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NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 2 नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्

AglaSem पर कक्षा 7 संस्कृत पाठ 2 नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् (दीपकम्) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 2 (Deepakam).
NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 2 नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् - Page 1 of 24

About NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 2 नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्

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Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 2 नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 2: नत्यं पबामः सुभा षतरसम्

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

15 – 28 13 43 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 23 pages

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

क ा 7 · सं स्कृ त · द पकम्

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 2: नत्यं पबामः सुभा षतरसम्
NCERT कक्षा 7 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के द्वतीयः पाठः — नत्यं पबामः सुभा षतरसम् के सम्पूण हल। यह पाठ नौ चुने हुए सुभा षत
का संग्रह है, जो पञ्च ‘व’कार , षड् दोष , शु द्ध के साधन , भारतवष के स्वरूप, नरन्तर अभ्यास, स्वाध्याय, मधुर वचन, उद्यम और परोपकार क
शक्षा दे ते ह। यहाँ हर ोक का अन्वयः → अथः → भावः तथा अभ्यासः के प्रश्न 1 से 8 तक का हर उपभाग क्रमशः हल कया गया है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

द पकम् (क ा 7) 15 – 28

खं ड प्रश्न

13 43

माध्यम

हन्द

पाठ्य-प्रश्नाः (संवादः) — पृष्ठ 15–16
पाठार े सुशीलायाः, रमायाः, सुरेशस्य च प्रश्नाः

सं वादः

प्र.1 महोदय ! अस्माकं वद्यालयस्य भत्तौ ‘अयोग्यः पुरुषो ना स्त योजकस्तत्र दुलभः’ इ त ल खतम् अ स्त । अस्य कः
भावः इ त कृपया बोधयतु ।

उत्तरम् — भोः सुशीले ! अस्य भावाथः अ स्त यत् अ स्मन् जग त कोऽ प अयोग्यः ना स्त । सव योग्याः स न्त, परन्तु प्रेरकस्य
मागदशकस्य च अभावः अ स्त ।
[ हन्द अथ — हे सुशीला! इसका भाव यह है क इस संसार म कोई भी व्य क्त अयोग्य नह है। सब योग्य ही ह, कमी केवल प्रेरणा
दे ने वाले और माग दखाने वाले क है — अथात् ‘योजक’ अथात् जोड़ने वाले/ नयो जत करने वाले का ही अभाव रहता है।]

ऐसा क्य : ‘योजकः’ शब्द का अथ है — जो सही व्य क्त को सही काम से जोड़ दे । म , पत्थर और लोहा अपने-
आप बेकार दखते ह, पर एक कुशल शल्पी उन्ह से म न्दर खड़ा कर दे ता है। इस लए दोष वस्तु म नह , उसका
उपयोग जानने वाले के अभाव म है।

स्मरणीयम्: यह वाक्य भतृह र क परम्परा का प्र सद्ध सुभा षत है और वद्यालय क भ त्तय पर बहुधा लखा
मलता है।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 महोदय ! ‘सुभा षता न’ इत्यनेन कः अ भप्रायः ?

उत्तरम् — वत्स ! मानवानां व वधमूल्यानां वकासाय श्रेष्ठजनैः उक्ता न सुवचना न एव सुभा षता न । एता न अस्माकं
चन्तन वकासाय एव वद्यालयस्य प रसरे स्था पता न ।
[ हन्द अथ — मनुष्य म अनेक प्रकार के मूल्य के वकास के लए श्रेष्ठ जन द्वारा कहे गए सुन्दर वचन ही ‘सुभा षत’ कहलाते ह।
‘सु + भा षत’ = अच्छ तरह कहा गया वचन। ये हमारे चन्तन के वकास के लए ही वद्यालय-प रसर म लगाए गए ह।]

शब्द-रचना: सु (उत्तम) + भा षतम् (कहा हुआ वचन) = सुभा षतम्, नपुंसक लङ्ग। बहुवचन — सुभा षता न।

प्र.3 श्रीमन् ! सुभा षतानां पठनेन कः लाभः ?

उत्तरम् — प्रयसुरेश ! सुभा षतानां पठनेन अस्माकं नै तकः सामा जकः च वकासः भव त । अस्मा भः क कतव्यं कञ्च न कतव्यम्
इ त सुभा षता न बोधय न्त ।
[ हन्द अथ — हे प्रय सुरेश! सुभा षत के पढ़ने से हमारा नै तक और सामा जक वकास होता है। हम क्या करना चा हए और
क्या नह करना चा हए — यह सुभा षत ही समझाते ह।]

ऐसा क्य : सुभा षत उपदे श को बहुत थोड़े शब्द म, लय के साथ कह दे ता है; इस लए वह कण्ठस्थ हो जाता है और
अवसर आने पर स्वयं स्मरण हो आता है। यही उसक शक्षा-श क्त है। इसी लए पाठ का नाम है — नत्यं पबामः
सुभा षतरसम् (हम प्र त दन सुभा षत-रस पएँ)।

सुभा षता न — अन्वयः, अथः, भावः च — पृष्ठ 16–21
पाठस्य नव सुभा षता न

सु भा षतम्

ोक 1 वस्त्रेण वपुषा वाचा वद्यया वनयेन च । वकारैः पञ्च भयुक्तो नरो भव त पू जतः ॥१॥ — अस्य ोकस्य
अन्वयं, अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — वस्त्रेण, वपुषा, वाचा, वद्यया, वनयेन, च, वकारैः, पञ्च भः, युक्तः, नरः, भव त, पू जतः ।
अन्वयः — वस्त्रेण वपुषा वाचा वद्यया वनयेन च (इ त एतैः) पञ्च भः वकारैः युक्तः नरः पू जतः भव त ।
अथः ( हन्द ) — वस्त्र, शरीर, वाणी, वद्या और वनय — इन पाँच ‘व’कार से युक्त मनुष्य संसार म पू जत (आदरणीय) होता है।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

पञ् च वकाराः

१. वस्त्रम् — समुिचत एवं स्वच्छ पहनावा

२. वपुः — स्वस्थ, सुडौल शरीर
३. वाक् — मधुर और िहतकर वचन

४. िवद्य ा — िनरन्तर अध्ययन

५. िवनयः — नम व्यवहार

भावः — यः जनः समु चता न वस्त्रा ण धर त, शरीरेण स्वस्थः अ स्त, सदा सुमधुरं हतकरं च वचनं वद त, सवदा अध्ययने संलग्नः
भव त, तथा च वनम्रतया व्यवहर त — तादृशः पञ्च भः वकारैः युक्तः मनुष्यः लोके सम्मानं प्रा ो त ।

ऐसा क्य : पाँच गुण मलकर व्य क्तत्व बनाते ह। केवल वद्या हो पर वाणी कठोर हो, या वेश ठ क हो पर वनय न
हो, तो आदर नह मलता। इसी लए ोक ‘पञ्च भः युक्तः’ कहता है — पाँच साथ चा हए।

व्याकरणम्: ‘वस्त्रेण, वपुषा, वाचा, वद्यया, वनयेन, वकारैः’ — सवा ण तृतीया वभ क्तः (करणे तृतीया)।
‘पञ्च भः वकारैः’ — तृतीया बहुवचनम्, पुं लङ्गम्।

