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अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु
सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/1/3
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
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9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै
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MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII A I S S C E-March 2020
CODE NO. 61/1/3
Q.NO. अपेक्षित उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
NO.
SECTION-A
1. C- ब्राह्मी और खरोष्ठी Pg-28 1
2. भिखुणी Pg-92 1
अथवा
Pg-92 1
अपने अनुयाभययोों को बुद्ध का अोंभिम सोंदेश था-“िुम सब अपने भिए
खुद ही ज्योभि बनो क्ोोंभक िुम खुद ही अपनी मुक्ति का रास्ता ढूँ ढना है
3. C- I और III Pg-94 1
4. मथुरा (िगवान महावीर) से िीथंकर की छभव Pg-88 1
Pg-91 1
दृभिबाभििोों के भिए: सुत्त भपिक
5. C- शुि भिन्ह Pg-101 1
6. D- इसकी भिखाई आज िक पढ़ी नहीों जा सकी है . Pg-15 1
7. D- पुरा वनस्पभिज्ञो Pg-2 1
8. गुरु रामानोंद Pg-162 1
अथवा
Pg-147 1
बसवण्णा
1
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9. (A) I, III औरों IV Pg-233 1
10. (D) औरों गजेब Pg-234 1
11. गुरु गोभबोंद भसोंह Pg-164 1
12. (A)- दोनोों (A) और (R) सही हैं और(A) ,(R) सही स्पिीकरण है । Pg-130 1
13. (A) यह पुस्तक फारसी में भिखी गई है। Pg-118 1
14. मीराबाई Pg-164 1
15. भशव Pg-144 1
16. (C) स्विोंत्र िारि के भिए उपयुि राजभनभिक स्वरुप सुझाने के भिए Pg-389 1
17. अगस्त 1946 में मुस्लिम लीग द्वारा प्रयति काययवाही क्षिवस ’की 1
घोषणा करने का कारण-, कैभबनेट भमशन से अपना समथथन वापस Pg-391
िेने के बाद अपनी पाभकस्तान की माूँग को जीिना था।
18. (B) भिप्स भमशन Pg-363 1
19. (C) I, III औरों IV Pg-425 1
20. (C) गोभवोंद बल्लि पोंि Pg-418 1
SECTION-B
21. क्षवशाल स्नानगार
i. भवशाि स्नानगार आूँ गन में बना एक भवशाि
आयािकार जिाशय था जो गभियारोों से िारो
िरफ से भिरा था
ii. जिाशय में जाने के भिए उत्तर और दभिण में
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सीभढया बनी थी
iii. जिाशय के भकनारो को ईटोों को जमाकर जि
बद्ध भकया गया था
iv. इसके िारोों और कि बने हुए थे भजस पास कुआों
था
Pg-8 3
v. जिाशय से पानी नािे में जािा था.
vi. गभियारे के दोनोों ओर अन्य स्नानगार थे।
vii. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकन्हीों िीन भबोंदुओों की व्याख्या की जाए
22. भारतीय संचार प्रणाली पर इब्न बतूता के क्षवचार:
i. सोंिार की प्रणािी अभििीय थी।
ii. डाक प्रणािी दो प्रकार की थी- िोडोों की िौकी भजसे
उिुग कहा जािा था और पाूँव की िौकी को दावा
कहा जािा था। दावा िोडे की िुिना में िेज था।
iii. व्यापाररयोों को प्रोत्साभहि करने के भिए भवशेष उपाय
भकए गए थे।
iv. मागों को सराय से थी।
v. डाक प्रणािी िी बहुि कुशि और िेज थी।
vi. जाससोों की खबरें भसोंि से भदल्ली िक केवि पाोंि भदनोों
में डाक प्रणािी के माध्यम से सुल्तान िक पहुोंि जािी
