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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 9: च ड़या
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
116 – 127 19 37 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 36 pages
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: च ड़या
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 9 च ड़या के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह क वता बहार के क व आरसी प्रसाद सह (1911–
1996) क रचना है, जसम च ड़या मनुष्य को प्रेम, मल-जुलकर रहने, संतोष और स्वतंत्रता का संदेश दे ती है। पृष्ठ 116 से 127 तक क हर ग त व ध
— मेरी समझ से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, अनुमान और कल्पना से, क वता क रचना, भाषा क बात, भाव क
बात, आज क पहेली, चत्र क बात, नभय वचरण, साथ-साथ, शब्द एक अथ अनेक, रचनात्मकता, हमारा पयावरण, प रयोजना काय, झरोखे से,
साझी समझ और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 116 – 127
खं ड प्रश्न
19 37
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 118 और 119
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से
अ धक उत्तर भी हो सकते ह। 1. क वता के आधार पर बताइए क इनम से कौन-सा गुण प क्षय के जीवन म नह
पाया जाता है? • प्रेम-प्री त • मल-जुलकर रहना • लोभ और पाप • नभय वचरण
सट क उत्तर है — लोभ और पाप। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / ग़लत क वता का प्रमाण
प्रेम-प्री त प क्षय म है “ च ड़या बैठ प्रेम-प्री त क री त हम सखलाती है!”
मल-जुलकर रहना प क्षय म है “करते सब आपस म हल मल!”, “सब मल-जुलकर रहते ह वे”
लोभ और पाप पिक्षयों में नही ं है ★ “उनके मन म लोभ नह है, पाप नह , परवाह नह ”
नभय वचरण प क्षय म है “सीमा-हीन गगन म उड़ते, नभय वचरण करते ह”
क्य : प्रश्न म ‘नह पाया जाता है’ पूछा गया है, इस लए हम वह गुण चुनना है जो प क्षय म नह है। बाक तीन गुण
क वता म प क्षय क वशेषता के रूप म गनाए गए ह; केवल लोभ और पाप ही ऐसे ह जनका क व ने साफ़ शब्द
म नषेध कया है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए: ऐसे प्रश्न म सबसे पहले ‘नह ’ शब्द पर घेरा लगा ली जए। अकसर वद्याथ जल्दबाज़ी म सही गुण
चुन लेते ह और उत्तर उलट जाता है।
प्र.2 2. “सब मल-जुलकर रहते ह वे, सब मल-जुलकर खाते ह” क वता क यह पं क्त कन भाव क ओर संकेत
करती है? • असमानता और वभाजन • प्र तस्पधा और संघष • समानता और एकता • स्वाथ और ईष्या
सट क उत्तर है — समानता और एकता। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
‘सब’ = कोई छू टा नही ं, कोई ऊँ चा-नीचा नही ं → समानता
‘िमल-जुलकर’ = साथ रहना, साथ खाना → एकता
अथ — पिक्षयों में न भे द भाव है, न बँट वारा; वे एक पिरवार की तरह रहते है।
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वकल्प क्य नह
असमानता और वभाजन पं क्त म ‘सब’ शब्द दो बार आया है — यह तो बँटवारे का ठ क उल्टा है।
प्र तस्पधा और संघष पक्षी एक-दूसरे से होड़ नह करते; क वता म उनका आपस म लड़ना कह नह है।
स्वाथ और ईष्या अगले ही पद म लखा है — “बच जाता जो, और के हत, उसे छोड़ वे दे ते ह!” यह स्वाथ नह , त्याग है।
क्य : जंगल म खंजन, कपोत, चातक, को कल, काक, हंस, शुक — सब अलग-अलग जा त के पक्षी ह, फर भी
‘ हल मल’ कर रहते ह। क व इसी दृश्य से मनुष्य को जा त, धम और वग के भेद भुलाने का इशारा कर रहा है।
प्र.3 3. “वे कहते ह, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग म” क वता म पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लए कहते
ह? • आकाश म उड़ते रहना • बंधन म रहना • स्व ं द रहना • संचय करना
सट क उत्तर है — स्व ं द रहना। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
पिक्षयों का पश्न — “हम स्वच्छं द और क्यों त मु ने , डाली है बेड़ी पग में?”
पिक्षयों का सुझ ाव — “त मु दे खो हमको, िफर अपनी सोने की किड़ याँ तोड़ ो”
िनष्कष — वे मन ष्ु य से स्वच् छं द , यानी बंधन -मुक्त जीवन जीने को कहते है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प नणय कारण
आकाश म अंशतः य द इसे ‘सीमा-हीन गगन म नभय वचरण’ के प्रतीक के रूप म लया जाए तो यह भी चुना जा सकता है
उड़ते रहना स्वीकाय — प्रश्न म कहा भी गया है क एक से अ धक उत्तर हो सकते ह। पर शब्दशः मनुष्य उड़ नह सकता,
इस लए यह मुख्य उत्तर नह है।
बंधन म रहना ग़लत पक्षी तो बेड़ी तोड़ने को कह रहे ह, बंधन म रहने को नह ।
स्व ं द रहना सही ★ ‘स्वच्छं द’ शब्द क वता म ज्य -का-त्य आया है — “हम स्वच्छं द और क्य तुमने…”।
संचय करना ग़लत पक्षी संचय करते ही नह — “जो मलता है अपने श्रम से, उतना भर ले लेते ह”।
टप: ‘स्वच्छं द’ का अथ ‘मनमानी’ नह है। यहाँ इसका अथ है — लोभ, संग्रह और द्रोह के बंधन से मुक्त होकर
सहज जीवन जीना।
प्र.4 (ख) अब अपने मत्र के साथ मलकर चचा क जए और कारण बताइए क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
यह समूह-चचा क ग त व ध है। चचा म हर वद्याथ को अपने चुने हुए वकल्प के लए क वता क एक पं क्त प्रमाण के रूप म
बोलनी चा हए — यही इस ग त व ध का असली कौशल है।
चचा का तरीका:
1. पहले हर सदस्य अपना उत्तर पढ़े ।
2. फर क वता खोलकर वह पं क्त दखाए जससे उत्तर सद्ध होता है।
3. य द कसी का उत्तर अलग है तो उसक पं क्त भी सुनी जाए — दोन म कौन-सी अ धक सीधी है, यह समूह मलकर तय करे।
नमूना उत्तर:
प्रश्न मने यह चुना क्य क क वता कहती है
1 लोभ और पाप “उनके मन म लोभ नह है, पाप नह , परवाह नह ” — यह सीधा-सीधा नषेध है, इस लए संदेह क गुंजाइश
ही नह ।
2 समानता और “सब मल-जुलकर” म ‘सब’ समानता बताता है और ‘ मल-जुलकर’ एकता। बाक तीन वकल्प इसके उल्टे
एकता भाव ह।
3 स्वच्छंद रहना “हम स्वच्छं द और क्य तुमने, डाली है बेड़ी पग म?” — यहाँ पक्षी अपने स्वच्छं द जीवन क तुलना मनुष्य क
बेड़ी से कर रहे ह।
क्य यह ज़रूरी है: उत्तर सही होना आधा काम है; उत्तर का कारण बता पाना पूरा काम है। पाठ से प्रमाण दे ने क
यही आदत आगे हर वषय म काम आती है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या
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मलकर कर मलान — पृष्ठ 119
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पाठ से
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पाठ से मलान
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क वता म से चुनकर कुछ संदभ नीचे दए गए ह। अपने समूह म इन पर बातचीत क जए और इन्ह इनके सही
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भाव से मलाइए। इनके लए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने प रजन और शक्षक क सहायता ले सकते ह।
— संदभ: 1. च ड़या क बोली, 2. सोने क e कm
a s ड़याँ, 3. नभय वचरण, 4. मु क्त-मंत्र, 5. दनभर काम। भाव: 1.
बंधन और लालच, 2. श्रम और संतोष, l3. बंधन से मु क्त, 4. स्वतंत्रता और नबाध जीवन, 5. प्रेम और स्वतंत्रता
का संदेश।
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सही मलान इस प्रकार है —
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a g सं द सही भाव क वता क वह पं क्त जससे यह मलान बनता है
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5. पेम और स्वतंत्र ता
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1. च ड़या क “बोली म संदेश सुनाती है?” … “प्रेम-प्री त क री त हम सखलाती है! वह जग के बंद मानव
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बोली का संदे श को मु क्त-मंत्र बतलाती है!”
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2. सोने क
क ड़याँ
1. बंध न और लालच
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a क है, यानी धन का लालच ही बंधन बन गया है।
“तुम दे खो हमको, फर अपनी सोने क क ड़याँ तोड़ो” — कड़ी यानी ज़ंजीर, और वह ‘सोने’
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3. नभय 4. स्वतंत्र ता और “सीमा-हीन गगन म उड़ते, नभय वचरण करते ह” — जहाँ सीमा ही नह , वहाँ रुकावट भी
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वचरण िनब ध जीवन नह ।
4. मु .क्त-मं है!g
“वह जग के बंद मानव को मु क्त-मंत्र बतलाती a
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s e m त्र 3. बंध न से मुिक्त ” — ‘बंद ’ शब्द ही बता दे ता है क कससे
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मु क्त चा हए।
5. दनभर 2. श्रम और संतोष “ दन भर करते काम, रात म पेड़ पर सो जाते ह” और “जो मलता है अपने श्रम से, उतना भर
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काम ले लेते ह” — मेहनत भी, और उतने म ही संतोष भी।
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मलान का तरीका: पहले हर संदभ को क वता म ढूँ ढ़ए और उसक पूरी पं क्त प ढ़ए। पं क्त म जो शब्द सबसे
भारी है — ‘बंद ’, ‘सोने’, ‘सीमा-हीन’, ‘श्रम’ — वही भाव क ओर उँ गली उठा दे ता है।
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.cबंoधन स्वयं है, और ‘मु क्त-मंत्र’ उस बंधन से छू टने का उपाय है। g l
ध्यान र खए: 2 और 4 आपस म उलझ सकते ह, क्य क दोन बंधन से जुड़े ह। अंतर यह है — ‘सोने क क ड़याँ’
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 119
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह, इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार कक्षा म अपने समूह म साझा क जए और ल खए। (क) “ च ड़या बैठ
प्रेम-प्री त क री त हम सखलाती है!”
