काल’ व्यक्त करने वाले तीन-तीन वाक्य
बनाइए— भूतकाल: कल, परस , पहले, पछला, बीते हुए। वतमान काल: आज, अभी-अभी, अब, हमेशा,
आजकल। भ वष्य काल: कल, परस , अगले दन/साल/महीने, आगामी (आने वाले समय म), जल्द ही।
हर स्तंभ के लए वाक्य नीचे दए गए ह। ध्यान द जए क काल केवल समय-शब्द से नह , क्रया के रूप से भी बनता है।
शब्द भूतकाल के वाक्य
कल कल हमारे व ालय म वा षक खेल- दवस हुआ था।
परसों परस दाद गाँव से आई थ और मेरे लए गुड़ क गजक लाई थ ।
पहले पहले इस मैदान म एक पुराना बरगद का पेड़ था।
िपछला पछला सप्ताह परीक्षा क तैयारी म बीत गया।
बीते हुए बीते हुए वष म मने तैरना सीख लया था।
शब्द वतमान काल के वाक्य
आज आज आकाश म बादल छाए ह।
अभी-अभी डा कया अभी-अभी च दे गया है।
अब अब म ग णत का प्रश्न हल कर रहा ँ।
हमेशा माँ हमेशा कहती ह क पहले सोचो, फर करो।
आजकल आजकल हमारे मोहल्ले म सबेरे योग क कक्षा लगती है।
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शब्द भ वष्य काल के वाक्य
कल कल हम सब च ड़याघर जाएँगे।
परसों परस हद क परीक्षा होगी।
अगले िदन/साल/महीने अगले महीने मेरी बड़ी बहन आठव कक्षा म आ जाएगी।
आगामी (आने वाले समय में) आगामी वषा-ऋतु म हम व ालय के मैदान म पचास पौधे लगाएँगे।
जल्दी ही जल्द ही हमारे गाँव तक पक्क सड़क बन जाएगी।
रोचक बात: हद का ‘कल’ और ‘परस ’ एक ही शब्द होते हुए भी भूतकाल और भ वष्य काल — दोन म चलते
ह। अंतर क्रया से पता चलता है — “कल म गया था” (भूत) और “कल म जाऊँगा” (भ वष्य)। इसी लए हद म
समय-शब्द अकेला काल तय नह करता।
प्र.2 (ख) आपने जो वाक्य बनाए ह, उन्ह ध्यान से दे खए। पहचा नए क इन वाक्य म कन शब्द से पता चल रहा है
क वाक्य म काय भूतकाल म हुआ, वतमान काल म हुआ है या भ वष्य काल म होगा? वाक्य म उन शब्द को
रेखां कत क जए।
ऊपर के वाक्य म जो शब्द रेखां कत ह, वही काल बताने वाले शब्द ह। ये सब क्रया के रूप ह। पहचान का नयम इस प्रकार है —
काल पहचान कराने वाले शब्द उदाहरण (रेखां कत भाग)
भूतकाल था, थे, थी,ं ‐आ / ‐ई / ‐ए में समाप्त होने वाली ि या, गया/ खेल- दवस हुआ था • दाद आई थ • पेड़ था • सप्ताह बीत
गई, चुक ा था, िलया था गया • सीख लया था
वतमान है, है,ं हू,ँ रहा है / रही है / रहे है,ं ता है / ती है बादल छाए ह • दे गया है • कर रहा ँ • कहती ह • लगती है
काल
भिवष्य ‐गा / ‐गी / ‐गे, होगा/होगी, जाएगा/जाएगी जाएँगे • होगी • आ जाएगी • लगाएँगे • बन जाएगी
काल
सूत्र —
ि या के अंत में थ ा / थे / थ ी ं → भूत काल
ि या के अंत में है / है ं / हूँ → वतमान काल
ि या के अंत में गा / गी / गे → भिवष्य काल
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जाँच कर दे खए: ऊपर वाले “कल” वाले दोन वाक्य ली जए — “कल खेल- दवस हुआ था” और “कल हम
च ड़याघर जाएँगे”। समय-शब्द दोन म एक ही है, पर काल अलग है। इससे साफ़ है क असली संकेत क्रया दे ती
है, समय-शब्द केवल सहायता करता है।
पाठ से जो ड़ए: कुंड लया क पं क्त “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध लेइ” म एक ही पं क्त म भूत (‘बीती’)
और भ वष्य (‘आगे’) दोन आ गए ह। क व ने बना व्याकरण पढ़ाए काल का खेल दखा दया।
आपक बात — पृष्ठ 79
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) “खटकत है जय मा ह कयो जो बना बचारे॥” का अथ है ‘ बना सोचे कए गए काय मन म चुभते रहते
ह।’ क्या आपने कभी ऐसा अनुभव कया है? उस घटना को साझा क जए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए उत्तर आपका अपना होना चा हए। अ े उत्तर म ये चार बात ज़रूर आनी चा हए —
1. घटना — क्या हुआ था, कब और कसके साथ।
2. जल्दबाज़ी — उस समय आपने क्या नह सोचा।
3. ‘खटकना’ — बाद म मन म क्या चुभता रहा। यही प्रश्न का असली कद्र है।
4. बदलाव — अब आप क्या अलग करते ह।
नमूना उत्तर: “ पछले वष कक्षा म मेरे मत्र सुहैल ने चत्रकला क प्र तयो गता जीती। मुझे लगा क उसने मेरा ही
वचार चुरा लया है। मने बना कुछ पूछे, सबके सामने कह दया — ‘यह चत्र इसका अपना नह है।’ बाद म पता
चला क उसने वह चत्र दो हफ़्ते पहले ही बना लया था और मने ही उसे दे खा नह था। मने माफ़ माँग ली, उसने
मान भी ली — पर वह बात महीन तक मेरे मन म चुभती रही। जब भी उसका चत्र द वार पर दखता, मुझे अपनी
