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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 4: अपने प रवेश म ग त का वणन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
48 – 71 15 55 हन्द
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कक्षा 9 व ान अध्याय 4 अपने प रवेश म ग त का वणन AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: अपने प रवेश म ग त का वणन
यह अध्याय ग त के वणन क भाषा गढ़ता है — संदभ बदु के सापेक्ष त, च लत दूरी और व ापन, माध्य चाल और माध्य वेग, तथा माध्य
त्वरण। इसके बाद यही ग त त-समय एवं वेग-समय ाफ से पढ़ना सखाया जाता है, नयत त्वरण के लए तीन शुद्धग तक समीकरण व्युत्पन्न
कए जाते ह और अंत म एकसमान वृत्तीय ग त पर चचा होती है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
अन्वेषण (कक्षा 9) 48 – 71
खं ड प्रश्न
15 55
माध्यम
हन्द
चतन क जए — पृष्ठ 48
अध्याय का आरंभ
चतन क जए
प्र.1 हम अपने वाहन को आगे चलने वाले वाहन से कतनी दूरी पर रखना चा हए जससे आगे चलने वाले वाहन
चालक ारा अचानक ेक लगाने पर भी हमारा वाहन उससे टकराने से बच सके।
इतनी दूरी, जतनी म हमारा अपना वाहन रुक सके — और यह दूरी दो अलग-अलग भाग से बनती है।
रुकने की दू री = पितिक्रया दू री + बेक -दू री
पितिक्रया दू री = u × tr (चालक के पितिक्रया करने तक वाहन चलता ही रहता है)
बेक -दू री = u² / (2|a|) (v² = u² + 2as में v = 0 रखने पर)
मान ली जए हमारा वाहन u = 54 km h⁻¹ = 15 m s⁻¹ से चल रहा है, चालक का प्र त क्रया काल tr ≈ 1 s है और सूखी सड़क
पर ेक से |a| = 4 m s⁻² मलता है —
पितिक्रया दू री = 15 m s⁻¹ × 1 s = 15 m
बेक -दू री = (15 m s⁻¹)² / (2 × 4 m s⁻²) = 225 / 8 m = 28.1 m
कु ल = 15 m + 28.1 m = लगभग 43 m
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ऐसा क्य होता है: आगे वाला वाहन भी ेक लगा रहा होता है, इस लए वास्तव म हम उससे अ त रक्त कतनी दूरी
चा हए, यही मायने रखता है। प्र त क्रया काल पूरी तरह हा न है — उस एक सेकंड म वाहन पूरी चाल से चलता है
और ेक बलकुल नह लगता। इसी कारण सुर क्षत दूरी को मीटर म नह , ब ल्क समय म बताया जाता है (आगे वाले
वाहन से 2–3 सेकंड पीछे र हए) — समय-अंतराल चाल के साथ स्वयं बढ़ जाता है।
प्र.2 क्या यह दूरी हमारे वाहन क चाल पर नभर करती है?
हाँ — और अनुमान से कह अ धक तीव्रता से, क्य क ेक-दूरी चाल के वग के अनुपात म बढ़ती है।
बेक -दू री s = u² / (2|a|)
u = 15 m s⁻¹ (54 km h⁻¹) → s = 225 / 8 m = 28.1 m
u = 30 m s⁻¹ (108 km h⁻¹) → s = 900 / 8 m = 112.5 m
चाल दोगुनी करने पर ेक-दूरी दोगुनी नह , चार गुनी हो जाती है। प्र त क्रया दूरी (u × tr) केवल दोगुनी होती है, इस लए अ धक
चाल पर ेक-दूरी ही नणायक हो जाती है।
सुझाव: यही सूत्र बताता है क गीली सड़क पर, व ालय के पास और कुहरे म ग त-सीमा इतनी कम क्य रखी
जाती है। गीली सड़क |a| घटा दे ती है और s, |a| के व्युत्क्रमानुपाती है — ेक-क्षमता आधी होते ही हर चाल पर
रुकने क दूरी दोगुनी हो जाती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 51
अनुभाग 4.1.2 च लत दूरी और व ापन
प्र.1 क्या ये दो रा शयाँ कभी बराबर भी हो सकती ह?
हाँ। कुल च लत दूरी और व ापन का प रमाण तब बराबर होते ह जब वस्तु सरल रेखा म केवल एक ही दशा म चले और कभी
पलट कर वापस न आए।
चत्र 4.4 म धा वका वापस लौटती है, इस लए दोन भन्न ह —
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t = 0 s से t = 16 s के बीच —
कु ल चिलत दू री = OA + AB = 100 m + 60 m = 160 m
िवस्थापन का पिरमाण = OB = 40 m
160 m ≠ 40 m
कतु t = 0 s से t = 10 s के बीच वह केवल O से A तक जाती है, बना लौटे —
कु ल चिलत दू री = OA = 100 m
िवस्थापन का पिरमाण = OA = 100 m → बराबर
ऐसा क्य होता है: दूरी पथ के हर टु कड़े को जोड़ती है और आगे-पीछे म भेद नह करती। व ापन म पीछे क
ग त, आगे क ग त म से घट जाती है। जब तक पीछे क कोई ग त है ही नह , दोन योग एक-से रहते ह। जैसे ही वस्तु
पलटती है, लौटने वाला पथ दूरी म जुड़ता है पर व ापन का एक भाग काट दे ता है — इसके बाद व ापन का
प रमाण सदा च लत दूरी से कम ही रहेगा।
क्रयाकलाप 4.1 — आइए, व ष
े ण कर — पृष्ठ 51
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अनुभाग 4.1.2 च लत दूरी और व ापन
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क्रयाकलाप
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a s em4.5 म दशाए अनुसार कसी गद को बदु ‘O’ से ऊध्वाधरत: ऊपर क ओर फका गया है। यह ऊपर क ओर
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चत्र
a
प्र.1
चलती हुई बदु ‘B’ तक जाती है और वहाँ से गर कर वापस बदु O पर लौट आती है। क्या इस गद क ग त को
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सरल रेखा म ग त माना जा सकता है?
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B
140 cm
120 cm
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80 cm C
60 cm
40 cm A
20 cm
0 cm O
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चत्र 4.5, पृष्ठ 51 — गद क ऊध्वाधर ग त। ऊपर जाने (बाएँ) और नीचे आने (दाएँ) क ग तय को दो अलग-अलग
बदुदार रेखाओं से केवल स्पष्टता के लए दशाया गया है; वास्तव म गद एक ही सरल रेखा पर ऊपर जाती और नीचे
आती है।
हाँ। पूरी यात्रा — O से B तक ऊपर और B से O तक नीचे — एक ही ऊध्वाधर सरल रेखा पर होती है।
ऐसा क्य होता है: सरल रेखा म ग त का अथ यह नह क वस्तु एक ही ओर चलती रहे। इसका अथ केवल इतना है
क उसका पथ सरल रेखा हो। यहाँ गद नीचे आते समय ठ क उसी रेखा पर लौटती है; चत्र 4.5 म ऊपर और नीचे
क ग तय को दो अलग बदुदार रेखाओं से केवल इस लए दखाया गया है ता क A, B और C पृष्ठ पर एक-दूसरे पर
न पड़। वास्तव म दोन रेखाएँ एक ही ह।
स्वयं जाँ चए: गद B पर पलटती अवश्य है, इस लए यहाँ च लत दूरी और व ापन का प रमाण अलग हो जाएँगे —
ता लका 4.1 इसी को दखाने के लए बनी है।
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प्र.2 इस ग त के लए ता लका 4.1 म मान अं कत क जए।
B
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चत्र 4.5, पृष्ठ 51 — गद क ऊध्वाधर ग त। ऊपर जाने (बाएँ) और नीचे आने (दाएँ) क ग तय को दो अलग-अलग
बदुदार रेखाओं से केवल स्पष्टता के लए दशाया गया है; वास्तव म गद एक ही सरल रेखा पर ऊपर जाती और नीचे
आती है।
क्र. त O से चलकर इं गत त तक पहुँचने म O से चलकर इं गत त तक
सं. गद ारा च लत कुल दूरी पहुँचने म गद का व ापन
1. O 0 cm 0 cm
2. A 40 cm 40 cm ऊपर क ओर
3. B
4. C
5. O
ता लका 4.1, पृष्ठ 51 — गद ारा च लत दूरी और उसका व ापन (पुस्तक म छपी हुई ता लका, जसे भरना है)।
चत्र 4.5 से प ढ़ए — O 0 cm पर, A 40 cm पर, उच्चतम बदु B 140 cm पर और C 80 cm पर है। कतु C नीचे आते समय
अं कत है, अथात गद C पर तब पहुँचती है जब वह B से 60 cm नीचे आ चुक होती है।
क्र. त O से चलकर इं गत त तक पहुँचने म गद O से चलकर इं गत त तक पहुँचने म
सं. ारा च लत कुल दूरी गद का व ापन
1. O 0 cm 0 cm
2. A 40 cm 40 cm ऊपर की ओर
3. B 140 cm 140 cm ऊपर की ओर
4. C 200 cm 80 cm ऊपर की ओर
5. O 280 cm 0 cm
C पर: दू री = OB + BC = 140 cm + (140 cm − 80 cm) = 140 cm + 60 cm = 200 cm
िवस्थापन = C की िस्थित − O की िस्थित = 80 cm − 0 cm = 80 cm ऊपर की ओर
वापस O पर: दू री = OB + BO = 140 cm + 140 cm = 280 cm
िवस्थापन = 0 cm − 0 cm = 0 cm
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140 B
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ऊपर: O → A → B
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= 140 cm
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नीचे: B → C →aOse m.
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0 cm O
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गद 140 cm ऊपर जाती है और उतने ही 140 cm नीचे लौटती है — पथ 280 cm लंबा है पर त म सकल प रवतन शून्य।
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प्र.3 ता लका 4.1 म दए गए आँकड़ का व ेषण क जए और व ापन के संबंध म नीचे दए गए कथन म से सत्य
कथन का चयन क जए— (i) यह कभी भी शून्य नह होता है। (ii) इसका प रमाण कुल च लत दूरी से अ धक हो
सकता है। (iii) इसका प रमाण कुल च लत दूरी से कम हो सकता है या उसके बराबर हो सकता है। (iv) इसका
प रमाण सभी तय म सदै व च लत दूरी से कम होता है।
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चत्र 4.5, पृष्ठ 51 — गद क ऊध्वाधर ग त। ऊपर जाने (बाएँ) और नीचे आने (दाएँ) क ग तय को दो अलग-अलग
बदुदार रेखाओं से केवल स्पष्टता के लए दशाया गया है; वास्तव म गद एक ही सरल रेखा पर ऊपर जाती और नीचे
आती है।
क्र. त O से चलकर इं गत त तक पहुँचने म O से चलकर इं गत त तक
सं. गद ारा च लत कुल दूरी पहुँचने म गद का व ापन
1. O 0 cm 0 cm
2. A 40 cm 40 cm ऊपर क ओर
3. B
4. C
5. O
ता लका 4.1, पृष्ठ 51 — गद ारा च लत दूरी और उसका व ापन (पुस्तक म छपी हुई ता लका, जसे भरना है)।
सत्य कथन है — (iii) इसका प रमाण कुल च लत दूरी से कम हो सकता है या उसके बराबर हो सकता है।
ता लका के आँकड़ पर एक-एक कथन जाँ चए —
(i) असत्य — अं तम पं क्त म गद वापस O पर है और व ापन ठ क 0 cm है।
(ii) असत्य — C पर व ापन 80 cm है जब क च लत दूरी 200 cm। व ापन कभी अ धक हो ही नह सकता, क्य क
यह तो दोन तय के बीच क सीधी दूरी मात्र है।
(iii) सत्य — A पर दोन 40 cm ह (बराबर); गद के पलटने के बाद हर जगह व ापन कम है।
(iv) असत्य — इसम "सभी तय म" कहा गया है, जब क A पर दोन बराबर ह, अतः "कम" हर त म लागू नह
होता।
ऐसा क्य होता है: दो बदुओं के बीच सबसे छोटा माग उन्ह मलाने वाली सरल रेखा होती है। व ापन वही सीधी
दूरी है, जब क च लत दूरी वास्तव म अपनाए गए माग क लंबाई। कोई माग सीधी रेखा से छोटा हो नह सकता,
इस लए व ापन का प रमाण ≤ च लत दूरी — और बराबरी तभी, जब माग स्वयं वही सीधी रेखा हो, अथात वस्तु
कभी लौटे नह ।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 51
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अनुभाग 4.1.2 च लत दूरी और व ापन
सो चए और बताइए
प्र.1 कसी सीधे धावन पथ पर इसके दो सर के बीच इधर से उधर दौड़ते हुए कसी धावक के उदाहरण ( चत्र 4.4) म
धावक का व ापन शून्य कब होगा? उस त म उसके ारा तय क गई कुल दूरी कतनी होगी?
