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अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु
सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/2/3
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
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9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै
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MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII A I S S C E-March 2020
CODE NO. 61/2/3
प्र॰स॰ अऩेक्षऺत उत्तय/भल्
ू म बफॊद ु ऩष्ृ ठ स॰ अॊक
1. C (ननषाद) ऩ.ृ स -61 1
2. भथयु ा से प्राप्त फद्
ु ध की भनू ति ऩ.ृ स -103 1
ऩ.ृ स -101
दृष्टिबधधतों के लऱए: शारबॊजिका
3. C (I औय III) ऩ.ृ स -11 1
4. फ़्ाॊस के प्रदर्शित र्रए ऩ.ृ स -83 1
अथवा
ऩ.ृ स -96
स्तूऩों भें फुद्ध से िुड़े अवशेष गाड़ ददमे िाते थे जिन्हे ऩववत्र सभझा िाता है ।
5. सत्तो सत्कामों ऩ.ृ स -103 1
6. दहॊद ू है ऩ.ृ स -104 1
भानकय उनकी ऩूिा की िाती वाद है
भाना िाता ।
7. शहयी केंद्रों / कोई शहयी ववशेषता ऩ.ृ स -5 1
8. वह सम्राट शाहिहाॉ के ज्मेष्ठ ऩुत्र दाया र्शकोह का चिककत्सक था। ऩ.ृ स -122 1
9. C (हरयहय औय फक्
ु का) ऩ.ृ स -171 1
10. B(I,II औय III) ऩ.ृ स -173 1
11. D (कॊधाय को रेकय उसके सपाववदों के साथ सौहाद्रऩूर्ि सॊफॊध थे) ऩ.ृ स -230 1
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12. ददल्री ऩ.ृ स -221 1
13. गुरफदन फेगभ ऩ.ृ स -243 1
अथवा
ऩ.ृ स -231
अब्दर
ु हभीद राहौयी
14. ककताफ-उर-दहन्द ऩ.ृ स -117 1
15. इब्न फतूता ऩ.ृ स -118 1
16. C [ (A) औय (R) दोनों सही हैं औय(R),(A) की सही व्माख्मा है ।] ऩ.ृ स -365 1
17. अध्मऺता आधाय ऩ.ृ स -349 1
प्रनतफॊध िाॊि
18. अवध गद्दी ऩ.ृ स -292 1
के फाद ववद्रोह की
फागडोय सौऩी।
19. B(III,I,IV,II) ऩ.ृ स - 1
361,364,391,411
20. D ( अॊग्रेज़ों की अनुभनत के बफना सहमोगी ऩऺ ककन्हीॊ अन्म शासकों के साथ ऩ.ृ स -296 1
सॊचध कय सकेगा)
खॊड ख
21. हड़प्ऩा के शहरों की गह
ृ स्थाऩत्य कऱा: ऩ.ृ स -7 3
i
ii. बवन आॉगन
iii. आॉगन गनतववचधमों
।
iv. खखड़ककमाॉ
v. आॉगन सीधा
vi. ।
vii. की नार्रमाॉ
2
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viii.
ix. कुएॊ ।
x. कोई अन्म भान्म बफॊद ु
ककन्ही तीन बफॊदओ
ु ॊ की व्माख्मा
22. ववजयनगर शहर के लऱए जऱ के स्रोत: ऩ.ृ स -177 3
i. तॊग
ु बद्रा इस ऺेत्र भें िर का भख्
ु म स्रोत था।
ii.
कयधनी
iii. धायाएॉ
iv. धायाओॊ फाॉध
v. के र्रए कुछ हौज़ फनाए गमे थे।
vi.
