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अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु
सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/4/3
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
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9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै
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MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII
AISSCE, MARCH 2020
CODE NO. Set-61/4/3
Q.NO अपेक्षित उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
NO.
PART - A
1 a- राजगृह Pg 31 1
2 d- इसके आं कड़ ं क समान रूप से सभी राज् ं से समान रूप से एकत्र ककया Pg 220 1
गया था
3 जजमानी प्रणाली Pg 205 1
4 a-म ट
ं े स्कूयू Pg 132 1
5 d – (i)-b, (ii) – c, (iii) – a, (iv)- d Pg. 1
202,213
6 c – (1),(4),(3) और (2) Pg 173 1
7 जॉन मार्शल Pg 20 1
8 d- उन् न
ं े धम्म के माध्यम से समाज का कल्याण ककया Pg 47 1
9 c- 1,2 & 3 Pg 16 1
10 कुषाण राजा की की बलुआ पत्थर से बनी मूकतश (ककनष्क) Pg 37 1
दृकिबाकधत ं के कलए… कसक्के / . मूकतश / कर्लालेख / आकि (क ई 1 )
11 .कुषाण ं द्वारा जारी क्षकए गए स ने के क्षसक्के - वे स ने के कसक्के जारी करने Pg 45 1
वाले पहले र्ासक थे। उनके स ने के कसक्के र मन और पाकथशयन र्ासक ं द्वारा
जारी ककए गए के समान थे।
गुप्त शासक द्वारा जारी क्षकए गए स ने के क्षसक्के सबसे र्ानिार थे और
र्ुद्धता के कलए जाने जाते थे और लंबी िू री के लेनिे न के कलए उपय ग ककए जाते
थे।
12 a –a – वह मुहम्मि कबन तुगलक के साम्राज् के िौरान काजी था Pg 118 1
13 कौकटल्य (चाणक्य) Pg 32 1
या
चंद्रगुप्त मौयश
14 फ्ांसवा बेकनशयर Pg- 122 1
15 Mansabdari System Pg 214 1
16 c- र्ाह मल Pg- 293 1
17 a- ि न ं (A) और (R) सभी सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या है Pg 339 1
18 a- वाकजि अली र्ाह एक अल ककप्रय र्ासक थे Pg 296 1
19 a- केवल (1) और (2) Pg 321 1
1
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20 फ टश कवकलयम्स Pg 324 1
या
फ टश सेंट जॉजश
PART - B
21 पुरातत्वक्षिद ं द्वारा िगीकरण के क्षसद्ांत ं क अतीत के साथ
i. वगीकरण का सामन्य कसद्धांत प्रयुक्त पिाथों जैसे -पत्थर धातु
अस्थथ हाथीिांत कमट्टी, धातु, हड्डी, आइवरी आकि
ii. उपय कगता के आधार पर - औजार या आभूषण
iii. आधुकनक समय में उसके प्रयुक्त वस्तुओं की समानता के
आधार पर - म,के चस्क्कयां , पत्थर के फलक
iv. पूरा वास्तु की उपय कगता के उस सन्दभश के परीक्षण के आधार
पर
v. अप्रत्यक्ष साक्ष् ं के आधार पर जैसे मूकतशय ं का कचत्रण
Pg-22
vi. रातत्वकवि ं ने हड़प्पा थथल पर कपास के कनर्ान जैसे अप्रत्यक्ष 3
सबूत ं के माध्यम से र् ध ककया।
vii. पुरातत्वकवि ं ने मेस प टाकमया में पाए जाने वाले सांस्कृकतक
अनुक्रम और तुलना में जगह के संिभश में संिभश का फ्ेम
कवककसत ककया है।
vi। क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
ककसी भी तीन कबंिुओं क उिाहरण ं के साथ उकचत ठहराया जाना
चाकहए
अथिा
हड़प्पा क्षिक्षप एक रहस्य्मयी क्षिक्षप के रूप में
i. यह कलकप आज तक पढ़ी नहीं जा सकी
ii. सबसे लंबे कर्लालेख में लगभग 26 कचन् हैं।
iii. 375-400 के बीच इसके कई संकेत हैं
iv. यह कलकप वणशमाकलय नहीं थी
3
v. यह कलकप िायी से बायीं और कलखी जाती थी Pg-15
vi. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
2
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ककन्ीं तीन कबंिुओं की व्याख्या
.