वह जल्दबाज़ी याद आ जाती। यही तो क व कहते ह — ‘खटकत है जय मा ह कयो जो बना बचारे।’ अब मने तय
कया है क कसी पर आरोप लगाने से पहले उससे अकेले म एक बार पूछ ज़रूर लूँगा।”
क्य ऐसी बात ‘खटकती’ है: ग़लती का नुकसान तो सुधर सकता है, पर मन को यह याद रह जाता है क सोचने
का समय था और हमने नह सोचा। इसी अपराधबोध को ग रधर ने ‘खटकना’ कहा है — काँटे क तरह, जो
दखता नह पर चुभता रहता है।
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(ख) “बीती ता ह बसा र दे आगे क सु ध लेइ।” का अथ है ‘अतीत को भूलना और भ वष्य पर ध्यान दे ना
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चा हए।’ क्या आप इस बात से सहमत ह? क्य ? उदाहरण दे कर समझाइए।
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म इस बात से बड़े हस्से म सहमत ँ, पर एक शत के साथ — अतीत को भूलना नह , उसे पकड़े न रहना चा हए। बीती बात से
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सीख लेकर आगे बढ़ना सबसे अ ा रास्ता है।
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सहम त के कारण
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बीता समय बदला नह जा सकता; उस पर सोचते रहना समय
a परीक्षा हो चुक ी है। अब पच दोबारा नही ं िमले गा। उसी की िचंता में
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और मन दोन क हा न है। अगला िवषय भी िबगड़ जाएगा।
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िखलाड़ ी हारने के बाद मैद ान छोड़ दे ता तो कभी
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आगे का समय हमारे हाथ म है, इस लए श क्त वह लगनी
चा हए।
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ag lपु ाना दुख पकड़े रहने से रश्ते भी बगड़ते ह। दो िमत्र पुराने झगड़ े को भुल ा दे ं तो दोस्ती िफर बन जाती है।
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जहाँ थोड़ी असहम त है उदाहरण
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अतीत क सीख भूल जाना हा नकारक है। भूलना चा हए दुख को, िजस अनजान संदे श से एक बार ठगी हुई, वह याद रहे तो दोबारा ठगी
अनुभव को नह । a नही ं होगी।
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अ याद और इ तहास हमारी पहचान ह। दादी की कहािनयाँ, त्योहारों की यादे ं और दे श का इितहास — इन्हे ं
भूल ना ठीक नही ं।
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मे रा नष्कष: क व का आशय भी यही है। वे कहते ह — “आगे को सुख होइ समु झ बीती सो बीती”। यहाँ ‘समु झ’
शब्द बहुत महत्व का है — पहले समझो, फर छोड़ो। बना समझे छोड़ना भूलना है, समझकर छोड़ना समझदारी।
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(ग) पाठ म द गई दोन कुंड लयasके आधार पर आप अपने जीवन म कौन-कौन से बदलाव लाना चाहगे?
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दोन कुंड लय से जो सूत्र मलते ह, उन्ह रोज़ के जीवन के छोटे -छोटे नयम म बदला जा सकता है —
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कुंड लया का सूत्र जो बदलाव म लाऊँगा
“ बना बचारे जो करै सो पाछे कोई भी बड़ ा िनणय तुरंत नही ं लूँगा — कम से कम एक रात सोचूँगा या घर में बड़ ों से एक बार
प छताय” पूछूँगा।
“काम बगारे आपनो” काम शुरू करने से पहले उसकी छोटी-सी योजना बनाऊँ गा — क्या चािहए , िकतना समय लगेगा,
पहले क्या।
“जग म होत हँसाय” दू स रों की भूल पर हँस ूँगा नही,ं और अपनी भूल पर हँस ी से डरकर उसे िछपाऊँ गा भी नही ं — सुधार
लूँगा।
“खटकत है जय मा ह” गुस्से में कु छ कहने से पहले दस तक िगनूगँ ा, क्योंिक कही हुई बात वापस नही ं आती।
“बीती ता ह बसा र दे ” कम अंक या हार पर दुखी होकर बैठा नही ं रहूगँ ा; उसी िदन अगली तैयारी शुरू क रूँ गा।
“आगे क सु ध लेइ” हर रिववार अगले स प्ताह की एक छोटी-सी सूची बनाऊँ गा — क्या पढ़ ना है, क्या करना है।
“जो ब न आवै सहज म ताही म चत एक साथ दस काम पकड़ ने के बजाय एक काम पूरा करके अगला उठाऊँ गा।
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“दुजन हँसै न कोइ चत्त म खता न ऐसा कोई काम नही ं क रूँ गा िजसे बाद में िछपाना पड़ े।
पावै”
सुझाव: आठ बदलाव एक साथ मत उठाइए। इनम से केवल दो चु नए, उन्ह कॉपी के पहले प े पर ल खए और
