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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: मश्रण एवं उनके पृथक्करण का
अन्वेषण
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
72 – 93 36 81 हन्द
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: मश्रण एवं उनके पृथक्करण का
अन्वेषण
गन्ने से चीनी, समुद्र जल से नमक, रक्त क एक बूँद से प्लाज्मा — ये सब वास्तव म मश्रण का पृथक्करण ही ह। इस अध्याय म मश्रण को
वलयन, नलंबन और कोलॉइड म बाँटा गया है, वलयन क सांद्रता को संख्या म व्यक्त करना सीखा गया है, और फर पृथक्करण क व धयाँ —
क्रस्टलीकरण, आसवन, कागज वणले खक , पृथक्कारी क प, ऊध्वपातन, अपकद्रण तथा स्कंदन — वक सत क गई ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
अन्वेषण (कक्षा 9) 72 – 93
खं ड प्रश्न
36 81
माध्यम
हन्द
चतन क जए — पृष्ठ 72
अध्याय का आरंभ
चतन क जए
प्र.1 पं कल जल म नलं बत कण कुछ समय प ात तली पर बैठ जाते ह परंतु दुग्ध म ऐसा नह होता है, क्य ?
क्य क इन दोन मश्रण के कण का आकार बहुत भन्न है। पं कल जल एक नलंबन है, जब क दुग्ध एक कोलॉइड है।
पंक के कण — व्यास 1000 nm से अिधक
दुग् ध के कण (वसा तथा पोटीन) — व्यास 1 – 1000 nm
ऐसा क्य होता है: द्रव के भीतर दो प्रभाव आपस म प्र तस्पधा करते ह। गुरुत्व कण को नीचे ख चता है, जब क जल
के अणुओं क नरंतर अ नय मत टक्कर उसे ऊपर उछालती रहती ह। नीचे ख चने वाला बल कण के आयतन के
साथ बढ़ता है ( त्रज्या के घन के अनुपात म), जब क टक्कर का प्रभाव उसके पृष्ठ पर नभर करता है। इस लए पंक
का बड़ा कण टक्कर क तुलना म कह तीव्रता से नीचे खचता है और कुछ ही मनट म बैठ जाता है। दुग्ध का कण
उससे हजार गुना छोटा है, अतः अणुओं क टक्कर ही उसे स्थायी रूप से प र क्षप्त बनाए रखती ह। दुग्ध म उप स्थत
प्रोट न प्रत्येक वसा-गो लका को ढककर उन्ह आपस म जुड़कर बड़ी और भारी बनने से भी रोकते ह।
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स्वयं जाँ चए: पं कल जल और दुग्ध के गलास रात भर पास-पास स्थर र खए। पंक तली पर एक स्पष्ट परत बना
लेता है, जब क दुग्ध एकसमान बना रहता है। यही एक अवलोकन एक को नलंबन और दूसरे को कोलॉइड कहने के
लए पयाप्त है।
प्र.2 वाष्पीकरण कस प्रकार क्वथन से भन्न होता है?
वाष्पीकरण पृष्ठ पर होने वाला प रवतन है जो प्रत्येक तापमान पर चलता रहता है, जब क क्वथन संपूण द्रव म होने वाला प रवतन है
जो केवल एक न त तापमान पर होता है।
तुलना का वाष्पीकरण क्वथन
बदु
कहाँ होता है केवल द्रव के मुक्त पृष्ठ पर संपूण द्रव म — भीतर बुलबुले बनते ह
तापमान क्वथनांक से नीचे प्रत्येक तापमान पर केवल क्वथनांक पर (सामान्य दाब पर जल के लए
100 °C)
गित मंद और शांत तीव्र और प्रबल
ऊज का ोत द्रव तथा प रवेश से ही ऊष्मा लेता है, इस लए द्रव ठं डा हो बाहर से लगातार ऊष्मा दे नी पड़ती है
जाता है
दै िनक उदाहरण गीले कपड़ों का सूखना, पसीने से ठं डक के तली में जल का खौलना
ऐसा क्य होता है: द्रव म अणुओं क चाल एकसमान नह होत । कसी भी तापमान पर पृष्ठ के कुछ अणु इतने तीव्र
होते ह क वे मुक्त होकर नकल जाते ह — यही वाष्पीकरण है, और चूँ क केवल तीव्रतम अणु नकलते ह, शेष द्रव
ठं डा हो जाता है। क्वथन तब आरंभ होता है जब तापमान इतना अ धक हो जाए क द्रव के भीतर वाष्प का दाब
वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाए। तभी द्रव के भीतर वाष्प का बुलबुला बना दबे बन सकता है और संपूण द्रव
वाष्प म बदलने लगता है।
प्र.3 आपको घने वृक्ष क प त्तय के मध्य छोटे अंतराल म से छनकर नकलता हुआ सूय का प्रकाश चमक ली करण
के रूप म क्य दखाई दे ता है?
क्य क वृक्ष के नीचे क वायु म धूल, धुआँ और जल क सूक्ष्म बूँद वद्यमान होती ह और ये कण सूय के प्रकाश को प्रक णत करके
उसका कुछ भाग आपक आँख क ओर मोड़ दे ते ह। यही टडल प्रभाव है।
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ऐसा क्य होता है: प्रकाश सीधी रेखा म चलता है, इस लए आपसे दूर जाता हुआ करणपुंज स्वयं दखाई नह दे
सकता — आप केवल वही प्रकाश दे खते ह जो वास्तव म आपक आँख म प्रवेश करता है। स्वच्छ वायु म करणपुंज
को मोड़ने वाला कुछ नह होता। परंतु जब वह प्रकाश क तरंगदै य जतने आकार के नलं बत कण से मलता है, तो
प्रत्येक कण उसका थोड़ा भाग सभी दशाओं म बखेर दे ता है और उसका कुछ अंश आप तक पहुँच जाता है। तब
आपको करणपुंज का माग स्वयं दखाई दे ने लगता है, जो वृक्ष क गहरी छाया म चमक ली करण के रूप म उभर
आता है।
क्या आप जानते ह? यही प्रभाव खेल स्टे डयम क फ्लड लाइट् स के करणपुंज को दृश्यमान बनाता है ( चत्र
5.24), धूल भरे सनेमा हॉल म प्रोजेक्टर का माग दखाता है, और क्रयाकलाप 5.1 म दुग्ध वाले बीकर से लेसर
गुजारने पर ठ क यही आप दे खते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 73
5.1 हम मश्रण का वग करण कस प्रकार कर सकते ह?
प्र.1 तेल और जल का मश्रण समांगी है अथवा वषमांगी?
वषमांगी। तेल और जल अ मश्रणीय ह — वे आपस म मलते ही नह , और कतना भी वलो डत क जए, कुछ ही समय म स्पष्ट
सीमा के साथ दो पृथक परत म बँट जाते ह।
ऐसा क्य होता है: समांगी मश्रण का संघटन प्रत्येक भाग म एकसमान होना चा हए। तेल-जल मश्रण के ऊपरी
भाग से एक बूँद ली जए तो तेल मलेगा और तली से ली जए तो जल। संघटन सवत्र एकसमान नह है, अतः मश्रण
वषमांगी है। कण के स्तर पर दे ख तो जल के अणु परस्पर प्रबलता से आक षत होते ह और तेल के अणु इस
आकषण म स म्म लत नह हो पाते, इस लए दोन प्रकार के अणु एक-दूसरे म फैलने के बजाय अलग-अलग रह जाते
ह।
प्र.2 क्या आप कुछ अन्य वषमांगी मश्रण के उदाहरण पर वचार कर सकते ह?
हाँ — ऐसा प्रत्येक मश्रण वषमांगी है जसम आप एक से अ धक भाग क ओर संकेत कर सक।
द्रव म ठोस: जल म रेत, जल म चॉक का चूण, पं कल जल, जल म चाय क प त्तयाँ।
द्रव म द्रव: सरस का तेल और जल, करो सन और जल।
ठोस म ठोस: लोहे क छ लन और गंधक, रेत और साधारण नमक, मली-जुली दाल।
गैस म ठोस अथवा द्रव: धुआँ (वायु म ठोस कण), कोहरा तथा बादल (वायु म जल क बूँद), वायु म धूल।
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संकेत: पीतल और काँसा जैसी मश्रधातुएँ दे खने म ठोस-ठोस मश्रण लगती ह, परंतु वे समांगी होती ह — धातुओं
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को पघलाकर मलाया गया है, इस लए वे परमाणुओं के स्तर तक म श्रत ह।
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क्रयाकलाप 5.1 — आइए, प्रयोग कर — सामू हक क्रयाकलाप — पृष्ठ 73
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5.1 हम मश्रण का वग करण कस प्रकार कर सकते ह?
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क्रयाकलाप
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प्र.1 क्या आपको प्रत्येक मश्रण म कण दखाई दे रहे ह? अपने अवलोकन को अ भले खत क जए।
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केवल बीकर ‘ख’ म। तीन मश्रण ह — जल म नमक (क), जल म चॉक का चूण (ख) तथा जल म दुग्ध क कुछ बूँद (ग)।
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बीकर मश्रण क्या कण दखाई दे ते दखावट
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ह?
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क साधारण नमक + 50 mL जल
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नही ं स्वच्छ और पारदश — इसके पार लखा हुआ पढ़ा जा
a सकता है
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ख चॉक का चूण + 50 mL जल हाँ धुँधला; जल म घूमते श्वेत कण स्पष्ट दखाई दे ते ह
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a s eतmु अलग-अलग कण दखाई नह
comजल agl
ग दुग्ध क कुछ बूँद + 50 mL नही ं एकसमान दु ग्धल श्वेत, परं
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agl ऐसा क्य होता है: हमारी आँख लगभग 1000 nm से बड़े कण को ही अलग-अलग दे ख सकती है। नमक 1 nm
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com दखाई दे ते ह। दुग्ध के कण इनके बीच (1 – 1000 nm) a
से भी छोटे आयन म टू ट चुका है, इस लए बीकर ‘क’ शुद्ध जल जैसा दखता है। चॉक के कण 1000 nm से कह
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बड़े ह और पयाप्त प्रकाश प्रक णत करके अलग-अलग
ह, इस लए कोई एक कण अलग से नहseदखता, फर भी सब मलकर द्रव को श्वेत बना दे ते ह।
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प्र.2 कसी लेसर संकेतक से नकले प्रकाश करणपुंज को एक-एक करके मश्रण के पात्र पर डा लए ( चत्र 5.3) और
बीकर के पा से लेसर पुंज क लंबवत दशा म उसका अवलोकन क जए। अपने अवलोकन को अ भले खत
क जए।
क ख ग
लेसर संकेतक
(क ) नमक और जल (ख) चॉक चूण और जल (ग ) दुध और जल
चत्र 5.3, पृष्ठ 73 — पुन न मत रेखा चत्र: तीन बीकर क, ख और ग म से लेसर करणपुंज भेजने क व्यव ा, पा से
दे खने पर।
करणपुंज का माग ‘क’ म दखाई नह दे ता, ‘ख’ म चमक ला दखाई दे ता है तथा ‘ग’ म भी दखाई दे ता है।
िक्रयाकलाप 5.1 के तीनों िमश्रणों में से गुजरता लेसर िकरणपुंज
बैगं नी खंड = लेसर संकेतक
िवलयन (क) िनलंबन (ख) कोलॉइड (ग)
कण < 1 nm कण > 1000 nm कण 1 – 1000 nm
माग िदखाई नही ं देता चमकीला माग; बैठते है ं िदखता है; बैठते नही ं
क्रयाकलाप 5.1 के तीन मश्रण म से गुजरता लेसर करणपुंज — वलयन म अदृश्य, नलंबन म चमक ला, कोलॉइड म दृश्यमान।
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बीकर पा से दे खने पर लेसर करणपुंज का यह क्या बताता है
माग
क — नमक और िदखाई नही ं दे ता वास्त वक वलयन; कण प्रकाश प्रक णत करने के लए अत्यंत
जल छोटे ह
ख — चॉक और चमकीला, स्पष्ट नलंबन; बड़े कण प्रकाश को प्रबलता से प्रक णत करते ह
जल
ग — दुग्ध और जल िदखाई दे ता है कोलॉइड; मश्रण एकसमान लगता है फर भी प्रकाश प्रक णत
करता है
ऐसा क्य होता है: करणपुंज तभी दखता है जब कुछ प्रकाश पाश्व म मुड़कर आपक आँख तक पहुँचे। प्रकाश क
तरंगदै य (लगभग 400 – 700 nm) से बहुत छोटे कण तरंग को लगभग अछू ता छोड़ दे ते ह, इस लए वलयन म
करणपुंज बना दखे नकल जाता है। तरंगदै य जतने अथवा उससे बड़े कण उसे सभी दशाओं म बखेर दे ते ह और
करणपुंज का माग जगमगा उठता है। यही टडल प्रभाव है और यही वह सरलतम उपाय है जससे दखने म स्वच्छ
कोलॉइड को वलयन से अलग पहचाना जा सकता है।
सुरक्षा सव प र: लेसर करणपुंज पर कभी सीधी दृ ष्ट न डा लए। अवलोकन केवल करणपुंज के लंबवत दशा म,
पाश्व से क जए।
प्र.3 अनुमान लगाइए क य द इन बीकर को कुछ क्षण के लए र रखा जाए तो प्रत्येक बीकर म आपको क्या
दखाई दे गा?
बीकर ‘क’ (नमक और जल): कोई प रवतन नह । वलयन स्वच्छ रहता है और ऊपर से नीचे तक समान रूप से खारा बना
रहता है।
बीकर ‘ख’ (चॉक और जल): चॉक तली पर श्वेत परत के रूप म बैठ जाता है और ऊपर का जल अपेक्षाकृत स्वच्छ हो जाता
है। इसे अवसादन कहते ह।
बीकर ‘ग’ (दुग्ध और जल): कोई प रवतन नह । यह एकसमान दु ग्धल बना रहता है; घंट बाद भी कुछ नीचे नह बैठता।
ऐसा क्य होता है: कसी कण के बैठने के लए उसका भार उन अ नय मत आण वक टक्कर पर भारी पड़ना
चा हए जो उसे नलं बत रखती ह। चॉक के कण (1000 nm से बड़े) इतने भारी ह क वे यह प्र तस्पधा हार जाते ह
और नीचे बैठ जाते ह। नमक अलग-अलग आयन के रूप म है और दुग्ध के कण केवल 1 – 1000 nm के ह, अतः
‘क’ और ‘ग’ दोन म टक्कर ही जीतती ह और कुछ नह बैठता।
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प्र.4 एक नस्यंदन उपकरण व्यव त क जए और उसक सहायता से प्रत्येक मश्रण का पृथक-पृथक नस्यंदन
क जए। क्या नस्यंदक पत्र पर कोई अवशेष रहता है?
अवशेष केवल बीकर ‘ख’ से मलता है।
बीकर नस्यंदक पत्र पर अवशेष नस्यंद
क — नमक और जल कोई नही ं स्वच्छ नमक का वलयन (अब भी खारा — नमक नकल जाता है)
ख — चॉक और जल श्वेत चॉक का अवशेष स्वच्छ जल
ग — दुग्ध और जल कोई नही ं दु ग्धल द्रव — अप रव तत
ऐसा क्य होता है: नस्यंदक पत्र लगभग 1000 nm के छद्र वाली छलनी है। इससे बड़ा कुछ भी रोक लया जाता
है और छोटा सब कुछ द्रव के साथ नकल जाता है। चॉक के कण छद्र से बड़े ह, अतः वे रुक जाते ह। घुले हुए नमक
के आयन और कोलॉइडी दुग्ध कण सीधे नकल जाते ह — इसी लए नस्यंदन से न वलयन पृथक होता है और न
कोलॉइड।
प्र.5 अपने अवलोकन के आधार पर बताइए क क्या ये सभी मश्रण एक ही प्रकार के ह अथवा भन्न- भन्न प्रकार के
ह?
ये तीन भन्न- भन्न प्रकार के मश्रण ह। चार परीक्षण को साथ रखने पर प्रत्येक बीकर अपना अलग उत्तर-प्र तरूप दे ता है।
परीक्षण क — नमक + जल ख — चॉक + जल ग — दुग्ध + जल
कण िदखाई दे ते है?ं नह हाँ नह
िटंडल पभाव? नह हाँ हाँ
िस्थर रखने पर बैठते है?ं नह हाँ नह
िनस्यंद न पर अवशेष? नह हाँ नह
िम श्रण का पकार िवलयन (समांग ी) िनलंबन (िवषमांग ी) कोलॉइड (िवषमांग ी)
ऐसा क्य होता है: इन सभी प रणाम को केवल एक गुणधम तय करता है — प र क्षप्त कण का आकार। 1
nm से कम पर वलयन, 1 nm से 1000 nm के बीच कोलॉइड और 1000 nm से अ धक पर नलंबन। कोलॉइड
ही रोचक मध्यवत स्थ त है: वह ‘क’ क भाँ त समांगी दखता है, परंतु ‘ख’ क भाँ त प्रकाश प्रक णत करता है।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 74
5.2 वलयन; 5.2.1 वलयन क सांद्रता
प्र.1 कसी वलयन म वलेय और वलायक कस अनुपात म उप त होते ह? क्या इन्ह मात्रात्मक रूप से व्यक्त
कया जा सकता है?
कोई एक न त अनुपात नह होता — वलयन तनु भी हो सकता है और सांद्र भी। परंतु जो अनुपात वास्तव म लया गया है उसे
ठ क-ठ क व्यक्त कया जा सकता है, और वही संख्या वलयन क सांद्रता कहलाती है।
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ं ता = िवलायक अथवा िवलयन की दी हईु मात्रा में उपिस्थत िवलेय की मात्रा
कक्षा 9 के स्तर पर इसे प्र तशत के तीन रूप म लखा जाता है —
% m/m = (िवलेय का द व्यमान ÷ िवलयन का द व्यमान) × 100
% m/v = (िवलेय का द व्यमान ÷ िवलयन का आयतन) × 100
% v/v = (िवलेय का आयतन ÷ िवलयन का आयतन) × 100
यह क्य आवश्यक है: ओ.आर.एस., लवणीय वलयन अथवा पीड़कनाशी छड़काव के लए केवल “जल म नमक”
कह दे ना पयाप्त नह — प्रत्येक के लए न त अनुपात चा हए। च कत्सालय के लवणीय वलयन म 0.9 % m/v
सो डयम क्लोराइड होना ही चा हए, अथात प्रत्येक 100 mL वलयन म 0.9 g नमक, क्य क इसी सांद्रता पर वह
रक्त के अनुरूप होता है और रक्त क णकाओं को क्ष त नह पहुँचाता।
प्र.2 य द वे ऐसा नह करते ह तो क्या होगा?
