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अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु
सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/5/2
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
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9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै
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MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII
AISSCE MARCH 2020
CODE NO. Set-61/5/2
Q.NO अपे क्षित उत्तर / मूल्य अंक PAG MA
Part -A E RKS
NO.
1 A- केवल 1 और 2 Pg-1 1
2 वेल्लालर -बडे भूमि िामलक ों Pg- 1
39
अमििई -दास
3 िातृ दे वी( हडप्पा) Pg- 1
23
नेत्रहीन ं के क्षिए: -उन्नत ( Unicorn.).
4 एस.एन. रॉय (सौरीोंद्रनाथ रॉय) Pg- 1
20
5 पाटमलपुत्र Pg- 1
31
अथवा
िगध
6 अल-ब्रुनी ख्वाररज़ि / उज़्बेमकस्तान से था और उसने अरबी भाषा िें मकताब- Pg- 1
116
उल-महोंद मलखा था।
अथवा Pg-
118
िुहम्मद मबन तुगलक इब्न बतूता की मवद्वता से प्रभामवत था
7 C-. मवद्वान उस मलमप क पढ़ नहीों सके है Pg- 1
15
8 A-(i-b,ii-c,iii-d, iv-a) Pg- 1
121,
122,
137
9 A- लॉर्ड वैलेस्ली Pg- 1
336
10 A- द न ों (A) और (R) सही हैं और (R) A की सही व्याख्या है Pg- 1
328
11 C-1,2 और 3 Pg- 1
319
12 कराईक्कल अम्मम्मयार Pg- 1
145
13 A- बडी आबादी, बाज़ार ों और कुशल सोंचार Pg- 1
126`
14 A- कालड िार्क्ड Pg- 1
132
15 धम्म Pg- 1
32
1
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16 िमलक िुहम्मद जायसी Pg- 1
158
17 आमद ग्रन्थ सामहब Pg- 1
161
18 रै दास / रमवदास Pg- 1
165
19 इस्तिरारी बोंद बस्त Pg- 1
260/
262
20 Pg- 1
A र्े मवर् ररकार्ो 277
21 Part-B
सांप्रदाक्षिक सौहादद क बहाि करने के क्षिए गांधीजी के प्रिास
i. उन् न
ों े अपने मसद्ाोंत ों के िाध्यि से साोंप्रदामयक महोंसा क र कने की
क मशश की।
3
ii. उन् न
ों े मवमभन्न क्षेत्र ों के दों गाग्रस्त क्षेत्र ों का दौरा मकया। Pg-
365-
iii. उन् न
ों े अल्पसोंख्यक ों के कष् ों के प्रमत अपनी मचोंता मदखाई। 395
iv. उन् न
ों े सभी वगों की सिानता के मलए काि मकया।
v. उन् न
ों े द सिुदाय ों के बीच आपसी मवश्वास और मवश्वास की भावना
का मनिाडि करने की क मशश की।
vi. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
मकन्ीों तीन मबोंदुओों की व्याख्या
क्षवरुपाि मंक्षदर की क्षवशेषताएं
22 i. िोंमदर के सोंरक्षक दे वता मवरुपाक्ष और पम्पादे वी थे।
ii. िोंमदर ों क अध्ययन केंद्र के रूप िें कायड मकया जाता है।
iii. धामिडक, सािामजक, साोंस्कृमतक और आमथडक केंद्र के रूप िें िोंमदर।
iv. शाही प्रामधकरि की मवशाल पैिाने की सोंरचना।
v. शाही द्वार या शाही ग पुरि
vi. िोंर्प
vii. हॉल क नक्काशीदार खोंभ ों से सजाया गया है
viii. केंद्रीय स्थल या गभडगृह