ोक 2 षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भू त मच्छता । नद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं द घसूत्रता ॥२॥ — अस्य ोकस्य
अन्वयं, अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — षड् , दोषाः, पुरुषेण, इह, हातव्याः, भू तम्, इच्छता, नद्रा, तन्द्रा, भयम्, क्रोधः, आलस्यम्, द घसूत्रता ।
अन्वयः — इह भू तम् इच्छता पुरुषेण नद्रा तन्द्रा भयं क्रोधः आलस्यं द घसूत्रता (च इत्येते) षड् दोषाः हातव्याः ।
अथः ( हन्द ) — इस संसार म ऐश्वय (उन्न त) चाहने वाले मनुष्य को छह दोष छोड़ दे ने चा हए — अ धक न द, आलस-भरी
जड़ता, भय, क्रोध, आलस्य और काम को टालते रहना।

दोषः अथ वह कैसे रोकता है

िनद ा अतनद समय न ट होता है
ष्

तन्द ा ऊँघ, अकमण्यता मन काम में लगता ही नही ं

भयम् डर आर भ ही नही ं कर पाते
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क्रोधः गुस्सा िववेक और स ब ध न ट
म् न् ष्

आलस्यम् सुस्ती पिर म क जाता है
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दीघसूत्र ता काम टालना अवसर हाथ से िनकल जाता है

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम्
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भावः — अस्मासु नद्रादयः षड् दोषाः भव न्त । एते अस्माकम् ऐश्वयस्य उन्नतेश्च अवरोधकाः भव न्त । अतः य द मानवः स्वजीवने
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ध नकः वद्वान् वा भ वतुम् इच्छ त, ऐश्वय वैभवं च प्राप्तुं वाञ्छ त, त ह सः अ त नद्रां, तन्द्रां, भी त, क्रोधम्, आलस्यं, वलम्बेन

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कायकरणस्य प्रवृ त्त च — एतान् षड् दोषान् प रत्यजेत् ।

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aकृत्य-प्रत्ययान्तं रूपम्, प्रथमा बहुवचनम्, अथः — त्यक्तव्याः ।
व्याकरणम्: ‘पुरुषेण’ एवं ‘इच्छता’ — तृतीया एकवचनम् (कमवाच्ये कत र तृतीया)। ‘हातव्याः’ — ‘हा’ धातोः

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अ गात्रा ण शुध्य न्त मनः सत्येनgशुध्य त । वद्यातपोभ्यां भूतात्मा बु द्ध ानेन शुध्य त ॥३॥ — अस्य
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ोकस्य अन्वयं, अथ, भावं च लखन्तु ।

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s,eशुध्य त ।
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पदच्छे दः — अ ः, गात्रा ण, शु ध्य न्त, मनः, सत्ये न, शु ध्य त, वद्या-तपोभ्याम् , भू तात्मा, बु द्धः, ाने न

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अन्वयः — गात्रा ण अ ः शुध्य न्त । मनः सत्येन शुध्य त । भूतात्मा वद्यातपोभ्यां शुध्य त । बु द्धः ानेन शुध्य त ।
a अथः ( हन्द ) — शरीर के अङ्ग जल से शुद्ध होते ह, मन सत्य से, जीवात्मा वद्या और तप से, तथा बु द्ध ान से शुद्ध होती है।
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च त् वािर शुि -साधनािन

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गात्रािण → अिद् भ ः (जल)
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मनः → सत्येन (सत्य)

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भूत ात्मा → िवद्यातपोभ्याम् (िवद्या + तप)
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बुि ः → ाने न ( ान)
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ag भावः — प्र त दनं स्नानेन मानवस्य शरीरं स्वच्छं भव त । सत्येन मनः प वत्रं भव त; सत्यकथनेन मन स द्वन्द्वः भी तः च न भव त ।

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नत्यं वद्याभ्यासेन प रश्रमेण च जीवस्य शु द्धः भव त । ानेन च बु द्धः नमला भव त । अतः मनुष्यः नत्यं स्नानं, सत्यकथनं,
वद्याभ्यासं, प रश्रमं, ानाजनं च कुयात् ।
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ऐसा क्य : जैसे बाहर क मैल जल धो दे ता है, वैसे ही भीतर क मैल — झूठ, दु वधा, अ ान — सत्य, तप और
ान धोते ह। ोक बाहरी स्वच्छता से आरम्भ करके क्रमशः भीतरी शु द्ध तक ले जाता है।

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.cतृoतीया द्ववचनम् ( वद्या च तपः च — द्वन्द्वसमासः)। g l
व्याकरणम्: ‘अ ः’ = ‘अप्’ (जल, नत्यं स्त्री लङ्गं बहुवचनम्) इत्यस्य तृतीया बहुवचनम्। ‘ वद्यातपोभ्याम्’ —

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

ोक 4 उत्तरं यत् समुद्रस्य हमाद्रे ैव द णम् । वष तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्त तः ॥४॥ — अस्य ोकस्य
अन्वयं, अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — उत्तरम्, यत्, समुद्रस्य, हमाद्रे ः, च, एव, द क्षणम्, वषम्, तद्, भारतम्, नाम, भारती, यत्र, सन्त तः ।
अन्वयः — यत् समुद्रस्य उत्तरं हमाद्रे ः च द क्षणं तद् एव भारतं नाम वषम्, यत्र भारती सन्त तः (अ स्त) ।
अथः ( हन्द ) — जो भूभाग समुद्र के उत्तर म और हमालय के द ण म है, वही ‘भारत’ नामक वष (दे श) है, जहाँ भरत क
सन्तान (भारतीय) रहती है।

समुद ात् उत्तरम् + िहमादे ः दिक्षणम् = भारतवषम्

तत्र िनवसन्ती सन्तितः = भारती (भारतीयाः)

भावः — अ स्मन् सुभा षते सुभा षतकारः भारतस्य भौगो लकं स्वरूपं वणय त । हन्दमहासागरस्य उत्तरभागे हमालयस्य च
द क्षणभागे यः भूभागः अ स्त, तस्य भूभागस्य नाम भारतवषम् । अत्रत्याः नाग रकाः भारतीयाः इ त प्र सद्धाः ।

शब्दाथः: ‘वषम्’ अत्र न ‘साल’, अ पतु महाद्व पस्य वभागः (a division of a continent)। ‘ हमा द्रः’ = हम
+ अ द्र = हमालयः। ‘सन्त तः’ = अपत्यम्, सन्तान। यह ोक वष्णुपुराण का प्र सद्ध वचन है।

