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CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-4-1 Solutions _Hindi_

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CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-4-1 Solutions _Hindi_ - Page 1 of 12

About CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-4-1 Solutions _Hindi_

CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-4-1 Solutions _Hindi_ is available here for free download. Published by CBSE for Class 12, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (12 pages). Candidates preparing for Class 12 can use CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-4-1 Solutions _Hindi_ to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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Yes. CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-4-1 Solutions _Hindi_ can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

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CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-4-1 Solutions _Hindi_ – Text

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Page 1

अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु

सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/4/1

सामा िनदश :-

1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।

2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।

3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।

6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।

7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।

8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।

Page 2

9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।

10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)

11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –

 उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
 उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
 उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
 उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
 आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
 योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
 उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
 कु ल अंक के योग म अशुि
 उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
 उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।

12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।

13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै

14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।

15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।

16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै

Page 3

MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII
AISSCE, MARCH 2020
CODE NO. Set-61/4/1

Q.NO अपेक्षित उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARK
NO. S
PART- A
1. जॉन मार्शल Pg 20 1

2 c- 1,2 & 3 Pg 16 1
3 कुषाण राजा की की बलुआ पत्थर से बनी मूर्तश (कर्नष्क) Pg 37 1

दृर्िबार्ित ों के र्लए… र्सक्के / . मूर्तश / र्र्लालेख / आर्ि (क ई )
4 d- उन् न
ों े िम्म के माध्यम से समाज का कल्याण र्कया Pg 47 1

5 कौर्िल्य (चाणक्य) Pg 32 1

या

चोंद्रगुप्त मौयश
6 a- राजगृह Pg 31 1

7 कुषाण ं द्वारा जारी क्षकए गए स ने के क्षसक्के - वे स ने के र्सक्के जारी करने वाले पहले Pg 45 1

र्ासक थे। उनके स ने के र्सक्के र मन और पार्थशयन र्ासक ों द्वारा जारी र्कए गए के

समान थे।

गुप्त शासक द्वारा जारी क्षकए गए स ने के क्षसक्के सबसे र्ानिार थे और र्ुद्धता के

र्लए जाने जाते थे और लोंबी िू री के लेनिे न के र्लए उपय ग र्कए जाते थे।
8 a – वह मुहम्मि र्बन तुगलक के साम्राज्य के िौरान काजी था Pg 118 1

9 a- म ि
ों े स्कूयू Pg 132 1

10 c – (1),(4),(3) और (2) Pg 173 1

11 जजमानी प्रणाली Pg 205 1

12 d – (i)-b, (ii) – c, (iii) – a, (iv)- d Pg. 1
202,213
13 मनसबिारी प्रणाली Pg 214 1

14 िु आरश ते बारब सा Pg 122 1

15 d- इसके आों कड़ ों क समान रूप से सभी राज्य ों से समान रूप से एकत्र र्कया गया था Pg 220 1

16 a- थॉमस ज न्स बाकशर Pg 308 1

17 फ िश र्वर्लयम्स Pg 324 1

या
फ िश सेंि जॉजश
18 a- ि न ों (A) और (R) सभी सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या है Pg 339 1

19 a-. वार्जि अली र्ाह एक अल कर्प्रय र्ासक थे Pg 296 1

20 a- केवल (1) और (2) Pg 321 1

1

Page 4

PART B

21 पुरातत्वक्षिद ं द्वारा िगीकरण के क्षसद्ांत ं क अतीत के साथ

i. वगीकरण का सामन्य र्सद्धाोंत प्रयुक्त पिाथों जैसे -पत्थर िातु अस्थथ

हाथीिाोंत र्मट्टी, िातु, हड्डी, आइवरी आर्ि

ii. उपय र्गता के आिार पर - औजार या आभूषण

iii. आिुर्नक समय में उसके प्रयुक्त वस्तुओों की समानता के आिार पर -

म,के चस्क्कयाों , पत्थर के फलक Pg-22
3

iv. पूरा वास्तु की उपय र्गता के उस सन्दभश के परीक्षण के आिार पर

v. अप्रत्यक्ष साक्ष् ों के आिार पर जैसे मूर्तशय ों का र्चत्रण

vi. रातत्वर्वि ों ने हड़प्पा थथल पर कपास के र्नर्ान जैसे अप्रत्यक्ष सबूत ों के

माध्यम से र् ि र्कया।

vii. पुरातत्वर्वि ों ने मेस प िार्मया में पाए जाने वाले साोंस्कृर्तक अनुक्रम और

तुलना में जगह के सोंिभश में सोंिभश का फ्रेम र्वकर्सत र्कया है।

vi। क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु
र्कसी भी तीन र्बोंिुओों क उिाहरण ों के साथ उर्चत ठहराया जाना चार्हए

