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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव

AglaSem पर कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 6 गति पर बलों का प्रभाव (अन्वेषण) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 6 How Forces Affect Motion (Exploration), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव - Page 1 of 62

About NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव

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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 6: ग त पर बल का प्रभाव

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

94 – 115 24 60 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 61 pages

Page 2

कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: ग त पर बल का प्रभाव
अध्याय 4 ने बताया था क कोई वस्तु कैसे ग त करती है; यह अध्याय बताता है क क्य करती है। बल एक धक्का या खचाव है जसक दशा होती है,
और वस्तु क ग त केवल प रणामी बल पर नभर करती है। इसी एक वचार से न्यूटन के ग त के तीन नयम नकलते ह — वही कारण जससे
सक्क का ढे र रुकता है, क्षेत्ररक्षक हाथ पीछे ख चता है, एयरबैग जान बचाता है और रॉकेट उड़ान भरता है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

अन्वेषण (कक्षा 9) 94 – 115

खं ड प्रश्न

24 60

माध्यम

हन्द

चतन क जए — पृष्ठ 94
अध्याय आरंभ

चतन क जए

प्र.1 जब कोई ना वक अपने चप्पू से जल को पीछे क ओर धकेलता है तो उसक ड गी (छोट नौका) आगे क ओर
क्य बढ़ती है? और जब वह जल को धकेलने के लए अ धक बल लगाता है तो ड गी क ग त अ धक तीव्र हो
जाती है, ऐसा क्य होता है?

क्य क जल भी चप्पू को पीछे से धकेलता है। यह न्यूटन के ग त के तृतीय नयम का उदाहरण है — चप्पू और जल एक क्रया-
प्र त क्रया युग्म बनाते ह।

चप्पू जल को पीछे की ओर बल F से धके लता है

जल चप्पू को आगे की ओर उतने ही बल F से धके लता है

दोनों बल अलग-अलग वस्त ओ
ु ं — जल और चप्पू — पर लगते है,ं इसिलए वे एक-दू सरे को िनरस्त नही ं करते

चप्पू पर लगने वाला यह अग्रगामी बल ना वक क भुजाओं से होकर ड गी तक पहुँचता है और ड गी आगे क ओर त्व रत होती है।

अ धक बल लगाने पर ग त अ धक क्य : अ धक ज़ोर से धकेलने पर जल पर लगने वाला F बड़ा होता है, अतः
तृतीय नयम से जल भी चप्पू को उतने ही बड़े बल से आगे धकेलता है। तीय नयम a = F/m के अनुसार ड गी
का द्रव्यमान वही रहने पर बड़ा बल बड़ा त्वरण दे ता है, इस लए प्रत्येक स् ोक म ड गी अ धक तेजी से वेग प्राप्त
करती है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

डोंगी

चप्पू जल को पीछे धकेलता है
जल चप्पू को आगे धकेलता है

ड गी को आगे बढ़ाने वाला क्रया-प्र त क्रया युग्म। दोन तीर बराबर ह परंतु अलग-अलग वस्तुओं पर लगते ह।

प्र.2 मान ली जए क वही ना वक उसी चप्पू से उतना ही बल लगाकर दो अलग-अलग ड गय को चलाता है जनम से
एक ड गी खाली है तथा दूसरी ड गी म एक अन्य यात्री भी बैठा है। इनम से कौन-सी ड गी अ धक तीव्र ग त से
चलेगी?

खाली ड गी अ धक तीव्र ग त से चलेगी।

a = F ÷ m (न्यूट न का ि तीय िनयम)

दोनों िस्थितयों में चप्पू का बल F समान

खाली डोंगी: m कम → a अिधक

यात्री सिहत डोंगी: m अिधक → a कम

ऐसा क्य होता है: त्वरण द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यात्री बैठ जाने से ड गी स हत कुल द्रव्यमान बढ़
जाता है, इस लए वही बल कम त्वरण उत्पन्न करता है। समान समय म खाली ड गी अ धक वेग प्राप्त कर लेती है।

स्वयं जाँ चए: य द ना वक स हत खाली ड गी 100 kg क है और यात्री 50 kg जोड़ता है, तो 300 N बल पर
खाली ड गी का त्वरण a = 300 N ÷ 100 kg = 3 m s–2 और भरी ड गी का a = 300 N ÷ 150 kg = 2 m s–
2 होगा — दो- तहाई।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 95

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

6.2 संतु लत एवं असंतु लत बल

प्र.1 इस प्रकार के प्रकरण म जब कसी वस्तु पर चाहे वह र हो या ग तमान, एक से अ धक बल लग रहे ह तो उन
बल का उस वस्तु पर कुल प्रभाव क्या होता है?

केवल प रणामी बल का प्रभाव पड़ता है — वस्तु ठ क वैसा व्यवहार करती है मानो उस पर केवल वही एक बल लग रहा हो।

य द बल संतु लत ह (प रमाण बराबर, दशा वपरीत) तो प रणामी बल शून्य होता है। वरामाव ा म रखी वस्तु वरामाव ाम
ही रहती है और ग तमान वस्तु नयत वेग से चलती रहती है। जल पर तैरती गद ऐसा ही उदाहरण है — नीचे क ओर
गुरुत्वाकषण बल और ऊपर क ओर उत्प्लावन बल एक-दूसरे को संतु लत करते ह।
य द बल असंतु लत ह तो शून्येतर प रणामी बल लगता है। एक ही दशा के बल जुड़ते ह; वपरीत दशा के बल घटते ह और
प रणामी बल बड़े बल क दशा म होता है। तब वस्तु प रणामी बल क दशा म त्व रत होती है।

एक ही िदशा: पिरणामी F = F1 + F2

िवपरीत िदशाएँ: पिरणामी F = |F1 – F2|, बड़ े बल की िदशा में

संकेत: फश पर रखे बक्से को धकेलते समय आपका बल और घषण बल दोन लगते ह। बक्सा तभी चलता है जब
आपका धक्का घषण बल से अ धक हो, क्य क तभी प रणामी बल शून्येतर और आगे क ओर होता है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 97

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

6.2 संतु लत एवं असंतु लत बल
co m
e m.
m as
सो चए और बताइए

.co a g l
a s emभारोत्तोलक (weightlifter) एक भारोत्तोलन दं ड को ऊपर उठाती है ( चत्र 6.8)। उन दो बल क सूची
gl
कोई
a
प्र.1
बनाइए जो इस दं ड पर लग रहे ह। य द भारोत्तोलक दं ड को र रखती है तो क्या ये बल संतु लत ह?

co m
e m . ag
g l as भारो ोलन दंड
a

co m
e m.
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m .co a g
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m a s
m .co agl
l a se
a g
भारो ोलक
. com
m
m ase
e m . co agl
g l as
a
se m
चत्र 6.8, पृष्ठ 97 — भारोत्तोलक भारोत्तोलन दं ड को सर के ऊपर र रखे हुए (पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

com g l a
m . a
ase
agl
दं ड पर लगने वाले दो बल ह —

co m
1. पृथ्वी ारा लगाया गया गुरुत्वाकषण बल (भार), जो ऊध्वाधर नीचे क ओर लगता है।
m .
m as e
.co g l
2. भारोत्तोलक के हाथ ारा दं ड पर लगाया गया ऊपर क ओर का बल।

e mहाँ — जब तक वह दं ड को a
la s र रखती है, दोन बल संतु लत ह।

ag c
m .
e
ऐसा क्य होता है: " र" का अथ है दं ड वरामाव ा म है, अतः उसका वेग नह बदल रहा और त्वरण शून्य है।
m a s
co agl
तीय नयम a = F/m के अनुसार शून्येतर द्रव्यमान पर त्वरण शून्य तभी होगा जब प रणामी बल शून्य
.
न्यूटन के

e m
as
हो। इस लए हाथ का ऊपर का बल ठ क भार के बराबर होना चा हए।

a g l

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 4 of 61

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

हाथों का बल (ऊपर)

भार mg (नीचे)

पिरणामी बल = 0
र पकड़े गए भारोत्तोलन दं ड पर लगने वाले बल — प रमाण म बराबर, दशा म वपरीत, अतः संतु लत।

क्या आप जानते ह? उदाहरण 6.4 म यही संख्या नकाली गई है — 30 kg के दं ड के लए F = mg = 30 kg ×
9.8 m s–2 = 294 N ऊपर क ओर।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 दो खलाड़ी ‘R’ एवं ‘S’ पंजा-कुश्ती प्र तयो गता (arm-wrestling) म भाग ले रहे ह ( चत्र 6.9)। जस क्षण
हाथ आगे क दशा म (पृष्ठ से बाहर आपक ओर) झुकते ह तो क्या खला ड़य ारा लगाए गए बल संतु लत ह?
य द नह , तो कस खलाड़ी ने अ धक बल लगाया है?

R S

मेज
चत्र 6.9, पृष्ठ 97 — पंजा-कुश्ती: बाएँ खलाड़ी R, दाएँ खलाड़ी S, कोह नयाँ मेज पर और हाथ आपस म जुड़े हुए
(पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

नह , उस क्षण बल संतु लत नह ह। खलाड़ी R ने अ धक बल लगाया है।

ऐसा क्य होता है: जुड़े हुए हाथ तभी तक र रहते ह जब तक दोन के बल बराबर और वपरीत — अथात
संतु लत — ह । जस क्षण हाथ वास्तव म ग त करने लगते ह, वेग शून्य से बदल जाता है, अतः त्वरण है और इस लए
शून्येतर प रणामी बल भी है। प रणामी बल — और इसी लए ग त — सदै व बड़े बल क दशा म होती है। चत्र 6.9
म R बाईं ओर है और हाथ पृष्ठ से बाहर आपक ओर झुक रहे ह, अथात R क धकेलने क दशा म — इस लए R
अ धक बल लगा रहा है।

संकेत: "हाथ अभी हले नह " संतु लत बल क त है; "हाथ हल रहे ह" सदै व असंतु लत बल क । ग त क
दशा दे खए — वही बताती है क कसका बल बड़ा है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 97

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

6.3 घषण बल— प्राय: अनदे खा परंतु सदै व वद्यमान बल

प्र.1 क्या आपके ारा लगाए गए बल के प रणामस्वरूप वस्तु व ा पत होती है? आपने अनेक बार अनुभव कया
होगा क कसी वस्तु पर बल लगाने पर भी वह व ा पत नह होती और उसे व ा पत करने के लए आपको
और अ धक बल लगाना पड़ता है। ऐसा क्य होता है?

आवश्यक नह । वस्तु तभी ग त करती है जब आपका बल घषण बल से अ धक हो।

लगाया गया बल Fपयुक्त आगे की ओर

घषण बल Fघषण पीछे की ओर, वस्त ु की िनचली सतह और फश के बीच

पिरणामी बल = Fपयुक्त – Fघषण

यिद Fपयुक्त ≤ Fघषण → पिरणामी बल शून्य → वस्त ु िवरामावस्था में ही रहती है

यिद Fपयुक्त > Fघषण → पिरणामी बल आगे की ओर → वस्त ु आगे त्विरत होती है

ऐसा क्य होता है: घषण बल वस्तु क नचली सतह और फश के मध्य उत्पन्न होता है और सदै व उस दशा के
वपरीत लगता है जस ओर वस्तु ग त करने का प्रयास करती है। एक सीमा तक यह आपके लगाए बल के बराबर ही
हो जाता है, अतः दोन बल संतु लत रहते ह और कुछ नह होता। उस सीमा को पार करने पर ही प रणामी बल उत्पन्न
होता है और वस्तु चलने लगती है।

प्र.2 क्या इसका अथ यह है क इन्ह नरंतर ग त म रखने के लए आपको नरंतर बल लगाते रहने क आवश्यकता
होती है?

हाँ — परंतु केवल इस लए क घषण बल उप त है। बल ग त बनाए रखने के लए नह , घषण को नरस्त करने के लए
चा हए।

िनयत वेग बनाए रखने के िलए: Fपयुक्त = Fघषण

→ पिरणामी बल = 0 → त्वरण शून्य → वेग समान बना रहता है

बल लगाना बंद करने पर: पिरणामी बल = Fघषण पीछे की ओर → वस्त ु मंद होकर रुक जाती है

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: यही न्यूटन का प्रथम नयम कहता है। ग त को बनाए रखने के लए कसी बल क आवश्यकता
नह ; बल केवल वेग म प रवतन के लए चा हए। वास्त वक फश पर घषण बल वेग को नरंतर बदलने का प्रयास
करता है, इस लए प रणामी बल शून्य रखने के लए आपको बराबर और वपरीत बल लगाते रहना पड़ता है। पूणत:
घषणर हत फश पर एक बार ग त आरंभ होने के बाद कसी बल क आवश्यकता नह होती।

क्या आप जानते ह? युग तक यह गलत धारणा बनी रही क वस्तु को नयत वेग से ग तमान रखने के लए बल
चा हए। सत्रहव शताब्द म गैली लयो गै लली ने वचार प्रयोग से दशाया क य द क्षै तज तल पर ग तमान वस्तु क
सभी बाधाएँ हटा द जाएँ तो वह अ न त काल तक ग तमान रहेगी।

क्या होगा य द… — पृष्ठ 98
6.3 घषण बल— प्राय: अनदे खा परंतु सदै व वद्यमान बल

क्या होगा य द…

प्र.1 घषण बल वश्व से लुप्त हो जाए तो वस्तुओं क ग त पर इसका क्या प्रभाव होगा?

