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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें

AglaSem पर कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें (अन्वेषण) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 7 Work Energy and Simple Machines (Exploration), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें - Page 1 of 63

About NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें

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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 7: काय, ऊजा एवं सरल मशीन

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

116 – 139 21 47 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 62 pages

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: काय, ऊजा एवं सरल मशीन
न्यूटन के नयम बताते ह क कसी क्षण बल क्या कर रहा है। यह अध्याय एक सरल रास्ता दे ता है — बल के ान पर ऊजा का हसाब र खए। कसी
वस्तु पर कया गया काय उसक ऊजा म प रवतन के बराबर होता है, और इसी एक कथन से ग तज ऊजा, तज ऊजा, यां त्रक ऊजा का संरक्षण,
श क्त तथा घरनी, आनत तल एवं उ ोलक का यां त्रक लाभ — सब प्राप्त हो जाते ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

अन्वेषण (कक्षा 9) 116 – 139

खं ड प्रश्न

21 47

माध्यम

हन्द

चतन क जए — पृष्ठ 116

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय आरंभ

चतन क जए

प्र.1 ऊपर दशाए गए चत्र म नीली फसलप (Slide) के आधार तल पर बच्चे के वेग का प रमाण क्या होगा?

नीली िफसलप ी मंच

बैगं नी िफसलप ी
h
लाल िफसलप ी (सीधी)

भूिम

अध्याय के आरंभ का चत्र, पृष्ठ 116 — पुनर चत रेखा चत्र। तीन अलग-अलग आकार क फसलप याँ — नीली
कुंड लत, लाल सीधी तथा बगनी लहरदार — तीन भू म से h ऊँचाई पर स्थत एक ही मंच से आरंभ होती ह।

य द फसलप के शीष क भूतल से ऊँचाई h हो तो बच्चा आधार तल पर v = √(2gh) वेग से पहुँचेगा।

शीष पर: गितज ऊज = 0, िस्थितज ऊज = mgh

आधार तल पर: िस्थितज ऊज = 0, गितज ऊज = ½mv2

यांित्रक ऊज का संरक्षण (घषण की उपेक्षा करते हुए):

½mv2 = mgh

v2 = 2gh

v = √(2gh)

चत्र म दशाए गए झूला-घर का मंच भूतल से लगभग 2 m ऊपर है, अतः

v = √(2 × 10 m s–2 × 2 m) = √(40 m2 s–2) ≈ 6.3 m s–1

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: समीकरण के दोन ओर से द्रव्यमान m कट जाता है और फसलप क आकृ त भी कोई
भू मका नह नभाती। केवल ऊध्वाधर गरावट h ही यह तय करती है क कतनी गुरुत्वीय तज ऊजा ग तज
ऊजा म बदलेगी।

प्र.2 क्या अलग-अलग द्रव्यमान वाले दो बच्चे एक ही फसलप के आधार तल पर एक ही वेग से पहुँचगे ?

हाँ — दोन √(2gh) के बराबर समान वेग से आधार तल पर पहुँचगे।

½mv2 = mgh
द व्यमान m दोनों पक्षों में है, अतः कट जाता है

v = √(2gh) — m पर िनभ र नही ं

ऐसा क्य होता है: भारी बच्चे म शीष पर तज ऊजा अ धक सं चत होती है (mgh बड़ा है), कतु उसी बड़े
द्रव्यमान को त्व रत भी करना पड़ता है। ये दोन प्रभाव ठ क-ठ क एक-दूसरे को नरस्त कर दे ते ह — ठ क वैसे ही
जैसे सभी वस्तुएँ समान त्वरण g से मुक्त रूप से गरती ह।

ध्यान द जए: वास्तव म बच्चे के कपड़ और फसलप के बीच घषण भी काय करता है, और यह इस बात पर
नभर करता है क बच्चा सतह पर कतना दबाव डालता है। अतः बहुत हल्का बच्चा खुरदरी फसलप पर कुछ
धीमा पहुँच सकता है।

प्र.3 इनम से कस फसलप के आधार तल पर कोई बच्चा सबसे अ धक वेग से पहुँचेगा?

पृष्ठ 116 के चत्र को ध्यान से दे खए — नीली कुंडलाकार, लाल सीधी तथा बगनी लहरदार, तीन फसलप याँ एक ही मंच से
आरंभ होकर एक ही भूतल पर समाप्त होती ह। अतः तीन के लए ऊध्वाधर गरावट h समान है और घषण क उपेक्षा करने पर
तीन पर आधार तल का वेग समान होगा, v = √(2gh)।

v = √(2gh) के वल h पर िनभर है

समान h → समान v, चाहे पथ की लंबाई या आकृ ित कु छ भी हो

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
ऐसा क्य होता है: गुरुत्व केवल ऊध्वाधर गरावट के माध्यम से ही काय करता है। कनारे क ओर सरकने या

m a s em मलती।
gl
कुंडली म घूमने से पथ क लंबाई तो बढ़ती है कतु ऊँचाई नह बदलती, इस लए अ त रक्त ऊजा नह
. co a
a s em
gl जाँ चए: घषण को ध्यान म रख तो लंबी नीली कुंडलाकार फसलप बच्चे को कह अ धक लंबी सतह पर
aरगड़ती
स्वयं
है, अतः वहाँ ऊजा क हा न सबसे अ धक होती है। व्यवहार म छोट व तीव्र ढाल वाली लाल फसलप पर

com
ag
बच्चा सबसे तेज पहुँचता है। य द कसी फसलप का शीष अ धक ऊँचा होता तो वह तीन से आगे नकल जाती।

m .
as e
a g l
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 116
co m
m.
अध्याय आरंभ

o m l a se
प्र.1 m .c जब बल समय के साथ प रव तत हो या उनके काय करने क प्र क्रया ज aटलg हो तो इन नयम को लागू
se करना क ठन हो जाता है। क्या ऐसी स्थ तय को समझने का कोई अपेक्षाकृत अ धक सरल एवं सक्षम साधन
कतु
l a
ag उपलब्ध है?

m a s
m.co agl
se

g l a
a
हाँ — बल के स्थान पर ऊजा का हसाब र खए। काय-ऊजा प्रमेय केवल आरं भक और अं तम अव ाओं क तुलना करता है,
अतः बल को प्रत्येक क्षण जानने क आवश्यकता ही नह पड़ती।

com
न्यूटन के नयम के लए प्रत्येक क्षण का बल चा हए — F = ma से त्वरण, फर शुद्धग तक समीकरण से v और s। य द F

m .
e
बदलता रहे तो a भी बदलता रहेगा और शुद्धग तक समीकरण लागू ही नह ह गे।

c o m g l as
. a
ऊजा क व ध म केवल दो संख्याएँ चा हए — आरंभ क ऊजा और अंत क ऊजा। कया गया काय = ऊजा म प रवतन बल के

sem
नयत होने या न होने, दोन तय म सत्य है।
a
agl
m
यह क्य उपयोगी है: उदाहरण 7.9 म ेक फेल हुआ ट्रक रेत भरी बचाव ढलान पर चढ़ता है। रेत का बल, ढलान

a se
com g l
और गुरुत्व — सब एक साथ काय करते ह, फर भी "आरं भक ऊजा + रेत ारा कया गया काय = अं तम ऊजा"

m . a
ase
लखने से ढलान क लंबाई तीन पं क्तय म मल जाती है। यही प्रश्न F = ma से हल करने म पूरा पृष्ठ लग जाता।

agl

co m
सो चए और बताइए — पृष्ठ 119
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 62

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

7.1 कसी नयत बल ारा कया गया काय

सो चए और बताइए

प्र.1 पछले अध्याय के चत्र (6.8) म एक भारोत्तोलक दशाई गई है जसने भारोत्तोलन दं ड (barbell) को अपने हाथ
म पकड़ कर स्थर रखा हुआ है। क्या वह इस दं ड को स्थर पकड़े रखने म कोई काय करती है?

भारोत्तोलन दंड

भारोत्तोलक

फश

चत्र 6.8, पृष्ठ 97 (अध्याय 6) — पुनर चत रेखा चत्र: एक भारोत्तोलक भारोत्तोलन दं ड को सर के ऊपर स्थर पकड़े
हुए।

नह । वह दं ड पर शून्य काय करती है, क्य क दं ड का कोई व ापन नह होता।

W=F×s

वह ऊपर की ओर जो बल लगाती है = दंड का भार = mg

दंड का िवस्थापन, s = 0
W = mg × 0 = 0 J

ऐसा क्य होता है: व ान म काय के लए बल क दशा म व ापन आवश्यक है। दं ड अपने ान पर ही रहता है,
अतः उसे कोई ऊजा ानांत रत नह होती — न उसक ग तज ऊजा बदलती है, न तज ऊजा।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

फर भी वह थक जाती है। बल लगाए रखने के लए उसक माँसपे शय के तंतु बार-बार सकुड़ते और फैलते ह।
इसम शरीर म सं चत रासाय नक ऊजा व्यय होती है और उसका अ धकांश भाग ऊष्मा बन जाता है। अथात ऊजा
उसके शरीर के भीतर व्यय होती है, दं ड पर नह । थकान काय होने क वै ा नक कसौट नह है।

प्र.2 बताइए पछले अध्याय के चत्र 6.13 (ग) म दशाई गई कसी खुरदरी सतह (rough surface) पर ग तमान एक
के ऊपर एक रखे सक्क के एक ढे र पर घषण ारा कया गया काय धनात्मक होगा, ऋणात्मक होगा या शून्य
होगा?

घषण बल

A B
रबर बैडं के कारण बल
(क)

A B

घषण बल

(ख)

चत्र 6.13, पृष्ठ 99 (अध्याय 6): सक्क के ढे र पर लगने वाला बल — (क) त नत रबर बड को छोड़ने पर रबर बड तथा
घषण के कारण, और (ख) बड से अलग होने के बाद खुरदरी सतह पर फसलते समय केवल घषण के कारण। (पुस्तक
म केवल भाग (क) और (ख) ही छपे ह; प्रश्न म उ ल्ल खत “ चत्र 6.13 (ग)” वस्तुतः भाग (ख) क स्थ त है।)

सक्क के ढे र पर घषण ारा कया गया काय ऋणात्मक होगा।

िसक्कों की गित की िदशा →

घषण बल की िदशा ← (सदै व सापेक्ष गित का िवरोध करता है)

बल और िवस्थापन परस्पर िवपरीत है ं

W = F × (– s) = ऋणात्मक

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: घषण सरकते हुए सक्क पर पीछे क ओर काय करता है, अतः वह उन्ह ऊजा दे ता नह ब ल्क
उनसे ऊजा लेता है। यही खोई हुई ग तज ऊजा सक्क तथा मेज क सतह म ऊष्मा के रूप म प्रकट होती है — और
इसी कारण ढे र धीमा होकर अंततः रुक जाता है।

स्वयं जाँ चए: अपनी दोन हथे लय को तेजी से रग ड़ए। वे गम हो जाती ह। ग तमान हथे लय पर घषण ारा कया
गया ऋणात्मक काय ही तापीय ऊजा बन गया है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 120
7.2 काय-ऊजा प्रमेय

प्र.1 हमने दे खा है क जब कसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और वह वस्था पत हो जाती है तो उस पर काय होता
है। क्या इससे वस्तु म आगे काय करने क क्षमता आ जाती है?

हाँ। कसी वस्तु पर कया गया धनात्मक काय उसे ऊजा प्रदान करता है, और ऊजा का अथ ही है काय करने क क्षमता।

क्षेत्ररक्षक गद फकते समय उस पर काय करता है। फर वही ग तमान गद वकेट गरा दे ती है — अथात गद ने वकेट पर काय
कया ( चत्र 7.8 क, ख)।
गमले को खड़क क मुँडेर तक उठाने म काय कया जाता है। य द गमला गर जाए तो नीचे रखी वस्तु को क्ष त पहुँचा सकता है
— यह भी काय ही है ( चत्र 7.8 ग)।

वस्त ु पर िकया गया काय = उसकी ऊज में पिरवतन (समीकरण 7.3)

धनात्मक काय → ऊज में वृिद्ध → िकसी अन्य वस्त ु पर काय करने की क्षमता

ऐसा क्य होता है: ानांतरण म ऊजा नष्ट नह होती, केवल आगे बढ़ जाती है। क्षेत्ररक्षक ारा द गई ऊजा गद तब
तक अपने पास रखती है जब तक वह वकेट से नह टकराती, फर उसे स प दे ती है। गद वकेट पर धनात्मक काय
करती है और वकेट गद पर उतना ही ऋणात्मक काय — इस लए गद ठ क उतना ही खोती है जतना वकेट पाता
है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 121

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

7.2 काय-ऊजा प्रमेय

सो चए और बताइए

प्र.3 जब आप एक सपाट सड़क पर साइ कल पर सवार होकर साइ कल के पैडल पर बल लगाते ह तो इस प्र क्रया म
आपक माँसपे शयाँ ऊजा प्रदान करती ह। आपक माँसपे शय ारा प्रदत्त ऊजा साइ कल सवारी म कस रूप म
प्रकट होती है?

