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अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु
सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/1/1
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
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9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै
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MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII A I S S C E-March 2020
CODE NO. 61/1/1
Q.NO अपेक्षित उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARK
. NO. S
SECTION-A
1. D- पुरा वनस्पतिज्ञो Pg-2 1
2. D- . इसकी तिखाई आज िक पढ़ी नहीीं जा सकी है Pg-15 1
3. C- ब्राह्मी और खरोष्ठी Pg-28 1
4. तिखुणी OR Pg-92 1
अपने अनुयातययोीं को बुद्ध का अींतिम सींदेश था-“िुम सब अपने तिए खुद ही ज्योति
बनो क्ोींतक िुम खुद ही अपनी मुक्ति का रास्ता ढूँ ढना है ” Pg-92 1
5. B- उत्तरायणायण सुत्त Pg-88 1
6. मथुरा (िगवान महावीर) से िीथंकर की छतव Pg-88 1
दृतिबातििोीं के तिए: सुत्त तपिक Pg-91 1
7. C- I और III Pg-94 1
8. (A)- - दोनोीं (A) और (R) सही हैं और(A) ,(R) सही स्पिीकरण है । Pg-130 1
9. (A) यह पुस्तक फारसी में तिखी गई है । Pg-118 1
10. मीराबाई Pg-164 1
11. गुरु गोतबींद तसींह Pg-164 1
12. गुरु रामानींद Pg-162 1
1
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अथवा
बसवण्णा Pg-147 1
13. (A)I, III औरीं IV Pg-233 1
14. (D) औरीं गजेब Pg-234 1
15. ितमि वेद Pg-144 1
16. (B) तिप्स तमशन Pg-363 1
17. (C) I, III औरीं IV Pg-425 1
18. (C) गोतवींद बल्लि पींि Pg-418 1
19. (C). स्विींत्र िारि के तिए उपयुि राजतनतिक स्वरुप सुझाने के तिए Pg-389 1
20. अगस्त 1946 में मुस्लिम लीग द्वारा प्रयति काययवाही क्षिवस ’की घोषणा
करने का कारण-, कैतबनेट तमशन से अपना समथथन वापस िेने के बाद अपनी Pg-391 1
पातकस्तान की माूँ ग को जीिना था।
SECTION-B
21. क्षवशाल स्नानगार
i. तवशाि स्नानगार आूँ गन में बना एक तवशाि आयािकार
जिाशय था जो गतियारोीं से चारो िरफ से तिरा था
ii. जिाशय में जाने के तिए उत्तर और दतिण में सीतढया बनी थी
iii. जिाशय के तकनारो को ईटोीं को जमाकर जि बद्ध तकया
गया था
iv. इसके चारोीं और कि बने हुए थे तजस पास कुआीं था
v. जिाशय से पानी नािे में जािा था.
vi. गतियारे के दोनोीं ओर अन्य स्नानगार थे।
vii. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
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तकन्ीीं िीन तबींदुओीं की व्याख्या की जाए
Pg-8 3
22. अल-क्षिरूनी के सामने आयी िाधाएं
i. पहिी बािा िाषा थी।
ii. दसरा िातमथक तवश्वासोीं और प्रथाओीं में अींिर था।
iii. िीसरा अवरोि अतिमान था
iv. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
तकन्ीीं िीन तबींदुओीं की व्याख्या की जाए Pg-124 3
23. 1857 के िाि औपक्षनवेक्षशक शहर-
i. 1857 के बाद िारि में तब्रतटश रवैया तवद्रोह के िगािार डर से आकार िे
रहा था।
ii. गोरे िोगोीं को अतिक सुरतिि और अिग िेत्रोीं में रहने की जरूरि थी।
iii. गोरे िोगोीं के तिए तसतवि िाइन तवकतसि हुई।
iv. सैतनकोीं को िैनाि करने के तिए कैंटोनमेंट बनाए गए थे।
