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अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु
सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/3/1
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
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9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै
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MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII A I S S C E-March 2020
CODE NO. 61/3/1
Q.NO. EXPECTED ANSWERS/VALUE POINTS PAGE MARKS
NO.
SECTION - A
1. गुजरात Pg – 2 1
2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण Pg – 20 1
या
Pg-20 1
एस एन रॉय
3. कैलाशनाथ मंदिर (महाराष्ट्र) Pg – 1
नेत्रहीन ं के दलए 107
Pg –
कृष्णा
104 1
4. ब दिसत्व क उनके प्रयास ं के माध्यम से य ग्यता प्राप्त करने र्वाले Pg – 1
गहन ियालु मानर्व के रूप में माना जाता था। 103
अथर्वा
र्वाल्टर एदलयट गुंटूर (आं ध्र प्रिे श) के आयुक्त थे दजन् न
ं े अमरार्वती का
िौरा दकया और मद्रास के दलए कई मूदतिकला पैनल ं क ले गए दजन्ें
एदलयट माबिल्स कहा जाने लगा। Pg - 98
5. C - I, II और III Pg – 1
108
6. D –.अमरार्वती के नष्ट् ह ने के बाि ही दर्वद्वान स्थल परसंरक्षण का Pg – 98 1
महत्त्व समझ सके
7. D –. महाजनपि ं का अदर्विभार्व और ल हे का उपय ग Pg – 84 1
8. C – IV, I, III, II Pg – 1
137
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9. दिल्ली और िौलताबाि Pg – 1
127
10. टर े र्वल्स इन ि मुग़ल एम्पायर Pg – 1
130
11. हजारा राम मंदिर Pg – 1
183
12. हररहर और बुक्का Pg – 1
171
13. तालीक टा की लडाई / राक्षसी तांगडी की लडाई Pg – 1
173
14. कमल महल Pg – 1
181
15. दजओर्वन्नी करे री Pg – 1
216
16. A – Pg – 1
A और R ि न ं सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। 296
17. नर्व ग दथक Pg – 1
341
18. D, II-IV-I-III Pg – 1
314
19. माउं ट आबू और िादजिदलंग Pg – 1
327
20. D – डच बॉम्बे में Pg – 1
319
SECTION - B
21. हड़प्पा धर्म के कई पुनर्नमर्ामण र्ान्यताओं
i. िे र्वी की मृणमूदति
ii. पुर दहत राजा
iii. य गी- आद्य दशर्वा (प्र ट -दशर्व) - जानर्वर ं से दिरा
iv. - शंक्वाकार आकार की पत्थर की र्वस्तुएँ।
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v. र्वेदियां
vi. दर्वशाल स्नानागार
vii. प्रकृदत की पूजा
viii. एकशंगी
ix. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। Pg – 23 3
दकन्ी तीन की उिाहरण ं सदहत व्याख्या
अथवा
हड़प्पा का रूपान्तरण ग्रार्ीण जीवन पद्धर्त की ओर
i. कलाकृदतय ं की अनुपस्स्थदत - मुहर, माला और दमट्टी के
बतिन।
ii. लंबी िू री के व्यापार, दशल्प दर्वशेषज्ञता गायब ह गई।
iii. आर्वास दनमािण के तरीक का ह्वास
iv. हरप्पा स्थल ं की भौदतक संस्कृदत में बिलार्व
v. ग्रामीण जीर्वन शैली की ओर
vi. स्थानीय भार के उपय ग के दलए एक मानकीकृत र्वजन प्रणाली
pg - 17 3
से बिलार्व।
vii. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकसी भी तीन उिाहरण ं का आकलन
