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CBSE Class 12 Marking Scheme 2021 for Hindi Core

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Frequently Asked Questions

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CBSE Class 12 Marking Scheme 2021 for Hindi Core – Text

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प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2020- 21 तिषय- त िं दी (आधार)
कक्षा- 12
अिंक योजना
तनधाश ररि समय- 3 घिंटे अतधकिम अिंक – 80

सामान्य तनदे र्:-

 अिंक योजना का उद्दे श्य मू ल्ािं कन को अतधकातधक िस्तु तनष्ठ बनाना ै |
 खिं ड-अ में तदए गए िस्तु परक प्रश्नोिं के उत्तरोिं का मू ल्ािं कन तनतदश ष्ट अिंक योजना के आधार पर ी तकया जाए|
 खिं ड-ब में िर्शनात्मक प्रश्नोिं के अिंक योजना में तदए गए उत्तर-तबिंदु अिंतिम न ीिं ैं | ये सुझािात्मक एििं सािं केतिक ैं |
 यतद परीक्षार्थी इन सािं केतिक तबिंदुओिं से तिन्न, तकिंिु उपयुक्त उत्तर दे िो उसे अिंक तदए जाएँ |
 मू ल्ािं कन कायश तनजी व्याख्या के अनु सार न ीिं, बल्कि अिंक-योजना में तनतदश ष्ट तनदे र्ानु सार ी तकया जाए|

खिंड – अ िस्तुपरक- प्रश्नोिं के उत्तर

प्रश्न क्रम सिंख्या उत्तर अिंक
तििाजन

प्रश्न1. (i) IV. म ामारी का प्रिाि| 1

(ii) I. सिंक्रमर् को रोकने के तिए| 1

(iii) II. प्रतिरोधक क्षमिा के अिाि के कारर्| 1

(iv) III. बच्ोिं की त िंिा के कारर्| 1

(v) I. तर्क्षक की अकुर्ििा के कारर्| 1

(vi) III. बच्ोिं की त िंिा के कारर्| 1

(vii) I. बच्ोिं की तर्क्षा की त िंिा द्वारा| 1

(viii) III. जीिन में सिंघषश का बढ़ जाना| 1

(ix) I. िोग अतधक ोने से| 1

(x) II. आतर्थश क गतितितधयािं ठप ो जाने से| 1

(i) II. एकािं ि पर| 1

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(ii) III. स्वयिं को जानने के तिए| 1

(iii) III. एकािं ि प्रेम के कारर्| 1

(iv) I. सिंसार से प्रेम करके| 1

(v) III. एकािं ि से प्रेम करके| 1

(vi) I. ि तकसी को ातन न ीिं पहिं ािा| 1

(vii) IV. धमश के िास्ततिक स्वरूप की प ान| 1

(viii) III. नई सिंकल्पना| 1

(ix) I. ईश्वर किी तदखाई न ीिं दे िे| 1

(x) IV. सिंसार और प्रकृति की सुिंदरिा को दे खना| 1

प्रश्न2. (i) III. पािस ऋिु की सुिंदरिा| 1

(ii) II. प्रकृति से| 1

(iii) III. मानिीकरर्| 1

(iv) I. बादि| 1

(v) III. आपसी प्रेम के तिए| 1

(i) IV. जीिन| 1

(ii) II. सररिा-सागर| 1

(iii) I. प्रसन्निा| 1

(iv) IV. जीिन| 1

(v) IV. म ानिा के रूप में | 1

प्रश्न3. (i) I. माध्यमोिं को| 1

(ii) I. अखबार| 1

(iii) II. टे िीतिजन| 1

(iv) III. िेब दु तनया| 1

Page 3

(v) III. छ् | 1

प्रश्न4. (i) II. कोमि| 1

(ii) III. जिं गि में जाड़ा, िाप, आिं धी-िूफ़ान| 1

(iii) III. भ्रािा को खो दे ना| 1

(iv) I. तनरर्थश क| 1

(v) IV. तपिा के ि न का पािन न करिे| 1

प्रश्न5. (i) I. स्वाधीनिा के सार्थ जीना| 1

(ii) II. उसे अपनी इच्छा से कायश करने की स्वििंत्रिा दी जाए| 1

(iii) IV. िोकिािं तत्रक मू ल् सुदृढ़ ोिंगे| 1

(iv) IV. इसके सार्थ िी जातििाद और र्ोषर् की प्रतक्रया बनी र िी ै | 1

(v) II. जातिगि िे दिाि को प्रार्थतमकिा दे ने िािे| 1

प्रश्न6. (i) III. िे खक मृ त्यु के कारर् से अपररत ि ै | 1

(ii) III. इस सभ्यिा में सिी प्रकार के साधन र्थे तकिंिु तदखािा न ीिं र्था| 1

(iii) III. यर्ोधर बाबू का अपना पररिार र्था तजसे िे नाराज़ न ीिं करना ा िे र्थे| 1