v. िारिीयोीं के तिए अिग िेत्र सामने आया। Pg-
vi. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु। 326-
3
327
तकसी िी िीन तबींदुओीं की जाींच की जानी चातहए
अथवा
िक्षिण भारत के शहर- मुख्य क्षवशेषताएं -
i. मदु रई और काीं चीपुरम जैसे दतिण िारि के शहरोीं में, मुख्य ध्यान
मींतदर था।
ii. ये शहर महत्वपणथ व्यावसातयक केंद्र िी थे।
iii. यहाूँ िातमथक त्योहार अक्सर मेिोीं को व्यापार के साथ िीथथ यात्रा से
जोड़िे हैं ।
iv. शहर वे स्थान थे जहाूँ हर तकसी को शासक कुिीन वगथ के वचथस्व वािे
सामातजक व्यवस्था में अपनी क्तस्थति जानने की उम्मीद थी।
3
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v. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु। Pg- 3
तकसी िी िीन तबींदुओीं की जाीं च की जानी चातहए 318-
319
24. रौलट एक्ट:
i. प्रेस पर सेंसरतशप (अतिवेचन)
ii. तबना परीिण के कैद करना
iii. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
प्रभाव:
i. िारि बींद के आह्वान पर एक्ट के जवाब में दु कानें बींद हुईीं।
ii. प्रमुख स्थानीय काीं ग्रेस के िोगोीं को तगरफ्तार तकया गया
iii. पींजाब को बहुि नुकसान हुआ।
iv. अमृिसर में जतियाीं वािा बाग हत्याकाीं ड।
v. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
तकसी िी दो प्रिावोीं का उल्लेख तकया जाना है
Pg-349 1+2=3
SECTION-C
25. क्षववाह के क्षनयम:
i. वींश को जारी रखने के तिए बेटोीं को महत्वपणथ माना जािा था और बेतटयोीं
की शादी बाहर की जािी थी और िर के सींसािनोीं पर उनका कोई दावा
नहीीं था।
ii. एीं डोगामी और एक्सोगामी प्रचतिि थे।
iii. । बहुतववाह िी होिा था।
iv. बहुपतित्व- जैसे पाीं डवोीं में था।
v. िमथसत्रोीं और िमथशास्त्ोीं ने तववाह के आठ रूपोीं को मान्यिा दी, तजनमें से
केवि चार को ही अच्छा माना गया।
vi. िड़तकयोीं की शादी सही समय पर सही व्यक्ति से की जािी थी और
कन्यादान को तपिा का िातमथक किथव्य माना जािा था।
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vii. मतहिाओीं से अपेिा की गई थी तक वे अपने तपिा के गोत्र को त्याग दें और
तववाह पर अपने पति को गोद िें।
viii. उसी गोत्र के सदस्य तववाह नहीीं कर सकिे थे।
ix. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
x. तकन्ीीं चार तबींदुओीं का वणथन
अथवा
600BCE-600CE के िौरान पाररवाररक संिंध:
i. पररवार आमिौर पर बींिुत्व का तहस्सा थे।
ii. यह बींिुत्व माना जािा था, रि पर आिाररि था।
iii. बींिुत्के एक दसरे के साथ सींबींि थे िेतकन किी-किी वे झगड़ा करिे थे। Pg- 55, 4+4=8
iv. कौरवोीं और पाीं डवोीं के झगड़े ने के तवचार को मजबि तकया। सींसािनोीं 57-58
और तसींहासन का दावा कर सकिा है ।
i. रि के आिार पर पाररवाररक सींबींि स्वािातवक थे।
ii. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
तकन्ीीं DO तबींदुओीं का वणथन
क्षववाह के क्षनयम:
i. तववाह के प्रकार - अींि तववाह , बतह तबवाह.बहुपत्नी तववाह ,बहुपति
तववाह का पािन तकया गया।
ii. कन्यादान या तववाह में बेटी का उपहार तपिा का एक महत्वपणथ िातमथक
किथव्य माना जािा था।
iii. मतहिाओीं के गोत्र - मतहिाओीं से अपेिा की जािी थी तक वे अपने तपिा
के गोत्र को त्याग दें और अपने पति के तववाह पर उसे अपना िें।
