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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: वषा-बहार
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
83 – 95 21 51 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 44 pages
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: वषा-बहार
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 7 वषा-बहार के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह क वता छत्तीसगढ़ के क व मुकुटधर पाण्डेय
(1895–1989) क रचना है और वषा ऋतु के आनंद-भरे दृश्य का सजीव चत्र ख चती है। पृष्ठ 83 से 95 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से,
पं क्तय पर चचा, मलकर कर मलान, सोच- वचार के लए, अनुमान और कल्पना से, आपक रचनाएँ, शब्द से जुड़े शब्द, क वता क रचना, क वता
का स दय, वशेषण, ऋतु और शब्द, आपक बात, साक्षात्कार, वषा के दृश्य, वषा म ध्व नयाँ, वषा से जुड़े गीत, सृजन, आज क पहेली, झरोखे से,
साझी समझ और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 83 – 95
खं ड प्रश्न
21 51
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 85 और 86
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से
अ धक उत्तर भी हो सकते ह। (1) इस क वता म वषा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है? •
दुख और नराशा • आनंद और प्रसन्नता • भय और चता • क्रोध और वरोध
सट क उत्तर है — आनंद और प्रसन्नता। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
दुख और नराशा ग़लत क वता म कह भी दुख का एक भी दृश्य नह है — न बाढ़, न फ़सल क हा न, न कसी क परेशानी।
आनंद और सही ★ पूरी क वता खुशी के शब्द से भरी है — “मन को लुभा रही है”, “अ त ह प्रसन्न होते”, “करते ह नृत्य”,
प्रसन्नता “गाकर सुगीत प्यारे”, “खूब सुख से, आमोद छा रहा है”।
भय और चता ग़लत बजली और गरजते बादल डराने के लए नह , वषा के आगमन क सूचना दे ने के लए आए ह।
क्रोध और वरोध ग़लत क वता म कसी का कसी से कोई वरोध है ही नह ।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
क्य : ‘बहार’ शब्द का अथ ही है वसंत जैसा सुहावना समय। क व ने वषा को ‘बहार’ कहकर शीषक म ही अपना
भाव बता दया है — यह ऋतु आनंद क ऋतु है।
प्र.2 (2) “नभ म छटा अनूठ ” और “घनघोर छा रही है” पं क्तय का उपयोग वषा ऋतु के कस दृश्य को व्यक्त करने
के लए कया गया है? • बादल के घरने का दृश्य • बजली के गरने का दृश्य • ठं डी हवा के बहने का दृश्य •
आमोद छा जाने का दृश्य
सट क उत्तर है — बादल के घरने का दृश्य। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
‘नभ’ = आकाश
‘छटा अनूठी’ = अनोखी शोभा
‘घनघोर’ = घने -गहरे बादल
अथ — आकाश में गहरे बादल छा गए है ं और वह दृ श्य अनोखा लग रहा है।
क्य बाक वकल्प नह : बजली और ठं डी हवा क बात क वता म आगे क पं क्तय म आती है — “ बजली
चमक रही है” और “चलती हवा है ठं डी”। ‘आमोद’ का दृश्य तो बहुत बाद म, बाग वाले पद म आता है। ये दोन
पं क्तयाँ केवल आकाश का चत्र ख चती ह।
ध्यान द जए: ‘घनघोर’ म ‘घन’ का अथ ही बादल है। इस लए यह शब्द बादल के लए ही सबसे उपयुक्त है।
प्र.3 (3) क वता म वषा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है क्य क— • क व वषा को वशेष ऋतु मानता है। • वषा म
सभी जीव-जंतु स क्रय हो जाते ह। • वषा सबके लए सुख और संतोष लाती है। • वषा एक अ त अनोखी
प्राकृ तक घटना है।
इस प्रश्न के एक से अ धक उत्तर सही ह। सबसे मज़बूत उत्तर है — वषा सबके लए सुख और संतोष लाती है। इसके साथ क व
वषा को वशेष ऋतु मानता है और वषा म सभी जीव-जंतु स क्रय हो जाते ह — इन पर भी तारा (★) बनाया जा सकता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प नणय क वता से प्रमाण
क व वषा को वशेष ऋतु मानता सही ★ वषा को ‘बहार’ (वसंत) कह दे ना ही उसे वशेष मानना है — “इस भाँ त है अनोखी,
है वषा बहार भू पर”।
वषा म सभी जीव-जंतु स क्रय सही ★ मोर नाचते ह, मढक गाते ह, पपीहे फरते ह, हंस कतार बाँधते ह, जलचर प्रसन्न होते
हो जाते ह ह।
वषा सबके लए सुख और सबसे सही ★ पहली ही पं क्त — “वषा-बहार सब के, मन को लुभा रही है”। ‘सब के’ शब्द ही
संतोष लाती है इस वकल्प को सबसे ऊपर रख दे ता है।
वषा एक अद्भत अनोखी आं शक रूप से यह बात सच है, पर यह क वता का भाव नह है। क व वषा को ‘घटना’ क तरह
प्राकृ तक घटना है सही नह , ‘उत्सव’ क तरह दे खता है।
याद र खए: जब प्रश्न म लखा हो “एक से अ धक उत्तर हो सकते ह”, तो हर चुने हुए वकल्प के लए क वता से
एक पं क्त प्रमाण के रूप म दे सकना ज़रूरी है।
प्र.4 (4) “सारे जगत क शोभा, नभर है इसके ऊपर” इस पं क्त का क्या अथ है? • प्रकृ त म सभी जीव-जंतु एक-
दूसरे पर नभर ह। • वषा पृथ्वी पर ह रयाली और जीवन का मुख्य ोत है। • बादल क सुंदरता से ही पृथ्वी क
शोभा बढ़ती है। • हम वषा ऋतु से जगत क भलाई क प्रेरणा लेनी चा हए।
सट क उत्तर है — वषा पृथ्वी पर ह रयाली और जीवन का मुख्य ोत है। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
“इसके ऊपर” में ‘इस’ का अथ है — वष
पंिक्त का सीधा अथ — संसार की सारी सुंदरता वष पर िटकी हईु है।
क्य : वषा न हो तो न दयाँ-ताल सूख जाएँ, खेत बंजर हो जाएँ, पेड़ मुरझा जाएँ, पशु-पक्षी प्यासे मर। जस ह रयाली
को हम ‘शोभा’ कहते ह, वह पानी से ही बनती है। इस लए क व कह रहा है क जगत क शोभा का आधार वषा है।
दूसरा स्वीकाय उत्तर: “प्रकृ त म सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर नभर ह” — यह भी लया जा सकता है, क्य क
पूरी क वता यही दखाती है क वषा से पौधे, पौध से पक्षी और खेत से कसान — सब जुड़े हुए ह। पर पं क्त का
सीधा अथ दूसरा वकल्प ही है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
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(ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
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क आपने ये उत्तर ही क्य चुन?
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यह चचा क ग त व ध है। चचा म हर साथी को केवल यह नह बताना है क उसने क्या चुना, ब ल्क यह भी बताना है क क वता क
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कस पं क्त के कारण चुना।
चचा का तरीका —
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1. समूह का हर सदस्य बारी-बारी अपना उत्तर बताए।
2. उत्तर के साथ क वता क एक पं क्त प्रमाण के रूप म पढ़े ।
3. जहाँ उत्तर अलग-अलग ह, वहाँ दे खा जाए क कसका प्रमाण अ धक मज़बूत है।
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4. अंत म समूह तय करे क कस प्रश्न म सचमुच एक से अ धक उत्तर बनते ह।
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नमूना उत्तर: “प्रश्न 3 म मने ‘वषा सबके लए सुख और संतोष लाती है’ चुना, क्य क क वता क पहली ही पं क्त म ‘सब के’ शब्द
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gभीl सही है — मोर नाच रहे ह, मढक गा रहे ह। हम दोन ने मलकर तय कया क दोन उत्तर सही ह, क्य क जीव-जंतुओं का
आया है — “वषा-बहार सब के, मन को लुभा रही है”। मेरी मत्र ने ‘वषा म सभी जीव-जंतु स क्रय हो जाते ह’ चुना। उसका प्रमाण
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स क्रय होना भी उनके सुख का ही चह्न है।”
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सुझाव: चचा म कसी का उत्तर ‘ग़लत’ कहकरm
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का टए मत। पहले पू छए — “तुम्ह क वता क कौन-सी पं क्त से
aतक छपा मलेगा।
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ऐसा लगा?” अक्सर उसम भी एक अच्छा
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 86
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पाठ से
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gl पाठ से काव्य-स दय
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पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई o ह।mइन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका l a
प्र.1
m .c समूह म साझा क जए और ल खए— (क) “ फरते लखो पपीहे, ह ag
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क्या अथ समझ म आया? अपने वचार
ीष्म ताप खोते / करते ह नृg
se अपने
a वन म, दे खो ये मोर सारे।”
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m है; उधर वन म सारे मोर नाच रहे
भावाथ — दे खो, पपीहे इधर-उधर उड़ते फर रहे ह और गरमी क तपन से उन्ह छु टकारा मलeगया
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ह। co m gl a
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as ‘ पऊ- पऊ’ पुकारता रहता है; पानी बरसते ही उसक पुकार पूरी हो जाती है — इसी लए वह ‘ग्रीष्म ताप खोते’ यानी गरमी का कष्ट
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वस्तार से — ‘लखो’ का अथ है दे खो। क व पाठक को साथ लेकर दृश्य दखा रहा है। पपीहा वह पक्षी है जो वषा क प्रतीक्षा म
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भूलते हुए उड़ रहा है। मोर का नाचना वषा के आगमन का सबसे जाना-पहचाना चह्न है।
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इन पं क्तय क खूबी: क व ने यहाँeपशु
s m-प क्षय के माध्यम से बताया है क वषा का सुख केवल मनुष्य का सुख
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gl क साँस लेती है। ‘दे खो’ और ‘लखो’ जैसे शब्द से क वता म चत्रात्मकता आ
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नह है। पूरी सृ ष्ट एक साथ राहत
जाती है — पढ़ते ही आँख के सामने दृश्य बन जाता है।
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अलंकार: मोर का ‘नृत्य’ करना और पपीहे का ताप ‘खोना’ — दोन म प क्षय को मनुष्य क तरह भाव करते
दखाया गया है, अत: यहाँ मानवीकरण है।
प्र.2 (ख) “चलते ह हंस कह पर, बाँधे कतार सुंदर / गाते ह गीत कैसे, लेते कसान मनहर।”
भावाथ — कह हंस सुंदर पं क्त बनाकर चल रहे ह, और उधर खेत म कसान कतने मनोहर गीत गा रहे ह।
वस्तार से — ‘कतार बाँधना’ का अथ है पं क्त म चलना। हंस का पं क्तबद्ध चलना प्रकृ त के अपने अनुशासन और स दय को
दखाता है। ‘मनहर’ यानी मन को हर लेने वाला — कसान का गीत सुनने वाले का मन मोह लेता है। कसान गा इस लए रहा है
क्य क वषा उसके लए सबसे बड़ी खुशखबरी है; पानी आया तो बीज बोया जाएगा और फ़सल होगी।
इन दो पं क्तय को साथ रखने का अथ: एक ओर प्रकृ त (हंस) और दूसरी ओर मनुष्य ( कसान) — दोन वषा
के आने पर एक ही तरह प्रसन्न ह। क व दखाना चाहता है क वषा प्रकृ त और मनुष्य को एक ही सुख म जोड़ दे ती
है।
भाषा: “गाते ह गीत कैसे” म ‘कैसे’ प्रश्न नह , वस्मय है — अथात कतने सुंदर गीत गा रहे ह! ‘गाते ह गीत’ म
अनुप्रास (‘ग’ क आवृ त्त) भी है।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 86
पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे स्तंभ 1 म द गई ह, उनके भावाथ स्तंभ 2 म दए गए ह। स्तंभ 1 क
पं क्तय का स्तंभ 2 क उपयुक्त पं क्तय से मलान क जए — स्तंभ 1: 1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे ह
2. चलती हवा है ठं डी, हलती ह डा लयाँ सब 3. ताल म जीव जलचर, अ त ह प्रसन्न होते 4. फरते लखो पपीहे,
ह ीष्म ताप खोते 5. खलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है 6. चलते ह हंस कह पर, बाँधे कतार सुंदर | स्तंभ
2: 1. वषा ऋतु म तालाब के जीव-जंतु अ त प्रसन्न ह। 2. वषा हो रही है और झरने बह रहे ह। 3. वषा आने पर
लाख पपीहे गम से राहत पाते ह। 4. हंस क कतार प्रकृ त क सुंदरता और अनुशासन को दशाती ह। 5. वषा म
खले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृ त म सुगंध और ताजगी फैला रहे ह। 6. ठं डी हवाओं के कारण पेड़ क सभी
शाखाएँ हल रही ह।
सही मलान इस प्रकार है —
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स्तंभ 1 (क वता क पं क्त) मलान स्तंभ 2 (भावाथ)
1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे है ं →2 वषा हो रही है और झरने बह रहे ह।
2. चलती हवा है ठं डी, िहलती है ं डािलयाँ सब →6 ठं डी हवाओं के कारण पेड़ क सभी शाखाएँ हल रही ह।
3. तालों में जीव जलचर, अित है ं पसन्न होते →1 वषा ऋतु म तालाब के जीव-जंतु अ त प्रसन्न ह।
4. िफरते लखो पपीहे, है ं ग ीष्म ताप खोते →3 वषा आने पर लाख पपीहे गम से राहत पाते ह।
5. िखलता ग ल
ु ाब कै सा, सौरभ उड़ा रहा है →5 वषा म खले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृ त म सुगंध और ताजगी फैला रहे ह।
6. चलते है ं हंस कही ं पर, बाँधे कतार सुंद र →4 हंस क कतार प्रकृ त क सुंदरता और अनुशासन को दशाती ह।
मलान कैसे पहचान: हर पं क्त म एक कुंजी-शब्द होता है — झरने, डा लयाँ, जलचर, पपीहे, गुलाब, हंस। स्तंभ 2
म उसी शब्द को ढूँ ढ़ ली जए, मलान अपने आप हो जाएगा।
ध्यान द जए: स्तंभ 2 क तीसरी पं क्त म ‘लाख पपीहे’ लखा है। क वता का ‘लखो’ वास्तव म ‘दे खो’ है, ‘लाख ’
नह । मलान तो 4 → 3 ही रहेगा, पर सही अथ है — “दे खो, पपीहे इधर-उधर फर रहे ह और गरमी का ताप
भूल रहे ह।”
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 86 और 87
पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता को एक बार पुन: ध्यान से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) क वता म कौन-कौन गीत गा रहे ह
और क्य ?
