Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
कक्षा 9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 10: ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं
अनुप्रयोग
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
184 – 207 29 63 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 60 pages
Page 2
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं
अनुप्रयोग
ख चकर छोड़ा गया रबड़ बड, टकराया गया स्व रत्र भुज और एक सरे से धकेली-ख ची गई स्लंक — तीन एक ही बात कहते ह: ध्व न माध्यम के
घनत्व म उत्पन्न वक्षोभ है, माध्यम का प्रवाह नह । इस अध्याय म यही वचार मापी जा सकने वाली रा शय — तरंगदै य, आवृ त्त, आवतकाल,
आयाम और चाल — म बदलता है और फर प्र तध्व न, सोनार तथा पराश्रव्य तरंग पर लागू होता है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
अन्वेषण (कक्षा 9) 184 – 207
खं ड प्रश्न
29 63
माध्यम
हन्द
चतन क जए — पृष्ठ 184
अध्याय का आरंभ
चतन क जए
प्र.1 दो अंत रक्ष यात्री अंत रक्ष स्टे शन क यां त्रक भुजा म सुधार करने के लए अंत रक्ष म साथ-साथ चल रहे ह। क्या
वे एक-दूसरे से बातचीत कर सकते ह और धातु क वस्तुओं के परस्पर टकराने क ध्व न वैसे ही सुन सकते ह जैसे
वे पृथ्वी पर सुनते ह?
नह — सीधे नह सुन सकते। बाह्य अंत रक्ष लगभग नवा तत है और वहाँ ध्व न तरंग के संचरण के लए कोई माध्यम नह है।
ऐसा क्य होता है: ध्व न संपीडन और वरलन क एक श्रृंखला है — ऐसे क्षेत्र जहाँ माध्यम के कण पास-पास आ
जाते ह और ऐसे क्षेत्र जहाँ वे दूर हट जाते ह। कोई कण इस वक्षोभ को आगे तभी बढ़ा सकता है जब वह अपने
पड़ोसी कण से टकराए। जहाँ कण ही न ह वहाँ संघट्ट भी नह ह गे, अतः वक्षोभ को आगे ले जाने वाला कुछ नह
बचता। नवात बेलजार प्रयोग ( चत्र 10.7) यही दशाता है — जैसे-जैसे वायु बाहर नकाली जाती है, घंट बजती
दखाई तो दे ती है पर उसक ध्व न लुप्त हो जाती है।
पृथ्वी पर वही टकराहट आसानी से सुनाई दे ती है क्य क दोन या त्रय के बीच क वायु एक उत्तम माध्यम है।
क्या आप जानते ह? अंत रक्ष यात्री अपने प रधान म लगे रे डयो सेट से बात करते ह। रे डयो तरंग वद्युतचुंबक य
तरंग ह, यां त्रक नह , अतः उन्ह माध्यम क आवश्यकता नह होती। य द दोन हेलमेट आपस म सटा दए जाएँ तो
टकराहट सुनी जा सकती है — तब हेलमेट का ठोस पदाथ माध्यम का काय करता है।
Page 1 of 60
Page 3
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अ धकांश चमगादड़ रा त्र के अंधेरे म अपने शकार का पता लगाने हेतु ध्व न का उपयोग कैसे करते ह?
अ धकांश चमगादड़ पराश्रव्य तरंग के छोटे -छोटे स्पंद (20 kHz से अ धक आवृ त्त) उत्स जत करते ह और फर वस्तुओं तथा
शकार से पराव तत होकर लौटने वाली प्र तध्व नय को सुनते ह। इसे प्र तध्व न ारा स्थान नधारण (echolocation) कहते ह।
चमगादड़ पराश्रव्य तरंग का एक स्पंद भेजता है।
यह स्पंद कसी क ट, द वार अथवा टहनी से पराव तत हो जाता है।
चमगादड़ के कान लौटती हुई प्र तध्व न ग्रहण करते ह।
समय- वलंब से वह वस्तु क दूरी और प्र तध्व न क दशा तथा प्रबलता से उसक स्थ त एवं आकार का अनुमान लगा लेता है।
िशकार की दू री = v × t / 2 (ध्विन वहाँ तक जाती है और लौटती भी है)
यिद वायु में पितध्विन 0.02 s में लौटे , तो दू री = 340 m s⁻¹ × 0.02 s ÷ 2 = 3.4 m
पराश्रव्य तरंग ही क्य : कम तरंगदै य छोट वस्तुओं से स्पष्ट रूप से पराव तत होती है। वायु म 40 kHz पर λ =
344 m s⁻¹ ÷ 40000 s⁻¹ ≈ 0.0086 m ≈ 0.9 cm — मच्छर जैसे छोटे क ट से टकराकर लौटने के लए पयाप्त
छोट । 100 Hz क ध्व न का λ ≈ 3.4 m होता, जो क ट के चार ओर से नकल जाती।
क्या आप जानते ह? डॉ ल्फन, व्हेल और कुछ पक्षी भी प्र तध्व न ारा स्थान नधारण करते ह, और इसी सद्धांत
का उपयोग मनुष्य सोनार तथा अल्ट्रासोनोग्राफ म करते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 184
अध्याय क भू मका
प्र.1 ऊजा के जन व भन्न रूप के वषय म आपने पढ़ा था उनम से कौन-सा रूप ध्व न ऊजा म प रव तत होता है?
यां त्रक ऊजा — वशेष रूप से कंपन करती हुई वस्तु क ग तज ऊजा — ध्व न ऊजा म प रव तत होती है।
जब आप रबड़ बड या सतार का तार ख चकर छोड़ते ह तो आपक पे शयाँ उस पर काय करती ह। यह काय कंपन करते तार
क ग तज ऊजा बनता है, जो आगे वायु को ध्व न के रूप म स्थानांत रत हो जाती है।
लाउडस्पीकर म क्रम भन्न है: वद्युत ऊजा → यां त्रक ऊजा (तनुपट का कंपन) → ध्व न।
पटाखे म: रासाय नक ऊजा → ऊष्मा → गैस का तीव्र प्रसार → ध्व न।
Page 2 of 60
Page 4
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
यह क्य महत्वपूण है: ऊजा को न तो उत्पन्न कया जा सकता है और न ही नष्ट (अध्याय 7)। अतः ध्व न ऊजा सदै व
कसी अन्य ऊजा भंडार से ही आती है। यही कारण है क ख चकर छोड़ा गया रबड़ बड कुछ ही समय म शांत हो
जाता है — उसक कंपन ऊजा ध्व न के रूप म वायु म और कुछ ऊष्मा के रूप म नष्ट हो चुक होती है।
प्र.2 ध्व न कैसे उत्पन्न क जा सकती है और यह हमारे कान तक कस प्रकार पहुँचती है?
ध्व न कंपन करती हुई वस्तु ारा उत्पन्न होती है और माध्यम के घनत्व म गमन करते वक्षोभ के रूप म कान तक पहुँचती
है।
1. उत्पादन। कोई ोत (वाक् तंतु, स्व रत्र भुज, ढोल का पटल, बाँसुरी का वायु स्तंभ) कंपन करता है — अपनी माध्य स्थ त के
इधर-उधर आगे-पीछे ग त करता है।
2. संचरण। ोत क प्रत्येक अग्र ग त समीप क वायु के कण को संपी डत कर संपीडन बनाती है (घनत्व औसत से अ धक)।
प्रत्येक पश्च ग त वरलन छोड़ जाती है (घनत्व औसत से कम)। कण अपने पड़ो सय से टकराकर संपीडन को आगे बढ़ाते ह,
अतः संपीडन आगे गमन करता है जब क प्रत्येक कण केवल अपनी माध्य स्थ त के इधर-उधर दोलन करता है।
3. बोध। पहुँचते हुए संपीडन और वरलन कणपटल को दबाते और छोड़ते ह जससे वह कंपन करने लगता है। नन्ह अ स्थयाँ
कंपन को प्रव धत करती ह, कणावत उन्ह वद्युत संकेत म बदलता है और म स्तष्क उन्ह ध्व न के रूप म पढ़ता है।
C R C R C
तरंग के संच रण की िदशा
ोत कंपन करता है → संपीडन-िवरलन गमन करते है ं → कणपटल कंपन करता है
ोत और कान के बीच क वायु के कण — संपीडन (C) म पास-पास, वरलन (R) म दूर-दूर। यह प्र तरूप दाईं ओर बढ़ता है; कण नह
बढ़ते।
संकेत: दोन वचार अलग र खए — वक्षोभ गमन करता है, कण नह । आपके कान तक वास्तव म ऊजा पहुँचती
है, वह वायु नह जो स्व रत्र भुज के पास थी।
क्रयाकलाप 10.1 — पृष्ठ 185
Page 3 of 60
Page 5
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
आइए, अन्वेषण कर — 10.1 ध्व न का उत्पादन
co m
e m.
m as
क्रयाकलाप 10.1
.co a g l
a s emको एक हाथ म पकड़ कर अचल रखते हुए दूसरे हाथ क अँगुली से रबड़ बड को थोड़ा-सा ख चकर छो ड़ए।
gl
डब्बे
a
प्र.1
क्या आपको कोई ध्व न सुनाई दे ती है?
co m
e m . ag
हाँ, एक स्पष्ट 'टन्न' जैसी ध्व न सुनाई दे ती है।
g l as
a
ख चने पर तना हुआ बड अपनी माध्य स्थ त से हट जाता है। छोड़ते ही तनाव उसे वापस ख चता है, वह आगे नकल जाता है और
m
इस प्रकार आगे-पीछे ग त करता रहता है — अथात कंपन करता है। कंपन करता बड अपने पास क वायु को आगे-पीछे धकेलता है
co
m.
और आपके कान क ओर संपीडन एवं वरलन भेजता है।
o m l a se
m .c आवश्यक है: अकेला बड बहुत कम वायु को ग त दे ता है। खुले डब्बे परagतानने से वह डब्बे के भीतर
कseवायु और गत्ते को भी कं पत कर दे ता है, अतः कह अ धक वायु वक्षुब्ध होती है और ध्व न बहुत प्रबल हो जाती
डब्बा क्य
g l a
a है। इसी कारण सतार, वीणा या गटार म खोखला ढाँचा होता है।
m a s
m .co agl
l a se
प्र.2
a g
रबड़ बड को पुनः ख चकर छो ड़ए और इसे ध्यानपूवक दे खए। क्या यह कंपन कर रहा है?
. com
हाँ। छोड़ने के तुरंत बाद बड धुँधला दखाई दे ता है — स्पष्ट रेखा के स्थान पर एक चौड़ी, धुँधली पट्टem
m a s
gl
दखती है, क्य क वह आँख क
. o तेज़ आगे-पीछे ग त कर रहा है।
पकड़ से cभी
a
a s em
agl कं पन = माध्य िस्थित के इधर-उधर आगे-पीछे की आवत गित (दोलन )
se m
com g l a
.
धुँधली पट्टी की चौड़ ाई ≈ कं पन के आयाम का दुगन
ु ा
m a
ase
agl
स्वयं जाँ चए: कंपन करते बड को अँगुली से बहुत हल्के से छू इए। आपको झनझनाहट अनुभव होगी — और ध्व न
m
तुरंत बंद हो जाएगी, क्य क आपक अँगुली कंपन ऊजा को सोख लेती है।
. co
em
m l as
.co a g
a s emप्र.3
gl
रबड़ बड के कंपन रुकने तक प्रतीक्षा क जए। क्या आप अब भी ध्व न सुन पाते ह?
a c
m .
m a s e
m .
नह । जस क्षण बड वरामावस्था म आता है, ध्व न भी बंद हो जाती है।
e
co agl
g l as
a
com
m .
m ase
.co
a g l Page 4 of 60
Page 6
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: ध्व न बड क अपनी कंपन ऊजा से चल रही थी। प्रत्येक दोलन म थोड़ी ऊजा वायु को मलती है
(और कुछ रबड़ के भीतर ऊष्मा के रूप म नष्ट होती है)। यह भंडार समाप्त होते ही बड रुक जाता है, नए संपीडन
नह बनते और आपके कान तक पहुँचने के लए कुछ शेष नह रहता।
यही एक अवलोकन पूरे क्रयाकलाप का नष्कष है: ध्व न कंपन ारा उत्पन्न होती है; कंपन नह तो ध्व न नह ।
प्र.4 रबड़ बड को अ धक तानकर अथवा इसे थोड़ा-सा ढ ला करके इसम तनाव प रव तत क जए और प्रत्येक त
म रबड़ बड को ख चकर छो ड़ए। क्या ध्व न प रव तत होती है? आप कस प्रकार के प रवतन अनुभव करते ह?
हाँ, ध्व न बदल जाती है। बड को अ धक तानने पर ध्व न तीक्ष्ण (उच्च तारत्व) हो जाती है; ढ ला करने पर ध्व न गंभीर (कम
तारत्व) हो जाती है।
आप क्या करते ह बड कैसे कंपन करता है आवृ त्त आवतकाल क्या सुनाई दे ता है
Ν T
अिधक तानना (अिधक तेज़ी से वापस लौटता है अिधक कम तीक्ष्ण, उ च्च तारत्व
तनाव)
ढीला करना (कम तनाव) धीरे-धीरे लौटता है कम अिधक गंभीर, कम तारत्व
अिधक ज़ोर से खी ंचकर माध्य स्थ त से अ धक दूर तक अपिरवितत अपिरवितत अिधक पबल (अिधक
छोड़ना झूलता है आयाम)
ऐसा क्य होता है: अ धक तने बड को माध्य स्थ त क ओर ख चने वाला प्रत्यानयन बल अ धक होता है, अतः वह
प्रत्येक आगे-पीछे क यात्रा कम समय म पूरी करता है। चूँ क ν = 1/T, कम आवतकाल का अथ है अ धक आवृ त्त,
और अ धक आवृ त्त उच्च तारत्व के रूप म सुनाई दे ती है।
संकेत: ध्यान द जए क तनाव तारत्व बदलता है जब क कतने ज़ोर से ख चा गया यह प्रबलता बदलता है।
यही आवृ त्त और आयाम का अंतर है — और यही कारण है क सतार या तानपुरे को खूँ टयाँ घुमाकर, अथात तनाव
बदलकर, स्वरबद्ध कया जाता है।
प्र.5 रबड़ बड को डब्बे से हटा द जए। इसे अपनी दो अँगु लय के मध्य ता नए अपने कान के समीप लाकर रबड़ बड
को थोड़ा-सा ख चकर छो ड़ए। क्या अब भी ध्व न उत्पन्न होती है? क्या यह अभी भी पूव क ध्व न जतनी ही
प्रबल है?
ध्व न अब भी उत्पन्न होती है, परंतु यह पहले से बहुत क्षीण होती है।
Page 5 of 60
Page 7
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: ध्व न का ोत कंपन करता बड है और वह अब भी कंपन कर रहा है — अतः ध्व न तो उत्पन्न
होगी ही। परंतु अकेला पतला बड बहुत कम आयतन क वायु को झाड़ता है, इस लए वह प्र त सेकंड बहुत कम ऊजा
वायु को दे पाता है। डब्बे पर लगे होने पर बड के कंपन डब्बे और उसके भीतर के वायु स्तंभ तक पहुँचते थे, और
वह बड़ा कं पत पृष्ठ कह अ धक वायु को ग त दे ता था। वायु के घनत्व दोलन का अ धक आयाम अथात अ धक
ऊजा वहन, अतः अ धक प्रबलता।
यह करके दे खए: कंपन करते बड को लकड़ी क मेज़ या स्ट ल के गलास से सटा द जए। ध्व न फर से प्रबल हो
जाती है — मेज़ या गलास वही काय कर रहे ह जो वाय लन का ढाँचा करता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 185
10.1 ध्व न का उत्पादन
प्र.1 मानव एवं जंतु ध्व न कस प्रकार उत्पन्न करते ह? बोलते समय अथवा गाते समय अपने गले को धीरे से स्पश
क जए। क्या आपको कह कंपन का अनुभव हुआ?
हाँ — गले के अगले भाग म, वाक् यंत्र (कंठ) पर स्पष्ट झनझनाहट अनुभव होती है।
मनुष्य और अनेक जंतुओं म ध्व न वाक् तंतुओं के कंपन से उत्पन्न होती है — ये कंठ के भीतर कसकर खची हुई पेशीय प ट्टयाँ ह।
फेफड़ से ऊपर आती वायु इनके बीच से नकलती है और इन्ह कं पत कर दे ती है; यही कंपन आपक वाणी बनते ह।
इसके बाद जीभ, ह ठ, मुँह और नासा-गुहा इस मूल ध्व न को वाणी अथवा संगीत म रूपांत रत करते ह।
जंतु दूसरे ढं ग से भी ध्व न बनाते ह: ट े और झ गुर अपने पंख अथवा टाँग को रगड़कर ध्व न उत्पन्न करते ह, अतः रगड़ने
वाले पृष्ठ ही कंपन करने वाला ोत होते ह।
वाणी का तारत्व भन्न क्य होता है: वाक् तंतु क्रयाकलाप 10.1 के तने हुए रबड़ बड जैसा व्यवहार करते ह।
कशोरावस्था म लड़क के वाक् तंतु लंबे और मोटे हो जाते ह, अतः वे प्र त सेकंड कम बार कंपन करते ह — आवृ त्त
कम, और वाणी म गहनता आ जाती है। प्रत्येक व्य क्त क ध्व न-गुणता उसके गले, मुँह और नासा-गुहा क आकृ त
पर भी नभर करती है, इसी लए आप मत्र क वाणी तुरंत पहचान लेते ह।
स्वयं जाँ चए: गले पर अँगु लयाँ रखकर पहले गुनगुनाइए, फर वही शब्द फुसफुसाकर क हए। फुसफुसाने पर
झनझनाहट लुप्त हो जाती है — फुसफुसाहट म वाक् तंतु कंपन नह करते।
क्रयाकलाप 10.2 — पृष्ठ 186
Page 6 of 60
Page 8
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
आइए, अन्वेषण कर — 10.1.1 स्व रत्र भुज
क्रयाकलाप 10.2
प्र.1 स्व रत्र भुज क एक भुजा को रबड़ पैड पर धीरे से टकराइए ( चत्र 10.4 ख) और अपने कान के समीप लाइए।
क्या आपको कोई ध्व न सुनाई दे ती है? (ध्यान र खए स्व रत्र भुज कसी कठोर सतह से न टकराएँ)
भुज ाएँ
रबड़ पैड
स्तंभ
(क ) स्विर त्र ि भुज एवं रबड़ पैड (ख) स्विर त्र ि भुज को रबड़ पैड से टकराते हुए
चत्र 10.4 (क) और (ख), पृष्ठ 186 — पुनः च त्रत रेखा चत्र। स्व रत्र भुज को उसके स्तंभ से पकड़कर उसक एक
भुजा को नरम रबड़ पैड पर धीरे से टकराया जाता है।
हाँ — एक र, शुद्ध गुंजार सुनाई दे ती है।
टक्कर से दोन भुजाएँ एक-दूसरे क ओर तथा दूर कंपन करने लगती ह। प्रत्येक बाहर क ओर ग त भुजा के पास क वायु को
संपी डत करती है और प्रत्येक भीतर क ओर ग त उसे वरल करती है, अतः संपीडन - वरलन क एक श्रृंखला आपके कान तक
पहुँचती है।
ध्व न के प्रयोग म स्व रत्र भुज ही क्य : वाणी या घंट के वपरीत यह लगभग एकल आवृ त्त (एक शुद्ध स्वर)
दे ता है। इसक आवृ त्त भुजाओं क लंबाई, मोटाई और पदाथ से न श्चत होती है, अतः चाहे जतने ज़ोर से टकराइए
वह बदलती नह — अ धक ज़ोर से टकराने पर ध्व न केवल प्रबल होती है, तीक्ष्ण नह ।
संकेत: इसे सदै व नरम रबड़ पैड पर ही टकराइए, कभी मेज़ या कसी कठोर कनारे पर नह । कठोर सतह से भुजाएँ
मुड़ या टू ट सकती ह और स्व रत्र क आवृ त्त स्थायी रूप से बदल जाती है।
Page 7 of 60
Page 9
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अब कंपन करते हुए स्व रत्र भुज क एक भुजा को जल क सतह से धीरे से स्पश कराइए। क्या आपको जल
क सतह पर तरंग न मत होती हुई दखाई दे ती ह?