कोई भी ग तमान वस्तु स्वयं कभी नह रुकेगी — और हम कसी वस्तु को न तो चला पाएँगे, न मोड़ पाएँगे, न रोक पाएँगे।

ग तमान वस्तुए ँ कभी नह रुकगी। एक बार लुढ़काई गई गद, पैडल मारना बंद करने के बाद साइ कल, रबड़ बड से छोड़ा गया
सक्क का ढे र — सब नयत वेग से सदै व चलते रहगे, ठ क वैसे ही जैसे प रणामी बल शून्य होने पर न्यूटन का प्रथम नयम
कहता है।
चलना और दौड़ना असंभव हो जाएगा। आप इस लए आगे बढ़ते ह क्य क आप पृथ्वी क सतह को पीछे धकेलते ह और
घषण बल आपके पैर को आगे धकेलता है। घषण न होने पर आपका पैर पीछे फसल जाएगा और आप गर जाएँगे।
वाहन न त्व रत हो सकगे, न रुक सकगे। टायर बना पकड़ के घूमते रहगे; ेक पूणत: घषण पर ही नभर ह।
कोई वस्तु अपने ान पर नह टकेगी। गाँठ, क ल, पेच, थोड़ी ढलवाँ मेज पर रखा गलास, खंभे पर लपट रस्सी — सब
घषण के कारण ही टकते ह।

ऐसा क्य होता है: दै नक जीवन क अ धकांश तय म घषण ही एकमात्र क्षै तज संपक बल है। इसे हटा द जए
तो ग तमान वस्तु पर क्षै तज प रणामी बल शून्य हो जाता है, अतः उसका वेग स्वयं कभी बदल ही नह सकता; और
हम वह बल भी खो दे ते ह जससे हम धरती को धकेलते ह।

संकेत: घषण को प्राय: हा नकारक कहा जाता है क्य क यह ऊजा का क्षय करता है, परंतु यह प्रश्न दशाता है क
नयं त्रत ग त इसी के कारण संभव है।

क्रयाकलाप 6.1 — आइए, जाँच कर — पृष्ठ 98

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

6.3 घषण बल— प्राय: अनदे खा परंतु सदै व वद्यमान बल
co m
e m.
m as
क्रयाकलाप

.co a g l
a s emरबड़ बड से संपक छू टने के प ात सक्क के ढे र का वेग धीरे-धीरे कम होता जाता है और कुछ दूरी तय करने
gl
क्या
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प्र.1
के प ात वह रुक जाता है?

co m
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हाँ। ढे र क्रमशः धीमा होता जाता है और C से कुछ दूरी तय करके रुक जाता है।
a
ं का बल > घषण बल → पिरणामी बल आगे → ढे र त्विरत
m
.co
रबड़ बैड
ं के संपक में रहते हएु : बैड

संपक छू टने के बाद: के वल घषण बल, पीछे की ओर → पिरणामी बल पीछे → ढे र मंिदत em
c o m g l as
m . अिधकतम मान से घटकर 0 m s हो जाता है और ढे र रुक जाता है a
e
–1
s
वेग अपने

a gla
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ऐसा क्य होता है: ता नत रबड़ बड सक्क को आगे क ओर धक्का दे ता है और उनका वेग शून्य से बढ़ाकर कसी

em
.co
मान तक ले जाता है। जस क्षण बड का संपक छू टता है, वह धक्का समाप्त हो जाता है परंतु सक्क और मेज के
agl
a s
कोl घटाकर शून्य कर दे ता है।
बीच का घषण बल समाप्त नह होता। घषण बल ग त क वपरीत दशा म लगता है, अब यही एकमात्र (अतः
प रणामी) क्षै तज बल है और यह वेगag

co m
m .
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.co a g l
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e m . co agl
g l as
a

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m .
m ase
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a g l Page 9 of 61

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 क्या अब सक्क का ढे र लकड़ी क सतह वाली मेज क तुलना म अ धक दूरी तय करके वरामाव ा म आता है?
क्या अब उसके वेग म कमी पहले क तुलना म धीमी होती है?

4 िसक्कों का ढेर
C
C

A B A B
रबड़ बैड
ं

(ख) सतह पर िचह्न A, B और C (ग) रबड़ बैड
ं C तक खीचं ा गया

चत्र 6.12 (ख) और (ग), पृष्ठ 98 — क्रयाकलाप 6.1 क व्यव ा का पुनः बनाया गया रेखा चत्र।

दोन प्रश्न का उत्तर हाँ है। पट लत पटल पर ढे र अ धक दूर जाता है और उसका वेग अ धक धीरे-धीरे घटता है।

ऐसा क्य होता है: रबड़ बड हर बार उसी चह्न C तक ख चा जाता है, अतः सक्क का प्रारं भक वेग दोन बार
समान होता है। जो बदला है वह है सतह। पट लत पटल लकड़ी क तुलना म अ धक चकना होता है, इस लए
सक्क पर घषण बल कम लगता है। a = F/m के अनुसार कम वरोधी बल कम मंदन दे ता है, अतः वेग धीरे-धीरे
घटता है और ढे र वरामाव ा म आने से पहले अ धक दूरी तय करता है।

संकेत: बदु A, B और C को ठ क उन्ह दू रय पर अं कत रखना ही इस तुलना को नष्पक्ष बनाता है — इसी से हर
बार प्रारं भक वेग समान रहता है।

प्र.3 क्या सक्क का ढे र और भी अ धक दूरी तय करता है तथा उसका वेग और भी धीरे-धीरे घटता है?

हाँ। पॉ लशदार संगमरमर या टाइल पर दूरी तीन म सबसे अ धक और वेग क कमी सबसे धीमी होती है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

घषण बल का क्रम: लकड़ ी का पटल > पटिलत पटल > पॉिलशदार संगमरमर/टाइल

मंद न का क्रम (a = Fघषण ÷ m): लकड़ ी > पटिलत > संगमरमर

तय की गई दू री का क्रम: संगमरमर > पटिलत > लकड़ ी

ऐसा क्य होता है: पॉ लशदार संगमरमर या टाइल क सतह और भी चकनी होती है, अतः सक्क पर घषण बल
सबसे कम लगता है। वरोधी बल जतना कम, मंदन उतना ही कम, और वेग शून्य होने तक ढे र उतनी ही अ धक दूरी
तय करता है।

प्र.4 आप अपने अवलोकन से क्या नष्कष नकालते ह?

घषण बल संपक म आने वाली सतह क प्रकृ त पर नभर करता है — और घषण बल जतना कम होगा, वेग उतना ही
धीरे घटे गा तथा वस्तु रुकने से पहले उतनी ही अ धक दूरी तय करेगी।

सतह प्रकृ त घषण बल C से तय क गई दूरी

लकड़ी का मेज पटल तीन म सबसे खुरदरा सबसे अिधक सबसे कम

पटिलत मेज पटल अ धक चकना कम अिधक

पॉिलशदार संग मरमर / टाइल सबसे चकना सबसे कम सबसे अिधक

ऐसा क्य होता है: सक्क का प्रारं भक वेग हर बार समान रहता है, इस लए रुकने क दूरी को केवल वरोधी बल
ही बदल सकता है। भन्न सतह भन्न घषण बल दे ती ह, अतः भन्न मंदन और भन्न दू रयाँ। इसी प्रवृ त्त को आगे बढ़ाएँ
तो शून्य घषण वाली सतह पर सक्के सदै व चलते रहगे — यही पृष्ठ 100 का वचार प्रयोग और यही न्यूटन के प्रथम
नयम का सार है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 99
6.3 घषण बल— प्राय: अनदे खा परंतु सदै व वद्यमान बल

प्र.1 आप यह कस प्रकार जाँच सकते ह क घषण बल का मान वास्तव म भन्न- भन्न सतह के लए भन्न- भन्न होता
है?

कमानीदार तुला से इसे सीधे मापकर, जैसा क्रयाकलाप 6.2 म कया गया है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

1. कमानीदार तुला को सतह पर क्षै तज त म र खए और जाँ चए क उसका पा ांक शून्य है।
2. लकड़ी के गुटके को उसके हुक से जो ड़ए और धीरे-धीरे बल बढ़ाते हुए ख चए।
3. जस क्षण गुटका ग त आरंभ करे, उस क्षण का पा ांक अ भले खत क जए। यही पा ांक गुटके और उस सतह के बीच के
घषण बल का स न्नकट माप है।
4. चार सतह पर यही दोहराइए और पा ांक क तुलना क जए।

यह घषण बल क्य मापता है: जस क्षण गुटका चलना आरंभ करता है, उसके वेग म लगभग कोई प रवतन नह
होता, अतः त्वरण शून्य है और प रणामी बल भी शून्य। क्षै तज दशा म केवल दो बल ह — ग का खचाव और
घषण बल — इस लए दोन प रमाण म बराबर होने चा हए। तुला जो पढ़े , घषण बल वही है।

स्वयं जाँ चए: क्रयाकलाप 6.1 म जस सतह पर सक्क ने सबसे अ धक दूरी तय क थी, यहाँ उसी सतह पर तुला
का पा ांक सबसे कम आना चा हए। दो अलग क्रयाकलाप, एक ही नष्कष।

क्रयाकलाप 6.2 — आइए, मापन कर — पृष्ठ 99
6.3 घषण बल— प्राय: अनदे खा परंतु सदै व वद्यमान बल

क्रयाकलाप

प्र.1 बल बढ़ाते हुए कमानीदार तुला को धीरे-धीरे ख चए और जैसे ही गुटका ग त आरंभ करे तो तुला के पाठ्यांक को
अ भले खत क जए। यह पाठ्यांक क्या दशाता है?

यह उस सतह ारा गुटके पर लगाए गए घषण बल का प रमाण दशाता है ( फसलन आरंभ होने से पहले सतह अ धकतम जतना
घषण बल दे सकती है, उसका स न्नकट मान)।

गुट के पर क्षैितज बल: िस्पंग का िखंच ाव (आगे), घषण बल (पीछे )

"जै से ही गित आरंभ करे" — उस क्षण वेग अभी बदल नही ं रहा

→ त्वरण ≈ 0 → पिरणामी बल ≈ 0

→ Fिस्पंग = Fघषण

अतः तुला का पाठ ाक
ं = घषण बल, न्यूटन में

संकेत: तुला को समान ग त से और पूणत: क्षै तज ख चए। झटके से या तरछा ख चने पर ऊध्वाधर घटक जुड़
जाता है और पा ांक बगड़ जाता है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 य द गुटके का वेग न तो बढ़ रहा हो और न ही घट रहा हो तो आप गुटके पर लगने वाले प रणामी बल के वषय म
क्या कह सकते ह?

लकड़ ी का गुटका
कमानीदार तुल ा
िखंच ाव

डोरी

चत्र 6.14, पृष्ठ 99 — कमानीदार तुला ारा ख चे जा रहे गुटके का पुनः बनाया गया रेखा चत्र।

गुटके पर लगने वाला प रणामी बल शून्य है।

वेग िनयत → वेग में पिरवतन = 0

→ त्वरण a = 0 m s–2
F = ma = m × 0 = 0 N

ऐसा क्य होता है: यह न्यूटन का प्रथम नयम उलटे क्रम म पढ़ना है। नयत वेग — वरामाव ा भी इसी क वशेष
त है — प रणामी बल शून्य होने का लक्षण है। गुटके पर बल तो लग ही रहे ह (आपका खचाव, घषण बल,
भार, अ भलंब बल), परंतु वे युग्म म नरस्त हो जाते ह और वेग बदलने के लए कुछ शेष नह बचता।

प्र.3 क्या कमानीदार तुला का पाठ्यांक लकड़ी के गुटके पर लगने वाले घषण बल के प रमाण को दशाता है?

हाँ — स न्नकट रूप से। क्य क प रणामी बल शून्य है, ग का खचाव और घषण बल प रमाण म बराबर तथा दशा म वपरीत
होने चा हए, अतः तुला का पा ांक घषण बल दे दे ता है।

"स न्नकट" क्य : हाथ से ख चने पर गुटका पूणत: नयत वेग से नह चलता, कमानीदार तुला का अल्पतमांक
सी मत होता है, और फसलन आरंभ होते ही घषण बल थोड़ा बदल जाता है। इस लए पा ांक एक अ ा आकलन
है, यथाथ मान नह । सतह क तुलना के लए यह पूणत: पयाप्त है, और क्रयाकलाप को यही चा हए।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
उस सतह के लए सबसे कम है जस पर सक्क के ढे र ने सबसे अ धक दूरी तय क है? क्याem
प्र.4 सभी सतह के लए कमानीदार तुला के पाठ्यांक क तुलना क जए। क्या पाठ्यांक भन्न- भन्न ह? क्या पाठ्यांक

m a s
co अ धक है जस पर तय क गई दूरी न्यूनतम थी? gl
पाठ्यांक उस सतह
के लए.सबसे
em a
a s
a
उत्तरgl

co m
तीन का उत्तर हाँ है। पा ांक सतह-दर-सतह भन्न आते ह और क्रयाकलाप 6.1 से पूणत: मेल खाते ह।

e m . ag
सतह
l as
क्रयाकलाप 6.1 म दूरी
g
क्रयाकलाप 6.2 म तुला का पाठ्यांक घषण बल

पॉिलशदार संग मरमर / टाइल सबसे अिधक
a सबसे कम सबसे कम

. comमध्यम
m
पटिलत मेज पटल मध्यम मध्यम

m as e
.co सबसे कम सबसे अिधक
a g l
m
लकड़ी का मेज पटल सबसे अ धक

l a se
a g दोन क्रयाकलाप एक ही उत्तर क्य दे ते ह: क्रयाकलाप 6.1 घषण बल को अप्रत्यक्ष रूप से मापता है — अ धक

m
घषण का अथ है अ धक मंदन (a = Fघषण/m) और इस लए कम दूरी। क्रयाकलाप 6.2 उसी घषण बल को सीधे
a s
m .co agl
se
न्यूटन म मापता है। दोन को सतह का एक ही क्रम दे ना चा हए और वे दे ते भी ह। यही मेल नष्कष को वश्वसनीय
बनाता है।
g l a
a

co m
m .
वै ा नक क भाँ त सो चए — पृष्ठ 100
m as e
.co a g l
em
6.3 घषण बल— प्राय: अनदे खा परंतु सदै व वद्यमान बल

वै sा नक क भाँ त सो चए
a
a gl
se m
com g l a
.
अब एक वचार प्रयोग क जए। हम वचार प्रयोग तब करते ह जब व्यवहार जगत म प्रयोग के लए आवश्यक
a
प्र.1
पर
e m
कsउनके मध्य घषण बल शून्य है। कल्पना क जए य द आप ऐसी वस्तु और एक
तय को सृ जत करना क ठन होता है। मान ली जए आपको एक वस्तु और एक क्षै तज फश मलता है
जनक सतह इतनी चकनी ह a
a g l
समतल सतह के साथ क्रयाकलाप 6.1 के चरण 3 और 4 को दोहराते ह तो क्या होगा? क्या वस्तु का वेग घटे गा?

m
क्या वस्तु कभी वरामाव ा म आएगी अथवा सदै व ग तमान रहेगी?

. co
se m
o m l a
gरहेगी। उसका वेग नह घटेगा और वह कभी
.cबड वस्तु को ग तमान कर देगा और उसके बाद वह सदै व नयत वेग से ग तमान

m a
se
रबड़
a
agl
वरामाव ा म नह आएगी।

.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 14 of 61

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

बैड
ं के संपक में रहते हएु : पिरणामी बल आगे → वेग 0 से बढ़ कर v हो जाता है

संपक छू टने के बाद: घषण बल = 0 N, और कोई अन्य क्षैितज बल नही ं

→ पिरणामी क्षैितज बल = 0 N

→ a = F/m = 0 ÷ m = 0 m s–2

→ वेग सदै व v बना रहता है, सरल रेखा में

ऐसा क्य होता है: वास्त वक क्रयाकलाप म वस्तु का वेग केवल और केवल घषण बल घटाता है। घषण हटा द जए
तो वेग बदलने वाला कुछ बचता ही नह । तब न्यूटन का प्रथम नयम अक्षरशः लागू होता है — ग तमान वस्तु नयत
वेग से ग त करती रहती है जब तक उस पर कोई प रणामी बल काय न करे।

क्या आप जानते ह? यही तक गैली लयो ने न्यूटन से भी पहले, सत्रहव शताब्द म दया था — य द कोई वस्तु
क्षै तज तल पर ग त कर रही हो और उसक ग त म आने वाली सभी बाधाएँ हटा द जाएँ तो वह अ न त काल तक
ग तमान रहेगी। वचार प्रयोग ने उन्ह उन प र तय के वषय म सही नष्कष तक पहुँचा दया जन्ह वे प्रयोगशाला
म कभी बना ही नह सकते थे।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 101
6.4 न्यूटन का ग त का प्रथम नयम

सो चए और बताइए

प्र.3 एक वस्तु नयत वेग से ग त कर रही है। क्या उस पर कोई प रणामी बल काय कर रहा है?