क वता म तीन गीत गाने वाले ह — मा लन, मढक और कसान।
कौन क वता क पं क्त क्य गा रहे ह
मािलने ं “बागों में गीत सुंद र, गाती है ं वषा से बाग़ हरे-भरे हो गए ह और फूल खल उठे ह। जस बाग़ को वे सँवारती ह, वह सुंदर हो
मािलने ं अब” गया — इसी खुशी म वे गा रही ह।
मेंढक “मेंढक लुभा रहे है,ं गाकर वषा मढक क अपनी ऋतु है। पानी भरते ही उनका जीवन-काल शुरू होता है, इस लए वे टर-टर
सुग ीत प्यारे ” करते ह — क व को यही उनका ‘सुगीत’ लगता है।
िकसान “गाते है ं गीत कै से , ले ते वषा कसान के लए सबसे बड़ी खुशखबरी है। पानी आया तो बुवाई होगी और फ़सल होगी। खेत
िकसान मनहर” म काम करते हुए गीत गाने से थकान भी कम लगती है।
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इसका अथ: गीत यहाँ केवल आवाज़ नह , भीतर क खुशी का बाहरी रूप है। स्त्री, पशु और श्र मक — तीन का
गाना यह बताता है क वषा क खुशी सबक साझी खुशी है।
Try This: क वता म जो गा नह रहे पर खुश ह — मोर (नाचकर), गुलाब (महककर), हंस (कतार बाँधकर),
जलचर (प्रसन्न होकर) — उनक भी एक सूची बनाइए। इससे क वता का पूरा ‘उत्सव’ सामने आ जाएगा।
प्र.2 (ख) “ बजली चमक रही है, बादल गरज रहे ह” / “ताल म जीव जलचर, अ त ह प्रसन्न होते” — द गई दोन
पं क्तय को ध्यान से प ढ़ए। इनम वषा के दो अलग-अलग दृश्य दशाए गए ह। इन दोन म क्या कोई अंतर है? क्या
कोई संबंध है? अपने वचार ल खए।
हाँ, दोन म अंतर भी है और गहरा संबंध भी।
आधार “ बजली चमक रही है, बादल गरज रहे ह” “ताल म जीव जलचर, अ त ह प्रसन्न होते”
दृश्य कहाँ का है ऊपर — आकाश का नीचे — धरती के तालाबों का
कैसा भाव जगाता है तेज़, ज़ोरदार, थोड़ा डरावना शांत, कोमल, सुखद
कौन-सी इं द्रय आँख (चमक) और कान (गरज) मन का अनुभव (प्रसन्नता)
समय वषा के ठ क पहले का क्षण वषा हो जाने के बाद का क्षण
संबंध — दोन एक ही घटना क दो क ड़याँ ह। बजली चमकती है, बादल गरजते ह, फर पानी बरसता है; उसी पानी से सूखे पड़े
ताल भर जाते ह और उनम रहने वाले जलचर जीव — मछली, कछु ए, मढक — प्रसन्न हो जाते ह।
िबजली + गरज → वष → ताल भरे → जलचर पस
न्न
क व ने ऐसा क्य कया: पहले शोर, फर शां त — यह क्रम क वता को नाटक य बनाता है। साथ ही यह जीवन का
एक सच भी कहता है — जो चीज़ ऊपर से डरावनी लगती है, उसी से नीचे कसी का जीवन चलता है।
प्र.3 (ग) क वता म मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचा नए, सम झए और अपने शब्द म ल खए।
क वता क मुख्य बात यह है — वषा ऋतु सारे संसार के लए आनंद, नया जीवन और सुंदरता लेकर आती है, और जगत
क सारी शोभा इसी पर टक है।
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क व ने यह बात कहने के लए कोई उपदे श नह दया। उसने बस एक के बाद एक दृश्य दखा दए — आकाश म घरते बादल,
बरसता पानी, बहते झरने, ठं डी हवा म हलती डा लयाँ, गाती मा लन, प्रसन्न जलचर, ताप भूलते पपीहे, नाचते मोर, गाते मढक,
महकते गुलाब, कतार म चलते हंस और गीत गाते कसान। इन सब दृश्य को जोड़कर प ढ़ए तो एक ही बात नकलती है — वषा
आते ही सारी सृ ष्ट खुशी से भर उठती है।
अं तम दो पं क्तय म क व यह बात स्वयं कह भी दे ता है —
“इस भाँित है अनोखी, वष बहार भू पर
सारे जगत की शोभा, िनभर है इसके ऊपर।”
दो स्तर क बात: ऊपरी स्तर पर यह स दय क क वता है — वषा कतनी सुंदर लगती है। भीतरी स्तर पर यह
जल के महत्व क क वता है — पानी न हो तो न ह रयाली बचेगी, न पशु-पक्षी, न फ़सल। इसी लए इसे केवल ऋतु-
वणन कहकर छोड़ दे ना ठ क नह होगा।
प्र.4 (घ) “ खलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” इस पं क्त को पढ़कर एक खलते हुए गुलाब का सुंदर चत्र
म स्तष्क म बन जाता है। इस पं क्त का उ े श्य केवल गुलाब क सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अथ
भी हो सकता है?
इस पं क्त का उ े श्य केवल गुलाब क सुंदरता बताना नह है — इसम एक बड़ा अथ छपा है।
पहला अथ (सीधा): वषा के बाद बाग़ म गुलाब खल गया है और उसक सुगंध चार ओर फैल रही है।
दूसरा अथ (भीतरी): गुलाब अपनी सुगंध अपने पास नह रखता, उसे ‘उड़ा’ दे ता है — यानी बाँट दे ता है। जो सुख हम मला
है, उसे दूसर तक पहुँचाना ही उसका स ा उपयोग है।
तीसरा अथ: गुलाब वषा से ‘पाता’ है — पानी; और बदले म ‘दे ता’ है — सुगंध। प्रकृ त म हर जीव लेने और दे ने के इसी चक्र म
बँधा है।
भाषा क खूबी: क व ने ‘फैला रहा है’ न लखकर ‘उड़ा रहा है’ लखा। ‘उड़ाना’ म एक उदारता है, एक मस्ती है
— जैसे कोई खुले हाथ से बाँट रहा हो। यहाँ गुलाब को मनुष्य क तरह काम करते दखाया गया है, इस लए यह
मानवीकरण का सुंदर उदाहरण है।
ध्यान द जए: अगली ही पं क्त है — “बाग म खूब सुख से, आमोद छा रहा है”। यानी गुलाब क सुगंध पूरे बाग़ का
आनंद बन गई है। इससे साफ़ है क क व गुलाब को अकेली सुंदर वस्तु नह , आनंद बाँटने वाला मान रहा है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
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(ङ) क वता म से उन पं क्तय को चुनकर ल खए जनम सकारात्मक ग त व धय का उल्लेख कया गया है, जैसे
— ‘गीत गाना’, ‘नृत्य करना’ और ‘सुगंध फैलाना’। इन ग त व धय के आधार पर बताइए e
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इस क वता का
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उत्तरgl
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सकारात्मक ग त व धय वाली पं क्तयाँ —
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“बागों में गीत सुंद र, गाती है ं मािलने ं अब”
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“तालों में जीव जलचर, अित है ं पसन्न होते” पस न्न होना
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ताप से मुक्त होकर
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“िफरते लखो पपीहे, है ं ग ीष्म ताप खोते”
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“करते है ं नत्ृ य वन में, दे खो ये मोर सारे ” नत्ृ य करना
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गाना और मन लुभाना
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“मेंढक लुभा रहे है,ं गाकर सुग ीत प्यारे ”
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“िखलता ग ल
ु ाब कै सा, सौरभ उड़ा रहा है” िखलना और सुगंध फै लाना
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“बागों में खूब सुख से , आमोद छा रहा है” ag आनंद का छा जाना
सुंद र पंिक्त बनाकर चलना
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“चलते है ं हंस कही ं पर, बाँधे कतार सुंद र”
काम करते हुए गीतse m
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“गाते है ं गीत कै से , ले ते िकसान मनहर” गाना
a s em ‘वषा-बहार’ क्य — ‘बहार’ का अथ है वसंत, यानी वह ऋतु जसम फूल खलते ह, पक्षी गाते ह और चार ओर उल्लास
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शीषक
a रहता है। ऊपर क सूची दे खए — क वता म एक भी दुख या हा न का दृश्य नह है। गाना, नाचना, महकना, प्रसन्न होना, कतार
बाँधना — हर ग त व ध उल्लास क है। जब वषा भी वही सब कर दखाए जो वसंत करता है, तो उसे ‘बहार’ कहना ठ क ही है।
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इस लए: क व ‘वषा’ और ‘बहार’ — दो अलग ऋतुओं के नाम एक साथ जोड़कर कहना चाहता है क वषा कसी
भी तरह वसंत से कम सुंदर नह । यह शीषक ही क वता का भाव पहले से बता दे ता है।
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और कल्पना से — पृष्ठ 87
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पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए— (क) “सारे जगत क शोभा, नभर है इसके ऊपर” क वता म कहा गया है
क वषा पर सारे संसार क शोभा नभर है। वषा के अभाव म मानव जीवन और पशु-प क्षय पर क्या-क्या प्रभाव
पड़ सकता है?
वषा न हो तो सूखा (अकाल) पड़ जाता है और उसका असर हर जीव पर पड़ता है।
कस पर क्या-क्या प्रभाव
मानव पीने के पानी क कमी; कुएँ, हडपंप और नल सूखना; खेत म बुवाई न हो पाना; फ़सल सूखना और अनाज महँगा हो जाना;
जीवन पर कसान पर कज़ और तंगी; काम क तलाश म गाँव से शहर क ओर पलायन; गंदे पानी से बीमा रयाँ; ब क पढ़ाई छू ट
जाना।
पशुओं पर चरागाह क घास सूख जाना, चारे का संकट; तालाब सूखने से प्यास; दूध का उत्पादन घटना; कमज़ोरी और बीमारी से पशुओं
क मृत्यु।
पि यों पर पीने के पानी और क ड़े-मकोड़ का न मलना; घ सला बनाने और अंडे दे ने का समय बगड़ना; कई प क्षय का दूसरे क्षेत्र म उड़
जाना; पपीहा और मोर जैसे वषा- प्रय प क्षय का दखना बंद हो जाना।
जलचर ताल-पोखर सूखते ही मछ लयाँ, कछु ए और मढक सबसे पहले मरते ह — इनके पास जाने के लए दूसरी जगह नह होती।
जीवों पर
पेड़-पौधों पत्ते झड़ना, फूल-फल न आना, नए पौध का न उगना, ह रयाली क जगह धूल और सूखी ज़मीन।
पर
यही क व क बात है: क वता के सारे सुंदर दृश्य — नाचता मोर, महकता गुलाब, गाता कसान — पानी के बना
एक भी नह बचेगा। इसी लए क व ने कहा क जगत क शोभा वषा पर नभर है।
Check it yourself: अपने क्षेत्र म पछले कसी सूखे या कम बा रश वाले साल के बारे म घर के बड़ से पू छए
— पानी कहाँ से लाना पड़ा, फ़सल का क्या हुआ, पशुओं को चारा कैसे मला। यह असली जानकारी आपके उत्तर
को बहुत मज़बूत बना दे गी।
प्र.2 (ख) “ बजली चमक रही है, बादल गरज रहे ह” – बजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृ तक घटनाएँ ह।
इन घटनाओं का लोग के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है? (संकेत— आप सकारात्मक और नकारात्मक
यानी अ े और बुरे, दोन प्रकार के प्रभाव के बारे म सोच सकते ह।)
इन घटनाओं के अच्छे और बुरे — दोन तरह के प्रभाव होते ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
सकारात्मक (अ े ) प्रभाव नकारात्मक (बुरे) प्रभाव
वषा आने क पहली सूचना मल जाती है — कसान बुवाई क तैयारी शुरू खुले खेत म, पेड़ के नीचे या ऊँची जगह पर खड़े व्य क्त पर
कर दे ता है। बजली गरने का ख़तरा।
गरमी से राहत मलने क आशा बँधती है; मन प्रसन्न हो जाता है। बजली गरने से पशुओं क मृत्यु, पेड़ का जलना और घर
म आग लग जाना।
बजली क चमक से हवा क नाइ ोजन ऐसे रूप म बदल जाती है जो वषा बजली के उपकरण, ांसफ़ॉमर और मोबाइल टावर ख़राब
के साथ म म पहुँचकर खाद का काम करती है। हो जाना; बजली क आपू त बंद होना।
ब और क वय के लए यह प्रकृ त का सबसे रोमांचक दृश्य होता है — तेज़ गरज से छोटे ब े और पशु डर जाते ह; रात म यात्रा
मल्हार जैसे राग और अनेक लोकगीत इसी से जन्मे ह। और खेत का काम रुक जाता है।
सुरक्षा क बात: बजली कड़कने पर खुले मैदान म या अकेले खड़े पेड़ के नीचे मत रु कए। पक्के घर के भीतर चले
जाइए, खड़क से दूर र हए और बजली के उपकरण का प्लग नकाल द जए।
ध्यान द जए: क वता म क व ने केवल सुंदर पक्ष लया है, क्य क उसका उ े श्य वषा का उत्सव दखाना है। पर सच
यही है क एक ही घटना कसी के लए वरदान और कसी के लए ख़तरा हो सकती है।
प्र.3 (ग) “करते ह नृत्य वन म, दे खो ये मोर सारे”– इस पं क्त को ध्यान म रखते हुए वषा आने पर प क्षय और जीव
क खुशी का वणन क जए। वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते ह गे?