माँसपे शय क रासाय नक ऊजा इन रूप म प्रकट होती है—

ग तज ऊजा — साइ कल तथा आपक अपनी, जब तक चाल बढ़ रही हो। नयत चाल आ जाने पर यह बढ़ना रुक जाता है।
तापीय ऊजा — सबसे बड़ा भाग। धुरी, चेन तथा टायर-सड़क संपक के घषण और वायु प्र तरोध के वरुद्ध कया गया काय
पुज , सड़क और वायु को गम करता है।
ध्व न ऊजा — चेन, टायर और हवा क हल्क आवाज।
शरीर के भीतर तापीय ऊजा — माँसपे शयाँ पूण दक्ष नह होत , इस लए शरीर गम होता है और पसीना आता है।

सपाट सड़ क पर िस्थितज ऊज में कोई वृिद्ध नही ं होती (h नही ं बदलता)

िनयत चाल पर गितज ऊज में भी वृिद्ध नही ं होती

अतः माँसपेिशयों ारा दी गई ऊज = घषण व वायु पितरोध के िवरुद्ध िकया गया काय

= तापीय ऊज + थोड़ ी ध्विन ऊज

ऐसा क्य होता है: नयत चाल पर आप पर नेट बल शून्य होता है, अतः आपका आगे क ओर धक्का घषण और
वायु प्र तरोध को ठ क-ठ क संतु लत करता है। माँसपे शय ारा दया गया प्रत्येक जूल तुरंत इन्ह वरोधी बल ारा
उतना ही ऋणात्मक काय करके ले लया जाता है। पैडल चलाना बंद कर द जए तो साइ कल रुक जाती है —
क्य क व्यय चलता रहता है और आपू त रुक जाती है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 121
7.4.1 ग तज ऊजा

प्र.1 कसी वस्तु म उसक ग त के कारण कतनी ऊजा होती है?

m द्रव्यमान क वस्तु जो v चाल से ग तमान है, उसक ग तज ऊजा K = ½mv2 होती है।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
m द व्यमान की वस्त ु पर िनयत बल F लगे और वह s िवस्थापन में चाल u से v हो जाए।
m l as
.co
शुद्ध गितक समीकरण: v2 = u2 + 2as, अतः s = (v2 – u2) ÷ 2a
m a g
l a se
a g
िकया गया काय: W = F × s = ma × (v2 – u2) ÷ 2a

W = ½m(v2 – u2) (समीकरण 7.5)

co m
काय-ऊज पमेय के अनुसार यही वस्त ु की ऊज में पिरवतन है।
e m . ag
g l as
a
िवरामावस्था से आरंभ करने पर (u = 0) यह पूरा भाग गितज ऊज ही है:

K = ½mv2 (समीकरण 7.6)

co m
em.
m l as
.co a g
वग का महत्त्व: K, v के साथ नह ब ल्क v2 के साथ बढ़ती है। कसी वाहन क चाल दोगुनी करने पर उसक ग तज

a s
ऊजा emचार गुनी हो जाती है (उदाहरण 7.4), अतः ेक को चार गुनी ऊजा हटानी पड़ती है। यही कारण है क सड़क
a gl दुघटनाओं म द्रव्यमान से कह अ धक बड़ा कारक चाल होती है।
m a s
m .co
ध्यान द जए: ग तज ऊजा क कोई दशा नह होती। 5 m s–1 से पूव क ओर जाती गद और उतनी ही चाल से agl
l a se
g
प श्चम क ओर जाती गद क ग तज ऊजा बल्कुल समान होती है। इसका मात्रक जूल है: 1 J = 1 kg m2 s–2।
a

co m
m .
as e
om
सो चए और बताइए — पृष्ठ 123
. cऊजा a g l
emऔर बताइए
7.4.1 ग तज

a s
agl
सो चए

se m
com
दो वस्तुओं A एवं B के द्रव्यमान क्रमश: m एवं 4 m ह। बताइए क य द इनक ग तज ऊजा समान हो तो इनके
g l a
. a
प्र.4

m
ase
वेग का अनुपात क्या होगा?

agl
अनुपात vA : vB = 2 : 1 होगा।
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 9 of 62

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

K = ½mv2

िदया है KA = KB

½ × m × vA2 = ½ × 4m × vB2

m कट जाता है: vA2 = 4 vB2

वगमूल लेने पर: vA = 2 vB

vA : vB = 2 : 1

ऐसा क्य होता है: ग तज ऊजा द्रव्यमान क पहली घात पर कतु चाल क दूसरी घात पर नभर करती है। चार गुना
हल्का होने क भरपाई के लए A को केवल √4 = 2 गुना तेज होना पयाप्त है।

स्वयं जाँ चए: मान ली जए m = 1 kg और vB = 3 m s–1। तब KB = ½ × 4 kg × 9 m2 s–2 = 18 J, तथा
KA = ½ × 1 kg × 62 m2 s–2 = 18 J। दोन समान।

प्र.5 क्या नयत वेग से ग तमान कसी वस्तु क ग तज ऊजा उसक स्थ त म प रवतन करने के साथ-साथ प रव तत
होती है?

नह । वह जहाँ भी हो, उसक ग तज ऊजा ठ क उतनी ही बनी रहती है।

K = ½mv2
इस सूत्र में के वल m तथा v है ं — न h, न x, न िकसी पकार की िस्थित।

िनयत वेग → v नही ं बदलता → K नही ं बदलती

ऐसा क्य होता है: नयत वेग का अथ है शून्य त्वरण, अतः न्यूटन के प्रथम नयम से वस्तु पर नेट बल शून्य है। शून्य
नेट बल शून्य काय करता है, और काय-ऊजा प्रमेय के अनुसार शून्य काय का अथ है ऊजा म शून्य प रवतन।

सावधानी: य द त म प रवतन ऊध्वाधर हो तो उसक तज ऊजा अवश्य बदल सकती है — कतु उसके
लए कसी अन्य बल को उसे उठाना पड़ेगा। क्षै तज दशा म नयत वेग से ग त करने पर K और U दोन अप रव तत
रहते ह।

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क्रयाकलाप 7.1 — आइए, जाँच कर — पृष्ठ 125
7.4.2 स्थ तज ऊजा — गुरुत्वीय स्थ तज ऊजा

क्रयाकलाप

प्र.1 गद को रेत क सतह से करीब 1m ऊँचाई तक उठाकर गराइए ( चत्र 7.17)। क्या रेत म एक ग ा बन जाता है?
वचार क जए क गद रेत म ग ा क्य बना दे ती है?

कम ऊँ चाई से िगराई गई गेदं अिधक ऊँ चाई से िगराई गई गेदं

भुरभुरी रेत

रे त का पात्र

चत्र 7.17, पृष्ठ 125 — पुनर चत रेखा चत्र: व भन्न ऊँचाइय से गद गराने पर रेत क सतह पर बने ग े।

हाँ, कटोरे जैसा ग ा बन जाता है। गद ग ा इस लए बनाती है क्य क वह ग तज ऊजा लेकर पहुँचती है और उसी ऊजा से रेत पर
काय करके कण को कनारे धकेल दे ती है।

गेंद को h = 1 m ऊपर उठाने पर िस्थितज ऊज संिचत होती है U = mgh

मुक्त रूप से िगरने पर रेत के ठीक ऊपर यह पूरी गितज ऊज बन जाती है:

½mv2 = mgh, अतः v = √(2gh) = √(2 × 10 × 1) ≈ 4.5 m s–1
रेत में पितरोधी बल F गहराई d तक काय करके गेंद को रोक दे त ा है:

F × d = mgh → d = mgh ÷ F

ऐसा क्य होता है: रेत गद पर पीछे क ओर बल लगाती है (गद पर ऋणात्मक काय) और गद रेत के कण को बाहर
व नीचे धकेलती है (रेत पर धनात्मक काय)। गद तब तक चलती रहती है जब तक रेत उसक पूरी ग तज ऊजा सोख
न ले — और वह जतना गहरा जाती है, रेत ने उतना ही अ धक काय कया होता है।

यह करके दे खए: इसी गद को पक्के सीमट के फश पर गराइए। कोई ग ा नह बनता, क्य क फश वकृत नह हो
सकता — ऊजा तेज ध्व न और गद के उछाल म चली जाती है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 अब गद को रेत क सतह से 2 m ऊपर ले जाकर कसी दूसरी जगह गराइए जससे सतह पर बने ग े अलग-
अलग दखाई द न क एक दूसरे के ऊपर। क्रयाकलाप के इस चरण को पुन: दोहराइए। इस बार बने ग े क
गहराई क तुलना पहले बने ग े क गहराई से क जए। क्या आपको इनम कोई अंतर दखाई दे ता है? कस स्थ त
म ग े क गहराई अ धक व कस स्थ त म कम होती है?

हाँ, स्पष्ट अंतर दखाई दे ता है। 2 m से गराई गई गद का ग ा अ धक गहरा होता है और 1 m से गराई गई गद का ग ा
सबसे कम गहरा। 2 m से दोबारा गराने पर गहराई लगभग पहले जतनी ही मलती है।

गराने क ऊँचाई H सं चत स्थ तज ऊजा U = MGH ग े क गहराई D = MGH ÷ F

1m mg × 1 m सबसे कम

2m mg × 2 m — दोग नु ी लगभग दोगुनी गहरी

ऐसा क्य होता है: गद को अ धक ऊँचाई तक उठाने का अथ है गुरुत्व के वरुद्ध अ धक काय करना, अतः अ धक
तज ऊजा सं चत होती है। यह पूरी ऊजा रेत तक ग तज ऊजा के रूप म पहुँचती है और रेत को गद रोकने के
लए उतना ही ऋणात्मक काय करना पड़ता है। औसत प्र तरोधी बल F समान होने पर दोगुनी ऊजा के लए दोगुनी
दूरी चा हए — अथात गहरा ग ा।

क्रयाकलाप का नष्कष: पृथ्वी क सतह से वस्तु क ऊँचाई जतनी अ धक होगी, उसक गुरुत्वीय तज ऊजा
उतनी ही अ धक होगी — यही प रणाम पुस्तक आगे U = mgh (समीकरण 7.8) के रूप म लखती है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 126
7.4.2 स्थ तज ऊजा

सो चए और बताइए

प्र.6 य द कोई गद पृथ्वी क सतह के नकट क्षै तज दशा म नयत वेग से ग तशील है तो क्या उसक स्थ तज ऊजा म
प रवतन होता है? जब कसी वस्तु को धीरे-धीरे ऊध्व दशा म ऊपर उठाया जाता है तो क्या इसक स्थ तज ऊजा
म प रवतन होगा?

क्षै तज ग त म कोई प रवतन नह । ऊध्व दशा म उठाने पर स्थ तज ऊजा mgΔh से बढ़ जाती है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

U = mgh

(क ) क्षैितज गित : भूत ल से ऊँ चाई h नही ं बदलती

ΔU = mg × 0 = 0 J — कोई पिरवतन नही ं

(ख) Δh तक धीरे-धीरे ऊपर उठाने पर:

ΔU = mg × Δh — िस्थितज ऊज बढ़ ती है

जै से 2 kg की पुस्तक 1.5 m ऊपर उठाने पर: ΔU = 2 kg × 10 m s–2 × 1.5 m = 30 J

ऐसा क्य होता है: गुरुत्व सीधे नीचे क ओर ख चता है। क्षै तज ग त इस खचाव के लंबवत होती है, अतः गुरुत्व
कोई काय नह करता और कुछ भी सं चत नह होता। ऊपर क ओर ग त सीधे खचाव के वरुद्ध है, अतः गुरुत्व के
वरुद्ध mgΔh काय करना पड़ता है — और यही काय पृथ्वी-वस्तु नकाय म तज ऊजा के रूप म सं चत हो
जाता है, जो वस्तु छोड़ने पर वापस मल जाती है।

ध्यान द जए: "धीरे-धीरे" शब्द महत्त्वपूण है। धीरे-धीरे उठाने पर लगाया गया बल केवल mg होता है और कोई
अ त रक्त ग तज ऊजा नह बचती — अथात दया गया प्रत्येक जूल तज ऊजा ही बनता है।

क्रयाकलाप 7.2 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 127
7.4.3 यां त्रक ऊजा का संरक्षण

क्रयाकलाप

प्र.1 गोलक को एक ओर क्षै तज रेखा के ऊपर स्थ त बदु P तक ले जाकर छो ड़ए। आरंभ के कुछ दोलन म दोलन
रेखा के चरम बदुओं (extreme points) पर इसका अवलोकन क जए। क्या गोलक लगभग क्षै तज रेखा क
ऊँचाई के स्तर तक पहुँच जाता है?

हाँ — आरंभ के कुछ दोलन म गोलक दूसरी ओर लगभग क्षै तज रेखा तक पहुँच जाता है, कतु ठ क उस तक कभी नह
पहुँचता, और प्रत्येक दोलन म थोड़ा और नीचे रह जाता है।

बदु नम्नतम बदु से ऊँचाई स्थ तज ऊजा ग तज ऊजा यां त्रक ऊजा

P (छोड़ने का िबंद ु) h mgh 0 mgh

Q (िनम्नतम िबंद ु) 0 0 ½mv2 = mgh mgh

R (दू स री ओर) h (लगभग) mgh 0 mgh

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

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ऐसा क्य होता है: डोरी अ वतान्य है और उसम उत्पन्न तनाव सदै व गोलक क ग त के लंबवत रहता है, अतः डोरी

m a s em
glको उसी ऊँचाई h तक
कोई काय नह करती। काय केवल गुरुत्व करता है, जो तज ऊजा को ग तज ऊजा म और फर वापस बदलता
रहता है। योग.cKo+ U — अथात यां त्रक ऊजा — mgh पर
emपड़ता है। a
र रहता है, इस लए गोलक
लौटनाsही
a
agl

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ag
"लगभग" क्य : वास्त वक जगत म नलंबन बदु पर घषण तथा वायु प्र तरोध प्रत्येक दोलन म थोड़ा ऋणात्मक

m .
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काय करते ह। यह ऊजा ऊष्मा व ध्व न बनकर नकल जाती है, इस लए यां त्रक ऊजा धीरे-धीरे घटती है, गोलक हर

a g l
बार कुछ कम ऊँचाई तक जाता है और अंततः लोलक रुक जाता है।

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सो चए और बताइए — पृष्ठ 129
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7.4.3 यां त्रक ऊजा का संरक्षण

सो चए और बताइए

प्र.7 चत्र 7.19 म च त्रत स्थ त के लए गद क यां त्रक ऊजा का मान ठ क उस समय ात क जए जब वह भूतल से
टकराती है और दशाइए क इस स्थ त म भी इसका मान mgh ही होगा।

A t=0

mg
(h − h′)

h B t=t
m

h′

C

चत्र 7.19, पृष्ठ 126: m द्रव्यमान क वस्तु को A (ऊँचाई h) पर वरामावस्था से छोड़ा जाता है; t समय प ात वह B
(ऊँचाई h′) से गुजरती है और C पर भूतल से टकराती है।

बदु C पर पहुँचते समय गद के पास कोई स्थ तज ऊजा शेष नह रहती और ग तज ऊजा mgh हो जाती है, अतः उसक
यां त्रक ऊजा तब भी mgh ही है।

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वस्त ु h ऊँ चाई पर िबंद ु A से िवरामावस्था से छोड़ ी जाती है। भूत ल (C) को h = 0 मािनए।

C पर ऊँ चाई: h′ = 0, अतः िस्थितज ऊज = mg × 0 = 0 J

C पर चाल — v2 = u2 + 2gh में u = 0 रखने पर:

v2 = 0 + 2gh = 2gh

C पर गितज ऊज :

K = ½mv2 = ½ × m × 2gh = mgh

C पर यांित्रक ऊज = K + U = mgh + 0 = mgh ✔

अध्याय म पहले से नकाली गई दो तय से तुलना क जए—

बदु स्थ तज ऊजा ग तज ऊजा यां त्रक ऊजा

A (t = 0, ऊँचाई h) mgh 0 mgh

B (समय t, ऊँचाई h – ½gt2) mgh – ½mg2t2 ½mg2t2 mgh

C (भूतल, ऊँचाई 0) 0 mgh mgh

ऐसा क्य होता है: यहाँ काय केवल गुरुत्व कर रहा है। गरने से वस्तु जतनी तज ऊजा खोती है, ठ क उतनी ही
ग तज ऊजा प्राप्त कर लेती है। भंडार का केवल नाम बदलता है, कुल मान mgh से हटता नह । यही यां त्रक ऊजा
का संरक्षण है।

स्वयं जाँ चए: m = 0.5 kg, h = 5 m, g = 10 m s–2 ली जए। A पर U = 0.5 × 10 × 5 = 25 J। C पर v =
√(2 × 10 × 5) = 10 m s–1, अतः K = ½ × 0.5 × 100 = 25 J। दोन समान।

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प्र.8 आपने कसी व ान उद्यान म चत्र 7.22 जैसा प्रदश दे खा होगा जसम एक गद को इस प्रदश के उच्चतम बदु से
छोड़ा जाता है। वणन क जए क इसम बदु A, B और C पर ग तज ऊजा और स्थ तज ऊजा कस प्रकार
प रव तत होती है। व्याख्या क जए क बाद म आने वाले शीष C, D तथा E पहले वाले शीष क अपेक्षा कम
ऊँचाई वाले क्य होते ह? क्या इसका संबंध घषण के कारण ऊजा के कुछ भाग के अन्य रूप म प रव तत होने से
हो सकता है?