छड़काव दो म से कसी एक प्रकार से असफल हो जाएगा।
पीड़कनाशी बहुत कम: सांद्रता उतनी नह रहती जतनी क ट को नष्ट करने के लए चा हए, अतः क ट जी वत रह जाते ह और
फसल क रक्षा नह होती। बार-बार द गई दुबल मात्रा प्र तरोधी क ट को बढ़ने म सहायता भी कर सकती है।
पीड़कनाशी बहुत अ धक: अ त रक्त मात्रा फसल को झुलसा दे ती है, मृदा म एक त्रत होती है, वषा के साथ बहकर तालाब
और न दय म पहुँचती है तथा अनाज पर अवशेष छोड़ दे ती है जो खाने वाल तक पहुँच जाते ह।
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ऐसा क्य होता है: पीड़कनाशी का प्रभाव इस बात पर नभर करता है क उसके कतने अणु प्रत्येक क ट तक
m a s em को 10 mL
पहुँचते ह। यह संख्या सांद्रता से तय होती है, छड़के गए कुल आयतन से नह । उसी 1 mL पीड़कनाशी
gl अनुपात म घट जाता
co mL जल म मलाने पर सांद्रता दसवाँ भाग रह जाती है और प्रभाव भीaउसी
के स्थान पर .100
a s em 5.3 का यही तक है, जसम 100 mL छड़काव म 1 mL पीड़कनाशी 1 % v/v वलयन बनाता है।
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है। उदाहरण
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प्र.3 क्या आप ऐसे अन्य उदाहरण के वषय म सोच सकते ह?
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हाँ — प्रायः प्रत्येक तैयार कए जाने वाले वलयन का अनुपात महत्वपूण होता है।
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त सही अनुपात क्य आवश्यक है
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a ओ.आर.एस.
अितसार से पीिड़त बच्चे के िलए नमक और चीनी क सांद्रता शरीर के तरल के अनुरूप होनी चा हए, अन्यथा जल का अवशोषण
ठ क से नह होगा
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िचिकत्सालय का लवणीय िवलयन 0.9 % m/v NaCl रक्त के अनुरूप है; इससे अ धक अथवा कम रक्त क णकाओं को क्ष त
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पहुँचाता है
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फश साफ करने का िवरंजक िवलयन aबहुत तनु हो तो क टाणु नह मरते; बहुत सांद्र हो तो सतह और त्वचा को हा न पहुँचती है
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जैम अथवा शीतल पेय के िलए चीनी की स्वाद तथा प ररक्षण क अव ध इसी से तय होती है
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चाशनी
. cनoमें m उपयुक्त मात्रा रक्षा करती है, उससे अ धक हा नकारकgहैl
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seक्लोरीन
दंतमंज फ्लुओ राइड, पेयजल में
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चाय की प्याली में चीनी और दुग्ध वही सामग्री, भन्न अनुपात, बल्कुल भन्न स्वाद
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सो चए और बताइए — पृष्ठ 76
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5.2.2 हम सांद्रता को कस प्रकार व्यक्त करते ह?
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सो चए और बताइए
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कसी साधारण प्रसाधन पाउडर (टै ल्कम पाउडर) म 4% m/m जक ऑक्साइड है, जो एक पू तरोधी
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(antiseptic) क भाँ त काय करता है। 300 g टै ल्कम पाउडर म जक ऑक्साइड क कतनी मात्रा उप त
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12 g जक ऑक्साइड। a
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% m/m = (िवलेय का द व्यमान ÷ िमश्रण का द व्यमान) × 100
4 = (ZnO का द व्यमान ÷ 300 g) × 100
ZnO का द व्यमान = (4 × 300 g) ÷ 100
ZnO का द व्यमान = 12 g
यह क्य ठ क है: “4 % m/m” पाउडर के प्रत्येक 100 g के वषय म कथन है — प्रत्येक 100 g म 4 g जक
ऑक्साइड। 300 g ऐसे तीन भाग ह, अतः उसम 3 × 4 g = 12 g होगा। शेष 300 g − 12 g = 288 g टै ल्क
तथा अन्य अवयव ह।
संकेत: ध्यान द जए क यहाँ द्रव्यमान-द्रव्यमान प्र तशत का उपयोग कया गया है, यद्य प टै ल्कम पाउडर एक
वषमांगी ठोस मश्रण है, वलयन नह । यही सूत्र दुग्ध पाउडर, मसाल के मश्रण और डब्बाबंद खाद्य पदाथ पर भी
लगाया जाता है।
प्र.2 आपक माँ ने आपको अपने अ त थ मत्र को परोसने के लए संतरे के सां द्रत रस क एक बोतल द है। वे
आपको एक गलास म सांद्र रस के दो बड़े चम्मच जल म म श्रत करने के लए कहती ह। य द प्रत्येक बड़े चम्मच
का माप 15 mL हो और आप प्रत्येक व्य क्त के लए 150 mL रस तैयार करते ह, तो आपके ारा बनाए गए
मश्रण म संतरे के सांद्र रस का आयतनानुसार सांद्रता प्र तशत (% v/v) क्या होगा?
20 % v/v।
सांद रस (िवलेय) का आयतन = 2 × 15 mL = 30 mL
रस (िवलयन) का आयतन = 150 mL
% v/v = (िवलेय का आयतन ÷ िवलयन का आयतन) × 100
% v/v = (30 mL ÷ 150 mL) × 100
% v/v = 20 % v/v
यहाँ v/v क्य , m/m क्य नह : सांद्र रस और जल दोन द्रव ह, और रसोई म द्रव को तोलने क अपेक्षा उसका
आयतन मापना (बड़ा चम्मच, मापक गलास) कह सरल है। आयतन-आयतन प्र तशत ठ क इसी स्थ त के लए
बनाया गया है — इसी कारण सरके पर 5 % v/v ऐसी टक अम्ल लखा होता है।
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स्वयं जाँ चए: मलाया गया जल = 150 mL − 30 mL = 120 mL, अतः सांद्र रस और जल का अनुपात 30 :
120 = 1 : 4 है। पाँच भाग रस म एक भाग सांद्र रस अथात पाँचवाँ भाग, और 100 का पाँचवाँ भाग 20 — वही
उत्तर।
प्र.3 सरका, जसका उपयोग खाद्य प ररक्षक (preservatives) और योज्य (additives) के रूप म कया जाता
है, म 5% v/v ऐसी टक अम्ल होता है। ध्यान र खए क ग्लैशल ऐसी टक अम्ल एक द्रव है, जो 100% ऐसी टक
अम्ल है। य द आप ग्लैशल ऐसी टक अम्ल से सरका बनाना चाहते ह तो यह आप कस प्रकार बनाएँगे?
5 mL ग्लैशल ऐसी टक अम्ल मा पए और उसम जल मलाते जाइए जब तक वलयन का कुल आयतन 100 mL न हो जाए।
यही 5 % v/v सरका है।
आवश्यक: % v/v = 5, िवलयन का आयतन = 100 mL
5 = (ऐसीिटक अम्ल का आयतन ÷ 100 mL) × 100
ऐसीिटक अम्ल का आयतन = (5 × 100 mL) ÷ 100 = 5 mL
िमलाया जाने वाला जल ≈ 100 mL − 5 mL = 95 mL
अ धक मात्रा बनानी हो तो तनुकरण संबंध का उपयोग क जए, क्य क जल मलाने पर शुद्ध ऐसी टक अम्ल क मात्रा नह बदलती
—
C1V1 = C2V2
100 % × V1 = 5 % × 1000 mL
V1 = 50 mL ग्लैशल ऐसीिटक अम्ल, िजसे जल िमलाकर 1000 mL बनाया जाए
सुरक्षा सव प र: ग्लैशल ऐसी टक अम्ल संक्षारक है और उसक वाष्प आँख म चुभती है। सदै व अम्ल को जल म
डा लए, जल को अम्ल म कभी नह ; धीरे-धीरे वलो डत करते हुए और कसी वयस्क क दे खरेख म ही क जए।
आयतन को अंत म 100 mL तक पूरा क जए — 5 mL अम्ल म सीधे 100 mL जल मत मलाइए, क्य क
म श्रत द्रव के आयतन ठ क-ठ क जुड़ते नह ह।
क्रयाकलाप 5.2 — आइए, वलेयता को ाफ के रूप म नरू पत कर — पृष्ठ 77
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5.2.3 पदाथ क वलेयता
क्रयाकलाप
प्र.1 उपयुक्त आलेख से प्राप्त सूचना के आधार पर अनुमान लगाइए क कसी न त तापमान पर दो यौ गक ‘क’
और ‘ख’ म से कौन-सा जल क द हुई मात्रा म अ धक वलेय होगा?
400
यौिगक ‘ख’
350
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यौिगक ‘क ’
50
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10 20 30 40 50 60 70 80
तापमान (°C)
चत्र 5.6, पृष्ठ 77 — जल म यौ गक ‘क’ और ‘ख’ के वलेयता वक्र।
यौ गक ‘ख’ — ग्राफ के प्रत्येक तापमान पर उसका वक्र यौ गक ‘क’ के वक्र से कह ऊपर है।
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400
यौिगक ‘ख’
≈360
300 287
िवलेयता (100 g जल मे ं g)
241
200
100
यौिगक ‘क’
80 °C पर ≈66
0
10 20 30 40 50 60 70 80
तापमान (°C)
चत्र 5.6 के अनुसार जल म यौ गक ‘क’ और ‘ख’ के वलेयता वक्र। x-अक्ष पर तापमान चु नए, ऊपर वक्र तक जाइए, फर बाईं ओर y-
अक्ष तक।
20 °C पर: ख ≈ 205 g पित 100 g जल, क ≈ 37 g पित 100 g जल
60 °C पर: ख = 287 g पित 100 g जल, क ≈ 56 g पित 100 g जल
80 °C पर: ख ≈ 360 g पित 100 g जल, क ≈ 66 g पित 100 g जल
ाफ कैसे पढ़: x-अक्ष पर कोई तापमान चु नए, सीधे ऊपर वक्र तक जाइए और फर सीधे बाईं ओर y-अक्ष तक —
वही पा ांक उस तापमान पर 100 g जल म घुलने वाली वलेय क अ धकतम मात्रा है। चूँ क ‘ख’ का वक्र सवत्र
‘क’ से ऊपर है, अतः समान तापमान पर समान द्रव्यमान के जल म ‘ख’ सदै व अ धक घुलेगा।
प्र.2 (i) 20°C पर यौ गक ‘क’ क जल म वलेयता 60°C पर उसक वलेयता _________ (से कम है / से अ धक है /
के समान है)।
से कम है।
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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
20 °C पर ‘क’ की िवलेयता ≈ 37 g पित 100 g जल
m l as
.co
60 °C पर ‘क’ की िवलेयता ≈ 56 g पित 100 g जल
m a g
l a se
g
वृिद्ध ≈ 56 g − 37 g = 19 g पित 100 g जल
a
. c om
ऐसा क्य होता है: ठोस को घोलने के लए उसके कण को क्रस्टल से अलग करना पड़ता है और इसम ऊजा व्यय
ag
होती है। तापन यह ऊजा दे ता है और साथ ही जलeकm
a s े अणुओं क चाल भी बढ़ा दे ता है, जससे वे क्रस्टल के पृष्ठ पर
a l बढ़ने पर ठोस वलेय क वलेयता बढ़ती है।
अ धक बार टकराते ह। इन दोन कारण सेgतापमान
co m
em.
coहैm)। l as
(ii) 20°C पर यौ गक ‘ख’ क वलेयता 60°C पर उसक वलेयता _________ (से कम है / से अ धक है / के
g
.
प्र.3
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से कम है।
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20 °C पर ‘ख’ की िवलेयता ≈ 205 gglपित 100 g जल
a
60 °C पर ‘ख’ की िवलेयता = 287 g पित 100 g जल
co m
वृिद्ध ≈ 287 g − 205 g = 82 g पित 100 g जल
m .
m as e
.co a g l
a s eसंmकेत: ‘ख’ का वक्र केवल ऊँचा ही नह , कह अ धक तीव्र ढाल वाला भी है। तीव्र ढाल वाला वलेयता वक्र ही
agl कसी यौ गक को क्रस्टलीकरण ारा शुद्ध करने के लए उपयुक्त बनाता है, क्य क तापमान म थोड़ी-सी कमी से ही
बड़ी मात्रा म ठोस बाहर आ जाता है।
se m
com g l a
m. a
ase
प्र.4
agl
(iii) तापमान म वृ द्ध से ____________ क वलेयता म ____________ क अपेक्षा अ धक वृ द्ध होती है (यौ गक
m
‘क’/ यौ गक ‘ख’)।
. co
em
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तापमान म वृ द्ध से यौ गक ‘ख’ क वलेयता म यौ गक ‘क’ क अपेक्षा अ धक वृ द्ध होती है।
agl
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g l as
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m ase
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20 °C से 60 °C तक:
यौिगक ख: 287 g − 205 g ≈ 82 g पित 100 g जल
यौिगक क: 56 g − 37 g ≈ 19 g पित 100 g जल
यौिगक ख की वृिद्ध लगभग 82 ÷ 19 ≈ 4 गुन ा अिधक है
ऐसा क्य होता है: वलेयता कतनी तीव्रता से बढ़ती है, यह प्रत्येक वलेय का अपना गुणधम है — यह इस पर
नभर करता है क उस ठोस के घुलने म कतनी ऊष्मा अवशो षत होती है। यौ गक ‘ख’ घुलते समय ‘क’ क अपेक्षा
कह अ धक ऊष्मा अवशो षत करता है, इस लए तापन उसे कह अ धक सहायता पहुँचाता है। ग्राफ पर यही बात
‘ख’ के वक्र क अ धक तीव्र ढाल के रूप म दखाई दे ती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 77
5.2.3 पदाथ क वलेयता
प्र.1 य द आप उच्च तापमान पर एक संतृप्त वलयन बनाते ह और उसे धीरे-धीरे ठं डा करते ह, तो वचार क जए क
इसका क्या प रणाम होगा?
घुले हुए वलेय का कुछ भाग शुद्ध ठोस क्रस्टल के रूप म वलयन से बाहर आ जाएगा। यही क्रस्टलीकरण क प्र क्रया है।
60 °C पर यौिगक ‘ख’ का संत ृप्त िवलयन: 100 g जल में 287 g
40 °C पर ‘ख’ की िवलेयता (िचत्र 5.6 से): 241 g पित 100 g जल
पृथ क होने वाला द व्यमान = 287 g − 241 g = 46 g
ऐसा क्य होता है: संतृप्त वलयन उस तापमान पर वलायक क अ धकतम धारण-क्षमता तक भरा होता है।
तापमान गरने पर यह अ धकतम सीमा भी गर जाती है, अतः वलयन म अब आवश्यकता से अ धक वलेय
उप स्थत है। यह अ त रक्त वलेय ठोस के रूप म बाहर आने के अ त रक्त कुछ नह कर सकता। य द शीतलन धीमा
हो तो कण को नय मत ज्या मतीय प्र तरूप म स त होने का समय मल जाता है और बड़े, सुरू पत, चमकदार
क्रस्टल बनते ह; य द तीव्र हो तो एक साथ अनेक छोटे -छोटे क्रस्टल बन जाते ह और प्रत्येक छोटा ही रह जाता है।
क्या आप जानते ह? अशु द्धयाँ प्रायः घुली ही रह जाती ह क्य क वे बहुत कम मात्रा म होती ह और अपनी संतृप्तता
से बहुत दूर होती ह। इसी लए क्रस्टलीकरण से शुद्ध ठोस प्राप्त होता है और इसका उपयोग यौ गक के शु द्धकरण
म कया जाता है।
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क्रयाकलाप 5.3 — आइए, क्रस्टल बनाएँ — पृष्ठ 78
5.3.1 क्रस्टलीकरण
क्रयाकलाप
प्र.1 इसे कुछ समय के लए छोड़ द जए। आप क्या दे खते ह?
काँच क प्लेट पर रखी संतृप्त कॉपर सल्फेट वलयन क बूँद से जल वा ष्पत हो जाता है और प्लेट पर कॉपर सल्फेट के छोटे नीले
क्रस्टल शेष रह जाते ह।
ऐसा क्य होता है: यहाँ वलयन ठं डा नह कया जा रहा — वलायक हटाया जा रहा है। जैसे-जैसे जल के अणु पृष्ठ
से नकलते ह, जल क मात्रा घटती जाती है जब क कॉपर सल्फेट क मात्रा वही रहती है, अतः वलयन अपनी
संतृप्तता पार कर जाता है और अ त रक्त वलेय ठोस के रूप म पृथक हो जाता है। क्रस्टल नीले इस लए होते ह
क्य क कॉपर सल्फेट अपनी संरचना म जल लेकर क्रस्ट लत होता है।
प्र.2 क्या आपको क्रस्टल प्राप्त हुए? य द हाँ, तो क्या यह प्रयोग करने क अच्छ व ध है? व्याख्या क जए।
हाँ, क्रस्टल तो बनते ह — परंतु य द अच्छे अथवा शुद्ध क्रस्टल चा हए तो यह अच्छ व ध नह है।
क्रस्टल बहुत छोटे और कुरूप होते ह। पतली परत से वाष्पीकरण तीव्र होता है, अतः अनेक क्रस्टल एक ही क्षण म बनने
लगते ह और कसी को भी बड़ा होने के लए न समय मलता है, न पदाथ।
उत्पाद अशुद्ध होता है। जल के उड़ जाने पर बूँद म घुला हुआ सब कुछ — अशु द्धयाँ भी — प्लेट पर ही रह जाता है। कुछ भी
हटता नह ।
कोई नयंत्रण नह । दर कक्ष के तापमान, हवा और आद्रता पर नभर करती है, अतः प रणाम वश्वसनीय रूप से दोहराया नह
जा सकता।
उ चत व ध वही है जो चरण 1 – 6 म द गई है: गम संतृप्त वलयन को नस्यं दत करके अघुलनशील अशु द्धयाँ हटाइए, उसे ढक
द जए और धीरे-धीरे, र रखकर ठं डा होने द जए।
धीमा शीतलन क्य बेहतर है: शीतलन धीमा हो तो वलयन प्रत्येक क्षण केवल थोड़ा-सा अ तसंतृप्त रहता है। बहुत
कम क्रस्टल-कद्र बनते ह और उनम से प्रत्येक को वलयन से कण एकत्र करके बड़ा, चमकदार, सुरू पत क्रस्टल
बनने का समय मल जाता है। घुलनशील अशु द्धयाँ बचे हुए द्रव म रह जाती ह, जसे उँ डेल दया जाता है — यही
बात क्रस्टलीकरण को केवल सुखाने क नह , ब ल्क शु द्धकरण क तकनीक बनाती है।
वै ा नक क भाँ त सो चए — पृष्ठ 79
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5.3.1 क्रस्टलीकरण
वै ा नक क भाँ त सो चए
प्र.1 य द कॉपर सल्फेट के गम संतृप्त वलयन को कक्ष के तापमान पर धीरे-धीरे ठं डा करने क अपेक्षा हमशी तत जल
म तीव्रता से ठं डा कया जाए तो न मत होने वाले क्रस्टल छोटे ह गे तथा भली-भाँ त न मत नह हो पाएँगे। इस
प रकल्पना का परीक्षण करने के लए आप कसी प्रयोग क अ भकल्पना एवं उसका नष्पादन कस प्रकार
करगे?