नमूना उत्तर —
पहली बूँद पड़ते ही मानो पूरे वन म खबर फैल जाती है। मोर अपने चमक ले पंख फैलाकर गोल-गोल घूमने लगता है और बीच-बीच
म ‘म्याऊँ-म्याऊँ’ जैसी लंबी पुकार लगाता है। पपीहा डाल-डाल फरता हुआ ‘ पऊ- पऊ’ बोलता है — जस पानी क वह प्रतीक्षा
कर रहा था, वह आ गया। मढक क चड़ और भरे हुए ग म कूद पड़ते ह और सारी रात टर-टर का समवेत गान करते ह। तालाब के
भीतर मछ लयाँ ऊपर आकर पानी क सतह पर छपाके मारती ह। कोयल और बुलबुल भीगी डा लय पर बैठकर पंख फड़फड़ाती ह
और च च से पानी क बूँद पीती ह। च टयाँ अपने अंडे लेकर ऊँची जगह क ओर पं क्त बाँधकर चल पड़ती ह। हरन और नीलगाय,
जो दन भर छाया म छपे रहते थे, अब खुले मैदान म नकल आते ह और भीगी घास चरते ह।
वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते ह —
आवाज़ से: मोर क पुकार, पपीहे क ‘ पऊ’, मढक क टर-टर, प क्षय का कलरव।
ग त से: नाचना, उड़ान भरना, कूदना, पानी म छपाके मारना।
व्यवहार से: घ सले बनाना, जोड़े बनाना, अंडे दे ने क तैयारी करना — क्य क वषा के बाद भोजन आसानी से मलता है।
शरीर से: पंख फैलाना, पंख फड़फड़ाकर पानी झाड़ना, धूल म लोटने क जगह भीगी म म बैठना।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: गरमी म इन जीव के लए पानी और भोजन दोन क कमी हो जाती है। वषा आते ही घास उगती
है, क ड़े-मकोड़े नकलते ह और तालाब भर जाते ह। यानी वषा उनके लए भोजन, पानी और संतान — तीन का
मौसम है। उनक खुशी केवल भाव नह , जीवन क ज़रूरत से जुड़ी है।
आपक रचनाएँ — पृष्ठ 87
पाठ से
पाठ से ले ख न
प्र.1 (क) क वता म वणन है क मोर नृत्य कर रहे ह और मढक सुगीत गा रहे ह। इस दृश्य को अपने शब्द म च त्रत
क जए।
यह अपने शब्द म दृश्य- चत्रण (शब्द- चत्र) लखने का प्रश्न है।
अ े उत्तर म क्या होना चा हए —
कम-से-कम तीन इं द्रय का प्रयोग — जो दखाई दे , जो सुनाई दे , जो गंध या स्पश से महसूस हो।
क वता के अपने शब्द बीच-बीच म — मोर, वन, मढक, सुगीत।
अपने आस-पास क एक स ी बात जोड़ना — जससे चत्र नकली न लगे।
नमूना उत्तर:
“आकाश म काले बादल घर आए ह और दन म ही हल्का अँधेरा-सा हो गया है। ठं डी हवा का पहला झ का आता है और आम के
पेड़ क डा लयाँ झूम उठती ह। तभी वन के कनारे से एक मोर नकलता है। वह अपने नीले-हरे पंख धीरे-धीरे खोलता है — जैसे
कसी ने रंग का पंखा फैला दया हो। बूँद उसके पंख पर मोती-सी चमकती ह। वह गोल घूमता है, गरदन उठाकर लंबी पुकार लगाता
है, और दूसरे मोर भी एक-एक करके नाचने लगते ह। नीचे, गाँव के कनारे वाले ग े म पानी भर गया है। वहाँ मढक क पूरी मंडली
बैठ है। पहले एक बोलता है — टर! फर दस-बीस मलकर टर-टर का ऐसा गान छे ड़ते ह क लगता है वन म कोई उत्सव चल रहा
हो। भीगी म क स धी गंध चार ओर फैली है। मोर का नृत्य और मढक का गीत — मानो वषा के स्वागत म प्रकृ त ने अपना
अपना कायक्रम प्रस्तुत कर दया हो।”
Tip: दृश्य- चत्रण म ‘बहुत सुंदर था’ जैसे शब्द मत ल खए। उसक जगह यह ल खए क क्या दखा — पाठक
स्वयं तय कर लेगा क सुंदर था।
प्र.2 (ख) वषा से जुड़ी कसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस क वता से जोड़कर एक कहानी तैयार क जए।
यह रचनात्मक लेखन का प्रश्न है। पहले कोई एक वषा-कथा चु नए, फर उसम क वता के दृश्य परो द जए।
चुनने के लए कुछ प्र सद्ध कथाएँ —
तानसेन और राग मल्हार — गाने से वषा हो जाने क कथा (आपक पुस्तक का नाम भी मल्हार इसी से जुड़ा है)।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
इंद्र और गोवधन — मूसलधार वषा से गाँव को बचाने क कथा।
मढक-मढक का ववाह — सूखे के समय गाँव म क जाने वाली लोक-परंपरा।
चातक (पपीहा) क कथा — जो केवल स्वा त नक्षत्र क बूँद पीता है, इसी लए वषा क प्रतीक्षा करता है।
कहानी बनाने का तरीका — (1) समय और जगह बताइए, (2) समस्या दखाइए — सूखा, (3) कोई पात्र कुछ करे, (4) वषा आए
और क वता के दृश्य दखने लग, (5) अंत म क वता क पं क्त जोड़ द जए।
नमूना उत्तर (संक्षेप म):
“बहुत पुरानी बात है। एक गाँव म लगातार तीन वष पानी नह बरसा। ताल सूख गए, मा लन के बाग़ के गुलाब मुरझा गए और वन
का मोर नाचना भूल गया। गाँव क बूढ़ दाद ने बताया क पहले जब वषा रूठ जाती थी, तब लोग मलकर मल्हार गाते थे। ब ने
ठान लया — वे रोज़ शाम को ताल के कनारे बैठकर गाएँगे। पहले दन कुछ नह हुआ। दूसरे दन भी नह । सातव दन जब वे गा रहे
थे, एक पपीहा पास क डाल पर आ बैठा और ‘ पऊ- पऊ’ बोल उठा। ब ने आकाश क ओर दे खा — नभ म छटा अनूठ थी,
घनघोर बादल छा रहे थे। बजली चमक , बादल गरजे और पहली बूँद माट पर गरी। उसी रात ताल भर गया, मढक ने गीत छे ड़
दया और भोर होते-होते वन म मोर नाचने लगे। मा लन फर से गाती हुई बाग़ म फूल चुनने आई और कसान गीत गाता हुआ खेत
क ओर चला। दाद ने मुस्कराकर कहा — ‘दे खा, सारे जगत क शोभा इसी वषा के ऊपर नभर है।’”
Tip: कहानी म क वता क कम-से-कम दो पं क्तयाँ ज्य -क -त्य र खए। इससे कहानी और क वता का जोड़ साफ़
दखाई दे गा।
प्र.3 (ग) इस क वता से प्रेरणा लेकर एक चत्र बनाइए। उसम आपने क्या-क्या बनाया है और क्य ?
यह चत्रकला और लेखन — दोन का प्रश्न है। चत्र आप बनाइए; यहाँ यह बताया गया है क उसम क्या-क्या आना चा हए और
उसका ववरण कैसे लख।
चत्र का भाग क्या बनाइए क वता क पं क्त जससे लया
ऊपरी भाग गहरे काले-नीले बादल, एक टे ढ़ चमकती बजली, तरछ बरसती बूँद “नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है”
(आकाश)
पहाड़ी / पृष्ठभू म पहाड़ से गरता झरना, हरे-भरे पेड़ जनक डा लयाँ एक ओर झुक ह “झरने भी ये बहे है”ं / “िहलती है ं डािलयाँ
सब”
बीच का भाग पंख फैलाकर नाचता मोर “करते है ं नत्ृ य वन में, दे खो ये मोर सारे ”
नीचे बाईं ओर पानी से भरा ताल, उसम मछ लयाँ और कनारे पत्थर पर बैठा मढक “तालों में जीव जलचर, अित है ं पसन्न
होते”
नीचे दाईं ओर खेत म हल या रोपाई करता कसान, मुँह पर मुस्कान “गाते है ं गीत कै से , ले ते िकसान मनहर”
कोने म बाग़ का एक खला हुआ गुलाब और टोकरी लए मा लन; आकाश म “िखलता ग ल
ु ाब कै सा…” / “बाँधे
कतार बाँधे उड़ते हंस कतार सुंद र”
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
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नमूना ववरण: “मने अपने चत्र म सबसे ऊपर घने बादल और एक चमकती बजली बनाई, क्य क क वता वह से शुरू होती है।
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बीच म नाचता मोर इस लए बनाया क वही वषा क खुशी का सबसे बड़ा चह्न है। नीचे भरा हुआ ताल और मढक बनाया, क्य क
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है। मने पूरे चत्र म. हरा, नीला और भूरा रंग अ धक भरा, क्य क ये तीन वषा ऋतु के रंग ह।”
क व कहता है क जलचर जीव अ त प्रसन्न होते ह। दाईं ओर कसान इस लए बनाया क वषा का सबसे बड़ा लाभ उसी को मलता
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a Tip: चत्र के नीचे एक पं क्त शीषक क तरह लख द जए — “सारे जगत क शोभा, नभर है इसके ऊपर।” चत्र
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का अथ तुरंत खुल जाएगा।
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शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 88
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पाठ से
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पाठ से शब्द क बात
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a glप्र.1 अपने समूह म चचा करके ‘वषा’ से जुड़े शब्द नीचे दए गए रक्त ान म ल खए— (पुस्तक म ‘वषा’ के साथ
जुड़े सात खान म से एक म ‘उत्साह’ पहले से भरा हुआ है।)
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पुस्तक म बीच म वषा लखा है और उससे सातlखाने जुड़े ह; उनम से एक म उत्साह पहले से भरा है। बाक छह खान म ‘वषा’
सुनते ही मन म आने वाले शब्द भरने ह।
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नमूना उत्तर (कोई छह चुन ली जए):
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शब्द वषा से उसका जोड़
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त्साह
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(पुस्तक म दया हुआ) पहली बूँद पड़ते ही मन म जो जोश भर जाता है।
हिरयाली वषा के बाद सूखी ज़मीन हरी घास से ढँ क जाती है।
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धीरे-धीरे पड़ती बूँद .कco
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आवाज़। a
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सोंधी महक a l म भीगी म से उठने वाली गंध।
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इंद धनुष वषा रुकने पर आकाश म बनने वाली सात रंग क कमान।
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िकसान / फ़ सल
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वषा से ही बुवाई होती है और अनाज मलता है।
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वषा आते ही स क्रय हो उठने वाले जीव।
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कागज़ की नाव ब का वषा से जुड़ा सबसे प्रय खेल।
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छाता / बरसाती वषा म भीगने से बचने क चीज़।
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सावन / म ार
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वषा का महीना और वषा का राग।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
यह ग त व ध क्य : ‘उत्साह’ कोई वस्तु नह , एक भाव है। पुस्तक ने यही उदाहरण दे कर संकेत दया है क आप
केवल वस्तुओं के नाम (छाता, बादल) न लख, भाव और अनुभव के शब्द भी लख — जैसे उमंग, ताज़गी, राहत,
बचपन।
Try This: अपने समूह के सब शब्द एक जगह लखकर उन्ह तीन ढे रय म बाँ टए — दखने वाले (बादल,
इंद्रधनुष), सुनाई दे ने वाले (गरज, टर-टर, रम झम) और महसूस होने वाले (ठं डक, उत्साह, स धी महक)। शब्द
क यह छँ टाई अगली बार क वता लखने म बहुत काम आएगी।
क वता क रचना — पृष्ठ 88
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 “वषा-बहार सब के, मन को लुभा रही है” — इस पं क्त म रेखां कत शब्द पर ध्यान द जए। ‘वषा’ एक ऋतु का
नाम है। ‘बहार’ ‘वसंत’ का दूसरा नाम है। यहाँ ‘वषा’ और ‘बहार’ को एक साथ दया गया है जससे वषा ऋतु क
सुंदरता को स्पष्ट कया जा सके। इस क वता म ऐसी ही अन्य वशेषताएँ छपी ह, जैसे— क वता क कुछ
पं क्तयाँ सरल वाक्य के रूप म ही ह तो कुछ म वाक्य संरचना सरल नह है। अपने समूह के साथ मलकर इस
क वता क अन्य वशेषताओं क सूची बनाइए। अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके साथ साझा क जए।
समूह-काय म जो सूची बन सकती है, वह इस प्रकार है —
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
वशेषता क वता से उदाहरण क्या असर पड़ता है
हर पद दो-दो पंिक्तयों का है और दोनों रही है – रही है; रहे है ं – बहे है;ं सब – अब; होते पढ़ने म लय बनती है और क वता आसानी से
पंिक्तयों के अंत में तुक िमलती है – खोते; सारे – प्यारे ; सुंद र – मनहर याद हो जाती है।
हर पंिक्त के बीच में एक िवराम “िबजली चमक रही है, / बादल गरज रहे है”ं पं क्त दो बराबर टु कड़ म बँट जाती है, जससे
(अल्पिवराम ) है गाते समय एक न त ताल मलती है।
कु छ पंिक्तयाँ िबलकु ल सरल वाक्य है ं “पानी बरस रहा है”, “िबजली चमक रही है” बात सीधे समझ म आ जाती है — जैसे कोई
खड़क से बाहर दे खकर बता रहा हो।
कु छ पंिक्तयों में शब्दों का क्रम उलटा है “तालों में जीव जलचर, अित है ं पसन्न होते” तुक मलाने के लए क्रम बदला गया है; इससे
(व्यितक्रम ) (सीधा क्रम — तालों में जलचर जीव अित क वता म एक पुराना, गीत जैसा रंग आ जाता
पसन्न होते है)ं है।
िवशेषण अपने िवशेष्य के बाद रखा गया है “छटा अनूठी”, “कतार सुंद र”, “सुग ीत जस शब्द पर ज़ोर दे ना है, वह पं क्त के अंत म
प्यारे ”, “हवा है ठं डी” आ जाता है।
तत्सम (संस्कृ त से आए ) शब्दों का पयोग नभ, जलचर, सौरभ, आमोद, मनहर, जगत, क वता को ग रमा और मठास मलती है।
शोभा
पाठक को साथ ले क र चलने वाले शब्द “लखो”, “दे खो”, “कै सा”, “कै से ” लगता है क व हम उँ गली पकड़कर दृश्य दखा
रहा है।
मानवीकरण — पकृ ित मनुष्य की तरह गल
ु ाब ‘सौरभ उड़ा रहा है’, मेंढक ‘सुग ीत’ गा प्रकृ त सजीव और अपनी-सी लगने लगती है।
काम करती है रहे है,ं हंस ‘कतार बाँधे ’ है ं
अनुपास — एक ही वण की आवृित्त “ग ◌ाते है ं ग ◌ीत”, “स ब के ... स ◌ुंद र... पं क्त कान को अच्छ लगती है।
स ◌ौरभ”
किवता का ढाँचा — पहले आकाश, नभ → पानी/झरने → ताल → वन → खेत कैमरे क तरह दृश्य धीरे-धीरे ऊपर से नीचे और
िफर धरती, िफर जल , िफर वन, अंत में → “सारे जगत की शोभा” दूर से पास आता है, और अंत म एक नष्कष
मनुष्य पर रुकता है।
साझा करते समय: हर वशेषता के साथ क वता क एक पं क्त ज़रूर प ढ़ए। बना उदाहरण के कही गई बात कक्षा
को समझ नह आएगी।
क वता का स दय — पृष्ठ 89
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 (क) नीचे क वता क कुछ पं क्तयाँ द गई ह। इनम कुछ शब्द हटा दए गए ह और साथ म मलते-जुलते अथ वाले
शब्द भी दए गए ह। इनम से प्रत्येक शब्द से वह पं क्त पूरी करके दे खए। जो शब्द उस पं क्त म जँच रहे ह उन पर
घेरा बनाइए। ________ बहार सब के, मन को लुभा रही है (बा रश, बरसात, बरखा, वृ ष्ट) / ________ म छटा
अनूठ , घनघोर छा रही है (आकाश, गगन, अंबर, व्योम) / बजली चमक रही है, ________ गरज रहे ह (मेघ,
जलधर, घन, जलद) / ________ बरस रहा है, झरने भी ये बहे ह (जल, नीर, स लल, तोय)
पहले याद र खए क क वता म मूल शब्द क्या थे — वषा, नभ, बादल, पानी। अब हर पं क्त म दए गए वकल्प को रखकर दे खए
क कौन-सा शब्द मात्राओं क लय म भी बैठता है और अथ म भी।
पं क्त मूल जो शब्द कारण
शब्द जँचते ह (घेरा
बनाइए)
________ बहार वष बरखा, बरसात ‘बरखा’ दो मात्राओं म ‘वषा’ जैसा ही चलता है और लोकगीत का शब्द होने से
सब के , मन को लुभा ‘बहार’ के साथ सुंदर लगता है। ‘बरसात’ भी चल जाता है। ‘बा रश’ बोलचाल का
रही है शब्द है, क वता क लय म कुछ भारी पड़ता है; ‘वृ ष्ट’ बहुत शास्त्रीय है और
‘बहार’ के साथ मेल नह खाता।
________ में छटा नभ गगन, अंबर दोन ‘नभ’ के पयाय ह और लय म बैठ जाते ह। ‘आकाश’ म एक मात्रा अ धक
अनूठी, घनघोर छा होने से पं क्त लंबी हो जाती है; ‘व्योम’ क ठन शब्द है, ब क क वता म कम
रही है जँचता है।
िबजली चमक रही है, बादल मेघ , घन ‘मेघ’ और ‘घन’ दोन बादल के प्र सद्ध पयाय ह और बहुवचन ‘गरज रहे ह’ के
________ गरज साथ ठ क बैठते ह। ‘जलधर’ और ‘जलद’ अथ म तो सही ह (जल को धारण
रहे है ं करने वाला), पर बोलने म भारी लगते ह।
________ बरस पानी नीर, जल ‘नीर’ ‘पानी’ क तरह ही सहज और कोमल है। ‘जल’ भी चलेगा, पर एक मात्रा
रहा है, झरने भी ये कम होने से लय थोड़ी ढ ली पड़ती है। ‘स लल’ और ‘तोय’ अथ तो पानी ही है,
बहे है ं पर ये शब्द आज कम बोले जाते ह।
यहाँ सीखने क बात: पयायवाची शब्द का अथ एक होते हुए भी उनका रंग अलग-अलग होता है। ‘बरखा’
लोकगीत का शब्द है, ‘वृ ष्ट’ शास्त्र का, ‘बा रश’ रोज़ क बोलचाल का। क वता म शब्द केवल अथ से नह , लय,
ध्व न और भाव से भी चुना जाता है।
कोई एक उत्तर सही-ग़लत नह : यह ग त व ध उत्तर ढूँ ढ़ने क नह , कान से परखने क है। जो शब्द रखकर आपको
पं क्त सबसे मीठ लगे, उस पर घेरा बनाइए — बस कारण बता पाइए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) अपने समूह म वमश करके पता लगाइए क कौन-से शब्द रक्त ान म सबसे अ धक सा थय को जँच रहे
ह और क्य ?