भावाथ: पीपल क डाली पर बैठ च ड़या केवल गाती नह , वह हम प्रेम से रहने का ढं ग सखाती है। ‘री त’ का अथ है — तरीका,
चलन। यानी प्रेम कोई भाषण दे कर सखाने क चीज़ नह , जीकर दखाने क चीज़ है — और च ड़या वही कर रही है।
क्य यह पं क्त महत्वपूण है: क वता क शुरुआत म ही क व यह तय कर दे ता है क च ड़या इस क वता म ‘गुरु’
क भू मका म है और मनुष्य ‘ शष्य’ क । पूरी क वता इसी उलटफेर पर टक है — छोटा-सा पक्षी बड़े-से मनुष्य को
पाठ पढ़ा रहा है।
काव्य-स दय:
मानवीकरण — च ड़या को शक्षक बना दया गया है; वह ‘ सखलाती’ है, जो मनुष्य का काम है।
अनुप्रास — ‘प्र◌ेम-प्र◌ी त’ म ‘प्र’ क और ‘प्री त… री त’ म मलती-जुलती ध्व नय क आवृ त्त पं क्त को गीत जैसा बना दे ती
है।
‘हम’ शब्द पर ध्यान द जए — क व स्वयं को भी सीखने वाल म गन रहा है।
प्र.2 (ख) “उनके मन म लोभ नह है, पाप नह , परवाह नह ”
भावाथ: प क्षय के मन म तीन चीज़ नह ह — लोभ (और-और पाने क भूख), पाप ( कसी का हक़ छ नने क बुराई) और परवाह
(कल के लए जमा करने क चता)। ये तीन एक ही ज़ंजीर क क ड़याँ ह: लोभ आता है, तो पाप आता है, और फर जोड़ी हुई चीज़
खो जाने क चता आ जाती है।
लोभ नही ं → संगह नही ं
संगह नही ं → दू सरों का हक़ छीनने की ज़रूरत नही ं (पाप नही ं)
कु छ जोड़ ा ही नही ं → खोने का डर नही ं (परवाह नही)ं
इसिलए पक्षी िनिश्चंत है ं और मन ष्ु य बेचै न ।
क्य : क व यह नह कहता क पक्षी बहुत साहसी ह, ब ल्क यह कहता है क उनके पास खोने को कुछ है ही नह —
इसी लए वे नभय ह। यही क वता का सबसे गहरा वचार है।
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काव्य-स दय: ‘नह ’ शब्द तीन बार दोहराया गया है। यह पुनरु क्त पं क्त को हथौड़े क चोट जैसा ज़ोर दे ती है। साथ ही यह नषेध
से च रत्र गढ़ने क सुंदर यु क्त है — क व यह नह बताता क प क्षय म क्या है, वह बताता है क उनम क्या नह है।
प्र.3 (ग) “सीमा-हीन गगन म उड़ते, नभय वचरण करते ह”
भावाथ: पक्षी ऐसे आकाश म उड़ते ह जसक कोई सीमा, कोई बाड़, कोई सरहद नह है; इस लए वे बना कसी डर के जहाँ चाह
घूमते ह। यहाँ ‘सीमा-हीन गगन’ केवल आकाश नह , बंधनर हत जीवन का प्रतीक है।
क्य यह मनुष्य पर चोट है: ज़मीन को मनुष्य ने खेत, गाँव, राज्य और दे श क रेखाओं म बाँट रखा है; आकाश
आज भी अनबँटा है। क व इसी अंतर से दखाता है क सीमाएँ प्रकृ त ने नह , मनुष्य ने बनाई ह — और फर उन्ह म
स्वयं बँध गया है।
काव्य-स दय:
प्रतीक — ‘गगन’ स्वतंत्रता का और आगे आने वाली ‘बेड़ी’ पराधीनता का प्रतीक है।
अनुप्रास — ‘ नभय वचरण’ म मलती-जुलती ध्व नयाँ और ‘सीमा-हीन’ म ‘ह’ क गूँज।
वरोधाभास — छोट -सी च ड़या और सीमा-हीन वशाल गगन — यह वषमता ही पं क्त को प्रभावशाली बनाती है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 120
पाठ से
पाठ से
प्र.1 नीचे क वता क कुछ पं क्तयाँ और उनसे संबं धत प्रश्न दए गए ह। क वता पढ़ने के बाद अपनी समझ के आधार
पर प्रश्न के उत्तर द जए। (क) “सब मल-जुलकर रहते ह वे, सब मल-जुलकर खाते ह” प क्षय के आपसी
सहयोग क यह भावना हमारे लए कस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट क जए।
प क्षय क यह भावना हम सखाती है क साथ रहने और बाँटकर खाने से जीवन आसान भी होता है और सुंदर भी। वन म
खंजन, कपोत, चातक, को कल, काक, हंस और शुक — सब अलग-अलग जा त के पक्षी ह, फर भी वे ‘ हल मल’ कर रहते ह।
यही बात मनुष्य के समाज पर लागू होती है।
यह भावना हमारे लए इन तरीक़ से उपयोगी है —
बड़ा काम आसान हो जाता है — खेत क कटाई, बाढ़ म बचाव, गाँव क सफ़ाई या वद्यालय का वा षकोत्सव — मलकर
करने पर हर काम हल्का लगता है।
कसी को भूखा नह रहना पड़ता — ‘ मल-जुलकर खाते ह’ का अथ है, जसके पास है वह उसके साथ बाँटता है जसके
पास नह है। लंगर, सहभोज और मध्याह्न भोजन इसी भावना के रूप ह।
झगड़े घट जाते ह — जहाँ बाँटने क आदत होती है, वहाँ छ ना-झपट क ज़रूरत ही नह पड़ती।
भेदभाव मटता है — जा त, धम, भाषा या अमीरी-ग़रीबी के भेद तभी टकते ह जब लोग अलग-अलग बैठते-खाते ह।
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सुरक्षा मलती है — झुंड म रहने वाले पक्षी एक-दूसरे को ख़तरे क सूचना दे ते ह; वैसे ही मलकर रहने वाले मुहल्ले म लोग
एक-दूसरे का ध्यान रखते ह।
क्य : ‘सब’ शब्द दो बार आया है — रहने म भी और खाने म भी। क व यह जताना चाहता है क सहयोग केवल
त्योहार के दन का दखावा नह , रोज़ के जीवन का ढं ग होना चा हए।
अपने आस-पास दे खए: मध्याह्न भोजन म सब ब का एक साथ बैठकर खाना, बाढ़ के समय गाँव का सामू हक
रसोईघर, या मुहल्ले के लोग का मलकर तालाब क सफ़ाई करना — ये सब “सब मल-जुलकर” के ही आधु नक
उदाहरण ह।
प्र.2 (ख) “जो मलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते ह” पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते ह। मनुष्य
का स्वभाव इससे भन्न कैसे है?
पक्षी उतना ही लेते ह जतने से उस दन का पेट भर जाए; मनुष्य ज़रूरत से कह अ धक जोड़ता है और जोड़ता ही चला जाता है।
यही दोन के स्वभाव का मूल अंतर है।
बात पक्षी मनुष्य
कतना लेते ह “उतना भर” — केवल आवश्यकता भर आवश्यकता से कई ग न
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बचे हुए का क्या “और के हत उसे छोड़ वे दे ते ह” भंडार में भर ले ता है, कई बार सड़ जाने तक
दूसर क कमाई “नह कमाई से और क अपना घर वे भरते ह” कई बार दू स रों का हक़ छीनकर भी जोड़ता है
मन क दशा “लोभ नह … परवाह नह ” — न त और पाने की िचंता, खोने का डर
घर “आसमान ही उनका घर है” — जहाँ चाह, वहाँ एक घर होते हुए भी दू स रा, तीसरा जोड़ने की होड़
क्य होता है ऐसा: मनुष्य के पास कल क चता और दूसर से आगे नकलने क होड़ — दोन ह। पक्षी केवल आज
म जीता है, इस लए उसे भंडार क ज़रूरत नह पड़ती। क व इसी अ त रक्त संग्रह को आगे ‘सोने क क ड़याँ’ कहता
है।
ध्यान द जए: क व संचय-मात्र का वरोध नह कर रहा। च ट और गलहरी भी संचय करती ह। उसका वरोध
लोभवश कए गए अनावश्यक संग्रह से है, जससे दूसर का हस्सा छन जाता है।
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प्र.3 (ग) “हम स्व ं द और क्य तुमने, डाली है बेड़ी पग म?” पक्षी को स्व ं द और मनुष्य को बे ड़य म क्य बताया
गया है?
पक्षी स्वच्छं द इस लए है क उसने कभी कुछ बाँधा ही नह — न ज़मीन, न धन, न मन। मनुष्य बे ड़य म इस लए है क उसने अपनी
बेड़ी स्वयं बनाई है। पं क्त म “तुमने डाली है” — यह क्रया मनुष्य क अपनी है, कसी और ने उसे नह बाँधा।
पक्षी स्व ं द क्य मनुष्य बेड़ी म क्य
“आसमान ही उनका घर है; जहाँ चाहते, जाते ह!” — कोई सीमा घर , ज़मीन, सीमा और दीवारे ं बनाकर स्वयं को एक जगह बाँध िलया
नह
“उनके मन म लोभ नह है” — पाने क भूख नह धन-संपित्त के लोभ ने उसे उसी के पीछे दौड़ता रहने पर मजबूर कर
िदया
“परवाह नह ” — खोने का डर नह जो जोड़ा है वह िछन न जाए — यह िचंता िदन-रात साथ रहती है
“करते सब आपस म हल मल!” — कोई बैर नह द ोह-भावना, ऊँच-नीच और भेद भाव ने आपस में दीवारे ं खड़ी कर दी ं
‘सोने क क ड़याँ’ का रहस्य: क व ने लोहे क नह , सोने क क ड़याँ कहा है। लोहे क ज़ंजीर तो कोई तोड़ना
चाहेगा, पर सोने क ज़ंजीर तो सुंदर लगती है — मनुष्य उसे गहना समझकर पहने रहता है। धन और सु वधा का
बंधन ऐसा ही है: दखता आभूषण जैसा है, है बेड़ी ही।
टप: इस प्रश्न का उत्तर लखते समय ‘तुमने डाली है’ पर ज़रूर ल खए — यही पूरी क वता का सबसे तीखा शब्द
है।
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 120
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर संवाद क जए— 1. च ड़या मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश दे ती है, आपके अनुसार मनुष्य
के पास कन काय को करने क स्वतंत्रता है और कन काय को करने क स्वतंत्रता नह है?
मनुष्य को स्वतंत्रता तो बहुत कुछ करने क है, पर वह स्वतंत्रता वह तक है जहाँ तक कसी दूसरे को हा न न पहुँचे। यही
स्वतंत्रता और स्वच्छं दता का अंतर है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या
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ये करने क स्वतंत्रता है ये करने क स्वतंत्रता नह है
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अपनी पसंद का काम, खेल और वषय चुनना
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िकसी को उसकी पसंद से रोकना या उस पर अपनी पसंद थोपना
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अपने वचार बोलना और लखना िकसी का अपमान करना, अपशब्द कहना या झूठ फै लाना
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दे श म कह भी आना-जाना और बसना िकसी की ज़मीन या घर पर ज़बरद स्ती क़ ब्ज़ा करना
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अपनी पूजा-पद्ध त और त्योहार मनाना दू स रे की आ स्था का मज़ाक उड़ाना या उसे बदलने को मजबूर करना
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ईमानदारी से कमाना और अपनी कमाई ख़च करना
ag दू स रे की कमाई या हक़ छीनना — “नही ं कमाई से औरों की…”
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पेड़ लगाना, पशु-प क्षय क दे खभाल करना पेड़ काटना, घोंस ले उजाड़ना, पक्षी को िपंजरे में बंद करना
िबना हेल मेट, तेज़ र ़ तार या ग़ ल त िदशा में चलानाem
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सड़क पर वाहन चलाना
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se: च ड़या भी सीमा-हीन गगन म उड़ती है, पर वह कसी दूसरे पक्षी का घ सला नह छ नती। उसक स्वतंत्रता म
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दूसर के लए जगह बची रहती है — असली स्वतंत्रता का यही अथ है।
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चचा के लए: समूह म यह सवाल उठाइए —e“क्या
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m मुझे ट वी क आवाज़ रात म तेज़ रखने क स्वतंत्रता है?” उत्तर agl
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aglसमझ म आ जाएगी।
सोचते ही स्वतंत्रता क सीमा अपने आप
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2. च ड़या और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भन्न है?
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क वता के अनुसार दोन का जीवन लगभग हर बात म उलटा है — च ड़या का जीवन सरल, स्व ं द और संतोषी है, मनुष्य का
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ज टल, बँधा हुआ और असंतुष्ट।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
बदु च ड़या का जीवन मनुष्य का जीवन
घर “आसमान ही उनका घर है” — जहाँ रहते ह, वह दु नया बसा पक्का घर बनाता है और िफर उसी से बँध जाता है
लेते ह
भोजन श्रम से जतना मला, उतना ही; बचा हुआ और के लए आवश्यकता से अिधक जोड़ता है, बाँटने में कं जूस ी
करता है
दनचया “ दन भर करते काम, रात म पेड़ पर सो जाते ह” — सहज रात में भी िचंता और िहसाब-िकताब
आपसी अलग-अलग जा त के पक्षी भी ‘ हल मल’ कर रहते ह जाित, धम , धन के भेद और द ोह-भावना
संबंध
मन “लोभ नह , पाप नह , परवाह नह ” लोभ, होड़ और खोने का डर
स्वतंत्रता “सीमा-हीन गगन म… नभय वचरण” “डाली है बेड़ी पग में” — बंध न स्वयं का बनाया हुआ
ध्यान दे ने क बात: क व यह नह कहता क मनुष्य बुरा है। वह कहता है क मनुष्य ने अपने जीवन को ज़रूरत से
ज़्यादा उलझा लया है — और उलझन सुलझाने का सूत्र एक छोट -सी च ड़या के पास है।
दूसरा पक्ष: मनुष्य के जीवन म कुछ बात ऐसी भी ह जो च ड़या के पास नह — भाषा, शक्षा, कला, च कत्सा और
एक-दूसरे क योजनाबद्ध सहायता। क वता इन्ह नकारती नह ; वह बस कहती है क इन सबके साथ च ड़या-सा मन
भी बचा रहना चा हए।
प्र.3 3. च ड़या कह भी अपना घर बना सकती है, य द आपके पास च ड़या जैसी सु वधा हो तो आप अपना घर कहाँ
बनाना चाहगे और क्य ?
यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर वद्याथ का अलग होगा। अच्छे उत्तर म तीन बात ज़रूर होनी चा हए — (1) जगह का
नाम, (2) उस जगह का थोड़ा-सा वणन, और (3) वह क्य — कम से कम दो कारण।
नमूना उत्तर:
य द मेरे पास च ड़या जैसी सु वधा होती तो म अपना घर कसी नद के कनारे खड़े बरगद के पेड़ पर बनाता। सुबह सबसे पहले
सूरज क करण मेरे घर पर पड़ती, नीचे नद बहती रहती और आस-पास सैकड़ पक्षी मेरे पड़ोसी होते। म वह इस लए बनाता
क्य क — पहला, वहाँ न शोर है न धुआँ, और खुली हवा दन भर मलती रहती; दूसरा, पानी और भोजन दोन पास ही होते,
इस लए दूर भटकना नह पड़ता; और तीसरा, ऊँचाई से म दूर-दूर तक खेत, पहाड़ और आकाश दे ख पाता — जैसे क वता क
च ड़या “सीमा-हीन गगन” दे खती है। हर मौसम म जगह बदलने क छू ट भी मुझे बहुत भाती, क्य क तब म गरमी म पहाड़ पर और
जाड़े म मैदान म रह सकता।
अपना उत्तर बनाइए: जगह कोई भी चु नए — समुद्र-तट, पहाड़ क चोट , दाद के गाँव का आम का बग़ीचा, या
अपने वद्यालय का पीपल। बस कारण अपने अनुभव से द जए, कताबी नह ।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 4. य द आप च ड़या क भाषा समझ सकते तो आप च ड़या से क्या बात करते?
इस उत्तर म प्रश्न क एक सूची बनाइए, जो आप च ड़या से पूछना चाहगे, और साथ म यह भी ल खए क आप उसे क्या बताना
चाहगे। संवाद के रूप म लखने पर उत्तर और सुंदर बन जाता है।
नमूना उत्तर (संवाद):
म च ड़या
तुम रोज़ सुबह इतना मीठा क्य गाती हो? क्य क नया दन मलना ही मेरे लए सबसे बड़ी ख़ुशी है।
रात म तेज़ आँधी आती है, तब तुम्ह डर नह लगता? डर लगता है, पर म डाल पकड़कर बैठ जाती हूँ और सुबह का इंतज़ार करती हूँ।
तुम कल के लए दाना जमा क्य नह करत ? जो आज मल गया, वही बहुत है। जमा करूँगी तो उड़ना भारी हो जाएगा।
हम मनुष्य तुम्हारे कस काम आ सकते ह? छत पर पानी का एक सकोरा रख दो और पेड़ मत काटो — इतना ही बहुत है।
इसके अलावा म उससे यह भी पूछता — तुम्ह रास्ता कैसे याद रहता है, तुम हज़ार कलोमीटर उड़कर हर साल एक ही जगह कैसे
लौट आती हो, और आसमान से हमारा गाँव कैसा दखता है? और अंत म म उससे क्षमा माँगता — उन सब पेड़ के लए जो हम
मनुष्य ने काट दए और जनम कभी उसके घ सले रहे ह गे।
क्य यह प्रश्न पूछा गया है: क वता क पहली ही पं क्त है — “तुम्ह ात क्या अपनी बोली म संदेश सुनाती है?”
यानी च ड़या बोल तो रही ही है, कमी हमारी ओर है — हम सुनना नह जानते। यह प्रश्न उसी सुनने का अभ्यास है।
क वता क रचना — पृष्ठ 120
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 “सब मल-जुलकर रहते ह वे / सब मल-जुलकर खाते ह” — रेखां कत शब्द पर ध्यान द जए। ये शब्द लखने-
बोलने म एक जैसे ह। इस तरह क शैली प्राय: क वता म आती है। अब आप सब मल-जुलकर नीचे द गई
क वता को आगे बढ़ाइए— संकेत— सब मल-जुलकर हँसते ह वे / सब मल-जुलकर गाते ह......
यहाँ जो शैली दखाई गई है उसे पुनरु क्त (एक ही शब्द-समूह का बार-बार आना) कहते ह। नयम सरल है — हर पं क्त “सब
मल-जुलकर” से शुरू होगी, बीच म एक नया क्रया शब्द र खए, और दूसरी पं क्त का अंत पहली से तुक मलाइए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
ढाँच ा — सब िमल-जुलकर ___ है ं वे
सब िमल-जुलकर ___ है;ं
तक
ु िमलाइए — हँसते / बसते , गाते / खाते / जाते , बोते / रोते
नमूना उत्तर:
सब मल-जुलकर हँसते ह वे
सब मल-जुलकर गाते ह;
सब मल-जुलकर उड़ते नभ म,
सब मल-जुलकर आते ह!
सब मल-जुलकर दाना चुगते,
सब मल-जुलकर बाँटते ह;
सब मल-जुलकर तनके लाकर,
सब मल-जुलकर छाँटते ह!
सब मल-जुलकर पानी पीते,
सब मल-जुलकर नहाते ह;
सब मल-जुलकर घ सले रचकर,
सब मल-जुलकर सो जाते ह!
कक्षा म क जए: यह ग त व ध सचमुच ‘ मल-जुलकर’ करने क है। एक वद्याथ पहली पं क्त बोले, दूसरा उससे
तुक मलाती दूसरी पं क्त जोड़े, तीसरा अगली — पूरी कक्षा क एक क वता तैयार हो जाएगी।
यह शैली क्य काम करती है: दोहराव क वता को गीत जैसी लय दे ता है और उसे याद रखना आसान बना दे ता है।
साथ ही “सब मल-जुलकर” बार-बार सुनकर एकता का भाव मन म गहरा बैठ जाता है — यही क व चाहता है।
भाषा क बात — पृष्ठ 121
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पाठ से
पाठ से भाषा क बात
प्र.1 “पीपल क ऊँची डाली पर / बैठ च ड़या गाती है! / तुम्ह ात क्या अपनी / बोली म संदेश सुनाती है?” —
रेखां कत शब्द पर ध्यान द जए। ‘गाती’ और ‘सुनाती’ रेखां कत शब्द से च ड़या के गाने और सुनाने के काय
का बोध होता है। वे शब्द जनसे काय करने या होने का बोध होता है, उन्ह क्रया कहते ह। क वता म ऐसे क्रया
शब्द को ढूँ ढ़कर ल खए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
क्रया वह शब्द है जससे कसी काय के करने या होने का बोध हो। ‘ च ड़या’ क वता म क्रया शब्द क भरमार है — नीचे उन्ह
ढूँ ढ़कर, अथ और नए वाक्य के साथ दया गया है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या
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क वता का क्रया शब्द क वता क पं क्त नया वाक्य
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गाती है
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“बैठ च ड़या गाती है!”
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मेर ी छोटी बहन पाथना बहुत सुर ीली आवाज़ में गाती है।
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g l a “बोली म संदेश सुनाती है?”
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सुनाती है दादी हर रात हमें एक नई कहानी सुनाती है।
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िसखलाती है “री त हम सखलाती है!” हमारी िशिक्षका हमें िचत्र बनाना िसखलाती है।
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co m घड़ी हमें ठीक समय बतलाती है।
बतलाती है “मु क्त-मंत्र बतलाती है!”
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वास करते है ं
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“काक, हंस, शुक आ द वास करते” इस पुर ाने िक़ ले में अब के वल कबूतर वास करते है।
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रहते है ं “सब मल-जुलकर रहते ह वे” मेरे नाना-नानी गाँव में रहते है।
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a s emबैठकर खाते है।ं
com agहरlसाल पहाड़ों पर जाते है।ं
खाते है ं “सब मल-जुलकर खाते ह;” हम सब दोपहर का भोजन एक साथ
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जाते है ं “जहाँ चाहते, जाते ह!” गरमी की छु ि यों में हम
aglबसाते है ं “दु नया एक बसाते ह;” ची ंिटयाँ िम ी के नीचे अपनी पूर ी बस्ती बसाते है।
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सो जाते है ं “पेड़ पर सो जाते ह।” थककर लौटे मज़दू र पेड़ की छाँव में सो जाते है।
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g l a बच्चे थाली में उतना ही ले ले ते है ं िजतना खा सकें ।
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ले ले ते है ं “उतना भर ले लेते ह;”
छोड़ दे ते है ं “उसे छोड़ वे दे ते ह!” अच्छे लोग बदले की भावना छोड़ दे ते है।
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उड़ते है ं “सीमा-हीन गगन म उड़ते” शाम होते ही सारस कतार बनाकर उड़ते है।
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omहै ं
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अभयार ण् य में िहरणgिनडर होकर िवचरण करते है।
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िवचरण “ नभय वचरण करते ह;” ं
agl भरते है ं “अपना घर वे भरते ह!” िकसान कटाई के बाद अपनी कोिठयाँ अनाज से भरते है।
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कहते है ं “वे कहते ह, मानव! सीखो” बड़े-बूढ़े कहते है ं िक सुबह जल्दी उठना चािहए।
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सीखो “मानव! सीखो, तुम हमसे जीना” पहले तैर ना सीखो, िफर गहरे पानी में जाना।
दे खो “तुम दे खो हमको, फर अपनी” ज़रा ऊपर दे खो, आकाश में इंद धनुष िनकला है!
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तोड़ो “सोने क क ड़याँ तोड़ो;” डर की दीवार तोड़ो, तभी आगे बढ़ पाओगे।
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पुर ाना झगड़ा छोड़ो और नए िसरे से िम त्र ता करो।
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छोड़ो “द्रोह-भावना को छोड़ो!”
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“यही सुनाने आती है”
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हमारी गली में हर सुबह दू ध वाली आती है।
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उड़ जाती है “गा-कर फर उड़ जाती है।” पतंग डोर टू टते ही दू र उड़ जाती है।
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पहचानने का सरल तरीक़ा: वाक्यse
l a से पू छए — “क्या कया?” या “क्या हो रहा है?”। जस शब्द से उत्तर मले,
ag ने क्या कया? गाया।
वही क्रया है। जैसे — च ड़या
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ध्यान द जए: ‘बैठ ’, ‘गाकर’, ‘ मल-जुलकर’ जैसे शब्द भी काम से बने ह, पर ये अकेले वाक्य पूरा नह करते —
ये क्रया के सहायक रूप (कृदं त) ह। मुख्य क्रया वही है जो वाक्य के अंत म आकर उसे पूरा करती है।
भाव क बात — पृष्ठ 121 और 122
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) जब आप नीचे दए गए दृश्य दे खते ह तो आपको कैसा महसूस होता है? अपने उत्तर के कारण भी सो चए
और बताइए। आप नीचे दए गए भाव म से शब्द चुन सकते ह। आप कसी भी दृश्य के लए एक से अ धक शब्द
भी चुन सकते ह। [भाव — प्रेम, वीरता, दया, करुणा, क्रोध, हँसी, आनंद, डर, घृणा, आश्चय, ममता, शां त, सुख,
दुख, ईष्या, गव, नराशा, आभार, उत्साह, चता, आत्म व ास, सहानुभू त, उदासीनता, शंका] दृश्य — 1.
