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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 10: मीरा के पद
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
128 – 143 22 48 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 39 pages
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: मीरा के पद
NCERT कक्षा 7 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के अं तम पाठ 10 मीरा के पद के सभी प्रश्न के पूरे हल। ये दोन पद लगभग 500 वष पहले हद क
महान कव यत्री, कृष्ण-भक्त और संत मीरा ने रचे थे — पहला पद ीकृष्ण के रूप का और दूसरा सावन क झड़ी का चत्र ख चता है। पृष्ठ 128 से
143 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, क वता क रचना, अनुमान और कल्पना से,
शब्द के रूप, शब्द से जुड़े शब्द, पं क्त से पं क्त, क वता का स दय, रूप बदलकर, मुहावरे, सबक प्रस्तु त, आपक बात, वशेषताएँ, मधुर ध्व नयाँ,
चत्र करते ह बात, सावन से जुड़े गीत, खोजबीन, आज क पहेली, खोजबीन के लए और पढ़ने के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 7) 128 – 143
खं ड प्रश्न
22 48
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 129 और 130
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से
अ धक उत्तर भी हो सकते ह। (1) “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” पद म मीरा कनसे वनती कर रही ह? • संत से •
भक्त से • वैजंती से • ीकृष्ण से
सट क उत्तर है — ीकृष्ण से। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
‘नंद लाल’ = नंद के लाल यानी ष्
ीकृ ण
‘बसो मेरे नै न न में’ = मेरी आँखों में बस जाइए
अथ — हे नंद लाल! आप मेरी आँखों में बस जाइए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
संत से ग़लत संत का नाम आता ज़रूर है, पर ‘संतन सुखदाई’ कहकर — वह ीकृष्ण का गुण है, वनती संत से नह
क जा रही।
भक्त से ग़लत ‘भक्त वछल’ भी ीकृष्ण का ही वशेषण है — भक्त से प्रेम करने वाले।
वैजंती से ग़लत वैजंती माल तो ीकृष्ण के गले का आभूषण है, कोई व्य क्त नह ।
ीकृष्ण सही ★ पूरा पद ीकृष्ण को ही संबो धत है — नंदलाल, गोपाल, मीरा के प्रभु, सब उन्ह के नाम ह।
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क्य : पद का पहला ही शब्द ‘बसो’ आज्ञा/प्राथना का रूप है — “बस जाइए”। जसे यह प्राथना क जा रही है, उसी
का नाम उसी पं क्त म है — नंदलाल।
प्र.2 (2) “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” पद का मुख्य वषय क्या है? • प्रेम और भ क्त • प्रकृ त क सुंदरता • युद्ध और
शां त • ान और शक्षा
सट क उत्तर है — प्रेम और भ क्त। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
प्रेम और सही ★ मीरा अपने आराध्य से वनती कर रही ह क वे उनक आँख म बस जाएँ, और उनके रूप का प्रेम-भरा वणन
भ क्त करती ह। अंत म उन्ह ‘संतन सुखदाई’ और ‘भक्त वछल’ कहती ह — यह शुद्ध भ क्त-भाव है।
प्रकृ त क ग़लत प्रकृ त का वणन दूसरे पद म है, इस पद म नह ।
सुंदरता
युद्ध और ग़लत पद म युद्ध या संघष का कोई प्रसंग ही नह है।
शां त
ज्ञान और ग़लत मीरा यहाँ कुछ सखा नह रह , अपने मन का प्रेम कह रही ह।
शक्षा
जानने योग्य: मीरा को नगुण नह , सगुण भ क्त-धारा क कव यत्री कहा जाता है — क्य क वे ईश्वर को रूप, रंग,
वेश और आभूषण के साथ, एक साकार रूप म दे खती ह।
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प्र.3 (3) “बरसे बद रया सावन क ” पद म कौन-सी ऋतु का वणन कया गया है? • सद • गरमी • वषा • वसंत
सट क उत्तर है — वषा। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
बदिरया बरस रही है → बादल
“दािमन दम कै ” → िबजली चमक रही है
“नन्ही ं नन्ही ं बूदँ न मेहा बरसे” → बूदँ े ं िगर रही है ं
“सावन” → आषाढ़ के बाद का महीना = वष ऋ त ु
क्य : हद महीन म सावन ( ावण) और भाद (भाद्रपद) — ये दो महीने वषा ऋतु के ह। पद का पहला शब्द ही
‘बरसे’ है, इस लए ऋतु पहचानने म कोई क ठनाई नह होती।
प्र.4 (4) “बरसे बद रया सावन क ” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा— • प्रसन्न ह। • दुखी ह। • उदास ह। •
च तत ह।
सट क उत्तर है — प्रसन्न ह। इसके सामने तारा (★) बनाइए।
पद के अपने शब्द ही इसका प्रमाण ह —
“सावन क मन भावन क ” — सावन मन को भाने वाला है।
“सावन म उमग्यो मेरो मनवा” — मन उमंग से भर गया।
“भनक सुनी ह र आवन क ” — प्रयतम के आने क आहट सुनाई द ।
“शीतल पवन सोहावन क ” — हवा सुहावनी लग रही है।
“आनंद मंगल गावन क ” — आनंद और मंगल के गीत गाए जा रहे ह।
ध्यान द: वषा-वणन वाले अ धकतर भ क्त-पद म वरह और तड़प होती है, इस लए ‘दुखी’ या ‘उदास’ चुन लेने क
भूल हो सकती है। पर इस पद म एक भी शब्द वरह का नह है — यहाँ बादल वयोग का नह , मलन का संदेश
लेकर आए ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद
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(ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
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प्र.5
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क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
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यह चचा का प्रश्न है। चचा का तरीका यह है — हर साथी पहले अपना चुना हुआ वकल्प बताए, फर पद क वह पं क्त पढ़कर
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सुनाए जसके कारण उसने वह वकल्प चुना। बना पं क्त के दया गया कारण अधूरा माना जाए।
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नमूना उत्तर:
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प्रश्न मने चुना agक पं क्त से)
मेरा कारण (पद
ीकृ ष्ण से
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(1) “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” — नंदलाल ीकृष्ण का ही नाम है।
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(2)
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पेम और
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“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल” — यह भक्त का अपने प्रभु के प्र त प्रेम है।
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g l a(3) “बरसे बद रया सावन क ” — सावन वषा ऋतु का महीना है।
a (4) पस है ं “सावन म उमग्यो मेरो मनवा” और “आनंद मंगल गावन क ”।
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a प्रश्नl (2) म कोई ‘प्रकृ त क सुंदरता’ भी कह सकता है, पर वह दूसरे पद के
चचा का सूत्र: य द दो सा थय के उत्तर अलग ह तो झगड़ने के बजाय दोन पं क्तयाँ साथ रखकर दे खए — कई
बार दोन उत्तर ठ क नकलते ह। जैसे g
लए ठ क होगा, इस पद के लए नह ।
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मलकर
e m कर मलान — पृष्ठ 130
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पाठ से मलान
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प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ शब्द नीचे दए गए ह। अपने समूह म इन पर चचा क जए और इन्ह इनके सही अथ या
संदभ से मलाइए। इसके लए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शक्षक क सहायता ले सकते ह। शब्द — 1.
नंदलाल 2. वैजंती माल 3. सावन 4. गरधर | अथ/संदभ — 1. पवत को धारण करने वाले, ीकृष्ण 2. ावण
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का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना 3. वैजयंती पौधे के बीज से बनने वाली माला 4.
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नंद के पुत्र, ीकृष्ण
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सही मलान इस प्रकार है —
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शब्द मलान अथ/संदभ पद क पं क्त
1. नंद लाल →4 नंद के पुत्र, ीकृष्ण “बसो मेरे नैनन म नंदलाल”
2. वैजंती माल →3 वैजयंती पौधे के बीज से बनने वाली माला “उर वैजंती माल”
3. सावन →2 ावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना “बरसे बद रया सावन क ”
4. िगरधर →1 पवत को धारण करने वाले, ीकृष्ण “मीरा के प्रभु गरधरनागर”
क्य : ध्यान द जए क नंदलाल और गरधर — दोन ीकृष्ण के ही नाम ह, पर कारण अलग-अलग ह। ‘नंदलाल’
उनके जन्म-संबंध से बना नाम है — वे नंद बाबा के लाल ह। ‘ गरधर’ उनके कम से बना नाम है — उन्ह ने गोवधन
ग र (पवत) को उँ गली पर धर लया था।
जानने योग्य: ‘ गरधरनागर’ म ‘नागर’ का अथ है — नगर का, यानी चतुर, सुसंस्कृत, हर कला म नपुण। मीरा
अपने पद म प्रायः ‘ गरधर नागर’ नाम ही लेती ह। सावन का महीना अंग्रेज़ी कैलडर म लगभग जुलाई–अगस्त म
पड़ता है।
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 130
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह पढ़कर आपको इनका क्या अथ समझ म आया? अपने वचार
अपने समूह म साझा क जए और ल खए। (क) “नन्ह नन्ह बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन क ॥”
अथ: नन्ह -नन्ह बूँद के रूप म मेह (वषा) बरस रहा है और उसके साथ ठं डी, सुहावनी हवा बह रही है।
‘नन्ही ं नन्ही ं’ = बहुत छोटी-छोटी
‘बूदँ न’ = बूदँ ों के रूप में
‘मेहा’ = मेह, वष
‘शीतल’ = ठं डी ‘सोहावन’ = सुहावनी, भली लगने वाली
भाव: यह मूसलाधार, डराने वाली बा रश नह है। बूँद छोट ह, हवा ठं डी है — पूरा दृश्य कोमल और सुखद है। गरमी से तपी धरती
और तपे मन, दोन को यह फुहार ठं डक दे रही है। मीरा के लए यह ठं डक बाहर क भी है और भीतर क भी — क्य क उन्ह ‘ह र
आवन क भनक’ सुनाई दे चुक है।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
भाषा का स दय: ‘नन्ह नन्ह ’ म एक ही शब्द दो बार आया है — इसे पुनरु क्त कहते ह; इससे बूँद का लगातार
गरना आँख के सामने आ जाता है। साथ ही ‘नन्ह नन्ह ’ म ‘न’ क और ‘स◌ावन… श◌ीतल… स◌ोहावन’ म ‘स’
क आवृ त्त है — यह अनुप्रास है।
प्र.2 (ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥”
अथ: मीरा के प्रभु ( ीकृष्ण) संत को सुख दे ने वाले ह और भक्त से वत्सल भाव यानी माता- पता जैसा स्नेह रखने वाले गोपाल ह।
शब्द अथ क्या बताता है
संतन सुखदाई संत को सुख दे ने वाले जो स े मन से उन्ह भजता है, उसे वे शां त दे ते ह।
भक्त वछल भक्तवत्सल — भक्त पर वैसा ही स्नेह जैसा गाय का बछड़े पर भक्त क योग्यता नह , उसका प्रेम दे खते ह।
गोपाल गाय का पालन करने वाले वे राजा नह , ग्वाले ह — साधारण लोग के अपने।
भाव: पहली चार पं क्तय म मीरा ने ीकृष्ण का रूप बताया था — मूरत, सूरत, नैन, मुरली, माला, घं टका, नूपुर। अं तम पं क्त म
वे उनका स्वभाव बताती ह। यही पद का नष्कष है — ीकृष्ण केवल सुंदर नह , दयालु भी ह, इसी लए मीरा न त होकर उनसे
प्राथना कर पाती ह।
ध्यान द: ‘वछल’ संस्कृत के वत्सल शब्द का ब्रज रूप है और ‘वत्स’ का अथ है बछड़ा। गाय अपने बछड़े को दे खकर
जैसे दौड़ पड़ती है, वैसे ही प्रभु अपने भक्त क ओर — यह चत्र इसी एक शब्द म छपा है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 131
पाठ से
पाठ से
प्र.1 पाठ को एक बार फर से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) पहले पद म ीकृष्ण के बारे म क्या-क्या
बताया गया है?