हाँ — स्पश करती भुजा से चार ओर तरंग फैलती दखाई दे ती ह और जल क सूक्ष्म फुहार भी उछल सकती है।
यह क्य महत्वपूण है: आप भुजा को कंपन करते हुए दे ख नह सकते, परंतु उसका प्रभाव दे ख सकते ह। जब भी
भुजा नीचे आती है वह जल को नीचे धकेलती है; जब ऊपर जाती है जल वापस भर जाता है। यही बार-बार का
धक्का और छू ट तरंग उत्पन्न करता है। अतः ये तरंग इस बात का दृश्य प्रमाण ह क भुजाएँ वास्तव म कंपन कर रही ह
— और इस लए सुनी गई ध्व न कंपन से ही उत्पन्न हुई थी।
स्वयं जाँ चए: बना टकराए स्व रत्र भुज को जल से छु आइए — कोई तरंग नह बनती। टकराकर पुनः छु आइए
— तरंग तुरंत बनती ह और गुंजार भी धीमी पड़ जाती है, क्य क जल भुजाओं से ऊजा ले रहा है।
प्र.3 इस क्रयाकलाप के चरण 3 को कुछ बार दोहराइए। प्रत्येक बार स्व रत्र भुज क भुजाओं को पृथक-पृथक
अ भ वन्यास म अपने कान के समीप लाइए। क्या आपको प्रत्येक अ भ वन्यास म ध्व न सुनाई दे ती है?
हाँ — प्रत्येक अ भ वन्यास म ध्व न सुनाई दे ती है, यद्य प स्व रत्र घुमाने पर उसक प्रबलता कुछ बदलती है।
ऐसा क्य होता है: कंपन करती भुजाएँ केवल एक रेखा म नह , अपने चार ओर क वायु को वक्षुब्ध करती ह।
प्रत्येक वक्षुब्ध कण सभी दशाओं म अपने पड़ो सय से टकराता है, अतः संपीडन और वरलन ोत से लगभग
गोलीय तरंग के रूप म फैलते ह ( चत्र 10.10)। आप कान कह भी रख, इस फैलती तरंग का कोई न कोई भाग वहाँ
पहुँचता है।
अ भ वन्यास बदलने पर प्रबलता इस लए बदलती है क्य क दोन भुजाएँ वपरीत दशाओं म ग त करती ह और कुछ वशेष दशाओं
म उनके वक्षोभ आं शक रूप से एक-दूसरे को नरस्त कर दे ते ह। मुख्य नष्कष वही रहता है: ध्व न ोत से एक साथ अनेक
दशाओं म संच रत होती है।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 186
Page 8 of 60
Page 10
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
10.1.1 स्व रत्र भुज
co m
e m.
m as
सो चए और बताइए
.co a g l
a s eनmउत्पन्न करने के व भन्न साधन क खोज क जए।
gl
ध्व
a
प्र.1
o m
c ag
.
हर व ध अंततः एक ही बात पर आती है — कसी वस्तु कोmकंपन कराना। अंतर केवल इसम है क क्या कंपन कराया जा रहा है।
l a se
ध्व न उत्पन्न करने क ag है
क्या कंपन करता उदाहरण
m
वध
िसतार, वीणा, िगटार, एकतारा, रबड़ बैeडं m.
co
m as
खी ंचकर छोड़ना तना हुआ तार
. co a g l
s em
पहार करना
a
तना हुआ पटल अथवा धा त्वक तबला, ढोलक, मंजीरा, मंिदर की घंटी, स्विरत्र ि भुज
agl
वस्तु
बाँस ुरी, शहनाई, शंख, सीटी
s
फूँ क मारना नली के भीतर का वायु स्तंभ
coहैm a
em
. सारंगी, वायिलन agl
s
गज से रगड़ना तार, जस पर गज फेरा जाता
a
रगड़ना a l पृष्ठ
रगड़ने वालेgदोन िट े और झी ंगुर पंख या टाँगें रगड़ ते है;ं श्यामपट्ट पर चाक की
चरचराहट
co m
बोलना, गाना, जंतओ
ु ं की पुकार
m .
e
पिट्टयों के बीच से वायु वाक् तंतु
m l as
.co g
िनकालना
m a
l a se गम गैस का अचानक पसार वायु स्वयं पटाखा, मेघ गजन, गुब्बारे का फू टना, ध्विन बूम
ag मोबाइल फोन, रे िडयो, लाउडस्पीकर
m
िव तु संके त से शंकु का कं पन स्पीकर का तनुपट
a se
. com a g l
m
ase
समान सूत्र: हर पं क्त म कोई वस्तु आगे-पीछे ग त करती है। यह ग त पड़ोसी वायु को संपी डत और वरल करती है,
agl
और घनत्व का यही वक्षोभ ध्व न कहलाता है।
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 60
Page 11
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 व भन्न प्रकार के संगीत वाद्ययंत्र क एक सूची तैयार क जए और उनके कंपन करने वाले उन भाग क पहचान
क जए जो ध्व न उत्पन्न करते ह।
वाद्ययंत्र वग ध्व न उत्पन्न करने वाला कं पत भाग कंपन कैसे कराया जाता
है
िसतार, वीणा, सरोद, तत वाद्य तने हुए धातु के तार; तूबँ ा/ढाँचा ध्विन को पबल करता ख चकर छोड़ना
एकतारा है
सारंग ी, वायिलन तत वाद्य तने हएु तार गज से रगड़ना
तबला, ढोलक, म ृद ंग म, डमरू अवनद्ध ढोलशीष का तना हुआ पटल तथा भीतर की वायु प्रहार
वाद्य
बाँस ुर ी, शहनाई, सीटी सु षर वाद्य खोखली नली के भीतर का वायु स्तंभ फूँक मारना
हारमोिनयम सु षर वाद्य धातु की पतली रीड ध कनी से भेजी वायु
मंजीरा, घंटी, घटम घन वाद्य धातु या िमट्टी का ढाँचा स्वयं प्रहार
स्विरत्र ि भुज घन वाद्य दोनों भुजाएँ नरम पैड पर टक्कर
अ धकांश वाद्ययंत्र म एक से अ धक कं पत भाग क्य : अकेला तार या रीड बहुत कम वायु को ग त दे ता है,
अतः ध्व न क्षीण रहती है। वीणा का तूँबा, तबले का खोल और वाय लन का ढाँचा उसके साथ कंपन करते ह और
बहुत अ धक वायु को ग त दे ते ह — प्र त सेकंड अ धक ऊजा श्रोता तक पहुँचती है और ध्व न प्रबल हो जाती है।
क्या आप जानते ह? तबले के पटल के कद्र पर लगा काला धब्बा — स्याही — पटल के कंपन का ढं ग बदल दे ता
है। इसी से भारतीय ढोल एक न श्चत स्वर पर स्वरबद्ध कए जा सकते ह, जो संसार के अ धकांश ढोल म संभव
नह । सर सी. वी. रमन ने इसी का वस्तृत अध्ययन कया था।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 186
10.2 ध्व न का संचरण
प्र.1 ोत से ध्व न आपके कान तक कैसे पहुँचती है? ध्व न वायु से होकर संचरण (propagate) करती है परंतु क्या
यह ठोस एवं द्रव से होकर भी गमन करती है?
ध्व न कसी भौ तक माध्यम से होकर कान तक पहुँचती है, और हाँ — यह गैस के साथ-साथ ठोस और द्रव से होकर भी
गमन करती है।
Page 10 of 60
Page 12
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
ोत अपने पास के कण को दो लत कर दे ता है। ये कण अपने पड़ो सय से टकराकर संपीडन आगे बढ़ाते ह; पड़ोसी आगे बढ़ाते ह;
और इस प्रकार वक्षोभ कण-दर-कण कणपटल तक पहुँच जाता है। यह काय करने वाला पदाथ माध्यम कहलाता है।
ठोस: क्रयाकलाप 10.3 — डेस्क पर कान रखकर सुनने पर खर च क ध्व न वायु क तुलना म कह अ धक स्पष्ट सुनाई दे ती
है।
द्रव: क्रयाकलाप 10.4 — जल म डू बे दो चम्मच क टकराहट भी सुनाई दे ती है।
गैस: वायु से होकर सामान्य श्रवण।
ठोस म ध्व न सबसे अ तरह क्य चलती है: ठोस म कण पास-पास और मज़बूती से बँधे होते ह, अतः धक्का
अगले कण तक लगभग तुरंत पहुँच जाता है। गैस म कण दूर-दूर होते ह और टकराने से पहले कुछ दूरी तय करते ह,
अतः वक्षोभ धीरे-धीरे बढ़ता है। इसी लए ध्व न ठोस म सबसे तीव्र (स्ट ल ≈ 5000 m s⁻¹), द्रव म कम (जल ≈
1500 m s⁻¹) और गैस म सबसे धीमी (वायु ≈ 340 m s⁻¹) होती है।
क्रयाकलाप 10.3 — पृष्ठ 186 – 187
आइए, जाँच कर — 10.2 ध्व न का संचरण
क्रयाकलाप 10.3
प्र.1 अब अपना एक कान डेस्क पर र खए और दूसरा कान बंद क जए और चत्र 10.5 म दशाए अनुसार पुनः सु नए।
क्या आप डेस्क के माध्यम से ध्व न सुन पाते ह?
दू सरा कान बंद िम त्र स्
डे क पर आघात करता है
कान डेस्क पर
डेस्क
चत्र 10.5, पृष्ठ 187 — पुनः च त्रत रेखा चत्र। एक वद्याथ अपना एक कान डेस्क पर रखता है और दूसरा कान बंद कर
लेता है जब क उसका मत्र उसी डेस्क पर आघात करता है।
हाँ — और डेस्क से आने वाली आघात या खर च क ध्व न वायु से आने वाली ध्व न क तुलना म स्पष्ट रूप से अ धक
प्रबल एवं तीक्ष्ण सुनाई दे ती है।
Page 11 of 60
Page 13
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: आघात से डेस्क क लकड़ी कंपन करने लगती है। ठोस के कण पास-पास और मज़बूती से बँधे
होने के कारण प्रत्येक कण वक्षोभ को अगले कण तक लगभग तुरंत पहुँचाता है और ऊजा बहुत कम इधर-उधर
बखरती है। वायु म वही ऊजा सभी दशाओं म फैलकर तेज़ी से क्षीण हो जाती है। अतः डेस्क मूल ऊजा का कह
बड़ा भाग आपके कान तक पहुँचा दे ती है।
नष्कष: ध्व न ठोस से होकर भी संचरण कर सकती है। दूसरा कान बंद करना आवश्यक है — इससे वायु से आने वाली क्षीण
ध्व न कट जाती है और आप केवल डेस्क से आई ध्व न का ही आकलन करते ह।
क्या आप जानते ह? ठोस म ध्व न वायु क तुलना म लगभग 15 – 20 गुना तेज़ चलती है। इसी लए रेल क पटरी
आती हुई रेलगाड़ी क ध्व न वायु से बहुत पहले पहुँचा दे ती है, और इसी लए पृष्ठ 198 के प्रश्न 11 म 340 m लंबी
स्ट ल क बाड़ पर दोन पथ के बीच लगभग 0.93 s का अंतर मलता है।
क्रयाकलाप 10.4 — पृष्ठ 187
आइए, जाँच कर — 10.2 ध्व न का संचरण
क्रयाकलाप 10.4
प्र.1 अब दोन चम्मच को बाल्ट के पा अथवा तल को स्पश कए बना जल म डु बोइए और उन्ह जल के भीतर पुन:
एक-दूसरे से टकराइए ( चत्र 10.6 ख)। क्या अब भी आपको उत्पन्न ध्व न सुनाई दे ती है?
जल जल
(क) वायु मे ं टकराते हुए (ख) जल मे ं टकराते हुए
चत्र 10.6, पृष्ठ 187 — पुनः च त्रत रेखा चत्र। धातु के दो चम्मच को (क) जल के ऊपर वायु म और (ख) जल म पूरी
तरह डु बोकर, बाल्ट के पा या तल को स्पश कए बना टकराया जाता है।
हाँ, टकराहट स्पष्ट सुनाई दे ती है — वायु म सुनी ध्व न से कुछ मंद और गुणता म भन्न, पर न श्चत रूप से सुनाई दे ती है।
Page 12 of 60
Page 14
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
टक्कर से चम्मच कंपन करने लगते ह। कंपन करती धातु अपने चार ओर के जल को संपी डत और वरल करती है, अतः संपीडन-
वरलन जल से होकर आगे बढ़ते ह, जल क सतह पार कर वायु म आते ह और आपके कान तक पहुँचते ह।
चम्मच बाल्ट को छू ने क्य नह चा हए: य द वे पाश्व या तल को छू ल तो कंपन ठोस बाल्ट और मेज़ के रास्ते भी
कान तक पहुँच सकते ह। उन्ह अलग रखने पर एकमात्र शेष पथ जल → वायु रह जाता है, अतः प्रयोग वास्तव म
यही जाँचता है क द्रव ध्व न का संचरण करते ह या नह ।
संकेत: ध्व न क गुणता इस लए बदलती है क्य क जल और वायु स्वर क व भन्न आवृ त्तय को असमान रूप से
वहन करते ह, और कुछ ध्व न जल क सतह से वापस पराव तत हो जाती है।
प्र.2 य द ध्व न द्रव म संचरण नह करती तो क्या आप यह ध्व न सुन पाते?
नह । चम्मच को बाल्ट से अलग रखने पर उन्ह छू ने वाला एकमात्र माध्यम जल ही है।
ध्विन का पथ: कं पन करते चम्मच → जल → जल की सतह → वायु → कान
य द ध्व न द्रव म संच रत न होती तो इस ंखला क पहली ही कड़ी टू ट जाती। कंपन धातु क सतह पर ही समाप्त हो जाता, कोई
संपीडन चम्मच से बाहर ही न नकलता, और आपको कुछ भी सुनाई न दे ता।
यह तक सही क्य है: वै ा नक कसी दावे क जाँच इसी प्रकार करते ह — हर वैक ल्पक पथ हटा द जए और
दे खए क प्रभाव बचता है या नह । चूँ क टकराहट सुनाई दे ती है, शेष एकमात्र व्याख्या यही है क जल ने उसे वहन
कया। अतः ध्व न ठोस और गैस क भाँ त द्रव से होकर भी संच रत होती है।
क्या आप जानते ह? जल म ध्व न क चाल वायु क तुलना म लगभग 4 – 5 गुना अ धक होती है और वह क्षीण
होने से पहले कह अ धक दूरी तय करती है। इसी लए पनडु ब्बयाँ खोजने और महासागर क तली का मान चत्र बनाने
के लए प्रकाश या रे डयो नह , सोनार प्रयुक्त होता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 187
Page 13 of 60
Page 15
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
10.2 ध्व न का संचरण
co m
e m.
m l as
.co a g
ऐसा ान जहाँ कोई माध्यम (द्रव्य) नह होता उसे नवात (vacuum) कहा जाता है। क्या आप नवात म ध्व न
m
प्र.1
l a se
सुन पाएंगे?
a g
co m
. ag
नह । नवात म ध्व न नह सुनी जा सकती, क्य क कण के बना ध्व न तरंग के संचरण का कोई साधन नह है।
e m
l as
इसका प्रमाण है नवात बेलजार प्रयोग ( चत्र 10.7):
a g
1. बंद बेलजार म रखी वद्युत घंट का स्वच ऑन कया जाता है — ध्व न प्रबल सुनाई दे ती है।
m
2. नवात पंप से धीरे-धीरे वायु नकाली जाती है। ध्व न क्रमशः धीमी होती जाती है।
co
m.