यह समूह-सवक्षण क ग त व ध है। इसे व्यव स्थत ढं ग से करने का तरीका —
1. चार पं क्तय के लए एक ता लका बनाइए, जसम हर वकल्प के सामने एक खाना हो।
2. समूह के हर सदस्य से पूछकर उसके चुने हुए शब्द के आगे एक नशान (।) लगाइए।
3. अंत म ग नए क कस शब्द को सबसे अ धक नशान मले।
4. फर पू छए — क्य ? केवल संख्या लखना अधूरा उत्तर है; कारण लखना ही असली काम है।
नमूना उत्तर: “हमारे समूह म आठ सदस्य थे। पहली पं क्त म पाँच सा थय ने बरखा चुना, दो ने बरसात और एक ने बा रश। कारण
यह बताया गया क ‘बरखा-बहार’ बोलने म एक साथ बहता है और लोकगीत म यही शब्द सुनने को मलता है। दूसरी पं क्त म छह
सा थय ने गगन चुना, क्य क ‘गगन म छटा’ बोलते ही पं क्त गाने जैसी लगती है। तीसरी पं क्त म सात सा थय ने मेघ चुना,
क्य क ‘मेघ गरजना’ मुहावरे क तरह पहले से सुना हुआ है। चौथी पं क्त म चार ने नीर और तीन ने जल चुना; एक साथी ने कहा
क ‘जल बरस रहा है’ म पं क्त छोट पड़ जाती है।”
नष्कष: जन शब्द को अ धक साथी चुनते ह, वे प्राय: वही होते ह जो पहले से सुने हुए ह — गीत , कहावत या
कहा नय म। इसका अथ यह है क भाषा केवल शब्दकोश से नह , कान से भी सीखी जाती है।
वशेषण — पृष्ठ 89 और 90
पाठ से
पाठ से भाषा क बात
प्र.1 “बाग म गीत सुंदर, गाती ह मा लन अब” — इस पं क्त म ‘सुंदर’ शब्द ‘गीत’ क वशेषता बता रहा है अथात यह
‘ वशेषण’ है। ‘गीत’ एक सं ा शब्द है जसक वशेषता बताई जा रही है, अथात यह ‘ वशेष्य’ शब्द है। (क) नीचे
द गई पं क्तय म वशेषण और वशेष्य शब्द क पहचान करके ल खए— 1. नभ म छटा अनूठ , घनघोर छा रही
है ( वशेषण — अनूठ , वशेष्य — छटा) 2. चलते ह हंस कह पर, बाँधे कतार सुंदर 3. मढक लुभा रहे ह, गाकर
सुगीत प्यारे 4. चलती हवा है ठं डी, हलती ह डा लयाँ सब
पूरी ता लका इस प्रकार भरी जाएगी —
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
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पं क्त वशेषण वशेष्य
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1. नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है अनूठी
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2. चलते है ं हंस कही ं पर, बाँधे कतार सुंद र
3. मेंढक लुभा रहे है,ं गाकर सुग ीत प्यारे प्यारे सुगीत
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4. चलती हवा है ठं डी, िहलती है ं डािलयाँ सब
em . ठं डी हवा ag
g l as
a
पहचानने का आसान तरीका: सं ा से पू छए — “कैसी?” / “कैसा?” / “कैसे?” जो उत्तर मले, वही वशेषण है
और जससे पूछा, वही वशेष्य है।
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e m.
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छटा कैसी? — अनूठ । कतार कैसी? — सुंदर । सुगीत कैसे? — प्यारे । हवा कैसी? — ठं डी ।
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a s emद जए: इस क वता म वशेषण प्राय: वशेष्य के बाद आया है — ‘छटा अनूठ ’, ‘कतार सुंदर’। साधारण गद्य
gl
ध्यान
a म हम ‘अनूठ छटा’, ‘सुंदर कतार’ कहते ह। क व ने तुक मलाने के लए क्रम बदल दया है।
m
पं क्त 1 म ‘घनघोर’ और पं क्त 4 म ‘सब’ भी वशेषण-जैसे शब्द ह — ‘घनघोर’ (कैसे बादल) और ‘सब’ ( कतनी
a s
m .co
डा लयाँ, यानी संख्यावाचक वशेषण)। इन्ह भी लख सकते ह, पर ता लका म एक-एक जोड़ी अपे क्षत है।
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(ख) नीचे दए गए वशेष्य के लए अपने मन से वशेषण सोचकर ल खए— 1. वषा 2. पानी 3. बादल 4.
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प्र.2
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डा लयाँ 5. गुलाब
c o m g l as
उत्तर . a
s e m
aglaहर वशेष्य के लए दो-दो वशेषण दए जा रहे ह (पुस्तक म दो-दो रक्त स्थान बने ह)।
se m
वशेष्य वशेषण वशेषण
com
वाक्य म प्रयोग
g l a
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(1) (2)
1. वष मूस लधार agl
िरमिझम रात भर मूसलधार वषा होती रही। / सुबह से रम झम वषा मन को भा रही है।
2. पानी ठं डा िनमल
co m
पहाड़ी झरने का ठं डा पानी बहुत मीठा था। / नद का नमल पानी तल तक दखाई दे
रहा था।
m .
m as e
.co काले घनघोर
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3. बादल काले बादल दे खकर ब े छत पर दौड़ पड़े। / घनघोर बादल छाते ही दन म अँधेरा हो
l a s गया।
ag c
4. हरी-भरी झूमती वषा के बाद आम क डा लयाँ हरी-भरी हो गईं। / हवा म झूमती डा लयाँ मानो ताली
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डािलयाँ बजा रही ह ।
. c oक्यारी a g
सुगंिधत m
5. ग ल
ु ाब िखला हुआ
a s e म खला हुआ गुलाब सबका ध्यान ख च रहा था। / सुगं धत गुलाब क महक
a g l कमरे म भर गई।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
Tip: वशेषण चुनते समय उसका लग और वचन वशेष्य के अनुसार बद लए — ‘ठं डा पानी’ पर ‘ठं डी हवा’;
‘हरी-भरी डा लयाँ’ पर ‘हरा-भरा बाग़’।
और भी वकल्प: वषा — पहली, सुहानी, तेज़; पानी — साफ़, गंदला, खारा; बादल — सफ़ेद, गरजते, बरसते;
डा लयाँ — पतली, फूल से लद , टू ट ; गुलाब — लाल, ताज़ा, काँटेदार। इनम से जो आपके अनुभव के सबसे पास
हो, वही ल खए।
ऋतु और शब्द — पृष्ठ 90 और 91
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 “ फरते लखो पपीहे, ह ीष्म ताप खोते” — ‘ताप’ शब्द ीष्म ऋतु से जुड़ा शब्द है। भारत म मुख्य रूप से छह
ऋतुए ँ क्रम से आती-जाती ह। लोग इन ऋतुओं म कुछ वशेष शब्द का उपयोग करते ह। नीचे दए गए शब्द को
पढ़कर कौन-सी ऋतु का स्मरण होता है? इन शब्द को ता लका म उपयुक्त ान पर ल खए— धूप, लू, बयार,
हमपात, वृ ष्ट, पाला, ताप, जाड़ा, झड़ी, ठठु रन, धुंध, कोहरा, आँधी, उमस, ह रयाली, बहार, तपन, जेठ, सावन,
रम झम, शीतलता, ओस, ठं डक, बादल फटना, कड़ाके क ठं ड
प ीस शब्द को छह ऋतुओं म इस तरह बाँटा जा सकता है —
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
ऋतु शब्द क्य
वसंत ऋतु बयार, बहार, हिरयाली ‘बयार’ = मंद-शीतल हवा; ‘बहार’ = फूल का खलना; ‘ह रयाली’ = नए पत्त
(सामान्यत: माच– का आना। यह ऋतु न गरम है, न ठं डी — सबसे सुहानी।
अपैल )
गीष्म ऋतु धूप, लू, ताप, तपन, जेठ, आँध ी ‘लू’ = गरम हवा; ‘जेठ’ = सबसे गरम हद महीना; ‘आँधी’ = गरमी के दन म
(सामान्यत: मई–जून) उठने वाला धूल भरा तूफ़ान।
वष ऋतु वृिष्ट, झड़ी, सावन, िरमिझम, ‘झड़ी’ = लगातार कई दन क बा रश; ‘सावन’ = वषा का महीना; ‘उमस’ =
(सामान्यत: जुल ाई– बादल फटना, उमस बा रश के बीच क चप चपी गरमी।
अगस्त)
शरद ऋतु ओस, शीतलता, ठं डक वषा जाते ही आकाश साफ़ हो जाता है, रात ठं डी होने लगती ह और सुबह घास
(सामान्यत: िसतंबर – पर ओस दखने लगती है।
अक्तूबर)
हेमंत ऋतु ध ंध
ु , कोहरा, जाड़ा सद शुरू होने का समय — सुबह-शाम कोहरा और धुंध छाने लगती है।
(सामान्यत: नवंबर –
िदसंबर)
िशिशर ऋतु पाला, िहमपात, िठठुर न, कड़ाके सबसे तीखी सद — ‘पाला’ = रात म जमने वाली बफ़ जैसी ओस; ‘ हमपात’ =
(सामान्यत: जनवरी– की ठं ड बफ़ गरना; ‘ ठठु रन’ = ठं ड से काँपना।
फरवरी)
कुछ शब्द एक से अ धक जगह जँच सकते ह: ‘धूप’ ग्रीष्म क भी है और श शर क सुहानी धूप भी; ‘ह रयाली’
वसंत म भी और वषा के बाद भी; ‘उमस’ ग्रीष्म के अंत म भी होती है; ‘ठं डक’ शरद, हेमंत — दोन म। ऐसे शब्द
को जहाँ भी रख, कारण बता पाना ज़रूरी है।
ऋतुओं का क्रम याद र खए: वसंत → ग्रीष्म → वषा → शरद → हेमंत → श शर → ( फर वसंत)। दो-दो महीने
क छह ऋतुएँ मलकर बारह महीने का एक वष बनाती ह।
आपक बात — पृष्ठ 91
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) वषा के समय आपके क्षेत्र म क्या-क्या प रवतन आते ह?