नह । उस पर प रणामी बल शून्य है।

िनयत वेग → वेग के पिरमाण या िदशा में कोई पिरवतन नही ं

→ त्वरण a = 0 m s–2

पिरणामी F = ma = m × 0 m s–2 = 0 N

ऐसा क्य होता है: प रणामी बल वेग को बदलता है, बनाए नह रखता। अलग-अलग बल तो लग ही सकते ह —
60 km h–1 क नयत चाल से चलती कार पर इंजन का बल, घषण बल, भार और अ भलंब बल सभी लगते ह —
परंतु वे परस्पर ठ क-ठ क नरस्त हो जाते ह और प रणामी बल शून्य रहता है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: " नयत वेग" म वरामाव ा (v = 0 नयत) भी स म्म लत है। दोन तय म त्वरण शून्य है और इस लए
प रणामी बल भी शून्य।

प्र.4 मान ली जए कसी वस्तु पर कोई प रणामी बल काय नह कर रहा है। नम्न ल खत म से कौन-सी तयाँ संभव
ह? (i) य द वस्तु वरामाव ा म है तो वह वरामाव ा म ही रहेगी। (ii) य द वस्तु पहले से ग तमान है तो वह
नयत वेग से ग त करती रहेगी। (iii) वस्तु नयत त्वरण से ग त कर रही है।

(i) और (ii) संभव ह। (iii) संभव नह है।

त संभव? कारण

(i) िवरामावस्था में है तो िवरामावस्था में हाँ प रणामी बल शून्य का अथ त्वरण शून्य; वरामाव ा म रखी वस्तु के पास चलने का
ही रहेग ी कोई कारण नह

(ii) िनयत वेग से गित करती रहेग ी हाँ त्वरण शून्य होने से वेग का प रमाण या दशा बदल ही नह सकते

(iii) िनयत त्वरण से गित कर रही है नही ं कोई भी त्वरण a ≠ 0 के लए प रणामी बल F = ma ≠ 0 चा हए — यह
वरोधाभास है

(iii) क्य गलत है: त्वरण और प रणामी बल F = ma ारा परस्पर बँधे ह। य द a नयत और शून्येतर है तो F =
ma भी नयत और शून्येतर होगा। बना प रणामी बल के त्वरण हो ही नह सकता।

प्र.5 दै नक जीवन म ऐसी त खोजना क ठन है जहाँ कसी वस्तु पर कोई बल न लग रहा हो। परंतु अनेक बल
लगाकर ऐसी त प्राप्त क जा सकती है जहाँ वस्तु पर लगने वाला प रणामी बल शून्य हो। एक उदाहरण क
सहायता से समझाइए।

बल को हटाया नह जा सकता, परंतु उन्ह संतु लत कया जा सकता है — ऐसे बल जो ड़ए क वे युग्म म नरस्त हो जाएँ और
प रणामी बल शून्य हो जाए।
उदाहरण — मेज पर रखी पुस्तक।

नीचे की ओर: पुस्तक का भार, F = mg

ऊपर की ओर: मेज ारा लगाया गया अिभलंब बल N

पिरणामी बल = N – mg = 0 N, क्योंिक N = mg

→ a = 0 m s–2 → पुस्तक िवरामावस्था में ही रहती है

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

उदाहरण — भारी बक्से को नयत चाल से धकेलना।

आगे की ओर: आपका बल, मान लीिजए 40 N

पीछे की ओर: घषण बल, 40 N

ऊध्व धर िदशा में: भार mg नीचे , अिभलंब बल N ऊपर, N = mg

दोनों िदशाओं में पिरणामी बल = 0 N → बक्सा िनयत वेग से िखसकता है

ऐसा क्य होता है: न्यूटन का प्रथम नयम प रणामी बल के वषय म है, अलग-अलग बल के वषय म नह । धकेले
जा रहे बक्से पर चार अलग बल लगते ह, फर भी वह ऐसा व्यवहार करता है मानो कोई बल लग ही न रहा हो,
क्य क वे दो वपरीत युग्म म नरस्त हो जाते ह। अन्य उदाहरण — रस्साकशी जसम दोन ट म बराबर बल से
ख चती ह, और जल पर तैरती गद जस पर उत्प्लावन बल भार को संतु लत करता है।

वै ा नक क भाँ त सो चए — पृष्ठ 102
6.5 न्यूटन का ग त का तीय नयम

वै ा नक क भाँ त सो चए

प्र.1 आप अपनी प रकल्पना का परीक्षण कस प्रकार कर सकते ह? आपको एक ऐसे क्रयाकलाप के वषय म वचार
करना होगा जहाँ आप एक ही वस्तु और एक ही सतह पर अलग-अलग प रमाण के बल लगाकर प रणामी त्वरण
ात कर सक। आप अलग-अलग प रमाण के बल कैसे लगा सकते ह?

बल के ोत के रूप म अलग-अलग प रमाण के भार का उपयोग क जए — पृथ्वी अ धक द्रव्यमान वाली लटक वस्तु को अ धक
गुरुत्वाकषण बल से ख चती है।

लटके भार का मान, F = mg

िगलास में द व्यमान दोगुन ा → उसका भार दोगुन ा → गाड़ ी पर िखंच ाव बल दोगुन ा

गाड़ ी, सतह और तय की जाने वाली दू री समान रिखए, िजससे के वल बल बदले

परीक्षण क रूपरेखा ( क्रयाकलाप 6.3):

1. बॉल बेय रग वाले प हय से एक गाड़ी बनाइए और उसम धागा बाँ धए।
2. धागे को मेज के दूसरे सरे पर लगे पाइप ( घरनी) पर डा लए और मुक्त सरे से एक कागज का गलास बाँ धए।
3. गलास म वस्तुएँ र खए। गलास नीचे गरता है और धागा गाड़ी को एक नयत बल से ख चता है जो गलास तथा उसम रखी
वस्तुओं के भार के बराबर है।
4. वलं बत दृश्य ग त वी डयो से नयत दूरी s तय करने का समय मा पए — यह T1 है।

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5. गलास का द्रव्यमान दोगुना क जए (अथात बल दोगुना) और समय पुनः मा पए — यह T2 है।

यह नष्पक्ष परीक्षण क्य है: गाड़ी का द्रव्यमान, सतह, प्रारं भक वेग (u = 0) और दूरी s — सब नयत रखे गए
ह। केवल खचाव बल बदला गया है, इस लए त्वरण म जो भी प रवतन दखे वह केवल बल के कारण होगा। बल
और त्वरण क प रकल्पना के परीक्षण के लए यही आवश्यक है।

धागा िघरनी
गाड़ी

पत्येक पयास मे ं समान दूरी s
िगलास + िसक्के

गाड़ी और घरनी का नकाय। गलास तथा उसम रखी वस्तुओं का भार एक नयत — और जानबूझकर दोगुना कया गया — खचाव बल
दे ता है।

क्रयाकलाप 6.3 — आइए, प्रयोग कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 102
6.5 न्यूटन का ग त का तीय नयम

क्रयाकलाप

प्र.1 आइए, मापे गए समय के मान का उपयोग करके कुछ व ेषण कर।

दोन प्रयास म गाड़ी वरामाव ा से चलती है और समान दूरी s तय करती है, अतः केवल दो समय-मान से ही त्वरण का अनुपात
मल जाता है।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
गित का समीकरण, u = 0: s = ut + ½at2 = ½at2
e m.
m l as
m .co a g
l a se
a g
पयास 1 (बल F): s = ½ a1T12

पयास 2 (बल 2F): s = ½ a2T22

co m
em . ag
g l as
दोनों में दू री समान है, अतः
a
½ a1T12 = ½ a2T22
co m
a2 ÷ a1 = T12 ÷ T22
em.
m l as
m .co a g
l a se
g
मान क्या दशाते ह: गलास म दोगुना भार होने पर गाड़ी पाइप तक जल्द पहुँचती है, अतः T2 < T1, जससे T12/T22 एक से बड़ा
a हो जाता है और इस लए a2 > a1।
m a s
उदाहरण: मान लीिजए T1 = 1.4 s और T2 =m .cos agl
s2e
1.0
l a
g s ÷ 1.00 s2 ≈ 2
a2 ÷ a1 = (1.4 s) ÷ (1.0 s) =a1.96
2 2

बल दोगुन ा करने से त्वरण लगभग दोगुन ा हो जाता है
co m
m .
o m l a se
m .c नयत द्रव्यमान वाली वस्तु का त्वरण उस पर लगाए गए प रणामी बलaकgे बढ़ने के साथ बढ़ता है — त्वरण
seप रणामी बल के समानुपाती होता है। ध्यान द जए क आपको त्वरण मापना ही नह पड़ा; नयत दूरी और u = 0 ने
नष्कष:
a
agl सारा काम केवल समय मापन से करा दया।

se m
com g l a
m . a
ase
संकेत: व्यवहार म वृ द्ध ठ क दो गुनी से थोड़ी कम मलती है। मापन त्रु ट के अ त रक्त गाड़ी के प हय और सतह के

agl
बीच का घषण लगाए गए बल का कुछ भाग खा जाता है।

co m
m .
m as e
.co l
वै ा नक क भाँ त सो चए — पृष्ठ 103
a g
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 19 of 61

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

6.5 न्यूटन का ग त का तीय नयम

वै ा नक क भाँ त सो चए

प्र.1 क्या कसी वस्तु का त्वरण बल के अ त रक्त कसी अन्य कारक पर भी नभर करता है? दै नं दन (everyday)
अनुभव से आप जानते ह क समान प रमाण के बल का उपयोग करके भारी वस्तुओं क तुलना म हल्क वस्तुओं
को ग त म लाना सुगम होता है। इससे एक अन्य प रकल्पना भी सामने आती है क समान बल लगाने पर कम
द्रव्यमान वाली वस्तु म त्वरण अ धक होता है (या अ धक द्रव्यमान वाली वस्तु म त्वरण कम होता है)। आप कस
प्रकार अपनी दूसरी प रकल्पना का परीक्षण कर सकते ह?

वही प्रयोग पुनः क जए, परंतु इस बार बल नयत रखकर गाड़ी का द्रव्यमान बद लए।

1. क्रयाकलाप 6.3 को एक प रवतन के साथ दोहराइए — गलास और उसम रखी वस्तुओं का द्रव्यमान नयत र खए, जससे
खचाव बल वही बना रहे।
2. गाड़ी म और वस्तुएँ डालकर उसका द्रव्यमान दोगुना क जए और तुला से उसे मा पए।
3. पहले क भाँ त उसी दूरी s के लए वलं बत दृश्य ग त वी डयो से समय अ भले खत क जए।
4. a2 ÷ a1 = T12 ÷ T22 से दोन त्वरण क तुलना क जए।

यह रूपरेखा क्य उपयुक्त है: द्रव्यमान संबंधी प रकल्पना का परीक्षण तभी हो सकता है जब आप केवल द्रव्यमान
बदल। बल ( गलास तथा उसम रखी वस्तुओं का भार), सतह, प्रारं भक वेग u = 0 और दूरी s सब नयत रखे गए ह,
अतः समय म जो भी अंतर आएगा वह द्रव्यमान के प रवतन से ही आएगा। यही "एक समय म एक ही चर बद लए"
वाला तक है जसने क्रयाकलाप 6.3 को बल का नष्पक्ष परीक्षण बनाया था।

क्रयाकलाप 6.4 — आइए, प्रयोग कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 103
6.5 न्यूटन का ग त का तीय नयम

क्रयाकलाप

प्र.1 मापे गए समय के मान का उपयोग करके इन दो तय के लए त्वरण का अनुपात ात क जए। क्या आप
पाते ह क समान बल के लए जब आपने गाड़ी का द्रव्यमान बढ़ाया तो त्वरण कम हो गया?

हाँ। भारी गाड़ी उतनी ही दूरी तय करने म अ धक समय लेती है, जसका अथ है उसका त्वरण कम है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

दोनों पयास िवरामावस्था से आरंभ होते है ं और समान दू री s तय करते है ं

s = ½ a1T12 = ½ a2T22

a2 ÷ a1 = T12 ÷ T22

गाड़ ी का द व्यमान दोगुन ा करने पर वह धीमी हो जाती है, अतः T2 > T1

→ T12 ÷ T22 < 1 → a2 < a1

उदाहरण: T1 = 1.0 s, T2 = 1.4 s

a2 ÷ a1 = (1.0 s)2 ÷ (1.4 s)2 = 1.00 ÷ 1.96 ≈ 0.51 ≈ ½

द व्यमान दोगुन ा करने से त्वरण लगभग आधा रह जाता है

इसका अथ: कसी दए गए बल के प रमाण के लए उत्पन्न त्वरण वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
क्रयाकलाप 6.3 ( नयत m पर a ∝ F) के साथ मलाने पर न्यूटन का तीय नयम मलता है — a = F ÷ m,
अथात F = ma।

संकेत: मापा गया अनुपात प्रायः ठ क ½ नह आता — प हय का घषण और वी डयो से समय पढ़ने क त्रु ट दोन
इसम योगदान करते ह।

ज ासा-सूत्र — पृष्ठ 104
6.5 न्यूटन का ग त का तीय नयम

ज ासा-सू त्र

प्र.1 1 N बल कतना होता है यह अनुभू त हम कैसे कर सकते ह?

अपनी हथेली पर रखे 100 ाम द्रव्यमान के भार जतना — जैसे एक छोटा सेब या 100 g का कोई पैकेट।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

m = 100 g = 0.1 kg, g = 9.8 m s–2

भार, F = mg

F = 0.1 kg × 9.8 m s–2
F = 0.98 N ≈ 1 N

यह द्रव्यमान आपक हथेली पर लगभग 1 N से दबाव डालता है और हथेली उसे लगभग 1 N से ऊपर क ओर धकेलती है। दोन
बल संतु लत होते ह, इसी लए द्रव्यमान र रहता है।

यह जानना क्य उपयोगी है: न्यूटन तभी वास्त वक लगता है जब आप एक न्यूटन को अनुभव कर सक। "1 N ≈
100 g द्रव्यमान का भार" मन म बैठ जाने पर प्रश्न क संख्याएँ अमूत नह रहत — स्पोट् स कार पर 3000 N का
बल लगभग 300 kg के भार जतना है, और 50 g क गोली पर 500 N का अवरोधक बल वशाल है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 106
6.5 न्यूटन का ग त का तीय नयम

सो चए और बताइए

प्र.6 100 g द्रव्यमान वाली एक खलौना कार 0.5 m s–1 के नयत वेग से ग तमान है। खलौना कार पर लगने वाला
प रणामी बल क्या है?