Pg-
185- 3
ix. िोंमदर िें बने हॉल मवमभन्न प्रय जन ों के मलए उपय ग मकए जाते थे।
187
2
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x. वहााँ पर दे वताओों के मववाह सोंपन्न हुए
xi. द न ों और स्तम्भ वाले िोंर्प
xii. छ टे -छ टे िोंमदर
xiii. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
मकन्ी तीन मबोंदुओों की व्याख्या
23 अक्षििेख साक्ष् ं की सीमाएं
तकनीकी सीिाएाँ -
i. अमभलेख धूमिल उत्कीिड हैं और पुनमनडिाडि अमनमित हैं।
ii. मशलालेख क्षमतग्रस्त ह सकता है या पत्र गायब हैं।
iii. मशलालेख िें प्रयुक्त शब् ों के सटीक अथड के बारे िें सुमनमित ह ना
हिेशा आसान नहीों ह ता है।
Pg-
iv. अमभलेख नष् भी ह जाते है मजनसे शब् लुप्त ह जाते है 1 3
48
v. अमभलेख ों के शब् ों का अथड मनकाल पाना आसान नहीों 1
vi. अनेक अमभलेख कालाोंतर िें सुरमक्षत नहीों बचे।
vii. कुछ अमभलेख अोंश िात्र है ।
viii.अमभलेख केवल उन्ी ल ग के मवचार व्यक्त करते है ज उन्ें बनवाते
थे।
ix. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु 3
Pg-
मकसी भी तीन मबोंदुओों की व्याख्या
44
अथवा
िूक्षम और नदी मागद
i. िागों क मवमभन्न मदशाओों िें बढ़ाया गया था: - िध्य एमशया, उत्तरी
अफ्रीका, पमिि एमशया, दमक्षि पूवड एमशया और चीन।
ii. शासक ों ने इन िागों क मनयोंमत्रत करने का प्रयास मकया।
iii. व्यापाररय ों ने इन िागों पर यात्रा की।
iv. इन िागों के िाध्यि से िाल की मवस्तृत श्ृोंखला क ले जाया गया।
v. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु
3
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मकन्ी तीन मबोंदुओों की व्याख्या
24 ि ग ं ने अफवाह ं पर क्षवश्वास क् ं क्षकिा
i. मवमलयि बेंमटक की पमििी मवचार, पमििी सोंस्थान ों द्वार भारत की
सुधारवाद नीमतयाों नीमतय ों के कारि।
ii. पमििी मशक्षा का पररचय।
Pg- 3
iii. भारतीय व्यवस्था पर अोंकुश लगाने के मलए अोंग्रेज ों द्वारा पमििी मवचार
295
और पमििी सोंस्थान स्थामपत मकए गए थे।
iv. भारतीय सिाज िें मब्रमटश हस्तक्षेप जैसे सती प्रथा का उन्मूलन और
मवधवा पुनमवडवाह की अनुिमत।
v. ईसाई मिशनररय ों की गमतमवमधयााँ।
vi. सभी पुरानी सोंस्कृमत और परों परा के प्रमतस्थापन की मब्रमटश नीमत।
vii. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
मकन्ीों तीन मबोंदुओों की व्याख्या
25 सांची स्तूप का संरिण
i. भ पाल के शासक ों (शाहजहााँ बेगि और उनके उत्तरामधकारी सुल्तान
जहााँ बेगि) ने इसके सोंरक्षि के मलए धन प्रदान मकया।
ii. उसने सोंग्रहालय क मवत्त प मषत मकया।
iii. उन् न
ों े प्राचीन स्थल के रख रखाव के मलए धन अनुदान मदया ।
iv. अमतमथशाला बनाने के मलए धन अनुदान मदया जहाों जॉन िाशडल रहते
थे और पुस्तकें मलखते थे।
v. जॉन िशाल के खोंर् के प्रकाशन के मलए अनुदान मदए।
vi. एएसआई ने इसे बहाल करने और सोंरमक्षत करने िें भी िदद की।