अथिा

हड़प्पा क्षिक्षप एक रहस्य्मयी क्षिक्षप के रूप में

i. यह र्लर्प आज तक पढ़ी नहीों जा सकी

ii. सबसे लोंबे र्र्लालेख में लगभग 26 र्चन् हैं।
Pg-15 3
iii. 375-400 के बीच इसके कई सोंकेत हैं
iv. यह र्लर्प वणशमार्लय नहीों थी

v. यह र्लर्प िायी से बायीों और र्लखी जाती थी

vi. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु

र्कन्ीों तीन र्बोंिुओों की व्याख्या
.
22 क्षिजयनगर मंक्षदर िास्तुकिा में निाचार

i. राजकीय प्रर्तकृर्त मूर्तशयाों मोंर्िर ों में प्रिर्र्शत की जाने लगी

ii. र्वर्ाल पैमाने की सोंरचनाएँ ज र्ाही अर्िकार की र्नर्ानी रही ह ग
ों ी

iii. उन्ें राया ग पुरम या राजकीय प्रवेर् द्वार के रूप में उिाहरण र्िया गया था।

iv. मोंडप
v. उत्कीर्णशत स्तम्भ

2

Page 5

vi. ऊोंची मीनारें
Pg-184 3
vii. लोंबे खोंभे वाले गर्लयारे ज अक्सर मोंर्िर पररसर के भीतर मोंर्िर ों के आसपास

चलते थे।

viii. नक्कार्ीिार खोंभे।

ix. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु
र्कन्ीों तीन र्बोंिुओों की व्याख्या

23 संक्षिधान सभा में मजबूत केंद्र की िकाित के कारण:

i. साोंप्रिार्यक उन्माि क र कने के र्लए।

ii. रािर भलाई के र्लए

iii. उपलब्ध आर्थशक सोंसािन ों क जुिाना।
iv. उर्चत प्रर्ासन थथार्पत करना।

v. र्विे र्ी आक्रमण के र्वरुद्ध िे र् की रक्षा करना।

vi. िे र् के आर्थशक र्वकास की य जना बनाना
Pg-424 3
vii. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु

र्कन्ीों तीन र्बोंिुओों की व्याख्या
24 रै यतिारी प्रथा और रै यत

i. राजस्व क रै यत ों के साथ व्यवस्थथत र्कया गया
ii. राजस्व की माोंग इतना अर्िक था र्क रै यत भुगतान करने में सक्षम नहीों थे। वे

अपने गाोंव ों क छ ड़कर पलायन कर गए।

iii. कलेक्टर ों ने रै यत ों से भुगतान क अत्योंत गोंभीरता से र्लया।

iv. ऋण का भुगतान करने में असमथशता के कारण फसल ों की जब्ती हुई और पूरे
गाोंव पर जुमाशना लगाया गया।

v. रै यत ों ने ऋणिाताओों से उच्च ब्याज िर पर ऋण उिार र्लया।
Pg 278 3
vi. रै यत क़र्श में डू ब गए

vii. रै यत साहूकार ों क कुर्िल समझते थे
viii. बाोंि पत्र ों में जाली आों कड़े िे ते थे

ix. सीमा कानून, प्रथागत कानून ों का उल्लोंघन र्कया गया।

x. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु

क ई भी तीन र्बोंिु उिाहरण के साथ

PART C

54 8
25 िी.एस. सुथंकर और सामाक्षजक इक्षतहास का पुनक्षनिमािण

i. भारतीय सोंस्कृर्तकमी वी.एस. सुथोंकर ने महाभारत के आल चनात्मक सोंस्करण क

तैयार करने का प्रयास र्कया।

3

Page 6

ii. िे र् के र्वर्भन्न र्हस् ों से ग्रोंथ ों की पाोंडुर्लर्पय ों का सोंग्रह।
iii. िीम ने प्रत्येक पाोंडुर्लर्प के छों ि ों की तुलना की