3. लगभग नवात क स्थ त म घंट को बजते हुए दे खा तो जा सकता है पर ध्व न सुनाई नह दे ती।
m as e
.co g l
4. वायु पुनः प्र वष्ट कराने पर ध्व न लौट आती है और धीरे-धीरे पूव जतनी प्रबल हो जाती है।
a
emक्य होता है: संपीडन वह क्षेत्र है जहाँ कण पास-पास आ गए ह । जार म जतने कम कण बचगे, इस नकटता
a s
a gl
ऐसा
को आगे बढ़ाने वाले संघट्ट भी उतने ही कम ह गे, अतः जार क द वार और आपके कान तक उत्तरोत्तर कम ऊजा
m a s
agl
पहुँचेगी। कण बल्कुल न ह तो संपी डत करने और आगे बढ़ाने को कुछ भी नह — इस लए ध्व न तरंग का अ स्तत्व
m
ही संभव नह । ध्व न एक यां त्रक तरंग है: उसे भौ तक माध्यम चा हए। .co
l a se
a g
संकेत: ध्यान द जए क ध्व न लुप्त होते समय भी घंट दखाई दे ती रहती है — प्रकाश आपके पास पहुँचता रहता
co
है। प्रकाश यां त्रक तरंग नह है, अतः वह नवात को सरलता से पार कर लेता है। अंतर याद रखने का यही सबसे स्पष्ट
m
m .
as e
ढं ग है।
m l
m .co a g
l a se
g
a सो चए और बताइए — पृष्ठ 188
se m
10.2.1 ध्व न संचरण हेतु माध्यम क आवश्यकता होती है
com g l a
m . a
ase
सो चए और बताइए
agl
नीचे दए गए अ भकथन एवं कारण को प ढ़ए और उनके संबंध म आगे दए गए वकल्प म से सही वकल्प का
m
प्र.1
. c o
चयन क जए। अ भकथन— कसी बंद जार म से अ धकांश वायु नकाल दे ने के प ात हम इसम बजती हुई घंट
s e m होती है। (i) अ भकथन
क ध्व न नह सुन पाते ह। कारण— ध्व न को संचरण हेतु एक माध्यम क आवश्यकता
. comऔर a g
कारण दोन सत्य ह, परंतु कारण अ भकथन क सही व्याख्या नह करताla है। (ii) अ भकथन और कारण
as em दोन सत्य ह, और कारण अ भकथन क सही व्याख्या करता है। (iii) अ भकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।
agl
(iv) अ भकथन असत्य है, परंतु कारण सत्य है।
.c
s e m
. c om a g la
(ii) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह,m
a s e और कारण अ भकथन क सही व्याख्या करता है।
लlजार प्रयोग म अ धकांश वायु नकाल दे ने पर घंट बजती दखती तो है पर व्यावहा रक रूप से
अ भकथन सत्य है: नवातaबेg
सुनाई नह दे ती।
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 14 of 60
Page 16
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
कारण सत्य है: ध्व न एक यां त्रक तरंग है और उसे संचरण हेतु भौ तक माध्यम चा हए।
कारण अ भकथन क व्याख्या करता है: वायु नकालने से वे ही कण हट जाते ह जो संपीडन- वरलन को आगे बढ़ा रहे थे।
माध्यम लगभग शेष न रहने पर तरंग जार क द वार और फर आपके कान तक पहुँच ही नह सकती — अतः ध्व न सुनाई नह
दे ती। कारण केवल एक सत्य तथ्य नह , अ भकथन का वास्त वक हेतु है।
अ भकथन–कारण प्रश्न हल करने क व ध: क्रम से तीन बात जाँ चए — (1) क्या अ भकथन स्वयं म सत्य है?
(2) क्या कारण स्वयं म सत्य है? (3) क्या कारण इस प्रश्न का उत्तर दे ता है क 'अ भकथन सत्य क्य है?' तीन का
उत्तर हाँ होने पर ही 'कारण सही व्याख्या करता है' वाला वकल्प चु नए।
क्रयाकलाप 10.5 — पृष्ठ 188
आइए, अवलोकन कर — 10.3 ध्व न तरंग
क्रयाकलाप 10.5
प्र.1 अपने सरे से स्लंक को अपने मत्र क ओर बलपूवक धके लए और उसे तुरंत वापस ख च ली जए ( चत्र 10.8)।
क्या आप स्लंक म उत्पन्न कसी वक्षोभ (disturbance) का अवलोकन करते दे खते ह जो आपके मत्र क
ओर बढ़ता है?
फे रे पास-पास आ गए है।ं
फे रों के मध्य दूरी बढ़ गई है।
चत्र 10.8, पृष्ठ 188 — पुनः च त्रत रेखा चत्र। एक सरे पर तेज़ धक्का दे कर तुरंत ख चने पर फेर का पास-पास आया
हुआ क्षेत्र ( वक्षोभ) खची हुई स्लंक के अनु दश आगे बढ़ता है।
हाँ। एक ऐसा क्षेत्र जहाँ फेरे पास-पास समट गए ह, स्लंक के अनु दश आपके मत्र क ओर दौड़ता हुआ दखाई दे ता है।
ऐसा क्य होता है: आपके धक्के से पहले कुछ फेरे आपस म समट जाते ह। प्रत्येक समटा फेरा अपने आगे वाले
फेरे को दबाता है और फर वापस लौट आता है, अतः यह समटाव फेरे-दर-फेरे आगे बढ़ता जाता है। स्लंक के
अनु दश जो गमन करता है वह नकटता का प्र तरूप है, फेरे स्वयं नह — प्रत्येक फेरा थोड़ा आगे बढ़कर अपनी पूव
स्थ त पर लौट आता है।
Page 15 of 60
Page 17
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
यह ध्व न तरंग के एकल संपीडन का उत्तम प्र तरूप है: ोत पर धक्का, संघट्ट ारा आगे बढ़ता समटाव, और माध्यम का कोई
सामू हक प्रवाह नह ।
प्र.2 अब स्लंक के सरे को अनेक बार जल्द -जल्द आगे क ओर धक्का द जए तथा पीछे क ओर ख च ली जए
( स्लंक के सरे को ख चना और धक्का दे ना नरंतर उत्पन्न होने वाली ध्व न के सदृश है)। क्या स्लंक म वक्षोभ
क एक श्रृंखला उत्पन्न होती है? क्या ये वक्षोभ स्लंक क पूण लंबाई के अनु दश ग त करते ह? क्या स्लंक पर
लगाया गया चह्न वक्षोभ क दशा के समानांतर आगे-पीछे ग त करता है?
तीन का उत्तर हाँ है।
वक्षोभ क श्रृंखला उत्पन्न होती है। जहाँ फेरे पास-पास ह वे क्षेत्र और जहाँ वे दूर फैले ह वे क्षेत्र क्रम से आते ह।
ये स्लंक के अनु दश गमन करते ह, एक के बाद एक, आपके सरे से आपके मत्र के सरे तक।
च ह्नत फेरा गमन नह करता। वह केवल अपनी वरामावस्था के इधर-उधर दोलन करता है, और वह भी वक्षोभ क गमन
दशा के समानांतर।
स्लंक म वायु म ध्व न तरंग म
फे रे पास-पास संपीडन — घनत्व औसत से अिधक
फे रे दू र -दू र िवरलन — घनत्व औसत से कम
िचि त फे रा अपनी जगह दोलन करता वायु का कण अपनी माध्य िस्थित के इधर-उधर दोलन करता
िसमटाव का पितरूप आगे बढ़ ता ध् विन तरंग आगे संचिरत होती
इससे ध्व न अनुदै य तरंग क्य सद्ध होती है: कण उसी रेखा के अनु दश कंपन करते ह जसके अनु दश तरंग
चलती है। ऐसी तरंग को अनुदै य तरंग कहते ह। रस्सी को ऊपर-नीचे हलाकर बनाई गई तरंग से तुलना क जए —
वहाँ कण गमन दशा के लंबवत ग त करते ह, और वह अनुप्रस्थ तरंग है ( चत्र 10.13)।
संकेत: च ह्नत फेरा ही इस क्रयाकलाप का मुख्य बदु है। यह इस बात का दृश्य प्रमाण है क ऊजा गमन करती है
जब क द्रव्य अपनी जगह रहता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 190
Page 16 of 60
Page 18
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
10.3 ध्व न तरंग
प्र.1 य द कोई माध्यम (अथात कण) ही वद्यमान न हो तो क्या ध्व न तरंग का संचरण संभव है?
नह । कसी भौ तक माध्यम क अनुप त म ध्व न तरंग संच रत नह हो सकत ।
ध्व न तरंग स्वयं कण के उच्च और नम्न घनत्व का प्र तरूप है। य द कण ही न ह तो घनत्व बढ़ाने-घटाने को कुछ नह , और वक्षोभ
को टकराकर आगे बढ़ाने वाला भी कोई नह । इस प्रकार माध्यम क माँग करने वाली तरंग यां त्रक तरंग कहलाती ह, और ध्व न उन्ह
म से एक है।
यां त्रक तरंग अयां त्रक तरंग
माध्यम आवश्यक? हाँ नही ं
उदाहरण ध् विन; िस्लंकी की तरंगें; भूकंपीय तरंगें पकाश
िनव त पार कर सकती है? नही ं हाँ — इसीिलए सूय और तारों का पकाश पथ्ृ वी तक पहचु ँ ता है
पकार ध् विन अनुदै य है; भूकंपीय तरंगें दोनों पकार की पकाश अनुपस्थ है
क्या आप जानते ह? भूकंप पृथ्वी से होकर दोन प्रकार क यां त्रक तरंग भेजते ह। अनुदै य भूकंपीय तरंग सबसे
तेज़ चलती ह और भूकंप-लेखी पर सबसे पहले पहचानी जाती ह, इसी लए भूकंप क आरं भक चेतावनी उन्ह से
मलती है।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 191
10.3 ध्व न तरंग
सो चए और बताइए
प्र.1 नीचे दए गए अ भकथन एवं कारण को प ढ़ए और उनके संबंध म आगे दए गए वकल्प म से सही वकल्प का
चयन क जए। अ भकथन— संपीडन एवं वरलन माध्यम म ग त करते ह। कारण — माध्यम के कण तरंग के
साथ लगातार आगे बढ़ते रहते ह। (i) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह, परंतु कारण अ भकथन क सही
व्याख्या नह करता है। (ii) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और कारण अ भकथन क सही व्याख्या करता
है। (iii) अ भकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है। (iv) अ भकथन असत्य है, परंतु कारण सत्य है।
(iii) अ भकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।
अ भकथन सत्य है। संपीडन और वरलन वास्तव म माध्यम म आगे ग त करते ह — ध्व न तरंग यही है।
कारण असत्य है। माध्यम के कण तरंग के साथ आगे नह बढ़ते। प्रत्येक कण केवल अपनी माध्य स्थ त के इधर-उधर, संचरण
क दशा के समानांतर, दोलन करता है और तरंग के गुज़र जाने पर वह लौट आता है।
Page 17 of 60
Page 19
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
कण र रहते हुए भी प्र तरूप कैसे चलता है: क्रयाकलाप 10.5 के च ह्नत फेरे को याद क जए। वह थोड़ा
आगे जाता है, वापस आता है, फर आगे जाता है — फर भी समटा हुआ क्षेत्र पूरी स्लंक पार कर जाता है। प्रत्येक
कण अपने पड़ोसी को धक्का दे कर पीछे हट जाता है; पड़ोसी अगले को धक्का दे कर पीछे हट जाता है। इस प्रकार
नकटता आगे बढ़ती है, कोई कण यात्रा नह करता। ोत से कान तक जो पहुँचता है वह ऊजा है, द्रव्य नह ।
स्वयं जाँ चए: य द कारण सत्य होता तो लाउडस्पीकर के सामने खड़े होने पर उससे नकलती हुई लगातार हवा
अनुभव होती। ऐसा नह होता — यही प्रमाण है क वायु आपक ओर बह नह रही।
क्रयाकलाप 10.6 — पृष्ठ 191 – 192
आइए, प्रयोग कर — 10.4 ध्व न तरंग क ऊजा
क्रयाकलाप 10.6
प्र.1 पात्र को छु ए बना धातु क प्लेट पर डंडे से चोट मारकर उसके समीप एक प्रबल ध्व न उत्पन्न क जए। शीट पर
दान का अवलोकन क जए। क्या ध्व न का दान पर कोई प्रभाव पड़ता है?
हाँ — तनी हुई शीट पर रखे दाने उछलते और इधर-उधर सरकते ह, जब क पात्र को कसी ने छु आ तक नह ।
ऐसा क्य होता है, चरण दर चरण:
1. चोट खाई धातु क प्लेट कंपन करती है और वायु म संपीडन- वरलन भेजती है।
2. ये तनी हुई शीट तक पहुँचते ह। संपीडन उसे दबाता है, वरलन उसे छोड़ता है — इस प्रकार शीट प्र त सेकंड कई
बार दबती-छू टती है और कंपन करने लगती है।
3. कंपन करती शीट अपने ऊपर रखे दान को ऊपर उछाल दे ती है।
दाने गुरुत्व के वरुद्ध ऊपर उठे ह, अतः उन पर काय हुआ है। यह काय ध्व न से ही आ सकता था, इस लए क्रयाकलाप सद्ध करता
है क ध्व न ऊजा वहन करती है। जब ोत कंपन करता है तो वह माध्यम को ऊजा स्थानांत रत करता है; माध्यम के कण अन्य
कण से टकराकर उस ऊजा को आगे बढ़ाते ह।
संकेत: दान को समान रूप से बखे रए, एक जगह ढे र न लगने द जए — ढे र भारी होता है और उसे उठाने म
अ धक ऊजा लगती है, जससे प्रभाव दखना क ठन हो जाता है।
Page 18 of 60
Page 20
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
emके दाने लेकर
प्र.2 व भन्न ध्व न ोत के साथ इस क्रयाकलाप के चरण 4 को दोहराइए और अनाज के दान पर पड़ने वाले प्रभाव
m a s
co दोहराइए। gl
का अवलोकन क जए। आप ध्व न क प्रबलता को घटा या बढ़ा सकते ह। भन्न- भन्न अनाज
. a
em
क्रयाकलाप
l a s
ag
co m
ध्व न जतनी प्रबल होगी, दाने उतना ही ऊँचा और तीव्रता से उछलगे। मंद ध्व न पर वे मु श्कल से काँपते ह; अत्य धक प्रबल
ध्व न पर वे शीट से उछलकर बाहर गर जाते ह।
m . ag
l a se
आप क्या बदलते ह g दखता है
aक्या कारण
प्ले ट पर अिधक शिक्त से पहार (पबल ध्विन) दाने कही ं अिधक ऊँ चा
co m
अ धक आयाम → तरंग अ धक ऊजा वहन करती है →
m.
उछलते है ं
e
शीट अ धक वस्था पत होती है
m l as
m .co
ोत को दू र ले जाना दाने कम गित करते है ं
a g
वही ऊजा बड़े क्षेत्रफल म फैल जाती है, अतः शीट पर
l a se तीव्रता घट जाती है
g
a भारी दानों (नमक, चावल) के स्थान पर हल्के हल्के दाने अिधक और समान ऊजा कम द्रव्यमान पर अ धक वस्थापन दे ती है
सरलता से उछलते है ं
om a s
agl
दाने (सूजी, चाक-पाउडर)
पभावem . c
s
ीण और मंद पड़ जाता
glहैa
शीट का तनाव ढीला करना क्ष ढ ली शीट ध्व न तरंग के तीव्र धक्क का ठ क-ठ क
a
अनुसरण नह कर पाती
. c om
प्रबलता और आयाम साथ-साथ क्य बढ़ते ह: अ धक ज़ोर से प्रहार करने पर प्लेट प्र त सेकंड उतनी ही बार
कंपन करती है (आवृ त्त वही रहती है, इसी लए स्वर वही सुनाई दे ता है)। बदलता है यह कm
s e
a आयाम। अ धक आयाम क
झूलतीoहैm
प्लेट कतनी दूर तक
. c , जससे प्रत्येक संपीडन म घनत्व प रवतन बड़ा हो जाता है — अथातaअglधक
mग अ धक ऊजा वहन करती है, अतः शीट तक प्र त सेकंड अ धक ऊजा पहुँचती है और दाने ऊँचा उछलते ह।
seतरं
a
agl
se m
com g l a
m . a
ase
सो चए और बताइए — पृष्ठ 192
agl
10.4 ध्व न तरंग क ऊजा
सो चए और बताइए
. com
m a s emल खत म से आपके कान तक
co क्या पहुँचता है? (i) स्व रत्र भुज के समीप के वायु कण (ii) ध्व न aतरंgगl ारा वा हत ऊजा (iii) स्व रत्र भुज
प्र.1 जब ध्व न कसी स्व रत्र भुज से आपके कान तक पहुँचती है तो वास्तव म नम्न
.