यह अपने अनुभव से लखने का प्रश्न है। उत्तर म प्रकृ त, लोग के काम और जीवन-शैली — तीन तरह के प रवतन आने चा हए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
कसम क्या-क्या बदलता है
प रवतन
पकृ ित में सूखी ज़मीन पर घास उग आती है; पेड़ धुलकर चमकने लगते ह; तालाब और नाले भर जाते ह; क ड़े-मकोड़े, कचुए और
मढक नकल आते ह; मोर, पपीहा और कोयल क आवाज़ बढ़ जाती ह।
खेती में खेत जोते जाते ह; धान क रोपाई शुरू होती है; बैल- ै क्टर दन भर चलते ह; कसान सबसे व्यस्त हो जाता है।
रास्तों और घरों में क ी सड़क क चड़ हो जाती ह; ग म पानी भर जाता है; छत टपकने लगती है; कपड़े सूखने म दो-दो दन लगते ह।
बाज़ ार और खान- भु े , पकौड़े और गरम चाय क दुकान बढ़ जाती ह; आम और जामुन आते ह; हरी स ब्जयाँ सस्ती हो जाती ह।
पान में
जीवन में छाता-बरसाती नकल आती है; ब े कागज़ क नाव चलाते ह; तीज-ह रयाली जैसे त्योहार मनाए जाते ह; मच्छर बढ़ने
से बीमा रय का डर भी रहता है।
नमूना उत्तर: “हमारे गाँव म वषा आते ही सबसे पहला बदलाव आवाज़ का होता है। जो मैदान गरमी म सूना पड़ा रहता था, वहाँ रात
भर मढक टर-टर करते ह। पीछे वाला ताल, जो जून तक सूखा था, दो ही दन म लबालब भर जाता है। क ा रास्ता क चड़ हो जाता
है, इस लए हम स्कूल घूमकर पक्क सड़क से जाते ह। खेत म रोपाई शुरू हो जाती है और शाम को औरत गीत गाती हुई लौटती ह।
नीम और पीपल के पत्ते धुलकर इतने चमकते ह जैसे कसी ने रगड़कर साफ़ कर दए ह ।”
Tip: ‘बहुत प रवतन आते ह’ लखकर मत छो ड़ए। एक ऐसी बात ल खए जो केवल आपके क्षेत्र म होती है —
कोई ताल, कोई नद , कोई त्योहार, कोई पेड़। यही आपके उत्तर को सबसे अलग बनाएगी।
प्र.2 (ख) बा रश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। कसी रोचक घटना को भी साझा क जए।
यह अपना नजी अनुभव सुनाने का प्रश्न है। इसे कहानी क तरह सुनाइए — समय, जगह, कौन-कौन थे, फर क्या हुआ, अंत म
आपको कैसा लगा।
अ े उत्तर म क्या हो —
एक ही घटना, वस्तार से — दस घटनाएँ जल्द -जल्द नह ।
कोई एक चत्र जो याद रह जाए — भीगा बस्ता, टपकती छत, क चड़ म फसलना।
अंत म एक पं क्त — उस दन क्या सीखा या कैसा लगा।
नमूना उत्तर:
“ पछले सावन क बात है। सुबह नकलते समय आकाश साफ़ था, इस लए म छाता घर ही छोड़ आया। छु के समय ऐसी झड़ी
लगी क स्कूल के बरामदे से बाहर पैर रखना मु श्कल हो गया। हम चार दोस्त ने तय कया क भीगते हुए ही चलगे। रास्ते के ग म
इतना पानी भर गया था क वे छोटे -छोटे तालाब लग रहे थे। मेरे मत्र रो हत ने अपनी कॉपी का एक पन्ना फाड़कर नाव बनाई और
पानी म छोड़ द — वह बहती हुई नाली तक चली गई और हम सब ता लयाँ बजाने लगे। तभी एक बात हुई जो म कभी नह भूलूँगा
— सामने क गली से एक बुजग दाद छाता लए आ रही थ । उन्ह ने हम भीगते दे खकर अपना छाता मेरी छोट बहन के सर पर कर
दया और खुद भीगती हुई हम घर तक छोड़ गईं। उस दन बा रश तो याद रही ही, दाद क वह बात उससे भी अ धक याद रह गई।”
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
सुरक्षा क बात: बहते पानी, भरे हुए नाले या बजली के खंभे के पास खेलना ख़तरनाक है। अनुभव सुनाते समय
यह भी बताइए क आपने क्या सावधानी रखी।
प्र.3 (ग) वषा ऋतु म आपको क्या-क्या करना अ ा लगता है और क्या-क्या नह कर पाते ह?
दोन पक्ष अलग-अलग ल खए — तभी उत्तर पूरा होगा।
जो करना अ ा लगता है जो नह कर पाते
बरामदे म बैठकर बा रश दे खना और गरम पकौड़े-चाय का आनंद मैदान म क्रकेट या कब ी खेलना — मैदान गीला और फसलन भरा
लेना रहता है
कागज़ क नाव बनाकर बहते पानी म छोड़ना साइ कल से दूर तक जाना — क चड़ म प हया फँस जाता है
पहली बा रश म जान-बूझकर भीगना और म क स धी महक धूप म कपड़े और अनाज सुखाना
लेना
छत से पानी क धार के नीचे हाथ रखना; इंद्रधनुष खोजना शाम को दे र तक बाहर खेलना — जल्द अँधेरा हो जाता है
घर पर बैठकर कहानी क कताब पढ़ना या चत्र बनाना नानी के गाँव या पक नक पर जाना — रास्ते बंद हो जाते ह
नमूना उत्तर: “मुझे वषा म सबसे अच्छा लगता है छत पर जाकर पानी क धार के नीचे हथेली रखना और नीचे गली म बहते पानी म
कागज़ क नाव छोड़ना। शाम को माँ जब पकौड़े बनाती ह, तो पूरा घर एक साथ बैठकर खाता है — यह बात केवल बा रश के दन
म ही होती है। पर म शाम को मैदान म क्रकेट नह खेल पाता, क्य क मैदान म पानी भरा रहता है। साइ कल भी नह चला पाता,
क्य क क े रास्ते पर क चड़ जम जाता है।”
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
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(घ) बा रश के मौसम म आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते ह? उन्ह कौन-कौन सी
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प्र.4
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समस्याएँ होती ह?
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जीव सुरक्षा कैसे करते ह क्या समस्याएँ होती ह
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गाय, भैसं , पेड़ के नीचे, बरामदे म या गोशाला म खड़े हो जाते ह; शरीर लगातार गीले रहने से खुर म घाव और चम-रोग; ठं ड
बकरी हलाकर पानी झाड़ते ह।
a g l लग जाना; भीगा चारा खाने से बीमारी।
कु त्ते और सी ढ़य के नीचे, खड़ी गाड़ी के नीचे या दुकान के छ ेम भीगने से ठं ड और काँपना; भोजन न मलना; पल्ल
िबिल्लयाँ
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दुबक जाते ह। का बह जाना।
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िचिड़ या, गौरै या,
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कबूतर .c नष्ट होना; उड़ने g
घने पेड़ के भीतरी हस्से म, छ े या रोशनदान म छप जाते तेज़ हवा-पानी से घ सले गर जाना; अंडे और चूज़ का
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ह; पंख शरीर से चपका लेते ह।
a म क ठनाई।
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glची ंिटयाँ और
a कीड़ े अंडे मुँह म दबाकर पं क्त बाँधकर ऊँची और सूखी जगह पर बल म पानी भर जाना; पूरी बस्ती का बह जाना।
चले जाते ह; बल का मुँह बंद कर दे ते ह।
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साँप और िबच्छू
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बल भरने पर बाहर नकलकर सूखी जगह — घर, अनाज मनुष्य के सामने आ जाने पर दोन के लए ख़तरा।
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l a se
क कोठरी, लकड़ी के ढे र — म शरण लेते ह।
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हम क्या कर सकते ह: छत या आँगन म एक ओर सूखी जगह बना द जए; घ सले वाले पेड़ क डाल न का टए;
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गली के कुत्ते- बल्ली को बरसात म बरामदे म जगह द जए; म के सकोरे म पानी रखते समय ध्यान र खए क
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उसम बरसाती पानी भरकर मच्छर न पनप।
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a gl क वता से जो ड़ए: क वता म मोर, मढक और पपीहे केवल खुश दखाए गए ह। पर सच यह है क उसी बा रश म
च ड़या का घ सला गर भी सकता है। एक ही ऋतु कसी के लए उत्सव और कसी के लए संकट हो सकती है —
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com g l a
.
यह दे ख पाना ही असली समझ है।
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(ङ) अपने समूह के साथ मलकर वषा ऋतु पर आधा रत एक क वता क रचना क जए। उसम अपने घर और
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आस-पड़ोस से जुड़ी हुई बात स म लत क जए।
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a semक वता बनाने का तरीका —
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1. पहले समूह म बैठकर वषा से जुड़े 15–20 शब्द एक कागज़ पर लख ली जए (छत, नाली, नीम, क चड़, छाता, पकौड़े, मढक,
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co agl
ताल…)।
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2. उनम से तुक मलने वाली जो ड़याँ छाँ टए — छत–रात, ताल–हाल, नाव–गाँव, धार–बहार।
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3. ‘वषा-बहार’ क तरह हर पद दो पं क्तय का र खए और पं क्त के बीच म एक वराम द जए।
4. हर पद म एक दृश्य र खए — पूरी क वता म उपदे श नह , चत्र होने चा हए।
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m .
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
5. अंत म एक पं क्त ऐसी र खए जो पूरी क वता का नष्कष हो — जैसे मूल क वता म “सारे जगत क शोभा…”।
नमूना उत्तर:
मेरे मुहल्ले की बरसात
काले-काले बादल आए, नीम की डाली झूमी
पहली बूदँ िगरी माटी पर, सोंधी खुशबू घूमी।
छत से िगरती धार िनराली, नीचे भरा है आँगन
कागज़ की नावें दौड़ ी ं, बच्चों का हुआ मन-भावन।
पीछे वाला सूखा पोखर, भर आया है सारा
मेंढक टर-टर गाते , लगता गीत हो प्यारा।
दादी चू े पर बैठी ं, पकौड़ े है ं छन रहे
सारे बच्चे गोल बैठे, िकस्से है ं सुन रहे।
खेत ों में हल चल पड़ े है,ं गाता जाए िकसान
पानी आया तो लौटी, मेरे गाँव की मुसकान।
Tip: क वता म वही बात र खए जो आपने सचमुच दे खी ह — अपनी गली का नाम, अपने पेड़ का नाम, अपने
पड़ोसी का काम। सुनी-सुनाई बात से बनी क वता फ क लगती है।
साक्षात्कार — पृष्ठ 92
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 “गाते ह गीत कैसे, लेते कसान मनहर।” मान ली जए क आप अपने व ालय क प त्रका के पत्रकार ह। आप
एक कसान का साक्षात्कार कर रहे ह जो वषा के आने पर अपने खेत म गीत गा रहा है। (क) अपने समूह के साथ
मलकर उस कसान के साक्षात्कार के लए कुछ प्रश्न ल खए। (संकेत — आपका क्या नाम है? आप क्या काम
करते ह? आप काम करते समय गीत क्य गाते ह? आ द)
साक्षात्कार के प्रश्न तीन तरह के होने चा हए — प रचय के, काम के और भाव के। सबसे अच्छे प्रश्न वे होते ह जनका उत्तर ‘हाँ’ या
‘नह ’ म न दया जा सके।
वग प्रश्न
पिरचय 1. आपका नाम क्या है और आप कस गाँव से ह?
2. आप कतने वष से खेती कर रहे ह?
3. आपके खेत म कौन-कौन सी फ़सल होती ह?
काम और वष 4. वषा आने से पहले आप खेत म क्या-क्या तैयारी करते ह?
5. पहली बा रश के बाद सबसे पहला काम कौन-सा करते ह?
6. य द कसी साल वषा दे र से आए तो आप क्या करते ह?
7. आज खेती म कौन-कौन सी नई चीज़ आ गई ह जो पहले नह थ ?
गीत और भाव 8. आप काम करते समय गीत क्य गाते ह?
9. यह गीत आपने कससे सीखा — पताजी से, दाद से या साथी कसान से?
10. इस गीत के बोल क्या ह? क्या आप हम एक कड़ी सुना सकते ह?
11. गीत गाने से काम म क्या फ़क पड़ता है?
12. वषा क पहली बूँद खेत पर पड़ते ही आपके मन म क्या आता है?
आगे की बात 13. आप चाहते ह क आपके ब े भी खेती कर? क्य ?
14. हम शहर और स्कूल के ब े कसान के लए क्या कर सकते ह?
साक्षात्कार लेने के नयम: पहले अपना प रचय द जए और अनुम त ली जए; एक बार म एक ही प्रश्न पू छए; उत्तर
बीच म मत का टए; उत्तर सुनकर उससे नकलने वाला अगला प्रश्न पू छए; अंत म धन्यवाद क हए।
प्र.2 (ख) अपने समूह के साथ मलकर इस साक्षात्कार को अ भनय ारा प्रस्तुत क जए। आपके समूह का कोई
सदस्य कसान क भू मका नभा सकता है। अन्य सदस्य पत्रकार क भू मका नभा सकते ह।
यह कक्षा म करने क ग त व ध है। तैयारी इस तरह क जए —
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
भू मकाएँ बाँ टए: एक कसान, दो-तीन पत्रकार, एक ‘कैमरा/माइक’ पकड़ने वाला और एक जो संवाद लखता जाए
( रपोटर)।
साम ी: गमछा या पगड़ी ( कसान के लए), कागज़ क कॉपी और पेन (पत्रकार के लए), खेत दखाने के लए पीछे बना हुआ
चाट।
क्रम: स्वागत → प रचय → प्रश्न → कसान का एक गीत → धन्यवाद।
नमूना संवाद:
पत्रकार: नमस्ते चाचा! हम िव ालय की पित्रका के िलए बात करना चाहते है।ं क्या दो िमनट िमलेगं े?
िकसान: आइए-आइए िबिटया, बैिठए। मेड़ पर बैठ जाइए, पर सँभलकर — गीली है।
पत्रकार: आपका नाम और आपका गाँव?
िकसान: रामदीन, गाँव बरगदही। तीस बरस से यही खेत जोत रहा हूँ, जै से मेरे बाबूजी जोतते थे ।
पत्रकार: अभी आप गा रहे थे । काम करते समय गीत क्यों गाते है?ं
िकसान: (हँसकर) रोपाई में कमर दुखती है, िबिटया। गीत गाओ तो पता ही नही ं चलता िक कब आधा खेत हो
गया। और िफर, आज पानी आया है — आज न गाएँ तो कब गाएँ?
पत्रकार: यह गीत आपने िकससे सीखा?
िकसान: अपनी अम्मा से। वे सावन में यही गाती ं थी ं। अब मेरी बहू गाती है।
पत्रकार: पहली बूदँ खेत पर पड़ ती है तो मन में क्या आता है?