22. र्ुगल घरे लू जीवन र्ें पर्िय ं के बीच अंतर:
i. बेगम- ज शाही और कुलीन पररर्वार ं से आती थीं, क भारी
मात्रा में नकि और महर प्राप्त ह ता था। उन्ें उच्च िजाि दिया
गया था।
ii. अगहा - दजनका जन्म कुलीन पररर्वार में नहीं हुआ
iii. आिाछा या उप पदियां -, मादसक भत्ता और उपहार दमलते थे
iv. शासक की इच्छा के आिार पर बेगम ं की स्स्थदत में र्वृस्ि ह
सकती
v. अगहा और आगच्छा भी बेगम की स्स्थदत पा सकती थी
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vi. प्रेम और मातृत्व ने दर्वदिसम्मत दर्वर्वादहक पदिय ं का िजाि
दिलाने में मिि करता था
vii. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकन्ी तीन की व्याख्या
Pg – 3
242
23. . इस्तर्रारी बन् ब
ं स्त
i. बंगाल के राजाओं और तालुकिार ं के साथ इस्तमरारी
बन् ब
ं स्त या स्थायी समझौता दकया गया था।
ii. उन्ें जमींिार ं के रूप में र्वगीकृत दकया गया था।
iii. जमींिार गाँर्व में ज़मीन का मादलक नहीं था बस्ि राज्य का
एक राजस्व कलेक्टर था।
iv. इस्तमरारी बन् ब
ं स्त या स्थायी समझौता ने संपदत्त के
अदिकार ं क सुरदक्षत कर दिया और स्थायी रूप से राजस्व
मांग की िरें तय कर िीं।
v. कंपनी ने जमींिार ं के साथ राजस्व तय दकया।
vi. कंपनी क फसल दर्वफलता के बार्वजूि राजस्व के दनयदमत
प्रर्वाह का आश्वासन दिया गया था।
Pg – 3
vii. ज ल ग भुगतान करने में असफल रहे , उनके राजस्व क 259
र्वसूलने के दलए नीलामी की जानी थी।
viii. अंग्रेज ं क कृदष में सुिार करने के दलए एक सफल य जना
दमली।
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ix. जमींिार ं ने राजस्व का संग्रह दकया, कंपनी क भुगतान दकया
और अपनी आय के रूप में अंतर क बनाए रखा।
x. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकसी भी तीन की जांच
24. . भारत छ ड़ आं द लन र्नस्संदेह एक जन आं द लन था।
i. आं ि लन का आं रंभ महात्मा गांिी ने दकया था
ii. हजार ं भारतीय एक साथ शादमल हुए।
iii. हडतालें आय दजत की गईं।
iv. छात्र ं ने कॉलेज छ ड दिया।
v. आं ि लन में मदहलाओं ने सदिय रूप से भाग दलया।
vi. र्वकील ं ने अिालत ं क छ ड दिया।
vii. स्वतंत्र सरकारें ि दषत की गईं।
Pg- 3
viii. ल ग ं ने महात्मा गांिी "कर या मर " के नारे का पालन दकया
350
और राष्ट्र के दलए अपना जीर्वन लगाने क तैयार थे।
ix. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकन्ीं तीन दबंिुओं की व्याख्या
SECTION - C
25.
इर्तहासकार ं ने र्हाभारत का र्वश्लेषण करते कई तत् ं पर
र्वचार र्कया
i. भाषा - इदतहासकार ं ने दर्वदभन्न भाषाओं जैसे संस्कृत, प्राकृत,
पाली या तदमल में ग्रंथ ं की जांच की।
ii. र्वषय वस्तु - इदतहासकार र्वतिमान पाठ की दर्वषय र्वस्तु क ि
व्यापक शीषों के अंतगित र्वगीकृत करते हैं - आख्यान और
उपिे शात्मक
a) आख्यान -दजनमें कथाएँ कथा के रूप में दनदिि ष्ट् हैं।
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b) दजन अनुभाग ं में उपिे शात्मक के रूप में दनदिि ष्ट् सामादजक
मानिं ड ं के बारे में नुस्खे हैं।
c) यह दर्वभाजन दकसी भी तरह से एकांकी नहीं है। उपिे शात्मक
खंड में कहादनयां शादमल हैं और कथा में अक्सर एक