ोक 5 जल बन्दु नपातेन क्रमशः पूयते घटः । स हेतुः सव वद्यानां धमस्य च धनस्य च ॥५॥ — अस्य ोकस्य अन्वयं,
अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — जल बन्दु- नपातेन, क्रमशः, पूयते, घटः, सः, हेतुः, सव वद्यानाम्, धमस्य, च, धनस्य, च ।
अन्वयः — घटः क्रमशः जल बन्दु- नपातेन पूयते; सः हेतुः सव वद्यानां धमस्य च धनस्य च भव त ।
अथः ( हन्द ) — जल क बूँद के गरने से घड़ा धीरे-धीरे भर जाता है। यही (क्रमशः संचय का) नयम समस्त वद्याओं, धम और
धन क प्रा प्त का भी कारण है।
भावः — यथा नरन्तरं जलस्य बन्दूनां पतनेन रक्तः अ प घटः पूणः भव त, तथैव जीवने नरन्तरम् अभ्यासेन सामान्यः अ प
मानवः सवप्रकारकं ानं, धम, धनं च लभते ।

ऐसा क्य : यहाँ भरते हुए घड़े का दृ ान्त (उपमा) दया गया है। एक बूँद से कुछ नह होता — पर बूँद रुकती नह ,
इस लए घड़ा भर जाता है। इसी तरह प्र त दन थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, थोड़ा-थोड़ा बचाना, थोड़ा-थोड़ा अच्छा काम करना
— वष म बड़ी पूँजी बन जाता है।

व्याकरणम्: ‘पूयते’ — कमवाच्यम्, लट् लकार, प्रथमपुरुष एकवचनम् (‘पूर् / पॄ’ धातु)। ‘जल बन्दु नपातेन’ —
तृतीया एकवचनम्, करणे तृतीया।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

ोक 6 यः पठ त लख त पश्य त प रपृच्छ त प ण्डतानुपाश्रय त । तस्य दवाकर करणैः न लनीदल मव वस्ता रता
बु द्धः ॥६॥ — अस्य ोकस्य अन्वयं, अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — यः, पठ त, लख त, पश्य त, प रपृच्छ त, प ण्डतान्, उपाश्रय त, तस्य, दवाकर करणैः, न लनीदलम्, इव, वस्ता रता,
बु द्धः ।
अन्वयः — यः पठ त लख त पश्य त प रपृच्छ त प ण्डतान् उपाश्रय त च, तस्य बु द्धः दवाकर करणैः न लनीदलम् इव वस्ता रता
भव त ।
अथः ( हन्द ) — जो पढ़ता है, लखता है, दे खता है, आदरपूवक प्रश्न पूछता है और वद्वान के पास रहता है — उसक बु द्ध वैसे ही
खल उठती है जैसे सूय क करण से कमल का दल खल जाता है।

बुि -िवकासस्य पञ् च सोपानािन

पठनम् → लेखनम् → दशनम् → पश्नः → सत्सङ् गः

फलम् — िवस्तािरता बुि ः

भावः — अस्मा भः आत्म वकासाय सवथा श्रेष्ठजनैः सह सङ्ग तः वासश्च कतव्यः । यतो ह यः नरन्तरं पठ त (अथात् स्वाध्यायं
करो त), लख त, पश्य त, व वधान् प्रश्नान् करो त (स्वस्य संशयं दूरीकरो त), ा नजनानाम् आश्रये (समीपे) तष्ठ त — तस्य बु द्धः
तथैव वधते यथा सूयस्य करणैः कमलं पूणतया वक सतं भव त ।

अलङ् कारः: ‘न लनीदलम् इव’ — ‘इव’ शब्द के कारण यहाँ उपमा अलङ् कारः है। उपमेय — बु द्धः; उपमानम् —
न लनीदलम्; साधारण धम — वस्ता रता ( खलना); वाचक — इव।

ोक 7 प्रयवाक्यप्रदानेन सव तुष्य न्त जन्तवः । तस्मात् तदे व वक्तव्यं वचने का द रद्रता ॥७॥ — अस्य ोकस्य
अन्वयं, अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — प्रयवाक्य-प्रदानेन, सव, तुष्य न्त, जन्तवः, तस्मात्, तद्, एव, वक्तव्यम्, वचने, का, द रद्रता ।
अन्वयः — सव जन्तवः प्रयवाक्यप्रदानेन तुष्य न्त, तस्मात् तद् एव वक्तव्यम्; वचने का द रद्रता ?
अथः ( हन्द ) — प्रय वचन कहने से सभी प्राणी सन्तुष्ट हो जाते ह; इस लए वही ( प्रय वचन) बोलना चा हए। वचन म कैसी
कंजूसी?
भावः — मधुरभाषणेन सव अ प प्रा णनः — अस्माकं सवा ण मत्रा ण, माता, पता, ाता इत्यादयः — प्रसन्नाः भव न्त ।
मधुरभाषणेन का प हा नः ना स्त । अतः सवदा मधुरभाषणम् एव करणीयम् । मधुरभाषणे कदा प सङ् कोचः न करणीयः ।

ऐसा क्य : ‘वचने का द रद्रता’ — यह ोक का सबसे सुन्दर तक है। धन दे ने म तो खच होता है, पर मीठा बोलने म
कुछ भी खच नह होता; फर भी लोग उसम कंजूसी करते ह। यह प्रश्न-रूप (काकु) से कही गई फटकार है।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

पाठ- टप्पणी: पुस्तक के पृष्ठ 20 पर छपा ‘भावाथः — मधुरभाषणेन सव अ प प्रा णनः…’ वस्तुतः इसी सातव
ोक का भावाथ है (पृष्ठ-स ा के कारण वह आठव ोक के साथ छप गया है)।

ोक 8 आलस्यं ह मनुष्याणां शरीर ो महान् रपुः । नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीद त ॥८॥ — अस्य
ोकस्य अन्वयं, अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — आलस्यम्, ह, मनुष्याणाम्, शरीरस्थः, महान्, रपुः, न, अ स्त, उद्यमसमः, बन्धुः, कृत्वा, यम्, न, अवसीद त ।
अन्वयः — आलस्यं ह मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रपुः (अ स्त) । उद्यमसमः बन्धुः न अ स्त, (जनः) यं (उद्यमं) कृत्वा न अवसीद त ।
अथः ( हन्द ) — आलस्य ही मनुष्य का शरीर म ही बैठा हुआ बड़ा शत्रु है। प रश्रम के समान कोई बन्धु नह , जसे करके मनुष्य
कभी दुःखी नह होता।

प ः ोकस्य वचनम् अथ

शत्र ःु आल यम् — शरीर थः महान् िरपुः
स् स् भीतर ही रहने वाला, इसी लए सबसे खतरनाक

िमत्रम् उ मः — अि तीयः ब धुः
द्य द्व न् जो कभी हारने-दुःखी होने नह दे ता

भावः — आलस्यम् एव मनुष्यस्य शरीरे वद्यमानः महान् शत्रुः अ स्त । तत् एव अस्माकं कायस्य सम्पादने अवरोधकं भव त ।
प रश्रमः एव अस्माकं वास्त वकं मत्रम् अ स्त । यः प रश्रमं करो त सः कदा प दुःखं न प्रा ो त ।

व्याकरणम्: ‘नास्त्युद्यमसमो बन्धुः’ = न + अ स्त + उद्यमसमः + बन्धुः (यण्/गुण-स न्ध तथा वसग-स न्ध)।
‘नावसीद त’ = न + अवसीद त (वृ द्ध-स न्धः: अ + अ = आ)।