asem
l
का पदाथ (iv) संपी डत वायु क नरंतर धारा
a g
.c
s e m
m a
(ii) ध्व न तरंग ारा वा हत ऊजा।
m . co agl
l a se
g को धक्का देता है, और यह क्रम चलता रहता है। स्व रत्र भुज से कणपटल तक पूरी दूरी
जो वायु कण भुजाओं के पास थे वे वह रहते ह। प्रत्येक कण केवल अपनी माध्य स्थ त के इधर-उधर दोलन करता है और अपने
पड़ोसी को धक्का दे ता है; पड़ोसीaअगले
जो तय करता है वह वक्षोभ, और उसके साथ ऊजा है।
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 19 of 60
Page 21
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प नणय कारण
(i) स्विरत्र ि भुज के समीप के वायु कण गलत वे कण केवल अपनी माध्य स्थ त के इधर-उधर कंपन करते ह; यात्रा नह करते
(ii) ध्विन तरंग ों ारा वािहत ऊज सही संघट्ट ारा ऊजा कण-दर-कण स्थानांत रत होती है
(iii) स्विरत्र ि भुज का पदाथ गलत स्ट ल आपके हाथ म ही रहता है; उसम से कुछ नकलता नह
(iv) संपीिडत वायु की िनरंतर धारा गलत संपीडन और वरलन क्रम से आते ह; वायु का कोई एकतरफा प्रवाह नह होता
संकेत: माइक्रोफोन इसे मूत रूप दे ता है। उसके तनुपट पर पहुँची ध्व न ऊजा वद्युत ऊजा म बदल जाती है; स्पीकर
यही ंखला उल्ट दशा म चलाता है। हर चरण पर जो चीज़ हस्तांत रत होती है वह ऊजा ही है।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 193
Page 20 of 60
Page 22
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
10.5 ध्व न तरंग का आलेखीय नरूपण
सो चए और बताइए
प्र.1 दो ध्व न तरंग के लए माध्यम का घनत्व प रवतन चत्र 10.17 (क) और (ख) म दशाया गया है। इस पर संपीडन
और वरलन को C एवं R ारा अं कत क जए। चत्र 10.17 (ग) और (घ) म दए गए आलेख म अक्ष को अं कत
क जए और चत्र 10.17 (क) और (ख) के संगत वक्र ख चए।
(क) (ख)
(ग) (घ)
चत्र 10.17, पृष्ठ 193। (क) और (ख) म दो ध्व न तरंग के लए माध्यम का घनत्व दशाया गया है; (ग) और (घ) रक्त
आलेख ह जन पर अक्ष अं कत करके वक्र ख चने ह।
(क) और (ख) पर अंकन। जहाँ बदु पास-पास समटे ह वहाँ घनत्व औसत से अ धक है — वहाँ C ल खए। जहाँ बदु वरल ह
वहाँ घनत्व औसत से कम है — वहाँ R ल खए। मु द्रत चत्र म इन क्षेत्र के कद्र से होकर नदशक रेखाएँ ख ची गई ह।
(क) म बाईं ओर क पहली बदुदार नदशक रेखा सघन पट्ट से होकर जाती है, अतः वहाँ C, अगली बदुदार रेखा पर R और
इसी क्रम म प्रत्येक बदुदार रेखा पर बारी-बारी से C तथा R अं कत क जए। इनके बीच क अ वरल रेखाएँ वे स्थान दशाती ह
जहाँ घनत्व ठ क माध्य के बराबर है।
(ख) म नदशक रेखाएँ ठ क उन्ह स्थान पर ह, परंतु बदुओं का प्र तरूप आधे तरंगदै य से खसका हुआ है: अब पहली
बदुदार रेखा वरल पट्ट से होकर जाती है, अतः वहाँ R और अगली बदुदार रेखा पर C आएगा। जो स्थान (क) म संपीडन है
वही (ख) म वरलन है। दोन प ट्टय का तरंगदै य समान है।
(ग) और (घ) के अक्ष का अंकन। क्षै तज अक्ष पर दूरी और ऊध्वाधर अक्ष पर घनत्व ल खए, तथा माध्य घनत्व के लए एक
क्षै तज बदुदार रेखा ख चए।
वक्र ख चना। प्रत्येक C पर श्रृंग (अ धकतम घनत्व) और प्रत्येक R पर गत (न्यूनतम घनत्व) आएगा। अतः
Page 21 of 60
Page 23
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
(ग), जो (क) के संगत है: वक्र ऊध्वाधर अक्ष पर स्थत पहली बदुदार नदशक रेखा से, माध्य घनत्व रेखा के ऊपर श्रृंग से
आरंभ होता है।
(घ), जो (ख) के संगत है: वही वक्र आधे तरंगदै य से खसका हुआ — जहाँ (ग) म श्रृंग था वहाँ (घ) म गत होगा।
(क) / (ग)
C R C R C R C
घनत्व माध्य
दू र ी →
(ख) / (घ)
घनत्व
R C R C
ऊपर: (क) का बदु-प्र तरूप C और R के अंकन स हत तथा उसके नीचे संगत घनत्व–दूरी आलेख (ग) — प्रत्येक C पर श्रृंग, प्रत्येक R पर
गत। नीचे: पट्ट (ख) के लए आलेख (घ), वही तरंग आधे तरंगदै य से खसक हुई।
बदुओं के चत्र से आलेख चकनी तरंग जैसा क्य बनता है: आलेख कण को नह , कसी एक क्षण पर प्रत्येक
दूरी पर माध्यम के घनत्व को आले खत करता है। संपीडन के मध्य तक घनत्व चकने ढं ग से अ धकतम तक बढ़ता
है और वरलन के मध्य तक चकने ढं ग से न्यूनतम तक घटता है, अतः आलेख माध्य घनत्व रेखा के इधर-उधर एक
चकनी वक्र बन जाता है।
संकेत: शब्दावली स्पष्ट र खए — श्रृंग आलेख का उच्चतम बदु है (अ धकतम घनत्व, अथात संपीडन) और गत
नम्नतम बदु (न्यूनतम घनत्व, अथात वरलन)। ध्व न तरंग अनुदै य ही रहती है, भले उसका आलेख लहरदार दखे।
क्रयाकलाप 10.7 — पृष्ठ 194
Page 22 of 60
Page 24
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
आइए, प्रयोग कर ( नदशन क्रयाकलाप) — 10.6.1 तरंगदै य, आवृ त्त और आवतकाल
क्रयाकलाप 10.7
प्र.1 ‘सा’ क आवृ त्त के सापेक्ष प्रत्येक स्वर क आवृ त्त का अनुपात ात क जए और उनक परस्पर तुलना क जए।
क्या आपको कोई प्र तरूप (pattern) दखाई दे ता है।
हाँ — आवृ त्तयाँ बराबर अंतराल पर नह बढ़त , परंतु 'सा' के सापेक्ष उनके अनुपात सरल भन्न होते ह, और ऊपर वाला
'सा' ठ क नीचे वाले 'सा' का दुगुना नकलता है।
स्वर प्रारूपी मापी गई आवृ त्त 'सा' से अनुपात सरल भन्न
सा 240 Hz 1.00 1
रे 270 Hz 1.13 9/8
गा 300 Hz 1.25 5/4
मा 320 Hz 1.33 4/3
पा 360 Hz 1.50 3/2
धा 400 Hz 1.67 5/3
िन 450 Hz 1.88 15/8
सा (ऊपर वाला) 480 Hz 2.00 2
'पा' का अनुपात = 360 Hz ÷ 240 Hz = 1.5 = 3/2
ऊपर वाले 'सा' का अनुपात = 480 Hz ÷ 240 Hz = 2.0
प्र तरूप: 'सा' से ऊपर वाले 'सा' तक आवृ त्त बढ़ती जाती है और प्रत्येक चरण एक सरल पूणाक अनुपात है। चूँ क
ऊपर वाला 'सा' नीचे वाले का ठ क दुगुना है, दोन सरे मलकर एक अष्टक (octave) बनाते ह — ऐसे दो स्वर का
अंतराल जनम एक क मूल आवृ त्त दूसरे क दुगुनी हो (उदाहरण के लए 200 Hz और 400 Hz)। इसी लए दोन
'सा' 'एक ही स्वर, ऊँचे पर' जैसे लगते ह।
संकेत: आपके अपने मान इस ता लका से ठ क नह मलगे, क्य क आप कस तारत्व से आरंभ करते ह यह आपक
वाणी या ऐप्प क से टग पर नभर है। जो अवश्य मलना चा हए वे ह अनुपात, वशेषकर अष्टक का 2 : 1।
Page 23 of 60
Page 25
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
य द अपनी वाणी और मोबाइल ज नत स्वर दोन का उपयोग कया गया है तो समान स्वर के लए उनक
e
प्र.2
m l as
.co
आवृ त्तय क तुलना क जए।
a g
se m
g l a
a
एक ही नाम के स्वर के लए दोन आवृ त्तयाँ नकट तो होती ह पर प्रायः बल्कुल समान नह , और स्वर के बीच के अनुपात
co m
फर भी वही प्र तरूप दखाते ह।
e m . ag
as
ऐप्प लगभग शुद्ध एकल आवृ त्त दे ता है, अतः स्पेक्ट्रम पर उसका शखर स्थर और तीक्ष्ण दखता है।
a g l
आपक वाणी मूल आवृ त्त के साथ अनेक अ धस्वरक दे ती है, अतः स्पेक्ट्रम पर एक प्रबल नम्न शखर के साथ कई क्षीण
उच्च शखर दखते ह। तुलना मूल आवृ त्त से ही करनी चा हए।
co m
वाणी का पा ांक कुछ हट् ज़ इधर-उधर डोलता भी है क्य क स्वर को पूणतः स्थर रखना क ठन है।
se m.
o m l a
g ही रहेगा और 'पा' आपके
आप.c'सा' 245 Hz पर गाएँ और ऐप्प 240 Hz बजाए, तब भी स्वर पहचान मaएक
दोन भन्न होकर भी 'एक ही स्वर' कैसे: हमारा कान जसे स्वर मानता है वह मुख्यतः मूल आवृ त्त से तय होता है।
यदm
l a se 'सा' का लगभग 1.5 गुना ही रहेगा। जो भन्न होता है वह है ध्व नगुणता (timbre) — अ धस्वरक का
a g अपने
प्र तरूप और तीव्रता — और यही कारण है क बाँसुरी, एकतारा और मानव वाणी समान प्रबलता पर समान स्वर
m a s
.co agl
बजाने पर भी पूणतः भन्न सुनाई दे ती ह।
se m
g l a
a
सो चए और बताइए — पृष्ठ 195
co m
.
10.6.1 तरंगदै य, आवृ त्त और आवतकाल
e m
m l as
.co g
सो चए और बताइए
em a
a s
agl प्र.1 क्रयाकलाप 10.1 को पहले एक बार मोटे रबड़ बड के साथ इसके प ात पतले रबड़ बड के साथ दोहराइए। क्या
se m
पतला रबड़ बड मोटे रबड़ बड क तुलना म अ धक तीव्र कंपन करता है? य द हाँ, तब पतले रबड़ बड ारा उत्पन्न
com
ध्व न क आवृ त्त और आवतकाल मोटे रबड़ बड ारा उत्पन्न ध्व न क आवृ त्त एवं आवतकाल से कस प्रकार
g l a
m . a
ase
भन्न होते ह?
उत्तर agl
हाँ — समान लंबाई और समान तनाव पर पतला बड मोटे बड क तुलना म अ धक तीव्र कंपन करता है।
co m
m .
m as e
.co
बड कंपन क दर आवृ त्त Ν आवतकाल T = 1/Ν
a g l सुनाई दे ने वाली ध्व न
a s em पतला बैडं
gl
अ धक तीव्र अिधक कम तीक्ष्ण — उ च्च तारत्व
a c
कम अिधक गंभीर — कम तारत्व
m .
e
मोटा बैड
ं कम तीव्र
m a s
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 24 of 60
Page 26
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
ν = 1/T (समीकरण 10.1)
यिद पतला बैड
ं 1 s में 400 दोलन पूरे करे, तो ν = 400 Hz और T = 1/400 s = 0.0025 s
यिद मोटा बैड
ं 1 s में 200 दोलन पूरे करे, तो ν = 200 Hz और T = 1/200 s = 0.005 s
मोटाई से अंतर क्य पड़ता है: मोटे बड क प्रत्येक सट मीटर लंबाई पर अ धक द्रव्यमान होता है। वही प्रत्यानयन
बल अब अ धक द्रव्यमान को त्व रत करता है, अतः बड आगे-पीछे लौटने म अ धक समय लेता है — प्रत्येक पूण
दोलन लंबा हो जाता है। अ धक आवतकाल का अथ है कम आवृ त्त, क्य क ν और T परस्पर व्युत्क्रम ह।
क्या आप जानते ह? इसी लए सतार या वीणा म अलग-अलग मोटाई के तार साथ-साथ लगे होते ह: मोटे तार नम्न
स्वर दे ते ह और पतले तार उच्च स्वर, वह भी लगभग समान तनाव पर।
प्र.2 य द वायु से भरी एक लंबी नली के दोलायमान पस्टन ारा उत्पन्न ध्व न तरंग क आवृ त्त 20 Hz है तो पस्टन
प्र त मनट कतने दोलन पूण करता है?
प्र त मनट 1200 दोलन।
आवृि ν = दोलनों की संख्या ÷ िलया गया समय
∴ दोलनों की संख्या = ν × समय
ν = 20 Hz = 20 s⁻¹, समय = 1 िमनट = 60 s
दोलनों की संख्या = 20 s⁻¹ × 60 s = 1200
मात्रक कैसे मलते ह: हट् ज़ का अथ ही 'प्र त सेकंड' है, अतः 20 Hz का शा ब्दक अथ है 'प्रत्येक सेकंड म 20
दोलन'। 60 s से गुणा करने पर सेकंड कट जाते ह और शेष रहता है एक शुद्ध संख्या — दोलन क गनती, जो पूछ
ही गई थी। गुणा करने से पहले मनट को सेकंड म बदलना अ नवाय है; अ धकांश भूल यह होती ह।
संकेत: 20 Hz मानव श्रव्यता प रसर (20 Hz – 20 kHz) क ठ क नचली सीमा पर है। इस पस्टन से धीमा कोई
भी दोलन अवश्रव्य ध्व न उत्पन्न करेगा, जसे हम सुन ही नह सकते।
Page 25 of 60
Page 27
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 बताइए चत्र 10.19 म आलेख ारा नरू पत ध्व न तरंग का अध तरंगदै य क्या है?
वत् नघ
0 1.5 3.0 4.5 दूरी (cm)
चत्र 10.19, पृष्ठ 195 — ध्व न तरंग का आलेखीय नरूपण (दूरी के साथ घनत्व)।
अध तरंगदै य 1.5 cm (= 0.015 m) है।
पहले आलेख प ढ़ए। वक्र 0 पर माध्य घनत्व रेखा से आरंभ होकर श्रृंग तक चढ़ता है, वापस रेखा को पार करता है, गत तक गरता है
और 3.0 cm अं कत चह्न पर पुनः रेखा पर लौट आता है। यह एक पूण घनत्व दोलन है — अतः मु द्रत पैमाने पर एक पूरा तरंगदै य
है
λ = दो क्रमागत श्र ृंगों (अथवा दो क्रमागत गत )ं के मध्य की दू री
िचत्र 10.19 से: λ = 3.0 cm
∴ λ/2 = 3.0 cm ÷ 2 = 1.5 cm = 0.015 m
λ = 3.0 cm
λ/2 = 1.5 cm
घनत्व
0 1.5 दूरी (cm) 3.0 4.5
चत्र 10.19 का पठन: एक पूण घनत्व दोलन 0 से 3.0 cm तक फैला है, अतः λ = 3.0 cm और अध तरंगदै य 1.5 cm।
Page 26 of 60
Page 28
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
अध तरंगदै य का महत्व: यह ठ क वह दूरी है जो एक संपीडन के कद्र से अगले वरलन के कद्र तक होती है। श्रृंग
से आधा तरंगदै य दूर जाते ही घनत्व अपने अ धकतम से सीधे न्यूनतम तक पहुँच जाता है।
संकेत: एक सामान्य भूल है श्रृंग से अगले गत तक क दूरी को तरंगदै य मान लेना। वह दूरी तो केवल λ/2 है। सदै व
श्रृंग से श्रृंग अथवा गत से गत मा पए।
क्या होगा य द… — पृष्ठ 196
10.6.3 ध्व न क चाल
क्या होगा य द…
प्र.1 क्या होगा य द… वायु म ध्व न क चाल आवृ त्त पर नभर करती तो क्या तब भी गायक ारा वाद्ययंत्र के साथ
प्रस्तुत संगीत कान को सुखद लगता है? अपने उत्तर के समथन म तक द जए।
नह — संगीत गमन करते-करते बखर जाता, और मंच से जतना दूर बै ठए उतना ही बुरा सुनाई दे ता।
गाया हुआ स्वर या वाद्ययंत्र का स्वर कभी एकल आवृ त्त नह होता: वह मूल आवृ त्त के साथ अनेक अ धस्वरक का संयोजन होता
है। ये सब एक ही क्षण मंच से चलते ह।
मान लीिजए मूल आवृि (200 Hz) 340 m s⁻¹ से और एक अिधस्वरक (400 Hz) 350 m s⁻¹ से चले।
34 m के हॉल को पार करने में मूल आवृि का समय = 34 m ÷ 340 m s⁻¹ = 0.100 s
अिधस्वरक का समय = 34 m ÷ 350 m s⁻¹ = 0.097 s
पहुँच ने पर अंत र = 0.100 s − 0.097 s = 0.003 s, और दू री के साथ यह बढ़ ता जाएगा
एक ही स्वर के अ धस्वरक मूल आवृ त्त से पहले या बाद पहुँचते, अतः स्वर बखर जाता और उसक ध्व नगुणता दूरी के साथ
बदलती जाती — हॉल के पीछे बैठे श्रोता को तबला तबले जैसा सुनाई ही न दे ता।
गायक के उच्च स्वर और संगत वाद्य के नम्न स्वर भन्न समय पर पहुँचते, अतः एक साथ बजाए जाने पर भी वे ताल से बाहर
हो जाते।
भन्न दू रय पर बैठे श्रोता एक ही प्रस्तु त से भन्न ताल और भन्न स्वर-रंग सुनते।
वास्त वक संसार संगीत के अनुकूल क्य है: वायु म ध्व न क चाल केवल माध्यम पर — ताप और आद्रता पर —
नभर करती है, ोत या उसक आवृ त्त पर नह । अतः कसी स्वर-संयोजन क सभी आवृ त्तयाँ एक ही 344 m s⁻¹
से चलती ह और साथ ही पहुँचती ह, जससे स्वर अखंड बना रहता है। आवृ त्त बदलने पर तरंगदै य समायो जत
होता है (λ = v/ν), चाल कभी नह ।
Page 27 of 60
Page 29
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? कुछ वशेष पदाथ, जैसे सरंध्र फोम और अ भयां त्रत संरचनाएँ, ध्व न क चाल को आवृ त्त पर
नभर बना दे ते ह। ध्व नक के अ भयंता इसी असामान्य व्यवहार के कारण उनका उपयोग करते ह।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 197
10.6.3 ध्व न क चाल
सो चए और बताइए
प्र.1 ता लका 10.1 वायुमंडलीय दाब पर कुछ माध्यम म ध्व न क चाल दशाती है।
ता लका 10.1 — 15 °C पर व भन्न माध्यम म ध्व न क चाल
अव ा पदाथ/माध्यम लगभग चाल
ठोस स्ट ल 5000 m s⁻¹
द्रव जल 1500 m s⁻¹
गैस वायु 340 m s⁻¹
नम्न अनुपात ात करके भन्न- भन्न माध्यम म ध्व न के चाल क तुलना क जए। (i) वायु म ध्व न क चाल के
सापेक्ष जल म ध्व न क चाल। (ii) जल म ध्व न क चाल के सापेक्ष स्ट ल म ध्व न क चाल।
(i) लगभग 4.4 : 1 (ii) लगभग 3.3 : 1
(i) अनुपात = vजल / vवायु
= 1500 m s⁻¹ ÷ 340 m s⁻¹
= 4.41 ≈ 4.4 → vजल : vवायु ≈ 4.4 : 1
(ii) अनुपात = vस्टील / vजल
= 5000 m s⁻¹ ÷ 1500 m s⁻¹
= 3.33 ≈ 3.3 → vस्टील : vजल ≈ 3.3 : 1
ध्यान द जए क अनुपात का कोई मात्रक नह होता — m s⁻¹ म m s⁻¹ का भाग दे ने पर मात्रक कट जाते ह। दोन को मलाने
पर vस्ट ल : vवायु = 5000 : 340 ≈ 14.7 : 1, जो अध्याय के इस कथन से मेल खाता है क ठोस म ध्व न वायु क तुलना म
सामान्यतः 15 – 20 गुना तेज़ चलती है।
Page 28 of 60
Page 30
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ठोस > द्रव > गैस क्य : ध्व न तरंग कण के आपसी संघट्ट से आगे बढ़ती है। स्ट ल म परमाणु मज़बूत बंध से
जकड़े और बहुत पास-पास होते ह, अतः धक्का लगभग तुरंत आगे बढ़ जाता है। जल म अणु पासem
m a s
glहोते ह, अतः प्रत्येक अणु
तो ह पर सरक
सकते ह, इस.cलएo धक्का कुछ धीरे बढ़ता है। वायु म अणु दूर-दूर और दुबल अंतः क्रया वाले
a
a s emसे पहले तुलनात्मक रूप से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है — वक्षोभ रगकर चलता है। इस प्रकार सघन
aपैglकग और दृढ़ बंधन का अथ है अ धक ध्व न चाल।
को टकराने
co m
e m .