आपको कह से कसी पक्षी के चहचहाने क आवाज सुनाई दे ती है। 2. शाम के समय कसी पेड़ पर अन गनत
पक्षी एक साथ चहचहा रहे ह। 3. कोई गाय अपने ब े को दूध पला रही है। 4. कोई व्य क्त अपने वाहन क
खड़क से कूड़ा बाहर फक दे ता है। 5. कोई ब ा कसी व्यथ कागज को कूड़ेदान म डाल दे ता है। 6. कोई व्य क्त
बना हेलमेट पहने बहुत तेज बाइक चला रहा है। 7. दो प्राणी कसी कारण लड़ रहे ह। 8. एक व्य क्त जसके पैर
नह ह, वह वशेष रूप से बनाई गई तप हया गाड़ी पर यात्रा कर रहा है। 9. कसी ान पर नेत्रहीन व्य क्तय के
लए भारती ( ेल) ल प म सूचनाओं के बोड लगे ह। 10. कोई व्य क्त कसी को अपशब्द कह रहा है। 11. कोई
व्य क्त कसी जरूरतमंद भूखे को भोजन दे रहा है। 12. कोई लड़का स्वा दष्ट भोजन बनाकर अपनी बहन को
खला रहा है।
यह अनुभव का प्रश्न है, इस लए भाव आपके अपने ह गे। नीचे द गई ता लका एक नमूना उत्तर है — भाव के साथ-साथ कारण
लखना सबसे ज़रूरी है, क्य क प्रश्न म यही माँगा गया है।
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क्र. दृश्य भाव कारण
1 पक्षी के चहचहाने क आवाज़ आनंद , शांित यह आवाज़ मन को शांत कर दे ती है और लगता है क आस-पास का
वातावरण अब भी हरा-भरा और स्वस्थ है।
2 शाम को पेड़ पर अन गनत पक्षी आनंद , उ त्साह, इतने सारे प क्षय का एक साथ लौटना क वता क उसी पं क्त को
आ श्चय साकार कर दे ता है — “सब मल-जुलकर रहते ह वे”।
3 गाय अपने बछड़े को दूध पलाती ममता, पेम , क रुणा माँ का वात्सल्य मनुष्य और पशु — दोन म एक जैसा है; यह दृश्य
हुई अपनी माँ क याद दला दे ता है।
4 वाहन क खड़क से कूड़ा क्र ोध , घ ृणा, िचंता यह सावज नक जगह को गंदा करना है। उस कूड़े से नाली रुकती है
फकना और आवारा पशु प्ला स्टक नगल जाते ह।
5 ब ा कागज़ कूड़ेदान म डालता आनंद , गव, आभार छोटा-सा ब ा भी अपनी ज़म्मेदारी समझ रहा है — यह दे खकर
हुआ भरोसा जगता है क सफ़ाई क आदत बन रही है।
6 बना हेलमेट तेज़ बाइक चलाना िचंता, डर , शंक ा एक छोट -सी चूक जान ले सकती है; उसके प रवार का चेहरा आँख
के सामने आ जाता है।
7 दो प्राणी लड़ रहे ह दुख, िचंता, क रुणा लड़ाई म दोन को चोट लगती है। क वता कहती है — पक्षी तो
“ हल मल” रहते ह; फर हम क्य नह ?
8 दव्यांग व्य क्त तप हया गाड़ी आ त्मिवश्वास , गव, वह कसी पर नभर नह है, अपने बल पर आगे बढ़ रहा है। यह दृश्य
पर यात्रा करता हुआ पेर णा दया का नह , सम्मान का है।
9 ेल ल प म सूचना-बोड सुख, गव, आभार इसका अथ है क समाज ने नेत्रहीन सा थय को भी बराबरी से याद
रखा — स ी समानता यही है।
10 कोई कसी को अपशब्द कह रहा क्र ोध , दुख, घ ृणा कड़वे शब्द क चोट चोट से भी गहरी होती है और वष याद रहती है।
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11 ज़रूरतमंद भूखे को भोजन दे ना क रुणा, दया, पेम , यह ठ क वही भाव है जो क वता म है — “बच जाता जो, और के
सुख हत, उसे छोड़ वे दे ते ह!”
12 लड़का भोजन बनाकर बहन को पेम , ममता, आनंद रसोई का काम केवल लड़ कय का नह होता — यह दृश्य स्नेह भी
खलाता हुआ दखाता है और बराबरी भी।
ध्यान द जए: दृश्य 8 पर सबसे अ धक सोचने क ज़रूरत है। दव्यांग व्य क्त को दे खकर ‘दया’ या ‘सहानुभू त’
लखना सहज लगता है, पर वह गाड़ी उसक स्वतंत्रता का साधन है, कमज़ोरी क नशानी नह । इस लए वहाँ
‘आत्म वश्वास’ और ‘गव’ अ धक सही भाव ह।
याद र खए: कोई भी भाव ‘ग़लत’ नह होता, बशत आप उसका कारण बता सक। शक्षक भी कारण ही दे खगे।
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प्र.2 (ख) उपयुक्त भाव म से आप कौन-से भाव कब-कब अनुभव करते ह? भाव के नाम लखकर उन तय के
लए एक-एक वाक्य ल खए। (संकेत— आत्म व ास– जब म अकेले पड़ोस क दुकान से कुछ खरीदकर ले
आता हूँ।)
संकेत के ढाँचे पर च लए — भाव का नाम – वह त जसम आपको वह भाव होता है। स्थ त अपने ही जीवन क हो, तभी
वाक्य स ा लगेगा।
नमूना उत्तर:
भाव म इसे कब अनुभव करता/करती हूँ
आनंद जब पहली बािरश में मैं आँग न में भीगता हू ँ और िम ी की सोंध ी गंध चारों ओर फै ल जाती है।
पेम जब दादी अपने िहस्से का ल ू भी मेर ी थाली में रख दे ती है।
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ममता जब छोटा भाई डरकर मेर ा हाथ पकड़ ले ता है और मैं उसे सीने से लगा ले ता हू।
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करुणा जब सद की रात में कोई कु त्त ा िठठुर ता हुआ दुक ान के बाहर बैठा िदखाई दे ता है।
आत्मिवश्वास जब मैं पूर ी क क्षा के सामने िबना काग़ ज़ दे खे किवता सुना दे ता हू।
ँ
गव जब गणतंत्र िदवस पर हमारा ितरंग ा फहराया जाता है और सब िमलकर रा गान गाते है।
ं
उत्साह जब खेल -िदवस से एक िदन पहले हम मैद ान में अभ्यास करने जाते है।
ं
आभार जब मेर ी साइिकल पंक्चर हो गई थी और एक अनजान व्यिक्त ने िबना पैसे िलए उसे ठीक कर िदया।
आश्चय जब मैंने पहली बार आकाश में सारसों की ‘वी’ आकार की लंबी कतार दे खी।
डर जब रात में तेज़ आँध ी चलती है और िखड़िकयाँ ज़ोर -ज़ोर से खड़कने लगती है।
ं
िचंता जब परीक्षा का पिरणाम आने वाला होता है और मुझे नी ंद नही ं आती।
दुख जब हमारे आँग न का पुर ाना नीम का पेड़ काट िदया गया और उस पर बना घोंस ला िगर गया।
क्रोध जब कोई िकसी छोटे बच्चे को िबना कारण डाँटता या िचढ़ ाता है।
शांित जब भोर में मैं छत पर बैठकर पिक्षयों की चहचहाहट सुनता हू।
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सहानुभिू त जब मेरे िम त्र की तबीयत ख़राब होती है और वह िव ालय नही ं आ पाता।
हँस ी जब मेर ा तोता मेर ी ही आवाज़ में “कौन है?” बोल उठता है।
लखने का सुझाव: हर वाक्य ‘जब…’ से शुरू क जए। इससे भाव और स्थ त दोन एक ही वाक्य म स्पष्ट हो जाते
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आज क पहेली — पृष्ठ 122
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 क वता म आपने कई प क्षय के नाम पढ़े । अब आपके सामने प क्षय से जुड़ी कुछ पहे लयाँ द गई ह। प क्षय को
पहचानकर सही चत्र के साथ रेखा ख चकर जो ड़ए— (1) दखने म हूँ हरा-हरा / कहता हूँ सब खरा-खरा /
खाता हूँ म मच लाल / कहते सब मुझे मट्ठूलाल (2) सुंदर काले मेरे नैन / ेत श्याम है मेरे डैन / उड़ता रहता हूँ
दन-रैन / खेलूँ पानी म तो आए चैन (3) संदेश पहुँचाना मेरा काम / दे ता हूँ शां त का पैगाम / करता हूँ म गूटर-गूँ
/ आओगे पास तो हो जाऊँगा छू (4) पीता हूँ बा रश क बूँद / रखता हूँ फर आँख मूँदे / दे खो चकोर है मेरी साथी
/ बन उसके घूमूँ ऊँघ ऊँघ (5) रहता है घर के आस-पास / रंग है उसका काला खास / जो भी दोगे खाता है वो /
झुंड म आ जाता है वो (6) कूहू कूहू मधुर आवाज सुनाती / घर अपना म कहाँ बनाती / काली हूँ पर काक नह /
बतलाओ म क्या कहलाती (7) तन मेरा सफेद / गदन मेरी लंबी / नाम बताओ स ी-स ी / कहलाता हूँ म
जलपक्षी
पुस्तक के पृष्ठ पर बीच म सात प क्षय के चत्र ऊपर से नीचे इस क्रम म छपे ह — कबूतर, खंजन, चातक, कौआ, कोयल, हंस
और तोता। हर पहेली को उसके चत्र से इस प्रकार जो ड़ए —
पहेली उत्तर पहचान का सूत्र
( चत्र)
1. “ दखने म हूँ हरा-हरा… कहते तोता (शुक ) हरा रंग, लाल च च, लाल मच खाना और ‘ मट्ठू’ नाम — सब तोते क पहचान ह।
सब मुझे मट्ठूलाल” क वता म इसे ‘शुक’ कहा गया है।
2. “सुंदर काले मेरे नैन… खेलूँ पानी खंजन काले-सफ़ेद (श्वेत-श्याम) पंख और पानी के कनारे रहना — खंजन (wagtail)
म तो आए चैन” क पहचान। क वता क पं क्त है — “वन म जतने पंछ ह, खंजन”।
3. “संदेश पहुँचाना मेरा काम… कबूतर पुराने समय म संदेश ले जाना, ‘गुटरगूँ’ बोली और शां त का प्रतीक होना — तीन
करता हूँ म गूटर-गूँ” (कपोत) कबूतर के लक्षण ह।
4. “पीता हूँ बा रश क बूँद… दे खो चातक लोक-मान्यता है क चातक केवल वषा क बूँद पीता है; चकोर के साथ इसका नाम
चकोर है मेरी साथी” (पपीहा) अकसर जोड़ा जाता है।
5. “रहता है घर के आस-पास… कौआ (काक ) घर के पास रहना, काला रंग, सब कुछ खा लेना और झुंड म उतर आना — कौए
झुंड म आ जाता है वो” क पक्क पहचान।
6. “कूहू कूहू मधुर आवाज कोयल ‘कूहू’ बोली, काला रंग, और यह क वह अपना घ सला नह बनाती — इसी लए
सुनाती… काली हूँ पर काक नह ” (कोिकल ) पूछा गया “घर अपना म कहाँ बनाती”।
7. “तन मेरा सफेद… कहलाता हूँ म हंस सफ़ेद शरीर, लंबी गदन और जल म तैरना — हंस के अलावा कोई और नह ।
जलपक्षी”
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या
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पहेली 6 का सबसे बड़ा सुराग: “घर अपना म कहाँ बनाती” — कोयल अपने अंडे कौए के घ सले म रख दे ती है,
अपना घ सला बनाती ही नह । और “काली हूँ पर काक नह ” यह भी बता दे ता है क उत्तर कौआeनह
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gl का तरीक़ा: पहले चत्र म रंग दे खए (हरा → तोता, सफ़ेद → हंस), फर आकार-गदन दे खए, और अंत म
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ली क बोली (‘गूटर-गूँ’, ‘कूहू’) से मलाइए। सात जोड़े आसानी से बन जाएँगे।
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रोचक बात: इन सात प क्षय के नाम — खंजन, eकपोत,
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agl पंछ ह, खंजन, कपोत, चातक, को कल; काक, हंस, शुक आ द वास
तीसरे पद म एक साथ आए ह: “वन म जतने
करते सब आपस म हल मल!”