यहाँ से गेदं छोड़ ी जाती है

A

C

D
E

B

आधार
चत्र 7.22, पृष्ठ 129 — व ान उद्यान के गद वाले रोलर कोस्टर प्रदश का पुनर चत रेखा चत्र: गद ऊँचे स्तंभ के शीष से
छोड़ी जाती है, शीष A तक चढ़ती है, B पर उतरती है और फर क्रमशः नचले शीष C, D तथा E से होकर जाती है।

गद ऊँचे मीनार के शीष से वरामाव ा से छोड़ी जाती है, अतः वहाँ उसक पूरी यां त्रक ऊजा तज ऊजा ही होती है। उसके बाद
दोन रूप बारी-बारी बदलते रहते ह — कतु कुल मान धीरे-धीरे रसता रहता है।

आरंभ आरंिभक ऊँचाई — िफर कभी नही ं िमलती

A
C

D

E

B
गित की िदशा
प्रत्येक शीष पछले से नीचा है, क्य क पथ के हर भाग म घषण और वायु प्र तरोध थोड़ी यां त्रक ऊजा ले जाते ह।

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बदु ऊँचाई स्थ तज ऊजा ग तज ऊजा

A — पहला शीष ऊँचा, िकं तु आरंभ से नीचे अिधक कम (अब तक हुई िगरावट िजतनी)

B — दो शीष ं के बीच की घाटी सबसे नीचा, लगभग भूतल लगभग शून्य — न्यूनतम अिधकतम — यहाँ गेंद सबसे तेज होती है

C — अगला शीष A से नीचा िफर अिधक , िकं तु A से कम A की अपेक्षा अिधक

पत्येक िबंद ु पर: K + U = यांित्रक ऊज

ढलान से नीचे आते समय: U घटती है, K उतनी ही बढ़ ती है

शीष पर चढ़ ते समय: K घटती है, U उतनी ही बढ़ ती है

C, D तथा E क्रमशः नीचे क्य — हाँ, इसका कारण घषण ही है।

गेंद िजतनी ऊँ चाई तक चढ़ सकती है, h = यािं त्रक ऊज ÷ mg

पथ के पत्येक भाग में घषण व वायु पितरोध ऋणात्मक काय करते है ं

बाद की यांित्रक ऊज = पहले की यांित्रक ऊज – (घषण में गई ऊज )

कम यांित्रक ऊज → अगले शीष की अिधकतम ऊँ चाई कम

ऐसा क्य होता है: गद और पटरी के बीच घषण तथा वायु प्र तरोध सदै व गद क ग त के वरुद्ध काय करते ह। यह
ऋणात्मक काय हर चक्कर म थोड़ी यां त्रक ऊजा को ऊष्मा और ध्व न म बदल दे ता है, और ऊष्मा व ध्व न गद म
वापस नह लौट सकत । इस लए अ भकल्पक को प्रत्येक शीष पछले से नीचा बनाना पड़ता है — अन्यथा गद के
पास उसे पार करने क ऊजा ही नह बचेगी और वह लौट आएगी।

क्या आप जानते ह? वास्त वक रोलर कोस्टर भी इसी नयम से बनाए जाते ह। पहली गरावट सदै व सबसे ऊँची
होती है और उसके बाद का प्रत्येक मोड़ या शीष पछले से नीचा।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 131

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

7.6.2 आनत तल
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आप संदूक को एक चकने आनत पटरे पर चत्र 7.26 (ख) म दशाए अनुसार रख सकते ह और इसे इस आनत
m
प्र.1

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पटरे पर धकेल कर ऊपर के तल तक उठा सकते ह। क्या इस व ध म कम बल क आवश्यकता होती है?

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F
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आनत पटरा
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F′
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a (क) (ख)

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चत्र 7.26, पृष्ठ 131 — पुनर चत रेखा चत्र: एक संदूक को (क) सीधा ऊपर उठाकर तथा (ख) आनत पटरे पर धकेल

se m
कर उसी ऊँचे तल तक पहुँचाना।

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हाँ। चकने आनत पटरे पर संदूक धकेलने म सीधे ऊपर उठाने क तुलना म कम बल लगता है — ठ क h/L गुना कम।

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m ऊपर उठाने में: आवश्यक बल = भार = mg, दू री = h a g
a s eसीधे
agl L लंबाई के आनत तल पर उसी ऊँ चाई h तक िनयत चाल से धके लने पर:

se m
आपके ारा िकया गया काय = F′ × L
com g l a
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अिजत िस्थितज ऊज = mgh
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काय-ऊज पमेय (घषण की उपेक्षा करते हुए): F′ × L = mgh

F′ = mgh ÷ L = mg × (h ÷ L)
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m
चूँिक L > h है, गुणक h/L एक से छोटा है, अतः F′ < mg
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a s emउदाहरण के लए, 100 kg के संदूक को h = 1 m ऊँचा उठाने के लए L = 4 m का पटरा लगाइए—
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सीधे उठाने में: F = mg = 100 kg × 10 m s–2 = 1000 N
पटरे पर: F′ = 1000 N × (1 m ÷e4m
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a s m) = 250 N — के वल चौथाई

agl

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यह "मुफ्त" क्य नह है: दोन व धय म कया गया काय समान है — इस उदाहरण म 1000 J। पटरे पर आप
1000 N को 1 m तक लगाने के ान पर 250 N को 4 m तक लगाते ह। मशीन उसी काय को अ धक दूरी पर
फैला दे ती है ता क कसी भी क्षण लगने वाला बल आपके वश म रहे।

क्रयाकलाप 7.3 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 131
7.6.2 आनत तल

क्रयाकलाप

प्र.1 इसके प ात पटरे को पुस्तक के च े या स्टू ल के शखर-तल के साथ चत्र 7.27(क) म दशाए अनुसार टका कर
र खए। अब गाड़ी को आनत तल के सहारे ख चते हुए आनत तल क ऊँचाई तक धीरे-धीरे लाइए। इस स्थ त म
कमानीदार तुला का पाठ्यांक (आवश्यक बल) क्या पूव चरण 2 के पाठ्यांक से कम प्राप्त होता है?

कमानीदार त ल
ु ा
गाड़ ी

पटरा

पुस्तकों का च ा
(क) (ख)

चत्र 7.27, पृष्ठ 131 — पुनर चत रेखा चत्र: (क) कम लंबाई के (अ धक ढलान वाले) तथा (ख) अ धक लंबाई के (कम
ढलान वाले) आनत पटरे पर खलौना गाड़ी को ख चने म लगाए गए बल का मापन; दोन स्थ तय म पुस्तक के च े क
ऊँचाई समान है।

हाँ — आनत तल पर कमानीदार तुला का पाठ्यांक सीधे ऊपर उठाने क तुलना म स्पष्ट रूप से कम आता है।

गाड़ी को कैसे उठाया गया कमानीदार तुला का पाठ्यांक तय क गई कया गया काय
दूरी

चरण 2 — h = 0.5 m तक ऊध्व mg (पूर ा भार ) 0.5 m mg × 0.5 m
िदशा में उठाना

चरण 3 — L = 1.5 m के पटरे पर mg × (h/L) = mg/3, अथ त लगभग 1.5 m (mg/3) × 1.5 m = mg × 0.5 m
खी ंचना एक -ितहाई — समान

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पटरे का यािं त्रक लाभ = L ÷ h = 1.5 m ÷ 0.5 m = 3

अतः आयास भार का एक-ितहाई रह जाता है।

यिद गाड़ ी का भार 6 N हो तो पटरे पर त ल
ु ा का पाठ ांक लगभग 2 N आना चािहए।

ऐसा क्य होता है: पटरा अ भलंब बल के ारा गाड़ी के भार का कुछ भाग स्वयं सँभाल लेता है। आपको केवल भार
का वह घटक पार करना पड़ता है जो ढलान के अनु दश काय करता है, और ढलान जतनी कम होगी वह घटक
उतना ही छोटा होगा।

स्वयं जाँ चए: वास्त वक पा ांक मा पए। वह mg × h/L से कुछ अ धक आएगा, क्य क गाड़ी के प हय और
पटरे के बीच के घषण को भी पार करना पड़ता है — ऊपर क व्युत्प म घषण क उपेक्षा क गई है।

प्र.2 अब पटरे और आधार के बीच का झुकाव (कोण) कम क जए जैसा क चत्र 7.27 (ख) म प्रद शत है और इस
क्रयाकलाप के चरण 3 को दोहराइए। ध्यान द जए क जब पटरे को कम कोण पर झुकाया जाता है तो गाड़ी को
ऊपर ख चने के लए आवश्यक बल का मान (कमानीदार तुला का पाठ्यांक) कस प्रकार प रव तत होता है।

कमानीदार त ल
ु ा
गाड़ ी

पटरा

पुस्तकों का च ा
(क) (ख)

चत्र 7.27, पृष्ठ 131 — पुनर चत रेखा चत्र: (क) कम लंबाई के (अ धक ढलान वाले) तथा (ख) अ धक लंबाई के (कम
ढलान वाले) आनत पटरे पर खलौना गाड़ी को ख चने म लगाए गए बल का मापन; दोन स्थ तय म पुस्तक के च े क
ऊँचाई समान है।

पटरे का झुकाव कम करने पर आवश्यक बल और भी घट जाता है — कतु अब गाड़ी को अ धक दूरी तक ख चना पड़ता है।

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समान ऊँ चाई h के िलए कम झुक ाव का अथ है अिधक L

यांित्रक लाभ = L ÷ h → बड़ ा

आयास F′ = mg × (h ÷ L) → छोटा
िकया गया काय = F′ × L = mgh → अपिरवित त

पटरे क लंबाई L (H = 0.5 M) यां त्रक लाभ L/H 6 N क गाड़ी के लए आयास कया गया काय

1.0 m 2 3.0 N 3.0 J

1.5 m 3 2.0 N 3.0 J

3.0 m 6 1.0 N 3.0 J

ऐसा क्य होता है: आनत तल काय को कम नह कर सकता — वह तो केवल ऊँचाई से तय होकर mgh पर र
है। वह इतना ही कर सकता है क बल के बदले दूरी दे दे । पटरे क लंबाई दोगुनी करने पर आयास आधा और दूरी
दोगुनी हो जाती है, गुणनफल ठ क वही रहता है।

क्या आप जानते ह? प हयेदार कु सय के लए बनाई जाने वाली लंबी, हल्क ढलान वाली रप तथा पहाड़ क
घुमावदार सड़क इसी सद्धांत पर बनती ह।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 132

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7.6.2 आनत तल

सो चए और बताइए

प्र.9 व्याख्या क जए क पहाड़ पर सड़क नीचे से ऊपर तक सीधे न बनाकर कम ढलान क घुमावदार क्य बनाई
जाती ह ( चत्र 4.26)?

पवतीय माग

चत्र 4.26, पृष्ठ 67 (अध्याय 4) — पुनर चत रेखा चत्र: पहाड़ी पर कम ढलान के घुमावदार मोड़ से ऊपर चढ़ता हुआ
माग।

पहाड़ी क घुमावदार सड़क एक लंबा आनत तल है। वह वाहन को उसी ऊँचाई h तक कह अ धक लंबे पथ L से चढ़ाती है, अतः
सड़क के अनु दश आवश्यक बल बहुत कम रह जाता है।

ढलान के िलए यांित्रक लाभ = L ÷ h (समीकरण 7.13)

सड़ क के अनुिदश आवश्यक बल, F′ = mg × (h ÷ L)

सड़ क को घुमावदार बनाने से उसी h के िलए L बड़ ा हो जाता है → F′ छोटा हो जाता है

गुरु त्व के िवरुद्ध िकया गया काय = F′ × L = mgh — दोनों िस्थितयों में समान

मान ली जए 1500 kg के ट्रक को 300 m ऊँची पहाड़ी चढ़नी है, g = 10 m s–2—

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
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गुरु त्व के िवरुद्ध काय = mgh = 1500 kg × 10 m s–2 × 300 m = 45,00,000 J
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600 m की सीधी चढ़ ाई पर: F′ = 45,00,000 J ÷ 600 m = 7500 N
a g
l a se
g
6000 m लंबी घुमावदार सड़ क पर: F′ = 45,00,000 J ÷ 6000 m = 750 N — दसवाँ भाग
a

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ऐसा क्य होता है: सड़क ट्रक क आवश्यक ऊजा घटा नह सकती — वह mgh है और पहाड़ी क ऊँचाई से तय
ag
m गुनी दूरी पर फैला दे ती है, जससे कसी भी क्षण आवश्यक
है। कम ढलान इतना ही करती है क उसी काय कोeदस
s
a
aglऔर टायर क पकड़ 750 N दे सकते ह, 7500 N नह ।
बल दसवाँ भाग रह जाता है। साधारण इंजन

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m.
दो और कारण: कम ढलान पर टायर के फसलने क संभावना घट जाती है, और उतरते समय ेक को वही mgh

m as e
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कह अ धक दूरी म हटाना पड़ता है, जससे वे कम गम होते ह और सुर क्षत रहते ह।

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व्याख्या क जए क कसी भवन के ऊपरी तल तक पहुँचने के लए हम सीधी खड़ी हुई सीढ़ क तुलना म आनत
m a
प्र.10

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सीढ़ का उपयोग अ धक सु वधाजनक क्य लगता है?