संकेत: ता लका 15 ºC के लए द गई है, और यह आक स्मक नह है। गैस म चाल ताप पर स्पष्ट रूप से नभर ag
g l as
करती है — वायु 0 ºC पर 331 m s⁻¹ और 22 ºC पर 344 m s⁻¹ क चाल दे ती है — अतः ताप बताए बना गैस
क चाल का कोई अथ नह । a
co m
em.
om — पृष्ठ 198
सो चए और.cबताइए g l as
em a
a s
agl
m a s
m .co agl
l a se
a g
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 60
Page 31
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
10.6.3 ध्व न क चाल
सो चए और बताइए
प्र.1 कसी प रसर क स्ट ल क बनी सीधी बाड़ के साथ दो मत्र एक-दूसरे से 340 m क दूरी पर खड़े ह ( चत्र 10.
23)। गुंजन बाड़ पर अपना कान रखती है और उसका मत्र धातु क कसी वस्तु से बाड़ पर प्रहार करता है। चत्र
10.1 म द गई स्ट ल और वायु म ध्व न क चाल के मान का उपयोग करके गुंजन तक वायु और स्ट ल के माध्यम
से पहुँचने वाली ध्व न के मध्य के समय अंतराल का प रकलन क जए। क्या इसके लए दोन ध्व नय के मध्य
अंतर करना संभव होगा? (दो ध्व नय को पृथक-पृथक सुनने हेतु उनके मध्य कम-से-कम 0.1 s का समय
अंतराल होना चा हए।)
त्र
िम धात ु की व स् त ु से प हार करता है गुंजन का कान बाड़ पर
स्टील की बाड़
340 m
चत्र 10.23, पृष्ठ 198 — पुनः च त्रत रेखा चत्र। एक ही प्रहार क ध्व न गुंजन तक दो माग से पहुँचती है — स्ट ल क
बाड़ से होकर और वायु से होकर।
ता लका 10.1 — 15 °C पर व भन्न माध्यम म ध्व न क चाल
अव ा पदाथ/माध्यम लगभग चाल
ठोस स्ट ल 5000 m s⁻¹
द्रव जल 1500 m s⁻¹
गैस वायु 340 m s⁻¹
मुद्रण संबंधी सूचना: हद संस्करण म यहाँ ' चत्र 10.1 म द गई ... चाल के मान ' छपा है, परंतु चत्र 10.1 तो
मंजीरे का चत्र है और उसम कोई चाल नह द गई। अभीष्ट संदभ ता लका 10.1 (पृष्ठ 197) का है, जैसा अंग्रेज़ी
संस्करण म 'Table 10.1' छपा है। वहाँ से ली जए — स्ट ल म 5000 m s⁻¹ और वायु म 340 m s⁻¹।
समय अंतराल लगभग 0.93 s है, और हाँ — गुंजन दोन आघात को सरलता से पृथक-पृथक सुन सकती है।
Page 30 of 60
Page 32
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
एक ही प्रहार ध्व न को दो पथ से एक साथ भेजता है: स्ट ल क बाड़ से होकर, और वायु से होकर। दूरी दोन म समान 340 m है;
केवल चाल भन्न है।
समय = दू री ÷ चाल
स्टील से होकर (v = 5000 m s⁻¹):
tस्टील = 340 m ÷ 5000 m s⁻¹ = 0.068 s
वायु से होकर (v = 340 m s⁻¹):
tवायु = 340 m ÷ 340 m s⁻¹ = 1.000 s
समय अंत राल Δt = tवायु − tस्टील
= 1.000 s − 0.068 s = 0.932 s ≈ 0.93 s
क्या वह अंतर कर पाएगी? दो ध्व नयाँ तभी पृथक सुनाई दे ती ह जब उनके बीच कम-से-कम 0.1 s का अंतराल हो। यहाँ
0.932 s > 0.1 s → हाँ, उसे दो पृथ क आघात सुन ाई दे ंगे
स्ट ल से आने वाली ध्व न पहले पहुँचती है और लगभग एक सेकंड बाद वही आघात वायु से होकर पहुँचता है।
स्टील की बाड़, 340 m
िमत्र पहार करता है गुज
ं न सुनती है
स्टील से: 5000 m s⁻¹ → 0.068 s मे ं पहच
ु ँ ती है
वायु से: 340 m s⁻¹ → 1.000 s मे ं पहच
ु ँ ती है
अंतर = 0.93 s, कान की 0.1 s की सीमा से कही ं अिधक
एक ही प्रहार, दो पथ। स्ट ल उसे वायु क तुलना म लगभग 14.7 गुना तेज़ पहुँचाता है, अतः दोन आगमन लगभग एक सेकंड के अंतर पर
होते ह।
Page 31 of 60
Page 33
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
कान को 0.1 s क्य चा हए: लगभग 0.1 s से कम अंतराल पर पहुँचने वाली दो ध्व नय को म स्तष्क एक ही
अनुभू त म मला दे ता है। इसी कारण प्र तध्व न सुनने के लए परावतक सतह कम-से-कम 17 m दूर होनी चा हए।
यहाँ अंतराल उस सीमा से नौ गुना है, अतः कोई क ठनाई नह ।
क्रयाकलाप 10.8 — पृष्ठ 198
आइए, प्रयोग कर ( नदशन क्रयाकलाप) — 10.6.4 मानव ारा ध्व न-बोध
क्रयाकलाप 10.8
प्र.1 आवृ त्त को प्रत्येक बार 100 Hz बढ़ाते हुए 1000 Hz तक ले जाइए और वणन क जए क ध्व न कस प्रकार
प रव तत होती है?
जैसे-जैसे आवृ त्त 100 Hz से 1000 Hz तक बढ़ती है, ध्व न क्रमशः तीक्ष्ण होती जाती है — तारत्व बढ़ता जाता है —
जब क प्रबलता क से टग को छु आ तक नह गया।
नधा रत आवृ त्त कैसी सुनाई दे ती है वायु म तरंगदै य (V = 344 M S⁻¹)
100 Hz गहरी, गुंजार जैस ी, मानो दू र का इंजन 344 ÷ 100 = 3.44 m
300 Hz भरी हुई, पुरुष की गंभीर वाणी जैस ी 344 ÷ 300 = 1.15 m
600 Hz उजली, स्पष्ट 344 ÷ 600 = 0.57 m
1000 Hz पतली, कणभेद ी, सीटी जैस ी 344 ÷ 1000 = 0.34 m
तारत्व क्य बढ़ता है: तारत्व आवृ त्त का म स्तष्क ारा कया गया बोध है। अ धक आवृ त्त का अथ है क आपके
कणपटल पर वायु का घनत्व प्र त सेकंड अ धक बार अ धकतम से न्यूनतम और वापस झूलता है, और कान इसे
तीक्ष्ण ध्व न के रूप म पढ़ता है। सामान्यतः उच्च तारत्व उच्च आवृ त्त के साथ और कम तारत्व कम आवृ त्त के साथ
चलता है, यद्य प सट क संबंध सरल नह है। ध्यान द जए क ध्व न क चाल भर 344 m s⁻¹ बनी रहती है — घटता
तो तरंगदै य है, क्य क λ = v/ν।
संकेत: आवृ त्त बदलते समय प्रबलता कुछ बदली-सी लग सकती है। इसका दोष ऐप्प का नह — मानव कान
स्वाभा वक रूप से लगभग 1000 – 4000 Hz के बीच सवा धक सुग्राही होता है, अतः समान ऊजा क ध्व नयाँ
समान प्रबल नह लगत ।
Page 32 of 60
Page 34
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अब आवृ त्त को 50 Hz पर व्यव त क जए और 20 Hz तक अथवा उस मान तक कम करते जाइए जहाँ आप
ध्व न को सुन नह पाते ह।
लगभग 50 Hz से नीचे जाते ही स्वर गहरी गड़गड़ाहट-सा हो जाता है, तेज़ी से सुनना क ठन होता जाता है और 20 Hz के
आस-पास बल्कुल लुप्त हो जाता है — तब वह सुनाई दे ने के बजाय कंपन के रूप म अनुभव हो सकता है।
मानव श्रव्यता पिरसर = 20 Hz से 20 000 Hz (20 kHz)
20 Hz से कम → अवश्रव्य तरंगें — उत्पन्न तो होती है,ं पर हमें सुन ाई नही ं दे त ी ं
20 kHz से अिधक → पराश्रव्य तरंगें — ये भी हमें सुन ाई नही ं दे त ी ं
ध्व न लुप्त क्य हो जाती है: तरंग तब भी उत्पन्न हो रही है और वायु म संच रत भी हो रही है। वफल होता है
संसूचक। लगभग 20 Hz से नीचे कणपटल और कणावत इतनी अच्छ प्र त क्रया नह दे पाते क म स्तष्क तक
उपयोगी संकेत भेज सक, अतः हम कुछ भी दज नह होता। तरंग के भौ तक म कुछ नह बदला — बदली है केवल
हमारी संवेदन क्षमता।
सट क सीमा हर व्य क्त म भन्न होती है और आयु के साथ घटती है, अतः कक्षा म सब के लए ध्व न एक ही मान पर लुप्त नह
होगी। अनेक वद्याथ इसे लगभग 20 Hz तक सुन लेते ह; कुछ को 30 Hz पर ही सुनाई दे ना बंद हो जाता है।
क्या आप जानते ह? हाथी 20 Hz से नीचे क अवश्रव्य ध्व नय से कई कलोमीटर दूर तक संदेश भेजते ह, और
कुत्ते, ब ल्लयाँ, चमगादड़ तथा डॉ ल्फन 20 kHz से ऊपर क पराश्रव्य ध्व नयाँ सुनते ह। हमारा प रसर तो इस
वशाल प रसर क एक छोट -सी खड़क भर है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 199
10.6.4 मानव ारा ध्व न-बोध
प्र.1 क्या मनुष्य सभी ध्व नय को सुन सकते ह?
नह । मनुष्य केवल एक सी मत आवृ त्त प रसर — श्रव्यता प रसर, लगभग 20 Hz से 20 000 Hz (20 kHz) — क
ध्व नयाँ ही सुन सकते ह।
Page 33 of 60
Page 35
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
m l as
m .co a g
l a se
a g अवश्रव्य श्रव्यता पिरसर पराश्रव्य
m
.co
20 Hz 20 kHz
ag
आविृ
sem
कु े, िबिल्लयाँ, चमगादड़ , डॉिल्फन
la
हाथी सुन लेते है ं
a g
मानव श्रव्यता प रसर केवल बीच क पट्ट है। उसके दोन ओर ध्व न वद्यमान है, पर हमारे कान उस पर प्र त क्रया नह करते।
co m
se m.
20 Hz से कम आवृ त्त क तरंग अवश्रव्य तरंग कहलाती ह। हाथी इन्ह सुन लेते ह, और इनसे भूकंप, ज्वालामुखी व ोट तथा
o m l a
gऔर डॉ ल्फन इन्ह सुन लेते ह, और
20 kHz.cसे अ धक आवृ त्त क तरंग पराश्रव्य तरंग कहलाती ह। कुत्ते, ब ल्लयाँ, चमगादड़
प्रचंड झंझावात का पता लगाया जाता है।
m a
seइनका उपयोग सोनार, अल्ट्रासोनोग्राफ तथा धातुओं म दोष खोजने म करते ह।
aहम
agl
m a s
.co agl
सीमा है ही क्य : श्रवण एक यां त्रक प्र क्रया है। कणपटल और उसके पीछे क नन्ह अ स्थय को आते हुए घनत्व
se m
प रवतन का अनुसरण करना पड़ता है, और कणावत क रोम को शकाओं को उन्ह वद्युत संकेत म बदलना पड़ता
g l a
है। एक न श्चत आवृ त्त पट्ट के बाहर दोन वफल हो जाते ह। यह संसूचक क सीमा है, ध्व न क नह — तरंग तो
दोन ओर पूणतः वास्त वक है। a
co m
m .
as e
क्या आप जानते ह? ऊपरी सीमा आयु के साथ घटती है और प्रबल ध्व न से हुई क्ष त से भी घटती है। कोई कशोर
m l
.co g
20 kHz तक सुन सकता है जब क कोई वयस्क 14 – 16 kHz पर ही रुक जाता है, इसी लए पुस्तक कहती है क
e m प रसर 'प्रत्येक व्य क्त के लए भन्न होता है'। a
la s यह
ag
se m
com g l a
सो चए और बताइए — पृष्ठ 201
m . a
ase
agl
10.7.1 प्र तध्व न
सो चए और बताइए
. c om
s e mसेकंड प ात सुनाई दे ।
comपरावतक सतह को न्यूनतम कतनी दूरी पर रखा जाना चा हए? इसकaे gलएlaध्व न क चाल को आप 343 m s−1
प्र.1 कसी प्रयोग म यह आवश्यक है क प्र तध्व न ध्व न उत्सजन के कम-से-कम 0.2
.
as em मान ली जए।
agl c
m .
s e
m a
. co agl
परावतक सतह कम-से-कम 34.3 m दूर होनी चा हए।
e m
l as
ध्व न को आना-जाना दोन करना है: ोत से द वार तक और वापस श्रोता तक। अतः कुल पथ पूछ गई दूरी का दुगुना है।
g
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 60
Page 36
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
तय की गई कु ल दू री = चाल × समय
= 343 m s⁻¹ × 0.2 s
= 68.6 m
यह आने -जाने की कु ल दू री है, अतः
परावतक सतह की दू री = 68.6 m ÷ 2
= 34.3 m
एक ही सूत्र म: d = v t / 2 = (343 m s⁻¹ × 0.2 s) / 2 = 34.3 m। इससे नज़द क क कोई भी द वार प्र तध्व न बहुत जल्द
लौटा दे गी और प्रयोग के लए अनुपयुक्त होगी।
2 का गुणक छोड़ा नह जा सकता: इसे भूलने पर उत्तर दुगुना 68.6 m आ जाएगा। इस अध्याय क प्र तध्व न,
सोनार और पराश्रव्य संवेदक क हर गणना क संरचना एक ही है — मापा गया समय सदै व आने-जाने का समय
होता है, अतः या तो समय आधा क जए या दूरी, दोन नह और कोई नह भी नह ।
संकेत: पुस्तक के अपने उदाहरण से तुलना क जए। प्र तध्व न सुनाई दे ने के लए न्यूनतम दूरी कान क 0.1 s क
सीमा से तय होती है: d = (340 m s⁻¹ × 0.1 s) / 2 = 17 m। यह प्रयोग दुगुना वलंब माँगता है, अतः उसे
लगभग दुगुनी दूरी चा हए।
क्या होगा य द… — पृष्ठ 202
10.8 पराश्रव्य तथा अवश्रव्य तरंग और उनके अनुप्रयोग
क्या होगा य द…
प्र.1 क्या होगा य द… य द मनुष्य भी कुत्त क तरह पराश्रव्य तरंग को पहचान सकते तो इसके क्या लाभ और हा नयाँ
होत ?
हम संसार क बहुत-सी अ त रक्त जानकारी मल जाती, परंतु साथ ही हम ऐसे शोर से घर जाते जसका आज हम पता
तक नह चलता।
Page 35 of 60
Page 37
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
लाभ हा नयाँ
चमगादड़ों और डॉिल्फनों का िशकार करना सुनाई दे ता, और जंतओ
ु ं पराश्रव्य कीट-भगाने वाले यंत्रों, कु छ मशीनों, वाहनों के पािकं ग
का वह संवाद भी जो आज हमारे िलए मौन है। संवेद कों और सफ़ ाई उपकरणों का िनरंतर शोर।
िचिकत्सक या तकनीिशयन धातु खंड के भीतर के दोष या अवरुद्ध पाइप पराश्रव्य वेिल्डंग और औ ोिगक सफ़ ाई संयंत्र असहनीय कायस्थल
को यंत्र के िबना, सीधे सुनकर पहचान ले ते। बन जाते और उ न्हे ं भारी पिररक्षण चािहए होता।
पराश्रव्य दू र ी संवेद क, सुर क्षा चेताविनयाँ और परास मापक कान से ही समान आयाम पर उ च्च आवृि की ध्विन अिधक ऊज वहन करती है,
जाँचे जा सकते। अतः लंबे समय तक इसके संपक में रहने से श्रवण क्षित तेज़ी से हो
सकती।
हमारी अपनी पितध्विन-क्षमता बेहतर होती: कम तरंग दै य छोटी वस्तुओ ं वाणी और संगीत एक स्थायी 'सर-सर' के नीचे दब जाते, िजससे
से परावितत होती है, अतः अंधे रे में छोटी बाधाओं का भी अनुम ान लग ध् यान लगाना और बातचीत करना किठन हो जाता।
जाता।
पराश्रव्य तरंग ान नधारण म इतनी उपयोगी क्य ह: वायु म 40 kHz पर λ = 344 m s⁻¹ ÷ 40 000 s⁻¹ ≈
0.0086 m, अथात एक सट मीटर से भी कम। कोई तरंग तभी स्पष्ट रूप से पराव तत होती है जब वस्तु उसके
तरंगदै य से बहुत छोट न हो, अतः पराश्रव्य तरंग उन छोटे लक्ष्य से भी साफ़ लौट आती ह जनके चार ओर से
सामान्य ध्व न नकल जाती। यही कारण है क ये शशु के अंग का प्र त बब बना सकती ह, गुद क पथरी तोड़
सकती ह और धातु खंड के भीतर क दरार खोज सकती ह।
संकेत: जब कोई प्रश्न लाभ और हा नयाँ दोन माँगे तो केवल राय क सूची नह , प्रत्येक के पीछे का भौ तक कारण
द जए। यहाँ दोन पक्ष एक ही तथ्य से नकलते ह — कम तरंगदै य और अ धक ऊजा।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 203
10.8.1 प्र तध्व न ारा ान नधारण
सो चए और बताइए
प्र.1 जल म ध्व न प्रकाश क अपेक्षा बहुत अ धक दूरी तक गमन करती है, इस लए इसका उपयोग व भन्न अंतजलीय
अनुप्रयोग म कया जाता है। महासागर क गहराई ात करने के लए भेजा गया कोई सोनार संकेत 4 सेकंड म
वापस लौटता है। य द समुद्र जल म ध्व न क चाल 1500 m s−1 है तो बताइए क उस ान पर महासागर क
गहराई कतनी होगी?