(iv) II. तसिंधु घाटी सभ्यिा में राजा से बड़ा स्र्थान िोगोिं के कायों को र्था| 1

(v) I. ऐति ातसक इमारिोिं में बीिे हए जीिन के त न्ह म सूस ोिे ैं | 1

(vi) II. अकेिापन उपयोगी ै | 1

(vii) I. नाररयोिं की स्वििंत्रिा के नन से जनसिंख्या िृल्कि की समस्या बढ़ी ै | 1

(vii) IV. िे पररििशन को स जिा से स्वीकार न ीिं कर पािे र्थे | 1

(ix) I. एन.फ्रेंक तकसी सिंिेदनर्ीि व्यल्कक्त की खोज में र्थी| 1

(x) II. दत्ता जी राि जानिे र्थे तक खे िी-बाड़ी में िाि न ीिं ै | 1

खिंड 'ब'
िर्श नात्मक प्रश्नोिं के सिंिातिि उत्तर सिंकेि

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प्रश्न क्रम सिंख्या उत्तर तनधाश ररि अिंक
तििाजन
प्रश्न7. तकसी एक तिषय पर िगिग 150 र्ब्ोिं में र नात्मक िे ख तिल्कखए:- 5x1=5

िू तमका - 1 अिंक
तिषयिस्तु - 3 अिंक
िाषा - 1 अिंक
प्रश्न8. 2 में से तकसी 1 तिषय पर पत्र (िगिग 80-100 र्ब्-सीमा) 5x1=5

आरिं ि और अिंि की औप ाररकिाएँ - 1 अिंक
तिषयिस्तु - 3 अिंक
िाषा - 1 अिंक

प्रश्न9. प्रश्नोिं के उत्तर िगिग 40-50 र्ब्ोिं में तिल्कखए:- 3+2-=5
(i)  र्ब् कतििा का मे रुदिं ड ै | 3
 तितिन्न र्ब्ोिं के उत ि मे ि से ी कतििा बनिी ै |
 एक र्ब् में ी अने क अर्थश तिपे र िे ैं | र्ब्ाििी ोने पर ी कतििा तिखना
सरि ो पािा ै |
 िािनाओिं और सिंिेदनाओिं को र्ब्ोिं के द्वारा ी आकार तमििा ै |
कतििा िाषा में ोिी ै , इसतिए िाषा का सम्यक ज्ञान ज़रूरी ै ।िाषा र्ब्ोिं से बनिी
ै । र्ब्ोिं का एक तिन्यास ोिा ै तजसे िाक्य क ा जािा ै । िाषा प्र तिि एििं स ज
ो पर सिंर ना ऐसी तक पाठक को नयी िगे। कतििा में सिंकेिोिं का बड़ा म त्त्व ोिा ै ।
इसतिए त न्होिं (,') य ाँ िक तक दो पिंल्कक्तयोिं के बी का खािी स्र्थान िी कुि क र ा
ोिा ै । िाक्यगठन की जो तितर्ष्ट प्रर्ातियाँ ोिी ैं , उन्हें र्ै िी क ा जािा ै । इसतिए
तितिन्न काव्य र्ै तियोिं का ज्ञान िी ज़रूरी ै ।
-----------------------------------------------------------------------------

 क ानी की सिी घटनाओिं को कर्थानक क िे ैं |
 क ानी का नक्शा कर्थानक ोिा ै |
 क ानी तिखने से प िे कर्थानक तिखा जािा ै |
 कर्थानक तकसी घटना, जानकारी, अनु िि, कल्पना पर आधाररि ोिा ै |
 सिंपूर्श क ानी के केंद्र में कर्थानक ी ोिा ै |
(ii)  नाटक को दृश्य-काव्य िी क ा जािा ै | 2
 अन्य तिधाएँ केिि तिल्कखि रूप में ी अपनी पूर्शिा को प्राप्त करिी ैं |
 नाटक अपने तिल्कखि रूप से अगिे रर् (मिं न) िक अधूरा र िा ै |
नाटक कृत्योिं और दृश्योिं के माध्यम से मिं त ि तकया जािा ै । इसमें कर्थानक,
पररल्कस्र्थतियाँ , स्पष्टीकरर् आतद स्विः स्पष्ट ोिे ैं । प्रत्येक पात्र के सिंिाद अिग-अिग