पहले पद म मीरा ने ीकृष्ण का सर से पाँव तक चत्र ख चा है। पद म जो-जो बात आई है, वह क्रम से यह है —
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क्रम पद क पं क्त ीकृष्ण के बारे म क्या बताया
1 “बसो मेरे नैनन में नंद लाल” वे नंदलाल ह — नंद बाबा के लाल।
2 “मोहिन मूर ित साँविर सूर ित” उनक मूरत मन मोह लेने वाली है और सूरत साँवली है।
3 “नैना बने िवशाल” उनक आँख बड़ी-बड़ी ह।
4 “अधर सुध ा रस मुर ली राजित” ह ठ पर मुरली सुशो भत है, जससे अमृत जैसा मीठा रस बरसता है।
5 “उर वैजंती माल” छाती पर वैजयंती माला पड़ी है।
6 “क्षदु घंिटका किटतट सोिभत” कमर पर छोट -छोट घं टयाँ शोभा दे रही ह।
7 “नूपरु शब्द रसाल” पैर के नूपुर मीठ ध्व न कर रहे ह।
8 “संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल” वे संत को सुख दे ने वाले, भक्त से स्नेह करने वाले गोपाल ह।
ध्यान दे ने क बात: पहले सात बदु ीकृष्ण का बाहरी रूप बताते ह और आठवाँ उनका भीतरी स्वभाव। मीरा वणन
ऊपर से नीचे क ओर करती ह — पहले चेहरा और आँख, फर ह ठ, फर छाती, फर कमर, फर पाँव। इसी क्रम के
कारण पूरा चत्र आँख के सामने बन जाता है।
प्र.2 (ख) दूसरे पद म सावन के बारे म क्या-क्या बताया गया है?
दूसरे पद म सावन के बारे म ये बात बताई गई ह —
सावन मन को भाने वाला महीना है — “सावन क मन भावन क ”।
सावन म बद रया बरसती है — “बरसे बद रया सावन क ”।
सावन मन म उमंग भर दे ता है — “सावन म उमग्यो मेरो मनवा”।
चार दशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आते ह — “उमड़ घुमड़ चहूँ दश से आया”।
बजली चमकती है और झड़ी लग जाती है — “दा मन दम कै झर लावन क ”।
नन्ह -नन्ह बूँद के रूप म मेह बरसता है — “नन्ह नन्ह बूँदन मेहा बरसे”।
ठं डी और सुहावनी हवा बहती है — “शीतल पवन सोहावन क ”।
चार ओर आनंद-मंगल के गीत गाए जाते ह — “आनंद मंगल गावन क ”।
क्य यह वणन खास है: मीरा सावन का वणन केवल मौसम क तरह नह करत । उनके लए सावन क झड़ी प्रभु
के आने क सूचना है — “भनक सुनी ह र आवन क ”। इसी लए बादल, बजली और बूँद डराती नह , आनंद दे ती ह।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
Tip: उत्तर लखते समय हर बात के साथ पद क पं क्त भी लख द जए — इससे उत्तर पूरा माना जाता है और याद
भी अ े से रहता है।
क वता क रचना — पृष्ठ 131
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” / “मीरा के प्रभु गरधरनागर” — इन दोन पं क्तय पर ध्यान द जए। इन पं क्तय
म मीरा ने अपने नाम का उल्लेख कया है। मीरा के समय के अनेक क व अपनी रचना के अंत म अपने नाम को
स म लत कर दया करते थे। आज भी कुछ क व अपना नाम क वता म जोड़ दे ते ह। आप ध्यान दगे तो इस
क वता म आपको ऐसी अनेक वशेषताएँ दखाई दगी। (जैसे— क वता म छोट -छोट पं क्तयाँ ह। ीकृष्ण के
लए अलग-अलग नाम का प्रयोग कया गया है आ द।) (क) इस पाठ को एक बार फर से प ढ़ए और अपने-
अपने समूह म मलकर इस पाठ क वशेषताओं क सूची बनाइए।
ध्यान से पढ़ने पर इस पाठ क ये वशेषताएँ मलती ह —
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद
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वशेषता पाठ से उदाहरण
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अंत म कव यत्री का नाम (छाप/ “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई”, “मीरा के प्रभु गरधरनागर”
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gl-छोट पं क्तयाँ — हर पद पाँच
aछोट दोन पद पाँच-पाँच पं क्तय के ह
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ीकृष्ण के लए अनेक नाम नंदलाल, गोपाल, ह र, गरधरनागर, प्रभु
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गाए जाने योग्य लय — हर पं क्त के
अंत म एक ही तुक
a पद म — नंदलाल, वशाल, माल, रसाल, गोपाल; दूसरे पद म — सावन क , भावन क ,
आवन क , लावन क , सोहावन क , गावन क
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टे क ( ायी) पं क्त — जो बार-बार “बसो मेरे नैनन म नंदलाल”, “बरसे बद रया सावन क ”
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दोहराई जा सकती है
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ब्रज-राज नैनन, मूर त, साँव र, सो भत, बद रया, मनवा, आवन, दश, मेहा
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a अनुप्रास — एक ही वण क आवृ त्त “बरसे बद रया”, “म◌ोह न म◌ूर त”, “स◌ाँव र स◌ूर त”, “द◌ा मन दम”
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पुनरु क्त “नन्ह नन्ह ”, “सावन क , सावन क ”, “उमड़ घुमड़”
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ऊपर से नीचे क ओर रूप-वणन सूरत → नैन → अधर → उर → क टतट → नूपुर
सीधी प्राथना, बीच म कोई कथा नह “बसो मेरे नैनन म…” — पहली ही पं क्त म नवेदन
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दृश्य और ध्व न दोन का चत्रण दृश्य — साँव र सूर त, दा मन; ध्व न — मुरली, नूपुर शब्द, भनक
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m योग्य: रचना के अंत म क व ारा अपना नाम जोड़ने को छाप या भ णता कहते ह। कबीर ‘कहत कबीर’, a g
a s eजानने
agl सूरदास ‘सूरदास प्रभु’ और तुलसीदास ‘तुलसीदास’ लखते थे। उस समय रचनाएँ छपती नह थ , गाकर आगे बढ़ती
थ — नाम जुड़ा रहने से यह पता चलता रहता था क पद कसका है।
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प्र.2 agl
(ख) अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके साथ साझा क जए।
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यह कक्षा म करने क ग त व ध है। इसे इस तरह क जए —
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a s em1. समूह क सूची को एक चाट पेपर पर बड़े अक्षर म ल खए — एक पं क्त म एक वशेषता, और उसके आगे पद से उदाहरण।
agl 2. समूह से एक साथी सूची पढ़कर सुनाए और दूसरा साथी बोड पर उदाहरण वाली पं क्त लख दे ।
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3. दूसरे समूह से पू छए — “क्या आपक सूची म कोई ऐसी वशेषता है जो हमारी सूची म नह है?” उसे अपनी सूची म जोड़
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ली जए।
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4. अंत म सबक वशेषताओं को मलाकर कक्षा क एक साझी सूची बनाइए और उसे कक्षा क द वार पर लगा द जए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
नमूना प्रस्तु त क पहली दो पं क्तयाँ: “हमारे समूह को इस पाठ क सबसे बड़ी वशेषता यह लगी क मीरा ने
अपना नाम क वता के भीतर ही रख दया है — ‘मीरा के प्रभु’। दूसरी वशेषता यह लगी क दोन पद म हर पं क्त
का अंत एक ही तुक पर होता है, इसी लए ये पद गाने म इतने मीठे लगते ह।”
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 131
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए— (क) मान ली जए क बादल ने मीरा को ीकृष्ण के आने का संदेश
सुनाया है। आपको क्या लगता है क उन्ह ने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए उत्तर एक नह । पर अ ा उत्तर पद से जुड़ा होना चा हए — बादल क भाषा वैसी ही हो जैसी पद
म उनक हरकत है: उमड़ना-घुमड़ना, गरजना, दा मनी का दमकना और बूँद का टपकना।
क्या कहा होगा — बादल गरजकर वही खबर लाए जो मीरा सुनना चाहती थ — “तुम्हारे गरधर आ रहे ह”।
कैसे कहा होगा — शब्द से नह , संकेत से — गड़गड़ाहट से आवाज़ द , बजली चमकाकर रोशनी क , और नन्ह बूँद भेजकर
मीरा को छू लया। इसी लए मीरा कहती ह “भनक सुनी ह र आवन क ” — भनक यानी हल्क -सी, अधूरी-सी आहट।
नमूना उत्तर (बादल क बात):
“मीरा! सुन ो — हम आषाढ़ के पार से आ रहे है।
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चारों िदशाओं से उमड़ -घुमड़ कर हम इसिलए आए है ं िक त म्ु हे ं एक खबर दे न ी है।
यह दे खो, दािमनी को दमका िदया है — यह हमारा दीपक है, हमने त म्ु हारे पभु के आने की राह जगमगा दी है।
इन नन्ही ं-नन्ही ं बूदँ ों को िगना करो — ये हमारे बोल है।
ं
और यह जो शीतल पवन त म्ु हे ं छू कर गई — यह उन्ही ं की ओ र से भे जा हुआ संदे श है।
तै यार हो जाओ मीरा, त म्ु हारे िगरधर नागर आ रहे है!ं ”
चचा के लए: बादल को संदेशवाहक बनाना हद -संस्कृत काव्य क बहुत पुरानी परंपरा है। का लदास के मेघदूत म
एक यक्ष बादल के हाथ अपनी पत्नी को संदेश भेजता है। अपने समूह म सो चए — बादल के अलावा और कौन-
कौन संदेश ला सकता है? हवा? नद ? कोई पक्षी?
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) य द आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहगे और क्या-क्या
पूछगे?
यह आपक अपनी कल्पना का प्रश्न है। अ े उत्तर म दो चीज़ होनी चा हए — (1) कुछ कहने क बात (आदर, प्रशंसा, अपने मन
क बात) और (2) कुछ पूछने के प्रश्न, जो पाठ म पढ़ बात से नकले ह ।
नमूना उत्तर — जो म क ँगा/क ँगी:
“आपके पद आज पाँच सौ वष बाद भी गाए जाते ह — हमारी कक्षा ने भी आज ‘बरसे बद रया सावन क ’ गाया।”
“मुझे सबसे अ पं क्त लगी — ‘नन्ह नन्ह बूँदन मेहा बरसे’, क्य क यह पढ़ते ही बा रश क खुशबू याद आ जाती है।”
“आपने महल छोड़कर जो रास्ता चुना, उसके लए बहुत साहस चा हए था।”
नमूना उत्तर — जो म पूछूँगा/पूछूँगी:
1. राजकुमारी होते हुए भी आपने महल छोड़कर संत का जीवन क्य चुना?
2. आपके पद अपने आप बन जाते थे या आप उन्ह सोच-समझकर लखती थ ?
3. तीथ-यात्राओं म आपको सबसे अ धक कौन-सी जगह भाई?
4. सावन के बादल म आपको ीकृष्ण के आने क भनक कैसे सुनाई द ?
5. जब लोग ने आपका वरोध कया, तब आपने हम्मत कैसे बनाए रखी?
6. आप ीकृष्ण को ‘ गरधर नागर’ ही अ धक क्य कहती ह?
