Page 1
NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 7th
aglase .co
Page 2
Book : Hindi Ncert Solutions | Chapter - 20 Hindi
Class : 7th
Subject : Hindi
Chapter : 20
Chapter Name : विप्लि-गायन
Q1 'कण-कण में है व्याप्त िही स्वर ..... कालकूट फवण की व िंतामवण'
(क) 'िही स्वर', 'िह ध्ववन' एििं 'िही तान' आवि िाक्ािंश वकसके वलए/वकस भाि के वलए प्रयुक्त हुए हैं ?
(ख) िही स्वर, िह ध्ववन एििं िही तान से सिंबिंवित भाि का 'रुद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है /वनकली मेरे अिंतरतर
से' - पिंक्तक्तय िं से क्ा क ई सिंबिंि बनता है ?
(क) 'िही स्वर', 'िह ध्ववन' एििं 'िही तान' आवि िाक्ािंश का प्रय ग ल ग िं में क्रािंवत की भािना क जगाने के
वलए वकया गया हैं |
(ख) िही स्वर, िह ध्ववन एििं िही तान से सिंबिंवित भाि का 'रुद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है /वनकली मेरे अिंतरतर
से' में आपसी सिंबिंि बनता है क् विं क यह गीत एक क्रािंवत के रूप में कवि के मुख से वनकल रहा है वजससे
िह जनता क जागृत करना ाहता है |
Page : 142 , Block Name : कविता से
Q2. नी े िी गई पिंक्तक्तय िं का भाि स्पष्ट कीवजए -
'साििान ! मेरी िीणा में ...... ि न िं मेरी ऐिंठी हैं।'
Answer. इस पिंक्तक्त में कवि ल ग िं क पररिततन के प्रवत साििान करते हुए कहते हैं वक अब त मेरी िीणा
का स्वर भी मिुरता की अपेक्षा क्रािंवत की आग ही उगलेगा। िीणा से कठ र स्वर वनकलने के कारण मेरी
उँ गवलय िं की वमजराबें टू टकर वगर गईिं, वजससे उँ गवलयाँ ऐिंठकर घायल ह जाती है ।लेवकन इस गीत क
गाते हुए मैं अपनी वकसी परे शानी की तरफ़ ध्यान नहीिं िू ँ गा |
Page : 142 , Block Name : कविता से
Q1 स्वािीनता सिंग्राम के विन िं में अनेक कविय िं ने स्वािीनता क मुखर करनेिाली ओजपूणत
कविताएँ वलखीिं | माखनलाल तुिेिी, मैविलीशरण गुप्त और सूयतकािंत विपाठी 'वनराला' की ऐसी
कविताओिं की ार- ार पिंक्तक्तयाँ इकट्ठा कीवजए वजसमें स्वािीनता के भाि ओज से मुखर हुए हैं |
Page 1 of 4
Page 3
Book : Hindi Ncert Solutions | Chapter - 20 Hindi
⚫ माखनलाल तुिेिी -
िेि िं से बवलिान िं तक ज ह ड़ लगी
प्रिम प्रभात वकरण से वहम में ज त जागी
उतर पड़ी गिंगा खेत िं खवलहान िं तक
मान आँ सू आये बवल-महमान िं तक
⚫ मैविलीशरण गुप्त -
ज भरा नहीिं है भाि िं से
वजसमें बहती रसिार नहीिं।
िह हृिय नहीिं है पत्थर है ,
वजसमें स्विे श का प्यार नहीिं।
⚫ सूयतकािंत विपाठी 'वनराला' -
त ड़ , त ड़ , त ड़ कारा
पत्थर, की वनकल वफर,
गिंगा-जल-िारा!
गृह-गृह की पाितती!
पुनः सत्य-सुन्दर-वशि क सँिारती
उर-उर की बन आरती!–
भ्रान् िं की वनश्चल ध्रुितारा!–
त ड़ , त ड़ , त ड़ कारा!
Page : 142-143, Block Name : कविता से आगे
Page 2 of 4
Page 4
Book : Hindi Ncert Solutions | Chapter - 20 Hindi
Q1 कविता से मूलभाि क ध्यान में रखते हुए बताइए वक इसका शीर्तक 'विप्लि -गायन' क् िं रखा
गया ह गा?
Answer. 'विप्लि -गायन' का अित है - क्रािंवत का आह्वान करना | कवि इस कविता के माध्यम से पररिततन
की वहल र लाना ाहता हैं | विकास और गवतशीलता क अिरुद्ध करनेिाली प्रिृवि से सिंघर्त करके कवि
नया सृजन करना ाहता है |
Page : 143, Block Name : अनुमान और कल्पना
Q1. कविता में ि शब् िं के मध्य (-) का प्रय ग वकया गया है , जैसे - 'वजससे उिल-पुिल म जाए' एििं
'कण-कण में है व्याप्त िही स्वर'। इन पिंक्तक्तय िं क पविए और अनुमान लगाइए वक कवि ऐसा प्रय ग क् िं
करते हैं?
Answer. कवि कविता में ि शब् िं के मध्य (-) का प्रय ग कर शब् िं में मत्कार और लय बनाये रखने के
वलए करते हैं। इस कारण कविता भी ओजपूणत लगती है।
Page : 142 , Block Name : प्रश्न अभ्यस भार्ा की बात
Q2. कविता में (,-।) आवि जैसे विराम व ह् िं का उपय ग रुकने, आगे-बिने अििा वकसी खास भाि क
अवभव्यक्त करने के वलए वकया जाता है। कविता पिने में इन विराम व ह् िं का प्रभािी प्रय ग करते हुए
काव्य पाठ कीवजए। गद्य में आमतौर पर है शब् का प्रय ग िाक् के अिंत में वकया जाता है , जैसे - िे शराज
जाता है। अब कविता की वनम्न पिंक्तक्तय िं क िे क्तखए -
'कण-कण में है व्याप्त......िही तान गाती रहती है ,'
इन पिंक्तक्तय िं में है शब् का प्रय ग अलग-अलग जगह िं पर वकया गया है।
कविता में अगर आपक ऐसे अन्य प्रय ग वमलें त उन्हें छाँटकर वलक्तखए।
⚫ किंठ रुका है महानाश का, मारक गीत रुद्ध ह ता है
⚫ टू टीिं हैं वमजराबें,अिंगुवलयाँ ि नो ो मेरी ऐिंठी हैं |
Page : 142 , Block Name : भार्ा की बात
Q3. वनम्न पिंक्तक्तय िं क ध्यान से िे क्तखए -
'कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ......एक वहल र उिर से आए,'
Page 3 of 4
Page 5
Book : Hindi Ncert Solutions | Chapter - 20 Hindi
इन पिंक्तक्तय िं के अिंत में आए, जाए जैसे तुक वमलानेिाले शब् िं का प्रय ग वकया गया है। इसे तुकबिंिी या
अिंत्यानुप्रास कहते हैं। कविता से तुकबिंिी के अन्य शब् िं क छाँटकर वलक्तखए। छािंटे गए शब् िं से अपनी
कविता बनाने की क वशश कीवजए |
Answer. तुकबिंिी िाले शब् -
बैठी है - ऐिंठी हैं,
इिर – उिर,
रुद्ध – युद्ध,
फवण - मवण
Page : 143 , Block Name : भार्ा की बात
Page 4 of 4