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चत्र क बात
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पाठ से आगे चत्र
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इन तीन चत्र को ध्यान से दे खए और बताइए— आप प क्षय को इनम से कहाँ दे खना पसंद करगे और क्य ?
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पुस्तक म तीन चत्र दए गए ह —
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agl पहला ऊँची-ऊँची इमारत से भरा शहर, जनके बीच कुछ पक्षी उड़ रहे ह उड़ तो रहे ह, पर न पेड़ है, न घ सला — केवल कंक्र ट और
शोर
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दूसरा सोने के रंग का सुंदर पजरा, जसके भीतर एक च ड़या झूले पर पूर ी तरह बंद ी — दाना-पानी तो है, पर आकाश नही ं
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बैठ है
तीसरा घने हरे पेड़ का जंगल, जसम एक पेड़ के कोटर म च ड़या बैठ है पूर ी तरह स्वतंत्र — अपना घर , अपना भोजन, अपना आकाश
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उत्तर: म प क्षय को तीसरे चत्र म — हरे-भरे पेड़ और जंगल म दे खना पसंद करूँगा।
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se m वही उनका असली घर है। पेड़ पर वे घ सला बना सकते ह, ब े पाल सकते ह और डाल-डाल फुदक सकते ह।
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जंगल म उन्ह अपना भोजन — फल, बीज, क ड़े — स्वयं अपने श्रम से मलता है, ठ क वैसे ही जैसे क वता कहती है: “जो
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मलता है अपने श्रम से, उतना भर ले लेते ह।”
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वहाँ वे “सीमा-हीन गगन म उड़ते, नभय वचरण” कर सकते ह। पजरे म यह संभव ही नह ।
हe— और क वता क च ड़या का संदेश भी तभी सच होता है जब वह स्वयं स्वतंत्र हो।
पेड़ पर बैठकर वे स्वतंत्र होकर गाते s
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
पजरा क्य नह : दूसरे चत्र का पजरा सोने-जैसा चमक ला है — ठ क वैसा ही जैसा क वता का ‘सोने क
क ड़याँ’ वाला बंधन। सुंदर होने से बंधन बंधन नह रह जाता। जो पक्षी उड़ने के लए बना है, उसे दाना दे कर बंद कर
दे ना उसके साथ अन्याय है।
पहले चत्र पर भी सो चए: शहर म पक्षी दखते तो ह, पर उनके लए न पेड़ बचे ह, न पानी। इसी लए गौरैया जैसे
पक्षी शहर से घटते जा रहे ह। य द हम छत पर दाना-पानी रख और घर के पास पेड़ लगाएँ, तो पहला चत्र भी
प क्षय के लायक़ बन सकता है।
नभय वचरण — पृष्ठ 123 और 124
पाठ से आगे
पाठ से आगे चत्र
प्र.1 “सीमा-हीन गगन म उड़ते, नभय वचरण करते ह” — क वता क इन पं क्तय को प ढ़ए और इन चत्र को
दे खए। इन चत्र को दे खकर आपके मन म क्या वचार आ रहे ह? (संकेत— जैसे इन चत्र म कौन नभय
वचरण कर रहा है?)
पुस्तक म दो चत्र दए गए ह और दोन मलकर एक ही बात कहते ह — जो जहाँ बंद है, वह डर है; जो खुला है, वही नभय है।
चत्र उसम क्या दख रहा है नभय वचरण कौन कर
रहा है
पहला (सफ़ारी) जंगल के बीच से एक जालीदार बस जा रही है, जसम लोग बंद बैठे ह। बाहर शेर पशु — शेर और भैस
ं ा। यहाँ िपंजरे
और जंगली भसा खुले घूम रहे ह। में मनुष्य है!
दूसरा पजर म बंद बंदर और शेर; बाहर लोग खुले घूमते, दे खते और बात करते हुए। मनुष्य। यहाँ पशु बंद ी है।
ं
( च ड़याघर)
चत्र दे खकर मन म आने वाले वचार:
पहला चत्र दे खकर लगता है क पशु अपने घर म ह और मनुष्य मेहमान — इस लए मनुष्य को सुरक्षा के लए जाली के पीछे
रहना पड़ रहा है। यह ठ क भी है, क्य क जंगल पशुओं का है।
दूसरे चत्र म शेर वही है, पर पजरे म उसक गरज कह खो गई है। जस शेर को ‘वन-राज’ कहते ह, वह पत्थर के फ़श पर बैठा
है — यह दे खकर मन दुखी हो जाता है।
दोन चत्र को साथ र खए तो एक सवाल उठता है — बंद कोई भी हो, बंधन तो बंधन ही है। क वता क च ड़या यही तो कह
रही है — “हम स्वच्छं द और क्य तुमने, डाली है बेड़ी पग म?”
सफ़ारी का तरीक़ा च ड़याघर से बेहतर लगता है, क्य क उसम पशु अपने प्राकृ तक प रवेश म रहते ह और मनुष्य केवल दे खने
आता है — छ नने नह ।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
गहरी बात: ‘ नभय वचरण’ का अथ केवल घूमना नह , बना डर के घूमना है। पजरे म बंद पशु घूम तो सकता है,
पर उसके पास जाने के लए कोई दशा ही नह बची। इसी लए क व ने ‘सीमा-हीन’ शब्द जोड़ा है — स्वतंत्रता का
असली अथ यही है क आगे कोई द वार न हो।
सो चए और चचा क जए: क्या पशुओं को दे खने के लए उन्ह पकड़ना ज़रूरी है? आज कैमरा, वृत्त चत्र और
अभयारण्य के ज़ रए हम उन्ह बना बंद बनाए भी दे ख सकते ह।
साथ-साथ — पृष्ठ 124
पाठ से आगे
पाठ से आगे चचा
प्र.1 “वन म जतने पंछ ह, खंजन, कपोत, चातक, को कल; काक, हंस, शुक आ द वास करते सब आपस म
हल मल!” 1. वन म सारे पक्षी एक साथ रह रहे ह, हमारे प रवेश म भी पशु-पक्षी साथ रहते ह। आप वचार
क जए क हमारे प रवेश म उनका रहना क्य आवश्यक है?
पशु-पक्षी हमारे प रवेश क शोभा भर नह , उसक ज़रूरत ह। वे कई ऐसे काम करते ह जो कोई मशीन नह कर सकती।
वे क्या करते ह हम क्या लाभ होता है
फूल का परागण (मधुमक्खी, ततली, सूयपक्षी) फल और बीज बनते है;ं परागण न हो तो आम , अम रूद , सरसों — कु छ भी न िमले ।
बीज का बखराव (तोता, कोयल, बुलबुल) पक्षी बीट के साथ बीज दू र -दू र िगराते है ं और अपने आप नए पेड़ उग आते है।
ं
क ड़ को खाना (गौरैया, कठफोड़वा, बगुला) फ़ सल को नुक़ सान पहच
ु ँ ाने वाले कीड़े क़ ाबू में रहते है;ं कीटनाशक कम लगाना पड़ता
है।
सफ़ाई करना (कौआ, चील, गद्ध) मरे हुए जीव और जूठन साफ़ हो जाती है, िजससे बीमािरयाँ नही ं फै लती ं।
म उपजाऊ बनाना (कचुआ, च ट , गोबर) ज़मीन भुर भुर ी और उपजाऊ बनी रहती है।
दूध, ऊन, खाद और खेती म सहायता (गाय, भस, भोजन, वस्त्र और खेती — तीनों में सीधा योगदान।
भेड़, बैल)
प्रकृ त का संकेत दे ना पपीहा-मोर वष की सूचना दे ते है;ं पिक्षयों का अचानक चुप हो जाना ख़तरे का संके त
होता है।
मन को सुख दे ना सुबह की चहचहाहट, िततली का रंग , गाय का बछड़े को चाटना — ये दृ श्य मन को
शांत करते है।
ं
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
सबसे बड़ा कारण — खाद्य ंखला: प्रकृ त एक जाल क तरह है। एक धागा टू टे तो पूरा जाल ढ ला पड़ जाता है।
य द पक्षी घट जाएँ तो क ड़े बढ़गे, फ़सल घटे गी और अंत म भूखे हम ही रहगे। इसी लए उनका रहना हमारे अपने ही
हत म है।
याद क जए: हमारे दे श म गद्ध क संख्या घटने से मरे हुए पशुओं का ढे र बढ़ गया और उससे बीमा रयाँ फैलने
लग — यह इस बात का सबसे स्पष्ट उदाहरण है क एक पक्षी के जाने से पूरा प रवेश हल जाता है।
प्र.2 2. हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-प क्षय क सहायता कैसे कर सकते ह?