ोक 9 अ ादशपुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् । परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥९॥ — अस्य ोकस्य अन्वयं,
अथ, भावं च लखन्तु ।

पदच्छे दः — अष्टादश-पुराणेषु, व्यासस्य, वचन-द्वयम्, परोपकारः, पुण्याय, पापाय, परपीडनम् ।
अन्वयः — अष्टादशपुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् (अ स्त) — परोपकारः पुण्याय, परपीडनं पापाय (च भव त) ।
अथः ( हन्द ) — अठारह पुराण म व्यास जी क दो ही बात ह — दूसर का उपकार करना पुण्य के लए है, और दूसर को पीड़ा
दे ना पाप के लए।
भावः — महषः वेदव्यासस्य अष्टादशपुराणानां सारः वचनद्वये अ स्त —

परेषाम् उपकारेण पुण्यं भव त ।
परेषां पीडनेन पापं भव त ।

अतः अस्मा भः सवदा परोपकारः करणीयः; अन्येषां पीडनं कदा प न करणीयम् ।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य : अठारह पुराण हजार ोक के ह, पर उनका नचोड़ केवल दो पं क्तय म आ जाता है — यही इस
सुभा षत क श क्त है। धम क कसौट सरल कर द गई: ‘मेरे इस काम से कसी का भला हुआ या बुरा?’

व्याकरणम्: ‘पुण्याय’, ‘पापाय’ — चतुथ वभ क्तः, एकवचनम् (प्रयोजने चतुथ )। ‘वचनद्वयम्’ —
नपुंसक लङ्गम्, प्रथमा एकवचनम्।

वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 22–23
शब्दः / अथः / हन्द / English तथा ‘मातृभाषया अथ लखन्तु’

शब्दाथाः

प्र.1 मातृभाषया अथ लखन्तु — उ ाय, प्रेरकः, नै तकः, वपुषा, सम्मानम्, हातव्याः, भू तम्, तन्द्रा, द घसूत्रता,
अवरोधकाः, वाञ्छ त, अ ः, भूतात्मा, द्वन्द्वः, वषम्, सन्त तः, नपातेन, हेतुः, प रपृच्छ त, उपाश्रय त, सङ्ग तः,
तुष्य न्त, रपुः, पुण्यम्, परपीडनम् ।

पुस्तक क ता लका के अनुसार पूरा शब्दाथ-कोश नीचे दया गया है। अ न्तम स्तम्भ ‘मातृभाषया अथ लखन्तु’ म य द आपक
मातृभाषा हन्द है तो तीसरे स्तम्भ का ही अथ ल खए; अन्य मातृभाषा हो तो उसका अनुवाद ल खए।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम्
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शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH

m कृत्वा as e
उत्थाय
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उत्थानं खड़ े होकर
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Having got up
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se m प्रेरणादायकः
g l a पेिरत करने वाला One who inspires
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पेर कः

नैितकः सदाचारयुक्तः नैितक Moral / ethical

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वपुषा शरीरेण शरीर से
em . By physique ag
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सम्मानम् आदरः
aआदर Respect

छोड़ ना चािहए
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हातव्याः त्यक्तव्याः Worth discarding

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ऐ वय
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भूितम् वैभवम् Prosperity

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तन्द ा अकमण्यता कमहीनता Lassitude

aglदीघसूत्रता वलम्बकायप्रवृ त्तः काय को आगे टालने की पवृि त्त Procrastination

रोकने वाले om a s
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अवरोधकाः नवारकाः Barriers

a s em/ चाहती है
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चाहता Wants / Desires
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वाञ्छित इच्छ त

अिद् भः जलैः जल से By water

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भूतात्मा जीवः पाणी Soul

द्वन्द्वः .co
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दुिवधा aDilemma
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द्वै धीभावः

agl वषम् भूमेः वभागः महा ीप का िवभाग
द्व A division of continent

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सन्तितः अपत्यम् स तान Progeny

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िगरने By falling

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िनपातेन पतनेन

हेतःु कारणम् कारण Reason

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पिरपच्ृ छित सादरं पृच्छ त िवनय से पूछता / ती है Humbly enquires

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उपाश्रयित समीपम् गच्छ त पास जाता / जाती है Approaches

a s em सङ् गितः
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संसगः संग Association
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स तु ट होते है ं Feeling satisfied
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तुष्यिन्त सन्तोषम् अनुभव न्त

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िरपुः शत्रुः
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पुण् यम् सत्कमणां फलम्
a स काय ं का फल
त् Fruits of meritorious deeds

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

परपीडनम् अन्येभ्यः कष्टप्रदानम् दू स रों को पीड़ ा दे ना Bothering others

सङ् केतः: ‘उत्थाय’, ‘कृत्वा’ जैसे रूप ल्यप्/क्त्वा प्रत्यय वाले अव्यय ह — इनका रूप कभी नह बदलता।
‘वपुषा’, ‘अ ः’, ‘ नपातेन’ तृतीया वभ क्त के रूप ह, जो इस पाठ का व्याकरण-केन्द्र है।

वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 1 — पृष्ठ 23
अधो ल खतानां प्रश्नानाम् उत्तरा ण एकपदे न लखन्तु

अभ्यासः

प्र.1 (क) नरः क त भः वकारैः पू जतः भव त ?

उत्तरम् — पञ्च भः (वकारैः) ।
[ हन्द — मनुष्य पाँच ‘व’कार से पू जत होता है — वस्त्र, वपुः (शरीर), वाक्, वद्या, वनय।]

व्याकरणम्: ‘पञ्च भः’ — तृतीया वभ क्तः, बहुवचनम् (‘पञ्चन्’ संख्यावाचक शब्द नत्यं बहुवचने)। प्रश्न
‘क त भः’ तृतीया म है, इस लए उत्तर भी तृतीया म ही दे ना है।

प्र.1 (ख) पुरुषेण क त दोषाः हातव्याः ?

उत्तरम् — षड् (दोषाः) ।
[ हन्द — मनुष्य को छह दोष छोड़ने चा हए — नद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य और द घसूत्रता।]

सङ् केतः: ‘षष्’ शब्द का प्रथमा/ द्वतीया बहुवचन रूप षट् होता है; ‘दोषाः’ (घोष वण) के पूव आने पर स न्ध से षड्
दोषाः बनता है।

प्र.1 (ग) बु द्धः केन शुध्य त ?

उत्तरम् — ानेन ।
[ हन्द — बु द्ध ान से शुद्ध होती है — ‘बु द्ध ानेन शुध्य त’।]

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

व्याकरणम्: ‘ ानेन’ — ‘ ान’ (नपुंसक लङ्ग, अकारान्त) क तृतीया वभ क्त, एकवचन। प्रश्नपद ‘केन’ भी
तृतीया एकवचन है।

प्र.1 (घ) जल बन्दु नपातेन क्रमशः कः पूयते ?