Tip: ऐसे प्रश्न मत बनाइए जनका उत्तर ‘हाँ’ या ‘नह ’ म आ जाए। ‘क्य ’, ‘कैसे’ और ‘क्या-क्या’ से शुरू होने वाले
प्रश्न बातचीत को आगे बढ़ाते ह।
शब्द के रूप — पृष्ठ 131 और 132
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 (क) “मोह न मूर त साँव र सूर त, नैना बने वशाल।” इस पं क्त म ‘साँव र’ शब्द आया है। इसके ान पर
अ धकतर ‘साँवली’ शब्द का प्रयोग कया जाता है। इस पद म ऐसे कुछ और शब्द ह, जन्ह आप कुछ अलग रूप
म लखते और बोलते ह गे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दए गए ह। इन्ह आप जस रूप म बोलते- लखते ह, उस
तरह से ल खए। • नैनन • सो भत • भक्त वछल • बद रया • मेरो मनवा • आवन • दश • मेहा
पद के शब्द और आज क खड़ी बोली म उनके रूप —
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
पद का शब्द आज हम जस रूप म बोलते- लखते ह क्या बदला
नैनन नयनों में / आँखों में ‘नैन’ का बहुवचन ‘नैनन’ ब्रज का रूप है; खड़ी बोली म ‘नयन ’।
सोिभत शोिभत (शोभा पा रहा) ब्रज म ‘श’ प्रायः ‘स’ हो जाता है — शो भत → सो भत।
भक्त वछल भक्तवत्सल संस्कृत ‘वत्सल’ बोलचाल म घसकर ‘वछल’ हो गया।
बदिरया बदली / बादल ‘बदरा’ म -इया प्रत्यय जुड़कर प्यार-भरा छोटा रूप बना।
मेर ो मनवा मेरा मन ब्रज म ‘मेरा’ = ‘मेरो’; ‘मन’ म -वा जुड़कर ‘मनवा’।
आवन आना / आगमन ‘आवन’ क्रया का पुराना भाववाचक रूप है।
िदश िदशा अंत का ‘आ’ लोप हो गया — दशा → दश।
मेहा मेह / वष / बािरश ‘मेघ’ से बना ‘मेह’, और लय के लए ‘मेहा’।
ऐसा क्य होता है: मीरा ने ये पद ब्रज और राज ानी मली-जुली भाषा म रचे थे, जो उस समय क गाने-बजाने क
भाषा थी। हमारी आज क हद खड़ी बोली है। इस लए अथ वही रहता है, केवल शब्द का रूप बदल जाता है। ये
पुराने रूप ग़लत नह ह — इन्ह से पं क्त म लय और मठास आती है। “मेरा मन” गाकर दे खए और फर “मेरो
मनवा” — अंतर तुरंत समझ आ जाएगा।
Try This: पद म ऐसे और शब्द ढूँ ढ़ए — मूर त (मू त), सूर त (सूरत), राज त (राजती/सुशो भत), चहूँ (चार ),
उमग्यो (उमड़ पड़ा), दमकै (दमककर), गावन (गाना), लावन (लाना)।
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 132
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 नीचे दए गए ान म ीकृष्ण से जुड़े शब्द पाठ म से चुनकर ल खए— (कद्र म ‘ ीकृष्ण’ और एक ान पर
‘मुरली’ पहले से दया गया है।)
पुस्तक म बीच के गोले म ीकृष्ण लखा है और एक गोले म मुरली भरा हुआ है। बाक़ गोल म पाठ से चुनकर ये शब्द भरे जा
सकते ह —
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
गोले म ल खए पाठ क पं क्त ीकृष्ण से क्या संबंध
मुरली “अधर सुधा रस मुरली राज त” उनके ह ठ क बाँसुरी ( दया हुआ उदाहरण)
नंद लाल “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” उनका नाम — नंद के पुत्र
वैजंती माल “उर वैजंती माल” उनके गले-छाती का हार
क्षदु घंिटका “क्षुद्र घं टका क टतट सो भत” उनक कमर क छोट घं टयाँ
नूपरु “नूपुर शब्द रसाल” उनके पैर का घुँघरूदार गहना
गोपाल “भक्त वछल गोपाल” उनका नाम — गाय का पालन करने वाले
िगरधरनागर “मीरा के प्रभु गरधरनागर” उनका नाम — गोवधन पवत धारण करने वाले
हिर “भनक सुनी ह र आवन क ” उनका नाम — दुख हरने वाले
और भी भरे जा सकते ह: ‘साँव र सूर त’, ‘ वशाल नैना’, ‘मोह न मूर त’ और ‘भक्त वछल’ — ये भी पाठ म
ीकृष्ण के लए ही आए ह। जतने गोले ह , उतने शब्द चुन ली जए; बाक़ सूची अपनी लेखन-पु स्तका म लख
ली जए।
ध्यान द: इस ग त व ध से एक बड़ी बात पता चलती है — इतने छोटे -से पद म मीरा ने ीकृष्ण के लए चार अलग-
अलग नाम (नंदलाल, गोपाल, ह र, गरधरनागर) और चार आभूषण/वस्तुएँ (मुरली, वैजंती माल, क्षुद्र घं टका, नूपुर)
रख द ह।
पं क्त से पं क्त — पृष्ठ 132
पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 म कुछ पं क्तयाँ द गई ह। मलती-जुलती पं क्तय को रेखा ख चकर मलाइए— स्तंभ
1 — 1. अधर सुधा रस मुरली राज त, उर वैजंती माल 2. क्षुद्र घं टका क टतट सो भत, नूपुर शब्द रसाल 3. मीरा
के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल 4. सावन म उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी ह र आवन क 5. उमड़
घुमड़ च ँ दश से आया, दा मन दमकै झर लावन क | स्तंभ 2 — 1. चार दशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर
बरस रहे ह, बजली चमक रही है, वषा क झड़ी लग गई है। 2. ह ठ पर सुरीली धुन से भरी हुई बाँसुरी और सीने
पर वैजयंती माला सजी हुई है। 3. सावन के महीने म मेरे मन म बहुत-सी उमंग उठ रही ह, क्य क मने ीकृष्ण के
आने क चचा सुनी है। 4. हे मीरा के प्रभु! तुम संत को सुख दे ने वाले हो और अपने भक्त से स्नेह करने वाले हो।
5. कमर पर छोट -छोट घं टयाँ सजी हुई ह और पैर म बँधे हुए नूपुर मीठ आवाज म बोल रहे ह।
सही मलान —
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद
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स्तंभ 1 (पद क पं क्त) मलान स्तंभ 2 (अथ) पहचान का सूत्र
om l a s=eह ठ, मुरली = बाँसुरी,
उर वैजंती माल .c ag उर = सीना
1. अधर सुध ा रस मुर ली राजित, →2 ह ठ पर सुरीली धुन से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर अधर
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वैजयंती माला सजी हुई है।
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a2.gक्षlदु घंिटका किटतट सोिभत, →5 कमर पर छोट -छोट घं टयाँ सजी हुई ह और पैर म क्षुद्र = छोट , क टतट = कमर,
नूपरु शब्द रसाल बँधे हुए नूपुर मीठ आवाज म बोल रहे ह। नूपुर = पायल
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3. मीरा के पभु संतन सुखदाई, →4
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हे मीरा के प्रभु! तुम संत को सुख दे ने वाले हो और संतन सुखदाई, भक्त वछल ag
भक्त वछल गोपाल
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अपने भक्त से स्नेह करने वाले हो। — दोन शब्द ज्य के त्य
4. सावन में उमग्यो मेर ो मनवा, →3
a सावन के महीने म मेरे मन म बहुत-सी उमंग उठ रही उमग्यो = उमंग, भनक =
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भनक सुनी हिर आवन की ह, क्य क मने ीकृष्ण के आने क चचा सुनी है। आहट/चचा
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a s emदश = चार दशा, दा मन
om agl = बजली, झर = झड़ी
5. उमड़ घुम ड़ चहू ँ िदश से आया, →1 चार दशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे ह, चहूँ
दािमन दमकैcझर
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लावन की बजली चमक रही है, वषा क झड़ी लग गई है।
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agl Tip: ऐसे मलान म सबसे आसान जोड़ी पहले बना ली जए — यहाँ 3 → 4 सबसे आसान है, क्य क दोन म ‘मीरा
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के प्रभु’, ‘संत ’ और ‘भक्त ’ शब्द साफ़ दखते ह। बाक़ अपने आप कम होते जाएँगे।
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क वता का स दय — पृष्ठ 133
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पाठ से
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पाठ से काव्य-स दय
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agl प्र.1 “बरसे बद रया सावन क ।” इस पं क्त म रेखां कत शब्द पर ध्यान द जए। क्या आपको कोई वशेष बात दखाई
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द ? इस पं क्त म ‘बरसे’ और ‘बद रया’ दोन शब्द साथ-साथ आए ह और दोन ‘ब’ वण से शुरू हो रहे ह। दूसरे
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है। पाठ म से इस प्रकार के अन्य उदाहरण.cढूoँ ढ़कर ल खए।
शब्द म कह तो इस पं क्त म ‘ब’ वण क आवृ त्त हो रही है। इस कारण यह पं क्त और भी अ धक सुंदर बन गई
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एक ही वण क इस आवृ त्त को अनुप्रास अलंकार कहते ह। पाठ म इसके अनेक उदाहरण ह —
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पं क्त जो शब्द साथ आए दोहराया गया वण
“बसो मेरे नैनन में नंद लाल” न◌ैनन, न◌ंदलाल न
“मोहिन मूर ित साँविर सूर ित” म◌ोह न, म◌ूर त म
“मोहिन मूर ित साँविर सूर ित” स◌ाँव र, स◌ूर त स
“अधर सुध ा रस मुर ली राजित” रस, मुरली, र◌ाज त र
“क्षदु घंिटका किटतट सोिभत” घं टका, क टतट क
“मीरा के पभु संतन सुखदाई” स◌ंतन, सुखदाई स
“सावन की, सावन की मन भावन की” स◌ावन, स◌ावन स
“सावन में उमग्यो मेर ो मनवा” म◌ेरो, मनवा म
“उमड़ घुम ड़ चहू ँ िदश से आया” उमड़, घुमड़ म-ड़ की आवृि
“दािमन दम कै झर लावन की” दा मन, दम द
“नन्ही ं नन्ही ं बूदँ न मेहा बरसे ” नन्ह , नन्ह न
“शीतल पवन सोहावन की” श◌ीतल, स◌ोहावन श/स
“आनंद मंग ल गावन की” मंगल, ग◌ावन ग
ऐसा करने से क्या होता है: एक ही वण बार-बार सुनाई दे ने से पं क्त म संगीत जैसी लय बन जाती है और वह
जल्द याद हो जाती है। इसी लए भजन, लोकगीत और कहावत अनुप्रास से भरी होती ह — “काला अक्षर भस
बराबर”, “तन-मन-धन”।
Try This: अपने नाम के पहले वण से शुरू होने वाले तीन शब्द जोड़कर एक पं क्त बनाइए — जैसे ‘र व क र◌ोट
र◌ोज़ रसीली’। यही अनुप्रास है।
रूप बदलकर — पृष्ठ 133
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पाठ से
पाठ से ले ख न
प्र.1 पाठ के कसी एक पद को एक अनु े द के रूप म ल खए। उदाहरण के लए— ‘सावन के बादल बरस रहे ह..’