iv. 13,000 पृष् ों में छों ि प्रकार्र्त।

v. उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले कहानी के सोंस्कृत सोंस्करण ों में सामान्य तत्व

vi. क्षेत्रीय सोंस्करण ों में क्षेत्रीय र्वर्विताएों र्मलीों
vii. प्रभेि उन गूढ़ प्रर्क्रयाओों के र् िक है र्जन् न
ों े प्रभर्ाली परों पराय और लचीले

र्वचार और आचरण के बीच सोंवाि कायम कर के सामार्जक इर्तहास ों क रूप

र्िया

viii. सोंवाि द्वन्द और मतव्य क र्चर्त्रत र्कया हैबिलाव क फुिन ि और पररर्र्ि ों में
प्रलेस्खत र्कया गया था

ix. र्वर्भन्नताओों ने थथानीय र्वचार ों और प्रथाओों के माध्यम से प्रारों र्भक और बाि में

सामार्जक इर्तहास क आकार र्िया

x. इर्तहासकार ों द्वारा सामार्जक इर्तहास के मुद् ों का पता लगाया गया था
xi. पाली, प्राकृत और तर्मल में रचनाओों से यह सोंकेत र्मलता था र्क प्रामार्णक सोंस्कृत

ग्रोंथ ों में र्नर्हत र्वचार पूरे आर्िकाररक रूप से मान्यता प्राप्त थे।

xii. महाभारत के उिाहरण जैसे: पररजन पर आिाररत पररवार, र्पतृसत्ता का आिर्श

महत्वपूणश और मूल्यवान था, बहुर्ववाह और बहुर्ववाह जैसे र्ववाह के र्नयम
प्रर्तर्बोंर्बत ह ते हैं, महाभारत ने पुि र्कया र्क वणश व्यवथथा र्िव्य मूल की थी

xiii. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु

समग्रता में मूल्याोंकन

अथिा

अछूत ं का जीिन

i. व्यवथथा से बाहर के ल ग ों क ब्राह्मण ों द्वारा अछूत कहा जाता था।
ii. उन्ें अपर्वत्र माना जाता था।

iii. वे लार् ों और मृत जानवर ों क सोंभालने जैसी गर्तर्वर्ियाँ करते थे। 64-65 8

iv. चाोंडाल कहा जाता था।

v. पिानुक्रम के नीचे रखे गए थे।
vi. मनुस्मृर्त ने चाोंडाल के कतशव्य ों क र्निाशररत र्कया जैसे: उन्ें गाँव के

बाहर रहना पड़ता था।

vii. उन्ें छ ड़े गए बतशन ों का उपय ग करना था।

viii. मृत और ल हे के गहन ों के कपड़े पहने।
ix. वे गाँव ों और र्हर ों में नहीों जा सकते थे।

x. उन्ें गर्लय ों में ताली बजानी पड़ी।

xi. उन्ें जल्लाि और मेहतर के रूप में काम करना था।

xii. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु

4

Page 7

26 सुिह-ए-कुि

i. मुगल साम्राज्य में कई अलग-अलग जातीय और िार्मशक समुिाय र्ार्मल

थे।
ii. सुलह-ए-कुल क पूणश र्ाोंर्त के रूप में वर्णशत र्कया गया है।

iii. इसे अकबर के प्रबुद्ध र्ासन की आिारर्र्ला माना जाता था।

iv. प्रत्येक िमश क राज्य के अर्िकार क कम करने या आपस में लड़ने की

र्तश पर अर्भव्यस्क्त की स्वतोंत्रता िी गई थी।
v. राज्य की नीर्तय ों के माध्यम से लागू र्कया गया था।