कु ल चिलत दूरी
स्थापन
िव
t = 16 s
O B A
0m 20 m 40 m 60 m 80 m 100 m
t=0s t=4s t = 10 s
चत्र 4.4, पृष्ठ 50 — धावक O → A (100 m) तक जाकर B (60 m) पर लौटता है। कुल च लत दूरी 160 m; O से
व ापन 40 m।
व ापन उसी क्षण शून्य होगा जब वह लौट कर अपने प्र ान बदु O पर आ जाएगी — क्य क व ापन त म सकल
प रवतन है और तब उसक अं तम त आरं भक त के बराबर हो जाती है।
िवस्थापन = अंितम िस्थित − आरंिभक िस्थित
=0m−0m=0m
य द वह O से A तक (100 m) दौड़ कर वापस O पर आती है, तो —
कु ल चिलत दू री = OA + AO
= 100 m + 100 m = 200 m
ऐसा क्य होता है: दोन रा शयाँ अलग-अलग प्रश्न का उत्तर दे ती ह। "आप कतना दौड़े?" — इसम पथ का हर
मीटर गना जाता है, लौटने का भी। "अब आप आरंभ क तुलना म कहाँ ह?" — इसम पथ का कोई महत्त्व नह ।
इस लए हर बंद यात्रा म व ापन शून्य और दूरी शून्येतर होती है।
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co m ापन
m.
स्वयं जाँ चए: O पर समाप्त होने वाली कसी भी यात्रा म व ापन शून्य होगा — O से B और वापस म व
as e
com
0 m पर दूरी 80 m, तथा O–A–O–A–O म व ापन 0 m पर दूरी 400 m।
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m
ase
agl कसी वाहन म उपयुक्त ईंधन का प रमाण नम्न ल खत म से कस रा श पर नभर करता है? अपने उत्तर के
प्र.2
m
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समथन म तक द जए। (i) कुल च लत दूरी (ii) व ापन
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agl
(i) कुल च लत दूरी।
c o m
.
m को धकेलते रहना
s e
ऐसा क्य होता है: इंजन को सड़क के हर एक मीटर पर घषण और वायु-प्र तरोध के वरुद्ध वाहन
. c omकाय — और इस लए जलने वाला ईंधन — पूरे पथ पर जुड़ता जाता aहै।glवa ापन पथ के वषय म
पड़ता है। यह
कुछem
l a s बताता ही नह ।
agएक सरल परीक्षण से बात स्पष्ट हो जाती है। मान ली जए कोई ऑटो आपको घर से 4 km दूर व ालय छोड़ता है और वापस घर
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लौट आता है —
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कु ल चिलत दू री = 4 km + 4 km =g8lkm
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िवस्थापन = 0 km
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m ापन पर नभर होता, तो लौटती यात्रा न:शुल्क होनी चा हए थी और टं क अंत म s
a e ही भरी रहती जतनी आरंभ
o l
स्पष्टत: नह होता। ईंधन-मापी और ओडोमीटर, दोन दूरी का हसाब रखते ह, वagापन का नह ।
म। ऐसा.c
य द ईंधन व उतनी
m
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agl क्या आप जानते ह? इसी कारण ऑटो या टै क्सी का मीटर ओडोमीटर के पा ांक (दूरी) पर चलता है, इस बात पर
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नह क आप आरंभ बदु से अंत म कतनी दूर पहुँचे।
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प्र.3 कोई गद एक अ भनत पथ पर नीचे क ओर लुढ़कती है जैसा चत्र 4.6 म दशाया गया है। क्या इसक ग त सरल
रेखीय ग त है? य द यह मान लेते ह क गद का प्र ान बदु ‘O’ मूल बदु है तो क्या O से D तक क इसक ग त
का चत्रण एक क्षै तज रेखा लेकर उसी प्रकार कया जा सकता है जैसा चत्र 4.3 म कया गया है? क्या तय
A, B, C एवं D म से प्रत्येक पर गद ारा च लत कुल दूरी एवं बदु O से इसके व ापन के प रमाण बराबर ह
अथवा भन्न- भन्न ह?
40 cm
10 cm
O 20 cm
30 cm
A
B
C
D
चत्र 4.6, पृष्ठ 51 — कसी अ भनत पथ पर लुढ़कती हुई कोई गद। OA = 40 cm, AB = 10 cm, BC = 20 cm, CD
= 30 cm।
O B A
− +
−20 m 0m 20 m 40 m 60 m 80 m 100 m
चत्र 4.3, पृष्ठ 50 — एक सरल रेखा पर अं कत संदभ बदु O तथा समय के दो भन्न क्षण पर धा वका क तयाँ B
एवं A।
हाँ, यह सरल रेखीय ग त है। चत्र 4.6 का अ भनत पथ स्वयं एक सरल रेखा है (भले ही ढलवाँ), और गद पूरे समय उसी पर बनी
रहती है — अत: पथ सरल रेखा है।
हाँ, इसे चत्र 4.3 जैसी रेखा पर दशाया जा सकता है। ग त एक वमीय है — O से पथ के अनु दश एक ही संख्या गद क त
पूरी तरह तय कर दे ती है। उस संख्या-रेखा को कागज़ पर क्षै तज ख चना केवल सु वधा है — वह रेखा वास्तव म अ भनत पथ को ही
नरू पत करती है, और उस पर धनात्मक दशा "O से D क ओर ढलान के अनु दश" है, न क "क्षै तजत: दाईं ओर"।
चत्र 4.6 के अंकन को पथ के अनु दश प ढ़ए — OA = 40 cm, AB = 10 cm, BC = 20 cm, CD = 30 cm। अत: O से
मापी गई तयाँ —
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त O से च लत कुल दूरी O से व ापन का प रमाण बराबर?
A 40 cm 40 cm हाँ
B 40 + 10 = 50 cm 50 cm हाँ
C 50 + 20 = 70 cm 70 cm हाँ
D 70 + 30 = 100 cm 100 cm हाँ
अत: A, B, C और D — प्रत्येक पर दोन मान बराबर ह।
ऐसा क्य होता है: गद अ भनत पथ पर केवल एक ही दशा म नीचे लुढ़कती है, कभी ऊपर वापस नह आती।
पलटाव न होने से पथ स्वयं ही दोन तय को मलाने वाली सरल रेखा है, इस लए उसक लंबाई सीधी दूरी के
बराबर है। हाँ, व ापन क दशा अ भनत पथ के अनु दश — ढलान से नीचे क ओर — है, क्षै तज नह ।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 53
अनुभाग 4.1.3 माध्य चाल एवं माध्य वेग
सो चए और बताइए
प्र.4 सड़क माग से प रवार स हत कसी यात्रा के लए आप पहले तीन घंटे म 200 km उत्तर दशा क ओर गाड़ी
चलाते ह। इसके प ात अगले दो घंटे म आप 200 km द क्षण दशा म गाड़ी ले जाते ह। अपनी पूरी यात्रा के लए
अपनी माध्य चाल और माध्य वेग ात क जए।
दोन रा शयाँ अलग-अलग नका लए — एक पथ पर नभर है, दूसरी केवल आरंभ और अंत पर।
कु ल चिलत दू री = 200 km + 200 km = 400 km
कु ल समय अंत राल = 3 h + 2 h = 5 h
माध्य चाल = कु ल चिलत दू री / समय अंत राल
= 400 km / 5 h = 80 km h⁻¹
वेग के लए उत्तर दशा को धनात्मक मा नए —
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िवस्थापन = (+200 km) + (−200 km) = 0 km
माध्य वेग = िवस्थापन / समय अंत राल
= 0 km / 5 h = 0 km h⁻¹
ऐसा क्य होता है: यात्रा ठ क वह समाप्त होती है जहाँ से आरंभ हुई थी, इस लए त म सकल प रवतन शून्य है
— और माध्य वेग, जो व ापन ÷ समय है, शून्य ही रहेगा, चाहे गाड़ी कतनी भी तेज़ चली हो। माध्य चाल शून्य
नह है क्य क ओडोमीटर ने पूरे 400 km गने। यह भी ध्यान द जए क माध्य चाल दोन खंड क चाल का
साधारण औसत नह है: खंड-चाल 200/3 ≈ 66.7 km h⁻¹ और 200/2 = 100 km h⁻¹ ह, जनका औसत
83.3 km h⁻¹ होता, 80 km h⁻¹ नह । सदै व कुल दूरी को कुल समय से भाग द जए।
SI मात्रक म: 80 km h⁻¹ = 80 × 1000 m / 3600 s = 22.2 m s⁻¹।
प्र.5 कस दशा/ कन दशाओं म — (i) कसी वस्तु के माध्य वेग का प रमाण उसक माध्य चाल के बराबर होता है?
(ii) कसी वस्तु के माध्य वेग का प रमाण तो शून्य होता है कतु उसक माध्य चाल शून्य नह होती है?
(i) जब वस्तु उस पूरे समय अंतराल म सरल रेखा पर केवल एक ही दशा म चले और कभी पलटे नह ।
|माध्य वेग| = |िवस्थापन| / t तथा माध्य चाल = चिलत दू री / t
ये तभी बराबर होंगे जब |िवस्थापन| = चिलत दू री
और यह के वल एकिदशीय सरल रेखीय गित में होता है
(ii) जब वस्तु समय अंतराल के अंत म अपनी आरं भक त पर लौट आए — तब व ापन शून्य हो जाता है पर पथ क लंबाई
शून्य नह होती।
िवस्थापन = 0 → माध्य वेग = 0
चिलत दू री ≠ 0 → माध्य चाल ≠ 0
उदाहरण — उदाहरण 4.2 म सारंग 50 s म तरण-ताल के एक सरे से दूसरे सरे तक जाकर लौट आता है; उसक माध्य चाल 1 m
s⁻¹ है और माध्य वेग 0 m s⁻¹। वृत्त क एक पूरी प रक्रमा, या उसी प्लेटफ़ॉम पर लौटती रेलगाड़ी भी ऐसा ही उदाहरण है।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 4 अपने प रवेश म ग त का वणन AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: दोन प रभाषाओं म केवल अंश का अंतर है — चाल म च लत दूरी और वेग म व ापन। दशा
(i) वह त है जहाँ ये दोन अंश एक हो जाते ह; दशा (ii) वह चरम त है जहाँ व ापन वाला अंश शून्य हो
जाता है जब क दूरी वाला अंश बढ़ता रहता है।
क्रयाकलाप 4.2 — आइए, प रकलन कर — पृष्ठ 55
अनुभाग 4.1.4 माध्य त्वरण
क्रयाकलाप
प्र.1 कार के माध्य त्वरण का मापन कसी कार क चाल 0 km h⁻¹ से लेकर 100 km h⁻¹ तक पहुँचने म लए गए
समय ारा कया जा सकता है। इंटरनेट पर व भन्न प्रकार क कार के लए इस समय के मान ढूँ ढ़ए और उन्ह
ता लका 4.2 म ल खए।
कार का वह समय अंतराल जसम कार क चाल 0 KM H⁻¹ से माध्य त्वरण का प रमाण
प्रकार 100 KM H⁻¹ हो जाती है (S) (M S⁻²)
ता लका 4.2, पृष्ठ 55 — कसी समय अंतराल म माध्य त्वरण का प रमाण (पुस्तक म यह ता लका रक्त छपी है, जसे
आपको भरना है)।
सबसे पहले चाल म हुए प रवतन को SI मात्रक म बद लए, क्य क त्वरण m s⁻² म चा हए।
चाल में पिरवतन = 100 km h⁻¹ − 0 km h⁻¹ = 100 km h⁻¹
100 km h⁻¹ = 100 × 1000 m / 3600 s = 27.8 m s⁻¹
अब प्रत्येक कार के लए नमाता या कसी सड़क-परीक्षण ारा बताया गया "0–100 km h⁻¹" समय ढूँ ढ़ कर बीच वाला स्तंभ
भ रए। सामान्यत: प्रका शत मान इस प्रकार होते ह — इसे केवल नमूना मा नए; क्रयाकलाप का उ े श्य यही है क आप वास्त वक
आँकड़े स्वयं खोज।
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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 4 अपने प रवेश म ग त का वणन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
(M S⁻²) m.