िकसान: लगता है कोई बहुत िदनों बाद घर लौटा हो। जून भर आसमान दे खते -दे खते आँखे ं थक जाती है।ं बूदँ
िगरी नही ं िक सारी थकान उतर जाती है।
पत्रकार: बहुत-बहुत धन्यवाद चाचा। एक कड़ ी सुना दीिजए, हम अपनी पित्रका में छापेंगे।
िकसान: (गाते हुए) “बरसे बदिरया सावन की, सावन की मन-भावन की…”
प्रस्तु त क सलाह: संवाद र टए मत। प्रश्न याद र खए और उत्तर अपनी भाषा म द जए — तभी अ भनय स ा
लगेगा। कसान क भाषा म गाँव के अपने शब्द र खए, इससे पात्र जीवंत हो जाएगा।
वषा के दृश्य — पृष्ठ 92
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे खोज
प्र.1 (क) वषा के उन दृश्य क सूची बनाइए जनका उल्लेख इस क वता म नह कया गया है। जैसे आकाश म
इंद्रधनुष।
पहले दे ख ली जए क क वता म क्या-क्या है — बादल, बजली, गरज, पानी, झरने, ठं डी हवा, डा लयाँ, मा लन, ताल, जलचर,
पपीहे, मोर, मढक, गुलाब, हंस, कसान। अब इनके अलावा के दृश्य —
वग क वता म न आए दृश्य
आकाश इंद्रधनुष; बा रश के बाद नकलती धूप; बादल के पीछे से झाँकता सूरज; ओल का गरना; कुहरे जैसी झीनी फुहार।
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धरती पर भीगी म क स धी महक; क चड़ और भरे हुए ग े; नद म उफान और बाढ़; खेत क मेड़ पर बहता पानी; उगते हुए नए अंकुर;
ज़मीन से नकलते कचुए।
जीव-जंत ु छाया ढूँ ढ़ते कुत्ते- बल्ली; बल छोड़कर भागती च टयाँ; पत्ते पर बैठ लाल मखमली बीरबहूट ; भीगकर सकुड़ी च ड़या; बरसात
म उड़ते जुगनू; मक्खी-मच्छर का बढ़ना।
मनुष्य छाता और बरसाती लए चलते लोग; कागज़ क नाव चलाते ब े; भु े और पकौड़े क दुकान; टपकती छत पर तरपाल डालते
लोग; रुके हुए वाहन और बंद रास्ते; तीज-ह रयाली जैसे त्योहार और झूले।
क व ने ये क्य छोड़ दए: ‘वषा-बहार’ का उ े श्य वषा का उत्सव दखाना है। इस लए क व ने क चड़, बाढ़, मच्छर
और रुके हुए काम — ये असु वधा वाले दृश्य जान-बूझकर नह लए। क वता म केवल वही रखा गया जो सुंदर और
आनंददायक है।
प्र.2 (ख) वषा के समय आकाश म बजली पहले दखाई दे ती है या बजली कड़कने क ध्व न पहले सुनाई दे ती है या
दोन साथ-साथ दखाई-सुनाई दे ती है? क्य ? पता क जए।
बजली क चमक पहले दखाई दे ती है, गरज उसके बाद सुनाई दे ती है। चमक और गरज पैदा तो एक ही क्षण म होती ह, पर
हम तक अलग-अलग समय पर पहुँचती ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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पकाश की चाल ≈ 3,00,000 िकलोमीटर पित सेकं ड
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ध्विन की चाल (हवा में) ≈ 330 मीटर पित सेकं ड (लगभग ⅓ िकलोमीटर पित सेकं ड)
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aअथ त पकाश ध्विन से लगभग नौ लाख गुना ते ज़ चलता है।
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इस लए — बजली क चमक लगभग उसी क्षण आँख तकm
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पहुँच जाती है, जब क उसक आवाज़ को उतनी दूरी तय करने म कई
a है और कुछ देर बाद ‘गड़गड़’ सुनाई देती है।
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सेकंड लग जाते ह। यही कारण है क पहले चमक दखती
Check it yourself — बादल कतनी दूर है? चमक दखते ही मन-ही-मन गनना शुरू क जए — एक, दो,
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तीन… जैसे ही गरज सुनाई दे , गनती रोक द जए।
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g साथ-साथ ह , तो बजली
9 से.कंड लगे तो बादल लगभग 3 कलोमीटर दूर है। य द चमक और गरज लगभग
दूरी ( कलोमीटर म) ≈ सेकंड क संख्या ÷ 3
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a g बहुत पास है — तुरंत पक्के घर के भीतर चले जाइए।
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एक बात और: ‘गड़गड़ाहट’ लंबी इस लए सुनाई दे ती है क्य क बजली क लक र कई कलोमीटर लंबी होती है।
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उसके अलग-अलग हस्स से चली ध्व न हम तक अलग-अलग समय पर पहुँचती है, और पहाड़ -बादल से टकराकर
लौटती भी है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 (ग) आपने वषा से पहले और वषा के बाद कसी पेड़ या पौधे को ध्यान से अवश्य दे खा होगा। आपको कौन-कौन
से अंतर दखाई दए?
क्या दे खा वषा से पहले वषा के बाद
पत्तों का रंग धूल जमी हुई, फ का-मटमैला हरा धुले हुए, गहरे हरे और चमकते हुए
पत्तों की दशा मुरझाए, कनारे से मुड़े हुए, कुछ तने हुए, ताज़े; नई क पल फूट हुई
सूखकर गरे
तना और छाल सूखी, दरार वाली छाल गीली, गहरे रंग क ; उस पर हरी काई जम जाती है
जड़ के पास की सख़्त, फट हुई, धूल भरी नरम, गीली; चार ओर घास और छोटे -छोटे अंकुर
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फू ल -फल कम, जल्द झड़ जाने वाले नई क लयाँ और फूल; कई पेड़ पर फल लगना शुरू
आस -पास का सूनापन च ट , कचुआ, ततली, भ रा, मकड़ी के जाले, प क्षय का कलरव, तने पर
जीवन उगते छोटे कुकुरमुत्ते
गंध धूल क गंध भीगी म और पत्त क स धी महक
ऐसा क्य होता है: पौधा जड़ से पानी ख चकर पत्त तक पहुँचाता है। सूखे म यह पानी कम पड़ जाता है, इस लए
पत्ते ढ ले पड़ जाते ह। वषा के बाद जड़ को भरपूर पानी मलता है, को शकाएँ भर जाती ह और पत्ते फर तन जाते
ह। साथ ही धुले पत्त पर धूप ठ क से पड़ने लगती है, जससे प्रकाश-सं ेषण तेज़ हो जाता है और पौधा तेज़ी से
बढ़ता है।
Try This: अपने आँगन या स्कूल के एक ही पेड़ को चु नए। वषा से पहले उसका एक चत्र बनाइए और नीचे
तारीख़ ल खए। बा रश के दो दन बाद उसी पेड़ का दूसरा चत्र बनाइए। दोन चत्र को साथ रखकर अंतर ल खए
— यह सबसे अच्छा उत्तर बनेगा।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (घ) “चलते ह हंस कह पर, बाँधे कतार सुंदर” — क वता म हंस के कतार म अथात पं क्तबद्ध रूप से चलने का
वणन कया गया है। आपने कन- कन को और कब-कब पं क्तबद्ध चलते हुए दे खा है? (संकेत — च ट , गा ड़याँ,
ब े आ द)
कौन कब पं क्त क्य बनाते ह
ची ंिटयाँ बा रश से पहले, दाना या अंडे ले जाते समय आगे वाली च ट गंध का नशान छोड़ती जाती है; पीछे वाली उसी
पर चलती ह, इससे कोई रास्ता नह भूलता।
पवासी प ी (हंस , ऋतु बदलने पर लंबी उड़ान के समय ‘V’ आकार म उड़ने से पीछे वाले पक्षी को हवा का कम प्र तरोध
सारस , बत्तख) झेलना पड़ता है और श क्त बचती है।
िव ाथ प्राथना-सभा म, कक्षा से बाहर नकलते भीड़ और धक्का-मुक्क न हो और सबका नंबर बारी-बारी आए।
समय, मध्याह्न भोजन क पं क्त म
गािड़ याँ व्यस्त सड़क, टोल नाके या लाल बत्ती पर अनुशासन से दुघटना नह होती और यातायात चलता रहता है।
सै िनक परेड और गणतंत्र दवस के माच म एक साथ कदम मलाकर चलना अनुशासन और एकता दखाता
है।
बत्तख के बच्चे / तालाब क ओर जाते समय / जंगल म चलते माँ के पीछे -पीछे चलने से ब े खोते नह और सुर क्षत रहते ह।
हािथयों का झुंड समय
लोग मतदान क पं क्त, टकट खड़क , बक, ‘पहले आओ, पहले पाओ’ का न्याय बना रहता है।
मं दर के दशन म
सीखने क बात: क व ने हंस क कतार को ‘सुंदर’ कहा — यानी उसक नज़र म अनुशासन भी एक स दय है।
पं क्त म चलने से समय भी बचता है, श क्त भी और झगड़ा भी नह होता। प्रकृ त यह बात हमसे पहले सीख चुक
है।
वषा म ध्व नयाँ — पृष्ठ 92
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) क वता म वषा के अनेक दृश्य दए गए ह। इन दृश्य म कौन-कौन सी ध्व नयाँ सुनाई दे रही ह गी? अपनी
कल्पना से उन ध्व नय को कक्षा म सुनाइए।
क वता के हर दृश्य के साथ एक ध्व न जुड़ी हुई है। सूची इस प्रकार बनेगी —
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
क वता का दृश्य कौन-सी ध्व न कैसे बोलगे
“बादल गरज रहे है”ं गरज गड़-गड़-गड़ड़… (गले से गहरी, लंबी आवाज़)
“िबजली चमक रही है” कड़ क कड़ाSSक! (एक झटके म, तेज़)
“पानी बरस रहा है” बूदँ ों की आवाज़ रम झम- रम झम / टप-टप-टप / छत पर — छन्न-छन्न
“झरने भी ये बहे है”ं झरने की धार छल-छल, कल-कल, शाँय-शाँय
“चलती हवा है ठं डी, िहलती है ं डािलयाँ हवा और पत्ते सन्न-सन्न / सर-सर-सर
सब”
“गाती है ं मािलने ं अब” िस्त्रयों का लोकगीत सावन का कोई गीत — “बरसे बद रया सावन क …”
“तालों में जीव जलचर” पानी में हलचल छपाक-छपाक, बुल-बुल (बुलबुले)
“िफरते लखो पपीहे” पपीहे की पुक ार पऊ- पऊ / पी कहाँ-पी कहाँ
“करते है ं नत्ृ य वन में… मोर” मोर की बोली म्याऊँ-म्याऊँ जैसी लंबी पुकार; साथ म पंख क
फड़फड़ाहट
“मेंढक लुभा रहे है”ं मेंढकों का समवेत गान टर-टर-टर
“चलते है ं हंस कही ं पर” पंखों की आवाज़ फड़-फड़, और हंस क ‘क्वाँक-क्वाँक’
“गाते है ं गीत… िकसान” िकसान का गीत और खेत की गीत के साथ — क चड़ म पैर का ‘चप्-चप्’
आवाज़ ें
कक्षा म करने का तरीका: कक्षा को चार समूह म बाँ टए — बादल, पानी, पशु-पक्षी और मनुष्य। शक्षक क वता क पं क्त पढ़
और जस समूह क बारी हो, वह अपनी ध्व न नकाले। अंत म सब मलकर एक साथ ध्व न कर — पूरी कक्षा एक ‘वषा-वन’ बन
जाएगी।
Did you know? जन शब्द क ध्व न ही उनका अथ बता दे ती है — टर-टर, रम झम, छल-छल, कड़क, सर-
सर — उन्ह हद म अनुकरणात्मक या ध्वन्यात्मक शब्द कहते ह। क वता म ऐसे शब्द जोड़ने से चत्र के साथ
आवाज़ भी बन जाती है।
प्र.2 (ख) “मढक लुभा रहे ह, गाकर सुगीत प्यारे” — क वता म मढक क टर-टर को भी प्यारा गीत कहा गया है।
आपके वचार से बेसुरी ध्व नयाँ भी कब-कब अ लगने लगती ह?