iv. उसी गोत्र के सदस्य तववाह नहीीं कर सकिे थे।
v. प्रत्येक गोत्र का नाम एक वैतदक द्रिा के नाम पर रखा गया था।
vi. मािृसत्तात्मक समाज - सािवाहनोीं में मािाओीं के गोत्र से प्राप्त नाम थे।
vii. बहुतववाह िी होिा था।
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viii. बहुपतित्व- जैसे पाीं डवोीं में था।
ix. िमथसत्रोीं और िमथशास्त्ोीं ने तववाह के आठ रूपोीं को मान्यिा दी, तजनमें से
केवि चार को ही अच्छा माना गया।
x. कन्यादान को तपिा का िातमथक किथव्य माना जािा था।
xi. उसी गोत्र के सदस्य तववाह नहीीं कर सकिे थे।
xii. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
दोनोीं को तमिा कर तकन्ीीं चार तबींदुओीं का वणथन
अथवा
िंधुत्व
i. पररवार आमिौर पर बींिुत्व का तहस्सा थे।
ii. यह बींिुत्व माना जािा था, रि पर आिाररि था।
iii. बींिुत्के एक दसरे के साथ सींबींि थे िेतकन किी-किी वे झगड़ा करिे
थे।कौरवोीं और पाीं डवोीं के झगड़े ने के तवचार को मजबि तकया।सींसािनोीं
और तसींहासन का दावा कर सकिा है ।
iv. बींिुत्के एक दसरे के साथ सींबींि थे िेतकन किी-किी वे झगड़ा करिे थे।
v. कौरवोीं और पाीं डवोीं के झगड़े ने के तवचार को मजबि तकया। सींसािनोीं
Pg- 2+2+4=
और तसींहासन का दावा कर सकिा है । 55,56, 8
vi. रि के आिार पर पाररवाररक सींबींि स्वािातवक थे। 60-65,
vii. तववाह के प्रकार - अींि तववाह , बतह तबवाह.बहुपत्नी तववाह ,बहुपति 68
तववाह का पािन तकया गया।
viii. कन्यादान या तववाह में बेटी का उपहार तपिा का एक महत्वपणथ िातमथक
किथव्य माना जािा था।
v. मतहिाओीं के गोत्र - मतहिाओीं से अपेिा की जािी थी तक वे अपने तपिा
के गोत्र को त्याग दें और अपने पति के तववाह पर उसे अपना िें।
vi. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
तकन्ीीं चार तबींदुओीं का वणथन
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वणय व्यवस्था
i. िमथसत्र और िमथशास्त्ोीं में आदशथ व्यवसाय के बारे में तनयम थे।
ii. ब्राह्मणोीं को वेदोीं का अध्ययन और तशिा दे ना, बतिदान और अनुष्ठान
करना, उपहार दे ना और प्राप्त करना था।
iii. ितत्रय युद्ध में शातमि होिे थे, िोगोीं की रिा करिे थे और न्याय करिे थे,
वेदोीं का अध्ययन करिे थे, बतिदान दे िे थे और उपहार दे िे थे।
iv. वैश्य व्यापार, कृतष और दे हािी िमथ को तनिाना था, बतिदान प्राप्त करना
और उपहार दे ना था।
v. शद्रोीं को राजकीय कायथ करने और िीन उच्च वणों की सेवा करनी थी।
vi. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
तकन्ीीं चार तबींदुओीं का वणथन
यह क्षसद्ध करने के क्षलए क्षक इस क्षसद्धांत का सावयभौक्षमक रूप से पालन नही ं
क्षकया गया था:
i. गैर ितत्रय राजा- वणथ व्यवस्था के आदशथ पेशोीं के तवपरीि।शींग और कण्व
ब्राह्मण थे।
ii. कुछ सािवाहन रातनयोीं ने तववाह के बाद िी अपने तपिा के गोत्र को
बरकरार रखा।
iii. सािवाहन शासकोीं में एीं डोगैमी के उदाहरण पाए गए।
iv. तहतडम्बा के साथ िीम का तववाह िमथसत्रोीं से अिग था।
वाकाटक रानी प्रिािी गुप्ता द्वारा ितमदान दे ने का प्रचिन
v. एकिव्य को िीरीं दाजी कौशि प्राप्त करना
vi. मींडसोर तशिािेख आदशथ व्यवसाय के तनयमोीं से तवचिन का एक
उदाहरण है ।