प रणामी बल शून्य है।

m = 100 g = 0.1 kg, वेग िनयत 0.5 m s–1

वेग में पिरवतन = 0 → a = 0 m s–2

F = ma

F = 0.1 kg × 0 m s–2

F=0N

द्रव्यमान और चाल का यहाँ कोई महत्व क्य नह : न्यूटन का तीय नयम बल को त्वरण से जोड़ता है, वेग से
नह । कार चाहे कतनी भी तेज चले, य द वह वेग बदल नह रहा तो त्वरण नह है, अतः प रणामी बल भी नह हो
सकता। कार पर घषण जैसे बल लग तो सकते ह, परंतु कुछ और उन्ह ठ क-ठ क संतु लत कर रहा होगा।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: 100 g और 0.5 m s–1 आपको प रकलन म उलझाने के लए दए गए ह। पहले " नयत" शब्द प ढ़ए —
वही उत्तर तय कर दे ता है, बना कसी ग णत के।

प्र.7 अलग-अलग द्रव्यमान वाले दो ब े एक जैसे झूल (swings) पर बैठे ह। दोन ब को समान प्रारं भक त्वरण
दे ने के लए आपको कस ब े पर अ धक बल लगाने क आवश्यकता होगी? कारण बताइए।

अ धक द्रव्यमान वाले ब े पर अ धक बल लगाना पड़ेगा।

F = ma

त्वरण a दोनों के िलए समान रखना है

अतः F, m के अनुक्र मानुपाती है

हल्का बच्चा, m1: F1 = m1a

भारी बच्चा, m2 (> m1): F2 = m2a > F1

ऐसा क्य होता है: द्रव्यमान यह मापता है क कोई वस्तु अपनी ग त म प रवतन का कतना वरोध करती है —
अथात उसका जड़त्व। समान समय म समान वेग-प रवतन लाने के लए भारी बच्चे का अ धक जड़त्व पार करना
होगा और इसके लए बड़ा बल चा हए।

स्वयं जाँ चए: a = 2 m s–2 के लए 20 kg के बच्चे को F = 20 kg × 2 m s–2 = 40 N चा हए, जब क 30
kg के बच्चे को F = 30 kg × 2 m s–2 = 60 N — डेढ़ गुना।

प्र.8 काँच क वस्तुओं को प रवहन के समय क्ष त से बचाने के लए बुलबुल वाली प्ला स्टक शीट अथवा सूखी घास म
लपेटा जाता है?

बुलबुल वाली शीट या सूखी घास प्रत्येक झटके म काँच के रुकने का समय बढ़ा दे ती है, और रुकने का समय अ धक होने का अथ है
काँच पर बल कम।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
झटके के समय काँच को अपना वेग u से घटाकर 0 करना पड़ ता है
m l as
.co
a = (v – u) ÷ t = (0 – u) ÷ t
m a g
l a se
g
F = ma = –mu ÷ t
a

co m
. ag
द व्यमान m और वेग-पिरवतन u झटके से तय होते है ं
e m
अतः t अिधक → |a| कम → |F| कम
g l as
a

. c om
ऐसा क्य होता है: कठोर पेट काँच को कुछ मलीसेकंड म रोक दे ती, जब क संपीड्य बुलबुले या लचीली घास दबते
हुए उसे कह अ धक समय म वरामाव ा तक लाते ह। वही वेग-प रवतन अ धक समय म होनेmसे त्वरण बहुत कम
m a e
sकम
हो जाता हैoऔर
. c F = ma के अनुसार काँच पर लगने वाला बल भी उतना ही कम — इतना
a g l क वह काँच को

a s emवाले बल से नीचे रहे। पै कग बल को काँच के बड़े क्षेत्रफल पर फैला भी दे ती है।
gl
तोड़ने

a
m a s
agl
क्या आप जानते ह? ठ क यही सद्धांत गद लपकते समय हाथ पीछे ख चने वाले क्षेत्ररक्षक, एयरबैग से बचने वाले

m .co
यात्री और फोम के ग े पर उतरने वाले ऊँची कूद के खलाड़ी क रक्षा करता है।

l a se
a g
क्रयाकलाप 6.5 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 107
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
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com g l a
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ase
agl

co m
m .
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g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 24 of 61

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

6.6 न्यूटन का ग त का तृतीय नयम

क्रयाकलाप

प्र.1 अब अपने दोन हाथ का उपयोग करके मेज को अपने से दूर धके लए अथात चत्र 6.23 (क) म दशाए अनुसार
मेज पर आगे क दशा म बल लगाइए। आप क्या अनुभव करते ह? क्या जस कुस पर आप बैठे ह वह वपरीत
दशा म ग त करती है?

लड़ की ारा मेज पर मेज ारा लड़ की पर
लगाया गया बल लगाया गया बल

मेज पिहयों वाली कु स
चत्र 6.23 (क), पृष्ठ 107 — मेज पर आगे क दशा म बल लगाना और उससे बनने वाला बराबर तथा वपरीत बल का
युग्म (पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

आप कुस स हत पीछे क ओर खसक जाते ह — हाँ, कुस आपके धक्के क वपरीत दशा म ग त करती है।

आप मेज को आगे की ओर बल F से धके लते है ं

मेज आपको पीछे की ओर उतने ही बल F से धके लती है

आपके पैर फश से ऊपर है,ं अतः घषण आपको रोक नही ं रहा

आप + कु स पर पिरणामी बल = F पीछे की ओर → आप पीछे त्विरत होते है ं

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: बल कभी अकेला नह लगता — बल के लए कम-से-कम दो वस्तुओं का परस्पर क्रया करना
आवश्यक है। जब आपके हाथ मेज पर दबाव डालते ह तो मेज भी आपके हाथ पर बराबर और वपरीत बल लगाती
है। भारी मेज अपने बड़े द्रव्यमान और नीचे के घषण के कारण मु श्कल से हलती है, परंतु आप प हय वाली कुस
पर ह, अतः आप पर लगने वाला पीछे का बल लगभग न वरोध है और आप लुढ़क जाते ह।

संकेत: पैर को फश से ऊपर उठाना महत्त्वपूण है। पैर नीचे होने पर फश का घषण मेज के धक्के को संतु लत कर
दे ता और आप नह हलते।

प्र.2 अब मेज को अपनी ओर ख चने का प्रयास क जए अथात चरण 2 क वपरीत दशा म मेज पर बल लगाइए
( चत्र 6.23 ख)। अब आपक कुस कस दशा म ग त करती है?

लड़ की ारा मेज पर मेज ारा लड़ की पर
लगाया गया बल लगाया गया बल

मेज पिहयों वाली कु स
चत्र 6.23 (ख), पृष्ठ 107 — मेज को अपनी ओर ख चना; युग्म के दोन बल उलट जाते ह (पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

अब कुस आगे क ओर, अथात मेज क ओर ग त करती है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

आप मेज को अपनी ओर खी ंचते है ं

मेज आपको अपनी ओर उतने ही बल से खी ंचती है

आप + कु स पर पिरणामी बल मेज की ओर → आप आगे लुढ़कते है ं

ऐसा क्य होता है: प्र त क्रया बल क दशा क्रया बल क दशा के साथ सदै व पलटती है, क्य क युग्म बराबर और
वपरीत होता है। मेज को दूर धके लए तो वह आपको दूर धकेलेगी; अपनी ओर ख चए तो वह आपको अपनी ओर
ख चेगी। दोन बार आप पर लगने वाला बल उस बल के वपरीत होता है जो आप मेज पर लगाते ह।

प्र.3 इस क्रयाकलाप से आप क्या नष्कष नकाल सकते ह?

जब भी आप मेज पर बल लगाते ह, मेज उसी क्षण आप पर वपरीत दशा म बराबर बल लगाती है। यही न्यूटन का ग त का
तृतीय नयम है।

जब भी कोई वस्त ु िकसी दू सरी वस्त ु पर बल लगाती है तो

दू सरी वस्त ु भी उसी समय पहली वस्त ु पर बराबर और िवपरीत बल लगाती है

वह बात जो वद्याथ प्रायः चूक जाते ह: युग्म के दोन बल दो अलग-अलग वस्तुओं पर लगते ह — एक मेज पर,
दूसरा आप पर। इसी लए वे एक-दूसरे को नरस्त नह करते और इसी लए आप वास्तव म ग त करते ह। दो बराबर
और वपरीत बल तभी संतु लत होते ह जब वे एक ही वस्तु पर लग।

यह क जए: इसी से समझ आता है क बना पैडल मारे साइ कल को पैर से पृथ्वी क सतह पीछे धकेलकर क्य
चलाया जा सकता है, और आप चलते ही क्य ह — आपका पैर पृथ्वी क सतह को पीछे धकेलता है और घषण के
रूप म सतह आपको आगे धकेलती है।

क्रयाकलाप 6.6 — आइए, सत्या पत कर — पृष्ठ 108

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

6.6 न्यूटन का ग त का तृतीय नयम

क्रयाकलाप

प्र.1 कल्पना क जए क आप दूसरे कमानीदार तुला के मुक्त सरे को अपने दूसरे हाथ से ख च रहे ह। पूवानुमान
लगाइए क य द दोन कमानीदार तुला र ह तो उनके पाठ्यांक म क्या संबंध होगा?

पूवानुमान: दोन तुलाओं का पाठ्यांक ठ क एक-सा (न्यूटन म बराबर) होगा।

तल
ु ा A, त ल
ु ा B पर बल FAB लगाती है

तल
ु ा B, त ल
ु ा A पर बल FBA लगाती है

न्यूट न का त ृत ीय िनयम: |FAB| = |FBA|

ु ा उस बल का पिरमाण िदखाती है जो उसे खी ंच रहा है
पत्येक कमानीदार त ल

→ पाठ ांक A = पाठ ांक B

यह पूवानुमान सुर क्षत क्य है: दोन तुलाएँ हुक से आपस म जुड़ी ह, अतः एक पर लगने वाला बल पूणत: दूसरी
से ही आता है। न्यूटन का तृतीय नयम कहता है क ऐसा युग्म सदै व प रमाण म बराबर और दशा म वपरीत होता है,
चाहे आप धीरे ख च या ज़ोर से। और चूँ क तुलाएँ र ह, प्रत्येक पर प रणामी बल शून्य है, इस लए पा ांक म
कुछ और जुड़ भी नह सकता।

प्र.2 अब चरण 3 को दोहराइए। आपके ारा लगाए गए बल के प रमाण को प रव तत करके इसे कई बार दोहराइए।
क्या आपका अवलोकन आपके पूवानुमान के समान है?

हाँ। आप चाहे कम बल से ख च, मध्यम से या अ धक से — दोन पैमान का पा ांक हर बार एक ही आता है।

प्रयास तुला A का पाठ्यांक तुला B का पाठ्यांक नष्कष

हल्का िखंचाव जैसे 2 N 2N बराबर

मध्यम िखंचाव जैसे 5 N 5N बराबर

तेज िखंचाव जैसे 9 N 9N बराबर

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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यह क्या सद्ध करता है: दोन तुलाएँ एक-दूसरे पर वपरीत दशा म जो बल लगाती ह वे प रमाण म बराबर ह —
और बल का प रमाण बदलने पर भी बराबर ही बने रहते ह। अलग-अलग बल के साथ दोहराना हीem
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gl दे ता है।
एक संयोगवश
o एक सामान्य नयम — न्यूटन के ग त के तृतीय नयम — के प्रमाण मaबदल
मले पा ांक.cको

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संकेत: दोन तुलाएँ क्षै तज ह और आरंभ म शून्य पढ़, अन्यथा उनका अपना भार तुलना म व्यव त त्रु ट जोड़

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दे गा।

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क्रयाकलाप 6.7 — आइए, समझते ह — पृष्ठ 109
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6.6 न्यूटन का ग त का तृतीय नयम

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क्रयाकलाप
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a glप्र.1 गुब्बारे से बँधे धागे को ढ ला क जए जससे हवा धीरे-धीरे बाहर नकले और दे खए क स् ॉ और गुब्बारा कस
दशा म ग त करते ह।
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aglदौड़ते ह जस दशा म हवा मुँह से बाहर नकल रही है।

गुब्बारा और स् ॉ धागे पर उस दशा के वपरीत

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तनी हईु गुब्बारे की रबड़ भीतर की हवा को मुँह से बाहर धके लती है, बल F से
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बाहर िनकलती हवा गुब्बारे को िवपरीत िदशा में उतने ही बल F से धके लती है
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s m बल अलग-अलग वस्तओ
eदोनों
g l a ु ं — हवा और गुब्बारे — पर लगते है,ं अतः िनरस्त नही ं होते
a गुब्बारे + स्टॉ पर पिरणामी बल आगे की ओर → वह धागे पर त्विरत होता है
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ऐसा क्य होता है: सकुड़ती हुई तनी रबड़ भीतर क हवा को दबाकर पीछे क ओर नष्का सत करती है। न्यूटन के
तृतीय नयम से नकलती हुई हवा गुब्बारे पर बराबर बल आगे क ओर लगाती है। तने हुए धागे पर परोया स् ॉ केवल
ग त को सीधी रेखा म रखता है ता क प्रभाव स्पष्ट दखे।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

स्टॉ

गुब्बारा
हवा बाहर िनकलती है
गुब्बारा इस ओर चलता है
गुब्बारा-रॉकेट — हवा एक ओर नकलती है और बराबर बल गुब्बारे को दूसरी ओर धकेलता है।

क्या आप जानते ह? रॉकेट भी ठ क इसी प्रकार ग त करता है। उसका इंजन गैस को नीचे क दशा म नष्का सत
करता है; गैस रॉकेट को बराबर बल से ऊपर धकेलती है, और यह ऊपर का बल रॉकेट के भार से अ धक होने के
कारण प रणामी बल ऊपर क ओर होता है और रॉकेट उड़ान भरता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 109
6.6 न्यूटन का ग त का तृतीय नयम

प्र.1 य द अंत रक्ष म ग तमान रॉकेट का इंजन उसक ग त क दशा म ही गैस नष्का सत करने लगे तो क्या होगा?