भाध्मभ केंद्र
vii. भहत्वऩूर्ि सॊफॊधी के िर
का प्रमोग र्सॊिाई औय ऩीने के र्रए ककमा िाता था।
ककन्ही तीन बफॊदओ
ु ॊ की व्माख्मा
23. “स्वराज्य के लऱए हहॊद,ू मुसऱमान,ऩारसी और लसक्ख, सबको एकजुि होना ऩ.ृ स -350 3
ऩड़ेगा”
असहयोग आॊदोऱन:
i गाॊधीिी ने ।
ii दहॊद ू
iii आभ रोगों ने िाहे दहॊद,ू भस
ु रभान,ऩायसी मा र्सक्ख हो सफने आॊदोरन
भें बाग र्रमा।
3
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iv औऩननवेर्शक शासन के खखराफ़ असहमोग की अऩीर ऩय
ककसानों,काभगायों औय दस
ू यों ने औऩननवेर्शक कानूनों की अवहे रना कय
दी।
v कोई अन्म भान्म बफॊद ु
ककन्ही तीन बफॊदओ
ु ॊ की व्माख्मा
24. वे ऩररष्स्थततयाॉ ष्जनके अॊतगगत अॊग्रेज़ अधधकाररयों ने उन्नीसवीॊ शताब्दी में ऩ.ृ स -270-271 3
सॊथाऱों को राजमहऱ की ऩहाड़ड़यों में बसने के लऱए आमॊत्रित ककया:
i कयने भें ध्मान
ii
iii
iv सॊथारों ने की गमे
v कोई अन्म भान्म बफन्द ु
ककन्ही तीन बफॊदओ
ु की व्माख्मा
अथवा
अठारहवी शताब्दी के अॊत के दशकों में राजमहऱ की ऩहाड़ड़यों के ऩहाड़ी ऱोगों
की आधथगक और सामाष्जक दशा : 3
ऩ.ृ स -267-269
i
ii
छाव
iii
।
iv आक्रभर् िहाॉ
v
vi इकट्ठे
रकड़ड़माॉ इकट्ठी
4
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vii ।
viii प्रनतयोध
ix
x कोई अन्म भान्म बफॊद ु
ककन्ही तीन बफॊदओ
ु ॊ की व्माख्मा
खॊड ग
25. महाजनऩदों की ववशेषताएॉ: ऩ.ृ स -29-31 4+4=8
i. ।
ii. प्रर्सद्ध
iii. फद्
ु ध
iv.
v. ब्राह्भर्ों ने धभिशास्त्र नाभक ग्रॊथों भें शासकों के र्रए ननमभ ननधािरयत
ककए।
vi.
vii. सेनाएॉ
viii. फाक़ी
ix. कोई अन्म प्रासॊचगक बफॊद ु
ककन्ही िाय बफॊदओ
ु की व्माख्मा
सबसे शष्क्तशाऱी जनऩद के रूऩ में मगध:
i.
ii.
iii.
iv.
5
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v. अिातसतु भहत्वाकाॊऺी औय
शजक्तशारी औय उनकी नीनतमाॉ ।
vi. ( ) िो
।
ककन्ही िाय बफॊदओ
ु की व्माख्मा
अथवा
मौयग प्रशासन की मुख्य ववशेषताएॉ :
ऩ.ृ स -32-34
i. ऩाॉि । वे थे 5+3=8
,
ii.
था
iii. भागों
iv. माबत्रमों के र्रए भाध्मभ ।
v.
vi. के र्रए का
ककन्ही ऩाॉि बफॊदओ
ु की व्माख्मा
अशोक के ‘धम्म’ के लसदधाॊत :
i. असोक के र्सद्धाॊत
ii. असोक भाध्मभ
iii. ने अऩने
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।
iv. ब्राह्भर्ों
शार्भर है ।
v. ।
vi. धभों ।
vii. अचधकारयमों
ककन्ही तीन बफॊदओ
ु की व्माख्मा
26 मुग़ऱकाऱीन भारत में कृवष समाज में महहऱाओॊ की भूलमका: ऩ.ृ स -206-207 8
i. भदहराएॉ कॊधे कॊधा
ii. भदहराएॉ
iii. कई
iv. इस सॊदबि भें घय(भदहराएॉ) औय दनु नमा(भदि )के फीि एक रैंचगक
अरगाव सॊबव नहीॊ था।
v.
धभि
भदहराएॉ
vi. भदहराएॉ
vii.
भहत्वऩूर्ि सॊसाधन
viii. फड़े होने ऩय मह फच्िे श्रभ आधारयत सभाि का दहस्सा हो िाते
थे।
ix. भाॉ
थी
x. भदहराएॉ घय के काभ बी सॊबारती थी।
xi. ,भदहराएॉ भाॉ,ऩत्नी औय फहन की
बर्ू भका ननबाती थी।
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xii.