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se m आनत सीढ़ ी
g l a ऊ व धर सीढ़ ी
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भवन m
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m ।g
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चत्र 7.30, पृष्ठ 132 — पुनर चत रेखा चत्र: एक ही भवन पर समान ऊँचाई तक पहुँचने के लए लगाई गई आनत
सीढ़ तथा ऊध्वाधर सीढ़a
se m
g l a
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m .
m a s e
co agl

m .
ase
तरछ सीढ़ एक आनत तल है। उसके प्रत्येक डंडे पर आप कम ऊँचाई चढ़ते ह, अतः हर बार कम बल लगता है — और सीढ़ स्वयं
आपके भार का कुछ भाग सँभाल लेती है।
a g l

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m .
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सीधी खड़ ी सीढ़ ी: पत्येक डंडा आपको पूरी डंडा-दू री िजतना ऊपर उठाता है

→ पत्येक बार लगभग पूरा भार mg लगाना पड़ ता है, वह भी हाथों के सहारे

h ऊँ चाई तक जाने वाली L लंबाई की आनत सीढ़ ी:

सीढ़ ी के अनुिदश बल, F′ = mg × (h ÷ L) < mg

कु ल िकया गया काय = F′ × L = mgh — दोनों सीिढ़ यों के िलए समान

ऐसा क्य होता है: तरछ सीढ़ पर डंडे आपके पैर को सीढ़ के लंबवत दशा म धकेलते ह और यह अ भलंब बल
आपके भार का एक भाग वहन कर लेता है। आपको भार का केवल वह भाग लगाना पड़ता है जो ढलान के अनु दश
है, और वह भी अ धक लंबी चढ़ाई म। सीधी खड़ी सीढ़ पर डंडे तो सीधे ऊपर धकेलते ह, कतु टके रहने के लए
आपको पकड़कर ख चना भी पड़ता है, अतः उठाने का बड़ा भाग आपक भुजाएँ करती ह।

ध्यान द जए: यहाँ "सु वधाजनक" का अथ है प्रत्येक क्षण कम बल, कम ऊजा नह । 3 m ऊँची पहली मं जल तक
चढ़ने म 50 kg के व ाथ को दोन सी ढ़य पर mgh = 50 × 10 × 3 = 1500 J ही खच करना पड़ता है।

क्रयाकलाप 7.4 — आइए, जाँच कर — पृष्ठ 133
7.6.3 उत्तोलक

क्रयाकलाप

प्र.1 पैमाने के दूसरे सरे पर एक रबड़ र खए। क्या स्टे पलर ऊपर उठ जाता है? य द नह तो एक और रबड़ र खए।

एक या दो रबड़ रखने पर पैमाने का दूर वाला सरा नीचे झुक जाता है और भारी स्टे पलर ऊपर उठ जाता है — जब क
स्टे पलर का भार रबड़ से कई गुना अ धक होता है।

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पैमाना एक उत्तोलक है और पेंिसल आलंब।

संत ल
ु न की शत: आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा (समीकरण 7.15)

मान लीिजए पेंिसल स्टे पलर वाले िसरे से 5 cm और रबड़ वाले िसरे से 25 cm दू र है:

भार भुजा = 5 cm, आयास भुजा = 25 cm

यािं त्रक लाभ = आयास भुजा ÷ भार भुजा = 25 cm ÷ 5 cm = 5

अतः 0.2 N भार वाली रबड़ 5 × 0.2 N = 1 N तक के स्टे पलर को उठा सकती है

ऐसा क्य होता है: रबड़ वाला सरा प सल से दूर है, अतः वह अ धक दूरी तय करता है; स्टे पलर वाला सरा प सल
के पास है, अतः बहुत कम चलता है। एक सरे पर कया गया काय दूसरे सरे तक पहुँचता है, F1d1 = F2d2।
इस लए अ धक दूरी चलने वाला छोटा बल कम दूरी चलने वाला बड़ा बल दे सकता है।

यह करके दे खए: प सल को खसकाकर पैमाने के मध्य के पास लाइए। यां त्रक लाभ घट जाता है और अब रबड़
स्टे पलर को नह उठा पात । प सल को स्टे पलर के और पास ले जाइए तो एक ही रबड़ पयाप्त हो जाती है। उ ोलक
क पूरी श क्त इसी म है क आलंब कहाँ रखा गया है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 133
7.6.3 उत्तोलक

प्र.1 उत्तोलक के एक सरे पर कम बल लगाकर दूसरे सरे पर रखी वस्तु पर अ धक बल लगाया जा सकता है। यह
कस प्रकार संभव होता है?

यह इस लए संभव है क उ ोलक बल नह , काय आगे पहुँचाता है। जस सरे को आप दबाते ह वह कम बल के साथ अ धक दूरी
चलता है; भार वाला सरा अ धक बल के साथ कम दूरी चलता है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

भार F₂ (अिधक) आयास F₁ (कम)

आयास भुजा d₁ (लंबी)

भार भुजा d₂ (छोटी)
आलंब

लंबी भुजा पर चलने वाला छोटा आयास छोट भुजा पर बड़ा बल दे ता है: F₁ × d₁ = F₂ × d₂।

आयास वाले िसरे पर िदया गया काय = भार वाले िसरे पर पाप्त काय

F1 × d1 = F2 × d2 (समीकरण 7.14)

पुन व्यविस्थत करने पर: F2 = F1 × (d1 ÷ d2)

यांित्रक लाभ = आयास भुजा ÷ भार भुजा = d1 ÷ d2 (समीकरण 7.16)

ऐसा क्य होता है: उ ोलक एक दृढ़ छड़ है जो आलंब पर घूमती है, अतः दोन सरे समान समय म समान कोण से
घूमते ह। आलंब से जो सरा अ धक दूर है उसे उसी अनुपात म लंबा चाप तय करना पड़ता है। चूँ क एक सरे पर छड़
पर कया गया काय दूसरे सरे पर प्रकट होता है, लंबे पथ के साथ छोटा बल और छोटे पथ के साथ बड़ा बल आना ही
चा हए।

उत्तोलक जो नह कर सकता: वह कुल काय नह घटाता और ऊजा नह बनाता। 200 N क च ान को 0.1 m
उठाने म आपको 20 J दे ना ही पड़ेगा, चाहे सब्बल लगाइए या नंगे हाथ।

क्रयाकलाप 7.5 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 134

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7.6.3 उत्तोलक

क्रयाकलाप

प्र.1 सभी अवलोकन और माप को अं कत (record) क जए और अ धक पं क्तयाँ जोड़कर ता लका 7.1 को पूरा
क जए। [बाएँ पलड़े म सक्क क संख्या n₁ (आयास); आलंब से बाएँ पलड़े क दूरी L₁ (cm); दाएँ पलड़े म
सक्क क संख्या n₂ (भार); आलंब से दाएँ पलड़े क दूरी L₂ (cm)]

ता लका 7.1 — पलड़ म सक्क क संख्या और आलंब से उनक दूरी

बाएँ पलड़े म सक्क क आलंब से बाएँ पलड़े दाएँ पलड़े म सक्क क आलंब से दाएँ पलड़े
संख्या N1 (आयास) क दूरी L1 (CM) संख्या N2 (भार) क दूरी L2 (CM)

1 1

1 2

ता लका 7.1, पृष्ठ 134 — पुस्तक म छपी दोन पं क्तयाँ। इसे उतारकर दाएँ पलड़े म 4 तथा 8 सक्क के लए और
पं क्तयाँ जो ड़ए।

बाएँ पलड़े (1 सक्का) को एक नयत दूरी पर र खए — मान ली जए L1 = 20 cm — और हर बार भारी दाएँ पलड़े को तब तक
खसकाइए जब तक दं ड क्षै तज न हो जाए। एक सामान्य पूण ता लका इस प्रकार होगी—

बाएँ पलड़े म सक्के N₁ दूरी L₁ दाएँ पलड़े म सक्के N₂ दूरी L₂ N₁ × N₂ ×
(आयास) (CM) (भार) (CM) L₁ L₂

1 20 1 20 20 20

1 20 2 10 20 20

1 20 4 5 20 20

1 20 8 2.5 20 20

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अंितम दो स्तं भ सदै व बराबर आते है,ं अतः दंड तब क्षैितज रहता है जब
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n1 × L 1 = n 2 × L 2
m a g
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g
अथ त आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा (समीकरण 7.15)
a

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यांित्रक लाभ = भार ÷ आयास = n2/n1 = L1/L2
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चौथी पंिक्त: यांित्रक लाभ = 8 ÷ 1 = 20 cm ÷ 2.5 cm = 8
a

. com
ऐसा क्य होता है: यह दं ड-तुला प्रथम ेणी का उ ोलक है जसम डोरी आलंब का काय करती है। सभी सक्के

m a s em
co पड़ती है, क्य क दोन ओर मलान बल × भुजा के गुणनफल का होताaहैg। l
एक समान भार के ह, अतः सक्क क संख्या सीधे बल का माप है। भार दोगुना करने पर आलं ब से उसक दूरी
.
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आधी करनी

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ध्यान द जए: एक जैसे एक रुपये के सक्के और मजबूत प्ला स्टक का पैमाना ली जए, तथा पलड़ को पतले धागे

a s
comपा ांक गलत आएँगे। agl
से लटकाइए ता क भुजा क लंबाई सरलता से पढ़ जा सके। य द खाली दं ड आरंभ म ही क्षै तज न हो तो एक पलड़े
को थोड़ा खसकाकर उसे क्षै तज क जए, अन्यथा .सभी
a s em
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सो चए और बताइए — पृष्ठ 135
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7.6.3 उत्तोलक — उत्तोलक का वग करण

सो चए और बताइए

प्र.11 चत्र 7.35 म दशाए अनुसार चम्मच क सहायता से कसी डब्बे का ढक्कन खोलना सरल क्य होता है?

चम्मच ढक्कन

िडब्बे का िकनारा

िडब्बा
िड ब् बे को िस्थर पकड़े हए
ु हाथ

चत्र 7.35, पृष्ठ 135 — पुनर चत रेखा चत्र: चम्मच का सरा डब्बे के ढक्कन के नीचे लगाकर उसके ह े को दबाया
जाता है, जब क दूसरा हाथ डब्बे को स्थर पकड़े रहता है।

चम्मच यहाँ बहुत बड़े यां त्रक लाभ वाले प्रथम ेणी के उत्तोलक क भाँ त काय करता है — डब्बे का कनारा आलंब है, ढक्कन
का कनारा भार है और ह े के दूर वाले सरे पर आपका हाथ आयास लगाता है।

भार भुजा = िडब्बे के िकनारे से ढक्कन के िकनारे तक की दू री ≈ 1 cm

आयास भुजा = िकनारे से आपके हाथ तक की दू री ≈ 10 cm

यांित्रक लाभ = आयास भुजा ÷ भार भुजा = 10 cm ÷ 1 cm = 10

अतः हाथ का 20 N बल ढक्कन पर उठाने वाला बल दे त ा है

F2 = F1 × (d1 ÷ d2) = 20 N × 10 = 200 N

ऐसा क्य होता है: ढक्कन चार ओर से कनारे म कसा रहता है और उसे उखाड़ने के लए उँ ग लय से कह अ धक
बल चा हए। चम्मच काय को घटाता नह , कतु आपके हाथ को ढक्कन के कनारे से लगभग दस गुनी दूरी चलाकर
बल को दस गुना कर दे ता है। पूरे समय F1d1 = F2d2 ही लागू रहता है।

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यह करके दे खए: चम्मच को सरे के ान पर ह े के बीच से पक ड़ए। आयास भुजा आधी हो जाती है, यां त्रक
लाभ आधा रह जाता है और ढक्कन उठाना स्पष्ट रूप से क ठन हो जाता है — यही प्रमाण है क भुजाओं क लंबाई
ही नणायक है।

प्र.12 कसी कठोर वस्तु को काटने के लए उसे कची के आलंब के नकट क्य रखा जाता है?

क्य क वस्तु को आलंब के पास ले जाने से भार भुजा छोट हो जाती है, और छोट भार भुजा का अथ है अ धक यां त्रक लाभ —
इस लए ब्लेड वस्तु पर कह बड़ा बल लगाते ह।

कैं ची पथम ेणी का उत्तोलक है — कील (rivet) आलंब है।

यांित्रक लाभ = आयास भुजा ÷ भार भुजा
आयास भुजा (कील से उँ गिलयों तक) समान रहती है, मान लीिजए 8 cm

वस्त ु नोक के पास: भार भुजा = 6 cm → यांित्रक लाभ = 8/6 = 1.3

वस्त ु कील के पास: भार भुजा = 1 cm → यािं त्रक लाभ = 8/1 = 8

उँ गिलयों के 30 N दबाव पर—

नोक के पास: काटने वाला बल = 30 N × 1.3 = 40 N

कील के पास: काटने वाला बल = 30 N × 8 = 240 N

ऐसा क्य होता है: ब्लेड क ल के प रतः घूमते ह, अतः क ल के पास का बदु बहुत छोटा चाप तय करता है जब क
आपक उँ ग लयाँ बड़ा चाप। F1d1 = F2d2 के अनुसार भार पर कम ग त के साथ अ धक बल आना ही चा हए।
मोटा ग ा या तार जैसी कठोर वस्तुओं को यही बड़ा बल चा हए; मुलायम कागज को नह , इस लए उसे ब्लेड म कह
भी काटा जा सकता है।

क्या आप जानते ह? तार काटने वाले प्लास और सँड़सी म जबड़े ायी रूप से छोटे और ह े लंबे बनाए जाते ह
— ठ क इसी कारण से उनका यां त्रक लाभ अ भकल्प से ही अ धक होता है।

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प्र.13 पूरे इ तहास म (प हय , भार या चुंबक का उपयोग करके बने) सदै व चलते रहने वाली मशीन के कई प्रारूप
प्रस्ता वत कए गए ह ले कन वास्तव म कोई भी सदै व के लए चलती नह रहती है। सभी वास्त वक मशीन
अंतत: धीमी हो कर रुक क्य जाती ह? काय एवं ऊजा के पद म व्याख्या क जए।

प्रत्येक वास्त वक मशीन के ग तमान पुज पर घषण और वायु प्र तरोध काय करते ह। ये बल नरंतर ऋणात्मक काय करते ह और
मशीन क यां त्रक ऊजा को ऊष्मा तथा ध्व न म बदल दे ते ह — ऐसे रूप जो ग तमान पुज म वापस नह लौट सकते। ईंधन या
व ुत से भंडार भरा न जाए तो यां त्रक ऊजा घटते-घटते शून्य हो जाती है और मशीन रुक जाती है।