कार का प्रकार वह समय अंतराल जसम कार क चाल 0 KM H⁻¹ से 100 KM माध्य त्वरण का प रमाण
se
H⁻¹ हो जाती है (S)
c o m g l a
m . a 2.3
s e
छोटी हैचबैक 12.0
glaआकार की 10.0
aमध्यम 2.8
से डान
com
e m . ag
as
SUV (टब पेटोल) 8.5 3.3
िव तु हैचबैक 7.0
a g l 4.0
स्पोट् स कार 3.5 7.9
co m
e m.
m l as
.co
m जाता है, अत: त्वरण को तीन दशमलव तक लखना झूठ प रशुद्धता होगी। a
सुझाव: तीसरे स्तंभ को दो साथक अंक तक ही र खए। प्रका शत 0–100 समय स्वयं केवल दशमलव के एकg ान
a s eबताया
gl
तक
a
a s
coपmरकलन क जए।
प्रत्येक कार के लए माध्य त्वरण के प रमाण .का agl
s em
प्र.2
a
agl
co m
.
पहले सूत्र ल खए, फर मान प्र त ा पत क जए — ता लका क हर पं क्त के लए वही तीन पं क्तयाँ।
e m
c o m = (अंितम वेग − पारंिभक वेग) / समय अंतराल [समीकरण 4.3 ख]
g l as
m . a
e
माध्य त्वरण
as
agl
|a| = (27.8 m s⁻¹ − 0 m s⁻¹) / t
se m
com g l a
.
नमूना पं क्तय के लए हल —
m a
ase
agl
t = 12.0 s → |a| = 27.8 / 12.0 = 2.3 m s⁻²
m
t = 10.0 s → |a| = 27.8 / 10.0 = 2.8 m s⁻²
. co
t = 8.5 s → |a| = 27.8 / 8.5 = 3.3 m s⁻²
e m
m l as
m .co
t = 7.0 s → |a| = 27.8 / 7.0 = 4.0 m s⁻²
a g
l a se
ag t = 3.5 s → |a| = 27.8 / 3.5 = 7.9 m s⁻²
.c
s e m
m a
em . co agl
g l as
a
com
m .
m ase
.co
a g l Page 19 of 74
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ऐसा क्य होता है: हर कार को वही अं तम चाल प्राप्त करनी है, इस लए अंश 27.8 m s⁻¹ नयत है और त्वरण
केवल समय के व्युत्क्रमानुपाती हो जाता है। जो कार अपना 0–100 समय आधा कर ले, उसका माध्य त्वरण दोगुना
हो जाता है। इनक तुलना g = 9.8 m s⁻² से क जए — स्पोट् स कार तक आगे क ओर उतनी तेज़ी से चाल नह
बढ़ा पाती जतनी तेज़ी से गरता हुआ पत्थर नीचे क ओर बढ़ाता है।
स्वयं जाँ चए: यह मान पूरे दौर का माध्य है। वास्त वक त्वरण छोटे गयर म सवा धक होता है और अ धक चाल पर
वायु-प्र तरोध बढ़ने से घट जाता है — अत: कार कसी भी क्षण ठ क इसी मान से त्व रत नह हो रही होती।
क्रयाकलाप 4.3 — आइए, ाफ आले खत कर — पृष्ठ 57
अनुभाग 4.2.1 ाफ-आलेखन
क्रयाकलाप
प्र.1 ता लका 4.3 का संदभ ली जए। हम यह सु न त करने क आवश्यकता है क कस रा श (समय अथवा त)
को इन दोन म से कस अक्ष के अनु दश दशाया जाए।
समय 0S 1S 2S 3S 4S 5S 6S
त 0m 20 m 40 m 60 m 80 m 100 m 120 m
ता लका 4.3, पृष्ठ 57 — व भन्न क्षण पर कसी वाहन क तयाँ।
समय को X-अक्ष के अनु दश और त को Y-अक्ष के अनु दश दशाइए।
ऐसा क्य होता है: समय वह रा श है जसे हम स्वयं नय मत रूप से पढ़ते जाते ह — वाहन कुछ भी करे, समय
अपनी ग त से बीतता ही रहता है। त वह रा श है जो समय के अनुसार बदलती है। हर ाफ क प रपाट यही है
क नयंत्रक (स्वतंत्र) रा श X-अक्ष पर और प रव तत होने वाली (आ त) रा श Y-अक्ष पर रखी जाए। इससे
प्रवणता, अथात ऊध्वाधर प रवतन ÷ क्षै तज प रवतन, स्वयं ही " त म प रवतन ÷ समय म प रवतन" बन जाती
है — जो वेग है, और वही हम चा हए। अक्ष बदल द जए तो प्रवणता "समय प्र त मीटर" बन जाएगी, जसका कोई
उपयोग नह ।
सुझाव: यही नयम आगे वेग-समय ाफ को अथ दे ता है — X पर समय और Y पर वेग होने से प्रवणता त्वरण दे ती
है और क्षेत्रफल व ापन।
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प्र.2 ाफ पेपर पर नरूपण हेतु प्रत्येक रा श के लए एक उपयुक्त मापक्रम नधा रत क जए।
समय 0S 1S 2S 3S 4S 5S 6S
त 0m 20 m 40 m 60 m 80 m 100 m 120 m
ता लका 4.3, पृष्ठ 57 — व भन्न क्षण पर कसी वाहन क तयाँ।
अ ा मापक्रम वह है जो आँकड़ को पूरे पृष्ठ पर फैला दे और अंक भी सरलता से अं कत हो जाएँ। ता लका 4.3 के लए पुस्तक का
चयन है —
X-अक्ष पर: 5 भाग = 1 s (समय 0 s से 6 s तक)
Y-अक्ष पर: 5 भाग = 20 m (िस्थित 0 m से 120 m तक)
दे खए इससे कतना ान भरता है — 6 s × 5 भाग = 30 भाग चौड़ाई म, और 120 m ÷ 20 m × 5 = 30 भाग ऊँचाई म।
साधारण ाफ पेपर पर यह एक सु वधाजनक वगाकार क्षेत्र है।
ऐसा क्य होता है: मापक्रम दो शत से तय होता है। (क) सबसे बड़ा मान पृष्ठ पर आ जाए। (ख) प्रत्येक छोटा भाग
कसी गोल संख्या (1, 2, 5, 10, 20 …) को नरू पत करे, ता क बीच के बदु बना प रकलन के पढ़े जा सक। "5
भाग = 17 m" जैसा मापक्रम पृष्ठ पर आ तो जाएगा, पर उस पर 60 m अं कत करना असंभव होगा। इसी प्रकार
बहुत बड़ा मापक्रम, जैसे 5 भाग = 100 m, सभी छह बदुओं को एक कोने म समेट दे गा और प्रवणता का यथाथ
मापन असंभव हो जाएगा।
स्वयं जाँ चए: मापक्रम से ाफ का रूप बदलता है, अथ नह । रेखा कागज़ पर कतनी ढलवाँ दखती है यह आपके
चुने मापक्रम पर नभर है, पर उससे प रक लत वेग नह बदलता।
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प्र.3 सभी बदुओं का आलेखन हो जाने के प ात उन्ह संयो जत करके वाहन क ग त का त-समय ाफ बनाइए
(4.11 ग)। ता लका 4.3 म दए गए आँकड़ के लए यह एक सरल रेखा है।
समय 0S 1S 2S 3S 4S 5S 6S
त 0m 20 m 40 m 60 m 80 m 100 m 120 m
ता लका 4.3, पृष्ठ 57 — व भन्न क्षण पर कसी वाहन क तयाँ।
(0 s, 0 m), (1 s, 20 m), (2 s, 40 m) … (6 s, 120 m) अं कत करके जोड़ने पर मूल बदु से जाती हुई एक ही सरल रेखा
प्राप्त होती है।
िस्थित (m)
120
100
80
60
40
20
0 1 2 3 4 5 6
समय (s)
ता लका 4.3 का त-समय ाफ। हर 1 s म 20 m क समान वृ द्ध होने से सभी बदु एक ही सरल रेखा पर आते ह।
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ऐसा क्य होता है: प्रत्येक क्रमागत 1 s म वाहन क त ठ क 20 m बढ़ती है। समान क्षै तज प रवतन पर समान
ऊध्वाधर प रवतन — ज्या म त म यही सरल रेखा क शत है। इसक प्रवणता ही वेग है —
v = (120 m − 0 m) / (6 s − 0 s) = 20 m s⁻¹, पूरे समय िनयत
अत: सरल रेखीय त-समय ाफ का अथ है नयत वेग, अथात एकसमान ग त।
सुझाव: यह ाफ सड़क का चत्र नह है। यह यह नह कहता क वाहन "ऊपर" गया — यह कहता है क मूल बदु से
उसक दूरी समय के साथ नय मत रूप से बढ़ ।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 59
अनुभाग 4.2.2 त-समय ाफ
प्र.1 त-समय ाफ क आकृ त, ग त क प्रकृ त के संबंध म क्या इं गत करती है?
आकृ त तुरंत बता दे ती है क वेग नयत है या बदल रहा है, क्य क त-समय ाफ क प्रवणता ही वेग है।
त-समय ाफ क अथ कारण
आकृ त
ढलवाँ सरल रे खा िनयत वेग (एकसमान गित) समान समय अंतराल म समान व ापन, अत: प्रवणता
अप रव तत
समय-अक्ष के समांतर सरल रे खा वस्तु िवरामावस्था में त समय के साथ बदलती ही नह , अत: प्रवणता शून्य
उत्तरोत्तर ढलवाँ होता वक्र वेग बढ़ रहा है — त्विरत क्रमागत समान अंतराल म व ापन बढ़ते जाते ह
गित
उत्तरोत्तर चपटा होता वक्र वेग घट रहा है क्रमागत समान अंतराल म व ापन घटते जाते ह
पुस्तक के दोन उदाहरण इसे स्पष्ट करते ह। चत्र 4.13 (क) म वस्तु 2 s से 3 s के बीच 20 m और 5 s से 6 s के बीच भी 20 m
चलती है — समान समय म समान व ापन, अत: ाफ सरल रेखा और वेग नयत। चत्र 4.13 (ख) म 4 s से 6 s के बीच का
व ापन 10 s से 12 s के बीच के व ापन से कम है — ाफ ऊपर क ओर व क्रत है और वेग बढ़ रहा है।
ऐसा क्य होता है: वेग क प रभाषा है त म प रवतन ÷ समय म प रवतन, और इस ाफ पर " तम
प रवतन" ऊध्वाधर वृ द्ध है तथा "समय म प रवतन" क्षै तज वृ द्ध। अत: वेग ही ढलान है। जस आकृ त का ढलान
नयत हो उसका वेग नयत होगा; जसका ढलान बदले उसका वेग बदल रहा है — और वही त्वरण है।
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
त-समय ाफ से कौन-कौन-सी भौ तक रा शयाँ प्राप्त क जा सकती ह?
e
प्र.2
m l as
.co a g
a s em
a l बात नकाली जा सकती ह —
सीधेgतीन
1. कसी भी क्षण पर वस्तु क त — उस समय के ठ क ऊपर Y-मान पढ़ ली जए।
2. दो क्षण के बीच व
. com
ापन — दोन Y-मान का अंतर, s₂ − s₁।
ag
a s emवाली रेखा क प्रवणता।
agl
3. उन क्षण के बीच माध्य वेग — दोन बदुओं को मलाने
m
v = BC / CA = (s₂ − s₁) / (t₂ − t₁) [समीकरण 4.2 क]
co
िचत्र 4.14 से: v = (80 m − 40 m) / (4 s − 2 s) = 40 m / 2 s = 20 m s⁻¹
em.
