aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः

AglaSem पर कक्षा 7 संस्कृत पाठ 3 मित्राय नमः (दीपकम्) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 3 (Deepakam).
NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः - Page 1 of 23

About NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः

NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः is available here for free download. Published by NCERT for Class 7, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (23 pages). Candidates preparing for Class 7 can use NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः?

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः have?

NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः contains 23 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 7 study material?

You can find more Class 7 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 3 मित्राय नमः – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (23 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 3: म ाय नमः

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

29 – 38 10 41 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 22 pages

Page 2

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · सं स्कृ त · द पकम्

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: मत्राय नमः
NCERT कक्षा 7 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के तृतीयः पाठः — मत्राय नमः के स ूण हल। यह एक संवादात्मक गद्य पाठ है जसम
यो गता, उसक सखी और अन्य छात्र योग श क्षका (आचाया) के पास जाकर सूयनमस्कार सीखते ह, बारह मन्त्र बोलते ह और अन्त म ‘आ दत्यस्य
नमस्कारान्…’ ोक पढ़ते ह। व्याकरण क दृ ष्ट से पूरा पाठ चतुथ वभ क्त पर के न् त है — ‘नमः’ के योग म चतुथ और दान के अथ म (दा /
यच्छ् धातु के योग म) चतुथ । नीचे पृष्ठ 29 से 38 तक के संवाद-प्रश्न, वयम् अभ्यासं कुमः के प्रश्न १–८ (हर उपभाग स हत) और प रयोजनाकायम्
के तीन काय क्रम से हल कए गए ह — पहले संस्कृत उत्तर, फर कोष्ठक म हन्द अथ।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

द पकम् (कक्षा 7) 29 – 38

खं ड प्रश्न

10 41

माध्यम

हन्द

पाठे वद्यमानाः प्रश्नाः — पृष्ठ 29–31
पाठः — मत्राय नमः (संवादः)

पाठः

प्र.1 अहो ! यो गते त्वं प्रातः क करो ष ?

अहं प्र त दनं प्रातः पत्रा सह उद्यानं गच्छा म ।
[म प्र त दन सवेरे पताजी के साथ बगीचे जाती ँ।]

वाक्य कैसे बना: पत्रा सह — ‘सह’ (साथ) के योग म तृतीया वभ क्त आती है, इस लए ‘ पतृ’ का रूप पत्रा
हुआ। उद्यानम् कम है, इस लए तीया एकवचन — उद्यानम्। ‘यो गते’ सम्बोधन एकवचन है (मूल शब्द —
यो गता)।

ध्यान द: ‘गच्छा म’ उत्तमपुरुष एकवचन (लट् -लकार) है — गच्छा म / गच्छावः / गच्छामः।

Page 1 of 22

Page 3

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 उद्याने क करो ष भोः ?

अहं तु भ्रमणं करो म । कन्तु बहवः जनाः तत्र ायामं योगासना न च कुव न्त ।
[म तो टहलती ँ। कन्तु बहुत-से लोग वहाँ व्यायाम और योगासन करते ह।]

यह से कथा मुड़ती है: ‘अहं तु भ्रमणं करो म’ म तु का अथ ‘तो/केवल’ है — अथात् वह स्वयं केवल टहलती है।
इसी उत्तर के दूसरे वाक्य से मत्र को योगासन का पता चलता है और वे आचाया के पास जाने का नश्चय करते ह।

वचन दे खए: बहवः जनाः … कुव न्त — कता बहुवचन है, इस लए क्रया भी बहुवचन (कुव न्त)। एकवचन म यही
‘जनः … करो त’ होता।

प्र.3 आचाय ! कम् अद्य भवान् अस्मान् योगासनं शक्षय त ?

आचाया उत्तरं ददा त — नश्चयेन, वदन्तु कम् आसनं श क्षतुम् इच्छ न्त ?
[अवश्य, बताइए कौन-सा आसन सीखना चाहते ह?]

आदर का प्रयोग: ‘भवान्/भवती’ के साथ क्रया प्रथमपुरुष म आती है — भवान् शक्षय त, न क ‘भवान्
शक्षय स’। इसी तरह आचाया भी छात्र के लए आदरसूचक बहुवचन ‘वदन्तु … इच्छ न्त’ का प्रयोग करती ह।

पुस्तक म एक वसंग त: यहाँ सम्बोधन ‘आचाय’ (स्त्री लङ्ग) है, अतः व्याकरण क दृ ष्ट से भवती … शक्षय त
होना चा हए; पुस्तक म भवान् छपा है। परीक्षा म पाठ का वाक्य ज्य -का-त्य लख, पर नयम यही याद रख —
स्त्री लङ्ग म भवती, पुं लङ्ग म भवान्।

प्र.4 वदन्तु कम् आसनं श क्षतुम् इच्छ न्त ?

यो गता वद त — आचाय ! अद्य सूयनमस्कारं शक्षयतु ।
[हे आचाया! आज सूयनमस्कार सखाइए।]
आचाया उत्तरं ददा त — समीचीनम् । सूयनमस्कारः ादशानाम् आसनानां समाहारः अ स्त ।
[बहुत अच्छा। सूयनमस्कार बारह आसन का समूह है।]

Page 2 of 22

Page 4

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

‘ शक्षयतु’ क्य ? यह लोट् -लकार, प्रथमपुरुष एकवचन है और आदरपूवक प्राथना के लए प्रयुक्त होता है —
‘ सखाइए’। य द समान आयु के मत्र से कहना हो तो मध्यमपुरुष का शक्षय ( सखाओ) आता।

शब्द-अथ: समाहारः = समूह, संग्रह। समीचीनम् = ठ क है, उत्तम है।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 32
अभ्यासः — प्रश्नः १ : अधो ल खतानां प्रश्नानाम् उत्तरा ण एकपदे न लखन्तु

अभ्यासः

प्र.1 (क) शुभं भवतु इ त कः वद त ?

आचाया ।
[आचाया (योग श क्षका) ऐसा कहती ह।]

पाठ से प्रमाण: छात्र कहते ह — ‘नमो नमः आचाय !’ और उत्तर म आचाया – शुभं भवतु । उप वशन्तु सव । अतः
‘शुभं भवतु’ कहने वाली आचाया ह।

एकपदे न उत्तर: प्रश्न म ‘कः’ पूछा गया है, इस लए उत्तर प्रथमा वभ क्त, एकवचन, स्त्री लङ्ग म — आचाया।
पूरा वाक्य लखना हो तो — ‘आचाया शुभं भवतु इ त वद त।’

प्र.1 (ख) यो गता आचाया ‘ क शक्षयतु’ इ त वद त ?