सभग्रता भें भूल्माॊकन
अथवा
मुग़ऱ साम्राज्य की भ-ू राजस्व प्रणाऱी:
i.
ii. प्रशासननक तॊत्र फनाने के र्रए यािस्व भहत्वऩूर्ि था। ऩ.ृ स -213 8
iii. ववत्तीम की कयता था।
iv. ननधािरयत
सूिनाएॉ इकट्ठा
v. ननधाियर्
vi. ननधािरयत
vii. यािस्व वसर
ू ी कयता था।
viii.
ix. यािस्व ननधाियर् के र्रए की गई।
x. बूर्भ का वगीकयर् ऩोरि,ऩयौती,ििय औय फॊिय भें ।
xi. बू-यािस्व सॊग्रह के प्रकाय-कर्कुत, फटाई मा बाओरी,खेत फटाई औय
राॉग-फटाई।
xii. यािस्व का वावषिक रयकॉडि यखा िाता था।
xiii.
xiv.
xv. कोई अन्म भान्म बफॊद ु
सभग्रता भें भूल्माॊकन
27. 18वीॊ और 19वीॊ सहदयों के दौरान औऩतनवेलशक शहरों में ऱोगों के सामाष्जक ऩ.ृ स -329-330 8
जीवन में आए ऩररवतगन:
i दाॉतों उॉ गरी
िहाॉ
ii वहाॉ
iii के िैसे फसें औय ट्राभ।
8
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iv दफ़्तय पैक्ट्री
v
उत्तेिक
vi ।
vii भहत्वऩूर्ि
viii
ix क्रकि भाॉग
भध्मभ वगि
x
xi
xii
xiii भाध्मभ भध्मवगीम
xiv
xv
xvi
गाॉव
xvii भहॉगा
xviii शहय भें
xix
xx कोई अन्म भान्म बफॊद ु
सभग्रता भें भूल्माॊकन
अथवा
की प्रकिया:
ऩ.ृ स -321-322 4+4
i
ii अध्ममन आॉकड़े
स्रोत
iii साधन
iv
9
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श्रेखर्माॉ
v
vi कोई अन्म भान्म बफॊद ु
ककन्ही िाय बफॊदओ
ु ॊ की व्माख्मा
औऩतनवेलशक शासन के दौरान जनगणना के प्रतत सॊशय:
i
श्रेखर्माॉ
ii प्रकक्रमा
iii िाॉि
iv ऊॉिी
।
v ऊॉिी
vi
ककन्ही िाय बफॊदओ
ु ॊ की व्माख्मा
खॊड घ
28. “एक गोऱी भी नहीॊ चऱाई गयी”
28.1 प्रशासतनक व्यवस्था के समाप्त हो जाने के कारणों की ऩरख कीष्जये ?
ऩ.ृ स -392 2
i. फॊटवाये की प्रकक्रमा िर यही थी।
ii सत्ता
iii
कोई दो बफॊद ु
28.2 हाऱत को तनयॊत्रित करने के लऱए अॊग्रेज़ अधधकारी कोई कदम क्यों नहीॊ
2
उठा सके? ऩ.ृ स -392
10
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i. सॊबारा
ii. सत्ता
iii.
कोई दो बफॊद ु
28.3 क्या आऩ यह सोचते है कक ष्ज़ऱा मष्जस्रे ि की भूलमका न्यायसॊगत थी?
उत्तय हाॉ मा नहीॊ हो सकता है । ऩ.ृ स -392 2
(ववद्माथी के स्वमॊ के वविाय )
29. “उधचत” सामाष्जक कतगव्य
ऩ.ृ स -62 2
29.1 द्रोण ने एकऱव्य को अऩना लशटय स्वीकार करने से क्यों मना कर
हदया?
i.द्रोर् धभि सभझते थे औय केवर कुरु यािकुभायों को र्शऺा दे ते थे।
ii. एकरव्म वनवासी ननषाद था।
iii.द्रोर् ब्राह्भर् थे औय कुरु यािकुभायों को धनुवविद्मा की र्शऺा दे ते थे।
कोई दो बफॊद ु
29.2 एकऱव्य ने तीर चऱाने की उत्तम कुशऱता कैसे प्राप्त की?