ऐसा नयं त्रत प्रयोग अ भक ल्पत क जए जसम केवल शीतलन क दर बदली जाए और शेष सब कुछ समान रखा जाए।
परीक्षण क जाने वाली प रकल्पना: कॉपर सल्फेट के संतृप्त वलयन को तीव्रता से ठं डा करने पर छोटे और कम सुरू पत क्रस्टल
बनते ह।
चर
प्रकार इस प्रयोग म
स्वतंत्र चर (िजसे आप बदलते है)ं शीतलन क दर — हमशी तत जल-ऊष्मक बनाम कक्ष के तापमान क स्थर वायु
आिश्रत चर (िजसे आप मापते है)ं बने हुए क्रस्टल का आकार तथा रूप
िनयंित्र त चर (जो समान रखे जाते है)ं एक ही िवलयन, समान आयतन, समान पारंिभक तापमान, एक जैसे बीकर, दोनों समान समय तक िस्थर
प्र क्रया
1. क्रयाकलाप 5.3 के अनुसार कॉपर सल्फेट का गम संतृप्त वलयन बनाइए और उसे गम अवस्था म ही नस्यं दत करके
अघुलनशील अशु द्धयाँ हटा द जए।
2. गम नस्यंद को दो समान भाग म बाँटकर दो एक-जैसे बीकर म ली जए और दोन का प्रारं भक तापमान तापमापी से नोट
क जए।
3. बीकर 1 को हमशी तत जल के पात्र म र खए। बीकर 2 को मेज पर कक्ष के तापमान पर रहने द जए। दोन को वॉच ग्लास से
ढक द जए और स्थर र खए।
4. प्रत्येक बीकर का तापमान हर दो मनट पर अ भले खत क जए, जससे दोन शीतलन दर का प्रमाण आपके पास रहे।
5. समान न त समय के प ात दोन बीकर के क्रस्टल को नस्यं दत क जए, ठं डे जल से धोइए और वॉच ग्लास पर सुखाइए।
6. तुलना क जए: प्रत्येक बीकर के लगभग दस क्रस्टल क सबसे लंबी भुजा स्केल अथवा आवधक लस से मा पए और दे खए
क उनके फलक कतने तीक्ष्ण और नय मत ह।
अपे क्षत प रणाम: बीकर 1 से अनेक छोटे क्रस्टल मलगे जनके फलक खुरदरे और अ नय मत ह गे; बीकर 2 से कम परंतु बड़े,
चमकदार और स्पष्ट सपाट फलक वाले क्रस्टल मलगे। यह प रकल्पना का समथन करता है।
ऐसा क्य होता है: क्रस्टल दो प्र तस्पध चरण म बढ़ते ह — नए कद्र बनना और पहले से बने कद्र का बढ़ना। तीव्र
शीतलन वलयन को एकाएक अत्य धक अ तसंतृप्त कर दे ता है, अतः एक साथ बहुत बड़ी संख्या म कद्र बन जाते ह
और सी मत वलेय उन सबम बँट जाता है; इस लए प्रत्येक छोटा रह जाता है। धीमा शीतलन अ तसंतृप्तता को मंद
बनाए रखता है, अतः कम कद्र बनते ह और प्रत्येक को क्रमबद्ध रूप से कण जोड़ने का समय मलता है, जससे बड़े
और सुरू पत क्रस्टल बनते ह।
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संकेत: एक बार का प्रयोग प्रमाण नह होता। पूरी तुलना कम-से-कम तीन बार दोहराइए; य द हर बार वही अंतर
दखे तो प्रमाण कह अ धक प्रबल हो जाता है। सुरक्षा सव प र: कॉपर सल्फेट वषालु है — इसे कसी वयस्क क
दे खरेख म ही प्रयोग क जए और नग्न हाथ से कभी स्पश न क जए।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 79
5.3.1 क्रस्टलीकरण
सो चए और बताइए
प्र.4 क्रयाकलाप 5.2 म दए गए वलेयता वक्र का संदभ ली जए। य द यौ गक ‘क’ और ‘ख’ के गम, संतृप्त वलयन
के समान द्रव्यमान को 80°C से 60°C तक ठं डा कया जाए, तो कस वलयन से अ धक ठोस नक्षे पत होने क
संभावना है?
यौ गक ‘ख’ के वलयन से कह अ धक ठोस नक्षे पत होगा।
चरण 1 — चत्र 5.6 से वलेयताएँ प ढ़ए (प्र त 100 g जल म g म):
यौिगक ख: 80 °C पर ≈ 360 g 60 °C पर = 287 g
यौिगक क: 80 °C पर ≈ 66 g 60 °C पर ≈ 56 g
चरण 2 — प्र त 100 g जल पर नक्षे पत ठोस
यौिगक ख: 360 g − 287 g ≈ 73 g
यौिगक क: 66 g − 56 g ≈ 10 g
चरण 3 — प्रश्न म वलयन का समान द्रव्यमान कहा गया है, अतः 100 g वलयन के लए नका लए
ख: 100 g जल + 360 g िवलेय = 460 g िवलयन
िन ेप = (73 g ÷ 460 g) × 100 g ≈ 15.9 g पित 100 g िवलयन
क: 100 g जल + 66 g िवलेय = 166 g िवलयन
िन ेप = (10 g ÷ 166 g) × 100 g ≈ 6.0 g पित 100 g िवलयन
दोन प्रकार क गणना एक ही नष्कष दे ती है: ‘ख’ से अ धक नक्षेप होता है — समान द्रव्यमान के वलयन के लए लगभग 2.6
गुना अ धक।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: क्रस्टल क मात्रा यह नह तय करती क कोई यौ गक कतना घुलता है, ब ल्क यह क ठं डा होने
पर उसक वलेयता कतनी तीव्रता से गरती है। ‘ख’ का वक्र 80 °C से 60 °C के बीच तेजी से eगरता
s m है, अतः बड़ी
m a
l ही पृथक होता
co वलेय बाहर आ जाता है। ‘क’ का वक्र लगभग सपाट है, अतः कुछ भीagनाममात्र
मात्रा म अ त.रक्त
s m पोटै शयम नाइ ेट जैसे तीव्र ढाल वाले यौ गक क्रस्टलीकरण से शुद्ध कए जाते ह, जब क सो डयम
eकारण
a
gl जैसे लगभग सपाट वक्र वाले पदाथ वलायक को वा ष्पत करके प्राप्त कए जाते ह।
है। इसी
aक्लोराइड
co m
e m .
संकेत: ग्राफ से पढ़े गए मान स न्नकट होते ह। इन्ह “लगभग 360 g” ल खए, “360.0 g” नह — चत्र 5.6 पर ag
केवल 287 g और 241 g ही ठ क-ठ क अं कत ह।
g l as
a
. c om
m a s emकोई प रवतन होगा?
वाष्पीकरण क दर बढ़ाने अथवा घटाने पर साधारण नमक के क्रस्टल के आकार म क्या
co क जए। gl
प्र.5
. a
em
व्याख्या
l a s
agउत्तर
m a s
हाँ। धीमे वाष्पीकरण से बड़े क्रस्टल बनते ह और तीव्र वाष्पीकरण से अनेक छोटे -छोटे क्रस्टल।
m .co agl
वाष्पीकरण क दर
l a se
वलयन म क्या होता है प्राप्त क्रस्टल
धीमी (उथला पात्र, मंद धूप,
a g
वलयन धीरे-धीरे संतृप्तता पार करता है, अतः कम कद्र बनते ह और प्रत्येक कम, बड़े और सुरूिपत
क्र
om
िस्थर वायु) बढ़ता रहता है ि स्टल
वलयन एकाएक संतृप्तता से बहुत आगे नकल जाता है, अतः एक साथ m
. c
m
तीव (तेज तापन, शुष्क हवा,
a s e अनेक छोटे, कु रूप
. co agl
पतली परत) बहुत अ धक कद्र बन जाते ह िक्रस्टल
se m
l a
ag ऐसा क्य होता है: प्राप्त होने वाले नमक का कुल द्रव्यमान इस बात से तय होता है क कतना घुला था —
se m
m प्रत्येक को थोड़ा ही भाग मलता है; धीमा वाष्पीकरण कम a
वाष्पीकरण क दर उसे नह बदल सकती। दर केवल यह बदलती है क वह नयत द्रव्यमान कतने क्रस्टल म बँटता
है। तीव्र वाष्पीकरण अनेक वृ द्ध-कद्र बना दे ता c
. है,oअतः
a g l
a s eहैm
gl नह दे ता।
कद्र बनाता है, अतः प्रत्येक बड़ा हो जाता । कण को क्रस्टल के नय मत ज्या मतीय प्र तरूप म स त होने के
लए समय भी चा हए, जो तीव्र a वाष्पीकरण
co m
m .
e
क्या आप जानते ह? भारत के नमक- नमाता यह बात व ान लखे जाने से बहुत पहले से जानते थे: करकच नमक
m l as
.cदोनo व धय से स्पष्ट रूप से भन्न आकार के क्रस्टल मलते थे। g
समुद्र जल के उथले पान म धीमे वाष्पीकरण से बनता था, जब क पंगा नमक सांद्र खारे जल को उबालकर — और
m a
l a se
ag
.c
s e m
com a
m. agl
क्रयाकलाप 5.4 — आइए, एक प्र क्रया का वणन कर — पृष्ठ 79
as e
a g l
co m
m .
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a g l Page 19 of 73
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5.3.1 क्रस्टलीकरण
क्रयाकलाप
प्र.1 चत्र 5.9 को ध्यानपूवक दे खए। यह दशाता है क समुद्र जल से नमक के क्रस्टल कस प्रकार प्राप्त कए जाते
ह। इस प्र क्रया का अपने शब्द म वणन क जए।
समुदी जल संतृ त िवलयन
प् नमक के िक्र टल
स्
चत्र 5.9, पृष्ठ 79 — नमक उत्पादन क प्र क्रया के चरण।
समुद्र जल → संतृप्त वलयन → नमक के क्रस्टल। यह वलायक के वाष्पीकरण से चलने वाला क्रस्टलीकरण है, जो तटवत
क्षेत्र म उथले नमक-पान म वशाल पैमाने पर कया जाता है।
1. समुद्र जल को उथले पान म भरा जाता है। समुद्र जल एक तनु वलयन है — प्रत्येक 100 g जल म लगभग 3.5 g घुले
लवण — अतः आरंभ म वह संतृप्तता से बहुत दूर होता है। पान चौड़े और उथले बनाए जाते ह जससे बहुत बड़ा पृष्ठ धूप और
हवा के संपक म रहे।
2. जल वा ष्पत होता है और खारा जल संतृप्त वलयन बन जाता है। जल के अणु पृष्ठ से नकलते रहते ह, परंतु नमक नह
नकल सकता; अतः वलायक का द्रव्यमान घटता जाता है जब क वलेय का वही रहता है और सांद्रता लगातार बढ़ती जाती है।
जब उस तापमान पर जल और नमक नह रख सकता, तो खारा जल संतृप्त हो जाता है।
3. आगे वाष्पीकरण से नमक के क्रस्टल नक्षे पत होते ह। इसके बाद उड़ने वाला प्रत्येक ग्राम जल उतना नमक पीछे छोड़
जाता है जसे वह अब धारण नह कर सकता, और यह अ त रक्त नमक पान के तल पर घनाकार क्रस्टल के रूप म जम जाता
है। इन्ह बटोरकर, धोकर और सुखाकर उपयोग म लाया जाता है।
शीतलन के ान पर वाष्पीकरण क्य : शीतलन केवल उसी वलेय के लए उपयोगी है जसक वलेयता तापमान
के साथ तीव्रता से बदलती हो। साधारण नमक 10 °C पर लगभग 36 g प्र त 100 g जल घुलता है और 80 °C पर
भी केवल लगभग 37 g (ता लका 5.4) — वक्र व्यावहा रक रूप से सपाट है। अतः समुद्र जल को ठं डा करने से
लगभग कोई क्रस्टल नह मलेगा। एकमात्र कायकारी उपाय वलायक को हटाना है, और यह काय सूय न:शुल्क
कर दे ता है।
क्या आप जानते ह? भारत के तट पर यह एक प्राचीन कौशल था: करकच नमक समुद्र जल के वाष्पीकरण से
और पंगा नमक सांद्र समुद्र खारे जल को उबालकर बनाया जाता था — दोन व धय से भन्न- भन्न आकार के
क्रस्टल मलते थे।
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आइए, और आगे वचार कर — पृष्ठ 79
5.3.1 क्रस्टलीकरण
आइए, और आगे वचार कर
प्र.1 क्या आपने कभी कसी ऐसे ान का भ्रमण कया है जहाँ प्रकृ त म बड़े-बड़े क्रस्टल दखाई दए ह ?
प्राकृ तक क्रस्टल वह बनते ह जहाँ ख नज से भरा वलयन बहुत लंबे समय तक स्थर पड़ा रहे — गुफाओं म, खदान म और भू-
पपट के भीतर।
नमूना उत्तर: वद्यालय क यात्रा म हम मेघालय के सोहरा (चेरापूंजी) स्थत मावसमाई गुफा ( चत्र 5.10 क) गए थे। चूना-पत्थर क
छत से टपकता जल घुले हुए कै ल्सयम यौ गक साथ लाता है। प्रत्येक बूँद छत पर लटक रहकर धीरे-धीरे जल और काबन
डाइऑक्साइड खोती है, वलयन संतृप्त हो जाता है और थोड़ा-सा ठोस नक्षे पत हो जाता है। हजार वष म ये नक्षेप ऊपर से
लटकते स्तंभ और तल से उठते स्तंभ का रूप ले लेते ह। स्फ टक ( चत्र 5.10 ख), अपने स्वच्छ छह-फलक य नुक ले क्रस्टल के
साथ, खदान और च ान क गुहाओं म मलने वाला एक और सुंदर उदाहरण है।
प्रकृ त हमसे बेहतर क्रस्टल क्य बनाती है: क्रस्टल का आकार इस बात पर नभर करता है क वह कतने धीरे
बढ़ा। प्रयोगशाला म हम वलयन को एक घंटे म ठं डा करते ह; गुफा म वलयन शता ब्दय तक बूँद-बूँद पहुँचता रहता
है। अत्यंत धीमी वृ द्ध का अथ है बहुत कम कद्र और प्रत्येक को नय मत ज्या मतीय प्र तरूप म कण जोड़ने के लए
असी मत समय — इसी लए प्राकृ तक क्रस्टल वशाल और अत्यंत सुरू पत हो सकते ह।
यह क जए: य द गुफा तक जाना संभव न हो तो बाजार से सधा नमक, मश्री, फटकरी अथवा स्फ टक लेकर
आवधक लस से दे खए। जो आकार दखे उसका चत्र बनाइए — प्रत्येक यौ गक का अपना व शष्ट क्रस्टल-आकार
होता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 80
5.3.2 आसवन
प्र.1 अब वचार क जए य द हम वलायक को भी पुनः प्राप्त करना चाहते ह तो इसके लए हम क्या करना होगा?
साधारण वाष्पीकरण के स्थान पर आसवन का उपयोग क जए।
वाष्पीकरण: िवलयन → िवलेय पाप्त, िवलायक वायु में िवलुप्त
आसवन: िवलयन → िवलेय फ्लास्क में शेष तथा िवलायक संघिनत होकर एकित्रत
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
यह क्य काय करता है: दोन व धय का पहला चरण एक ही है — वलायक वाष्प बनकर उड़ता है। अंतर आगे है।
वाष्पीकरण म यह वाष्प कमरे म बखर जाती है। आसवन म उसे संघ नत्र म ले जाया जाता है, जहाँ बहता हुआ ठं डा
जल उसक गुप्त ऊष्मा हर लेता है, वह पुनः द्रव बन जाती है और एकत्रण-पात्र म टपकती है। कुछ भी नष्ट नह
होता, अतः दोन घटक शुद्ध रूप म प्राप्त हो जाते ह।
क्या आप जानते ह? श वर म लगाया गया आसवन उपकरण इसी प्रकार खारे अथवा पं कल जल से पीने योग्य
जल दे ता है: जल उबलकर वाष्प बनता है और संघ नत होकर एक त्रत हो जाता है, जब क नमक और मैल पात्र म ही
रह जाते ह।
प्र.2 हम इन दो मश्रणीय द्रव को कस प्रकार पृथक कर सकते ह?
आसवन ारा, बशत उनके क्वथनांक म कम-से-कम लगभग 25 °C का अंतर हो।
तापमापी
जल िनकास
जल संघिनत्र
स्टै ंड
आसवन
फ्लास्क वाष्प संघिनत होती है
जल पवेिशका
ऐसीटोन तथा ऐसीटोन की वाष्प
जल का िमश्रण
बनर शंक्वाकार फ्लास्क
आसवन क व्यवस्था। कम क्वथनांक वाला द्रव पहले वा ष्पत होता है, संघ नत्र वाष्प को पुनः द्रव बना दे ता है और आसुत शंक्वाकार
फ्लास्क म एक त्रत हो जाता है।
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ऐसीटोन का क्वथनाक
ं = 56 °C
जल का क्वथनांक = 100 °C
अंत र = 100 °C − 56 °C = 44 °C, जो 25 °C से अिधक है → आसवन काय करेगा
मश्रण को आसवन फ्लास्क म गम क जए। कम क्वथनांक वाला द्रव ऐसीटोन लगभग 56 °C पर पहले उबलता है; उसके आस वत
होते समय पाश्व-न लका के मुँह पर लगे तापमापी का पा ांक 56 °C के आस-पास स्थर रहता है। उसक वाष्प जल-संघ नत्र से
गुजरकर ठं डी होती है और शंक्वाकार फ्लास्क म शुद्ध ऐसीटोन के रूप म एक त्रत हो जाती है। जल, जसे 100 °C चा हए, आसवन
फ्लास्क म ही रह जाता है।
25 °C का नयम क्य : कोई भी द्रव अपनी बारी क प्रतीक्षा नह करता — क्वथनांक से नीचे भी उसका कुछ भाग
वा ष्पत होता रहता है। य द दोन क्वथनांक पास-पास ह तो फ्लास्क से उठने वाली वाष्प दोन द्रव का मश्रण होगी
और आसुत अशुद्ध रहेगा। लगभग 25 °C अथवा अ धक के अंतर का अथ है क जब पहला द्रव उबल रहा हो, तब
दूसरा बहुत थोड़ी ही वाष्प दे ता है, अतः आसुत व्यावहा रक रूप से शुद्ध होता है। कम अंतर के लए प्रभाजी
आसवन का उपयोग कया जाता है।
प्र.3 क्या दो मश्रणीय द्रव के मश्रण को वाष्पीकरण ारा पृथक कर दोन द्रव को प्राप्त कया जा सकता है?