उत्तरम् — घटः ।
[ हन्द — जल क बूँद के गरने से धीरे-धीरे घड़ा भर जाता है।]

व्याकरणम्: ‘घटः’ — पुं लङ्ग, प्रथमा वभ क्त, एकवचन; कमवाच्य क्रया ‘पूयते’ का कम ही यहाँ प्रथमा म आया
है।

प्र.1 (ङ) आलस्यं केषां महान् रपुः अ स्त ?

उत्तरम् — मनुष्याणाम् ।
[ हन्द — आलस्य मनुष्य का बड़ा शत्रु है — और वह भी शरीर के भीतर ही बैठा हुआ (शरीरस्थः)।]

व्याकरणम्: ‘मनुष्याणाम्’ — षष्ठी वभ क्त, बहुवचन, पुं लङ्ग। प्रश्न का ‘केषाम्’ भी षष्ठी बहुवचन है।

वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 2 — पृष्ठ 24
नम्न ल खतानां प्रश्नानाम् उत्तरा ण पूणवाक्येन लखन्तु

अभ्यासः

प्र.2 (क) नरः कथं पू जतो भव त ?

उत्तरम् — नरः वस्त्रेण वपुषा वाचा वद्यया वनयेन च — एतैः पञ्च भः वकारैः युक्तः सन् पू जतः भव त ।
[ हन्द — मनुष्य वस्त्र, शरीर, वाणी, वद्या और वनय — इन पाँच ‘व’कार से युक्त होकर पू जत (आदरणीय) होता है।]

सङ् केतः: ‘कथम्’ (कैसे) का उत्तर तृतीया वभ क्त (साधन/करण) म दे ना उ चत है — इसी लए यहाँ ‘वस्त्रेण …
वनयेन’ रूप आए ह।

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प्र.2 (ख) पुरुषेण के दोषाः हातव्याः ?

उत्तरम् — भू तम् इच्छता पुरुषेण नद्रा, तन्द्रा, भयम्, क्रोधः, आलस्यं, द घसूत्रता च — एते षड् दोषाः हातव्याः ।
[ हन्द — ऐश्वय चाहने वाले मनुष्य को छह दोष छोड़ दे ने चा हए — अ धक न द, ऊँघ/अकमण्यता, भय, क्रोध, आलस्य और काम
को टालने क आदत।]

प्र.2 (ग) कस्य बु द्धः वस्ता रता भव त ?

उत्तरम् — यः पठ त, लख त, पश्य त, प रपृच्छ त, प ण्डतान् उपाश्रय त च — तस्य बु द्धः दवाकर करणैः न लनीदलम् इव
वस्ता रता भव त ।
[ हन्द — जो पढ़ता है, लखता है, दे खता है, आदर से पूछता है और वद्वान के समीप रहता है — उसक बु द्ध सूय क करण से
खले कमल-दल क तरह वक सत हो जाती है।]

प्र.2 (घ) क कृत्वा मनुष्यः नावसीद त ?

उत्तरम् — उद्यमं कृत्वा मनुष्यः न अवसीद त ।
[ हन्द — प रश्रम करके मनुष्य कभी दुःखी/हताश नह होता। इसी लए कहा गया — ‘नास्त्युद्यमसमो बन्धुः’ अथात् उद्यम के समान
कोई मत्र नह ।]

व्याकरणम्: ‘कृत्वा’ — क्त्वा प्रत्ययान्त अव्यय (‘करके’)। ‘नावसीद त’ = न + अवसीद त।

प्र.2 (ङ) व्यासस्य वचनद्वयं कम् ?

उत्तरम् — ‘परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्’ इ त व्यासस्य वचनद्वयम् ।
[ हन्द — ‘परोपकार पुण्य के लए है और दूसर को पीड़ा दे ना पाप के लए’ — यही अठारह पुराण म कहा गया व्यास जी का दो-
वाक्य वाला सार है।]

वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 3 — पृष्ठ 24

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

उदाहरणानुसारं ोकांशान् यथो चतं योजयन्तु

अभ्यासः

प्र.3 उदाहरणानुसारं ोकांशान् यथो चतं योजयन्तु — (क) वद्यया वपुषा वाचा वस्त्रेण वनयेन च। (ख) षड् दोषाः
पुरुषेणेह हातव्या भू त मच्छता। (ग) अ गात्रा ण शुध्य न्त मनः सत्येन शुध्य त। (घ) उत्तरं यत् समुद्रस्य
हमाद्रे ैव द णम्। (ङ) जल बन्दु नपातेन क्रमशः पूयते घटः। — [ नद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं द घसूत्रता॥ /
वकारैः पञ्च भयुक्तो नरो भव त पू जतः॥ / वष तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्त तः॥ / स हेतुः सव वद्यानां
धमस्य च धनस्य च॥ / वद्यातपोभ्यां भूतात्मा बु द्ध ानेन शुध्य त॥]

पुस्तक म (क) का मलान उदाहरण-रूप म पहले से जुड़ा हुआ है। शेष चार का सही मेल नीचे है —

क्रमः प्रथमः ोकांशः यथो चतः द्वतीयः ोकांशः ोक-सं.

(क) िवद्यया वपुषा वाचा वस्त्रेण िवनयेन च। वकारै ः प चिभयु तो नरो भवित पूिजतः॥
ञ् क् १

(ख) षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूितिमच्छता। िनद ा त द ा भयं क्रोध आल यं दीघ सू ता॥
न् स् त्र २

(ग) अिद् भग त्रािण शुध् यिन्त मनः सत्येन शुध् यित। िव ातपो यां भूता मा बुि
द्य भ् त् नेन शु यित॥
ध् ३

(घ) उत्तरं यत् समुद स्य िहमादे श्चैव दिक्षणम्। वष ं तद् भारतं नाम भारती य स तितः॥ त्र न् ४

(ङ) जलिबन्दुिनपातेन क्रमशः पूयते घटः। स हेतःु सविव ानां धम य च धन य च॥
द्य स् स् ५

मलान क कुंजी: हर पं क्त म एक ‘सङ् केत-शब्द’ है जो जोड़ी बता दे ता है —
(ख) म ‘षड् दोषाः’ कहा गया, तो दूसरी पं क्त म उन छह के नाम गनाए गए ह।
(ग) म गात्र और मन क शु द्ध है, तो आगे भूतात्मा और बु द्ध क शु द्ध आती है।
(घ) म ‘उत्तरं यत्’ के ‘यत्’ का जोड़ीदार ‘तद्’ अगली पं क्त म है।
(ङ) म ‘घटः’ के लए ‘सः’ सवनाम अगली पं क्त म आया है।

वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 4 — पृष्ठ 25
नम्न ल खतानां वाक्यानां समानाथकान् ोकांशान् पाठात् चत्वा लखन्तु

अभ्यासः

प्र.4 (क) मधुरवाण्या सव प्रसन्नाः भव न्त ।

समानाथकः ोकांशः — प्रयवाक्यप्रदानेन सव तुष्य न्त जन्तवः । ( ोक ७)

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions

[ हन्द — प्रय वचन कहने से सभी प्राणी सन्तुष्ट होते ह। ‘मधुरवाणी’ = ‘ प्रयवाक्य’, ‘प्रसन्नाः भव न्त’ = ‘तुष्य न्त’।]
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mप रश्रमेण तुल्यः बान्धवः ना स्त । a g
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प्र.4 (ख)