ऩ.ृ स -62
i. द्रोर् के भना कयने ऩय एकरव्म वन भें रौट आमा।
2
ii. उसने र्भट्टी से द्रोर् की प्रनतभा फनाई औय उसके साभने तीय िराने
का अभ्मास कयने रगा।
iii.वह तीय िराने भें र्सद्धहस्त हो गमा।
कोई दो बफॊद ु
29.3 एकऱव्य ने अऩने-आऩ को ऩाॊडवों के समऺ द्रोण का लशटय होने का
11
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ऩररचय क्यों हदया? ऩ.ृ स -62 2
i. िफ कुरु यािकुभायों का कुत्ता उसे दे खकय बौंकने रगा तो वह क्रोचधत
हो गमा।
ii. उसने सात तीय िराकय उसका भॉह
ु फॊद कय ददमा।
iii. ऩाॊडव तीयॊ दाज़ी का मह अदबत
ु दृश्म दे खकय आश्िमििककत यह गमे
औय एकरव्म को तराशा।
iv. उसने स्वमॊ को द्रोर् का र्शष्म फतामा।
कोई दो बफॊद ु
30.
ऩ.ृ स -157 2
30.1 जहाॉआरा ने शेख के प्रतत अऩने ववश्वास और भष्क्त को ककस प्रकार
दशागया?
i. उसने दो फाय की अजख्तमायी नभाज़ अदा की।
ii फहुत ददनों तक वह यात को फाघ के िभड़े ऩय नहीॊ सोमी।
iii उसने भक
ु द्दस ।
iv उसने अऩनी ऩीठ उनकी तयप नहीॊ की।
v. वह ऩेड़ के नीिे ददन गुिायती थी।
कोई दो बफन्द ु
30.2 उसने दरगाह को एक ववलशटि तीथग और श्रदधा का स्थऱ क्यों माना?
ऩ.ृ स -157
i. ईश्वय के प्रनत उसके श्रद्धा औय सभऩिर् की विह से। 2
ii. वह अऩने भुशीद(गुरु) की भुयीद थी।
iii. मह ऩारयवारयक ऩयॊ ऩया थी।
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iv. आशीवािद के र्रए।
v. कोई अन्म भान्म बफॊद।ु
कोई दो बफॊद ु
30.3 उसने ककस प्रकार दरगाह ऩर अऩना सम्मान प्रकि ककया?
ऩ.ृ स -157
i धूर 2
ii वह नॊगे ऩाव वहाॉ की ज़भीन को िभ
ू ती हुई गमी।
iii उसने भज़ाय के िायों ओय पेये र्रए।
iv उसने सफसे उम्दा इतय भुकद्दस दयगाह ऩय नछड़का।
v गर
ु ाफी दऩ
ु ट्टा िो उसके र्सय ऩय था उसे उतायकय भक
ु द्दस
भज़ाय के ऊऩय यखा।
कोई दो बफॊद ु
खॊड ड.
31 बया हुआ सॊरग्न भानचित्र दे खें 3+3=6
केवऱ दृष्टिबाधधत ऩरीऺाधथगयों के लऱए :
1x3=3
31.1 ववकलसत हड़प्ऩाई ऩुरास्थऱ (कोई तीन):
हड़प्ऩा,भोहनिोद , रोथर,नागेश्वय,कारीफॊगन,याखीगढ़ी,फनावरी, धौरावीया,
िन्हुदडो, फाराकोट
अथवा
1857 के ववद्रोह के केंद्र (कोई तीन):
कानऩुय,झाॉसी,भेयठ,ददल्री,आज़भगढ़,रखनऊ,करकत्ता,फनायस,ग्वार्रमय,िफरऩुय,
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आगया,अवध
31.2 राटरीय आॊदोऱन के केंद्र (कोई तीन):
1x3=3
िॊऩायर्,खेड़ा,अहभदाफाद,फनायस,अभत
ृ सय,िौयी िौया,राहौय,फायदोरी,दाॊडी,फॊफई,कयािी
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