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तिखे ोिे ैं । नाटक अतिव्यल्कक्त केंतद्रि िर्था िािप्रधान ोिे ैं िर्था किाकारोिं की
अतिव्यल्कक्त किा,सिंिाद-सम्प्रे षर्, आिाज आतद इसमें प्रमु ख िू तमका अदा करिी ैं ।
अतिनय द्वारा तकसी िाि, घटना, सामातजक राय आतद प्रस्तु ि की जािी ैं | नाटक में
सिी प्रकार के ररत्रोिं का समािेर् ोिा ै , जै से- नायक-नातयका, खिनायक, िघु ररत्र
इत्यातद।
-------------------------------------------------------------------------------

 ररत्र तकसी िी क ानी के मूि ोिे ैं |
 प्रत्येक पात्र का अपना एक स्विाि ोिा ै , और ि तकसी न तकसी उद्दे श्य से
जु ड़ा ोिा ै |
 ररत्र के तिकास के सार्थ क ानी का तिकास ोिा ै |
प्रश्न10. तनम्नतिल्कखि प्रश्नोिं के उत्तर िगिग 40-50 र्ब्ोिं में तिल्कखए:- 3+2=5

(i)  तिर्े ष िे खन अर्थाश ि तकसी तिर्े ष तिषय पर सामान्य िे खन से टकर तिखा 3
गया िे ख|
 तिर्े ष िे खन करने िािे पत्रकारोिं की म ारर्थ अपने क्षे त्र तिर्े ष में ोिी ै |
 खे ि, राजनीति, आतर्थश क, अपराध, तफ़ल्म-जगि, कृतष, कानू न, तिज्ञान इत्यातद
के क्षे त्र में तिर्े ष िे खन तकया जािा ै |
-------------------------------------------------------------------------------

 फ़ी र का िे खक अपने ति ार, िािनाएँ , दृतष्टकोर् को फ़ी र में व्यक्त कर
पािा ै इसतिए इसे आत्मतनष्ठ िे खन की श्रे र्ी में रखा जािा ै |
 कर्थात्मक र्ै िी का प्रयोग, सरि-स ज िाषा, आकषश क िाषा इत्यातद के कारर्|
 तिषय िा अर्थिा गिंिीर कुि िी ो सकिा ै |
(ii)  सिंपादकीय िे खन समा ार-पत्र की अपनी आिाज़ ोिी ै | 2
 सिंपादकीय के द्वारा तकसी घटना, समस्या या मु द्दे के प्रति अपने ति ार प्रकट
करिे ैं |
 तबना तकसी के नाम के िी िापा जािा ै |
 सिंपादकीय समा ार-पत्र के सिंपादक और उनके स योतगयोिं के द्वारा तिखा
जािा ै
------------------------------------------------------------------------------|

 समा ार सिंिाददािा अर्थिा ररपोटश रोिं द्वारा तिखा जािा ै |
 उल्टा तपरातमड र्ै िी में तिखा जािा ै |
 िः ककारोिं का ध्यान रखा जािा ै |

प्रश्न11. प्रश्नोिं में से तकन्हीिं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगिग 50-60 र्ब्ोिं में तिल्कखए:- 3+3=6

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(i)  प िे ििं द में उन्होने तदखिाया ै तक सिंसार के अच्छे -बुरे समस्त िीिा प्रपिं ोिं 3