सामादजक संिेश शादमल ह ता है।
iii। लेखक - मूल कथा के रचदयता भाट सारथी थे दजन्े सूत
कहा जाता था ये क्षेत्रीय य िाओं के साथ युि क्षेत्र में जाते थे
उनकी रचनाएँ मौस्खक रूप से प्रसाररत ह ती थीं।
a) ब्राहमण ं ने ने कथा परं परा पर अपना अदिकार कर दलया
b) नए राजा अपने इदतहास क दनयदमत रूप से दलखना चाहते थे
c) बाि में ऋदष व्यास द्वारा रदचत महाभारत।
iv. र्तर्थयां
a) . इदतहासकार भी ग्रंथ ं की रचना या संकलन की संभादर्वत
तारीख ं के साथ-साथ उस स्थान कीजानने भी क दशश करते
हैं, जहाँ उनकी रचना हुई ह गी।
b) ईसा पूर्वि पाँचर्वीं शताब्दी के प्रारं भ में, महाभारत मौस्खक रूप
से प्रसाररत हुआ था।
c) पाँचर्वीं शताब्दी ईसा पूर्वि से, यह ब्राह्मण ं द्वारा दलखा गया था।
d) C200 और 200 CE के बीच - कृष्ण महत्व में बढ़ने पर
रचनाएँ की गईं। Pg–72- 4x2=8
e) C200 से 400 CE के बीच मनुस्मृदत जैसे बडे दसिान् ं क 76
ज डा गया।
दकन्ीं चार दबंिुओं की व्याख्या
अथवा
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र्हाभारत बंधुता और सार्ार्जक संबंध ं पर आधाररत कहानी है।
i. बंधुता - प्राकृदतक और रक्त संबंि ं पर आिाररत पाररर्वाररक
संबंि। इदतहासकार ं ने पररर्वार और ररश्तेिारी के प्रदत
दृदष्ट्क ण की जांच और दर्वश्लेषण दकया।
ii. र्पतृ वंर्िकता के र्वचार - महाभारत ने इस दर्वचार क पुष्ट्
दकया, भूदम और शस्क्त पर झगडा कौरर्व ं और पांडर्व ं के बीच
था ज कौरर्व ं के एक ही शासक पररर्वार से थे।
iii. र्ववाह के प्रकार - अंत दर्वर्वाह , बदह दबर्वाह.बहुपिी दर्वर्वाह
,बहुपदत दर्वर्वाह का पालन दकया गया।
iv. कन्यािान या दर्वर्वाह में बेटी का उपहार दपता का एक
महत्वपूणि िादमिक कतिव्य माना जाता था।
v. मदहलाओं के ग त्र - मदहलाओं से अपेक्षा की जाती थी दक र्वे
अपने दपता के ग त्र क त्याग िें और अपने पदत के दर्वर्वाह पर
उसे अपना लें।
vi. उसी ग त्र के सिस्य दर्वर्वाह नहीं कर सकते थे।
vii. प्रत्येक ग त्र का नाम एक र्वैदिक द्रष्ट्ा के नाम पर रखा गया था।
viii. मातृसत्तात्मक समाज - सातर्वाहन ं में माताओं के ग त्र से प्राप्त
नाम थे।
ix. गुरु दशष्य परम्परा - एकलव्य और द्र णाचायि की कहानी।
x. माँ की सलाह का महत्व - पांडर्व ं ने माँ की सलाह के बाि
द्रौपिी से शािी की। हालाँ दक, गांिारी द्वारा अपने पुत्र िु योिन
क िी गई सलाह का पालन नहीं दकया गया था।
xi. मदहलाओं का उत्तरादिकार - यद्यदप सामान्य मदहलाओं के
पास भूदम तक पहुंच नहीं थी, रानी प्रभाती गुप्ता के पास भूदम
पर अदिकार थे ज उन् न
ं े िान में दिए थे
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xii. िमिसूत्र ं और िमिशास्त् ं के दनयम ं का हमेशा पालन नहीं
दकया गया। उिाहरण के दलए, गैर-क्षदत्रय ब्राह्मण भी शासक
बन गए।
xiii. बुस्िमान ं की तरह दर्वर्वाह के आठ रूप ं क मान्यता िी गई थी
Pg–55-
लेदकन केर्वल चार क ही अच्छा माना गया था जबदक शेष की 60
8
दनंिा की गई थी।
xiv. यह संभर्व है दक इनका पालन उन ल ग ं ने दकया ज
ब्राह्मणर्वािी मानिं ड ं क स्वीकार नहीं करते थे।
xv. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकसी भी आठ उिाहरण ं का आकलन .