m l as
.co a g
a s em
l
बना कसी प रकलन के यह भी पता चल जाता है क ग त एकसमान है (सरल रेखा), त्व रत है (वक्र) या वस्तु वरामावा म है
g(समय-अक्ष
a वेग अ धक)। के समांतर रेखा) — और एक ही अक्ष पर दो रेखाएँ ह तो कौन-सी वस्तु तेज़ है (उदाहरण 4.7: अ धक ढलवाँ रेखा का
m a s
e
. c o
mे फलन के रूप म सं चत करता है, और ऊपर क हर रा श केवल agl
s
ऐसा क्य होता है: यह ाफ त को समय क
a g la नह दे ता वह है त्वरण — उसके लए यह जानना पड़ेगा क प्रवणता
त और समय से ही बनी है। जो यह सीधे
स्वयं कैसे बदल रही है, जसे आप उच्चतर कक्षाओं म सीखगे।
co m
m .
as e
. com4.4 — आइए, प रकलन कर — पृष्ठ 59–60 a g l
em
क्रयाकलाप
a s
agl
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
sem
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 24 of 74
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अनुभाग 4.2.2 त-समय ाफ
क्रयाकलाप
प्र.1 आपके ारा आले खत त-समय ाफ ( चत्र 4.11 ग) से इसका कोई भाग (माना AB) ली जए, जैसा चत्र
4.14 म दशाया गया है। बदु A से एक रेखा X-अक्ष के समांतर और दूसरी Y-अक्ष के समांतर ख चए। ऐसा ही
बदु B से क जए।
120
100
s₂ B
80
(m) ति थ
60
स्ि
A C
40
s₁
20
t₁ t₂
0 1 2 3 4 5 6
समय (s)
चत्र 4.14, पृष्ठ 59 — त-समय ाफ से वेग का प रकलन। A है (t₁ = 2 s, s₁ = 40 m) तथा B है (t₂ = 4 s, s₂ =
80 m); BC = s₂ − s₁ एवं CA = t₂ − t₁।
चत्र 4.11 (ग) क सरल रेखा पर A को t₁ = 2 s ( त s₁ = 40 m) और B को t₂ = 4 s ( त s₂ = 80 m) पर ली जए।
A से Y-अक्ष के समांतर ख ची रेखा समय-अक्ष पर t₁ अं कत करती है और X-अक्ष के समांतर ख ची रेखा त-अक्ष पर s₁। B से
भी वैसा ही करने पर t₂ और s₂ अं कत हो जाते ह।
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िस्थित (m)
B
80 m
BC = 40 m
CA = 2 s
40 m
A C
t₁ = 2 s t₂ = 4 s
समय (s)
A और B से लंब गराने पर समय अंतराल CA और त म प रवतन BC अं कत हो जाते ह।
सुझाव: प्रत्येक बदु से ख ची गई ये दो बदुदार रेखाएँ केवल A और B के नदशांक पढ़ने का साधन ह। ये कसी
ग त को नह दशात ।
प्र.2 बदु A से ख ची गई क्षै तज रेखा को आगे बढ़ाइए जससे त्रभुज ABC न मत होता है। त्रभुज क भुजाएँ BC
एवं CA क्या नरू पत करती ह?
समकोण त्रभुज ABC म ाफ-रेखा AB कण है। इसक दो लंब भुजाएँ ह —
CA — क्षै तज भुजा — समय म प रवतन t₂ − t₁ को नरू पत करती है।
BC — ऊध्वाधर भुजा — त म प रवतन s₂ − s₁ को नरू पत करती है, अथात उन दो क्षण के बीच का व ापन।
CA = t₂ − t₁ = 4 s − 2 s = 2 s
BC = s₂ − s₁ = 80 m − 40 m = 40 m
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ऐसा क्य होता है: CA उस दशा म है जसम X-अक्ष समय मापता है, अत: उसक लंबाई समय अंतराल ही हो
सकती है; BC उस दशा म है जसम Y-अक्ष त मापता है, अत: उसक लंबाई त म प रवतन ही होगी।
त्रभुज ख चने का लाभ यही है — यह अमूत "प्रवणता" को दो ऐसी भुजाओं म बदल दे ता है जन्ह ाफ के अपने
मापक्रम से नापा जा सकता है।
प्र.3 समीकरण (4.2 क) के अनुसार त म प रवतन (BC) को समय म प रवतन (CA) से वभा जत करने पर
आपको माध्य वेग प्राप्त होता है।
हाँ — त्रभुज क दोन भुजाओं का भागफल ठ क माध्य वेग क प रभाषा दोहरा दे ता है।
माध्य वेग = िस्थित में पिरवतन / समय अंत राल [समीकरण 4.2 क]
यहाँ िस्थित में पिरवतन = BC तथा समय अंत राल = CA
v = BC / CA = (s₂ − s₁) / (t₂ − t₁)
ऐसा क्य होता है: ज्या म त क दृ ष्ट से BC ÷ CA रेखा AB क प्रवणता है — वह कतनी ढलवाँ है। भौ तक क
दृ ष्ट से वही अनुपात व ापन ÷ समय है, अथात वेग। इस लए " त-समय ाफ क प्रवणता" और "वेग" याद
रखने योग्य दो अलग तथ्य नह ह; ये एक ही अनुपात के दो नाम ह। सामान्यत: कसी भी ाफ क प्रवणता, X-रा श
के सापेक्ष Y-रा श म प रवतन क दर दे ती है।
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प्र.4 ाफ से समय t₁ एवं t₂ तथा दू रय s₁ एवं s₂ के मान लेकर माध्य वेग का मान प रक लत कया जा सकता है।
120
100
s₂ B
80
(m) ति थ
60
स्ि
A C
40
s₁
20
t₁ t₂
0 1 2 3 4 5 6
समय (s)
चत्र 4.14, पृष्ठ 59 — त-समय ाफ से वेग का प रकलन। A है (t₁ = 2 s, s₁ = 40 m) तथा B है (t₂ = 4 s, s₂ =
80 m); BC = s₂ − s₁ एवं CA = t₂ − t₁।
चत्र 4.14 से पढ़े गए चार मान प्र त ा पत क जए —
v = (s₂ − s₁) / (t₂ − t₁)
= (80 m − 40 m) / (4 s − 2 s)
= 40 m / 2 s
= 20 m s⁻¹
ाफ सरल रेखा है, इस लए बदुओं का कोई भी अन्य युग्म वही उत्तर दे गा। t₁ = 0 s, t₂ = 6 s से जाँ चए —
v = (120 m − 0 m) / (6 s − 0 s) = 120 m / 6 s = 20 m s⁻¹ ✓
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as e
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ऐसा क्य होता है: सरल रेखा क प्रवणता हर जगह एक ही होती है। " नयत वेग" का अथ ठ क यही है, और
. com
m भन्न खंड
त-समय ाफ म अंतर पड़ताe—
s
m a
इसी लए यहाँ AB खंड का चयन कोई अंतर नह डालता। व क्रत
e m . co
भन्न माध्य वेग दे ते, क्य क वहाँ वेग स्वयं बदल रहा होता है।
agl
g l as
a स्वयं जाँ चए: ऊपर क भाँ त मात्रक भी साथ ले च लए। मीटर म सेकंड का भाग दे ने पर m s⁻¹ अपने आप आ
com
ag
जाता है — यह जाँचने का सरल तरीका है क भाग उलटा तो नह दे दया।
m .
as e
a g l
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 61–62
co m
m.
अनुभाग 4.2.3 वेग-समय ाफ
as e
. c om ाफ क आकृ त ग त क प्रकृ त के संबंध म क्या बताती है? a g l
प्र.1 m
se
वे ग -समय
l a
ag
s
m a
.co agl
यहाँ प्रवणता त्वरण है, इस लए आकृ त बताती है क वेग कस प्रकार बदल रहा है।
se m
g l a
a
वेग-समय ाफ क अथ पुस्तक का उदाहरण
आकृ त
co m
समय-अक्ष के समांतर सरल वेग िनयत, त्वरण शून्य
.
चत्र 4.17 (क) — 20 m s⁻¹ पर चलती
m
as e
com l
रे खा कार
.की ओर ढलवाँ सरल a g
e m
as रे खा
ऊपर वेग िनयत दर से बढ़ रहा है; त्वरण िनयत और वेग की चत्र 4.17 (ख) — 30 s म 0 से 15 m
agl
िदशा में s⁻¹
वेग िनयत दर से घट रहा है; त्वरण िनयत और वेग के चत्र 4.17 (ग) — 30 s म 15 m s⁻¹ से 0
se m
a
नीचे की ओर ढलवाँ सरल रे खा
िवपरीत
.c om a g l
m
se रहा है
l a
त्वरण स्वयं बदल
ag
विक्रत रे खा इस अध्याय म इस पर चचा नह
ता लका 4.5 बताती है क चत्र 4.17 (ख) सरल रेखा क्य है — प्रत्येक 5 s अंतराल म वेग ठ क 2.5 m s⁻¹ बढ़ता है, अथात
co m
समान समय म समान प रवतन।
m .
m as e
.aco= (2.5 m s⁻¹ − 0 m s⁻¹) / (5 s − 0 s) = 0.5 m s⁻² a g l
se m
g l a
a a = (5.0 m s⁻¹ − 2.5 m s⁻¹) / (10 s − 5 s) = 0.5 m s⁻² … पूरे समय वही
c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 29 of 74
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ऐसा क्य होता है: त्वरण है वेग म प रवतन ÷ समय म प रवतन, जो इन अक्ष पर ऊध्वाधर वृ द्ध ÷ क्षै तज वृ द्ध,
अथात प्रवणता है। नयत प्रवणता का अथ नयत त्वरण, और शून्य प्रवणता का अथ त्वरण बलकुल नह — चाहे
वेग कतना भी बड़ा क्य न हो।
प्र.2 वेग-समय ाफ से कौन-कौन सी भौ तक रा शयाँ ात क जा सकती ह?
तीन, और तीसरी ही इस ाफ को इतना उपयोगी बनाती है —
1. कसी भी क्षण पर वेग — Y-मान सीधे पढ़ ली जए।
2. माध्य त्वरण — दो बदुओं के बीच रेखा क प्रवणता।
3. व ापन — उस अंतराल म ाफ-रेखा और समय-अक्ष के बीच प रबद्ध क्षेत्रफल।
पवणता: a = BC / CA = (v − u) / (t₂ − t₁)
िचत्र 4.17 (घ) से 10 s और 20 s के बीच —
a = (10 m s⁻¹ − 5 m s⁻¹) / (20 s − 10 s) = 5 m s⁻¹ / 10 s = 0.5 m s⁻²
क्षेत्रफल: िचत्र 4.18 (क) में 0 s और 6 s के बीच िवस्थापन
= आयत OABC का क्षेत्रफल = OA × OC
= 20 m s⁻¹ × 6 s = 120 m
ऐसा क्य होता है: क्षेत्रफल एक ऊँचाई (वेग, m s⁻¹) और एक चौड़ाई (समय, s) का गुणनफल है, और m s⁻¹ ×
s = m — एक लंबाई। यह संयोग नह है: नयत वेग के लए व ापन = वेग × समय ठ क आयत का क्षेत्रफल ही
है। ढलवाँ रेखा के लए भी यही वचार चलता है, बस आकृ त को आयत और त्रभुज म बाँट लेते ह।
प्र.3 क्या वेग-समय ाफ से आप कसी अन्य भौ तक रा श का भी प रकलन कर सकते ह?
हाँ — व ापन, ाफ-रेखा और समय-अक्ष के बीच प रबद्ध क्षेत्रफल से।
चत्र 4.18 (ख) क त्व रत होती कार के लए 10 s से 20 s के बीच व ापन आकृ त ABDE का क्षेत्रफल है, जो एक आयत और
एक त्रभुज म बँट जाती है —
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कक्षा 9 व ान अध्याय 4 अपने प रवेश म ग त का वणन AglaSem · NCERT Solutions
िवस्थापन = आकृ ित ABDE का क्षेत्रफल
= आयत ACDE का क्षेत्रफल + ित्रभुज ABC का क्षेत्रफल
= (CD × DE) + (½ × CA × BC)
= (5 m s⁻¹ × 10 s) + (½ × 10 s × 5 m s⁻¹)
= 50 m + 25 m = 75 m
वे ग (m s⁻¹)
B
10
25 m
A
5
C
50 m
E D
10 s 20 s
10 s से 20 s के बीच व ापन = आयत (50 m) + त्रभुज (25 m) = 75 m।
ऐसा क्य होता है: आयत वह दूरी है जो कार तय करती य द वह पूरे 10 s अपने आरं भक वेग 5 m s⁻¹ पर ही
चलती रहती। त्रभुज वह अ त रक्त दूरी है जो उसे चाल बढ़ने के कारण मलती है। दोन को जोड़ना बस "जो होता"
म "त्वरण ने जो जोड़ा" मला दे ना है।
व ान एवं समाज — पृष्ठ 65
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अनुभाग 4.3 शुद्धग तक समीकरण
व ान एवं समाज
प्र.1 क्या अब आप यह समझ सकते ह क आपको अपना वाहन आगे चलने वाले वाहन से एक सुर क्षत दूरी पर क्य
बनाए रखना चा हए ( चत्र 4.20) और इस सुर क्षत दूरी का मान आपके आरं भक वेग म प रवतन से कस प्रकार
समायो जत करने क आवश्यकता होती है?