vii. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु। (4)
तकन्ीीं चार तबींदुओीं का वणथन
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26. क्षवजयनगर के क्षकलेिंिी का महत्व:
i. फारस के शासक के एक राजदि अब्दु र रज्जाक ने तकिोीं और तकिेबींदी
की साि पींक्तियोीं का उल्लेख तकया है ।
ii. तवजयनगर की तकिेबींदी
iii. तकिेबींदी की साि पींक्तियाूँ थीीं।
iv. कृतष में आसपास के िेत्र और जींगिोीं को िी िेरा गया था
v. सबसे बहरी दीवार पहातड़योीं से जोड़िी थी
vi. यह तवशाि सरीं चना शुण्डाकार थी
vii. वगाथ कार और आयािकार बुजथ बहार की और तनकिे हुए थे
viii. इसको खेिोीं से िेरा गया था
ix. पहिी, दसरी और िीसरी दीवार के बीच में खेिी के खेि, बगीचे और िर
थे
x. िातमथक केंद्र और कृतष केंद्र के बीच एक कृतष िेत्र के साक्ष्य तमिे है
xi. कृतष िेत्र के चारोीं ओर तवस्तृि सुरिा रणनीति।
xii. एक दसरी पींक्तियाूँ शहरी पररसर के आीं िररक कोर के चारोीं ओर थी
xiii. एक िीसरी पींक्ति ने शाही केंद्र को िेर तिया था ।
Pg- 8
xiv. गारे के तबना तवशाि तचनाई तनमाथ ण। 177-
xv. िुींगिद्रा से पानी तनकािने वािी तवस्तृि नहर प्रणािी। 178
xvi. सींरतिि फाटक सड़कोीं से जुड़ा हुआ था
xvii. तकिेबींदी के बारे में इसका महत्व कृतष मागों से तिरा था।
xviii. तकिेबींदी के अींदर िेत्र थे, इस प्रकार िोगोीं और सैतनकोीं को िोजन प्रदान
करने का स्रोि।
xix. तकिेबींदी के अींदर की सड़कें सैतनकोीं की सेवा के तिए थीीं।
xx. तकिेबींदी की रे खा राजा और तवषयोीं को सुरिा प्रदान करने के तिए थी।
xxi. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
तकन्ीीं आठ तबींदुओीं की व्याख्या की जाए
अथवा
8
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क्षवजयनगर शहर के क्षलए जल के स्रोत:
i. िुींगिद्रा नदी शहर के पानी का मुख्य स्रोि थी।
ii. िुींगिद्रा की सहायक नतदयोीं िी िोगोीं और कृतष के तिए पानी की आपतिथ
करिी है ।
iii. तवतिन्न आकारोीं के जिाशयोीं को बनाने के तिए इन िाराओीं के साथ
िटबींि बनाए गए थे।
iv. पानी के िींडारण और आपतिथ के तिए एक तवशाि जिाशय का तनमाथ ण िी
तकया गया था। अब इसे कमिापुरम टैं क कहा जािा है ।
v. तहररया नहर शहर के िोगोीं के तिए पानी का एक और स्रोि था।
vi. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
Pg- 4+4
तकन्ीीं चार तबींदुओीं का वणथन
172,
क्षवजयनगर साम्राज्य के व्यापार का क्षवकास: 177
i. राजाओीं और व्यापाररयोीं द्वारा व्यापार तकया जािा था।
ii. सेना के तिए िोड़े अरब और मध्य एतशया से आयाि तकए गए थे।
iii. व्यापार को शुरू में अरब व्यापाररयोीं द्वारा तनयींतत्रि तकया गया था।
व्यापाररयोीं के स्थानीय समुदाय कुतदराई चेट्टी या िोड़ा व्यापाररयोीं ने इन में
िाग तिया।
iv. पुिथगािी सेना के तिए बेहिर िकनीक िी िाए।
v. तवजयनगर मसािे, वस्त् और कीमिी पत्थरोीं के व्यापार के तिए िी जाना
जािा था।
vi. उच्च मल्य वािे तवदे शी सामानोीं का िी कारोबार होिा था।
vii. राज्य ने इससे राजस्व िी अतजथि तकया।
viii. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु
तकन्ीीं चार तबींदुओीं का वणथन
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27. जमी ंिार राजस्व का भुगतान करने में क्ों क्षवफल रहे :