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समानाथकः ोकांशः — नास्त्युद्यमसमो बन्धुः (कृत्वा यं नावसीद त) । ( ोक ८)

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[ हन्द — उद्यम (प रश्रम) के समान कोई बन्धु नह । ‘प रश्रमेण तुल्यः’ = ‘उद्यमसमः’, ‘बान्धवः’ = ‘बन्धुः’।]
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co m
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प्र.4 (ग) परोपकारेण मानवस्य पुण्याजनं भव त ।
m l
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a समानाथकः ोकांशः — परोपकारः पुण्याय (पापाय परपीडनम्) । ( ोक ९)

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[ हन्द — परोपकार पुण्य के लए होता है, अथात् दूसर का भला करने से पुण्य मलता है।]

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प्र.4 (घ) a g
हन्दमहासागरात् हमालयपयन्तं भारतवषम् ।

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sयत्रe सन्त तः) । ( ोक ४)

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समानाथकः ोकांशः — उत्तरं यत् समुद्रस्य हमाद्रे श्चैव द क्षणम् । वष तद् भारतं नाम (भारती

a em — जो समुद्र के उत्तर म और हमालय के द क्षण म है वही भारत नामक देश है। ‘ हन्दमहासागरः’ = ‘समुद्रः’, ‘ हमालयः’ =
[sहन्द

agl ‘ हमा द्रः’।]
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वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 5 — पृष्ठse25
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अधो ल खतानां शब्दानाम् उदाहरणानुसारं पयायपदा न लखन्तु (यथा — वपुः – शरीरम्)

अभ्यासः
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.co जलम् – ……………… a g l
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प्र.5 (क)

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उत्तरम् — नीरम् । (अन्या न पयायपदा न — स ललम्, तोयम्, अम्बु, वा र, उदकम्, पयः, आपः)

m .
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[ हन्द — ‘जल’ का पयायवाची — नीर, स लल, तोय, अम्बु, वा र, उदक।]

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

पाठ-सम्बन्धः: तीसरे ोक का ‘अ ः’ इसी ‘अप्’ (= जल) शब्द का तृतीया-बहुवचन रूप है।

प्र.5 (ख) लोचनम् – ………………

उत्तरम् — नेत्रम् । (अन्या न — चक्षुः, नयनम्, अ क्ष, दृक्, ईक्षणम्)
[ हन्द — ‘लोचन’ का पयायवाची — नेत्र, चक्षु, नयन, अ क्ष, दृग्।]

प्र.5 (ग) धनम् – ………………

उत्तरम् — वत्तम् । (अमरकोशानुसारम् — द्रव्यं, वत्तं, स्वापतेयं, रक्थम्, ऋक्थं, धनं, वसु, हरण्यं, द्र वणं, द्युम्नम्, अथः, वभवः)
[ हन्द — ‘धन’ का पयायवाची — वत्त, द्रव्य, वसु, अथ, वभव, द्र वण।]

प्र.5 (घ) बु द्धः – ………………

उत्तरम् — म तः । (अमरकोशानुसारम् — मनीषा, धषणा, धीः, प्र ा, शेमुषी, म तः, प्रेक्षा, चेतना)
[ हन्द — ‘बु द्ध’ का पयायवाची — म त, धी, प्र ा, मनीषा, शेमुषी, धषणा।]

प्र.5 (ङ) रपुः – ………………

उत्तरम् — शत्रुः । (अमरकोशानुसारम् — वैरी, सपत्नः, अ रः, द्वषन्, द्वे षणः, दु द्)
[ हन्द — ‘ रपु’ का पयायवाची — शत्रु, वैरी, अ र, सपत्न, दुश्मन।]

सङ् केतः: ये सभी पयायपद पाठ के अन्त म दए ‘योग्यता वस्तरः — पयायपदा न (अमरकोशः)’ भाग से लए जा
सकते ह।

वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 6 — पृष्ठ 26

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अधः रक्त ाना न तृतीया वभक्तेः समु चतरूपैः पूरयन्तु

अभ्यासः

प्र.6 अधः रक्त ाना न तृतीया वभक्तेः समु चतरूपैः पूरयन्तु — एकवचनम् / द्ववचनम् / बहुवचनम् : (सुधाखण्डेन
– सुधाखण्डाभ्याम् – सुधाखण्डैः), (वृ ेण – …… – ……), (…… – लताभ्याम् – लता भः), (…… – दे शाभ्याम् –
दे शैः), (पुण्येन – …… – ……), (…… – …… – वनयैः)

पहली पं क्त पुस्तक म उदाहरण-रूप म भरी हुई है। शेष रक्त स्थान (मोटे अक्षर म) इस प्रकार भरे जाएँगे —

शब्दः ( लङ्गम्) एकवचनम् द्ववचनम् बहुवचनम्

सुध ाखण्ड (पुं.) सुधाखण्डेन सुधाखण्डाभ्याम् सुधाखण्डैः

वृक्ष (पुं.) वृक्षेण वृ ा याम्
क्ष भ् वृ ैः
क्ष

लता (स्त्री.) लतया लताभ्याम् लता भः

दे श (पुं.) दे शेन दे शाभ्याम् दे शैः

पुण् य (नपु.ं ) पुण्येन पु या याम्
ण् भ् पु यैः
ण्

िवनय (पु.ं ) िवनयेन िवनया याम् भ् वनयैः

त ृत ीया-िवभ क्ते ः पत् ययाः

अकारान्त पुंिलङ् ग/नपुंसकिलङ् ग → -एन | -आ भ्याम् | -ऐः

(छात्र → छात्रेण, छात्राभ्याम्, छात्रैः; ान → ाने न , ानाभ्याम्, ानै ः)

आकारान्त स्त्रीिलङ् ग → -अया | -आ भ्याम् | -आिभः

(लता → लतया, लताभ्याम्, लतािभः; छात्रा → छात्रया, छात्राभ्याम्, छात्रािभः)

ऐसा क्य : बहुवचन म पुं लङ्ग/नपुंसक लङ्ग को ‘-ऐः’ मलता है पर स्त्री लङ्ग को ‘- भः’ — इसी लए ‘दे शैः’ पर
‘लता भः’। यही अन्तर पहचानकर ता लका भरनी है।

टप्पणी: ‘सुधाखण्ड’ का अथ है चाक (chalk) का टु कड़ा — कक्षा क ही वस्तु से उदाहरण दया गया है।

वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 7 — पृष्ठ 26

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

कोष्ठके पदा न व लख्य सुभा षतं पूरयन्तु

अभ्यासः

प्र.7 कोष्ठके पदा न व लख्य सुभा षतं पूरयन्तु — प्रथमः कोष्ठक-समूहः : उत्तरम् / यत् / …… / हमाद्रे ैव / …… ;
…… / त ारतं / …… / भारती यत्र / …… । द्वतीयः कोष्ठक-समूहः : …… / सव / तुष्य न्त / …… ; तस्मात् /
…… / वक्तव्यम् / वचने का / …… ।