मशीन पर काय-ऊज पमेय लगाने पर:

यांित्रक ऊज में पिरवतन = सभी बलों ारा िकया गया काय

घषण व वायु पितरोध सदै व गित का िवरोध करते है,ं अतः उनका काय ऋणात्मक होता है

एक चक्र के बाद यांित्रक ऊज = पहले की यांित्रक ऊज – (ऊष्मा व ध्विन में गई ऊज )

हर चक्र में भंडार छोटा → गित धीमी → अंत तः शून्य

सदै व चलने वाली मशीन को इन दो असंभव बात म से एक करनी पड़ेगी—

ऐसी मशीन जो शून्य से ऊजा उत्पन्न करे ता क सदा उपयोगी काय करती रहे। यह ऊजा संरक्षण के नयम का उल्लंघन है —
ऊजा रूप बदल सकती है, कह से प्रकट नह हो सकती।
ऐसी मशीन जसम घषण, वायु प्र तरोध और ध्व न बल्कुल न ह और जो केवल चलती रहे। वह भी कोई उपयोगी काय नह
कर सकेगी, क्य क नकाला गया प्रत्येक जूल उसके अपने भंडार से ही जाएगा।

घषण क हा न क्य नह लौटती: पृष्ठ 126 के "आइए, और चतन कर" बॉक्स म यही मुख्य बात कही गई है —
गुरुत्वीय, वै ुत या चुंबक य बल के वरुद्ध कया गया काय तज ऊजा के रूप म सं चत होता है और लौटाया जा
सकता है। घषण के वरुद्ध कया गया काय सं चत नह होता। वह पुज और वायु म फैली अव्यव त तापीय ऊजा
बन जाता है, और प हय , भार या चुंबक क कोई भी व्यव ा उसे वापस नह बटोर सकती।

ध्यान द जए: अ े अ भकल्प से हा न कम क जा सकती है — चकने बेय रग, तेल, धारारे खत आकृ त —
जससे मशीन अ धक दे र चलती है। शून्य कभी नह क जा सकती।

क्या होगा य द … — पृष्ठ 135

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7.6.3 उत्तोलक — उत्तोलक का वग करण

क्या होगा य द …

प्र.1 … सदै व चलते रहने वाली मशीन अथात ऐसी मशीन बनाना संभव हो जो एक बार चलना आरंभ करने के प ात
बना ईंधन या वद्युत के उपयोगी काय करती रह?

ऐसी मशीन बन ही नह सकती, और कारण वही है जस पर यह पूरा अध्याय टका है — कया गया काय = ऊजा म प रवतन।
सदा उपयोगी काय करते रहने का अथ होगा एक ऐसे भंडार से सदा ऊजा बाँटते रहना जो कभी भरा ही नह जाता।

समय t में िदया गया उपयोगी काय = W

मशीन के भंडार से ली गई ऊज = W (और कोई ोत है ही नही ं)
समय t के बाद: शेष ऊज = E0 – W

t बढ़ ने पर भंडार िरक्त हो जाता है और मशीन को रु कना ही पड़ ेगा।
ृ न।
सदै व चलने के िलए चािहए E0 = अनंत , अथवा शून्य से ऊज का सज

य द ऐसी मशीन सचमुच होती तो क्या होता:

न बजलीघर चा हए होते, न बाँध, न ईंधन — हर घर म रखा एक छोटा-सा बक्सा बल्ब, पंप और रेलगा ड़याँ सदा चलाता रहता,
न ईंधन का बल होता न धुआँ।
कतु यही तक शेष भौ तक को तोड़ दे ता। गरती गद क चाल, राकेट क पहुँच और ईंधन से मलने वाली ऊष्मा — इन सबका
पूवानुमान ऊजा संरक्षण से ही होता है। य द ऊजा कह से भी प्रकट हो सकती तो इनम से कोई गणना काम न करती — और ये
गणनाएँ प्र त दन काम करती ह।

यह वचार बार-बार क्य लौटता है: अ तरह बना प हया या चुंबक क व्यव ा आश्चयजनक रूप से लंबे समय
तक घूमती रह सकती है, जो उत्साही आ वष्कारक को "सदै व" जैसी लगती है। सावधानी से मापने पर हर बार
घषण, वायु प्र तरोध और ध्व न के कारण धीमी कतु नरंतर हा न दखाई दे ती है। प्रस्ता वत प्रत्येक अ भकल्प
परीक्षण म ठ क इसी बदु पर वफल हुआ है।

क्या आप जानते ह? हजार ऐसे अ भकल्प क वफलता स्वयं म एक वै ा नक प्रमाण है। यह ऊजा संरक्षण के
नयम के पक्ष म सबसे प्रबल प्रायो गक साक्ष्य म से एक है — प्रकृ त को इसे तोड़ने का हर अवसर दया गया और
उसने कभी नह तोड़ा।

अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 136 – 138

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय-अंत अभ्यास
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अभ्यास प्रश्न

.co a g l
a s em क नम्न ल खत कथन सत्य ह या असत्य— (i) काय तब होता है जब कोई बल लगाया जाता है भले ही
gl
बताइए
a
प्र.1
वस्तु ग त न करे। (ii) बाल्ट को ऊध्वाधरतः ऊपर उठाने से बाल्ट पर धनात्मक काय होता है। (iii) काय और
ऊजा दोन का SI मात्रक जूल (J) है। (iv) एक स्थर तनी हुई रबड़ क प
m
म ग तज ऊजा होती है। (v) ऊजा
एक रूप से दूसरे रूप म प रव तत हो सकती है।
. co ag
em
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a

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m.
क्रम कथन सत्य / कारण

se
असत्य

coतबmहोता है जब बल लगाया जाए, l a
g शून्य है, चाहे आप िकतना ही जोर
. W = F × s। s = 0 होने परaकाय
emभले ही वस्तु गित न करे
अस त्य
s
(i) काय

a
agl
लगाएँ (िचत्र 7.5, दीवार धके लना)।

(ii) बाल्टी को ऊध्व धरतः ऊपर उठाने पर स त्य आपका बल ऊपर की ओर है और िवस्थापन भी ऊपर की ओर — एक

m a s
.co agl
उस पर धनात्मक काय होता है ही िदशा, अतः W धनात्मक।

स त्m
(iii) काय और ऊज दोनों का SI मात्रक जूल
l a se य िकया गया काय ऊज में पिरवतन के रूप में पकट होता है, अतः मात्रक
(J) है
a g एक ही होना चािहए। 1 J = 1 N m = 1 kg m² s⁻²।

m
अस त्य
co
(iv) िस्थर तनी हुई रबड़ की प ी में गितज K = ½mv² और v = 0, अतः K = 0। उसमें िवकृ ित के कारण
ऊज होती है पत्यास्थ िस्थितज ऊज संिचत है।
m .
m एक रूप से दू सरे रूप में पिरवितत as e
(v)
.coहो सकती है
ऊज स त्य
a g l
बल्ब में िवद्य तु → पकाश, माँस पेिशयों में रासायिनक → यांित्रक, घंटी

a s em में यांित्रक → ध्विन (अनुभाग 7.3)।

agl
(i) और (iv) म सावधानी: ये दोन ही अध्याय के मुख्य भ्रम ह। थकान काय नह है, और तना होना ग त म होना
se m
comापन है; ग तज ऊजा क कसौट सदै व चाल है। g l a
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नह है। काय क कसौट सदै व बल क दशा म व
m
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प्र.2 रक्त स्थान भ रए— (i) कया गया काय = ______ × ______ (बल क दशा म)। (ii) कसी वस्तु पर ______ न्यूटन
बल लगाने से वस्तु 1 m वस्था पत होती है तो 1 जूल काय संपन्न होता है। (iii) m द्रव्यमान और v वेग वाले पड
क ग तज ऊजा का व्यंजक ______ होगा। (iv) पृथ्वी क सतह से h ऊँचाई पर स्थत m द्रव्यमान क वस्तु क
स्थ तज ऊजा ______ होती है। (v) काय करने क ______ को श क्त कहते ह।

क्रम उत्तर कहाँ से

(i) बल × िवस्थापन समीकरण 7.1 / 7.2: W = F × s

(ii) 1 1 J = 1 N × 1 m, पष्ृ ठ 118

(iii) ½mv² समीकरण 7.6

(iv) mgh समीकरण 7.8

(v) दर समीकरण 7.11: P = W/t

पत्येक सूत्र के मात्रक जाँिचए—

W=F×s→N×m=J

K = ½mv² → kg × (m s–1)2 = kg m2 s–2 = J

U = mgh → kg × m s–2 × m = kg m2 s–2 = J
P = W/t → J ÷ s = W (वाट)

ध्यान द जए: ऊजा के तीन सूत्र को घटाकर kg m² s⁻² ही आना चा हए। य द आपके लखे सूत्र से यह न आए
तो वह गलत है — परीक्षा म यह सबसे तेज जाँच है।

प्र.3 जब ऊपर क ओर फक गई गद अपने उच्चतम बदु पर पहुँचती है तो नम्न ल खत म से कौन-सा/ से कथन सही
है/ह? (i) गद पर लगने वाला बल शून्य है। (ii) गद का त्वरण शून्य है। (iii) इसक ग तज ऊजा शून्य है। (iv)
इसक स्थ तज ऊजा अ धकतम है।

सही कथन ह (iii) तथा (iv)।

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क्रम कथन सही? कारण

(i) गेंद पर लगने वाला बल शून्य है नही ं ग रु
ु त्व कभी बंद नही ं होता। उच्चतम िबंद ु पर भी भार mg नीचे की ओर लग रहा
है।

(ii) गेंद का त्वरण शून्य है नही ं a = F/m = mg/m = g = 10 m s⁻², नीचे की ओर — उस क्षण भी जब v = 0
है।

(iii) इसकी गितज ऊज शून्य है हाँ उच्चतम िबंद ु पर v = 0, अतः K = ½mv² = 0।

(iv) इसकी िस्थितज ऊज अिधकतम हाँ वही ं h सबसे अिधक है, अतः U = mgh सबसे अिधक।
है

पूरी उड़ ान में यांित्रक ऊज संरिक्षत रहती है:

फेंकते समय: K = ½mu2, U = 0

उच्चतम िबंद ु पर: K = 0, U = mghmax

बराबर करने पर: mghmax = ½mu2 → hmax = u2 ÷ 2g

(i) और (ii) म वद्याथ क्य फँसते ह: शून्य वेग को शून्य त्वरण मान लया जाता है। वेग गद क चाल है; त्वरण
यह है क वह चाल कतनी तेजी से बदल रही है। उच्चतम बदु पर वेग ऊपर से नीचे जाते हुए शून्य से गुजर रहा है,
और वह पहले जतनी ही तेजी से बदल रहा है — प्र त सेकंड 10 m s⁻¹ क दर से।

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प्र.4 नम्न ल खत म से प्रत्येक स्थ त म होने वाले ऊजा रूपांतरण क पहचान क जए। (i) एक ट्रक का पहाड़ी पर
ऊपर क ओर चढ़ना (ii) घड़ी क ग का खुलना (iii) हरे पत्त ारा प्रकाश सं ेषण (iv) बाँध से बहता हुआ
जल (v) मा चस क तीली का जलना (vi) एक पटाखे म व ोट होना (vii) माइक्रोफोन म बोलना (viii) एक
द प्त वद्युत बल्ब (ix) सौर-पैनल

क्रम स्थ त ऊजा रूपांतरण वास्तव म क्या होता है

(i) टक का पहाड़ी पर रासायिनक → गितज + डीजल जलता है; इंजन पिहए चलाता है और टक ऊँचाई भी पाप्त करता
चढ़ ना गुरुत्वीय िस्थितज (+ तापीय) है, अतः mgh िमलता है। शेष घषण व गम िनकास में चला जाता है।

(ii) घड़ी की िस्पंग का पत्यास्थ िस्थितज → यांित्रक लपेटी हुई िस्पंग िवकृ त होकर ऊज संिचत करती है; खुल ते समय वह
खुल ना (गितज) िगयर और सुइयाँ घुम ाती है।

(iii) हरे पत्तों ारा पकाश पकाश (सौर) → रासायिनक पणहिरत ारा अवशोिषत सूय का पकाश ग्लूक ोस के बंध ों में संिचत हो
संश्ले षण ृ ला का ऊज भंडार है।
जाता है — यही आहार शंख

(iv) बाँध से बहता हुआ गुरुत्वीय िस्थितज → गितज जलाशय में ऊँचाई पर रखे जल में mgh है; िगरने पर वह ½mv² बन
जल (→ टरबाइन में िवद्य तु ) जाती है और टरबाइन घुम ाती है।

(v) मािचस की तीली रासायिनक → तापीय + पकाश तीली के िसरे के रसायन अिभिक्रया करके संिचत बंध ऊज ऊष्मा और
का जलना लौ के रूप में मुक्त करते है।
ं

(vi) पटाखे में िवस्फोट रासायिनक → तापीय + पकाश अत्यंत तीव अिभिक्रया; गम गैसे ं बाहर की ओर धके लती है,ं अतः टुक ड़ों
+ ध् विन + गितज और वायु को गितज ऊज भी िमलती है।

(vii) माइक्रोफोन में ध् विन → िवद्यतु वायु के कं पन एक िझल्ली को कं िपत करते है ं और कं िपत िझल्ली उसी
बोलना के अनुरूप िवद्य तु संके त उत्पन्न करती है।

(viii) दीप्त िवद्य तु बल्ब िवद्यतु → पकाश + तापीय धारा तंत ु को इतना गम कर दे ती है िक वह चमकने लगता है। तंत ु वाले
बल्ब में अिधकांश ऊज पकाश नही ं, ऊष्मा बनकर िनकलती है।

(ix) सौर-पैनल पकाश (सौर) → िवद्यतु पकाश-से ल सूय के पकाश को सीधे िवद्य तु धारा में बदल दे ते है।
ं

ध्यान दे ने योग्य पैटन: प्रत्येक त म कुल ऊजा पहले और बाद म समान रहती है — केवल नाम बदलता है। और
लगभग हर त म कुछ भाग तापीय ऊजा बन जाता है, जसका पुनः उपयोग सबसे क ठन होता है।

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प्र.5 एक वद्याथ को एक लफ्ट ारा धीरे-धीरे भूतल से भवन के सबसे ऊपरी तल तक ले जाया जाता है, तत्प ात
वही वद्याथ सी ढ़य से चढ़कर सबसे ऊपरी तल तक पहुँचता है। य द भवन क ऊँचाई h = 72.5 m, गुरुत्वीय
त्वरण g = 10 m s–2 और वद्याथ का द्रव्यमान m = 50 kg है तो— (i) य द वद्याथ को लफ्ट ारा सीधे
सबसे ऊपरी तल तक ले जाया जाता है तो उसक स्थ तज ऊजा म हुई वृ द्ध ात क जए। (ii) जब वद्याथ
सी ढ़य से चढ़कर सबसे ऊपरी तल पर पहुँचता है तो उसक स्थ तज ऊजा म वृ द्ध ात क जए। (iii) आप तय
कए रास्ते पर स्थ तज ऊजा क नभरता के संबंध म क्या नष्कष नकालगे?