रॉकेट धीमा हो जाएगा।

िनष्क्रिमत गैस आगे की ओर (गित की िदशा में) फेंकी जाती है

न्यूट न के त ृत ीय िनयम से गैस रॉके ट को पीछे की ओर धके लती है

रॉके ट पर पिरणामी बल उसके वेग के िवपरीत होता है

→ त्वरण ऋणात्मक (मंद न) → चाल घटती है

ऐसा क्य होता है: रॉकेट का इंजन बाहर कसी वस्तु को धकेलकर काम नह करता — वह केवल द्रव्यमान को एक
दशा म फकता है और बदले म वपरीत दशा म बराबर धक्का पाता है। नष्कासन आगे क ओर हो तो प्र त क्रया
बल पीछे क ओर होगा, जो अवरोधक बल है। अंत रक्ष म, जहाँ न वायु है न धरातल, ेक लगाने का यही एकमात्र
उपाय है।

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क्या आप जानते ह? चंद्रयान-3 के वक्रम लडर ने ठ क इसी व ध से ग त कम करके चंद्रमा के द क्षणी ुव के
समीप सुर क्षत अवतरण के लए आवश्यक वेग प्राप्त कया था।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 110
6.6 न्यूटन का ग त का तृतीय नयम

सो चए और बताइए

प्र.9 कभी-कभी जल फकने वाले पाइप को पकड़े रखने के लए दमकलकम (fireperson) को संघष क्य करना
पड़ता है?

क्य क जल पाइप को पीछे क ओर उतने ही बल से धकेलता है जतने बल से पाइप जल को आगे फकता है — और यह पीछे का
बल बहुत बड़ा हो सकता है।

पाइप जल को आगे की ओर उच्च चाल से फेंकता है, बल F से

न्यूट न के त ृत ीय िनयम से → जल पाइप को पीछे की ओर बल F से धके लता है

पाइप को िस्थर रखने के िलए दमकलकम को आगे की ओर उतना ही बल F लगाना पड़ ता है

ते ज बहता जल = पित सेकं ड संवेग में बड़ ा पिरवतन = बड़ ा F

बल इतना बड़ा क्य होता है: दमकल का पाइप प्र त सेकंड कई कलोग्राम जल अत्यंत तीव्र वेग से बाहर फकता है।
इतने कम समय म जल के वेग म इतना बड़ा प रवतन लाने के लए बड़ा बल चा हए (F = ma), और पाइप पर लगने
वाली प्र त क्रया भी उतनी ही बड़ी होती है। य द दमकलकम दृढ़ता से न टके तो पाइप स हत उस पर प रणामी बल
पीछे क ओर होता है और वह पीछे धकेल दया जाता है — इसी लए दमकलकम प्रायः नोज़ल को दो लोग मलकर
पकड़ते ह और आगे झुककर खड़े होते ह।

संकेत: रॉकेट, चप्पू और दमकल का पाइप — तीन एक ही भौ तक ह — द्रव्यमान को एक ओर फ कए और
वपरीत दशा म धक्का पाइए।

प्र.10 मान ली जए क एक अंत रक्ष यान (spacecraft) अंत रक्ष के ऐसे क्षेत्र म ग त कर रहा है जहाँ उस पर लगने
वाला गुरुत्वाकषण बल नगण्य है। सुझाव द जए क वह अपनी ग त को कैसे प रव तत कर सकता है?

अपना इंजन चलाकर और गैस नष्का सत करके — जब बाहर धकेलने के लए कुछ है ही नह तब बल पाने का यही एकमात्र
उपाय है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

इंजन िकसी िदशा में िनष्क्रिमत गैस को बल F से फेंकता है

न्यूट न के त ृत ीय िनयम से गैस यान को िवपरीत िदशा में बल F से धके लती है

गुरु त्वाकषण नगण्य होने से यही पिरणामी बल है
a = F ÷ m → वेग िनष्कासन की िवपरीत िदशा में बदलता है

चाल बढ़ाने के लए: गैस को ग त क वपरीत दशा म, अथात पीछे क ओर नष्का सत क जए।
चाल घटाने के लए: गैस को ग त क दशा म, अथात आगे क ओर नष्का सत क जए।
दशा बदलने के लए: पाश्व के छोटे थ्रस्टर चलाइए, जससे प्र त क्रया बल बगल क ओर लगे और वेग क दशा बदल जाए।

और कुछ क्य काम नह करेगा: नगण्य गुरुत्वाकषण और वायु क अनुप त म कोई बाह्य वस्तु यान को स्पश ही
नह कर रही। तब न्यूटन का प्रथम नयम कहता है क उसका वेग स्वयं बदल ही नह सकता। इस लए यान को अपना
प्र त क्रया-द्रव्यमान — ईंधन — साथ ले जाना पड़ता है और बल पाने के लए उसे फकना पड़ता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 111
6.7 वस्तुओं के नकाय पर लगने वाले बल

प्र.1 परंतु क्या हम इन नयम को दो या दो से अ धक परस्पर जुड़ी वस्तुओं पर लागू कर सकते ह?

हाँ। दो या अ धक जुड़ी वस्तुओं को एक ही नकाय मानकर उस पूरे नकाय पर न्यूटन के नयम लगाए जा सकते ह।

िनकाय के भीतर के बल (आं त िरक बल) — जै से जोड़ ने वाली डोरी का तनाव T — पर िवचार करने की
आवश्यकता नही ं

के वल बाहर से लगने वाले बल (बाह्य बल) महत्त्वपूण है ं — जै से लगाया गया बल F

a = F ÷ (िनकाय का द व्यमान) = F ÷ (m1 + m2) … समीकरण 6.4

आंत रक बल क्य छोड़े जा सकते ह: न्यूटन के तृतीय नयम से वे सदै व बराबर और वपरीत युग्म म आते ह —
डोरी पे टका 1 को पीछे और पे टका 2 को आगे उतने ही तनाव T से ख चती है। पूरे नकाय पर जोड़ने पर प्रत्येक
युग्म नरस्त हो जाता है, अतः वे नकाय क समग्र ग त को बदल ही नह सकते। तब दोन पे टकाएँ ठ क (m1 +
m2) द्रव्यमान वाली एक वस्तु क भाँ त त्व रत होती ह।

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संकेत: आपका अपना शरीर भी एक नकाय है। चलते समय आपके हाथ और पैर ज टल रूप से ग त करते ह, तब
भी आपक समग्र ग त का अध्ययन शरीर को एक इकाई मानकर कया जा सकता है। व ान प्रायः तब सरल हो
जाता है जब हम वस्तुओं को उनके अंश म दे खना बंद कर दे ते ह और उन्ह समग्रता म दे खना आरंभ करते ह।

प्र.2 हम प्रत्येक का त्वरण कैसे ात कर सकते ह?

दोन पे टकाओं और डोरी को एक नकाय मा नए। दोन पे टकाएँ आपस म बँधी ह, अतः दोन का त्वरण एक ही होता है —

िनकाय पर बाह्य बल = F (तनाव T आं त िरक है)

िनकाय का द व्यमान = m1 + m2

a = F ÷ (m1 + m2) … समीकरण 6.4

यही एक मान पेिटका 1 और पेिटका 2 दोनों का त्वरण है

सोदाहरण हल। मान ली जए m1 = 3 kg, m2 = 2 kg और घषणर हत सतह पर F = 10 N।

a = 10 N ÷ (3 kg + 2 kg) = 10 N ÷ 5 kg = 2 m s–2

तनाव, के वल पेिटका 2 से: T = m2a = 2 kg × 2 m s–2 = 4 N

पेिटका 1 से जाँच : F – T = 10 N – 4 N = 6 N = m1a = 3 kg × 2 m s–2 ✓

a = F ÷ (m₁ + m₂), दोनों पेिटकाओं के िलए समान

डोरी F
पेिटका 2 पेिटका 1

T (आंतिरक युग्म — िनरस्त)

दोन तनाव बराबर और वपरीत आंत रक युग्म बनाते ह, अतः नकाय पर बाहर से केवल F लगता है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
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संकेत: अन्य बाह्य बल — कुल भार (m1 + m2)g नीचे क ओर और कुल अ भलंब बल (N1 + N2) ऊपर क

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ओर — एक-दूसरे को संतु लत कर दे ते ह, इस लए वे क्षै तज समीकरण म नह आते।
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अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 112 – 114
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अध्याय-अंत अभ्यास

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अभ्यास प्रश्न

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एक क्षै तज बल F का उपयोग करके कसी मेज को फश पर नयत वेग से ग त प्रदान क जाती है। फश ारा मेज
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प्र.1

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पर लगाया गया घषण बल कतना है?

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a l बल F है — प रमाण म लगाए गए बल के बराबर और दशा म वपरीत।
gघषण
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वेग िनयत है → a = 0 m s–2
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पिरणामी क्षैितज बल = ma = m × 0 = 0 N
a

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क्षैितज बल: लगाया गया बल F (आगे), घषण बल Fघ (पीछे )
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F – Fघ = 0
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a s eFmघ = F, गित की िवपरीत िदशा में
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ऐसा क्य होता है: नयत वेग प रणामी बल शून्य होने का लक्षण है (न्यूटन का प्रथम नयम)। मेज पर केवल दो ही
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क्षै तज बल ह — आपका बल और घषण बल — अतः वे ठ क-ठ क नरस्त होने चा हए। ध्यान द जए क यहाँ

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घषण बल आपके बल से "कम" नह है; कम होता तो मेज त्व रत हो रही होती।

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संकेत: य द F घषण बल से बड़ा होता तो मेज त्व रत होती; छोटा होता तो मं दत होती। नयत वेग दोन को बराबर
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होने पर बाध्य कर दे ता है।
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प्र.2 एक चकनी घषण र हत सतह पर ग तमान गद के लए सही शब्द का चयन कर नम्न ल खत कथन को सत्य
कथन बनाइए। (i) य द गद पर कोई प रणामी बल नह लगाया जाता है तो गद का वेग समान रहेगा/ बढ़े गा/
घटे गा। (ii) य द गद पर उसक ग त क दशा म प रणामी बल लगाया जाता है तो गद के वेग का प रमाण समान
रहेगा/ बढ़े गा/ घटे गा। (iii) य द गद पर उसक ग त क दशा के वपरीत दशा म प रणामी बल लगाया जाता है
तो गद के वेग का प रमाण समान रहेगा/ बढ़े गा/ घटे गा।

भाग सही कारण
वकल्प

(i) कोई पिरणामी बल नही ं समान रहेगा a = F/m = 0 ÷ m = 0 m s–2; वेग बदल ही नह सकता (न्यूटन का प्रथम
नयम)

(ii) गित की िदशा में पिरणामी बल बढ़ े गा त्वरण वेग क दशा म है, अतः गद तेज होती है

(iii) गित की िवपरीत िदशा में पिरणामी घटेगा त्वरण वेग के वपरीत है — मंदन, अतः गद धीमी होती है
बल

बल क दशा ही सब कुछ क्य तय करती है: न्यूटन का तीय नयम कहता है क त्वरण सदै व प रणामी बल क
दशा म होता है। य द वह दशा वेग से मेल खाती है तो प्रत्येक सेकंड चाल बढ़ाता है; य द वेग के वपरीत है तो
प्रत्येक सेकंड चाल घटाता है। "घषण र हत" इस लए कहा गया है ता क आप जान ल क कोई छपा हुआ वरोधी
बल नह है — जो कुछ होगा वह पूणत: बताए गए प रणामी बल के कारण होगा।

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प्र.3 एक चकनी क्षै तज सतह पर वद्यमान दो गुटके P और Q चत्र 6.36 (क) और चत्र 6.36 (ख) म दशाए गए ह।
गुटके P पर 4 N और 5 N प रमाण के दो बल वपरीत दशाओं म काय कर रहे ह जब क गुटका Q नयत वेग से
ग तमान है। नम्न ल खत म से कौन-सा कथन सत्य है? (i) P पर प रणामी बल लगता है और Q पर प रणामी
बल नह लगता है। (ii) P पर प रणामी बल नह लगता है और Q पर प रणामी बल लगता है। (iii) P और Q
दोन पर प रणामी बल लगता है। (iv) न तो P और न ही Q पर प रणामी बल लगता है।

5N P 4N Q

(क) (ख)

चत्र 6.36, पृष्ठ 112 — (क) गुटके P पर वपरीत दशाओं म 5 N और 4 N के बल, (ख) नयत वेग से ग तमान गुटका
Q।

सही कथन (i) — P पर प रणामी बल लगता है और Q पर प रणामी बल नह लगता है है।

गुट का P: 5 N दाईं ओर, 4 N बाईं ओर (िचत्र 6.36 क)

बल िवपरीत है,ं अतः घटाइए

पिरणामी बल = 5 N – 4 N = 1 N, दाईं ओर → शून्येत र

गुट का Q: िनयत वेग से गितमान (िचत्र 6.36 ख)

a = 0 m s–2 → पिरणामी बल = ma = 0 N

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5N 4N
P Q

िनयत वे ग → पिरणामी बल = 0 (ख)
पिरणामी 1 N → (क)
P पर बल असंतु लत ह (प रणामी 1 N दाईं ओर); Q नयत वेग से चल रहा है, अतः उस पर प रणामी बल शून्य है।

Q ग तमान होते हुए भी प रणामी बल-र हत क्य है: ग त के लए बल क आवश्यकता नह होती, केवल ग त म
प रवतन के लए होती है। Q का वेग नयत है, अतः उसका त्वरण शून्य है, और F = ma से उस पर प रणामी बल
भी शून्य होना चा हए।

प्र.4 सप नौका दौड़ (केरल म वल्लुम कल्ली) के अभ्यास के समय 100 ना वक एक नौका को एक साथ खे (चला) रहे
ह। इनम से 95 ना वक नौका को आगे बढ़ाने के लए पीछे क ओर चप्पू चलाते ह। त्रु टवश 5 ना वक वपरीत
दशा म चप्पू चलाते ह। य द प्रत्येक ना वक 200 N का क्षै तज बल लगाता है तो बताइए सप नौका पर लगने
वाला प रणामी बल कतना है? (कषण बल (drag force), वायु घषण आ द क उपेक्षा क जए।)

प रणामी बल 18 000 N, आगे क दशा म है।

पत्येक नािवक का बल = 200 N

आगे बढ़ ाने वाला समूह: 95 नािवक

Fआगे = 95 × 200 N = 19 000 N

िवरोध करने वाला समूह: 5 नािवक

Fपीछे = 5 × 200 N = 1 000 N

दोनों समूह िवपरीत िदशाओं में धके लते है,ं अतः घटाइए
पिरणामी बल = 19 000 N – 1 000 N = 18 000 N, आगे की ओर

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ऐसा क्य होता है: एक ही दशा के बल प रमाण म जुड़ते ह और वपरीत दशा के घटते ह, तथा प रणामी बल बड़े
योग क दशा म होता है। त्रु टवश उल्टा चप्पू चलाने वाले 5 ना वक केवल सहायता नह करते, ब ल्क 5 सही ना वक
का प्रभाव भी नरस्त कर दे ते ह — अतः सभी 100 के सही चलाने (20 000 N) क तुलना म 2 × 1 000 N = 2
000 N क हा न होती है।

स्वयं जाँ चए: प्रभावी ना वक क संख्या 95 – 5 = 90 है, और 90 × 200 N = 18 000 N — वही उत्तर, और
भी शीघ्र।