सूयनमस्कारम् ।
[सूयनमस्कार ( सखाइए — ऐसा कहती है)।]

पाठ से प्रमाण: यो गता – आचाय ! अद्य सूयनमस्कारं शक्षयतु । ‘ शक्षयतु’ क्रया का कम ‘सूयनमस्कारम्’ है।

वभ क्त: उत्तर तीया वभ क्त, एकवचन, पुं लङ्ग म है — क्य क यह क्रया का कम है। अकेला लखते समय
‘सूयनमस्कारम्’, वाक्य के भीतर स न्ध/उ ारण के कारण ‘सूयनमस्कारं शक्षयतु’।

Page 3 of 22

Page 5

as e
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
सूयनमस्कारः कतीनाम् आसनानां समाहारः अ स्त ?
e
प्र.1 (ग)

m l as
.co a g
a s em
a gl ।
ादशानाम्
[बारह आसन का।]

co m
e m . ag
as
पाठ से प्रमाण: सूयनमस्कारः ादशानाम् आसनानां समाहारः अ स्त । इसी लए मन्त्र भी बारह ह — ॐ मत्राय नमः
से ॐ भास्कराय नमः तक।
a g l

co m
m.
वभ क्त: ‘ ादशानाम्’ षष्ठी वभ क्त, बहुवचन है — ‘आसनानाम्’ के साथ इसका वशेषण- वशेष्य सम्बन्ध है
(बारह आसन का)।
m as e
.co a g l
se m
g l a
a प्र.1 (घ) केषु सूयनमस्कारः ेष्ठः ?

m a s
m .co agl
a se

योगासनेषु ।
ag l
[योगासन म।]

c o m
.
पाठ से प्रमाण: एवं योगासनेषु सूयनमस्कारः एकः ेष्ठः आसनक्रमः अ स्त । — इस प्रकारmयोगासन म सूयनमस्कार
एक oेष्ठm l a se
.c आसन-क्रम है।
a g
s e m
a
agl वभ क्त: प्रश्न ‘केषु’ (सप्तमी बहुवचन) है, इस लए उत्तर भी सप्तमी वभ क्त, बहुवचन, नपुंसक लङ्ग —

se m
com l a
योगासनेषु। जस वभ क्त म प्रश्न, उसी वभ क्त म उत्तर — यही संस्कृत का सरल नयम है।
. a g
m
gl ase
प्र.1 (ङ)
a
सूयनमस्कारेण जनाः क दृशं शरीरं प्राप्नुव न्त ?

co m
m .
as e
com। l

. a g
sem[स्वस्थ (नीरोग) शरीर।]
स्वस्थम्

a
agl c
m .
पाठ से प्रमाण: ‘स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः’ च प्राप्नवाम । — अतः सूयनमस्कार से लोग स्वस्थ शरीर पाते ह।
m a s e
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 22

Page 6

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

वभ क्त: ‘क दृशम्’ का उत्तर वशेषण के रूप म आता है, अतः वह वशेष्य ‘शरीरम्’ क ही वभ क्त लेगा —
तीया वभ क्त, एकवचन, नपुंसक लङ्ग — स्वस्थम्। पूरा वाक्य — ‘जनाः स्वस्थं शरीरं प्राप्नुव न्त।’

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 32–33
अभ्यासः — प्रश्नः २ : अधो ल खतानां प्रश्नानाम् उत्तरा ण पूणवाक्येन लखन्तु

अभ्यासः

प्र.2 (क) सव छात्राः आचाया क पृच्छ न्त ?

सव छात्राः आचाया पृच्छ न्त — ‘आचाय ! कम् अद्य भवान् अस्मान् योगासनं शक्षय त ?’ इ त ।
[सब छात्र आचाया से पूछते ह — ‘हे आचाया! क्या आज आप हम योगासन सखाएँगी?’]

पूण वाक्य कैसे बनाएँ: प्रश्न का ढाँचा ज्य -का-त्य उत्तर म उतार द जए और ‘ कम्’ के स्थान पर पाठ का वाक्य
रख द जए, अन्त म इ त लगा द जए — संस्कृत म उद्धरण के अन्त म ‘इ त’ ही उद्धरण- चह्न का काम करता है।

ाकरण: आचायाम् तीया एकवचन है — ‘प्रच्छ् ’ धातु कमक है, इस लए जससे पूछा जाता है वह भी
तीया म आता है (आचाया पृच्छ न्त)। अस्मान् = हम (अस्मद्, तीया बहुवचन)।

प्र.2 (ख) सूयनमस्कारः इत्यनेन कः आशयः ?

सूयनमस्कारः ादशानाम् आसनानां समाहारः अ स्त । प्रत्येकस्मात् सूयनमस्कारात् पूवम् एकः मन्त्रः भव त । तेषु प्रथमः
मन्त्रः ‘ॐ मत्राय नमः’ इ त अ स्त ।
[सूयनमस्कार बारह आसन का समूह है। हर सूयनमस्कार से पहले एक मन्त्र होता है। उनम पहला मन्त्र है — ‘ॐ मत्राय नमः’।]

Page 5 of 22

Page 7

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः मन्त्रः सूयस्य नाम्नः अथः

१ ॐ िम ाय नमः सबका मत्र

२ ॐ रवये नमः जो स्तुत्य है, तेजोमय

३ ॐ सूय य नमः जो स क्रयता दे ता है

४ ॐ भानवे नमः प्रकाश दे ने वाला

५ ॐ खगाय नमः आकाश म चलने वाला

६ ॐ पूष्णे नमः पोषण करने वाला

७ ॐ िहरण्यगभ य नमः सुनहरे गभ वाला, सृ ष्ट का बीज

८ ॐ मरीचये नमः करण वाला

९ ॐ आिदत्याय नमः अ द त-पुत्र

१० ॐ सिव े नमः प्रेरणा दे ने वाला

११ ॐ अक य नमः पूजा के योग्य

१२ ॐ भास्कराय नमः प्रकाश का नमाता

(सवान्ते) ॐ सिवतसृ ूयनारायणाय नमः सबके अन्त म बोला जाने वाला समापन-मन्त्र

‘इत्यनेन कः आशयः’ का अथ: ‘इससे क्या तात्पय है?’ — अथात् शब्द क प रभाषा पूछ जा रही है, केवल
अनुवाद नह । इस लए उत्तर म तीन बात आनी चा हए — (1) बारह आसन का समूह, (2) हर आसन से पहले एक
मन्त्र, (3) पहला मन्त्र कौन-सा है।

प्र.2 (ग) आचाया कं ोकं पाठय त ?