22 क्षिठ्ठिा मंक्षदर की क्षिशेषताएं :
i. मुख्य िे वता के रूप में कवष्णु की मूकतश।
ii. कई हॉल और रथ के रूप में बनाया गया एक अनूठा मंकिर।
iii. रथ गली।
iv. ग पुरम
v. स्तंकभत मंडप।
vi. पथ के साथ सड़कें पक्की ह गईं। Pg- 188 3
vii. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
ककसी भी तीन कबंिुओं का वणशन ककया जाना है।
23 राष्ट्रभाषा के रूप में क्षहंदुस्तानी
i. गांधीजी क लगा कक सभी क आम भाषा ब लनी चाकहए।
ii. यह भारत के एक बड़े कहस्से की एक ल ककप्रय भाषा थी।
iii. कहंिुस्तानी कहंिी और उिू श का कमश्रण था।
iv. कहंिुस्तानी एक समग्र भाषा थी।
v. यह बहु सांस्कृकतक भाषा कवकवध समुिाय ं के कलए आिर्श मानी
जाती थी।
vi. यह कवकभन्न क्षेत्र ं के ल ग ं द्वारा समझी जाती थी
vii. यह कहंिू और, मुसलमान ं और उत्तर और िकक्षण के ल ग ं क
एकजुट कर कर सकती थी
viii. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु Pg-425 3
ककन्ीं तीन कबंिुओं की व्याख्या
24 रै यतिारी प्रथा और रै यत
i. राजस्व क रै यत ं के साथ व्यवस्थथत ककया गया
ii. राजस्व की मांग इतना अकधक था कक रै यत भुगतान करने में सक्षम
नहीं थे। वे अपने गांव ं क छ ड़कर पलायन कर गए।
iii. कलेक्टर ं ने रै यत ं से भुगतान क अत्यंत गंभीरता से कलया।
iv. ऋण का भुगतान करने में असमथशता के कारण फसल ं की जब्ती हुई
और पूरे गांव पर जुमाशना लगाया गया।
3
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v. रै यत ं ने ऋणिाताओं से उच्च ब्याज िर पर ऋण उधार कलया।
vi. रै यत क़र्श में डू ब गए
vii. रै यत साहूकार ं क कुकटल समझते थे
viii. बांध पत्र ं में जाली आं कड़े िे ते थे
ix. सीमा कानून, प्रथागत कानून ं का उल्लंघन ककया गया। 3
x. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु Pg 278
क ई भी तीन कबंिु उिाहरण के साथ
PART - C
25
िी.एस. सुथंकर और सामाक्षजक इक्षतहास का पुनक्षनिमािण
i. भारतीय संस्कृकतकमी वी.एस. सुथंकर ने महाभारत के आल चनात्मक
संस्करण क तैयार करने का प्रयास ककया।
ii. िे र् के कवकभन्न कहस्स ं से ग्रंथ ं की पांडुकलकपय ं का संग्रह।
iii. टीम ने प्रत्येक पांडुकलकप के छं ि ं की तुलना की
iv. 13,000 पृष् ं में छं ि प्रकाकर्त।
v. उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले कहानी के संस्कृत संस्करण ं में सामान्य
तत्व
vi. क्षेत्रीय संस्करण ं में क्षेत्रीय कवकवधताएं कमलीं
vii. प्रभेि उन गूढ़ प्रकक्रयाओं के र् धक है कजन् न
ं े प्रभर्ाली परं पराय
और लचीले कवचार और आचरण के बीच संवाि कायम कर के
सामाकजक इकतहास ं क रूप किया
viii. संवाि द्वन्द और मतव्य क कचकत्रत ककया हैबिलाव क फुटन ट और
पररकर्ि ं में प्रलेस्खत ककया गया था
ix. कवकभन्नताओं ने थथानीय कवचार ं और प्रथाओं के माध्यम से प्रारं कभक और
बाि में सामाकजक इकतहास क आकार किया