प्र.5 जब कसी वस्तु पर प रणामी बल लगता है तो हम दे खते ह क वस्तु त्व रत होती है— (i) त्वरण बल क दशा के
वपरीत दशा म और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है। (ii) त्वरण बल क दशा के वपरीत दशा
म और वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती होता है। (iii) त्वरण बल क दशा म और वस्तु पर लगने वाले बल के
व्युत्क्रमानुपाती होता है। (iv) त्वरण बल क दशा म और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।

सही वकल्प (iv) — त्वरण बल क दशा म और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है है।

न्यूट न का ि तीय िनयम: a = F ÷ m, अथ त F = ma

a की िदशा = पिरणामी बल F की िदशा

m िनयत होने पर: a ∝ F (बल दोगुन ा, त्वरण दोगुन ा)

F िनयत होने पर: a ∝ 1 ÷ m (द व्यमान दोगुन ा, त्वरण आधा)

वकल्प नणय क्या गलत है

(i) गलत दशा गलत है; त्वरण प रणामी बल क ही दशा म होता है

(ii) गलत दशा भी गलत, और a द्रव्यमान का समानुपाती नह , व्युत्क्रमानुपाती है

(iii) गलत a बल का समानुपाती है, व्युत्क्रमानुपाती नह

(iv) सही a = F/m से पूणत: मेल खाता है

इसके पीछे का प्रमाण: क्रयाकलाप 6.3 ने दखाया क द्रव्यमान नयत रखकर बल दोगुना करने पर त्वरण लगभग
दोगुना हो जाता है। क्रयाकलाप 6.4 ने दखाया क बल नयत रखकर द्रव्यमान दोगुना करने पर त्वरण लगभग
आधा रह जाता है। दोन मलकर a = F/m दे ते ह।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

एक सीधी रेखा के अनु दश ग तमान चार वस्तुओं A, B, C और D के लए
. com
m वस्तु C (iv)
त-समय ाफ ( चत्र 6.37) म
दशाए गए ह। इनम से कस पर एक प रणामी बल काय करता है — (i) वस्तु A (ii) वस्तु Be(iii)
प्र.6

m a s
वस्तु D.co
a gl
a s em
a gl

co m
e m . ag
as
त िथ

त िथ

त िथ

त िथ
g l
स्ि

स्ि

स्ि

स्ि
a
0 समय 0 समय 0 समय 0 समय
co m
m.
वस्तु A वस्तु B वस्तु C वस्तु D

m l a se
.co g ाफ।
aत-समय
sem
चत्र 6.37, पृष्ठ 113 — चार वस्तुओं A, B, C और D के

a
agl
m a s
.co agl

सही वकल्प (iii) — वस्तु C है।
se m
g l a
वस्तु त-समय ाफ का आकार a ढाल क्या बताती है प रणामी बल

co m शू य
.
A ऊपर क ओर झुक सीधी रेखा नयत धनात्मक वेग
m
न्

mक्षै तज सीधी रेखा as e
B
. c o त नह बदल रही — वस्तु वरामाव
a g l
ा म है शून्य

a s eCm
gl
उत्तरोत्तर तीव्र होती वक्र रेखा वेग बढ़ रहा है — वस्तु त्व रत हो रही है शून्येतर
a
D नीचे क ओर झुक सीधी रेखा नयत ऋणात्मक वेग (एकसमान दर से पीछे लौटना) शून्य
se m
com g l a
m . a
िस्थित-समय गाफ की ढाल = वेग las e
ag
सीधी रेखा (A, B, D) → िनयत ढाल → िनयत वेग → a = 0 → पिरणामी F = ma = 0 N

वक्र रेखा (C) → बदलती ढाल → बदलता वेग → a ≠ 0 → पिरणामी F ≠ 0
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

वस्तु A वस्तु B वस्तु C वस्तु D
प त्येक गाफ मे ं ऊध्व धर अक्ष पर िस्थित और क्षैितज अक्ष पर समय है

केवल C वक्र है। बदलती ढाल का अथ है बदलता वेग, और केवल बदलते वेग के लए ही प रणामी बल चा हए।

इस प्रश्न का छल: D नीचे क ओर झुक है जो दे खने म नाटक य लगती है, परंतु कसी भी ढाल क सीधी रेखा का
अथ है नयत वेग — वस्तु बस ऋणात्मक दशा म एकसमान दर से चल रही है। रेखा क तीव्रता चाल बताती है;
वक्रता त्वरण बताती है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.7 कोई ना वक कसी छोट नौका से तट पर कूदता है ( चत्र 6.38)। जैसे ही ना वक आगे क ओर कूदता है तो क्या
नौका ग त करेगी? य द हाँ, तो कस दशा म और क्य ?

नािवक

तट
नौका

चत्र 6.38, पृष्ठ 113 — एक ना वक छोट नौका से तट क ओर आगे कूदते हुए (पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

हाँ — नौका पीछे क ओर, अथात तट से दूर क ओर ग त करेगी।

नािवक आगे कू दने के िलए नौका को पीछे की ओर बल F से धके लता है

न्यूट न के त ृत ीय िनयम से नौका नािवक को आगे की ओर उतने ही बल F से धके लती है

जल बहुत कम घषण दे त ा है, अतः नौका पर पीछे का बल लगभग िनिवरोध है

aनौका = F ÷ mनौका, तट से दू र की िदशा में

नौका क ग त इतनी स्पष्ट क्य दखती है: नौका छोट है, अतः उसका द्रव्यमान ना वक के द्रव्यमान से बहुत
अ धक नह है, और वह जल पर तैर रही है जहाँ घषण लगभग नगण्य है। इस लए वही बराबर और वपरीत बल
नौका म सरलता से दखने वाला त्वरण उत्पन्न कर दे ता है। य द ना वक घाट से बँधे कसी भारी जहाज से कूदता तो
उतना ही बल कह कम त्वरण दे ता और आपको दखाई ही न दे ता।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: इसी लए ना वक को पहले नौका बाँधने को कहा जाता है। य द धक्का दे ते समय नौका पीछे खसक जाए तो
आपके बल का कुछ भाग व्यथ चला जाता है और आप जल म गर सकते ह।

प्र.8 ऊँची कूद प्र तयो गता म खलाड़ी सतह पर सुर क्षत गर इसके लए रेत या फोम के ग े क व्यव ा क जाती है
( चत्र 6.39)। इसके पीछे का कारण स्पष्ट क जए।

छड़

गा

चत्र 6.39, पृष्ठ 113 — ऊँची कूद म छड़ को पार करता खलाड़ी और नीचे रखा ग ा (पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

ग ा उस समय को बढ़ा दे ता है जसम खलाड़ी का वेग घटकर शून्य होता है, जससे त्वरण और इस लए खलाड़ी पर लगने वाला
बल घट जाता है।

िखलाड़ ी नीचे की ओर वेग u से िगरता है और v = 0 पर रुकता है

a = (v – u) ÷ t = –u ÷ t

F = ma = –mu ÷ t

सतह कठोर हो या नरम, m और u वही रहते है ं

नरम ग ा → t बहत ु कम → |F| बहत
ु अिधक → |a| बहत ु कम

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्रभाव का प रमाण दे खए। मान ली जए m = 60 kg और u = 6 m s–1।

गरने क सतह रुकने का समय T A=U÷T F = MA

कठोर भूिम 0.02 s 300 m s–2 18 000 N

फोम का ग ा / रे त 0.50 s 12 m s–2 720 N

ऐसा क्य होता है: ग ा यह नह बदल सकता क खलाड़ी कतने वेग से आ रहा है, केवल यह बदल सकता है क
वह कतनी सौम्यता से रुकेगा। फोम या रेत दबते ह, इस लए वही वेग-प रवतन कह अ धक समय म होता है, त्वरण
घट जाता है और F = ma से ह य तथा जोड़ पर लगने वाला बल इस उदाहरण म लगभग 25 गुना कम हो जाता
है। यही तक गद लपकते समय हाथ पीछे ख चने, कार के एयरबैग और काँच क बुलबुल वाली पै कग पर भी लागू
होता है।

प्र.9 स ब्जय से भरी हुई एक ठे लागाड़ी कसी अन्य प्रत्येक दृ ष्ट से उसी के समान परंतु खाली ठे लागाड़ी से टकराती है।
टकराव के समय— (i) भरी हुई ठे लागाड़ी, खाली ठे लागाड़ी पर अ धक प रमाण का बल लगाती है। (ii) खाली
ठे लागाड़ी, भरी हुई ठे लागाड़ी पर अ धक प रमाण का बल लगाती है। (iii) दोन म से कोई भी ठे लागाड़ी दूसरी
ठे लागाड़ी पर बल नह लगाती है। (iv) भरी हुई ठे लागाड़ी और खाली ठे लागाड़ी दोन एक-दूसरे पर समान
प रमाण का बल लगाती ह।

सही वकल्प (iv) — दोन ठे लागा ड़याँ एक-दूसरे पर समान प रमाण का बल लगाती ह है।

न्यूट न का त ृत ीय िनयम: जब भी कोई वस्त ु दू सरी वस्त ु पर बल लगाती है,

दू सरी वस्त ु भी उसी समय पहली पर बराबर और िवपरीत बल लगाती है

F (भरी → खाली) = F (खाली → भरी), पिरमाण में

दोनों बल िदशा में िवपरीत है ं और अलग-अलग ठे लागािड़ यों पर लगते है ं

परंत ु त्वरण बराबर नही ं होते —

aखाली = F ÷ mखाली, aभरी = F ÷ mभरी

mभरी > mखाली → aखाली > aभरी

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
यह उत्तर पहले गलत क्य लगता है: हम खाली ठे लागाड़ी को दूर छटकते दे खते ह और मान लेते ह क उस पर
अ धक बल लगा। वस्तुतः हम उसका अ धक त्वरण दे ख रहे होते ह, अ धक बल नह । बल बराबरeह;
s mद्रव्यमान बराबर
m a
gl वस्तुओं के द्रव्यमान
नह ह, और .शेcषoकाम a = F/m कर दे ता है। न्यूटन का तृतीय नयम परस्पर क्रया करने वाली
eखmतक नह करता। a
a s
agl
का उल्ले

com
ag
क्या आप जानते ह? यही तक उदाहरण 6.7 को समझाता है — पृथ्वी और फल एक-दूसरे को बराबर बल से

m .
as e
ख चते ह, परंतु पृथ्वी का वशाल द्रव्यमान उसके त्वरण को इतना कम कर दे ता है क वह सं ान म ही नह आता।

a g l

co m
m.
प्र.10 व भन्न द्रव्यमान वाली वस्तुओं पर लगाए गए कसी बल ारा उत्पन्न त्वरण के संगत त्वरण-द्रव्यमान ाफ चत्र

m
6.40 म दशाया गया है। इस त के लए बल-द्रव्यमान ाफ आले खत क जए।
as e
.co a g l
se m
g l a
a
m a s
10.0
m .co agl
l a se
a g
7.5
(m s⁻²)

co m
m .
5.0
ase
com g l
णरवत्

m . a
ase
agl
2.5

se m
com g l a
1em
. a
0
a s 2 3 4 5
agl द व्यमान (kg)

co m
.
चत्र 6.40, पृष्ठ 114 — त्वरण-द्रव्यमान ाफ; मु द्रत मान (1 kg, 10.0 m s⁻²), (2 kg, 5.0 m s⁻²), (4 kg, 2.5

m a s em
m s⁻²) और (5 kg, 2.0 m s⁻²) से पुनः आले खत।

e m . co agl
g l as
a c
.

s e m
m a
agl
बल-द्रव्यमान ग्राफ F = 10 N पर एक क्षै तज सरल रेखा होगा, क्य क प्रत्येक वस्तु पर वही बल लगाया गया था।
. co
e m
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


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िचत्र 6.40 से मानों के युग् म पिढ़ ए और F = ma लगाइए —

m = 1 kg, a = 10.0 m s–2 → F = 1 kg × 10.0 m s–2 = 10 N

m = 2 kg, a = 5.0 m s–2 → F = 2 kg × 5.0 m s–2 = 10 N

m = 4 kg, a = 2.5 m s–2 → F = 4 kg × 2.5 m s–2 = 10 N

m = 5 kg, a = 2.0 m s–2 → F = 5 kg × 2.0 m s–2 = 10 N

पत् येक द व्यमान के िलए F = 10 N

बल (N)

15
F = 10 N, िनयत
10

5

1 2 3 4 5
दव्यमान (kg)
चत्र 6.40 के लए बल-द्रव्यमान ग्राफ — F = 10 N पर द्रव्यमान-अक्ष के समानांतर एक सरल रेखा।

दोन ाफ इतने भन्न क्य दखते ह: चत्र 6.40 का त्वरण-द्रव्यमान ग्राफ गरती हुई वक्र रेखा है क्य क a =
F/m — F नयत होने पर a, m का व्युत्क्रमानुपाती है, अतः वक्र पहले तेजी से गरता है और फर चपटा हो जाता
है। प्रत्येक बदु को उसी के द्रव्यमान से गुणा करने पर यह व्युत्क्रम संबंध ठ क-ठ क नरस्त हो जाता है और
गुणनफल F हर जगह एक-सा आता है। इस लए क्षै तज बल-द्रव्यमान रेखा इसी बात का ग्राफ य कथन है क
"प्रत्येक वस्तु पर एक ही बल लगाया गया था"।

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प्र.11 सरल रेखा म ग तमान 10 kg द्रव्यमान क कसी वस्तु का वेग-समय ाफ चत्र 6.41 म दशाया गया है। ाफ का
उपयोग करके वस्तु पर लगने वाले बल का प रकलन क जए।

30
(m s⁻¹)

20
गवे

10

0 4 8
समय (s)
चत्र 6.41, पृष्ठ 114 — वेग-समय ाफ; (0 s, 10 m s⁻¹), (4 s, 20 m s⁻¹) और (8 s, 30 m s⁻¹) से होकर जाती
सरल रेखा।

वस्तु पर लगने वाला बल 25 N है, ग त क दशा म।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

िचत्र 6.41 से, गाफ इन िबंद ुओ ं से होकर जाने वाली सरल रेखा है —

(t = 0 s, v = 10 m s–1), (t = 4 s, v = 20 m s–1), (t = 8 s, v = 30 m s–1)

त्वरण = वेग-समय गाफ की ढाल = (v – u) ÷ t

a = (30 m s–1 – 10 m s–1) ÷ (8 s – 0 s)

a = 20 m s–1 ÷ 8 s = 2.5 m s–2

न्यूट न का ि तीय िनयम: F = ma

F = 10 kg × 2.5 m s–2

F = 25 kg m s–2 = 25 N

स्वयं जाँ चए: दूसरे बदु-युग्म से — a = (20 – 10) m s–1 ÷ (4 – 0) s = 2.5 m s–2। वही उत्तर, जो पु ष्ट
करता है क रेखा वास्तव म सरल है और त्वरण नयत है।