vi. तुरानी , ईरानी, अफगान, राजपूत, िक्कनी जैसी समग्र सोंस्कृर्त से अनेक

समुिाय के ल ग िरबार में कायशरत थे

vii. जर्जया या तीथशयात्रा ‘कर’ समाप्त कर र्िया गया।

viii. र्नमाशण और रखरखाव के र्लए पूजा थथल ों क अनुिान र्िया गया।

ix. अोंतर िार्मशक चचाश के र्लए इबाित खाना का र्नमाशण। Pg 240- 8
245
x. यूर प से जेसुइि र्मर्न क र्नमोंत्रण।

xi. र्होंिू राजकुमारी के साथ वैवार्हक गठबोंिन।
xii. र्वर्भन्न जातीय समूह के ल ग र्ाही कायश का र्हस्ा थे।

xiii. ल ग ों क उनकी िार्मशक पहचान के बावजूि य ग्यता के आिार पर

उपार्ियाों िी गयी थे।

xiv. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु।
र्कन्ी आठ र्बोंिुओों की व्याख्या

अथिा

मुगि घरे िू दु क्षनया
i. इसमें सम्राि की पर्िय ,ों ररश्तेिार ,ों मर्हला सेवक ों और िार्सय ों का
समावेर् था।

ii. पर्िय ों के बीच भेि क बनाए रखा गया था -बेगम, अगाह और अगाछह

iii. मार्सक भत्ता नकि,, उपहार र्िए जाते थे
Pg 242-
iv. स्त्री और पुरुष गुलाम, अपनी कौर्ल और बुस्द्धमता से अनेक कायो का 243 8

सोंपािन करते थे
v. उनके द्वारा र्वर्भन्न कायश र्कए गए।

vi. गुलाम र्हर्ड़े व्यापर में रूर्च लेने वाली मर्हलाओ के एजेंि ह ते थे

vii. कुछ रार्नय ों और राजकुमाररय ों ने र्वत्तीय स्त्र त ों पर र्नयोंत्रण रखा
viii. कुछ के पास मनसबिारी अर्िकार व् र्नयोंत्रण और आय भी थी

ix. कुछ राजकुमारी ने र्वत्तीय सोंसािन रखे।

x. सोंसािन ों पर र्नयोंत्रण ने महत्वपूणश मर्हलाओों क इमारत ,ों बगीच ों और

बार्ार ों क वास्तुकलात्मक पररयाजनाओों में र्हस्ा र्लया

5

Page 8

xi. मुगल राजकुमारी जहाँआरा ने कई वास्तुकला पररय जनाओों जैसे
र्ाहजहाोंआबाि के चाोंिनी चौक की रूपरे खा तैयार की

xii. कुछ र्कताबें गुलबिन बेगम द्वारा र्लखी गई -हुमायूोंनामा

xiii. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु।

र्कन्ी आठ र्बोंिुओों की व्याख्या

27 असहय ग आं द िन पर भारतीय ं की प्रक्षतक्षिया

i. रौलि एक्ट के स्खलाफ पृष्भूर्म, जर्लयाोंवाला बाग नरसोंहार और

स्खलाफत आों ि लन के पक्ष में गाोंिीजी ने असहय ग आों ि लन चलाया।

ii. र्होंिू और मुसलमान ों ने सामूर्हक रूप से औपर्नवेर्र्क कानून ों क समाप्त

करने की क र्र्र् की।
iii. छात्र ों ने सरकार द्वारा सोंचार्लत स्कूल ों और कॉलेज ों में जाना बोंि कर र्िया।

iv. वकील ों ने अिालत ों में जाने से इनकार कर र्िया।

v. कई कस् ों और र्हर ों में श्रर्मक वगश हड़ताल पर चले गए

vi. िे हात ों ने अोंग्रेज ों के स्खलाफ असोंत ष र्िखाया।
vii. आों ध्र में पहाड़ी जनजार्तय ों ने वन कानून ों का उल्लोंघन र्कया।

viii. अवि में र्कसान ों ने कर ों का भुगतान नहीों र्कया।

ix. कुमाऊों में र्कसान ों ने औपर्नवेर्र्क अर्िकाररय ों के र्लए भार उठाने से

इनकार कर र्िया। Pg 350- 8
x. थथानीय नेतृत्व के स्खलाफ र्वर ि। 351

xi. मर्हलाओों की भागीिारी

xii. र्कसान ,ों श्रर्मक ों और अन्य ल ग ों ने अपने र्हत ों के अनुकूल तरीक ों से

औपर्नवेर्र्क र्नयम ों के साथ असहय ग करने के र्लए आह्वान र्कया।

6

Page 9

xiii. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु
समग्र रूप से मूल्याोंकन