सुरिक्षत दू री
गित की िदशा
चत्र 4.20, पृष्ठ 65 — दो ग तमान वाहन के बीच सुर क्षत दूरी (पाठ्यपुस्तक के चत्र से नामां कत रेखा चत्र के रूप म
पुनःआले खत)।
हाँ। वाहन वहाँ नह रुकता जहाँ चालक चाहे — वह वहाँ रुकता है जहाँ भौ तक अनुम त दे , और वह ान u से नह , u² से तय
होता है।
रुकने की दू री = पितिक्रया दू री + बेक -दू री
= u tr + u² / (2|a|) [दू सरा पद v² = u² + 2as में v = 0 रखने से]
अध्याय के अपने ेक-मान |a| = 4 m s⁻² और प्र त क्रया काल tr = 1 s लेकर —
आरं भक वेग U प्र त क्रया दूरी U TR ेक-दूरी U²/2|A| कुल रुकने क दूरी
36 km h⁻¹ = 10 m s⁻¹ 10 m 12.5 m 22.5 m
54 km h⁻¹ = 15 m s⁻¹ 15 m 28.1 m 43.1 m
108 km h⁻¹ = 30 m s⁻¹ 30 m 112.5 m 142.5 m
54 से 108 km h⁻¹ जाने पर चाल दोगुनी होती है, पर रुकने क दूरी तीन गुने से भी अ धक हो जाती है — क्य क अकेली ेक-
दूरी ही चार गुनी हो जाती है।
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ऐसा क्य होता है: ेक लगने पर वाहन अपनी ग तज ऊजा एक लगभग नयत दर से खोता है, जो टायर को मलने
वाले घषण से तय होती है, और उस संतुलन म चाल वग के रूप म आती है। प्र त क्रया वाला भाग स्वभाव से भन्न है
— वह सड़क का वह टु कड़ा है जो पूरी चाल पर बना कसी ेक के तय होता है, इस लए वह केवल u के अनुपात म
बढ़ता है। यही कारण है क "20 m पीछे र हए" जैसा नयम व्यथ है — सुर क्षत दूरी चाल के साथ बढ़नी चा हए,
इसी लए चालक को समय-अंतराल (2–3 s) सखाया जाता है।
क्या आप जानते ह? जो कुछ भी |a| घटाता है — गीली या कंकरीली सड़क, घसे टायर, अ धक भार लदा ट्रक
— वह ेक-दूरी को उसी अनुपात म बढ़ा दे ता है। पकड़ आधी हो जाए तो ता लका क हर ेक-दूरी दोगुनी हो
जाएगी। वाहन से वाहन (V2V) प्रौ ो गक , जसे भारत स हत अनेक दे श म वक सत कया जा रहा है, दूसरे पद
पर प्रहार करती है — यह आगे वाले वाहन से इलेक्ट्रॉ नक चेतावनी दलवा कर प्र त क्रया काल को मनुष्य क सीमा
से बहुत नीचे ले आती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 66
अनुभाग 4.4.1 एकसमान वृत्तीय ग त
प्र.1 इस ब े ारा च लत दूरी कतनी है? मूल त से उसका व ापन कतना है?
चक्र य झूले पर बैठा बच्चा प र ध के अनु दश A से B होते हुए C तक जाता है ( चत्र 4.22)।
च लत दूरी = वृत्त के अनु दश वास्तव म तय कए गए वक्र ABC क लंबाई।
व ापन = आरं भक और अं तम तय को मलाने वाली सरल रेखा AC, जसक दशा A से C क ओर है।
ये दोन बराबर नह ह — वक्र बाहर क ओर उभरा हुआ है जब क जीवा सीधी काटती है, अत: वक्र ABC > जीवा AC।
ऐसा क्य होता है: वृत्ताकार पथ पर वस्तु प्रत्येक क्षण मुड़ रही होती है, इस लए वह कभी भी सीधे अपने गंतव्य क
ओर नह चल रही होती। वक्र का हर टु कड़ा उससे मलने वाली सीधी प्रग त से लंबा होता है। पथ क लंबाई और
त म सकल प रवतन के बीच का यही अंतर बताता है क हम दूरी और व ापन — दो अलग रा शयाँ — क्य
चा हए।
प्र.2 एक प रक्रमा (वृत्त का एक चक्कर) पूण करने म ब े ारा च लत दूरी कतनी है?
एक पूरी प रक्रमा का अथ है प र ध पर एक बार पूरा चक्कर, अत: च लत दूरी वृत्ताकार पथ क प र ध होगी।
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
एक पिरक्रमा में चिलत दू री = 2πR
m l as
.co
जहाँ R वृत्ताकार पथ की ित्रज्या है
a g
a s em
aglओर व ापन शून्य है, क्य क प रक्रमा के अंत म बच्चा ठ क उसी
दूसरी त पर लौट आता है जहाँ से चला था।
इसी कारण एक प रक्रमा म दोन माध्य रा शयाँ इतनी भन्न हो जाती ह। य द प रक्रमा म T समय लगे तो —
co m
e m . ag
माध्य चाल, vav = 2πR / T [समीकरण 4.5]
g l as
a
माध्य वेग = िवस्थापन / T = 0 / T = 0
co m
em.
m l as
.co g
स्वयं जाँ चए: R = 2 m के चक्र य झूले को एक चक्कर म T = 8 s लग तो vav = 2 × 3.14 × 2 m / 8 s =
m a
l a se
12.6 m / 8 s = 1.6 m s⁻¹, जब क उसी प रक्रमा म माध्य वेग 0 m s⁻¹ है।
a g
m a s
m .co
एकसमान वृत्तीय ग त म चाल तो अचर रहती है कतु कसी क्षण पर वेग क दशा के वषय म आपका क्या वचार
agl
se
प्र.3
l a
है? क्या यह प रव तत हो रही है?
a g
co m
m .
हाँ, दशा नरंतर बदलती रहती है — प्रत्येक क्षण। कसी बदु पर वेग उस बदु पर ख ची गई स्पश रेखा के अनु दश, ग त क दशा
m
म होता है, और वृत्त पर आगे बढ़ने के साथ स्पश रेखा घूमती जाती है।
o l a se
पुस्तक .का a g पर धावक एक चक्कर म 4 बार दशा
c आयताकार और षट्भुजाकार पथ वाला तक ( चत्र 4.23) यही दखाता है। आयत
m
se है, षट्भुज पर 6 बार। भुजाओं क संख्या बढ़ाते जाइए तो मोड़ अ धक बार और हर बार छोटे आते जाएँगे। अंतत: पथ वृत्त
aबदलता
agl बन जाता है — प्रत्येक भुजा एक बदु म समट जाती है और मुड़ना कभी रुकता ही नह ।
se m
comऔर दशा है। इनम से कसी एक का बदलना भी वेग का g l a
. a
eरmत्वरण। अत: एकसमान वृत्तीय ग त त्व रत ग त है, भले ही चालमापी
ऐसा क्य होता है: वेग केवल संख्या नह , प रमाण
बदलना है, और बदलता वेग अथात शून्s
a
l जीवन म हम वाहन को तभी "त्वरणशील" कहते ह जब उसक चाल बदले,
येत
का पा ांक कभी हले ही नह ।aदैgनक
और इसी लए वृत्तीय मोड़ पर अचर चाल से मुड़ती कार का त्वरण हम दखाई ही नह दे ता।
co m
m .
o m l a se
agके क्षण उसके वेग क दशा थी।
.cसरल रेखा म नकल जाता है, ठ क उसी स्पश रेखा के अनु दश जो मुक्त होने
स्वयं जाँ चए: क्रयाकलाप 4.5 स्पश रेखा को दृश्य बना दे ता है। कंचे के घूमते समय छल्ला उठा ली जए — कंचा
se m
g l a
a c
m .
a s e
comपृष्ठ 67 agl
m.
क्रयाकलाप 4.5 — आइए, जाँच कर —
ase
a g l
com
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 74
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अनुभाग 4.4.1 एकसमान वृत्तीय ग त
क्रयाकलाप
प्र.1 एक छल्ला, जैसे क आसंजक टे प का खाली रोल, तथा एक कंचा ली जए।
दृढ़ और कुछ चौड़ा छल्ला ली जए — आसंजक टे प के रोल का खाली गत्ते वाला भाग सबसे उपयुक्त है — और एक चकना काँच
का कंचा जो उसके भीतर सरलता से लुढ़क सके।
सुझाव: चौड़ा छल्ला लंबा वृत्ताकार पथ दे ता है, अत: कंचा प्र त सेकंड कम चक्कर लगाता है और आप उसक ग त
क दशा आँख से दे ख पाते ह। छल्ले क भीतरी द वार चकनी होना भी आवश्यक है — खुरदरी द वार कंचे को
बार-बार धक्का दे ती रहेगी और "वृत्तीय" ग त डगमगा जाएगी।
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प्र.2 छल्ले को एक चकनी सतह पर लटाकर र खए और कंचे को छल्ले के भीतर इस प्रकार प्रक्षे पत क जए क यह
इसक आंत रक प रसीमा के अनु दश घूमने लगे ( चत्र 4.24)।
कं चा
टे प का छल्ला
िचकनी सतह
चत्र 4.24, पृष्ठ 67 — छल्ले के भीतर ग तमान कंचा; यहाँ इसे ऊपर से दे खे गए नामां कत रेखा चत्र के रूप म
पुनःआले खत कया गया है (पाठ्यपुस्तक म छाया चत्र छपा है)।
छल्ले को चकनी मेज़ या फ़श पर सपाट र खए और कंचे को भीतरी द वार के अनु दश उछा लए, कद्र क ओर नह — जससे वह
प रसीमा से सटकर चक्कर लगाने लगे।
ऐसा क्य होता है: अपने आप छोड़ दया जाए तो कंचा सरल रेखा म लुढ़केगा। वह चक्कर केवल इस लए लगाता है
क छल्ले क भीतरी द वार उसे लगातार भीतर क ओर धकेलती रहती है और उसका पथ नरंतर मोड़ती रहती है।
द वार का यही भीतरी धक्का सरल रेखीय ग त को वृत्तीय ग त म बदलता है — और छल्ला उठाते ही यही धक्का
समाप्त हो जाएगा।
सुझाव: सतह का चकना होना महत्त्वपूण है। खुरदरे फ़श पर घषण कंचे को शीघ्र धीमा कर दे ता है, चाल अचर नह
रहती और ग त एकसमान वृत्तीय ग त नह रह जाती।
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प्र.3 पूवानुमान क जए क जब कंचा ग त क अव ा म हो और हम छल्ले को ऊपर उठा ल, तो क्या होगा?
पूवानुमान: कंचा मुड़ना बंद कर दे गा और सरल रेखा म नकल जाएगा — उसी बदु पर ख ची गई स्पश रेखा के अनु दश जहाँ वह
छल्ला उठने के क्षण था।
वह न तो चक्कर लगाता रहेगा, और न ही कद्र से बाहर क ओर त्रज्या के अनु दश उड़ेगा। परीक्षण से पहले अपना पूवानुमान लख
ली जए।
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक क्षण कंचे का वेग पहले से ही स्पश रेखा के अनु दश है — वह वास्तव म उसी दशा म
चल रहा है। द वार केवल उस वेग क दशा को मोड़े जा रही थी। द वार हटते ही दशा बदलने वाला कुछ बचता ही
नह , अत: कंचा उसी दशा म चलता रहता है जसम वह उस क्षण चल रहा था।
प्र.4 अब कंचे ारा एक या दो चक्कर पूरे कर लेने के प ात बना इसक ग त को बा धत कए, छल्ले को ऊपर उठा
ली जए। आप क्या अवलोकन करते ह? क्या कंचा अपनी वृत्ताकार ग त बनाए रखता है? या यह कसी अन्य ढं ग
से ग त करने लगता है?