26. . सूफीवाद
i. ल ग ं का समूह दजसका रहस्यर्वाि और र्वैराग्य की और
झुकार्व
ii. ईश्वर की भस्क्त और प्रेम के माध्यम से म क्ष पाने पर ज र
दिया।
iii. खानकाह के आसपास शेख, पीर या मुदशिि के नाम से जाने
जाने र्वाले समुिाय ं क संगदठत दकया।
iv. मुदशिि ने दशष्य ं (मुरीि )ं क नामांदकत दकया और एक
उत्तरादिकारी (खलीफा) दनयुक्त दकया।
v. आध्यास्त्मक आचरण के दलए स्थादपत दनयम।
vi. शेख र्व् जनसामान्य के बीच की सीमा का दनिािरण
vii. सूफी दसलदसला का गठन
viii. िीक्षा के दर्वदशष्ठ अनुष्ठान दर्वकदसत दकये गए
ix. शेख का र्वाली के रूप में आिर
x. समुिाय रस ई फुतुह पर चलती थी
xi. सूफी संत की िरगाह पर दज़यारत
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xii. पैगंबर म हम्मि तक खींचते हुए गुरु और दशष्य के बीच सूफी
दसलदसले (श्ृंखला)।
xiii. सूद़ियाँ दज़ि (ईश्वरीय नाम) का पाठ करके ईश्वर क याि
xiv. शेख का पंथ र्वली के रूप में प्रदतदष्ठत था।
xv. नाम, समा और कव्वाली ,संगीत और नृत्य द्वारा रहस््मयी
गुणगान
xvi. दचश्ती स्थानीय परं परा से भी जुडे
xvii. ईश्वर की मानर्वीय प्रेम के रूप में अदभव्यस्क्त
xviii. स्थानीय परं पराओं क आत्मसात करने के प्रयास ं के दलए
दिन-प्रदतदिन अभ्यास
Pg–
xix. कुछ सूदफय ं ने ब्रह्मचयि का पालन दकया। दजन्ें अलग-अलग
153- 8
नाम ं से जाना जाता है, जैसे- कलंिर, हैिरी, मिाररस, मलंग, । 159
उन्ें शरीयत का अनुपालन करने र्वाले बा-शरीय के दर्वपरीत
कहा जाता है।
xx. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकन्ी आठ दबंिुओं की व्याख्या
अथर्वा
. र्सख धर्म
i. गुरु नानक िे र्व जी दसख िमि के पहले गुरु थे।
ii. दनगुिण भस्क्त में दर्वश्वास
iii. दहंिू और मुसलमान ं ि न ,ं कमिकांड, छदर्व पूजा और िमिग्रंथ
के त्याग
iv. उनके अनुसार पूणि भगर्वान या रब का क ई दलंग नहीं है ।
v. शबि या दिव्य नाम का महत्व।
vi. अनुयादयय ं क समुिाय में संगदठत दकया।
vii. पूजा के दलए दनयम दनिािररत दकए गए थे।
viii. सामूदहक सस्वर पाठ / नाम दसमरन।
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ix. आदि ग्रंथ सादहब में भजन - दसख ं की पदर्वत्र पुस्तक क
"गुरबानी" कहा जाता है।
x. गुरुओं की रचनाएं , बाबा फरीि, रदर्विास और कबीर जैसे
सूफी कदर्व आदि ग्रंथ सादहब में संकदलत हैं।
Pg-
xi. अंदतम गुरु, गुरु ग दर्वंि दसंह ने खालसा पंथ (शुि की सेना) की 163,164 8
नींर्व रखी।
xii. पांच प्रतीक - केश, कृपण ,कच्छ, कंिा और कडा
xiii. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकन्ी आठ दबंिुओं की व्याख्या
27. . स्र त के रूप र्ें र्ौखखक गवाही
i. मौस्खक कथा, यािें , डायरी, पररर्वार का इदतहास।
ii. िु ख और समय की चुनौदतयां।
iii. पीदडत ं के अनुभर्व और यािें ।
iv. दर्वभाजन के िौरान ल ग ं दर्वशि र्वृत्तांत।
v. सरकारी अदिकाररय ं के व्यस्क्तगत लेखन दब्रदटश और
राजनीदतक िल ं के बीच बातचीत पर प्रकाश डालते हैं।लेदकन
र्वे हमें शरणादथिय ं और अन्य ल ग ं के अनुभर्व ं के बारे में बहुत
कम बताते हैं
vi. सीमा - गरीब ं के जीर्वन का अनुभर्व । उिाहरण के दलए।