या ‘सावन क बद रया बरसती है...’ आ द।
इस काम को करने का तरीका —
1. पद क हर पं क्त का अथ अपने शब्द म एक वाक्य म ल खए।
2. अब पं क्तय के टु कड़े हटा द जए और उन वाक्य को जोड़कर एक बहती हुई गद्य-पं क्त बना द जए।
3. पुराने रूप बदल द जए — ‘मनवा’ क जगह ‘मन’, ‘मेहा’ क जगह ‘वषा’, ‘ दश’ क जगह ‘ दशा’।
4. ‘और’, ‘क्य क’, ‘तभी’, ‘इस लए’ जैसे जोड़ने वाले शब्द लगाइए — गद्य म ये ही लय का काम करते ह।
नमूना उत्तर 1 — “बरसे बद रया सावन क ” का अनु े द:
सावन क बद रया बरस रही है। यह सावन का महीना है, जो सबके मन को भा जाता है। इस महीने म मेरा मन उमंग से भर उठा है,
क्य क मने अपने प्रभु के आने क हल्क -सी आहट सुन ली है। चार दशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर चले आए ह, बीच-बीच म
बजली दमक जाती है और वषा क झड़ी लग गई है। नन्ह -नन्ह बूँद के रूप म मेह बरस रहा है और उसके साथ ठं डी, सुहावनी हवा
बह रही है। मीरा के प्रभु तो गरधर नागर ह — इसी लए आज चार ओर आनंद और मंगल के गीत गाए जा रहे ह।
नमूना उत्तर 2 — “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” का अनु े द:
हे नंदलाल! आप आकर मेरी आँख म ही बस जाइए। आपक मूरत मन मोह लेने वाली है, सूरत साँवली है और आँख बड़ी-बड़ी ह।
आपके ह ठ पर वह मुरली सजी है जससे अमृत जैसा मीठा रस बरसता है, और छाती पर वैजयंती क माला झूल रही है। कमर पर
छोट -छोट घं टयाँ शोभा दे रही ह और पैर के नूपुर बहुत मधुर ध्व न कर रहे ह। मीरा के प्रभु ऐसे ही ह — संत को सुख दे ने वाले
और अपने भक्त से स्नेह करने वाले गोपाल।
Check it yourself: अनु े द लखने के बाद उसे ज़ोर से प ढ़ए। य द कह पं क्त अटकती है तो वहाँ जोड़ने
वाला शब्द छू ट गया है। और यह ध्यान र खए क गद्य म तुक मलाने क कोई ज़रूरत नह होती।
मुहावरे — पृष्ठ 133
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पाठ से
पाठ से भाषा क बात
प्र.1 “बसो मेरे नैनन म नंदलाल।” नैन या आँख म बस जाना एक मुहावरा है, जब हम कोई व्य क्त या वस्तु इतनी
अ धक प्रय लगने लगती है क उसका ध्यान हर समय मन म बना रहने लगता है तब हम इस मुहावरे का प्रयोग
करते ह, जैसे — उसक छ व मेरी आँख म बस गई है। ऐसा ही एक अन्य मुहावरा है— आँख म घर करना। नीचे
आँख से जुड़े कुछ और मुहावरे दए गए ह। अपने प रजन , सा थय , शक्षक , पुस्तकालय और इंटरनेट क
सहायता से इनके अथ सम झए और इनका वाक्य म प्रयोग क जए। 1. आँख का तारा
अथ: बहुत अ धक प्रय, सबसे अ धक दुलारा।
वाक्य पयोग: छोटी बहन घर में सबसे छोटी है, इसीिलए वह दादी की आ ँखों का तारा है।
चत्र सम झए: तारा वह है जो अँधेरे म भी चमकता और आँख ख च लेता है। जस व्य क्त को दे खते ही आँख चमक
उठ, वही ‘आँख का तारा’ है।
Tip: मुहावरे का प्रयोग करते समय उसका रूप वाक्य के अनुसार बद लए — “वह मेरी आँख का तारा है”, “वे
अपने पता क आँख के तारे थे”। मुहावरा कभी अकेला नह लखा जाता, हमेशा वाक्य म चलता है।
प्र.2 2. आँख पर पदा पड़ना
अथ: सामने का सच दखाई न दे ना; लोभ, मोह या क्रोध के कारण सही-ग़लत का ध्यान न रहना।
वाक्य पयोग: लालच में उसकी आ ँखों पर ऐसा पद पड़ा िक वह अपने ही िमत्र को धोखा दे बैठा।
चत्र सम झए: पदा पड़ जाने पर आँख खुली रहकर भी कुछ नह दे ख पाती। यहाँ पदा कपड़े का नह , लोभ या
मोह का है।
प्र.3 3. आँख के आगे अँधेरा छाना
अथ: अचानक कुछ न सूझना; बुरी खबर या बड़े दुख से घबरा जाना, चक्कर आ जाना।
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वाक्य पयोग: दुघटना का समाचार सुन ते ही माँ की आ ँखों के आ गे अँधेरा छा गया।
चत्र सम झए: बहुत घबराहट म सचमुच आँख के आगे धुँधलापन आ जाता है। मुहावरा इसी शारी रक अनुभव से
बना है, पर प्रयोग मन क दशा के लए होता है।
प्र.4 4. आँख दखाना
अथ: क्रोध से घूरना, डाँटना या डराना-धमकाना।
वाक्य पयोग: मुझे आ ँख मत िद खाओ , मै ं वही कह रहा हूँ जो सच है।
अंतर सम झए: ‘आँख दखाना’ = डाँटना/धमकाना, जब क ‘आँख मारना’ = इशारा करना और ‘आँख लगना’ =
न द आ जाना। एक ही अंग से बने मुहावर के अथ बहुत अलग-अलग होते ह।
प्र.5 5. आँख का काँटा
अथ: जो बलकुल न सुहाए; जसे दे खकर चुभन हो, ऐसा व्य क्त।
वाक्य पयोग: ईमानदार अफ़सर धीरे-धीरे भ ष्ट लोगों की आ ँख का काँट ा बन गया।
चत्र सम झए: काँटा आँख म पड़ जाए तो एक पल भी चैन नह मलता। जस व्य क्त क उप त कसी को
उतनी ही अखरे, वह उसक ‘आँख का काँटा’ है। ध्यान द जए — यह ‘आँख का तारा’ का बलकुल उल्टा मुहावरा
है।
प्र.6 6. आँख फेरना
अथ: पहले जैसा स्नेह छोड़ दे ना, बेरुख़ी दखाना, पहचानने से मुँह मोड़ लेना।
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वाक्य पयोग: अपना काम िनकल जाने के बाद उसने हमसे आ ँखे ं फेर ली।
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मलता-जुलता मुहावरा: ‘मुँह मोड़ना’ भी लगभग यही अथ दे ता है।
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प्र.7 7. आँख भर आना
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अथ: आँख म आँसू आ जाना, भावुक हो जाना।
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आ ँखे ं भर आ ई ं
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ध्यान द: यह मुहावरा केवल दुख म नह चलता — बहुत खुशी, गव या स्नेह म भी आँख भर आती है। जैसे — “बेट
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को पदक लेते दे ख पता क आँख भर आईं।”
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प्र.8 8. आँख चुराना
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a s emसामना करने से बचना; ल ा या अपराध-बोध के कारण नज़र न मलाना।
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वाक्य पयोग: काँच टू टने की बात पकड़ ी जाने पर वह सबसे आ ँखे ं च ुराने लगा।
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चत्र सम झए: जो सच बोल रहा होता है, वह सीधे आँख म दे खता है। जसने कुछ छपाया हो, उसक नज़र इधर-
उधर भागती है — यही ‘आँख चुराना’ है।
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. com9. आँख से उतारना a g l
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अथ: मन से उतार दे ना; जो पहले प्रय था उसका आदर-प्रेम समाप्त कर दे ना।
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वा य पयोग: एक ही झूठ नेaउसे
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g सबकी आ ँखों से उतार िद या ।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
जोड़कर दे खए: ‘आँख म बसना’ का उल्टा है ‘आँख से उतरना’। मीरा चाहती ह क नंदलाल उनक आँख म बस
जाएँ — यानी कभी आँख से न उतर।
प्र.10 10. आँख म खटकना
अथ: बुरा लगना, अखरना; कसी क उन्न त या उप त सहन न होना।
वाक्य पयोग: उसकी तरक्की कु छ लोगों की आ ँखों में खटकने लगी।
Check it yourself: इन दस मुहावर को दो सू चय म बाँ टए — प्रेम/अपनापन वाले (आँख का तारा, आँख
भर आना) और नाराज़गी/दूरी वाले (आँख का काँटा, आँख फेरना, आँख से उतारना, आँख म खटकना, आँख
दखाना)। बाक़ तीन (आँख पर पदा पड़ना, आँख के आगे अँधेरा छाना, आँख चुराना) मन क दशा बताते ह।
सबक प्रस्तु त — पृष्ठ 134
पाठ से
पाठ से गतवध
प्र.1 पाठ के कसी एक पद को चुनकर अपने समूह के साथ मलकर अलग-अलग तरीके से कक्षा के सामने प्रस्तुत
क जए, उदाहरण के लए— • गायन करना। • भाव-नृत्य प्रस्तु त करना। • क वता पाठ करना आ द।
यह कक्षा म मलकर करने क ग त व ध है। एक अ प्रस्तु त क तैयारी इस तरह क जए —
तरीका कैसे तैयारी कर कस बात का ध्यान रख
गायन ‘बरसे बद रया सावन क ’ को मल्हार या कसी सरल लोक-धुन म गाइए। एक हर पं क्त का अंत ‘…क ’ पर है —
साथी टे क (“बरसे बद रया सावन क ”) दोहराए, बाक़ अगली पं क्तयाँ गाएँ। इसी पर सुर ठहराइए।
भाव-नृत्य ‘बसो मेरे नैनन म नंदलाल’ पर हाथ से भाव दखाइए — नैन, मुरली बजाना, गले पद जस क्रम म चलता है, भाव भी
क माला, कमर क घं टयाँ, पैर के नूपुर। उसी क्रम म — ऊपर से नीचे।
क वता दो-दो साथी एक-एक पं क्त बोल और पूरा समूह टे क दोहराए। ‘नन्ह नन्ह ’, ‘उमड़ घुमड़’ जैसे शब्द
पाठ को धीरे और ठहरकर बो लए।
चत्र- पद क हर पं क्त का एक चत्र बनाइए और पं क्त बोलते समय वह चत्र ऊपर चत्र बड़े और सादे ह ता क पीछे बैठे
प्रस्तु त उठाइए। साथी भी दे ख सक।
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नमूना योजना: “हमारा समूह ‘बरसे बद रया सावन क ’ गाएगा। दो साथी ताली से ताल दगे, एक साथी टे क गाएगा,
तीन साथी बारी-बारी पं क्तयाँ गाएँगे और अं तम पं क्त ‘आनंद मंगल गावन क ’ हम सब मलकर दो बार गाएँगे।”
आपक बात — पृष्ठ 134
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) “बरसे बद रया सावन क ” 1. इस पद म सावन का सुंदर चत्रण कया गया है। जब आपके गाँव या नगर म
सावन आता है तो मौसम म क्या प रवतन आते ह? वणन क जए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। अ े उत्तर म दखने, सुनने, सूँघने और छू ने — चार तरह के बदलाव आने चा हए, और वे
आपके ही गाँव/नगर के ह ।
वणन म ये बात आ सकती ह:
आकाश: धूप कम, काले-भूरे बादल; दन म भी अँधेरा-सा; बजली चमकना, बादल गरजना।
तापमान: गरमी क तपन टू ट जाती है, हवा ठं डी और नम हो जाती है।
धरती: सूखे खेत हरे हो जाते ह, ग म पानी भर जाता है, नद -नाले भर उठते ह, रास्त म क चड़ हो जाता है।
पेड़-पौधे: धूल धुल जाती है और पत्ते चमकने लगते ह; नई घास और मशरूम उग आते ह।
जीव-जंतु: मढक क टर-टर, झ गुर क आवाज़, मोर का नाचना, कचुए और बरसाती क ड़े नकल आना।
गंध: पहली बा रश पर गीली म क स धी महक — जसे ‘स धी सुगंध’ कहते ह।
लोग का जीवन: कसान बुआई म जुट जाते ह, छाते-बरसाती नकल आती ह, ब े कागज़ क नाव चलाते ह, झूले पड़ जाते
ह।
नमूना उत्तर:
“हमारे गाँव म सावन आते ही सबसे पहले आकाश बदलता है। जून क चौड़ी धूप ग़ायब हो जाती है और दोपहर म भी बादल इतने
घने हो जाते ह क लगता है साँझ हो गई। पहली बा रश गरते ही गीली म क स धी महक पूरे घर म भर जाती है। खेत, जो अब
तक फट हुई धरती क तरह दखते थे, दो-चार दन म हरे हो जाते ह और पता जी धान क रोपाई म लग जाते ह। पीपल के पत्त क
धूल धुल जाती है और वे नए जैसे चमकने लगते ह। रात म मढक क टर-टर और झ गुर क आवाज़ इतनी तेज़ होती है क न द म
भी सुनाई दे ती रहती है। पगडं डयाँ क चड़ से भर जाती ह, फर भी हम चप्पल हाथ म लेकर स्कूल जाते ह — क्य क सावन म भीगने
का अपना ही आनंद है।”
Tip: ‘बहुत अ ा लगता है’ जैसे वाक्य से ब चए। उसक जगह वह चीज़ ल खए जसे दे खकर अ ा लगा — यही
अ ा वणन कहलाता है।
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प्र.2 2. सावन क ऋतु म कस- कस प्रकार क ध्व नयाँ सुनाई दे ती ह? इन ध्व नय को सुनकर आपके मन म कौन-
कौन सी भावनाएँ उठती ह? आप कैसा अनुभव करते ह? अपने अनुभव के आधार पर बताइए। (उदाहरण के
लए — बजली के कड़कने या बूँद के टपकने क ध्व नयाँ।)
सावन क ध्व नयाँ और उनसे जागने वाले भाव —
ध्व न कैसी सुनाई दे ती है मन म क्या भाव उठता है
बादलों का गरजना गड़गड़ — गहरी, दूर से आती हुई पहले हल्का डर, फर उत्सुकता क अब बा रश आएगी
िबजली का कड़कना कड़ाक — अचानक और तेज़ च क जाना; छोटे भाई-बहन का दौड़कर पास आ जाना
छत या टीन पर बूदँ ों का टपकना टप-टप, फर लगातार झरझर मन शांत हो जाता है, न द आने लगती है
तेज़ हवा और प ों की सरसराहट सरसर, साँय-साँय ठं डक और ताज़गी का अनुभव
मेंढकों की टर-टर रात भर, एक साथ कई हँसी आती है; लगता है वे भी बा रश का उत्सव मना रहे ह
मोर की ‘पीहू-पीहू’ और पपीहे की पुक ार दूर खेत से आती हुई मन उमंग से भर जाता है
नाली-नाले में पानी का बहना कल-कल, छपाक बाहर नकलकर कागज़ क नाव चलाने का मन करता है
झूले की चरमराहट और सावन के गीत लय म, बार-बार त्योहार जैसा उत्साह
नमूना उत्तर: “मुझे सबसे अ लगती है छत पर बूँद के टपकने क आवाज़। शुरू म टप… टप… अलग-अलग सुनाई दे ती है, फर
इतनी बूँद गरने लगती ह क एक लगातार झरझर बन जाती है। उस समय पढ़ाई म मन नह लगता, बस खड़क के पास बैठकर
सुनते रहने का मन करता है। पर बजली का कड़कना मुझे आज भी थोड़ा डरा दे ता है — तब दाद कहती ह, ‘डरो मत, यह तो
बादल क आपस क बात है।’”
पद से जो ड़ए: मीरा ने भी इसी अनुभव को दो शब्द म बाँध दया है — “भनक सुनी ह र आवन क ”। भनक यानी
वह हल्क -सी आवाज़ जो पूरी तरह सुनाई तो नह दे ती, पर मन को बता जाती है क कुछ होने वाला है।
प्र.3 3. वषा ऋतु म आपको कौन-कौन सी ग त व धयाँ करने या खेल खेलने म आनंद आता है?