आचाया इमं ोकं पाठय त —

आिद य य नम कारान् ये कु वि त िदने िदने ।
त् स् स् न्

आयुः प ा बलं वीय ं ते ज ते षां च जायते ॥
ज्ञ स्

अन्वयः — ये दने दने आ दत्यस्य नमस्कारान् कुव न्त, तेषां च आयुः, प्र ा, बलं, वीय तेजः (च) जायते ।
अथः ( हन्द ) — जो लोग प्र त दन सूय को नमस्कार करते ह, उनक आयु, बु द्ध, बल, पराक्रम और तेज — ये सब बढ़ते ह।

Page 6 of 22

Page 8

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

भावः — ोक सूयनमस्कार का फल गनाता है और वह भी पाँच स्तर पर — आयु (जीवन), प्र ा (मन), बल (शरीर), वीय
(पराक्रम) और तेज (व्य क्तत्व क का न्त)। ध्यान द जए, क व ने ‘ दने दने’ कहा है — एक दन का नह , प्र त दन के अभ्यास
का फल है। यही पाठ का मूल सन्दे श भी है — ‘अतः वयं प्र त दनं सूयनमस्कारं करवाम।’

ाकरण के दो बन्दु: नमस्कारान् — तीया वभ क्त, बहुवचन (कम)। तेजस्तेषाम् म वसग-स न्ध है — तेजः
+ तेषाम् = तेजस्तेषाम्।

प्र.2 (घ) सूयनमस्कारस्य प्रथमः मन्त्रः कः ?

सूयनमस्कारस्य प्रथमः मन्त्रः ‘ॐ मत्राय नमः’ इ त अ स्त ।
[सूयनमस्कार का पहला मन्त्र ‘ॐ मत्राय नमः’ है।]

यही पाठ का शीषक है: पाठ का नाम भी ‘ मत्राय नमः’ इसी पहले मन्त्र से लया गया है। ‘ मत्र’ सूय का वह नाम है
जो बताता है क सूय सबके साथ बना भेद के मत्रता करता है।

वभ क्त: मत्राय — चतुथ वभ क्त, एकवचन, पुं लङ्ग। नयम — ‘नमः’ शब्दस्य योगे चतुथ वभ क्तः भव त।

प्र.2 (ङ) सूयनमस्कारेण क दृशं बलं वधते ?

सूयनमस्कारेण शारी रकं, मान सकम्, आध्या त्मकं च बलं वधते ।
[सूयनमस्कार से शारी रक, मान सक और आध्या त्मक — तीन प्रकार का बल बढ़ता है।]

बलस्य प्रकारः अथः कैसे बढ़ता है

शारीिरकम् शरीर का बल बारह आसनों से पूरे शरीर का यायाम हो जाता है — लचीलापन और फू ित बढ़ ती है
व् स्

मानिसकम् मन का बल वास और गित का ताल िमलाने से एकागता बढ़ ती है
श्

आध्याित्मकम् आत्मा से जुड़ा बल म ो चार और नम कार-भाव से कृत ता और संयम आता है
न् च् स् ज्ञ

वभ क्त: सूयनमस्कारेण — तृतीया वभ क्त, एकवचन (साधन/करण)। ‘शारी रकम्’ आ द तीन ‘बलम्’ के
वशेषण ह, अतः प्रथमा एकवचन नपुंसक लङ्ग म ह।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 33

Page 7 of 22

Page 9

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

अभ्यासः — प्रश्नः ३ : पाठात् समु चतं पदं चत्वा अधः रक्तस्थाना न पूरयन्तु

अभ्यासः

प्र.3 (क) प्रत्येकस्मात् ....................... पूवम् एकः मन्त्रः भव त ।

प्रत्येकस्मात् सूयनमस्कारात् पूवम् एकः मन्त्रः भव त ।
[हर सूयनमस्कार से पहले एक मन्त्र होता है।]

रक्तस्थान कैसे पकड़ा: ‘प्रत्येकस्मात्’ और ‘पूवम्’ दोन पञ्चमी वभ क्त क माँग करते ह (‘पूवम्’ के योग म
पञ्चमी आती है), इस लए भरने वाला पद भी पञ्चमी एकवचन म ही होगा — सूयनमस्कारात्, न क
‘सूयनमस्कारः’।

प्र.3 (ख) वयं प्र त दनं ....................... करवाम ।

वयं प्र त दनं सूयनमस्कारं करवाम ।
[हम प्र त दन सूयनमस्कार कर।]

वभ क्त: ‘करवाम’ क्रया का कम चा हए, इस लए तीया वभ क्त, एकवचन — सूयनमस्कारम् → वाक्य म
सूयनमस्कारं। ‘करवाम’ लोट् -लकार, उत्तमपुरुष, बहुवचन है — ‘हम कर’।

प्र.3 (ग) स्वस्थं ....................... स्वस्थं ....................... च प्राप्नवाम ।

स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः च प्राप्नवाम ।
[हम स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन प्राप्त कर।]

क्रम मत बद लए: पाठ म यही क्रम छपा है — पहले शरीरम्, फर मनः। ‘स्वस्थम्’ दोन बार वशेषण है और दोन
वशेष्य नपुंसक लङ्ग ह, इस लए रूप एक ही रहा।

मनः का रूप: ‘मनस्’ सकारान्त नपुंसक लङ्ग है — प्रथमा और तीया दोन एकवचन म मनः ही रहता है (मनः –
मनसी – मनां स)।

Page 8 of 22

Page 10

as e
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
एकेन ....................... सूयनमस्कारस्य बहू न प्रयोजना न वदा म ।
e
प्र.3 (घ)

m l as
.co a g
a s em
नl ोकेन सूयनमस्कारस्य बहू न प्रयोजना न वदा म ।
एकेg
a
[एक ही ोक से म सूयनमस्कार के बहुत-से लाभ बताती ँ।]

com
e m . ag
as
वभ क्त: ‘एकेन’ तृतीया वभ क्त, एकवचन म है, इस लए उसका वशेष्य भी तृतीया एकवचन म — ोकेन।

a
यहाँ तृतीया ‘साधन’ ( जसके ारा) का अथ दे रही है।
g l

co m
e m.
m as
आ दत्यस्य ....................... ये कुव न्त दने दने ।

.co l
प्र.3 (ङ)

a g
se m
g l a
a आ दत्यस्य नमस्कारान् ये कुव न्त दने दने ।

m a s
.co agl
[जो प्र त दन सूय को नमस्कार करते ह…]

se m
g l a
वभ क्त: ‘कुव न्त’ का कम चा हए और वह अनेक ह, अतः तीया वभ क्त, बहुवचन — नमस्कारान्। यह पं क्त
पाठ के ोक क पहली पं क्त है। a

c o m
‘ दने दने’: एक ही पद क पुनरावृ त्त से ‘हर दन’ का अथ नकलता है — इसे व्याकरण m .
s e म वीप्सा कहते ह। ऐसे ही

c हे’m= हर घर म, ‘ग्रामे ग्रामे’ = हर गाँव म।
‘गृहे गृo
. a gla
a sem
agl
se m
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 34
com g l a
m . a
ase
अभ्यासः — प्रश्नः ४ : ‘नमः’ युक्तशब्दानां सङ् ग्रहः