x. इकतहासकार ं द्वारा सामाकजक इकतहास के मुद् ं का पता लगाया गया था
xi. पाली, प्राकृत और तकमल में रचनाओं से यह संकेत कमलता था कक
प्रामाकणक संस्कृत ग्रंथ ं में कनकहत कवचार पूरे आकधकाररक रूप से मान्यता
प्राप्त थे।
xii. महाभारत के उिाहरण जैसे: पररजन पर आधाररत पररवार, कपतृसत्ता
का आिर्श महत्वपूणश और मूल्यवान था, बहुकववाह और बहुकववाह जैसे
कववाह के कनयम प्रकतकबंकबत ह ते हैं, महाभारत ने पुि ककया कक वणश 8
Pg 54
व्यवथथा किव्य मूल की थी
xiii. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
4
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समग्रता में मूल्यांकन
अथिा
अछूत ं का जीिन
i. व्यवथथा से बाहर के ल ग ं क ब्राह्मण ं द्वारा अछूत कहा जाता
था।
ii. उन्ें अपकवत्र माना जाता था।
iii. वे लार् ं और मृत जानवर ं क संभालने जैसी गकतकवकधयााँ करते
थे।
iv. चांडाल कहा जाता था।
v. पिानुक्रम के नीचे रखे गए थे।
vi. मनुस्मृकत ने चांडाल के कतशव्य ं क कनधाशररत ककया जैसे: उन्ें
गााँव के बाहर रहना पड़ता था।
vii. उन्ें छ ड़े गए बतशन ं का उपय ग करना था।
viii. मृत और ल हे के गहन ं के कपड़े पहने।
ix. वे गााँव ं और र्हर ं में नहीं जा सकते थे।
Pg- 64- 8
x. उन्ें गकलय ं में ताली बजानी पड़ी। 65
xi. उन्ें जल्लाि और मेहतर के रूप में काम करना था।
xii. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
समग्रता में मूल्यांकन
26 अकबर-नामा
i. अबुल फ़ज़्ल द्वारा कलस्खत।
ii. यह पाण्डु कलकप स्र त ,ं कववरण िे ने के पारम्पररक ऐकतहाकसक
दृकिक ण , आकधकाररक िस्तावेज ं और मौस्खक प्रर्ंसापत्र ं पर
आधाररत है।
iii. इसे तीन पुस्तक ं में कवभाकजत ककया गया है और तीसरी पुस्तक ऐन-
ए-अकबरी है - मंकर्ल आबािी , कसपाह आबािी और मुल्क
आबािी की रचना।
iv. सभी पक्ष ं का कववरण प्रस्तुत ककया है
v. यह भौग कलक, सामाकजक, राजनीकतक, प्रर्ासकनक और सांस्कृकतक
क बताते हुए अकबर के र्ासनकाल का कवस्तृत कववरण प्रिान
करता है।
vi. अबुल फर्ल की भाषा अलंकृत थी स इसमें कथन र्ैली और लय
क महत्पूणश थथान किया गया
5
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vii. भाषा में भारतीय फ़ारसी र्ैली क महत्वपूणश थथान किया गया है
viii. उन् न
ं े अकबर से जुड़े कवचार ं क स्पि ककया।
ix. यह तेरह साल में कलखा गया था।
Pg-231 8
x. यह कहंिू, जैन, बौद्ध और मुस्िम जैसे साम्राज् की कवकवध आबािी
क िर्ाशता है।
xi. इसने समग्र संस्कृकत क किखाया।
xii. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु।
समग्रता में मूल्यांकन
अथिा
OR
क्षिक्षशष्ट् खिताब ं क मुगि सम्राट ं और महाद्वीपीय शखिय ं के साथ
उनके संबंध
i. मुगल बािर्ाह ं ने र्हंर्ाह (राजाओं का राजा) के रूप में सामान्य
स्खताब ग्रहण ककया
ii. कवकर्ि उपाकधयााँ जहााँगीर (कवश्व द्रिा) मान ली गईं