महीने भर नभाइए। छोटा नयम जो नभ जाए, बड़ी सूची से कह अ ा है।
प्र.4 (घ) “खान पान सन्मान राग रंग मन ह न भावै॥” इस पं क्त म खान-पान, सम्मान और राग-रंग अ ा न लगने
क बात क गई है। आप इसम से कसे सबसे आवश्यक मानते ह? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
तीन म से म खान-पान को सबसे आवश्यक मानता ँ — पर तीन क अपनी-अपनी जगह है। नीचे तीन पर वचार दया गया है
ता क आप अपने मन का उत्तर चुन सक।
बात क्य आवश्यक कतनी
आवश्यक
खान- यह जीवन क पहली आवश्यकता है। भूखे पेट न पढ़ाई होती है, न खेल, न सेवा। शरीर चलेगा तभी मन सबसे आवश्यक
पान और काम चलगे।
सम्मान यह मनुष्य क दूसरी बड़ी आवश्यकता है। सम्मान मलने पर आत्म व ास बढ़ता है और व्य क्त समाज म दू स रे स्थान पर
अपनी जगह बना पाता है।
राग-रंग गीत-संगीत और उत्सव मन को ताज़ा करते ह। थका हुआ मन इन्ह से फर काम के लायक बनता है। तीसरे स्थान पर
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
मेरा कारण: क्रम इस तरह बनता है — पहले शरीर, फर मन, फर आनंद। सम्मान और राग-रंग तभी अथ रखते ह
जब पेट भरा हो। इसी लए म खान-पान को सबसे आवश्यक मानता ँ।
दूसरा पक्ष भी ठ क है: य द कोई कहे क सम्मान सबसे आवश्यक है, तो वह भी सही है। कारण — भोजन तो मल
जाता है, पर अपमान सहने वाला व्य क्त भीतर से टू ट जाता है। क व क पं क्त भी यही तो कहती है — जसक हँसी
उड़ी हो, उसे भरा थाल भी अ ा नह लगता। इस प्रश्न म आपका कारण ही आपका उत्तर है।
पंिक्त का असली संदे श —
किव यह नही ं कह रहे िक ये तीनों बेक ार है।
ं
वे कह रहे है ं — मन अशांत हो तो तीनों बेस्वाद हो जाते है ं।
इसिलए सबसे पहले सँभ ालने की चीज़ है — मन ।
हँसी — पृष्ठ 80
पाठ से आगे
पाठ से आगे मू ल्य- शक्षा
प्र.1 “जग म होत हँसाय” (क) कभी-कभी लोग दूसर क गल तय पर ही नह , उनके कसी भी काय पर हँस दे ते ह।
अपने समूह के साथ मलकर ऐसी कुछ तय क सूची बनाइए, जब कसी को आप पर या आपको कसी पर
हँसी आई हो।
यह समूह-ग त व ध है। सूची दो भाग म बनाइए — जब मुझ पर हँसी आई और जब मुझे कसी पर हँसी आई। नीचे नमूना सूची
द गई है; आप अपने अनुभव जो ड़ए।
जब कसी को मुझ पर हँसी आई जब मुझे कसी पर हँसी आई
कक्षा म ज़ोर से पढ़ते हुए एक शब्द ग़लत बोल दया। मत्र दौड़ते-दौड़ते फसलकर गर पड़ा।
खेल म गद पकड़ते-पकड़ते छू ट गई। कसी का जूता उलटे पैर म पहना हुआ था।
नया कुरता थोड़ा बड़ा था और सब दे खने लगे। कसी ने अध्या पका का नाम ग़लत बोल दया।
मंच पर क वता सुनाते समय एक पं क्त भूल गया। बहन ने चाय म चीनी क जगह नमक डाल दया।
ग णत के प्रश्न का उत्तर बलकुल उलटा नकला। छोटा भाई बड़ क नकल उतार रहा था।
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दे खने क बात: ऊपर क सूची म एक बात साफ़ दखती है — हम दूसर पर जन बात पर हँसते ह, वही बात अपने
साथ होने पर बुरी लगती ह। यही इस ग त व ध का असली उ े श्य है।
प्र.2 (ख) ऐसी दोन तय म आपको कैसा लगता है और दूसर को कैसा लगता होगा?
त मुझे कैसा लगता है दूसरे को कैसा लगता होगा
जब मुझ पर शिमदं गी होती है, चेहरा गरम हो जाता है, मन करता है कही ं हँसने वाले को लगता है क यह तो मज़ाक भर था; उसे
हँस ी होती है िछप जाऊँ । कई बार िफर वही काम करने से डर लगता है — अकसर पता ही नह चलता क सामने वाले को चोट
जैसे दोबारा मंच पर जाने से । लगी।
जब मैं िकसी उस क्षण मज़ ा आता है और साथी भी साथ हँस ते है।ं पर जब जस पर हँसा गया, उसे अपमान लगता है। कई बार वह
पर हँस ता हू ँ उसका उतरा हुआ चेहरा िदखता है, तो भीतर से अच्छा नही ं चुप हो जाता है, समूह से कट जाता है या ग़स्सा दखाकर
लगता। अपनी चोट छपाता है।
पाठ से जो ड़ए: कुंड लया कहती है — “जग म होत हँसाय चत्त म चैन न पावै”। यानी दु नया क हँसी सबसे पहले
मन का चैन छ नती है। तभी तो आगे लखा है क उसे फर खान-पान, सम्मान, राग-रंग — कुछ भी अ ा नह
लगता।
एक भेद याद र खए: साथ हँसना (हम सब मलकर मज़ेदार बात पर हँसे) और पर हँसना ( कसी एक को नशाना
बनाकर हँसे) — दोन अलग ह। पहला मत्रता बढ़ाता है, दूसरा चोट पहुँचाता है।
प्र.3 (ग) सो चए क कोई व्य क्त आपक कसी भूल पर हँस रहा है। ऐसे म आप क्या कहगे या क्या करगे ता क उसे
एहसास हो जाए क इस बात पर हँसना ठ क नह है?