अमरावती की क्षनिक्षत Pg- 4+4=
83,98 8
i. स्थानीय राजा स्तूप के खोंर्हर ों पर िोंमदर बनाना चाहते थे।
4
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ii. कॉमलन िेकानाइज़ ने अिरावती पर ररप टड तैयार की लेमकन कभी
प्रकामशत नहीों हुई।
iii. गुोंटूर के आयुक्त वाल्टर इमलयट, अिरावती के िद्रास िें िूमतडकला
पैनल ले गए।
iv.अिरावती के स्लैब क एमशयामटक स साइटी ऑफ़ बोंगाल क भेजा गया
था।
V अमनमितकालीन नीमत के कारि अिरावती के िूल कायड िें मगरावट आई।
vi क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
द न ों िें से चार मबोंदुओों की व्याख्या
अथवा
क्षहंदू और बौद्ध किा और मूक्षतदकिा
Pg- 4+4
99- =8
106
महोंदू िूमतडकला और कला
i. वैष्णववाद - दस अवतार ों की िूमतडकला। उदाहरि के मलए। शेषनाग
के साथ पृथ्वी दे वी (ऐह ल), वराह,आमद ।
ii. शैव ित- मलोंग िें मशव की िूमतडयाों
iii. िानव रूप िें भी मशव की िूमतडयाों
iv. िहाबलीपुरि िें दु गाड की छमव
v. िथुरा िें वासुदेव-कृष्ण की िूमतड
vi. एल रा की िूमतडयाों
vii. कैलाश नाथ िोंमदर
viii. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु
बौद्ध किा और मूक्षतदकिा
i. ररक्त स्थान बुद् के ध्यान की दशा
ii. स्तूप िहामनबनना के प्रतीक
iii. सारनाथ बुद् के पहले उपदे श का प्रतीक
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iv. पेड बुद् की जीवन की घटना का प्रतीक
v. स्तूप के त रि द्वार पर शैलभोंमजका सिृम्मद् का शुभ प्रतीक
vi. गजलक्ष्मी-सौभाग्य की प्रमतिा
vii. वृक्ष बुद् के जीवन की एक घटना का प्रतीक है।
viii. बुद् और ब मधसत् ों की छमवयााँ
viii. सपड और पशु रूपाोंकन ों
ix. हाथी, घ डे , बोंदर और झ पडी जैसे जानवर ों की िूमतडयाों स्तूप पर
मवमभन्न जातक कहामनय ों से सिझा जा सकता है।
x. कुछ जानवर ों क िानवीय मवशेषताओों के प्रतीक के रूप िें इस्तेिाल
मकया गया था उदाहरि के मलए हामथय ों क शम्मक्त और ज्ञान क
दशाडने के मलए मचमत्रत मकया गया था।
xi. किल और हामथय ों से मघरी एक िमहला की िूमतड प्रिुख है
xii. -कुछ ल ग ों ने गजलक्ष्मी के रूप िें पहचाना, (सौभाग्य की दे वी) और
कुछ के रूप िें िाया (बुद् की िााँ)
x. जातक कहामनय ों और बुद् की जीवनी के दृश्य
xi. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु
कथन का सिथडन करने के मलए प्रत्येक क क ई चार उदाहरि
26 सुिह-ए-कुि
i. िुगल साम्राज्य िें कई अलग-अलग जातीय और धामिडक सिुदाय
शामिल थे।
ii. सुलह-ए-कुल क पूिड शाोंमत के रूप िें वमिडत मकया गया है।
iii. इसे अकबर के प्रबुद् शासन की आधारमशला िाना जाता था।
iv. प्रत्येक धिड क राज्य के अमधकार क कि करने या आपस िें लडने
की शतड पर अमभव्यम्मक्त की स्वतोंत्रता दी गई थी।
v. राज्य की नीमतय ों के िाध्यि से लागू मकया गया था।
vi. तुरानी , ईरानी, अफगान, राजपूत, दक्कनी जैसी सिग्र सोंस्कृमत से