(i) 36 250 J। (ii) 36 250 J — बल्कुल उतनी ही। (iii) गुरुत्वीय स्थ तज ऊजा केवल प्राप्त ऊँचाई पर नभर करती है,
तय कए गए रास्ते पर नह ।

(i) िलफ्ट ारा
सूत्र: ΔU = mgh

ΔU = 50 kg × 10 m s–2 × 72.5 m

ΔU = 36 250 J = 3.625 × 104 J (लगभग 36.25 kJ)

(ii) सीिढ़ यों ारा

आरंिभक और अंितम ऊँ चाई वही है,ं अतः h अब भी 72.5 m है

ΔU = 50 kg × 10 m s–2 × 72.5 m = 36 250 J — कोई अंत र नही ं

(iii) नष्कष: कसी वस्तु क गुरुत्वीय तज ऊजा केवल चुने गए संदभ तल से उसक ऊध्वाधर ऊँचाई पर नभर करती है। वह
रास्ते पर नभर नह करती — सीधे ऊपर, सी ढ़य से, घुमावदार ढलान से या पहाड़ी सड़क से — सभी म mgh समान ही रहता है।

ऐसा क्य होता है: गुरुत्व ऊध्वाधर नीचे क ओर काय करता है। सीढ़ के क्षै तज भाग — पायदान — पर
व ापन गुरुत्व के लंबवत होता है, अतः वहाँ गुरुत्व कोई काय नह करता और कुछ सं चत नह होता। केवल
ऊध्वाधर भाग गने जाते ह और उन सबका योग ठ क 72.5 m है।

फर अंतर क्या है: सी ढ़य पर व ाथ कह अ धक थक जाता है। ऐसा इस लए क पैर क माँसपे शयाँ शरीर को
आगे-पीछे ले जाने म भी काय करती ह और शरीर के भीतर ऊष्मा के रूप म ऊजा खोती ह। पृथ्वी- व ाथ नकाय म
सं चत ऊजा दोन तय म 36 250 J ही रहती है।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

एक क्रेन m द्रव्यमान को एक न
. com
emअ धक ऊजा एवं
प्र.6 त समय म कसी भवन के 10व तल तक उठाती है। इसके प ात यह उसी

m a s
coहए? यह मान ली जए क सभी तल क ऊँचाई समान है। gl
द्रव्यमान को उसी भवन के 20व तल तक दोगुने समय म उठाती है। इसके लए उसे कतनी और

. a
em
श क्त चा

a s
a gl

co m
ऊजा दोगुनी चा हए — अथात 100 % अ धक। श क्त ठ क उतनी ही चा हए — बल्कुल भी अ धक नह ।

e m . ag
g l as
a
मान लीिजए एक तल की ऊँ चाई h0 है और पहली बार में t समय लगता है।

co m
m.
पहली बार — 10वें तल तक

m as e
.co
ऊँ चाई = 10h0
a g l
m
Es1e= mg × 10h0
gl a
a P1 = E1 ÷ t = 10mgh0 ÷ t
m a s
m .co agl
l a se
g
दू सरी बार — 20वें तल तक , 2t समय में

ऊँ चाई = 20h0
a

co m
E2 = mg × 20h0 = 2E1
m .
m as e
.co
P2 = E2 ÷ (2t) = 20mgh0 ÷ 2t = 10mgh0 ÷ t = P1
a g l
se m
g l a
a
m
अितिरक्त आवश्यक ऊज = E2 – E1 = 10mgh0, अथ त 100 % अिधक

अितिरक्त आवश्यक शिक्त = P2 – P1 = 0 Wom l a se
.c a g
se m
l a
ag
श क्त क्य नह बदलती: श क्त प्र त एकांक समय कया गया काय है। ऊँचाई दोगुनी करने से काय दोगुना होता है,

co m
कतु समय भी दोगुना होने से वह काय दोगुने अंतराल पर फैल जाता है। दोन 2 के गुणक कट जाते ह, अतः क्रेन क

m .
मोटर ठ क उसी दर से काय कर रही है — बस अ धक दे र तक।
m as e
.co a g l
se m स्वयं जाँ चए: संख्याएँ र खए। m = 500 kg, h₀ = 3 m, g = 10 m s⁻², t = 30 s ली जए। तब E₁ = 500 ×
g l a
a c
.
10 × 30 = 1,50,000 J और P₁ = 5000 W। तथा E₂ = 500 × 10 × 60 = 3,00,000 J और P₂ = 3,00,000

s e m
a
÷ 60 = 5000 W। श क्त समान।
m
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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प्र.7 घरनी क सहायता से कसी झंडे को भू म से एक ऊँचे ध्वजदं ड के शीष तक उठाने के लए आवश्यक ऊजा कन
कारक पर नभर करती है? क्या झंडे को धीरे-धीरे या शीघ्रता से ऊपर उठाने पर कए गए काय के प रमाण म
अंतर होगा? य द झंडे को उठाने क ग त दोगुनी कर द जाए तो श क्त क आवश्यकता कस प्रकार प रव तत
होगी? अपने उत्तर क व्याख्या क जए।

ऊजा झंडे के द्रव्यमान, ध्वजदं ड क ऊँचाई तथा g पर नभर करती है। ग त से कए गए काय म कोई अंतर नह पड़ता।
ग त दोगुनी करने पर आवश्यक श क्त दोगुनी हो जाती है।

ऊज िकन कारकों पर िनभ र है

E = mgh, अतः िनभर है—

• m — झंडे का (तथा साथ उठने वाली रस्सी का) द व्यमान

• h — ध्वजदंड की ऊँ चाई

• g — गुरु त्वीय त्वरण
िस्थर िघरनी का यािं त्रक लाभ 1 होता है; वह के वल आपके नीचे की ओर िखंच ाव को ऊपर की ओर उठाव में

बदलती है, न बल बदलती है न ऊज ।

धीरे या शीघ?

W = mgh में t है ही नही।
ं दोनों िस्थितयों में िकया गया काय समान है।

गित दोगुन ी करने पर

P = W ÷ t। गित दोगुन ी होने पर समय आधा: t′ = t/2
P′ = W ÷ (t/2) = 2W ÷ t = 2P — शिक्त की आवश्यकता दोगुन ी

संख्याओं से स्पष्ट क जए। 0.5 kg का झंडा, 10 m ऊँचा दं ड, g = 10 m s–2—

कस प्रकार उठाया गया कया गया काय समय श क्त

धीरे , 0.5 m s⁻¹ से 0.5 × 10 × 10 = 50 J 20 s 2.5 W

दोग नु ी गित से , 1 m s⁻¹ 50 J — अपिरवितत 10 s 5 W — दोगुनी

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यहाँ काय और श क्त अलग क्य हो जाते ह: काय बताता है कतनी ऊजा ानांत रत हुई; श क्त बताती है
कतनी तेजी से। झंडा दोन तय म उसी ऊँचाई पर उतनी ही तज ऊजा के साथ पहुँचता है — वही काय है।
कतु रस्सी ख चने वाले व्य क्त या मोटर को वही ऊजा आधे समय म दे नी पड़ती है, और यह माँसपे शय या मोटर पर
भारी माँग है।

प्र.8 60 kg द्रव्यमान का कोई व्य क्त 100 kg के स्कूटर पर सवारी करता है, वह स्कूटर को v वेग तक त्व रत करता
है। दूसरे दन उसका 40 kg द्रव्यमान का पुत्र उसके साथ यात्री के रूप म बैठता है, य द उक्त दोन दन म स्कूटर
समान समय म समान चाल प्राप्त करता है। तो बताइए दोन दन म उपयोग कए गए ईंधन का अनुपात कतना
होगा? यह मान ली जए क स्कूटर म ऊजा का स्थानांतरण पूणतया ईंधन के कारण होता है और वायु प्र तरोध या
घषण के कारण कोई अन्य हा न नह होती है।

पहले दन और दूसरे दन प्रयुक्त ईंधन का अनुपात 4 : 5 होगा।

पहला िदन — व्यिक्त + स्कू टर

कु ल द व्यमान M1 = 60 kg + 100 kg = 160 kg

िवरामावस्था से आरंभ , अंितम चाल v:

E1 = ½M1v2 = ½ × 160 kg × v2 = 80v2 जूल (v, m s–1 में)

दू सरा िदन — व्यिक्त + पुत्र + स्कू टर

कु ल द व्यमान M2 = 60 kg + 40 kg + 100 kg = 200 kg

E2 = ½M2v2 = ½ × 200 kg × v2 = 100v2 जूल

ईंधन का अन पु ात (सारी ऊज ईंधन से आती है और कोई अन्य हािन नही ं)

E1 : E2 = 80v2 : 100v2 = 80 : 100 = 4 : 5

समय अंतराल का इसम कोई योगदान क्य नह : ईंधन ऊजा दे ता है, और आवश्यक ऊजा ½Mv² से तय है।
समय केवल इंजन क श क्त तय करता है, कुल जलने वाला ईंधन नह । चूँ क दोन दन समय समान है, श क्तय का
अनुपात भी वही 4 : 5 रहेगा।

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ध्यान द जए: बहुत सामान्य भूल यह है क 60 kg क तुलना 100 kg से या 60 + 40 = 100 kg से कर ली
जाए। इंजन को पूरे ग तमान नकाय को त्व रत करना पड़ता है, अतः स्कूटर का अपना 100 kg दोन दन गनना ही
चा हए।

प्र.9 सरकने वाली कु सय वाले सी-सॉ प्रकार के एक झूले पर एक तरफ एक बच्चा बैठा है और दूसरी ओर एक
वयस्क। वयस्क का भार बच्चे के भार से दोगुना है। इसके प ात भी सी-सॉ संतु लत है। ऐसी स्थ त को दशाता
हुआ एक चत्र बनाइए जसम आलंब से बच्चे और वयस्क क दूरी दशाई गई ह ।

संतुलन के लए बच्चे को आलंब से वयस्क क तुलना म दोगुनी दूरी पर बैठना होगा। य द वयस्क d दूरी पर बैठे तो बच्चा 2d
दूरी पर बैठेगा।

वयस्क, भार 2W
बच्चा, भार W

2d d
W × 2d = 2W × d — झूला संत ुिलत रहता है

आलंब

सी-सॉ प्रथम ेणी का उ ोलक है। हल्का बच्चा आलंब से उतनी ही दोगुनी दूरी पर बैठता है जतना वयस्क का भार दोगुना है।

उत्तोलक की संत ल
ु न शत (समीकरण 7.15):

आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा

मान लीिजए बच्चे का भार W और वयस्क का 2W है।

W × dबच्चा = 2W × dवयस्क

W कट जाता है: dबच्चा = 2 × dवयस्क

अतः यिद वयस्क आलंब से 1 m दू र बैठे तो बच्चे को 2 m दू र बैठना होगा।

जाँच : 300 N × 2 m = 600 N m तथा 600 N × 1 m = 600 N m ✔

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यह क्य काम करता है: सी-सॉ को संतु लत केवल भार नह करता, ब ल्क भार × आलंब से दूरी का गुणनफल —
अथात घूणन प्रभाव — करता है। आधा भारी होने क भरपाई ठ क-ठ क दोगुनी दूरी पर बैठकर हो जाती है।

यह करके दे खए: उदाहरण 7.13 ( चत्र 7.34) के झूले म AC = EC = 2 m और BC = DC = 1 m है; वहाँ
कुस A पर बैठा 15 kg का बच्चा कुस D पर बैठे 30 kg के बच्चे को संतु लत करता है — यही 2 : 1 का नयम।

प्र.10 एक गद को 20 m s–1 क ग त से ऊपर क ओर फका जाता है। (i) गद क ऊपर क ओर ग त और नीचे क
ओर ग त के समय इस पर गुरुत्व के अधीन कए गए काय के चह्न क पहचान क जए। (ii) य द गद 19.4 m
क ऊँचाई तक पहुँचती है तो वायु प्र तरोध ारा कतना काय कया जाता है? (मान ली जए g = 10 m s–2)

(i) ऊपर जाते समय ऋणात्मक, नीचे आते समय धनात्मक। (ii) ऊपर चढ़ते समय वायु प्र तरोध ने गद पर –12 J काय
कया।

ध्यान द जए: हद संस्करण म गद का द्रव्यमान छपने से रह गया है। अं ेजी संस्करण के अनुसार यह 2 kg है,
और नीचे क गणना उसी मान से क गई है।

(i) गुरु त्व ारा िकए गए काय का िच ह्न

गुरु त्व सदै व नीचे की ओर काय करता है।

ऊपर जाते समय: िवस्थापन ऊपर, बल के िवपरीत → ऋणात्मक काय (गेंद धीमी होती है और गितज ऊज

खोती है)

नीचे आते समय: िवस्थापन नीचे , बल की िदशा में → धनात्मक काय (गेंद ते ज होती है और गितज ऊज पाती

है)

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
(ii) चढ़ ाई में वायु पितरोध ारा िकया गया काय
m l as
.co
m = 2 kg, u = 20 m s–1, h = 19.4 m, g = 10 m s–2
m a g
l a se
g
aफेंकते समय गितज ऊज :

co m
Ki = ½mu2 = ½ × 2 kg × (20 m s–1)2 = 400 J
e m . ag
g l as
a
उच्चतम िबंद ु पर गितज ऊज : Kf = 0 J (गेंद क्षण भर के िलए रुक जाती है)

co m
m.
चढ़ ाई में गुरु त्व ारा िकया गया काय:

m as e
.co
Wगुरुत्व = –mgh = –(2 kg × 10 m s–2 × 19.4 m) = –388 J
a g l
se m
g l a
a पूरी चढ़ ाई पर काय-ऊज पमेय:
m a s
.co agl
Wगुरुत्व + Wवायु = Kf – Ki

se m
(–388 J) + Wवायु = 0 J – 400 J = –400 J
g l a
a
Wवायु = –400 J + 388 J = –12 J

co m
m .
m as e
.co a g l
उत्तर ऋणात्मक क्य और इतना छोटा क्य : वायु प्र तरोध प्रत्येक क्षण ग त का वरोध करता है, अतः उसका काय

a s em ऋणात्मक ही होना चा हए — वह ऊजा लेता है, दे ता नह । ये 12 J ठ क वही ऊजा है जो ऊष्मा और घूमती हवा के

agl रूप म गद से नकल गई। प रणाम दे खए: वायु न होती तो गद u²/2g = 400 ÷ 20 = 20 m तक जाती। इन्ह 12
m
J क हा न से अं तम 0.6 m छू ट गया।

a se
. com a g l
m
ase
स्वयं जाँ चए: 12 J ÷ (mg) = 12 J ÷ 20 N = 0.6 m — ठ क उतनी ही ऊँचाई क कमी। ऊजा का हसाब पूरी
तरह मल जाता है। agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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प्र.11 एक 10.0 kg का गुटका नगण्य घषण वाले क्षै तज फश पर ग तमान है। चत्र 7.37 म दशाए अनुसार गुटके पर
उसक ग त क दशा म 0 m से 4 m तक के वस्थापन के समय अंतराल म एक प रवत बल (variable
force) लगाया जाता है। य द गुटके क 0 m क स्थ त पर ग तज ऊजा 180 J थी तो गुटके क चाल ात
क जए। (i) 0 m पर और (ii) 4 m पर। क्या गुटके क ग त के कसी भाग म गुटके का त्वरण ऋणात्मक है?