दोन कोष्ठक-समूह म दो सुभा षत बखरे हुए ह। रक्त कोष्ठक को भरने पर पूरे ोक इस प्रकार बनते ह —
प्रथमं सुभा षतम् (गुलाबी कोष्ठकाः — ोक ४):

उत्तरम् | यत् | समुद स्य | िहमादे श्चै व | दिक्षणम्

वष ं | तद् भ ारतं | नाम | भारती यत्र | सन्तितः

उत्तरं यत् समुद स्य िहमादे श्चै व दिक्षणम् ।

वष ं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्तितः ॥

द्वतीयं सुभा षतम् (हरे कोष्ठकाः — ोक ७):

िपयवाक्यपदाने न | सव | त ष्ु यिन्त | जन्तवः

तस्मात् | तदे व | वक्तव्यम् | वचने का | दिरद ता

िपयवाक्यपदाने न सव त ष्ु यिन्त जन्तवः ।

त स्मात् तदे व वक्त व्यं वचने का दिरद ता ॥

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

रक्तः कोष्ठकः भरणीयं पदम् अथ

पंिक्त 1, ततृ ीयः समुद य स् समुद्र का

पंिक्त 1, पञ्चमः दि णम्
क्ष द क्षण म

पंिक्त 2, पथमः वष ं दे श / भूभाग

पंिक्त 2, ततृ ीयः नाम नाम से

पंिक्त 2, पञ्चमः स तितः
न् सन्तान

पंिक्त 3, पथमः िपयवा यपदानेन
क् प्रय वचन दे ने से

पंिक्त 3, चतुथः ज तवः
न् प्राणी

पंिक्त 4, िद्वतीयः तदे व वही

पंिक्त 4, पञ्चमः दिरद ता कंजूसी / कमी

सङ् केतः: छन्द अनु ु प् है — प्रत्येक पाद म आठ अक्षर। कोष्ठक भरते समय अक्षर गन लेने से सही पद तुरन्त
पहचान म आ जाता है।

वयम् अभ्यासं कुमः — प्रश्न 8 — पृष्ठ 26
उपयुक्ता न सुभा षता न प ठत्वा रक्त ाना न पूरयन्तु

अभ्यासः

प्र.8 (क) आलस्यं ह मनुष्याणां शरीर ो ……………… रपुः ।

उत्तरम् — आलस्यं ह मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रपुः ।
[ हन्द — आलस्य ही मनुष्य का शरीर म स्थत बड़ा शत्रु है।]

व्याकरणम्: ‘महान्’ — ‘महत्’ शब्द का पुं लङ्ग प्रथमा एकवचन रूप; ‘ रपुः’ का वशेषण होने से वही लङ्ग-वचन-
वभ क्त।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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……………… वचने का द रद्रता ।
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प्र.8 (ख)

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agl — तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का द रद्रता ।
उत्तरम्
[ हन्द — इस लए वही ( प्रय वचन) बोलना चा हए; वाणी म कैसी कंजूसी?]

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प्र.8 (ग) ag ।
यः पठ त लख त पृच्छ त ………………

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se m.

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.cपढ़ता है, लखता है, पूछता है और वद्वान के पास जाता है — (उसी क बु aद्धgवक सत होती है)।]
उत्तरम् — यः पठ त लख त पृच्छ त प ण्डतानुपाश्रय त (प ण्डतान् उपाश्रय त) ।

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[ हन्द — mजो
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ag पूणा पं क्तः: मूल ोक म यह चरण इस रूप म है — “यः पठ त लख त पश्य त प रपृच्छ त प ण्डतानुपाश्रय त ।”

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अभ्यास म संक्षेप के लए ‘पश्य त’ छोड़ा गया है और ‘प रपृच्छ त’ के स्थान पर ‘पृच्छ त’ छपा है।

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स हेतुः सव वद्यानां ……………… धनस्य च ।
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प्र.8 (घ)

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coसmहेतुः सव वद्यानां धमस्य च धनस्य च । g l as
उत्तरम् .— a
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agl [ हन्द — वही (क्रमशः संचय) समस्त वद्याओं, धम और धन का कारण है।]

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……………… बु द्ध ानेन शुध्य त ।

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प्र.8 (ङ)

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उत्तरम् — वद्यातपोभ्यां भूतात्मा बु द्ध ानेन शुध्य त ।

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[ हन्द — जीवात्मा वद्या और तप से शुद्ध होता है तथा बु द्ध ान से शुद्ध होती है।]

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व्याकरणम्: ‘ वद्यातपोभ्याम्’ — तृतीया द्ववचन ( वद्या और तप — दो साधन), द्वन्द्वसमासः।

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प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 28
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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

प्रकल्प-कायम्

प रयोजनाकायम्

प्र.1 ‘शुध्’ इ त धातोः लट् -लकारस्य रूपा ण ोरकपत्रे ल खत्वा आनयन्तु ।

व धः — एक चाट-पेपर ( ोरकपत्रम्) पर तीन पुरुष × तीन वचन क ता लका बनाइए और ‘शुध्’ ( दवा दगण, परस्मैपद) धातु के
लट् -लकार रूप बड़े अक्षर म ल खए। ऊपर शीषक द जए — ‘शुध्’ धातुः, लट् -लकारः (वतमानकालः)।

पुरुषः एकवचनम् द्ववचनम् बहुवचनम्

पथमपुरुषः शु यित
ध् शु यतः
ध् शु यि त
ध् न्

मध्यमपुरुषः शु यिस
ध् शु यथः
ध् शु यथ
ध्

उत्तमपुरुषः शु यािम
ध् शु यावः
ध् शु यामः
ध्

ऐसा क्य : ‘शुध्’ दवा दगण (चतुथ गण) क धातु है, इस लए धातु और प्रत्यय के बीच ‘श्य’ वकरण जुड़ता है —
शुध् + य + त = शुध्य त। यही कारण है क सब रूप म ‘शुध्य-’ दखाई दे ता है।

पाठ-सम्बन्धः: तीसरे ोक म इसी धातु के दो रूप आए ह — शुध्य न्त (गात्रा ण शुध्य न्त — बहुवचन) और
शुध्य त (मनः शुध्य त — एकवचन)। चाट म इन दोन को रँगीन कलम से घेर द जए।

प्र.2 सुभा षतेषु आगता न तृतीया वभ क्तरूपा ण संगृह्य उत्तरपु स्तकायां लखन्तु । तेषां प्रयोगं कृत्वा वाक्या न अ प
लखन्तु ।

व धः — पहले नौ सुभा षत को दोहराकर ‘-एन / -आ / -या / -ऐः / - भः / -भ्याम्’ अन्त वाले सभी पद छाँ टए, फर हर पद से
एक नया वाक्य बनाइए।
नमूना उत्तर — पाठे आगता न तृतीया वभ क्तरूपा ण तथा वाक्या न:

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 2 नत्यं पबामः सुभा षतरसम् AglaSem · NCERT Solutions