iii. र्ाहजहााँ (कवश्व का राजा) भी माना जाता था
iv. इन र्ीषशक ं और उनके अथों ने कनकवशर ध क्षेत्रीय और राजनीकतक
कनयंत्रण के कलए मुगल सम्राट ं के िाव ं क ि हराया।
v. ईरान और मध्य एकर्या से अलग हुए कहंिूकुर् पवशत ं द्वारा पररभाकषत
सीमाओं के कनयंत्रण पर मुगल राजाओं और ईरान और पड़ सी िे र् ं के
बीच राजनैकतक और कूटनीकतक संबंध कटका हुआ था।
vi. मुग़ल कविे र् नीकत का उद्े श्य रणनीकतक चौककय ं क कवर्ेष रूप से
काबुल और कंधार क कनयंकत्रत करके संभाकवत खतरे क कम करना
Pg-
था। 248-250 8
vii. ईरान और तूरान ,कहंिकुर् पवशत द्वारा पररभाकषत सीमा पर कनयंत्रण
करना चाहते थे।
viii. मुगल ं ने काबुल और कंधार जैसे रणनीकतक क्षेत्र ं क कनयंकत्रत करने
की क कर्र् की।
ix. कंधार, सफ़ाकवि ं और मुगल ं के बीच कववाि की एक कड़ी था।
x. मुगल ं के साथ सफ़ाविी ने राजनकयक संबंध बनाए रखे ।
xi. ओट मन साम्राज् में व्यापाररय ं और तीथशयाकत्रय ं के कलए आवागमन
सुकनकित करने के कलए मुगल ं और ओट मन के बीच अच्छे संबंध।
xii. मुगल ं ने धमश और वाकणज् क कमला किया।
xiii. मक्का और मिीना के कलए भारी िान।
6
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xiv. अकबर द्वारा यूर प से जेसुइट कमर्न क कनमंत्रण
xv. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु।
समग्रता में मूल्यांकन
27 असहय ग आं द िन में महात्मा गांधी की भूक्षमका महत्वपूणि थी।
i. थथानीय आं ि लन -ं चंपारण, खेड़ा और अहमिाबाि की सफलता के बाि,
गांधीजी ने 1920 में असहय ग आं ि लन र्ुरू करके र लेट एक्ट,
जकलयांवाला बाग नरसंहार का कवर ध र्ुरू ककया।
ii. यह रौलट सत्याग्रह था कजसने गांधीजी क वास्तव में रािरीय नेता बना किया
iii. असहय ग आं ि लन की कवर्ेषताएं (ककसी भी स्तर पर सरकार के साथ
सहय ग नहीं करना)।
iv. स्कूल ,ं कॉलेज और कानून अिालत ं का बकहष्कार। रािरीय स्कूल, कॉलेज
ख ले गए
v. कर ं का भुगतान न करना
vi. सरकार के स्खताब और स्वैस्च्छक संघ का त्याग
vii. यकि गांधीजी ने कहा कक असहय ग आं ि लन क प्रभावी ढं ग से चलाया
जाता, त भारत एक साल में स्वराज जीत जाता।
viii. संघषश क और व्यापक बनाने के कलए उन् न
ं े स्खलाफत आं ि लन क
असहय ग आं ि लन में कमला किया।
ix. असहय ग आं ि लन पहला जन आं ि लन था कजसने गांधीजी क जन नेता
बनाया और भारतीय इकतहास के पाठ्यक्रम क भी बिल किया।
x. गांधीजी के अनुयायी गरीब ककसान, श्रकमक, छात्र और वकील और
उद्य गपकत भी थे।
xi. गांधीजी ने सफलतापूवशक कवकभन्न गुट ं क एक साथ लाया।
xii. चौरी चौरा की घटना के बाि जब गांधीजी ने आं ि लन वापस ले कलया, त
आं ि लन ढह गया। इसकलए, यह आं ि लन में गांधीजी की महत्वपूणश
भूकमका क िर्ाशता है।
xiii. गांधी के लुई कफर्र अमेररकी जीवनी लेखक ने कलखा "असहय ग
आं ि लन भारत और गांधीजी के जीवन में एक युग का नाम बन गया ...