अत्र इदम् अवधे य म्
agl

. c om
पाठे वद्यमानानां ‘नमः’ युक्तशब्दानां सङ् ग्रहं कृत्वा लखन्तु — यथा – मत्राय नमः । (क) ......... (ख) .........
m (ञ) ......... (ट) .........
प्र.4
(ग) ......... (घ) ......... (ङ) ......... (च) ......... (छ) ......... (ज) ......... (झ)e.........
m a s
. co a gl
asem
g l

a c
.
पाठ के सूयनमस्कार-मन्त्र म ‘नमः’ के साथ कुल बारह पद आए ह। उदाहरण म मत्राय नमः दे दया गया है, अतः शेष ग्यारह पद

s e m
m a
(क) से (ट) तक इस प्रकार भरे जाएँगे —

e m . co agl
g l as
a

com
m .
m as e
.co


a g l Page 9 of 22

Page 11

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः ‘नमः’ युक्तं पदम् प्रा तप दकम् अन्तः हन्द अथ

यथा िम ाय नमः । मत्र अकारान्तः मत्र (सूय) को नमस्कार

(क) रवये नमः । रव इकारान्तः र व को नमस्कार

(ख) सूय य नमः । सूय अकारान्तः सूय को नमस्कार

(ग) भानवे नमः । भानु उकारान्तः भानु को नमस्कार

(घ) खगाय नमः । खग अकारान्तः आकाशचारी को नमस्कार

(ङ) पू णे नमः ।
ष् पूषन् नकारान्तः पोषक को नमस्कार

(च) िहर यगभ य नमः ।
ण् हरण्यगभ अकारान्तः हरण्यगभ को नमस्कार

(छ) मरीचये नमः । मरी च इकारान्तः करणवान् को नमस्कार

(ज) आिद याय नमः ।
त् आ दत्य अकारान्तः आ दत्य को नमस्कार

(झ) सिव े नमः । स वतृ ऋकारान्तः प्रेरक को नमस्कार

(ञ) अक य नमः । अक अकारान्तः अक को नमस्कार

(ट) भा कराय नमः ।
स् भास्कर अकारान्तः भास्कर को नमस्कार

नयम (अत्र इदम् अवधेयम्): ‘नमः’ शब्दस्य योगे चतुथ वभ क्तः भव त । इसी लए ऊपर के सभी पद चतुथ
वभ क्त, एकवचन म ह। हन्द म हम ‘सूय को नमस्कार’ कहते ह — वही ‘को’ संस्कृत म चतुथ बन जाता है।

ग्यारह से एक अ धक: पाठ के अन्त म ‘ॐ स वतृसूयनारायणाय नमः’ (सवान्ते) भी आता है। पुस्तक म केवल
(क) से (ट) तक ग्यारह खाने ह, इस लए यह तेरहवाँ पद अ त रक्त रूप से लख द जए — यह भी ‘नमः’ के योग म
चतुथ का ही उदाहरण है।

क ठन रूप याद र खए: र व → रवये, भानु → भानवे, मरी च → मरीचये, स वतृ → स वत्रे, पूषन् → पूष्णे।
शेष सब अकारान्त ह, अतः सीधे –आय लगा द जए।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 34–35

Page 10 of 22

Page 12

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

अभ्यासः — प्रश्नः ५ : उदाहरणानुसारं वाक्यरचना (‘नमः’ + चतुथ )

अभ्यासः

प्र.5 उदाहरणानुसारं कोष्ठकात् पदा न स्वीकृत्य वाक्या न रचयन्तु — [अ ग्नः, आचाया, त्रवणध्वजः, जनकः, वृक्षः,
दे वी, भ गनी, मातामही, जननी, पृ थवी, नद ] यथा – अग्नये नमः । (क) ......... (ख) ......... (ग) ......... (घ)
......... (ङ) ......... (च) ......... (छ) ......... (ज) ......... (झ) ......... (ञ) .........

कोष्ठक म ग्यारह पद ह; उनम से अ ग्नः उदाहरण म चला गया, अतः शेष दस पद (क) से (ञ) तक ठ क बैठ जाते ह। हर पद को
चतुथ एकवचन म बदलकर ‘नमः’ जोड़ द जए —

क्रमः कोष्ठकस्य पदम् लङ्गम् / अन्तः वाक्यम् हन्द अथ

यथा अ ग्नः इकारान्तः, पुं लङ्गः अग्नये नमः । अ ग्न को नमस्कार

(क) आचाया आकारान्तः, स्त्री लङ्गः आचाय यै नमः । आचाया को नमस्कार

(ख) त्रवणध्वजः अकारान्तः, पुं लङ्गः ि वण वजाय नमः ।
ध् तरंगे को नमस्कार

(ग) जनकः अकारान्तः, पुं लङ्गः जनकाय नमः । पता को नमस्कार

(घ) वृक्षः अकारान्तः, पुं लङ्गः वृ ाय नमः ।
क्ष वृक्ष को नमस्कार

(ङ) दे वी ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः दे यै नमः ।
व् दे वी को नमस्कार

(च) भ गनी ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः भिग यै नमः ।
न् बहन को नमस्कार

(छ) मातामही ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः माताम ै नमः । नानी को नमस्कार

(ज) जननी ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः जन यै नमः ।
न् माता को नमस्कार

(झ) पृ थवी ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः पिृ थ यै नमः ।
व् पृथ्वी को नमस्कार

(ञ) नद ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः न ै नमः । नद को नमस्कार

तीन साँचे, बस इतना ही: अकारान्त पुं लङ्ग → –आय (वृक्ष → वृक्षाय); आकारान्त स्त्री लङ्ग → –आयै (आचाया
→ आचायायै); ईकारान्त स्त्री लङ्ग → अ न्तम ‘ई’ का ‘य्’ + ऐ (नद → नद्यै, दे वी → दे व्यै, भ गनी → भ गन्यै)।
‘अ ग्न’ जैसे इकारान्त पुं लङ्ग म –ये लगता है (अग्नये)।