अवलोकन: कंचा तुरंत वृत्त छोड़ दे ता है और सरल रेखा म लुढ़कता चला जाता है। वह वृत्तीय ग त नह बनाए रखता।
वह जस सरल रेखा पर जाता है, वह ठ क उसी बदु पर वृत्त क स्पश रेखा है जहाँ कंचा छल्ला उठाते समय था — अत:
क्रयाकलाप दोहरा कर कसी दूसरे बदु पर छल्ला उठाइए तो कंचा कसी दूसरी दशा म नकलेगा।
ऐसा क्य होता है: मुक्त होते ही कंचा उसी दशा म चलता रहता है जसम वह उस क्षण चल रहा था, और अब कोई
द वार उसे बग़ल से धकेल नह रही, इस लए दशा बदलने का कोई कारण नह बचता। इससे दो बात एक साथ पुष्ट
होती ह — (क) वृत्तीय ग त म वेग स्पश रेखा के अनु दश होता है, और (ख) वृत्तीय ग त बनाए रखने के लए पथ को
नरंतर मोड़ने वाली कसी वस्तु का होना आवश्यक है। (ख) का कारण आप आगे के अध्याय म जानगे।
प्र.5 प रणाम क पु ष्ट के लए इस क्रयाकलाप को अनेक बार दोहराइए।
कम से कम चार-पाँच बार क जए, हर बार वृत्त के स्पष्टत: भन्न बदु पर छल्ला उठाइए, और कंचे के नकलने क दशा अं कत कर
ली जए या नोट कर ली जए।
हर बार वही नष्कष मलना चा हए — सरल रेखा म नकलना, और सदै व मु क्त- बदु पर ख ची गई स्पश रेखा के अनु दश।
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ऐसा क्य होता है: एक ही प्रयास संयोग हो सकता है — कंचे को धक्का लग गया हो या सतह ढलवाँ हो। मु क्त-
बदु जान-बूझकर बदल कर दोहराने से हम नयम क जाँच करते ह, कसी एक उदाहरण क नह । य द कंचा त्रज्या
के अनु दश नकलता या मुड़ता रहता, तो स्पश रेखा वाला स्पष्टीकरण ग़लत सद्ध हो जाता। ऐसा कभी नह होता —
इसी लए नष्कष वश्वसनीय है।
स्वयं जाँ चए: य द चक्कर के दौरान कंचा स्पष्ट रूप से धीमा पड़ता दखे तो आपक सतह पयाप्त चकनी नह है
— काँच क मेज़ या भली प्रकार पॉ लश कए फ़श पर क जए, ता क वृत्तीय ग त एकसमान के नकट रहे।
अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 68–70
अध्याय के अंत के प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
प्र.1 मेरे पताजी एक सीधी सड़क पर चल कर एक दुकान पर गए जसक घर से दूरी 250 m है। वहाँ पहुँच कर उन्ह ने
पाया क वह कपड़े का थैला लाना भूल गए ह। वह घर वापस लौटे , थैला लेकर दुकान पर आए, सामान खरीदा
और लौट कर घर आ गए। बताइए क उन्ह ने कुल कतनी दूरी तय क ? उनके घर से व ापन का मान कतना
हुआ?
यात्रा को चार खंड म बाँ टए। प्रत्येक खंड 250 m लंबा है।
खंड यात्रा दूरी
1 घर → दुकान 250 m
2 दुकान → घर (थैले के लए) 250 m
3 घर → दुकान (पुन:) 250 m
4 दुकान → घर (सामान लेकर) 250 m
कु ल चिलत दू री = 250 m + 250 m + 250 m + 250 m
= 4 × 250 m = 1000 m = 1 km
व ापन के लए घर को मूल बदु और दुकान क दशा को धनात्मक मा नए —
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
िवस्थापन = अंितम िस्थित − आरंिभक िस्थित
m l as
=0m−0m=0m
m .co a g
l a se
g
aऐसा क्य होता है: पूरी यात्रा के अंत म वे ठ क वह खड़े ह जहाँ से चले थे, इस लए त म सकल प रवतन शून्य
co m
है — चाहे उन्ह ने वह सड़क कतनी ही बार नापी हो। दूरी म, इसके वपरीत, चलने का हर मीटर गना जाता है, और
भूला हुआ थैला उन्ह 500 m अ त रक्त चलवा गया।
e m . ag
g l as
a
c o m
.
प्र.2 कोई व ाथ एक पुस्तक लेने के लए व ालय भवन के भूतल से चतुथ तल तक दौड़ते हुए जाता है और फर
उतर कर तीय तल
s e
त अपने कक्षा-कक्ष म लौटता है। य द प्रत्येक तल क ऊँचाई 3 mmहै तो ात क जए—
. comे ारा च लत ऊध्वाधर दूरी, तथा (ii) आरं भक बदु से उसके ऊध्वाधर
(i) उसक
a gवla ापन का प रमाण
s em
la
agउत्तर
s
एक तल क ऊँचाई = 3 m। ऊँचाइयाँ भूतल से मा पए और ऊपर क दशा को धनात्मक ली जए।
m a
m .co agl
l a se
g
भूत ल → चत थ
ु तल: 4 तलों की चढ़ ाई = 4 × 3 m = 12 m (ऊपर)
चत थ a
ु तल → ि तीय तल: 2 तलों की उतराई = 2 × 3 m = 6 m (नीचे )
co m
m .
(i) च लत ऊध्वाधर दूरी
m as e
.co a g l
a s e=m12 m + 6 m = 18 m
a gl
se m
com l a
(ii) आरं भक बदु से ऊध्वाधर व ापन का प रमाण
. a g
e m
भूत ल से ि तीय तल की ऊँ चाई = l2a×s3 m = 6 m
ag
िवस्थापन = 6 m − 0 m = 6 m, ऊ ध्व धरत : ऊपर की ओर
co m
m .
o m l a se
.cजुड़ते ह। कतु जब हम केवल यह पूछते ह क " व ाथ अब आरंभ क तुaलgना म कतना ऊपर है?", तब वे ऊपर
ऐसा क्य होता है: नीचे उतरे गए 6 m वास्त वक चढ़ाई-उतराई ह — पैर उन्ह महसूस करते ह — इस लए वे दूरी म
s e m
a
agl
चढ़े 12 m म से घट जाते ह। इसी लए दूरी 12 + 6 = 18 m और व ापन 12 − 6 = 6 m।
.c
s e m
m a
. co agl
सुझाव: यहाँ संख्याएँ तल के अंतराल ह, तल के क्रमांक नह । भूतल से चतुथ तल तक 4 अंतराल ह, 5 नह ।
e m
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 74
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प्र.3 एक लड़क अपना स्कूटर चला रही है और पाती है क इसके ग तमापी यंत्र का पाठ्यांक र है। क्या यह संभव
है क उसका स्कूटर त्वरणशील हो? और य द ऐसा है तो कैसे?
हाँ, स्कूटर त्वरणशील हो सकता है — य द वह दशा बदल रही हो, जैसे कसी मोड़ पर या गोल चक्कर पर।
ऐसा क्य होता है: ग तमापी यंत्र केवल वेग का प रमाण बताता है। कतु वेग प रमाण और दशा दोन है, और
त्वरण वेग म प रवतन क दर है। अत: केवल दशा का बदलना ही शून्येतर त्वरण दे ने के लए पयाप्त है, भले ही सुई
बलकुल र खड़ी रहे।
त्वरण ≠ 0, यिद वेग का पिरमाण बदले, अथवा वेग की िदशा बदले, अथवा दोनों बदले ं
अनुभाग 4.4 क एकसमान वृत्तीय ग त ठ क यही त है — अचर चाल, नरंतर मुड़ता वेग, और इस लए त्व रत
ग त।
उसके स्कूटर का त्वरण शून्य केवल तभी होगा जब वह उसी र पा ांक के साथ सीधी सड़क पर चले।
स्वयं जाँ चए: मोड़ काटते समय आपको जो बग़ल का धक्का महसूस होता है, वही यह त्वरण है — जब क इंजन
क आवाज़ और ग तमापी का पा ांक बलकुल नह बदलते।
प्र.4 एक कार वरामाव ा से चलना आरंभ करती है और 6 s म इसका वेग 24 m s⁻¹ हो जाता है। इन 6 s म इसका
त्वरण और इसके ारा च लत दूरी ात क जए।
िदया है: u = 0 m s⁻¹ (िवरामावस्था से), v = 24 m s⁻¹, t = 6 s
माध्य त्वरण — समीकरण (4.3 ख) से —
a = (v − u) / t
= (24 m s⁻¹ − 0 m s⁻¹) / 6 s
= 24 m s⁻¹ / 6 s = 4 m s⁻², गित की िदशा में
च लत दूरी — समीकरण (4.4 ख) से —
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s = ut + ½at²
= (0 m s⁻¹ × 6 s) + (½ × 4 m s⁻² × (6 s)²)
= 0 + ½ × 4 × 36 m
= 72 m
स्वयं जाँ चए: नयत त्वरण म माध्य वेग = (u + v)/2 = (0 + 24)/2 = 12 m s⁻¹, अत: s = 12 m s⁻¹ × 6 s
= 72 m ✓। समीकरण (4.4 ग) से भी: v² = u² + 2as → 576 = 0 + 8s → s = 72 m ✓। तीन माग, एक ही
उत्तर।
ऐसा क्य होता है: कार पूरे समय चाल बढ़ा रही है, इस लए वह 24 m s⁻¹ क नयत चाल से चलती कार (जो 144
m तय करती) से कम और लगभग शून्य चाल से रगती कार से अ धक दूरी तय करती है — ठ क बीचोबीच। कारण
यह है क नयत त्वरण म वेग रै खक रूप से बढ़ता है, अत: माध्य वेग आरं भक और अं तम मान का साधारण
औसत ही होता है।
प्र.5 आरं भक वेग 28 m s⁻¹ एवं नयत त्वरण से ग तमान कोई मोटर साइ कल 98 m चल कर रुक जाती है। मोटर
साइ कल का त्वरण तथा इसे वरामाव ा म आने म लगे समय का मान ात क जए।
िदया है: u = 28 m s⁻¹, v = 0 m s⁻¹ (रुक जाती है), s = 98 m
त्वरण — समीकरण (4.4 ग) u, v, a और s को समय के बना जोड़ता है —
v² = u² + 2as
(0 m s⁻¹)² = (28 m s⁻¹)² + 2 × a × 98 m
0 = 784 m² s⁻² + 196 m × a
a = − 784 m² s⁻² / 196 m
a = − 4 m s⁻ ²
ऋण चह्न बताता है क त्वरण क दशा वेग क दशा के वपरीत है — मोटर साइ कल क चाल घट रही है।
लगा समय — अब समीकरण (4.4 क) से —
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v = u + at
0 m s⁻¹ = 28 m s⁻¹ + (− 4 m s⁻²) × t
4 t = 28 s
t=7s
स्वयं जाँ चए: s = ut + ½at² = 28 × 7 + ½ × (− 4) × 49 = 196 − 98 = 98 m ✓
ऐसा क्य होता है: पहले समीकरण (4.4 ग) चुनना ही पूरी यु क्त थी। प्रश्न म u, v और s दए ह, t नह — और
(4.4 ग) एकमात्र शुद्धग तक समीकरण है जसम t आता ही नह । जस अ ात रा श क आवश्यकता न हो, उससे
बचने वाला समीकरण चुनने से हर बार एक चरण बच जाता है।
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प्र.6 चत्र 4.27 दो ऐसी वस्तुओं A एवं B का त-समय ाफ दशाता है जो समांतर सरल रेखीय पथ पर एक ही
दशा म ग तमान ह। क्या वस्तुओं A एवं B का वेग कभी बराबर होगा? अपने उत्तर के समथन म तक द जए।
A
B
(m) ति थ
स्ि
0 5
समय (s)
चत्र 4.27, पृष्ठ 69 — समांतर सरल रेखीय पथ पर एक ही दशा म ग तमान दो वस्तुओं A एवं B के त-समय