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। कुछ ग त व धयाँ जो ब को वषा म सबसे अ धक भाती ह —
कागज़ क नाव बनाकर बहते पानी म छोड़ना और उसके पीछे दौड़ना।
बा रश म भीगना और आँगन के पानी म छपाक-छपाक कूदना।
झूला झूलना — सावन म पेड़ पर झूले डालना और झूला-गीत गाना।
बरसात रुकने पर इंद्रधनुष खोजना और उसके रंग गनना।
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छत या बरामदे से बैठकर गरम पकौड़े और चाय के साथ बा रश दे खना।
क चड़ म फुटबॉल या कब ी खेलना।
पानी क बूँद से भीगे पत्त -फूल के चत्र बनाना या तसवीर उतारना।
घर के भीतर अंताक्षरी, पहे लयाँ, कहानी-कहना — जब बाहर जाना संभव न हो।
नमूना उत्तर: “मुझे वषा म सबसे अ धक आनंद कागज़ क नाव चलाने म आता है। हम तीन-चार साथी अपनी-अपनी नाव एक साथ
छोड़ते ह और गली के मोड़ तक दौड़ते हुए दे खते ह क कसक नाव सबसे आगे पहुँचती है। बा रश थमने पर हम क चड़ वाले मैदान
म कब ी खेलते ह — गरने पर चोट भी नह लगती, बस कपड़े ख़राब हो जाते ह।”
ध्यान रखने योग्य: बहते नाले, भरे ग े और नद के कनारे से दूर र हए, और बजली कड़कते समय पेड़ के नीचे या
खुले मैदान म मत खड़े होइए। भीगने के बाद तुरंत सर प छकर सूखे कपड़े पहन ली जए।
प्र.4 4. सावन के महीने म हमारे दे श म अनेक त्योहार मनाए जाते ह। आपके घर, प रसर या गाँव म सावन म कौन-
कौन से त्योहार मनाए जाते ह? कसी एक के वषय म अपने अनुभव बताइए।
सावन ( ावण) म दे श भर म अनेक त्योहार आते ह —
त्योहार कहाँ वशेष रूप से क्या होता है
हिरयाली तीज राज ान, ह रयाणा, उत्तर प्रदे श झूले पड़ते ह, स्त्रयाँ हरे वस्त्र पहनकर तीज-गीत गाती ह
रक्षाबंध न पूरे दे श म बहन भाइय को राखी बाँधती ह
नाग पंचमी उत्तर और प म भारत नाग-दे वता क पूजा, दूध-लावा चढ़ाना
कजरी / झूल ा उत्सव पूव उत्तर प्रदे श, बहार कजरी गीत गाए जाते ह
ओणम केरल पुष्प-रंगोली (पूक्कलम), नौका-दौड़, ओणसद्य
बोनालु / ावण सोमवार तेलंगाना / पूरे दे श दे वी-पूजा; सोमवार को शव-आराधना और कांवड़-यात्रा
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ु पूिणमा पूरे दे श म (आषाढ़ के अंत/सावन के आरंभ म) गुरुजन का सम्मान
नमूना उत्तर (रक्षाबंधन के अनुभव पर):
“हमारे घर म सावन का सबसे बड़ा त्योहार रक्षाबंधन है। उस दन माँ सुबह जल्द उठकर खीर और सेवइयाँ बनाती ह। द द बाज़ार
से पछले सप्ताह ही राखी ले आई थ और उसे तुलसी के चौरे पर रख दया था। पूजा के बाद वे मेरे माथे पर तलक लगाकर, अक्षत
छड़ककर मेरी कलाई पर राखी बाँधती ह और म उन्ह कुछ उपहार दे ता हूँ — पछले वष मने अपनी बचत से उनके लए एक रंग-पेट
ली थी। मुझे यह त्योहार इस लए अ ा लगता है क इस दन हम दोन क सारी लड़ाइयाँ अपने आप ख़त्म हो जाती ह।”
Tip: अनुभव लखते समय एक ही त्योहार चु नए और उसका पूरा दन क्रम से ल खए — सुबह क्या हुआ, फर
क्या, और अंत म आपको कैसा लगा। दस त्योहार क सूची से एक त्योहार क स ी कहानी कह अ लगती है।
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पालन करने वाला’ कहती ह। 1. क्या आपके जीवन म कोई ऐसा व्य क्त है जो सदै व आपकem
प्र.5 (ख) “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” — इस पद म मीरा ीकृष्ण को ‘संत को सुख दे ने वाला’ और ‘भक्त का
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co आनं दत करता है? वस्तार से बताइए। gl
सहायता करता है
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और आपको
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उत्तरgl
coसm ी घटना जो यह बात सद्ध करे।
यह आपके अपने जीवन का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर वद्याथ का अलग होगा। अ े उत्तर म तीन बात होनी चा हए — वह व्य क्त
कौन है, वह कस- कस तरह सहायता करता है और कोई एक
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नमूना उत्तर:
“मेरे जीवन म वह व्य क्त मेरी नानी ह। वे हमारे a
साथ ही रहती ह। जब भी म कसी बात से उदास होता हूँ, वे बना पूछे ही समझ
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जाती ह और मुझे अपने पास बठाकर कोई पुरानी कहानी सुनाने लगती ह। पछले वष ग णत क परीक्षा म मेरे अंक बहुत कम आए
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emकभी वद्यालय नह गईं।
थे और मुझे लगा क अब सब मुझ पर नाराज़ ह गे। नानी ने डाँटा नह । उन्ह ने केवल इतना कहा — ‘एक परीक्षा से कोई ब ा तय
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अगली परीक्षाcमoमेरे अंक बहुत अ े आए। नानी के पास ऐसी कोई डग्री नह है, पर मुझे लगताgहैl क हम्मत बँधाना सबसे बड़ी
नह होता, बेटा।’ फर उन्ह ने रोज़ शाम को मेरे साथ बैठकर पहाड़े दोहराने शुरू कर दए, हालाँ क वे स्वयं
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सहायता है , और वह वे सबसे अ तरह करती ह।”
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पद से जो ड़ए: मीरा जन दो गुण के कारण ीकृष्ण को अपना मानती ह, वे ह — सुख दे ना और साथ नभाना।
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हमारे आस-पास के लोग भी इन्ह दो गुण से हमारे ‘अपने’ बनते ह।
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Tip: केवल ‘मेरे पता जी बहुत अ aे ह’ लखना अधूरा उत्तर है। एक घटना ल खए — घटना ही ‘अ े ह’ को
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सद्ध करती है।
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a s em 2. कव यत्री ने पाठ म ‘नूपुर’ और ‘क्षुद्र घं टका’ जैसे उदाहरण का प्रयोग कया है। कसी का वणन करने के लए
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प्र.6
a हम केवल बड़ी-बड़ी ही नह , ब ल्क उससे जुड़ी छोट -छोट बात भी बता सकते ह। आप भी अपने आस-पास के
कसी व्य क्त या वस्तु का वणन करते हुए उससे जुड़ी छोट -छोट बात पर ध्यान द जए और उन्ह ल खए।
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पहले दे खए मीरा ने क्या कया — उन्ह ने यह नह लखा क “ ीकृष्ण बहुत सुंदर ह”। उन्ह ने छोट -छोट चीज़ गना द — कमर
क नन्ही घं टयाँ, पैर के नूपुर क आवाज़, गले क माला। इन्ह छोट चीज़ से पूरा चत्र बन गया।
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वणन लखने का तरीका:
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1. व्य क्त या वस्तु चु नए और दो मनट उसे सचमुच ध्यान से दे खए।
2..cपाँच छोट बात नोट क जए — कोई आवाज़, कोई गंध, कोई आदत, कोई नशान,
a g कोई रंग।
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se 3. बड़े-बड़े वशेषण (‘बहुत सुंदर’, ‘बहुत अ ा’) हटा द जए और उनक जगह ये पाँच बात रख द जए।
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नमूना उत्तर 1 — व्य क्त (दादा जी):
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“दादा जी क छड़ी क नोक पर पीतल क एक छोट -सी टोपी लगी है — घर म सबसे पहले उसी क ठक-ठक सुनाई दे ती है, फर
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दादा जी दखाई दे ते ह। उनके चश्मे क एक डंडी टू टकर धागे से बँधी है, पर वे नया चश्मा नह लेते। जेब म हमेशा दो इलायची रहती
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ह, एक अपने लए और एक मेरे लए। अख़बार पढ़ते समय वे हर बड़ी खबर के नीचे प सल से लक र ख च दे ते ह, और शाम को वही
लक र दखाकर हम समझाते ह।”
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नमूना उत्तर 2 — वस्तु (मेरी पुरानी साइ कल):
“मेरी साइ कल का रंग कभी नीला था, अब हडल के पास से उतरकर उसम से लोहा झाँकने लगा है। घंट दबाने पर पूरी ‘टन्न’ नह
बजती, आधी-सी आवाज़ आती है, पर मुझे वही आवाज़ पसंद है। पीछे के कै रयर म एक जगह रबर बड बँधा है, जहाँ म ट फ़न
फँसाता हूँ। चेन थोड़ी ढ ली है, इस लए मोड़ पर वह हल्क -सी खटकती है — इसी खटके से माँ जान जाती ह क म स्कूल से लौट
आया हूँ।”
Try This: अपने लखे वणन म से ‘सुंदर’, ‘अ ा’ और ‘बहुत’ — ये तीन शब्द काट द जए। य द उसके बाद भी
वणन से चत्र बनता है, तो आपका वणन सफल है।
वशेषताएँ — पृष्ठ 135
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 “मोह न मूर त साँव र सूर त, नैना बने वशाल।” (क) इस पं क्त म कव यत्री ने ीकृष्ण क मोहनी मूरत, साँवरी
सूरत और वशाल नैन क बात क है। आपको ीकृष्ण क कौन-कौन सी बात ने सबसे अ धक आक षत
कया?