या

नमक सत्याग्रह

i. गाोंिीजी ने नमक कानून त ड़ने के र्लए एक माचश की घ षणा की

ii. नमक कानून ने र्ब्रर्िर् र्ासन क नमक के र्नमाशण और र्बक्री में

एकार्िकार र्िया।

iii. नमक पर राज्य का एकार्िकार गहरा अल कर्प्रय था क्य र्ों क प्रत्येक
भारतीय घरे लू नमक अपररहायश था और ल ग ों क घरे लू उपय ग के र्लए भी

नमक बनाने की मनाही थी।

iv. गाोंिीजी ने र्ब्रर्िर् र्ासन के स्खलाफ एक व्यापक असोंत ष फैलाने की

उम्मीि की और िाोंडी माचश र्ुरू र्कया। िाोंडी पहुोंच उन् न
ों े नमक कानून
त ड़ा।

v. िे र् के अन्य र्हस् ों में समानाोंतर नमक माचश का आय जन र्कया गया।
Pg- 348 -
vi. र्कसान ों ने औपर्नवेर्र्क वन कानून ों का उल्लोंघन र्कया र्जससे उनकी 350 8

वन ों तक पहुोंच सीर्मत ह गई।
vii. फैक्टर ी मार्लक हड़ताल पर चले गए।

viii. वकील ों ने र्ब्रर्िर् अिालत ों का बर्हष्कार र्कया।

ix. छात्र ों ने सरकार द्वारा सोंचार्लत र्ैर्क्षक सोंथथान ों और स्कूल ों में जाने से

इनकार कर र्िया।
x. भारतीय ों क र्गरफ्तार र्कया गया।

xi. गाोंिीजी ने अछूत ों की सेवा के र्लए सवणों से गुहार लगाई।

xii. र्होंिू, मुस्िम, पारसी और र्सख क एकजुि ह ने के र्लए कहा गया था।

xiii. हजार ों स्वयोंसेवक इस कारण से र्ार्मल हुए।
xiv. कई अर्िकाररय ों ने अपने पि ों से इस्तीफा िे र्िया।

xv. गाोंिीजी की बैठक ों में सभी वगों के ल ग र्ार्मल ह ते थे।

xvi. मर्हलाओों ने बड़ी सोंख्या में भाग र्लया।

xvii. िाोंडी माचश ने गाोंिी क िु र्नया के सामने लाया। माचश क यूर पीय और
अमेररकी प्रेस द्वारा कवर र्कया गया था।

xviii. नमक माचश ने र्ब्रर्िर् ों क यह एहसास र्िलाया र्क उन्ें भारतीय ों क कुछ

र्स्क्तयाों िे नी ह ग
ों ी।

xix. क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु
समग्र रूप से मूल्याोंकन

7

Page 10

28 थेररगथा

28.1 पुन्ना के क्षिचार ं क द उदाहरण ं से समझाइए।

i. वह ब्राह्मणवािी ररवाज ों के स्खलाफ थी।
ii. उन् न
ों े बताया र्क आध्यास्त्मकता का सार र्ाश्वत आनोंि में है।

iii. उसने आत्मा की र्ुद्धता पर ज र र्िया।

(क ई ि र्बोंिु) २

28.2 ब्राह्मण ने नदी में प्रक्षतक्षदन ग ता िगाने के क्षिए क्या स्पष्टीकरण क्षदया

अपने िै र्नक डु बकी के र्लए और्चत्य र्िया

28.3 i. स्नान के अनुष्ान से बुराइय ों क र का जा सकता है।

ii. पानी में नहाने से कुछ भी ठीक ह सकता है।
Pg-93 2 +2
2
+2=6
बौद् दशिन के मूि क स्पष्ट करें ज उनके गाथा के माध्यम से व्यक्त क्षकया
गया है।

i. बुद्ध ने जार्त प्रथा और कमशकाोंड की र्नोंिा की।

ii. बुद्ध ने ल ग ों से आध्यास्त्मक अनुभव के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने का