ऐसे म न चल्लाना है, न चुप रह जाना है। शांत रहकर, साफ़ शब्द म अपनी बात कहना सबसे असरदार होता है। यह तरीका
अपनाइए —
1. पहले शांत हो जाइए — एक गहरी साँस ली जए। गुस्से म दया गया उत्तर बात बगाड़ दे ता है।
2. भूल स्वीकार कर ली जए — “हाँ, मुझसे ग़लती हुई।” इससे हँसने वाले के पास कहने को कुछ बचता ही नह ।
3. अपनी बात सीधे क हए — “मुझे इस पर हँसा जाना अ ा नह लग रहा।”
4. उसे उसक जगह पर र खए — “यही भूल तुमसे हो जाती तो तुम्ह कैसा लगता?”
5. बात को आगे बढ़ाइए — “अब बताओ, इसे सही कैसे कया जाए?” इससे हँसी सहयोग म बदल जाती है।
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नमूना उत्तर (संवाद):
साथी — (हँसते हुए) दे खो-दे खो, इसने ‘ऋ’ को ‘र’ पढ़ दया!
म — हाँ, मने ग़लत पढ़ा। अब सही प ँ गा। पर एक बात क ँ? इस तरह हँसने पर अगली बार बोलने म मुझे झझक
होगी।
साथी — अरे, म तो मज़ाक कर रहा था।
म — मुझे पता है तुम्हारा मन बुरा नह था। पर मज़ाक तभी अ ा लगता है जब दोन हँस। अभी तो सफ़ तुम हँस
रहे थे। चलो, तुम मुझे ‘ऋ’ का सही उ ारण सखा दो — फर हम दोन साथ हँसगे।
यह तरीका क्य काम करता है: हँसने वाले को अकसर यह पता ही नह होता क उसक हँसी चुभ रही है। जैसे ही
उसे दूसरे क जगह पर रखकर सोचने को कहा जाता है, उसे स्वयं एहसास हो जाता है। इसे सहानुभू त कहते ह —
और यह डाँट से कह अ धक असर करती है।
सोच-समझकर — पृष्ठ 80 और 81
पाठ से आगे
पाठ से आगे सु र क्षा
प्र.1 “ बना बचारे जो करै सो पाछे प छताय।” (क) आज के समय म कुछ लोग जल्द म काय कर दे ते ह या जल्द म
नणय ले लेते ह। कुछ ऐसी तयाँ बताइए जहाँ जल्दबाजी म नणय लेना या काय करना हा नकारक हो सकता
है।
जल्दबाज़ी सबसे अ धक वहाँ नुकसान करती है जहाँ कया हुआ काम वापस नह लया जा सकता। ऐसी कुछ तयाँ —
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त जल्दबाज़ी म क्या होता है संभा वत हा न
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सड़क पार करना
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mबना दाएँ-बाएँ देखे दौड़ लगाना; बना हेलमेट बाइक चलाना lasकोई नही ं कर सकता
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दुघ टना — िजसकी भरपाई
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aसंgदेशl
मोबाइल पर आया लक पर क्लक करना, ओ.ट .पी. बता दे ना, अनजान जमा पैस ा एक क्षण में चला जाना
क्यू.आर. कोड स्कैन करना
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अफ़ वाह फै लना, िकसी िनद ष को बदनामी, कभी-
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सोशल मीिडया बना जाँचे कोई ख़बर या तस्वीर आगे भेज दे ना
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कभी क़ ानूनी मुस ीबत
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परीक्षा
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प्रश्न पूरा पढ़े बना उत्तर लखना शुरू कर दे ना पूरा उ त्तर ग़ ल त; समय भी गया और अंक भी
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ग स्ु से में बोलना बना सोचे कड़वी बात कह दे ना िरश्ता टू टना — कही हुई बात लौटती नही ं
ख़राब या नक़ ली सामानe,m
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बचत का नुक सान
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कोई चीज़ खरीदना “आज ही आ ख़री दन” दे खकर तुरंत पैसा दे दे ना
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बना डॉक्टर से पूछे कोई भी गोली खा लेना तबीयत और िबगड़ ना
aglिकसी पर आरोप
दवा ले ना
बना पूरी बात जाने कसी को दोषी कह दे ना िनद ष को चोट और अपने मन में स्थायी पछतावा
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लगाना
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पहचान का सूत्र: कोई भी काम करने से पहले स्वयं से एक प्रश्न पू छए — “क्या यह वापस लया जा सकता है?”