ढाल त्वरण क्य दे ती है: त्वरण क प रभाषा ही है वेग म प रवतन बटा लया गया समय, और वेग-समय ग्राफ पर
"ऊध्वाधर वृ द्ध बटा क्षै तज वृ द्ध" ठ क यही मापती है। रेखा सरल है, इस लए ढाल — और इस लए बल — पूरी
ग त म समान रहता है। वक्र वेग-समय ग्राफ का अथ बदलता हुआ बल होता।

प्र.12 100 m s–1 के वेग से ग तमान 50 g द्रव्यमान क कोई गोली एक र भारी लकड़ी के गुटके म प्रवेश करती है
और 50 cm क दूरी तक भेदने के प ात रुक जाती है। गोली पर लगने वाले अवरोधक बल का आकलन
क जए (मान ली जए क गुटके के भीतर गोली का त्वरण अचर है)।

अवरोधक बल 500 N है, जो गोली क ग त क वपरीत दशा म लगता है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

पहले SI मात्रकों में बदिलए

m = 50 g = 0.05 kg, u = 100 m s–1, v = 0 m s–1, s = 50 cm = 0.5 m

चरण 1 — त् वरण ात कीिजए, v2 = u2 + 2as से

(0 m s–1)2 = (100 m s–1)2 + 2 × a × 0.5 m

0 = 10 000 m2 s–2 + (1.0 m) a

a = –10 000 m2 s–2 ÷ 1.0 m = –10 000 m s–2

चरण 2 — बल ात कीिजए, F = ma से

F = 0.05 kg × (–10 000 m s–2)
F = –500 N

ऋण िचह्न दश ता है िक बल गित का िवरोध करता है; इसका पिरमाण 500 N है

बल इतना बड़ा क्य है: गोली अपना पूरा 100 m s–1 का वेग लकड़ी म केवल आधे मीटर के भीतर खो दे ती है।
इतनी कम दूरी म इतना बड़ा वेग-प रवतन वशाल मंदन दे ता है, और F = ma उसे बड़े बल म बदल दे ता है —
यद्य प गोली का द्रव्यमान केवल 50 g है, जसका भार लगभग 0.49 N ही है। अवरोधक बल गोली के अपने भार से
हजार गुना से भी अ धक है।

संकेत: प्र त ापन से पहले ग्राम को कलोग्राम और सट मीटर को मीटर म बदलना अ नवाय है, अन्यथा उत्तर न्यूटन
म नह आएगा। 50 g = 0.05 kg और 50 cm = 0.5 m।

प्र.13 एक ेष्ठ फुटबॉलर ने फुटबॉल पर 108 km h–1 के वेग से प्रहार करके उसको मले क्ष तपूरक नशाने
(penalty shot) को गोल म प रव तत कर दया। उसके ारा लगाया गया अनुमा नत बल 800 N था।
फुटबॉल का द्रव्यमान 0.4 kg था। उसके पैर और गद के मध्य संपक समय क गणना क जए।

संपक समय 0.015 s, अथात 15 मलीसेकंड है।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
em.
चरण 1 — वेग को SI मात्रक में बदिलए
m l as
.co
v = 108 km h–1 = 108 × 1000 m ÷ 3600 s = 30 m s–1
m a g
l a se
a g
गेंद िवरामावस्था से चलती है, अतः u = 0 m s–1

co m
चरण 2 — त् वरण ात कीिजए, F = ma से
e m . ag
a = F ÷ m = 800 N ÷ 0.4 kg
g l as
a
a = 2000 kg m s–2 ÷ kg = 2000 m s–2

co m
e m.
m l as
.co g
चरण 3 — संपक समय ात कीिजए, v = u + at से

emms–1 = 0 m s–1 + (2000 m s–2) t a
a s
gl
30
a t = 30 m s–1 ÷ 2000 m s–2

m a s
.co agl
t = 0.015 s = 15 ms

se m
g l a
a
समय इतना कम क्य है: केवल 0.4 kg द्रव्यमान पर 800 N का बल 2000 m s–2 का वशाल त्वरण दे ता है —
लगभग g का 200 गुना। इस दर पर गद पलक झपकने के अंश म 30 m s–1 तक पहुँच जाती है। इसी लए फुटबॉल
co m
m .
as e
जूते से लगभग तत्काल छू ट जाती है और पैर से दबकर उसका आकार बदलते दे खने के लए उच्च ग त के कैमरे
m l
.co a g
चा हए।

se m
g l a
a संकेत: km h–1 को m s–1 म बदलने के लए 5/18 से गुणा क जए। यहाँ 108 × 5/18 = 30 m s–1।

se m
com g l a
m . a
gl ase
a
प्र.14 2 kg द्रव्यमान क एक वस्तु 10 m s–1 के नयत वेग से ग तमान है। यह एक खुरदरे क्षेत्र म प्रवेश करती है जहाँ
वस्तु पर घषण बल 7 N है। उसी समय वस्तु पर उसक ग त का वरोध करते हुए 3 N का एक अ त रक्त नयत
बल लगाया जाता है। खुरदरे क्षेत्र म प्रवेश करने के प ात वस्तु वरामाव
co m
ा म आने से पूव कतनी दूरी तय

m .
e
करती है?

com g l as
. a
a sem

agl वस्तु खुरदरे क्षेत्र म रुकने से पहले 10 m दूरी तय करती है।
c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

चरण 1 — पिरणामी बल ात कीिजए। दोनों बल गित का िवरोध करते है,ं अतः जुड़ते है।
ं

Fपिरणामी = 7 N + 3 N = 10 N, गित के िवपरीत िदशा में

चरण 2 — त् वरण ात कीिजए, F = ma से

a = F ÷ m = –10 N ÷ 2 kg

a = –5 m s–2 (ऋणात्मक, क्योंिक यह गित को मंद करता है)

चरण 3 — दू री ात कीिजए, v2 = u2 + 2as से, जहाँ u = 10 m s–1, v = 0

(0 m s–1)2 = (10 m s–1)2 + 2 × (–5 m s–2) × s

0 = 100 m2 s–2 – (10 m s–2) s

s = 100 m2 s–2 ÷ 10 m s–2 = 10 m

दोन बल जुड़ते क्य ह: घषण बल ग त क वपरीत दशा म लगता है और प्रश्न म कहा गया है क अ त रक्त 3 N
का बल भी ग त का वरोध कर रहा है। एक ही दशा के बल सदै व प रमाण म जुड़ते ह, अतः वस्तु पर एक ही 10 N
का अवरोधक बल लगता है। खुरदरे क्षेत्र से पहले वस्तु का वेग नयत था, जसका अथ है वहाँ प रणामी बल शून्य था
— खुरदरा क्षेत्र ही प रणामी बल को शून्येतर बनाता है।

स्वयं जाँ चए: रुकने म लगा समय t = (v – u)/a = (0 – 10 m s–1) ÷ (–5 m s–2) = 2 s, और औसत वेग
(10 + 0)/2 = 5 m s–1। दूरी = 5 m s–1 × 2 s = 10 m ✓

प्र.15 कोई ै क्टर m1 द्रव्यमान के हैरो (जुताई उपकरण) को प रणामी बल F से ख चता है जसके प रणामस्वरूप हैरो
म a1 त्वरण उत्पन्न होता है। वही ै क्टर m2 द्रव्यमान क कसी ॉली को F बल से ख चता है जसके
प रणामस्वरूप ॉली म a2 त्वरण उत्पन्न होता है। य द ै क्टर अब हैरो को ॉली पर रखकर उसे उसी बल F से
ख चता है तो a1 और a2 के पद म प रणामी त्वरण का व्यंजक प्राप्त क जए। घषण को नगण्य मान ली जए।

प रणामी त्वरण a = a1a2 ÷ (a1 + a2) होगा।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

चरण 1 — पत् येक द व्यमान को F और उसके त् वरण के पदों में िलिखए, F = ma से

के वल हैरो: F = m1a1 → m1 = F ÷ a1

के वल टॉली: F = m2a2 → m2 = F ÷ a2

चरण 2 — हैरो + ट ॉली को एक िनकाय मािनए (समीकरण 6.4)

a = F ÷ (m1 + m2)

चरण 3 — द व्यमान पित स्थािपत कीिजए

a = F ÷ (F/a1 + F/a2)

a = F ÷ [ F (1/a1 + 1/a2) ]

a = 1 ÷ (1/a1 + 1/a2)

a = a1a2 ÷ (a1 + a2)

संख्याओं से त्व रत जाँच। मान ली जए a1 = 6 m s–2 और a2 = 3 m s–2।

a = (6 × 3) ÷ (6 + 3) m s–2 = 18 ÷ 9 = 2 m s–2
यह a1 और a2 दोनों से कम है — होना भी यही चािहए, क्योंिक अब वही बल अिधक कु ल द व्यमान खी ंच रहा है

व्युत्क्रम क्य आते ह: द्रव्यमान जुड़ते ह, त्वरण नह । चूँ क a = F/m है, नयत बल पर द्रव्यमान त्वरण का
व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस लए द्रव्यमान को जोड़ने का अथ है त्वरण के व्युत्क्रम जोड़ना — यही कारण है क
उत्तर का रूप समांतर क्रम के प्र तरोध या संपक म रखे लस जैसा है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.16 जब कसी दं ड चुंबक के ुव को चुंबक य दक्सूचक (magnetic compass) के नकट लाया जाता है तो दं ड
चुंबक और दक्सूचक सुई (जो स्वयं भी एक चुंबक है) एक-दूसरे पर चुंबक य बल लगाते ह। न्यूटन के ग त के
तृतीय नयमानुसार दोन बल प रमाण म बराबर और दशा म वपरीत होते ह। तथा प दक्सूचक सुई
(compass needle) ग त करता है जब क दं ड चुंबक ग त नह करता है ( चत्र 6.42)। ऐसा क्य होता है?
व्याख्या क जए।

दंड चुबं क

N
िदक्सूचक सुई

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N

W E

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चुबं कीय िदक्सूचक

चत्र 6.42, पृष्ठ 114 — दं ड चुंबक का ुव चुंबक य दक्सूचक के नकट; सुई घूमकर चुंबक क ओर हो जाती है
(पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

क्य क बराबर बल बराबर त्वरण उत्पन्न नह करते — दक्सूचक सुई का द्रव्यमान बहुत कम है और उस पर घषण भी लगभग नह
है, अतः वही बल उसे सरलता से घुमा दे ता है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

न्यूट न का त ृत ीय िनयम: |सुई पर बल| = |दंड चुंबक पर बल| = F

न्यूट न का ि तीय िनयम: a = F ÷ m

सुई: बहुत कम द व्यमान mसुई → बड़ ा त्वरण

दंड चुंबक: कही ं अिधक द व्यमान mचंबु क → अत्यंत कम त्वरण

द्रव्यमान। दक्सूचक क सुई चुंब कत धातु क एक पतली-सी पत्ती होती है जसका द्रव्यमान ग्राम के अंश जतना होता है; दं ड
चुंबक उससे कई गुना भारी होता है। a = F/m के अनुसार वही F सुई को कह बड़ा त्वरण दे ता है।
घषण। सुई एक नुक ली क लक (pivot) पर संतु लत रहती है, अतः उसके घूमने का लगभग कोई वरोध नह होता। दं ड चुंबक
मेज पर रखा है, जहाँ उसके और सतह के बीच का घषण छोटे चुंबक य बल को सरलता से संतु लत कर दे ता है और उस पर
प रणामी बल शून्य बना रहता है।

सामान्य सद्धांत: न्यूटन का तृतीय नयम केवल बल को नयत करता है, प रणाम को नह । इसके बाद प्रत्येक वस्तु
क्या करेगी यह उसके अपने द्रव्यमान और उस पर लगने वाले अन्य बल पर नभर करता है। उदाहरण 6.7 यही बात
वशाल पैमाने पर कहता है — पृथ्वी और फल एक-दूसरे को बराबर ख चते ह, परंतु पृथ्वी का वशाल द्रव्यमान
उसका त्वरण अमाप्य बना दे ता है। उदाहरण 6.8 इसे बंदूक और गोली से कहता है — वही 2 N गोली को 20 m s–
2 दे ता है परंतु बंदूक को केवल 0.4 m s–2।

यह क जए: दं ड चुंबक को कसी चकनी सतह पर ढ ला र खए, अथवा जल म थम कोल के टु कड़े पर तैराइए, और
दक्सूचक पास लाइए। अब चुंबक भी ग त करता दखेगा — क्य क आपने उसे रोके रखने वाला घषण हटा दया है।

प रयोजना काय — पृष्ठ 115
प रयोजना काय

प रयोजना काय

प्र.1 आप जानते ह क घषण बल संपक म आने वाली सतह क प्रकृ त पर नभर करता है। क्या यह इस बात पर भी
नभर करता है क सतह एक-दूसरे को कतनी दृढ़ता से दबाती ह? क्या ग त आरंभ होने से पूव कसी वस्तु पर
लगने वाला घषण बल ग त आरंभ होने के प ात लगने वाले घषण बल से अ धक होता है? क्या लुढ़कती हुई वस्तु
पर लगने वाला घषण बल फसलती हुई वस्तु पर लगने वाले घषण बल से कम होता है? इन प्रश्न के उत्तर ढूँ ढ़ए
और एक सूचनालेख बनाइए। ऐसे अवलोकन यह समझाने म सहायता करते ह क प हए का आ वष्कार मानव
इ तहास म एक महत्त्वपूण मील का पत्थर क्य था।

तीन प्रश्न का उत्तर है — हाँ। प्रत्येक को प्रयोग से कैसे सद्ध कर और क्या मलेगा, नीचे दया है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
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m.
प्रश्न जाँच कैसे कर क्या मलेगा

हाँ — दबावla
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sना होने पर पाठ ांक
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सतहे ं िकतनी दृ ढ़.ताcसे दबती है?ं
क्या घषण इस पर िनभर है िक उसी लकड़ी के गुटके को कमानीदार तुला से ख चए, फर
g
दोगु
लगभगaदोगुना हो जाता है
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उसके ऊपर वैसा ही दूसरा गुटका रखकर उसी सतह पर

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पुनः ख चए

क्या गित आरंभ होने से पूव का तुला को ध्यान से दे खए — फसलन के ठ क क्षण का हाँ — िफसलन आरंभ होते ही पाठ ाक ं
m
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घषण बाद के घषण से अिधक उच्चतम पा ांक, फर फसलते समय का र पा ांक थोड़ ा िगर जाता है (स्थैितक घषण > सप

sem
है? घषण)

क्या लुढ़कने का घषण िफसलने
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पहले गुटके को घसी टए, फर उसे चार कंच या खलौना हाँ — लुढ़कने वाला पाठ ांक कही ं कम
के घषण से कम है? गाड़ी के प हय पर रखकर उसी तुला से ख चए आता है