i. कींपनी ने महसस तकया तक राजस्व की माीं ग को ठीक करने के बाद,
जमीींदार अवैितनक शेष रातश के साथ तनयतमि रूप से िुगिान करें गे।
ii. बहुि अतिक माीं गोीं के कारण जमीींदार तवफि रहे ।
iii. ज़मीींदार राजस्व समय पर नहीीं जमा कर सक थे,
iv. फसि की परवाह तकए तबना राजस्व िय कर तदया गया था, और
समय पर िुगिान तकया जाना था।
v. सयाथ स्त कानन के अनुसार, यतद तनतदथ ि तितथ के सयाथ स्त िक िुगिान
नहीीं हुआ, िो ज़मीींदारी को नीिाम तकया जाना था।
vi. स्थायी बींदोबस्त ने जमीींदारोीं की शक्ति को रै यिोीं से तकराया वसिने
िक सीतमि कर तदया।
vii. जमीींदारोीं ने स्थानीय न्याय और स्थानीय पुतिस को व्यवक्तस्थि करने के
तिए अपनी शक्ति खो दी।
viii. किी-किी खराब मौसम या खराब फसि के कारण तकराया वसिना
मुक्तिि होिा था।
ix. किी-किी रै यिोीं ने जानबझकर िुगिान में दे री की।
Pg- 8
x. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु। 259-
एक परे के रूप में मल्याीं कन तकया जाना है 260
अथवा
ग्रामीण िंगाल में 19 वी ं सिी की शुरुआत में जोतिार
i. जब जमीींदार समस्याओीं का सामना कर रहे थे, िो कुछ अमीर
तकसान जोिदार कहिािे थे, गाूँ वोीं में अपनी शक्ति मजबि कर
रहे थे।
ii. ii। 19 वीीं शिाब्दी के प्रारीं ि िक जोिदार ने जोिदार ितम के
तवशाि िेत्रोीं का अतिग्रहण कर तिया था।
iii. उन्ोींने स्थानीय व्यापार के साथ-साथ ऋण को तनयींतत्रि तकया।
iv. उन्ोींने गाूँ व के तकसानोीं पर अपना प्रिाव डािा
10
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v. ज्यादािर जमीींदार अक्सर शहरी इिाकोीं में रहिे थे और जोिदारोीं
पर तनिथर हो गए थे।
vi. गाूँ वोीं के िीिर जोिदारोीं की शक्ति जमीींदारोीं से अतिक थी।
vii. चींतक गाूँ वोीं में क्तस्थि थे, इसतिए उनका तनयींत्रण काफी हद िक
गरीब ग्रामीणोीं पर था।
viii. उन्ोींने गाीं वोीं जमीींदारोीं का जमकर तवरोि तकया। Pg-261 8
ix. उन्ोींने जमीींदार के अतिकाररयोीं को रोका और उनके क्तखिाफ
तकसानोीं को िामबींद तकया।
x. यही कारण है तक जब जमीींदार के सम्पदा की नीिामी की गई, िो
खरीददारोीं के बीच की नीिामी हुई।
xi. उनके उदय ने ज़मीींदारी प्रातिकरण को अतनवायथ रूप से कमजोर
कर तदया।
xii. कोई अन्य प्रासींतगक तबींदु।
एक परे के रूप में मल्याीं कन तकया जाना है
SECTION-D
28.
सम्राट के अक्षधकारी की क्ा क्ा कायय करते थे
28.1 सम्राट के अक्षधकाररयों को क्षकस उद्दे श्य से क्षनयुक्त क्षकया गया था?
उत्तर: राजा के अतिकाररयोीं को तनयुि तकया गया था
i. िोगोीं की सेवा करने के तिए, तवतिन्न प्रकार की नौकररयोीं की दे खरे ख या
दे खिाि करना।
ii. िोगोीं पर प्रशासतनक तनयींत्रण के तिए। (2)
अक्षधकारीयों द्वारा क्षकये गए व्यवसाय के प्रकारो को स्पष्ट कीक्षजये
उत्तर:
i. कुछ अतिकाररयोीं ने नतदयोीं को अिीिण तदया।
ii. कुछ ने जमीन की पैमाइश की।
iii. iii। कुछ ने तनरीिण तकया तजसके द्वारा नहरोीं से पानी छोड़ा जािा है ।
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iv. कुछ िो तशकाररयोीं के आवेश थे।
v. अन्य िोगोीं ने कर एकत्र तकए।
vi. जमीन से जुड़े कुछ अिीिण व्यवसाय।
Pg-34 2+2+2=
(तकसी िी दो तबींदुओीं को समझाया जाए) (2)
6
कमयचाररयों के कायों का क्षनररिण करने की क्ा आवश्यकता थी थी?