सावधानी: ‘मातामही’ और ‘जननी’ जैसे लम्बे ईकारान्त शब्द म भी नयम वही रहता है — मातामही →
माताम ै, जननी → जनन्यै। ‘माताम ै’ को ‘मातामहीयै’ लखना सामान्य भूल है।

Page 11 of 22

Page 13

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 35
अभ्यासः — प्रश्नः ६ : कोष्ठके वद्यमानानां शब्दानां चतुथ - वभक्तेः रूपा ण प्रयुज्य वाक्या न पुनः लखन्तु

अत्र इदम् अवधे य म्

प्र.6 (यथा) यथा – सै नकः (दे श) जीवनं प्रयच्छ त ।

सै नकः दे शाय जीवनं प्रयच्छ त । (पुस्तके दत्तम्)
[सै नक दे श के लए अपना जीवन दे दे ता है।]

नयम (अत्र इदम् अवधेयम्): दानाथ (दा-धातोः तथा च यच्छ् -धातोः योगे) चतुथ - वभक्तेः प्रयोगः भव त । अथात्
जब कोई वस्तु कसी को द जाती है, तो जसे द जाती है वह पद चतुथ म आएगा — दे श → दे शाय।

दो धातु, एक ही अथ: ददा त और यच्छ त / प्रयच्छ त — दोन का अथ ‘दे ता है’ है। पुस्तक का ही उदाहरण —
शक्षकः छात्राय पुस्तकं ददा त। = शक्षकः छात्राय पुस्तकं यच्छ त।

प्र.6 (क) माता (याचक) वस्त्रं ददा त ।

माता याचकाय वस्त्रं ददा त ।
[माता भखारी को वस्त्र दे ती है।]

रूप: याचक (अकारान्तः, पुं लङ्गः) → याचकाय — चतुथ वभ क्त, एकवचन।

प्र.6 (ख) पौत्रः ( पतामही) औषधं ददा त ।

पौत्रः पताम ै औषधं ददा त ।
[पोता दाद को औष ध दे ता है।]

रूप: पतामही (ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः) → पताम ै — चतुथ वभ क्त, एकवचन। ईकारान्त स्त्री लङ्ग म ‘ई’
बदलकर ‘य्’ हो जाता है और उस पर ‘ऐ’ चढ़ता है (नद → नद्यै क तरह)।

Page 12 of 22

Page 14

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

प्र.6 (ग) अहं (भ गनी) उपायनं ददा म ।

अहं भ गन्यै उपायनं ददा म ।
[म बहन को उपहार दे ता/दे ती ँ।]

रूप: भ गनी (ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः) → भ गन्यै — चतुथ एकवचन। उपायनम् = उपहार, भट। ‘ददा म’ उत्तमपुरुष
एकवचन है।

प्र.6 (घ) पता (से वका) वेतनं ददा त ।

पता से वकायै वेतनं ददा त ।
[ पताजी से वका को वेतन दे ते ह।]

रूप: से वका (आकारान्तः, स्त्री लङ्गः) → से वकायै — चतुथ एकवचन। आकारान्त स्त्री लङ्ग म –आयै जुड़ता है
(बा लका → बा लकायै)।

प्र.6 (ङ) त्वं ( मत्र) पुष्पं ददा स ।

त्वं मत्राय पुष्पं ददा स ।
[तुम मत्र को फूल दे ते हो।]

रूप: मत्र (अकारान्तम्, यहाँ ‘ मत्र’ = सखा) → मत्राय — चतुथ एकवचन। यही पद पाठ के पहले मन्त्र ‘ मत्राय
नमः’ म भी है — वहाँ ‘नमः’ के योग म, यहाँ ‘दा’ धातु के योग म।

प्र.6 (च) दे वः (भक्त) आशीवादं ददा त ।

दे वः भक्ताय आशीवादं ददा त ।
[भगवान् भक्त को आशीवाद दे ते ह।]

Page 13 of 22

Page 15

as e
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
रूप: भक्त (अकारान्तः, पुं लङ्गः) → भक्ताय — चतुथ एकवचन।

m as e
.co a g l
a s em
aप्र.6gl(छ) आरक्षकः (चोर) दण्डं ददा त ।

com
m . ag

as e
l
आरक्षकः चोराय दण्डं ददा त ।
[ सपाही चोर को दण्ड दे ता है।]
a g

. c om
‘दे ना’ हमेशा उपहार नह होता: यहाँ जो दया जा रहा है वह दण्ड है, फर भी क्रया ‘ददा त’ ही है — इस लए

s e m वभ क्त तय
करता है।com gla
नयम वही लगेगा और ‘चोर’ चतुथ म आएगा। संस्कृत म दान का भाव नह , दा-धातु का प्रयोग

. a
a s em
agl रूप: चोर (अकारान्तः, पुं लङ्गः) → चोराय — चतुथ वभ क्त, एकवचन। आरक्षकः = सपाही, रक्षक।

m a s
m .co agl
l a se
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 36 a g
अभ्यासः — प्रश्नः ७ : माता कस्मै / कस्यै धनं ददा त ?

co m
m .
e
अभ्यासः

m l as
.co a g
m उदाहरणानुसारं माता कस्मै/कस्यै धनं ददा त इ त कोष्ठके वद्यमाना न पदा न उपयुज्य लखन्तु — [पुत्री, पुत्रः,
s e
la
प्र.7

ag पा चका, आप णकः, याचकः, पतामही] (क) – माता पुत्र्यै धनं ददा त । (ख) – ......... (ग) – ......... (घ) –

m
......... (ङ) – ......... (च) – .........

a se
. com a g l
m
ase

agl
पुस्तक के चत्र म ‘माता’ और ‘ददा त’ के बीच छह पद रखे ह। हर पद को चतुथ एकवचन म बदलकर वाक्य बनाइए। (क) पुस्तक
ने भर दया है —

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 14 of 22

Page 16

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः कोष्ठकस्य पदम् लङ्गम् / अन्तः वाक्यम् हन्द अथ

(क) पुत्री ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः माता पुत्र्यै धनं ददाित । (पुस्तके दत्तम्) माता पुत्री को धन दे ती है

(ख) पुत्रः अकारान्तः, पुं लङ्गः माता पु ाय धनं ददाित । माता पुत्र को धन दे ती है

(ग) पा चका आकारान्तः, स्त्री लङ्गः माता पािचकायै धनं ददाित । माता रसोइया (स्त्री) को धन दे ती है