50
(N)लब

0 1 2 3 4
िवस्थापन (m)

चत्र 7.37, पृष्ठ 138: गुटके पर लगाए गए बल का उसके वस्थापन के साथ आलेख।

(i) 0 m पर 6 m s⁻¹। (ii) 4 m पर लगभग 8.12 m s⁻¹। नह — त्वरण कभी ऋणात्मक नह होता, यद्य प 3 m से 4 m
के बीच वह घटता अवश्य है।

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50
बल (N)

छायांिकत क्षेत्रफल = काय = 150 J

0 1 2 3 4
िवस्थापन (m)

प रवत बल ारा कया गया काय चत्र 7.37 के बल- व ापन ाफ के नीचे बने समलंब का क्षेत्रफल है।

(i) 0 m पर चाल

K = ½mv2 → v = √(2K ÷ m)

v = √(2 × 180 J ÷ 10.0 kg) = √(36 m2 s–2) = 6 m s–1

0 m से 4 m तक बल ारा िकया गया काय = गाफ के नीचे का क्षेत्रफल

आकृ ित समलंब है: समांत र भुजाएँ 4 m (नीचे ) तथा 2 m (ऊपर का सपाट भाग, 1 m से 3 m), ऊँ चाई 50 N।

W = ½ × (4 m + 2 m) × 50 N = ½ × 6 m × 50 N = 150 J

खंडों से जाँच: ½(1 m)(50 N) + (2 m)(50 N) + ½(1 m)(50 N) = 25 + 100 + 25 = 150 J ✔

(ii) 4 m पर चाल — काय-ऊज पमेय से

4 m पर K = 0 m पर K + िकया गया काय = 180 J + 150 J = 330 J

v = √(2 × 330 J ÷ 10.0 kg) = √(66 m2 s–2) = 8.12 m s–1

क्या त्वरण कह ऋणात्मक है? नह ।

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a = F ÷ m, और गाफ दश ता है िक 0 m से 4 m तक हर िबंद ु पर F धनात्मक (गित की िदशा में) है।

0 से 1 m: F 0 → 50 N बढ़ ता है, अतः a 0 → 5 m s–2 बढ़ ता है

1 से 3 m: F = 50 N, अतः a = 50 N ÷ 10.0 kg = 5 m s–2, िनयत

3 से 4 m: F 50 N → 0 घटता है, अतः a 5 m s–2 → 0 घटता है — कम, िकं त ु िफर भी धनात्मक

यहाँ जो अंतर समझना आवश्यक है: घटता हुआ बल पीछे क ओर लगने वाला बल नह होता। 3 m से 4 m के
बीच भी गुटके को आगे ही धकेला जा रहा है, अतः उसक चाल बढ़ती ही रहती है — बस कम तेजी से। त्वरण तभी
ऋणात्मक होता जब ाफ अक्ष से नीचे चला जाता, और वह कभी नह जाता।

प्र.12 चंद्रमा क सतह (चंद्रतल) पर गुरुत्वाकषण पृथ्वी क सतह के गुरुत्वाकषण का लगभग 1/6 भाग है। एक
अंत रक्ष यात्री पृथ्वी क सतह से कसी गद को 8 m क ऊँचाई तक फक सकता है। य द उसी गद को उतने ही
ऊध्व वेग से चंद्रमा क सतह से ऊपर क ओर फका जाए तो गद चंद्रमा क सतह पर कतनी ऊँचाई तक
जाएगी?

गद चंद्रमा पर 48 m तक जाएगी — छह गुनी ऊँचाई।

अंत िरक्ष यात्री दोनों बार समान चाल u से फेंकता है, अतः गेंद की आरंिभक गितज ऊज भी समान है।

उच्चतम िबंद ु पर वह पूरी िस्थितज ऊज बन जाती है:

½mu2 = mgh → h = u2 ÷ 2g

पृथ्वी पर

hपृ = u2 ÷ (2gप)ृ = 8 m

चंद मा पर, gचं = gपृ ÷ 6

hचं = u2 ÷ (2gचं) = u2 ÷ (2 × gप/6)
ृ = 6 × u2 ÷ (2gप)ृ = 6 hपृ

hचं = 6 × 8 m = 48 m

संख्याओं से, gपृ = 10 m s–2 लेकर—

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u = √(2gपhृ प)ृ = √(2 × 10 × 8) = √160 ≈ 12.6 m s–1

gचं = 10 ÷ 6 ≈ 1.67 m s–2

hचं = u2 ÷ (2gचं) = 160 ÷ (2 × 1.67) = 48 m ✔

ऐसा क्य होता है: एक ही प्रकार से फकने पर गद को समान ग तज ऊजा ½mu² मलती है। चंद्रमा पर प्रत्येक
मीटर क चढ़ाई म केवल mgचंh अथात छठा भाग तज ऊजा लगती है, अतः उतनी ही ऊजा से छह गुनी ऊँचाई
मल जाती है। ध्यान द जए, गद का द्रव्यमान कह आता ही नह — वह दोन ओर से कट जाता है।

क्या आप जानते ह? इसी कारण चंद्रमा पर अंत रक्ष यात्री लंबी, धीमी छलाँग लगाते हुए चलते थे। पैर का वही
धक्का उन्ह छह गुना ऊपर उठा दे ता था।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
एक 1000 kg द्रव्यमान क एक कार सड़क पर नयत चाल से ग तमान है। अचानक चालक को आगे कोई बाधा
emको दे खने के क्षण
प्र.13

m a s
o ग त का आलेखी नरूपण चत्र 7.38 म दशाया गया है। (i) बताइए कagस्थl त A और B के बीच कार
दखाई दे ती है। वह कार को पूरी तरह रोकने के लए ेक लगाता है। चालक ारा आगे बाधा
से कार.cक

a s emग त कस प्रकार क है? (ii) स्थ त A पर कार क ग तज ऊजा का प रकलन क जए। (iii) बताइए क B
l
क
ag और C के बीच कार को रोकने के लए ेक ारा कतना काय करना होगा? (iv) कार क ग तज ऊजा कस
ऊजा म प रव तत हो जाती है?

co m
e m . ag
g l as
a

co m
m.
A B
m
35
as e
.co a g l
se m
l a
(m s⁻¹)

a g
m a s
.co agl
लाच

se m
g l a
a C

3m
0 1 2
. co
e m
m (s)
l as
.co g
समय

m a
l a se
g
चत्र 7.38, पृष्ठ 138: चालक ारा बाधा दे खने के क्षण (A) से कार के रुकने (C) तक का चाल–समय आलेख।

a
se m
com g l a
m . a
ase

agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 49 of 62

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

A B
35
चाल (m s⁻¹)

क्षे त्रफल = तय की गई दू री

C

0 1 2 3
समय (s)

A से B: एक सेकंड तक नयत चाल — चालक का प्र त क्रया काल। B से C: दो सेकंड म एकसमान मंदन से वराम।

(i) A और B के बीच कार सरल रेखा म 35 m s–1 क नयत चाल से चलती है।

गाफ t = 0 s से t = 1 s तक क्षैितज है, अतः चाल नही ं बदलती।

त्वरण = 0, अतः कार पर ने ट बल शून्य है — बेक अभी लगाए ही नही ं गए।

यह एक सेकं ड चालक का पितिक्र या काल है — बाधा दे खने और पैडल दबाने के बीच का समय।

इस बीच तय दू री = 35 m s–1 × 1 s = 35 m, अथ त बेक लगने से पहले ही इतनी दू री िनकल जाती है।

(ii) A पर गितज ऊज

K = ½mv2

K = ½ × 1000 kg × (35 m s–1)2

K = 500 kg × 1225 m2 s–2

K = 6,12,500 J = 6.125 × 105 J

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(iii) B से C तक बेक ारा िकया गया काय

B पर कार के पास अब भी 6,12,500 J है (चाल 35 m s–1 ही है)।

C पर कार िवरामावस्था में है: K = 0 J।
काय-ऊज पमेय: िकया गया काय = गितज ऊज में पिरवतन

W = 0 J – 6,12,500 J = –6,12,500 J

ऋणात्मक िच ह्न दश ता है िक बेक का बल गित का िवरोध करता है।

पित-जाँच: बेक लगने के बाद तय दू री = ित्रभुज का क्षेत्रफल = ½ × 2 s × 35 m s–1 = 35 m
बेक बल = 6,12,500 J ÷ 35 m = 17,500 N

और न्यूट न के ि तीय िनयम से: a = (0 – 35) ÷ 2 = –17.5 m s–2, F = 1000 × 17.5 = 17,500 N ✔

(iv) ग तज ऊजा मुख्यतः तापीय ऊजा म बदल जाती है — ेक पैड व डस्क, टायर तथा सड़क क सतह म ऊष्मा — और साथ
म थोड़ी ध्व न ऊजा (टायर क चरचराहट)।

सड़क पर इसका महत्त्व: कुल रुकने क दूरी 35 m प्र त क्रया + 35 m ेक = कुल 70 m है। और चूँ क K, v² के
अनुपात म है, 70 m s⁻¹ पर चलती कार से चार गुनी ऊजा हटानी पड़ती, अतः ेक क दूरी भी लगभग चार गुनी हो
जाती।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.14 एक घषण र हत (frictionless) पथ पर ग तमान 0.5 kg गद का स्थ तज ऊजा- वस्थापन ाफ चत्र 7.39 म
दशाया गया है। बदु O पर गद का वेग 0 m s–1 और स्थ तज ऊजा 30 J है। P, Q और R पर बल के वेग क
गणना क जए।

40 R
O
(J)

30
Q
ज ऊ ज ति थ

20
P
स्ि

10

स्
िव थापन (m)

चत्र 7.39, पृष्ठ 138: घषण र हत पथ पर ग तमान 0.5 kg गद क स्थ तज ऊजा का वस्थापन के साथ आलेख।

P पर गद लगभग 6.3 m s⁻¹ से ग तमान है, Q पर वह क्षण भर के लए वरामावस्था म है (0 m s⁻¹), और R तक वह
कभी पहुँच ही नह सकती।

ध्यान द जए: हद संस्करण म "बल के वेग" छपा है; यहाँ आशय गद के वेग से है, जैसा अं ेजी संस्करण म है।

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कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन AglaSem · NCERT Solutions

R रेखा से ऊपर है — अगम्य
R
40

O कु ल यािं त्रक ऊज = 30 J Q
30
िस्थितज ऊज (J)

P
20

10

िवस्थापन (m)

बदुदार रेखा गद का नयत 30 J का भंडार है। गद केवल उन्ह बदुओं तक जा सकती है जहाँ वक्र इस रेखा से नीचे है।

चरण 1 — कु ल यांित्रक ऊज ात कीिजए

O पर: v = 0 m s–1, अतः K = 0 J; और U = 30 J
कु ल यांित्रक ऊज E = K + U = 0 + 30 = 30 J

पथ घषण रिहत है, अतः E हर जगह 30 J ही रहेगी।

चरण 2 — पत् येक िबंद ु पर K = E – U, िफर v = √(2K ÷ m), जहाँ m = 0.5 kg

बदु ाफ से U K = 30 J – U V = √(2K ÷ M)

P 20 J 10 J √(2 × 10 ÷ 0.5) = √40 ≈ 6.3 m s⁻¹

Q 30 J 0J 0 m s⁻¹ — क्षण भर के िलए िवराम

R 40 J –10 J असंभव — गेंद R तक पहचु ँ ती ही नही ं

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
P पर: K = 30 J – 20 J = 10 J
m l as
.co
v = √(2K ÷ m) = √(2 × 10 J ÷ 0.5 kg) = √(40 m2 s–2) = 6.32 m s–1
m a g
l a se
g
aQ पर: K = 30 J – 30 J = 0 J

co m
v = √0 = 0 m s–1
e m . ag
g l as
R पर: K = 30 J – 40 J = –10 J
a

co m
m.
िकं त ु K = ½mv2 कभी ऋणात्मक नही ं हो सकती, अतः R तक पहुँच ा नही ं जा सकता।

m as e
.co a g l
a s em म क्या होता है: गद O से चलकर ग म तेज होती है, चढ़ाई पर धीमी होती है और Q पर ठ क शून्य चाल
gl से पहुँचती है। Q उसका पलटाव बदु है। वहाँ से वह उसी रास्ते लौट आती है, P को फर 6.3 m s⁻¹ से पार करती है
वास्तव
a
और शून्य चाल के साथ O पर लौट जाती है। घषण न होने के कारण वह O और Q के बीच यही यात्रा सदा दोहराती
m a s
.co agl
रहती है।

se m
g l a
ध्यान द जए: कसी भी a
तज ऊजा ाफ पर कुल ऊजा के मान पर क्षै तज रेखा ख च ली जए। वस्तु केवल उन्ह

m
भाग म ग त कर सकती है जहाँ वक्र उस रेखा से नीचे है; जहाँ वक्र रेखा को छू ता है वे उसके पलटाव बदु ह।