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थी
Pg-129 3
vii. डाक प्रणािी भजसने व्यापाररयोों को न केवि सिना
िेजने और िोंबी दरी पर िेजने की अनुमभि दी।
viii. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकन्हीों िीन भबोंदुओों की व्याख्या की जाए।
23. 1857 के बाि औपक्षनवेक्षशक शहर-
i. 1857 के बाद िारि में भब्रभटश रवैया भवद्रोह के िगािार डर से
आकार िे रहा था।
ii. गोरे िोगोों को अभिक सुरभिि और अिग िेत्रोों में रहने की
जरूरि थी।
iii. गोरे िोगोों के भिए भसभवि िाइन भवकभसि हुई।
Pg-326- 3
iv. सैभनकोों को िैनाि करने के भिए कैंटोनमेंट बनाए गए थे।
327
v. िारिीयोों के भिए अिग िेत्र सामने आया।
vi. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकसी िी िीन भबोंदुओों की जाोंि की जानी िाभहए
अथवा
िक्षिण भारत के शहर- मुख्य क्षवशेषताएं -
i. मदु रई और काोंिीपुरम जैसे दभिण िारि के शहरोों में,
मुख्य ध्यान मोंभदर था। 3
ii. ये शहर महत्वपणथ व्यावसाभयक केंद्र िी थे। Pg-318-
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iii. यहाूँ िाभमथक त्योहार अक्सर मेिोों को व्यापार के साथ िीथथ 319
यात्रा से जोडिे हैं।
iv. शहर वे स्थान थे जहाूँ हर भकसी को शासक कुिीन वगथ के
विथस्व वािे सामाभजक व्यवस्था में अपनी क्तस्थभि जानने की
उम्मीद थी।
v. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकसी िी िीन भबोंदुओों की जाोंि की जानी िाभहए
24. गांधीजी: एक समाज सुधारक के रूप में
i. गाोंिीजी ने अस्पृश्यिा के उन्मिन के भिए काम भकया।
ii. उन्होोंने बाि भववाह के क्तखिाफ वकािि की।
iii. उन्होोंने भहन्द- मुक्तिम एकिा के भिए प्रिार भकया।
iv. वह िाहिे थे भक िारिीय आत्मभनिथर बनें।
Pg-365 3
v. उन्होोंने खादी को बढ़ावा भदया।
vi. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
वभणथि भकए जाने वािे िीन भबोंदु।
SECTION-C
25. क्षववाह के क्षनयम:
i. वोंश को जारी रखने के भिए बेटोों को महत्वपणथ माना जािा था
और बेभटयोों की शादी बाहर की जािी थी और िर के सोंसािनोों
पर उनका कोई दावा नहीों था।
ii. बहुभववाह िी होिा था।
iii. बहुपभित्व- जैसे पाोंडवोों में था।
iv. िमथसत्रोों और िमथशास्त्ोों ने भववाह के आठ रूपोों को मान्यिा
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दी, भजनमें से केवि िार को ही अच्छा माना गया।
v. िडभकयोों की शादी सही समय पर सही व्यक्ति से की जािी थी
और कन्यादान को भपिा का िाभमथक किथव्य माना जािा था।
Pg-55, 57- 4+4=8
vi. मभहिाओों से अपेिा की गई थी भक वे अपने भपिा के गोत्र को
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त्याग दें और भववाह पर अपने पभि को गोद िें।
vii. उसी गोत्र के सदस्य भववाह नहीों कर सकिे थे।
viii. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
ix. भकन्हीों िार भबोंदुओों का वणथन
अथवा
600BCE-600CE के िौरान पाररवाररक संबंध:
i. पररवार आमिौर पर बोंिुत्व का भहस्सा थे।
ii. यह बोंिुत्व माना जािा था, रि पर आिाररि था।
iii. बोंिुत्के एक दसरे के साथ सोंबोंि थे िेभकन किी-किी वे झगडा
करिे थे।
iv. कौरवोों और पाोंडवोों के झगडे ने के भविार को मजबि भकया।