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य द उत्तर ‘नह ’ है, तो वहाँ रुककर सोचना अ नवाय है। यही ग रधर क “ बना बचारे” वाली चेतावनी का आज का
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रूप है।
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a s em (ख) मान ली जए क आपको या आपके कसी प रजन को नीचे दए गए संदेश मलते ह। ऐसे म आप क्या
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प्र.2
a करगे? 1. आपका बक खाता बंद होने वाला है। 2. बधाई हो! आपने 10 लाख रुपये क लॉटरी जीती है। सत्यापन
के लए ₹5000 इस नंबर पर अभी भेज द। 3. गलती से आपके नंबर पर ₹1000 का रफंड भेजा है। कृपया रफंड
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वापस भेज द। 4. आपका सम काड बंद होने वाला है। के.वाई.सी. अपडेट करने के लए हम आधार और पैन क
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s म फँसा ँ। तुरंत ₹5000 इस नंबर पर भेज दो। 7. इस ऐप को डाउनलोड कर
फोटो भेज। 5. आपके मनपसंद मोबाइल पर 70 प्र तशत तक क छू ट, ऑफर खत्म होने से पहले यहाँ पेमट कर।
6. म तुम्हारा चाचा बोल रहा ँ। aे न
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और ₹1000 का कैशबैक a पाएँ। 8. यहाँ मुफ्त गफ्ट पाने का मौका है। इस लक पर क्लक कर और जानकारी
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दज कर। 9. आपको बना गारंट के तुरंत ₹50,000 का ऋण मल सकता है। अभी प्रोसे सग फ स भर। 10. इस
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emहै। इसे रफंड करने के लए ये
लक पर क्लक कर और ₹100 का मोबाइल रचाज पाएँ। 11. आपके ए.ट .एम. काड क वैधता समाप्त हो
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co क्यू.आर. कोड स्कैन कर। (* रा ीय साइबर क्राइम रपो टग पोटल—)agl
रही है। इसे तुरंत अपडेट करने के लए पन बताएँ। 12. आपका पेमट फँसा हुआ
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पुस्तक म हर संदेश के सामने “आप कर” वाला स्तंभ दया गया है। पूरी ता लका नीचे है —
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क्र. संदेश आप कर
1 आपका बक खाता बंद होने वाला है। ओ.ट .पी. कसी को न द। तुरंत कॉल काट द। अपने बक से संपक कर।
2 बधाई हो! आपने 10 लाख रुपये क लॉटरी जीती है। सं दग्ध वेबसाइट पर कोई भुगतान (पेमट) न कर। ऐसी वेबसाइट को
सत्यापन के लए ₹5000 इस नंबर पर अभी भेज द। साइबर क्राइम सेल म रपोट कर।
3 गलती से आपके नंबर पर ₹1000 का रफंड भेजा है। कसी अनजान को पैसा न भेज। अपने बक ऐप म सभी लेन-दे न क जाँच
कृपया रफंड वापस भेज द। कर। य द पैसा कट गया है तो तुरंत बक को सू चत कर।
4 आपका सम काड बंद होने वाला है। के.वाई.सी. इस प्रकार के कॉल को तुरंत काट द। बक से सीधे संपक कर। फोन पर
अपडेट करने के लए हम आधार और पैन क फोटो आधार या पैन या कोई व्य क्तगत जानकारी साझा न कर।
भेज।
5 आपके मनपसंद मोबाइल पर 70 प्र तशत तक क छू ट, सं दग्ध छू ट वाले या मुफ्त वाले झाँसे म न फँस। लक पर क्लक न कर।
ऑफर खत्म होने से पहले यहाँ पेमट कर।
6 म तुम्हारा चाचा बोल रहा ँ। े न म फँसा ँ। तुरंत व्य क्त क पहचान क पु ष्ट कर, तुरंत पैसे ांसफर न कर। प रवार के
₹5000 इस नंबर पर भेज दो। अन्य सदस्य से बात कर।
7 इस ऐप को डाउनलोड कर और ₹1000 का कैशबैक कसी अनजानी वेबसाइट से कोई ऐप डाउनलोड न कर। ऐप क समीक्षा
पाएँ। और रे टग क जाँच कर। सं दग्ध ऐप को फोन आ द से हटा द।
8 यहाँ मुफ्त गफ्ट पाने का मौका है। इस लक पर क्लक कसी सं दग्ध ऐड ( व ापन) पर क्लक न कर। अपने ब्राउजर म पॉप-
कर और जानकारी दज कर। अप ब्लॉकर चालू कर।
9 आपको बना गारंट के तुरंत ₹50,000 का ऋण मल केवल अ धकृत बक से संपक कर। ऋण मंजूरी फ स के नाम पर कसी
सकता है। अभी प्रोसे सग फ स भर। को पैसा न भेज। साइबर क्राइम सेल म 1930 नंबर पर सू चत कर।
10 इस लक पर क्लक कर और ₹100 का मोबाइल ऐसी कसी भी लॉटरी पर भरोसा न कर। इसके वषय म साइबर सेल को
रचाज पाएँ। सू चत कर।
11 आपके ए.ट .एम. काड क वैधता समाप्त हो रही है। ए.ट .एम. काड क जानकारी कसी के साथ साझा न कर। बक के असली