नह । वाष्पीकरण से दोन म से केवल एक ही वापस मल सकता है — और वह भी शुद्ध रूप म नह ।
जो द्रव वा ष्पत होता है वह वायु म उड़कर नष्ट हो जाता है; उसे पकड़ने क कोई व्यवस्था नह होती। अतः एक घटक सदा के
लए चला जाता है।
दोन द्रव एक साथ वा ष्पत होते ह, क्य क वाष्पीकरण प्रत्येक तापमान पर चलता रहता है। इस लए पीछे बचे द्रव म दूसरे द्रव
का कुछ अंश रह ही जाता है — वह भी शुद्ध नह होता।
वाष्पीकरण तभी उपयोगी है जब वलेय कोई अवाष्पशील ठोस हो, जैसे जल म नमक, और आपको वलायक वापस न चा हए।
जहाँ वाष्पीकरण असफल है वहाँ आसवन क्य सफल है: आसवन दो बात जोड़ता है — एक नयं त्रत तापमान,
जससे कम क्वथनांक वाला द्रव पहले वा ष्पत होता है, और एक संघ नत्र, जो उस वाष्प को पकड़कर पुनः द्रव बना
दे ता है। वाष्प मुक्त होने के बजाय पकड़ी जाती है, इसी लए दोन घटक प्राप्त हो जाते ह।
क्रयाकलाप 5.5 — आइए, जाँच कर — पृष्ठ 82
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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
5.3.3 कागज वणले खक
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e m.
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क्रयाकलाप
.co a g l
a s emस्तर का कागज पर ऊपर चढ़ते समय अवलोकन क जए। आप क्या दे खते ह?
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जल
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प्र.1
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जल कागज म लगातार ऊपर क ओर चढ़ता है — जार म m .
s e भरे जल के स्तर से काफ ऊपर तक — और जब गीला अग्रभाग स्याही
a लगता है। एक ही काला बदु खचकर लक र बन जाता है और कनार पर
agl
के बदु तक पहुँचता है तो स्याही को अपने साथ ख चने
रंग उभरने लगते ह।
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जल कागज पर ऊपर क्य चढ़ता है: वणलेखन कागज (तथा नस्यंदक पत्र) सेलुलोस के महीन रेश का जाल है
o m l a
g चढ़ जाते ह। इसे के शका
.c (संसंजन), अतः वे इन संक ण न लकाओं म खचकर गुरुत्व के वरुद्ध ऊपर
जसके बीच असंख्य संक ण न लकाएँ होती ह। जल के अणु सेलुलोस क ओर आक षत होते ह (आसंजन) और
m a
se कहते ह — इसी कारण द पक क सूती बत्ती तेल ऊपर ख चती है और तौ लया जल सोख लेता है।
परस्पर भी
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क्रया
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संकेत: रेखा प सल से ख चनी चा हए, पेन से नह । प सल ग्रेफाइट क होती है, जो अघुलनशील है और वलायक के
a s em
साथ नह चलती, अतः प रणाम बगाड़ नह सकती।
agl
co m
m .
जैसे-जैसे जल ऊपर चढ़ता है तो स्याही भन्न- भन्न रंग के धब्ब के रूप म पृथक हो जाती है। इससे आप क्या
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प्र.2
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नष्कष नकालते ह?
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यही क “काली” स्याही एक पदाथ है ही नह — वह अनेक रंगीन रंजक का मश्रण है, और प्रत्येक रंजक कागज पर अपनी-
a se
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अपनी ग त से चलता है।
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धब्ब क संख्या बताती है क स्याही lमas
चूँ क अलग-अलग रंगीन धब्बे बनते ह, अतः कम-से-कम उतने ही भन्न घटक उप स्थत ह।
ag
कतने घटक ह।
जो धब्बा सबसे ऊपर पहुँचा है वह उस घटक का है जसे कागज सबसे कम रोकता है और जल सबसे अ धक आक षत करता
है।
co m
m .
o m l a se
.cरोकता है, जब क ऊपर चढ़ता जल (ग तशील प्रावस्था) उसे आगे ले जाताaहैg। जो रंजक जल म सरलता से घुलता है
घटक पृथक क्य होते ह: प्रत्येक रंजक दो प्र तस्पध खचाव के बीच रहता है — कागज ( स्थर प्रावस्था) उसे
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g l a
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और सेलुलोस से दुबलता से चपकता है, वह प पर बहुत ऊपर तक बह जाता है। जो कागज से प्रबलता से
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चपकता है और कम घुलता है, वह आरंभ-रेखा के पास रह जाता है। चूँ क प्रत्येक रंजक का इन दोन आकषण का
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संतुलन अलग है, इस लए प्रत्येक भन्न ऊँचाई पर रुक जाता है और एक बदु धब्ब क पं क्त बन जाता है।
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यह क जए: यही प्रयोग हरे खाद्य रंग से, पालक क प त्तय के हरे सत्व से अथवा पुष्प क पंखु ड़य के रंग से
दोहराइए। इनम से कुछ के लए जल पयाप्त नह होगा और ग तशील प्रावस्था के रूप म ऐल्कोहॉल अथवा वलायक
का मश्रण लेना पड़ेगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 82
5.3.3 कागज वणले खक
प्र.1 क्या जल प्रत्येक त म एक वलायक के रूप म काय करेगा?
नह । जल तभी काय करता है जब मश्रण के घटक वास्तव म जल म घुलते ह । अनेक स्थ तय म कोई अन्य वलायक अथवा
वलायक का मश्रण लेना पड़ता है।
पृथक कया जाने वाला उपयुक्त ग तशील प्राव ा कारण
मश्रण
काली अथवा रंग ीन स्के च-पेन की जल अथवा 2 % m/v लवण रंजक जल म घुलनशील ह
स्याही वलयन
पालक की पि यों के हरे वणक ऐल्कोहॉल अथवा वलायक का क्लोरो फल जल म अघुलनशील है परंतु ऐल्कोहॉल म घुल
मश्रण जाता है
पुष्प की पंखिु ड़यों के रंग ीन वणक ऐ ल्कोहॉल अथवा जल-ऐ ल्कोहॉल पंखड
ु ़ ी में कौन-सा वणक है, इस पर िनभर
िम श्रण
वलायक का चुनाव क्य महत्वपूण है: कोई घटक कागज पर तभी चल सकता है जब ग तशील प्रावस्था उसे
घोलकर साथ ले जा सके। य द वलायक कसी घटक को घोल ही न पाए तो वह घटक आरंभ-रेखा पर ही रह जाएगा
और कुछ पृथक नह होगा। साथ ही वलायक को सभी घटक को समान रूप से भी नह घोलना चा हए, अन्यथा सब
एक साथ दौड़गे और एक ही धब्बा बने रहगे। अच्छा वलायक वही है जो प्रत्येक घटक के साथ कुछ भन्न व्यवहार
करे।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 82
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5.3.3 कागज वणले खक
सो चए और बताइए
प्र.6 नम्न ल खत कथन सत्य ह अथवा असत्य। असत्य कथन को सही भी क जए। (i) नमक के वलयन से नमक
को वाष्पीकरण अथवा आसवन ारा पृथक कया जा सकता है। (ii) आसवन का उपयोग उन दो द्रव को पृथक
करने म भी कया जा सकता है जनके क्वथनांक समान ह । (iii) कागज वणले खक म प्रयोग के आरंभ म
वलायक का स्तर प्र तदश बदु से ऊपर होना चा हए। (iv) वाष्पीकरण और क्रस्टलीकरण समान प्र क्रयाएँ ह।
कथन सत्य / सही कया हुआ कथन
असत्य
(i) नमक के िवलयन से नमक को वाष्पीकरण स त्य —
अथवा आसवन ारा पथ ृ क िकया जा सकता है।
ृ क
(ii) आसवन का उपयोग उन दो द वों को पथ अस त्य आसवन दो मश्रणीय द्रव को तभी पृथक कर सकता है जब उनके
करने में भी िकया जा सकता है िजनके क्वथनांक क्वथनांक म कम-से-कम लगभग 25 °C का अंतर हो।
समान हों।
(iii) कागज वणले िखकी में पयोग के आरंभ में अस त्य प्रयोग के आरंभ म वलायक का स्तर प्र तदश बदु से नीचे होना चा हए।
िवलायक का स्तर पितदश िबंद ु से ऊपर होना
चािहए।
(iv) वाष्पीकरण और िक्रस्टलीकरण समान अस त्य ये भन्न ह: वाष्पीकरण म वलायक हटाकर वलेय पीछे छोड़ा जाता है,
पिक्रयाएँ है।
ं जब क क्रस्टलीकरण म संतृप्त वलयन से शुद्ध ठोस नय मत क्रस्टल
के रूप म नक्षे पत होता है।
(i) यह सत्य क्य है। नमक एक अवाष्पशील ठोस है: इन तापमान पर वह वाष्प नह बनता। अतः जल हटा दे ने पर — चाहे
वा ष्पत करके, चाहे उबालकर और आसवन उपकरण म संघ नत करके — दोन ही स्थ तय म नमक पात्र म शेष रह जाता है।
आसवन इससे अ धक करता है: वह शुद्ध जल भी लौटा दे ता है।
(ii) यह असत्य क्य है। आसवन इस बात पर नभर है क एक द्रव दूसरे से पहले वा ष्पत हो। य द दोन द्रव समान तापमान पर
उबल तो वे साथ-साथ वा ष्पत ह गे और आसुत का संघटन मश्रण जैसा ही रहेगा — कुछ पृथक नह होगा।
(iii) यह असत्य क्य है। य द वलायक का स्तर आरंभ म बदु से ऊपर हो तो स्याही धुलकर जार के वलायक म मल जाएगी और
नष्ट हो जाएगी। पूरी व ध इसी पर टक है क वलायक कागज म से होकर ऊपर चढ़े और बदु तक नीचे से पहुँचे, अतः स्तर आरंभ
म बदु से नीचे ही होना चा हए।
(iv) यह असत्य क्य है।
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बदु वाष्पीकरण क्रस्टलीकरण
क्या हटाया जाता है वलायक उड़ा दया जाता है वलायक रहता है; अ त रक्त वलेय बाहर आता है
िकससे चलता है तापन अथवा वायु के संपक से गम संतृप्त वलयन के धीमे शीतलन से
उत्पाद की शुद्धता सभी घुली अशु द्धयाँ वलेय के साथ ही रह जाती ह अशु द्धयाँ द्रव म रह जाती ह; क्रस्टल शुद्ध होते ह
ठोस का रूप पपड़ी अथवा महीन चूण क्र
िनयिमत ज्यािमित वाले सुरूिपत ि स्टल
क्रयाकलाप 5.6 — आइए, पृथक कर — पृष्ठ 83
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5.4.1 दो अ मश्रणीय द्रव का पृथक्करण
क्रयाकलाप
प्र.1 इसे प्रयोगशाला स्टड पर र रहने द जए। ( चत्र 5.16) आप क्या दे खते ह?
पयोगशाला स्टै ंड
पृथक्कारी कीप
सरसों का तेल
जल
स्टॉपकॉक
शंक्वाकार फ्लास्क
काँच की डाट
चत्र 5.16, पृष्ठ 83 — क्रयाकलाप 5.6 म प्रयुक्त पृथक्कारी क प क व्यव ा का पुन न मत रेखा चत्र।
उँ डेलने से आरंभ म धुँधला दखने वाला मश्रण शीघ्र ही दो स्पष्ट पृथक परत म बँट जाता है — रंगहीन जल (20 mL) क परत
पर तैरती पीले सरस के तेल (5 mL) क परत, और दोन के बीच सपाट, स्पष्ट दखाई दे ने वाली सीमा।
ऐसा क्य होता है: सरस का तेल और जल अ मश्रणीय ह: उनके अणु अपनी ही जा त के अणुओं को दूसरी जा त
क तुलना म कह अ धक आक षत करते ह, अतः वे एक-दूसरे म फैलते नह । स्थर रखने पर गुरुत्व दोन द्रव को
केवल घनत्व के आधार पर छाँट दे ता है — अ धक घनत्व वाला नीचे बैठता है और हल्का ऊपर तैरता है — और एक
बार छँ ट जाने के बाद उन्ह फर मलाने वाला कुछ नह रहता।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
पीले रंग का सरस का तेल ऊपरी परत और जल नचली परत बनाता है। क्या आप समझा सकते ह क ऐसा क्य
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प्र.2
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होता है?
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क्य क सरस का तेल जल से कम घना है, अतः उसके समान आयतन का भार कम होता है और वह तैरता है।
com
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जल का घनत्व = 1.00 g cm⁻³
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सरसों के ते ल का घनत्व ≈ 0.91 g cm⁻³g l
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चूँिक 0.91 g cm⁻³ < 1.00 g cm⁻³, ते ल ऊपर आ जाता है
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ऐसा क्य.cहोता है: दोन द्रव का 1 cm³ ली जए। जल के घन का द्रव्यमान 1.00 g g l a
m a है और तेल के घन का केवल
l a se 0.91 g। गुरुत्व भारी जल को अ धक बल से ख चता है, अतः जल तली म बैठ जाता है और हल्के तेल को
लगभग
a g ऊपर धकेल दे ता है। दूसरे शब्द म, चार ओर के जल ारा तेल पर लगने वाला उत्प्लावन बल तेल के अपने भार से
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अ धक है, इस लए तेल ऊपर उठकर बैठ जाता है। पृथक्कारी क प इसी घनत्व-अंतर का उपयोग करती है:
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स्टॉपकॉक खो लए और नचला द्रव पहले नकल जाता है।
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संकेत: दोन द्रव के मलन-स्थल वाला छोटा-सा मध्य भाग अलग करके छोड़ द जए। उसे मला लेने पर दोन दू षत
m
हो जाएँगे, और एक मलीलीटर खोना शुद्धता खोने से कह कम हा नकारक है।
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m य द… — पृष्ठ 83 a g
क्याseहोगा
la दो अ मश्रणीय द्रव का पृथक्करण
ag5.4.1
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क्या होगा य द…
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प्र.1 समान घनत्व के दो अ मश्रणीय द्रव को पृथक्करण क प म मलाया जाए तो उसम परत कैसे बनगी?
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m a s em रहेगी।
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वे एक के ऊपर एक स्पष्ट परत बनाएँगे ही नह , और पृथक्कारी क प उन्ह पृथक करने म असफल
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asem
a g l ऐसा क्य होता है: पृथक्कारी क प केवल इस लए काय करती है क गुरुत्व अ धक घनत्व वाले द्रव पर प्रबलता से
.c
लगकर हल्के द्रव को ऊपर धकेल दे ता है। य द दोन घनत्व समान ह तो कसी भी द्रव पर कोई नेट ऊपरी या नचला
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धक्का नह रहता — कसी के पास तैरने अथवा डू बने का कोई कारण नह बचता। एक द्रव क बूँद दूसरे म बखरी
m . co
रह जाती ह, अतः मश्रण बहुत समय तक धुँधला बना रहता है और य द अंततः बैठ भी जाए तो सीमा धुँधली रहती है
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और उसका स्थान अ न त। द्रव तब भी मलते नह (वे अ मश्रणीय ही रहते ह और अलग बूँद बनाते ह), परंतु वे
परत म सजते नह । a g
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इसके ान पर क्या कया जा सकता है:
अपकद्रण — न लका को घुमाने पर गुरुत्व से कई गुना प्रबल बल उत्पन्न होता है, और तब घनत्व का बहुत थोड़ा अंतर भी एक
द्रव को बाहर क ओर धकेलने के लए पयाप्त होता है।
कसी एक का घनत्व बदल द जए — उदाहरणाथ जलीय परत म कोई लवण घोलकर उसे अ धक घना बना द जए, जससे
दोन सामान्य रूप से पृथक हो जाएँ।
आसवन, य द दोन द्रव के क्वथनांक म पयाप्त अंतर हो, क्य क यह व ध घनत्व पर नभर ही नह करती।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 83
5.4.1 दो अ मश्रणीय द्रव का पृथक्करण
प्र.1 क्या आप ऐसे कसी वषमांगी मश्रण के वषय म सोच सकते ह जसका एक घटक गैस हो?
हाँ। गैस आपस म स्वतंत्र रूप से मल जाती ह, अतः गैस का मश्रण प्रायः समांगी होता है — परंतु य द दूसरा घटक गैस म फैला
हुआ कोई ठोस अथवा द्रव हो तो मश्रण वषमांगी होता है।
मश्रण गैस म क्या प र क्षप्त है प्रकार
धआ
ु ँ वायु म काबन तथा राख के सूक्ष्म ठोस कण िवषमांग ी
कोहरा, ध ंध
ु , बादल वायु म जल क सूक्ष्म बूँद िवषमांग ी
वायु में धूल वायु म ठोस धूल-कण िवषमांग ी
वायु सुग ंध क का स्पे, एरोसॉल वायु म द्रव क बूँद िवषमांग ी
हाइडोजन और ऑक्सीजन (रॉके ट ईंध न) गैस म गैस समांग ी
गैस के अ धकांश मश्रण समांगी क्य होते ह: गैस के कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते ह और सभी दशाओं म
तीव्र ग त से स्वतंत्र रूप से चलते ह, अतः वे क्षण भर म पूरे पात्र म समान रूप से फैल जाते ह और कोई भाग दूसरे से
भन्न नह रहता। परंतु वायु म तैरता कोई ठोस अथवा द्रव कण एक अलग प्रावस्था है जसक स्पष्ट सीमा है — आप
बता सकते ह क धुआँ कहाँ है और कहाँ नह — इस लए ऐसे मश्रण वषमांगी होते ह।
क्रयाकलाप 5.7 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 84
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5.4.2 ऊध्वपातन
क्रयाकलाप
प्र.1 क प क भीतरी द वार को ध्यान से दे खए। क्या कोई ठोस नक्षेप (deposit) दखाई दे ता है?