का आधार पेट की आग का दारुर् ि ग न यर्थार्थश ै । श्रम के अिग अिग रूप
ैं पर सबका िक्ष्य एक मात्र पेट की िू ख ै ।
 दू सरे ििं द में प्रकृति और र्ासन की तिषमिा से उपजी बेकारी ि गरीबी की
पीड़ा का यर्थार्थश परक त त्रर् करिे हए उसे दर्ानन (रािर्) से उपतमि करिे
ैं । गरीबी रूपी रािर् ने सबको दु खी कर रखा ै |
(ii)  दू रदर्श न पर एक अपात ज का साक्षात्कार‚ व्यािसातयक उद्दे श्योिं को पूरा करने 3
के तिए तदखाया जािा ै ।
 दू रदर्श न पर एक अपात ज व्यल्कक्त को प्रदर्श न की िस्तु मान कर उसके मन
की पीड़ा को कुरे दा जािा ै ‚ उसे खु िेआम िु नाया जािा ै ।
 साक्षात्कारकिाश को उसके तनजी सुख-दु ख से कुि िे ना-दे ना न ीिं ोिा।
 दू रदर्श न पर तदखाए जाने िािे इस प्रकार के अतधकािं र् कायशक्रम केिि
सिंिेदनर्ीििा का तदखािा करिे ैं |
 तबना तकसी िोक-मयाश दा के उसका फायदा उठाने से न ीिं ूकिे|
 उनकी कर्थनी और करनी में पूर्शि: अन्तर ोिा ै ।
(iii)  कतििा में कतित्व र्ल्कक्त का िर्शन ै । 3
 कतििा त तड़या की उड़ान की िर कल्पना की उड़ान ै िे तकन त तड़या के
उड़ने की अपनी सीमा ै जबतक कति अपनी कल्पना के पिंख पसारकर दे र्
और काि की सीमाओिं से परे उड़ जािा ै ।
 फूि कतििा तिखने की प्रेरर्ा िो बनिा ै िे तकन कतििा िो तबना मु रझाए र
युग में अपनी खु र्बू तबखे रिी र िी ै ।
 कतििा बच्ोिं के खे ि के समान ै और समय और काि की सीमाओिं की परिा
तकए तबना अपनी कल्पना के पिंख पसारकर उड़ने की किा ब े िी जानिे ै ।
प्रश्न12. प्रश्नोिं में से तकन्हीिं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगिग 30-40 र्ब्ोिं में तिल्कखए:- 2+2=4

(i)  कतििा में नीिे नि को राख से तिपे गीिे ौके के समान बिाया गया ै । 2
 दू सरे तबिंब में उसकी िुिना कािी तसि से की गई ै ।
 िीसरे में स्लेट पर िाि खतड़या ाक का उपमान ै ।
 िीपा हआ आँ गन कािी तसि या स्लेट गाँ ि के पररिेर् से ी तिए गए ैं ।
 प्रािः कािीन सौिंदयश क्रमर्ः तिकतसि ोिा ै ।
 धीरे -धीरे िातिमा िी समास ो जािी ै और सुब का नीिा आकार् नीि जि
का आिास दे िा ै |
 सूयश की स्वतर्शम आिा गौरिर्ीिं दे के नीि जि में न ा कर तनकिने की उपमा|
(ii) य ाँ तनिं दा करने िािे कति का परदा खोिना ा िे ैं अर्थाश ि् बुराई करना ा िे ैं पर 2

इससे उनकी कतमयाँ खु द ी उजागर ोिी जा र ी ैं |
(iii) पतक्षयोिं के बच्े तदनिर अपनी माँ की प्रिीक्षा में इस आर्ा से नीड़ो से झाँ किे र िे ैं 2

तक र्ाम को िौटिे समय िे उनके तिए िोजन िे कर आएगी और उन्हें ममिा का मधुर
स्पर्श प्रदान करे गी।

प्रश्न13. प्रश्नोिं में से तकन्हीिं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगिग 50-60 र्ब्ोिं में तिल्कखए:- 3+3=6

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(i) डॉ. आिं बेडकर की कल्पना के आदर्श समाज के मु ख्यिः िीन तबिंदुओ-िं स्वििंत्रिा, समिा 3
एििं भ्रािृिा यानी िाई ारा पर आधाररि ै । ये िीनोिं मू ल् िोकिािं तत्रक मू ल् ी ैं |
(ii) 'कािे मे घा पानी दे ' पाठ में गािं ि की गमी और पानी से उपजी समस्या िर्था 'प ििान 3
की ढोिक' क ानी में म ामारी के दौरान ग्रामीर् पृष्ठिू तम को उकेरा गया ै |
(iii) िगि जी सतफ़या की ाररतत्रक तिर्े षिाएँ :- 3