उत्तर:
i. उन पर तनयींत्रण रखने के तिए काम करने वािोीं का काम अिीिक को
करना आवश्यक था।
ii. उनके काम को तवतनयतमि करने के तिए। (2)
29.
अकिर के शासन में भूक्षम का वगीकरण
चाछर भूक्षम तीन से चार वषय तक खली क्ों छोड़ी जाती थी ?
Ans: चचेर ितम को िीन से चार वषों के तिए अवाप्त तकया गया था
िातक
i. यह इस अवति के िीिर अपनी प्रजनन िमिा वापस पा सकिा है ।
ii. इससे उसकी िाकि ठीक हो सकिी है । (2)
29.2 इस वगीकरण का आधार स्पष्ट कीक्षजए।
उत्तर: वगीकरण पर आिाररि था
i. ितम की उवथरिा।
ii. प्रतिवषथ खेिी की जाने वािी तमट्टी की िमिा या नहीीं। (2)
Pg-214 2+2+2=
6
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29.3 क्ा आपको लगता है क्षक राजस्व का आकलन करने के क्षलए यह एक
ठोस आधार था?
उत्तर:
i. यह वगीकरण ितम के प्रकार और उत्पादकिा के अनुसार िय तकए गए
राजस्व का आकिन करने के तिए उतचि िगिा है ।
ii. इसने काश्तकारोीं के तिए राजस्व का िुगिान आसान बना तदया।
(2)
30. क्षवद्रोही ग्रामीण
30.1 इन ग्रामीणों से क्षनपटने में अंग्रेजों के सामने आने वाली समस्या की जााँच
करें ।
उत्तर:
i. अींग्रेजोीं को ग्रामीणोीं से तनपटने में बहुि समस्या का सामना करना
पड़ा। वे तब्रतटश अतिकाररयोीं को दे खकर दर चिे जािे थे।
ii. उन्ोींने बींदकोीं के साथ बड़ी सींख्या में तफर से एकत्र तकया।
(2)
३०.२अवध) के लोग अंग्रेजों के स्लखलाफ क्ों थे?
उत्तर:
i. अवि के िोग शत्रुिापणथ थे क्ोींतक अवि के राजा को अींग्रेज़ोीं ने
तनष्कातसि कर तदया था
ii. िोकतप्रय राजा वातजद अिी शाह को किकत्ता में तनवाथ तसि और
तनवाथ तसि कर तदया गया था।
iii. तविटन के साथ कई िोगोीं ने अपनी आजीतवका खो दी। (2)
Pg-
296,
297, 2+2+2=
305, 6
306
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30.3 अंग्रेजों ने क्षवद्रोक्षहयों का िमन कैसे क्षकया?
उत्तर:
i. तवद्रोतहयोीं को वश में करने के तिए अींग्रेजोीं ने दमनकारी उपायोीं को
परी िाकि से अींजाम तदया। उत्तर िारि में माशथि िॉ िाग तकया
गया।
ii. कानन और व्यवस्था की सािारण प्रतियाओीं को तनिींतबि कर तदया
गया था और तवद्रोह के तिए सजा मृत्यु थी।
iii. तवद्रोही जमीींदारोीं को हटा तदया गया और वफादार को पुरस्कृि
तकया गया।
SECTION-E
30 मानक्षचत्र आधाररत कायय 1x6=6
31.1 िरा हुआ नक्शा सींिग्न है 1x3
1x3
31.2 िरा हुआ नक्शा सींिग्न है
नेत्रहीन परीिाक्षथययों के क्षलए:
1x3
31.1 बारडोिी, चौरी-चौरा, चींपारण, दाीं डी, अमृिसर, बींबई, किकत्ता, खेड़ा,
अहमदाबाद, बनारस, िाहौर, कराची।
दी गई सची से कोई िी िीन केंद्र।)
अथवा
मगि, वक्तज्ज, कोशि, पाीं चिा, कुरु, गाीं िार, अवींति, राजगीर, उज्जैन, िितशिा,
1x3
वाराणसी (काशी)।
(सची से कोई िी िीन केंद्र।)
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1x3
31.2 साीं ची, अजींिा, िुक्तम्बनी, बोि गया, सारनाथ, िरहुि, नागाजुथनकोींडा,
अमराविी, नातसक।
(दी गई सची से कोई िी िीन )
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