इसे तुरंत अपडेट करने के लए पन बताएँ। उपभोक्ता सहायता फोन नंबर पर संपक कर। ए.ट .एम. पन तुरंत बदल।
12 आपका पेमट फँसा हुआ है। इसे रफंड करने के लए ये कसी अ ात व्य क्त के भेजे क्यू.आर. कोड को स्कैन न कर। कसी
क्यू.आर. कोड स्कैन कर। सं दग्ध ग त व ध को तुरंत बक और पु लस को रपोट कर।
सारे बारह संदे शों का एक ही सूत्र —
रु को → जाँच ो → बड़ों को बताओ → तब कु छ करो।
ठग की सबसे बड़ ी ताक़ त आपकी जल्दबाज़ी है। वह हमेशा “त रु ंत ”, “अभी”, “आिख़री मौका” जै से शब्द
इसीिलए िलखता है।
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याद र खए — कोई भी स ा बक, कंपनी या सरकारी दफ़्तर फोन या संदेश पर कभी ओ.ट .पी., ए.ट .एम. पन
या पासवड नह पूछता। य द कोई पूछे, तो वही ठग है।
रा ीय साइबर क्राइम रपो टग पोटल — cybercrime.gov.in तथा हेल्पलाइन नंबर 1930।
पाठ से जो ड़ए: ठगी का पूरा जाल “ बना बचारे” काम करवाने पर ही टका है। य द हम एक मनट रुककर सोच
ल, तो जाल अपने आप टू ट जाता है। कुंड लया क सीख यहाँ सीधे-सीधे काम आती है।
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प्र.3 (ग) नीचे कुछ तयाँ द गई ह। इन तय म बना सोचे-समझे काय करने या नणय लेने के क्या प रणाम हो
सकते ह— • सोशल मी डया पर झूठा संदेश या असत्य समाचार पर भरोसा करके उसे सबको भेज दया। •
जल्दबाजी म बना हेलमेट के बाइक चलाने पर पु लस ने चालान काट दया। • बना माता- पता से पूछे ऑनलाइन
गेम पर पैसे खच कर दए।
त संभा वत प रणाम सही रास्ता
झूठा संदे श िबना जाँचे भेजने से पहले जाँ चए — ख़बर कस समाचार-सं ाक
अफ़ वाह तेज़ी से फै लती है और लोगों में डर है? तारीख़ क्या है? तस्वीर पुरानी तो नह ? संदेह हो तो न
सबको भेज दे ना
या ग़ स्ु सा पैद ा होता है।
भेज।
िकसी िनद ष व्यिक्त या समुद ाय को बदनामी
झेल नी पड़ ती है।
भेजने वाले पर भी भरोसा उठ जाता है —
“यह तो िबना जाँचे कु छ भी भेज दे ता है। ”
गंभीर मामलों में क़ ानूनी कारवाई भी हो
सकती है।
िबना हेल मेट बाइक दो मनट का समय बचाने के लए जान का जो खम मत
जुम ना भरना पड़ ता है — बचत का सीधा
चलाना और चालान ली जए। हेलमेट पहनकर ही नक लए।
नुक सान।
कटना
इससे बड़ ी बात — िसर की चोट जानले वा हो
सकती है। हेल मेट क़ ानून के िलए नही,ं जान
के िलए है।
घर में िचंता और डाँट; बाइक चलाने की
अनुमित भी िछन सकती है।
दुघ टना हो जाए तो बीमा का दावा भी अटक
सकता है।
िबना पूछे ऑनलाइन गेम कोई भी ऑनलाइन ख़च करने से पहले घर म बताइए। खेल
घर का पैस ा िबना बताए चला जाता है — कई का समय तय क जए और भुगतान क जानकारी कभी ऐप
पर पैसे खच करना
बार बहुत बड़ ी रकम।
म सहेजकर न र खए।
माता-िपता का भरोसा टू टता है, िजसे दोबारा
बनाना किठन होता है।
खेल की लत लग सकती है — पढ़ ाई, नी ंद
और खेल -कू द सब िबगड़ ते है।ं
काड की जानकारी ऐप में सहेज दी हो तो
आगे और ख़च होते रहते है।ं
तीन म एक ही जड़: तीन जगह व्य क्त ने काम पहले कया, सोचा बाद म। प रणाम भी तीन म वही है जो
कुंड लया कहती है — “सो पाछे प छताय” और “खटकत है जय मा ह”। नुकसान पैसे का भी होता है और मन क
शां त का भी।
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आज क पहेली — पृष्ठ 81 और 82
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 “खान पान सन्मान” इस पं क्त के तीन शब्द म केवल एक मात्रा का बार-बार उपयोग कया गया है। (आ क
मात्रा) ऐसे ही दो वाक्य नीचे दए गए ह जसम केवल एक मात्रा का उपयोग कया गया है— नीली नद धीमी थी।
च ट चीनी जीम गई। अब आप इसी प्रकार के वाक्य अलग-अलग मात्राओं के लए बनाइए। ध्यान रहे, आपके
वाक्य का कोई न कोई अथ होना चा हए। आप एक वाक्य म केवल एक मात्रा को बार-बार या बना मात्रा वाले
शब्द का ही उपयोग कर सकते ह। (मात्रा — आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)
नयम दो ह — (1) वाक्य म केवल एक ही मात्रा आए, (2) बाक़ शब्द बना मात्रा वाले ह , और वाक्य का कोई अथ ज़रूर
नकले। नमूना ता लका —
मात्रा वाक्य जाँच
आ ( ◌ा काका बाजार जाकर आम का-का, बा-जा-र, जा-क-र, आ-म, ला-या — सब म केवल ‘◌ा’ या बना मात्रा।