सहायता के लए बड़े काम क ज़रूरत नह ; छोटे -छोटे नय मत काम ही सबसे अ धक काम आते ह।
पानी र खए — छत, बालकनी या आँगन म म का एक सकोरा रोज़ भरकर र खए। गरमी म पक्षी भूख से नह , प्यास से मरते
ह। पानी रोज़ बद लए ता क मच्छर न पनप।
दाना डा लए — बाजरा, चावल के दाने या बचा हुआ अनाज एक चौड़े बतन म र खए। तला-मसालेदार भोजन कभी मत
द जए।
घ सला बनाने द जए — रोशनदान, छ े या पुराने डब्बे म य द गौरैया घ सला बना ले तो उसे उजा ड़ए मत। लकड़ी या म
का घ सला-घर भी टाँगा जा सकता है।
पेड़ लगाइए और बचाइए — पीपल, बरगद, नीम, जामुन और सहजन प क्षय को भोजन भी दे ते ह और घर भी। क वता क
च ड़या भी पीपल क डाली पर ही बैठ है।
पजरे म मत र खए — पक्षी न ख़री दए, न कसी को ख़रीदने द जए। तोता या मैना पालना क़ानूनन अपराध भी है।
पतंग क माँझा और प्ला स्टक — काँच वाली माँझा से हज़ार पक्षी घायल होते ह। साद डोर का प्रयोग क जए और
प्ला स्टक खुले म मत फ कए, क्य क गाय और पक्षी उसे नगल लेते ह।
घायल पशु-पक्षी क सहायता — घायल पक्षी को डब्बे म सावधानी से रखकर पशु- च कत्सालय या कसी संस्था तक
पहुँचाइए।
तेज़ आवाज़ और पटाख़े कम क जए — तेज़ धमाक से पक्षी घबराकर घ सले छोड़ दे ते ह।
कुत्ते- बल्ली के लए भी — सद म पुरानी बोरी या कपड़ा बछा द जए और खाने का थोड़ा हस्सा रख द जए।
कक्षा म क जए: ‘सकोरा अ भयान’ चलाइए — हर वद्याथ अपने घर क छत पर एक सकोरा रखे और सप्ताह
भर क तस्वीर या रपोट कक्षा म साझा करे। यह सबसे सस्ता और सबसे असरदार काम है।
क्य : क वता कहती है — “बच जाता जो, और के हत, उसे छोड़ वे दे ते ह!” पक्षी हमारे लए बचाकर छोड़ते ह;
थोड़ा-सा पानी और दाना उनके लए छोड़ दे ना हमारी ओर से केवल शष्टाचार है।
शब्द एक अथ अनेक — पृष्ठ 124 और 125
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे शब्द क बात
प्र.1 “उनके मन म लोभ नह है”, इस पं क्त म ‘मन’ का अथ ‘ चत्त’ (बु ) है, कतु ‘मन’ शब्द के अन्य अथ भी हो
सकते ह। … आगे कुछ और ऐसे ही शब्द दए गए ह। दए गए शब्द का अलग-अलग अथ या संदभ म प्रयोग
क जए— (क) कर
‘कर’ के तीन प्रमुख अथ — (1) हाथ, (2) टै क्स यानी राजस्व, (3) करण। इसके अलावा यह ‘करना’ क्रया का रूप भी है।
अथ वाक्य म प्रयोग
हाथ माँ ने अपने कर से मेरे िसर पर आशीव द िदया।
टैक्स, राजस्व हर नागिरक को समय पर कर चुक ाना चािहए।
िकरण सूय के कर पड़ते ही ओस की बूदँ े ं चमक उठी ं।
‘करना’ का रूप पहला काम पूर ा कर लो, तभी खेल ने जाना।
जोड़कर दे खए: ‘कर’ से बने शब्द भी इन्ह अथ से जुड़े ह — करतल (हथेली), करदाता (टै क्स दे ने वाला), दनकर
(सूय — जसक करण दन बनाती ह)।
प्र.2 (ख) जल
‘जल’ के दो प्रमुख प्रयोग — (1) सं ा के रूप म ‘पानी’, (2) ‘जलना’ क्रया का रूप।
अथ वाक्य म प्रयोग
पानी गरमी में पिक्षयों के िलए छत पर जल रखना चािहए।
जलना (आग से ) दीपक रात भर जल कर सुबह बुझ गया।
ईष्य से जलना दू स रों की सफलता दे खकर जल मत, बिल्क उनसे सीख।
मज़े क बात: एक ही वाक्य म दोन अथ लाकर दे खए — “जल डालो, वरना द पक क बाती और जल जाएगी।”
यही ‘शब्द एक, अथ अनेक’ का असली मज़ा है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या
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(ग) अथ
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प्र.3
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aglके तीन प्रमुख अथ — (1) मतलब, (2) धन-संप त्त, (3) प्रयोजन या उ ेश्य।
‘अथ’
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अथ वाक्य म प्रयोग
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‘मुिक्त-मंत्र ’ का अथ है — बंध न से छू टने का उपाय।
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मतलब
धन, संपित्त
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अथ के पीछे भागते-भागते मनुष्य ने अपना चैन खो िदया।
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पयोजन, उ े श्य वह इसी अथ से यहाँ आया था िक सबसे िमलकर बात कर ले ।
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जुड़े हुए शब्द: अथशास्त्र (धन का शास्त्र), अथहीन ( जसका कोई मतलब न हो), अथपूण (गहरे मतलब वाला)।
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(घ) फल
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प्र.4
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उत्तर a
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‘फल’ के तीन प्रमुख अथ — (1) पेड़ पर लगने वाला फल, (2) प रणाम, (3) ग णत म कसी क्रया का उत्तर। चौथा प्रयोग
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‘फलक’ यानी ह थयार का धारदार भाग भी है।
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वाक्य म प्रयोग
agl खाने वाला फल पके हुए फल खाने के िलए तोते पेड़ पर उतर आए।
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पिरणाम, नतीजा
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मेहनत का फल दे र से िमलता है, पर मीठा िमलता है।
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गिणत का उत्तर
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12 और 8 को जोड़ने पर फल 20 आता है।
धारदार भाग
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ध्यान द जए: ‘फल’ के पहले दोन अथ आपस म जुड़े हुए ह — पेड़ मेहनत से बड़ाem
होता है और फर फल दे ता है;
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(ङ) आम
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‘आम’ के तीन प्रमुख अथ — (1) एक फल, (2) साधारण या सामान्य, (3) जनसाधारण।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
अथ वाक्य म प्रयोग
फल का नाम बग़ ीचे में आम पकते ही कोयल कू कने लगी।
साधारण, सामान्य गाँव में िबजली का चले जाना एक आम बात है।
जनसाधारण, जनता यह योजना आम आदमी की सुिवधा के िलए बनाई गई है।
पूरी ग त व ध का सार: एक ही शब्द को अलग-अलग संदभ म र खए तो उसका अथ बदल जाता है। जैसे “मंगल ने
मंगल से कहा क मंगल को मंगल पर मंगल होगा।” — यहाँ पहला और दूसरा ‘मंगल’ व्य क्त के नाम ह, तीसरा दन
(मंगलवार), चौथा ग्रह और पाँचवाँ ‘शुभ काय’। शब्द वही, अथ पाँच!
ऐसे शब्द को क्या कहते ह: जन शब्द के एक से अ धक अथ होते ह, उन्ह अनेकाथ शब्द कहा जाता है। इनका
अथ हमेशा वाक्य के संदभ से तय होता है, अकेले शब्द से नह ।
रचनात्मकता — पृष्ठ 125
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) खुले आसमान म, पेड़ क टह नय , छत और भवन आ द पर बैठे या उड़ते पक्षी बहुत मनमोहक लगते ह।
अपनी पसंद के ऐसे कुछ दृश्य का कोलाज बनाकर कक्षा म प्रद शत क जए।
यह हाथ से करने क ग त व ध है। कोलाज का अथ है — कई चत्र , कतरन और रंगीन काग़ज़ को एक ही चाट पर सजाकर एक
नया चत्र बना दे ना।
बनाने का तरीक़ा:
1. सामग्री जुटाइए — एक चाट पेपर, ग द, कची, रंगीन काग़ज़ और पुरानी प त्रकाओं, कैलडर या अख़बार क पक्षी वाली
तस्वीर। कुछ चत्र आप स्वयं भी बना सकते ह।
2. वषय तय क जए — जैसे “मेरे आस-पास के पक्षी”, “उड़ान”, या “प क्षय के घर”।
3. पृष्ठभू म बनाइए — नीले काग़ज़ से आकाश, हरे से पेड़ और भूरे से छत या डाल। ऊपर से प क्षय क कतरन चपकाइए।
4. परत बनाइए — दूर के पक्षी छोटे और पास के बड़े र खए; इससे गहराई आ जाती है।
5. पं क्तयाँ जो ड़ए — कोलाज के कनारे क वता क कोई पं क्त सुंदर अक्षर म ल खए, जैसे — “सीमा-हीन गगन म उड़ते,
नभय वचरण करते ह!”
6. नाम ल खए — हर पक्षी के नीचे उसका नाम लख द जए, ता क कक्षा के साथी भी पहचान सक।
अ े कोलाज क तीन पहचान: (1) चत्र एक-दूसरे को ढँ क नह , (2) ख़ाली जगह भी थोड़ी छू ट रहे, (3) कोई
एक चत्र सबसे बड़ा हो जो नज़र को पकड़ ले।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) “स्वतंत्रता और प्रेम” का संदेश दे ने वाला एक पोस्टर बनाइए। इसम इस क वता क कोई पं क्त या संदेश भी
स म्म लत क जए।
अच्छे पोस्टर म चार चीज़ होती ह — एक बड़ा चत्र, एक छोटा-सा नारा, क वता क एक पं क्त और नीचे बनाने वाले का नाम।
बहुत ल खए मत; पोस्टर दूर से पढ़ा जाना चा हए।
नमूना पोस्टर क रूपरेखा:
भाग क्या रख
चत्र एक टू टा हआ
ु िपंजरा, िजसका दरवाज़ा खुल ा है, और उसमें से एक िचिड़या खुले नीले आकाश की ओर उड़ रही
है।
बड़ा नारा (ऊपर) “िपंजरा नही,ं आसमान दो!”
क वता क पं क्त (बीच “तुम दे खो हमको, िफर अपनी सोने की किड़याँ तोड़ो;”
म)
छोटा संदेश (नीचे) पेम बाँध ता नही,ं उड़ना िसखाता है। — पक्षी को िपंजरे में मत रिखए।
दूसरे वकल्प (पं क्तयाँ जो पोस्टर पर सुंदर लगगी):
“ च ड़या बैठ प्रेम-प्री त क री त हम सखलाती है!”
“सीमा-हीन गगन म उड़ते, नभय वचरण करते ह”
“ओ मानव! तुम मानवता से द्रोह-भावना को छोड़ो!”
रंग-योजना का सुझाव: पृष्ठभू म हल्क (आसमानी या सफ़ेद) र खए और अक्षर गहरे (नीले या लाल)। पजरे को
सुनहरा बनाइए — इससे ‘सोने क क ड़याँ’ वाली बात अपने आप दख जाएगी।
हमारा पयावरण — पृष्ठ 125
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे पयावरण
प्र.1 मनुष्य बना सोचे-समझे जंगल क लगातार कटाई कर रहा है, जससे पशु-प क्षय का जीवन प्रभा वत हो रहा है।
मनुष्य ारा कए जा रहे ऐसे काय क एक सूची बनाइए, जनसे पयावरण व हमारे प रवेश के पशु-प क्षय के
लए संकट क त उत्पन्न हो रही है। इस संकट क त से बचने के लए क्या-क्या उपाय कए जा सकते ह?
ल खए। आप इस काय म शक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय क सहायता भी ले सकते ह। (संकेत— जैसे– ऊँचे
भवन का नमाण…….)