. co
e m
m l as
.co a g
m 1.5 kg द्रव्यमान का एक ना रयल, 10 m ऊँचाई वाले एक ना रयल के वृक्ष के शखर से समुद्र तट क गीली रेत
l a se प्र.15

ag पर गरता है। तट से टकराने पर ना रयल रेत म एक ग ा बनाकर स्थर हो जाता है। (i) रेत से टकराने से ठ क

m
पहले ना रयल के वेग क गणना क जए। (ii) मान ली जए क रेत का औसत प्र तरोधी बल 3000 N है और

m ली जए)। l a se
cos–2 g
ना रयल क संपूण ऊजा का उपयोग रेत म ग ा बनाने म कया गया है। ना रयल ारा रेत म बनाए गए ग े क
गहराई का प रकलन क जए (g = 10 .m a
a s em
उत्तर agl
(i) लगभग 14.1 m s⁻¹। (ii) ग े क गहराई लगभग 0.05 m अथात 5 cm होगी।
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 54 of 62

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(i) टकराने से ठीक पहले चाल

m = 1.5 kg, h = 10 m, g = 10 m s–2

नािरयल िवरामावस्था से िगरता है और के वल गुरु त्व काय करता है, अतः यांित्रक ऊज संरिक्षत है:

िशखर पर िस्थितज ऊज = रेत पर गितज ऊज

mgh = ½mv2

m कट जाता है: v2 = 2gh = 2 × 10 m s–2 × 10 m = 200 m2 s–2

v = √200 = 14.14 m s–1 ≈ 14.1 m s–1

(ii) ग े की गहराई

नािरयल रेत तक जो ऊज लाता है:

E = mgh = 1.5 kg × 10 m s–2 × 10 m = 150 J

(जाँच: ½mv2 = ½ × 1.5 kg × 200 m2 s–2 = 150 J ✔)

रेत F = 3000 N बल से गहराई d तक िवरोध करती है और नािरयल पर ऋणात्मक काय करती है:

रेत ारा िकया गया काय = –F × d

नािरयल रुक जाता है, अतः इस काय को पूरी 150 J हटानी होगी:

F × d = 150 J

3000 N × d = 150 J

d = 150 J ÷ 3000 N = 150 N m ÷ 3000 N

d = 0.05 m = 5 cm

रेत ना रयल को क्य बचा लेती है: हटानी तो दोन तय म वही 150 J है, कतु बल रुकने क दूरी पर नभर
करता है। रेत पर F = 150 J ÷ 0.05 m = 3000 N। पक्के फश पर ना रयल शायद 1 mm म रुक जाता, जसके
लए F = 150 J ÷ 0.001 m = 1,50,000 N चा हए — पचास गुना अ धक, और उसे तोड़ने के लए पयाप्त।
ठ क इसी कारण हम ग े , एयरबैग और पै कग साम ी का उपयोग करते ह।

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एक सूक्ष्म बात: रेत म 0.05 m धँसते समय ना रयल इतना और नीचे गरता है, जससे उसे mgd = 1.5 × 10 ×
0.05 = 0.75 J और मल जाती है। इसे भी जोड़ तो 3000d = 150 + 15d, अतः d = 150 ÷ 2985 = 0.0503
m — दो साथक अंक तक वही 5 cm, जैसा प्रश्न म अभीष्ट है।

प रयोजना काय — पृष्ठ 139
प रयोजना काय

प रयोजना काय

प्र.1 एक पेन के दोन सर को हटा द जए ता क र फल नली के भीतर स्वतंत्र रूप से सरक सके ( चत्र 7.40)। पेन के
ढक्कन को नली क साइड म स्थर (Fix) क जए और ढक्कन के क्लप पर एक रबड़ बड जोड़ द जए। रबड़ बड
के मुक्त सरे को सेफ्ट पन का उपयोग करके र फल से जोड़ द जए। रबड़ बड को ख चए और छोड़ द जए।
र फल तेजी से बाहर नकलती है जो प्रत्यास्थ स्थ तज ऊजा का ग तज ऊजा म रूपांतरण दशाती है। भन्न- भन्न
खचाव के साथ इसे दोहराइए और दे खए क र फल ारा तय क गई दूरी म कस प्रकार प रवतन आता है। क्या
खचाव और तय क गई दूरी म कोई संबंध है?

िरिफल
पे न का ढ क्कन

रबड़ बैड
ं

सेफ् टी िपन

पे न की नली (दोनों िसरे हटाए हुए)

चत्र 7.40, पृष्ठ 139 — पेन प्रक्षेपक का पुनर चत रेखा चत्र: ढक्कन को नली क साइड म स्थर कया गया है और
उसके क्लप से एक रबड़ बड सेफ्ट पन ारा र फल से जुड़ा है, जो नली के भीतर स्वतंत्र रूप से सरक सकती है।

हाँ। बड जतना अ धक ख चा जाएगा, र फल उतनी ही दूर जाएगी — और दूरी खचाव क तुलना म कह तेजी से बढ़ती
है, लगभग खचाव के वग के अनुपात म।
प्रयोग को ठ क ढं ग से कैसे कर

1. नली पर सट मीटर के नशान लगाइए ता क हर बार र फल को मापी हुई दूरी x तक पीछे ख चा जा सके।

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2. हर बार र फल को एक ही ऊँचाई से और एक ही ान से क्षै तज दशा म छो ड़ए — पेन को मेज के कनारे पर टे प से चपका
द जए।
3. मेज के कनारे से उस ान तक क्षै तज दूरी R मा पए जहाँ र फल पहली बार गरती है।
4. प्रत्येक खचाव पर तीन बार छो ड़ए और औसत ली जए, जससे त्रु ट कम हो।

खचाव X (CM) दूरी R (CM) — नमूना पाठ्यांक R÷X R ÷ X²

2 40 20 10

3 90 30 10

4 160 40 10

R, x2 के अन पु ात में क्यों बढ़ ता है

ं में संिचत पत्यास्थ िस्थितज ऊज िवस्तार के वग के अनुपात में बढ़ ती है: U ∝ x2
तने हुए बैड

यह पूरी ऊज िरिफल की गितज ऊज बन जाती है: ½mv2 = U ∝ x2

अतः v2 ∝ x2, अथ त v ∝ x

मेज से क्षैितज छोड़ ने पर उड़ ान का समय t िनयत रहता है, अतः R = v × t ∝ v ∝ x

िकं त ु कोण बनाकर छोड़ ने पर पक्षेप्य सूत्र से R ∝ v2 ∝ x2

अपने आँकड़ म क्या अपे क्षत है: मेज से क्षै तज छोड़ने पर R, x के अनुपात म बढ़े गा। फश पर कोण बनाकर
छोड़ने पर R लगभग x² के अनुपात म बढ़े गा। दोन ही तय म खचाव दोगुना करने पर दूरी दोगुनी से अ धक
बढ़ती है — और R बनाम x (या x²) का सीधी रेखा वाला ाफ ही इसका प्रमाण है।

सुरक्षा: र फल को कभी कसी के चेहरे क ओर मत छो ड़ए, और य द चश्मा हो तो अवश्य पह नए। फश के साथ-
साथ या कसी ग े के डब्बे म छो ड़ए।

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प्र.2 सरलता से उपलब्ध साम य , जैसे— काडबोड, लकड़ी के प हए या पैमाने, प सल या बोल्ट (जो आलंब का काय
कर), धागा या रस्सी, छोट घरनी (या एक साथ जोड़े गए दो बोतल के ढक्कन) और छोटे -मोटे भार उठाने के
लए कागज के गलास आ द का उपयोग करके एक या अ धक सरल मशीन या उनका संयोजन (उत्तोलक, घरनी
और आनत तल) बनाइए। अ भकल्प (design) बनाने म कल्पनाशील र हए। अपने मॉडल का उपयोग कसी
छोटे भार को उठाने या चलाने म क जए, आयास और भार को मा पए और यां त्रक लाभ का प रकलन क जए।

इनम से कोई एक बनाइए, फर कमानीदार तुला से (या एक जैसे सक्के गनकर) आयास मा पए और यां त्रक लाभ = भार ÷ आयास
का उपयोग क जए।

मशीन कैसे बनाएँ क्या माप अपे क्षत यां त्रक लाभ

उत्तोलक पेंिसल पर िटका 30 cm का पैम ाना। भार (कागज के भार भुजा d₂, आयास भुजा यांित्रक लाभ = d₁/d₂; d₁ = 24
िगलास में पत्थर) पेंिसल के पास, आयास दू र वाले िसरे d₁ तथा आवश्यक आयास cm व d₂ = 6 cm पर = 4
पर।

आनत फश से पुस्तकों के च े (ऊँचाई h) तक L लंबाई का कड़ा L, h तथा कमानीदार तुल ा यांित्रक लाभ = L/h; L = 60
तल गत्ते का पटरा। कमानीदार तुल ा से िखलौना गाड़ी ऊपर का पाठ ांक cm व h = 15 cm पर = 4
खी ंिचए।

िघरनी कील की ध रु ी पर पीठ से पीठ िचपकाए दो बोतलों के भार का मान तथा मुक्त एक िस्थर िघरनी के िलए
ढक्कन, हुक से लटकाइए। खाँचे पर धागा, एक ओर भार, िसरे पर आवश्यक बल लगभग 1 — वह के वल िदशा
दू स री ओर आयास। बदलती है

नमून ा उत्तर — पैमाने वाला उत्तोलक

भार = 200 g का पत्थर, अतः भार = mg = 0.2 kg × 10 m s–2 = 2 N
भार भुजा d2 = 6 cm, आयास भुजा d1 = 24 cm

अपेिक्षत आयास: F1 = F2 × d2 ÷ d1 = 2 N × 6 ÷ 24 = 0.5 N

मापा गया आयास (कमानीदार त ल
ु ा) = 0.6 N

यांित्रक लाभ = भार ÷ आयास = 2 N ÷ 0.6 N = 3.3

आदश यािं त्रक लाभ = d1 ÷ d2 = 24 ÷ 6 = 4

मापा गया यां त्रक लाभ आदश मान से सदा कुछ कम क्य आता है: आपके आयास का कुछ भाग आलंब, पटरे
क सतह या घरनी क धुरी के घषण को पार करने म तथा पैमाने या रस्सी को स्वयं उठाने म चला जाता है। यह भाग
भार पर कोई उपयोगी काय नह करता। चकनी सतह और हल्के पुज दोन मान को पास ले आते ह — कतु कोई
मशीन आदश मान से आगे कभी नह जाती।

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as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 7 काय, ऊजा एवं सरल मशीन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

m
यह करके दे खए: दो मशीन को जो ड़ए — उ ोलक से भार को आनत तल पर चढ़ाइए, फर उसे लुढ़काइए।
ह।m
यां त्रक लाभ गुणा हो जाते ह, और इसी तरह वास्त वक क्रेन तथा जैक बहुत बड़े मान प्राप्त करते e
.co
c o m g l as
m . a
as e
a g l
प्र.3 कम्प्यूटर अनुकार (Computer Simulation) ऐसी भौ तक रा शय को समझने म सहायता कर सकते ह

co m
जनक कल्पना करना क ठन होता है। PhET अनुकार (https://phet.colorado.edu) अन्योन्य क्रयात्मक

m . ag
se
मॉडल प्रदान करते ह जैसे क ‘ऊजा स्केट पाक (Energy Skate Park)’, ‘ऊजा के रूप और रूपांतरण

g l a
(Energy Forms and Changes)’, ‘दोलक प्रयोगशाला (Pendulum Lab)’, और ‘द्रव्यमान तथा ग
a उपयोग करके यह दे खए क द्रव्यमान, ऊँचाई और घषण जैसे कारक को
(Masses and Springs)’। इनका

m
प रव तत करने पर ऊजा के व भन्न रूप म कस प्रकार प रवतन होता है।

co
se m.
o m l a
c ग त के साथ-साथ ऊजा का दंड-आरेख भी दखाता है। एक बार म एक ही राaशgबद लए और दे खए कौन-सा दंड
प्रत्येक अनुक.ार
m
sहैeऔर कौन-सा घटता है — यही पूरा अध्याय परदे पर है।
l a
ag
बढ़ता

a s
com
अनुकार क्या बदल क्या दे ख कौन-सी संकल्पना सद्ध

. agl
होती है

e m
g l aकोs गितज और ि थितज ऊज के दंड आपस में
a से
Energy Skate घषण शून्य कीिजए; स्के टर स् यांित्रक ऊज का संर क्षण
Park अलग-अलग ऊँचाइयों बदलते है,ं िकं तु कु ल दंड टस से मस नही ं (अनुभाग 7.4.3)
होता
m
छोिड़ए

. c o
e mरोलर कोस्टर के शीष क्रमशः
है; स्के टर का उ च्चतम िबंद ु हर चक्कर मेlं as नीचे क्यों (पश्न 8, पष्ृ ठ 129)
Energy Skate अब घषण चालू कीिजए तापीय ऊज का दंड पकट होकर बढ़ ता जाता

co m
. ag
Park

se m नीचे आता है
l a
ag Energy Skate ऊँचाई वही रखकर स्के टर का सभी दंड एक साथ बड़ े हो जाते है,ं िकं तु नीचे v = √(2gh) द व्यमान पर िनभर
Park द व्यमान बदिलए की चाल अपिरवितत रहती है नही ं (िचंतन कीिजए, पष्ृ ठ 116)
se m
m
गोलक को अलग-अलग कोणों .coघषण रिहत ि थित में वह हर दोलन में उसी g l a
Pendulum Lab
em ऊँ चाई तक लौटता है; घषण के साथ हर बार
िक्रयाकलाप 7.2, पष्ृ ठ 127 a
s
स्

a
agl
से , घषण सिहत तथा रिहत
छोिड़ए कु छ कम

पत्यास्थ िस्थितज ऊज का दंड िखंचाव की
m
.co(अनुभाग 7.4.2)
Masses and िस्पंग को िभन्न-िभन्न मात्रा में िवकृ ित ारा संिचत ऊज

sem ऊज के रूप, िचत्र 7.10; पष्ृ ठ
Springs खी ंिचए तुल ना में कही ं तेजी से बढ़ ता है

c omForms ते lहै;a
ृ ला में आगे बढ़g
.
m and Changes
Energy जलचक्र, जिनत्र और बल्ब को ऊज के िचह्न शंख
a
ं कु छ
e
las
जोिड़ए भाग सदै व ऊष्मा बनकर िनकल जाता है 136 का घराट

ag c
m .
क्या अं कत क जए: Energy Skate Park म घषण बंद करके 2 m, 4 m और 6 m क गरावट पर स्केटर
m a s e
. co
क नम्नतम बदु क चाल नोट क जए। वे लगभग 6.3, 8.9 तथा 10.8 m s⁻¹ आनी चा हए — ठ क √(2gh), g
e m agl
l as
= 9.8 m s⁻² लेकर। अनुकार का आपक अपनी गणना से मल जाना ही इस अभ्यास का मुख्य उ े श्य है।
a g

co m
m .
m as e
.co


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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages63
Languagehindi
Updated19 Sep 2026