हाँ — उल्ट रखी क प क ठं डी भीतरी द वार पर ेत ठोस कपूर क परत जम जाती है, जब क रेत चीनी म क प्याली म ही रह
जाती है।
कपूर (ठोस) —तापन→ कपूर की वाष्प —कीप की दीवार पर शीतलन→ कपूर (ठोस)
ठोस → वाष्प सीधे = ऊध्वपातन
वाष्प → ठोस सीधे = िन ेपण
ऐसा क्य होता है: धीरे गम करने पर (गलनांक से नीचे रखते हुए) कपूर द्रव अवस्था म गए बना सीधे ठोस से वाष्प
अवस्था म चला जाता है — उसके कण को ठोस के पृष्ठ से सीधे मुक्त होने जतनी ऊजा मल जाती है। वाष्प ऊपर
उठकर क प क द वार से मलती है, जो कक्ष क वायु के संपक म होने के कारण कह ठं डी है। वहाँ वाष्प ऊजा
खोकर सीधे ठोस अवस्था म लौट आती है। रेत इन तापमान पर ऊध्वपा तत नह होती, इस लए वह प्याली म शेष रह
जाती है। मश्रण इस लए पृथक हो जाता है क्य क एक घटक ऊध्वपा तत होता है और दूसरा नह ।
संकेत: क प क न लका म लगा रूई का फाहा केवल सजावट नह है — वह कपूर क वाष्प को बाहर नकलने से
रोकता है जससे वह सारी क प के भीतर ही संघ नत हो जाए। नैफ्थलीन, अमो नयम क्लोराइड और शुष्क बफ (ठोस
काबन डाइऑक्साइड) भी ऊध्वपा तत होते ह और इसी प्रकार प्रयोग म लाए जा सकते ह।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 84
5.4.2 ऊध्वपातन
सो चए और बताइए
प्र.7 अ मश्रणीय द्रव पृथक्कारी क प म दो पृथक परत क्य बनाते ह?
क्य क वे एक-दूसरे म घुलते नह और उनके घनत्व भन्न होते ह।
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अिधक घनत्व वाला द व → नीचे बैठता है → िनचली परत
कम घनत्व वाला द व → तै रता है → ऊपरी परत
उदाहरण: जल (1.00 g cm⁻³) नीचे , सरसों का ते ल (≈ 0.91 g cm⁻³) ऊपर
ऐसा क्य होता है — दो अलग-अलग कारण साथ-साथ काम करते ह:
1. वे अलग रहते ह। जल के अणु परस्पर प्रबलता से आक षत होते ह। तेल के अणु उस आकषण म स म्म लत नह
हो पाते, अतः वे जल के अणुओं के बीच फैलने के बजाय अपनी ही जा त के साथ एक त्रत हो जाते ह। इस लए दोन
द्रव दो पृथक प्रावस्थाओं के रूप म सीमा बनाकर रहते ह।
2. गुरुत्व उन्ह क्रम म सजाता है। एक बार अलग हो जाने पर गुरुत्व उन्ह घनत्व के अनुसार छाँट दे ता है। समान
आयतन के लए अ धक घनत्व वाला द्रव भारी होता है, अतः वह नीचे बैठता है और हल्के को ऊपर धकेल दे ता है;
यही व्यवस्था स्थायी होती है। इसी लए परत सदै व एक ही क्रम म बनती ह और वैसी ही बनी रहती ह।
संकेत: पृथक्कारी क प का संपूण आधार यही है। स्टॉपकॉक खो लए तो नचली परत पहले नकलती है; सीमा के
नल तक पहुँचते ही उसे बंद कर द जए, थोड़ा-सा मला हुआ भाग अलग करके छोड़ द जए, और फर ऊपरी परत
को अलग एक त्रत कर ली जए।
प्र.8 क्या ऊध्वपातन, वाष्पीकरण से भन्न है? पु ष्ट क जए।
हाँ, ये भन्न ह। ऊध्वपातन ठोस → वाष्प सीधा प रवतन है; वाष्पीकरण द्रव → वाष्प का पृष्ठीय प रवतन है। मुख्य अंतर यह है क
आरं भक अवस्था क्या है और कह द्रव अवस्था आती भी है या नह ।
तुलना का बदु ऊध्वपातन वाष्पीकरण
अवस्था पिरवतन ठोस → वाष्प, बना द्रव अवस्था के द्रव → वाष्प
आरंिभक पदाथ एक ठोस एक द्रव
कहाँ होता है ठोस के पृष्ठ पर द्रव के पृष्ठ पर
कौन-से पदाथ केवल कुछ — कपूर, नैफ्थलीन, अमो नयम क्लोराइड, प्रत्येक द्रव, प्रत्येक तापमान पर
शुष्क बफ
िवपरीत पिक्रया नक्षेपण (वाष्प → ठोस) संघनन (वाष्प → द्रव)
ृ क करने
िकसे पथ ऊध् वपाितत होने वाले ठोस को न होने वाले से (रे त से कपूर) अवाष्पशील िवले य को िवलायक से (नमक के िवलयन से
में नमक)
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
केवल कुछ ही ठोस ऊध्वपा तत क्य होते ह: अ धकांश ठोस म कण इतनी प्रबलता से बँधे होते ह क वाष्प बनने
से पहले उन्ह द्रव के रूप म ढ ला पड़ना ही पड़ता है। कपूर और नैफ्थलीन म कण के बीच का बल इतना दुबल है क
सामान्य दाब पर पृष्ठ का कोई कण सीधे वाष्प अवस्था म टू टकर नकल सकता है — इस लए ठोस कभी द्रव अवस्था
से गुजरता ही नह ।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 84
5.4.2 ऊध्वपातन
प्र.1 क्या आप ऐसे अन्य मश्रण के वषय म सोच सकते ह जनम घटक को पृथक करने के लए ऊध्वपातन प्रक्रम
का उपयोग कया जा सकता है?
हाँ — ऐसा प्रत्येक मश्रण जसम ठ क एक घटक धीरे गम करने पर ऊध्वपा तत होता हो।
मश्रण ऊध्वपा तत होने वाला घटक पीछे शेष रहने वाला घटक
नैफ्थलीन और रे त नैफ्थलीन रेत
अमोिनयम क्लोराइड और साधारण नमक अमोिनयम क्लोराइड साधारण नमक
कपूर और साधारण नमक कपूर साधारण नमक
आयोडीन और रे त आयोडीन रेत
शुष्क बफ के साथ िमला कोई सामान्य ठोस ठोस काबन डाइऑ क्साइड दूसरा ठोस
व ध के काय करने क शत: ऊध्वपातन ठोस-ठोस मश्रण को तभी पृथक करता है जब एक घटक अपने गलनांक
से नीचे ही सीधे वाष्प बन जाए और दूसरा उस तापमान पर अप रव तत रहे। य द दोन ऊध्वपा तत ह , अथवा कोई
भी न हो, तो यह व ध व्यथ है और कसी अन्य अंतर — वलेयता, चुंबकत्व अथवा घनत्व — का उपयोग करना
पड़ेगा।
प्र.2 क्या एक धातु को कसी दूसरी धातु म वलेय करना संभव है?
सामान्य ताप पर नह — परंतु य द धातुओं को पहले पघला लया जाए तो हाँ। ऐसे पघले मश्रण के जमने पर बना समांगी ठोस
मश्रधातु कहलाता है।
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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
मश्रधातु लगभग संघटन क्य बनाई जाती है
m l a se
.co जल्द संक्षaा g
पीतल लगभग 80 % कॉपर और 20 % जक कॉपर से कठोर, आसानी से ढलने वाली,
se m रत न होने वाली
g l a
aकाँसा लगभग 80 % ताँबा और 20 % टन प्रबल और टकाऊ; मू तय और घंट म
प्रयुक्त
m
क्रोिमयम .16co– 18 %, िनकैल
m ag
%e
स्टेनले स आयरन के साथ काबन 0.03 – 0.8 %, पबल और जंग -रोधी; बतनों और उपकरणों में
10.0 – 14.0 %, मोिल ब्डेनम 2.0 – 3.0 s
a
agl
स्टील पयुक्त
पघलाना क्य आवश्यक है: ठोस धातु म परमाणु एक न त जालक म जड़े रहते ह और एक-दूसरे के पास से
co m
se
खसक नह सकते, अतः एक धातु दूसरी म फैल ही नह पाती। पघलाने से परमाणु ग तशील हो जाते ह और दोन
m.
o m l a
g मलावट परमाणु-स्तर क
.cमश्रधातु एक समांगी मश्रण है और एकल धातु जैसी प्रतीत होती है। चूँ कaयह
प्रकार के परमाणु परमाणु-स्तर तक मल जाते ह। ठं डा होने पर मश्रण उसी मली हुई अवस्था म जम जाता है,
m
aहैs, eकेवल भौ तक नह , इस लए कसी भी भौ तक व ध से मश्रधातु को उसक धातुओं म पुनः पृथक नह
इस लए
agl कया जा सकता।
m a s
m .co agl
l a se
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 85 a g
m
5.4.3 नलंबन
. co
em
m l as
.co g
हम जल से पंक (क चड़) को कस प्रकार पृथक कर सकते ह?
a
प्र.1
a s em
a gl उत्तर
m
m भारी पंक-कण तली पर बैठ जाते ह; ऊपर का अपेक्षाकृत स्वच्छ जल glase
सबसे सरल व ध से आरंभ क जए और तभी आगे ब ढ़ए जब जल फर भी स्वच्छ न हो।
1. अवसादन और नस्तारण। पं कल जल को स्थरcरoखए।
तलछट को हलाए बना सावधानी से उँ डेल eलीmजए।
. a
g l asसूती कपड़े से छा नए। छद्र से बड़े कण अवशेष के रूप म रुक जाते ह।
a
2. नस्यंदन। इसे नस्यंदक पत्र अथवा स्वच्छ
3. स्कंदन, फर नस्यंदन। फटकरी का चूण मलाइए। यह सूक्ष्म कण को गुच्छ म बाँध दे ती है जो गुरुत्व से नीचे बैठ जाते ह और
फर नस्तारण अथवा नस्यंदन से हटाए जा सकते ह।
. c om
s e m क तली तक पहुँचा देता है।
com gla
4. अपकद्रण। प्र तदश को तीव्र ग त से घुमाइए; अपकद्र य बल अत्यंत सूक्ष्म कण को भी न लका
. a
a sem एक व ध प्रायः पयाप्त क्य नह होती: पं कल जल म कण के आकार क सीमा बहुत वस्तृत होती है। बड़े कण
agl मनट म बैठ जाते ह और नस्यंदक पत्र म रुक जाते ह। सबसे महीन मृ त्तका-कण इतने हल्के होते ह क आण वक
c
m .
टक्कर उन्ह नलं बत रखती ह, और वे इतने छोटे होते ह क कागज के छद्र से सीधे नकल जाते ह — इसी लए
a s e
. c om
छानने के बाद भी जल प्रायः धुँधला रहता है। ऐसे कण को पहले बड़ा बनाना पड़ता है (स्कंदन) अथवा गुरुत्व से
agl
s e mहै (अपकद्रण)।
a
प्रबल कसी बल से नीचे धकेलना पड़ता
agl
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 73
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प्र.2 य द कुछ समय रखने के प ात भी पं कल जल साफ न हो तो इसे कस प्रकार साफ कया जाए?
अपकद्रण और/अथवा स्कंदन ारा — अध्याय ने ठ क इसी स्थ त के लए ये दोन तकनीक द ह।
स्कंदन। थोड़ा-सा फटकरी का चूण मलाइए, जो जल-शु द्धकरण म प्रयुक्त एक श्वेत क्रस्टलीय पदाथ है। फटकरी सूक्ष्म नलं बत
कण को आपस म चपकाकर गुच्छे बना दे ती है। ये बड़े और भारी गुच्छे गुरुत्व से शीघ्र नीचे बैठ जाते ह — इसी प्र क्रया को
अवसादन कहते ह — और ऊपर का स्वच्छ जल नस्तारण अथवा नस्यंदन ारा अलग कया जा सकता है।
अपकद्रण। धुँधले जल को न लका म लेकर तीव्र ग त से घुमाइए। न लकाएँ बाहर क ओर क्षै तज हो जाती ह और प्रत्येक कण पर
बाहर क ओर लगने वाला अपकद्र य बल उसके भार से कई गुना अ धक होता है, अतः अत्यंत सूक्ष्म कण भी न लका क तली म
पहुँच जाते ह और ऊपर स्वच्छ द्रव रह जाता है।
जहाँ नस्यंदन असफल है वहाँ ये क्य सफल ह: नस्यंदन एक छलनी है और वह केवल अपने छद्र से बड़े कण
ही हटा सकती है। स्कंदन समस्या को दूसरी ओर से पकड़ता है — छलनी को महीन करने के बजाय वह कण को
बड़ा बना दे ता है जब तक वे स्वयं बैठ न जाएँ। अपकद्रण कण नह , बल बदल दे ता है: वह गुरुत्व के स्थान पर कह
प्रबल बाहरी बल लगा दे ता है, जससे दन म बैठने वाले कण मनट म बैठ जाते ह।
क्या आप जानते ह? वा हत मल उपचार संयंत्र म यही क्रम अपनाया जाता है — अवसादन, फर स्कंदन, फर
नस्यंदन — और उसके बाद ही उपचा रत जल छोड़ा जाता है अथवा शौचालय तथा पौध के लए पुनः उपयोग म
लाया जाता है।
ज ासा-सूत्र — पृष्ठ 85
5.4.3 क. अपकद्रण
ज ासा-सू त्र
प्र.1 चक्रण वाला यह खेल एक लोक नृत्य है जसे मराठ म ‘फुगड़ी’ और पंजाबी म ‘क कली’ कहते ह। आपक
ानीय भाषा म इसे क्या कहा जाता है?
दो व्य क्तय का यही चक्रण-खेल पूरे भारत म खेला जाता है और प्रत्येक भाषा म इसका अलग नाम है।
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भाषा / क्षेत्र खेल अथवा नृत्य का नाम
मराठी (महारा ) फु गड़ी
पंजाबी (पंजाब) कीकली
कोंक णी (गोवा) फु गड़ी
गज
ु राती (ग ज
ु रात) घे र ो / फु गड़ी
नमूना उत्तर: “हमारी भाषा म इसे ______ कहते ह। हम अपनी भुजाओं को क्रॉस करके एक-दूसरे के हाथ पकड़कर घूमते ह, और
जतनी तेजी से घूमते ह उतना ही अ धक बाहर क ओर खचाव अनुभव होता है।” अपने दादा-दाद से पू छए — उन्ह इसका कोई
स्थानीय नाम अवश्य ात होगा।
खेल म छपा व ान: घूमते समय आपका शरीर सीधी रेखा म चलने का प्रयास करता रहता है, परंतु साथी क
पकड़ आपको वृत्त म ख चती रहती है। आपको ऐसा लगता है मानो कोई आपको बाहर क ओर फक रहा हो। वृत्तीय
ग त म कसी वस्तु पर बाहर क ओर लगने वाला यही प्रभाव अपकद्र य बल कहलाता है, और अपक द्रत्र ठ क इसी
बल से घूमती न लका म मश्रण के भारी कण को तली तक पहुँचाता है।
व ान एवं समाज — पृष्ठ 86
पेपरफ्यूज
व ान एवं समाज
प्र.1 ऐसे सरल तकनीक आ वष्कार के वषय म और जानकारी प्राप्त कर जो सुदूर क्षेत्र म च कत्सा सेवाओं को
अ धक सुलभ बनाएँ।
पेपरफ्यूज ऐसे मतव्ययी च कत्सा उपकरण के पूरे प रवार का एक सदस्य है: ये रोजमरा क वस्तुओं से बनते ह, इन्ह वद्युत क
आवश्यकता नह होती, लागत बहुत कम होती है, और इन्ह ऐसे गाँव तक ले जाया जा सकता है जहाँ न प्रयोगशाला हो, न वश्वसनीय
बजली।
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उपकरण यह कैसे काय करता है यह क्या संभव बनाता है
पेपरफ्यूज बटन-चरखी क भाँ त ऐंठे हुए धाग पर लगी गत्ते क चकती; िवद्य तु के िबना मले िरया और ऐनीिमया की जाँच
तीव्र चक्रण से रक्त का अपकद्रण
फोल्डस्कोप कागज क शीट को मोड़कर बनाया गया सूक्ष्मदश जसम ेत्र में ही सूक्ष्म जीव और र क्त किणकाएँ दे खना,
एक नन्हा काँच का लस लगा होता है वह भी बहत
ु कम लागत पर
कागज-प ी जाँच रक्त अथवा मूत्र क एक बूँद के शका क्रया से उपचा रत क्र
गभ वस्था, मले िरया, मध मु ेह और सं मण की
कागज पर चलकर रंग बदल दे ती है तत्काल जाँच
सौर-ऊज चािलत छोटे सौर पैनल से ठं डा रखा जाने वाला ऊष्मारोधी बक्सा िबजली रिहत गाँवों तक टीके ठं डे पहच
ु ँ ाना
टीका-वाहक
जयपुर फु ट स्थानीय सामग्री से हाथ से बनाया गया रबर और लकड़ी का पैर गँवा चुके व्यिक्तयों के िलए सुल भ गितशीलता
कृ त्रम पैर
पेपरफ्यूज क्य काय करता है: प्रयोगशाला का अपक द्रत्र केवल एक ही काम करता है — न लका को इतनी तेज
घुमाना क रक्त के प्रत्येक घटक पर बाहर क ओर लगने वाला बल उसके भार से कह अ धक हो जाए, जससे भारी
लाल क णकाएँ बाहर क ओर चली जाएँ और हल्का प्लाज्मा अक्ष के पास रह जाए। इस वचार म मोटर कह
आवश्यक नह है। ऐंठे हुए धाग से घुमाई गई चकती कई हजार चक्कर प्र त मनट तक पहुँच सकती है, जो कुछ ही
मनट म वही पृथक्करण कर दे ती है। भौ तक वही है; केवल लागत हटा द गई है।
यह क जए: क्रयाकलाप 5.8 का बटन-और-धागे वाला चक्र बनाइए और दे खए क केवल धाग को ख चकर और
ढ ला करके कसी चकती को कतनी तीव्र ग त तक पहुँचाया जा सकता है।
क्रयाकलाप 5.8 — आइए, एक प्र तरूप बनाएँ — पृष्ठ 86
5.4.3 क. अपकद्रण
क्रयाकलाप
प्र.1 गत्ते क एक चकती और मोटे धागे क सहायता से आप स्वयं का अपक द्रत्र (centrifuge) बनाइए। आप दे ख
पाएँगे क कस प्रकार भारी कण बाहर क ओर ग त करते ह। पृथक्करण के व ान को समझने क यह एक
रोचक एवं स्वयं करके दे खने क व ध है। आप इस लघु अपक द्रत्र के उपयोग से कस मश्रण को पृथक करना
चाहगे?