बेसुरी ध्व न तब अच्छ लगने लगती है जब वह कसी अ खबर, अपनेपन या लंबी प्रतीक्षा के अंत से जुड़ जाती है। ध्व न तब
कान से नह , मन से सुनी जाती है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
बेसुरी ध्व न कब अ लगती है क्य
मेंढकों की टर-टर सूखे के बाद पहली बा रश क रात यह आवाज़ बताती है क तालाब भर गया — यानी पानी
आ गया।
कौए की काँव-काँव जब घर म कसी मेहमान के आने क लोक- व ास म कौए का बोलना अ त थ के आने का
आस हो संकेत माना जाता है।
छोटे बच्चे का रोना जन्म के तुरंत बाद यही आवाज़ बताती है क ब ा स्वस्थ है — पूरा प रवार
खुश हो जाता है।
छु ी की घंटी की खनखनाहट स्कूल के अं तम पी रयड म बजना तो बेसुरा है, पर वह आज़ाद क सूचना दे ती है।
पुराने पंखे या मोटर की खटपट बजली लौट आने पर अँधेरे और उमस के बाद वही आवाज़ राहत क आवाज़
बन जाती है।
बच्चे की टू टी-फू टी बाँस ुरी या बेस ुरा जब वह पहली बार कुछ बजाना-गाना उसम सुर नह , पर उसक को शश और खुशी सुनाई दे ती
गाना सीख रहा हो है।
दादी की खाँस ती-सी आवाज़ में गाया त्योहार या ववाह के अवसर पर वहाँ सुर नह , अपनापन और परंपरा सुनी जाती है।
लोकगीत
नष्कष: कोई ध्व न अपने आप म सुरीली या बेसुरी नह होती। जस भाव के साथ हम उसे सुनते ह, वही उसे मीठा
या ककश बना दे ता है। क व को मढक क टर-टर इस लए ‘सुगीत’ लगी, क्य क उसके भीतर वषा के आने का
आनंद भरा हुआ था।
वषा से जुड़े गीत — पृष्ठ 93
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 “बाग म गीत सुंदर, गाती ह मा लन अब” / “गाते ह गीत कैसे, लेते कसान मनहर।” • हमारे दे श म वषा के आने
पर अनेक गीत और लोकगीत गाए जाते ह। अपने समूह के साथ मलकर वषा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँ ढ़ए और
ल खए। इस काय के लए आप अपने प रजन , शक्षक , इंटरनेट और पुस्तकालय क भी सहायता ले सकते ह।
वषा भारत के लोकजीवन का सबसे बड़ा गीत- वषय है। खोज इस तरह क जए —
1. घर से शुरू क जए: दाद , नानी या माँ से पू छए — “सावन म आप क्या गाती थ ?” उनके शब्द ज्य -के-त्य लख ली जए।
2. अपनी भाषा म ढूँ ढ़ए: हर क्षेत्र के अपने वषा-गीत ह।
3. पुस्तकालय और इंटरनेट: ‘सावन के गीत’, ‘कजरी’, ‘मल्हार’ खो जए। जो भी ल, गीत के साथ उसका क्षेत्र और भाषा ज़रूर
ल खए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
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गीत-प्रकार क्षेत्र / भाषा पहचान
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कजरी (कजली)
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पूव उत्तर प्रदे श, बहार — सावन म स्त्रय
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ारा गाया जाने वाला गीत — “बरसे बद रया सावन
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भोजपुरी क …”
aझूgलlा / िहंडोला गीत ब्रज, अवध ह रयाली तीज पर झूला झूलते समय के गीत
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राग म ार / िमयाँ की शास्त्रीय संगीत, पूरे भारत म वषा ऋतु का राग — इसी से आपक पुस्तक का नाम मल्हार पड़ा है
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बारहमासा agl
अवधी, ब्रज, राजस्थानी बारह महीन का वणन, जसम सावन-भाद का हस्सा सबसे प्र सद्ध है
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रोपनी / रोपाई गीत बहार, छत्तीसगढ़, पूवाचल धान क रोपाई करते समय खेत म गाया जाने वाला श्रमगीत
ह रयाली तीज और सावन के मेल के गीतem
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तीज गीत
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राजस्थान, ह रयाणा
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सुआ छत्तीसगढ़, झारखंड वषा और फ़सल से जुड़े सामू हक
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Tip: गीत लखते समय चार बात ज़रूर दज क जए — (1) गीत के बोल, (2) कससे सुना, (3) कब गाया जाता
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है, (4) क ठन शब्द के अथ। यही एक अच्छे संकलन क पहचान है।
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प्र.2 • सभी समूह ारा एक त्रत गीत को संक लत करके वषा-गीत क एक पु स्तका भी तैयार क जए।
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a 1. साम ी जुटाइए: हर समूह अपने गीत साफ़ अक्षर म एक-एक पन्ने पर लखकर दे ।
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2. क्रम तय क जए: गीत को भाषा या क्षेत्र के अनुसार बाँ टए — जैसे ‘भोजपुरी कजरी’, ‘छत्तीसगढ़ करमा’, ‘राजस्थानी
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तीज’।
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3. पन्ना कैसा हो: ऊपर गीत का नाम, नीचे बोल, कनारे पर एक छोटा चत्र, और सबसे नीचे — “यह गीत हम ______ जी ने
सुनाया।”
4. शुरू और अंत: पहले पन्ने पर आवरण- चत्र और पु स्तका का नाम; दूसरे पन्ने पर अनुक्रम णका; अं तम पन्ने पर सब सहयो गय
के नाम और आभार।
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5. जो ड़ए और सजाइए: पन्न को सलकर या रबन से बाँधकर पु स्तका बना ली जए। मुखपृm
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ष्ठ पर बादल, मोर और झूले का चत्र
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s पु स्तका के नाम के सुझाव: ‘बरसे बद रया’, ‘सावन क सरगम’, ‘हमारे गाँव के वषा-गीत’, ‘मल्हार: कक्षा 7 का गीत-संग्रह’।
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आगे का काम: तैयार पु स्तका को वद्यालय के पुस्तकालय म रख द जए और प्राथना-सभा म उसम से एक गीत
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गाकर सुनाइए। जो गीत बुजग से मले ह, वे अगली पीढ़ तक इसी तरह पहुँचते ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
सृजन — पृष्ठ 93
पाठ से आगे
पाठ से आगे ले ख न
प्र.1 “बाग म खूब सुख से, आमोद छा रहा है” — ‘आमोद’ या ‘मोद’ दोन शब्द का अथ होता है— आनंद, हष,
खुशी, प्रसन्नता। क वता म वषा ऋतु म ‘आमोद’ के दृश्य का वणन कया गया है। क वता के इन दृश्य को हम
नीचे दए गए उदाहरण क तरह अनु े द म भी लख सकते ह— “हवा क ठं डक थी, बा रश क रम झम बूँद गर
रही थ , मोर नृत्य कर रहे थे और मढक खुश होकर गाना गा रहे थे। ये सभी मलकर वषा ऋतु को एक उत्सव जैसा
बना रहे थे। बाग म गुलाब क खुशबू और आम के पेड़ पर नए फल दे खकर पक्षी और लोग, सभी प्रसन्न हो गए
थे। कसान अपने खेत म काम करते हुए इस प्राकृ तक आनंद के भागीदार बन रहे थे।” अब नीचे दए गए
‘आमोद’ से जुड़े व भन्न दृश्य का एक-एक अनु े द म वणन क जए— • बा रश के बाद उपवन म सैर • प रवार
के कसी प्रय सदस्य या मत्र से वष बाद मलना • स दय का पहला हमपात • कोई उत्सव • मत्र संग खेलना •
कसी प्रय पुस्तक को पढ़ना • कसी काय को पूरा करना या सफल प्रदशन करना • समुद्र के कनारे शांत सवेरा
या शाम
अनु े द कैसे लख — दए गए नमूने को ध्यान से दे खए। उसम तीन बात ह — (1) जो दख रहा है, (2) जो सुनाई/महसूस हो
रहा है, (3) उससे मन म जो आनंद जगा। हर अनुच्छेद म यही तीन बात र खए, 4–6 वाक्य म।
नमूना उत्तर —
1. बा रश के बाद उपवन म सैर
बा रश थम चुक थी और हवा म भीगी म क स धी महक भरी थी। पत्त क नोक से बूँद अब भी टप-टप टपक रही थ और घास
इतनी हरी लग रही थी मानो कसी ने उसे धोकर रख दया हो। एक ओर गुलाब क क्यारी थी, जहाँ पंखु ड़य पर टक बूँद मोती-सी
चमक रही थ । तत लयाँ फर से उड़ने लगी थ और कह दूर एक पपीहा बोल रहा था। धीरे-धीरे चलते हुए मन इतना हलका हो गया
क लगा जैसे बा रश ने भीतर का सारा मैल भी धो दया हो।
2. प रवार के कसी प्रय सदस्य या मत्र से वष बाद मलना
स्टे शन पर गाड़ी रुक और भीड़ म सबसे पहले वही चेहरा दखा जसे म पाँच साल से नह दे ख पाया था। मामा जी कुछ बदल गए थे
— बाल थोड़े सफ़ेद हो गए थे — पर हँसी वही थी। उन्ह ने बैग नीचे रखकर दोन हाथ फैला दए और म दौड़कर लपट गया। कुछ
दे र तक कसी को कुछ कहने क ज़रूरत ही नह पड़ी। घर पहुँचते-पहुँचते बात शुरू हुईं तो रात के बारह बज गए और कसी को न द
नह आई। इतने वष क दूरी उस एक शाम म मट गई।
3. स दय का पहला हमपात
सुबह खड़क खोली तो सामने का सारा दृश्य बदल चुका था। छत, पेड़, रास्ता — सब पर सफ़ेद बफ़ क परत बछ थी और चार
ओर ऐसी चुप्पी थी क अपनी साँस भी सुनाई दे रही थी। हथेली आगे बढ़ाई तो एक नन्हा फाहा उस पर आकर बैठा और पल भर म
पानी बनकर बह गया। ब े ऊनी टो पयाँ पहनकर बाहर नकल आए और बफ़ के गोले बनाकर एक-दूसरे पर फकने लगे। ठं ड
ह य तक पहुँच रही थी, फर भी कोई भीतर जाना नह चाहता था।
4. कोई उत्सव
द वाली क शाम पूरा मुहल्ला द य से जगमगा उठा था। हर छ े, हर मुँडेर पर पं क्त म रखे द ये हवा म हौले-हौले काँप रहे थे।
रसोई से गु झया और मठरी क गंध आ रही थी और आँगन म रंगोली के रंग अभी सूखे भी नह थे। पड़ोस के ब े फुलझ ड़याँ लेकर
गोल घूम रहे थे और दाद सबको एक-एक करके मठाई खला रही थ । उस रात लगा क उत्सव का असली उजाला द य म नह ,
साथ बैठे लोग के चेहर पर होता है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
5. मत्र संग खेलना
शाम के चार बजते ही मैदान म सबसे पहले हम ही पहुँच गए थे। बल्ला पुराना था और गद पर टे प चढ़ थी, पर खेल का उत्साह
कसी बड़े मैच से कम नह था। हर चौके पर शोर उठता और हर वकेट पर हँसी। बीच-बीच म झगड़ा भी होता — “यह नो-बॉल
थी!” — और अगले ही पल सब भूलकर खेल फर शुरू हो जाता। सूरज ढलने पर जब घर लौटे तो पैर थके थे, पर मन इतना हलका
था क रास्ता कब कट गया, पता ही नह चला।
6. कसी प्रय पुस्तक को पढ़ना
दोपहर क चुप्पी थी और म खड़क के पास बैठकर वह कताब पढ़ रहा था जसे मने पुस्तकालय से बड़ी मु श्कल से पाया था। पन्ने
पलटते-पलटते कब कमरा गायब हो गया और म कहानी के उस जंगल म पहुँच गया, पता ही नह चला। जब नायक संकट म फँसा तो
मेरी साँस रुक गई और जब वह बच नकला तो म अकेले ही मुस्करा दया। माँ ने दो बार खाने के लए पुकारा, पर मने सुना ही नह ।
कताब खत्म हुई तो थोड़ा दुख भी हुआ — जैसे कोई अच्छा साथी बछड़ गया हो।
7. कसी काय को पूरा करना या सफल प्रदशन करना
वा षकोत्सव के मंच पर जाने से पहले हाथ काँप रहे थे और गला सूख रहा था। पर जैसे ही पहली पं क्त बोली, सारा डर उतर गया
और शब्द अपने आप नकलने लगे। अंत म जब पूरी कक्षा और शक्षक ता लयाँ बजा रहे थे, तो लगा जैसे कान म कोई संगीत बज
रहा हो। मने इसके लए तीन हफ़्ते रोज़ अभ्यास कया था — और उस एक क्षण म वह सारी मेहनत साथक लगी। घर लौटकर
पताजी ने केवल इतना कहा — “शाबाश” — और वही मेरे लए सबसे बड़ा पुरस्कार था।
8. समुद्र के कनारे शांत सवेरा या शाम
सवेरे का समय था और समुद्र अब भी न द म लग रहा था। लहर धीरे-धीरे आकर पैर को छू त और गीली रेत लेकर लौट जात । दूर
क्ष तज पर सूरज क पहली लाली फैली थी और पानी उसे सोने-सा चमका रहा था। कुछ मछु आरे अपनी नाव खोल रहे थे और
सीगल पक्षी लहर के ऊपर चक्कर काट रहे थे। न कोई शोर था, न कोई जल्द — बस नमक न हवा और लहर क एक जैसी
आवाज़, जो मन को बलकुल शांत कर दे ती है।
Tip: हर अनुच्छेद के अंत म एक वाक्य ऐसा र खए जो भाव बताए — “मन हलका हो गया”, “वही सबसे बड़ा
पुरस्कार था”। यही वाक्य अनुच्छेद को ‘आमोद’ का अनुच्छेद बनाता है।
आज क पहेली — पृष्ठ 94
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 आपने वषा से जुड़ी एक क वता पढ़ है। अब भारत क व भन्न ऋतुओं से जुड़ी कुछ पहे लयाँ प ढ़ए और इन्ह
बू झए— जाने कैसा मौसम आया, / सूरज ने सबको झुलसाया। / आम पक तो रस ढलके, / समय कौन-सा ये
झलके?
उत्तर — ीष्म ऋतु (गरमी का मौसम, सामान्यत: मई–जून)
पहेली का संकेत वह ीष्म क ओर कैसे ले जाता है
“सूर ज ने सबको झुल साया” तेज़ धूप और लू — यह केवल गरमी म होता है।
“आम पकें तो रस ढलके ” आम मई-जून म ही पकता है; इसी लए उसे ‘गरमी का फल’ कहते ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से जो ड़ए: क वता क पं क्त “ फरते लखो पपीहे, ह ीष्म ताप खोते” म यही ऋतु आई है — और वषा उसी
ताप से छु टकारा दलाती है।
प्र.2 पानी बरसे, बादल गरजे, / धरती का हर कोना हरसे। / न दयाँ नाले भरे हर ओर, / बूझो कसका है ये जोर?
उत्तर — वषा ऋतु (सावन-भाद , सामान्यत: जुलाई–अगस्त)
पहेली का संकेत अथ
“पानी बरसे , बादल गरजे” यही वषा ऋतु क पहचान है — क वता म भी ठ क यही पं क्त है: “ बजली चमक रही है, बादल गरज रहे ह”।
“धरती का हर कोना हरसे ” ‘हरसना’ = ह षत होना, खुश होना। वषा से सारी धरती प्रसन्न हो उठती है।
“निदयाँ नाले भरे हर ओर” सूखी न दयाँ और नाले फर से बहने लगते ह।
यही पाठ क क वता क ऋतु है। ‘वषा-बहार’ का पूरा दृश्य इसी पहेली का वस्तार है — बरसता पानी, गरजते
बादल, भरे हुए ताल और प्रसन्न जीव-जंतु।
प्र.3 हवा म ठं डक बढ़ती जाए, / धूप सुहानी सबको भाए। / नई फसल खेत म लाए, / बूझो कौन-सा मौसम आए?
उत्तर — शरद ऋतु (सामान्यत: सतंबर–अक्तूबर)
पहेली का संकेत अथ
“हवा में ठं डक बढ़ ती जाए” वषा जाते ही रात ठं डी होने लगती ह — पर कड़ाके क सद अभी नह आई।
“धूप सुहानी सबको भाए” शरद क धूप न जलाती है, न कँपाती है — इसी लए ‘सुहानी’ कही गई।
“नई फसल खेतों में लाए” वषा म बोई गई खरीफ़ फ़सल (धान, मक्का, बाजरा) इसी समय पकने और कटने लगती है।
य द आपने ‘हेमंत’ लखा हो: तो भी सोचने का ढं ग ग़लत नह है, क्य क ठं ड और फ़सल दोन हेमंत म भी ह। पर
‘धूप सुहानी’ और ‘ठं डक बढ़ती जाए’ (यानी अभी बढ़ना शुरू ही हुई है) — ये दो संकेत शरद क ओर ही ले जाते ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 फूल खले, हर पक्षी गाए, / चार ओर ह रयाली छाए। / बाग म खुशबू छा जाए / बूझो ऋतु ये क्या कहलाए?
उत्तर — वसंत ऋतु (सामान्यत: माच–अप्रैल)
पहेली का संकेत अथ
“फू ल िखले , हर प ी गाए” वसंत को ‘ऋतुराज’ कहा जाता है — इसी म सबसे अ धक फूल खलते ह और कोयल कूकती है।
“चारों ओर हिरयाली छाए” पतझड़ के बाद पेड़ पर नई क पल फूट पड़ती ह।
“बागों में खुशबू छा जाए” आम के बौर और सरस -गदे क महक इसी ऋतु क है।
पाठ से जो ड़ए: ‘बहार’ शब्द इसी वसंत के लए आता है। क व ने वषा को ‘बहार’ कहकर उसे वसंत के बराबर
सुंदर बता दया — यह बात इस पहेली को पढ़ने के बाद और साफ़ हो जाती है।
प्र.5 बफ गरे, सद बढ़ जाए, / ऊनी कपड़े सबको भाए। / धुंध क चादर लाए रात, / बूझो कस ऋतु क बात?
उत्तर — हेमंत ऋतु (सद का आरंभ, सामान्यत: नवंबर– दसंबर)
पहेली का संकेत अथ
“सद बढ़ जाए” ‘बढ़ जाए’ का अथ है सद अभी बढ़ रही है — यानी यह जाड़े क शुरुआत है।
“ऊनी कपड़े सबको भाए” स्वेटर, शॉल और रजाई इसी समय नकलते ह।
“ध ंध
ु की चादर लाए रात” नवंबर- दसंबर क रात म कोहरा और धुंध छाने लगती है।
“बफ िगरे ” पहाड़ी क्षेत्र म इसी समय पहला हमपात होता है।
‘ श शर’ भी स्वीकाय है — क्य क कड़ाके क ठं ड और हमपात श शर (जनवरी–फरवरी) म और भी अ धक होते
ह। पर छह पहे लय को छह ऋतुओं म बाँटने पर यह पहेली हेमंत क और अगली श शर क बैठती है।
प्र.6 पत्ता-पत्ता गरता जाए, / सूनी डाली बहुत सताए। / पेड़ कर खुद को तैयार, / कौन-सी ऋतु का है ये सार?