सोंसािनोों और भसोंहासन का दावा कर सकिा है।
i. रि के आिार पर पाररवाररक सोंबोंि स्वािाभवक थे।
ii. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकन्हीों दो भबोंदुओों का वणथ न
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क्षववाह के क्षनयम:
i. भववाह के प्रकार - अोंि भववाह , बभह भबवाह.बहुपत्नी भववाह
,बहुपभि भववाह का पािन भकया गया।
ii. कन्यादान या भववाह में बेटी का उपहार भपिा का एक
महत्वपणथ िाभमथक किथव्य माना जािा था।
iii. मभहिाओों के गोत्र - मभहिाओों से अपेिा की जािी थी भक वे
अपने भपिा के गोत्र को त्याग दें और अपने पभि के भववाह पर
उसे अपना िें।
iv. उसी गोत्र के सदस्य भववाह नहीों कर सकिे थे।
v. प्रत्येक गोत्र का नाम एक वैभदक द्रिा के नाम पर रखा गया था।
vi. मािृसत्तात्मक समाज - सािवाहनोों में मािाओों के गोत्र से प्राप्त
नाम थे।
vii. बहुभववाह िी होिा था।
viii. बहुपभित्व- जैसे पाोंडवोों में था।
ix. िमथसत्रोों और िमथशास्त्ोों ने भववाह के आठ रूपोों को मान्यिा
दी, भजनमें से केवि िार को ही अच्छा माना गया।
x. कन्यादान को भपिा का िाभमथक किथव्य माना जािा था।
Pg-55, 56, 2+2+4=8
60-65,68
xi. उसी गोत्र के सदस्य भववाह नहीों कर सकिे थे।
xii. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
दोनोों को भमिा कर भकन्हीों िार भबोंदुओों का वणथन
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अथवा
बंधुत्व
i. पररवार आमिौर पर बोंिुत्व का भहस्सा थे।
ii. यह बोंिुत्व माना जािा था, रि पर आिाररि था।
iii. बोंिुत्के एक दसरे के साथ सोंबोंि थे िेभकन किी-किी वे झगडा
करिे थे।कौरवोों और पाोंडवोों के झगडे ने के भविार को मजबि
भकया।सोंसािनोों और भसोंहासन का दावा कर सकिा है ।
iv. बोंिुत्के एक दसरे के साथ सोंबोंि थे िेभकन किी-किी वे झगडा
करिे थे।
v. कौरवोों और पाोंडवोों के झगडे ने के भविार को मजबि भकया।
सोंसािनोों और भसोंहासन का दावा कर सकिा है।
vi. रि के आिार पर पाररवाररक सोंबोंि स्वािाभवक थे।
Pg-55, 56, 2+2+4=8
vii. भववाह के प्रकार - अोंि भववाह , बभह भबवाह.बहुपत्नी भववाह 60-65,68
,बहुपभि भववाह का पािन भकया गया।
viii. कन्यादान या भववाह में बेटी का उपहार भपिा का एक
महत्वपणथ िाभमथक किथव्य माना जािा था।
v. मभहिाओों के गोत्र - मभहिाओों से अपेिा की जािी थी भक वे
अपने भपिा के गोत्र को त्याग दें और अपने पभि के भववाह पर
उसे अपना िें।
vi. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
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भकन्हीों िार भबोंदुओों का वणथन
वणय व्यवस्था
i. िमथसत्र और िमथशास्त्ोों में आदशथ व्यवसाय के बारे में भनयम
थे।
ii. ब्राह्मणोों को वेदोों का अध्ययन और भशिा दे ना, बभिदान और
अनुष्ठान करना, उपहार दे ना और प्राप्त करना था।
iii. िभत्रय युद्ध में शाभमि होिे थे, िोगोों की रिा करिे थे और न्याय
करिे थे, वेदोों का अध्ययन करिे थे, बभिदान दे िे थे और
उपहार दे िे थे।
iv. वैश्य व्यापार, कृभष और दे हािी िमथ को भनिाना था, बभिदान
प्राप्त करना और उपहार दे ना था।
v. शद्रोों को राजकीय कायथ करने और िीन उच्च वणों की सेवा
करनी थी।