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प हए ने इ तहास क्य बदल दया: लुढ़कने का घषण फसलने के घषण का एक छोटा-सा e अंm
m a s
co को सतह क असमानताओं पर घसीटना नह पड़ता — वह उन्ह पार aकरglजाती है और कसी भी क्षण
श ही होता है, क्य क
लुढ़कती.वस्तु
m
संsपeक केवल एक छोटे क्षेत्र म होता है। लदे हुए स्लेज को भू म पर घसीटने म बड़ा और नरंतर बल चा हए; उसे
gl a
a प हय पर रख दे ने से यह बल अत्यंत कम हो जाता है, अतः एक बैल या एक व्य क्त उतना भार ख च लेता है जसके

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लए अन्यथा कई चा हए होते।

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अ े सूचनालेख म क्या होना चा हए:
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कमानीदार तुला वाले परीक्षण का नामां कत चत्र, जसम पा ांक N म अं कत हो।

m
आपके पा ांक क दं ड-आकृ त (bar chart) — एक गुटका बनाम दो गुटके; ग त आरंभ होने से पूव बनाम फसलते हुए;

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फसलना बनाम लुढ़कना।

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प्रत्येक तुलना के नीचे एक स्पष्ट नष्कष-वाक्य।
l a se
एक.c"तो इससे क्या" प — साइ कल के हब म बॉल बेय रग, ठे ल और सूटकेस केaपgहए, और ेक तथा टायर के खाँच को
m
se अ धक घषण क्य चा हए।
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प्र.2 समान द्रव्यमान वाली दो खलौना गा ड़याँ ली जए और प्रत्येक के ऊपर एक छड़ चुंबक चपका द जए ( चत्र
6.32)। एक चकनी सतह पर मीटर स्केल लगाइए। गा ड़य को मीटर स्केल के मध्य बदु के पास इस प्रकार र खए
क उनके सजातीय ुव एक-दूसरे को स्पश कर। गा ड़य को छो ड़ए और दो वराम घ ड़य का उपयोग करके
वरामाव ा म आने म उनके ारा लए गए समय और प्रत्येक ारा रुकने से पहले तय क गई दूरी अ भले खत
क जए। दोन गा ड़य म समान द्रव्यमान जोड़ने के प ात प्रयोग को दोहराइए। क्या गा ड़य ने वपरीत दशाओं
म समान दूरी तय क है? तय क गई दूरी-द्रव्यमान का ाफ बनाइए। अपने नष्कष का व ेषण क जए और
उन पर चचा क जए।

छड़ चुंबक

िखलौना गाड़ ी िखलौना गाड़ ी
चत्र 6.31, पृष्ठ 110 — दो खलौना गा ड़याँ, प्रत्येक पर एक छड़ चुंबक, एक-दूसरे पर बराबर और वपरीत चुंबक य
बल लगाती हुई (पुनः च त्रत रेखा चत्र)। ध्यान द जए: प्रश्न म “ चत्र 6.32” छपा है, परंतु पुस्तक म चत्र 6.32 आवे शत
गुब्बार का है; छड़ चुंबक वाली खलौना गा ड़याँ चत्र 6.31 म ह। इस क्रयाकलाप म सजातीय ुव स्पश कराए जाते
ह, इस लए दोन बल बाहर क ओर ह गे।

हाँ — दोन गा ड़याँ वपरीत दशाओं म लगभग बराबर दूरी तय करती ह, और द्रव्यमान बढ़ाने पर दोन दू रयाँ घट जाती ह।

सजातीय धु व पितकिषत करते है,ं अतः पत्येक गाड़ ी दू सरी को दू र धके लती है

न्यूट न का त ृत ीय िनयम: |गाड़ ी A पर बल| = |गाड़ ी B पर बल| = F

द व्यमान समान → दोनों का a = F ÷ m समान → चाल समान, िदशाएँ िवपरीत

दोनों में समान द व्यमान जोड़ ने पर: F अपिरवितत, m अिधक

→ a कम → पत्येक गाड़ ी कम चाल से चलती है → कम दू री

ाफ कैसा दखेगा। तय क गई दूरी (y-अक्ष) बनाम एक गाड़ी का कुल द्रव्यमान (x-अक्ष) आले खत क जए। आपको गरता
हुआ वक्र मलेगा — अ धक द्रव्यमान, कम दूरी — सरल रेखा नह ।

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प्रयास प्रत्येक गाड़ी का द्रव्यमान गाड़ी A ारा तय दूरी गाड़ी B ारा तय दूरी

1 m सबसे अ धक A के लगभग बराबर

2 2m कम A के लगभग बराबर

3 3m सबसे कम A के लगभग बराबर

व ेषण: बराबर दू रयाँ न्यूटन के तृतीय नयम क पु ष्ट करती ह — दोन गा ड़य पर चुंबक य धक्का बराबर है।
घटती दू रयाँ तीय नयम क पु ष्ट करती ह — समान बल पर भारी गाड़ी को कम त्वरण मलता है, अतः वह कम
चाल से चलना आरंभ करती है और घषण उसे शीघ्र रोक दे ता है। एक ही प्रयास म दोन गा ड़य के बीच के छोटे
अंतर पर ईमानदारी से चचा क जए — चुंबक क असमान प्रबलता, प हय का भन्न घषण, असमतल सतह अथवा
दोन वराम घ ड़य म प्र त क्रया-समय का अंतर।

संकेत: दोन गा ड़य को ठ क एक ही क्षण छो ड़ए और दोन वराम घ ड़याँ साथ चालू क जए। प्रत्येक प्रयास तीन
बार दोहराकर औसत ली जए — ऐसे प्रयोग का एक ही प्रयास वश्वसनीय नह होता।

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प्र.3 एक वृक्ष क खुरदरी शाखा या खंभे के चार ओर एक बार रस्सी लपे टए। एक भारी बाल्ट को एक सरे से बाँ धए
और दूसरे सरे से उसे रोकने का प्रयास क जए ( चत्र 6.43)। अब रस्सी को एक बार और लपे टए तथा प्रयास
दोहराइए। आप पाएँगे क जतनी अ धक बार आप रस्सी को लपेटते ह रस्सी और शाखा के मध्य पकड़ बढ़ती
जाती है जससे घषण बढ़ता है और भार को थामे रखने के लए आवश्यक बल कम हो जाता है। प रणामस्वरूप
भार को थामे रखना बहुत सरल हो जाता है। केवल एक बार लपेटने से प्रयास म कमी, उस कमी से कह अ धक
होगी जतनी आपने अपेक्षा क होगी। यह दशाता है क घषण एक सरल रै खक ढं ग से नह बढ़ता है, संपक म
छोटे प रवतन भी बल म बड़े प रवतन ला सकते ह। इसी प्रकार रस्सी और खंभे के मध्य घषण बड़े जहाज को
घाट पर सुर क्षत रूप से रोके रखने म सक्षम बनाता है।

शाखा पर एक बार
लपेटी गई रस्सी
शाखा

भारी बाल्टी

चत्र 6.43, पृष्ठ 115 — खुरदरी शाखा पर एक बार लपेट गई रस्सी, एक सरे पर भारी बाल्ट और दूसरा सरा हाथ से
थामा हुआ (पुनः च त्रत रेखा चत्र)।

आप क्या दे खगे: बना लपेटे आपको बाल्ट का लगभग पूरा भार थामना पड़ता है। एक बार लपेटने पर यह स्पष्ट रूप से सरल हो
जाता है; दो बार लपेटने पर उसी बाल्ट को आप बहुत कम प्रयास से थाम लेते ह; तीन-चार बार लपेटने पर दो अँगु लय से ही काम
चल जाता है।

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लपेट क उसी बाल्ट को थामने म आवश्यक क्या हो रहा है
संख्या प्रयास

0 लगभग पूरा भार खंभे से कोई घषण नह ; केवल आपका हाथ भार सँभाल रहा है

1 प ट रूप से कम
स् ष् लपट हुई लंबाई पर लगने वाला घषण भार का कुछ भाग उठा
लेता है

2 बहुत कम दूसरे लपेट का घषण पहले से ही घटे हुए तनाव पर लगता है

3 या अिधक नाममात्र कमी लपेट-दर-लपेट गु णत होती जाती है

कमी अपेक्षा से इतनी अ धक क्य होती है: घषण रस्सी क उस पूरी लंबाई पर लगता है जो खंभे के संपक म है,
और प्रत्येक बदु पर वह शेष बचे तनाव का एक अंश हटा दे ता है। इस लए हर नया लपेट कोई नयत बल नह घटाता
— वह पछले लपेट के बाद बचे तनाव को गुणा करके घटा दे ता है। कसी भन्न से बार-बार गुणा करने पर मान बहुत
तेजी से गरता है, और "घषण सरल रै खक ढं ग से नह बढ़ता" का अथ यहाँ यही है।

सुरक्षा और ईमानदार प्र तवेदन: पहले हल्क बाल्ट से आरंभ क जए, पैर हटाकर खड़े र हए, और य द संभव हो
तो प्रयास को अनुमान से नह , कमानीदार तुला से अ भले खत क जए। फर ल खए क यही वचार और कहाँ काम
करता है — घाट पर बोलाड के चार ओर लपट जहाज क रस्सी, पवतारोही क बलेइंग, और बैलगाड़ी क रस्सी
का खूँटे पर लपेटा जाना।

प्र.4 यह दे खना प्राय: शक्षाप्रद होता है क समय के साथ वै ा नक वचार कस प्रकार से वक सत होते ह। य द आप
रु च रखते ह तो न्यूटन ारा ग त के नयम को प्र तपा दत करने के प्रकार का पता लगाने के लए उनक मूल
कृ त प्र स पया के अंश प ढ़ए। इस ंथ का मूल पाठ और उस पर क गई ट काएँ दोन ऑनलाइन उपलब्ध ह।

इस प रयोजना क व ध: अनुवाद म एक छोटा अंश प ढ़ए, न्यूटन के अपने शब्द क तुलना इस अध्याय के आधु नक कथन से
क जए, और ल खए क क्या बदला और क्या नह ।

1. Philosophiæ Naturalis Principia Mathematica (1687) का कोई अंग्रेजी अनुवाद खो जए और आरंभ म दए
"Axioms, or Laws of Motion" वाले भाग को ही प ढ़ए — यह मु श्कल से दो पृष्ठ का है।
2. ध्यान द जए क न्यूटन ने अपना तीय नयम ग त (motion) के पद म कहा था — जसे आज हम संवेग अथात द्रव्यमान
× वेग कहते ह — F = ma के रूप म नह । इस अध्याय के खंड 6.5 के "आइए, और चतन कर" बॉक्स म यही पूण रूप दया
गया है।
3. वचार को पीछे तक खो जए — गैली लयो का योगदान क्या था और न्यूटन ने उसम क्या जोड़ा?
4. न्यूटन के कथन और अध्याय के कथन क नयम-दर- नयम तुलना करते हुए एक पृष्ठ ल खए।

नमूना उत्तर ( जस पर आप अपना काय बना सकते ह):

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कक्षा 9 व ान अध्याय 6 ग त पर बल का प्रभाव
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वचार न्यूटन से पहले न्यूटन का योगदान

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गित का
.cलएo भी बल चा हए
यह गलत धारणा थी क वस्तु को नयत वेग से ग तमान रखने के
ग त के लए नह a g l
बल केवल वेग के प रवतन के लए चा हए; एकसमान
कारण
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aजड़त्व गैली लयो ने वचार प्रयोग से तक दया क बाधाएँ हटा द जाएँ न्यूटन ने इस गुण को जड़त्व नाम दया और उसे प्रथम
तो वस्तु ग तमान बनी रहेगी नयम बनाया

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बल और कोई संख्यात्मक नयम नह
e m . तीय नयम — संवेग म प रवतन क दर प रणामी ag
त्वरण
g l as बल के समानुपाती

परस्पर
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बल को एक ही वस्तु पर लगने वाला माना जाता था तृतीय नयम — बल सदै व दो अलग वस्तुओं पर बराबर
िक्रया और वपरीत युग्म म
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emआ रही एक धारणा का ान लया, और ऐसा इस लए हुआ क्य क वचार प्रयोग तथा सावधान प्रेक्षण ने
यह करना क्य उपयोगी है: इससे पता चलता है क तीन नयम स्वत:स्पष्ट नह थे। उन्ह ने लगभग दो हजार वष
सेsचली
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gl उस धारणा का खंडन कया। मूल ग्रंथ पढ़ने से यह भी दखता है क भौ तक का कतना बड़ा भाग सावधान
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प रभाषाओं का है — न्यूटन एक भी नयम कहने से पहले द्रव्यमान, संवेग और बल क प रभाषाओं म कई पृष्ठ
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लगाते ह।

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क्या आप जानते ह? न्यूटन के नयम आज भी दै नं दक वस्तुओं से लेकर ग्रह और तार तक ग त का वणन करते ह।

m
इनम संशोधन केवल अत्यंत भारी पड के नकट, प्रकाश क ग त के समीप क चाल पर, और परमाणु के आकार

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के अत्यंत सूक्ष्म कण के लए आवश्यक होता है।

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अध्याय — एक नज़र म
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बल का प रमाण और दशा दोन होते ह। इसका SI मात्रक न्यूटन (N) है और इसे कमानीदार तुला से मापा जाता है। एक

a gl
न्यूटन वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान वाली वस्तु म 1 m s–2 का त्वरण उत्पन्न करता है।
प रमाण म बराबर और दशा म वपरीत बल संतु लत होते ह; प रणामी बल शून्य होता है। असंतु लत बल से शून्येतर

co
प रणामी बल मलता है — एक ही दशा के बल जुड़ते ह, वपरीत दशा के घटते ह। वस्तु क ग त केवल प रणामी बल पर
m
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नभर करती है।

om है। इसके बना कोई ग तमान वस्तु स्वयं कभी धीमी नह होती। g l as
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घषण बल सदै व ग त (या ग त के प्रयास) क वपरीत दशा म लगता है और संपक म आने वाली सतह क प्रकृ त पर नभर

se m
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न्यूटन का प्रथम नयम — कोई वस्तु वरामाव ा म है तो वरामाव ा म ही रहेगी और ग तमान है तो नयत वेग से ग त

.c
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करती रहेगी, जब तक उस पर कोई प रणामी बल काय न करे। प रणामी बल शून्य का अथ है त्वरण शून्य — वेग शून्य नह ।

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न्यूटन का तीय नयम — a = F/m, अथात F = ma। त्वरण प रणामी बल क दशा म होता है, बल के समानुपाती और

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द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। वस्तु का भार F = mg है, जहाँ पृथ्वी क सतह के नकट g = 9.8 m s–2।

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न्यूटन का तृतीय नयम — य द वस्तु A, वस्तु B पर बल लगाती है तो उसी क्षण B भी A पर बराबर और वपरीत बल लगाती
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है। ये दोन बल अलग-अलग वस्तुओं पर लगते ह, इस लए एक-दूसरे को नरस्त नह करते। बराबर बल बराबर त्वरण उत्पन्न

m
नह करते, क्य क द्रव्यमान भन्न होते ह।

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Board / OrgNCERT
ExamClass 9
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Pages62
Languagehindi
Updated19 Sep 2026