अब्दु ल लती़ि के दपता
vii. उन पुरुष ं और मदहलाओं के अनुभर्व ं क समझाया दजनके
अस्स्तत्व क नजरअंिाज कर दिया गया था।
viii. झ। कुछ सीमाएँ ऐसी भी हैं जैसे इसमें सच्चाई और कालिम
का अभार्व है। Pg – 8
400
ix. व्यस्क्तगत अनुभर्व ं की दर्वदशष्ट्ता सामान्यीकरण क भी कदठन
बनाती है।
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x. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकसी भी आठ दबंिुओं का आकलन दकया जाना है
या
र्वभाजन के दौरान ल ग ं के अनुभव
i. सांप्रिादयक दहंसा।
ii. कई हजार ल ग ं की हत्या।
iii. लाख ं ल ग ं क शरणादथिय ं में बिल दिया गया।
iv. भारी हताहत।
v. कई बेिर हुए थे।
vi. संपदत्त और संपदत्त क ख दिया।
vii. ररश्तेिार ं और ि स्त ं से अलगार्व।
viii. उनकी स्थानीय संस्कृदत क छीन दलया।
ix. मदहलाओं क अगर्वा कर बेइज्जत दकया गया।
x. कई मदहलाएं िु श्मन के हाथ ं में पडने के बजाय कुएं में कूि
गईं।
xi. ल ग ं क नहीं पता था दक सीमा के दकस दहस्से में र्वे
जल्दबाजी में दनदमित सीमाओं के पार खडे थे।
Pg – 8
xii. अंग्रेज केर्वल िशिक थे। 380-
xiii. भारतीय सैदनक ं और पुदलसकदमिय ं ने दहंिू, मुस्िम या दसख 381,
के रूप में काम दकया। 394-
xiv. दर्वभाजन ने अफर्वाहें और िृणा उत्पन्न की ज सीमा के ि न ं 398
ओर ल ग ं के इदतहास क आकार िे ती हैं।
xv. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु।
दकसी भी आठ दबंिुओं का आकलन
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SECTION - D
28. स्र त आधाररत प्रश्न
प्रभावती गुप्ता और दं गुन गााँव
(२ (.१) रानी प्रभावती गुप्ताने धार्र्मक य ग्यता अर्जमत करने की
क र्िि कैसे की?
प्रभार्वती गुप्ता ने िादमिक य ग्यता अदजित करने का प्रयास दकया
a. उसने जमीनें िान कर िीं।
b. उन् न
ं े आचायि क सम्मान और श्िांजदल अदपित की।
क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। (2)
(२ (.२) भूर्र् दान के असार्ान्य पहलू
a. सैदनक ं और पुदलसकदमिय ं क िी गई भूदम।
b. जानर्वर ं और क यला प्रिान करने के िादयत्व से छूट।
c. मदिरा खरीिने और नमक ख िने से मुस्क्त
d. खान ं और खादिरा के पेड ं से मुस्क्त
e. खदनज पिाथि और खदिर से मुस्क्त
f. फूल और िू ि की आपूदति करने की बाध्यता से छूट।
g. प्रमुख और छ टे कर ं से छूट।
h. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। (2)
कईि।
28.3) र्िलालेख हर्ें राज्य और सार्ान्य ल ग ं के बीच के संबंध
के बारे र्ें क्या बतात है ?
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a. सािारण ल ग ं क राजा से उपज क दहस्सा दमलने की उम्मीि
थी
b. उन्ें राज्य के आिे श ं का पालन करना ह ता था ।
c. राज्य ने कृदष भूदम के दर्वस्तार के दलए संभर्वतः छ टे भूखंड ं
का िान दकया।
d. ल ग लेन-िे न का ररकॉडि नहीं रखते थे।
e. भूदम अनुिान भी राजनीदतक शस्क्त क कमज र करने का
संकेत था
Pg – 41
2+2+2=6
f. और शासक अपने क ताकतर्वर दिखाना चाहते थे
g. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। (2)
कईि
29.