अनेक सिुदाय के ल ग दरबार िें कायडरत थे
6
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vii. जमजया या तीथडयात्रा ‘कर’ सिाप्त कर मदया गया।
Pg- 8
viii. मनिाडि और रखरखाव के मलए पूजा स्थल ों क अनुदान मदया गया। 233-
235
ix. अोंतर धामिडक चचाड के मलए इबादत खाना का मनिाडि।
x. यूर प से जेसुइट मिशन क मनिोंत्रि।
xi. महोंदू राजकुिारी के साथ वैवामहक गठबोंधन।
xii. मवमभन्न जातीय सिूह के ल ग शाही कायड का महस्सा थे।
xiii. ल ग ों क उनकी धामिडक पहचान के बावजूद य ग्यता के आधार पर
उपामधयाों दी गयी थे।
xiv. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
मकन्ी आठ मबोंदुओों की व्याख्या
अथवा
1707 तक मुगि ं का राजवंशीि उत्तराक्षधकार Pg- (½ x
225 6=3)
िुगल नाि िोंग ल से मनकला है।
i. बाबर
ii. हुिायूों
iii. अकबर
iv. जहाोंगीर
v. शाहजहाों
vi. औरों गजेब
मुगि सम्राट के अन्य दे श ं के साथ राजनैक्षतक और राजनक्षिक संबंध।
Pg-
i. ईरान और तूरान ,महोंदकुश पवडत द्वारा पररभामषत सीिा पर मनयोंत्रि 248- 3+5
250 =8
करना चाहते थे।
ii. िुगल ों ने काबुल और कोंधार जैसे रिनीमतक क्षेत्र ों क मनयोंमत्रत
करने की क मशश की।
iii. कोंधार, सफ़ामवद ों और िुगल ों के बीच मववाद की एक कडी था।
iv. िुगल ों के साथ सफ़ावदी ने राजनमयक सोंबोंध बनाए रखे ।
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v. ओट िन साम्राज्य िें व्यापाररय ों और तीथडयामत्रय ों के मलए आवागिन
सुमनमित करने के मलए िुगल ों और ओट िन के बीच अच्छे सोंबोंध।
vi. िुगल ों ने धिड और वामिज्य क मिला मदया।
vii. िक्का और िदीना के मलए भारी दान।
viii. अकबर द्वारा यूर प से जेसुइट मिशन क मनिोंत्रि
ix. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
क ई पााँच मबोंदुओों की व्याख्या
संक्षवधान सिा -संघीि ढांचे पर बहस
27 i. केंद्र सरकार और राज्य ों के सोंबोंमधत मवषय ों पर ज रदार बहस हुई,
ii. उनिें से एक केंद्र सरकार और राज्य ों के सोंबोंमधत अमधकार थे।
iii. नेहरू ने िजबूत केंद्र के मलए तकड मदया।
iv. सोंमवधान की तीन सूमचय ों के मलए सोंमवधान का प्रारूप: सोंघ, राज्य और
सिवती सूची।
v. अनुच्छेद 356 ने राज्यपाल की मसफाररश पर केंद्र क राज्य प्रशासन
सोंभालने की शम्मक्त दी।
vi. राजक षीय िहासोंघ पर ज र मदया गया।
vii. के सथानि ने राज्य ों के अमधकार ों के मलए तकड मदया।
viii. कुछ सदस् ों क लगा मक राजक षीय प्रावधान प्राोंत ों क खराब कर
दे गा।
ix. कई ल ग ों ने सिवती और सोंघ सूची के मवषय ों क कि करने के मलए
Pg- 8
कडी िेहनत की। 423
x. अोंबेर्कर िजबूत और एकजुट केंद्र चाहते थे।
xi. साोंप्रदामयक तनाव क र कने के मलए केंद्र की शम्मक्तय ों बढ़ाया जाना
था
xii. ग पालस्वािी अय्योंगार िजबूत केंद्र चाहते थे।
xiii. बी.के. शिाड ने दे श की भलाई के मलए िजबूत केंद्र का तकड मदया।