ाफ। दोन रेखाएँ t = 5 s पर एक-दूसरे को काटती ह। (पुस्तक म त-अक्ष पर कोई मापक्रम अं कत नह है।)
नह । इनका वेग कभी बराबर नह होगा।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 4 अपने प रवेश म ग त का वणन
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यहाँ ये िमलतीcoहैm
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दोन a g
ाफ सरल रेखाएँ ह, अत: दोन वस्तुओं का वेग नयत है — कतु प्रवणताएँ भन्न ह, इस लए वेग हर क्षण भन्न ह।
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तक, दो चरण म —
mसरल रेखाएँ ह। सरल रेखीय l as
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1. दोन ाफ त-समय ाफ का अथ है प्रवणता कभी नह बदलती, अत: प्रत्येक वस्तु अपने-
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la 2. A क रेखा प्रत्येक बदु पर B क रेखा से अ धक ढलवाँ है। चूँ क
अपने नयत वेग से चल रही है।
ag त-समय ाफ क प्रवणता वेग है, अत: vA > vB —
और दोन नयत होने से यह असमानता पूरी यात्रा म बनी रहती है।
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vA = िनयत, vB = िनयत, तथा A की पवणता > B की पवणता
⇒ हर क्षण vA > vB ⇒ ये कभी बराबर नही ं होते
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omका अथ है उस क्षण दोन क l a se
ऐसा क्य होता है: दोन रेखाएँ लगभग t = 5 s पर एक-दूसरे को काटती अवश्य ह, और यही भ्रम क जड़ है।
.cकाटने ag है — न क वेग समान है। वेग बराबर
m होने के लए प्रवणताएँ बराबर चा हए, जससे दोन रेखाएँ समांतर हो जात , और समांतर रेखाएँ कभी मलती नह ।
त समान है — A, B को जा पकड़ता
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ag यहाँ रेखाएँ मलती ह — यही प्रमाण है क वे समांतर नह ह।
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सुझाव: B आरंभ म A से आगे है (उसक रेखा त-अक्ष पर ऊपर से शुरू होती है), पर A तेज़ है और t = 5 s पर
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उसे पार कर जाता है। इसके बाद A आगे रहता है और अंतर बढ़ता ही जाता है।
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प्र.7 चत्र 4.28 म दया गया ाफ सरल रेखा म ग तमान दो वस्तुओं A एवं B के लए 0 – 10 सेकंड के बीच उनक
तय म समय के साथ होने वाले प रवतन को दशाता है। सही वकल्प या वकल्प का चयन क जए— (i) 10
s समय अंतराल म दोन का माध्य वेग बराबर है क्य क उनक आरं भक और अं तम तयाँ समान ह। (ii) 10
s समय अंतराल म दोन क माध्य-चाल बराबर है क्य क ये दोन समान समय म समान दू रयाँ चलते ह। (iii) 10
s समय अंतराल म A क माध्य-चाल B क माध्य-चाल से कम है क्य क 10 s म इसके ारा च लत दूरी B ारा
च लत दूरी से कम है। (iv) 10 s समय अंतराल म A क माध्य-चाल B क माध्य-चाल से अ धक है, क्य क कुछ
काल-खंड म B क चाल A क चाल से कम है।
(m)
A
B
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0 10
समय (s)
चत्र 4.28, पृष्ठ 69 — सरल रेखा म ग तमान दो वस्तुओं A एवं B क तय म 0 s से 10 s के बीच समय के साथ
होने वाला प रवतन। दोन एक साथ चलना आरंभ करती ह और t = 10 s पर एक ही त पर पहुँचती ह। (पुस्तक म
त-अक्ष पर कोई मापक्रम अं कत नह है।)
सही वकल्प ह — (i) एवं (ii)।
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िस्थित (m)
A
B
0 10
समय (s)
A और B एक साथ चलते ह और एक साथ ही पहुँचते ह। A का वेग नयत है; B पहले धीमा और बाद म तेज़ — पर दोन के आरंभ और
अंत बदु एक ही ह।
ाफ प ढ़ए — दोन वस्तुएँ t = 0 s पर एक ही त से चलती ह और t = 10 s पर एक ही त पर पहुँचती ह। दोन पूरे समय
आगे ही बढ़ती ह — कोई वक्र कभी नीचे नह आता — अत: कोई भी पलटती नह ।
(i) सही। आरं भक और अं तम तयाँ समान होने का अथ है व ापन समान, और समय अंतराल भी वही 10 s।
माध्य वेग = िवस्थापन / समय अंत राल
A का िवस्थापन = B का िवस्थापन ⇒ माध्य वेग बराबर
(ii) सही। कोई भी वस्तु लौटती नह , इस लए प्रत्येक के लए च लत दूरी = व ापन का प रमाण — और वे बराबर ह।
चिलत दू री = |िवस्थापन| (कोई पलटाव नही ं)
⇒ A की माध्य चाल = B की माध्य चाल
(iii) ग़लत — A कम दूरी नह चलता; 10 s म दोन समान दूरी तय करते ह।
(iv) ग़लत — यह ठ क है क अंतराल के आरं भक भाग म B, A से धीमा है, पर बाद के भाग म वह उतना ही तेज़ है, और पूरे 10
s म दोन प्रभाव नरस्त हो जाते ह।
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ऐसा क्य होता है: माध्य चाल और माध्य वेग केवल दोन सर और कुल समय पर नभर करते ह — बीच म क्या
हुआ, इससे नह । B क यात्रा क्षण-प्र तक्षण A से बहुत भन्न है (B त्व रत हो रहा है, A नह ), पर माध्य रा शयाँ यह
अंतर दे ख ही नह पात । इसे पकड़ने के लए कसी वशेष क्षण पर उनके वेग क तुलना करनी पड़ेगी, माध्य क
नह ।
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प्र.8 54 km h⁻¹ क चाल से ट्रक चलता हुआ एक ट्रक चालक सड़क के कनारे लगा एक यातायात नदश-पट ( चत्र
4.29) दे खता है जसम ट्रक के लए ग तसीमा 40 km h⁻¹ सू चत क गई है। वह 36 s म अपनी चाल घटाकर
36 km h⁻¹ पर ले आता है। इस समयाव ध म उसके ारा च लत दूरी कतनी थी? यह मान ली जए क चाल
घटाने क अव ध म उसका त्वरण अचर था।
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Speed
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चत्र 4.29, पृष्ठ 69 — ग त सीमा का यातायात नदश-पट: कार के लए 50 km h⁻¹, ट्रक के लए 40 km h⁻¹।
पहले दोन चाल को SI मात्रक म बद लए, क्य क समय सेकंड म दया है।
u = 54 km h⁻¹ = 54 × 1000 m / 3600 s = 15 m s⁻¹
v = 36 km h⁻¹ = 36 × 1000 m / 3600 s = 10 m s⁻¹
t = 36 s
नयत त्वरण म माध्य वेग u और v का साधारण औसत होता है, अत: —
s = ½ (u + v) t
= ½ × (15 m s⁻¹ + 10 m s⁻¹) × 36 s
= ½ × 25 m s⁻¹ × 36 s
= 12.5 m s⁻¹ × 36 s = 450 m
स्वयं जाँ चए, लंबे माग से:
a = (v − u)/t = (10 − 15) m s⁻¹ / 36 s = − 0.139 m s⁻²
s = ut + ½at² = 15 × 36 + ½ × (− 0.139) × 1296 = 540 − 90 = 450 m ✓
ऐसा क्य होता है: चालक चाल घटा रहा है, इस लए त्वरण ऋणात्मक है — उसक दशा ग त के वपरीत है —
फर भी ट्रक आगे ही बढ़ रहा है, अत: दूरी पूरे समय धनात्मक रहती है। ध्यान द जए क केवल 18 km h⁻¹ चाल
घटाने म ही वह 450 m, यानी लगभग आधा कलोमीटर चल जाता है। राजमाग पर चाल तुरंत नह बदलती —
इसी लए ग त-सीमा का नदश-पट उस खंड से काफ़ पहले लगाना पड़ता है जहाँ वह सीमा लागू होती है।
क्या आप जानते ह? अंत म उसक चाल 36 km h⁻¹ है, जो 40 km h⁻¹ क सीमा से कम है — अत: इन 36 s
के अंत तक वह नयम का पालन कर रहा है।
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प्र.9 एक कार वरामाव ा से ग त आरंभ करती है और एकसमान त्वरण से 5 s म 20 m s⁻¹ का वेग प्राप्त कर लेती
है। इसके प ात 10 s तक यह 20 m s⁻¹ के वेग से चलती है और अंतत: ेक लगा कर (एकसमान त्वरण से) 6
सेकंड म रुक जाती है। इसके ारा च लत कुल दूरी ात क जए।
तीन चरण, और एक ही वेग-समय ाफ के नीचे तीन क्षेत्रफल।
वेग (m s⁻¹)
20
200 m
50 m 60 m
0 5 15 21
समय (s)
कुल दूरी ाफ के नीचे का पूरा क्षेत्रफल है — एक त्रभुज, एक आयत और एक और त्रभुज।
चरण 1 — चाल बढ़ना (0 s से 5 s): u = 0, v = 20 m s⁻¹, t = 5 s
s₁ = ½ (u + v) t = ½ × (0 + 20) m s⁻¹ × 5 s = 50 m
चरण 2 — नयत वेग (5 s से 15 s): v = 20 m s⁻¹, t = 10 s
s₂ = v × t = 20 m s⁻¹ × 10 s = 200 m
चरण 3 — ेक (15 s से 21 s): u = 20 m s⁻¹, v = 0, t = 6 s
s₃ = ½ (u + v) t = ½ × (20 + 0) m s⁻¹ × 6 s = 60 m
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कु ल चिलत दू री = s₁ + s₂ + s₃
= 50 m + 200 m + 60 m = 310 m
ऐसा क्य होता है: शुद्धग तक समीकरण केवल वह लागू होते ह जहाँ त्वरण नयत हो, और यहाँ त्वरण तीन भन्न
मान लेता है (+4 m s⁻², 0, तथा −10/3 m s⁻²)। इस लए यात्रा को उन्ह दो बदुओं पर काटना पड़ता है जहाँ
त्वरण बदलता है, हर खंड अलग हल करना पड़ता है और अंत म जोड़ना पड़ता है। ाफ इसे दखा दे ता है — एक के
बाद एक तीन सरल आकृ तयाँ।
स्वयं जाँ चए: 20 m s⁻¹ से रुकने म 6 s लगते ह, अत: a₃ = (0 − 20)/6 = − 3.33 m s⁻²। तब s₃ = 20 × 6
+ ½ × (− 3.33) × 36 = 120 − 60 = 60 m ✓
प्र.10 एक बस 36 km h⁻¹ के वेग से ग तमान है तभी चालक को 30 m आगे एक अवरोध दखाई पड़ता है। ेक
लगाने क प्र त क्रया म उसे 0.5 s का समय लगता है। ेक लगाने के प ात बस का वेग 2.5 m s⁻² के नयत
त्वरण से कम होता है। क्या यह बस अवरोध तक पहुँचने से पहले रुकेगी?