) लाया।
इ ( ि◌ ) कशन, इस चट पर दन लख। क-श-न, इ-स, च-ट, प-र, द-न, ल-ख — केवल ‘ि◌’।
ई ( ◌ी ) तीली गीली थी। ती-ली, गी-ली, थी — केवल ‘◌ी’।
उ ( ◌ु ) मुकुल, तुम गुड़ चुन। मु-कु-ल, तु-म, गु-ड़, चु-न — केवल ‘◌ु’।
ऊ ( ◌ू ) तू फूल छू , धूल न छू । तू, फू-ल, छू , धू-ल, न — केवल ‘◌ू’।
ऋ ( ◌ृ ) मृग तृण चर। मृ-ग, तृ-ण, च-र — केवल ‘◌ृ’। (यह सबसे क ठन मात्रा है, क्य क ‘ऋ’ वाले शब्द कम
ह।)
ए ( ◌े ) मेरे बेटे ने खेत म बेर दे खे। मे-रे, बे-टे , ने, खे-त, म, बे-र, दे -खे — केवल ‘◌े’।
ऐ ( ◌ै ) बैल पैदल सैर पर है। बै-ल, पै-द-ल, सै-र, प-र, है — केवल ‘◌ै’।
ओ ( ◌ो मोर बोल, कोयल सो। मो-र, बो-ल, को-य-ल, सो — केवल ‘◌ो’।
)
औ ( ◌ौ मौन रह, चौक पर न दौड़। मौ-न, र-ह, चौ-क, प-र, न, दौ-ड़ — केवल ‘◌ौ’।
)
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया
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वाक्य बनाने क तरक ब:
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पहले उस मात्रा वाले दस शब्द कागज़ पर लख डा लए — जैसे ‘◌ो’ के लए मोर, बोल, ढोल, खोल, चोर, गोल,
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s e mतोड़, कोयल।
दो, सो,
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agl रखने से वाक्य आसानी से बन जाता है।
फर उनम से दो-तीन जोड़कर वाक्य बनाइए। बीच म बना मात्रा वाले शब्द (न, पर, कर, चल, रह, तब, अब)
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क्रया चुनते समय आ ा-रूप (चुन, लख, बोल, दौड़) सबसे काम आता है, क्य क इनम अकसर अलग मात्रा
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नह जुड़ती।
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अनुस्वार (◌ं) और चंद्र बदु (◌ँ) मात्रा नह ह — पुस्तक के अपने उदाहरण “च ट चीनी जीम गई” म भी ‘◌ ’
आया है।
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gवह याद भी जल्द हो जाती
ग”.cम एक ही मात्रा के दोहराव से पं क्त म ढोल-सी लय आ जाती है — इसी लए
यह पहेली सखाती क्या है: क व शब्द केवल अथ के लए नह , ध्व न के लए भी चुनता है। “खान पान सन्मान
राग रंm a
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खोजबीन के लए — पृष्ठ 82
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पाठ से आगे प रयोजना
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आपने इस पाठ म ग रधर क वराय क कुंड लया “ बना वचारे जो करै....।” को पढ़ा। अब आप नीचे द गई
m इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके एक अन्य कहानी “ बना वचारे करो न काम” सुन सकते ह— (पुस्तक म क्यू.आर.
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agla कोड दया गया है।)
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यह सुनने और खोजने क ग त व ध है। पुस्तक के पृष्ठ 82 पर दए गए क्यू.आर. कोड को अपने शक्षक या घर के बड़ के साथ
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मलकर स्कैन क जए और कहानी “ बना वचारे करो न काम” सु नए।
सुनते समय ये बात नोट क जए —
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क्या दे खना है अपनी कॉपी म ल खए
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m .पात्रcoकौन-कौन ह? नाम और उनका स्वभाव — कौन जल्दबाज़ aथाg, कौन धै य रखने वाला।
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ag वह एक क्षण िजससे पूरी कहानी मुड़ गई।
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बना सोचे कौन-सा काम हुआ?
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उसका क्या प रणाम नकला? िकसे नुक सान हुआ और कै से ।
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mअपने शब्दों में एक वाक्य।
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कहानी क सीख क्या है?
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कुंड लया से मेल कुं डिलया की कौन-सी पंिक्त इस कहानी पर सबसे सटीक बैठती है?