(घ) आप णकः अकारान्तः, पुं लङ्गः माता आपिणकाय धनं ददाित । माता दुकानदार को धन दे ती है

(ङ) याचकः अकारान्तः, पुं लङ्गः माता याचकाय धनं ददाित । माता भखारी को धन दे ती है

(च) पतामही ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः माता िपताम ै धनं ददाित । माता दाद को धन दे ती है

प्रश्न म ही उत्तर का सूत्र है: प्रश्नवाचक पद दो ह — कस्मै (पुं लङ्ग/नपुंसक लङ्ग क चतुथ ) और कस्यै (स्त्री लङ्ग क
चतुथ )। जस पद के लए ‘कस्मै’ लगेगा वह –आय म जाएगा (पुत्राय, आप णकाय, याचकाय), और जसके लए
‘कस्यै’ लगेगा वह –आयै / –यै म (पा चकायै, पुत्र्यै, पताम ै)।

दा-धातु (परस्मैपदम्), लट् -लकारः — पृष्ठ 38 क सारणी:

पुरुषः एकवचनम् वचनम् बहुवचनम्

प्रथमपुरुषः ददाित दत्तः ददित

मध्यमपुरुषः ददािस दत्थः दत्थ

उत्तमपुरुषः ददािम द ः द ः

दा-धातु (परस्मैपदम्), लोट् -लकारः: ददातु / दत्ताम् / ददतु — दे ह / दत्तम् / दत्त — ददा न / ददाव / ददाम।
ध्यान द जए, मध्यमपुरुष एकवचन म रूप दे ह है, ‘ददा ह’ नह ।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 36
अभ्यासः — प्रश्नः ८ : उदाहरणानुसारं रक्तस्थाना न पूरयन्तु (चतुथ - वभक्तेः रूपा ण)

अभ्यासः

प्र.8 (यथा) यथा – गणेश – ........................ ........................ ........................

गणेश – गणेशाय, गणेशाभ्याम्, गणेशेभ्यः । (पुस्तके दत्तम्)
[गणेश के लए — एकवचन, वचन, बहुवचन म चतुथ के रूप।]

Page 15 of 22

Page 17

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

तीन साँचे याद कर ली जए, फर पूरा प्रश्न मनट म बनेगा:

वगः एकवचनम् वचनम् बहुवचनम् उदाहरणम्

अकारान्त — पुं लङ्ग / नपुंसक लङ्ग –आय –आभ्याम् –एभ्यः छा ाय, छा ा याम्, छा े यः
भ् भ्

आकारान्त — स्त्री लङ्ग –आयै –आभ्याम् –आभ्यः बािलकायै, बािलका याम्, बािलका यः
भ् भ्

ईकारान्त — स्त्री लङ्ग –यै –ईभ्याम् –ईभ्यः न ै , नदी याम्, नदी यः
भ् भ्

एक ही अन्तर पक ड़ए: अकारान्त म बहुवचन –एभ्यः होता है (छात्रेभ्यः), जब क आकारान्त और ईकारान्त म –
भ्यः सीधे जुड़ता है (बा लकाभ्यः, नद भ्यः)।

प्र.8 (क) भक्त – भक्ताय ........................ भक्तेभ्यः

भक्त – भक्ताय, भक्ताभ्याम्, भक्तेभ्यः ।
[भक्त के लए / दो भक्त के लए / अनेक भक्त के लए।]

वगः: अकारान्तः, पुं लङ्गः — साँचा –आय / –आभ्याम् / –एभ्यः। रक्त स्थान वचन का था।

प्र.8 (ख) से वका – ........................ से वकाभ्याम् ........................

से वका – से वकायै, से वकाभ्याम्, से वकाभ्यः ।
[से वका के लए / दो से वकाओं के लए / अनेक से वकाओं के लए।]

वगः: आकारान्तः, स्त्री लङ्गः — साँचा –आयै / –आभ्याम् / –आभ्यः। एकवचन म –ायै ही स्त्री लङ्ग क पहचान है;
‘से वकाय’ लखना भूल होगी।

प्र.8 (ग) अनुजा – अनुजायै ........................ ........................

अनुजा – अनुजायै, अनुजाभ्याम्, अनुजाभ्यः ।
[छोट बहन के लए / दो छोट बहन के लए / अनेक छोट बहन के लए।]

Page 16 of 22

Page 18

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

वगः: आकारान्तः, स्त्री लङ्गः। अनुजा = छोट बहन (अनुजः = छोटा भाई, जसका चतुथ रूप ‘अनुजाय’ होता)।

प्र.8 (घ) गृ हणी – ........................ गृ हणीभ्याम् ........................

गृ हणी – गृ हण्यै, गृ हणीभ्याम्, गृ हणीभ्यः ।
[गृ हणी के लए / दो गृ ह णय के लए / अनेक गृ ह णय के लए।]

एकवचन म ‘ई’ क्य टू टती है: ईकारान्त स्त्री लङ्ग म एकवचन के समय अ न्तम ई का य् हो जाता है और उस पर ऐ
चढ़ता है — गृ हणी + ऐ = गृ हण्यै। पर वचन-बहुवचन म ‘ई’ ज्य -क -त्य रहती है — गृ हणीभ्याम्, गृ हणीभ्यः।

प्र.8 (ङ) कुमारी – कुमाय कुमारीभ्याम् ........................

कुमारी – कुमाय, कुमारीभ्याम्, कुमारीभ्यः ।
[कुमारी के लए / दो कुमा रय के लए / अनेक कुमा रय के लए।]

वगः: ईकारान्तः, स्त्री लङ्गः — शा लनी / नद / भ गनी के ही साँचे पर।

प्र.8 (च) वन – वनाय ........................ ........................