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है — पर उत्तर पाठ म आई बात से जुड़ा होना चा हए। पाठ म ीकृष्ण क जो-जो बात आई ह,
उनम से चु नए —
बात पाठ म कहाँ क्य आक षत करती है
मुर ली “अधर सुधा रस मुरली एक साधारण बाँस क पोरी से ऐसी धुन नकलती है क सब उसक ओर खचे चले
राज त” आते ह
साँवला रूप “साँव र सूर त” सुंदरता केवल गोरे रंग म नह होती — यह पं क्त यही सखाती है
िवशाल नैन “नैना बने वशाल” बड़ी और शांत आँख अपनापन जगाती ह
भक्तों से स्नेह “भक्त वछल गोपाल” वे भक्त क योग्यता नह , उसका प्रेम दे खते ह
संतों को सुख “संतन सुखदाई” बड़ा होकर भी सबके पास रहना, दूर न हो जाना
दे ना
िगरधर होना “मीरा के प्रभु गरधरनागर” पवत उठाकर गाँव के लोग और पशुओं क रक्षा क — साहस और सेवा दोन
नमूना उत्तर: “मुझे ीकृष्ण क दो बात ने सबसे अ धक आक षत कया। पहली — उनक मुरली। वे कोई अस्त्र-शस्त्र नह , बाँस
क एक पोरी लेकर चलते ह और उसी से सबका मन जीत लेते ह। दूसरी — ‘भक्त वछल’ होना। मीरा एक साधारण भक्त थ , पर
उनके पद कहते ह क प्रभु ने उन्ह कभी दूर नह कया। मुझे यह बात अ लगती है क वे बड़े होकर भी छोटे -से भक्त को नह
भूलते।”
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प्र.2 (ख) कसी व्य क्त या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अ धक आक षत करता है? क्य ? अपने जीवन से
जुड़े कसी व्य क्त या वस्तु के उदाहरण से बताइए।
इस प्रश्न म तीन बात ज़रूरी ह — गुण का नाम, क्य वह गुण अ ा लगता है, और अपने जीवन का एक उदाहरण।
ऐसे गुण जन्ह चुना जा सकता है: स ाई, दूसर क सहायता करना, धैय, हम्मत, दूसर क बात ध्यान से सुनना, अपने काम म
मन लगाना, वादा नभाना, नम्रता, हार के बाद फर खड़े हो जाना।
नमूना उत्तर 1 — व्य क्त (गुण: दूसर क बात ध्यान से सुनना):
“मुझे लोग म सबसे अ ा गुण यह लगता है क वे दूसर क बात बीच म काटे बना सुन। मेरी मत्र सलमा म यह गुण है। जब म
कोई बात कहता हूँ तो वह अपना मोबाइल या कताब नीचे रख दे ती है और मेरी ओर दे खकर पूरी बात सुनती है। एक बार म खेल म
हारकर बहुत नराश था। बाक़ साथी सलाह दे ने लगे क मुझे क्या करना चा हए था, पर सलमा ने केवल इतना कहा — ‘बता, हुआ
क्या था?’ और चुपचाप सुनती रही। बात कहते-कहते मेरा मन अपने आप हल्का हो गया। तभी से मुझे लगता है क सुनना भी एक
बड़ी सहायता है।”
नमूना उत्तर 2 — वस्तु (गुण: सादगी और उपयो गता):
“वस्तुओं म मुझे वह गुण भाता है क वे साद ह और सचमुच काम आएँ। हमारे घर म एक म का घड़ा है। उसम न कोई बटन है, न
बजली लगती है, फर भी गरमी म उसका पानी ज से अ धक मीठा लगता है। मुझे यह बात अ लगती है क जो चीज़ जतनी
साद होती है, वह उतनी ही टकाऊ होती है।”
Tip: गुण चुनते समय ऐसा गुण चु नए जसका आपके पास कोई स ा उदाहरण हो। उदाहरण के बना गुण क
तारीफ़ अधूरी रह जाती है।
प्र.3 (ग) हम सबक कुछ वशेषताएँ बाह्य तो कुछ आंत रक होती ह। बाह्य वशेषताएँ तो हम दखाई दे जाती ह,
ले कन आंत रक वशेषताएँ व्य क्त के व्यवहार से पता चलती ह। आप अपनी दोन प्रकार क वशेषताओं के दो-
दो उदाहरण द जए।
पहले अंतर समझ ली जए —
बाह्य वशेषताएँ आंत रक वशेषताएँ
कैसे पता चलती ह दे खने से, पहली ही मुलाक़ात म व्यवहार से, समय के साथ
उदाहरण कद, रंग, बाल, आवाज़, चाल, हँसी, चश्मा ईमानदारी, धैय, दया, हम्मत, मेहनत, ग़स्सा, शम लापन
पाठ से “साँव र सूर त”, “नैना बने वशाल” “संतन सुखदाई”, “भक्त वछल”
नमूना उत्तर:
मेरी बाह्य वशेषताएँ —
1. मेरे बाल घुँघराले ह और माथे पर बाईं ओर बचपन क एक छोट -सी चोट का नशान है।
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2. म कक्षा म सबसे लंबा हूँ, इस लए प्राथना-सभा क पं क्त म हमेशा सबसे पीछे खड़ा होता हूँ।
मेरी आंत रक वशेषताएँ —
1. धैय: कोई सवाल एक बार म हल न हो तो म उसे छोड़ता नह , तीन-चार बार करके दे खता हूँ।
2. सहायता का भाव: जस साथी क कॉपी छू ट जाती है, म अपनी कॉपी बाँटकर उसके साथ लख लेता हूँ।
ध्यान दे ने क बात: बाह्य वशेषताएँ हमारी अपनी चुनी हुई नह होत — कद, रंग, नाक-नक़्श जन्म से मलते ह।
आंत रक वशेषताएँ हम स्वयं बनाते ह, अपनी आदत से। इसी लए कसी को उसके रंग-रूप पर नह , उसके व्यवहार
पर परखना चा हए। मीरा ने भी पहले ीकृष्ण का रूप कहा, पर पद समाप्त उनके स्वभाव पर कया।
मधुर ध्व नयाँ — पृष्ठ 135 और 136
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 “अधर सुधा रस मुरली राज त, उर वैजंती माल॥ क्षुद्र घं टका क टतट सो भत, नूपुर शब्द रसाल॥” इन पं क्तय म
तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आए ह, जनसे मधुर ध्व नयाँ उत्पन्न होती ह। उन वस्तुओं के नाम पहचा नए और उनके
नीचे रेखा ख चए।
वे तीन वस्तुएँ ह — मुरली, क्षुद्र घं टका और नूपुर। पुस्तक म इन्ह तीन शब्द के नीचे रेखा ख चए।
वस्तु क्या है कैसी ध्व न पद का प्रमाण
मुरली बाँसुरी — बाँस का फूँककर बजने सुरीली, लंबी तान “अधर सुधा रस मुरली राज त” — ह ठ से अमृत
वाला वाद्य जैसा रस बरसाती है
क्षदु कमर म बँधी छोट -छोट घं टयाँ छन-छन, हलने पर बजने “क्षुद्र घं टका क टतट सो भत”
घंिटका वाली
नूपरु पैर का घुँघरूदार गहना, पायल रुनझुन — मीठ , चलने पर “नूपुर शब्द रसाल” — ‘शब्द’ यानी आवाज़,
बजने वाली ‘रसाल’ यानी मीठ
‘वैजंती माल’ क्य नह : माला भी ीकृष्ण पर सजी है, पर वह बजती नह — उससे कोई ध्व न नह नकलती।
इस लए वह इन तीन म नह गनी जाएगी।
ध्यान द जए: मीरा ने केवल ीकृष्ण का चत्र नह ख चा, उनक आवाज़ भी सुना द है — मुरली क तान, घं टय
क छनक और नूपुर क रुनझुन। इसी लए यह पद पढ़ते हुए दृश्य के साथ संगीत भी सुनाई दे ने लगता है।
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प्र.2 आगे मधुर ध्व नयाँ उत्पन्न करने वाले कुछ वाद्ययंत्र के वषय म पहे लयाँ द गई ह। इन्ह पहचानकर सही चत्र के
साथ रेखा ख चकर मलाइए— (1) हवा से बोलती है, सुर म गीत सुनाती है, होठ से छू जाए, तो मन को लुभाती
है। (2) दो सा थय का जोड़ा, हाथ से है बजता, ताल मलाए ताल से, हर संगत म सजता। (3) शाह म शा मल
होती, फूँक से संगीत सुनाती, सुख के सारे काम सजाती, दुख म भी ये साथ नभाती। (4) तार म छपा संगीत,
माँ सरस्वती का गहना, छे ड़े जब अँगु लयाँ, बहे राग का झरना। (5) दो हाथ से बजती है ये, ताल से थरक पैर,
हर उत्सव क है ये साथी, लटक गले ये करती सैर। (6) ना गन-सी लहराती है जो, बड़ी खास आवाज है जसक ,
तीन, चीन, रंगीन, हीन से मली-जुली पहचान है इसक । (7) सौ तार का जादू, डं डय से जो गाए, कश्मीर क
वा दय जैसा मधुर संगीत लाए। (8) छोटा-सा यंत्र है, हाथ से बजता जाए, घर-मं दर का साथी, झंकार से मन
बहलाए।
आठ पहे लय के उत्तर और उनसे जुड़े चत्र —
पहेली उत्तर पहचान का सूत्र प्रकार
1. हवा से बोलती है… होठों से छू जाए बाँस ुरी फूँक (हवा) से बजती है और ह ठ से लगाई जाती है सु षर (फूँक
वाला)
2. दो सािथयों का जोड़ा… हर संग त तबला तबला-डग्गा क जोड़ी; हर गायन-नृत्य क संगत म रहता है अवनद्ध (चमड़े
में सजता वाला)
3. शाहों में शािमल होती, फूँ कों से शहनाई राज-दरबार और मंगल अवसर ( ववाह) पर बजती है; फूँक से सु षर
संग ीत सुनाती बजती है
4. तारों में िछपा संग ीत, माँ सरस्वती वीणा माँ सरस्वती के हाथ म वीणा ही रहती है; तार अँगु लय से छे ड़े तत (तार वाला)
का गहना जाते ह
5. दो हाथों से बजती… लटक गले ये ढोलक दोन सर पर चमड़ा, दोन हाथ से बजती; गले म लटकाकर अवनद्ध
करती सै र चलते-चलते भी बजाई जाती है
6. नािगन-सी लहराती… तीन, चीन, बीन सपेरे क बीन; ‘तीन, चीन, रंगीन, हीन’ — इन सबसे तुक मलाने सु षर
रंग ीन, हीन वाला शब्द बीन ही है
7. सौ तारों का जादू , डंिडयों से जो संतरू लगभग सौ तार, दो छोट लकड़ी क डं डय (कलम) से बजता, तत
गाए… कश्मीर कश्मीर का प्र सद्ध वाद्य
8. छोटा-सा यंत्र … घर-मंिदर का मजीरा धातु क दो छोट कटो रयाँ, भजन-क तन म ताल दे ती ह घन (ठोस धातु
साथी, झंक ार वाला)
चत्र से मलाने का तरीका: पुस्तक के चत्र इसी क्रम म नह ह। पहले वाद्य का प्रकार दे खए — बाँसुरी और
शहनाई फूँक से बजते ह (लंबी नली), तबला और ढोलक पर चमड़ा मढ़ा है, वीणा और संतूर म तार दखगे, मजीरा दो
छोट कटो रय जैसा है और बीन म एक तूँबा (लौक जैसा गोल भाग) साफ़ दखता है।
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पद से जो ड़ए: पहेली (1) क बाँसुरी वही ‘मुरली’ है जो पहले पद म ीकृष्ण के अधर पर सजी है, और (8) का
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मजीरा वही वाद्य है जसे लेकर मीरा जैसे संत भजन गाते थे।
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चत्र करते ह बात — पृष्ठ 137
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे ले ख न
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प्र.1 नीचे दए गए चत्र को ध्यान से दे खए— यह मीरा का काँगड़ा शैली म बना चत्र है। इस चत्र के आधार पर मीरा
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के संबंध म एक अनु े द ल खए।
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पहले चत्र म क्या-क्या दखता है, यह दे ख ली जए —
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चत्र म क्या बताता है
se m यह संत -साधुओं का रंग है — मीरा ने महल का वैभव छोड़कर संत का जीवन
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केस रया-नारंगी रंग का लंबा वस्त्र
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हाथ म दो तूँब वाला तार-वाद्य (वीणा/तानपूरा) वे गा-गाकर भजन करती थ ; संगीत ही उनक भ क्त का रास्ता था
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खुले, लंबे काले बाल — कोई भारी ंगार नह सादगी; राजसी ठाट-बाट का त्याग
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a s e क हुई पलक, चेहरे पर हल्क मुस्कान ध्यान म डू बा, शांत और आनं दत मन
agl कान का एक आभूषण और माथे का छोटा ट का राजकुल से आने क हल्क -सी झलक
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गहरी नीली पृष्ठभू म और सफ़ेद संगमरमर क जालीदार काँगड़ा शैली क कोमल रंग-योजना; महल का प रवेश
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नमूना उत्तर (अनु े द): agl
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“इस चत्र म मीरा केस रया वस्त्र पहने, हाथ म तूँब वाली वीणा लए बैठ ह। उनके लंबे काले बाल खुले ह और आँख आधी झुक
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हुई ह — जैसे वे अपने चार ओर क दु नया को भूलकर कसी और ही धुन म डू बी ह । ह ठ पर बहुत हल्क -सी मुस्कान है, जससे