हाँ — बस अवरोध से 5 m पहले ही रुक जाएगी।
u = 36 km h⁻¹ = 36 × 1000 m / 3600 s = 10 m s⁻¹
चरण 1 — प्र त क्रया दूरी। 0.5 s तक चालक ने ेक छु आ ही नह , अत: बस पूरी चाल से चलती रहती है —
s₁ = u × tr = 10 m s⁻¹ × 0.5 s = 5 m
चरण 2 — ेक-दूरी। अब u = 10 m s⁻¹, v = 0, a = − 2.5 m s⁻²। समीकरण (4.4 ग) से —
v² = u² + 2as
(0 m s⁻¹)² = (10 m s⁻¹)² + 2 × (− 2.5 m s⁻²) × s₂
0 = 100 m² s⁻² − 5 m s⁻² × s₂
s₂ = 100 / 5 m = 20 m
चरण 3 — रुकने क कुल दूरी।
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s = s₁ + s₂ = 5 m + 20 m = 25 m
25 m < 30 m ⇒ बस 5 m की गुंजाइश के साथ रुक जाती है
ऐसा क्य होता है: प्र त क्रया दूरी भूल जाना सरल है, जब क यहाँ वह पूरी रुकने क दूरी का पाँचवाँ भाग है। उन
0.5 s म ेक कुछ भी नह कर रहे — बस केवल 10 m s⁻¹ से ज़मीन नापती रहती है। य द चालक का ध्यान 0.5 s
के बजाय 1.5 s के लए बँट जाता, तो अकेली प्र त क्रया दूरी 15 m और कुल 35 m हो जाती — बस अवरोध से
टकरा जाती, जब क ेक ठ क पहले जतने ही अ े काम कर रहे होते।
यह भी क जए: यही प रकलन 54 km h⁻¹ (15 m s⁻¹) क बस के लए, उसी प्र त क्रया काल और उसी ेक के
साथ दोहराइए। प्र त क्रया दूरी = 7.5 m, ेक-दूरी = 225/5 = 45 m, कुल 52.5 m — अवरोध क दूरी से
लगभग दोगुना। वह बस समय रहते नह रुक पाती।
प्र.11 कसी व ाथ ने कहा, “पृथ्वी सूय के चार ओर ग त करती है।” इस संदभ म चचा क जए क क्या पृथ्वी पर
रखी कसी वस्तु को वरामाव ा म माना जा सकता है।
दोन कथन एक साथ सत्य हो सकते ह, क्य क वराम और ग त सदै व कसी चुने हुए संदभ बदु के सापेक्ष ही बताए जाते ह।
चुना गया संदभ बदु क्या वस्तु क त समय के साथ बदलती है? नष्कष
मेज़, दीवार, भूिम नही ं वस्तु िवरामावस्था में है
सूय हाँ — वह पथ्ृ वी के साथ सूय के चारों ओर चलती है वस्तु गितमान है
पथ्ृ वी का अक्ष हाँ — घूणन के कारण वह िदन में एक बार चक्कर लगाती है वस्तु गितमान है
ऐसा क्य होता है: अध्याय क अपनी प रभाषा कहती है क वस्तु तब ग तमान है जब संदभ बदु के सापेक्ष उसक
त समय के साथ बदले। संदभ बदु बदलते ही उत्तर बदल सकता है, जब क वस्तु ने कुछ भी अलग नह कया।
अत: " वरामाव ा म होना" वस्तु का नरपेक्ष गुण कभी नह है — यह वस्तु और संदभ बदु, दोन के वषय म
कथन है।
अत: सही उत्तर यह है — पृथ्वी पर रखी वस्तु पृथ्वी के सापेक्ष वरामाव ा म है और सूय के सापेक्ष ग तमान है। दै नक जीवन म
हम चुपचाप पृथ्वी को ही संदभ बदु मान लेते ह, इसी लए मेज़ पर रखी पुस्तक को " वरामाव ा म" कहने पर कुछ अधूरा नह
लगता।
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क्या आप जानते ह? पृथ्वी आपको सूय के चार ओर लगभग 30 km s⁻¹ से ले जा रही है और भूमध्य रेखा पर
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लगभग 0.46 km s⁻¹ से पूव क ओर घुमा रही है। आपको कुछ अनुभव नह होता, क्य क आपक
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. cम,o वायु, कुस — आपके साथ ही चल रही है। a
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हर वस्तु — भू
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कसी साइ कल चालक के लए 0 s से 120 s के बीच वेग-समय ाफ चत्र 4.30 म दशाया गया है। उन क्षेत्रफल
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प्र.12
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को छायां कत (अलग-अलग रंग म) क जए जो इसका व ापन नरू पत करते ह, जब— (i) साइ कल
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चालक नयत वेग से चल रहा है। (ii) साइ कल चालक का वेग कम हो रहा है। 0 –120 s समय अंतराल म
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व ापन एवं माध्य त्वरण का प रकलन भी क जए।
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समय (s)
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चत्र 4.30, पृष्ठ 70 — कसी साइ कल चालक के लए 0 s से 120 s तक का वेग-समय ाफ: 0 s से 20 s तक वेग 0
→ 3 m s⁻¹, 20 s से 100 s तक नयत 3 m s⁻¹, फर 120 s पर घटकर 2 m s⁻¹।
co m
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g है, 20 s से 100 s तक 3 m s⁻¹ पर
.c4.30 को बदु-दर- बदु प ढ़ए — वेग 0 s से 20 s के बीच 0 से 3 m s⁻¹ तकaबढ़ता
m
se र रहता है, और 100 s से 120 s के बीच घट कर 2 m s⁻¹ रह जाता है।
चत्र
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वेग (m s⁻¹)
6
5
4
3
2
(i) 240 m
1 (ii) 50 m
30 m
0 20 40 60 80 100 120
समय (s)
नीला: नयत वेग वाला खंड (20 s – 100 s)। गुलाबी: घटते वेग वाला खंड (100 s – 120 s)। हरा: आरंभ म चाल बढ़ने वाला खंड।
(i) नयत वेग — 20 s से 100 s। ाफ के समतल भाग के नीचे का आयत छायां कत क जए।
िवस्थापन = आयत का क्षेत्रफल = v × t
= 3 m s⁻¹ × (100 s − 20 s) = 3 × 80 m = 240 m
(ii) वेग कम होना — 100 s से 120 s। गरते भाग के नीचे का समलंब चतुभुज छायां कत क जए।
िवस्थापन = ½ (समात
ं र भुजाओं का योग) × चौड़ ाई
= ½ × (3 m s⁻¹ + 2 m s⁻¹) × 20 s = ½ × 5 × 20 m = 50 m
120 s म कुल व ापन। आरं भक खंड (0 s से 20 s, एक त्रभुज) भी जो ड़ए —
0 s – 20 s: ½ × 20 s × 3 m s⁻¹ = 30 m
20 s – 100 s: 240 m
100 s – 120 s: 50 m
कु ल िवस्थापन = 30 m + 240 m + 50 m = 320 m
120 s म माध्य त्वरण। यह केवल दोन सर के वेग पर नभर है —
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aav = (अंितम वेग − आरंिभक वेग) / t
= (2 m s⁻¹ − 0 m s⁻¹) / 120 s
= 0.0167 m s⁻² ≈ 0.017 m s⁻², गित की िदशा में
ऐसा क्य होता है: माध्य त्वरण बहुत छोटा है और धनात्मक भी, जब क अं तम 20 s म साइ कल चालक क चाल
वास्तव म घट थी। कारण यह है क "माध्य" केवल पहले और अं तम पा ांक क तुलना करता है — वह
वरामाव ा से चला और 2 m s⁻¹ पर समाप्त हुआ, अथात सकल वृ द्ध। ाफ बीच म तीन बलकुल भन्न त्वरण
दखाता है (+0.15 m s⁻², 0, तथा −0.05 m s⁻²) — एक अकेला माध्य यह सब छपा लेता है।
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प्र.13 एक लड़क कसी सीधी सड़क पर दौड़ कर अपनी पहली मैराथन दौड़ प्र तयो गता क तैयारी कर रही है। व भन्न
समयाव धय म अपनी धावन-चाल के प रकलन के लए वह एक स्माटवॉच का उपयोग करती है। चत्र 4.31 म
दशाया गया वेग-समय ाफ व भन्न क्षण पर उसके वेग के मान को च त्रत करता है। ाफ के आधार पर उसके
ारा दौड़ी गई दूरी का आकलन क जए।
7.5
(km h⁻¹)
5.0
गवे
2.5
0 2 4 6
समय (h)
चत्र 4.31, पृष्ठ 70 — धा वका का वेग-समय ाफ, छपे हुए ाफ-जाल से पढ़कर बनाया गया (एक छोटा वग =
क्षै तज दशा म 0.2 h तथा ऊध्वाधर दशा म 0.25 km h⁻¹)। ध्यान द जए — पुस्तक म Y-अक्ष पर मात्रक ‘km
s⁻¹’ छपा है, जो मुद्रण-त्रु ट है; सही मात्रक km h⁻¹ है।
वह सीधी सड़क पर एक ही दशा म दौड़ती है, अत: उसके ारा तय दूरी वेग-समय ाफ के नीचे का क्षेत्रफल है। चत्र 4.31 के सात
अं कत बदु प ढ़ए (एक छोटा वग = 0.2 h क्षै तज और 0.25 km h⁻¹ ऊध्वाधर) —
समय (H) 0 0.6 1.6 3.0 4.6 5.6 6.6
वेग (KM H⁻¹) 7.0 7.0 7.5 7.5 7.0 6.5 6.5
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वेग (km h⁻¹)
7.5
5.0
क्षेत्रफल ≈ 47 km
2.5
0 2 4 6
समय (h)
धा वका के वेग-समय ाफ के नीचे का क्षेत्रफल। दोन अक्ष km और h म ह, अत: क्षेत्रफल सीधे कलोमीटर म आ जाता है।
क्षेत्रफल को छह प य म बाँट कर प्रत्येक पर समलंब- नयम लगाइए —
0 → 0.6 h: 7.0 × 0.6 = 4.2 km
0.6 → 1.6 h: ½(7.0 + 7.5) × 1.0 = 7.25 km
1.6 → 3.0 h: 7.5 × 1.4 = 10.5 km
3.0 → 4.6 h: ½(7.5 + 7.0) × 1.6 = 11.6 km
4.6 → 5.6 h: ½(7.0 + 6.5) × 1.0 = 6.75 km
5.6 → 6.6 h: 6.5 × 1.0 = 6.5 km
कु ल ≈ 4.2 + 7.25 + 10.5 + 11.6 + 6.75 + 6.5 = 46.8 km ≈ 47 km
स्वयं जाँ चए, शीघ्र व ध से: उसका वेग 6.5 – 7.5 km h⁻¹ क प से कभी बाहर नह जाता, अत: लगभग 6.6
h तक उसका औसत वेग लगभग 7 km h⁻¹ रहा। इससे 7 × 6.6 ≈ 46 km — ाफ जतनी प रशुद्धता दे सकता
है, उसम यही उत्तर है। बदु आँख से पढ़े गए ह, इस लए "लगभग 47 km" कहना ईमानदारी है; 46.8 km लखना
ाफ से अ धक प रशुद्धता का दावा होगा।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 4 अपने प रवेश म ग त का वणन
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ऐसा क्य होता है: मात्रक स्वयं हसाब रख लेते ह। km h⁻¹ म ऊँचाई और h म चौड़ाई का गुणनफल km दे ता है,
m क होती है,
अत: कोई रूपांतरण करना ही नह पड़ता। यह भी दे खए क दूरी कतनी है — पूरी मैराथन 42.2ekm
s
m
co म ही उससे अ धक दूरी तय कर चुक है। gl a
. a
em
अत: वह अभ्यास-दौड़
a s
gl क एक बात: हद संस्करण म चत्र 4.31 के ऊध्वाधर अक्ष पर "वेग (km s⁻¹)" छपा है, जब क क्षै तज
aछपाई
अक्ष h म है और यह एक धा वका क चाल है। सही मात्रक km h⁻¹ ही है (अं ेज़ी संस्करण म भी यही छपा है),
co m
और ऊपर का प रकलन उसी पर आधा रत है।
e m . ag
g l as
a
प्र.14 कसी राज्य-राजमाग पर प्रवेश करने के प ात एक कार 2 मनट तक 6 m s⁻¹ के नयत वेग से चलती है और
co m
m.
फर 6 सेकंड तक 1 m s⁻² के नयत त्वरण से त्व रत होती है। इस कार क ग त के लए वेग-समय ाफ बना
m as e
.co g l
कर 2 मनट 6 सेकंड क अव ध म राज्य के राजमाग पर कार का व ापन ात क जए।
m a
l a se
g
a पहले समय बद लए और अं तम वेग नका लए, ता क ाफ मापक्रम म बन सके।
om a s
2 िमनट = 120 s, अत: पूरा अंत राल = 120em
. c agl
l a s s + 6 s = 126 s
त्विरत होने के बाद अंितम वेग: v =aug+ at = 6 m s⁻¹ + (1 m s⁻² × 6 s) = 12 m s⁻¹
co m
m .
m as e
.co
वेग (m s⁻¹)
a g l
se m
g l a 12
a
se m
com a
54 m (यह पतली प ी)
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m
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agl
6
co m
.
720 m
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m l as
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a s em 0 120
agl समय (s) 126
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m
ापन पूरा छायां कत क्षेत्रफल है — नयत वेग वाले खंड का लंबा आयत और त्वरण वाले 6 s का पतला समलंब।
e
व
m a s
e m . co agl
as
भाग 1 — आयत (0 s से 120 s):
a g l
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 59 of 74