यह स्व र्ासन के कलए प्रकर्क्षण था।"
xiv. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
समग्र रूप से मूल्यांकन
Pg 348-
350 8
7
Page 10
या
"भारत छ ड़ आं द िन -जन आं द िन "
i. कक्रप्स कमर्न ’की कवफलता के बाि गांधीजी ने भारत छ ड़
आं ि लन चलाया और नारा किया- "कर या मर "।
ii. युवा कायशकताशओं ने हड़तालें कीं
iii. उन् न
ं े पूरे िे र् में त ड़फ ड़ के कायश भी ककए
iv. जेपी नारायण भूकमगत प्रकतर ध के कलए सकक्रय ह गए।
v. गांधीजी की कगरफ्तारी के बाि, अरुणा आसफ अली, सुचेता
कृपलानी आकि जैसे अन्य नेता सकक्रय हुए और जनता क संगकठत
ककया।
vi. कई कजल ं में, स्वतंत्र सरकारें घ कषत की गईं।
vii. सतारा में, एक समानांतर सरकार प्रगकत सरकार बनाई गई थी
viii. मेकिनीपुर में स्वतंत्र सरकार की घ षणा की गई
ix. युवाओं ने कॉलेज ं और कवश्वकवद्यालय ं क छ ड़ किया और जेल चले
गए
x. कई वगश, जाकतयां और अन्य श्रेकणयां आं ि लन में र्ाकमल हुईं।
xi. अंग्रेज ं ने बहुत ताकत से जवाब किया
xii. भारत छ ड़ आं ि लन कहंसक था लेककन गांधीजी ने आं ि लन क बंि Pg- 8
363-364
नहीं ककया।
xiii. गांधी जी ने 1944 में कांग्रेस और लीग के बीच अंतर क कम करने
की क कर्र् की।
xiv. क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
समग्र रूप से मूल्यांकन
28 एक रािसी
कररकमि अखियार ने िुद क स द
ं यि की पारं पररक प्रकृक्षत से अिग
28.1 दशािया था।
a) उसने भगवान कर्व की पूणश भस्क्त प्राप्त करने के कलए अपनी सांसाररक
सुंिरता क बहा किया।
b) उसने खुि क राक्षसी, फूली हुई नाकड़य ं वाली बहार कनकली आाँ ख ं वाली
सफ़ेि िांत, उभरा हुआ उिर, लाल केर् , बहार कनकले िांत , लम्बी कपंडली
वाली िर्ाशयाI 2
अखियार की इस रचना ने क्षपतृसत्तात्मक मानदं ड ं क चुन ती कैसे दी।
28.2
i. उसने भयभीत छकव लेने वाले कपतृसत्तात्मक मानिं ड ं क पररभाकषत
ककया।
8
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ii. उसने सामाकजक रूप से मान्य सुंिरता क अस्वीकार कर किया।
iii. उसने सामाकजक व्यवथथा की आल चना की।
(क ई ि कबंिु) २
उसके सामाक्षजक दाक्षयत्व ं के त्याग के क्षकसी भी द पहिुओ ं का क्षिश्लेषण
करें ।
28.3
i. कर्व की महान भस्क्त और अत्यकधक तप के कलए मागश अपनाया
ii. मकहलाओं की सिाचार के गुण
iii. वह जंगल ं में भटकने लगी कजसे उसने भगवान कर्व का घर माना।
(क ई ि कबंिु) २
Pg-145 2+2+2
29 औरत की बरामदी का मतिब क्या था
29.1 भारत के क्षिभाजन के द रान नरसंहार के द कारण
a) सांप्रिाकयक उन्माि
b) सम्मान की रक्षा करना
c) प्रर्ासन िं ग ं क कनयंकत्रत नहीं कर सका
d) क ई अन्य प्रासंकगक कबंिु
(क ई ि कबंिु) 2
29.2
सामाक्षजक कायिकताि और पुक्षिस न जिान ज ड़े क क्य ं ि ज रहे थे ?