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
आगे बढ़कर करने योग्य काम:
तुलना क जए — कहानी और कुंड लया, दोन एक ही बात कहती ह। पर कहानी घटना से समझाती है और
कुंड लया केवल दो पं क्तय म। दोन म कौन-सा तरीका आपको अ धक असरदार लगा और क्य — पाँच
पं क्तय म ल खए।
और खो जए — ग रधर क वराय क कुछ और प्र सद्ध कुंड लयाँ ढूँ ढ़ए — जैसे “लाठ म गुन बहुत ह सदा
रा खए संग” और “सुख के मीत सबै मल”। पुस्तकालय क हद काव्य-संग्रह पुस्तक म ये आसानी से मल
जाएँगी।
कहावत जुटाइए — अपने घर और मोहल्ले के बड़ से पू छए क वे “सोच-समझकर काम करने” पर कौन-सी
कहावत बोलते ह — जैसे “सौ बार सोचो, एक बार करो”, “जल्द का काम शैतान का”, “दूध का जला छाछ भी
फूँककर पीता है”। इनक सूची कक्षा म लगाइए।
सुनाइए — यही कहानी अपने शब्द म छोटे भाई-बहन को सुनाइए और अंत म कुंड लया क पं क्त जोड़
द जए।
सुरक्षा का सुझाव: इंटरनेट पर कोई भी कड़ी खोलते समय बड़ को साथ र खए। यह भी इसी पाठ क सीख है —
“ बना बचारे” कोई लक मत खो लए।
अध्याय — एक नज़र म
पाठ म ग रधर क वराय क दो कुंड लयाँ ह। पहली कुंड लया का संदेश है — बना सोचे-समझे कया गया काम बाद म
पछतावा दे ता है। ऐसा व्य क्त अपना काम भी बगाड़ लेता है और दु नया म हँसी का पात्र भी बनता है।
पहली कुंड लया आगे कहती है क जग क हँसी झेलने वाले का चत्त बेचैन रहता है। तब अ ा खान-पान, सम्मान और राग-
रंग — कुछ भी उसे अ ा नह लगता। यह दुख टालने से भी नह टलता और मन म काँटे-सा खटकता रहता है।
दूसरी कुंड लया का संदेश है — बीती बात को भुला दो और आगे क सुध लो। जो काम सहज रूप से बन रहा हो, मन उसी म
लगाओ। ऐसा करने से कोई दुजन हँस नह पाएगा और मन म कोई खोट या अपराधबोध नह रहेगा।
कुंड लया छह पं क्तय का छं द है — पहले दो पं क्तय का दोहा, फर चार पं क्तय का रोला। इसक सबसे बड़ी पहचान यह
है क जस शब्द से कुंड लया शुरू होती है, उसी शब्द पर वह समाप्त भी होती है — जैसे “ बना बचारे … बना बचारे”,
“बीती … बीती”।
दोहे क दूसरी पं क्त रोले क पहली पं क्त के रूप म दोहराई जाती है — “जग म होत हँसाय”, “ताही म चत दे इ”। इस
आवृ त्त से कुंड लया म लय और कड़ी-सी जुड़ाव बन जाता है।
भाषा ब्रज म त है और शैली नी तपरक — सीधी, सरल, कहावत जैसी। इसी कारण ग रधर क पं क्तयाँ आज भी लोक म
कहावत क तरह बोली जाती ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 6 ग रधर क वराय क कुंड लया AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द / अथ कुंड लया म प्रयोग अपने वाक्य म प्रयोग
पं क्त
बचारे िवचार करके , सोच- “ बना बचारे जो करै सो पाछे बना बचारे लया गया नणय अकसर उलटा पड़ता
समझकर प छताय” है।
प छताय पछताता है, अफ़ सोस करता “सो पाछे प छताय” समय बीत जाने पर प छताय कोई लाभ नह ।
है
होत हँसाय हँस ी का पात्र बनता है “जग म होत हँसाय” बना तैयारी मंच पर जाकर वह जग म होत हँसाय।
चत्त मन, अंतःकरण “ चत्त म चैन न पावै” परीक्षा से पहले उसका चत्त कह नह लगता था।
सन्मान सम्मान, आदर “खान पान सन्मान राग रंग” गुरु का सन्मान करना व ाथ का पहला धम है।
मन ह न भावै मन को अच्छा नही ं लगता “राग रंग मन ह न भावै” बुखार म उसे मीठा भी मन ह न भावै।
टरत न टारे टालने से भी नही ं टलता “दुःख कछु टरत न टारे” गलती से हुआ नुकसान टरत न टारे।
खटकत चुभता है, अखरता है “खटकत है जय मा ह” वह कड़वी बात आज भी मन म खटकत है।
जय जी, हृदय, मन “खटकत है जय मा ह” माँ क याद जय म बसी रहती है।
बीती बीता हुआ समय, अतीत “बीती ता ह बसा र दे ” बीती बात को याद करके दुखी होना बेकार है।
बसा र दे भुल ा दे “बीती ता ह बसा र दे ” पुराने झगड़े बसा र दे और आगे बढ़।
सु ध लेइ सुध ले , ध्यान दे , खबर रख “आगे क सु ध लेइ” अपने स्वास्थ्य क सु ध लेइ, तभी काम कर पाओगे।
चत दे इ मन लगा, ध्यान दे “ताही म चत दे इ” पढ़ते समय पूरा चत दे इ, तभी याद रहेगा।
दुजन बुर ा व्यिक्त, दुष्ट “दुजन हँसै न कोइ” दुजन क बात पर ध्यान मत द जए।
खता दोष, गलती, कमी “ चत्त म खता न पावै” स े मन से कए काम म कोई खता नह नकलती।
परतीती पतीित, िवश्वास, भरोसा “यहै करु मन परतीती” अपनी मेहनत पर परतीती र खए।
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