वन – वनाय, वनाभ्याम्, वनेभ्यः ।
[वन के लए / दो वन के लए / अनेक वन के लए।]

वगः: अकारान्तम्, नपुंसक लङ्गम् — पर चतुथ म इसके रूप अकारान्त पुं लङ्ग जैसे ही बनते ह (आसन →
आसनाय, आसनाभ्याम्, आसनेभ्यः)। लङ्ग का अन्तर प्रथमा- तीया म दखता है, चतुथ म नह ।

Page 17 of 22

Page 19

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

प्र.8 (छ) मत्र – ........................ ........................ मत्रेभ्यः

मत्र – मत्राय, मत्राभ्याम्, मत्रेभ्यः ।
[ मत्र के लए / दो मत्र के लए / अनेक मत्र के लए।]

पाठ से जो ड़ए: यही मत्राय पाठ के पहले मन्त्र ‘ॐ मत्राय नमः’ म आया है और पाठ का शीषक भी यही है।
‘ मत्रम्’ (सखा के अथ म) अकारान्त नपुंसक लङ्ग माना जाता है, पर चतुथ के रूप वही रहते ह।

प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 38
प रयोजनाकायम् (प्रकल्प-काय)

प रयोजनाकायम्

प्र.1 सूयनमस्कारस्य ादशानाम् आसनानां भ त्तपत्रा ण रचयन्तु । मन्त्रान् अ प लखन्तु ।

यह करके दखाने वाला काय है। एक चाट-पेपर ली जए, ऊपर शीषक ल खए — ‘सूयनमस्कारः — ादश आसना न ादश
मन्त्राः च’ — और नीचे बारह खाने बनाकर हर खाने म एक आसन का चत्र तथा उसका मन्त्र ल खए।
अच्छे भ त्तपत्र म ये चार बात अवश्य ह —

1. आसन का क्रमाङ् क (१ से १२ तक) और उसका संस्कृत नाम;
2. उससे जुड़ा मन्त्र — ‘ॐ … नमः’;
3. आसन का सरल चत्र या रेखा चत्र (पुस्तक के पृष्ठ 30–31 के चत्र दे खकर बनाइए);
4. सबसे नीचे समापन-मन्त्र — ‘ॐ स वतृसूयनारायणाय नमः’।

नमूना उत्तर (आदश ता लका) —

Page 18 of 22

Page 20

as e
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
क्रमः मन्त्रः आसनम् हन्द म स्थ त

m as e
१
.co
ॐ िम ाय नमः पणामासनम्
a g l
सीधे खड़े होकर नमस्कार-मु ा

a s emॐ रवये नमः
gl
२ ह तउ ानासनम् दोन हाथ ऊपर उठाकर पीछे क ओर झुकना
a
स् त्त

३ ॐ सूय य नमः पादह तासनम् आगे झुककर हाथ पैर के पास

m
स्

.co ag
sem
४ ॐ भानवे नमः अ वस चालनासनम्
श् ञ् एक पैर पीछे , दृ ष्ट ऊपर

५ ॐ खगाय नमः la
aदgडासनम्
ण् शरीर एक सीधी रेखा म, हाथ पर टका

com
६ ॐ पूष्णे नमः अ टाङ् गनम कारः शरीर के आठ अंग भू म से स्पश

.
ष् स्

भुजङ् गासनम् s mजैसी मु ा
छाती ऊपर, साँप केeफन

com l a
७ ॐ िहरण्यगभ य नमः

m . ॐ मरीचये नमः agशरीर
ase
८ अधोमुख वानासनम् (पवतासनम्) कमर ऊपर, पवत जैसा

agl९
श्

ॐ आिदत्याय नमः अ वस चालनासनम्
श् ञ् चौथी स्थ त दुहराइए, दूसरा पैर आगे

पादह तासनम्om a s
.c agl
१० ॐ सिव े नमः तीसरी स्थ त दुहराइए

emानासनम्
स्

a s
gl
ह तउ
a
११ ॐ अक य नमः स् त्त दूसरी स्थ त दुहराइए

१२ ॐ भास्कराय नमः पणामासनम् पहली स्थ त म लौटकर नमस्कार

co m
समापन-पणामः
m .
as e
(सवान्ते) ृ ूयनारायणाय नमः
ॐ सिवतस पूरा चक्र पूरा होने पर अ न्तम नमस्कार

m l
.co
m क्य , और आधे दोहराए क्य जाते ह: सूयनमस्कार आगे-पीछे झुकने का जोड़ा है — पहली छह स्थ तय म a g
a s eबारह
agl शरीर आगे बढ़ता है, अगली छह म वही स्थ तयाँ उलटे क्रम म लौटती ह। इसी लए ४ और ९, ३ और १०, २ और ११,
१ और १२ एक जैसे ह — पर मन्त्र हर बार नया होता है।
se m
com g l a
m . a
सजावट का सुझाव: चाट के बीच मaएक e
s बड़ा सूय बनाइए और उसक बारह करण पर बारह नाम — मत्रः, र वः,
g l
a मरी चः, आ दत्यः, स वता, अकः, भास्करः — ल खए। मन्त्र म इनके चतुथ
सूयः, भानुः, खगः, पूषा, हरण्यगभः,

m
रूप ही आते ह।

. co
e m
m l as
.co a g
a s emप्र.2
gl
प्र त दनं सकुटु म्बं सूयनमस्कारस्य अभ्यासं कुवन्तु ।

a c
m .
m a s e
यह अभ्यास-काय है, ल खत उत्तर नह । इसे इस तरह क जए —
e m . co agl
g l as
a
समयः — प्रातःकाल, सूय दय के समय, खाली पेट। भोजन के तुरन्त बाद कभी न क जए।
स्थानम् — खुली, हवादार जगह; नीचे चटाई या दरी बछाइए।

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 19 of 22

Page 21

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

आर ः — पहले दन केवल दो या तीन चक्र। धीरे-धीरे बढ़ाकर छह से बारह तक ले जाइए।
मन्त्रः — हर स्थ त के साथ उसका मन्त्र बो लए; इससे ग त और ास दोन क ताल बैठ जाती है।
सकुटु म्बम् — प रवार के सब लोग साथ क जए। दादा-दाद या छोटे भाई-बहन जतना कर सक उतना ही कराइए।

नमूना उत्तर (साप्ता हक अभ्यास-पत्रकम्) — अपनी कॉपी म ऐसी ता लका बनाकर हर दन भ रए:

वासरः ( दन) समयः आवृत्तयः (चक्र) कः कः अकरोत् ?