उस ान पर महासागर 3000 m (3 km) गहरा है।
Page 36 of 60
Page 38
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
4 s संके त के नीचे जाने और वापस आने का कु ल समय है।
कु ल दू री = चाल × समय = 1500 m s⁻¹ × 4 s = 6000 m
गहराई = कु ल दू री ÷ 2 = 6000 m ÷ 2 = 3000 m = 3 km
अथवा एक ही चरण म: d = v t / 2 = (1500 m s⁻¹ × 4 s) / 2 = 3000 m।
प्रकाश या रेडार नह , सोनार ही क्य : जल कुछ द सय मीटर म ही प्रकाश को अवशो षत और प्रक णत कर दे ता
है, और रे डयो तरंग तो लगभग तुरंत अवशो षत हो जाती ह। दूसरी ओर ध्व न जल म वायु क तुलना म लगभग 4 –
5 गुना तेज़ चलती है और क्षीण होने से पहले कई कलोमीटर तक जाती है। इसी लए गहरे समुद्र क एकमात्र
व्यावहा रक जाँच ध्व न से होती है — जहाज़ सोनार (sound navigation and ranging) से ही समुद्र तल का
मान चत्र बनाते ह और पनडु ब्बयाँ तथा जहाज़ के अवशेष खोजते ह।
संकेत: य द कसी प्रश्न म लौटने का नह ब ल्क केवल पहुँचने का समय दया हो तो उसे आधा न क जए। ध्यान से
प ढ़ए क दया गया समय 'वापस लौटने म', 'प्र तध्व न के लए' है या 'पहुँचने म'।
अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 204 – 206
अध्याय के अंत के प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
प्र.1 कौन-सा अवलोकन इस वचार का सव त्तम समथन करता है क ध्व न एक यां त्रक तरंग है? (i) ध्व न परावतन
प्रद शत करती है। (ii) ध्व न के संचरण के लए माध्यम आवश्यक है। (iii) ध्व न क आवृ त्त होती है। (iv) ध्व न
ऊजा वहन करती है।
(ii) ध्व न के संचरण के लए माध्यम आवश्यक है।
यां त्रक तरंग क प रभाषा ही यह है क उसे संचरण हेतु भौ तक माध्यम चा हए। अतः जो अवलोकन ध्व न को यां त्रक सद्ध करता है
वह ठ क वही है जो दशाता है क माध्यम के बना ध्व न समाप्त हो जाती है — नवात बेलजार प्रयोग।
Page 37 of 60
Page 39
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प क्या ध्व न के लए सत्य है? क्या 'यां त्रक' सद्ध करता है?
(i) परावतन पदिशत करती है हाँ नह — प्रकाश भी पराव तत होता है और वह यां त्रक नह है
(ii) माध्यम आवश्यक है हाँ हाँ — यही पिरभाषा है
(iii) आवृि होती है हाँ नह — हर तरंग क आवृ त्त होती है
(iv) ऊज वहन करती है हाँ नह — हर तरंग ऊजा वहन करती है
शेष तीन क्य अपयाप्त ह: ये तीन ध्व न के बारे म सत्य कथन ह, परंतु सभी तरंग के बारे म भी सत्य ह। कोई
अवलोकन कसी वग करण का प्रमाण तभी बनता है जब वह उस वग को अन्य वग से पृथक करे।
प्र.2 कसी माध्यम म संच रत हो रही ध्व न तरंग क आवृ त्त बढ़ाने पर क्या बढ़े गा? (i) तरंगदै य (ii) चाल (iii) प्र त
सेकंड संपीडन क संख्या (iv) आवतकाल
(iii) प्र त सेकंड संपीडन क संख्या।
आवृ त्त क प रभाषा ही है कसी नयत बदु से प्र त सेकंड गुज़रने वाले पूण घनत्व दोलन क संख्या, और प्रत्येक पूण दोलन अपने
साथ एक संपीडन लाता है। अतः आवृ त्त बढ़ाने से प्र त सेकंड पहुँचने वाले संपीडन क संख्या सीधे बढ़ जाती है।
चाल: v के वल माध्यम पर िनभर → अपिरवित त
तरंगदै य: v = ν × λ से λ = v/ν → ν बढ़ ने पर घटे गा
आवत काल: T = 1/ν → ν बढ़ ने पर घटे गा
संख्याओं से जाँच (वायु, v = 344 m s⁻¹):
ν = 200 Hz → λ = 344 ÷ 200 = 1.72 m, T = 0.005 s
ν = 400 Hz → λ = 344 ÷ 400 = 0.86 m, T = 0.0025 s
चाल क्य नह बदलती: ध्व न क चाल माध्यम से तय होती है — उसके कण कतने पास-पास और कतने दृढ़ता
से बँधे ह, तथा ताप और आद्रता कतनी है। ोत केवल यह तय कर सकता है क वह कतनी बार संपीडन भेजेगा।
प्रत्येक संपीडन कतनी तेज़ चलेगा यह माध्यम तय करता है, और तरंगदै य स्वयं को उसके अनुसार समायो जत कर
लेता है।
Page 38 of 60
Page 40
ase
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
य द कसी बदु से 4 सेकंड म 20 संपीडन गुजरते ह तो आवृ त्त होगी— (i) 80 Hz (ii) 5 Hz (iii) 10 Hz (iv)
e
प्र.3
m l as
0.2 Hz
m .co a g
l a se
a g
(ii) 5 Hz।
co m
आवृि ν = दोलनों की संख्या ÷ िलया गया समय m. ag
l a se
= 20 ÷ 4 s ag
m
= 5 s⁻¹ = 5 Hz
co
em.
om g l as
बराबर है। .c
उस बदु से गुज़रने वाला प्रत्येक संपीडन वहाँ एक पूण घनत्व दोलन को च ह्नत करता है, अतः संपीडन गनना दोलन गनने के ही
em a
a s
agl
आवतकाल T = 1/ν = 1 ÷ 5 Hz = 0.2 s — पत्येक 0.2 s में एक संपीडन, जो जाँच में सही बैठता है: 20 ×
m a s
0.2 s = 4 s ✓
m.co agl
l a se
a g
0.2 Hz क्य जाल है: वकल्प (iv) 4 ÷ 20 है, जो सेकंड म आवतकाल है, आवृ त्त नह । मात्रक पर ध्यान द जए
— हट् ज़ का अथ है 'प्र त सेकंड', अतः गनती ऊपर और समय नीचे आना चा हए।
co m
m .
m as e
.co a g l
a s em कसी कक्ष म पराव तत ध्व न उत्पन्न होने के 0.05 सेकंड प ात कान तक पहुँचती है। क्या यह प्र तध्व न उत्पन्न
agl प्र.4
करेगी या अनुरणन? कारण स हत बताइए।
se m
com g l a
m . a
यह अनुरणन उत्पन्न करेगी, प्र तध्व न नहa।se
agl
सीधी और परावितत ध्विन के बीच का समय अंत राल = 0.05 s
co m
m .
m
दो ध्विनयों को पृथ क सुन ने के िलए आवश्यक न्यून तम अंत राल = 0.1 s
as e
.co a g l
se m
g l a
a 0.05 s < 0.1 s → मिस्तष्क उन्हे ं पृथ क नही ं कर सकता
c
m .
a s e
. c om
चूँ क पराव तत ध्व न तब पहुँचती है जब मूल ध्व न अभी दज ही हो रही है, दोन आपस म मल जाती ह। ध्व न ोत के बंद हो जाने
agl
के बाद भी कुछ समय बनी रहती प्रतीत होतीm
s e
la है:
है — परावतन के कारण बने रहने क इसी प रघटना का नाम अनुरणन है।
ऐसे कक्ष का आकार भी जाँचा जा g
aसकता
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 60
Page 41
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
d = v t / 2 = (340 m s⁻¹ × 0.05 s) ÷ 2 = 17 m ÷ 2 = 8.5 m
8.5 m दूर क द वार एक सामान्य बड़े कमरे क है — और वास्त वक प्र तध्व न के लए न्यूनतम दूरी इसक दुगुनी, 17 m, चा हए।
प्र तध्व न अनुरणन
समय अंतराल कम-से -कम 0.1 s 0.1 s से कम (पायः 0.05 s के भीतर )
परावतन पायः दू र की सतह से एक ही परावतन हॉल की दीवारों से अनेक परावतन
क्या सुनाई दे ता है ध् विन की स्पष्ट पथृ क पुनरावृि ध् विन का िखंचना, स्वयं में िमलकर धुँधला हो जाना
कहाँ पहाड़ ी, खड़ ी चट्टान, लंबा खाली गिलयारा हॉल , सभागार, खाली कमरे
संकेत: सभागार म ध्व न-अवशोषक पैनल, ग े दार कु सयाँ और पद इसी लए लगाए जाते ह क अनुरणन नयं त्रत
रहे। बहुत कम हो तो हॉल नज व लगता है; बहुत अ धक हो तो वाणी अस्पष्ट हो जाती है।
प्र.5 चत्र 10.30 म दो ध्व न तरंग के आरेखीय नरूपण दए गए ह। य द X और Y अक्ष के पैमाने समान ह तो
बताइए — (i) कस तरंग का तरंगदै य अ धक है? (ii) कस तरंग का आयाम कम है?
वत्नघ
वत्नघ
दूरी दूरी
(क) (ख)
चत्र 10.30, पृष्ठ 205 — दो ध्व न तरंग के घनत्व–दूरी आलेख; दोन अक्ष के पैमाने समान ह।
(i) तरंग (क) का तरंगदै य अ धक है। (ii) तरंग (क) का ही आयाम कम है।
दोन मु द्रत आलेख को दूरी अक्ष क समान लंबाई पर प ढ़ए:
Page 40 of 60
Page 42
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
तरंग (क) तरंग (ख)
समान दू र ी में पूण चक्र 3 6
तरंग दै य (श्रंगृ से श्रंगृ ) अिधक — लगभग (ख) का दुगनु ा कम
माध्य घनत्व रे खा से श्रंगृ की ऊँचाई कम अिधक — लगभग 1.5 गुना
अतः अिधक λ, कम आयाम कम λ, अिधक आयाम
घनत्व
(क) दू री (ख) दू री
3 चक्र → अिधक λ 6 चक्र → कम λ
छोटे श्रगृं → कम आयाम ऊँचे श्रगृं → अिधक आयाम
दोन आलेख दूरी क समान लंबाई और समान पैमाने पर बने ह, अतः चक्र सीधे गने जा सकते ह और श्रृंग क ऊँचाई सीधे तुलनीय है।
पैमाने समान होना क्य आवश्यक था: तरंगदै य क्षै तज अक्ष से और आयाम ऊध्वाधर अक्ष से पढ़ा जाता है। य द
दोन आलेख के पैमाने भन्न होते तो कोई तरंग वास्तव म बड़ी हुए बना ही बड़ी दख सकती थी। पैमाने समान होते
ही चक्र गनना और श्रृंग-ऊँचाई क तुलना करना उ चत तुलना बन जाती है। ध्व न क भाषा म (ख) क आवृ त्त
अ धक है (ν = v/λ) और आयाम भी अ धक है, अतः वह अ धक तीक्ष्ण और अ धक प्रबल सुनाई दे गी।
Page 41 of 60
Page 43
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.6 चत्र 10.31 म तीन ोत A, B और C ारा उत्पन्न ध्व न तरंग दशाई गई ह। य द A क आवृ त्त अ धकतम और C
क न्यूनतम है तो संबं धत वक्र क पहचान क जए तथा उन पर A, B और C अं कत क जए।
वत्नघ
दूरी
चत्र 10.31, पृष्ठ 205 — तीन ोत क ध्व न तरंग एक ही अक्ष-युग्म पर; वक्र पर जान-बूझकर कोई नाम अं कत
नह है।
हरा वक्र A है, लाल वक्र B है और नीला वक्र C है।
तीन वक्र एक ही दूरी अक्ष पर ख चे गए ह, अतः जसम सवा धक चक्र समाते ह उसका तरंगदै य सबसे कम और आवृ त्त सबसे
अ धक है।
चत्र 10.31 का वक्र अक्ष पर पूण चक्र तरंगदै य आवृ त्त Ν = V/Λ अंकन
हरा (सबसे ऊँचा, सबसे पास-पास) 4 न् यूनतम अिधकतम A
लाल (मध्यम) 3 मध्यम मध्यम B
नीला (सबसे फै ला, सबसे छोटे श्रंगृ ) 2 अिधकतम यूनतम
न् C
तीनों एक ही माध्यम में चल रही है,ं अतः तीनों के िलए v समान है।
v = ν × λ से ν ∝ 1/λ — कम तरंगदै य अथ त अिधक आवृि ।
चूँिक λहरा < λलाल < λनीला, νहरा > νलाल > νनीला
∴ हरा = A, लाल = B, नीला = C
Page 42 of 60
Page 44
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
श्रृंग क ऊँचाई से नणय क्य नह : यहाँ संयोग से सबसे ऊँचा वक्र ही सबसे अ धक आवृ त्त वाला है, पर यह
केवल इसी चत्र का संयोग है। श्रृंग क ऊँचाई आयाम है, जो प्रबलता और ऊजा बताती है, आवृ त्त नह । आवृ त्त
इस बात से पढ़ जाती है क दूरी अक्ष पर चक्र कतने पास-पास ह।
संकेत: गनती श्रृंग से श्रृंग क जए, आलेख के आरंभ से नह । य द कोई वक्र चक्र के बीच से आरंभ होता हो तो पूरे
चक्र आँख से गनने क तुलना म श्रृंग गनना कह अ धक वश्वसनीय है।
प्र.7 ऐसी ध्व न तरंग का ाफ बनाइए जसका घनत्व आयाम 3 मात्रक तथा तरंगदै य 4 cm हो।
y-अक्ष पर घनत्व और x-अक्ष पर दूरी ली जए, माध्य घनत्व के लए एक क्षै तज बदुदार रेखा ख चए और फर ऐसी चकनी तरंग
बनाइए जो
प्रत्येक श्रृंग पर माध्य घनत्व रेखा से 3 मात्रक ऊपर और प्रत्येक गत पर 3 मात्रक नीचे जाए (यही घनत्व आयाम है), तथा
दूरी अक्ष पर प्रत्येक 4 cm के बाद दोहराए — श्रृंग से श्रृंग अथवा गत से गत 4 cm हो।
λ = 4 cm
+3
आयाम = 3 मात्रक
घनत्व माध्य
−3
0 4 8 12 दूरी (cm) 16
घनत्व–दूरी आलेख जसम घनत्व आयाम 3 मात्रक और तरंगदै य 4 cm है। प्रत्येक श्रृंग एक संपीडन है और प्रत्येक गत एक वरलन।
अपने आलेख क जाँच कैसे कर: (1) श्रृंग से श्रृंग और गत से गत दोन 4 cm होने चा हए; (2) श्रृंग बदुदार रेखा
से ठ क उतना ऊपर हो जतना गत नीचे, अथात 3 मात्रक; (3) वक्र प्रत्येक चौथाई तरंगदै य पर, अथात प्रत्येक 1
cm पर, माध्य घनत्व रेखा को काटे । प्रत्येक श्रृंग पर C और प्रत्येक गत पर R भी अं कत क जए — इससे स्मरण
रहेगा क आलेख संपीडन और वरलन का ही वणन कर रहा है।
Page 43 of 60
Page 45
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
संकेत: य द चाल भी द हो तो आवृ त्त भी जोड़ी जा सकती है। उदाहरण के लए वायु म 344 m s⁻¹ पर ν = v/λ
m
= 344 m s⁻¹ ÷ 0.04 m = 8600 Hz।
as e
.co a g l
se m
g l a
a कसी फल्म म अंत रक्ष म हुए कसी अंत रक्ष यान के व ोट म प्रकाश और ध्व न दोन का एक साथ एक ही
प्र.8
co m
ag
समय पर उत्पन्न होना दशाया जाता है। बताइए क इस चत्रण म क्या त्रु टयाँ ह?
m .
as e
a g l
इसम दो त्रु टयाँ ह, और पहली तो नणायक है।
. c om
1. ध्व न होनी ही नह चा हए। बाह्य अंत रक्ष लगभग नवा तत है। ध्व न यां त्रक तरंग है और उसे भौ तक माध्यम चा हए; कण
लगभग न होने पर संपी डत करने और वक्षोभ आगे बढ़ाने को कुछ नह । दूर खड़े दशक के लए व m
s e
c mतरंग नह है, अतः चमक दखाई देगी — इसी लए सूय का प्रकाश खालीaअंgतlरक्षa पार कर पृथ्वी तक पहुँचता
ोट पूणतः मौन होगा।
(प्रकाश यांoत्रक
है।e)m
.
a s
a gl2. माध्यम होने पर भी दोन एक साथ नह पहुँच सकते। प्रकाश ध्व न क तुलना म असाधारण रूप से तेज़ चलता है, अतः
चमक सदै व पहले पहुँचती है और ध्व न कुछ वलंब से।
m a s
m .co agl
पकाश की चाल = 3 × 10⁵ m s⁻¹
l a se
वायु में ध्विन की चाल = 340 m s⁻¹
a
अनुपात = 3 × 10⁵ ÷ 340 ≈ लगभग 8,80,000 गुन ा ते ज़
g
co m
m .
ase
com
वायु में 1700 m दू र िस्थत ोत के िलए:
. a g l
m
ase
ध्विन का समय = 1700 m ÷ 340 m s⁻¹ = 5 s
agl पकाश का समय = 1700 m ÷ (3 × 10⁵ m s⁻¹) ≈ 0.0000057 s — व्यावहािरक रूप से तत्काल
se m
यही भौ तक रोज़मरा म: मेघ गजन के समय.cपहले om बजली क चमक दखती है और कुछ सेकंड बाद गड़गड़ाहट g l a
em हुए थे। इस अंतराल को गनकर 340 m s⁻¹ से गुणा करने पर a
a s
gl
सुनाई दे ती है, जब क दोन एक ही क्षण उत्पन्न
त ड़त-पात क दूरी मल जाती हैa।
c o m
संकेत: फ़ल्म के लए उ चत सुधार यह होगा क एक चमक ली मौन चमक दखे औरm .
s e उसके बाद कुछ नह —
a धा त्वक ढाँचे से होकर पहुँचे,
. om य द कैमरा कसी अंत रक्ष यान के भीतर माना गया हो तो ध्व न यानaकgे lअपने
cअथवा
as em क्य क वह तो माध्यम है।
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 44 of 60
Page 46
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.9 एक ोत 3.44 m तरंगदै य वाली ध्व न तरंग उत्पन्न करता है। य द तरंग क चाल 344 m s−1 है तो उसका
आवतकाल ात क जए।
आवतकाल 0.01 s है।
चरण 1 — आवृि ात कीिजए। v = ν × λ (समीकरण 10.2)
ν = v / λ = 344 m s⁻¹ ÷ 3.44 m
= 100 s⁻¹ = 100 Hz
चरण 2 — आवत काल ात कीिजए। ν = 1/T (समीकरण 10.1)
T = 1 / ν = 1 ÷ 100 Hz
= 0.01 s
अथवा एक ही चरण म, क्य क v = λ/T: T = λ/v = 3.44 m ÷ 344 m s⁻¹ = 0.01 s।
उत्तर का भौ तक अथ: T = 0.01 s वह समय है जसम तरंग ठ क एक तरंगदै य आगे बढ़ती है, और उतना ही
समय वायु का कोई एक कण अपनी माध्य स्थ त के इधर-उधर एक पूण दोलन करने म लेता है। 100 Hz एक
गहरी, गुंजार जैसी ध्व न है और 20 Hz – 20 kHz के श्रव्यता प रसर के भीतर है।
संकेत: मात्रक पर ध्यान द जए। m ÷ (m s⁻¹) = s, अतः तरंगदै य म चाल का भाग दे ने पर सदै व समय मलता
है। य द आपका उत्तर कसी और मात्रक म आए तो आपने भाग उल्टा दया है।
प्र.10 कसी डू बे हुए जलयान क खोज के लए कसी जलपोत से भेजे गए सोनार संकेत क प्र तध्व न 5 सेकंड प ात
प्राप्त होती है। य द समुद्र जल म पराश्रव्य तरंग क चाल 1525 m s−1 है तो डू बे हुए जहाज के भगनावशेष
समुद्र म लगभग कतनी गहराई पर त है?