पेड़ ं और खेत ं की र्संचाई करना।
(२ ९ .१) र्ुगल काल के दौरान लाहौर र्ें र्संचाई के स्र त, उदाहरण
के साथ सर्झाइए।
a. पदहया दसंचाई।
b. र्वे कुएं की गहराई के अनुरूप, उनके बीच लकडी के रस्सी के
ि िेरे बनाते थे ।
c. िुरी पर एक और पदहया
d. अंदतम पदहये क बैल के जररये िुमाया जा ता था पदहया के
एक छ र पर एक िू सरा पदहया तय ह जाता था
क ई भी ि (2)
13
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(२ ९ .२) आगरा र्ें भूर्र् क र्संर्चत करने के र्लए र्कस प्रणाली
का उपय ग र्कया गया? उदाहरण सर्हत स्पष्ट कीर्जए।
a. ल ग बाल्टी से पानी भरते हैं ।
b. अच्छी तरह से दकनारे पर, र्वे लकडी का एक कांटा स्थादपत
करते हैं दजसमें कांटे के बीच एक र लर समाय दजत ह ता है ,
एक रस्सी क एक बडी बाल्टी से बाँिते हैं , एक र लर के ऊपर
रस्सी डालते हैं और इसके िू सरे दसरे क बैल से बाँ िते हैं।
क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। (2) Pg – 2+2+2=6
199
(२ ९ .३) र्संचाई पररय जनाओं क र्ुगल राज्य का सर्थमन कैसे
र्र्ला?
मुगल राज्य का समथिन?
a. राज्य ने नई नहर ं की खुिाई का काम शुरू दकया। (नहर,
नाला)
b. शाह नहर जैसे पुराने क िु रुस्त दकया
c. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। (2)
30. र्ेरा र्ानना है र्क अलग र्नवामचक र्ंडल अल्पसंख्यक ं के र्लए
आत्मघाती ह ग
ं े।
(३०.१) "संर्वधान सभा र्ें कुछ नेताओं ने पृथक र्नवामचक ं की के
र्लए तकम र्दया"। कथन की जााँच करें ।
a. सिस्य ं ने दर्विानसभा में पृथक दनर्वािचन प्रणाली के दलए तकि
दिया।
b. बी प कर बहािु र जैसे नेताओं ने पृथक दनर्वािचक ं की दनरं तरता
के दलए दनर्वेिन दकया।
c. राजनीदतक प्रणाली में अल्पसंख्यक ं के सद्भार्व और दनष्पक्ष
प्रदतदनदित्व के दलए।
14
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d. उन् न
ं े तकि दिया दक समुिाय ं के बीच मतभेि क कम दकया
जा सकता है।
e. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। (2)
क ई भी ि अंक।
(30.2) प्रस्ताव के र्वर ध र्ें ग र्बंद बल्लभ पंत के पररप्रेक्ष्य का
र्वश्लेषण करें ।
a. उन् न
ं े पृथक दनर्वािचक के दर्वचार का दर्वर ि दकया और इसे
आत्मिाती माना।
b. उन् न
ं े तकि दिया दक अल्पसंख्यक ं क स्थायी रूप से पृथक
दकया जाएगा और यह उन्ें कमज र बनाएगा।
c. क ई अन्य प्रासंदगक दबंिु। (2)
कईि।
(३०.३) भारत क एक र्जबूत एकीकृत राष्टर बनाने के र्लए र्कए
गए तकों का र्वश्लेषण करें ।
a. राजनीदतक एकता बनाने और राष्ट्र क मजबूत बनाने के दलए
एक मजबूत केंद्र क महत्व दिया गया।
b. सभा सिस्य ं ने अस्स्मता पर ज र दिया।
c. समुिाय ं क सांस्कृदतक संस्थाओं के रूप में मान्यता िी पर
ज र दिया। और सांस्कृदतक अदिकार ं का आश्वासन पर ज र
दिया।
d. र्वफािार नागररक बनने के दलए ल ग ं क केर्वल समुिाय और Pg-418 2+2+2=6
स्वयं पर ध्यान केंदद्रत करना बंि करना पर ज र दिया।
e. क ई अन्य सापेक्ष र्बंदु। (2)
कईद।
a. SECTION - E
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31. र्ानर्चत्र आधाररत प्रश्न 1x6=6
(31.1) संलग्न नक्शा दे खें। 1x3
1x3
(31.2) संलग्न र्ानर्चत्र दे खें।
Q.No. के बदले र्ें दृर्ष्टहीन परीक्षार्थमय ं के र्लए 31:
Pg- 30
(३१.१) मगि, पांचला, तक्षदशला, गांिार, कुरु, उज्जदयनी, र्वांगा, अंगा, 1x3
र्वादज, र्वत्स, मल्ल, कौशाम्भी, क सल, कासी, मत्स्य, सुरसेना, असाका,
अर्वंती, कम्ब ज
क ई तीन
(31.2) आगरा, लाहौर, फतेहपुरसीकरी, शाहजहानाबाि (दिल्ली)
1x3
क ई तीन
16