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लगता है क वे इस समय पूरी तरह प्रसन्न ह। उनके शरीर पर कोई भारी गहना नह है, केवल कान का एक आभूषण और माथे का
g रंग है और नीचे सफ़ेद संगमरमर क
.c ट का है — यही उनके राजकुल से आने क एकमात्र नशानी है। पीछे गहराaनीला
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se जालीदार छत दखाई देती है, यानी वे कसी महल क छत पर बैठ ह। पर उनका मन महल म नह है; वह वीणा के तार और अपने
छोटा-सा
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गरधर के साथ है। चत्र दे खकर वही मीरा सामने आ जाती ह जनके बारे म पाठ म पढ़ा — एक राजकुमारी, जसने महल छोड़कर
भजन और सत्संग का जीवन चुन लया।”
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काँगड़ा शैली: यह हमाचल प्रदे श कe
s mगड़ा क्षेत्र म अठारहव सद म वक सत हुई लघु चत्र (miniature) शैली
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aglरेखाएँ, चेहरे का पाश्व- चत्र (side profile), बड़ी-बड़ी आँख, चटख नीले-नारंगी
है। इसक पहचान है — कोमल
रंग और अ धकतर राधा-कृष्ण तथा भ क्त से जुड़े वषय।
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लखने का तरीका: चत्र-आधा रत अनु े द म पहले जो दख रहा है वह ल खए (वस्त्र, वाद्य, मुद्रा, पृष्ठभू म),
फर उससे जो समझ आता है वह ल खए (त्याग, भ क्त, आनंद)। केवल कल्पना से लखा गया अनु े द अधूरा
माना जाएगा।
सावन से जुड़े गीत — पृष्ठ 137
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 अपने प रजन , मत्र , शक्षक , पुस्तकालय या इंटरनेट क सहायता से सावन म गाए जाने वाले गीत को ढूँ ढ़ए
और कसी एक गीत को अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए। आप सावन से जुड़ा कोई भी लोकगीत, खेलगीत,
क वता आ द लख सकते ह। कक्षा के सभी समूह ारा एक त्रत गीत को जोड़कर एक पु स्तका बनाइए और
कक्षा के पुस्तकालय म उसे स म लत क जए।
यह समूह म करने क प रयोजना है। इसे इन चरण म क जए —
1. खोज: घर क दाद -नानी, माँ, बुआ या मोहल्ले क स्त्रय से पू छए — “सावन म आप कौन-सा गीत गाती थ ?” प्रायः सबसे
अ े लोकगीत यह मलते ह।
2. लखना: गीत को सुनते ही लख ली जए, बाद म याद करके नह । जो शब्द समझ म न आए, उसे वैसे ही लखकर बाद म अथ
पूछ ली जए।
3. ब्योरा: गीत के नीचे ल खए — कौन-सी भाषा/बोली, कससे सीखा, कस अवसर पर गाया जाता है।
4. पु स्तका: सब समूह के गीत क्रम से लगाकर एक आवरण-पृष्ठ बनाइए (जैसे ‘सावन के गीत — कक्षा 7’), सूची पृष्ठ जो ड़ए
और उसे कक्षा-पुस्तकालय म रख द जए।
कहाँ-कहाँ से गीत मल सकते ह:
प्रकार उदाहरण कहाँ के
कजरी “ रम झम बरसे बद रया…” पूव उत्तर प्रदे श ( मज़ापुर, बनारस), बहार
तीज/झूला गीत “सावन आयो झूलण को…” राज ान, ह रयाणा
मल्हार राग मल्हार म गाए जाने वाले वषा-गीत शास्त्रीय संगीत — पूरे दे श म
भ क्त-पद मीरा का “बरसे बद रया सावन क ” (इसी पाठ से) राज ान
बालगीत “पानी बरसा छम-छम-छम…” ब क ज़बानी, पूरे दे श म
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
नमूना प्र व :
गीत: “ रम झम रम झम बरसे प नया, भीगे मोरी अँगनइया…”
प्रकार: कजरी (लोकगीत) | बोली: भोजपुरी
कससे सीखा: नानी से | कब गाया जाता है: सावन म झूला डालते समय, स्त्रय ारा समूह म।
यह काम क्य : लोकगीत कसी कताब म नह , लोग क स्मृ त म रहते ह। य द हम उन्ह लख न ल तो एक पीढ़
बाद वे लुप्त हो जाते ह। आपक यह पु स्तका सचमुच एक संग्रह-काय है।
खोजबीन — पृष्ठ 137
पाठ से आगे
पाठ से आगे खोज
प्र.1 आपने पढ़ा क मीरा ीकृष्ण क आराधना करती थ । आपने कक्षा 6 क पुस्तक मल्हार म पढ़ा था क सूरदास
भी ीकृष्ण के भक्त थे। अपने समूह के साथ मलकर सूरदास क कुछ रचनाएँ ढूँ ढ़कर कक्षा म सुनाइए। इसके
लए आप पुस्तकालय और इंटरनेट क सहायता ले सकते ह।
सूरदास के बारे म संक्षेप म: सूरदास (लगभग 1478–1583) ब्रजभाषा के सबसे बड़े क व माने जाते ह। वे दृ ष्टहीन थे, फर भी
उन्ह ने बाल-कृष्ण के ऐसे चत्र ख चे जैसे सब कुछ आँख से दे खा हो। उनका सबसे प्र सद्ध ग्रंथ है ‘सूरसागर’। वे वल्लभाचाय के
शष्य और ‘अष्टछाप’ के क वय म सबसे प्रमुख थे।
कक्षा म सुनाने के लए कुछ प्र सद्ध पद —
पद क पहली पं क्त कस वषय पर
“मैया मोरी मैं निहं माखन खायो” माखन चुराकर भी मना कर दे ने वाले बाल-कृष्ण का भोलापन
“मैया कबिहं बढ़ ै ग ी चोटी” बालक कृष्ण क ज़द — मेरी चु टया कब बड़ी होगी
“अब मैं नाच्यो बहुत ग पु ाल” वनय का पद — अब मुझे इस संसार-नृत्य से मुक्त क जए
“चरन कमल बंद ौ हिर राई” प्रभु के चरण क वंदना
“ऊधौ, मोिह बज िबसरत नाही ं” भ्रमरगीत — गो पय का उद्धव से संवाद
मीरा और सूरदास — मलती-जुलती और अलग बात:
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
बदु मीरा सूरदास
आराध्य ीकृष्ण ( गरधर नागर) ीकृष्ण (बाल-गोपाल)
भाव प्रेम और समपण — प्रभु मेरे अपने ह वात्सल्य — प्रभु मेरे बालक ह
भाषा राज ानी म त ब्रज शुद्ध ब्रजभाषा
छाप “मीरा के प्रभु…” “सूरदास प्रभु…”
रूप पद — गाए जाने वाले भजन पद — गाए जाने वाले भजन
प्रस्तु त का तरीका: समूह के हर साथी को एक-एक पद बाँट द जए। पहले पद गाकर या पढ़कर सुनाइए, फर
उसका अथ दो-तीन वाक्य म बताइए, और अंत म कक्षा से पू छए — “इसम कौन-सा भाव है, वात्सल्य या वनय?”
आज क पहेली — पृष्ठ 138
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ शब्द नीचे दए गए ह। इनक अं तम ध्व न से मलती-जुलती ध्व न वाले शब्द वग म से
खो जए और ल खए— शब्द — 1. मूर त (समान ध्व न वाला शब्द — सूर त) 2. सावन 3. उमड़ 4. नागर 5.
नंदलाल। वग — आ | घु | म | ड़ / व | अ | सू | गो / न | ग | र | पा / सो | भ | त | ल
वग (4 × 4 का खाना) इस प्रकार है —
आ घु म ड़
व अ सू गो
न ग र पा
सो भ त ल
उत्तर —
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
शब्द समान ध्व न वाला शब्द वग म कहाँ से मला
1. मूर ित सूरित तीसरे स्तंभ म ऊपर से नीचे — सू + र + त (यह उदाहरण पहले से दया हुआ है)
2. सावन आवन पहले स्तंभ म ऊपर से नीचे — आ + व
3. उमड़ घुमड़ पहली पं क्त म बाएँ से दाएँ — घु + म + ड़
4. नागर नगर तीसरी पं क्त म बाएँ से दाएँ — न + ग + र
5. नंद लाल गोपाल चौथे स्तंभ म ऊपर से नीचे — गो + पा + ल
‘समान ध्व न’ का अथ: शब्द के अंत क ध्व न मलनी चा हए, अथ नह । जैसे — मूर त / सूर त, सावन / आवन,
उमड़ / घुमड़, नागर / नगर, नंदलाल / गोपाल। इसी को क वता म तुक कहते ह, और इसी तुक के कारण मीरा के
पद गाने म इतने मीठे लगते ह।
Try This: वग म बचे हुए अक्षर को भी जोड़कर दे खए — चौथी पं क्त म सो + भ + त से ‘सो भत’ बन जाता
है, जो पद का ही शब्द है (“क्षुद्र घं टका क टतट सो भत”)। इस तरह के वग-पहेली म शब्द सीधे (बाएँ से दाएँ) और
खड़े (ऊपर से नीचे) — दोन तरह से छपे रहते ह।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 138
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 नीचे द गई इंटरनेट क ड़य का प्रयोग करके आप कव यत्री मीरा के बारे म और जान-समझ सकते ह — • मीरा •
मीरा के भजन • मीराबाई • मीरा के भजन— एम एस सुब्बु लक्ष्मी • मीरा फल्म 1945 भाग एक • मेरे तो गरधर
गोपाल
यह खोजबीन क ग त व ध है। पुस्तक म दए गए हर संकेत से क्या मलेगा, यह दे ख ली जए —
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद
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खोज-शब्द क्या मलेगा क्या नोट क जए
m मीरा का जीवन-प रचय — राज ान के मेड़ता क्षेत्र म जन्म, l a se
.co बचपन से कृष्ण-भ क्त, महल त्यागकर तीथ-यात्रा g कन ान क यात्रा क
शताब्द ),aकन-
मीरा / मीराबाई जन्म- ान, समय (लगभग सोलहव
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aमीरा के भजन उनके प्र सद्ध पद के पाठ और गायन दो-तीन पद क पहली पं क्तयाँ अपनी
पु स्तका म लख ली जए
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मीरा के भजन — एम
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प्र सद्ध गा यका एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी क आवाज़ म मीरा के सु नए क एक ही पद गाने पर कतना अलग ag
एस सुब्बुल क्ष्म ी भजन
g l as लगता है
मीरा िफल्म 1945 भाग
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मीरा के जीवन पर बनी पुरानी फ़ल्म दे खए क फ़ल्म म मीरा का जीवन कस
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एक तरह दखाया गया है
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a s emके पद से क जए — छाप
com वही है, ‘ lगरधर’ नाम वही है
मेरे तो िगरधर गोपाल मीरा का सबसे प्र सद्ध पद — “मेरे तो गरधर गोपाल, दूसरो न इसक तुलना पाठ
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कोई”
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a खोजबीन के बाद एक छोटा-सा काम क जए: अपनी लेखन-पु स्तका म मीरा पर एक पृष्ठ बनाइए —
1. मीरा का प रचय — पाँच वाक्य म।
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2. उनके तीन पद क पहली पं क्तयाँ।
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agl एक रेखा चत्र।
3. जो पद आपको सबसे अ ा लगा, उसका एक वाक्य म कारण।
4. पद सुनते समय जो चत्र मन म बना, उसका
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ध्यान र खए: इंटरनेट पर खोज करते समय बड़ क सहायता ली जए। जो जानकारी मले, उसे एक से अ धक जगह
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मलाकर दे ख ली जए — तभी वह भरोसेमंद मानी जाती है।
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a पढ़ने के लए — पृष्ठ 139 से 143
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पाठ से आगे
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पढ़ने के लए अ त रक्त पठन
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पढ़ने के लए — ‘स्वा मभक्त सुमुख’ ( चत्रकथा, पृष्ठ 139–142)। पुराने समय म, म हसक राज्य म जब सकुल
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प्र.1
नामक राजा का शासन था, चत्रकूट पवत पर एक गुफा म हंस का बहुत बड़ा झुंड नवास करता था। एक दन
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कुछ हंस आहार क तलाश म नकल पड़े… इस कथा को प ढ़ए और सम झए।
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कथा का सार —
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1. म हसक राज्य म राजा सकुल का शासन था। चत्रकूट पवत क एक गुफा म हंस का बड़ा झुंड रहता था। एक दन कुछ हंस
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आहार क तलाश म नकले और उन्ह नगर के पास एक भव्य कमल-सरोवर दखा, जसका नाम था मानु सय।