भग्नावशेष जलपोत से लगभग 3812.5 m (लगभग 3.8 km) नीचे है।
Page 45 of 60
Page 47
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
5 s स्पंद के नीचे भ ग् नावशेष तक जाने और वापस आने का समय है।
कु ल दू री = चाल × समय
= 1525 m s⁻¹ × 5 s
= 7625 m
भग्नावशेष की गहराई = कु ल दू री ÷ 2
= 7625 m ÷ 2
= 3812.5 m ≈ 3.8 km
यहाँ पराश्रव्य तरंग ही क्य : पराश्रव्य तरंग का तरंगदै य बहुत कम होता है, अतः वे जहाज़ के ढाँचे जतनी छोट
वस्तु से भी उसके चार ओर से नकलने के बजाय स्पष्ट रूप से पराव तत हो जाती ह, और उन्ह एक सँकरे पुंज के
रूप म भेजा जा सकता है जससे दशा भी न श्चत हो जाती है। ध्व न जल म क्षीण हुए बना दूर तक जाती भी है,
जब क प्रकाश नह जाता। दशा, स्पष्ट परावतन और लंबी पहुँच का यही संयोजन सोनार को संभव बनाता है।
संकेत: 1525 m s⁻¹ ता लका 10.1 के 1500 m s⁻¹ के नकट है। समुद्र जल म चाल ताप, गहराई और लवणता
के साथ थोड़ी बदलती है, इस लए प्रश्न सदै व यह बता दे ता है क कौन-सा मान लेना है।
प्र.11 कसी वाहन म पा कग सहायता प्रणाली के एक भाग के रूप म पराश्रव्यी दूरी संवेदक लगा हुआ है जो प्र तध्व न
नधारण तकनीक का उपयोग करता है। वाहन को पीछे करते समय (यह लगभग 40 kHz क ) पराश्रव्यी तरंग
उत्स जत करता है जो अवरोध से पराव तत होकर वापस आती ह। य द चेतावनी बीप अवरोध से 1.2 m दूरी पर
बजना आरंभ होती है तो पराश्रव्यी तरंग को अवरोध तक जाकर वापस आने म कतना समय लगता है? मान
ली जए क वायु म पराश्रव्यी तरंग क चाल 345 m s–1 है।
लगभग 6.96 × 10⁻³ s, अथात लगभग 7 मलीसेकंड।
Page 46 of 60
Page 48
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
स्पंद अवरोध तक जाकर लौटता है, अतः वह 1.2 m की दुगन
ु ी दू री तय करता है।
कु ल दू री = 2 × 1.2 m = 2.4 m
समय = दू री ÷ चाल
= 2.4 m ÷ 345 m s⁻¹
= 0.00696 s ≈ 6.96 × 10⁻³ s ≈ 7.0 ms
यह भी जाँच ली जए क 40 kHz वास्तव म पराश्रव्य है और यह इस काम के लए उपयुक्त क्य है:
λ = v / ν = 345 m s⁻¹ ÷ 40 000 s⁻¹ = 0.0086 m ≈ 0.9 cm
40 kHz > 20 kHz → पराश्रव्य, चालक को सुन ाई नही ं दे त ी
प्रणाली इतनी अ क्य काम करती है: आने-जाने म केवल लगभग 7 ms लगते ह, अतः संवेदक प्र त सेकंड
अनेक स्पंद भेज सकता है और वाहन के पीछे सरकते ही बीप लगभग नरंतर अद्यतन होती रहती है। एक सट मीटर
से कम तरंगदै य का अथ है क स्पंद कसी नीचे लगे खंभे या फुटपाथ के कनारे से भी स्पष्ट पराव तत होगा। और
40 kHz श्रव्यता प रसर से ऊपर होने के कारण चालक को केवल वद्युत बीप सुनाई दे ती है, पराश्रव्य तरंग कभी
नह ।
संकेत: यहाँ मलीसेकंड स्वाभा वक मात्रक है। 0.00696 s = 6.96 ms, क्य क 1 ms = 10⁻³ s।
प्र.12 वायु म ध्व न क चाल 0 °C पर लगभग 331 m s−1 तथा 22 °C पर लगभग 344 m s−1 है। य द वायु का
तापमान 22 °C से घटकर 0 °C हो जाए, तो 1720 m दूरी तय करने म मेघगजन क ध्व न को लगभग कतना
अ त रक्त समय लगेगा? मान ली जए क अन्य सभी प र तयाँ अप रव तत रहती ह।
लगभग 0.2 s अ त रक्त समय।
Page 47 of 60
Page 49
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
समय = दू री ÷ चाल
22 ºC पर (v = 344 m s⁻¹):
t₁ = 1720 m ÷ 344 m s⁻¹ = 5.000 s
0 ºC पर (v = 331 m s⁻¹):
t₂ = 1720 m ÷ 331 m s⁻¹ = 5.196 s
अितिरक्त समय = t₂ − t₁
= 5.196 s − 5.000 s = 0.196 s ≈ 0.2 s
ठं डी वायु ध्व न को धीमा क्य कर दे ती है: गैस म ध्व न अणुओं के अपने पड़ो सय से टकराने से चलती है। ताप
इसी बात का माप है क वे अणु पहले से कतनी तेज़ ग त कर रहे ह। 22 ºC पर अणु 0 ºC क तुलना म तेज़ चलते
ह, अतः वे अपने पड़ो सय तक जल्द पहुँचते ह और संपीडन को शीघ्र आगे बढ़ा दे ते ह। वायु ठं डी करते ही प्रत्येक
संघट्ट थोड़ा वलं बत हो जाता है, अतः पूरा वक्षोभ धीरे आगे बढ़ता है। आद्रता का प्रभाव भी इसी दशा म है — नम
वायु ध्व न को कुछ तेज़ ले जाती है।
संकेत: ध्यान द जए क प्रभाव कतना छोटा है: 22 ºC क गरावट 5 s क यात्रा को केवल लगभग 4% बदलती
है। इसी लए मेघ गजन का मोटा नयम — 'सेकंड ग नए और लगभग 340 m s⁻¹ से गुणा क जए' — जाड़े क
रात म भी उतना ही काम करता है जतना गम क रात म।
Page 48 of 60
Page 50
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
340 m s−1 क चाल से संच रत हो रही एक ध्व न तरंग के लए माध्यम के घनत्व म प रवतन चत्र 10.32 म
e
प्र.13
m l as
.co
दशाया गया है। ध्व न तरंग का तरंगदै य तथा आवृ त्त का प रकलन क जए।
a g
se m
g l a
a 8 cm
com
e m . ag
g l as
a
co m
se m.
o m चत्र 10.32, पृष्ठ 206 — संचरण क दशा म माध्यम के घनत्व का प रवतन;la
.c ag
अं कत दूरी 8 cm है।
se m
g l a
a
m a s
तरंगदै य λ = 4 cm = 0.04 m और आवृ त्त ν = 8500 Hz।
m .co agl
l a se
g
पहले चत्र से तरंगदै य प ढ़ए। बदु-प्र तरूप म सघन प ट्टयाँ (संपीडन) और वरल प ट्टयाँ ( वरलन) क्रम से आती ह, और उनके कद्र
a
से होकर हल्क नदशक रेखाएँ ख ची गई ह। 8 cm अं कत तीर इस प्र तरूप क दो पूण आवृ त्तय पर फैला है — अथात एक
संपीडन से तीसरे संपीडन तक। अतः
co m
m .
m as e
.co
8 cm = 2λ → λ = 8 cm ÷ 2 = 4 cm = 0.04 m
a g l
se m
g l a
a
8 cm
se m
com g l a
m . a
ase
agl
C C C
co m
m .
m
λ = 4 cm λ = 4 cm
as e
.co a g l
a s em चत्र 10.32 का पठन: 8 cm का तीर संपीडन प्र तरूप क दो पूण आवृ त्तय पर फैला है, अतः एक तरंगदै य 4 cm है।
agl
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 49 of 60
Page 51
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
अब आवृि । v = ν × λ (समीकरण 10.2)
ν=v/λ
= 340 m s⁻¹ ÷ 0.04 m
= 8500 s⁻¹ = 8500 Hz
मीटर म बदलना क्य आवश्यक है: चाल m s⁻¹ म द गई है, अतः भाग दे ने से पहले तरंगदै य भी मीटर म होना
चा हए — 4 cm = 4/100 m = 0.04 m। सट मीटर म काम करने पर 340 ÷ 4 = 85 मलता, जो हट् ज़ म
आवृ त्त है ही नह । प्र तस्थापन से पहले हर रा श को SI मात्रक म लाइए।
स्वयं जाँ चए: 8500 Hz, 20 Hz और 20 kHz के बीच है, अतः यह श्रव्य ध्व न है — एक ऊँची, तीक्ष्ण ध्व न।
इसका आवतकाल T = 1/ν = 1/8500 ≈ 1.18 × 10⁻⁴ s है।
प्र.14 345 m s−1 क समान चाल से संच रत हो रही दो ध्व न तरंग A तथा B का आलेखीय नरूपण चत्र 10.33 म
दशाया गया है। प्रत्येक तरंग का तरंगदै य कतना है? इसके साथ ही उनक आवृ त्तय का भी प रकलन क जए।
A
B
वत् नघ
0 2.5 5.0 दू र ी (cm)
चत्र 10.33, पृष्ठ 206 — दो ध्व न तरंग A तथा B का आलेखीय नरूपण।
λA = 2.5 cm और νA = 13 800 Hz; λB = 5.0 cm और νB = 6900 Hz।
चत्र 10.33 के दूरी अक्ष से तरंगदै य प ढ़ए। 0 और 5.0 cm के बीच वक्र A दो पूण चक्र पूरे करता है जब क वक्र B केवल एक।
Page 50 of 60
Page 52
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
तरंग A: 5.0 cm में 2 तरंगदै य → λA = 5.0 cm ÷ 2 = 2.5 cm = 0.025 m
तरंग B: 5.0 cm में 1 तरंगदै य → λB = 5.0 cm = 0.050 m
आवृि याँ, ν = v / λ से, दोनों के िलए v = 345 m s⁻¹:
νA = 345 m s⁻¹ ÷ 0.025 m = 13 800 Hz = 13.8 kHz
νB = 345 m s⁻¹ ÷ 0.050 m = 6900 Hz = 6.9 kHz
तरंग 5.0 CM म चक्र तरंगदै य Λ आवृ त्त Ν = V/Λ आवतकाल T = 1/Ν
A 2 2.5 cm = 0.025 m 13 800 Hz 7.25 × 10⁻ ⁵ s
B 1 5.0 cm = 0.050 m 6900 Hz 1.45 × 10⁻ ⁴ s
आवृ त्तयाँ 2 : 1 के अनुपात म क्य आईं: दोन तरंग एक ही माध्यम म ह, अतः दोन क चाल 345 m s⁻¹ है। v
नयत होने पर ν तरंगदै य के व्युत्क्रमानुपाती होती है। तरंग A का तरंगदै य B का ठ क आधा है, अतः उसक
आवृ त्त ठ क दुगुनी है। संगीत क भाषा म A, B से एक अष्टक ऊपर है — अष्टक का अथ ही आवृ त्त का दुगुना होना
है।
संकेत: दोन वक्र के आयाम भी भन्न ह (A के श्रृंग ऊँचे ह), जससे प्रबलता प्रभा वत होती है। प्रश्न केवल तरंगदै य
और आवृ त्त पूछता है, अतः प रकलन म आयाम क कोई भू मका नह ।
Page 51 of 60
Page 53
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.15 दो सवसम ध्व न ोत बदु A और B पर रखे गए ह — इनम से एक वायु म है और दूसरा जल म डु बोया गया है
( चत्र 10.34)। दोन ोत एक ही समय पर ध्व न उत्पन्न करते ह जो क्षै तज दशा म च ान क ऊध्वाधर सतह
तक जाती है और वापस लौटती है। य द A बदु तक ध्व न के लौटने म लगा समय B बदु तक ध्व न के लौटने म
लगे समय का 4.5 गुना है तो वायु और जल म ध्व न के वेग का अनुपात क्या है?
च ट्टान
ोत A (वाय ु मे)ं
A
दीवार
ोत B (जल मे)ं
B
चत्र 10.34, पृष्ठ 206 — पुनः च त्रत रेखा चत्र। ोत A जल के ऊपर वायु म है और ोत B जल म डू बा है; दोन
च ान क ऊध्वाधर सतह से समान क्षै तज दूरी पर ह।
vवायु : vजल = 1 : 4.5 = 2 : 9, अथात लगभग 0.22 : 1।
ोत A वायु म है और ोत B जल म डू बा है, परंतु दोन चट्टान क सतह से समान क्षै तज दूरी पर ह, अतः दोन स्पंद आने-जाने क
समान दूरी तय करते ह। उसे 2d मान ली जए।
Page 52 of 60
Page 54
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
समय = दू री ÷ चाल
A के िलए (वायु में): tA = 2d / vवायु
B के िलए (जल में): tB = 2d / vजल
िदया है: tA = 4.5 × tB
∴ 2d / vवायु = 4.5 × (2d / vजल)
दोनों ओर से 2d कट जाता है:
1 / vवायु = 4.5 / vजल
∴ vजल = 4.5 × vवायु
vवायु : vजल = 1 : 4.5 = 2 : 9 ≈ 0.22
चट्टान
A (वायु मे)ं
दोनों ओर समान क्षैितज दू री d
B (जल मे)ं
समान 2d पर t₀ = 4.5 t₋ → v₋ = 4.5 v₀
दोन स्पंद चट्टान तक और वापस समान 2d दूरी तय करते ह। केवल माध्यम क चाल भन्न है, अतः समय चाल के व्युत्क्रमानुपाती ह।
उत्तर भौ तक दृ ष्ट से उ चत क्य है: अध्याय कहता है क जल म ध्व न क चाल वायु क तुलना म लगभग 4 – 5
गुना होती है, और यह प्रश्न ठ क 4.5 दे ता है। ता लका 10.1 के मान से 1500 m s⁻¹ ÷ 340 m s⁻¹ = 4.4 —
बहुत नकट का मेल। जल के अणु वायु के अणुओं क तुलना म कह अ धक पास-पास होते ह, अतः संपीडन बहुत
तेज़ी से आगे बढ़ता है।
Page 53 of 60
Page 55
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
संकेत: अनुपात कस क्रम म पूछा गया है इस पर ध्यान द जए। प्रश्न वायु : जल पूछता है, अथात छोट संख्या
m as e
l
पहले (1 : 4.5)। य द जल : वायु पूछा जाता तो उत्तर 4.5 : 1 होता।
m .co a g
l a se
a g
प रयोजना काय — पृष्ठ 207
co m
. ag
प रयोजना काय
e m
प रयोजना काय
g l as
a
co m
प्र.1 वतमान म अनेक लोग ईयरफोन का अत्य धक उपयोग करते ह। ऐसे शोध अध्ययन का पता लगाइए य द उपलब्ध
m.
ह , जो यह समझने के लए कए गए ह क ईयरफोन के अ धक उपयोग का सुनने क क्षमता पर क्या प्रभाव
o m l a se
पड़ता है। यह भी जा नए क श्रवण क्षमता का परीक्षण कैसे कया जाता है तथा नम्न, मध्यम और उच्च श्रवण
m .c ास नधा रत करने के लए डेसीबल क क्या सीमाएँ नधा रत क गईaह।gश्रवण सहायक यंत्र अथवा
se उपकरण को खरीदने तथा नःशुल्क कणावत प्र तरोपण से संबं धत सरकारी योजनाओं क जानकारी भी एकत्र
क्षमता
a
agl क जए। इसके साथ अपने नष्कष पर एक लेख भी ल खए।
m a s
m .co agl
l a se
g
व ध। यह एक छोट शोध प रयोजना है, अतः तीन चरण म काम क जए: सामग्री जुटाइए, व्यव स्थत क जए, फर ल खए।
a
1. साम ी जुटाइए। वश्वसनीय ोत ली जए — सुर क्षत श्रवण पर WHO क रपोट, ICMR और AIIMS के अध्ययन, तथा
m
सामा जक न्याय और अ धका रता मंत्रालय क वेबसाइट। हर तथ्य के साथ उसका ोत और वष अवश्य ल खए।
. co
se m
2. श्रवण परीक्षण सम झए। श्रव्यतामापी (audiometer) ात आवृ त्त के स्वर धीरे-धीरे बढ़ती प्रबलता पर बजाता है; जस
o m g l a
.cख (audiogram) कहलाता है।
न्यूनतम स्तर पर श्रोता उसे सुन पाता है वही उस आवृ त्त पर उसक श्रवण दे हली है। दे हली बनाम आवृ त्त का आलेख श्रव्यता
m a
s3.e ल खए — 400 – 600 शब्द का लेख: ईयरफोन कान पर क्या प्रभाव डालते ह, अध्ययन म क्या मला, ास क श्रे णयाँ क्या
आले
a
agl ह, और कौन-सी सहायता उपलब्ध है।
se m
अ े लेख म ये बात अवश्य होनी चा हए
com g l a
m . a
ase
agl
श्रवण ास क श्रेणी श्रवण दे हली (बेहतर कान) दै नक जीवन म अथ
सामान्य 20 dB से कम कोई क ठनाई नह
co m
लगभग 20 – 35 dB
m .
e
िनम्न (mild) धीमी वाणी या शोरगुल म बातचीत समझने म क ठनाई
com(moderate) g l as
.मध्यम a
sem
लगभग 35 – 50 dB सामान्य बातचीत म क ठनाई; श्रवण यंत्र से प्रायः लाभ होता है
a
agl उच्च (severe) लगभग 65 – 80 dB सामान्य वाणी सुनाई नह दे ती; श क्तशाली यंत्र या प्र तरोपण चा हए
c
m .
m a s e
co agl
नमूना उत्तर (लेख का आरंभ):
m .