आग्रह र्कया।

iii. सोंस्कार के बजाय आचरण और मूल्य ों क महत्व र्िया।
(क ई ि र्बोंिु) २
29 एक रािसी

29.1 कररकमि अम्मियार ने खुद क सौंदयि की पारं पररक प्रकृक्षत से अिग दशािया था।

a) उसने भगवान र्र्व की पूणश भस्क्त प्राप्त करने के र्लए अपनी साोंसाररक सुोंिरता क बहा

र्िया।
b) उसने खुि क राक्षसी, फूली हुई नार्ड़य ों वाली बहार र्नकली आँ ख ों वाली सफ़ेि िाोंत,

उभरा हुआ उिर, लाल केर् , बहार र्नकले िाोंत , लम्बी र्पोंडली वाली िर्ाशयाI 2
29.2
अम्मियार की इस रचना ने क्षपतृसत्तात्मक मानदं ड ं क चुनौती कैसे दी।

i. उसने भयभीत छर्व लेने वाले र्पतृसत्तात्मक मानिों ड ों क पररभार्षत र्कया।

ii. उसने सामार्जक रूप से मान्य सुोंिरता क अस्वीकार कर र्िया।

iii. उसने सामार्जक व्यवथथा की आल चना की।
(क ई ि र्बोंिु) २
29.3
उसके सामाक्षजक दाक्षयत्व ं के त्याग के क्षकसी भी द पहिुओ ं का क्षिश्लेषण करें ।

i. र्र्व की महान भस्क्त और अत्यर्िक तप के र्लए मागश अपनाया

ii. मर्हलाओों की सिाचार के गुण
iii. वह जोंगल ों में भिकने लगी र्जसे उसने भगवान र्र्व का घर माना। Pg-145 2+2+2=
6
(क ई ि र्बोंिु) २

8

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2
30 औरत की बरामदी का मतिब क्या था

भारत के क्षिभाजन के दौरान नरसंहार के द कारण
30.1 a) साोंप्रिार्यक उन्माि

b) सम्मान की रक्षा करना
c) प्रर्ासन िों ग ों क र्नयोंर्त्रत नहीों कर सका

d) क ई अन्य प्रासोंर्गक र्बोंिु

(क ई ि र्बोंिु) २

30.2 सामाक्षजक कायिकताि और पुक्षिस नौजिान ज ड़े क क्य ं ख ज रहे थे ?

a) अपहृत मर्हलाओों क वापस लाने के र्लए तार्क उनका पुनवाशस र्कया जा सके

b) ि न ों र्वर्भन्न समुिाय ों र्सख और मुस्िम से सोंबोंर्ित थे।
2

30.3
क्या आपक िगता है क्षक अक्षधकारी िड़की क िापस िेने की क क्षशश में सही थे?

अपने उत्तर का समथिन करने के कारण बताएं ।

a) अर्िकाररय ों क र्ववार्हत ज ड़े के र्नजी जीवन में हस्तक्षेप नहीों करना चार्हए था।
Pg-395 2+2+
b) उनके अनावश्यक हस्तक्षेप के कारण लड़की की मृत्यु ह गई। 2
2=6
(छात्र ों के र्वचार ों क ध्यान में रखा जाए)
31 31.1, 31.2- सोंलग्न मानर्चत्र िे खें: 1x6=
6
दृक्षष्टबाक्षधत परीिाक्षथिय ं के क्षिए

a) बौद् धमि के पक्षित्र स्यथान (क ई भी तीन थथान)
1x3=
नागाजुशनक ड
ों ा, साोंची, अमरावती, लुस्म्बनी, भरहुत, ब िगया, अजोंता। 3

या

मुगि शाही शहर। (क ई तीन जगह)
b)
आगरा, लाहौर, फतेहपुर सीकरी, र्ाहजहानाबाि (र्िल्ली)।

1x3=
भारतीय राष्टरीय आं द िन (क ई तीन थथान) 3

चोंपारण, खेड़ा, अहमिाबाि, बनारस, अमृतसर, चौरी चौरा, लाहौर, बारड ली, िाोंडी, बॉम्बे,

कराची

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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSolution
Pages12
Updated22 Jul 2026