vi. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकन्हीों िार भबोंदुओों का वणथन
यह क्षसद्ध करने के क्षलए क्षक इस क्षसद्धांत का सावयभौक्षमक रूप से
पालन नही ं क्षकया गया था:
i. गैर िभत्रय राजा- वणथ व्यवस्था के आदशथ पेशोों के भवपरीि।शोंग
और कण्व ब्राह्मण थे।
ii. कुछ सािवाहन राभनयोों ने भववाह के बाद िी अपने भपिा के गोत्र
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को बरकरार रखा।
iii. सािवाहन शासकोों में एों डोगैमी के उदाहरण पाए गए।
iv. भहभडम्बा के साथ िीम का भववाह िमथसत्रोों से अिग था।
वाकाटक रानी प्रिािी गुप्ता िारा िभमदान दे ने का प्रििन
v. एकिव्य को िीरों दाजी कौशि प्राप्त करना
vi. मोंडसोर भशिािेख आदशथ व्यवसाय के भनयमोों से भवििन का
एक उदाहरण है।
vii. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु। (4)
26. क्षवजयनगर का चरमोत्कषय
i. शासक कृष्णदे व राय एक सक्षम शासक थे।
ii. उसने अपने साम्राज्य का ववस्तार वकया।
iii. उसने उड़ीसा के शासक ों क अपने अध़ीन कर विया।
iv. उन् न
ों े ब़ीजापुर के सुल्तान ों क भ़ी परावजत वकया।
v. उनका राज्य युद्ध क़ी वनरों तर तैयाररय ों में बना रहा,
िेवकन शाोंवत बऩी रह़ी।
vi. राजा ने मोंवदर भ़ी बनवाए।
vii. उन् न
ों े ववजयनगर के पास एक उपनगऱीय बस्त़ी क़ी
स्थापना क़ी वजसे नागािपुरम कहा जाता है।
viii. व्यापार भ़ी फिा-फूिा।
क ई अन्य प्रासोंवगक वबोंदु।
वकस़ी भ़ी चार वबोंदुओों क़ी जाोंच क़ी जाएग़ी।
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क्षवजयनगर का पतन:
i. कृष्णदे व राय क़ी मृत्यु के बाद पिन वदखाई द़ी।
ii. उनके उत्तरावधकाऱी ववद्र ह़ी नायक या सैन्य प्रमुख ों से
परे शान थे।
Pg-173 4+4=8
iii. सैन्य नायक महत्वाकाोंक्ष़ी ह गए।
iv. 1565 में ववजयनगर के मुख्यमोंत्ऱी ने सेना का नेतृत्व
ताविक टा और ग िकुोंडा में वकया।
v. सुल्तान ों क़ी सोंयुक्त सेना ने ववजयनगर क़ी सेना क
भगाया।
vi. ववजयनगर शहर के ववनाश के विए सुल्तान ों क़ी
सेनाएँ वजम्मेदार थ़ीों।
vii. क ई अन्य प्रासोंवगक वबोंदु।
वकस़ी भ़ी चार वबोंदुओों क़ी जाोंच क़ी जाएग़ी।
अथवा
अमारा-नायक प्रणाली:
i. अमारा-नायक प्रणािी भवजयनगर साम्राज्य का एक
नवािार थी।
ii. अमारा-नायक सैन्य प्रमुख थे और कर एकत्र करिे
Pg- 5+3=8
थे।
173,175
iii. उन्हें शासन करने और कर एकत्र करने के भिए िेत्र
भदया गया था।
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iv. उन्होोंने व्यक्तिगि उपयोग के भिए राजस्व का भहस्सा
भदया जािा था
v. प्रभियोभगयोों ने भवजयनगर के राजा को प्रिावी युद्ध बि
प्रदान भकया।
vi. अमरा-नायक ने प्रभिवषथ व्यक्तिगि रूप से पेश
vii. राजा को िेंट दे िे थे
viii. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकसी िी पाोंि भबोंदुओों की जाोंि की जानी िाभहए।
कृष्णिे व राय की मृत्यु के बाि अमर-नायक प्रणाली की
भूक्षमका:
i. कृष्णदे व की मृत्यु के बाद, राया नायक ने अपने
उत्तराभिकाररयोों के क्तखिाफ भवद्रोह कर भदया।
ii. कई अमरा-नायक ने स्विोंत्र राज्योों की स्थापना की।
iii. इससे भवजयनगर राज्य का पिन हो गया।
iv. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकसी िी िीन भबोंदुओों की जाोंि की जानी िाभहए
27.