उत्तर दो हस्स म ल खए — पहले संकट पैदा करने वाले काय, फर उनके सामने उपाय। ता लका बना लेने से उत्तर स्पष्ट और
पूरा दखता है।
मनुष्य का काय पशु-प क्षय और पयावरण पर संकट उपाय
ऊँचे भवन का नमाण पेड़ कटते ह, घ सले उजड़ते ह; काँच क भवन के साथ पेड़ लगाना अिनवाय हो; काँच पर िनशान लगाएँ
द वार से टकराकर पक्षी मर जाते ह तािक पक्षी उसे दे ख सकें ; छत पर घोंस ला-घर रखें
जंगल क अंधाधुंध कटाई पशु-प क्षय का घर और भोजन दोन छन एक पेड़ काटें तो पाँच लगाएँ; दे शी पजाितयाँ — पीपल ,
जाते ह; वे गाँव म घुस आते ह बरगद , नीम , जामुन — लगाएँ; वन-अिधकार क़ ानूनों का
पालन करे ं
तालाब-नद पाटना और जलपक्षी और मछ लयाँ मर जाते ह; भूजल तालाबों की सफ़ ाई और मर म् मत; कारखानों का पानी शोिधत
उनम कचरा डालना घटता है करके ही छोड़ना
प्ला स्टक फकना गाय, कछु ए और पक्षी उसे नगल लेते ह और कपड़े/जूट का थैल ा; एक बार उपयोग वाले प्ल ािस्टक से पूर ी
मर जाते ह तरह बचना; कचरे को अलग -अलग करना
खेती म अ धक क टनाशक क ड़े मरते ह तो प क्षय का भोजन घटता है; जैिवक खाद और गोबर खाद ; फ़ सल -चक्र; कीट खाने वाले
और रासाय नक खाद ज़हर खाद्य- ंखला म ऊपर चढ़ता जाता है पिक्षयों के िलए खेत में बसे रे लगाना
शकार, अवैध व्यापार और तोता, मैना, कछु आ जैसी प्रजा तयाँ घट रही वन्यजीव संर क्षण अिधिनयम का पालन; पक्षी न ख़रीदे ं; बेचने
पजरे म पालना ह वालों की सूचना वन-िवभाग को दे ं
काँच वाली माँझा और खुले पतंग क माँझा से प क्षय के पंख और गला सादी सूती डोर ; माँझे पर पितबंध का समथन; घायल पक्षी को
बजली के तार कट जाता है तुर ंत िचिक त्सालय पहच
ु ँ ाना
वाहन और कारखान का वायु प्रदूषण से प क्षय के फेफड़े और अंड साइिकल और सावजिनक वाहन का पयोग ; पेड़ों की हरी प ी
धुआँ के छलके प्रभा वत होते ह लगाना
तेज़ रोशनी, पटाख़े और रात म उड़ने वाले प्रवासी पक्षी रास्ता भटक रात में अनावश्यक रोशनी बंद रखना; पटाख़े कम चलाना;
शोर जाते ह (गद्यांश म भी यही लखा है) ध्विन-सीमा का पालन
कचरे को जलाना ज़हरीला धुआँ और आग से घ सले नष्ट गीले कचरे से खाद बनाना; सूखे कचरे को छाँटकर
पुनचक्रण के िलए दे ना
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
क वता से जो ड़ए: क व ने लखा है — “नह कमाई से और क , अपना घर वे भरते ह!” आज मनुष्य ठ क इसका
उल्टा कर रहा है। जंगल प क्षय क ‘कमाई’ है और हम उसी से अपना घर भर रहे ह। संकट क जड़ यही है।
सूची बनाते समय: कम से कम तीन काय अपने ही गाँव या मुहल्ले के ल खए — जैसे “हमारे तालाब म कूड़ा डाला
जाता है” या “सड़क चौड़ी करने के लए बरगद काटा गया”। इससे उत्तर सजीव हो जाएगा।
प रयोजना काय — पृष्ठ 125
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 (क) पयावरण संरक्षण के लए हम अपने स्तर पर कुछ प्रयास कर सकते ह। आप अपने वद्यालय, आस-पास
और घर म दे खए क कन- कन काय म प्ला स्टक के थैले का प्रयोग कया जाता है? उन काय क सूची
बनाइए। अब इनम प्रयोग कए जा रहे प्ला स्टक के थैल के वकल्प पर वचार क जए और ल खए। (संकेत—
जैसे– हम प्ला स्टक के थैले क जगह कागज या कपड़े के थैले का प्रयोग कन- कन काय म कर सकते ह।)
करने का तरीक़ा: तीन दन तक एक छोट कॉपी साथ र खए और जहाँ-जहाँ प्ला स्टक का थैला दखे, वह लख ली जए — घर,
दुकान, वद्यालय, ठे ला, दवाख़ाना। तीन दन बाद सूची बनाकर सामने वकल्प ल खए।
नमूना सूची और वकल्प:
कहाँ / कस काम म प्ला स्टक का उपयोग बेहतर वकल्प
सब्ज़ी-फल क ख़रीद हर सब्ज़ी के लए अलग पतली थैली कपड़े या जूट का बड़ा झोला; भीतर छोटे कपड़े के थैले
राशन — दाल, चावल, प्ला स्टक क बड़ी थै लयाँ घर से स्टील /प्ल ािस्टक का िडब्बा या कपड़े की थैल ी ले
आटा जाना
वद्यालय का ट फ़न क्लंग- फ़ल्म और पॉ लथीन म रोट लपेटना स्टील का िटिफ़ न, सूती कपड़े का नैपिकन, के ले का पत्त ा
पानी प्ला स्टक क बोतल स्टील या ताँबे की बोतल ; क क्षा में िम ी का घड़ा
जन्म दन और समारोह थम कोल क प्लेट, प्ला स्टक के चम्मच- पत्त ल -दोना, काग़ ज़ की प्ले ट, स्टील के िगलास
गलास
दुकान से मठाई/नाश्ता पॉ लथीन क थैली काग़ ज़ के िलफ़ ाफ़े , अख़बार की थैल ी, घर का िडब्बा
पुस्तक-कॉपी क जल्द प्ला स्टक कवर भूर ा काग़ ज़ या पुर ाने कै ले ंडर का काग़ ज़
पौध क नसरी काली पॉ लथीन क थै लयाँ िम ी के गमले , नािरयल -जटा या काग़ ज़ की क्यारी
कचरा फकना पॉ लथीन म भरकर फकना गीले कचरे से खाद बनाना; सूखा कचरा अलग िडब्बे में
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या
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प्रस्तु त का सुझाव: सूची के साथ एक छोटा-सा आँकड़ा भी जो ड़ए — जैसे “हमारे घर म एक सप्ताह म 14
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पॉ लथीन आईं; कपड़े का झोला लेने पर यह घटकर 2 रह गईं।” आँकड़ा उत्तर को बहुत मज़बूत बना
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क्य ज़रूरी है: प्ला स्टक सैकड़ साल तक नह गलता। खुले म पड़ी थैली गाय के पेट म जाकर उसक जान ले लेती
है और नाली म जाकर बरसात म जल-भराव करती है। एक कपड़े का झोला सैकड़ थै लय क जगह ले लेता है।
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प्र.2 ag वषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार कर और उसक प्रस्तु त वद्यालय
(ख) सभी वद्याथ ‘पयावरण बचाओ’
प्रांगण म कर।
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g के बीच खड़े होकर कया जाता
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se पदा, सजावट और माइक नह होते; ऊँची आवाज़, ताली क लय और सामू हक नारे ही उसक ताक़त ह।
नुक्कड़ नाटक
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agतैयारी के चरण:
है। इसम
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coकmथैली, ठे केदार, ब ा और सूत्रधार। पेड़ और च ड़या को बोलने agl
1. समूह बनाइए — 10 से 12 वद्याथ । दो-तीन साथी ‘कोरस’ म रह जो बीच-बीच म नारा दोहराएँ।
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s em यु क्त है।
2. पात्र तय क जए — पेड़, च ड़या, नद , गाय, प्ला स्टक
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वाला पात्र बनाना नुक्कड़ नाटक क सबसे प्रभावशाली
3. कथानक — (1) एक हरा-भरा गाँव; a (2) ठे केदार पेड़ काटने आता है; (3) च ड़या का घ सला गर जाता है; (4) गाय प्ला स्टक
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नगल लेती है; (5) ब े वरोध करते ह और पौधे लगाते ह; (6) अंत म सब मलकर संकल्प लेते ह।
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4. संवाद छोटे र खए — दो-दो पं क्तय के। नुक्कड़ नाटक म लंबे भाषण नह चलते।
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5. नारे तैयार क जए — “पेड़ बचाओ, जीवन बचाओ!”, “थैला लाओ, थैली भगाओ!”, “ पजरा नह , आसमान दो!”
c जो ड़ए — बीच म या अंत म कक्षा मलकर बोले — “सीमा-हीन गगन म उड़ते
6. क .वता a g, नभय वचरण करते ह!”
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s7.e अभ्यास — कम से कम तीन बार खुले म अभ्यास क जए, ता क बना माइक के आवाज़ पीछे तक पहुँचे।
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agl नमूना अंश:
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पात्र संवाद
सूत्रधार agl
रुको! ज़रा ठहरो! एक कहानी सुनते जाओ — यह कहानी तुम्हारी भी है।
च ड़या मैं इसी पीपल पर रहती थी… कल यहाँ आरी चली और मेर ा घर िगर गया।
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पेड़ मैंने पचास साल छाया दी, हवा दी, फल िदए। बदले में क्या माँग ा? कु छ भी नही ं।
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sem गाय
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और मैंने? रोटी समझकर एक थैल ी िनगल ली थी… अब कु छ खाया नही ं जाता।
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ब ा बस ! आज से हमारे मुहल्ले में न पेड़ कटेग ा, न थैल ी आएगी।
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सब मलकर
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पेड़ बचाओ , जीवन बचाओ ! धरती अपनी, हम रखवाले !
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान र खए: प्रस्तु त के लए वद्यालय से अनुम त ली जए, दशक के आने-जाने का रास्ता खुला र खए और नाटक
8–10 मनट से लंबा मत क जए।
झरोखे से — पृष्ठ 125 और 126
पाठ से आगे
पाठ से आगे अ त रक्त पठन
प्र.1 क वता म प क्षय के ‘सीमा-हीन गगन म उड़ने’ क बात कही गई है। प क्षय का आकाश म उड़ना उ े श्यपूण है।
प क्षय क उड़ान से जुड़ी एक रोचक जानकारी आगे द गई है। इसे पढ़कर आप प क्षय क उड़ान से जुड़े कुछ
नए तथ्य को जान पाएँगे। [पाठ — ‘प क्षय क प्रवास यात्राएँ’, पक्षी-जगत, रा ीय पुस्तक न्यास, दल्ली]
‘प क्षय क प्रवास यात्राएँ’ नामक यह गद्यांश पक्षी-जगत (रा ीय पुस्तक न्यास, दल्ली) से लया गया है। इसका मूल वषय है —
प्रवास, यानी प क्षय का मौसम के अनुसार एक जगह से दूसरी जगह जाना और फर लौट आना।
गद्यांश से मले मुख्य तथ्य:
बात गद्यांश क्या बताता है
कब और कहाँ हर साल शरद ऋतु और जाड़ों की शुरुआत में एिशया, यूर ोप और अमरीका के उ त्त री भागों से अनेक पक्षी गरम दे शों में आ
से कहाँ जाते है;ं वसंत और गरिमयों में िफर उ त्त र लौट जाते है।
ं
समय क वे समय के इतने पक्के होते है ं िक उनके आने-जाने के एक -एक िदन की ठीक गणना की जा सकती है। के वल पितकू ल मौसम
पाबंद में ही दे र होती है।
छोट दूरी का कु छ पक्षी थोड़ी ही दू र जाते है।
ं रहन-सहन के क ष्ट या भोजन कम पड़ने पर होने वाला यह आवागमन मुख्यतः उ त्त र भारत में
प्रवास िदखता है, जहाँ मौसम िभन्न -िभन्न और तीव होते है।
ं
ऊँचाई का जो पक्षी गरिमयाँ ऊँचे पहाड़ों पर िबताते है,ं वे जाड़ों में िनचली पहािड़यों, तराई या मैद ानों में उतर आते है।
ं भारत में यह बहुत
प्रवास होता है, क्योंिक गंग ा के मैद ान के बराबर ही िवशाल िहमालय है।
रास्ते के कष्ट इन “छोटे-छोटे वीर याित्र यों” को जंग ल , मैद ान और समुद पार करने पड़ते है।
ं भयंक र तूफ़ ान उ न्हे ं माग से भटका दे ते है,ं
आँिधयाँ समुद की ओर धके ल दे ती है ं और रात में नगर का तीव पकाश उ न्हे ं भटका दे ता है।
यात्रा क शैली कु छ पक्षी रुक -रुक कर चलते है ं तािक थकान न हो; कु छ िबना रुके , िबना खाए , लगातार बहत
ु लंबी यात्र ा पूर ी कर ले ते है।
ं
कु छ के वल िदन में उड़ते है,ं कु छ िदन-रात दोनों; पर अिधकतर सूय स्त के बाद आगे बढ़ ते है।
ं
दल बनाकर पक्षी पायः दल बनाकर उड़ते है।