सोमवासरः पातः ६:१५ ३ अहम्, माता, अनुजः

मङ्गलवासरः पातः ६:१५ ४ अहम्, पता

बुधवासरः पातः ६:२० ४ अहम्, माता, पता

… … … …

सावधानी: कमर या घुटने म चोट हो, या कोई रोग हो, तो पहले बड़ से/ च कत्सक से पू छए। आसन म झटका कभी
न द जए — जतना सहज लगे उतना ही झु कए।

प्र.3 वद्या ववादाय धनं मदाय श क्तः परेषां प रपीडनाय । खलस्य साधो वपरीतमेतत् ानाय दानाय च रक्षणाय ॥
अ स्मन् ोके वद्यमाना न चतुथ - वभक्त्यन्तरूपा ण चत्वा लखन्तु ।

इस ोक म छह पद चतुथ - वभ क्त म ह —

क्रमः चतु यन्तं पदम् प्रा तप दकम् हन्द अथ कसके वषय म

१ िववादाय ववाद झगड़े के लए खलस्य (दुजन की) िव ा

२ मदाय मद घमण्ड के लए खलस्य धनम्

३ पिरपीडनाय प रपीडन सताने के लए खलस्य शि तः

४ ज्ञ ानाय ान ान के लए साधोः (सज्जन की) िव ा

५ दानाय दान दान के लए साधोः धनम्

६ र णाय
क्ष रक्षण रक्षा के लए साधोः शि तः

अन्वयः — खलस्य वद्या ववादाय (भव त), धनं मदाय (भव त), श क्तः परेषां प रपीडनाय (भव त) । साधोः एतत् वपरीतम् —
( वद्या) ानाय, (धनं) दानाय, (श क्तः) च रक्षणाय (भव त) ।
अथः ( हन्द ) — दुष्ट व्य क्त क वद्या झगड़े के लए होती है, धन घमण्ड के लए और श क्त दूसर को सताने के लए। सज्जन के
लए यह सब उलटा है — उसक वद्या ान के लए, धन दान के लए और श क्त दूसर क रक्षा के लए होती है।

Page 20 of 22

Page 22

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

भावः — वद्या, धन और श क्त — ये तीन अपने आप म न अच्छे ह न बुरे; इनका मूल्य पात्र से तय होता है। एक ही तलवार
शल्य च कत्सक के हाथ म जीवन बचाती है और डाकू के हाथ म जीवन लेती है। इसी लए ोक कहता है क साधना केवल वद्या या
धन पाने क नह , अपने स्वभाव को साधु बनाने क होनी चा हए।

पहचानने का तरीका: चतुथ वभ क्त ‘के लए’ का अथ दे ती है और अकारान्त शब्द म –आय पर समाप्त होती है।
ोक म जहाँ-जहाँ ‘–आय’ दखे, वह चतुथ है — ववादाय, मदाय, प रपीडनाय, ानाय, दानाय, रक्षणाय। यहाँ
यह प्रयोजन (तादथ्य) बता रही है, दान नह — अथात् चतुथ केवल ‘दे ने’ म नह , ‘ कस काम के लए’ म भी आती
है।

स - वच्छे द: साधो वपरीतमेतत् = साधोः + वपरीतम् + एतत् ( वसग-स न्ध तथा स्वर-स न्ध)। खलस्य = दुजन
का; परेषाम् = दूसर का (षष्ठी बहुवचन)।

अध्याय — एक नज़र म
पाठ क कथा — यो गता प्र त दन प्रातः पता के साथ उद्यान जाती है और वहाँ भ्रमण करती है, जब क बहुत-से लोग वहाँ
व्यायाम और योगासन करते ह। यह सुनकर सब मत्र उत्साह से योग श क्षका (आचाया) के पास जाते ह और सूयनमस्कार
सीखने क इच्छा प्रकट करते ह।
सूयनमस्कारः ादशानाम् आसनानां समाहारः अ स्त — सूयनमस्कार बारह आसन का समूह है। हर आसन से पहले एक
मन्त्र बोला जाता है; उनम पहला मन्त्र है ‘ॐ मत्राय नमः’ और सबके अन्त म ‘ॐ स वतृसूयनारायणाय नमः’।
सूय के बारह नाम — मत्रः, र वः, सूयः, भानुः, खगः, पूषा, हरण्यगभः, मरी चः, आ दत्यः, स वता, अकः, भास्करः। मन्त्र म
ये सब चतुथ वभ क्त म आते ह — मत्राय, रवये, सूयाय, भानवे, खगाय, पूष्णे, हरण्यगभाय, मरीचये, आ दत्याय, स वत्रे,
अकाय, भास्कराय।
दो ाकरण- नयम (अत्र इदम् अवधेयम्) — (1) ‘नमः’ शब्दस्य योगे चतुथ वभ क्तः भव त — जैसे भास्कराय नमः। (2)
दानाथ (दा-धातोः तथा च यच्छ् -धातोः योगे) चतुथ - वभक्तेः प्रयोगः भव त — जैसे शक्षकः छात्राय पुस्तकं ददा त / यच्छ त।
चतुथ वभ क्त के रूप — अकारान्त पुं लङ्ग व नपुंसक लङ्ग म –आय / –आभ्याम् / –एभ्यः (छात्राय, छात्राभ्याम्,
छात्रेभ्यः); आकारान्त स्त्री लङ्ग म –आयै / –आभ्याम् / –आभ्यः (बा लकायै); ईकारान्त स्त्री लङ्ग म –यै / –ईभ्याम् / –ईभ्यः
(नद्यै, नद भ्याम्, नद भ्यः)।
पाठ का ोक और सन्दे श — ‘आ दत्यस्य नमस्कारान् ये कुव न्त दने दने। आयुः प्र ा बलं वीय तेजस्तेषां च जायते॥’ —
प्र त दन सूयनमस्कार करने वाल को आयु, बु द्ध, बल, पराक्रम और तेज मलता है। सूयनमस्कार से शारी रक, मान सक
तथा आध्या त्मक तीन प्रकार का बल बढ़ता है और ‘स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः’ प्राप्त होता है।

Page 21 of 22

Page 23

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 3 मत्राय नमः AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्दः (प्रा तप दकम् ) ाकरण-प रचयः चतु थ — एकवचनम् हन्द अथ

मत्र अकारान्तः, पुंिलङ् गः मत्राय सूय (सबका मत्र); सखा

रव इकारान्तः, पुंिलङ् गः रवये सूय

भानु उकारान्तः, पुंिलङ् गः भानवे सूय (प्रकाशवान्)

पूषन् नकारान्तः, पुंिलङ् गः पूष्णे सूय (पोषण करने वाला)

मरी च इकारान्तः, पुंिलङ् गः मरीचये सूय ( करण वाला)

स वतृ ऋकारान्तः, पुंिलङ् गः स वत्रे सूय (प्रेरक)

आचाया आकारान्तः, स् ीिलङ् गः आचायायै अध्या पका, गुरु

भ गनी ईकारान्तः, स् ीिलङ् गः भ गन्यै बहन

पतामही ईकारान्तः, स् ीिलङ् गः पताम ै दाद

आसन अकारान्तः, नपुंस किलङ् गः आसनाय आसन

प्र ा आकारान्तः, स् ीिलङ् गः प्र ायै मेधा, बु द्ध

तेजस् सकारान्तः, नपुंस किलङ् गः तेजसे द प्त, का न्त

Page 22 of 22

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages23
Updated19 Sep 2026