a) अपहृत मकहलाओं क वापस लाने के कलए ताकक उनका पुनवाशस ककया जा सके
b) ि न ं कवकभन्न समुिाय ं कसख और मुस्िम से संबंकधत थे।
2
29.3
क्या आपक िगता है क्षक अक्षधकारी िड़की क िापस िेने की क क्षशश में
सही थे? अपने उत्तर का समथिन करने के कारण बताएं ।
a) अकधकाररय ं क कववाकहत ज ड़े के कनजी जीवन में हस्तक्षेप नहीं करना 2+2+2
Pg-395
चाकहए था।
b) उनके अनावश्यक हस्तक्षेप के कारण लड़की की मृत्यु ह गई। 2
(छात्र ं के कवचार ं क ध्यान में रखा जाए)
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30 थेररगथा
पुन्ना के क्षिचार ं क द उदाहरण ं से समझाइए।
30.1
i. वह ब्राह्मणवािी ररवाज ं के स्खलाफ थी।
ii. उन् न
ं े बताया कक आध्यास्त्मकता का सार र्ाश्वत आनंि में है।
iii. उसने आत्मा की र्ुद्धता पर ज र किया।
(क ई ि कबंिु)
30.2
२
ब्राह्मण ने नदी में प्रक्षतक्षदन ग ता िगाने के क्षिए क्या स्पष्ट्ीकरण
क्षदया
30.3 अपने िै कनक डु बकी के कलए औकचत्य किया
i. स्नान के अनुष्ान से बुराइय ं क र का जा सकता है।
ii. पानी में नहाने से कुछ भी ठीक ह सकता है।
2
ब द् दशिन के मूि क स्पष्ट् करें ज उनके गाथा के माध्यम से व्यि
क्षकया गया है। Pg-93 2 +2+2
i. बुद्ध ने जाकत प्रथा और कमशकांड की कनंिा की।
ii. बुद्ध ने ल ग ं से आध्यास्त्मक अनुभव के माध्यम से ज्ञान प्राप्त
करने का आग्रह ककया।
iii. संस्कार के बजाय आचरण और मूल्य ं क महत्व किया।
(क ई ि कबंिु)
२
31 31.1, 31.2- संलग्न मानकचत्र िे खें: 1x6=6
दृक्षष्ट्बाक्षधत परीिाक्षथिय ं के क्षिए
a) ब द् धमि के पक्षित्र स्यथान (क ई भी तीन थथान)
1x3=3
नागाजुशनक ड
ं ा, सांची, अमरावती, लुस्म्बनी, भरहुत, ब धगया, अजंता।
या
मुगि शाही शहर। (क ई तीन जगह)
आगरा, लाहौर, फतेहपुर सीकरी, र्ाहजहानाबाि (किल्ली)।
1x3=3
b) भारतीय राष्ट्रीय आं द िन (क ई तीन थथान)
चंपारण, खेड़ा, अहमिाबाि, बनारस, अमृतसर, चौरी चौरा, लाहौर, बारड ली,
िांडी, बॉम्बे, कराची
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