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2. हंस के राजा मरालदे व और उनके मंत्री सुमुख — दोन वहाँ जाने के पक्ष म नह थे, क्य क “ जस जगह का उपयोग मनुष्य
करते ह , वहाँ जाना हमारे लए सुर क्षत नह है।” पर टोली के आग्रह पर राजा मान गए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
3. सरोवर पर शकारी का जाल बछा था। उतरते ही राजा मरालदे व के पाँव जाल म फँस गए। उन्ह ने चल्लाकर सबको सचेत
नह कया — “अगर म अभी ही चल्ला पड़ा तो मेरे साथी बना कुछ चुगे ही उड़ जाएँगे।” वे चुपचाप प्रयास करते रहे, पर
जतना ख चते, रस्सी उतनी ही कसती जाती।
4. जब सब हंस चुग-खा चुके, तब उन्ह ने संकट का संकेत दया। पूरी टोली उड़ गई — केवल मंत्री सुमुख लौट आया और उसने
राजा को घायल और लहूलुहान पाया।
5. राजा ने उसे उड़ जाने क अनुम त द , पर सुमुख ने कहा — “हे प क्षय म ेष्ठ, संकट क इस घड़ी म आपके साथ रहना
मेरा परम कतव्य है। म आपको इस त म छोड़ने क अपेक्षा आपके साथ मर जाना अ धक पसंद करूँगा।”
6. आखेटक आया और प्रसन्न हुआ क एक साथ दो हंस मल गए। उसने पूछा क मुक्त होते हुए भी सुमुख उड़ क्य नह जाता।
सुमुख ने वनती क — “महाराज को छोड़ दो और बदले म मुझे पकड़ लो। म इनके समान ही बड़ा और मोटा-ताजा हूँ, तुम्ह
कोई हा न नह होगी।”
7. सुमुख क स्वा मभ क्त से आखेटक का हृदय बदल गया। उसने बड़ी कोमलता से राजा के पाँव छु ड़ाए और उनके जख्म धोकर
साफ़ कए।
8. दोन हंस उसे पुरस्कार दलाना चाहते थे, इस लए उसके साथ राजा सकुल के पास गए। राजा ने उन्ह सोने के आसन पर बठाया,
शहद और मसरी का प्रबंध कराया, पूरी कथा सुनी और आखेटक को घर, रथ, भरपूर सोना तथा एक लाख क आय क
व्यव ाद।
9. मरालदे व ने कहा — “यह सब मेरे सेनाप त सुमुख क समझदारी और नष्ठा के कारण संभव हुआ। उसने मुझे बचाने के लए
अपने प्राण क बाजी लगा द ।” फर राजा सकुल क अनुम त लेकर दोन अपने झुंड म लौट आए।
कथा से क्या सीख मलती है —
पात्र कौन-सा गुण कहाँ दखा
मरालदे व (हंस ों का राजा) अपने से पहले सा थय क चता फँस जाने पर भी चुप रहे ता क साथी भरपेट चुग ल
सुम ुख (मंत्र ी/से नापित) स्वा मभ क्त, नष्ठा और साहस अकेले लौटा और अपने प्राण दे कर राजा को बचाने को तैयार हुआ
आखेटक हृदय-प रवतन, करुणा शकार छोड़ दया और घाव धोकर साफ़ कए
दोनों हंस कृतज्ञता अपने लए नह , आखेटक को पुरस्कार दलाने राजा के पास गए
राजा सकु ल उदारता और न्याय अ त थ-सत्कार कया और उपकार का उ चत पुरस्कार दया
कथा का मूल संदेश: यह हंस से जुड़ी प्राचीन भारतीय पशु-कथाओं (जातक-परंपरा) क कथा है। इसका संदेश है
— स ी नष्ठा कठोर से कठोर हृदय को भी बदल दे ती है। सुमुख ने न लड़ाई क , न छल कया; उसने केवल सौम्यता
से, पर दृढ़ता से अपनी बात कही — और आखेटक का मन बदल गया।
करने योग्य: यह चत्रकथा है, इस लए इसे कक्षा म नाटक क तरह प ढ़ए — एक साथी मरालदे व, एक सुमुख, एक
आखेटक, एक राजा सकुल और एक सूत्रधार बन जाए।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 पढ़ने के लए — ‘ वजयी वश्व तरंगा प्यारा’ (पृष्ठ 143)। “ वजयी वश्व तरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा॥ सदा
श क्त बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला। वीर को हरसाने वाला, मातृभू म का तन मन सारा॥ … आओ प्यारे
वीरो आओ, दे श धम पर ब ल ब ल जाओ। एक साथ सब मल कर गाओ, प्यारा भारत दे श हमारा॥” —
श्यामलाल गुप्त ‘पाषद’
यह प्र सद्ध झंडा गीत है, जसे स्वतंत्रता-आंदोलन के समय क व श्यामलाल गुप्त ‘पाषद’ ने रचा था। इसक टे क — “झंडा ऊँचा
रहे हमारा” — आज भी स्वतंत्रता दवस और गणतंत्र दवस पर गाई जाती है।
पद-दर-पद भाव —
पं क्तयाँ भाव
“िवजयी िवश्व ितरंग ा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा” टे क — हमारा तरंगा पूरे वश्व म वजयी हो और सदा ऊँचा फहराता रहे।
“सदा शिक्त बरसाने वाला, पेम सुध ा सरसाने वाला” यह झंडा दे खने वाल म श क्त भरता है और प्रेम रूपी अमृत बहाता है।
“वीरों को हरसाने वाला, मातभृ िू म का तन मन सारा” वीर को हष से भर दे ता है; यह केवल कपड़ा नह , मातृभू म का तन-मन है।
“स्वतंत्र ता के भीषण रण में, लख कर जोश बढ़ े क्षण-क्षण में” स्वतंत्रता के क ठन संघष म इसे दे खते ही पल-पल जोश बढ़ता है।
“काँपें शत्र ु दे ख कर मन में, िमट जावे भय संक ट सारा” शत्रु इसे दे खकर मन-ही-मन काँप उठता है और हमारा सारा भय मट जाता है।
“इस झंडे के नीचे िनभय, ले स्वराज्य यह अिवचल िनश्चय” इस झंडे के नीचे नडर होकर स्वराज्य लेने का अटल संकल्प लेते ह।
“आओ प्यारे वीरो आओ, दे श धम पर बिल बिल जाओ” वीरो, आओ — दे श के लए सवस्व न्योछावर कर दो।
“इसकी शान न जाने पाये, चाहे जान भले ही जाये” झंडे क शान कम न हो, चाहे इसके लए प्राण ही क्य न दे ने पड़।
भाषा और शल्प —
टे क क आवृ त्त: “झंडा ऊँचा रहे हमारा / वजयी वश्व तरंगा प्यारा” हर पद के बाद दोहराई जाती है — इसी से यह समूह म
गाने योग्य बनता है।
अनुप्रास: “वि◌जयी वि◌श्व”, “ब ल ब ल”, “सदा श क्त… सरसाने”।
रूपक/मानवीकरण: झंडा श क्त ‘बरसाता’ है, प्रेम-सुधा ‘सरसाता’ है और वीर को ‘हरसाता’ है — नज व झंडे को सजीव
क तरह दखाया गया है।
तुकांत: वाला-वाला-वाला-सारा, रण म-क्षण म-मन म-सारा — तीन पं क्तय क एक ही तुक, फर चौथी पं क्त टे क से जुड़
जाती है।
पाठ से जो ड़ए: मीरा के पद और यह झंडा गीत — दोन गाए जाने के लए रचे गए ह। दोन म एक टे क है जो बार-
बार लौटती है, दोन म छोट -छोट तुकांत पं क्तयाँ ह और दोन म गहरा समपण-भाव है — एक म प्रभु के प्र त, दूसरे
म मातृभू म के प्र त।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद AglaSem · NCERT Solutions
करने योग्य: प्राथना-सभा म यह गीत समूह म गाइए। कुछ शब्द आज कम प्रयोग होते ह — सुधा (अमृत), सरसाना
(बहाना/भर दे ना), हरसाना (हष से भर दे ना), लख कर (दे खकर), अ वचल (अटल), प्रण (प्र तज्ञा) — गाने से पहले
इनके अथ जान ली जए।
अध्याय — एक नज़र म
पाठ म मीरा के दो पद ह। पहला — “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” — ीकृष्ण से प्राथना है क वे मीरा क आँख म ही बस
जाएँ। दूसरा — “बरसे बद रया सावन क ” — सावन क झड़ी और उसके साथ जागी उमंग का गीत है।
पहले पद म ीकृष्ण का सर से पाँव तक का चत्र खचता है — मोहनी मूरत, साँवली सूरत, वशाल नैन, ह ठ पर अमृत
बरसाती मुरली, छाती पर वैजयंती माला, कमर पर क्षुद्र घं टका और पैर म मधुर बोलते नूपुर। अंत म मीरा उन्ह ‘संतन सुखदाई’
और ‘भक्त वछल’ कहती ह।
दूसरे पद म वषा और भ क्त एक हो जाती ह। बादल चार दशाओं से उमड़-घुमड़कर आते ह, दा मनी ( बजली) दमकती है,
नन्ह -नन्ह बूँद गरती ह और शीतल पवन बहती है — और इसी झड़ी म मीरा को ‘ह र आवन क भनक’ सुनाई दे ती है।
इस लए पद का भाव प्रसन्नता और उमंग है, वरह नह ।
दोन पद म मीरा ने अं तम पं क्त म अपना नाम जोड़ा है — “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई”, “मीरा के प्रभु गरधरनागर”। यह
भ क्त-काल क क वता क एक बड़ी पहचान है, जसे छाप या भ णता कहते ह।
भाषा ब्रज-राज ानी म त है — नैनन, मूर त, साँव र, सो भत, बद रया, मनवा, आवन, दश, मेहा जैसे रूप आज क
खड़ी बोली से अलग ह। स दय अनुप्रास से आता है — “बरसे बद रया”, “म◌ोह न म◌ूर त”, “स◌ाँव र स◌ूर त”, “नन्ह
नन्ह ”, “द◌ा मन दम कै”।
पाठ के बाद पढ़ने के लए दो रचनाएँ द गई ह — चत्रकथा ‘स्वा मभक्त सुमुख’ (हंस-मंत्री सुमुख क स्वा मभ क्त क
जातक-कथा) और श्यामलाल गुप्त ‘पाषद’ का झंडा-गीत ‘ वजयी वश्व तरंगा प्यारा’।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पद क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
नंदलाल नंद के पुत्र , ीकृ ष्ण “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” मं दर म नंदलाल क झाँक सजाई गई थी।
नैनन नयनों में, आँखों में “बसो मेरे नैनन म नंदलाल” माँ का चेहरा आज भी मेरे नैन म बसा है।
मोह न मोहने वाली, मन हर ले ने वाली “मोह न मूर त साँव र सूर त” ब े क मोहनी हँसी ने सबका मन मोह लया।
मूर त मूित, रूप, स्वरूप “मोह न मूर त साँव र सूर त” कुम्हार ने म क सुंदर मूर त बनाई।
साँव र साँवली सूर त, साँवला चेहरा “मोह न मूर त साँव र सूर त” उसक साँवरी सूरत म एक अलग ही तेज है।
सूर त
अधर होंठ “अधर सुधा रस मुरली गीत सुनते-सुनते उसके अधर पर मुस्कान आ
राज त” गई।
सुधा अम ृत “अधर सुधा रस मुरली दाद क बात कान म सुधा घोल दे ती ह।
राज त”
राज त सुशोिभत होती है, शोभा दे ती है “अधर सुधा रस मुरली मंच पर तरंगा राजता हुआ बहुत भला लगा।
राज त”
उर हृदय, छाती “उर वैजंती माल” उसके उर म दे श-प्रेम भरा हुआ है।
वैजंती माल वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला “उर वैजंती माल” मू त के गले म वैजयंती माला पहनाई गई।
क्षुद्र घं टका छोटी-छोटी घंिटयाँ, घुँघ रू “क्षुद्र घं टका क टतट नतक क क्षुद्र घं टकाएँ छनछना उठ ।
सो भत”
क टतट कमर, कमर का भाग “क्षुद्र घं टका क टतट क टतट पर बँधा पटका हवा म लहरा रहा था।
सो भत”
नूपुर पैर ों में पहनने का घुँघ रूदार गहना, पायल “नूपुर शब्द रसाल” आँगन म नूपुर क झंकार गूँज उठ ।
रसाल रसीला, मीठा, मध रु “नूपुर शब्द रसाल” बाँसुरी क रसाल तान सबको बाँध लेती है।
भक्त वछल भक्तवत्सल — भक्तों से स्नेह करने वाला “भक्त वछल गोपाल” भक्त वत्सल प्रभु अपने भक्त को नह भूलते।
बद रया बदली, बादल “बरसे बद रया सावन क ” दोपहर होते ही काली बद रया घर आई।
उमग्यो उमंग से भर गया “सावन म उमग्यो मेरो पहली बूँद पड़ते ही मन उमग उठा।
मनवा”
भनक धीमी, अस्पष्ट आहट या खबर “भनक सुनी ह र आवन क ” मेले क भनक लगते ही ब े दौड़ पड़े।
दा मन दािमनी, िबजली “दा मन दम कै झर लावन दा मनी चमक और सारा आकाश जगमगा उठा।
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कक्षा 7 हद अध्याय 10 मीरा के पद
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शब्द अथ पद क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
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मेहा
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मेह, वष , बािरश “नन्ह नन्ह बूँदन मेहा बरसे”
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रात भर मेह बरसता रहा।
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सोहावन “शीतल पवन सोहावन क ” सावन क शाम बड़ी सोहावनी लगती है।
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गरधरनागर गोवधन पवत को धारण करने वाले चतुर “मीरा के प्रभु गरधरनागर” मीरा ने अपना सब कुछ गरधर नागर को स प
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ीकृ ष्ण दया।
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