अमरीकी गृह युद्ध ने िक्कन के रयतों के जीवन को प्रभाक्षवत
क्षकया
i. 1861 में अमेररकी गृहयुद्ध भछड गया
ii. कच्चे कपास का आयाि अमेररका से हुआ।
iii. बोंबई में कपास की कीमिें बढ़ गईों और व्यापाररयोों ने भब्रभटश
माोंग को परा करने के भिए भजिना सोंिव हो सके कपास की
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फसि को बढ़ाने का प्रयास भकया।
iv. अोंग्रेज िब दक्कनबॉम्बे की ओर बढ़े ।
v. बढ़िे ऋण की वजह से दक्कन में दों ग
vi. प्रत्येक एकड के भिए 100 अभग्रम राभश कपास की फसि के
भिए दी गयी
vii. साहूकार दीिथकाभिक ऋण दे ने को िैयार थे।
viii. बोंबई-दक्कन में कपास उत्पादन का भवस्तार हुआ। Pg-280- 8
283
ix. अमीर भकसानोों को फायदा हुआ िेभकन बहुसोंख्यक सीमाोंि
िारी कजथ में डब गए।
x. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकसी िी आठ भबोंदुओों का मल्ाोंकन भकया जाना है।
अथवा
पांचवी ं ररपोर्य के मुख्य पहलू:
i.1813 में भब्रभटश सोंसद को सौोंपी गई ररपोटों की यह पाूँ िवीों श्ृोंखिा
थी।
ii. यह ईस्ट इों भडया कोंपनी के प्रशासन और गभिभवभियोों पर एक ररपोटथ
थी।
iii यह 1002 पृष्ठोों में ििा गया भजसमें 800 पृष्ठ पररभशि थे।
iv.इसने रै यिोों और जमीोंदारोों की याभिकाओों को पुन: प्रस्तुि भकया।
v.इसमें भवभिन्न भजिोों के किेक्टरोों की ररपोटें िी थीों। Pg-263-
8
vii. इसमें राजस्व और न्याभयक राजस्व और बोंगाि और न्याभयक 264
प्रशासन और अभिकाररयोों िारा भिक्तखि मद्रास पर साोंक्तख्यकीय
13
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िाभिकाएूँ हैं।
viii. इस ररपोटथ का ियन एक प्रवर सभमभि िारा भकया गया था।
ix. यह िारि में ईस्ट इों भडया कोंपनी के शासन की प्रकृभि पर गहन
सोंसदीय बहस का आिार बन गया।
x. इस ररपोटथ ने पारों पररक जमीोंदारी शक्ति के पिन को
अभिरों भजि भकया और उस पैमाने को िी कम कर भदया भजस
आिार पर जमीोंदार अपनी जमीन खो रहे थे।
xi. कोई अन्य प्रासोंभगक भबोंदु।
भकसी िी आठ भबोंदुओों का मल्ाोंकन भकया जाना है।
SECTION-D
28. क्षवद्रोही ग्रामीण
30.1 इन ग्रामीणों से क्षनपर्ने में अंग्रेजों के सामने आने वाली समस्या की
जााँच करें ।
उत्तर:
i. अोंग्रेजोों को ग्रामीणोों से भनपटने में बहुि समस्या का सामना
करना पडा। वे भब्रभटश अभिकाररयोों को दे खकर दर ििे जािे
थे।
ii. उन्होोंने बोंदकोों के साथ बडी सोंख्या में भफर से एकत्र भकया।
(2)
३०.२अवध) के लोग अंग्रेजों के स्लिलाफ क्ों थे?
उत्तर:
i. अवि के िोग शत्रुिापणथ थे क्ोोंभक अवि के राजा को अोंग्रेज़ोों
ने भनष्काभसि कर भदया था
ii. िोकभप्रय राजा वाभजद अिी शाह को किकत्ता में भनवाथ भसि
14
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और भनवाथ भसि कर भदया गया था।
iii. भविटन के साथ कई िोगोों ने अपनी आजीभवका खो दी। (2)
Pg- 296,
297, 305, 2+2+2=6
306
30.3 अंग्रेजों ने क्षवद्रोक्षहयों का िमन कैसे क्षकया?