पं कल जल इसके लए सबसे उपयुक्त मश्रण है, क्य क प रणाम अपनी आँख से दखता है और इसके लए कक्षा म उपलब्ध
वस्तुओं के अ त रक्त कुछ नह चा हए।
इसे कैसे क जए
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
1. गत्ते क कड़ी चकती के कद्र के पास दो छद्र म मोटा धागा परोकर उसके सरे बाँधकर फंदा बना ली जए, जैसा चत्र 5.20 के
पेपरफ्यूज म है।
2. पं कल जल भरी एक छोट , कसकर बंद प्ला स्टक न लका को चकती के कनारे के पास चपटा करके टे प से चपका द जए।
संतुलन बनाए रखने के लए ठ क उसके वपरीत ओर एक और वैसी ही न लका चपकाइए।
3. फंदे को दोन सर से पक ड़ए, चकती को घुमाकर धाग म ऐंठन द जए, फर धाग को बार-बार ख चए और ढ ला छो ड़ए।
चकती एक बार एक दशा म और फर दूसरी दशा म तीव्र ग त से घूमती है।
4. दो-तीन मनट घुमाने के बाद रोककर न लका को सीधा खड़ा करके दे खए।
आप क्या दे खगे: न लका के उस सरे पर — जो बाहर क ओर था — पंक क दबी हुई परत, और उसके ऊपर कह अ धक स्वच्छ
जल। वही न लका मेज पर रखी रहती तो इतनी स्वच्छ होने म बहुत अ धक समय लगता।
ऐसा क्य होता है: वृत्त म घूमता कण न लका क द वार ारा नरंतर कद्र क ओर ख चा जाता रहता है। घूमती
न लका के भीतर के मश्रण क दृ ष्ट से यह एक प्रबल बाहरी धक्के जैसा लगता है — अपकद्र य बल। इसका मान
कण के द्रव्यमान के साथ और चक्रण-चाल के वग के साथ बढ़ता है, अतः कुछ हजार चक्कर प्र त मनट पर यह कण
के भार से सैकड़ गुना अ धक हो जाता है। इस लए पंक के भारी कण बाहरी सरे तक उतनी तेजी से पहुँच जाते ह
जतना अकेला गुरुत्व कभी नह कर पाता, जब क हल्का जल अक्ष के पास रह जाता है।
अन्य मश्रण जन्ह आजमाया जा सकता है: जल म चॉक का चूण, दही का गाढ़े दही और म े म अलग होना,
अथवा बना छने फल के रस का गूदा। सुरक्षा सव प र: न लकाएँ भली-भाँ त बंद और मजबूती से चपक होनी
चा हए, चकती संतु लत होनी चा हए, और घुमाते समय सब लोग दूर खड़े रह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 86
5.4.3 ख. स्कंदन; 5.4.4 कोलॉइड
प्र.1 क्या आप दै नक जीवन म प्रयुक्त स्कंदन प्र क्रयाओं के अन्य उदाहरण पर वचार कर सकते ह?
हाँ — स्कंदन रसोई म, जलकल म और स्वयं आपके शरीर म भी काय करता है।
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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
दै नक प्र क्रया प्रयुक्त स्कंदक क्या गुच्छे बनाता है
m as e
.co
दुग्ध से पनीर अथवा छे ना बनाना न बू का रस अथवा सरका (अम्ल)
a g l ृ क हो जाते है ं
दुग्ध के पोटीन ग च्ु छे बनाकर म े से पथ
se m
g l a जामन के जीवाणुओं ारा बना लै क्टक दुग्ध के पोटीन म ृद ु ठोस जाल बना ले ते है ं
a
दुग्ध से दही जमाना
अम्ल
m
.co ag
जलकल में पेयजल का फटकरी महीन म ृि का और गाद के कण बैठने योग्य ग च्ु छे बनाते है ं
sem
शुिद्धकरण
a
वािहत मल उपचार
agl
फटकरी अथवा अन्य स्कंदक िनलंिबत ठोस िनस्यंद न से पहले ही बैठ जाते है ं
कटने पर रक्त का जमना शरीर के अपने स्कंदन-प्रोट न
co m
र क्त किणकाएँ रे शों के जाल में फँ सकर घाव बंद कर दे ती
e m.
है ं
m l as
m .co
पकाते समय अंडे का जमना ऊष्मा
a g
अंडे के पोटीन ग च्ु छे बनकर ठोस सफे दी बना दे ते है ं
l a se
a g स्कंदक क आवश्यकता क्य : पं कल जल के सूक्ष्म कण सब एक ही प्रकार का वद्युत आवेश धारण करते ह, अतः
m a s
agl
वे परस्पर प्र तक षत होकर अलग-अलग और नलं बत बने रहते ह। स्कंदक इस आवेश को उदासीन कर दे ता है।
m .co
प्र तकषण समाप्त होते ही टकराने वाले कण उछलकर अलग होने के बजाय चपक जाते ह और इतने बड़े गुच्छे बना
l a se
g
लेते ह क गुरुत्व उन्ह नीचे ख च सके। दुग्ध म यही काम अम्ल करता है: न बू का रस प्रोट न कण का पृष्ठ बदल दे ता
a
है जससे वे प्र तकषण छोड़कर पनीर के रूप म जम जाते ह।
co m
m .
m as e
.co a
य द रक्त के घटक को अपकद्रण (centrifugation) ारा पृथक कया जाए और रक्त का स्कंदन हो तो क्या
g l
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प्र.2
a s
यह नलंबन है? यद्य प हम रक्त को शकाओं को नग्न आँख से नह दे ख सकते। क्या यह एक वलयन है?
l
ag उत्तर
se m
com g l a
. a
न यह है, न वह। रक्त एक कोलॉइड है — वह ठ क इन दोन के बीच आता है।
e m
as
agl
प्रमाण यह क्या संकेत दे ता वास्तव म इसका अथ
है
ृ क होता है; स्कं िदत होता है नलंबन जैसा लगता है
. c om
इसके कण इतने बड़े ह क प्रबल बल उन्ह बाहर
धकेल सके m
अपकें द ण पर पथ
a se
. com l
agे कण आँख क वभेदन-क्षमता से कह छोटे ह
m
ase िदखता है
किणकाएँ नग्न आँखों से नही ं िदखती ं; रक्त एकसमान वलयन जैसा लगता है इसक
agl c
m .
s e
िस्थर रखने पर बैठता नही ं नलंबन नह है आण वक टक्कर कण को प र क्षप्त बनाए रखती ह
comबीच की िस्थित a
e m . agl
as
िनष्कष कणों का आकार 1 – 1000 nm → कोलॉइड
a g l
co m
m .
m as e
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दोन संकेत परस्पर वरोधी क्य नह ह: प्रश्न का उत्तर कण का आकार दे ता है। रक्त क णकाएँ नमक के वलयन
के आयन (< 1 nm) से कह बड़ी ह, अतः रक्त वास्त वक वलयन नह ; परंतु वे नलंबन के कण (> 1000 nm)
से छोट ह, अतः अकेला गुरुत्व उन्ह नीचे नह ख च सकता और वे स्थर रखने पर बैठती नह । अपक द्रत्र के कह
प्रबल बल के आगे वे अवश्य झुक जाती ह — और इसी लए रक्त बक दान कए गए रक्त को अपकद्रण ारा
प्लाज्मा, प्लेटलेट, श्वेत तथा लाल क णकाओं म बाँट लेते ह।
संकेत: दुग्ध, आइसक्र म और टमाटर साॅस ठ क इसी कारण कोलॉइड ह — आँख को एकसमान, फर भी कण इतने
बड़े क प्रकाश प्रक णत करके टडल प्रभाव दखा सक।
व ान एवं समाज — पृष्ठ 87
रक्तदान कर
व ान एवं समाज
प्र.1 क्या आप अपना रक्त समूह जानते ह? पता लगाइए!
आपका रक्त समूह इस बात से तय होता है क आपक लाल रक्त क णकाओं के पृष्ठ पर कौन-से चह्नक प्रोट न ह। सामान्य ABO
तथा Rh पद्ध त म आठ समूह होते ह: A+, A−, B+, B−, AB+, AB−, O+ तथा O−।
कैसे पता लगाएँ: रक्त समूह क जाँच के लए एक-दो बूँद रक्त ही पयाप्त है। यह लगभग प्रत्येक रक्तदान श वर म न:शुल्क होती
है, और कसी भी च कत्सालय अथवा वकृ त- व ान प्रयोगशाला म करवाई जा सकती है। कुछ वद्यालय क स्वास्थ्य जाँच म भी
यह अ भले खत क जाती है। इसे लखकर अपनी वद्यालय-डायरी म र खए — आपात स्थ त म यह बहुमूल्य समय बचाता है।
यह क्य महत्वपूण है और इस अध्याय से इसका क्या संबंध है: य द कसी रोगी को गलत समूह का रक्त दे दया
जाए तो शरीर आने वाली क णकाओं को बाहरी मानकर उन्ह आपस म चपका दे ता है और रक्त वा हकाएँ अवरुद्ध
हो जाती ह। इसी लए दान कए गए प्रत्येक यू नट क जाँच करके उपयोग से पहले उसका समूह पहचाना जाता है।
फर उसे अपकद्रण ारा पृथक करके प्लाज्मा, प्लेटलेट, श्वेत तथा लाल क णकाओं म बाँटा जाता है ( चत्र 5.22)
— वही तकनीक जो आपने पं कल जल के लए पढ़ — क्य क तब एक ही दान से कई रो गय का उपचार हो
सकता है, प्रत्येक को केवल वही घटक दे कर जसक उसे आवश्यकता है। इन घटक को रक्त बक म सुर क्षत रखा
जाता है और आवश्यकता पड़ने पर आपू त क जाती है।
क्या आप जानते ह? शरीर कुछ ही सप्ताह म दान कए गए रक्त क पू त स्वयं कर लेता है, इसी लए कसी स्वस्थ
वयस्क के लए नय मत रक्तदान सुर क्षत है। अध्याय 3, क्रयाशील ऊतक म आपने पढ़ा था क रक्त पोषक तत्व ,
गैस तथा हाम न का प रवहन करके शरीर के व भन्न भाग को जोड़ता है — रक्तदान वस्तुतः यही सेवा कसी दूसरे
तक पहुँचा दे ता है।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 87
5.4.4 कोलॉइड
प्र.1 आइए, यह समझने का प्रयास करते ह क कोलॉइड क्या होते ह? ये वलयन और नलंबन से कस प्रकार भन्न
होते ह?
कोलॉइड वह मश्रण है जसम एक पदाथ के 1 nm से 1000 nm आकार के कण दूसरे पदाथ म न घुलते हुए और न बैठते हुए
समान रूप से प र क्षप्त रहते ह।
गुणधम वलयन कोलॉइड नलंबन
पकृ ित समांगी वषमांगी ( दखने म समांगी) वषमांगी
कणों का आकार 1 nm से कम 1 – 1000 nm 1000 nm से अ धक
कण िदखाई दे ते है?ं नह नह हाँ, नग्न आँख से
ृ क?
िनस्यंद न से पथ नह नह हाँ
िस्थर रखने पर बैठते है?ं नह नह हाँ
िटंडल पभाव नही ं दश ता दश ता है दश ता है
कोलॉइड के घटक के अपने नाम ह: वलेय जैसे प र क्षप्त कण प र क्षप्त प्राव ा बनाते ह और जस पदाथ म वे फैले रहते ह वह
प रक्षेपण माध्यम कहलाता है।
कोलॉइड ही रोचक मध्यवत त क्य है: उसके कण इतने छोटे ह क अ नय मत आण वक टक्कर उन्ह स्थायी
रूप से नलं बत रखती ह, अतः वलयन क भाँ त वह कभी बैठता नह और नस्यंदक पत्र से नकल जाता है। परंतु
वे इतने बड़े भी ह क प्रकाश प्रक णत कर सक, अतः वलयन के वपरीत वह टडल प्रभाव दशाता है और वास्तव म
दो-प्रावस्था वाला वषमांगी मश्रण है। ता लका क प्रत्येक पं क्त क व्याख्या केवल आकार से हो जाती है।
प्र.2 क्या आप अन्य कन्ह ऐसे पदाथ के वषय म सोच सकते ह जो कोलॉइड हो सकते ह?
कोलॉइड दै नक जीवन म सवत्र ह — रसोई म, स्नानघर क ताक पर, आकाश म और स्वयं आपके शरीर म।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
कोलॉइड प र क्षप्त प्राव ा प रक्षेपण माध्यम
दुग्ध वसा क द्रव बूँद जल (जल म तेल पायस)
मक्खन जल क बूँद वसा (तेल म जल पायस)
रक्त रक्त क णकाएँ तथा प्रोट न प्लाज्मा
आइसक्रीम, टमाटर साॅस वसा तथा ठोस कण जल
बादल, कोहरा, ध ंध
ु जल क बूँद वायु
धआ
ु ँ काबन के ठोस कण वायु
कोल्ड क्रीम, बॉडी लोशन, वैिनिशंग क्रीम जल अथवा तेल की बूदँ े ं तेल अथवा जल
यह क जए: साबुन के वलयन क कुछ बूँद वाले जल म खाद्य तेल क कुछ बूँद डालकर भली-भाँ त हलाइए। ऐसा
दु ग्धल मश्रण मलेगा जो लंबे समय तक पृथक नह होता — यही पायस है। साबुन यहाँ पायसी कारक का काय
करके तेल क बूँद को अलग-अलग रखता है। दुग्ध और मक्खन म यही काम प्रोट न करते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 88
5.5 टडल प्रभाव
प्र.1 क्या आपने कभी अपने आस-पास कण ारा प्रकाश का प्रक णन दे खा है? कुछ अन्य उदाहरण सो चए!
हाँ — जहाँ भी कोई प्रकाश करणपुंज नलं बत कण वाली वायु अथवा द्रव से गुजरता है, उसका माग दखाई दे ने लगता है। यही
टडल प्रभाव है।
अंधेरे कक्ष म छोटे छद्र अथवा पद क झरी से आती सूय- करण, जसे वायु क धूल उभार दे ती है।
घने वृक्ष क प त्तय के बीच से छनकर आता सूय का प्रकाश, अथवा प्रात:काल वन म धुंध म से गुजरता प्रकाश।
खेल स्टे डयम क फ्लड लाइट् स के करणपुंज ( चत्र 5.24) तथा सनेमा हॉल म प्रोजेक्टर के प्रकाश का शंकु।
कोहरे वाली रात म वाहन क हेडलाइट, जसका करणपुंज दूर तक दखाई दे ता है क्य क जल क बूँद प्रकाश प्रक णत करती
ह।
जल म मले दुग्ध अथवा तनु साबुन के वलयन के बीकर म से गुजारा गया लेसर अथवा टॉच का प्रकाश।
आकाश का नीलापन और डू बते सूय क ला लमा — वायुमंडल के अणुओं तथा सूक्ष्म कण ारा प्रक णत सूय-प्रकाश।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
करणपुंज दखाई क्य दे ने लगता है: कोई वस्तु तभी दखती है जब उससे आया प्रकाश आपक आँख म प्रवेश
करे। आपक दृ ष्ट-रेखा के आर-पार जाता करणपुंज आपक ओर कुछ नह भेजता — जब तक कोई वस्तु उसका
कुछ भाग पाश्व म न मोड़ दे । नलं बत कण ठ क यही करते ह: प्रत्येक कण करणपुंज का थोड़ा भाग सभी दशाओं म
बखेर दे ता है और उसका जो अंश आपक आँख तक पहुँचता है वही करणपुंज का माग ख च दे ता है। स्वच्छ वायु
और वास्त वक वलयन म प्रकाश प्रक णत करने योग्य कुछ भी बड़ा नह होता, इस लए उनम करणपुंज अदृश्य ही
रहता है।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 88
5.5 टडल प्रभाव
सो चए और बताइए
प्र.9 बादल का नमाण वायु म सूक्ष्म जल-बूँद अथवा वायु म तैरते हम क्रस्टल से होता है। वलयन , नलंबन और
कोलॉइड के वषय म अपनी जानकारी के आधार पर बताइए क बादल कस प्रकार के मश्रण ह और क्य ?
बादल एक कोलॉइड है — एक एरोसॉल, जसम जल क सूक्ष्म बूँद अथवा हम क्रस्टल प र क्षप्त प्रावस्था ह और वायु प रक्षेपण
माध्यम है।
परीक्षण बादल क्या करता है नष्कष
क्या बूदँ े ं वायु में घुल ी है?ं नह — वे द्रव जल क अलग बूँद ही बनी रहती ह वलयन नह
क्या वे नीचे बैठ जाती है?ं नह — बादल घंट अथवा दन तक तैरता रहता है नलंबन नह
क्या यह पकाश पकीिणत करता है? हाँ — इसी लए बादल श्वेत दखते ह और छाया डालते ह टडल प्रभाव दशाता है
क्या अलग-अलग बूदँ े ं िदखती है?ं नही ं — बादल एक िचकने िपंड जैस ा िदखता है कण कोलॉइडी आकार के → कोलॉइड
बूँद नीचे क्य नह गरत : बादल क बूँद केवल कुछ माइक्रोमीटर क होती ह, अतः उनका भार अत्यंत अल्प होता
है जब क उन पर वायु का घषण अपेक्षाकृत बड़ा; ऊपर उठती वायु-धाराएँ उन्ह सरलता से थामे रखती ह। वे वषा के
रूप म तभी गरती ह जब अनेक बूँद मलकर इतनी बड़ी बूँद बना ल क उसका भार ऊध्व धारा पर भारी पड़े। इसी
कारण बादल श्वेत भी दखता है — बूँद सूय-प्रकाश के सभी रंग को लगभग समान रूप से प्रक णत करती ह, और
सभी रंग मलकर श्वेत दखते ह।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
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जन नगर क वायु म अ धक धुआँ और धूल होते ह, वे प्रायः धुँधले क्य दखाई दे ते ह?