as e
a g l
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 54 of 60
Page 56
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: "प्रबलता डे सबेल म मापी जाती है और डे सबेल का पैमाना भ्रामक है: प त्तय क सरसराहट कुछ ही
dB क होती है, सामान्य वातालाप लगभग 60 dB का, और पटाखे 100 dB से भी अ धक — परंतु dB म थोड़ी-
सी वृ द्ध से भी ध्व न तीव्रता म बहुत अ धक वृ द्ध हो जाती है। ईयरफोन कान क नली के भीतर बैठते ह, अतः उसी
से टग पर स्पीकर क तुलना म कणपटल तक कह अ धक प्रबल ध्व न पहुँचती है। वश्व स्वास्थ्य संगठन चेतावनी
दे ता है क 80 dB से ऊपर लंबे समय तक सुनना श्रवण के लए जो खम है, और भारत म महा वद्यालयीन वद्या थय
पर हुए अध्ययन म अ धक ईयरफोन उपयोग करने वाल म मापने योग्य दे हली-प रवतन मले ह। क्ष त कणावत क
रोम को शकाओं को होती है और वे को शकाएँ पुनः नह बनत — इसी लए यह श्रवण ास स्थायी होता है। भारत
सरकार क ADIP योजना ( दव्यांगजन को सहायक उपकरण क खरीद/ फ टग हेतु सहायता) के अंतगत श्रवण
यंत्र नःशुल्क अथवा अनुदा नत मूल्य पर दए जाते ह, और पात्र बच्च के लए नःशुल्क कणावत प्र तरोपण भी इसी
योजना म उपलब्ध है। रा ीय ब धरता नवारण एवं नयंत्रण कायक्रम जाँच और उपचार म सहायता करता है।"
सलाह के पीछे क भौ तक : अ धक आयाम क तरंग अ धक ऊजा वहन करती है, और तीव्रता एकांक क्षेत्रफल से
एकांक समय म पहुँचने वाली ऊजा है। ईयरफोन एक छोटे ोत को कणपटल के बल्कुल पास रख दे ते ह, अतः
क्षेत्रफल अत्यंत छोटा होता है और मध्यम श क्त पर भी तीव्रता ऊँची हो जाती है। इसी लए '60/60 नयम' सुझाया
जाता है — 60% से अ धक प्रबलता नह और एक बार म 60 मनट से अ धक नह ।
प्र.2 पोस्टर पेपर या गत्ते एवं आसंजक टे प क सहायता से एक शंकु बनाइए। मोबाइल फोन म कोई संगीत कायक्रम
चला कर मोबाइल को शंकु से ढक द जए। शंकु के साथ और शंकु के बना ध्व न क प्रबलता क तुलना क जए।
आप ध्व न क वशेषताओं को मापने के लए कसी अन्य मोबाइल फोन म उपलब्ध ऐप्प का भी उपयोग कर
सकते ह। व भन्न आकार के आवरण लेकर प्रयोग क जए और अपने अवलोकन को अ भले खत क जए। (यह
क्रयाकलाप शक्षक के मागदशन म कराई जाए।)
व ध। पोस्टर पेपर को शंकु के रूप म लपेटकर टे प लगाइए और सँकरे सरे को इतना का टए क फोन का स्पीकर ठ क बैठ जाए।
एक स्थर स्वर या न श्चत संगीत, न श्चत प्रबलता से टग पर चलाइए और मापक फोन लेकर एक न श्चत दूरी पर खड़े होइए। पहले
शंकु के बना dB पा ांक ली जए, फर शंकु के साथ — प्रबलता से टग या अपनी स्थ त बदले बना।
व्यव ा 1 M पर प्रारूपी DB पाठ्यांक कैसा सुनाई दे ता है
के वल फोन लगभग 62 dB पतली ध्व न, सभी दशाओं म फैलती है
सँक रा शंकु सामने लगभग 68 dB, बगल में कम सामने अ धक प्रबल, तीक्ष्ण दशात्मक
चौड़ा शंकु सामने लगभग 66 dB, अिधक फै लाव प्रबल पर कम दशात्मक
शंकु के पीछे के वल फोन से भी कम स्पष्ट रूप से धीमी
अ े उत्तर म यह अवश्य हो: दोन स्थ तय म समान प्रबलता से टग, हर पा ांक के लए समान दूरी, कई बार दोहराकर औसत,
और शंकु के आगे तथा पीछे दोन ओर के पा ांक।
Page 55 of 60
Page 57
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
शंकु ध्व न को प्रबल क्य बना दे ता है: शंकु ऊजा उत्पन्न नह करता। उसके बना ध्व न फोन से लगभग गोलीय
तरंग के रूप म फैलती है और वही ऊजा तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रफल म बँट जाती है, अतः तीव्रता शीघ्र घटती है। शंकु
उसी ऊजा को एक सँकरे पुंज म मोड़ दे ता है, अतः आपके सामने के छोटे क्षेत्रफल से प्र त सेकंड अ धक ऊजा
गुज़रती है। तीव्रता एकांक क्षेत्रफल से एकांक समय म ऊजा है, अतः सँकरा पुंज अ धक तीव्रता और अ धक अनुभूत
प्रबलता दे ता है। इसका मूल्य यह है क बगल और पीछे वाल को कम सुनाई दे ता है।
क्या आप जानते ह? भ पू (मेगाफोन), शहनाई का फैला हुआ मुख और पुराने ग्रामोफोन का हॉन इसी वचार पर
बने ह। कनाटक के बीजापुर स्थत गोल गुम्बज क ममरश्रावी गैलरी इसका उल्टा प्रयोग करती है — एक घुमावदार
गुंबद जो धीमी-सी फुसफुसाहट को पराव तत कर पूरे हॉल म पहुँचा दे ता है।
प्र.3 संगीत समारोह और सम्मेलन कक्ष म मंच के पीछे क द वार तथा छत का घुमावदार डजाइन, समतल सतह
क तुलना म श्रोताओं के लए ध्व न क गुणवत्ता को कैसे श्रेष्ठ बनाता है? आप कसी वास्तुकार से परामश कर
सकते ह या इंटरनेट पर इस वषय म खोज सकते ह।
मंच के पीछे और ऊपर क घुमावदार सतह ध्व न को बाहर और नीचे क ओर श्रोताओं क ओर पराव तत करती है, जससे
कलाकार क अ धक ऊजा श्रोताओं तक पहुँचती है और सभी सीट तक अ धक समान रूप से पहुँचती है।
यह ध्व न को एकत्र कर मोड़ दे ती है। ध्व न परावतन के उन्ह नयम का पालन करती है जो प्रकाश के ह: आपतन और
परावतन क दशाएँ आपतन बदु पर अ भलंब से समान कोण बनाती ह। मंच के पीछे क घुमावदार सतह उस ध्व न को पकड़
लेती है जो ऊपर और पीछे जा रही थी — जो अन्यथा व्यथ जाती — और उसे हॉल क ओर मोड़ दे ती है।
यह प्रबलता को समान करती है। ध्व न के बड़े क्षेत्रफल म फैलने से तीव्रता घटती है, अतः पछली सीट पर ध्व न अगली सीट
से बहुत कम होती। घुमावदार छत के पैनल इस प्रकार आकार और झुकाव म बनाए जाते ह क दूर क सीट तक अ त रक्त
पराव तत ध्व न पहुँचे और आगे-पीछे लगभग समान स्तर मले।
यह वलंब को नयं त्रत करती है। सीधी ध्व न के लगभग 0.05 s के भीतर पहुँचा परावतन उसम मलकर उसे प्रबल कर दे ता
है। 0.1 s के बाद पहुँचा परावतन पृथक प्र तध्व न के रूप म सुनाई दे ता और वाणी को अस्पष्ट कर दे ता। वास्तुकार घुमावदार
सतह को इस प्रकार रखते ह क हर पराव तत पथ इतना छोटा रहे क वह भ्रम नह , बल प्रदान करे।
समतल समांतर द वार अ धक हा नकारक ह क्य क ध्व न उनके बीच बार-बार पराव तत होती रहती है, जससे अत्य धक
अनुरणन और अस्पष्ट, धुँधली ध्व न उत्पन्न होती है।
अवशोषक भी क्य चा हए: केवल परावतन से हॉल गूँजने लगेगा। ध्व न-अवशोषक पैनल, ग े दार कु सयाँ, पद
तथा अन्य मुलायम और छद्रयुक्त सतह अनावश्यक वलं बत परावतन को सोख लेती ह। लक्ष्य ऐसा अनुरणन होता
है जो संगीत को समृद्ध बनाने के लए पयाप्त लंबा हो पर वाणी को स्पष्ट रखने के लए पयाप्त छोटा भी।
क्या आप जानते ह? भारत के मध्यकालीन वास्तुकार इसे भली-भाँ त समझते थे। कनाटक के बीजापुर स्थत गोल
गुम्बज क ममरश्रावी गैलरी इस प्रकार बनी है क धीमी-सी फुसफुसाहट भी वशाल गुंबद म पराव तत होकर कई बार
सुनाई दे ती है।
Page 56 of 60
Page 58
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 कसी मत्र के साथ 200 m या इससे भी बड़े खुले प रसर म ध्व न क ग त मापने क एक सरल ग त व ध
क जए। (यह ग त व ध शक्षक के मागदशन म कराई जाए।) (i) आपका मत्र खुले प रसर के एक छोर पर
गुब्बार के साथ खड़ा हो जब क आप दूसरे छोर पर स्टॉपवॉच लेकर खड़े ह । (ii) अपने मत्र को एक गुब्बारा
फोड़ने का संकेत द जए। जैसे ही आप गुब्बारे को फूटते हुए दे ख, स्टॉपवॉच चालू कर द जए। जैसे ही गुब्बारे के
फटने क ध्व न सुनाई दे तो स्टॉपवॉच बंद करके समय अं कत क जए। (iii) इस प्रयोग को कई बार दोहराइए
और प्राप्त समय का औसत ात क जए। (iv) मोबाइल फोन म उपलब्ध कसी मान चत्र अनुप्रयोग क सहायता
से अपने और अपने मत्र के मध्य क अनुमा नत दूरी ात क जए। (v) मापी गई दूरी को औसत समय से
वभा जत करके ध्व न क औसत ग त ात क जए। बताइए क प्रयोग से प्राप्त ग त का मान कतना है? इसक
तुलना वायु म ध्व न क ग त से क जए, जो लगभग होती है। (vi) आपने गुब्बारे के फटने को ‘दे खने’ और उसक
ध्व न को ‘सुनने’ के मध्य का समय ही क्य मापा?
मुद्रण संबंधी सूचना: हद संस्करण म भाग (v) 'इसक तुलना वायु म ध्व न क ग त से क जए, जो लगभग होती
है।' पर समाप्त हो जाता है — तुलना का मान छू ट गया है। अंग्रेज़ी संस्करण से ली जए: 25 ºC पर लगभग 346 m
s⁻¹।
(v) प्रयोग से लगभग 330 – 360 m s⁻¹ क चाल मलनी चा हए, जो 25 ºC पर स्वीकृत मान 346 m s⁻¹ के नकट है।
250 m क मापी गई दूरी के लए नमूना पाठ्यांक:
प्रयास 1 2 3 4 5
समय (s) 0.75 0.70 0.78 0.72 0.75
औसत समय = (0.75 + 0.70 + 0.78 + 0.72 + 0.75) s ÷ 5
= 3.70 s ÷ 5 = 0.74 s
ध्विन की चाल = दू री ÷ औसत समय
= 250 m ÷ 0.74 s
= 338 m s⁻¹
346 m s⁻¹ से तुलना करने पर त्रु ट (346 − 338)/346 × 100 ≈ 2.3% — स्टॉपवॉच वाले प्रयोग के लए अच्छा। सबसे बड़ा
त्रु ट- ोत आपका अपना प्र त क्रया काल है, जो लगभग 0.2 s होता है; इसी लए अनेक बार दोहराकर औसत लेना आवश्यक है।
(vi) 'दे खने' और 'सुनने' के बीच का समय ही क्य : क्य क प्रकाश ध्व न क तुलना म इतना तेज़ चलता है क गुब्बारे के फूटने
क चमक को तत्काल पहुँचा मान लेना उ चत है।
Page 57 of 60
Page 59
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग AglaSem · NCERT Solutions
250 m पार करने में पकाश का समय = 250 m ÷ (3 × 10⁵ m s⁻¹) ≈ 8 × 10⁻⁷ s
250 m पार करने में ध्विन का समय ≈ 0.74 s
पकाश एक िमलीसेकं ड के दस-लाखवें भाग िजतना समय लेत ा है — पूणतः उपेक्षणीय।
अतः जस क्षण आप गुब्बारे को फूटते दे खते ह वही व्यावहा रक रूप से वह क्षण है जब ध्व न उत्पन्न हुई। चमक पर स्टॉपवॉच चालू
करना और ध्व न पर बंद करना इस प्रकार केवल ध्व न के गमन का समय मापता है, और आपको तथा मत्र को कोई अलग संकेत
भेजने क आवश्यकता नह पड़ती।
प रणाम बेहतर कैसे बनाएँ: उपलब्ध सबसे लंबा मैदान ली जए (अ धक दूरी पर आपक नयत प्र त क्रया-काल
त्रु ट कुल समय का छोटा अंश रह जाती है), कम-से-कम दस बार दोहराइए, और भू मकाएँ बदल-बदलकर दोन
सा थय के प्र त क्रया काल का औसत ली जए। वायु का ताप भी नोट क जए, क्य क स्वीकृत मान 0 ºC पर 331
m s⁻¹ से बदलकर 22 ºC पर 344 m s⁻¹ हो जाता है।
प्र.5 इंटरनेट संसाधन क सहायता से आद्रता और तापमान का ध्व न क ग त पर प्रभाव जा नए। इसके लए कुछ
संसाधन क सूची नीचे द गई है। (i) https://phet.colorado.edu/en/simulations/sound-
waves/ (ii) https://musiclab.chromeexperiments.com/Experiments (iii)
https://phyphox.org/experiments
ताप और आद्रता दोन वायु म ध्व न क चाल बढ़ाते ह, और ताप का प्रभाव कह अ धक बड़ा है।
त वायु म लगभग चाल ोत
0 ºC पर शुष्क वायु 331 m s⁻ ¹ अनुभाग 10.6.3
15 ºC पर वायु 340 m s⁻ ¹ ता लका 10.1
22 ºC पर वायु 344 m s⁻ ¹ अनुभाग 10.6.3
25 ºC पर वायु 346 m s⁻ ¹ प रयोजना काय, पृष्ठ 207
समान ताप पर नम वायु शुष्क वायु से कु छ अिधक अनुभाग 10.6.3
प्रत्येक संसाधन का उपयोग कैसे कर
PhET Sound Waves: आवृ त्त बद लए और संपीडन- वरलन दे खए। स्वयं पु ष्ट क जए क आवृ त्त बदलने पर तरंगदै य
बदलता है, चाल नह ।
Chrome Music Lab: Spectrogram और Oscilloscope प्रयोग आपक अपनी वाणी क मूल आवृ त्त और
अ धस्वरक दखाते ह — ध्व नगुणता को सीधे दे खने का अवसर।
Phyphox: 'Audio Spectrum' और 'Audio Scope' वास्त वक आवृ त्तयाँ मापते ह। यह ऐप्प प्र तध्व न का समय भी
माप सकता है, अतः ात दूरी पर द वार लेकर आप गम दन म और फर ठं डी सुबह म ध्व न क चाल स्वयं माप सकते ह।
Page 58 of 60
Page 60
as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 10 ध्व न तरंग — अ भलक्षण एवं अनुप्रयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
गम वायु ध्व न को तेज़ क्य ले जाती है: संपीडन एक अणु से दूसरे तक संघट्ट
. com
ारा पहुँचता है। ताप बढ़ने पर
m a s emबढ़ता है।
glओं से हल्के होते ह
अणु अ धक तेज़ ग त करते ह, अतः वे अपने पड़ो सय तक जल्द पहुँचते ह और वक्षोभ शीघ्र आगे
. co इससे मलता-जुलता है: जल के अणु उन नाइट्रोजन और ऑक्सीजन aअणु
m वे लेते ह, अतः समान दाब पर नम वायु शुष्क वायु से कुछ कम घनी होती है और वक्षोभ को थोड़ा तेज़
eस्थान
आद्रता का कारण
a s
aलेglजाती है।
जनका
co m
e m .
यह करके दे खए: ऊपर के मान से गणना क जए क मेघ गजन के अनुमान म कतनी त्रु ट हो सकती है। 5 s ag
g l as
गनकर 331 m s⁻¹ से गुणा करने पर 1655 m मलता है और 346 m s⁻¹ से 1730 m — 1.7 km म केवल
लगभग 75 m का अंतर, अतः यह मोटा नयम काफ़ सुर क्षत है।a
co m
em.
m l as
.co a g
a s em
a l
gअध्याय — एक नज़र म
s
ध्व न कंपन करने वाली वस्तुओं ारा उत्पन्न होती है। कंपन रुकते ही ध्व न भी रुक जाती है; कंपन करने वाली वस्तु ध्व न का
om a
. c agl
ोत कहलाती है।
a s emहै — क्र मक संपीडन (उच्च घनत्व) और वरलन ( नम्न घनत्व) आगे बढ़ते
ध्व न एक अनुदै य यां त्रक तरंग के रूप म चलती
ह जब क माध्यम के कण केवल अपनी माध्य
a gl स्थ त के इधर-उधर दोलन करते ह। ध्व न नवात म संच रत नह हो सकती।
ध्व न तरंग तरंगदै य λ (m), आवृ त्त ν (Hz), आवतकाल T (s) और आयाम से व णत होती है। इनम संबंध ह ν = 1/T तथा
v = ν × λ।
co m
m .
e
ध्व न क चाल माध्यम पर नभर करती है, ोत पर नह — ठोस म सवा धक (स्ट ल ≈ 5000 m s⁻¹), द्रव म कम (जल ≈
m l as
.co g
1500 m s⁻¹), गैस म न्यूनतम (वायु ≈ 340 m s⁻¹); ताप और आद्रता बढ़ने पर चाल बढ़ती है।
emदूर) और अनुरणन (0.05 s के भीतर पहुँचने वाले बहु परावतन) उत्पन्न करता है। a
s
ध्व न का परावतन प्र तध्व न (कम-से-कम 0.1 s का अंतराल चा हए, अथात 340 m s⁻¹ पर परावतक कम-से-कम 17 m
l a
ag
m
20 Hz से कम आवृ त्त अवश्रव्य और 20 kHz से अ धक पराश्रव्य कहलाती है। पराश्रव्य तरंग का उपयोग प्र तध्व न ारा
a se
com l
स्थान नधारण, सोनार, अल्ट्रासोनोग्राफ , गुद क पथरी तोड़ने और धातु म दोष खोजने म होता है।
. a g
m
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 59 of 60