ं सारस और हंस आकाश में ‘वी’ (V) की आकृ ित में उड़ते है।
ं अबाबील , चकिदल , फु दकी,
उड़ना समुद तटीय पक्षी और जलपक्षी दलों में इक े होते है,ं और हर दल में एक ही पकार के पक्षी होते है।
ं
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
क वता से जो ड़ए: क वता कहती है “जहाँ चाहते, जाते ह!” — पर यह गद्यांश बताता है क उनका जाना मनमाना
नह , उ े श्यपूण है। वे भोजन और अनुकूल मौसम क खोज म हज़ार कलोमीटर उड़ते ह। स्वतंत्रता का अथ
आवारगी नह , ब ल्क अपने उ े श्य क ओर बना रुकावट बढ़ना है — यही दोन पाठ का साझा संदेश है।
‘वी’ आकार क्य : आगे उड़ने वाला पक्षी हवा को चीरता है और पीछे वाल को कम ज़ोर लगाना पड़ता है। थकने पर
आगे वाला पीछे चला जाता है और दूसरा उसक जगह ले लेता है — यह भी “सब मल-जुलकर” का ही एक सुंदर
उदाहरण है।
भारत म दे खए: हर जाड़े म साइबे रया से सारस और बत्तख भरतपुर (केवलादे व), चल्का झील, सांभर झील और
नल सरोवर तक पहुँचती ह। पास क कसी झील पर जाड़ म जाइए — प्रवासी पक्षी आपको स्वयं दख जाएँगे।
साझी समझ — पृष्ठ 127
पाठ से आगे
पाठ से आगे ले ख न
प्र.1 आप इंटरनेट या कसी अन्य माध्यम क सहायता से अन्य प्रवासी प क्षय के बारे म रोचक जानकारी एक त्रत
क जए और प्रवासी प क्षय पर लेख ल खए।
लेख को चार भाग म बाँ टए — भू मका, प्रवास क्य , कौन-कौन आते ह, और संकट व बचाव। लेख के साथ एक चत्र या नक़्शा
लगा द तो और अच्छा लगेगा।
नमूना लेख — प्रवासी पक्षी: बना पासपोट के यात्री
भू मका — हर वष जाड़ म हमारी झील पर कुछ अनजाने मेहमान उतरते ह। ये हज़ार कलोमीटर उड़कर आते ह, कुछ महीने रहते
ह और गरमी आते ही लौट जाते ह। इन्ह प्रवासी पक्षी कहते ह।
प्रवास क्य — पक्षी घूमने के शौक़ से नह उड़ते। उत्तर के दे श म जाड़ म झील जम जाती ह और क ड़े-मकोड़े ख़त्म हो जाते ह।
भोजन और गरमाहट क खोज म वे द क्षण क ओर आ जाते ह। गर मय म वहाँ दन लंबे और भोजन भरपूर होता है, इस लए वे
ब े पालने वापस लौट जाते ह।
प्रमुख प्रवासी पक्षी और उनके ठकाने —
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
पक्षी कहाँ से आता भारत म कहाँ दखता रोचक बात
है है
साइबेिरयन सारस साइबे रया केवलादे व, भरतपुर कभी हर जाड़े में आता था; अब बहुत दुल भ हो गया है।
(कु रजाँ) (राजस्थान)
डेम ोइज़ेल क्रेन मंगो लया, मध्य ख चन, जोधपुर िहमालय के ऊपर से उड़कर आता है; खी ंचन गाँव के लोग हर
(कु रजाँ) ए शया (राजस्थान) सुबह इन्हे ं दाना डालते है।
ं
बार-हेडेड गूज़ मध्य ए शया चंबल, चल्का, प ग बाँध दुिनया के सबसे ऊँचे उड़ने वाले पिक्षयों में — िहमालय के
(धारीदार हंस ) िशखरों के ऊपर से िनकल जाता है।
़ ले िमंग ो (राजहंस ) ईरान, कच्छ का मुंबई क खाड़ी, चल्का, गल
ु ाबी रंग इसे अपने भोजन (शैवाल और झी ंगे) से िमलता है।
रन सांभर झील
अबाबील (स्वैल ो) यूरोप, मध्य पूरे भारत म यही पक्षी ग ाश
ं में भी िगनाया गया है; यह दल बनाकर उड़ता
ए शया है।
आक िटक टन आक टक ( ुवीय समुद्र तट पर कभी- पूर ी दुिनया में सबसे लंबी पवास -यात्र ा — आक िटक से
क्षेत्र) कभार अंटाक िटका तक , हर साल आना-जाना।
रास्ता कैसे याद रहता है — वै ा नक बताते ह क पक्षी सूय और तार क स्थ त, पृथ्वी के चुंबक य क्षेत्र और नद -पहाड़ जैसी
ज़मीनी नशा नय से दशा पहचानते ह। ब े पहली बार भी अकेले सही जगह पहुँच जाते ह — यह आज भी व ान के लए
अचरज क बात है।
संकट और बचाव — आद्रभू मय (wetlands) का सूखना, शकार, बजली के तार, ऊँची इमारत क काँच-द वार और रात क
तेज़ रोशनी इनके सबसे बड़े दुश्मन ह। झील को बचाना, शकार रोकना, रात म अनावश्यक रोशनी बंद करना और इन्ह भोजन-स्थल
पर परेशान न करना — यही इनक सबसे बड़ी सहायता है।
नष्कष — प्रवासी पक्षी हम याद दलाते ह क प्रकृ त सीमाओं को नह मानती। जस आकाश को क व ने ‘सीमा-हीन’ कहा है, उसे
ये पक्षी हर साल सच कर दखाते ह।
खोज करते समय: जानकारी वश्वसनीय ोत से ली जए — भारतीय वन्यजीव संस्थान, बॉम्बे नेचुरल हस्
सोसाइट क वेबसाइट, या पुस्तकालय म सलीम अली क पुस्तक। लेख के अंत म अपने ोत भी ल खए — यह
अच्छे लेखन क पहचान है।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 127
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 नीचे द गई इंटरनेट क ड़य का प्रयोग करके आप जीव-जगत के बारे म और भी जान-समझ सकते ह— • हमारा
पयावरण • वह च ड़या जो
पुस्तक म इन दोन शीषक के साथ क्यू-आर कोड / इंटरनेट क ड़याँ द गई ह। इन्ह शक्षक या अ भभावक क दे खरेख म खो लए
और जो दे ख-पढ़, उसे अपनी कॉपी म नोट क जए।
कड़ी यह कस बारे म है दे खने-पढ़ने के बाद क्या क जए
हमारा पयावरण, उसम पशु-प क्षय क भू मका, और मनुष्य के काम से पाँच नए तथ् य िलिखए और अपने गाँव/मुहल्ले से जुड़ी
पय वरण होने वाला नुक़सान दो सम स्याएँ चुनकर उनके उपाय सुझाइए।
वह िचिड़या केदारनाथ अग्रवाल क प्र सद्ध क वता ‘वह च ड़या जो’ — जसम दोनों किवताओं की तुल ना कीिजए — दे िखए िक दोनों
जो भी एक च ड़या के स्वभाव और स्वतंत्रता का चत्र है किव िचिड़या में क्या-क्या ग ण
ु दे खते है।
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तुलना का नमूना:
बदु ‘ च ड़या’ — आरसी प्रसाद सह ‘वह च ड़या जो’ — केदारनाथ अग्रवाल
च ड़या क्या करती मनुष्य को प्रेम, एकता और स्वतंत्रता का संदेश दे ती है जुंडी के दाने रुिच से खाती है और नदी में तैर ती है
है
मुख्य गुण नल भ, नभय, मलनसार छोटी, संतोषी, जल -थल में समान रूप से पस न्न
साझा भाव दोनों किवताओं में िचिड़या थोड़े में संतष्ु ट, स्वतंत्र और जीवन से भरपूर है — दोनों किव उसे मनुष्य के िलए आदश मानते
है।
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सुर क्षत खोजबीन: केवल पुस्तक म द गई क ड़य या वश्वसनीय शै क्षक वेबसाइट का ही प्रयोग क जए, और
इंटरनेट पर अपनी नजी जानकारी कभी साझा मत क जए।
आगे ब ढ़ए: प क्षय पर हद म और भी सुंदर रचनाएँ ह — महादे वी वमा क ‘ गल्लू’ और ‘नीलकंठ’, तथा सलीम
अली क पुस्तक। पुस्तकालय से लेकर प ढ़ए और कक्षा म सुनाइए।
अध्याय — एक नज़र म
च ड़या आरसी प्रसाद सह क क वता है। पीपल क ऊँची डाली पर बैठ एक च ड़या गाती है — क व पूछता है क क्या तुम्ह
पता है, वह अपनी बोली म कोई संदेश सुना रही है?
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या
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च ड़या का पहला संदेश है प्रेम-प्री त क री त और मु क्त-मंत्र। जंगल के सारे पक्षी — खंजन, कपोत, चातक, को कल,
काक, हंस, शुक — आपस म हल मल कर रहते ह, मल-जुलकर खाते ह और पूरा आसमान उनका घर है।
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दूसर के लए.cछोड़ दे ते ह — “नह कमाई से और क , अपना घर वे भरते ह!” a
दूसरा संदेश है संतोष। प क्षय के मन म न लोभ है, न पाप। वे अपने श्रम से जतना मलता है उतना ही लेते ह और बचा हुआ
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seऔर सबसे बड़ा संदेश है स्वतंत्रता। पक्षी सीमा-हीन गगन म नभय वचरण करते ह, जब क मनुष्य ने स्वयं अपने पैर म
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agबेड़ी डाल रखी है। इस लए वे कहते ह — “तुम देखो हमको, फर अपनी सोने क क ड़याँ तोड़ो”।
तीसरा
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‘सोने क क ड़याँ’ क वता का सबसे सुंदर रूपक है — धन, लोभ और संग्रह के वे बंधन जो दे खने म सुंदर लगते ह पर ह बेड़ी
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ही। क वता म मानवीकरण ( च ड़या सखलाती, बतलाती, कहती है), अनुप्रास (“प्रेम-प्री त क री त”, “ मल-जुलकर”) और
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g े , गाकर उड़ जाती है — यानी संदेश देकर स्वयं अपनी स्वतंत्रता म लौट जाती
तुकांत (गाती-सुनाती, ह-ह) क छटा दे खने योग्य है।
अंत म च ड़या घड़ी भर बैठकर, हम च कतaकरक
है। पाठ के साथ ‘पक्षी-जगत’ से लया गया प क्षय क प्रवास यात्राएँ नामक रोचक गद्यांश भी दया गया है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
ात मालूम , पता “तुम्ह ात क्या अपनी” मुझे ात नह था क आज वद्यालय बंद
है।
री त ढं ग , तरीका, परंपरा “री त हम सखलाती है!” अ त थ का स्वागत करना हमारे गाँव क
पुरानी री त है।
बंद कै दी, बंध न में पड़ा हुआ “वह जग के बंद मानव पजरे का तोता बंद होकर भी गाना नह
को” भूला।
मु क्त-मंत्र बंध न से छू टने का उपाय / सूत्र “मु क्त-मंत्र बतलाती है!” मेहनत ही ग़रीबी से नकलने का मु क्त-
मंत्र है।
पंछ पक्षी, िचिड़या “वन म जतने पंछ ह” शाम होते ही पंछ अपने घ सल को लौट
आते ह।
खंजन एक छोटा काला-सफ़े द पक्षी जो पायः जल के पास िदखता “वन म जतने पंछ ह, तालाब के कनारे खंजन पूँछ हलाता फर
है (wagtail) खंजन” रहा था।
कपोत कबूतर “कपोत, चातक, छत के रोशनदान म कपोत ने घ सला बना
को कल” लया।
चातक एक पक्षी, िजसके बारे में कहा जाता है िक वह के वल वष “कपोत, चातक, चातक क तरह हम भी पहली बा रश क
की बूदँ पीता है (पपीहा) को कल” राह दे ख रहे थे।
को कल कोयल “कपोत, चातक, आम बौराते ही को कल कूकने लगी।
को कल”
काक कौआ “काक, हंस, शुक आ द काक ने घड़े म कंकड़ डालकर पानी ऊपर
वास” कर लया।
शुक तोता “काक, हंस, शुक आ द शुक क च च लाल और पंख हरे होते ह।
वास”
हल मल िमल-जुल कर, घुल िमल कर “करते सब आपस म हमारे मुहल्ले म सब लोग हल मल कर
हल मल!” त्योहार मनाते ह।
श्रम मेहनत, पिरश्रम “जो मलता है अपने श्रम अपने श्रम क कमाई म सबसे अ धक
से” सुख है।
हत भलाई, फ़ ायदा “बच जाता जो, और के पेड़ लगाना सबके हत का काम है।
हत”
गगन आकाश, नभ “सीमा-हीन गगन म गगन म सारस क कतार बहुत सुंदर लगी।
उड़ते”
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कक्षा 7 हद अध्याय 9 च ड़या AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
नभय िबना डर के , िनडर “ नभय वचरण करते ह” सच बोलने वाला व्य क्त नभय रहता है।
वचरण घूम ना-िफरना, िवचरना “ नभय वचरण करते ह” हरण का झुंड घास के मैदान म वचरण
कर रहा था।
स्वच्छं द अपनी इच्छा से चलने वाला, स्वतंत्र “हम स्वच्छं द और क्य नद पहाड़ म स्वच्छं द होकर बहती है।
तुमने”
बेड़ी पैर ों में डाली जाने वाली ज़ंजीर; बंध न “डाली है बेड़ी पग म?” डर हमारे मन क सबसे बड़ी बेड़ी है।
पग पैर , चरण “डाली है बेड़ी पग म?” थके पग भी घर क राह पहचान लेते ह।
द्रोह- वैर , बैर , दू स रों का बुर ा चाहने का भाव “द्रोह-भावना को छोड़ो!” द्रोह-भावना छोड़ द तो आधे झगड़े अपने
भावना आप मट जाएँ।
च कत हैर ान, अचंिभत “बैठ घड़ी भर, हम च कत छोट बहन का चत्र दे खकर सब च कत
कर” रह गए।
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