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प्र.10
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क्य gकl नगर क वायु म नलं बत धुएँ और धूल के कण सूय-प्रकाश को सभी दशाओं म प्रक णत कर दे ते ह — पूरे नगर के
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पैमाने पर टडल प्रभाव।
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इससे धुंध कैसे बनती है: कसी दूर के भवन से चला प्रकाश सीधी रेखा म आपक आँख तक आता है और उस
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भवन का प्र त बब लाता है। माग म उसे धुएँ और धूल के लाख कण मलते ह और प्रत्येक उस प्रकाश का कुछ भाग
इधर-उधर मोड़ दे ता है। इससे दो बात होती ह। पहली, भवन से आता प्रकाश दुबल पड़ जाता है, अतः भवन धुँधला
दखता है। दूसरी, जो सूय-प्रकाश कभी आपक ओर आ ही नह रहा था वह प्रक णत होकर आपक दृ ष्ट-रेखा म
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आ जाता है और पूरे दृश्य पर एकसमान धूसर-श्वेत आभा फैला दे ता है। प्र त बब का व्य तरेक घट जाता है और सब
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कुछ धुला-धुला तथा अस्पष्ट दखने लगता है — यही धुंध है।
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a gl क्या आप जानते ह? कोलॉइडी आकार के कण — वाहन के धुए,ँ नमाण-काय क धूल और ईंधन के जलने से बने
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— सबसे अ धक हा नकारक ह। वे इतने छोटे होते ह क दन तक वायु म नलं बत रह सकते ह, और इतने छोटे क
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साँस के साथ फेफड़ क गहराई तक पहुँच जाएँ — इसी लए जो धुंध क्ष तज छपाती है वह एक स्वास्थ्य-चेतावनी
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भी है।
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क्रयाकलाप 5.9 — पृष्ठ 88
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5.5 टडल प्रभाव
क्रयाकलाप
प्र.1 ता लका 5.1 को पूण क जए और वलयन , नलंबन एवं कोलॉइड के वषय म आपने जो कुछ भी सीखा है
उसका पुनरावलोकन क जए।
क्रम संख्या गुणधम वलयन नलंबन कोलॉइड
1. प्रकृ त (समांगी/ वषमांगी)
2. कण का आकार
3. दृश्यता
4. नस्यंदन ारा पृथक्करण
5. न:सादन अथवा तलछट
6. टडल प्रभाव
ता लका 5.1, पृष्ठ 88 — व भन्न प्रकार के मश्रण के गुणधम (पुस्तक के अनुसार, रक्त कोष्ठक स हत)।
ता लका 5.1 — व भन्न प्रकार के मश्रण के गुणधम
क्रम गुणधम वलयन नलंबन कोलॉइड
संख्या
1. प्रकृ त (समांगी / समांग ी िवषमांग ी िवषमांग ी, यद्य िप िदखने में समांग ी
वषमांगी)
2. कण का आकार 1 nm से कम 1000 nm से अिधक 1 – 1000 nm
3. दृश्यता कण िदखाई नही ं दे ते; कण नग्न आँखों से िदखाई कण िदखाई नही ं दे ते; िम श्रण
िम श्रण पारदश दे ते है ं एकसमान िदखता है
4. नस्यंदन ारा ृ क नही ं होते
पथ ृ क हो जाते है ं — अवशेष
पथ ृ क नही ं होते
पथ
पृथक्करण छोड़ते है ं
5. न:सादन अथवा नही ं बैठते िस्थर रखने पर बैठ जाते है ं नही ं बैठते
तलछट (अवसादन)
6. टडल प्रभाव नही ं दश ते दश ते है ं दश ते है ं
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
उदाहरण: वलयन — जल म नमक अथवा चीनी, सरका, पीतल; नलंबन — जल म चॉक का चूण, पं कल जल, जल म रेत;
कोलॉइड — दुग्ध, रक्त, धुआँ, आइसक्र म, बादल।
छह पं क्तय के पीछे एक ही वचार है: कण का आकार। 1 nm से नीचे कण इतने छोटे होते ह क न बैठते ह,
न नस्यंदक पत्र म फँसते ह, न प्रकाश प्रक णत करते ह — वलयन क सारी वशेषताएँ इसी से नकल आती ह।
1000 nm से ऊपर वे बैठने योग्य भारी, नस्यंदक पत्र म फँसने योग्य बड़े और आँख को दखने योग्य होते ह। इन
दोन के बीच कोलॉइड दोन सू चय से आधी-आधी वशेषताएँ ले लेता है: छानने और स्थर रखने पर वह वलयन
जैसा व्यवहार करता है, और प्रकाश करणपुंज डालने पर नलंबन जैसा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 89
प्रकृ त तथा दै नक जीवन म पृथक्करण
प्र.1 शकंजी के सभी संघटक को एक बार मलाने के प ात इन्ह पृथक करने क कल्पना क जए। क्या आप ऐसा
कर सकते ह?
पूरी तरह नह — और कसी एक व ध से तो न त ही नह । शकंजी म जल के साथ घुली चीनी, नमक, न बू का रस उसके अम्ल
तथा वणक स हत, और प्रायः गूदे के कण तथा बफ होते ह। आप कुछ घटक वापस पा सकते ह, परंतु सभी को शुद्ध रूप म नह ।
घटक जो व ध काम करेगी कतनी अच्छ तरह
गूद ा और बीज नस्यंदन सरलता से हट जाते है ं — ये िनलंबन है ं
जल आसवन शुद्ध रूप में पाप्त
चीनी और नमक एक साथ वाष्पीकरण अथवा क्रस्टलीकरण पाप्त तो होते है,ं परंत ु आपस में िमले हुए
नी ंबू के रंग ीन वणक कागज वणले खक के वल अत्यल्प मात्र ा में, उपयोग योग्य नही ं
चीनी को नमक से अलग करना क्र
बार-बार पभाजी ि स्टलीकरण अत्यंत किठन — दोनों जल में घुल नशील है ं
मलाना पृथक करने से सरल क्य है: पृथक्करण क प्रत्येक तकनीक कसी न कसी अंतर का उपयोग करती है
— कण के आकार म, वलेयता म, क्वथनांक म, घनत्व म, अथवा कागज पर चलने क ग त म। जस गुणधम पर
कोई व ध टक है, य द दो घटक उसम समान ह तो वह व ध उन्ह अलग नह कर सकती। चीनी और नमक दोन
श्वेत ह, दोन जल म घुलनशील ह और दोन अवाष्पशील ह, अतः छानना, आसवन अथवा वाष्पीकरण दोन के साथ
एक जैसा ही व्यवहार करते ह। मश्रण म जतने अ धक घटक ह गे, उतने ही अ धक अलग-अलग अंतर खोजने पड़गे
और तकनीक क ंखला उतनी ही लंबी होती जाएगी।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? प्रकृ त और उद्योग को यही क ठनाई कह बड़े पैमाने पर झेलनी पड़ती है — महासागर से
प्ला स्टक हटाना, पुरानी मोबाइल बैट रय से ली थयम पुनः प्राप्त करना, अथवा वा हत मल को छोड़ने से पहले
उपचा रत करना। आपके अपने गुद यह काय प्र त क्षण करते ह — रक्त से अप शष्ट पृथक करते हुए उपयोगी पदाथ
भीतर ही रखते ह।
अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 90 – 93
अध्याय के अंत के प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
प्र.1 नम्न ल खत मश्रण म से कौन-से मश्रण सही रूप से समांगी और वषमांगी मश्रण के रूप म वग कृत कए
गए ह? सही वकल्प चु नए। (i) वायु — समांगी, दुग्ध — वषमांगी, चीनी का वलयन — समांगी, धुआँ —
समांगी (ii) पीतल — वषमांगी, कोहरा — वषमांगी, सरका — वषमांगी, पं कल जल — समांगी (iii) कॉपर
सल्फेट का वलयन — समांगी, नमक का वलयन — समांगी, दुग्ध — समांगी, काँसा (Bronze) — समांगी (iv)
पं कल जल — वषमांगी, दुग्ध — वषमांगी, रक्त — वषमांगी, पीतल — समांगी
सही वकल्प है (iv) पं कल जल — वषमांगी, दुग्ध — वषमांगी, रक्त — वषमांगी, पीतल — समांगी।
वकल्प उसम क्या त्रु ट है
(i) ध एु ँ को समांग ी कहा गया है। ध आ
ु ँ वायु में पिरि प्त काबन के ठोस कण है ं — एक िवषमांग ी कोलॉइड।
(ii) तीन त्र िु टयाँ: पीतल एक िम श्रधातु है, अतः समांग ी; िसरका जल में घुल ा ऐसीिटक अम्ल है, अतः समांग ी; पंिकल जल एक िनलंबन है,
अतः िवषमांग ी।
(iii) दुग्ध को समांग ी कहा गया है। दुग्ध एक कोलॉइड है — जल में पिरि प्त वसा की बूदँ े ं — अतः िवषमांग ी है।
(iv) चारों सही है:ं पंिकल जल (िनलंबन) िवषमांग ी, दुग्ध (कोलॉइड) िवषमांग ी, र क्त (कोलॉइड) िवषमांग ी, पीतल (िम श्रधातु) समांग ी।
दुग्ध और रक्त वषमांगी क्य गने जाते ह: ये आँख को एकसमान दखते ह, परंतु वास्तव म दो-प्रावस्था वाले
मश्रण ह — एक पदाथ क बूँद अथवा क णकाएँ दूसरे म प र क्षप्त, और प्रत्येक कण के चार ओर एक वास्त वक
सीमा। केवल वही मश्रण समांगी है जो अलग-अलग कण के स्तर तक एकसमान हो, जैसे नमक का वलयन अथवा
पघलाकर ठं डी क गई मश्रधातु। व्यावहा रक परीक्षण टडल प्रभाव है: दुग्ध और रक्त प्रकाश करणपुंज को
प्रक णत करते ह, चीनी का वलयन नह ।
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प्र.2 सही वकल्प का चयन क जए तथा सही और गलत वकल्प के कारण स्पष्ट क जए। नम्न ल खत म से कौन-
से मश्रण टडल प्रभाव दशाते ह? (क) वायु और धूल के कण का मश्रण (ख) कॉपर सल्फेट और जल का
मश्रण (ग) स्टाच और जल का मश्रण (घ) ऐसीटोन और जल का मश्रण — (i) क और ख (ii) ख और घ (iii)
क और ग (iv) ग और घ
सही वकल्प है (iii) क और ग।
मश्रण प्रकार कण का आकार टडल प्रभाव?
(क) वायु और धूल के कण नलंबन / एरोसॉल > 1000 nm हाँ — दश ता है
(ख) कॉपर सल्फे ट और जल वास्त वक वलयन < 1 nm नही ं
(ग) स्टाच और जल कोलॉइड 1 – 1000 nm हाँ — दश ता है
(घ) ऐसीटोन और जल दो िम श्रणीय द वों का िवलयन < 1 nm नही ं
(क) और (ग) क्य दशाते ह: दोन म कण इतने बड़े ह क प्रकाश करणपुंज का कुछ भाग पाश्व म मोड़ सक, अतः पाश्व से दे खने
पर करणपुंज का माग दखाई दे ने लगता है।
(ख) और (घ) क्य नह दशाते: दोन म पदाथ अलग-अलग आयन अथवा अणुओं के स्तर तक घुले हुए ह, जो प्रकाश क
तरंगदै य (लगभग 400 – 700 nm) से कह छोटे ह। ऐसे कण प्रकाश-तरंग को लगभग अछू ता छोड़ दे ते ह, अतः कुछ प्रक णत
नह होता और करणपुंज बना दखे नकल जाता है। कॉपर सल्फेट का वलयन नीला है, इससे कोई अंतर नह पड़ता — रंग
अवशोषण से आता है, जब क प्रक णन एक बल्कुल अलग प रघटना है।
याद रखने योग्य नयम: कोई मश्रण टडल प्रभाव तभी दशाता है जब उसके प र क्षप्त कण कम-से-कम प्रकाश क
तरंगदै य के लगभग बराबर ह । यह प्रत्येक कोलॉइड और प्रत्येक नलंबन के लए सत्य है और प्रत्येक वास्त वक
वलयन के लए असत्य।
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
अपने व शष्ट गुणधम होते ह। बॉक्स म दए गए शब्द अथवा वाक्यांश का उपयोग करके ताem
प्र.3 कसी मश्रण को वलयन, नलंबन अथवा कोलॉइड के रूप म वग कृत कया जा सकता है जनम से प्रत्येक के
m a s
o और वाक्यांश का एक से अ धक बार उपयोग कया जा सकता है।a[बड़े gl आकार के कण; कण
लका 5.2 को पूण
. cशब्द
emरूप से वत रत रहते ह; छोटे आकार के कण (1 nm से कम व्यास); मध्यम आकार के कण (1–1000
क जए।
a s
gl nm); र रखने पर नीचे बैठ जाते ह (1000 nm से अ धक व्यास); नीचे नह बैठते; प्रकाश का प्रक णन करते
समान
a
ह; नस्यंदन पर पृथक हो जाते ह; पारदश ; नमक का वलयन; दुग्ध; जल म रेत; धुआँ; वषमांगी मश्रण;
com
. ag
नस्यंदन ारा पृथक नह कए जा सकते; क चड़; मक्खन; पीतल।]
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a नलंबन कोलॉइड
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गुणधम गुणधम गुणधम
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उदाहरण उदाहरण उदाहरण
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ता लका 5.2, पृष्ठ 90 — पुस्तक के अनुसार, प्रत्येक प्रकार के मश्रण के गुणधम एवं उदाहरण के लए रक्त ान
स हत।
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पूण क.cगई a g
se m ता लका 5.2
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a वलयन नलंबन कोलॉइड
se m
com g l a
. बैठ जाते ह (1000 nm से
छोटे आकार के कण (1 nm से मध्यम आकार के कण (1–1000 nm);
a
गण
ु धम बड़े आकार के कण; स्थर रखने पर
e m
as धक व्यास); नस्यंदन पर पृथक हो
कम व्यास); पारदश ; कण समान नीचे कण समान रूप से वत रत रहते ह; नीचे
agl
रूप से वत रत रहते ह; नीचे नह अ नह बैठते; नस्यंदन ारा पृथक नह कए
बैठते; नस्यंदन ारा पृथक नह जाते ह; प्रकाश का प्रक णन करते ह; जा सकते; प्रकाश का प्रक णन करते ह;
कए जा सकते वषमांगी मश्रण वषमांगी मश्रण
co m
m .
e
उदाहरण नमक का िवलयन; पीतल जल में रे त; कीचड़ दुग्ध; ध आ
ु ँ; म क्खन
m l as
.co a
m प्रत्येक वाक्यांश को कहाँ रख: कण के आकार से आरंभ क जए। छोटे कण न बैठ सकते ह, न नस्यंदक पत्र म
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फँस सकते ह, न प्रकाश प्रक णत कर सकते ह — इससे पूरा वलयन-स्तंभ बन जाता है, और बॉक्स म से नमक का
m .