उत्तर:
i. भवद्रोभहयोों को वश में करने के भिए अोंग्रेजोों ने दमनकारी उपायोों
को परी िाकि से अोंजाम भदया। उत्तर िारि में माशथि िॉ िाग
भकया गया।
ii. कानन और व्यवस्था की सािारण प्रभियाओों को भनिोंभबि कर
भदया गया था और भवद्रोह के भिए सजा मृत्यु थी।
iii. भवद्रोही जमीोंदारोों को हटा भदया गया और वफादार को पुरस्कृि
भकया गया।
29.
सम्रार् के अक्षधकारी की क्ा क्ा कायय करते थे
28.1 सम्रार् के अक्षधकाररयों को क्षकस उद्दे श्य से क्षनयुक्त क्षकया गया था?
उत्तर: राजा के अभिकाररयोों को भनयुि भकया गया था
i. िोगोों की सेवा करने के भिए, भवभिन्न प्रकार की नौकररयोों की
दे खरे ख या दे खिाि करना।
ii. िोगोों पर प्रशासभनक भनयोंत्रण के भिए। (2)
अक्षधकारीयों द्वारा क्षकये गए व्यवसाय के प्रकारो को स्पष्ट कीक्षजये
उत्तर:
i. कुछ अभिकाररयोों ने नभदयोों को अिीिण भदया।
15
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ii. कुछ ने जमीन की पैमाइश की।
iii. iii। कुछ ने भनरीिण भकया भजसके िारा नहरोों से पानी छोडा जािा
है ।
iv. कुछ िो भशकाररयोों के आवेश थे।
v. अन्य िोगोों ने कर एकत्र भकए।
vi. जमीन से जुडे कुछ अिीिण व्यवसाय।
(भकसी िी दो भबोंदुओों को समझाया जाए) (2)
Pg-34 2+2+2=6
कमयचाररयों के कायों का क्षनररिण करने की क्ा आवश्यकता थी थी?
उत्तर:
i. उन पर भनयोंत्रण रखने के भिए काम करने वािोों का काम अिीिक
को करना आवश्यक था।
ii. उनके काम को भवभनयभमि करने के भिए। (2)
1.
30.
अकबर के शासन में भूक्षम का वगीकरण
चाछर भूक्षम तीन से चार वषय तक िली क्ों छोड़ी जाती थी ?
Ans: ििेर िभम को िीन से िार वषों के भिए अवाप्त भकया गया था
िाभक
i. यह इस अवभि के िीिर अपनी प्रजनन िमिा वापस पा सकिा है ।
ii. इससे उसकी िाकि ठीक हो सकिी है । (2)
29.2 इस वगीकरण का आधार स्पष्ट कीक्षजए।
उत्तर: वगीकरण पर आिाररि था
i. िभम की उवथरिा।
ii. प्रभिवषथ खेिी की जाने वािी भमट्टी की िमिा या नहीों। (2)
16
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29.3 क्ा आपको लगता है क्षक राजस्व का आकलन करने के क्षलए यह Pg-214 2+2+2=6
एक ठोस आधार था?
उत्तर:
i. यह वगीकरण िभम के प्रकार और उत्पादकिा के अनुसार िय भकए
गए राजस्व का आकिन करने के भिए उभिि िगिा है ।
ii. इसने काश्तकारोों के भिए राजस्व का िुगिान आसान बना भदया।
(2)
SECTION-E
31. Map based work 1x6=6
मानक्षचत्र आधाररत कायय
1x3
31.1 िरा हुआ नक्शा सोंिग्न है
1x3
31.2 िरा हुआ नक्शा सोंिग्न है
नेत्रहीन परीिाक्षथययों के क्षलए:
1x3
31.1 बारडोिी, िौरी-िौरा, िोंपारण, दाों डी, अमृिसर, बोंबई, किकत्ता,
खेडा, अहमदाबाद, बनारस, िाहौर, करािी।
दी गई सिी से कोई िी िीन केंद्र।)
अथवा
मगि, वक्ति, कोशि, पाों ििा, कुरु, गाों िार, अवोंभि, राजगीर, उिैन, 1x3
ििभशिा, वाराणसी (काशी)।
(सिी से कोई िी िीन केंद्र।)
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31.2 साों िी, अजोंिा, िुक्तम्बनी, बोि गया, सारनाथ, िरहुि, नागाजुथनकोोंडा, 1x3
अमराविी, नाभसक।
(दी गई सिी से कोई िी िीन )
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