तृतीयारूपम् मूलशब्दः वचनम् स्ववाक्यम्

वस्त्रेण वस्त्र (नपुं.) एकवचनम् सः शुभेण व ेण िव ालयं ग छित ।
स्त्र द्य च्

वपुषा वपुस् (नपुं.) एकवचनम् बालकः व थेन वपुषा क्रीडित ।
स् स्

वाचा वाच् (स्त्री.) एकवचनम् माता मधुरया वाचा वदित ।

िवद्यया वद्या (स्त्री.) एकवचनम् िव या एव मनु यः शोभते ।
द्य ष्

िवनयेन वनय (पुं.) एकवचनम् छा ः िवनयेन गु ं नमित ।
त्र रु

वकारै ः वकार (पुं.) बहुवचनम् प चिभः वकारै ः नरः पूिजतः भवित ।
ञ्

पुरुषेण पुरुष (पुं.) एकवचनम् पिर िमणा पु षेण काय ं सािधतम् ।
श्र रु

अिद् भः अप् (स्त्री.) बहुवचनम् वयम् अिद् भः पादौ प ालयामः । क्ष

सत्येन सत्य (नपुं.) एकवचनम् स येन जयः भवित ।
त्

ानेन ान (नपुं.) एकवचनम् ानेन अ धकारः न यित ।
न् श्

िवद्यातपोभ्याम् वद्या + तपस् द्ववचनम् िव ातपो यां जीवनं सफलं भवित ।
द्य भ्

जलिबन्दुिनपातेन जल बन्दु नपात (पुं.) एकवचनम् जलिब दुिनपातेन घटः पूयते ।
न्

िदवाकरिकरणैः दवाकर करण (पुं.) बहुवचनम् िदवाकरिकरणैः कमलं िवकसित ।

िपयवाक्यपदानेन प्रयवाक्यप्रदान (नपुं.) एकवचनम् िपयवा यपदानेन िम ािण वध ते ।
क् त्र न्

Tip: तृतीया वभ क्त मुख्यतः करण ( जससे काम हो) और कमवाच्य के कता के लए आती है — ‘पुरुषेण
हातव्याः’ म कता तृतीया म है, ‘सत्येन शुध्य त’ म करण।

कायकलापः — पृष्ठ 28
ग त व धः

कायकलापः

प्र.1 ‘सुभा षतकण्ठपाठ वषये’ एकां प्र तयो गतां वग, क ायां, वद्यालये च आयोजयन्तु ।

व धः — यह ग त व ध तीन स्तर पर करनी है — पहले समूह (वग) म, फर कक्षा म, और अन्त म वद्यालय-स्तर पर।

1. वग-स्तरः — कक्षा को 5–6 छात्र के समूह म बाँ टए। हर समूह पाठ के नौ म से तीन सुभा षत कण्ठस्थ करे।

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2. क ा-स्तरः — हर समूह से एक प्र त न ध ोक सुनाए। नणय के तीन आधार र खए — शुद्ध उ ारण, छन्द-लय, और
भावाथ-कथन (हर ोक के बाद उसका अथ भी बताना होगा)।
3. वद्यालय-स्तरः — प्राथना-सभा म वजेता छात्र सुभा षत सुनाएँ; ‘सुभा षत-म ूषा’ नाम से एक भ त्त-प त्रका बनाकर
सप्ताह का एक सुभा षत ल खए।

नमूना उत्तर (प्र तयो गता-सूचना) —

सुभ ािषत -क ण्ठपाठ-पितयोिगता

िदनाङ् कः — …………

स्थानम् — िवद्यालय-सभागृहम्

िवषयः — ‘दीपकम्’ िद्वतीयपाठस्य सुभ ािषतािन

िनयमाः — (१) त्रीिण सुभ ािषतािन कण्ठस्थािन (२) सस्वरं पठनम् (३) भावाथकथनम् अिनवायम्

आयोजकः — संस्कृ त -िवभागः

Tip: कण्ठस्थ करने का सरल क्रम — पहले ोक को अनु ु प् क चाल म (८-८ अक्षर) तालबद्ध प ढ़ए, फर
पदच्छे द बो लए, फर अथ। तीन साथ करने से ोक जल्द और दे र तक याद रहता है।

अध्याय — एक नज़र म
पाठ का मूल वाक्य पहले पृष्ठ के संवाद म है — “अयोग्यः पुरुषो ना स्त योजकस्तत्र दुलभः”। अथात् इस जगत् म कोई भी
अयोग्य नह ; कमी योग्यता क नह , प्रेरक और मागदशक क है।
सुभा षतम् क्या है? — “मानवानां व वधमूल्यानां वकासाय श्रेष्ठजनैः उक्ता न सुवचना न एव सुभा षता न।” श्रेष्ठ जन द्वारा
कहे गए सुन्दर वचन ही सुभा षत ह।
लाभ क्या? — “सुभा षतानां पठनेन अस्माकं नै तकः सामा जकः च वकासः भव त।” सुभा षत बताते ह क हम क्या करना
चा हए और क्या नह ।
नौ सुभा षत का सार — पञ्च वकार (वस्त्र, वपुः, वाक्, वद्या, वनय), त्याज्य षड् दोष ( नद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य,
द घसूत्रता), शु द्ध के चार साधन (जल, सत्य, वद्या-तप, ान), भारतवष का भूगोल, बूँद-बूँद से घड़ा, स्वाध्याय से बु द्ध-
वकास, प्रय वचन, उद्यम, और परोपकार।
व्याकरण का केन्द्र — तृतीया वभ क्त। पूरे पाठ म वस्त्रेण, वपुषा, वाचा, वद्यया, वनयेन, अ ः, सत्येन, ानेन, वकारैः,
दवाकर करणैः जैसे करण-रूप बार-बार आते ह; अभ्यास प्रश्न 6 इन्ह रूप का है।
अ न्तम सन्दे श व्यास जी के वचनद्वय म है — परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् — अठारह पुराण का सार यही दो बात
ह।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द अथ ENGLISH

उत्थाय उत्थानं कृ त्वा खड़े होकर Having got up

प्रेरकः पेर णादायकः प्रे रत करने वाला One who inspires

वपुषा शरीरे ण शरीर से By physique

हातव्याः त्यक्तव्याः छोड़ना चा हए Worth discarding

भू तम् वैभवम् ऐश्वय Prosperity

तन्द्रा अकमण्यता कमहीनता Lassitude

द घसूत्रता िवलम्बकायपवृित्तः काम को टालने क प्रवृ त्त Procrastination

अ ः जलै ः जल से By water

भूतात्मा जीवः प्राणी Soul

वषम् भूम ेः िवभागः महाद्व प का वभाग A division of continent

सन्त तः अपत्यम् सन्तान Progeny

नपातेन पतनेन गरने से By falling

प रपृच्छ त सादरं पच्ृ छित वनय से पूछता/ती है Humbly enquires

उपाश्रय त समीपम् गच्छित पास जाता/जाती है Approaches

तुष्य न्त सन्तोषम् अनुभविन्त सन्तुष्ट होते ह Feel satisfied

रपुः शत्र ःु बैरी Enemy

परपीडनम् अन्येभ्यः कष्टपदानम् दूसर को पीड़ा दे ना Bothering others

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages24
Updated19 Sep 2026