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वलयन तथा पीतल ही वे दो उदाहरण ह जो कण-स्तर तक एकसमान ह। बड़े कण तीन काम करते ह, जससे
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नलंबन-स्तंभ जल म रेत और क चड़ के साथ बन जाता है। तब कोलॉइड-स्तंभ दोन ओर से एक-एक गुणधम ले
s e mसकता है ( वलयन क भाँ त), परंतु प्रकाश प्रक णत करता है और
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लेता है: वह न बैठता है और न छाना जा
aत)।l दुग्ध, धुआँ और मक्खन तीन इसी ववरण पर खरे उतरते ह।
वषमांगी है ( नलंबन क भाँ g
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कक्षा 9 व ान अध्याय 5 मश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: “प्रकाश का प्रक णन करते ह” तथा “ वषमांगी मश्रण” — ये दोन वाक्यांश दो-दो बार प्रयुक्त होते ह; प्रश्न
स्वयं संकेत दे ता है क कुछ वाक्यांश दोहराए जाएँगे।
प्र.4 नम्न ल खत प्रश्न को हल क जए— (i) केक बनाने क कसी व ध म 420 g मैदा, 75 g चीनी और 5 g
सो डयम हाइ ोजनकाब नेट का उपयोग सूखी साम ी के रूप म कया जाता है। उपयुक्त व ध के उपयोग ारा
मश्रण के प्रत्येक घटक क सांद्रता व्यक्त क जए। (ii) कसी पीतल मश्रधातु म द्रव्यमान के अनुसार 70% ताँबा
(कॉपर) है। 120 g पीतल म उप त कॉपर और जक क मात्रा प रक लत क जए।
(i) तीन साम ग्रयाँ ठोस ह, अतः उपयुक्त व ध द्रव्यमान-द्रव्यमान प्र तशत (% m/m) है।
िमश्रण का कु ल द व्यमान = 420 g + 75 g + 5 g = 500 g
चीनी का % m/m = (75 g ÷ 500 g) × 100 = 15 % m/m
मैद ा का % m/m = (420 g ÷ 500 g) × 100 = 84 % m/m
सोिडयम हाइडोजनकाब ने ट का % m/m = (5 g ÷ 500 g) × 100 = 1 % m/m
जाँच : 15 % + 84 % + 1 % = 100 % ✓
(ii) “द्रव्यमान के अनुसार 70 % ताँबा” का अथ है प्रत्येक 100 g पीतल म 70 g ताँबा।
ताँबे का द व्यमान = (70 ÷ 100) × 120 g = 84 g
िजंक का द व्यमान = 120 g − 84 g = 36 g
जाँच : िजंक का % m/m = (36 g ÷ 120 g) × 100 = 30 %, और 70 % + 30 % = 100 % ✓
यहाँ % m/m क्य , % m/v क्य नह : द्रव्यमान-आयतन प्र तशत के लए वलयन का आयतन चा हए, और
चूण तथा ठोस मश्रधातुओं का कोई सु न त वलयन-आयतन होता ही नह — मैदे के डब्बे म दान के बीच वायु
भी भरी रहती है, अतः उसका आयतन मैदे क मात्रा का वश्वसनीय माप नह है। द्रव्यमान म यह क ठनाई नह है,
इस लए ठोस मश्रण सदै व द्रव्यमान से ही व्यक्त कया जाता है। अध्याय दुग्ध पाउडर और मसाल के मश्रण के लए
भी यही प रपाट अपनाता है।
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संकेत: कसी मश्रण के सभी घटक के प्र तशत जोड़कर 100 आने ही चा हए। प्रत्येक सांद्रता-प रकलन क त्व रत
जाँच के लए इसका उपयोग क जए।
प्र.5 खाद्य तेल के कसी पैकेट पर एक लीटर (910 g) लखा है। य द इस तेल को जल के साथ म श्रत कया जाए तो
क्या यह अलग परत बनाएगा? य द हाँ, तो कौन-सा पदाथ ऊपर रहेगा? आप इन दो परत को कस प्रकार पृथक
करगे? प्रयुक्त उपकरण का चत्र भी बनाइए।
हाँ, यह अलग परत बनाएगा और तेल ऊपर रहेगा। दोन को पृथक्कारी क प से पृथक कया जाता है।
चरण 1 — तेल का घनत्व ात क जए
घनत्व = द व्यमान ÷ आयतन
ते ल का आयतन = 1 L = 1000 mL = 1000 cm³, द व्यमान = 910 g
ते ल का घनत्व = 910 g ÷ 1000 cm³ = 0.91 g cm⁻³
जल का घनत्व = 1.00 g cm⁻³
चरण 2 — तुलना। 0.91 g cm⁻³ < 1.00 g cm⁻³, अतः तेल समान आयतन के जल से हल्का है। तेल और जल अ मश्रणीय भी
ह। इस लए वे दो परत बनाते ह, जनम तेल ऊपरी परत और जल नीचे रहता है।
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काँच की डाट
खाद्य तेल, घनत्व
0.91 g cm⁻³ (ऊपरी परत)
स्टै ड
ं जल, घनत्व
1.00 g cm⁻³ (िनचली परत)
स्टॉपकॉक
शंक्वाकार फ्लास्क —
पहले जल िनकाला जाता है
पृथक्कारी क प। कम घनत्व वाला तेल ऊपरी परत बनाता है; स्टॉपकॉक खोलने पर अ धक घनत्व वाला जल पहले नकलता है।
चरण 3 — इन्ह कैसे पृथक कर
1. मश्रण को प्रयोगशाला स्टड पर लगी पृथक्कारी क प म डा लए और काँच क डाट लगा द जए।
2. इसे तब तक स्थर रहने द जए जब तक स्पष्ट सीमा के साथ दो परत न बन जाएँ।
3. डाट हटाकर स्टॉपकॉक धीरे-धीरे खो लए। नचली परत (जल) शंक्वाकार फ्लास्क म नकल जाती है।
4. सीमा के नल तक पहुँचते ही स्टॉपकॉक बंद कर द जए। थोड़ा-सा मला हुआ भाग अलग एक त्रत करके छोड़ द जए।
5. स्टॉपकॉक पुनः खोलकर ऊपरी परत (तेल) को एक स्वच्छ पात्र म अलग एक त्रत क जए।
यह क्य काय करता है: पृथक्कारी क प केवल दो तथ्य का उपयोग करती है — द्रव आपस म मलते नह , और
उनके घनत्व भन्न ह। छँ टाई गुरुत्व स्वयं कर दे ता है और अ धक घनत्व वाले द्रव को नीचे बैठा दे ता है; तली म लगा
नल फर उसी द्रव को अलग नकाल लेने दे ता है। न तापन चा हए, न कोई रसायन, न नस्यंदक पत्र।
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प्र.6 नीचे दए गए अ भकथन एवं कारण को प ढ़ए और उनके संबंध म आगे दए गए वकल्प म से सही वकल्प का
चयन क जए। अ भकथन— वलयन टडल प्रभाव नह दशाते ह। कारण— वलयन के कण का आकार 100
nm से बड़ा होता है, अतः वे प्रकाश का प्रक णन नह कर सकते। (i) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और
कारण अ भकथन क सही व्याख्या है। (ii) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और कारण अ भकथन क सही
व्याख्या नह है। (iii) अ भकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है। (iv) अ भकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।
सही वकल्प है (iii) अ भकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।
अ भकथन — सत्य। वास्त वक वलयन टडल प्रभाव नह दशाता। नमक अथवा कॉपर सल्फेट के वलयन म से लेसर गुजा रए
और पाश्व से करणपुंज का माग दखाई नह दे गा।
कारण — असत्य, दो कारण से।
कारण में कहा गया: िवलयन के कणों का आकार > 100 nm ✗
सही मान: िवलयन के कणों का आकार < 1 nm ✓
आकार ही गलत है। वलयन म वलेय के कण 1 nm से छोटे होते ह, 100 nm से बड़े नह ।
तक भी गलत है। बड़ा होने पर कण प्रकाश का प्रक णन अ धक करेगा, कम नह । कण इतने छोटे होते ह, इसी लए प्रक णन
नह कर पाते।
इसके पीछे क भौ तक : दृश्य प्रकाश क तरंगदै य लगभग 400 – 700 nm होती है। इस तरंगदै य से बहुत छोटा
कण गुजरती हुई प्रकाश-तरंग को लगभग अछू ता छोड़ दे ता है, अतः पाश्व म कुछ भी प्रक णत नह होता और
करणपुंज अदृश्य रहता है। जैसे ही कण लगभग तरंगदै य के आकार के हो जाते ह — जैसे कोलॉइड (1 – 1000
nm) अथवा नलंबन (> 1000 nm) म — वे प्रबल प्रक णन करते ह और करणपुंज जगमगा उठता है।
संकेत: अ भकथन-कारण प्रश्न म पहले कारण को अकेले पर खए, तब दे खए क वह अ भकथन क व्याख्या करता
है या नह । यहाँ अ भकथन एक सही तथ्य है परंतु कारण म तथ्यात्मक त्रु ट है, जससे वकल्प (iii) ही बचता है।
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m क जए।
ता लका 5.3 म दए गए मश्रण को आप कस प्रकार पृथक करगे? अपनी चय नत व ध के कारण का भी
उल्लेख क जए। य द कसी मश्रण को पृथक नह कया जा सकता है तो उसके कारण क eव्याख्या
प्र.7
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a gl मश्रण पृथक्करण क व ध चयन का कारण
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पं कल जल से पंक
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रक्त प्र तदश म अन्य घटक से प्लाज्मा
नैफ्थलीन और रेत
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चॉक चूण और साधारण नमक
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a g जल और तेल
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पुष्प के वणक
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ता लका 5.3, पृष्ठ 91 — पुस्तक के अनुसार, दाईं ओर के दोन स्तंभ रक्त ह।
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पूण क गई ता लका 5.3
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मश्रण पृथक्करण क व ध चयन का कारण
पंिकल जल से अवसादन तथा िनस्तारण, िफर पंक एक अघुलनशील नलंबन है जसके कण 1000 nm से बड़े ह, अतः वे
पंक िनस्यंद न; ध ँध
ु लापन बना रहे तो बैठ जाते ह और नस्यंदक पत्र उन्ह रोक लेता है। अत्यंत सूक्ष्म कण को
िफटकरी (स्कं दन) अथवा अपकें द ण स्कंदक से गुच्छे बनाकर अथवा अपकद्रण से नीचे बैठाना पड़ता है।
रक्त पितदश में अपकें द ण रक्त एक कोलॉइड है; उसक क णकाएँ गुरुत्व से नह बैठत और नस्यंदक
अन्य घटकों से पत्र से नकल जाती ह। चक्रण से कह प्रबल बाहरी बल उत्पन्न होता है और
प्लाज्मा अ धक घनत्व वाली क णकाएँ तली म एक त्रत हो जाती ह, ऊपर हल्का
प्लाज्मा शेष रह जाता है।
नैफ्थलीन और ऊध् वपातन नैफ्थलीन अपने गलनांक से नीचे ही ठोस से सीधे वाष्प बन जाता है और ठं डी
रे त सतह पर नक्षेपण ारा पुनः प्राप्त हो जाता है; रेत ऊध्वपा तत नह होती और
शेष रह जाती है।
चॉक चूण और जल िमलाकर िनस्यंद न, िफर िनस्यंद नमक जल म घुलनशील है और चॉक नह । नस्यंदन चॉक को अवशेष के रूप
साधारण नमक क्र
का वाष्पीकरण अथवा ि स्टलीकरण म नकाल दे ता है; नस्यंद को वा ष्पत करने पर नमक वापस मल जाता है।
साधारण नमक वाष्पीकरण (नमक पाने के िलए) नमक जल म घुला एक अवाष्पशील ठोस है, अतः जल उड़ा दे ने पर वह पीछे
और जल अथवा आसवन (दोनों पाने के िलए) रह जाता है। आसवन जल को संघ नत करके भी एक त्रत कर लेता है।
जल और तेल ृ क्कारी कीप
पथ दोन अ मश्रणीय ह और उनके घनत्व भन्न ह, अतः वे दो परत बनाते ह और
नचली परत स्टॉपकॉक से नकाली जा सकती है।
पुष्प के वणक कागज वणले िखकी न्न
वणक इस बात में िभ होते है ं िक कागज उ न्हे ं िकतनी पबलता से रोकता है और
न्न न्न
वे िवलायक में िकतनी सरलता से घुल ते है,ं अतः वे प ी पर िभ -िभ दू र ी तय
करते है।
ं
सबम समान सूत्र: यहाँ प्रत्येक व ध घटक के बीच कसी एक अंतर को पकड़ती है — कण का आकार ( नस्यंदन,
अपकद्रण), ऊध्वपा तत होने क क्षमता (ऊध्वपातन), वलेयता (घोलकर छानना), वाष्पशीलता (वाष्पीकरण,
आसवन), घनत्व (पृथक्कारी क प) अथवा कागज पर चलने क ग त (वणले खक )। तकनीक चुनना वास्तव म यह
पूछना है: इन दोन घटक म कस एक गुणधम का अंतर सबसे अ धक है?
प्र.8 कसी मश्रण म दो मश्रणीय द्रव ‘क’ तथा ‘ख’ उप त ह। ‘क’ का क्वथनांक 60°C तथा ‘ख’ का क्वथनांक
90°C है। इन्ह पृथक करने क व ध सुझाइए। सुझाई गई व ध का नामां कत चत्र भी बनाइए।
इन्ह साधारण आसवन ारा पृथक क जए।
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‘क’ का क्वथनाक
ं = 60 °C
‘ख’ का क्वथनांक = 90 °C
अंत र = 90 °C − 60 °C = 30 °C
30 °C आवश्यक 25 °C से अिधक है → साधारण आसवन काय करेगा
तापमापी
जल िनकास
जल संघिनत्र
स्टै ंड
आसवन
फ्लास्क वाष्प संघिनत होती है
जल पवेिशका
ऐसीटोन तथा ऐसीटोन की वाष्प
जल का िमश्रण
बनर शंक्वाकार फ्लास्क
आसवन क व्यवस्था। कम क्वथनांक वाला द्रव पहले वा ष्पत होता है, संघ नत्र वाष्प को पुनः द्रव बना दे ता है और आसुत शंक्वाकार
फ्लास्क म एक त्रत हो जाता है।
प्र क्रया
1. मश्रण को आसवन फ्लास्क म ली जए और उस पर तापमापी इस प्रकार लगाइए क उसका बल्ब पाश्व-न लका के मुँह के स्तर
पर रहे। पाश्व-न लका को जल-संघ नत्र से जो ड़ए और एकत्रण-पात्र के रूप म शंक्वाकार फ्लास्क र खए।
2. तार क जाली पर फ्लास्क को धीरे-धीरे गम क जए। तापमापी का पा ांक चढ़कर लगभग 60 °C पर र हो जाता है, जो
बताता है क केवल द्रव ‘क’ उबल रहा है।
3. ‘क’ क वाष्प संघ नत्र म जाती है, जहाँ बहता ठं डा जल उसक ऊष्मा हर लेता है और वह पुनः द्रव बन जाती है। शुद्ध ‘क’
शंक्वाकार फ्लास्क म टपकता है।
4. जब तापमापी का पा ांक 60 °C से ऊपर चढ़ने लगे तो रोककर एकत्रण-पात्र बदल द जए — द्रव ‘क’ पूरा आस वत हो चुका
है।
5. अ धक क्वथनांक वाला द्रव ‘ख’ आसवन फ्लास्क म ही शेष रह जाता है; उसे वह से लया जा सकता है अथवा लगभग 90 °C
पर अलग आस वत कया जा सकता है।
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क्वथनांक का अंतर व ध क्य तय करता है: अ धक क्वथनांक वाला द्रव भी सदा कुछ न कुछ वा ष्पत होता रहता
है, अतः वाष्प कभी पूणतः शुद्ध नह होती। लगभग 25 °C अथवा अ धक का अंतर यह सु न त करता है क ‘क’
के उबलते समय ‘ख’ इतनी कम वाष्प दे क आसुत व्यावहा रक रूप से शुद्ध ‘क’ ही रहे। यहाँ अंतर 30 °C है, जो
पयाप्त है। य द अंतर 25 °C से कम होता — जैसे ऐसीटोन (56 °C) और ऐल्कोहॉल (78 °C) म — तो साधारण
आसवन असफल रहता और प्रभाजी आसवन क आवश्यकता पड़ती।
प्र.9 वाष्पीकरण, क्रस्टलीकरण और आसवन क तुलना क जए। आप कस त म एक व ध को दूसरी व धय
क अपेक्षा प्राथ मकता दगे?
तुलना का वाष्पीकरण क्रस्टलीकरण आसवन
बदु
क्या िकया वलायक को वायु म उड़ा दया गम संतृप्त वलयन को धीरे-धीरे ठं डा द्रव को उबालकर, फर संघ नत करके
जाता है जाता है कया जाता है एक त्रत कया जाता है
क्या पाप्त होता केवल वलेय; वलायक नष्ट हो वलेय के शुद्ध क्रस्टल; बचा हुआ द्रव दोन घटक, प्रत्येक शुद्ध रूप म
है जाता है फक दया जाता है
पाप्त ठोस की कम — प्रत्येक घुली अशु द्ध उसी उच्च — अशु द्धयाँ वलयन म रह एक त्रत द्रव शुद्ध होता है
शुद्धता के साथ रह जाती है जाती ह
उपकरण खुला पात्र; प्रायः केवल धूप और बीकर, क प, वॉच ग्लास — सरल आसवन फ्लास्क, तापमापी, संघ नत्र,
हवा एकत्रण-पात्र
लागत और सबसे कम म ध् यम सबसे अिधक — लगातार तापन और
पिर श्रम शीतल जल आवश्यक
कसे कब प्राथ मकता द
वाष्पीकरण — जब वलेय कोई अवाष्पशील ठोस हो, वलायक वापस न चा हए और शुद्धता का वशेष महत्व न हो। नमक-
पान म समुद्र जल से साधारण नमक प्राप्त करना इसका मानक उदाहरण है; काम सूय न:शुल्क कर दे ता है।
क्रस्टलीकरण — जब ठोस शुद्ध चा हए और उसक वलेयता तापमान के साथ तीव्रता से बदलती हो। कॉपर सल्फेट का
शु द्धकरण अथवा कसी यौ गक को उसके साथ बनी अशु द्धय से पृथक करना इसी व ध से होता है, और साथ म सुरू पत
क्रस्टल भी मल जाते ह।
आसवन — जब आपको द्रव चा हए, अथवा दोन घटक पुनः प्राप्त करने ह । जल से ऐसीटोन पृथक करना, खारे जल से पीने
योग्य जल प्राप्त करना और कन्नौज क दे ग-भापका व ध से पुष्प क सुगंध नकालना — इन सबके लए आसवन ही चा हए।
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शु द्धकरण के लए वाष्पीकरण क अपेक्षा क्रस्टलीकरण क्य : वाष्पीकरण वलायक को पूरी तरह हटा दे ता है,
अतः उसम घुला हुआ सब कुछ — वां छत वलेय और अवां छत अशु द्धयाँ, दोन — एक साथ पात्र म जमा हो जाता
है। क्रस्टलीकरण केवल अ त रक्त वलेय को बाहर नकालता है। अशु द्धयाँ बहुत कम मात्रा म होने के कारण
अपनी संतृप्तता से बहुत दूर रहती ह और सीधे द्रव म ही घुली रह जाती ह, जसे उँ डेल दया जाता है। यही एकमात्र
कारण है क क्रस्टलीकरण शुद्ध करता है और वाष्पीकरण नह ।
प्र.10 रक्त कोलॉइडी मश्रण का एक उदाहरण है। (i) क्या होगा य द शरीर म रक्त एक शुद्ध नलंबन क भाँ त
व्यवहार करे? (ii) रक्त के कसी प्र तदश म प र क्षप्त प्राव ा और प रक्षेपण माध्यम क पहचान क जए।
(i) य द रक्त शुद्ध नलंबन क भाँ त व्यवहार करे तो उसक क णकाएँ इतनी बड़ी ह गी क गुरुत्व उन्ह नीचे ख च लेगा — और यह
प्राणघातक होगा।
क णकाएँ बैठ जाएँगी। जहाँ भी रक्त का प्रवाह धीमा पड़ेगा, लाल क णकाएँ वा हका क नचली ओर बैठ जाएँगी और ऊपर
लगभग क णका-र हत प्लाज्मा रह जाएगा। रक्त एकसमान नह रहेगा।
ऑक्सीजन क आपू त ठप हो जाएगी। लाल रक्त क णकाएँ प्रत्येक ऊतक तक ऑक्सीजन पहुँचाती ह। य द वे बैठ जाएँ तो
म स्तष्क और पे शय तक पहुँचने वाला रक्त बहुत कम ऑक्सीजन ले जाएगा।
के शकाएँ अवरुद्ध हो जाएँगी। बैठ और गु च्छत क णकाएँ सूक्ष्मतम के शकाओं को जाम कर दगी, जससे उन ऊतक तक
पोषक तत्व क आपू त और अप शष्ट का नष्कासन रुक जाएगा।
हृदय पर भार पड़ेगा, क्य क उसे ऐसा मश्रण धकेलना पड़ेगा जो लगातार पृथक होता रहता है, और थक्के भी बन सकते ह।
(ii) रक्त के प्र तदश म:
कोलॉइड का घटक रक्त म वह क्या है
पिरि प्त पावस्था र क्त किणकाएँ तथा पोटीन — लाल र क्त किणकाएँ, श्वेत र क्त किणकाएँ, प्ले टले ट तथा प्लाज्मा-पोटीन
पिर ेपण माध् यम प्लाज्मा, जो मुख्यतः जल है और िजसमें लवण, ग्लूक ोस तथा हाम न घुले रहते है ं
कोलॉइड होना शरीर के लए ठ क क्य है: कोलॉइडी कण इतने छोटे होते ह क माध्यम क नरंतर आण वक
टक्कर उन्ह समान रूप से प र क्षप्त बनाए रखती ह, अतः आप कतनी ही दे र स्थर खड़े रह, रक्त एकसमान बना
रहता है और ऊतक तक पहुँचने वाली प्रत्येक बूँद अपने हस्से क क णकाएँ ले जाती है। फर भी कण इतने बड़े ह
क पयाप्त प्रबल बल उन्ह हटा सके — और इसी लए रक्त बक दान कए गए रक्त को अपक द्रत्र म घुमाकर
प्लाज्मा, प्लेटलेट, श्वेत तथा लाल क णकाओं म बाँटकर चार अलग-अलग रो गय क सहायता कर सकते ह।
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प्र.11 आपको रेत, साधारण नमक और नैफ्थलीन का एक मश्रण दया गया है ( चत्र 5.25 क)। चत्र 5.25 ख इस
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cकo जए और उन्ह ल खए। gl
मश्रण के घटक को पृथक करने के व भन्न चरण को दशा रहा है। पृथक्करण तकनीक क सही क्रम क
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पहचान
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त्र 5.25 — ( ) 1 2 3
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चत्र 5.25, पृष्ठ 92 — पुन न मत रेखा चत्र। (क) दया गया मश्रण; (ख) पुस्तक म दशाई गई तीन व्यव ाएँ — 1, 2
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और 3।
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सही क्रम है 1 → 3 → 2, अथात ऊध्वपातन → नस्यंदन → वाष्पीकरण ( क्रस्टलीकरण)।
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