 पिंसारी की दु कान से केिि अपनी जरूरि का सामान (जीरा और नमक)
खरीदना।
 तनतिि समय पर ूरन बे ने के तिए तनकिना।
 ि आने की कमाई ोिे ी ूरन बे ना बिंद कर दे ना।
 ब े हए ूरन को बच्ोिं को मुफ्त बाँ ट दे ना।
 सिी का जय-जय-राम क कर स्वागि करना।
 बाजार की मक-दमक से आकतषश ि न ोना।
 समाज को सिंिोषी जीिन की तर्क्षा दे ना।

सतफ़या की ाररतत्रक तिर्े षिाएँ :-

 ईमानदार-सतफ़या ईमानदार िी ै जब सतफ़या को य पिा ििा ै तक
पातकस्तान से िारि नमक िे जाना गैरकानू नी ै उसने िय तकया तक प्रेम की
इस िें ट को ि ोरी से न ीिं िे जाएगी।
 दृढ़तनियी-सतफ़या का स्विाि दृढ तनियी ै । ि तकसी िी कीमि पर िा ौरी
नमक को िारि िे जाना ा िी ै इसतिए ि स ी गिि सिी िरीकोिं पर
ति ार करिी ै ।
 तनडर-सतफ़या तनडर िी ै । य जानिे हए िी तक नमक िे जाना गैरकानू नी ै
ि तबना तझझके कस्टम िािोिं के सामने नमक की पुतड़या रख दे िी ै ।
 िायदे को तनिाने िािी-सतफ़या सैयद ै । सैयद ोने के नािे ि अपने तकये
िायदे को तकसी िी कीमि पर पूरा करना ा िी ै ।
प्रश्न14. प्रश्नोिं में से तकन्हीिं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगिग 30-40 र्ब्ोिं में तिल्कखए:- 2+2=4

(i) 2
िु ट्टन तसिं जब जिानी के जोर् में आकर ाँ द तसिं नामक मँ जे हए प ििान को
ििकार बैठा, िो सारा जनसमू , राजा और प ििानोिं की समू आतद की य धारर्ा
र्थी तक य कच्ा तकर्ोर तजसने कुश्ती किी सीखी न ीिं ै , प िे दाँ ि में ी ढे र ो
जाएगा। ािाँ तक िु ट्टन तसिं की नसोिं में तबजिी और मन में जीि का जज़्बा उबाि खा
र ा र्था। उसे तकसी की परिा ने र्थी। ाँ ढोि की र्थाप में उसे एक-एक दाँ ि-पें का
मागशदर्श न जरूर तमि र ा र्था। उसी र्थाप का अनु सरर् करिे हए उसने ‘र्े र के बच्े’
को खू ब धोया, उठा-उठा कर पटका और रा तदया। इस जीि में एक मात्र ढोि ी
उसके सार्थ र्था। अिः जीिकर ि सबसे प िे ढोि के पास दौड़ा और उसे प्रर्ाम
तकया।
(ii) 2
बाज़ार का जादू ढ़ने पर मनु ष्य बाज़ार की आकषश क िस्तु ओिं के मो जाि में फँस
जािा ै । बाजार के इसी आकषश र् के कारर् ग्रा क सजी-धजी ीजोिं को आिश्यकिा
न ोने पर िी खरीदने के तिए िािातयि ो जािा ै । इसी मो जाि में फँसकर ि ऐसी
गैरजरूरी िस्तु एँ खरीद िे िा ै जो कुि समय बाद घर के तकसी कोने की र्ोिा बढ़ािी

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ै , परन्तु जब य जादू उिरिा ै िो उसे ए सास ोिा ै तक जो िस्तु एँ उसने आराम
के तिए खरीदी र्थीिं, उल्टा िे िो उसके आराम में खिि डाि र ी ै ।
(iii) 2
िल्कक्तन का िास्ततिक नाम िक्ष्मी र्था, त न्दु ओिं के अनु सार िक्ष्मी धन की दे िी ै । प्राय:
नाम व्यल्कक्तत्व का परर ायक ोिा ै तकन्तु िल्कक्तन गरीब र्थी, उसका पूरा जीिन
ससुराि िािोिं की सेिा करने और पति की मृ त्यु के बाद सिंघषश करिे हए व्यिीि हआ।
इस प्रकार उसके नाम का िास्ततिक अर्थश और उसके जीिन का यर्थार्थश दोनोिं परस्पर
तिन्न र्थे । इसतिए तनधशन िल्कक्तन सबको अपना असिी नाम िक्ष्मी बिाकर उप ास का
पात्र न ीिं बनना ा िी र्थी|

Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeMarking Scheme
Pages8
Updated30 Apr 2026