xiv. कुछ सदस् आमथडक सोंसाधन जुटाने और उमचत प्रशासन के मलए
िजबूत केंद्र चाहते थे।
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xv. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
(सिग्र रूप से मवश्लेषि मकया जाए)
अथवा
गाोंधीजी द्वारा क्षहंदुस्तानी क राष्ट्रिाषा के रूप में प्रस्तुत करना
i. गाोंधीजी ने महोंदुस्तानी क राष्रभाषा के रूप िें िहत् मदया।
4+4
ii. यह आि ल ग ों की भाषा थी। Pg- =8
425-
iii. महन्दु स्तानी-महोंदी और उदू ड का िेल। 426
iv. यह सिाज के बडे महस्से के बीच ल कमप्रय भाषा थी।
v. यह मवमवध सोंस्कृमत द्वारा सिृद् एक सिग्र भाषा थी।
vi. उनके अनुसार यह बहुसोंस्कृत भाषा महोंदुओों और िुसलिान ों और
उत्तर और दमक्षि के ल ग ों क एकजुट कर सकती थी।
राष्ट्र िाषा पर सिा का क्षनणदि
i. आर वी धुलेकर ने महोंदी के मलए िजबूत दलील दी।
ii. उन् न
ों े यह भी मनवेदन मकया मक सोंमवधान मनिाडि के मलए महोंदी क
भाषा के रूप िें इस्तेिाल मकया जाए।
iii. वे दे वनागरी महोंदी क आमधकाररक और राष्रीय भाषा के रूप िें चाहते
थे।
iv. कुछ सदस् चाहते थे मक अोंग्रेजी का इस्तेिाल आमधकाररक उद्दे श्य के
मलए मकया जाता रहे।
v. पूरे सोंमवधान सभा िें महोंदी मवर धी प्रचार भी फैला।
vi. प्रत्येक प्राोंत क प्राोंत के भीतर आमधकाररक कायड के मलए अपनी
क्षेत्रीय भाषा चुनने की अनुिमत थी।
vii. क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
प्रत्येक के चार मबोंदुओों की जाोंच.
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स्र त आधाररत प्रश्न
िारत में चााँदी कैसे आिी
29.1 मुग़ि साम्राज्य क्षकस प्रकार िारी मात्रा में धन एकक्षत्रत कर सका ?
उत्तर: िुगल ों द्वारा भारी धन का सोंचय।
a) वस्तुओों के आयात मनयाडत से
b) व्यापार के जीवोंत िाध्यि से।
c) वस्तु सोंरचना और व्यापार िें मवस्तार के कारि।
मकन्ी द मबोंदुओों की व्याख्या (2)
Pg-
2+2+
29.2 चांदी क्षकस प्रकार दु क्षनिािर में ह ते हुए िारत पहुंची? 217 2=6
उत्तर: चाोंदी दु मनयाभर िें ह ते हुए भारत पहुोंची
a) धातु िुद्रा की उपलब्धता।
b) खनन तकनीक का मवस्तार।
c) अथडव्यवस्था िें धन का पररसोंचरि।
d) नकदी िें कर ों और राजस्व की मनकासी।
मकन्ी द मबोंदुओों की व्याख्या (2)
29.3 िारत में वस्तु क्षवक्षनमि क्षकस प्रकार ह ता था?
a) नकद लेनदे न के िाध्यि से।
b) वस्तुओों के लेनदे न के िाध्यि से
(2)
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कि हम नमक कानून त डें गे
30.1 नमक कानून के प्रक्षत िारतीि ं की प्रक्षतक्षििाओं की जााँच करें ।
उत्तर:निक कर कानून के प्रमत भारतीय ों की प्रमतमियाएाँ ।
a) निक कानून के म्मखलाफ व्यापक असोंत ष था।
b) निक पर राज्य का एकामधकार अल कमप्रय था। (2)
30.2 गांधीजी क िह क्षवश्वास क् ं था क्षक सरकार सत्याग्रक्षहि ं क
क्षगरफ्तार नही ं करे गी?