उत्तर — श शर ऋतु (पतझड़ का समय, सामान्यत: जनवरी–फरवरी)
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार
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पहेली का संकेत अथ
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“पत्ता-पत्ता िगरता जाए” श शर म पेड़ के पुराने पत्ते झड़ जाते ह — इसी लए इसे पतझड़ भी कहते ह।
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g l a पत्त के बना डा लयाँ खाली और उदास दखती ह।
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“सूनी डाली बहुत सताए”
“पेड़ करे ं खुद को तैयार” यह सबसे सुंदर संकेत है — पुराने पत्ते गराकर पेड़ आने वाले वसंत के लए तैयार हो रहा है।
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ध्यान द जए: पत्ते गरना अंत नह , नई शुरुआत क तैयारी है। श शर के तुरंत बाद वसंत आता है और वही सूनी
agछह ऋतुओं का चक्र फर से आरंभ हो जाता है — वसंत, ग्रीष्म, वषा,
डाली नई क पल से भर जाती है। इस तरह
शरद, हेमंत, श शर।
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em— पृष्ठ 94
झरोखे से
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे अ त रक्त पठन
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आपने जो क वता इस पाठ म पढ़ है, उसे लखा है मुकुटधर पाण्डेय ने। आइए, अब पढ़ते ह इन्ह क लखी एक
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प्र.1
अन्य क वता ‘ ीष्म’ का अंश— “बीते दवस बसंत के, लगा ज्येष्ठ का मास / वश्व व्य थत करने लगा, र व करण
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का त्रास / अवनी आतप से लगी, जलने सब ही हाल / जीव, जंतु चर-अचर सब, हुए अ मल बेहाल / र व मयूख
के ताप से, झुलस गए बन बाग / सूखे स रता सर तथा नाले, कूप तड़ाग / लगी आग पुर ाम म, चता बढ़ अपार
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/ नर-नारी व्याकुल बसे, भय सदै व उर धार”
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a पहले क ठन शब्द के अथ —
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ शब्द अथ
ज्येष्ठ जेठ का महीना (मई–जून), सबसे गरम महीना व्यिथत दुखी, पी ड़त
रिव सूय त्र ास कष्ट, पीड़ा, डर
अवनी पृथ्वी, धरती आतप धूप क तपन
चर- चलने वाले (पशु-पक्षी) और न चलने वाले (पेड़-पौधे) — यानी अिमल / बेचैन, जन्ह कह चैन न मले / बुरी दशा
अचर सब बेहाल म
मयूख करण बन बाग वन और बाग़
सिरता नद सर / तड़ ाग सरोवर, तालाब
कू प कुआँ पुर, गाम नगर और गाँव
उर हृदय, मन धार धारण कए हुए
भावाथ — वसंत के दन बीत गए और जेठ का महीना आ लगा। सूय क करण के कष्ट ने सारे संसार को दुखी कर दया। धरती
धूप क तपन से जलने लगी और चर-अचर — सभी जीव-जंतु बेहाल हो गए। सूय क करण के ताप से वन और बाग़ झुलस गए।
न दयाँ, सरोवर, नाले, कुएँ और तालाब — सब सूख गए। नगर और गाँव म आग लग गई, चता बहुत बढ़ गई; स्त्री-पुरुष सब
व्याकुल हो गए और हृदय म हर समय भय लए जीने लगे।
‘वषा-बहार’ और ‘ ीष्म’ क तुलना —
आधार वषा-बहार ीष्म
मुख्य भाव आनंद और उ ल्लास क ष्ट और व्याकु लता
प्रकृ त क दशा ताल भरे, बाग़ हरे, फूल खले ताल-कुएँ सूखे, वन-बाग़ झुलसे
जीव-जंतु “अ त ह प्रसन्न होते”, मोर नाचते ह “चर-अचर सब, हुए बेहाल”
मनुष्य कसान गीत गाता है, मा लन गाती है “नर-नारी व्याकुल बसे, भय सदै व उर धार”
भाषा सरल, चत्रात्मक; तत्सम-तद्भव का मेल अ धक तत्सम और शास्त्रीय (अवनी, मयूख, तड़ाग)
दोन को साथ पढ़ने का लाभ: ‘ग्रीष्म’ पढ़ने के बाद ही समझ आता है क ‘वषा-बहार’ म इतनी खुशी क्य है।
जस ताप को ग्रीष्म ने ख चा है, वषा उसी का उपचार है। इसी लए क व ने लखा — “ फरते लखो पपीहे, ह ग्रीष्म
ताप खोते”। एक ही क व क दो क वताएँ मलकर पूरी कहानी कहती ह।
ध्यान द जए: ‘ग्रीष्म’ दोहा छं द म लखी गई है — दो-दो पं क्तय म बात पूरी होती है और अंत म तुक मलती है
(मास–त्रास, हाल–बेहाल, बाग–तड़ाग, अपार–धार)। मूल क वता ‘वषा-बहार’ म भी यही दो-पं क्तय वाला ढाँचा है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
साझी समझ — पृष्ठ 95
पाठ से आगे
पाठ से आगे चचा
प्र.1 अब इस क वता पर अपने सा थय के साथ वचार- वमश क जए।
पूरे पाठ के अंत म यह चचा इस लए रखी गई है क आप सबक समझ एक जगह मल जाए। चचा को दशा दे ने के लए ये प्रश्न
उठाइए —
1. इस क वता का सबसे सुंदर दृश्य आपको कौन-सा लगा और क्य ?
2. क्या वषा सचमुच सबके लए सुख लाती है? कन लोग के लए यह क ठनाई भी लाती है — मछु आरे, दहाड़ी मज़दूर, बेघर
लोग, नद कनारे बसे गाँव?
3. क व ने वषा को ‘बहार’ क्य कहा? क्या आप कसी और ऋतु को भी ‘बहार’ कह सकते ह?
4. क वता म मनुष्य केवल दो जगह आया है — मा लन और कसान। बाक जगह प्रकृ त ही है। क व ने ऐसा क्य कया होगा?
5. “सारे जगत क शोभा, नभर है इसके ऊपर” — आज जल-संकट को दे खते हुए इस पं क्त का क्या अथ बनता है? पानी बचाने
के लए हम क्या-क्या कर सकते ह?
6. य द आपको इस क वता म एक और पद जोड़ना हो, तो वह कस दृश्य का होगा?
चचा का तरीका: कक्षा को 5–6 के समूह म बाँ टए। हर समूह ऊपर से कोई दो प्रश्न ले और दस मनट बात करे। फर हर समूह का
एक सदस्य अपनी बात कक्षा के सामने रखे। श्यामपट पर दो स्तंभ बनाइए — “ जस पर सब सहमत” और “ जस पर मतभेद
रहा”।
अ चचा के नयम: एक बार म एक व्य क्त बोले; दूसर क बात पूरी सुनकर ही उत्तर द; अपनी बात के लए
क वता से प्रमाण द; असहम त व्य क्त से नह , वचार से हो।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 95
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 खोजबीन के लए — • वषा ऋतु • आँधी पानी • वसंत • ऋतुए ँ
ये चार वषय आगे पढ़ने और खोजने के लए दए गए ह। हर वषय पर क्या-क्या खोजा जा सकता है —
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
वषय क्या खो जए कहाँ से
वष मानसून भारत म कब और कहाँ से आता है; चेरापूँजी और मॉ सनराम क वषा; वषा- भूगोल क पाठ्यपुस्तक, समाचार-
ऋतु जल संचयन (rainwater harvesting); वषा पर लखी अन्य क वताएँ और पत्र, वद्यालय का पुस्तकालय,
लोकगीत; राग मल्हार क कथा। इंटरनेट
आँधी आँधी कैसे उठती है; ओले क्य गरते ह; चक्रवात (साइक्लोन) क्या है; आँधी-तूफ़ान के व ान क पुस्तक, मौसम वभाग
पानी समय क्या कर और क्या न कर; बजली गरने से बचाव के नयम। क जानकारी, आपदा-प्रबंधन क
पु स्तकाएँ
वसंत वसंत को ‘ऋतुराज’ क्य कहते ह; वसंत पंचमी और होली; वसंत पर सुभद्राकुमारी हद क पुस्तक, क वता-संग्रह,
चौहान, नराला और सु मत्रानंदन पंत क क वताएँ; ‘बहार’ शब्द का प्रयोग। बड़ से बातचीत
ऋतुए ँ छह ऋतुओं के नाम, महीने और वशेषताएँ; ऋतुएँ क्य बदलती ह (पृथ्वी का झुकाव व ान और सामा जक व ान क
और प रक्रमा); ऋतु के अनुसार फ़सल — खरीफ़, रबी, ज़ायद; ऋतु के अनुसार पुस्तक, पंचांग, इंटरनेट
त्योहार; जलवायु प रवतन से ऋतुओं पर पड़ता असर।
प रयोजना का सुझाव — ‘ऋतु-चक्र चाट’: एक बड़े गोल चाट को छह भाग म बाँ टए। हर भाग म ल खए — ऋतु का नाम,
महीने, दो-तीन वशेष शब्द (जैसे ग्रीष्म — लू, ताप, जेठ), उस ऋतु का एक फल, एक त्योहार और एक चत्र। बीच म लख द जए
— “सारे जगत क शोभा, नभर है इसके ऊपर।”
Tip: खोजबीन म जो भी जानकारी मले, उसके साथ यह ज़रूर ल खए क वह कहाँ से मली — कस पुस्तक से,
कस व्य क्त से या कस वेबसाइट से। यही अच्छे शोध क पहचान है।
अध्याय — एक नज़र म
वषा-बहार मुकुटधर पाण्डेय क क वता है। ‘बहार’ का अथ है वसंत यानी सबसे सुहावना मौसम। क व ने वषा ऋतु को ही
‘बहार’ कह दया — यानी उसके लए वषा भी उतनी ही सुंदर और उल्लासभरी ऋतु है।
क वता आठ पद्यांश म वषा के दृश्य क एक ंखला बनाती है — नभ म घनघोर घटा, बजली और गरजते बादल, बरसता
पानी और बहते झरने, ठं डी हवा म हलती डा लयाँ, बाग म गाती मा लन, ताल म प्रसन्न जलचर, ताप खोते पपीहे, नाचते मोर,
गाते मढक, महकते गुलाब, कतार म चलते हंस और गीत गाते कसान।
क वता का मुख्य भाव आनंद और प्रसन्नता है। वषा कसी एक के लए नह , सबके लए सुख लाती है — मनुष्य, पशु-पक्षी,
जल-जीव, पेड़-पौधे, सबके लए। इसी लए पहली ही पं क्त म क व कहता है — “वषा-बहार सब के, मन को लुभा रही है”।
अं तम पं क्त क वता का नष्कष है — “सारे जगत क शोभा, नभर है इसके ऊपर।” पानी के बना ह रयाली नह , फ़सल
नह , जीवन नह । इस तरह क वता स दय-वणन से आगे बढ़कर जल के महत्व क बात कहती है।
भाषा-स दय म दे खने योग्य ह — मानवीकरण (झरने ‘बहे’, गुलाब ‘सौरभ उड़ा रहा है’, मढक ‘सुगीत’ गा रहे ह), अनुप्रास
(“गाते ह गीत”, “सुख से... सौरभ”), तत्सम शब्दावली (नभ, जलचर, सौरभ, आमोद, मनहर, अवनी) और वशेषण-
वशेष्य क जो ड़याँ (छटा अनूठ , कतार सुंदर, सुगीत प्यारे, हवा ठं डी)।
पाठ म क वता के साथ-साथ भारत क छह ऋतुओं (वसंत, ग्रीष्म, वषा, शरद, हेमंत, श शर) से जुड़े शब्द, ऋतु-पहे लयाँ और
मुकुटधर पाण्डेय क ही दूसरी क वता ‘ग्रीष्म’ का अंश भी दया गया है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 7 वषा-बहार AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
बहार वसंत; सुंद रता और उल्लास से भरा समय “वषा-बहार सब के, मन को लुभा बा रश के बाद बगीचे म फूल क बहार आ
रही है” गई।
नभ आकाश, गगन “नभ म छटा अनूठ ” नभ म काले बादल घर आए ह।
छटा सुंद र दृ श्य, शोभा “नभ म छटा अनूठ ” सूयास्त के समय आकाश क छटा दे खते ही
बनती थी।
अनूठ अनोखी, िनराली, िजसके जैस ी और कोई न “नभ म छटा अनूठ ” दाद क कहानी कहने क शैली अनूठ है।
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घनघोर बहुत घना और गहरा (बादलों के िलए) “घनघोर छा रही है” घनघोर घटा दे खकर हम भागकर घर लौट
आए।
जलचर जल में रहने वाले जीव — मछली, कछु आ , “ताल म जीव जलचर” तालाब सूखने पर जलचर जीव पर संकट आ
मेंढक आिद जाता है।
ताल तालाब, पोखर “ताल म जीव जलचर” गाँव के ताल म कमल खले हुए थे।
लखो दे खो (‘लखना’ = दे खना) “ फरते लखो पपीहे” लखो, कैसे बादल पहाड़ से लपट रहे ह!
पपीहा एक प ी, जो वष के आने पर ‘िपऊ-िपऊ’ “ फरते लखो पपीहे” पहली बूँद पड़ते ही पपीहा बोल उठा।
बोलता है
ग्रीष्म / गरमी की ऋतु / गरमी, तपन “ह ग्रीष्म ताप खोते” ग्रीष्म के ताप से पूरा मैदान सूख गया था।
ताप
मा लन माली की पत्नी; बाग़ में फू ल चुनने-सँवारने “गाती ह मा लन अब” मा लन ने टोकरी म ताज़े गदे सजा दए।
वाली स्त्री
सुगीत सुंद र गीत, मीठा गान “गाकर सुगीत प्यारे” ब ने प्राथना-सभा म एक सुगीत सुनाया।
सौरभ सुग ंध , महक “सौरभ उड़ा रहा है” रातरानी का सौरभ पूरे आँगन म भर गया।
आमोद आनंद , हष, खुशी, पसन्नता “आमोद छा रहा है” वजय क खबर सुनते ही गाँव म आमोद छा
गया।
मनहर मन को हरने वाला, मनोहर “लेते कसान मनहर” पहाड़ का मनहर दृश्य भुलाए नह भूलता।
भाँ त तरह, पकार “इस भाँ त है अनोखी” इस भाँ त काम करोगे तो कभी पूरा नह
होगा।
अवनी पथ्ृ वी, धरती (किवता ‘ग ीष्म’ में) “अवनी आतप से लगी” वषा क पहली बूँद पड़ते ही अवनी महक
उठ ।
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शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
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िकरण (किवता ‘ग ीष्म’ में) “र व मयूख के ताप से”
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भोर क पहली मयूख पवत- शखर पर पड़ी।
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