उत्तर: गाोंधीजी सत्याग्रमहय ों की मगरफ्तारी पर भर सा नहीों कर रहे थे
a) वह अपने प्रदशडनकाररय ों क शाोंमत की सेना िानता था।
b) अोंग्रेज ों पर दु मनया की राय का र्र। (2)
30.3 दांडी माचद के आधार की की व्याख्या कीक्षजिे
उत्तर:दाोंर्ी िाचड का आधार
a) मब्रमटश ों के सबसे व्यापक रूप से नापसोंद कानून क त डने के मलए।
Pg-
358 2+2+
b) मब्रमटश शासन के म्मखलाफ असोंत ष क बढ़ाने के मलए। 2=6
c) अोंग्रेज ों के म्मखलाफ राष्रवादी अमभयान शुरू करना।
d) सभी वगों के सिुदाय ों क एकजुट करने के मलए,
e) स्वराज की ओर जाने के मलए।
(2)
मकन्ी द मबोंदुओों की व्याख्या
30
स्र त आधाररत प्रश्न
एक धनाढ्य शूद्र
30.1 ब्राह्मण स्विं क अन्य जाक्षत से श्रेष्ठ क् ं मानते थे?
i. उत्तर:ब्राह्मि खुद क अन्य जामत से श्ेष्ठ िानते थे
11
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a) उनकी बुम्मद् के आधार पर
b) उमचत रों ग के आधार पर।
c) शुद्ता के आधार पर
d) ब्रह्मा के पुत्र ों के रूप िें िाना जाता है
e) क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु
Pg-
70 2+2+
2=6
मकन्ी द मबोंदुओों की व्याख्या (2)
30.2 कच्छना के अनुसार एक शूद्र ने अपनी स्थथक्षत में कैसे सुधार क्षकिा?
उत्तर:कच्छना के अनुसार, एक शूद्र अपनी म्मस्थमत िें सुधार कर सकता था
a) धन के आधार पर
b) आमथडक म्मस्थमत और गररिा के आधार पर (2)
28.3 वणद व्यवथथाता के प्रक्षत बौद्ध दृक्षष्ट्क ण के बारे में िह कहानी क्ा
बताती है?
उत्तर: विड व्यवस्थाता के प्रमत बौद् दृमष्क ि
a) जामत आधाररत मवचार ों की अस्वीकृमत
b) जन्म के आधार पर श्ेष्ठता के मवचार ों क खाररज कर मदया।
c) सािामजक सिानता के मलए अनुर ध
d) क ई अन्य प्रासोंमगक मबोंदु।
मकन्ी द मबोंदुओों की व्याख्या (2)
31 31.1 , 31.2 - संिग्न मानक्षचत्र दे खें
1x6
दृक्षष्ट्बाक्षधत परीिाक्षथदि ं के क्षिए =6
31.1 हडप्पा थथि
Pg-2 1x3
कालीबोंगन, ल थल, नागेश्वर, ध लावीरा, राखीगढ़ी, बनवाली- (भारत) =3
हडप्पा, , बालाक ट, चाहाँज दड ,ि हनज दड
क ई तीन
12
Page 15
अथवा Pg-95 1x3
=3
बौद्ध थथि
साोंची, बरहुत, अजोंता, नामसक, कारला, नागाजुडनक र्
ों ा, अिरावती, ब धगया
क ई तीन 1x3
Pg- =3
31.2 305
क्षवद्र ह का केंद्र 1857
मदल्ली, िेरठ, आगरा, लखनऊ, झााँसी, कानपुर, आज़िगढ़, बनारस, कलकत्ता
क ई तीन
13